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00:00:01:20 [संगीत] जय श्री राम सभी लोगों को। अब देखिए कुछ पिछली बार से मैं ऐसा कर पा रहा हूं कि ज्यादा लेट नहीं हो रहा हूं निर्धारित दिए गए समय से। अ आज एक गंभीर विषय पर हम लोग चर्चा करने वाले हैं। अ एक परिवार है जो हमारे वीडियोस देख रहा था कुछ दिनों से और वो अपने समाज में अपने घर में जागरूकता फैलाने का प्रयास भी कर रहा था। पर उसके ही घर के जो लोग रामपाल से प्रभावित थे उन लोगों ने बलपूक उनके साथ मतलब कहेंगे कि दुराचार किया है, दुराचरण किया है तो वो क्या है क्या नहीं है? तो वह भी आके आपको बताएंगे

00:01:02:00 और इससे हमें पता लगेगा कि किस तरह से डर का वातावरण बना करके जैसे आपने अभी पिछली बार जो वो छोटी प्यारी बहना है जो उसने आकर के बताया था कि जब उसका एक्सीडेंट हो गया था तो जो लोग रामपाल से प्रभावित थे वह घर के ही लोग वो उसका इलाज नहीं करवा रहे थे। और उसको फिर डराया गया, धमकाया गया कि तेरे साथ ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि तू सद्भक्ति नहीं कर रही है। यह है वो है। ये सब उसको डराया धमकाया गया और उसने उन चीजों को मान लिया और

00:01:44:16 इन चीजों को मान करके वो जो बहना थी वो भी थोड़ी बहुत देर के लिए मजबूरी में हर हर महादेव। हर हर हर महादेव। हर हर शंकर और मजबूरी में उसने जो है फिर रामपाल का जो है आलंबन लेना शुरू किया मगर उसके अंदर से उसकी आत्मा जो है कचोटती रही और फिर हमारे वीडियो उसके सामने आए तो ये सब मगर यहां पर हम बात कर रहे थे कि बलपूर्वक तो ये लोग बलपूक भी कार्य करते हैं और बलपूर्वक कार्य करने में अगर कोई इनके अनुसार नहीं चल रहा है तो इन्होंने क्या किया वहां पर कि उनके साथ बल का प्रयोग किया, क्षति पहुंचाई, अवमानना की।

00:02:28:09 जब तक मातृशक्ति नहीं जुड़ रही है, मातृशक्ति भी हैं और उनके साथ शायद उनके हस्बैंड भी होंगे। वो लोग वो दंपत्ति जब तक नहीं जुड़ पा रही है तब तक आप कोई अपने प्रश्न हो तो वो कर सकते हैं। अच्छा एक बात मैं और बता दूं। सभी को आशीर्वाद छोटे जितने भी हैं सबको ढेर सारा आशीर्वाद। जितने भी साथ वाले हैं उन सबको यथोचित अभिवादन बड़ों को सम्मान सभी को जय श्री राम। तो अच्छा हो सकता है निकट भविष्य में आपको हमारी एक इस्लामिक

00:03:09:15 इनफ्लुएंसर्स या कहें विद्वानों के साथ या पता नहीं जो भी आएंगे तो उनके साथ एक चर्चा देखने को मिल जाए बहुत जल्दी क्योंकि क्योंकि हमसे संपर्क किया Instagram के द्वारा कुछ इस्लामिक लोगों ने कि भाई आपका हमें नाम रिकमेंड किया जाता है। कहीं पर भी कोई बात होती है तो हमें कहा जाता है कि आहान से आप जो है बात करके देखिए। तो बहुत जल्दी आपको एक अच्छी सी वार्ता देखने को मिल सकती है क्योंकि जो मातृशक्ति आई थी जो इस्लाम को मानने वाली थी पिछली बार उन्होंने बहुत ज्यादा समय नहीं लिया था तो शुरू होने से पहले ही बात जो है खत्म हो गई थी मगर अभी मूल रूप से जहां पर हमें पहुंचना था वह समय आने वाला क्योंकि आर्य समाज इस या रामपाल या जो भी तथाकथित सनातनी है मान लीजिए चोला ही पहन रहे हैं सनातनी होने का उसमें रामपाल तो चोला भी नहीं पहन रहे वो तो खुद कह रहे हैं कि नहीं हिंदू मुस्लिम एक हैं है ना तो रामपाल की तो बात

00:04:24:16 अलग है। खैर फिर भी यह सब तो एक मान लीजिए कि बहाना है। वास्तविकता तो यह है कि हमें इस्लामिक लोगों से पूछना है कि जिस ईश्वर को प्राप्त करने के लिए दिए गए आचरणों को मजहब के रूप में आप स्वीकार कर रहे हैं क्या वो ईश्वर वही ईश्वर है जिसकी आपके मन में चाह है जो आपकी मुक्ति का हेतु है

00:04:58:26 नहीं इस्लामिक अवेकनिंग नहीं है आवाज हक भी नहीं है आवाज ऐसे से हम चर्चा नहीं करेंगे जो अपने चेहरा ना दिखाए चर्चा हम उसी से करेंगे जो चेहरा दिखाएगा एक दिन इस पाखंडियों शिवश को क्या बहुत सारे शिवांश हो गए हैं क्या भाई साहब कह रहे हैं कि एक दिन इस पाखंडियों शिवश को बहुत सारे शिवांश हो गए तो अच्छी बात है छुपने की जगह नहीं मिलेगी क्या हुआ मेरे ऊपर आपके तत्वदर्शी का जादू नहीं चल रहा है क्या तो लाइव चर्चा चर्चा के लिए ललकारा है।

00:05:39:20 कलयुगी योगी ने हमको लाइव चर्चा के लिए ललकारा है। तो भाई कलयुगी योगी जैसे नहीं बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो हमें चर्चा के लिए ललकारते हैं। तो हमारा उनसे यह कहना है कि वह कुछ ऐसा करें। अभी कलयुगी योगी इत्यादि जो है यह हमारे लिए नगण्य है। नगन नथिंग कुछ नहीं हो तो आप कुछ ऐसा करिए कि हम विवश हो जाए आपका प्रतिकार करने के लिए आपको उत्तर देने के लिए हमें लगे कि आपकी आपको उत्तर देने के लिए आपकी चर्चा में भी जाना पड़ जाए तो जाएंगे तो हम आएंगे है ना अब जैसे हमें आवश्यक लगता है कि भाई इस की बातें सामने लाना है तो हम उनके मंदिर चले जाते हैं कि नहीं चले जाते तो आप कुछ ऐसा करो स्वयं को ऐसा बनाओ कि हम विवश हो जाए आपसे आपके साथ चर्चा चर्चा करने के लिए हमने कुछ ऐसा किया है कि आप विवश हो गए आपको आना पड़ गया आया ना हम तो ऐसे करके दिखाओ तो हम

00:06:42:24 तो जाकिर नायक तो अब ओल्ड फैशन हो गया है। ये जो नए-नए फदक रहे हैं इन लोगों से बात करेंगे तो आर्य समाज वाले वो तो कैंसिल हो गया ना वो पीछे हट गए ना दो बहाने लेकर के वो पीछे इसलिए वो दो बहाने थे उनके पास कि भाई चर्चा का विषय जो है सर्वशक्तिमान ईश्वर नहीं होगा क्यों नहीं होगा पता नहीं अच्छा वो क्या कहते हैं अ एक और था कि कैमरा केवल हम चलाएंगे। क्यों भाई? क्यों चलाओगे?

00:07:27:01 ये बात है। वो तो कैंसिल हो गया। तो कलयुगी योगी को मेरा संदेश है कि आप ऐसे बनो कि आप जब ललकारे हैं तो हम आ जाए। हमें लगेगा तो हम आ जाएंगे। है ना? हां। और नहीं आना होगा। हमें आपके ऊपर डाउट होगा तो हम कोई बीच का मध्यस्थ चैनल ढूंढेंगे। जैसे कि कई बार ऐसा हुआ कि हमने लोगों जैसे फैक्ट बाय अभिषेक है। अब वो अगर हमसे चर्चा करने आता है उसने अपने आप को ऐसा बना रखा है कि यदि वो हमसे संपर्क करेगा रामपाल का जो नुमाइंदा है फैक्ट बाय अभिषेक कि भैया हमसे चर्चा करो तो हम उसके लिए समय निकालेंगे क्योंकि उससे बात करने पर उसके 35,000 फॉलोवरर्स हैं। वो प्रभाव पड़ेगा। यू आर नथिंग। तुम कुछ नहीं हो तो तुम्हारे लिए हम एक्स्ट्रा एफर्ट्स क्यों डाले? हां, हमारी चलती लाइफ में तुम आ गए। हमने तुम्हारा निराकरण कर दिया। क्यों तुम वहां पर ऐसेसे करते रहे? अब बोलते नहीं आना जाना सिद्ध नहीं होता है। इससे ये सिद्ध नहीं होता। तब तो बिल्कुल बिल्कुल हां हां ये सब करते रहे। फिर आप जाकर के दूसरी चीजें कर रहे हो। तो ये चीज है। तो फैक्ट बाय अभिषेक अगर हमसे संपर्क करता है। है ना? या यह जैसे अभी हमने फोन लगाया था कुछ दिनों पूर्व सच्चिदानंद स्वामी को

00:08:42:02 तो वह अगर हमें कहते हैं कि हमसे चर्चा करो तो हां हम उनसे चर्चा करने आएंगे। हो सकता है कोई मध्यस्थ चैनल ढूंढे या हो सकता है अगर वो अपने ही चैनल पर आने का सुझाव दे तो उसमें भी हो सकता है हम तैयार हो जाए। भाई मैं भी परेशान हूं रामपाल के चक्कर में। आप अभी लिंक दिया जाएगा तो आप जुड़ जाइएगा। आप अपनी चीजें यहां रख सकते हैं। है ना? और क्या कहते हैं यह

00:09:15:27 इस के मंदिरों में हम गए हैं कई बार चर्चा करने तो आप अपने आप को बनाइए कुछ ऐसा करिए कि हमको दिक्कत हो आपसे अभी हमें कोई परेशानी नहीं आप अकेले थोड़ी ना है ये सब करने वाले बहुत लोग हैं बोल रहे हैं रोज हमें टैग किया जाता है रोज हमें मेंशन किया जाता है आप अकेले हो क्या बहुत बहुत लोग मेंशन कर रहे हैं। आप चिंता मत करो। आप तो करते रहो, करते रहो। जब हमें लगेगा कि नहीं नहीं अब आपको रोकना आवश्यक है तो रोकेंगे आकर के। है ना? तूफान ही फैसला करेगा रोशनी का। दिया वो जलेगा जिसमें दम हो। ठीक है।

00:09:58:21 मोहान कौन है भाई? मोहान। तो मातृ शक्ति जुड़ नहीं रही है। मैं ऑपरेटर महोदय को कहूंगा कि मातृ शक्ति से संपर्क करें और उन्हें जुड़ने को कहें। देखिए आप लोग एक चीज पर ध्यान नहीं देते हो। आपको बरगलाया अवश्य गया है। ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध करना है तो आपको शंकराचार्य के सिद्धांत को मानना पड़ेगा। ठीक है? या तो आप यह मान लो कि हमारा ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं है। यह आपको मानना पड़ेगा। कहीं कुछ जा नहीं सकते। अभी देखा था ना कलयुगी योगी भाई वो वो उसका कहना है मैं आर्य समाजी नहीं हूं। तो आर्य समाजियों को क्यों सपोर्ट कर रहे हो भाई? तुम तो सपोर्ट नहीं कर रहे आर्य समाजियों को उनके उनके सिद्धांतों को आप लड़ रहे हो उनकी तरफ से। आप आ रहे हो कि ईश्वर अवतार नहीं ले सकता। आप अद्वैती हो। क्या हो? उपनिषदों को पढ़ा है। कहां से पढ़ा है? क्या कहां से नहीं पढ़ा आप शंकराचार्य का बात बता रहे हैं। शंकराचार्य ने अपने गीता भाष्य में उपनिषदों के भाष्य में कितनी जगह पुराणों का आलंबन लिया है। जानते क्या हो शंकराचार्य के बारे में? शंकराचार्य के लिखे हुए ग्रंथ तुम तक पहुंचे कैसे हैं? पहले ये तो सोचो कि एक तरफ कहते हो

00:11:13:25 चमत्कार को मानते नहीं हम क्योंकि हम आधे आर समाजी हुंडा हिंदू हैं। दूसरी तरफ कहते हो कि क्या कहते हैं यह? हमारे पास आ गए बस गीता प्रेस के पास आ गए बस कहां से आए भाई रामायण में उनको भगवान कहा गया है विश्वामित्र जी को तो क्या कहा था अब तुम गीता प्रेस की रामायण जब मान रहे हो तो पुराणों को मानने वाले हो गए ना क्या कहा था कि भगवान शब्द का प्रयोग जो परमात्मा है उसके लिए मुख्य रूप से है और अन्यों के लिए गौण रूप से है पूज्य पदार्थों के निमित अगर कोई पूज्य है तो उसके लिए भी भगवान शब्द का उपयोग हो जाता है। पर मुख्य रूप से उसका उपयोग परमात्मा के लिए तो वह जो गौण उपयोग है उनका उसमें यह जो हमारे महापुरुष हैं इनको लिया जाता है।

00:12:18:24 और मैंने कुछ और भी नई बातें सुनने में आ रही हैं कि रामपाल का कोई उत्तराधिकारी है जो 20 वर्ष का हो गया है और अब यहां से आगे उसके अंदर वो आत्मा आ जाएगी और वो जो है सिंहासन संभालेगा। तो अब क्या हुआ कि वैसे ये लोग वंशवाद को नहीं मानते मगर अपना पारिवारिक धंधा बनाए रखने के लिए वंश के अनुसार ही उत्तराधिकारी चुन लिया गया।

00:12:55:18 हां यह बात आपने सही कही है कि इस समय जो है इनके जितने भी आश्रम है वहां एक नाम सबको पता चल चुका होगा आहान या फिर शिवश नारायण द्विवेदी ये लोग एक दो तीन दिन भंडारा करा देते हैं तो उसका बड़ा गान करते हैं। और यह नहीं देखते कि वाराणसी में अन्नपूर्णा माता के मंदिर में सदैव भंडारा चला करता है। बड़ा बढ़िया वहां पे मिलता है। इडली और डोसा भी मिलता है। और भी मिलता होगा। तो मैंने वही लिया था इडली और वो

00:13:48:04 तो जाइए आप लोग कभी वाराणसी में अन्नपूर्णा माता का प्रसाद भी ग्रहण करिए वो जो मातृ शक्तियां आने वाली है कुछ ही समय में सूचना प्राप्त हो गई है गीता में जो ट्री वाला कांसेप्ट रामपाल ने बताकर दिमाग खराब किया है उसमें कुछ है ही नहीं भाई ट्री वाला कांसेप्ट अरे भाई भाई संसार रूपी उल्टे वृक्ष की व्याख्या करने वाला तत्वदर्शी है। तो उल्टे वृक्ष की व्याख्या तुम ही ने की है। ये क्यों मान लिया जाए?

00:14:24:26 अभी कमेंट करने वालों में से कोई कर देगा वो भी तत्वदर्शी हो जाएगा। तो अगर इस पहचान को यह प्रमाण मान भी लिया जाए कि यह तत्वदर्शी की बात हो रही है तब भी हमें अन्य कई चीजों की आवश्यकता पड़ जाएगी यह सिद्ध करने के लिए कि जिसको हम कह रहे हैं तत्वदर्शी वही तत्वदर्शी है। तो यह लिंक दे दिया गया है। जो जुड़ना चाहता है वो जुड़ सकता है। फेस के साथ यदि वैचारिक मतभेद के निमित्त आ रहा है तो फेस के साथ आ सकता है।

00:15:04:21 हिंदू धर्म मोहान तुम्हारी तो ज्ञान गंगा इत्यादि में पहले ही पेज पर लिखा रहता है कि हिंदू मुस्लिम सिख कोई धर्म नहीं है न्यारा तुम आ जाओ आ जाओ ना डर लगता है यह डर अच्छा है डर लगना चाहिए डर लगता है तो ब्रह्म से बनी माया अज्ञान या मिथ्या है आपको पर्सपेक्टिव समझना पड़ेगा। यह भगवान अलग हैं। आप अलग हो। यह माया नहीं है। संसार यह कब तक है? जब तक आप अपने व्यवहार में कुछ देख रहे हैं। जैसे मैंने अभी बताया पिछला लाइव हुआ था जो ये कलयुगी योगी के साथ उसमें मैंने बताया कि जब तक आपको भेद बुद्धि प्राप्त है आप माता बहन और पत्नी के साथ एक जैसा व्यवहार कर सकते हैं। पिता पुत्र के साथ एक जैसा व्यवहार कर सकते हैं। नहीं कर सकते। तो जब तक आप लोगों को भेद बुद्धि प्राप्त है।

00:16:20:09 हां इंद्रजीत दास जी ये आपने बिल्कुल सही बात कही है। आप जो है आदि तत्वदर्शी हैं और एक आध अभी और बनाएंगे अपने किसी भाई को तो वो परम आदि परम आदि तत्वदर्शी हो जाएगा। एडजेक्टिव लगाते जाओ। अपनी दुकान खोलते जाओ। एडजेक्टिव से ही दुकानें चल रही है। ब्रह्म पे जाकर के वेदव्यास जी स्टॉप हो जाते हैं। ब्रह्म सूत्र हो गया। परम ब्रह्म परम ब्रह्म हम

00:17:00:28 तो जब तक आपको भेद बुद्धि प्राप्त है तब तक यह सब सत्य है और भेद बुद्धि जब प्राप्त नहीं है तो फिर आपको यह जानने की आवश्यकता ही नहीं है कि क्या माया है क्या नहीं है। आपको यह पता चल जाना कि ये माया है। यही मुक्ति है। ये अज्ञानता मिट जाना। अच्छा एक दिक्कत और आती है कि भाई जैसे अ जो पारमार्थिक स्वरूप है और व्यवहारिक स्वरूप है इसको कभी-कभी लोग समझ नहीं पाते हैं। संभवत हमारी जो

00:17:36:12 बहन है वह आने वाली है। अभी नहीं आई है। यह मार्कस नाम का कौन व्यक्ति भाई? चेहरा दिखाएं मार्कस जी हर हर महादेव हर हर महादेव कैसे हैं पाणी जी बिल्कुल बढ़िया मस्त है बिल्कुल प्रभु राम की कृपा है जी जी जी जी उन्हीं की कृपा से बस सब कुछ है रामपाल जी का भंडारा प्रसाद कोई ना खाए क्योंकि उस प्रसाद में थूक मिलाया जाता है तो खैर भाई वह सब हम नहीं जानते क्या किया जाता

00:18:13:13 अवतारवाद के लिए आर्गुममेंट नहीं दिया। दिया तो था। हमने आर्गुममेंट दिया था मगर उस व्यक्ति ने क्या किया? जब काउंटर नहीं किया तो हम और आगे बढ़े नहीं। मैंने कहा ये संतुष्ट हो गया। आना जाना सिद्ध हो गया। हमने कहा वो शांत रहा मुंडी लाता रहा। हम संतुष्ट हो गए। अगर वो काउंटर करता कुछ कहता ये फलानी चीज कैसे आना जाना सिद्ध हो गया तो हम आगे आर्गुममेंट रखते। हमने दिया था। अब उसके बाद हमने वीडियो बना के आर्गुममेंट दे दिया। अगर उसको समझ में नहीं आया तो तो क्या है कि यह जो परमार्थ और व्यवहार की बात है यह परमार्थ में ईश्वर है। यह हमें प्रातिभाषिक अनुभव होता है और उसको हम नकार सकते हैं। है ना? तो वो हमारी जो भौतिक इंद्रियां हैं उनका विषय नहीं होता है। तो जब तक वो उनका विषय नहीं है तो उसका वो पारमार्थिक प्रातिभाषिक स्वरूप हो गया। और जब वह हमारी यह जो भौतिक इंद्रियां होती हैं इनका विषय बन गया आंखों से देख सकते हैं, कानों से सुन सकते हैं, हाथों से छू सकते हैं। तो यह हो गया सगुण साकार स्वरूप यानी व्यवहारिक स्वरूप। है ना? तो जब हम कहते हैं कि बहुत सी ऐसी चीजें

00:19:28:14 हैं जैसे वही वाली बात कि जो मंत्रों के दृष्टा बने ऋषि तो मंत्रों के दृष्टा बने। मंत्र मंत्र जो थे पहले भी थे ईश्वर के ईश्वर के रूप में ज्ञान ईश्वरीय ज्ञान के रूप में मंत्र उनके पहले भी थे मगर फिर वो इंद्रियों का विषय बन गए वही मंत्र तो उसको कह दिया व्यवहारिक हो गए तो यदि आप यह कह सकते हो कि जब आप यह कहने से नहीं चूक रहे कि किसी देश काल परिस्थिति में ऋषि गण जो है वह मंत्रों के दृष्टा बनते हैं क्योंकि वो मंत्र उनकी इंद्रियों का विषय बन गए। तो जब यह आप कह सकते हो कि जब पहले से ही मंत्र थे उनके माइंड में फिर भी उनका आना जाना आप स्वीकार कर रहे हो मंत्रों का दृष्टा बनना स्वीकार कर रहे हो तो इसी प्रकार से पहले से ही व्याप्त ईश्वर जितने अंश में वो सब सर्वत्र व्याप्त है मगर जितना अपना अंश वो ऐसा बना देता है जो आपकी इंद्रियों का विषय बन जाए भौतिक इंद्रियों का तो वो सगुण साकार हो जाता है व्यवहारिक हो जाता है यही अंतर है व्यवहार और परमार्थ में मंत्र मंत्र ऋषियों के मस्तिष्क में पहले भी थे मगर वो इंद्रियों का विषय नहीं थे। व्यवहारिक नहीं थे। फिर इसी माध्यम से वो इंद्रियों का विषय बन गए। तो वो व्यवहारिक

00:20:43:18 हो गए। तो इसको आपने कह दिया हां आना जाना सिद्ध होता है। तो जब मंत्रों का प्रकट होना, दृष्टा होना, मंत्रों का और भी बहुत सारे ऐसे उदाहरण मिल जाएंगे। ये तो एक उदाहरण है। तो जब यह सब सिद्ध होता है तो बाकी चीजें भी फिर आपको ईश्वर का आना जाना भी स्वीकार करना पड़ेगा। और यदि आप ईश्वर का आना जाना स्वीकार नहीं कर सकते तो शास्त्रों के वो सारी जगह मिटा दो जहां पर इस तरीके से व्यवहारिक सत्ता की बात हो रही है। शास्त्रों में दोनों प्रकार से ज्ञान दोनों प्रकार का ज्ञान दिया गया है। एक पारमार्थिक रूप से क्या है और एक व्यवहारिक रूप से क्या है? अब जैसे पारमार्थिक रूप से क्या है? जैसे वह सर्वत्र व्याप्त है। वह सर्वव्यापी है। वह यह है, वह है। वो निराकार है। उसका कोई आकार नहीं। यह भी कहा गया है। मगर फिर यह भी कहा गया कि उसके इतने मुख है वो ऐसा है, वो वैसा है। है ना? पारमार्थिक रूप के लिए क्या कह दिया गया? वह जो जानने में आ सकने वाला नहीं है। व्यवहार में आ सकने वाला नहीं है। ले लो। सीधे लिख दिया। व्यवहार में नहीं आ सकता। तो व्यवहारिक नहीं है तो क्या है? पारमार्थिक है। तो मांडकोपनिषद में सात में यह बात दी गई है। तो भगवान के दोनों पर्सपेक्टिव से जो उनकी उनके बारे में ज्ञान है वो दोनों ज्ञान दिया गया। एक व्यवहार में नहीं आ सकता। ये पारमार्थिक हो

00:21:58:19 गया। हम दूसरा अब जैसे श्री कृष्ण कह रहे हैं तेरे और मेरे बहुत से जन्म हो चुके हैं। ये तू नहीं जानता मैं जानता हूं। तो ये क्या है? वो अपना इस समय वो दे रहे हैं व्यवहारिक कि जन्म हो चुके हैं तो ये क्या व्यवहार है ये ईश्वर का जन्म नहीं होता वो अजन्मा है मगर वो अपने व्यवहारिक स्वरूप का बोध करा रहे हैं अब जैसे अजन्मा कह दिया ईश्वर को वो अजन्मा है अविनाशी है अजन्मा है तो आपने कह दिया भाई ईश्वर का जन्म नहीं हो सकता ईश्वर का जन्म होना व्यवहारिक सत्य है और पारमार्थिक सत्य है कि वो अजन्मा है तो क्या है अब आप यह देखो कि आप आत्मा हो। आपकी सच्चाई है जीवात्मा। मगर आप अपना जन्म होना कहते हो ना हैप्पी बर्थडे टू यू। क्यों मनाते हो? आपका तो कभी जन्म हुआ ही नहीं। तो जब तक आप मनुष्य हैं, मनुष्य के अनुसार जीवन को जी रहे हैं और वो जीना पड़ेगा। जब तक आप मुक्त नहीं हो जाओगे तब तक आप भेद बुद्धि को प्राप्त रहोगे। एनी हाउ तो तब तक आपको यह मानना पड़ेगा यदि आप अपने जन्म को स्वीकार कर रहे हो किसी देश काल परिस्थिति में स्वयं को प्रकट होने वाला मान रहे हो तो फिर भगवान के अवतार से

00:23:13:20 आपको क्या दिक्कत ठीक है तो ये है हमने अवतार पर आर्गुममेंट दिया अब उसने काउंटर नहीं किया और वो क्या कर रहा था कि हमने जब बात अपनी बताई तो उस पर काउंटर ना करके वो विषय को बदल दे रहा था जैसे वो आर्य समाधि से हो गया तुरंत अद्वैती कि ए तो ईश्वर है बी ईश्वर नहीं है। भाई वो कहता कि अभी भी मुझे बताओ कि वो जो श्री कृष्ण राम कृष्ण आदि के रूप में जो अवतार होता है वो वो कैसे? मैं बताता वो कह दिया हां यहां तक मेरी बात सही यहां तक मैं बात को समझ गया हूं। अब मुझे आप ये बताइए ए ईश्वर कैसे बी ईश्वर क्यों नहीं? या उसके बाद मूर्ति पूजा क्या वेदों में है? जब हमने सारी बात बता रहे मूर्ति पूजा को तू मान रहा है तो फिर वहां बोलना कि नहीं कैसे आंखों का विषय कैसे हो रहा है ईश्वर

