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00:00:03:08 सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं कि आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और जो बहुत सारे इस समय प्रकरण चल रहे हैं उन सब से आप अवगत होंगे। थोड़ा बहुत हम भी आपको अवगत करा देते हैं। सबसे पहली बात है रामपाल। रामपाल पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है और पुलिस उसमें इन्वेस्टिगेशन कर रही है फिलहाल। जैसा कि आप लोगों को संज्ञान में होगा कि जो आने वाली
00:00:48:02 25 डेट जो दी गई है 25th ऑफ अगस्त की हाई कोर्ट के द्वारा तो उस वहां पर पुलिस को कुछ बताना है जाकर के कि हमने इस बीच ये किया क्योंकि पिछली बार ये हुआ था जो दिनांक 1 अगस्त 2025 को जो सुनवाई हुई थी तो उसमें शासन ने यह कहा था कि यह मामला बहुत बड़ा है, गंभीर है और इसमें अभी तक हम कोई कारवाई नहीं कर पाए हैं। तो इसलिए हमें थोड़ा और समय चाहिए। तो वो समय इनको मिल गया। इन्होंने एक हफ्ते मांगा था मगर इनको जो है 25 तारीख तक का समय दे दिया गया। तो अगली जो हमारी हियरिंग होनी है वह 25 को होनी है। उस दिन कुछ अच्छे समीकरण हमें प्राप्त हो सकते हैं और इस बीच पुलिस भी कुछ बड़े एक्शन ले सकती है। अ इसके अलावा दूसरा प्रकरण एक चल रहा है जिसमें कि संयोग से हमारी भी सीरीज निग्रह निकासिका जो इस समय अभी-अभी रिलीज की गई है। उसमें पांच पार्ट आ चुके हैं। छठवा बाकी है। यह कहा जा सकता है कि संयोग
00:02:03:08 से कि हम भी उसी समय पर यह रिलीज कर रहे हैं जिस समय भागवतानंद का विवाद पीएन मिश्र जी और संदीप देव जी से चल रहा है। पर ऐसा नहीं है। ये काफी दिन पहले से सुनियोजित था। इसकी शुरुआत निग्रह निकासिका की तब हो गई थी जब भागवतानंद ने हमें 100 करोड़ का नोटिस भेजा था। और उस नोटिस में बताया था कि मैं प्रामाणिक आचार्य हूं शास्त्र संप्रदाय का। तो हमें उसकी रिप्लाई लिखना था। रिप्लाई में निग्रह निकासिका लिखी गई कि वो प्रमाणिक आचार्य नहीं है। हो सकता है कि आगे भविष्य में हम कभी लिखते मगर अ उसने हमको एक कारण दिया लिखने का कि बैठकर के अब तुम मेरे ऊपर ध्यान दो। हर तरह से सोचो। तो ध्यान दिया सोचा और निग्रह निकासिका प्राप्त हो गई। खैर अब इसके बाद दो प्रासंगिक विषय और उठ खड़े हुए हैं इस विवाद से। मैं जरा सेटिंग ठीक कर लूं अपनी।
00:03:13:03 डिस्प्ले तो दो विवाद और उठ खड़े हुए। एक तो शाक्य द्वीपीय ब्राह्मण वाला और
00:03:51:18 जांबाला जांबाला से प्रारंभ हुआ। वो शाक द्वीपीय ब्राह्मण पे आकर के चल रहा है। सब जवाला वाले मामले में हमारा पक्ष क्या है? वह हम यह जो तथाकथित आचार्य बनकर घूमता है जो प्रशांत उसको केंद्र में रखते हुए पहले वीडियो बना चुके हैं और उसके अनुयायियों को भी जबाला वाले विषय में जो है काउंटर कर चुके हैं और हमने अपने कई स्ट्रीम्स में कई वीडियोस में स्पष्ट लिखते हैं कि किसी को भी हमारा यदि वैचारिक विरोध है तो वह आकर के प्रत्यक्ष वार्ता कर सकता है। तो यदि ज्वाला वाले विषय में किसी को कोई आपत्ति है जो हमने कहा है आचार प्रशांत को केंद्र में रखते हुए तो आ सकता है। इसके अलावा जो शाक्य वाला मामला जो मुख्य चल रहा है इस समय उसमें हमारा पक्ष वही है जो शास्त्रों का पक्ष होगा जो प्रामाणिक आचार्यों का परंपरा प्राप्त आचार्यों का जो पक्ष होगा। अब इसमें एक बात आ रही है कि सीधे तौर पर इधर पीएन मिश्र जी जुड़े हुए हैं ज्योतिष पीठ के साथ और इधर सीधे रूप सीधे तौर पर जो पूज्य राघवाचार्य जी महाराज हैं और पूज्य जो
00:05:07:01 विद्या भास्कर जी महाराज हैं इन लोगों ने भी आकर के सामने से कह दिया है कि शाकदपीय ब्राह्मण प्रामाणिक होते हैं। तो मुझे लगता है कि इस बात का जो लाभ है वही वाली सिचुएशन फिर से हो रही है कि भागवतानंद जो कटाक्ष करता है उसको कहता है कि मैं संतों की निंदा नहीं करता है। वह यह कहता है कि मैं भाई मैं तुम्हें किसी व्यक्ति का विरोधी नहीं बना रहा हूं बल्कि उनके उस गलत सिद्धांत का विरोधी बता बना रहा हूं जो वो बोल रहा है मगर क्योंकि वो गलत बात बोलने वाला वो व्यक्ति है जैसे किसी ने उससे प्रश्न पूछा था उसकी जो प्रवचन चल रहा होगा उसमें कि भाई आप जो है मेरा अनास्था हो रही है तो बोला कि अरे उनके उस वक्तव्य के प्रति अनास्था होनी चाहिए उनके प्रति नहीं फिर अगर ऐसा है तो जो गलत वक्तव्य बोलने वाले व्यक्ति हैं उनके साथ खड़ा होने पर तू फिर क्यों आलोचना करता है? फिर ये वाली बात आ जाती है। जैसे राजेंद्र दास जी महाराज किसी अंश में आर्य समाजियों के यहां गए। भाई उनकी अपनी चीजें हैं। वो गए। उन्होंने कभी ये नहीं कहा मैं आर्य समाज के सिद्धांतों का समर्थन करता हूं। मगर वो गए तो राजेंद्र दास जी महाराज
00:06:22:04 गए या फिर बागेश्वर वाले कहीं पर कुछ अंशों में गलत लोगों के साथ खड़े हो गए तो गलत लोगों के साथ खड़े हो गए और उनकी गलती क्या है कि उन्होंने कुछ एक सिद्धांत ऐसा गलत दिया है। तो इस कारण से बागेश्वर के साथ कोई खड़ा नहीं होना चाहिए। इस कारण से राजेंद्र दास जी के साथ कोई खड़ा नहीं होना चाहिए। अगर कोई खड़ा होगा तो तू उसकी निंदा करेगा। तू वही तो कर रहा है जो तू खुद मना कर रहा है। इसकी सबसे बड़ी इसके इसके बारे में बात करने में सबसे बड़ी दिक्कत क्या है कि इसने अपने सिद्धांतों को अभी पूर्ण रूप से प्रस्तुत तो किया नहीं है ग्रथावली के द्वारा तो इसके वक्तव्यों को खोजना पड़ता है कि कहां पर इसने अपनी बात को ही काटा है। जब ये कह रहा है कि मैं किसी व्यक्ति विशेष की नहीं बल्कि उसके गलत सिद्धांत की प्रति तुम्हें अना मतलब तुम्हें कह रहा हूं कि आस्था मत रखो इसके गलत सिद्धांत में तो उस गलत सिद्धांत को बोलने वाला निर्गत करने वाला जो व्यक्ति है उसके साथ जब कोई व्यक्ति खड़ा हो रहा है आस्था पूर्वक तो तुझे वहां पर क्वेश्चन नहीं करना चाहिए कि भाई गलत सिद्धांत देने वाले के साथ तुम क्यों खड़े हो तब तो तुम क्वेश्चन भी कर रहे हो इसका मतलब तुम व्यक्ति के सिद्धांत नहीं बल्कि व्यक्ति पर भी व्यक्ति के प्रति भी अनास्था जगा रहे दूसरी बात इसके
00:07:37:10 जो फॉलोअर्स है कई बार आकर के कहते हैं बहुत सारी चीजें तो याद नहीं रह पाती पर मैं बता देता हूं जो इसके फॉलोवरर्स है वो कई बार आकर के कहते हैं कि तुम उस जगह पर चुप क्यों हो तुम उस जगह पर चुप क्यों हो भाई हमें जहां जिसका विरोध करना है और हमें आवश्यक लगेगा उपयुक्त लगेगा वहां हम करते हैं प्रतिकार करते हैं और जिन चीजों को हम प्राथमिकता देते हैं उन चीजों को हम प्राथमिकता देते हैं और अगर बात यही है कि तुमने उसका विरोध क्यों नहीं किया? वहां क्यों नहीं बोला? वहां मुंह बंद क्यों है? तो हमने अनुराग कश्यप का विरोध भी नहीं किया है। नरसिम्हा फिल्म में भगवान शिव का अपमान हो गया। उसमें भी अपना दिमाग खपा रहे हैं कि कैसे करना है भाई इसमें काम। नरसिम्हा मूवी जिन्होंने बताई है इस का उन्हें संरक्षण प्राप्त है और उसमें अच्छे से इस को महिमांडन किया गया है और बारीकी के साथ इस की विचारधारा को वहां पर प्रोत्साहन की दिया गया है जो शायद हमारे अन्य ऐसे मर्मज्ञ लोग नहीं देख पाए उसमें नहीं वो चीजें देख पाए मगर हमने तो देखी ना तो अभी हम उसका भी विरोध नहीं कर पाए हम अनुराग कश्यप का विरोध नहीं कर पाए जिसने ब्राह्मणों के लिए बहुत एक कोई फिल्म अभी थोड़े
00:08:52:12 दिन पहले बनाई थी। बड़ा विवाद चला था। और लगभग 10 कम से कम 10 बौद्धानुगामी ऐसे हैं जो प्रतिदिन शंकराचार्य की बुराई करते हैं। हम उनका भी विरोध नहीं कर पाए। तो इसका अर्थ यह है कि हम अब किसी का विरोध ना करें। क्योंकि हम उनका विरोध नहीं कर पाए। तो यह एक बचकाना वो होता है जब हमको जो आवश्यक लगेगा हमारी रणनीति के अंतर्गत होगा। आवश्यक होगा, उपयुक्त होगा, लाभकारी होगा। हम उसका विरोध जरूर करेंगे। ठीक है? और व्यर्थ में प्रत्येक किसी ने भी बोल दिया अरे जाओ उसका विरोध करो तो यह भी नहीं संभव है। दूसरी बात मैं कह रहा था जैसे हमारे मान्य आचार्यों ने आगे आकर के पहल कर दी है कि भाई शाक्य द्वीपीय ब्राह्मण ऐसा है कि वो प्रामाणिक है और इधर पीएन मिश्र जी भी सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं ज्योतिष पीठ वालों से तो मेरा इस ओर ध्यान आकर्षित करना चाह रहा था जो वर्णाश्रमी नहीं है जो धर्माभाष है सनातना है वो इस बात का लाभ उठाएंगे और लाभ उठा रहे हैं ठीक है? तो ऐसे सार्वजनिक रूप से आगे आकर के और इस तरह से बातों को करने की बजाय आप लोग पहले सर्वस्मति से आपस में आपका सबका आपस में वार्ता है चर्चा है। आप लोग आपस में एक चर्चा सौहार्दपूर्ण करते
00:10:07:15 हुए और एक निर्णय समाज को दीजिए जिससे कि ये ऐसे जो तत्व हैं आर्य समाजी स्कन टाइप के जो तत्व है ये इस ये जो द्वंदवाद छिड़ा हुआ है इसका फायदा ना उठाएं। यह मेरे मेरा निवेदन है जो प्रामाणिक पीठ है हमारी प्रमाणिक पीठों से जुड़े हुए जो उसके उसके पीठाधिपति पीठाधीश्वर है उनसे और उनसे जुड़े हुए लोग कि भाई इस मामले में एक चर्चा कर ले आपस में और एक निर्णायक वक्तव्य सामने आ जाए और
00:10:41:01 आचार्यों से भी यही निवेदन है। अब इसके बाद एक पक्ष और है कि इसके जो फॉलोअर्स हैं भागवतानंद के वो अलग-अलग जगह वही एक क्वेश्चन जिसका जवाब हम अपने वीडियोस में दे चुके हैं और उस जवाब से संतुष्ट ना होने की स्थिति में यह भी कह चुके कि तुम आकर के सामने से बात कर लो। तो जिसका हम ऑलरेडी उत्तर दे चुके हैं। उसी बात को अलग-अलग व्यक्ति एक एक जगह एक एक जगह रिपीट करता रहता है। तो भाई क्या तुमने अपने आका का वक्तव्य नहीं देखा इस बारे में? वह खुद यही बात बोल चुका है अपनी वीडियोस में। क्या मैं एक एक व्यक्ति के कमेंट में जाकर के जवाब दूं उसका? तो वो चाहेंगे कि यहां नहीं आएगा। यहां मां का दूध नहीं पिया इसने यहां नहीं पिया। वो एक दयानेश करके शायदश पौराणिक करके एक आईडी है। वो लिख रहा है अपनी पोस्ट डाल के कि यहां नहीं आएगा जवाब देने। भाई मैं एक-एक व्यक्ति का जवाब नहीं दे सकता। अगर अगर तू जिसको तू मानता है अगर तू उसके प्रति निष्ठा रखता है उसका पक्ष जानता है तो आजा सामने से बात कर लेंगे कायरों की तरह मुंह छुपाकर बंद कमरे में बैठकर और टाइप करना बहुत
00:11:56:02 आसान होता है धर्म के लिए सामने आकर मुखर हो के प्रखरता के साथ अपना सीना तान के खड़े होना इन दोनों बातों में अंतर है। करते रहो वहां बंद कमरे में बैठकर के हम जब घर की स्त्रियों पर आक्रमण कर देंगे ना विधर्मी तब वही करना पोस्ट डालना Facebook पर तो कहने का अर्थ यह है कि एक एक व्यक्ति के कमेंट में जाकर के हमारे लिए तो संभव है नहीं कि हम अलग-अलग व्यक्तियों की सबकी जो शंकाएं हैं उसका समाधान करें। हमने अपने पक्ष को बहुत अच्छे से संतुष्टिजनक पूर्वक निर्गत कर दिया है वीडियो के माध्यम से। यदि यदि किसी पक्ष पर किसी को आपत्ति है तो वह आकर के सामने आकर बात करे। ठीक है? ये सारी चीजें थी। एक आचार्यों से निवेदन कि वो आपस में बात कर ले और एक निर्णय समाज को प्रदान करें। दूसरी जबाला वाले विषय में हम अपना पक्ष बहुत पहले ही प्रस्तुत कर चुके हैं। आवश्यकता पड़ेगी। कोई अगर सामने से बात करेगा तो अन्यथा आवश्यकता पड़ेगी तो पुनः प्रस्तुत करेंगे।
