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00:00:02:19 तो सभी को जय श्री राम और आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे। काफी दिनों से आपके बीच लाइव नहीं आए थे और आज हमने आपको सरप्राइज किया है क्योंकि ज्यादातर ऐसा होता था कि जो हमने समय दिया है उससे हम लेट आते थे। बट आज हमने आना था कि हम आज समय से पहले पहुंचेंगे। समय से पहले आ गए। कुछ लोग परीक्षा कर रहे होंगे कि भाई 9:30 पर स्टार्ट होगा। हमने 9:30 इसीलिए रखा था कि हम 9 मान के चले तो हमने कहा 9:30 रखते हैं जिससे कि विलंब हमें उतना स्पेस मिल जाएगा। कई बार ऐसा होता है कि कुछ लोग होते हैं वो बोलते हैं इंटरनेट नहीं आ रहा है मतलब जिसके साथ चर्चा होनी है। जय श्री राम। जय श्री राम। सभी को जय श्री राम। जिसके साथ चर्चा होनी है उसका इंटरनेट खराब है या फिर वह टेक्निकली बिल्कुल कुछ समझ नहीं पा रहा है क्या करना है क्या नहीं करना है तो कई बार ऐसे कर पिछली बार देखा था कि हमें अपनी लाइव को जो है बंद करना पड़ा था उनके पास पता नहीं क्या हुआ था कुछ टेक्निकल चीजों में दिक्कत आई थी तो हमने कहा कि आज समय से आज खैर

00:01:18:00 तो हम अपने जो साथी हैं उनको ले लेते हैं जिनके साथ आज चर्चा होनी है। जी विनोद जी जय श्री राम सर साह जी विनोद जी थोड़ा सा हमारे दर्शकों को अपना परिचय दे दीजिए आप हम विनोद दास है मुंबई से और यहीं पे रहते हैं बेसिकली नेटिव प्लेस तो यूपी है आजमगढ़ और रहना सर मुंबई में ही है जहां आप मुंबई में है।

00:02:10:12 रामपाल से कब जुड़े आप? हम नवंबर 2018 से जुड़े हुए हैं। उसके पहले हम अच्छा उसके पहले हम उसके पहले हम जो है बाकी की सभी भक्ति करते थे। जो अपना व्रत उपवास नहीं नहीं मैं वो मैं वो नहीं पूछ रहा हूं। मैं वो नहीं पूछ रहा हूं। मैं ये पूछ रहा हूं कि ये रामपाल से आपने जो दीक्षा ली है वो डायरेक्ट रामपाल से ली है वो एलईडी वाली दीक्षा है। नहीं एलईडी की दीक्षा एलईडी वीडियो से दीक्षा है। वीडियो

00:02:52:02 तो आपको तो मैंने मैंने आपके बहुत सारे कमेंट्स वगैरह देखे हैं। अभी जब आपकी प्रोफाइल देखी जिस प्रोफाइल पे आप जुड़े हैं तो उसमें मैंने देखा कि आपके जो कमेंट्स मैंने काफी विरोध में देखे थे बहुत पहले से तो मैं ये जानना चाह रहा था कि जैसे रामपाल जी जो आपके अनुसार जो आपके गुरु हैं वो कहां चले गए?

00:03:25:22 हेलो विनोद जी [हंसी] एक रामपाल का कोई बहुत अनिष्ट फॉलोअर है जो सक्षम नाम से जो रामपाल के द्वारा सिखाई गई शिक्षा का प्रमाण दे रहा है। हां जी विनोद जी

00:04:02:24 तो मैं यह जानना चाह रहा था जैसे आप अह रामपाल के ज्ञान को आप मानते हैं कि वो प्रामाणिक ज्ञान है। है ना? आवाज नहीं आ रही आपको। आवाज नहीं आ रही। अब बोलिए

00:04:35:08 आवाज नहीं आ रही। कुछ परिवर्तन किया है क्या आपने? आप एक बार रिमूव हो जाइए। फिर दोबारा आइए। है ना? तो

00:05:11:06 रामपाल के फॉलोअ स्वयं को रामपाल का फॉलोअ कहने में भी डरते हैं। क्या बात है? जेल में रामपाल जी रिपोर्ट [हंसी] हां जी तो रामपाल के द्वारा दिया जाने वाला जो ज्ञान है उसको उसको आप प्रामाणिक समझते हैं, तत्व ज्ञान समझते हैं। जी सबसे पहले तो हम ये कह गए कि आप भी गुरु को मानते हैं और हम भी गुरु को मानते हैं तो गुरु के लिए दो शब्द हो जाए तो अच्छा रहेगा। नहीं गुरु के लिए दो शब्द क्यों?

00:06:12:16 क्यों? हम लोग यहां पर हम नहीं हम लोग यहां पर जो आए हैं वो एक दूसरे के गुरु के बारे में महिमा मंडन सुनने नहीं आए बल्कि दोनों का ही आपका भी ये कहना है कि आपके जो गुरु ने ज्ञान दिया है वो प्रामाणिक है और मेरा कहना है कि वो प्रामाणिक नहीं है है ना ये वो सौहार्दपूर्ण वाला मंच तो है नहीं हां हो सकता था शायद अगर कोर्ट तक बात ना गई होती हो सकता था अगर ऐसी बातें ना कही गई होती जिनके कारण कोर्ट तक जाना पड़ जाए पुलिस कोर्ट कचहरी सब हो गया तो वो सब बातें नहीं रह गई कि गुरु की वंदना हो जाए या इस तरह की सामंजस्यता हो जाए सीधे हम लोग मूल विषयों पे आए तो उचित होगा ठीक है तो चलिए तो आपका

00:07:03:03 कहना है कि रामपाल के द्वारा दी जाने वाली जो शिक्षा है वो बिल्कुल प्रामाणिक है बिल्कुल सही है है सही बात है। तो मुझे थोड़ा सा सबसे पहले एक्चुअली रामपाल मतलब जो जिसको भी आप गुरु मानते हैं उसके द्वारा दी जाने वाली जो शिक्षा है उसके बारे में बात करने के लिए कुछ पहले दो एक दो चीजें हैं जिनको जान लेना आवश्यक है। जिससे कि हम बाद में जब बात करेंगे तो जो हमने यहां से जाना है चर्चा के प्रारंभ में वो मदद करेगा। तो इसलिए मैं आपसे जानना चाह रहा हूं कि आपकी जानकारी में धर्म क्या है? वो किस तरह से उपयोगी है मानव के लिए? एक जीव के लिए या मनुष्य के लिए धर्म उपयोगी उपयोगी क्यों है? क्या आवश्यकता है उसे धर्म की? देखिए मैं ज्यादा कुछ बहुत विशेष तो नहीं जानता हूं लेकिन इतना जानता हूं कि जो अच्छे कर्म किया जाए और मानव जीवन में जो उपयोगी है वही और हर व्यक्ति के लिए उसका अपना अपना अलग-अलग धर्म होता है और नहीं नहीं जो अच्छे कर्म है

00:08:18:07 ये तो उसके लक्षण है और फिर अच्छे अच्छे कर्म भी किसको माना गया किस आधार पर वो भी देखना पड़ेगा वो एक अलग जैसे मैंने कहा कि मोटरसाइकिल की क्या आवश्यकता है? तो आपको बताना है कि भाई मोटरसाइकिल से हम एक जगह से दूसरी जगह यात्रा करते हैं। आपको ये नहीं बताना है कि मोटरसाइकिल Hero Honda भी होती है, Pulsar भी होती है या Bajaj का भी होता है, Blet का भी होता है। ये नहीं पूछ रहा हूं। ये लक्षण है। समझ रहे हैं आप? मैंने पूछा कि वो काम क्या आती है? मोटरसाइकिल काम क्या आती है? वो बताइए। क्या जरूरत है धर्म की? आवश्यकता के अनुसार धर्म की परिभाषा क्या है?

00:09:02:07 मूल धर्म तो हम यह मानते हैं कि जिसके द्वारा इंसान का मन क्योंकि मनुष्य जीवन अनमोल है और मोक्ष का रास्ता मिले सबसे बड़ा धर्म है। अच्छा हां ठीक है। अब ये आपने सही बात कह दी। जिसके द्वारा आपको मोक्ष प्राप्त हो जिन कार्यों को करने से जिन नियमों को मानने से आप मोक्ष की ओर आगे बढ़े वो आपका धर्म की ठीक है सही बात तो फिर मोक्ष क्या है इस आत्मा का जन्म मरम से हमेशा के लिए छुटकारा हो जाए यही मोक्ष है परमात्मा में चले अच्छा तो आत्मा यहां से पहले कहां थी जो वो मतलब जो वो आज जो वो जन्म मरणम के चक्कर में फंसी है आत्मा ये कैसे फंसी है इससे पहले कहां थी जो ये फंस गई और इसके बाद ये इसके बाद रामपाल रामपाल जी के अकॉर्डिंग ये कहां जाने वाली है आत्मा अकॉर्डिंग टू मोक्ष पहले परमात्मा के साथ में थी नहीं नहीं बाद में के साथ वो बाद में पूछूंगा मैं ये पूछ रहा हूं कि इसके बाद इसके

00:10:17:08 बाद कहां जाएगी आत्मा देखिए श्रीमद् भागवत गीता में परम परम अक्षर ब्रह्म बताया गया है। भाई साहब मैं देखिए हम लोग एक सुनिए तो मैं आपसे प्रमाण पूछूंगा मगर बिना बात के प्रमाण आप मत दीजिए। आप खाली अपनी विचार बताइए। जहां प्रमाण की आवश्यकता होगी मैं बोल दूंगा। हां सतलोक सतलोक सतलोक जाना है। सतलोक जाएगी। तो सतलोक जाकर के जन्म मरण के चक्कर से छूट जाएगी। जी बाकी दुख तकलीफ से नहीं छूटेगी। दुख तकलीफ से तो यहां पर जब तक रहेंगे तब तक छूट ही जाएंगे। यहां भी छूटेंगे और बाकी वहां जाने के बाद तो जन्म मृत्यु होगी ही नहीं। सारे दुखों से छूट जाएंगे। अभी आप दुख तकलीफ से छूटे हुए हैं। 90% यानी पूरी तरीके से नहीं छूटे हुए हैं। हां समय लगता है। अच्छा 90% ये कैसे पता चला आपको कि मैं 90% छूटा हुआ हूं? 90%

