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00:00:01:11 [संगीत] तो सभी को जय श्री राम स्वयं को सनातनी कहने वाले कुछ विशेष सनातन का चोला ओड़कर सनातन विरुद्ध विचारधारा पन पाने वाले और सनातन के विरुद्ध बात करने वाले तंत्र से जुड़े हुए कुछ समाजी हैं जिन्हें हम अलंकार समाजी के नाम से जानते हैं तो कल से हमारे पास बहुत सारे इस तरह के मैसेजेस आ रहे थे जिसमें कि हमें किसी यह जानकारी दी जा रही कि हमारे विरुद्ध आक्षेप लगाते हुए हमारे ऊपर कुछ वीडियो बनाया गया है उस वीडियो में क्या है यह भी बताया गया हमें कि भाई हमारी कुछ व्यक्तिगत जानकारी जो आज से करीब 6 साल चार साल पा साल आ साल पहले की है कुछ इस तरह

00:01:16:18 की सामग्री जो हमारी व्यक्तिगत है हमारे घर की उसम मात शक्तियां भी है ऐसी जानकारी उन लोगों को मिल गई जिन लोगों के सिद्धांतों पर हम प्रश्न करते हैं तो उन नीच लोगों ने क्या किया कि उनके पास सैद्धांतिक जवाब तो है नहीं हमने कई बार कहा यह वाली कहानी भी हम आपको एक बार सुना चुके हैं कि बचपन में हमने किसी बच्चे को अपनी कोई वस्तु थी उसको प्राप्त करने के लिए हम भी छोटे ही थे बालक थे तो उस समय हमने उसे मार लगा दी थी उस पर प्रहार कर दिया था तो उसने हमें गाली दी थी अब उसने जब हमें गाली दी तो हमने उसे हमने उससे अपनी चीज जो है जो उसके पास चली गई थी उसके अधिकार में नहीं थी व चीज हमने उससे छीन ली जब छीन ली तो उसने हमें गाली दी जब गाली दी तो हमने उसकी मार ल पिटाई कर जो गन्ने का डंडा वले लिए हुए था उसी गन्ने के डंडे को उसे छीना और चार पांच उसके चपा चप चपा चप पीछे चिपका दिए जब हमने चिपका दिए तो हम घर ले आए अपने जो सामग्री

00:02:31:22 थी उसे लेकर के उसके थोड़ी देर बाद उसकी दादी या संभवत उसकी माता जी वह हमारे घर पर आ गई पिताजी को हमारे डॉक्टर साहब डॉक्टर साहब बोला जाता है तो वो आकर के घर पर आकर के बोली कि अरे देखो डॉक्टर साहब तुम्हारे मोड़ ने हमारे लल्लू को और वो डंडे से मारा है तो मैंने कहा कि भाई इसने हमें गाली दी थी माता की बहन की इस तरह की गालियां दी थी तो उन्होंने कहा बेटा जिसके पास सामर्थ्य नहीं होता है ना वह मुंह चलाता है जिसको भगवान ने सामर्थ्य नहीं दिया है उसको भगवान ने जुबान दी है तो जब हमने सैद्धांतिक चर्चा शुरू की सैद्धांतिक बातें की कि भाई ईश्वर अनंत सामर्थ वान है कि नहीं आपके पास वेद मंत्र किस प्रकार से आए यह सब बातें जब हमने छेड़ी तो पांच मूल सिद्धांत जिनके प्राप्त ना होने के कारण जिनका प्रचार प्रसार ना होने के कारण आज हमारा सनातन समाज बटक रह गया है और कोई भी विधर्मी कोई मले हमारे ऊपर आक्रमण आसानी से कर सकता है कुछ भी बोल सकता है क्योंकि हम बटे हुए हैं बटे हुए क्यों है क्योंकि

00:03:47:12 सनातन का चोला तो सबने पहना है मगर उसमें वास्तविक सनातन से कोई कोई जुड़ा हुआ है ज्यादातर लोग सनातन विरुद्ध विचारधाराएं पकड़ के चल रहे हैं कोई खुद को ईश्वर बनाने में लगा है कोई सनातन के नाम पर अब्राह्मिक विचारधारा दे रहा है कोई सनातन के नाम पर मूर्ति पूजा का ही खंडन कर रहा है कोई सनातन के नाम पर कृष्ण को क्राइस्ट से जोड़ दे रहा है कोई सनातन के नाम पर अपना व्यापार चला रहा है जहां पर उनकी वोह ब्रह्मा जी की वाणी आती है स्वयं रोज तो यह सब हो रहा है और अगर हमने ऐसे में कुछ मूल चार पांच प्रश्न पूछ लिए तो ये जो अलंकार समाज है हमने कोई दोष भावना से नहीं पूछ हमने केवल इतना हमारा प्रयास था कि जो चीजें जहां पर संशोधन हो वो संशोधित हो जाए जिससे कि समाज में जो बिखराव है वो दूर हो जाए और अगर आपके सिद्धांत ज्यादा मजबूत है तो हमने खुले हृदय से हृदय से उनका स्वागत करने की बात भी कही कि आपके यदि ज्यादा स्ट्रांग सिद्धांत है या फिर इन प्रश्नों का उत्तर है आपके पास तो आप हमें वो उत्तर बता दीजिए हम आपके साथ खड़े हैं मगर हमें वो उत्तर कभी नहीं बताया गया हमें

00:05:02:14 कभी नहीं बताया गया व परंपरा से कैसे वेद मंत्र आए आप तक हमें कभी नहीं बताया गया कि अगर यदि ईश्वर सीमित है तो असीमित कैसे यदि ईश्वर की सामर्थ्य का अंत है तो अनंत सामर्थ्य वान कैसे है ना यह सब हमें कभी बताया नहीं गया मगर हमारे इन प्रश्नों को बंद करने के लिए एक व्यक्तिगत लड़ाई छेड़ दी व्यक्तिगत निजी निजी युद्ध में कई तरीके हो सकते हैं कि भाई किसी ने कह दिया कि तुम्हारी संस्था नकली है कई तरीके मतलब सिद्धांति जवाब नहीं है कि जब ईश्वर की सामर्थ्य का अंत है उसे ईश्वर मानो कहो ईश्वर मगर यह सत्य तो एक्सेप्ट करो कि वो अनंत सामर्थ वान नहीं है कहीं ब्रेक लग रही है उसम तो इसका कोई उत्तर नहीं देते वो और निजी निजता प आ जाते तो ऐसी निजता एक बात बात हुई हमने एक वीडियो बनाया था जिसमें कि हमने कुछ संस्कार होते हैं मानव जीवन के उनमें से एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण संस्कार होता है जिसके कारण वेदों का गायत्री मंत्र इत्यादि को जपने का अधिकार प्राप्त होता है और जो परंपरा

00:06:17:14 प्राप्त आचार्य गण है उनके द्वारा स्त्रियों के लिए उसे उपयोगी नहीं माना गया उपयुक्त नहीं माना गया स्त्रियों के लिए दूसरी विधि है ईश्वर को प्राप्त करने तो ऐसे में कुछ लोग जब यह जो सनातन परंपराएं चली आ रही है और वह आपको वेद मंत्र दे रही है वो उनका अर्थ आपको दे रही है और आप उनका विरोध करते हुए अपनी कोई नई चीजें फैला रहे हैं तो हम उस पर प्रश्न कर रहे हैं तो उस प्रश्न के उत्तर में कोई उत्तर तो है नहीं तो कहां से देंगे तो क्या ढूंढा कि शिवांश नारायण द्विवेदी की व्यक्तिगत जीवन में क्या है क्या नहीं है उसकी फोटो है वह अपनी धर्मपत्नी के साथ कैसे रह है या जो भी उनको सामग्री हालांकि उसमें भी कुछ ऐसा नहीं है कि बहुत बड़ा कोई बहुत बड़ा कोई शैतानी प्रूव हो रहा हूं ऐसा कुछ नहीं है सामग्रियों में उसको प्रस्तुतीकरण आप ऐसे कर दो कि परंपरा है कि अमुक अमुक है वो बात अलग है मगर ऐसा तो है नहीं कि मुझे आपने शराब पीते हुए मेरा फोटो ले लिया सिगरेट पीते हुए फोटो ले लिया है ना या व विचार वो कहीं वैश्यालय में जाते हुए मेरा फोटो ले लिया हो ऐसा तो कुछ है नहीं क्योंकि राम की छाया जो थी वो हमारे ऊपर बचपन से पड़ गई थी तो ये सब

00:07:32:14 चीज अज्ञानता का अज्ञानता के कारण सही विधियों का आलंबन नहीं था गुरु विहीन होने की वज और यह जो बात है यह बात हम अपने अनेकानेक वीडियो में बता भी चुके हैं कि हम पहले कैसे थे और फिर गुरु की शरण में आने पर शंकराचार्य शरण में आने पर हमारे जीवन में क्या बदलाव आया हमने विशेष रूप से सब वीडियो के माध्यम से बताया है कुछ इंटरव्यू भी हुए उसमें भी बताया मगर ये जो नीच वृत्ति के लोग हैं इनको ये बात शायद ये सुन नहीं पाए क्योंकि जो चील होता है जिस तरीके से आकाश में रहता है आज मेरे एक मित्र ने मुझे ये उदाहरण दिया चिल चील होता है उसको केवल अपने खाने की चीज जो होती है ना मास वही दिखता है इसी प्रकार से इनको बाकी सब चीजें नहीं दिखी कि शिवांश द्विवेदी ने अपना जो पुराना जीवन है कहीं बताया तो नहीं है वो नहीं देखा और हमारे जो जिस पुराने जीवन को हम बताया हमने बताया है दर्शकों के समक्ष आम जन के समक्ष हम बता चुके हैं जिस जीवन को उसी जीवन को दोबारा से उठा कर के लाकर देखो आज हमें बहुत बड़ा हम आज विश्व विजेता हो गए हमने आवान को आज हम हरा देंगे दंब आज

00:08:47:14 हम विश्व विजेता हो गए क्योंकि हमें आवान की ऐसी चीज मिल गई वो चीज जो हम पहले ही प्रस्तुत कर चुके उसी उसी चीज को बस ज्यादा से ज्यादा आपने इतना अंतर ला दिया कि हमने अपने घर की मात शक्ति की फोटो नहीं दिखाई थी अपने जीवन में मगर आपने हमारे घर की मातृ शक्तियों को भी सामने लाकर खड़ा कर दिया और एक अनकहे रूप से अप्रत्यक्ष रूप से नीचता के साथ यह बता दिया कि भाई आपके घर की जो गरिमा है मान सम्मान है वह जो है उसका हम दुरुपयोग कर सकते हैं इसलिए हमारे विरुद्ध बोलना नहीं चुप हो जाना हमसे परंपरा मत पूछना हमसे यह मत पूछना कि ईश्वर का यदि सामर्थ्य का अंत है तो व अनंत सामर्थ्य वान कैसे हमसे यह मत पूछना कि जनेऊ धारण करते टाइम यज्ञोपवित धारण करते टाइम किसकिस प्रकार का विधान किया गया है किस संस्कार में कौन से विधान है शास्त्रों में वो शास्त्र जो आपको परंपरा से मिलते हैं बिना परंपरा के तो नहीं मिलते ईश्वर कान में आगे तो कह नहीं रहा आपके

00:09:50:24 तो यह सारी बातें हैं एक एक करके हम सारे चैप्टर्स खोलेंगे जो जो वहां पर बातें की गई है मोटी मोटी जो मालूम है उस पर तो अब जब इनको वह सामग्री मिल गई तो सबसे पहले तो हम अपने पुराने जीवन के बारे में दर्शकों को बता चुके हैं कि नहीं बता चुके यह मैं आपको बताना चाहूंगा भाई वो वीडियो जरा प्ले कर दीजिए ये लगभग आज से डेढ़ डेढ़ साल पहले यह वीडियो हम डाल चुके हैं य पर

00:11:04:02 ठीक है बस ब बस करिए तो इस वीडियो के माध्यम से इसके इसके इससे भिन्न कुछ और इंटरव्यू भी हुए हमारा एक इंटरव्यू हुआ था के द लास्ट वरियर पर वहां पर उस इंटरव्यू को हमने अपने चैनल पर भी डाला हुआ है अनेका अनेक बार जब कई बार बात आती है तो हमने पुराने जीवन का ब में बताते हैं कि भाई ऐसा ऐसा था धर्म रक्षा के कारण हमारी धर्म रक्षा के भाव के कारण हमारी रुचि हुई भगवत भक्ति में और भगवत भक्ति के कारण हमारे जीवन में आए गुरु और गुरु के कारण हमारे जीवन में आया आचरण धर्मा आचरण और अभी भी पूरा नहीं आ गया है अभी भी पूरा नहीं आ गया है अभी भी प्रयासरत है मगर भगवत गीता में एक बात कही गई है क्या अज्ञानता वश अथवा व्यवस्था वश धर्म का पालन ना कर पाने की स्थिति में यदि आपके मन में पश्चाताप है तब भी आप धर्म के कहलाएंगे है ना तो धर्म का पालन ना करना आपकी व्यवस्था होनी चाहिए आपका चयन नहीं ठीक है और

00:12:19:15 यदि आप गलत तरीके से लोगों के सामने धर्म का स्वरूप प्रस्तुत कर रहे हैं और जब हम उस पर प्रश्न कर रहे हैं तो आप यह बात बोल रहे हैं कि भैया आप भी तो ऐसे रहते हैं पहली बात तो हम ऐसे रहते थे यह आप यह जो सामग्री आपने उपयोग की है आप खुद वहां पर जाकर के देख सकते हैं अगर निष्पक्ष होंगे आत्मा अंदर की मरी नहीं होगी तो खुद वहां पर जाकर के देख सकते हैं कि यह जो सामग्री आपने दिखाई आज से सा साल छ साल आ साल पहले की सामग्री है तो पहली बात तो ये तबकी है दूसरी बात यह है कि क्या हमने उस सामग्री को दिखाते समय वहां यह दावा किया है धर्म है यह शास्त्रीय है अरे भाई हम तो कह ही रहे हैं ना कि हम भटके हुए थे हम तो पहुंचे गुरु की शरण में तब हमें जो है चीजें पता चली क्या है क्या नहीं है हमें तो कुछ मालूम ही नहीं था हम भी कहते थे ईश्वर अल्लाह एक है हम भी कहते थे कुछ नहीं मालूम था भटके हुए थे नहीं था गुरु हमारे जीवन में मगर जब एक दिन किसी कन्वर्टेड हिंदू ने कन्वर्टेड हिंदू ऐसा हिंदू

00:13:35:00 जो मुस्लिम धर्म को अपना चुका था धर्म नहीं मुस्लिम जो विचारधारा है उसे अपना चुका था उसने हमें बताया कि मैं वो था जन्म से क्षत्रिय है उसने हमको बताया कि मुझे मुस्लिम ज्यादा पसंद है हम तब तक यही सोचते थे कि सारे जो जितने भी जो वही वाली जो डाल दी गई थी यही सोचते थे कि भाई जैसे हमारा हिंदू धर्म वैसे ही बाकी के क्योंकि यह मेंटालिटी है यह डाल दी गई थी सबके मन में हम भी उनमें से एक थे भटके हुए मगर जिस दिन उसने यह बोला कि मुझे इस्लाम पसंद है तब मैंने मेरे जीवन में बदलाव आना शुरू हुआ और वह इस्लाम पर और ऐसा नहीं है धर्म रक्षा के निमित्त धर्म परिवर्तन के निमित्त यह यह जो कबीर वाले हैं ना यह कबीर वालों से रोड पर लड़े हैं गुरुदेव का सानिध्य तब तक नहीं मिला था सिर्फ राम का नाम था कुछ नहीं पता था सिर्फ राम पता था राम एक ही बात पता थी बचपन से राम जहां हारोगेट में वह हारने नहीं देंगे तुम्हे राम का नाम तुम्हें हारने नहीं देगा और वही हुआ राम के नाम के कारण

00:14:50:00 ही उस समय तक जब तक मैं इस्लाम को जानता ही नहीं था कि इस्लाम ने कहा क्या है मैं तो यही सोचता था जैसे हमारे यहां कहा गया ईश्वर ने वहां पर उस भाषा में कह दिया ये मेंटालिटी थी भटके हुए हिंदू मगर फिर भी कहीं पर अगर बड़ा छोटे की बात आती थी ना कि हिंदुत्व छोटा है कहीं ऐसी कंपैरेटिव बात आती थी तो अपने धर्म को आगे रखने के लिए सबसे आगे रहते थे दुर्गा माता के बारे में कोई बुरी बात बोलता था सड़क पर मिल जाता था खड़ के मारते थे अभी भी मारेंगे अभी भी मारेंगे अगर माता के बारे में कोई गलत बात बोलेगा तो मारेंगे

00:15:33:14 तो यह सब स्थिति थी उसके बाद जब उस व्यक्ति ने बोला यह परिवर्तन हम देखते आ रहे हैं कि भाई स्टॉल लगे हैं गीता तेरा ज्ञान अमृत और हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई कोई धर्म नहीं है न्यारा है ना यह सब जब हम जुमले देखते आ रहे थे लोग इधर उधर ऐसे में जब एक प्रकट शिव जी छोटे हैं विष्णु जी विष्णु जी बड़े हैं कृष्ण जी उनसे भी बड़े हैं यह सब मैं देखते आ रहा था मेरा दिमाग भर चुका था आत्मा बिल्कुल चीत्कार करने लगी थी और उसका बिल्कुल जो अंतिम व चरण था वो वो था जब एक व्यक्ति ने कह दिया क्षत्रिय घर के उत्पन्न व्यक्ति ने उसने यह कह दिया कि मैं मुझे इस्लाम पसंद है वहां से मेरे जीवन में मोड़ आया बदलाव आया और गुरुदेव का भगवत भक्ति स्टार्ट की तब मैंने भगवान के नाम का आलंबन लिया मुझे कुछ नहीं समझ में आ रहा था मैं क्या तब भगवान के नाम का सहारा लिया उनकी भगवत भक्ति की उनकी कृपा से जो मेरे जीवन में होना चाहिए था अनन्यास चिंतन जो मेरे जीवन में मुझे होना चाहिए था मेरे जीवन के लिए आवश्यक था वह भगवान ने फिर उसकी व्यवस्था की भगवान ने सार बम जगतगुरु शंकराचार्य को मेरे जीवन में ला दिया क्योंकि

00:16:49:02 जो लड़ाई में लड़ना चाहता था उसका उसके लिए मुझे सबसे बड़ा जो शस्त्र चाहिए था ब्रह्मास्त्र चाहिए था वो था प्रामाणिक आचार्य ऐसा आचार जिसकी बात अका रूप से आप रख सकते हो नो फफ नो बट वह आचार मेरे जीवन में मुझे मिले और मैं तड़पा हं ऐसे आचार्य ऐसे सार्वभौम अकाट्य सिद्धांतों के लिए मैं तरसा हूं धर्मयोद्दा

00:17:29:10 गुरुदेव आए तो यदि कोई जी यदि किसी का जीवन बिगड़ा हुआ है और उसके जीवन में गुरु का आगमन होता है और उसका जीवन सुधर जाता है तो यह गलत बात नहीं सुधरना चाहिए है ना मुझे एक बात यह भी अच्छी लगी जब मुझे जानकारी मिली य वाली कि भाई आपके लिए ऐसा ऐसा हो रहा है वहां पर 10 द लोग झुंड बना कर के बातें कर रहे हैं तो मुझे यह अच्छा ल लगा

00:18:02:28 कि एक व्यक्ति के लिए भाई मेरा कोई अगर मुझे देखा जाए तो हमारा ऐसा कोई बहुत विश्वव्यापी संगठन तो हो नहीं गयान एक व्यक्ति के लिए कितने लोग भेड़िए बन कर के गीदड़ बन कर के बातें कर रहे तो यह गर्व की बात है एक व्यक्ति ने इतना इनकी जड़ों को हिला दिया कि इतने लोगों को एक साथ आना पड़ा हमने पहले भी कहा कि वो जो चोर टाइप का है एक इनका अलंकार मायों का वो कहते हैं अंडर कवर्ड गुंडा जो पहले अपने ट्विटर प टेलीग्राम पर आचार्यों को गाली देता है शिवलिंग के बारे में भद्दे भद्दे अश्लील बातें कहता है

00:18:44:06 और तर मतलब सारी इलीगल चीज इलीगल वक्तव्य जो व दे सकता है मर्यादा के बाहर जाकर के वो सब देता है हमने उसे इतना विवश कर दिया कि उसको जाकर के झूठ ठ के लिए ही सही थोड़ी बहुत देर के इसलिए ही सही आचार्य का आलंबन लेना पड़ा आचार्य के शरणागत होना पड़ा है ना और इतनी रातों की उसकी वो नींद उड़ गई रात रात में उठ उठ करके वह खड़े होकर के सपने देख सपने में जब उसके आवान आने लगा तो वह न केन प्रकार हर उसने दाब पेच उपयोग में लाकर के देख लिया मगर उसका जो सार्थक नहीं हो पाया वह कैसे रोक के आवान कैसे रोके सनातन धर्म को एक करने की साधी को कैसे रोके और उसको वास्तविकता य उसको आधी से कोई दिक्कत नहीं है सनातन धर्म से कोई दिक्कत नहीं है उसकी विचारधारा पर कोई उंगली कैसे उठा रहा है इससे दिक्कत और उसकी विचारधारा की रक्षा के लिए यदि सनातन एक नहीं होता है सनातन की रक्षा नहीं होती तो ना हो बाल में जाए मेरी विचारधारा सुरक्षित रहनी चाहिए भले ही वो अकाट्य ना हो भले ही वो सार्वभौम सिद्ध ना हो सके मेरी विचारधारा नहीं होनी चाहिए तो

00:19:59:14 मुझे यह अच्छा लगा कि इतने सारे लोग जो है ने बैठ कर के हमारे बारे में चर्चा की और हमारी उस सामग्री को लिया जो सामग्री हम भूल चुके थे कि भाई वह कहीं डली है हमने नहीं डाली है किसी और डाली वो सब अलग विषय है तो ऐसी सामग्री प्राप्त करके यह स्वयं को घोषित करने लगे हम विश्व विजेता हो गए और कितने लोगों को उसमें आना पड़ रहा है तो एक आवान कितनों पर भारी पड़ रहा है यह सोचने वाली बात और सिद्धांत के जवाब में सिद्धांत नहीं आ रहा है व्यक्तिगत कटाक्ष आ रहे हैं यह सोचने वाली बात भाई और अंततोगत्वा एक बात में आपको हसी की बताऊ कि मेरी जो सामग्री आपने दिखाई है इस कंपैरिजन में दिखाते हुए कि तुमने भी तो उसके जनेऊ पर या उसके किसी संस्कार पर फलाने के संस्कार पर बात की कि तुमने जो है क्या पहन रखा है तो भाई आपके हमने उस कृत पर बात की थी जिस कृत को आप धर्म के स्वरूप में प्रस्तुत कर रहे थे हमने अपने यह जो हमारी सामग्री जो आप प्रदर्शित कर रहे हो हमने इस सामग्री को धार्मिक सामग्री के रूप में प्रदर्शित

00:21:14:25 नहीं किया है आपकी और भी आपका और भी निजी जीवन है आगे हम लोग इस पर बात करेंगे हमने उस पर कुछ भी कटाक्ष नहीं किया था हमने सिर्फ प्रश्न पूछा था जिस बात को अपने जीवन के उस अंश को जिसको आप धर्म धार्मिक या शास्त्रो चित रूप में लोगों के सामने प्रदर्शित कर रहे हैं उस पर हमने प्रश्न किया था कि क्या ऐसे ऐसे होता है क्या ऐसा ऐसा शास्त्रों में लिखा है हमने अपनी हमारी जिस सामग्री को आपने प्रदर्शित किया है क्या कहते हैं हमारे हमारे ऊपर कटाक्ष करने के लिए उस सामग्री को हमने थोड़ी ना ये धर्म में लिखा है यह शास्त्रो चित है या ये धर्म धर्म है हम तो खुद उसे त्यागे बैठे हैं आज हम तो खुद उसे त्यागना चाहते व्यवस्था वश आवश्यकता पड़ने पर दोबारा पहनेंगे जींस दोबारा पहनेंगे टीशर्ट यदि धर्म रक्षा की आवश्यकता हो जाएगी तो अवश्य पहनेंगे मगर जो पुरानी सामग्री आपको प्राप्त भी है तो हमने उसमें कहीं यह दिखाया क्या ये धर्म है यहां लिखा है या हमारा देखो यहां पर जने हो रहा है मुंडन हो रहा है ऐसा दिखाया क्या हमने हमने तो नहीं कहा उस समय पूर्ण शास्त्रीय थे हमने तो अपने कई वक्तव्य मगर आप अपने आप को जरूर शास्त्रो चित रूप में धार्मिक रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं तो हमने

00:22:30:03 उस धार्मिक रूप में प्रस्तुत करने पर आपके वहां पर प्रश्न किया है कि भाई क्या ऐसा ऐसा हमारे शास्त्र कहते हैं कि जनी इस प्रकार से होता है संस्कार इस प्रकार से होता है मुंडन इस प्रकार से होता है तो अगर आप उसके कंपैरिजन में हमको यह बता रहे हैं कि देखो तुम भी तो ऐसा कर रहे हो तो भाई मैं आपको एक बात बता दूं मैं आज चौड़ी छाती करके बोल रहा हूं गर्व के साथ मुझे गर्व है कि आज मैं परंपरा प्राप्त प्रामाणिक आचार्य की शरण में आज आ गया मुझे गर्व है और जितने भी उनके एक लाख करोड़ जितने शिष्य होंगे उन सबको आज ये गर्व होगा कि हम शंकराचार्य की शरण में हैं ठीक है मैं आज गर्व के साथ बोल सकता हूं कि मेरी वह सारी जो सामग्री है जो आपने दिखाई है वह धर्मो चित नहीं है शास्त्रो चित नहीं है गलत है तुम बोल दो तुम बोल दो तुम्हारा वह संस्कार गलत था बोल पाओगे है हिम्मत नहीं क्योंकि आपका जो अस्तित्व है वो सत्य पर नहीं है इसलिए आपको झूठ का आलंबन लेना पड़ेगा सिद्धांत नहीं है इसलिए आपको व्यक्तिगत टिप्पणी का आलंबन लेना पड़ेगा मैं बोल रहा हूं जो मेरी पूरी सामग्री आपने प्रस्तुत की है भाई वो ऐसी कोई सामग्री उसमें नहीं है जो निकृष्ट

00:23:45:16 रूप से ही देखा जाए हां जो शास्त्रों पर चलने वाला बिल्कुल पक्का व्यक्ति होगा आचार्य गण होंगे उनके अनुसार वो निम्न जरूर है मगर वो ऐसी अधर्म अधार्वा मैं कह रहा हूं कि वोह शास्त्रो चित नहीं है कोट पहनना जींस पहनना शास्त्रो चित नहीं है आप कह दो कि आपने वह जो ड्रामा किया है अपने संस्कार में वह शास्त्रो चित नहीं है वह केवल एक ड्रामा है कह सकते हो जब नहीं कह सकते हो तो इससे कंपेरिजन क्यों करके दिखा रहे हो अपने आप को क्यों जस्टिफाई कर रहे हो पहली बात अब जरा हम एक एक करके विषय खोलते रहेंगे हमारे साथ कई सारे साथी हैं हम उनको लेंगे और पहली बात ध्यान रखेंगे कि हमने पहले भी ऐसे मित्रों के साथ चर्चा की है जो अपना चेहरा नहीं दिखाते हैं मगर हमने कोई भी वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा नहीं की जिसमें कि सामने वाला चेहरा ना दिखाए इसका कारण क्या है कि जब चेहरा नहीं होता है तो सामने वाला कुछ भी

00:24:58:10 छुपा कर के चलते ही है इंटरनेट पर कि हम वो कर सके जो हम अंदर से जो हमारा पशु त्व हम उसे पोषित कर सके तो यहां पर जिनको भी हम बिना चेहरे के लेंगे पहली बात तो वैचारिक मतभेद है ही नहीं जिसके कारण कि ऐसा कोई सीन हो कि उसमें अश्लील चीज आ जाए और दूसरी बात यह कि उनको हम व्यक्तिगत स्तर पर जानते भी हैं जो व्यक्ति यहां पर आएगा कहीं से बकैती करने डिबेट करने जबकि हम डिबेट नहीं करते चर्चा करते हैं जो व्यक्ति बाहर से कोई आएगा तो हम उसको नहीं जानते वो कौन है क्या है इसलिए उसका चेहरा आवश्यक है कि उसको डर रहे कि वो जो बोल रहा है वो दुनिया देख रही है उसकी पहचान है मगर जब कोई व्यक्ति बिना पहचान के आता निर्द हो कर के वो कुछ भी बोलता है और बोलते हैं देखो आप यही इनका जो अंडर कवर्ड एजेंट है इसी की खूब सारी चैट है भांड ये वो अरे गंदे गंदे वर्ड भाई मैं बोल नहीं सकता राधा रानी के लिए शिवलिंग के लिए यही अंडर कव जो इनका गुंडा है जिसको इन्होंने खुद ही लात मार दिया अलंकार हों ने अब वो मारा मारा फिर रहा है ऑफिशियल मतलब डिक्लेयर कर दिया हम इसे नहीं जानते अब वो मारा मारा फिर रहा है तो वो जो अंडर कवर्ड गुंडा है वो अपने चेहरे छुपे होने के कारण ही उसकी बहुत सारी सामग्री आपको प्राप्त हो जाएगी इंटरनेट

00:26:13:16 से फिलहाल जो हमारे आज के जो चर्चा में लोग आ रहे हैं उनको हम क्योंकि व्यक्तिगत रूप से जानते हैं और यह वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा नहीं है तो इसलिए आज कई लोग ऐसे भी हैं जो अपना चेहरा रिवील नहीं करेंगे क्योंकि सुरक्षा की दृष्टि से उ जैसे आज ये मेरे साथ कर रहे हैं मैं भी ऐसे ही होता अपना चेहरा ना दिखाता और खुब अपनी फैमिली की फोटो डालता है ना मैंने क्या ऐसा नहीं है क्या ये सब करते हुए मेरे मन में भय नहीं आया होगा आया था जब मैं मुस्लिमों की डिबेट में गया था तब आया था जब मैं बोलता हूं ऐसे करके जो जेल में बैठा हुआ व्यक्ति है उसका बाहर तंत्र चल रहा है उसके बारे में जब मैं निडर हो कर के बोलता हूं तो मेरे मन में भय आता है कि मेरा भी परिवार है क्या होगा उसका यह सारी चीजें मेरे मन में भी आती है मगर तब मुझे एक नाम याद आता है एक नाम राम वो देखेंगे तब मैं य सब कर पाता

00:27:26:18 हूं गोविंद जी जी लिंक मैंने आपको वहां दिया है गोविंद गुरकुल जी मैंने लिंक आपको आपकी इग्रा आईडी पर दिया है युगल किशोर जी आप अपना आपका स्वागत है आप अपनी बात रखें जय श्री कृष्ण जय श्री श्र

00:28:00:18 जी बोलिए तो जो विषय को लेकर आज हम य उपस्थित हुए हैं जो जिस प्रकार से सामग्री इन्होने डाली जो पहले हुआ या आ साल या फिर न साल पहले तो इस प्रकार से ि देखा जाए तो भगवान कृष्ण के ऐसे कई सारे भक्त हुए हैं भगवान राम के भी ऐसे कई सारे भक्त हुए हैं जिन्होंने पीछे पाप किया हुआ था किंतु बाद में वे शुद्ध हुए तो उल्टा नाम जपत जग जाना वाल्मीकि व ब्रह्म समाना यह रामचरित मानस में लिखा है माने कि जो वाल्मीकि जी है वो उल्टा नाम जपते जपते ब्रह्म समान हो गए भगवान श्री राम की कृपा से वो पहले कुसंगति में पड़ गए थे अब इस कथा को भी कुछ लोग जो है प्रक्षिप्त मानेंगे कि वाल्मीकि जी है वो पाप युक्त नहीं थे वो तो शुद्ध थे भागवत जी में लिखा है कि वो वरुण के प्राची के दसव पुत्र थे किंतु कल्प भेद से कल्प भेद हरि चरित सुहाय कल्प भेद से इस सारी कथा मान्य में सामंजस्य साधना

00:29:15:20 पड़ता है तो ऐसे स्कंद पुराण के अंदर भी आता महाभारत के अंदर महाभारत के अंदर वाल्मिकी जी स्वयं युधिष्ठिर जी से बोल रहे हैं कि अहिता मुनियों ने मेरे को कहा था कि तुम पाप त हो जाओ मैं पाप युक्त हो गया इसका अर्थ क्या है कि वाल्मीकि जी स्वयं अपनी वाणी से कह रहे हैं कि अहिता मुनियों ने किसी कारण वश मेरे को श्राप दे दिया कि तुम पाप युक्त हो जाओ मैं पाप युक्त हुआ किंतु बाद में क्या हुआ भगवान शिव की ईशान की शरण में जाने से मैं पाप मुक्त हुआ मुझे आदेश प्राप्त हुआ कि तुम वाल्मीकि रामायण की रचना करो तो वाल्मीकि रामायण लिखी और स्कंद पुराण के अंदर भी बात को बताया गया है कि अग्नि शर्मा नाम के ब्राह्मण थे तो अग्नि शर्मा जो ब्राह्मण थे कुछ कुसंगति में वो फस गए थे तो ऐसे चरित्र देखे जाते हैं कि कितने ही भक्त जो होते हैं कई कई जो होते हैं वो जन्म से भक्त होते हैं कई कई जो होते है कुसंगति में फस जाते हैं जैसे तुलसीदास जी अब तुलसीदास जी का बहुत बड़ा उदाहरण है रामचरित मानस उन्होंने लिखी राम जी गते बड़े भक्त हुए अनन्य भक्त हुए तो तुलसीदास जी भी कुछ क्षण के लिए अपनी पत्नी में आसक्त हो गए वहां पर भी ये देखा जा सकता है किंतु बाद में उनके जीवन में क्या परिवर्तन आया भगवान श्री राम की भक्ति से आज सारा संसार

00:30:31:27 यह बात नहीं देखता कि व पत्नी में आसक्त हुए थे वो इस बात को देखता है कि जो पत्नी में आ सकति हुई बाद में भगवान श्री राम की जो उन्होने भक्ति की जो उनको भगवान हनुमान जी के दर्शन प्राप्त हुए जो राम चरित मानस जैसा सद ग्रंथ उन्होने आज समाज को दिया उसके कारण तुलसीदास जी कितनी महिमा है भक्तों के बीच में सारे भक्त जन उनका न करते हैं तो यदि हम पिछली लाइफ को अगर करके यदि हम कुछ कहते हैं वहां पर अब उन लोगों का क्या है कि शास्त्र यदि किसी अपात्र के हाथ में पड़ जाते हैं वो क्या करता है वो उसका अर्थ विपरीत कर देता है भगवत गीता में ही बोला गया है ना अधर्मम धर्मम तिया मन तमता सर्व अर्था विपरीता बुद्धि साथ तामसी हमारी बुद्धि तामसी नहीं है हम अर्थ का अनर्थ नहीं करते पीछे किसी की आवाज आ रही है किसकी आवाज आ रही है पीछे कोई आवाज आ रही है बो तो हमारी हमारी जो बुद्धि है वो तामसी नहीं है इनकी बुद्धि तामसी है तो अर्थ का अनर्थ कर देते हैं यजुर्वेद भाष 26 दो का जो ये लोग उदाहरण देते हैं शूद्र को वो यज पवित को

00:31:46:28 धारण करने के लिए तो वहां पर ऐसा कोई उल्लेख नहीं है कि वहां पर जो है यज्ञ पवित धारण करवाया जाए वहा पर कोई ऐसा अब एक बात मैंने इनकी वीडियो में कल देखी जहा पर ये लोग एक बात इन्होंने कही कि बड़े से बड़ा व्याकरण आचार्य मेरे समक्ष यदि उपस्थित हो जाए तो वो भी मुझे संतुष्ट नहीं कर पाएगा इसका अर्थ य है कि उन्होने पहले ही ये स्वीकार कर लिया कि मैं संतुष्ट होंगा ही नहीं तुम करने का प्रयास करो मैं संतुष्ट तुमसे होंगा ही नहीं बड़े से बड़ा व्याकरण आचार्य फिर इन्होने दूसरी बात क्या कही कि मैं अभी व्याकरण हालांकि मैं व्याकरण का प्रकांड विद्वान नहीं हूं मैं व्याकरण इतनी अच्छी नहीं जानता मैं सीख रहा हूं सीखते हुए भी जो प्रकांड विद्वान है उसकी बात भी स्वीकार नहीं कर सकते इसका अर्थ क्या हो गया ये अहंकार अंदर बोल रहा है ये उसकी बात कर रहे हैं क्या जो एक रहरे से बदन का एक है जो पोट पें टाई में साक्षात्कार किया करता है जो जी जी जी वही वही वही उत्तर का को प्रक्षिप्त बोलने के लिए इन्होने राम भद्राचार्य जी का उदाहरण ले लिया वही रामभद्राचार्य जी ने इनके लिए कुछ कह दिया तोय लोग तिल मिला गका मतलब क्या हुआ कि दुश्मन का दुश्मन मित्र

00:33:02:09 ये मतलब एक खेल देखिए कि राम भद्राचार्य जी को यदि आप मान रहे हैं तो पूरा मानिए और नहीं मान रहे तो अर्ध कुकुट न्याय अर्ध कुकुट न्याय जो कर रहे हो आद मुर्गी खाली इस व्यक्ति की नीचता मैंने ये देखी है इतना नीच है गिरा हुआ कि इसने अपने प्रचार के लिए पहले कहा वहां पर ये इसका दोगलापन ये है जिसकी आप बात कर रहे हैं इसने अपने साक्षात्कार ये कहा कि वो जो उत्तर कांड है प्रक्षिप्त है और एक परंपरा प्राप्त आचार्य है वो भीय मानते हैं राम भद्राचार्य ठीक है राम भद्राचार्य मूर्ति पूजा का विरोध करने के कारण दयानंद जी का वो करते हैं कहीं पर कह देते हैं दयानंद जी से गलती हो गई उसके विरोध में जिसको य समर्थन देता है य व्यक्ति लड़का व्यक्ति क्या है अभी किशोर अवस्था में ही है तो ये जिसको समर्थन देता है उस तंत्र के द्वारा राम भद्राचार्य के लिए सड़को पर उतर आते हैं वो लोग राम भद्राचार्य अपनी बात वापस लो अपनी बात वापस लो नहीं तो हम ये कर देंगे वो कर देंगे यह सब करते हैं तब इसको ध्यान नहीं आता कि मुझे इन्ह रोकना चाहिए परंपरा प्र आचार कुछ बोल रहे तो सुन लो तब प्रमाण नहीं है तब वो प्रमाण

00:34:17:13 है जन आंदोलन हो रहा है उसके बाद उसी समय बांग्लादेश में हिंदू काटे जा रहे हैं उसके लिए रोड पर नहीं उतर रहे जो इनके अलंकार समाजी जिनम अभी भी वो तत्व बाकी है कुछ है ना जो सनातन परंपरा वाले वो तब भी एक निष्पक्ष होकर के बात कह रहे कि भाई हमारे देखो अलंकार वाले इस समय क्या कर रहे हैं यह समाजी इस समय क्या कर रहे हैं इस समय राम भद्राचार्य का विरोध करने का समय नहीं है इस समय बांग्लादेशी हिंदुओं को अपना समर्थन प्रकट करने का समय है वो कह रहे हैं इन्हीं के लोग कह रहे हैं मगर तब विज्ञान दर्शन को याद नहीं आता किय जो जो ये अलंकार वाले लोग है समय गलत कर रहे हैं है ना

00:34:58:14 तो यह जो है इस तरह से ये जो लोग हैं जो अपने अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं इनका दो और फिर उसके बाद क्या करता है ये इसकी नीचता देखिए समय आने पर य भी बोल देता है कि हमरे समाज के भी नहीं है हम अलंकार समाज के भी नहीं है क बार हु मिक्स ब्रीड लेकर के चल रहे हैं य देखिए ये जिस सिद्धांत को पकड़ के चलेंगे यह जिस सिद्धांत को पकड़ के चलेंगे जैसे ही वह सिद्धांत इनके आड़े आने लगेगा ये तुरंत उसको छोड़ देंगे यह है सनातन जो किसी भी देश काल परिस्थिति में नहीं बदलता ये है इनके अकाट्य सिद्धांत कि हम उत्तरकांड को प्रक्षिप्त इसलिए मानते हैं क्योंकि राम भद्राचार्य जी ने भी कहा है हम राम भद्राचार्य को भी नहीं मानते क्योंकि वो मूर्ति पूजा के समर्थक हम विरोधी है और हम फिर उसको भी नहीं मानते जो मूर्ति पूजा का विरोधी है क्योंकि हम पर बात आ रही है अब हम तो अलंकार समाजी भी नहीं है हम है क्या हम वो है जिसको भगा भगा के मारा जाए सड़क में दौड़ा दौड़ा के घुमा घुमा के बस मारा जाए हम वो है और कुछ ना किया जाए हम बस वो है जिसको बस दौड़ा और मारो एक ही काम

00:36:14:07 खैर ये ये चीज तो है ही मैं यहां पर सत्यम जी को कहूंगा कि वो कुछ बात कहे अपनी जी सत्यम जी जय मां जय श्री राम जय मां जय श्री राम तो सबसे पहले तो मैं एक बात कहना चाहूंगा युगल जी ने जो बात कही कि उस व्यक्ति ने कहा कि व्याकरण का प्रकांड विद्वान भी आ जाए तो मैं उसकी बात नहीं मानूंगा तो उस पर मुझे एक बात याद आ गई दो व्यक्ति आपस में बात कर रहे थे वो एक ने कहा कि मैं काशी में शास्त्रार्थ करने गया और मुझे कोई भी विद्वान हरा नहीं पाया तो दूसरा व्यक्ति कहा कि तुझे कुछ तो आता ही नहीं है ऐसा कैसे हो गया कि कोई हरा नहीं पाया बोले वो बोलते थे मैं मानता ही नहीं था तो इतनी सी बात है आप चाहे कितना शास्त्र प्रमाण दे लो इनको नहीं मानना वो और कल की जो जो भी स्ट्रीम हुई जब भी हुई उसमें इनकी जो आवाज थी जो जो वहां बैठे थे कुछ लोगों की आवाज इतनी मतलब द्वेष से भरी हुई थी वह स्पष्ट समझ आ रहा था कि पर्सनल कुछ द्वेष था इसलिए वो स्ट्रीम करी गई किसी भी तरीके से आप को गलत साबित करना है

00:37:29:18 लोगों को भटका है यही उनका उद्देश्य था भाई उद्देश्य की बात तो यह है कि हमने पूछा है कि वेद मंत्र आपके पास कैसे आए इसका उत्तर नहीं है प्रॉब्लम यह क्यों कर रहा है यह सवाल हमने पूछा है यदि ईश्वर अवतार नहीं ले सकता सीमित है तो ठीक है मान लो कि ईश्वर अनंत सामर्थ वान नहीं हमने तो केवल मर्यादा में रहते हुए एक प्रश्न किया था ना दे देते उत्तर आज तक नहीं दिया उत्तर आज तक टिल टुडे आज तक इन्होने उत्तर नहीं दिया उत्तर में क्या दिया कि हम तुम्हारे घर की मातृ शक्तियों को सार्वजनिक रूप से हम जो है लोगों तक पहुंचा देंगे बता देंगे ये भैया यह करना इनका दुरुपयोग करना और वहां पर ये भी कहेंगे कि देखो हम किसी स्त्री पर अलान नहीं लगाना चाह रहे हैं मगर उस स्त्री की जो जो उसकी अनुमति के बिना किसी भी मातृ शक्ति की इस तरह से हम जो है पब्लिक में ले आएंगे भाई जहां से आपने व सामग्री उठाई है वोह उसकी जानकारी में है वह सामग्री नहीं है

00:38:44:22 यह सारी बात सोचने की है एक बात और है इसमें मैं अभी दो दिन से एक आर्य समाज के व्यक्ति से मैं बात कर रहा था जी बात यह थी कि दयानंद जी ने माना है कि 1000 हत्या का दोष लगता है मूर्ति पूजा करने पर तो उसने बोला यह कहां लिखा हुआ है मैंने उसको बताया कि देखो पत्र व्यवहार में मि द जी दशो जी वो जिनके बारे में आप बात कर रहे हैं वो इस बात के लिए पश्चाताप प्रकट कर चुके क्षमा भी मांग चुके हैं और अब वह एक नए रूप में नए जीवन में आगे बढ़ना चाह रहे हैं तो हमें ऐसी स्थिति में उनका प्रोत्साहन करना चाहिए ना कि बारबार उसी बात को लेकर कटाक्ष करना चाहिए उसके बारे में उन्होंने पूरा एक्सप्लेनेशन दिया है दो चार लाइव पहले आप जाक के देखे तो आपको पता चलेगा जी कंटिन्यू करिए सत्यम जी तो उन्होंने बोला कि कहां लिखा हुआ है मैंने कहा कि देखो य युधिष्ठिर वि मांस जी जो है आर्य समाज के विद्वान उन्होंने पत्र व्यवहार नाम से पुस्तक निकाली है तो सामने से रिप्लाई आया कि युधिस्टर वि मांस जी तो उटपटांग लिखते रहते हैं तो अपनी बात सिद्ध करने के लिए अपने ही विद्वानों को कुछ भी कह देते य तो उटपटांग लिखते रहते हैं इनको तो जन ही नहीं है वर्तमान के जो आचार्य

