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00:00:02:25 तो सभी को जय श्री राम आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और एक्साइटेड भी होंगे आज की होने वाली चर्चा के लिए आज कोई आचार्य जी आ रहे हैं यह अलंकार आर समाज की ओर से जो आर्य समाजी है ये और यह आज हमसे चर्चा करने आ रहे हैं इस विषय पर कि ईश्वर अवतार क्यों नहीं ले सकता उन्होंने से ही संपर्क किया था हमसे आज सुबह भी बात हुई और कुछ दिनों पूर्व बात हुई थी तो उन्हीं का इंतजार कर रहे तब तक अगर वो नहीं आ रहे अब तक हम लोग कुछ क्वेश्चन ले सकते हैं अगर आप लोग कोई क्वेश्चन हो तो आप पूछ सकते हैं वैसे हम लोग क्वेश्चन आंसर्स का एक वो लेकर आने वाले हैं व चालू हो जाएगा मतलब नियमित रूप से होता रहा

00:01:18:15 करेगा जय श्री राम जय श्री राम सभी को सभी छोटों को ढेर सारा प्यार और आशीर्वाद और जो बड़े हैं उनको सम्मान यथोचित अभिवादन [संगीत] और जो समकक्ष है उनका भी यथोचित अभिवादन आर समाज अमर रहे बिल्कुल उसमें सुधार हो जाए वह जैसा है वैसा ही रहे जो गलत शिक्षाएं हैं सनातन परंपरा विरुद्ध

00:02:00:14 वो जो है बदल दी जाए और वो अमर रहे भी यही प्रार्थना करते हैं जय श्री राम जय श्री राम और एक प्रश्न देखा था मैंने बलात्कारी ईश्वर को बलात्कारी बोलना ईश्वर को बलात्कारी बोलना गलत है हां ईश्वर को बलात्कारी बोलना गलत है य बात सही है नहीं बोलना चाहिए ईश्वर सर्व सामर्थ्य वान है उसको असाम वान बोलना भी गलत है

00:02:52:13 और सब कुछ करने वाला होते हुए भी ईश्वर पर कोई दोष नहीं लगता है क्योंकि ईश्वर को सब कुछ करते हुए भी किसी भी कर्म के फल में आसक्ति नहीं होती है वो फ्री है तो इसलिए उस पर कोई दोष नहीं लगता है क्या हो रहा है ऑटोमेटिक बारबार स्टोरी जो है डाउन हो जा रही है ईश्वर को जल्दी देखने के लिए क्या कर सकते हैं ईश्वर की भक्ति ईश्वर की कृपा से ही उनकी उनका सी को प्राप्त होते हैं और भक्ति भी कृपा से ही आती है तो ईश्वर की भक्ति करिए जितना हो सके ईश्वर जल्दी ही दिखते हैं वैसे तो दो तीन दिन भी आपने अगर मन से भक्ति की

00:03:55:00 तो हां जी नेटवर्क इशू नहीं है यहां पर कोई भी और वाईफाई वगैरह भी ऑन है तो उन्हें आने में विलंब क्यों हो रहा है मैं नहीं अभी बता सकता प्रशांत जी के साथ चर्चा हो सकती है मगर वह इतने सुलभ नहीं है कोई हमारी उनसे वार्ता सुनिश्चित करवा देगा तो अवश्य ही समय निकालेंगे इतना सुलभ नहीं है और कुछ लोग कहते हैं कि सीधे उन्हीं से जाकर करो इनसे क्यों कर रहे हो तो ये लोग उनका प्रचार क्यों कर रहे हैं जो भाई प्रचार करने निकलोगे तो आपसे पूछा जाएगा ना एक मिनट जरा सेटिंग्स ठीक कर लू मैं मोइल

00:04:49:02 के पले वैदिक मंत्रों के अनेक अर्थ हो सकते हैं पर हमें कौन सा अर्थ लेना है यह परंपरा से पता चलेगा और समाज जी अपना अर्थ करते हैं ऐसे तो रावण को रामायण के श्रीमान बोला है इसका कोई अर्थ लक्ष्मी कर दे

00:05:34:13 तो गई तो वापस सृष्टि में आना होगा आर समा जी बोलते हैं मूर्ति पर कुत्ता मूत जाता है फिर तो वो इनके गुरु की फोटो पर भी मूत देगा वो आ नहीं पा रहे मुझे लग रहा है कि उनको जुड़ने में संभवतः कोई अ तकनीकी असहजता हो रही होगी मैं समझ सकता हूं सभी का सभी उतने निपुण नहीं होते हैं तकनीकी चीजों में मगर इस निपुण ना होने की स्थिति के कारण उन्हें गवार नहीं कहना चाहिए जैसा कि यह चंगू मंगू करा करते हैं कोई अगर इंग्लिश का वर्ड नहीं बोल पाया या फिर इंग्लिश के वर्ड के बारे में किसी को प्रॉपर जानकारी नहीं है ये जो स्कन वाले स्न के जो चंगू बंगू है जिन ऊपर कल आपने वीडियो देखा होगा वो जो है उसको गवार कहने लगते हैं मान लो किसी की भाषा तमिल नहीं है और उसको तमिल के शब्द का अर्थ नहीं मालूम तो वो गवार हो गया य चंगू मंगू को या तो सारी भाषाएं आती हो दुनिया की और नहीं आती होंगी तो गवार कहलाएंगे जी

00:06:50:20 जी और हमारा एक कल शॉर्ट वीडियो डाला गया था जिसम की अ हमने एक सवाल उठाया था कि जो अ धार्मिक धर्म कैसे लुप्त होता जा रहा है लुप्त सा हो गया है समाज से जिस कारण से अत्यंत घोर से घोर बहुत निंदनीय चीजें आपको सुनाई दे रही है और यदि हमने इस पर ध्यान नहीं दिया कि धर्म की स्थापना हो और प्रयासरत नहीं हुए तो इससे आगे स्थितियां और बढ़ती चली जाए काफी सारे सो कॉल्ड खुद को वैष्णव कहते हुए शायन आचार्य के भाष्य को नहीं मान रहे और कह रहे हैं वो बुद्धिस्ट थे वो काफी सारे नहीं है बहुत अल्प है कुछ है व आपके संपर्क में आ गए तो आपको काफी सारे लग रहे होंगे मगर मुख्य बात यह है कि उनसे यह तो आपको पूछना ही चाहिए कि अगर वह बुद्धिस्ट है उनके भाष नहीं मानने तो आपके आचार्य ने लिखे तो वो तो लाइए वो तो फिर मले पर चले जाते तो हेलो आचार्य जी आ चुके हैं आप अपना सीधा कर लीजिए आप अपना

00:08:10:10 कैमरा घुमा लीजिए एक साइड ऐसे उसम एक सेटिंग होती है र आपको सेटिंग पता नहीं है एक सेटिंग होती है घुमाने पर वो स्क्रीन रोटेशन ऑन कर लीजिए अपनी स्क्रीन रोटेशन ऑन है आपकी स्क्रीन रोटेशन ऑन कर लीजिए

00:08:46:07 हा तो जी आपका स्वागत है चर्चा के लिए आप पधारे आपका धन्यवाद आभार जी आपने कुछ बोला हा आवाज आ रही है हा आवाज आ रही है अब आ रही है अच्छा सबको सादर नमस्ते जी जी जी नमस्ते नमस्कार जय श्री राम जय श्री राम हम भी जय श्री राम बोलते हैं बच बोलो जय श्री राम जय श्री राम

00:09:33:20 तो यहां बहुत सारे बच्चे बैठे हुए हैं क्या आपके पास हा गुरुकुल के सभी बच्चे आ गए हैं सुनने के लिए चर्चा सुनने के लिए अच्छा स्वागत है थोड़ा सा आप अपने गुरुकुल और अपने बारे में बता दीजिए जिससे दर्शक जान जाए कहां से हैं क्या है मैं वैसे तो रहने वाला उत्तर प्रदेश का हूं जी और पहले कालेज में मेरी शिक्षा हुई जी फिर उसके पश्चात मन में आया कि जब सत्या प्रकाश पढ़ा हम तो मन में विचार आया कि ऋषि दयानंद जो बात कहते हैं हम या सत्य है असत्य है इसको स्वयं परखना चाहिए और स्वयं परखने के लिए संस्कृत का ज्ञान आवश्यक है तो फिर मैं पानी महाविद्यालय बहालगढ़ आपने पंडित यो मी मांस जी का नाम सुना होगा संस्कृत के विन सभी जानते हैं तो वहां पर चला गया वहां पर अष्टाध्याई कंठस्थ करके फिर मा भास से पढ़ा दर्शन पढ़े अब

00:10:48:21 लगभग 30 वर्षों से गुरुकुल का आचार्य हूं अच्छा य छोटा सा तो अभी महोदय अभी आपके पास जो बच्चे सामने बैठे हुए हैं उनका मतलब किस कक्षा से किस आयु वर्ग के हैं हां लगभग 10 वर्ष से लेकर के 18 साल तक के हैं बच्चे अच्छा जो अभी वहां बैठे हैं साम हां हां हां इसमें बहुत से बच्चे अष्ट अध्याय याद कर रहे हैं कुछ अध्याय की व्याख्या पढ़ रहे हैं अच्छा अच्छा कुछ धातु वृति पढ़ रहे हैं अच्छा परीक्षाएं भी देते हैं अच्छा तो किसी एक बच्चे से जरा सा मिलवा जाएंगे थोड़ा सा अगर आपको आपत्ति ना हो तो हां हां बिल्कुल बिल्कुल किसी छोटे सबसे जो छोटा हो उसको जरा सा बुला दीजिए अच्छा छोटा बच्चा आ जाओ

00:11:50:00 अभिजीत हा य बैठ जा य अभिजीत नाम है आपका अभिजीत आपको गायत्री मंत्र आता है हां जी सुनाइए हा जी थोड़ा सा सुनाइए पूरा नहीं थोड़ा सा ओ भरे भुव

00:12:25:24 त बस बस बस बस बस आपका यज्ञ बत हो गया है जने संस्कार हुआ हा जी हो गया हा दिखाइए जने अरेख तो आपका यज्ञ संस्कार के सायु में हुआ बेटा

00:13:02:20 अच्छा किस आयु में हुआ आपका अरे ये अच्छा 11 यानी ब्राह्मण के अनुसार आपका ज जन हुआ है ब्राह्मण के अनुसार हुआ ऐसा है शिवांश जी जी आर्य समाज में जो भी आते हैं आप थोड़ा सा कैमरा वैसे कर लीजिए उतर आपका कट रहा है अच्छा अच्छा

00:13:41:28 देखिएगा य हमारे [संगीत] यहां किसी छात्र से किसी प्रकार की जाति चर्चा नहीं हो अच्छा नहीं नहीं वो ठीक है पढ़ाने वाले अध्यापक भी हैं हम बहुत से ऐसे अध्यापक हैं जो 12 12 साल तक यहां शिक्षा दिए बच्चों को लेकिन हमें पता नहीं चला ये किस बिरादरी के है किस जाति के नहीं नहीं हमारे साथ छात्र पढ़ते थे जी नरेश जी अब विदेश आदमी घूमते हैं वैदिक धर्म का ही प्रचार करते हैं हम पढ़ कर के निकल गए और पढ़ने के बाद स्नातक बनने के कई सालों के बाद किसी व्यक्ति के द्वारा पता चला कि वे पंजाबी अच्छा हा और मेरे मित्र रहे साथ हम रहते रहे साथ हम भोजन भी करते थे तो

00:14:57:01 आर्य समाज में ऐसा व्यवहार है कि पता ही नहीं चलता कौन किस बिरादरी का है यहां पर भी जैसे जो आते हैं पूछते हैं बहुत से लोग पूछते हैं कि इसमें कौन-कौन से बच्चे ब्राह्मण के हैं हम मना कर देते हैं कि यें किसी छात्र का जाति का पता नहीं है कौन किस जाति का है यहां इस पर चर्चा ही नहीं करते नहीं नहीं मैं असल में पूछ दूसरी बात रहा हूं जैसे इनका जब जने हुआ है यज्ञ पवित हुआ है इका ज ऐसा है जो गुरुकुल में जाति आप जैसे जो आप सब सबका ज संस्कार जी जी मैं एक बात पूछ रहा था मैं एक बात पूछ रहा था आवा रही है आवाज आ रही है आपकी आपकी आवाज आ रही है ठीक है बस तो मैं एक बात ये पूछ रहा था कि जैसे इसका जो जन जैसे आपके बच्चे का जने हो रहा है तो यह जन के बाद आपने डिसाइड नहीं किया कि ब्राह्मण है क्षत्रिय या वैश्य है नहीं हम तो डिसाइड है जब शिक्षा प्राप्त कर लेगा तब तब डिसाइड करेंगे कि ब्राह्मण है की क्षत्रिय है कि वैसे की सूत्र है तो तो जो संस्कार विधि है जो मनुस्मृति

00:16:12:12 उसमें दिया गया है कि ब्राह्मण का जन इतने से इतने वर्ष के बीच में होना चाहिए जो ब्राह्मण का बच्चा है अष्टमी ब्राह्मण उने लिखा हुआ है मैं भी जानता हूं जी जी जी उसका तात्पर्य यह है कि अगर का बच्चा है आठवी में उसका संस्कार करें क्षत्रिय का दसवी में वैस का बवे में ब्राह्मण का इसलिए करें कि अगर माता पिता ब्राह्मण है तो निश्चित रूप से उसके अंदर कुछ संस्कार आएंगे अच्छे संस्कार आ ब्राहमण मतलब प्राथमिक रू शिवांश जी व्याकरण महाभाष्य में लिखा है कुभ का प्राचीन काल के ब्राह्मण के लिए प्राचीन काल में जो ब्राह्मण होते थे बड़े त्यागी तपस्वी धर्मात्मा होते थे और आर्य समाज में ब्राह्मण का बहुत मान्य

00:17:12:18 है उसचा है यानी कि प्राथमिकता से जो यज पवित या प्राथमिकता से जो वर्ण हम मानते हैं वह मानते हैं जन्म से उसके माता पिता कौन है उसके हिसाब से उसको ब्राह्मण क्त्र अथ वै मान लिया जाएगा नहीं मानते ब्राहमण अ वहा तात्पर्य है कि अगर ब्राह्मण के परिवार का है ब्रहण के अनुस मात मान पमान आचार पुरुष वेद न लिखते है तो इनका ज जिसके माता पिता विद्वान हा मैं समझ इनका जो जन हुआ है ये आ से 12 के बीच में हुआ होगा तो इसका मतलब ब बता आपको जी देखिए ऐसा एक तो व्यवस्था थी संस्कार विधि में जो ऋषि दयानंद ने लिखा है ऋषियों का मान्य रखने के लिए उन्होंने बातें लिखी हैं और लेकिन अक्षर सा पालन नहीं होता है सामूहिक रूप से सबका संस्कार श्रावणी पर पर सबका सम जन संस्कार हो जाता है जो नए बच्चे आते हैं और जो पुराने बच्चे हैं उ नया धारण करते पुराना उतार देते मतलब ये ध्यान दि

