⬜ Not used yet · 00:00:01:20 – 00:23:30:04 (23:28)
00:00:01:20 [संगीत] सभी को जय श्री राम जो अभी वर्तमान में एक प्रकरण चल रहा है और वैसे भी इस समय हमें बहुत ज्यादा अलग से समय नहीं मिल पा रहा है कि जो वीडियो शूट कर पाए जैसे सभी के घर में पर्व है त्यौहार है इस कारण जो हमें पहले से जो क्रम में चल रही चीजें हैं उन्हीं को ही समय दे पा रहे हैं
00:00:38:07 तो संतोष कुमार जी आज हमारे साथ हैं संतोष जी अपना कैमरा ऑन कर लीजिए आपका चेहरा दिख नहीं रहा है सर कैमरा जी आवाज कट रही है आपकी आवाज कट रही है जय श्री राम काव्य
00:01:18:22 कवे जय श्री राम तो आज हम लोग और कुछ विवेचना करने वाले हैं उस बारे में कि कबीर अ परमात्मा क्यों क्यों नहीं है है ना कबीर की भक्ति मोक्ष दायक नहीं है और एक बात और मैं कहना चाहूंगा हमारे जितने भी समर्थक हैं वो जो हमारे इस अभियान से सहमत है उनको मैं स्पेशली कह रहा हूं कि यह आपका दायित्व है इस चैनल की सुरक्षा क्योंकि इसने निर्विवाद रूप से जहां पर भी कहीं पर धर्म पर धर्म के किसी किसी भी रूप में धर्म को हानि पहुंचाने वाली शिक्षा धर्म के नाम से प्रचारित प्रसारित की जा रही है तो उस चैनल इस चैनल ने उस शिक्षा का प्रतिकार किया है तो ऐसा हो सकता है और हो भी रहा है कि इस चैनल को बंद करवाने का प्रयास कि जाए तो यह आप सबका दायित्व है
00:02:33:28 कि आप की दो चीजें अभी तक आज तक मैंने कभी नहीं मांगा आपसे मगर आज मैं मांग रहा हूं आप जब भी कोई वीडियो देखें तो उसको लाइक करें उसको शेयर करें और यदि आपके पास यह 9 रप हैं तो आप इस चैनल की मेंबरशिप लीजिए जिससे कि एक मैसेज जाए य को कि यह चैनल एक इपोर्ट मैसेज है इसको भी लोग पसंद करते हैं तो जब उनके सामने बहुत सारे लोगों ने नेगेटिव थॉट्स उनके डाले हो तो हमारे पॉजिटिव थॉट्स भी उनके सामने हो कंपेयर कर सके कि हा भाई इतने लाइक भी आ रहे हैं इस कंटेंट को लोग पसंद कर रहे हैं और हमारी हमारी कोशिश तो ऐसी होनी चाहिए कि उसी को ही उसी का पल्ला हरी हो जाए तो ये आप लोगों का दायित्व है धर्म रक्षा के निमित्त एक और आपका प्रयास है यह कि आप इस कंटेंट को शेयर करिए अगर इस पर और अपने कंटेंट बनाने वो बनाइए लाइक जरूर करिए क्योंकि य को पता लगेगा अगर उनके उनको कहीं से मैसेज आ रहा है किय गलत वीडियो है तो आपके लाइक से उसको ये पता लगेगा नहीं लोगों को पसंद भी आ रहा है
00:03:49:26 है ना तो ये सक्रिय धर्म रक्षक की भूमिका निभाएं दायित्व समझे और अगर 9 कर सकते तो मेंबरशिप ले इससे भी पता चलेगा कि भाई लोग इसको देख रहे हैं सुन रहे समझ रहे हैं जुड़ रहे हैं क्योंकि हम अपने वीडियोस में दर्शन विज्ञान और व्यवहार की सीमा में रहकर ही बात करते हैं मगर फिर भी अगर नेगेटिव खबरें पहुंचाई जाएंगी तो क्या होगा कि चैनल पर लोड पड़ सकता है चैनल को प हानि पहुंच सकती है बहुत सी चीजें हैं हो सकती है और प्रयास किया भी जा रहा है इसलिए आप लोग ध्यान रखें कि आपका य दायित्व है मेंबरशिप लीजिए लाइक करिए शेयर करिए यह दायित्व ध्यान रखिए अपना हमारे आज के आगंतुक जो है चर्चा के लिए जो आने वाले थे वो आ चुके
00:04:45:12 हैं दास जी आपका चेहरा नहीं दिख रहा है जय श्री राम राम राम जी सत साहेब जी जय श्री राम जी आपका परिचय दे दीजिए दास जी पहले सर मैं हेमदास दास और जयपुर से हूं और मैं भी कबीर पंथी हूं आप ना एक बार यह जो है नाय हेडफोन को हटा के बात करिए जरा ठीक है जी बोलिए मैं इसको रख देता
00:05:41:20 हूं हां जी आवाज आ रही है अब पहले से तो कम आ रही है पहले ज्यादा ठीक थ पहले ज्यादा ठीक थी आवाज आवाज एक अब ठीक है अब ठीक है ठीक है ठीक है चलिए हां जी आ रही है जी तो हमारी कल चर्चा चल रही थी जो उसके बाद ही आपने हमें मैसेज किया था कि हमें भी एक बार जोड़े सर आपकी आवाज कम आ रही है मेरी आवाज कम आ रही है भाई कोई कमेंट करके बता द मेरी आवाज कम आ रही है क्या कमेंट कर दे
00:06:26:04 कोई ठीक है आवाज मेरी आवाज तो ठीक आ रही है मुझे बिल्कुल कम आ रही है आपकी आवाज पता नहीं आप एक बार लीव करके दोबारा आ जाइए तो अभी हम लोग और भी कुछ बातें करेंगे क्योंकि अभी व पूरी नहीं हो पाएंगी तो इसलिए अभी करना ठीक नहीं है अब आप इस समय शिवांश द्विवेदी एक्सपोज डाल कर के अगर देखेंगे य पर सर्च करेंगे तो आपको भरा पड़ा सेक्शन पूरा पूरा सब तरफ से कारवाही शुरू हो गई है है ना तो इसलिए यही वह समय है जब आप लोगों को भी एक्टिव रहना है क्योंकि मुझे अपनी चिंता नहीं है मुझे इस अभियान की चिंता है इस वैचारिक क्रांति की चिंता
00:07:24:25 है जी अब आ रही है आपको हा बिल्कुल आ रही हा तो मैं यह कह रहा था कल हमारी एक वार्ता हो रही थी रामपाल जी के शिष्यों के साथ और उस वार्ता वो वार्ता बीच में ही अधूरी रह गई और जिसके बाद ही मेरे ख्याल से आपने हमसे संपर्क भी किया है कि एक बार हमें भी जोड़े अपनी लाइफ में हा जी हा तो मैं वही से कंटिन्यू करना चाहूंगा मैं आपसे यह जानना चाहता हूं कि जो कबीर है वो अजर अमर सर्वशक्तिमान है नहीं इस बारे में आप जी बिल्कुल है सर अच्छा तो जो अजर है उसका अर्थ आप क्या लेते हैं अजर का मतलब होता है जिसका जन्म नहीं हुआ अजन्मा हो अजर का अर्थ य होता है हां मतलब जैसे जो अविनाशी परमात्मा होते हैं ना वो चार दाग से नहीं आते मतलब जैसे जैसे सभी जीव की उत्पत्ति चार कारणों से हुई है जैसे
00:08:40:19 अंडज जर ज और मतलब कि कबीर जी पर आयु का प्रभाव पड़ता है कि नहीं पड़ता है यह पूछ रहा हूं सर पहले तो हमें यह समझना पड़ेगा कि कबीर जी है कौन तब ये चीज समझ में आएगी कि आयु उन पर प्रभाव डालती है या नहीं नहीं डालती है कि नहीं पहले वो बताइए ना वो तो है कौन तो वो तो उस पर हम लोग चर्चा कर ही रहे हैं काफी दिनों से हा वो देही रूप में अगर आते हैं तो उस परे उम आयु लगती है च आयु दिखती है मतलब दे जब वो लीला रूप में आएंगे दहिक रूप में आएंगे तो जो प्राकृतिक नियम है उन पर लागू हो जाएंगे उन पर लागू होते अच्छा क्योंकि ये नियम जो सारे देही पर ही लागू होते हैं आत्मा पर नहीं होते ये कहां पर लिखा है कि जब वो लीला में आएंगे तो उन पर नियम लागू होंगे लीला से बाहर नियम लागू नहीं है यह जैसे मैं आपको यह गीता के माध्यम से बताना चाहूंगा कि जैसे श्री कृष्ण भगवान ने अर्जुन से कहा कि हे अर्जुन तेरे और मेरे अनेको जन्म हो चुके हैं तू नहीं जानता मैं जानता
00:09:56:15 हूं मैं आपको एक बात बताऊ लीला मतलब कि हम यह कह रहे हैं कि हमने एक लीला यानी नाट्य मंच तैयार किया और उस नाट्य मंच के ऊपर जाकर के हम बहुत से काम नहीं कर पाते मगर इस ये जो वास्तविक जीवन है इसमें हम बहुत से काम है जो कर लेते हैं मगर वही काम हम जाकर के वो जो नाट्य मंच है जो केवल एक नाटक है है ना लीला का मतलब यही हुआ ना हा लीला का मतलब नाट्य मंच हुआ तो जो जो वास्तविक संसार नहीं हम उसके अंदर जाकर के तो सीमित है और उससे बाहर हम असीमित है आप यह कह
00:10:39:13 रहे हा जी हा देही रूप में हम सीमित है लेकिन वो लीला लीला के रू लीला में आकर के ईश्वर ईश्वर जो है सीमित हो जाता है प्राकृतिक नियमों के अधीन हो जाता है मगर लीला से बाहर वो स्वतंत्र है अच्छा तो वो जो लीला रूप में आकर के वो जो बाधित हो जाता है पहले तो वो मुझे आप प्रमाण दिखाइए कि वो बाधित होता है लीला रूप में आकर वो प्रमाण देखो सर सैकड़ों प्रमाण हमने य देखे कि जब भी कोई भी चाहे कोई सा भी कोई से भी इष्ट है कोई से भगवान है जब भी इस धरती पर अवतरित होते हैं उनको वही सारे कर्म करते हैं मैं आपको एक एक बात याद दिलाना चाहूंगा कि अजर का अर्थ है जिसे कभी बुढ़ापा ना
00:11:38:28 आए स्क्रीन पर देख लीजिए यह नीचे लिखा है अजर का अर्थ दिख रहा है सबसे नीचे ठीक है जिसे कभी बुढ़ापा ना आए अजन्मा नहीं है अजर का अर्थ जिसे कभी बुढ़ापा ना आए जवान सदा जवान रहने वाला अजर है ना पहली बात अब दूसरी बात आप यह कह रहे हैं कि मैं जो अपनी वास्तविक लाइफ में तो फ्री हूं और जो मैं एक लीला रचता हूं जिसमें मुझे सिर्फ नाटक करना है उसमें मैं बाधित हूं सर वो वो हम जैसे मानुष को गुरु रूप में समझाने आए हैं कि जैसे मैं हूं ना वैसे ही तुम हो तुम अपने स्वरूप को भूल गए तुमने अपने स्वरूप को केलिए केवल यह देही मान रखा है लेकिन तुम्हारा स्वरूप कुछ कोई और है जैसे गीता जी ने कहा किन तो तो और में शरीर नहीं है तो और में एक आत्मा है तो हम सब भी आत्मा है मतलब कुल मिला के कहा जाए कि जो वो है कबीर वो अजर नहीं है हां आत्मा जन्म नहीं लेती ना सर नहीं नहीं
00:12:54:00 मैं कह रहा हूं कबीर जी जो देह में आते हैं यहां प देह वो अजर नहीं बुढ़ापा में आता है उनको हा व शरीर दिखता आत्मा वो उन्होंने अपने आप को शरीर नहीं दिखाया उन्होंने कहा है कि जैसे तुम अपने स्वरूप को भूल गए कि मैं जो मेरा जो तु जी आप रामपाल जी के शिष्य है क्या जी हम रामपाल जी के शिष्य रह चुके हैं रह चुके हैं और हा अभी नहीं है अभी नहीं है अभी नहीं है तो आप कबीर जी की बात रखने आए हैं जो रामपाल जी भी रामपाल जी के भी अगेंस्ट में है वो बात ऐसा कुछ है हां बिल्कुल अच्छा तो हमें हमने आपको तो ऐसा कुछ कहा नहीं था तो आपको आने की आवश्यकता ही नहीं थी नहीं सर वो मैंने चर्चा ही सुनी थी क्योंकि हम अभी समझ ही नहीं पा रहे कि कबीर है कौन कबीर को हमने एक सरी रूप में मान रखा है हमने चैनल है देखिए ऐसा है कबीर है कौन के बारे में हमने बात वो जो आपका जो विषय है कि कबीर को लोग जाने स्पिरिचुअल मार्ग जो भी आप बताएंगे कबीर को फॉलो करने वाला वो एक अलग चीज है ठीक है आप आप यह कह रहे हैं कि कबीर परमात्मा
00:14:09:07 है कि नहीं पहले बताइए अब आप आ गए इसलिए बात कर रहा आपसे बिल्कुल बिल्कुल परमात्मा है लेकिन परमात्मा के परमात्मा के बारे में भी आप कुछ व्याख्या सुनेंगे तब पता लगेगा परमात्मा कहते किसको है पहले परमात्मा परमात्मा के लिए व्याख्या आप किस आधार पर बताएंगे आपकी अपनी सोच है या कोई ग्रंथ है या क्या है देखो हम कबीर साहिब की बताए माध्यम से हम बताना चाह रहे आपको उन्होने परमात्मा कहा किसको है परमात्मा होता सुनि मतलब वेदों के आधार पर नहीं बताएंगे आप कबीर जी के बताए हुए मार्ग के आधार पर बताएंगे हम एक सिर्फ एक गीता जी के आधार पर और एक कबीर साहिब के आधार पर दो आधार पर बताए गीता जी क्या है भाई साहब गीता के बारे में थोड़ा बताइए मुझे क्या है वो गीता जी में कुछ आत्म ज्ञान है नहीं नहीं लक्षण मत बताइए तस्त तथ लक्षण मत बताइए स्वरूप भूत लक्षण बताइए गीता जी के स्वरूप भूत लक्षण का मतलब समझ लीजिए कि गीता जी क्या क्या करती है उस उसके अंदर क्या क्या है वह क्या क्या उनके यह सब तथ लक्षण है वो क्या है वो स्वरूप
00:15:24:07 भूत लक्षण है आप मुझे गीता जी का वो बताइए कहां से आया कहां से उद्गम है क्या वो उसके बारे में बताइए सर मैं इतना उद्गम वगैरह यह नहीं बता सकता मैंने तो जो गीता जी का मैं बता देता हूं आपको गीता खुद ये कहती है कि वो वेदों का मार्ग प्रशस्त करती है गीता खुद ये कहती है कि वह वेदों का मार्ग प्रशस्त करती है पूरी गीता में कई बार वेदों का नाम लेते हुए यही वैदिक मार्ग है यही वेदों का धर्म है यही वेद है बोला जाता है ना पूरी गता में कई बार बोलिए तो हम वेदों की सीमा के बाहर जाकर के तो गीतो गीता का अर्थ नहीं कर सकते जब गीता खुद ये कह रही है कि हम वेदों को मानते हैं ठीक है गता तो हम ये नहीं कह सकते तो हम यह नहीं कह सकते कि नहीं भाई हम वेद को नहीं मानते हम गीता को मानते हैं सर देखो मैं मैं सिर्फ मोटा मोटा ऐसे मोटा मोटा ज्ञान समझा आपको बताना चाहता हू अब देखिए अब बात ऐसी आ गई मोटी मोटी मोटी बात ऐसी आ गई जो शास्त्र आप मान रहे हो जिस तरह से
00:16:39:07 उस रूप में हमें नहीं स्वीकार है और जाहिर सी बात है कि जिस रूप में हम शास्त्र को मान रहे हैं उस रूप में आपको शास्त्र स्वीकार नहीं है वेदों के आधार पर गीता और वेद आपको स्वीकार नहीं है आपको स्वतंत्र रूप से गीता स्वीकार है है ना जी अच्छा अब मैं ये कहूंगा कि अब सीधे-सीधे परिभाषा पर आ जाते परमात्मा की तो जब आप ये कहते हैं कि परमात्मा क्या है तो सबसे पहले क्या है पर जाने से पहले हम यह तो पता करें कि परमात्मा है आपके अनुसार बिल्कुल है तो आपके अनुसार परमात्मा है यह कैसे सिद्ध होता है बताए ये ऐसे सिद्ध होता है कि कबीर साहिब ने एक वाणी के माध्यम से बताया है कि मोग कहां ढूंढे बंदे मैं तो तेरे पास वो हमारे पास मेंही है और जैसे परमात्मा के परमात्मा यानी सबसे श्रेष्ठ आत्मा को परमात्मा कहते हैं हम अभी आत्मा है और हम जैसे किसी गुरु की शरण में जाकर जब हम कोई कुछ भक्ति करने लग जाएंगे तब हम महात्मा हो जाएंगे
00:17:54:28 और फिर जब हमारे सारे विकार दश इंद्रियों पर जब हम काबू कर लेंगे तो कबीर साहब ने ने कहा कि तू क्या कहे कबीर कबीर साहब ने भी ये नहीं कहा कि तुम मेरी पूजा करो कबीर साहब ने अपने आप को कभी नहीं कहा कि तुम मेरी पूजा करो उन्होंने तो ये कहा कि जो मैं ज्ञान दे रहा हूं तुम उसको अपनाओ और मुक्ति पाओ उन्होंने तो खुद ने मना किया है कि मेरी पूजा मत करो और कभी आपसे हमारी कोई आपत्ति नहीं थी मगर आप क्योंकि आ गए इसलिए मुझे आपका केवल जहां जहां पर जहां जहां पर वैदिक मार्ग के अगेंस्ट जाएंगे वहां मुझे आपको बोलना पड़ेगा मैं आपसे पूछ रहा हूं सबसे पहले तो जिस पर चलने की बात की जा रही है यह बताइए तो कि कोई व्यक्ति उस मार्ग पर क्यों चले कोई व्यक्ति दूध लेने जा रहा है कोई व्यक्ति दूध लेने जा रहा है बिल्कुल उसको उसको व कारण तो बताइए कि वह कबीर के बताए हुए मार्ग पर क्यों चले कबीर के बताए मार्ग पर अपने जीवन और मृत्यु के जो चक्कर है इसको हमेशा हमेशा के लिए खत्म करने के लिए चले अपने मुक्ति के लिए चले ठीक है मुक्ति किससे किस किस चीज से मुक्ति जैसे लख चौरा से मुक्ति हमारा यहां इस जीव किसी भी शरीर में आना ना हो और
00:19:10:07 और हम इस मोह बंधन से हमेशा हमेशा के लिए मुक्त हो जाए मुक्त मुक्ति के लिए तो अब जब हम यह कहते हैं कि तुम अपनी मुक्ति के लिए काम करो तो सबसे पहले हमें उसको यह तो बताना पड़ेगा फलाना मुक्त है जो मुक्त हो गया वो तो दिखेगा ही नहीं तो वही तो मैं कह रहा हूं आप आपको सिद्ध करना होगा कि परमात्मा नाम की कोई चीज है दुनिया में यही तो प्रॉब्लम है अगर आप यह कह देंगे कि परमात्मा भी बाधित है तो परमात्मा के होने और ना होने का कोई औ चित ही नहीं बचता ना नहीं बाधित नहीं है ना वो बाधित आप कह तो रहे व अजर नहीं है हा बूढ़ा होता थोड़ी है परमात्मा कोई बूढ़ा थोड़ी होता है ज ब होता है कह रहे बूढ़ा होता है नहीं मैंने नहीं कहा मैंने नहीं कहा कि वो बूढ़ा होता है आप उसको शरीर मान रहे हो इसलिए आपको बूढ़े दिख रहे हैं हम उनको शरीर नहीं मान रहे हम उनको एक आत्मा मान रहे हैं परमात्मा मान रहे इसलिए जो आप जो आत्मा उनको मान रहे हो वो तब मान रहे हो ना जब वो शरीर में नहीं है बिल्कुल तो इसका मतलब है आपको पहले उसका अस्तित्व तो सिद्ध करना होगा कि दुनिया में कोई ऐसा है जो जीवन और मरण के चक्र से छूट गया
