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00:00:01:17 [संगीत] तो सभी को जय श्री राम आज एक विशेष वार्ता के लिए मैं आपके सामने आया हूं देखिए एक और ब्रीड तैयार हो रही है जो सनातन के नाम से ही और सना को दीमक की तरह खा रही है सनातन के नाम से सनातन रक्षक के नाम से या सनातन योद्धाओं के नाम से ब्रीड तैयार हो रही है और यह स्वयं ही धर्म का नाश करने पर तुली हुई है तो उस ब्रीड का आज मान लीजिए कि इंट्रोडक्शन है आपके समक्ष उस ब्रीड का नाम है होंडा हिंदू होडा हिंदू इस ब्रीड का नाम है और इसमें अभी हम लोग बात करेंगे कि कौन-कौन किस किस तरह के लोग आते हैं सभी को जय श्री राम जय श्री राम हर जी तो हम लोग आज इस पर विस्तृत बात करेंगे होंडा हिंदू है क्या अगर मोटे तौर पर मान लिया जाए एक नास्तिक कौन होता है होंडा हिंदू को समझने के लिए हम नास्तिक से शुरुआत करते हैं नास्तिक कौन होता है देखिए नास्तिक ईश्वर को मानता

00:01:16:22 है या नहीं मानता है उसको मोक्ष चाहिए कि नहीं चाहिए यह उसका अपना पर्सनल उद्देश्य हो सकता है मगर व हमारे लिए हानिकारक क्यों होता है धर्म धर्माज लोगों के लिए वो हानिकारक क्यों होता है क्योंकि जब वो ईश्वर को नहीं मानता है तो वह नियमों को मानना बंद कर देता है उसकी उसके पास निश्चित नियमावली नहीं होती है नास्तिकों के पास जीवन को जीने के लिए कोई आधार नहीं होता है तेरे लिए कर्तव्य और अ कर्तव्य के विषय में एकमात्र शास्त्र प्रमाण है यह धर्म पर चलने वाले का होगा है ना कि मैं यह करूंगा ये नहीं करूंगा और अगर वो नहीं करता है शास्त्र को जिस जगह वो विरोध करता है तो वो वहां पर अपराधी माना जाएगा उस दृष्टि से तो जो नास्तिक होता है उसके पास ऐसी कोई निश्चित नियमावली नहीं होती है जिसके आधार पर उसे किसी भी चीज के लिए बाउंड किया जा सके नहीं होती है अपनी भी कोई नियमावली नहीं लिखी होती मैं यह करूंगा यह नहीं करूंगा यह होता है नास्तिक तो इस कारण से नास्तिक आपके लिए हमारे समाज सामाजिक दृष्टिकोण से इस कारण से नास्तिक जो है हमारे लिए हानिकारक होता है अब यह होंडा हिंदू कौन है होंडा वो है

00:02:31:27 जो न केन प्रकार वो यह सोचता है कि मैं सनातनी हूं मैं हिंदू हूं और मैं जो है धर्म की रक्षा कर रहा हूं हो सकता है धर्म की रक्षा ना करने वाले लोग भी हो मगर डा हिंदू है यह हिंदू वो है जिनके पास भी फिक्स निश्चित नियमावली जिनकी नहीं है तो क्या अंतर र नास्तिक में जिस प्रकार से नास्तिक आपके लिए हानिकारक है उसी प्रकार से ा हिंदू भी आपके लिए ना हानिकारक यह आपको यह बताते रहेंगे कि देखिए शंकराचार्य ने यह लिखा रामानुजाचार्य ने यह लिखा जहां जहां जिसकी जिसकी जो जो बात जो इनके लिए मान्य होगी जो इनके फेवर में हो रही होगी यानी कि इनकी अपनी जो मनोवृति है उससे जो मैच खा रही होगी उन मनोवृति के पोषण के लिए इनको जहां जहां से जिसके जिसके शब्द मिल जाएंगे उन शब्दों कोय प्रमाण के रूप में उपलब्ध करा देंगे मगर जब इनसे जिनको इन्होंने प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया है उन्हीं की दूसरी चीजों को आप पूछने लगेंगे तो व कहे नहीं नहीं मैं कोई शंकराचार्य शंकर परंपरा का थोड़ी ना जो मैं इनकी हर बात मान ल मुझे उनकी बात अच्छी लगी

00:03:47:02 इसलिए मानली य क्या है य होंडा हिंदू क्योंकि जब ऐसा होगा तो आप किसी भी शास्त्र के आधार पर उसको आप बाउंड नहीं कर सकते कि भाई देख बहन से विवाह नहीं करना है क्यों मनुस्मृति में लिखा है अरे भाई मनुस्मृति में तो कई श्लोक प्रक्षिप्त है चलो ठीक है आर समाज वाली मनुस्मृति दिखा द तुम आर समाज को मानते हो आर समाज वाली मनुस्मृति दिखा द नहीं नहीं मैं दयानंद जी को भी कहीं कहीं पर नहीं मानता हूं क्योंकि मैं होडा हिंदू हूं मेरा कोई धर्म नहीं है मैं धर्म से बाहर हूं यह है होंडा हिंदू जो कि वक्त आने पर हर किसी भी नियम जो भी नियम उसकी उसके द्वारा स्वीकार जो उस समय की स्थिति है कार्य है उसके द्वारा स्वीकार कार्य के विरुद्ध जा रहा होगा वो उसको नकार सकता है क्यों क्योंकि मैं आर्थ समाज थोड़ी रहा हूं तो ऐसे ही अभी दो तीन उदाहरण में आपको दे रहा हूं जैसे जिस पर आज हम पूरी विस्तृत बात करने आया वो तो है रियल इंटेंशन यह भी समय आने पर कह देता है भाई मैं इसको भी मानता हूं इसको भी मानता हूं और जो है शंकराचार्य की जी की भी जय और जो है वो दयानंद सरस्वती की भी जय सबकी जय अरे क्या मतलब है जय का भाई अर्थ पूर्ण जय है कि

00:05:03:01 कि यह पाखंड है तुम्हारा क्या है जय का मतलब जब शंकराचार्य अपने भाष्य में लिख रहे हैं कि संप्रदाय हीन जो व्यक्ति होता है वह गुरु के रूप में स्वीकार नहीं होता है तुम कर रहे हो उनकी जय फिर संप्रदाय हीन व्यक्ति को भी गुरु के रूप में स्वीकार कर रहे हो हालांकि उसको भी पूर्णतया नहीं कर रहे हो तो ये क्या है यह है दोगलापन तो इस जो डगले हिंदू है वह सबसे प्राथमिक स्तर पर हानिकारक है क्यों क्योंकि उनको य लगता रहता है कि हम जो है सनातन भाई आर समाजी हो या स्कोन वाले हो या क्या कहते हैं रामपाल वाले हो कम से कम इनके पास कोई बुक तो होती है कि मैं इस बुक में जो लिखा है चलो ठीक है रामपाल है सपोज ट रामपाल क्या करता है कि वो इस पुराण से यहां से यह बात लेगा वहां से वो बात ली जा जाएगी फिर ऐसे कर कर के एक अपनी बुक निकाल लेंगे भ हम सारे पुराणों को पूरा का पूरा नहीं मानते इतना इतना मानते हैं मगर वो बुक तो कम से कम उनकी नियमावली है धर्म और अधर्म का निर्णय करने वाली है इनके पास वो भी नहीं होता है तो इनका धर्म है क्या तो वक्त आने पर जो लोग यह कह

00:06:18:06 देते हैं आर्य समाज का पक्ष लेने आएंगे और या अ अन्य संप्रदायों का पक्ष लेने आएंगे या अन्य परंपराओं का पक्ष लेने आएंगे मगर वक्त आने पर कह देंगे नहीं नहीं मैं किसी संप्रदाय को नहीं मानता मैं मैं आर समाजी थोड़ी र हूं मैं आर समाजी नहीं हूं यह कर देते हैं तो क्या होता है कि आप किसी भी नियम के लिए किसी भी आधार को लेकर के इनसे बात ही नहीं कर सकते क्योंकि ये तुरंत उससे फुदक के बाहर चले जाएंगे मैं आर समाजी थोड़ी मुझे बात मान लू तो एक दिन ऐसा आएगा जब इनसे यह कह रहे होंग आप कि भाई माताओं और बहनों से विवाह मत करो आर समाज ने भी इतनी बात मानी है नहीं नहीं मैं आर समाजी नहीं मैं तो करूंगा तो ये जो जिनके पास निश्चित नियमावली नहीं होती है वो नास्तिक होते हैं सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में कौन माता है कौन बहन है कौन पत्नी है मैं धर्म बताता है मगर धर्म की जब निश्चित नियमावली है ही नहीं हमारे पास क्योंकि हम जिसको फॉलो कर रहे हैं दयानंद जी को फॉलो कर रहे हैं तो उनसे भी हम समय समय पर डिनायर जाएंगे जैसे आर्य वरा आर्य वरा क्या कहती है कि भाई मैं जो है मैं आर समाजी नहीं हूं सब बातें उनकी रख लेंगी दयानंद जी की उसके बाद कहेंगी मैं आर समाजी नहीं हूं तो इनका धर्म और अधर्म का निर्णय कहां से होगा भाई तेरे लिए कर्तव्य और अ कर्तव्य के विषय में

00:07:33:08 एक मात्र शास्त्र प्रमाण है इनका शास्त्र है क्या अच्छा इन्होंने क्या अपने स्वयं वेदों का भाष्य कर रखा है तो कम से कम उसे ले आए कि यह मेरा धर्म है इन्होंने अपने अपने अपने उससे मनुस्मृति के श्लोकों को छाट के बना रखा हो कुछ तो वो ले आए मर ऐसा इन हंडा हिंदुओ ने नहीं किया है उसके लिए बहुत साहस चाहिए बहुत परिश्रम चाहिए वो तो दूर की बा भाई बहुत बड़े-बड़े विद्वान होते हैं जो ये सब कार्य कर पाते हैं यह भाष्य कर दे नियमावली बना दे चलो ठीक है कि बना दी वो वेद भाष्य अलग है कि नहीं है वोह बात बात की बात है कि वो मैच नहीं खा रहे मगर हर समाज यों के पास भी कम से कम कुछ सिद्धांत तो है मेरा यह सिद्धांत है और यह सिद्धांत मेरा नहीं है मगर होंडा हिंदू कौन है होंडा हिंदू वो है जो दोगला है जिसका कोई सिद्धांत नहीं है वो है होडा हिंदू बस इतनी बात है वो ईश्वर को स्वीकार किए हुए हैं और जो दूसरा व्यक्ति है उसने ईश्वर को स्वीकार नहीं किया है मगर वक्त आने पर वो उस चीज से भी मुक सकता है क्योंकि वो तो आर समाजी नहीं है वो तो रामपाल वाला नहीं है वो तो व तो स्नस नहीं है वो क्या है नहीं पता है ना जैसे यह जो मोहित गौड़

00:08:48:24 मोहित गड़ भी अपने जगह जगह पर य कह देते हैं मोहित गड़ यानी वो विज्ञान दर्शन विज्ञान दर्शन वो व्यक्ति जो मुझसे कभी मेरे फोन को मिला कर के बात करने में समर्थ रहा और उसने मेरे बिना स्पष्ट बात किए हीय डिक्लेयर कर दिया कि भय शिवांश नारायण द्विवेदी जो है हमसे डरते हैं अच्छी बात है मुंगेरी लाल के हसीन सपनों की दुनिया में खोए रहने के लिए स्वतंत्र है आप प्रत्यक्ष वार्ता होगी कभी वैसे आपने ऐसा अपने आप को छोड़ा नहीं कि प्रत्यक्ष वार्ता आपसे की जाए मगर जब होगी तो दृश्य बदल जाएगा ु का सुनिए

00:09:26:28 थोड़ा विचारधारा से भीभी पूरी तरी से नहीं जुड़े जैसे अभी कलयुग योगी जी है तो वो ये सब चीजें अभी जान रहे हैं व पूरा हरे समाज से वैसा कुछ भी इंट्रोड्यूस नहीं है रियल इंटेंशन को आप लीजिए तो ऐसा कुछ नहीं है यहां पर निष्पक्ष रूप से बुद्धि को खोल हम निष्पक्ष रूप से बुद्धि को खोल रहे हैं अभी य आर्य समाज को इन्होंने पूरा का पूरा स्वीकार नहीं किया है अर्थात ये है कि अभी उनके पास धर्म है ही नहीं तो क्या है ये जिसके पास धर्म नहीं है वो कौन हुआ अधर्मी अधर्मी कौन हुआ जिसके पास सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में कौन माता है कौन बहन है कौन पत्नी है यह चुनाव करने का निर्णय नहीं होता है भाई तुमने अपने आप मनुस्मृति का अर्थ किया नहीं तुमने अपने आप वेद भाष्य किए नहीं है और जिनके वेद भाष्य तुम पढ़ रहे हो जिनको तुम प्रमाण के रूप में प्रस्तुत कर रहे हो उन्हीं के वेद भाष्य पर अभी भी तुम्हें डाउट है उन्हीं की चीजों पर अभी भी तुम्हें डाउट है तो इसका अर्थ क्या हुआ इसका अर्थ क्या हुआ कि तुम्हारे पास जीवन को जीने के लिए निश्चित नियमावली नहीं है इसी को कहते हैं हुंडा हिंदू फिर वो भले ही रियल इंटेंशन हो व फिर भले हीय जिसका नाम लिया कलयुग का योगी हो या फिर य आपके विज्ञान दर्शन वाले हो यह दोगलापन

00:10:43:06 है आर्य समाज आर्य समाज दयानंद दयानंद जी करते करते भी आप उनके भी सगे नहीं हो रहे हैं क्योंकि कहीं ऐसा ना हो जाए कि किसी दिन य मुझको बहन से विवाह करने के लिए मना कर दे नहीं तो बताइए कौन सी निश्चित नियमावली आपके धर्म और अधर्म के लिए य और धर्म जब आप आर्य समाज का पक्ष रखने वाला होते हुए भी आप कह रहे हैं कि हमें उस पर भी अभी पूरी तरीके से भरोसा नहीं किया है तो आपका सनातन सिद्धांत क्या है फिर नहीं है अभाव है यह है होंडा हिंदू इसी ब्रीड से आज हम आपको इंट्रोड्यूस कराने आए हैं उसका जो एक व्यक्ति है जो रियल इंटेंशन है इसके बारे में आज हम बात करेंगे रियल इंटेंशन वो व्यक्ति है जो सम समय पर आकर के यह कहता

00:11:33:20 है जो समय समय पर आकर के यह कहता है भाई आपस में मत लड़ो तो आज हम इसके ये जो सारे दोगले पन है इनको देखेंगे उसने क्या क्या किया है और क्या क्या आक्षेप लगाए हमारे ऊपर इन पर बातें करेंगे जैसे मैंने कई बार ऐसी कहानियां देखी और सुनी ऐसा नहीं है मैं ये नहीं कहूंगा कि मैंने अब तक अपनी जीवन में कोई फिल्म नहीं देखी हालाकि फिल्मों को को देखने के पक्ष में नहीं हूं मगर जब दिशाहीन थे तो देखी भाई तो मैं कभी-कभी ऐसी कुछ चलचित्र भी देखे कि जिसमें कि क्या होता था कि एक व्यक्ति होता था और उसमें वो मतलब कुछ ऐसा व्यक्ति जिसको की जनता मानती हो या सुनती हो वो व्यक्ति जब देखा जाता था तो उसकी अपनी ही लड़ाई में पूरी वो जो कहानी है निकल जाती थी ऐसी कई फिल्में है ऐसी कई कहानियां है जैसे कि कोई मान लीजिए शक्तिमान है या स्पाइडरमैन है तो इनका कभी कभी कोई कोई ऐसा भाग बना इनकी कहानियों का जिसमें उनकी पर्सनल लड़ाई में ही पूरी कहानी निकल गई जैसे श्री राम श्री राम जी क्या थे कि अगर देखा

00:12:48:21 जाए तो रामायण को उस पर्सपेक्टिव से देखे तो सीता माता का हरण हुआ उन्होने सीता माता को छोड़ा अगर इतने पार्ट की अगर वो कथा कही जाए तो क्या हुआ उनकी पर्सनल जो एक समस्या थी उसी में ही पूरी कहानी निकल गई तो मैं ये ऐसी कहानियों से थोड़ा सा दूर हटता था कि यह क्या बात है भाई उस कहानी को दिखाओ उसको महानायक के रूप में प्रस्तुत करो जो जिसकी पर्सनल कहानी ना हो जो समाज के लिए लड़ रहा हो उसकी पर्सनल उसकी कथा को आप लोगों को समाज तक पहुंचाए ये कैसी कहानियां है हालांकि श्री राम की वो बात अलग थी मगर जो और जो इस तरह की मैं कहानियां सुनता देखता था तो मेरे मन में ये भावना आती थी भाई इसकी जो ये जो पर्सनल कहानी इसको क्यों इतना बड़ा महानायक बता रहे इसने किया क्या इस पर जिसने वार किया उसको इसने जवाब दिया मगर उसके पीछे छुपा हुआ जो अर्थ था वह मैं ध्यान नहीं दे पाता था कि इस पर वार इसलिए हो रहा है क्योंकि यह लड़ रहा है क्योंकि यह समाज के लिए लड़ रहा है इस पर वार इसलिए हो रहे हैं इसकी जो पर्सनल कहानी है वो इसलिए इस रूप में आई है क्योंकि इसने समाज के लिए आवाज उठाई धर्म के लिए इसने आवाज उठाई इस उस पर पर्सनल अटैक चालू हुए और आज मैं भी तुच्छ सा व्यक्ति उसी

00:14:03:26 स्टेज पर आकर के खड़ा हो गया क्या हुआ मैं पूछता था लोगों से जाकर के ईश्वर सर्व शक्तिमान है कि नहीं वेद मंत्र कैसे आए क्यों क्योंकि जब आप ऐसा अर्थ दे रहे हो जिसम जिसका अर्थ अकाट्य नहीं है मगर उसको वेदों के प्रमाण की आड़ में आप लोगों को थोपना चाहते हो तब पूछना पड़ा कि भाई ये जो अर्थ आपके पास आए उसी परंपरा से आए जहां से वेद आए कि नहीं किसी को नीम निम्न या हीन भावना दिखाने के लिए नहीं मैं पूछता था क्या परम स्वतंत्र मोक्ष है तो यह एक जो भावना थी कि हम उन सिद्धांतों का प्रचार प्रसार कर दे समाज में जिसको कोई काट ना सके उन सिद्धांतों के नीचे हमारा समाज एक हो जाएगा और हम जो विधर्मी सनातन को नष्ट करने पर तुले हुए हैं पूरी दुनिया में जो खेल चल रहा है सनातन से लड़ाई का उसमें हम सशक्ति के साथ हम सब एक होक के लड़ सके तो क्या हुआ कि समाज के लिए गिलहरी वाला प्रयास जब करना हमने शुरू किया तो हमारी एक पर्सनल पर्सनल अटैक्स हम पर होने लगे जिनका जवाब हमें देना पड़ रहा है अब जो व्यक्ति आज य जवाब देते हुए में देखेगा व यही सोचेगा भाई तुम कर क्या रहे हो समाज के लिए क्या कर रहे हो तुम समाज के लिए तुमने क्या किया कुछ नहीं तुम तो अपने जो तुम पर पर्सनल टैक्स कर रहा है व उसका तुम जवाब दे रहे हो

00:15:18:27 उसका तुम उत्तर दे रहे हो तो ये स्थिति क्यों आई क्योंकि हमने समाज के लिए कुछ करने का सोचा कि नहीं भाई मैं जब पार्क में जाता था था तो वहा रामपाल की स्टॉल्स लगे रहते थे दुर्गा माता को बुरा भला कहने वाले लोग खड़े रहते थे मुझे नहीं सहन हुआ नहीं सहन हुआ तो मैंने आवाज उठाई तो आज आवाज उठाई है तो पर्सनल टैक्स तो झेलने पड़ेंगे मेरी अपनी लड़ाई है भाई सबको मतलब नहीं होना चाहिए इससे मेरी अपनी लड़ाई हो गई अ अब ये सामाजिक कहां रहा तो आज मुझे वो चीज समझ में आई कि वो जो महानायक होते हैं या नायक होते हैं काल्पनिक होते हैं या श्री रामचंद्र जीसे होते हैं इनकी पर्सनल लड़ाइयां पर्सनल नहीं होती है इनकी पर्सनल लड़ाइयां भी सामाजिक समाज के लिए होती है धर्म संस्थापन के लिए होती

00:16:11:01 है तो एक भाई साहब पूछ रहे हैं कि दयानंद का भगवान क्या होता है ईश्वर तो सभी के हैं हां दयानंद जी के भगवान से अर्थ है कि दयानंद जी के द्वारा जो ईश्वर की परिभाषा दी जाती है वो परिभाषा के अनुसार वह सर्वशक्तिमान है या नहीं ठीक है लोरेंस जी तो अब एक आगे इन्होंने अब इन्होंने रियल इंटेंशन वालों ने हमसे हमारे बारे में खूब अनाप सनाप जो मन में आया बका और यह व्यक्ति हि हिले बिना बात नहीं कर पाता ऐसे ऐसे करके ही बात करता है वो उसको जेनेटिक मिला है या फिर वो कुछ हल्का फुल्का कुछ अधी पौआ का ले लेता है आने से पहले तो पता नहीं मगर ऐसे ही बात करता है मेरे भाई मेरे भाई तो आज बात करते हैं मेरे भाई से तो अब सबसे पहली बात ये आती है क्लेम करता है कि भाई स्त्री और जो शूद्र है इस विषय में आप कहते हो कि तुमको अधिकार नहीं है यह वो तो सबसे पहले तो इनका य दोगलापन दिखा दूं मेरा एक वक्तव्य दिखा दीजिए जहां मैंने कहा हो कि इनको अधिकार नहीं है तुम नीच हो इसने अपनी वीडियो में कहा है कि

