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00:00:01:28 [घंटी की आवाज़] निकली उस दिन 28 नवंबर को घर से निकली थी हॉस्टल के लिए एक तारीख को उसको जाना था ट्रिप पर तो सामान लेके जितना उसको पहले हॉस्टल में पहुंचाना था घर से जो ले जाना था वो सारी सारा सामान धीरे-धीरे उसने हॉस्टल में रख दिया और उस दिन जब सामान ले निकली तो उस समय मैं नहा रही थी वो जैसे जैसे निकलने से पहले गले लग के जाती है तो उस दिन वो गले भी नहीं लग पाई थी मेरे मैं नहा रही थी और उसने कहा कि जा रही हूं मुझे लेट हो रही है कॉलेज की बस आने वाली तो फिर चली गई और फिर वहां तक मेन रोड तक जाने के बाद उसको एहसास हुआ कि मां को
00:00:51:27 हम मां को छोड़ के जा रही हूं तो उसने मेन रोड पर सामान रखा अपना फिर कॉल किया मुझे वापस घर आई वो घरा के मतलब मां आप नीचे आओ एक बार करके मैंने कहा क्या हुआ तो बोली मैं कुछ भूल गई हूं आप आओ नीचे तो मैंने कहा भेज रही हूं किसी के साथ मुझे भी स्कूल जाना है लेट हो रही है तो बोली नहीं आप आओ फिर नीचे गई तो उसने गले लगाया मुझे और कहा अपना ध्यान रखना और बस लव यू मां करके वो वापस निकल गई मैं समझ ही नहीं पाई थी इतने दिन बाद ऐसे मतलब इतना करते जा रही थी और आज फिर से वापस आके ये कैसे गला गले लगा रही है। मैंने पूछा तो बोलती है आपकी शिकायत रहती ना आजकल मैं आपसे बात नहीं करती हूं करके इसलिए मैं ट्रिप में जा रही हूं। दो-तीन दिन तक आऊंगी नहीं ना इसलिए करके मैं आपको फिर से मिलने आई थी घर के और मुझे बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि वो पूरी तरह छोड़ के जाने की तैयारी में। फिर फोन पर दो दिन तक नॉर्मल कांटेक्ट में रही। 1 दिसंबर को बात हुई थी उससे सुबह कि हां मै ट्रिक में जा रही हूं कर फिर कॉलेज में उसने उसके पहले से ही उसने एक मेल आईडी से मेल करना चालू किया कॉलेज में मेरी तरफ से कि ये वो मेरा मेल
00:02:06:28 आईडी है कि मैं अपनी बेटी को घर पर बुला रही हूं करनी उसी मेल आईडी को वो बार-बार ट्राई करती थी कि कॉलेज वालों को हॉस्टल वालों को मैसेज करती थी उससे कि मैं अपनी बेटी को घर बुला रही हूं तो परमिशन चाहिए करके तो दो चार बार उसी परमिशन से उसी मेल से मेल करके घर पर आई भी थी और कॉलेज वालों ने ऑब्जेक्शन नहीं दिया था उस पर। तो उस दिन भी सुबह 7:30 बजे मां का मतलब मेरी तरफ से मेल किया उसने कॉलेज को कि 7:30 बजे मैं बुला रही हूं करके। फिर उसका टाइमिंग थोड़ा सा आगे पीछे करके फिर से मेल किया और कॉलेज वालों को मेल मिल गया मां की तरफ से कि जा सकती है वो घर। और फिर वहां से निकली। फिर जो लेडी उसको लेने आई थी उसके साथ जाके कहीं पर उसने रजिस्टर पोस्ट किया सारे पुलिस स्टेशंस में कि मैं अपनी मर्जी से जा रही हूं। मैं 18 साल की हो गई हूं और इस ज्ञान को फॉलो करती हूं और मैं मुझे मेरी मां से प्रोटेक्शन चाहिए करके वहां आसपास के जितने भी तीन चार पुलिस स्टेशन थे सब में उसने रजिस्टर पोस्ट किया और मेल भी किया और फिर उसकी कॉपी भी उसने साथ में रखी और फिर रात को 9:00 बजे की ट्रेन से वो दिल्ली पहुंच गई और उसका यह कहना है पुलिस वालों को कि मैं अपनी मर्जी से आई हूं और जनरल कंपार्टमेंट में बैठ के आई हूं जबकि दो दिन का सफर था पूरा उसके Google अकाउंट पे कुछ
00:03:22:00 फोटो फोटो जो मिली है उसमें दिख रहा है कि बहुत सारा सामान उसके पास है तो उसका अकेले का नहीं है। तो ये चीजें भी बाद में समझ में आई मुझे और सारे रास्ते वो बिल्कुल कांटेक्ट में नहीं थी। कितनी बार कॉल करो तो फोन में चार्जिंग नहीं है। फोन मुझे कहीं डिपॉजिट करना पड़ रहा है ऐसे वैसे करके और दो दिन पहले उसने फ्रेंड्स के साथ जाके कुछ फोटो ली थी कहीं मॉल में जाके और वो फोटो मुझे उस दिन भेजती है कि देख के आप निश्चिंत हो जाओ कि मैं मतलब मजे कर रही हूं फ्रेंड्स के साथ करके। बस उसके अलावा बात नहीं की उसने पूरे दो दिन का सफर होता है कोयंबतूर से डेली तो दिल्ली पहुंच गई थी शायद उस समय मैंने कॉल किया था तो किसी वो साथ में जो लेडी थी उसने फोन उठाया था शायद उसने कहा माताजी करके उसने बात की तो मैं एकदम दंग रह गई ये फ्रेंड्स के साथ गई है तो माताजी वाला शब्द तो कहां से आ रहा है तो मैंने पूछा आप कौन तो उसने तुरंत फोन काट दिया फिर मैं एकदम परेशान हो गई और मैंने लगातार 15 20 बार कॉल किया तो रिसीव ही नहीं वो लोग सोच में पड़ गए कि अब क्या करें इधर? फिर 15 20 बार कॉल जाने के बाद प्रीटी ने मैसेज किया कि मैं कॉलेज अभी पहुंची हूं। यहां पर सर्टिफिकेट डिस्ट्रीब्यूट कर रहे हैं। सामान मेरे हाथ में है तो मैं आपको आधे घंटे बाद कॉल करूंगी घर में। मतलब इतनी अच्छी तरह वो झूठ बोलने में माहिर हो गई थी। तब तक बड़ी बड़ी शांति