00:18:27:22 बना मतलब ये ध्यान दिए बिना ही ब्राह्मण के अनुसार होना है या क्षत्रिय के अनुसार होना है वो संस्कार विधि को ध्यान दिए बिना ऐसा है कि देश काल परिस्थिति के अनुसार कुछ परिवर्तन हम कर लेते हैं जैसे संस्कार ऋषि दयानंद ने सत्या प्रकाश में और संस्कार विधि में भी विधवा विवाह का विधान नहीं किया है शुद्रास पुनर्विवाह शुद्र विधवा है उसका लिखा है उन्होंने लेकिन ऋषि दयानंद ने अपने जीवन काल में ही सभी विधवाओं के विवाह का समर्थन किया था और स्वामी श्रद्धानंद जी ने विधवा विवाह का जो है जोर शोर से प्रचार किया समर्थन किया और करवाना शुरू कर दिया न ने जो सत्या प्रकाश और संस्कार विधि में यह ऋषियों का मान्य रखने के लिए उन बातो को रख दिया लेकिन अपने जीवन काल में उन्होंने पुन विधवाओं के विवाह का समर्थन किया कि सभी विधवाओं का चाहे ब्राह्मण का हो क्योंकि

00:19:39:20 ने दो मिनट सुनि जी सर्वत्र देखा था जो ब्राह्मण की ब्राह्मण विधवा है या तथाकथित हो या रियल की ब्राह्मण हो किसी ब्राह्मण बच्चे की शादी हुई 14 साल की उम्र में या 16 साल की उम्र में उत्तर प्रदेश बिहार में विवाह होता था उसके बाद दो साल तीन साल के बाद गौना होता था अ भी ऐसा कुछ प्रचलन है गांव में तो उस समय लड़की पति के घर नहीं जाती थी विवाह के समय गौना के समय जाती थी तो जैसे मान लीजिए युवक है ब्राह्मण का बेटा है 16 साल की उम्र में उसका विवाह हो गया गौना नहीं हुआ दुर्भाग्य से उसका देहांत हो गया ठीक है तो वह जो है लड़की विधवा हो गई और उसका विवाह नहीं होता था तो फिर क्या होता था प्राय करके व्यभिचार बनती थी मैंने अपनी आंखों से देखा है एक ऐसे ही लड़की जो है वो विधवा हो गई सारे उसके

00:20:54:25 सुख छीन लिए गए मुंडन हो गया सफेद वस्त्र दे दिया गया त्याग तप की उपदेश दे दिया गया लेकिन धीरे धीरे जब बड़ी हुई तो छुप छुप करके उसने जो है उल्टे सीधे काम शुरू कर द और आपने भी देखा होगा जो विधवा आश्रम थे महिला ती है इन सबको देख कर के महर्ष दयानंद सरस्वती ने सबके सभी विधवाओं का विवाह का उन्होंने समर्थन किया आर्य समाज ने जोर शोर से कहा कि सभी विधवाओं का विवाह हो जाना चाहिए हम लोग समर्थन करते हैं मतलब ऋषियों ने नहीं माना था विधवा विवाह आर्य समाज ने माना जो रीति रिवाज है संस्कार आदि है देश काल परिस्थिति के अनुसार इसके अंदर परिवर्तन कर लेना चाहिए मुल्ला की तरह कठ मुला नहीं होना चाहिए आज मुल्ला की क्या हालत है आप देख रहे हैं अधिकतर पढ़े लिखे जो मुस्लिम है इस्लाम धर्म को छोड़ रहे हैं नास्तिक बन रहे हैं एकस मुस्लिम आप इनका जब पढ़ेंगे तो सुनेंगे इलाम को छोड़ बात रखना चाहूंगा आपने काफी विवेचना मैं थोड़ी सी बात रखना चाहूंगा कि हम कहते कि हमारा जो धर्म है वो सनातन है

00:22:07:21 अपरिवर्तनीय शल नहीं है वह शाश्वत है ठीक है तो अब हम कह रहे हैं कि जो ऋषियों ने जो चीजें की थी लागू वो ना करके क्योंकि जो स्त्रिया है व वय विचार हो रही है इसलिए उनका हारी मैं मुझे अपनी बात रख मैंने आपका काफी लंबा सुना है मैं अभी थोड़ा अपनी बात मैंने जो आपका सुना है ना मैं बस उसको रिपीट कर रहा हूं जिससे मैं जो समझाऊं वो कंफर्म कर लू बस तो हमारा धर्म हमारा धर्म है सनातन जो परिवर्तनशील नहीं है नित्य स्थाई शाश्वत तो आपका कहना है कि ऋषियों ने जो हमें दिया जो विधि विधान दिया काल परिस्थिति के अनुरूप हम अपने अनुसार अपने मतलब जो हमें ठीक लगे उसमें हम थोड़ा सा बदलाव कर लेते हैं अब इसमें पहली प्रॉब्लम य आएगी कि जो बदलाव करेगा वह कौन होगा पहली प्रॉब्लम तो य किसके द्वारा किया जाने वाला बदलाव मान्य होगा यह प्रॉब्लम आ गई दूसरी प्रॉब्लम यह आ गई कि ऋषियों ने क्या सोच समझ करके उस विधान को दे दिया था और

00:23:22:26 सही विधान नहीं दिया था यह भी एक प्रॉब्लम आ गई तीसरी प्रॉब्लम यह आ गई कि हम क्या कह रहे हैं कि व्यभिचार ना हो इसलिए जो गलत जो जैसे कि गौ हत्या गौ हत्या को लोग गलत ना कहे इसलिए गौ हत्या के लिए हमने वैद वो खोल दिए क्या कहते हैं कत्ल खाने वैद कर दिए उसी तरीके से अगर स्त्री को किसी पुरुष के संपर्क में नहीं आना है तो हमने उसको पुरुष में पुरुष के संपर्क में आने का सर्टिफिकेट दे दिया यही हुआ ना शादी करा दी अच्छा आपका कहना जी जी आपका ये कहना है कि मैंने मैंने खुद देखा है विधवा हो जाने के बाद जो स्त्रियां है वो वय विचार हो रही है पर क्या आपने यह नहीं देखा होगा कि स्त्रियां विधवा वो विवाह में रहते हुए भी व्यभिचार हो रही है पुरुष हो रहे हैं उसका क्या करें अच्छा हमने उसका विवाह करा दिया कि अब उसकी विचार जो व्यभिचार है उसके जीवन से समाप्त हो जाए तो प्रश्न य आएगा उसका फिर से हस्बैंड खत्म हो जाएगा फिर उसका विवाह कराओ फिर अगर खत्म हो गया तो फिर विवाह कराओ तो ये एक प्रोसेस की वो विचार ना हो व्यभिचारी तो व्यक्ति विवाह में रहते हुए भी हो रहा है और व्यभिचारी व्यक्ति अगर वह विवाह होता है फिर खत्म हो जाएगा तो क्या हम फिर विवाह कराएंगे

00:24:38:03 फिर विवाह कराएंगे तो क्या य एक यह बहुत सारे क्वेश्चन उ जाते हैं जो आपने व्याख्या की है उ जा क रहे आप देखि ऐसा है कि संभावना कम होती है जो ग्रस्त होते हैं आपने भी देखा होगा जब तक कोई युवक है उसका विवाह नहीं हुआ है तब तक तो इधर उधर जो है झांकता है देखता है उल्टे सीधे काम भी करता है जब विवाह हो जाता है तो प्राय सुधर जा बहुत कम चांस रहते हैं उस बिगड़ने के ली हम लोग मान रहे ये हम लोग मान रहे आप भी तो सुनिए

00:25:25:04 सुन मैंने खुद देखा है बहुत से लोग हमारे पास आते हैं और कहते हैं कि य मेरा बेटा बिगड़ा हुआ है क्या करें देख सुन कर के हम कहते हैं विवाह कर दो ये खोटे से बध जाएगा तो सुधर जाएगा मैंने अपने जीवन में ही कई ऐसे युको को सुधारा है ठीक है प्राय जो है सुधर जाते हैं कहने का मतलब ये है कि जो हम कहने का मतलब ये है ऋषियों के भी बिगड़ जाते हैं ग गृहस्थ स्त्रिया भी बिगड़ जाती है लेकिन कने का जिस स्त्री का विवाह हो जाए तो संभावना कम र ठीक कहने का अर्थ ये है कि हम धर्म की बात जी सनातन किसे कहते हैं सदा भव सनातनम आज बड़ी जोर शोर से चर्चा हो रही है के सनातन सनातन धर्म सनातन लेकिन सनातन क्या निरुक्त में कहा है सदा भव सनातनम जो सदा से रहता है उसको सनातन कहते सदा से क्या रहता है ईश्वर जीव प्रकृति ये तीन सनातन है परमात्मा सनातन है जो सदा रहता है जीव

00:26:40:25 सदा रहता है और प्रकृति भी सदा रहती है ये तीन सनातन है हम और इसके अलावा परमात्मा का जो ज्ञान है हम और परमात्मा का ज्ञान भी सनातन है तो सनातन का तात्पर्य है वेद वेद वैदिक ज्ञान ही सनातन है और बाकी जो चीज है य सनातन नहीं है सनातन वैदिक धर्म ही वेद का ज्ञान ही सनातन है और य रीति रिवाज है रीति रिवाज देश काल परिस्थिति के अनुसार कभी चला जसे किसी काल में प्रथा को महिलाओं ने अपनाया चलिए

00:27:23:16 ने वो देखिए आज का हमारा मुख्य टॉपिक य नहीं हम लोग किसी और दिन बैठ के बात हां हमारा विषय था सारे प्रश्न हां श्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं है कई सारे प्रश्न एक मिनट कई सारे प्रश्न उठते हैं तो उसमें से क्या है कि अभीर हर पॉइंट प अगर बात करेंगे तो वो इसी का होके रह जाएगा तो एक संपत में मैंने अपने कुछ क्वेश्चन पुट अप कर दिए हैं हम लोग फिर किसी दिन बैठे इस बारे में हम पूछेंगे आप इसका उत्तर दीजिएगा ऐसे एक चीज मैं और एक मिनट एक चीज मैं और समझा कि आपने ज बताया कि हमारे संस्कार विधि में बताया गया है कि ब्राह्मण का जनेऊ इतने से इतने के वर्ष के बीच में हो जाना चाहिए तो अभी जो आप जन करा रहे हैं यज्ञ पवित जो करा रहे हैं वो आप इस हिसाब उस विधि के अनुसार नहीं करा रहे हम सबका एक साथ करा दे रहे वो ब्राह्मण क्षत्रियो वैश्य या सब

00:28:30:00 सुनि एक मिनट बा अपनी बात मेरी बात भी सुनो कभी आप पहन लेते हैं पहनते नहीं पहनते मैंने कहा उसको बता दू मैं बनल है आत्र बात करते तो आपके अंदर भी तो परिवर्तन आ जाता है आपने प्रश्न पूछा तो मैं आपको बता दूं ठीक है आपने कहा कि मैं आधुनिक वस्त्र पहन लेता हूं कभी-कभी तो मैं बिल्कुल आधुनिक वस्त्र पहन लेता हूं कभी-कभी मगर मैं उस आधुनिक वस्त्र पहनने को धर्म के रूप में खपत नहीं करता नहीं तो ये सिद्धांत है मेरा ऐसा करना सही है कभी पढ़ते नहीं प लेकिन क्या ये बण के लिए उचित है मैं क्या कह रहा हूं मैं क्या कह रहा हूं देखण प्र ब दे परि के अ चलता हो भाई साब इसम प्रश्न दो उठते हैं देश काल परिस्थिति के अनुसार एलजीबीटी क्यू वाले करेंगे कि अभी कल को लोग कहने लगे देश काल परिस्थिति के अनुसार बहन के साथ विवाह मान्य कर दो कुछ

00:29:45:00 लोग ऐसे आएंगे तो फिर दिक्कत य आएगी सुन एक मिनट साब सुनिए सु जब तो फिर दिक्कत य आएगी देश काल परिस्थिति के अनुसार अगर कुछ बदलना है तो वो कौन बदलेगा उसकी दिक्कत आएगी फिर तो ह माता के साथ सुनि हर व माता के साथ के सा दूस बात दूसरी बात य जैसे आपने बोला कि सनातन शंकर वो अंग्रेजी कपड़े पहन कर के वीडियो बनाता है मैं भी अंग्रेजी कपड़े पहन लेता हूं तो मैं सपने अंग्रेजी पन को धर्म के रूप में ख्या पित नहीं करता हूं स

00:30:31:18 ऐ इसको सम लीजिए को धर्म बताते रिवाज नहीं मनुम में मनुस्मृति में धर्म लिए लिए तेरे लिए कत तेरे लिए एक मिनट तेरे लिए कर्तव्य और अ कर्तव्य के विषय में एक मात्र शास्त्र प्रमाण है तो आपका कहने का मतलब है कि कई मोड़ पर आर्य समाज आर्य समाजी शास्त्रों पर नहीं चलते हैं मन मुताबिक चलते हो और अपने मन मुताबिक चलने को भी वह कहते हैं कि य धर्म है अगर अगर मैं अी जाते आपका टरनेट इंटरनेट आपका कट रहा है

00:31:34:21 आवाज आ रही है हम अच्छा अब हम विषय पर चर्चा करते हैं हां विषय पर करते हैं विषय पर करते ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं है अवतार ता है कि नहीं है तो क्या तो ईश्वर सर्वशक्तिमान है और सर्वशक्तिमान का अर्थ ये है कि जो चाहे सो एक मिनट भाई साहब हा हा मैं कुछ बोल रहा हूं ना हां बोलिए बोलिए मैं अपना प्रश्न रख देता हूं कि क्या आर्य समाज के द्वारा प्रतिपादित होने वाला पूजित होने वाला परिभाषित होने वाला जो ईश्वर है वह अनंत सामर्थ्य वान सर्वशक्तिमान है या नहीं अब आप बताइए हां आपके प्रश्न में ही मेरा उत्तर है आप ये बताइए आप क्या मानते हैं आप ईश्वर को सर्वशक्तिमान मानते हैं और ईश्वर अवतार लेता है कि नहीं लेता है आप अपना उत्तर रखिए फिर मेरे से ज प्रश्न करें प्र मेरे प्रश्न में ही आपका उत्तर है आप बताइए आप ईश्वर को सर्वशक्तिमान मानते हैं आप अपनी बात कह दीजिए कि हम यह मानते हैं

00:32:50:03 आप अपनी बात कहिए ठीक है आपने प्रश्न पूछा ठीक है मैं उत्तर देता हूं फिर मैं प्रश्न पूछूंगा मैं ईश्वर को सर्वशक्तिमान मानता हूं और यह मानता हूं कि ईश्वर नहीं लेता अब मेरा प्रश्न सुनिए अरे भाई जब आपने ज विषय आपने बोला है कि ईश्वर जो है सर्वशक्तिमान है भाई साब मैं आपसे पूछ रहा हूं जो आपने क्लेम किया है मुझे उसका तो करने दीजिए वो विषय खत्म कहा हो गया मैं आपसे पूछ रहा हूं यदि वो सर्वशक्तिमान है सर्वशक्तिमान है तो क्या वह अवतार ले सकता है अब आपने कहा अवतार नहीं ले सकता जब अवतार नहीं ले सकता तो आवता नहीं व देखिए आवश्यकता है कि नहीं दो बातें मत करिए अवतार ले सकता है कि नहीं यह बताइए पहले नहीं नहीं ले सकता नहीं ले सकता तो जब वो नहीं ले सकता है तो आपने जो सर्व विशेषण लगाया हुआ है शक्तिमान के सामने सर्व वो हटा दीजिए