00:20:25:10 है दुनिया में कोई ऐसा है दुनिया में कोई ऐसा है जो सुख दुख के द्वंद से आजाद हो गया है हो गए ना नानक साहब बिल्कुल नानक साहब हो गए ये भाई साहब फिर देखिए अब क्या हो रहा है अब आप अपने ग्रंथ ला रहे हैं आप अपने ग्रंथ लाएंगे मैं लाऊंगा आप नहीं मानोगे ना तो आप अपने ग्रंथ ना लाइए हम सिर्फ अब तर्क प बात कर रहे हैं वो बताइए सर ग्रंथ क्यों जैसे कई जैसे महापुरुष हैं सब जैसे पहले पुराने पुराने जो भी महापुरुष सब मुक्त हो गए के ग्रंथ हमारे भी है वो क्यों ना माने जाए आपके क्यों ना माने जाए नहीं ग्रंथ ग्रंथ मैं ये नहीं कह रहा कि ग्रंथ में सारा सत्य नहीं है ना सत्य है लेकिन कहा मैं कह रहा हूं जितना सत्य आप बता रहे उतना हम क्यों मान ले हम अपने ग्रंथों को क्यों ना
00:21:19:09 माने तो फिर आप अपने को मानो हम अपने को माने हमने तो कहा ही नहीं कि आप अपने आप को आक के सिद्ध करो तो फिर चर्चा करने का तो कोई उचित नहीं हैने तोहा है पहले आदमी जान लेने जाने का कारण आपको जाने से पहले कुछ बेसिक कांसेप्ट बता देता हूं असतो मा सगम तमसो मा ज्योतिर गम ठीक है इसमें जीव की जो वास्तविक चा है मुझे असत से सत की ओर ले चलो बकल मुझे
00:21:58:19 मृत्यु से अमरता की ओर ले चलो मुझे क्या कहते अंधकार से उजाले की ओर ले चलो जीव की मूल वास्तविक चा है इस चा को अगर हम सरल शब्दों में परिभाषित कर दे तो एक जीव के अंदर भी कभी ना मरने की चा विद्यमान है प्रत्येक जीव के अंदर कभी ना दुखी होने की चा विद्यमान है बिल्कुल और सदा आनंदित रहने की चा विद्यमान है तत चित आनंद विद्यमान है एक नास्तिक व्यक्ति जो यह कहता है संसार में कोई ईश्वर नहीं है वह भी कभी-कभी ऐसी इच्छा करता है विज्ञान के विपरीत जाकर के जीना चाहता है विज्ञान के विपरीत जाकर के अपने माता-पिता को सुरक्षित देखना चाहता है विज्ञान के विपरीत जाकर के बारिश को सोचता हैय कम हो जाए विज्ञान के विपरीत जाकर के वो सोचता है कि ये जो कल का मैच है वो भारत जीत जाए विज्ञान के विपरीत जाकर के वो भविष्य देखना चाहता है विज्ञान के विपरीत जाकर के वो भूतकाल में जाना चाहता है प्रकृति के सारे नियमों को तोड़ देने वाला बनना चाहता है प्रकृति के अधीन ना
00:23:13:22 रहने वाला बनना चाहता है जीव की इस वास्तविक चा से ही यह सिद्ध होता है कि संसार में कोई एंटिटी है जो प्रकृति के नियमों के नीचे नहीं है क्यों हमारे
✅ This part is already used · 00:23:30:04 – 00:23:35:16 (0:05)
→ Used in: A · Live रामपाल के जाल में पीड़िता #तत्त्वदर्शीसंत #rampaljimaharaj at 2:30:58 ↗
00:23:30:04 अंदर भूख होने से ही यह सिद्ध हो जाता है कि दुनिया में खाना है हमारे अंदर प्यास होने से
⬜ Not used yet · 00:23:35:16 – 01:34:03:13 (1:10:28)
00:23:35:16 ही सिद्ध हो जाता है कि दुनिया में जल है हमारे अंदर देखने की क्षमता से सिद्ध हो जाता है कि देखने का जो विषय है दृश्य उसका अस्तित्व है सुनने का जो विषय है आवाज उसका अस्तित्व है तो जिस प्रकार देखने की क्षमता होने मात्र से दृश्य का अस्तित्व डंके की चोट पर सिद्ध होता है उसी प्रकार से कानों कानों का जो विषय सुनने की क्षमता का जो विषय है आवाज उसका अस्तित्व सिद्ध हो जाता है इसी प्रकार से प्रत्येक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी व्याप्त सत चित आनंद की जो चा है उसी से सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर का अस्तित्व सिद्ध हो जाता है यह तो हुआ परमेश्वर का अस्तित्व सिद्ध अब यहां पर एक बात आई कि जो प्रत्येक मनुष्य है वो प्रकृति के सभी नियमों से मुक्त होना चाहता है सभी नियमों से मुक्ति नहीं वो कंट्रोल करने वाला बनना चाहता है जब वो कह रहा है बार ज्यादा हो रही तो कम हो जाए जब वह कह रहा है धूप ज्यादा पड़ रही तो कम हो जाए तो ये क्या है उसके अंदर प्रकृति को कंट्रोल कर लेने की चा प्रकृति के ठीक विरुद्ध जाने की मूल चाहा उसकी विद्यमान है संसार यदि
00:24:50:19 दुखम है तो उसको सुखमय जीना है संसार यदि मृत्यु वाला है तो उसको अमर होना है संसार यदि अज्ञ तो उसको चित होना है तो जब उसके अंदर यह सारी चा विद्यमान है प्रकृति के नियमों से मुक्त होने की तो इसका अर्थ है जो हमने अभी बताया कि उसकी चाह सेय सिद्ध होता है कि संसार में कोई सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर है इसी प्रकार जब उसके अंदर यह चा विद्यमान है प्रकृति के नियमों के अधीन ना होने की तो इसी से सिद्ध होता है कि संसार में कोई है जो प्रकृति के नियमों के अधीन नहीं है उसी का नाम सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर है बिल्कुल तो वोह कौन है सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर और वही वही परमेश्वर हमें मुक्ति दिलाने के लिए हमें मोक्ष के मार्ग पर बताने के लिए समय समय पर अवतरित होते हैं सगुण साकार स्वरूप में और वो गुरु रूप जब हम सगुण साकार की भक्ति करते हैं सगुण साकार को पाने का प्रयास करते हैं तब हमें उनका जो वो स्वरूप है जो वाणी के द्वारा परिभाषित नहीं हो सकता जो वाणी का अ विषय है व्यवहार का अ विषय है जैसे कि हमारे शरीर को संचालित करने के लिए चाहिए होती है कैलोरी मगर
00:26:05:25 कैलोरी हमारे व्यवहार का विषय नहीं है हमारे व्यवहार का विषय कैलोरी कहां से प्राप्त होगी उसका सगुण साकार जो स्वरूप है भोजन तो हम प्रयास करते हैं भोजन के लिए फल स्वरूप हमें प्राप्त होती है कैलोरी नहीं मैं आपसे जानना चाहूंगा कि हमारा यह हमेशा हमेशा के लिए जीवन मरण का चक्कर कैसे खत्म होगा व्यवहारिक रूप से देखें तो भगवत प्राप्ति से और अगर पार मर्थक रूप से देखें तो अविद्या से छूट जाने से अविद्या से अलग हो जाने से लेकिन शास्त्रों में तोय कहता है कि गुरु बिन माला फेरते गुरु बिन देते बताऊ शास्त्र की बात मैं आपको बताऊं आपने बिना गुरु के मुक्ति बिना गुरु के मुक्त मुक्ति हो जाएगी क्या हमने कब कहा तो फिर इसके लिए गुरु बनाना पड़ेगा ना नहीं कहा ना आपने तो गुरु बनाओ तो ये हमने कहा अगर मैंने ये नहीं कहा कि दुनिया में जापान है तो इसका मतलब ये सिद्ध हो गया कि मैं यह मानता हूं कि दुनिया में जापान नहीं है अगर मैंने नहीं कहा कि दुनिया में जापान है
00:27:21:02 तो इसका मतलब यह हो गया कि मैं ये मानता हूं कि दुनिया में जापान नहीं है ये तो मैंने नहीं कहा गु के बिना तो कम नहीं चल सकता ना व्यक्ति बिल्कुल तो ग अब गुरु हां हा खैर मैं ये कहना चाह रहा था आप आए अच्छा लगा मगर हमारी बातचीत इस समय रामपाल से हो रही है रामपाल जी के लोगों से हो रही है और आपने अपने विचार व्यक्त किए देखो मेरी बात सुनो मैं हमें सत्य चाहिए अब वो चाहे आपसे मिले चाहे रामपाल जी महाराज से मिले चाहे किसी भी गुरु से मिले सत्य की खोज है और सत्य ही परमात्मा है आपको यदि आप राम देखिए आपको सत्य चाहिए तो आपसे अगर आपकी बातों का प्रतिकाराम रूप से अगर बात करने की इच्छा है आपको यहां पर करना है वन ऑन वन तो हम लोग ऐसे भी बात कर सकते हैं मैं नहीं चाहता हूं क्योंकि आप ना तो रामपाल जी को फॉलो कर रहे हैं आप किसी समय में रहे तो मैं नहीं चाहता हूं कि मैं यहां पर आ करके आपके लिए नकारात्मकता से आपकी बातों का खंडन करूं या कुछ करूं मैं वो सब नहीं चाहता मेरी बात सुनो रामपाल जी महाराज का पवित्र ज्ञान उनके मैं वहां तीन साल ढाई साल रह के आया हूं है ना तो
00:28:36:09 छोड़ क्यों दिया छोड़ क्यों दिया पवित्र ज्ञान था तो सुनो छोड़ने का कारण ये कि है क्योंकि कबीर साहिब ने यह कहा है कि तंत्र मंत्र सब झूठ है मत बर्म ज कोई सार शब्द जाने बिना कागासन होई बताया कबीर जी ने कहा है आपको किसने बताया कि कबीर जी ने कहा है किसने बताया उकी वाणी है वाणी आपके पास कैसे आई वाणी है उनकी वाणी वाणी आपके पास कैसे आई वाणी हम सुनते आए हैं कबीर बोध सागर कबीर सागर कबीर बोध सागर इत्यादि यह सब आपको कान में डायरेक्ट उन्होंने कबीर ने कहे हैं या आपने किसी किताब से पढ़े हैं
00:29:28:20 बताइए नहीं हमने किताब में भी पढ़े हैं और सुने भी है किसे सुने जो उनकी वाणी है वो सुनिए वाणी किससे सु मोबाइल में भी है मोबाइल मेंब मैं कबीर साहब 600 साल पहले आए थे लगभग अगर मेरी जानकारी गलत हो तो सही कर दीजिएगा पहले आ कबीर ने डायरेक्ट आपसे बात नहीं की है ना कि है क्या नहीं नहीं कि है डायरेक्ट उन्होंने आपसे बात नहीं की उनके नाम से मिलने वाली किताबें जो है वो वही है जो कबीर ने लिखी थी आपको कैसे पता कबीर तो अनपढ़ थे उन्होंने लिखी नहीं लिखी तो दूसरों ने थी उन्होंने वाणी बोली थी और दूसरो ने लिपि ठीक है उन्होंने जो लिपिबद्ध करवाई थी ये वही किताब है जो आपने पढ़ी प्रमाण मान लिया आपको कैसे पता पता ऐसे ना कि क्योंकि उनकी जितनी भी वाणिया है उसमें जरा सा रति भ झूठ नहीं है कोई रवर झूठ साबित करके बता दे इसलिए हम वो हां आप ये तो आपने बताया ना मैं ये पूछ रहा हूं कि उ जो उनके नाम से जो वाणी आपके पास है वो उन्हीं की नाम की है ये आपको कैसे पता क्योंकि जिससे आपने ली है उस पर आपको भरोसा नहीं है भरोसा
00:30:43:22 तो अपनी आत्मा करती है ना अंदर से आवाज आती है कि सत्य सत्य और असत्य को स्वीकार करती है व भाई साब आप आए अच्छा लगा हम जा सकते जय श्री राम रामपाल दास जी का ज्ञान पवित्र है मगर हम उनको भी छोड़ बैठे क्योंकि कबीर ने यह कहा था अगर कबीर ने य कहा था तो पवित्र कहां से रहा अब आप रामपाल को ही अनफॉलो कर रहे हो जिससे आपको कबीर वाणी मिली हा यह कैसा दोगलापन है
00:31:22:22 भाई तो और कोई आए थे अभी थोड़ी देर पहले कोई आना चाहता है तो आ जाओ भैया लिंक दे दीजिए मैं फिर याद दिला रहा हूं आवान के धर्म रक्षा अभियान को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है तो रीश जी बहुत-बहुत आभार आपको बहुत बहुत आभार शिवम जी बहुत-बहुत आभार कोमल मेहरा जी बहुत बहुत आभार आपका काफी लोगों ने ले लिया है सुखराम हर्ष झा जी आभार आपका मैं फिर आप लोगों को बताना चाह रहा हूं आवान के धर्म रक्षा अभियान को बंद करने का प्रयास किया जा रहा है मैंने आज तक कभी नहीं कहा आप लोगों से कि आप यह सब करिए मगर अब आपका दायित्व है जो वीडियो देखें लाइक करें शेयर अवश्य करें और यदि सामर्थ्य है तो कम से कम वह 9 रप वाली जो मेंबरशिप है वो अवश्य ले ले जिससे कि य हमारे चैनल चैनल को किसी प्रकार की क्षति पहुंचाने से पहले सोचे कि चैनल को अगर नकारात्मक व्यूज आ रहे हैं तो सकारात्मक भी आ रहे हैं तो इसलिए आप लोगों को यथा सामर्थ इस बात का ध्यान रखना है
00:32:37:22 कि हमें आपका लाइक चाहिए जिससे ट को पता चले कि इसको लोग पसंद भी करते हैं हमें आपकी सदस्यता चाहिए जिससे कि य को भी फायदा हो तो वह चैनल को बंद करने से पहले या क्षति पहुंचाने से पहले सोचे और शेयर भी चाहिए जिससे कि य को लगे कि हां इसको लोग फैला रहे हैं पॉजिटिव है और जो हमारे बारे में नकारात्मक सूचना पहुचा पहुंचाई जा रही हो वो निरस्त हो वीक तो पड़े कम से कम ना इसलिए तो अभी ले लेते हैं हम पुष्पेंद्र जी
00:33:11:16 को सनातनी राजा र जय श्री राम पुष्पेंद्र जी कल आप कहां चले गए थे कल आप कहां चले गए थे हा जी सर कल ग सर पता नहीं आपकी तरफ से कोई लाइव हट गई थी आपने हटाई पता नहीं कैसे हटी पता नहीं उसके बाद कई बार कोशिश करी जॉइन करने की जन नहीं हो पाया सर जय श्री राम राजा राय जी राम राम साहब आपने स्क्रीनशॉट लिया है क्या कल का जब आप मुझे याद है उसका नहीं नहीं उस टाइम तो कोई स्क्रीनशॉट नहीं लिया था तो हम लोग कल बात कर रहे थे कि क्या कबीर जी अजर है कि नहीं नहीं वो तो बात कर रहे थे लेकिन टॉपिक य टॉपिक यहां चल रहा था आप प्रमाण दिखा रहे थे कि आप ब्रह्मा विष्णु महेश को अजर क्यों नहीं मान अने मैं आपको एक बात बता दूं आपको मालूम है टॉपिक क्या चल रहा था और मुझे मालूम है आज ये शो दोबारा चल रहा है दोबारा से थंबनेल लगा है दोबारा से पब्लिक आई है आवश्यक नहीं है कि पब्लिक को मालूम हो कैसे तो आप हमें अभी बताइए क्या कबीर अजर है
00:34:28:00 अजर मैंने बोला था अजर है लेकिन वो अपनी जब मृत्यु लोक में आते तो अपनी स्थिति चेंज कर लेते हैं वो सामर्थ्य है वो कुछ भी कर सकते हैं तो वो ऐसे हो जाते हैं कि वो बूढ़े दिखें आपकी आवाज थोड़ी कम आ रही है आप लीव करके दोबारा आ जाइए क्या लीव करके दोबारा आ जाइए नहीं नहीं आप बोलिए आवाज आ रही है हां आ रही है लेकिन कम आ रही है बोलिए आप अब मुझे सबसे पहले तो आपने जो यह कहा है कि वो जब सृष्टि में आते हैं तो वो अपने आप को ऐसा कर लेते हैं कि उनके ऊपर जो है आयु का प्रभाव पड़े और वो अविनाशी ना रहे यह सब कहां लिखा है नहीं तो ये भी कहां लिखा है कि म रामपाल दस जी ने कहा है क्या ऐसा रामपाल कहा है नहीं तो यह भी तो कहीं नहीं लिखा कि ब्रह्मा विष्णु महेश अमर है यह भी तो कहीं भी नहीं लिखा भाई साहब अभी बात हो रही है ब्रह्मा विष्णु महेश अमर है इसके लिए हम बहुत सारे प्रमाण पूर्व में दे चुके हैं सुनिए भाई साहब आपको अगर टॉपिक चेंज करना है तो बात अलग है आप जा सकते हैं अभी टॉपिक चल रहा है
00:35:43:00 टॉपिक चल रहा है टॉपिक चल रहा है भाई साहब हेलो भाई साहब टॉपिक चल रहा है क्या कबीर अजर है ब्रह्मा विष्णु महेश के अविनाशी ना होने से कबीर की अजर सिद्ध नहीं होती ब्रह्मा विष्णु महेश के अविनाश ना होने से यह सिद्ध नहीं होता कि शास्त्र में लिखा है कि कबीर जो है जब वह लीला में आएंगे तो वह बाधित हो जाएंगे वह सीमित हो जाएंगे वह बूढ़े हो जाएंगे यह सब नहीं सिद्ध होता है वो एक अलग चैप्टर है कि अगर कबीर नहीं है तो कौन है तो फिर हम वो ढूंढेंगे ठीक है अभी आप मुझे बताइए क्या कबीर अजर है कि नहीं ब्रह्मा विष्णु महेश केया हा मैंने आपके क्वेश्चन का एक ही शब्द में जवाब दे दिया परमात्मा है वो कुछ भी कर सकता है शास्त्र से बोलिए या तो कहिए कि शास्त्र में ऐसा कुछ नहीं लिखा है शास्त्र मैं तो कबीर सागर से बोल रहा हूं कबीर सागर में स्पष्ट लिखा है कि ना मेरा जन्म ना गर्भ बसेरा बालक बन दिखलाया काशीनगर जल कम पर डेरा त जुलाने पाया ठीक है फिर दूसरी चीज कभी इसकी हिंदी बो इसकी हिंदी बोलिए हिंदी बोलिए इसकी इसकी हिंदी ये है कि उन्होंने ये बोला है कि ना मेरा जन्म होता ना मैं किसी के गर्म में आता ठीक है और काशीनगर जल कमल पर मतलब