00:04:37:10 से मतलब कि सामने वाले को बिल्कुल भी शक हुए बिना झूठ बोल रही थी वो। तो आधे घंटे बाद उसने कॉल किया। एकदम नॉर्मल तरीके से बात किया कि बहुत मजा आया। हम लोग ट्रिप में मजे करके आए हैं और सर्टिफिकेट्स दे रहे थे इसलिए फिर मैंने कहा ये माताजी करके किसने बात की तो बोली कि माताजी तो किसी ने बोला नहीं आपको ऐसा लगा तो मैं परेशान हो गई कि मुझे सुनाई तो दिया और बेटी इतने आराम से बात कर रही तो शायद मुझे गलत सुनाई दिया या फिर यह मेरा वहम है। वहम तो हो नहीं सकता क्योंकि मैंने सुना तो है इतना तो पक्का है। तो फिर एक बार बेटी पर भरोसा कर ही लेती हूं करके मैं ठीक है करके फोन रख दिया मैंने लेकिन बेचैनी हो ही रही थी कि कुछ गलत हो रहा है। फिर रात को 9:30 पौ:45 के आसपास मैंने कॉल किया उसको तो नॉर्मल तरीके से उसने बात की। मैंने कहा वीडियो कॉल रिसीव कर। तो बोली कि इस हॉस्टल में सब लोग सो रहे हैं। थके हुए हैं। लाइट बंद है तो मैं भी बात नहीं कर सकती। मैंने कहा बाहर आके बात कर लेकिन तेरे को बात करना पड़ेगा। तो फिर उसने तुरंत वीडियो कॉल रिसीव किया। बोला कि फिर मैंने देखा कि वो हॉस्टल का रूम नहीं था। पीछे कुछ पर्दा दिख रहा था जो वहां का नहीं था वो। फिर नॉर्मल तरीके से ही बात किया। फिर मैंने फोन रख दिया और मुझे चैन ही नहीं पड़ रहा था कि कुछ तो गड़बड़ है। फिर मैंने उससे कहा कि लोकेशन शेयर कर अपना कहां पर है? तो उसने
00:05:52:14 अब वो परेशान हो गई कि दिल्ली में है तो लोकेशन कैसे शेयर करेंगे। फिर उसने अपने फ्रेंड से बात करने की कोशिश की। लोकेशन लेने की कोशिश की। वो सब कुछ हो नहीं पाया। फिर उसने Google मैप से लोकेशन निकाल के शेयर किया। WhatsApp लोकेशन ना शेयर करके Google मैप से कॉलेज का लोकेशन शेयर किया। फिर मैंने उसको कॉल किया और कहा कि तू कॉलेज में तो है नहीं इतना मुझे पता है। कहां है बता वरना मैं अभी आधी रात को निकल के कॉलेज जा रही हूं और तुझे पता है कि कॉलेज कितना दूर है और तेरी मां अकेली फिर उसने बताया कि मैं दिल्ली आई हूं। तो मुझे लगा कि किसी प्रोग्राम अटेंड करने के लिए मैं मना करती हूं। इसलिए वो दिल्ली गई है और मैंने डांटा उसको अच्छे से और कहा कि तू घर आ बेटी। फिर मैं तेरे को बताती हूं कि झूठ बोलने का मतलब क्या होता है। तू क्या-क्या कर रही है। मुझसे झूठ बोल के देखती हूं मैं भी। फिर मैंने अपनी दीदी लोगों को फोन लगाया। किसी ने रिसीव नहीं किया। फिर भांजी ने रिसीव करके कहा कि वह अपनी मर्जी से आई है यहां। मैंने कहा बताना तो चाहिए था कि आई है तुझे पता है कि मैं परेशान होऊंगी उसके लिए। तो तब भी यह नहीं बताया कि वो पूरी तरह आ गई। मैंने कहा तुम सब से मैं बाद में बात करूंगी। पहले बेटी से तो समझ लो कि कर क्या रही है वो अपनी पढ़ाई छोड़ के। घर आ जाए फिर बात करती हूं उससे। फिर अगले दिन सुबह मुझे मेल आता है 5:30 बजे कि मां आपको बता के आती तो आप आने नहीं देते मुझे। इसलिए मैं अपनी मर्जी से आ गई हूं
00:07:07:18 और मैंने सुबह-सुबह खोला नहीं था। देख तो लिया था लेकिन खोला नहीं था क्योंकि मुझे स्कूल जाने की जल्दी थी और मुझे लग रहा था कि थोड़ा सा अपना कुछ एक्सप्लेनेशन दे देगी वो समझा देगी मुझे तो मेरा गुस्सा कम हो जाएगा। फिर उसके बाद घर आएगी तो मैं उतना डांटूंगी नहीं उसको। इसलिए वो मेल कर रही हूं। फिर जब स्कूल जाके थोड़ा सा फ्री हुई तब मैंने मेल खोल के देखा तो उसमें लिखा था कि आप हॉस्टल से मेरा सामान ले आना। मैं समझ ही नहीं पाई कि हॉस्टल से सामान लाने की बात क्यों कर रही है ये? दो-तीन बार मेल पढ़ा तब जाकर मुझे एहसास हुआ कि यह पूरी तरह छोड़कर चली गई है और उसमें लिखा है कि मैं अपने डिसीजन खुद ले सकती हूं। मैं अब 18 साल की हो गई हूं और अब अपना ध्यान रखना और यहां मैं अपना ध्यान रखूंगी और अब ये रास्ता मेरा लाइफ टाइम के लिए यही हूं। ये चीजें फिर समझ में आई। तो मैंने तुरंत स्कूल में मतलब कुछ बहाना बना के मैं घर आई कि तबीयत ठीक नहीं है। फिर घर आकर मैंने कॉल किया उसको कि तू बताए बिना चली गई तो क्या हो गया? मैं तुझे वापस ले आऊंगी। ऐसे थोड़ी ना कुछ तो अभी लाइफ को समझी ही नहीं है। पढ़ाई करते-करते निकल गई है तो फिर ऐसे ऐसे तो मैं जाने नहीं दूंगी तुझे। फिर मैंने कहा कि ले आऊंगी वापस जो उसको कहा उस बात को लेके अमोल ने उसको गाइड किया कि तू वहां दिल्ली पहुंच ही गई थी। तो