00:13:08:28 तीसरा कि एक एक व्यक्ति अपेक्षा करना बंद करे कि उसके कमेंट में जाकर के हम उसको व्यक्तिगत रूप से उत्तर देंगे। यदि उसको लगता है कि वो सत्य का पक्षधर है। उसकी माताजी ने उसको निष्ठा पूर्वक पिलाया है तो वो सामना करेगा। आमने सामने बात करे। हम घंटों तक वहां कमेंट में फिर हमने एक बात कही। फिर उधर से पांच मिनट बाद 10 मिनट बाद कोई उत्तर आया। हमारे पास इतना समय नहीं है भाई। तुम्हारे पास होगा। हमारे पास नहीं है। ठीक? हमारे लिए वो संभव नहीं है
00:13:44:04 और निग्रह निकासिका बहुत मेहनत से बनाई है। आप लोग उसे देखें और उसमें जो प्रश्न खड़े किए हैं इसकी अप्रामाणिकता से संबंधित वो आप प्रश्न करें जाकर के पूछे और आज भी एक बहुत सनसनीखेज खुलासा होने वाला है शाम को इसकी परंपरा का अंतिम जो चरण है ना वो सनसनीखेज खुलासा सबको हिला के रख देने वाला है वो अवश्य देखें अभी थोड़ी बहुत देर में वीडियो आ जाएगा वो जो लास्ट और अंतिम पार्ट है इसका निग्रह निकास का ठीक है अब ये जो नास्तिक व्यक्ति हैं जो आए हैं इनको हम स्टेज पर ले लेते हैं।
00:14:33:03 कैमरा ऑन कर लीजिए अपना। विस्मय रावत जी मारुति शर्मा जी हमने नहीं कहा है कि वो कोई ऑथेंटिक व्यक्ति है। परंतु नहीं है तो यह बात भी सामने से कही जानी चाहिए ना। फिर एक बात मैं कहना भूल गया। जब तक ये राउत जी अपना कैमरा ऑन कर रहे हैं। मैं वो भी बोल देता हूं। क्या है कि
00:15:19:08 जो आर्य समाजी है ना उनका काम करने का तरीका क्या है? आर्य समाजियों का इस का काम करने का तरीका क्या होता है? जाकिर नायक का या ये जो विधर्मी पार्टीज हैं इनका काम करने का तरीका क्या है? इनका काम करने का तरीका यह होता है कि जो हमारे सनातन धर्म के जटिल मुद्दे जिन पर बहुत प्रमाद फैला हुआ है और जिनके जिनके संबंध में शंका समाधान केवल दो लाइन में नहीं हो सकता है। ऐसे जटिल मुद्दों को जानबूझकर आर्य समाजी स्कॉन जैसी संस्थाएं या ओसो जैसी संस्थाएं आचार्यों के सामने प्रश्न खड़ा कर ऐसे जटिल मुद्दों से जुड़े हुए प्रश्नों को खड़ा कर आचार्यों को असहज स्थिति में डालते हैं। असहज जैसे कि मान लीजिए मंच पर बैठे हुए हमारे शंकराचार्य अब कोई आर्य समाज जी आकर के बोले क्या तुम्हारे यहां पर स्त्रियां मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकती गर्भगृह में क्या तुम्हारे यहां पर स्त्रियां शिवलिंग को छू नहीं सकती अब इसको समझाने में समय चाहिए जो वहां पर चल रहे प्रसंग के लिए उतना समय तो है नहीं
00:16:36:00 अब क्या होगा कि या तो वो ये कहे नहीं कर सकती तो क्या होगा जनता में सनातन धर्म के प्रति परंपरा प्राप्त सिद्धांतों के प्रति अनास्था हो और यदि वो वहां पर यह कह दे कि नहीं नहीं ऐसा किसने कहा कि नहीं कर सकती तो क्या होगा तो शास्त्र का विरोध हो जाएगा तो ऐसी स्थितियां उत्पन्न करता है आर्य समाज इस कौन इस कौन क्या कहता है अरे ये तो खुद को ही भगवान मानते हैं ये तो अद्वैत वाले ये तो खुद की पूजा करवाना चाहते हैं ये क्या है जटिल मुद्दा अद्वैत को समझाने में टाइम लगेगा कि खुद की पूजा करवाना चाहते हैं कि नहीं करवाना चाहते जाते मगर ये तो अद्वैत मतलब मैं ही ब्रह्म हूं। ये तो खुद तो क्या जटिल मुद्दा उखाड़ा तो असहज स्थिति उत्पन्न की। अब इसको समझाने के लिए टाइम चाहिए। आपने प्रश्न तो खड़ा कर दिया। वही कार्य भागवतानंद भी कर रहा है कि ऐसे जटिल मुद्दों पर प्रश्न खड़ा करो जिन पर बात करने में समय लगे जिनको किसी मंच पर बहुत साधारण रूप से प्रस्तुत करना आज के समय में बहुत सरल नहीं है। ऐसे जटिल मुद्दे वो खड़े करता है। वही रणनीति अपना रहा है जो इस और आर्य समाज योगी रही है अपने अपने को बिल्ड अप करने के लिए
00:17:52:02 और यदि जटिल मुद्दे पे शांत रह जाए आचार्य जन मौन हो जाए कि अरे तुम उसके पक्ष में क्यों नहीं बोल रहे हो? अच्छा मुझसे सब लोग सवाल कर रहे कि तुम क्यों नहीं बोल रहे हो? तुम क्यों नहीं बोल रहे हो? अरे भैया ज्योतिष पीठ वाले महाराज जी भी तो नहीं बोल रहे हैं। वहां क्यों नहीं तुम जाकर के ये सवाल पूछ रहे हो? क्यों नहीं बोल रहे हो? तो कुछ ऐसी चीजें होती हैं जिस पर कहां मौन रहना है, कहां पर बोलना है प्रकर्ता के साथ। तो यह सारी चीजें सोचनी पड़ती है। विशेष तौर पर उस समय जब राजतंत्र नहीं है, लोकतंत्र है। अब यहां पर यदि कोई
00:18:30:09 ये कोई आचार्य मौन रह गया तो लो आत्म मुग्धता मौन हो गए। और फिर स्वयं के गुरु ने मना किया कि मेरा बारे में बताना मत। तो मैं नहीं बताऊंगा। व्यक्तिगत रूप से बता दूंगा। हां। तो ये सारी चीजें हैं। ठीक है। वो आ गए क्या? आपका चेहरा बहुत धुंधला आ रहा है। कृष्णा राउत जी। वो कैमरा में थोड़ा प्रॉब्लम है ना इसलिए मैं कैमरा बंद करके बात कर सकता हूं? नहीं नहीं। कैमरा बंद करके बात नहीं करते हम लोग। अच्छा ठीक है।
00:19:13:13 हम तो आप धर्म को नहीं मानते। मैं नास्तिक हूं। मैं किसी धर्म में मेरा विश्वास नहीं है। हम धर्म में विश्वास नहीं है। यानी कि ईश्वर में विश्वास नहीं है। हां। अच्छा। तो सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में माता, बहन और पत्नी में अंतर किस आधार पर करते हैं? हम मतलब विज्ञान के बेसिस पे आधार कर सकते हैं। पहली बार अंतर कब किया था? अ पहली बार अंतर तब हुआ था जब मतलब अर्ली जो ट्राइब्स थे उन्होंने एक दूसरे के बीच में अंतर किया। कब किया था? मैं जब जन्म हुआ था तब से मैंने किया है। मुझे पता है कौन नहीं विज्ञान की थ्योरी आपने पढ़ ली थी बचपन में ही। नहीं नहीं पढ़ी थी लेकिन सिंस हमारा जो भी मतलब मतलब बायोलॉजिकल फंक्शन जो है वो विज्ञान के आधार पर काम करते हैं। इसीलिए विज्ञान हम यानी कि आपका कहना ये है कि अगर किसी को उसके मां-बाप बचपन से नहीं सिखाएंगे बहन है, मां है तो भी वो सीख जाएगा।
00:20:28:16 सिखाने की जरूरत ही नहीं है। जब हम में इनबिल्ट वो सारी चीजें हैं। मैं ये पूछ रहा हूं कि क्या आप ये कह रहे हैं कि यदि किसी को उसके मां-बाप नहीं सिखाते हैं कि माता कौन है, बहन कौन है, पत्नी कौन है? तो भी वो सीख जाता है। हां। उदाहरण उदाहरण के तौर पर मैं मेरा जो कहने का मतलब ये है जो मतलब जो इसके पीछे जो विज्ञान है जो लोग इसके पीछे विज्ञान देखते हैं उनको एंथ्रोपोलॉजिस्ट कहते हैं। एंथ्रोपोलॉजिस्ट ने ये कहा है कि बात करिए। देखिए अभी आपको उदाहरण देना है। मैं आपको बहुत सारे उदाहरण दे दूंगा। अनगिनत जिसमें कि बच्चे को माता-पिता ने ही सिखाया है। अनगिनत अब आप मुझे उदाहरण दीजिए जिसको ना सिखाया हो वो बन गया हो। मतलब क्या बन जाए? यही माता बहन और पत्नी में अंतर करने वाला [संगीत] अगर एक मान लीजिए एक बच्चे को हम नव जब किसी का जन्म हुआ होता है। जस्ट जन्म हुआ होता है। पिता आसपास है क्या इस समय
00:21:44:07 अभी तो नहीं है नहीं है कभी ऐसा हुआ है कि आप कपड़ों के बिना घर से बाहर गए हो बचपन में हां नहीं यानी आपको ये सेंस लेके पैदा हुए थे कि मुझे कपड़े पहनने हैं हां तो अब जब आप झूठ की लड़ाई लड़ रहे हैं तो इसमें आप कर ही क्या सकते हैं आपके मां-बाप ने आपको कभी ना कभी रोका का है। यह बात तथ्य है। नंगे बाहर मत जाओ। नग्न अवस्था में बाहर मत जाओ। आपके माता-पिता ने कभी ना कभी बताया है ये बहन है। ये मां है। ठीक है? हां। तो अब जब आप झूठ बोलने लगोगे तो वो काम नहीं चलेगा। आपको अगर नास्तिक बनना है तो सत्यवादी नास्तिक बनिए। या तो मुझे उदाहरण दीजिए। ऐसा कोई बच्चा है जिसको उसके मां-बाप ने सिखाया हो कभी ना कभी कि बिना कपड़ों के बाहर नहीं जाते। बिना हाथ धोए खाना नहीं खाते। ये सब सभ्यता सिखाई गई है ना उसको मां-बाप के द्वारा कि उस समय उसने साइंस पढ़ ली थी। नहीं मैं मैं ये कहने की कोशिश कर रहा हूं कि आप जो कह रहे हैं पढ़ने की जरूरत है। मैं ये कह रहा हूं कि उसे
00:22:59:10 पढ़ने की जरूरत है। मैं आपके मैं आपके हिसाब से सारे प्रश्नों को लूंगा। पहले एक बात को खत्म करिए। अभी बात चल रही है कि आपको जो यह सभ्यता मिली है माता बहन और पत्नी में अंतर करने की आपका कहना कि आपने आपके मां-बाप ने नहीं सिखाई है। इसीलिए मैंने पूछा था कि मां-बाप आपके आसपास हो तो आप पूछ लो। क्या ये बचपन में कभी बिना चड्डी के बाहर गया था क्या? यह देखा गया है कि जब एक मतलब ये एक साइंटिफिक इसको कहते हैं मैं साइंस पे आ रहा हूं मेरे भाई। आप पहले इस चीज को क्लियर करिए कि आपके माता-पिता ने ही आपको ये सभ्यता दी है कि मैं बाहर जाऊं तो कपड़े पहन के जाऊं। फिर मैं साइंस पे आऊं। हां हां हां ठीक है ना? हां। ठीक है। हां। तो ये इनबिल्ट नहीं था। इनबिल्ट होता तो आपके माता-पिता को ना देनी पड़ती। पहली बात। हां। ठीक है। तो आपका यह कथन गलत है कि इनबिल्ट है। हां। अब दूसरी बात आती है साइंस। क्या साइंस के जितने भी अच्छा साइंस ने ये कहा है वो साइंस ने कहा होता है? साइंस का कोई एक अपना सेंटर चल रहा है या साइंस को प्रतिपादित
00:24:15:01 करने वाले अलग-अलग साइंटिस्ट होते हैं। उनकी थ्योरी होती है। साइंस क्या है? कहां से स्फूटित हो रहा है? साइंस हम पहले ऑब्जर्व करते हैं और उनके बीच में रूल्स निकालने की कोशिश करते हैं। हम मेरा कहने का मतलब है जब हम कहते हैं ये साइंस कहती है तो साइंस का कोई एक सेंटर है क्या कि ये जो सेंटर कह देगा ये माना जाएगा ये साइंस ने कहा है। क्योंकि हम ये जानते हैं क्योंकि हम ये देखते हैं कि एक साइंटिस्ट ने यदि ये वाली थ्योरी दी है तो उसके ठीक विपरीत दूसरे साइंटिस्ट ने दूसरी थ्योरी दी है। देखते हैं ना? हां। तो फिर इसका मतलब जब हम ये कहते हैं कि साइंस ने ये कहा है तो वो पर्टिकुलर प्रॉपर जो पूरे ह्यूमन बीइंग्स के द्वारा प्रतिपादित की जाने वाली साइंस है उसके द्वारा निर्गत होने वाली बात नहीं होती है बल्कि साइंस को फॉलो करने वाले किसी एक विशेषज्ञ के द्वारा प्रतिपादित कोई नियम होता है जिसको कुछ और ऑथेंटिक लोगों ने कुछ और प्रामाणिक लोगों ने या कुछ और ऐसे श्रेष्ठ जनों ने स्वीकार कर लिया होता है जिस पर जिन पर लोगों की आस्था है। समझ में आ रही है आपको मेरी बात? यानी कि जब आप यह वक्तव्य दे रहे हैं साइंस
00:25:30:07 ने ये कहा है तो वो वक्तव्य पूरे ओवरऑल साइंस का नहीं है। वो किस कुछ साइंटिस्ट का है। उसके अगेंस्ट थ्योरीज भी है। मैं बात अभी अपना व्यक्तित्व रख सकता हूं। हां रखिए। ये मैं ये कहना कोशिश कर रहा हूं। जब एक साइंटिस्ट या अपना एक व्यक्तित्व रखते हैं तब उस व्यक्तित्व को टेस्ट किया जाता है यूजिंग रियल वर्ल्ड एप्लीकेशन। मान लीजिए हमें अभी गुरुत्वाकर्षण के बारे में किसी ने एक थ्योरी दी। अरे भाई आप देखिए एक एक करके बात चली। मैं नहीं आपको मैं ये नहीं कह रहा हूं कि आपकी बातें मैं सारी सिरे से खारिज कर रहा हूं। जो बात चल रही है। हां। जब आपने ये जो सेंटेंस कहा है उस पर ध्यान दीजिए। आपने कहा साइंस ये कहती है। साइंस नहीं कहती है। कुछ साइंटिस्ट ऐसा कहते हैं और मैं आपको ऐसे भी साइंटिस्ट दिखा दूंगा जो उसके ठीक विपरीत बात कर रहे हैं। हां। लेकिन अगर वो जो उनके विपरीत बात कर रहे हैं। वो वो वो फिर हमें प्रैक्टिकली जाके देखना होगा ना क्या हो रहा है। कौन सा साइंटिस्ट? हां। हम अभी ये नहीं कह सकते साइंस ये कहती है। नहीं तो यहीं पे प्रैक्टिकल शुरू करना पड़ेगा। हां। है ना? हां। अच्छा। अब दूसरी आगे बात ये