00:24:05:06 इंद्रजीत दास जी कह रहे हैं जय हो परम आदि तत्वदर्शी श्री पहाड़ी जी महाराज नहीं मार्केट में एक बहुत बड़े बंदी छोड़ परम तत्वदर्शी जगतगुरु आ चुके हैं एक हां दुष्यंत ठाकुर जी हां जी भैया ठाकुर जी जय श्री राम जय जय श्री राम

00:24:39:22 चरण स्पर्श आशीर्वाद आपको ढेर सारा प्रभु श्री राम की कृपा सदैव बनी रहे वो तो आप लोगों के आशीर्वाद से बनी है बनी रहेगी रामपाल के पाखंड का खंडन चल रहा है। नहीं उनका कोई ऐसी बात है ही नहीं जिसका खंडन हमें करना पड़े। उन्होंने ही स्वयं कर व्यवस्था की है इसकी। हमने उन्होंने ऐसी व्यवस्था की है और कुछ जो उनके अज्ञानी चेले आ जाते हैं कुछ चेले आ जाते हैं थोड़ा सा थोड़ा सा उसका ध्यान रखें वर्तनी ऐसी हो कि मतलब जो हम लोग यहां पर प्रेजेंट करते हैं ना कि हम अल्पज्ञ ही सही मगर शंकराचार्य परंपरा से जुड़े हुए हैं तो हम लोगों का जो ऐसा हो व्यवहार जो यह बताएं कि हां यह लोग शंकराचार्य के लोग हैं। है ना? शंकराचार्य को फॉलो करते हैं दूर से।

00:25:45:06 जी नहीं उन्होंने एक वीडियो चलाई थी। यहां से जाने के बाद उन्होंने एक लाइव चलाई थी। आपने देखी होगी। तो मैंने नीचे एक कमेंट्स किया था। अभी आप यहां वीडियो आप कंटेंट चला रहे हैं। तो जब आप लाइव में थे तो यह क्वेश्चन आपने पूछना था ना शिवशी जी से शिवशी भाई से पूछना था। आप संतुष्ट नहीं थे तो उसके बारे में बताना था आपने वहां अब यहां आके वीडियो बना रहे हो आप बोला वहां मुझे बोलने का मौका ये बात कि वहां मुझे बोलने का मौका नहीं मिला बोले लाइव वीडियो तो हम भी देख रहे थे बराबर तो बोलने का मौका सभी को मिल रहा था भाई आप अपने क्वेश्चंस को छोड़ के दूसरे क्वेश्चन कर रहे हो और कह रहे हो कि बोलने का मौका नहीं मिला। आप ए और बी पर क्यों आ गए जब आपका अवतार सिद्ध नहीं हुआ तो क्यों क्यों आए ए ईश्वर है बी ईश्वर नहीं है आप लोगों ने अगर देखा हो तो आपको ध्यान होगा कि वह व्यक्ति इस प्रश्न को छोड़ के कि उसका आना जाना कैसे सिद्ध होता है इस पर उसने बिल्कुल बिल्कुल करके बोला और फिर वो आगे बढ़ा उसके बाद उसका अगला प्रश्न था कि नहीं वाल्मीकि जी भी तो है उनके लिए तो भगवान कहा गया तो रामकृष्ण को ही भगवान क्यों माना गया रामचरितमानस में मैंने इस पर ध्यान नहीं दिया मैं इस पे इस पे इसका उत्तर

00:27:00:07 इस प्रकार से दिया जो हमारे शास्त्र जिसको परम ब्रह्म का अवतार कहेंगे हम उसको अवतार मानेंगे। शास्त्र जिनको नहीं कहेंगे हम उसको नहीं मानेंगे। शास्त्र ने कहा कि कृष्ण भगवान जो कृष्ण जो है स्वयं परम ब्रह्म है। कृष्णस्तु भगवान स्वयं तो वो हैं। अच्छा उन्होंने कहा क्या उनके लिए रामस्तु स्वयं प्रभु ऐसे करके आया उसमें रामायण स्वयं प्रभु है ना तो हम उसे मानेंगे ना। अच्छा उनके लिए जो भगवान आया है विश्वामित्र इत्यादि के लिए तो भगवान शब्द अगर उनके लिए आया है बिल्कुल भगवान के तुल्य है भगवान के समान उनका महत्व है क्योंकि वो गुरु है और गुरु और भगवान में अंतर नहीं करना है तो भगवान के समान महत्व का बोध कराने के लिए उनके लिए भगवान शब्द का उपयोग किया है

00:27:54:14 नहीं ये अवतारवाद का बात तो हमारे वेदों में भी आती है वामन अवतार के बारे में बता बताया गया है वेदों में बिल्कुल बिल्कुल अरे अरे सबके कई कई अवतारों के बारे में बताया गया है इस पर वीडियो है हमारा बहुत अवतारों के बारे में बताया गया यजुर्वेद के 32 वे अध्याय का एक मंत्र आता है उसमें तो कह रहा है हे प्रजापति तुम बहुत से रूपों में प्रकट होते हो आप लोग एक ये पुराण दिग्दर्शन खरीद लो इसमें आपको जो है ये जो अवतार है ना अवतारों की बात वेदों में कहां कहांहां की गई है वो सब दिया पुराणों का भी कैसे कंटेंट मिलता है वेदों में वह सब है इसमें जी और बहुत सी जो कथाएं हैं कुजा के साथ समागम ये जो जिस उछलते रहते हैं राधा कृष्ण का जो वो है वो सब भी है मतलब बहुत एक संक्षिप्त में आपको सब कुछ मिल जाएगा कुंजी है ये बात कोई ये नए नए है ये ये सब जो बातें उठाते हैं ये भाई हमारे आचार्य गण बहुत सालों से लड़ रहे हैं इन लोगों से ऐसा नहीं है धर्म की रक्षा ऐसे नहीं होती है। ये आज ये नए हैं। ये राम श्री राम के ऊपर सवाल उठाने वाले रामपाल अपने आप को नए समझते हैं। ये तो कॉपी कर रहे हैं पुराने लोगों को। जैन बुलके

00:29:09:27 ये सब उठा चुके हैं राम जी के ऊपर। उत्तरकांड को प्रक्षिप्त कह चुके हैं। और हमारे आचार्य गण लड़े हैं सदियों से। सब नई बातें हैं। शिव दर्शन जी इस कान में भी मतलब जो भगवान शिव और विष्णु में भेद करते हैं उनका भी सिस्टम बड़ा खराब है। जी हरिहर में भेद जो करते हैं से मुझे एक बात याद वो आई है। ये देखिए इसमें

00:29:47:03 इसमें वो चैप्टर मैं आपको दिखाऊं जहां पे वेदों में पुराणों का एक चैप्टर है। वेदों में पुराणों का वो है जिक्र। जी। इस से मुझे एक बात याद आई है कि यह जो वहां पर चल रहा है जो हमारे हिंदू भाई के ऊपर जो है एक ये सब चीजें हो रही है अटेमप्ट किए जा रहे हैं। तो इसके लिए कुछ अंदर से कूटनीत कूटनीति का सहारा लेते हुए कुछ स्कॉन भी कर रहा है। ऐसा नहीं है कि उसने सीधे-सीधे सपोर्ट हटा दिया है। तो उनको करने दें कूटनीति का उपयोग जिससे कि जो हमारे हिंदू भाई हैं देखिए कई बार लोग यह सोचने लगते हैं कि भाई ये एक तरफ तो इस के बारे में इस की शिक्षाओं पर ये हम इस की शिक्षाओं के विरुद्ध जरूर हैं मगर उनसे अलग नहीं है क्योंकि अंततवा वेदों में प्रमाण्य बुद्धि जिसमें है वो एक हिंदू है। जिसकी वेदों में प्रमाण्य बुद्धि है वो हिंदू है। वो हमारा अपना है। हमारे बीच की उनकी आपस की चीजें हैं कि भाई उनकी यह शिक्षाएं

00:31:02:14 जो है कैसे अधर्म को प्रतिपादित कर रही है वह सब बाद का विषय है। मगर सबसे पहले क्या आवश्यक है कि अगर वेदों में प्रमाण बुद्धि है और कोई बाहर का व्यक्ति आकर के हमारे किसी भी भाई जिसकी वेदों में प्रमाण बुद्धि है और क्योंकि उससे किसी की शत्रुता ही इस बात पर है कि इसकी वेदों में प्रमाण बुद्धि क्यों नहीं है? कुरान में वेदों में प्रमाण बुद्धि क्यों है? कुरान में क्यों नहीं है? बाइबल में क्यों नहीं है? तो उस समय हम अपने भाई के साथ खड़े होंगे ना। वो बात की बातें हैं। वो बाद की बातें हैं कि हरियर में भेद कर रहे हैं तो हम देख लेंगे। अपना आपस का मामला है। हमने एक निश्चल जी महाभाग का एक वीडियो देखा था। हमारे मन में भी पहले मतलब बहुत बहुत ये था कि मतलब वो भगवान छोटे गणेश पुराण पढ़ो तो गणेश बड़े विष्णु पुराण पढ़ो तो विष्णु पुराण विष्णु बड़े शिव पुराण पढ़ो तो शिव पुराण बड़े तो हमने शिव स्वरूप निशानंद जी महाभाग का एक वीडियो देखा था उनकी एक बात हमें बहुत अच्छी लगी और हमारा मतलब चित्त का भी शुद्धिकरण हो गया उन्होंने जब कहा था एक ही ब्रह्म पांच रूपों में विभक्त होते हैं। वही भगवान

00:32:17:22 उपासक बनते हैं। वही उपासक बन जाते हैं। तो मतलब अगर बनते अगर ना बनते तो हम ये नहीं कह सकते थे कि ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है। क्यों? कर सकता है। भगवान क्या भगवान क्या उपासक नहीं बन सकते? बन सकते हैं। लोग बन गए उपासक जी। उनकी मतलब उसी बात से हमको समझ भगवान स्वयं उपा बन जाते हैं। जी और एक एक ही को समझना ये हमारे हिसाब से मूर्खता का विषय है। ब्रह्मा विष्णु महेश गौरी और गणेश इनमें मतलब भेद बुद्धि करनी ही नहीं चाहिए। जी ये एक ही है। पहले हमारा भी बहुत मतलब ये था लेकिन अब जब से निशान जी महाभाग का हमने थोड़ा सा प्रवचन सुना एक भाई साहब कह रहे हैं कि एक भाई साहब कह रहे हैं कि भाई आर्य समाज का कोई तोड़ नहीं है। बिल्कुल अच्छी बात है। कोई तोड़ होना भी नहीं चाहिए। हमारे हिंदू है वो वो भी हिंदू ही हैं। बस ये है कि उनका ईश्वर जो है वो सर्वशक्तिमान नहीं है।

00:33:33:03 वो जीव की चाह का विषय नहीं है। इस कारण से व्यक्ति उनके यहां पर रहते हुए धर्म के प्रति प्रतिबद्ध नहीं रह पाएगा। क्योंकि उनका ईश्वर पूर्ण नहीं है। ईश्वर पूर्ण होने की आवश्यकता है। ईश्वर पूर्ण है वही ईश्वर हो सकता है। तो इसमें थोड़ा सा उनको चेंज करना चाहिए। बाकी जब ईश्वर पूर्ण होगा तो उनके द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो धर्म है वो भी शाश्वत हो जाएगा और मिलने वाला जो मोक्ष है वह भी परम स्वतंत्र हो जाएगा। जी पाड़ी जी बिल्कुल

00:34:14:07 तो आज जो बहन आने वाले थे वह आए नहीं अभी। हां अभी तक नहीं आए। मैं ऑपरेटर महोदय से कहूंगा और उनको एक बार संपर्क कर लीजिए। बिल्कुल। [संगीत] ये तो गलत है। हम अपनी आस्था किसी के ऊपर थोप नहीं सकते। जी ना मैं ये मान रहा हूं तो आप भी यही मानिए। और दूसरे की चीज को गलत ठहराना तो यह तो बहुत गलत है ना कि अगर अगर जैसे मेरे को रेड कलर पसंद है सामने वाले को ब्लू कलर पसंद है। ये नहीं कह सकता ना आपकी जो आपकी चॉइस है वो गलत है। नहीं मार के नहीं। आप अपनी बात को तर्क और प्रमाण के साथ रखो सामने या बल बल का प्रयोग करना कि निकल जाओ यहां से और जो है तुमने यह वीडियो कैसे सुना। वो वीडियो जो कि तर्क और प्रमाण प्रस्तुत कर रहा है जो हम मान रहे हैं वो गलत है। ये तो गलत बात है। तो यह देखिए इसमें वो चैप्टर है वैदिक अवतारवाद। देख रहे हैं वैदिक अवतारवाद। इसमें आपको जो हमारे अवतार हैं ज्यादातर उनका जिक्र मिलेगा लाइन से। श्री रामचंद्र जी का अवतार

00:35:29:15 का वर्णन श्रुति श्रुति शास्त्रों में कहां-कहां और वराह का कुर का नरसिंह का वामन का परशुराम का श्री राम भगवान के बारे में जब जिक्र आता है तो अयोध्या का सरयू नदी का महाराजा दशरथ का शक्ति शक्ति रूप सीता की वंदना राम विवाह विश्वामित्र यज्ञ रक्षा यह सब वहां पर वैदिक भाषा में वहां पर आपको मिलेगा कृष्णा अवतार भी मिलेगा तो ऐसे ही नहीं है हमारे भाई परंपरा प्राप्त आचार्य है उनकी शरण में हम ऐसे ही नहीं है गुरु गोविंद ग्रंथ की शरण में है केवल गुरु नहीं केवल गोविंद नहीं केवल ग्रंथ नहीं गुरु गोविंद और ग्रंथ एम थ्री जी तो इसीलिए तो कहता हूं मैं देखिए ये जो विश्वास है ना ये घमंड नहीं है ये विश्वास धर्म से आता है। ईश्वर से आता है। ईश्वर ईश्वर में इतना जो अिग विश्वास है वह यह बुलवाता है कि मत पड़ो चक्कर में कोई नहीं टक्कर में अपने ऊपर कोई घमंड नहीं है ईश्वर के ऊपर घमंड है कर्म के ऊपर घमंड है अब क्या नहीं होना चाहिए

00:36:40:04 तो ये बातें हैं जब आप जब आप शुरू में आप ये बता रहे थे कि एक जो मातृशक्ति है उनको परेशान किया जा रहा है इस कारण से तो एक नीचे मैं कमेंट्स पढ़ रहा था तो एक बोल रहे थे कि संत रामपाल जी महाराज को फंसाने के लिए उनको बदनाम करने के लिए यह नाटक रचा जा रहा है। हम इसके बारे में क्या कहना चाहोगे आप? अरे इनके नाटक नहीं देखे आपने क्या-क्या नाटक करते हैं ये लोग? अपने नाटकों को भूल जाते हो क्या? अरे वो यहां ऐसा हो गया वैसा हो गया। न्यूज़ चैनल बना दिया और यह कर दिया वो कर दिया। हमारा मुंह मत खुलवाओ। नाटक तो आप लोग करते हो। हमारा अगर नाटक होता तो अब टाइम पर आती मातृशक्ति क्योंकि नाटक तो फिक्स होता है। प्रीप्ल होता है ये अगर नाटक होता तो वो तो टाइम पे अब तक आ चुकी होती बिल्कुल बिल्कुल यही मैं कहना चाहता हूं ना वो बोल रहे हैं कि स्क्रिप्टेड है। हम यह स्क्रिप्टेड है कि लेट आना तुम

00:37:49:20 जैसे ये लोग बनाते रहते हैं स्क्रिप्टेड ये आश्रम में बंद है कमरे में जैसे ग्रंथ का वही है हर्ष झा जी पूछ रहे हैं भैया ग्रंथ का पीडीएफ मिल जाएगा हां मिल जाएगा ये मिल जाएगा आपको पीडीएफ ये देखिए आ रहा है पुराण दिग दर्शन ठीक है ना और ये कोई नई यही बात नहीं है। उत्तरकांड पर आक्षेप लगाना, रामायण मीमांसा ग्रंथ पढ़िए। राम भगवान के ऊपर उठे हुए सभी प्रश्नों का उत्तर मिलेगा। बस ये है कि आजकल लोगों के पास टाइम नहीं है तो वो पढ़ते नहीं है। रामायण मीमांसा ग्रंथ है। ये देखिए बताता हूं। ये पीछे ही रखा है। ये रामायण मीमांसा क्यों है मेरे पास? क्योंकि जब मैं थोड़ा सा होश में आया था तो मैं सुनता था कि राम भगवान के ऊपर आक्षेप लगा करते हैं। अब मेरे पास दो ही ऑप्शन थे। या तो राम भगवान के बारे में मैं खुद कोई सारी जानकारियां एकत्रित कर लूं। वो भी प्रामाणिक होंगी कि नहीं ये नहीं पता। परंपरा प्राप्त होंगी कि नहीं ये नहीं पता। तब ये ग्रंथ मेरे को मिला। महान करपात्री जी महाराज के द्वारा रचित ग्रंथ तर्क और प्रमाण की पराकाष्ठा

00:39:06:09 राघवाचार्य जी का आपने सुना हो एक कथन कि पिछले 10,000 वर्ष में जो नास्तिक पैदा हुए थे और आने वाले हजारों वर्ष तक जो पैदा होंगे वो ईश्वर को नकारने के लिए जो जो तर्क और कुछ भी कह सकते होंगे उन सारी चीजों का उत्तर करपात्री जी महाराज ने पहले ही लिख दिया है। वो है कर्पात्री जी महाराज। तो ऐसे ही ये रामायण ये अब ये सोचो आप ये जैन बुलके आज के थोड़ी ना ये ये नए हैं ये मार्केट में नए है ये तो कॉपी पेस्ट कर रहे हैं ये कॉपी पेस्ट है रामपाल वगैरह जो किया करते हैं इनके पहले से ही बहुत है रामपाल के चेलों से बात करने के लिए पीडीएफ चाहिए भाई डिफेंस वाली पीडीएफ आपको उपलब्ध हो जाएगी जो हमने छह वीडियोस बनाए हैं। एक प्लेलिस्ट है छह वीडियोस की उस प्लेलिस्ट में जो लास्ट वाला वीडियो है छठवा वीडियो है जो उसके डिस्क्रिप्शन में वो पीडीएफ है डिफेंस की है अटैक की नहीं है अटैक की पीडीएफ अभी बनाई जा रही है डिफेंस का मतलब जितने वो क्वेश्चन करते हैं मोटे-मोटे उन सबका हमारे शास्त्रों में क्या जवाब लिखा है वह सब है। अब अटैक की क्या है? काउंटर क्या है? कि

00:40:21:13 अब जो वह कहते हैं उस पर काउंटर करने वाली बातें उसके लिए नई पीडीएफ बन रही है। अब जैसे वह कहते हैं कि भैया बिना तत्वदर्शी के मोक्ष नहीं मिलेगा। मगर उनहीं की किताब में लिखा हुआ है कि अर्जुन को मोक्ष मिल गया। इसका क्या जवाब देंगे वो? तत्वदर्शी से गलती हो गई। गलती हो गई। एक अलग ही दुनिया में जी रहे हैं। हम तो इसमें इसमें देखिए इसकी भूमिका ही इतनी अपनी लंबी है। बहुत लंबी तो इसकी भूमिका ही है। आप भूमिका ही पढ़ लेंगे तो बहुत सारे जो इसकी रामायण मीमांसा की इसकी आप भूमिका भी पढ़ लेंगे तो काफी सारी आपकी चीजें जो हैं वो दूर हो जाएंगी। जो भ्रम होंगे दूर हो जाएंगे।

00:41:14:02 तो बहुत अच्छे बुक है। ये गीता पे सवाल ये उठाया अभी इन लोगों ने अभी इनका एक चला था ना स्क्रिप्टेड जगत और भगत वाला उसमें ये सवाल उठाया कि अगर भगवान श्री कृष्ण ने यह गीता का ज्ञान दिया तो या खुद वो परमात्मा है तो हर एक जगह उसकी उधर इसका यह शब्द क्यों बोल रहे हैं अब क्योंकि दो पर्सेक्टिव है ना उनके दो रूप है। जब कोई व्यक्ति से हम बात कर रहे होते हैं उस व्यक्ति को यह नहीं मालूम होता है कि मैं ही हूं वो व्यक्ति सामने वाले को नहीं मालूम होता है कि मैं ही वो व्यक्ति हूं। तो वो ऐसे बात करता है दीप भैया मैं उसको ढूंढ रहा हूं। अच्छा अच्छा उसको ढूंढ रहे हो। जैसे एक बार क्या हुआ था गुरुदेव पहले बहुत समय पहले की बात है कि गुरुदेव अपने आश्रम में ही वो बताते हैं वो सफाई कर रहे थे तो वो गेट पर थे तो कोई आया मिलने के लिए कि मुझे शंकराचार्य जी से मिलना है तो अब गुरुदेव जो है उस समय सफाई कर रहे हैं क्योंकि उस समय इतना नहीं था संसाधन तो जब गुरुदेव सफाई कर रहे थे तो गुरुदेव ने कहा हां अंदर बैठे होंगे मिल लीजिए जाके तो जब सामने वाला आपको पहचान नहीं रहा है तो उस समय आवश्यक नहीं है कि

00:42:29:06 आप उसी समय कह दे कि मैं ही वो हूं। आपने भेज दिया अंदर फिर अंदर खुद ही अच्छे वो जिस रूप में शंकराचार्य को मिलना चाहिए अपने श्रोता से या आगंतुक से तो उस रूप में फिर वो आ गए हां भाई बताइए मैं ही शंकराचार्य बिल्कुल यही बात मैं समझाना चाह रहा था जी तो और ऐसा नहीं है कि इनके जो तत्वदर्शी उन्होंने ये सब बातें की नहीं है हमने दिखा दिया अब इनके पास कोई जवाब नहीं हैदशी हमारी बहन आ चुकी है आपको हमारा जय श्री राम आपको जय श्री राम भैया सुभाष भाई जी

00:43:11:03 मेरी सास जी मेरी सासू मां रामपाल थोड़ी हुई है जी मतलब वो ना तो भगवान को मानती है जी ना पूजा पाठ में मतलब पूजा पाठ जो हम लोग कहते हैं ना प्रसाद पाती है अच्छा प्रसाद ये कोई त्यौहार है त्यौहार पे हम लोग मनाते हैं तो वो कहते हैं पहले हमें निकाल दो फिर भगवान को भोग लगाओ जी और ये लोग मतलब ये लोग झूठ भी बहुत ज्यादा बोलते हैं हमारी सासू मां को हां हमारी सासू मां को डाट मतलब ये दांतों में मसूड़े नहीं फूल जाते हैं तो पहले ये मसूड़े फूलते थे तो कहने लगी हमें कैंसर था और गुरुदेव की दीक्षा ली तो हमारा कैंसर ठीक हो गया है। अच्छा हां मतलब दांत मसूड़े फूल गए तो मसूड़े में वो पानी से नहीं निकलता है। जी कह रही थी हमें कैंसर होगा तो गुरु जी की दीक्षा जब से हम ठीक हो गए। अच्छा तो ये लोग एक दावा करते हैं बहन जी कि भाई जो भी रामपाल की शरण में जाता है उसके आचरण बहुत अच्छे हो जाते हैं।

00:44:26:26 तो ये जो धर्म के जो धर्म के जो लक्षण है जैसे सत्यवादिता इत्यादि तो आप कह रही है कि ये लोग झूठ बोलने में एक्सपर्ट हैं। हां बिल्कुल सही। और ये लोग भाई नहाते भी नहीं है मतलब हमारी माताजी नहीं नहाती और पूजा कर लेती हैं। नहाते नहीं है? हां नहाए नहीं मतलब दो दिन तक दो दिन तक नहाएंगे नहीं और आएंगे तो बस शायद में नहाएंगे नहीं और आके पूजा कर लेंगे। ओ हो हो गोपाल जी जो जला देंगी। और हमारी मौसी सास को बुआ सास को ले गई थी आश्रम अभी मैं एक एक बात ये पूछ रहा था ये लोग ये कहते हैं कि हम लोग जो है रामपाल के जो भगत हैं वो पान सुपारी बीड़ी गुटखा ये सब दुर्वसन में नहीं पढ़ते मगर आप बता रही है कि वो नहाते नहीं है नित्य प्रति हां सत्य बात है बिल्कुल हम तो रहते हैं ना उनके साथ में तो ये आपकी जो ये माता जी है ये कब से जो मतलब ये रामपाल को कब कितने दिन हो गए? 2014

00:45:37:22 अब ये 2014 से 24 तक की अगर आप बात कर रहे हैं तो मतलब 10 साल हो गए तो ये भी नहीं कह सकते नहीं भाई वो भगत नहीं है तो नहा नहीं रहे तो ये अच्छा ये ना नहाने की बात कुछ ऐसा है कि और भी आपने भगतों को देखा हो जो नहीं नहाते या गंदे रहते हैं इस तरह से ऐसा कुछ में दो दो लेडीज है हमारी अम्मा है और एक जने और है इनका यही काम होता है सर्दियों में यही काम होता है नहाए बिना रह लेती है हां बिना नहाए बिना रह लेती है फ्रेश होके आई हाथ पांव धोए और जोत बत्ती कर देती है ओ हो हो हो तो हम लोग विरोध करते हैं तो लड़ाई झगड़ा भी करती हैं और मतलब हम उनसे बहुत ज्यादा प्रयास करती हैं कि बरवाला चलो गुरु जी के आश्रम में तुम वहां दीक्षा लो हमारे पति है। उन्होंने अभी तक रामपाल के जो शिष्य थे उन्होंने दो लोगों की दीक्षा छुड़वा दी है। अच्छा क्या बात है। बहुत बढ़िया। वो हमसे कह रही थी कि तुम मतलब मना करो भैया को के मतलब तुम्हें पाप लगे। तुम दीक्षा छुड़वा रही। तो वे कह कि हम सही रास्ता बता रहे तो इ कौन सी गलत बात है? नहीं मतलब ऐसा है कि यह कोई