00:34:05:08 सर्व शक्तिमान का अर्थ यह है कि अपने कार्य में परमात्मा हम पुन समर्थ है ईश्वर सृष्टि की रचना करने में पालन करने में संघार करने में जो उसका संविधान संविधान के अनुसार परमात्मा सब करने में समर्थ है तो इसका मतलब मेरा प्र सुन मैं अभी आपकी बात आप प्रश् पूछेंगे ऐसा नहीं है आप जानते हैं आप जानते हैं कि आपने जो उत्तर दिया है ये अभी पूरा नहीं हुआ है आप खुद जानते हैं जान फिर वही आप तो उतर दो इस प्रॉब्लम ये है बा मुझे भी तो पूछने का अवसर दीजिए कि केवल आप भाई साहब सुनिए आप ज्यादा से ज्यादा क्या एक मिनट भाई भाई साहब एक मिनट अपनी बात रख लू मैं अपनी बात रख लू कि मैं क्या करने वाला हूं मैं अपनी बता दूं आपको

00:35:21:26 मैं के प्रतिकार में आप मुझसे क्वेन करेंगे तो ज्यादा से ज्यादा यही तो होगा गलत साबित कर देंगे यही करेंगे ना यही करेंगे ना क्या मेरे क्या मेरे गलत साबित हो जाने से आपका सही होना अरे भाई साब आपका फिर वही बात अभी आपका सिद्धांत क्लियर नहीं हुआ ना आप अपने

00:35:55:06 स बोल देख जो आप बोले हो उस बहुत सारी जो आप भाई साहब मैं जो भी मानता हूं मैं आपको बताऊंगा मेरे मानना यदि मेरा मानना आप गलत साबित कर देंगे तो आप जो है सि नहीं हो जाए अभी आपकी चीज जस्टिफाई नहीं हो पाई है आप आप अभी आप

00:36:30:07 नहीं साथ साथ मैं भी प्रश्न पूछूंगा और सा फिर कोई बात भाई साब फिर कोई बात हो ही नहीं सकती अगर साथ साथ आप प्रश्न ही पूछते जाएंगे प्रश्न के जवाब में प्रश्न पूछे जाएंगे तो कोई बात होनी नहीं है अपने स्टेटमेंट स्टेटमेंट को एकस कर अपनेट इसे बताने में क्या हर्ज है ये बताइए बात ये है बात ये है कि विषय बदल जाएगा अभी जो आपने बोला है वो करना पड़ेगा अरे क्यों कर ले जब अभी जब चर्चा चल रही तो उसको पूरा करिए ना आप आपने अपनी कही हुई बात है आपको अपनी कही हुई बात पर डाउट है क्या आपको अपनी कही हु बात ट है भाई साब भाई साहब आपको चर्चा करनी नहीं है नहीं जब तक आप उत्तर नहीं देंगे आगे बात नहीं बढ़ेगी आपको चर्चा करनी नहीं है प्रश्न के जवाब में प्रश्न प्रश्न के जवाब में प्रश्न नहीं पूछा जाता मत मैंने अपना मंत रख लिया अरे मैं तो र रहा हं तभी तो आया हं मैं ईश्वर को श्वर अवतार लेने वाला मानता हं तभी तो आया मैंने आपके गुरु का नाम नहीं पूछा आपने गुरु का भी नाम पूछ

00:37:48:25 लियाने किया मैं बता रहा हूं मैं बता रहा यद मैं आप आया होता तो अपने बारे में बताता आप अगर कहते तो और हो सताने ईश्वर को सर्वशक्तिमान मान हमारा मंतव्य जो है है आपको मालूम भी आपने क्लेम किया हैने किया उस पले विय बदलना चाह रहे मैं विल नहीं बदलना चाहता इसी पर चर्चा करें तो मैं पूछ आपने शक्तिमान का अर्थ बताया तो मुझे क्वेश्चन करने दीजिए ना उसके बारे में वो बात खत्म नहीं हुई ना नहीं पहले आप बताइए आप बताइए आपका

00:38:51:24 मत को मानता दिया अवतार को मानता हूं ईश्वर अवतार ले सकता है अब मैं क्वेश्चन पूछू ईश्वर अव क् पूछ हा मैं क्वेश्चन पूछू अब आया ना आपके पास अगला सवाल आया आपके पास अगला सवाल आया अब आया ना आप अगले सवाल आए जब तक एक क्वेश्चन पूछा हुआ उससे कोई संतुष्ट नि नहीं निकलता दूसरा क्वेश्चन अगर लाएंगे दूसरा विषय उड़ेंगे कि मैं क्या मानता हूं मैं सही हूं कि नहीं मैं गलत नहीं तो फ आपका विने पूछने उतर दिया फिर आपने समीक्षा कर लू तो समीक्षा कर अभ समीक्षा

00:39:43:27 नहीं सुनि आपने कहा ईश्वर को करने एक मिनट भाई साब आपने ईश्वर अपने कार्य को करने सामर्थ वान है इसलिए वह सर्वशक्तिमान है पहली बात तो यह हो गई कि ईश्वर अपने कार्यों को करने में सामर्थ वान है अपने मतलब एक सीमा है उसके कार्यों की कि वह सिर्फ अपने कार्य कर सता एक मिनट भाई साब मैं अभी क्वे क्वे नहीं रखा मैंने क्वे नहीं रखा तो ईश्वर के कार्यों की सीमा है कि उसके जो जो काम वो नियत है वही वो कर सकता है उसके बाहर वो नहीं जा सकता ठीक है अब त आती है कि जब आपसे मैं सर्व व्यापक का अर्थ पूछूंगा सर्वव्यापक तो सर्वव्यापक का अर्थ आप क्या बताएंगे मैं बता दूं व्यापक सर्वत्र है विष्णु सर व्यापक का अर्थ है विष्णु सर्वव्यापक का अर्थ है कि वो ऐसी कोई जगह नहीं है इंच मात्र भी एक पॉइंट भी जहा वो ना हो ठीक है हा विष्णु सर्व कार्थ

00:41:00:08 भाई साब आपने जवाब दे दिया है यानी कि व्यापक के साथ जब आपने सर्व लगाया तो आपने अर्थ लिया कि उसकी सीमा से बाहर कुछ है ही नहीं वो हर जगह है कुछ भी नहीं है जो उसकी सीमा से बाहर है तब आपने य सर्व का उपयोग किया ठीक है उसके बाद मैं अगर आपसे सर्वज्ञ का अर्थ पूछू सर्वज्ञ का अर्थ तो क्या आप ये कहोगे कि वो अपनी चीजों को जानता है इसलिए वो सर्वज्ञ है या वो यह कहोगे वो सब कुछ जानता है इसलिए वो सर्वज्ञ है हा नहीं सब कुछ जानता है सब कुछ एक एक पॉइंट भी ऐसा नहीं है दुनिया का संसार का जानता तो वो सर्वज्ञ यानी यहां पर भी आपने सर्व का जो विशेषण लिया वो सब कुछ से लिया अर्थ से लिया ठीक है और सर्वव्यापक का जो आपने लिया कि वो हर जगह है तो आप यह भी नहीं कह सकते कि व नाली में नहीं है आप यह भी नहीं कह सकते एक मिनट आप सर्व आप सर्वव्यापक का अर्थ यह मानते हो कि वो नाली में भी है वो मलम भी है मतलब कि आपने कहीं पर भी यह नहीं छोड़ा कि कोई दुनिया में ऐसी जगह हो सकती है जहां ईश्वर ना हो तो आपने सर्वव्यापक में सर्व का अर्थ सब कुछ लिया आपने सर्वज्ञ में सर्व का अर्थ सब कुछ लिया अब दिक्कत ये है कि आप सर्वशक्तिमान में कह रहे हो कि वो अपने अपने कार्य जो करने में है सामर्थ

00:42:15:21 वान है और वह अनावश्यक कार्य दूसरे कार्य नहीं कर सकता जो उसके कार्य है वही कर सकता है यानी यहां पर आपने सर्व का जो अर्थ लिया है वो सब कुछ नहीं लिया उसकी सी सीमा कर दी यानी संसार में कोई ऐसी जगह नहीं है जहां वो ना हो संसार में कुछ भी ऐसा नहीं है जो वो ना जानता हो मगर संसार में कुछ ऐसे कार्य हैं जो वह नहीं कर सकता है तो सर्व का अर्थ आपने खुद ही बदल दिया कौन सा कार्य है जो देखो ऐसा है जी कि वेद क्या है वेद परमात्मा का संविधान है भाई साहब हम लोग वेद वेद भी वे भी आे

00:43:05:10 बा उस अपना कर अपना प्रश्न क्लियर कर द की यदि वो अनंत अनंत रूप से सर्वव्यापक व्याप्त है तो व ऐसी कोई जगह नहीं है जहां वो ना हो अगर वो अनंत रूप से सर्वता है मिनटर वो अनंत रूप से सर्व ज्ञाता है एक मिनट अगर वह अनंत रूप से सर्व ज्ञाता है तो ऐसा कुछ नहीं है जो वो ना जानता हो तो फिर जब वह अनंत रूप से सामर्थ वान है सर्वशक्तिमान है तो फिर ऐसे कुछ कार्य क्यों है जो वह नहीं कर सकता बताइए नहीं कौन सा कार्य है जो नहीं कर सकता आप बताइए अवतार नहीं ले सकता आपने कहा ना अवतार लेने की जरूरत क्या है नहीं ये बता अभी बात होही है आप जो है रोटी खा सकते अभी बात ही मेरी बात भी तो सुनो तो आप जरूरत मत

00:44:21:13 लाइने बोहा बोरहा बो क्ता बात कर रहे अभी हम उसकी क्षमता में बात कर रहे हैं बताइए य धता रसे समा मा मैंने आपसे क्या पूछा परमात्मा को आप सर्वशक्तिमान नहीं मानते इसीलिए तो कहते हो कि रावण को मारने के लिए अवतार लिया क्या रावण के शरीर में नहीं था मन उसका मन नहीं ये बताओ रावण को मारने के लिए दु के विनाश के लिए विषय बदल रहा है भाई साहब विषय बदल रहा है मैं पूछ रहा हूं कि जिसकी सामर्थ्य का अंत है उसके सामने सर्वशक्तिमान जो लगा रहे हो आप मेरी बात नहीं सुन रहे अरे सुन तो रहा हूं आप दूसरी जगह जा रहे हो आप दूसरी जगह जाओ बात तो सुनो मेरी

00:45:36:19 बात भी तो सुनो बोलो हा अब ये बताइए परमात्मा जब सर्वत्र है तो रावण के शरीर में है कि नहीं है है बिल्कुल है तोब हा जब मारना चाहेगा तो रावण को मार देगा कि नहीं मार देगा बिल्कुल मार देगा बिना शरीर धारण करे बिना शरीर धारण किए बिना उतार लिए मार सकता है कि नहीं कर सकता है बकुल ब मार सकता है शरीर धार क्यों करेगा अरे तो भाई ये आवश्यकता हो गई ना मैं पूछ रहा हूं हैने आपसे क्या पूछा मैंने आपसे क्या पूछ भाई साहब सुनिए मैं इसका जवाब भी आपने जो पूछा है मैं इसका जवाब भी जानता वि आपको पक रख रहा मैं आपसे पूछ रहा ह भाई साब

00:46:28:10 अरे भाई मेरा क्वेश्चन ये है आचार जी मेरा क्वेन ये है मेरा क्वे य अगर कुछ कार्य है जो वो नहीं कर सकता तो उसके आगे आपने अन क्यों लगाया है शास्त्रार्थ बस नहीं होती है आप पहले बोलिए कह रहे हो सुनिए मैं बताऊ आप यह कह रहे हो कि क्योंकि सुनि क्यक उस आ नहीं

00:47:02:06 इसने बोला मेरा सुन नहीं रहे मैं सुन रहा हूं आप दूसरी जग क्यों जा रहे हो आप आवश्यकता लेता है ईश्वर अगर अगर कोई भी का है दुनिया का नहीं आ क्यासा पहा बना भा मैं उत्तर दे रहा हूं आपको आपने प्रश्न पूछा उतर सुनि दीजिए तो पहली बात यह है कि अगर आपने जब यह मान लिया कि उसकी सामर्थ्य का अंत है कि वह जन्म नहीं ले सकता अवतार नहीं ले सकता अनंत अनंत है परमात्मा अनंत है उसकी शक्ति भी अनंत है देखिए भाई मुझे बोलने दीजिए अगर मैं जवाब देने बैठ हूं आपको जवाब दे रहा हू आपको मैं आपको जवाब दे रहा हूं भाई साब मैं आपको जवाब दे रहा हूं आप काट जवाब दे रहा मैं आपको जवाब दे रहा हूं हा तो आपने यह कहा कि यहां से शुरू करेंगे आपने यह कहा कि ईश्वर जन्म नहीं अवतार नहीं ले सकता जन्म नहीं ले सकता तो फिर भी वो जो है सर्वशक्तिमान जरूरत

00:48:18:15 क्या है भाई साहब आपने कहा कि सता आपने कहा कि नहीं कहा नहीं ये बताओ जन्म ले क्या [प्रशंसा] कोई सुनिए भाई साहब मैं कह रहा हूं मेरा कोई काम ना कर पाने का कोई भी कारण हो एक्स वाई जड कोई भी कारण कि मुझे आवश्यकता नहीं है कि मैं एक देशी हो जाऊंगा कोई भी कारण हो मगर उसके बाद मुझे सर्वशक्तिमान नहीं कहा जा सकता अगर मैं कोई कार्य करने में सक्षम नहीं हूं और कार्य ना कर पाने का कोई भी कारण हो कि भैया मैं को आवश्यकता नहीं है भैया मैं सुनिए

00:48:57:19 उसके बाद मुझे अनंत सामर्थ वान सर्वशक्तिमान नहीं कहा जा सकता अब मैं आपको आपके प्रश्न का उत्तर दे रहा हूं ठीक है एक बात बताइए आपने जो प्रश्न किया के अर था नहीं ता क्या है आपने जो प्रश्न किया उसका उत्तर ले लीजिए रावण के अंदर था फिर उसको आवश्यकता क्या है जरूरत बता रहा हूं अभी यह बताइए आपके अंदर ईश्वर विद्यमान है कि नहीं हां विद्यमान है हा तो आपके अंदर उसका ज्ञान विद्यमान है कि