00:26:45:10 आती है। अब दूसरी आगे बात आती है। क्या साइंस के द्वारा बताए जाने वाले नियम बदलते हैं या नहीं? मान लेते हैं कि साइंस ने ये बताया है। हां हां साइंस के द्वारा नियम बदल बदलते हैं। अगर नए एक्सपेरिमेंट होते हैं और अगर नई चीज आती है तो वो बदलते हैं। ये कौन सा सही है। तो इसका मतलब आज आप बचपन से आपने युवा होने तक या साइंस को ना जानने तक आपने अपनी बहन को बहन इसलिए माना है क्योंकि माता-पिता ने सिखाया है। ठीक है? हां। अच्छा। उसके बाद युवा होने के बाद आज की डेट में आप इसलिए मानते हैं अपनी बहन को बहन क्योंकि साइंस ने कहा है या माता-पिता की बात भी है और साइंस की बात भी है। हां
00:27:35:13 समझ रहे हैं आप क्या कहना चाहते हैं? अभी राइट नाउ आपकी जो आपका जो अपनी बहन को बहन मानने के लिए मां को मां मानने के लिए जो आपका जो सेंस है वो साइंस से है या फिर माता-पिता से या दोनों से है? पहला जो था वो साइंस से था फिर माता पिता से। अरे अभी तो आपने कहा कि बचपन से मुझे माता पिता ने बचपन में ही आपने थ्योरीज पढ़ ली थी क्या? नहीं मैं मैं अपनी एक बातें पूरी कहना चाहता हूं। एक जिससे मैं थोड़ा स्पष्ट मैं आपकी चीजों को मैं समझ रहा हूं। मैं बहुत सारे नास्तिकों से बात कर चुका हूं। आप मुझे मुझे मालूम है आप क्या-क्या कहना चाह रहे हैं। इसलिए मैं थोड़ा सा पॉइंट टू द पॉइंट रहने की कोशिश कर रहा हूं और मैं ऐसा नहीं आपको बोलने का मौका नहीं दूंगा। आपने जो वक्तव्य दिया है अभी आपने कहा कि बचपन से मुझे मेरे माता-पिता ने सिखाया तब आपके जीवन में साइंस नहीं थी ना तो आपका ये कहना गलत है कि पहले साइंस थी और फिर माता-पिता। मैं मैं ये कहने की कोशिश कर रहा हूं। मान मान लीजिए मैं मेरा कहने का मतलब यह है कि अगर हमारे जो बायोलॉजिकल फैक्ट है अगर वो इस चीज से अग्री ही नहीं करते तो हम उस नजरिए से देख ही नहीं पाते। मैं ये कहने की कोशिश कर रहा हूं। आप फिर
00:28:50:14 से फिर से दोबारा उस पर जा रहे हैं। बायोलॉजिकल फैक्ट होने के बाद आज तक आपने ये नहीं सुना है कि लोगों ने बहन के साथ रमण किया है। ऐसे केसेस नहीं है सामने। हां किया है तो यानी कि बायोलॉजिकल फैक्ट नहीं है। अगर होते तो वो ना करता। जैसे हमारे पास लोहा खाने का बायोलॉजिकल फैक्टर नहीं है। तो इसलिए हम लोहा नहीं खाते हैं। लेकिन ये ये बात भी तो सच है कि मेजरिटी ऑफ़ लोग उस चीज में नहीं जाते हैं ना। तो हमें एक पैटर्न देखने को मिलता है जिससे हम ये कह सकते हैं कि उसके पीछे का एक साइंस फक्चुअल है। मेजरिटी ऑफ लोग तो मेजरिटी ऑफ़ लोग तो आस्तिक है। फिर
00:29:35:08 लेकिन आस्तिक होने आस्तिक होने का मतलब नहीं नहीं अभी देखिए आप अगर मेजॉरिटी पे चलेंगे तो मैं मेजरिटी पे सवाल करूंगा। मेजॉरिटी ऑफ़ लोग तो आस्तिक है ना। दुनिया के कितने परसेंट लोग आस्तिक हैं? होंगे लेकिन ज्यादातर लोग होंगे आस्तिक होंगे ना तो फिर वहां मेजरिटी कहां चली गई आस्तिक आस्तिक होने के पीछे का उसका एक रीजन ये भी है बस बस इसका मतलब आपको मेजॉरिटी से मतलब नहीं है तो फिर आप अपनी चीज को सिद्ध करने के लिए मेजॉरिटी मत बताइए। दूसरी बात यह है कि जो चलिए मान लीजिए आस्तिक भी नहीं है। मगर वह जो मेजरिटी आप कह रहे हैं ना उन मेजरिटी वाले लोगों में भी बहन को बहन की तरीके से देखने की जो भावना है वो भावना आई कहां से है? माता-पिता से। साइंस से नहीं आई है। मेजॉरिटी में देखिए आप फिर आपकी बात कटेगी।
00:30:31:27 नहीं समझे? हां। हां। तो आप ये कह रहे हैं मेजॉरिटी ऑफ़ लोग तो बहन को बहन की तरह से ही देखते हैं। गलत नहीं करते हैं बहन के साथ। यह मेजॉरिटी ऑफ़ लोगों में ज्यादा मेजोरिटी उन्हीं लोगों की जिनको धर्म ने सिखाया, माता-पिता ने सिखाया, जो साइंटिस्ट नहीं थे, जिन्होंने साइंस की वो थ्योरीज नहीं पढ़ी थी जो आप जिनके बल पर कह रहे हैं, मैं इसलिए बैन को बैन मानता हूं। लेकिन अगर मैं जिस तरह से आपने ये कहा कि हमने ये सब तब सीखा जब हमें साइंस के थ्योरीस पता नहीं थे। मतलब एक अल्पायु में मुझे पता नहीं था कि साइंस की थ्योरीज है तो ये हमें धर्म से मिला। आप ये कहने की कोशिश कर रहे हैं। मैं कहूंगा आप कंक्लूजन पे मत जाइए। प्लीज मतलब आपका कंक्लूजन हम एक एक बात को काउंटर कर रहे हैं। एक एक बात को आप कंक्लूजन पे मत जाइए। कंक्लूजन पे भी जाएंगे। मगर अभी जो बात चल रही है उस पे रहिए। जो आपने बात आपने जो यह बात कही है कि भाई मेजरिटी ऑफ पीपल जो है बहन को बहन के तरीके से ही देखते हैं। इसलिए अपवाद की वजह से नियम नहीं बदला जा सकता। सही बात है। बिल्कुल सही बात। मगर उस मेजरिटी ऑफ पीपल में मेजरिटी उनहीं लोगों की है जिन्होंने साइंस के द्वारा नहीं अपने माता-पिता के द्वारा दिए गए धर्म के कारण बहन को बहन के नजरिए से देखा है। और दूसरी बात आपका जो ये कहना
00:31:46:28 है कि उसके अंदर ह्यूमन इंस्टिंक्ट है। बहन को बहन के तरीके से देखना। ठीक है? तो जो ह्यूमन इंस्टिंक्ट है उसके अनुसार उसने अपने आप बहन को बहन के नजरिए से किसी ने देखा हो तो आप बता दीजिए। उसको तो बचपन से ही सिखाया गया। अभी मैंने आपसे पूछा उदाहरण दीजिए। मैं तो आपको उदाहरण दे रहा हूं। आप ही हो एक उदाहरण। आपके माता-पिता ने आपको सिखाया। सुनिए आपके अंदर से नहीं आया। आपके माता-पिता ने आपको सिखाया। मुझे आप उदाहरण दीजिए। जिसके माता-पिता से वो रहित हो। समाज से वो रहित हो। किसी ने ना सिखाया हो और वो जो है बहन को बहन मानने लगा। मैं आपको एग्जांपल दे सकता हूं। उदाहरण चाहिए आपको ना? हम मैं आपको उदाहरण दे सकता हूं। एक ऐसे मतलब ट्राइब्स का एग्जांपल दे सकता हूं। आदिवासियों के एग्जांपल दे सकता हूं जो लोग भगवान में नहीं मानते हैं। लेकिन भगवान को मानने की बात नहीं है मेरे भाई। यहां पे तो ये है कि कहां से आ रही है। आज के टाइम में नहीं मान रहे हैं। मगर उसके जैसे आप भगवान को नहीं मान रहे हैं। मगर आप बहुत सारी चीजें ऐसी कर रहे हैं दिन भर में जो धर्म से रिलेटेड है। आपके माता-पिता मान रहे हैं। माता-पिता नहीं मान रहे तो उनके माता-पिता मान रहे हैं। समझ रहे हैं आप मेरी बात? जैसे कोई यह व्यक्ति कहे कोई यह व्यक्ति कहे कि यार देखो विदेशों में
00:33:02:02 तो सनातन धर्म है नहीं वहां के लोग कैसे अपनी अपनी सभ्यता को मानते हैं कुछ कुतर्की आते हैं ऐसे नास्तिक वो कहे कि विदेशों में तो सनातन धर्म है नहीं वहां कैसे धर्म पहुंचा भाई ये बताओ कि आपका थॉमस अलवा एडिसन से कोई मतलब है क्या संबंध है आपका कोई किससे थॉमस अलवा एडिसन से कोई संबंध है आपका? नहीं है। नहीं है। नहीं है। मगर बल तो आपके यहां उसी का जल रहा है ना। हां। जल रहा है ना? हां। तो इसका अर्थ क्या हुआ कि आप सीधे तौर पर थॉमस हलवा एडिसन से भले ही ना जुड़े हो। मगर आपके यहां बल उसी का जल रहा है। इसी प्रकार से आप सीधे तौर पर धर्म से सनातन धर्म से ना जुड़े हो मगर जितने अंशों में आपके जीवन में प्रकाश है वो सनातन धर्म से ही है। नहीं तो आपको बताना पड़ेगा ये कहां से स्टार्ट हुआ है आपका। वो आज ऐसा कर रहे हैं उसके आधार पे ये नहीं माना जा सकता कि उनके पीछे धर्म नहीं है। मैं आज का एग्जांपल लेकिन नहीं दे रहा हूं। मैं जब मैं जब ट्राइब्स की बात कर रहा हूं मैं इधर तीन ट्राइब्स के बारे में बात करना चाहूंगा। आदिवासियों के एक है हंटर गैदर ट्राइब्स जो 2 लाख साल पहले जीते थे। दूसरा
00:34:17:03 है ऑस्ट्रेलियन अबोजिनल जो 500 साल पहले जीते थे और तीसरा है जो इन ट्राइब्स जो आर्कटिक में पाए जाते हैं वो 5000 साल पहले जीते थे। इन ट्राइब्स को जब हमने स्टडी किया तब हमें पता चला इनके बीच में जो मैरिज होता था वो अपने फैमिली मेंबर्स से डिस्टेंट रिलेटिव से करते थे और ये एक ऐसे टाइम में था जब रिलीजन एक्सिस्ट नहीं करता था। ये सब प्री रिलीजियस सोसाइटीज थे। जब ये सब क्लेम्स है। ये क्लेम्स होते हैं। नहीं उस उस समय सुनिए ये सब क्लेम्स होते हैं। इसीलिए मैं हिस्ट्री में अब जाऊंगा। मैं खोल के दिखाऊंगा कि वो कर लेते थे। आज के टाइम में ही ले लीजिए चचेरी बहनों से विवाह करना आपके यहां क्या माना जाता है? हम तो नहीं करते बहन से। नहीं करते। मुसलमान तो करते हैं। हां करते हैं। तो खत्म हो गई बात। लेकिन सदर्न इंडिया में तो लोग करते हैं। मतलब दक्षिण भारत में तो करते हैं। फिर भी धर्म ने क्या कहा है? लेकिन धर्म ने क्या कहा है? मनुस्मृति में लिखा हुआ है चचेरी ममेरी फुपेरी बहनों से विवाह करना त्याज है। धर्म ने कहा यदि किसी के पिता ने सिखा दिया बेटा मदिरापान मत करना। अब कोई मदिरापान कर रहा है तो आप ये कहेंगे कि देखो वो तो कर रहा है इसलिए इसका मतलब इसके पिता ने सिखाया
00:35:32:14 है। समझ रहे हैं मेरी बात? हां। अगर किसी के पिता ने ये कह दिया कि बेटा मदिरापान मत करना। उसके पांच 10 लड़के हैं। उनमें से दो लड़के मदिरापान फिर भी कर रहे हैं। तो उसके आधार पर हम ये थोड़ी ना कहेंगे कि हां उसके पिता ने सिखाया माता पिता मदिरापान करना। दूसरी बात दूसरी बात महाभारत में लिखा हुआ है कि किसी के द्वारा कर देना कह देना प्रमाण नहीं होता है। उसको युक्ति युक्त तरीके से शास्त्रों द्वारा स्वीकार किया जाना प्रमाण होता है। तो जहां पर जो लोग कर रहे हैं आप हमारे अन्य वीडियोस देखिएगा हम उनका खंडन करते हैं जो लोग ऐसा करते हैं चचेरी मरी फुपेरी बहनों से जो विवाह कर लेते हैं उसके आधार पर आप ये नहीं कह सकते कि धर्म ने सिखाया है ठीक है और दोनों ही बातें आपने खुद ही उदाहरण दे दिया जिनको धर्म का सही से बोध नहीं है वो कर रहे हैं वो या तो मुस्लिम बनके कर रहे हैं या साउथ इंडिया में कर रहे हैं या पूर्वांचल में कर रहे हैं कर रहे हैं धर्म का सही बोध कराने पर ही व्यक्ति अपनी ममेरी चचेरी फुपेरी बहनों को त्यागेगा। पहली बात। अब जरा आपकी साइंस पे दोबारा आ जाते हैं।
00:36:48:24 आपने माना साइंस के नियम बदलते हैं। आज की थ्योरी ने कुछ कहा, कल की थ्योरी ने कुछ कहा। हां। तो इसका मतलब अगर कल साइंस ये कह देती है कि बहन के साथ विवाह करने पर जो है कोई दिक्कत नहीं है तो आपकी नजरें अपनी बहन को लेकर के बदल जाएगी। लेकिन साइंस ऐसा कहेगा ही क्यों? ये कोई वो थोड़ी ना है। मैंने आपने खुद माना ना कि नियम बदलते हैं। कल तक कल तक आंखों का इलाज नहीं था। आज आंखों का इलाज है। कल उसने कहा था आंखों का इलाज नहीं है। उसके कुछ साल बाद उसने कहा आंखों का इलाज है। ठीक विपरीत बात बोल दी। लेकिन वो भी इसलिए है क्योंकि उसके लिए हमें मिला है। प्रमाण मिले हैं। तब जाके हमने कहा है ना। साइंस ने ये घोषित कर दिया है। इसमें अब कोई नई थ्योरी नहीं आ सकती है। आ सकती है। लेकिन हम ऐसे तो नहीं कह सकते कि कि मतलब अगर ऐसा मैं आपसे क्या पूछ रहा हूं? नई थ्योरी आ सकती है ना? हां हां आ सकती है। आ सकती है। चांसेस है तो नई थ्योरी आने की संभावना पर हम बात कर सकते हैं ना क्योंकि आप मान रहे हैं आ सकती है थ्योरी। हां आ सकती है। हां। तो अब मैं आपसे पूछ रहा हूं जब ऐसी थ्योरी आ जाएगी कि बहन के साथ विवाह करने पर कोई अवगुण नहीं है तो