00:40:00:03 गुरुकुल से पढ़कर आचार्य बने हैं उनको दोगला कह देते हैं मतलब सिर्फ अपने मत की पुष्टि के लिए सामने वाला व्यक्ति गुरुकुल में पड़ा है अध्ययन किया है गुरु के उसने सानिध्य में तब आचार्य बन रहा है उसको दोगला कह रहे हैं खुद घर बैठे सत्या प्रकाश पढ़ रहे हैं सिर्फ सत्या प्रकाश पढ़कर अपने आप को प्रकांड विद्वान माने जा रहे हैं तो यहीं से समझ आ रहा है कि इनकी बुद्धि का स्तर बहुत ही निम्न है मैं तो कह रहा हूं जीरो से भी नीचे जा रहा है कहीं कहीं तो सामान्य हिंदी शब्द नहीं पढ़ पाते वो मिल गया ना भाई सिद्धांतों का अभाव कैसे पता चलता है उत्तर नहीं है अनंत और उसका सामर्थ्य वान का तो परंपरा का उत्तर नहीं है तो क्या करेंगे भाई ये आज से आठ साल पहले देखो ऐसे करता था वो भी उसको गलत मिस इफॉर्म भी करेंगे साथ ही साथ कि आज भी ऐसे करता है तुमको नहीं दिखाता है आज भी ऐसे करता है तुमको नहीं दिखाता है एक एक चीज प बात करेंगे जो जो चीजें की गई है अभी मैं बीच में एक बात ले लेता हूं कि इनके यहां पर कोई श्रद्धानंद जी थे है ना श्रद्धानंद जी अलंकार समाझ श्रद्धानंद जी जो थे वो पहले उनके बारे में हिस्ट्री है कि वो इन्हीं के चैनलों पर व हिस्ट्री पड़ी हुई है कि भाई वो मास तक खाते थे वो शराब तक पीते थे

00:41:15:03 वो व्या व्यक्ति का भी आलंबन कर लेते थे वह सारे अवगुण जो एक व्यक्ति में हो सकते उनके अंदर थे उसके बाद उनके जीवन में बदलाव आया फिर वो एक बड़े क्रांतिकारी के रूप में सामने आए इनके अकॉर्डिंग यह बात है तो यदि अब जैसे कि इन्होने हमारी पुरानी सामग्री को उठा करके और हमारे लिए इत्यादि इत्यादि जो शब्द उपयोग में लाया छपरी तो इनके अनुसार वह सतानंद जी भी छपरी है है ना और वह हर व्यक्ति वो हर व्यक्ति व हर क्रांतिकारी व हर आचार्य छपरी है जिसका भूत भूतकाल में या भूतपूर्व में कुछ ऐसा इतिहास रहा है जो शास्त्रो चित नहीं था मेरा तो ऐसा भी नहीं है क्योंकि मैंने पहले ही बताया कि बचपन से राम की छाया मुझे मिल गई थी यह कृपा है कुछ प्रारब्ध की कृपा मान लो या फिर कुछ संस्कार मान लो ऐसे घर में जन्म मिल गया यह कृपा रही ईश्वर की की मुझे राम का जो आदर्श था बचपन में ही ये सेट हो गया था कि मेरे आदर्श कौन है हम सबको एक आदर्श चाहिए होता है ना मैंने तब तक नहीं पढ़ा था रामो विग्रह वान धर्मा नहीं पढ़ा था मगर मुझे यह पता चल गया था कि मुझे जीवन में अगर किसी को बेंचमार्क बनाना है किसी को अपना आदर्श बनाना है तो और जब मैं काफी

00:42:30:15 जब मैं अध्ययन किया बड़ा हुआ और जब मैंने अपने शास्त्रों को तब मुझे वो लाइन मिली रामो विग्रहवां धर्मा तोय भगवत कृपा नहीं है तो और क्या है कि बिना शास्त्र को खोले ही मुझे वोह जो शास्त्र उचित बात थी वो बचपन से मेरे अंदर धारण हो गई थी कि मुझे अगर किसी को फॉलो करना है कोई मेरे लिए एग्जांपल है जीवन में तो वो राम मैं कर पाऊ ना कर पाऊ बाद की बात है मगर जब भी मैं अपने आपको को लूंगा कि मैंने सही किया या गलत किया तो मैं किससे तो लूंगा भगवान राम से मुझे जब भी चुनाव करना होगा धर्म और अधर्म में तो मैं किससे लूंगा कुछ समझ में नहीं आ रहा होगा तो भगवान राम से तो मेरे ऊपर तो तब भी ऐसी कृपा रही कि भाई मेरा मेरे पास ना मेरा ऐसा कोई इन्होने भी सामग्री दिखाई कोई ऐसी थोड़ी ना है कि प्रदर्शित नहीं कर सकते हां वो एक धार्मिक व्यक्तित्व के अग की सीमा से बाहर जरूर है मगर वो ऐसी थोड़ी ना दिखाई नहीं जा सकती जैसे वो जो तथागत स्वघोषित आचार रहे उनकी हुक्का पीते हुए सामग्री आ गई थी ऐसी कोई सामग्री मेरी नहीं है है ना फिर भी उस सामग्री को य पुरानी जो भूतकाल की सामग्री है गुरुदेव की शरण में आने से पहले की सामग्री उसको ऐसे प्रस्तुत कर रहे देखो ये छपरी तो इनके हिसाब से सदानंद जी इत्यादि और भी जो अशा स्त्रीय कार्य जिसने भी

00:43:46:10 किए धार्मिक मार्ग में आने से पहले वो सब इनके लिए छपरी होंगे और मैंने तो अभी तक कहीं पर भी यह भी घोषित नहीं किया कई बार लोग मुझे गुरु कहते हैं कई बार लोग आचार्य कह देते हैं मैं उनको याद दिलाता हूं कि मैं आचार्य कहलाने योग्य नहीं हूं मैं गुरु के संबोधन के योग्य नहीं हूं आप मुझे अपना भाई समझे आप मुझे अपना मित्र समझे बंधु समझे मैं कभी हमेशा सदैव मैं इन बातों के लिए मना करता हूं मैं तो कभी अपने आप को ऐसे प्रस्तुत नहीं करता सामने से मना करता हूं आप लोगों ने देखा ही होगा जो अगर रेगुलर जो भी देखते हैं तो इन केन प्रकार अगर ये वाली बात आती तो मैं मा मना करता हूं मगर फिर भी मेरा इतिहास तो ऐसा नहीं है जैसा इन लोगों का है फिर भी वो आपके लिए श्रद्धावन है आपके लिए जो है वो पूजनीय है सम्माननीय है और मैं नहीं हूं मैं आपके लिए सम्मान छोड़िए एक सामान्य व्यवहार के लायक भी नहीं हूं आपने कर दिया पपड़ी तो ये क्या है आपके लिए क्या इनको भी आप छपी कहेंगे तो यह डगला पन है और जहां पर धर्म का अभाव होता है जहां पर सर्वशक्तिमान ईश्वर का अभाव होता है वहां पर धर्म जो आचरण है उसम हीनता आएगी भाई मेरे पास परंपरा प्राप्त गुरु नहीं था आचरण हीन था मेरे को नहीं पता था धोती बांधनी है आज मैं संध्या वंदन करता हूं धती बांध के कर रोज सुबह का हमारा नाम जप का सेशन देख लीजिए रोज सुबह धोती में

00:45:01:12 मिलूंगा मैं आपको आ जाइए नाम जप करेंगे साथ में पूजा के आसन पर बैठूंगा तो मैं धोती धोती बांध के मिलूंगा आपको अभी भी सिले हुए वस्त्र है सिले हुए वस्त्र अभी भी है क्योंकि हमें ऐसी समय धारा में जी रहे हैं जिसमें कि वास्तविक स्वरूप में पहुंचने में समय लगेगा मगर हम यह नहीं है कि उसी को धर्म मान लेंगे जो हमें आपातकालीन स्थितियों के लिए हम आलंबन लेना पड़ रहा है जिन चीजों का उसी को हम धर्म के रूप में प्रचारित नहीं करेंगे जब हमें शुद्ध धर्म बताना होगा तो हम बताएंगे भैया धोती जो बिना सिले हुए वस्त्र है लांग मार कर के लांग लपेट करके ही आसन पर बैठा जाता है जब आप वैदिक पूजा के विधि विधान से बैठते हैं पूजा के लिए तो ये इस बारे में क्या कहेंगे कि जो इनके श्रद्धानंद जी है वो और भी बहुत से हैं ज्यादा लोगों के मे तो दयानंद जी भी तो बचपन में वो चिलम आयुर्वेद के रूप में चिलम वगैरह पीते थे को डिफेंड करते हैं कि वो बीमारी के लिए पीते थे बाद में छोड़ दिए थे तो बाद में छोड़ दिए थे उनको भी तो फिट कर रहे हो ना आप फ्रेम में बाद में आचरण बदल गया था हां तो और तो दूसरों पर आप ये क्यों नहीं फिट करते हो वो दोगलापन है ना दोगलापन कहां होगा रामो दना भाषित

00:46:16:16 राम दो प्रकार की बातें करना नहीं सिखाते वो दोगलापन है तो दोगलापन कहां से आ रहा है जब राम धर्म है राम बता रहे हैं दो तरह की बातें मत करो तो इनके व्यवहार में दोगलापन क्यों आ रहा है क्योंकि वहां पर सर्वशक्तिमान ईश्वर नहीं है बात सारी आकर के टिक जाती है जहां ईश्वर होगा वहां धर्म होगा और ईश्वर वो होगा जो सर्वशक्तिमान होगा जहां बाधित ईश्वर है वहां अधर्म है आप कोई भी देख लीजिए भले ही वो सनातन का चोला ड़ करके तंत्र काम कर रहा हो या सनातन के विरुद्ध सनातन से बाहर सीमा में रह कर के तंत्र काम कर रहा हो अब जैसे आप देखो इनका ये जो स्ट्रेटजी है जो इन्होंने व्यक्तिगत आक्षेप लगाने का आलंबन लिया हालांकि उससे हमें कोई प्रभाव नहीं पड़ा मैं बता रहा हूं आपको क्योंकि हमारे साथ श्री रघुनाथ तो किस बात की चिंता हमें ठीक है हमें कोई प्रभाव नहीं पड़ा मगर जनता के समक्ष वास्तविकता रखने का रखने की आवश्यकता थी तो आज हम रख रहे हैं तो प्रभाव नहीं पड़ा और तो और हमें उससे फायदा हुआ क्यों फायदा हुआ क्योंकि धर्म के पास लाने के लिए जो पहला जो आकर्षण चाहिए होता है ना जो हमारे बारे में आप ने लोगों को जो बताया है उससे लोग और प्रभावित हो रहे हैं मेरे पास पूरे दिन

00:47:31:18 भर में आज इतने मैसेजेस आ ग भैया आप ऐसे से ऐसे आए आपका ये जीवन है भैया मैं बहुत प्रभावित हूं अभी भी कई लोगों ने यह देखिए कई लोगों ने कमेंट किया है तो यह कमेंट ये क्या है शिवांश भाई मैं आपको बताऊं आपका ट्रांसफॉर्मेशन ही इनके लिए सबसे बड़ी इच्छा है तो जो व्यक्ति अपना मंतव्य पहले से बना चुका है मुझे भी जी जी जी जी जी प्यारी बहना तो जो व्यक्ति अपना मंतव्य पहले से बना चुका है उसकी बात तो अलग है मगर जो न्यूट्रल व्यक्ति जो अभी भी भटक रहा है वो देखेगा एक व्यक्ति की एक व्यक्ति का जीवन ऐसा भी था वो ऐसे कार कारों में चलता था ऐसे वो हवाई जहाज में उड़ता था वो ऐसी लाइफ जीता था और वो आज ये कर रहा है और इतने डंके की चोट पर कर रहा है वो प्रभावित हो रहे हैं लोग उससे मेरे पास बहुत सारे मैसेजेस आए और अभी कमेंट्स भी आ रहे हैं तो हालाकि इन्होंने जो किया है वो तो हमारे समर्थन में व सिद्ध हो रहा है क्योंकि मैंने पहले ही कहा था भगवत गीता 9 कि तू मेरी शरण में आजा तेरी प्राप्ति की चिंता और अप प्राप्ति वो अप प्राप्ति की चिंता और प्राप्ति की रक्षा मैं देखूंगा मैं तो जिस दिन हमने ये वाले श्लोक पढ़ लिए थे हमने केवल य श्लोक आप लोगों की तरह माइक पर वो जनता

00:48:46:18 के समक्ष उनको बेवकूफ बनाने के लिए हम लोग ये लोक नहीं बोलते हैं ये धारण है अंदर रक्त में बह रहे हैं लोक कर्मन वादी कारते मा फले सु कदाचना रामो विग्रहवां धर्मा य ऐसे ही नहीं बोलते हैं ये अंदर खून में बह रहे हैं तब बोलते हैं तो हमें तो कोई दिक्कत नहीं ई बल्कि और समर्थन हो गया मगर इनकी जो य स्ट्रेटजी है वो स्ट्रेटजी वही वाली स्ट्रेटजी है जो कम्युनिस्ट और जो यह मल तंत्र है मैंने कहा ना सनातन आपका शत्रु कौन है वो नहीं जो सामने खड़ा हुआ आपको दिखाई दे रहा है कि सनातन का जो मुख्य शत्रु है वो सामने हाथों में शत्र लिए खड़ा हुआ कोई अजन भी नहीं है सनातन का जो वास्तविक शत्रु है वह पीछे शास्त्र लिए खड़ा हुआ आपका कोई अपना है आपका कोई अपना तो अब इनका ये आलंबन देखिए इनका हीन आचरण देखिए और किसी एक ने नहीं किया है यह भी है तंत्र के तंत्र से जुड़े हुए बहुत सारे लोग उसमें शामिल थे एक से एक से अधिक बहुत सारे और यहां तक की जो स्वयं को हरे कृष्ण वाले कहते हैं वो भी उनका समर्थन कर रहे हैं उन्हीं की राधा रानी को गाली पड़ती

00:50:01:19 है वो भी उनका समर्थन कर रहे हैं उन्हीं के अवतारवाद का वो भागवत का खंडन लिखा हुआ है दयानंद जी के द्वारा भागवत का खंडन लिखा है दयानंद जी के द्वारा उन्हीं का वही सपोर्ट करते हैं खैर तो इन्होंने जो स्ट्रेटजी अपनाई है ये मलेच्छ तंत्रों की स्ट्रेटजी होती है और यह जो कम्युनिस्ट तंत्र है धर्म से हीन तंत्र उनकी स्ट्रेटजी होती है कि जब सैद्धांतिक वार ना कर पाओ सैद्धांतिक हमारे पास शस्त्र अस्त्र ना रह जाए तो क्या करो व्यक्तिगत कुछ निकालो जैसे बागेश्वर वाले अभी ज्यादा प्रचार होने लगा था उनका वो आगे बढ़ने लगे थे तो उनके खिलाफ मुकदमा हो गया वो जो है हाई कोर्ट में सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गए उनको लेकर के जहां भी है न्यायालय का उनके लिए जो है ये सब केस बस लगा दिए और ऐसा होता है कि जब कोई व्यक्ति सता नहीं है सिद्धांत से सामर्थ्य से नहीं सत्ता है तो इस तरह के ये जो मले तंत्र है और जो कम्युनिस्ट तंत्र है इस तरह के कुचक्र चलाते हैं जो चलाए जा रहे हैं तो ये धर्म वाले कहां से हुए सनातन धर्म वाले कहां से हुए कॉपी तो कर रहे हैं ये मले तंत्र को मले हुए फिर कम्युनिस्ट को कॉपी कर रहे तो कम्युनिस्ट हो गए

00:51:17:13 धर्म हीन आचरण हीन नीच ऐसी चीजों का आलंबन लेते हुए चल रहे हैं जी मैं गोविंद जी से कहूंगा कुछ बताए सबसे पहले तो सभी को हरि ओम नमस्ते जय श्री राम जैसे कि आपको पहले बताया आज बात भी हुई आपसे एक ही मैसेज किया था मैंने आपको की कल मेरे पास य खबर आ गई थी कि यह वाली लाइव चलने वाली है ठीक है तो मैंने इनको बहुत समझाया अब एक आदमी कैसे ही इनको समझा सकता है मैंने इनको जितने भी तरीके से हो सकता है कहा इनको मतलब बहुत ज्यादा तो इनकी मेरे साथ बातचीत नहीं हुई थी लेकिन मैंने इनको ये गुण बताने की जो मेरा प्रयास था वो मैंने किया कि भाई तुम यह क्या कर रहे हो किसी पर पर्सनल टिप्पणी करके तुम्हें प्राप्त क्या होगा यह तो बता दो कम से कम ठीक है तो इनको मैंने बताया तो फिर इन्होंने मेरे को कोई रिप्लाई तो दिया था लेकिन वो वही था कि पता नहीं क्या ऐसे फालतू का कोई बात आई थी मैंने इनको समझाया कि भाई यह सब काम तुम क्यों कर रहे अगर तुम स्वयं को वैदिक मानते भी हो तो क्या वेद यह बताते हैं कि पर्सनल टिप्पणी करो किसी स्त्री के ऊपर उसकी फोटो लगा दो ठीक है या फिर

00:52:32:16 उसका यह कर लो और क्या कौन सा अपराध मतलब की अपराध क्या है इसमें कि यदि कोई व्यक्ति जिम में अपना कोई कार्य कर रहा है और फोटो खिंचवा रहा है तो उसमें अपराध क्या बनाना यह नहीं समझ पाया ठीक है ना अगर यह फोटो खिंचवाना अगर आदि आदी चीजें अवैध हैय आप कहते हो कि गलत चीजें हैं तो आप क्यों मोबाइल का इस्तेमाल करके अपना प्रचार कर रहे हो बताइए आपकी भी तो वीडियो आ रही है ना उसमें या आप कह दीजिए कि हमारी सोच इतनी ज्यादा छोटी है कि यदि कोई व्यक्ति किसी स्त्री के साथ फोटो खिंचवा लेता है तो मतलब उसमें कुछ गलत ही हो जाता है तो मेरे को लगता है कि आर्य समाज जिस स्थिति पे है ना बहुत अच्छे लोग भी हैं बीच में कुछ चुनिंदा लोग हैं जो बहुत अच्छे भी है सकारात्मक बातें भी होती है लेकिन यह जो लोग उछलकर सामने आ रहे हैं ना ना इनके पास बोलने का ढंग है पहली बात पहली बात तो इनके पास बोलने का कोई ढंग नहीं दूसरी बात इन्ह शून्य भी ज्ञान नहीं है ठीक है और तीसरी बात है जब व्यक्ति केवल निंदा को ही जीवन का एकमात्र लक्ष्य बना लेता है हां खंडन मंडन की आपकी प्रतिक्रिया है वह आप करिए लेकिन जब निंदा ही एकमात्र जीवन का लक्ष्य बन जाए तब तो आप वैदिक भी नहीं रहे क्योंकि वेद तो कह नहीं रहा किसी चीज की व्यर्थ में निंदा ही

00:53:47:16 निंदा करते रहो यदि कोई व्यक्ति हमारा ऐसा व्यक्ति हो जो कि हमें देखे कोई नया व्यक्ति आकर और वो इनकी ऐसी भाषा सुने और ऐसे लोगों की विचार सुने और छपरी आदि फोटो के ऊपर लिखना ये कौन सा वैदिक कार्य बताइए यदि फिर वैदिक आज तक आपको वैदिक क्रियाए या वेदों का ज्ञान आपको यह भी नहीं सिखा पाया कि किसी से बात कैसे करनी है आपकी और हमारी दुश्मनी क्या है जैसे शिवांश जी है उनकी आपके साथ दुश्मनी क्या है पहले यह बताइए शून्य बस इतनी सी बात है कि आप उनका खंडन नहीं कर पा रहे हैं बस यही है ना इसके अलावा तो कुछ और नहीं है तो इसका क्या मतलब है कि सामने आके चर्चा करिए उससे या पीठ पीछे किसी को छपरी आदि लगा बताइए अब मेरा भी काम जिम में ही था ठीक है मैं बता रहा हूं आपको अपना भी इतिहास बना देता हूं मैं अभी जिम में ही ट्रेनिंग दिया करता था चार सर्टिफिकेशन है मेरे पास पर्सनल ट्रेनिंग से लेकर स्पेशलिस्ट इन स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन ठीक है मैंने सारी ऑनलाइन सर्टिफिकेशन की हुई तो अब इसका मतलब क्या है कि मनुष्य का जीवन चेंज नहीं हो सकता या जैसे श्रद्धानंद जी की अभी बात आई है तो फिर आप क्या उनको पूरी उम्र यही बात अब हम लगा दें ऐसी फोटो तो फिर होगा हम तो करते नहीं ऐसी छोटी चीजें हमारे पास और बहुत काम है करने के लिए तो यह चीजें देखिए

00:55:03:03 कितना बोलना है कितनी बात करनी है मुंह को कितना खोलना है यदि इतना भी फिर वैदिक ज्ञान से आपको चीज नहीं प्राप्त हो तो मेरे को लगता है बहुत अफसोस जनक बात है और कम से कम आपको इसके बारे में अब यह वीडियो तो आपने बना ही दी है लेकिन मुझे लगता है कि आपको इस वीडियो को डिलीट करके कुछ दिन के लिए एक दिन के लिए कम से कम उपवास रखकर ध्यान करना चाहिए मनन करना चाहिए कि मेरे मुख से क्याक गलत शब्द निकले हैं और इन शब्दों को हम आगे ना दोहराए शिवांश जी को याद होगा कुछ दिन पहले जब हमारा एक टॉपिक चल रहा था रामपाल जी के बारे में मैंने शिवांश जी को बताया कि ऐसे ऐसे करके आज पुण्य तिथि है दयानंद जी की तो इन्होंने हमारा इतना सम्मान रखा है हालांकि मैं भी आर्य समाज से ही जुड़ा हुआ हूं कहीं ना कहीं ठीक है इन्होंने हमारा इतना सम्मान रखा बात का मतलब कि मेरे को यकीन नहीं हुआ कि क्या मेरी ये चीज ठीक है एक्सेप्ट होगी तुरंत ही इन्होंने बात को रोक कर बताया कि हमारा किसी के साथ कोई वैर भाव नहीं है और दयानंद जी को उनकी पुण्य तिथि पर आज हम जो है वो साधुवाद देते हैं या जो भी उनके लिए ठीक है सम्मान जनक तो बताइए अब व्यक्ति इससे ज्यादा और क्या कर सकता है एक व्यक्ति और उसमें कौन

00:56:18:08 सी ऐसी गलत बात थी जो कि बड़ी गैर वैदिक थी या कोई पाप था उसमें जो फोटो अगर खिंचवाना पाप है आपके अनुसार यानी कि कुछ नहीं मिला तो आप पर्सनल टारगेटिंग कर दीजिए यह फिर आप अपने आप को आर्य तो नहीं कह सकते ना कम से कम यह श्रेष्ठ पुरुषों की वाणी है श्रेष्ठ पुरुषों का लक्षण है किसी की फोटो के ऊपर छपरी लिख दीजिए अगर आप उसको परास्त नहीं कर पा रहे सिद्धांत में तो मुझे लगता है आ आर्य समाज को भी ऐसे लोगों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए हमसे ज्यादा आर्य समाज के जो ऑफिशियल हैं उनको इनके ऊपर नजर रखनी चाहिए कि यह क्या हरकतें कर रहे हैं आर्य समाज के नाम पर और आर्यों के नाम पर ये क्या कार्य कर रहे हैं तो मुझे लगता है हमसे ज्यादा कार्यवाही इनके ऊपर स्वयं आर्य समाज को ही कर देनी चाहिए कि ये कैसी व्यर्थ टिप्पणी है किसी स्त्री के बारे में तुम ऐसे शब्द बोल रहे हो उसको टारगेट कर रहे हो दुनिया को दिखा रहे हो वैसे तो तुम कहते हो कि भाई हमारे यहां पर स्त्रियां बड़ी सम्माननीय है वेदों में सबको जो है वह पूर्ण अधिकार दिया गया है तो आगे चलकर प्रश्न नहीं उठेंगे आप पर तो मैं बस यही कहना चाहता हूं क्योंकि मैं थोड़ा सा आज दुखी हूं इस चीज से ठीक है मेरे मुंह से कहीं कोई ज्यादा बात ना निकल जाए जो अक्सर निकल जाती है तो मैं बस यही कहूंगा कि यह अत्यंत दुष्ट और अत्यंत नीच आचरण

00:57:33:13 था जो इन्होने वीडियो में कहा है इससे बाद मैं अब जो है विराम चाहता हूं वाणी के लिए आपने जो बातें कही है वो मतलब काफी सार गर्भित है उसमें मुझे दो चीजें यहां पर मैं बताना चाहूंगा दर्शकों को एक चीज आई सामने जिम और एक चीज आई कि भाई पर्सनल नहीं जाते तो पर्सनल नहीं जाते प मतलब कि व्यक्तिगत जब आप सिद्धांत से खंडन नहीं कर पा रहे सिद्धांत का जवाब अच्छा पहले मेरी भावनाएं देखिए आप य इन लोगों को यह लगता है जितने भी लोग हैं कि मैं अपना जिस मत को मानता हूं उसका झंडा ऊंचा करना चाहता हूं इनको यह गलत फहमी है मैं बार-बार कहता हूं कि आप सिद्धांत ले आइए ऐसा सिद्धांत जिसकी काट ना हो मैं आपका प्रचार करने लगूंगा व्यक्तिगत रूप से मैं भले ही शंकराचार्य का शिष्य रहू मैं आपका प्रचार बन जाऊंगा मैं आपका झंडा लेकर चलूंगा मगर वो नहीं लाते वो कभी नहीं लाएंगे क्योंकि है ही नहीं प्रॉब्लम य इनको लगता है कि मैं जो है शंकराचार्य का झंडा ऊंचा करना अपने वो व्यक्तिगत जो मैंने मंतव्य बना लिया उसका आगे रखना चाहता हूं अपना सिद्धांत नहीं देंगे जिसको काटना काट ना सके कोई दे दो ना नहीं देते अच्छा दूसरी बात ये है कि जब हम ये

00:58:48:13 क ये कहेंगे इन्होने मैंने जाना वो हम जब ये बात आए कि भाई तुम जब सिद्धांत से खंडन नहीं कर पाए तो व्यक्तिगत आक्षेप के तो वो बोल र वो सामने वाला वहां बता रहा है वो जो अपने आप को वीरा कहता है वीरा कहती है वो वहां बोल रही है कि क्यों उसने भी तो इसके ऊपर व्यक्तिगत आक्षेप किया मैंने उसके उसका व्यक्तिगत आक्षेप नहीं किया है उसका जो आप धार्मिक संस्कार दिखा रहे हो वैदिक स्वरूप में उस पर आक्षेप किया है कि वो धार्मिक नहीं है वो अवैदिस वस्त्रों में आप ये संस्कार का आलंबन ले रहे हो इस संसार इस संस्कार को क्रियान्वित कर रहे हो क्या यह संस्कार ऐसा लिखा है हमारे शास्त्रों में और फिर मैं वही कहता हूं कि जब आप उसके उत्तर में मेरी उन चीजों को रख रहे हो तो मैं तो ठोक के कह रहा हूं कि मेरी वो चीजें अशा स्त्री है तुम कह दो मेरा वो संस्कार अशा स्त्री है अभी हो जाएगा दूध का दूध और पानी का पानी आप मैं तो अभी कह रहा हूं यहां मैं तो कह रहा हूं य तो बात आप किसी सिद्धांत के ऊपर ही कर रहे हो ना यहां भी तो आप बात सिद्धांत के ये तो व्यक्तिगत चीज हो ही नहीं सकती कभी यहां तो सिद्धांत हां जी तो हमने सिद्धांत पूछा कि क्या जिन वस्त्रों को धारण करके आप

01:00:03:16 अपना वो संस्कार क्रियान्वित कर रहे हो क्या उन वस्त्रों का के लिए कहा गया है क्या वह हमारे भारत की संस्कृति है तो इन्होंने उसको य ले लिया व्यक्तिगत टिप्पणी है भाई है ना जब अगर आपका जो व्यक्तिगत जीवन है तो फिर उसमें आप धार्मिक वो मत बनो इनफ्लुएंसर हमने कई बार इसमें यह कहा अपनी लाइव स्ट्रीम में अपनी वीडियोस में कि भाई मैं अल्पज्ञ शिष्य हूं और प्रयास करता हूं चीजें पहुंचाने का जो आचार्य गण कहते हैं फिर भी यदि कोई मेरे मुख से ऐसी बात निकल जाएगी जो परंपरा से प्राप्त सर्व मान सार्वभौम आचार्य के विरुद्ध होगी तो वहीं की वही मेरी बात निरस्त मानी जाए हम तो यह बता हमने कभी अपने आप को आचार्य के रूप में गुरु के रूप में ख्या पित ही नहीं किया कि हम धर्म की वो बिल्कुल क्या कहते धर्म हमी से शुरू होता है हमने इस तरह से अपने आप को प्रस्तुत ही नहीं किया फिर भी हमारी कोई अगर साल पुरानी सामग्री के आधार पर आप ये बता रहे हो क्या शास्त्र कहते हैं तो हम यह स्वीकार करते हैं कि हमारी वह सामग्री अशा स्त्रीय है अब आपने अब आप अपनी उस सामग्री को अशा स्त्रीय मान लो जिसके कंपैरिजन में आपने हमारी सामग्री दिखाई है कि यह भी तो ऐसा करता है हमने कभी उसे धार्मिक स्वरूप में प्रस्तुत नहीं किया हम

01:01:18:19 तो उसे प्रस्तुत ही नहीं कर रहे हो गए होंगे छ साल हम तो उसे प्रस्तुति नहीं कर रहे भूल गए किसने डाली वो भी अभी जांच का विषय है वो भी जांच का विषय वो डाली किसने तो हम तो उसे यूज ही नहीं कर रहे मगर यह उसको आज भी यूज कर रहे हैं जिसको इन्होंने धर्म के स्वरूप में दिखाया तो जब हम यह ठोक के सीना कह रहे हैं कि भैया हमारी वो शास्त्र के बाहर की चीज है वो गलत वो वो धर्म धर्म की सीमा में नहीं है धर्म की सीमा के बाहर की चीज है हो सकता है कि आज की दृष्टिकोण से वो पहनावा पहनना आम हो गया हो प्रासंगिक हो गया हो मगर वो जो अशा स्त्रीय है तो है अब आप अपनी उस चीज को शास्त्रीय मान लो अब दूसरी बात एक है यह है कि आज हम लोग जिस समय धारा में जी रहे हैं जहां पर हमारा अध्ययन से लेकर के शिक्षा से लेकर के सुरक्षा से लेकर के हर चीज पर पाश्चात्य करण हो गया है स्कूल स्कूल लाइफ से लेकर के हर चीज में पाश्चात्य विचारधारा घुस चुकी है ऐसी सिचुएशन में अगर कोई व्यक्ति मेडिकल स्टोर खोल करके बैठा है तो यदि वो धीरे धीरे धीरे धीरे परंपरा प्राप्त आचार की शरण में आ जाए और मेडिकल स्टोर से उसकी रस्ती चल रही है मेडिकल स्टोर बंद कर दे तुरंत क्या मैंने

01:02:33:19 कहा आपको कि मैं पुरोहित हूं या मैं यज्ञ करवाता हूं मुझसे आप संपर्क करिएगा मैं आपका जो है जो वेदोक्त कर्म होते हैं वो मैं करवाता हूं मैंने कहा मैंने तो कभी इस तरह से प्रस्तुत नहीं किया जब हम यह देखेंगे कि अगर यह ब्राह्मण है तो और क्या ये ब्राह्मण उचित कार्य कर रहा है तो वो तब उसकी आवश्यकता तब होगी जब हम वैदिक कर्म करवाने होंगे उस ब्राह्मण से से हमने तो अपने आप को कभी प्रस्तुत ही नहीं किया हम तो खुले कई बार सामने से बताते हैं कि भाई जो हमारे शास्त्रों की सीमा के बाहर था वो ज्ञान हमने अर्जित किया है उसी से हमारा जीवन चलता है जो थोड़ा बहुत और हमने स्वीकार भी किया कि वो जो जो चीजें है वो शास्त्रीय नहीं है भैया वो वीडियो दिखा दीजिए जिम के विषय में जब हमने अपना जिम का वीडियो डाला था तो हम अपनी बात को बता रहे हैं कि यह शास्त्रीय नहीं है देखिए और उसकी तुलना किससे कर रहे हैं जिसको ये शास्त्रीय बताते हुए प्रस्तुत कर रहे हैं मतलब अपने संस्कार को यह शास्त्रीय बता रहे हैं कि हमने वो संस्कार जो किया देखो देखो स्त्रियों का ये होता है स्त्रियों का वो होता है उसकी तुलना उससे कर रहे हैं जिसको हम ये बताते हुए बता रहे हैं कि यह शास्त्रीय नहीं है यह हमारी व्यवस्था है कि गुरु के आने से पहले ज्ञान प्राप्त करने से पहले हमारा जो आजीवक पार्जन का माध्यम था हमारी शिक्षा हमारा जो क्या कहते हैं संस्कार वो

01:03:48:21 इस तरह के हुए कि हमको इन सब चीजों का आलंबन लेना पड़ा दिखा दीजिए भैया वो वाला वीडियो जो जिम के लिए हमने बनाया था मेरा प्रश्न तो ये है कि जिम जो है उससे कोई व्यक्ति अवैध कैसे हो जाता है या उससे कोई व्यक्ति जो है वो कैसे खंडित हो जाता है उसका धर्म कैसे खंडित हो जाता है धर्म खंडित नहीं मगर मैं यह कहूंगा अगर कोई ब्राह्मण घर में जन्म लेकर के ब्राह्मण वृत्ति से आज को पार्जन नहीं कर रहा है जो कि आजकल मैंने वो जिम से जो अर्थ आता था मैं अपनी पर्सनल बात कर रहा हूं छोटे वाले भाई है उनकी बात नहीं कर रहा हूं जो जिम से आने वाला अर्थ आज मेरे जीवन में नहीं कह गया आज जो है जिम से जो ब्राह्मण की वृत्ति होनी चाहिए आज लगभग उसी पर आ चुका हूं आने वाले समय में भगवान ने चाहा तो पूर्णतः उसी पर आ जाऊंगा मगर जो जिम का वो है हिस्सा मेरे जीवन प वो कम होता जा रहा है अब मैं क्या करूं भाई कि गुरुदेव के आने से पहले या ज्ञान प्राप्त करने से पहले इतना मटिया मेट हो रखा था कि हमारी जो पढ़ाई हुई वो मिशनरी स्कूल में हुई हम जो पले बड़े हमने इंग्लिश की शिक्षा ली इंग्लिश मीडियम स्कूल में जाकर के पढ़े और हमने वैसी शिक्षाए प्राप्त की उसी के बारे में हमने अपने जो प्रोफेशन था उसी में तैयार किया तो आज अगर हम लोग धर्म को

01:05:03:24 हमें अगर धर्म को हमें धर्म धर्म का आलंबन लेना है तो हम अपना आजी को पार्जन हटा दे अपने जो घर ग्रहस्ती है उसको भूका मरने के लिए छोड़ दे कि तुम मरो जाकर के क्योंकि हमने जो धर्म का आलंबन ले लिया है क्या यह धर्म कहता है धर्म कहता है यदि व्यवस्था वश आपको जो धर्म का अनुकरण नहीं भी कर पा रहे मगर आपको मालूम है कि धर्म क्या है और आपको मालूम है कि आप धर्म की सीमा के बाहर हो तब भी आप धर्मजीवन आप में नहीं आप अपने आप को वो नहीं कह रहे हो कि मैं सही हूं शास्त्र गलत है आपकी प्रमाण बुद्धि यदि शास्त्र में है तो भी आप धर्मजयगढ़

01:05:55:19 कर्म होंगे उससे वो बहिष्कृत होता जाएगा तो मैं तो नहीं कह रहा हूं कि मैं किसी के यहां पर विवाह संस्कार कराऊ जाकर के मैं तो नहीं कह रहा हूं किसी के यहां जो है अश्वमेध यज्ञ कराओ मुझे पुरोहित बना कर के बिठा मैंने तो कभी नहीं कहा इसके लिए संपर्क करिए मुझसे यह लोग इनके य जरूर सब तरह की वक्ति ली जाती है और इनके यहां जरूर ये वो भी चलता है इनके य कि भैया हमसे संपर्क करें भागे हुए बच्चों का हम विवाह करवा देंगे यह करवा देंगे आपका वो करवा देंगे और वही लोग बाहर जाकर के सब सब तरह की पत्तियों में डूबे होते हैं कोई अपना व्यापार भी कर कोई व्यापार भी करेगा बाहर जाकर के कोई अधिवक्ता भी होगा बाहर जाकर के कोई पुलिस कर्मचारी भी होगा बाहर जाकर के और समय आने पर वही लोग आर्य आर्य बन कर के और आचार्य आचार्य बन कर के वहां बैठ जाएंगे और सब वो वेदोक्त कर्म भी कराने लगे मगर हमारे हम क्या है कि जो हमारे य आचार्य हैं उनका जीवन आप देख लीजिए कपाती जी के कृपा पात्र शिष्य है प्रयागराज चले जाइए पूरे दिन में त्रिकाल संध्या करने वाले पूरे दिन मिट्टी शौच सब का आलंबन है हालांकि सौचा चार का आलंबन तो हम भी लेते हैं मगर जितना वो वेदोक्त तरीके से जीवन जीते हैं वेदोक्त करने के लिए उपयुक्त ब्राह्मण कर्म से भी जन्म से तो है ही तो हमने तो नहीं कहा कि हम वेदोक्त कर्मों के करने के लिए भैया हमसे फोन

01:07:10:20 लगाया और हम हम जो विवाह करा देंगे हम ये करा देंगे तो दोनों ही चीजें वो जिम वाला जरा दिखा दीजिए कि हमने उस चीज को अशा स्त्रीय स्वीकार किया था कि नहीं पर मैं इससे पहले एक बात कहना चाहूंगा अभी कुछ एक डेढ़ दो तीन हफ्ते पहले मैं गया हुआ था आ समाज की एक मीटिंग थी ठीक है अब व यहां पर उनकी कोई खंडन नहीं है मैं बता रहा हूं कि वो क्या कह रहे थे वहां पर वहां पर पूछ रहे थे कि आर्य समाज निरंतर संख्या में घटता जा रहा है तो इसको बढ़ाने के लिए कोई हमें आप बताइए क्या-क्या हम कर सकते हैं और मैं अपनी जिम्मेदारी पर यह बात बोल रहा हूं अपनी पर्सनल जिम्मेदारी पर कि मैं जो बातें बोल रहा हूं वो बिल्कुल सत्य है और मेरे सामने ही घटित हुई है ठीक है जम्मू के आर्य समाज है मिट एक मिनट अमन जी आपको हम बता दें कि जो जिनके बारे में आप बात कर रहे हैं वह यहां पर जब आए हैं आज उनका शायद पांचवा छठवां बार होगा जो प्रथम बार वह आए थे तो उन्होंने अपने पूर्व काल में किए हुए जो उनसे जो अज्ञानता वश कुछ ऐसी चीजें हुई थी उनको लेकर के पश्चाताप प्रकट किया क्षमा याचना की और वह भी बताया किन परिस्थितियों में उनसे वह गलतियां हुई और आगे ना करने का प्रण लेते हुए आज वह धर्म प्रहरी धर्म रक्षक के रूप में आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं सेसे

01:08:25:22 में हमें ऐसे लोगों का प्रोत्साहन करना चाहिए क्योंकि यदि हम यह चाहते हैं कि धर्म का विस्तार हो तो और यदि आपको यह लगता है कि आप धार्मिक है तो इसका अर्थ है कि हमें उन्हीं लोगों को धार्मिक बनाना होगा जो आज धार्मिक नहीं है और यदि कोई धार्मिक बन रहा है तो हमें उसके टांग नहीं हड़नी चाहिए ऐसा मेरा मानना है जी गोविंद जी बताइए तो यहां पर फिर एक मीटिंग हो रही थी कि कैसे इस चीज को आगे बढ़ाया जाए गिनती में आर्य समाज कम हो रहा काफी और युवा वर्ग जो है वो नहीं आकर्षित हो पा रहा तो वहां पर जो एक जो एक दिया गया आईडिया दिया गया और जिसे शॉर्ट लिस्ट भी किया गया है ठीक है वो यह है कि हमारे पास सार समाज मंदिर में बहुत सारी जगह है और क्यों ना हम यहां पर एक जिम खोल दी जाए ठीक है यहां पर 0 7 हजार लगभग लगेगा और हम एक यहां पर जिम खोल देते हैं जिम में बच्चे आएंगे और आर्य समाज की तरफ आकर्षित होंगे और यह मैं बात पूरी अपनी जिम्मेदारी पर बोल रहा हूं ये मेरा पर्सनल जिम्मेदारी के साथ मैं कह सकता हूं कि यह बात मेरे सामने घटित हुई है और कहां हुई है यह जम्मू के बक्षी नगर आर्य समाज में हुई है घटित ठीक है ये मीटिंग हुई थी और इस चीज को शॉर्ट लिस्ट भी किया गया है और मेरे सामने किया गया है तो अब इसमें फिर हम क्या बोलेंगे बिल्कुल हमने

01:09:40:24 भी जो ये जो जिम है हमारा हमने भी इसको ओपन करते समय आप हमारे जिम में कभी देखोगे तो भगवत गीता के श्लोक अवतो मा सद्गमय ये सब आपको उपनिषदों के ये कर्मण्य वादी का पूरा आपको एक अलग वातावरण रामो विग्रहवां धर्म और हमने वहां पर कोट्स भी लिखवाया वो सब भगवान के जो श्लोक है मतलब एक अलग वातावरण तो जो एक जो आज के प्रासंगिक समाज में जो जीवन को जीने वाला जो एक भौतिकवादी जो युवा है वो जब ऐसी जिम में आता है और वो चीजों को धीरे धीरे जानना शुरू करता है तो उसके अंदर भी प्रभाव उत्पन्न होगा हमने यह सोचते हुए अपनी वृत्ति का ध्यान रखते हुए और फिर भी इस जिम को एक ब्रिज बनाया एक जो भौतिकवादी संसार है उससे कैसे कोई एक परंपरा प्राप्त आचार्य की शरण में आए या फिर वेदोक्त मार्ग अध्यात्म के मार्ग पर आए एक ब्रिज का कार्य हमने बना कर के किया मतलब उसको भी ऐसे नहीं कि स्वतंत्र रूप से हमने केवल व्यापार के निमित्त ही बनाया आज भी जो शौर यात्रा आपने देखी होगी जो बांग्लादेश के हिंदुओं के लिए हमने निकाली उसमें युवा हमारे साथ कंधे से कंधा मिला कर के चल रहा है वो युवा हमने कहां से प्राप्त किया उसी जिम से उसी जिम में आने वाले जो व्यायामशाला में आने वाले जो व्यायाम करने वाले जो थे उसी से प्राप्त किया है ना अब जरा मैं चाहूंगा कि उस जिम का जब हमने

01:10:55:28 वो इंट्रोडक्शन डाला था वो आप जरा शुरू से लगा दीजिए कि शुरू में ही हमने ऐसे हाथ जोड़ते हुए वहां पर दिखाया है यह एडमिट किया है कि यह चीज जो है शास्त्रीय नहीं है अब जो चीज हम कह चुके हैं भाई य शास्त्री नहीं हमारी व्यवस्था है क्योंकि हमारी शिक्षा ही ऐसी है जो मेन एक जिम का इंट्रोडक्शन वाला वीडियो हा पेन मशीन जिम ऑफ आदित्यवानी देखिए सम राष्ट्र की वेदना हो शर अपने ये वाला नहीं है वडियो ये तो शायद शर्ट है अच्छा यही है यही है यही है इसको शुरू से लगाइए शुरू से य जोभी अभी अभी दश आया था

01:11:46:27 जोड़ने पीछे करिए थोड़ा थोड़ा आगे बढ़ाइए थोड़ा रक्ष के नहीं इससे पहले चलने दीजिए य सनातन धर्म यही यही यही वाला सन दिखाना है वंदे गुरु परंपरा मुझे आशीर्वाद दीजिए गुरुदेव यद्यपि यह व्यायामशाला और यह व्यायाम जो मैं जनमानस के समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूं ये हमारे सनातन धर्म शास्त्रों के अनुसार तो नहीं है देख लीजिए इसको कहते हैं सिद्धांत वादत प्रस्तुत कर रहा हूं य हमारे सनातन ध अगर हम ऐसा कुछ दे भी रहे हैं सामने लोगों को दिखा भी रहे हैं पॉज कर दीजिए बस एक बार और सुना दीजिए जो बात मैंने यहां कही एक बार और दिखा दीजिए क्लियर हो जाएगा अपने आप को छोटा कह पाना भी मुश्किल होता है लोगों के लिए उसी के द्वारा मैं जनमानस की सेवा करने के लिए प्रयासरत हूं देखिए पीछे कर मैंने ये बात भी बताई है जो मेरे पास है उस सेवा कर पा के अनुसार तो नहीं है