00:36:58:04 मैंने काशीनगर में एक अवतार के रूप में मतलब वहां जन्म लिया और एक जुलाई के यहां में अपना लीला में जीवन जिया और वहां मैंने सारी लीला करके और यहां से निकल गया ठीक है तो मतलब इसम इसमें ये कहां पर लिखा लिखा मिला हमें कि वो जब लीला में आता है परमात्मा तो वोह जो है बूढ़ा भी होता है यह कहां लिखा है नहीं तो नहीं पहले मेरी सुनो आप कबीर सागर को मानते हो अरे भाई पहले मैं आपसे पूछ लू आप जो बोल रहे हो वो आप ही के ग्रंथों में लिखा है कि नहीं अपने मन से बोल रहे हो क्योंकि क्योंकि आपके कई लोग हमसे यह कहते हैं कि भैया आप जिन लोगों से बात करते हो उनको तक नहीं मालूम है रामपाल जी का ज्ञान है क्या तो कम से कम हम उस ज्ञान को क्रॉस करें जो रामपाल जी कहो आपने अपने मन से यहां पर अपनी बात को बड़ा रखने के लिए कुछ भी बोल दिया आप हमें बताए तो कि आपके ग्रंथों में कहां लिखा है बात कही है ज्ञान गंगा में कहीं पर लिखी है कि जो कबीर कबीर होगा वह अजर नहीं है लीला में आने के बाद वह अजर नहीं है हां है नहीं है बिल्कुल नहीं है अजर नहीं है ना लीला में आने के बाद कोई अजर नहीं है वह अपने स्थिति चेंज करते रहते हैं उन पर कोई फर्क नहीं पड़ता
00:38:13:19 लीला में आने के बाद अजर नहीं है वो अपनी स्थिति चेंज करते हैं अब ये कहा लिखा है कोई अपना रेफरेंस दीजिए आपसे मैं पूछ तो रहा आप कबीर सागर को मानते हो आप संतो की वाड़ी को मानते हो अरे भाई आपका रेफरेंस जब तब हम उसको काटेंगे ना पहली बात तो ये है कि हमें यही यही पता है किय कोई रेफरेंस है ही नहीं उसमें मैं रेफरेंस मैं रेफरेंस तो तब दूंगा जब मानते हो उस ग्रंथ को आपके पास रेफरेंस है देना है कि नहीं देना है मैं सर क्या पूछ रहा हूं आप मेरे क्वेश्चन का जवाब ही नहीं दे पा रहे मैं कह रहा हं आप कबीर सा को मा आपसे ये जानना चाह रहा हूं कि जो बात आप कह रहे हैं वो रामपाल दास जी ने कही है कि नहीं मैं इसलिए पूछ रहा हूं अरे सर मेरे क्वेश्चन जो आप बोल रही है उसका जवाब ही नहीं दे पा रहे मैं पूछ रहा हूं आप कबीर सागर को मानते हो आप कबीर सागर ने कबीर साहब ने जिन्हो को संतो को अपना अपनी शरण ली है क्या उनकी वाणी को मानते हो मैं नहीं मानता मैं नहीं मानता मैं नहीं आप नहीं मानते तो मैं जो क कहीं से वेद से में प्रमाण नहीं दे सकता मतलब जो और आपके ग्रंथों से वो अजर नहीं है आप उसको मानते नहीं पास आपके पास केवल जो प्रमाण है वो कबीर सागर के ही है ना वेद से है ना पुराणों से है ना उपनिषद से है ना रामपाल दास जी की किताब भर से हैं वेद से प्रमाण है वेद से ये प्रमाण है कि वो जो कबीर परमात्मा जब वो लीला में
00:39:28:19 आएगा वो जब लीला में आएगा तो वो सीमित हो जाएगा अ अजर नहीं रहेगी उसकी वेद से प्रमाण है जब वह पृथ्वी पर आता है तो व उसकी जो प्रवश है वह मतलब एक क्वारी गाय गायों के दूसरे परव से होगी ठीक है भाई साहब हम लोग सवाल कर रहे हैं अजर के बारे में जब वो धरती पर आएगा तो वो अजर नहीं रहेगा लीला में तो आप आपका कहीं प्रमाण है इस चीज का कि ब्रह्मा विष्णु महेश मतलब जो अजर भाई साहब फिर टॉपिक चेंज कर रहे हैं हम आपको ब्रह्मा विष्णु महेश के प्रमाण देके ही भेजेंगे अभी बात चल रही है कि ईश्वर लीला में आकर के अजर नहीं होता नहीं तो आप कबीर सागर को मान आप कबीर सागर को मानते नहीं संतों की वाड़ी को मानते नहीं फ क दिखाऊंगा एक बात बताइए आप जब आप जब मैं कबीर सागर को नहीं मानता हूं और इसलिए आप मुझे प्रमाण नहीं दे रहे हैं तो आपने अभी जो इससे पहले प्रमाण दिया था वो क्यों दिया था कौन सा प्रमाण दिया था मैंने अभी आपने दोआ सुनाया था कोई कबीर जी का कोई वाक्य सुनाया था क्यों सुनाया क्यों सुनाया आपको तब नहीं मालूम था कि
00:40:43:21 मैं नहीं मानता हूं कबीर जी की बात को इस आप जोर दे रहे थे इसलिए सुनाया था तो अभी जोर दे रहा हूं अभी जोर दे रहा हूं दिखा दो भैया प्रमाण आप आप बोले ना य बात को मैं कई सार को नहीं मानता नहीं मानते तो कोई बात नहीं आपकी इच्छा अच्छा पहले आपको नहीं मान पहले आपको ये बात नहीं मालूम थी नहीं मेरे को ये मालूम नहीं थी आपका ब सागर को बक नहीं मान ल दास जी के चरणों की सौगंध खाके कहिए अरे सर यह कौन सी बात हुई रामपाल दास जी के चरणों की सौगंध खाके कहिए मैं मैं मेरे गुरु के चरणों की सौगंध खाता हूं कि मुझे नहीं मालूम था कि कबीर दास जी ये कबीर वाणी मानता है नहीं मानता सर ये आप टॉपिक चेंज कर रहे हो ये आप टॉपिक चेंज कर रहे हो मुझे नहीं मालूम तो नहीं मालूम इससे क्या मतलब है तो यानी कि आप जो यह कह रहे हैं कि जो भगवान है वह लीला में आकर के अजर नहीं रह जाते हैं उनके ऊपर प्राकृतिक नियम लागू हो जाते हैं इसके लिए आपके पास शास्त्र का प्रमाण नहीं है जी शास्त्र का प्रमाण है लेकिन जिन शास्त्रों में प्रमाण है उनको आप मानते नहीं ठीक है वेदों में प्रमाण है क्या वेद में पुराण में गीता में वे वेद में मैंने गुरु जी के गुरु जी के वचन से अभी यह चीज नहीं मतलब सुनी कि उनका अजर का प्रमाण है वेद में अगर सुने तो भविष्य में आपको बताय
00:41:59:19 सुनिए आपको एक बात बताऊ एक पर्सनल राय दे रहा हूं आप यह कह करके कि लीला में आकर के भगवान बाधित हो जाते हैं आप रामपाल दास जी का विरोध कर रहे हैं मैं नहीं कर रहा आप कर रहे आप कर र नहीं कर रहा नहीं कर रहा आप आप दिखा दो प्रमाण मैं नहीं दिखाऊंगा वो आपको जब य से जाओगे कुछ दिन अपने लोगों से ही मिलोगे वही आपको बताएंगे नहीं आप ये कह रहे लीला में भी वास्तविक दुनिया में वो जो करते हैं वो करते हैं मगर कम से कम यह जो दुनिया है जिसमें हम लोग दुख भोग रहे हैं कष्ट भोग रहे हैं बूढ़े हो रहे हैं मर रहे हैं जी रहे हैं इसमें यदि कबीर आएगा तो वो भी वैसे ही मरेगा बूढ़ा होगा परेशान होगा वो सारे प्रकृति के नियम उस पर भी लागू हो जाएंगे हां बिल्कुल देख लो भैया ये ये वेदों में प्रमाण है और कबीर साहब यहां पर आकर के बूढ़े होते हैं कुछ भी ना करने वाले होते हैं सब कुछ कर सकने वाला तो छोड़ दो सुनो सुनो आपने सुनो आपने एक क्वेश्चन किया था कल मुझसे परमात्मा सर्वशक्तिमान है मैंने बोला था सर्वशक्तिमान है भाई साब साब एक मिनट मुझे जरा दर्शको से बात कर लेज दो मिनट आप चुप रहिए ठीक है दो मिनट मैं आपको बोलने का अवसर
00:43:14:19 दूंगा दो मिनट आप चुप रहिए मैं दर्शको से बात कर रहा हूं तो भाई इनका कहना है कि जिस जगह पर हम लोग चाहते हैं कि ईश्वर हमें ईश्वर का सानिध्य प्राप्त हो हा पर हम लोग सर्दी जो त्रिविध ताप होते हैं भौतिक ताप उनसे हम बचना चाहते हैं सर्दी गर्मी धूप छाव इन सब से हम बचना चाहते हैं मृत्यु यह वो तो ईश्वर भी इनका वह ईश्वर है जो यहां पर आने के बाद जो है वह भी आप ही के जैसा हो जाता है और उस पर भी य धूप छाव इत्यादि सब कुछ लागू हो जाती है वह उसके कंट्रोल में नहीं है कि वो अपनी उम्र को बढ़ने से रोक दे वो उसके कंट्रोल में नहीं हैम
00:43:57:08 पास कर रहे हो आप हां बताइए मैंने ये नहीं बोला कि उनके ऊपर उनके ऊपर उन पर ये शक्ति नहीं है को नियम लागू कर ले वो आप सर्वशक्तिमान है वह स्थिति आप चेंज करें या ना करें वो उनके ऊपर निर्भर है लेकिन उनके ऊपर कोई नियम लागू नहीं है ठीक है उनकी इच्छा है तो यानी यानी कि वो अपनी इच्छा से बूढ़े होते हैं यहां पर आते हैं तो बिल्कुल सर्वशक्तिमान है कुछ भी कर सकते हैं उनके लिए कोई इंपॉसिबल नहीं है पॉसिबल है सारी चीज ठीक है ठीक है अब आप एक बा बताइए वो जिस रूप में वहां पर होते हैं उसी रूप में यहां पर आते हैं या अपने रूप को चेंज कर लेते हैं रूप चेंज रूप एक जैसा होता है लेकिन जिस स्थिति में वो वहां रहते हैं ठीक है जितना उनका नूर वहां है उस नूर को यहां नहीं लाते उस नूर को कुछ कम करते हैं अच्छा ठीक है तो इसका मतलब कहने का ये है कि वो जो तेज है उनमें तेज तेज वो कम कर देते हैं बाकी आते एज इट इज है ठीक है बिल्कुल यानी कि एक बार वो कबीर कबीर जी की फोटो दिखा
00:45:04:15 दीजिए कबीर जी की फोटो दिखा दीजिए इनको फोटो दिख रही है आपको दिखाइए दिख रही है मेरे को दिख रही है दिख रही है तो वो जो उनका सतलोक है उसमें ऐसे ही रहते हैं बिल्कुल सर बिल्कुल सर अच्छा तो ये जो आपको दिख रही है फोटो ये अजर है कि नहीं है अजर अब सर आप मतलब आप टॉपिक आगे बढ़ गया अब अजर वाली बात अब कहां से आ गई टॉपिक आगे कहां बढ़ा आपने कहा कि वह सृष्ट में आकर के बूढ़े दिखाई देते हैं मगर वो वहां बूढ़े नहीं होते हैं तो वहां पे तो बूढ़े ही दिख रहे हैं सतलोक में क्या सतलोक में वो बूढ़े दिख रहे हैं कहां ये सतलोक मतलब सतलोक में बूढ़े सतलोक से मगाया आपने फोटो गए आप सतलोक में यानी कि यानी कि सतलोक वाला रूप दूसरा है हां तो मैं आपसे पूछ रहा हं आप सतलोक से लेक आए हो इसको फोटो को आप सतलोक से लेक आए इस फोटो को अरे भाई साहब मैं आपसे पूछ रहा हूं कि सतलोक वाला जो कबीर का रूप है वो दूसरा है
00:46:21:15 ना मैं आपसे पूछ रहा हूं आपने जो मुझे फोटो दिखाया आप इस फोटो को सतलोक से लेकर आए क्या ये जो फोटो रामपाल दास जी से प्राप्त है जो उनकी किताबों में है ये वो फोटो है अब आप बता दो र् होते हु बस तो इस मृत्यु लोक का आप इस मृत्यु लोक का फोटो दिखा रहे हो मेरे को तो इसका मतलब जिस कबीर को हम जानते हैं वह कबीर वो नहीं है जो वहां पर बैठता है वो रूप उसका नहीं हैने बोला मैंने बोला ही नहीं ऐसा कि वो कबीर य नहीं है मैंने बोला ऐसा नहीं बोला अरे मैं रूप की बात कर रहा हूं नहीं मैंने नहीं बोला ना ऐसा आप बोल रहे हो य बात तो मैं रूप की बा कर रहा जो हम कबीर को जिस रूप में जानते हैं क्या वो रूप वो नहीं है क्या मैंने सर रूप की बात करी है मैंने रूप की बात करी है सिर्फ ठीक है रूप एक ही है लेकिन वो अपने तेज को हल्का करते सबसे पहले तो उजाले में आइए जिससे आपका चेहरा लोगों को दिखे दिख रहा है सर मेरा चेहरा और कितना दिखा अंधेरा है अधेरा व चेहरा आपका समझ में नहीं आ रहा है आप उजाले में आइए आपके चेहरे पर रोशनी पड़े ठीक है
00:47:29:01 बल्ब की ओर हो जाइए अपना अपना फेस बल्ब जिधर हो ना उधर करिए अभी भी आपके अंधेरा ही है तो मैं य आपसे पूछ रहा हूं हा ठीक है ठीक है अब ठीक है अब ठीक फिर आप झुक रहे ना तो छाया आ जा रही है ठीक है अब ठीक है पीछे रहिए मतलब झुक जाएंगे तो छाया आ जाएगी बोलिए हां मैं यह कह रहा हूं कि आपका कहना है कि आपके पास कबीर का फोटो प्राप्त नहीं है जो वहां सतलोक में वो रहता है वोह फोटो है क्या मैं उस फोटो को आप सतलोक में फोटो जो है या नहीं है ठीक है वो जैसा भी फोटो है ठीक है लेकिन हमें इतना पता है कि जो कबीर जी का जो रूप है जो हम रूप देख रहे हैं फोटो में ठीक है ये बूढ़ा अजर अमर ये क्या ये चीज नहीं पता हमने जो फोटो देख रहे हैं बिल्कुल रूप ऐसा मिलेगा ठीक है मतलब वो ऐसे ही दिखेंगे ना वहा भी बिल्कुल रूप चेहरा चेहरा फेस कट फेस कट ओनली
00:48:44:18 ये नहीं के जो क नाम बूढ़ा के जवान है इससे कोई मतलब नहीं है फेस कट यह जो रूप आपको दिख रहा है अभी यह वाला जो रूप दिख रहा है अभी ये आपको क्या बूढ़ा लग रहा है क्या क्या जो अभी जो यहां पर जो य रामपाल दास जी की किताबों में जो चेहरा है वो बूढ़ा दिख रहा है क्या आपको ना मेरे को बूढ़ा दिख रहा है ना मेरे को जवान दिख रहा है क्या दिख रहा है मेरे को चेहरा दिख रहा है चेहरा दिख रहा है बिल्कुल तो आपका कहने का मतलब है आप उनको बूढ़ा नहीं मानते जो जो फोटो यहां दिख रही है वो बूढ़ ब बुढ़ापा नहीं है वो मैं मैं नहीं मान में परमात्मा का चेहरा देखता हूं परमात्मा का चेहरा और इसी रूप में मिलेंगे हमको अच्छा जो आपको दिख मतलब दाढ़ी होगी कि नहीं ये सफेद बाल सर जैसा हमको चेहरा दिखाया हम इसी रूप में देख रहे और आ रू पूछ सफेद बाल होंगे कि नहीं दाढ़ी होगी कि नहीं सर मैं भी मैंने भी तो आपके क्वेश्चन का जवाब दिया इतना लंबा क्यों करते हो मैंने जो चेहरा देखा रा दे स पूछ रहा हूं दाढ़ी होगी कि नहीं बोलो हा ना सर आप क्या देख रहे हो आप क्या देख रहे हो जैसा फोटो मेरे को दिख रहा है वही आप देख रहे हो जैसा मेरे दिख रहा है ऐसा ही मेरे को आगे मिलेगा बस इतना इतना क्लियर बोल
00:49:59:20 रहा हूं ना दाढ़ी होगी कि नहीं आपने कहा फेस कट तो हो सकता है क्लीन शेप वाला देखो वहां पे इसलिए क्लियर कर रहा हूं कहां पर क्लीन क्लीन वाला आपने कहा वैसा ही फेस कट मिलेगा रूप नहीं फेस कट तो हो सकता है आपने कोई अंदर का फेस कट देख लिया हो कबीर जी का इसलिए पूछ रहा हूं वहां प दाढ़ी मिलेगी उकी नहीं मि मैंने तो ऐसा नहीं मैंने तो ऐसा बोला ही नहीं है मैंने देख लि क्लियर करो ना भाई आपने नहीं कहा मैं कब कह रहा हूं आप क्लियर कर दो वहा दाढ़ी मिलेगी सफेद बाल वाली कि नहीं मिलेगी सर मैंने देखा ही नहीं तो मैं कैसे क्लियर कर दूं अच्छा यानी कि अब तीन बातें हो गई पहली बात तो ये है पहली बात तो यह है कि आपने कहा कि यहां लीला में आकर के आकर जो कबीर जी है वो प्राकृतिक नियमों के अधीन हो जाते हैं मैंने नहीं बोला अधीन हो जाते हैं मैंने यह नहीं बोला अधीन हो जाते हैं क्या क्या हो जाते हैं मैंने यह बोला कि परमात्मा सर्व शक्ति माने लीला में हो चाहे कभी भी हो परमात्मा अपना कुछ भी कर सकता है कुछ भी बालक बन सकता है बूढ़ा बन सकता है जवान बन सकता है कुछ भी बन सकता पथवी
00:51:14:26 को सुनो पृथ्वी को पलट भी सकता है ए इट ऐसे ही कर सकता है परमात्मा में सारे गुण है नहीं तो यानी कि जो परमात्मा है लीला में अजर नहीं है यह तो आपने बोला ना मैंने सर में मेरा मेरी बात को ध्यान से सुनिए मैं कहना क्या चाह रहा हूं हां बोलो अजर हो अमर हो यह परमात्मा जाने लेकिन मुझे इतना पता परमात्मा सब कुछ कर स देखिए सब बातें अगर आप परमात्मा जानने वाली कर देंगे मुझे नहीं पता है कर देंगे तो हम लोग बात किस बात प करेंगे जब आप हर बात प ी बात करो सुनो आप सुनो सुनो सुनो सर आप मुझे एक चीज का जवाब दे दीजिए आप नहीं मानते कि परमात्मा सब कुछ कर सकता है आप नहीं मानते क्या भाई साहब देखिए चिड़चिड़ा से गर्म होने से जल्दबाजी करने से कुछ एक एक बात प एक एक बात प तसल्ली से बात करेंगे तसल्ली से भागते हुए बात नहीं करेंगे एक एक बात प तसल्ली से बात करेंगे करनी है आपको क्यों नहीं करनी तक लेकर आए ऐसा क्या तर्क दूं जिससे इसको विवाद को रोका जा सके बस सुनिए आपने कहा कि लीला में आकर वो ईश्वर अजर नहीं है ठीक है लीला से बाहर वो अजर है ठीक है हमने कहा नहीं बोला आप सुनो सर आप फिर मुझे बोलना पड़ता है मैंने ये बोला