00:08:23:15 डीसीपी को साउथ वेस्ट दिल्ली के डीसीपी को उसने मेल करवाया कि मेरी मां को मैंने बता दिया था तरीके से कि मैं अपनी मर्जी से आई हूं। उसके बाद मां मुझे धमकी दे रही थी कि वापस ले जाएगी तो मुझे आपसे प्रोटेक्शन चाहिए और मैंने सारे पुलिस स्टेशनंस में इन्फॉर्म कर दिया था कि मैं अपनी मर्जी से जा रही हूं। तो ये चीज मैं फिर समझ ही नहीं पा रही थी कि क्या करूं। मैं अपनी बहन से बात की। फिर रात को मैंने लैपटॉप खोल के देखा कि उसकी चैटिंग उसमें WhatsApp चैट खुली हुई थी उसमें। तो मैंने इसके पहले भी देखा था कि भाई जी आप नाराज हैं क्या मुझसे बात क्यों नहीं कर रहे हैं। ऐसा चैट मैंने देखा था जब वो घर पे थी। तो देखूं तो सही कि चल क्या रहा है। तो फिर मैंने देखा तो WhatsApp तो बंद था उसमें लेकिन Google अकाउंट उसका खुला हुआ था। तो उसमें मैंने देखा कि दो-ती घंटे पहले ही उसने पीसीपी को मेल किया कि मां से मुझे प्रोटेक्शन चाहिए और मां मुझे धमकी दे रही है। और फिर मैंने अपनी बहनों से बात की कि गलत हो रहा है। यह सब कुछ आप सही नहीं कर रहे हो। उसको जल्दी से घर भेज दो वरना सही नहीं होगा। उन्होंने कहा कि हमारी कोई इसमें इंटरफेरेंस नहीं है। आपको भी हमने ज्ञान दिया है। अगर वह ज्ञान समझी है तो वो उसकी अच्छाई है। आप समझ नहीं पाए ये आपकी कमी है। ज्ञान तो हम सबको देते हैं तो हम इसके जिम्मेदार कैसे हुए? ज्ञान तो आपको भी दिया। फिर अगर हमारे ज्ञान की वजह से वो गई है तो आपको भी चले जाना चाहिए था। आप नहीं गई मतलब
00:09:38:21 आप हम जिम्मेदार नहीं है। आपकी बेटी जिम्मेदार है। वो अपनी मर्जी से गई। ये उनका तर्क था। फिर मैंने बहुत उनसे बहस की। तब जाकर उन्होंने कहा कि आप चले जाओ दिल्ली। आपकी बेटी मानती है तो ले आओ। हम कुछ नहीं कर सकते। फिर मैं अगले दिन दिल्ली पहुंची। 5 तारीख को 5 तारीख को आधी रात को 2:00 बजे मैं वहां पर आश्रम पहुंची। लेकिन उन्होंने कहा कि अभी हम मिलने नहीं देंगे आपकी बेटी को। रूल्स हैं हमारे आश्रम के कुछ तो हम सुबह ही मिलने देंगे। फिर दो दिन तक मैं ना सो पाई ना खा पाई। फिर रात को 2:00 बजे से लेकर सुबह तक का मैं इंतजार कर रही थी। 7:00 बजे उन्होंने बेटी से बेटी को सामने लाया और मैं देख के दंग रह गई। उसके चेहरे पर कोई कोई इमोशन नहीं है। कोई फीलिंग नहीं है। बस एकदम क्लाश की तरह खड़ी है वो मेरे सामने। मैं देख के कि बेटी क्या हुआ? क्यों यहां आई है? अभी तो अच्छे से मिल के आई थी तू तो बस यही मेरा रास्ता है। आप बस इस जन्म के मां-बाप हो। आपके साथ मेरा हिसाब किताब खत्म हो गया। मैंने कहा ऐसे कैसे हिसाब किताब खत्म हो गया? तू 18 साल की हुई है तब तक मैं पाली हूं। तो नहीं इतना ही आपका काम था। आपका आपकी जिम्मेदारी थी मुझे पालना। और मैं अब आपकी बात नहीं सुनूंगी। मुझे इस रास्ते पर आना है और मैं आ गई हूं और आप कुछ नहीं करोगे अब।
00:10:54:00 और इतना उसके सामने मैं बैठ के रोना करना कर रही हूं। उसका हाथ पकड़ने की कोशिश कर रही हूं। छूने भी नहीं दे रही थी मुझे। एकदम लाश की जिंदा लाश की तरह एक रोबोट की तरह मेरे सामने बैठी थी कि उसको कुछ फर्क नहीं पड़ रहा था। मैंने कहा एक बार घर चल ले समझ लेते हैं कि क्या परेशानी है। मैं तेरे को कहीं रोक-टोक नहीं करूंगी। तेरे को जो करना है करना लेकिन घर में रह के करना दूसरी जगह नहीं और तेरे को पता है मैं तेरे में ही जी रही हूं तेरे बिना मैं जी नहीं पाऊंगी तू चल ले बेटी एक बार करके बहुत मैंने उसे मेहनत की लेकिन कहीं उसको फर्क नहीं पड़ रहा था एकदम लाश की तरह बैठी थी मेरे सामने मैं पूछ रही हूं उसको कि हुआ क्या है तेरे को बिल्कुल तेरे इतना जो तू मुझे ले इतना इमोशनल रहती थी तो बोलती है ये सब मोह माया है। मुझे मोह माया के जाल में नहीं फंसना है। मुझे अब भगवान मिल गए हैं। मैं भगवान के रास्ते पर आ गई हूं। तो अब और कुछ नहीं चाहिए मुझे। सही जगह पहुंची हूं। और मुझे पता है आप भी देखना एक दिन में मुझ पर गर्व करोगे कि आपको भी यहां आना है। आप भी बोलोगे कि बेटी तूने सही काम किया। तेरी वजह से मैं भी सही रास्ते पर आई हूं। करके आप भी बोलोगे देखना। तो फिर बहुत उसको समझाने की कोशिश की। बिल्कुल मारने को तैयार ही नहीं