00:38:03:27 आपका नजरिया अपनी बहन को या मां को देखने का बदल जाएगा। लेकिन मेरा सवाल तो वही है कि आप जब बात कर रहे हैं कि ऐसी नई थ्योरी आएगी तो मेरा सवाल ये उठता है कि ऐसी नई थ्योरी क्यों आएगी? ऐसा क्योंकि अगर उसके पीछे कोई है ही नहीं। मान लीजिए अरे मेरे भाई इसलिए आएगी कि इसलिए आएगी कि जैसे आज साइंस अपना काम कर रही है नए प्रयोग कर रही है बहुत सारे डिसीजन ले रही है ऐसे ही वो करती जाएगी और हो सकता है नई थ्योरी फिर से आ जाए और नई थ्योरी आएगी क्यों ये आप तब बोलिए तो फिर आप ये कहिए कि नहीं आएगी नई थ्योरी नहीं आएगी आगे बोलिए अरे लेकिन जो चेंजेस आते हैं साइंस में वो मतलब हम एक्सपेरिमेंट करके देखते हैं तब जाके हम करते हैं ऐसा नहीं कि कुछ भी आ सकता है तो एक्सपेरिमेंट करके करके देखने के बाद आएगी। आपने अपनी बात का सवाल का जवाब दे दिया। लेकिन अरे लेकिन एक्सपेरिमेंट में आएगा ही नहीं। क्योंकि एक्सपेरिमेंट कह चुके हैं कि ऐसा नहीं करना चाहिए। तो फिर आप ये बोलिए ना कि नहीं आ सकती नई थ्योरी। हां इस इस चीज को लेके नहीं आएगी नई थ्योरी। हां नहीं आएगी। ये डिक्लेअ किसने और कहां पर किया है? साइंटिफिक पेपर्स में डिक्लेयर्ड हुए हैं। बताइए।
00:39:14:14 मेरे अभी तो नहीं है लेकिन मैंने पढ़े हैं पेपर जिसमें डिक्लेअ हुए हैं। तो आप आप लाइए वो वो जहां पर ये डिसीजन दिया हो किसी साइंटिस्ट ने कि अब इस मामले पे और कोई थ्योरी नहीं आएगी। पहली बात। दूसरी बात ये भी हमें देखना पड़ेगा कि वो जो ये बात कह रहा है उसकी बात को वो क्यों माना जाए? डिसीजन निर्णायक क्यों माना जाए? अच्छा ये भी देखना पड़ेगा। तो पहले तो आप पेपर लाइए उसके बाद उस पर हम बात करेंगे। अभी फिलहाल आपके पास पेपर तो है नहीं ना आने के विषय में। ना आने के विषय में प्रमाण है क्या अभी? नहीं अभी तो नहीं है। नहीं है तो अभी मैं आपको क्वेश्चन कर रहा हूं वो बताइए। अच्छा ठीक है। अगर आ जाती है तो आपका क्या होगा? या तो प्रमाण दीजिए ना आने के विषय में या फिर इस क्वेश्चन का जवाब दीजिए। आपका अपनी बहन को देखने का नजरिया बदल जाएगा कि अब मैं इसके साथ विवाह कर सकता हूं या उसी पर डटे रहेंगे। नहीं बहन का मतलब बहन
00:40:16:07 रुकिए एक मिनट मैं देख रहा हूं पेपर। हां ये पेपर है एक बीबीसी में निकला है। कजिन मैरिज न्यू एविडेंस टेल्स अस अबाउट द इफेक्ट्स ऑफ कजिन मैरिजेस बाय सचल एंड लटकमिस क्या है इसमें? इसमें ये दिया गया है कि जो कजिन मैरिजेस हो रहे हैं या फिर जो यूके में जो कजिन मैरिजेस हो रहे हैं उसमें एक मतलब डिटरमेंटल इफेक्ट आया है और जो इनब्रीडिंग मेरे भाई मैं पूछ रहा हूं नई थ्योरी नहीं आएगी। ये डिक्लेअ किया है क्या? हां इस इसको लेके उन्होंने कहा है कि यह नहीं होना चाहिए। आप बातों को घुमा रहे हैं। अब आप अभी तक मुझे लग रहा था किसी सज्जन से बात कर रहा हूं। मैंने क्या पूछा है? ये डिक्लेअ करना है इसमें नई थ्योरी नहीं आ सकती। आप कह रहे हो नहीं होना चाहिए ऐसा। दोनों बातों में फर्क है। आप भी समझ रहे हो। आप मगर यहां पे बातों के लक्ष्य घुमा रहे हो।
00:41:25:27 सत्य पे बात करिए। सत्य पे है। आपने अभी दो चार झूठ यहां ऑलरेडी बोल चुके हो आप। क्या आप बचपन से अपने आप यह सोचा था आपने कि आप जो है बिना कपड़ों के बाहर नहीं जाएंगे। फिर आपने माना कि हां माता-पिता ने सिखाया। ठीक है? तो पहली बात यह समझ लीजिए कि साइंस के अकॉर्डिंगली हम लोग भी एनिमल है। हां और एनिमल नहीं है। हम वो सोशल एनिमल बाद में आपने नाम दिया वो सोशल वो सोशल आ कहां से रहा है? वो सोसाइटी आ कहां से रही है? क्योंकि हम कहां से आ रही है वो सोसाइटी? उसी को तो ढूंढ रहे हैं क्योंकि यह देखा गया है कि हम लोग सोसाइटी फॉर्म करके मतलब जीते हैं। हम एक समाज में रहते हैं तो हम सामाजिक पशु है। हां मगर उसमें जो नियम सिद्धांत है वो इसीलिए है क्योंकि हमारे अंदर ईश्वर की खोज करने की आस्था है। इसलिए
00:42:21:01 भाई साइंस ने ये बताया है क्या आपको कि हम लोग ऐसा क्यों है? सोशल एनिमल्स क्यों है हम? क्योंकि ह्यूमन क्योंकि ह्यूमन बीइंग्स में जो ब्रेन डेवलपमेंट है वो बाकी के कंपैरिजन में थोड़ा ज्यादा है। तो एक समय में मनुष्य को यह पता चला कि अगर उनको कुछ कार्य करने हैं तो वो अकेले इन कार्यों को नहीं कर सकता। तो उनको अपने जो भी काम है या कर्म है उनको विभाजन करके करना पड़ेगा। एक देखिए काम को करने की तकनीक के लिए टीम गठित करना अलग होता है। वो तो भेड़िए भी करते हैं। टीम गठित करके काम करते हैं ना भेड़िए। हां लेकिन वो भी करते हैं। लेकिन ह्यूमन बींग्स का जो करना है हम ज्यादा अच्छे से करते हैं। हम ज्यादा अच्छे से करते हैं। और साइंस ने ये भी माना है कि 90% लोग जो है उनके अंदर जो है भगवान की वो है इनबिल्ट इच्छा। ये माना है कि नहीं? नहीं इस चीज को ले मैंने थोड़ा पढ़ा था तो इस चीज को ले मुझे यह पता चला कि हमारे अंदर वो इनबिल्ट भगवान को मानने की नहीं है। हमारे अंदर इनबिल्ट है कि हम दूसरों के प्रति डिपेंडेंट रहेंगे।
00:43:36:14 उस साइंटिफिक पेपर की जो आप बात कर रहे हैं उसमें ये लिखा था कि जब एक छोटा बच्चा पैदा होता है तो वो अपने माता-पिता के प्रति डिपेंडेंट होते हैं। उस तरह से जब हम बड़े होते हैं तो हम किसी के प्रति डिपेंडेंट होने की चाह ना कि एक भगवान को देखने की चाह। वो भगवान क्या है आपके अनुसार? मैं मैं तो भगवान को नहीं मानता क्योंकि मैं तो ना जब आप कह रहे हो कि मैं नहीं मानता कि ऐसा कोई है। तो वो कैसा है जिसको आप मना कर रहे हो कि वो नहीं है। लेकिन जो डिफॉल्ट पोजीशन है वो तो नल हाइपोथेसिस है ना कि मतलब मतलब मान लीजिए अगर आप एक जैसे मैंने कहा दुनिया में सुनिए जैसे मैंने कहा है दुनिया में कोई ये ठोस चीज है हां जिसमें मैं अगर हाथ मारूंगा तो मेरे चोट लग जाएगी। ठीक है? अगर मैं कहूंगा कि मैं नहीं मानता इस दुनिया में कोई शेखर है तो मैं उसको बताऊंगा कि शेखर से आप मतलब क्या समझते हैं तो फिर मैं उसको बताऊंगा हां ऐसी चीज जो कुछ स्टील जैसी फील होती है जिसमें अगर हम हाथ मारेंगे तो उसमें चोट लग जाएगी तो ऐसे ही भगवान से आप समझते क्या
00:44:51:15 है किसको कहते हैं भगवान भगवान अकॉर्डिंग टू मतलब अगर हम सभी रिलजन को लेंगे तो वो डिस्क्राइब करते हैं एक ऑल पावरफुल ओमनीिसेंट बीइंग को जिसने पूरी सृष्टि को क्रिएट किया है। अभी आपने साइंस की थ्योरी में क्या माना है? साइंस की थ्योरी में ये कहा गया है कि लोगों का एक नेचुरल हैबिट होता है टू बी डिपेंडेंट ऑन अदर्स। डिपेंड डिपेंड डिपेंड डिपेंड को ही पकड़ लीजिए। जो आप बोल रहे हैं उसी से ही हम आपको जवाब देंगे। हां डिपेंड होने का इंस्टिंक्ट है ना आपके अनुसार हां लोगों में हां तो जब डिपेंड होते चले जाएंगे डिपेंड होते चले जाएंगे जब एक अवस्था ऐसी आएगी कि सब लोग इस पर डिपेंड हो सकते हैं उसी का नाम है भगवान भगवान को सर्वाधार भी कहा गया है हमारे यहां औरों का नहीं मालूम सर्वाधार भी भगवान ही है तो यदि हम लोग डिपेंड हो रहे हैं अपने माता पिता पर माता पिता भी किसी पर होंगे वो वो भी किस क्योंकि आपने कहा सब लोग डिपेंड होना चाहते हैं। तो जहां जाकर के सबका आधार हो जाए निर्भर होने का आधार उसी
00:46:06:19 का नाम ईश्वर है। मैं इसको ले एक पॉइंट कह सकता हूं। जस्ट आपका मैंने एक YouTube श देखा था जिसमें आपने सच्चिदानंद की बात करी थी। मैं करूंगा उसप भी आऊंगा। वो अलग-अलग आ गए। आप पहले एक बात को आपने आप कोई भी बात खत्म नहीं कर रहे। देखिए आपने देखिए शुरू में आपने कहा मैं आपको याद दिला दूं। शुरू में आपने कहा कि मैं अपने आप कपड़े पहनना सीखा। बहन को बहन में अपने आप देखना सीखा। फिर तर्क करने पर आपने माना कि नहीं कपड़े मुझे माता-पिता ने दिए। बहन को बहन मुझे माता-पिता ने दिया। उसके बाद अब आज की डेट में आप साइंस के कारण मान रहे हैं। मैंने आपसे पूछा कि क्या साइंस कल को जब यह कह देगी कि बहन से विवाह करने पर कोई दिक्कत नहीं है तो क्या आप मान लेंगे? तो आप उस चीज का जवाब देने से बचते हुए आपने टॉपिक्स को चेंज भी किया। अभी आपने मेरा जवाब अभी तक नहीं दिया है कि यदि साइंस ये कहने लगेगी यदि आप साइंस पर डिपेंड करते हैं तो साइंस ये कहने लगेगी कि बहन से विवाह करने पर कोई दिक्कत नहीं है तो क्या आप कर लेंगे?
00:47:22:12 तो इसका जवाब क्या है? मेरा लेकिन अब आपने कहा आपका क्वेश्चन आंसर ये आता है कि साइंस ऐसा कहेगी क्यों? इसलिए कहेगी क्योंकि साइंस बदल सकती है। साइंस बदल सकती है। सुनिए सनातन जो साइंस के सिद्धांत है वो सनातन नहीं है। अच्छा कोई हमसे कहे अगर कल को तुम्हारा धर्म कहे अगर कल को तुम्हारा धर्म ये कहने लग जाए कल को कि बहन से विवाह कर सकते हो तो क्या करने लगोगे? तो हमारा जवाब होगा कि हमारा धर्म ये नहीं कहेगा क्योंकि हमारा धर्म सनातन है। सनातन का मतलब होता है नित्य स्थाई। जो किसी भी देश काल परिस्थिति में ना बदले उसका नाम सनातन है। मगर आपकी साइंस सनातन नियम नहीं है। आपकी साइंस को आप खुद मानते हैं कि वो बदल रही है। आज कुछ थ्योरी है। कल को कुछ थ्योरी है। आज आपने कहा 500 साल पहले की कोई ऐसी सभ्यता मिल गई जो उसको नहीं मानती थी। और वो चचेरे और वो जो है अपनी बहनों से विवाह नहीं करती थी। अब भैया उससे पहले की कोई थ्योरी निकल आई। कोई खुदाई हो गई उसमें करती थी फिर लोग बदल गया साइंस का नियम मुसलमान
00:48:38:00 मुसलमानों के यहां पर चचेरी बहनों से विवाह वो है अलऊ कर रहे हैं वहां साइंस का क्या हो गया ह्यूमन इंस्टिट का क्या हो गया ह्यूमन इंस्टिंक्ट तो ये है सुनिए दो प्रकार के धर्म होते हैं एक सिद्ध कोटि का होता है और एक साध्य कोटि का होता है तो ये जो बहन से विवाह ना करना यह सब साध्य सिद्ध कोटि के धर्म है। सिद्ध कोटि का धर्म सुनिए क्या है? मैं छत से कूदूंगा तो मेरे चोट लगेगी इसलिए मैं नहीं कूदूंगा। ये है सिद्ध कोटि का धर्म। समझ रहे हैं? यह सिद्ध है। इसको मुझे साधना नहीं है। ये सिद्ध है। मैं छत से कूदूंगा तो मेरे चोट लगेगी इसलिए मैं नहीं कूदूंगा। तो ना कूदना मेरा सिद्ध कोटि का धर्म हो गया। मगर जिसको मुझे साधना है। बहुत की दबाव नहीं है मेरे ऊपर। प्रत्यक्ष रूप से मेरे ऊपर कोई दबाव नहीं है। मगर उसको मुझे साधना है। वह है साध्य कोटि का धर्म और वह हमें धर्म से ही मिलता है। हमारे या तो मां-बाप आस्तिक होंगे नहीं तो उनके मां-बाप आस्तिक होंगे। अन्यथा व्यक्ति पशु के समान हो जाएगा। और जहां पर जितना जितना ढीला धर्म है, जहां धर्म की जितनी कम पहुंच है, वहां पर ये चीजें तिलांजलि भी
00:49:53:01 दी जाती है। धर्म के बारे में ज्यादा बोध नहीं है। व्यक्ति पहले लिविन में जाता है, उसके बाद जो है समलैंगिकता में जाता है, रेप में जाता है। और उसके बाद धीरे धीरे धीरे धीरे करके बहनों पर भी जाता है, माओं पर भी जाता है। धर्म की पहुंच जहां जैसे जैसे घटती जाती है, ये होने लगता है। जी। इस चीज में मैं दो बातें कहना चाहूंगा। कैसे आपने उस पर बात कहिए पहले बहन के लिए क्या नजरिया होगा उस पर बात कहिए। बहन बहन को हमें आदर्श देखना चाहिए सर। नहीं नहीं जब साइंस ये कह रही है कि भाई बहन के साथ भी विवाह हो सकता है। रमण हो सकता है। तब आप क्या कहेंगे?