00:52:30:01 परमात्मा सर्वशक्तिमान है वो कुछ भी कर सकता है कुछ भी अच्छा तो यानी कि वो लीला में हमको दिख रहा है मगर वो चाहे तो वो जवान भी दिख सकता है बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल अब आए ना सही इंफॉर्मेशन पर बिल्कुल बिल्कुल ठीक है अब बात ये आती है ये जो फोटो है जी ये जो फोटो है ये लीला वाला फोटो नहीं है ये सतलोक वाला फोटो है या सतलोक वाला फोटो नहीं है लीला वाला फोटो है ये इस मृत्युलोक का फोटो है जब यहां 600 वर्ष पहले यहां पर रहे थे वो ये वो फोटो है मृत्युलोक का फोटो है ये ये जो है सतलोक सतलोक का फोटो नहीं है यह जो हमें फोटो प्राप्त है ठीक है यह फोटो जो हमें प्राप्त है यह जो है सतलोक का नहीं है अच्छा तो इसका मतलब आपको सतलोक में वो कैसे दिखते हैं यह नहीं बताया गया आज तक बताया गया है ना मतलब इसी जैसा हम यहां देख रहे हैं बिल्कुल ऐसा आपको मिलेगा तो फिर ये वही फोटो हो गया ना सतलोक वाला नहीं मैं कैसे कह सकता हूं सतलोक मैंने देखा नहीं भाई जब आप ये कह रहे हो बिल्कुल वही फोटो मिलेगा
00:53:45:03 जी राजा जी आप बोल लीजिए कुछ कहना चाह रहे हैं मैं ये कह रहा हूं कि अभी इन्होंने अपनी बात कह दी ना कि सर्वशक्तिमान होते हुए भी यहां पर आ सकता है और जैसे मृत्यु होती है वैसे मर सकता है उसके बावजूद भी सर्व शक्तिमान है गलम मैंने नहीं बोला मर सकता है गलत इमेशन सर आपसे बात हो रही है बीच मत ला सर गलत इमे जा रुक जा रुक जा रुक जा मैं यह कह रहा हूं कि सतलोक में कैसा दिखता है यह आपको बताया गया है तत्वदर्शी के द्वारा कि नहीं बिल्कुल बताया गया है कैसा दिखता है जो हम मैं सर कितनी बार बोलू जो हम यहां देख रहे हैं ठीक है जो हम यहां देख रहे यानी यही उलिया है ना सतलोक वाला जो हम यहां देख रहे हैं ठीक है हा यही उलिया है ना सतलोक में भी ये हमको वहां मिलेगी ठीक है जब यहां से जलेंगे हम शरीर छोड़ के ठीक है जब वहा पहुंचेंगे ये चीज हमको ये हमको बिल्कुल एज इट इज मिलेंगे क्योंकि अगर हम यहां जो चीज देख रहे हैं हमको बताया गया कि आपको उस आदमी से ये फोटो ऐसे मिलना है जब हम उसका चेहरा पहचान के चल रहे हैं जभी तो हम उससे मिल पाएंगे जब हम चेहरा नहीं पहचान पाएंगे तो आगे कैसे मिल पाएंगे अभी ठीक है अभी थोड़ी देर बाद थोड़ी देर पहले आप ये कह रहे थे कि वो जो सतलोक वाला फोटो है
00:55:00:04 वो हमने देखा ही नहीं है वो हमें क्या पता कैसा होगा हमने तो मृत्युलोक वाला देखा हैन तो मैंने ये भी तो बोला था कि जो हमें यहां दिखाया जा रहा है ये चेहरा हमें वहां मिलेगा ये भी तो बोला था मैंने जब आपकी बात फसने लगती है तो आप अपनी बात को काट भी देते हैं क्योंकि नहीं सर मैंने मैंने तो ये भी बोला था ना जो हम देख नहीं सर चार तरह की बात कर रहे हैं आप पहले कह रहे हैं कि हमने सतलोक का देखा ही नहीं है ये सतलोक का फोटो है क्या मैं अब मैं अभ भी कह रहा हूं कि सतलोक मैंने देखा ही नहीं मैं गया नहीं सतलोक तो सतलोक तो मैं आप कैसे बता लेन दोरा त आपसे पूछ रहा हूं सतलोक में वो कैसे दिखते हैं यह आपको पता है कि नहीं वह बताओ हम सर मैंने सतलोक में नहीं गया नहीं देखा कितनी बार बोलू कैसे आपको बताऊ मैं यानी कि आपको नहीं पता ना वो कैसे दिखते हैं सतलोक में इतना पता है मुझको जो यहां दिखाया गया इस रूप में जरूर मिलेंगे इतना पता है यानी कि आपको पता है ना वो कैसे दिखते हैं सतलोक में मैंने सर क्लियर कर दी आगे मत बढ़ाना ये बात ने बोल दिया ऐसे मिलेंगे तो मिलेंगे ऐ आपको एक चीज क्लियर करनी है वो सतलोक में कैसे दिखते हैं ये आपको पता है या वो सक में कैसे दिखते हैं ये आपको नहीं पता है बताइए अच्छा सर मुझे बता सर मुझे बता आपके हिसाब से क्लियर करूं अभी भाई साहब देखिए विषयात मत करिए आप ये बताइए
00:56:15:04 सतलोक में वो कैसे दिखते हैं मेरे मम्मी पापा कैसे दिखते हैं सुनो सुनो सर सुनो सतलोक में देखो भाई देखो विषय को चेंज मत करो सुनो सर को चेंज मत करो वो कैसे दिखते हैं ये तत्वदर्शी ने आपको बताया है कि नहीं बताया है बताया तो है जो फोटो यहां देख रहे उसी रूपले एक्सेप्ट करो ना हा बताया है फिर कह र हो कि मैं गया नहीं तो मैं कैसे कह दू अरे सर फिर आप सतलोक की बात क्यों कर रहे हो क्यों ना करें सत बि करोगे आपने य हमने फोटो यहां का देखा आपने फोटो यहां का देखा
00:56:54:09 आपको बस इतनी सी बात है मैं आपसे एक सरल भाषा में एक क्वेश्चन कर रहा हूं पुष्पेंद्र जी ध्यान से सुनिए कर सतलोक में कबीर कैसे दिखते हैं क्या यह आपको पता है या बताया गया तत्वदर्शी के द्वारा या नहीं अच्छा सर मेरे आपने मेरे मम्मी पापा को पहचानते हो फिर भाई मुझे सीधा-सीधा जवाब दो सतलोक में कबीर जी कैसे दिखते हैं यह आपको बताया गया है कि नहीं पुष्पेंद्र जी सर कितनी बार पूछोगे जो हम फोटो यहां देख रहे हैं ठीक है गुरुजी ने हमें जो बताया जो हम फोटो यहां देख रहे एज इट इज इस रूप में व मिलेंगे ठीक है आगे हमारे साथ क्या होगा कहां रखेंगे क्या है सारी चीजें हमको क्या मिलेगा क्या पता है ना कि सतलोक में कबीर कैसे दिखते हैं यह आपको बताया गया ना हमें इसी रूप में मिलेंगे कितनी बार बोलू इसी रूप में जि रूप में जब इसी रूप में मिलेंगे तो ये एक्सेप्ट करो ना कि हां मुझे मालूम है वहां पर ईश्वर कैसा दिखेगा हां मुझे मालूम है इस रूप में दिखाया इसी रूप में मिलेगा और बताओ तो यही तो शुरू में एक्सेप्ट करना था ठीक है इसका मतलब कबीर जी सतलोक में ऐसे ही दिखते हैं जैसे यहां दिख
00:58:09:13 रहे हैं तो भैया फोटो दोबारा दिखाओ इनको फोटो दोबारा दिखा दीजिए जो लोग साथ में जुड़े हुए हैं उनको मैं फिर याद दिला रहा हूं हमारे चैनल पर आघात हो रहा है उसे रुकवाने का इस धर्म रक्षा अभियान को रुकवाने का प्रयास किया जा रहा है आप प्राथमिकता से कम से कम लाइक अवश्य करें जिससे टब को पता चले कि इस चैनल को सपोर्ट भी करते हैं लोग सिर्फ नेगेटिव न्यूज ना जाए यब के पास और जितना आप जो भी समर्थक है कमेंट्स में भी ये बात कहे ठीक है हां भाई यही सतलोक में बैठे हुए कबीर ऐसे ही दिखेंगे ना सर बारबार क्वेश्चन क यह मतलब क्या क्या कोया आपने अपनी
00:59:12:13 बा बात करनी है क्लियर करना है कि आप जाना चाहते बताइए नहीं आप सुनो आपका ये जो नियम है ना सतलोक में दाढ़ी वाले कबीर दिखेंगे या नहीं नहीं सुनो सुनो सुन सुनो सररी आप हाथ जोड़ के एक प्रार्थना है इतना भाई इतना टैलेंट नहीं है मेरी बात सुनिए भैया वो आपसे किसी प्रकार का तर्क करने नहीं आया है वो बहुत दिनों से वीडियो देख रहा है और बस वो दे रहा है कि बस तर्क को तर्क में उलझाया जाए बस उसके पास हिमत नहीं है कि एक भी बात प टिक जाए एक बात प टिकने में उसको इस बात का डर है अपनी बात कोही झुला दे रहा है वो अपनी हर बात को खुद ही झुला दे रहा है वो रामपाल कहीं कहीं प वो वो रामपाल का आपके किसी भी बात को जो आप बोले जो आपके मुख से निकलेगा उसको पकड़ले में उसको भय लग रहा है फस जाऊगा फस जाऊंगा वो सिर्फ तर्क में उलझाने आया है बातों को उसके पास हिम्मत नहीं कि अपने पक्ष को पूर्व पक्ष में रख सके या उत्तर पक्ष में ख स य बात
01:00:16:15 सम आप जा सकते हटाओ भैया इनको पुष्पेंद्र जी को मुझे आज सुबह आपका कल वाला वीडियो देख रात को मैं सो रहा था एक बात चिंतन में आया कि एक बच्चा सुनिए एक बच्चा जो है भया एक बच्चे को बाहर के उस दोस्तों ने पूछा कि भाई तुम्हारे तुमको पैदा करने वाला कौन है तो बोला कि मुझे तो मालूम नहीं अपनी मम्मी से पूछ के आता हूं तो अपनी मम्मी के पास वो बच्चा गया और उसने पूछा कि भाई मुझे उत्पन्न करने वाला कौन है तो मा ने कहा कि तुम्ह उत्पन्न करने वाले रमेश है बच्चा बो ठीक है मैं समझ गया मे उत्पन्न करने वाले मुझे रमेश है तो दिन उसके पिताजी बहुत साल से बाहर थे दिन उसके पिताजी उसके घर पर आए इस बच्चे ने पूछा कि मम्मी य पिता य व्यक्ति कौन है तो बोले य तुम्हारे पिताजी अच्छा और मुझे उत्पन्न करने वाले कौन है तो बो बताया था र यही है रमेश बोला की आपने मुझे बो मुझे उत्पन्न करने वाले रमेश है लेकिन ये तो पिताजी है तुम्हारे पिताजी ही रमेश है पिताजी रमेश कैसे हो जाएंगे रमेश कोई और है आपने कहा था तो मैं लिए यह वाली बात प्रमाण नहीं है मुझे उत्पन्न करने वाले मेरे पिताजी है पिताजी नहीं रमेश है
01:01:32:03 वही बात है व गीता में गीता श्री कृष्ण ही काल है श्री कृष्ण कैसे काल हो जाएंगे व काल कोई और है लेकि य लेकिन ये गीता ही तो कह रही है इस बात को श्री कृष्ण अकाल है बात नहीं मान वही बात ज भोले मूर्ख बालक को लग रहा है कि अपनी मां की एक बात को मानता है बात को काटता है सेम वही अवस्था इन लोगों की वही अवस्था अनुचित कथा नाम से आए हैं जी जय श्रीराम आपका परिचय हम धनबाद के रहने वाले अरुण कुमार दास मेरा नाम है अच्छा बताएं आपका आध्यात्मिक परिचय बताएं बस अरुण कुमार दास आप रामपाल दास जी के फॉलोअर हैं शिष्य हैं क्या है हम किसी के ही शिष्य नहीं अच्छा आपका आध्यात्मिक ज्ञान कहां का है कहां से आप अपने धर्म को जानते हैं क्या है क्या नहीं है बस मेरा दादाजी मेरा पिताजी और मेरा मन से जो होते हैं उसी के बारे में कहता दूसरे के बारे में नहीं लेता इसलिए
01:02:47:22 को विद्या लेना यह बहुत भयंकर है इसलिए दूसरे आए है य जो आप चर्चा कर रहे आप अच्छा चर्चा कर रहे हैं इसलिए मैं जुड़ने का चाहता हूं ताकि ये आगे बढ़े जी जी बहुत बहुत बहुत धन्यवाद आपका आभार हमें समझ में नहीं आया ना एक तो आपने दास नाम बताया और ऊपर से आपने ये वो दास नाम होता है रामपाल के फॉलोअर ना भी हो तब भी दास नाम होता है मगर ऊपर से आपने जो आपका जो नाम लिखा हुआ है ना वो लिखा हुआ है अनुचित कथा अनुचित कथा तो पहले से एक माइंड मेकअप हो गया कि भाई एक क्या अनुचित कथा वो फिर दास तो ऐसा लगा कि आप रामपाल दास जी के फॉलोअर है है ना तो कोई बात नहीं जैसे कि थ इनको अब हटा दो पुष्पेंद्र जी को ये बातें बहुत घुमा चुके यहां जो बहुत से चर्चा हम सुने हैं आपका बहुत पहले से पहले तो ब्रह्मा विष्णु महेश के बारे में कबीर दास बोलते रहते हैं इसी के बारे में मैं थोड़ा देर क्लियर कर दूं ब्रह्मा विष्णु महेश आखिर है कौन ब्रह्मा मतलब ब्रह्मा को जो धारण करे वो ब्रह्मा है और
01:04:03:00 जो पति पालन करे वह विष्णु है और जो संघर करे वो महेश है सीधी सी बात है इसमें कोई दोराई नहीं है म ईश्वर जब सृष्टि करते हैं तो ब्रह्मा कहलाते हैं पालन करते हैं तो विष्णु कहलाते हैं और संहार करते हैं तो शिव कहलाते हैं अच्छा एक बात पूरा करने दीजिए जैसे मेरा पिताजी और मां के संस्पर्श में जब हम आए वो भी सोच लीजिए बिना नेवता का हमने बुलाया इसमें कोई नेवता नहीं दिया था कि बेटा हम तुमको बुला रहे हैं लेकिन हम आ गए तो उसने जो हमको बुलाया मतलब वोह ब्रह्मा है मने सृष्ट करता है इनका काम धरती पर जब मेरे मा लाया तो उनका काम समाप्त हो गया अब आ गया विष्णु का काल विष्णु के मतलब जो हमको प्रतिपाल की कोई जरूरी नहीं पिताजी हो कोई भी हो सकता है जो हमको भोजन भाई साब अच्छा लगा आपने समर्थन प्रकट किया हम लोग इस टॉपिक में किसी और दिन चर्चा रखेंगे हम आपको लेंगे अी कौन सा चर्चा कर रहे हैं यह बता
01:05:23:03 द चर्चा कर रहे कि रामपाल दास जी के द्वारा जो भ्रामक शिक्षाएं फैलाई जा रही हैं उसमें क्या तथ्य है क्या प्रमाण है क्या वो है इस पर हम चर्चा कर रहे हैं आपको हम फिर किसी दिन जोड़ेंगे आप उस आइए एक मिनट एक मिनट य सबसे पहले रामपाल जी बहुत सा चर्चा किया है जिसमें गुरु गोविंद दो खड़े और जब मैं वहां जाता हूं तो वहां सिर्फ गुरु को पाता हूं गोविंद कहां चला गया इस प्रश्न का जवाब हमको लोग से मिला नहीं तो जब वहा गोविंद है ही नहीं तो मैं किसको पैर लाग यह तो मेरा चॉइस नहीं हुआ यह तो जबरदस्ती है ची भी आपका पट भी आपका यह रामपाल जी का जो तथ है उसके आधार पर हम बात किया यह बिल्कुल पसंद नहीं है सतलो सत के मतलब जहां पर सत है वही लोक है लोक के मतलब जहां पर ज्यादा आदमी हो जाए ब्रह्म लोक पिताजी के अंदर में हर एक पुरुष के अंदर ब्रह्म रहते इसलिए ब्रह्म लोक है विष्णु लोक जहां पर हम प्रति पालन होते सबको वो हो गया विष्णु लो और संघर करता
01:06:38:12 मेरे साथ ही रहते हैं और वो परेशान रहते हैं कि हम क्या किए और उसी का परिणाम के स्वरूप वो हम ज में ले भाई साहब मैं आपको थोड़ा सा कहूंगा ठीक है अच्छा लगा आप जो है हमारा नंबर नोट कर लीजिए व्यक्तिगत रूप से हमसे जुड़िए धरातल प 7483 186 ठीक है अब मैं मिनट लिखने दीजिए भैया नहीं वो आप आप आप जा कर के नोट कर लीजिएगा स्क्रीन पर है लिखा हुआ है 7408 30169 थोड़ा आस्ते बोलिए 74
01:07:23:26 0830 69 तो कितना तो कम हो गया 740 8369 830 869 थैंक यू भगवान आपको धन्यवाद धन्यवाद अब मैं कहूंगा कि आप जो है वह उनको भेजिए जरा जो आज हम बात कर ले अभी कोई है नहीं क्योंकि रामपाल दास जी की ओर से तो आप जरा उनको कनेक्ट कर दीजिए जो हमारे संस्कृत ज्ञ गुरु भाई है एक उन्मे शर्मा
01:08:23:09 जी हां किरण दीक्षित जी बताइए जी जय श्री राम गुरुजी जय श्री राम जी गुरुजी मैं जो है मतलब यह जो कबीर पंथी है उनका जो ईश्वर है मतलब कबीर देव और इसकन का जो भगवान है श्री कृष्ण इकन के द्वारा जो प्रतिवाद है तो उन दोनों में एक सिमिलरिटी है की मतलब मैंने नोटिस किया है आपसे मतलब शेयर करना चाहता हूं यह बात तो दोनों का ही विषय मैंने सुना है कि कबीर साहब का जो दे है वो नूर तत्व से और न भी कहते कि भगवान श्री कृष्ण साकार तो है लेकिन उनका शरीर जो है वो स्पिरिचुअल है तो कुछ दिन पहले जब मैंने जो आया था ना भ राधा कृष्ण दास जी वो एक दूसरे चैनल पर लाइव कर रहे थे वहा पर किसी ने उनसे पूछा कि आत्मा क्या है सगुण साकार है निर्गुण निराकार उन्होंने साफ क दि कि आत्मा सगुण साकार है और आत्मा का भी एक आकार है और इसीलिए ही वो लोग कहते हैं कि भगवान श्री कृष्ण का शरीर जो है वो आत्मा से बना हुआ है
01:09:26:10 तो क्या ये सच है मतलब भगवान श्री कृष्ण का शरीर आत्मा से बना हुआ है वो देखिए सच्चाई से भागने के लिए कितना भी धर उधर कर लीजिए भगवान के तीन रूप है उसमें भी मोटे मोटे पकड़ लीजिए तो एक प्राप्त है और एक व्यवहारिक है व्यवहारिक के साथ व्यवहार करके प्राप्त को प्राप्त किया जाता सिंपल समझ गए हा हा और गु तो उन्मे शर्मा जी आ गए हैं अब हम थोड़ा सा इनके साथ बातचीत करेंगे उन्मे शर्मा जी जय जगन्नाथ जय श्री राम जय जगन्नाथ भैया जय श्री राम किरण जी को म्यूट कर दीजिए किरण जी [संगीत] को