00:17:26:02 तुमको अधिकार नहीं है तुम नीच हो मैं कहता हूं इनके लिए मैंने अगर यह कहा हो मैं उसी क्षण अपना चैनल डिलीट कर दूंगा कि तुमको अधिकार नहीं है तुम नीच हो क्या है वर्ड्स को ट्विस्ट करके प्रस्तुत करने की कला आनी चाहिए आपको आपको कैसे सामने वाले को बुरा साबित करना है वो आना चाहिए तो इन्होंने अपने उस वीडियो में कुछ भी ऐसा तर्क और प्रमाण सहित कुछ नहीं कहा बस केवल लोगों की भावनाओं से खेला है लोगों की भावनाओ से खेलने का अर्थ जानते हैं ना क्या होता है मैंने एकद बार अपने वीडियो में बताया है कि जब मैं छोटा था अपने मित्रों के साथ ऐसा मजाक कर देता था सिर्फ इतना कह देता था कि तुम्हारे चेहरे पर जो मुस्कान दिखती है वह खोखली है तुम अंदर से बहुत दुखी हो लगभग 90 पर लोगों से मैंने यह बात कही और उन्होंने कहा अरे वाह आपने तो मेरे दिल की बात छीन ली और मैं एक लाइन और कह देता था कि आपको सबने धोखा दिया पर आपने सबके साथ जो है वो किया आपने सबका आपने सबके साथ किसी के साथ विश्वास घात नहीं किया पर सबने आपके साथ विश्वास इतनी एक दो बातें में उनसे कह देता था तो क्या होता था वो व्यक्ति तुरंत अरे वाह इसने हमारी ओो ने भी यही काम किया आचार्य प्रशांत भी यही काम करते हैं जो तथाकथित है यही

00:18:41:07 काम करते हैं क्या काम करते हैं कि जब उनके पास युक्ति और प्रमाण नहीं होता है तो प्रोपेगेंडा फैलाते हैं ऐसी बातें बोलते जिससे व्यक्ति कनेक्ट हो जाए उनका कोई सिर पैर नहीं होता है अच्छा अब यह कहते हैं कि स्त्रियों का अप ना होना जो है स्त्रियों का जो वेद अध्ययन है उसके बारे में शास्त्र क्या कहते हैं परंपरा प्राप्त यह बताना जो है स्त्रियों का अपमान है है ना ये कहां के सनातन सिद्धांत है माता का अपमान है तो अब सबसे पहली बात है इन्होंने कहा कि हमने कहा है कि स्त्रियों को घर के अंदर रहना चाहिए नहीं पूज्य गुरुदेव ने क्या कहा जब स्त्रियों की बात आई उनसे पूछा गया स्त्रियों के लिए कैसा जीवनयापन कि अपने शील की सुरक्षा भंग ना हो अपने शील की गरमा भंग ना हो इस दायरे में रहते हुए आप खूब उड़ान भरिए धर्म कहता है शास्त्र कहते हैं और परंपरा प्राप्त आचार्य कहते हैं मगर इसने क्या किया इस व्यक्ति ने वर्ड्स को ट्विस्ट किया जो शास्त्रों की जो परंपरा प्राप्त शास्त्रों की जो मर्यादा है व अगर हमने बता दी तो हमने यह कहा कि भाई स्त्रियां नीच है या शूद्र नीच इसने ऐसे प्रस्तुत कर दिया मैं

00:19:56:12 इसको एक निमंत्रण दे रहा हूं यह व्यक्ति आकर के मुझे दिखा दे कि मैंने कहां यह बात कही है कि स्त्रियां नीच है इसलिए उन्हें अधिकार नहीं है जो इसने अपने वीडियो में 15 बार बोला है कम से कम वही भावनात्मक खेल वही कि तुम्हारे साथ धोखा हुआ वही माइंड से कनेक्ट करने वाली बातें तुरंत व्यक्ति धोखा हुआ हो या ना हुआ हो तुरंत भाव हो जाएगा वही बात है य ये कोई बातें बेसिर पैर वाली है जो तुमने अपने पूरे वीडियो में की है बाकी अभी रियल इंटेंशन की रियल जो उनका इंटेंशन है क्या हमने हुंडा इंदू के अर्थ में जाना और अभी सनेह सने और जानेंगे

00:20:36:28 तो अच्छा दूसरी बात अब यह आती है कि ऐसा तो है नहीं कि सभी जो स्त्रियां हैं उनका जो यज्ञ पवित है वो हो रहा है अब इनके अनुसार जो है यज्ञ पवित से ही स्त्री जो है सुलक्षणा मानी जाएगी इनके इनके कथानक के अनुसार यही है तो इसका मतलब इस देश में जितनी स्त्रिया है वो सब नीच है इनके अनुसार क्योंकि उनका यज्ञ पवित नहीं हुआ और यज्ञ पवित से रोकने वाला व्यक्ति यह कह रहा है कि तुम नीच हो इसलिए नहीं होगा तो यानी कि जिनका यज पवित नहीं हुआ है जिन स्त्रियों का उसको तुम नीच कह रहे हो यह होता है तक अभी चलते हैं और और आगे चलते हैं ठीक है अच्छा वैसे एक बात बता दूं कि तुम्हारे जो जिस मत को क्या कहूं मैं तुम्हारे बारे में तुम्हारे बारे में तो कुछ बोली बोला भी नहीं जा सकता ना कि भाई तुम आर समाज को मानते हो खट से मना कर दोगे तुम हो क्या तुम्हारा अस्तित्व क्या है भाई तुमने किसके वेद भाष्य को स्वीकार किया है वह तुम्हारा धर्म है वेद धर्म है ना मगर तुमरे समाज को मानते नहीं हो दयानंद जी को पूरा मानते नहीं हो इसका मतलब दयानंद जी पर विश्वास थोड़ा सा डाउट है

00:21:51:28 इसका मतलब कि जिसके तुम जो तुम वेद भाष्य पढ़ रहे हो उस पर थोड़ा डाउट है इसका मतलब तुम्हें मालूम नहीं कि मेरा धर्म क्या है तुम पक्के नहीं हो अपने धर्म के वरना पूछो शीशे में खड़े होकर के पूछो कि तुम्हारा धर्म है क्या इसको कहते हैं होडा हिंदू ठीक है तो फिर अब तुम्हे पहले एक बात बता दूं ठीक है आंशिक रूप से ही सही तुमने अगर मनुष्य ये आर्य समाज को स्वीकार किया है हिलने वाले प्राणी तो आर्य समाज मैं जितनी स्त्रियां है ना जिन्होंने यज्ञ पवित धारण कर लिया और जो एक दो इस तरह के मत है परिवार इत्यादि जिन्होंने यज्ञ पवित धारण कर लिया है ठीक है उनसे कई गुना ज्यादा कई गुना ज्यादा उन परंपराओं की शिष्या हैं स्त्रियां जो ये कहती है कि स्त्रियों को यज्ञ पवित नहीं कराने की आवश्यकता है नहीं कराना चाहिए अमुक अमुक कारण है अमुक अमुक शास्त्रों में दिया गया है तो वो सब संतुष्ट है खुश है प्रसन्न है और साथ ही साथ आपके अनुसार क्या है वो सब नीच नीच है ना नीच शब्द को याद रखना बारबार काम आएगा आगे चलते

00:23:09:27 हैं अब इनका कहना है कि क्या जिनका यज्ञ पवित नहीं होता है जिनका ये भले ही शूद्र की बात कर लो जिनको अधिकार नहीं है शुद्ध का अर्थ ही है जो चतुर्थ वर्ण है तो इनका कहना है जो बाकी के तीन वर्ण है जिन्ह द्विज कहा जाता है दज तब जब उनका दूसरा मतलब पवित्र हो जाए तब उन्हें द्विज कहा जाता है तो जो दज की बात है कि आपका कहने का अर्थ है कि यदि आपका

00:23:50:10 यह हा हां हां बहुत सारा मटेरियल था तो एकदम से गायब हो गया था ठीक है अब बात ये आती है कि इन्होंने एक बात कही कि क्या भाई जिस क्या भाई यह जो जिनका तुम यज्ञ पवित ना कराने की बात कर रहे हो क्या वह उनके चेतना नहीं होती इसका मतलब पहली बात तो यह है कि जितनी महिलाओं ने संसार में जितने महिलाओं पुरुषों ने यज्ञ पवित नहीं कराया है वो चेतना हीन है तुम्हारे अनुसार अरे मेरे भाई तुम जिनके साथ बैठे हो ना तुम जिनके साथ खा पी रहे हो तुम जिनके साथ उठ बैठ रहे हो तुम जो तुम्हारी जो टीम है तथाकथित हुंडा हिंदुओ की टीम भी बन गई है पता नहीं आप लोगों को अभी आगे बात करूंगा टीम के बारे में डा हिंदुओ की टीम है इनमें से ही कई लोगों का यज्ञ पवित नहीं हुआ होगा तो ये सब लोग क्या है चेतना हीन और नीच है ना और तो और ये लोग यज्ञोपवित होता क्यों है यज्ञ पवित इसलिए होता है कि जिससे व्यक्ति वेद अध्ययन में अधिकार प्राप्त कर सके मगर इनकी जो टीम है इतनी बात

00:25:05:10 तो आर समाज भी मानता है मगर यहां पर नहीं मानेगा इनकी जो टीम है उस टीम में जाने कितने लोग हैं जो बिना यज्ञ पवित के ही वेद अध्ययन कर रहे हैं और वेद की बातें आपको यहां करते हुए मिल जाएंगे टीवी पर टब पर तो क्या हुआ कि अब यह जो भाई साहब है इन्होंने लिखा है इन्होंने यह कहा कि अगर तुम इनको वेदा अध्ययन की बात करते हो सबसे पहली बात तो यह है कि वेद अध्ययन का मतलब यह नहीं होता है कि व्यक्ति को उसको जो विकास है या मुक्ति का जो प्रबंध है वो छीन लेना उसका जो मुक्ति का प्रबंध है दूसरे तरीके से होगा और इनका जो जो वेदा अध्ययन वाली बात है इनका मुक्ति का प्रबंधन अलग तरीके से होगा इनका भौतिक जीवन अलग तरीके से निकलेगा दूसरे का अलग तरीके से उनको शिक्षा से वंचित करने के लिए नहीं कहा जा रहा है कि तुम नीच हो तुम ये हो तुम वो हो ये सब के अपने चुनाव वाले डायलॉग है ना तो खैर तुम्हारी बात देख लेते हैं अगर विधि निषेध को बताना अगर किसी व्यक्ति के संबंध में विधि निषेध को बताना यह घोषित करना है कि जिसके लिए हम विधि निषेध बता रहे हैं मतलब तुम यह काम नहीं करोगे अगर यह घोषित करना सामने वाले को नीच सिद्ध करता है

00:26:20:14 तो यह तुम्हारी सत्यार्थ प्रकाश इसमें यहां पर ये आपके जिनको आप मानते मेंटर हल्का फुल्का उनको भी समय समय पर आप दे देते हैं नहीं मानते हल्का फुल्का मानते हैं तो वहीं पर यह कह रहे हैं रजस स्ला शास्त्रों में रजस स्ला आदि स्त्रियों का स्पर्श करने का निषेध है अब ये विधि बता दी ग र स्त्री के लिए तो क्या नीच हैय क्या इसके चेतना नहीं है ये क्या करोगे

00:26:54:15 इसका मैं देखो भाई कमिया सबके अंदर है ये भाई साब य भी क आप सोचिए य सनातन धर्म की रक्षा की बात करते हैं और यह भी कहते हैं देखो कमिया सबके अंदर भाई दयानंद में कमी है तेरे हिसाब से शंकराचार्य में कमी है तेरे हिसाब से राघवाचार्य में कमी है तेरे हिसाब से सब में कमी है रक्षा क्यों कर रहे हो अरे भाई अपने सनातन धर्म पर तुम्हें गर्व नहीं है क्यों रक्षा कर रहे हो मेरे सनातन धर्म में कोई कमी नहीं है वो धर्म है इतने दोगले लोग हो मतलब तुम सामने वाले से इसलिए लड़ रहे हो कि चीज तो मेरी भी गलत है मगर क्योंकि मैंने उसको स्वीकार किया इसलिए मैं उसकी रक्षा कर रहा हूं बस यह लड़ाई धर्म की नहीं तुम्हारी वर्चस्व की

00:27:50:09 है समय समय आने पर कह दोगे सब में कमी है अरे भाई तुम तुम फिर रक्षा क्यों कर रहे हो क्यों मरने मरने मारने की बातें कर रहे हो फिर अपना लो उसका धर्म क्यों रक्षा कर रहे हो जब तुम्हारे धर्म में कमी है तो क्योंकि तुमने तो कोई ऐसी चीज दी नहीं ना जिसमें कमी ना हो दे दो वही मान ले होंडा हिंदुओं की निश्चित नियमावली दे दो हमें चलो नहीं दे पाओगे क्योंकि तुम्हें धर्म से कोई मतलब नहीं है अपने चैनलों से मतलब है ये हिल हिल के बातें करने से मतलब है तुम्हें अदी पवे के नशे में इसी तरह बात करते हो ना

00:28:32:14 समय आने पर अपने धर्म पर उंगली उठा दोगे आर समाज पर उंगली उठा दोगे दयानंद जी पर उंगली उठा दोगे शंकराचार्य पर उंगली उठा दोगे अरे तो तुम्हारा धर्म आ कहां से रहा है कौन सा धर्म है तुम्हारा धर्म को ही प्रस्तुत करने वाले अलग-अलग चेहरे हैं ये अगर इनमें से सब लोग गलत है तो धर्म गलत है ना तुम्हारा फिर या तुम्हारा धर्म से पैसा है अर्थ है तो क्या क्या देखा हमने कि विधि निषेध बताने से यदि नीचता सिद्ध हो रही है कहां का सिद्धांत है ये कि अगर हमने किसी को बता दिया कि तुम यह काम नहीं करना चाहिए शास्त्रों में य चीज दी हुई है तो हमने उसे नीच कह दिया वो भी घृणा तुल्य घणा मूलक नीच

00:29:28:09 कब कह दिया और यदि है तो यहां पर ये क्या कहा जा रहा है रजस्वला स्त्री का स्पर्श नहीं होना चाहिए नीच होती है क्या वो तुम्हारी माता नीच हो जाती है क्या जाओ पूछना बताना अपनी मां को जा कर के रजला की स्थिति में तुम नीच होती हो क्योंकि अगर स्पर्श का विधि निषेध बताया है शास्त्रों में तो उसके अनुसार फर तुम नीच हो सही कहा था मत पढ़ो चक्कर में कोई है नहीं टक्कर में सुनो अब

00:30:02:27 आगे हम आगे क्या है भाई अब भाई संस्कार विधि में यह कहा गया है कि जिसको अपने माता पिता जिन माता-पिता को अपने बच्चे को मूर्ख बनाना होता है वह उसको जो है शूद्र शूद्र का नाम दे या जो भी है इस तरह की कुछ बात है मैं यहां पर बता देता हूं मूर्ख के लिए शूद्र का उपयोग होता है मूर्ख के लिए शूद्र का उपयोग होता है शूद्र कौन है जो चतुर्थ वर्ण है जिसका जनव नहीं होता तो मूर्ख जो है वो शूद्र है तो मूर्ख के चेतना नहीं होती क्या वो इंसान नहीं होता मनुष्य नहीं होता हो गया विधि निषेध तो नीच है फिर है

00:30:55:21 हां इसीलिए कहता हूं हमारा ये जो नैरेटिव है ना मत पढ़ो चक्कर में कोई नहीं टक्कर में अभी लोगों के चुभने लगा है अच्छी बात है चुभना चाहिए आप लोगों से भी कहूंगा अभी इसका उपयोग करना शुरू करो आप लोग शूद्र का अर्थ ही कर दिया मूर्ख इसका मतलब आज दुनिया में जितने भी तुम्हारी टोपी तुम्हारे ही सर आज दुनिया में जितने भी सर्विस डिपार्टमेंट में काम करने वाले लोग हैं वो मूर्ख है बताओ अपने चैनल पर जाकर के चिल्लाओ मूर्ख है वो सब लोग शास्त्रों के मर्ग को तो समझना नहीं है ना हवाई हवाई बात करनी है

00:31:41:24 करो हमसे कह रहे हैं कि भाई तुम्हारी मां पागल है उसके बुद्धि घुटनों में है उसको जो है वो नहीं है है ना यह हमसे कह रहे हैं तुम कह दो अपनी मां से जाकर के तु नीच हो जाती हो और महीने हम नहीं मानते कहां लिखा है सनातन सिद्धांत अगर कोई वेद नहीं पढ़ेगा तो वो नीच हो जाएगा कोई वेद नहीं पढ़ेगा तो वो जो है वो कहलाएगा पागल कहलाएगा कहां का सनातन सिद्धांत है तुम्हारा अपना तुम्हारा अपना सिद्धांत है सनातन सिद्धांत नहीं तुम्हारा कोई सिद्धांत ही नहीं है तुम तो समय आने पर वो मनुस्मृति को श्लोक को भी मना कर दोगे तुम्हारा मन चल गया मन चले हो तुम तो मन चले हो मनुस्मृति का श्लोक है या कहीं और भी धर्म की व्याख्या हो रही है माताओं बहनों से विवाह मत करो तो तुम उन लोगों में से हो य होडा हिंदू उन लोगों में से हैं जहा अगर इनका मन चल गया तो ऐसे श्लोकों को भी नकार देंगे हम नहीं मानते कहां से आ रहा है शंकराचार्य परंपरा हम शंकराचार्य परंपरा को थोड़ी ना मानते कहा से आ रहा है दयानंद जी सेमा जी थोड़ी ना कहां से आ रहा राघवाचार्य से मैं वैष्ण वैष्णव परंपरा से थोड़ी ना ह मेरा तो धर्म मेरा है मनम धर्म है मेरा मेरे पास शास्त्र नहीं है मन चलाऊ

00:32:55:21 मैं और यह मन चला होना भी तुम्हारी सत्यार्थ प्रकाश से ही दिखा दूंगा कि मन भटकता है ठीक है तो हमारी मां पागल नहीं है हां आप जरूर बताना अपनी माता जी को कि आपके अनुसार जो सिद्धांत है उससे यही सिद्ध हो रहा है और आगे भी ऐसी कुछ बातें आएंगी तो अपने हृदय को पक्का करके चलो पहले भी बहुत सी बातें की है भाई साहब ने तो हमने कभी जो है बात नहीं की मैंने कहा कि ठीक है करने दो भाई वैसे भी वही वाली बात कि हम अपनी लड़ाई तब तक लड़ते रहे भाई हम लोग समाज के लिए निकले धर्म के लिए निकले हैं हम लोग इसलिए नहीं निकले कि किसी ने मुझको व्यक्तिगत आक्षेप कर दिया बस उसी का निराकरण प्रस्तुत करता रहू है ना इसके लिए नहीं निकले मगर क्योंकि लोग यहां पर दी जाने वाली जानकारियां प्राप्त करते हैं तो फिर अगर इन जानकारियों पर आक्षेप लगता है तो फिर कभी-कभी उसका निराकरण प्रस्तुत करने की आवश्यकता भी दिखाई देती

00:34:06:18 है अब आगे वही वाली बात फिर से इन्होंने क्या किया भाई प्रोपेगेंडा को दोहराया है शूद्र यज्ञ पवित स्त्री यज्ञ पवित वही इर्दगिर्द क्योंकि इन्होंने क्या किया है ना कि इसके नाम पर ही इनका जो सेक्ट है जिसके पक्षधर बनते हैं हालांकि उसके भी समय समय पर विरोधी बन जाते हैं अपनी दुकान के लिए पक्षधर किसके हैं ये अपने आप के पक्षधर किसके हैं इनके नियम क्या है वो जो रियल इंटेंशन बताएगा धर्म क्या है वो जो रियल इंटेंशन कहेगा मैं आर्यवीर दीदी की भी बात नहीं मानूंगा मैं कोई आ आर्यवीर समाज से नहीं हूं हा मैं मोहित गड़ की भी बात नहीं मानूंगा किसी दिन मैं कोई उसका वो थोड़ी ना मैं कौन किसकी बात मानूंगा मैं किसी के अनुग हो कर के नहीं रह सकता पड़ में जाए गीता का वो श्लोक जहां कहा हो कि तेरे लिए कर्तव्य कर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण है प में जाएगी भगवान श्री मैं तो अपने अनुग रहूंगा मेरी इंद्रिया मेरा काम मेरा विषय जो कहेगा मैं वो करूंगा उसके लिए जिसकी जिस पंक्ति की आड़ लेनी होगी मैं वो करूंगा मेरा नाम है होंडा हिंदू मैं हूं होंडा ू मैं हूं होंडा

00:35:19:21 हिंदु अब इन्होंने फिर बात कही कि तुम्हारा पिछला जीवन क्या था तुम तुम जो है ये मानते हो जन्म है वो है ये है वो है जो है फिर से हमारे पिछले जीवन के कुछ जो चित्र को प्राप्त हो गए हैं उस पर बात कर दी अरे भाई हमने कभी अपने वीडियोस में इन इन बातों को लेकर कोई वीडियो बनाया है क्या कि दयानंद जी का पिछला जीवन कैसा था सन जी का पिछला जीवन कैसा था बनाया है भाई हम कभी भी उन बातों पर बात नहीं कर रहे हैं जिन बातों से समाज का हित ना हो ऐसी बातों पर बात नहीं करते हम लोग कि इसकन के मंदिरों में क्या हो रहा है इससे कुछ नहीं बदल जाएगा केवल सिद्धांतों की बात कर रहे हैं मेरे भाई समझ क्यों नहीं रहे हो अकाट्य सिद्धांत अगर ईश्वर अनंत सामर्थ वान है तो फिर उसमें बाधा क्यों है अवतार लेने में यही बातें हैं जो हमें धर्मिंदर जिता सकती है इसको क्यों नहीं भेद में डाल पा रहे

00:36:38:00 हो फर हमने गलती कर दी भा अकाट्य सिद्धांतों के प्रचार प्रसार में निकल गए हमने कहा कि हम शंकराचार्य का ही वो करेंगे हमने कितनी बार कहा हमारे वीडियोस में आप अपने क्या कहते हैं हमें केवल सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म दे दो हमने तो नहीं कहा कि दयानंद जी का बैकग्राउंड कैसा था श्रद्धानंद जी का बैकग्राउंड कैसा था हमने कहा क्याय सब बातें जो लोग कहते हैं जोय नीचता करते हैं हा चिन्म स्वामी जी दास दास जी के लिए हमें खेद है इस बात का वहां पर जो हो रहा है और इस बात का भी खेद है कि स्कोन ने जो है अपने हाथ खींच लिए अनऑफिशियल कर दिया उने व बहुत सारी एक्टिविटीज में काम करते हुए दिखाई देते थे और इस बारे में हम बात कर चुके पहले र

