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00:00:02:02 तो जय श्री राम सभी को। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और आज का जो टॉपिक है बहुत ही गंभीर है। आपने थंबनेल देख ही लिया होगा। कुछ बातों को लेकर के हम विवेचना करने वाले हैं। एक चैनल है स्टेप अप जे करके। शायद Facebook पेज भी इसी नाम से है और मुझे जहां तक मुझे इनका जो है पेज का हैंडल का ही नाम सीधे तौर पर पता है स्टेप अप जे और इनका जो व्यक्तिगत नाम है इनका वो शायद जगदीप या जगदीश है तो इसमें मैं कंफ्यूज हूं थोड़ा इनकी चीजों को लेकर के आज की विवेचना है और इसमें रामपाल का एक महत्वपूर्ण जो रामपाल की एक महत्वपूर्ण भूमिका है किस प्रकार से स्टेप अप जे पहले रामपाल की चीजों का विरोध करते करते हैं और फिर उसके बाद जो है अभी इस समय कुछ अलग तरह की गतिविधियां दिखाई दे रही हैं जो कि रामपाल का समर्थन कर रही हैं और किस तरीके से रामपाल की चीजों पर वह लीपापोती करते हुए भी दिखाई दे रहे हैं तो यह सब बातों पर हम लोग बात करने वाले हैं और फिर इसमें एक निर्णय है कि स्टेप अप जे वाले यदि अनजाने में ऐसा

00:01:17:06 कर रहे तो वह स्वयं और जो दर्शक हैं जो उन्हें देख रहे हैं वह स्वयं निर्णय करें कि यह उनकी पत्रकारिता है या चाटुकारिता है। ठीक है? तो अब इसमें सबसे पहले हम लोग जो बात करेंगे कहां से स्टार्ट हुई है स्टेप अप जे वालों से कुछ दिन पहले मेरी बात हुई थी जिस समय एकदम से हरियाणा में धर्मेंद्र हुड्डा के द्वारा वीडियो निर्गत और फिर रामपाल द्वारा धर्मेंद्र हुड्डा को प्रतिकार स्वरूप कुछ अनरगल टिप्पण टिप्पणियां कर देने के बाद यह मामला गर्म हो हो गया था और विरोध शुरू हुआ था। तो उसी समय यह जो स्टेप अप जे वालों का विरोध भी मुझे दिखाई दिया था Facebook पर और मैंने इनसे संपर्क भी किया था। फिर मैंने इनको रामपाल के विरुद्ध जो प्रशासनिक न्यायिक और लिखित कारवया चल रही है उनसे भी अवगत कराया था। इन्होंने तुरंत मुझसे कहा कि आप जो है यहां आ जाइए प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लीजिए। चीजों को समझने की बजाय इन्होंने सीधे प्रेस कॉन्फ्रेंस इत्यादि की बात कही। मतलब जैसे एक अ एक व्यवसायिक

00:02:32:07 प्रेस रिपोर्टर का दृष्टव्य होता है ना कि चीजों की गंभीरता से पहले यह देखना कि कंटेंट हमारा हमसे रिलेटेड चीजें जिस जिन चीजों में इस समय हमारी रुचि है उससे रिलेटेड चीजें हमें कैसे मिलेंगी तो मुझे कुछ ऐसा दिखाई दिया हालांकि मैं कई लोगों ने मुझे कहा कि आप यहां आ जाइए तो मैंने वहां जाने से जाने में कोई रुचि नहीं दिखाई क्योंकि पहले उस प्रकार का एक मंच यदि वहां पर प्राप्त हो तो हम है। अच्छा इसमें धर्मेंद्र हुड्डा को लेकर के भी कुछ बातें हैं। पहले हम यह वाली बात कर लें स्टेप अप जे वाली। इसके बाद जब इनका मुझे विरोध दिखाई दिया था। ठीक है। अभी रिसेंटली स्टेप अप जी का एक इंटरव्यू सामने आया जिसमें यह तथाकथित जगतगुरु तत्वदर्शी बाबा रामपाल का इंटरव्यू ले रहे हैं और बड़े ही मीठे-मीठे सवाल कर रहे हैं। बड़े ही मीठे-मीठे तरीके से उनको उत्तर प्राप्त हो रहे हैं और यह उन उत्तरों को समेट करके रख के चले आ रहे हैं वहां से। यह सब चीजें आपको देखने को मिल रही होंगी इन दिनों। उसके बाद कहानी [गला साफ़ करने की आवाज़] यही नहीं रुकती। जब जब बाबा रामपाल के विरोध में कोई चीज आ रही है जैसे कि अ सुक्राईनाथ ने सुक्राईनाथ जी ने उन्होंने जब बाबा रामपाल की बहुत जड़े खोद

00:03:47:13 दी और तरीके से खंडन किया रामपाल की चीजों का लगभग उनके सामने जो जो टॉपिक उन्हें याद रहे होंगे स्मरण में वो सब उन्होंने खदेड़ा अच्छे से ठीक है उस के बाद भी यह जो स्टेप PUBG वाले हैं। इनका जो तरीका है जो पहले जो चल रहा था विरोध में रामपाल के विरोध में वो तरीका या वो एटीट्यूड रामपाल के प्रति व्यवहारिक जो व्यवहार है वो इनके व्यवहार में कहीं भी बदलाव या कोई गंभीरता या आश्चर्यचकित होना कुछ नहीं। बस इन्होंने वहां पर सुक्राईनाथ जी का इंटरव्यू ले लिया और डाल दिया। उसको लेकर के आगे कोई काउंटर क्वेश्चंस रामपाल को लेकर के कुछ नहीं बल्कि जगह-जगह पर वह रामपाल को डिफेंड करते ही नजर आ रहे हैं। है ना? फिर इसके बाद अभी एक मैंने ऑडियो क्लिप सुनी जो इन्होंने सुनाई है। स्टेप अप जे से मेरी जो बातचीत हुई है वो भी रिकॉर्डेड है। अगर यह कहेंगे कि भाई आप वो रिकॉर्डिंग पब्लिक कर दीजिए। हालांकि उसमें ऐसा कुछ खास नहीं है पर जो मैं कह रहा हूं वह सत्य है इस बात के लिए। तो यदि वह कहेंगे तो मैं उस रिकॉर्डिंग को निर्गत कर दूंगा।

00:05:03:18 खैर वह ऐसी कोई आवश्यक बात नहीं है। फिर भी अब इसमें हुड्डा जो धर्मेंद्र हुड्डा हैं धर्मेंद्र जी का मामला क्या आता है कि वो बात कर रहे हैं स्टेप अप जी वालों से कि भाई वो कुछ जो मैं यहां पे आज जो भाव प्रस्तुत कर रहा हूं लगभग लगभग उसी के इर्द-गिर्द धर्मेंद्र जी भी वहां पर भाव प्रस्तुत कर रहे हैं। भाषा का अंतर है और शब्दों का अभाव है उनके पास। उनकी गति उतनी नहीं है शास्त्रों में या भाषा में तो उनके पास शब्दों का अभाव है तो वह अपनी बात को ठीक से स्टेप अप जी के सामने रख नहीं पा रहे मगर बात उनकी भी यही है कि भाई कुल मिलाकर के तुम इस फर्जी बाबा का साथ क्यों दे रहे हो पाखंडी बाबा का साथ क्यों दे रहे हो तो स्टेप अप जी वहां पर यह कह रहे हैं अच्छा एक चीज इन्होंने ऐसी कही है वहां पर यह इनका कहना यह है कि भाई शुक्राईनाथ जैसे लोग शुक्राईनाथ जी जैसे लोग अगर विरोध करें तब तो समझ में भी आता है तुम क्यों कर रहे हो? मतलब कि अगर शंकराचार्य या कोई आचार्य जो कि शास्त्रों को पढ़े हैं और वह बता रहे हैं कि व्यक्ति गलत है तो उनके कहने के अनुसार यदि सामान्य वर्ग उस उस पर उसका अनुकरण करते हुए उस गलत का विरोध करता है तो उसको नहीं करना चाहिए।

00:06:18:19 यह इनका कहने का अर्थ है वहां पर। तो सुक्राईनाथ जी के लिए वह कह रहे हैं कि वह अगर करें तो ठीक भी है। भाई तुम किस अधिकार से कर रहे हो? भाई जब जब व्यक्ति को अधर्म की ब आएगी ना पाखंड की ब आएगी तबतब वो अपनेप स्तर पर विरोध करेगा। वो बात अलग है कि धर्मेंद्र हुड्डा की उसमें गति नहीं है तो वो तुमको जवाब नहीं दे पा रहा है। तुम जो सवाल पूछ रहे हो पाखंड क्या होता है? हां और बाबा रामपाल किस-किस प्रकार से धर्म को क्षति पहुंचा रहा है। यह सब बातें वह तुमको उतना उपयुक्त तरीके से उत्तर नहीं दे पा रहे हैं। तो तुम खेल रहे हो रिकॉर्डिंग चालू करके। अच्छा एक बात और है जब ये करके आ गए हो शुक्राईनाथ जी का जिस दिन इंटरव्यू ले रहे हैं स्टेप अप जे वाले। उस दिन भी मेरी इनसे बात हुई है तो यह उस समय शायद इंटरव्यू लेने से जस्ट 5 मिनट पहले की बात होगी। मेरा फोन गया होगा। इन्होंने कहा मैं अभी बात करता हूं आपसे और इनके पास मेरा नंबर सेव था। यह बात भी रिकॉर्डेड है। तो इन्होंने कहा मैं अभी बात करता हूं आपसे और मैं इस समय शुक्राईनाथ जी के पास बैठा हुआ हूं और ऐसा-सा शुक्राईनाथ जी से भी मैंने शायद बात की फोन पर उस दिन तो उन्होंने कहा शुक्राईनाथ जी से आप बात कर लो। तो मैंने उनसे बात की तो उन्होंने कहा हां आपकी मतलब वो जो एक औपचारिक अभिवादन होता है वो हुआ और उसके बाद वो फोन कट हो गया। उसके बाद से अब तक मैंने कई बार

00:07:34:12 अह यह स्टेप अप जी को फोन में लाया पर यह फोन से गायब हैं। अब कारण कुछ भी दे सकते हैं भाई कि बिजी हैं, व्यस्त हैं जो भी हैं। परंतु हम तो अपना कर्म करेंगे ना यथावत जो हम कर सकते हैं। कर्मन्यवादी कारस्ते मा फले सुदा है ना आप वहां धर्मेंद्र की धर्मेंद्र जी का आप मजाक उड़ा रहे हो बैठकर के क्योंकि वह आपको पाखंड का अर्थ नहीं बता पा रहे। वह आपको स्पष्ट रूप से यह नहीं बता पा रहे कि बाबा रामपाल बाबा रामपाल की ढोल में पोल क्या-क्या है। है ना? उनके पास शब्द नहीं है। तो अब सबसे बड़ी बात यह है कि यह प्रश्न क्यों आया पत्रकारिता या चाटुकारिता? इसका एक बहुत आधारभूत सवाल तो यह है। यह जो धर्मेंद्र जी की बात है ना जो मैं कहना चाहता था वह यही बात है कि जब सही तरीके से स्ट्रक्चरल वे में चीजों को ले नहीं चला जाता है तो यह दृश्य देखने पड़ जाते हैं। धर्मेंद्र हुड्डा जी को पहले मैंने एक वीडियो बना करके या इस चीज से अवगत कराया था। आप आर्य समाज की बातों को लेकर के आगे मत चलो। और कुछ-कुछ आर्य समाज की भावनाओं से प्रेरित बात भी एक दो बातें आज जब मैंने वो रिकॉर्डिंग सुनी तो उसमें अपना पक्ष रखते समय धर्मेंद्र हुड्डा जो है वो आर्य समाज की भावनाओं को परोस रहे हैं और परोसते हुए यह कह रहे हैं कि

00:08:49:15 भाई देखो कुछ कमियां है मगर हमें ऐसे कहना नहीं चाहिए यह कहने का प्रयास कर रहे हैं। है ना? देखो सर्वप्रथम तो सम्मान पूर्वक तरीके से धर्मेंद्र जी को मैं एक बात कहूंगा जो धर्म होता है ना वह मैथमेटिक्स की तरह होता है। मैथ का सवाल उसमें पॉइंट समथिंग समथिंग का भी इधर-उधर नहीं होता है। उसको सनातन कहते हैं। सनातन का अर्थ पहले आप समझो क्योंकि आप धर्म की रक्षा करने के लिए निकले हो। तो इसलिए आपको यह जानकारी होनी चाहिए। सनातन का अर्थ है जो किसी भी देश काल परिस्थिति में ना बदले जिसका ना आदि है ना अंत जिसकी कभी शुरुआत नहीं हुई उसको सनातन कहते हैं। अगर उसके स्वरूप में बदलाव आ रहा है परिवर्तन आ रहा है वो सनातन नहीं है। और आप सनातन धर्म की रक्षा करने निकले हो तो आप यह मत कहो कि यहां पर यह कमी है, वहां पर वो कमी है। आप गुरुओं के पास जाओ, आचार्यों के पास जाओ और उनका समाधान प्राप्त करो, अध्ययन करो और उतनी ही बात बारे में बात करो जितनी जानकारी। यह मेरी यह मेरा आपसे निवेदन है धर्मेंद्र हुड्डा जी ठीक है तो यह कह देना कि नहीं नहीं कमियां तो हैं पर उनको ऐसे बोलना नहीं चाहिए तो पवन दास वाली भाषा हो गई आर्य समाज वाली भाषा हो गई मूर्ति पूजा का विरोधी आर्य समाज ही भी है और आप