00:46:53:10 ऐसा नहीं है कि रामपाल के द्वारा ही सिखाया जाता हो कि नहाओ मत कभी-कभी। मगर बात ये आती है कि जो इतना निष्ठावान भगत हो गया है उसका आचरण ये लोग ये दावा करते हैं ना कि हमारे जो भगत होते हैं रामपाल के वो जो है बहुत ज्यादा क्या कहते हैं आचरण उनके बहुत शुद्ध हो जाते हैं और हमने देखा है यहां पर आने वाले ज्यादातर लोग जो है 90% जो रामपाल का फेवर करने आते हैं वो किस में दिख रहे होते हैं ये आप लोग खुद ही तय कर सकते हो है ना किस तरह से वो दिख रहे होते हैं हमारे साथ में रहती हमें पता है। हम तो ज्यादा पहचानते हैं उनको और ये लोग क्या कहते हैं जी आपने कभी से पूछा नहीं कि आप माता जी नहाए बिना कैसे बत्ती कर दे रही हो? तो पूछा तो वो कहते हम लोग तो शुद्ध रहते हैं। अच्छा हम लोग आत्मा शुद्ध है हम लोगों की। हां वो व्यवहार और परमार्थ वाली वही वाली बात है। ये बात भी ध्यान रखिएगा जो लोग जो लोग ये कहते हैं ना कि अवतार अवतार वो भगवान का आना जाना सिद्ध नहीं होता है तो उनके लिए नहाना नहाने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि वो आत्मा है। वो तो गीली नहीं होती ना।

00:48:09:01 हां हां और वो जा भी कहने लगती मतलब जो हमारे गुरु जी है जेल में भली है और उनके अवतार में 20 साल का लड़का हो गया है वो उनके ह्रदय में हमारे रामपाल जी की आत्मा आएगी गुरु जी की कौन ये ये मैं समझा नहीं क्या क्या बोल रहे है दोबारा बताइए एक मतलब कह रही थी हमारे गुरु जी की आत्मा एक लड़का हो गया 20 साल का उनकी गद्दी पर वही बैठेगा अच्छा वो लड़का उन्हीं का लड़का है कोई और है वो अब ये नहीं बताया उन्होंने कह रही थी उनकी आत्मा गुरु जी की आत्मा उनमें ट्रांसफर हो जाएगी बस बस वो वो उनका नहीं भी हो भाई शुरू में मैंने कह दिया था कि वंशवाद को अपना रहे हैं वो है क्या मैं मेरे को एक जानकारी ऐसी कुछ है कि रामपाल जो है नहीं चाहते कि अब उनके नाम से ये सब हो और उनके नाम से ऐसा हो रहा है। मैं इसमें पक्का नहीं हूं। मगर जो ये जो एक नया व्यक्ति तैयार किया जा रहा है ये आप भगत लोगों को जाकर पूछना चाहिए अपने गुरु से क्या ऐसा है कि आपकी आत्मा उसमें आने वाली है और मतलब वे लोग इतना भी तैयार रहते हैं कि अपना किराया लगा के और वहां पर लेके जाते हैं

00:49:24:12 हमारी माता जी अपना खुद का किराया लगा के वहां पे लेके जाती हैं। अभी दीपावली के पहले इन लोगों का भंडारा था ना तो हमारी मौसी बुआ सास को ले गई थी तो दीपावली लोग गए हां तो जुड़ो आप कैसे कैसे भी जुड़ो लेकिन जुड़ो इनसे तो मतलब उन लोगों का भी विश्वास गुरु जी पे आने लगा था रामपाल आप अपनी माता जी से मेरा संपर्क कराइएगा मेरे को करीबन 200 लोगों को लेके जाना है तो वो कुछ आने जाने का ट्रेन का भाड़ा पहुंचा दे तो अच्छा रहेगा क्यों पाणी जी हां सही बात है। नहीं मतलब सही बात है। सुश भाई और मतलब तो हम लोग मतलब बेवफ बुआ और सास मौसी सा दोनों प्रतार तो होने लगी थी कि हम हां दीक्षा ले लेंगे। दीपावली पे हम लोग गए हमने आपकी डिबेट सुनाई। तो मतलब हमारी अम्मा को इतना गुस्सा आया, इतना गुस्सा आया कि हम लोगों को घर से बाहर निकाल दिया। कह दिया अब हमारे यहां पर मत आना। अच्छा हां संत रामपाल जी महाराज एक मिनट एक मिनट मैं बोलना चाहूंगा कुछ ये रामपाल जी के जितने अनुयाई हैं और रामपाल जी ये तो कहते हैं कि रामपाल के कबीर दास जी की भक्ति करने से सब एक हो जा

00:50:39:13 रहे हैं इसमें कोई झगड़ा नहीं हो रहा है वो एक कर रहे हैं यहां तो अलग करने की बात हो रही है फिर अरे बहुत ज्यादा झगड़ा कर जब से उन्होंने दीक्षा ले ली जब से उनका दिमाग जाने की ऐसा हो गया है पहले बिल्कुल झगड़ा नहीं करती थी अब तो बस वो जनक कौन टाइप की हो गई है किसी को नहीं समझती कि हमारे बच्चे हैं, बहू है, बेटा है, किसी से कोई मतलब नहीं है। अपने से मतलब है। गलत चीज गलत दिखाई। और इनका विरोध हम लोग बहुत ज्यादा करते हैं। एक बार हमारे यहां पर आए थे। मॉम ने बुलाया था। चार पांच लोग थे। चार पांच जने थे पुस्तक सेवा के लिए। तो हमारे पति और हमारे देवर ने कुछ उन्होंने से पूछा। उन्होंने जवाब नहीं दे पाए। तो फिर हमारे देवर ने लाठी उठाई और भगाया। अच्छा खदे

00:51:32:26 तो भाग गए थे। मतलब कोई भी सवाल का जवाब नहीं दे पाए थे। हम अपनी कहते हैं तो किसी बात कोई भी बात कहेंगे तो अपनी पर जाएंगे। बस वो जो करेंगे वैसे ही जी और हमारे जो ससुर थे ना आज ये लोग कहते हैं कि मतलब कितना दान करेंगे कितना पुण्य करेंगे हमारे चाचा ससुर लाख दान करके गए यहां पर लाख दान करके गए और आप लोगों की अपनी आर्थिक स्थिति कैसी है बहन जी

00:52:11:13 आपके पति क्या करते हैं हमारे पति शॉप है उनकी मोबाइल टीवी की रिपेयरिंग की बताइए मोबाइल टीवी रिपेयरिंग की जिनकी शॉप है उनके घर से लाख दान किए जाते हैं। वहां जहां जाने वाला आदमी ये तक जहां जाने वाला आदमी ये तक नहीं सीख पा रहा है कि मुझे डेली नहाना है। झूठ नहीं बोलना है। अच्छा ये पान तंबाकू बीड़ी सिगरेट वगैरह भी यूज़ करते हैं क्या? ये रामपाल के भगत जो होते हैं नहीं ये नहीं कहते हैं जी ये हमारी मतलब जो हमारी अम्मा है ये चीज नहीं कहती है अम्मा नहीं करती वैसे जब अम्मा से आपके आपका संपर्क है तो फिर थोड़े बहुत भगत को जानते होंगे तो क्या पान बीड़ी ये सब करते हैं कि नहीं भगत लोग अन्य भगत हमारे मोहल्ला में दो ही लोग हैं अच्छा आप और किसी को जानते नहीं है हां किसी और को नहीं जानते हैं जिसकी मतलब हमारे पति पति ने जिसकी दीक्षा छुड़वाई है और वो भी करते थे। हां वो करते थे। नहीं करते थे। नहीं वो तो पहले से नहीं करते थे। वो पहले से ही नहीं करते थे। अच्छा कोई हमको ले गया दीक्षा दिलवा। भाई और एक बात ये लोग ये भी दावा करते हैं जो चाचा खत्म

00:53:26:14 हो गए थे ना अभी करंट से। ये लोग आए थे बिजली के करंट लगने से। सो ये लोग आए थे। जी ये लोग कह रहे थे कि इनकी जो सब है ना हमें दे दो हम जो संपत्ति है रामपाल के नाम करो आश्रम के नाम तो मतलब हम सब भी हमें दो तो मोहल्ला के जो हमारे थे ना फिर उन्होंने खदेड़ा उन लोगों को जी कि हम क्यों आपको सब जी उनके

00:54:00:24 चिया आपके चिया ससुर के घर से दान गया था ना वो लाख का चाची ससुर की किसी को भी पता नहीं चला उनके मरने के बाद पता लगा ओ हो वो सफाई हुई सीधेसीधे निकली जब पता लगा एक बहन कह रही है कि मेरी मम्मा एंड पापा ने भी तीन साल में तीन से चार लाख दान किए। ओ अच्छा नहीं और ये बोलते हैं कि ये जितने भी ब्राह्मण है ये लूट रहे हैं। हां आरोप इस तरीके से लगा रहे हैं। अच्छा मैंने एक बात सुनी थी कि जब वहां से नाम दान लेते हैं तो उनका एक ये रहता है कि आप अपने आय का 10% वहां दान करना है। क्या बात सच है? और ये लोग पहाड़ी जी ये लोग ये भी कहते हैं जो ज्यादा दान करेगा वो सतलोक में जाएगा। सतलोक इसका मतलब सतलोक में प्लॉट बांटे जा रहे हैं। हां मतलब ये लोग कह रहे

00:55:07:18 नहीं उनकी मैंने सुनी है कि दान किसी को नहीं देना है तो यहां दान क्यों देना है फिर सतलोक के लिए अच्छा सतलोक के लिए सतलोक में अच्छा भाई साहब मैं ये कह रहा था बहन जी आपके जो हमारे पतिदेव है जो आपके पतिदेव है उनसे कहिए वो वो बातें स्वयं करें ना नहीं तो ये लोग ऐसे कहने लगेंगे कोई उन्हें समझा रहा था तो वो बातें स्वयं बोल देवा भाई बात जी भाई नमस्कार नमस्कार जय श्री राम जय श्री राम

00:55:50:19 जी बताएं अच्छा वो एक व्यक्ति थे जिनोंने दान नाम दान लिया था इनका रामपाल जी का जी तो उन लोगों को मैंने समझाया वो दुकान पे आते थे हमारे तो वही रामपाल ही रामपाल की बात करते थे वहां से ये हो जाता है वहां से कैंसर सही हो गया ये हो गया वो हो गया बहुत सारी बातें करते थे वो लोग सही समझाया मैंने अच्छी तरह से ये बताओ पहले तो ग्रंथों को जैसे उन्होंने जो पुस्तक लिख दी है वो तुमने पढ़ ली अब उसका तुम देखो तो अच्छी तरह से ग्रंथों में वो ग्रंथों में माहिर है। उसने मिलान किया कुछ गड़बड़ मिला उसे उसने छोड़ दी। अच्छा हां बहुत आसान है अरे मैं तो सोच मैं तो ये सोचता हूं इनके ही ग्रंथों के जो सिद्धांत है आप नोट कर लो बस एक जगह। आप ये जो चीजें बोल रहे हैं ना उनको एक जगह नोट कर लो। फिर इनके ही किताबें जब पढ़ोगे ना तो उन सारे सिद्धांतों का खंडन इनकी ही किताबों में मिल जाएगा। अपनी किताब नहीं खोलनी पड़ेगी। आप लिख लो बस ये क्या बोल रहे हैं उनको लिख लो।

00:57:05:27 तो नहीं ये लोग बहुत जिद्दी है जिद बहुत किसी की बात मानते नहीं है कुछ वो कहेंगे नहीं वही सही है वो तो जो ये कहे वो सही है अपन लोग कुछ भी कह दे ना वो हम [संगीत] जब सामने वाले की बात माननी नहीं है तो परमाण कोई मतलब नहीं रहता उनको किसी की बात मानते ही नहीं है। हमारी माता जी तो ऐसी है कि वो जो बातें कह देंग उसमें जो उन्होंने कह दिया जो उनके वो होते हैं वो क्या होते गुरु जी नहीं इन्ह क्या कुछ इन्होंने सत्संग होते हैं सत्संग में कुछ बातें होती है तो सत्संग में कोई बातें पढ़ी पढ़ी लिखी तो है नहीं सत्संग में जो उन्होंने किसी ने उनके जो होते हैं गुरु उन्होंने कुछ कह दिया कि जे सही जे जो बस वही कहते रहेंग उनको सही प्रमाण भी दो फिर भी नहीं मानती है वो बिल्कुल पता है जितना वहां उनको पढ़ाया गया है उसके आगे पीछे का बिल्कुल नहीं पढ़ाया गया देखो आधी अधूरी बात से जानकारी पूरी नहीं मिलती है

00:58:21:01 यही है कि भैंस की पूंछ दिखा के रामपाल जी ने ये कह दिया कि ये देखो ये हाथी की पूंछ है मेरे पास हाथी है पर उसका पूरा शरीर दिखाया नहीं हां हां और इसे भ्रमित करना कहते हैं। जैसे एक जगह बहुत से जगह में इन्होंने जैसे शिव पुराण का एक एग्जांपल ले लेते हैं। सदा शिव को काल कह दिया इन लोगों ने कहीं पर शिव को भी काल कह दिया। अब इनसे प्रमाण मांगो तो बोलते है की यही सदा शिव काल रूपी लिखा है यहां पर। पर जस्ट उसके नीचे ही एक लाइन और लिखी कि जो सदा शिव है वही शिव है वही ब्रह वही शंभू है वही महेश है वही रुद्र है

00:59:06:19 अब ये नहीं पढ़ा के वो आगे निकल जाते हैं ये तो अधूरा ज्ञान हो गया ना जब ज्ञान दे रहे हो तो पूरा ज्ञान दो सामने वालों को अच्छा कभी आप नहीं नहीं इसमें मैं एक बात कहना चाहूंगा जब इनकी किताब पढ़ी जाएगी तो उसमें जरूर बीच ये भी लिखा है वो भी लिखा है ये नहीं पढ़ा आपको याद है हमने एक ये ट्रिक खेली थी एक बार कि इनकी ही गरिमा गीता की में लिखा है शायद कि ब्रज का अर्थ आना होता है। हालांकि वो बात सही है कि उससे जस्ट पहले रामपाल जी ने ये लिखा है वहां पर कि हम जो है यहां पर इस की गीता दिखा रहे हैं। हम अगर यह बात ना पढ़े उनकी हम इस की गीता दिखा रहे हैं तो इनकी गीता में भी लिखा है ब्रजकार ताना तो अगर हमको केवल अपने मतलब की बात निकालनी है तो हम क्यों पढ़े? रामपाल की लिखी हुई वो बात जहां पर ये लिखा है कि इस की गीता का वो है अंश। समझ रहे हैं ना आप मेरी बात? सही है। इनकी किताब पढ़ो तो पूरी पढ़ो। और हमारी ग्रंथ जो पढ़े जाएंगे वो अधूरे पढ़े जाएंगे। वाह।

01:00:18:00 यह वो ये वो बोलते हैं कि हमें उतना ही लेना है यहां से जितना हमें जरूरत है। और एग्जांपल फॉर क्या बोलते हैं? जैसे हम उसी मेडिकल स्टोर में गए तो हमें जो बीमारी है हम उसी की दवाई लेंगे। बाकी की दवाई पूरी मेडिकल स्टोर नहीं उठा लाएंगे। पर हम यह भी तो नहीं कह सकते कि बाकी की जो दवाइयां रखी है वो बेकार है। वो किसी काम की नहीं है। वहां घास तो रखा नहीं होगा। दवाइयां रखी होगी। नहीं नहीं इसमें मैं और ज्यादा तार्किक उत्तर देता हूं कि मेडिकल स्टोर में कौन सी दवाई आपके काम की है कौन सी नहीं काम की है ये तब तय हो सकता है जब आप डॉक्टर हो आप डॉक्टर नहीं हो ना हां हां आप डॉक्टर नहीं हो सही बात है बल्कि आपको डॉक्टर कौन है इसको उस मेडिकल स्टोर में जाकर के आप सिद्ध करना ये दवाई इस डॉक्टर ने अगर लिखी है जो डॉक्टर ये दवाई लिखेगा वही डॉक्टर असली डॉक्टर है। वाह। अच्छा मैं ये आपका अपना बात है ना

01:01:25:03 सुधा महाराज और अच्छा ये लोग इनके चैन छे चलो ठीक है। ठीक है। मैं एक बात पूछना चाहूंगा। आप लोग कभी आश्रम गए हो इनके? नहीं मैं नहीं गया था। अच्छा मतलब संत रामपाल जी महाराज से जुड़ने से पहले कैसा व्यवहार था और जुड़ने के बाद कैसा व्यवहार रहा उनका? जुड़ने के पहले उनका बहुत अच्छा व्यवहार था। सबके साथ बैठती थी। खाना पीना खाती थी। जब से उनका है जो रामपाल जी जुड़ गई है तब तो सबसे अलग सी रहती है। बिल्कुल इससे कोई मतलब नहीं है ज्यादातर। अह और घर में कोई पूजा हो तो उनका खाना पहले निकाल दिया जाता है। पूजा के पूजा में बाद में। अच्छा अच्छा ये भोग भी लगाते हैं क्या उनको? हां वही से मिलते हैं। कोई प्रसाद मिलता है वो भोग लगाती है। नहीं नहीं नहीं मैं घर की बात कर रहा हूं। जैसे घर में खाना भोजन करने से पहले जैसे हम लोग ईश्वर को जो भी है भगवान श्री कृष्ण को भोग लगाते हैं। जैसे बहुत से लोग तो ये भी भोग लगाते हैं क्या घर में? नहीं थाली में नहीं लगाते। अपनी जो खाने की थाली होती है ना उसी में एक को डोल का रख देती उसी में लगा

01:02:44:04 क्योंकि इन्होंने इन्होंने बहुत जगह इसका खंडन किया हुआ है कि क्या ईश्वर के आगे थाल रखने से ईश्वर को भोजन करने से क्या ईश्वर खा लेगी क्या मूर्ति नहीं लगाती हूं क्यों लगाती हो भाई वो तो बेचारे जेल में रोटी तोड़ रहे हैं जेल वाली बहुत निकृष्ट स्तर की रोटियां होती है वहां पर यहां पे गांव का देसी यहां पे गांव का देसी खाना उनकी फोटो को परोसा जा रहा है क्या बात है भाई भाई उनके कहने के मुताबिक तो वो लीला कर रहे हैं

01:03:28:24 लीला कष्ट में सह के नहीं करी जाती है लीला जो है अगर लीला ही कर रहे होते तो नौ नौ वकील नहीं लगाए होते अपने बेल के लिए अपने इसके लिए अरे लीला कर रहे होते तो यह थोड़ी ना कहते कि भैया मैं बीमार था अभी सही हो गया हूं बिल्कुल गुमराह कर रहे और आपकी जो है वो हो रही है चश्मा लगाना पड़ रहा है आपको क्यों लगाना पड़ रहा है भाई आप तो 16 बरस के बने रहो ना हां सही बात है ये तो

01:04:01:18 ये तो सही बात है जो जो ईश्वर होता है उतना तो बूढ़ा होता है वो उसको है अभी आप देख लो रामपाल की पुरानी फोटो देखो आज की फोटो देखो बुढ़ापा दिख जाएगा आपको शिवांश भैया मुझे सतलोक में मस्त सस्ते फ्लैट चाहिए आपका तो संपर्क है कुछ कुछ शूट करा देंगे शूट नहीं हमारा नाम ले लोगे सतलोक में तो एंट्री नहीं मिलेगी बादाम काजू बंद हो जाएगा आवान का नाम ले लिया तो बस वहां कट चाहे जितनी तुमने भक्ति करी हो जो भी पैसा रहता है मां वहां प्रदान करती है जो भी ये क्या हुआ दिवाली अभी पहले तो मैं ये पूछूंगा आपसे कि अभी आपके पास रहने की व्यवस्था तो है ना नहीं तो हम लोग कुछ ना कुछ व्यवस्था है कुछ नहीं वो तो व्यवस्था तो है रहने की हम उन्होंने तो उन्होंने क्योंकि आपको निकाल ही दिया घर से दिया घर पर नहीं आना। जी जी। अच्छा और एक चीज और पूछ रहा था कि ये

01:05:14:12 जो आप उस दिन एक्सैक्ट क्या हुआ था? थोड़ा सा उस वृतांत को थोड़ा क्लियर बताएंगी कि क्या हुआ था जो उनको आपको इतना वो गुस्सा आ गया जो उन्होंने आपको निकाल दिया। अरे हुआ ये था कि मतलब हमारे चाचा ससुर थे ना तो उनको लगा करंट। करंट से उनकी मौत हो गई। वो भी दीक्षा लिए हुए थे। तो हमने उनसे हमने उनसे कहा अगर मतलब हमारे उनसे नन्हा कहा जाता नन्ना अगर रामपाल की दीक्षा ली हुई थी और वो भगवान है तो दो मिनट के लिए लाइट चली जाती। वो अपने भक्त की कह सकते हैं ना। आपको एक बात बताऊं मैं इस बात में रामायण में यह लिखा हुआ है कि आपके आसपास यदि किसी की अकाल मृत्यु होती है तो समझ जाइए कि गलत तरीके से पूजा पाठ हो रहा है। हां हां हां और ये रामायण में लिखा हुआ है जी हमारी माता मृत्यु हुई थी उनकी अकाल मृत्यु वही पांच लाख दान करके आए थे हमारे नन्हा एक लाख दान करके आए थे। इसके बाद उनको करंट लग गया तो वो खत्म हो गए। और फिर हमारी जैसे हमारी अम्मा हमारी

01:06:29:15 मौसी सास को बुआ सास को ले गई थी धनाना आश्रम दीपावली के पहले कोई भंडारा था इन लोगों का तो जी लेके गई तो फिर मतलब उसी टाइम पे हम लोग भी पहुंच गए तो ऐसी बातें हो रही थी चार छह जनी औरतें भी बैठी थी बाहर तो हमारी सासू मां मतलब उनका माइंड वाश कर रही थी बुआ का और मौसी का तो ऐसी बातें होने लगी तो हमने आपकी डिबेट लगा दी हमने अब सुनो ये तो मतलब उनको आपकी बात में सच्चाई लगी बोली अब हम नहीं लेंगे दीक्षा तो हमारी अम्मा तो इतनी वो नाराज हो गई उनकी बात हमारी अम्मा तो इतनी लाल पीली हो गई के हद से ज्यादा

01:07:15:01 वो झगड़ा किया बस बोली अब हमारे यहां यहां पर मत आना। इनसे बोली जाओ फलाने और हमारे घर पर मत आना। हटो यहां से बैग हटा दिया। चलो भैया मां है क्या कह सकते हैं? निकल आए। बिल्कुल। उन्होंने बहुत मतलब बहुत हम बहुत प्रतार्थ करती हैं कि चलो आश्रम तुम बहुत परेशान हो। आश्रम चलो तुम्हारे जो कष्ट दूर हो जाए। तो हमारे हम लोग ये कह थे अगर मसूड़े फूलने से कैंसर हो गया था तो हम लोगों को पता ही नहीं चला। अब कैंसर बना रहा अच्छा उनसे उनसे कहिएगा तुम्हारी कैंसर की कोई रिपोर्ट है क्या जांच की वो हमें दे दो जरा अरे भैया कुछ भी नहीं है। हम लोगों ने खुद इलाज कराया है मसूड़ा खोलता था। हम लोगों ने खुद इलाज कराया है मसूड़े का और वो बता दें कैंसर। कहीं इनका इंटरव्यू लेकर कहीं वो वीडियो में तो नहीं लगाया कहीं पर मैं देख रहा था कुछ कुछ वीडियो की मुझे कैंसर था ये था बहुत से और ये लोग करते हैं ड्रामेबाजी किया करते हैं ये लोग ऐसा वीडियो बनाते रहते हैं इन लोगों की हम बहुत ज्यादा वीडियो देखते हैं ये बताते हैं मतलब जेलधाम से

01:08:30:02 हमारे गुरु जी अस्पताल में आए उन्होंने सही कर दिया ऐसा वैसा तो हम आपको यही बताना चाहते हैं जो लोग पूरा पूरा झूठ बोलते हैं जी आज आज एक चीज बात पता चली कि रामपाल द्वारा जो ईश्वर है उनकी भक्ति करने से भी सुरक्षित नहीं है क्योंकि 5 लाख दान करने के बाद भी अकाल मृत्यु प्राप्त हुई उनको अकाल मृत्यु मर गया और ये रामायण में लिखा है कि जिस घर में अकाल मृत्यु हो जाए आपके आसपास यदि अकाल मृत्यु हो रही है आजकल देखिए ये जो विप्लव है क्यों है आज जो एक विप्लव का माहौल है पूरे उसमें उसमें क्यों है? क्योंकि गलत तरीके से भी पूजा पाठ अगर करोगे तो उसका भी परिणाम यही होगा। ना जी लोग मतलब कोई भाजन आ जाए या हमारी मतलब खुद की बिटियां उनकी हमारी नंदे आ जाए उनकी बिटियां तो उनको कोई मतलब नहीं है लड़कियों से ना किसी के पांव छूना कुछ नहीं चाहे बिटियां रोती रहे। लेकिन कोई मतलब इतनी नष्ट हो जाते हैं जो लोग के हद से ज्यादा। मतलब हमारी बहन जी ससुर के हैं सात साल के आते हमारे पतिदेव जब खत्म हो गए थे ससुर तो बहुत निष्टपना होगा उनमें

01:09:47:03 जी भाई कोई आना चाहता है लाइव में तो आ सकता है अपने चेहरे के साथ अपने सिद्धांतों को वो करने और वो कमेंट में वो दे दीजिए अह तो अभी आप लोगों का जीवन ठीक चल रहा है ना बहन जी कोई किसी प्रकार की सहायता अथवा आवश्यकता की वो हो आवश्यकता हो तो हमसे जरूर संपर्क करिएगा आपके बहुत सारे भाई हैं जो जो भी बन पड़ेगा हम अवश्य करेंगे है ना आप अपने आप को अकेला ना समझिएगा बालाजी कृपा सबको ठीक चल रहा है बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया इसीलिए कहते हैं बालाजी के भक्त इसीलिए कहते हैं मत पड़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में में अभी जो हमारे बा धाम की पद यात्रा गई थी ना तो उन लोगों ने खुद कहा अम्मा चलो पद यात्रा में चार ही कदम चलो नहीं हम नहीं जाएंगे हमें आदेश नहीं है अच्छा वो और कह रहा था मैं कि अ जो आपकी जो छूटी मतलब