00:37:40:18 तो अभी कुछ दिनों पूर्व यह जो फैक्ट बाई अभिषेक है रामपाल का फॉलोअर उसने कितनी घृणित तरीके से बात की दयानंद जी के लिए हम तो वीडियो बना चुके हैं कि दयानंद जी के बारे में अपशब्द ना बोला करें मगर उसने जब ग्रहण तरीके से बात की हमने कभी भी इन चीजों का मिसयूज करने की कोशिश नहीं की आर्य समाज पर आक्षेप लगाओ वो ऐसे थे वो वैसे थे वो यह करते थे वो ये करते थे इन पर्सनल अटैक से आप केवल वो बैट बॉल खेलते रहो टेनिस की तरह इनसे समाज का कोई हित नहीं होना है कि शिवांश नारायण द्विवेदी पहले ऐसा था देखो देखो अय पाखंड है य वो है अरे भाई शिवास नारायण द्विवेदी के पिछले जीवन से क्या तुम्हारा ईश्वर सर्वशक्तिमान सिद्ध हो जा रहा है क्या वो क्यों नहीं सिद्ध कर रहे हो क्या तुम्हारा अशा स्त्रीय जने का जो जिसके ऊपर हमने प्रश्न किया था व शास्त्रीय सिद्ध हो जा रहा है क्या वो क्यों नहीं शास्त्रीय सिद्ध कर रहे

00:38:35:08 हो क्या तुम्हारे वेद मंत्रों की व्याख्या मिल गई क्या कैसे आ तुम्हारे वो क्यों नहीं दे रहे हो जो प्रश्न तुमसे मूल पूछे गए हैं उनकी बात ना करके तुम जब यह पर्सनल चीजों पर आते हो तो इसका अर्थ क्या है तुम्हारे पास उनका उत्तर नहीं है नहीं बात करोगे कभी सर्वशक्तिमान पर आए थे तुम माउंट आबू वालो से वाले अभी बात करूंगा आएगा क्रम में है फिर क्या है भाई बीच बीच में कहेंगे आदि गुरु शंकराचार्य को बदनाम कर रहे आदि गुरु शंकराचार्य को बदनाम कर रहे हो अरे कौन है आदि गुरु शंकराचार्य हवा है क्या कुछ मालूम है ना उनके बारे में गीता का भाष्य किया उपनिषद का भाष्य किया अद्व दर्शन की स्थापना की यह सब है ना उनके बारे में जानते हो ना कैसे पता सपना आया था क्या दिमाग खराब है वो हिलना हिलने की आदत जो पड़ गई है ना उसी कारण दिमाग खराब है अरे भाई जो आदि शंकराचार्य जी हैं उनके बारे में जो जानकारियां आपको हैं जिसके कारण आप उनकी जय करते

00:39:50:10 हो वो जानकारियां कैसे आई आप तक उनके शास्त्रों के माध्यम से ना वो शास्त्र आपको किसने दि हाथ में वो भी कह दो आर समाज से लिए हैं शंकराचार्य की चीजें भी शंकराचार्य वालों से नहीं आई है वो भी आर समाज से आई है यही है ना फिर जय शंकराचार्य शंकराचार्य फिर लिख रहे हैं 13 अध्याय के दूसरे शलोक जाने कितनी बार परंपरा की बात कर रहे तुम्हारी परंपरा मैं गुरु को नहीं मानता निरुक्त में कह दिया निरुक्त कहां से आया तुम्हारे पास अरे भाई अगर आपत्ति काल में जो है जब गुरु नहीं होता है तो तर्क ही हमारा गुरु होता है य उस समय के लिए है फिर वहां पर आप वेद मंत्रों का भी सहारा मत लो ना वेद मंत्र लेने के लिए तो गुरु ले लिए ना आपने केवल तर्क पर खड़े रहो यह है तर्क फिर वहां बदतमीज कर रहे हो गाल प पप्पी ये वो गाल में पप्पी वाली तुमने फोटो डाल रखी है और ये तुम जो है भूतकाल में थे तो फिर ये ऐसे कैसे हो गए ब्राह्मण अरे तुमने हमारी परंपरा जो प्राप्त चीजें हैं ये सब जान लिया करके प्रात दोष

00:41:05:13 किसे कहते हैं देर से जने होने पर क्या होता है क्या नहीं होता है बस लगे वही प्रोपेगेंडा फैलाने में और अगर कहीं से तुमको वह पिक्चर प्राप्त हो भी गई है तो वह पिक्चर क्या इसलिए है कि उसको उसको लेकर के लोग वहां तर्क वितर्क करें कि इस पर क्या होना चाहिए क्या मतलब उसका मिसयूज करें ये हमने ला था अच्छा अगर तुम्हारे फैमिली की किसी मातृ शक्ति की या किसी की फोटो अगर मिल जाती है तो हम तर्क वितर्क ना करके उसको एडिट करें कोई हो हम नहीं करे कोई और करे तो फिर वो तो ऑफेंस नहीं होना चाहिए क्योंकि उसने क्योंकि फसबुक पर डाली है तो अब उसकी फोटो के साथ कुछ भी किया जा सकता है चलेगा नहीं किया जा सकता है ना मेरे भाई बात यह है किस उद्देश्य से किस परिपेक्ष में कहां पर क्या चीज डाली गई है यह आपको देखना सोचना समझना पड़ेगा ना वरना तुम ये इजाजत दो कि तुम्हारे रिलेटिव में कहीं पर किसी मातृशक्ति की कहीं से किसी को फोटो अगर मिल जाए तो वह उसको एडिट करके कुछ भी बनाए उसका नहीं दे पाओगे तो अपने ही सिद्धांतों का खनन क्यों कर रहे हो क्योंकि

00:42:21:28 अधि पवे का नशा है इसीलिए कर रहे हो हिले बिना बात नहीं कर पाते ना अच्छा इसमें एक चीज और कह सकते हो तुम इसमें एक चीज ये कह सकते हो उंडा हिंदू क्या कह सकते हो कि भई तुमने भी तो बात की किसी कन्या के वो जने के हमने जने के बारे में बात की उसके पर्सनल जीवन के बारे में नहीं जो चीज धर्म में आ गई धार्मिक चीजों के रूप में जब प्रस्तुत कर रहे हो किसी को और धार्मिक सवाल किया हमने निर्णय भी नहीं दिया यह गलत ही है हमने कहा क्या यह शास्त्रों में लिखा है कपन मेखला लिखा है यह नहीं लिखा है तो लिखा दिखाओ कभी नहीं दिखा

00:43:05:26 पाओगे और अगर कर भी दी चलो दुर्जन तोष न्याय से कर भी दी तो अब जिस व्यक्ति ने सवाल किया है उसकी दुनिया में जो भी कोई जुड़ा हुआ होगा उससे रिलेटेड रिलेटेड तुम्हे जो भी चीजें मिल जाए उनका यूज करोगे और फिर कहोगे यह रियल इंटेंशन वाले हैं हम अगर कर भी दिया है मैंने तो मुझसे जुड़े हुए जितने भी दुनिया में जीव होंगे उन्होंने तुमसे सवाल कर लिया कि वेद मंत्र कहां से आए तुमसे सवाल कर लिया ईश्वर सर्व शक्तिमान है कि नहीं तो तुम अब मेरे से रिलेटेड जितने भी लोग होंगे उन सबको खींच लाओगे इसमें यही सनातन सिद्धांत है यही तुम्हारा वो है सत्यवादी सत्यवादी नहीं हो डोले हो धर्म हीन धर्म हीन कौन होता है मालूम है शास्त्र में लिखा है हां जिसको सामने खड़ी हुई हम वो होता है ठीक है और चलते हैं तभी कुछ ऐसी चीजें आने वाली जो बिल्कुल ही अन एक्सपेक्टेड होंगी जो लोग देख रहे हैं वो छोड़े ना तो भाई इसके बाद भी अगर हमारा जीवन कन्वर्ट हुआ है तो क्या कभी हमने ये कहा है कि हम भैया बहुत मतलब हम जो है ब्राह्मण श्रेष्ठ ब्राह्मण ये है वो है हमने य कहा है क्या हम सदैव कहते हैं शंकराचार्य के अल्पज्ञ

00:44:21:02 शिष्य श्री राम के साधारण भक्त कोई अगर हमें आकर गुरु कहने लगता है आचार्य कहने लगता है उसको मना कर देते हैं क्या मैं गुरु मत कहो मैं आचार्य मत कहो इससे पता नहीं चलता कि हमय खुद कहते हैं कि हम जो है वो ब्राह्मण नहीं है जो ब्राह्मण श्रेष्ठतम माना जाए हमने तो नहीं कहा कि हम जो यज्ञ कराने के लिए उपयुक्त है या फिर फलाने फलाने जितने भी वेदोक्त कर्म होते उनके लिए उपयुक्त हमने कहा है क्या कहीं दिखाओ कहां पर कहा है यथा सामर्थ प्रयास कर रहे हैं शास्त्रों को जानने के बाद शास्त्रों के अनुसार चलने का यथा सामर्थ

00:44:59:15 क्योंकि धर्म को पालन ना करना ना कर पाने में आपकी व्यवस्था होनी चाहिए चयन नहीं तुम्हारा चयन है तुम्हारा चयन है धर्म का पालन ना कर पाना और अगर हमसे कहीं पर हो रही है तो व व्यवस्था है ज ज्ञान नहीं है तो व्यक्ति ने किया तुम तो जानबूझ के कर रहे हो हमने यही सवाल किया ना जो जने कर रहे हो गलत विधि से तुमको विधि बताने वाला नहीं है क्या पता है तुम्हें होता है कि नहीं होता है चलो खैर आगे चलते

00:45:34:02 हैं अब इन्होंने इनका कहना है कि भाई तुमने अपनी घर की वो फोटो डाली क्यों हमने बात की वो तो बाद की बात है ये वो है सैकड़ों ने डाली है अब वो वाली समष्टि वाली बात आ जाती है जो मैं कह रहा था ना कि लड़ाई मेरी अपनी अकेले की है तो दुनिया में पता नहीं कितने ठीक ठाक घर होंगे जो संभ्रांत होंगे जिनकी गरिमा होगी और उन्होने अपनी पिक्चर्स फेसबुक पर सोशल मीडिया पर डाली होग और हमने भी आज से पहले कुछ छ सात साल पहले कुछ डाली ठीक है अब भाई वो जो छ सात साल पहले की फोटो है डाली नहीं थी इसको भी लोग कट करके निकाल लेंगे डाली बाद में है फोटो छ सात साल पहले की है मगर अगर डाली भी है तो इस तरह से एक सामान्य लोग जो है आजकल जो जिस तरह से उनके ऊपर वातावरण का वो है प्रभाव तो ना जाने कितने लोग डाल रहे हैं तो इन्होंने उनकी फोटो उठा कर के प्रश्न क्यों नहीं किया हमारी फोटो उठा कर के प्रश्न क्यों किया क्यों किया क्योंकि मैं चला गया था इनके मंदिर हां मैंने पूछ लिया था क्या तुम्हारा ईश्वर ईश्वर है कि ईश्वर के नाम पर ईश्वरा भास है ये है दिक्कत क्या तुम्हारा धर्म धर्म है धर्म के नाम पर धर्मा आभास है ये है दिक्कत क्या तुम्हारी मुक्ति

00:46:49:02 मुक्ति है मुक्ति के नाम पर मुक्ति का आभास है ये है दिक्कत ये परेशानी है आवान से ये परेशानी है शिवांश से और फिर इसको शिवांस की पर्सनल लड़ाई बना दो भाई अरे भाई तुम जवाब क्यों नहीं देते तुम्हारा ईश्वर अनंत सामर्थ वान है कि नहीं दे दो ना बंद कर दूंगा चैनल यह बात नहीं करोगे दूसरी बातें करोगे यह बात नहीं करोगे दे दो तीनों तुरंत आ समाज का प्रचारक हो जाऊंगा ईश्वर सर्वशक्तिमान परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म तीन चीज दे दो तुरंत आ समाज का हो जाऊंगा जितने जैसे लोगों कहोगे वही लगा दूंगा तुम्हारे साथ बैठ कर के मैं भी उंडा हिंदुओ की तरह जिस तरह तुम कहोगे वैसे ही स्ट्रीम करने लगूंगा हालांकि तुम आर समाजी नहीं हो तो तुम कहोगे हुंडा हिंदू बनो आर समाजी मत बनो ये भी एक दिक्कत

00:47:46:16 है प्रॉब्लम बस यही थी कि हमने तुम्हारे वो तास के पत्तों का जो महल तुमने खड़ा किया है ना अपना कपोल कल्पित उनको छू दिया था इसलिए तुमने हमारे जो बारे में जो ये सब बातें खोद के निकाली तुम्हारी वह बातें जो सार्वजनिक है हमने उनका उपयोग नहीं किया क्योंकि हमारा उद्देश्य किसी को नीचा दिखाना नहीं है अकाट्य सिद्धांतों को सामने लाना है अकाट्य जिसको काटा ना जा सके दोगलापन कि शूद्र को हमने नीचा कहा स्त्रियों को हमने नीचा कहा पहली बात शास्त्रों में भी यदि कहीं नीच वर्ड आया है नीचा वर्ड आया निम्न वर्ड आया है तो वह घृणा मूलक नहीं है व्यवस्था मूलक है अगर मैं जिस भवन में रह रहा हूं मेरा घर सबसे नीचे के फ्लोर पर है तो उससे ऊपर रहने वाले के लिए मैं नीचे हूं मैं नीच हूं वहां पर मगर यदि इसको गणा मूलक के रूप में पेश किया जाएगा तो यह बेवकूफी है यह व्यवस्था मूलक शब्द है मगर ऐसे शब्द जिनके दो अर्थ निकाले जा सकते हैं उसमें से जो दूसरा

00:49:01:19 जिससे कि अपना कार्य सिद्ध हो सके अपनी नकारात्मकता फैला सके उनका उपयोग करके ऐसे लोग जो है टई करते हैं इसको कहते टई जैसे व जाकिर नायक करता था मास का अर्थ गुदा भी है मास का अर्थ मास भी है तो कहीं अगर गुदे का ण आ गया तो मास हो गया यह है इनके इनका होंडा हिंदुओं का

00:49:34:20 धर्म आ जाओ ना एक वीडियो कहीं दिखा दो मुझे कहते हुए कि स्त्रियां नीच है उन्हें अधिकार नहीं है सदैव सम्मान से बोला है कि कैसे कैसे किसकिस कारण से क्या क्या है कहीं नहीं मैंने नीचता की बात की मगर क्योंकि इनकी दुकान ही चलेगी हम जैसों के विरुद्ध नफरत फैलाने से भाई अकाट्य सिद्धांत आ जाए तो बहुत सारे चैनल्स की क्या जरूरत रह जाएगी जब बच्चा बच्चा जानने लगेगा ईश्वर सर्वशक्तिमान है तो दुकानों को कम होना पड़ेगा ना जिनकी दुकाने चल रही है उनको तो दिक्कत होगी उससे हमारी तो जिंदगी इसी पर निर्भर है जीवन इसी पर निर्भर है धर्म भाड़ में जाए गीता भाड़ में जाए परंपरा भाड़ में जाए वेद भाड़ में जाए यह है होंडा हिंदुओं की

00:50:23:13 सच्चाई इन्होंने वहां पर एक जगह पर फिर व हमसे जुड़ी हुई मात शक्ति है उसके फिर ऐसे क्या कहते हैं ऐसे अंगों का भी नाम लिया है जि जो कि काफी आपत्ति जनक है यह इनके घर के संस्कार है और फिर अपने आप को ब्राह्मण कहते हैं जबकि इनके दयानंद जी के अनुसार ब्राह्मण तो व है जो सत्कर्म से युक्त हो और तुम वहां पर जो है ऐसे स्त्री के उन अंग उन अंगों की बात कर रहे हो खुल्लम खुल्ला तुम्हे कोई हिचक नहीं है

00:50:57:14 बोलने में शर्म नहीं आई तुम्हे चलो खैर अभी पूरी होते होते कानों में खून निकल आएगा देखो तो क्या हुआ तो भाई यह क्यों हो रहा है हमसे जुड़ी हुई दूर दराज का भी कोई व्यक्ति है जिसकी सामग्री इनको अगर प्राप्त हो रही है उसके ऊपर य आपत्ति जनक टिप्पणियां क्यों कर रहे हैं क्यों कर रहे हैं क्योंकि मैंने पूछ लिया इनसे कि क्या तुम्हारा ईश्वर सर्वशक्तिमान है या नहीं मैंने यह पूछ लिया इसलिए इनको दिक्कत है क्यों पूछा भाई बट रहा है हिंदू बटने दो मिट रहा है हिंदू मिटने दो यह सब मत पूछो केवल अंदी में लड़े रहो धर्म में हमारे भी कमी है हां बहुत कमी है हमारे धर्म में मेरे सनातन धर्म में कोई कमी नहीं है वो है सनातन धर्म सीना ठोक के कह रहा हूं बोलो ऐसे सीना ठोक के जो भी तुम्हारे शास्त्र है उनमें कोई कमी नहीं है नहीं बोलते हो समय आने पर उन्ही को मना कर देते हो क्या है तुम्हारा धर्म दोगलो होंडा

00:52:15:08 हिंदुओ सबसे बड़ी तकलीफ है यह सनातन समाज के लिए अरे भाई स्त्रियों का यज्ञ पवित पर अगर प्रश्न पूछ लिया तो ये अपमान कैसे हो गया तिरस्कार कैसे हो गया बता दो यह है इस इस तरीके से हो गया प्रश्न ही तो पूछा है वो भी उससे पूछा है जो नेता बनता है मंचों पर जा जा करके शंकराचार्य का की बुराई करता है उससे पूछा है उन आचार्यों की बुराई करता है जो आचार्य आपको वेद मंत्र पहुंचाते हैं जिनके आधार परने हम वैदिक है सनातनी है

00:53:08:27 अब यह बताओ कि तुमने अगर यह मान लिया कि भाई इसका जने नहीं होगा इसका ऐसा है शास्त्रों ने अगर यह कह दिया है शास्त्रों का ऐसा अर्थ हम प्रचारित प्रसारित कर रहे तो इसका मतलब है कि वो जो है क्या कहते हैं वो नीच है हीन है तो तुम तुम जिन जिन शास्त्रों को आंशिक रूप से स्वीकार कर रहे हो उसम जोय सब बातें है उसमें जोय सब बातें हो रही है रजत स्ला छूने लायक नहीं होती है जो चमार होती है जो चमारिन होती है क्या लिखा है उसके बारे में यह मैं पढ़ के बता देता हूं चमारन के साथ जो है कुछ बात कही गई है हा यह लिखा हुआ है जिन नीच स्त्रियों को छूना नहीं मना है छूना भी मना है उनको भी कइ कर रहे किसी को कोई ऐसा सेक्ट है सेम का कोई ऐसा सेक्ट है जो कि इनके हिसाब से जिन नीच स्त्रियों को छूना मना है छूना भी नहीं है नीच स्त्रिया क्यों उनकी चेतना नहीं होती क्यों भाई रियल इंटेंशन अदी पवा इनके चेतना नहीं होती सब समान है तो क्यों कर रहे य भेद भेद का नाम ही संसार

00:54:24:10 है पार मार्क रू भेद नहीं है व्यवहारिक रूप से भेद का निर्वाह करके पार मार् रूप के अभेद की प्राप्ति करना ही जीवन का उद्देश्य है यह सब नहीं सोचना नहीं पढ़ना नहीं जानना है दुकान चलानी है रियल इंटेंशन मत पढ़ो इसीलिए कहा है मत पढ़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में अभी बाकी है चलते रहो तो क्या लिखा है यहां पर इन्होने कि समागम में काशी की यात्रा चमारी से स समागम यह देखिए चमारी से समागम करने को मानो ये लोग प्रयाग स्नान मानते हैं यानी चमारी से समागम मानना जो है वो प्रयाग स्नान नहीं मानना चाहिए नीच चमारी यह लिख ये सत्या प्रकाश में लिखा देख लो चमारी से समागम को देख लो भैया दिख रहा है मैं नहीं बोल रहा हूं ये तुम्हारे बोल रहे है बस बात वही है कि जितना इन्होंने मान लिया तो वो वो विधि निषे विधि निषेध है और दूसरा जब विधि निषेध बताएगा जो कि इनकी सीमा के बाहर होगा तो वो जो है वो चेतना नहीं है व जो है वो अपमान है स्त्रियों

00:55:39:14 का व जो है शूद्रों का अपमान है अभी तर्क की बात भी करेंगे बहुत बहुत सारी बातें अभी आगे शंकराचार्य जी के पीछे चिपकर जो है बातें करते हैं फिर वही बात अरे भाई शकर चार्य जी तो कह रहे व शंकराचार्य जी है क्या शंकराचार्य जी के शास्त्र है जिससे कि जाना जाता है ये लिखने वाले शंकराचार्य जी है उनके शास्त्र जो बोल रहे हैं वो बोले कि ना बोले शंकराचार्य जी के नाम से कोई तर्क पूर्ण बात की है तुमने अपने वीडियो में जब आमने सामने बात करने के लिए आया तो तुमने कहा कि इधर आओ उधर आओ अपने चैनल पर भी नहीं आओगे इतना डर है कि तुम्हारी वो जो वो वाली पहचान नहीं है सबकी जय जय करता हूं वो कहीं खराब ना हो जाए उसको चोट ना पहुंच जाए जब तक दूर हो तभी तक इस तरह से सुरक्षा में हो यह बिल्कुल बोलती बंद हो जाएगी बोलती बंद सच्चाई है ये तुम जैसे लोगों की बोलती बंद हो

00:56:51:12 जाएगी आर्कियोलॉजिकल प्रमाण है भाई पहली बात तो आर्कियोलॉजिकल प्रमाण है प्रतिमा के रूप में वो प्रतिमा तो शास्त्र विरुद्ध है तुम्हारे हिसाब से अब यहां प्रमाण हो गए मंदिरों पर बनी है ना व प्रतिमा नेपाल में ऐसा आभूषण चलता है जो जने की तरीके से पहना जाता है मां भगवती जब संसार की रचना करती तो उनके जो किसी कारणवश उनको भी नाग का जनेऊ लपेटा हुआ दिखाया जाता है तो उनमें से किसकी मूर्ति है किसने बनवाई है तुम्हारे हिसाब से तो मूर्ति प्रतिमा जो है वो शास्त्रोक्त है ही नहीं तो उसकी उसको किसी बात का आधार बना कर के तुम कैसे दिखा रहे हो यह देखो देवी की प्रतिमा पर जने हुए और स की सीधी एक बात मेरे भाई कि तुम्हारे पास कहां से आया यह ज्ञान क्योंकि जहां से आया वहा उसको तो तुम नकार दोगे अरे किसी ना किसी परंपरा को तो मानोगे