00:11:26:07 मैं अपना सवाल क्लियर कर दूं। मैं अपना सवाल क्लियर कर दूं। 90% छूटे हुए का मतलब है कि आपको ये मालूम है कि मुझे कितने दुख मिलने वाले हैं और फिर वो नहीं मिल रहे। यानी कि आपके पास कोई लेखाजोखा है कि मुझे इतने ज्यादा दुख मिलने वाले हैं पर वो नहीं मिल रहे। इसलिए मैं 90% टूटा हुआ मान रहा हूं और 10% नहीं छूटा हुआ। तो ये आपके पास कोई विवरण है क्या? आपके लिए कौन-कौन से दुख है जो बंधे हुए हैं? हमारे ऊपर मुसीबतों का पहाड़ था सर जी। वो मैं ये नहीं कह रहा हूं आपके पास क्या था? आप 90% आपके आप 90%

00:12:09:10 मेरा सवाल कुछ और भाई साहब भाई साहब देखिए ट्रैक मत बदलिए। ट्रैक बदलेंगे दिक्कत आएगी। ट्रैक मैं सवाल यह पूछ रहा हूं कि यदि आप यह कह रहे हैं कि मैं 90% बचा हुआ हूं। यानी कि आपको 100% की वैल्यू पता है। वो वैल्यू कैसे पता है? उसका रिकॉर्ड कहां पर मेंटेन है? इस बारे में कोई प्रमाण है शास्त्र का तो वो मुझे बताइए। आपके पास नहीं इसका इसका प्रमाण हमारे पास नहीं है। तो ये सिद्ध कैसे होगा कि 90% आप बचे हुए हैं। मान लीजिए मान लीजिए मैं बता रहा हूं। आप जो कहने जा रहे हैं उसको ले लेता हूं। मान लीजिए कि आपने कहा कि मैं इतना फंसा हुआ था। ठीक? और फिर यहां आने के बाद में छूट गया। यह भी तो हो सकता है कि जितना आप फंसे हुए थे और जिस दिन आप छूटे हैं वही उसी दिन तक आपको वो तकलीफें मिलनी थी। उसके बाद वो तकलीफें नहीं मिलनी थी। मतलब कि आपके हिस्से में जो दुख बांधा गया था वो उतना ही था जितना जिसके बाद आप छूट गए उससे। और अगर आप यह कहेंगे आज की डेट में कि 90% मैं बचा हुआ हूं बिल्कुल कांटे की नोक पर तो फिर आपको निश्चित करना होगा हमें प्राकट प्रमाण

00:13:24:16 के साथ कि 90% ये मेरा दुख ये खड़ा है पर मुझे छू नहीं पा रहा है। इसलिए मैं बचा हुआ हूं। केवल 10% दुख मुझे छू पा रहा है। नहीं इसका प्रमाण नहीं दिया। इसका प्रमाण दिया नहीं। ठीक है। अब यह वैसे भी हमारे मेन विषय से अलग है। आपने 10% तो माना ही है कि 10% वो है दुख तकलीफ है। जीवन में थोड़े ये मानना ही पड़ेगा कि जो सतलोक का सुख है वो यहां नहीं है। ये तो सही बात है। ये सही बात है। यानी कि सतलोक में ऐसा सुख है जो कभी खत्म नहीं होता।

00:14:00:16 पूछ रहा हूं आपसे। दुख नाम की चीज ही नहीं है तो खत्म होने का सवाल ही कहां? दुख नाम की चीज नहीं है। मतलब कि जो हम पाना चाहते हैं वह पा लेते हैं। क्या मतलब? जैसे कई बार आती है ना इच्छा कि मुझे वो चाहिए। तो जो हम पाना चाहते हैं वो पा लेते हैं। इसलिए दुख नहीं है कैसे? थोड़ा सा बताएंगे। ऐसा कुछ है जो हमें वहां ना मिलता हो। जाने पर वहां जाने के बाद सारी इच्छाएं मनुष्य की खत्म हो जाती है। मतलब वो जगह ऐसी है जहां पर कोई इच्छा बाकी नहीं रह जाती। बाकी नहीं रहती।

00:14:40:26 वो जगह ऐसी है जहां पर कोई इच्छा बाकी नहीं रह जाती। हां। और यदि हमें ऐसी जगह भेजा जा रहा है जहां पर इच्छा बाकी रहे तो वो जगह तो मोक्ष की कहलाएगी। वो हो ही नहीं सकता मोस्ट की जगह। तो अब मैं आता हूं तो दोबारा से प्रश्न पे कि जो आत्मा है जो यहां फंसी हुई है वो यहां से पहले कहां थी और फिर कैसे फंसी? ये तो आपने बहुत सारी चर्चाओं में आपने सुन रखा है। और फिर हमसे जानने का उसका कुछ औचित्य नहीं बनता है। औचित्य यही है। ठीक है। मैं बता देता हूं। औचित्य क्या है? मैं बता देता हूं। आपने कहा कि जहां पर कोई इच्छा नहीं बाकी रहती है वो मोक्ष की जगह है। पर आपके ही अनुसार जो जीव है उसके अंदर वो काल नाम का जो आपका राक्षस है क्या है वो उसको फॉलो करने की इच्छा आई। उसके पीछे पीछे जाने की इच्छा आई। तब जो है जीव फसा संसार में। वो इच्छा कैसे आ गई? अगर वो सतलोक में है। अगर वहां कोई इच्छा आएगी नहीं। वहां दुख का नाम ही नहीं है, अस्तित्व ही नहीं है। तो वो कमी कैसे आ गई उसके अंदर?

00:16:01:13 बताइए। ये इसका इसका तो आपने लोगों से सुन रखा है। आपके वीडियो में मैंने देखा है। लोगों से ये सवाल भी पूछे हैं। उसका उत्तर भी लोगों ने दिया है। उत्तर दिया तो वही उत्तर आप दीजिए मुझे। दे दीजिए। आपके अनुसार लोगों ने उत्तर दिया है ना? हां आपने उत्तर आपने वो चीज तो कई वीडियो मैंने आपका देखा था उसमें उत्तर दे दीजिए मैं अभी देखता हूं कौन सा उत्तर है भाई तो क्योंकि काल भी परमात्मा का ही अंश है और वो वो भी साथ ही रहता था और उसको मैं ये नहीं पूछ रहा हूं भाई साहब मैं ये नहीं पूछ रहा हूं कि कैसे वो क्या-क्या हुआ था विवरण नहीं पूछ रहा हूं आपसे मैं पूछ रहा हूं इच्छा कैसे आ गई आप यह बताइए इच्छा आ सकती है कि नहीं आ सकती है सतलोक में या तो आ अगर आ सकती है तो वो मोक्षदायक जगह नहीं है और नहीं आ सकती है तो वहां आई थी फिर जीव फसना नहीं चाहिए था ये बात मैं विवरण नहीं पूछ रहा हूं। जैसे मैंने पूछा कि भैया जब आपने कहा कि मोटरसाइकिल से हम यात्रा करते हैं धरती पर चलते हैं तो ये मोटरसाइकिल चल क्यों नहीं रही है? तो आपने बताया कि भैया देखो उसमें

00:17:16:24 पेट्रोल कम है, उसमें यह है, उसमें वह है। इसका मतलब कि वह यात्रा कराने में सक्षम नहीं है। हमें ये मानना पड़ेगा ना कुल मिलाकर के कि वो जो है यात्रा कराने में सक्षम नहीं है। तो आप मुझे ये बताएं कि वहां पर इच्छा आ सकती है कि नहीं आ सकती है। देखिए सृष्टि रचना के समय की प्रारंभिक स्टडी है। स्टेज है हम भाई साहब मुझे मुझे मुझे आप क्लियर देखिए पहले मुझे हेडलाइन बता दीजिए कि आप मेरे प्रश्न से संबंधित क्या बताने जा रहे हैं फिर उसके अंदर जाइए डिटेल में पहले मैंने पूछा है आप इसको क्लियर करिए सतलोक में कोई इच्छा आ सकती है कि नहीं आ सकती यानी कि सतलोक में हमें किसी प्रकार का अभाव महसूस हो सकता है या नहीं हो सकता है वहां अभाव महसूस नहीं होता लेकिन हर इंसान की इच्छा तो होती है कुछ और और अगर ज्यादा पाने की और कुछ बनने की इच्छा हो रही है और वो वहां से भटक रहा है तो उसको कुछ कोई कुछ नहीं कर सकता। इसका मतलब जब ये सतलोक में जाएंगे तो इनकी इच्छा हो सकती है और कहीं भटक सकते हैं। भटक सकते हैं।

00:18:31:25 जिस तरीके से वो भटक करके आ गए। उसके साथ सभी लोग आ गए तो भटक सकते हैं। भटक दोबारा से फस सकते हैं जीवन मरण के चक्कर में भटक के। लेकिन जिस चीज का जिस दुख का पहले से ही एहसास रहेगा कि भाई यह दुख को हमने झेल करके आए हैं तो वापस आदमी उसी काटों में उलझेगा नहीं। ये चीज पहले तो मुझे ये बताइए कि ये सिद्धांत कहां लिखा है? हम ये सिद्धांत गीता जी ने भी आपका थोड़ा आपका थोड़ा सर कट रहा है। ये सिद्धांत कहां लिखा है? यह सिद्धांत गीता जी में भी बताया गया है। वहां जाने के बाद जिस चीज का दुख जिस चीज का दुख हम एक बार झेल लेते हैं उसके लिए हम प्रिपेयर रहेंगे पहले से ही। ये फिर उसमें हम नहीं फसेंगे। कबीर सागर के द्वारा है। कबीर सागर के द्वारा लिखा है। हमारे सनातन शास्त्रों में सिद्धांत नहीं है। वो तो मैंने पढ़ा नहीं कि उसको बताओ। नहीं तो आप हमें तो हमें तो हमारे शास्त्रों से मनवाने आए हो ना। हमें इस पर आपत्ति कभी नहीं है कि आप अपने कबीर सागर के आधार

00:19:47:03 पर क्या क्लेम करो। यद्यपि उसमें हमारे जो देवी देवता है सनातन शास्त्रों में वर्णित उनका नाम ना लो। हमें इस पर आपत्ति नहीं है। हमें आपत्ति इस पर है कि हमारे शास्त्रों के आधार पर आप गलत जानकारी या उसके विरुद्ध जाकर के जानकारी मत दो। और यहां के देवी देवताओं का नाम मत खराब करो। अपने आप चाहे जिसकी पूजा करो आप। हमें आपत्ति इस बात की नहीं। कबीर सागर में क्या लिखा है? हमें आपत्ति इस बात पे है कि आपने गीता के नाम पर क्या-क्या फैलाया है। उसके लिए हम आप यहां बैठे हुए हैं। तो ठीक है। हम ये कहेंगे कि जैसे गीता जी में गीता जी तो सभी धर्म ग्रंथों का सार है। चारों वेदों का सार है। भाई साहब सुनिए मेरी बात एक समझिए। पहले आप मुझे क्लियर करिए कि हम क्या सुनने जा रहे हैं। खामखा एक आप लंबा सा एक प्रवचन दे दे। उसके बाद में आपसे कहूं मैंने तो ये पूछा ही नहीं था। तो मैं आपसे पूछ रहा हूं कि क्या आपके पास सनातन शास्त्रों से इस बात का प्रमाण है कि एक बार जो दुख हो गया उसके लिए दोबारा हम लोग उसमें नहीं फस सकते। जो व्यक्ति चोरी करता है, जेल जाता है, क्या वह दोबारा जेल नहीं जाता? दोबारा चोरी नहीं करता। चोरी