01:11:02:09 उस दिन जो आपने हमारा वीडियो दिखाया था और वीडियो दिखाने के बाद वो जो उनका मन बदल गया कि नहीं अब मैं नहीं देखूंगी अब मैं नहीं लूंगी दीक्षा तो वो वीडियो देखने के बाद फिर आपको जब उन्होंने निकाल दिया तो उसके बाद उनका मन तो नहीं बदल गया कि नहीं मैं ले लेती हूं दीक्षा ना ना अब नहीं बदला है हम सब कहे रहते हैं बात कहते अच्छा अच्छा चलिए हमारे वीडियो से कुछ तो ऐसा हुआ कि भाई कहीं पे कोई व्यक्ति फंसने से बच गया गया बस बहुत भगवान की कृपा है जी पहाड़ी जी भगवान की कृपा है कि हमारे वीडियोस कुछ तो काम आए कहीं एक व्यक्ति तो बचा बिल्कुल जैसे फूल बनाते वक्त जब श्री राम जी का फूल बन रहा था तो एक गिलहरी थी छोटी सी वो भी सहायता कर रही थी तो पूछा कि तुम तो छोटी सी हो तुम क्या सहायता करोगे इस पुल बनाने में तो गिलहरी ने जवाब दिया था ना कि मेरा नाम तो आएगा ना इधर रामायण में तो यही काम हम कर रहे हैं। मतलब लोग भोले बाबा के बारे में हनुमान जी के बारे में बहुत गलत शब्द बोलते हैं तो सहन नहीं होते। जी जी जी नहीं देखिए वो ऐसा

01:12:17:13 है ना कर्म निवादी कारस्ते मा फलेशु गदाचन। चलिए यह एक भाई साहब आए हैं। जय श्री राम राज नागर जी आपको बताएं अपना परिचय। जी जय श्री राम जय श्री राम जी राज नागर जी बोले एक अरे एक किताब है इनकी जिसमें लिखा हुआ है जैसे इनके क्या तर्क रहते हैं ना कि भाई ये ऐसा कर सकते हैं वैसा कर सकते हैं उसमें एक जगह लिखा हुआ था कि भ ये क्या है कि किसी कोई कथा थी तो उसमें लिखा हुआ था कि भाई इन्होंने क्या किसी की मतलब जैसे दो भाई थे तो उनको गोली लगी थी तो गोली आके रामपाल ने रोक ली थी अच्छा चक्कर में हां भाई वो बोल रहे थे जैसे नहीं आता कि वो आजकल ऐड आते हैं कि यहां पर राम प्रकट हुआ फिर उसने गोली रोक ली उस चक्कर में यहां पर क्या है प्रोग्राम था कोटा के कोटा के पास में वहां पर किसी ने जाके और उसको प्रोग्राम में रमे नहीं हो रही थी शादी वहां पर वहां पर शादी हो रही थी तो वहां पर लड़ाई झगड़ा हो गया किसी बजरंग

01:13:32:21 दल वालों के और इनके तो उन्होंने गोली चला दी और उसमें एक आदमी रामपाल जी का भगत खत्म हो गया। अब उसने भी बोल दिया कि भाई जब यार मैं तो यह चेक करने आया था कि भाई यहां पर जो इसमें लिखा हुआ है कि भाई रामपाल आया क्यों नहीं अब तो वहां पर यही हुआ है कि भाई रामपाल आया क्यों नहीं जब इस किताब में लिखा हुआ है इनकी में कि भाई रामपाल ने आके एक की जान बचा ली गोली लगने से तो मैंने भी गोली चलाई थी आज क्यों नहीं आया तो इनका तर्क था कि वो भी जेल में है

01:14:17:22 नहीं भाई देखिए एक मिनट बहन जी एक मिनट भाई साहब अगर आपको कोई समस्या है आप ऊपर आकर के बात कर सकते हैं चेहरे के साथ यदि डरपोक है कायर है बचपन में माता जी का निष्ठा पूर्वक दूध नहीं पिया है तो एक बार कर दीजिए कमेंट और बार-बार ना करें ठीक है एक बार की छूट है एक बार कर दीजिए बार-बार एक ही कमेंट कॉपी पेस्ट ना करें कमेंट और जी बहन जी बताएं वीडियो भी वीडियो भी भेजूंगा एक तो हमारी अम्मा बताती है इनकी तो मैं नहीं होती है सारा एक वीडियो है न्यूज़ चैनल पे जी तो लड़का लड़की को एक कमरे में भेज देते हैं वहां से एक धागा पहना देता है लड़का और हो गई शादी क्या कर देता है एक मिनट दोबारा बताइए जरा एक धागा पहना देते हैं गले में और हो गई शादी और कुछ नहीं उनका लॉकेट होता है किसी के यहां पर मेरा मेरी आवाज रिपीट आ रही है किसी के यहां मोबाइल चल रहा है तो एक मिनट एक मिनट किसी के यहां पर मोबाइल चल रहा है इसमें मेरी आवाज मुझे वापस सुनाई दे रही है चल रहा है क्या ठीक है नहीं

01:15:32:28 चल रहा नहीं तो ये मतलब कैसे ये जैसे कोई वर पक्ष और वधू पक्ष एकत्रित होता है मंदिर में क्या होता है थोड़ा बताएं डिटेल में कैसे होती है वो शादी रमेनी होती है तो मतलब इकट्ठा होते हैं तो एक लड़का मतलब जो वर है और वधू दोनों को एक कमरे में अंदर कर दिया जाता है और एक धागा पहना दिया जाता है बस और बाहर निकाल के बस हो गई शादी और ये शास्त्र सम्मत कहां लिखा है कि ऐसे होनी है शादी ये कहां लिखा है शास्त्रों में भाई चलो तुम भक्ति कराओ नाम बताओगे वो सब बातें तो अलग है। शादी ऐसे होनी है। यह कहां लिखा है?

01:16:21:13 मतलब इनकी शादी जो है शास्त्र नहीं है। जी जी जी समझ गया मैं समझ गया। ना जी पांव में बिछिया पहनती जी जी हां बोलिए बोलिए बोलिए आप बोलिए बहन जी बोलिए ना पैरों में बिछिया पहनती है ना गले में मंगलसूत्र पहनती है मतलब ऐसे ही रहती है दोद चूड़ी डाल के जी कहती है हमें गुरु जी का आदेश नहीं है कुछ पहन मैंने देखा है कि जो एक वो क्या नाम से ठाकुर नाम को लज्जित करने वाली एक मातृ शक्ति है जो हमारे विरोध में डेली वो बना रही है। उस उसको मैंने किसी किसी वीडियो में बिंदी लगाए हुए और कानों में कुछ पहने हुए भी देखा है। पहाड़ी जी

01:17:14:14 जी जी ये कभी ऐसा ऐसा होता है ना कभी-कभी भूल जाते हैं कि हम रामपाल जी के शिष्य हैं। कभी-कभी भूल जाते हैं कि हम हम पर रामपाल का डाका पड़ चुका है हमारे जीवन में। एक सवाल है जो विवाह होता है मतलब कि जो दोनों पक्ष के होते हैं वर और पध जो पक्ष के होते हैं सभी ने नाम दान लिया होता है इसका मतलब हां वहां पर जो जाते हैं सब नाम दान वाले ही रहते हैं एक दूसरे में ही शादी करते हैं वो जात पात नहीं देखते ये लाइव स्ट्रीम में पूछा गया था जब ये उधर लाइव स्ट्रीम चलाई थी तो हमारे से कोई गए थे तो पूछा था कि क्या मुसलमान से तुम अपने बहन बेटियों की शादी कर लोगे? उन्होंने बोला कि हां पहले तो बोला कि हां कर लेंगे हम। तो बाद में उनको याद आया कि हमने इसमें कुछ जोड़ना भूल गए। बोले क्या जोड़ना भूल गए कि हम शादी उसी से करेंगे जिसने नाम दान ले रखा हो उस रामपाल जी से। कोई मुसलमान से बात

01:18:17:15 तो ये जातपात की विदाई जो चल रही थी ना आपने एक बनाया था आपने वो रखा था उसके उपलक्ष में उन लोगों ने रखा था तो फिर आप भी तो यही कर रहे हो ना अपने उधर उसको जोड़ने के बाद ही उससे शादी करा रहे हो हां जो रामपाल को मानेगा रामपाल की जात का होगा जो जेलधाम जाने वाला होगा उसी से शादी होगी हां श्याम सुनो जी एक मिनट बहन जी मैं आपसे फिर बात करता हूं थोड़ा सा रुक जाइए श्याम स्टूडियो श्याम स्टूडियो जी जय श्री राम आवाज नहीं आ रही आपकी ये विजय दास विजय दास को हटा दीजिए वो अभंत आचरण वाला व्यक्ति है अपर्यादित बातें कर रहा है आवाज नहीं आ रही सर अब आ रही है आ रही है मैं ग्वालियर से बात कर रहा हूं एमपी प्रदेश से सर ग्वालियर से अच्छा क्या बात है मैं आपकी सुनता रहता हूं मैं आपसे बहुत सालों से जुड़ा हूं दोनों आपसे अच्छा अच्छा बहुत आभार आपने वीडियो बना के डाली थी मेला में आपने उनके खिलाफ तब से जुड़ा हूं मैं आपसे अच्छा बहुत आभार क्योंकि मुझे बहुत अच्छा लगता है कि कोई खड़ा है हमारे

01:19:32:26 लिए कि ऐसे काम कर रहा है क्योंकि हम में इतना सा तो है पर इतनी अभी बुद्धि नहीं है कि हम किसी को समझा सके इनको जी जी जो कार्य आप कर रहे हैं बहुत अच्छी तरीके से जी जी मेरे ससुराल वाले भी जुड़े अच्छा 2013 से मतलब 2013 में शादी हुई थी तब से जुड़े हैं वो लोग तो मैं भी बहुत परेशान हूं उन लोगों से ये देखिए एक रामपाल के भक्त की बात करने की मर्यादा देखिए आपको दिखाते हैं लोग दावा करते हैं कि रामपाल के भक्त जो होते हैं उनका इनका आचरण बहुत हो जाता है। इसको यहां पता है कि यहां पर एक मातृशक्ति भी है लाइफ में। मगर इसकी भाषा देखिए क्या है? ये है नीचता। यही नीचता सिखाई जाती है क्या आपको आश्रम से सतलोक आश्रम से? क्या लिख रहा है? देखो यहां मालूम है बीच में एक बहन भी बैठी हुई है। ये बात लिख रहा है। ये है रामपाल का रामपाल की शिक्षा। है ना? आपको मैं बहुत बढ़िया। नाम रोशन करो अपने रामपाल का तत्वदर्शी का नाम रोशन करो और और लिखो तो यहां दिखाएंगे फिर से लिखो फिटबॉल जी फिर से लिखो

01:20:48:12 फिर यहां दिखाएंगे रामपाल सिखा रहा है खेल धाम से लिखो आपको मैं एक रिकॉर्डिंग है ये ये जो लड़का है ये ये जो भी है फिट बॉय विराज ये अभी ऊपर आया था उसमें लाइव में जुड़ने के लिए और हमारी ये मर्यादा है भाई कि वैचारिक मतभेद के निमित्त जो व्यक्ति आएगा आएगा चर्चा करने के लिए वो व्यक्ति चेहरे के साथ आएगा। यहां तक कि जितने भी हमसे नॉर्मल बात करने भी आते हैं उनका भी चेहरा ही ले ही लेते हैं। मगर मुख्य रूप से वैचारिक मतभेद के निमित्त हमने जब भी चर्चा की है तो चेहरे के साथ की है। हमने इनको कहा चेहरे दिखाओ तो गंदी गंदी अश्लील बातें कर रहे थे इसमें प्राइवेट चैट में। और हटा दिया तो अब ये अश्लील बातें वहां से लिख रहे हैं। जबकि इन्हें मालूम है यहां मात्र फिटि बैठी है। अब इससे कोई मतलब नहीं है। क्यों? क्यों मतलब नहीं है? क्योंकि धर्म है ही नहीं ना। जहां ईश्वर नहीं है वहां धर्म कहां से होगा?

01:21:44:24 जी पाणी जी मैं एक आपको एक रिकॉर्डिंग भेजूंगा। उसमें 15 से 20 मिनट बात हुई है किसी रामपाल जी के शिष्य से और उसमें 15 से 20 मिनट में सिर्फ दो मिनट शालीनता से बात करी है उन्होंने और 18 मिनट पूरी गाली गलौज के साथ पूरी 18 मिनट पूरी गाली गलौज और सामने वाला जो सनातनी है वो बिल्कुल उनकी बातें शालीनता से सुन रहे हैं और उनके मुंह से एक भी गाली नहीं निकली है ये सिखाया जाता है वहां

01:22:18:12 क्या हुआ बेड बॉय बोला नहीं दोबारा कुछ या हो सकता है कि बोल बोलो शायद बिल्कुल मर चुकी हो आत्मा दोबारा बोल पाओ शायद नहीं अभी तक तो नहीं बोला हम लोग ये ये सही करते हैं ना चलती लाइफ में ही कुछ लोगों को ठीक करते रहते हैं अपना परिचय ऐसे ही देते हैं हम परिचय और भी कोई आया आया है क्या? जी बहन जी आप बोले आप कुछ बोलना चाह रही थी तो रुक गए थे। जी हम रामपाल के चेलों से ये कहना चाहते हैं पहले तो अपनी शुद्धता करें। शुद्ध होकर पूजा करें।

01:23:03:03 कम से कम नहा तो लिया करो भाइयों। बहन जी बता रहे हैं कि नहा नहाते तक नहीं हो। हम्म। अगर आपको पूजा करनी है तो नहा धोकर करो। ऐसे मतलब अशुद्ध होकर पूजा करते हो। कहां से भगवान प्राप्त होंगे आपको? क्या पता ये आपका ही बनाया हुआ। ओ क्यों शिवश नारायण द्विवेदी भाई भाई देखिए बनाया हुआ है कि नहीं है वो ठीक है। आप भी बहुत सारी ऐसी बातें बोलते हैं कि बनाया हुआ है। हमारा गोली बचा गोली वो हो गई। ये वो ये मत बोला करो फिर ऐसी बातें। फिर क्यों बोलते हो कि रामपाल के सारे भगत होते हैं। वो गुटखा बीड़ी तंबाकू नहीं खाते। क्या पता वो आपके ही द्वारा बनाया गया मामला हो। अच्छा क्या पता अच्छा तुम कह रहे हो कि कबीर जो है माता की कोख से जन्म नहीं लिया। क्या पता माता की कोख से जन्म लिया हो। फिर क्यों मान ली वहां बात? क्या पता उसने कुंवारी गाय का दूध ना पिया हो। क्यों मान ली वो बात? हम भाई वो भगवान है इसलिए बात मानी कि बात मान ली इसलिए सिद्ध हुआ कि वो भगवान है क्योंकि बात माने बिना तो भगवान सिद्ध नहीं होगा तो फिर ये भी नहीं कह सकते भगवान है इसलिए मानी उसकी बात है ना पाणी

01:24:18:07 जी बिल्कुल भगवान है इसलिए बात नहीं मानी क्योंकि उस बात से तो सिद्ध होगा ना कि वो भगवान है कि नहीं तो क्यों मान ली उसकी बात क्यों मान ली इनको हर एक चीज इसको स्क्रिप्टेट ही लगता है इनको क्योंकि ये खुद स्क्रिप्ट में जीते हैं। स्क्रिप्ट में तो खुद जी रहे हैं। रामपाल हरि ओम हरि ओम हरि ओम चौधरी जी जय श्री राम बताएं। हेलो हां जी आवाज जी जय श्री राम जी जय श्री राम बताएं राम राम जी सुकी कहीं से आवाज रिपीट आ रही है मुझे आ रही है हां अब नहीं आ रही आ रही है आ रही है आवाज क्लियर यहां दो मोबाइल चल रहे है क्या नहीं एक ही मोबाइल है मेरे पास तो और तो किसी का माइक भी ऑनलाइन है।

01:25:27:08 हां जी आवाज आ रही है क्लियर है? नहीं आपकी क्लियर आ रही है। अब मेरी भी ठीक आ रही है। जी बोल ना फिर आने एक मिनट एक मिनट एक मिनट अभी पहाड़ी जी मेरी आवाज ठीक आ रही है आपको? हां ठीक आ रही है आपके क्लियर आ रही है। तो हरि ओम चौधरी जी आपकी तरफ से कोई दिक्कत है? मैं जो बोल रहा हूं वह रिपीटर सुनाई दे रही है हमको।

01:26:10:28 हर हर महादेव दोस्तों हर हर महादेव। जय श्री राम। जी हर हर महादेव। जी रंजीत सिंह जी अरे एक चीज हम पूछना चाहते हैं यह जो रामपाल जी के फॉलोअर्स हैं इनसे कि ये किसको मानते हैं प्रमाणिक ज्यादा बीजक को मानते हैं जो कि कबीर जी की खुद की रचनाएं हैं या धर्मदास जी के लिखे वो कबीर सागर को बताइए हरि ओम चौधरी जी आप यह बताइए कि बीजक को आप सही मानते हैं या फिर कबीर सागर को

01:26:50:21 आवाज आपको अन म्यूट कर दीजिए। अरविंद चौधरी आप पहले आप जाके वापस आइए। आपके साथ कुछ दिक्कत है टेक्निकल तो आप एक बार दोबारा जुड़िएगा। ये कबीर बीजक को नहीं मानते। मुझे तो ये मालूम है। अरे किसी चीज को नहीं मानते। जो रामपाल ने अपनी इनको इनसे बस यह कंफर्म करना है कि ये मानते किसको हैं कबीर जी के लिखे हुए बीजक को या धर्मदास जी के लिखे कबीर सागर को कारण हम बता रहे हैं इन्हने इन्होंने ऐसा है रणजीत सिंह जी सुनिए इन्होंने अपनी एक बुक में एक जगह ये भी लिख दिया है कि कबीर वाणी में भी लोगों ने मिलावट मिलावट कर दी है तो ये उसको भी नहीं मानते मिलावट किया गया होगा तो हमको ये बताइए मिला मिलावट हुआ होगा। कहां मिलावट हुआ होगा? उसके मीनिंग्स में ओरिजिनल जो रचनाएं हैं बीजक जो उनकी कविताएं हैं या जो उसमें रमायनी वगैरह उसमें थोड़ी मिलावट होगा। नहीं अभी ये तो चर्चा का विषय है मगर इससे कोई फायदा है ही नहीं। वो उनकी किताबों से ही बात हो जाती है। उन्हीं की किताब है ना। हमारी किताब तो है नहीं। कबीर जी की रचना है। हमने तो किया नहीं। कबीर जी ने खुद लिखा है ना। और कबीर जी ने उसमें

01:28:06:02 स्पष्ट तौर पर कबीर जी के बीजक को अगर आप पढ़ेंगे तो हम बता रहे हैं कबीर जी के बीजक में आप शुरू से लेकर लास्ट तक पढ़ते जाइए। वो निराकार ब्रह्म के उपासक रहे हैं। उन्होंने कभी साकार ब्रह्म को माना ही नहीं और ये लोग चिल्ला रहे हैं। ईश्वर साकार है। जी ये देखिए साकार है। ईश्वर साकार है। ये देखिए रामपाल के जो एक मिनट रंजीत जी एक मिनट। रामपाल के जो भगत लोग हैं वो कैसे बात करते हैं यहां पे उसका प्रमाण देखिए इसको बड़ा करिए जरा भाई साहब

01:28:41:20 लाइव में जॉइ करना साले कुत्ते पढ़िए इसको क्या लिख रहे हैं ये कहां गए भाई ये वही है ये देखिए अरे यार ये अपना मतलब इंट्रोडक्शन दे रहे हैं कि इनका यही इनका वो है यही इनका धर्म है। रीजन हम बता दे रहे हैं। कबीर की रचना है जो बीजक का जो रचनाओं का जो संकलन है बीजक उसमें सातवें वाले में कबीर ने स्पष्ट किया है कि जिस ब्रह्म की तू खोज कर रहा है वो कोई और नहीं तू ही है। तेरे अंदर ही है वो ब्रह्म। और इसके बाद जानते ही नहीं है ना। मेरी बात सुनो। और रामपाल के एक वीडियो में यह देखा है कि भाई उन्होंने एक बात बोली है कि अगर कबीर खुद आ के भी कह दे आपसे कि मैं कबीर हूं और मेरे पूजो तो उन्होंने साफ मना कर रखा है कि नहीं वो कबीर नहीं है जो है वो मैं हूं। अच्छा अगर ये बीज को पढ़ रहे हैं। हम बता देना कि ये प्रमाणिक है या नहीं है। उस दिन रात में अमित नाम के कोई व्यक्ति के साथ टीआर पहाड़ी जी की बहुत रात लेट नाइट तक जो है बहस हुई थी। पहाड़ी जी याद है ना आपको? परसों शायद आई थिंक परसों काफी देर तक वो बंदा जो है वहां

01:29:56:24 पर जो है गीता को लेकर के बहस कर रहा है। अरे यार गीता को लेकर बहस करने की जरूरत ना है आपको। आप जो है खाली बीजक को पढ़ लो। बीजक में शायद 61वें श्लोक में कबीर दास कह रहे हैं कि तू मेरे बनाए बताए हुए मार्ग का अनुसरण कर। तो मैं तुझे उस निराकार ब्रह्म के दर्शन करा दूंगा जो जिसके दर्शन के लिए शिव जो है अपने अंगों में भूत लपेटे हुए जो है समाधि लगा के बैठे हैं। विष्णु जिसके दर्शन के लिए जो है योग निद्रा का आश्रय लेकर के तपस्या कर रहे हैं। अर्थात कबीर बार-बार फोर्सफुली कह रहे हैं कि वो परबह्म जिसकी खोज में जो है मनुष्य परेशान है। सभी लोग इधरउधर घूम रहे हैं। तमाम तरह के आचरण कर रहे हैं। वह निराकार ब्रह्म है। और यह महोदय यह लोग चिल्ला रहे हैं। अब एक चीज हम बता दें जैसे हमारे मम्मी है, पापा हैं तो मातृभक्त होते हैं जैसे कुछ लोग तो उनके लिए माता का स्थान जो है ईश्वर से बढ़ के होता है। इस चीज को समझने वाली चीज है। कोई पितृ भक्त होगा तो उसके लिए पिता का जो स्थान होता है ना वो ईश्वर से ऊपर होता है। तो इसी तरह से धर्मदास जी हैं। धर्मदास जी के लिए जो है वो परम गुरु भक्त थे। तो वो गुरु का स्थान उन्होंने गुरु का स्थान जो है ईश्वर के ऊपर रखा है और

01:31:11:25 इसीलिए उन्होंने अपनी रचनाओं में सर्वश्रेष्ठ गुरु को बताया है। तो ये तो अंडरस्टुड सी बात है, समझदारी की बात है, विवेक की बात है कि इंसान को खुद के विवेक से सोचना चाहिए। जी। अच्छा एक बात मैं बता दूं। ये जो लोग भी गाली गलौज कर रहे हैं ऊपर आकर के वो अपने मनहूस चेहरे को लेकर आ सकते हैं। यदि इतना आपकी माता जी ने इतना दूध पिलाया है तो ही आए। यदि आपके पास अपना काला हो चुका चेहरा समाज के समक्ष रखने का साहस नहीं है तो आपको नहीं आना चाहिए। यहां पर साहस गुर्दे गुर्दा होता है ना जिनके पास जैसे हरि ओम चौधरी जी हैं वो भी रामपाल जी के फॉलोअ है या कबीर दास को भगवान मानने वाले हैं। मगर इनके पास गुर्दा है तभी तो चेहरा ले आए ना। तो गुर्दा हो तो आओ। वरना अपनी कायरता का पोषण कहीं और जाके करो। जी हरि ओम चौधरी जी जय श्री राम। अब आवाज क्लियर आ रही है क्या? जी आवाज आ रही है बिल्कुल क्लियर बताइए। हां तो ये भाई साहब जो कह रहे थे कि भाई आप बीजक को मानते हो या जो है क्या क्वेश्चन

01:32:26:26 था इनका? क्या मानते हो? ग्रंथ कौन सा मानते हो? ऐसा कुछ पूछ रहे थे ना। कबीर को आप प्रमाणित मानते हो या कबीर सागर को प्रमाणित मानते हो? ये पूछ रहे हैं वो। देखो सर एक्चुअली प्रॉब्लम यह है कि जो ग्रंथों की अगर हम बात करें ना तो ग्रंथ एक्चुअली अगर पूरे पढ़े नहीं है तो फिर वो उसके ऊपर डिबेट करना भी एक प्रकार की कोई अच्छी बात तो नहीं है। हम पूरा जब तक उसमें कितने 1100 जन कितने तो पेज है उसमें जो बीजक और जो ये कबीर सागर है मैं एक बार देखा था पूरा मैंने नहीं पढ़ा तो ये कह पाना तो बड़ा एक नामुमकिन काम है कि भैया पूरी मेरे को नॉलेज है। ये तो मैं नहीं कहूंगा। नहीं नहीं ये नहीं देखिए पूछा ये जा रहा है कि जैसे आपको अभी अगर रामपाल दास की कोई किताब दी जाए तो क्या आप उसमें प्रमाण बुद्धि रखेंगे या ये सोचेंगे कि इसमें भी कोई बात गलत हो सकती है? देखो सर जब नाम लेने से पहले मैंने करीब 2013 से औरत 15 दो साल दो साल मैंने इसमें काफी मतलब जो है सोच विचार किया उसके बाद मैंने नाम लिया तो उसमें जितने

01:33:41:27 भी मैंने देखे मुझे सही लगे भाई साहब मैं पूछ रहा हूं आप मेरा सवाल नहीं समझ रहे मैं ये नहीं कह रहा हूं कि आपने रामपाल को क्यों चुना मैं ये पूछ रहा हूं कि जैसे अभी रामपाल की कोई किताब आएगी ज्ञान गंगा या ये तो इसमें जैसे आपकी प्रमाण बुद्धि है कि नहीं इसकी एक एक लाइन बिल्कुल अक्षरस सत्य है। है कि नहीं है? पहले तो ये बताओ। देखो मैं आपसे फिर कह रहा हूं कि मैंने पूरे ग्रंथों का अध्ययन नहीं किया है। मैं इस पर डिबेट में आपसे हार जाऊंगा। लेकिन मेरे पास और बहुत सी बातें हैं जो सोचने योग्य है। ऐसा नहीं है कि आप आपने जो एक मिनट मतलब आपको अभी भी डाउट है कि हो सकता है इसमें कोई गलती निकल आए। तो मैं उस चीज में शब्दों पर तो मैं ग्रामर पे संत व्याकरण देखिए मैं आपको एक बात बताऊं मैं सनातनी हूं मैं हिंदू हूं मैं अब मैं कह रहा हूं मुझे मेरे जो परंपरा प्राप्त ग्रंथ हैं परंपरा प्राप्त आचार्यों के उसके हर शब्द पर अक्षरस विश्वास है। क्या आपको विश्वास है रामपाल के ग्रंथों पर?