01:13:04:24 परंतु यद मुझे आशीर्वाद दीजिए गुरुदेव और पीछे यद्यपि शंकराचार्य मध्यमा और पीछे बस आप चलने दीजिए नारायण समारंभ शंकराचार्य मध्य अदा चार्य परं वंदे गुरु परंपराम मुझे आशीर्वाद दीजिए गुरुदेव यद्यपि यह व्यायामशाला और यह व्यायाम जो मैं जनमानस के समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूं ये हमारे सनातन धर्म शास्त्रों के अनुसार तो नहीं है परंतु जो भी इस आधुनिक युग में आधुनिक शिक्षा के द्वारा मुझे प्राप्त हो पाया है उसी के द्वारा मैं मैंने यहां पर ये भी एडमिट किया है जो भी एक मिनट आशीर्वाद मैंने यहां पर ये भी एडमिट किया कि जो भी इस आधुनिक शिक्षा के द्वारा मुझे प्राप्त हो पाया है उसी के द्वारा मैं सेवा कर पाऊंगा मेरे पास जो है मैं वही दे पाऊंगा समाज को ना मैं और कुछ तो नहीं दे पाऊंगा अगर मैंने प्रोटीन फैट और कार्ब की पढ़ाई की है तो मैं प्रोटीन फैट और कार्ब की ही बात कर सकता हूं या तो मैं बैठ जाऊ एक तरफ है ना चलिए आगे बढ़ाइए

01:14:20:24 प्रभु श्री राम से भी यही प्रार्थना है प्रभु श्री राम आप भी मुझे शक्ति दीजिएगा कि मैं आपकी भक्ति से कहीं भी विचलित ना हो सकू और जो उद्देश लेकर मैं चल रहा हूं उसमें सफल हो सक बस बस करिए हटा दी तो यदि हमारी कोई ऐसी चीज है भी जो शास्त्रों की सीमा के बाहर है तो हम तो भैया जिस चीज को आप आरोप आरोप के रूप में प्रस्तुत कर रहे उसको हम एडमिट कर रहे कि वो अ शस्त्री है अब आप जिसके समानांतर उस चीज को प्रस्तुत कर रहे आप एडमिट कर लो कि वह अ शस्त्री था अब देखिए एक खास बात देखिए यह लोग अपने इन संस्कारों को य जो संस्कार य करते हैं क्या कहते सलवार सूट में संस्कार करते हैं जिसका कोई विवरण शास्त्र में नहीं है शास्त्रीय है तो जब यह करते हैं इस तरह का कार्य तो उसके लिए कि किसका आलंबन लेते कि देखो फलानी जगह मूर्ति बनी है जहां पर देवी है देवी पर है यज्ञ पवित है हा और वैसे क्या है मूर्ति विरोधी डगले पन की हद है अपनी बातों को सिद्ध करने

01:15:36:00 के लिए राज व राम भद्राचार्य चाहिए अपनी बातों को सिद्ध करने के लिए मूर्ति चाहिए और ना हम राम भद्राचार्य को मानते हैं नाम मूर्ति को मानते हैं वस्तुतः क्या दोगलापन है यह नहीं सोचेंगे कि वहां पर परम तत्व की बात हो रही है जो सृष्टि को अपने धारण करती है और वह मूर्ति किसने बनाई परंपरा प्राप्त व्यक्ति ने बनाई किसने नहीं बनाई इससे मतलब नहीं जैसे आज मैंने एक फोटो देखा मैंने मेरे संज्ञान में एक फोटो आया आज उसमें क्या था कि भगवान श्री कृष्ण ऐसे उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाए हुए हैं और साथ में एक इस्लामिक भेष भूषा दिख रही है संभवत हो सकता है व राजस्थानी भेस भूषा हो पता नहीं पर वो भी अपनी उंगली लगाए हुए हैं अब यह फोटो किस प्रामाणिक तंत्र ने बनाई है नहीं बनाई है उसकी प्रमाणिकता क्या है वो बात बाद में है मगर उसका भाव एकय भी आ रहा है केवल कृष्ण ने नहीं उठाया था गोवर्धन पर्वत वहां पर एक मुसलमान जैसे दिखते दिखते हुए व्यक्ति ने भी गोवर्धन पर्वत में सहारा दिया ठीक है या मुसलमान छोड़ दीजिए किसी और व्यक्ति ने भी सहारा दिया इतना तो ठीक है अब अगर हम इस फोटो को आज से 100 साल बाद देखा जाएगा तो यह भी प्रमाण हो जाएगा देखो केवल कृष्ण ने नहीं दिया

01:16:51:03 था सहारा दूसरे व्यक्ति ने भी दिया था देखो प्रमाण तो भाई जब तक उसकी प्रमाणिकता सिद्ध नहीं होगी कि वह मूर्ति बनाई किसने किस परिपेक्ष में उसको आप प्रमाण के रूप में प्रस्तुत कर लोगे वो भी तब जब आप स्वयं मूर्ति को मानते ही नहीं हो तो ये यह पराकाष्ठा है लेपन की पराकाष्ठा है ना मैं मैं एक बात और छोटी सी इसमें ऐड करना चाहूंगा अगर फिर ऐसे देखेंगे तो जाहिर सी बात है कि इस मोबाइल पर जब हम लाइव कर रहे हैं तो यह भी अस्त्रीय होगा क्योंकि शास्त्रों में तो उसका कोई वर्णन है नहीं ठीक है लेकिन लेकिन साधन जो है यदि उसे तुम सत्य तक पहुंचने में और लोगों को सत्य तक पहुंचाने में या धर्म को आगे बढ़ाने में मदद नहीं लोगे तो क्या साधन सारे दुष्टों के लिए बने हैं यह बात का जवाब देना पड़ेगा एक तो क्या साधन फिर सारे दुष्टों के लिए बने हैं कि कोई अश्लीलता फैलाने के लिए मोबाइल को यूज कर सकता है लेकिन वह वैदिक ज्ञान को या अपने गुरु वाणी को या अपने गुरु के आदेश को को बढ़ाने के लिए यूज नहीं कर सकता क्योंकि य शास्त्री तो इसे भी माना जाएगा अगर फिर कट्टर ही शास्त्रीय होना है तो तो इसलिए सारे साधन संतों के लिए हैं पहले मैं एक बात अपनी क्लियर

01:18:06:04 कर देता हूं ये मेरी एक्चुअल सोच है सारे साधन सत पुरुषों के लिए हैं सारे साधन सत्य का प्रचार करने के लिए है और सारे साधन सत्य तक पहुंचने के लिए है और जो जो भी साधन इसमें उपयोगी होंगे उसका उपयोग किया जाएगा परंतु यह बात याद रखना है कि यदि हम उसको शास्त्र का आलंबन लेकर या उसके पीछे छुपकर या उसका स्टीकर लगाकर कर रहे हैं तो फिर वह हमारे लिए मान्य नहीं है जैसे कि शिवास जी ने पहले ही अपने जिम के बारे में बोल दिया ठीक है तो इतनी बात याद रखिएगा शास्त्र जितने भी यह साधन है यह सब सत्पुरुष के लिए है बड़ी सुंदर वाक्य एक आया वीर भोग्य वसुंधरा का तो वीर जो है वही इस वसुंधरा की हर एक चीज का जो है वो इस्तेमाल करेगा हम सारे साधन इस्तेमाल करेंगे और आगे बढ़ेंगे सत्य के लिए अगर किसी को परेशानी है वह हमारे सामने आए बैठे अपनी बात रखे यदि उसका सत्य सिद्धांत ज्यादा ऊपर है तो हम उसके अनुसार भी कार्य करने के लिए तैयार है जैसा कि ये मैं आपकी बात दोहरा रहा हूं अपनी बात नहीं दोहरा रहा बक तो ये मैं कहना चाहता हूं इसलिए इन छोटी-छोटी और बिल्कुल तुच्छ मानसिकता वाली चीजों को त्याग दीजिए आप क्या कर रहे हो जैसे कि मैंने

01:19:21:09 पहले भी कहा कि आपको इस वीडियो बनाने के बाद पश्चाताप करने की आवश्यकता है किसी भी सत्पुरुष से पूछ लीजिए जाकर किसी भी 100 सत्पुरुष की लिस्ट बनाइए उनमें से 100 को पूछ लीजिए वो 100 के 100 बोलेंगे आपने गलत काम किया है और आपको इसके लिए पश्चाताप तक करने की अनिवार्यता है तो इसलिए मैं तो बस यही बोलूंगा कि हम सारे साधन इस्तेमाल करेंगे परंतु सत्य के लिए परंतु धर्म के लिए लोगों को जोड़ने के लिए इसमें गुरुदेव एक युक्ति बताते हैं कि भाई ये तो वो वाली बात है इस समय कि जब कोई डिवाइडर वाला रोड होता है ना रोड डिवाइडर वाला जिसमें एक आने का है एक जाने का है मगर जिस समय रो एक तरफ कंस्ट्रक्शन चल रहा होता है तब जो रंग साइड जाना है वही धर्म हो जाता है तो यदि यह जो समय है यह कंस्ट्रक्टिव वाला ही समय है रोड का एक साइड तो बन रहा है तो एनीहाउ आपको इधर से जाना ही पड़ेगा और यह जो आपातकालीन धर्म है अगर इसमें लोग कहे कि वही तो हम भी कर रहे तो आपातकालीन धर्म की व्याख्या भी हो चुकी है शास्त्रों में हमें शास्त्र से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है आपातकालीन धर्म की भी व्याख्या हमारे शास्त्रों

01:20:36:16 में सुनिश्चित है इस पर मैं आऊंगा आगे किसी निकृष्ट बुद्धि वाले नीच व्यक्ति ने यह तर्क भी दिया है कि धर्म भी बदलना चाहिए उससे मैं पूछूंगा अभी कानों से उसका खून निकलेगा जब मैं पूछूंगा तोर अभी मैं एक बात आ रहा हूं कि ये लोग एक कई बार अपनी जब चीजें बता रहे होते हैं मैंने देखा अकाट्य चीज नहीं बताते क्यों नहीं बताते अलंकार समाज के लोग कई बार ऐसी व्याख्या कर रहे होते कि फलाने विद्वान ने रिसर्च के माध्यम से यह कहा है फलाने विद्वान ने यह कहा है तो इसका पहली बात तो यह कि इनके अनुसार जो विद्वान है वो विद्वान है पहली बात और इनके अनुसार जो विद्वान है उसने यदि कह दिया तो वह चीज सही हो गई अगर किसी व्यक्ति के अनुसार कोई विद्वान है और उसके अनुसार जो विद्वान है वो यह कह रहा है जो भी कह रहा है वो सच है तो एक विद्वान बंगाल में भी हुए उन्होंने कहा कि वो किसी उनके कोई सिद्धि की बात है वहां पर और उन्हें जो है नरक में नरक भोगते हुए दयानंद जी मिल गए अब बताइए इस तरह की जानकारियों को हमने कभी रखा अपने पटल पर हमने सिर्फ अकाट्य चीजों को सदैव रखा कोई भी एक बात आप आकर के काट ही नहीं सकते ऐसी चीजों को हम मैं क्यों नहीं

01:21:51:19 करता बहुत सारी बातें कर सकते हैं नहीं करते सिर्फ वो बात लोहे की तरह जो मजबूत है केवल वो बात मजबूत एकदम मजबूत आर या पार कुछ नहीं कर सकते उसमें टस से मसल ही नहीं सकते जैसे अंगत का पैर था कोई नहीं हिला पाया वही पैर आज भी गड़ा हुआ है ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं वेद मंत्र कहां से आए बस और यह हराने की भावना से नहीं है इसकी वजह से समाज क्षतिग्रस्त हो रहा है इसकी वजह से रामपाल जैसों को मौका मिल रहा है स्वयं को पुजवा का क्यों नहीं समझते इसकी वजह से जाकिर नायक को मौका मिलता है वेदों का अर्थ बताने का हम नहीं कह सकते उससे जब तुम ऐसा कहोगे बिना परंपरा के ज्ञान दोगे वो भी कहेगा मैं भी दे सकता हूं बताओ मैंने भी जने करा लिया और मैं गलत दूंगा करते रहो भते रहो शास्त्रार्थ करने के लिए मिलेगा ही नहीं व तुमको तो यह जो अगर मैं यहां पर बैठा हुआ हूं और आपके चैनल पर मेरी वीडियो भी डली हुई है जब मैं आपके साथ प्रथम बार चर्चा करने आया था ठीक है जी तो अगर मैं अपना अहम अपने पल्ले बांधकर उसको लटका कर फिरता रहूं और मैं मनन ना करूं ठीक है तो फिर तो यही हो जाएगा कि मचाने दीजिए जो भी

01:23:07:08 कन्वर्जन हो रहा है या जो भी हो रहा है उन सबको मचाने दीजिए अपनी तबाही हम आपसी मतभेद लेकर यहां पर बैठे रहते हैं और जब हम एक दूसरे के सिद्धांत को ना काट पाए तो एक दूसरे को नीचा दिखाएंगे क्योंकि जुबान तो सभी के पास है मैं मैं क्यों बैठा हू यहां पर मैं किसी वजह हेतु आपसे आया आपसे क्षमा भी याचना की है सबसे क्षमा याचना की क्यों की क्योंकि मेरे को आपकी बात समझ आई ईश्वर सर्वशक्तिमान है तो उसकी शक्तियों को बाधित करना केवल और केवल अपना ही कहीं ना कहीं पर अहम दर्शाता है बाकी आपके सिद्धांत क्या है क्या नहीं आप निराकार ईश्वर की व्याख्या करते हैं तो अच्छी बात है ना वह भी तो है और हम उसको कहा मना कर रहे हैं परंतु यदि आप हर एक चीज में केवल निंदा को ही अपना साधन मानोगे तो निंदा से केवल और केवल मेरे को ल जहां तक ये मेरी अपनी पर्सनल टिप्पणी है और अपने पर ही आर्य समाज के लोग इसको ना ले या कोई भी अपने यदि मैं केवल निंदा का ही आश्रय लेता हूं तो मेरी बुद्धि एक दिन भ्रमित हो जाएगी एक दिन मैं पाप की गर्क में गिर जाऊंगा मेरे को सत्पुरुष से भी ईर्षा होनी शुरू हो जाएगी इतने बड़े तपस्वी बैठे हुए हैं यदि आपको उसकी किसी बात से मानना नहीं है या आपका कोई मतभेद है तो उन तपस्वी हों के साथ अपना मतभेद

01:24:22:09 प्रकट कर दीजिए बस कि हमारे यहां हम ऐसा नहीं करते हैं अपने अनुसार ठीक है लेकिन जिस टाइप की बोली बोली जा रही है मुझे लगता है वो बड़ी ही निंदनीय है बहुत बहुत जितनी उसकी भरत सना की जाए कम है परंतु हम वो भी नहीं कर रहे हैं एक बार भी हम बस आपको सत्य बता रहे हैं सत्य स्वीकार करिए दो चार चीजें करना छोड़ दीजिए पहला तो पर्सनल अटैक दूसरा है सत्पुरुष की निंदा तीसरा है जब भी बोले तब सोच विचार करके बोले और जो आज तक किया है उसका पश्चाताप अवश्य करें मैं बार-बार आपसे यह कह रहा हूं यदि आप पुराणों को नहीं मानते हैं तो मत मानिए भाई परंतु पुराणों में भी तो वैदिक ज्ञान ही छिपा है अंततः और यह बात तो मुझे लगता है कि इसमें भी कही गई है जो सत्यार्थ प्रकाश है इसमें भी यह बात कही गई है परंतु उन्होंने कहा है कि उसमें से लेने की आवश्यकता नहीं है हम डायरेक्ट वेदों से ही ले लेंगे तो हमें कोई बुराई तो है नहीं तो आप वेदों को यदि सर्वोच्च मान रहे हैं हम भी तो मान रहे हैं लेकिन कुछ आपसी बातें हैं जिनका हल होना आवश्यक है नहीं तो लड़ते रहिए आपस में लोगों के घर में रामपाल बाबा जी के चेले घुसे हुए हैं आपके सामने महिला आई थी और भी आपको मैसेज आते होंगे अवश्य ही

01:25:37:16 मेरे को मैसेज आए मेरे को फोन कॉल आ रहे कि भैया हमारे घर में इस इस प्रकार से मेरा बड़ा भाई है मेरे पिताजी है आदि है वो रामपाल जी के शिष्य हो चुके हैं और हमें हर बार हर बात पर नीचा दिखाते हैं यह कार्य नहीं दिख रहा यह कार्य नहीं दिख रहा आपको कि यह कार्य कितना आवश्यक है और आपके लिए आवश्यक क्या हुआ दो घंटे की लाइव जिसमें आपने केवल निंदा की भरतना की भर भर के व्यर्थ की टिप्पणियां की यह आपके लिए सर्वोत्तम लक्ष्य है मेरे लिए होता तो मैं नहीं निंदा कर सकता था या मेरे पास मुंह नहीं है मेरे को भी अच्छा खासा बोलना आता है लेकिन मैं क्यों यहां पर बैठा हूं क्योंकि मेरे को पता है मैं उस समय गलत था या मेरे पास उस वक्त ऐसी दृष्टिकोण नहीं था जो आज मेरे पास है तो छोड़ा ना अपने अहम को अपने अहम में रहता तो कोई मेरे को गोली थोड़ी मार देता मैं एक बात यहां पर यह कहूंगा यदि हम आचार्य पद की जो निश्चित होनी चाहिए निश्चित सिद्धांत होने चाहिए उसको ही हटा देंगे कि नहीं यही आचार्य बन सकता है जब हम उसको ही हटा देंगे तो हर कोई आचार्य बनेगा और सबसे शास्त्रार्थ करते रहना तुम सबको बताते रहना आज हमने यही तो किया है तभी तो इतने टेक्ट खड़े हो गए ये जनक जनक कौन है इसका

01:26:53:13 जिसने परम से चले आ रहे ज्ञान विज्ञान को जानने की बजाय समझने की बजाय उसका आलंबन लेने की बजाय जो चीज नहीं समझ में आ रही थी उसमें श्रद्धा जो शरणागत होकर के उसको समझने का प्रयास करने की बज उसको तिरस्कार करके रख दिया आज उसका नतीजा इतने सारे तंत्र जो आज खड़े हो गए हैं सबको उसने छूट दे दी सब करो वेदों का वो भी करेगा वो अगन अन्या को अन्या बना देंगे वो लोग वो लोग ब्रज का अर्थ आने का जाना कर देंगे वो लोग ऐसी कॉमेडी करेंगे पूछो ही नहीं कॉमेडी बना देंगे शास्त्रों को बिल्कुल क्योंकि हमने उन्हें परोस के दिया ना कि कोई भी कर सकता है इनकी व्याख्या हमने उन्हें परोस के दिया तो ठीक है अब हम एक बात यहां पर लेंगे ये जैसे कुल मिलाकर के जैसे अभी अ ये लोग जब हम इनके बारे में कोई बात करते हैं तो जब ये हम पर बात करते तो ये चाहते हैं कि हम लोग परतंत्र है पक्षपात हीनता तो है नहीं इनके अंदर तो जब यह हमारे बारे में बात करते हैं तो यह सोचते हैं यह चाहते हैं कि हम लोग शांत रहे लोग कुछ ना कहे ये लोग भांड बोले अपने शास्त्रों में कुछ भी लिख दे कुछ भी गंदे से गंदा कर दे और हम लोग शांत

01:28:08:15 हो कर के सुनते रहे क्योंकि इनके अनुसार ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र सब समान है मगर हम लोगों का जन्म हुआ है इनकी गुलामी करने के लिए इनके अकॉर्डिंग ये है यह ऐसी वृत्ति वाले है और यदि किसी ने बोला यदि किसी का यदि किसी ने किसी को आपने बोलने पर मजबूर कर दिया जैसे एक यश तिवारी नाम का लड़का था हालांकि उसने कई कई बार अमर्यादित आचरण किए और हमने उसके लिए उसको टोका भी कमेंट में जा जा कर के उस समय हमय पर एक्टिव नहीं थे मगर अगर उसने आपके आप बोल रहे हो आपका वो जो अंडर कवर्ड गुंडा है वो खूब बोल रहा है उसकी खूब सारी सामग्री प्राप्त है ठीक है उसको आपने जानबूझकर अपनी आंखों में पट्टी बान ली राधा मां के लिए शिवलिंग के लिए जी के लिए गंदी से गंदी बातें तब आपको होश नहीं आया कि कोर्ट में मुकदमा दर्ज करा दे मगर यदि यश तिवारी ने ऐसा कर दिया तो यश तिवारी का तो हम करियर खत्म कर देंगे उसको बिल्कुल सर्वनाश कर देंगे आज वो व्यक्ति गुमनामी के अंधेरों में जी रहा है और अपने व्यक्ति से अपना पल्ला जाड़ लिया हम उसे जानते नहीं जाओ ढूंढते रहो आज वो व्यक्ति निर्द हो कर के घूम रहा है अपने आप को सम्राट कह रहा है धर्म का और ऐसे व्यक्ति की रातों में

01:29:23:19 आ सपने में आता है उसे जगाता है ऐसे व्यक्ति की बिल्कुल रातों में आवान सपने में आता है उसे जगाता है कि मैं तुझे चैन से सोने नहीं दूंगा तू जग खटिया से उठ उ के खड़ा होगा मैं इसलिए चैन से नहीं सो पा रहा हूं क्योंकि आवान चैन से सो रहा है यह प्रॉब्लम है मैं यहां पर इनको लूंगा यह जो अपने बारे में यदि कोई भी ये कुछ भी बोलते रहे राधा मां का जो तुलना है राधा जी की तुलना वो वो कर दे ये क्या कहते हैं उससे अरे मैं कैसे कहूं भाई अश्लील अश्लील जो चलचित्र बनते हैं उनमें काम करने वाली जो वो होती है महिलाएं उनसे राधा की तुलना कर दे ये लोग मगर कोई ना बोले मगर इधर से किसी इनके किसी कृत पर अगर इधर से किसी ने बोल दिया तो ये लोग कोर्ट किसकी धमकी देते हैं ये करते हैं हमें भी तो दिया भाई इसका इससे उसे क्या मतलब था कि हमारी संस्था क्या है क्या नहीं है इस देश में बहुत सारे लोग हैं जो अपने अपने वो चला रहे हैं तंत्र मगर इसने उनसे पूछा इसने हमसे पूछा क्यों पूछा क्योंकि हमने इससे इसकी परंपरा पूछी थी हमने इससे इसकी परंपरा

01:30:38:22 पूछी थी इसलिए इसने पूछा संस्था का रजिस्ट्रेशन बताओ भैया देखो वो होंगे तुम्हारे चपेट में जो आ गए होंगे खेल इस बार भी अच्छा खेला है तुमने अंडर कवर्ड गुंडे सुन रहे हो तो मेरी बात खेल इस बार भी ने अच्छा खेला था आदमी गलत चुन लिया है यह आदमी थोड़ा सरफरा टाइप का है ठीक है तो मैं लव भारत को यहां पर लेना चाहूंगा इनके साथ भी इस तरह का कुछ हुआ है थोड़ा सा आप अपना वक्तव्य दे लव भारत जी जय श्री राम ज श्री

01:31:15:28 रामकी आवाज थोड़ी आवाज ठीक नहीं आ रही बंद कर या तो ऐसे पास में लगा के बोलिए या तो माइक को आपकी आवाज नहीं आ रही जी बार जी बोलिए अब आ रही है आवाज बहुत बढ़िया

01:31:58:00 आ रही है आ रही है थोड़ी धीरे आ रही है आपकी आ नहीं आ रही है हेलो हेलो हां ठीक है अब आ रही है करके आता हूं आपकी आवाज नहीं ना आवाज ठीक से नहीं आ र उनका क्या बोल दोबारा कनेक्ट करके आता हूं अच्छा अच्छा तो तब तक हम अनुज शिवास जी ये बात तो आपने वैसे बिल्कुल सही कही है और मैं आपसे बिल्कुल एग्री करता हूं इस बात प कि इस बार उन्होंने गलत व्यक्ति चुन लिया है बस यही दिक्कत क्योंकि हां मतलब जितना वो समझ रहे हैं जैसे एक वो होता है ना एक आइसबर्ग जो पहाड़ होता है इसका बर्फ का बर्फ का पहाड़ हां बर्फ का पहाड़ जो होता है वो ऊपर से तो दिखता है कि इतना बड़ा होगा इतना बड़ा है इतना ऊंचा है लेकिन उसके नीचे जितना बड़ा हिस्सा होता है वो उनको दिखता नहीं है और मुझे लग रहा है कि यही उन लोगों को दिख नहीं रहा है अभी ठीक है कि आगे पीछे दाएं बाएं कौन है कितने हैं कहां है वो वो वाली

01:33:13:01 बात है मतलब मैं उस भाव से नहीं कह रहा हूं कि बड़े छोटे वाले उस भाव से नहीं कह रहा हूं मैं ये बताना चाह रहा हूं कि ये समाज यह संस्था यह देश मतलब में लोग अकेले नहीं है लोग लोग हैं साथ में और अगर साथ में नहीं अभी भी है तो जुड़ रहे हैं और जुड़ेंगे और जुड़ के फिर यह बड़ा बनेगा ठीक है तो यही है बस यही है कि सिद्धांत जो है अपना वह अटल अपना रहना चाहिए धर्म से रहना चाहिए और यथाशक्ति जितना हो सके हमें समाज को देना चाहिए जैसा कि आपने बोला कि जितनी आपकी था शक्ति जितना आप कर सकते हैं समाज को दे रहे हैं जो भी आपके पास समाधान है जो यंत्र है या जो आपका ज्ञान है वह आप शेयर कर रहे हैं ता शक्ति था संभव जितना हो सकता है और वो करना भी वो बिल्कुल ठीक है मुझे उसमें कोई कुछ गलत नहीं लगता ठीक है तो गुरुदेव भी यही कहते हैं ऐसा थोड़ना है कि हर कोई बिल्कुल एकदम प्रगड़ पंडित ही है सब कुछ ज्ञान ही है उसे और वो क्या बोलते हैं कि सब कुछ जो करेगा वो शास्त्र नियम के शास्त्र विधि के हिसाब से ही करेगा अभी के समय ठीक है लेकिन अगर एक हिस्सा अगर उसे आता है जो उसे सीख सकता है जो उसने ग से सीखा है और उसको अपनी सीमित

01:34:28:01 में सीमित में जितना वो समाज को दे सकता है समझा सकता है तो वो तो व कर ही रहा है ठीक है और इस बात के लिए मैं पूरी तरह से सपोर्ट करता हूं हिवा जी आपको और आवान को और इसीलिए मैं आपके साथ हूं हमेशा नारायण आभार आपका जी लव भारत जी वापस आ गए आवाज आ रही है बहुत बढ़िया ठीक है ठीक तो मैं ये कह रहा था कि इनका जो आदत है व्यक्तिगत प्रहार करने की और किसी भी प्रकार से जो सामने वाला व्यक्ति है जो वास्तविकता सबके सामने लाने का प्रयास कर रहा है उसको उसको दबा देने की उसकी आवाज को दबाने की जो यह आदत है ये ऐसा नहीं है कि एक के साथ हो आपके साथ हो या फिर किसी और के साथ हो सबके साथ ही है इनका अब देखेंगे कि इनके अभी इस समय बहुत ज्यादा प्रचलित है य इनकी मानसिकता वालों में ये जो गौतम खट्टर है बहुत ज्यादा प्रचलित है है और इन्होंने मुझे मैसेज करा था एक समय जब मैंने इनके ऊपर वीडियो बनाई थी तो इन्होंने मैसेज यह करा कि छोटी सी क्लिप काटकर गलत संदेश मत दो या तो यह वीडियो हटा दो अन्यथा मैं साइबर सेल में कंप्लेंट करूंगा आपके

01:35:43:04 इस कृत की तो आपका पूरा पेज जाएगा श्रीमान फिर मैंने भी इनको यही बताया कि मैंने पहली बात तो आपका जो बात है उसका संदेश बदला नहीं आपकी बात का मतलब बदला नहीं तो अगर बदला नहीं है तो आपकी क्लिप में यूज कर सकता हूं इतना मैं स्वतंत्र हूं यहां पर आप वो नहीं कर सकते कि नहीं आपने क्लिप कैसे यूज कर दी तो कोई वैसे भी देखा जाए तो कुछ य कर नहीं सकते दूसरी बात कि यह चीज है कि फिर इन्होंने मैंने यह लिखा कि नहीं मैंने आपकी बात का मतलब बदला नहीं है और फिर ये जो यूज कर रहे ये मैंने बिल्कुल ठीक कर और आपने जो गलत बोले है तो इसका मैं विरोध करता हूं और आपको आगे चर्चा करनी है तो कर लीजिए ऐसे करके तो फिर इन्होंने बोला ओके पेज तो डिलीट होगा आपका मतलब सीधे मतलब धमकी फ इस पर मैंने वीडियो भी बनाई थी और इतना समर्थन मुझे सच्चे हिंदुओं से प्राप्त हुआ कि ये ऐसा नहीं कर पाए जो इनकी मंशा थी ऐसा करने आपने वो शेयर किया है क्या जो चैट है वो शेयर की है क्या हां मैंने करी थी शेयर ा पर की है ं नहीं मेरे पे की है जी जी अच्छा अच्छा मुझे वहां भेजनी पड़ेगी

01:36:58:07 पहले अच्छा तो मैं ठीक है अभी आपने बता दिया है मैं अभी करता हूं उसका आप हो सके तो ना हर हर महादेव जय श्री राम हर हर महादेव य से मैं एक बात बोलूंगा कि आपके साथ नया नहीं हुआ है मेरे साथ भी हुआ था आर्य समाज ने मेरी और मेरी वाइफ की फोटो घुमाई थी फेसबुक पर और उस पर अबद टिप्पणी की थी अच्छा तो लीगल सेल में जाने की बात करी थी राजीव शर्मा हमारे मित्र है उन्होंने कहा था साइबर सेल में कंप्लेंट कर करने के लिए तब उस समय माफी मांगी थी उन्होंने और मामला दफा हो गया तो ये बहुत ही निंदनीय है नीच मानसिकता है कि मतलब कि प्राइवेट फोटो जब जो है वो वायरल करना ये किसी तरह से वैदिक परंपरा नहीं है चलो ये वेद की बात करते हैं क्या वेद इनको यही सिखाता है अरे हमें तो अरे

01:38:13:09 भाई राम जी से सीखो भाई कैसे युद्ध लड़ते हैं कैसे सिद्धांति होते हैं बक वहां पे गए थे तो क्या स्त्रियों पे हाथ डाला था ये तो मलेच्छ की मानसिकता है युद्ध में आई हाथ आई हुई आपको हाथ आ गई स्त्रियों की छवि तो आपने उसको यूज कर लिया आपको किसी शत्रु की कोई और स्त्री डायरेक्ट स स शरीर प्राप्त हो जाए तो आप उसको उपयोग में ले आओगे अपना जी गुरुकुल एक मिनट गुरुकुल जी मैं ये कहूंगा कि जैसे हमारे भाई ने ये बात बोली है मुझे लगता है एक कंप्लेंट तो आपको भी कर देनी चाहिए इसमें फायदा क्या है करें या नहीं करें वो बात की बात है मेरा अपना सजेशन है इससे आप पर जो की गई टिप्पणी है उनका तो उनको पश्चाताप होगा ही ठीक है परंतु वो सबक भी सीखेंगे कि आगे से ऐसा किसी के साथ नहीं करना यह मेरा एक सजेशन है यदि हो सके तो इसके ऊपर आप विचार भर भी कर सके तो मेरे को लगता है मेरा सजेशन सार्थक हो जी जी हम लोग इस पर कार कर रहे हैं इसके लिए तो मैं उनसे ये कहना चाहूंगा तो आप लोगों ने जो ये किया है क्योंकि हो तो सबके सब चोर वहां पर भाई है तो नीच इतने के चेहरा तो दिखाने का कहां कहां पर किस जिसने मुंह काला कराया कुछ कह नहीं सकते क्योंकि सबने वहां पर चेहरा तो दिखाया नहीं वो वही लोग

01:39:28:10 हैं जो नाम दिखा रहे हैं वो नहीं है कौन है ये भी नहीं कहा जा सकता भाई जब वहां चेहरा नहीं है तो हमें क्या पता कौन है क्या नहीं है है ना तो जिनका नाम है जो अपना नाम लिख रहे हैं वो वही है कि नहीं जिनका नाम वो लिख रहे हैं यह भी नहीं कहा सकता मगर फिर भी वहां जो भी है जो वो कुकृत्य कर रहा है वो नीच ऐसा है जिसने कहीं ना कहीं अपना मुंह काला जरूर कराया है जिसकी वजह से वो चेहरा दिखा नहीं पा रहा है है ना ना जिसने भी वहां पर अपने आपको हो सकता है वो जो नाम उसने वहां पर यूज किया उन लोगों ने वो उन लोगों ने उनका बदनाम करने के लिए यूज कर दिया हो नाम वो कोई और हो मगर वो लोग जो भी हैं उन्होंने वो इतने गए गुजरे हैं हो सकता है मां-बाप से अनाथ मतलब ऐसी जगह उनका जन्म हुआ हो जहां से वो बता ना पा रहे हो अपने बारे में या फिर उनके साथ कुछ ऐसी घटनाएं घटित हो गई उन्होंने कुछ ऐसा पाप कर्म कर दिया हो जिसकी वजह से वो अपने चेहरे पर कालिक पोत करके घूम रहे हैं जिसकी वजह से वो अपना चेहरा नहीं दिखा पा रहे हो खामा खा विज्ञान दर्शन और जो वहां पर जितने भी लोग थे इनको बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं जो भी है मगर है तो वो इतने नीच कि वो अपने चेहरे पर काले कुतबा कर के घूम रहे हैं वो दिखा नहीं पा रहे उनको मैं ये कहना चाहूंगा कि आप अपने वीडियो को बारीक नजरों से देखें अच्छे से कि आपने उसमें कोई आज का

01:40:43:10 जो लौकिक संविधान है उसके बाहर तो कुछ नहीं किया है है ना क्योंकि मैंने अभी अभी आपको थोड़ी देर पहले बताया है खेल तो अच्छा खेल रहे हैं आप ऐसा नहीं है नो डाउट खेल अच्छा है बस इस बार जो आपका वो है ना प्रतिद्वंदी जिसके खिलाफ आप खेल रहे हैं वह आदमी व आदमी गलत चुन लिया ठीक है वो अनुज जी कुछ कहना चाह रहे थे आप कुछ कहना चाह रहे थे शता जी मैं यही कहूंगा कि आप लीगल कारवाई करें जो आपका राइट है और कोई कानून हमें प्रोविजन देता है इस चीज की हम आप सभी आपके साथ और आहवान चैनल और आपके साथ खड़े हैं आप अच्छा काम करें हैं एक बात और मैं बोलूंगा फिल्मों का मैं हालांकि आलन नहीं लेना चाहिए परंतु एक डायलॉग गुरु फिल्म का था अभिषक उन बोलते जब लोग आपके बारे में बोलने लग जाए ना समझो तरक्की कर रहे

01:41:43:19 हो लीगल वाला जो आपने बोला है अनुज जी वो तो हम देख रहे हैं अभी नहीं नहीं वो आपको देखना ही चाहिए पंडित जी पहले तो क्षमा मांगूंगा मैं आपसे जी मैं नहीं कह रहा कि उसके पीछे कौन है या नहीं है जैसे कि शिवास जी ने बोल कि हो सकता कोई उनको बदनाम करने के लिए हो लेकिन एज ए हम जो है ना अपनी रिपोर्ट दायर कर सकते हैं उस अकाउंट के खिलाफ क्योंकि उन्होंने हमारी प्राइवेसी में या प्राइवेट लाइफ में जो दखलंदाजी की है कोई भी हो उसके पीछे सामने तो आएगा कम से कम तो मुझे लगता है इसमें जो भी समर्थन हमारी तरफ से भी रहेगा चाहे वो ग्राउंड लेवल पर हो या कुछ भी हो ठीक है उसके लिए हम तैयार है बिल्कुल ठीक है हर प्रकार से आपको आगे बढ़ना चाहिए जी जी मैं यही कहूंगा कि भाई जो उन्होंने जो हीन आचरण प्रस्तुत किया है और चेहरा नहीं दिखा पाए हैं तो इससे दो चीजें तो साफ होती है या तो वह किसी संभ्रांत माता-पिता के जन्म संताने नहीं है और या फिर उन्होंने स्वयं ही वह स्वयं संभ्रांत नहीं है उन्होंने स्वयं ऐसा कुछ कर दिया है जिससे कि उनको जो है जिस चीज को वो सत्य समझ रहे उसको प्रस्तुत करते हुए भी उनको जो है अपने चेहरे पर कालिक पोत के रखनी पड़ती है

01:42:59:14 तो इतने जो ऐसे छुपे हुए जो नीच है उनको सामने लाने के लिए कुछ ना कुछ करा ही जाएगा खर अब मैं थोड़ा सा कुछ पॉइंट्स पर आऊंगा कि एक हो गया बात आई थी एक ये केक वाली बात है और मतलब जो वहां पर एक मात्र शक्ति है जिसकी जिसकी ओर से यह पक्ष काव संस्कार वाली बात प हमने जो बात उठाई थी तो मातृ शक्ति की तरफ से दिखाने का प्रयास किया जा रहा है कि भाई देखिए हमको यह जो है वस्त्र बताते हैं वस्त्र हम किस समय के लिए बताते हैं संस्कार के समय के लिए वहां पर आवश्यक बहुत है है ना नहीं है तो मत करो ना यार मत करो बिना उसके भी तो आप धर्म धार्मिक कहला सकते हो आपके जो गौतम खट्टर जी है वो पजामा पहन कर के घूमते हैं पजामा पहनते हैं ना तो वो पजामा जो है क्या दयानंद जी पहनते थे क्या पजामा नहीं पहनते थे तो मत करो ना यार वो काम जो अगर आपके पास वो चीजें नहीं है तो वो चीजें करना आवश्यक नहीं है अपने आप को उससे अलग कर लो खैर उन्होंने चार पांच चीजें

01:44:14:18 दिखाई एक तो कि केक उन्होंने कहा कि भाई ये केक काट रहे हैं यह विदेशियों का है और केक में जो है अंडा होता है पहली बात तो ये फोटो देख के ही समझ जाते हैं कि उसम अंडा है कि नहीं जसे कोई सप्लीमेंट देख के अपने आप ही बता दिया कि इसमें ये कैफीन है पूरा 100% कैफीन भरा हुआ है हा वो कैफीन को प्रमोट कर रहे हैं और क्या कहते हैं इनका भाई ऐसा है केक केक की बात कर रहे हैं वहां पर और एक चीज कोई और थी अंडे वाला क्या अंडे वाला केक है पिज्जा पिज्जा का फोटो हमारे छोटे भाई का दिखाया पिज्जा का भैया आज की डेट में मिल तो लो हमारे भाई से उठा उठा के ना पटक दे तब बताना और वो फोटो कबका है जिस बालक दिखाई दे रहा है 10 साल 12 साल पहले का फोटो अभी आके मिल लो तुमको गिरा के ना मारे तब बात

01:45:11:02 करनाय देखिए ये जो ये जो आपको क्या लगता है हम आपके बारे में जानते नहीं है हम ऐसी टिप्पणियां नहीं करते हमारा कोई व्यक्तिगत वही नहीं है आक्षेप हम तो सैद्धांतिक बातें पूछ रहे हैं आपसे अब ये केक कौन काट रहा है यह आपके लिए संकेत है यह केक वही मातृ शक्ति से जुड़ा हुआ है जो मातृ शक्ति आक्षेप लगा रही है वही केक काट रही है अब इसमें कितने अंडे मिले हैं हमारा बड़ा था हमारी डाइट ज्यादा है आपके अंडे कितने हैं पांच छह अंडा दिया किसने मुर्गी का ही है कबूतर का है किसका है वो पता लग जाता होगा आपको देखते ही है ना पता ल हां वो केवल फोटो में देख कर के पता लग जाता है कि वो केक अंडे वाला है कि बिना अंडे वाला है दूसरी बात हमने तो कहा ही है कि भाई हम ऐसे समाज में उत्पन्न हुए ऐसी ऐसे पढ़ाई लिखाई हुई और हमने कभी नहीं कहा कि हम गुरुकुल में जाकर पड़े हैं हमने तो कभी ये दावा नहीं कहा कि हम जो पाच वर्ष की उम्र में हमारा जने हो गया था व्रत संध्या लगी थी हमारा दोष हुआ था रात दोष था उसको हमने नाम जप कर करके कर करके कर करके प्रयास किया है भगवान ने उसको क्षमा किया हो ना किया हो बात अलग है

01:46:26:07 हमने कभी नहीं कहा स्वयं के पुराने जीवन को पूर्णत शास्त्र अभी भी आज भी मेरे इस जीवन को लेकर के मेरे गृहस्थ जीवन में अड़चन आती है कि क्या आप सारे जीवन ऐसे ही रहोगे क्या क्या आप जींस कभी नहीं पहनो ग क्या क्या आपका कोट पेंट यूंही चढ़ता रहेगा क्या ये सब सवाल आते हैं प्रश्न आते हैं मेरे सामने और मैं मैं उनको कभी ये नहीं कहता कि मैं नहीं करूंगा नहीं करूंगा मैं कहता हूं कि भाई देखो आज तो आवश्यकता नहीं है यथा संभव प्रयास करने दो जब आवश्यकता होगी तब देखा जाएगा तो ऐसे करके उनका मन भी रख वो रह जाता है और जो है हम जो है इस ओर जो आना चाहते हैं आध्यात्मिकता में वो भी आते हैं मगर हमने कभी नहीं कहा कि हम पूर्णतया शास्त्रोक्त जीवन ही जी पा रहे हैं क्योंकि भाई भाई हमने कहा ना यथा संभव प्रमाण बुद्धि हमने कभी अपने आप को सही नहीं कहा शास्त्र को सही कहा हमने जब जिम डाली तो हमने वहां स्वीकार किया कि यह शास्त्रीय नहीं है यह शास्त्र से वो है हम सही नहीं है शास्त्र सही है मगर आप जो अ शस्त्री चीजें कर रहे हैं वहां पर आप अपने को जो है प्रमाणिक कह रहे हो शास्त्रों पर लांछन लगा रहे हैं ये अंतर है तो अब यह तो रही केक की बात कि भैया

01:47:41:07 हम अगर यदि मैं शंकराचार्य जी का शिष्य हो गया या मैंने उनका आलंबन ले लिया मैं वेदोक्त मार्ग पर आने का प्रयास कर रहा हूं तो एट ए टाइम उसी समय मेरे माता पिता भाई बहन अगर संताने हो तो वो सब उसी समय वेद पाठी ब्राह्मण हो जाए है ना उसमें समय नहीं लगना चाहिए एक सेकंड का भी इनका कहने का मतलब ये है ये इनकी युक्ति है जी अच्छा इन्होंने अंडे वाले केक का हो गया अब इन्होंने एक बात कही कैफीन की तो पहली बात तो फिर वही वाली बात आ जाएगी कि हम लोग कार्य क्या कर रहे हैं हमारी आज को पार्जन क्या है जिम में जिम जो है उसे किसे जिम कहा जाता है दूसरी बात जो सप्लीमेंट यह देने का देने की बात कर रहे हैं जिस सप्लीमेंट की बात कर रहे हैं वो सप्लीमेंट में तो कैफीन है भी नहीं एक प्रतियोगिता करवाई थी हमने हिंदू युवाओं को वो हमने कहा ना कि जिम को भी हमने एक सेतु बनाया कि किस तरीके से जिम का उपयोग हम कर सके जो बच्चे हैं उनको धर्म रक्षा में लाने के लिए अध्यात्म के मार्ग में लाने के लिए तो हमने एक हिंदू योद्धा नाम से कंपटीशन करवाया है ना और उस कंपटीशन में हमने पुरस्कार

01:48:56:10 स्वरूप सिट्रोन मलेट सिट्रोन मलेट क्या करता है एक तत्व है जो कैफीन में नहीं आता है और जो ड्रग्स में नहीं आता है हम कभी भी अपनी जिम में ड्रग्स को प्रमोट नहीं करते कभी भी और ना ही किसी कॉफी चाय ना पीने वाले को कैफीन के लिए कहते हैं जो पहले से कैफीन ले रहा है उस अगर वो यह पूछेगा कि हम कैफीन कहां से ले तो अवश उसको बताएंगे जानकारी उसको देंगे कि भाई कैफीन और कैफीन होती क्या है जो आज जो है समाज में प्रासंगिक है हर व्यक्ति कॉफी और चाय के रूप में कैफीन इंटेक कर रहा है डेली लगभग हर व्यक्ति हम नहीं कर रहे लगभग हर प्रत्येक व्यक्ति कर रहा है आपके ही आश्रम में चलिए मान लिया ओए मान लिया जो आपकी निष्ठा विद्या अलंकार जी हैं अलंकार समाज यों की जो विश्व स्तर ये वो है प्रचारक अलंकार समाज की उनके यहां जब हम गए थे साक्षात्कार करने उनसे पूछ लीजिएगा अगर वह सत्यवादी होंगी तो उन्होंने हमको चाय का चाय के लिए पूछा और हमारे साथ में जो वहां पर थे उन्होंने

01:50:11:12 चाय पी उन लोगों ने चाय पी हमने चाय नहीं पी यह है सिद्धांत वादी ता हम तो चाहे छूते ही नहीं है शिवान जी इसमें एक पॉइंट ऐड करूंगा मैं तो जी ली बात आपने कही है कि जो पहले से पी रहा है उसको बता रहे हैं कि क्या सही है तो एक तरह से देखा जाए तो यही तो ये तो वेदोक्त विधि हो गई ना जिसे परिसंघ विधि बोलते हैं बिल्कुल नहीं उसको हम कैफीन का विकल्प भी देते हैं कि कैफीन की जगह मेंटल जो आपकी जो स्थिति है चित्त को एनस वो जो एक आपका कॉन्शसनेस उसको बढ़ाने के लिए आप लंग खाइए आप जो है सुबह सुबह दही में डाल कर के सेव खाइए जो एक नहीं जब हैवी एक्सरसाइज करते तो ब्रेन जो है डाउन होने लगता है उसका ऑक्सीजन लेवल कम हो जाता है तो कैफीन इंटेक अगर होता है तो व्यक्ति का थोड़ा सा और देर तक वो चीज चलती है उसका परफॉर्मेंस अच्छा रहता है मगर वो कैफीन आता तो उसमें हीय मादक पदार्थों में तामसिक में आता है तो उसको हम ये तो नहीं कह सकते शास्त्र उचित है तो हम प्रयास करते हैं कि उसको विकल्प भी बताए और धीरे-धीरे उसको जो है लाए ये तो गुरुदेव भी कहते हैं कि भैया एक ही दिन में सारा घी मत पिला दो मगर इससे फर्क कहां पड़ रहा है क्या प्रभावित हो गया धर्म या ब्रह्म मगर आप जो कर रहे हैं उससे धर्म ब्रह्म प्रभावित हो रहा है