00:49:37:15 नहीं परमात्मा का ज्ञान अलग है मेरा ज्ञान अलग है जीवात्मा का ज्ञान अलग है परमा श्वर है नहीं आपके अंदर ईश्वर है कि नहीं हा मेरे अंदर सब परिपूर्ण है मेरी आमा है परि के ज्ञान के साथ आपके अंदर है नहीं देखो जीव की सत्ता अलग है परमात्मा की सत्ता अलग है मैं आपके अंदर ईश्वर है नहीं सुनो तो ऐसे नहीं ये जो है हा भरवाने वाली बात मत करो हा ऐसे हा भरवाने वाली बात मत करो बताइए हम जानते आपको परमात्मा की सत्ता अलग है जीवात्मा की सत्ता अलग है मतलब आपके अंदर होते हुए भी आपके अंदर होते हुए भी ईश्वर की सारी क्वालिटीज नहीं है निकल जाती है सुनो पहले ता ये बताओ परमात्मा जब सर्वत्र है तो शरीर से जब जीवात्मा निकल जाती है तो परमात्मा रहता है कि नहीं रहता ये बताओ तो इसका मतलब आपके अंदर होते हुए भी आपके अंदर होते हुए भी परमात्मा का पूरा कंट्रोल नहीं है आप नहीं नहीं आप ये बताओ लास्ट में परमात्मा रहता है कि नहीं रहता है अरे रहता है क्यों नहीं रहता है रहता है मैं क मना कर

00:50:52:15 रहा हूं हा हा तो जीवात्मा निकल गया ना तो जीवात्मा की सत्ता अलग परमात्मा की सत्ता अलग है तो इसका मतलब आपके अंदर परमात्मा का पूरा कंट्रोल नहीं है थोड़ा बहुत कंट्रोल कम है बा कल नहीं है मैं पूछ ये रहा हूं कि अगर भगवान चाहे ईश्वर अगर चाहे तो वह केवल मन में एक संकल्प कर ले कि इसको मेरा ज्ञान हो जाए मिनट मिनट आपने सुना नहीं आपने प्रश्न नहीं सुना मैं अगर आप अगर आपके अंदर भाब अगर आपके अछ रहा अगर आपके अंदर ईश्वर है और ईश्वर होना भी छोड़ दो होना आपसे भाई साब भाईब भाई साब मैं पूछ रहा क्या श्वर का आपके पूरा कल है के अनुसार महाभारत के अनुसार देखिए भाई साहब अभी जो बात चल रही है

00:52:00:21 प्रश्न सुन लीजिए मेरा प्रश्न सुन लीजिए भाई मेरा प्रश् सुली मेरा प्रश्न सुन प्रसे आपने मन संकल्प करले राव को मार सकता है उसको अवतार लेने की जरूरत नहीं है उस प्र आ जाएगा तो फिर मंत्र के रूप में जनने की आवता क्या जी बंद करिए हम नहीं करेंगे आपसे

00:52:35:28 आप कर आपको क्या हैने क्यों नहीं आपके प्र आपने कहा नाता रावण को वो बिना अवतार लिए मार सकता है आपसे पूछ रहा हूं कि आपको अपना ज्ञान बिना म के दे सकता है कि नहीं बना म के

00:53:09:08 दे अपनान बिना मंत्रों के दे सकता है कि नहींन बना म के दे सकता है नहीं आपसे अपता सता

00:54:46:00 वो नहीं करेगा हां और उसके बाद क्या होगा उसके बाद इस्लामिस्ट उनसे पूछेंगे ये ईश्वर को तब तक नहीं मानेंगे जब तक इनका ईश्वर मल में ना हो भाग रहे हैं देखिए प्रश्नों से आचार्य 60 वर्ष के हैं बताइए जब कोई प्रश्न चल रहा है तो अच्छा तुम मानते हो तो ये कैसे वो कैसे अच्छा उस पर ही बात को घुमा दो डायवर्ट कर दो वो बातें रही जाए कि सर्व विशेषण कैसे आएगा हा आप देख लीजिए आप लोग जो आर समाज को फॉलो करते हैं उनको देख लीजिए क्या हो रहा है पंडित जी जय श्री राम र जय श्री राम जय श्री कृष्ण हर महादेव देख रहा था मैं पता है मैंने अब यह जाना है कि आर्य समाज हों ने यह नहीं सीखा कि सत्य की स्थापना कैसे होगी बल्कि आर्य समाज ने य विषयात कहके विषयात करके अपने मत को कैसे वर्चस्व ऊचा

00:56:01:08 किया जाए यही किया होगा सब जगह ब जहां फसने लगो विषयात करो अरे भाई मेरे गलत होने से आपका सही होना सिद्ध नहीं होता है अपने अपने सिद्धांत को सिद्ध करिए 60 वर्ष के आप है आचार्य आप है आर्स गुल कुर आप चला रहे हैं पस बच्चों को अपने साथ आप बिठाए हुए हैं और फिर आप कह रहे कि मैं आपसे प्रश्न करूंगा अरे मैंने प्र का उत्तर देने से मना थोड़ी ना किया फिर मैं जब प्रश्न का उत्तर दे रहा हूं तो आप जो है पता नहीं क्या दुर्वाषा ऋषि वहा बैठ के अपने प बच्चों को संतुष्ट कर रहे होंगे अब अब संतुष्ट कर रहे होंगे अरे व बच्चों गुरुजी आप जो है सवाल से भाग रहे थे अरे दुर्वाषा ऋषि लो साहब अरे भाई मैंने पूछा कि पहली बात तो वही जवाब नहीं आया कि अगर सर्वव्यापक का अर्थ है कुछ भी सर्व के बाहर नहीं सर्वज्ञ का अर्थ है कि कुछ भी सर्व के बाहर नहीं तो स मान का अर्थ य क्यों है कि सर्व के बाहर कुछ है फिर अब इन्होंने मुझसे पूछा कि अगर ईश्वर संकल्प मात्र से रावण को खत्म कर सकता है कि नहीं ईश्वर संकल्प मात्र से आपको अपना वैदिक ज्ञान भी दे सकता है मंत्रों की भी आवश्यकता नहीं है और नहीं दे सकता तो बोलो यह भी बाद है ईश्वर यह भी बोल दो

00:57:16:19 यह भी बोल दो इसमें बाद है ईश्वर नहीं दे सकता मंत्र के रूप में ही देना पड़ेगा तो जैसे हमें जो ईश्वर का ज्ञान है उस ज्ञान को प्राप्त करने के लिए उसका स साकार स्वरूप वेद की आवश्यकता है उसी प्रकार जो ईश्वर अव्यावहारिक है व्यवहार में नहीं आ सकता उसको समझने के लिए हमें उसके सगुण साकार स्वरूप उसके अवतार की आवश्यकता है सिंपल आप प्रश्न करेंगे जापान कहां है तो वो उत्तर देंगे तुम्हें अमेरिका के बारे में पता है है ये वही हो रहा था

00:57:56:07 वो विषयात ही सीखा है विषयात करना सीखो ओ मेहनत करने वालों विषयात करना सीखो ओ मेहनत करने वालों डीडी वन देखा था ना किसी ने बचपन में देखा था नहीं दूरदर्शन मैंने देखा था ब वो यह है तो भाई कहां गए वह आचार्य जी चले ही गए वो बीच में समझ गए कि भाई यह तो जड़ तक जाएगा तो पहले ही बोलने लगे नहीं नहीं शास्त्र नहीं होगा आपके साथ अरे भाई हम शास्त्र कर ही नहीं रहे हम तो चर्चा कर रहे हैं कोई एक विषय चल रहा है उसको भाई अभी तो मैं गुस्सा भी नहीं हुआ रोकली जी आज तो मैं गुस्सा नहीं हुआ हूं आज तो मुझे ओवर आज तो मैं गुस्सा नहीं हुआ आज आप कह रहे हो गुस्सा हो गए

00:58:56:07 आज तो मैंने जो मेरा जो वॉइस तेज करना पड़ा वह ओवरलैपिंग के लिए करना पड़ा कि भाई वह जो है अपनी बार लगातार बोलते जा रहे थे तो मुझे फिर ओ मुझे मेरी आवाज भी सुनाई दे तो इसलिए मुझे तेज बोलना पड़ रहा था इसका मतलब क्या है कि इनके पास अंदरूनी रूप से इनके पास सिद्धांत नहीं है यह विषय को बदल करके चर्चा में आगे जाने का प्रयास करते हैं एक मॉडरेटर के साथ करिए जो जो उनको रोक दे बीच में नहीं वो उनकी भी क्यों सुनेंगे वो उनकी भी क्यों सुनेंगे जिसको नहीं सुननी वो नहीं सुनेगा मैं आपको मॉडरेटर के लिए फोन किया था आज आपका फोन आया था हां मैं मीटिंग में हगा मिला हां आया था आया था बजे आया था अरे आप मुझे मैं मैं आ जाता ना तो हो जाता बहुत सही मैं बता देता कि मैं उसी समय बोलता ना ना कि आप आप ये बोल रहे हैं येसे भटक रहे हैं कृपया वापस आए टॉपिक पर तो वो हो जाती है बात तो अच्छा इनका एक खुद ही का स्टेटमेंट क्या हुआ कि ये जो है अपने गुरुकुल में जो धार्मिक चीजें कर रहे हैं उसमें ये धर्म

01:00:11:14 का वो नहीं ले रहे हैं अपने मनमुक ी कर रहे हैं जो दयानंद जी भी करके चले गए वो भी नहीं कर रहे हैं दयानंद जी ने कहा कि ब्राह्मण का जनेह इतने से इतने के बीच में होगा तो उस परे ध्यान नहीं दे रहे हैं और जो इन्होंने एक बात कही कि जब ये जहां से जा रहे होंगे तब मैं इनको दूंगा तो मैं इनसे पूछता कि आज तक आपने किसी को शूद्र कहा है क्या नहीं नहीं कहा है जाते समय बेटा तुमने इतने दिन यहां गुरुकुल में बिताए और बेटा तुमने जो है गायत्री मंत्र भी पढ़ा ये है वो है मगर तुम हो शूद राज के बाद गायत्री मंत्र मत पढ़ना आज तक कहा है क्या किसी को ये एक बहुत बड़ा अभी वो चर्चा आने वाली है अगले हफ्ते तक आ जाएगी राम पांडे जी आपको भी मैंने फोन किया था अच्छा जी मेरे पास फोन ही नहीं आया आपके नहीं आया होगा

01:01:05:27 देखिए गुरुकुल से जाते समय यह किसी को कहते हैं क्या कि तुम शूद्र आज से गायत्री मंत्र बंद ये बड़ा बड़ा क्वेश्चन है व आर समाज छोड़ देगा तुरंत ह आज से समाज नहीं बाबा बाबाजी पूरी तैयारी के साथ में आए थे कि आपको बोलने ही नहीं देना है आप चाहे कितना भी कोशिश कर लो आप क्वेश्चन नहीं कर सकते उनसे हां तो बात ये है ना इनका बैकग्राउंड आपने नहीं बताया कैसे आए कैसे ये ये खुद आए थे स्वयं आए थे या इनका इनको इनके पास हमारा नंबर है बीच-बीच में मुझे फोन कर रहे थे एक दिन एक दिन बस सीधे फोन लगाया और उस पर चिल्लाने लगे हां करो शास्त्रार्थ तुरंत फोन पे ही तुरंत करो साथ-साथ चालू मैंने कहा क्या साहब मैं अच्छा मैं ट्रेन पकड़ रहा था कहीं स्टेशन पे था मैंने क्या शास्त्र क्या तुम्हारा ईश्वर चाइना में जन्म क्यों नहीं लेता है क्यों नहीं ले रहा चाइना में जन्म तो मैंने कहा कि तुम भाई लाइव आकर के आप जो है बात करिए नहीं अभी करो तुरंत यही की यही अब आदमी सुबह कुल्ला कर रहा हो मंजन कर रहा हो दातून कर रहा हो कुछ कर रहा हो तो इनको जो है जैसे ही इनका फोन आया तुरंत इनका शसरा चालू तो इन्होंने देखा सुना होगा चर्चाएं तो उसमें य थोड़ा शायद

01:02:21:04 अग्रेसिव मोड में रहे होंगे अभी तो इन्होंने बहुत अपने आप को रोक के रखा था जब फोन पर बात करते हैं तो बहुत उसमें रहते हैं उत्तेजना में मुझे मुझे समझाना पड़ता है रुको रुको रुको ऐसे से ऐसे करेंगे कुछ समझ में नहीं आ रहा होता बोल रहे होते हैं चर्चा का ज्ञान ही नहीं है शिवान जी मेरे कने मतलब ये है किन ये खोखला पन है व कहावत है ना कि थोथा चना बजे घन चना बना

01:02:53:20 जी वो वाली बात है है नहीं इनके पास में कुछ ये सब सब इनके आईडिया है सब कुछ समझते हैं ये और यह आते हैं अपनी ऐसी की तैसी करवाने के लिए ऐसे ही सब करने के लिए आके हसा के अपने आप को चले जाते हैं यहां प ऐसी कोई चर्चा होती है मैं देखकर मेरे को बहुत हसी आ रही थी और वो भी वही मैं कह रहा हूं कि ऐसे ऐसे आचार्य हो जाते हैं जिनको सुनने की अरे पहले तो गुड लिनर बनो यार अपना पहले सुनो उसके बाद उसको जवाब दो सही नहीं समझ में आ रहा फिर आप काउंट करो उनको क्वेश्चन करो उनको चर्चा होती है ऐसी ये तो बहस हो गया ना कि हम आके एक दूसरे के साथ बहस करते हैं ना आप बोलो ना मैं बोलू ऑडियंस ऐसे ही मजे लेती रहती

01:03:39:22 है अब ये देखिए पहले अपनी बात को रखने के लिए रावण के शरीर में ईश्वर था कि नहीं था संकल्प मात्र से रावण को मारा जा सकता है कि नहीं जब मैंने बात रखी तो वो अलग सत्ता है वो अलग सत्ता है अब उसमें जो है बातें बदलने लगी अपने आप चले गए आपने हटा दिया उनको नहीं मैंने तो नहीं हटाया है य बीच में डिस्कनेक्ट हो गए थे दोनों लोग और सुनिए इनके मुखबिर से हमने क्या क्या प्राप्त किया दयानंद जी जो लिख के गए वो ये नहीं कर रहे हैं भाई जो धर्म का क्षेत्र है उसमें तो यथावत पालन करिए जब दयानंद जी लिख और चलो बदलाव कर रहा है तो कौन करेगा कैसे करेगा किस आधार पर करेगा उसका कोई पैरामीटर होगा कि नहीं तेरे लिए कर्तव्य और कर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण है आपके शास्त्र कहां है फिर अपने मन मर्जी से कर रहे हो जब अच्छा दूसरी एक बात है कि क्या कहते हैं वो विधवा विवा वाली बात कि विधवा जो है व विचार हो रही है यह कितना लॉजिकल है कितना लॉजिकल है कि ऋषियों ने विधवा विना पहले तो इन्होंने मान लिया कि विधवा विवाह मना है ऋषियों के द्वारा यानी कि शास्त्र क्या कहते