00:50:41:08 लेकिन सर बात तो वही आ जाएगी कि फिर वो ऐसा क्यों मतलब सुन लीजिए उसको नए क्योंकि उसको नए ऐसे एक्सपीर एक्सपेरिमेंट्स मिल जाएंगे ये कोई बात है क्या वो ऐसा कहेगी क्यों आप जब खुद कह रहे हो कि साइंस जब साइंस बदलती है ऐसा आप खुद कह रहे हो ना आप ये कह दो साइंस नहीं बदलती लेकिन लेकिन वो ऐसे रेंडमली तो नहीं बदलती ना कि आज ऐसा मैं कह रहा हूं रैंडम यार मैं कह रहा हूं 50 साल में करेगी 10 साल में करेगी तब आपका क्या होगा। मैं कहा कह रहा हूं कि अगले ही चढ़ कर देगी। रेंडम मैंने बोला क्या? मैंने आपको रैंडम बोला क्या? मैंने बोला अगर साइंस धीरे-धीरे ग्रेजुअली ये चीज निकाल के दे देगी कि बहन के साथ रमण करने में कोई दिक्कत नहीं है तो क्या आप अपनी बहन के साथ जो आपका नजरिया है बदल देंगे। मां के साथ जो नजरिया है उसको बदल देंगे। आप मुझे एक हाइपोथेटिकल सिनेरियो दे रहे हैं। इसलिए मैं कह नहीं पा रहा हूं। हाइपोथेटिकल सिनेरियो नहीं है। आप यह मान रहे हैं कि साइंस के नियम बदलते हैं और आपके पास इस बात का अभी प्रेजेंट में कोई प्रमाण नहीं है कि यह सिद्धांत नहीं बदलेगा। ऐसा किसी साइंटिस्ट ने कहा हो प्रामाणिक भागवत अब मान लीजिए भागवतानंद कह दे एक व्यक्ति है भागवतानंद वो कह दे कि हां ये सिद्धांत नहीं बदलेगा। तो ऐसे किसी अप्रामाणिक व्यक्ति की बात
00:51:56:12 भी नहीं चलेगी। पहले तो किसी ने कहा हो फिर वह प्रामाणिक हो फिर हम उसकी प्रामाणिकता देखेंगे कि उसको कौन कितना मानता है वो बाद की बात है मगर अभी तो आपके बारे आपके पास सबसे बेसिक चीज भी नहीं है मैं मेरा ये कहने का मेरा जो कहने का अर्थ यह है कि जब आप ये कह रहे हैं कि मतलब मैं ये इसलिए कह रहा हूं क्योंकि साइंस खुद साइंस आपने कहा कि साइंस अपने नियम बदलती तो यदि हमारे हमारा आधार साइंस होगा बहन को बहन की दृष्टि से देखने का तो साइंस के बदलने के साथ-साथ हमारा नजरिया भी बदल जाएगा। इसलिए हमें मानना होगा कि साइंस से हटके हमारा कोई और आधार है बहन को बहन मानने का। हम ये कह रहे हैं। हम साइंस के सिद्धांतों से मदद लेते हैं। मगर साइंस के ऊपर आधारित हम अपनी मां को मां चैन नहीं कर सकते हैं। बहन को बहन चयन नहीं कर सकते। आप प्लीज जवाब दीजिए जिससे कि हम आगे बढ़े या जवाब नहीं है तो फिर आगे बढ़ते हैं। आप इसमें चुप रहेंगे। आपके पास जवाब नहीं है। मैं एक मतलब अगर एक साइंटिस्ट का नाम बताऊंगा जो इसने कहा था तो हम चलेगा।
00:53:12:16 तो हम देखेंगे ना कि उसको माना गया नहीं माना गया। ये सब चीजें भी आएंगी ना। ऐसे तो मैं भी कह दूंगा एक साइंटिस्ट का नाम जिसने कहा था कि धर्म होता है चलेगा आपके लिए साइंस हां ये बात सच है कि साइंस ऐसा कभी नहीं एक्चुअल में सच बात ये है कि साइंस ऐसा कभी नहीं कहता कि अ मतलब कि ऐसा फाइनली ऐसा कभी होगा नहीं तो एक पॉसिबिलिटी रहती है। तो मान लीजिए अगर अगर पॉसिबिलिटी है तो मैं उसी पॉसिबिलिटी पे ही आपसे पूछ रहा हूं मेरे भाई। आप मुझे सत्यता बताएं कि यदि ऐसा हुआ कि साइंस ने कल को अपनी थ्योरी दे दी कि बहन के साथ रमण करने पर कोई दिक्कत नहीं है तो आपका नजरिया आपकी बहन को लेकर के क्या होगा? अगर साइंस ऐसी बातें कहता है कि बहन के साथ रमणी तो इसका जो इंप्लिकेशन होगा वो भी अलग होगा। मतलब आप जिस अभी जिस मतलब कह रहे हैं फॉर एग्जांपल अगर साइंस अपनी बहन को लेके उसको गलत नजर से ना देखने के लिए ये बाध्यता
00:54:27:27 फील करते हैं कि नहीं करते अपने जीवन में? हां करते हैं। हां। तो ये बाध्यता उस समय फील करेंगे या हटा देंगे? ये बाध्यता फील करेंगे। क्यों करेंगे? जब साइंस ने बाध्यता हटा दी तो फिर क्यों करेंगे? जब आप ऐसा मैं एक्चुअल में मेरा कन्फजन इस चीज पर हो रहा है कि जब आप ये कहेंगे कि साइंस ने ये कह दिया कि ऐसा करने मतलब ऐसा करना है तो इसका अर्थ ये होगा कि हमारा जो जेनेट मतलब जेनेटिक है या डीएनए है वो हम सबसे अलग है। आप जब ऐसी बातें कहते हैं या फिर आप जब ऐसा हाइपोथेटिकल सिचुएशन देते हैं तो आप एक ऐसी चीज के बारे में कह रहे हैं। मैं हाइपोथेटिकल सिचुएशन नहीं दे रहा हूं मेरे भाई। आपने खुद माना है साइंस खुद कहती है कि कभी ऐसा नहीं होगा वो ऐसा कभी नहीं कह यानी कि ऐसे ऐसा हो सकता है ऐसा असंभव नहीं है कि ऐसा ना हो साइंस देखिए हमारा जी मैं आपको उसी ओर पॉइंट आउट कर रहा हूं कि हमारे जो एथिक्स होते हैं नैतिकता
00:55:43:03 होती है उसका आधार यदि हम साइंस को बना देंगे तो क्योंकि साइंस का एक वो है प्रकृति है कि वो बदलती है तो हमारी नैतिकता भी बदलेगी तो आपको हम जिस तरह से इसलिए हमारी नैतिकता का आधार वो नियम वो स्त्रोत होगा जो कभी ना बदलता हो। उसी का नाम धर्म है उसी का नाम सनातन। तो अगर आप ऐसा जिस तरह से मैंने आपको दिखाए कुछ पेपर्स दिखाए कि जिसमें ये सब लिखा हुआ है और आप अभी ये कह रहे हैं कि ऐसा हो सकता है। तो आपको भी मुझे वैसे प्रमाण दिखाने पड़ेंगे कि ऐसा हो रहा है। तब जाके मैं कुछ बता तो रहा हूं। मुस्लिम मुस्लिम विवाह कर तो रहे हैं। ये प्रमाण नहीं दिया मैंने आपको। मैं आपको थ्योरी तो मैं आपको आपके विपरीत थ्योरी तो बहुत सारी दे दूंगा मगर मुझे उसकी जरूरत ही नहीं है। मैं आपको दिखा रहा हूं ना कि मुस्लिम ऐसा कर रहे हैं अपने इंस्टिंक्ट के अगेंस्ट जाकर के कर रहे हैं के अगेंस्ट और सुनिए मैंने आपको सिद्ध और साध्य दो बताई बात। क्या बताई कि सिद्ध कोटि के धर्म को व्यक्ति त्याग नहीं पाता है। त्याग नहीं सकता है। उस वो कूदेगा तो उसके चोट लगेगी। ये सिद्ध कोटि का धर्म है। तो मुसलमान को इसको तो अप्लाई करना ही पड़ेगा कि मैं ना कूदू। या तो मरने के लिए कूदू या तो चोट के लिए कूदू। वो ये नहीं सोचेगा कि मैं गिरूंगा और चोट नहीं लगेगी।
00:56:58:07 ठीक है? मगर वो इसको अप्लाई क्यों नहीं कर रहा है? अगर ये भी सिद्ध कोटि का धर्म है। साइंस का मतलब सिद्ध कोटि का धर्म। तो वो इसको अप्लाई क्यों नहीं कर रहा है? इसके बिना कैसे आराम से रह रहा है वो? आपने कहा कि मेजरिटी में होता है। दूसरे नंबर की जनसंख्या मुसलमानों की है। बट और क्रिश्चियन में भी होता है। हां ऐसा तो मतलब हिंदू में भी कुछ कुछ में होते हैं। फिर मैंने कहा हिंदू में तो मना किया है ना नहीं होता है। मुसलमान में मना नहीं किया। उनकी किताब में लिखा है कर सकते हो। जहां पर उन्होंने मना नहीं किया और जहां पर वो लोग ऐसा कर रहे हैं तो उनको वैसा फल मिल रहा है। जहां पर ऐसा कहा गया है। फिर आप दूसरी दूसरी बातों पे क्यों जा रहे हो मेरे भाई? मैं कह रहा हूं मैंने आपने मुझसे प्रमाण मांगा तो मैंने आपको सिद्ध कर दिया कि मेजरिटी ऑफ लोगों के यहां पर यही है कि बहन के साथ चचेरी बहन के साथ विवाह कर लो। नहीं एक्चुअल में सच बात कहा जाए तो अगर हम पूरा पपुलेशन लेंगे अर्थ का तो अगर पृथ्वी का लेंगे तो मेजॉरिटी ऑफ़ लोग कजिन मैरिज नहीं कर रहे हैं। मेजोरिटी ऑफ़ लोग अगर आप ले लीजिए फिर भी कजिन मैरिज नहीं कर रहे हैं। ठीक है? मगर एक बहुत बड़ा हिस्सा तो कर रहा है ना। आप मुझे एक साइंटिस्ट का पेपर दे रहे हो। सुनो आप मुझे मुझसे आपने क्या पूछा
00:58:13:13 था कि जैसे मैंने आपको थ्योरी दी है। पेपर दिए हैं। आप भी मुझे कुछ पेपर दे दीजिए। थ्योरी दे दीजिए। फिर उसमें बात ये आती है कि वो कितना प्रमाणिक है? वो बात किसने कही है? किसके लिए ऑथेंटिक है, किसके लिए नहीं ऑथेंटिक है। इसलिए मैं जड़ पर आपसे बात कर रहा हूं। और मेजॉरिटी ना भी हो। मगर एक बहुत बड़ी संख्या उनके यहां नियम है कि कजन सिस्टर से शादी कर लो। कोई दिक्कत नहीं है। जिस जिस जगह पे वो लोग साइंस को मान रहे हैं उस जगह पे उनकी संख्या बहुत कम है। बहुत कम है। अगर जगह पे साइंस को मान रहे हैं। क्रिश्चियन और मुस्लिम्स के यहां पर चचेरी बहनों से विवाह करना अलाउ है। और दुनिया में सबसे ज्यादा संख्या क्रिश्चियन को मानने वालों की है। सेकंड नंबर पर मुस्लिम को मानने वालों की है। हां वो बात सच है। तो ये बहुत बड़ा हिस्सा है। अब वो करते हैं कि नहीं करते वो नहीं उनके यहां नियम है कि कर सकते हो लेकिन मैं तो उन हां वो बात सच है लेकिन उन्होंने जो नियम बनाए हैं वो तो साइंस के आधार पर बनाए ही नहीं है तो वो अपने कुछ भी भाई मैं ये नहीं कह रहा हूं आप पता नहीं कहां जा रहे हो आपका कहना है कि ये जो इंस्टिंक्ट है ये ह्यूमन इंस्टिंक्ट है तो मैं आपको बता रहा हूं ये ह्यूमन इंस्टिटक्ट वहां कहां गया इतनी इतनी बड़ी आबादी में
00:59:28:07 ये इनबिल्ट आपने कहा ये इनबिल्ट जैसे कि मैं मैं गिरूंगा जीने की इच्छा रखना ना मरने की इच्छा ये इनबिल्ट है ठीक है इसके बिना कोई नहीं है अगर मैं किसी की ओर हाथ फिराऊंगा तो उसकी पलक झपक जाएगी तो ये इच्छा इनबिल्ट है। इसके बिना वो नहीं है। तो ये कैसी इनबिल्ट इच्छा है जिसके बिना इतना क्रिश्चियंस और मुस्लिम्स का इतना बड़ा जो जन समूह है वो आराम से रह रहा है। सर देखिए इवन दो हमारी इनबिल्ट इच्छा है मैं मैं कुछ कहना चाहूंगा एक पूरा पॉइंट रखना चाहूंगा इवन दो ह्यूमन बीइंग्स की ऐसी इनबिल्ट इच्छा है लेकिन ह्यूमन बीइंग्स के पास फ्री विल भी है जिसके कारण वो इनबिल्ट इस इनबिल्ट इच्छा के अगेंस्ट जा पा रहे हैं। मैं एक एक एग्जांपल दूंगा। ह्यूमन बीइंग्स की नेचुरल इच्छा है कि वो जीना चाहते हैं। लेकिन फिर भी ऐसे कुछ लोग हैं जो इस जीना नहीं चाहते और सुसाइड कर लेते हैं। लेकिन इसका मतलब ये तो नहीं है कि वो इनबिल्ट इच्छा नहीं है ह्यूमन बींग्स के बीच में कि वो जीना चाहते हैं। चलिए चलिए चलिए जो लोग सुसाइड कर लेते हैं वो भी अपने आनंद के लिए करते हैं। नहीं वो अपने आनंद जो लोग सुसाइड कर लेते हैं वो सुसाइड करके भी यह प्रूव
01:00:43:08 कर रहे हैं कि इस शरीर में ही मेरा अस्तित्व नहीं है। इससे इधर भी मेरा अस्तित्व है। जिससे कि मैं अपनी इस देह को नष्ट करके खुश रह पाऊंगा। सुसाइड तो सबसे बड़ा उदाहरण है। और दूसरी बात फिर आप मेजरिटी यहां कहां ले गए? दुनिया में कुछ चंद लोग सुसाइड कर रहे हैं। अभी आप थोड़ी देर पहले कह रहे थे मेजॉरिटी ऑफ़ पीपल क्या करते हैं? देखा जाता है। हां, मेजॉरिटी ऑफ़ पीपल सुसाइड नहीं करते। उसी तरह से अगर उसी तरह से अगर आप पृथ्वी के सारे लोग लेंगे मेजॉरिटी ऑफ़ लोग कजिन मैरिजेस नहीं करते। अगर आप मुसलमानों के भी एक्सक्लूड कर लीजिए। मैं मेरा ये है अगर आप देखेंगे तो इन टोटल कुछ परसेंटेज ऑफ लोग करते नहीं। अगर मेजॉरिटी ऑफ़ लोग कजिन मैरिजेस करते हैं। भाई मेरे भाई सबसे पहली बात तो ये है कि मेजॉरिटी का तो बात वहां खत्म हो गई। जब मैंने आपको कहा कि दुनिया में मेजॉरिटी में लोग नास्तिक हैं क्या? तो आपने कहा नहीं मेजॉरिटी में तो आस्तिक हैं। यहां खत्म हो गई। दूसरी बात मैंने आपसे पूछा क्या आपके अंदर अपने आप ये भावना आई? आपने पहले झट से झूठ बोला था कि मैं अपने आप सीखा हूं। कपड़ों कपड़े पहन के ही बाहर जाना। बहन को बहन की नजरें देखना मैं अपने आप ही सीखा हूं। फिर भी मैंने वहां पर मेजॉरिटी की बात कही थी। तो आपने कहा था
01:01:58:19 क्या कहते हैं? वहां भी आपने अपनी चीज को प्राथमिकता दी तब आपने ये नहीं सोचा था कि नहीं होता तो यही है कि लोग अपने आप नहीं सीखते। उनको कोई ना कोई सिखाता ही है। तो आपने वहां पर अपने आप को प्रायोरिटी दी। वहां खत्म हो गई। और मेजरिटी की बात आपको मैं बता दूं। आपने कहा कि मैं एक साइंटिस्ट का दे दूं जिसने ये लिखा है कि अब ऐसा नहीं होगा। आपने कहा ना? हां। आपने यहां पर मेजॉरिटी को ध्यान में नहीं दिया। दुनिया के लाखों करोड़ों साइंटिस्ट ने नहीं लिखा कि अब ऐसा नहीं होगा। मगर एक ने लिखा तो आपने उसको प्रायोरिटी दे दी। लेकिन ज्यादातर लोगों ने तो मैंने जो कहा वो लिखा है। ज्यादातर लोगों ने मैंने जो कह रहा हूं अब ऐसा नहीं होगा। ये पूछा जा रहा है। अब ऐसा नहीं होगा। अब ऐसा नहीं होगा। ये ज्यादातर लोगों ने लिखा है या कम लोगों ने लिखा है। यहां भी आपने मेजॉरिटी को पीछे कर दिया। ठीक है? अब आपने पूछा कि आप उदाहरण दीजिए कि कहां पे नहीं माना जाता है। और ऐसी थ्योरीज भी है। यद्यपि मैं उनको लेके नहीं चल रहा हूं। ऐसी थ्योरीज भी है कि बहन के साथ मुसलमानों ने अपने साइंटिस्ट तैयार कर रखे हैं कि हां बहन के साथ विवाह हो सकता है। एक ही घर में विवाह हो सकता है। लेकिन जो साइंटिस्ट वो तैयार कर रहे हैं वो डिस्रूव्ड है। मैंने मैंने वो पढ़ा है लेकिन कौन अप्रूव करता है उन्हें?
01:03:14:26 अगर वह जो कह रहे हैं वो एक्चुअल में मतलब एक्चुअल मैंने आपको मैंने आपको इस संबंध में कई प्रकार से संतुष्ट कर दिया है। कई प्रकार से मैंने आपको बताया है। मैंने आपको सीधे-सीधे बताया कि साइंस के नियम बदलते हैं। बहुत सारे नियम है जो बदले और साइंस ये कहती भी है कि अब आपने खुद कहा कि ऐसा नहीं होगा या साइंस कभी नहीं कहती। अब आप कह रहे हैं कि मैंने आपको एक साइंटिस्ट दिया है। आप मुझे अभी बता रहे थे कि ऐसा नहीं होगा। साइंस कभी नहीं कहती कि अब आगे ऐसा दूसरी थ्योरी नहीं आएगी। फिर आप अपनी ही बात को काट करके मुझे एक साइंटिस्ट का वो प्रमाण दे रहे हो कि एक साइंटिस्ट है जिसने ये कहा है कि आगे ऐसा नहीं होगा। तो यानी साइंस ये कहती है कि ऐसा नहीं होगा। नहीं मैंने मैंने मैंने जो मैंने यह कहा है कि जो साइंटिस्ट ने दिया था उसमें यह लिखा था कि जो कजिन मैरिजेस हो रहे हैं या फिर जो आपस के फैमिली में मैरिजेस हो रहे हैं वो मतलब डिसएडवांटेजेस मतलब उससे हेल्थ डिग्रेड हो सकता है। भाई तो ये तो आपने शुरू में भी कह दिया था। तो ये तो वही वाली बात हो गई कि अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए आप जो चीज पहले से सबको मालूम है उसी चीज को और आप डेकोरेट करके बता रहे हो। पूछा यह जा रहा है कि किसी ने यह कहा है क्या कि आगे ऐसा नहीं होगा?