00:21:02:14 करेगा तो करता है कि नहीं? करता है कि नहीं? करता है कि नहीं? करेगा तो जाएगा। करेगा तो जाएगा। मैं मैं पूछ रहा हूं कोई व्यक्ति एक ही अपराध सजा पा लेने के बाद भी दोबारा करता है कि नहीं? करता है। तो आपने जो सिद्धांत दिया वो ना तो तार्किक सिद्ध हुआ और ना आपने प्रमाण दिया। तो ये सिद्धांत यहां का नहीं है। ये तो सतलोक की बात कर रहे हैं। ये सतलोक की बात कर रहे। भौतिक जगत की बात कर रहे। दोनों में डिफरेंस है ना सर? तो भाई सतलोक के बारे में भौतिक जगत के अंदर उपलब्ध शास्त्रों में लिखा है ना। तभी तो सतलोक को जानते हो। सतलोक को आपने कहां से जाना? एक मिनट। सतलोक को आपने कहा सतलोक में जाना कि यहां जाना गीता जी में खुद बताया गया है ना भाई साहब आप मुझे सज्जन व्यक्ति लग रहे हैं इसलिए मैं आपसे स्पष्ट बातें चाह रहा हूं स्पष्ट बातों पर रहिए आपने कहा कि भैया एक बार जिसमें व्यक्ति चक लेगा दुख का स्वाद तो उसके बाद दोबारा उसमें नहीं फसेगा मैंने आपको तर्क भी दे दिया प्रमाण आप मुझे दे नहीं रहे आपके पास कोई प्रमाण है सनातन शास्त्रों से तो हम दूसरी बात करते हैं अभी इस चीज का प्रमाण तो मैं गीता जी की बात कर रहा हूं तो आप बोल रहे

00:22:17:18 उसकी बात मत करो अभी गीता जी की बात कहां कर रहे थे आपने कहा कि प्रमाण कबीर सागर में सनातन शास्त्रों में प्रमाण नहीं है अब आप कह रहे हो है नहीं गीता जी के 18 भाई साहब मैंने पूछा ये प्रमाण है क्या एक बार दुख चख लेने के बाद दोबारा नहीं चखेगा ये प्रमाण है क्या गीता जी में नहीं चखेगा ये बात अलग है ये पॉइंट अलग है क्योंकि अगर उस इंसान को इस दुख का आभास रहेगा तो 100% 99% ये होता है कि वापस उस तरफ ना जाए। 99 है कि 100 है? नहीं 99 100 एक% तो कुछ भी कर सकता है। यानी कि आपका जो मोक्ष है वो 99% सही है। एक% की वहां चूक है। ये आप कह सकते हैं। आप ही ने तो कहा 99% नहीं जाएगा। नहीं हम हम नहीं मान सकते उस बात को आपके द्वारा हो सकता है। अरे आप 99% मोक्ष मान रहे हो सतलोक में कि 100% मोक्ष मान रहे हो? मोक्ष तो 100% होना है। तो आप तो कह रहे हो 99% आदमी नहीं जाएगा इधर उधर। लेकिन जो भटकाव वाली बात है 1% भटकाव भटकाव होने का चांस है ना 1%

00:23:32:26 आपके अनुसार। हां तो वो बता तो रहा है कि एक% है वो भटक जा सकता है। एक% का भटकाव का चांस है। सतलोक में भी एक% की इच्छा आ जाने का भटकाव आ जाने का अभाव महसूस होने का चांस है। हम है ना? हां। सही बात है। तो फिर ये मोक्ष कैसे हुआ? आपने तो कहा मोक्ष तो वो है जहां पर अभाव ना हो। दुख का नाम ही ना हो। अब दुख का नाम तो नहीं है। दुख का नाम तो वहां होगा नहीं। लेकिन आदमी की मनुष्य की अगर इच्छा इस ढंग से बलवती हो रही है कि भाई वो सबके ऊपर परमात्मा के भी ऊपर जाने की कोशिश करता है तो वहां पे तो वो भटकाव तो होना है। निश्चित है। यानी कि जब व्यक्ति के अंदर मान लीजिए ऐसी कोई इच्छा आ गई कोई कोई ऐसी इच्छा आ सकती है जिसके कारण पूरा ना होने पर वो दुखी हो। वो खुद सोचने लगे कि व्यक्ति दुखी तभी व्यक्ति दुखी तभी होता है ना जब उसकी इच्छा पूर्ति नहीं होती तो वो दुखी होता है। सही बात है। तो यानी कि वहां पर ऐसा कुछ हो सकता है जिसके कारण व्यक्ति दुखी हो।

00:24:48:28 हां वही सर्वे सर्वा बनने की इच्छा तो फिर आप फिर वहां पर आपका मोक्ष सिद्ध नहीं हो रहा है। ये मानना पड़ेगा। ठीक। अब मैं एक बात अगली करता हूं। अब मैं एक बात अगली करता हूं। यह बताइए कि जब काल मर जाता है, काल मरता है कि नहीं मरता है? काल खुद कह रहे हैं कि हमारी जन्म मृत्यु होती है। हम तो काल की वजह से ही फंसते हैं लोग इस दुनिया में। जीव हां। है ना? काल को देख के अट्रैक्ट होते हैं और काल की वजह से फंस जाते हैं। तो काल जब मरता है उसकी जन्म मृत्यु होती है। तो जब जिसने आपको फसाया है वो मर गया जिसकी वजह से आप फंसे हो। काल के लोक में फसे हो तो आप मुक्त माने जाओगे। सारे जीव मुक्त हो गए। फिर तो

00:25:46:09 काल की मृत्यु वो तो प्रलय होने के बाद हो गया। अरे कभी भी हो जिस समय काल मरता है उस समय जिसने काल की पूजा नहीं भी की होगी वो मुक्त होगा ना ये तो बहुत ही अंत की बात कर रहे हैं आप अरे कभी की बात है मैं पूछ रहा हूं जिसने आपके रामपाल के अनुसार पूजा भक्ति नहीं की होगी नाम दीक्षा नहीं ली होगी काल जब मरेगा काल जब मरता है तो उस समय जो आत्माएं होंगी फंसी हुई काल के लोक में वो मुक्त होंगी ना मुक्त मानना पड़ेगा ना उनको क्योंकि काल की वजह से फंसी थी वो

00:26:32:26 अब इसका जवाब मेरे पास नहीं है हां तो हमें उन्हें मुक्त ही मानना पड़ेगा और दिक्कत ये है कि हमने कहा कि जैसे ही मुक्त हुए तो कहां गए? जब यह सब फसने फसाने का चक्कर ही समाप्त हो गया तो हम कहां गए सीधे वही जहां से आए थे और जब वहां से आए थे उसके बाद आपने कहा ना नहीं फसेगा वहां गए कहां वो तो उसी जगह कहां रहे गए गए कहां रह गए ना उसी जगह क्योंकि उनको रास्ता तो आगे का मिला नहीं वो तो गए कहां वो तो वही रह गए ना प्रलय हो गया मृत्यु हो गई सबकी मृत्यु हो गई दुनिया खत्म हो गई दुनिया खत्म हो गई मगर मनुष्य धरती पर धरती पर जीवित रहा तो वही रह गए ना फिर मनुष्य नहीं रहा मनुष्य मनुष्य का भी शरीर खत्म हो गया सब कुछ हो गया वात चक्र तो वही वही घूमेगा ना फिर आगे कहां गया वो कहां कहां गया वो धरती पर था मनुष्य एक व्यक्ति है जिंदा ठीक जो काल की वजह से यहां फंसा हुआ है एक जीव है अब जब काल मरा तो वो उसकी बॉडी मरी वो वो मर के कहीं और गया कि नहीं गया? गया तो कहां गया? नहीं गया तो कहां रहा?

00:27:48:00 बताइए। भाई अभी हम पृथ्वी पे हैं। पृथ्वी का प्रलय हो पृथ्वी का प्रलय हो जाएगा। काल भी खत्म हो जाएगा तो पृथ्वी कहां जाएगी? पृथ्वी तो है ना। तो पृथ्वी कहां है? जितने लोग जितने लोग यही रह जाएंगे। ऊपर कहां जाएंगे? क्योंकि उनको रास्ता ही नहीं मिला। अरे तो पृथ्वी खत्म हो गई। जब प्रलय आ गई काल का लोक खत्म हो गया तो जो लोग बचेगा उसी में जाएंगे ना हां तो पानी पानी रहा पानी में आए फिर वापस पृथ्वी उसमें रहेगी ये आपकी ये आपकी ये आपकी सृष्टि रचना में कहां लिखा है

00:28:30:19 मैंने कहा था ना मैंने कहा था ना कि मैं आपसे मांगूंगा प्रमाण जहां आवश्यकता होगी वहां मांगूंगा जब अपने अंदाजी मुद्दे फेंकोगे मनगढ़ंत बातें बोलोगे तो फिर मैं पूछूंगा कि तुम्हारे बाबा जी ने कहां पर लिखा है ये? आपने जिससे दीक्षा ली है उन्होंने कहां लिखा है? यहां तो हम गीता सुनिए आप जो बात जो आप एक मिनट जो बात आप इस समय बोल रहे हैं वो बात तो सनातन सनातन एक मिनट एक मिनट भाई साहब एक मिनट सनातन शास्त्रों की तो दूर की बात है। जो बात आप इस समय बोल रहे हैं कि पृथ्वी नहीं रहेगी तो पानी में रहेंगे। यह बात आपके जो रामपाल जी है उन्होंने भी नहीं रखी होगी। यह तो तर्क की बात आप कर रहे हैं। सर जी तर्क क्या करेंगे? आप कुतर्क कर रहे हैं ना। देखिए प्रमाण की जरूरत कहां होती है? वहां होती है जब आप कुछ ऐसी बात कर रहे हो जिसको मैं नहीं मान पा रहा हूं या मैं कुछ ऐसी बात कर रहा हूं जिसको आप नहीं मान पा रहे हैं तब हमें एक हायर अथॉरिटी की आवश्यकता होती है तो कम से कम मुझे सनातन शास्त्रों से नहीं तो कम से कम इसमें अपने गुरु की वाणी ही दे दीजिए कि भैया यहां रहेंगे लोग जब धरती खत्म हो गई तो आपने कहा पानी पानी कहां पर है कहां