00:12:09:03 थी। फिर मैं बाहर से निकल गई। फिर मैंने कहा कि मतलब अब मुझे चीजें क्लियर हो रही थी कि जितने भी केसेस आए थे वीरेंद्र देव दीक्षित के आश्रम में वो सारे सही थे। इन लोगों का कहना है कि वो सब तब मैंने ध्यान नहीं दिया था कि चलो कौन इन झंझट में पड़े कि बहनों से कौन बहस करे। उनकी सोच है तो वो अपने घर में बैठी हुई है तो कोई नुकसान नहीं है। ठीक है। ज्ञान को कुछ भी भगवत गीता के श्लोक वगैरह कर रहे हैं तो करने दो। उसमें कोई गलत नहीं। तो मैं कभी उस झंझट में पड़ी ही नहीं। लेकिन अब समझ में आ रहा था कि जितने मां-बाप परेशान हो रहे थे वीरेंद्र देव दीक्षित की संस्था की वजह से वही हाल आज मेरा है और फिर पुलिस स्टेशन में भी मैंने वही कंप्लेंट दी कि यह संस्था पहले से बदनाम है और इस आदमी ने मतलब बहुत गलत किया है लड़कियों के साथ और आज वो भागा हुआ है तो मेरी बेटी 18 साल की जरूर हुई है लेकिन वो अपनी समझ से समझदारी से यहां आई है। इस बात की छानबीन की जाए और न्याय दिलाया जाए। तीन दिन तक मैं पुलिस स्टेशन के चक्कर काटी हूं और फिर वहां से एक एसआई साथ में आई थी और उन्होंने बस पूछताछ की तो ये लोग सारे घेर के बैठ गए। मेरी बेटे को बोलते हैं कि आप बस स्टेटमेंट लेने आई हो तो स्टेटमेंट ले चले जाओ। आपको काउंसिल करने का कोई अधिकार नहीं है। वो समझा रही थी कि आपकी मां अगर मतलब परेशान है तो आप चले जाओ एक बार मां के
00:13:24:04 पास। वहां रह के कर लेना। मां को समझा के आ जाना। तो सारी लेडीज वहां जितनी भी थी सब लोग घेर के खड़ी हो गई। उस एसआई को बोलती है कि आपको किसने हक दिया इससे बात करने का? वो स्टेटमेंट दे रही थी आप ले चले जाओ। फिर सब लोग लेडीज जो वहां पर थी सबने बेटी के साथ रह के उससे स्टेटमेंट लिखवाया फिर से और वो स्टेटमेंट लेके सही वापस आ गई और यही है कि 18 साल के ऊपर की हो गई है तो हम कुछ नहीं कर सकते। उसके बाद जो मेरी लड़ाई चालू हुई इन लोगों से कि क्या हुआ? सारा WhatsApp चैट इनका Google अकाउंट सारी चीजें मैंने निकाली तो धीरे-धीरे परतें खुलती गई कि कैसे कहां से शुरुआत हुई क्या उसने मेरी बेटी से बात की क्या-क्या कॉल रिकॉर्डिंग है क्या-क्या इनके वीडियोस हैं। क्या-क्या इनकी चार्ट है। सारी चीजें निकल निकली। तब मुझे समझ में आया कि कैसे मेरे ही आंखों के सामने मुझे पता चले बिना कैसे मेरी बेटी को अपने कंट्रोल में किया गया। फिर मुझे लगा कि चीजें तो सारी क्लियर है तो हम कोर्ट में एप्लीकेशन देंगे और तुरंत ही मेरी बेटी मेरे हाथ में आ जाएगी। तो मैंने दिल्ली में कोई मेरी फ्रेंड के फ्रेंड है उनके थ्रू मैंने रिट पिटीशन डाला दिल्ली हाई कोर्ट में लेकिन वो केस आज तक चलते ही आ रहा है और दो साल से उसमें कोई सुनवाई नहीं थी। शुरू-शुर में दो-तीन सुनवाई हुई थी उसमें
00:14:39:15 जिसमें मुझे परमिशन दी गई थी कि मैं बेटी से मिल सकती हूं। बेटी बिल्कुल पहले दिन तो पुलिस प्रोटेक्शन के साथ वो डालती हूं और वही वही उसका हाल की लाश की तरह है और मैं बगल में उसके खड़ी हूं। मैं उसकी तरफ देख रही हूं और वो मेरी तरफ देखने को भी तैयार नहीं है। उसको छूने की कोशिश कर रही हूं। एकदम हाथ मतलब छूने भी नहीं दे रही। एकदम पलट के खड़ी हो गई कि हाथ नहीं लगाना मुझे। और मैं सामने भी उसके खड़ी हूं पुलिस वहां कोर्ट में तो पुलिस वाले बोल रहे हैं कि मैडम आप आप हमको हमारी ड्यूटी करने दीजिए। आपकी बेटी नहीं चाहती कि आप उसको देखूं। तो मैं उसको देख भी नहीं पा रही थी। फिर जज ने भी कहा कि आप बात करो अपनी मां से पांच मिनट तो बोलती है कि मेरी इच्छा नहीं है मां से बात करने की। मैं नहीं बात करना चाहती और मेरी मर्जी के खिलाफ कोई मुझे बात भी नहीं करवा सकता। तो एक चीज उस पर रटा दी गई है कि मैं मेजर हूं और अपने डिसीजन खुद लूंगी और कोई इसमें इंटरफेयर नहीं कर सकता। फिर जज ने चेंबर में बुलाकर उससे बात की। उसको समझाया दो-तीन पेशी के बाद तो उसको मानना पड़ा कि वो मुझसे मिलेगी। अ हर दिन 45 मिनट मिलने की परमिशन दी गई थी और किसी के इंटरफेरेंस के बिना मैं उससे बात करूं ये परमिशन मिली थी। तो पहले दिन तो उन्होंने मिलने ही नहीं दिया और मतलब इंटरफेयर