01:04:54:22 हैं विधवा विवाह होना चाहिए यह जो आर्य समाज है अपने मन से कर रहा है ये उन्होने एक्सेप्ट किया है ठीक है तो इनके लिए शास्त्र प्रमाण नहीं है कर्तव्य कर्तव्य के विषय में अपना मन मुताबिक मान्य है दूसरी बात इनका लॉजिक क्या है कि व व्यभिचारी हो रहे हैं भाई जब तक भोग का निवारण करने के लिए भोग देते रहोगे तो उसके गर्भ से भी भोग ही निकलेगा बिल्कुल भोग का निवारण करने के लिए यदि भोग देते रहेंगे आप तो उसके गर्भ से भी भोग ही निकलेगा तो क्या है कि आप अगर उसको यह लगा रहे हैं कि तुम्हारा जो भोग है वो क्या कहते हैं वो ना कहला है अनैतिक ना कहला है इसलिए हम तुम्ह सर्टिफिकेट दे देते हैं कि तुम जो भोग करना चाहते हो उसको जो है नीति पूर्ण तरीके से करो तो उसके बाद वो फिर वो और भोग मांगेगी भैया इसमें भी सर्टिफिकेट दे दो इसमें भी सर्टिफिकेट मेरे चार विवाह कराओ इसमें भी सर्टिफिकेट दे दो क्योंकि वो भोग कर रही थी अपने पति से बाहर जाकर के भी या स्त्री से बाहर अपने पत्नी से बाहर जाकर पुरुष भोग कर रहा था इसलिए उसकी मैंने और चार शादियां मान्य कर दी पांच शादिया मान्य कर दी बना दो इस्लाम और क्या हैय

01:06:10:01 हा जैसे आज आजकल की जो गवर्नमेंट भी तो ऐसे ऐसे रूल रेगुलेशन फॉलो वो अलाव करती है ना आप बेड में भी बेड में भी सीसीटीवी कैमरा लगाएंगे कि पति पत्नी के साथ विचार कर रहा है कि नहीं कर रहा है जबरदस्ती कर रहा है कि नहीं कर रहा है तब उसको फाइड करने के लिए आर्य समाज में भेज दो और इस सब के बावजूद इस सब के बाद भी आप आज के जो वैवाहिक संबंध उनका वो देख लीजिए क्या है लोग आत्महत्या क्यों कर रहे हैं भाई तुम्हारी व्यवस्था बहुत बढ़िया है तुम्हारी व्यवस्था लागू है क्यों कर रहे हैं आत्महत्या

01:06:44:01 फिर आप आप आचार्य को रिक्वेस्ट कर लीजिए एक बार और आ जाए एक बार मॉडरेटर के साथ हो जाए या अब नेक्स्ट आप नेक्स्ट जो भी डिस्कशन रखिए ना वो मॉडरेटर के साथ ही रखिए उसे क्या होगा किर आपकी भी बात ओवरलैप नहीं होगी और उसे रोक दिया जाएगा नहीं असल में वहां बच्चों के सामने उनका वो हो रहा था ना तो वह अपने बच्चों को सुनाने में लग रहे थे बच्चों के सामने कहीं वो ना हो जाए कि गुरु जी के पास उत्तर नहीं था उतर नहीं था उनके पास दिख रहा था वना अब कैसे करें तो तो नहीं

01:07:20:20 था चलो कोई बात नहीं खैर मुझे इस का पहले से आभास ला कर आ रहे क्या आभास था हल्ला कर रहे थे और क्या कर रहे थे वो अल्लाह करने आ रहे हैं इस बात का मुझे आभास था बच्चों के सामने नहीं नहीं लाही कर रहे बा का जवाब ही नहीं था मैं क्वेश्चन करूंगा फिर काउंटर क्वेश्चन में तुरंत करूंगा ये कौन है भाई हिंदुस्तान ू सनातनी भाई अपने आप को सनातनी तो लिख लो क्योंकि सनातन का यूज तो वो लोग कर रहे हैं हिंदू तो मना कर रहे हैं अपने आप को हिंदू क्यों कह रहे हो इस कौन के फॉलोवर तो हिंदू तो मना कर रहे हैं वो लोग वी आर नॉट

01:08:10:21 हिंदू तो हमने क्या जाना कि अगर ईश्वर सर्वज्ञ है तो कोई ऐसी चीज ना हो जो उसके जानने से बच गई हो अगर ईश्वर सर्वव्यापक है तो कोई ऐसी जगह ना हो जो उसके होने से बच गई हो व्याप्त होने से बच गई हो तो ईश्वर अगर सर्वशक्तिमान है तो कोई ऐसा कार्य क्यों है जो उसके द्वारा किए जाने से बच जाए और ईश्वर यदि सब जगह है वह केवल सं संकल्प मात्र से रावण को मार सकता है तो वह केवल संकल्प मात्र से आपको अपना ज्ञान भी करा सकता है वह चाह लेगा आपको ज्ञान हो जाएगा फिर क्यों वो वेदिक मंत्रों के रूप में दे रहा है अलग सत्ता अलग सत्ता है य जवाब होगा हा फ वो अलग सत्ता नहीं य य पर बाद करना पड़ेगा ना ईश्वर को बिल्कुल हा बाद मानना पड़ेगा ना 21 पंडित हारे थे दयानंद जी से वहीं पर व काशी में शास्त्र स्मृति स्थल प वही पर बैंड बजा के आए किसी की कर अभी वीडियो आने वाला

01:09:23:14 है एक टाइम प बहुत प्रभाव में आ गया था इनके आर्य समा जीयों के बहुत ज्यादा प्रभाव में आ गया था मैं अपने घर में हमेशा ह हर टॉपिक पर लड़ाई झगड़ा करता रहता था भगवान बचाए मुझे कैसे कैसे कैसे कैसे मुझे सद्बुद्धि हुई और कैसे कैसे वहां से बाहर निकला मैं आप जैसे सद्बुद्धि आदमी के साथ में कांटेक्ट हुआ लोगों को समझा मैं वो उनके तर्को को समझा फिर जाकर मेरा माइंड मे दिमाग खुला मैं कहा यार ये चीज है यहां प ये माइंड को बिल्कुल ब्लॉक कर देते हैं मालिक और मैक्सिमम आजकल के जो हिंदू है ना जो न हिंदू है जिसे मतलब उनको ज्ञान से कोई मतलब नहीं है धर्म से कोई मतलब नहीं है क्योंकि लोकाचार में फसे हुए हैं उस लोकाचार को आधार बनाते हुए य कोई भी नियम कानून लागू कर देते हैं अपने आर्य समाज के अंदर में तो उससे ज्यादा अट्रैक्शन मिलता है उनको तो उसके लिए व बहुत बढ़िया रहता है आर्य समा को तो उन्ही को कैप्चर कि हुए उनके माइंड को कैप्चर किया हुआ है इन्होने बिल्कुल अभी मैं एक प्रमाण बुद्धि वाली बात कर रहा था कि महाभारत में एक वाक्य आया है कि अगर अ श्रद्धावन व्यक्ति अच्छे आचरण वाला हो और श्रद्धावन व्यक्ति खराब आचरण वाला हो फिर भी वह अ श्रद्धावन अच्छे आचरण वाले से उच्च है कारण क्या है उसका क्योंकि उसकी प्रमाण बुद्धि धर्म में

01:10:38:20 श्रद्धा है तो अभी जैसे इन्होंने कहा ना कि तुम भी तो अंग्रेजी कपड़े पहन लेते हो तो मैं उतने हिस्से में कहूंगा कि मैं गलत हूं तुम जितने हिस्से में गलत हो तो वहां यह कहो कि तुम गलत हो तुम अपने गलत को भी सही क्यों कह रहे हो समझ रहे जैसे कोई व्यक्ति है जो अपनी इंद्रियों को काबू में नहीं कर पा रहा है उसके पिता ने उसको मना किया बेटा शराब पीना गलत बात है अब वोह जाकर के शराब पी रहा है अब शराब पीते समय दो तरह की बुद्धि होनी चाहिए एक कि मुझसे मुझसे रहा नहीं जा रहा मैं पी के रहूंगा मगर पिताजी जो समझाते वही सही है यह क्या हुआ यह हुआ श्रद्धा उसकी प्रमाण बुद्धि अपने पिता में है बिल्कुल और दूसरा व्यक्ति क्या है अरे वो गलत है यह सही है यही सही है शराब पीना सही है यह गलत व्यक्ति है तो हम लोग सब लोग अपने अपने जीवन में ऐसी बहुत सी चीजें कर रहे हैं जो पूर्णत शास्त्र सम्मत नहीं है मगर उतने अंश को हम धर्म के रूप में खपत नहीं करते हम वहां कहते हैं कि हम य गलती कर रहे हैं भाई यहां धम य हम धर्म का वो नहीं कर पा रहे हम लोग प्रयास रत है वैसा बन जाने के लिए मगर हमने धर्म धर्म को वो नहीं कर लिया यहां पर कि मैंने अगर अंग्रेजी

01:11:54:00 कपड़े पहन लिए तो ये जो ये संविधान है यही है तेरे लिए कर्तव्य कर्तव्य में तुझे अंग्रेजी कपड़े पहनने है रामपाल जी क्या हाल है रामपाल रामपाल जी के चेलो का क्या हाल चाल है आजकल जी फनन आते हैं कभी कभी आज सुबह सुबह आ मेरी नींद उसी है फोन से ही आवाज आ रही है या नेटवर्क इशू है हा आर्य समाज जी वो मैं उनसे कहना चाहूंगा वो जो अभी आचार्य जी आए थे वो अगर आना चाहे तो दोबारा आ सकते हैं बीच में मॉडरेटर है कोई अगर अनावश्यक प्रलाप करेगा तो उनको जो है याद दिलाया जाएगा कि आप अनावश्यक बोल रहे हैं अभी नारायण कोई हिंदू का अर्थ पूछ रहा है रहाती हुई गाय को धोने वाला हिंदू हिंदू सरोवर से लेकर हिमालय से लेकर हिंदू सरोवर के बीच में हिंदुस्थान और क्या कहते हैं वो व वा कालिका पुराण का एक श्लोक है ना बलि ना कालीना छने धर्मे कल विरत कलो यव कंता हिंद वि विंद

01:13:11:08 वासना कालने लिना नून मधम कलिते कलो यवने जवने अघोर अर्घ मा क्रांता हिंद विंद मा मतलब अर्थ ये है कि काल बलि के चक्र कु चक्र के कारण कली में अधर्म से वैदिक धर्म के अन्न हो जाने पर तथा घोर आक्रांता यावो से भारत के विविध भूभाग को को का उत्पीड़न हो जाने पर जो हिंदू हैं वो विंध्या पर्वत से और हिंदू सरोवर के बीच में आ गए वो हिंदू कहलाए यह प्रमाण है हिंदू का होने का ये ग्रंथ है भाई गर्भ से क ू है उसी का ही पहला दूसरा श्लोक है जी काली इनका ईश्वर सर्वशक्तिमान तो नहीं है बस एक खोखले तौर पर दावा जरूर करते कि हमारा ईश्वर भी सर्वशक्तिमान है अभी सर्वशक्तिमान पर और बहुत सी बातें चीज थी जैसे इन्होंने कहा कि वो हमारा ईश्वर सर्वशक्तिमान है क्योंकि वह अपने कार्य कर लेता है उसमें किसी की सहायता नहीं लेता मगर सृष्टि करना अगर उसका कार्य है तो उसके लिए उसको प्रकृति की सहायता लेनी पड़ रही है कि नहीं प्रकृति की सहायता लेनी पड़ रही है कि नहीं बिना प्रकृति के सृष्ट करता है क्या वो संसार की और

01:14:27:13 जीव की सहायता लेनी पड़ रही है कि नहीं बिना जीव के मनुष्य पैदा करता है क्या वो और दूसरी बात अगर इस डेफिनेशन को हम ले लेंगे कि आत्म निर्भर है अगर सर्वशक्तिमान का मतलब है जो अपने कार्य खुद कर सके तो उसका मतलब है कि वह आत्मनिर्भर है तो आत्मनिर्भर और सर्वशक्तिमान क्या एक है नहीं सर्वशक्तिमान आत्मनिर्भर है मगर हर आत्मनिर्भर सर्वशक्तिमान नहीं है अब मैंने कहा कहा कि भाई मेरा कार्य है ताली बजाना तो मैं ताली बजा रहा हूं तो मैं सर्वशक्तिमान हो गया क्या ये कहां की डेफिनेशन है

01:15:07:07 भाई और इसके साथ ही साथ बहुत सी चीजें थी जो समझ गए थे जब मैंने क्वेश्चन किया ना कि मनुष्य के अंदर ईश्वर है कि नहीं तो वो समझ ग कि ईश्वरी सत्ता अलग है जी सत्ता अलग है अब सत्ता करने लगे सल आपसे पूछा ना कि लास्ट में है कि नहीं ईश्वर तो आपने बोल दिया हां तो क र अरे अब क्या बोलू ये तो मैं एक् नहीं कर रहा था आंसर हिंदू मुस्लिम की शादी करवा देते और क्या कह के वो भैया वो बनना चाह रहा था हिंदू बनना चाह रहा था इसलिए हमने विवाह करवा दिया सर्टिफिकेट दे दिया उसको क कल का वीडियो सुन रहा था मैं वो आचार्य जी के पास गए थेला आचार्य जी थे क्या ड्रामा तयार मतलब मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि मतलब इनकी बौद्धिक स्तर कितना बड़ा है कितना छोटा है इनका जी कुछ नहीं समझ में आता इनका और वैसे वैसे लोगों को कहते हैं कि हम हिंदुओं की शादी कराते हैं अभी मेरे पास एक कल फोन आया था कि आपको विवाह से क्या दिक्कत है मैंने कहा कि भैया आपके आपके अनुसार जो धार्मिक है जो धर्म को मानने

01:16:22:14 वाला है वही उसी की शादी अपने आप करागे या किसी की भी करा दोगे बोला किसी की भी नहीं जो धर्म को मानेगा उसी की कराएंगे तो फिर मैंने पूछा ये बताओ कि मूर्ति पूजक जो है वो धर्म को मानने वाले हैं आपकी नजरों में नहीं है अधर्म ही है सत्यार्थ प्रकाश में लिखा है मूर्ति पूजा अधर्म में पाप है तो अगर मूर्ति पूजा अधर्म में पाप है तो मूर्ति पूज को का विवाह क्यों करा रहे हो अपने यहां अगर तुम मुसलमान को कन्वर्ट करा कर कि पहले उसको सनातनी बनाते हो फिर उसका विवाह कराते हो तो तुम मूर्ति पूजक को कन्वर्ट क्यों नहीं करा रहे हो आर समाजी में या तो उसको अधर्मी मान लो या मान लो कि नहीं नहीं हम ऐसे ही कहते हैं वरना हम तो अंदर से तो हम भी वही है हम भी मूर्ति की पूजा करते हैं अंदर