00:57:49:04 ना अन कहे रूप में यह अलंकार समाज को भी ये मानना पड़ता है कि हमारे पास जो है परंपरा है ये जो सुति स्मति गुरु शिष्य परंपरा है वहां से हमें वेद मंत्र मिले हैं पूरे वीडियो में इन्होने कुछ बातें दोहराते रहे बस वही स्त्रियों का अपमान वो वही वाली बात के कैसे कनेक्ट कैसे हो सामने वाले के मन से हृदय से स्त्रियों को अपवित्र मानने वाली बात यह सब दोहराते रहे उसम कुछ कुछ नहीं बेसर प बारबार स्त्रियों का अपमान अरे भाई बताओ तो कहां लिखा है कि किसी को विधि निषेध का विधि निषेध के बारे में बोल देना ये जो है स्त्रियों का अपमान है कहां लिखा है पुरुष को अगर मांग नहीं भरनी है स्त्री को मांग भरनी है पुरुष को मंगल सूत्र नहीं पहनना है तो ये पुरुष का अपमान है नीच है पुरुष तुम्हारे हिसाब से हमारे हिसाब से नहीं अब बोल रहे हैं एलजीबीटी क्यू के बारे में क्यों नहीं बोलते मास फोर वालो के बारे में क्यों नहीं बोलते एलजीबीटी क्यू ये सब लोग आते कहां से दुनिया में तुम जैसे लोगों के कारण जब तुम लोग कहते

00:59:04:06 हो कि नहीं हमारे समाज को नहीं मानते मगर हम जो दयानंद सरस्वती का प्रचार करते हैं तब एलजीबीटी क्यों हम क्यों बाउंड हो भाई शास्त्रों पर ऐसे लोगों को जन्म देने वाले तुम हो रामपाल जैसे लोगों को जन्म देने वाले तुम हो मैंने कहा ना ये जिनके पास निश्चित नियमावली नहीं है जो वक्त आने पर कह देते हैं कि कमी हमारे में भी है सब में है तो क्यों लड़ रहे हो भाई धर्म के लिए धर्म वो है जो सनातन है धर्म वो है जो सबके लिए उपयुक्त हो क्या ये कहा है कहीं कहीं पर दयानंद जी ने कि हमारे सनातन में भी कमियां है थोड़ी मगर चलो नहीं नहीं कहां से आ ये बात तुम्हारे पास

00:59:56:15 यह वो लोगों में से हैं ऐसे लोग जो हुंडा हिंदू होते हैं इस तरह के ये उन लोगों में से होते हैं यह वक्त आने पर वही वो जो माता और बहन वाली फाउंडेशन है ना कि नहीं विवाह इनसे नहीं करना है इनका मन चल गया तो य उस श्लोक को भी प्रक्षिप्त बता देंगे अपना काम करने के लिए अपने मंतव्य की सिद्धि के लिए क्योंकि इनका मन चला होगा तो तब इनको आप आर समाज से बाउंड नहीं कर पाओगे नहीं नहीं भाई ये तो ये तो दयानंद जी ने भी माना है नहीं मैं कोई यार समाजी थोड़ी ना हूं मैं तो करूंगा वो लोग है इसलिए इनकी इनकी कोई निश्चित नियमावली नहीं होती है फिर ये कहेंगे ताल ठोकेंगे हम सनातनी कहां से हो तुमने वेद भाष्य कर लिया अपना तुमने मनुस्मृति का अर्थ कर लिया अपना तुमने गीता भाष्य कर लिया अपना क्या है तुम्हारा शास्त्र क्या है तुम्हारा कुछ नहीं ठेंगा चैनल है हमारा य पर वो हमारा धर्म

01:00:51:07 है तुम कहते हो कि विधि निषेध बताने बताने से ये सिद्ध होता है कि भाई हम किसी को नीच कह रहे हैं तो इसका मतलब यह माना जाए कि तुम लोग अपने घर की स्त्रियों का पर पुरुष से स्पर्श या उससे आगे की चीजें नहीं होने देते हो तो इसका मतलब यह मानोगे कि वो नीच है जो पुरुष से आप नहीं होने दे रहे पर पुरुष से ये सब चीज पप्पी और या फिर क्योंकि तुम इस भावना का विरोध करने वाले हो कि विधि निषेध मत बताओ क्योंकि विधि निषेध से कोई व्यक्ति नीच सिद्ध होगा इसलिए विधि निषेध नहीं बतानी चाहिए तो इसका मतलब तुमने अपने अलाउ कर रखा होगा कि हां भाई चुंबन होने दो हां भाई स्पर्श होने दो यह सब अलाउ कर रखा है क्या दिन भर यही होता है तुम्हारे यहां होने दो पर पुरुष के साथ क्योंकि विधि निषेध के कारण तो वो पुरुष जो है वो नीच सिद्ध हो जाएगा ना नीच हो जाएगा वो तो दिन भर होता रहता है क्या

01:01:56:13 शायद संभवत सुबह से शाम तक यही चला करता होगा हा भाई सब कुछ ठीक है हमारे यहां तो भाई हमने अगर रोका तो वो नीच हो जाएगा इसलिए अतिथि तो वो है हमारे य तो इसलिए करो भाई यही सब चला करता है क्या तो पता करना चलता है कि नहीं चलना और अगला वीडियो अगर बना हो तो बताना कि हमारे यहां होता है कि नहीं होता और नहीं होता है तो क्या वो व्यक्ति नीच है क्या हमारे घर की वो स्त्रिया नीच हो गई क्या जिनको स्पर्श नहीं करने दिया जा रहा है वो सब नीच हो गए क्योंकि तुम्हारे अनुसार विधि निषेध का मतलब ही यही है कि नीच अपमान तिरस्कार तो तुम्हारे यहां यही चलता होगा कोई नीच नहीं है क्योंकि किसी को नीच नहीं सिद्ध करना

01:02:41:16 तुम्हें अब तुम्हारे कुछ उदाहरण दे देते हैं तुम्हारी आंशिक धर्मावत नहीं कब कहां इसके भी गद्दार बन जाओ तो उदाहरण देते हैं कहां से सबसे पहले तो हमने आपको वो दिखाई दिया आपके अनुसार किसी को विधि निषेध बताना जिसके लिए बताई जा रही है वो क्या

01:03:21:13 है पिछले हमारे पिछले समय की बातें करते हो हम चलिए तो विधि निषेध बताने से कोई व्यक्ति अपमानित हो जाता है कोई व्यक्ति जो है नीच सिद्ध हो जाता है ठीक है तो एक काम करते हैं अभी देखते हैं क्या क्या विधि निषेध का किस किस के लिए बताए गए हैं जो कन्या माता के कुल की अच्छा मुझे यह मनुस्मृति में भी है मगर य इससे इसलिए पढ़ना पड़ेगा क्योंकि पता नहीं किस श्लोक को कह देय तो प्रक्षिप्त है यह भी एक दिक्कत है तो वही वाली बात जैसे रामपाल के रामपाल की चीजों से ही राम रखो सामने तो ज्यादा अच्छा है तो ऐसे ही इनके द्वारा स्वीकार बुक से ही निकाली जाए बात तो ज्यादा अच्छा रहे तो देखो भया शलोक तो उन्होने माना है जो कन्या माता के कुल से छह पीढ़ियों में ना हो और पिता के गोत्र की ना हो तो उस कन्या से विवाह करना उचित है यानी की जिसके बारे में बताया जा रहा है वह कन्या उचित है यानी जिनके बारे में मना किया जा रहा है व सब नीच है क्या अपमानित है क्या क्या है वो नीच सब करो अब हेलो अच्छा तुम कहते हो कि वो ज जन्म से वो चीजें नहीं होती है तो इसमें

01:04:36:13 एक बात आई है जो कुल सत्क्रिया से हीन हो मुझे पता नहीं है मगर होडा हिंदुओ में ऐसे लोग शामिल है आप हो कि नहीं वो वो नहीं पता है मगर जो यह कहते हैं कि मैं शूद्र कुल से उत्पन्न हूं मगर मेरा यज्ञ पवित्र हो गया ब्राह्मण मैंने ज्ञान प्राप्त किया और मैंने ब्राह्मण ले लिया ठीक है इसमें कहा जा रहा है जो कुल सत्क्रिया से हीन हो हो सत पुरुषों से रहित हो वेद अध्ययन से विमुख हो तो अब यहां पर क्या है कि यदि कोई यह कह रहा है कि मेरा मैं जिस कुल में जन्मा हूं वह शूद्र कुल है मैं जिस मैं जिस घर में जन्मा हूं मैं शूद्र था मगर मैं अब जो वेदा अध्ययन करके और यज्ञ धारण करके मैं ब्राह्मण हो गया हूं यानी कि य किस कुल में जन्मा था नीच कुल में जन्मा था क्या क्योंकि यहां पर स्कूल में विवाह करने से मना किया जा रहा है

01:05:26:20 क्या कहोगे इसे णा मूलक नीच कहोगे यह सत्यार्थ प्रकाश में लिखा हुआ है पढ़ लो तो नीच कुल है क्या जो भी व्यक्ति तुम्हारे अनुसार शूद्र से ब्राह्मण बन रहा है उसका कुल नीच ता क्या बोलो नीच बोलो चार च नाम शास्त्रों के मर्म को नहीं समझना है अपनी रोटिया सेकनी है बोलो नी च उनको तुम लोग नीच हो बोलना अगर आपके यहां ऐसा हुआ हो तो बोलना घर पर जाकर के सत्यार्थ प्रकाश के अनुसार तुम लोग नीच हो नीच कुल है तुम्हारा अब मैं ब्राह्मण बनाऊ यहां से आगे उत्तम कुल होगा तुम्हारा नीच कुल है ऐसे बोलना सत्यार्थ प्रकाश के अनुसार मेरे अनुसार नहीं सत्यार्थ प्रकाश के अनुसार अच्छा आगे क्या कहा जा रहा है ना पीले वर्ण वाली ना अधिका अर्थात पुरुष से लंबी चौड़ी अधिक बल वाली ना रोग युक्ता है ना यह सब क्या नीच है क्या पीले वर्ण वाली पुरुष से लंबी चौड़ी य सब नीच है क्या इनसे मना किया जा रहा है इनसे विवाह मत करो

01:06:41:25 इनसे मना किया जा रहा है यह देख लो ज्यादा लंबी चौड़ी है व नीच है क्या उसमें चेतना नहीं होती है क्या नीच समझते हो लंबी लंबी लड़कियों को ी विरोधी हो गए क्या तुम स्त्री विरोधी हो नीच हो गए ना लंबी चौड़ी स्त्री है उसके चेतना नहीं होती और क्या है भाई जिसका नाम गंगा जमुना हो कोकिला मैना हो काली हो ऐसे नाम वालियों के साथ भी विवाह नहीं करना चाहिए सब नीच

01:07:22:19 है अरे शर्म करो थोड़ी बहुत कुतर्क लेकर जो फिरते हो अच्छा आप क्या कह रहे हैं आगे जिसके सरल यह देख लो भैया जिसको डाउट हो गंगा पार्वती इत्यादि नाम वाली और नीचे क्या लिखा काली नाम वाली यह सब स्त्रियां जो है इनसे विवाह नहीं होना चाहिए तो यह सब नीच है नीच है नीच इस वड को नीच इसी पर अपनी दुकान चलाओ नीच इसी पर चल रहा है ना दुकान इसी पर चल रही है इसलिए नीच शब्द पर हमें मार्केटिंग करनी है अपनी अभी आऊंगा इस पर भी मार्केटिंग पर भी इसीलिए कहता हूं मत पड़ो चक्कर में क्यों पड़े हो चक्कर में कोई है नहीं टक्कर में ऐसे नहीं कहता हूं मत पढो चक्कर में ये नहीं करता हूं क्योंकि अद पवे का नशा नहीं करते इसलिए और जो पुराना जीवन है ना वो भी ऐसा ही था दुर्व्स नहीं थे जो हिलना पड़े

01:08:42:10 समझे और देखो और क्या लिखा है और दूसरी बात एक और है ये जो कुल की बात हो रही है अब बात यह है कि यह भी आपको जांचने की आवश्यकता है कि क्या उत्तम कुल से विवाह हुआ था कि नहीं है ना परस्पर विरुद्ध गुण कर्म स्वभाव वालो का विवाह कभी नहीं होना चाहिए तो इसका मतलब जो विरुद्ध गुण कर्म वाले होते वो सब नीच होते हैं क्या नीच होते हैं क्या और आप अपना भी आप जितने भी होंडा हिंदू है या जितने भी ये लोग है जो इसका विरोध करते अरे तुम स्त्रियो विरोध करते हो या तुम जो है पर उसका विरोध करते हो जो है क्या कहते हैं वेदन इत्यादि का तो वो भी आप जाकर के अपने अपने में चेक करो क्या तुम लोगों का विवाह उत्तम था कि नहीं नीच विवाह तो नहीं था इस पर अभी बात करेंगे देखो नीच

01:09:57:14 विवाद था कि नहीं इसमें एक जगह कहा गया है कि यदि जो स्त्री है वह 24 वर्ष की हो यह सबसे अच्छा मुझे लगा इनकी आंखें खोलने के लिए कि 24 वर्ष की जो स्त्री हो और अ 4 वर्ष का जो पुरुष हो वह विवाह उत्तम है ठीक है यानी कि स्त्री 24 वर्ष की ना हो पुरुष 48 वर्ष का ना हो ऐसा विवाह जब हुआ 24 और 48 वाला रेशियो नहीं रहा 16 वाला रहा या दूसरा रहा इसमें दिया गया वो सब विवाह क्या हो गए अधम हो गए नीच हो गए तो तुम अपने घर में जाकर पूछना कि मैं नीच विवाह से उत्पन्न हूं या उत्तम विवाह से उत्पन्न हूं ये पूछने को सत्यार्थ प्रकाश कह रही है पूछना मैं नीच विवाह से उत्पन्न हूं उत्तम विवाह से उत्पन्न हूं या अधम विवाह से उत्पन्न ह ये वाला ठीक है पूछना मैं किस विवाह

01:11:12:20 से उत्पन्न हूं उत्तम विवाह से सत्या प्रकाश के अनुसार मैं उत्तम विवाह से उत्पन्न हूं या नीच विवाह से उत्पन्न हू पता करना बताना वीडियो बना के हेल हिल के इसीलिए कहता हूं मत पढ़ो चक्कर में कोई नहीं टक्कर में और कहता रहूंगा क्योंकि मैं सवाल पूछूंगा ईश्वर सर्व शक्तिमान है कि नहीं तुम्हारा पूछता रहूंगा समझे क्या सोचा था ऐसे ही जाने देंगे तुम हिलेल के कुछ भी कर कहते रहोगे ऐसे ही करते रहेंगे

01:11:56:16 अब अब एक आगे की बात करते हैं कि तुम लोग यह कहते हो कि तुमने जो अपना जो पूरा तंत्र स्थापित किया है उसमें एक बहुत बड़ा नाम है गायत्री मंत्र जिने गायत्री मंत्र स्त्री सूत्र य इस पर आपका पूरा तानाबाना बना हुआ है तुम्हे क्या आवश्यकता है गायत्री मंत्र की क्या आवश्यकता है तुम गायत्री मंत्र की गायत्री मंत्र में से प्रार्थना की जा रही है कि हमें सद बुद्धि दो प्रचोदयात आर समाज का भी यही है हमें प्रेरित करो प्रार्थना कर रहे हैं ना भगवान से मांग रहे हैं ना कुछ तुम्हारा तो भगवान नहीं देता हर समाज का ईश्वर नहीं देता है क्या आवश्यकता है त्री मन निरर्थक है तुम्हारे हिसाब से भाई आर समाज का ईश्वर है जो वो मांगने से कुछ नहीं देता है कर्मों का वो वो करेगा जो आप अच्छे कर्म करोगे पुरुषार्थ करोगे उस पर वह आपको कुछ देगा व मांगने से कुछ नहीं देगा तो तुम्हारे हिसाब से तो गायत्री मंत्र व्यर्थ है फिर क्यों मांग रहे हो क्यों उसके नाम पर अपनी दुकाने चला रहे हो क्योंकि

01:13:11:22 जब उसके नाम पर अपनी दुकाने चलेंगी तभी तो शाम को अध पवे का इंतजाम होगा तभी तो लेंगे फिर आ करके इनका ईश्वर जो है वो ये भक्ति करने से नहीं देता है कुछ भक्ति करने से कुछ ईश्वर देता नहीं है तो क्यों उससे मांगने वाली भक्ति कर रहे हो मैं कह रहा हूं उनका ईश्वर का महिमा मंडन करो मगर मांग क्यों रहे हो गायत्री मंत्र में तो मांगा जा रहा है क्यों मांग रहे

01:13:46:26 हो क्योंकि गायत्री मंत्र के नाम पर अपनी दुकान चलानी है गायत्री मंत्र वेद मंत्रों के नाम पर अपनी दुकान चलानी है और जहां चाहो वहां अलंकार फिट कर देना है फिर य रोना रोना है कि हम तो तुम्हें पौराणिक कहेंगे हम तो तुम्हे वेद विरुद्ध पौराणिक कहेंगे मगर तुम हमको वो मत कहना अलंकार ऐसे थोड़ी ना चलेगा जब चोट करते हो उस समय सोच लिया करो कहां जा रहे हैं किस पर कर रहे हैं है ना सोचा करो छोटे हो अभी चचा कह रहे ना हां बालक हो बालक बुद्धि हो तो सोचा करो पहले कि क्या क्या क्या हो सकता है

01:14:36:10 आगे तो क्या है भाई एक तरफ गायत्री मंत्र का ढंडोरा पीटते हैं एक तरफ जो गायत्री मंत्र के नाम पर जय श्री राम जय श्री राम एक तरफ गायत्री मंत्र के नाम पर और जो है अपनी दुकाने चलाते हैं फिर दूसरी तरफ कहते ईश्वर मांगने से कुछ देता नहीं है तो क्या हुआ गायत्री मंत्र निरर्थक कितने बड़े दोगले हो भाई दोगलो पर भी दोगलापन चलो ठीक है इसमें दोगलापन है नहीं है बाद की बात है मगर जो इसको मानने का दावा कर रहा है वह भी यह कह देता है मैं कोई आर समाजी थोड़ी ना अरे हद होती है दोगले पन की

01:15:21:09 भाई लेपन की हद होती है यह जो रामपाल सेक्ट तैयार हुआ ना यह आर समाज से ही निकला है क्योंकि अका सिद्धांत नहीं थे तुम्हारे पास एक तरफ गायत्री मंत्र को एक तरफ गायत्री मंत्र के नाम पर अपना कुनबा भरते हो और दूसरी तरफ गायत्री मंत्र को निरर्थक बोलते हो य दोगलापन

01:15:57:24 तुम्हारा और क्या तुमने वो बारबार जो नाम लिए थे के वो जो है इनके गुरु ऐसे हैं यह बताते वो बताते दो ही नाम क्यों लिए सारे नाम क्यों नहीं लिए राघवाचार्य का नाम क्यों नहीं लिया राजेंद्र दास जी का नाम क्यों नहीं लिया य सब नाम क्यों नहीं लिए स्त्री गायत्री मंत्र की बात बागेश्वर वाले भी करते हैं राजेंद्र दास जी भी करते हैं प्रेमानंद जी भी करते हैं शंकराचार्य का नाम ही क्यों लिया क्योंकि उनका एक अल्प के शिष्य तुमसे यह पूछ रहा है कि तुम्हारा ईश्वर सर्व शक्तिमान है कि नहीं इसलिए लिया

01:16:38:03 और बागेश्वर वालों के यह जो राम भद्राचार्य जी है इनके पैरों में तुम्हारे गौतम खट्टर बैठे हुए हैं क्यों बैठे स्त्री गायत्री मंत्र की बात तो ये लोग भी करते हैं ना मीठा मठा गब गब कड़वा कड़वा थू डोले पन की हद है हद एक तरफ कह रहे हो अरे वह क्या कहते हैं यहां ससुरा लोगों को मुक्ति नहीं मिल रही है तो किसने मना किया कि मुक्ति नहीं मिलेगी न ब में भगवान कह रहे हैं ना विधियां अलग अलग है मुक्ति से किसी को वंचित नहीं किया गया है कौन से कौन से हमने अपने वीडियोस में या शंकराचार्य जी ने अपने वीडियो में किस परंपरा प्राप्त आचार्य ने अपने वीडियो में कहा कि महिलाओं को और इन फलाने फलाने मूक अमुक वर्ग के व्यक्तियों को मुक्ति नहीं मिलेगी मगर विधि का आलंबन लेना पड़ेगा ना और अगर नहीं लेना है तो यह क्या है इसकी विधि विधि तुम्हारी विधि विधि जितना चाहो उसमें खिल्ली उड़ा लो दूसरों की जितना चाहो राधा जी की खिल्ली उड़ा लो जितना

01:17:53:09 चाहो शिव भगवान की खिल्ली उड़ा लो फिर कह दो हम धर्म के रक्षक है और समय आने पर क दो हमारे समाज को भी नहीं मानते हम कौन है हम होंडा हिंदू है होंडा हिंदू का मतलब दिखावटी धार्मिक लोग दिखावटी धार्मिक सब कुछ कृष्ण है तो फिर काहे का स्त्री पुरुष सब कुछ कृष्ण है तो काहे की माता और बहन सब कुछ कृष्ण है तो क्यों माता बहन और पत्नी व्यवहार और परमार्थ सब कुछ कृष्ण है मगर व्यवहारिक रूप से नहीं इस व्यवहार में प्राप्त भेद का आलंबन लेकर के परमार्थ के अभेद तक पहुंचना है सब कुछ अगर कृष्ण है तो कुरान को लिखने वाला गलत क्यों हो गया तुम्हारे लिए क्यों लड़ रहे हो उससे जाकर के हद होती है अधी पवे की कम उपयोग में लिया करो अधि पवा आगे चलते हैं भाई अब भाई ये बात करते हैं दार्शनिक विचार ने आपको जो है बुलाया था कितना झूठ बोलते हो य भी तुम्हारा दोगलापन है गायत्री मंत्र में दोगलापन आर्य समाज

01:19:08:15 को मानने वाला होते हुए आर समाज को ना मानने वाला होने का दोगलापन तुम्हारा धर्म और सिद्धांत सिद्ध नहीं है उसमें दोगलापन हमारे नाम से यह बोलना कि भैया हम जो है वो नीच कहते हुए उनका अधिकार जो है छीन लेते यह दोगलापन झूठ और फिर दोगलापन क्या दोगलापन की दार्शनिक विचार ने अपने पास आपको बुलाया था क्यों नहीं गए अरे हमने उनको कहा था कि हमें मोहित गौड़ के साथ बात नहीं करनी है क्योंकि वह उस चर्चा में शामिल था जहां पर य फलानी फलानी चीजें हुई अगर तुमने नहीं किया तो उसका सार्वजनिक रूप से विरोध कर दो हम कर लेंगे चर्चा तुम्हारे साथ मगर नहीं किया विरोध