01:34:50:19 अब यह क्वेश्चन एक्चुअली सर ऐसा उलझा हुआ है कि इसमें हां ना कहना यह अपने आप में ही फंसना है। मतलब आपको डाउट है एक तरीके से। हां ना कहने में डाउट है। तो अब इसका क्या जवाब दिया जाए? ये तो क्वेश्चन ही ऐसा है कि हां कहेंगे तो मरेंगे और ना कहेंगे तो मरेंगे। ये तो क्वेश्चन ही ऐसा हो गया ना। तो अरे क्वेश्चन ऐसा है मुझे आप तर्क और प्रमाण से समझाइए कि ये क्वेश्चन गलत क्यों है? बताइए। मैं आपको अपना पर्सनल एग्जांपल दे देता हूं। जो जो मैं मतलब जानता है मैंने जो देखा है जो मैंने महसूस किया जो वो वो देखिए विषय अलग चल रहा है भाई साहब थोड़ा समझने का प्रयास करिए मैं समझ रहा हूं आप बहुत मतलब सज्जनता से बात कर रहे हैं और चीजों को समझना चाहते हैं मैं समझ चुका अब तक बात करके विषय हमारा ये चल रहा है पूछा ये जा रहा था कि क्या आपकी रामपाल में प्रमाण्य बुद्धि समझते हैं रामपाल जो कहेगा वो सत्य ही होगा प्रमाण्य बुद्धि इसे कहते हैं। तो क्या यह ऐसी बुद्धि है रामपाल और उनके द्वारा दी जाने वाली शिक्षाओं में या डाउट है कि अगर किसी दिन रामपाल ने कोई ऐसी बात कही जो मुझे ठीक नहीं लगेगी तो मैं रामपाल को छोड़ दूंगा या फिर रामपाल भी कोई ऐसी बात कह सकते हैं

01:36:06:04 जो कि हो सकता है सही ना हो। क्या ऐसी बुद्धि है आपकी? सर इसके लिए मैं आपसे थोड़ा सा बोलना चाहूंगा दो चार बातें अगर आप सुन लो तो बोलिए बोलिए गुरु गुरु जो होता है ना उसकी जो आज्ञा होती है वो सर्वधार्य होती है गुरु ने कह दिया ना जो फाइनल है आप अगर लॉजिक की बात कर रहे तो नाम में लेने से पहले की बात अलग थी लेकिन जब मैंने मेरे भाई साहब मैं मैं आपको एक बात कहूंगा आप जो है खींच रहे हैं आप सीधे कह दो हां उनकी हर बात मेरे लिए पत्थर की लकीर है हां हां बिल्कुल जो उनका आदेश होगा वो हमारे लिए फाइनल होगा। हां तो अब मैं यह पूछ रहा हूं जैसे उनकी हर बात आपके लिए फाइनल है। क्या ऐसे ही आपके लिए कबीर बीजक या गरीब दास जी का जो भी है वो है पत्थर की लकीर या नहीं है? हां गरीब दास जी का ग्रंथ है। बिल्कुल फाइनल है। कबीर बीजक आपके लिए फाइनल नहीं है। देखो गरीब दास जी का भी इतना बड़ा ग्रंथ है। उसमें इतने पेज हैं उसको मतलब मैंने पूरा नहीं पढ़ा और ये कबीर जो बीजक है और जो ये है प्रमाण है ये प्रमाण लेकिन मैं मानता हूं इनको। तो प्रमाण मानते हैं तो उसका एक एक शब्द प्रमाण है ना।

01:37:22:02 हां बिल्कुल। तो भैया बताइए क्या पढ़ा आपने कबीर कबीर बीजक से रंजीत जी कबीर बीजक में तो बार-बार हम बता रहे हैं उसके रमणी नंबर सातव में वो एकदम स्पष्ट बता रहे हैं कि तू किसी जिसे ढूंढना चाहता है उसे बाहर मत ढूंढ तत्व मसीह वो तेरे अंदर ही मिलेगा किसी और जगह नहीं मिलेगा किसी मंदिर में नहीं मिलेगा किसी मस्जिद में नहीं मिलेगा किसी मूर्ति में किसी इंसान में नहीं तेरे अंदर मिलेगा इसके बाद 61व में वो कह रहे हैं कि तू तू मेरे बताए हुए मार्ग का अनुसरण कर। वो परम ब्रह्म निराकार है। उसका कोई आकार नहीं है। वो अजन्मा मतलब उन्होंने क्लियरली निर्गुण निराकार ब्रह्म की ही साधना उपासना की है। और ये लोग चिल्ला रहे हैं। हां भाईजक से यहां पे एक बात कह दूं। यहां पर मैं एक बात कह दूं कि निर्गुण निराकार ब्रह्म की भक्ति करने का ही समर्थन केवल हम नहीं करते हैं। मगर यहां पे बात रखी जा रही है कि कबीर दास जी ने तो यह बात कही है तो आपके जो तत्वदर्शी हैं वो ऐसा क्यों कह रहे हैं कि नहीं ईश्वर साकार है। जी वो तो गुरु ने वेदों में प्रमाण दे रखे हैं। काफी जो देखो सारे प्रमाण में ले नहीं मतलब मतलब अगर वेद की बात आ जाएगी तो वहां पर आप कबीर जी की बात नहीं मानोगे।

01:38:39:13 वेदों की बात आ जाएगी तो कबीर जी की बात नहीं मानेंगे। यह पूछ रहा हूं मैं आपसे। क्यों नहीं मानेंगे? मानेंगे। तो ये बोल तो रहे हैं कि कबीर से कबीर कह रहे हैं फलानी जगह पे ये लिखा हुआ है कि ईश्वर निराकार है। आप ऐसा करो मेरे को बता दो कौन सा क्या बता रहे हो आप। मैं देख लूंगा उसको। फिर नेक्स्ट टाइम पे चर्चा कर लेंगे। लेकिन फिलहाल सुनिए हम हम बता दे रहे हैं बीजेक उठाइएगा सुनिए ना बीजेक उठाइए रमायणी नंबर सात में पढ़िए रमायणी नंबर 59 में पढ़िए रमायणी नंबर 61 में पढ़िए ठीक है उसको अच्छे से पढ़िएगा और इसके बाद फाइनल आप कर लीजिएगा कि ईश्वर निराकार है कबीर जी कह रहे हैं और

01:39:25:25 नहीं आप बहन जी हमारी चली गई है बहन जी आप अपने आप अपने मन से कुछ ना बोल रंजीत जी एक मिनट एक मिनट बहन जी हमारी चली गई है वो यहां पर चर्चा गम होने लगी थी तो मैं उनको बता दूं बहन जी आप अपने आप को अकेला ना समझे किसी भी प्रकार की का कोई कष्ट हो तो आपके बहुत सारे भाई हैं यहां पर तो आप संपर्क करें हमसे और आप यथावत रूप से जैसे अपने भक्ति मार्ग में आगे बढ़ रहे हैं अपने सनातन धर्म को लेकर के वैसे ही आगे बढ़े बालाजी की कृपा भगवान आप पर बनाए रहे दोनों पर और आप फूले भले हम ऐसी प्रार्थना करते हैं भगवान से जी अब रंजीत जी आप इनसे अपनी बात बोलिए। हम यही पूछना चाहते हैं कि आखिरकार में नहीं ये डल्टी वाली बात क्यों? दोहरी बात क्यों? कबीर जी जब खुद बोल रहे हैं कि वो ईश्वर निराकार है जिसकी तू खोज कर रहा है। उसे कहीं और खोजने की जगह तू अपने अंदर ढूंढ। मैं उसे तेरे अंदर ही दिखाऊंगा। हां बोलिए। ये ये प्रमाण मैंने नहीं देखा है। मैं देख लूंगा। चलिए लेकिन मैं अभी इसका इनके पास इसका जवाब नहीं है। अभी इन्होंने पढ़ा नहीं है। जी हरि ओम जी अब आप अभी नहीं अगर अभी कबीर आके ये बोल दे कि ये सब मतलब एक तरह से फिर मानोगे या

01:40:40:28 नहीं मानोगे एक बार इनसे भी पूछ लेना अगर खुद कबीर आके पूछ बोले कि ये सब गलत है तो फिर इन चीजों को मानोगे या नहीं मानोगे? भाई ये वीडियो में है ओम चौधरी जी कबीर अगर बोलेंगे भी आ जाए तो इन मेरी बातें काटने नहीं होगी। अब ये तो सर काल्पनिक बात हो गई ना। काल्पनिक हो गई। मतलब खुद उनकी वीडियो में बोल रहे हैं रामपाल जी कि अगर खुद कबीर राजा है और वो बोले कि मैं कबीर हूं तो भी उनको कबीर नहीं मानना है और अपनी बातों पर अटल रहना है। मैं एक वीडियो डाल दूंगा। ये वीडियो बहुत अच्छा पॉइंट है। अच्छा संदीप जी आप अपनी बात बोले। खुद खुद बोल रहे हैं वो कि भाई अगर खुद कबीर आके भी बोले तो भी अपन को जो अभी लिखी हुई पुस्तकें प्रमाणित है उन्हीं को मानना है। कबीर की बात को भी नहीं मानना है। जय श्री राम जय श्री राम। जय श्री राम जय श्री राम। जी संदीप जी बस बस कृपा राम। हरि ओम जी एक बात बताओ। आपने हिरण्यकश्यप का नाम सुना है आपने? हिरण्यकश्यप का? हां नाम सुना है। अच्छा रावण का नाम सुना है? सुना है कंस

01:41:56:12 का सुने नाम तो सुना है अच्छा ये बताओ कि ये किसका विरोध करते थे ये कौन से परमात्मा थे जिसका ये विरोधी थे तीनों के तीनों ये युग तो आपको पता ही होंगे कौन-कौन से युग में थे ये तीनों तीनों किसके विरोधी थे यह बताओ जरा इन्होने किसका विरोध किया था जिसकी वजह से इनको जो है इनकी दुर्गति हुई यह बताओ मेरे को कंस ने कृष्ण भगवान का विरोध किया था अच्छा उसके बाद हिरण्यकश्यप ने किसका किया था? वो दीवार में प्रकट हुए थे। वो नरसिंह नाम से जो थे थे तो विष्णु अवतारी कहते हैं। वैसे तो हां सारे विष्णु विष्णु जी के ही अवतार हैं। मतलब हिरण्यकश्यप ने भी विष्णु जी का विरोध किया। रावण ने भी विष्णु जी का विरोध किया और कंस ने भी सेम काम किया। मानते हो आप ये बात? अब देखो जहां तक ये अब इसमें क्या है? इसमें बहुत सारी बातें हैं। एक्चुअली अगर इसमें हम इसकी कहानी बहुत लंबी हो जाएगी कि भाई क्या क्या आधार है क्या है तो वो एक बहुत आधार सर मेरे को ये इनका आधार ना वहां से पता है जब इनको ये श्राप मिला था ना मेरे को वहां से आधार है सारा मेरे को पता है किस वजह से कौन-कौन से जन्म में आए थे मुझे सिर्फ ये बताओ कि आप ये बात मानते हो कि इन्होंने विष्णु जी का विरोध किया था ये बताओ खाली या

01:43:11:15 नहीं किया था ना क्या क्या कहते थे विष्णु जी के बारे में क्या बोलते थे ये इनकी पूजा करनी चाहिए या नहीं करनी चाहिए मना करते थे ना कि भाई मेरी पूजा करो तो कहते थे ये तो हां हां तो आज की आज की जो सिचुएशन है आपको रामपाल जी क्या समझाते हैं कि आप आप उनकी पूजा विष्णु जी की करो या नहीं करो ये बताओ आप नहीं हिरण्यकश्यप रावण कंस के पथ पे चल रहे हो कि नहीं देखो आप अपने आपका पर्सपेक्टिव आपका देखने का नजरिया अलग है और मेरा थोड़ा अलग है मैंने अब आप लोग मुझे बात कर लेने दीजिए। अभी अगले 510 मिनट में आपको निर्णायक चीजें प्राप्त होने वाली है। हरि ओम जी हरि ओम जी आप ये बताइए हां दे दीजिए इनका जवाब दे दीजिए फिर हम लोग बात करते हैं। जी आप बोल रहे थे ना कि यह जो उनका विरोध किया था और और क्या बोल रहे थे आप जस्ट अभी कि ये जो है गुरु इनकी पूजा करने के लिए बोल रहे ऐसा कुछ बोल रहे थे ना आप हमने ये हमने ये बोला कि ये तीनों के तीनों थे जो थे ये रावण जी ये तीनों के तीनों विष्णु जी के विरोधी थे और ये मना करते थे ये तीनों के भी उनकी पूजा नहीं करनी हमारी पूजा करो क्योंकि हम

01:44:26:16 उससे उनसे भी ऊपर है ये मानते हो हां ठीक है फिर इनकी गति खराब हुई ये कहना चाहते हो आप नहीं मैं सिर्फ ये कहना चाह रहा हूं कि ये विरोधी थे ना मतलब ये श्री विष्णु जी के विरोधी थे कंफर्म है ना पहले ये देखो आप तो ये आपने रामपाल जी आपने रामपाल जी की आपने रामपाल जी की वो सुनी होंगी उन्होंने कई बार ये वाले रेफरेंसेस भी दिए हैं आपको के वो इन्होंने हिरण्यकश्यप ने उनका विरोध किया था ये किया था तो आपको ये छोटी सी बात ये आपके मतलब माइंड में क्यों नहीं आती कि हम हम लोग भी विष्णु विरोध कर रहे हैं आप लोग भी के उनकी पूजा के लिए मना कर रहे हैं मैं ये सिर्फ ये जानना चाहता हूं कि आपके दिमाग में क्या चीज भरी हुई है ऐसी बिल्कुल मैं आपको बता रहा हूं। आप बोल रहे हो कि विष्णु जी की पूजा नहीं करते तो ऐसा नहीं है। यह मैं आपको क्लियर बता रहा हूं। गुरु जी ने जो बताया है ब्रह्मा विष्णु महेश ठीक है। ये देवता बताए हैं ऐसा नहीं है कि देवता नहीं है। पहली बात तो ये और गुरु जी जो मंत्र देते हैं हमको इन देवी देवताओं को के ही देते हैं। अभी जैसे ये बोल रहे थे ना कि उसमें लिखा हुआ है कौन सा ये बीजक का बता रहे थे ना कि मैं निराकार हूं और क्या बता रहे थे? आप सर आप मुझे सिर्फ मेरी बात मेरी मोटी सी बात समझो आप मैं क्या समझाना चाह रहा हूं आपको पता है उनके जन्म क्यों के हुए थे ये जो जन्म हुए थे उनके जो कौन थे ये हिरण्यकश्यप कौन था पता है

01:45:41:18 आपको इस बात का हिरण्यकश्यप और हिरणाक्ष कहां से आए थे कौन थे ये इनका पूर्व जन्म क्या था पता है आपको इसके बारे में देखो ये मुझे नहीं पता कोई बात नहीं मैं बताता हूं ये दरअसल थे ये विष्णु जी के दरबान थे जय और विजय शायद आपको पता नहीं वहां से ये कथा चली थी सनकादिक ऋषियों ने इनको श्राप दिया था। कारण क्या था? विष्णु जी के वहां विष्णु जी को मिलने गए थे। सनकादिक ऋषि जो थे। ठीक है? तो इन्होंने उनको मिलने के लिए मिलने के लिए थोड़ा सा इनको लेट करवा दिया था। सिर्फ मतलब सिर्फ कहते हैं ना कि तीन सेकंड के लिए मतलब इनको रोक लिया था खाली। तो इसलिए इन्होंने इनको श्राप दिया कि आप जो है तीन जन्म तक राक्षस योनि में जाओगे। हम ठीक है? तीनों जो इन्होंने ये फिर आगे आगे इनकी कथा चली। हिरणाक्ष हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यप उसके बाद यह जैसे रावण और उसके कुंभकरण उसके बाद यह शिशु बार दंत वक्र के रूप में आए धरती पर लेकिन कहता वहीं पर विष्णु जी ने इनको कमिटमेंट की थी कि मैं ही आपको धरती पर आकर मतलब कि आपका जो है उद्धार भी करूंगा मैं। ठीक है? यहां पर आपको मिसलीड किया गया है। मिसलीड ये किया गया है कि कभी वो कह देते हैं कि वो अपना रावण को जो रावण को तीर लगा था वो

01:46:56:19 उन्होंने मारा था। कबीर जी ने आकर मार दिया। हिरण्यकश्यप का वध जो है उसने कबीर जी ने कर दिया था। ये बेतुकी बातें क्यों होती है? जब आप शास्त्रों से बात मिलान क्यों नहीं करते इन चीजों का? मैं ये पूछना चाह रहा हूं आपसे। ऐसा डायरेक्ट नहीं कहा गया है। वो उसके पीछे बहुत लंबी कहानी है। वो पूरा वो बताते हैं कि पूर्ण परमात्मा कौन है? कंप्लीट गॉड है। किस रूप में आता है वो हर आप ना पूर्ण एक छोटा वर्ड है। संपूर्ण की बात करो। हम तो संपूर्ण परमात्मा को मानते हैं। हां वही वो कंप्लीट गड जिसको बोलते हैं सुप्रीम गड जो सारे ब्रह्मांड का जो ये इन सभी देवी देवताओं से ऊपर है। डेमी गॉड्स होते हैं। छोटे गॉड्स होते हैं। गुरु जी का जो ज्ञान है वो ये कहता है। वो किसी देवी देवता की बुराई नहीं करते। आप जो कह रहे हो कि विष्णु जी का आप जो है वो नहीं कर रहे हो। ऐसा नहीं है। हमारे को गुरु जी जो मंत्र देते हैं उसमें विष्णु जी का भी नाम आता है। उसमें जो है गणेश जी का भी मंत्र दिया जाता है। ये देवी देवताओं के मंत्र संदीप जी अब अब मेरी बारी है। अब आप लोग मुझे दे दीजिए। मैं थोड़ा सा इनसे करता हूं। पहले तो हरि ओम जी आप अगर कुछ कहना चाहते हैं आए थे आप अगर आपका कोई प्रश्न है हमारी किसी बात का विरोध है मैं ये डिबेट देख रहा था तो मैं ये इसमें एक अभी ये गुरु जी का कोई भगत थे और ये आप बता रहे थे कि ये मतलब जो है मिसगाइड हुए हैं और पता नहीं बोल रहे थे कि भाई ये जो है घर से निकाल दिया ऐसा कुछ मैं देख रहा था

01:48:12:07 हम तो मैं आपको एक बात बताना चाहता हूं देखो एक तो सभी जो गुरु जी के शिष्य है ना जो गुरु जी ने जो बोला है उसमें में मर्यादा भी कोई चीज होती है। कई ऐसे भगत हैं जो गले में ऐसे रामपाल जी का लॉकेट डाल लेते हैं। मैं आपको बता दूं लॉकेट डालने से आदमी भगत नहीं बन जाता है। गुरु जी ने मर्यादा बताई है। ऐसा नहीं कि हमारे कई ऐसे भगत हैं जिन्होंने ठीक है गुरु जी के भगत हैं जिन्होंने ऐसे लॉकेट डाल रखा है। लेकिन वो क्या करते? सुनिए मेरी बात सुनिए। आप जो बातें बोलने जा रहे हैं कुल मिला के उसका निष्कर्ष ये है आपकी बातें बोलने का कि वो जो महिला थी वो झूठ बोल रही थी कहीं ना कहीं। ठीक है? नहीं मैं यह नहीं कह रहा हूं झूठ बोल रही थी मेरा यह नहीं है कहना वो या तो उस बात को नहीं समझ पाए हैं या फिर वो किसी और तो सुनिए मैं इसी बारे में आपको मैं इसी बारे में आपको बता रहा हूं जो ये है ये तो एक विश्वास की बात है कि हमें उनकी बात कैसी लग रही है आपको उनकी बात कैसी लग रही है फिर से वही होने लगा जो अभी आप पिछली बार आए थे ना तो मुझे मेरी आवाज रिपीट सुनाई दे रही थी अब फिर से होने लगा मैं तो कुछ कर नहीं रहा इसमें अपने आप ही हो रहा हूं तो क्या कहे अभी आ रही है क्या मेरी आवाज रिपीट आपको अब नहीं आ रही है। जसवंत जी शायद आपसे आ रही थी। तो हमारी यह बात है। अब मुझे थोड़ा सा आपने जैसे बताया

01:49:27:08 कि आपने बहुत चारों धाम घूम लिए मगर आपको रामपाल जी में सच्चाई नजर आई। तो इसलिए आपने रामपाल जी को पकड़ा। ठीक है। मुझे आप यह बताइए कि धर्म क्या है? देखो सर मैं आपसे एक मेरी रिक्वेस्ट मानू क्या आप? खाली शब्दों के जाल में तो मैं देखो नहीं। भाई साहब ये शब्दों का जाल नहीं है। मैंने बहुत साधारण सी बात आपसे पूछी है भाई साहब कि आप अगर रामपाल के द्वारा प्रतिपादित होने वाला धर्म मान रहे हैं तो यू शुड नो कि धर्म होता क्या है? रंजीत जी रंजीत जी रंजी एक रंजीत जी प्लीज तो अब मुझे आप ये बताइए कि धर्म क्या है?

01:50:08:24 अरे सर अब ये वही बात हो गई ना धर्म का वैसे शब्दों में डिफाइन करना ये मेरे लिए पॉसिबल नहीं है सर। मैं एक आप जो कहेंगे उस बात पर हां ना कर सकता हूं। मेरा यह मैं बता सकता हूं बस। तो आपको इसका मतलब यह नहीं पता है कि धर्म है क्या? पता तो है। पता है लेकिन शब्दों का इधर उधर हो गया तो उसमें फिर बहुत बड़े प्रॉब्लम क्रिएट हो जाती है। क्या हो जाएगा? गोली थोड़ी ना मार दी जाएगी आपको। बात गोली की नहीं है सर। बातों की डिबेट होती है लेकिन मैं यहां पर बात वो आ गई ना कि मैं शब्दों के जाल में मिला के कुल मिलाकर के आप हमारी सारी बातों को वो करेंगे टेस्टिफाइड और उसके बाद जब हम आपसे कोई बात पूछेंगे तो आपके पास एक ही जवाब है कि मैं नौ सिखिया हूं मुझे कुछ नहीं आता। ये कौन सी बात है? जब आप नौ सिखिए मान लीजिए मान लीजिए कि आप नौ सिखिए। एक मिनट 1 मिनट। मान लीजिए कि आप नौ सिखिए मान लिया। तो फिर आप यह दावा कैसे कर रहे हैं कि मैंने यह चुनाव किया और वह सही चुनाव है। जब आपको धर्म और अधर्म की व्याख्या नहीं पता है तो आपको कैसे पता कि किस आधार पर मैं किसको चुनू और किसको ना चुनू?

01:51:11:20 हां वो ठीक है आपकी बात क्वेश्चन आपका सही है लेकिन वो शब्दों की बात तो सुनिए सुनिए तेरे लिए कर्तव्य और अकर्तव्य क्या करना है और क्या नहीं करना है इसके लिए शास्त्र प्रमाण है। शास्त्र में मन मुखी व्याख्या बिल्कुल नहीं। मनमुखी चले मन मुखी व्याख्या बिल्कुल नहीं। तो सबसे पहली बात तो ये है कि आपके पास धर्म का अर्थ ही नहीं पता है। मैं आपको बता देता हूं क्या है धर्म का अर्थ? जीव की चाह का वास्तविक विषय जीव कौन है समझ रहे है ना? हां बताओ आप। जीव नहीं समझ रहे बोल तो दो भाई आप बात पूरी करो ज तो बताऊंगा जीव समझते हैं कि नहीं समझते जीव कौन होता है आत्मा को समझता हूं सोल आत्मा को बोलते हैं जीव ठीक है जीव की चाह का वास्तविक विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर जीव की डिमांड क्या है वास्तविक जीव की वास्तविक डिमांड है सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर ये जीव की मूल चाह आप खाने में, पीने में, सोने में,

01:52:27:06 जागते में, ठंडे में, गरम में, हर जगह आप किसको ढूंढ रहे हो? किसको ढूंढ रहे हो? भगवान को। सच्चिदानंद को। ढूंढ रहे हो ना? मैं सतचित होना चाहता हूं। और ये बात भी मैं अपने मन से नहीं बोल रहा। इसको कहते हैं तेरे लिए कर्तव्य अकर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण है। ये बात कहां से बोल रहा हूं? असतो मा सद्गमया तमसो मा ज्योतिरगमया मृत्यु माम गमया सरकारी स्कूलों तक में ये लाइन लिखी मिल जाएगी आपको असतो मा सदगमया तमसो मा ज्योतिगमया मृत्यम गमया कोई भी जो जीव है वो असत से सत की ओर जाना चाहता है ये उसकी मूल इच्छा है वो तमसो मा ज्योतिर्गमया अज्ञान से ज्ञान की ओर जाना चाहता है ये उसकी मूल इच्छा है मृत्यु माम गमया मृत्यु से अमृत्व की ओर आना जाना चाहता है। यह उसकी मूल इच्छा है। ठीक है? तो जीव की चाह का वास्तविक विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को परिभाषित कर सकने वाले जो शास्त्र हैं यथासंभव उनको कहते हैं

01:53:42:07 वेद। सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को परिभाषित कर सकने वाले शास्त्रों द्वारा सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त कराए जाने के निमित्त बताई गई विधि का नाम धर्म है। समझ रहे हैं? धर्म क्या है? कि उस सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त कैसे किया जाएगा? वो जो विधि है वही धर्म है। यह करना है यह नहीं करना है। सच बोलना है, झूठ नहीं बोलना है। क्यों? क्योंकि हमें भगवान तक जाना है। मांस नहीं खाना है। क्यों? क्योंकि हमें भगवान तक जाना है। है ना? व्यभचार नहीं करना है। क्यों? क्योंकि हमें भगवान तक क्या करना है? जाना है। तो धर्म और अधर्म की व्याख्या किसके आधार पर है?