00:29:45:22 भरा हुआ है पानी मन से कुछ भी बोलते चले चले जाओ। ये गलत बात है। ठीक नहीं है ये। तो हमें यह मानना पड़ेगा कि जब काल मरता है तो जिस लोक से आत्माएं यहां आई हैं जिस कारण से आई है वो कारण जब खत्म हो गया वो मुक्त हो गए तो मुक्त हो के वही पहुंचे जहां से आई है और फिर आप ही ने कहा काल फिर जन्म लेता है तो काल ने फिर जन्म लिया तो फिर अट्रैक्ट होंगी और फिर फसेंग यानी कि सतलोक में मुक्ति नहीं मिल रही है। इतना अभी तक हमें क्लियर हो गया। एक तो वो 99% से हो गया और एक इस वाली बात से हो गया। अब आगे चलते हैं। आपने सतलोक सतलोक इसी को मान रहे हैं। किसको मान रहे हैं? इसी इसी इसी लोक को आप सतलोक मान रहे हैं। आपके किस को किस लोक को? पृथ्वी लोक को

00:30:47:22 बैठक काल काल का जो 21 ब्रह्मांड है उसी को आप सतलोक मान रहे काल मरा तो सब मर गए और वहां से मुक्त हो गए तो काल मरने पे जो जो काल की वजह से फंसी हुई है काल जिनको फसा रहा है काल नहीं चाहता कि ये मुक्त हो जब वो मर जाएगा तो फिर कौन चाहेगा कि ये फंसी कबीर ठीक है आगे आगे चलो हां इसीलिए कहते हैं कि मत खींचिए बात को अच्छा अब एक बात बताइए मुझे कि आत्मा को आप अविनाशी कहते हैं नित्य कहते हैं शाश्वत कहते हैं क्या कहते हैं आत्मा अविनाशी है नित्य है शाश्वत है मतलब वो ही है और रहेगी हम क्योंकि परमात्मा का अविनाशी जीव है तो आत्मा तो अविनाशी है आत्मा को कभी कुछ नहीं हो सकता है

00:32:00:19 आत्मा को कभी कुछ नहीं आत्मा को कभी कुछ नहीं हो सकता ऐसा कोई समय था जब आत्मा नहीं थी ऐसा तो नहीं है। ऐसा नहीं है। यानी कि आत्मा को आप ईश्वर की तरह नित्य मानते हैं। सब परमात्मा ने रचा है तो परमात्मा परमात्मा खुद से सभी आत्माओं को खुद ने बनाया है और अपने पैदा किया है। यानी कि किसी समय ऐसा था जब आत्मा नहीं थी। हां ऐसा था। या नहीं होगी क्योंकि इतना इतनी विस्तृत हमको जानकारी नहीं है क्योंकि यही कहा गया है कि भाई परमात्मा के साथ ही सब लोग रहते हैं जब परमात्मा के साथ सब लोग रहते थे और आत्मा अविनाशी थी परमात्मा की अंश है तो फिर जो है अलग से तो थी नहीं तो परमात्मा और आत्मा एक ही जैसे थी

00:33:06:02 आत्मा किसी समय मैं थी या नहीं थी इस बारे में क्लियर आंसर नहीं है क्या आपके पास नहीं ये क्लियर नहीं है आप पता नहीं आप टाइम पास करने आए हैं ऐसा लग रहा है बहुत ही हल्के तरीके से आप रख रहे हैं रामपाल का पक्ष खैर अविनाशी नहीं अविनाशी मानता है रामपाल ने अविनाशी माना है आत्मा को और नित्य नहीं माना है ठीक है रामपाल का कहना है कि आत्मा का अभाव था एक समय था जब आत्मा नहीं थी। अच्छा हम यानी कि आत्मा जो है

00:33:45:15 क्या कहते हैं? अब एक तरीके से देखा जाए तो जब कोई चीज नहीं थी और है तो फिर वो नष्ट भी हो सकती है। उसी स्टेज में वापस जा सकती है। मगर उसने कहा आपकी किताब ने कि आत्मा का अभाव था उत्पत्ति से पहले। तो अब बात यह आती है फिर आत्मा का जो तत्व है वह कहां से निकाला? परमात्मा ने अपने अंश से निकाला। अपने को तोड़ा।

00:34:23:08 नहीं वचन की शक्ति थी। उससे पैदा किए। वचन की शक्ति शब्द से पैदा किए। नहीं शब्द से पैदा किए ये तो यहां ये जो परमार्थ की दुनिया है जहां जो पूर्ण है सतलोक पूर्ण है वहां किसी चीज का अभाव है ही नहीं फिर वहां पर जो चीज नहीं है वो प्रकट हो रही है तो वो तत्व कहां से आ रहा है वो तत्व एकिस्ट करता था पहले या नहीं करता था रामपाल कह रहे हैं कि नहीं करता था तो फिर वो आत्मा किस चीज से बनाई? उसका मटेरियल कहां से लिया? शब्द की शक्ति से बनाई वो अलग है। मटेरियल कहां से लिया? उसका

00:35:14:19 अरे परमात्मा को पता है। हमें नहीं पता। तो आपके जो तत्वदर्शी है उनको भी नहीं पता है। उनको पता होगा। उनको पता होगा। यानी कि उन्होंने कहीं लिखा होगा। आपको नहीं पता है? मैंने शायद उस चीज को नहीं पढ़ा। तो यह सब चीजें आपको पूछनी चाहिए ना। तात्विक बातें तो यही है। तत्व की बातें कहते हैं तत्वदर्शी है। अत तत्वदर्शी है तो क्या है? ब्रह्मा विष्णु महेश की पूजा नहीं करनी चाहिए। इनकी पूजा करनी चाहिए। मैं पहले ये था मैं ये हो गया। मैं पहले वो था वो हो गया। ये हो गया। तत्व की बात कहां है इसमें? अब तत्व का प्रश्न किया तो मुझे नहीं पता। मुझे नहीं पता। मुझे नहीं पता। यह तत्व का प्रश्न है जिनके उत्तर चाहिए होते हैं। इसमें फंसता है व्यक्ति कि आत्मा को तुम कह रहे हो कि वो नहीं है एक समय पे तो फिर जब आप बना रहे हो तो फिर आपको बताना पड़ेगा वो मटेरियल कहां से आ रहा है आत्मा का। ये है तत्वदर्शी। ये है तत्व ज्ञान जो आपको पता नहीं है कि काल मरा तो क्या हुआ? फिर दोबारा कैसे उत्पन्न हुई? ये सब तत्व तात्विक बात है। दार्शनिक दार्शनिक बातें कहते हैं। इनको एक समर्थवान गुरु ही समझा सकता है जो

00:36:29:20 कि आपके जिसको आप गुरु कह रहे हो उसने आपको नहीं समझाया अभी तक। और कहते आप लोग तत्वदर्शी हो अगर उसकी शरण में जाने से आपका कहना है कि पहले मुझ पर बहुत तकलीफें थी और उनकी शरण में आने से मेरे दुख दूर हो गए। ठीक है? तो आप उसको यह कहिए कि दुख दूर करने वाला बाबा या दुख दूर करने वाला संत तत्वदर्शी की संज्ञा हटानी पड़ेगी ना तो तत्व के दर्शन दिखाना पड़ेगा। समझ रहे हैं आप मेरी बात? जैसे कि जैसे कि हमने कहा कि यह मोटरसाइकिल धरती पर दौड़कर आपकी यात्रा पूरी करवाती है। फिर हमने ये भी कह दिया कि ये हवा में भी उड़ती है। फिर हमने ये भी कह दिया कि पानी में भी चलती है। तो धरती पर दौड़ने की बात हमने प्रूफ कर दी। प्रमाण दिखा दिया। मगर जब आसमान में उड़ने की बात आई, पानी में चलने की बात आई तो आप वहां फेल हो गए। तो आपको फिर इन बातों का क्लेम अलग हटाना पड़ेगा। पहले तो यह संज्ञा दूर करो। जब तत्व का दर्शन आपने नहीं सीखा तत्व को उससे नहीं जाना तो आपको कहना

00:37:44:24 होगा फिर तत्वदर्शी नहीं फिर आप वो कहिए हमारे दुख दूर हो गए। अच्छा दूसरी बात ये आती है। दूसरी चीज क्या है कि दुख दूर करने वाले जो बाबा की बात आप कर रहे हैं। तो अगर हम उनके पास जाकर के अपना दुख दूर करवाते तो बात अलग होती। हमने तो एक मंत्र का जाप किया था ना। भाई साहब आपके बाबा जी ने अपनी किताब में ये लिखा है कि ब्रह्मा विष्णु महेश जो हैं उनकी पूजा करने से इस लोक के मिलने वाले दुख नष्ट होते हैं पर मोक्ष नहीं मिलता। ठीक है? ये आपके बाबा जी ने ही लिखा है।

00:38:30:09 समझ रहे हो? यानी कि बाबा जी का काम ही वहां से शुरू होता है। बाबा जी के अनुसार जहां ब्रह्मा विष्णु महेश इस लोक के दुख शांत कर देते हैं। मगर बाबा जी का काम कहां से शुरू होता है? तत्व, परमार्थ, मोक्ष और उन सब में बाबा जी फेल हो रहे हैं। और यहां की चीजें तो बता रहे हैं कि ब्रह्मा विष्णु महेश भक्ति से शांत हो जाती है। दिखाऊं? उनकी भक्ति तो दिया जाता है ना। उनकी भक्ति तो करते हैं। उनकी भक्ति करने से यहां के दुख दूर हो जाएंगे। ये कहा है आपके बाबा जी ने। तो ये सही बात है। आप फिर ये नहीं कह सकते कि ब्रह्मा विष्णु महेश की भक्ति से मेरे दुख दूर नहीं हो रहे थे। यह बात आपके बाबा जी ने भी कही है कि ब्रह्मा विष्णु महेश की भक्ति करने से यहां के दुख दूर हो जाएंगे। हां मगर आपको मोक्ष एक मिनट भाई साहब मगर आपको जीवन मरण के चक्कर से मुक्ति नहीं मिलेगी। आपको मोक्ष नहीं मिलेगा। ये कहा है आपके बाबा जी ने। तो जब बात मोक्ष की आ रही है जिसके लिए उन्होंने अपने आप को अधिकृत बताया कि मोक्ष मैं दूंगा। जीवन मरण से आजादी मैं दूंगा। दुख से आजादी मैं दूंगा। यहां के बाद वाला दुख तो उसमें आप फेल हो गए। ना तो आपका मोक्ष सिद्ध हुआ ना आपके जीवन और मरण की वो से मुक्ति होना सिद्ध हुई और