00:15:54:21 कर रहे थे बार-बार बीच में आना वीडियो लेना कि मेरी बेटी को यह ध्यान रहे कि उन सबकी नजर है बेटी पर तो वो आराम से बात भी नहीं कर पा रही थी। फिर मैंने थोड़ा सा जोर से बोला कि आप इंटरफेयर कर रहे हैं तो मैं फिर से कंप्लेंट करूंगी। ऑर्डर में क्लियर लिखा हुआ है कि किसी के इंटरफेरेंस के बिना मैं बेटी से मिलूंगी। तो फिर उन्होंने अगले दिन से सामने तो नहीं दिखे लेकिन ऐसी जगह पर हमको बिठाए थे। वहां पर सारे पर्दे लगे थे, ग्रिल्स लगे थे, खिड़की थी। तो हर जगह से हर कोई नोटिस कर सकता है कि हम क्या बात कर रहे हैं। तो हम सबकी नजर में ही बीच में बैठे थे। मैंने कहा छत पर जाकर बात कर लेते हैं। तो बोलती है छत पर भी नहीं जाऊंगी। मैं यहीं बैठूंगी। इसके अलावा बाहर एक कदम भी नहीं रखूंगी। तो फिर परमिशन हमको उतनी ही मिली। रोज मिल के आती थी जैसे 4:00 से पौ:45 बजे का मिलने का टाइम था। तो 4:00 बजे के 1 मिनट पहले भी अगर मैं वहां गेट के सामने खड़ी होती हूं, बेल बजाती हूं तो वो नहीं खुलेंगे। 4:00 बजे ही गेट खोलेंगे। और जैसे ही पौ:45 बजती थी मेरी बेटी उठकर खड़ी हो जाती थी कि आपका टाइम हो गया। अब निकलो अब तो जितनी देर पौन घंटा मैं उसके सामने कुछ भी समझाने की कोशिश करना रोना कुछ भी करती थी बचपन की यादें मतलब उसको याद दिलाना कि बेटी हम कितने अच्छे से रहते थे कितना तू मुझे मानती थी कितना हम दोनों मिलके स्ट्रगल किए हैं।
00:17:10:04 कुछ फर्क नहीं पड़ रहा था उसके बस वह ऐसे लाश की तरह बैठी रहती थी कान बंद करके जैसे कुछ भी उसको सुनना नहीं उनका कहना था कि मां के रूप में माया आएगी जो तुमको वापस ले जाने की कोशिश करेगी तुम अपने अपने आप में इतना स्ट्रांग रहना कि बस उस माया से तुम जीत जाओ तो उसको ये सिखाया गया कि मैं माया के रूप में आ रही हूं तो फिर बिल्कुल उसके कुछ फर्क ही नहीं पड़ रहा था इतने दिन तक मैंने कोशिश की लगभग 14 15 दिन फिर उसके बाद कोर्ट से आर्डर आया कि आप एक हफ्ता रह सकती हैं वहां पर तो वहां रहने गई तो वहां की कहानी अलग है। मतलब मुझे फोन वहां उनके आश्रम के अंदर यूज़ नहीं करने देना है और जिस रूम में रखे थे वहां पर ही रहना है और बेटी मेरे साथ नहीं सोएगी। दूसरे बेड पर सोएगी। मैं उसको छू भी नहीं सकती। वो भी ठीक है। मैंने मान लिया। फिर उसके बाद ऊपर जहां उनका आश्रम है मेन आश्रम वहां पर अगर बैठते थे तो छूने भी नहीं देना है। बहुत ठंडी थी उस समय। मतलब मैं ठंडी सहन नहीं होती है मुझे तो बहुत ज्यादा परेशान थी। एक दिन ऐसे ही बैठे-बैठे वह एकदम कंबल लपेट के बैठी थी। तो मैंने अपने पैर उसके कंबल में घुसाने की कोशिश की। तो इतनी जोर से उसने झिड़की दी मुझे कि क्या कर रहे हो आप? क्यों छू रहे हो मुझे करके? मैंने कहा बचपन से ये चलते आ रहा है कि हम दोनों एक कंबल में सोते हैं। तेरे पैर ठंडे
00:18:25:06 होते हैं तो तू मेरे मतलब गर्म करने की कोशिश करती है। मेरे पैरों के नीचे दबा लेती है। हम ये करते ही हैं। तो आज क्या हो गया? तो मैं अभी भगवान के आस्त में हूं और आप मुझे छुओगे तो मेरे वाइब्रेशन खराब हो जाएंगे। यहां हम किसी को छूते नहीं हैं। तो आप दूर रहूं मुझसे। तो समझ में ही नहीं आ रहा था कि यह भगवान है क्या है? क्या कहां मेरी बेटी फंस गई है। उसको मैं छू नहीं सकती। उसको मैं देख नहीं सकती। बहुत मतलब बुरा समय था। और वहां छत पर भी बेटी अकेली जा नहीं सकती। उसके दिमाग में यह भरा गया है कि जो बाहर के लोग हैं वो सारे दुर्योधन दुशासन है। तो इस चार दीवारी से इस तालों से अगर तू बाहर निकलेगी तो कोई भी तेरे को मतलब तेरे साथ गलत कर सकता है। तो छत पर भी अगर जाना है तो उनकी माताएं जो साथ में रहती है वो साथ में जाएगी। ग्राउंड फ्लोर पर भी जाना है तो माता साथ में जाएगी। मैंने कहा नीचे चलते हैं मेरे साथ चल दे। मैं हूं साथ में। तो बोलती है आपके साथ नहीं जाऊंगी। आपके साथ सेफ नहीं हूं मैं। माता साथ में चलेगी तभी जाऊंगी। और मैंने कहा ठीक है फिर मैं चली जाती हूं नीचे। तो उसको इतना अजीब लग रहा था कि आप अकेले नीचे चले जाओगे। नीचे मतलब अकेले कैसे जा सकते हो? कैसे सेफ हो? इतना डर उसके दिमाग में है कि मैं खुद भी अकेले नीचे नहीं जा सकती। मैंने कहा हम एक जगह से दूसरे एक स्टेट से दूसरे स्टेट दोनों ही गए हैं।
