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00:00:02:19 सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और विलंब के लिए मैं क्षमा चाहता हूं। कारण जानेंगे तो आपको अच्छा लगेगा। कहीं पर [नाक से की जाने वाली आवाज़] विवाद हो रहा है। मतलब हमारे कोई सनातन धर्मी हैं जो कहीं पर किताबें बेची जा रही हैं। तो उन्हीं का फोन आ गया और वो उनका प्रतिकार कर रहे हैं। जहां पर ये किताबें बांटी जा रही हैं। जैसे होता है कि भाई कहां इन किताबों में क्या है कहां पर लिखा है ये सब चीजें वो पूछ रहे थे और अभी वो जो नजदीकी पुलिस स्टेशन है वहां पर हैं तो उनको बहुत सारी चीजें मुझे प्रोवाइड करानी पड़ी कि हाई कोर्ट से क्या ऑर्डर्स निकले हैं हमने एफआईआर में क्या लिखाया है और

00:00:56:28 रामपाल की किताबों में जो वहां पर बेची जा रही हैं ऑन द स्पॉट उसमें कहां पर क्या लिखा है तो उसी में थोड़ी सी देरी हुई और दूसरी बात कुछ यहां पर सेटिंग्स वगैरह भी करने में टाइम लग गया। तो देरी का मुख्य कारण तो वही है। बाकी आज का जो विषय है बहुत गंभीर विषय है। एक मां है जो पिछले काफी समय से अपनी बिटिया के लिए अपनी बिटिया को घर वापस लाने के लिए लड़ रही है। संघर्ष कर रही है। जो तथाकथित स्वयं को आध्यात्मिक ज्ञान देने वाले होने का दावा करते हैं, बताते हैं कि हम बहुत बड़े आध्यात्मिक ज्ञान बेचने वाले हैं। वही रामपाल जैसा एक दूसरा सेक्ट। तो [गला साफ़ करने की आवाज़] ऐसे ही एक सेक्ट के द्वारा इनकी बिटिया को बहुत समय रहते हुए बहलाना और ब्रेन वाश करना प्रारंभ हो गया था। यद्यपि शायद इन्होंने ही जोड़ा था। जो क्लिटी वो तो यह स्वयं ही बताएंगी। वह बिटिया को ब्रेन वाश करके यह तक समझा दिया गया था कि अभी तुम अपने घर में किसी भी प्रकार का प्रतिकार मत बताना कि तुम हमसे इतना

00:02:12:00 ज्यादा अफेक्टेड हो कि आप अपना घर बार छोड़कर के यहां आने वाले हो तो बल्कि तुम अभी वेट करो जब तुम 18 की हो जाओगी उसके बाद तुम घर घर से बाहर निकलना तब तक घर में किसी को पता नहीं लगने देना है कि तुम ऐसा सोच भी रही हो तो उसने वही किया 18 तक वेट किया और 18 के बाद अपनी मां अकेली अकेली मां यह भी बता दूं यह जो मां है यह अभी सिंगल है और इनको अकेला छोड़ के जिसका एकमात्र वो बिटिया ही सहारा थी जीवन का एक होता है ना कि हम जीवन जी क्यों रहे हैं भौतिक दृष्टि से अगर देखें तो हम जीवन जी क्यों रहे हैं कि भाई क्योंकि मुझे इसको पालना है, इसको पोसना है, इसको बड़ा करना है उसी में सारी खुशियां होती है ना तो इनके जीवन की वो जो खुशियां थी वो वही इनकी बिटिया एकमात्र तो उसको ले जाते हैं ये लोग वहां से चली जाती है वो और इतना ज्यादा विरोध विरोधी हो जाती है कि मैं यहीं रहूंगी अब मैं यहां से वापस नहीं आऊंगी क्योंकि वही घिसी पिटी पुरानी कहानियां जिनका जनक है ब्रह्मा कुमारी कि यह संसार मरण

00:03:27:10 खत्म होने वाला है नष्ट होने वाला है और अब कोई आएगा जो तुमको इस तरफ से उस तरफ दूसरी नई दुनिया में देवता बना करके रखेगा तो जो उसके पीछे चलेंगे वह देवता बनके रहेंगे। बाकी सब लोग कष्ट भोगेंगे या जो भी है बहुत सी चीजें तो जो दावा करने वाला पक्ष है उसके बारे में थोड़ा सा बता दूं। ब्रह्मा कुमारी का ब्रह्मा कुमारी से कई विंग टूट रहे हैं। एक आध्यात्मिक विश्वविद्यालय नाम का विंग टूटा है। ब्रह्मा कुमारी है। इसमें ब्रह्मा कुमारी से जुड़े हुए वीरेंद्र देव दीक्षित कोई रहे हैं। जिनके भगवान होने का दावा होता था जब वो जीवित थे। अभी वह गायब हो गए हैं। मतलब वो डेथ डेथ हो चुकी है उनकी। वीरेंद्र देव दीक्षित की। तो अब वीरेंद्र देव दीक्षित के भी दो पार्ट हो चुके हैं। जिसमें से एक पार्ट यह दावा करता है कि वीरेंद्र देव दीक्षित जीवित हैं। जबकि उनका डेथ सर्टिफिकेट है लीगल। तो वीरेंद्र देव दीक्षित जीवित हैं। और एक पार्टी दावा करती है कि नहीं जीवित नहीं है। अब वो मेरे अंदर आ गए। तो जो मेरे अंदर आ गए हैं पार्टी दावा करती है। वो इस बिटिया को ले गई है। ठीक है? मेरे अंदर आ गए हैं। अब मैं ज्ञान का प्रवाह कर रहा हूं। इस तरीके से मतलब अब वह भगवान एक तरीके से धरती पर तो हम

00:04:42:14 सबसे पहले इनको मातृ शक्ति को ले लेते हैं और यही अपनी कहानी आज बताने वाली है। बहुत मार्मिक और बहुत गंभीर विषय है। सभी लोग ध्यान से सुने जय श्री राम। जय श्री राम भाई जी। जी शता जी मैंने अपनी ओर से जितना मेरे संज्ञान में था बताने की कोशिश की है। थोड़ा सा आप अपने बारे में संक्षिप्त बताएं कि कैसे यह प्रारंभ हुआ। आपकी स्थिति क्या थी? बेटी की स्थिति क्या थी? जहां से आपके उसमें आए। कैसे इन लोगों ने आपकी बेटी को ब्रेन वाश करना चालू किया? और वो कौन से पॉइंट्स थे जिनके आधार पर बेटी जो है प्रभावित हो गई। इस तरीके से थोड़ा सा बताएं। जी। मेरा

00:05:36:00 नाम सरिता शर्मा है और मैं एक टीचर हूं। मेरी इकलौती बेटी है। सिंगल पेरेंट हूं मैं। बेटी मुझसे बहुत ज्यादा जुड़ी हुई थी। बचपन से ही। मतलब मुझे छोड़कर वह एक दिन भी नहीं रह सकती थी। एक दिन क्या एक टाइम भी नहीं रह सकती थी। लेकिन उसका आध्यात्मिकता में थोड़ा सा उसकी रुचि थी और बचपन से ही उसके सवाल ऐसे थे कि कैसे मतलब हम कहां से आए हैं? मरने के बाद कहां जाएंगे? मरना क्या होता है? ये सारी चीजें वो पूछते रहते थे। बचपन से ही। कुछ सवालों के जवाब मेरे पास भी नहीं थे क्योंकि हमने भी इतना ज्यादा आध्यात्मिकता में इतना डीप इन्वॉल्व हुए नहीं। बस इतना जानते थे कि भगवान है और हम अच्छा काम करेंगे तो सब कुछ सही होगा। बस इतना ज्यादा हम डीपली कभी गए नहीं। तो उसके सवाल सवालों के जवाब मैं दे नहीं पाती थी। बाकी अच्छी खासी लाइफ हमारी चल रही थी। मैं जब से सिंगल पेरेंट हुई हूं वो जब पांच साल की थी 2013 में तब मेरा डिवोर्स हो गया था। उसके बाद से मेरा स्ट्रगल चालू हुआ अपनी जॉब को ले। एक अच्छी लाइफ जीने को ले तो बेटी को साथ में ले ही मैंने जॉब की तैयारी की और मेरा गवर्नमेंट जॉब लगा। फिर उसके बाद से हमारी लाइफ थोड़ी सी सुधरने लगी कि हम अच्छी जिंदगी जिएंगे। अब इसी बीच में हमारे परिवार में जो मेरे

00:06:51:03 ताऊ जी की लड़कियां हैं वो ब्रह्मकुमारीज को फॉलो करती थी पहले। अच्छा ब्रह्मकुमारी को फॉलो करते करते उनको कहीं ना कहीं थोड़ी सी संतुष्टि हुई कि वो एक भगवान का नशा उनको होने लगा कि दुखों से वो बाहर आ रहे हैं या फिर चीजें सुधर रही है उनकी लाइफ में वो उतना डीप जानकारी तो मुझे है नहीं लेकिन धीरे-धीरे पता नहीं वो कब लोग वो लोग कब आध्यात्मिक विश्वविद्यालय से जुड़ गए फिर वहां वीरेंद्र देव दीक्षित की आध्यात्मिक विश्वविद्यालय से जुड़े या ब्रह्माकुमारी से जुड़े पहले ब्रह्मकुमारी से जुड़े थे वो फिर उसके बाद कब उनका डायवर्शन हुआ इस तरफ आध्यात्मिक विश्वविद्यालय की तरफ यह मुझे उसकी जानकारी नहीं है। मैंने कभी उनकी तरफ इतना ध्यान दिया नहीं। बाकी वो हमारे घर आना जाना उनका तो लगा ही रहता था। हम एक ही घर में पले बड़े हैं। तो कोई भी त्यौहार पर वगैरह मिलते थे। तो बस वो इसी के बारे में बताते रहते थे कि यह दुनिया खत्म होने वाली है। आपको आध्यात्मिकता में आना है। इसका अगर आप ज्ञान लेंगे तो आप सतयुग में जाएंगे और जो लोग इसका ज्ञान लेंगे वही बस सतयुग में जाएंगे। बाकी सारे लोग बर्फ में दब के मर जाएंगे। कलयुग का अंत होने वाला है। अब ज्यादा समय नहीं बचा है हमारे पास। तो ऐसे करते करते वो सुनाते रहते थे। बस अब घर वाले हैं करके

00:08:06:12 हम उनकी बात का मान रखने के लिए उनके पास बैठ जाते थे। सुन लेते थे कभी-कभी और बेटी को भी वो सुनाना चालू किए तो मुझे लगा कि चलो ठीक है कहीं ना कहीं उसको सवालों के जवाब मिल रहे हैं। कुछ भी वो सवाल कर रही है तो ये कुछ ना कुछ एक्सप्लेनेशन उसका देते अब सही है नहीं है। मैंने इतना ध्यान दिया नहीं और इसको कभी सीरियसली लिया भी नहीं कि ऐसा कुछ इतना इतनी दूर तक बात जा सकती है। तो धीरे-धीरे मेरी बेटी उनके साथ इनवॉल्व होने लग गई और उसको समझ में आ रहा था कि मतलब ज्ञान उनका सही है ऐसे समझ में आ रहा था और ज्यादा टाइम उनके साथ बिताने लग गई और मिलते तब तो ठीक था। उसके बाद फोन में भी वो उसके साथ उनके साथ ही बात करती थी और फिर ऑनलाइन क्लासेस अटेंड करना ये सारी चीजें करने लगी और सेंटर पर जाने की कोशिश करना बार-बार मुझसे रिक्वेस्ट करना कि वहां जाना है चलते हैं ऐसे वैसे तो मतलब ये जो आपके जो आपके रिलेशन में जो थी पहले से बड़ी मातृशक्ति मतलब वो मैच्योर है ना तो उनके साथ उनके उनके साथ के कारण ये आध्यात्मिक विश्वविद्यालय से जुड़ी और आध्यात्मिक विश्वविद्यालय को उस समय ऑपरेट कौन कर रहा था? उस समय तो वीरेंद्र देव दीक्षित की ही संस्था चलती थी और यह लोग उन्हीं से जुड़े

00:09:21:20 थे। उन्हीं की क्लासेस अटेंड करते थे। उन्हीं के सेंटर्स पर जाते थे। आपकी बिटिया मतलब वीरेंद्र देव दीक्षित से वीरेंद्र देव दीक्षित से आपकी बिटिया मिल चुकी है। नहीं नहीं नहीं वो तब तक जब तक मेरी बिटिया इस इन लोगों से जुड़ी थी तब तक उन वो मतलब छोड़ के जा चुके थे। मतलब भाग चुके थे वो। उन पर केसेस भी हो चुके थे और मेरी दीदी लोग वो बोलती थी कि इन पर सारे झूठे केसेस हुए हैं। ब्रह्मकुमारी वालों ने केस किया है इन पर मीडिया वालों को पैसे देके। तो मैंने कभी उस पर इतना गंभीरता से उसको लिया नहीं और ध्यान भी नहीं दिया क्या चल रहा है। चलो ठीक है इनकी आस्था है या फॉलो कर रहे हैं। इससे हमको कुछ नुकसान नहीं होना है। तो मैंने उनकी बातों का विरोध भी नहीं किया। कोई उनसे आर्ग्यू भी नहीं किया। छोड़ दिया था उस बात को। फिर बेटी उनके साथ जाती थी कभी सेंटर पर तो मैं उतना मन से तो नहीं भेजती थी लेकिन चलो कोई गलत काम नहीं कर रही है। धार्मिक काम ही है। भगवत गीता के श्लोक ही ये पढ़ते हैं और उसी का विश्लेषण करते हैं। ये सारी चीजें मुझे पता थी। तो थोड़ा सा जिद करके मुझे भी चलने पर मजबूर करती थी। तो मैंने कहा चलो मतलब अकेली को ना भेजूं। क्या है मैं भी देख लेती हूं। एक बार मेरी बहनें भी जब आपकी जब आपकी बिटिया गई है मतलब आध्यात्मिक विश्वविद्यालय तब तक वीरेंद्र देव दीक्षित

00:10:37:01 भाग चुके हैं। जी है ना? उन पर केसेस हो चुके हैं तो वो अपना छोड़ के भाग चुके हैं तो तब वहां लीडिंग में कौन था जब वो भाग चुके हैं तब जब आपकी बिटिया उनके ही अनुयाय थे जो फॉलो कर रहे थे उनकी संस्था तो चल ही रही थी उस पर कोई रोक नहीं हुआ था स्पेसिफिक स्पेसिफिक नाम वगैरह कुछ नहीं है उतनी जानकारी मुझे नहीं थी उसके बारे में लेकिन वहां पर जो हमारे लोकल एरिया में जो सेंटर चलता था वहां पर दीदी लोगों ने कहा था कि आप जाओ वहां पर तो मैं बेटी को को लेके मेरी भी स्कूल की छुट्टियां ही चल रही थी तो मैं लेके गई थी बेटी को कि क्या है समझे तो सही करके अब वो लोग इतना ज्यादा जोर दे रहे हैं कि ज्ञान सुनो तो आपको चीजें समझ में आएगी तो देख लेते हैं इसमें कोई नुकसान नहीं है तो मैं गई थी उनका कोर्स सुनने चार पांच दिन तक तो उसमें उन्होंने मेरा भी नाम जोड़ दिया कि मैं भी जाती थी जबकि उनके जोर देने पर मैं जाती थी और मेरी मां को भी उन्होंने ही जोर दिया कि आप यह फॉलो करो आप सुबह मतलब अमृतवेला योग लगाओ ऐसे यह सारी चीजें उनके जोर देने पर ही कभी मेरी मां भी कर लेती थी या फिर ये सारी चीजें तो नहीं की हूं। मैं बस हफ्ता भर वो वहां पर बेटी के साथ गई थी और बहुत सारी उनके उनकी बातें ऐसी थी जो समझ में नहीं आ रही थी मुझे और मैं सवाल करती थी तो वो ऐसे जवाब देते थे जिसका कोई कोई लॉजिक ही

00:11:52:07 नहीं बनता है। तो मैंने उतना ध्यान दिया नहीं। उसके बाद फिर मेरी भांजी भी मेरे पीछे पड़ी कि आप और सुनो डीप ज्ञान सुनो। दुनिया खत्म होने वाली है। टाइम नहीं है आपके पास। तो जबरदस्ती ऑनलाइन क्लास लेना सुनाना सारी चीजें वो भी कर रही थी। अब मेरी बेटी बहुत ज्यादा उसमें इन्वॉल्व हो रही थी। यह मुझे समझ में आ रहा था। लेकिन मुझे कोई कारण नहीं मिल रहा था कि मैं उस पर मतलब उसको रोक-टोक करूं। टाइम है कोरोना का टाइम चल रहा है। पढ़ाईवढ़ाई भी उतनी ज्यादा नहीं हो रही है। तो ठीक है कुछ तो अच्छा ही ज्ञान सीख रही है। भगवत गीता के श्लोकों की बात करते हैं। ये यही मैं सोच सकती।

00:12:27:01 धीरे-धीरे इनवॉल्व होते होते इन्होंने अमोल कोकने से परिचय करवाया। जी जी जी भाई जी आपकी अमोल कोकने जो इनका गुरु है उनसे परिचय करवाया था इन्होंने और मेरी बेटी से कहा गया है कि ये सुप्रीम कोर्ट के वकील हैं। चीजें तो बहुत सारी उसको बताई गई लेकिन मेरी जानकारी में बस इतनी बातें आई हैं कि सुप्रीम कोर्ट के वकील हैं और बहुत जानकार हैं और उनसे अगर हम टच में रहेंगे तो बहुत सारा मतलब नया कुछ सीखने को मिलेगा। बहुत सारी बातें वह सिखाते हैं। ऑनलाइन काम भी वह करते हैं या फिर टेक्निकल स्किल्स भी सीखूंगी। इन इनके पूरे ग्रुप की तरफ से बता रही थी कि इन सब से मुझे टच में रहना है। आपकी शिकायत रहती है कि मैं किसी फ्रेंड से बात नहीं करती हूं। अगल-बगल वालों से बात नहीं करती हूं। तो मैं इस ग्रुप से जुड़ी हूं तो अच्छा काम कर रही हूं। करके मुझे प्रूफ भी दिखाती थी कि देखो ऑनलाइन क्लासेस चल रही है। इसमें भगवत गीता के श्लोक चल रहे हैं और वहां पर उसका विश्लेषण। अब मैं विश्लेषण के डीप में मतलब क्या चल रहा है विश्लेषण में यह तो मैंने ध्यान दिया नहीं लेकिन भगवत गीता के श्लोक चल रहे हैं इतना मुझे समझ में आया तो वो रटना उनको फिर उनका टेस्ट देना ऑनलाइन ये चीजें वो करती थी मैंने कहा चलो अच्छी चीज कर रही है मैंने कभी किया नहीं यहां पर मैं यहां पर मैं एक चीज याद दिला दूं कि एक पैटर्न