01:19:55:24 और हमने कहा था उस उसके जवाब में कि अभी भी वहां पर कमेंट पोस्ट है और हमने अपनी पोस्ट में भी डाला है कि हम आचार्य प्रशांत जी है जो जिन्होंने य हमको प्रस्ताव दिया था हमने कहा कि हम आपके साथ चर्चा कर सकते हैं कोई आपत्ति नहीं है तो यहां पर इस जानकारी को ट्विस्ट करके बदल करके प्रस्तुत करने वाला कौन हुआ डगला क्योंकि आचार्य प्रशांत ने हमें अपने पास बुलाने को बुलाया तो हमने उनका वो प्रस्ताव स्वीकार किया हम आ जाएंगे मगर मोहित गौड़ से चर्चा नहीं करेंगे हम उसके साथ मंच साझा नहीं करेंगे जिसने जो है कुछ आपत्ति जनक चीजों की हो या फिर चीजों के साथ वो जुड़ा हुआ हो नहीं करेंगे उसके साथ स्वार्थ पूर्ण वार्ता उसके साथ मंच साझा नहीं करेंगे हम आप आप करके हम बात नहीं कर पाएंगे उसके साथ जिसने यह सब किया

01:20:47:25 हो माफी मांगता हूं अब अब निकल रहा होगा ना खून जब पूछोगे जाकर के कि तुम्हारा वि जो है नीच था मैं नीच से उत्पन्न हूं कि नीच विवाह से उत्पन्न हूं सत्यार्थ प्रकास के अकॉर्डिंग या कौन से विवाह से उत्पन्न ह पूछो ऐसे ही होता है ना चुभने वाली बातें ऐसे ही कहते हो ना अपने वीडियोस में पप्पी पिछवाड़ा यह सब शब्द यूज कर रहे हो ना वहां पर करो शरम नहीं आई और फिर कह रहे हैं कि क्या कहते हैं ये यह आरोप भी लगा रहे हैं फिर दोगलापन इनके दोगले पन गिनते जाइए कितने दोगले पन है इसके यह आरोप लगा रहा है कि मैंने कहा कि हम अपने घर में चर्चा करेंगे नहीं कहा हमारा पत्र देखिए पोस्ट किया हुआ जाकर के उसमें लिखा है कि हम आपके यहां पर आ जाएंगे मगर विषय होगा सर्वशक्तिमान क्योंकि हम शुरू से उसी विषय को लेकर के चले और आपने भी वही विषय हमको दिया था कि ईश्वर के स्वरूप पर बात करेंगे और आप होते

01:22:03:03 कौन है अगर हमने यह बात तो अभी तक की नहीं है आप ही क्यों य तय करेंगे कि क्या विषय होगा बताइए अगर हमने शाब्दिक भेद से आपका विषय जो है लिख दिया आपने ईश्वर का स्वरूप दिया हमने ईश्वर सर्वशक्तिमान दे दिया तो आपको अपने विषय को बदल देने का अधिकार प्राप्त हो गया कहां का सनातन सिद्धांत है और यदि प्राप्त हो गया तो फिर हमको ये बताइए कि हम जब ऐन मौके पर आप बदल नहीं देंगे विषय को इसका क्या गारंटी है जब आप अभी बदल रहे हैं तो ये दोगलापन है ये झूठ है कपट है क्योंकि धर्म से मतलब नहीं है क्योंकि धर्म सिखाते हैं राम रामो विग्रह मान धर्म तुमको तो सिखाया गया दोगलापन तो तुम बोलोगे दोगलापन करोगे दोगलापन छिपा के ट्विस्ट करके चीजों को प्रस्तुत करोगे स्पष्ट बादिता नहीं है सत्य वादित नहीं है झूठ बादिता है असत्य बादिता है थोड़े दिनों में तुम भी राम पालियो जैसा एक शक्त तैयार कर दोगे कहां से निकला भाई डा हिंदुओं

01:23:13:01 से अपने घर में चर्चा करने को हमने नहीं कहा हमने जैसे उन्होंने विकल्प दिया था वैसे ही हमने भी विकल्प दिया था जब उन्होंने कहा नहीं नहीं यही होगी तो हमने मान लिया फिर उन्होंने आगे क्या कहा पता है रिकॉर्ड स हम करेंगे क्यों गुलाम है क्या तुम्हारे गुलाम है क्या और यह क्या कहते हैं कि तुमने जो है वो अब तक जो चर्चा की है प्रस्तुत करते हैं वो सब नव आर्य समाजी थे नव स्निस्ट थे क्या इस कौन ये कहता है क्या आर समाज ये कहता है तुम्हारी बात क्यों मानी जाए तु तुम तो खुद कह रहे हो कि मैं आर समाजी नहीं हूं मेरा कोई धर्म नहीं है मेरे पास निश्चित नियमावली नहीं है तुम्हारा तो कोई धर्म ही नहीं है तुम ही विद्वान हो ना

01:24:10:00 सबसे तुम हर जगह जाते हो कितनी बार गए हो शंकराचार्य के मंचों में राघवाचार्य के मंचों में मैं तो गया हूं तुम्हारे आर समाज के मंदिरों में अभी दो चार दिन पहले उनको फोन भी किया था तुम्हारे वो सच्चिदानंद जो दिन भर अनाप चना बोला करते हैं तुम कितनी बार गए हो शंकराचार्य के यहां नहीं जाओगे क्योंकि तुमको सत्य जानने से मतलब नहीं है तुमको दुकान चलाने से मतलब है यह यह करने से मतलब है

01:24:44:25 तुम हर जगह जाते हो शंकराचार्य से जब कोई प्रश्न पूछता है तो पूछता है क्या कि तुम्हारा किस कौन सा वर्ण है शिक्षा से और ज्ञान दूर नहीं किया गया है विधि है किस विधि के आलंबन द्वारा व्यक्ति को ज्ञान प्राप्त होगा जो उसे मोक्ष तक ले जाएगा विधि है ज्ञान से दूर नहीं किया गया है कह रहे हो अपनी मां के बारे में सोचना बुद्धि हो तर्क करना व्यक्तिगत तर्क मान्य व्यास स्मृति में लिखा है मनुस्मृति में लिखा है अमान्य है व्यक्तिगत तक जो वेद ब्रह्म सूत्र का भाष्य किया ना उसमें लिखा है व्यक्तिगत तक मान्य क्या करोगे मना कर दो ब्रम सूत्र को बन जाओ धर्मी खुल के अभी तो होडा हिंदू हो फिर बन जाओ नास्तिक हूं मैं व्यक्तिगत तर्क अमान्य कहा है व्यास सस्वती में तुम्हारे लोग भी कहते हैं पूछो उनसे जाके व्यक्तिगत तर्क मान्य है कि नहीं चले बड़े तर्क तर्क तर्क तर्को में भी जीरो तर्क पर आ जाओगे तो बिल्कुल ही तुम्हारी बात बहुत जल्दी ध्वस्त हो जाएगी वेद

01:26:00:04 का सहारा लेकर के थोड़ी बहुत देर टिक भी टिकते भी हो परंपरा पूछनी पड़ती है फिर फिर वही सच्ची परंपरा की आर में ये लोग झूठे हैं अरे भाई कहां से तुमको पता चला है ये आदि शंकराचार्य जी के बारे में सब की जय आदि शंकराचार्य की जय दयानंद की जय तो क्या है धर्म कुछ है ही नहीं सबकी जय धर्म वो है जो हम मानते हैं क्या है धर्म धर्म कुछ नहीं है यही

01:26:39:12 धर्म अरे भाई किस बात का डर लगता है तुम्हें अपने आप को आर्य समाजी बोलने में किस बात का भय है विश्वास नहीं है क्या उन ग्रंथों प जिनका तुम ढंडोरा पीट रहे हो विश्वास नहीं है क्या उस जनेऊ पर जो तुम्हारा हुआ है डर है क्या कहीं जने गलत ना सिद्ध हो जाए अच्छा एक बात बताओ आचार्य प्रशांत ने तो किसी के ऊपर व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की थी उसके व्यक्तिगत जीवन पर जबक उसने यह भी कह दिया कि पहले मैं ऐसा जीवन जी रहा था अब मैं ऐसा हूं उसके जीवन पर तुमने आक्षेप क्यों उठाया तुम बात करते हो हिंदू एकता की आपस में मत लड़ो मगर जब स्कोन और आर समाज के बीच में कुछ होता है तो तुम वीडियो बनाते हो इसकन की प पोप

01:27:29:18 लीला आए दिन तुम वीडियो बना रहे हो ये देखो क्यों बनाया इसके ऊपर वीडियो तुमने क्योंकि बात यह नहीं [प्रशंसा] है कि किसने तुम्हारे उस पर व्यक्तिगत कटाक्ष कर दिया या कौन जो है धर्म अधर्म की बात कर रहा है बात यह है कि उस किसी ने उस किसी ने उस मान्यता पर उस विचारधारा पर उस नियमावली पर उंगली कैसे उठा दी जिसको मैंने आंशिक रूप से स्वीकार किया है उस पर अगर कोई उंगली उठा सकता है वो तो वो सिर्फ मैं होऊंगा और कोई मायका लाल ऐसा नहीं है जो उस नियमावली पर उंगली उठा सके मैं वो हूं मैं कौन हूं मैं हंडा हिंदू आई एम द होंडा हिंदू

01:28:16:00 वन यही है ना तुम्हारी सच्चाई तुम नोरा पीटते हो हिंदू एकता हिंदू एकता का फिर तुम किसी को छोड़ते नहीं हो क्योंकि उस उसकी उसकी कहीं ना कहीं उससे एंटी हो गई है जिस जो तुम्हारा जो जिसकी जिसको तुम धर्म के रूप में प्रस्तुत कर रहे हो अरे भाई कितने शूद्र बनाए हैं आर समाज इसी नाम पर लेता है ना आर समाज में भर्ती होती सीध भर्ती ब्राह्मण भर्ती कितने शूद्र बनाए

01:28:55:25 इसका मतलब कि जो लोग भी सर्विस डिपार्टमेंट का काम कर रहे हैं वो आर समाजी नहीं है आर समाजी होंगे तो ब्राह्मण होंगे ब्राह्मण होंगे वर्ण सकता कर रहे होंगे फिर वो तुम्हारे अकॉर्डिंग ली बात कर रहा हूं अगर इस तरीके से प्रसन्न करने वाली बात है ना तुमसे तुमसे ज्यादा प्रसन्न तो जो शूद्र वर्ण है जो हमारा चतुर्थ वर्ण है वो जो है राम पालो से खुश है वो तो ब्राह्मण भी नहीं बनाते वो तो हंस भगवान की भक्ति में डूब जाने वाला हंस बताते हैं जैसे एक इन्होंने भी पकड़ा स्कोन वालो वैष्णव बनाते हैं वो व और श्रेष्ठ कर देते हैं लो तो तुमसे तो अच्छे ही है मूर्ति पूजक है इकोन वाले वेदों में प्रमाण बुद्धि दोनों की है मगर मूर्ति पूजा के कम से कम वो बुत परस्ती के विरुद्ध थोड़ी ना है तुम हो बुत परस्ती के विरुद्ध बुत परस्ती गलत है ना

01:29:59:24 क्या किया तुमने मिलावट बोल दिया रामपाल ने बोल दिया काल नहले प ला तुमने मौका दिया तुम जैसे लोगों ने तुम जैसे सेक् ने मौका दिया यह तथाकथित जितने भी तंत्र है उनको पनपने का परंपराओं का विरोध करके अपमान करके पप कह के कह के पाखंड कह के तुम जैस लोगों ने इनको जन्म दिया है सेवा करने वाला छोटा हो गया निम्न हो गया कहां लिखा है कुछ लिखे हुए बातें करोगे अपने मन गंत दूसरों की सफाई करना अरे भाई दूसरों की सफाई करने करना भी एक काम है काम कोई बड़ा छोटा नहीं होता है तुमने तुमने उसको नाम दिया है कि अरे वो वो नहीं मैंने एक बार बताया वीडियो में क्या किया जाता है अपने सेक् को तैयार करने के लिए कि पहले एक प्रॉब्लम को क्रिएट किया गया जैसे कि गायत्री मंत्र बहुत आवश्यक है गायत्री मंत्र बहुत आवश्यक है गायत्री मंत्र से ही मुक्ति मिल सकती है केवल वेद जिस रूप में है उस रूप में पढ़ने पर ही मुक्ति

01:31:14:26 मिल सकती है केवल तो यह प्रॉब्लम पहले क्रिएट की गई उसके बाद देख वो तुझे वेद नहीं पढ़ने दे रहे हैं देख वो तुझे जने नहीं करने रहे देख वो तुझे य नहीं करने दे रहे हैं मुक्ति जाए भाड़ में मुक्ति से कोई मतलब नहीं है तुमने ये सब टैक चालू किया रे वो तुझे नीच समझते हैं व वो ये करते हैं वो करते हैं अरे मैं पूछता हूं तुम लोग ये जो अत्याचार का ढंडोरा पीटते हो कहां का इतिहास है कहां पर नीच ऊच के नाम पर जो है अत्याचार हुआ 200 साल पहले तक जब तक वर्ण व्यवस्था मानी जाती थी भारत का दृश्य कुछ और था आज अपना दृश्य देखो धर्म अधर्म का क्या स्थिति प ला दिया तुमने अब एलजीबीटी क्यू वाले खड़े हो रहे तो तुम परंपराओं पर वो कर रहे हो जिनको तुमने मानना छुड़वा दिया लोगों

01:32:18:28 से गटर का कांसेप्ट भी नहीं था हमारे यहां ये जो ये मल सा करने की बातें की जाती है यह भी अंग्रेज है तब से हुआ हम तो इसको डिनायर हैं और अगर आ गया था तो मशीन का उपयोग क्यों नहीं हुआ उसमें मशीने थी हीन भावना का प्रचार प्रसार तुमने किया अरे मैं कह रहा हूं क्या आज की डेट में ब्राह्मण कुल में जन्मा हुआ कोई ऐसा व्यक्ति नहीं होगा जो चर्म की फैक्ट्री में काम कर रहा होगा मैनेजर होगा कुछ भी होगा जो चर्मकार जो कारखाने हैं इन सबका मालिक होगा या कुछ भी होगा काम कर रहा होगा चर्म को काटने का ब्राह्मण कुल में उत्पन्न व्यक्ति भी वो वो कार्य कर रहा है आज की डेट में क्षत्रिय कुल में उत्पन्न होने वाला व्यक्ति वैश कुल में उत्पन्न होने वाला व्यक्ति उन सब वर्गों का काम कर वो सब वर्गों का काम कर रहा है जिन वर्गों को शूद्र कहा जाता है इसका मतलब क्या हुआ कार्य कोई भी बड़ा छोटा नहीं था अगर होता तो ये जो तीन वर्ण के लोग हैं ये उसमें क्यों जाते अगर कोई कार्य जिससे किसी को भय हो सकता है तो वो था वेद वेदोक्त जीवन

01:33:34:10 चर्या और उसी से बचने के लिए आदमी भागता है दूसरी ओर जो अपने वर्ण और कुल के विरुद्ध जाकर के आचरण करता है नहीं तो बताओ अभी मैं तुमको बहुत सारे नाम दे सकता हूं जहां ब्राह्मण कुल के लोग जो है ऐसी ऐसी जगह परकार उनकी आज को पार्जन का माध्यम यह होगा जिसको शूद्र कहा जाएगा तो क्यों चुना उन्होंने वो वो तो नीच कार्य था

01:34:08:06 ना अगर कुछ भी कठिन है वह है वेदों को धारण करना वह जीवन शैली कठिन है इसलिए धीरे धीरे धीरे करके मुक्त किया गया कि तुम्हारा जीवन ऐसा होगा तो तुम अगर यह करोगे तो यह मत करना एक आस प्रद मुझे वीडियो दिखा था जय भीम वालों का उसम वो कह रहा था अपने लोगों को कि तुम अपना सरनेम मत बदलना यह लोग तुमसे तुम्हारा काम छीनना चाहते हैं सरनेम बदलवाने के

01:34:40:21 उसमें यह लोग और आगे चल कर के वह आरक्षण की बात भी कर रहा है आरक्षण बंद करवा देंगे तुम सबका नाम बदल करके कोई काम बड़ा छोटा नहीं था य तुम लोगों तुम जैसे लोगों ने अपनी रोटिया सेख है बड़ा छ बड़ा छोटा कर कर के तुम जैसे लोग जब विकल्प देते हो ना तब यह विकृतियां आती है समाज में शास्त्रों के मर्म को जानना नहीं है राघवा चार प उंगली उठा दोगे राम की राम जी का ऐसा विवाह क्यों हुआ वैसा विवाह क्यों हुआ फिर भले ही तुम्हारे ही नेता लोग वहां जाकर के उनके चरणों में बैठते हो बागेश्वर वालों के चरणों में राम भद्राचार्य जी के चरणों में क्यों जा रहे हो अरे तुम तो वह लोग हो जो ओशो वादियों के यहां भी चले जाते हो उनको भी सपोर्ट कर देते हो क्योंकि होंडा हिंदू है ना होडा हिंदू है हम हम ओसो के भी है हम आर समाज के भी हैं हम सबके हम किसी के नहीं है हम तो नास्तिक है क्योंकि हमें यह नहीं पता है सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में आधार किस आधार पर भेद करें शास्त्र नहीं है हमारे पास निश्चित नहीं है हमारा धर्म बदलता है किस आधार पर मुझे क्या अच्छा लग रहा है आधार हम वो हिंदू है इसको

01:35:55:26 कहते हैं होडा हिंदू तुमने तो जन्म से वो मान लिया था है ना कि जन्म से नहीं वोह कर्म से होता है तो क्यों नहीं आ गए अंबेडकर वगैरह तुम्हारे उसम बहकावे में क्योंकि उनको उनको यह पता था कि वहां पर भी कुछ रिस्ट्रिक्शन है जो कि उस तरह से नहीं है और तुम्हारी जो जो तथाकथित जो पुस्तक ना धर्म जिसका तुम आंशिक वो करते हो आलंबन लेते हो वो भी 25 30 बार बदलने की चीजें है उसम और अभी भी उसको आप शोध ग्रंथ कहते हो वाह अरे भाई शोध ग्रंथ है तो उसमें इसका मतलब आज की डेट में सनातन सिद्धांत नहीं है ना शोध ग्रंथ है तो सनातन कहां से

01:36:51:25 वो अभी मैं जा वाला एक ऐसे व्यक्ति मिले स सत्यार्थ प्रकास या जो आर समाज के जो ग्रंथ है ना इसमें कितना कितना बदलाव हुआ इसमें कौन-कौन सी चीज ऐसे लोगों के साथ पॉडकास्ट है बहुत निकट आने वाले दिनों में पता चलेगा जी यही कह रहा हूं तो कुल मिलाकर बात यही है कि पूछो दोगलापन छोड़ो जो दोगली बातें तुमने अपने उसम वीडियो में की है ना बहुत सारी उनको छोड़ो और पूछो अपने घर पर जाकर के कि मैं किस तरह के विवाह से उत्पन्न ऊच के नीच पूछो सत्या प्रकाश के अनुसार पूछना मेरे अनुसार नहीं है ना गायत्री मंत्र का प्रचार बंद करो क्योंकि तुम्हारे सत्या प्रकाश के हिसाब से ईश्वर मांगने से कुछ नहीं देता और भागवत का खंडन इत्यादि करते हुए कई जगह पर दयानंद जी ने इस बारे में बात की है कि जिसका कोई उपयोग उपयोगिता नहीं है वह व्यर्थ के मंत्र इत्यादि नहीं देने चाहिए आर्य समाज

01:38:07:04 के अनुसार फिर वह सारे मंत्र बेकार है जिसमें की ईश्वर से कुछ मांगा जा रहा हो क्योंकि ईश्वर मांगने से नहीं अच्छे कर्मों का फल देता है मांगने से कुछ नहीं देता येय लिखा हुआ है ईश्वर मांगने से कुछ देता है क्या 150 क्या स्तुति आदि करने से ईश्वर प्रार्थना करने वाले का भला कर देगा तो देखिए क्या लिखा है नहीं नहीं तो जिस गायत्री मंत्र में कुछ मांगा जा रहा है भगवान से सद बुद्धि मांगी जा रही है नहीं देगा कर्म करने से देगा इसीलिए कहता हूं मत पड़ो चक्कर में मत पड़ो सर्वशक्तिमान ईश्वर लाओ मैं आपका हो जाऊंगा उंगली पकड़ के चलूंगा परम स्वतंत्र मोक्ष लाओ

01:39:22:14 इस पर वीडियो बनाओ वरना मत पढ़ो चक्कर में कोई है नहीं टक्कर में समझे हम तुमको लगा होगा कि कोई होगा हां भाई दे दीजिए किसी को कोई बात अपनी रखनी हो तो आ जाए लिंक दे दीजिए

01:40:07:01 अरे लिंक डाल दीजिए लिंक दिया है भाई कोई आ आना चाहता तो आ जाए पा मिनट हम लोग वेट करेंगे उसके बाद हम इसको ऑफ करेंगे ू कौन है जिसकी कोई निश्चित नियमावली नहीं है ऐसे लोग कई मिलते रहते हैं मैं किसी को मानता नहीं हूं तुम्हारा हिंदुत्व कहां से डिफाइन हो रहा है कहां डेफिनेशन है तुम्हारे हिंदुत्व की धर्म और धर्म की यह है डा हिंदू क्योंकि जिसको इन्होंने स्वीकार किया जिसके रक्षक बन रहे उसके भी दोगले उसको भी मना करते हैं यह तो उनमें से हैं जो यह तक कह देते हैं कि सब में कमियां है इसका मतलब सनातन धर्म का अस्तित्व ही नहीं है तुम जैसे लोग नाश करवाते हो कहने का मौका मिलता है