00:19:40:07 अपनी नई दुनिया बताए हैं। कौन साथ था हमारे? कोई भी तो नहीं था और क्या बिगड़ा है हमारा? तो वो सारी चीजें वो भूल गई है। अब इतना डर उसके दिमाग में है कि कुछ नहीं हम अकेले कर सकते हैं। हम किसी ना किसी का हमको सपोर्ट हमेशा चाहिए। क्योंकि सगा भाई और सगा बाप भी दुर्योधन दुशासन होते हैं और रात को लाइट बंद करके नहीं सोते हैं वो लोग बोलते हैं कि सारे दुष्ट आत्माएं चारों तरफ रहती है तो वो कभी भी अटैक कर सकती है तो लाइट चालू करके ही सोना है जो पहले कभी ऐसे नहीं करती थी ये भी पढ़ा दिया गया कि सौगा भाई भी दुर्योधन दुशासन होता है बिल्कुल बिल्कुल किसी पर भी भरोसा नहीं कर सकते आप दुर्योधन दुशासन हर कोई होता है जो आदमी है वो दुर्योधन दुशासन है बस इनके गुरु के अलावा मैंने कहा फिर ये भी तो आदमी ही है तो बोलती है यह तो अष्ट देवों में से मतलब मुझसे फिर नहीं कहा कि अष्ट देवों में से हैं लेकिन ये उनके बोलती थी डिवाइन सोल है ये ये बहुत पवित्र आत्मा है और उनके फर्स्ट फ्लोर पर जो वहां के ओनर है भावना करके उनके पति जो रहते थे तो एक दिन फर्स्ट ग्राउंड फ्लोर से हम लोग सेकंड फ्लोर पर आ रहे थे और बीच में उनका आना हुआ तो ऐसे इसको गाइड कर दिया गया कि तुम उधर पलट जाओ और मेरी बेटी ऐसी जैसे ससुर को देख के बहू घूंघट में कैसे
00:20:55:13 पलट जाती है कि जेठ का सामना नहीं करना है। ससुर का सामना नहीं करना है। बस एकदम पलट गई और उनको बोल दिया गया कि संस्कृति आ रही है तो आप पलट जाओ। तो फिर वो भी पलट गए। इधर ये भी पलट गई। मैंने कहा ये क्या है? मतलब रास्ते से वो आ रहे हैं। वो सीढ़ियां उतर रहे हैं और तुम सीढ़ियां चढ़ रहे हो। इतनी चौड़ी सीढ़ियां है। तो इसमें क्या प्रॉब्लम हो गई? तो बोलती है कि आदमी का सामना नहीं करना है और वह उसी बिल्डिंग में रहते हैं। उन्हीं को लाना ले जाना करते हैं। इनका खेल ही समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर चल क्या रहा है। आधी रात को 2:00 बजे उसको जगाते हैं। पूरा दिन बिजी रखते हैं। इतना काम देते हैं कि वो अपने आप में कुछ सोचने की ही टाइम उनको नहीं मिलती है कि हम क्या कर रहे हैं। हम कुछ गलत तो नहीं कर रहे हैं। बिल्कुल सोचने पर भी पाबंदी है। टाइम ही नहीं मिलता है। इतना बिजी रहते हैं तो फिर थक जाते हैं। फिर सो जाती हूं। बस वहां का माहौल पूरा ऐसे ही तालों में बंद रखे हैं उसको और अभी तो और भी ज्यादा पूरा पैक कर दिए हैं बिल्डिंग को कि कहीं कहीं से कोई घुस नहीं सकता। फिर क्या हुआ?
00:21:58:26 मैं मिल नहीं पाई अपनी बेटी से और तरस गई और मैं पुलिस स्टेशन के चक्कर काट काट के भी थक गई। एनएचआरसी से थोड़ा सा काम आगे बढ़ते दिखा। मुझे अपनी बेटी की चिंता तो है ही साथ-साथ वह जितने बच्चों को और फंसा रहा है उसकी भी बहुत ज्यादा चिंता हो रही थी क्योंकि यह आदमी पूरे देश भर के स्कूल्स कॉलेजेस में जाकर प्रचार कर रहे हैं। क्या क्या किसी प्रकार से दैहिक शोषण भी वहां पर होता है बच्चों का जो जिनको ले जाया जाता है। ये एक ये कठिन प्रश्न है मेरा जो आपके लिए सुनने में मतलब आपको जवाब देना इसका थोड़ा आपके लिए कठिन होगा। मगर लोगों के जानने के लिए और समाज के लिए आवश्यक प्रश्न है। क्या किसी प्रकार से वहां पर जो जाने वाली जो लड़कियां है इनका दैहिक शोषण भी होता है। ऐसी कुछ जानकारी वीरेंद्र देव दीक्षित के बारे में तो सबको पता है ही कि वो क्या करते थे? आपकी जानकारी में क्या ऐसा कुछ आपको आशंका? वीरेंद्र दीक्षित से जुड़े हुए कई मामले हैं। आपने बताया कोर्ट केसेस भी हुए वो भागे भी और बाद में अभी की क्या स्थिति वीरेंद्र दीक्षित की डेथ हो चुकी है। वीरेंद्र देव दीक्षित तो खत्म हो गए हैं 2022 में और वो जानकारी बाहर नहीं निकाली गई थी क्योंकि उन्होंने कहा था कि वो इसी शरीर से सबको सतयुग में ले जाएंगे। अब तो फिर बाद में ये