00:13:42:12 है इन लोगों का काम करने का सभी के लिए आवश्यक है ये जानना अक्सर लोग यह दावा करते हैं अरे भाई हम तो भगवत गीता की बातें कर रहे हैं। क्या दिक्कत है? हम तो वेद की बात कर रहे हैं। उसमें क्या प्रॉब्लम है? हम तो उपनिषद की बात कर रहे हैं। उसमें क्या प्रॉब्लम है? तो पैटर्न क्या है? कि आपकी जो जिस द्वेष भावना के साथ कोई बुरी शक्ति कोई बुरा तंत्र आपके आसपास आकर के बैठ गया है नजरें जमा करके और जो भी उसका गलत उद्देश्य उसकी पूर्ति करने के लिए वो वो यह जानता है कि आपकी भावनाएं जुड़ी हुई है गीता से। आपकी भावनाएं जुड़ी हुई है वेद से। तो आपकी आपकी भावनाएं जुड़ी हुई है उपनिषद से। तो उसको जो जहर भरना होता है आपके इर्दगिर्द जो भी उसको अपना द्वेष पूर्ण कार्य करना होता है वह गीता वेद पुराण उपनिषद ऐसे शास्त्र जिनसे जिनमें आपकी आस्था है जिनमें आपकी श्रद्धा है उनका नाम लेकर के ताना-बाना बुनता है उनके नाम की आड़ में अपनी वो गलत चीजें आपको देता है क्योंकि अगर डायरेक्ट अपनी चीजें आपको देगा तो आप उसको सुनोगे ही नहीं आप उसको देखोगे ही नहीं आप उसकी ओर आकर्षित ही नहीं होगे या फिर आप अपने बच्चों को

00:14:57:15 वहां उस बारे में सुनने की अनुमति नहीं दोगे बल्कि उसका प्रचार ही रुक जाएगा ना। तो जब गीता का प्रवचन हो रहा है, गीता के नाम पर बात हो रही है तब आप यह सोचते हो कि अच्छी बात है भाई सुन रहा है सुनने दो। नहीं तो वहां पर अगर कोई कहे कि एक नया भगवान आया है। वो अपने भगवान होने के बारे में बता रहा है तो कौन से मां-बाप वहां भेज देंगे? वहां माता-पिता वहां भेजते हैं गीता सुनने के लिए, वेद सुनने के लिए, पुराण सुनने के लिए या जो भी धर्म शास्त्र उनको सुनने के लिए और वहां पर टैग यह लगाया जाता है उसकी आड़ में उनके बातों को तोड़ मरोड़ करके कुछ इस तरह से प्रस्तुत किया जाता है कि वहां अर्थ जब होता है तो गीता होती नहीं है। वहां पर उनका अपना जो मंतव्य होता है वो होता है। तो यह बहुत बड़ा एक पैटर्न है। इस चीज से सभी को बचना चाहिए। जो लोग यह सोचते हैं अरे गीता की बात हो रही है क्या दिक्कत है आचार्य प्रशांत ने तो उपनिषद की बात की है क्या दिक्कत है दिक्कत है वो जानते हैं कि हमारी पहले से आस्था किस में है वो पहले उसको उसका उस नाम को पकड़ते हैं और फिर उनकी जिन चीजों से अपनी बातों को जोड़ सकते हैं नई बातों को अपनी बातों को उन चीजों से जोड़ के आपको प्रस्तुत कर देते हैं। फिर आप यह सोचते हो अरे इनसे क्यों

00:16:12:16 कुछ कहे ये तो वेद की बात कर रहे हैं ये तो गीता की बात कर रहे हैं। वो बात वही कर रहे हैं जिससे आपको प्रॉब्लम थी। ये सदैव ध्यान रखिए। यह बातें वही है जिनसे आपको प्रॉब्लम है। सनातन को जिनसे प्रॉब्लम है वही बातें हैं। बस वो सिर्फ वेद और गीता के नाम पर आपको परोसी जा रही है। जी बिल्कुल वही हां जी। जी तो वही चीजें ये करते थे। उसमें जो भगवान की व्याख्या है वो इन्हीं के बारे में बोला गया है। वीरेंद्र देव दीक्षित के बारे में ही बोला गया है कि जो मूढ़मती लोग होते हैं वो साधारण शरीर में आए हुए भगवान को नहीं पहचान पाते। तो वह वीरेंद्र देव दीक्षित के बारे में बोला गया है। यह उनका कहना है। तो अगर उससे कनेक्ट करके जोड़ा जाए तो मेरी बेटी मानती थी कि यह सारी चीजें सच में यहीं पर अप्लाई होती है और कोई लोग बाकी के लोग यह समझ नहीं रहे हैं। तो शुरू से मेरी बेटी मुझे समझाने की कोशिश करती कि मां यह सही ज्ञान है। हमको इसी ज्ञान में जाना है। सबको यहीं आना है। क्योंकि जब दुनिया खत्म होने वाली रहेगी सबको इन्हीं के पास आना पड़ेगा और जो ज्ञान में रहेंगे वो तो सेफ रहेंगे। बाकी जैसे कि अगर मैं उनका ज्ञान नहीं सुन रही हूं तो बाकी जितने भी लोग हैं जितने मर गए हैं इस बीच में उन सबकी आत्माएं

00:17:27:22 ज्ञान सुनने के लिए मेरे शरीर में प्रवेश करेगी तो हर हर एक शरीर में 810 आत्माएं प्रवेश करेगी तो उस शरीर को कितनी तकलीफ होगी तो हमको इस तकलीफ से नहीं गुजरना है हम पहले सेफ हो जाएं इसके लिए पहले से सुन लेते हैं ज्ञान तो वो मुझे बहुत समझाने की कोशिश करती थी और मैं बोलती थी कि इनका लॉजिक मुझे समझ में नहीं आता है इन इनका कहना है कि 5000 साल का चक्र है मतलब मतलब मतलब जो जो आत्माएं यदि हमने अभी ज्ञान नहीं सुना तो बाद में ज्ञान सुनने के लिए बाद में ज्ञान सुनने के लिए हम जो है अ तरसेंगे और तरसेंगे और फिर किसी और के शरीर में प्रवेश करेंगे। ऐसा है। हम नहीं प्रवेश करेंगे। जैसे अभी मैं लास्ट समय में मैं अगर जिंदा हूं तो जो मर गए हैं उनकी आत्मा भटकती रहेगी। तो उन सबकी आत्माएं जो जिंदा शरीर है उस शरीर के अंदर आकर ज्ञान सुनने की कोशिश करेगी। तो मेरे शरीर में मान लीजिए जो मर गए हैं मेरे आसपास 810 लोग मेरे शरीर में घुसेंगे और फिर मेरे शरीर के थ्रू वो ज्ञान सुनने की कोशिश करेंगे क्योंकि सिर्फ आत्मा से वो सुन नहीं सकते। तो जब किसी के शरीर में कोई दूसरी आत्मा प्रवेश करती है तो बहुत तकलीफ होती है शरीर को। तो अंत समय में 810 आत्माएं अगर मेरे शरीर में घुसती है तो मुझे कितनी तकलीफ होगी?

00:18:43:13 उस तकलीफ से बचने के लिए मुझे अभी ज्ञान में आ जाना चाहिए तो मेरा शरीर सेफ हो जाएगा। फिर कोई दूसरी आत्मा मेरे शरीर में प्रवेश करने की कोशिश नहीं कर पाएगी। अप्रोच नहीं करेगी। जी वाह बहुत बढ़िया। तो यही चीजें तो इसका अर्थ तो ये हुआ कि आत्मा जो है ज्ञान ग्रहण नहीं कर सकती। जी ये एक नोट करने वाली बात है। आत्मा ज्ञान ग्रहण नहीं कर सकती। इसका अर्थ तो यह हो गया कि आत्मा को सुख होगा तभी जब वो जो है देह धारण करे जी तभी वो तभी वो मुक्त हो सकती है। इनके हिसाब से मुक्ति तभी है जब वो शरीर धारण करे। शरीर धारण के बिना मुक्ति नहीं है। जी यही हो गया ना क्योंकि वो ग्रहण तो कर नहीं सकती है ज्ञान बिना देह के। हां बहुत और कई बार ऐसे हुआ है मैंने देखा बताती थी कि उनके क्लासेस में जो पार्टिसिपेट कर रहे हैं वो किसी को किसी की डेथ हो गई है तो मैंने पूछा कि मतलब इन लोगों का तो कहना है कि जो इनके ज्ञान में चलते हैं वो उनकी डेथ नहीं होगी वो सीधा सतयुग में जाएंगे। वीरेंद्र देव दीक्षित का ये कहना था कि सतयुग में जाएंगे। इसी शरीर के साथ सबको ले जाएंगे जो ज्ञान इनके ज्ञान में चलेंगे। तो अगर किसी की डेथ हो गई तो फिर उसका तर्क यह लोग ऐसे देते थे कि उनके

00:19:58:21 अंदर भक्ति के संस्कार रह गए हैं। इसलिए वह ज्ञान के संस्कार पूरे नहीं अपना पाए। भक्ति के संस्कार छोड़ नहीं पाए इसलिए उनको शरीर छोड़ना पड़ा। फिर वो तुरंत ही पैदा होंगे। फिर नए शरीर के साथ वो सिर्फ ज्ञान में चलेंगे तब जाके वो सतयुग में जा पाएंगे। ये उनका तर्क हुआ करता था। मतलब कोई मर जाए तो उसके लिए वो ये तर्क देते हैं। बाकी जितने लोग इनका ज्ञान फॉलो कर रहे हैं ये सब मरेंगे नहीं। यही बात रहती है और जितना ज्यादा ये प्रचार करेंगे इनका ज्ञान है क्या इनका ज्ञान है क्या वो है यही चीज भगवान धरती पर आ गए हैं अभी वीरेंद्र देव दीक्षित की आत्मा मतलब शरीर में भगवान मतलब कुछ ऑब्जेक्ट मतलब कुछ मतलब कुछ ऑब्जेक्टिव जानकारियां इनका ज्ञान है कि ये ये भगवान इस शरीर में आया है इसकी उंगली पकड़ के चलोगे तो यहां जाओगे वहां जाओगे जो ऑब्जेक्टिफाई कर रहे हैं ये ये ज्ञान है ये ऑब्जेक्ट िव जो दिखा रहे हैं इस नाम के व्यक्ति के अंदर आते हैं ये वो ये तो मतलब इसका उससे तो कोई मतलब है ही नहीं कि सतोमा सद्गम तमसोमा ज्योतिर्ग मृत्यु मतम गम या फिर अथातो धर्म जिज्ञासा अथातो ब्रह्म जिज्ञासा इन सब से कोई मतलब नहीं है सिर्फ नाम बता रहे जैसे नाम में सारी झूठी बातें लिखी हुई है असली सच्चाई आत्मा की सच्चाई सिर्फ

00:21:13:27 इनका ज्ञान देता है और बाकी ज्ञान है कि वो ज्ञान ये है कि उसमें नाम पता चलता है कि कौन किस नाम के शरीर में ये होगा ये ज्ञान जी उनका कहना है कि भगवत गीता में भी लिखा हुआ है कि किस कहां पर भगवान का मतलब अवतरण होगा कौन सी जगह पर तो भगवत गीता के आधार से ही नॉर्थ में जहां मतलब कंपिल गांव में एक साधारण शरीर में आएगा करके ये साफ लिखा गया है उनके ये भगवत गीता में ये उनका कहना है ये उन्होंने अपना मिस इंटरप्रिटेशन कर दिया है जी फिर बेटी को तो वीरेंद्र ये अमोल कोकने जो है वकील है और उसके अलावा यह भी बताया गया है कि उस वो अष्ट देवों में से एक हैं। और मुझे इस बात की बिल्कुल जानकारी नहीं थी क्योंकि उनका कहना था कि मम्मी जब ये सारी बातें फॉलो नहीं करती है तो ये सारी ये बातें नहीं समझ पाएगी जब तक वो ज्ञान में नहीं आएगी तो ये बातें मां को नहीं बताना है। और धीरे-धीरे जी अगर कौन सी बात है कि ये अष्ट अष्ट देवों में से एक है। दीक्षित ये नहीं अमोल कोकनी जी तो पहली बार जब अमोल कोकनी से बात हुई थी मेरी बेटी की तो मेरी बेटी ऐसे किसी से बात नहीं करती थी जनरली तो उसने क्या

00:22:29:03 किया दूसरे फोन में रिकॉर्ड किया कि वो अपने आप देखना चाहती थी कि मतलब उसने बात की है सही तरीके से बात की है नहीं की है करके तो उसकी रिकॉर्डिंग मुझे मिली तो उसे समझ में आया कि वो पहले ही कॉल में जब मां के बारे में पूछ रहा है उससे तो पूछ रहा है कि मां तुमको हमेशा डांटती रहती है क्या क्योंकि उस वहां तब तक मैं थोड़ा सा समझ चुकी थी कि ये कट रही है धीरे-धीरे मुझसे। जब से अमोल कोकनी से बात करना या उसके टच में आना चालू हुआ इसका फिर

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00:22:56:09 मतलब मेरी बहनों के थ्रू ही पहले तो बात नहीं हुई थी ऑनलाइन चैटिंग वगैरह कुछ हुई होगी उसके पहले तो बहुत ज्यादा वो काम देता था उनका YouTube का काम ये एडिटिंग वगैरह करना तो पढ़ाई से पूरी तरह कट गई थी खाना पीना सोना ये सारी चीजें पूरी तरह उसने छोड़ दिया मतलब मैं डांटती थी या बोलती थी तब थोड़ा बहुत कर लेती थी उसके अलावा नहीं तो धीरे-धीरे फिर मुझे समझ में आने लग गया कि ये कटते जा रही है। पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे रही है। अपने शरीर पर ध्यान नहीं दे रही है। फिर मैंने थोड़ा सा उसको समझाना डांटना चालू किया। तो फिर

00:23:27:22 एक बार मैंने उसका लैपटॉप ले लिया था। मतलब मैंने कहा तू ये सब काम करते बैठेगी तो मैं करने नहीं दूंगी। बाकी पढ़ाई करेगी टाइम से सोएगी तो करने दूंगी।

⬜ Not used yet · 00:23:37:27 – 00:23:53:18 (0:16)

00:23:37:27 एक रूटीन फॉलो करेगी सही तरीके से स्कूल टाइम पर पहुंचना फिर आना स्कूल का काम करना तो ही मैं करने दूंगी। तो उस दिन वो चुप रह गई फिर अगले दिन उसने मेरी शिकायत की मेरी बहनों से कि मम्मी ने लैपटॉप ले लिया और काम नहीं करने दे रही है।

00:23:53:18 और इनको एक चीज और सिखाई जाती है कि मां-बाप जो है वो बंधन है। तो वो एक एक कोड वर्ड जैसे उनको अगर बोलना है कि मम्मी पास में है तो उसको ये ये बोलती थी कि मैं बंधन में हूं।

⬜ Not used yet · 00:24:06:26 – 00:24:21:03 (0:14)

00:24:06:26 तो ये मोह माया है। चलो मोह माया का शब्द वो रेगुलर यूज़ नहीं करती थी। लेकिन उनको हिंट देने के लिए कि मैं मां के साथ हूं। मम्मी पास में है तो मैं बंधन में हूं। मैं बंधन में हूं। अच्छा वो पूछना भी ऐसे ही पूछते थे कि बंधन में हो क्या? तो यह बोलते थे कि हां मैं

00:24:21:03 बंधन में हूं। बोलते बोलते बोलते इसको यह फील होने लग गया कि मेरी मां अगर मेरे साथ है तो मैं बंधन में हूं। मुझे काम नहीं करने दे रही है। और इस काम से ही मैं सतयुग में जाऊंगी या फिर आगे की तरक्की होगी जो भी है। तो फिर इसको तो समझाया गया था कि उसको ये बातें रटा दी थी कि आप अगर अपनी मां के साथ हो तो बंधन में हो। जी जी और फिर वो धीरे-धीरे वह सोचते सोचते बोलते बोलते फील भी करने लग गई कि मैं बंधन में हूं। जैसे ही मैं दिख जाती थी उसका मतलब चेहरा ही बदल जाता था कि अब मुझे काम नहीं करने देगी मेरी मां। पहले तो मैं स्कूल से आती थी या फिर इधर कहीं से भी बाहर उस तरह से ये ये ठीक उस तरह से दृश्य दिखाई दे रहा है जैसे वो केरला स्टोरीज की एक सच्चाई है ना कि वो जाकर के अपने पिता के मुंह पे थूकती है। वो भावनाएं आ जाती है उसके अंदर। यह इस समय वैसी भावनाएं उसके अंदर डाल दी गई आपकी बिटिया के बिल्कुल मैंने केरला स्टोरी मतलब मेरी बेटी घर से जाने के बाद ही मैंने वो मूवी देखी तो कई सारे किस्से ऐसे मुझे दिख रहे थे कि ये हुआ है मेरे और लोग ये सोचते हैं कि ये जो है इस्लामिक संस्थाएं नहीं है। ये तो हिंदू धर्म की बात कर रही है। जबकि वही कार्य हो रहा है। केवल किताबों का नाम बदल गया है। आपकी