00:39:45:10 ना ही आपने ये बताया कि वो आत्मा उससे पहले कहां थी ना तो तत्व ज्ञान सिद्ध हो रहा है ना मोक्ष सिद्ध हो रहा है ठीक है अब आप ये बताइए आप कमेंट तो भरभ के करते थे आज आप भरवात में कह रहे हैं कि मुझे नहीं पता मुझे नहीं पता खैर अब आप ये बताइए मुझे कि क्या क्या काल तत्वदर्शी है। क्या यह क्लेम किया जाता है कि भैया काल ने कहा कि तू तत्वदर्शी की शरण में जा। ठीक है। और 1866 में भी कहा कि तू जा। ठीक है। चार 34 में कहा कि तत्वदर्शी की शरण में जा। 1866 में था कहा कि तू और किसी दूसरे प्रभु की शरण में जा। आपके अनुसार है ना इसका मतलब वो जिस चीज के लिए भेज रहा है वह चीज उसके पास नहीं है। हेलो

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00:40:59:10 कहां चले गए भाई? सीधे व्यक्ति हैं जो आए हैं। जो बात है वो स्वीकार तो कर रहे कम से कम लिंक दे दीजिए क्योंकि बहुत देर की चर्चा दिख नहीं रही है तो मैं ये पूछ रहा हूं कि क्या काल तत्वदर्शी है? क्या काल की शरण में जाने से आपको शुद्ध भक्ति मिल सकती है? क्या वो तत्वदर्शी है?

00:41:53:08 आपकी आवाज नहीं आ रही। फिर से आप एक बार जाइए और दोबारा कनेक्ट हो जाइए। भाई लिंक दे दीजिए क्योंकि बहुत ज्यादा समय का इनका दिख नहीं रहा है। लिंक दे दिया गया है।

00:42:32:28 भाई साहब आए क्यों मुझे समझ में नहीं आ रहा है। ज्यादातर प्रश्नों के उत्तर में इनका नील बटे सन्नाटा है। हां जी।

00:42:57:25 तो क्या आ गया था इसके लिए काल तत्वदर्शी है क्या आप डीएडी लगा दीजिए उसमें अच्छा क्या काल तत्वदर्शी है नहीं काल तत्वदर्शी नहीं है काल तत्वदर्शी होते तो दूसरे के शरीर में जाने के लिए क्यों कहते बस गुड और आपके आपके रामपाल ने भी यही माना है। ठीक है? तो इसका मतलब 1866 में तत्वदर्शी की 434 में तत्वदर्शी की शरण में जाने को कहा जा रहा है। तत्वदर्शी की शरण में जाने पर मोक्ष मिल जाएगा। पक्का

00:43:51:18 तो आपके पास भगवत गीता है। है ना तो दूसरे अध्याय का 16वा श्लोक खोलिए। हम

00:44:30:07 खोला खोलना खोला पढ़िए क्या लिखा है इसमें लिखा है कि असत भाव विधते तू सत अभाव अरे हिंदी पढ़ लो भैया संस्कृत मत पढ़ो हिंदी पढ़ लो आप असत की सत्ता नहीं है और सत का अभाव नहीं है इस प्रकार इन दोनों का तत्व तत्व ज्ञानी पुरुषों द्वारा देखा गया है यहां पे

00:45:06:04 असत का भाव नहीं है और सत का अभाव नहीं ठीक है। हम ठीक है ना? हम असत असत का भाव नहीं है और सत का अभाव नहीं है। इस प्रकार इस बात को जानने वाले को ऊपर संस्कृत में देखिए क्या लिखा है? नीचे तो तत्व ज्ञानी लिखा हुआ होगा। ऊपर क्या लिखा है? संस्कृत में क्या शब्द है? तत्वदर्शी भी। हां। क्या लिखा है? तत्व दर्श भी मतलब तत्वदर्शी संतों के द्वारा देखा जाता है। यानी कि तत्वदर्शी कौन है जो यह बात जानता है कि सत्य का कभी अभाव नहीं होता और असत का कभी भाव नहीं होता।

00:46:01:13 है ना? तत्वदर्शी कौन है? सत का कभी इस श्लोक के हिसाब से कौन है जो ये जानता है कि सत्य का कभी अभाव नहीं होता और असत का कभी भाव नहीं होता। ठीक है? तो

00:46:34:28 अब बात ये आती है कि जो व्यक्ति यह बता रहा है कि तत्वदर्शी कौन है? जिसको यह पता है कि सत्य का कभी अभाव नहीं होता और असत का कभी भाव नहीं होता। जो व्यक्ति ये बता रहा है उसको यह बात मालूम है ना कि सत्य का कभी अभाव नहीं होता और असत का कभी सत का कभी अभाव नहीं होता और असत का कभी भाव नहीं होता। जो व्यक्ति जो व्यक्ति यह बता रहा है कि भैया जो भी व्यक्ति यह जानता है कि सत और असत का ये होता है वो व्यक्ति तत्वदर्शी है। जो व्यक्ति ये बता रहा है उसको ये मालूम है ना कि सत और असत का क्या मामला है? इसीलिए तो दिया है ना कि तत्वदर्शी के द्वारा देखा जाता है। किस प्रकार देखा जाता है? सत्य और असत सत्य और असत्य क्या है? तत्वदर्शी ही बताता है। हां। मगर वो क्या है कि सत्य का कभी अभाव नहीं होता। वहां लिखा है ना इस प्रकार क्या लिखा है?

00:47:47:27 क्या लिखा है? हम इस प्रकार हम यानी कि मैं एग्जांपल ले लूं जैसे कि मान लीजिए कि मैं ये बता रहा हूं कि जो व्यक्ति ये जानता है कि कुर्सी को इंग्लिश में चेयर कहते हैं। ठीक है? मैं ये कह रहा हूं कि जो व्यक्ति ये जानता है कि कुर्सी को इंग्लिश में चेयर कहते हैं उसको इंग्लिश जानने वाला माना जाता है। ठीक है? तो मेरा मेरे ऐसे बताने से ये सिद्ध हो गया ना कि मैं जानता हूं कि कुर्सी को इंग्लिश में चेयर कहते हैं।

00:48:32:04 नहीं समझे? तो यहां तो आत्मा परमात्मा की बात चल रही है। चेयर कहां से भाई साहब? में एक-एक करके बात करिए। मैंने अभी ये पूछा है कि अगर कुर्सी को इंग्लिश में चेयर जानने वाला मैं कह रहा हूं कि तत्वदर्शी है तो मैं यह बात जानने के कारण कि कुर्सी को इंग्लिश में चेयर कहते हैं। मैं भी तत्वदर्शी सिद्ध हो रहा हूं ना। जब मुझे पता है कि कुर्सी को इंग्लिश में क्या कहना चाहिए तभी तो मैं यह बता रहा हूं कि जो यह बात जानता है वो तत्वदर्शी है।

00:49:12:00 तो ये भी जो चीज है कि कुर्सी बनी किस पे है? कुर्सी बनने की बात वहां आ रही है क्या? खाली कुर्सी पे ही नहीं भाई श्लोक में क्या लिखा है? श्लोक में खाली कुर्सी की बात जानने वाले को तत्वदर्शी कहा गया कि नहीं कहा गया? हां ये चीज ठीक है लिखा है यहां पे लेकिन ये चीज लिखा है भाई साहब भाई साहब एक मिनट भाई साहब एक एक करके चलिए वहां पर केवल सत्य और असत के बारे में सही से जानकारी रखने वाले को तत्वदर्शी कहा गया है। कि सत्य का कभी सत्य का कभी अभाव नहीं होता और असत का कभी भाव नहीं होता। इसका मतलब जो इस बात को बता रहा है कि जो लोग यह जानते हैं वह तत्वदर्शी है वह बताने वाला भी तत्वदर्शी सिद्ध हो रहा है। तो इस श्लोक के अनुसार इस श्लोक के अनुसार काल भी तत्वदर्शी सिद्ध हुआ। ठीक है? अब दूसरी एक बात आती है कि आपके अनुसार जो रामपाल है, वो तत्वदर्शी है। ठीक है?

00:50:27:01 इसके अनुसार इसके अनुसार काल कैसे तत्वदर्शी संत हुए सिद्ध हुए इस श्लोक में तो ये खुद कह रहे हैं कि तत्व ज्ञानी पुरुषों द्वारा देखा गया है। वो अपने आप को थोड़ी बता रहे हैं यहां पे। अरे भाई क्या देखा गया है? क्या देखा गया है? इसमें जब श्लोक में खुद कह रहे हैं कि असत्ञानियों तत्व ज्ञानियों के द्वारा क्या देखा गया भाई साहब तो जब ये कह रहे हैं कि सत्य का भाव नहीं और असत का अभाव नहीं और ये तत्व्ञानियों के द्वारा देखा ये तत्वज्ञानियों के द्वारा देखा गया तो काल जो काल है जो जो इस श्लोक को बोल रहा है उसको उसको पता चल गया ना कि सत का भाव अभाव नहीं होता है और जिसको पता चल गया उसको तत्वदर्शी माना उन्होंने

00:51:31:01 तो फिर वो दूसरे के पास जाने के लिए क्यों कहे ये तो आप बताओगे ना मुझे आपने कहा है ना काल तत्वदर्शी नहीं है मैंने तो नहीं कहा और आप ये कहते हो कि दूसरे एक मिनट एक मिनट भाई साहब आप ये कहते हो कि वहां दूसरे के पास जाने की बात कही गई है हम नहीं कहते हम कहते हैं कि वो आने की बात आराम आराम आराम से बोलिए कोई कोई आराम से ये क्लेम हम नहीं करते हैं कि दूसरे के पास जाने को कहा है ये आप करते हो हम गीता का परंपरा से प्राप्त अर्थ लेते हैं जिसमें जाने की बात को नहीं कहा गया है हमने वहां कहा है कि आ जाने की बात को वहां कहा गया है मगर आप कहते हो कि नहीं जाने को कहा गया है तो अगर जाने को कहा गया है तो यहां तो तत्वदर्शी सिद्ध हो रहे हैं काल आपके अनुसार अब दूसरी बात अब दूसरी बात भाई साहब दूसरी बात ये है कि हमने एक बात जान ली कि सच का कभी अभाव नहीं होता। सच का कभी कभी अभाव अभाव नहीं होता। जीवन मरण से छूट जाना। क्या उसे सत स्वरूप हो जाना कह सकते हैं?