00:10:04:21 आज नहीं तो कल ठीक से जरा एक बात अच्छे से अवलोकन कर लेना ये रामपाल जो भाषा बोल रहा है ना उसके मूल में आर्य समाज बैठा है ये आर्य समाज से ही निकल के आ रही है चीजें जिसको यह और सरगर्मी के साथ बना रहा है। मगर साथ की साथ यहां पर मैं आर्य समाज का पक्ष भी लेता हुआ दिखाई दूंगा आप लोगों को। किस मामले में? आर्य समाज और रामपाल में अंतर क्या है? अंतर यह है आर्य समाज और रामपाल में कि आर्य समाज जो पुराणों को लेकर के बात करता है वो यह कहता है पुराण नकली हैं। क्योंकि इस इस तरह की बातें कृष्ण पर लागू नहीं हो सकती। इस इस तरह की बातें राम पर लागू नहीं हो सकती। पुराणों से निकल के जो बातें आ रही हैं या अन्य स्मृति ग्रंथों से निकल के जो बातें आ रही जो आर्य समाज को समझ में नहीं आ रही क्योंकि समर्थवान गुरुओं की शरण में जाकर उन्होंने अध्ययन नहीं किया। अपने मनमुखी व्याख्यान देने लगे। ठीक है? मगर उसके बाद यदि उसको कुछ कमी लग रही है तो उन कमियों को वह यथार्थ के रूप में जोड़ नहीं रहा है। सनातन धर्म के मान जो प्रतीक चिन्ह है उनसे ना वो अलग कर रहा है। वो पुराणों पे अविश्वास जताते हुए ये कहानियां बता रहा है क्योंकि पुराणों में ये कहानियां है या स्मृति ग्रंथों में ये कहानियां है या और ऐसे धर्म शास्त्रों में ये कहानियां तो वो सब प्रक्षिप्त है। वह

00:11:19:25 यह कहता है और रामपाल क्या कहता है कि रामपाल हमारे मन में कृष्ण और राम के प्रति बुरी भावना को जन्म देने के लिए शिव के मन शिव के लिए बुरी भावना को जन्म देने के लिए पुराणों के उसी गलत अर्थ को लेता है जिस गलत अर्थ को आर्य समाज ने लिया आर्य समाज ने पुराण को अलग हटा दिया क्योंकि उसको अर्थ समझ में नहीं आया और इसने जिस जो अर्थ आर्य समाज ने लिया इसने उस अर्थ को लेते हुए पुराणों के आधार पर श्री कृष्ण और शिव जी और राम जी इत्यादि जो हमारे सनातन मान बिंदु है उनका दुश्मन बना दिया सनातन समाज को दुश्मन बना रहा है बना दिया तो बना बना तो क्या ही पाएगा तो यह अंतर आप लोग आर्य समाज में और रामपाल में सदैव ध्यान रखो आर्य समाज रामपाल जैसा नहीं है उसको जहां पर सनातन धर्म की क्षति होती हुई दिखाई दी उसकी अपनी अल्प बुद्धि के अनुसार उसने उस उस हिस्से को काट दिया कि भाई पुराण को मैं मानता ही नहीं हूं और इसने जहां पर जिस हिस्से के द्वारा क्षति होता दिखाई किया उसको और पुष्ट तरीके से लेकर के उस पर विश्वास जताया। देखो देखो यहां तो यह हो रहा है इसलिए कृष्ण को मत मानो। यहां तो यह हो रहा है इसलिए शिव को मत मानो। यह अंतर है आर्य समाज और रामपाल में। आर्य समाज ने कभी यह नहीं कहा कि वेद पर विश्वास मत करो। वेद के अलावा

00:12:34:28 कोई और ग्रंथ है। अंतिम प्रमाण आर्य समाज का वेद है। वो बात अलग है कि उसको जब कोई अर्थ समझ में नहीं आया या कुछ ऐसी चीज आई तो उसने उस हिस्से को वेद का अंग माना ही नहीं। यह बात है। पर इसने सनातन धर्म के प्रति घृणा फैलाने के लिए रामपाल ने वेदों के प्रति वैदिक धर्म के प्रति घृणा फैलाने के लिए इसने वेद को मानने का दिखावा तो किया मगर वेद वेद के ऐसे पार्ट जो कि उनके लिए संदिग्ध थे। इसने उनको कहा कि ये देखो ये बिल्कुल सच्चे पार्ट है और इससे अर्थ निकलता है कि सनातन धर्म को छोड़ दो। सनातन धर्म को छोड़ने का अर्थ है कि मैं बनाऊंगा आदि सनातन। मतलब जिसका कोई शुरुआत नहीं होती मैं उसकी शुरुआत लिखूंगा। आदि सनातन बनाऊंगा ढम डम ढोल है ना और उसके बाद क्या है कि जिसकी कोई शुरुआत नहीं होती मैं उसकी मैं उसकी शुरुआत लिखूंगा और वेदों को छोड़ दो। कबीर पे आ जाओ। यह है आदि सनातन। यह है हिंदुत्व। वेदों को छोड़ दो। कबीर पे आ जाओ। कबीर के साथ-साथ अल्लाह को ले लो और जीसस को ले लो। और ऐसे पाखंडी को जब कोई पाखंडी कह रहा है या तुम्हारा विरोध कर रहा है उसका पक्ष उसके पक्षपक्ष उसके पक्ष पक्षकार बने घूम

00:13:50:00 रहे हो तुम एक बिकाऊ पत्रकार जैसे दिख रहे हो उस भूमिका में और जब कोई इस तुम्हारी इस गतिविधि का विरोध कर रहा है तो तुम वहां पे पूछ रहे हो पाखंड होता क्या है जैसे तुम तो दो साल के बबुआ हो तुम्हें तो कुछ पता ही नहीं है ना तुम्हें तो कुछ ढोल में पोल पता ही नहीं है फिर तो ऐसा क्यों ना माना जाए कि जो अन्य जो रामपालियों को प्रसाद मिलता है वो तुम्हें भी मिला। हां। और क्या माना जाए इसमें? जब तुम अपने कर्तव्य को भूल ही जाओगे जो तुमने बीड़ा उठाया है कि मैं पत्रकारिता करूंगा। मैं समाज को सच्चाई दिखाऊंगा तो ये सब प्रश्न तुमसे पूछे जाएंगे ना। तुम प्रश्न पूछो या ना पूछो जिनकी तुम चाटुकारिता करने का प्रयास करते दिख रहे हो। प्रतीत तो ऐसा ही हो रहा है। तुम प्रश्न पूछो या ना पूछो। मगर हम तो तुमसे प्रश्न पूछेंगे ना। अब देना जवाब। कोई सनातनी मिला नहीं ना तुम्हें मनुवादी कोई मिला नहीं ठीकठाक जो सुक्राईनाथ जी उन्होंने भी थोड़ा सामंजस्य तरीके से जो है थोड़ा एक उसमें

00:14:52:04 जो एक सहजता होते सहज भाव में उन्होंने अपनी बातें रख दी तुमको कोई मिला ही नहीं कट्टर व्यक्ति जिसके कारण तुम ये सब ढोल ढपली बनाए घूम रहे हो उधर से उधर अब नहीं घूमोगे तो सबसे पहली बात है यह धर्मेंद्र जी का हो गया ना थोड़ा सा आप ध्यान रखिए कि आर्य समाज की बातों को लेकर के आप सनातन धर्म की रक्षा नहीं कर पाएंगे। खासतौर पर रामपाल के विरुद्ध तो खड़े नहीं हो पाएंगे। ठीक है? इसलिए समर्थवान गुरुओं से सुनिए कि पुराणों जो पुराणों स्मृति ग्रंथों के आधार पर जो ये बोल रहा है वो उसका क्या खंडन है? एक खंडन मैंने पिछले यह धर्मेंद्र हुड्डा जी के लिए जो मैंने पिछली लाइव की थी उसमें मैंने एक खंडन बताया था अश्लील बात अश्लील आक्षेप जो ये लगाता है रामपाल उसको देखना

00:15:46:28 ठीक है तो अब आ जाते हैं ये स्टेप स्टेप अप जेप तो यह व्यक्ति क्या कर रहा है यह व्यक्ति दिखाई दे रहे हैं वहां रामपाल के खेमे में जाकर के बढ़िया बहुत बढ़िया तरीके से इंटरव्यू ले रहे हैं फिर बाहर आकर करके कोई अगर टोक दे रहा है तो उससे पूछ रहे हैं भाई पाखंड होता क्या है? क्यों कह रहे हो पाखंडी उसको? और शुक्राईनाथ जी जैसे व्यक्ति ने उनको गंभीर प्रमाण उपलब्ध करा दिए। उसके बाद भी उसकी कोई चिंतन मनन विवेचन इत्यादि कुछ नहीं दिख रहा है। और ले दे के अपने हर नेक्स्ट वीडियो में उसका घी खरीद रहे हैं। उसके घी का प्रचार कर रहे हैं। उसके तेल का प्रचार कर रहे हैं। उसके सामग्री का प्रचार कर रहे हैं। है ना? तो यह फिर यहां जब ऐसा होता है ना तो इसको दिखाई देता है जनता को कि तुम पत्रकार दिख रहे हो यहां पर कि चाटुकार दिख रहे हो ये फिर प्रश्न उठ जाता है अब

00:16:35:20 यह बताओ सबसे पहली बात कि तुमको एन केन प्रकारन जब यह पता है कि रामपाल के विरुद्ध हाई कोर्ट में केस लगा हुआ है उत्तर प्रदेश में तुमने रामपाल से प्रश्न किया कि तुम्हारे जो लोग हैं शासन है शासन ने वहां पर एफआईआर दर्ज कराई है तुम्हारे नामदान सेंटर के ऊपर। शासन के आदेश से उसमें एसीपी की रिपोर्ट लगी है कि हम किताबों को ढूंढ रहे हैं। नामदान सेंटर पर किताबें नहीं मिली हैं। यह एसीपी की रिपोर्ट मेरे पास हैं। मैंने तुमको ये सारी चीजें बताई है। हाई कोर्ट का आर्डर बताया है। एफआईआर के बारे में बताया है। नामद सेंटर बंद होने के बारे में बताया है। किताबों के जलने के बारे में बताया है। WhatsApp के जरिए और भी बहुत सी चार चीजें भेजी हैं। इंटरनेट पर जो यह लाइव लॉ करके वेबसाइट होती है। जहां पर जो कानूनी ऑर्डर्स वगैरह निकलते हैं। वहां पर हिंदुस्तान टाइम्स पर जाने कितनी तरीके की चीजें वहां पर खबरें पड़ी हुई हैं। जो हाई जो रामपाल के ऊपर जो हत्या के केस हैं यह है वो है वो सब एक तरफ। मगर रामपाल को लेकर के जो हमारा जो हिंदुओं का जब मुख्य विरोध है एक खूनी के रूप में नहीं है पाखंडी के रूप में

00:17:50:24 वेद विरोधी के रूप में है अधर्मी के रूप में है उस अधर्म का उस अधर्म के विरुद्ध हाई कोर्ट में ठीक है उत्तर प्रदेश इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका लगी हुई है जिस पर कोर्ट ने आड़े हाथों लिया शासन को और जिस पर शासन ने एफआईआर करवाई है तुम्हारी लखनऊ में राम पाल की किताबें नहीं बेच पा रही हैं। तुमने पूछा कि तुम्हारा सेंटर वहां क्यों बंद हो गया है? तुमने पूछा कि वहां पर दोबारा किताबें कब बिकने वाली है तुम्हारी? तुमने पूछा कि तुम्हारा कोई पैरोकार हाई कोर्ट में तुम्हारी उनकी पैरवी करने क्यों नहीं जा रहा है? तुमने पूछा कि ऑफिशियली रामपाल की ओर से कौन खड़ा हुआ है जो एफआईआर हुई है उस संबंध में? तुमने पूछा तुमने पूछा कि जेलर को तलब कर लिया हाई कोर्ट ने कि भाई तुम्हारे यहां पर जिस समय रामपाल जेल में था उस समय जेल में बंद व्यक्ति के नाम से बाहर इतना बड़ा कारोबार चल रहा है तो जेलर क्या कर रहा है उस संबंध में जेलर को तलब कर लिया गया जेलर आज के टाइम में पार्टी है उस केस में उस रिट में और जैसे अन्य YouTube मेटा इत्यादि ये सब पार्टी है शासन उसमें एक पार्टी है कि भाई उसके अंडरटेिंग में यह सब कैसे हो रहा तो शासन को रामपाल क्यों नहीं बता रहा है अपनी चीजें जिससे कि शासन वो जवाब लगाए