00:25:36:09 किताबों के नाम के आधार पर वही कार्य हो रहा है। जी जी बोले कभी भी मैं बाहर जाती थी तो निकलने से पहले ही पूछती थी कि कितनी देर में आओगे और मतलब 10-15 मिनट तो 10 मिनट लग जाएगी क्या इतने से काम में आपको ऐसे वैसे पूछती थी लेकिन जब इन लोगों से जुड़ी तो उसको लगता था कि मां जितनी देर बाहर रहे उतना अच्छा है और जैसे अगर मैं दो-ती घंटे भी लग जाते थे घर आती थी तो उसको मतलब उधर तुरंत समझ में आता था कि वो उधर फोन पे लगी है या उनका काम कर रही है तो उधर तुरंत समझ में आता था कि किसी को बोल रही है कि मम्मी आ गई है घर पे इस तरीके से हिंट देते रहती है और कई बार मैंने देखा है कि मैं आ रही हूं तो उसको कुछ परवाह ही नहीं है वो अपने कमरे में है लगी है कोई फर्क नहीं पड़ रहा है उसको फिर मुझे ही बोलना पड़ता था कि बेटी मैं आ गई हूं घर थोड़ी थोड़ी देर मेरे साथ बिता ले तो फिर हां आ रही हूं करके जबरदस्ती आके मेरे साथ बैठती थी फिर ऐसे करते-करते धीरे-धीरे उनको मतलब मुझे समझ में आ रहा था कि कुछ तो गलत गलत हो रहा है। लेकिन अब अब हम मां बेटी हैं और मेरी इकलौती बेटी है तो मुझे इतना ज्यादा एक्सपीरियंस भी नहीं है कि बच्चे बड़े होते समय कितना मां मतलब पेरेंट्स से जुड़े रहते हैं या कटते हैं। कटती तो मुझे दिख रही

00:26:51:13 है लेकिन जब मैंने अपने फ्रेंड से बात की कि मेरी बेटी मुझसे कट रही है। मुझे समझ में नहीं आ रहा क्या कारण है। कहीं मैं डांटना करना भी नहीं करती हूं। तो कारण ही समझ में मुझे इस पर तो बिल्कुल शक ही नहीं हुआ क्योंकि कोई लड़कों से बात नहीं करती थी तो मैं एकदम निश्चिंत थी कि मेरी बेटी कहीं मतलब गलत जगह तो नहीं फंस रही है। लेकिन ये ज्ञान जो इसका चल रहा है इस पर मैं शक भी नहीं कर सकती थी क्योंकि ये भगवत गीता के श्लोकों की बात करती है वही रटती है। टाइम वेस्ट ये करती है नहीं। तो कहां शक करूं? समझ में ही नहीं आ रहा था। फिर कहीं ना कहीं मुझे समझ में आ रहा था कि पूरा टाइम ये इसी में लगा रही है। तो यही कारण हो सकता है मुझसे कटने का। और जब मैंने इससे बोलना चालू किया कि यह सब जो कर रही है तू गलत हो रहा है। भगवान मां बेटी को अलग नहीं करते हैं। तू घर में मेरे साथ रहते हुए भी मेरे साथ नहीं है। मैं बहुत अकेलापन फील कर रही हूं। तो ये सब बंद करना पड़ेगा तेरे को। मैं ऐसे नहीं तेरे को कंटिन्यू करने दूंगी। तो कोई भगवान मां बेटी के बीच में नहीं आ सकते हैं। यहां तक आयु क्या थी आपकी बिटिया की? लगभग 16 साल।

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00:27:50:02 यह 16 साल की थी तब की बात है। फिर उसके बाद टच में अमोल कोकने के टच में आए हुए कितना टाइम हो चुका था? वो 16 साल की थी उसी के आसपास की बात है। मतलब जैसे ही वो टच में आया शुरू शुरू में इन लोगों का ज्ञान ये मोह माया छोड़ना है। मेरी बहनें तो ये सिखा चुकी थी और बाकी जैसे अमूल कोकने टच में आया तब से मुझसे कटना दूर होना चालू की बेटी। लगभग लगभग छ महीने या और एक साल 16 साल की थी तब से वो टच में आया तब से पहले कॉल में ही उसने कहा कि आप आप सारी चीजें जहां पर आपको ये शक हो गया कि जब आपने डिक्लेअ कर दिया कि तुमको ये सब बंद करना होगा। जी जी हां यहां लगभग छ महीने पहले से आपने चलिए तीन चार महीने आप जी उतना एक्सैक्ट डेट वगैरह तो मुझे आईडिया नहीं है टच में आ चुकी थी टच में आ चुकी थी वो उसके और पहले ही कॉल में उसने पहले कॉल की रिकॉर्डिंग अगर ध्यान से सुने तो ध्यान सीधा समझ में आ रहा है कि वो उससे पूछा कि तुम इस नवंबर में 18 साल की होने वाली हो ना करके तो फिर बेटी ने बताया नहीं भाई जी ये 2022 की बात है तो सितंबर महीने की बात है 2022 बेटी ने कहा कि

00:29:05:08 इस नवंबर में नहीं भाई जी मैं अगले नवंबर में 18 साल की हंगी और उसी कॉल में उसने अच्छा तो अगले साल करके वो कैलकुलेट करके मतलब आवाज भी आ रही कि जैसे चेक कर रहा है कि कितना 18 साल की कब होगी कौन से साल में होगी फिर ये भी पूछ रहा है कि तुम मम्मी के साथ स्कूल आती जाती हो तो उसने कहा हां तो अच्छा रिकॉर्डिंग है आपके पास अभी जी जी है ठीक है वो रिकॉर्डिंग आप मुझे दे दीजिएगा जिससे कि मैं उसको देख लूं। जी जी। तो फिर उसी में उसने पूछा कि मां तुमको डांटते रहती है? तो बेटी ने कहा नहीं भाई जी ऐसे तो नहीं डांटती है। बाकी मैं पढ़ाई वगैरह नहीं करती हूं तो तो डांटती मतलब खाना पीना नहीं करती हूं। हमेशा दिन भर इसी में लगी रहती हूं तब डांटती हूं। तब उसने पूरा मेरा फेवर लेकर बोला और

00:29:50:00 धीरे-धीरे वो उसकी बातों में आने लग गई और उसी कॉल में उसने कहा कि आपको ना डॉक्टर इंजीनियर की पढ़ाई नहीं करना है। आप आध्यात्मिकता के रास्ते पर जाओगे तो सबसे हटके कुछ करोगे और हमारे पास अब ज्यादा टाइम नहीं बचा है। तो पहले कॉल से जो उसने पढ़ाई को लेके एक डिसरेज करना चालू किया तो तब से उसकी पढ़ाई भी छूटने लगी। पहले पढ़ाई में अच्छी थी मेरी बेटी। तो इनका काम करते-करते कि यह YouTube के वीडियो सेवा उसको सेवा का नाम देते थे कि आप जितनी ज्यादा सेवा करोगे आपको ऊंचे पद का मेवा मिलेगा। उसके चैट में भी सब हर जगह यही लिखा है कि जितनी सेवा करोगे उतना ऊंचे पद का मेवा मिलेगा। तो हर दिन की इसको सेवा की रिपोर्ट देनी पड़ती थी कि आज क्या किया तो आज इतने वीडियोस अपलोड किए जितने वीडियोस के एडिटिंग की आज ये किया वो किया। चार पांच चीजें वो लिख के भेजती थी हर दिन की। और अगर किसी दिन उसने कुछ रिपोर्ट नहीं भेजा तो उस उस तरफ से अभी तक यह काम क्यों नहीं किया? मतलब ऐसे हक से वो डांटता था कि जैसे इसको नौकरी पर रखा है और वो ये काम कर रही है और वो डरती भी थी कि हर दिन काम नहीं किया तो नहीं भाई जी अभी भेजती हूं अभी 9:00 बजे तक भेजती हूं भाई जी ऐसा हुआ था भाई जी मतलब अपना एक्सप्लेनेशन देती थी फिर काम हो गया टाइम से तो वो तारीफ करता था कि बहुत अच्छा काम कर रही हो और काम नहीं होता था तो डांटता था फिर

00:31:05:06 यह पूछती थी भाई जी आप नाराज हैं क्या मुझसे आप मुझसे बात क्यों नहीं कर रहे हैं फिर दो दिन तीन दिन बात नहीं करता था फिर कोई काम देता था तो इसको लगता था कि मैं पूरा मतलब अच्छा काम करके दिखाऊंगी तो भाई जी बात करेंगे मुझसे तो ऐसे करते करते पूरा उसको कंट्रोल में ले लिया रात भर वो सोती नहीं थी मैं उसको बुलाते बुलाते थक जाती थी कि बेटा सो जा आजा सोते हैं कितनी देर तक वेट कर रही हूं मैं तेरा तो वो अभी आ रही हूं अभी आ रही हूं करते लैपटॉप खोल के वैसे ही मतलब कभी आधी रात को उठ के देखती थी तो वैसे वैसे कुड के पड़ी रहती थी चटाई पर लैपटॉप चालू ही रहता था तो मुझे इतना अजीब लगता था कि चल क्या रहा है समझ ही नहीं पा रही हूं कि यह कर क्या रही हैं और कुछ भी पूछती थी तो बोलती थी कि स्कूल का काम कर रही हूं या ऐसे आप देख लो मतलब दोनों तरफ टैब चालू रहते थे उसके एक तरफ स्कूल का काम और एक तरफ इनका काम तो कभी-कभी ये भी चीजें दिखाती थी कि देख लो आप मैं स्कूल का ही प्रोजेक्ट का काम कर रही हूं कुछ तो मैं समझ मैं शक करूं तो किस बात का शक करूं ये भी मुझे समझ नहीं पा रही थी तो कभी आधी रात को उठकर देखती फिर तकिया रख के उसके सर के नीचे ओढ़ा के फिर मैं अपने काम में लगती समझ ही नहीं पा रही थी फिर उसी कॉल में उसने एक एक मिनट एक मिनट अ जिन लोगों को नहीं पता है उन लोगों को मैं

00:32:20:09 बता दूं कि इनकी बेटी पिछले लगभग एक दो वर्ष से या उससे कम या थोड़ा बहुत ऊपर नीचे हो सकता है ढाई साल से वो अमोल कोकने का जो आध्यात्मिक विश्वविद्यालय है वहां पर है इनसे दूर हो चुकी है इस बीच इन्होंने हर प्रकार से जो भी इनके सामर्थ्य की सीमा में आता है वह सारी वो सारे प्रयास कर लिए हैं उसको वापस लाने के और इनकी बेटी एक अकेली नहीं है। इस तरह की कई अन्य बिटियाएं हैं जो वहां पर है बेटियां हैं वहां पर है जो कैसे वहीं वापस पहुंच गई वो सारी कहानी आज अभी हम जानने जा रहे हैं। जी तो पहले कॉल से उसने जो इसका ब्रेन वाश करना चालू किया कि आपकी लाइफ में कोई भी परेशानी है तो आप मुझे बताओ। तो बेटी मान रही थी कि वह एक केयरटेकर है। वह उसका ध्यान रखेंगे या ध्यान तो मैं रख ही रही थी लेकिन जैसे ही मेरे खिलाफ वो बोलने लग गए कि तुम्हारी मां ज्ञान में नहीं चलती है और उनको इतनी जानकारी नहीं और वो समझना भी नहीं चाह रही है। तो धीरे-धीरे वो ज्ञान के आधार पर इसको सपोर्ट करना चालू किए हैं और बोल रहे थे कि जो भी बात है मुझे बताना करके।

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00:33:31:18 फिर धीरे-धीरे वो उनके टच में आने लगी और मेरी बहनें भी हर दिन उनका मैसेज रहता था कि तुम उनसे बात करो उनको पूछो उनके हालचाल पूछो उनकी तबीयत के बारे में पूछो उनको अच्छा लगेगा। ये चीजें मुझे बिल्कुल जानकारी नहीं थी कि ये सब कुछ चल रहा है। और

00:33:47:03 जब भी मैं सामने आती थी तो बेटी उनको मैसेज कर देती थी कि मम्मी सामने है तो अभी बात नहीं कर सकती। बंधन में हूं। और जैसे ही धीरे-धीरे हर दिन उनकी बात होती थी। कोड वर्ड था बंधन में हूं। कोड वर्ड जी जी जैसे इस्लामिस्ट हैं कि हम काफिर में सिखाते हैं कि भाई इनके पास जब तुम रहोगे तो बंधन में रहोगे जी और जो रामपाल वाले हैं वो कहते हैं कि ये जगत के लोग हैं। संगत के लोग नहीं है जगत के लोग हैं। इनके यहां भी वही बोला जाता है भाई जी कि ये लौकिक मां-बाप हैं और यह सिर्फ इस जन्म के मां-बाप हैं और आपको पुरुषार्थ सारे जन्मों का करना है और यह अंतिम जन्म है आपका। इस जन्म में आपने अगर सही पुरुषार्थ कर लिया तो आप सतयुग में जाओगे वरना नहीं। तो बेटी मुझसे बहुत ज्यादा जुड़ी हुई थी तो उसको यह बोला गया है कि वो समझाने की कोशिश करती थी कि मम्मी नहीं समझ रही है। ऐसे उनको बोलती थी तो बोलते थे कि यह सब मोह माया है। फिर भी नहीं समझ रही थी। बेटी का जुड़ाव तो था ही बचपन से मुझसे। तो फिर मोह माया के नाम से भी नहीं समझ रही थी। तो उन्होंने एक और चीज ट्राई की कि तुम अगर सतयुग में जाओगी तो तुम्हारी मां भी तुम्हारी वजह से सतयुग में जाएगी। तो तुम पुरुषार्थ करो अपना। अभी तो नहीं मान रही है तुम्हारी मां लेकिन तुम जब चली जाओगी मां को छोड़ के या इस ज्ञान में आ जाओगी

00:35:02:04 तो तुम्हारी मां भी समझने की कोशिश करेगी कि तुम कहां गई हो फिर वैसे तुम्हारी मां भी इस ज्ञान में आएगी अभी तो नहीं समझ रही है उनको अभी जरूरत महसूस नहीं हो रही है और ज्यादा टाइम नहीं बचा है तो तुमको अपनी मां की का भी भला करना है तो तुमको यह करना पड़ेगा ऐसे धीरे-धीरे रेगुलर टच में रहे फिर साल भर पूरा बीत गया और जैसे ही वो 18 साल की होने वाली थी तैयार उसको कर दिया गया है कि तुम अब तुमको आना है और मैं परेशान होकर फिर कभी उसको समझाने की कोशिश करती तो बेटी वहां बताती थी कि मां डांट रही है तो उनका उनको एक पॉइंट यह भी चाहिए था कि मां के खिलाफ कुछ सबूत उनको इकट्ठा करने थे कि मां डांटते रहती थी इसलिए बेटी घर छोड़ के गई तो बेटी को बोला गया था कि तुम रिकॉर्ड करो जो मां तुमको डांटती है। तो फोन तो हाथ में पकड़ के बैठी रहती थी और मुझे अंदाजा भी नहीं कि वो रिकॉर्ड कर रही है। तो जब भी मैं उसको समझाने की कोशिश करती थी या कभी डांट भी देती थी। तो सारी चीजें उसने रिकॉर्ड की। रिकॉर्ड करके सामने वालों को भेजा है। यह तो भेजा ही होगा जब उन्होंने कहा है। तो यह चीजें मुझे उसके फोन में रिकॉर्डिंग मिली। तो मुझे ख्याल आया कि ये तो मैंने उसको समझाने के लिए कहा था। ये रिकॉर्डिंग कहां से हो गई? कभी मैंने सोचा भी नहीं कि बेटी ऐसी बातें रिकॉर्ड कर सकती है। आपके घर में बैठी हुई आपकी ही बिटिया जिसको आपने अपने गर्भ से जन्म दिया था वो एक जासूस की तरीके से काम कर रही है। एक एजेंट

00:36:17:15 की तरीके से काम कर रही है आपके विरोध में कि आपकी जो निजी क्षण होते हैं उनको रिकॉर्ड करके जिसमें आप अपनी बिटिया से बात कर रही हैं। ऐसे क्षणों को रिकॉर्ड करके और वह किसी पराए व्यक्ति को भेज रही हैं जिससे आपका कोई संबंध नहीं है। ना ही वह किसी तरीके से अधिकारी है शास्त्रों में ना ही वह किसी तरीके से अधिकारी है। शास्त्रों का अर्थ बताने में वह किसी भी तरीके से प्रमाणिक व्यक्ति नहीं है। उस व्यक्ति को एक घर के बाहर के पर्सन को आपके घर का जो बच्चा है वह भेज रहा है आपकी निजी जानकारियां। रिकॉर्ड करके भेज रहा है। इतना ब्रेन वाश। एक बात मैं पूछूंगा कि जब आपने पहली बार यह डिक्लेअ किया था कि तुमको यह सब बंद करना होगा तो फिर उस दिन फिर उसका रिप्लाई क्या आया था? नहीं मां आप सही बोल रहे हो। मुझे पढ़ाई में ध्यान देना चाहिए। एग्जाम भी पास आ रही है तो मैं ये सब बंद कर दूंगी। सारे ग्रुप से एग्जिट हो जाऊंगी करके। फिर उन्होंने सबको इन दे दी। जी कि इंफॉर्मेशन दे दी कि अब कुछ दिन तक मैं कांटेक्ट में नहीं रह पाऊंगी। एग्जाम पास में आ रही हो और मम्मी सब बंद करवा देगी करके और फिर सारे ग्रुप से एग्जिट हो गई तो मुझे मैं भी निश्चिंत हो गई कि अभी यह कुछ नहीं कर रही है लेकिन सारा

00:37:32:26 काम वो कर ही रही थी कैसे मतलब सारे इन लोगों के नाम उसने सारे टीचर्स के फ्रेंड्स के नाम से सेव कर रखा था जैसे अमोल कोकने का नाम कर रखा था ए के सर करके जैसे उसके कॉलेज के ही टीचर हैं और सबके चैट्स लॉक करके रखा था तो कभी भी मुझे कुछ शक होता था कि तू कर क्या रही है एक बार फोन तो दिखा अपना तो फोन हाथ में लेती थी तो आराम से दे देती थी। देख लो क्या है इसमें। मैं किसी से बात कर रही हूं। क्या आप जानते हो मैं किसी लड़कों से बात नहीं करती हूं। तो आपको किस बात की चिंता हो रही हो? तो फिर मैं फोन देखती थी तो उसमें मुझे कुछ दिखता नहीं था और इतना भरोसा था बेटी पर कि कुछ गलत काम करेगी नहीं। अपने संस्कारों पर भरोसा था। लेकिन मैं यह नहीं समझ पाई कि ये भोलीभाली सीधी साधी इसको कुछ भी बोल दिया जाए भगवान के नाम पर तो ये मान लेगी करके। इस बात का मुझे अंदाजा भी नहीं था। तो सारे ध्यान रखनी चाहिए। एक बात यहां ध्यान देने वाली बात है कि हम अपने बच्चे को अधर्मी होने से बचा सकते हैं। परंतु जब अधर्म को ही धर्म के नाम पर परोसा जाएगा तो बच्चे को तो यही लगेगा ना कि मैं धर्म कर रहा हूं। जबकि वो होगा अधर्म। ये सोचने मां-बाप सोचते माता-पिता सोचते रहते हैं कि मैं अधर्म से दूर रखे हूं अपने संतान को। जबकि संतान को संतान को अधर्म नहीं करना है। मगर जब उसके सामने अधर्म धर्म के रूप में प्रस्तुत कर दिया जाएगा