01:41:22:03 कि तुम्हारा येय तो यह कह रहा है मेरी एक चर्चा के बारे में बहुत बात होती किसी दिन उस पर बात करेंगे जहां पर व्यक्ति यह कह रहा है बुराई को बनाना बुराई नहीं है मुस्लिम्स के साथ जो हुई थी उसमें वो लोग इतने सारे बोलने लगे कि आर्य समाज तो ऐसा मानता है फिर आप कैसे कैसा कह रहे हैं तुम्हारे जैसे लोगों की वजह से होता है ना भाई तुम जैसे लोग मौका देते हो ना उनको हम जब अपने ईश्वर की सर्व सामर्थ्य सिद्ध कर रहे हैं तो वहां पर आर समाज हमें कमजोर करता है ना नहीं नहीं आर समाज तो य मानता है व अवतार नहीं ले सकता तो पूछना पड़ेगा ह समान कि भैया हम सर्वशक्तिमान कैसे माने कि नहीं नहीं जो अपना अपने कार्य कर लेता है वो सर्वशक्तिमान है तो फिर आत्मनिर्भर कौन है और फिर जो अपने कार्य नहीं है उनको भी कर लेता उसको क्या कहोगे क्षमता क्षमता है उसके अंदर उसको क्या कहोगे परम सर्वशक्तिमान तो हमारा वो परम सर्वशक्तिमान

01:42:28:07 छीन लिया सर्वशक्तिमान का अर्थ बदल दोलो यही सबसे बड़ी रुकावट है अलंकार को फैलाने में चलिए कोई आना नहीं चाह रहा है कोई आया है क्या आर्यन कुशवा आपका चेहरा

01:43:24:19 आप आ सकते हैं लाइव में आपको लिंक दिया गया है अपनी बात रख सकते हैं हम लोग समझने का प्रयास करेंगे आप क्या कहना चाह रहे हैं हमने सदैव सर्द पूर्ण चर्चा का ही आलंबन लेने का प्रयास किया मगर आपत्ति जनक शब्दावली हों के कारण हमें उसके प्रति उत्तर में वैसा करना पड़ा कलयुग का नीच योगी भी आया है क्या चेहरा दिखाओ भाई उसके नाम से कोई और तो नहीं आ गया है जय श्री राम शिवा भया जय श्री राम हमने अभी कुछ होंडा हिंदुओ की बात की थी जिनका धर्म निश्चित नहीं है उनमें से एक व्यक्ति की फोटो लगा के आया है व्यक्ति मगर वही है कि नहीं यह नहीं

01:44:18:22 पता तो चेहरा दिखा दे तो आपको ऊपर लिया जाए तबतक अपनी बात रखें आर्य जी हां भैया तो ये जितने सारे हैं ना सब सबका जो कांसेप्ट है वो एक ही है चाहे वो आर्य समाज हो कहते हैं कि मिलावट हो गई है रामपाल मिलावट की जगह काल ले आएंगे और कौन कहते हैं कलयुग है तो कलयुग में मतलब भा स्न वालों का है कि कलयुग के नाम पर भाव भाव अच्छा होना चाहिए भाव अच्छा भाव के नाम पर कुछ भी कर दो आप नहीं वो अपनी बात मनते हैं भा अपनी बातें मनवा लेते हैं अपनी बातें मनवा लेते हैं तो धंधा चलाना है ना अपनी बातें कैसे बनवाते है देखो जैसे वो कहेंगे कि यदि आपने जैसे अभी एक बात हुई थी कि वो लोग भगवत गीता को किसी को ऐसे व्यक्ति को भी दे देते हैं जो पता नहीं कहां से आ रहा व कह रहा मैंने अभी हाथ गंदे मैंने मीट खाया चिकन खाया है तो भगवत गीता को उसको भी फोर्स करते कि आप य ले लो ले लो तो इसमें इनका तर्क होता है कि वो व्यक्ति अगर उसको देखने के तुरंत बाद मर जाता तो उसको मोक्ष मिल जाता क्योंकि उसने लास्ट में भगवान का नाम या भगवान का स्मरण कर लिया था ठीक है अब यही

01:45:33:26 10 जो अपराध बताते उसमें क्या कहते हैं 10 अपराध बताते उसमें कहते हैं अगर तुम तुमने फलानी फलानी विधि का आलंबन नहीं लिया तो तुम्हें नाम का फायदा नहीं होगा तो जो व्यक्ति को आप भगवत गीता दिखा रहे हो उसने वो फलाने फलाने नियम उसको मालूम तक नहीं तो उसने क से किया होगा बताइए मगर अपने सिद्धांतों को तो यथावत रखना है अपने हा तो स्वघोषित सिद्धांत उनको रखना मगर जो पहले से चले आ रहे सिद्धांत उनसे दिक्कत अपने सिद्धांतों में भी नहींन वाले कहते हैं कि जो शिवजी है व परम वैष्णव हैकी बात हमने पढ़ लिया है हम हम आमने सामने जा चुके हैं और फिर अवसर मिलेगा जाएंगे

01:46:23:13 और आपको कोई बात रखनी है तो आप लाइव में आइए बारबार एक ही कमेंट को कॉपी पेस्ट ना करिए वरना व स्पैम मान लिया जाएगा हां भाई हा शिवांश भया स् कन वाले कहते हैं योगी जी आ ग बताइए कलयुग के योगी जी बताइए तो नमस्कार भाई आपको जय श्री राम नहीं आपने एक स्टेटमेंट दिया कि 200 साल पहले कोई भेदभाव नहीं होता था किस आधार पर देखिए हम लोग शुरुआत करेंगे ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं इस बात प फिर हम बाकी की चीज लेंगे कय

01:47:17:09 बा सर्वशक्तिमान के ऊपर बात करते आ श्वर सर्वशक्तिमान है अवतार

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01:47:23:24 नहीं ले सकता क्यों कैसे समझाइए इसको थो अवतार मतलब अवतार मतलब होता अवत होना तो प्रश्न उठता है कि अगर ईश्वर ने अवतार लिया है तो पहले वहां पर क्या था अगर सब जगह ईश्व है व सर्वव्यापी है तो फिर व अवतार ले कैसे रहा है अच्छा एक बात बताइए कि आपके अनुसार जो ईश्वर सृष्टि की रचना करता है वह केवल मन में सोच लेता है कि बाकायदा फिजिकली फोर्सफुली वो रचना करता है संकल्प मात्र से संकल्प मात्र से कोई फोर्स काम नहीं करती है फोर्स भी काम करती है कि नहीं फोर्स काम करती है उसी की

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01:48:09:21 फोर्स है उसी की फोर्स काम करती है है ना अब एक बात बताइए कि अगर सृष्टि की रचना हो रही है तो जिस समय पृथ्वी बन रही है उसी समय सूर्य भी बन रहा है आपने इस पर वीडियो भी बनाया था जिस समय पृथ्वी बन रही हर जगह सारी जगह एक साथ कार्य हो रहा है ऐसा नहीं क सते मैं समझ रहा हूं मैं समझ रहा हूं कार मैं समझ रहा हूं मुझे अपना प्रश्न पूरा कर लेने दीजिए एक साथ सभी जगह सारी जगह कार्य हो रहा है तो कहीं पर ज्यादा एनर्जी की जरूरत है कि नहीं है जहां जहां पर सूर्य बन रहा है वहां पर ज्यादा एनर्जी और जहां पर पृथ्वी बन रही है वहां पर कम एनर्जी जरूरत है कि नहीं है पह हां पह या

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01:48:56:27 ईश्वर स्वयं को रेगुलेट करेगा ना कि भाई कहां पर पृथ्वी बनने लायक एनर्जी का यूज होना है और कहां पर सूर्य बनने लायक एनर्जी का यूज हो रहा है हां तो बिल्कुल सही बोला लेकिन ये नहीं कह सकते कि एक जगह तो कार्य कर रहा है लेकिन दूसरी जगह कार्य नहीं कर रहा मैं ये नहीं कह रहा हूं कि एक जगह कार्य कर रहा है मैं ये नहीं मेरा कहना ही नहीं वो अपने आप को कम ज्यादा कर रहा है जबकि वो समग्र रूप से एक रस होकर के सर्वत्र व्याप्त है वो

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01:49:23:26 अपने आप को सर ऊपर नीचे नहीं कर र वो ऊर्जा को जो अपनी ऊर्जा है जो प्राण है उसको वो किसी जगह पर कारण कई परिणाम निकलते एक परिणाम अलग है दूसरा परिणाम अलग है उसका कारण है अलग-अलग कारणों के कारण अलग-अलग कारण जैसे बीज है तो बीज से अगर पेड़ बनेगा तो सिर्फ बीज कारण नहीं होता कारण होता है पानी कारण होता है वायु कारण होती है सूर्य तो अलग-अलग कारणों से एक परिणाम निकलता है तो सूर्य अग बना है परिणाम है आप एक बात बताइए कि आप तत्व कितने मान रहे हैं यहां पर पंच भाई एक तो प्रकृति तत्व हो गया एक जीव तत्व हो गया एक ईश्वर तत्व हो गया तो आप शक्ति जो ईश्वर की है वो उससे अलग कैसे गिन रहे हैं मैं तो गिन ही नहीं रहा हूं अलग मैं कह रहा हूं ईश्वर की ही शक्ति है ईश्वर ही कार्य कर रहा है ना शक्ति के रूप में बिल्कुल बिल्कुल तो जब ईश्वर कार्य कर रहा है तो अपने आप को कम ज्यादा कर रहा है कि मैं यहां पर ज्यादा एक्टिव हो वहां पर कम एक्टिव हो वहा पर फोर्स ज्यादा लगे यहां पर फोर्स जो है कम लगे

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01:50:31:07 पहली बात अगर वह सूर्य में कोई कार्य कर रहा है पृथ्वी में कोई कार्य कर रहा है मैंने फिर बोला उसका परिणाम अलग अलग है लेकिन आप य कह दो कि यहां पर ज्यादा कार्य कर र य पर कम कार्य कर र है यह कोई तर्क संगत नहीं रहता कि आप देख लो तक संगत है मान लीजिए मान लीजिए कि एक जगह मुझे 100 किलो की बोरी उठानी है और एक जगह मुझे जो है 5 किलो की बोरी उठानी है तो जहां पर मैं 100 किलो की बोरी उठाऊंगा वहां प फोर्स ज्यादा लगाऊंगा ना फोर्स ज्यादा लगेगी ना कंपेरटिवली टू जहां पर मुझे 5 किलो की बोरी उठानी है बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल सही तो यहां पर मैंने अपने आप को रेगुलेट किया ना कम ज्यादा कर लिया ना जबकि मैं समान रूप से सब जगह व्याप्त था हम बिल्कुल तो रेगुलेट हो गया ना इससे यह सा पहली पहली बात चलो ठीक है आपने इससे यह साबित कैसे होता है कि अवतार ले रहे हैं इससे इससे अवतरित होना अवतरित अवतरित होना सिद्ध हुआ ना कि जो ईश्वर स सर्वव्यापक था एक रस था उस कहीं पर भी कम ज्यादा नहीं था अब वोह कम ज्यादा के रूप में काम कर रहा है इसको कह दिया अवतरित होना यह वो वाला अवतार नहीं है जो जो ये वो वाला अवतार नहीं है अभी भी मैं बताऊंगा यह वो वाला अवतार नहीं है अभी भी जो आंखों से दिखाई दे मगर अवतरित

01:51:46:07 हुआ ना हुआ ना किसी देश काल परिस्थिति में उसने जब सृष्टि की रचना की तो वो अपने आप से अवतरित हुआ

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01:51:55:07 जो काम मेरी खोपड़ी कर जो काम मेरी खोपड़ी कर सकती है वो काम मेरे हाथ नहीं कर सकते और जो काम मेरे हाथ कर सकते हैं वो काम मेरी खोपड़ी नहीं कर सकती है ना मगर इसीलिए हम लोग एक रस नहीं है हाथ जो कर सकते हैं वो खोपड़ी

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01:52:11:08 भगवान एक रस है तो एक रस से जब वो सृष्टि का निर्माण करेगा तो उसे अवतरित होना उतरना पड़ेगा अवतरित होना पड़ेगा तो जो निर्गुण निराकार ईश्वर है वो सगुण निराकार बना

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01:52:22:26 सगुण हो गया निराकार है निराकार अभी भी है मगर सगुण हो गया अवतार ले लिया उसने आपको अपने आपको को क्या किया उसने कस्टमाइज किया कि मैं कहां पर कम कम वो हूं एक्टिव और कहां पर ज्यादा एक्टिव हूं यहां चर्चा है नहीं कि स सगुण था निराकार था मैं कह रहा हूं वो सगुण भी है वो निराकार भी है

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01:52:43:00 लेकिन यह कह देना कि ए तो ईश्वर है बी ईश्वर नहीं है य ईश्वर को संकुचित करने वाली बात है

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01:52:49:01 देखिए अभी अभी बात बदल रही है अभी क्या था कि ईश्वर जब सब पहले से ही व्याप्त है ईश्वर जब सब जगह पहले से ही व्याप्त है तो उसका आना जाना सिद्ध नहीं हो रहा ईश्वर सब जगह पहले से ही व्याप्त है मगर ईश्वर के सगुण स्वरूप का आना जाना सिद्ध हो गया सगुण रूप अगर ईश्वर ने सगुण रूप लिया है तो यह भेद नहीं हो सकता कि आप अलग हो और मैं अलग हूं य तोय तो बात की बात ये बात की बात है अभी हम एक तर्क को काट रहे हैं केवल अभी ये अगला चरण है ऐसा नहीं है इसका उत्तर नहीं है इसका उत्तर नहीं है ऐसा नहीं है मगर अभी हम केवल एक तर्क को पकड़ रहे हैं कि जैसे कि आपने तर्क दिया कि जो सब जगह पहले से ही व्याप्त है उसका आना जाना कैसे सिद्ध होगा अच्छा आप एक बात बताओ कि भगवान सब जगह पहले से व्याप्त है ये तो मानते ही हो ना व्याप्त है तो एक बात बताओ कि किसी देश काल

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01:53:44:27 परिस्थिति में जो इनका जो ये है ऋषियों का मस्तिष्क उसमें जो वेद मंत्र है वो कैसे प्रकट हो रहे हैं ईश्वर तो पहले से ही था कैसे प्रकट हो रहे हैं ठीक है कैसे कैसे प्रकट हो रहे हैं ठीक है सिंपल प्रश्न है कैसे प्रकट हो रहे हैं पहली बात वह पुरुष है या पुरुष के द्वारा लिखे गए है या ईश्वर के द्वारा आए है इसमें क्या है कि वह अभ्यास के द्वारा हो रहे है ऐसे नहीं कि एकदम से उतर गया पह व तो भी कहते हैं कि भगवान अभ्यास के द्वारा अपना दर्शन दे देते हैं इसी देश काल परिस्थिति में बिल्कुल मैंने तो इस को काट रहा हूं मैं इस तर्क को काट रहा हूं जो पहले से ही है अगर ईश्वर सबके पास है तो ईश्वर के रूप में उसका ज्ञान भी है वेद मंत्र भी है फिर किसी देश काल परिस्थिति में कोई उनका दृष्टा क्यों बन रहा है इसका मतलब ईश्वर होते हुए भी पार मर्थक रूप से ईश्वर होते हुए भी व्यवहारिक रूप से उसका आना जाना सिद्ध होता है य बात अजीब लग रही है मुझे एक बात बहुत नता समझाना कि वह सर्वव्यापी है अब वो सर्वव्यापी है वो यहां भी है यहां भी है अब उसने यहां पर अवतार लिया अरे जब वो

01:54:59:28 यहां पर है ही तो अवतरित क्यों हो रहा है मैं बता रहा हूं मैं बता रहा हूं वो जहां हर जगह है वो पार मर्थक रूप से आध्यात्मिक दृष्टि से है आध्यात्मिक दृष्टि समझते हैं आप जैसे कि कोई मुक्त होता है यहां से तो क्या आकाश का कोई गेट खुलता है नहीं खुलता ना नहीं तो यानी कि उसका केवल एक डायमेंशन चेंज होता है गेट नहीं खुलता है कोई कि आकाश में कोई गेट खुला और थोर की तरह इस दुनिया से उस दुनिया में चले गए ये सब नहीं होता है डायमेंशन चेंज होता हा तो इसी तरीके से यह जो भगवान हर जगह है यह आध्यात्मिक उससे है फिर वो व्यवहारिक रूप में प्रकट हो जाता है मतलब कि बिल्कुल ऐसे जैसे कि मक्खन दूध में है मगर अभ्यास करने पर मक्खन प्रकट हो जाता है काट की लकड़ में तो यह अभ्यास करने से प्रकट हो जाता है यूं ही प्रकट होता विष्णु का

01:55:56:03 अभी आपने बोला अभ्यास करने से ठीक है तो अभी हम तर्क ये वाला काट रहे हैं कि जो पहले से ही व्याप्त है वो उसका आना जाना सिद्ध नहीं होता है होता है अभ्यास करने से होता है पर होता है आना जाना सिद्ध नहीं होता अब वो जान गया कि वो ईश्वर ही है पहले वो जानता नहीं था अरे आप दूसरी जग जा रहे आत्मा है हो जाए तो क्या भगवान नहीं है आप जो है अध्यात्म को और इसको आध्यात्मिक दुनिया को भौतिक जगत को एक करके चल रहे दिक्कत य मैंने अभी आपको बताया कि ईश्वर जब सब जगह व्याप्त है तो किसी देश काल परिस्थिति में जो ऋषि है वह मंत्रों के दृष्टा कैसे बन रहे हैं बताइए इसको ठीक से बताइए मैंने कहा अभ्यास करके ध्यान करके अभ्यास करके जो चीज उनके पास पहले से थी उसी का दर्शन कर रहे हैं उनके पास तो पहले से थी ना वो चीज वो चीज है ही वो चीज है ही कोई नई तो चीज आई नहीं ना मैं ये कह नहीं सकता कि परमात्मा परमात्मा है ही अब देखिए अगर मैं मैं हूं मैं जीव आत्मा हं जानता नहीं हूं मानता हूं अभ्यास करके मुझे अनुभव हुआ कि मैं जीव आत्मा हूं और जीवात्मा मुक्त हो गई ठीक आपकी बात समझ गया मैं आपकी बात

01:57:11:04 समझ गया इसको ऐसे समझ लीजिए कि हमारे दो तरीके के ट्रुथ होते हैं एक होता है बिहेवियरल ट्रुथ एक होता है स्पिरिचुअल ट्रुथ जो टनल होता है जैसे की पृथ्वी गोल है यह हमको किस दृष्टि से पता है सेटेलाइट इत्यादि की दृष्टि से हम देख रहे तो पृथ्वी गोल है मगर पृथ्वी हमें दिख कैसी रही है फ्लैट चप फ्लैट अब हम व्यवहार कैसा करेंगे फ्लैट के अनुसार जब हम फ्लैट के अनुसार व्यवहार करेंगे सैटेलाइट बनाएंगे एरोप्लेन बनाएंगे तब हम पृथ्वी की पदी से बाहर निकलेंगे फिर कहेंगे हां यह पृथ्वी जो है गोल है इसी तर अभ्यास के माध्यम से अरे मेरी बात सुन लो सुन लो ईश्वर का अवतार का होना सिद्ध होता है व्यवहारिक रूप से आना जाना जब हम यह कहते हैं कि ईश्वर आता है जाता है तो यह व्यवहारिक रूप से है और पार मर्थक रूप से तो ईश्वर सब जगह है ही वो तो है ही मगर मगर मगर उसके अनुसार मैं अपनी बात पूरी कर लू मगर उसके अनुसार हम लोग बिहेव नहीं कर सकते क्यों नहीं कर सकते जैसे कि ईश्वर हर जगह है तो ईश्वर तो माता भी है और पत्नी भी है क्या करोगे एक जैसा

01:58:26:07 बिहेव करोगे क्या देखिए बिल्कुल सही बोला एक जैसा हा अलग अलग बिहेव करे क्योंकि अभी हम भौतिक उसम है ठीक है बात लेकिन सूक्ष्म दृष्टिकोण से देखा जाएगा तो यह कह देना कि व अवतरित हुआ यह एक देखो ऊपरी रूप से तो मैं मानता हूं कि सभी ये बात हम भी कह रहे हैं ये बात हम भी कह रहे हैं सूक्ष्म दृष्टिकोण से तो भगवान जो है सब जगह पहले से ही सर्वत्र व्याप्त है मगर जो व्यवहारिक दृष्टिकोण है उसमें भगवान का आना जाना

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01:58:57:09 सिद्ध होता है हम भी यही कहते हैं हम कोई अलग नहीं कह रहे अगर आप ये बात मानने वाले है जो भेद है इसके सूत्रम शैली में समझिए भेद का निर्वाह करके अभेद तक पहुंचा जाता है जो अद्वैत है वोह हो गया परमार्थिक धरातल पर प्राप्त का विषय तो निर्वाह किसका करेंगे भेद का क्योंकि हम लोग अज्ञान से अविद्या से ग्रसित हो गए तो अब हो गए तो अब क्या करें अविद्या के अनुसार उस अविद्या का पालन करो जो अविद्या तुम्हारी मुक्ति की हेतु बन जाए जैसे कि धरती पर गिरा हुआ इंसान धरती का सहारा लेकर उठ खड़ा होता है जैसे कि एक एरोप्लेन है उसको यदि धरती से मुक्त होना है आकाश में उड़ना है तो पहले धरती पर ही दौड़ता है उसी प्रकार से हम जब अविद्या में आ गए हैं तो हमारा बिहेव होगा किसके अनुसार अविद्या की चीजों के अनुसार शास्त्रों में अविद्या अविद्या इनको भी कहा गया वेद को भी अविद्या कहा गया शास्त्रों में तो अविद्या यह वो अविद्या है जो हमें मुक्त कराएगी होता है ना अविद्या के भी रूप होते हैं तो ये वो

02:00:08:04 अविद्या ये वो अविद्या है जो मुक्त कराएगी

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02:00:10:24 तो व्यवहारिक दृष्टि से माता बहन पत्नी यह सब अलग अलग है सूक्ष्म दृष्टि से माता और बहन और पत्नी में कोई अंतर नहीं मगर वो मुक्त की दृष्टि से वो ब्रह्म की दृष्टि से मनुष्य की दृष्टि से माता अलग है बहन अलग है बेटी अलग है पत्नी अलग है