00:52:47:22 जीवन मरण से छूट जाना क्या उसे सत स्वरूप हो जाना कह सकते हैं? सत स्वरूप मतलब सत जो कभी बदलता नहीं है। इस शरीर का अगर वृत्ति हो गई, शरीर खत्म हो गया इसका मतलब यह नहीं हुआ कि हमारी हमारी मुक्ति हो गई। मैं कहां कह रहा हूं? मैं कह रहा हूं क्या जो आत्मा है वह छूट के कभी सत स्वरूप हो सकती है सतलोक में पहुंचने के बाद वो सत स्वरूप हो जाएगी कि नहीं जिसको कभी जो सत स्वरूप हो जाएगी हां अच्छा पक्का पक्का हां तो इसका मतलब आत्मा एक ऐसा तत्व है जिसका कभी अभाव नहीं हो सकता

00:53:42:21 क्योंकि वो सत है ना सत हो जाएगी ना सतलोक जा के तो अभाव तो हो नहीं सकता उसका तो आपके बाबा जी तो यहां पर लिख रहे हैं कि उसका अभाव था आत्मा का पहले यानी कि तत का भी किसी समय अभाव हो सकता है। ये पहले की बात है और पहले या बाद में तत का अभाव माना जा सकता है कि नहीं? यानी पहले वो असत थी। चलो ऐसे मान लो। पहले असत थी। असत तो बाद में हुई। सत्य पहले थी। पहले सत्य थी तो सत पहले थी तो अभाव कैसे हो गया? क्योंकि यहां है इसके लिए अब आप पहले मान रहे आने से पहले मेरे भाई पहले अपनी पढ़ो पहले हमारे ग्रंथों को पढ़ने की बजाय अपने बाबा जी के ग्रंथ को पढ़ो ये देखिए आप दूसरे अध्याय के

00:54:57:06 16व ही श्लोक का वर्णन करते हुए आपके जो रामपाल जी हैं कहते हैं कि उत्पत्ति से पहले आत्मा का अभाव था। दिख रहा है ठीक है तो यदि आत्मा का अभाव था यानी कि वो असत हो गई ठीक परमात्मा के साथ थे ना इसके लिए अरे इधर उधर देख के झूठ मत बोलो भाई नहीं वो कह रहे हैं सुनो सुनो आपके बाबा जी क्या लिख रहे हैं सुनिए

00:55:33:27 परमात्मा से संपूर्ण संपूर्ण संसार व्याप्त है। यानी कि विस्तार को प्राप्त हुआ है। उस अविनाशी परमात्मा का अभाव किसी भी समय में नहीं होता है। ठीक है? सही बात है। परमात्मा के अतिरिक्त कोई भी नित्य नहीं है। यानी कि आत्मा का अभाव था। परमात्मा से अलग है ना आत्मा? कोई भी नित्य नहीं है क्योंकि आत्मा की उत्पत्ति परमात्मा ने अपने वचन से अपने शरीर से की है। उत्पत्ति से पहले आत्मा का अभाव था। उत्पत्ति से पहले आत्मा का अभाव था। तो अभाव किसका होता है? असत का जो असत है।

00:56:23:06 तो अगर आत्मा अगर आत्मा असत है सुनिए अगर आत्मा असत है तो दो 16 के अनुसार उसका कभी भाव नहीं हो सकता वो कभी सत नहीं हो सकती यह ज्ञान यहां पे है 21 ब्रह्मांड के लिए ये कहां लिखा है काल के काल काल के लिए प्रमाण कहा है कि ये ज्ञान यहां के लिए है क्योंकि काल खुद दे रहे है ना अब मैं प्रमाण पूछ रहा हूं इस समय आपसे काल खुद दे रहे ये ज्ञान तो इसके लिए वो कह रहे हैं भाई साहब ये कहां लिखा है कि ये सत असत का जो बात है ये किस ब्रह्मांड के लिए है ये बात ये कहां लिखा है जब वो खुद कहते हैं ना कि हां भाई भाई साहब मैंने कहा अगला शब्द आप बताएं कि अध्याय नंबर ये श्लोक क्रमांक ये प्रमाण पूछ रहा हूं प्रमाण आपका पक्ष नहीं दो तीन चीजें हैं कन्वर्सेशन में पक्ष तर्क प्रमाण तो पक्ष आपने ने रख दिया कि ये तो 21 ब्रह्मांडों की बात है। सत असत वाली बात 21 ब्रह्मांडों के लिए है।

00:57:33:10 ठीक है। तर्क भी मैंने आपसे मांगा नहीं फिलहाल। अब मैं आपसे प्रमाण मांग रहा हूं। प्रमाण बताइए। ये जो सतत की व्याख्या की है जिसके कारण तत्वदर्शी कहा गया। व्याख्या को जानने वाले को। यह व्याख्या केवल 21 ब्रह्मांडों के लिए है। यह कहां लिखा है? आपको कोई मतलब नहीं है क्या सच्चाई से? क्यों नहीं मतलब है? साफ दिखाई दे रहा है कि यहां पे आप अटक रहे हो। कुछ भी बोलते जा रहे हो। नहीं नहीं ऐसी बात तो नहीं है। आपके बाबा जी ने कहा लिखा है? कहां लिखी है वाली बात? एक ये सत असत वाली बात 21 ब्रह्मांडों के लिए है। कहां लिखी है?

00:58:16:16 अरे कुछ तो शर्म कर लो आप लोग थोड़ी शर्म आती है कि नहीं कुछ भी बोल दो बस मुंह से

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00:58:25:10 अध्याय 15 का श्लोक एक से चार में वहां पे नहीं कह रहे हैं कि तत्व तो

00:59:00:02 ना ही आपके बाबा जी ने ये लिखा है कि असत औसत की जो बात है वो केवल उसके लिए है। 21 ब्रह्मांडों के लिए और ना ही हमारे सनातन शास्त्रों में कहीं लिखा है। और तर्क के अनुसार भी देखेंगे तो यदि आप आत्मा का अभाव मान लोगे जिसका आपने जवाब नहीं दे पाए थे कि मटेरियल कहां से आया अभाव अगर मान लोगे तो जिस चीज का अभाव था उसका कभी शाश्वत सत स्वरूप नहीं हो सकती। फिर आप उसको मुक्ति नहीं दे सकते। जो सतलोक वाली अनंत काल की मुक्ति है वह फिर आप क्लेम नहीं कर सकते क्योंकि उसका अभाव था वो भाव वाली नहीं हो सकती फिर सत स्वरूप हो ही नहीं सकती क्योंकि वो सत स्वरूप थी ही नहीं सत स्वरूप तो वही हो सकता है जो सत स्वरूप है समझ रहे हैं कुछ

00:59:54:00 सब बातें थोड़ा सोचा करिए कुछ भी बोल दो चाहे वो अपने बाबा जी से मैच कर रही है कि नहीं कर रही आपने 10 बातें अभी तक बोल दी जो आपके बाबा जी से मैच नहीं कर रही पहले आप आत्मा को नित्य कह कह रहे थे। आपके बाबा जी ने नित्य नहीं माना आत्मा को। ठीक है? थोड़ा थोड़ा अपने सेंस ऑफ ह्यूमर का इस्तेमाल करो मेरे भाई। अच्छा बाबा जी ने बाबा जी ने नित्य नहीं माना है कि परमात्मा के जीव अविनाशी जीव है। अविनाशी अलग हो गया। और फिर वो क्लेम बनता है जो कह रहा है कि पहले जो है ये नित नहीं ये अभाव था और फिर कह रहा है बाद में अविनाशी। अच्छा अब दूसरी बात अब ये बताओ

01:00:37:13 कि आप कहते हो कि जब आत्मा ये हम अंतिम अंतिम थोड़ी सी बात कर रहे हैं। फिर उसके बाद किसी और से बात करेंगे। आपके साथ काफी बातें हो चुकी है। अर्जुन जब भगवान श्री कृष्ण के साथ में खड़ा है शरीर से आपके अनुसार उनके उनके अंदर काल जाकर के बोल रहा था। ठीक है? तो यदि अर्जुन श्री कृष्ण की शरण में पहले से ही है तो फिर कृष्ण क्यों कहेंगे कि वो मेरे पास आए है ना

01:01:14:28 अर्जुन श्री कृष्ण की शरण में पहले से ही है। तो फिर ये तर्क नहीं बनता कि भाई मेरे अपने पास आने को क्यों कहेंगे वो ये क्लेम किया जाता है ना रामपाल रामपाल वालों की तरफ से हम तो अब बात यहां पर ये आती है कि क्या ये जो जीव है उसको जो अविनाशी कहा गया है वो किस कारण से कहा गया है क्यों है जीव अविनाशी परमात्मा तो अंश है इसके लिए अविनाशी कहा गया नहीं

01:01:51:13 इसलिए कहा गया है कि वह सदैव परमात्मा के साथ रहती है। ये आपके बाबा जी ने अपनी किताब में कहा है। कि सदैव परमात्मा के साथ होने से आत्मा अविनाशी है। समझ रहे हैं मेरी बात? परमात्मा ऐसा लिखे हैं कि परमात्मा के साथ रहती थी। वहां से हम बिछड़ करके आए। इसके लिए नहीं अविनाशी नहीं अविनाशी तो है। नहीं परमात्मा के साथ है इसलिए अविनाशी है। साथ में है। जैसे ही वो साथ कट होगा हटेगा वो अविनाशी नहीं रह जाएगी। वो साथ में है परमात्मा के। इसलिए अविनाशी है।

01:02:42:12 अब कुछ बातें थोड़ी सी मैं पूछ लूं आपसे। मैं एक बात खत्म कर लूं फिर हम लोग करेंगे बात। तो परमात्मा जो है क्या कहते हैं? परमात्मा के साथ रहने के कारण आत्मा अविनाशी बताई गई है। आपके रामपाल के द्वारा। ठीक है? तो अब बात ये आती है कि