00:38:48:09 तब तो वह उसमें फस सकता है। यदि उसको सही मार्गदर्शन सही दिशा नहीं मिली होगी। जी उसको यही बोला जाता है कि भगवान के नाम पर तुम अगर झूठ भी बोलोगे तो वो पाप नहीं होगा। वो युक्ति उसको युक्ति का नाम देते थे। तो अगर वो मुझसे झूठ भी बोलती थी तो युक्ति से युक्ति से पुरुषार्थ करना। उसको बोलते थे कि उसके बहुत सारे जी चैट में भी मिला है कि वो क्लासेस सुन रही है और उनको फिर क्लासेस सुनने के बाद जो जो ज्ञान के पॉइंट्स उन्होंने सुनाए हैं तो सबको पॉइंट सुनाना पड़ता है कि क्या-क्या पॉइंट्स आपने लिखे हैं या फिर ग्रहण किए हैं। तो वो पॉइंट नहीं सुना पाती थी। तो उसके चैट में था कि तुम पॉइंट क्यों नहीं सुना रही हो? करके पूछा जाता था। तो बोलती थी कि मां सो रही है। वो आधी रात की बात होती जैसे सुबह 3:00 बजे 3:30 बजे उस समय तो बोलती थी कि मैं इयरफोन लगा के सुन रही हूं। मां सो रही है इसलिए मैं पॉइंट सुना नहीं सकती। मैं बाद में लिख के भेज दूंगी पॉइंट। तो फिर उसकी तारीफ की जाती थी कि देखो कितना युक्ति से तुम पुरुषार्थ कर रही हो। बहुत अच्छी बात है करके तारीफ होती थी। तो ऐसे करते-करते धीरे-धीरे सब कुछ मतलब उनके कंट्रोल में आने लग गया और बेटी पूरी तरह तैयार हो गई घर छोड़ के जाने के लिए। अब वो उनसे पूछने लग गई कि कब मुझे आना है। तो

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00:39:58:04 कुछ चैट में मुझे समझ में आया जो मेरी दीदी की लड़की मेरी भांजी जो अभी वो भी यहां पर आ चुकी है पहले से वो मुझे पता नहीं था। हमको किसी को बताया नहीं गया कि मेरी भांजी भी यहां पर है। जब बेटी गई तब जाकर मुझे पता चला कि मेरी भांजी पहले से या छ महीने पहले से यहां पर

00:40:13:13 है। तो उससे मेरी बेटी पूछ रही थी कि कब मुझे आना है बताओ। तो उसका कहना था कि एडल्ट होने के बाद तुम नवंबर में एडल्ट होने वाली हो। दो महीने पहले वो पूछ रही थी तो उसने कहा कि एडल्ट होने के बाद यहां आना और ये सब जानकारी उसकी चैट से मिली है। जी जी सारी चैट्स के स्क्रीनशॉट मैंने रखी है। तो उसने भी उसका उसने कॉलेज ज्वाइन कर लिया था 12th के बाद 12th के पहले भी वो पढ़ाई में ज्यादा ध्यान नहीं दे रही थी। मतलब लास्ट का एक महीना अगर मैं उसके पीछे नहीं लगती और इन सब चीजों को से दूर नहीं रखती उसको तो 12th में फेल हो जाती। एग्जाम्स में भी उसने कभी भी झूठ नहीं बोलती थी वो। मैं मतलब इतना अच्छे से उसको समझा के रखी थी कि झूठ बोलना भी पाप है। तो एग्जाम में उसने कॉपी तक किया क्योंकि वो पहले दिन तक इन्हीं का काम कर रही थी। अगले दिन सुबह उसकी एग्जाम थी। प्रैक्टिकल एग्जाम में वो पकड़ी गई। तो टीचर ने बताया कि इसने कॉपी किया एग्जाम में करके। तो मुझे बहुत अजीब लग रहा था कि ये कर क्या रही है आखिर। फिर उससे पूछा तो फिर रोने लग गई कि मुझे समझ में नहीं आ रहा था क्या करूं। बहुत परेशान हो गई थी मैं ऐसे वैसे करके। फिर चैट में समझ में आया कि वो उस दिन पहले दिन आधी रात तक इन्हीं लोगों का काम कर रही थी इनकी वाहवाही लेने के लिए या फिर इनका इनको नाराज ना

00:41:28:14 करने के लिए हम तो कॉलेज में ज्वाइन किया उसने और अब वो चाह रही है कि वो मुझसे दूर रहे और कॉलेज उसका 30 कि.मी. दूर था तो मैं भी परेशान थी कि सुबह 7:00 बजे निकलती थी कि शाम को फिर 7:00 बजे घर पहुंचती फिर कॉलेज का काम भी ज्यादा हो रहा था तो मैंने कहा हॉस्टल में रह लेगी क्या? पहले तो हॉस्टल में रहने से बिल्कुल उसको पसंद नहीं था क्योंकि वो मार्च को छोड़ के नहीं रहना चाह रही थी। लेकिन इस बार जब मैंने कहा कि हॉस्टल में रह लेगी क्या तू? तो तुरंत उसने हां कर दी क्योंकि अब उसको मां से दूर रहना है क्योंकि मां की रोक-टोक चल रही है यहां पर और वहां पर रहेगी तो कोई रोक-टोक करने वाला नहीं होगा। तो तुरंत उसने हां भर ली और मैंने भी सोचा कि आना जाना परेश बहुत उसको प्रॉब्लम हो रही है तो हफ्ते में एक बार आया जाया करेगी। और यहां तक आप यहां तक यहां तक आप यह समझ चुकी थी कि मतलब आपके मन में यह आ गया था कि इसने वो छोड़ दिया आध्यात्मिक विषय क्योंकि आप डिक्लेअ कर चुकी हो ना जी जी तो इसने कहा था कर रही थी वो काम हां ग्रुप्स भी छोड़ दिया कर रही थी मगर आप वो कर रही थी मगर आपको ये लग रहा आपको ये लग रहा था कि अब ये हट चुकी है जी है ना बहुत दिनों तक बिल्कुल किसी से कांटेक्ट नहीं कुछ नहीं अब अब मैं भी थोड़ा सा रिलैक्स हो गई कि ध्यान पूरा पढ़ाई में लगा रही है या कॉलेज का काम कर रही है। आधी-आधी रात

00:42:43:20 तक बैठ के प्रोजेक्ट वर्क कर रही है। तो मैं भी निश्चिंत हो गई थी। फ्रेंड्स के साथ घुलना मिलना सब कुछ कर रही है। तो ठीक था। लेकिन कॉलेज से जब वो मैं मतलब वीकेंड पर जब आती थी घर पे तो मैं वेट कर रही थी। पहले हफ्ते जब हफ्ता भर पहली बार मुझसे दूर रही है तो मैं वेट कर रही थी कि अब आएगी कॉलेज से तो मिलेगी घर के। तो जैसे आपने कहा ना केरला स्टोरी में वो लड़की जैसे अपने पिता पर थूकती है वो घर के अंदर हिजाब पहन के जब घुसती है वही वाला सीन मतलब एकदम देखते ही मैं दें रह गई तो ये सीन तो मेरे साथ हुआ है बेटी जैसे ही घर में घुसी कभी भी मैं घर से बाहर निकलती हूं या वो निकलती है तो गले मिलके कि मतलब जल्दी आना ऐसे वैसे ध्यान रखना अपना ये चीजें हर दिन की हुआ करती थी और उस दिन हफ्ते भर के बाद वह जब घर के अंदर घुसी

00:43:37:25 सीधा घर के अंदर चली गई। देखा तक नहीं उसने मेरी तरफ। मैं रुक के मैंने पूछा उससे कि लाडो इतने दिन बाद तो आई है। गले तो लग गए तो फिर आके ऐसा लगती है जैसे अब जबरदस्ती गले लगना पड़ेगा। के तो वही जो केरला स्टोरी वाला सीन था वही समझ में आ रहा था कि कुछ बहुत ज्यादा गड़बड़ हो रहा है। मैंने सोचा कि उससे बात करूंगी आराम से। फिर उसके थोड़े दिन बाद की ही बात है जो वो घर छोड़ के चली गई। मैं उसको बड़े प्यार से रखने की कोशिश कर रही थी कि उसको डांटो ना बढ़ती उम्र है। शायद वो फ्रेंड से घुलमिल रही है इसलिए मुझसे दूर हो रही है। मैं बात करने की कोशिश करती और वो नहीं मां ऐसा कुछ नहीं है। आपको ही ऐसा लग रहा है आपको दिख रहा है ना कितना काम है कॉलेज का वैसे करके लेकिन साफ समझ में आ रहा था कि कट रही थी वो और

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00:44:30:28 फिर वो डिमांड करने लग गई कि मुझे अपना बर्थ सर्टिफिकेट चाहिए। कॉलेज में पूछ रहे हैं। तो मैंने कहा चलो निकलवा देती हूं। फिर मैंने अपने किसी दोस्त को बोल के अह बर्थ सर्टिफिकेट निकलवाया उसका बर्थ सर्टिफिकेट लेके फिर तैयारी हो चुकी थी उसकी लगभग तब तक

00:44:49:10 और 17 नवंबर 2023 को वो 18 साल की हुई और 18 तारीख को ही उसकी घर छोड़ने की बात थी। उन लोगों की तैयारी थी कि अगले दिन भी मां कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी। वो 18 साल की अगर हो गई तो तो फिर 18 तारीख को वो जा नहीं पाई क्योंकि मैं अपने पेरेंट्स के पास गई हुई थी। दिवाली का टाइम था और हम सारी बहनें सब मिलने वाले थे तो उस समय तो वो जा नहीं पाई तो उसने बता दिया कि मैं अभी नहीं आ पाऊंगी। बर्थ सर्टिफिकेट वगैरह सब कुछ उसने लगभग मंगवा ही लिया था। फिर उसके चैट्स में जो लेडी उसको लेने आने वाली थी उसका भी मैसेज था कि मैं अभी आज दिल्ली जा रही हूं करके 18 तारीख की बात है। तो बाद में समझ में आया कि अगले दिन वो जाने वाली थी लेकिन उसका प्लान उस समय फ्लॉप हो गया था करके। फिर 14 तारीख को हम लोग कुछ 8 नवंबर कुछ निकले थे। अपने पेरेंट्स के घर गए थे। दिवाली थी 14 तारीख की कुछ। तो उस समय हम लोग अपनी दीदी के घर गए थे जो इनके ज्ञान में चलती हैं। उन्होंने इसको एक ड्राफ्ट दिया एक लेटर और एक सिम भी दिया था इसको कि इन लोगों के कांटेक्ट में रहे जिसका बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था मुझे। वो भी चैट में से ही पता चला बाद में कि यहां पर एक तुम्हारा एक लेटर पड़ा है और उसमें सिम पड़ी है

00:46:04:14 तो तुम ले लेना करके। उस दिन के बाद की चैट हमको मिली नहीं कि सारा कांटेक्ट उसके बाद का उस नए सिम से हुआ था। तो फिर वो सिम यूज करने लगी और उस ड्राफ्ट में यह था कि उसको घर से निकलने के पहले सारे पुलिस स्टेशन में क्या-क्या उसको लिख के देना। तो फिर 1 दिसंबर को फिर हम वहां से अपने पेरेंट्स के घर से आ गए। उसके बाद 1 दिसंबर को इन लोगों का प्लान बना और उसके तीन दिन पहले उसने मुझसे कहा कि कॉलेज की ट्रिप है। ट्रिप में जा रही हूं। मैं पोंडीचेरी जा रही हूं। तो तीन दिन लगेंगे उसमें। फिर उसने मुझसे पैसे लिए कुछ ₹4500 लिए। तो कैश मैंने देकर भेजा था और मैं परेशान थी कि कैश पास में रखेगी इतना हैंडल कर पाएगी नहीं कर पाएगी तो मैं उसको बार-बार बोल रही थी कि तुम अपने किसी टीचर को दे देना अपने अकाउंट में रखना ऐसे वैसे उसको समझा रही थी लेकिन सारे रास्ते जो घर से निकली उस दिन 28 नवंबर को घर से निकली थी हॉस्टल के लिए एक तारीख को उसको जाना था ट्रिप पर तो सामान लेके जितना उसको पहले हॉस्टल में पहुंचाना था घर से जो लेके जाना था वो सारी सारा सामान धीरे-धीरे उसने हॉस्टल में रख दिया और उस दिन जब सामान ले निकली तो उस समय में मैं नहा रही थी। वो जैसे जैसे निकलने से पहले गले लग के जाती है तो उस दिन वो गले भी नहीं लग पाई थी मेरे। मैं नहा रही थी और उसने कहा कि जा रही हूं। मुझे लेट

00:47:19:18 हो रही है। कॉलेज की बस आने वाली है। तो फिर चली गई और फिर वहां तक मेन रोड तक जाने के बाद उसको एहसास हुआ कि मां को हम मां को छोड़ के जा रही हूं तो उसने मेन रोड पर सामान रखा अपना फिर कॉल किया मुझे वापस घर आई वो घर आती मतलब मां आप नीचे आओ एक बार करके मैंने कहा क्या हुआ तो बोली मैं कुछ भूल गई हूं आप आओ नीचे तो मैंने कहा भेज रही हूं किसी के साथ मुझे भी स्कूल जाना है लेट हो रही है तो बोली नहीं आप आओ। फिर नीचे गई तो उसने गले लगाया मुझे और कहा अपना ध्यान रखना और बस लव यू मां करके वो वापस निकल गई। मैं समझ ही नहीं पाई थी इतने दिन बाद ऐसे मतलब इतना करते जा रही थी और आज फिर से वापस आके ये कैसे गला गले लगा रही है। मैंने पूछा तो बोलती है आपकी शिकायत रहती ना आजकल मैं आपसे बात नहीं करती हूं करके। इसलिए मैं ट्रिप में जा रही हूं। दो-तीन दिन तक आऊंगी नहीं ना इसलिए करके मैं आपको फिर से मिलने आई लेके

00:48:34:28 और मुझे बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि वो पूरी तरह छोड़ के जाने की तैयारी में फिर फोन पर दो दिन तक नॉर्मल कांटेक्ट में रही। 1 दिसंबर को बात हुई थी उससे सुबह कि हां मैं ट्रिप में जा रही हूं घर। फिर कॉलेज में उसने उसके पहले से ही उसने एक मेल आईडी से मेल करना चालू किया कॉलेज में मेरी तरफ से कि वो मेरा मेल आईडी है कि मैं अपनी बेटी को घर पर बुला रही हूं करनी। उसी मेल आईडी को वो बार-बार ट्राई करती थी कि कॉलेज वालों को हॉस्टल वालों को मैसेज करती थी उससे कि मैं अपनी बेटी को घर बुला रही हूं तो परमिशन चाहिए करके। तो दो चार बार उसी परमिशन से उसी मेल से मेल करके घर पर आई भी थी और कॉलेज वालों ने ऑब्जेक्शन नहीं दिया था उस पर। तो उस दिन भी सुबह 7:30 बजे मां का मतलब मेरी तरफ से मेल किया उसने कॉलेज को कि 7:30 बजे मैं बुला रही हूं करके फिर उसका टाइमिंग थोड़ा सा आगे पीछे करके फिर से मेल किया और कॉलेज वालों को मेल मिल गया मां की तरफ से कि जा सकती है वो घर और फिर वहां से निकली फिर जो लेडी उसको लेने आई थी उसके साथ जाके कहीं पर उसने रजिस्टर पोस्ट किया सारे पुलिस स्टेशंस में कि मैं अपनी मर्जी से जा रही हूं मैं 18 साल की हो गई हूं और इस ज्ञान को फॉलो करती हूं और मैं मुझे मेरी मां से

00:49:50:02 प्रोटेक्शन चाहिए करके। वहां आसपास के जितने भी तीन चार पुलिस स्टेशन थे सब में उसने रजिस्टर पोस्ट किया और मेल भी किया और फिर उसकी कॉपी भी उसने साथ में रखी और फिर रात को 9:00 बजे की ट्रेन से वो दिल्ली पहुंच गई और उसका यह कहना है पुलिस वालों को कि मैं अपनी मर्जी से आई हूं और जनरल कंपार्टमेंट में बैठ के आई हूं। जबकि दो दिन का सफर था पूरा उसके Google अकाउंट पे कुछ फोटो जो मिली है उसमें दिख रहा है कि बहुत सारा सामान उसके पास है तो उसका अकेले का नहीं है। तो ये चीजें भी बाद में समझ में आई मुझे और सारे रास्ते वो बिल्कुल कांटेक्ट में नहीं थी। कितनी बार कॉल करूं तो फोन में चार्जिंग नहीं है। फोन मुझे कहीं डिपॉजिट करना पड़ रहा है। ऐसे वैसे करके और दो दिन पहले उसने फ्रेंड्स के साथ जाके कुछ फोटो ली थी कहीं मॉल में जाके और वो फोटोस मुझे उस दिन भेज दी है कि देख के आप निश्चिंत हो जाओ कि मैं मतलब मजे कर रही हूं फ्रेंड्स के साथ करके। बस उसके अलावा बात नहीं की उसने। फिर तीसरे दिन जब वो पहुंच गई थी दिल्ली लगभग पहुंच ही गई होगी उस दिन तीन तारीख को 3 दिसंबर को। कहां से निकली थी दिल्ली के लिए वो? कोयंबटूर से। कोयंबटूर से जी तो पूरे दो दिन का सफर होता है कोयंबटूर से दिल्ली तो दिल्ली पहुंच गई थी शायद उस समय मैंने कॉल किया था तो किसी वो