00:19:06:02 कि हम हम लोग तो ठीक है। रामपाल तो फरार है। रामपाल को पता ही नहीं है कि उसकी चीजों पर केस चल रहा है। रामपाल को पता ही नहीं है कि उसके लोग यहां पर नाम ददान सेंटर उनका बंद हो चुका है। यह सब सवाल तुमने किए रामपाल से। इसको पत्रकारिता नहीं पत्रकारिता ना कहकर चाटुकारिता ना कहे तो क्या कहें बताओ? अब तुम उस व्यक्ति से पूछ रहे हो। उस व्यक्ति से तुम पूछ रहे हो कि पाखंड क्या होता है? धर्मेंद्र जी से तुमको पाखंड का अर्थ पता है? तुम खुद बताओ। अभी तक के टाइम पे इस समय तक मैं लिख के दे सकता हूं कि स्टेप अप जे को पाखंड का अर्थ ही नहीं पता है। पाखंड का अर्थ सुनो। पा का मतलब है वेद। खंड का मतलब है विरोध। वेद विरोधी जो होता है वह पाखंडी है। वेद का विरोधी पाखंड है। वेद का मतलब ही धर्म है। शिवराम आपटे की इनको दिखाओ। प्रमाण क्रमांक एक पाखंड का अर्थ क्या होता है? देखो पाखंडी कैसे सिद्ध होता है? शिवराम आपटे का दिखाओ इनको। ये देखो पढ़ो। त्रई धर्म

00:20:21:03 है ना? उसका खंडन करने वाला उसको पाखंडी कहते हैं। नास्तिक कहते हैं। अधर्मी कहते हैं। वेदर विरोधी नास्तिक होता है। दूसरा प्रमाण दिखाओ मनुस्मृति का। ये पढ़ो थोड़ा बहुत। ठीक है? केवल फरलोबाजी वाली पत्रकारिता मत करो। पढ़ो थोड़ा बहुत। यह देखो मनुस्मृति में क्या लिखा है। दो 9 मनुष्य वेद और स्मृतियों में कहे हुए धर्म को करता हुआ इस संसार में कीर्ति और मरकर निश्चय करके परम परमोत्तम सुख पाता है। ठीक है? वेद और स्मृति में कहा हुआ। बड़ा रखो अभी वेद को श्रुति और धर्म शास्त्र को स्मृति जानना चाहिए। धर्म शास्त्र सब हो गए। पुराण इतिहास पुराण स्मृति इत्यादि। ठीक है? और यह दोनों सब विषयों में आगे क्या कहा जा रहा है? जो द्विज नीचे 11वा 11वा श्लोक मुख्य है। जो द्विज उन दोनों धर्म के मूलों का तर्क शास्त्र के सहारे अपमान करता है। कुल मिलाकर के वेद की निंदा करता है। वह नास्तिक है। वह नास्तिक और वेद निंदक है। नास्तिक कौन है? वेद निंदक। यह है। पाखंडी का मतलब क्या है?

00:21:36:07 नास्तिक। वेद विरोधी और वेद विरोधी कौन है? नास्तिक। और यह मनुस्मृति के प्रमाणिकता पर अगर मालूम ना हो तो पता कर लेना। वाल्मीकि रामायण में लिखा हुआ है जब सुग्रीव को बाली को तीर मारा था ना प्रभु श्री राम ने। तुम तो कहते हो ना तुम तुम सबको मानते हो। राम जी को मानते तुम रामपाली तो नहीं हो ना। उसको थोड़ा ज्यादा प्रमाण देने पड़ेंगे। रामपाली होगा तो और देने पड़ेंगे प्रमाण। जो ग्रंथ वो मानता है उन्हीं से देने पड़ेंगे। मनुस्मृति को तुम्हें मानना पड़ेगा ना। वाल्मीकि रामायण में प्रभु श्री राम ने तीर मारा था बाली को। बाली ने आरोप लगाया कि तुमने मुझे गलत तरीके से मारा है। बाली ने भी वहां पर लगभग लगभग मनुस्मृति की बातें ही कही। तब जाकर प्रभु श्री राम ने एज इट इज वाल्मीकि रामायण में मनुस्मृति के दो से तीन श्लोक बोले हैं। उच्चारित किए हैं। एज इट इज उठा के वो पढ़ लेना। मनुस्मृति में जो श्लोक आठव अध्याय में दिए गए हैं वही श्लोक वहां किष्किंदा कांड में बाली की मृत्यु के समय बाली को उत्तर देते हुए प्रभु श्री राम ने बोले हैं वाल्मीकि रामायण का अध्ययन कर लेना। ठीक है? तो मनुस्मृति से हो गया वेद विरोधी। और अगला तीसरा प्रमाण भी दिखा दीजिए। तीसरा प्रमाण। इसके

00:22:51:18 बाद क्या लिखा है? तीसरे में जो ब्राह्मण ब्राह्मण आदि वर्ण स्वधर्म को छोड़कर पर धर्मों में प्रवृत्त होते हैं अथवा हीन वृत्ति का आलंबन लेते हैं वह नग्न कहलाते हैं। नग्न कहलाते हैं। आगे पढ़िए। जिस स्थान में चारों वर्णों का अत्यंत मिश्रण हो उसमें रहने से पुरुष की साधु वृत्तियों का क्षय हो जाता है। जो पुरुष ऋषि अब ये देखो देख लो यहां। यह तुम्हारे बाबा जी का इस समय तुम्हारे हो गए ना बाबा जी। तभी तो उनका प्रचार करते घूम रहे हो माइक लेकर के। तो पढ़ो यहां पत्रकारिता या चाटुकारिता कर रहे हो निश्चय करो जो पुरुष ऋषि देव पितृ भूत और अतिथि गण का पूजन किए बिना भोजन करता है उससे संभाषण करने से भी लोग नरक में पड़ते हैं। और तुम्हारा जो रामपाली है वह क्या करता है? क्या कहता है? पितृ पूजा नहीं करनी चाहिए। पितृ पूजा का तो निषेध है। पितृ पूजा अगर हम यह मान करके चले कि यही सब कुछ है। स्वतंत्र सत्ता मान करके चले तब वहां पर गीता में उसके लिए कहा गया है ऐसा ना सोचे यह नहीं कहा गया कि पितृ पूजन करना ही नहीं है श्राद्ध कर्म करना ही नहीं है ठीक है इसके आगे क्या लिखा है अतः वेदत्रय के त्याग से यानी वेद विरुद्ध हो गया मामला वेदत्रय

00:24:06:21 के त्याग से दूषित इन नग्नों के साथ वेद विरोधी कौन हो गए नास्तिक नास्तिक को यहां नंगा कहा जा रहा है नंगा शास्त्र में ये लोग बहुत यहां की बात वहां निकाल के उल्टे सीधे शब्दों का प्रयोग करते हैं ना हमारे लिए अगर मैं अपनी पे आ जाऊं तो ये लोग खून के आंसू रोने लगे। मगर मेरे को मुझे मेरे पास एक मर्यादा रूपी धर्म है ना। इसलिए ये लोग इतना नाच लेते हैं। जो नंगा नाच करते हैं ना ये सब ये युवराज और ये सचिन अभिषेक ये नंगा नाच जो दिखाते हैं इसी कारण से दिखाते हैं। ये देखो तुम्हारे बारे में क्या लिखा है। नंगे हो तुम लोग जो इन चीजों का विरोध करते हो। पितृ पूजन का श्राद्ध कर्म का श्राद्ध कर्म का विरोध करने वाला वेद विरोधी है वेदत्रय को त्याग देने वाला है और उसको नंगा कहा गया है नंगो

⬜ Not used yet · 00:24:54:14 – 00:25:11:13 (0:17)

00:24:54:14 आगे चलिए नीचे नीचे चलिए यदि इनकी दृष्टि इसके आगे नहीं है ना ठीक है इसके आगे वाला प्रमाण लाइए इसके आगे वाला यहां पर इनकी दृष्टि अगर पड़ जाए तो नहाने को कहा गया है इन नंगों की

00:25:11:13 हां इसमें क्या कहा है? इस प्रकार मैंने तुमसे पाखंडी तो संभाषण तक करने से मना किया है। बात करने से और जिसे नंगा कहा गया है। जिसे नास्तिक कहा गया जिसे वेदई का विरोध करने वाला कहा गया है। विष्णु पुराण तीसरा अंश 18वां अध्याय 48 से 51 अभी हमने पढ़ा है और अब हम पढ़ रहे हैं 96 से 102 ठीक है? उसी क्रम में आगे मुख्य बातें क्या लिखा है? इस प्रकार मैंने तुमसे पाखंडी से संभाषण करने का दोष और फिर आगे अश्वमेध यज्ञ का महत्व दिखाया गया है। इसलिए पाखंडी और पापाचार पाखंडी कौन है? पापाचारी। पाखंडी और पापाचारी से कभी वार्तालाप और स्पर्श ना करें। इसको मानते हो ना तुम? वहीं जाकर आए हो ना स्पर्श कर करके पाखंडियों के यहां। देखो अपनी चाटुकारिता है कि नहीं? तो आगे क्या है? और तुम नंगो भी सुनो जो नंगे लोग हैं। जो नंगाई करते हैं अपने वीडियोस में आजकल खैर शांत है वो वो हो गई है ना पूजा उनकी चांटों से लातों से घूंसों से हो गई है पूजा तो आजकल शांत है थोड़े पर खैर तुम्हारा वो परमानेंट निवारण तो यहां से ही होगा ना परमानेंट निवारण तो हम ही करेंगे ये तो

00:26:26:16 सतई स्तर की बातें हैं। अह तो वार्तालाप स्पर्श भी ना करें। ठीक है? जिसके घर में एक मास तक नित्य कर्मों का अनुष्ठान ना हुआ हो उसको देख लेने पर बुद्धिमान मनुष्य सूर्य का दर्शन करें। ये जिन जिनके घर में ऐसा नहीं होता उनको देख लेने से क्या दोष होता है? फिर जिन्होंने वेद त्रय का सर्वथा त्याग कर दिया है। तथा जो पाखंडियों का अन्न खाते हैं अन्न तो नहीं खाया वहां जाकर अरे प्रसाद तो नहीं लिया खीर इत्यादि का। यह मैं स्टेप अप जे वालों से पूछ रहा हूं। ऐसा तो नहीं इनका अन्न वन् तो नहीं खाया। देखो क्या लिखा है। अन्न खाया हो तो देख लेना। तो क्या होता है?

00:27:11:27 अन्न खाते हैं। वैदिक मत का विरोध करते हैं। उन पापा पापात्माओं के दर्शन आदि करने पर तो कहना ही क्या है? इन दुराचारी पाखंडियों के साथ वार्तालाप करने संपर्क रखने उठने बैठने में महापाप होता है। इसलिए इन सब बातों का त्याग करें। पाखंडी है ना विकर्मी विडाल व्रत वाले दुष्ट स्वार्थी बगुला भगत [हंसी] बगुला भक्त लोगों का वाणी से भी आदर ना करे तुम वाणी से आदर करते फिर रहे हो अरे शर्म करो जो तुम्हारी मां के बारे में इतनी अश्लीलता परोस रहा है अपनी किताबों में उसके द्वारा इजाद किए हुए जो ये युवराज जैसे लोग हैं इतनी घृणित बातें कर रहे हैं तुम्हें शर्म नहीं आ रही है उसकी उसका प्रचार करते फिर रहे हो। कहते हो अपने आप को पत्रकार। लज्जा आनी चाहिए तुम्हें अपने आप पर। कह रहे हो कि मैं तो सबको मानता हूं। क्या खाक मानते हो तुम? अंडरवियर से लेकर के जाने क्या-क्या बातें लिखी हुई है इसकी किताबों में। पता भी है। जीने की राह में पढ़ के देख लेना। शिव पार्वती के प्रसंग में क्या-क्या लिखा है इसने। तुम्हारे फुअर बाबा ने और उनहीं का आलंबन लेकर के सचिन और युवराज जैसे लोग

00:28:27:27 वीडियो बनाते हैं। ये मसलदी वो मसलदी कुछ मालूम ना तालुम ना संस्कृत का ज्ञान ना शास्त्र का ना शास्त्र का अवलोकन ना गुरु का सानिध्य खड़े हो गए और उसका उसका तुम ढिंढोरा पीट रहे हो। वाह बहुत अच्छा घी है। बहुत अच्छा घी है। बहुत अच्छा घी है। मुझको अक्सर लोग फोन करके कहते क्यों? रामपाल के पाइप नहीं दिखाई दिए तुम्हें एनाकोंडा जैसे। वैसे तो वो भी क्या है क्या नहीं है अलग बात है। मगर यदि रामपाल पाइप लगा रहा है लोगों के घर में तो उसके पास तुम लोग अपनी स्त्रियों को सोने भेज दोगे क्या? विरोध नहीं करोगे अगर वो मंगाएगा उनको तो?