01:51:26:26 अथातो धर्म जिज्ञासा प्रभावित हो रहा है अथातो ब्रह्म जिज्ञासा प्रभावित हो रहा है जी गोविंद जी मैं आर्य समाज जब जाता हूं ठीक है तो वहां तो मेरे को आज तक उन्होंने कभी ऐसी बात नहीं कही कि यह भाई चाय है या इसमें ये कैफीन या ये वो जबक हर संडे को वहां पर प्रोग्राम होता और चाय तो सबको दी जाती है ये देखिए एक चीज दिखा रहा था मैं य ये कोई प्री प्लान नहीं है ये मेरे पास रखा था ये वो प्रमाण पत्र है प्रशंसा पत्र जो वो जो प्रतियोगिता कराई थी ना जिसका इन्होंने चित्र दिखाया है जिसमें हम उनको सिट्रोन मलेट दे रहे हैं सिट्रोन मलेट होता क्या है कि उसके बारे में बता दूं कि वो सप्लीमेंट में ही आता है सप्लीमेंट को हिंदी में कहेंगे तो पूरक आहार कि आप दिन भर में आज जो खा पी रहे हैं जाहिर सी बात है आज जो हमें मिल भी रहा है वो उतनी पौष्टिकता नहीं है सब्जियों में जो भी हम खा पी रहे हैं जो पेस्टिसाइड्स लग लग के फल आ रहे हैं हर चीज में मिलावट है तो हमारे पास वो पोषक तत्व नहीं पहुंच रहे हैं हमारी जो जीवन शैली है आज की वो पूर्णतया आज कृत्रिम जैसी हो गई है उस जीवन शैली में यदि सप्लीमेंट है भी तो कोई वो उस जीवन शैली को जीते हुए वाले व्यक्ति के लिए उतनी ज्यादा विपरीत

01:52:41:27 नहीं है सप्लीमेंट मगर हमने जो सप्लीमेंट दिया वो सिलिन मलेट वो किस कार्य आता है कि वो आपकी जो सिकड़ी हुई जो नर्व्स होती है उनको वो खोलता है जिससे कि आपका जो रक्तचाप है वो सुचारू रूप से हो जाए और ऑक्सीजन वगैरह जहां पर जितनी मात्रा में पहुंचना चाहिए वो पहुंचे और जिसकी वजह से आपको यथोचित ऑक्सीजन जगह-जगह पर मिले विशेष तौर पर वहां पर जहां का आप व्यायाम कर रहे हैं और विशेष तौर पर ब्रेन में तो वो एक ऐसा सप्लीमेंट है जिसे मादक पदार्थ में नहीं गिना जाता है मादक नहीं है वो तामसिक नहीं जो हमने दिया ये प्रभु श्री राम की कृपा है हमने सोचा समझा नहीं था भाई ने जो छोटे वाले भैया ने जो पकड़ा दिया हम ने दे दिया मगर उस चित्र कोब इन्होंने दिखाया है हमने कैफीन को वहां पर नहीं दिया किसी को भी ठीक है और साथ में हमने क्या दिया उन युवाओं को ये उनको एक प्रेरणा यदि आप यह मल युद्ध कर रहे हैं यदि आप आज शरीर बना रहे हैं यदि आप अपने आप चौड़ा कर रहे हैं तो गौ माता की रक्षा के लिए यदि आपको योद्धा बनना है तो गौ माता की रक्षा के लिए हमारी जिम में पोस्टर लगे हुए हैं गाय को प्यार करता हुआ बॉडी बिल्डर ऐसे वैसे पोस्टर नहीं है

01:53:57:02 गाय को प्यार करता हुआ बॉडी बिल्डर हमारी जिम में मिलेगा वो नहीं मिलेंगे मलेच्छ एक भी मलेच्छ नहीं मिलेगा गाय को प्यार करने वाला शास्त्र को हाथ में लेकर चलने वाला रुद्राक्ष माला धारण करने वाला यज्ञ को भी धारण करने वाला ऐसे चित्र आपको हमारी जिम में मिलेंगे उनको देख के क्या भावना उड़ेगी युवाओं में यार हमको भी ऐसे ही धोती पहननी है हमको भी ऐसे ही जने धारण करना है हमको भी स्वयं को इस योग्य बनाना है हम भी ऐसे बनना चाहते तो ऐसी भावनाएं डालने वाला हमने ये देख लो आख फाड़ के जिसको तुम हीन आचरण में गिना रहे हो ये यह दिया था हमने उन्हें हिंदू योद्धा सम्मान संयोग वष पास में रखा हुआ मिल गया जी गोविंद जी कुछ कह रहे थे हां तो मैं कह रहा हूं यदि फिर कैफीन की बात है तो आर्य समाज में भी तो हर संडे को हम जाते हैं तो वहां पर भी हमें चाय आदि दी जाती है हम हमें तो आज तक उन्होंने कभी ऐसी बात नहीं कही कि यह गलत है या कुछ भी हां यदि नशीला पदार्थ होता है तो वह तो फिर हमें दवाई में भी प्राप्त हो जाता है ना लेकिन उसी दवाई का कोई केवल नशे के लिए ही इस्तेमाल करे वो तो बात गलत है ठीक है तो मुझे लगता है ना यह आर्य समाज के सिद्धांत को ही पूर्ण तरीके से जानते हैं ठीक है क्योंकि कोई भी

01:55:12:03 यदि वरिष्ठ अधिकारी है वो भी इतनी हीन बातें इसको ना मैं कहना नहीं चाहता लेकिन हम टची बातें कहते हैं यानी छोटी छोटी बातें जैसे चुगली हो होती है एक किस्म की जैसे चुगली की जाती है ना वैसे ही इस आचरण को मैं देखूंगा तो ऐसी कोई भी बात मेरे को इनकी एक भी नहीं लगी जहां पर इन्होंने कोई ऐसी बात कही हो जैसे कि कोई सामर्थ्य वान बात थोड़ी है ये कोई कि आपको नहीं पता सिन सिलिन मेलेट क्या होता है वो ऑक्सीजन बढ़ाने के लिए शरीर में एक सप्लीमेंट होता है क्योंकि मैंने भी न्यूट्रिशन की पढ़ाई की है ठीक है बड़े सारे सप्लीमेंट ऐसे होते हैं जो नहीं आते हैं ड्रग्स की कैटेगरी में और उनके पीछे लिखा भी होता है कि यह इन सब संस्थाओं से प्रमाणित है जहां की ड्रग्स वगैरह की टेस्टिंग होती है ठीक है अब कोई अब तो ऐसे लोग भी है जो वे प्रोटीन को भी वो मानते हैं कि ठीक है कि यह भी कोई एडिक्टिव चीज है या कुछ भी तो मुझे लगता है कि जब आपने बता रहे हैं कि सिटन मेलेट है तो मुझे लगता है पहले वीडियो बनाने से पहले एक बार देख तो लेते होता क्या है नहीं पता था तो आजकल य पर 100 वीडियो मिल जाती है ठीक है जब नाइट्रोजन हमारी मैं तो मैं तो ये कह रहा हूं कि जिस समय

01:56:27:14 वहां पर दे रहा हूं वो भले ही वहां प सब पाश्चात्य वस्त्रों में हो मैं वहां पर आपको पारंपरिक दिख रहा हूं जो उन्होंने चित्र दिखाया देखो कैफीन को प्रमोट करते हैं मैं आपको उस भीड़ में पारंपरिक वस्त्रों में दिख रहा हूं ऐसी जगह आप सोचो कोई व्यक्ति धोती और उसको पहन करके ऐसे वस्त्रों को पहन करके अभी भी मॉल में आपको दिखे मैं आपको अपनी मॉल की तस्वीरें दिखा दूं तो यह तो आप आपको प्रोत्साहित करना चाहिए वो व्यक्ति जिम में जाकर के युवाओं के बीच में युवाओं के लिए वो उदाहरण बन रहा है युवाओं को प्रेरित कर रहा है कि हम भी आपके जैसे बने और उनको जो कैफीन नहीं था वो तो कैफीन दिख गया मगर उनको य सर्टिफिकेट नहीं दिखा व क्योंकि वो चील वाली कहावत बताई थी ना वो मा मास देखती है केवल वो मास देखती है केवल चील वाली कहावत है ना मैं तो मैं तो बड़ा ही स कहि है तो मैं तो एक किस्म से बड़ा जो है ना दुखी भी इसके लिए वर्ड नहीं यूज करूंगा क्योंकि वो ज्यादा हो जाता है थोड़ा ठीक है लेकिन आहत जरूर आप कह सकते हैं कि आपने कैसे ऐसी बातें कही है जिनके बीच में ना कोई तुक बनता है और चुगली निंदा आदि से ऊपर आप क्यों नहीं उठ पा रहे हो मेरे को आज यह भी कहीं ना कहीं समझ आ रहा है क्योंकि आप संतों

01:57:42:24 के खिलाफ हमेशा से ही एक द्वेष भावना और उनकी जो आप कह सकते हो कि हीन वाणी में उनके खिलाफ जो बोलते हैं ना शायद इसी का फल ये है कि आप कोई भी तथ्यात्मक चर्चा नहीं करना चाहते हो और आप केवल और केवल दोष ढूंढने में लगे हो केवल दोष ढूंढने में ठीक है तो मेरे को मेरे को तो अंतत यह लग रहा है कि आर्य समाज भी यदि कोई अच्छा व्यक्ति आर्य समाज का जैसे मैं हमारे यहां पर है एक व्यक्ति बड़ी अच्छी बातें करते हैं बड़ी सरलता से हर एक चीज को अपने भाव को रखते हैं ठीक है और उन्होंने 100 बार कहा है कि मूर्ति पूजने वाले हमारे दुश्मन नहीं हमारे भाई है जब चाहे हमारे साथ आए बैठे प्रेम से आचरण करें हम बैठ जो भी उनके साथ दिक्कत है ठीक है लेकिन ऐसे व्यक्ति जो है ना ये कट्टर कहलाते हैं और हर जगह मिलते ही मिलते हैं और ऐसे लोगों से मुझे सावधान तो रहने की जरूरत है ही लेकिन साथ ही साथ इनको समय समय पर जवाब देने की और ज्यादा आवश्यकता है ठीक है ताकि लोगों को भी पता चल सके मैंने इनको बड़ा समझाया कि ऐसा काम मत करना लेकिन यह लोग नहीं हटे फिर भी जी जी जी तो जी आदित्य वाने जी को लूंगा भारत जी आपने वो सेंड किया है

01:59:22:02 गौतम खट्टर जी है जो धमकाते हैं भाई हा ये चैट देख ली या तो व वीडियो हटा दो अन्यथा साइबर सेल में कंप्लेन करूंगा आपके इस कृत को आप इस दोले देखिए इनके ऐसे कितने चैट वो जो अधर्मी उवाच है उसके चैट में मिल जाएंगे ऐसे कितने चैट होंगे इसको कहते दोगलापन ऐसे कितने चैट मिलेंगे इनको वहां पर इसको कहते दोगलापन इसको दोगलापन कहते हैं

02:00:01:09 खर अभी मैं आता जो हमारा एक हमारा जो हमारे बीच का एक युवा है जो पता नहीं किसी घमंड में आ गया है या किस प्रभाव में आ गया है कौन से प्रभाव में आया है दोगलापन और नीच हरकत करना स्वयं के नाम के आगे विज्ञान लगाना दर्शन लगाना इस तरह की चीजें करना तो उसके बारे में बात करूंगा उसने हमारे बारे में कुछ बातें कही वहां पर लाइव में वीडियो में वो क्या थी कि सबसे पहली बात उनका यह कहना था कि मैंने कई बार आवान से बात करने का प्रयास किया उसके निमित्त उन्होंने हमारा एक अनुज है आदित्य वर्ष ने हमारे अनुज है और बहुत ज्यादा मतलब कर्मठ मैं कहूंगा एक समझ लीजिए हमारे सदस्य हैं हां इनकी जो शिक्षा दीक्षा है वह कोई गुरुकुल की नहीं है जैसे हमारा एक पास्ट है और सच्ची बात आपको सबसे बड़ी सरप्राइज तो यह होगा सुनक के कि यह पहले आर समाज में फसे हुए थे हां मुझे इन्होंने जो गलती

02:01:16:13 से वहां के ग्रंथ खरीद लिए थे वो ग्रंथ इन्होंने मुझे भिजवाए भैया इनका मैं क्या करूं ईश्वर सर्वशक्तिमान है नहीं इनका तो मैंने कहा ठीक है हमको भेज दो अध्ययन के काम आएंगे जब हम कोई बात कर रहे होंगे तो हमें अपना उनकी तरफ से क्या कहा गया है वो पक्ष दिखाने में आसानी रहेगी थोड़ी तो इन्होंने हमको बिजवा दिया वो ग्रंथ अभी भी हमारे कार्य आते हैं वो सत्यार्थ प्रकाश है उसम और चीज है उसम वो इनके द्वारा ही बजवाई गई है हमारे पास भेजूंगा ब है मेरे पास गलती से मैंने भी ले लिया था मुझे आदित्य जी ने ही बताया अरे आपकी लाइब्रेरी में ये ये ग्रंथ क्या कर रहा है मैंने कहा अच्छा देखे तो तो देखा तो आदित्य जी ने बताया रे पास भी आप क हो तो मैं उतार के दिखा दूं एक बड़ा सा जत्था है पूरा वो आदित्य वासने जी ने ही भिजवाया हमको और ये पहले प्रभा में आ गए थे मगर जब इनको ईश्वर की सर्वशक्ति मत्ता वाला सिद्धांत प्राप्त हुआ तो फिर उन्होंने कहा कि नहीं ये तो सही और उन्होंने पूछा और किसकिस से पूछा इन्होंने गौतम खट्टर जी से इनका डायरेक्ट बात हो रही थी और भी कुछ लोग हैं आर्य समाज के जो गणमान्य माने जाते हैं उनसे इनकी बातें हो रही थी इन्होंने हमसे पूछा कि ईश्वर सब कुछ कर सकता है कि नहीं वही वाली बात नहीं कर सकता

02:02:31:27 नहीं कर सकता तो सीमित हो गया ठीक है सीमित हो गया भाई तो ऐसी इनकी चर्चाएं है अब यह जो है इनसे जो है सबसे पहली बात विज्ञान दर्शन के नाम से जो अपने आप व्यक्ति बताता है विज्ञान दर्शन है भी कि नहीं उस लाइव में विज्ञान दर्शन ही था है विज्ञान दर्शन के नाम से कोई और व्यक्ति था मैं नहीं जानता मगर वहां पर उसने नीचता भरे और निकृष्ट भरी बातें की जब उसने यह कहा कि हमने आवान से बात करने का प्रयास किया भाई सबसे पहली बात तो यह बता दूं हमारा जो नंबर है दूर भाष नंबर वो हर वीडियो में लगभग हम देते हैं हर वीडियो में अभी भी बोल रहा हूं 740 8301 69 कितनी बार दे चुके हैं हर वीडियो में हमारा नंबर है और लगभग आप जिससे भी आप संपर्क करोगे सबके पास हमारा नंबर मिल जाएगा हमारे लगभग इवन हमारी जो फेसबुक प्रोफाइल है वहां पर हमारा नंबर है हमारी जो ये य चैनल का डिस्क्रिप्शन है इसमें आपको हमारी सारी जानकारी मिल जाएगी तो आपको यदि हमसे चर्चा करनी थी कोई भी सौहार्द पूर्ण व्यावहारिक चर्चा तो आपने हमसे संपर्क क्यों नहीं किया नंबर से क्यों नहीं किया दूसरी बात डेली हम य लाइव कर रहे हैं क्यों नहीं आ गए हम यहां पर लाइव स्ट्रीम के लिए देते हैं

02:03:47:08 कोई भी आदमी चला आर है कोई भी व्यक्ति जवाइन कर लेता है तो आप क्यों नहीं कर लेते आपको तो चर्चा ही करनी थी हमसे क्यों नहीं की दूसरी बात आदित्य वासने जी ने अगर हमारे रेफरेंस से आपको कुछ कहा या नहीं कहा उन्होंने अपनी समझ से जो भी कहा वहां पर तो क्या वह बिल्कुल एकदम अक्षरस बात हो गई कि आवान ने य कहा है और फिर आप इस तरह से भी प्रस्तुत कर रहे हो अपनी बातों को वहां पर कि भाई यह जो है आवान की ही दूसरी आईडी मतलब कितने बड़े अंतर्यामी हो गए जबक चमत्कार को मानते नहीं हो क्योंकि परंपरा को मानते नहीं नहीं हो आप चमत्कार को विज्ञान का खंडन करते हुए उतने ही अंश में मानते हो जितने अंश में दयानंद जी ने चमत्कार को मान लिया तो चमत्कार को आप तो मानते नहीं हो तो जब मानते नहीं हो तो आप कैसे अपने आप को अंतर्यामी कह रहे हो कि हमको जो है पता चल गया कि आदित्य वासने नाम की जो आईडी है वो आवान की आईडी है बातें वो करो जो अकाट्य हो कभी आना मिलना कभी-कभी बिल्कुल सारा जो भ्रम है ना विज्ञान का दर्शन का अध्यात्म का चकना चूर हो जाएगा व्याकरण का केवल एक ही प्रश्न है ईश्वर सर्वशक्तिमान है

02:05:02:20 कि नहीं बस और यदि नहीं है तो वह ईश्वर कैसा और यदि ईश्वर नहीं है तो माता बहन और पत्नी में अंतर कैसे करते हो सर पर पांव रख के भागोगे समझ रहे हो ना वैज्ञानिक महोदय जो आए बड़े कोट प में सब जगह साक्षात्कार मनुवादी मिला नहीं है कोई है ना मनुवादी से जिस दिन सामना हो जाएगा कहीं वहां पर तुरंत अपनी चप्पल सर पर रख कर के भागना पड़ेगा चप्पलों में जब हम भागते हैं तो चप्पलों से दिक्कत आती है या तो स्पोर्ट शूज हो तभी आना स्पोर्ट शूज पहन लो एडीडास वगैरह के तब आना वरना चप्पलों में मत आना वरना चप्पल सर पर रखनी पड़ेगी भागते समय तो आदित्य जी मैं आपसे पूछना चाहूंगा आपसे क्या बातें हुई इनकी वो सब चीज थोड़ा सा बताए नारायण जय श्री राम मेरा यह बात हुई थी कि उस समय लगभग लगभग जुलाई की बात है जूनन जुलाई की और मेरे को ध्यान नहीं तो मैं पोस्ट डालता था इं पर वैसे में एक्टिव कम रहता हूं जो भी हमसे परिचित है उनको सबको पता होगा कि हमारा व्यापार है और बहुत विस्तृत है ऐसा नहीं है कि कोई छोटा मोटा व्यापार हो तो उस चक्र में व्यस्त रहते हैं

02:06:17:20 तो उस समय इनका कमेंट आया करता था आवान की रील्स पर और शायद हमारे पोस्टों पर कि आवाज आ रही है मेरी वैसे भैया जी जी आ रही है बिल्कुल आ रही है बिल्कुल आ रही है तो इनका कमेंट आया करता था कि आपसे चर्चा करने का माध्यम क्या है तो उस समय हमने इनसे बात की तो उस समय बात की तो उतनी बात हुई थी जो उन्होंने उस पर दिखाई थी गलत तरीके से दिखाई थी उसके बाद मैं अपने कामों में लग गया और मैं आज भी मैं 3040 दिन से और लगभग लगभग हजारों मैसेज पेंडिंग में पड़े हैं जी तो अगर इनको चर्चा करनी थी अगर इनको चर्चा करनी भी थी तो दोबारा भी मैसेज कर सकते थे पर व उन्होंने नहीं किया उस दिन के बाद से और उसको किस तरीके से प्रस्तुत किया है वो सबने देखा मैं तो एक बात कहूंगा कि आदित्य वासने जी अपनी व्यस्तता में अगर व्यस्त हो गए आदित्य रसने जी आपको यथोचित उत्तर नहीं दे पाए तो आपको चर्चा जब हमसे करनी है तो आदित्य वासने जी के पास जा क्यों रहे हैं हम जब अपने हर वीडियो में अपना नंबर दे रहे हैं तो उसको क्यों नहीं मिला रहे कपी आती है क्या आवान से भय है क्या आवान

02:07:33:03 जो है वह आपके सिद्धांतों को टटोल देगा क्या अंदर हलक में हाथ डाल करके भय है क्या जो डायरेक्ट आवान की आवान को मैसेज कहीं भी किसी प्रकार का रिस्ट्रिक्शन हमने नहीं लगा रखा तो आवान को डायरेक्ट मैसेज करने में आपको कोई भय है क्या अच्छा उसके बाद इन्होंने बताया कि हमने आवान को भी मैसेज किया है सबसे पहली बात वही वाली बात कि भैया आपने क्या अपना थोबड़ा लगा रखा है क्या जिसको लेकर के आप सारी उसमें जाते हैं चर्चाओं में उसको तो आपने छुपा रखा है हमें आपसे पूछना पड़ रहा है यह

02:08:11:14 देखिए यह देखिए यह चैट में क्या बता रहे हैं इन्होंने क्या बताया कि हमने आवान से पूछने को कहा हमें कुछ बात करनी है आपसे तो हमने कहा कि आपका परिचय जब हमने इनको परिचय बता दिया तो परिचय का जवाब य कब दे रहे हैं थोड़ा बड़ा करिए थोड़ा बड़ा करिए हां आपसे बात व वार्ता करने का क्या माध्यम है तो हमने पहला प्रश्न किया हम सिद्धांत वादी व्यक्ति है भैया पहले समझ लो भाषा शैली आपका परिचय डायरेक्ट बहुत ज्यादा वो इधर उधर की बातें नहीं करते आपका परिचय क्या है तो यह बोल रहे हैं कि हमारा अब यह कब बोल रहे हैं पहली बात जरा इसको डेट कितनी है जरा लिख के बता दीजिए आप आप लिख के डेट बता दीजिए जब हमने इनसे पूछा है परिचय तो यह पूछा है 2 26 12 है कि 11 है 2612 2023 को उन्होंने 2:1 दोपहर में पूछा है हां 26 11202 को इन्होंने जो है हमें मैसेज किया और हमने इनको बता दिया कि भैया हमने इनसे पूछा आपका परिचय ठीक है अब इनकी स्ट्रेटेजी देखिए क्योंकि इन्हें बात

02:09:26:14 नहीं करनी है इनको ऐसा सामग्री एकत्रित करनी है देखो देखो हमने जो है इनसे बात करने का प्रयास किया मगर यह हमसे डरते हैं तो फिर क्या हुआ जी तो इन्होंने जो है इसका उत्तर कब दिया है 11 कितनी जनवरी को दिया है जनवरी 2024 शाम को 651 पर जब 2611 को हम इनसे इनका परिचय पूछ रहे हैं तो ये 18 जनवरी को उत्तर दे रहे हैं कि हमारा परिचय क्या है सोचिए और हम इनको लेकर के कॉन्शियस हो जाए बहुत बहुत अच्छे तरीके से क्योंकि इनका जो फेस है वो इतना चमकता हुआ है जो हमारे सपनों में भी आता है कि भैया दर्शन जी का दर्शन प्राप्त करना है ना इनकी प्रोफाइल में भले ही इन्होंने कुछ भी और लगा रखा हो मगर हम इनको पहचान ले और हम दिन और रात इनके सपने देखते रहे कि भैया उनका मैसेज क्यों नहीं आया क्यों नहीं आया क्यों नहीं आया और जब मैसेज ना आए तो हम इंतजार करते रहे और जब य अपने यथावत रूप से जब मैसेज दे कभी भी तो हम उसको देख कर के फिर दोबारा से पुनः सक्रिय हो जाए तो इन्होंने 18 जनवरी को क्या मैसेज किया कि जी मेरा परिचय तो मेरा पेज है

02:10:44:02 26 से 261203 से इनका अगला मैसेज आया परिचय देने वाला 181 2024 सोचिए इतना दिन क्यों लग गया इनको परिचय बताने में मुंह काला था क्या भाई जब व्यक्ति इस तरह की बातें कर रहा है तो उससे पूछना पड़ेगा कि आपको अपना परिचय बताने में जब आप हमसे बात करने आए हो तो ये 18 और चार 22 दिन का समय लग गया आपको अपने बारे में जानने के लिए कि मैं कौन हूं मैं किसकी संतान हूं मैं क्या हूं क्या नहीं हूं और फिर हम पर आरोप लगा रहे हैं कि आप हमारे जो मैसेजेस है वो देखकर भी आपने हमको टाइम समय नहीं दिया हमें भय हमें भय नहीं है क्योंकि हमारे साथ श्री रघुनाथ तो किस बात की चिंता हमें जी ये ध्यान रखना हमें भय नहीं है सीने पर गोली खाएंगे सीने पर ऐसा वैसा ना समझो भाई वोह आपका दर्शन आपका विज्ञान रखो वहीं तक जहां तक आपको वो अंधों में काना राजा बना करके घुमाया जा रहा है जब तक दूर हो तब तक दूर हो सामना जिस दिन होगा प्रत्यक्ष वार्ता होगी दृश्य बदल जाएगा उसके बाद देखिए इन्होंने क्या किया लाइए दोबारा जरा

02:11:57:10 चित्र 10 15 दिन तक इष्ट मित्रों से चर्चा कर लिए क्या परिचय बताया जाए बिल्कुल हां इन्होंने यही यही चर्चा की होगी 22 दिनों तक कि क्या परिचय बताना है भाई अपना तो वो भी इन्होंने देखिए क्या बताया है उस समय कि मेरा परिचय तो मेरा पेज है तब भी इनको ढांड से नहीं बना कि अपने बारे में खुल के बोल पाए मैं बोलता हूं खुल के मेरा नाम शिवांश नारायण द्विवेदी श्रीमद जगतगुरु शंकराचार्य पूरी पीठाधीश्वर जी का अल्पज्ञ शिष्य और प्रभु श्री राम का साधारण भक्त यह है मेरा परिचय तुम्हारा परिचय क्या है अपना परिचय बनाने बताने में लज्जा आती है और दूसरों पर आक्षेप करने चलते हो अब देखिए उसके बाद इनका मैसेज आ गया अब इनका जो मैसेज है इन्होंने कहा हमारा परिचय तो इतना और से मैंने खोल के देख लिया किसी का मैसेज पड़ा है हमारा परिचय तो इतना अब इनका परिचय जानने के लिए हम इनका पेज सर्च करें तो भाई आपको लगता है कि आपके पास यही कार्य है लोगों के चैट में जाकर के चैटिंग करना हमारे पास नहीं है कि पहले आपका परिचय पूछे उसके बाद एक महीने बाद जब आप उत्तर दो फिर उस पर तुरंत सक्रिय हो जाए आपका जाकर के चैनल

02:13:12:19 हम चेक करने लगे अजीब बात है और जब हमने यहां पर इनको कोई प्रतिक्रिया नहीं दी इसके उत्तर में तो इन्होने चवा उड़ा दिया देखो देखो आवान हमसे चर्चा करने से डरता है आ जाओ भैया एनी टाइम एनी वेयर एनीबडी आई एम रेडी अगर इनको चर्चा के लिए तत्परता दिखानी ही थी और इनको करनी ही थी हर हाल में तो रोज तो लिंक देते हैं ना लाइव चैट में सुन रहे हो भया दन मोबाइल नंबर दे रखा है और इन लोग का झुंड ही यही करता है कि जो भी व्यक्ति हमारा खंडन करे उसको चैट में परेशान करो ताकि कुछ उल्टा पुल्टा कभी फ्रस्ट्रेट होकर बोल दे तो उसका क्लिप ले जाकर य पर डालो और वही कल करना चाह रहे थे जी आपको बस समय दे रहा हूं बस एक बहुत फैक्ट फुल बात है वह मैं आपसे कह रहा हूं पहली बात तो यह है कि जो लोग यह सोचते हैं कि हम चर्चा से भाग रहे हैं उनको पता है अपनी आत्मा में कि आवान भागता है कि नहीं भागता हा जो अमर्यादित आचरण वाला है जो समय आने पर अपनी माता का भी व्यवसाय बना दे जो समय आने पर अपने पिता को भी उसकी जो मर्यादा उसको भंग कर दे ऐसे किसी व्यक्ति

02:14:27:27 के साथ हम चर्चा में नहीं बैठेंगे ठीक है मगर यदि कोई संभ्रांत रह गया है अभी भी अलंकार समाज में होते हुए भी तो उसके लिए हमने कहा एनी टाइम एनी वेयर एनीबडी आई एम रेडी ठीक है आई एम रेडी तो मैं अभी एक बात बता रहा अगर उत्तर ना देने से यह सिद्ध हो जाता है कि सामने वाला आपसे भय खा रहा है मान लिया ओए मान लिया मान लिया अब दिखाओ भैया इनके गौतम खट्टर जी के साथ हमारी वो चैट दिखाओ दिखाओ खोलो

02:15:08:00 चैट आप ही कह रहे हो ना कि यदि चैट का उत्तर नहीं देगा व्यक्ति तो वह जो है भगोड़ा माना जाएगा डरपोक माना जाएगा वो जो है भय खाने वाला माना जाएगा हम नहीं कह रहे तो हमारी चैट जरा खोलिए ा वाली और उसमें वो चैट इनको दिखाइए कि गौतम अगर नहीं है तो थोड़ा विलंब होगा मैं अभी थोड़ी देर बाद दिखा दूंगा तब तक हम आद गौतम खट्टर जी का हमारे पास जब हमने हलचल कर दी थी नाय परंपरा वाली अचानक से हुआ था अपना वो कि भाई परंपरा क्या है आपकी तो जब वोह हलचल हुई थी तो गौतम खट्टर जी भी हमारी बात पहुंची होगी तो वो खट्टर जी हमको मैसेज करते हैं जो उनका जो तरी का है मैसेज करने का वही प्रणव और नमस्ते ये उन्होंने हमको भेजा हमने इधर से भेजा आज तक कोई उत्तर नहीं आया हमने य सोचा भाई व्यस्त व्यक्ति है इतने सारे फॉलोअर्स है नहीं देख पाए होंगे हमने तो य आक्षेप नहीं लगा दिया अपने वीडियोस में उठा कर के कि भैया देखो देखो यह अलंकार समाजी समाजी हमसे भय खाते हैं क्या तुम्हारे सिद्धांत है तुम करोगे परंपरा चार परंपरा प्राप्त आचार्यों की वो समीक्षा दूर ही दूर से सांप और बिच्छू शेरों को काटा नहीं करते

02:16:23:06 दूर ही दूर से रंग कर निकल जाते हैं ठीक है वहीं तक सीमित रहो जहां तक आपकी बवाई हो रही ववा ववा क्या शेर मारा हम मारने तो दो वही वाली बात है अपने ही लोगों को एकत्रित कर लो उसमें जो है अर्ज किया है और अर्ज किया है वैसे ही आपके जो वो हैं प्रशंसक चापलूस वो चिल्लाने लगे वाह वाह वाह वाह तो आप ही को कहना पड़ेगा भाई रुक जाओ शेर कहने तो दो हां ये देख लीजिए भैया बड़ा कर

02:17:02:08 दीजिए यह चैट है खट्टर जी की और इन्होंने हमको अभिवादन किया जी है ना और हमने इनको जय श्री राम बोला और नीचे क्या लिखा है और आज तक इनका पल अच्छा यह भी बात है हम इनके पास नहीं गए हैं यह भी सोचने वाली जब सामने से यदि आपका कहना यह है कि सामने वाला व्यक्ति सीन करने के बाद अलग हो जाता है और जवाब नहीं देता और तो वो हारा हुआ माना जाएगा भय भीन माना जाएगा तो फिर यहां पर तो य इस जो हमारा केस है उसमें तो आप हमारे पास आए हैं इस केस में तो यह हमारे पास आए तब उत्तर नहीं दे रहे हैं तो क्या करें कहोगे इ भगोड़ा य वही अपना दोगलापन निभाओगे य भी कि हम जो यथा सामर्थ अपने दोगले पन का निर्वाह करेंगे यथा सामर्थ धर्म का नहीं लेपन का निर्वाह करेंगे और स्वयं को वैदिक घोषित करेंगे और वस्तुत हम कौन

02:18:07:01 है तो हम खट्टर जी का यहां कोई विरोध नहीं कर रहे भाई ठीक है उनके फॉलोअर्स है इतने सारे मिलियंस के आसपास फॉलोअर्स है कितनों को समय दे पाएंगे मुझे किया होगा उन्होंने उसके बाद नहीं कर पाए अ हम य क्या कको भगोड़ा भगोड़ा चिल्लाने लगे कल थंबनेल बना दे गौतम खट्टर भगोड़ा आप लोग पहले बनाओ आपका तो सिद्धांत है जो जवाब ना दे व भगोड़ा है व भय खाने वाला है तो बनाओ और नहीं तो घोषित करो स्वयं को मोहर लगाओ मैं मोर बनवा के दे दूंगा अगर आपको ना मिले तो गुलो मैं दोगला

02:18:47:08 हूं डोला दर्शन और स्वार्थ पूर्ण चर्चा करनी हो तो आ जाना बता दिया है नंबर है आईडी है आपकी जो आईडी है उसमें आपका फेस नहीं लगाया कहीं बहुत से लोग संपर्क करते हैं डेली सबको यथोचित उत्तर दे पाना उतना सरल नहीं है और वह भी तब जब व्यक्ति केवल चैट तक सीमित ना हो नवो मार्ग तक सीमित ना हो धरातल पर भी सीमित हो धर्म के दुश्मन रा धरती पर भी है ना उनको भी उठा उठा के पटकना पड़ता है ठीक है तो यह हो गया अच्छा इसकी एक बात और देखी मैंने ये दर्शन की यह जब अपने साक्षात्कार में जा रहा है तो करपात्री जी की समीक्षा कर रहा है बैठ कर के और सोचिए किनके सामने कर रहा है इस निर्लज को लज्जा नहीं आई नास्तिकों के सामने सोचिए वो करपात्री जी वो करपात्री जी वो शंक वो शंकराचार्य जो जब भाई हमारी जब लड़ाई जब विधर्मी से है तो हम सब

02:20:02:12 एक है का संदेश देते हैं वह नास्तिकों के समक्ष करपात्री जी की समीक्षा कर रहा है उनके सिद्धांतों का खंडन करना खंडन कर नहीं पाओगे अभी अकेले में बैठे हो मैं फिर बता रहा हूं प्रत्यक्ष वार्ता होगी तो भ्रम टूट जाएगा चकरा हो जाएगा फिर बता रहा हूं हम अपने जो सिद्धांत है ना उनके लिए प्राण ऐसे ही नहीं दे सकते हमें संशय नहीं है उन सिद्धांतों पर इसलिए हम अड़ बड़ के आगे आ जाते

02:20:41:12 हैं अच्छा एक बात बताओ यह साइंस की बातें कर रहा है यह वहां जाकर के नास्तिकों के सामने वो एक और दोगला चैनल है क्वेस्ट क्वेस्ट करके क्या नाम है उसका हाइपर है के क्वेस्ट है पता नहीं हाला चैनल है उस चैनल पर जाकर के और जो है यह जो है यह व्यक्ति दर्शन नाम का और जो है एक नास्तिक अधर्मी व्यक्ति के समक्ष जो है और कपाती जैसे महापुरुष का समीक्षा कर रहे हैं खंडन कर रहे हैं और यह बताओ तुमने अपनी जो प्रकाश फैलाते हो जिसका ईश्वर बाधित है उसकी समीक्षा कर ली तुमने उसी नास्तिक के सामने ढेले भर नहीं करो समीक्षा बहुत सी चीज ऐसा नहीं है कि उसने चमत्कार को नहीं माना है क्योंकि चमत्कार को माने बिना ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध नहीं कर पाओगे कहीं ना कहीं से तो विस्फोट होगा ही सृष्टि रचना का चमत्कार तभी ईश्वर की सिद्धि होगी समझ गए बाबू जी ब फर्क सिर्फ इतना है कि हम उतना चमत्कार मानेंगे जितना हमें समझ में आ जाए जितना हम मानते हैं

02:21:56:19 बस हमारा चमत्कार चमत्कार दूसरे का चमत्कार अवेल करने योग्य यह है तो नास्तिक व्यक्ति के सामने करपाती जी का समीक्षा कर रहे हैं और यह वही कम्युनिस्ट है जो आपके वो जो कौन है वैज्ञानिक कहे जाते हैं जिनका का वैदिक फिजिक्स नाम से पेज है चैनल है ये वही कम्युनिस्ट व्यक्ति है जो उनका मजाक उड़ाते हैं जो उल्टी सीधी बातें करते हैं हनुमान जी आपका इनका एक पक्ष ऐसा भी है जो हनुमान जी उड़ते थे ये भी मानता है उसमें वैचारिक वो है फिर मतभेद इसको लेकर मैं आगे बात करूंगा मगर इसने अपने इंटरव्यू में इस हल्के व्यक्ति ने हल्का मतलब जो जिसके सिद्धांत हल्के हो डगला है ना तो इस हल्के व्यक्ति ने क्या किया वहां पर अच्छा इसका एक और है मैंने इसकी एक बात जानी है कि इससे किसी ने अभी शिकायत की इसके घर पर कि भाई जहां पर इस तरह से किसी के घर की स्त्रियों का बाहर उनका चित्र दिखाया जा रहा है यह वहीं पर बैठा है यह खंडन नहीं कर रहा है तोय तो उसके पिताजी वहां बोल रहे हैं

02:23:12:00 इस लड़के के पिताजी बोल रहे हैं कि इसने थोड़ी ना प्रदर्शित किया है भाई मनुस्मृति का वचन है मोन रहने से अच्छा होता है सत्य बोलना यदि वो खंडन योग्य कार्य था तो तुमने खंडन क्यों नहीं किया तुम तो बहुत बड़ी ध धर्म की ध्वजा लेकर चल रहे हो ना क्यों नहीं खंडन कर दिया कि ये मत करो दूसरी बातें करो उनके घर की मातृ शक्तियों का प्रदर्शन यहां मत करो दोगले कहीं के धर्म को धारण करने वाले बनते हो हैं वहां पूछा जा रहा है उत्तरकांड के बारे में उत्तरकांड तो प्रक्षिप्त है क्यों क्योंकि हम आर्य समाजी है अच्छा अच्छा उत्तरकांड और क्यों क्य प्रक्षिप्त है क्योंकि हम आर्य समाजी आर्य समाज को सपोर्ट किससे मिला है राम भद्राचार्य से क्योंकि वो परंपरा प्राप्त है और राम भद्राचार्य जी गलत है क्योंकि वो आर समाज का विरोध करते हैं मूर्ति पूजा का समर्थन करते हैं और हम आर समाज का विरोध करते हैं क्योंकि आर समाज कई जगह पर ऐसी बातें करता है जो हम उसकी भी नहीं मानते मैं आर समाजी नहीं हूं मैं राम भद्राचार्य को मानने वाला नहीं हूं मैं परंपरा प्राप्त को मानने वाला नहीं हूं मैं जो है जो सनातन धर्म ग्रंथ है जब परंपरा को नहीं माना तो धर्म ग्रंथों को नहीं माना आर समाज को नहीं माना मैं किसी को मानने वाला नहीं हूं

02:24:27:03 मगर मैं हिंदू का बहुत बड़ा योद्धा हूं मैं हिंदुओं की रक्षा करने जन्मा हूं मैं हिंदू धर्म को कितना मानता हूं बिल्कुल नहीं मेरे अंदर हिंदुओं के कितने संस्कार है बिल्कुल नहीं मगर मैं हिंदुओं का रक्षक हूं मैं ना राम भद्राचार्य को मानता हूं ना मैं आर्य समाज को मानता हूं और मैं नास्तिकों के सामने जो है अपने जो पूर्व के आचार्य है भले ही वो आपके विचार आपके विचारों को मानने वाले हो या ना हो मगर ईश्वर की सत्ता को स्वीकार करने वाले तो है वेदों में परमाण बुद्धि रखने वाले तो हैं मगर मैं उनकी समीक्षा कर दूंगा नास्तिकों के सामने क्योंकि मुझे अपने आप को प्रचार प्रसार की वस्तु सामग्री बनाना है मुझे बिकना है मार्केट में मुझे अपने आप को बेचना है मेरी बोली लगनी है इंटरव्यू पर जाने कर जाने की इसलिए मैं बोलूंगा समय आने पर मैं कुछ भी कर दूंगा व्यापार व्यापार की सामग्री बना दूंगा अपनी ग्रहस्ती को भी ऐसे लोग हैं ऐसे ही लोग होते दोगले जो अपने माता-पिता को भी व्यापार की सामग्री बना

02:25:37:02 दे चलिए ठीक है आगे ब आगे मैं अब मैं आदित्य जी से कहूंगा वो बोले जी पंकज जी मैं लूंगा आदित्य जी जो आदित्य नारायण ऐसा है कि अगर सत्यार्थ प्रकाश के अंदर भी कई चीज ऐसे मिले जो य डिफेंड ना कर पाए तो स्पष्ट कहते देखिए हम इसको मानने के लिए बाध्य नहीं है य अनुते सा धर्म वेद नेत एक रटा हुआ लाइन है जो तर्क प फिट बैठेगा वो हम मानेंगे बाकी नहीं मानेंगे और एक महाभारत की इनके यहां व्याख्या करने वाले हुए थे जगदीश्वरानंद जी उन्होंने तो खूब चमत्कार माने हैं कि स्वामी जी हवा में ऊपर उड़ते थे हनुमान जी भले ना उड़ पाए तो आपने कहा दो संप्रदाय है इनके अंदर एक हनुमान जी को उड़ा हुआ मानता है एक टैर के जाने वाला मानता है और एक मानता है कि आसपास जो है कोकोनट के वृक्षों से नाव बना के गए थे तीन पक्ष हैं और तीनों में आपस ही बहुत बड़ा मतभेद है सामने दिखाते नहीं है लोग

02:26:52:10 हां पहले थ बहुत ज्यादा मत भेद जब से जो आप आए हैं स्ट्रीम करने लग गए हैं तो हनुमान जी जा जैसे उड़े हो आवान का खंडन करो अभी य सिस्टम चल रहा है वर्तमान में जो यह कहते हैं तक तर्क से ही मानूंगा तो इन्हीं के कुछ लोग प्रचार बताते हम भी मानते हैं कि शास्त्रों के विरोध में श्रुति के विरोध में व्यक्तिगत तर्क भी अमान्य है इन्हीं के कुछ लोग बताते हैं और हम भी मानते हैं उन चीजों को दो एक 11 संभवत ब्रह्म सूत्र में कहा यह बात व्यास जी ने तो शति के विरोध में तर्क भी अमान्य अगर वो शति के विरोध में आप व्यक्तिगत तर्क दे रहे हो तो अमान्य कर दो खंडन तो भाई और मैं उनकी स्ट्रीम को पूरा नहीं देखा था कुछ अंश बीच बीच मैं देखता था आधा इस स्ट्रीम को देखता था आ को देखता था जो बिंदु मैंने सुना एक जो बात है कि ब्राह्मण उचित कर्म से ही जी जीव को पार्जन करना ये परंपरा व है तो हमारी परंपरा के अंदर जब हम महा निर्माण तंत्र का अनुशीलन करते हैं तो कलयुग में जो स्थिति और आपत्ति काल आएगी

02:28:07:15 इसका उपदेश स्वयं माता पार्वती ने दिया है और आठवे से दसवी उल्लास के अंदर उसके अंदर उल्लास है जब हम वर्ण धर्म का अनुशीलन करेंगे तो वहां हमें ये ज्ञात होता है कि माता पार्वती कहती है कि आपत्ति काल में जो ब्राह्मण है वो कलयुग में यदि प्रथम वर्ण के जो कर्म है उसको ना कर पावे तो अन्य वर्णों के कर्म का भी आश्रय लेकर के जीव को उपार्जन कर सकता है यह तो हमारे परंपरा में ही आदेश है निर्माण तंत्र आर्काइव इंटरनेट पर अवेलेबल है कोई भी जाकर पढ़ सकता है हमारी परंपरा में तंत्र मान है अब आप उसको ना मानो पंडो ने लिख दिया है तो मानते रहिए आप ये लोग वैसे कहते हैं हम आचार्यों का वो करते हैं भाषा देखी है कभी वीडियो में जिसको अपने साथ बिठाए हो वो अंडर कवर्ड गुंडे को भाषा देखी है पंडे पंडे पोप ये भाषा है उसकी वो कन भी नहीं है जिसके साथ बैठ कर के मंच साझा कर रहे हो वो कन्या भी तो कल फोटो रे माता पिता से वो ऐसे ही बोलेगा ना उस दिन आपका जो वो है ना आत्मा वो झग जोरे

02:29:16:27 गी इनके बीच में एक महानुभाव और थे वो जो ऐसे ऐसे करके वीडियोस बनाते हैं घूम घूम के झूम झूम के हास्यप्रद मुद्राओं में और धर्म की शिक्षा देने का दावा करते हैं और समय पड़ जाए तो तुरंत सेंटीमेंटल खेलने लगते हैं शूद्र चमार इत्यादि वोह कहते हैं कि मैं जो है हिंदी में अगर उनका अर्थ किया जाए उनके पेजस का तो कहेंगे कि वो वास्तविक और उद्देश्य वास्तविक भाव है ना वास्तविक