00:51:05:03 साथ में जो लेडी थी उसने फोन उठाया था शायद उसने कहा माता जी करके उसने बात की तो मैं एकदम दंग रह गई ये फ्रेंड्स के साथ गई है तो माताजी वाला शब्द तो कहां से आ रहा है तो मैंने पूछा आप कौन तो उसने तुरंत फोन काट दिया फिर मैं एकदम परेशान हो गई और मैंने लगातार 15 20 बार कॉल किया तो रिसीव ही नहीं किया। वो लोग सोच में पड़ गए कि अब क्या करें? फिर 15 20 बार कॉल जाने के बाद प्लेटी ने मैसेज किया कि मैं कॉलेज अभी पहुंची हूं। यहां पर सर्टिफिकेट डिस्ट्रीब्यूट कर रहे हैं। सामान मेरे हाथ में है तो मैं आपको आधे घंटे बाद कॉल करूंगी घर में। मतलब इतनी अच्छी तरह वो झूठ बोलने में माहिर हो गई थी। तब तक बड़ी बड़ी शांति से मतलब कि सामने वाले को बिल्कुल भी शक हुए बिना झूठ बोल रही थी वो। तो आधे घंटे बाद उसने कॉल किया। एकदम नॉर्मल तरीके से बात किया कि बहुत मजा आया। हम लोग ट्रिप में मजे करके आए हैं और सर्टिफिकेट्स दे रहे थे इसलिए फिर मैंने कहा ये माताजी करके किसने बात की तो बोली कि माताजी तो किसी ने बोला नहीं आपको ऐसा क्यों लगा तो मैं परेशान हो गई कि मुझे सुनाई तो दिया और बेटी इतने आराम से बात कर रही है तो शायद मुझे गलत सुनाई दिया या फिर यह मेरा वहम है वहम तो हो नहीं सकता क्योंकि मैंने सुना तो है इतना तो पक्का है तो फिर एक बार बेटी पर भरोसा कर ही लेती हूं करके मैं ठीक है करके फोन रख दिया मैंने लेकिन बेचैनी हो ही रही

00:52:20:04 थी कि कुछ गलत हो रहा है। फिर रात को 9:30 पौ:45 के आसपास मैंने कॉल किया उसको तो नॉर्मल तरीके से उसने बात की। मैंने कहा वीडियो कॉल रिसीव कर। तो बोली कि इस हॉस्टल में सब लोग सो रहे हैं। थके हुए हैं। लाइट बंद है तो मैं अभी बात नहीं कर सकती। मैंने कहा बाहर आकर बात कर लेकिन तेरे को बात करना पड़ेगा। तो फिर उसने तुरंत वीडियो कॉल रिसीव किया। बोला कि फिर मैंने देखा कि वो हॉस्टल का रूम नहीं था। पीछे कुछ पर्दा दिख रहा था जो वहां का नहीं था वो। फिर नॉर्मल तरीके से ही बात किया। फिर मैंने फोन रख दिया और मुझे चैन ही नहीं पड़ रहा था कि कुछ तो गड़बड़ है। फिर मैंने उससे कहा कि लोकेशन शेयर कर अपना कहां पर है। तो उसने अब वो परेशान हो गई कि दिल्ली में है तो लोकेशन कैसे शेयर करेगी? फिर उसने अपने फ्रेंड से बात करने की कोशिश की। लोकेशन लेने की कोशिश की। वो सब कुछ हो नहीं पाया। फिर उसने Google मैप से लोकेशन निकाल के शेयर किया। WhatsApp लोकेशन ना शेयर करके Google मैप से कॉलेज का लोकेशन शेयर किया। फिर मैंने उसको कॉल किया और कहा कि तू कॉलेज में तो है नहीं। इतना मुझे पता है। कहां है बता? वरना मैं अभी आधी रात को निकल के कॉलेज जा रही हूं और तुझे पता है कि कॉलेज कितना दूर है और तेरी मां अकेली। फिर उसने बताया कि मैं दिल्ली आई हूं। तो मुझे लगा कि किसी प्रोग्राम अटेंड करने के लिए मैं मना करती हूं। इसलिए वो दिल्ली गई है और मैंने डांटा उसको अच्छे से और कहा कि

00:53:35:08 तू घर आ बेटी। फिर मैं तेरे को बताती हूं कि झूठ बोलने का मतलब क्या होता है। तू क्या-क्या कर रही है। मुझसे झूठ बोल के देखती हूं मैं भी। फिर मैंने अपनी दीदी लोगों को फोन लगाया। किसी ने रिसीव नहीं किया। फिर भांजी ने रिसीव करके कहा कि वो अपनी मर्जी से आई है यहां। मैंने कहा बताना तो चाहिए था कि आई है तुझे पता है कि मैं परेशान होऊंगी उसके लिए। तो तब भी ये नहीं बताया कि वो पूरी तरह आ गई। मैंने कहा तुम सबसे मैं बाद में बात करूंगी। पहले बेटी से तो समझ लो कि कर क्या रही है वो अपनी पढ़ाई छोड़ के। घर आ जाए फिर बात करती हूं उससे। फिर अगले दिन सुबह मुझे मेल आता है 5:30 बजे कि मां आपको बता के आती तो आप आने नहीं देते मुझे। इसलिए मैं अपनी मर्जी से आ गई हूं। और मैंने सुबह-सुबह खोला नहीं था। देख तो लिया था लेकिन खोला नहीं था क्योंकि मुझे स्कूल जाने की जल्दी थी और मुझे लग रहा था कि थोड़ा सा अपना कुछ एक्सप्लेनेशन दे देगी वो समझा देगी मुझे तो मेरा हिस्सा कम हो जाएगा। फिर उसके बाद घर आएगी तो मैं उतना डांटूंगी नहीं उसको। इसलिए वो मेल कर रही हूं। फिर जब स्कूल जाकर थोड़ा सा फ्री हुई तब मैंने मेल खोल के देखा तो उसमें लिखा था कि आप हॉस्टल से मेरा सामान ले आना। मैं समझ ही नहीं पाई कि हॉस्टल से सामान लाने की बात क्यों कर रही है ये। दो-तीन बार मेल पढ़ा तब जाकर मुझे एहसास हुआ कि यह पूरी तरह छोड़कर चली गई है और उसमें लिखा है कि मैं अपने डिसीजन खुद ले सकती हूं। मैं अब 18 साल की हो गई हूं और अब

00:54:50:09 अपना ध्यान रखना और यहां मैं अपना ध्यान रखूंगी और अब ये रास्ता मेरा लाइफ टाइम के लिए यही हूं। ये चीजें फिर समझ में आई। तो मैंने तुरंत स्कूल में मतलब कुछ बहाना बना के मैं घर आई कि तबीयत ठीक नहीं है। फिर घर आके मैंने कॉल किया उसको कि तू बताए बिना चली गई तो क्या हो गया? मैं तुझे वापस ले आऊंगी। ऐसे थोड़ी ना कुछ तो अभी लाइफ को समझी ही नहीं है। पढ़ाई करते-करते निकल गई है तो फिर ऐसे ऐसे तो मैं जाने नहीं दूंगी तुझे। फिर मैंने कहा कि ले आऊंगी वापस जो उसको कहा उस बात को लेके अमोल ने उसको गाइड किया कि तू वहां दिल्ली पहुंच ही गई थी। तो डीसीपी को साउथ वेस्ट दिल्ली के डीसीपी को उसने मेल करवाया कि मेरी मां को मैंने बता दिया था तरीके से कि मैं अपनी मर्जी से आई हूं। उसके बाद मां मुझे धमकी दे रही थी कि वापस ले जाएगी तो मुझे आपसे प्रोटेक्शन चाहिए और मैंने सारे पुलिस स्टेशंस में इन्फॉर्म कर दिया था कि मैं अपनी मर्जी से जा रही हूं। तो ये चीज मैं फिर समझ ही नहीं पा रही थी कि क्या करूं। मैं अपनी बहन से बात की। फिर रात को मैंने लैपटॉप खोल के देखा कि उसकी चैटिंग उसमें WhatsApp चैट खुली हुई थी उसमें। तो मैंने इसके पहले भी देखा था कि भाई जी आप नाराज हैं क्या मुझसे बात क्यों नहीं कर रहे हैं। ऐसा चैट मैंने देखा था जब वो घर पे थी। तो देखूं तो सही कि चल क्या रहा है। तो फिर

00:56:05:10 मैंने देखा तो WhatsApp तो बंद था उसमें लेकिन Google अकाउंट उसका खुला हुआ था। तो उसमें मैंने देखा कि दो-ती घंटे पहले ही उसने पीसीपी को मेल किया कि मां से मुझे प्रोटेक्शन चाहिए और मां मुझे धमकी देती है। और फिर मैंने अपनी बहनों से बात की कि गलत हो रहा है। यह सब कुछ आप सही नहीं कर रहे हो। उसको जल्दी से घर भेज दो वरना सही नहीं होगा। उन्होंने कहा कि हमारी कोई इसमें इंटरफेरेंस नहीं है। आपको भी हमने ज्ञान दिया है। अगर वह ज्ञान समझी है तो वह उसकी अच्छाई है। आप समझ नहीं पाए यह आपकी कमी है। ज्ञान तो हम सबको देते हैं तो हम इसके जिम्मेदार कैसे हुए? ज्ञान तो आपको भी दिया फिर अगर हमारे ज्ञान की वजह से वो गई है तो आपको भी चले जाना चाहिए था। आप नहीं गई मतलब आप हम जिम्मेदार नहीं है। आपकी बेटी जिम्मेदार है। वो अपनी मर्जी से गई। ये उनका तर्क था। फिर मैंने बहुत उनसे बहस की। तब जाकर उन्होंने कहा कि आप चले जाओ दिल्ली। आपकी बेटी मानती है तो ले आओ। हम कुछ नहीं कर सकते। फिर मैं अगले दिन दिल्ली पहुंची। 5 तारीख को 5 तारीख को आधी रात को 2:00 बजे मैं वहां पर आश्रम पहुंची। लेकिन उन्होंने कहा कि अभी हम मिलने नहीं देंगे आपकी बेटी को। रूल्स हैं हमारे आश्रम के कुछ तो हम सुबह ही मिलने देंगे। फिर दो दिन तक मैं ना सो पाई ना खा पाई। फिर रात को 2:00 बजे से लेकर सुबह तक का मैं इंतजार कर रही थी। 7:00 बजे उन्होंने बेटी से बेटी को सामने लाया और मैं देख के

00:57:20:16 दंग रह गई। उसके चेहरे पर कोई कोई इमोशन नहीं है। कोई फीलिंग नहीं है। बस एकदम क्लाश की तरह खड़ी है वो मेरे सामने। मैं देख के कि बेटी क्या हुआ? क्यों यहां आई है? अभी तो अच्छे से मिल के आई थी तू। तो बस यही मेरा रास्ता है। आप बस इस जन्म के मां-बाप हो। आपके साथ मेरा हिसाब किताब खत्म हो गया। मैंने कहा ऐसे कैसे हिसाब किताब खत्म हो गया? तू 18 साल की हुई है तब तक मैं पाली हूं। तो नहीं इतना ही आपका काम था। आपका आपकी जिम्मेदारी थी मुझे पालना। और मैं अब आपकी बात नहीं सुनूंगी। मुझे इस रास्ते पर आना है और मैं आ गई हूं और आप कुछ नहीं करोगे अब।

00:57:59:03 और इतना उसके सामने मैं बैठ के रोना करना करी हूं। उसका हाथ पकड़ने की कोशिश कर रही हूं। छूने भी नहीं दे रही थी मुझे। एकदम लाश की जिंदा लाश की तरह एक रो की तरह मेरे सामने बैठी थी कि उसको कुछ फर्क नहीं पड़ रहा था। मैंने कहा एक बार घर चल ले समझ लेते हैं कि क्या परेशानी है। मैं तेरे को कहीं रोक-टोक नहीं करूंगी। तेरे को जो करना है करना लेकिन घर में रह के करना दूसरी जगह नहीं और तेरे को पता है मैं तेरे में ही जी रही हूं तेरे बिना मैं जी नहीं पाऊंगी तू चल ले बेटी एक बार कह के बहुत मैंने उसे मेहनत की लेकिन कहीं उसको फर्क नहीं पड़ रहा था एकदम लाश की तरह बैठी थी मेरे सामने मैं पूछ रही हूं उसको कि हुआ क्या है तेरे को बिल्कुल तेरे इतना जो तू तो मुझे ले इतना इमोशनल रहती थी तो बोलती है ये सब मोह माया है। मुझे मोह माया के जाल में नहीं फंसना है। मुझे अब भगवान मिल गए हैं। मैं भगवान के रास्ते पर आ गई हूं। तो अब और कुछ नहीं चाहिए मुझे। सही जगह पहुंची हूं। और मुझे पता है आप भी देखना एक दिन मुझ पर गर्व करोगे कि आपको भी यहां आना है। आप भी बोलोगे कि बेटी तूने सही काम किया। तेरी वजह से मैं भी सही रास्ते पर आई हूं। करके आप भी बोलोगे देखना। तो फिर बहुत उसको समझाने की कोशिश की। बिल्कुल मानने को तैयार ही नहीं

00:59:14:09 थी। फिर मैं बाहर से निकल गई। फिर मैंने कहा कि मतलब अब मुझे चीजें क्लियर हो रही थी कि जितने भी केसेस आए थे वीरेंद्र देव दीक्षित के आश्रम में वो सारे सही थे। इन लोगों का कहना है कि वो सब तब मैंने ध्यान नहीं दिया था कि चलो कौन इन झंझट में पड़े कि बहनों से कौन बहस करे। उनकी सोच है तो वो अपने घर में बैठे हुए है तो कोई नुकसान नहीं है। ठीक है। ज्ञान को कुछ भी भगवत गीता के श्लोक वगैरह कर रहे हैं तो करने दो। उसमें कोई गलत नहीं। तो मैं कभी उस झंझट में पड़ी ही नहीं। लेकिन अब समझ में आ रहा था कि जितने मां-बाप परेशान हो रहे थे वीरेंद्र देव दीक्षित की संस्था की वजह से वही हाल आज मेरा है और फिर पुलिस स्टेशन में भी मैंने वही कंप्लेंट दी कि यह संस्था पहले से बदनाम है और इस आदमी ने मतलब बहुत गलत किया है लड़कियों के साथ और आज वो भागा हुआ है तो मेरी बेटी 18 साल की जरूर हुई है लेकिन वो अपनी समझ से समझदारी से यहां आई है। इस बात की छानबीन की जाए और न्याय दिलाया जाए। तीन दिन तक मैं पुलिस स्टेशन के चक्कर काटी हूं और फिर वहां से एक ऐसे ही साथ में आई थी और उन्होंने बस पूछताछ की तो ये लोग सारे घेर के बैठ गए। मेरी बेटी को बोलते हैं कि आप बस स्टेटमेंट लेने आई हो तो स्टेटमेंट ले चले जाओ। आपको काउंसिल करने का कोई अधिकार नहीं है। वो समझा रही थी कि आपकी मां अगर मतलब परेशान है तो आप चले जाओ एक बार मां के

01:00:29:10 पास। वहां रह के कर लेना। मां को समझा के आ जाना। तो सारी लेडीज वहां जितनी भी थी सब लोग घेर के खड़ी हो गई। उस एसआई को बोलती हैं कि आपको किसने हक दिया इससे बात करने का? वो स्टेटमेंट दे रही थी आप ले चले जाओ। फिर सब लोग लेडीज जो वहां पर थी सबने बेटी के साथ रह के उससे स्टेटमेंट लिखवाया फिर से और वो स्टेटमेंट लेके सही वापस आ गई और यही है कि 18 साल के ऊपर की हो गई है तो हम कुछ नहीं कर सकते। उसके बाद जो मेरी लड़ाई चालू हुई इन लोगों से कि क्या हुआ? सारा WhatsApp चैट इनका Google अकाउंट सारी चीजें मैंने निकाली तो धीरे-धीरे परतें खुलती गई कि कैसे कहां से शुरुआत हुई क्या उसने मेरी बेटी से बात की क्या-क्या कॉल रिकॉर्डिंग है क्या-क्या इनके वीडियोस हैं। क्या-क्या इनकी चैट है? सारी चीजें निकल निकली। तब मुझे समझ में आया कि कैसे मेरे ही आंखों के सामने मुझे पता चले बिना कैसे मेरी बेटी को अपने कंट्रोल में किया गया। फिर मुझे लगा कि चीजें तो सारी क्लियर है तो हम कोर्ट में एप्लीकेशन देंगे और तुरंत ही मेरी बेटी मेरे हाथ में आ जाएगी। तो मैंने दिल्ली में कोई मेरी फ्रेंड के फ्रेंड है उनके थ्रू मैंने रिट पिटीशन डाला दिल्ली हाई कोर्ट में लेकिन वो केस आज तक चलते ही आ रहा है और दो साल से उसमें कोई सुनवाई नहीं थी। शुरू शुरू में दो-तीन सुनवाई हुई थी उसमें

01:01:44:21 जिसमें मुझे परमिशन दी गई थी कि मैं बेटी से मिल सकती हूं। बेटी बिल्कुल पहले दिन तो पुलिस प्रोटेक्शन के साथ वोट डालती हूं और वही वही उसका हाल की लाश की तरह है और मैं बगल में उसके खड़ी हूं। मैं उसकी तरफ देख रही हूं और वो मेरी तरफ देखने को भी तैयार नहीं है। उसको छूने की कोशिश कर रही हूं। एकदम हाथ मतलब छूने भी नहीं दे रही। एकदम पलट के खड़ी हो गई कि हाथ नहीं लगाना मुझे कर। और मैं सामने भी उसके खड़ी हूं। पुलिस वहां कोर्ट में तो पुलिस वाले बोल रहे हैं कि मैडम आप आप हमको हमारी ड्यूटी करने दीजिए। आपकी बेटी नहीं चाहती कि आप उसको देखूं। तो मैं उसको देख भी नहीं पा रही थी। फिर जज ने भी कहा कि आप बात करो अपनी मां से पांच मिनट तो बोलती है कि मेरी इच्छा नहीं है मां से बात करने की। मैं नहीं बात करना चाहती और मेरी मर्जी के खिलाफ कोई मुझे बात भी नहीं करवा सकता। तो एक चीज उसको रटा दी गई है कि मैं मेजर हूं और अपने डिसीजन खुद लूंगी और कोई इसमें इंटरफेयर नहीं कर सकता। फिर जज ने चेंबर में बुला के उससे बात की। उसको समझाया दो-तीन पेशी के बाद तो उसको मानना पड़ा कि वो मुझसे मिलेगी अ हर दिन 45 मिनट मिलने की परमिशन दी गई थी और किसी के इंटरफेरेंस के बिना मैं उससे बात करूं ये परमिशन मिली थी तो पहले दिन तो उन्होंने मिलने ही नहीं दिया और मतलब इंटरफेयर