00:23:14:00 जानकारी आई कैसे वो तो उनके साथ जो लोग थे उन्होंने ही बताया कि मतलब कुछ लोग जो साथ में थे उनको समझ में आया कि ऐसा कुछ है ना कि कोई डेथ सर्टिफिकेट वगैरह भी मिल गया है अभी दीक्षित का। जी शुरुआत ऐसे हुई कि जो लोग उनके साथ थे वह मान रहे थे कि ये ये इनहीं में भगवान है और इसी शरीर से हम सबको सतयुग में लेकर जाएंगे। जब वो खत्म हो गए तो उनके साथ जो कुछ लोग जुड़े थे उनको समझ में आया कि ये तो चले गए हैं। अब हमको सतयुग में कौन ले जाएंगे? तो फिर उनका दिमाग खुला कि हम गलत जगह फंसे हैं। तो फिर उन्होंने प्रचार करना चालू किया कि ये वीरेंद्र दीक्षित खत्म हो गए और साथ में वो लोग थे। उन्होंने स्टेटमेंट भी दिया कुछ। अब वह कितना उनको मानते हैं इसका तो मुझे कोई जानकारी नहीं है। लेकिन जब वह खत्म [गला साफ़ करने की आवाज़] हो गई यह चीज समझ में आई तो अमोल कोहनी ने उनके सारे बर्थ डेथ सर्टिफिकेट वगैरह सब कुछ निकलवाया। अब इनका कहना है कि वो जो भगवान की आत्मा वीरेंद्र देव दीक्षित में आती थी। अब वह इनके अंदर आती हैं। यह जो हीरा एक डिब्बी में रखा हुआ था वह डिब्बी को तो जला दिया गया है वहां पर हैदराबाद में कोई क्रिमेशन सेंटर पर और अब वो जो भगवान है जो शिव की आत्मा राम की आत्मा कृष्ण की आत्मा है इन ये अष्टदेव
00:24:29:06 जो इन्होंने बाबा की बहुत सेवा की है। अब इनके अंदर आकर सबका उद्धार करने में यह काम कर रही है। तो अब इन्हीं को भगवान माना जाए। उस शरीर को भी याद नहीं करना है। जिस शरीर में भगवान की आत्मा है उसी शरीर को याद करना है। तो अब इनका गाइडेंस ऐसे सबको अपनी तरफ डाइवर्ट करने में लगे हुए हैं कि अब यही भगवान है। तो तो फिर ये तो क्लियर हो गया। जी वीरेंद्र अब वीरेंद्र देव दीक्षित की जगह इन्होंने ली है तो आगे चलके ये भी वही ज्ञान फैला सकते हैं कि सबको पवित्र करने के लिए जो वीरेंद्र देव दीक्षित करते थे उसी बहाने से और ये भी वही करेंगे। और कुछ मुझे ऐसे प्रूफ भी मिले हैं जहां पर यह लड़कियों को समझाने की कोशिश कर रहा है कि इनको भगवान माने। इनको इनको पार्टनर माने अपना। एक रिकॉर्डिंग ऐसी मिली है जहां एक लड़की पूछ रही है इनके ज्ञान के आधार पर बोला जाता है कि 9 लाख लोग सतयुग में जाएंगे जिसमें 4.5 लाख ब्रह्मकुमारी से होंगे और 4.5 लाख इनके ज्ञान से होंगे। रुद्रमाला ये अपने आप को रुद्रमाला बोलते हैं और ब्रह्मकुमारी को विजयमाला बोलते हैं। तो आधे लोग इधर के होंगे तो आधे उनके पार्टनर जो हैं उधर से होंगे। तो लड़की पूछती है कि हमारे पार्टनर बीके में है क्या करके तो वह बताते हैं कि नहीं यहां पर भी होंगे यहां पर जो अष्टदेव की जगह पर बैठे हैं
00:25:44:12 वह भी आपके पार्टनर हो सकते हैं। आपको कैसा पार्टनर चाहिए? एरागरा न तो कह रहा चाहिए कि जो अपनी सीट पे सेट हो गया है जो अष्ट देवों की जगह बैठा है ऐसा पार्टनर चाहिए। तो यह किस तरफ लड़कियों का ध्यान मतलब ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। क्या यह करना चाहते हैं? तो यह चीजें संकेत देती है उसी बात का कि इनका ज्ञान किस तरफ जा रहा है। बाकी बहुत सारी चीजें पता चली है जिसका मतलब सुनने में आया है तो उस पर मैं बोल नहीं पाऊंगी लेकिन जो प्रूफ मेरे पास है उस पर तो मैं अच्छे से बोल सकती हूं। मैं एक बार फिर से बता दूं कि आध्यात्मिक विश्वविद्यालय सबसे कहां से शुरू हो रहा है? ब्रह्मा कुमारीज का सेंटर चलता है पूरे भारत में। वहां पर एक व्यक्ति ज्वाइन करता है जिसका नाम होता है वीरेंद्र देव दीक्षित। थोड़े दिनों बाद वो अपनी खुद की एक संस्था अलग से चालू करता है। वह अपनी संस्था का नाम रखता है आध्यात्मिक विश्वविद्यालय। वीरेंद्र देव दीक्षित लगभग लगभग उसी पैटर्न में बात करता है जिस पैटर्न में ब्रह्मा कुमारी करती है कि भाई किसी के शरीर के अंदर भगवान आ रहे हैं। कुछ वस्तुनिष्ठ जानकारियां अलग हो जाती हैं जिसके नाम पर वीरेंद्र देव दीक्षित अपनी अलग संस्था बनाता है। उसके बाद वीरेंद्र देव दीक्षित