02:29:53:07 अभिप्राय तो वह आए थे वह हमको ज्ञान देते हैं भैया कि भैया आपस में मत लड़ो आप भा हम भी तो वही कह रहे हैं भाई हम कह रहे हैं य बात कि भाई अगर आप निराकार ईश्वर को मानते हो कोई बात नहीं आप अपने मन में यह सोचो कि वेदों में जहां जहां पर अलंकार के रूप में ईश्वर के स्वरूप की बात हुई है यह जो लोग है यह जो हमारे हिंदू भाई है ये वो है और आप निराकार की पूजा करो वो जो ू भाई है वो निराकार को मना तो नहीं कर रहे मगर प्रॉब्लम ये है कि जिसका अस्तित्व ही किसी के खंड आर्थ बना हो उसको तो वो करना ही पड़ेगा वो खंडन कम बंद कर देगा वो जब तक स्टेज पर जाकर के शंकराचार्य की बुराई नहीं करेंगे जब तक स्टेज पर जाकर के स्त्रियों का जन भले ही राघवाचार्य बोल रहे हो रामानंदाचार्य नहीं होना चाहिए भले ही सारे परंपरा प्राप्त आचार्य एक तरफ से बोल रहे हो फिर भी जब तक स्टेज पर जाकर के उसका खंडन नहीं करेंगे उस बात का तब तक हमारा अस्तित्व कैसे आएगा लाइमलाइट में जब तक हम भावुक बातें नहीं करेंगे तो हम तो यह बोल ही रहे हैं आपस में तो लड़ाई जिस तंत्र का समर्थन आप करते हैं वह कर रहा है ना राधा जी के बारे में अ शब्द बोल कर के शिवलिंग के बारे में अ शब्द बोल

02:31:07:19 करके वास्तविक उद्देश्य जी पहले य व्यक्ति कहेगा की भाई आपस में मत लड़ो और यदि इसके समर्थन प्राप्त तंत्र से इसकन की लड़ाई हो जाएगी तोय वीडियो बनाएगा इसकन की इसकन की पोप लीला यह वीडियो बनाएगा तब क्यों लड़ रहा है तब क्यों लड़ने जा रहा है उससे सोचने वाली बात है ना बस कुल मिलाकर के जितना आपने सोच लिया है कोई नियमावली नहीं है कुछ नहीं है जितना आप कहो वो माने आप कहो उठो तो उठ जाए आप कहो बैठो तो बैठ जाए आप यह चाहते हो कि आप हमारे तानाशा बन करके रहो और अगर नहीं तो आप इस तरह से हमारे घर की मातृ शक्तियों के चित्रों को सार्वजनिक करने में सहयोग करोगे यही नीचता सीखी है ना तुमने वास्तविक उद्देश्य वाले व्यक्ति यही है ना तुम्हारा वास्तविक उद्देश्य

02:32:09:20 नीच एक और है इन्हीं में रावा ये व्यक्ति दावा करता है बस आपस में ना लड़ो राघवाचार्य जो परंपरा प्राप्त जो आचार्य है उनका तुम उनको तुम पाखंडी बोलने से नहीं डरते हो पंडे बोलने से नहीं डरते हो तुम्हारे तुम्हारे वो लोग तुमने कभी उनका प्रतिकार नहीं किया जो अपने वीडियोस बनाते हैं और बोलते हैं सबसे पहला शत्रु है हिंदू पौराणिक है सबसे पहला शत्रु ऐसे बोलते हैं तुम्हारे लोग तब तुम वीडियो नहीं बनाते उनके लिए अजीब दोगलापन है भाई पराकाष्ठा है दोगले पन की भय भी नहीं लगता भय लगेगा कहां से एक बात क्योंकि क्योंकि जिस ईश्वर की कल्पना क्योंकि जिस ईश्वर की कल्पना की है वो ईश्वर तो है ही नहीं भय किसका लगे जिसके जीवन में ईश्वर होगा तब तो वो धर्म को धारण करेगा ना मुंह में दही दही जम जाएगा फिर सबको धमकियां देने लगेंगे इनके ऊपर कोई बात कर दी जाए मेरे पर बात कर दी तो मैं एससी एसटी एक्ट लगवा दूंगा गलत मत गलत भ्रम में

02:33:24:20 मत रहना भाई पूरी जानकारी है कहां कहां क्याक बोलते फिरते हो ठीक है किसी को भी पकड़ के ले जाएंगे अलंकार समाज के केंद्रों में जहां भागे हुए इनकी विवाह करा दिया जाता है 50 में पहले 250 में होता था फिर 500 में होने लगा फिर 1100 में होने लगा आज 2100 फिर 5100 लो भाई हमारे यहां कराया जाता है जो भगोड़े होते हैं दंपत्ति बिना माता-पिता की आज्ञा के जो करना चाहते जिसको निकृष्ट विवाह माना जाता है वो विवाह कराते हैं प्राथमिकता से कुछ पैसे लेकर अभी कोर्ट में मैंने देखा था एक जगह किसी अ मलेच्छ तंत्र के व्यक्ति ने हिंदू समाज की व्यक्ति से हिंदू समाज की जो मातृशक्ति थी उससे विवाह करा लिया इन्हीं के केंद्र में जाकर के और उस विवाह से दुखी होकर के माता-पिता उनके बिटिया के माता-पिता उस विवाह को चैलेंज करने लगे तो बिटिया ने अपने माता-पिता के विरुद्ध एक केस दर्ज करवा दिया कोर्ट में

02:34:40:01 और कोर्ट में जज पूछ रहा है कि भाई ऐसा क्या कर दिया तुम्हारे माता-पिता ने जो तुम जिन्होंने तुम्हें पाल पोस करके बड़ा किया है जो आज तुम उन पर जो है मुकदमा दर्ज करा रही हो ऐसा क्या कर दिया तो उनका वकील उठ कर के कह रहा है कि उन्होंने विवाह किया है उने बोला विवाह कहां किया है तो यह जज के जज के शब्द है कि भाई यह जो लड़का है इस लड़के का यह जो कन्वर्ट हुआ उनका कहना है कि हम जो विवाह कराते हैं किसी गैर सनातनी से सनातनी महिला का तो हम उसका पहले धर्म परिवर्तन कराते हैं मतलब एक तो जिस दिन वो पहुंचा कि हम दोनों को विवाह करना है तो भाई तुम्हें हिंदू बनना पड़ेगा हां मैं बन जाता हूं बन गया हिंदू तुरंत हिंदू बन गया वो हो गया वो उसने सब अपने नमाज सब अपनी प्रेयर आमीन वगैरह सब छोड़ दिया बन गया वो हिंदू तुमने बना दिया उसको तो वहां जज पूछ रहा है कि ये इसको अथॉरिटी किसने दी है यह अलंकार समाज को किसने अथॉरिटी दी है कि वह किसी को हिंदू बनाने वाला हिंदू करने वाला होता है ऐसे विवाह किसी का विवाह के बारे में अथॉरिटी या फिर हिंदू हिंदू कहने के रूप में या सनातनी कहने के रूप में अथॉरिटी किसने दी है जज के वो है व पर पता नहीं वो सुप्रीम कोर्ट के थे क्या हाई कोर्ट के थे तो यह सब इनके

02:35:55:08 कारनामे है और फिर जो है ये बोलते हैं यही इसी तरीके से यह भी करता है यह जो वास्तविक उद्देश्य वाला व्यक्ति है जो हास्यप्रद रूप में जो है शिक्षा देने की दिखावा करता है यह क्या करता है किसी को भी पकड़ के ले जाएगा अलंकार समाज के केंद्र ले भाई तू बन गया ब्राह्मण ले भाई तू बन गया ब्राह्मण ब्राह्मण फैक्ट्री है ब्राह्मण फैक्ट्री है सीधे किसी को भी पकड़ के ले जाओ ब्राह्मण होष ब्राह्मण जी क्वांटम वैक्यूम जी बोले हरर महादेव कन्हैया अच्छा अच्छा हरर हर हर ये ना इन्होने आपके और अ ज जी के साथ में ही नहीं किया था ये मेरे साथ भी हुआ था ये काफी पुरानी बात है अच्छा हा एक एक समय की मैं आपको घटना य बताता हूं एक बार होता क्या है कि मेरे घर में किसी फंक्शन में शादी वगैरह थी जी तो क्या हुआ कि मैं अपनी वाइफ के साथ में जो है वो नृत्य कर रहा था डीजे पर तो क्या हुआ कि मेरी फोटो मेरी वीडियो वीडियो को कहां

02:37:10:09 से उठा कैसे उली हो सकता है सोशल मीडिया पर किसी ने शेयर करी हो कुछ भी किया हो तो हालाकि उसम मेरी वाइफ का फोटो नहीं ये पक्का है क्योंकि उन्होने काट के लगाई थी ये तो है के साथ नहीं लगाई थी लेकिन मैं उस ड कर रहा था मेरी फोटो सब जगह वारल कर देखो ये नक है मु और एक काला पहाड़ नाम का व्यक्ति है वो हमेशा जब भी मैं किसी चैनल पर जाता था या उस पर जाता था तो वो मेरे को हमेशा यही कहता था ये तो नया है अब मुझे ये समझ में नहीं आ रही कि आर समाज के लोग नाचते है तो वो नया नहीं है वो क्या हम दिखाएंगे यहां पर अभी हम नृत्य भी दिखाएंगे सूट बूट में आया कन्हैया बैंड बजाने को वो भी दिखाएंगे नहीं सोचने सोचने वाली बात है कि इतने इतने प होते सिद्धांत का कोई जवाब नहीं दिया जाता जवाब नहीं मिलेगा कोई भी लेकिन बा पर्सनल अट जाते अगर नहीं करोगे हम तो केस कर देंगे तुम्हारे ऊपर इससे जदा क्या होगा प असर नहीं हो रहा तोस करो उस अब आप पूछने वाली बात है कि भले व केस कितना भी झूठ हो कितना भी फल्स हो लेकिन उसको साबित करने के लिए जाना तो पड़ेगा बा है

02:38:25:21 को कर एक बारने के कर दिया तो करनी पड़ेगी कब कबतक करते रहेम भर आइए आपसे वि चर्चा होगी जब काफी देर से कोई चर्चा चल रही है तो हा जी मैं अपना वक्त पूरा करू जी जी बोलिए तो जो आनंदू होता है जैसे क्या होता है जैसे बहुत से लोग है है वो काम कर रहे हैं अपनी जगह पर जितना उनको पॉसिबल हो सकता है वो कर रहे हैं लेकिन बाप व अपने परिवार से भी रे हुए सोचने वाली मा बाप का प्रेशर होता हैम क्यों कर रहे हो किसी होता है बच का होता क्यों कर रहे हो क ले रहे हो तो इन चीजों का य बहुत फायदा उठाते उसे मालूम होता है य वक्ति फैमिली वाला है य ऐसा है इसको थोड़ य करेंगे करेंगे तोय प छ के भाग जाएगा काम तम

02:39:40:22 लेन ऐसा नहीं होगा अब ऐसा नहीं होगा एक बात मैं याद दिला दूं यहां पर जो हम जो नीच कह रहे हैं उसका अर्थ क्या है जो हीन आचरण आप लोगों ने किया है किसी के घर की मात्र हमारी जो जो व्यक्तिगत जीवन है हमारा उसको हम पहले भी प्रदर्शित कर चुके हैं उसके करने की आवश्यकता नहीं थी मगर आपने किया भी तो घर की मात शक्तियों के चित्र को प्रस्तुत नहीं करना चाहिए था तो ऐसा हीन आज ण करने वाले के रूप में हम नीच शब्द का उपयोग कर रहे हैं कोई ब्राह्मण भी कोई क्षत्रिय भी इस तरह का आचरण करने पर नीच कहलाएगा हर वह व्यक्ति नीच है जो वह कर रहा है वह कार्य कर रहा है जहां पर भी कर रहा है अब

02:40:42:14 मैं इस पर आऊंगा सीधे जो उसमें जो मुख्य विषय था आदित्य जी को सुन नहीं पाए आदित्य जी चले गए कुछ कार गया था तो वो चले गए उसमें एक मुख्य विषय था कि अ कि भई ये जो है हमारे वो जो संस्कार हम करवा रहे थे उस पर इसने टिप्पणी दी है तो ये भी तो खुद अशा स्त्रीय चीज तो पहली बात वो हमारी गुरु शरण में आने से पहले की थी आध्यात्मिक मार्ग में आने से पहले की सामग्री थी पहली बात दूसरी बात यह है कि क्या किसी भटके हुए व्यक्ति को सही मार्ग पर आने की अनुमति हमारे धर्म के द्वारा दी गई है कि नहीं अगर वह आ जाता है तो क्या उसका जो व पास्ट लाइफ है उसके आधार पर उसको गलत ठहराना उचित है आज के समय में और युगल किशोर जी वापस आ गए दूसरी बात यह है कि हमने हमारी वो जो अशा स्त्रीय दिखने वाली चीज है उसको कभी भी शास्त्रो चित नहीं कहा है और अभी भी हम ठोक करके कह रहे हैं कि भैया वो वो चीजें वो वो सामग्रियां जो हमारी पूर्व की है या जिनका व्यवस्था वस आज हमें आलंबन लेना पड़ रहा

02:41:57:16 है जैसे जिम इत्यादि का वो भी उस रूप में कि हम उसका उपयोग उस सेतु के रूप में कर रहे हैं जो सामान्य वर्ग को और जो है अध्यात्म मार्ग पर लाने का प्रयास करता है फिर भी हम उसको पूर्णतया शास्त्री नहीं कह रहे आप अपने उस संस्कार को जिस पर हमने वो टिप्पणी की जो आप कह रहे हो उसको कह दो अ शस्त्री हो जाएगा दूध का दूध पानी पानी यही बात खत्म कह दो मगर आपके अंदर वो सामर्थ्य नहीं है सत्य को स्वीकार करने का फॉलोअर्स है ना व बुरा मान जाएंगे फॉलोअर्स फॉलोअर्स बुरा मान जाएंगे हम अपने आपको को कह देंगे हम गलत है तो यही दिक्कत है क्षमा मांगना अपनी गलती को स्वीकार करना बहुत बड़ी बात होती है खास तौर पर उनके लिए जिनके जीवन में धर्म नहीं होता ईश्वर नहीं होता ईश्वर खोखला होता है सर्वशक्तिमान नहीं होता तो यह बातें तो हमने कर ही ली अब बात ये आती है कि एक बात यह कहती है कि यह जो मातृशक्ति जिसके आधार पर ये सारे एलिगेशन लगाए गए और तरह तरह की बातें की गई एक सोहम शुक्ला जी भी है वो चले गए हैं अगर सुन रहे हो तो आ जाए भाई चर्चा का विषय बहुत वृहत था तो इसलिए देर हो सकती है सबको लेने में मगर आप लोग आ

02:43:12:18 जाए जुड़ जाए आदित्य जी भी चले गए हैं वो वापस आ जाए तो अब एक बात आती है कि यह जो ऐसे बात करती कि हमारी हमारे मन में सम्मान है उनका बहुत बहुत सम्मान है मगर हम मंच पर जाएंगे तो हम खंडन उन्ही का करेंगे हम पाखंडी उन्ही को कहेंगे पंडे उन्ही को कहेंगे पोप उन्ही को कहेंगे देखा है ना इनका किसी मातृशक्ति का वीडियो देखा है जो मंच पर खड़ा हो कर के बोल रहे हो कि परंपरा प्राप्त आचार्य तुमको गायत्री मंत्र पढ़ने नहीं देंगे मना करेंगे तुमसे गायत्री मंत्र पढ़ने के लिए देखा है ना सभी देखा है कि नहीं देखा ही होगा बिल्कुल देखा है बिल्कुल देखा है हा गायत्री मंत्र नहीं पढ़ने देंगे और खुद खुद किसी व्यक्ति के आ साल पूर्व के पिज्जा पर आ साल पूर्व के किसी बात पर आक्षेप लगाएंगे उसके आजीवक पार्जन के आधार पर जो वो सप्लीमेंट की बात कर रहा है इसमें वो कैफीन का उपयोग कर भी नहीं रहा उस पर वो आक्षेप लगाएंगे और भैया इनका दिखा दो जरा इनका भी दिखा

02:44:22:00 दीजिए कैफीन कितना है इनके जीवन में और ये मलेच्छ तंत्र का भोजन कितना है इनके जीवन में दिखा दीजिए भैया श्रीराम य हम उन नीच की वास्तविकता बता रहे हैं उन नीच लोगों की वास्तविकता बता रहे हैं जिनके चेहरे पर कालिक पुती हुई है और जिस कारण से मुंह काला होने की वजह से पता नहीं कौन सा उनके साथ क्या है ऐसा अछम में बात हो गई किस कारण से उनको मुंह छुपाना पड़ रहा है ऐसे नीच लोगों की बात कर रहे हैं यहां पर जिन्होंने अपना मुह ना दिखाते हुए वहां पर जो है हमारे पर व्यक्तिगत टिप्पणी की हमारे घर की गरिमा आत्म सम्मान जो न केन प्रकार ने इनको सामग्री जो प्राप्त हुई उसका दुरुपयोग किया ऐसे नीच लोगों की हम बात कर रहे हैं हा जी दिखाइए भैया इनके जीवन की कैफीन और भोजन का आलंबन

02:45:27:12 आपको क्या लगता है कि हमारे पास आपकी जानकारियां है नहीं हमें मतलब क्या है कि आपके निजी जीवन में आप क्या कर रहे हैं हमें मतलब केवल उससे है नहीं अब तो अब तो बहुत मटेरियल है अब तो बहुत मटेरियल है कोई बात नहीं मटेरियल बहुत है बहुत मटेरियल है जी हम केवल मतलब उससे है कि कहां पर आप धर्म के स्वरूप को विकृत करते हुए प्रस्तुत कर रहे हो हमने केवल उस पर बात की थी आपने मामले को गलत उलझा दिया है

02:46:04:20 ना दिखा दीजिए भैया व चित्र ये लोग क्या करते हैं काट पीठ की बातों को लेके आते हैं अब जैसे एक सत्या प्रकाश है उसम उन्होने भागवत की समीक्षा की है जी जी युगल जी आप बोले तब तक यह इन्होंने भागवत की जो समीक्षा की उसके मतलब इनका एक व्यवसाय हो चुका है कि यह लाएंगे तो वही आधी अधूरी चीज काट पीट के चूहे जिस प्रकार

02:46:46:08 से चूहे जिस प्रकार से चीजों को कुतर देते हैं उस प्रकार से प्रमाणों को कुतर की आदत है इनकी तो भागवत के अंदर सप्तम स्कंध में श्री प्रहलाद जी महाराज का चरित्र है उसमें नरसिंह भगवान जो है प्रहलाद जी महाराज से कह रहे हैं कि यदि तुम्हारी सात पीढ़ियां होती तो वह तर जाती तो यहां पर इन्होंने क्या प्रस्तुत करा अपने ग्रंथों में कि भगवान नरसिंह कह रहे हैं प्रहलाद से कि उसकी साथ पीढ़ियां है तो सात पीढ़ियां मैं तार दूंगा बल्कि सात पीढ़ियां उसकी नहीं है लेकिन मूल यदि ग्रंथ पढ़ा जाए तो मूल ग्रंथ में उपलब्ध हो रहा है कि नरसिंह भगवान कह रहे सात पीढ़ियां होती तो मैं ताड़ देता इसका अर्थ क्या हुआ कि चूहों की तरह प्रमाणों को कुतरना इनकी आदत हो गई है और आधे अधूरे प्रमाणों को लाकर के यह लोग क्या सिद्ध करना चाहते हैं और वही दूसरी और कुछ लोग जो इनकी बातों को सुनते हैं या फिर मूल ग्रंथों का अध्ययन जिनको प्राप्त नहीं है इनकी आधी अधूरी बात उन्होंने क्योंकि आधा परसेंट जो इनका जितना भी परसेंट ज्ञान होता है वो सुनने के ऊपर डिपेंड होता है इनकी बात किसी ने सुनी कहीं से इन्फ्लुएंस हुए वहां से लेकर के आए बात को और कहीं जाकर के चिपका दी किंतु मूल ग्रंथ का अध्ययन नहीं किया कि इन्होंने जहां से उदाहरण दिया है जहां से इन्होंने प्रमाण दिया

02:48:01:13 है मूल ग्रंथ को जाकर के खोले और देखें कि क्या इनका प्रमाण है तो वहां से प्राप्त होता है कि जो भी यह प्रमाण देते हैं वह सारे के सारे प्रमाण कटते जाते हैं मूल ग्रंथों से वहां पर मूल कोई ऐसी बात लिखी ही नहीं है जो इन्होंने अपने ग्रंथों में लिखी है तो यह इनकी आदत हो चुकी है प्रस जी आत्म

02:48:37:00 प्र एक मिनट यह खुद कहती है कि भैया वह पाखंडी है पंडे है और खुद यहां पर नचती है है ना न है ये वीडियो बनाती है हमारे घर की जो मातृ शक्ति है वो ऐसे नचती हुई नहीं मिलेंगी यह नचती है उसकी रील बनाती है उसको भी प्रदर्शित करती है लोगों के समक्ष अपने फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए दिखाओ भैया इनका इनका वो कैफीन का आलंबन दिखाओ और इनका वो दिखाओ नचनिया पन वो दिखाओ इनका कैसे नच रहे हैं

02:49:23:14 श्रीराम यह तो केक है हां ऊपर ऊपर ऊपर आइडेंटिटी रिल नहीं करिएगा किसी की भी केवल आप दिखा दीजिए जिसको समझना होगा वो समझे मुझे समझ नहीं आता इतना हेट कमेंट क्यों ना मैं कोई गलत कपड़ा पहना ना किसी और की तरह कैमरा के सामने मुजरा किया अगर मैंने कॉफी पी भी ली तो कोई अपराध कर दिया नहीं पीनी चाहिए थी मैं भी सामान्य इंसान हूं कभी-कभी मेरा मन मेरा भी मन करता है और पीछे वाले बाऊ जी हमारे सारथी हैं जो बस अपना काम कर रहे थे तो कह रही है कि अगर मैंने कॉफी पी भी ली तो कोई अपराध कर दिया और उसके बाद इसमें कफन है उसमें कैफीन है यहां कैफीन है इधर कैफीन

02:50:16:19 है नारायण अबे भैया थोड़ा पढ़े लिखे हो कि नहीं कॉफी से लाख गुना अच्छा है कॉफी के अंदर का वह तत्व जिसके लिए कॉफी पीते हैं लोग बिल्कुल थोड़ा पढ़ाई करो जाकर के कॉफी लोग इसलिए पीते हैं क्योंकि उसमें कैफीन है उसको बस एक ही चीज समझ में आती है पाउडर की तुलना कॉफी से यह देखो ठुमका देखिए भैया ये सड़क पर नच रही है मि ठुमका [संगीत] देखिए पीछे पीछे करिए ठुमका फिर से दिखाइए अरे रहने दीजिए कोई बात

02:51:02:27 नहीं समा यह देखो यह देखिए यह है ठुमके और वो वाला दिखाइए जरा डायरेक्ट कैफी पीते हुए हमने तो सिट्रोन मलेट दे दिया किसी को उसमें इनको कैफीन दिखाई दे गई हमने किसी हमने किसी का केक कट रहा है हम नहीं काट रहे किसी का कट रहा है उसम हम जाकर खड़े हो गए तो उसम इनको अंडे दिखाई दे गए तो यह तो साक्षात कर रहे हैं किसी के इश्क में खुद को मिटा

02:51:43:04 दूं कॉफी पीते हुए इनका है जो यह पिज्जा की बातें कर रहे हैं हमारे छोटे भाई आज से 10 साल पहले का फोटो है उसमें कोई अंधा भी होगा वो भी देख के पहचान लेगा उस समय की उनकी काया आज की उनकी काया को देख कर के 10 साल पहले का फोटो और वो तब के फोटो को जब जब दिशाहीन गुरु विहीन जीवन तब के फोटो को आज की तुलना में रख रहे हैं और वो बता रहे देखो देखो पिज्जा और खुद जो कर रहे हैं मलेच्छ तंत्रों के सेंटर्स में जाकर के बैठ रहे हैं वहीं पर जहां पर हलाल मास का उपयोग होता है हलाल सर्टिफाइड है सब यह सब मैकडोनाल्ड यह सब केएफसी वगैरह जो भी है य टाको इंडियाना वगैरह जो बेचते हैं कॉफी यह सब हलाल सर्टिफाइड है यह हमसे जो पैसा कमा रहे हैं उसका एक अंश उसमें भी ज्यादा है उन संस्थाओं के पास जो यहां पर बम लगाने वालों को आतंक फैलाने वालों की पैरवी करती हैं जब वह पकड़े जाते हैं तो और ऐसी जगह पर जाकर के वहां को पोषित कर रहे हैं को मैं जो है टाकू इंडियाना टा मुझे नहीं पता कहां पर गए मगर इसी तरह की एक चीज है व और वहां जाकर के और यह देखिए स्वयं को परोस नहीं रहे तो और

02:52:58:08 क्या कर रहे बताइए रील बना कर के आप डांस करते हुए और थुमका लगा रहे हैं यह अवैध हैय वस्त्र देख लो ठुमका देख लो वो भी तब जब आप स्वयं को एक धार्मिक व्यक्तित्व के बारे िक व्यक्तित्व के रूप में प्रदर्शित करते हैं शास्त्र शास्त्र कहता है शास्त्र ही कहता है कि यदि हमारा कोई शत्रु है हम पर एक आंख से नजर रख रहा है तो हम उस पर दो आंख से नजर रखें और यदि वह हमारे ऊपर दोनों आंखों से नजर रख रहा है तो हम उसके ऊपर तीन आंखों से नजर रखें दो हमारी आंखें और एक शास्त्र की आंख तो जो भी हम का कर रहे हैं वह अपने शास्त्रोक्त ही कर रहे

02:54:02:02 हैं तो कुल मिलाकर के मेरा कहना इतना था मैं इनकी आइडेंटिटी रिवील नहीं कर रहा हूं कि मैं किनके बारे में बात कर रहा हूं सांकेतिक बात कर रहा हूं उन तक मेरा संदेश पहुंच जाए पहली बात हमने आपके निजी जीवन में कभी भी झांका नहीं निजी जीवन की सामग्री प्राप्त होते होते हुए भी ऐसा नहीं है हमारे लोग भी आपके यहां पर पाच पाच छछ साल सात सात साल से है यह जानने के लिए आपके य क्या चल रहा है ऐसा ना समझिए आप अपने आपको को दं भरने लगे हमने आवान को खत्म कर देंगे कोई नहीं करेगा खत्म जिसकी जो धर्म की रक्षा करता है उसकी रक्षा धर्म करता है अरे सिद्धांत को केवल प्रचारित मत करो धारण करो पहले धर्म

02:54:51:14 को आपको शर्म नहीं आई आपकी एक उस सामग्री पर हमने बात कही जो सामग्री को आप धर्म धार्मिक उसमें प्रस्तुत कर रहे हैं शास्त्रो चित उसम प्रस्तुत कर रहे और आपने हमारे उन आचरण को जिनको हम छोड़ चुके हैं उनका आलंबन लेते हुए मिस इफॉर्म करते हुए कि आज के आचरण है और उनको हमने कभी भी धार्मिक आचरण के रूप में प्रस्तुत नहीं किया उनको आपने कह दिया ये कैसा आचरण है हम कह रहे हैं कि वो गलत है आप कह आपका व संस्कार गलत था और तो और वो भी तब आप यह सामग्री हमारी दिखा रहे हैं जब आपकी ऐसी अभद सामग्री हम नहीं नवाते भाई अपने घर की मातृ शक्तियों को इस तरह से रोड पर ठीक है और फिर उनको नचवा करके जो प्रस्तुत करते हो सार्वजनिक रूप से लोगों के लिए ठुमका देखो भाई हीन आचरण है मत करना आगे से दोबारा

02:55:48:21 और अगर कैफीन की आदत नहीं है तो कैफीन मत लेना और लड़ो अपने आप से आदत हो भी तो छोड़ो उससे मैं एक बात कहना चाहता हूं यहां पे ये ये इनका जो है यह जो पहले अभी राधा रानी को जो गाली देते हैं या राधा रानी के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं करती हैं वही राधा वो जो लड्डू गोपाल जी है उनके घर पर है और रामचरित मानस का पंडित जी पाठ कर रहे हैं और लड्डू गोपाल जी जिस बेड पर बैठे हुए हैं उस बेड के पीछे लिख रहा है राधे राधे और पूर्व में जो इनकी वीडियो देखिए तो वहां पर गौड़ीय वैष्णव का इनका तिलक उर्द पुंड लगा हुआ है और हर वीडियो में हरे कृष्णा हरे कृष्णा जप रही है अब ऐसा क्या हुआ कि जो लड्डू गोपाल जी को आप खिला रही थी पिला रही थी और जो जिस बेड पर लड्डू गोपाल जी बैठे हुए हैं पीछे उसके लिख रहा है राधे राधे आज उसी राधे राधे से आपको िड़ होने लगी ऐसा क्या हुआ ऐसा इसलिए हुआ

02:56:51:15 मैं बताता हूं ऐसा इसलिए हुआ कि जब तक भड़काऊ भाषण नहीं देंगे तो फॉलोअर्स नहीं बढ़ेंगे सारी बात है माल प माल नहीं आएगा भड़काऊ भाषण नहीं देंगे बात आप ही विरोध करती है इनकी बातें आपस में विरोध करती है यह कहते हैं कि आप इसलिए ऐसी वीडियो बना रहे हो जिससे आपको फॉलोअर्स मिले जिससे आपको फेम मिले अरे भाई तुम यदि किसी और के ऊपर बोल रहे हो अन्य व्यक्ति जो फेमस है आप भी उसके ऊपर बोल रहे हो तो इसका अर्थ है वोह अगला व्यक्ति भी यह कह सकता है कि वो अमुक व्यक्ति जो मेरे लिए वीडियो बना रहा है मैं फेमस हूं इसलिए मेरा नाम खराब करने के लिए वो जो है वीडियो बना रहा है कल को आप जाकिर नायर के ऊपर वीडियो बनाएंगी तो जाकिर नायर कहेगा कि मैं फेमस हूं इसलिए मेरा नाम का गलत इस्तेमाल करने के लिए वीडियो बनाया जा रहा है फिर तो किसी तंत्र के ऊपर हम बोल ही नहीं पाएंगे फिर तो उंगली उठा ही नहीं पाएंगे ये तो आपके मुख से आप ही के सिद्धांत का खंडन हो रहा है तो क्या आप यह कह कर के कि हम जो है है इसलिए हमको हमारे साथ वो उठना चाहते हैं इसलिए हमको जो है बदनाम कर रहे तो यह तो कहीं बात बैठती नहीं तो कुतर्क [संगीत] है अरे भाई अगर यह हमसे कहेंगे ना कि तुम भी तो वही कर रहे हो ना जो हम कर रहे हैं तो फिर

02:58:06:19 तुम अपने आप को सही क्यों कहोगे हम उसमें भी तुम्हें चित्त करेंगे सबसे पहले किसने किसका खंडन करना शुरू किया बोलो शंकराचार्य ने किया था दयानंद जी का खंडन बोलो अस् में नहीं कहां से करते तो आपने शुरू किया हम उसके प्रतिकार स्वरूप कर रहे हैं और आप यदि अपनी अभद्र भाषा शैली का उपयोग ना करें मार्केट में तो हम यह भी ना करें जो करना पड़ रहा है कर रहे आप हम केवल सैद्धांतिक बात पूछ पाछ के रह जाते

02:58:48:13 भाई मैं तो कह रहा हूं आपने मेरी जो सामग्री दिखाई है अपने संस्कार के समानांतर कि देखो अगर यह हम पर आक्षेप लगा रहा तो यह भी तो यह कर रहा है तो मैं कह रहा हूं आपको कि मेरी वह चीज जो आपने दिखाई है वह गलत है और आगे से मैं पूरा प्रयास करूंगा कि मैं दोबारा उसको ना करू अब आप कह दो कि आपका वह संस्कार गलत था और आगे आप प्रयास करोगी कि आप उसको ना करो बोलो सामर्थ परंपराओं का खंडन करके ही तो अस्तित्व में आए हैं कैसे छोड़ दे वो भाव हील कर देने वाले वो वो स्ट्राइक करने वाले सीखा भी होगा अपने लोगों से कैसे बोलना है मंच पर जाकर भड़काऊ भाषण वो नहीं बोलेंगे कैसे काम चलेगा छोड़ दो राधे राधे को जो छोड़ दो कृष्ण को छोड़ दो राम को करो खंडन जाकर के परंपराओं का आचार्यों का और यह सब जो एक वो जो इनका अंडर कवर्ड गुंडा है ना जो जिसको रातों की नींद नहीं आ आ सपने में आवान आता है इसके उस अंडर कवर्ड गुंडे ने एक प्रक्रिया और अपनाई है कि वो रामानुजाचार्य जी के लिए तो सम्मानजनक बात बोलता है और शंकराचार्य जी के लिए अभद्र तरीके से बात करता है नवीन वेदांत इत्यादि वो सोच रहा है यह

03:00:03:13 बात करके हमको जो है रामा रामानुजाचार्य परंपरा वालो का सपोर्ट प्राप्त होगा ऐसा कुछ नहीं धोके में ना रहना भैया जितने भीम धर्मी परंपरा है ना संप्रदाय वो सब एक है सब एक है तो अंधकार में ना रहना नहीं तो किसी दिन चोट खा जाओ और इन्होंने एक बात और कही कि इनके ऊपर जोय जन्म से जाति मान रहे हैं एससी एसटी एक्ट वेदों को ना पढ़ने की बात कर रहे हैं स्त्री शूद के इनके ऊपर जो एससी एसटी एक्ट लगाना चाहिए तो भाई भगवान कृष्ण के ऊपर एससी एसटी एक्ट लगाओ फिर लगाओ भागवत के ऊपर ब्रह्म बंदु ना हंत भगवान कृष्ण कह रहे हैं श्रीमद् भागवत के अंदर कि शिशुपाल जो है वो ब्राह्मण का पुत्र है ब्रह्म बंदर ना हंत तब उसका कर्म ब्राह्मण वाला नहीं था जब उससे मणि निकाल ली गई जब उसने ब्रह्मास्त्र का संधान किया जब अर्जुन जी ने भी ब्रह्मास्त्र का संधान किया ब्रह्मास्त्र को रोकने के लिए तब उसको घसीट करके जब ले जाया गया द्रौपदी के समक्ष तो उसका भी हृदय करुणा से भर आया कि ये तो गुरु पुत्र है आप समझिए कि यह द्रोणाचार्य ही हमारे समक्ष है और सबसे बड़ी बात किय ब्राह्मण पुत्र है भगवान कृष्ण कह रहे हैं कि ब्राह्मण को शरीर से मार शरीर से उसका वध करना य शास्त्र उचित नहीं है व वध करो क्या

03:01:18:19 कैसे इसका वध किया जाए शास्त्र अनुकूल क्या है तो भाई क्या करो इसका स्थान बदल दो इसको स्थान से निकाल दो या तो ब्राह्मण का धन हरण कर ले यदि कोई आतताई ब्राह्मण है यानी कि शिशुपाल जो था वो आतताई था यह मानना पड़ेगा ना कि आतंकवादी था जब आतंकवादी था तो ब्राह्मण सिद्ध नहीं होगा तुम्हारे अनुसार और यदि ब्राह्मण है तो आतंकवादी सिद्ध नहीं होगा तो हम जब जन्म से मान रहे हैं ब्राह्मण को तो हम तो कह ही रहे हैं कि जब ब्राह्मण वाला वो कर्म नहीं कर रहा है तो वो ब्राहमण माना जाएगा किंतु माना तो ब्राह्मण ही जाएगा और ब्राह्मण की हत्या

03:01:58:04 श एक भ्रांति फैलाई जाती हम लोग ब्राह्मणवादी है ऐसा कुछ नहीं है ब्राह्मण जब निकृष्ट कार्य करता है तो राम जी के द्वारा उसका वध होता है अवश्य और शूद्र भी जब अच्छा कार्य करता है तो कृष्ण के द्वारा उसका सम्मान होता है तो ण व्यवस्था जो जन्मा आधारित है वो ऐसे नहीं सिर्फ जन्म से जन्म से नॉमिनेशन कर्म से सिलेक्शन जन्म से नॉमिनेशन कर्म से सिलेक्शन यह है शुद्ध वर्ण व्यवस्था और जो मैं पिछली बत जो बोलते बोलते रुक गया हूं वो फिर मैं आपको याद दिला रहा हूं मैं अपनी चीजों को मान रहा हूं मैंने तो पहले भी कहा व शास्त्री है आप कह दो कि आपका वो जो संस्कार है व शस्त्री आगे से ऐसा नहीं करेंगे कह दो इसीलिए भगवत गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है इसीलिए कहा है क्या इसीलिए भगवान श्री कृष्ण भगवत गीता में कहा था कि धर्म का अनुकरण अनुसरण ना कर पाने की स्थिति में यदि आपके मन में उसे पूरी तरीके से अनुपालन ना कर पाने का पश्चाताप है तो भी आप

03:03:16:22 धर्मजयगढ़ एक लाइन में कहे तो धर्म का अनुकरण अनुसरण ना कर पाना आपकी व्यवस्था होनी चाहिए आपका चयन नहीं आप जो कर रही हो चयन कर रही हो कोई व्यवस्था नहीं है और जो हमारी जिन चीजों पर आपने आक्षेप लगाया हालाकि वो है भी नहीं फिर भी अगर दुर्जन तोष नय से मान भी ले कि वो धर्म के बाहर है व्यवस्था है हमें अज्ञान थे गुरु नहीं था तब की बात आप आज फिट कर रही हो क्यों क्योंकि सिद्धांत नहीं है काटने के लिए तभी इन इनका जो है वो धर्म के नाम पर उप धर्म है जो धर्म की तरह भाषित तो लगता है किंतु वास्तविकता में है पाखंड जिसको उप धर्म भागवत के अनुसार कहा गया है जी जो देवराज पाखंड का रूप धारण करके आए थे महाराज पृथु के यज्ञ का घोड़ा चुराने के लिए तो वो जितने पाखंड रूप उन्होंने धारण किए उन सारे पाखंड रूपों को भागवत में ही ऐसा लिखा है कि मंद बुद्धि लोगों ने ग्रहण कर लिया और वो मंद बुद्धि लोग यही है जो पा कला रहे जिसको धर्म कहा जाता

03:04:23:18 हैर ये लोग दे रहे हैं अब मैं थोड़ा सा कहूंगा की पंकज जी काफी देर से हैं पंकज जी आप बोले पंकज जी है और प्रवीण कुमार जी जुड़े हैं प्रमार जी प्र जी आपको पंकज जी के बाद हम लेंगे जी मैं यही कह रहा था भैया जैसे की बहुत सारी चर्चाओं में सभी लोगों ने जितने जो चीजें बोलनी थी वो बोल दी है अब मैं आपके सामने एक बात रखना चाह रहा हूं कि एक अलंकार समाज का व्यक्ति था अब वो जीनस टीशर्ट मतलब जितने भी पाश्चात्य संस्कृति के जितने भी वस्त्र है वोह पहनता था और एक महान क्रांतिकारी हुए थे उनके बारे में ये बहुत बोलता था जब उन्होंने जीनस का इन सब चीजों का विरोध किया था राजीव दीक्षित जी का तो उन की जितनी भी जो भी चीजें थी उसको गलत तरीके से जो है प्रमोट करना शुरू किया आवाज आ र जी और दूसरी बात मैं यह कहना चाहता हूं यह लोग कहते हैं जब आपके जो पुरानी आ साल 10 साल पुराने जो विष के ऊपर इन सब चीजों के

03:05:38:20 ऊपर आक्षेप लगाना शुरू कर दिया है के जब उस समय राव दीक्षित जी जीवित थे और उनकी एक ही मंच पर बाबा रामदेव जी बैठकर जींस का विरोध करते करते जो है ना इतनी डींगे हाक थे कि 90 डिग्री एंगल में जो है यह करना पड़ता है कि जीनस उतारने में बड़ी दिक्कत होती है और जब उनकी मृत्यु हो गई तो कुछ दिनों बाद ही रामदेव जी स्वदेशी जींस के नाम पर जो है उसको प्रमोट करने लगे उनके लिए क्या बोलेंगे क्या आज तक इन्होने कुछ बोला उनके लिए कुछ नहीं बोलना केवल जो है ना जहां तक मंत की सिद्धि होगी उतनी ही बात काट पीट के उतनी वही बात आती है शास्त्र की बात है जहां पर जो हमारा फायदा हो रहा है उतना हम देख लेंगे जैसे आपने बोला कि रामानुज संप्रदाय के जो है ना आचार्यों का य बड़े सम्मान के साथ बात कर रहा है और इधर शंकराचार्य भगवान के लिए बुरा कहेगा वो ये सोच रहा है कि इनका हम जो है आलंबन लेके इनका हम सपोर्ट हासिल कर लेंगे तो यह जो जितनी निकृष्ट जो बातें कर रहे हैं जो हरकत कर रहे यह ना तो हमारे किसी परंपरा प्राप्त आचार्यों ने सिखाई है ना हमारे किसी महापुरुषों

03:06:54:00 ने पूर्वजों ने सिखाई है और यह यहां आके ी जो हरकत कर रहे हैं वो यहां पर ये बंद कर दे पहली बात और बहुत ही साधारण से शब्दों में कि आपने एक बात कही यह जो निकलना शुरू हुए है ना कि इनका जो पहले बिल में घुसे हुए थे अब इनके धीरे धीरे जो तिलंगा लग गया है ना व अंदर तक जो है ना अंदर जा रहा है तो अब ये अपने आप ही सामने आएंगे हमें इनको निकालने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और अपने आप ही पराजित हो जाएंगे क्योंकि सत्य को किसी के प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती है और यहां पर वही बात सब सब कहते हैं आप कहते हैं गुरुदेव कहते हैं कि हमारे साथ श्री रघुनाथ तो किस बात की चिंता तो इतने आज हमें इस बात प आना पड़ रहा है तो सिर्फ इसलिए कि आप जो है ना जिस चीजों का कंपेरिजन कर रहे हैं तो पहले आप उस चीज को तो इतना सामर्थ अपने अंदर लाइए आप ये बातें कह रहे अपने अर परंपरा प्राप्त आचार्य की एक बात मुझे याद आ गई अभी राम भद्राचार्य के विरुद्ध लोगों ने राम भद्राचार्य जी के विरुद्ध इन लोगों ने एक वो खड़ा किया भाई के और आप माफी मांगो माफी मांगो राम भद्राचार्य जी ऐसे वैसे तो है नहीं

03:08:09:12 भाई वो अच्छा हुआ राम रामदेव बाबा जी ने इनकी सुलह करा दी नहीं ये कुछ नहीं कर पाते जी ये उनका बाल भी बाका नहीं कर पाते वो सीधे तोल के कहते हैं जिसकी मान है सीधे बोलते हैं फिर वो बिल्कुल जिसकी माने श्रद्धा पूर्वक निष्ठा पूर्वक ये ये जो कर रहे थे ना वापस लो वापस लो ये सब धरे के धरे रह जाते कुछ नहीं कर पाते उनका व वो बीच में आ गए मतलब इनकी वो बचा ली क्या कहते हैं उसको इमेज इज्जत प्रतिष्ठा बचा ली इनकी नहीं तो साफ पता चलता कि क्या स्तर है का समाज में वभी बता गुरुक गोविंद जी बता के तो गए मीटिंग चल रही है हमारे लोग कम हो रहे तो व्यायामशाला खोल दे वही व्यायामशाला जिसका खंडन इन्ही के लोग कर रहे हैं अ चाय कफन की बात कर रहे हैं हमारे सामने प्रमाण है जब हम गए थे वहां पर इनके य पर अलंकार समाज वालो के पास में आप साथ में थे तो सबसे पहले किस चीज के लिए पूछा था क्या हम दूध के लिए पूछा था क्या क्या रबड़ी के लिए पूछा था क्या आप तो व थे आप वहा प थे मैंने वहां चाय पी क्या बताइए उन्होंने पी चाय समस्या

03:09:24:18 वही है क्योंकि उनको वो तो रोज पी रहे हैं अब उनको जब यहां समस्या हो जाती है बात फिर वही है और आज मैं एक बात बहुत अच्छे से बता देना चाहता हूं यह सभी जितने भी चाहे वो किसी भी तरीके से इनका उपयोग हो रहा हो या बिल्कुल ही वो सच्चे वही व्यक्ति है जो लाइव में आकर ये सब चीज कह रहे थे उनकी पूरी जन्म कुंडली हमारे पास बिल्कुल उपस्थित है सब चीजें है तो हमारी मर्यादा है हमारे गुरु ने ये सब नीच हरकत नहीं सिखाई है कि हम जो है ना इतनी नीचता की पराकाष्ठा हो जाए हम यहां पर भी आपकी जो केवल निंदा इसलिए कर रहे हैं आपको ये समझाना चाहते हैं कि शास्त्र सम्मत जब आप बातें कर रहे हैं तो उसका पहले जो है ना निर्वाह करना शुरू कर दीजिए और हम वो चीजें नहीं करना चाहते हो ना कभी कभी हम जीवन में करेंगे आपकी वैसे ही सारी चीजें सामने आ जाएंगी और अगर हम अगर हम पार्ट वन पार्ट टू करके लाना शुरू कर दिए तो आपको हमारी साधारण भाषा में बोलेंगे ना कि गांव की चूले तक में चौका तक में रसोई तक में छुपने के लिए जगह नहीं मिलेगी आपको बना देंगे आपके र प्रवीर कुमार जी आप बोले जय जगन्नाथ शि जी जय जगन्नाथ राघव जी आप जाइए नहीं वापस आइए