01:10:14:22 और उमेश शर्मा जी हम लोग आज बात करने पड़े हैं विस्तृत रूप से व्रज शब्द पर जो मामे कम शरणम व्रज शब्द आया है उस पर हम लोग बात करने वाले हैं आज और क्योंकि आप संस्कृत ज्ञ हैं संस्कृत के विद्वान हैं तो इसलिए आज हमने आपको आमंत्रित भी किया है तो मैं चाहूंगा पहले थोड़ा सा आप दर्शकों को संस्कृत में अपना परिचय देते हुए यह विश्वास दिला दे कि आप संस्कृत के ज्ञाता हैं आपके संस्कृत का भगवत कृपा से आपके पास है ज्ञान दीजिए जी अवश्य मेरा आवाज आ रहा है जी आ रहा है
01:10:57:24 नमो नमः सर्वे अ शल्य गोत्रो उत्पन्न उन्मे शर्मा महाराष्ट्र देशीय पुण्य पतन नगरे बसामी तथा पुण्य पत्तन नगरे एकम विद्यापीठम वर्तते तिलक महाराष्ट्र विद्यापीठ नामना तत्र संस्कृत विषय प्रोफेसर रूपेण कार्यं करोमी इदम आधुनिक रूपेण अयम परिचय जातः महत्त्वपूर्ण तत्र एकम अस्ति य पूज्य पादा नाम पुरी पीठाधी स्वरा नाम निश्चलानंद सरस्वती महाभागा नाम अहम अल्प अल्पज्ञ शिष्य दीक्षा प्राप्त अयम मम परिचय तेशाम अनुय इ बहुत सुंदर आपने परिचय दिया अब दर्शकों को इसका हिंदी अनुवाद भी बता दीजिए जिससे कि बाद में वो अपना वेरीफाई वगैरह करते रहे उनको कोई डाउट हो तो जी मैंने जो अभी बोला देववाणी संस्कृत में इसका सरल भाषा में अनुवाद ऐसा होगा मैं चाल गोत्र में उत्पन्न ब्राह्मण हूं ब्राह्मण वर्ण में उत्पन्न उन्मे वैसे तो मेरा उपनाम
01:12:12:24 जोशी है परंतु जैसा शर्माता ब्राह्मणा वरमाता क्षत्रिय ऐसा लगाया जाता है शास्त्रों में तो उसके अनुसार चकि मैं संस्कृत में बोल रहा था तो उमेश शर्मा यह मेरा परिचय हुआ लेकिन वैसे तो उपा नाम हो गया जोशी महाराष्ट्र राज्य का निवासी हूं उसमें जो पुणे शहर है पुणे नगर उधर से मैं बिलोंग करता हूं और पुणे में टिड़क महाराष्ट्र विद्यापीठ नाम से एक संस्कृत की यूनिवर्सिटी है उधर में संस्कृत प्रोफेसर के रूप में काम करता हूं और सबसे महत्त्वपूर्ण बात पूज्य पूरी पीठाधीश्वर महा भागी शा प्राप्त हो यह सब परिचय में मैंने कहा अभी भाई आप लोग पता कर लीजिएगा संस्कृत पढ़ाते हैं ये यूनिवर्सिटी में ठीक है ना अब हम लोग इनसे बात करेंगे एक शब्द आया है भगवत गीता 18 66 बोल लेता हूं
01:13:23:15 [संगीत] हिंदी संस्कृत की डिक्शनरी आपको चौखंबा से मिलेगी य शिवराम आपटे जी की
01:13:57:04 यह देखिए आप लोगों को दिख रहा होगा यह श्लोक है संपूर्ण धर्मों को अर्थात इसकी संस्कृत र शाय य येय संस्कृत दिख रही है ना सर्व
01:14:36:15 धर्मानंद आया है उसका उपयोग जितने भी पारंपरिक आचार्य हैं उन्होंने किया है कि भाई वहां भगवान कह रहे हैं कि सभी धर्मों को त्याग के मेरी शरण में आ जाओ ठीक है यह भगवत जो गीता प्रेस गोरखपुर से उसका भी है आज भगवत पाद आदि शंकराचार्य जी का भी है जितने भी परंपरा प्राप्त आचार्य गण है उनका है मेरी शरण में आज अब यहां पर एक ट्विस्ट करते हैं ये रामपाल दास तो अब नहीं है यहां पर मगर उन्हो को फैला के गए हैं यहां पर भगवान कह रहे कि मेरी शरण से जा अब इसमें हमने यह डिक्शनरी जो शिवराम आपटे की वो भी दिखाते हैं 963 पृष्ठ पर
01:15:26:03 शिवराम आप्टे जी की डिक्शनरी में उन्होंने 963 है कोई और है 993 शायद 99393 93 हा 993 है यह शिवराम आप जी की डिक्शनरी का हाय स्क्रीन पर आ गया जी तो इसमें प्राथमिकता से इन्होंने ब्रज शब्द का अर्थ जाना लिखा है और साथ ही साथ वहां पर चलना भी लिखा है प्राथमिकता से तो हमने एक वीडियो बनाया इसमें और उसमें बताया कि व्रज का अर्थ केवल जाना ही नहीं होता है व्रज का अर्थ चलना भी होता है आना भी होता है आना में भी उसका पर्या अवसान है अगर तो हमने वीडियो बना के डाल दिया हमने ये भी कहा कि कोई ऐसी डिक्शनरी लाओ जिस डिक्शनरी में ब्रज का अर्थ केवल जाना लिखा हो दूसरा कोई अर्थ ना लिखा हो आना ना लिखा हो या अदर वाइज कोई भी ऐसा ना हो जो आपकी चीजों के अगेंस्ट जाता हो ठीक है तो जब हमने ये बना दिया उसके बाद कोई व्यक्ति कहीं से एक वो निकाल के लाया डिक्शनरी उसमें हमने क्या कहा था कि हमने जब यह कहा कि कोई ऐसी डिक्शनरी लाओ
01:16:41:13 जिसमें ब्रज का अर्थ केवल जाना लिखा हो और आना ना लिखा हो आना ना लिखा हो से मतलब ऐसा कोई शब्द ना लिखा हो जो आपकी चीजों को तोड़ दे तो एक व्यक्ति है उसने हमारे ऊपर वीडियो बनाया उसने दिखा दी ई चतुर्वेदी जी हैं लखनऊ के ही है हजरतगंज के और उसने उसमें दिखा दिया उनकी एक संस्कृत हिंदी शब्दकोश है वो अब नहीं रहे उनकी पीढ़ी है आज की जो वर्तमान युवा पीढ़ी वो है उसने दिखा दिया कि यह देखो इसमें जो है जाना लिखा है मगर आना नहीं लिखा है मगर आना नहीं लिखा था मगर वहां चलना लिखा था आना नहीं लिखा था मगर वहां चलना लिखा था अगर भगवान कहेंगे मेरी शरण में चल इसका क्या मतलब हुआ जी तू जो भी कार्य कर मेरी में चल तो उसका परवन भी आना में हो गया है ना चलना चल तो हमने जब यह वाला जो अपनी बात दूसरी बात उसको यह बात सिद्ध करने के लिए वोह डिक्शनरी लेनी पड़ी जो डिक्शनरी उसके गुरु ने यूज नहीं की थी उसके गुरु स्वयं य डिक्शनरी यूज करते हैं और जब लोगों को इसका अर्थ बताते हैं ब्रज का तो इसके अर्थ को बताते समय नीचे उपसर्ग के द्वारा या किसी ना किसी प्रकार से डिक्शनरी को लिखने वा ले ने भी आना को स्वीकार किया
01:17:56:14 है उपसर्ग के बाद उपसर्ग के बाद ही उन्होंने हां है ना तो इसमें जो ग्रंथ का है इसने आना को स्वीकार किया उपसर्ग के लगा के अना लगाए चलना स्वीकार किया और तो और सहारा लेना मेरी शरण का सहारा ले है ना और पहुंचना अब देखिए यहां पर एक शब्द दोबारा आया जैसे हम उपसर्ग लेने के बाद ही उपसर्ग लगने के बाद ही उन्होंने आना लिया है मगर उपसर्ग लगने के बाद उन्होंने पहुंचना भी लिया है और पहुंचना ऊपर बिना उपसर्ग के भी है पहुंचना जो शब्द है वो बिना उपसर्ग के ऊपर भी है बिना उपसर्ग के तो कहने का मतलब है उपसर्ग के बाद भी ऐसा अर्थ आ रहा है जो उपसर्ग के बिना भी था है ना जी तो हमने जब यह जवाब दिया कि भैया आपने जो डिक्शनरी दिखाई है सबसे पहली बात तो वो डिक्शनरी वो डिक्शनरी के विरुद्ध है जो डिक्शनरी आपके लोग आपके जो गुरुदेव है वो बता रहे हैं उससे आपको बाहर क्यों जाना पड़ रहा है इसका मतलब उसमें कोई खोट है तो आपने दनदना के दूसरी डिक्शनरी बता दी हमने य सवाल किया आपको क्यों जाना पड़ा बाहर दूसरी बात आप
01:19:11:14 जो दिखा भी रहे हो उसमें केवल जाना नहीं लिखा है उसमें चलना भी लिखा है जिसका परवन आना में किया जा सकता है ठीक है तो अब उनका यह कहना हो गया कि तुमने तो यह कहा था ना एक भी ऐसी डिक्शनरी लाओ तो भैया सबसे पहली बात तो मैं यहां पर आप लोगों को यह बताना चाहूंगा कि अगर मैंने यह कह दिया कि ऐसी डिक्शनरी लाओ तो इसका मतलब यह है क्या कि कल तुरंत की तुरंत मैं कोई डिक्शनरी लिख कर के किताब छाप दूंगा उसको भी आप प्रमाण के रूप में स्वीकार कर लोगे उसकी त तक जाना पड़ेगा ना और दूसरी बात यह है कि आप जो लेकर भी आए हैं उसमें चलना भी लिखा हुआ है और चलने का परवन आने में है मामे कम शरणम मेरी शरण में चल तू अपने सभी धर्म कार्य जो कर कर्तव्य कार्य जो कर वो सब मेरी शरण में कर मेरी शरण में आ हो गया तो यह सब बातें इनकी खैर समझ में नहीं आएंगे आप संस्कृत ज्ञ है तो अब हमारे दो पॉइंट है कुल मिलाकर के कि एक पहली बात तो ब्रज का मूल अर्थ क्या है क्योंकि जहां तक मुझे ज्ञात है ब्रज का मूल अर्थ शास्त्रों में मूल अर्थ कुछ और ही है और उपयोगिता के अनुसार कि का उपयोग कहां कहा पर हो सकता
01:20:26:18 है उसके अनुसार यहां पर अर्थ लिखे हैं शिवराम आपटे जी ने हमारे सनातन शास्त्रों में कुछ मूल अर्थ और है है ना दूसरी बात दूसरी बात कि जब भगवान यह कहेंगे कि मेरी शरण से जा जब भगवान य कहेंगे मेरी शरण से जा तो यहां पर की जगह से आना आवश्यक है आवश्यक है जी है ना मेरी शरण में आ जब आ लेंगे तब तो यहां पर मैं होना उचित है मगर मेरी मेरी शरण से जाने के लिए यहां पर से आना आवश्यक है मेरी शरण में जा मेरी शरण में जा तो नहीं हो पाएगा नहीं हो पाए मेरी शरण में जा तो नहीं हो पाएगा उनका कहना मेरी शरण से जा तो आप हमें ये बताइए क्या इस श्लोक में पहले तो हमें ये देखना है कि ब्रज का वास्तविक अर्थ क्या है और उसका कहां-कहां पर परवन हो सकता है और दूसरा ये कि ब्रज का इस श्लोक में जो कनेक्टिंग वो है मेरी शरण में है या मेरी शरण से है क्योंकि अगर हम जाना शब्द लेंगे तो संस्कृत में से की संस्कृत भी होनी चाहिए से को अलग करने वाली जो संस्कृत है कि मेरी शरण से जा से जा तो अलग करने वाली संस्कृत भी होनी चाहिए तो यह आप थोड़ा सा मुझे
01:21:41:22 बताए जी तो पहली बात तो तु के ठीक है मैं बोलना शुरू करूं अभी जी आपका हा जी तो यदि मैं मैंने जो अभी ब्रज धातु के लिए कुछ भेजा था आपकी फोटो रुक गई है नेटवर्क नहीं है क्या नेटवर्क तो है वाईफाई से कनेक्ट हुआ हूं अभी ठीक है क्या जी जी तो ब्रज धातु के लिए जो मैंने भेजा था व यदि उपलब्ध हो सका स्क्रीन पर तो पहला जो हमने अभी कहा हां जी वही तो सबसे पहले किसी भी डिक्शनरी को भी धातु का अर्थ कहां से प्राप्त होगा यह पता करना पड़ेगा चाहे जो शिवराम आप जी हो जाए वाचस पत्य हो जाए या शब्द कल्पद्रुम हो जाए ऐसी जो मान्यता प्राप्त शब्दकोश है वह भी अर्थ किधर से लेते होंगे यहां पर विषय चल रहा है धातु का क्रियापद का संस्कृत में धातु कहकर शब्द आता है जैसे हम वर्ब कह देते हैं अंग्रेजी में टू गो मतलब मूल वर्ब हो गया उसका कहीं प्रयोग नहीं होगा भा उसके रूपों का प्रयोग हो
01:22:56:25 जाएगा तो ऐसे व्रज यदि दिख नहीं रहा है तो जूम भी कर सकते हैं ब्रज यह हो गया मूल रूप उसका ये मेरे ख्याल से पाणिनी सूत्र है ना हां जी जी मैं अभी वही बोलने वाला था तो महर्षि पाणिनी जी ने जो संस्कृत के व्याकरण का है तो उन्होंने 4000 लगभग सूत्रों की रचना की है उसके अतिरिक्त भी उनके कई सारे ग्रंथ है उसमें एक ग्रंथ आता है धातु रूपा वली या धातु पाठ इस पेज के ऊपर शायद दिख भी जाए धातु पाठ य शब्द यदि फोटो में आया हो तो पेज नंबर क्या हैय 11 हा इधर दिख नहीं रहा है लेकिन भाद गण कई दूसरे पेज पर जाएगा मेरे पास है जी जीय चैप्टर नंबर थ दिखाएंगे मुझे चैप्टर नंबर क्या हैय दद गण हा मतलब पहला जो गण होता है धातुओं का अच्छा उसम जाएगा पहले गण को तु का पहला ग जी जी उसको टेक्निकल शब्द भवाद गण है कक भू धातु से आरंभ होता है इसीलिए भू आदि ठीक तो जब तक आप देख रहे हो मैं यहां
01:24:12:00 बता देता हूं ये प्रथम पाद है क्या पाद कौन सा हैय नहीं नहीं मैं आपको बताता हूं शिमा जी ये कोई सूत्र नहीं है मैं अभी वही बता रहा था जो 4000 सूत्र है पाण के तो उसके अतिरिक्त भी बहुत सारे ग्रंथ है जी उसी ग्रंथों में से एक ग्रंथ है धातु पाठ तो अलग अलग से छपता है वो हा अच्छा धातु नाम से मिलता है अच्छा अच्छा तो व उस धातु पाठ में क्या लगभग 2000 धातु है संस्कृत भाषा में लगभग अच्छा दो के दो धातु जो है उनका अर्थ क्या है वो खुद पाणिनी जी ने बताया हुआ है हमारे लिए अच्छा तो सी क्रम में जो अभी ब्रज धातु है तो अभी मुझे स्क्रीन दिख नहीं रही है वो शो हो रही है क्या शो में दोबारा दिखा दीजिए स्क्रीन हा तो अभी हम उधर उधर का पढ़ेंगे वो नहीं वो भी ले पानी नहीं वाला इस पले पहले वाला हा जी देखो इधर हमें वो दिख रहा है बाण ब्रज धातु लिखा है पानी जी ने और उसके आगे शब्द लिखा है गत अभी हम जो पढ़ रहे हैं ब्रज गत ये स्वयं पाणिनी जी के ही शब्द
01:25:27:03 पढ़ रहे हैं इसके अतिरिक्त कुछ नहीं है ब्रज हो गया मूल धातु और उसके आगे गत यह शब्द आया है तो इस शब्द को इस शब्द का विवेचन करने में थोड़ा अधिक टाइम लग जाएगा शॉर्ट में बता देता हूं सती सप्तमी नाम से एक प्रयोग होता है संस्कृत भाषा में जैसे युधिष्ठिर जी ने युद्ध समाप्ति के बाद यज्ञ किया तो सरल भाषा में कहने के लिए जब युद्ध समाप्त हुआ तब ऐसा प्रयोग हम कर सकते हैं जब तब संस्कृत में होगा यदि तद अथवा यदा तदा बेसिकली तो अर्थ यही रहेगा लेकिन शब्दावली बदल जाएगी वाक्य का स्ट्रक्चर बदल जाएगा इस पद्धति से वाक्य रचना कर सकते हैं हम अच्छा जैसा हिंदी में करेंगे युद्ध समाप्त होने के बाद हा हो गया तो जब तब का अभी औचित्य नहीं रहा लेकिन फिर भी अर्थ नहीं बदला युद्ध समाप्त होने के बाद तो व्याकरण का एक नियम है संस्कृत में सती सप्तमी रचना उसे कहते हैं तो वो जो रचना है बेसिकली सप्तमी विभक्ति जो प्रयोग में लाई जाती है वो अधिकरण के अर्थ में प्रयोग में लाई जाती है जैसा मैं अभी आसन पर बैठा हूं तो अहम आसने उप विषम तो
01:26:42:04 आसन ये हो गई सप्तमी विभक्ति आसन शब्द की आसन के ऊपर में बैठा हूं ये एक अर्थ हो गया सप्तमी का लेकिन जो विभक्ति होती है एक से अधिक उनके अर्थ होते हैं तो यहां जो सती सप्तमी की रचना के बारे में हम बोल रहे हैं तो यहां जो गत शब्द हमें दिख रहा है उसमें मूल शब्द आता है गति स्पीड गति और गति और गति का मतलब यहां स्पीड नहीं लेना है हमें अंग्रेजी की तरह स्पीड भी ले सकते हैं लेकिन य वे जो चलायमान हो जो चल रहा हो जो चल रहा हो जिसम मोशन है केवल उतना ही अर्थ है मतलब इनकमिंग मोशन आउट जी केवल मूवमेंट आ ही रहा है या जा ही रहा है ऐसा कुछ वहा नहीं है सिर्फ गति कहने का मतलब यह है कि अगर हम मोटा मोटा मान ले तो ब्रज का पाणिनी जी के द्वारा जो स्वीकारा गया अर्थ है मूल वो है गतिशील अब वो गतिशील जाने के लिए है या गतिशील आने के लिए वो इस पर निर्भर करता है कि वो यूज कहां हो रहा है एकली एकदम बराबर एकदम बराबर ये शिवराम भाई शिवराम आप और जो ये शब्दकोश लिखते हैं
01:27:57:14 वो जहां से पढ़ते हैं वो जिसके ऊपर आधारित बात करते हैं ये उनकी बात हो रही है पाणिनी वैसे आपको मालूम नहीं होगा पाणिनी कौन है अष्टाध्याई सूत्र जो जिन्होंने लिखा है जिनके ऊपर आधारित हमारी सारी विवेचना हैं भले ही आर समाज वाले करते हो या क्या कहते हैं भले ही वो जो संप्रदाय संप्रदाय है वो करते हो अष्टाध्यायी तो हा तो इसमें कहने का अर्थ ये है कि मूल अर्थ जो निकला बिल्कुल कांटे की नोक वाला वो क्या निकला ब्रज का मूल अर्थ की जो गतिशील है गतिशीलता गतिशील मवि अब अब उसका जो मूवमेंट है वो कहां पर यूज हो रहा है किसके साथ हो रहा है उससे तय होगा कि उसका वो मूवमेंट जाने के लिए या मूमेंट आने के लिए आने के लिए जी एकदम सटीक बात जी जी और और भी एक दो रेफरेंस हमारे पास थे उसी उन रेफरेंस में भी एक जो हमारे माधवाचार्य है विजयनगर साम्राज्य के संस्थापक उनका यख है तु उनका भी धातु पाठ है मतलब व है पानी काई उन्होंने धातु वृत्ति लिखे उसके ऊपर मतलब कमेंट की अच्छा जी बत