01:03:17:08 यदि आत्मा सदैव परमात्मा के साथ होने के कारण अविनाशी है तो यानी कि जिस समय जो अर्जुन है वो काल की शरण में था श्री कृष्ण की शरण में था उसी समय अर्जुन परमात्मा की शरण में भी था तो फिर किस परमात्मा की शरण में जाने को बोला गया? यही चीज तो हम आपसे पूछना चाहते हैं। अरे हमारे अनुसार तो जाने को बोला ही नहीं जा रहा ना भाई। हमारे अनुसार तो ज्ञान दो तरीके की गति होती है। एक होती है ज्ञानार्थक और एक होती है गत्यार्थक। ज्ञानार्थक गति ये होती है कि मैं भले ही आपके पास भी खड़ा हूं पर फिर भी मैं मन से आपकी शरणागत नहीं हुआ हूं। ज्ञानार्थक गति नहीं है। वहां पर गत्यार्थक गति तो है। समझ रहे हैं? फिर

01:04:32:24 आपने कहा कि तू मुझको अपना ले तू मेरे पास आजा। मेरा हो जा मेरी शरण में आ जा। तो ये हो गई ज्ञानार्थक गति। वहां होते हुए भी आप उसकी शरण आपने उसकी सत्ता को स्वीकार नहीं किया था। पहले मन से अब जो है मन से ज्ञानार्थक गति करने को बोला जा रहा है। गत्यार्थक गति करके तो तुम आ गए हो मगर ज्ञानार्थक गति अभी नहीं कर पाए हो तो ज्ञानार्थक गति के लिए वहां बोला गया तो हमारे अनुसार जाने के लिए बोला ही नहीं गया है। आपके अनुसार बोला गया है। तो सवाल फिर आपसे है कि यदि वहां पर परमात्मा भी था तो फिर किसके पास जाने को बोला गया? क्योंकि परमात्मा के साथ रहने के कारण ही आत्मा अविनाशी है।

01:05:23:03 ठीक है? अब इस सब के बाद एक बात ये आ गई कुल मिलाकर के तत्वदर्शी हम सिद्ध नहीं कर पाए आपका। ठीक है? आपने आत्मा के बारे में कुछ बताया नहीं। आपने मोक्ष के बारे में कुछ बताया नहीं। काल के वो जीवन मरण के बारे में कुछ बताया नहीं। अब कुल मिलाकर के बात आ जाती है कि भाई जब आपके द्वारा मिलने वाला मोक्ष मोक्ष ही नहीं है। ठीक है। अच्छा ये बता दो ईश्वर है ये सिद्ध कैसे होता है? बस ये बता दो।

01:06:08:14 ईश्वर है सिद्ध कैसे होता है ईश्वर की कुछ सत्ता होती है कि नहीं मैं आपसे पूछ रहा हूं कैसे सिद्ध करोगे ईश्वर है मुझे बताओ ईश्वर की सत्ता को सिद्ध करिए अब इस चीज को हम नहीं सिद्ध कर पाएंगे आप सिद्ध कर सकते हैं। आपके तत्वदर्शी ने तात्विक चीजें कुछ बताई है कि नहीं बताई है? सुनो

01:06:42:26 ईश्वर सिद्ध कैसे होता है? अगर इस चीज को अगर आप समझ लोगे ना और न्यूट्रल होकर के एक बार को सोचने का प्रयास करोगे तो मेरे भाई आप चीजों को समझ पाओगे कि सत्य वास्तविकता में है क्या? केवल इसी बात से नहीं हम आपकी सारी बातें बहुत ध्यान से सुन रहे हैं। सुनिए और समझने की कोशिश कर रहे हैं। सुनिए प्रदारक उपनिषद का एक वचन है। उसके आधार पर मैं आगे की व्याख्या करूंगा। आप समझ जाएंगे। असतो मा सद्गमय तमसो मागमय मृत्य मतम गम संसार के प्रत्येक जीव में कभी ना मरने की अखंड ज्ञानी बन जाने की सदा सुखी रहने की चाह विद्यमान है। उसी चाह को इस वचन में कहा गया है। असतो मा सद्गमय तमसो मागमया मृत्युमा मतमय अब क्या है कि हमारे अंदर की वो चाह जिससे हम चाह करके भी अलग नहीं हो सकते। उस चाह के विषय का होने का उस चाह का विषय का अस्तित्व

01:07:59:13 डंके की चोट पर हमें मानना पड़ेगा। जैसे कि अगर हमारे अंदर भूख है भोजन की तो उससे सिद्ध हो जाता है कि इस दुनिया में भोजन है। हमारे अंदर प्यास है पानी की उससे सिद्ध हो जाता है कि इस दुनिया में कोई पानी है। इसी प्रकार से जिस प्रकार से ऊंख मात्र होने के कारण भोजन का अस्तित्व सिद्ध होता है। प्यास मात्र सिद्ध होने के कारण पानी का अस्तित्व सिद्ध होता है। उसी प्रकार सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर की प्यास होने के कारण सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर का अस्तित्व सिद्ध होता है। अब इसमें एक फैक्ट आएगा। फैक्ट क्या आएगा? कि एक बच्चे ने जन्म लिया। ठीक है? उसको कुछ नहीं बताया गया कि इस दुनिया में कोई भगवान है। कोई सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर है। या उसको यह नहीं बताया गया कि इस दुनिया में अनंत सुख है। या फिर उसको यह नहीं बताया गया कि इस दुनिया में अनंत ज्ञान है। या फिर उसको ये नहीं बताया गया कि इस दुनिया में अमरता है। फिर भी बचपन से ही वो सच्चित आनंद को ढूंढता है। हर चीज में वो उसी को ढूंढ रहा है।

01:09:14:19 तो जब उसको यह बताया ही नहीं गया कि इस दुनिया में सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर है तो फिर वो उसको ढूंढ क्यों रहा है? इससे सिद्ध होता है कि जो जीव है वो ईश्वर का अंश है। उसके अंदर भी अपनी क्वालिटीज वो विद्यमान है। वो जिसकी कारण वो आकर्षित हो रहा है। अंश हमेशा अपने अंशी की ओर आकर्षित होता है। समझ रहे हैं? अंश हमेशा अपने अंशी की ओर आकर्षित होता है। तो जैसे कि जो अग्नि है जब वो लपट बनती है तो वो दाएं हवा अगर नहीं चलेगी तो वो सीधे आकाश में स्थित अपना जो उसका अंशी है अग्नि हो गई अंश और उसका अंशी सिद्ध हुआ ऊपर आकाश में सूर्य तो वो अपने अंशी की ओर भागने का प्रयास करती है। कोई भी चीज जहां से निकली है वहीं जाने का प्रयास उसका होता है। नदियां, झरने, जल प्रपात इत्यादि सब पेड़ पौधे जहां से निकलते हैं उसी में

01:10:29:20 मिल जाने के लिए हर दिन वो गति करते हैं। इसी प्रकार जो जीव है क्योंकि वो ईश्वर का अंश है। सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर का अंश है। इसीलिए वो उसी उसी में मिल जाने के लिए प्रयासरत होता है। बिना बताए ही बिना स्वीकार किए ही उसके अंदर सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर के लिए आकर्षण होता है और उस आकर्षण से ही हम सिद्ध कर पाए हैं कि भगवान है वरना आप सिद्ध नहीं कर सकोगे। ठीक है? यहां पे इतने लोग इतने लोग नास्तिक है जो कभी भगवान को मानते ही नहीं तो उनको कैसे सिद्ध करेंगे कि ईश्वर है। सिद्ध कर तो दिया। नास्तिक भी कभी मरना नहीं चाहता है।

01:11:14:14 सिद्ध को पता है भाई उसको तो पता है कि मरना है एक दिन मरेंगे हम भी मरेंगे मगर अल्लाह नहीं चाहता मरना नहीं चाहता अलग बात है मैं बता रहा हूं ना जब उसको पता है कि मरना है एक दिन फिर भी वो मरना क्यों नहीं चाहता है क्यों दुख नहीं चाहता मन में यानी कि वो मुंह से कह रहा है कि इस दुनिया में कोई अमर नहीं है। मगर खुद कह रहा है कि मुझे अमर अमर के पास ही जाना है। खुद कह रहा है इस दुनिया में कोई अखंड ज्ञानी नहीं है। ईश्वर का मतलब क्या है? सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर। सतित आनंद स्वरूप परमेश्वर। जो अमर है जो अखंड ज्ञानी है जो कभी दुखी नहीं होता। ठीक है? ये है भगवान का अर्थ। तो भगवान शब्द से भगवान को नकार कर अपनी क्रियाओं में अपनी इच्छाओं में वो उसी भगवान को ढूंढ रहा है जिस भगवान के होने से वो मना कर रहा है। जैसे एग्जांपल ले ले वैज्ञानिक वैज्ञानिक कहते हैं कि इस दुनिया में ऐसा कोई नहीं है जो सब कुछ कर सकता है। सर्वशक्तिमान है। कहते हैं ना कहते हैं। मगर उनसे यह पूछा जाए

01:12:30:07 कि भैया यह बताओ कि वह कौन सा आविष्कार होगा जिसको करने के बाद तुम शांत बैठ जाओगे? तो वो क्या जवाब होगा? जिस दिन मैं कुछ ऐसा यंत्र बना लूंगा कि मैं सब कुछ कर सकूं तब तक वैज्ञानिक शांत नहीं बैठेंगे। जिस दिन मैं कुछ ऐसा बना लूंगा कि मैं जो चाहूं कर सकूं। इसका मतलब वो जा उसी तत्व की ओर रहे जिस तत्व के अस्तित्व को अभी नकार रहे हैं। सिद्ध कर दिया हमने बहुत से नास्तिकों को आस्तिक बनाया है। बहुत से नास्तिकों का मुंह बंद किया है। मेरे ख्याल से रामपाल जी ने कभी नहीं किया होगा। आपके गुरु में इसलिए जी लगा रहा हूं। अब दूसरी बात ये आती है। मैं अपने मूल विषय पे आ जाता हूं जो चल रहा था। तो क्योंकि उसके अंदर भी वही क्वालिटीज है जो परमात्मा के अंदर है। इसलिए जीव आकर्षित होता है परमात्मा की ओर। परंतु

01:13:33:08 जिसके कारण उस अट्रैक्शन के कारण हम ईश्वर को सिद्ध कर पाते हैं। ईश्वर को सिद्ध करने के कारण हम धर्म को सिद्ध कर पाते हैं। परंतु आपके जो ये जो बाबा जी हैं इन्होंने आत्मा के अंदर वो क्वालिटीज मानी ही नहीं है। तो फिर आत्मा अट्रैक्ट कैसे होगी? ईश्वर की ओर जब उसके अंदर ईश्वर की क्वालिटी है ही नहीं तो अट्रैक्ट कैसे होगी ईश्वर की ओर और जब अट्रैक्ट नहीं होगी तो ईश्वर सिद्ध कैसे होगा और जब सिद्ध नहीं होगा तो धर्म कैसे सिद्ध होगा ये सब सोचने वाली बात है और इसके साथ ही साथ जब आत्मा के अंदर सच्चिदानंद की क्वालिटी है ही नहीं तो उसे तुम सच्चिदानंद स्वरूप मोक्ष कैसे दोगे? बिलकुल टाइट हो गया 11 बज गए

01:14:30:12 लाइट बंद हो भाई वो सच्चिदानंद है ही यहां तो मोक्ष तब दे रहे है ना वो सच्चिदानंद है बस उसको उस तक पहुंचाना है उसका बोध कराना है तब तो ठीक है आपने मान लिया कि वो वो सच्चिदानंद है ही नहीं उसका तो अभाव था तो ना तो वो अट्रैक्ट होगी ना तो वो अट्रैक्ट होगी ईश्वर के लिए और ना ही उसको आप कभी अनंत वो जीवन वो अनंत मुक्ति दे पाओगे। क्यों नहीं दे पाओगे? क्योंकि वो स्वरूप है ही नहीं। सच्चिदानंद का अभाव कहां है? सच्चिदानंद अब आप जाइए। जो अब आप जाइए हंसीखुशी जाइए आप। मैंने जो आपको समझाया उसको जरा मनन करिए। चिंतन करिए। अभी आपको बहुत अध्ययन की आवश्यकता है। ठीक है? आप चिंतन मनन करिए और आप एक बात बताइए कि आपको क्या आपके गुरु जी ने यह बताया है कि आपकी ये किताबें कहां छपती हैं?