01:54:35:10 शास्त्र प्रमाण बता रहे हो ना आप? आपको कुछ समझ में नहीं आया। हां हां शास्त्र शास्त्र ही प्रमाण है। अभी आपने बताया ना कर्तव्य और अकर्तव्य जो है शास्त्र जैसा ठीक है। वो ठीक है। कर्तव्य और अकर्तव्य का अस्तित्व इसलिए है क्योंकि हमें भगवान को प्राप्त करना है। किसे प्राप्त करना है? भगवान को। भगवत प्राप्ति करनी है। मोक्ष प्राप्त करना है। ठीक है? इतना समझ में आया आपको? हां वो तो आ गया। तो अब मुझे यह बताइए कि आपने बहुत चारों धाम घूमने के बाद जो आपने तत्व धरती को पकड़ा है क्या उसके द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है वो उसका अस्तित्व सिद्ध होता है?

01:55:22:14 बिल्कुल होता है। सत बारे में बताया है गुरु जी ने। बताइए ईश्वर का अस्तित्व कैसे सिद्ध किया उन्होंने बताइए। ईश्वर का अस्तित्व है ना जब हम यहां से शरीर छोड़कर जाएंगे तो गुरु जी के ज्ञान के अकॉर्डिंग हमें जो है ऊपर एक सतलोक बताया है अरे मेरे भाई ये तो उन्होंने बताया है मैं एक नास्तिक हूं अभी आपके सामने अब मेरे सामने आप ईश्वर को सिद्ध करिए कि ईश्वर है इस दुनिया में क्या आपके तत्वदर्शी ने नास्तिकों का खंडन किया है नास्तिकों का तो खंडन है ना भगवान है हर चीज में बताया है कि बिना भगवान के पत्ता भी नहीं हिल सकता कुछ कुछ नहीं हो सकता बिना भगवान के तो भाई अरे अरे भाई मेरे सामने वो चीज है। ये बताया है कि बिना भगवान के पत्ता नहीं हिल सकता। मगर भगवान है। ये तो सिद्ध करो। हां भगवान है ना? बिल्कुल। सिद्ध करो। सिद्ध अब कैसे करें बताओ। मुझे विश्वास दिलाओ। मुझे युक्ति दो। प्रमाण दो कि मैं मान लूं कि हां इस दुनिया में भगवान का अस्तित्व है। मैं थोड़ी देर आपके लिए नास्तिक बन गया। अब मुझे विश्वास दिलाइए कि भगवान है। क्या दिया है ऐसा ज्ञान तत्वदर्शी ने? अगर कोई इंसान नास्तिक है जो भगवान को मानता

01:56:37:22 ही नहीं है। हां तो उससे तो बहस नहीं की जा सकती। नहीं। हम कर सकते हैं। हम कर सकते हैं। हमारे गुरु आपके अनुसार तत्वदर्शी नहीं है। मगर हम कर सकते हैं। हम कर सकते हैं। हम निरत्तर कर सकते हैं। सामने नास्तिक को जो दुनिया से धर्म और एक मिनट जो दुनिया से धर्म को छीनना चाहता है। हम उसके मुंह पर टेप लगा सकते हैं। हमारे गुरु आपके अनुसार तत्वदर्शी नहीं है ना। हमें मगर यह सिखाया गया कि नास्तिकों का मुंह कैसे बंद करना है। क्योंकि नास्तिक वो व्यक्ति है जो सबसे पहले धर्म के रास्ते में रोड़ा है। तो आप बताइए आपके तत्वदर्शी ने क्या बताया नास्तिकों को रोकने के लिए? देखिए हमारे गुरु जी ने तो बताया भगवान में पावर है। उसके नाम में शक्ति है। नाम भगवान अरे मेरे भाई भगवान है। ये तो बताओ आप मुझे। कैसे सिद्ध करोगे भगवान का अस्तित्व? कहां बताया? कौन सी बुक में लिखा है? भगवान है। प्रूफ की बात करें तो गुरुजी ने तो देखो बाइबल में भी दिखा दिया। गुरु ग्रंथ साहिब में दिखा दिया। मैं आपसे पूछ रहा हूं कि इस संसार में भगवान का अस्तित्व भी है। ये आप मुझे सिद्ध करिए। सिद्ध सिद्ध किससे करना

01:57:52:24 है? प्रमाण किताबों में दिखाना है या कोई जादू मंत्र दिखाना है। कैसे सिद्ध? अरे मेरे भाई कोई मैं किसी प्रमाण को तो किताब को तो तब स्वीकार करूंगा ना जब मैं आपके ऊपर विश्वास कर लूं कि हां आप भगवान के बारे में बता रहे हो। हां तो बिल्कुल अब तो का नास्तिकों का मुंह बंद होगा युक्ति से आप मुझे तर्क दीजिए तर्कों से मुझे संतुष्ट करिए देखो हमारे हमारे पास अगर खाली बातों का तर्क आप ले तो तर्क तो बहुत सारे हैं बताइए तर्क नास्तिकों का मुंह बंद हो जाए वो तर्क बताइए हां है ना बिल्कुल प्रूफ है लेकिन ऑन द स्पॉट एज ए मैजिक तो अरे प्रूफ की क्या बात है मैं प्रूफ जब युक्ति की बात हो रही है तो उसमें उसमें प्रूफ की बात ही नहीं है। कोई

01:58:40:07 जब युक्ति की बात हो रही है तो उसमें उसमें तो किसी आपको कोई भी संसाधन की आवश्यकता ही नहीं है। आप मुंह खोलिए अपना बस आप बताइए आपके तत्वदर्शी ने नास्तिकों का खंडन करने के लिए क्या विद्या दी है आपको? बताइए। विद्या यह है कि इस संसार में जो कुछ भी हो रहा है, आत्मा आ रही है, जा रही है, जो क्रियाविधि हो रही है, कोई ना कोई तो क्रिएटर है उसका और वही सुप्रीम गॉड है। कुछ उसमें शक्ति है, पावर है, वही चला रहा है इस संसार को। इंसान आते हैं, कुछ बीच में मर जाते हैं, कोई बीमार हो जाते हैं, कोई रोगी हो जाते हैं। उनके साथ कई ऐसे भी मैंने तो चमत्कार देखे। आप तो मानोगे नहीं इन चीजों को। तो अच्छा मतलब आप चमत्कार से ये सिद्ध करना चाहते हैं कि भगवान है। चमत्कार खाली चमत्कार भगवान सिद्ध होता है। खाली चमत्कार नहीं पूरा उन्होंने गीता दिखाई वेद दिखाया सब कुछ बताया। खाली चमत्कार गीता और वेद की बात तो तब आएगी ना जब नास्तिक गीता और वेद को मानता होगा।

01:59:39:01 एक ना सुनिए एक एक नास्तिक व्यक्ति है जो यह समझना चाहता है कि अगर दुनिया में भगवान है तो मैं कैसे मानू कि भगवान है। अब आप जैसे छोटा बच्चा होता है मान लो 10 साल का 15 साल का उसको अभी गीता वेद पे इतना विश्वास नहीं है कि नहीं नहीं इसमें जो लिखा है वो सत्य है। वो अपने पिता से सवाल करता है कि पापा आप भगवान को क्यों मानते हैं? भगवान है ये मुझे प्रूफ करके दिखाओ। तो आप उसको प्रूफ करेंगे उस बेटे को या छोड़ देंगे और यह तत्व ज्ञान आपको मिला है कि नहीं मिला है? हां बिल्कुल दिया है। हर चीज के बारे में उदाहरण दिए हैं। हर चीज को बताइए बताइए वो उदाहरण बताइए। आप ये मत बताइए कि दिया है। आप वो उदाहरण बताइए। जी उदाहरण ये है कि आए हमने जन्म क्यों लिया? क्यों मरेंगे? कहां जाएंगे? क्यों आए? भाई ये सब ये जन्म मरण क्यों लिया? आप आप नहीं है। आप आत्मा है। ये सब बातें तो तब है जब आप यह मान लो कि आप जो है इस इस शरीर से अलग भी कोई अस्तित्व है आपका। जब आप ये मान लो कि आत्मा भी है दुनिया में। आदमी क्यों माने आत्मा को ये सब तर्क तो दो। नहीं मानेगा तो वो अपने कर्म भोगेगा अपने हिसाब से। मतलब आपके पास ये तत्व ज्ञान

02:00:54:09 नहीं है। अब इसका तो क्या कोई नास्तिक है तो उसको तो क्या जवाब दे भाई? अरे मेरे भाई अगर कोई समझना चाहता है कि मैं आपकी बातों को समझना चाहता हूं मुझे बताइए भगवान है तो कैसे है निराकार है साकार है वो कैसे है मुझे बताओ तो मुझे संतुष्ट तो करो तो आप कह दोगे नहीं भाई तुम भगवान को नहीं ढूंढ रहे हो तुम जाओ यही करोगे सृष्टि रचना बताई गई है पूरी सृष्टि रचना बतानी पड़ेगी भैया कैसे कैसे आत्मा आई कैसे कैसे धरती है वो वो तो तब की बात है कैसे आत्मा आई जब आदमी आदमी ये विश्वास करता हो कि इस दुनिया से अलग भी किसी दुनिया का एकिस्टेंस है। वो एकिस्टेंस तो मनवाओ हमको।

02:01:40:16 वो सर सामने वाले की बुद्धि पर निर्भर करता है। इसको तो कैसे मनवाएंगे? आप ये बताइए आपने कैसे माना कि इस दुनिया में भगवान है। आप ही बता दीजिए। कैसे माना? मैं बताता हूं। कैसे माना? मैं ऐसा हनुमान जी की संकट मोचन जी का जो ये सुंदरकांड जो पाठ है मैं खूब करता था। मैं थोड़ा बीमार भी रहा बीच में पुजारियों का मैंने देखा अरे भाई मेरी बात सुन हनुमान जी की पूजा क्यों मानी आपने उससे पहले की बात बताओ हमारे पिताजी पिताजी ने बताई हमारे गांव में हमने देखा भाई ये सुंदरकांड का पाठ होता है करते यानी कि पिताजी के करने से आपने मान लिया कि हां ये जो कर रहे हैं तो भगवान है लेकिन पिताजी को इस चीज की नॉलेज थोड़ी थी सही है गलत है मैं ये नहीं कह रहा सही गलत आपने पिताजी की बात से माना कि दुनिया में कोई भगवान भी है। हां, पिताजी है, गांव वाले हैं। इनसे माना। हां। इसका मतलब आपने पिताजी पर विश्वास किया कि इस दुनिया में कोई भगवान है। हां। है ना? हां हां बिल्कुल। यानी कि आपको भगवान के एकिस्टेंस को सिद्ध करने वाले आपके पिताजी हैं। अब वो अब पता लग रहा है ना पिताजी नहीं है। अरे आपने भगवान का अस्तित्व किसके कहने पर स्वीकारा? अस्तित्व सही

02:02:55:25 पूजा गलत पूजा की बात नहीं कर रहा हूं मैं। हम पिताजी के कहने पर आपने अस्तित्व स्वीकारा है ना भगवान का। उन्होंने तो मुझसे कुछ नहीं कहा। मैंने तो उनको देखा और मैंने उनको देख के आपने स्वीकार किया ना। हां देख के स्वीकार किया कि भाई यही अच्छी चीज है जब ये कर रहे हैं। तो ठीक है। तो मगर आप ही के आचरण से ये पता लग जाता है कि पिता की कही हुई बात से ये सिद्ध नहीं होता है कि वो सही बात है। हम है ना? सही बात है। तो फिर अब आप मुझे फिर से बताइए कि भगवान है यह कैसे सिद्ध हुआ? पिताजी पर तो आपको विश्वास है नहीं क्योंकि पिताजी तो गलत बात बता रहे हैं साथ में। तो भगवान है ये कैसे सिद्ध हुआ आपके जीवन में? देखो हमारे पिताजी भी है ना भगत थे। खूब गोवर्धन जी की परिक्रमा लगाते थे। सारी बातें अचानक एक एक्सीडेंट हुआ और मेरे भाई आप लंबी बात खींच रहे हैं। आप अपनी बात बताइए कि मेरे को ये विश्वास भगवान है इस दुनिया में। वो कैसे हुआ? ऐसे हुआ क्योंकि मैंने ये राधे राधे वाले खूब देखे वृंदावन में मथुरा में देखे और हर जगह मैंने भगवान को पहले ढूंढा दो साल में परेशान तो भगवान को ढूंढा क्यों भगवान को माना क्यों मैं ये पूछ रहा हूं आपसे आप पता नहीं क्या समझ ही नहीं पा रहे हो मुझे समझदार लग रहे थे इन चीजों का

02:04:11:10 ज्ञान लेने के लिए कि आखिर सही कौन बता रहा है गलत भगवान अरे सही भाई साहब कौन सही भगवान के विषय में बता रहा है ये एक अलग चैप्टर है भगवान है यह आपने क्यों मान लिया? क्योंकि आपके पिताजी तो गलत बात भी बोल सकते हैं तो भगवान है। यह आपने क्यों माना? ये इसलिए माना क्योंकि मेरी अंतरात्मा कहती है कि भाई भगवान होना चाहिए। बस अच्छा इसका मतलब अंतरात्मा जो कहती है वो सही कहती है। क्योंकि मैं आस्तिक हूं। मैं नास्तिक नहीं। एक बात अरे आस्तिक तो उसे कहते हैं जो भगवान को मानता है। हां तो मानते हैं ना लेकिन वो भी तो देखना पड़ेगा कौन सा सही है। आस्तिक सुनिए आस्तिक होने की वजह से भगवान को नहीं माना जाता है। भगवान को मानने की वजह से आपको आस्तिक कहा जाता है। वांट टू बी नोटेड। समझ रहे हैं? आस्तिक होने की वजह से भगवान को नहीं माना जाता है। भगवान को माना जाता है। इसलिए आप आस्तिक है। समझ रहे हैं? अब बात आती है कि आपने भगवान को माना क्यों? क्या है? क्या उसका तर्क है कि मैंने इस कारण से भगवान को माना। आपने आपके पास आज आज तक जितने तर्क होंगे भगवान को मानने के मैं सब यही के यही काटूंगा। आपके पास कोई आधार

02:05:26:16 नहीं है भगवान को मानने का क्योंकि आप गलत गुरु की शरण में है। मैं ये सिद्ध करूंगा। नहीं। चलिए भगवान को भगवान हमेशा सुख देता है। ऐसा हमारी अंतरात्मा कहती है। अच्छा सुख रुकिए। इसका मतलब अंतरात्मा जो कहेगी वो सही कहेगी। भगवान के विषय में तो अंतरात्मा सही भाई साहब भाई साहब देखिए थोड़ा सा इजी हो जाएगा आपने एक सिद्धांत दिया मेरी अंतरात्मा कहती है भगवान है तो अंतरात्मा जो कहेगी वो सही कहेगी भगवान के विषय में सही कहेगी सही कहेगी मेरी अंतरात्मा कहती है हजारों लाखों लोगों की अंतरात्मा कहती है कि कृष्ण भगवान है तो सही है वो बिल्कुल आपको ऐसा लगता है तो सही होगा आपके आप बताओ सही है कि नहीं पलटो मत बात से आप बताओ सही है कि नहीं अब मैं इसका मैं आपको एक जवाब देता हूं अगर इस इसका जवाब यह है कि भगवान कोई पत्थर को पूछ रहा है तो जिसकी जो श्रद्धा है वो भाई साहब प्रश्न बदल रहा है मैं आपसे पूछ रहा हूं कि अंतरात्मा सही कहती है ये आपने सिद्धांत दिया अब मैं यहां पर बैठे हुए पांच लोगों से कहलवा रहा हूं उनकी अंतरात्मा कहती

02:06:41:25 है कि कृष्ण भगवान है, शिव भगवान है तो क्या यह सही बात है या गलत बात है? अगर विश्वास सॉलिड है तो जो जिसको मान रहा है वो उसी में उसकी श्रद्धा हो जाती है। ऐसा गीता में के साथ सुनिए सत्य क्या होता है? उसमें अगर नहीं लगता है। सत्य क्या होता है? उसमें अगर नहीं लगता है। आपके जो आपके आपसे ही पूछ लेता हूं। आपके जो रामपाल है वो अगर वाले तत्वदर्शी है या वास्तव में वास्तव में तत्वदर्शी है? इसका मैं आपको थोड़ा सा लंबा हो जाएगा आंसर। बस यह बात है और तो कोई बात नहीं है। क्यों आप हर चीज का जवाब ऐसे ही करना लंबा हो जाएगा और तो कोई बात नहीं। आपको यही नहीं पता कि आपके जो तत्व वास्तव में तत्व है कि नहीं। हर चीज का नहीं। देखो जो जिस चीज में बहुत ज्यादा श्रद्धा रखता है ना और अगर भगवान वहां है तो वो उसी रूप में उसको दर्शन देता है। फिर फिर फिर भगवान वहां है उसी रूप में दर्शन। आपका सिद्धांत क्या कहता है? कृष्ण परमेश्वर परमात्मा परम ब्रह्म है कि नहीं? गीता को पढ़कर को तो लगता नहीं है। तो इसका मतलब अंतरात्मा गलत भी बोल सकती है। बोल सकती है ना? अंतरात्मा तो गलत बोल सकती है। हां। तो

02:07:56:26 इसका मतलब आपका ये तर्क कट गया कि मेरी अंतरात्मा कहती है कि भगवान है इसलिए मैं भगवान को मानता हूं। आप कोई दूसरा कारण दीजिए भगवान को मानने का। भाई भगवान को इसलिए भी मानना चाहिए ना आखिर ज्ञान ज्ञान ज्ञान भी होना चाहिए। पहले आप मुझे एक बात बताइए पहले आप मुझे एक बात बताइए अंतरात्मा की बात कट गई ना? कट गई ना? हर आदमी की अंतरात्मा अलग-अलग विचार इसमें तो इसका मतलब ये नहीं माना जा सकता ना कि अंतरात्मा कांटे की नोक की बात कहेगी। अंतरात्मा सारी बात सही नहीं कह सकती। ये बात सही है। तो इसका मतलब अंतरात्मा के आधार पर आप भगवान को नहीं मान सकते। अब मुझे वो कारण बताओ जिसके कारण आपने अंतर जिसके कारण आपने भगवान को माना बताओ भगवान को पहले मैंने देखा जो भी मेरे आसपास का माहौल है उसको देखा जो भगवान को मंदिर में जा रहा है उससे चर्चा की मंदिर के पुजारी के पास गया आप आप बाद की बातें बता रहे हैं मैं किस पर विश्वास किया किस पर नहीं किया मैं पूछ रहा हूं भगवान है ये आपने कब माना क्यों माना वो बताइए

02:09:09:25 भगवान भगवान है। जब बीमार आदमी को भगवान जब सही स्वस्थ हो जाता है तो उसको लगता है भगवान जैसी शक्ति है। मेरे साथ ऐसा हुआ इसलिए कोई भी मतलब दुनिया मतलब दुनिया में कोई भी बीमार आदमी जब स्वस्थ हो जाएगा तो उसको अगर लगेगा वो चीज सत्य होगी। ये वो बीमारी नहीं है जो डॉक्टर वाली हो। ये कंडीशन जब डॉक्टर फेल हो जाते हैं उसके बाद की बात कर रहा हूं जो कि डॉक्टरों के एप्रोच से बाहर हो गए। भैया ये हमारे बस की बात नहीं है। ये तो कोई जिसको बोलते हैं ना प्रेत वादा आत्मा तो कोई कुछ भी कहो अपने शब्दों में लेकिन जब मतलब चमत्कार वो मानो डायरेक्टली मैं इस बात मैं समझ गया आप ये कह रहे हैं कि जब साइंस काम नहीं कर पाती है और उसको बीमारी को भी कोई सही कर दे तो इसका मतलब भगवान है। कुछ उसमें समथिंग इज देयर कुछ तो है ना ये तो मानना पड़ेगा ना। अरे समथिंग इज देयर कैसे? मैं यह पूछ रहा हूं आपको क्या काल में इतनी ताकत है कि नहीं कि वो किसी रोगी को सही कर सके? काल में काल में भी है लिमिटेड पावर है लेकिन वो मृत्यु को नहीं टाल सकता। ऐसा मैं सर पूछ रहा हूं रोगी को सही कर सकता है कि नहीं? कर सकता

02:10:25:01 है पर वो मरे हुए को जिंदा नहीं कर सकता है। भाई साहब मैं पूछ रहा हूं रोगी को सही कर सकता है कि नहीं? रोगी को कर सकता है। एक लिमिट तक कर सकता है। रोगी को सही कर सकता है। इसलिए आपने माना रोगी को सही कर सकता है। तो इसका मतलब दुनिया में जितने भी रोगी ऐसे हैं जो कि क्या कहते डॉक्टर्स के द्वारा सही नहीं हो पाए थे। तो उनके मन में ये ख्याल आया यदि कि इस दुनिया में कोई भगवान है तो उससे भी सिद्ध नहीं होता है कि भगवान है क्योंकि काल भी बुराई भी ऐसे चमत्कार कर सकती है। हां बुराई कर सकती है लेकिन फिर वो दोबारा फस जाएगा। परमानेंट इलाज नहीं होगा उसका। वो बाद की बात है। मैं ये पूछ रहा हूं कि इसका मतलब रोगी के ठीक होने से ये नहीं सिद्ध होता है कि दुनिया में भगवान है। रोगी के ठीक होने से यह सिद्ध नहीं होता है। भगवान

02:11:31:06 अब ये तो है बात सही है और क्या तो अब मुझे बताइए कि आपने क्यों माना कि भगवान है? तत्वदर्शी के शिष्य है ना आप? हम बताइए। ज्ञान से माना, ज्ञान से माना और फिर ये जो बातें जो मैं बता रहा हूं, इनसे माना और चमत्कार से कौन सा ज्ञान? ज्ञान कौन सी बुक में लिखा है कि भगवान है ऐसे सिद्ध होता है बताओ। ये तो गीता हमने काफी जितनी भी गुरु जी बताते हैं साधना चैनल पे काफी सारा उसमें सिद्ध कर रखा है। तो वो जो सिद्ध किया है वो बताओ ना भाई। वो सब बता रखा है। तत्वदर्शी अध्याय चार के 34 में बोल रखा है कि भाई गीता के फालतू बात मैं पूछ रहा हूं उस तत्वदर्शी ने जो आपको बताया है आपको सिखाया है वो तत्व बताओ तो तो तत्व के बात आपकी सही है लेकिन अब वो तत्व है भी तो काफी लें्थी हो जाएगा ना तत्व तो काफी पूरी सृष्टि अवस्था बतानी पड़ेगी आपको पता क्या है जो आप यहां पे आए हो मैं तो बस ये बताने आया था मैं तो मेरे को भाई वो इंटरव्यू जो आप बता रहे थे कि वो जो है इस तरीके से वहां से जाने के बाद यह ढूंढना कि भगवान है। यह कैसे सिद्ध होता है। यदि तत्वदर्शी से ना मिले तो

02:12:46:07 हमारे पास आ जाना। हम बता देंगे। ठीक है। जय श्री राम। अब एक दो मेरी बात भी सुन लो थोड़ी सी। अब आपसे मजा नहीं आया बात करके। अब आप फिर आप जब ये जान आप ये जान के आना किसी दिन दोबारा करेंगे। जान के आना कि भगवान है ये कैसे सिद्ध होता है। और तत्वदर्शी ने नहीं। मैं आपसे दोबारा मिलूंगा। दोबारा मिलूंगा। लेकिन आप आपने तो अपना मुझे दे दिया। हो चुके हैं और लोग भी है लाइन में। आपसे फिर बात करेंगे। आपने अपना क्वेश्चन दे दिया। पर मेरा क्वेश्चन भी तो सुनते जाओ। तो क्वेश्चन करने से फायदा क्या है? जब हमारे पास अभी जवाब का टाइम नहीं है। आप क्वेश्चन कर दोगे और मैं उसके बाद चर्चा को बंद करूंगा। तो कहने वाले ये कहेंगे भैया इसने जवाब नहीं दिया। तो आप अपना क्वेश्चन उस दिन करना। हो सकता है हम कल करेंगे। कल आ जाना। क्वेश्चन कर लेना क्या दिक्कत है? चलो ठीक है। कोई मरा जा रहा है क्या? ठीक है। ठीक जय श्री राम। ठीक है जी। सत और पूछो अपने तत्वदर्शी से।