01:29:13:20 बि थो चे वा चे नीचे धातु वृति हा नीचे देखो हां देखो ब्रज गत उन्होंने भी उसी अर्थ को स्वीकार किया है जो अर्थ महर्षि पाणिनी के द्वारा हमें प्राप्त होता है गतिशीलता माधवाचार्य जी और भी मतलब रेफरेंसेस तो बहुत मिल जाएंगे अलग अलग माधवाचार्य जी जो सायनाचार्य उनके बड़े भाई थे जी जी जी सायनाचार्य जी के बड़े भाई और जर जिनके प्राचीनतम वेद भाष में प्राप्त होते हैं प्राचीनतम प्राचीन सबसे पुराने वेद भाष्य लेने जाएंगे तो वो हमें मिलेंगे यण भाष्य भाष्य और ये उनके बड़े भाई है ये उनके बे उनका किया गया अर्थ है यहां पर वो भी इसी अर्थ को स्वीकार कर रहे हैं तो अब यह निकला कि ब्रज का जो मूल अर्थ है बिना किसी लाग लपेट के वह है गतिशील मात्र वो बात अलग है कि वो उ उपयोग कहां होगा किसके साथ होगा अब मुझे एक चीज और बता दीजिए ये तो हमने पाणिनी जी से जान लिया ब्रज का मूल अर्थ क्या है अब कोई अपने कोई अपनी डिक्शनरी में जो अपनी अपनी दृष्टिकोण से लिखता रहे मगर पाणिनी जी का जो अर्थ है
01:30:28:22 गतिशील वो हमने निकाल लिया अब आप यह बता दीजिए कि जो मामे कम शरणम ब्रज है है ना जी उसमें जब ये फिट हो रहा है तो वहां पे मैं को संबोधित करने वाली संस्कृत है या फिर से को संबोधित करने वाली संस्कृत है क्योंकि अगर जाएगा तो अलग होगा तो से अलग होगा आएगा तो जुड़ेगा तो मैं जुड़ेगा है ना तो मैं संबोधित करने वाली संस्कृत है या से को और अगर मे वाली संस्कृत है से वाली नहीं है तो से वाली क्या होगी और अगर से वाली संस्कृत है मैं वाली नहीं है तो मैं वाली संस्कृत क्या होगी यह थोड़ा सा समझाए जी जी वो जो मैंने गी गीता के जो तीन श्लोक भेजे थे वो यदि दिख सके तो उनको सामने रखते हुए हम बात कर सकते हैं मतलब 64 65 और 6 हां जी जी वही वही थोड़ा जूम आउट करेंगे तो भी चले तीनों लोक हा बस तो यह अभी 18 अध्याय का जो 6वा श्लोक है उसके ऊपर य बात चल रही है अब होता क्या है और एक यदि दिखा सके आप मैंने अलग सा भी एक भेजा है पहले इस लोक का हा बस बस करेक्ट हा पहले से जाएंगे जैसा
01:31:44:00 मैं नीचे पढ़ता जाऊंगा आप नीचे स्क्रोल करेंगे तो भी चलेगा तु यवम जो शब्द है वो अभी फिलहाल लोक में नहीं है लेकिन वो लेना पड़ता है वो उसके बारे में अभी बात नहीं करेंगे बहुत मोटा हो जाएगा विषय बड़ा हो जाएगा करता है वो चूंकि वो लेना पड़ता है माम एकम थोड़ा नीचे शरणम व्रज यह सभी शब्द श्लोक में है अब यहां ब्रज यह जो दिख रहा है वह क्रियापद है मूल धातु के रूप में नहीं आया है वो मूल धातु का जो रूप हमें प्रयोग में लाना पड़ता है भाषा में वो है ब्रज उसका व्याकरण भी नीचे लिखा दिख रहा है हमें ब्रज गत धातु आज्ञा अथ मध्यम पुरुष एकवचन यह उसका व्याकरण है जैसा राम शब्द लेंगे हम राम राम रामा प्रथमा तो रामा इसका व्याकरण क्या बोलेंगे राम शब्द अकारांत पुलिंगी शब्द प्रथमा विभक्ति का एकवचन इस दृष्टि से तो य मध्यम पुरुष मतलब त्वम तू और वो एकवचन है इसीलिए हमने त्वम शब्द को उधर एक शब्द आता है संस्कृत में अध्या हार करना उस शब्द को पकड़ना वह शब्द वहां है
01:32:59:16 दिख नहीं रहा है दिख नहीं रहा है फिर भी वहां वह है ऐसा पकड़ना उसको अधर करना कहते हैं तो आधर से वह हमें शब्द मिल जाता है अब हम ऊपर जाएंगे गीता के श्लोक में यहां 66 नंबर के श्लोक में माम कम शरणम ब्रज यहां जो ब्रज क्रियापद है वो आना अर्थ में है या जाना अर्थ में है इसका निर्णय धर से हो जाएगा यह महत्त्वपूर्ण प्रश्न है तो वो निर्णय ठीक पिछले वाले श्लोक से हो जाएगा क्योंकि आप कोई भी शास्त्र उठा उठा सकते हो उसमें पूर्व पर संगति होती है हर एक श्लोक में हर एक शब्द का पिछले शब्द से नाता आगे वाले शब्द से नाता हर एक श्लोक का पिछले श्लोक से आगे वाले श्लोक से नाता हर एक चैप्टर का पिछले आगे वाला नाता ऐसा एक विषय होता है जब तक वो रिलेशन हम पता नहीं कर लेते पूर्व पर संगति तब हमें उसका सटीक ठीक ठाक अर्थ नहीं मिल जाता तो यहां जो 65 नंबर का श्लोक है वहां भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को क्या कह रहे हैं
✅ This part is already used · 01:34:03:13 – 01:34:09:26 (0:06)
→ Used in: A · Live क्या सतलोक आश्रम सभी भक्त शैतान की औलाद है ? #तत्त्वदर्शीसंत #rampaljimaharaj at 3:10:44 ↗
01:34:03:13 मन मना भव मद भक्तो मदजी माम नमतु मामे वैश सत्यम ते प्रति जाने प्रियो
⬜ Not used yet · 01:34:09:26 – 03:35:04:00 (2:00:54)
01:34:09:26 स में इसका सरल भाषा में अर्थ यह हुआ मन मना भव मु मुझ में मन लगने वाला हो जा तू हो जा वहां जो भव यह रूप दिख रहा है वह भी वैसा ही है मध्यम पुरुष का एकवचन है अर्जुन को अर्जुन के लिए वह कहा जा रहा है मत भक्तो मेरा भक्त बन जा मद याजी अपने कर्मों के द्वारा मेरा ही यजन करने वाला हो जा जैसा गीता में अन्यत आया भी है ना कि जो वर्णाश्रम विहित कर्म है उनका आचरण ही मेरी पूजा है इत्यादि इत्यादि मया जीी माम नमस्कर मुझे नमस्कार करने वाला हो जा मुझे नमस्कार कर ले माम एव तू मुझे ही आकर प्राप्त हो जाएगा माम एव उसका यदि संधि विच्छेद करेंगे हम माम एव यसी य जो क्रियापद है व भविष्य कालीन क्रियापद है उसमें एक धातु है ण गत धातु वो भी अर्थक धातु है हो जाएगा हो जाएगा तू मुझे मुझे मिल जाएगा मुझको प्राप्त करेगा भविष्य में यदि ऐसा ऐसा करेगा तो और य स मतलब यह मैं
01:35:25:01 तुझे सत्य बात कह रहा हूं सत्यम ते प्रति जाने प्रति जाने क्रियापद का अर्थ होता है मैं प्रतिज्ञा करता हूं कि मेरे द्वारा कही गई बात सत्य है और यह मैं तुझे क्यों बता रहा हूं क्योंकि गीता शास्त्र तो गोपय है आया ही है सर्वत भया तो तुझे क्यों बता रहा हूं प्रिया असम तू मेरा प्रिय है इसलिए मैं तुझे बता रहा हूं इसके आगे यह श्लोक आया है जिस श्लोक में ब्रज धातु का प्रयोग किया गया है ब्रज क्रियापद का सर्व धर्मानंद को छोड़ने के बाद अब इधर धर्म शब्द का क्या अर्थ है वो अलग विषय हो जाएगा लग विषय अलग हो जाएगा सब धर्मों का परित्याग करने के बाद माम एकम शरणम रज मेरी शरण में आजा माम शब्द का प्रयोग इधर साफ साफ किया गया है और उसके आगे मेरी शरण में आने के बाद क्या होगा अहम तवाम सर्व पापे भयो मोक्ष श्याम मेरी शरण में आने के बाद मैं मतलब अ शब्द का अर्थ मैं मैं तुझे सब पापों से मुक्त कर दूंगा यह हो गया माचा शोक मत करो तो इधर माम अब वो नीचे वाला दिखाएंगे तो भी चलेगा माम माम एकम मुझे एक की शरण में
01:36:40:10 आा केवल मेरी शरण में आ केवल केवल मेरी शरण में आ मुझ एक की हा ऊपर वाला थो माम दिख रहा है ना माम माम ये थोड़ा सा व्याकरण हम जान लेंगे यद तो माम वाक्य का कर्म हो गया कर्ता कौन है त्वम क्रिया करने वाला साइलेंट है क्योंकि वो अर्जुन से बात कर रहे हैं तो वो उसके लिए त्वम आ रहा है मगर वो साइलेंट है मगर वो है वहां प व वहां पर है जी तो त्वम ये हो गया कर्ता क्रिया करने वाला क्या करना है शरण आना है किसके मां मेरे अब यदि दोनों सामने सामने बात कर रहे हैं तो मेरे शरण मेरी शरण की यदि बात बात हो रही है यदि मैं भगवान श्री कृष्ण हूं मेरे सामने अर्जुन बैठे हैं तो मेरी शरण में जा ऐसा तो हो ही नहीं सकता व्याकरण की दृष्टि से भी मेरी शरण में जा नहीं मान्य होगा मान्य ही नहीं होगा बैगा फिट बैठेगा ही नहीं पहली बात वो आमने सामने बैठे हैं इसलिए फिट नहीं बैठेगा दूसरी बात पिछले वाले श्लोक में पूरी की पूरी जो कहानी है वो मेरा मुझे नमस्कार कर मेरा यज्ञ कर इत्यादि है और उससे भी महत्त्वपूर्ण बात मेरी शरण में आने के बाद मैं तुझे मुक्त कर दूंगा सर्व पाप तो यहां थर्ड
01:37:55:12 पार्टी है ही नहीं बेसिक अगर किसी और के पास जाने की बात हो रही होती तो आगे कहते वो तुझे कर देगा वो तुझे मुक्त कर देगा वो तुझे मुक्त कर देगा जिसकी तू शरण में जाएगा लेकिन य तो वैसे भी अकॉर्डिंग टू अकॉर्डिंग टू ये जो रामपाल सेक्ट है इनके अकॉर्डिंग मुक्ति देने वाले कबीर है तो यहां पर श्री कृष्ण कह रहे हैं मैं तुझे मुक्त कर दूंगा अहम अच्छा अगर किसी थर्ड पार्टी के लिए आता तो वो क्या होता अहम की जगह तुझे मुक्त कर दे कीग हो जाता जो सकार होता है सकार बोते बताता हूं स और उसके आगे मतलब बर्बल बता रहा हूं जो कि लिखा नहीं है हमारे सामने तो स और उसके सामने विसर्ग स स
01:38:44:04 स पूरा सेंटेंस बता देता हूं मोक्ष श्यामी यह जो क्रियापद यूज हुआ इधर तो यदि कर्ता अहम है तो क्रियापद का एक रूप होता है मी वाला यदि कर्ता बदल गया सहा हो गया तो क्रियापद का रूप बदल जाता है उसके लास्ट में हमें ती दिखाई देगा मतलब मोक्ष शति सहा तवाम मोक्ष शति ऐसा उर होता अगर कोई थर्ड पार्टी है तो वो ती आ जाएगा मोक्ष सति जी जी जी ती आ जाएगा क्योंकि तीय जो प्रत्यय लगता है ति प्रत्यय थर्ड पार्टी एकवचन के लिए लगता है मतलब अंग्रेजी में कहे तो थर्ड पर्सन सिंगुलर और संस्कृत में कहे तो प्रथम पुरुष एकवचन उधर लगता है वक अलग चीज हो गई जी बिल्कुल अलग चीज हो गई मैंने भी पढ़ा था थोड़ा बप तो ये हो गया अच्छा एक बात य कहूंगा अच्छा वो मैं और से का कोई अंतर वाला शब्द है क्या य
01:39:43:07 सं शरण तो मा मतलब मेरे पास मेरी तरफ यह हो गया तो मेरे मेरी तरफ वाला य अर्थ हमें मिल गया मुझ से दूर ऐसा यदि कहना होता तो उधर जो विभक्ति का प्रयोग होता वह पंचमी विभक्ति का प्रयोग करना पड़ता जैसा माम यह जो शब्द है वो अस्मत नाम से एक सर्वनाम है मैं हम दोनों हम सब मतलब मेरे लिए वो उसका प्रयोग होता है सर्वनाम का तो वो जो सर्वनाम है अमत सर्वनाम उसके द्वितीय का द्वितीय विभक्ति का एकवचन का य रूप है माम अहम आवाम वयम प्रथमा माम मा आवाम न असमान न द्वितीय तोय माम ये द्वितीया हो गई यदि मुझसे दूर वाली बात करनी पड़ती करनी थी यदि तो उसी सरी शरण से मेरी शरण से जा मेरी शरण से दूर जा ऐसा कहना होता तो पंचमी विभक्ति का प्रयोग उधर भगवान श्री कृष्ण ने किया होता गीता में एक तो नहीं य प एक बात पूछूंगा मेरी शरण शब्द तो दोनों ही उसम वाक्य में मेरी शरण में आ मेरी शरण से जा केवल एक ही शब्द अलग हो रहा है मैं मैं और से जी जी तो शरण से शरण में इसमें क्या अंतर आ रहा है वो बताइए
01:40:58:09 जी हां मतलब हमें उस श्लोक से मेरी शरण में या मेरी शरण से दोनों में से कौन सा अर्थ वहां वहां है श्री कृष्ण के अभिप्राय से तो वो किधर से पता चलेगा उसी माम शब्द से ही पता चलेगा क्योंकि वो द्वितीय विभक्ति है और जो पूरा वाक्य बनेगा हमारा ये पद्य हो गया ना श्लोक जो गद्य वाक्य हमने बनाया जिसे अन्वय करना कहते हैं तो त्वम जो अभी लिखा दिख रहा था त्वम माम एकम शरणम ब्रज तू हां यही त्वम माम माम यह जो वाक्य में कर्म का प्रयोग अभी मतलब कर्म के रूप में आया है तो इसीलिए माम शब्द का ही अर्थ हमें मिलता है मेरी शरण में यहां चूंकि मैं के लिए कोई अन्य संस्कृत शब्द के प्रयोग की आवश्यकता नहीं वो विभक्ति ही हमें बता देती है कि इधर मैं है से नहीं है और से यदि कहना होता तो पंचमी का प्रयोग कना हा वही मैं पूछ रहा हूं अगर से कहना होता तो क्या लिखा जाएगा हा वो बता देता हूं मैं अभी मैं पूरा पढ़ के बता देता हूं मतलब जो भी मतलब संस्कृत के कुछ जानकार सुन रहे होंगे तो उनको भी तसली हो जाए अहम आवा प्रथमा
01:42:13:12 माम मा आवान अस्मा द्वितीया मया अवाम अमा तृतीया म म आवाम चतुर्थी मत मद आवाम अमत पंचमी मत म और त का जो मतलब हलंत त यदि बोलेंगे हम पूरा उच्चारण नहीं होगा मत यह मत शब्द वहां हमें मिल जाता यदि मुझ मेरी शरण से यह अर्थ अभिप्रेत होता तो वहा मत लिखना पड़ता या तो मतः यह अव्यय होता है संस्कृत में मत मत या मता जरा वो सेंटेंस सुना दीजिए कि मेरी शरण से जा अगर कहेंगे तो क्या लिख आएगा वो सेंटेंस सुना दीजिए हां त्वम मत अथवा मत तः अब यहां शरणम ये शब्द आएगा ही नहीं क्योंकि किसके शरण में जाए नहीं कहा जा रहा इसलिए मैं अभी शरण शब्द का प्रयोग नहीं करूंगा त्वम मत ब्रज अथवा त्वम मतः ब्रज तू मुझ से दूर जा किसी और की शरण में जा ऐसा उधर वाक्य आ जाता त्वम मत्ता ऐसा हो जाता अगर हम एज इट इज मेरी शरण से जा को संस्कृत
01:43:28:26 में कहे तो कैसे कहेंगे मेरी शरण से जा यही त्वम मतलब तू त्वम मत ब्रज बस इना ही काफी इतना ही काफी है तू मुझसे जा मुझसे जा वो शरण उसम जैसे अभी वो आपने एक शब्द बताया ना आदरण हा व यहां प शरण का हो गया शरण भी यहां पर शरण यहां पर है पर दिख नहीं रहा है जैसे दिख नहीं रहा नहीं नहीं जी जी नहीं जो वहां हमने देखा था है पर दिख नहीं रहा वैसा इधर नहीं है यदि इस वाक्य में मैं पहले हिंदी में समझा देता हूं तू मुझ से जा इतना ही हमने इसका अनुवाद कर दिया त्वम मत ब्रज इसमें यदि शरण शब्द मेंें जोड़ना है वो साइलेंट नहीं है यहां यदि जोड़ना होगा तो मुझे से जा तो ठीक बात है तो किसकी शरण में जाए यह भी बताना पड़ेगा ना केवल सामान्य व्यवहार में हम ऐसा कहेंगे तू जा और किधर ये सामने वाला पूछ देगा किस दुकान से लाना है सामान तो किधर ये कह रहा हूं वो छोड़ दीजिए कि वहा बताया गया कि नहीं बताया गया मैं तो ये कह रहा हूं यह जो वाक्य है मेरी शरण से जा कहीं भी जा
01:44:43:26 मर जा जा कर के कुछ भी कर ले आत्महत्या कर ले मेरी शरण से जा तो इसको अगर हम कन्वर्ट करेंगे एज इट इज तो वो लाइन क्या बने हां तो शरण शब्द यदि मेरी शरण से जाए ऐसा कहना है तो त्वम थोड़ा सा इधर व्याकरण बदल जाएगा मेरी तो ये षष्ठी विभक्ति आ जाएगी उस उधर तो मैं पूरा वाक्य पहले बता देता हूं अभी त्वम मम शरणा ब्रज त्वम शरणा शरणा पंचमी हां तो अंतर आया तो अंतर आ गया शरथ और शरणम का वहां शरणम और यहां पर आ गया शरणा ये अंतर शरणम शरणा य अंतर तो भैया आपने देख लिया कि अगर मेरी शरण से जा कहेंगे एक बात थोड़ी हा जोड़ता हूं शरणम और शरण का अंतर आ ही गया यदि उधर किसके शरण में जाना है इसका उल्लेख किया गया होता तो शरणम शब्द आ सकता था अच्छा हा तो शरणम शब्द सता था लेकिन हमें अभी केवल इतना ही चाहिए कि तू मेरी शरण से जा इतना ही कहना है तो इसका
