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⬜ Not used yet · 00:00:02:07 – 00:02:53:26 (2:52)

00:00:02:07 अब हरि और हर में भेद करने के लिए इसकन की तरफ से सबसे पहले बताया जाता है कि भाई भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं भगवत गीता में कहा है कि मैं भगवान हूं और किसी ने नहीं कहा मगर ये तो गलत है शिव पुराण में शिव जी कह रहे हैं भगवती पुराण में माता कह रही है राम गीता में राम जी कह रहे हैं मैं भगवान हूं इस पर इसकन वाले आगे कहते हैं कि भाई केवल भागवत पुराण ही है जो मानने योग्य है और अन्य पुराण मानने योग्य नहीं है मगर अगर भागवत पुराण को ही हम केवल मान ले तो उसी में तो अन्य पुराणों का सत्यापन किया गया है उसमें जो अंत में सूची दी गई है उसमें इन सारे पुराणों के नाम है और भागवत पुराण को लिखने वाले भी महा ऋषि वेदव्यास और शिव पुराण को लिखने वाले भी वे महा ऋषि वेदव्यास तो महा ऋषि वेदव्यास जी पर अगर विश्वास है तो उनके सभी ग्रंथों पर विश्वास होना चाहिए और अगर नहीं है तो फिर ऐसा कैसे कि एक पर नहीं है और एक पर है इसके अलावा एक तर्क और दिया जाता है कि भागवत पुराण की रचना सबसे अंत में हुई है मगर ऐसा भी नहीं है कहीं भी ऐसा नहीं लिखा हुआ है कि भागवत पुराण की रचना सबसे अंत में हुई है वस्तुतः कोई अलग-अलग पुराण है ही नहीं एक ही पुराण है जिसके 18 चैप्टर्स है केवल पद पुराण में दिया गया है अन्य और भी ग्रंथों में दिया गया है कि वेदों से भी पहले विनियोग मंत्र की तरह ब्रह्मा जी ने सर्वप्रथम पुराणों

00:01:17:27 का स्मरण किया था तो एक ही पुराण के 18 चैप्टर है अब बस बात यह है कि एक ही ईश्वर स्वयं को पांच अलग-अलग रूपों में प्रकट करते हैं पांच अलग कृत्य के निर्वाह के लिए सृष्टि की रचना एक बार नहीं हुई है कई बार हो चुकी है तो कल्प भेद से एक चैप्टर में सृष्टि की रचना की जो व्याख्या की गई उसमें शिव तत्व को प्रधान रख कर के की गई अगले चैप्टर में सृष्ट रचना की व्याख्या विष्णु तत्व को प्रधान रख कर के की गई उससे अगले चैप्टर में सृष्टि रचना की व्याख्या भगवती तत्व को प्रधान में रख कर के की गई बस इसी प्रकार से कर्मानुसार गणेश जी इसी प्रकार से कर्मानुसार ब्रह्मा जी और यह भी जगह-जगह पर शास्त्रों में कहा गया कि इनमें भेद करने वाला पापी है इनमें भेद करना पाप है अपराध है अच्छा एक तर्क और दिया जाता है कि शिवजी तो परम वैष्णव हैं शिवजी तो भगवान विष्णु के परम भक्त हैं परम का अर्थ सबसे ऊंचे वाले मगर इस सिद्धांत का निर्वाह भी ये लोग नहीं कर पाते हैं शिवजी को परम वैष्णव भी नहीं रहने देते हैं भगवत गीता यथारूप के दूसरे अध्याय के 62 में श्लोक में क्या लिखते हैं कि किसी अन्य विष्णु के भक्ति की तुलना में भगवान शिव को निम्न दिखाया गया है कि शिव जी ध्यान मने थे अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण नहीं कर पाए वहीं पर हरिदास ठाकुर नाम के एक भक्त ने अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण कर लिया

00:02:33:06 यह कंपैरेटिव व्याख्या देकर के शिवजी के वैष्णव को भी भंग कर दिया गया कि वोह परम वैष्णव है इतनी अनास्ता डाली जा रही है शिव जी के प्रति शिव दुर्गा काली के नाम का जप श्री कृष्ण भगवान के नाम के जप के समान समझने वाले मूर्ख और अपराधी हैं मगर बाइबल और कुरान के द्वारा जो प्रतिपादित होने वाला ईश्वर है वह कृष्ण के बराबर है वह कृष्ण के समान है भगवान

00:02:53:26 का स्थान कोई नहीं ले सकता और वह भगवान एक है उनका नाम है सनातन धर्म और वास्तविक आध्यात्मिक चेतना के अनुसार कृष्ण उनको अल्लाह भी बोलते हैं उनको गॉड भी बोलते हैं उनको जेहोवा भी बोलते हैं उसमें कोई भेद नहीं कोई अल्लाह अलग नहीं है कृष्ण अलग नहीं है गॉड अलग नहीं है