01:15:47:15 चले गए क्या?

⬜ Not used yet · 01:15:52:09 – 01:25:44:00 (9:52)

01:15:52:09 [हंसी] चलिए और किसी को ले लेते हैं। कोई और है तो आ जाओ भाई दे दो जरा लिंक विंक। लिंक दिया है भाई एक आध कोई व्यक्ति 101 मिनट के लिए बस मैं हूं आना चाहे तो आ जाए

01:16:54:00 वैसे इस प्रकार से होती थी कि एक व्यक्ति जो है कह रहा है कि हां तो भैया उस यह एक व्यक्ति है जो कह रहा है। अच्छा हां एक बात और है भाई स्ट्रीम यारार्ड का हमारा सब्सक्रिप्शन जो है वह खत्म हो गया है और आप देख रहे होंगे यहां पर मार्क आ रहा है तो आप लोग थोड़ा-थोड़ा सहयोग कर दें जिससे कि स्ट्रीम यारार्ड का हम सब्सक्रिप्शन ले सके और इस तरह की जो जागरूक करने के निमित्त चर्चाएं वह आपको प्राप्त होती रहे क्योंकि इसमें कुछ लिमिटेशंस होती हैं। तो आप लोग थोड़ा सा सहयोग करें आर्थिक जिससे कि हम यह सब्सक्रिप्शन ले सके। कुछ

01:17:57:06 15 ₹16,000 का इसका आता है शायद सब्सक्रिप्शन तो आप लोग थोड़ी मदद करें। अच्छा इनका कहना है कि तुम बस चंदे पर ही पलते रहो पलते हो। अच्छा आपका जो जेलधाम निवासी बाबा है वो फिलहाल उन लोगों के टुकड़ों पर पल रहा है जो टैक्स भरते हैं। है ना? जेल की रोटी तोड़ रहा है ना? तो उन लोगों का टैक्स जा रहा है। जेल कैसे चलती है? जब सरकार जेल का पैसा देती है। सरकार को पैसा कहां से मिलता है? जब जनता टैक्स देती है। तो जो व्यक्ति भी टैक्स दे रहा है ना उसके टुकड़ों पर पल रहा है आपका बाबा। दूसरी बात यह है कि तुम जो ये एनाकोंडा वाले पाइप लगाने की बात करते हो यद्यपि उसमें भी बहुत सारी चीजें हैं। पर अगर मान लिया जाए कि अनाकोंडा वाले पाइप लगवाए हैं। तो पाइप नकली नोटों से बनवा लगवाए हैं। फर्जरी की है पाइप फैक्ट्री वाले के साथ या फिर उसको पैसे दिए हैं। पैसे दिए तो पैसे उसका पैसे कहां से आए वह अभाव मटेरियल कहां से आया चंदे से आए काहे से आए

01:19:13:03 बेवकूफ एक व्यक्ति है वो जो हमने मेले में पुलिस प्रशासन से बातचीत के समय यह लिखा था पुलिस ने जब हमें यह कहा था एक बात हमारे सामने आई थी कि मेले में जाकर के जो हमने विरोध प्रदर्शन किया तो भाई हमें पुलिस की सहायता लेनी चाहिए थी। विरोध प्रदर्शन अपने से नहीं करना चाहिए था। उस बात के लिए हमने लिखा कि भाई जो हमने वो मेले में जाकर डायरेक्ट विरोध प्रदर्शन किया पुलिस सहायता लिए बिना उसके लिए हमें खेद है। तो क्षमा नहीं मांग रहा हूं। खेद है पर और आगे इस तरह के कृत की पुनरावृत्ति नहीं होगी। तो कहां की? खुद से कहां गए? अब तो पुलिस ले गए ना। कोर्ट गए, पुलिस ले गए। अब थोड़ी ना गए खुद से करने। तो जहां भी जाएंगे पुलिस के साथ जाएंगे कोर्ट के साथ जाएंगे। अच्छा तुम लोगों ने अच्छा मुझे आईडिया दिया भाई

01:20:09:15 भाई फेस दिखाइए मनप्रीत जी भाई साहब चले ही गए वो आए ही नहीं दोबारा। कोई और है जो फेस के साथ आ सकता है?

01:20:54:14 हमने तो कई बार कहा है कि मत पड़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में। आप लोग याद करते होंगे इन सब बातों का। हां कि आजकल इस तरह की लाइव कम हो रही है। वैसे आज की चर्चा काफी ठीक रही। सामने वाला व्यक्ति मतलब उड़ता नहीं दिखाई उसने। महेंद्र हां भाई महेंद्र जी जल्दी से फेस दिखाइए वरना हम पूरा करने वाले हैं अपनी लाइव को फिर ना कहिएगा कि भाई

01:21:39:10 इनका कर तो रहे हैं। इनके चैनल्स बैन हो रहे हैं। इनके लोगों को पुलिस ढूंढ रही है। यह लोग लखनऊ में किताबें नहीं बेच पा रहे हैं। आगे चलकर के उत्तर प्रदेश में नहीं बेच पाएंगे। फिर यह जो है भारत में नहीं बेच पाएंगे। तो हो रहा है। उसी के कारण ये लोग बरगला वो हो रहे हैं। बताइए मनप्रीत जी। जय श्री राम। जय श्री राम जी। इनके कुछ बताइए जी अभी कोई हरियाणा में कुछ हुआ है इनका दंगाई जो था कुछ उसके बारे में कुछ ये लोग चिल्ला रहे थे भगवान भगवान करके तो वहां के युवाओं ने जागरूकता के साथ प्रतिकार किया तो इन लोगों ने भैया अपने गुंडा वही पुरानी गुंडाग कर दी कि भैया भगवान नहीं कहोगे तो हम मारेंगे मारा तो वहां फंस गए ये लोग और दबा दिया को ऐसा लग रहा है कि पैसे वैसे दे दिए कहीं खबर आई है वहां से चुप करवा दी खाप पंचायत वगैरह ये जो है हम तो अपने भरोसे करते हैं हम तो अपने भरोसे करते हैं बिल्कुल

01:22:54:16 सही बात है लेकिन दबा दिया मामला फिर आया नहीं भाई जो भी है हमें तो ये पता है कि हम क्या कर सकते हैं है ना नहीं वो तो ठीक है तो लेकिन असलियत सामने आ ही रही है धीरे-धीरे आ गई अरे अरे तो उसी समय आ गई थी जब असलियत जब पकड़ने जा रहे तो वो कह रहा है भाई हमारे उनका इलाज चल रहा है उनकी तबीयत खराब है इनके बाबा जी का इलाज कैसे चल रहा है भाई वो तो भगवान है कैसे चल रहा है इलाज अच्छा एक बात है सोचने की कि जब ये खुद कबीर का अवतार है तो ये क्यों कह रहे हैं कि मैं कुत्ता हूं

01:23:38:12 मैं कबीर का कुत्ता हूं परमेश्वर का कुत्ता हूं काफी बातें अब तो एक वीडियो आई है कि वो प्रमोट कर रहे हैं 25,000 दिए हैं। एक को 15,000 वो ऑटो में बैठ के किताबें किताबें बांट रहे हैं। सीधा नहीं आ रहे। उसको तो आज पकड़ा गया है। कुछ ऐसा हुआ है। कुछ कुछ ऑटो वाला पकड़ा गया है। कोई किस में दावे रखे? अरे कोई नहीं अपना केस मजबूती के साथ चल रहा है। आप लोग इंतजार करिए बहुत जल्द शुभ परिणाम सामने आएंगे। चलिए ठीक है। ठीक है। जय श्री राम। जय श्री राम। जय श्री राम। जो लोग इस प्रकार से किसी लालच या लोभवश शांत शांत हो रहे हैं। अपने धर्म के साथ समझौता कर रहे हैं। आगे भुगतेंगे। भाई हम तो इस संतुष्टि के साथ सोते हैं कि हमने अपने धर्म के लिए कुछ किया। प्रश्न यह है कि आपने क्या किया? ठीक है? और जिसको भी कोई तकलीफ हो ये हिंदू ये

01:24:55:10 ये छुआछूत, सामाजिक भेदभाव, बढ़ावा, मनुस्मृति वो लाइव आ जाए भैया लाइव। लाइव के लिए हमारी व्यवस्था आपको मालूम ही है भाई वो स्क्रीन पर दिखा दीजिए वो एक बार हमारी व्यवस्था क्या है लाइव के लिए लाइव जो है जिसको भी आना है वो 740830 18869 पर हमें WhatsApp करें हमारे साथ इसी प्रकार से चर्चा सुनिश्चित होगी और आप हमारे समक्ष आ सकते हैं। वह जो भाई साहब थे उनको शायद कुछ प्रश्न करने थे पर उससे पहले वह चले गए हैं। हो सकता है कि उनको चिंतन मनन करने का मन हो और ठीक है फिर सभी को जय श्री राम।

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B: SARVASHAKTIMAAN DHARMA Live 1:25:52 · 19 Nov 2025

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A · Live गीता के नाम पर रामपाल के बोलबचन अध्याय 2 Ep-1 #satlokashram #rampalma...
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