01:17:13:09 से शिवान जी आजकल रामपाल जी के क्या हाल चाल है उनके चेलो का क्या हाल चाल है चेलो के फोन उन आते थोड़ा मुझे इधर समय नहीं मिल रहा है क्योंकि कुंभ में जाने के कारण र समाज और इन सब के चैप्टर रिओपन हो गए थी केस फाइल्स इनकी काफी दिन से क्लोज पड़ी हुई थी वो रिओपन हो गए तो उसमें लगातार वही चलता जा रहा है तो इसलिए अभी रामपाल जी को थोड़े रामपाल वालों को मैंने थोड़ी वो दे दी है थोड़ा आराम कर लो थोड़ा सा रिलैक्स अभी टाइम आउट चल रहा है हां तेरी बारी है कमर कसले तेरे बस में है सारे मसले तो तैयारी कर लो थोड़ी उसके बाद दोबारा किसी दिन तुम्हारी फाइल खोल देंगे बाकी ग्राउंड पर चल रहा है वो बताएंगे नहीं मगर ग्राउंड पर काफी कुछ चल रहा है और सबसे बड़ी बात है कि लोग इतने अलर्ट हो गए हैं इस समय कि कहीं भी अगर इनकी पुस्तकें बेची जा रही है नॉर्मली जहां इनका प्रभाव ज्यादा है वहां तो बात अलग है मगर जो सामान्य जगह है जहां अभी प्रभाव नहीं है वहां पर अगर कोई पुस्तक भेजता हुआ मिल रहा है तुरंत लोग बाग पुलिस को बुला रहे हैं ऐसे बहुत से मामले सामने आ रहे हैं तो ये जागरूकता तो ले ही आए हम लोग आजकल एक और चीजें चल रही है मुझे बहुत बाद में बहुत लेट समझ में

01:18:28:09 आया वो उसका जो मेन एजेंडा है जैसे कि इस एक टॉपिक पर मैंने आपको कॉल करके कंफर्मेशन लिया था शिव गुरु के नाम से शिव गुरु का जो टॉपिक चल रहा है आपको एक बार कॉल किया था आपको याद होगा शायद हम कि हमारे पूर्वांचल में ना पूर्वांचल और बिहार के साइड में शिव चर्चा बहुत जोरो सरो प है बहुत जोर सोर से शिव चर्चा चलता है जिसमें उनका मानना ये है कि शिव शिव को ही वो गुरु गुरु मान के और उनका गुणगान करते स्तुति वगैरह करते हैं उसमें क्या है कि जो अन्य प्रकार की जो जातियां है ठीक है जिसमें जो भाई ब्राह्मण वर्ग है चाहे क्षत्रिय वर्ग चाहे वैश्य वर्ग हो चाहे शूद्र वर्ग हो कोई भी व्यास ग में बैठकर प्रवचन करना स्टार्ट कर देता है कोई भी नहीं भाई मेरे को ज्ञान है मेरे को शिव गुरु जी के वो है मैं शिव जी को वो करूंगी और शिव को ही गुरु मान बाद में मेरे को य एजेंडा ये एजेंडा लगा मेरे को कि जो कुल गुरु होते हैं ना ये कुल गुरु का रिप्लेसमेंट है कोई कुल गुरु बनाया ग नहीं क्यों नहीं बनाएगा कि हमारे शिव गुरु ही है व वही है सब कुछ हमारे लिए और बहुत जोरो सोरो पर चल रहा है बहुत जोर स चल रहा है मेरे को थोड़ा सा पॉजिटिव पॉइंट भी लगा कि चलो ठीक है जो गांव के जो महिलाए वगैरह है जो थोड़ा सा धर्म कार्य करती है तो एक दूसरे के अंदर में बाउंडिंग होता है

01:19:43:14 एक दूसरे को समझती है तो तीसरा वर्ग ना उनके बीच में खलल पैदा नहीं कर सकता उनको तोड़ नहीं सकता तो मुझे एक पॉजिटिव पॉइंट ऐसा भी लगता है लेन बाद में जो मेन जो एजेंडा है ना वो मुझे यही लगा कि कुल गुरु की इन फ्यूचर में कोई आवश्यकता ही नहीं होगी क्यों क्योंकि हमारे तो हमारे लिए तो शिव ही गुरु है उन्हीं को हम गुरु मानके अपना कार्य करते हैं याहे कोई भी अपना वाली बात है कुल मिलाकर कर्मणा कर्मणा हर जगह कर्मणा कर दो जिससे जो हमारी परंपरा प्राप्त जो हमारे को प्राप्त है वो नष्ट हो जाए और फिर कर्मणा के नाम पर विदेशियों को ला दो मलेच्छ को ला दो और उन उनके हाथ में अपनी सत्ता दे दो और दोबारा से गुलाम बन जाओ मिटा दो सनातन धर्म क्योंकि जैसे ही हम लोग चीज जैसे ही हम लोग भक्ति के नाम पर कर्म के नाम पर सत्ता किसी और को किसी को भी देने लग जाएंगे बांटने लग जाएंगे तो उसमें मुस्लिम भी आ जाएगा उसमें क्रिश्चन भी आ जाएगा उसमें कोई भी व्यक्ति आ जाएगा कर्म के नाम पर भक्ति के नाम पर कोई भी आपकी धार्मिक सत्ता को अतिया ले ये ी ओर ले जा रहे हैं भले ही आर समाज हो या भले ही इसकन हो कर्म और ये भक्ति के नाम पर ये लोग धार्मिक सत्ता हमारी भेज देंगे अंततोगत्वा वो लोग सिखाएंगे एक दिन आ कर के देखो कृष्णा और क्राइस्ट एक है हम बताते

01:20:58:22 थे मगर जैसे सारी कलाए जो है कृष्ण में उ भाषित होती है इसलिए बाकी सब जो है निम्न है इसी प्रकार से क्राइस्ट के अंदर एक पॉइंट गुण और ज्यादा है कृष्ण से भी इसलिए वह कृष्ण से भी श्रेष्ठ है हम मानते बहुत है कृष्ण को एक दिन य आएगा देखिएगा इनके ही मंदिरों में हम मानते बहुत है कृष्ण को जैसे अभी शिव और विष्णु को मानते हैं ऐसे ही हम मानते बहुत है कृष्ण को मगर क्या है ना हम उनका अनादर नहीं एक पॉइंट थोड़ा सा ज्यादा है क्राइस्ट तो कृष्ण की जगह कृष्ण एंड क्राइस्ट आर सेम उसके बाद क्राइस्ट रह गए कृष्ण सेकेंडरी हो गए धीरे धीरे उतरते उतरते नीचे आ गए फ धीरे धीरे गायब होने लगे बास नहीं ये आपने ये सब डीप स्टेट के पार्ट है शिवा जी पता नहीं आप जानते हो नहीं जानते डीप स्ट का एक पार्ट यह भी है पूरे विश्व में एक नया रिलीजन क्रिएट करना है एक नया धर्म स्थापित कर और धर्म गा वो धर्म कैसा रहेगा वो अब्राहम अब्राहम रिलीजन के थॉट के अकॉर्डिंग चलेगा तो यह जो जितने भी एजें है जितने भी एजेंट है चाहे य आर्य समाज हो स्कोन हो चाहे ब्रह्म कुमारी हो चाहे ब्रह्म समाज हो यह सब उसी

01:22:14:08 के कोई आर समाधि आए आपका चेहरा दिखाइए भाई साब नहीं दिखाएंगे चले गए आप जो शिव गुरु की बात कर रहे थे ना देखिए भाव से तो आप किसी को भी अपना गुरु बना सकते हैं लेकिन क्या आपको गुरु ज्ञान दे रहा है गुरु कैसे आपने उसे गुरु बना लिया क्या उसने आपको शिष्य बनाया यह कैसे पता लगेगा आपको क्या आपने शिव से पूछा जाके यह बताइए या शिव ने आपको बताया तो ऐसा तो है नहीं तो अपने मन से कुछ भी करने से नहीं हो जाता ना उसके लिए फिर आपको बनाना ही पड़ेगा आपको गुरु चाहिए गुरु आजकल कुछ लोग यह कहने लगे हैं कि करोड़ों का फंड आ रहा है हमको यहां प कॉलर माइक यहां प कॉलर माइक खराब हो गया तो दो महीने से इंतजार कर रहे हैं कि रिपेयर हो जाए हा बिल्कुल

01:23:06:22 जो भी बोल रहा है भैया उसके मुह में घी शक्कर हा फंड आ रहा है य यात्रा करने के लिए फंड नहीं है यहां पर बहुत से कार है जो अटके हुए हैं उनके लिए फंड नहीं है ये लोग कह रहे करोड़ों रुपए का फंड आ रहा है कौन आया थामा भाई करोड़ मत ये ये इनके देखिए इनके कमेंट आ रहे हैं इस समय आर समा जीयों के चैट में कुछ लिख रहे हैं घर से उठवा लेंगे वही रामपाल का जो एक्सट्रीम लेवल पर जब चले गए थे हम तो जो होने लगा था वही य हो रहा है ले लो भाई स्क्रीनशॉट ले लो काम आएगी कभी बताने की

01:23:56:15 तो बहुत सारी चीजें हैं वो हम लोग बात कर सकते थे अगर एक एक करके बात करते तो कुल मिलाकर बात होती इसलिए नहीं है कभी भी क्यों नहीं होती है क्योंकि सामने वाले कोय मालूम है कि ज्यादा बात करूंगा तो भेद खुल जाएगा इसलिए बात को होने ही मत दो नहीं नहीं ये तो बिल्कुल प्रिपेयर्ड हो ग थे पहले से ही वो लग गया था मुझे इनकी बातों को सुनते ही ऑलरेडी प्रिपेयर्ड थेन बोलने ही नहीं देना शिवान जी को चाहे कितना भी कोशिश कर ले अच्छा एक एक बात बहुत बढ़िया है यह लोग आर्य समाजी लोग यह कहते हैं कि ईश्वर अपने कार्यों को करने के लिए किसी की सहायता नहीं लेता ठीक है फिर ये दूसरी और दावा करते हैं कि वह जब धर्म की स्थापना करती करनी होती है तो महापुरुषों को भेजता है अब एक बात बताओ ईश्वर खुद आकर के धर्म की स्थापना करेगा तो आत्मनिर्भर है ना सहायता लेने वाला है या किसी जीव को भेजेगा जा भाई धर्म की स्थापना करके आ दयानंद जी के रूप में या कृष्ण के रूप में या राम के रू इनके हिसाब से ये तो सहायता ले रहा है बिल्कुल ये तो सहायता ले रहा है ना कार्य करने में अपनी उसके कार्य उत्पत्ति स्थिति समार और वो कर्मों का फल लेना वो तो सब

01:25:11:22 में सहायता ले रहा है प्रकृति की सब में सहायता ले रहा है जीव की और धर्म की स्थापना की बात आ जाए तो खुद आके करेगा तब तो कहा जाएगा वो खुद करता है भाई आत्मनिर्भर है वो तो महान आत्माओं को भेज रहा है दूसरी आत्माओ को भेज रहा है क्यों भेज रहा है वो तो आत्मनिर्भर है उसको तो किसी की जरूरत नहीं है खुद करे तो इनकी चीजों से इन्हीं की बातें कटती है अच्छा उस समय चेहरा देखने लायक था आचार्य जी का जब मैंने पूछा कि आपके शरीर में ईश्वर है कि नहीं उनको याद आ गया सब सारी नॉलेज याद आ गई उस समय चलिए ठीक है आज की चर्चा को यहीं पर समाप्त करते हैं क्योंकि वो जा चुके हैं जाने के बाद हम लोगों को मेरे ख्याल से आधा घंटा हो चुका आधा पन घंटा तो लेंथ खामा खा बढ़ जाएगी तो लोग देखेंगे कम फिर उस चर्चा को है ना ठीक है फिर सभी को जय श्री राम और हमारा जो हमसे किसी भी बात पर अगर वैचारिक मतभेद रखते वैचारिक मतभेद के निमित्त आप ट कर सकते हैं यह हमारा नंबर है वहां पर फॉर्म मिलेगा चर्चा का लाइव स्ट्रीम चर्चा का उस फॉर्म को भर दीजिए हम आपसे संपर्क कर लेंगे दूसरी बात ट पर किसी भी प्रकार का सवाल करने का प्रयास ना करें ट

01:26:26:24 पर ही चर्चा करने का प्रयास ना करें अगर ऐसा करेंगे तो मुझे आपको ब्लॉक करना पड़ेगा क्योंकि मेरे पास समय नहीं है ट पर आपसे चर्चा करने का ठीक है तो यह सब चीजें याद रखिए और जिसको भी संपर्क करना वो कर सकता है 7408 30169 एक आने वाला है और मोहम्मद अपनी चेहरा नहीं दिखा रहे पता नहीं कौन है प्राइवेट चैट में गालिया दे रहे

01:26:58:26 हैं अच्छा थोड़ी भाषा ठीक हो गई अभी मोहम्मद बिलाल [हंसी] उद्दीन अरे चलो ठीक है हमारे ये वाले सिद्धांत जो इतने तगड़े हैं इतने तगड़े इतने स्ट्रंग है सर्वशक्तिमान ईश्वर वाला कि मतलब व्यक्ति आने बाद अगर अगर केवल बात करे ना मतलब वो झगड़ा ना करे चिल्लम चिल्ली ना करे बात अगर करे तो पाच 10 मिनट के अंदर निर्णय आ जाएगा अब देखिए व्यक्ति ज कैसे अपनी बात को घुमाता है जैसे मैंने कहा कि सर्व क्यों लगा रहे हो अगर सीमा कांत है अरे तो सर्व हो जाएगा एक देशीय कैसे रह जाएगा अगर वो अवतार लेले एक देशीय हो जाएगा व फिर सर्व देशीय नहीं रहेगा अरे भाई कोई कारण है ना कोई भी कारण है कि तू इस कुर्सी पर नहीं चढ़ पा रहा है कारण कोई भी है मगर सर्व मत लगाओ ना मत लगाओ बोलो सर्व नहीं है सर्व भी लगाएंगे और फिर बाधित भी करेंगे फिर दूसरा वेदों के प्रमाण को मानते हो कि नहीं भाई वेदों के प्रमाण को भी मानेंगे अभी हम आपसे पूछ रहे हैं सब कुछ कर सकता है कि नहीं फिर तीसरा कि उसको जरूरत क्या है आवश्यकता क्या है अरे भैया

01:28:14:02 मंत्रों के रूप में ज्ञान देने की क्या आवश्यकता है मन में सोचे यहां ज्ञान हो गया व्यक्ति को क्या ईश्वर ऐसा कर सकता है कि नहीं मगर वो मंत्रों के रूप में सगुण साकार स्वरूप क्यों दे रहा है ज्ञान का ज्ञान का सगुण साकार स्वरूप क्यों दे रहा है अरे यहां तक चर्चा लेकिन पहुंचेगी नहीं ना बीच में ही कुछ ना कुछ हो जाता है फिर खुद ही कहने लगे तुमसे शास्त्रार्थ नहीं होगा अरे भैया तुमने हमारी इतनी चर्चा देख रखी है फिर तुम य आ करके बता रहे हो शास्त्रार्थ नहीं होगा इन्होंने खुद स्वीकार किया है डिबेट हार चुके हैं हां तो जब हार ही चुके तो फिर क्या परेशान हो जल बन मछली की तरह क्यों फड़फड़ा रहे हो जब तुम हरा चुके हो तो जलन मछली की तरह क्यों फड़फड़ा रहे हो भाई फड़फड़ा तो उसके अंदर नहीं होती है जो जीता होता है वो चैन से बैठता है है ना झूठे की हद तक और चोर के घर तक तुम्हारे जो दो कौड़ी के वो जो तर्क वर्क लाते हो ना समय नहीं मिलता है जो तुम देते हो के वो सब लोग हो को कहते वो सेक्स गुरु है ये ते वो सेक्स गुरु है तो अच्छा दुनिया में हर कोई सेक्स से