⬜ Not used yet · 00:03:12:24 – 00:04:22:24 (1:10)

00:03:12:24 एक ही है और अंतता क्या लॉजिक प्राप्त होता है कि शिव जी जाना चाहते थे भगवान श्री कृष्ण की रासलीला में मगर उनको परमिशन नहीं मिली यह दिखाया जाता है कि देखिए शिव जी की स्थिति क्या है मगर वो यह नहीं बताते कि भगवान श्री कृष्ण ने भी शिव जी के नाम की दीक्षा ली थी ऑफिश उपमन्यु ऋषि से और 1000 साल तक तपस्या की थी और श्री कृष्ण ने बताया कि इनकी कृपा की वजह से ही मैं इतना विख्यात हूं इनकी कृपा की वजह से ही मैं लोगों में जाना जाता हूं अब यहां पर यह लोग कह देंगे कि ये तो लीला है भगवान की मगर अब यह कैसे तय होगा कि यह लीला है मगर शिवजी जो कर रहे हैं वो लीला नहीं है इसका कोई पैरामीटर नहीं है इसमें ये लोग कहेंगे कि भाई हर जगह लॉजिक नहीं होता है हर जगह लॉजिक नहीं होता और ये कहते भी हैं आपको आप में से कई लोग ऐसा सोचते हैं कि मैं कभी किसी इकन के ऑथेंटिक व्यक्ति के पास नहीं गया ऐसा नहीं है मैं गया था अपने सारे सवालों को लेकर के गया था लखनऊ इकन मंदिर के जो अध्यक्ष हैं उनके पास में कम से कम दो से तीन घंटा बैठा और वहां मैंने अपने सवाल उनसे पूछे और जब मैं सवाल ज्यादा करने लगा तो उन्होंने अंत में कहा कि हमें संशय भी ये देखकर करना चाहिए कि कहां करना है ठीक है गु प्रभु

00:04:22:24 जी मगर अभी जैसे आपने एक बात कही कि भागवत पुराण श्रेष्ठ है तो उसको श्रेष्ठ माने या ना माने अगर माने तो फिर देवी भागवत भी उसी के तुल्य हो गई बराबर आ गई या फिर उसको क्या मतलब 19 पुराण माने 18 माने फिर वो एक संशय बना रहेगा संश आत्मा विनती भगवान श्री कृष्ण ने कहा चार में देखिए ऐसा है ना संशय आत्मा विनती लेकिन आत्मा कोय समझना होगा कहां संशय करना है कहां नहीं करना और संशय में भी

⬜ Not used yet · 00:04:49:15 – 00:05:37:08 (0:48)

00:04:49:15 अब ये भी अब संशय को खत्म करने के लिए हम किसी के पास जा रहे हैं वो व्यक्ति भी यह कह रहा है कि संशय कहां करना चाहिए मालूम होना चाहिए तो संशय को खत्म करने के लिए एक और संशय कि संशय कहां करना है किसी चीज को समझने के लिए किसी चीज को लॉजिक के द्वारा समझने के लिए एक और लॉजिक कि हर जगह लॉजिक नहीं करना चाहिए तो फिर कहां करना चाहिए कहां नहीं करना चाहिए यह संशय अरे भाई वह गति ही क्या जो गणता को गंतव्य तक ना पहुंचाए गुरु का अर्थ है गु का मतलब अंधकार और रू का मतलब निकालने वाला अद्व तार का उपनिषद गुरु का मतलब है जो संशय दूर करे वही गुरु प्रश्न पूछने पर जो यह कह रहा है कि संशय भी कहां करना चाहिए और कहां नहीं यह मालूम होना चाहिए तो वह गुरु किस प्रकार से कहला जा सकता है जब व संशय को खत्म ही नहीं कर रहा है वो तो यह कह रहा है कि प्रश्न मत करो केवल हरे कृष्ण का जाप करो सबको भी

00:05:37:08 बोलना चाहूंगा कि जैसे प्रभु जी 16 माला जप कर रहे हैं वैसे ही आप भी 16 माला करिए और इन तर्क कुतर्क वितर्क शास्त्र के विभिन्न गहराइयां इनमें जाना हमारा उद्देश्य नहीं है हम हम इन विषयों में ना फस करके हरे कृष्ण महामंत्र का जप करें और यही हमारा

⬜ Not used yet · 00:05:58:15 – 00:09:14:00 (3:15)