01:04:30:09 आप बता रहे हो कई साइंटिस्ट ऐसे हैं जिसने यह कहा है कि ऐसा नहीं होना चाहिए। इन दोनों बातों में अंतर है। हां मतलब साइंस तो ऐसा आप मेरी एक बात से मुकर रहे हैं। जवाब देने से पीछे हट रहे हैं कि यदि साइंस अपने नियमों के ठीक विपरीत बात कह देती है। कई बार उसकी नई-नई रिसर्चेस आती है। जेनेटिक्स पे वो काम करते हैं तो कई बार ऐसा होता है। उसने पहले जो नियम दिया था उसके ठीक विपरीत वो दे देते हैं। तो मैं आपसे पूछ रहा हूं कि यदि साइंस ने यह कह दिया कि बहन के साथ रमण करने में कोई आपत्ति नहीं है तो आपकी नजर आपकी बहन को लेकर के बदल जाएगी या वही रहेगी जो आज है? जब साइंस ऐसा मेरा मेरा कहने का मतलब ये है जब आप अगर ऐसा कोई रिजल्ट मेरा मैं मैं जो कहने की कोशिश कर रहा हूं वो आप थोड़ा समझने की कोशिश करिए। रीजन मैं आपको दे रहा हूं ना साइंस साइंस बदलती है ये रीजन है साइंस बदलती है ना साइंस की थ्योरी बदलती है ना साइंस यानी कि आप आप ये कह रहे हो ये थ्योरी नहीं बदलेगी नहीं मैं ये नहीं कह रहा हूं कि ये थ्योरी नहीं बदलेगी लेकिन तो फिर ये मान लो फिर
01:05:45:15 उस चीज को सपोज करके आप मुझे जवाब दो नहीं नहीं बात तो सुनने की कोशिश करिए मैं क्या कहने की कोशिश कर रहा हूं जब जब साइन जब मान जब साइंस एक अलग थ्योरी देती है तो उसके पीछे का जो रीजन होता है वो पूरा अलग हो जाता है। इस अरे मेरे भाई तो मैं कह तो रहा हूं जो रीजन होता है अलग हो जाता है। मैं आपकी बात समझ रहा हूं। मैं कह रहा हूं या तो आप ये डिक्लेअ करिए कि साइंस इस बारे में नई थ्योरी नहीं देगी। या फिर मेरा जो सपोज किया हुआ बात है उस पर आप अपना जवाब दीजिए। या तो ये बोल दीजिए इस पर नहीं देगी। अगर दे सकती है तो उस बात पर अपना जवाब दीजिए। उस बात को मानते हुए सुनिए जो आप देखिए मेरे पास इतना समय नहीं है। आप अगर बचने की कोशिश करेंगे सवाल से भागने की कोशिश करेंगे तो मैं उस पर पकड़े रहूंगा और जो अच्छी अच्छे अच्छा जो डिस्कशन हो सकता होगा आगे वो रुक जाएगा। इसलिए आप अपने इस चीज को क्लियर करिए। या तो आप यह कहिए यहां पे कि साइंस इस बारे में अपनी थ्योरी नहीं बदलेगी। तो आप जवाब ना दे अच्छा है कोई बात नहीं सुनिए तो आप डिक्लेअ करिए आप तो साइंटिस्ट खुद बन जाइए खुद साइंस बन जाइए और ये कह दीजिए नहीं बदलेगी और या फिर
01:07:00:24 अगर बदल सकती है तो फिर आप अपना वो स्टैंड बताइए कि आप बहन को लेकर के आपकी दृष्टिकोण क्या होगा? आप मुझे बोलने देंगे। थोड़ा मैं बोल सकता हूं। मैं बोलने दूंगा। देखिए आप अगर इधर उधर भागेंगे पॉइंट की बात नहीं करेंगे तो फिर मैं आपको इंटरप्ट करूंगा। इसलिए आप पॉइंट की बात पूरा पॉइंट रहिए। मैं यह कहने की कोशिश कर मैं यह कहने की कोशिश कर रहा हूं। आपने अभी कहा कि साइंस अगर ऐसा कहती है तो मेरा इस चीज में सवाल होगा कि जब साइंस ऐसा कहेगी इसका मतलब ये होगा कि मान लीजिए एक मां अपने बच्चे को पैदा कर रही है तो बच्चे का जो डीएनए है वो मां के डीएनए से मिलता ही नहीं है। तब आप ऐसा ऐसा पॉसिबल है? बताइए।
01:07:44:19 आप मान लीजिए चलिए अब इसमें इसमें थोड़ा जाते हैं। आपका कहना है कि मां के साथ रमण ना करने की बात साइंस इसलिए कहती है कि मां के साथ उसका डीएनए मैच करता है। हां मतलब प्रूफ होता है। हां एक मिनट अगर इस पर ही चोट कर दी जाए कि जिसके साथ डीएनए मैच होगा उसके साथ रमण करने पर कोई दिक्कत नहीं है। अगर साइंस इस नियम को ही बदल दे तो ऐसा क्यों कोई कहेगा? ऐसा कहने से अरे भाई ऐसा इसलिए कहेगा क्योंकि साइंस के नियम खोज के अनुसार समय के अनुसार बदलते हैं। इसलिए कहेगा उसमें खोजे होती है। या तो आप आप इतनी बार इस बात को लंबा खींचने की बजाय आप ये कहिए ना मैं नहीं मानता कि इसमें जो है नियम बदलेगा। ये कहिए ना फिर। आप कह रहे हो ना ऐसा नहीं हो सकता है। आप एक मिनट आपकी बात से ही आपको जवाब दूं। आपने अभी क्या कहा कि क्या ऐसा हो सकता है किसी बच्चे का उसकी मां के साथ डीएनए मैच ना करे आपने ये कहा ना तो इसका मतलब आप ये मानते हो क्योंकि किसी बच्चे का उसकी मां के साथ डीएनए मैच नहीं कर ना करे ऐसा पॉसिबल नहीं है इसलिए ये पॉसिबल नहीं है कि कल को ये थ्योरी बदल जाए हां वही कहने की कोशिश कर हां तो यानी
01:08:59:27 कि मैं नहीं मानता कि इस मामले में साइंस की थ्योरी बदलेगी हां तो ये क्यों नहीं बोल रहे इतनी देर से मैं मैं एक्चुअल में वही बोलने की कोशिश कर रहा था। सुनिए सर एक अरे भाई कहां बोल रहे हो तुम? अब एक घंटा हो गया आपको। आप कहां बोल रहे हो? सुनिए। अच्छा सुनो। अब मैं आपकी बात समझ गया। अब मैं आपकी बात समझ गया। आपने डिक्लेअ कर दिया कि इस मामले में साइंस की थ्योरी नहीं बदलेगी। नहीं। नहीं भाई। ये आपकी बात क्यों मानी जाए? किसी साइंटिस्ट ने ऐसा कहा है। पहले तो ये बात आएगी। हां इसका इसका रीजन है कि क्यों ऐसा माना जाए क्योंकि जब क्योंकि जब भी जब जब दो इंडिविजुअल के बीच में मतलब बच्चा पैदा करते हैं अगर उन दोनों के डीएनए सीक्वेंस जो है वो सेम है और वो बच्चा भाई मैं आपसे ये पूछ रहा हूं मुझे ये बताइए क्या किसी साइंटिस्ट ने ये माना है इसमें नई थ्योरी नहीं आ सकती हां इसमें सब जितने भी साइंटिफिक जर्नल है और साइंटिफिक कम्युनिटी है। उन्होंने इस चीज को माना है कि इसमें नहीं हो सकता। नहीं थ्योरी नहीं आ सकती। नहीं नहीं बात को घुमाइए मत। नहीं नहीं इस नियम
01:10:15:06 के विपरीत नहीं आ सकती। वो बताइए कहां कहां है? आप 12वीं कक्षा की बायोलॉजी बुक ले लीजिए। आप 11वीं कक्षा की बायोलॉजी बुक ले लीजिए। आप दिखाइए। आपके पास बुक है। दिखाइए। अभी नहीं अभी तो नहीं है। लिखा है ना इसमें नई थ्योरी नहीं आएगी। नहीं क्या लिखा है? उसमें ये लिखा है कि जो भी मतलब जब भी एक फैमिली मेंबर के बीच में दूसरे फैमिली मेंबर्स के बीच में विवाह होगा उससे जो बच्चे उत्पन्न होंगे वो अरे मेरे भाई मैं इसके बैड रिजल्ट्स की बात नहीं कर रहा हूं। ये लिखा है क्या इसमें नई थ्योरी नहीं आएगी?
01:11:02:09 ऐसे तो मतलब आप जो कह रहे हैं वैसा तो नहीं भाई सुनो सुनो बहुत सारी साइंस की किसी समय की किताबें होंगी जिसमें लिखा होगा कि अमुक अमुक लालाज बीमारी है इसका कोई इलाज नहीं है इसका मतलब ये नहीं कि आज की डेट में इलाज नहीं है। तो उस समय की साहित्य की किताब के अनुसार वह चीज तो सही थी मगर उसके बाद वो इलाज आ गया उन बीमारियों का। इसका अर्थ है कि अगर कहीं पर किसी चीज का खंडन हो रहा है तो उससे ये सिद्ध नहीं होता है कि आगे भी नहीं होगा। ऐसे ये चीज पॉसिबल आगे भी नहीं है। या तो उसमें डिक्लेअ करो आप।
01:11:42:26 अरे लेकिन आप जैसा कह रहे आप इस विषय में अपनी तैयारी पूरी करके आइए। कि यह थ्योरी बदली नहीं जा सकती है। आगे आप लेकर के आइए। ठीक है? अब मैं आपसे पूछ रहा हूं आपके पास आज की डेट में कोई पक्का आधार नहीं है बहन को बहन मानने का। समझ गए? हां। और आप जो बहन को बहन मानते हैं वो इसी कारण से मानते हैं क्योंकि आपके माता-पिता ने आपको बताया कि ये बहन है बेटा। इसकी ओर दृष्टि मत डालना। और उसके बाद आपको अपनी इन भावनाओं जो आपको माता-पिता से सिखाई गई है इनको सपोर्ट देने वाली थ्योरी भी साइंस में मिल जाती है। जिससे यह सिद्ध होता है कि हमारे धर्म ने जो हमारे नियम बताए हैं वो कहीं ना कहीं हमारे फायदे के लिए ही बताए होते हैं। हमारे लिए अच्छे फलदायक ही होते हैं। परंतु पूरी तरीके से साइंस को प्रमाण नहीं माना जा सकता। क्योंकि साइंस में क्या है? साइंस पहली बात तो कोई एक निश्चित नियमावली नहीं है। एक साइंटिस्ट कुछ कहेगा, दूसरा साइंटिस्ट कुछ कहेगा। इसके अलावा वो आए दिन खुद ही एक ही साइंटिस्ट अपनीप चीजों को स्टेटमेंट को बदल देता है। पहले मैंने ये देखा था। अब मैं यह महसूस कर रहा हूं। तो इसलिए उसके ऊपर हम डिपेंड नहीं हो सकते।
01:12:57:27 यह हमारे लिए अंतिम प्रमाण है। प्रमाण हमारे लिए कुछ और है। उसको समझने के लिए हम साइंस का उपयोग ले सकते हैं। कहीं-क पे हम साइंस की बातों से समझ पाते हैं। ये सिद्धांत धर्म का क्यों दिया गया? पहली बात। अब ये बताइए अब सच्चिदानंद पर आ जाते हैं। मैं एक प्रश्न पूछना चाहता हूं इसके ऊपर। बोलिए। तब आप क्या करेंगे? जब साइंस के जो नियम है वह आपके रिलजन के नियम से पूरे विपरीत जाते हैं। अगर वो मेरे उदाहरण दे सकता हूं। हां
01:13:38:21 आप आप मनुस्मृति को मानते हैं ना? अरे भाई मैं आपको बता दे रहा हूं ना साइंस के नियम जहां पर हमारे रिलीजन के नियम से विपरीत जाएंगे तो हम अपने रिलीजन को फॉलो करेंगे। मैं मैं उसका एक उदाहरण देना चाहूंगा। हम्म बोलिए। उदाहरण क्यों दे रहे हैं? मैंने आपको जवाब दे तो दिया। बात यह है आप समझ नहीं रहे हो। आप मनुस्मृति खोलोगे मनुस्मृति में हम आपको उसको उसकी व्याख्या फिर खुल जाएगी। फिर एक घंटा हो जाएगा। अब मैं आपको सच्चिदानंद पर लाना चाहता हूं। फिर मनुस्मति की चर्चा पे एक घंटा हो जाएगा। समझो मेरी बात को। आपकी बात का जवाब मैंने दे दिया। अगर साइंस हमारे धर्म के ठीक विपरीत जाएगी तो हम अपने धर्म को प्राथमिकता देंगे। साइंस को नहीं देंगे। भले ही वो मतलब फ्यूचर मतलब इन जनरल वो डेट्रिमेंटल होगा आपके लिए फिर भी आप रिलजन को मानेंगे। डेट्रिमेंटल का हिंदी अर्थ क्या है? मतलब हानिकारक होगा। हानिकारक होना सिद्ध करना होगा आपको। जिस तरह से आपने अभी एक दिया कि मुसलमानों जो है फर्स्ट कजिन मैरिज करते हैं क्योंकि उनके रिलजन में ऐसा लिखा हुआ है। लेकिन ये जो है मतलब हानिकारक है और मतलब ये हानिकारक
01:14:54:02 है। ये सिद्ध है। तो उसी तरह से तो इस कारण एक व्यक्ति को अपने रिलजन से नहीं मतलब बिलीव करना चाहिए और साइंस से बिलीव करके अपने कजिन से मैरिज नहीं करनी चाहिए। साइंस पे बिलीव करके अपने कजिन से मैरिज नहीं करनी चाहिए। नहीं मतलब जो उसके अंदर ह्यूमन इंस्टिट आ रहा है इनबिल्ट वो इच्छा ले पैदा हो रहा है तो उसको बाहरी दबाव की आवश्यकता ही नहीं होनी चाहिए। तो फिर वहां पर वो कैसे अलव किया गया कि बहुत अच्छा है चचेरी बहन से विवाह कर लो। वहां तो साइंस को पढ़ने की भी आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। यदि वो इनबिल्ट है। मैंने आपको उदाहरण दिया। जैसे मैं लोहा नहीं खा सकता हूं तो मेरे अंदर लोहे को खाने की कोई इच्छा नहीं है। मेरे अंदर इनबिल्ट नहीं है कि मैं लोहा खाऊं।
01:15:43:01 हां। तो मैं यहां पर ये कह रहा हूं। ठीक है। अब बात करते हैं सच्चिदानंद की। हां। आपने वो वीडियो सुना है कि नहीं सुना है? हां मैंने सुना है। हम तो आप अपना पक्ष रख ही फिर सुना है तो। [संगीत] उस आप मुझे करेक्ट करिएगा अगर मैं कुछ गलत कह रहा हूं। आपने ये कहा था कि मनुष्य में एक चाह होती है जीने के लिए और उनकी एक सर्टन क्यूरोसिटी होती है, जिज्ञासा होती है और मतलब सच्चिदानंद जो क्वालिटीज है वो हम में होती है। जिस तरह से एक आदमी के भूख लगने का प्रमाण है कि खाद्य एक्सिस्ट करता है। फूड एक्सिस्ट करते हैं। और एक आदमी को प्यास लगती है क्योंकि वाटर एक्सिस्ट करता है। उसी तरह से हमारे अंदर जो सच्चिदानंद गुण है यह इस बात का प्रमाण है कि जो भगवान है वो एक्सिस्ट करते हैं।
01:16:45:27 हम यही आपका मतलब तर्क था ना हां आप देखिए देखिए नास्तिकों में और आस्तिकों में सबसे बड़ी एक दिक्कत क्या है? जो बीच में वैचारिक मतभेद आ रहा है वह इस कारण से आ रहा है कि जब आप आस्तिकों को काउंटर करते हैं तो आप यह ध्यान नहीं देते कि आप क्या सोचते हो कि ये ब्रह्मा जी है कमल पर बैठे हुए हैं। मैं नहीं मानता कि ऐसा कोई है। या ये विष्णु जी हैं। ये गरुड़ की सवारी कर रहे हैं। मैं नहीं मानता कि ऐसा कोई है। या आपने जिस भी रूप में जिसके द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर को देखा हो। है ना? आप कभी ये नहीं समझने का प्रयास करते हैं कि अंततः अंतो अंतत गत्वा इन्होंने ईश्वर कहा किसे है। अंततो गत्वा इन्होंने ईश्वर उसे ही कहा है जहां जिसको हम लोग खोज रहे हैं।
01:17:47:15 सारी लड़ाई खत्म हो जाए। आप ध्यान ही नहीं दे रहे हो। ईश्वर हम किसको कह रहे हैं? सच्चिदानंद स्वरूप को कह रहे हैं। सच्चिदानंद देने वाले को ईश्वर नहीं कह रहे हैं। सच्चिदानंद स्वरूप को कह रहे हैं। आपकी फोटो फ्रीज हो गई है क्या? नहीं दिखाई दे रहा है। नहीं मुझे तो फ्रीज दिख रही है आपकी फोटो। अह एक मिनट। [संगीत] जी
01:18:28:12 हेलो हां आप क्या तो सबसे बड़ी पहली प्रॉब्लम ये है कि आप जो नास्तिक होते हैं वो ऊपरी तौर तौर पर सतह लेवल पर यह सोचते हैं कि भाई ऐसा कोई नहीं हो सकता। यहां कोई नहीं बैठ सकता। यह है वह है। आप यह ध्यान नहीं देते हैं कि अंतत गतवा हमने ईश्वर कहा किसे है? हमने ईश्वर सच्चिदानंद स्वरूप को कहा है। यानी उस स्टेज को कहा है जिस स्टेज को हम पाना चाहते हैं। मुक्ति का नाम ही ईश्वर है। मुक्ति स्वरूप ईश्वर है। ज्ञान स्वरूप ईश्वर है। सच्चिदानंद स्वरूप ईश्वर है। अब यदि बात यह आती है कि क्या आप मुक्ति को मानते हैं कि नहीं? मुक्त हो जाना मानते हैं कि नहीं कि मैं मुक्त हो जाऊं। अगर नहीं मानते हैं तो फिर ये इच्छा आपके अंदर क्यों आ रही है कि मैं मुक्त हो जाऊं। और अगर आप इच्छा होते हुए भी यह कहेंगे कि मेरे इच्छा होने से ये सिद्ध नहीं होता कि वो उसका कोई अस्तित्व है। तो फिर ऐसे में भी आप मूर्मति सिद्ध होंगे। भाई क्योंकि मैं जाना तो चाहता हूं वहां पर पर वो जगह नहीं है तो आप
01:19:43:13 वहां पर भी आपकी बात ही खंडित होगी। तो इसको आप थोड़ा क्लियर करिए। मेरा कहने कहने का मतलब ये था कि अगर एक मनुष्य की बस चाह है तो इससे इस बात से साबित नहीं हो सकता कि वो चीज सच में एक्सिस्ट करती है। मैं यह कहने की कोशिश कर रहा था। ऐसी कौन सी चाह है जिसका विषय ना हो? बताइए। मान लीजिए एक मनुष्य की चाह हो सकती है कि वो उड़ना चाहता है। लेकिन इसका मतलब ये तो नहीं कि उनके पंख होंगे। उस चाह के बिना आप आराम से जी सकते हैं या नहीं? उड़ने वाली चाह के बिना। हां जी सकते हैं। मरने ना मरने की चाह को आप छोड़ के जी पा रहे हैं। आप आज की डेट में उड़ नहीं पा रहे हैं। आपको दुख हो रहा है क्या? नहीं नहीं हो रहा है। नहीं हो रहा है। जब मौत की बात आएगी मरने की विचार तक आएगा। दुख होगा कि नहीं होगा? हां हां होगा। होगा। इसका मतलब यह वह चाह है जिसको आप छोड़ नहीं सकते। उन चाहों को जिनसे आप इसका कंपैरिजन
01:20:58:14 कर रहे हैं उनको आप छोड़ सकते हैं। वो आपके द्वारा बनाई गई चाह है। ये इनबिल्ट चाह है। इसको इससे अपने आप को अलग करके बताइए ना। तो वही मैंने कहा ना वही मैंने कहा ना। अभी इनबिल्ट से अलग करने की बात ही तो कर रहा था। क्यों नहीं कर पा रहे हो अलग? अलग कर दो इस चाह से। इस चाह के बिना आप दुखी ना हो। मौत का ख्याल आने पर आपको दुख नहीं होना चाहिए। उससे भागो मत। तो कोई दिक्कत नहीं है। फिर मान लिया जाएगा। मगर आपको तो दुख है। अभी आपकी ओर मैं आप बन जाओ बहुत बड़े नास्तिक। मैं नहीं मानता कि दुनिया में कोई सत्य है। मैं नहीं मानता दुनिया में कोई अमृत्व को प्राप्त है या मैं अमृत्व को प्राप्त कर सकता हूं। तो पहली बात तो वो अलग काउंटर है कि जब आप अमरत्व है ही नहीं। इस दुनिया में आप मान ही नहीं रहे हो तो क्यों चाह रहे हो कि मैं अमृत को पा लूं। मगर दूसरी बात यह है कि आप नाश्ते को आप अमृत को नहीं मानते हो। आप 200 साल की आयु में भी जब आपके पिताजी आपके माता बीमार पड़ेंगे तो आप उनको हॉस्पिटल भेजोगे बच जाए। क्यों? मरने दो ना। क्यों भाग रहे हो मौत से?