00:29:12:26 पाइप का विरोध हो रहा है क्या ये रामपाल के? रामपाल के द्वारा फैलाए गए वैचारिक जहर का विरोध हो रहा है। वैचारिक जहर रामपाल चाहे घी बेचे बहुत अच्छी क्वालिटी का सस्ते दामों में चाहे लोगों के घर में सिलेंडर लगा दे चाहे सिलेंडर खोल के आग लगा दे। बात यहां उसकी नहीं हो रही है। बात यहां हो रही है वैचारिक जहर की। उसका विरोध हो रहा है कि रामपाल ये बेच रहे हैं। वो बेच रहे हैं। उसके वहां जाकर के दिखा रहे हो। यहां का दृश्य क्यों नहीं दिखा रहे? रामपाल का सेंटर क्यों बंद है? किताबों किताबों के बारे में बता नहीं पा रहे हैं। तुमने पूछा रामपाल से तुम्हारी किताबें कहां छपती है? पुलिस ढूंढ रही है रामपाल की किताबों को। पूछ पाओगे? दिखा पाओगे वो कारखाना रामपाल का? जैसे घी दिखाया, तेल दिखाया है। किताबें कहां छप रही? दिखाओ कारखाना। बात करते हैं पत्रकारिता की।

00:30:15:06 हां विष्णु पुराण वो पूरा नहीं हुआ वो लगाइए जरा 3 18 96 से 102 क्या लिखा है इन पाखंडी दुराचारी अति पापियों का संसर्ग दूर से ही त्यागने योग्य है इसलिए इनका सर्वदा त्याग करें और नीचे आइए यह

⬜ Not used yet · 00:30:37:03 – 00:31:30:16 (0:53)

00:30:37:03 तो मैं एक जगह से बता रहा हूं अरे जो हिंदू है ना मेरे समर्थक हैं। मैं तुम लोगों को कह रहा हूं कब तक मेरी बैसाखी पकड़ करके चलोगे। केवल चैट जीपीटी में बोलो कि वेद विरोधी को कहां-कहां क्या-क्या कहा गया है? पाखंडी कहां क्या कहा गया है? सब आ जाएगा तुम्हारे सामने। शिव जी को शिव पुराण में क्या-क्या कहा गया है। भगवान है कि नहीं कहा गया है। सब आ जाएगा तुम्हारे सामने। पर मेहनत कौन करे? बैसाखी के भरोसे चलना है ना। खुद कभी कुछ नहीं करना है।

00:31:19:03 बगल वाले रामपाली के यहां पोस्टर लगा सकते हो। लगाए एक पोस्टर नहीं लगाया होगा। लगेगा। अभी गली-गली में लगेगा।

00:31:30:16 रामपाल को नहीं। अब रामपालियों को पकड़ा जाएगा। तो विष्णु पुराण 3 18 48 51 यहां तक आपने देख लिया पाखंडी का अर्थ है नास्तिक पाखंडी का अर्थ है वेद विरोधी नंगा पाखंडी का अर्थ है ऐसा व्यक्ति जिसको देखना नहीं चाहिए बात नहीं करनी चाहिए स्पर्श नहीं करना चाहिए ठीक है ये सब पाखंडी के लिए कहा गया है और पाखंडी होने का एक प्रमाण हम लोग इसी जो हमने टेक्स्ट पढ़ा है अभी उसी में से दे दिया विष्णु पुराण कि वहां पर व्रत ना रखने वाले को व्रत को वेद का अंग माना गया है। आगे हम प्रमाण दे देंगे। व्रत को वेद का अंग माना गया है और वेद की निंदा हो रही है व्रत की निंदा करने में।

⬜ Not used yet · 00:32:16:24 – 00:33:13:13 (0:57)

00:32:16:24 इसने पत्रकारों से कहा था ना पत्रकारों के साथ शास्त्रार्थ हो गया। भाई पत्रकारों ने शास्त्रार्थ ले लिया। पता नहीं कहां से पत्रकारों ने कौन सा गुरुगम में ज्ञान लिया था। जिनके साथ इसने शास्त्रार्थ किया था जेलकट्टू ने। और बताते फिर रहे हो लोगों को कि अरे उनकी तो अगर वह बाहर कैसे आ गए कौन से उसमें उनको निर्दोष मान लिया गया है भाई हां बुढ़ापा देखते हुए 10 साल की जेल देखते हुए जो ये बाहर पाइप बांटे इनको देखते हुए यह कहते हुए कि सभा नहीं लगा सकते छोड़ा गया है इसको बाइज्जत बरी नहीं कहते जो डंका पीटते फिरते हो बरी हो गए बरी हो गए क्लीन चिट मिल गई इसको रहमो कर्म पे छोड़ना कहते हैं रहमो करम पे है तुम्हारा बाबा कोर्ट के उसको रहम आ गया तुम्हारे बाबा पे तो छोड़ा है उसी केस में 27 लोग बेल पे बाहर हैं इसलिए छोड़ा है

00:33:12:16 समझे

00:33:13:13 चलो अब आगे चलते हैं यह तो हमने दिखा दिया इसके साथ ही साथ लिंग पुराण खुद देख लेना 7821 और अग्नि पुराण 164 इसमें भी आपको मिल जाएगा अब यहां तक हमने यह समझ लिया पाखंडी किसे कहते हैं और विष्णु पुराण में वेद विरोधी किसको कहा गया है? पाखंडी वेद विरोधी को कहते हैं, नास्तिक को कहते हैं। यह सब हमने समझ लिया। अब रामपाल पाखंडी कैसे है? रामपाल पाखंडी कैसे है? यानी रामपाल वेद विरोधी कैसे है? तो एक तो हमने यही जान लिया व्रत का विरोध करने वाला पाखंडी हो गया, वेद विरोधी हो गया, नास्तिक हो गया, नंगा हो गया शास्त्र के हिसाब से। आगे जो है वेद की घोषणा है नान्या पंतः विद्यते क्या है? नान्या पंथ विद्यते वेद घोषणा कर रहे हैं। जीवन मरण के चक्र से छूटने का जो वेद बता रहा है उससे भिन्न कोई और मार्ग नहीं है। 31 18 यजुर्वेद ये देख लो वेद की घोषणा। नान्या पंथा विद्यते ये वेद की घोषणा है। स्पष्ट क्या घोषणा कर रहे हैं? वेद से भिन्न जीवन मरण से मुक्ति दिलाने वाला और

00:34:28:24 कोई मार्ग नहीं है। स्पष्ट घोषणा है वेद भगवान की और कहां पर है? यही घोषणा श्वेता शत्रुपनिषद तीन आठ में है। श्वेता शत्रुपनिषद दिखाइए इनको यह देखिए नान्या पंथा विद्यते और दिखाइए। इसके बाद वाला छ पांच श्वेता शत्रपनिषद नान्या पंथा विद्यते इससे भिन्न मोक्ष प्राप्ति का कोई और मार्ग नहीं है। यह वेद की घोषणा है। ठीक है? अब इनको जरा अच्छा एक घोषणा और दिखा बोल देता हूं। वो फोटो नहीं है। 11 5 16 ब्रह्मचारी ही आचार्य बनता है। कबीरचारी नहीं परम ब्रह्मचारी नहीं ब्रह्मचारी क्योंकि ब्रह्म ही हमारे यहां परम तत्व है। उसी को कहीं-कहीं जब उसके कई रूप होते हैं कार्य कारण भेद से तो उसी में परम और पूर्ण इत्यादि ये जो विशेषण है वो लगाने पड़ते हैं। कार्य कारण भेद से जब वो विभिन्न रूपों में प्रकट होता है। मगर परम तत्व के रूप में ब्रह्म की ही बात हुई है। अथा तो ब्रह्म जिज्ञासा है। अथा तो कबीर जिज्ञासा नहीं है। ब्रह्मसूत्र है हमारे यहां।

00:35:44:00 तुम तो पढ़े लिखे हो ना। स्टेप जे वाले तुम तो इनकी तरह फुअर नहीं हो। हां? ब्रह्मसूत्र लिखा है हमारे यहां। कबीर सूत्र लिखा है। जिस पर जिस पर भाष हुआ है सभी आचार्यों का। कुछ मालूम ना तालूम चले हैं प्रचारक बनने बनने स्टार प्रचारक बनेंगे अब चैनल दौड़ रहा होगा शायद इसलिए इसीलिए हो रहा होगा भाई बढ़िया अभी एकदम से गेम टर्न कर दूंगा और नई पब्लिसिटी आएगी बिल्कुल ह मार जाएगा चैनल इत्यादि यही सब होगा माइंड में व्यवसायिक चीजें भले ही धर्म को कोई भी क्षति पहुंचे उससे कोई मतलब नहीं है सनातन धर्म है ना तब तक सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में माता बहन और पत्नी में अंतर कर रहा है मनुष्य जैसे जैसे तुम क्षति पहुंचाओगे, जैसे जैसे लोग इसमें अनास्थावान होंगे, सनातन धर्म में, वैसे वैसे पाप को तुम न्योता दोगे। समझ रहे हो ना? आज तुम्हारे घर के बाहर आग नहीं लगी हुई है। तब तुम चैन से बैठे हुए हो और इंतजार कर रहे हो कि मेरे घर पर कब आग लगेगी? तब मैं बोलूंगा। बिजली में बिजली के झूले में बैठे बैठा हुआ वह व्यक्ति जो नीचे आते टाइम आंखें बंद करता है वह हो तुम जो सोच रहे हो कि सनातन धर्म के साथ खिलवाड़

00:36:59:18 करके और मैं अपना चैनल चला के अपना जीवन सुखी बना लूंगा कभी नहीं होगा विभिन्न प्रकार के श्राप लगेंगे तुमको विभिन्न प्रकार के आचार्यों से लेकर भटको तक के तुम्हें श्राप लगेंगे जो तुम्हें फैला रहे हो रायता यदि तुम्हारी जानकारी में है तो अभी के अभी इससे पथक हो जाओ। जीवन का भला चाहते हो तो और आत्मवलोकन करो। क्या कर रहा हूं मैं? बने पत्रकार फिर रहे हैं। लो भैया आ गए प्रमाण। तो वेद की घोषणा क्या है? वेद की घोषणा क्या है? नान्य पंथा विद्यते वेद के अलावा कोई भी और मार्ग नहीं है मुक्ति का। ठीक है? ब्रह्मचारी ही आचार्य बनता है। 11 पांच 16 अथर्ववेद अब इनको दिखाओ भैया इनके बाबा जी क्या कह रहे हैं वेद के बारे में? हम क्या कह रहे हैं वेद के बारे में? दिखाओ। वेदों व गीता में ज्ञान तो श्रेष्ठ है। परंतु भक्ति की साधना केवल काल ब्रह्म की प्राप्ति है। जिससे विकार रहित नहीं हो सकता। उस परमात्मा को प्राप्त करने योग्य मंत्र के जाप से ही हो सकता है।

00:38:14:24 वह किसी शास्त्र में नहीं है। वेद में मार्ग नहीं है। इसको कहते हैं पाखंड। वेद की इस बात का खंडन हो रहा है। कि वेद के अलावा कोई मार्ग नहीं है। वेद से भिन्न कोई मार्ग नहीं है। इस बात का खंडन है तुम्हारे बाबा की प्रत्येक किताब में। यह है पाखंड। समझ लेना। पाखंड की बात हो रही थी ना पाखंड कहते किसे हैं? तुम पूछ रहे थे धर्मेंद्र जी से तुमको खुद मालूम नहीं है पाखंड कहते किसे हैं पाखंड कहते हैं वेद विरोध को वेद विरोधी होता है नास्तिक नास्तिक होता है नंगा तो यह देखो नंगपन क्या लिखा है कि वेद और गीता से मुक्ति नहीं होगी और दिखा दो इसमें नीचे क्या लिखा है दिखाओ वेद को बोलने वाला वेद को बोलने वाला अज्ञानी भी है इसी यही कहीं आपको मिल जाएगा ठीक है अच्छा यह ब्रह्म साधना की घटिया गति है जिसका प्रमाण स्वयं ब्रह्म भगवान देते हैं। यहां पर ब्रह्म जो है भगवान हो गया। दूसरे शास्त्र में ब्रह्म को लिख रहे हैं काल और शैतान राक्षस जो आत्माओं को खाता है।

00:39:25:03 तो ब्रह्म साधना की घटिया गति ये तुम्हारी चीजों को जिनका तुम दिखा रहे हो ना कि मैं कलावा बांधता हूं। मैं तो सबको मानता हूं। यह घटिया कहा जा रहा है। वेदों को, वेदों के वक्ता को यहां घटिया कहा जा रहा है। आ रही है शर्म थोड़ी बहुत? आ रही है शर्म थोड़ी बहुत। चलो और नीचे दिखाओ इनको। और नीचे दिखाओ क्या कहा जा रहा है? वेदों को बोलने वाले के लिए। मेरी भक्ति वेदों व गीता में वर्णित विधि से करता है। वह मेरे भाव में भावित होता है तथा मेरे जैसे गुणों वाला अर्थात काल का दूसरा रूप हो जाता है। यह यानी काल की घटिया गति को प्राप्त करता है। जो घटिया गति पीछे हमने दिखा दी और अगला प्रमाण दिखाओ। वेद का विरोध देखो। पाखंड देखो रामपाल का। इसकी हेडलाइन पढ़ो चैप्टर की। क्या लिखा है? वेदों में वर्णित साधना से साधना विधि से विकार नहीं मरते। यानी वेदों में मोक्ष का मार्ग नहीं है। मुक्ति का मार्ग नहीं है। और भरभर के ना जाने कितनी बार ये लाइन चैप्टर की हेडलाइन है। रामपाल की ये भ्रष्ट किताबों में जो इललीगल रूप से छपती है छुप करके और तुम चले हो उसको बताने साधु। हां और दिखाओ भाई अगला