02:13:50:21 भगवान को सिद्ध कर नहीं पाएंगे। ये सिद्ध करेंगे वो भगवान है। वो भगवान है। पर ये तत्वदर्शी फिरते हैं। इनके दिमाग में ना बस एक चीज फिट हुई है। उसके अलावा और कुछ नहीं है। वो ये तो आउट ऑफ द सिलेबस क्वेश्चन होते हैं ये वाले। मतलब हर बात पे वो कह रहे है कि भ मेरे को कुछ पता नहीं है। मुझे कुछ पता नहीं यहां करने क्या आए हो। जय श्री राम भैया जी। जय श्री राम जसवंत राजावत जी आज आपने बहुत देर इंतजार किया है। मैंने देखा बहुत हो गया। जी मैं ये बोलना चाहता हूं। बैठ बैठ के बात करें। बैठ के बैठ के बात करें। ठीक है। परेशान हुए। मैं ये बोलना चाहता था के मैं इनके लिए बीच में नहीं बोल पाया। मैं भी यह बोलना चाहता था कि बरवाला आश्रम में जब रामपाल जी यहीं पर थे जब आपने पेपर नहीं पढ़ा होगा तो पेपर में एक लड़के की बरवाला आश्रम में ही जो जिनके परमात्मा का स्वयं का धाम है सतलोक उसमें करंट से मौत हुई थी और एक आदमी ने वहां पर बरवाला आश्रम में फांसी लगाई थी अब जब सतलोक में ही ऐसा हो रहा है कभी इनसे पूछो पुरानी जानकारी करें

02:15:05:25 बिल्कुल यहां पर मैं एक बात बताऊंगा अभी आने वाले दो-तीन दिन में ही इसी चैनल पे एक भाई साहब आने वाले हैं जिनके बेटे को कैंसर हुआ और सारे डॉक्टर्स ने हाथ खड़ा कर दिया। रामपाल के खेमे में पहुंचकर रामपाल के खेमे में पहुंच देखिए वहां की वह खबर आपके सामने है। गूगल से है यह एक युवक की मौत करंट लगने से जो आपने जो खबर अभी बताई है वो है ना और आने वाले दो-तीन दिनों में इसको थोड़ा बड़ा बड़ा चलिए छोड़िए आने वाले दो-तीन दिनों में एक भाई साहब हमारे चैनल पर आने वाले हैं। वो इतनी मार्मिक उनकी कथा है कि पूछिए नहीं। वो अभी मुझसे बोल रहे थे। मतलब बताते बताते वो रो रहे थे। उनके बेटे को कैंसर था। सभी हॉस्पिटल्स ने हाथ खड़े कर दिए। इन भाई साहब को यह रामपाल के खेमे वालों ने बोला कि हम आपके बेटे को ठीक कर देंगे। आप यहां आ जाइए ऐसा करिए वैसा करिए और पहले 2100 फिर 21000 फिर क्या-क्या नहीं वहां पर कराया उनका बेटा उनसे 22 तारीख वो पुष्पा 2 रिलीज हुई थी तो वो कहते उसको कुछ बता दिया होगा तो वो कहते कहते बेचारा चला गया इस दुनिया से पापा

02:16:21:01 पुष्पा 2 बहुत अच्छी पिक्चर आई है बहुत बहुत दुखी थे रो रहे थे उसको याद कर मतलब व्यक्ति के रोग कैसे अपनी चीज करते हैं नाटक कमाई वो आप देखिए आएंगे अभी दो तीन दिन में आएंगे यहां पर जी इन लोगों इन लोगों को शर्म नहीं है अभी पैसे के पीछे कितने गिर रहे हैं देखो ये एक मतलब रोगी के साथ कितना बड़ा मतलब परमात्मा से ही एक तरफ विश्वासघात है ये तो वो ये कह रहे थे रोतेरोते कि मेरा बेटा जा तो रहा ही था जाता मगर ये जो नाटक हुआ ना उसके साथ जाते टाइम जाते समय वो बहुत मुझे मतलब आत्मा को कचोट के चला गया मुझे उनकी आवाज सुनके मुझे रोना आ गया उस समय कोई भी होगा उसको लगेगा बुरा लगेगा सर है ही बुरा मतलब कीजिए और इतनी प्रासंगिक उन्होंने बात बताई ना कि हां वाकई में अभी जो वो पुत्पा टू नाम का चलचित्र आया रिलीज हुआ है तो उसी के बारे में बच्चा बोल रहा था अभी उसकी मृत्यु हुई है अभी देहांत हुआ है बताओ बताओ बताओ मतलब डॉक्टरों से भी ऊपर हो गए डॉक्टर भी आजकल यही कर रहे हैं और मरते मरीज से पैसे कमाते इन्होंने भी यही काम किया ये उसके भी गुरु शुरू हो रखा है।

02:17:36:09 आएंगे वो भाई इनकी बातें सुन ले। फिर हम लोग लाइव को बढ़ाते हैं क्योंकि 10:00 बज चुका है। गोस्वामी जी जय श्री राम। जय श्री राम। जय श्री राम। शिवास भैया हरि ओम जी से बात करके बहुत अच्छा लगा। उसने सही बात पकड़ ली। पर ये सब लोग गाली गलौज बहुत करते हैं। कमेंट में बहुत गाली बोलते हैं। जी ऐसा नहीं करना चाहिए ना। आपसे बात करनी हो तो सही तरह से बात करें। इज्जत से आए। हरि ओम जी से आपने कितना अच्छी तरह से बात की। सभी लोगों ने सुना। जी। अच्छी तरह से बात करेगा तो उसका भी ज्ञान बढ़ेगा। उसका भी सब होगा वो सही होगा। सब लोगों को अच्छा ज्ञान मिलेगा। आपका बात सही है। दूसरे की बात भी आप सुनने के सभी उत्सुक है सब लोग। शुभम उपाध्याय जी जय श्री राम। जय श्री राम भैया।

02:18:41:10 मैं ये पूछना चाहता हूं कि जैसे कुछ टाइम पहले जो बागेश्वर धाम जो वाले बाबा जी हैं उनके लिए मतलब कुछ रील वगैरह आपकी तरफ से आई थी कि जातिवाद जो है मतलब उसके ऊपर जो राजेंद्र दास जी महाराज ने अभी देखिए परसों तरसों उनको कहा वहां पर बैठे थे बागेश्वर वाले जो महाराज जी हैं वहां पर उन्होंने कहा कि वर्णाश्रम धर्म को खत्म करने से काम नहीं चलेगा। वर्णाश्रम धर्म के नाम पे जाति के नाम पे जो गलत चीजें हो रही हैं जो उसका गलत फायदा उठा रहे हैं। तू ये है तू वो है तू उधर बैठ हम ब्राह्मण है। ये सब जो हो रहा है वो नहीं होना चाहिए। उसके लिए है मगर उन्होंने राजेंद्र राज जी ने कहा भी और वहां बागेश्वर वाले सुन भी रहे हैं बैठ के। वो कह रहे हैं ऐसे खत्म नहीं कर सकते इसको क्योंकि जाति धर्म कुल धर्मा शाश्वता और हम लोग आज भी अपना अस्तित्व उसी के कारण बचा पाए हैं। उसी कारण आज हम लोग अपना अस्तित्व बचा पाए हैं। तो यह तो हो गया और भी एक दो लोग हैं। देखिए जो वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा है वह तो अब नहीं करेंगे।

02:19:57:06 जी बताइए कि आपका क्या नाम है? सॉलिट्यूड जी आपका चेहरा नहीं दिखाएंगे आप? नो सर मेरे को नहीं दिखाना। मेरा नाम भी मेंशन मत करिएगा। जी जी जी मैं इनसे रामपाल जी महाराज से सिक्स इयर्स से मतलब मैं एक्चुअली कुछ आपको बोल सकती हूं। मैं सिर्फ आप ही से मतलब इंटरेक्ट करना चाहती हूं। आई डू नॉट वांट टू सी देम। मतलब इट इज पॉसिबल। मतलब मैं समझा नहीं कि आप सिर्फ मेरे से यहां लाइव में बात करना चाहते हैं या WhatsApp इत्यादि पर? नहीं मतलब यहीं पे मतलब सिर्फ आप ही का फेस दिखे। मतलब ऐसा हो सकता है। मतलब ठीक है। थोड़ी देर के लिए

02:20:44:12 इनको थोड़ी देर आप लोग वेट कर लीजिए। जी जी जी। हां जी। तो मेरे को यह है मैं इनको रामपाल जी महाराज को सिक्स इयर्स से फॉलो कर रही हूं। ठीक है। और मेरा मतलब मतलब मैं ये समझती हूं बहुत अच्छी तरीके से मतलब हर चीज को बहुत अच्छे तरीके से समझती हूं जो आपने मतलब आप भी समझाते हो। ये सब मैं मतलब कहीं ना कहीं एक कोने में मेरे अंदर वो चीज है कि मतलब हां मतलब ऐसे तो नहीं हो सकता कि जैसे अभी भी आपने करंट वाली बात बताई थी ये सब ये सब तो नहीं हो सकता तो मतलब कहीं ना कहीं मतलब एक तरीके से 90 10 का मेरे अंदर ऐसे दिमाग में रहता है तो मेरे भी मन में ऐसे क्वेश्चंस उठते हैं। मैं सिक्स इयर्स से उनको फॉलो कर रही हूं। तो मेरे को एक डर रहता है ऐसे पता नहीं क्यों कि मतलब अगर मैं छोड़ दूं उन्हें तो पता नहीं कुछ गलत ना हो जाए और ऐसा हुआ भी है कि मतलब अगर मैंने वो चीज अगर छोड़ भी दी है मतलब मेरे को मैं घर से बाहर नहीं निकल सकती तो क्या बोलते हैं मेरे घर वाले अलव नहीं करते बिल्कुल तो मैंने ऑनलाइन ही नाम लिया था तो अब वो कहते हैं कि नहीं नहीं आओ यह बात मैं बहुत अच्छे तरीके से समझती हूं कि

02:21:59:13 एज अ लड़की के घर में ऐसे विरोध नहीं करना चाहिए हमको अभी थोड़ी देर पहले आपके उसमें कोई लाइव आया था। उन्होंने बोला था कि वो तो नहाती भी नहीं है। ये वो ऐसे करके वो बता रही थी घर से बाहर निकाल दिया। ये मैं एज अ ह्यूमन भी हमको ये शोभा नहीं देता करना कि जैसे हम किसी से लड़ाई भी करें। मैं तो भक्त कर उन सब की तो बहुत दूर की बात है। तो मेरे को अब मेरे को मतलब ये जानना है कि कि मतलब मैं मेरे को क्या करना चाहिए? मैं आपको बताता हूं। देखिए मैं आपको बताता हूं शुरुआत से। देखिए इन्होंने जो ताना-बाना बनाया है इसके साथ ही मैं आज का लाइव भी पूरा मानूंगा क्योंकि एक थोड़ा सा वृतांत है। ये जो इन्होंने ताना-बाना बनाया है कि काल श्री कृष्ण ने ज्ञान नहीं दिया। काल ने दिया है। ठीक है। मान लेते हैं। थोड़ी देर के लिए मान लेते हैं। अच्छा वो वो जो तत्वदर्शी है वो कौन है? वो रामपाल है। यह भी मान लेते हैं। मगर यदि तत्वदर्शी है तो वह तत्व ज्ञान देगा ना। तत्व ज्ञान देगा ना। तो तत्व ज्ञान देने की जब बात आती है तो तत्वदर्शी का कोई भी व्यक्ति पांच मिनट नहीं बोल सकता है।

02:23:14:26 कोई भी व्यक्ति आप कभी भी देखो उनके चैनल्स पर जाकर के वो ये प्रूफ तो करने में लगेंगे। यहां ये लिखा है। यहां ये लिखा है। काल ने ये बोला काल ने वो बोला। वो मगर जो मूलभूत प्रश्न है एक जीवात्मा के वो मूलभूत प्रश्नों का उत्तर कभी भी तत्वदर्शी के लोग या तत्वदर्शी आपको देता हुआ नहीं दिखेगा क्या कि यदि ईश्वर है तो क्या वो सब कुछ कर सकता है क्या वह सर्वशक्तिमान है यह है तत्व ईश्वर है तो कैसे सिद्ध होता है कि ईश्वर है यह है तत्व अगर ईश्वर ने ही अच्छे और बुरे दोनों लोगों को बनाया है तो ईश्वर की लिखी हुई किसी किताब पर हम भरोसा कैसे करें कि ये हमारी अच्छाई के लिए है। जब काल को भी ईश्वर बना रहा है। जब जीवात्माओं को भी ईश्वर बना रहा है। बुराई को भी ईश्वर ही बना रहा है। तो कबीर वाणी कबीर बीजक या उसके द्वारा नियुक्त किया हुआ जो तत्वदर्शी है वो बुराई करने के लिए नहीं आना आया है। यह हमको कैसे पता चले और फल स्वरूप जो मिलने वाला मोक्ष है क्या यह वही मोक्ष है जो हम मांग रहे हैं जो हम चाहते हैं

02:24:30:12 तो इन जो ये चार पांच तात्विक प्रश्न है इनहीं का निचोड़ है जो हमारा ब्रदारक उपनिषद एक तीन 28 का मंत्र है उसमें ये शब्द आया है क्या असुतो मा सद्गमया तमो मागया मृत्यु मम गमया ये जो हम ये प्रत्येक जीवात्मा मृत्यु से अमरता की ओर जाना चाहती है। प्रत्येक जीवात्मा अज्ञानता से ज्ञान की ओर जाना चाहती है। प्रत्येक जीवात्मा कभी ना खत्म होने वाला सुख प्राप्त करना चाहती है। इनहीं तीन चीजों को प्राप्त करने के निमित्त ईश्वर और धर्म की आवश्यकता है। ठीक है? जी। पहली बात। दूसरी बात यह है कि आपने कहा कि मुझे डर लगता है कि मैं जब कुछ करती हूं तो मेरे साथ कुछ गलत होने लगता है। तो इसका मतलब क्या है कि जब आप रामपाल की बातें मान रही हैं तो आपके साथ तब अच्छा ही अच्छा हो रहा है। क्या ऐसा है? जी क्या ऐसा है कि समस्या अच्छा हो रहा है? मेरे को ऐसा लगता है कि मतलब मेरी जिनसे शादी होने वाली है। अगर आपको लगता भी है अगर आपको लगता भी है तो इसका निराकरण ये है

02:25:46:12 कि एक पुत्र माता के साथ भी रमण करेगा तो उसको भी सुख की प्राप्ति होगी। मगर वो धर्म नहीं है। इसका अर्थ यह हुआ कि सुख जो आपको भौतिक सुख मिल रहा है वो धर्म का आधार नहीं है। वह धर्म का निर्णायक नहीं है। धर्म का निर्णायक तो क्या है? वैराग्य। आप उसमें पराकाष्ठा में जाइए। हमारे सभी शास्त्रों में वैराग्य की स्थिति बताई है। और अगर हम अपनी दृष्टि से देखें तो एक वैरागी के जीवन में तो सबसे ज्यादा दुख होता है। मगर भगवान ने तो जगह जगह ये कहा है कि वैरागी ही है जो सबसे ज्यादा निकट है भगवान के। मेरे साथ क्या है? मेरे को बात पता नहीं लंबी हो जाएगी या कैसे पर मेरे को ऐसा लगता है कि सब कुछ साइकोलॉजी है। मतलब जैसे अभी आपने वैराग्य की बात कही अभी आपने बोला मैं उनसे हट के भी अगर आपसे बात कहूं रामपाल जी महाराज से हट के भी बात कहूं मेरे को सब कुछ ऐसे लगता है कि सब कुछ साइकोलॉजी है। यह तो कुछ नहीं है। अब जैसे वैराग्य की बात पे आप कर लो तो ऐसा लगता है कि अच्छा ये बात इसलिए कही गई है क्योंकि जो जो दुखी इंसान होगा उसको सेटिस्फाई करने के लिए ये

02:27:01:15 बात कही गई है। जिनसे मेरी शादी होने वाली है वो वो मेरे को एक बात बोलते हैं कि मतलब वो प्रेमानंद जी महाराज को मानते हैं तो उन्होंने मेरे को बोला कि तत्व एक ही है। वो चाहे कहीं भी हो वो मतलब तत्व एक ही है। तू उसको कहीं भी पूज तुम उसको कहीं भी पूछ लो। तो मैं इस बात से भी बहुत करती हूं। समझती हूं इस बात को कि हां मतलब ऐसे भी हो सकता है कि आप चाहे उसको कृष्ण कृष्ण करके भज लो या कहीं भी कैसे भी भज लो मतलब जानना हम सबको बताता हूं इसमें दिक्कत क्या है कि जो आप किसी भी नाम से भजोगे यदि वो हमारे शास्त्रों द्वारा प्रमाणित नाम नहीं है तो आपके मन में ईश्वर की जो सर्वशक्तिमत्ता है वो सिद्ध नहीं होगी क्योंकि ईश्वर का एक दूसरा वर्ड है पूर्ण होना पूर्ण का मतलब मतलब आप समझते हैं जी पूर्ण का मतलब जिसमें किसी भी बात का अभाव ना हो। पूर्ण जी जी अगर वो चाहे कि मैं पेड़ को उखाड़ सकूं तो वो उखाड़ सके। अगर वो चाहे कि मैं दिन को रात कर सकूं तो वो कर सके। अगर वो संसार में ऐसी कोई बात ना हो जो वो ना कर सके। तो

02:28:16:21 ऐसा ईश्वर वो एकमात्र सनातन धर्म के द्वारा ही प्राप्त होता है। उसके द्वारा दी जाने वाली जो ग्रंथ है उनके द्वारा ही प्राप्त होता है। ऐसा ईश्वर जो कुछ भी कर सकता है। अब मैं बताऊं कि ऐसा ही ईश्वर क्यों होना चाहिए? जो सब कुछ कर सकता है। तो इसके लिए पीछे चलते हैं कि ईश्वर है। यह बात सिद्ध कैसे होती है? वहीं से पता चल जाएगा। एक नास्तिक व्यक्ति जो है ना अब ध्यान से सुनिएगा आप मेरी बात। एक नास्तिक व्यक्ति जो है वो भी यह सोचता है कि बारिश ज्यादा हो रही है तो कम हो जाए। धूप ज्यादा पड़ रही है तो कम हो जाए। सोचता है कि नहीं सोचता है? जी। यानी कि एक नास्तिक व्यक्ति जो भगवान को नहीं मानता है, साइंस को मानता है। साइंस ने नहीं कहा कि धूप को आप कंट्रोल कर सकते हो। फिर भी उसमें धूप को भी कंट्रोल कर लेने की इच्छा विद्यमान है। है ना? जी जी। एक नास्तिक व्यक्ति भी कभी यह नहीं चाहता है कि वो मृत्यु को प्राप्त हो। मृत्यु का विचार आते ही उसके मन में यह आएगा कि मैं उस बात से अपने दिमाग को कहीं और ले जाऊं। तुरंत

02:29:33:20 यानी कि साइंस के विरुद्ध जाके एक नास्तिक व्यक्ति भी मृत्यु से भाग रहा है। अच्छा कभी-कभी एक नास्तिक व्यक्ति के मन में भी आता है कि काश ये जो भविष्य है वो मुझे थोड़ी देर पहले पता चल जाता तो मेरा नुकसान ना होता। यानी कि एक नास्तिक व्यक्ति भी भविष्य देख लेना चाहता है। है ना? जी। तो इसका अर्थ यह है कि एक नास्तिक व्यक्ति भी प्रकृति के सारे नियमों के विरुद्ध सब कुछ कर सकने वाला बनना चाहता है। ठीक है। जी जी। अब दूसरी बात आती है कि हमारे अंदर जिसज चीज की चाह है हमारे अंदर जिस जिसज चीज की चाह है जिसको हम अपने से अलग नहीं कर सकते हैं उस उस चाह का अस्तित्व इस दुनिया में मौजूद है। जैसे कि हमारे अंदर भूख है तो दुनिया में भोजन है। जी हमारे अंदर प्यास है तो दुनिया में पानी है। हमारे अंदर देखने की हमारे अंदर देखने की इच्छा है तो दुनिया में दृश्य है। हमारे

02:30:48:28 अंदर सुनने की इच्छा है तो दुनिया में ध्वनि है, स्वर है। तो तो क्या है कि केवल हमारे अंदर भूख होने से ही यह सिद्ध हो जाता है कि दुनिया में खाने का भोजन का अस्तित्व है। हमारे अंदर प्यास होने से ही यह सिद्ध हो जाता है कि दुनिया में पानी का अस्तित्व है। उसी प्रकार एक नास्तिक व्यक्ति

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02:31:11:15 के अंदर भी सब कुछ कर सकने वाला बनने की चाह यानी सच्चिदानंद होने की चाह से यह सिद्ध होता है कि इस दुनिया में कोई है जो सब कुछ

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02:31:22:19 कर सकता है। जो सच्चिदानंद है। ठीक है? जी जी। हां। तो अभी तो अभी हमने यहां से सिद्ध किया कि ईश्वर वही हो सकता है जो सब कुछ कर सकता है। ठीक। जी। अब जब हमने ये सिद्ध कर लिया। अब जब हमने ये सिद्ध कर लिया तो बस इस पैरामीटर पे आप आप जिसकी भी भक्ति कर रही है उस पर उसको नाप लीजिए। क्या वो सब कुछ कर सकने वाला है। बात करें अगर कबीर की तो कबीर के बारे में यही लोग कहते हैं कि कबीर जो है यहां पर आकर के वो अपना रूप नहीं बदल सकता क्योंकि उसकी उसका रूप तो शाश्वत है।

02:32:08:14 जी तो क्या हुआ? कबीर बाधित हो गया और जो बाधित है वह सर्वशक्तिमान ईश्वर नहीं है। यानी कि लेकिन मतलब मैंने यह भी पढ़ा कि जैसे वेदों में लिखा है कि मतलब वो जो होते हैं मतलब जो कबीर परमात्मा मतलब ये शब्द जो लिखा है कि वो अपना जो रूप है वो हल्का करके आते हैं। की बात अलग है। रूप को बदल देने की बात अलग है। पहली बात तो यह है कि उन्होंने जब वेदों जब उन्हें संस्कृत नहीं आती है तो उनको वेदों का अर्थ करना कैसे आ गया? पहली बात तो यह है। दूसरी बात यह है कि चलो उनके वो गलतसलत मान भी ले तो वह यह कहते हैं कि वो अपने जो प्रकाश है तेज है उसको हल्का करके आते हैं। मगर अगर वही रूप शाश्वत है वो बदल शाश्वत का अर्थ समझती हैं। जो कभी बदला ना जा सके जो कभी बदल नहीं सकता जो अटल है वो शाश्वत सत्य है। ठीक है? तो अगर कबीर ही शाश्वत है तो वह अपना रूप नहीं बदल सकता। तो यहां पर कबीर बाधित हो गया है। कबीर कबीर दास जी है जो अगर वो ईश्वर है तो वो अपना रूप नहीं बदल

02:33:23:18 सकते क्योंकि यही कह रहे हैं कि वो शाश्वत स्वरूप है। तो जब वो रूप नहीं बदल सकते तो फिर वो वहां पे किस चीज की बात हुई है? वो वहां पर अलग चीजों की बात हुई है जिसमें इन्होंने अपने मन के अनुसार अर्थ ले लिया है। हमने अपनी लाइव स्ट्रीम्स अगर आपने हमारी पीछे से देखी होगी तो लगभग उनका हर क्लेम जो किया है उन्होंने वो उसको सिद्ध किया है कि वो गलत है उनका क्लेम। अगर अभी हम ये बात कर रहे हैं कि चलो मान लो उन्होंने जो कहा है वो वेदों में लिखा है तो हम क्या उस ईश्वर को इसलिए मानने लगेंगे क्योंकि वो रामपाल जी ने उसका जो अर्थ कर दिया है वो हम मानने लगेंगे क्या कि वो ईश्वर है भाई आपकी यात्रा कहां से शुरू हुई है वो आपकी यात्रा यहां से शुरू हुई है कि मुझे उस ईश्वर को प्राप्त करना है जो कुछ भी कर सकता है तो क्या कबीर दास कुछ भी कर सकते हैं नहीं कर सकते वह पहाड़ नहीं बन सकते क्योंकि यही कह रहे हैं कि वह शाश्वत स्वरूप है। अगर वह शाश्वत है तो वो अपना रूप नहीं बदल सकते। अगर वो रूप बदल सकते हैं तो इसका मतलब ये जो कबीर का आपको डायग्राम दिख रहा है यह शाश्वत स्वरूप नहीं है।

02:34:39:18 और जब आपने पूछा कि मुझे क्या करना चाहिए? तो आपके एक मनुष्य के जीवन की लगभग हर समस्या का निदान श्रीमद् भगवत गीता में दिया गया है। भगवान ने उसमें कहा कि जो लोग मुझसे भिन्न किसी देवता की काज को भजते हैं वो लोग ढूंढ तो मुझे ही रहे होते हैं मगर अवधि पूर्वक होने के कारण उनका कभी कल्याण नहीं होता। तो क्या हुआ इसका अर्थ? कि जब आप यह सोचते हो कि हमारा जो कबीर है वह कृष्ण से अलग है वह कृष्ण जो कुछ भी कर सकता है जो पूर्ण है सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रह असतो मा सद्गमया तमसो ज्योतिगम मृत्यु मृतम गमया इसमें जो जीव की डिमांड बताई जा रही है जो डिजायर बताई जा रही है उसका जो सब्जेक्ट है वो कृष्ण है वो और जब हम कहते हैं कि कबीर कृष्ण नहीं है उससे अलग है परमात्मा है तो यह बाधित है तो भगवान ने क्या कहा जो मुझ मुझसे भिन्न अगर तुम मेरा ही रूप समझ रहे हो, मुझ में और उसमें भेद नहीं कर रहे हो तो कोई बात नहीं है। मगर भेद तो आएगा क्योंकि हमारे शास्त्रों में जहां कृष्ण की बात हो रही है, उनके साथ में कबीर की बात नहीं हो रही तो आपके मन में भेद आएगा। तो इसलिए उनसे भिन्न किसी की भी भक्ति करने पर जैसे हम शिव