01:02:59:27 कर रहे थे बार-बार बीच में आना वीडियो लेना कि मेरी बेटी को यह ध्यान रहे कि उन सबकी नजर है बेटी पर तो वो आराम से बात भी नहीं कर पा रही थी फिर मैंने थोड़ा सा जोर से बोला कि आप इंटरफेयर कर रहे हैं तो मैं फिर से कंप्लेंट करूंगी। ऑर्डर में क्लियर लिखा हुआ है कि किसी के इंटरफेरेंस के बिना मैं बेटी से मिलूंगी। तो फिर उन्होंने अगले दिन से सामने तो नहीं दिखे लेकिन ऐसी जगह पर हमको बिठाए थे। वहां पर सारे पर्दे लगे थे, ग्रिल्स लगे थे, खिड़की थी। तो हर जगह से हर कोई नोटिस कर सकता है कि हम क्या बात कर रहे हैं। तो हम सबकी नजर में ही बीच में बैठे थे। मैंने कहा छत पर जाकर बात कर लेते हैं। तो बोलती है छत पर भी नहीं जाऊंगी। मैं यहीं बैठूंगी। इसके अलावा बाहर एक कदम भी नहीं रखूंगी। तो फिर परमिशन हमको उतनी ही मिली। रोज मिलकर आती थी जैसे 4:00 से 55 बजे का मिलने का टाइम था। तो 4:00 बजे के 1 मिनट पहले भी अगर मैं वहां गेट के सामने खड़ी होती हूं, बेल बजाती हूं तो वो नहीं खुलेंगे। 4:00 बजे ही गेट खोलेंगे और जैसे ही 5:45 बजती थी मेरी बेटी उठकर खड़ी हो जाती थी कि आपका टाइम हो गया। अब निकलो अब। तो जितनी देर पौन घंटा मैं उसके सामने कुछ भी समझाने की कोशिश करना, रोना कुछ भी करती थी। बचपन की यादें मतलब उसको याद दिलाना कि बेटी हम कितने अच्छे से रहते थे। कितना तू मुझे मानती थी। कितना हम दोनों मिलके स्ट्रगल किए हैं।

01:04:15:08 कुछ फर्क नहीं पड़ रहा था उसके। बस वो ऐसे ही लाश की तरह बैठी रहती थी। कान बंद करके जैसे कुछ भी उसको सुनना नहीं। उनका कहना था कि मां के रूप में माया आएगी जो तुमको वापस ले जाने की कोशिश करेगी। तुम अपने अपने आप में इतना स्ट्रांग रहना कि बस उस माया से तुम जीत जाओ। तो उसको यह सिखाया गया कि मैं माया के रूप में आ रही हूं। तो फिर बिल्कुल उसके कुछ फर्क ही नहीं पड़ रहा था। इतने दिन तक मैंने कोशिश की लगभग 14 15 दिन। फिर उसके बाद कोर्ट से आर्डर आया कि आप एक हफ्ता भर रह सकती हैं वहां पर। तो वहां रहने गई तो वहां की कहानी अलग है। मतलब मुझे फोन वहां उनके आश्रम के अंदर यूज नहीं करने देना है और जिस रूम में रखे थे वहां पर ही रहना है और बेटी मेरे साथ नहीं सोएगी। दूसरे बेड पर सोएगी। मैं उनको छू भी नहीं सकती। वो भी ठीक है। मैंने मान लिया। फिर उसके बाद ऊपर जहां उनका आश्रम है मेन आश्रम वहां पर अगर बैठते थे तो छूने भी नहीं देना है। बहुत ठंडी थी उस समय। मतलब मैं ठंडी सहन नहीं होती है मुझे। तो बहुत ज्यादा परेशान थी। एक दिन ऐसे ही बैठे-बैठे वह एकदम कंबल लपेट के बैठी थी। तो मैंने अपने पैर उसके कंबल में घुसाने की कोशिश की। तो इतनी जोर से उसने छिड़की दी मुझे कि क्या कर रहे हो आप? क्यों छू रहे हो मुझे करके? मैंने कहा बचपन से ये चलते आ रहा है कि हम दोनों एक कंबल में सोते हैं। तेरे पैर ठंडे

01:05:30:12 होते हैं तो तू मेरे मतलब गर्म करने की कोशिश करती है। मेरे पैरों के नीचे दबा लेती है। हम ये करते हैं। तो आज क्या हो गया? तो मैं अभी भगवान के आस्त इसमें हूं और आप मुझे छओगे तो मेरे वाइब्रेशन खराब हो जाएंगे। कि हां हम किसी को छूते नहीं है। तो आप दूर रहो मुझसे। तो समझ में ही नहीं आ रहा था कि यह भगवान है क्या है? क्या कहां मेरी बेटी फंस गई है? उसको मैं छू नहीं सकती। उसको मैं देख नहीं सकती। बहुत मतलब बुरा समय था। और वहां छत पर भी बेटी अकेली जा नहीं सकती। उसके दिमाग में यह भरा गया है कि जो बाहर के लोग हैं वो सारे दुर्योधन दुशासन है। तो इस चार दीवारी से इस तालों से अगर तू बाहर निकलेगी तो कोई भी तेरे को मतलब तेरे साथ गलत कर सकता है। तो छत पर भी अगर जाना है तो उनकी माताएं जो साथ में रहती है वो साथ में जाएगी। ग्राउंड फ्लोर पर भी जाना है तो माता साथ में जाएगी। मैंने कहा नीचे चलते हैं मेरे साथ चल दे। मैं हूं साथ में। तो बोलती है आपके साथ नहीं जाऊंगी। आपके साथ सेफ नहीं हूं मैं। माता साथ में चलेगी तभी जाऊंगी। और मैंने कहा ठीक है फिर मैं चली जाती हूं नीचे। तो उसको इतना अजीब लग रहा था कि आप अकेले नीचे चले जाओगे। नीचे मतलब अकेले कैसे जा सकते हो? कैसे सेफ हो? इतना डर उसके दिमाग में है कि मैं खुद भी अकेले नीचे नहीं जा सकती। मैंने कहा हम एक जगह से दूसरे एक स्टेट से दूसरे स्टेट दोनों ही गए हैं। अपनी

01:06:45:22 नई दुनिया बताए हैं। कौन साथ था हमारे? कोई भी तो नहीं था और क्या बिगड़ा है हमारा? तो वो सारी चीजें वो भूल गई है। अब इतना डर उसके दिमाग में है कि कुछ नहीं हम अकेले कर सकते हैं। हम किसी ना किसी का हमको सपोर्ट हमेशा चाहिए। क्योंकि सगा भाई और सगा बाप भी दुर्योधन दुशासन होते हैं और रात को लाइट बंद करके नहीं सोते हैं वो लोग। बोलते हैं कि सारे दुष्ट आत्माएं चारों तरफ रहती है तो वो कभी भी अटैक कर सकती है तो लाइट चालू करके ही सोना है जो पहले कभी ऐसे नहीं करती थी। ये भी पढ़ा दिया गया कि सौगा भाई भी दुर्योधन दुशासन होता है। बिल्कुल बिल्कुल किसी पर भी भरोसा नहीं कर सकते आप। दुर्योधन दुशासन हर कोई होता है। जो आदमी है वो दुर्योधन दुशासन है बस। इनके गुरु के अलावा मैंने कहा फिर ये भी तो आदमी ही है तो बोलती है ये तो अष्ट देवों में से मतलब मुझसे नहीं कहा कि अष्ट देवों में से हैं लेकिन ये उनके बोलती थी डिवाइन सोल है ये ये बहुत पवित्र आत्मा है और उनके फर्स्ट फ्लोर पर जो वहां के ओनर है भावना करके उनके पति जो रहते थे तो एक दिन फर्स्ट ग्राउंड फ्लोर से हम लोग सेकंड फ्लोर पर आ रहे थे और बीच में उनका आना हुआ तो ऐसे इसको गाइड कर दिया गया कि तुम उधर पलट जाओ और मेरी बेटी ऐसी जैसे ससुर को देख के बहू घूंघट में कैसे पलट

01:08:00:28 जाती है कि जेठ का सामना नहीं करना है। ससुर का सामना नहीं करना है। वैसे एकदम पलट गई और उनको बोल दिया गया कि संस्कृति आ रही है तो आप पलट जाओ। तो फिर वो भी पलट गए। इधर ये भी पलट गए। मैंने कहा ये क्या है? मतलब रास्ते से वो आ रहे हैं। वो सीढ़ियां उतर रहे हैं और तुम सीढ़ियां चढ़ रहे हो। इतनी चौड़ी सीढ़ियां है तो इसमें क्या प्रॉब्लम हो गई? तो बोलती है कि आदमी का सामना नहीं करना है और वह उसी बिल्डिंग में रहते हैं। उन्हीं को लाना ले जाना करते हैं। इनका खेल ही समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर चल क्या रहा है। आधी रात को 2:00 बजे उसको जगाते हैं। पूरा दिन बिजी रखते हैं। इतना काम देते हैं कि वो अपने आप में कुछ सोचने की ही टाइम उनको नहीं मिलती है कि हम क्या कर रहे हैं। हम कुछ गलत तो नहीं कर रहे हैं। बिल्कुल सोचने पर भी पाबंदी है। टाइम ही नहीं मिलता है। इतना बिजी रहते हैं तो फिर थक जाते हैं। फिर सो जाती हूं।

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01:08:47:22 उसको यह और सिखाया गया है। फिर अगली बार जब मैं जाने की कोशिश की हूं। मैंने सारी चीजें उसको बताने की कोशिश की कि बेटी देखो कितने पीड़ित परिवार है जो परेशान है इनकी संस्था की वजह से। कितने लोगों ने अपनी जिंदगी बर्बाद की है। और आज वो सब मेरे साथ हैं। मैं समझी हूं इन सब की कहानी। भाई जी आप हैं। भाई जी भाई जी आप दिख नहीं रहे हैं लाइन पर हैं। चालू है वीडियो।

01:09:36:24 एक मिनट वो मैं थोड़ा सा पॉज लूंगा। जी आप बात को यहीं से कंटिन्यू करिएगा। एक दूसरी जगह भी आवश्यकता है। एक मिनट। हां, मैं लाइन पर रहूं। जी जी लाइन पे रहिए। तो डरे नहीं। यह साइबर क्रिमिनल्स हो सकते हैं। इनकी रिपोर्ट नेशनल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत करें। गृह मंत्रालय द्वारा जारी।

01:10:24:16 हां जी बताइए। ये एक आर्डर बता समझ गए। दूसरी बात दूसरी बात देखिए रामपाल

01:11:40:00 रामपाल पर किसी ने कहीं पर रामपाल की किताबों को बेचते हुए किसी ने किसी पर एफआईआर करा दी। उसके बाद वह उसने भागदौड़ नहीं की। ये लोग एक दावा करते हैं ना ये आपसे यही दावा कर रहे हैं ना क्लीन चिट मिला है। उस क्लीन चिट में कहीं भी यह नहीं लिखा हुआ है कि इनकी किताबों में आपत्तिजनक सामग्री नहीं है। उसमें उसमें हुआ क्या है कि अ उसमें यह हुआ है कि जब किसी ने किसी पर एफआईआर कराई और मान लो जिसने एफआईआर कराई है उसको कोर्ट बुला रही है कि आकर के बयान दो। मगर वह पहुंच ही नहीं रहा है। वो व्यक्ति कहीं का था चला गया। एफआईआर करा के उसने संज्ञान नहीं लिया। तो एट दी एंड क्या करेगी कोर्ट? उस एफआईआर को वो कर देगी ना डिसबस्ट। ठीक है। ठीक है भैया। उस उस तरीके से वो खत्म हो गया मुकदमा। उसको ये लोग क्लीन चिट लेते हैं। जबकि मेरे पास अभी कल ही एक केस है जिसमें कि इनकी किताबों में आपत्तिजनक सामग्री होना कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। ये बहुत बड़ा मिल सकता है। भैया अभी [खांसने की आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़] पॉसिबल है अभी। मैं एक लाइव स्ट्रीम चल रही है। उसमें बैठा हुआ हूं। मैं देखता हूं भेजता हूं आपको। मगर वह जो क्लीन चिट है जो यह प्रस्तुत कर रहे हैं। उसमें कहीं नहीं लिखा

01:12:55:08 है कि वो किताबों में कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं है। ठीक है। उसमें कहीं नहीं लिखा है। आप उस पे है ना? हाई कोर्ट ने ऑर्डर लगाया है ना? किस पे? ये बुक पे हाई कोर्ट ने यह बुक क्यों बेची जा रही है? इस संबंध में शासन से क्वेरी किया है और यह यह जो पूरा गैंग है यह कैसे चल रहा है इस बारे में रामपाल जब जेल में था तो उसके जेलर तक को बुलाया है वो ऑर्डर आपके आपको मैंने जो ड्राइव का लिंक दिया उसमें उसमें लिखे हुए हैं। ठीक है ठीक है ओके ठीक है ठीक है

01:13:37:18 जी आप आ जाइए शता जी ओके भाई जी एक मिनट बस श्री जी

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01:14:14:12 बस वहां का माहौल [गला साफ़ करने की आवाज़] पूरा ऐसे ही तालों में बंद रखे हैं उसको और अभी तो और भी ज्यादा पूरा पैक कर दिए हैं बिल्डिंग को कि कहीं कहीं से कोई घुस नहीं सकता

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01:14:26:14 और इनकी बिल्डिंग ऐसी है कि अगर उसमें तो कोई दुर्घटना हो जाए जैसे अभी रिसेंटली वहां लखनऊ में जो हुआ था उस तरीके से कोई भी दुर्घटना अगर हो जाए गलती से वहां तो कोई बच नहीं सकता। ऐसा हाल है क्योंकि इतने ताले लगे हुए हैं कि वह ताले खोल भी नहीं सकते। चाबी किसके पास रहती है? नीचे जो ओनर है उसके पास रहती है। पता नहीं तो इन आध्यात्मिक विश्वविद्यालय का पालम स्थित जो केंद्र है उसकी बात हो रही है। जिसके यहां जिस केंद्र में हम लोग गए थे वहां का जो केयरटेकर टाइप का व्यक्ति है उसके साथ हमारी बातचीत हुई थी। जिसके जो ढपोर शंख है अगर बात की जाए अगर शास्त्र की या ज्ञान आध्यात्मिक ज्ञान की तो आपने देखा होगा हमारा वह वीडियो जिसमें वो ढपोर शंख जैसी बातें कर रहे थे तो वहीं की यह बात बता रही है हम लोग इन्हीं के द्वारा जानकारी प्राप्त होने पर वहां पर गए थे और अ जो लोग शास्त्रीय या आध्यात्मिक दावे करते हैं उनकी जरा हमने स्तर उसका जानने का प्रयास किया था। यह वही उसी पालम स्थित उसी केंद्र की बात हो रही है जहां पर इनकी बिटिया आज भी है। तो यह थोड़ा सा बताइए उसके बाद फिर यह तो कोर्ट का प्रोसेस हो गया। इसके बाद आपने बहुत सारे और भी प्रयास किए

01:15:41:20 होंगे बीच में। जी जी तो अभी रिसेंटली वाला जी आप बता लीजिए। जो भी आपको बताना हो आप बताइए। जी कोर्ट में हर बार डेट मिलती है और कुछ पेशी में मतलब बारी ही नहीं आती है और फिर अगली डेट मिल जाती है। जैसे दो साल से कुछ हो नहीं रहा है और इस इन दो सालों में मैंने हर जगह जैसे कहां-कहां मैं कंप्लेंट कर सकती हूं क्योंकि इनकी संस्था पहले से बदनाम है और क्या होता है सारे नेशनल मीडिया में आ चुका है और ये जो अमोल कोकने है वो वीरेंद्र देव दीक्षित का ही वकील है और इनको पता है कि सारे केसेस कैसे हैंडल किए जाते हैं जो पेरेंट्स इनके खिलाफ करते हैं। तो उसने पूरी तैयारी के साथ ही मेरी बेटी को घर से निकलवाया कि आप पहले यहां पर कंप्लेंट करके आओ और सारे काम उसने बहुत सिस्टमैटिक तरीके से करवाया कि 18 साल के होने के बाद एक दिन के बाद भी मां कुछ कर नहीं पाएगी। तो मैं हर जगह पर एनसीडब्ल्यू में, एनएचआरसी में, डीसीडब्ल्यू में मैं रेखा गुप्ता जी से भी मिलने की कोशिश की हूं। मैं डिप्टी सीएम के पास भी गई हूं। कमिश्नर ऑफिस में, होम मिनिस्टर में हर जगह मैंने एप्लीकेशन दिए हैं कि यह इस संस्था की जांच होनी चाहिए। मेरी बेटी भले ही 18 साल की है तो उसका मतलब दिमाग वो सही डिसीजन ली है। ये इस चीज की भी जांच होनी

01:16:56:21 चाहिए कि इनका ब्रेन वाश करने का तरीका कैसा है। इसके सारे सबूत मेरे पास हैं। तो इन सब की जांच होनी चाहिए। करके मैंने कई बार अप्रोच किया। मतलब जितना भी टाइम मैं यहां लगा सकती थी दिल्ली में हर जब भी मुझे दो-चार दिन की छुट्टी मिलती है मैं दो दिन का सफर करके ही दिल्ली पहुंच जाती हूं और एक दिन का भी मैं किसी से मिल सकती हूं। कितने वकीलों से मैंने मिला बहुत कोशिश की मैंने मतलब हर तरह से कि यहां थोड़ी उम्मीद बन रही है। ये लोग थोड़ी उम्मीद दे रहे हैं कि हम ऐसा करेंगे वैसा करेंगे इसकी जांच करवाएंगे। तो हर जगह मैं लोगों से जुड़ी थी। लेकिन फाइनली मुझे समझ में आया कि कुछ नहीं हो रहा है इसमें। और मेरी बेटी धीरे-धीरे फंसती ही जा रही है और पुराने पीड़ित जो हैं वह बोल रहे हैं कि आप जितना ज्यादा इसमें टाइम वेस्ट करोगे जितने दिन वहां बेटी आपकी रहेगी उतना ज्यादा वो आपसे दूर होती जाएगी और आप चाह के भी अगर उसको ले भी आओगे तो शरीर भले ही आपके पास रहेगा लेकिन वो पूरी तरह उनकी हो चुकी होगी और आप उसको सुधारने में परेशान हो जाओगे वो नॉर्मल हो नहीं पाएगी वो पूरी तरह डिप्रेशन में चली जाएगी ये बातें सुनके मैं बहुत ज्यादा परेशान हो रही थी और बहुत सारे केसेस हुए भी हैं जिन मां-बापों ने कोशिश कि उनके बच्चे तब उनका साथ नहीं दे रहे थे और आज उनकी हालत ऐसी है कि वह डिप्रेशन में है पूरी तरह। वह लोग अंदर हैं तो उनको दवाइयां दी जाती है। नींद की दवाइयां दी जाती है। डिप्रेशन की दवाइयां