01:45:59:15 लेशन शरणा ऐसा हो जाए अच्छा य लेकिन शया किसके शरण में य तो वही शलोक बता बता रहा है ना माम जी तो माम से हम मिलता है शरण में अच्छा माम से इसलिए काम चल जा रहा है मा जी जी तो अभी हमने जाना कि भाई कुल मिला अच्छा यह बताइए जब शरण माता क्या कहते जब जब कि बता दिया होता कि मेरी शरण से उसकी शरण में जा यह बता दिया कि वहां पर क्या है जिसकी शरण में जाना है तो क्या मम शरणम बन जाएगा मम शरणम से जा संभव ही नहीं है क्योंकि माम शब्द का ही अर्थ है मेरी मेरी मेरी शरण में हां तो यदि उनकी शरण में कहना पड़ता यदि भगवान शिव के बारे में कह रहे भगवान श्री कृष्ण त्वम भगवता शिवस शरणम ब्रज ऐसा कहते तो उधर माम शब्द आता ही नहीं आता ही नहीं अच्छ ठीक तो हमने आज कुछ मोटी मोटी चीजें जानी कि पहली बात तो यह है कि जो इसका बिल्कुल मूल अर्थ है ब्रज शब्द का वो ना जाना है ना आना
01:47:15:01 है मूल अर्थ है गतिशील ये हमने शास्त्र से देख लिया भैया है ना वेद में प्रमाण तो जो मूल अर्थ है वो है गतिशील ना जाना ना आना अब वह गति किस ओर होगी यह डिपेंड करता है कि वह कहां पर यूज किया जा रहा है पहली बात तो यह लकीर के फकीर कोई नहीं हो सकता कि नहीं जाना ही होगा हा जी जी एक जो आप जो कह रहे हैं उसको मैं शास्त्र का प्रमाण भी दे दूं तो कौन से शब्द का किस ग्रंथ में क्या अर्थ लेना है मानो हरि एक शब्द उसका उसके संस्कृत में बहुत सारे अर्थ है पांच ले लेते हैं हम इधर भगवान विष्णु सिंह जो होता है लायन वो एक अर्थ है मर्कट अर्थ होता है अश्व अर्थ होता है और इंद्र अर्थ होता है तो यह पांच अर्थ पांच अर्थ में डिक्शनरी से मिल जाएंगे लेकिन किसी ग्रंथ में यद हरि शब्द का प्रयोग है तो पांचों में से कौन सा चना है और कौन सा त्यागना है इसके लिए अलग से निकष है शास्त्रों में जैसे एक मैं अभी छोटा सा कह देता हूं प्रकर दकम तात्पर्य ग्राम ऐसे पंक्ति आई है शास्त्रों में जो प्रकरण चल रहा है मतलब जो कांटेक्ट चल रहा है उस कांटेक्ट के अनुसार
01:48:30:08 अर्थों का निर्णय हो जाएगा जैसे सैंधव शब्द है उसके तीन अर्थ हो जाएंगे नमक अश्व क्योंकि सब सब अश्व का पूर्वज व था मतलब उच्च शवा सिंधु से मतलब समुद्र से वह उत्पन्न हुआ ना समुद्र मंथन के समय तो यह हो गया और और एक अर्थ मिलता है सैंधव मतलब सिंधु देश का जो राजा होता है जयद्रथ महाभारत के समय का य राजा हम जयद तो सैंधव शब्द के कुल मिलाकर के तीन अर्थ हो गए नमक अश्व और जयद्रथ अब मानो भोजन का समय है भोजन करने के लिए सब बैठे हैं और किसी ने किसी को कह दिया जरा सैंधव लाओ भाई तो वह गया और जाकर अश्व को ले लेकर आ गया तो सब हसने लगे उसके ऊपर क्योंकि यद्यपि सैंधव शब्द का अर्थ अश्व होता है लेकिन जो प्रकरण चल रहा है कांटेक्ट चल रहा है उसके अनुसार यहां नमक अर्थ का ही विकार होना क्या हम कहेंगे अनिवार्य है उसके अनुसार अनिवार्य है तो उसके अनुसार ब्रज धातु के यद्यपि आना जाना गमन करना क्योंकि अर्थ ही गतिशीलता है ना तो गति तो अनंत प्रकार की हो सकती है इस लोक में कौन गति बताई जा रही है इनकमिंग वाली गति बताई जा रही है यह दो
01:49:45:08 मुद्दों के आधार पर हमें पता चलता है पिछले वाला श्लोक मेरे ऊपर जो सब कहानी कर दू आपने जो भी बोला जी उसको समरा कर दूं आज हमने क्या क्या जाना सबसे पहली बात है कि ब्रज का मूल अर्थ है गतिशील वह गति आने में भी हो सकती है जाने में भी हो सकती है दूसरी बात कि यदि वहां पर बात हो रही है कि तू मेरी शरण में शरण से जा तो मुक्ति भी वही देगा जिसकी शरण में जाओगे यह भी एक तार्किक बात है वो अगली पंक्ति में कह रहे मैं तुझे मुक्त कर दूंगा अहम को तो नहीं बोल दोगे अहम का अर्थ मैं तुझे मुक्त कर दूंगा है ना तू चिंता मत कर तो मुक्ति देने वाले कौन हुए वहां पर वही श्री कृष्ण नहीं तो वो होता जिसकी श्रम वो तुझे मुक्त कर देगा पहली बात दूसरी बात ये है कि पिछले वाले श्लोक में भी तू मुझको भज तू मेरा जजन कर यह सब बातें कही है मेरा तो उससे भी कॉन्टेक्स्ट ये आएगा कि मेरे ही लिए यह भी कर मेरे ही लिए मेरी शरण में आ उसी से लेना पड़ेगा एकदम से नया नहीं आ जाएगा और तीसरी बात हमने ये जानी कि यदि वो कहते कि मुझे
01:51:00:09 मेरी शरण से जा तो आप अंतर देख लीजिए कि क्या क्या होता कौन-कौन से सेंटेंस बन रहे हैं अभी तो है मामे कम शरणम व्रज और अगर मेरी शरण से जाने वाला बनता मेरी शरण से जा यह बनता तो वो दो सेंटेंस आप बता दीजिए कौन-कौन से बन रहे हैं जी केवल मेरी शरण से जा बनता तो त्वम मम शरत बज यह बनता ठीक है अगर त्वम ना लगाए तो मम शरणा मम शरणा व्रज व्रज हां और एक और आपने बताया था जब शरणम जब वो शरणा शरणम यूज हो जाएगा तो वहां वो क्या शब्द ब वो वाक्य क्या बनेगा वो बन जाएगा वाक्य यदि किसी और का नाम ले रहे हैं वहां उसके शरण में जा तो त्वम शिवस शरणम व्रज ऐसा हो जाए अच्छा त्वम शिवस तो हम हटा देते हैं थोड़ी देर शिवस शरणम ब्रज हा शरण जी तो कहने का मतलब ये है क्योंकि यहां पर माम मम कह दिया इसलिए ही यहां पर ये सिद्ध हो गया कि वो अपनी शरण में आने की बात कर रहे हैं अन्यथा वो या तो नाम लिया जाए तब वो दूसरे की शरण में जाना सिद्ध होगा या फिर शरणा कहा जाए तब वो दूसरे की शरण में जाना सिद्ध होगा है ना शरणा या फिर जिसकी शरण में जाना है उसका नाम ठीक है उसका नाम तो ये आपको बहुत धन्यवाद दे रहे हैं
01:52:15:10 देखिए हमारे बहुत से दर्शक है जो आपको सुन रहे थे आपको बहुत ढेर सारी शुभकामनाएं दी जा रही है है ना और देखिए केवल इतना क और हम बहुत हम बहुत जल्द अपनी संस्कृत क्लासेस भी लाने वाले हैं उमेश जी के साथ निशुल्क तो हमारे भाई बहन बंधु सब पढ़ेंगे संस्कृत ज्ञ बनेंगे और ऐसे पाखंड का मुह तोड़ उत्तर प्रस्तुत करेंगे और मुंह तोड़ उत्तर बाद में सबसे पहले अपना अपना उत्थान करें अपना धर्म को जाने अपने ईश्वर को जाने अपनी भगवत भक्ति में आगे बढ़े अब अपने वक्ति जीवन का हा अब इन सब बातों का एक निचोड़ और दे दूं कि गगल है जो वो हो सकता है कि आपको भाव वो ना बता पाए जो गुरु बताएगा शास्त्रों का है ना मगर गल में जो नियम डाले जाएंगे
01:53:15:08 अष्टाध्यायी खानी नहीं करता है तो आप जरा गल पर सर्च करके दिखा दीजिए वो ट्रांसलेशन गगल क्या करता है मामे कम शरणम ब्रज का यह लोग बहुत गगल करवाते हैं आजकल कहते कि उसम गगल करके देख लो सबसे बड़ा तत्वदर्शी संत कौन है तो उसमें इन लोगों ने खूब साइट ड बना रखी है तो उसमें लिख देते हैं हमने कहा अभी हम भी साइड बना दे तत्वदर्शी तिरछा दर्शी संत कौन है तो वो भी फिर आने लगेगा कि संसार का तिरछा दर्शी संत कौन है फिर तो यहां ये देखिए ट्रांसलेशन बड़ा कर दि भैया से मामे कम शरणम ब्रज तो यह कह रहे हैं गल इसका अर्थ करके दे रहा है केवल मेरी शरण लो अब ये गल किसी का पक्षधर नहीं है भैया उसको जो नियम डाले जाते हैं यह
01:54:19:16 अष्टाध्यायी मामे कम शरणम ब्रज आपके पास अलग से गल उसम डाल के देख लीजिए तो यह हो गया मामे कम शरणम ब्रज आज हमने बहुत विस्तार से जान लिया हमने यह भी जान लिया कि शिवराम आपटे जी का ज्ञान कहां तक का है और आज हमने जो बात की है वह किसकी की है पाणिनी जी की शिवराम आपटे जीकी शरण में है वहां से बात की तो आप कैसे भी पकड़ ले
01:54:54:27 इस बात का ध्यान रखना है कि पीछे क्या बात चल रही थी इस सेंटेंस में आगे क्या बात चल रही है कौन-कौन से शब्द की आवश्यकता है और आपने बड़ा ही अच्छा विवेचन किया और अगर किसी को इनसे संस्कृत में बात करनी हो तो वह भी आ सकता है यह जानने के लिए संस्कृत ज्ञ है कि नहीं जो इनको काल का दूध समझ रहा हो या और कुछ कह रहा हो आपके रामपाल जी को संस्कृत बोलते हुए तो मैंने नहीं सुना कभी हां एक दो बार अंग्रेजी बोलते हुए सुना था बहुत ही हार्ड अंग्रेजी है उनकी निमो यस न्यूमरस को निमोस बोल रहे हैं और भी एक दो शब्द सुने थे मुझे याद नहीं है हालांकि वह तत्वदर्शी है पर भाषिक ज्ञान हो सकता है उनका अल्प हो नि मोरिय बोल रहे थे न मोरिय न मोरिय पढ़ नहीं पा रहे वीडियो देखा छोटा सा उसमें एक दो शब्द है उनका बड़ा ही गलत उच्चारण किया था अर्थ करना तो दूर की बात
01:56:00:08 है तो ठीक है उमेश जी आपको आने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद जी जी आपने आकर के बहुत सारा प्रकाश डाल दिया धन्यवाद जी पाड़ी जी को आप बात करना चाहते हैं जी जी जी हर हर महादेव सभी लोग हर हर महादेव जी जी राज जी जी भैया हम लोगों ने एक बात की थी ना एक वर्ड एक मिनट एक मिनट एक्साइटेड है दोनों पहले राजा राय जी आप रख लीजिए अप जी आचार्य जी एक भागवत का एक श्लोक है दशम स्कंद का जो प्रारंभ हो रहा है शुरुआत में तो उसमें एक वर्ड है शब्द है कथ तो वंश विस्तार तो उसमें कुछ लोगों को दवारा आक्षेप किया गया कि ये पद अशुद्ध लिखा गया है और उसम जो उनका जो पक्ष है वो मैं आपको सुनाना चाहूंगा वो मैंने शिवा आपको किया स्क्रीन पर दिखा के आचार जी को दिखा दीजिए अरे मेरा फोन तो बिजी है इस समय अरे अलग से मैं आपको नंबर दे दूंगा इनको आप करवा ली अच्छा ठीक है थैंक यू थैंक यथ हो मेरा हो गया पहाड़ी पहाड़ी जी बोलिए इने क्या बोला सुनाई नहीं दिया अरे उन इने अर्थ कर रखा उसकी शरण में जा वहां पर
01:57:15:09 उस शब्द डाल रखा है यहां पर जबक पूरे श्लोक में उस शब्द तो है ही नहीं मेरी शरण से जा नहीं बोला है इन लोगों ने लिखा है उसकी शरण में जा हा तो अच्छा हा ये और बहुत अच्छी बात आपने य दिला दी उसकी उसकी उसकी का संस्कृत है क्या इसमें श्लोक में नहीं नहीं पूरे श्लोक में कहीं भी नहीं है अगर अगर कहेंगे उसकी शरण में जा तो संस्कृत क्या बनेगी तो हम पता च किसकी शरण में जा जी तो जब हमने पहले बात की थी ना सहा सहा मतलब वो आदमी यदि उसकी कहेंगे तो तस्य हो जाएगा शरण बज अब तो हमें पता भी चल गया कि किसकी शरण में जाना है उसकी शरण में जाना है मैं भी कहना चाह रहा हूं आचार्य जी बहुत बढ़िया पड़ी जी ने ब बहुत बढ़िया पॉइंट याद दिलाया बहुत बढ़िया वाह
01:58:09:27 ब जी जी जी प उसम सर्व धर्मानी माम शरणम रत लिखा है ना जो माम कम एक साथ है वो माम जो शब्द है वहा से काट शुरू में ले जाते हैं माम एकम एक साथ है ना जो माम शब्द है एकम से काट के वो शुरू में ले जाते हैं उसको संधि विच्छेद करके तो देखिए वो कुछ भी वो कुछ भी ले आए वो वो कुछ भी ले आए मगर तक्ष शब्द तो नहीं है ना उसकी मेरा तो तक है मगर उसकी शरण उसका तो संस्कृत है ही नहीं जी पहाड़ी जी मैं एक बात बोल देता हूं जैसे शि बो पड़ी जी वो भी बोल रहे हैं कि वो क्रम बदल देते तोड़ने के बाद संधि करने के बाद उधर ले जाते उसका उत्तर देता हूं जो शिवा जी ने अभी कहा क्रम यद्यपि बदल दिया उन्होंने फिर भी जो उनको अभिप्रेत शब्द है वह श्लोक में ही नहीं है तो तो उत्पन्न तो नहीं कर सकते अलग से यदि क्रम बदल भी दिया माम शब्द को पहले ले भी गए तो श्लोक क्या होगा माम एक बार यदि लोक दिख सके स्क्रीन पर उसकी क्या शुरुआत है मतलब दर्शक भी देख पाए पूरा श्लोक वो दिखा दीजिए जरा शलोक दिखा दीजिए
01:59:26:03 इनका पूरा अर्थ है ऐसा मेरी पूजा मुझ में त्याग कर केवल तू उस परमात्मा की शरण में चले जा मैं वो तुझे समस्त पाप मैं तुझे समस्त पापों से छुड़वा दूंगा शोक मत कर य अनकी गता जी जी व उसी अर्थ का हम अभी मतलब बात करेंगे यदि श्लोक दिखे तो अरे वो स्क्रीन पर दिखा दीजिए वो तीन श्लोक थे ना भगवत गीता के मामे कम शरणम ब्रज वाला 18 सर वो आपके पास तीन श्लोक थे ना वो दिखा दीजिए आप सही समय पर आए हैं आज हां सही समय पर आए बोलना हूं पंडित
02:00:12:15 जी नहीं ये बहुत फैला है इस ब्रज वाला ब्रज वाला रायता बहुत फैलाया है अ मैं कुछ कह सकता हूं हा हा बो पंत जी हा जी क कह रहा था दुर्जन तोष न्याय से यद मान भी लिया जाए कि आपके ब्रज का अर्थ जाना ही है तब भी जो माम एकम कह रहे उसको क्या किया जाए माम एकम आना पड़ेगा उसम ही जाना पड़ेगा माम उसी में जाना पड़ेगा हालाकि वो बोलने में थोड़ा अटपटा जरूर लगेगा मगर गया तो वो किसम मामे कम शरण मेरी शरण में आया
02:00:53:18 उसम वो लोग ये तर्क देते हैं कि श्री कृष्ण तो सामने ही खड़े हैं तो वहा मैं उतर जी जी जी मैं इसका उत्तर दूंगा कि पहली बात तो यह है कि अगर कोई व्यक्ति धर्म को जानने के लिए इनके रामपाल दास जी के पास जाएगा क्या धर्म है वो कहेगा कि भाई मैं आपकी शरण में आया हूं और मुझे बताइए धर्म और धर्म क्या क्या है वो उन्होंने पूरा व्याख्या कर दी धर्म और अधर्म लास्ट में उन्होंने बताया तु सारे धर्मों का निचोड़ बताऊ कि तू सब छोड़ दे मेरी शरण मेंही आजा आजा मेरी शरण में आजा ये कह सकते हैं उनके गुरु अच्छा अब दूसरी बात अगर ऐसी बात है कि बा बात को पकड़ना ही है आपको अपने हिसाब से करना है तो जब कबीर स्वयं परमेश्वर है है ना तो वो मांग किससे रहे हैं कबीर स्वयं परमेश्वर है मांग किससे रहे हैं साई इतना दीजिए किससे मांग रहे हैं कोई और परमेश्वर है है ना परमेश्वर फिर कोई और सिद्ध हो गया अरे इनका बताया था
02:02:08:20 ना जो बच्चा बोलता है ना यह व्यक्ति कौन है तो बोले य पापा है तो आप तो कह रहे थे कि रमेश पापा ही रमेश है ये बात नहीं हो सकती रमेश तो कोई और है आपने पहले बोला था पापा रमेश नहीं है रमेश कोई और है पहाड़ी जी का जो मुद्दा था वो मैं कंप्लीट कर दूं जो माम य क्रम बदल भी ले तो भी अरे ऑपरेटर महोदय लोक दिखा
02:02:41:12 दीजिए अच्छा ये लोक य देख लीजिए आप ये पढ़ लीजिए हा जी ये देखो माम पहले आ गया तो क्या हो गया श्लोक माम सर्व धर्मा परिज एकम शरणम बज संस्कृत व्याकरण का एक वैशिष्ट्य है बहुत बड़ा कि जैसे फॉर एग्जांपल अंग्रेजी भाषा में आई ट मैंगो मतलब मैं आम को खाता हूं यहां यदि क्रम बदल गया तो आम मुझे खाता है ऐसा हो जाएगा अर्थ हो सकता है संस्कृत व्याकरण में ऐसा संभव ही नहीं होता क्योंकि संस्कृत में सात विभक्ति हों का प्रयोग होता है जहां विभक्ति होती है वहां आप क्रम किधर भी मतलब कोई भी शब्द किधर भी लिख लो इसीलिए तो संस्कृत भाषा में पद्य रचना संभव है कर्ता पहले आ गया क्रियापद बा बाद में आ गया पहले क्रियापद ले लिया फिर बीच में कर्ता ले लिया कर्म किधर चला गया फर्क ही नहीं पड़ता क्योंकि सब शब्द पूरे के पूरे जो शब्द होते हैं वाक्य के हर एक शब्द को अपना अपना रोल पता होता है तो इसलिए उन्होंने यदि माम पहले भी ले लिया तो भी मतलब एक परसेंट का भी फर्क नहीं पड़ेगा अर्थ अर्थ करते समय आचार जी प्रश्न पूछ सकता हूं जी जी अ ये मैंने