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02:00:27:26 यह मनुष्य की दृष्टि है जब हम मुक्त हो जाएंगे जब हम मुक्त हो जाएंगे तो माता बहन पत्नी एक इसका एक और एग्जांपल है अच्छा लग रहा आपसे बात कर बोलिए इसका एक एपल और है नैनम छिंदंति शस्त्राणि नैनम दहति पावक न चैन क्लेप न शति मारुता अब इसमें कह रहे हैं कि तुमको ना कोई तुम आत्मा हो और तुमको ना कोई काट सकता है ना कोई छीर सकता है ना जला सकता है ये सब चीजें इसमें कही जा रही है मगर अभी जब हाथ घुमा देगा मेरी ओर कोई तो पलक झपक जाएगी भय क्योंकि थ्योर कली मैंने जान लिया है कि आत्मा मर नहीं सकती मगर प्रैक्टिकली अभी मैंने इसको एमप्लीफाई करना नहीं सीखा है तो क्या है कि प्रैक्टिकली अभी मुझे जो अज्ञानता का प्राप्त है उसी अज्ञानता में से वो अज्ञानता ढूंढनी पड़ेगी जिस अज्ञानता का आलंबन लेकर के मैं इस अज्ञानता से मुक्त हो पाऊं उसी का नाम धर्म है उसी का नाम वेद है उसी का नाम सनातन

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02:01:24:22 है तो यह सूक्ष्म दृष्टि की बात है कि ईश्वर सब जगह है मगर व्यवहार में ईश्वर का आना जाना सिद्ध होता है जैसे सूक्ष्म दृष्टि की बात है कि ईश्वर का ज्ञान सब जगह है मगर व्यवहार में ऋषियों द्वारा उसके वेद मंत्रों का दृष्टा होना सिद्ध होता है किसी देश काल परिस्थिति में जी ठीक है मैं अपनी बात एक बार ककलेट कर देता हू पू अच्छी तरीके से यहां बात मैं ये कह रहा हूं कि अभ्यास के माध्यम से जब जीव आत्मा जान जा कि व परमात्मा है तो जीवात्मा और परमात्मा में भेद नहीं रहता तो उसी जीवात्मा को अगर भगवान कह दिया जाए तो इसमें क्या गलती है पहली बात जब वो जान गई जब अभ्यास से जान गई ठीक है तार्किक दृष्टिकोण से मैं ये कह रहा हूं कि जब मैं कहूंगा कि वह अवतरित हुआ तो अगर मैं कहू अवतरित हुआ मतलब उतरा पर वो पहले भी वही था लेकिन हम मैं ये कह सकता हूं कि वो जागा जान गया कि व परमा बकल बिल्कुल बिल्कुल वो देखिए मुक्त की दृष्टि ब्रह्म की दृष्टि जो है ब्रह्म कौन है मुक्त जो ब्रह्म की दृष्टि है उसके अनुसार वो जागा ही है केवल वो ब्रह्म स्वरूप हो गया वो जागा भी नहीं कुछ नहीं हुआ उसके उसको अपने स्वरूप का बोध हो गया मगर यहां जो खड़ा है ये दो पर्सपेक्टिव है मान लीजिए बीच का हिस्सा है इसके इधर ब्रह्म है

02:02:39:28 और इधर जो है हम तो ब्रह्म देख रहा है कि एक व्यक्ति जो है मुक्त हो गया ब्रह्म स्वरूप हो गया हम देख रहे हैं व्यक्ति जो है उसके रूप में ईश्वर जो है अवतरित हो गया इसको मैं एक बात ऐसे कहूंगा कि जैसे जो सुखदेव जी का प्रकरण आता है महाभारत में महाभारत में सुखदेव जी का प्रकरण आता है सुखदेव जी मुक्त मुक्त हो गए थे ठीक है अब जब वो मुक्त हो गए तो उसके बाद उन्होंने ये जो हमारी जो गुरु परंपरा है शंकराचार्य की इसमें उनको दर्शन कैसे दे दिया जब वो मुक्त हो गए महाभारत में तो व्यवहारिक दृष्टि से हमने क्या देखा कि हमारे पास सुखदेव जी आए लक्षण साम्य से वस्तु साम्य मानी जाती है हमने उनसे पूछा तुम्हारे पिता का नाम क्या उन्होंने बता दिया हमने उनसे गुण से गुण सवाल किए उन्होंने सब बता दिया उनके जो तिल था वो भी वही प है सुखदेव जी के तो हमने ये माना कि सुखदेव जी ही आए हमें ज्ञान देने मगर वास्तव में कौन आया था ब्रह्म में लीन क्योंकि सुखदेव जी तो ब्रह्म स्वरूप हो गए थे मोक्ष तो ब्रह्म ही आए थे तो ब्रह्म ही तो है जो आपके हमारे सबके रूप में है मगर यह ब्रह्म दृष्टि की सच्चाई है व्यवहारिक सच्चाई क्या है कि आप जो है जो आपका नाम होगा वो है मैं जो हूं मैं वो हूं जो मेरा नाम है ये हमारी व्यवहारिक चाहिए अब इसका व्यवहार का आलंबन लेकर के

02:03:55:09 हम लोग वो जो परमार्थ है उसको सिद्ध करते हैं व्यवहार अब ये धर्म की उपयोगिता क्या है अगर अगर हम लोग सब कुछ सूक्ष्म दृष्टि से ही देखने लगे तो धर्म की कोई उपयोगिता ही नहीं है धर्म तो वही पर काम करे यहां जो हमारा भेद था वो यह था कि यह बात कह नहीं जा रही कि जो जागा हुआ व्यक्ति है वही भगवान है क्योंकि अगर जैसे कि आप बाल्मीकि रामायण में पढ़ते हो तो वहां पर विश्वामित्र को भी राम भगवान के से संबोधित कर रहे हैं वहां वशिष्ठ जी को भी भवान के संबोधित करे लेकिन राम जी को वहा पर भगवान बोला रामचरित मानस में जाकर उनको भगवान के रूप में दर्शाया जाता है तो इसमें मैं यह कहूंगा जागा हुआ व्यक्ति भी भगवान आप वो चीज सही कह रहे परमार्थिक दृष्टि से मगर इसमें बात आ जाएगी कि जो हमारे परंपरा प्राप्त वेदा आदि शास्त्र है उसने किस किस कौन कौन किस किस व्यक्ति को स्वीकार किया है उसको ही हम मानेंगे कि हा यह जागा हुआ है अब मैं कह द मैं जागा हूं तो मुझे थोड़ी ना भगवान माना जाएगा क्यों क्योंकि शास्त्र नहीं बोल रहे

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02:04:52:00 है तेरे लिए कर्तव्य और कर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण है तो हम लोग जागा हुआ उसे ही मानेंगे जिस जिसको हमारा वेद कहेगा अब ऐसे तो बुद्ध भी थे हमारे बीच में भेद यही है एक छोटी सी बात कह ता हूं हमारे बीच में भेद यही है कि आप ये कह रहे हो कि जो परंपरावादी लोग जो है उन्होंने जो कह दिया कि ये भगवान है तो परंपरावादी नहीं परंपरा प्राप्त गुरु गोविंद और ग्रंथ केवल ग्रंथ नहीं केवल ग्रंथ नहीं केवल गुरु नहीं केवल गोविंद नहीं परंपरावादी गुरु अ कभी कभी होता है कि गुरु और गोविंद मिलकर के ग्रंथ को वो करते वेरीफाई कभी-कभी होता है कि ग्रंथ और गोविंद मिलकर के गुरु को वेरीफाई करते जैसे कि गुरु कौन होना चाहिए तो शास्त्र में दिया हुआ है गुरु का परम लक्षण जो है सन्यासी है परम लक्षण सन्यासी है शास्त्र में दिया है अब दूसरी बात मनुष पति में लिखा है कि धर्म में संशय होने पर अधिष्ठाता ब्रह्मचारी को बनाए वही छोड़ने त्याग करने विरक्त ता अच्छा भगवत गीता में योगी को कई बार वैरागी होना होने वाला माना गया है वैराग्य होना चाहिए उसके जीवन में वो 15 प एक है वहां पर तीसरे वाले श्लोक में कहा है कि वैराग्य रूपी जो शस्त्र है उससे वो जो

02:06:07:02 वृक्ष प्रकृति का उसको काट दो जो माया है उसको काट दो वैराग्य परम लक्षण क्या हुआ वैराग्य दूसरा लक्षण क्या हुआ कि वो समस्त शति स्मति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा दे ऐसा ना करे कि इसमें य खा है तो ये तो मानूंगा इसमें ये लिखा है ये नहीं मानूंगा अब जैसे कि मुंडकोपनिषद में ऋषि गण अपनी परंपरा बता रहे हैं तो तीसरा प्रश्न यही है तीसरा जो वो है फैक्ट गुरु को जानने का अब शास्त्र से हम गुरु को जान रहे हैं तो क्या हुआ कि उसमें दिया गया है कि परंपरा प्राप्त जो सिद्धांत है वही ग्र ग्रहण करने योग्य है अपने जो आदि शंकराचार्य जी गीता के भाष्य में ये बात कह रहे हैं 13 अध्याय के दूसरे श्लोक में मुंडकोपनिषद में ऋषि गण बता रहे अपनी परंपरा एक से लेकर चार तक में चार दो में भगवत गीता भगवान श्री कृष्ण कह रहे हैं ज्ञान कैसे आ रहा है परंपरा से आ रहा है और तो और यहां तक कि राम जी जो धर्म का साक्षात स्वरूप है वह भी गुरु के पास जाते हैं अब जब गुरु के पास गए तो इसका मतलब यह है कि उसका वो भी किसी ना किसी गुरु के पास जाए तो यह क्या हो गई परंपरा हम लोग नॉर्मली आज की जो भौतिक शिक्षा है उसको प्राप्त करने के लिए यदि किसी के पास जाते हैं तो हम लोग चाहते हैं कि वो सर्टिफाइड टीचर हो सर्टिफाइड सर्टिफिकेशन क्या बता रहा है कि उस उसने वो अमुक

02:07:22:09 अमुक फिजिक्स केमिस्ट्री मैथ कहां से पढ़ी उसके गुरु का नाम क्या है क्या है उसका सोर्स ऑफ इंफॉर्मेशन तो जब वो बता देता है तो हम उस पर रिलाई कर कोई भी अभिभावक अपने बच्चे को सबसे पहले सर्टिफाइड टीचर के पास भेजना चाहते हैं तो यह तीसरा पक्ष हो गया कि परंपरा से क्यों परंपरा से क्योंकि हमारी श्रुति परंपरा है हमारा धर्म कैसे आया परंपरा से आया अगर आज हम कहते कि हम वेदों को मानने वाले हैं तो वेद हमारे पास आए कैसे परंपरा से अब यदि हमारे पास हमको पर से वेद मिले हैं और हम हमको परंपरा पर विश्वास नहीं है तो इसका मतलब यह हुआ हमारा यह विश्वास गलत है कि यह जो शलोक मंत्र है यह ईश्वर द द्वारा प्रदत मंत्र ही है क्योंकि वो व्यक्ति य हमसे अर्थ में झूठ बोल सकता है तो वह व्यक्ति हमसे मंत्र में भी झूठ बोल सकता है हो सकता है ईश्वर ने कोई और मंत्र दिया हो अज्ञानता के कारण या फिर द्वेष के कारण लालच के कारण उसने मंत्र को बदल दिया होय अ ब यदि वो अर्थ बदल षय मैं गुरु का लक्षण बता रहा था तीसरा हो गया परंपरा फिर एक चौथा और है कि गुरु वही जो आपका संशय दूर कर दे गु का मतलब अंधकार और रू का मतलब निकालने वाला असतो मा सगम त

02:08:37:22 जतिया म मतया तो गुरु वही जो आपका अंधकार दूर कर दे तो यह क्या है ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं अब गुरु वही जो सर्व शक्तिमान गुरु वही जो गोविंद को गोविंद के रूप में गोविंद और ग्रंथ के द्वारा गुरु डिसाइड हुआ कई बार ऐसा होता है जब गुरु और ग्रंथ के द्वारा गोविंद डिसाइड होता है तो इसलिए केवल गुरु नहीं केवल ग्रंथ नहीं केवल गोविंद नहीं

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02:09:03:12 हमारे यहां तो यह तक बुद्ध के रूप में अगर आकर के उन्होंने ये कहा कि वेदों का मत मानो यज्ञों की रक्षा के लिए तो हमने बुद्ध को ईश्वर का रूप तो माना मगर हमने उनकी शिक्षाओं का अनुगमन नहीं किया क्योंकि हम सनातनी वो है जो अपौरुषेय रखते अपर जिनका जिनकी रचना ईश्वर ने भी नहीं की हम उन शास्त्रों को मानते हैं मैंने ये प्रश्न किया था मुसलमानों से मैंने प्रश्न किया था ये सब कटिंग नहीं निकालते फस गए थे मैंने कहा कि अगर तुम्हारे अल्लाह ने बुराई को भी बनाया है शैतान को भी बनाया है तो यह कैसे कहा जाए कि कुरान में बुराई नहीं है जब तक आप अपर ग्रंथ की बात य ये तर्क की पराकाष्ठा है सनातन में तर्क की पराकाष्ठा क्यों पराकाष्ठा है कि भाई क्योंकि ईश्वर ने ही सब कुछ बनाया है तो अगर ईश्वर से प्रकट होने वाले ईश्वर के दिए हुए ग्रंथों को हम मान लेंगे ना तो उसकी क्रेडिबिलिटी प भी प्रश्न हो जाएगा तो हम उन ग्रंथों को मानते हैं जिन्हें ईश्वर ने भी नहीं रचा वो तो सदैव विद्यमान थे किस रूप में ईश्वर की सांस के रूप में तोय ब्रक उपनिषद दो चर 10 में दिया हुआ है ईश्वर की सांस के रूप में जो हमारे वेदा शास्त्र में वो सदैव विद्यमान थे तो ये

02:10:18:12 इतने घटकों के द्वारा जो हमें ये होगा कि भा ये ईश्वर का रूप है तो हम उसको मानेंगे क्योंकि हमना अब कोई स्वयं को घोषित कर दे व बात अलग है मगर समस्ती के रूप से उसी को धर्म माना जाएगा जो हमारे वेद शास्त्रों से उत्पन्न हो रहा होगा उसी को ब्रह्म माना जाएगा जैसे कि एक प्रश्न य भी किया गया था यह किया गया था अलंकार समाज के किसी व्यक्ति के द्वारा वो कहा था उसने कि अगर वो मूर्ति में आ जाता है तो फिर वहां क्या कहते हैं फलाना उसने उतर था उसका कि फिर तो जीसस की मूर्ति में भगवान मान लो उसकी पूजा कर लो जीसस की मूर्ति को भगवान मान लो उसकी पूजा कर लो क्यों नहीं करते हम लोग क्योंकि वो वैदिक नहीं है अब इसमें प्रश्न क्या बनता है कि जब सब कुछ भगवान है निराकार भगवान सर्वत्र व्याप्त है तो केवल प्रणव क्यों प्रणव को मानता है ना आर्य समाज केवल प्रणव क्यों दूसरा कोई शब्द उठा लो दो तीन चार कोई भी उठा लो और उसको मान लो भगवान नहीं क्यों क्योंकि प्रणव जो है वेद द्वारा दत्त है इसलिए हम उसका आलंबन हमने क्या कहा ये वो अविद्या है जो हमें अविद्या से मुक्त कराएगी तो वेदों का सहारा इसलिए चाहिए किसी को भी ईश्वर के रूप में स्वीकार करने के लिए क्योंकि वेदों

02:11:33:18 द्वारा बताई गई वो विद्या अविद्या है जो हमें अविद्या से ही मुक्त कराएगी जैसे नाव चलते समय चप्पू चलाते हैं ना तो नदी के पानी का ही उपयोग कर रहे हैं आगे नाव को धकेलने के लिए वो चीज जी वैसे मेरा विषय परंपरा या इस विषय में मैं बिल्कुल नहीं बोलना चाहूंगा ठीक है बात हमारी अवतारवाद के ऊपर थी और हमारी मुझे लगता है बहुत अच्छी बात वहां पर हो चुकी है मैं एक चीज आपसे पूछना चाहूंगा जैसे मूर्ति पूजा की बात क्या वेदों में मूर्ति पूजा आती है बिल्कुल बिल्कुल आती है

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02:12:07:07 बता देता हूं [संगीत] एक दो उदाहरण आपको दे दे रहा हूं अथर्ववेद में 5 30 12 और अथर्ववेद में दो 13 च दो 1 च में क्या कहा जा

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02:12:39:28 रहा है तुम आकर इस पाषाण में विराजमान हो जाओ यह आपका शरीर बन जावे सैकड़ों वर्ष पर्यंत उसमें आपकी विभूति को स्थिर करें और वेद में य 5 30 12 में क्या कहा जा रहा है मूर्ति को नमस्कार स्ता सत्र उपनिषद में मैं आपको दिखा देता हूं हे रुद्र आपकी जो मंगलमय शांत पुण्य प्रकाशनी मूर्ति है हे गिरि संतु उस पूर्ण आनंदमय रूप के द्वारा आप हमारी ओर देखो और जैसे नाथस प्रतिमा स्थ आ रहा है ना प्रतिमा का अर्थ वो नहीं माना है कई जगह आर समाज मेंही मगर वहां पर मूर्ति का खंडन करना था तो मान लिया आर समाज नेही कुछ कुछ अंशों में कई जगहों पर प्रतिमा का अर्थ मूर्ति नहीं माना है प्रतिमा का मतलब किसी के तुल्य प्रतिमान कि मेरे समान कोई नहीं है ना तस प्रतिमा मगर एक जगह सस्त प्रतिमा स भी आया है फिर क्या करें और स्वेता चतु निषद में तो रुद्र की मूर्ति की बात हो ही रही है और ऐसे तमाम जगह पर हुई है अरे भाई सीधे सधे ये समझ लीजिए अगर रूप की बात हो रही है कहीं पर मैं ऐसे लेकर चलता हूं कि रूप की बात अगर हो रही है कि आपके इतने हजार आंखें इतनी हजार हाथ है ये पैर है रूप की बात हो रही तो मूर्ति बन सकती है ना फिर क्या दिक्कत अच्छा

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02:13:53:00 ठीक है मान लो वहां पर भाव ये है कुछ और समझाना चाह रहे हैं मगर वेद में लिखा तो है तो आप मजाक क्यों उड़ा रहे हो मूर्ति पूजा का आप समझ लो उसका अच्छा अर्थ और अच्छे अर्थ को आप मान लो मगर मूर्ति पूजा का मजाक मत उड़ाओ कोई उस अलंकार के सहारे ही पूजा करना चाहता है आपके अनुसार व अलंकार है जैसे विराट पुरुष की व्याख्या हुई या भगवान की कई जगह पर इतने नेत्र है इतने हाथ है ऐसे व्याख्या हुई है वेदों में तो अगर व्यक्ति ने एज इट उसको ले लिया है तो आप उसका उपहास क्यों उड़ा रहे हो पप क्यों कह रहे हो पाखंड क्यों कह रहे हो मत कहो आपको उस अलंकार का अर्थ पता चल गया आप अलंकार अलंकार के अनुसार चल लो मगर मजाक उड़ाना आवश्यक है जगह जगह पर मजाक उड़ेगा लेकिन मूर्ति पूजा का उतना विस्तार रूप नहीं था जैसे कि हम बाल्मिक रामायण पढ़ते हैं या हम महाभारत महाभारत में शायद एक जगह शिवलिंग का वर्णन आता है लेकिन इतना विस्तारित रूप से नहीं बताया गया मंदिरों के बारे में इतने विस्तारित रूप से नहीं बताया गया इसके बारे में भी उत्तर है सतयुग त्रेता युग द्वापर युग और कलयुग यह धीरे-धीरे लोगों की आयु और प्रज्ञा शक्ति घट रही है जितना धर्म सतयुग में था उतना त्रेता में नहीं था जितना त्रेता में था उतना द्वापर में नहीं था और जितना द्वापर में था उतना

02:15:08:03 कलयुग में नहीं है तो जितना ज्यादा कलयुग आता जाएगा तो उतनी ज्यादा भगवान की सरलतम प्राप्ति कौन से मार्ग से हो जब व्यक्ति में प्रज्ञा नहीं बची तप करने की यज्ञ करने की उतना ज्यादा तो फिर उसके लिए वस् की गई कि ज्यादा आज ज्यादा मूर्ति इसीलिए दिख रही है आपको जगह जगह क्योंकि प्रज्ञा शक्ति घट चुकी है तो सबसे सरलतम व्याख्या क्या है कि तू मेरी शरण में आजा मैं तुझे पापों से मुक्त कर दूंगा भक्ति तो जो भक्ति की बात है 18 66 में भगवान ने कहा और भी कई न 32 में भगवान ने कहा तू मेरी शरण में इसीलिए उन्होंने क्यों कहा क्योंकि व्यक्ति की जो प्रज्ञा शक्ति है वो पतित होती जा रही है कटती चली जा रही है तो मूर्ति सबसे सरलतम होता है तो इसलिए आज आपको मूर्ति ज्यादा दिख रही है मगर ज्यादा हो या कम है तो और ईश्वर के स्वरूप की बहुत सारी जगह में बात हुई स्वरूप की अगर बात करें और विशेष तौर पर मूर्ति की बात मैंने आपको बता दिया कहां हो रही है विशेष रूप से और भी उदाहरण है मगर उदाहरण मात्र के लिए हमने लिख रखे आप इसको देखिए इसमें आप मुझसे संपर्क कर लीजिएगा तो मैं आपको मंत्र भी भेज दूंगा जहां पर आंशिक रूप से मंत्र क्योंकि पूरे वो यज्ञ पवित के बाद ही धारण कर देखना चाहिए मंत्रों को तो आंशिक रूप से मंत्र आपको भेज दूंगा आप उनको देखिएगा और

02:16:23:04 अब अब देखिए परंपरा क्यों पूछनी पड़ती है इसीलिए पूछनी पड़ती है जैसे मूर्ति की बात हो रही है मगर उसमें बिल्कुल ही व्यक्ति ने उलट कर दिया क्योंकि उसको मूर्ति को ठुकराना है मान लो अब इसलिए उसकी प्रमाणिकता पूछनी पड़ेगी कि आपने केवल बाजार से जाकर के ग्रंथ खरीद लिया है या आपने जहां परंपरा शुटी परंपरा थी ना हमारे य गुरु मंत्र को देते थे शिष्य को गुरु शिष्य परंपरा उससे आए मंत्र गीता प्रस ने नहीं छाप दिया मंत्र या चौखंबा ने नहीं छाप दिया मंत्र वो तो आया है गुरु शिष्य परंपरा से तो जहां से आपके मंत्र आ रहे हैं वहीं से आपने उनका अर्थ लिया है इसलिए पूछना पड़ता है किसी को नीचा दिखाने के लिए नहीं पूछना पड़ता है जब वो ऐसे यथावत चीजों का खंडन कर देते जैसे रामायण में एक जगह बात आई है अहिल्या को मुक्त किया श्री राम ने ठीक है यह बात इनकी विशुद्ध वाली रामायण में भी है हालाकि इन्होने छटनी कर दी मगर अहिल्या वाला वो है तो वहा इन्होने सीधे कह दिया वो तो अलंकार है इनकी जो रामायण पढ़ी आपने ना इनकी नहीं पढ़ी गीता प्रेस की पढ इनकी वाली देखिएगा तो इनकी वाली में ल्याया का जब पार्ट आता है तो मुझे बहुत समय पहले मैंने इनकी पढ़ी थी क्योंकि किसी मुसलमान ने मुझसे कह दिया था कि राम मास खाते थे तो