01:22:08:14 लेकिन यह जो हम ये जो हमारा आप जो कह रहे हैं इस चीज को ले कह रहे हैं कि ये भगवान का आपने जो अभी एक उदाहरण दिया है वो मैंने काट दिया। उदाहरण आपने दिया था ऐसी चाह का जो आप अपने से अलग कर सकते हो। आप उसका कंपैरिजन उस चाह से नहीं कर सकते जिससे आप अपने आप को अलग नहीं कर सकते। आप ऐसा उदाहरण दीजिए उस चाह का जिसका विषय भी ना हो और जिसको जिससे आप अपने आप को अलग भी ना कर पा रहे हो। ऐसा उदाहरण दीजिए।
01:22:42:04 एक जो मनुष्य मनुष्य की एक ऐसी चाह है कि वो एक ऐसा मशीन बनाए जिससे जितने भी एनर्जी आप उसको दे रहे हैं वो कभी वेस्ट ना जाए। इसको परपेचुअल मशीन कहते हैं। मतलब मान लीजिए अगर आप गाड़ी चला रहे हैं तो उसमें से कितना जो एनर्जी है वह वेस्ट हो जाता है। उनका मनुष्य की इस चीज की एक इच्छा है कि वो एक ऐसे मशीन को बनाए जिससे कोई भी एनर्जी वेस्ट ना जाए जिससे बहुत सारे क्राइसिस जो है वो सॉल्व हो सकते हैं। और ये मनुष्य की चाह है करने की। लेकिन इवन दो वो चाहता है जिससे बहुत सारे इंप्रूवमेंट हो सकते हैं। वैसा हो नहीं पा रहा है क्योंकि मतलब जो भौतिक विज्ञान के नियम है वो उसके अगेंस्ट चला जा रहा है। तो उसका दुख हो रहा है क्या? हां हो रहा है। कहां हो रहा है? उसके बिना तो आप आराम से रह रहे हो। कहां रो रहे हो? मौत का विचार आते ही आपको वहां से जिस चीज का अस्तित्व नहीं है ना उसके ना होने की स्थिति का बोध होते ही आपको दुख होगा। यहां पर आप काम चला ले रहे हो। ठीक है? कोई दिक्कत नहीं है। मगर मौत का ख्याल आते ही आपको दुख हो रहा है। माता-पिता के मरने की घड़ी नजदीक आते ही आपको दुख हो रहा है।
01:23:57:27 और आपकी बात बता दूं साइंटिस्ट हर वक्त क्या करने की जुगाड़ में है आविष्कार के द्वारा? बताइए। कौन सा ऐसा आविष्कार होगा जिसको करने के बाद साइंटिस्ट आराम से बैठ जाएंगे कि अब मुझे कोई आविष्कार नहीं करना है। बताइए कैसा आविष्कार हो सकता है? ऐसे आविष्कार के बारे में तो अभी ज्ञान नहीं है। नहीं नहीं अगर ऐसा आप जो पूछ रहे हैं कि मतलब साइंस का कोई लिमिट है या नहीं? मतलब इतने देर तक पढ़ेंगे उसके बाद और मतलब खत्म हो जाए। ये आप कहने की कोशिश कर रहे हैं ना। मैं ये कह रहा हूं कि वो कौन सा आविष्कार होगा जिसके बाद साइंटिस्ट ये कह दे कि इसके बाद अब मुझे कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं। कुछ है? कुछ हो सकती है? हां है मतलब एक ऐसी इस चीज को थ्योरी ऑफ एवरीथिंग कहते हैं जिसमें हम ऐसा इक्वेशन निकालेंगे गणित निकालेंगे जिससे ब्रह्मांड में होने वाले सारे मतलब जो भी काम है क्रिया कर्म है जो भी प्रोसेससेस है उन सबको हम एक ही इक्वेशन में समझ सकते हैं। तो अगर कुल मिलाकर के कुल मिलाकर के अगर मेरी भाषा में साधारण भाषा में कहें
01:25:13:18 तो साइंटिस्ट की खोज जाके खत्म कहां पर होती है? सच्चिदानंद पर ही होती है। सर्वशक्तिमान सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर पर। क्यों? मान लीजिए कि वो ऐसा चाहता है। कुल मिलाकर के ये सारी खोज जो समाप्त होगी ना जाकर के वो होगी कि वो कुछ ऐसा बना ले, ऐसा पा ले, ऐसे हो जाए कि वह जो चाहे जिस घड़ी जिस क्षण वैसा ही हो जाएगा। समझ गए ना? वो जो चाहे अब मेरे पंख आ जाए तो मैं पंख से उड़ लूं। अब मैं वो आप कौन सी मैं कौन सी मशीन बता रहे थे आप अभी? जिसमें परपेचुअल मशीन मतलब जितना एनर्जी हम देंगे उतना ही एनर्जी का वो काम करेगा और कोई वेस्टेज नहीं होगा। हां तो मेरे अनुसार ऐसी मशीन बन जाए। मैं एक सेकंड के अंदर यहां से वहां हो जाऊं। ट्रांसमिट हो जाऊं बल्कि उससे भी कम समय में। तो ये सारी चीजें अगर कहीं किसी दिन उसने प्राप्त कर ली कि जो मैं चाहूं वो हो जाए। जो मैं चाहूं वो हो जाए। अगर उसने प्राप्त कर ली तो उसी दिन उसको चैन मिलेगा।
01:26:29:03 इसी को मुक्ति कहते हैं। इसी को ईश्वर कहते हैं। तो कुल मिलाकर के जो आपकी जो दौड़ है वह उसी ओर तो जा रही है जिस ओर हम जा रहे हैं। बस आप में और हम में एक अंतर है कि आप जहां जा रहे हैं आप खुद ही कह रहे हैं वो है नहीं और हम जहां जा रहे हैं हम कह रहे हैं वो है। मैंने आपसे पूछा कि ऐसी इनबिल्ट इच्छा बताइए जिसका अस्तित्व भी ना हो और जिसके बिना वो जी ना पा रहा हो। जैसे भोजन इनबिल्ट इच्छा है। भोजन के बिना जीने में दिक्कत है उसे ईश्वर को इंसान को मनुष्य को सॉरी
01:27:06:16 आपने बताया एक मशीन एक मशीन है नहीं है तो भी हम लोग आराम से जी रहे हैं। दुखी हो रहे हैं। मगर मैं बता दूंगा ये मर रहा है तो आप दुखी होंगे। उस समय आप मौत के साथ जीना नहीं चाहते हैं। आप अपने परिजनों के लिए कह सकते हैं वो कम मरेंगे आपको दुख नहीं होगा। माता-पिता कम मरेंगे तो आपको दुख ना होगा। मान मान लीजिए अगर वो एक ऐसी स्थिति में है जिसमें वो बीमार है और तड़प-तड़प के जी रहे हैं तो तब मृत्यु मिलना ज्यादा आसान होगा। ज्यादा देन लिविंग तड़प तड़प के जीने से ज्यादा अच्छी बात है। तो वो जो तड़प रहे हैं आप कौन सी एज होगी जब यह मान लेंगे कि इस में उनको दुख हो तो मुझे दुख ना हो बताइए नहीं दुख दुख तो जिसकी ऐ में होगा तो हमें भी दुख ही लगेगा हम इसका मतलब आप उसके बिना चैन से नहीं रह पा रहे हैं नहीं हम मगर इसके बिना आप चैन से रह रहे हैं जब आएगी तब आएगी अभी मूवी देखने जाना है अभी सैद सपाटा करना है तो इसका मतलब ये आपकी इनबिल्ट इच्छा नहीं है। इनबिल्ट इच्छा के मूल में ये
01:28:21:18 है सब कुछ कर सकने वाला। ठीक है? मगर इनबिल्ट इच्छा नहीं है। और सुनिए सब कुछ कर सकने वाली इच्छा क्या होती है मालूम है? जिसके बाद आपकी कोई इच्छा बाकी ना रह जाए। शेष ना रह जाए। वो इच्छा सच्चिदानंद है। जैसे आपने कहा ना कि ये मशीन के बिना भी हम रह सकते हैं। मशीन बन भी जाएगी उसके बाद भी आपकी कई इच्छाएं शेष रह जाएंगी। मगर सच्चिदानंद वो है वो इच्छा है जिसके बाद आपकी कोई भी इच्छा शेष नहीं रह जाती। कंप्लीट उसी को साइंटिफिक लैंग्वेज में आप अविष्कार मान लो। उसी को साइंटिफिक लैंग्वेज में हम ईश्वर कहते हैं। मुक्ति कहते हैं। मोक्ष कहते हैं। ज्ञान स्वरूप सच्चिदानंद स्वरूप परमात्मा
01:29:09:13 आई होप कि आप मेरी बात कुछ समझ पा रहे हैं। हां समझ पा रहे हैं। हम सच का अर्थ क्या है? सच्चिदानंद तीन भाग में डिवाइडेड है ना। आपस में एक दूसरे का ही रूपांतरित वर्णन है व्यवहार के भेद से। बाकी सब एक ही है। सत का मतलब कि सत स्वरूप हो जाना। अपना जो एक्सिस्टेंस है अपना जो अस्तित्व है वह सत हो जाना मैं कभी मर नहीं सकता नैन चिनती शस्त्राण नैनती पावका ना चैन क्ले मारता सत स्वरूप हो जाना मुझे कुछ नहीं हो सकता मैं जैसा हूं वैसा ही रहूंगा ये सत स्वरूप है अब सत स्वरूप में ही सुख भी है मेरा सुख वैसा ही रहे जैसा है मेरे बाल कभी झड़े नहीं मेरे कभी झुर्रिया ना आए मेरे माता पिता सदैव सुखी रहे ये क्या है अनंत आनंद की भूख
01:30:08:02 और कुछ ना जान ना जानने के विषय का दुख भी मुझे ना हो कि मैं समथिंग समथिंग नहीं जानता हूं तो उसकी कमी अभाव ना हो मुझे अभाव मुक्त हो जाना किसी भी प्रकार का इतना सा भी किसी प्रकार का अभाव ना हो उसको कहते हैं पूर्ण और उसी को कहते हैं हम परमेश्वर फिर उसके बाद वो दूसरी चीजें है कि वो अवतार कैसे लेता है उसका रूप होता है ये है वो है फिर वो उसके अवतार लेने के विषय में ना मानने के विषय में उसका सच्चिदानंद स्वरूप होना खंडित हो जाने के विषय में फिर विभिन्न थ्योरीज में आपस में टकराव होता है। मगर मूल यही है कि सच्चिदानंद के बिना आप भी खुश नहीं है। आप भी अंतत गतवा सच्चिदानंद पर ही डिपेंड है। आपने कहा ना डिपेंड होना चाहते हैं। तो डिपेंड में जब अंतत गतवा डिपेंड होते चले जाए तो अंत में जो डिपेंड जिस पर होते हैं जो प्रारंभिक बिंदु है उसी का नाम ईश्वर जिस पर सब कुछ आधारित और जहां पर जाकर के आपकी सारी चिंताएं भगवत गीता में क्या कहा गया जैसे आप साइंस की बात करते हैं मैं इसको भगवत गीता से इसका उत्तर दूं वो ज्ञान जिसके बाद कुछ और जानना बाकी नहीं रह जाता
01:31:23:27 उसका उसका नाम ईश्वर है। उसका नाम मोक्ष है। तो आप साइंस के जरिए जाना वही चाह रहे हैं। मगर बस इतनी सी बात है। आप जब ये कह देते हैं कि वो है ही नहीं तो आपको पागल कहा जाएगा। मैं जा रहा हूं वो नरसिम्हा मूवी आई है देखने। पर नरसिम्हा मूवी तो एक्सिस्ट ही नहीं करती। मॉल तो एक्सिस्ट ही नहीं करता। कहां जाओगे तुम? नहीं मैं जा रहा हूं। कहां जा रहे हो? कि फलानी मूवी देखने। मूवी है नहीं मूवी नहीं है। आपको मानना पड़ेगा ना स्वीकार करने का और सुनिए यह जो इच्छा हमारे अंदर आ रही है कैसे आती है इसको मैं आपको थोड़ा समझा देता हूं कैसे आती है
01:32:06:12 आपके अंदर अभी कोई ऐसी चीज है आपके पास जो आपको प्राप्त ना हुई हो और उस चीज का अभाव हो आप कोई भी फोन मोबाइल टीवी कैमरा कार बिल्डिंग कुछ भी हां हां है मतलब ऐसी तो बहुत सारी इच्छाएं है ऐसी तो बहुत सारी इच्छाएं होती है जो प्राप्त नहीं एक इच्छा का नाम बताइए अ एक एग्जाम में मैं चाहता था अच्छे अंक आ जाए लेकिन उतने अच्छे अंक नहीं आए
01:32:41:22 रिजल्ट हां नहीं मैं पूछ रहा हूं जैसे कोई भौतिक कोई वस्तु हो कोई मोबाइल हो जो आप लेना चाहते हो कोई कार हो आप लेना चाहते हो इस तरह कोई वस्तु है [संगीत] हां मतलब मकान अच्छा लैपटॉप आए लैपटॉप आए कौन सी कंपनी का कोई मतलब इससे अच्छी कंपनी मुझे इतना तो पता नहीं लेकिन इससे अच्छा आप देखिए आपके अंदर लैपटॉप की इच्छा कब आई जब मुझे यह पता चला कि मतलब मैंने अपने कार्य देखे कि क्या-क्या करना चाहिए उसके अनुसार देखा क्योंकि आपको पता है कि इस दुनिया में लैपटॉप है। पहली पहली बात तो यही है ना किसी चीज को प्राप्त करने की इच्छा कब आ रही है आपके अंदर? जब वो एक्सिस्ट करती है। जब वो एक्सिस्ट करती है। आपके अंदर मार्क्स को प्राप्त करने की इच्छा क्यों आई? जब मार्क्स का प्राप्त होना एकिस्ट करता है। उसी तरीके से हमारे अंदर इनबिल्ट ये सच्चिदानंद को प्राप्त करने की इच्छा क्यों आई? क्योंकि सच्चिदानंद एक्सिस्ट करता है। अब एक बात और मैं आपको बता दूं। इस चीज में मैं एक बात कहना चाहूंगा इस चीज को लेके कि आप कह