00:40:40:07 प्रमाण। चारों वेदों 18 पुराणों गीता जी छह शास्त्रों में केवल ब्रह्म काल जो कि इसके अनुसार शैतान है की उपासना की जानकारी है यानी कि वेदों की इस बात का खंडन है इसके इसके यहां पर और तो और इसके रेफरेंस अलग से डालेंगे इस वीडियो में। यह जो वेदों को बोलने वाला है ना यह अपना उल्लू सीधा करने के लिए झूठ बोलता है। वेदों को बोलने वाला है ना जिसको भगवान कह रहा है वो जो है अज्ञानी है। वो कुछ जानता नहीं है। यह है तुम्हारे रामपाल का पाखंड। ठीक है? झूठ बोलता है और जो इसने यहां पर पिछले पेज पर भगवान कह दिया था ना भगवान की व्याख्या को भी मैं दे दूंगा। छठवे अध्याय में लिखी हुई है विष्णु पुराण के। जो पूर्ण होता है ना जिसको कोई अभाव नहीं होता वह भगवान होता है। यह दिखावे के लिए यहां पर भगवान कहता है। दूसरी जगह शैतान कहता है। प्राणियों को खाने वाला कहता है। हैं और तुम इसके इसकी पत्रकारिता कर रहे हो। हमें वो चाटुकारिता क्यों नहीं दिखाई देगी? ये देखो 97 नंबर पष्ठ है क्या? इसके आगे 97 नंबर पष्ठ है। हां। वेदों व गीता में वेदों व गीता

00:41:55:13 जी में वर्णित साधना से पाप विनाश नहीं होते। इसको कहते हैं पाखंड। पाखंडी हर वो व्यक्ति है जो वेदों को वेदों के प्रति अनास्था कर रखता है। शास्त्र के हिसाब से यदि तुम हिंदू हो तो बाकी अगर हिंदू नहीं हो तो हम तुम्हें हिंदू बना देंगे। कभी मिलना। एक भी कमी हमारे सनातन धर्म में दिखा देना। एक भी अभी किसी ठीक-ठाक व्यक्ति से सामना नहीं हुआ है। ठीक है? इसीलिए ऐसा है। तो क्या है? वेदों व गीता जी में वर्णित साधना से पाप विनाश नहीं होते। वेद क्या कह रहे हैं? और कोई मार्ग नहीं है। यह क्या कह रहा है? जेल कट्टू तुम्हारा क्या कह रहा है? वेदों और गीता में वर्णित साधना से पाप विनाश नहीं होते। मुक्ति नहीं होती है। ठीक है? वेदों और गीता का ज्ञान अधूरा है। क्या है? अधूरा। यह कहा है क्या वेद ने कहीं पे? अधूरा ज्ञान है। पूरा नहीं है। उससे मोक्ष नहीं मिलेगा। ठीक है? इसके बाद अगला अब ये सब आ गया। 11 5 16 से हमने बता दिया। वेद अभी ये हटा दीजिए। अभी हटा दीजिए।

00:43:11:13 वेद बार-बार बात कर रहे हैं। अभी स्क्रीन बड़ी कर दीजिए। वेद बार-बार बात कर रहे हैं। ब्रह्मचारी के पास कैसे जाया जाए? ब्रह्मचारी बनना है। ब्रह्मचारी की पूरे उसमें बात हो रही है। गीता में भी ब्रह्मचारी को बताया जा रहा है। और यह कह रहा है ब्रह्म के पास मत जाओ। इसने ब्रह्म हर शब्द का एक गलत अर्थ निकाल रखा है। सनातन के आगे आदि लगा के दूसरा सनातन बनाएगा। और ब्रह्म के आगे परम पूर्ण इत्यादि लगाकर दूसरे ब्रह्म बनाएगा। तो वेद जो है ब्रह्मचर ब्रह्मचारी के पास जाने की बात करता है। यानी ब्रह्म के पास वेद का ब्रह्म वह राक्षस नहीं है जो रामपाल के अनुसार राक्षस और प्राणियों को खाता है। प्राणियों को खाने वाला गीता जी में जो दृश्य है वो भगवान का जो संहार वाला रूप है वो दिखाने के लिए वो रूप दिखाया गया है। संहार मतलब जब प्रलय होती है क्या प्रलय नहीं है। इसके टट्टू तो बोलते हैं कि प्रलय होगी 1000 साल के बाद तब तक का ठेका रामपाल ने ले रखा है। हैं प्रलय होती है कि नहीं होती है? तो प्रलय होगी तो उसमें लोग खत्म होंगे कि जीवित रहेंगे। कैसी प्रलय होगी? तो प्रलय करने की शक्ति को धारण करने वाले के रूप

00:44:26:19 में वो व्याख्या है। जो रूप वो दिखाया गया विराट स्वरूप। खैर बैक टू द पॉइंट। कुल मिलाकर के जो भी लिखा हो बात यह है कि तुमको यह विश्वास नहीं है कि वेद से मुक्ति मिलेगी। रामपाल को यह विश्वास नहीं है। गीता से मुक्ति मिलेगी यह भी विश्वास नहीं। उसको छोड़कर के कबीर सागर पे जाना पड़ेगा तभी मुक्ति मिलेगी। यह है रामपाल का पाखंड। और सुनो रामपाल कबीर सागर को सूक्ष्म वेद कहता है। छमम छक्षम वेद। मैं छममछम कहता हूं और वो सूक्ष्म कहता है रामपाल वाला जो वाकई में कबीर सागर है कबीर विजय के उसका सम्मान है मगर रामपाल ने अपना तोड़ मरोड़ के जो प्रस्तुत किया दूसरे रूप में वो छममछम सागर है छममछम वेद तो ये जो सूक्ष्म वेद जो कहता है ये गवार व्यक्ति कहता है दूसरी ओर कि गीता वेदों का सार है इसने अपनी इंटरव्यू में क्या कहा कि हम पुराणों को नहीं मानते हैं हम पुराणों को नहीं मानते हम पुराणों को बाद में मानते पहले वेद और वेद का सार गीता और कई जगह लिखा हुआ है इसी की किताबों में कि गीता जो है वेद का सार है और इसके जो टट्टू है वो भी बोला करते हैं ये सब अब जब गीता वेद का वेद का सार

00:45:41:22 है और इसका जो कबीर सागर है वो पंचम वेद है या सूक्ष्म वेद है छमछम वेद है वेद तो है ना तो उसका भी तो सार गीता होना चाहिए या तो उसको वेद मत कहे और या फिर गीता को सार मत कह मगर दोनों जगह टांगे फसानी है ना फूल फूल और कांटे का आ जाए बनके भले ही बीच में डंडा आ जाए है ना दोनों मोटरसाइकिलों पर सवारी करनी है ना भले ही बीच में बंबू आ जाए तो ऐसे व्यक्ति की चाटुकारिता करते हुए आप दिखाई दे रहे हैं मिस्टर स्टेप अप जे उर्फ जगदीप या जगदीश जो भी हैं आप और

⬜ Not used yet · 00:46:15:03 – 01:24:24:00 (38:09)

00:46:15:03 सुनिए [खांसने की आवाज़] अब [गला साफ़ करने की आवाज़] इसने अपने जो वो इंटरव्यू दिया ना पत्र तुमने तो क्या ही बातें पूछी तुम्हारी जो बातें बकवास के अलावा और तुमने कुछ कुछ नहीं पूछा है उसमें 18 प्रश्न मैंने पूछे थे मैंने मैं उसमें कोई कमी हो तो बताएं जब सामने वाला कमी बता रहा है तो उस पर लीपापोती कर रहे हो सुन तेरी लीपापोती क्या है भाई क्या है लीपापोती तुम्हारी कि जब धर्मेंद्र हुड्डा इनको कह रहा है कि भाई वो त्यौहारों का विरोध करता है रामपाल ठीक है। अभी मैं वो जो पत्रकारों के साथ वार्ता हुई है ना जिसको शास्त्रार्थ कहते हैं अपने पेड़ पत्रकारों के साथ उनके वो तथाकथित फर्जी बाबा का जो शास्त्रार्थ हुआ है इसमें उसने करवा चौथ इत्यादि व्रत रखने का खंडन किया है और मैं बताऊंगा कि कहां पे शास्त्रों में लिखा हुआ है उसी व्रत का नाम ठीक मगर अभी के लिए जब राम ये धर्मेंद्र जी ने तुमसे कहा कि भैया त्यौहार जो है बनाने के लिए मना करता है रक्षाबंधन एक एक त्यौहार का प्रमाण दूंगा मैं तुझे तो इसने क्या लीपापोती की कि मैं तो नहीं मानता जब धर्मेंद्र हुड्डा ने ये बात कही कि भाई त्यौहार मनाने के लिए

00:47:30:04 मना करता है तो क्या कर तो क्या कहा इसने इस व्यक्ति ने वहां पर फोन पर कि वो कोई जबरदस्ती थोड़ी ना कर रहे हैं कि आप भी यही चीज मानो हम भाई बात क्या हो रही है रामपाल पाखंडी है कि नहीं बात ये नहीं हो रही है कि उसको उसको रोका जाए या उसके उसको रोका ना जाए। बात हो रही है कि वो पाखंडी है कि नहीं? तो तुमने कैसे लीपापोती की कि वो जबरदस्ती थोड़ी ना कर रहे हैं। इसीलिए कह रहा हूं ना कि कोई ठीक-ठाक व्यक्ति मिला नहीं। वहीं पकड़ लेता तुम्हारी जीभ को। उसी समय पकड़ लेता जीभ तुम्हारी। बात ये नहीं हो रही है कि रामपाल को रोकना है कि नहीं रोकना है। रामपाल जबरदस्ती कुछ कर रहा है। रामपाल ये कह रहा है कि मेरी शरण में नहीं आया तो तुमको राक्षस खाएगा। भय दिखा रहा है लोगों को झूठा। अगर तुम वेद को मानते हो तो रामपाल तुम्हारे हिसाब से नंगा है तुम्हारे हिसाब से और तुम उसकी लीपापोती कर रहे हो। जब तुमसे स्पष्ट सवाल किया धर्मेंद्र हुड्डा ने कि भाई वो कोई भी त्यौहार जो मनाते हैं हमारे भारतीय त्यौहार उनका विरोध करता है तो वो जबरदस्ती थोड़ी ना कर रहे हैं। अरे आईएस आईएस वाला तुझसे जबरदस्ती कर रहा है क्या? कि बम लगा बम लगा। तो अगर तेरे आसपास वो होगा तो तू उसकी खबर नहीं देगा भारतीय सेना

00:48:45:10 को या प्रशासन को है ना अच्छा तुम्हारे घर के बगल में अगर वैश्यालय खुल जाएगा तो तुम उसका विरोध नहीं करोगे क्योंकि वो तुमसे थोड़ी ना कह रहा है कि तुम भी यहां पार्टिसिपेट करवा कर भले ही वैश्यालय में आने जाने वाले ग्राहक तुम्हारे घर की स्त्रियों को भी वही समझने लगे जिस प्रकार की स्त्रियां वैश्यालय में मिलती है तुम विरोध नहीं करोगे या फिर उस दिन का इंतजार करोगे कि तुम्हारी बहन बेटी पत्नी मां को किसी दिन कोई वहां का ग्राहक हाथ ना पकड़ ले कि ₹50 में कि ₹100 में चल मेरे साथ उस दिन का इंतजार करोगे या वैश्व्यालय का विरोध करोगे

00:49:26:19 बकवास। ये इनके कुतर्क थे। धर्मेंद्र हुड्डा से जब बात हो रही थी। जब उसने स्पष्ट क्लियर कट क्वेश्चन किए तो इनकी लीपापोती चालू हो गई कि मैं नहीं मानता। नहीं मानते तो बोलना पाखंडी है वो। अरे भाई नहीं मानता यानी रामपाल कुछ ऐसा कर कह रहा है जो गलत है। तुमको तब तक पाखंडी का अर्थ नहीं मालूम है कि वेद विरोधी होता है। तुमको यह भी नहीं मालूम वेद में क्या कहा गया है और रामपाल की किताबों में क्या कहा गया है। मगर तुम्हें यह तो मालूम पड़ गया कि रामपाल कुछ ऐसा बोल रहा है जो गलत है। तुमने कहा ना मैं नहीं मानता तो बहुत पाखंडी है वो। नहीं बोलोगे संभता प्रसाद मिल गया है। हां इसीलिए प्रश्न उठता है कि पत्रकारिता है कि चाटुकारिता है ये आत्मवलोकन करो आत्मवलोकन। अच्छा और देखो धर्मेंद्र धर्मेंद्र जी ने स्पष्ट एक सवाल किया ऑन कॉल इस व्यक्ति से। क्या सवाल था? कि भाई वह देवी देवताओं की बुराई करता है। फिर वहां पर इसने जो है वही चीज की लीपापोती कि मैं तो नहीं मानता। मैं तो सबको मानता हूं। फिर बात ये हो रही कि तुम क्या मानते हो? क्या नहीं मानते हो? बात ये हो रही रामपाल खरा सच बोल रहा है कि नहीं बोल रहा है। रामपाल झूठ