03:10:40:02 जय जगन्नाथ आपका वो आएगा वापस आ जाइए राघव जी जी प्रवीण जी बोले इनके बाद बस आपको लेंगे जय श्री राम मैं थोड़ा जा रहा मुझे अस्पताल पहुंचना है तो इसलिए मैं सभी से विदा लेना चाहता हूं सभी के जय शीराम ह जय श्री राम महादेव महादेव जय जगन्नाथ प्रवी जी बोले हा कहना चाहता हूं य आर्य समाज को मैं कम से कम तो आ 10 साल से जानता हूं और कम से कम पाच लोगों से मैंने फोन करके करके पहले हम बात कर चुके लेकिन एकही किसी व्यक्ति ने सत्य कहा आज तक हमने तो कभी सुना नहीं था और यह लोग ऐसा चलते रहेंगे बाकी बात रहा की इनका जो सत्य प्रकाश उसम मेरा जो संदेह था पहले इनसे जुड़ने से पहले थोड़ा बहुत जानता था इनको तो मेरा डाउट था मूर्ति पूजा को आज विरोध कर रहे तो कल भगवान जगन्नाथ की मूर्ति को विरोध करेंगे और ऐसा देखा स व भी चीज लिखा है जो झूठ लिखा है हमारा भगवान जगनाथ के बारे में जो कभी ऐसा होता नहीं जैसा कि हमारा 12 साल में एक बार नवकल होता है तो उसका अलग है लेकिन उन्होंने उसको स प्रकाश में पूरा उल्टा सीधा अपना मर्जी जो जैसा आया लिख दिया जो है ऐसा होता

03:11:55:08 नहीं है और न लोगों को वास्तविकता बारे में कुछ पता नहीं और पता है तो उसको अड भी करते और हर पन्ना खोल के देखलो सत्य प्रकाश में ने कोई सच बात नहीं है स झूठ है इनका जो जो मुसलमान विरुद्ध में हम लड़ते और कोई माइकल लाल आज त किसीने मुसलमान विरु में को नहीं हमारा दयानंद सरस्वती ने लिखा था तो यह बात भी उनका झूठ है क्योंकि इनका जो पहला प्रकरण जो आता है पहले उसम ते है नहीं और उसके बाद इनका गलती हो गया था पहला संस्करण में द्वितीय संस्करण का जो प्राचीन पुस्तक उनके पास है नहीं किसके पास जितना छप रहा है है और उसम वही बात है सारे हमारा किसी ऐसा कोई जो साधु थे पहले उनका समय पर किसी का मर्यादा तो क्या नहीं य आदि गुरु शंकराचार्य को आदि गुरु भी नहीं कहा उन्होने शंकराचार्य शंकराचार्य ऐही कहा और पुराण को तो पुराण के लिखा है बाकी ब्राह्मण के विरु में लिखा है ब्राह्मण तो क्या परस्त्री गमन करते और िया जाते और मंदिर के अंदर नारी पुरुष का जो क्या बोलते होता है मंदिर के अंदर ये सब भावना लिखा है तो अगर हम देखा जाए य लोग

03:13:10:09 बोलते केस करेंगे ये करेंगे इनका सत्य तो बयान करना चाहिए हिंदुस्तान में आज तक कोई निकला नहीं था आपने निकला एक हमारा आदि गुरु शंक परपरा आपको नद देता ये अच्छी बात आपने य दिला दी एक इनका जो व अंडर कवर्ड गुंडा है जो जिसको उन्होंने कांट्रेक्ट दे रखा है लोगों को गालिया देने का वो यह बात कहता है कि तुम्हारे जो आचार्य गण है वो तक सम्मान प्रकट करते हैं दयानंद जी के लिए हमने कब असमान किया उनका हमने कब अपमान किया उनका हमने सदैव उनके लिए जब भी बोला दर्शन विज्ञान और व्यवहार की मर्यादा में बोला तो करते हो अपमान तुम दोगले हो तुम्हारे दयानंद जी ने अपने स प्रकाश में माना कि बौद्धों को हराने वाले जैनों को जैनों से शास्त्र करके उनको परास्त करने वाले उस समय वेदिक धर्म को बचाने वाले शंकराचार्य

03:14:10:08 हमारा प्रवीण जी बोलिए गुरुदेव गुरुदेव ने बार में बोले थे कि दयानंद सरस्वती के बारे में कि वो अंग्रेज का प्रभावित थे तो उसी बात उनको लग गई जोर से तो कुछ तो नहीं पाएंगे जी प्रवीण जी आवाज नहीं आ रही आपकी प्रवीण जी शायद नेटवर्क का कोई इशू होगा हां नेट राव जी बोले

03:14:54:14 आ प्रवीण जी आप एक बार जाके वापस आ जाए तब तक राघव जी आ जाइए राघव जी आप सुन रहे हैं तो आप आ सकते हैं ड्रॉप हो गए राघव जी युगल किशोर शर्मा जी हैं यहां पर जी जी युगल जी अपनी बात रखें जी नारायण नारायण जो जो बात इन्होंने जो बात इन्होंने आक्षेप के तौर पर लगाई थी जैसे वो क्या नाम याद नहीं आ रहा मेरे को अब जो भी था तो जो कॉफी के लिए उन्होंने बात करी थी वो स्वयं जब स्टारबक्स की कॉफी लेकर के चलती है तो उन्हीं के ऊपर आक्षेप लगते हैं तब यह शब्दावली कहां जाती है इनकी कि मैं एक सामान्य स्त्री हूं मेरा भी मन करता है कि मैं इस प्रकार इसका मतलब आप सामान्य स्त्री है तो हमने कब कहा कि भाई हम भगवान है या अवतार है हमसे गलतिया नहीं हो सकती अरे मैं तो यह पूछ रहा हूं सामान्य स्त्र की स्त्रियों के लिए मलेच्छ तंत्रों द्वारा बनाया जाने वाला जो मादक पदार्थ है वो कहां लिखा है सनातन में फिर अगर ऐसी

03:16:09:16 बात करोगे तो वो इनके लिए वो इनके लिए ग्रहण करने योग्य है तब वहां पर ये लोग कहते हम सामान्य है तब व का सिगल जी य पर दो तरह की स्थितियां होती है एक क्या स्थिति है यदि आप कुछ गलत कर रहे हो तो आप अपने आप को सही मत ठहर वाओ स्वीकार करो कि मैं गलत हूं दूसरी स्थिति क्या है व्यक्ति गलत तो कर रहा है फिर भी वो अपने आप को शास्त्र की सीमा में लाना चाहता है तो एक व्यक्ति से जब व्यवस्था गलत हो रहा व्यवस्था वश तो वो कह रहा है कि भैया यह जो है शित नहीं है मगर मेरे पास यही है दूसरा व्यक्ति चयन करके गलत कर रहा है शास्त्रों के बाहर जा रहा है चयन करके मगर वो फिर भी सिद्धांत दे रहा है कि मैं भी तो सामान स्त्री हूं तो मुझे शास्त्र की सीमा में ले लो अब इनकी इनकी जो तीन बात इनकी इनके तीन स्टेप लेते इनकी तीन बात मेरे को समझ में आई यहां पर सबसे पहले इन्होने व बनाना आरंभ ठुमके से किया है ना फिर चलते चलते वो वीडियो गया हरे कृष्णा प तो इन्होंने फिर वो उध पुंड लगा कर के हरे कृष्णा से जो इन्होंने वीडियो बनाना आरंभ करा वहां से फेम बटोरा फिर चलते चलते इनको कुछ और लगा होगा तो फिर यह गए आर्य समाज के

03:17:24:16 अंदर फिर इनको थोड़ी और तगड़ी बोली मिली तो इन लोगों ने क्या किया कहीं ना कहीं और लोगों को पकड़ा अब धीरे धीरे क्या अच्छा अब यह लोग आक्षेप लगाएंगे ना यह वाला कि तुम लोग फेमस लोगों को पकड़ते हो अच्छा जो वो खट्टर जी हैं उन्होंने स्कोन में जा जाकर विदेशी लोग के इंटरव्यू लिए हैं तो पहले तो उनके इंटरव्यू लिए अच्छी अच्छी बातें बोली अब बाद में आक्षेप करना आरंभ कर दिया बाद में आक्षेप करना इन लोगों ने आरंभ कर दिया विष्णु पुराण का श्लोक बताते हैं कि भगवान में समग्र ऐश्वर्य समग्र ऐश्वर्य है तो समग्र ऐश्वर्य जब भगवान विष्णु के अंदर समाहित है तो उनको भी तो तुम भगवान नहीं बोल रहे हो तब यह कहां जा रहा है तुम्हारा राधा रानी को तुम बीमारी मतलब राधा रानी को तुम बीमारी बता रहे हो इतनी निकृष्ट तुम्हारी सोच है जो सत्यार्थ प्रकाश में जिस भाषा का प्रयोग किया गया है उस अब सत्यार्थ प्रकाश को अगर बोलने के लिए बोल दिया जाए तो सत्यार्थ प्रकाश अगर बोलना चालू कर दे वो तो एक किताब है वोह कैसे बोलेगी अगर बोलना चालू कर दे वो तो सर्वत्र गाली बकना आरंभ कर देगी अभद्र भाषा का प्रयोग है उसमें किंतु वो बातें छुपाई जाती है उसके अंदर जो वहां पर अभद्र भाषा का

03:18:39:19 प्रयोग हो रहा है बस उन उन बातों को ले लेते हैं जहां पर हम तंत्रों का विरोध कर रहे हैं तो इनको दिखाना होता है कि देखो हम जो है इन त का ये लोगों की अजनता का फायदा उठाकर सिंपैथी प्राप्त करके फलीभूत होते हैं बस यही है कि बताया ना मैंने कि भागवत में जिस प्रकार से बताया गया कि उप धर्म है बस बाहर से लगता है कि यह हमारे जैसा है व्यक्ति जैसे चारवा सिद्धांत के अंदर चारवा सिद्धांत क्या है चारवा सिद्धांत के अंदर भी क्या बोला गया ऋण कतम पवे ऋण लेकर के घी पियो तो वहां पर भी दार पीने की बात नहीं की गई अब वो भी अपना प्रचार करना आरंभ करे तो घी पी कर के तो व्यक्ति कहे अरे देखो य तो घी पीने की बात कर रहा है कितना अच्छा है तो वह देखने में चमक धमक लग तो रही है किई वो घी पीने की बात कर रहा है किंतु वो उप धर्म है सर्वत्र सिद्धांत को स्वीकार नहीं कर रहा है जो सार्वभौम सिद्धांत है उसको स्वीकार नहीं कर रहा है च रहा है राघव जी आ गए राघव जी आ गए राघव जी को थोड़ा सा लेंगे राघव जी बात रख हां जी हा भैया जय श्री राम मेरी आवाज आ रही पहले तो आप यह

03:19:54:28 बताए हेलो हां अच्छे से आ रही है ना क्योंकि मैं थोड़ा सा इधर उसम हूं खुले हूं अच्छे से आ रही हा तो सबसे पहले मैं विशेषक इसी चर्चा के लिए बड़ा प्रतीक्षारत था देखिए आपके पुराने जीवन पर इन्होने आक्षेप किया और उसमें उन्होंने वस्त्रों को लेकर के मुख्यतः आपको बदनाम करने की असफल कोशिश की तो मेरा यह सभी आर्य समाजी हों से यह प्रश्न है कि आपके दयानंद आंगल वैदिक स्कूल में यूनिफॉर्म क्या है आपके बच्चों की आपके अध्यापकों की इनकी यूनिफॉर्म आपने भारतीय परंपरा के अनुसार रखी क्यों नहीं है इसका आप लोग जवाब दे है ना दूसरी बात यह है जैसे आपने

03:20:51:01 थोड़ी आपकी आवाज नहीं आ रही राघव जी राघव जी आपकी आवाज नहीं आ रही राघव जी एक बार आप लीव करके दोबारा आ जाइए हां जी हा जी जी हो गया हो गया आ गई आवाज अभी अभी आवाज आई जी जी आ गई आ हा मैं ये कहना चाहता हूं कि थोड़ी देर पहले आपने कहा था कि पंडित बनाने की फैक्ट्री तो मैं जितने भी आर्य समाज तक यह वीडियो पहुंचेगा संभवत जिन्होंने आप पर आरोप लगाया वो तो देखेंगे ही तो उनसे मेरा यह प्रश्न है कि आप लोग एक बात बताइए आपके गुरुकुल जब से चल रहे हैं विगत 1 स वर्षों से उसमें आपने तीन वर्णों के व्यक्ति कितने बनाए क्योंकि कर्मणा ही सही वर्ण व्यवस्था में तो आप अस्थान वित है तो फिर केवल ब्राह्मण ही क्यों बनाते हैं आप तीन वर्णों को क्यों नहीं बनाते जब किसी की इच्छा अनुसार ही यह तय होना है

03:22:06:13 तो आज तक किसी की इच्छा क्यों नहीं हुई कि मैं क्षत्रिय बनू मैं गौतम खट्टर से पूछना चाहता हूं कि आप बड़े-बड़े मंचों पर हिंदुओं के खून को उबाल हैं तो फिर उबाल में तो क्षत्रिय त्व नजर आता है तो क्षत्रिय आपके यहां से कितने निकल रहे हैं मेरा यदि गौतम घटर यह वीडियो देखेंगे तो उनसे यह सवाल है कि आप इसका जवाब दीजिए और अपने आर्य समाजी गुरुकुल में जाकर के दए कि हमें क्षत्रियों की जरूरत है खतरा है हिंदू खतरे में है तो जो हिंदू खतरे में है तो फिर आइए ले में और फिर बात कीजिए ऐसा कैसे चलेगा और किसी का वस्त्र कैसे उसका व्यक्तित्व ार करता है आप लोग सिले हुए वस्त्रों का आर्य समाज लोग ने यह आरंभ किया है सिले हुए वस्त्रों का सन्यास यदि आप वेद की बात करते हैं शास्त्र की बात करते हैं तो सिले हुए वस्त्रों का संन्यास कहां लिखा है जरा यह स्पष्ट कीजिए यह भी नहीं करते तो जब आप परंपराओं की बात कर रहे हैं तो पहले अपना अवलोकन कीजिए आत्मा अवलोकन कीजिए कि आप परंपराओं का निर्वहन कितना कर रहे हैं यदि दयानंद जी की बात करते हैं तो दयानंद जी ने भी कभी सिले हुए वस्त्र नहीं पहने लेकिन दूसरे आपके सन्यासी सारे के सारे पहन रहे होते हैं

03:23:22:06 और यदि आप यह कहते हैं कि हमें एक होना होगा मिचों का खतरा है इसका उसका खतरा है हमको आपसी विवाद छोड़ना है और हमको तो आपस में मिलकर के लड़ाई लड़नी है तो आप एक बात बताइए कि जिनको आप मिलाना चाह रहे हैं जिनको भी आप आर्य की संतान मान रहे हैं उनके इष्ट आराध्य देवी देवता जिसमें आप आस्थान वित नहीं है लेकिन वे हैं उन पर कीचड़ उछालना यह क्या आपको शोभा दे रहा है क्या इससे आप इनको एक कर पाएंगे क्या इससे आप मलेच्छ को खुराक नहीं दे रहे हैं हम हमको बदनाम करने के लिए आपके मन में जो भी हो हमने किसी आर्य समाजी को कभी बाध्य नहीं किया मेरी आवाज आ रही है ना जी जी बहुत बढ़िया हेलो हां हमने कभी किसी आर्य समाजी को बाध्य नहीं किया कि तुम पंचदेव उपासना में मानो किसी हमारे शास्त्र सम्मत संप्रदाय से दीक्षित हो लेकिन यह आपको किसने हक दे दिया कि हमारी मान्यताओं पर आप कुठाराघात ना केवल करें बल्कि हर हिंदू को जबरदस्ती अपनी आस्थान में लाने का प्रयास करें क्या यह गैर मजहब वाला धर्मांतरण का एक और तरीका नहीं है जो आप कर रहे हैं आपका डीएनए तो कुछ और नजर आ रहा है सनातनी डीएनए नजर नहीं आ रहा आपका क्योंकि यदि आप सत्य हैं तो सत्य

03:24:37:16 वह दिया है जो ऊंचे पहाड़ पर ही क्यों ना हो लेकिन दूर तक दिखाई देता है तो लोग आपकी ओर आएंगे यदि आप सत्य हैं तो आपको क्यों पड़ रही है लोगों के पास जाकर के निंदा करने की सनातन मान बिंदुओं पर इसका मतलब यह है कि आप अपना अवलोकन नहीं कर रहे हैं गड़बड़ी आप में एक गालिब का शेर है ना उम्र भर गालिब यही खता करते रहा कि आईने पर धूल थी और अपने चेहरे पर धू धूल थी और अपने आईना साफ करते रहा तो आप अपने चेहरे की धूल क्यों नहीं देख रहे हैं आर समाजी कैसे आप इस तरीके से काम करेंगे यदि गौतम खट्टर जी से पूछना य आप अवतारवाद में नहीं मानते हैं तो आप धीरन कृष्ण शास्त्री जी के मंच पर कर क्या रहे थे वह तो आपके हिसाब से पाखंडी है ढोंगी

03:25:28:20 है के अनुसार बागेश्वर धाम वाले अधर्मी है अधर्मी के साथ सा कर रहे अरे य एक मिनट लूगा किसी भी पारंपरिक आचार्य ने यह नहीं कहा कि निराकार की पूजा मत गलत है खराब है निंदा नहीं की उन्होंने कहा श्रेष्ठतम ये है बेस्ट ये है सब कुछ मगर निराकार को भी स्वीकार किया आप कर रहे हो निंदा और ऐसी वैसी निंदा नहीं निंदा करते करते भांड और पता नहीं क्या कुछ भी नहीं छोड़ रहे जी कंटिन्यू कर आपके मंचों पर इतनी अभद्रता प्रस्तुत की जा रही है और आप कह रहे हैं कि हमें मिलकर के मिचों से लड़ना है आप तो कई बार अपनी भाषा आदि की मर्यादा में इतने उतर जाते हैं जिससे मिले आपके सामने अच्छे नजर आ लग जाते आप यह अच्छा नहीं कर रहे हैं बड़े सम्मान के साथ में आर्य समाज से कह रहा हूं क्योंकि मैं स्वयं यह मानता हूं कि जब तक हम एक नहीं होंगे हम एक विचारधारा में नहीं आएंगे तब तक हम अपने शत्रु का ना केवल पहचान पाएंगे तो उसको परास्त करने की तो बात दूर की है तो आपको चाहिए कि हम बाध्य नहीं कर रहे कि आप लोग हमारी विचारधारा में आइए मूल सनातन की तो आपको भी यह कोई हक नहीं दिया

03:26:43:20 जाता और मैं इस बात को कई बार देख रहा हूं कि भगोड़े विवाह का एक बहुत बड़ा केंद्र जो आपने थोड़ी देर पहले बात की यह बने हुए हैं तो आप एक बात बताइए संस्कृति विनाश कर रहा है बॉलीवुड विनाश कर रहा है यह हो रहा है वो हो रहा है तो यह भगोड़े विवाह का समर्थन करके ना केवल समर्थन उनको करवा करके आप कितनी संस्कृति की रक्षा कर रहे हैं कितना ऋषि दयानंद के सपनों का भारत बना रहे हैं आप भगोड़े विवाह करवा कर के इसका जवाब आधिकारिक रूप से हर आर्य समाजी को देना चाहिए आप बोल रहे हैं कि मिले ऐसे होते हैं मले जिहाद करते हैं यह करते हैं वो करते हैं तो मले को आपने ऐसी कौन सी वाशिंग मशीन में डाल कर के हिंदू बनाने का क्रम चला रखा है जिसके तहत वो अपने इरादों से दूर हो जाता है और आप हिंदू बहन बेटियों की शादी कर देते हैं सेम डे आज जाइए आज ही विवाह करिए हिंदू आजही ब ये भी नहीं ये भी नहीं डेढ़ साल बाद आना एक साल बाद आना हा और एक मेरा प्रश्न है आपको लगता है कि यज्ञ पवित्र स्त्रियों का होना चाहिए आप एक बात बताइए हमारी सनातन संस्कृति ने उनको सर से लेकर पा तक 16 श्रंगार दिए जिसको आप मानते नहीं एक केवल पुरुष को एक यज्ञ पवित्र का अधिकार दिया है वो भी आपको महिलाओं के अधिकार का हनन लग रहा आवाज आ रही है किसी के पीछे से आवाज आ र

03:27:58:27 है हा जी वो क्योंकि मैं अभी बाहर से आ रहा हूं ना तो मैं थोड़ा सा एकांत में आ जाता हूं तो एक पुरुष को यदि कोई एक तरीके से अलंकार कहे या उसका संस्कार जो यज प संस्कार है वो प्रदान किया गया है वो राघव जी राघव जी रुक जाइए आप जो है पहले बोलिए बोलिए हा यह महिलाओं के अधिकार का हनन है कि आप यह बोल रहे हैं कि महिलाओं का यज्ञ पवित्र का अधिकार नहीं दिया गया 16 श्रंगार आपको कम दिख गए लेकिन आपको यज्ञ पवित्र दिख रही है उसकी तो यह कैसे आप इस तरीके की बातें कर रहे हैं आप किसी पर भी कीचड़ उछाल रहे हैं आपका मंच जो है कभी उसने किसी समाज के व्यक्ति पर कोई व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की है ना ही आप करने वाले हैं तो इनको भी अधिकार नहीं बनता है नहीं बनता है नहीं बनता है आप वैचारिक मतभेद रखते हैं तो वैचारिक मतभेद को लेकर के आइए शास्त्र सम्मत चर्चाएं कीजिए और अपने पक्ष को सिद्ध कीजिए आपका यह तो वामपंथी नजरिया समझ में आ रहा है कि जब आप निरुत्तर हो गए तो व्यक्तिगत हो गए यह तो ओझी मानसिकता का स्वतः प्रमाण है क्या आप निरुत्तर

03:29:14:06 होने की अवस्था में किसी पर व्यक्तिगत आ रहे और फिर जब आपके व्यक्तिगत जैसे अभी क्लिप चलाई गई आपके व्यक्तिगत बात आएगी तब आप क्या बोलेंगे तो जिनके खुद के घर शीशे के हो दूसरों के घर पर पत्थर मार रहे तो इस तरीके से सबसे महत्वपूर्ण बात य है कि इन्होने जो सामग्री हमारी प्रस्तुत की है वो पिछले जीवन की है पिछले जीवन की सामग्री है और दूसरी बात य हमने उस सामग्री को धर्म रूप में प्रस्तुत भी नहीं किया समाज के सामने और सबसे बड़ी बात ये है कि वो सामग्री हम खुद प्रस्तुत कर चुके हैं जन सामान्य के समक्ष मगर अब हमारे करने में और इनके करने में अंतर क्या आ इतना ही ना कि इन्होंने हमको अप्रत्यक्ष रूप से कह दिया कि आपके घर की मातृ शक्तियों के चित्र में प्राप्त हो चुके हैं अब सावधान हो जाना जी यही तो किया इन्होने भाई मेरे चित्र तो पुराने जी हा तो इन्होंने उसमें ड क्या किया है कि आपकी फैमिली फैमिली डज मैटर ये अब डरेगा अब आवान को डरना पड़ेगा आवान को दबाने के लिए उसके घर की मातृ

03:30:29:09 शक्तियों को बीच में कहीं से ढूंढ ला अब तुम्हारे घर की मातृ शक्ति के चित्र आ चुके हमारे हाथ में अब तुम प्रश्न मत कर देना परंपरा क्या है तुम्हारी अब तु प्रश्न मत कर देना कि ईश्वर सतिमान कैसे तो ये आप लोगों का भ्रम है कि इस गीदड़ भबकी से आहवान रुक जाएगा आहवान और डबल आवाज में चिल्ला चिल्ला के पूछेगा वेद मंत्र तुम्हारे पास कैसे आए आवाज और डबल आवाज में और ध्वनित होगा कि ईश्वर यदि बाधित है यदि वो अवतार नहीं ले सक रहा है तो उसको अनंत सामर्थ्य वान क्यों कह रहे हो हटाओ उसको अनंत सामर्थ वान से जी राघ जीने एक बात कही थी ा से सोशल मीडिया से आवान को भागना पड़ेगा अब लगता है इनको भागना [हंसी]

03:31:24:18 पड़ेगा और एक बात यह भी है सोचो सोच के सोच के देखिए जिस व्यक्ति के घर में किसी जिस व्यक्ति के हाथ में किसी के घर की किसी की व्यक्तिगत फोटो आ गई तो वह यह सोचने लगा इसके दम पर हम इसका अभियान कुछ लेंगे सोचिए हमारे पनल आप तो जानते हैं राघव जी हमारे जो वो होते हैं जो ग्रुप होते हैं जहां पर हम लोग यह जो कार्यकारणी समिति आपस में चर्चा करती है कोई नहीं है व पर सब विश्वास विश्वसनीय लोग है हमारी वहा पर बात देखि कहीं पर कोई उपास उड़ भी रहा होता है विरोधी तंत्रों के किसी व्यक्ति का तुरंत उस पर आवाज उठा दी जाती है नहीं इस तरह के व्यक्तिगत कटाक्ष हमें नहीं करने हम हमारे पास सिद्धांत है सिद्धांतों की लड़ाई लड़ेंगे हम क्यों बकुल इनको यह मतलब सोचिए व्यक्ति अपनी जीत किसम सोच रहा है कि मेरे घर मेरे हाथ में किसी की मात किसी के घर की मातृ शक्ति का चित्र है ये मले नहीं तो और कौन है ये लोग बिल्कुल यह तो अपनी हार खुद ही एक तरीके से स्वीकार करना है बस कह नहीं रहे मान नहीं रहे कि हम हार गए हैं क्योंकि व्यक्तिगत होना ही य दर्शा रहा है कि आपके विचारों

03:32:39:20 पर ताला लग गया है वैचारिक रूप से आपका शीघ्र पतन हो चुका है अब आप व्यक्तिगत आकर के किसी को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन भारत देश की सनातनी हिंदू जनता इनके सरी की मूर्ख नहीं मैं सभी आर्य समाज हों को नहीं कह रहा हूं जिन्होंने पटाक्षेप किए हैं उनको मैं इंगित करके कह रहा हूं तो इस तरीके की ओछी हरकतें आप छोड़िए और यह लोग जो बात करते हैं मेरा इनसे एक बात एक मेरा थोड़े दिन पहले का जैसे कुछ लोगों ने अपने अपने संस्मरण सुना आर समा जीयों से मैं भी पिछले कुछ वर्षों से इनसे चर्चा रत हूं तो एक व्यक्ति था नाम तो अभी मुझे याद भी नहीं आ रहा वो पतंजलि योगपीठ में पड़ता है मेरी आवाज ठीक आ रही है ना बहुत बढ़िया तो उसने किसी मेरी एक पोस्ट पर मेरे व्यक्तिगत ट पर आ गया वो और वो कहने लगा वही जाति को लेकर के प्रश्न करने लगा तो बहुत सारी बातें हुई मैं सब कहना अभी संभव नहीं है मैं डिटेल में नहीं कहना चाहूंगा मैं मोटी मोटी बात बताता हूं जब एक आपको सभी को जो उपस्थित है हमारे बंधुओ सब

03:33:54:20 जानते हैं कि हम लोग किस तरीके से वर्ण व्यवस्था को प्रस्तुत करते हैं जो उसका शास्त्रीय पक्ष है उसी को प्रकट करते हैं तो उसी प्रकार से मैंने प्रकट किया तो मैंने उससे यह कहा और अभी मैं यहां इस माध्यम से इस पटल पर सभी आर्य समाज हों को यह कहना चाहता हूं कि हम सनातनी तो हमारे शूद्र अंतेज भाई को अपना भाई मानते हैं लेकिन आपको इतनी उससे नफरत क्या है उस उसके शब्द से उसके अस्तित्व से इतनी नफरत क्या है कि आप उसे उसके अस्तित्व से मिटा देना चाहते हैं आप उसे वो नहीं रहने देना चाहते जो वो है और और कुछ बना देना चाहते हैं जबकि आप ही कहते हैं कोई काम छोटा बड़ा नहीं होता और कर्मणा ही सही आप चारों वर्णों के काम को स्वीकार कर रहे हैं तो आप क्या उनके हिस्से का काम करने वाले बांग्लादेश और पाकिस्तान से इंपोर्ट करेंगे क्या आपको उनके अस्तित्व से इतनी नफरत क्यों है मैं सभी आ समा से बोल रहा ये प्रश्न मैंने कई अपने वीडियोस में इनके साथ जो सेशन हुए उसमें जा जा करके पूछा कि आर समाज में आज तक कितने लोगों को शूद्र के रूप में स्वीकार किया है मगर एक भी नहीं मिलेगा जिनको इन्होने सूद का सर्टिफिकेट दिया हो क्योंकि आर्य समाजी व्यक्ति बनता ही इस शर्त

03:35:09:21 प है कि हम तुम्ह ब्राह्मण बनाएंगे समाज जही करसे जैसे क्रिश्चन मिशनरीज में होता है कि भाई यहां पर तुम्ह वो चीज नहीं मिल रही है देखो देखो तुम्हारे साथ ऐसा हो रहा है वैसा हो रहा है उसके जहर भर देते हैं और फिर उसको यहां पर देखो य ये तुम्हारे साथ य होगा तो व्यक्ति अलंकार समाज को जॉइन ही उस तरीके से कर रहा है ना कि तुमको जो है हम ये कर देंगे तुम्हारे पास अभी ये नहीं है देखो तो पहले समस्या को पैदा करना जन्म देना और फिर उस समस्या को चिपका देना पहले समस्या बनाई गायत्री मंत्र पढ़ना पढ़ने से ही मोक्ष मिलेगा गायत्री मंत्र पढ़ने से ही मोक्ष मिलेगा वेद को डायरेक्ट पढ़ने से ही मोक्ष मिलेगा वेद को डायरेक्ट पढ़ने से ही मोक्ष मिलेगा फिर उस समस्या को एक विशेष वर्ग से चिपका दिया गया देखो देखो वो इतनी इंपोर्टेंट चीज तुमसे छ जो है दूर कर रहे है वो इतनी इंपोर्टेंट चीज वो समस्या थी ही नहीं उस समस्या को जन्म दिया और फिर उस समस्या को जोड़ दिया जी जी हा और इनसे मैं कहना चाहता हूं आज गगल का दौर चल रहा है तो हर व्यक्ति का जो सबसे समीप का स्रोत है किसी भी चीज को जानने के लिए व है गल आर्य समाजी भी गल करते हैं उनसे मैं कहना चाहता हूं सभी आर्य समाजी जिन तक य मेरी बात जा रही है

03:36:25:08 गल पर कास्ट पिरामिड एक बार टाइप कीजिए अंग्रेजी या हिंदी में एक बार फिर कह रहा हूं कास्ट पिरामिड तो पिरामिड से ही हमको समझ में आ रहा है कि एक त्रिकोण का एक आकृति आएगी तो सबसे जो ऊपर टॉप है वह ब्राह्मण फिर क्षत्रिय फिर वैश्य फिर शूद्र यानी कास पिरामिड यह दिखाता है कि ब्राह्मण की संख्या सबसे कम फिर उससे ज्यादा क्षत्रिय वैश्य और सबसे ज्यादा शूद्र की ऐसा इसलिए है पिरामिड में ही उसे शो इसलिए किया जा रहा है क्योंकि जिस प्रकार से चारों वर्णों की उपलब्धता एक सफल समाज को चाहिए उस हिसाब से उनकी संख्या को पिरामिड के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है तो जब आप इतने ब्राह्मण बना देंगे तो फिर ब्राह्मण इतने सारे एक दूसरे को पढ़ाएंगे क्या एक 100 एक कक्षा में यदि 50 100 विद्यार्थी उस पर एक शिक्षक पर्याप्त होता है पर जब आप इतने सारे ब्राह्मणों की फौज खड़ी कर देंगे तो बाकी का काम क्या होगा मतलब कि आप यह चाह रहे हैं कि जो विदेशी शक्तियों से विगत 2000 ढाई ज वर्षों से सनातनी लोहा ले रहे हैं और जीत रहे हैं वह एक तल में ही हार जाए तो आप चाहते क्या है आप शत्रु हैं हमारे या आप हमारे ही सनातनी है गौतम टट्टर जी जरा

03:37:40:13 इस बात को सोचिए आप लोग चाहते क्या है और वो जो सहरावत बहन जिनका मैंने अभी गाना भी देखा तो जरा थोड़ा सा गुनगुनाए अपने मन में क्या रहे उनका परिचय प्राप्त नहीं है वो हमने संकेता मक दिखाया था वो जरूरी नहीं है जो आप नाम ले रहे उन्ही का हो वो केवल एक दश्य मात्र था समझना हो वो समझे हा मैं इस नहीं देते वो जो आपने नाम लिया हम इस बात की प्रामाणिकता नहीं देते वो जो आपने नाम लिया वो वयो उन्ही का था और मैं भी अपने शब्द इस और से वापस लेता हूं यदि इसमें अस्पष्टता है तो जब तक हम लोग क्योंकि स्पष्ट नहीं होते तब तक हम किसी व्यक्ति विशेष का नाम तक लेना पसंद नहीं करते हमारी विचारधारा नहीं कहती और हमारे परंपरा प्राप्त गुरुओं ने हमें ये नहीं सिखाया तो मैं अपने शब्द वापस लेता हूं लेकिन जो भी है तो जरा विचार कीजिए कि आप जा कहां रहे हैं आज बहुत सारे विद्वान अपने आप को कहने वाले समझने वाले जो हिंदू हित चिंतक हैं ढेरों चैनल बनाकर बैठे हैं न्यूज चैनल पर जाते हैं वो भी इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि कास्ट सिस्टम जाति व्यवस्था जरूरी है या नहीं और जब तक यह थी तब तक धर्मांतरण

03:38:55:16 नहीं हो पाया वरना जो मलेच्छ जो लोग थे वह जिस भी देश में गए 30 40 साल में उन्होंने वहां की समूल संस्कृति का नाश करके वहां पर अपने अपने मंथ मत और मजहब का झंडा गाड़ दिया पर इस भारत में नहीं कर पाए क्योंकि हमारे यहां हम जाति के रूप में विभाजित नहीं बल्कि माला के रूप में एक तार में पिरोए हुए हैं हम वी आर इंटरडिपेंडेंट ऑन ईच अदर किसी भी जाति का दूसरी जाति के बगैर काम ही नहीं चल सकता है तो इतना प्यारे जो हम पिरोए हुए हैं उसको तोड़ने का काम आप क्यों कर रहे हैं और यदि आप तोड़ने का काम कर रहे हैं तो हम आपसे कारण पूछ रहे हैं कि ठीक है आप तोड़ रहे हैं तो फिर कोई विकल्प होगा आपके पास चलो हम उसे मानते हैं पर आपके पास विकल्प कुछ है नहीं और आपकी ही विचारधारा चल रही है जब से इस देश में आए हैं कि कर्मणा ही व्यवस्था इस देश में चल रही है तो फिर भ्रष्टाचार का अराजकता का अन्याय का रोना हम क्यों पीट रहे हैं हर जनता त्राहिमाम क्यों कर रही है भारत की भारत की मेधा शक्ति बाहर क्यों जा रही है आप ही की व्यवस्था चल रही है ना आज एजुकेशन डिपार्टमेंट में हर ब्राह्मण नहीं आज डिफेंस सेक्टर में हर क्षत्रिय नहीं हर इकोनॉमिकल सेक्टर में हर वैश्य नहीं हर सर्विस सेक्टर में हर शूद्र नहीं

03:40:11:01 फिर यह गड़बड़ क्यों लेकिन हमारा इतिहास आप पाच साल पुराना भी माने तो आप ही लोग कहते हैं सोने की चिड़िया मुझे तो इतनी नफरत है सोने की चिड़िया शब्द से क्योंकि यह हमारे देश में आतंक फैलाने वाले लोगों ने सोने की चिड़िया नाम दिया हमारी भारत मातृभूमि है मेरी मां को कोई चिड़िया कहे उसकी जवान खींच लूंगा इसलिए आतताई हों का दिया हुआ शब्द है कि सोने की चिड़िया लेकिन यदि आप इसे सोने की चिड़िया कह रहे हैं तो वह जो स्वर्ण दौर आप मान रहे हैं उसमें तो जाति व्यवस्था वैसी ही थी जो शास्त्र सम्मत है तो जब वो स्वर्ण था उसे मिटाने के आप लगे क्यों हुए हैं और फिर आप देख ही रहे हैं परिणाम देख रहे इतने सालों से क्या मिल रहा है आपको कि संधी दौड़ में जी रहे हैं आप मन बहलाने को गाली भी ख्याल अच्छा है मंचों पर खून उबालने के लिए बहुत सारे भाषण दे देना उच्चा आदर्शवाद की बात कर लेना हमारे पूज्य गुरुदेव पूरी महाराज जी यह कहते हैं कि जब हम शास्त्र का अतिरेक करके अति आदर्शवाद में जाते तो उसके गर्भ से वामपंथ निकल आता है तो यही हो रहा है वामपंथ का शाब्दिक अर्थ भी देखें तो मूल धारा से विपरीत धारा में चलना यही हो रहा है

03:41:26:18 तो आप समझिए ना हम यह तो नहीं कह रहे कि हमारे शंकराचार्य को आप गुरु मानिए जबक वोह तो सार्वभौम जगतगुरु है लेकिन यदि आप बुद्धिमान है तो उनके द्वारा कही गई कोई अच्छी बात ग्राह्य नहीं है क्या क्या आपके गुरुओं ने जिनको भी आप गुरु मानते हैं दयानंद जी को मानते हैं क्या उन्होंने यह शिक्षा नहीं दी यदि नहीं द है तो फिर इस पर आप विचार कीजिए हम कुछ नहीं कहेंगे जी भैया कहिए आप प्रवीण जी जो अभी आ गए थे वो कुछ टिप्पणी की थी उन्होंने अलंकार समाज का जो ग्रंथ है उस पर और जी

03:42:03:01 की मैं थोड़ा सा चलते हुए बात कर रहा हूं इसलिए मेरी थोड़ी आवाज में आपको वो हो रहा होगा आप म्यूट कर लीजिए और प्रवीण जी संपर्क करने का प्रयास कर रहे हैं वो जुड़ नहीं पा रहे उन्होंने इनके ग्रंथ पर आर्य समाज के ग्रंथ पर कोई टिप्पणी की थी वो उनकी बात अधूरी रह गई थी वो बता रहे हैं कि वो इस वो बोल रहे थे कि सत्या प्रकाश को हटा देना चाहिए या उस पर प्रतिबंध लग जाना चाहिए इस बिहाव पर क्योंकि वह लोग ऐसा बोलते हैं कि पुराणों पर प्रतिबंध लग लग जाना चाहिए वह इस तरह की टिप्पणी देते हैं अलंकार समाधि इसलिए वह यह बात पूरी नहीं कर पाए थे उससे पहले चले गए इसलिए वो हमें संपर्क कर रहे हैं और और मैं एक बात यह कहूंगा कि जो बात मैंने अभी बीच में भी कही थी कि यदि शूद्र यदि सबको सबकी इच्छा अनुसार कर दिया जाए वो ठीक है कोई बात नहीं मगर जो तंत्र कर्मणा वर्ण व्यवस्था मानते हैं उनकी कर्मा वर्ण व्यवस्था का पसान किसम होता है यह वो लोग नहीं बताते और परवन मतलब उसकी उपयोगिता क्या है व तो कभी बताते ही नहीं है अच्छा उसकी उपयोगिता ना बताने पर भी उससे आने वाली जो विकृतियां उनको हमने कई बार डिस्कस किया है वो आज का टॉपिक है नहीं वैसे मगर फिर

03:43:18:07 भी प्रश्न य आ जाता है कि यदि आप बनाते हैं तो चारों को बनाते हैं या केवल एक को बनाते हैं यह प्रश्न आ जा अब मैं एक एक व्यक्ति और रह गया है मैं बता दूं कुछ लोग यह भी पूछ रहे हैं कि वो जो माता शक्ति जिसका ठुमका आप लोगों ने देखा वो क्या था क्या नहीं था हम नहीं जानते कि किसने हमारे ऊपर कहां पर कौन सी लाइव स्ट्रीम की है य पर हम नहीं जानते और जिन नामों को वहां पर उद्धृत किया गया है वोह वाकई में वो लोग थे जिनको बोलने वाले वही थे जिनका नाम वहां पर लिखा है या लोगों ने हमें बताया है तो यदि जो जिसने वहां पर ऐसा किया है जो हमें हमारे घर की मातृ शक्तियों की छवि वहां प्रस्तुत करके हमको धमकाने का प्रयास रोकने का प्रयास सैद्धांतिक विषय पर बात ना करने का प्रयास जिसने किया है यह उससे संबंधित चलचित्र था जो आपको यहां प्रस्तुत किया गया है तो वो आप लोग अपना खुद अन जो वो है परीक्षण जांच करें कि वह कौन थे मगर हमने यह बताया है कि भाई ऐसे भी लोग हैं जो स्वयं को शास्त्रो चित और बहुत बड़े वैदिक और संस्थाए चलाने

03:44:33:13 वाले कहते हैं मगर वास्तविकता में वो सड़क पर नाच रहे हैं और क्यों नाच रहे हैं अपने आप को क्यों प्रस्तुत कर रहे हैं सड़क पर नाच नाच कर क्यों प्रस्तुत कर रहे हैं क्योंकि उनको क्या चाहिए फेम चाहिए फेम चाहिए फेम तो संभ्रांत घर की स्त्रियां कभी इस तरह से सड़क पर नहीं नाचती है और जो कुछ निजी सामग्री आपको प्राप्त हुई हमने बताया पहले की है हम खुद उसको धर्म उचित स्वीकार नहीं करते शास्त्र उचित स्वीकार नहीं करते और वह हमारी जानकारी के बाहर भी शेयर हुई है यह भी हम जांच का विषय है इस जांच कर रहे हैं कि वो प्राप्त कैसे हुई है और उसमें यथा योग्य जो भी आज का जो लौकिक संविधान है उसके अनुसार कारवाई भी की जाएगी तो आप लोग इस बात में भी ना रहे है ना अच्छा अब एक बात आ जाती है उस भीड़ में वो जो तुचो की भीड़ थी वो जहां पर एक किसी के घर की मान मर्यादा को इस तरह से रखा जा रहा था चर्चा का विषय बना कर के उन टचो की भीड़ में एक व्यक्ति और था जो अपने आप को कहता है कलयुग का

03:45:49:16 योगी ऐसा कुछ कहता है तो अब वो वही था जो वहां पर था या नहीं था ये हमें बताया गया है कि कलयुग के योगी के नाम से भी एक कोई व्यक्ति उच्चा था जो क्या बात बोल रहा है वहां पर कि भाई महाभारत में कहीं पर ये कहा गया है कि अ जो धर्म है वो भी समय के साथ-साथ परिवर्तित होना चाहिए तो पहले मैं आप लोगों की तीनों की इसमें वो ले लू राय कि यह जो वक्तव्य है कितना मतलब इसकी इसका क्या अस्तित्व है इस वक्तव्य का कि जो धर्म है उसे भी समय के साथ-साथ वो भी परिवर्तित होना चाहिए और इसका आलंबन वो उन शास्त्रों से ले रहा है शास्त्रों के आलंबन से बात कह रहा है तो इसमें मैं अपनी बात अंत में रखूंगा कि अगर शास्त्र में वोह बात खी है तो उसका क्या अर्थ निकालना पड़ेगा क्या और क्यों उसका वही अर्थ सही होगा वो बाद में रखूंगा और क्याक तार्किक उसमें दिक्कतें आएंगी और कैसे आप संसार के सबसे महान तुच्छ व्यक्ति नीच व्यक्ति सिद्ध होंगे हीन आचरण करने वाले यह मैं अंत में रखूंगा पर पहले इस वक्तव्य पर मैं आप तीनों की जो विचार है वो लेना

03:47:06:16 चाहूंगा पंडित जी बताइए पंडित जी सुन रहे हैं अच्छा ठीक है युगल किशोर जी आप बताइए जी नारायण तो यह जो इन्होंने बात कही है महाभारत से प्रमाण देकर के कि जो धर्म है वह समय समय पर बदलना चाहिए तो धर्म समय समय पर बदलना चाहिए धर्म में क्या परिवर्तन आना चाहिए यह निश्चित कौन करेगा यह निश्चित कौन करेगा कि धर्म में क्या परिवर्तन आना चाहिए यदि हमारे पास वेदा आदि शास्त्र हैं व्यास जी नेने जिस महाभारत की रचना की है तो व्यास जी ने यह भी लिखा होगा कि इस युग में इस धर्म को इस तरीके से मानना पड़ेगा जिस प्रकार से सतयुग में बोला गया कि सतयुग में व्यक्ति तपस्या करता है द्वापर में यज्ञ करता है फिर कलयुग के अंदर आकर के वो नाम जप से उसको वो सिद्धि प्राप्त हो जाती है अर्च विग्रह की सेवा आदि भी युग में बताई गई है तो सतयुग में यह धर्म है फिर त्रेता में यह धर्म है द्वापर में अमुक धर्म है और कलयुग में अमुक धर्म है जब चारों में अमुक अमुक धर्म की बात आ रही है तो वहां पर वह निश्चित कौन कर रहा है वो निश्चित