00:05:58:15 इस प्रकार से खप होने वाला सनातन धर्म अब्राह्मिक विचारधारा के समान दिखाई देने लगता है कुरान में 5101 में कहा गया है कि ज्यादा सवाल ना करिए अन्यथा आपके लिए वो आयतें खोल दी जाएंगी जिनके कारण पिछले कुछ लोग बागी हो गए थे तो उसी प्रकार से यहां किया जा रहा है कि भाई हमारा शास्त्रों की गहराइयों में जाने का कोई वो नहीं है उद्देश्य हमें तो बस हरे कृष्ण का जाप करना है हरे कृष्ण कौन है नहीं पता ऐसे में ऐसी भ्रामक शिक्षा को फॉलो करने वाला व्यक्ति ट्रेडमिल पर खड़ा हुआ वो व्यक्ति दिखाई देता है जो सिर्फ दौड़ रहा है वो कहीं पहुंच नहीं रहा है जहां प था वही है क्योंकि क्योंकि अभी मैंने बताया ना वो गति ही क्या जो गणता को गंतव्य तक ना पहुंचाए तो ट्रेडमिल पर गति तो है मगर जो घनता है ना वो कहीं पहुंच नहीं रहा है वही दौड़ रहा है एक ही जगह पर खड़ा हुआ वही हाल है ऐसी भ्रामक शिक्षाओं का अनुसरण करने वालों का और यह सारे जो रहस्य है यह सारी जो वास्तविकता है यह खुल ना जाए ये भेद खुल ना जाए इसीलिए ट्रेनिंग देते समय शिक्षा देते समय बताते समय पढ़ाते समय सबसे पहले कहा जाता है शंकराचार्य से दूर रहना क्योंकि शंकराचार्य तो मायावादी है शंकराचार्य तो खुद को भगवान समझता है ऐसा भरा जाता है जहर शंकराचार्य के लिए लोगों में जिससे

00:07:13:22 कि लोग हमेशा शंकराचार्य से एक निश्चित दूरी बना कर के रहे जिससे कि कभी वह शंकराचार्य के टच में ना आ जाए जिससे कि उनको वास्तविकता का पता ना चल जाए जिससे कि भेद ना खुल जाए हमारा इसलिए शंकराचार्य से दूरी बनाई जाती है शंकराचार्य जी मायावादी है कि नहीं इस पर भी हम वीडियो लाने वाले हैं मगर फिलहाल यह समझ लीजिए जो नैरेटिव बनाए गए हैं शंकराचार्य मायावादी है शंकराचार्य खुद को भगवान मानते हैं यह सारे नेटिव इसलिए बनाए गए हैं जिससे व्यक्ति को कभी सच्चाई ना पता चल जाए क्योंकि शंकराचार्य के पास जाएंगे तो शंकराचार्य उन्हें असलियत बता देंगे प्रमाण के साथ तर्क के साथ शंकराचार्य आपसे ये नहीं कहेंगे कि भैया सवाल भी कहां करना हैय देखना पड़ेगा शंकराचार्य आपसे ये नहीं कहेंगे कि हर चीज का लॉजिक नहीं होता है आप करिए सवाल सभा में आने के बाद सब सबसे पहला सवाल होगा कि किसी का कोई प्रश्न हो तो बताइए ऐसे में मर्यादित रहते हुए सीमित रहते हुए संयम रखते हुए हम जब केवल प्रश्न करते हैं तो स्कन की जो भ्रामक शिक्षा है उसके वजह से जो लोग ग्रसित हैं वो आकर के हमें चैलेंज करते हैं क्रिटिसाइज करते हैं गालियां तक देते हैं और लोगों की ऐसी स्थिति को देख कर के मुझे मैट्रिक्स मूवी का वो सीन याद आ जाता है जब मॉर्फियस हीरो को बताता है कि अभी सभी लोग सच्चाई सुनने के लिए तैयार नहीं है और जब तक ये लोग तैयार नहीं है अगर इनको तुम सच्चाई बताने

00:08:28:26 जाओगे तो सबसे बड़े दुश्मन तुम्हारे यही हो जाएंगे वही हो रहा है आज मगर हमारा कार्य है जब तक नौका डूबती नहीं तब तक खेते रहना कर्मन निवादी कारस मा फलेशु कदाचना और हम खेते रहेंगे आगे महादेव की इच्छा हम हर उस व्यक्ति से प्रश्न करेंगे जो भगवान को बाधित करता है जो धर्म को बदलता है और जो जीव को ऐसा मोक्ष देता है जो कि परम स्वतंत्र ना होकर के परतंत्र है चाहे फिर वह ब्रह्मा कुमारी हो चाहे फिर वह आर्य समाज हो चाहे वह कबीर पंथी हो चाहे वह स्कन हो चाहे वह स्वामी नारायण पंथ वाले हो या डॉक्टर जाकिर नायक भी

00:09:12:10 हो

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 9:14 · 17 Nov 2023

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