00:50:41:20 बोल रहा है कि नहीं बोल रहा है। वो कह रहा है कि मैं जगतगुरु हूं। क्या वो जगतगुरु है। जब वो गलत बातें बोल रहा है। जब वो झूठ बोल रहा है तो वो जगतगुरु है। तो लिख लिख अपने थंबनेल में कि वो जगतगुरु नहीं है। रामपाल बनाओ उसके ऊपर वीडियो करो काउंटर क्वेश्चन उससे इस आधार पर नहीं करोगे अगर करोगे तो मुझे लगेगा कि तुमने अब तुम्हारी आत्मा जाग गई तुमने ध्यान से सोचा कि आज अगर मैंने इस वैश्यालय को अपने घर के बगल में खुलने दिया अगर अपने घर से 100 कदम दूरी पर खुलने दिया तो कल को एक वैश्यालय मेरे घर के बगल में आकर के खुल जाएगा

00:51:19:08 वही हाल है ये जो वैशालय का उदाहरण है ऐसी ही स्थिति कि हम विरोध जो रामपाल है वो जबरदस्ती थोड़ी ना कर रहा है। अच्छा उसके बाद क्या हो रहा है कि ये लीपापोती हो गई इनकी। तो जब देवी देवताओं की बुराई की बात आई तो भी कह दिया मैं नहीं मानता। अच्छा तुम्हारा जो बाबा है देवी देवताओं को ना मानने के बारे में क्या कहता है अपने उस पत्रकार वाले इंटरव्यू में कहता है कि ब्रह्मा विष्णु महेश जो है अच्छा उसने पहली लाइन क्या कही पहली लाइन कही कि भैया जो वेद और गीता के से मेल नहीं खाएगा उसका हम जो है उसको नहीं रखते हैं या फिर उन्होंने कहा पुराण पुराण तू नहीं पुराण नहीं मेन मेरे तो गीता और वो है पुराण को उसने नगण्य कह दिया सबसे पहली बात तो पुराण से ही उसकी बात कट गई। क्यों? वेद में कहां लिखा है कि ब्रह्मा विष्णु महेश का जन्म होता है। मरण होता है। नहीं लिखा। गीता में कहां लिखा है? ब्रह्मा विष्णु महेश का जन्म मरण होता है। नहीं लिखा। दोनों से

00:52:34:09 ये चीज मैच नहीं खाएगी देवी भागवत की। उसमें ब्रह्मा विष्णु महेश ने अपने कार्य कारण भेद से जो कार्य करने वाला रूप है उसमें लीलात्मक प्रकट और अप्रकट होने वाली स्थिति के लिए कहा कि हे देवी हम तुमसे ही आविर्भाव भाव को प्राप्त होते हैं। प्रकट और अप्रकट होते हैं। लीलात्मक जो प्रकटीकरण है उसके लिए वो बात कही गई। उसको इसने जन्मत्व भी मान लिया। जबकि उसी देवी भागवत में ना जाने कितनी बार इनको अविनाशी कहा गया है। सच्चिदानंद स्वरूप कहा गया है। इसको वो नहीं पकड़ेगा। भर भर के प्रमाण है भर भर के और यह जो अश्लीलता भरे आरोप लगते हैं उनके बारे में भी मैंने जो धर्मेंद्र जी के लिए जो पिछली लाइव की थी बताने के लिए कि आर समाज को लेकर के भैया तुम रामपाली से मत भिड़ो नहीं यही अश्रो होगा आज जो इसने जो किया तो भैया हमारे पास स्पष्ट सटीक जवाब है ही नहीं लिंग का अर्थ पढ़ना जब आध्यात्मिक स्तर पर बात हो रही है तो लिंग का अर्थ शिव पुराण में लिखा हुआ है जिसके बारे में जानकारी दी है जो हुड्डा जी के लिए लाइफ की थी जो उनका जो कार्यक्रम इत्यादि हो रहा था वहां हरियाणा में उससे पहले और वहां पर भग यानी स्त्री इंद्री जो होती है उसके बारे में भी जो आध्यात्मिक अर्थ है दैविक अर्थ है वो लिखा

00:53:49:13 हुआ है और वो भी शास्त्र में कहां लिखा है वो अर्थ वो उसके साथ बताया है पढ़ लेना प्रतीकात्मक सृष्टि रचना की व्याख्या है मनुष्य के आंड को तुमने ब्रह्म के आंड से जोड़ फिर ब्रह्मांड क्यों बोलते हो? अमैथुनी सृष्टि इस बारे में भी बताया है कि जिस प्रकार के आक्षेप ये लगा रहा है जो अश्लील बातें ये लोग कर रहे हैं जो सनातन धर्म के द्वारा जो आराध्य हैं हिंदू देवी देवताओं उनके संबंध में वो अमैथुनी सृष्टि है। मैथुन वहां एक्सिस्ट ही नहीं करता है। जाने कितने प्रमाण दिए हैं भरभर के वही लाइव देख लेना। अमैथुनी सृष्टि मैथुन क्रिया वहां एक्सिस्ट ही नहीं करती है। तो जब वहां पर वो दैय शक्तियों के बीच में रमण, रति, क्रिया इत्यादि की बात आ रही है तो वहां ये जो रामपाल और बबिता जैसे लोगों के बीच में जो व्यवहारिक संबंध की खबरें आती है ना उस प्रकार के संबंध सिद्ध नहीं होते हैं। वो शक्तियों के मेल की बात हो रही है। वहां पर जो शक्तियां संचालन करती हैं संसार का जिसकी प्रतीकात्मक व्याख्या है वहां पर।

00:55:02:16 खैर अब बैक टू द पॉइंट आ जाते हैं। तो भैया हमने यहां तक जान लिया कि जो पाखंडी है पाखंड का अर्थ क्या है? पाखंडी किसे कहा जाता है? वो वेद विरोधी होता है। वो नंगा होता है। व्रतों का विरोध करने वाला होता है। और रामपाल किस प्रकार से शास्त्रों के आधार पे नंगापन करते हुए दिखाई दे रहे हैं। वो कैसे? क्योंकि वह वेद घोषणा कर रहे हैं कि इसके अलावा और कोई मार्ग नहीं है। और रामपाली और रामपाल का पूरा तंत्र यह कहता है कि भैया वेद में मुक्ति का मार्ग नहीं है। उससे बाहर है। फिर वो कबीर सागर पे आता है। हालांकि कबीर सागर के लिए भी उसने लिख दिया है कि काल ने उसमें भी मिलावट की है। अंतिम प्रमाण रामपाल है। और रामपाल को भी यदि याद नहीं रहेगा कि पिछली बार मैंने क्या झूठ बोला था तो रामपाल की वही बात प्रमाण है जो उस समय वो बोल रहा है। क्योंकि पहले उसने बोल दिया हो, कुछ कर दिया हो। जैसे उसने अपने इंटरव्यू में बोला कि मैंने कभी खुद को भगवान नहीं कहा। जबकि उसने कई बार कह रखा है। अपने आप को भगवान अपनी किताब में ही कह रखा है कि मैं कबीर का अवतार हूं। ये सब कह रखा है उसने। वहां उसने झूठ बोल दिया। तो उसकी भी वही बात प्रमाण है। जिस समय उससे बात हो रही है। उस समय वो क्या बोल रहा है वो बात उसके लिए उसके द्वारा निर्गत मानी जानी चाहिए। और नहीं। पहले उसने बोल दिया उसको भूल जाओ। पहले उसने किताबों में लिख दिया उसको

00:56:17:18 भूल जाओ। इसीलिए कहते हैं सनातन वह होता है जो किसी भी देश काल परिस्थिति में ना बदले। इस बात को ध्यान रखो। झूठ की एक आदत होती है। उसको याद रखना पड़ता है। रामपाल जैसे शास्त्र चोर झूठ को याद नहीं रख पाते हैं। इसीलिए उनसे बार-बार गलतियां हो रही है। रामपाल की किताबों से कमियां क्यों निकाल पा रहा हूं? इसीलिए क्योंकि उसको लिखने वाला एक मनुष्य है और उसने झूठ बोला है। तो जो झूठ बोलेगा वो गलतियां करेगा अपने शास्त्रों में। वो कर रहा है। रामपाल की किताबों से ही रामपाल की प्रत्येक बात को काट दूंगा। समझे? अच्छा अब इसने जब पुराणों की अवमानना की है। अच्छा पहली बात तो देखो पुराण को ये मानता नहीं है। वेद गीता में लिखा नहीं है ब्रह्मा विष्णु महेश का अनिश्वरत्व और पुराण को ये मानता नहीं है मगर वहां पर अपनी बात को फिट करने के लिए पुराणों के लिए कह देता है कि भैया पुराण जो है वो पुराण में लिखा हुआ है देवी भागवत में कि वो जो है आविर्भाव त्रभाव को प्राप्त होते हैं। तो पुराण को ना मानने के संबंध में हम सूक्ष्म वेद या पंचम पुराण किसे कहा गया वह मैं दिखा देता हूं। प्रमाण दिखाइए भैया इन्हें पंचम वेद छंदोग उपनिषद में कहा गया है पुराणों को सात एक दो

00:57:36:28 इसके बाद वाला यह बड़ा करिए। यह देखिए इतिहास पुराण रूप पांचवा वेद वेदों का वेद ठीक है इतिहास पुराण रूप पांचवा वेद है पुराण को पांचवा वेद कहा गया है शास्त्रों में ये कहां लिखा है छंदोग उपनिषद सात एक दो इससे आगे वाला क्या है देखें नहीं नहीं अगला प्रमाण

00:58:11:22 अच्छा अगला प्रमाण और कुछ है अच्छा व्रत के विषय में ठीक है छोड़ दीजिए और सुन लीजिए कहां-कहां पर कहा गया है पुराणों को पुराणों की प्रामाणिकता बता दूं 7 एक चार छंदोग उपनिषद सात दो एक छंदोग उपनिषद बृहधारणिक उपनिषद दो चार 10 अथर्ववेद 11 7 24 इन सब में भरभर के पुराणों की प्रामाणिकता है जिसको यह पाखंडी कह रहा है कि जो है पुराण प्रामाणिक नहीं है ठीक है और

00:58:43:25 जब यह हमारे देवी देवताओं के लिए इतने अश्लील शब्द पेशाब इंद्रिय हैं। रामपाल कहता है अपने किताबों में कि मूर्ति पूजा वो शिवलिंग की पूजा वो पेशाब इंद्रिय है। मूत्र इंद्रिय है। ये सब लिखा है। मैं सबको मानता हूं। मैं उनकी थोड़ी ना मानता हूं। तो नहीं मानता तो भैया ये सुन के आरती उतारेगा क्या उसकी? पूछना उससे कि किस आधार पर लिखा? शिव पुराण में लिखा है। शिवलिंग की पूजा करने से मोक्ष प्राप्त होता है। विदेश्वर समिता में दवा अध्याय 36 37 श्लोक के आसपास देख लेना खोल के

00:59:26:09 अब इसने वहां अपने एक बात और कहता है क्या व्रत व्रत की बात करता है अच्छा यह जो ब्रह्मा विष्णु महेश के ईश्वरत्व के बारे में हमने प्रमाण दिए हैं पिछले लाइव में और इसमें भी साथ में बहुत सारे प्रमाण हम लगा देंगे जैसे कि भागवत में दिया गया है कि वेद किसके परायण हैं? वेद किसकी बात कर रहे हैं? तो विष्णु भगवान की बात कर रहे हैं। शिव जी ही परम ब्रह्म है। शिव के अलावा और कोई दूसरा उनसे किसी का कोई शिव से भिन्न किसी का ईश्वरत्व सिद्ध नहीं होता। और शिव जी जगतगुरु हैं। यह उनको अज्ञानी कहता है। और फिर भी तुम कहते हो कि पाखंडी नहीं है। शर्म आनी चाहिए आपको। शीशे में देख लेना सोने से पहले अपने आप को क्या कर रहे हो। छद्म प्रसिद्धि के लिए।

01:00:24:02 इन सब का ईश्वरत्व सिद्ध है शास्त्रों से और जिस प्रकार के आरोप लगा रहा है तो उनका सैद्धांतिक आधार क्या है? सैद्धांतिक खंडन शास्त्रों में कल्प वेद से कहीं पर देवी स्वरूप में परम तत्व की व्याख्या हुई है। अन्यों को उनसे प्रकट दिखाया गया है। और कल्प वेद से कहीं पर विष्णु रूप में कहीं पर शिव रूप में इस तरीके से बात की गई है। क्योंकि सृष्टि की रचना एक बार नहीं हुई है। कई बार हुई है। तो अलग-अलग कल्पों में कहीं पर किसी कल्प में दुर्गा रूप से सृष्टि के सृष्टि को उत्पन्न करने के बारे में करने वाले के बारे में बात हुई है और कहीं पर शिव रूप से और यह कल्प भेद भी शास्त्रों में भरा पड़ा है। कर लेना चैट जीपीटी और कार्य कारण भेद से ईश्वर अपने लीलात्मक प्रपंच में प्रकट प्रकट होते हैं। यह भी पढ़ लेना। वस्तुतः वो सच्चिदानंद स्वरूप है। ये भी पढ़ लेना। और ये एक बात और कहता है कि आदि शिव आदि गणेश आदि राम। अरे तो तू बोल ना कि आदि वेद हो। पहले तो तू ये बोलना शुरू कर। वेद में प्रमाण है आदि गणेश भगवान है। ये बोलना शुरू कर। कबीर तो कहीं स्पष्ट रूप से नहीं लिखा है मगर नहीं अपना जाल बिचाना है ना कबीर पंथ के नाम पर इसलिए खैर अब आगे क्या है व्रत के प्रमाण ले लो खोलो