02:17:38:06 इसलिए मैंने सारी रामायण पढ़ना शुरू किया था यात्रा मेरी भी विधर्मी हों से लड़ने पर ही शुरू हुई है ऐसा नहीं है कि मुझे हर समाज पर आक्षेप लगाने का कोई शौक है मगर धर्मयोद्दा जो हमारे सनातन के ऐसे सिद्धांत है जिनको वह तोड़ नहीं सकते उनको तोड़ने का मौका देने वाले हमारे सेक्ट होते हैं जैसे कि जिस प्रकार दूध से दही बन सकता है मगर दही से दूध नहीं उसी प्रकार कृष्ण तो शिव बन सकते मगर शिव जी कृष्ण नहीं बन सकते अरे भाई जब कृष्ण ही शिव बन रहे हैं तो शिव बनने के बाद उनकी पावर कम हो जाएगी

02:18:15:16 क्या तो ऐसा नहीं करना चाहिए शिव और कृष्ण में भेद नहीं करना चाहिए इससे उ सेक्ट को जो हमारा अहित करना चाहते हैं इससे उनको बल मिलता है इसलिए हमें पूछना पड़ता है कि भाई आपकी परंपरा क्या देखिए आप कोई अगर इंटरव्यू देख रहे होंगे ना हमारा जो इनके मंदिरों में जा जा करके हमने लिया है उसमें आप देखिएगा जो सबसे पहला वीडियो आर समाज का उसमें भी क्या हुआ था कि पहले ईश्वर के सर्वशक्तिमान के बारे में बात हुई थी ठीक है अब तर्क की बात तो रह नहीं जाती है तो फिर आती है बात प्रमाण की तर्क की बात नहीं रह जाती है तो प्रमाण की बात आने लगती तो वो उ वेद मंत्रों का अर्थ कुछ और करेंगे जिन वेद मंत्रों से हम ईश्वर का जो रूप है उसको सिद्ध कर सकते हैं ठीक है तब हमें पूछना पड़ा था कि आपकी परंपरा क्या है कैसे आए वेद मंत्र जिनसे वेद मंत्र आए उनसे अर्थ आया है कि अपने मन से अर्थ दे रहे हो अब मान लीजिए कि मैं आपको एक बुक दे रहा हूं यह बुक मैंने आपको दे दी ठीक है और आप इस बुक पर तो भरोसा कर रहे हो पर मुझ पर नहीं कर रहे हो तो इसका अर्थ क्या हो कि आपका इस बुक पर भी भरोसा होना सिद्ध नहीं होता क्योंकि ये बुक मैंने आपको दी है यदि आपको मुझ पर भरोसा है तभी मुझसे प्राप्त होने वाली बुक पर आपका भरोसा होना सिद्ध होता है यदि मुझ पर भरोसा नहीं है तो मैं हो सकता है आपको कोई

02:19:30:16 झूठी बुक दे रहा हूं कोई मिलावटी बुक दे रहा हूं मैं क्यों दूंगा आपको सही बुक गलत बुक दूंगा यह चीज है

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02:19:38:15 एक चीज ज ठीक है जी तो मैं आपके दो विषयो के बारे में समझना चाह रहा था मूर्ति पूजा के ऊपर अवतारवाद के ऊपर हमने बात कर ली थी मैं

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02:19:45:07 एक आपसे दरख्वास्त यहां पर करना चाहूंगा अगर आपके पास समय हो तो मेरा एक चैनल है उसम हम पॉडकास्ट करते हैं कृपया करके अगर मैं यही पर लाइव आपके साथ आ रखा हूं कृपया करके उस पॉडकास्ट में जुड़ेगा अगर आपके पास आपके चैनल को देखूंगा कि आपका कंटेंट क्या है कैसे है फिर मैं आपको सूचित कर द ठीक है दूसरी बात दूसरी बात जो आपने कहा कलयुग का नीच योगी तो यहां पर नीच शब्द का प्रयोग क्या है नीच शब्द का उपयोग यह है कि आप एक ऐसी वार्ता के हिस्सेदार थे जिस वार्ता में शास्त्रोक्त प्रश्न का उत्तर शास्त्र से ना देकर के व्यक्तिगत टिप्पणियां की गई ऐसा नहीं है कि हमारे पास अवसर नहीं है व्यक्तिगत बातें करने का मैंने अभी अभी इसी लाइव में बताया कि लोग अभी एक अभी वो जो रामपाल वाले हैं उन्होंने एक हमारे विरुद्ध एक वीडियो बनाया उसमें क्या किया एक जगह दयानंद जी को प्रमाण के रूप में ले लिया और दूसरी जगह पर दयानंद जी को ही घटिया नसेड़ी कहा है हमने कभी कहा है क्या अपने चैनल पर उन के बारे में ऐसे ऐसी चीजें प्राप्त है वो तंबाकू का सेवन करते थे ये करते थे वो करते थे मगर हमने कभी भी इस तरह की व्यक्तिगत बातें नहीं की हम मूल सिद्धांतों पर हमने बात की क्या ईश्वर सर्वशक्तिमान

02:21:00:22 परम स्वतंत्र मक्ष शाश्वत धर्म हां तो उसके बाद आपने हमने मैं अपनी बात बता रहा हूं आपने प्रश्न किया मैं बता रहा हूं हमने सदैव क्या किया यह कहा ये तक कहा मैं शंकराचार्य का प्रचार छोड़ दूंगा मुझे कोई दिक्कत नहीं शंकराचार्य के प्रचार को छोड़ने में आप मुझे तीन चीजें दीजिए मैं आपका हो जाऊंगा मैंने कितनी बार कहा होगा अपनी लाइफ में बहुत बार कहा है वीडियोस में कहा है मगर इससे किसी को कोई मतलब नहीं है मुझे देखिए मेरी व्यक्तिगत मान्यता आस्था हो सकती कि मैं शंकराचार्य जी को अपना मेरे गुरु है मगर यदि मुझे सार्वभौम सिद्धांत कहीं और से प्राप्त हो रहे हैं और उसके कारण समाज में मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित हो रहे हैं हमारे एकत आर है तो मैं उसको अपनी व्यक्तिगत मान्यता को अपने तक सीमित रखूंगा प्रचार आर समाज का कर दूंगा प्रचारित तो सर्वशक्तिमान ईश्वर हो रहा है ना केरल में अगर कोई कहती है कोई कन्या दूसरी कन्या से कि भाई यह तुम्हारा कैसा ईश्वर है जो रो रहा है अपनी पत्नी के विरय में अगर उस बिटिया को यह मालूम होता कि ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है वो किसी भी प्रकार के नियम के नीचे नहीं है वो सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है वो पूर्ण है अगर उसको य मालूम होता व तपाक से कहती कि तुम्हारा ईश्वर कह रहा है 6101 में मेरी संतान नहीं हो सकती मेरा ईश्वर व है जो कुछ भी कर सकता है उसकी कोई

02:22:15:22 लिमिट नहीं है यह सिधांत वो है जो एक मिनट में अभी एक कुछ दिनों पहले मुस्लिम आई थी पाच मिनट केवल लगे पाच मिनट चली गई क्यों जाना पड़ा सिद्धांतही ऐसा है कोई उत्तर है ही नहीं इसका तो जो बिना किसी बहुत ज्यादा उधेड़ बन के हमको जीत दिला सकता है उन सिद्धांतों को हमने साइड में रख दिया है तो हम सदैव जो प्रचार करते हैं इसका करते हैं इसी में से एक बात है हमने एक शास्त्रोक्त प्रश्न पूछा था कि और बहन कहा था एक हमारी बहन और छपरी नहीं कहा यह भी सोच बहन कहा था एक हमारी बहन और है जो सलवार सूट पर जने करती है अब क्या है आपकी व्यक्तिगत लाइफ कुछ भी हो मगर जब आप एक धर्म के इनफ्लुएंसर के रूप में आ गए हैं धार्मिक इनफ्लुएंसर के रूप में आ गए फिर अपनी चीज को प्रस्तुत कर रहे हैं तो वहां पर सवाल करने का जो है सबको अधिकार प्राप्त हो जाता है क्योंकि उनका धर्म है वहां पर धर्म सनातन केवल अकेला उनका नहीं है धर्म सबका है तो यदि आप एक धार्मिक इनफ्लुएंसर बन रहे हो उस रूप में किसी को प्रस्तुत कर रहे हो तो उस पर कोई सवाल निर्णय नहीं था हमने ये नहीं कहा कि गलत ही है हमने य कहा था क्या शास्त्रों में ये लिखा है जिस तरह से आप जने दिखा रहे हो शास्त्रों में

02:23:30:24 लिखा है पपीन और मेखला धारण पूर्वक ब्रह्मचारी ब्रह्मचार्य धारण करता है तो उसका शास्त्रो जवाब नहीं दिया अब जवाब क्या हुआ कि भाई कहीं भूले विसरे हमारी कोई फोटो मिल गई उसमें भी हमारे जो जितने भी जानकारी के लोग होंगे छोटा भाई होगा छोटे भाई की कोई जानकारी की कोई कन्या होगी वो उसके साथ फोटो सबको घसीट लो तो ये क्या आपको न्याय लगता है और जब न्याय नहीं लगता तो आपने उसका प्रतिकार नहीं किया आप उससे जुड़े रहे मैं यहीं पर प्रतिकार करता हूं कि कहीं भी किसी भी व्यक्ति के निजी स्तर में जाया जाए उसमें लाइफ में घुसा जाए यह पूर्णतः गलत है ये यहां पे ही बोल देता और मैं इस बात को स्पष्ट कर लेकिन यहां प्रश्न ये है कि आपने बोला कि मेरे से तो चर्चा करोगे लेकिन मोहित जी से चर्चा नहीं करोगे तो यह क्या पैरामीटर था कि मेरे से तो चर्चा करोगे लेकिन ने दिए हैं आपने शायद आपने आपने जो जो प्रश्न किए हैं उन सबके उत्तर हमने अपनी लाइव में देते रहे मगर आपने लाइव देखी नहीं है यह दिक्कत है हमने आपकी बात का ये उत्तर दिया है कि मोहित गौड़ यदि यहां पर आता है तो हम चर्चा कर लेंगे क्योंकि यदि बात बिगड़ रही होगी तो हमें आपको सम्मान देने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी मगर जहां पर वह चर्चा करने के लिए बुला रहे हैं वहां में उस व्यक्ति को सम्मान देना

02:24:45:28 पड़ेगा जो व्यक्ति ऐसी चर्चा पर जुड़ा हुआ उसने प्रतिकार नहीं किया उस हमें आप आप करके बात करनी पड़ेगी हम आपको नीच बोल चुके हैं ना नीच बोल चुके हैं उसके बाद हमने आपको यहां पर लिया है तो हम अपने किए हुए संतुष्ट है आपको ले रहे हैं आप नीच सुनने के बावजूद भी आपने गर्स दिखाया कि आप चर्चा के लिए आ गए ठीक है तो हमने मोहित से चर्चा यहां के लिए स्वीकार नहीं की है वहां के लिए स्वीकार की है जहां पर हमने कोई प्रतिकारा क्मक व्यवहार अभी किया नहीं है वहां पर भी हमें उसे सम्मान देना पड़ेगा इसलिए हम उस चर्चा में नहीं गए क्योंकि हमें उसको आप आप कहना पड़ेगा वो वहां था जब हमारे घर की स्त्री की बात हो रही थी जो ये जो ऋषि उज नाम का जो इनका जो अनऑफिशियल गुंडा है वो जो है अवद्र अवद्र टिप्पणियां करता है अपने पंडे है पोप है ये सब बातें करता है हमने कभी नहीं की इस तरह की बात अ शब्द कभी नहीं बोला बल्कि आप अगर लिस्ट में जाओगे ना नीचे तो आपको एक वीडियो मिलेगा जिसमें हमने अपने समर्थकों को यह कहा है कि दयानंद जी के लिए गलत बात मत बोला करिए हमने उस दिन भी प्रतिकार किया था जिस दिन उसने नसेड़ी घटिया बोला था तब भी हमने प्रतिकार किया था दयानंद जी की पुण्य तिथि थी तब हमने अपने य लाइव से उनको जो है श्रद्धा अर्पण किया था क्योंकि

02:26:01:19 हम लोग क्योंकि हम लोग ये सब आंतरिक बातें हैं कि क्या कहते हैं कि वो आर्य समाज है य कौन है ये सब हमारी अंदर की बातें हैं मगर वेद में अगर प्रमाण बुद्धि है तो जैसे ही कोई आप सामने वाला आएगा तो हम लोग एक है हम भाई है एक दिन एक क्रिश्चन आया था राम पालियो की बुराई करने आया था हमने उसको मना कर दिया था कि तुम य हमारे साथ मिलकर के उनका खंडन मत करो हम लोग आपस में देख लेंगे हमारी अपनी बातें तो मोहित गौड़ के साथ चर्चा यहां से मना नहीं किया क्योंकि हमने उसको जो सुनाया व सुना लिया है हमने उसकी उस चर्चा से मना किया जहां पर हमको अपने ऊपर नियंत्रण रखना होगा हमें नहीं रखना अच्छा अब एक बात आती है कुछ लोग ये कहते कि चर्चा में जाकर उसका मुंह बंद कर दो अगर उसने ऐसा ऐसा किया है तो कर दो मुह बंद ये कोई सनातन सिद्धांत नहीं है कि अगर अगर किसी ने आपको गाली दी है तो उसके साथ आप जो है डिबेट करें जाकर के और डिबेट में जाकर के उसका मुह बंद करें अच्छा तो फिर क्या करोगे हाथ पैर तोड़ोगे भाई जितना सामर्थ होगा करेंगे देखेंगे मगर चर्चा तो नहीं करेंगे बैठ कर के और आप कैसे हैं बहुत अच्छा लगा आपसे मिलकर के ये सब तो नहीं करेंगे तो दोगलापन है राम तो सिखाते राम धना भी भाष प पहली बात तो किसी और के चैनल में वो आएगा भी नहीं तो क्या आप दोनों डिबेट करोगे

02:27:17:28 ऑनलाइन किसी और के चैनल पर हमने कहा ना जैसे अभी आपने कहा है आप जो खंडन कर रहे हैं उस बात का जो आर्य वरा के आप उसमें लाइव में गए थे उसका खंडन कर रहे हैं कि नहीं कर रहे आर्य वरा जी की जो लाइव थ मैं ये कह रहा हूं किसी भी व्यक्ति की निजी लाइफ ऐसे मत ये डिप्लोमेटिक आंसर ये डिप्लोमेटिक आंसर आप स्पष्ट आप अगर खंडन कर रहे हैं या नहीं कर रहे आपसे तो मैंने जो कहना था कह दिया कर भी लिया मैं स्पष्ट रूप से कहता हूं कि वहां प अगर आपके क्योंकि मैं बहुत देर में जुड़ हूं अगर आपके किसी चरित्र के बारे में या किसी आपके लाइफ के बारे में कुछ कहा जाए तो मैं उसका पूर्णत खंडन करता हूं आपने वह वीडियो लाइव पूरी देखी नहीं है क्या अभी तक मैं अंत में जुड़ा था और मुझे इतना नहीं पता कि उसमें क्या क्या बातें हुई है कहां कहा आप एक बार देख लीजिए उसके बाद आप एक बार और आ जाइएगा फिर अपना भाव प्रकट करिएगा तो कुल मिलाकर के हमारा कहना यह है कि मोहित ग से चर्चा अब तब हो सकती है मंच तब हो सकता है साझा जब मोहित गौड़ भी उसका खंडन करें उसके लिए उस ऐसी चर्चा से जुड़े होने के लिए पश्चाताप प्रकट करें तब हम

02:28:32:28 उनसे चर्चा कर सकते हैं और ऐसा हम भूत पूर्व भी कर चुके हैं आर्यन जी बोलिए उनका शायद नेट चला गया शिवांश लोग एक और करते हैं भगवान श्री कृष्ण की जो लीलाए होती है उनको इतना उन बनाएंगे राधा जी हा नहीं देखिए लीलाए होती है लीलाए जो होती है वो मोतियों की तरह है लीलाए अलग-अलग लीला का अलग अलग अर्थ है ऐसे बहुत सारे मोती है सब लीलाए मगर इ इन मोतियो में एक सूत्र पिरोया गया है जो उसको माला का रूप दे देता है उन मूर्तियों को वो सूत्र क्या है ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है आपको ईश्वर बता रहा है मैं सब कुछ हूं मैं कुछ भी कर सकता हूं मैं सभी नियमों को नियम मैं सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक हूं मैं किसी भी नियम के नीचे नहीं हू तो ईश्वर इस तरह की लीलाओं से आपको

02:29:48:04 साइंटिफिक स्पिरिचुअल या जो आदि दैविक जो सिद्धांत है वो तो बता ही रहे हैं मगर साथ ही साथ आपको यह भी सिद्ध कर रहे हैं कि वो ईश्वर है यह जो अविद्या संसार अविद्या रूपी संसार के जो नियम है उनके ऊपर लागू नहीं होते हैं इसलिए ईश्वर ऐसी लीलाएं करते हैं ठीक है सुरेंद्र जी करके कोई आए हैं जिनका चेहरा नहीं दिख रहा है अब काफी लंबा हो चुका है ढाई घंटे हो चुके हैं हम लोग अब किसी और दिन जुड़ते हैं और बात करते हैं शिवा जी एक प्रश्न था योगी योगी जी से बात करके ठीक लगा और वह हमारा उनसे आग्रह है कि वह उस लाइव को पूरा देख ले और फिर अपने भाव प्रस्तुत कर द कि वो उसका खंडन करते हैं कि नहीं और उससे जुड़े होने पर उनको पश्चाताप है कि नहीं और अगर दोनों चीजें मोहित गौर करते हैं तो मैं फिर बोल रहा हूं मोहित गौर के साथ बात करने में मुझे कोई आपत्ति नहीं है

02:30:54:00 शिवा जहां पर पोस्ट डाली गई थी आचार्य प्रशांत के चैनल पर जो आर्य समाज वाले आचार्य प्रशांत जहां पर पोस्ट डाली गई थी वहां पर आचार्य प्रशांत से मैंने कहा था अगर चर्चा आप करना चाहते तो मैं आपके लिए तैयार ह हां जी बोलिए आरन कुशवा हा तो यह पूछ रहा था कि जो विष्णु पुराण है उसका अध्ययन किसी बिना गुरु के कर सकते हैं मतलब अपने आप गीता प्रेस वाली अध्ययन तो स्वा अध्ययन ही होता है मगर किसी ना किसी गुरु से आप आज्ञा ले लीजिए अनुमति ले लीजिए अध्ययन तो स्वा अध्ययन ही होता है हा ठीक है परंपरा प्राप्त आचार्य से अनुमति ले लीजिए वो अच्छा ठीक अगर नहीं है किसी के सानिध्य में तो सानिध्य प्राप्त करिए क्योंकि बिना गुरु के जो है मति भ्रष्ट हो जाती है फिर वही होगा फिर फिर आगे का प्रश्न य है कि वो पूरी शंकराचार्य जी से दीक्षा कैसे ले इसका मतलब प्रक्रिया क्या होता है पुरी शंकराचार्य जी से दीक्षा दीक्षा कैसे ले पुरी शंकराचार्य जी जहां भी आपके आसपास शिविर लगेगा उनका तो आप क्या कहते जाइएगा और वहां पर एक धोती और एक उपव स्त्र के साथ जाइए

02:32:09:18 और उपवत के साथ आप जाइए और वहां जाकर के आप अपना नाम लिखवा दीजिए सुबह का जो उनका प्रवचन होता है उसके बाद वो दीक्षा देते ठीक है ठीक ठीक है सभी को जय श्री राम आने के लिए धन्यवाद किसी भी प्रकार के वैचारिक मतभेद के लिए आप हमसे संपर्क कर सकते हैं एक बात रह गई है योगी जी की जो सनातन को कुछ चीजों को बदलने की बात करते हैं संभवत व किसी और दिन लाइव में आएंगे तो उनसे व बात हो पाएगी तो

02:32:53:27 अ किसी भी प्रकार के वैचारिक मतभेद के लिए केवल ट करें और जो मैंने शुरू में कहा था कि लड़ाई समाज के लिए ही होती है धर्म के लिए होती है परंतु वह फिर व्यक्तिगत हो जाती है ऐसे ही हमारी भी हो चुकी है अब जो साथ में रहना चाहता है वो रहे और जो यह कहते हुए अलग हट जाना चाहता है ये तो शिवांश की लड़ाई है इससे हमें क्या लेना देना वह अलग भी हो सकता है जय श्री राम सभी

02:33:32:01 को यह पथराज राम का व्यक्ति फिर आया है उसको भी मैं जाते जाते बता दूं इस पर भी इन्होंने कटिंग क्लिप निकाल ली है कुछ ऐसी जानकारी है कि इसने पहले गुरुदेव का क्या कहते हैं चित्र एडिट किया है पथराज वही जो रहा मैं जिज्ञासु हूं मैं आर समाजी नहीं हूं पहली बात दूसरी बात य है कि वैचारिक मतभेद के निमित्त हम यहां पर चर्चा करते हैं हम यहां पर चर्चा जिज्ञासा शांत करने के लिए नहीं करते हैं उसके लिए गुरुदेव के सभा स्थल है वहां जाए अथवा हमारी क्लासेस में है ठीक है पराज जी आप बहुत बड़े जिज्ञासु है ना इसलिए दूसरी बात य कि आपका स्टैंड भी आप क्लियर नहीं करते हैं कि आपको आर्य समाज की कौन सी शिक्षा वो समझ में नहीं आई है क्या विरोध है तो इन इन कारणों से हमने आपके साथ चर्चा नहीं की जिसको आप अपने अनुसार जो भी देना चाहते हैं रूप वो दे सकते हैं आप स्वतंत्र उसके लिए मगर वही बात है जब वैचारिक मतभेद के निमित्त जब प्रत्यक्ष वार्ता होगी तो दृश्य बदल जाएगा दृश्य बदल जाएगा जय श्री

02:34:43:26 [संगीत] राम m

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Live 2:34:51 · 03 Dec 2024

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