01:29:29:04 ही जन्म ले रहा है तो सेक्स गुरु होना क्या बुरी बात है अरे भैया सेक्स सेक्स गुरु होना में बुरी बात तब है जब वो जो धार्मिक सिद्धांत है कि इससे बाहर जाकर के सेक्स नहीं करना है और तब वोह व्यक्ति सेक्स कराए वो बुरी बात है यह इनके कुतर्क होते हैं दुनिया में सब जगह सेक्स ही हो रहा है अगर दुनिया में कल को सब जगह पन इंडस्ट्रीज खुलने लगेगी तो तुम्हारा वो धर्म हो जाएगा है ना दुनिया में सब लोग बहन के साथ विवाह करने लगेंगे तुम्हारा वो धर्म हो जाएगा इन् जैसे लोगों का यही वास्तविकता तो सामने लाता हूं मैं इनके तर्क

01:30:05:19 देखिए अरे भाई दुनिया में सब लोग सेक्स अरे भाई दुनिया में सब लोग अगर धर्म के बाहर जाकर के सेक्स करने लग जाएंगे तो हम उसे क्या धर्म मान ले इस समय भीषण गर्मी पड़ने वाली है मई जून में तू एसी मत चालू करना पंखा मत चालू करना गर्मी पड़ रही है पड़ेगी उससे बचने का उपाय मत करना तू यह सब कुतर किया करते लोग बैठ गए आपस ही आपस में खुश हो जाते हैं हां प्रशांत पर भी वीडियो बनाएंगे अभी कुछ कम लोग मिले हैं

01:30:37:27 उसके हां तो इसके सिद्धांतों के अनुसार देखिए धर्म की धर्म का जहां पर अभाव है वहां पर अंत में यही है धर्म का जहां पर अभाव है वहां अंत में यही है तो ये जो कलयुगी योगी है जो धर्म का चोला ड़ करके फिर कई जगह कह देंगे कि विदेशों में धर्म कहां से आया इसके कुतर्क सुनो मैंने सुने इसके कुत किसी से कह रहा है कि विदेशों में तो सनातन धर्म है नहीं तो फिर वहां पर क्या बहन को बहन नहीं मानता व्यक्ति अरे बेवकूफ यहां पर थॉमस अल्वा एडिसन नहीं है तो तू बल्ब कैसे जला रहा है थॉमस अल्वा अगर तू बल्ब जला रहा है तो तेरे पास थॉमस अल्वा एडिसन से बल्ब आया ना बेवकूफ मूर्ख तो इसका मतलब दुनिया में जहां कहीं भी जो भी कुछ धार्मिक आचरण हो रहा है वो कहीं ना कहीं सनातन से ही ग है सिंपल अब वहां पर सनातन की किताबें नहीं है अपने सही रूप में यहां पर थम सलमा एडिसन का जन्म नहीं हुआ तुमने दुकान से खरीदा तो इसका मतलब यह कहोगे कि बल्ब थॉमस अल्वा एडिसन से नहीं मिला किसी और से मिला तुमने अगर प्रोविजन स्टोर से बल्ब खरीद लिया इलेक्ट्रिक इलेक्ट्रिकल दुकान सेर बल्ब खरीद लिया तो तुम यह कहोगे हमको थॉमस एडिसन से बल्ब नहीं मिला है हमने तो इलेक्ट्रिक शॉप से लिया है हा हद होती है मूर्खता की यह इनके कुतर के

01:31:53:26 बच्चों जैसी अपनी सभा लगा कर के आजकल वो पेड एडवर्टाइज और चला रहे हो मुझसे योग सीखो और उस समय अपना जो ये ओशो वादी पन है उसको छुपा के रखते हैं क्योंकि भाई ज्यादा जनता तो वही वाली है अपनी वाली मूर्ति पूजा करने वाली सैद्धांतिक तो क्या कहते हैं अपनी जो वास्तविकता है उसको छुपा के रखते हैं ये लोग हां जी बताइए आचार्य जी वापस आ गया आप आप म्यूट है रुक जाइए चलिए ठीक है बोलिए बताओ हा आप ये बताइए द्रोपदी को बचाने के लिएना बताना आपको है आपने तो आपने उसका जवाब ले लीजिए भाई साहब आपने क् संकल्प मात्र से रावण को मार सकता है कि नहीं तो हम मैं पूछ रहा हूं व संकल्प मात्र से आपको अपना ज्ञान

01:32:59:06 पहले मेरा प्रश्न सुनिए क्यों क्यों जब आप कर आपने प्रश्न किया था व संकल्प मात्र ब्राह्मण को मार सकता है तो उसे अवतार लेने की आवश्यकता क्या है अगर तुम उसे अवतार की आवश्यकता बता रहे हो तो ईश्वर वादित हो रहा है अब मैं पूछ रहा हूं अगर वो अगर वो अपना ज्ञान बिना मंत्रों के दे सकता है संकल्प मा से दे सकता है सुन लीजिए सुन लीजिए ईश्वर अपना जन ईश्वर अपना ज्ञान संकल्प मात्र से दे सकता है कि नहीं अगर दे सकता है तो मंत्रों की आवश्यकता क्या है ये बता देता क्यों नहीं वैदिक वैदिक ग्रंथों की आवश्यकता क्या है तैयार हूं सुनो सुनो मैं तैयार बैठा हूं क दे दे मैं आपसे पूछ रहा हूं मैं तो तैयार बैठा हूं क भगवान दे दे ज्ञान का ज्ञान दे ब कोका मन वो जब चाहेगा देगा जब चाहेगा जिस रूप से देगा नहीं कर सकते दे क्यों नहीं रहा

01:34:14:07 उसका मन है ना कब किसको देगा है वो दे नहीं उसका मा तो इसका मतलब बात मानते हो कि नहीं कि ईश्वर का ज्ञान जो है ईश्वर वेद के स्वरूप में देता है यह बताओ मानते हो कि नहीं नहीं वेद के अभी तो कहा है आपके मन में दे सकता है अभी तो आपने कहा कि आपको दे सकता है कि नहीं दे सकता अभी तो कहा मैं आपसे पूछ रहा हूं आपका दे दिया तो ईश्वर दे सकता है कि नहीं सुनो सुनो सुनो अब मेरा भी प्रश्न सुनो ना आपके अनुसार ईश्वर सं देखो आप केवल प्रश्न पूछ पूछ रहा हूं मैं आपसे पूछ रहा हूं ईश्वर ये बताओ भाई साहब मैंने आपसे अभी प्रश्न पूछा उसका उत्तर नहीं मिला मुझे रुक जाइए मैंने दोनों लोगों को म्यूट कर दिया है कोई को कोई नहीं बोलेगा अभी रुक जाइए मैंने दोनों लोगों को म्यूट किया है मेरी बात सुनिए एक बार में एक व्यक्ति बोलेगा तभी यह चर्चा हो पाएगी वरना ये चर्चा नहीं हो सकती आप भी शिवांश जी और आचार्य जी अगर आप दोनों लोग बोलते रहेंगे तो दर्शकों को ना हमें कुछ समझ में नहीं आएगा ठीक है तो इसको थोड़ा सा बारी-बारी करके चलते हैं अभी मैं म्यूट रखता हूं मैं अन म्यूट कर दूंगा तब आप बोलिएगा आचार्य जी आप मेरी बात सुन रहे

01:35:29:24 हैं ठीक है आचार्य जी ठीक हा हा हा आप आप मेरी बात सुन रहे हैं मैंने अभी शिवान जी को किया ठीक है बस अभी एक प्रश्न एक एक करके चलते हैं आपका भी प्रश्न लेंगे और उनको शिवान जी को जवाब देना पड़ेगा ठीक है मैं मैं उसकी जिम्मेदार ऐसा है शिवा की आदत है केवल प्रश्न पूछते हैं पूछने नहीं देते सुनि आप नहीं बोल रहे देखिए वो म्यूट है वो म्यूट है शिवा जी आप म्यूट है आप म्यूट है ठीक है शिवा जी देखिए शिवा जी की कोई आवाज नहीं आई है ठीक है उन्होंने एक प्रश्न पूछा है ठीक है आपसे मैं हा मेरा प्रश्न सुनि सुनि अब तक है 3 बजे से यही पूछते आए हैं मुझे बोलने नहीं दिया ने जी मैं नहीं था मैं नहीं था वहा पर अभी मैं आया हूं हा मैं प्रश्न पूछता हूं य उत्तर देंगे बस उसका कंटिन्यू बस उसी प्रश्न को कंटिन्यू करके फिर आपको आपका ही प्रश्न का उत्तर देंगे वो देंगे वो देंगे नहीं जा रहे यहां से कहीं भी ठीक है उन्होने जब उनका प्रश्न ये था कि एक बार फिर से मैं आपको आपको प्रश्न याद है क्या प्रश्न पूछा था उन्होंने आप बता पाएंगे पीछे की बात है छोड़िए मैं प्रश्न पूछ रहा हूं शरू करते उने उन्होंने प्रश्न क्या किया था उन्होंने प्रश्न क्या किया था आप ये बताइए एक बार बस

01:36:44:27 आप दर्शको को बता दीजिए प्रश्न किया था कि क्या सभी लोगों का जन् संस्कार एक बार में कर देते हैं मैंने कहा नहीं उस नहीं प्रश् अभी जो प्रश् कि वो बता देखिए सीधी बात नहीं आप बताइए ब जी ईश्वर अवतार ले सकता है कि नहीं ले सकता है ये प्रश्न पूछा तो मैं इस प्रश्न की व्याख्या करता हूं रुक जाइए रुक जाइए रुक जा आपको म्यूट करता एक बार एक बार फिर से प्रश्न सुन लीजिए हा जी शट किया मैं प्रश्न बता रहा हूं अपना मेरा प्रश्न इनसे ये है आचार जी आप म्यूट है आप मेरा प्रश्न इनसे ये है कि इन्होंने कहा कि रावण को व बिना बिना अवतार लिए संकल्प मात्र से मार सकता है तो फिर उसको संकल्प लेने की क्या आवश्यकता है तो मैंने इनसे प्रश्न किया कि वो हमें अपना ज्ञान बिना वेद मंत्रों के केवल मन में सोच लेगा संकल्प मात्र से करा सकता है तो फिर उसे वैदिक स्वरूप देने की आवश्यकता क्या है मंत्रों के रूप में ने की आवश्यकता क्या है ठीक है अब अगर ये ये कह रहे तो दे क्यों नहीं रहा अगर य ये कह रहे कि दे क्यों नहीं रहा तो इसका जवाब

01:38:00:00 यह है कि अगर वो संकल्प मात्र से रावण जैसों को मार सकता है तो मार क्यों नहीं रहा फिर ये भी आ गया अगर वो मार सकता है तो मार क्यों नहीं रहा ठीक है ठीक है ठीक है उनको उनको जवाब देने दीजिए इसका बारी बारी चलते है ठीक है जी आचार्य जी इसका उत्तर दे उत्तर दे आप नहीं अ जब ये कह रहे हैं कि रावण को मारने के लिए स्वर अवतार लेता है तब मैंने कहा के अगर उसको मारना होगा तो संकल से मार लेगा रावण को मारेगा क्यों जब परमात्मा ने रावण को जन्म दिया तो उसको कार्य करने की पूरी स्वतंत्रता है व अपने मृत्यु से मरेगा परमात्मा उसको मारेगा क्यों अलग से उसको बीच में मारेगा मेरा प्रश्न है सुनि मेरा प्रश्न य है श्वर अर ता है आचार

01:38:51:13 जी उनका प्रश्न कि कर सकता है कि नहीं सकना क्यों करना नहीं देखिए ऐसा है फसाने की बात मत करिए हमारी देखो मैं भी प्रश्न पूछ र जिसम आप फस रहे हो वो बात क्यों ना की जाए जिसम आप फस रहे हो वो बात ये कहां लि आप सुनिए आप अगर किसी बात रहे हो तो ये हमारी दिक्कत नहीं है आप अगर किसी बात प फस रहे हो तो हमारी दिक्कत नहीं है अपने सितो को करो दूसरी बात मेरा प्रश्न ये नहीं है मेरा प्रश्न ये नहीं है मेरा प्रश्न य है क्या ईश्वर क्या मेरा प्रश्न ये है क्या ईश्वर क्या ईश्वर संकल्प मात्र से अपना ज्ञान दे सकता है कि नहीं मैं ये पूछ रहा हूं केवल प्र नहीं नहीं यही बताओ केव दे सकता है कि नहीं और अभी आपने कहा वो मारेगा क्यों अभी आपने जो कहा वो मारेगा क्यों तो फिर ईश्वर का कर्म का फल देने का डिपार्टमेंट किसका है भाई नहीं मारेगा उसको जन्म दिया है एक मिनट श्वर एक मिनट ईश्वर कर्मों के फल स्वरूप ईश्वर कर्मों के फल स्वरूप किसी को मार सकता है कि नहीं मृत्यु दे सकता है कि नहीं नहीं जिसको जन्म दिया है

01:40:07:06 उसका कर्म करने की पूरी स्वतंत्रता है उसको क अगर कर्मों का फल उसको देना होगा किय मर जाए तो मार नहीं सकता ईश्वर उसे देखो जब उसकी जितनी आय होगी बीच में क्यों मारेगा बीच में क म आ रहे उत्तर मिल गया है ये नहीं जाएगा उन्होने आचार्य ने अपना उत्तर दे दिया यही है उत्तर उनका ठीक है वो क्यों करेगा ये उत्तर नहीं है उनका कि वो कर सकता है कि नहीं इनका उत्तर क के मैंने पूछा है कर्मों के फल स्वरूप कर्मों के फल स्वरूप भगवान मैंने पूछा क्या सुन लीजिए कर्मों के फल स्वरूप ईश्वर किसी को मृत्युदंड दे सकता है नहीं कर्मों के फल स्वरूप देगा लेकिन तो फिर क्यों क रहे हो े जन्म दिया तो हा ज

01:41:05:15 मारेगा मारेगा तो आज क्यों नहीं मार रहा अगर को मारेगा तो आज क्यों नहीं मार रहा श्वर अ ले सकता है तो आज क्यों नहीं ले रहाय बताओ उसका मन उसका मन ये क्या बात हुई उसका मन द्रोपदी को बचाने के लिए दो बार आया म्यूट कर दिया है आपको आप सुनिए अब सुनिए म्यूट कर दिया आपको आपके अनुसार भी ईश्वर कर्मों का फल देता है ठीक है यही है इनका चले गए वो चले गए वो वो जाना ही पड़ेगा उनको ऐसे नहीं होता ऐसे नहीं होए ये क्या है जो सिंपैथी का गेम होता है ना सिंपैथी वाला कार्ड ये लोग वो निकालना चाहते हैं तो उन्होंने उत्तर दे दिया ना उन्होंने दिया कि हमारा मन वैर की बात जो कर रहे हैं ये क्या है ये इमोशनल कार्ड खेलते हैं ऐसी बातें बोलो जिससे जनता ब उत्तर है उसका भी उत्तर है लेकिन वहां तक बात नहीं जा पा रही उसका भी जवाब है देने के लिए उसका उसका उत्तर है मगर बात ये है कि जो विषय चल रहा है उसको तो खत्म करें वही वही विष दूसरा विषय क्यों खोद रहे हो अभी पूछा ये जा रहा है जब इनके हिसाब से भी ईश्वर मृत्युदंड दे सकता है तो ये क्यों कह रहे हैं कि ईश्वर क्यों दे