03:48:21:21 महाभारत को लिखने वाले व्यास जी कर रहे हैं आप और हम जैसे साधारण लोग नहीं कर रहे हैं कि कहां पर क्या चेंजेज होनी चाहिए यदि आज के दौर में आज आज भी आप देख लीजिए य यदि आज की जो लौकिक पढ़ाई है उसके अंदर यदि सीबीएससी की परीक्षा होगी उसमें क्या-क्या चेंजेज होने चाहिए यदि यूपीएससी की परीक्षा होगी उसमें क्या-क्या चेंजेज होने चाहिए वो कौन डिसाइड करेगा वो पढ़ने वाला व्यक्ति डिसाइड करेगा या फिर पढ़ाने वाला व्यक्ति डिसाइड करेगा ना पढ़ने वाला व्यक्ति डिसाइड करेगा ना पढ़ाने वाला व्यक्ति डिसाइड करेगा जो ऊपर उच्च अधिकारी बैठा हुआ है जिसके द्वारा यह सारा कार्य संचालित किया जा रहा है जहां से यह सारा कार्य आ रहा है वह इस बात को निश्चित करेगा कि यहां पर क्या चेंजेज होनी चाहिए जो सीबीएससी का सिलेबस चेंज होता है हर साल वो कहां से चज हो करके आता है तो जो शास्त्रों के अंदर चेंज होंगी बातें उनको कौन बताने वाला है उनको व्यास जी बताने वाले हैं उनको अधिकार प्राप्त है कि का किस जगह पर क्या करना है क्या नहीं करना है जैसे महाभारत के अंदर भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर जी को नाना जो किस जाति से कौन सी संतान उत्पन्न होगी वह बताया

03:49:36:27 वर्ण शंकर तो इस अमुक जाति से अमुक जाति उत्पन्न हो जाएगी यदि ब्राह्मण क्षत्रिय का समागम होता है तो सूत जाति उत्पन्न होती है जो सारथी का कार्य करती है इत्यादि बातें जो है भीष्म पितामास कि आप इंटरकास्ट जो मैरिज है वह मत करिए तो यह बात कौन निश्चित करेगा कौन बताएगा इसको जहां पर भगवान ये कह रहे हैं श्रुति स्मृति मम वाजा यतो लंग वर्तते भगवान कह रहे हैं कि श्रुति और स्मृति दोनों मेरी आज्ञा है भाई यदि इसको तुम उल्लंघन कर हो तो वहां पर तुम मेरे भक्त नहीं माने जाओगे तो इसका अर्थ क्या हो गया कि भगवान की बात माने या फिर तुम्हारी बात माने जब भगवान ने कह दिया कि श्रुति स्मृति मवा यानी कि भगवान स्वयं कह रहे कि यह मेरी आज्ञा है और यदि आप चेंस की बात कर रहे हो तो चेंज करने वाला व्यक्ति कौन है फिर यहां पर य देखना पड़ेगा और चेंज करने वाला व्यक्ति तर साधारण है तो भगवान की आज्ञा का उलंगन हो जाएगा इसको मैं सत्म शैली में ऐसे कहूंगा सबसे पहली बात जो आपने बात कही है वो अपने आप में ही इतनी गई बीती बात है इतनी निम्न को प्राप्त बात है वो अभी थोड़ी देर में आपको समझ

03:50:52:00 में आ जाएगा पहली बात ये है मेरे भाई कि आप स्वयं को क्या कहते हो धर्म से पता है पता है कलयुगी वाकई में ही कलयुगी हो आप वाकई में ही कलयुग के नीचे जो हो सकते हैं वो ये वक्तव्य देने वाले कैसे धर्म का नाम है सनातन सनातन है हमारा धर्म सनातन सनातन किसे कहते हैं नित्य स्थाई नित्य स्थाई धर्म है सनातन जो किसी भी देश काल परिस्थिति में प्रभावित ना हो उसका नाम है सनातन तो अब बात आ रही है अगर सनातन है तो फिर ये परिवर्तन की बात कैसे हो गई परिवर्तन की बात ऐसे हो गई कि एक व्यक्ति का जो अपनी मां के लिए जो धर्म है वही धर्म उसका अपने पिता के लिए नहीं है वही धर्म उसका अपनी पत्नी के लिए नहीं है तो यह क्या हुआ परिस्थिति के कारण जो धर्म चेंज हो रहा है इसी हिसाब से जो युग है सतयुग त्रेता द्वापर कलयुग इसके वातावरण के अनुसार भी धर्म चेंज हो रहा है कि द्वापर में ये चीजें वैलिड है और फिर उसके बाद उसके बाद इससे भी मोक्ष मिल जाएगा द्वापर में ये करोगे तभी मोक्ष मिलेगा कलयुग में ये भी कर लोगे तो भी मोक्ष मिल जाएगा

03:52:07:06 ये हो गया मगर अब बात कह रहे हैं कि हम तो कह रहे थे कि सनातन है तो फिर ये बदल क्यों रहा है तो जो बदलाव आना है वो बदलाव भी आपको करके दे दिया गया है उसका नाम है सनातन समझ में आया समझ में आया ना कलयुगी ी जी वो आदि ईट इसकी ईट उसका रोड़ा भानुमति का कुंडमा जोड़ा वो नहीं है अपनी नीचता को प्राप्त मत हो उससे ऊपर उठो आपका नाम क्या है मैं नहीं जानता मगर आप मुझे कलयुग के योगी ही लगते हैं इसलिए आपको कलयुगी योगी कह रहा हूं उससे ऊपर उठो कलयुग में जो नीच नकली योगी घूमते हैं वो आप मुझे दिखते हैं तो उससे ऊपर उठो यह जो सारी व्यवस्था है ना कि धर्म कहां-कहां पर आपातकालीन धर्म क्या होगा पिता का धर्म क्या होगा पुत्र का धर्म क्या होगा यह आपद यह सारी व्यवस्था भी शास्त्रों ने करके रख दी है उस उस संदर्भ में वहां पर वो वक्तव्य आया है जो जिसका आपने आलंबन लिया ठीक है अब दूसरी बात मैं कह रहा हूं अगर आपकी बात मान ली जाए कि धर्म भी देश काल परिस्थिति के अनुसार बदलता है तो आज आपकी माता आपके लिए माता है आज आप अपनी माता को पत्नी के रूप में देखने

03:53:22:06 के लिए मर्यादित हो ना देखने के लिए आज आप सीमित हो पत्नी के रूप में माता को ना देखने के लिए कल को क्या किसी देश काल परिस्थिति में आपका यह धर्म बदल सकता है बदल जाएगा बोलो आपके अनुसार बदल जाना चाहिए संभवत आप इस प्रकार की शिक्षा का प्रचार करना चाहते हैं कि आने वाले टाइम में जब मलेच्छ तंत्र प्रभावी हो जाए जब उनकी सत्ता आने लग जाए तो वह जब कहे कि नहीं माता से भी पत्नी का व्यवहार करो तो आप उनमें से हो नीच जो उस समय इसका भी आलंबन लेने लगेंगे यह कहते हुए कि महाभारत में लिखा था कि देश काल परिस्थिति के अनुसार धर्म का बदल देना चाहिए कितना नीच वक्तव्य है ये ना तो यह सनातन कहलाएगा धर्म और ना ही आप धर्मावलंबी कहलाओगे तो ये धर्मावलंबी का मुखौटा होता सामने आओ फिर रण में मैदान में सीधे सामना करिए ऐसे वैसे नहीं अग्नि ने आज तक अपना धर्म नहीं छोड़ा पृथ्वी ने आज तक अपना धर्म नहीं छोड़ा जल ने अपना धर्म नहीं छोड़ा वायु ने अपना धर्म नहीं छोड़ा सब अपने अपने धर्म का पालन कर रहे हैं कल को ये वही वाली बात है भाई मले में और हम में अंतर क्या है कभी सोचा

03:54:37:15 है यही अंतर है उनका धर्म बदलता है वो कहते हैं कि आज से पहले दो 187 में वो कहते हैं आज से पहले स्त्री संघ करने की आज्ञा नहीं थी पवित्र दिनों में रोजों की रात में मगर आज हम वो आज्ञा दे रहे हैं आज दे रहे हैं पहले से सुनिश्चित नहीं था हमारे वो जो युग के अनुसार जो परिस्थिति के अनुसार देश काल परिस्थिति के अनुसार जो अलग-अलग व्यवहार होंगे हमारे धर्म वो भी सुनिश्चित कर दिए गए हैं वह है सनातन ग्रंथावली वो है वैदिक वांगम वो भी सुनिश्चित है कि किस कि परिस्थिति में किसकिस वृत्ति का आलंबन लेना है क्या-क्या करना है ऐसे नहीं कि शास्त्र में कुछ लिखा है अपने मन के अनुसार हमने बदल दिया बदल देना कल को माता को पत्नी की दृष्टि से ना देखने का जो धर्म है उसको भी छोड़ देना बहन को पत्नी की दृष्टि से ना देखने का जो धर्म है उसको भी छोड़ देना कलयुग के नीच

03:55:36:26 योगी राघव जी बोले इस बार इस मामले में आवाज अभी आ रही है अच्छी जी हेलो हां मेरी आवाज अच्छी आ रही है ना आप पहले सब सुनिश्चित कीजिए आपकी आवाज आपकी आवाज सारे सभी श्रोताओं को बहुत पसंद आई है बहुत प्रशंसा ई आपकी आवा नहीं बस ये गुरुजी की आशीर्वाद है और कुछ नहीं मैं यह कहना चाहता हूं कि यह लोग परिवर्तन की बात करते हैं तो मैं यह कहना चाहता हूं कि बहुत अच्छी बात है मैं आपका स्वागत करता हूं मैं पलक पाड़ बिछा करके बैठा हु परिवर्तन के नाम का लेकिन आप एक परिवर्तन यह कीजिए कि अनादि काल से मानव की शुधा अन नहीं मिटा रहा है कुछ और सब्सीट्यूट लाइए प्यास पानी बुझा रहा उसमें भी परिवर्तन लाइए रोटी कपड़ा मकान की जो बेसिक नीड है आदमी की उसके अलावा कोई और तीन या चार या पांच या छह कोई बेसिक नीड लाईए यदि अनादि काल से य कांस्टेंट अस्थिर रूप से चल रही है यह अपरिवर्तनीय

03:56:38:15 सब कुछ धर्म के घटक है धर्म के भीतर ही सब कुछ है रामो विग्रहवां धर्मा धर्म के भीतर ही सब कुछ होता है उसके बाहर सब अधर्म होता है यह तो आप ही के वक्ता लोग कहते रहते हैं तो फिर कैसे आप यह बात कर रहे हैं कि परिवर्तन की आवश्यकता है और कौन सी कमी आपको नजर आती है यदि आप यह कहते हैं कि मूर्ति पूजा पाखंड वगैरा तो मैं कहना चाहता हूं कि एक विशेष समुदाय के लोग अपनी विचारधारा को मानते हुए छाती पर बम बांध के फट जाते हैं उसको आप पाखंड कह देते हैं लेकिन जिनको सनातनी हों का पाखंडी कह रहे ऐसा एक सनातनी जिने अपने छाती पर बम बांध करके फटा हो या किसी को भी आहित किया हो ऐसा कोई एक सनातनी बताइए ना अरे लॉकडाउन की बात में करना चाहता हूं कि जब लॉकडाउन में सब कुछ बंद था तो छोटे-छोटे पशु पक्षी यहां तक कि चीटी पंछी तक का खयालन सनातन हों ने रखा जो मूर्ति पूजा करते हैं क्योंकि वह उनमें अपने आराध्य देवी देवताओं का दर्शन करते हैं य कितनी सुंदर अभिव्यक्ति है आप इसको पाखंड का नाम देते आपको शर्म नहीं आती है पाखंड क्या होता है जितने भी आज हर कोई ये बताता है ना कि फलाना कंपनी का सीईओ कोई हिंदू है भारतीय ये है वो है क्या वो आर समाजी है

03:57:53:22 क्या सत्या नडेला आर्य समाजी है क्या सुंदर पिचाई आर्य समाजी है क्या रामानुजन जो महान गणितज्ञ थे वे आर्य समाजी थे तो पाखंडी यदि होते तो उनका विकास ही नहीं होता क्योंकि कहीं पाखंड है तो उन्होंने विश्व इतिहास में 1400 साल की परंपरा में एक सुई तक बना कर के विश्व को योगदान नहीं दिया पर हमने सब कुछ किया यह पाखंड नहीं हो सकता खबरदार आप गलत कर रहे हैं यह आपको कोई अधिकार नहीं है हमारी मान्यताओं पर कुठाराघात करने का अधिकार नहीं है हम बहुत सहन कर चुके हैं मैं बहुत प्यारी भाषा में कह रहा हूं बहुत अच्छे से कह रहा हूं किसी का निरादर करते हुए नहीं कह रहा हूं लेकिन आप खबरदार हो जाइए जो चीजें अपरिवर्तनीय

03:58:37:02 जैसे शर्मा जी ने बहुत अच्छी बात बोली कि कौन करेगा इसमें बदलाव आपने अच्छी बात बोली कि फिर माता को पत्नी के रूप में स्वीकार करने लगेंगे क्या यदि यह अच्छा लगता है तो कीजिए लेकिन यदि यह स्वागत योग्य नहीं है तो फिर आपको अपने विचार की शुद्धि की आवश्यकता है ना कि धर्म के परिवर्तन की अपना अपनी विचारधारा का पुनर्मूल्यांकन कीजिए और अंत में एक बात मैं कहना चाहता हूं जैसे मैंने अपने वक्तव्य की शुरुआत मेरी आवाज आ रही है ना हा वक्तव्य की शुरुआत की थी कि दयानंद आंगल वैदिक विद्यालय में यूनिफॉर्म जो है वह आज के आधुनिक समाज का है भारतीय परंपरा से मेल नहीं खाता और मुझे एक मित्र बता रहे थे कि 25 दिसंबर के दिन वहां बच्चों को सेंटा क्लॉस भी बनाया जाता है मैंने आंखों से नहीं देखा एक मित्र ने मुझसे कहा ठीक मैं उसमें नहीं जाना चाहता लेकिन यदि यूनिफॉर्म में ही तकलीफ थी तो बोलना नहीं था लेकिन मैं इससे इतर एक बात कहना चाहता हूं इसी परिपेक्ष में कि दयानंद आंगल वैदिक विद्यालय इसके नाम में ही है आंगल और वैदिक आप कहते हैं कि अंग्रेजों का प्रतिकार दयानंद जी जी ने किया उनकी मानसिकता से प्रेरित होकर के महान क्रांतिकारी हुए इस देश में तो जिनका आप खंडन कर रहे थे उनके साथ मिलकर

03:59:52:02 के आप आंगल वैदिक विद्यालय खोल रहे हैं या आप अपने आप को धोखा दे रहे हैं कि हमें धोखा दे रहे हैं जिनका खंडन आपके गुरुदेव सत्यार्थ प्रकाश में कर रहे हैं कथित रूप से आप ही के कथन के अनुसार कह रहा हूं तो ऐसा कैसे कि वो उनकी विचारधारा के साथ मिलकर के आंगल वैदिक बना रहे हैं इतना बड़ा झोल क्यों नहीं दिखाई देता आप लोग आपस में विमर्श क्यों नहीं करते मैंने कहा कि अभी इस लाइव को जो भी आर्य समाज जी देख रहे हैं वह अपने अपने खेमे में जाकर के अपने अपने गुरुकुल अपने मंदिर अपनी स्कूल जिसम भी जाकर के बातचीत करें कि इतने सालों से हम कर क्या रहे हैं इतने सालों में हमने केवल ब्राह्मण ही क्यों बनाए हैं क्षत्रिय वैश्य शूद्र से और विशेषक शूद्र से हमें इतनी नफरत क्यों है कि उसका अस्तित्व ही हमारी आंख की किरकिरी बना हुआ है क्यों बना हुआ है क्या बिगाड़ा है उसने आपका जो आपकी आंख की किरकिरी वो बना हुआ हमारा भाई क्यों उसको बिगाड़ रहे हो हर किसी को रोटी कपड़ा मकान चाहिए वह दे दो वह खुश हो जाता है लेकिन आप जबरदस्ती उसको कुछ और देने लग रहे हैं तो बेचारा जो पाना चाह रहा है उससे भी वंचित रह रहा है और जो आप देना चाह रहे हैं वह भी उसको ठीक से मिल नहीं पा रहा यह त्रिशंकु कल्चर खत्म किया जाना चाहिए तो मैं यही कहना चाहता हूं अधिक समय नहीं लेता हूं दूसरे भी हमारे बंधु

04:01:07:14 अपने विचार प्रकट करें इनकी ये जो परिवर्तन की बात सुन कर के मुझे एक बात याद आई जो स्कंद पुराण में वचन है पुराण को मानते हैं कि नहीं मानते हो डजन मैटर मगर वो है जी मनुष्य चाहे चारों वेद पढ़ ले सारे पुराण पढ़ ले सारे उपनिषद पढ़ ले जप तप व्रत दान यज्ञ सब कुछ बेकार है सब कुछ व्यर्थ है तीर्थ सब कुछ व्यर्थ है यदि वो किसी परंपरा प्राप्त प्रामाणिक आचार्य की शरण में नहीं जाता तो इनका वो हाल है मनुष्य गुरु के बिना पशु है तुम पशु हो पशु कौन होता है ना पता है सनातन को परिवर्तनशील बनाने वाले व्यक्ति पशु कौन होता है पता है धर्मे हीना पशु भी समाना सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में कौन माता है कौन बहन है कौन पत्नी है जिसको नहीं पता होता है जिसके पास धर्म नहीं होता है वो पशु होता है तो गुरु के बिना व्यक्ति पशु है लिखा है यह भी लिखा है शास्त्रों से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है हर तरह के आपातकालीन इत्यादि धर्म के बारे में हमारे यहा व्याख्या है

04:02:16:06 ठीक है तो आप अच्छा एक चीज मैं यह सोचता हूं हम लोग रक्षा किसकी कर रहे हैं सनातन धर्म की और फिर सनातन को क्या करना चाहते हैं कि वो बदल जाए बदल के कैसा हो जाए भाई जो आज नहीं है कल हो जाए आज हमारे वैदिक वांगम में नहीं है मूर्ति पूजा कल को मूर्ति पूजा आ जाए जैसे कि उसमें बात आई जो इनका इस्लामिक तंत्र है उसमें एक बात आई कि भाई हम अपनी कोई आयत बदल देते हैं तो उससे बेहतर आयत ले आते हैं संभवत दो 106 हम अपनी आयत को बदल देते हैं तो उससे कोई बेहतर आयत ले आते हैं अब इसका अर्थ यह है कि वो जो सिस्टम है वो जो ग्रंथ है उसकी कोई भी आयत कभी भी बदली जा सकती है वो लोग एक क एक तर्क दे सकते कुतर्क कि भाई वह अंत में यह कह के गए हैं कि अब कोई भी पैगंबर या अब कोई भी जो दूत है ऊपर वाले का वो आएगा नहीं तो वो जो आया उसको भी तो बदल सकते हैं और वहां पर वो ताल ठोक के कह रहे हैं ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है अवतार लेते टाइम तो कह रहे हैं ईश्वर की कोई पत्नी कैसे हो सकती है 611 संभवत उसमें वो कह रहे हैं कि ईश्वर की कोई संतान कैसे हो सकती है जब उसकी कोई पत्नी नहीं बाधित मगर जहां पर झूठ बोलना है बदलना

04:03:31:14 है तो वहां स्वीकार कर रहे हैं ईश्वर बदल सकता है अपनी आयतों को जब बदल सकता है तो वह उस आयत को भी बदल सकता है जिसमें यह लिखा है कि अब कोई भी पैगंबर नहीं आएगा लोग क्या कर लोगे उससे बेहतर आय देंगे पैगंबर आएंगे आ गए और क्या किया आज से मूर्ति पूजा अलाउड है बदल गया तुम्हारा धर्म क्या ऐसा ही धर्म है हमारा ऐसा ही धर्म है कलयुग के नीच योगी जो धर्म को बदलने की बातें करते हैं ऐसा धर्म नहीं है हमारा जो किसी भी देश काल परिस्थिति में ना बदले उसका नाम सनातन है सनातन की व्याख्या पकड़ो पढ़ो सनातन किसे कहा जाता है और यदि तुम अपने धर्म को परिवर्तनशील मान रहे हो तो उसे सनातन कहना बंद करो पाखंड बंद करो और हो जाओ मलेच्छ घोषित कर दो स्वयं को मलेच्छ मैंने जिस दिन आवान की नीव डाली थी उस दिन मैंने मैं जानता था कि जब हम इनकी जड़ों को टटोल गे तो इनका यही रूप सामने आएगा क्योंकि इनकी जड़ों में वही वाले तंत्र घुसे हुए हैं वो प्रोत है उससे जैसे आज इन्होंने मलेच्छ स्ट्रेटेजी का आलंबन ले लिया व्यक्तिगत होकर के और पता चला पहले भी कई बार लिया गया है

04:04:46:21 है ना और परिवर्तन की बात कर रहे हैं हम में अंतर ही यही है भाई हमारा धर्म व है जो परिवर्तनशील नहीं है और अतो अंततोगत्वा मैं कह रहा हूं तुम हमको प्रमाण दिखा रहे हो व प्रमाण आया कहां से तुम्हारे पास आओ किसी दिन बहुत बड़े स्वयं को वो टेक्निकल व्यक्ति समझते हो बहुत बड़े विचारक समझते हो फिलोसोफर समझ लग ग हो आओ किसी दिन बताओ मैं कहां से आया वो शास्त्र करो परंपराओं का खंडन करते हुए ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध सारा धरा का धरा रह जाएगा सारी हवा निकल जाएगी जब तक मनुवाद हों से दूर हो अपने ही अपने में वाह वाह क्या शेर मारा वा वा वा वो मुझे याद आता है वाह क्या एक्टिंग है वाह वो खड़े कर देते हैं ना उनको धर्म बदला तो भगवान भगवान कृष्ण गीता में कह रहे यदा यदा धर्म जनि भवती भारता तो भगवान श्री कृष्ण किस धर्म को बचाने के लिए आएंगे जो तुम लोगों ने बदला है उस धर्म को बचाने के लिए

04:05:55:27 आएंगे योगी ने धर्म को बदल दिया था कलयुग के नीच योगी ने धर्म को बदल दिया था उसको बचाने आएंगे जो नीच योगी कह देगा वह धर्म है तो उसको बचाने आते हैं भगवान भाई धर्म को बचाना ही इसलिए पड़ रहा है क्योंकि वो बदला नहीं जा बदल जाएगा तो फर को बचाना क्यों पड़ रहा है फिर बदल लो कह लो अपने आपको को हम हम जो है वो है मले हा इनकी जो गुटबाजी होती है वो होती है कैसी वो यना यना पता नहीं कौन सा शब्द है वो यूज करता है फिर माइंड इट उसमें और फिर वाह क्या एक्टिंग है वाह क्या हीरो है वही के लोग सब उसको प्रशंसा करने लग जाते ली बजा के वाह क्या एक्टिंग कर रहा हैट उसको थोड़ा सा रोल मिलता है ना वो शेर से लड़ने का वो जी आदित्य जी आप काफी देर से हैं आप

04:07:04:16 बोले आद जी आप आपकी आवाज नहीं आ रही है जी हो गए आप म्यूट है अभी हेलो बोलिए आवाज आई जी जी आई आपने बरा बोलने के लिए आवाज नहीं खुल रहे ऐसा है कि जो युवा है सब जुड़ रहे हैं जितने भी डिबेट करने वाले य बड़े बड़े यूटर है जो स्वयं को शास्त्रार्थ महारथ समझते हैं यह सब 18 19 17 बहुत ज्यादा 20 इसी में के एकाद दो है जो वरिष्ठ है जो वो वाले हैं कि आन तो हर उस व्यक्ति के खिलाफ है जो जातिवाद नहीं मानता जिनके गुरु जो है एक मुस्लिम है बुड्ढे से हैं व मतलब की एक व्यक्ति अगर जिम कर लिया पूर्व काल में तो परंपरा विरुद्ध हो गया को कोई एक मुस्लिम था तो क्या क्या खाता था क्या क्या पीता था तुम भी जानते हो उसको गुरुदेव बोलते हो उसके आगे पंडित शब्द लग जाता है उसके बाद में आर्य शब्द लग जाता है उसके चरणों में तुम दंडवत प्रणाम करते हो म क्या गुण तुम्ह दिख जाते हैं उन मल में जो गुण तुमको एक जो है ब्राह्मण में नहीं दिखते या एक भक्त में नहीं दिखते

04:08:20:16 ये भी तो विषय है और अगर धर्म की कहीं हानि हो रही है वर्तमान में धर्म रक्षा करना चाहते हो क्षत्रिय बनाओ क्षत्रिय खड़े करो कि हा भाई धर्म विरुद्ध कार्य कर रहा है इसको हम दंड देंगे या शासन को हम अपने हिसाब से चलाएंगे हम क्षत्रिय है वेद कहता है हम राज करें नहीं है कोई क्षत्रिय सब ब्राह्मण बन जाओ क्योंकि धर्म की रक्षा में मूलभूत केवल घोषित ब्राह्मण कर देते हैं लीपा पोती के लिए काम सब लोग वही सब करते हैं क्षत्रिय का आलंबन भी लेते हैं वो घोषित हो जाते हैम ब्राह्मण हो भाई ब्राह्मण बन गया बस तो वो ना तो जन्म से रहे ब्राह्मण ना ही कर्म से रहे वो सर्टिफिकेट से ब्राह्मण रहे आदित्य जी की बात में एक और बात ऐड करना चाहूंगा कि और अगर अगर आर्थिक स्थिति सुधार है तो वैश्य बनाइए शूद्र बनाइए वो भी आवश्यक है लेकिन कभी नहीं बनाएंगे नहीं ना क्योंकि अ आर्थिक स्थिति तो उनसे ही सुधरेगी ना लेकिन वो नहीं बनाएंगे धर्म योद्धा जी कुछ कह रहे हैं धर्म योद्धा जी को ले लीजिए बाकी एक चीज मैं यहां पर कहना चाहूंगा आपने बहुत अच्छी बात याद दिलाई ये लोग क्या करते हैं मलेच्छ को भी त्यागी और ऐसी ऐसी उपमा देकर

04:09:35:22 के और जो है कन्वर्टेड कर देते हैं ठीक है आप वो उनको जो है हिंदुत्व का चोला उड़वा रहे हो मगर उनकी क्या बैक स्टोरी आपको नहीं आता दिखाने में कि वो लोग क्या क्या करते थे मीट मांस मछली कैसे खाते पीते थे जो एक व्यक्ति का जो एक सामान्य सा जो शाखा आरही अपने पुराने जीवन में भी है जो यह मादक पदार्थों का कभी आलंबन नहीं लेने वाला व्यक्ति उसकी भी आप बातों को ऐसे प्रस्तुत कर रहे हो आपने पता नहीं कौन सा बवाल पा लिया पता नहीं कौन सा डेटोनेटर पा लिया आपने परमाणु बम को एक्टिवेट करने का आपने कोई कोड पा लिया मिशन इंपॉसिबल बना दिया आपने टॉम क्रूज की ऐसा ही तो है हमारी इन्होंने वो सामग्री फोटो एक सामान्य सी उसमें जीवन शैली दिखनी दिखती हुई एक सामान्य व्यक्ति जिसको ज्ञान विज्ञान नहीं है अपने धर्म का और ऐसा भी कोई उसमें मर्यादित आचरण नहीं है मगर उसको इन्होंने ऐसे प्रस्तुत कर दिया जैसे वो मिशन इंपॉसिबल का आखिरी और अंतिम जो एपिसोड आए तो वह है वो है ना तो

04:10:43:10 ये है जी आदित्य जी बोलिए और एक विषय यह था कि जैसे कि जिन भी माता जी के साथ आप खड़े थे आपके परिवार के थे जैसे आपने बताया मेरी आवाज आ रही है ना क्लियर जी जी आ रही है रही तो इन्होंने कहा कि देखो ये है पतला दुबला सा आवाहन और अभी इसकी बॉडी इतनी बन गई है तो बिना ब्रह्मचर्य के तो इतनी बॉडी बनना संभव नहीं है स्टेरॉइड्स ड्रग्स के प्रयोग से इसकी बॉडी बनी है क्योंकि ब्रह्मचारी तोय हो नहीं सकता देख किस तरह स् खड़ा हुआ है अरे भैया मतलब की तुम लोग अगर अपने परिवार के स्त्रियों के साथ खड़े हो जाते तुम्हारा ब्रह्मचार्य खंडित हो जाता है यह विचार का

04:11:33:24 विषय जी हा हा इन्होने कहा ना कि ब्रह्मचारी हो नहीं सकता है क्योंकि स्त्रियों के साथ चपक के खड़ा हुआ है अब बताइए कि परिवार की स्त्री के साथ अगर कोई खड़ा है अपनी बहन के साथ अपनी माता के साथ इन लोग का ब्रह्मचर्य खंडित हो जाता है उसी में नारायण अरे श जी पर्सनल अटैक की पराकाष्ठा है अच्छा हा आप क्या बताऊं मैं अब लेकिन ठीक है आदित्य जी बोल रहे हैं इनको बोलने देते हैं जी जी आद जी बोलिए तो ये हो गया अभी आदर्श जी होते और अच्छा विषय रखते उन्होंने बड़ा प्रमाण वगैरह निकाला था काल से और बैठे भी थे आप समय नहीं दे पाए उनको एक बार देख लीजिए बुला लीजिए अभी तो बाकी है चर्चा कर सकते हैं ड़ रहे बैक स्टेज में होंगे शायद नहीं अभी आए नहीं है आते ही इनको जोड़ लिया

04:12:35:19 जाएगा य य राम रामदेव बाबा जो है व शिल्पा शेट्टी के साथ फोटो खचा ब्रह्मचर्य नष्ट हो जाता है क्या उनका नहीं बस अपनी बात अ प्रूव करनी है अब कुछ भी बोल दो वो वाली बात है कुछ भी बोल दो वह एक लगता है मुझे ऐसा लगता है किय जो ये जो लोग है जिन्होंने अपने काले मुंह को छुपाकर वो किया है हो सकता है उन्होंने आज जो ठुमके देखे होंगे उसको देख कर के इनका ब्रह्मचर्य नष्ट हो गया होगा

04:13:14:18 ना अब उनके उनके अनुसार तो ऐसा ही होना चाहिए सत तो यही है जी उनका सिद्धांत तो यही कहता है और फर व मके परोसे जी आदर्श जी आ गए आदर्श जी आ गए जय श्री राम आदर्श जीम महादेव प्रणाम भैया जी खुश रहिए तो काफी देर से मैं देख रहा था स्ट्रीम को काफी सारे विषय हैं एकएक करके सबके ऊपर बात करूंगा जो शास्त्रीय विषय है उस परे ज्यादा मैं बात करूंगा पहले क्लिप जब चालू हुई आपके बारे में बोलना जब चालू किया तो आपसे आपके बारे में बोला उसको तो दिक्कत है हमको बहुत ज्यादा दिक्कत है लेकिन सबसे ज्यादा दिक्कत हुई जब अमित शर्मा जी पर उन्होंने टिप्पणी की ज्यादा देर कुछ नहीं बोले लेकिन उनके ऊपर भी टिप्पणी की गई थी अगर आपने देखा होगा स्ट्रीम को तो आचार्यों को टिप्पणी की है मेरा ज्यादा क्रोध है उनके ऊपर तो अब जो शास्त्रीय पक्ष था उसको थोड़ा मैं रखने की कोशिश करूंगा जैसे आदित्य जी ने कहा कि महानिर्वाण तंत्र के बारे में उन्होंने बताया तो हमारे एक आचार्य हुए हैं परंपरा में ठीक है शंकर परंपरा के नहीं थे

04:14:29:18 जो मी मांसी होते है ना मीमांसा उसमें एक भट्ट संप्रदाय है तो उनके आचार्य हुए उन्होंने मनुस्मृति के ऊपर भाष्य किया है उन्होंने कहा है कि अगर वेद के ज्ञान को समझना है तो तंत्र के ग्रंथों के साथ में सामंजस्य बैठा के समझिए तो वही काम हमारे आचार्य करते हैं जहां तक यथा संभव होता है तो तंत्र का भी आश्रय लेते हैं अनुशीलन करते हैं वोह तो तंत्र के ग्रंथों में जो ऋषि वाच जी थे उन्होंने कहा कि ब्राह्मण को अगर वैश्य का षि कौन है ऋषि उवाच कौन है वो जो अंडर कवर्ड एक गुंडा है वो है क्या जो गाली देता है शंकराचार्य को बोले जो भी है वो जहां तकता संबंधित है हमें क्योंकि मालूम नहीं है वहां कौन कन था हमें तो आपने भी यही बताया था कि वहां कौन ककन था आपको भी नहीं पता है तो धर्म सम्राट नाम जी नाम से वही बैठे थे जहां तक हमें ज्ञात है ऋषि वाद जी ही थे और इस में उन्ही लोग ने हा उन्होंने नाम भी लिया जी जी आप आप आप आप भाई जो नाम लिए जा रहे हैं भाई ये तो अंडर गुंडे का नाम है जिसको अन कह दिया था ऋषि

04:15:44:24 उवाच क्या है क्या नहीं है वही जो जिसकी रातों की नींद उड़ चुकी है रातों को सपने में आवाना दिखाई देता है जी बोलिए आदर जी आ रहा बात क्या है उसके ऊपर तो उसके ऊपर तंत्र में कई सारे प्रमाण है और यहां तक कि महाभारत में भी प्रमाण है कि ब्राह्मण जो है वह सारे काम आपातकाल में कर सकता है वैश्य के शूद्र के और क्षत्रियों के भी यह प्रमाण दिया गया है ठीक है दूसरी चीज जो बात रही ञ पवित की कि इनका यज पवित्र नहीं दिख रहा इत्यादि इत्यादि या सही समय पर इनका यज्ञ पवित्र नहीं हां ो पवित इत्यादि सही समय पर नहीं हुआ तो वेदांग के अंदर ठीक है आप आप स्तंभ धर्म सूत्र के अंदर आता है कि जिनका यज्ञो पवित सही समय पर नहीं होता है उनको तीन माह तक यानी एक पक्ष जो भी कहिए उसको तो क्या है कि तीन माह तक उनको धारण करना है ब्रह्मचर्य इससे उनका वो दोष खत्म हो जाता है ऐसा जो है बोलता है इसका प्रमाण भी मैं दे दूंगा ठीक है उसके बाद में भी फिर बात आई पवित की जहां यह कह रहे थे कि सिला हुआ वस्त्र इत्यादि इत्यादि पर जो बात हुआ तो उसके ऊपर मेरा

04:16:59:28 पक्ष यह है कि बात यह नहीं है कि आप सिले हुए कपड़े पहनो मत पहनो बात यह है कि जब कोई धार्मिक अनुष्ठान होता है उस समय पर धारण मत करिए ठीक है कोई भी धार्मिक अनुष्ठान हो अब ऐसे बात हो तो ज्यादा अच्छी रहती है कि कभी मत धारण करो उस तरीके का वस्त्र लेकिन यथा संभव की जब धार्मिक अनुष्ठान हो तो मत ही करिए जहां तक हो सके यज्ञो पवित की बात रही तो क्या कहना इसके ऊपर तो सब जान ही रहे हैं सबके सामने प्रमाण उपस्थित ही है इसके ऊपर चर्चा हो जाएगी किसी दिन बहुत बढ़िया तरीके से वो लोग आ जाए तो ठीक है दयानंद सरस हम अच्छा मैं एक चीज बताता हूं इन लोगों की हिप्पोक्रीन पुराण करते हैं ना हमेशा इनकी किताब थी गवर श्री कृष्ण बहुत कूदते हैं इनके ऊपर कि कृष्ण जी के ऊपर जब इन्होंने कहा कि कृष्ण तेरी गीता जलानी पड़ेगी तो हमारे आर्य समाजी भाइयों ने लिखा था योगेश्वर श्री कृष्ण आपको जानक हैरानी होगा योगेश्वर श्री कृष्ण में चंपत राय जी ने विष्णु पुराण से रेफरेंसेस दिए हैं अय बताइए अपने मत को सिद्ध करने के लिए व पुराण से रिफरेंस दे रहे हैं और फिर यह क्या कहेंगे कि पुराण का हम खंडन करते हैं अच्छा स्ट्रीम के अंदर एक हिप्पोक्रीन देखा होगा पहले तितिक्षा जी या मीनाक्षी

04:18:15:27 कोई था उन्होंने कहा कि मूर्ति पूजा में ये मूर्तियों में कौन कन था इस बारे में हमें ठीक से पता नहीं है हम इस बात की प्रमाणिकता नहीं लेते हैं वहां कौन-कौन था किसकिस ने अपने मुंह को छुपा रखा था आप भी नाम का आलंबन ना ने आप सांकेतिक दृष्टि में ही बात करें क्योंकि हमें नहीं पता कि कौन सी लाइव स्ट्रीम कहां पर किस रूप में हुई है हुई है यह जानकारी हमें मिली है और वहां पर जो नाम उधत किए जा रहे हैं वो वही लोग है जिनके व नाम है बोलने वाला वही है जिनके वो नाम है यह भी कंफर्म नहीं है तो इस रूप में अपनी बात को रखिए जी तो शिवा जी इसमें एक चीज जोड़ना चाहूंगा मैं कि वो जिस नाम से आए थे तो वो नाम तो कई लोगों का भी हो सकता है ऐसी बात नहीं है तो कम से कम उस नाम को केवल जो लोग उस समय थे उस जगह पर और उन्होंने वो नाम लिखा था उस भाव से ही नामों को लेने की भी क्या आवश्यकता है हम जब सांकेतिक दृष्टि में बात कर ही सकते हैं सही बात है ये इससे मैं क्षमा मांगूंगा इस के लिए तो वहां पर कोई थे महिला ही थी कोई उन्होंने कहा कि महिला वही महिला वही जो ये दावा कर करती है उस इस प्रकार का दावा किया होगा कि जिनके किसी संस्कार पर हमने टिप्पणी की थी

04:19:31:06 हां तो उन्होंने यह कहा कि जो पहले मूर्तियां मिलती थी जिसमें नगन इत्यादि ऐसे दृश्य दिखाए गए मूर्तियों के अंदर तो हा ये बात मैंने भी कही जी हा ये अलंकार है लेकिन वहीं पर फिर एक आदमी ने जो भी कहिए पुरुष ने उसके बाद मूर्ति दिखाना चालू किया उसी मूर्ति से सिद्ध करने का प्रयास किया कि पहले स्त्रियां यग पवित्र करती थी अब मैं ये कहूं आप पहले यह कहते हो कि अलंकार था वो तो मैं भी कह सकता हूं कि पहले के पुरुषों ने यह सोचा होगा कि स्त्रियों का यज्ञ पवित्र नहीं होता तो अलंकार रूप में उन्होंने मूर्ति बना दी कि ये भी एक अलंकार कर ले कह सते अरे जिनको मूर्ति में विश्वास नहीं है वो मूर्ति का आलंबन लेकर अपना मत सिद्ध कर रहे और क्या होगा दो दोगले पन की पराकाष्ठा बताइए एक बार एक अलंकार समाजी ने कहा कि ये देखो मुझको दिखाई मूर्ति ठीक है कि ऐसा ऐसा उन्होंने पहना है ये क्या है तो मैंने कहा ये कमर बंद है उन्होंने अपने टांग लिया है कांधे पर य यज्ञोपवित नहीं है अब बता क्या है तुम्हारे पास प्रमाण कि व यज्ञोपवित ही था कमर बंद नहीं था तो ये लोग ऐसे ही बातें करते हैं शास्त्र से प्रमाण होता नहीं है ठीक है तो यही सब इनका है जी अच्छा इसके और और चीजें थी इसके ऊपर शास्त्रीय प्रमाण और

04:20:46:09 मैं बात करूं जो हुआ इनके ही आचार है बार-बार आपने सुना होगा मैं नाम नहीं लूंगा उनका कि इन आचार्य से हमारे आके शास्त्रार्थ करिए इस गुरुकुल में जाकर के शास्त्रार्थ करिए तो उनके ही आचार्य हैं ठीक है वोह नाम ले रहे थे इसलिए मैं बोल देता हूं उनका नाम कि इनसे जाकर शास्त्रार्थ करिए या लोग देख रहे हैं वो समझ जाएंगे आ अलंकार समाजी के आचार्य हैं एक ठीक है आचार्य नाम है उनका पूरा मैं नहीं बोलूंगा उन वह खुद एक चैनल पर जाकर के पॉडकास्ट में कहते हैं कि मुझे खुद अपने समाज की एक चीज नहीं समझ में आती है जो परांत काल के बारे में बताया गया है स्वामी दयानंद जी ने परांत काल के बारे में बताया एक निश्चित समय के बाद में आपको मोक्ष से दोबारा आना पड़ेगा मृत्य मोक्ष मुझे स्वीकार नहीं है ये अलंकार समाज का मोक्ष से मैं संतुष्ट नहीं हा उन्होंने य खुद बोला तो आपके अलंकार समाजी खुद आपके आचार्य जब आपके सिद्धांत को मानने से डगमगा रहे हैं उनको खुद नहीं समझ में आ रहा इलॉजिकल लग रहा है तो आप दूसरे को कैसे समझाएंगे आचार्य ही आपके नहीं समझ पा रहे हैं तो क्या कहा जाए हमको आप कैसे संतुष्ट करेंगे जब आपके आचार्य जो न्याय इत्यादि पढ़ के दर्शन इत्यादि पढ़कर जिसके ऊपर

04:22:01:12 आप कह रहे हैं कि उनको इतना ज्ञान है व्याकरण चार्य है निरुता चार्य है सब उन्होंने पढ़ा हुआ है गुरुकुल में पढ़ा हुआ है वो भी संतुष्ट नहीं हुए आपके सिद्धांत से तो हम अल्पज्ञ जिनको कोई ज्ञान नहीं है आपके हिसाब से से पंडों को कोई ज्ञान नहीं होता तो उनको आप कैसे संतुष्ट करेंगे अपने सिद्धांत से तो आप पहले अपने आचार्य को समझिए देखिए हमें अलंकार समाज से कोई द्वेष नहीं है हमारे पूरे शंकराचार्य भगवान ने भी कहा कि भगवान की प्रेरणा से ही स्वामी दयानंद जी का जन्म हुआ जब मूर्ति पूजा विकृत हो गई थी तो हमें कोई दिक्कत नहीं है हम तो उनका आदर भी करते हैं एक सन्यासी के रूप में ब्रह्मचारी के रूप में एक योगी के रूप में बहुत उनका आदर है लेकिन जो उनका आलंबन लेकर मैं स्वयं अपनी बात बताता हूं आज के 2 साल पहले की ठीक है मैं मेरा भी ग्रुप चलता था ठीक है टेलीग्राम पे इन लोग के साथ मैं रहा हूं तो इन्हीं लोगों के कृत्यों के कारण मुझको दयानंद स्वामी से द्वेष हो गया कई सारे मैंने अपशब्द भी उस समय बोले मुझे बोध नहीं था फिर मैंने शंकराचार्य भगवान को सुना उन्होंने ऐसी बातें कहीं दयानंद जी के बारे में तो फिर मेरे पूरे माइंड मेरा चेंज हो गया फिर मैं कभी उनका अनादर नहीं करता आदित्य जी बैठे हैं वो जानते हैं इस विषय में हमने कई बार तो लोगों को डांटा है कि उनके बारे में उल्टा सीधा मत बोलो लेकिन जो यह कह रही थी हिप्पोक्रेट में आपको बताता हूं

04:23:17:07 ये इन्होंने एक वीडियो दिखाया कि हम बहुत आदर करते हैं निश्चलानंद सरस्वती जी का आपके आचार्यों का जो परंपरागत है जिन्होंने उनका क्योंकि रहना सहना बहुत टफ है वह मान रहे हैं असली परंपरा को लेकिन यही लोग जो बैठे थे यही वही जो आचार्य मैं बता रहा हूं जिन्होंने परांत काल को कहा लॉजिकल बोला है कि मुझे नहीं समझ में आता वो उनका एक सभा बैठा था एक समय पर उन्होंने उस समय पर शंकराचार्य भगवान को डिफेंड किया था खुद अलंकार समाजी थे उन्होंने डिफेंड किया था भगवान शंकराचार्य का एक वाक्य है प्रश्नोत्तरी में कि द्वार किम कम नरक स्य नारी ठीक है कि नारी जो होती है नरक का द्वार होती है तो उसके ऊपर उन्होंने एक्सप्लेनेशन दिया था कि यहां पर नारी जो शब्द है बहुत सोच समझ के लिखा गया है यह भी लिख सकते थे कि द्वार कि मेकम नरक स्त्री द्वार कि मेकम नरक महिला लेकिन उन्होंने क्या लिखा द्वार की मेकम रकस नारी तुम किसी स्त्री को अगर नारी के रूप में देख रहे हो तो ये तुम्हारा सबसे बड़ा दोष दोष है तुम उसको बहन के रूप में देखो उसको तुम माता के रूप में देखो इस रूप में देखोगे तो तुमको कोई पाप नहीं लगेगा फिर उन्होंने श्रुति वचन को कहा छांदोग्य एक आती है कि अगर सपने में स्वप्न में तुमको नारी का दर्शन होता है वहां पर ऐसा