01:18:11:22 दी जाती है और जो लड़कियां अभी ठीक हैं लेकिन वो बाहर निकलना चाहती हैं। तो उनका दिमाग उनमें ही बना रहे। उनका ज्ञान ही मतलब सब कुछ समझे। उसके लिए भी दवाइयां दी जाती है। कुछ ऐसे चीजें मुझे चैट में दिखा। जब बेटी मेरे साथ थी जब वह अपनी तबीयत को लेकर परेशान थी। उनका काम कर करके थक गई थी। तो अमोल कोकने ने एक दवाई उसको रेकमेंड की जो नॉर्मल तरीके से मेडिकल स्टोर्स में मिलती नहीं है। उस दवाई के बारे में मैंने जानकारी ली तो समझ में आया कि वो ऐसे मेंटल पेशेंट्स को दी जाती है दवाई जो कुछ जिनको दौरे पड़ते हैं ऐसे लोगों के लिए। तो उस दवाई का अगर मेरी बेटी मेरे साथ थी तब उसने रेकमेंड किया तो जाहिर है कि उसके उनके पास है तो वह देते ही होंगे। तो यह चीजें समझ के मैं इतना परेशान हो गई कि हो क्या रहा है मेरी इकलौती बेटी

01:19:04:16 जिसके लिए मैं जी रही हूं तो उसके साथ क्या क्या हो रहा है और वो समझ ही नहीं पा रही है वो मुझसे बात भी नहीं करना चाहती मैं कुछ भी उसको समझाने की कोशिश कर रही हूं वो खिलाफ ही बोल रही हूं उसको लग रहा है कि मां सबके खिलाफ है और वहां पर उसको यह दिखाया जाता है कि हम सब लोग तुम्हारी मां की भलाई के लिए हम रोज मेडिटेशन करते हैं। उनको सद्बुद्धि दे। भगवान इसके लिए मेडिटेशन करते हैं। आपको यह लग रहा है कि यहां सब आपके दुश्मन है। लेकिन यहां सब आपकी भलाई के लिए कर रहे हैं। वह आपको आप समझ नहीं पा रहे हो और आप सबके खिलाफ काम कर रहे हो। हर दिन मतलब जब भी बात होती थी उसका यही कहना रहता था। और मैं तरस गई उसको देखने के लिए उससे मिलने के लिए। हर बार जब भी बात होती थी लाडो देखना है रे कितने दिन हो गए तुझे देखे तो मुझे नहीं मिलना। आपको शरीर से इतना लगाओ क्यों? मैंने कहा वीडियो कॉल ही कर ले। तो आपको शरीर क्यों देखना है? बात कर तो रही हूं। आपको आप मेरी मां हो तो मेरी आत्मा से जुड़ो। आप अपनी आत्मा को पहचानो। भगवान को पहचानो। मुझे आप नहीं भगवान की जरूरत है। ये उसके शब्द रहते थे। अब दो साल से ज्यादा हो गए तो मैंने उसको कहा अभी कुछ दिनों पहले जून के जून मई के महीने में कि अभी स्कूल खुल जाएगी तो मैं फिर मिल नहीं पाऊंगी तेरे से और मैं बहुत परेशान हो गई हूं। देखना है तुझे करके। तो उसने कहा कि आप 1 जून को मुझे कॉल करना तब मैं आपको बताऊंगी। तब तो उसने सही तरीके से कहा कि मैं बताऊंगी

01:20:20:00 आपको कि कब आप मिल सकते हो मुझसे और जब मैंने 1 जून का इंतजार कर करके फिर 1 जून को कॉल किया तो बोलती है कि आप कोर्ट का केस अगर वापस लोगे तभी मैं आपसे मिलूंगी उसके अलावा नहीं मिलूंगी। तब तक उसके दिमाग में नहीं था कि कोर्ट के केस के बारे में बोलूं। एक कंडीशन लगाऊं तो मां मिल सकती है। लेकिन उनको मेरा वीक पॉइंट समझ में आ गया कि मैं तरस रही हूं अपनी बेटी को देखने के लिए और उसने यही बहाना लगाया कि आप यह करोगे तो इसके बदले में आपको यह मिलेगा। मतलब मैं देखने के लिए तरस जाऊं। मतलब देखने को मिल जाए उसके लिए मैं कोर्ट केस वापस लूं। यह उनका कहना है। कोर्ट का वो आर्डर पूरा हो गया क्या जिसमें आपको रोज मिलना रहता है। वो आर्डर अभी भी नहीं वो आर्डर वो आर्डर है अभी भी। लेकिन फिर उसके बावजूद भी यह मिलने नहीं दे रहे थे। कभी भी कॉल करो तो मैं चार पांच बार कॉल करूंगी तब उसका कॉल आएगा तो आएगा वरना मैं दो-ती दिन तक कोशिश करती रहूंगी। तब जाके उसका कॉल आता था। हां बोलो क्या है? अभी थोड़े दिन पहले तो बात किए हो। एक महीने के बाद भी बात करती हूं। जैसे मान लीजिए आप अभी अगर मिलने जाए अपनी बिटिया से दिल्ली में आपके पास कोर्ट का आर्डर है तो मिलने दिया जाएगा ना आपको 45 मिनट बिल्कुल नहीं बिल्कुल नहीं वो उससे ही बुलवा दिया जाता है कि मैं नहीं मिलना चाहती नहीं तो कोर्ट के आर्डर का क्या करें तो वो नहीं मिलना चाहती उसका ये कहना है मैं मेजर हूं तो कोर्ट का आर्डर भी काम नहीं आएगा उसको अमूल को सारी जानकारी है कि कोर्ट का कैसे होता है क्या-क्या हम

01:21:35:01 इसमें कर सकते हैं तो बेटी से ही हर बार बुलवा दिया जाता है कि मैंने मुझे नहीं मिलना बोल दो और जब भी मैं कॉल करती हूं तो मुझे समझ में आता है कि स्पीकर ऑन है। अगल-बगल के लोग समझा रहे हैं उसको जो मेरी बातें सुन रहे हैं और उसके हिसाब से वो जो गाइड कर रहे हैं एक-ए सेकंड बीच में रुकती है। फिर उनकी बात सुन के समझ के फिर मुझे जवाब देती है। ये हर बार मुझे एहसास होता है कि मैं अपनी बेटी से नहीं इतने लोगों से बात कर रही हूं जिसका जवाब सब दे रहे हैं। तो फिर मैंने बात करना भी कम किया। फिर जब बहुत ज्यादा परेशान होती थी। कभी 2 महीने में कभी 3 महीने में कभी रो देती थी तो आप कभी कभी कबभार पिघल भी जाती थी वो कि आप इतना परेशान क्यों हो रहे हो आप भी इसी रास्ते में आओगे थोड़े दिन की बात और है ऐसे समझाने की कोशिश करती थी आप अपना ध्यान रखना फिर अगर मैंने एक शब्द भी उनके खिलाफ ज्ञान के खिलाफ बोला तो फिर भड़क जाती थी कि नहीं आप गलत कर रहे हो ये आप सबके दुश्मन बने हुए यहां कोई आपका दुश्मन नहीं है सब आपकी भलाई चाहते हैं उसके सामने अगर वो लोग मेरी भलाई चाहते हैं तो वो मेरी बेटी को मेरे साथ में रहने दें और वो होते कौन है मेरे बेटे को मुझसे छीनने वाले? बोलती है मैं अपने और भगवान के बीच में आपको भी नहीं आने दूंगी। मैंने कहा मेरे और तेरे बीच में भगवान कैसे आ सकते हैं? और मैंने क्या गलत किया है जो मुझे मतलब भगवान हम दोनों के बीच में आ रहे हैं। और वो

01:22:50:04 बुक भी आपने ही लिखी है। जी जी ये इनकी पूरी कहानी है इस बुक में। अभी कुछ चीजें उसमें अपडेटेड नहीं होंगी। मगर इन्होंने ये बुक लिखी है। और Amazon पे अवेलेबल है ये बुक। जी ये Amazon पर Flipkart पर भी अवेलेबल है। ये मैंने पिछले साल पब्लिश किया था। इसका नाम है ब्रेकिंग फ्री ए मदर्स प्रॉमिस सन मार्तिका। तो आप कोई अगर इनकी ये कहानी पूरा जान पूरी जानना चाहते हैं इस मां की कहानी तो इस बुक को ले वहां से और पढ़ें और अपने लोगों को भी दें। इंग्लिश में है यह बुक। यह हिंदी भाषी नहीं है तो इन्होंने इंग्लिश में लिखना उचित समझाया जिससे कि कोई देश में रहने वाले किसी भी जगह पर हो तो वह पढ़ सके इनकी कहानी को जान सके।

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01:23:41:27 फिर क्या हुआ? मैं मिल नहीं पाई अपनी बेटी से और तरस गई और मैं पुलिस स्टेशन के चक्कर काट काट के भी थक गई। एनएचआरसी से थोड़ा सा काम आगे बढ़ते दिखा। मुझे अपनी बेटी की चिंता तो है ही साथ-साथ वह जितने बच्चों को और फंसा रहा है, उसकी भी बहुत ज्यादा चिंता हो रही थी क्योंकि यह आदमी पूरे देश भर के स्कूल्स कॉलेजेस में जाकर प्रचार कर रहा

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01:24:05:18 है। अब मुझे यह चीज समझ में नहीं आ रही कि स्कूल कॉलेज वाले किसी भी संस्था से कोई भी आता है तो उनका बैकग्राउंड जाने बिना आने कैसे देते हैं। अभी तक इनके चैनल पर स्पिरिचुअल रेवोल्यूशन नाम का इनका चैनल है। उनके चैनल पर 800 से ज्यादा वीडियो अपलोडेड हैं। जो पूरे देश भर में जहां-जहां जिन-जिन स्कूल्स कॉलेजेस में गए हैं वहां का अपलोड करते हैं वीडियो वह उसमें बस पहले तो मेडिटेशन की बात करते हैं। फिर उसके बाद बोलते हैं कि दुनिया सारी खत्म होने वाली है और आपको भगवान के रास्ते पर आना है। भगवान धरती पर आ गए हैं। आप हम लोगों से जुड़ेंगे तो आपको सही रास्ता मिलेगा और दुनिया खत्म होने से पहले अगर आप भगवान से जुड़ जाओगे तो आप साइड में जाओगे। यह सारी चीजें वो वहां गाइड करते हैं और सारे बच्चों को दिखाते हैं। उसमें तो मुझे सब में मेरी बेटी दिखती है कि इन सारे बच्चों के मां-बाप भी मेरी तरफ फसेंगे। अगर कोई भी बच्चा अगर उनको कॉल करता है तो इनकी पूरी टीम लगी है कि कोई एक कॉल आ जाता है तो उसको फॉलो अप करते हैं। फिर उसको गाइड करते हैं। ऐसे ही मेरी बेटी को समझाया गया कि तुम जितने लोगों को ले आओगी उतना ऊंचा तुम्हारा पद होगा और उतना ज्यादा संदेश फैलाओगी तो मतलब दुनिया का उद्धार होगा इससे। तो तुम तुम दुनिया की मतलब दुनिया दुनिया की भलाई कर रही हो तुम इस सेवा कर रही हो

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01:25:20:12 क्या क्या किसी प्रकार से दैहिक शोषण भी वहां पर होता है बच्चों का जो जिनको ले जाया जाता है ये एक ये कठिन प्रश्न है मेरा जो आपके लिए सुनने में मतलब आपको जवाब देना इसका थोड़ा आपके लिए कठिन होगा मगर लोगों के जानने के लिए और समाज के लिए आवश्यक प्रश्न है क्या किसी प्रकार से वहां पर जो जाने वाली जो लड़कियां या इनका दहिक शोषण भी होता है। ऐसी कुछ जानकारी वीरेंद्र देव दीक्षित के बारे में तो सबको पता है ही कि वह क्या करते थे। आपकी जानकारी में क्या ऐसा कुछ आपको आशंका? वीरेंद्र दीक्षित से जुड़े हुए कई मामले हैं। आपने बताया कोर्ट केसेस भी हुए वो भागे भी और बाद में अभी की क्या स्थिति है? वीरेंद्र देव दीक्षित की डेथ हो चुकी है। वीरेंद्र देव दीक्षित तो खत्म हो गए हैं 2022 में और वो जानकारी बाहर नहीं निकाली गई थी क्योंकि उन्होंने कहा था कि वो इसी शरीर से सबको सतयुग में ले जाएंगे। अब तो फिर बाद में जानकारी आई कैसे वो तो उनके साथ जो लोग थे उन्होंने ही बताया कि मतलब कुछ लोग जो साथ में थे उनको समझ में आया कि ऐसा कुछ है ना कि कोई डेथ सर्टिफिकेट वगैरह भी मिल गया है अभी दीक्षित का जी शुरुआत ऐसे हुई [गला साफ़ करने की आवाज़] कि जो लोग उनके साथ थे वो मान रहे थे कि ये ये इनहीं

01:26:35:15 में भगवान है और इसी शरीर से हम सबको सतयुग में ले जाएंगे जब वो खत्म हो गए तो उनके साथ जो कुछ लोग जुड़े थे उनको समझ में आया कि ये तो चले चले गए हैं। अब हमको सतयुग में कौन ले जाएंगे? तो फिर उनका दिमाग खुला कि हम गलत जगह फंसे हैं। तो फिर उन्होंने प्रचार करना चालू किया कि ये वीरेंद्र देयर दीक्षित खत्म हो गए और साथ में वो लोग थे। उन्होंने स्टेटमेंट भी दिया कुछ। अब वो कितना उनको मानते हैं इसका तो मुझे कोई जानकारी नहीं है। लेकिन जब वो खत्म हो गई ये चीज समझ में आई तो अमोल कोहनी ने उनके सारे बर्थ डेथ सर्टिफिकेट वगैरह सब कुछ निकलवाया। अब इनका कहना है कि वह जो भगवान की आत्मा वीरेंद्र देव दीक्षित में आती थी अब वह इनके अंदर आती है। यह जो हीरा एक डिब्बी में रखा हुआ था वो डिब्बी को तो जला दिया गया है वहां पर हैदराबाद में कोई क्रिमेशन सेंटर पर और अब वो जो भगवान है जो शिव की आत्मा राम की आत्मा कृष्ण की आत्मा है इन ये अष्टदेव जो इन्होंने बाबा की बहुत सेवा की है। अब इनके अंदर आकर सबका उद्धार करने में यह काम कर रही है। तो अब इनहीं को भगवान माना जाए। उस शरीर को भी याद नहीं करना है। जिस शरीर में भगवान की आत्मा है उसी शरीर को याद करना है। तो अब इनका गाइडेंस ऐसे सबको अपनी तरफ डाइवर्ट करने में लगे हुए हैं कि अब यही भगवान है।

01:27:51:20 तो तो फिर ये तो क्लियर हो गया। जी वीरेंद्र अब वीरेंद्र देव दीक्षित की जगह इन्होंने ली है तो आगे चलके ये भी वही ज्ञान फैला सकते हैं कि सबको पवित्र करने के लिए जो वीरेंद्र देव दीक्षित करते थे। उसी बहाने से और यह भी वही करेंगे और कुछ मुझे ऐसे प्रूफ भी मिले हैं जहां पर यह लड़कियों को समझाने की कोशिश कर रहा है कि इनको भगवान माने इनको इनको पार्टनर माने अपना। एक रिकॉर्डिंग ऐसी मिली है जहां एक लड़की पूछ रही है इनके ज्ञान के आधार पर बोला जाता है कि 9 लाख लोग सतयुग में जाएंगे जिसमें 4 लाख ब्रह्मकुमारी से होंगे और 4.5 लाख इनके ज्ञान से होंगे। रुद्रमाला ये अपने आप को रुद्रमाला बोलते हैं और ब्रह्मकुमारी इसको विजयमाला बोलते हैं। तो आधे लोग इधर के होंगे तो आधे उनके पार्टनर जो हैं उधर से होंगे।

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01:28:36:28 अपनी मर्जी से ही आश्रम खोल लिए बोलते हैं। 2023 में हमने यहां आश्रम खोला है तो उसका कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है। रजिस्ट्रेशन वो करना भी करवाना भी नहीं चाहते क्योंकि उनके गुरु ने कहा है कि यह जो सरकार है यह भ्रष्टाचारी सरकार है और हम शिष्टाचारी लोग भगवान की सरकार को ही मानेंगे। यह सरकार को नहीं मानेंगे। तो हम इसके नीचे क्यों दबे? अगर रजिस्ट्रेशन करवाते हैं तो इनको सारे जवाब देने पड़ेंगे कि कैसे चलता है, क्या सारी डिटेल्स उनको देनी पड़ेगी। कौन इसको चलाता है। तो कोई भी इनके पास रूल रेगुलेशन नहीं है। बस अपने ही बनाए हुए रूल पर चलते हैं और आश्रम का नाम दे दिए हैं और बस रखे हैं लोगों को। अपनी मर्जी से ला के रखें। रूल्स ही नहीं के चलते हैं। तो तो बेटी बेटी को जब आपने आपने जब चैलेंज किया है, आपने जब चैलेंज किया है तो आपने उसमें मतलब बेटी की तरफ से जब पक्ष आया कि भाई मैं यहां रहना चाहती हूं तो कहां बताया उसने? कहां रहना चाहती है? किसका घर है ये? ऐसे बताया होगा ना कि मैं इस नाम से आध्यात्मिक विश्वविद्यालय नाम का आश्रम है। आश्रम है। मैं इसी आश्रम में रहना चाहती हूं। मैं आध्यात्मिक पढ़ाई करना चाहती हूं। हम तो आपने ये वाली ये प्रश्न पूछा कि भाई ये आश्रम कौन सा आश्रम है? कैसा आश्रम? कौन चलाता है इस आश्रम?