01:33:56:26 रहे हैं कि हम जो पाना चाहते हैं वो ऑलरेडी एक्सिस्ट करती है। इसलिए हम मतलब उसको पाना चाहते हैं। लैपटॉप एक्सिस्ट करता है इसलिए मैं उसको पाना चाहता था। लेकिन ऐसे तो बहुत सारे उदाहरण है जो लोग चाहते थे तब एक्सिस्ट नहीं करता था। उन्होंने खुद उस चीज का निर्माण किया जिससे वो चीज आई। फॉर एग्जांपल हम चाहते थे कि वो चीज आई वो चीज आई मगर वो जो सिद्धांत था वो तो एक्सिस्ट करता था ना कि ऐसा करने से ऐसा बन जाएगा वो तो एक्सिस्ट करता था ना वो भौतिक रूप से वो चीज जो आई है सामने खड़े होकर के वो किसी ने बनाई किसी देश काल परिस्थिति में मगर वो सिद्धांत जो था किस सिद्धांत से वह बनेगा वो तो एक्सिस्ट करता था ना यानी कि उसका अस्तित्व था। सैद्धांतिक धरातल पर उसका अस्तित्व था। उस समय भी जिस समय लोग ये मानते थे कि ऐसा नहीं है। हां। सैद्धांतिक धरातल पर उसका अस्तित्व था। अभी मैं आपको एक दूसरी बात बता रहा हूं कि
01:35:02:19 अब पहली नंबर बात हमने क्लियर कर ली कि भाई कोई चीज है दुनिया में। इसीलिए हमारे अंदर चाह आ रही है। अब दूसरी बात आती है अ हां कि जैसे लैपटॉप इस दुनिया में बन गया है। ठीक है? हमारे अंदर तभी वो चाह आ रही है। मगर हमारे अंदर ईश्वर है। ये बिना बताए भी ईश्वर की चाह है। सच्चिदानंद के रूप में। तो यह जब हमने अखबार में नहीं पढ़ा जब तक हमारे माता-पिता ने भी नहीं बताया हमको कि कोई सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर है या जब हमने ये नहीं बताया तब भी ये चाह क्यों एक्सिस्ट कर रही है इस पर अगर ध्यान देंगे तो हमारा जो संबंध है और उसे प्राप्त करने का जो आकर्षण है वो समझ में आ जाएगा।
01:35:58:21 भाई लैपटॉप कभी ना कभी किसी ने बनाया और बनाने के बाद जब आपको इंफॉर्मेशन मिली तो आज आप लैपटॉप सीधे-सीधे मांग सकते हो। कंप्यूटर मांग सकते हो। मुझे आईफोन का मोबाइल चाहिए मांग सकते हो। मगर ये सच्चिदानंद को हम जन्म से क्यों मांग रहे हैं? बच्चे को बच्चा जो नवजात होता है तो कई बार माताओं को उसके पैर को बांधना पड़ता है। किसी फीते से यह कूद ना जाए। यानी कि बच्चे के अंदर और उस समय भी बच्चा अपने आप खींचता है। रस्सी से तोड़ना चाहता है। यानी कि उस समय भी मुक्ति की चाह होती है। प्रत्येक मनुष्य में मुक्ति की चाह। उस समय भी बच्चे की ओर अगर आप पलक झपकाओ हाथ घुमाओ तो वो भी बचने का प्रयास करता है। यह चाह कहां से आई? जब आपको पता ही नहीं है, अबोध है उस समय मुक्ति की चाह कहां से आ गई आपके अंदर? तो पता चलता है क्योंकि हम उस सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर के ही अंश हैं। इसलिए वो सारे हमारे अंदर गुण है। और उनहीं गुणों के कारण हम उसकी ओर आकर्षित हैं। इनबिल्ट क्योंकि तत्वतः हम भी सच्चिदानंद
01:37:14:09 स्वरूप ही है। इसलिए हम सच्चिदानंद की ओर अंश हमेशा अपनी अंशी की ओर आकर्षित होता है वह वाली थ्योरी तो इसलिए हमारे अंदर जन्म से ही यह चाह व्याप्त होती है कि हमें उसको प्राप्त करना है और हम प्राप्त करनी कोशिश करते हैं। जी बताइए। इसमें भी मैं एक बात कहना चाहूंगा ऐसी बहुत सारी चीजें हैं जो हमें पता है कि वो कभी एक्सिस्ट कर नहीं पाएंगे लेकिन फिर भी हम चाहते हैं कि वो एक्सिस्ट करे तो तब आप क्या करेंगे? तब भी वो चाह एक्सिस्ट करती है। मैंने कहा ना उनके उस चाह के मूल में पूर्णता है। किसी भी चीज का अभाव ना होना। आप पंख वाला हाथी सोच रहे हैं। मैं पंख लग जाए उड़ जाऊं वो पॉसिबल नहीं है। उसमें भी पूर्ण हो जाने की चाह है। पूर्णता पूर्ण ना शब्द आए ना मेरी डिक्शनरी में। पूर्ण सबके मुंह में पूर्णता की चाह है। पूर्ण पूर्ण हो जाऊं। जो चाहूं जैसा चाहूं वैसा बन जाए। जो साइंटिस्ट की मैंने अभी आपको बात बताई उसमें भी तो यही था। उस चाह के मूल में भी पूर्णता है। सभी पूर्ण हो जाना चाहते हैं। सच्चिदानंद स्वरूप हो जाना चाहते हैं। अबाध्य बन जाना चाहते हैं। यहीं से ईश्वर का एकिस्ट सिद्ध होता है। फिर वो बाद की बात है कि अब हमें
01:38:29:18 क्या करना है? ईश्वर को प्राप्त कैसे करना है? तो कर्मेंद्रियों से क्या करना है? ज्ञानेंद्रियों से क्या सोचना है? यह सब फिर आगे की बात है। तो कर्मेंद्रियों से क्या हो गया कि माता और क्योंकि आपको अपने शरीर को ऐसा ऐसा रखना है तो माता और बहन से विवाह नहीं करना है। अमुक अमुक स्त्रियों से विवाह नहीं करना है। अमुक अमुक स्त्रियां ही आपके लिए ग्रह हैं। ये सारी फिर नियमावली बनती है कि आप अपने शरीर को ऐसा कैसे रख पाए कि आपकी जो कॉन्शियसनेस है उस स्तर तक जा पाए जहां पर वो मुक्ति से मिल मिलान कर पाए। मुक्ति के साथ एक ही भूत हो पाए। और यदि आप अपने कर्मेंद्र्रियों से यह हाथों का धोना, गुप्तांग को धोना, मल मूत्र के त्याग के बाद अपने शरीर को स्वच्छ रखना जिससे कि स्वच्छता की अनुभूति आपके अंदर आए। ये सब चीजें भी धर्म से आती है। सिखाई जाती है। सीखो। अब ये पवित्रता क्या है? शुद्धता और पवित्रता। शुद्धता पवित्रता वही है कि हम अपने शरीर को सर्वप्रथम साफ सुथरा रखें जिससे कि हमारे चित्त की शुद्धि हो पाए वो पाने में सहायक हो। कई लोग कहते हैं अरे माला जपने से क्या होता है? माला जपने से मिल
01:39:44:21 जाएगा। भाई क्या किसी ने केवल हाथ धो लिया तो उसको हम स्वच्छ मान ले। नहाए ना भले ही। मगर क्योंकि नहाने से ही पूरी तरह सफाई होती है। इसलिए क्या हाथ धोना बंद कर दें? तो यह सब एक दूसरे के घटक होते हैं। तो इसी तरीके से अब कोई कहे कि जो धोती नहीं पहनेगा वह क्या भक्त नहीं है? ऐसे ऐसे कुतर्क किए जाते हैं ना। धोती पहने जो तिलक नहीं लगाएगा वो क्या भक्त नहीं है? अगर मान लिया भगवान है भी तो चुटिया की क्या जरूरत है? शिख की क्या जरूरत है? ये सब एक दूसरे के पूरक घटक होते हैं। इनमें से एक भी चीज को आप हटाओगे तो आपकी जो यात्रा है वो कटना ही होगी। और इन चीजों का आप सत्य सहिष्णुता की क्रमिक अभिव्यक्ति के अनुसार जब आप प्रतिपादन करते जाएंगे, आलमन लेते जाएंगे तो आप अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते जाएंगे। सहायक है एक दूसरे के लिए। जैसे शरीर की शुद्धता में हाथ धोना भी सहायक है। मुंह का कुल्ला करना भी सहायक है। मुंह धोना भी सहायक है और नहाना भी सहायक है। है ना? उसी प्रकार से ये सब फिर नियम होते हैं। जी बताइए। यह तो फिर तो मेरा प्रश्न वही हो जाता है कि मान लीजिए ऐसी कोई चीज है जो आपके धर्म ग्रंथ में लिखी है जो असल में सहायक
01:40:59:27 नहीं है तब आप क्या करेंगे ये आप पहले सिद्ध करना होगा कि सहायक नहीं है वो आप सिद्ध करिए ना मैं एक्चुअल में मनुस्पति का एग्जांपल देना चाहता था इसी इसी कारण के लिए ये एग्जांपल ले आप किसी और दिन आइए कि हम उस डिबेट का नाम रखेंगे मनुस्मति पर सवाल ठीक है। अभी हमने धर्म अभी हमने धर्म और ब्रह्म की बात की है। अब आपको मनुस्मति में बात करनी है तो एक दिन मनुस्मति के लिए आ जाइए। बाकी मैंने आपको जो है धर्म से और ब्रह्म से समझाया कि ईश्वर है ये कैसे सिद्ध होता है और धर्म क्यों है? उसका स्त्रोत क्या है? साइंस ये कहती है क्या? झूठ मत बोलो।
01:41:48:09 नहीं ऐसा तो नहीं तो फिर झूठ बोलने में कोई दिक्कत नहीं फिर [संगीत] टू स्टॉप द ट्रेन पुल द चेंज अब मनुस्मति को लेके आइए अगली बार फिर चर्चा करेंगे आपसे ठीक है अच्छा लगा चर्चा करके और चीजें लेके आइए और थोड़े प्रश्न थे मेरे आप आप गुरु परंपरा में मानते मानते हैं ना हम मानते हैं बहुत अच्छे से मानते हैं तो आप मतलब मैं आप अपने जो टॉपिक्स है गुरु परंपरा मनुस्मृति ये सब हमें लिख के भेज दीजिए एक एक दिन करके चर्चा कर लेंगे पौने दो घंटे की चर्चा हो गई है आप किसी और पाइए मैं एक्चुअल में मैंने आपको एक वीडियो का लिंक दिया था ना जो मैं नहीं देख पाता बहुत सारे WhatsApp आते हैं मैं नहीं देख पाता बहुत विशेष जब कोई बात होती तभी देख पाता हूं। मैं मैं ये पूछना चाहता कि जो भी मतलब पुराण प्रश्न को अगली बार पूछिए अगली चर्चा में। आज धर्म और ब्रह्म की हमने सिद्धि की है। आप जो है मनुस्मति पर क्वेश्चन करिए और आप जो है इस पर क्वेश्चन करिए गुरु परंपरा।
01:43:04:02 ठीक है? अगले चलिए जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी को चर्चा अच्छी लगी होगी। क्या होता है जब बहुत सारी चीजें हो जाती है तो कई ऐसी चीजें होती है जो हमारे पास है पर याद भी नहीं रहती है स्मरण नहीं रहता है तो और फिर टॉपिक चेंज होते हैं बार-बार तो [संगीत] चीजें हैं। बाकी मैंने आपको बताया था आचार्यों से निवेदन है कि वह आपस में सौहार्दपूर्ण चर्चा कर ले एक और निर्णय दे समाज को क्योंकि जो ये अलग-अलग विपरीतार्थक जो वक्तव्य आ रहे हैं उसकी वजह से समाज में जो विप्लव की स्थितियां बनी उसमें सभी मान्य जो आचार्य गण है वह आपस में बात कर ले और तभी सार्वजनिक हो इस प्रकार की बातें क्योंकि एक और
01:44:06:19 जहां एक और हमारे पूज्य जो राघवाचार्य जी विद्या भास्कर जी आ रहे हैं। दूसरी ओर भी ज्योतिष पीठ से जुड़े राम मंदिर के लिए उन्होंने अग्रणी होकर के काफी युद्ध किया है पीएन मिश्र जी। तो ऐसी स्थिति में इस तरह का टकराव जो विधर्मी है या धर्मभासी हैं, सनातनाभाष हैं उनको ना लाभान्वित करें और हमने जबाला वाला अपना पक्ष आचार्य प्रशांत के समय दे दिया था और इसमें भी सादय ब्राह्मणों वाले में हमारा ऐसा कोई भाव नहीं है। जो भी शास्त्र और गुरु गोविंद ग्रंथ के द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत होगा वही हमारा सिद्धांत है। और
01:44:54:26 अ जो कमेंट के माध्यम से अपना उत्तर चाहते हैं जो भागवतानंद के पक्षधर उनको भागवतानंद को कम से कम सुन लेना चाहिए जो ये कह चुका है अपने कई वक्तव्यों में कि हम एक एक व्यक्ति को कमेंट के माध्यम से उत्तर देना हमारे लिए संभव नहीं और भागवत की जो एक बात है कि वो असहज स्थिति में डालता है और इसी आधार पर वो जो है वाहवाही कमाता आता है जैसे आर्य समाज कौन अरे ये तो खुद को भगवान मानते हैं। अरे ये तो शूद्रों को मंदिर में नहीं घुसने देना चाहते। ऐसी ऐसे ही प्रश्नों को ला के आचार्यों के सामने जो मंच पर बैठे हैं जिनको दुनिया सुनती है उनके सामने ऐसे ही प्रश्न रखेगा जिससे जिसके वहां पर उत्तर देने में धर्म की कहीं ना कहीं से क्षति हो सकती हो। या तो शास्त्र विरुद्ध बोल दे या फिर ऐसी बात बोल दे जो अभी बड़ा जो जन सामान्य का वर्ग है वो विरोधी हो जाए। तो इसलिए वहां पर एक गुरुदेव ने बात कही थी कि एक ही दिन में घी नहीं पिलाया जाता है। तो ऐसे प्रश्नों को जो विवाद का विषय होते हैं उन्हीं विषयों को रखता है जिससे कि आचार्यों को बोलने में असहजता हो और उस असहजता का फायदा उठाता है।
01:46:10:02 अगर मौन रह गए तो फायदा उठाया या कहीं पर कुछ वक्तव्य दिया तो उसका फायदा उठाया और ठीक है। आशा करते हैं आपको अच्छी लगी हो चर्चा। सभी को जय श्री राम। [संगीत] तो
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