01:01:39:13 भैया ऋग्वेद एक एक 25 14 व्रत का प्रमाण लो इसने कहा था ना वहां पे क्या कहा था कि नहीं व्रत करने को तो मना किया है शास्त्रों में कहां पे कहां कहां से उठाया इसने वो मैं बताऊंगा अभी कहां से उठाया गीता में यह देखिए व्रत की बात हो रही सीधे-सीधे क्या लिखा है हां सीधे-सीधे व्रत की बात हो रही है

01:02:18:02 ये वेद की बात हो रही है ना वेद तो तुम्हारे लिए परम प्रमाण है तो व्रत को मानोगे कि नहीं मानोगे व्रत धारण करने की बात हो रही है। आपके व्रत में रहते हुए हम पाप रहित होवे। यह 29वा पढ़ रहा हूं मैं यजुर्वेद का। मैंने व्रतों का जो पालन किया उसको करने में मैं मेरा यह व्रत अनुष्ठान सिद्ध हो सका है। यह कर्म करने पर जो मैं था वह मन नहीं हूं। यह यज्ञ बात हो रही है व्रत की और देखो आगे ही पितरों की बात की की जा रही है। अगले में ही 29 में 28वां था यह। 29 में क्या कहा जा रहा है? अध्याय दो है। यजुर्वेद अध्याय दो और मंत्र है 28वा। अभी हम लोग देख चुके हैं। 29वां पढ़ रहा हूं। पितरों को दिए हुए अन्न को ले जाने वाले अग्नि के लिए हुए यह आहुति समर्पित है। पितरों के साथ रहने वाले सोम के लिए यह समर्पित है। यज्ञ वेदी पर आए हुए असुरों और राक्षसों का नाश हुआ है। पितरों को दे दिया दिए जाने की बात हो रही है। और पितरों की आगे और भी बहुत सी बातें हुई है। खैर महाभारत का है 143वा अध्याय 40वां श्लोक क्या कह रहा है? सदा उपवास करें। एकादशी आदि के दिन उपवास करें और दूसरे

01:03:33:08 दिन भी सदा दो ही समय भोजन करें। बीच में कुछ ना खाएं। नियम पूर्वक रह तो और ये कु की चटाई इत्यादि पर बैठने की मना करता है। वह भी कुकी की चटाई पर सोने इत्यादि के बारे में बात हो रही है। विरक्तता कैसे आए? और देखिए करवा चौथ के व्रत की बात हो रही है। करवा चौथ का व्रत इसने कहा था ना अपने उसमें इंटरव्यू में शास्त्रार्थ में करवा चौथ के व्रत की बात कहां हो रही है? हम करवा चौथ के व्रत की बात कहां हो रही है बता देता हूं। इसमें क्या लिखा है? एक पांच में यजुर्वेद पढ़ देते हैं। ऋग्वेद का हमने देख लिया एक 25 14 अब यजुर्वेद पे आ जाते हैं। एक पांच इसमें क्या लिखा है? हे व्रत का पालन करने वाले अग्नि व्रत का मैं आचरण करूंगा। लो व्रत का आचरण करने की बात हो रही है। अब वेद को ना माने जेल कट्टू रामपाल को माने तुम्हारे अनुसार वह तो बहुत अच्छे हैं क्योंकि तेल दे रहे हैं सस्ता घी दे रहे हैं सस्ता बहुत अच्छी गुणवत्ता वाला तुम उनका प्रचार कर रहे हो इसीलिए वेदों को ना माने सनातन धर्म को ना माने स्टेट अप वो स्टेप अप जगदीश ने कह दिया है जगदीप ने कह दिया है कि भैया वो घी दे रहा है सस्ता पाइप बांट रहा है लोगों में

01:04:48:09 जेल कट्टू इसलिए इन चीजों को ना मानो ब्रह्मा विष्णु महेश को गाली दो और उसके जो अनपढ़ पुअर चेले हैं उनकी तरह रोज वीडियो बनाओ। यह मसला वो मसला कल को वो दिन दूर नहीं जो आज इन राधा मां को और ये मां भगवती को पार्वती को शिव जी को गाली देने वालों के साथ तुम खड़े हुए। एक दिन तुम्हारे घर की स्त्रियों को जब ऐसा ही कुछ होगा तब तुम्हारी आत्मा में चित्कार होगी कि मैंने गलत लोगों का साथ दिया। उस दिन का श्राप है जो मुझे लगा है। ध्यान रखना यदि आज अब तुम आज आज तुमने आत्मा अवलोकन नहीं किया तो। ठीक है? और क्या कहा था इसने? इसने रामपाल ने अपने उसमें तथाकथित शास्त्रार्थ में क्या कहा था? इसने कहा था कि भैया वो करवा चौथ के व्रत की बात आई थी ना तो वहां पर ये लोग घट रामायण दिखा रहे हैं। घट रामायण हमारा शास्त्र है। वाल्मीकि हमारा शास्त्र नहीं है। घट रामायण अभी पिछले 500 सालों में कोई एक व्यक्ति आकर के पता नहीं क्या-क्या उसमें लिख गया। वो हमारा शास्त्र हो गया। घट रामायण इसके जो गवार और पुअर चेले वो ले मेरे पास आए थे। घट रामायण लाए हैं। यह पूरा एक अध्याय है चतुर्थी व्रत के बारे में। गणेश चतुर्थी और करवा चौथ इत्यादि जितने भी चतुर्थी

01:06:03:22 के दिन व्रत आते हैं उसका पूरा अध्याय है। कौन सा अध्याय है? यह अध्याय 113 नारद पुराण का 113वा अध्याय है और इसमें 43 वे श्लोक में 43 वे श्लोक में स्पष्ट लिखा हुआ है। जो कार्तिक कृष्ण चतुर्थी होती है उसके व्रत के बारे में क्या लिखा है? कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को करके व्रत केवल नारी गण ही करें। उसका विधान यह है स्त्री स्नानोपरांत अलंकृत होकर गणाधीश की पूजा करें। उनके समक्ष व्रती रहकर पूरी तरह से पकवान तथा दस कमंडलु करवा यहां करवा आ गया। करवा चौथ रखकर देवग को प्रियताम प्रसन्न हो कहकर अर्पित करें। तत्पश्चात सभी वस्तु सौभाग्यशाली स्त्री तथा ब्राह्मण गण को प्रदान करें। जब रात में चंद्रोदय परिलक्षित हो तब सविधि अर्घ प्रदान करके व्रत पूर्ति करने के अनंतर मिष्ठान भोजन करें अथवा दुग्ध जल पूर्ण कमंडलु सुपाड़ी अक्षत रत्न ब्राह्मण को प्रदान करें। यह व्रत द्वादश किवा सोडस वर्ष करें। अंत में उद्यापनोपरांत व्रत विसर्जन करें। यह हो गया तुम्हारा।

01:07:19:20 यह है बाबा जी का ज्ञान। वेद विरोधी ज्ञान, पाखंडी ज्ञान। और बाबा जी क्या कहते हैं कि भैया वो जो शिव पार्वती का जब विवाह हुआ था तो ऐसे थोड़ी ना हुआ था या वो जो दैय स्तर की जो चीजें हैं वो ऐसे थोड़ी ना हुई थी। तो इसलिए अपने यहां पर भी वैसे ही विवाह कराता है। तो इस प्रकार से सबसे पहले तो रामपाल और रामपाल के तमाम सारे लोग जो यह कहते हैं कि जो हमारा जो वेदों के अनुसार जो विवाह होता है वो विवाह विवाह नहीं है और उसको यदि तुम समर्थन करते हो तो तुम्हारे लिए भी यह बात लागू होगी कि रामपाल यदि यह बात सच बोल रहा है कि वो विवाह विवाह नहीं है जो हमारे मां-बाप ने किया है। तो इसका अर्थ है कि ये लोग जिन माता-पिता से उत्पन्न हुए हैं वो सारे अवैध संबंध थे। क्योंकि विवाह तो वहां हुआ ही नहीं रामपाल के अनुसार रामपाल की विधि तो अभी रामपाल बता रहा है 17 मिनट वाली है ना और उसके बाद अगर यहां से यह मान लिया जाए क्योंकि वो जो दैय चीजें होती है वो बिल्कुल स्पष्ट रूप से यहां पर लागू हो जाती हैं। जैसा वहां पर हो रहा है वैसा ही यहां होता है मनुष्यों में। तो फिर उस हिसाब से रामपाल ने एक विवाह बताया है अपनी सृष्टि रचना में कि भैया वो जो स्त्री थी उसके पहले इंद्री नहीं थी। यानी कि रामपाल के अनुसार रामपाल के यहां की

01:08:34:21 जो स्त्रियां होती हैं उनके जो स्त्री अंग होता है मुख्य वो होता ही नहीं है और वो किस ब्या ब्याह के समय जो वर होता है वो नाखूनों के द्वारा चिपकाया जाता है। अब उसमें फेवी का उपयोग होगा कि किसका होगा ये तुम देख लेना। मगर यदि वहां की चीजें एज इट इज यहां लागू करोगे तो ये सब तो पूछा जाएगा ना। या ये भी होता है क्या तुम्हारे यहां? क्योंकि तुम्हारी जो फर्जी कथाएं तुमने बना रखी है उन्हीं कथाओं में यह है कि भैया वो उसकी पत्नी इसलिए है क्योंकि उनका इस प्रकार से विवाह हुआ था कि विवाह से पहले वर की वधू पे यानी जिससे विवाह होने वाला है उस पर दृष्टि खराब हो गई थी और फिर दृष्टि खराब होने के बाद उसके पास स्त्री अंग था नहीं जो भग जिसे स्त्री अंग भग कहते हैं ना स्त्री इंद्री वो था नहीं स्त्री के पास वो फ्लैट था मामला और उसको जो है राक्ष राक्षस ने पहले चिपकाया नाखूनों से और उसके बाद उसके साथ जो है आगे की चीजें हुई। तो इनके यहां पर जो ब्याह होते हैं 17 मिनट वाले क्योंकि इनके यहां देवताओं के यहां पर होने वाली चीजें ऐसी ही होती हैं। तो एज इट इज इनके यहां पर क्योंकि ये लागू हो गया क्योंकि देवताओं में ऐसा हुआ था तो हमारे यहां भी ऐसा होना चाहिए। तो भैया इन्हीं के अनुसार जो दैय घटनाएं हुई हैं वहां पर ऐसा हुआ था कि विवाह के विवाह से पहले जो वर की

01:09:49:22 दृष्टि खराब हो गई थी। उस पर स्त्री पर जो कि स्त्री थी नहीं क्योंकि उसके स्त्री अंग था नहीं तो जिस पर भी यानी कि एक तरीके से यह भी माना जा सकता है कि दृष्टि किसी पर भी खराब हो सकती है पुरुष पर भी खराब हो सकती है रामपाल के अनुसार क्योंकि वो दैय चीजों को यहां ला रहा है तो किसी पुरुष पर भी खराब हो सकती है और फिर उसके बाद जो आजकल वो चल रहा है ना धर्म को ना मानने वाले लोगों के द्वारा सेक्स चेंज ऑपरेशन लिंग परिवर्तन वाला जो शल्य क्रिया होती है तो वो इनके यहां पर होती है और वह किसी पर भी दृष्टि आपकी आ जाए उसको चिपका दिया जाएगा उसके बाद उससे विवाह हो जाएगा बजाओ ताली और करो इसका प्रचार

01:10:31:01 तो पाखंड को जान लो कि पाखंड क्या है उसके बाद बोलो अब 100 की सीधी एक बात और बता देते हैं ये रामपाल अपनी किताब में कह रहा है गरिमा गीता की में कि गरमा गीता की में 75 नंबर पेज 75 नंबर जो पष्ठ है वह निकालिए भैया क्या है गरिमा गीता की पृष्ठ क्रमांक 75 क्या कह रहा है रामपाल कह रहा है कि नाम देने का अधिकारी वही है जिसको गुरु ने आदेश दे रखा हो कबीर को किसने आदेश दिया था भाई नाम देने का हम और कुछ तुम्हारे भी हालचाल वैसे ही है उसमें अभी ढोल में पोल है जो तुमने जिसको अपना गुरु बना रखा है उसने तुमको आदेश दिया है कि नहीं वो छोड़ दो कबीर को किसने आदेश दे दिया था ये पढ़ लो ये गरमा गीता की में ही लिखा है और कबीर कबीर तुमको वेद पढ़ा कहां से देंगे क्या कबीर ने वेदों पर भाष्य किया है ज्ञान प्राप्त होता है परंपरा से परंपरा से ज्ञान प्राप्त

01:11:46:02 होता है चार दो भगवत गीता तीन 16 भगवत गीता मांडकोपनिषद एक एक से चार भरभर के प्रमाण है। महाभारत में लिखा है ज्ञान परंपरा से प्राप्त होना चाहिए। तुम्हारी वेद की परंपरा क्या है? वो दिखाओ इनको। इसमें सबसे नीचे वाला दिखाओ। सबसे नीचे इसमें सबसे नीचे वाला दिखाओ। यहां लिखा है। 75 है ना?