02:35:54:21 की भक्ति कर रहे हैं। तो क्यों नहीं आएगा भेद? क्योंकि शिव और विष्णु को एक कहा गया है। मैं जैसे मेरे को मेरे अंदर एक और चीज है जैसे मेरी जो मर थी उनकी बहुत वो बहुत पूजा पाठ करती थी तो उनकी डेथ हो गई 2019 में तो उनका पार्किंसन से उनकी डेथ हुई थी। वो बहुत मेहनती और बहुत सेवा करने का उनके अंदर बहुत भाव था। लेकिन उनकी ऐसी डेथ हुई कि बस बहुत ही बुरा मतलब उनकी बेड रिडन हो गई थी। कमर भी उनकी गलने लगी थी। तो मेरे को ये मतलब थोड़ा ऐसा लगता है कि मतलब ऐसा क्यों हुआ? क्योंकि मैं आपको बता रहा हूं ना कि अभी रामपाल दास जी के टच में ही अभी एक महिला आई। उन्होंने बताया कि जो व्यक्ति थे 5 लाख की डोनेशन दी थी और उनको जो है करंट लगने से उनकी मौत हो गई। तो पहली बात तो यह है कि जो आपकी जो जो आपकी जानकारी में जो मातृ शक्ति आप बता रही हैं वो भक्ति कर रहे थे। ये देखिए सतलोक आश्रम में करंट लगने से एक युवक की मौत। ये देखिए ये देखिए ये वो नहीं है लाख डोनेशन वाले मगर ये युवक की मौत है। अकाल मृत्यु के लिए

02:37:09:25 साफ-साफ हमारे रामायण में लिखा हुआ है उत्तरकांड में अकाल मृत्यु यदि आपके आसपास हो रही है तो समझ जाइए कि पूजा गलत तरीके से हो रही है तो इनके यहां पर गलत तरीके से क्या हो रहा है कि भगवान को ना बज के भगवान के दुश्मन को बजा जा रहा है और हमारे यहां ये जो आपने जो बताया अब ये देखना पड़ेगा कि उनकी शिक्षा दीक्षा क्या थी वही वाली बात है अब जैसे मैंने अभी आपको इतनी डिटेलिंग कर दी कि जो सर्वशक्तिमान ईश्वर को भजेगा वही मुक्त होगा। अब उनके जानकारी में उनकी शिक्षा पद्धति में कौन से परंपरा प्राप्त आचार्य थे? क्या उनके संशय दूर हुए थे कि नहीं हुए थे? क्यों? क्योंकि भगवत गीता 440 में लिखा हुआ है कि संशयात्मा विनश्यति। जिसके मन में संशय है अपने धर्म और ब्रह्म को लेकर वो ना तो इस लोक में सुखी रहेगा ना ही परलोक में। ये लिखा है भगवत गीता में। तो उनके संशय दूर हो चुके आज देखिए आज आपके मन में अभी भी संशय है। क्यों संशय है? क्योंकि आप यह बात सही है। जो जो व्यक्ति पूर्ण ईश्वर को नहीं मानेगा परंपरा प्राप्त आचार्यों को नहीं जानेगा और परम स्वतंत्र मोक्ष को नहीं मानेगा तो उसके मन में निश्चित रूप से

02:38:25:06 संशय विराजमान होगा। दुनिया का कोई भी रामपाल दास का फॉलोअर ऐसा नहीं है जो यहां आकर के यह ना कहे इस बात का मुझे संशय नहीं है। अभी आपने देखा अब स्वस्थ हो गया मैं पहले बीमार था ये देखिए अब स्वस्थ हो गया मैं पहले बीमार था जब रामपाल दास जो स्वयं तत्वदर्शी है ये खुद बीमार हो रहे हैं पहले बीमार था बस बस करिए अब ये खुद स्वयं तत्वदर्शी यदि है तत्वदर्शी है आप तो नहीं है मगर ये तो है ये तत्वदर्शी होते हुए बीमार पड़ रहे हैं जब तो औरों की तो बात ही क्या है? तो आपकी जो माताजी है वो ठीक है। उनके साथ जो हुआ सो हुआ। मगर इसमें हम केवल एक एंगल ये नहीं ले सकते कि उन्होंने भक्ति की तो वो जो है उनके साथ ऐसा क्यों हुआ? बहुत सारे कारण होते हैं। इसका मैं आपको एक उदाहरण दे देता हूं कि मान लीजिए किसी को वेट लॉस करना है और वो जिम पहुंचता है। वो कहता है कि भाई मैंने यहां पीस दे दी और मैं जिम करने आऊंगा। क्या मेरा वेट लॉस हो जाएगा? तो भाई ठीक है वेट लॉस होगा। मगर बाहर जाकर के वो कचौड़ी समोसा भी खा रहा है, भटूरे भी खा रहा है। उसको जो डाइट प्लान दिया गया है वो फॉलो नहीं कर रहा है।

02:39:40:28 ऐसे नहीं होगा। हर चीज पर ध्यान देना होगा। तब रिजल्ट मिलता है। ठीक है? और जो आपने एक बात कही थी ना कि ये वैराग्य वाली बात केवल उनके उत्तर के लिए दे दिया। ऐसा नहीं है। वैराग का मतलब वैराग्य का मतलब समझ लीजिए क्या है? जब हमारी भगवान में भक्ति होने लगती है। तो धीरे-धीरे जो भौतिक प्रेम जो होता है वह हमारा घटता चला जाता है। दुनियादारी से जो हमारा प्रेम होता है वो हमारा घटता चला जाता है। और इसी को एक और हमारे अंदर उस ज्ञान का विकास होने लगता है जिसके कारण मृत्यु भी हमें सरल लगने लगती है। वो कौन सा ज्ञान है? नैनती शस्त्राण नैन दति पावका ना चैन क्ल मारता आत्मा को ना शस्त्र काट सकता है ना अग्नि जला सकती है ना वायु सुखा सकती है ना जल डुबो सकता है तो ये आत्मा का सत्य है। अब जो हमारे जो जगतगुरु शंकराचार्य जी हैं उनके पास एक व्यक्ति आया कि भाई मुझे कैंसर है मैं क्या करूं तो गुरुदेव ने यह नहीं कहा हम

02:40:56:00 तुम्हारा कैंसर ठीक करेंगे। गुरुदेव ने यह कहा कि आपको मूल समस्या दुख से है तो आपका जो भय है जिसके कारण आपको दुख है वो दूर होता है तो क्या कहते हैं जब आपको यह वाला ज्ञान मिलता है ना नैन छिन्नती शस्त्राणी तो आपका जो भौतिक प्रेम है वो कम होता है जिसके कारण आप भय मुक्त होने लगते हैं जिसके कारण आपके जीवन में स्थितियां कैसी भी है मगर आप सुखी रहते हैं अप एंड डाउन कितने भी चलते रहे मगर आप सुखी रहते हैं। क्यों? मन में संतुष्टि होती है। हमारे साथ श्री रघुनाथ तो किस बात की चिंता में वो सुख होता है हमारे मन में। और वो सुख क्यों होता है? रघुनाथ से हम किसी भी स्थिति में रघुनाथ से हम कब अपेक्षा करेंगे? अभी वही सर्वशक्तिमान वाली बात आ गई। हम भगवान से हर समस्या में कब अपेक्षा करेंगे? जब हमारे मन में यह बात फिट होगी कि भगवान सब कुछ कर सकते हैं तभी तो हम हर स्थिति में उनको याद करके सुखी हो जाएंगे। मगर जब हमारा भगवान ही कह देगा मैं ये नहीं कर सकता, मैं वो नहीं कर सकता, मैं फलाना नहीं कर सकता तो हम ये सोचेंगे पता नहीं इस समस्या से भगवान लड़ सकते हैं कि नहीं लड़ सकते।

02:42:11:13 सोचेंगे ना? जी जी। तो ये बात है। सर्वशक्तिमान की आप पूजा करें और अगर आप जिनको आप तत्वदर्शी मान रही हैं उनको अगर उनको तत्व तत्वदर्शी हैं। पहली बात तो उनके जितने भी शास्त्रों के प्रमाण है उनकी सबकी धज्जियां उड़ चुकी है। आप पिछले लाइव देखिएगा। मगर फिर भी अगर दुर्जन तोष न्याय से थोड़ी देर मान भी ले कि वो तत्वदर्शी है तो उनका वो तत्व ज्ञान कुछ नहीं है। बैंगन भी नहीं है। तो इसलिए आपको भगवान श्री कृष्ण की वो बात याद करनी चाहिए कि मुझसे भिन्न किसी भी देवता को जो लोग भज रहे होते हैं वहां पे ये नहीं कहा गया कि उनसे भिन्न शिव को भज रहे होते हैं। क्योंकि शिव और शिव और विष्णु भिन्न नहीं है। मगर मुझसे भिन्न मतलब जो कुरान के अनुसार जो ईश्वर को भज रहे होते हैं, बाइबल के अनुसार ईश्वर को भज रहे होते हैं। रामपाल दास जी के जैसे लोगों के अनुसार जो ईश्वर को भज रहे होते हैं उनका ईश्वर कृष्ण से भिन्न होता है और कृष्ण विष्णु से भिन्न ईश्वर बाधित होता है। सर्वशक्तिमान नहीं होता है। परम स्वतंत्र मोक्ष देने वाला नहीं होता है। शाश्वत धर्म देने वाला भी नहीं होता है। जी बताइए। मेरे को एक चीज पूछनी थी। आप लोग मतलब जो ये कबीर

02:43:27:01 साहब हैं इन मतलब इनकी जो टीचिंग्स हैं या जो लिखा हुआ है जैसे कबीर सागर में उस सबको मानते हैं या मतलब मेरे मैं इस चीज से मेरे को नहीं पता क्या मानते हैं टीचिंग जितनी टीचिंग्स जो परंपरा प्राप्त गुरु गोविंद और ग्रंथ हैं उनका विरोध नहीं करती हैं उतनी टीचिंग्स मानते हैं। हमारी जो सनातनी है हिंदू हैं उनकी जो प्रमाण्य बुद्धि है वो वेद में है। वेद के अकॉर्डिंग जितनी चीजें होंगी वो सब हमारे लिए मान्य है। वेद के विरोध में होंगी वो सब हमारे लिए मान्य नहीं है। अब जैसे कि तत्वदर्शी जो है वो ये कहते हैं कि वेद को कहने वाला मूर्ख है। कहते हैं कि नहीं कहते? अब ये बात नहीं उसमें

02:44:17:22 जी महाराज हां ये कहा है कि वेद को कहने वाला काल है वेद को कहने वाला काल है ये कहा है उन्होंने वेद को कहने वाला कौन है काली है ना पुराण को कहने वाले ब्रह्मा विष्णु महेश है इन सबको अज्ञानी कहा एक एक मैं यहां पे आके फुल स्टॉप हो जाता है मेरा जिसे उन्होंने लिखा है कि गुण तीनों की भक्ति में ये बोल पड़ा संसार कहे कबीर निज नाम बिना कैसे उतरो पार मतलब ये समझ में नहीं आता मेरे ये ऐसे है यहां गुण की बात की है पहली बात क्या ब्रह्मा विष्णु को क्या ब्रह्मा विष्णु महेश को आप केवल गुण मानती हैं क्या वो केवल गुण है केवल गुण तो नहीं है तो वहां तो बात केवल गुण की हो रही है ना

02:45:10:24 केवल गुण की बात हो रही है। गुण तीनों की भक्ति का मतलब है जो ये गुण से बनी हुई गुणों तीन गुणों से बनी हुई ये जो माया रूपी संसार है इसमें जो इनकी जो भक्ति करते हैं हाय मुझे एसी मिल जाए हाय मुझे टीवी मिल जाए हाय मुझे पैसा मिल जाए हाय मेरे को वो लड़की मिल जाए हाय मेरे को वो लड़का मिल जाए ये है तीन गुणों की भक्ति इसको मना किया फिर उसके फिर उसके बिल्कुल नीचे लिखा हुआ है कि तीन देव की जो करते भक्ति उनकी कभी ना होवे मुक्ति और एक जो वेद के लिए मतलब यह तो देखिए यह अपने मन से अगर कोई कुछ लिख देगा तो हमने कहा ना कि हम उसमें प्रमाण बुद्धि नहीं रखते। जी जी और एक एक चीज और मतलब जैसे बोलते हैं कि वेदों में प्रमाण है। कबीर साहब भगवान है। फिर आप कहीं कोई प्रमाण नहीं है। पहली बात तो ये है कि अगर पहली बात तो ये है कि अगर आप यह कहेंगे कि वेदों में प्रमाण है। कबीर साहब भगवान है तो इसका मतलब आप मानते हैं कि वेद हमारे लिए प्रमाण है। मानते हैं कि नहीं? जी जी नहीं आप एक मिनट सुनो हां जी मैं मैं ये कहना चाहती हूं कि फिर उसमें कबीर साहब ने लिखा है कि अपनी वाणी में लिखा है कि वेद मेरा भेद है मैं मिलूं वेदों से नहीं

02:46:26:00 जॉन वेद से मैं मिलूं वो वेद जानते नहीं तो मतलब इसको भी थोड़ा डिफाइन कर दो थोड़ा इसको ऐसे डिफाइन करते हैं कि भगवान के दो स्वरूप होते हैं एक जिसको प्राप्त किया जा सकता है और दूसरा जिसको समझा जा सकता है, जिसको देखा जा सकता है, सुना जा सकता है। एक भगवान का रूप केवल प्राप्त कर सकते हैं। जैसे कि आपको खाना खाना है। आपको भूख लग रही है। ठीक है? तो आपको वास्तव में क्या चाहिए? कैलोरी। क्या चाहिए? जी। कैलोरी। हां जी। मगर कैलोरी आपको मिलेगी कैसे? हवा में हाथ मारने से मिल जाएगी क्या? नहीं। नहीं। आपको कैलोरी मिलेगी भोजन से। जी। भोजन से मिलेगी ना? तो वेदों में हां। तो कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जो आपको यह बता दे कि कैलोरी का साइज कैसा होता है? वो दिखती कैसी है? या उसको जब हम ग्रहण कर रहे होते हैं तो हमारी कौन सी नस दबती है, कौन सी नस फूलती है? ये सब बता सकता है क्या कोई?

02:47:37:03 कैलोरी के विषय में डॉक्टर डॉक्टर्स ही बता सकते हैं वो तो नहीं नहीं यह चीज नहीं बता सकते कि जब कैलोरी को आप ग्रहण कर रहे होते हैं तो आपको कैसा फील होता है सिर्फ इतना कह सकते हैं कि आप संतुष्टि फील करते हो है ना ठीक है तो ये जो कैलोरी के फील करने वाली बात है इसको सिर्फ फील किया जा सकता है मगर इसको डिफाइन नहीं किया जा सकता ना जी जी मगर वो जो फील करने की स्थिति है। उसको किस जगह से प्राप्त करना है यह डिफाइन किया जा सकता है। खाना कहां मिलेगा यह आपको बताया जा सकता है। जी जी दाल रोटी के रूप में चावल भात के रूप में आपको यह बताया जा सकता है कि चावल कहां मिलेगा। तो हमारे जो शास्त्र है हमारी जो ये सारी वाणियां है गुरुओं की एक मिनट एक मिनट ये प्रमाण आप दोबारा दिखा दीजिएगा। मेरी एक बात पूरी हो जाए। तो हमारी जो हमारी जो वाणी जो भगवान की जो वाणी है जो वेद है उपनिषद है वह आपको उस जगह ले जाते हैं जहां से आपको वो स्थिति प्राप्त हो सकती है। इसलिए ये कहा जा सकता है कि भगवान के दो स्वरूप होते हैं। एक कैलोरी जैसा जिसको सिर्फ प्राप्त

02:48:52:09 कर सकते हैं। जिसको बताया नहीं जा सकता। सिर्फ व्यक्ति प्राप्त करके फील कर सकता है। हेलो चली गई और दूसरा दूसरा कैसा रूप होता है जिसको बताया जा सकता है। तो श्री कृष्ण चंद्र रामचंद्र इत्यादि के रूप में भगवान को डिफाइन किया जाता है। फल स्वरूप इनके द्वारा प्राप्त होने वाला जो भगवान का प्राप्तव्य वाला रूप होता है वो हमें प्राप्त हो जाता है। ठीक है? मैं आशा करता हूं कि आपकी बहुत सारी चीजें दूर हुई हो और बाकी वह जो आप प्रमाण दिखा रहे थे वह दिखा दीजिए। संदीप जी को ले लेते हैं।

02:49:33:13 ये मेरे को लगता है खाली कंटेंट लेने के लिए आते हैं आपसे और कुछ नहीं है। उपरोक्त नहीं हो सकता है। उनकी वास्तविक जिज्ञासा रही हो। ठीक है। जय श्री राम भैया जी। सादर प्रणाम। सादर जय श्री राम। जय श्री राम। जय श्री राम। भैया जी मैं कहना एक मिनट ये देखिए यह देखिए कबीर सागर में भी यह कह रहे हैं कबीर सागर भी प्रमाण नहीं है क्योंकि कबीर सागर में भी मिलावट हो चुकी है तो इसका मतलब मिलावट इसका मतलब क्या हुआ कि कबीर सागर भी प्रमाण नहीं है तो प्रमाण क्या है केवल जो स्वयं को तत्वदर्शी कहता है और तत्वदर्शी वह सिद्ध कहां से है कि गीता से कि गीता किसने कही कि मूर्ख ने अरे भाई जब मूर्ख ने कही है तो उसकी लिखी हुई बात के आधार पर तुम तत्वदर्शी क्यों मान ले रहे हो? जब मूर्ख है तो वो तो कहीं भी मूर्खता करेगा ना। और फिर जब उल्टा पेड़ बताने वाला तत्वदर्शी है तो उल्टा पेड़ मैं बता दे रहा हूं अभी। ये लो भैया उल्टे पेड़ की व्याख्या हो गई। मान लो मुझे तत्वदर्शी और मान लो कृष्ण भगवान है। कबीर भगवान नहीं है। हो गया। गीता जी में ये भी गीता जी में ये भी लिखा है कि जो बुद्धि देते हैं वो भी गीता ज्ञान दाता ही देते हैं। जो बुद्धिमानों

02:50:48:26 को बुद्धि देते हैं वही देते हैं। जी जी ठीक है हमारी काफी लंबी चर्चा हो गई है। जी पारस अवधिया जी जय श्री राम बताइए। जी जी मैं बोल रहा था कि ये लोग कबीर दास जी के नाम से जो कबीर सागर और दुनिया भर के जो ग्रंथ लिख के बैठे हैं और जबकि कबीर दास जी का एक दोहा है मसी कागज क्यों नहीं कलम गई नहीं हाथ तो उन्होंने कुछ लिखे तो थे नहीं तो ये लोग कहां से अपने कपोल कल्प लिख के बैठे हुए हैं ये ये बहुत विचारणीय बात है बिल्कुल बिल्कुल अरे इसमें इतने सारे मैसेजेस कैसे आ गए

02:51:31:03 विशाल भाटिया जी भी जाइन करना चाहते थे। चले गए। अब तो फिर कभी करेंगे क्योंकि 10:30 बजने जा रहे हैं। आप लोग अपना वो पहाड़ी जी आप अपना स्टेटमेंट दीजिए। फिर अब बढ़ाया जाए चर्चा को। एक बात हरि ओम। मैं बस यहां जो अभी मातृ शक्ति आई थी उनसे यही कहूंगा कि आप अपने तत्वदर्शी से ये जरूर पूछे। क्या ईश्वर सर्वशक्तिमान है? सब कुछ कर सकता है कि नहीं? क्या उनके द्वारा दिया जाने वाला जो मोक्ष है, कल्याण है, वो परम स्वतंत्र मोक्ष है कि नहीं? दिया जाने वाला जो धर्म है वो शाश्वत है कि नहीं? बस हम नहीं मान हम नहीं कह रहे वो गलत बता रहे हैं, ये कर रहे हैं, वो कर रहे हैं। ये तीन चीजें मांगिए। उनसे कहिए। जैसे उन्होंने कहा था उपनिषदों में असतो मा सद्गमया तमसो मा ज्योतिर्गमया। उनसे कहिए अपने गुरु से मुझे ले चलो सत्य से असत से सत की ओर मुझे ले चलो अंधकार से उजाले की ओर मुझे ले चलो मृत्यु से अमरता की ओर ऐसे कहिए और यदि वो आपको वो सारा ज्ञान वो सारी बातें आपको बता पाए दे पाए तो आप उनका अनुसरण करिए और नहीं तो परंपरा प्राप्त आचार्यों की शरण लीजिए आपके जो पतिदेव हैं होने वाले वो बहुत सही जगह पर है उनके अनुसार आप भक्ति का आलंबन लीजिए वहां

02:52:46:09 आपको आपकी अंतरात्मा में संशय नहीं रहेगा वहां आपकी अंतरात्मा में यह त्रुटियां नहीं रहेंग। आपके मन में संशय ही सबसे बड़ा दुश्मन है आपका। संशयात्मा विनसति भगवत गीता 440 में कहा गया है। जी पाणी जी बोले लास्ट में एक सवाल छोड़ जाता हूं मैं इनके लिए। बड़ा प्यारा सवाल है। शास्त्रों से नहीं है। लॉजिक सा है यह सवाल। अगर हम सभी हम सभी जितने भी प्राणी हैं हम कबीर दास जी के संतान हैं। वह हमारे परमपिता हैं। तो कोई पर जो पिता है जो कोई हमारा जो पिता श्री है क्या वो हमको किसी को खाने का आदेश दे सकते हैं क्या? जैसे काल को आदेश दे दिया कि तुम इनको खाओ। शराब कहो या आदेश कहो। तो वो कैसा ईश्वर है जो अपने ही संतान को खाने का आदेश दे दिया। काल को। अच्छा आज मैं एक सवाल और करूंगा कि यह जो है खाता किसे है काल सोचने वाली बात है भाई जिंदा इंसान को तो खाता नहीं है मरने के बाद ही खाता है और आत्मा अविनाशी है आत्मा

02:54:01:13 को कुछ हो नहीं सकता है तो ये खाता किसको है फिर वो वो दरअसल ना ये क्यों परेशान है श्री कृष्ण जी ने जब अपना स्वरूप दिखाया था ना वो उन्होंने इनका फ्यूचर दिखा दिया था अब इनको यह समझ तो है नहीं है। इसको वो काल बना के बैठे हैं। उन्होंने कहा था सारे मेरे ग के अंदर आ जाते हैं। अरे भाई वो तो वो तो जाहिर सी बात है क्योंकि जब महाभारत का युद्ध हुआ गीता बोलने के बाद तो धृतराष्ट्र ने सुना और क्या कहते हैं वो द्रोणाचार्य जो थे जो दांतों में दिख रहे थे द्रोणाचार्य के साथ तो वो युद्ध हुआ अर्जुन का तो ये तो बात ठीक है मगर इनका काल खा क्या रहा है क्योंकि वो आत्मा तो अविनाशी है यही कहते हैं तो ये काल खाता क्या है फिर कुल मिला के वो वो इनकी बुद्धि खा रहा है और कुछ नहीं खा रहा आत्मा को भून के खाता है ये देखिए ये कह रहे हैं भाई आत्मा तो अविनाशी है उसको तो कुछ हो ही नहीं सकता तो कैसे भून रहे हो

02:55:05:15 आना कभी दोबारा तब पता चलेगा अरे सवाल का जवाब दीजिए कि बोलो कि हम तो उनके है ना संतान हुए ना कबीर कबीर देव जी के कबीर जो ईश्वर है माना भी है माना भी है संतान माना भी है रामपाल वालों ने रामपाल ने अपनी पुस्तकों में लिखा है कहीं पे कि हम उनकी संतान पहाड़ी जी ने इनका तीर इनहीं पे चला दिया है ये बोलते हैं कि हम सब उन्हीं की संतान है कबीर कबीर देव जी की कबीर परमात्मा की हम संतान है। पर कबीर परमात्मा ने भी काल को ये आदेश दिया कि तू डेली श्राप दिया या आदेश बोलो डेली एक लाख जीवो को तू खाएगा। हमें अपने ही बच्चों को खाने का आदेश दे दिया। वो कैसा बाप है? और और गलती किसकी थी? काल की। श्राप किसको मिल रहा है? काल को। और खा किसको रहा है? बच्चों को। सजा।

02:56:09:27 तो चलिए फिर इस प्रश्न के साथ हम जो मातृ शक्ति अभी आई थी उनसे अच्छी वार्ता हुई और चाहेंगे कि उनके जीवन में प्रभु श्री राम की कृपा आए और उनके जीवन में जो संशय रूपी जो उनका शत्रु है सबसे बड़ा उनके हृदय को अंदर से जो कचोट रहा है वो संशय उनका दूर हो जाए और जैसा कि उन्होंने बताया निकट भविष्य में वो उनकी उनका विवाह संपन्न होने वाला है उसके लिए ढेर सारी शुभकामनाएं और भगवान जल्दी से अपनी शरण में आपको ले लें क्योंकि यह भी बात सही संदीप जी कि जिनको भगवान चाहते हैं उनहीं को अपनी शरण में लेते हैं। आपको सद्बुद्धि मिले और वो ले ले ऐसा। ठीक है। रावण के रावण के वहां शरण में लिए जो भी है रिजल्ट अच्छे आ रहे हैं। बोल रहा हूं रावण के वहां विभीषण को अपनी शरण में लिया था उन्होंने। जी जी जी जी जी। केवल एक बात मेरी है। सारी बातें एक तरफ हो जाती है। तीन चीजें पकड़ लीजिए। आप सही मार्ग पर आ जाएंगे। धर्म कौन सा? जो शाश्वत हो। शाश्वत मतलब आज माता, कल भी माता, परसों भी माता। ऐसा नहीं कि आज माता, कल कुछ और कल कुछ और। परफेक्ट परफेक्ट। धर्म जो है वो शाश्वत हो।

02:57:25:15 मोक्ष जो है वो परम स्वतंत्र हो। ये नहीं कि वहां से फिर आना पड़ेगा। फिर ये हो जाएगा। उसके बाद ये हो। मोक्ष जो है वो परम स्वतंत्र हो। और ईश्वर कौन सा हो? जो सर्वशक्तिमान हो जो सब कुछ कर सकने में सामर्थ्यवान हो कुछ भी कर सकना कर सकने वाला जब आप चमत्कार की ही बात कर रहे हो कि रोगों को ठीक कर दे तो ईश्वर भी तो ऐसा होना चाहिए जो कुछ भी कर सके कि केवल बस रोगों इतनी फिर तो डॉक्टर को भगवान मान लो जी हम जी ये बात है ठीक है तो सभी को जय श्री राम आने के लिए सबका आभार और आज की चर्चा बड़ी अच्छी रही जय श्री राम जय श्री राम जी जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम

02:58:13:22 [संगीत]

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