01:42:20:20 देगा मृत्युदंड अब जब हमने कहा दे सकता है तो आ आज क्यों नहीं दे रहा है अरे भैया तो तुम नहीं मानते हो तो तुम कहो ना कि ईश्वर कर्मों का फल नहीं देता है तुम कहो ना ये बात अब उसम द्रौपदी की बात बोल रहे हैं दूसरी बातें बोल रहे हैं वो क्यों बोल रहे हैं जनता का अपनी ओर वो प्रभाव उत्पन्न करने के लिए जनता में जैसे मैंने एक वो देखा था दृश्य क्या कहते हैं जैसे होता है ना कि किसी ने कत्ल कर दिया है किसी ने कत्ल कर दिया है या कत्ल नहीं भी किया है और वो आरोपी एक्यूज पर्सन के रूप में टगरी में खड़ा हुआ है ठीक है अब जो सामने वाला वकील है अधिवक्ता उसका उसको उसका लक्ष्य य है कि मैं इस कटघरे में खड़े हुए व्यक्ति को सजा दिलवा हं वो क्या कर रहा है कि वो जो निर्दय तरीके से जो हत्या की गई है विक्टिम की जो मरा है उसकी जो निर्दय तरीके से हत्या हुई है उसकी फोटो दिखा रहा है जज को क्यों दिखा रहे हो भाई उस फोटो से क्या सिद्ध हो रहा है केवल तुम लोगों के मन में वो जो एक्यूज्ड पर्सन है उसके विरोध में नफरत भर रहे हो नफरत प्रभाव उत्पन्न कर रहे हो वही हाल है इनका कि जब इनके पास तर्क और प्रमाण युक्ति इत्यादि नहीं है तो यह लोगों के मन में अपना प्रभाव उत्पन्न करने के लिए इमोशनल

01:43:35:22 बातें करने लगते हैं भाई तुमसे पूछा य जा रहा है जब तुम खुद मानते हो कि ईश्वर कर्मों का फल दे सकता है मृत्यु के रूप में तो तुम यह सवाल करने वाले होते ही नहीं हो कि भैया ईश्वर जो है मारेगा क्यों बण को जैसे उन्होने अपने मन को ईश्वर के मन से लि उ बो जैसे ईश्वर का वैसे हमारा मन उसके बाद बाद में क्या कह रहे है अगर ईश्वर मार सकता तो मार क्यों नहीं रहा तो ये सवाल तो उनसे भी बनता है कि ईश्वर अगर कर्मों का फल दे सकता है तो क्यों नहीं दे रहा है क्यों नहीं दे रहा है तो इसका मतलब आपको मानना पड़ेगा कि जब जहां ईश्वर को जिसका फल देना होता है वो दे भी रहा है हो सकता है आपको पता ना हो हो सकता है कि निठारी हत्याकांड करने वाला व्यक्ति आपके आज के टाइम में दुखी हो आपको नहीं पता है ईश्वर ने दिया दंड ठीक है तो जो अन्याय कर रहा है उसको किस रूप में ईश्वर दंड दे रहा है ये हम लोग नहीं जानते ना मगर हम लोग यह जानते हैं कि ईश्वर धन्य देता है कर्मों का फल देता है ये तो ये भी मानते हैं तो फिर ये कहने वाले कौन होते हैं कि अगर वह ईश्वर कर्मों का फल देता है तो फिर आज क्यों नहीं दे रहा है अभी क्यों नहीं दे रहा है मतलब कुल मिलाकर के जब अवतार को नकारना हो तो ये कहेंगे वो लड़ क्यों नहीं रहा है वो

01:44:50:24 दंड क्यों नहीं दे रहा है और अपने सिद्धांत के लिए वो कभी भी कहीं भी अपने मन से जब देता रहता है उसका बिल्कुल न्याय पूर्ण सिद्धांत है यह बात तो वहां भी लागू होगी ना कि कर्मों का फल वो देता है तो दे क्यों नहीं रहा है जी अभी अभी इसी समय अभी इसी समय कहीं ना कहीं दुनिया में किसी व्यक्ति ने किसी मच्छर को मारा होगा प्राणी की हत्या की होगी ठीक है ईश्वर उसे दंड क्यों नहीं दे रहा है तो हमें कहना पड़ेगा कि ईश्वर कब किस रूप में किसको दंड देता है यह हम नहीं कह सकते मगर वह देता है हम कह सकते हैं बिल्कुल ठीक है तो उसका मन वो किस रूप में कैसे दे हो सकता है आपको पता ही ना लगे अब मैंने एक दिन सवाल किया था ये लोग एक आरोप लगाते कि क्या ईश्वर ऐसे कार्य कर सकता है गणित कार्य कर सकता है तो मैंने एक दिन सवाल किया था इनके गुरुकुल चलाते हैं आचार्य जी वो उनका स्वभाव बड़ा बढ़िया था तो मैंने उनसे सवाल किया था कि अगर किसी व्यक्ति के ऊपर उल्का पिन डा के गिर गया राम से तो ये क्या मानेंगे ईश्वर ने धोखा दिया कि नहीं दिया बिना बताए उसकी मृत्य हो गई कुछ नहीं पता था धोखा है ये तो मौसम साफ था ना कोई भविष्यवाणी हुई कि उल्का पिंड आने वाला है उल्का पिंड

01:46:05:27 आके गिर गया खत्म हो गया वो तो इसमें क्या मानेंगे इसमें मानेंगे कि उसके कर्मों का उसको फल दिया ईश्वर ने अच्छा उसके कर्मों का फल दिया मगर धोखा दिया कि नहीं धोखे से मारा कि नहीं मारा तो हमें ये मानना होगा कि जो कार्य हमें सामने से दिख ऐसे दिख सकते कि ईश्वर ने गलत किया मगर उसके पीछे का कारण जानने के बाद ने कर्मों का फल दिया तो हमें मानना होगा कि ईश्वर जो करता है सही करता है तो इसका मतलब अगर उसने बाली का वध किया पेड़ के पीछे जाकर के या उसने जो है वो वो जो राजा बली था उसको जो है धोखे से उसकी तीन पग धरती के नाम पर पूरा व सब कुछ ले लिया उसका तो उसको वो भी उसके कर्मों का फल दिया ईश्वर ने बिल्कुल तो येय इनके तरीके हैं और

01:46:58:13 ये चलिए ईश्वर का वही वही है कि यह फस य एक्चुअली उत्तर उसका नहीं दे पा रहे थे कि कर सकता है कि नहीं जब आपके पास इसका उत्तर नहीं होगा तो आपके पास उसका सबसे जो क्लोजेस्ट जो आंसर होगा वो यही होगा क्यों क्या क्या जरूरत है ठीक है और यही समानता है मुझे जब यह इस्लाम पंथ से भी प्रश्न पूछा जाता है कि ईश्वर का आकार सता आकार हो सकता है कि नहीं तो उनका भी उत्तर यही होता है कि इसको जरूरत क्या है आकार लेने की येय बस यही य समानता मुझे दिखती है उसम सर मैंने उनसे मैं अब वो नहीं आएंगे उनका मन ठीक नहीं है शुरू से अगर होते तो शायद यह थोड़ा सा थोड़ा सा सही हो जाता और मुझे लगता है कि अब जो जो उन्होंने उत्तर दे दिया ना अब क्या है कि उनसे कभी क्या होता है कि आप ना हमेशा मनवा नहीं सकते अपनी बात को सम उस भाव से नहीं कह रहा हूं जी ये बात वो भी जानते हैं कि इसका जवाब नहीं है कि कर सकता है कि नहीं ये ये दे नहीं सकते उसका जब देंगे तो पढना कम हो जाएगा उनका ये बात जानते हैं वो तो वो कभी नहीं देंगे आप इसको ये समझिए तो तो ना उस चर्चा को वहीं पर उस चर्चा के उस पार्ट को वही विराम देकर फिर दूसरी चर्चा पर बढ़ जाना चाहिए क्योंकि जनता

01:48:13:13 तो देख ही रही है व समझ रही है अंत में जब निर्णय होता तो हम बता देते कि आपने इसका उत्तर दिया आपने उसका उत्तर नहीं दिया आपने उसका उत्तर क्यों नहीं दिया क्योंकि आपने इसका इस तरह से जवाब दिया वो सब नोट करके बता देते तो वो आप सही कह रहे हैं देखिए दिक्कत कहां हुई जैसे मैं पूछ कुछ रहा हूं मैंने पूछा य क्या आप इस सिद्धांत को मानते हो कि नहीं ईश्वर कर्मों का फल देता है तो जब आप इसको मानते हो कर्मों का फल देने वाले सिद्धांत को तो यह कैसे कह सकते हो कि दे क्यों नहीं रहा जी जी बिल्कुल इतने अंश में तो आप स्वयं भी दयानंद के विरोध में चले गए जी बोलो ना कि हम दयानंद को नहीं मानते खुल के बोलो फिर आपसे ना फिर आपसे जो है सना विरोधी के तरीके से बात किया अभी तक सनातन का चोला ड़ कर के बात कर रहे हो फिर जब आपके पास दयानंद का भी सहारा नहीं रह जाएगा तो फिर हम आपसे सनातन विरोधी के तौर पर बात करेंगे और फिर जब आपका सनातन विरोधी धर्मा भास का भी सहारा नहीं रह जाएगा तब हम आपसे नास्तिक के अनुसार बात करेंगे और जब आपके पास नास्तिकता का भी सहारा नहीं ले रह जाएगा तब हम आपका जो

01:49:22:26 को काट के बोल रहे कि अगर वो देता है तो दे क्यों नहीं रहा है अरे भाई कर्मों का फल देता है तो क्यों नहीं दे रहा ये तो तुम वो भी मानते दयानंद जी क्यों नहीं दे रहा कर्मों का फल मैंने तुम्हें हटा दिया अभी तुम यही रोना रोगे अभी तुम अपने बच्चों के बीच में जाक रोना रोगे मुझे म्यूट किया गया मुझे हटाया गया यही रोना रहोगे ना तो क्यों नहीं कर्मों का फल दे रहा ईश्वर मुझे आपके अनुसार ईश्वर कर्मों का फल देता है क्यों नहीं दे रहा तो फैक्ट ये आएगा उत्तर ये आएगा कि ईश्वर कब किसको किस रूप में उसके कर्मों का फल देता ईश्वर ही जानता है हम केवल ये जानते हैं कि वो देता है ठीक है जी ऑडियंस में जो कुछ लोग कमेंट कर रहे हैं आप लोगों से हाथ जोड़ के रिक्वेस्ट करता हूं मैं कि ना दयानंद जी के बारे में ना जो आचार्य जी आए थे उनके बारे में ना किसी के बारे में अभद्र भाषा का प्रयोग ना करें अच्छा है ठीक है तो आप लोगों से बस रिक्वेस्ट कर रहा हूं मैं कोई भी हो आप अपने मतलब आप कटाक्ष कर सकते हैं लेकिन उसमें भी अभद्रता ना हो तो अच्छा है मलब कर यह देखिए प्रश्न पूछा जा रहा है कि आवाजे हक से बात कब करोगे तो भाई देखिए जो व्यक्ति अपना चेहरा छिपाकर बात करता है उससे हम बात नहीं करते हैं तो आवाज आ यदि चेहरा दिखाकर बात कर सकता है और हमसे अगर

01:50:38:00 उसका संपर्क होता है हमने तो अपना नंबर सार्वजनिक कर रखा है अगर उसके अंदर गुर्दा है कि वह अपने पक्ष को मजबूती के साथ रखने में सामर्थ्य वान है ये लाइन ठीक नहीं है अगर माता ने सुनिए सुनि सुनिए अगर गुर्दा है माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया है तो वो हमसे संपर्क कर ले अन्यथा अपने संपर्क सूत्र को सार्वजनिक कर ले कर दे हम संपर्क कर लेंगे और आवश्यक नहीं कि व हमारे चैनल पर आए या हम उसके चैनल पर जाए किसी बीच का चैनल ढूंढ कर के मॉडरेटर के साथ चर्चा कर लेंगे हमारे बहुत साधारण से सिद्धांत है मगर वही उसी में पूरी दुनिया हि जाती है ईश्वर अच्छा मैं दर्शकों को एक चीज और बता दूं कि यह क्या कहते

01:51:31:12 हैं हम लोग एक सिद्धांतों का प्रेम ला रहे हैं पाच सिद्धांत ईश्वर वही है वो संसार के प्रत्येक मनुष्य संसार का प्रत्येक मनुष्य भगवान को ही ढूंढ रहा है फिर वो भले ही खुद को नास्तिक क्यों ना कहता हो पहला सिद्धांत आवान के जो पांच मुख्य सिद्धांत है संसार का प्रत्येक मनुष्य भगवान को ही ढूंढ रहा है फिर वो भले ही खुद को नास्तिक ही क्यों ना कहता हो य पहला है दूसरा है ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है तीसरा है ईश्वर के विषय में केवल वही शास्त्र प्रमाणिक जिन्ह ईश्वर ने भी ना रचा हो चौथा है ज्ञान प्राप्त होता है परंपरा से और पांच में के दो फैक्टर हैं परंपरा तो कौन सी परंपरा शंकराचार्य परंपरा नारायण समारंभा शंकराचार्य मध्यमाम अश्म चार्य पर्यंत वंदे गुरु परम और परंपरा में अन्य परंपराएं भी आती है अन्य प्रामाणिक परंपराएं भी आती है केवल शंकराचार्य परंपरा कोई लक्ष्य करके नहीं है यह इसमें रामानुजाचार्य जी की परंपरा भी आती है इसमें अन्य जितने भी प्रामाणिक हमारे परंपरा प्राप्त आचार्यों के संप्रदाय वह सब आते हैं और इस इस इस पायदान पर दूसरा जो

01:52:46:15 वो है फैक्टर वो क्या है रामो विग्रहवां धर्म रा श्री राम का साक्षात स्वरूप है जब जब जीवन में कुछ भी समझ में ना आए क्या करना है और क्या नहीं करना है तो श्री राम को फॉलो करें ठीक है तो ये पांच सिद्धांतों को लेकर हम चल रहे हैं और इनको लेकर के कुछ पेंटिंग हम लोग अपनी उसमें देने वाले हैं तो आप सबसे निवेदन है कि उनको आप अपने घर पर लगाएं और इससे हमारी थोड़ी आर्थिक सहायता भी हो जाएगी और इन सिद्धांतों को अपने घर पर अपने जहां पर आप चाहे कि लोग उन सिद्धांतों को पढ़े वहां पर इन सिद्धांतों को आप लगाइए अपने आप ठीक है आर्थिक सहायता तो हो जाएगी क्योंकि करोड़ों की फंडिंग अभी अभी हमें हो नहीं रही है तो जब होगी तो नारायण चलिए जय श्री राम ठीक है चलिए फिर जय श्री राम जय श्री कृष्ण हर हर महादेव हर हर महादेव

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Live 1:53:48 · 04 Mar 2025

ईश्वर अवतार निषेध- Arya Samaj Acharya Live Discussion #aryasamaj

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