04:24:32:12 भगवत पाद ने तो वहां पर देवी का जिक्र किया है वर्णन किया है कि अगर देवी का तुमको दर्शन होता है तो तुम्हारे जो मनोवांछित कर्म है उसको तुम पूर्ति हो जाएगी तुम्हारी जो भी तुम चाहते हो तुम्हें मिल जाएगा तो उसको समझाते हुए आचार्य कहते हैं उस समय अलंकार समाझ यों के कि वहां पर श्रुति वाक्य ऐसा है कि अगर तुम्हारे सपने में नारी आ रही है स्त्री आ रही है और वह देवी के रूप में आ रही है तुम तुम्हारे अंदर इतना आदर है स्त्रियों के लिए कि तुम उनको देवी स्वरूप देख रहे हो सपने में भी तो तुम्हारा जो व्यवहार होगा इतना उत्तम होगा कि तुम जीवन में कुछ भी प्राप्त कर सकते हो अपने कर्मों से तो कितना अच्छे तरीके से उन्होंने कहा उन्होंने बोला यह भाष्य अगर भगवान शंकर भगवत पाद जो है अगर व द्रोही होते द्वेष होते स्त्रियों के तो अपने श्रुति में ऐसा क्यों भाष्य करते इतना सुंदर इसका मतलब वह द्वेष नहीं थे तो यह खुद इतना सुंदर वर्णन देख कर के यही अलंकार समाजी समाज ने स्ट्रीम किया बकायदा और अपने ही आचार्य का खंडन किया कि आप गलत कह रहे हैं व बहुत बड़े एक बात और जोड़ना चाहूंगा जो नारी नर के द्वार वाली जो बात कही है भगवत पाद गुरु शंकराचार्य महाभाग्य समझना भी बहुत आवश्यक है

04:25:47:14 दर्शकों के लिए क्योंकि वो जो बात उन्होंने कही है वो वो जो लिखा है उन्होंने वो उन्होंने सन्यासी के लिए लिखा है तो बिल्कुल बकुल जो भी हा तो सन्यासी के लिए तो नारी नरक का द्वार कहने का जो उनका संदर्भ है वो सन्यासी के पॉइंट ऑ व्यू से समझना चाहिए मार्ग के हैं उनके लिए नारी जो है वो उस रूप में कहा ति जो प्रवृति मार्ग पर है उनके लिए नहीं जो प्रवृत्ति से निवृत्ति पा चुके अब उनके लिए जो है नारी को उस तरह से देखना वो उचित नहीं है तो वो उनकी जो जो अब उनका निवृत्ति पर कोई क्यों जाता है अब मुझे मोक्ष चाहिए मगर अगर वो नारी को नारी के दृष्टिकोण से देखेगा तो वह फिर प्रवृत्ति की ओ प्रवृत होगा तो उसके जो लक्ष्य में वो बाधा है उस परिपेक्ष में कहा गया बाकी मैंने अपने एक वीडियो में कई वीडियो में बताया भी है कि कपा जी ने वक्तव्य दिया था जो गुरुदेव बताते हैं कि जब एक बार ऐसा हो रहा था कि जो मुस्लिम तंत्र है व आर्य समाज पर प्रहार कर रहा था और उस समय उनकी सहायता के लिए कपाती जी खड़े हुए थे उनसे किसी ने टोका भी कि आप इनकी सहायता क्यों करते हैं तो करपात्री जी ने क्या कहा था कि

04:27:03:15 ऐसे नहीं वोह हमारे घर की बात है वेदों में परमाण बुद्धि वाले हैं हमारे घर की बात है जी और हम आपस में निपट लेंगे मगर बाहर का कोई आ जाएगा तो वही महाभारत क्या थी महाभारत की सीख कि आपस की बात है तो वो 100 हम पांच मगर कोई बाहर का आ गया तो हम 105 तो कृपा जी और गुरुदेव भी कोई अनादर भाव कभी भी हमें नहीं सिखाया गया भाई ना उन्होंने कभी किया हां इनके द्वारा जो अनादर है जो दोगलापन है वो अवश्य छलकता है इनकी बातों में ही छलकता है पहली बात तो वो जो वो जो ग्रंथ ही है इनका मूल उसी में भांड इत्यादि शब्द लिखे क्या करोगे को उसमें क्या कर लोगे आप जो नीव है फाउंडेशन मेंही लिखा है और इनके जो आज के कुछ बुद्धिजीवी हैं वह कई चीजों में जाकर के यहां पर विपरीत दिशा में जा रहे हैं मगर फिर भी अब अब क्या करेंगे यहां पर जो जो जो धर्म निष्ठ नहीं है ईश्वर निष्ठ नहीं है है ना जो मोक्ष निष्ठ नहीं है जो व्यक्ति निष्ठ है जो संस्था निष्ठ है वो पता है क्या करेगा ऐसे बुद्धिजीवियों के लिए वो क्या करेगा कहेगा कि वो आप्रामा

04:28:19:00 है वो आर समाज है ही नहीं वो आर समाज ही नहीं है तो मैं आज एक प्रकाश डालना चाहूंगा कि जो परंपरा की बात हम लोग करते हैं मैं एक चीज पर प्रकाश डालना चाहूंगा कि आर्य समाज का अंतिम निर्णायक आज के टाइम में कौन है बता सकते हैं ये लोग नहीं लौकिक विधान के अनुसार आपका आपको आलंबन लेना होगा जो शास्त्रोक्त नहीं है अन्यथा आप यह सिद्ध नहीं कर सकते कि आर्य समाज का अंतिम निर्णायक यह व्यक्ति है हमेशा उलझे रहो एक बात किसी ने अगर कोई मिलावट कर दी तो कोई यह कहने वाला नहीं है नहीं यह मैंने अपने गुरु से पढ़ा था यह शब्द यहां पर नहीं था क्योंकि परंपरा को आप मानते नहीं हो आप तो चुनावी प्रक्रिया पर चलते हो तो इनके पास परंपरा ना होने के कारण यह स्वयं को आर्य समाजी भी नहीं कर सकते क्लियर कट कि मैं आर समाजी हूं यह बहुत बड़ी विडंबना है जैसे अभी मैंने रामपाल वालों से पूछ लिया कि भाई आपको कौन व्यक्ति है जो रामपाल दास जो इस समय जेल में है उनके विहाव से यहां पर सूचनाएं दे रहा है क्या उन्होंने कहीं पर स्वीकार किया यह मेरा उत्तराधिकारी है तो जो व्यक्ति परंपरा को नहीं मानता है वो उत्तराधिकारी

04:29:34:00 की बात ही नहीं कर सकता है तो जब इनके य परंपरा को माना नहीं गया तो इनके य कोई गद्दी है ही नहीं वो है अंतिम निर्णायक इस तंत्र का है क्या आदर्श जी आपकी जानकारी में नहीं हमारे जानकारी में तो नहीं है जहां तक हमें पता है तो यह केवल इतना ही बता दे कि भाई आर्य समाज का अंतिम निर्णायक कौन है जो य ठोक के कह दे कि यह होगा यह अर्थ है आर्य समाज की बात का और यह नहीं है तो आपके यहां पर कोई अंतिम निर्णायक नहीं है हमारे यहां पर है यह होता है परंपरा का

04:30:09:03 लाभ अच्छा एक चीज मैं बताना चाहूंगा भैया आपको जी गुरुदेव का वक्तव्य था हमने सुना था तो बात यह होती है ना कि इन्होंने चार पीठ की स्थापना कैसे कर दी है ना अगर इनका शंकराचार्य परंपरा जैसी कोई चीज होती तो वेदों में वर्णन होता अगर प्रमाणिक होती तो तो उन्होंने दिया है इसका रिफरेंस वेद से ही दिया है उपनिषदों के अंदर में शंकराचार्य के जो चार पीठ हैं उनके बारे में संकेत मिलता है जिसको फिर शंकराचार्य भगवान ने उसका अनुशीलन करके चार पीठ बनाया से हवान में नहीं बना दिए ये भी बात है प्रमाण मैं आपको भेज दूंगा आप दिखा दीजिएगा कभी स्ट्रीम में अपने सारे तो ये सारी चीजें हर चीज वेदोक्त ही है अच्छा आदित्य जी अगर आप बता पाए तो भगवान शंकर का जब हम लोग रुद्राभिषेक करते हैं तो वहां पर भगवान शंकराचार्य की भी स्तुति होती है अगर यह मंत्र आपको याद होगा दित्य जी तो आप बता पाएंगे इस समय एक मंत्र आता है

04:31:15:27 हेलो आदित्य जी नम कपने च केसाय च नमा कपने च केय च इसको थोड़ा एक्सप्लेन करिए कि जो जो भगवान बड़ी बड़े जटाओ वाले हैं उन्हें भी प्रणाम है और यत केसाय बिना केश के जो भगवान है जो सिखा भी नहीं रखते हैं सन्यासी अग्नि का परित्याग कर देते हैं ऐसे शंकर को भी प्रणाम है रुद्राभिषेक में बोला जाता है रुद्रा अध्याय में कौन से शंकर है जो अभी तक हमको कहीं दिखाया आपको ऐसे शंकर जो टकले हो जिनके केस ना हो कहीं पर स्टोरी य तो भगवान शंकराचार्य के बारे में बात हो रहा है क्योंकि सन्यासी तो वही थे शंकर अवतारी तो यहां पर भी संकेत हमको मिलता है तो हर चीज परंपरा जब आप पढ़ेंगे तो हर चीज परंपरा से ही आपको लेनी पड़ेगी अच्छा एक चीज था भैया अगर मैं कुछ समय मिले तो मैं उस पर बोलना चाहूंगा जो यह बात था सनातन का कि सनातन में कहां लिखा है ऐसा ऐसा ऐसा ऐसा करना देखो जैसे मैं आपसे पूछ रहा हूं अगर आपके गुरुदेव

04:32:31:10 ने किसी के भी गुरुदेव ने अगर आपको किस कोई चीज करने से मना कर दी यह चीज मत करना तो तुम कर रहे हो तुम गलत हो लेकिन अगर मान लो गुरुदेव ने कि किसी चीज को करने से मना नहीं किया जैसे जलेबी खाने से मेरे गुरुदेव ने मना नहीं किया और यह भी नहीं कहा कि खा लो तो मैं क्या करूं उसमें अगर किसी का उससे कुछ बुरा हो रहा हो धर्म का अहित हो रहा हो तब तो मैं करूं तब तो दिक्कत है किसी का अहित नहीं हो रहा और कहते हैं बहुत लोग कहते हैं कि आप आप शंकराचार्य को मानने वाले तो टेलीग्राम पर क्या कर रहे हैं काहे इतना वक्तव्य दे रहे हैं आपके गुरु ने कहा क्या तो भाई मेरे गुरु जी हर चीज बताएंगे क्या उन्होंने संकेत कर दिया ऐसा ऐसा काम करना मैं वो करूंगा जितना मुझसे हो पाएगा तो कितनी मूर्खता पूर्ण कितनी तर्क तर्क हीन बात है य और अपना नाम क्या रखेंगे तर्कशील आर्या क्या तर्क था भाई तुम्हारे कल के वीडियो में तर्क निकालो तो एक मिनट का भी तर्क नहीं निकलेगा कुछ नहीं है और किसी को परांत काल पर मैं तो भी कह रहा हूं परांत काल के विषय पर अगर किसी को बात करना हो तो आ जाएगा कर लेगा बहुत बेहतरीन काल क्या था क्या प्रांत काल का विषय क्या था मैं आपको रिफरेंस भेज रहा हूं भैया आप दिखा पाए थोड़ा स्क्रीन शेयर करके

04:33:47:04 आप जो है मैं आप मेरे को इग्राम पर भेजिए आप इग्राम पर अच्छा एक मिनट मैं आदित्य जी को भेज देता हूं आदित्य कोई है यहां पर मैं क्या कहां से भेजू अपना आप आईडी दे दीजिए भेज देता हूं आपको आवान लिखिए आ जाएगा ा भेज दिया जाए तो नवीन शर्मा जी भता है तो मैसेज कर दीजिए वो लिख के दे दीजिए वो प्राइवेट चैट उने लिंक दिया

04:34:22:21 अच्छा तो तुम्हारी है तो हां तो मैं ये प भज को हम फॉरवर्ड कर देंगे तुरंत मैं मैं तब तक मैं तब तक जो है एक अंतिम वक्तव्य दे दूं जो मेरा बाकी रह गया है कि आपने कुछ दिनों पहले देखा होगा जब ये ईश्वर सर्वशक्तिमान का विषय चल रहा था परंपरा का विषय चल रहा था तो जब हमने यह एक राधा रानी के ऊपर जो वक्तव्य थे उनको लेकर के वीडियो बना दिया था और उस पर भड़क गए थे और जो कुछ छुटकू में उसमें एक कोई ठीक ठाक से बात करने वाले भी हैं तो उन्होंने अपने वीडियो में क्या कहा कि रामपाल जी और इकन और आर्य समाज तो ये जो आवान है जैसा कि अभी आदित्य जी बता ये जो आवान है यह उन्हीं लोगों को टारगेट करता है जो जाति जातिवाद नहीं मानते अब यहां पर उन्होंने क्या किया उनके लिए वही स्कन हमारा हो गया उनके लिए वही जो रामपाल हैको उन्होंने जेल में भिजवाया है है ना उसम जेल में जो भिजवाने का हाथ है उन्हीं का है तो वही उनके लिए आज वो एक पटल पर आ गए क्यों आ गए क्योंकि शेर का बच्चा एक ही

04:35:38:25 अच्छा शेर का बच्चा एक ही अच्छा एक मनुवादी आया एक परंपरावादी आया और ये जितने बाहर के तंत्रों से प्रभावित तंत्र हैं विपरीत विचारधारा सनातन के विरुद्ध विचारधारा से प्रभावित जिनकी आइडल जीी है गुण अर्थ में देखो गुण क्या है सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म उन तीनों परही प्रहार है आपके द्वारा ईश्वर अनंत नहीं है मोक्ष से आपके खुद के जो आचार है वो सेटिस्फाइड नहीं है और धर्म को बदलने की बात आपका खुद का व्यक्ति कर रहा है धर्म बदला जाएगा तीनों पटल गया और बाकी टीका लगाना है नहीं लगाना मत लगाओ नाम जप नहीं करना है यज्ञ करना है खूब करो क्यों भाई मैं गलत कह रहा हूं आदित्य जी जो बाकी की शेष चीज रह जाती है उनको लेकर के इतना विवाद नहीं है केवल जब आप शाश्वता पर आ जाएंगे धर्म की जब हम ईश्वर की सर्वशक्ति मत्ता पर आ जाएंगे और जब हम परम स्वतंत्र मोक्ष पर आ जाएंगे हम लोग एक हो जाएंगे हमारे बीच में वो जो कर्मकांड विषयक जो अंतर आएगा वो आएगा केवल यही तो आएगा दूसरा यह है कि जिस तरह सेकी फ है सामान्य हिंदु से प्रत उनके

04:36:54:12 आचरण उसी से प्रभावित क्योंकि वहा अभाव है तो वो तीनों पर आपका प्रहार है तो जब य जब यह हुआ कि आवान ने समाज को एक करने के लिए और यह प्रश्न करने चालू किए कि आपके पास वेद म कैसे आए आप कैसे परंपरा प्राप्त आचार्यों के ज्ञान का खंडन कर रहे हैं बहुत साधारण सी भाषा में सब प्रश्न किए तो क्या हुआ धीरे-धीरे मैं ये अपने कई वीडियोस में कह चुका हूं धीरे-धीरे वो तंत्र जो है एक होने लगे आज देखिए एक ही पटल पर दिवाली की बुराई करने वाला है ना कौन दिवाली की निंदा करने वाला कौन रामपाल तंत्र और क्या कहते हैं ये शिव जी को राधा मां को राधा जी को निंदा करने वाला कौन सा तंत्र अलंकार तंत्र और शिव जी को शिव जी की निंदा करने वाला कृष्ण से भिन्न किसी भी स्वरूप की निंदा करने वाला अलग हटा देने वाला है ना वो कौन है हरे कृष्णा तंत्र आज वो तीनों एक पटल पर होकर के आर समाज के या अलंकार समाज के जो कुछ लोग हैं वह बात कर रहे हैं रामपाल दास जी और हरे कृष्णा वाले और हमारा आवान इसलिए जो है वो करता है विरोध में वीडियो बनाता है क्योंकि आवान

04:38:09:21 जो है हम लोग जो है जातिवाद नहीं मानते ठीक भैया कह रहे नवीन जी ने प्रमाण देख लिया है टेलीग्राम प उस पर चर्चा की जाए थोड़ा सा मैं समझ र बस बस बस बस बात कर रहा बस मैं अपनी बात खम पूरी कर रहा हूं तो राम तो यह चीज जो है कि ये दो ये लोग जितने भी है मैंने बहुत पहले वीडियो दिखाया था यह देखो तीन प्रकार की तीन प्रकार की किताबें जिसमें की एक है प्रकाश एक है भगवत गीता वहां की विदेश की और एक है गीता तेरा ज्ञान अमृत इन तीनों में सबसे पहले भगवत पाद आदि शंकराचार्य जी का खंडन उनकी बुराई उनकी निंदा लिखी हुई है इनकेन प्रकार और आज वही समय आ गया ये तीनों व्यवहारिक दृष्टि से भी एक हो रहे हैं तो ये इनकी वास्तविकता है जी आदर्श जी

04:38:59:12 बोले जी अच्छा एक विनोद की बात मैं रख दूं थोड़ा सा इन्हीं लोगों के बारे में भागवत में एक आता है वर्णन कि जब भक्ति जो है ना उसका लोप चालू होता है गुजरात से और भक्ति आकर के फिर से युवा बनती है कहां पर वृंदावन में तो मुझे तब अलंकार समाजी याद आते हैं कहां से इनकी शुरुआत हुई थी गुजरात से और कहां प इनका टारगेट रहता खत्म करना वृंदावन तो भगवान ने सुखदेव जी ने पहले इनका दे दिया है ज राधा जी की बात रहे तो मैं एक चीज बता दूं राधा जी को श्राप दिया था है ना जो कथा आती है पुराणों के अंदर तो श्री दामा ने श्राप दिया था भगवान से मिलने जा रही थी राधा जी तो राधा जी से च खाते थे पहले श्रीरामा जी तो उन्होने कहा अगर मिलने जाओगी तो तुमको हम श्राप दे देंगे कि दिग दिगंतर तक लोग तुम्हे अपमानित करते रहेंगे तो वही हो रहा है उन्होंने क्या चुना उन्होंने कहा कि मुझे अपमानित करने दो मैं कृष्ण से विलग नहीं होंगी तो वही आज हो रहा है तो चलिए प्रमाण पर देख ले थोड़ा सा परांत काल पर थोड़ा चर्चा हो जाए व सही है हां

04:40:14:28 इसको खोल दीजिए स्क्रीन शेयर कर दीजिए जब पहले वाली जो पहले मैंने भेजा ना सबसे पहले उसको खोलिए जो एक क्वेश्चन आंसर के फॉर्म में है जी तो यहां पर जो प्रश्न किया जा रहा है पंडो द्वारा पंडे क्या पूछ रहे हैं कि जो मुक्ति से भी जीव जो मुक्ति से भी जीव फिर आता है तो वह कितने समय तक मुक्ति में रहता है तो उत्तर देते हैं स्वामी जी कि ते ब्रह्म लोके ह परांत काले परामदा परि मुच अंती सर्वे यह जो है श्रुति वचन है ठीक है मुंडक उपनिषद का वचन है वो कहते हैं कि

✅ This part is already used · 04:41:05:27 – 04:41:20:18 (0:15)

→ Used in: A · Live AHVAAN बंद करवाने का प्रयास तेज #vedpuran #hindu #iskcon #aryasamaj #rampaljima... at 1:06:13 ↗

04:41:05:27 33 लाख 20 सहस्त्र वर्षों की एक चतुर्य गी वो सहस्त्र चतुर युग हों का एक अहोरात्र ऐसे 30 अहोरात्र का एक महीना ऐसे ब बार महीनों का एक वर्ष ऐसे

⬜ Not used yet · 04:41:20:18 – 05:01:43:00 (20:22)

04:41:20:18 सत वर्षों का परांत काल होता है ठीक अब इसको नोट करिएगा इतना लंबा समय बहुत समय होता है ये भी बहुत छोटा समय नहीं है बहुत लंबा समय है अच्छा इसके ऊपर थोड़ा चर्चा करेंगे अब हम खोलेंगे इस पर भगवत पाद का भाष्य शंकर भाष्य शंकर भाष्य खोल दीजिए थोड़ा अा देखिएगा किस तरीके से यही लाइन प हमारा कौन सा उपनिषद है ये ये है मुंडक उपनिषद उपनिषद हां इसके बाद वाला पेज खोलिए जो एक और पेज था ना उसको

04:42:03:14 खोलिए एक दूसरा पेज भी होगा दो पेजेस भेजे होंगे ये है क्या [संगीत] तो एक सेकंड यह वाला यही है ना एक दूसरा पेज भी होगा भैया जिसमें मंत्र लिखा होगा फिर उसकी व्याख्या होगी देखिए उसको क्योंकि पहले हमको देखना पड़ेगा कि इसका सामान्य अर्थ क्या और स्वामी जी ने क्या इसका अर्थ किया है सामान्य अर्थ तो हम बता दे आपको हमारे पास उनका भाष्य वाला भी अवेलेबल नहीं चलिए मैं बता देता हूं स्क्रीन शेयर बाद में कर लेंगे दिखा दीजिएगा लिखा है कि जिन्होंने वेदांत जनित ज्ञान ठीक है जिय देखिए सामने देखिए य है क्या हा हा स्क्रीन पर मेरे पूरा दिख हा तो जिन्होंने वेदांत जनित विज्ञान से से ग अर्थ का अच्छी तरह निश्चय कर लिया है वह सन्यास योग से यत्न करने वाले समस्त

04:43:18:22 शुद्धि चित पुरुष ब्रह्म लोक में देह त्याग करते समय परम अमर भाव को प्राप्त हो सब ओर से मुक्त हो जाते हैं तो ये इसका सामान्य अर्थ है ठीक है आप कहीं भी जाएंगे किसीसी भी आप कहीं से भी पढ़ लीजिए ठीक है चाहे चौखंबा की जो आती है उपनिषद संचय वहां से पढ़ लीजिए जो भी विद्वान हैं आर्य समाजी को छोड़ कर के उन्होंने यही अर्थ किया है अच्छा हमारा जो मेन है ना जो यह मंत्र है यह जो लाइन है ते ब्रह्म लोके परांत काले इस पर हमारा ध्यान करना है तो इसकी जो व्याख्या भगवत पाद ने की है यह की है मोटा मोटा कि जो वेदांत के ज्ञान को यानी ब्रह्म ज्ञान को जो जान लेता है और उस पर निश्चय करता है उस पर योग करता है उससे वह अमर हो जाता है मुक्त हो जाता है एक सेकंड यह मंत्र कौन सा था आपने दिखाया था जो अभी इससे पहले

04:44:16:12 वाला इससे पहले वाला मंत्र कौन सा जी अभी जो आपने वो अभी जो जिसका सामान्य अर्थ पढ़ा है आपने वो हां ये मुंड को उपनिषद का मंत्र है मैं आपको रिफरेंस भेजता हूं ये खंड सा नंबर हां मैं खंड बता देता हूं खंड दो का छठवां मंत्र है है नाद जहां तक हां तो वो है इसको देख लीजिएगा आप तो इसके अंदर कहीं इस प्रकार की चर्चा है ही नहीं और जब आप पूरा इसका भाष्य पढ़ेंगे जो कि भगवत पाद ने किया है तो इसमें साधना से रिलेटेड बताया है और जो ब्रह्म लोक है उसके बारे में चर्चा की है कि ब्रह्म लोक क्या होता है क्या नहीं है उसके बारे में चर्चा की है ठीक है यहां पर ब्रह्म लोक का अर्थ है ब्रह्म स्वरूप हो जाना तो इसको प्राप्त करने की बात की गई है यानी ब्रह्म स्वरूप को प्राप्त करने की बात की गई है तो यहां पर कहीं इस प्रकार का वर्णन है ही नहीं अच्छा एक फ्लो मैं बताता हूं इनकी फिलॉसफी का इसके ऊपर ये बहुत बार पिटे जा चुके हैं स्ट्रीम में अगर सबको याद होगा यस तिवारी ने बहुत बार इन लोग को स्पल पकड़ा है होता क्या है कि जब आप कहते हैं कि इनकी मुक्ति थोड़ा समझ लीजिएगा कि आर्य समाज की मुक्ति की अवधारणा क्या है ठीक है मुक्ति है ही नहीं वापस आता है ना वो मुक्ति है ही

04:45:31:16 नहीं वो नहीं ये मतलब मुक्त में जैसे हम क्या करते हैं जब हम मुक्ति हम हमको मुक्ति प्राप्त होती है जीवात्मा को तो हम हम अपने आप को ब्रह्म स्वरूप हो जाते हैं ना ऐसा होता है कि ब्रह्म ब्रह्मे भवति तो इसका अर्थ क्या करते हैं हम कहते हैं ब्रह्मविद ब्रह्मे भवती तो ये लोग इसका अर्थ करते हैं कि जैसे एक ट्यूब है बड़ा सा मोटा सा तो उसके अंदर कोई आदमी बैठ जाए और वो बहुत छोटा हो और वो ट्यूब बहुत बड़ी हो वो चारों तरफ ट्यूब को देखेगा उसको यह लगेगा मान लीजिए छोटा सा माइक्रो ऑर्गेनिस्ट है वो एक ट्यूब के अंदर बैठा हुआ है चारों तरफ वो ट्यूब को देख रहा है ट्यूब बहुत बड़ी है ठीक है अनंत है उसके उसके सामने तो उसको लगेगा कि मैं ट्यूब हो गया हूं तो इनका यही अवधारणा है कि जब मैं योग करूंगा जब समाधि में जाऊंगा यम नियमा आसन प्राणायाम प्रत्याहार ध्यान धारणा समाधि इत्यादि से जब समाधि पर मैं पहुंच जाऊंगा तो मैं ब्रह्म के अंदर ऐसा मुझको प्रतीत होगा कि मैं ब्रह्म में चला गया हूं क्योंकि ब्रह्म सर्वव्यापी है और उसके यहां पे एक विनोद आ रहा है एक हासम बात आ रही है कि हमारी तो यह जो बंधन है वोह बंधन है इनकी मुक्ति बंधन है

04:46:47:09 हमारा जो बंधन है हमारा जो बंधन है वो भ्रम है और इनकी मुक्ति भ्रम है तो यही इस बात पर बहुत बार यह लोग उसको प्रतीत होता है यानी कि वो मुक्त है नहीं बस उसको बेवकूफ बन रहा है व वहा पर जी अच्छा इसके र अच्छा इसके ऊपर एक अलंकार समाजी से मेरी बात हुई थी मुक्ति के कांसेप्ट के ऊपर ही तो वो कहता है आपका जो ब्रह्म है वो एक समय पर साकार भी रहता है निराकार भी रहता है ऐसी कोई एक वस्तु बताओ इस पूरे ब्रह्मांड में जो साकार भी हो एक ही समय पर और निराकार भी हो तो मैंने कहा कि तुम ये मानते हो कि तुम्हारा ईश्वर सर्वव्यापी है तो कहा हां मैं कहा तु ऐसी चीज बताओ मैं कहा कि घड़ा है घड़े के अंदर ईश्वर है तो बोला हां मैं कहा घड़े के बाहर है ईश्वर उसने कहा हां मैंने कहा तुम चीज बताओ जो घड़े के अंदर भी हो एक ही समय पर बाहर भी हो तो फस गया तुरंत तो इनका यही कांसेप्ट है आधी अधूरी मतलब तुम कुछ भी बात करोगे तुम्हारा तुम एक व निश्चित आर्गुमेंट दे ही नहीं सकते और मुझे जहां तक आज तक मैंने पढ़ा मुझे तो आज तक शंकर अद्वैत से ज्यादा कोई लगी ही नहीं लॉजिकल चीज

04:48:02:15 अरे इनके अनुसार भाई बात य हो जाती है कि आपको एक्सेप्ट करना पड़ेगा जो प्राकृतिक नियम है उनको तोड़ने वाला ही ईश्वर है यह जो प्राकृतिक नियम है इन पर जो जिसका अधिकार है वही तो ईश्वर है वही तो ब्रह्म है अच्छा य यज्ञ पवित बात हुई तो मैं यह कहूं कि एक आचार्या थी एक आचार्य है नाम नहीं लूंगा उनका वो उनकी पत्नी जो है साथ में वीडियो बनाते हैं ठीक है उनकी पत्नी को भी काफी ज्ञान है पुराण इत्यादि पढ़ कर के बहुत ज्ञान उनको मिल गया है अर्जित कि उन्होंने तब से अपने तो बात ये कि वो बहुत अच्छा तर्क देती है इस विषय पर यग पवित पे कहती है कि कहती है कि मैं अपने पति के लिए 16 श्रृंगार धारण करती हूं मैं उनके लिए सिंदूर धारण करती हूं मंगल सूत्र धारण करती हूं तो क्या मेरा पति मेरे लिए य पवित्र नहीं धारण कर सकता बहुत सुंद कितना ये ये होता है एक परंपरा प्राप्त स्त्री ये जो समझे परंपरा को उसके अंदर यह पॉजिटिविटी आएगी उसके अंदर कुतर्क भाव नहीं आएगा अब पुरुष भी कहे कि तुम मंगल

04:49:17:20 सूत्र पहनती हो कां राती हो नथुनी पहनती हो हम भी पहने तब उसका उसका तुमको खंडन क्यों लगता है बात यह है और थो कर के सारी बातें एक तरफ है चमत्कार हम उतना मानेंगे जितना हमको सही लगेगा और यह जो विधि विषयक चीज है ये हम उतनी मानेंगे जितना हमको सही लगेगा ईश्वर को भी हम उतना मानेंगे जितना हमको सही लगेगा मोक्ष को भी हम उतना मानेंगे जितना हमको सही लगेगा क्योंकि जो अनादि काल से वेदा आदि शास्त्र सम्मत सिद्धांत है हमारी रुचि केवल उनका नाम उनके नाम का आलंबन लेने में है हमारी रुचि उनके तत्व उनके सिद्धांतों का आलंबन लेने में नहीं यह है और एट द एंड इस स्ट्रीम को आपकी बात तो पूरी हो गई होगी संभवत जी जी जी भैया जी हो गई अब क्या आगे क्या टीम को मैं बताते समय बता दूं कि हमने आज क्या-क्या जाना है जो मुख्य विषय था हमारे जो ऐसी पूर्व की ऐसी सामग्री इनको कहीं से प्राप्त हो गई हमारी इच्छा के बाहर हमारी जानकारी के बाहर जो कि जिसमें कि हम हमारा पूर्व का जीवन जिसको हम प्रस्तुत कर सक कर चुके हैं जन समान के सामने उसको इन्होंने अपने अनुसार प्रस्तुत किया और हमारे ऊपर कटाक्ष किए तरह-तरह के ऐसी

04:50:32:27 हमें जानकारी प्राप्त हुई उसमें अमुक अमुक नाम के लोग शामिल थे यह भी बताया गया मगर वो जब वहां पर वक्ता है अमुक नाम से बोलने वाले वो वही है जिनका वो नाम है वो उसके लिए हम वो नहीं है कि वो वो थे हमें तो अभी तक यह भी नहीं पता कि वो लाइव स्ट्रीम कौन से चैनल पर कहां पर हुई है दो दूसरी बात ये है जी मैं एक रख दू सबसे सबसे ज्यादा इंपोर्टेंट यज्ञो पवित पे मनुस्मृति का एक वाक्य है मैं वह दिखाना चाहूंगा सबको जिसमें मनु भगवान कहते हैं स्त्रियों के उपनयन के बारे में स्त्रियों का उपनयन क्या है तो बोलते हैं कि स्त्रियों का उपनयन उनका विवाह संस्कार है और उनके लिए क्या है तो बोले गृहस्थ जीवन का यापन करना ही उनके लिए विद्या है यह चीज जो है अंदर लिखी गई है अगर आपको पता ही होगा यह चीज हो सके तो भेजता आप दिखाइए कई वीडियो में प्रस्तुत किया है य प्रस्तुत किया यो उन्ही वीडियोस में मिल जाएगा जिन वीडियोस के कारण य ज्वाला भड़की है तो अब बात य आती है कि यह उन लोग ने किया क्यों उसमें हमें यह बताया गया कि उन लोगों ने इसलिए ऐसा किया कि हमने किसी एक संस्कार की जो

04:51:48:02 विधि थी उस पर एक प्रश्न कर दिया था उस पर एक टिप्पणी कर दी थी उनके अकॉर्डिंग हमने प्रश्न किया था कि जिन वस्त्रों में आप वो संस्कार की विधि जो है अपना रही है वो वस्त्र क्या वेदों में कहीं वर्णित है शास्त्रों में कहीं वर्णित है नहीं वर्णित है जो वर्णित है वो आपने धारण किए नहीं है क्योंकि वो महिलाओं के धारण करने योग्य नहीं है इससे यह भी पता चलता है कि महिला के लिए वो संस्कार वो विधि है ही नहीं दूसरी विधि है भगवत प्राप्ति की भगवान ने कहा ना 9 32 में भगवत गीता में कि तू मेरी शरण में आजा मैं देखूंगा व मैं तुझे सभी पापों से मुक्त कर दूंगा तो उन्होंने कहा जिनको जो यज्ञ पवित धारण नहीं कर सकते उनकी मुक्ति अलग तरह से होती है दूसरे रास्ते से होती है तो अब जब हमने उन पर यह प्रश्न किया क्या शास्त्र सम्मत तुमने वस्त्र पहने हैं क्या शास्त्र सम्मत तुमने चीजें धार की हुई है जो आप शास्त्र सम्मत होने का दावा कर रहे हो अपने संस्कार को शास्त्र सम्मत बता रहे तो इसके इसके प्रतिकार में उन्होंने हमारी जो सामग्री ऐसी जो हमने आज से सात आ साल पहले छ साल पहले कहीं डाल करके भूल गए हमारी जानकारी के बाहर किसी ने उठा कर डाल दी वो जांच का विषय उसको इन्होने बताया तुम क्या शास्त्री हो क्या हां भाई मैं शास्त्री नहीं हूं उस उस अंश में मैं शास्त्री नहीं हूं मैं कह रहा हूं वह

04:53:03:04 गलत है और मैं आगे से उसे नहीं करूंगा अब क्योंकि तुमने अपने संस्कार के क्या कहते संस्कार के तुलनात्मक दृष्टि में हमारी चीज को रखा है तो अब तुम भी मान लो कि तुम्हारा वो संस्कार शास्त्री नहीं था और आगे से तुम वैसा प्रयास कुतर्क नहीं करोगे दूसरी बात कि जो आपने प्रयास किया कि हमारी सामग्री का फायदा उठाकर हमें अप्रत्यक्ष रूप से यह दिखाने का कि देखो हमें तुम्हारी सामग्री मिल गई है अब देखना ज्यादा उच कोगे तो हम यह कर देंगे आगे वो कर धमकी भरा स्वर भी था उसमें तो पहली बात तो ये कि हमय सामग्री जैसा कि हमने बताया हम प्रस्तुत कर चुके थे दूसरी बात यह है कि हमने कभी भी उसको शास्त्रो चित धर्म धार्मिक स्वरूप के रूप में प्रस्तुत नहीं किया था तीसरी बात ये कि हम उसको गलत भी मान रहे हैं आप गलत मान लीजिए अपनी चीजों को चौथी बात यह है कि उसमें और आपके द्वारा प्रस्तुत करने में सिर्फ ये अंतर था हमारे प्रस्तुत करने में आपके प्रस्तुत करने में कि वो जो सामग्री थी उसमें हमारे घर की मात शक्तियां थी और कहीं ना कहीं आपने अपने उस पूरे वृतांत में यह समझाने का प्रयास किया यह दिखाने का प्रयास किया कि आप कितने नीच है कि किसी अपनी वर्चस्व होता को सिद्ध करने के लिए अपनी कुतर्कों को सिद्ध करने के लिए सामने वाले का खंडन जब हम सिद्धांतों से नहीं कर

04:54:18:04 पाएंगे तो हम उसको उसके मातृ शक्ति की छवियां लेकर के राए धमका एंगे ठीक है तो यह आपने वहां के पर आपने जो वो सब जो कु कुतर्क किए उससे आपने प्रयास किया बाकी व्यक्तिगत बहुत से आक्षेप किए और इसी इसी इसी क्रम में फिर आपने वो कैफीन वाला मुद्दा उठाया केक वाला मुद्दा उठाया और जो है नचने आपका हमने आपका कैफीन देखा हमने आपका केक देखा और हमने आपका नाच भी देखा सरे आम अच्छा फिर इसके बाद क्या है कि इसके बाद जब हम आगे बढ़ते हैं तो हमारा हमारी ध्यान जाता है एक जो है वास्तविक उद्देश्य नाम से एक व्यक्ति घूमता है कि मैं बहुत वास्तविक उद्देश्य वाला व्यक्ति हूं मेरा जो इंटेंशन है वो वास्तविक है है ना तो उसकी बात करें वो बनता है कि हम हिंदुओं के बहुत वो है क्या कहते हैं हिमायती है हिंदुओ के हम बहुत बड़े धर्म रक्षक है मगर वस्तुतः वो कुछ नहीं वो हिंदू भी सिद्ध नहीं होगा जिस दिन हमसे कभी वार्ता हो जाएगी वैसे होगी नहीं क्योंकि उनके अंदर इतना साहस नहीं अगर सिद्ध अगर वार्ता होगी हिंदू भी सिद्ध नहीं होगा क्योंकि वो जिस जिस चीज का आलंबन लेगा उसी उसी चीज का वो खंडन कर देगा वेदों का भी आलंबन लेगा वेदों का भी खंडन कर देगा निरुता चार का आलंबन लेगा निरुक्त का भी खंडन कर देगा

04:55:33:22 ठीक है तो वो ऐसी स्थिति में है उसका दोगलापन इससे सिद्ध होता है कि आपस में मत लड़ो और जो है बाहर वालों का प्रतिकार करो मगर जब उसके विचारधारा पर कोई कोई टिप्पणी कर देता है तो वो उसके विरुद्ध वीडियो बनाने लगता है कोप लीला मोग लीला ये सब करके टिप्पणियां लगाना है फिर दोगलापन दिखाता है कि आपस में मत लड़ो इसी क्रम में आगे एक व्यक्ति है अंडर कवर्ड उनका गुंडा उसके कुछ वक्तव्य थे तो उसका हमने बताया कि उसको लात मार कर के उसी की संस्थाओं से निकाल दिया गया डिक्लेयर कर दिया गया उसको अपना नाम बदलना पड़ा माथा पीटना पड़ा उसको आवान सपनों में दिखाई देने लगा उसकी ये स्थिति है और उसने बद्दे बद्दे वो तो है दुराचारी वो अपनी व्यक्तिगत जीवन में भी कैसा होगा अपनी बहन बेटियों के साथ अपनी मातृशक्ति को कैसे देखता होगा अपने घर की मांओं को कैसे देखता होगा वो कुछ कहा नहीं जा सकता है तो ये उसकी स्थिति है उस गुंडे का भी इन लोगों ने सहारा लिया है जो अनाधिकृत व्यक्ति है जिसका कोई पहचान नहीं है कोई उसको स्वीकार नहीं करता कि वो हमसे जुड़ा हुआ है इसी क्रम में आगे एक और था जो कलयुग का नीच योगी है तो उसने यह कहा था कि सनातन धर्म को बदलना चाहिए समय देश काल परिस्थिति के अनुसार तो इस पर हमारा उत्तर यह था कि जो बदल जाए वह सनातन नहीं है समझ में आया और जिस जिस देश काल परिस्थिति में जिस जिस धर्म का आलंबन लेना इसकी व्यवस्था ईश्वर

04:56:49:01 ने पहले से ही कर रखी है आप और हम कोई नहीं होते उसके संविधान में चेंज करने वाले और यदि बदल जाना है तो कल को क्या आप इस स्थिति को स्वीकार करोगे कि माता को माता की दृष्टि से देखना बंद कर दोगे पत्नी की दृष्टि से देखना चालू कर दोगे इसी क्रम में एक नीच व्यक्ति और था जो वैज्ञानिक है जो दार्शनिक है वो व्यक्ति बोलता है उसने भी इस में सबका साथ दिया तो वो व्यक्ति बोलता है कि हमने आवान आवान हमसे भय खाता है जबकि आवान से आपने जब एक बार चैट किया पहली बात तो डायरेक्ट आवान से चैट नहीं किया किसी और से चैट किया उसके छोटे भाई से चैट किया जो आवान को पता ही नहीं लगा कि ऐसी भी कोई चैट हो रही है और उसके बाद जब आपने आवान से चैट किया तो आवान जब आपसे आपका परिचय पूछ रहा तो एक महीने बाद आप परिचय बता रहे हो और फिर ये चाहते हो कि आवान और उसम पचय स्पष्ट नहीं कर रहे हो कह रहे हो मेरा पेज देख लो जाकर के तो भाई हम आपके कोई क्या शरणार्थी है शरणागति वाले व्यक्ति हैं जो हम जाकर के आपकी चेक करें आपको अपना परिचय बताना है तो बताओ नहीं बताना है तो मत बताओ तो फिर वो भय खा रहा है भय खा रहा है तो इसमें भी हमने जवाब दिया कि भाई गौतम खट्टर जी का एक विषय में हमारे पास कुद संदेश आया था उन्होंने हमको संदेश भेजा हमने उनका जवाब दिया और आज तक वो नहीं देख पाए हमने ये समझा व्यस्तता के कारण नहीं देख पाए होंगे

04:58:04:08 मगर आपका सिद्धांत है कि यदि व्यक्ति जवाब नहीं दे रहा है तो इसका मतलब भगोड़ा है भह खा रहा है तो उस सिद्धांत के अनुसार आपको उनको कहना चाहिए रप कहना चाहिए भगोड़ा कहना चाहिए तो क्या आप कहोगे नहीं कहोगे तो आप दोगले हैं दोगला कौन है राम और भाषित इसका विरोध करने वाला दो प्रकार की बातें ना करना वाला तो जब राम का विरोध हो गया तो धर्म का विरोध हो गया धर्म का विरोध हो गया तो कौन हो गया धर्मे नीना पशु भी समाना सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में कौन माता है कौन बहन है कौन पत्नी है जो यह नहीं जानता उस उसको कहा जाता है पशु और आप क्योंकि राम के विरुद्ध हो गए दो प्रकार की बातें करने वाले तो आप भी पशु सिद्ध हो गए तो इसका अर्थ क्या निकलता है वो आप भली बात ही समझते हैं तो यह सारे एक निचोड़ जो चार पाच घंटे की हमने बातें की है वो है और बाकी हमने ठुमके देखे नीच के नीच कैसे नाचते हैं रास्तों पर और बाकी अगर किसी को चर्चा करनी है किसी वैचारिक मतभेद के निमित्त तो एनी टाइम एनी वेयर एनीबडी आई एम रेडी शिवांश इज रेडी आवान इज रेडी और एक बात और कहूंगा कि हमारा नामा स्त्र चल रहा है जिसमें हम सब भाई मिलकर के नाम जपते हैं तो ईश्वर के नाम का जप करने के लिए

04:59:19:09 और संघ का बल प्राप्त करने के लिए आप हमसे जुड़ सकते हैं 7408 30169 पर व करिए किसी भी प्रकार की वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा करनी है तो आप हमसे संपर्क कर सकते हैं आपको यदि धर्म रक्षा अभियान में हमारा साथ देना है तो आप हमसे आप हमसे संपर्क कर सकते हैं और ध्यान रहे यहां पर मैं जो नीच शब्द बार-बार उपयोग में ला रहा हूं वो इसलिए ला रहा हूं कि किसी के घर की मातृ शक्तियों की जो प्रतियां है छवियां है उनका उपयोग किया जा रहा है उसको दबाने के लिए उसकी आवाज को कम करने के लिए तो उस रूप में ऐसे हीन आचरण से युक्त व्यक्ति को मैं नीच कह रहा हूं यहां पर वो ट्रेन के डब्बो वाला नीच नहीं है या फर्स्ट फ्लोर सेकंड फ्लोर में नीचे कौन है ऊपर कौन है वो वाला नीच नहीं है या फिर श्रेष्ठ और निम्न वाला य वो नीच है जो नीच ही है जो दो नीच होते हैं एक होता है व्यवस्था मूलक और एक होता है घृणा मूलक तो ये घृणा मूलक वाला नीच है व्यवस्था मूलक वाला नीच नहीं है घृणा मूलक वाला नीच है जो ऐसे हीन आचरण से युक्त है जहां पर किसी के घर की मातृ शक्तियों का उपयोग हो रहा है उसको उसकी आवाज को दबाने के लिए और वहां पर वो सब तमाशा देख रहे हैं हिजड़ों की तरह और वहां पर अपने अपने कुतर्क कर रहे हैं क्योंकि सामना

05:00:34:20 करने का साहस किसी में है नहीं है ना तो इसीलिए मैं बार-बार कहता हूं कि मत पड़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में है ना तो आपको ध्यान रखना चाहिए कि हम क्या है कौन सा हमारा धर्म है कौन से हमारे सिद्धांत है और मैंने सदैव सैद्धांतिक प्रश्न किए हैं अगर उनका उत्तर कभी प्राप्त हो जाए तो वह लेकर चले आइएगा क्या अलंकार समाज के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है वह सर्वशक्तिमान है कि नहीं और उसने जो अपनी कपोल कल्पित कहानियां गड़ी है वो कहानियां उनको कहां से प्राप्त हुई कैसे ईश्वर से वो कैसे आई अब तक है ना और जो लोग यह कहे कि ईश्वर ने डायरेक्ट द है उनको भी मैं बता दूं जो लोग यह कहे कि ईश्वर ने डायरेक्ट द है उनको भी मैं यह बता दूं कि कल तक आप यह कह रहे थे कि ईश्वर ने नहीं दिए वह हमारे पास ऋषि परंपरा से आई है तो फिर अब यहां पर आपके दोगलापन बाहर आ जाएगा सभी को जय श्री राम जुड़ने के लिए सभी को आभार सभी को जय श्री राम

05:01:40:18 आ [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Live 5:01:50 · 04 Nov 2024

अवैध समाज की छिछोरी चाल #vedpuran #sanatandharma

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A · Live Discussion with Rampal follower क्या ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी नहीं...
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