01:12:20:26 इसमें लास्ट की दो लाइन अंडरलाइन करिए। नाम देने का अधिकारी वही है जिसको गुरु जी ने आदेश दिया हो। कबीर को किसने आदेश दिया है? कौन सा मंत्र दिया था उनके गुरु ने उनको? क्या वही मंत्र आगे बढ़ाया है? और इनका वो वाला प्रमाण दिखा दो। गुरु के बिना जो वेद पढ़ता है। गुरु बिन वेद पढ़े जो प्राणी मना कर रहे हैं। समझे ना सार रहे अज्ञानी। ठीक है? अब यह बता दो रामपाल ने वेद किससे पढ़े हैं? क्या कबीर ने वेद भाष्य किया है? किसने वेद भाष्य किया है जो रामपाल ने पढ़ लिए। वेद लेने तो तुम जाते हो छपे हुए दयानंद जी के। कौन से वेद भाष्य पढ़े हैं रामपाल ने? उनके फड़ों ने छछूंदरों ने जो सनातन धर्म के देवी देवताओं का अपमान करते घूमते हैं। तूतड़ी सी बंद हो जाएगी जिस दिन सामने आओगे रामपाल आएगा ना 10 मिनट के अंदर रामपाल की लिख के दे रहा हूं लिख के 10 मिनट के अंदर खींचे निकल आएंगी अपना समूह ले चलते हुए पवेलियन वापस लौटते आओगे

01:13:32:16 दर्द भी कहेगा कि उठे तो कहां से उठे वो मार लगेगी ज्ञान वाली मार ज्ञान वाली आ तो सही निकल तो सही बाहर अपने बिल से और स्टेप अप जे जगदीप जी आप आत्मवलोकन करें कि आप पत्रकारिता कर रहे हैं कि चाटुकारिता कर रहे हैं। सनातन धर्म के बारे में वो व्यक्ति फवरता प्रस्तुत करता जा रहा है। वो और उसके चेले और आप उसके घी और पाइप का प्रचार करते घूम रहे हैं। पाखंड का अर्थ खुद नहीं मालूम है और धर्मेंद्र जी से पाखंड का अर्थ पूछ रहे हैं। आज पता चल गया ना पाखंड का अर्थ? कल वीडियो बना देना पाखंडी और नंगा नाम से।

01:14:15:27 उससे पूछो कहां छप रही तुम्हारी गैर कानानूनी किताबें। उससे पूछो यह कौन-कौन सी ट्रस्ट फर्जी के नाम पर तुम्हारा तुम्हारा भंडारा होता है फर्जी ट्रस्ट के नाम पे। तुम्हारा आश्रम चलता है फर्जी ट्रस्ट के नाम पे। तुम्हारी किताबें चलती है फर्जी फर्जी एड्रेस के नाम पे। तुम्हारे कार्यक्रम होते हैं फर्जी एड्रेस के नाम पे। सब कुछ फर्जी कागज पत्र के नाम पर तुम्हारी चीजें होती हैं और तुम बनते हो सत्यवादी जगत गुरु तत्वदर्शी

01:14:53:10 अपना अपना चेहरा जो है ना रात में सोने से पहले देखो क्या कर रहे हो किस तरीके से तुम सनातन का नुकसान कर रहे हो ये घी और तेल का प्रचार करके शर्म नहीं आई कहते हुए वो व्यक्ति करवा चौथ का खंडन कर रहा है। हर त्यहार का खंडन कर रहा है। कुछ मालूम ना तालूम चले भैया हम पत्रकारिता करेंगे। जो सटीक प्रश्न आ रहे हैं तो उस पर लीला लीपापोती कर रहे हैं। जब वो धर्मेंद्र जी कह रहे हैं कि भैया वो खंडन करता है त्यहारों का तो कह रहे हैं। मैं थोड़ी ना मानता हूं उनको। अरे ये बात बोलो ना कि हां रामपाल गलत है। झूठ बोल रहा है रामपाल त्यहारों के बारे में। सनातन धर्मियों को बेवकूफ बना रहा है। अरे घोषित कर दे हम सनातनी नहीं है। हिंदू नहीं है। हमारा वेदों से कोई मतलब नहीं है। अपना जो लिखे सड़ा हुआ ज्ञान और खूब सड़े हुए लोगों को फैलाए। हमें क्या मतलब?

01:15:48:07 वेदों के नाम पर, गीता के नाम पर, पुराणों के नाम पर, वेदों से दूर, गीता से दूर पुराणों से दूर करना उसका काम है। वेद क्या कह रहे हैं? वेद यह कह रहे हैं कि वेदों का ज्ञान देने वाला मूर्ख है। घटिया है उसकी भक्ति। गीता क्या कह रही है कि गीता को कहने वाला राक्षस है। घटिया है उसकी भक्ति। पुराण क्या कह रहे हैं कि पुराणों में जिनको भगवान के कहा गया उनको भगवान नहीं मानना है। अच्छा जिनको पुराणों में भगवान नहीं मानना है। पुराणों के अनुसार उनको भगवान माना क्यों गया वो हमें नहीं मालूम है। हमने खुद की खीर खुद ही खा ली थी। इसलिए हम उसके उसमें आकर के प्रभाव में आकर के भूल चुके हैं। उससे ऐसा विस्मृति भंग हुई है खुद की खीर खुद खा के कि वो जो है भूल गया हूं मैं।

01:16:39:25 पूछो उससे कि अगर ब्रह्मा विष्णु महेश को ना मानने की बात यह शास्त्र कर रहे हैं। सनातन धर्म शास्त्र तो उन्हें मानने की बात कहां लिखी है जिसके कारण लोगों ने उन्हें माना? बहुत साधारण सा प्रश्न है। क्योंकि उसके अनुसार पुराणों में जो बातें हैं वह तो ना मानने के संबंध में है। गीता में अगर व्रत को ना मानने के विषय में कहा गया है। हां छठव अध्याय में ये कहा गया है एक विशेष प्रकार का योग बताया जा रहा है। कि एक आसन पर बैठकर के और जो है आप योग करें। उस योग को ना करने की बात यह पगला पहले कहता है। मूर्ख यह फड़ व्यक्ति जो गीता में जो योग बताया गया है उसको ना करने की बात ये पहले कहता है। फिर उस योग को करने के संबंध में ये बताया जा रहा है कि बहुत ज्यादा खाने वाला या बहुत कम या ना खाने वाला दोनों ही प्रकार के लोगों से यह योग नहीं होगा। मतलब वहां पर एक सामंजस्य और वहां सामान्य स्थिति की बात हो रही है कि अपने रूटीन लाइफ में व्यक्ति किस प्रकार का आहार विहार करता है। जो विशेष व्रत इत्यादि हो रहे हैं उनकी बात थोड़ी ना हो रही है कि उनका खंडन हो गया और यही व्यक्ति अपनी गीता में गीता के उसमें किताब में लिखता है। जो व्यक्ति जो बातें वेद के बाहर की हो वेद से मैच नहीं खाए गीता की भी हो ना मानो। तो फिर क्यों मान ली बात?

01:17:54:26 वेद तो कह रहे हैं व्रत करो। तमाम सारे शास्त्रों में व्रत भरे पड़े हैं। हमारे अनुसार वहां पर सामान्य रूटीन लाइफ की बात हो रही है कि भाई जो और सबसे बड़ी बात वो जो बात कही गई है कि ज्यादा खाने वाला और ना खाने वाला दोनों ही इस प्रकार के योग को नहीं कर सकते। उस योग को ना करने की यह बात कह रहा है। मतलब कि जो काम करना ही नहीं है उसको करने के लिए जो विधि बताई जा रही है उस विधि का उपयोग यह हम जिसमें आस्था रखते हैं उसको ना मानने के लिए कह रहा है कि व्रत को ना मानने की बात हो रही है। भाई वहां वो बात कही जा रही है कि योग करना है तो कैसे करना है। रामपाल के अनुसार वो योग करना ही नहीं है। तो इसका मतलब रामपाल के अनुसार उस विधि को मानना ही नहीं है। कम कम खाने वाली ना खाने वाली वह तो बेकार की चीज़ हो गई क्योंकि वह किस बात के लिए कही जा रही है जो बात हमें करनी ही नहीं है वह तो वैल्यूलेस बात हो गई ठीक ऐसे कि जैसे कि आपको जाना है लखनऊ से कानपुर फिर बताया जा रहा है कि आपको वहां से बस मिलेगी तो यह व्यक्ति कह रहा है कि देखो देखो यह व्यक्ति ये कह रहा है कि कानपुर कहीं कहीं जाना ही नहीं है फिर यह व्यक्ति कह रहा है देखो देखो बस वहां से मिलेगी पहले

01:19:10:02 कह कह रहा है कि आपको कहीं जाना ही नहीं है। फिर कह रहा है देखो बस वहां से मिलेगी। अरे भैया तू बस मिलने की बात क्यों कर रहा है? जब तूने जाने का ही खंडन कर दिया तो ये है इसकी मूर्खता। ये इसका ढोंग ये इसका फड़ ज्ञान। ये इसका पाखंड तो इसका घी तेल मत बेचो। और अपनी पत्रकारिता वास्तविक धर्मोचित धार्मिक समझे? धर्म परायण पत्रकारिता दिखाओ। क्रांतिकारी बनो। क्रांतिकारी चाटुकार मत बनो। लिंक दे दीजिए। किसी को जुड़ना हो, कोई आज के संबंध में कुछ प्रश्न इत्यादि हो तो वह कर सकता है। वैचारिक मतभेद के निमित्त किसी को अगर चर्चा करनी हो तो वीडियो के अंत में दिए गए नंबर पर WhatsApp करके चर्चा सुनिश्चित कर सकता है।

01:20:07:08 जो भी आए वह अपने फेस के साथ आए। अपने बिल में घुसा बैठा रहता है। अरे निकल उससे पूछो ना कि भाई जबलपुर कब जाओगे? इंदौर कब जाओगे? आगरा कब जाओगे? वहां जाकर के सभा लगाओ। सामान्य लोगों को प्रश्न करने का मौका दो। क्यों बैठे हो अपने उसमें? वो जो जहां पर तुम्हारा वो बना हुआ है

01:20:52:00 छिप कर रहने का मामला। क्यों बैठे हो वहां? वैचारिक मतभेद के निमित्त किसी को यदि चर्चा करनी है। यह किसकी बात हो रही है? खीर से संबंधित बात हो रही है क्या? यह

01:21:38:02 ठीक है। चलिए मुझे लगता है कि कोई है नहीं ऐसा जो अभी उपलब्ध हो पाए और जो लोग यहां पर आए हैं इनकी मां ने इनको निष्ठा पूर्वक दूध नहीं पिलाया है तो वह जो है फेस के साथ नहीं आए। [नाक से की जाने वाली आवाज़] [गला साफ़ करने की आवाज़] ठीक है। अभी के लिए इतना पर्याप्त है और ये देखो इनकी मां ने निष्ठा पूर्वक दूध नहीं पिलाया। इसलिए कमेंट में केवल इतना लिख सकते हैं सामने आकर के एक बात एक ऐसी बात जो रामपाल की सनातन जो परंपरा प्राप्त सनातन धर्म है उसके विरुद्ध है रामपाल की बात एक ऐसी बात इनके जो गधे चेले हैं फूहड़ चेले हैं वो सिद्ध नहीं कर सकते एक बात और बस कमेंट वीर बनवा लो क्योंकि माता ने ऐसा दूध ही नहीं पिलाया जो जो पी है वो खीर पी है बाबा जी से उसके कारण यह तो होगा

01:22:43:27 चलिए ठीक है जय श्री राम सभी को समय देने के लिए धन्यवाद और स्टेप अप जे को मैं फिर से बोल रहा हूं एक बार दोबारा से आत्मवलोकन करो और देखो कि तुम कहां से कहां आ गए हो क्या कर रहे हो किसकी ओर खड़े हो धर्म की ओर या अधर्म की ओर तुमको यही नहीं दिखाई दे रहा है अगर तुम एक तरफ कह रहे हो कि मैं मानता हूं और उनका इतना अपमान हो रहा बलात्कार हो रहा है। बलात्कार करते समय जो कबीर सागर का सरलार्थ पढ़ लेना 512 पष्ठ संख्या पे लिखा है रामपाल ने कि जब राक्षस दुर्गा माता का बलात्कार कर रहा था। शर्म आनी चाहिए यार।

01:23:32:14 या तो बीच से हट जाओ और या खामखा यह फ्री का युद्ध निमंत्रण मत लो। है ना? फ्री के युद्ध को बिना खामखा व्यर्थ में युद्ध को न्योता मत दो। या तो बीच से हट ही जाओ तुमको नहीं करना रामपाल का विरोध। कोई जरूरत नहीं। खामखा इस युद्ध में मत पड़ो। ठीक है? वो हम देख लेंगे हमारा उसका। और बाकी यदि यही चाहिए तो फिर ठीक है। यही सही। तुम भी आ जाना। और जो व्यक्तिगत परामर्श है वह क्या है कि मत पड़ो चक्कर में कोई है नहीं टक्कर में। ठीक है? जय श्री राम सभी को।

01:24:22:16 [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Live 1:24:25 · 15 Sep 2026

पत्रकार या चाटुकार? Step up Jagdeep के ढोंग का पर्दाफाश

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A · Live गीता के नाम पर रामपाल के बोलबचन Ep-3 अध्याय 2.53-अध्याय 2.72 #satlok...
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