01:29:52:24 ऐसे करके बात बढ़ाई आगे। बोलते हैं ये एक आध्यात्मिक परिवार है। इसको कोई रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है। हम पूरे परिवार ये तो ये ये तो कोर्ट से आपने पूछवाया। मतलब कोर्ट में ये काउंटर पेश किया। जी मतलब वहां पर मेरी भांजी जो है मनीषा करके वो इंचार्ज है वहां की अपने आप को इंचार्ज बताती है उसके पास कोई ये ठोस सबूत नहीं है कि ये आश्रम कहां से बना है किसने बनाया है कोई कुछ भी नहीं है उसके पास बस ज्ञान में वो भी ब्रेन वाश है पूरी तरह तो इन्हीं की बातों को ले चलते हैं और कुछ नहीं है उनके पास

01:30:31:20 और पढ़ाईवढ़ाई उसने छोड़ दी है जैसे ही इसने कॉलेज ज्वाइन किया मैंने फीस 4 लाख की भरी थी तो एक सेमेस्टर उसने पढ़ाई की और एक सेमेस्टर कंप्लीट होते-होते एग्जाम दिया भी नहीं। उसके बीच में वो 18 साल की हो गई और उसने मतलब बुलवा लिया गया कि अमोल के साथ उसकी चैट भी है कि भाई जी मुझे कब आना है। तो उसने कहा एग्जाम खत्म होते ही आना है। नवंबर फर्स्ट वीक में उसकी एग्जाम चालू होने वाली थी जो थोड़ी पोस्टपोन हो गई थी। तो उसने कहा ठीक है भाई जी आप जैसा कहें मैं एग्जाम खत्म होते ही वहां पहुंच जाऊंगा। तो उसका 18 साल का होना और एग्जाम खत्म होना दोनों साथ-साथ हो रहे थे। तो उसने कहा एग्जाम खत्म होते ही पहुंच जाऊंगी और एग्जाम थोड़ी पोस्टपोन हो गई तो एग्जाम भी उसने दिया नहीं और वह पहुंच गई। फिर इसके आगे बहुत सारे काम उसने करवाया कि बेटी से कॉलेज के खिलाफ मतलब यूजीसी को मेल करवाया। फिर वहां से पता नहीं क्या-क्या बेटी से करवा रहे हैं और बेटी इतनी आज्ञाकारी बनी हुई है। वो किस दबाव में है ये भी समझ में नहीं आ रहा है कि वो जो जो बोल रहे हैं वो वो करवाती जा रही है। तो आगे वो क्या-क्या करवा सकते हैं इस बात का डर है मुझे। उसने कहा कि मतलब लैपटॉप और फोन घर से ले गई है। उन लोगों ने कह दिया कि बोल देना कि मम्मी को दे दिए हैं। तो उसने पुलिस को बोल दिया कि मम्मी ले चली गई। यहां आई थी जब लैपटॉप और फोन ले चली गई। तो जितना

01:31:47:03 झूठ वह बुलवा रहे हैं हर तरह का झूठ वो बोल रही है। वहां कोर्ट में बोल रही है कि मम्मी मुझे हरास करती है। मम्मी मुझे परेशान करती है। जब चेंबर में जज ने पूछा कि मम्मी कैसे रखती थी तुमको पहले मतलब घर पर थी जब तो सारी चीजें उसने सही-सही बताई कि मां बहुत स्ट्रगल करके मुझे पाली है। अच्छे से रखती है। तो फिर अभी मां को छोड़ के क्यों आई हो? तो बोलती है अब मुझे यह रास्ता पकड़ना है। भगवान के रास्ते में जाना है जिसमें मां साथ नहीं दे रही है। इसलिए मुझे यहां रहना है। तो बोले कि तुम घर पे रह के भी कर सकती हो। तो मां इसमें मतलब मुझे रोक-टोक करती है और इसलिए मुझे मां के पास नहीं रहना। और इसका कहना है इसकी जितनी भी सहेलियां हैं जो इसको मिस कर रही हैं सबको यहीं आना है। इसी घर में आना है जहां ये पालम का घर बना हुआ है। सब लोग ज्ञान के लिए यहीं पर आएंगे। इन्हीं से भीख मांगे कि हमको ज्ञान दो करके। यह इनका कहना है। यही उम्मीद करती हूं कि वह समझे यह सारा खेल क्या इन लोगों का है और उन पर अब इन्वेस्टिगेशन हो कि वह क्या ज्ञान बांट रहे हैं। क्या स्कूल्स कॉलेजेस में जाने की उनकी मतलब उनको परमिशन क्यों मिल रहा है? इस बात के भी छानबीन होनी चाहिए। इनकी संस्था का क्या स्टेटस है? बैकग्राउंड क्या है? बैन होना चाहिए। इनकी संस्था, इनका आश्रम और ये जो व्यक्ति है मोल कोकने विशेष रूप से वो उसे बैन होना चाहिए। उसके सार्वजनिक

01:33:02:04 प्रवचन इत्यादि सब पर रोक लेनी चाहिए। जैसे रामपाल पे बैन होने की मांग की गई है हमारे द्वारा हाई कोर्ट में उसी तरीके से बैन की मांग होनी चाहिए और जो इसने जो कुछ कर दिया है षड्यंत्र पूर्वक उसमें जांच करके उसमें दोषी जो पाए गए हैं जितने लोग उनको सजा होनी चाहिए और अगर यह भी निकलते हैं अमोल कोकने सीधे तौर पर कि ये इन सब षड्यंत्रों में लिप्त है जो कि आप बता रही हैं बहुत सारी ऐसी चीजें जो दर्शाती है वो लिप्त है तो उन पर भी कड़ी कारवाई होनी चाहिए उनको सजा बहुत सारे सबूत हमारे पास ऐसे भी हैं कि इनके आश्रम में जो सुसाइड केसेस हुए हैं उन सारे केसेस को दबाने की कोशिश ये जो कर रहे हैं अमोल के आश्रम में रह रही है आपकी बिटिया इनके जो दूसरे सेंटर हैं वीरेंद्र ये सब एक ही है वीरेंद्र देव दीक्षित का आश्रम बोलिए चाहे ये बोलिए ये उन्हीं के वकील है उन्हीं से सीखे हुए हैं और उन्हीं की संस्था को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं उसी नाम से और अब उन्हीं की गद्दी पर बैठ रहे हैं तो फिर सब एक ही हुए ना तो उनके जो पीड़ित हैं बहुत सारे लोग हमारे साथ हैं तो आगे आएंगे वह भी और जितने भी वहां सुसाइड केसेस हुए हैं उन सबको दबाने की कोशिश ये कैसे कर रहा है कैसे जो लोग डिप्रेशन में है उनको कहां-कहां रखना है किसको बांध

01:34:17:06 के रखना है किसको कहां मतलब शिफ्ट करना है इन सारी चीजों की भी डिस्कशन उसमें हो रही है। ये चीजें मैं अपनी बेटी को सुनाने की कोशिश करती हूं तो उसको समझाया गया है कि तुमको कुछ नहीं सुनना है। तुमको बस कान बंद कर लेना है। अगर कोई भी बात तुम्हारे काम में जाएगी थोड़ी थोड़ी सी भी अनिश्चयता आएगी तुम्हारे अंदर तो तुम्हारा पुरुषार्थ पूरा बेकार जाएगा और अगर तुम अपनी [गला साफ़ करने की आवाज़] मां को याद करती हो तो अगर देहधारियों को याद करोगी तो वह भी व्यभचारी याद कहलाएगी तो वो व्यभचार के बराबर है। इनके ही चैनल्स पर कुछ ऐसे वीडियोस अपलोड किए हैं जिसमें मतलब मां-बाप सबसे बड़े दुश्मन हैं। मां-बाप मोह माया का मतलब ये फैला के रखते हैं और कुछ नहीं। तो आपको ज्ञान में जाने नहीं देते हैं। आपका आप एक बार ऑपरेटर जी हमारा वो वीडियो यहां पर शो कर दीजिए जो उस जहां पर इनकी बिटिया इस समय है और वहां का हम लोगों ने जो वीडियो बनाया है वो यहां पर शो कर दीजिए ऑपरेटर जी और अमोल कोकने की पिक्चर भी हो सके तो यहां पर दिखा दीजिएगा। हालांकि वो शायद वीडियो के थंबनेल में है। वो अमोल कोकने की जो फोटो है। ठीक है? तो मुझे लगता है कि हम सभी को जागरूक होकर रहना चाहिए और

01:35:33:18 अपने आसपास के लोगों को बताएं ये किस प्रकार से हमारे बच्चों को हमसे छीन लिया जा रहा है। इस मां से इनकी बिटिया को छीना गया है और बहुत ही दर्दनाक इनका इनकी यात्रा रही है। संघर्ष कर रही हैं। क्या

✅ This part is already used · 01:35:47:25 – 01:36:34:24 (0:47)

→ Used in: A · Video आज इनकी बेटी को छीना गया है अगली बारी आपकी है at 29:20 ↗

01:35:47:25 बीती होगी इन पर जब इनकी बिटिया ने जाने से पहले इनको आखिरी बार गले से लगाया होगा और आज वह कोर्ट में आकर के कहती है कि मुझे अपनी मां को नहीं देखना है और पुलिस वाले घेर करके उसको खड़े होते हैं कि आपकी बिटिया आपको देखना नहीं चाहती है। सोचिए आप भी किसी के बेटे होंगे, किसी की बिटिया होंगी। आप किसी के मां होंगी, किसी के पिता होंगे, किसी के भाई होंगे। कैसा लगेगा जब आपका कोई व्यक्ति जिस पर आप निर्विवाद रूप से विश्वास करते हैं कि मेरा है मेरा अपना है और वह अचानक से अंदर ही अंदर कोई व्यक्ति आप आपसे छीन लेगा उसे

⬜ Not used yet · 01:36:34:24 – 01:37:21:15 (0:47)

01:36:34:24 और उस पर आपके सारे अधिकार खत्म हो जाएंगे नष्ट हो जाएंगे इसीलिए को वापस वहां आश्रम में ले जाया गया है वापस चली गई है वो वहां और उसका उसका तो फिर से वही सिखाया जा रहा है उसको कि इनके इनके बारे में यह बोलो वह बोलो तो सारी वह बातें जो झूठी-झूठी है वहां पर फिर से उससे स्टेटमेंट देके फिर कोर्ट में और एप्लीकेशन देके सब कुछ करवाया जा रहा है उससे मतलब वो करते जा रही है जहांजहां साइन करने बोल रहे हैं करते जा रही है उसको समझ में भी नहीं आ रहा है कि वो क्या कर रही है बस उसको यह समझाया जा रहा है कि तुम बहुत सही कर रही हो भगवान के रास्ते में यह सारी मोह माया की बातें आती रहेगी तो तुम कहीं फंस नहीं रही हो बहुत अच्छी बात है यही समझाया जा रहा हो

01:37:20:14 तो यह सारी

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→ Used in: A · Video आज इनकी बेटी को छीना गया है अगली बारी आपकी है at 30:09 ↗

01:37:21:15 चीजें हैं इनकी यात्रा और बहुत ही दुखद अभी तक रही है और भगवान से हम सभी प्रार्थना करते हैं आपकी बिटिया जल्दी घर वापस आ जाए और आपकी बिटिया के रूप में आपकी ये जो प्रेरणादायक प्रेरणादाई संघर्ष है आपका यह हम सभी के लिए बहुत अनुकरणीय है और हम सबको बहुत साहस देती है आपकी कहानी कि अन्याय न्याय के खिलाफ और अत्याचार के खिलाफ, अत्याचार के विरोध में कभी भी बैठ नहीं जाना चाहिए। निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए और आपने किया भी है और आपकी अपनी बेटी के लिए जो आपका स्नेह, आपका प्रेम है जो सभी के होता है। मगर आपके जितने भी प्रयास हैं उन सभी को नमन करते हैं हम और आगे जो हो सकेगा आपके जितने जितना हमसे हो सकता है आपके साथ जरूर हम खड़े होंगे आपकी लड़ाई में। ठीक है सरता जी पूरा करें। ठीक है। तो इस वीडियो को जितना हो सके लोगों तक पहुंचाएं। अमोल कोकने की चीजों को लोगों को बताएं। ब्रह्मा कुमारी की चीजों को लोगों को बताएं।

01:38:36:19 किस तरीके से ब्रह्मा कुमारी के द्वारा उत्पादित यह जो उत्पाद है आध्यात्मिक विश्वविद्यालय वीरेंद्र देव दीक्षित और फिर अमोल कोकने वस्तुनिष्ठता से अमोल कोकने और इनकी बेटी और इनकी कहानी है और अ अगर समग्र रूप से देखें व्यापक दृष्टि से देखें तो यह एक बुरी ताकतें हैं जो किस तरीके से हमारे सनातन समाज को सनातन धर्म को नष्ट करने पर तुली हुई है। वो आपको दिख रहा

⬜ Not used yet · 01:39:08:24 – 01:46:09:00 (7:00)

01:39:08:24 होगा। ठीक है? जय श्री राम सभी को। ऑपरेटर जी है नहीं क्या? दिखाना था यहां पर। एक मिनट हां

01:40:10:10 [गला साफ़ करने की आवाज़] ऑपरेटर ऑपरेटर महोदय से मैंने कहा है कि वो आध्यात्मिक विश्वविद्यालय वाला वीडियो यहां पर एक बार थोड़ा सा दिखा दें जहां पर इनकी बिटिया इस समय है। उसका पूरी तरीके से ब्रेन वाश हो चुका है और साथ में अमोल कोकने की भी फोटो आपको दिखा दें स्क्रीन पर और

01:40:42:24 एक बहुत ही इंपॉर्टेंट वीडियो आने वाला है। कोर्ट में हमारे ऊपर एक केस किया गया था। केस करने का प्रयास किया गया था कि जब रामपाल के गिरोह की एक मातृशक्ति रामपाल की किताबें बेच रही थी। प्रचार प्रसार कर रही थी। तब हमने उसका प्रतिकार किया था। तो उसने हमारे ऊपर झूठा छेड़खानी का मुकदमा दर्ज कराने का प्रयास किया था। उसमें स्टेप वाइज पहले आईजीआरएस फिर पुलिस हेड पुलिस थाने में इंफॉर्मेशन ये इत्यादि के द्वारा उसने प्रयास किया। फिर जो 1563 होता है कोर्ट के द्वारा एफआईआर कराने का प्रयास वो सब किया और अभी उस मामले में हमारे विरोध में मुकदमा करने का प्रयास किया कोर्ट में डायरेक्ट तो उसमें कोर्ट का एक बहुत अच्छा आदेश आया जिसमें कोर्ट ने बहुत सी चीजें स्वीकार की हैं। तो यह सारी चीजें चीजों को लेकर के हम जल्द ही

01:41:45:22 एक लाइव सेशन करेंगे जिसमें कोर्ट का वो आदेश सुनाएंगे। उसमें कोर्ट ने यह भी माना है कि जो रामपाल की किताबें हैं उसमें विवादित सामग्री हैं। देखिए यह है आध्यात्मिक विश्वविद्यालय जिसके बारे में बात हो रही है। और इस व्यक्ति का नाम है इस व्यक्ति का नाम है देव। देव सिंह नाम है शायद है ना और अमोल कोकने का चित्र दिखा दीजिए शायद थंबनेल पर होगा वो अमोल कोकने का चित्र जो व्यक्ति कह रहा है कि अब मेरे अंदर भगवान आते हैं

01:42:27:27 इस इसी वीडियो के थंबनेल पर होगा वो इन्हीं इन्हीं के कहने पर हम यहां पर गए थे इन्हीं के द्वारा जानकारी दिए जाने पर हम यहां गए गए थे और वहां जो मिल गया उससे बात बातचीत की थी और इनको पहले भी यह जो सरिता जी हैं इनको पहले भी हमने कई बार लाइव के लिए कहा कि आप आकर के अपनी चीजें बताइए इससे कि अन्य लोग जागरूक हो जाए जितने लोग देखेंगे उतने जागरूक होंगे। तो ये उस समय नहीं आती थी कि अगर मैं आऊंगी और इस तरीके से पब्लिकली आकर के बोल दूंगी तो ऐसा ना हो जो मैं मिल पा रही हूं। अपनी बिटिया से बात कर पा रही वो भी बंद हो जाए। परंत मगर अब इन्होंने आने का निर्णय इसलिए लिया क्योंकि यह उसको वापस लाने का वैसा प्रयास भी कर चुकी थी और उसमें भी विफल हो गई। तब इन्होंने कहा कि अपनी चीजें लोगों को बतानी पड़ेगी और तब यह आज लाइव आई हैं। जी अमोल कोकने का फोटो नहीं दिख सकता है जो थंबनेल [नाक से की जाने वाली आवाज़] पर है या फिर इंटरनेट से मिल जाए।

01:43:59:08 यह है अमोल कोकने। यह सेंटर में आप जो देख रहे हैं ना ब्रह्म के बगल में यह है अमोल कोकने। ब्रह्मा कुमारीज, वीरेंद्र देव दीक्षित, लेखराज और अमोल कोकने ये सब आपस में जुड़े हुए लोग हैं। ठीक है। चलिए फिर ठीक है सभी को जय श्री राम और जितना हो सके सतर्क रहें जागरूक करें और अभियान को आगे बढ़ाएं और सरिता जी की जो बुक है उन्होंने जो लिखी है आत्म कथा उसको आप Amazon या Flipkart से लेकर पढ़ सकते हैं। उसका नाम है हम लोग उसका लिंक दे देंगे। उसका लिंक यहां डिस्क्रिप्शन में डाल देंगे। बुक का नाम है ब्रेकिंग फ्री ए मदर्स प्रॉमिस। यह हां जी। बहुत बढ़िया। Amazon पे अवेलेबल है। अगर आप इस मां की कहानी लोगों तक पहुंचाना चाहे तो आप पहुंचाने का प्रयास करें जरूर।

01:45:12:16 निरंकार पाठक जी अभी समय काफी हो चुका है। आज कुछ और भी चीजें हैं जिनमें हम जुड़े हुए हैं। तो आपसे फिर दोबारा आप हमारे नंबर पर संपर्क करें और किसी दिन आपके साथ या किसी और चर्चा में आप जुड़ जाइएगा तो आपकी चीजों को हम लोग जरूर सुनेंगे। ठीक है? तो सभी को जय श्री राम। [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Live 1:46:13 · 19 Jul 2026

ब्रह्माकुमारी से जुड़ा एक सनसनीखेज खुलासा एक माँ ने क्यों किया अपनी ही बेटी को किडनैप?

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