00:27:00:16 पर कई सारे आरोप लगते हैं, एलगेशंस लगते हैं। जिसमें कई मामलों में फंसता चला जाता है। फिर वीरेंद्र देव दीक्षित गायब हो जाता है। तब वीरेंद्र देव दीक्षित के द्वारा जो यह संस्था स्टार्ट की गई थी, इसके दो भाग हो जाते हैं वीरेंद्र देव दीक्षित को मानने वालों के। उन दो भाग में से एक भाग है जो यह मानता है कि वीरेंद्र देव दीक्षित मरे नहीं है। वह जीवित है और वो आएंगे कलयुग के एंड में और जो सतयुग सतयुग में सबको ले जाएंगे। दूसरा भाग है जो यह सबूत इकट्ठा करता है कि वीरेंद्र देव दीक्षित मर चुके हैं और अब जो वीरेंद्र देव दीक्षित के अंदर परमात्मा आकर के जानकारी देते थे वो अब किसी और के शरीर में आ रहे हैं और वह शरीर है इस समय अमोल कोकने का। यह अमोल कोक ने जो पूरे भारतवर्ष में घूम घूम करके विद्यालयों से जुड़ जुड़ के घर परिवारों से जुड़ जुड़ के वहां के बच्चों को उसी यात्रा पर ले जा रहा है जिस यात्रा पर इनकी बिटिया जा चुकी है। तो यह आध्यात्मिक विश्वविद्यालय और ब्रह्मा कुमारी वीरेंद्र देव दीक्षित लेखराज इन सबकी आपस में यह खिचड़ी पकी हुई है। जिसका यह उत्पाद है इनकी बच्ची का घर से ऐसे चले जाना और यह एक बच्ची नहीं है। बहुत सारी ऐसी बिटियां जा चुकी हैं और यह एक परिवार नहीं
00:28:15:18 है। बहुत से ऐसे परिवार हैं जो टूट चुके हैं। किसी की पत्नी जा चुकी है। किसी की बहन जा चुकी, किसी की मां फंस चुकी है। अलग-अलग तरीके से यह बहुत बड़े स्तर पर चल रहा है लगातार। लेकिन हर जगह स्कूल्स कॉलेजेस में ये जो जा रहे हैं। ये मैंने एजुकेशन मिनिस्ट्री को भी मेल किया। एनएचआरसी से थोड़ा काम आगे बढ़ा लेकिन कहीं से फाइनली कुछ रिजल्ट नहीं निकला। पुलिस स्टेशन में भी मेल गया। पुलिस स्टेशन से मुझे मेल आया। फिर मैंने तुरंत हर मेल का रिप्लाई तुरंत किया। लेकिन कहीं फिर रिजल्ट देखा जाए तो शून्य था। कुछ भी नहीं था। और हर दिन मुझे यह सुनने में आ रहा है कि बेटी वहां पर मतलब सेफ नहीं है। अमोल भी वही कर मतलब कुछ पुराने जो अनुयाय थे वो बता रहे थे कि अमोल भी अभी वही काम करना चालू कर दिया है जो वीरेंद्र दीक्षित ने किया है। तो हर रात मैं इतनी बेचैन होके मतलब सो ही नहीं पाती थी। हर दिन की मेरी यही परेशानी कि मैं कैसे सो सकती हूं जब मेरी बेटी ऐसी जगह पर फंसी है। कोई भी मानने से सो पाएगी जब वो अपनी बेटी की चिंता करती है तो फिर मैंने जब मिलने की बात की तो वो मिलने के लिए भी तैयार नहीं है। वो लोग मिलने भी नहीं दे रहे हैं। तो मैं पुलिस स्टेशन के चक्कर काट काट के थक गई। क्या बीती होगी इन पर जब इनकी बिटिया ने जाने से पहले इनको आखिरी बार गले से लगाया होगा और आज वह कोर्ट में आकर के कहती है कि मुझे अपनी मां को नहीं देखना है
00:29:30:19 और पुलिस वाले घेर करके उसको खड़े होते हैं कि आपकी बिटिया आपको देखना नहीं चाहती है। सोचिए आप भी किसी के बेटे होंगे, किसी की बिटिया होंगी। आप किसी के मां होंगे, किसी के पिता होंगे, किसी के भाई होंगे। कैसा लगेगा जब आपका कोई व्यक्ति जिस पर आप निर्विवाद रूप से विश्वास करते हैं कि मेरा है, मेरा अपना है और वह अचानक से अंदर ही अंदर कोई व्यक्ति आप आपसे छीन लेगा उसे।
00:30:07:27 तो यह सारी चीजें हैं इनकी यात्रा और बहुत ही दुखद अभी तक रही है और भगवान से हम सभी प्रार्थना करते हैं आपकी बिटिया जल्दी घर वापस आ जाए और आपकी बिटिया के रूप में आपकी जो प्रेरणादायक प्रेरणादाई संघर्ष है आपका यह हम सभी के लिए बहुत अनुकरणीय है और हम सबको बहुत साहस देती है आपकी कहानी कि अन्याय के खिलाफ और अत्याचार के खिलाफ अत्याचार के विरोध में कभी भी बैठ नहीं जाना चाहिए। निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए और आपने किया भी है और आपकी अपनी बेटी के लिए जो आपका स्नेह आपका प्रेम है जो सभी के होता है मगर आपके जितने भी प्रयास है उन सभी को नमन करते हैं हम और आगे जो हो सकेगा आपके जितने जितना हमसे हो सकता है आपके साथ जरूर हम खड़े होंगे आपकी लड़ाई में ठीक है सरता जी पूरा करें ठीक है। तो इस वीडियो को जितना हो सके लोगों तक पहुंचाएं। अमोल कोकने की चीजों को लोगों को बताएं। ब्रह्मा कुमारी की चीजों
00:31:23:03 को लोगों को बताएं। किस तरीके से ब्रह्मा कुमारी के द्वारा उत्पादित ये जो उत्पाद है आध्यात्मिक विश्वविद्यालय वीरेंद्र देव दीक्षित और फिर अमोल कोकने वस्तुनिष्ठता से अमोल कोकने और इनकी बेटी और इनकी कहानी है और अगर समग्र रूप से देखें, व्यापक दृष्टि से देखें तो यह एक बुरी ताकतें हैं जो किस तरीके से हमारे सनातन समाज को सनातन धर्म को नष्ट करने पर तुली हुई है वो आपको दिख रहा होगा।
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आज इनकी बेटी को छीना गया है अगली बारी आपकी है
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