02:03:56:16 सुना आर प्रयोग क्या होता है आरस प्रयोग मतलब इस शास्त्र को में आ प्रयोग है इस व्याकरण के नियम चलेंगे ऐसा क्या होता है हा नहीं आर् जो शब्द है तो वो किसी और शब्द से बना है जैसे दशरथ शब्द है उससे बना दशरथ शब्द से शब्द बन गया नाम से नाम बन गया ठीक ऐसा मूल शब्द है ऋषि ऋषि शब्द से और एक शब्द बन गया आर्ष तो शब्द का अर्थ होता है ऋषि प्रणित इसी ऋषि के द्वारा जिसका प्रयोग किया गया है वैसा फॉर एग्जांपल यदि राम शब्दों को हमने ले लिया देव शब्दों को ले लेते हैं एकदम सुलभ हो जाएगा जिसको व्याकरण का ज्ञान मतलब नहीं होगा शायद किसी को उसको भी थोड़ा सा पता चल जाएगा देवा देव देवा यह हो गया उसका रूप देव शब्द का तो हम यदि वेद में चले जाएंगे वैदिक संस्कृत में क्योंकि वैदिक संस्कृत और लौकिक संस्कृत दो अलग संस्कृत भाषाएं है ही नहीं केवल कुछ रूप ऐसे हैं जो केवल वेद में प्रयोग किए जा सकते हैं पाण जी का सूत्र भी है सर्वे विध छंद विकल्प अंते तो य अलग बात हो जाएगी यह मैंने यह बता दिया ऐसा भी एक पक्ष रखते हैं लोग आजकल कि संस्कृत भाषाएं दो थी एक
02:05:11:21 लौकिक वाली एक वैदिक वाली तो उसका खंडन पाणिनी जी के सूत्र से ही हो जाता है ठीक बात तो कुछ शब्द केवल ऐसे होते हैं जिनका प्रयोग व्यवहार में नहीं करना होता है कुछ रूपों का वैसा एक बार आज जो मूल चर्चा जो हो रही है उस पर थोड़ा सा ध्यान दिला दूं पहली बात कि मामे कम शरणम ब्रज में जो पीछे वाला जो श्लोक है उसम बारबार मेरी पूजा कर मेरा यजन कर मुझे प्राप्त हो मेरी भक्ति कर ये सब बता रहे हैं उसी क्रम में आगे की बात सुननी जाएगी दूसरी बात कि मामे कम जो ब्रज शब्द है उसका अर्थ ना जाना है केवल आना है उसका अर्थ है मूल गतिशील और वो जो गतिशील है वो किसी भी दिशा में हो सकता है जाने में भी और आने में भी दूसरा दूसरा क्या है
02:06:07:27 कि उससे ठीक अगले में भगवान कह रहे हैं कि मैं तुझे सभी बंधनों से मुक्त कर दूंगा जबकि यदि किसी और की शरण में जाने को कह रहे हैं तो वहां परना चाहिए था कि वो तुझे सभी मरणों वो उससे मुक्त करे कर देगा दूसरी बात इन्होंने यहां पर एक शब्द अपनी ओर से ऐड किया है उसकी जब हम बात करते हैं उसकी तो उसकी को उपित करने वाला कोई भी संस्कृत शब्द वहां पर नहीं है जो जैसा कि इन्होने बताया तस्य है ना जैसे इन्होंने पहले कहा था शव शरणम ब्रज यह कहा था ना आपने शिवस शरणम ब्रज जोने है ना शिवस शिवस और अगर वहा पर उसकी बोल रहे तो वहा आना चाहिए तस शरणम ब्रज वहा पर आया मामे कम शरणम ब्रज ठीक है और ब्रज क्योंकि गतिशील है तो गतिशील हो जा भाई मेरी ओर हो जा क्योंकि वहा मामे कम कह रहे हैं और इसके इसके अलावा मेरी शरण से जा उसकी शरण में जा नहीं अब अगर बात करें मेरी शरण से जा तो आएगा य पर मामे कम ब्रज है ना जी और
02:07:18:25 एक मत मत शरणम ब्रज और एक आपने बताया था पंक्ति म मत शरणम ब्रज और एक आपने बताया था मामे कम शरणा व्रज शरणा मम श हा मम शरणा ब्रज और एक आएगा मत शरण हा अब इसके बाद एक बात य आती है कि वो तो पहले से ही भगवान की शरण में है तो फिर वो क्यों रहे हैं तो फिर वहा पर बात आ जाती है कि भाई कबीर दास जी पहले से ईश्वर है फिर वो क्यों मांग रहे हैं कि साई इतना दीजिए या रामपाल दास जी स्वयं को कह रहे कि मैं ईश्वर हूं और वो कह रहे है कि मैं तुच प्राणी हूं दो कौड़ी का हूं ये सब बातें क्यों कर रहे हैं दूसरी बात कि जो अर्जुन है वो व्यवहारिक तौर पर उसने ये जानते हुए कि वो अपने सखा से बात कर रहा है वो जो है अभी कुछ जानता नहीं है उस जानने को लेकर के शरण में आया है अर्जुन जो है जानने को लेकर के शरण में आया है मगर जब वो भगवान ने उसे अपना विराट स्वरूप दिखा दिया अपने बारे में यत्र तत् सर्वत्र मैं ही मैं हूं सब कुछ
02:08:33:26 बता दिया उसके बाद जब वो जब वो उन्होंने अपने बारे में यथा सामर्थ्य जो चीजें थी जो अर्जुन समझ सकता था उनके बारे में वो सब जब बता दिया तब उन्होंने तब कहा कि अब तू मेरे इस रूप की शरण में आजा जो मैंने तुझे अब बता दिया जिस रूप को उन्होंने गीता में बताया अपने अब वो बोल रहे हैं कि अब तू मेरी इस रूप की शरण में आ प्रॉपर और शरण में आने का मतलब क्या है मेरी भक्ति कर मेरी पूजा कर मेरे लिए यजन कर पहले वो जो अर्जुन था वो भगवान की भक्ति नहीं कर रहा था पहले वो सखा रूप में था पहले जो अर्जुन था वो भगवान के परब्रह्म को नहीं जानता था मगर यहां पर भगवान ने पूरी गीता में अपनी परब्रह्म को सिद्ध किया उसको बताया और फिर उससे कहा कि तू सब कुछ अब ध्यान मत दे अब तू मेरी आ जा ठीक
02:09:25:12 है हा एक लोग कह रहे हैं माम का अर्थ करते हैं उनका उनका नहीं माम शब्द दो बार यज कर रखा के अनुसार पूरा का पूरा असंभव है नाम का संभव ही नहीं ठीक है भैया तो कोई हो तो आ जाओ अब जा रहे हैं उन्म शर्मा जी ने अपना समय दिया और आवान के साथ बहुत ही गुण रूप से बहुत ही महत्त्वपूर्ण सदस्य के रूप में प्रभारी के रूप में और पदाधिकारी के रूप में कार्य कर रहे हैं बहुत सहयोग है आप आपका जो हमें है आपसे बहुत सहयोग प्राप्त है आपका बहुत ढेर सारा आभार आज आपने इस पर बहुत त विवेचना की बहुत अच्छे से और अंततोगत्वा जो मोटी बुद्धि के लोग है उनको समझ में आ जाएगा गल पर जाकर के डाल दो मामे कम शरणम ब्रज उनको जो है समझ में आ जाएगा रामपाल दास जी आपको संस्कृत के कुछ सवाल करने हैं क्या उन्मे शर्मा जी
02:10:31:06 से संस्कृत का य ब्रज वाला जो है ये समझ में नहीं आता मत जाना जाने का जाने होना चाहिए नहीं नहीं पहले य बताइए कि आपको यह विश्वास है कि नहीं कि संस्कृत के ज्ञाता है आपको संस्कृत का ज्ञान है क्या परमात्मा की जो आत्मा हिसाब से तो सही देगी ना वो उत्तर अब देखो मैं आपसे पूछ रहा हूं आप देखिए बाकी की बातें मुझसे करिएगा मैं आपको ये पूछ रहा हूं आपको संस्कृत वाला कोई मामला करना है इनसे पूछना व्याकरण इत्यादि के
02:11:07:02 संबंधित बता उत्तम पुरुष वाला था व सम भाई साब ये उसके लिए नहीं है मैं आपसे पूछ रहा हूं यदि आपको इनकी संस्कृत जता पर आपको इनके संस्कृत होने पर कोई डाउट है उस संबंध आप कोई विवेचना कोई जानकारी करना चाहते हैं इनसे बातचीत करना चाहते हैं संस्कृत में इनसे बात करना चाहते हैं तो आप करिए अन्यथा फिर हम लोग है य पर आपके लिए ना भगत जी मैं इतना पढ़ लि चौ तक पढ़ लिखा हूं हु ठीक है अब हम लोग आपसे बात कर लेंगे ब्रज शब्द को आज हमने अच्छे से जान लिया भाई ज्यादा से ज्यादा शेयर करिएगा और फिर से मैं कह रहा हूं हमें आप लोगों का अब आप लोगों का समय आ गया है दायित्व हाथ में ले कम से कम लाइक अवश्य करें और यदि सामर्थ है 9 रप से कम से कम मेंबरशिप अवश्य ले ले चैनल की क्योंकि चैनल पर आघात हो रहे हैं हमारे इस अभियान को रोकने का प्रयास किया जा रहा है तो यब को यह संदेश पहुंचे कि इनके वीडियोस जो उसको सूचना पहुंचाई जा रही है कि भाई ये इनके वीडियो नकारात्मक है तो आपके लाइक से आपके मेंबरशिप
02:12:22:06 से उसको सूचना पहुंचेगी कि यह जो चैनल है वह पॉजिटिव है ठीक है तो आपको अपना दायित्व निभाना है आपकी बारी है हमने काफी किया है जी अब उनमे जी आप चाहे तो आप लीव कर सकते हैं आपने काफी समय दे दिया है आप लीव कर सकते बहुत बहुत जी और जल्द ही हम आपकी जी जल्द ही हम आपके साथ क्ला का प्रकल्प लाएंगे जिससे कि हर आम जन को संस्कृत का ज्ञान हो जाए है
02:13:05:28 ना हमय प्रकल्प और आज विवेचन से जिनको ब शब्द के बारे में भ्रांति थी उनकी भ्रांति दूर हो गई होगी ऐसी आशा है उस आशा के साथ में अभी जी बहुत बहुत आभार आपका जी जय श्री राम जय श्री राम तो रामपाल दास जी आप अपना अन म्यूट कर लीजिए कुवारी गाय वाला आज करते हैं हां गुरुकुल गोविंद जी तो मैं ये पूछ रहा था मैं उसी के लिए बैठा हू आज कुवारी गाय का एक बार विवाह करवा ही देते हैं बहुत देर से कुवारी है इनकी वाली हमारी वाली नहीं हमारी तो आदी है इनकी कुवारी गाय का आज विवाह करवा जी जी रामपाल दास जी मैं आपको बोलूंगा कि आपकी ओर से एक बात क्लेम की जाती है कि वह जो ईश्वर है वह शिशु रूप में आता है और वो कुंवारी गाय का दूध पीता है यह बात कहां
02:14:21:03 से किस आधार पर आप बोलते हैं आपकी आवाज नहीं आ रही मैं कह रहा गरी द जी ग्र है ना उसम भी लिख रही है कवि सागर में भी लिखा हुआ है नहीं नहीं नहीं जैसे आप बोलते वेदों में प्रमाण है कबीर साहब भगवान है वो है कुछ ऐसा इशारा भगत दिखा रहे या गुरुजी ने दिखाया है ऋगवेद में मतलब इसका प्रमाण वेदों में नहीं है वेदों में है मालिक की महिमा इशारा मात्र उने कहा कबीर वेद मेरा वेद
02:15:09:16 हैद में प्रमाण है देखिए ऐसा है मेरी बात सुनिए आप सज्जन ति अच्छे से बात करते आप अच्छे लगते हैं मैं ये कह रहा हूं वेद में इस बात का प्रमाण है कि जो ईश्वर है वो आता है शिशु रूप में और कुमारी गाय का दूध पीता है भगत जी उन में हैय ज कबीर सागर है या फ ग जी महाराज जी ग्रंथ उम है भाई साहब वेदों में नहीं है ना वेदों में है इशारा मात्र बताया आपको इशारा मात्र है उसम कहां पे इशारा ये गुरु जी ने बताया नहीं उस दिन वो कौन भगत बता रहा था कौन से उसम ऋगवेद में कल ही बात हुई थी आपकी रा मात्र नहीं नहीं वो ऋग्वेद का दोबारा से बात कर लेते हैं आपने कौन सा बताया था 4 एकन है कौन सा है बता दो भाई ओ भाई गोविंद गुरुकुल मुझे न लिख रहे हो जोय
02:16:06:07 यस एकन ओ भाई यूएस लगता गोविंद गुरुकुल ये करके आता है यही सिखाया क्या यही भाषा है क्या तुम्हारी यही है तुम्हारी भाषा यही भाषा है सर समझे यही सीखा तुमने अपने ति दर्शी से आपने एक बड़ा अच्छा नाम दिया अप कोई अज्ञान है तो उसका गुरुजी मत गलत बात
02:16:41:02 है हमने हमने गुरुजी का नाम लिया क्या आपके आप उसको क रहे जिसने इस तरह से बात करना हमने आपके गुरुजी का नाम नहीं लिया भा जी बेजना एक लड़की दवारा कत कर गुरुजी भाई साब सुनि सुनिए सुनिए बेज्जती की बात बताऊ बेज्जती की बात दिखाऊ ये बाप हो गया हो गया ना बाप दिखाऊ ऐसे वीडियो सुनिए सुनिए सुनिए किसके और आपने सुनो आपने ताली बजाई और नाम किसका लिया पहला जी से जोड़ जबला जी केब देखिए ऐसा है मैं आपको आपके तत्वदर्शी संत के वीडियोस दिखाऊ कि कितना अपमान जनक तरीके से बात कर रहे हैं ब्रह्मा विष्णु महेश के बारे में दिखाऊ तो भगत जी
02:17:35:14 तीन दिखाऊ ज्ञान आधार किसी जीव के उसने तरीका देखिए यह देखो हो गया ना बा आप कह सकते हो किसी लड़की के द्वारा चेहरा भी उल् सीधी बात भाई साहब आप यहां पर समीक्षा ना करें आप जो है जो बात चल रही है वह बात करें गुरुकुल गोविंद जी को किसी ने कहा राक्षस और भांग पी के आता है तो उसका उसे उत्तर दिया गया हमने वहां पर नाम लिया ही नहीं हमने यह कहा जिससे तुमने वो सीखा होगा जिससे तुमने वो सीखा होगा वो तिरछा दर्शी होगा अब आगे बात करें
02:18:27:08 भाई साब देख आप भी जानते हो आपकी ओर से खूब अपमान हुआ है आप जानते हो भाई साहब आप अपने गुरुदेव की च की के कह दो कि आपकी ओर से अपमान नहीं हुआ भगत के द नहीं हु भगत ने किया होगा उ महाराज के द्वारा दिखा दूंगा दिखाऊ हरियाण की भाषा गुरुजी वो तो खरी भाषा है तो भाई ये हमारी भाष है अब लो ये हमारी भाषा है हरिया ता
02:19:04:03 बोलते देखो ऐसा है कि जब देखो उनको बात करनी होगी अपने सम्मानित लोगों के बारे में आपको बात करनी होगी सम्मानित लोगों के बारे में तब वह भाषा काम नहीं करेगी भाष काम कब करेगी जब किसी ऐसे के बारे में बात करनी हो जो हमारे लिए मायने नहीं रखता ठीक है उनसे बहुत अच्छे स्तर की उनसे बहुत अच्छे स्तर की भाषा उपयोग करते हैं उनके लिए रामपाल दास जी के लिए बहुत अ कल तो आपने तालि बजवा पला जी दिया किसी विषय में बात करनी है आपको जाना है बात कर आप बोल रहे उतर दे रहा तो मैंने तो मैंने मैंने आपसे उत्तर मांगा मैंने प्रश्न क किया आपसे आप अपनी ओर से कर रहे हो तो उससे पहले आपने डाट दिया कर कल आपने डाली ताली बज मैं पूछ रहा हूं देखिए अब एक बार और आपने दूसरा विषय उखाड़ तो मुझे आपको अलविदा कहना होगा जो बात चल रही है वह बात करिए किसी व्यक्ति ने हमसे गलत बात की थी हमने उसको जवाब दिया वो भी दर्शन विज्ञान व्यवहार की सीमा में रहते हुए हमने वहां पर उपयोग में नहीं लिया कि हम किसके लिए कह रहे हैं हमने तो वहां पर यह कहा जिससे तुम सीख के आए हो जिसने तुम्हें सिखाया होगा वो है तिचा दर्शी
02:20:19:08 अब उसको जिसने भी आया होगा गलत बात कहना उसको हमने त्रा दर्शी का उसमें आप बुरा क्यों जब मैं रामपाल दास जी का नाम लेकर के कहूं तब आप कहिए यहां त्रा दर्शी क्यों कह रहे हो मगर मैं कल की बात कर रहा था कल आपने जो उल् सी बुलवा रहा लड़की से जब ये भाषा कित कर रहे हैं भाई साहब फिर अब आप रहने दीजिए भाई साहब उसको वो विवेचना खामा खा लंबी हो जाएगी अलग से हो जाएगी उसका कोई अर्थ नहीं निकलेगा ना आप सिद्ध कर पाएंगे ना हम सिद्ध कर पाएंगे बात बात सदैव उन मुद्दों प की जाए जो हम अकाट्य रूप से सिद्ध कर सकते हैं अकाट्य केवल उन मुद्दों को पकड़ा करिए मैं आपको एक पर्सनल सीख दे रहा हूं य व्यक्तिगत केवल वो बात पकड़िए केवल उस बात पर खड़े हो जाइए जिसको निर्विवाद रूप से सिद्ध किया जा सके थोड़ी भी कॉम्प्रोमाइजिंग हो वो बात करिए ही नहीं मत करिए उसम समय ऊर्जा नष्ट होगी आपकी गलत होगा वो ठीक है अब आते
02:21:22:22 कुमारी गाय तो कुमारी गाय की बात कर रहे हैं क्या है ऋग्वेद न एक क्या है न चन न एकन हम भी निकाल लेते हैं क्या लिखा देखें ऋग्वेद मंडल नो ये आ गया यहां पर लिखा है इस बालक सोम को अवध जिसका वध ना किया जा सके गाय पान कराने हेतु इंद्र को संस्कृत करती है मतलब अपने दूध को मिलाकर साथ में मिलाकर इसमें कुमारी गाय कहीं पर नहीं है गाय के लिए एक शब्द आया है अवध अगन अगन का अर्थ होता है अवध यह दिखा द मैं
02:22:38:04 आपको यह आपको दिख रहा होगा अवध दिख रहा है इसका अर्थ कुमारी कुमारी नहीं है इसका अर्थ जो है कुमारी नहीं है तो अब ये वेदों में प्रमाण है कि वो कुमारी गाय का दूध पीते हैं ऐसा कुछ क हमारे भाई जी जुड़े हुए रामपाल दास जी रामपाल जी दो रामपाल दास जी दो शब्द लिखे होंगे ध और घ आप इनमें अंतर कैसे करेंगे जैसे यह धरती लिखा है या घरती लिखा है आप ये कैसे पहचानेंगे
02:23:25:28 धरती लिखा तो धा का अक्षर आएगा हा ध और घ पढ़ने में तो एक जैसे लिखते हैं उनके बीच में क्या डिफरेंस होता है जो आप पहचानते हो ध है या घ हैय अक्षर सेही पहचाना जाता है व तो ख जाता है अक्षर तो एक जैसे ही होते हैं मैं पूछ रहा हूं उसके बीच में वो क्या होती है क्या डिफरेंस होता है कि ध और घ अलग अलग पढ़ा जाता है उसम से ऐसा है ना गोल होता है थोड़ा हटा हुआ होता है लगा हुआ होता है हा बस ठीक है तो इनकी बात देख लीजिए एक तो ऊपर से गोल होता है और उसके ऊपर से जो लाइन होती है वो हटी हुई होती है ठीक है तो इनको मैं बता देता हूं कि वो अघन्य है अघन्य नहीं है ठीक है ऐसा ही है कि मैं कुछ गलत बोल रहा हूं शिवांश जी बिल्कुल बिल्कुल ये अगन लिखा है अगन अन्य नहीं लिखा है और कल मैंने पाणिनी जो पानी नहीं सॉरी निरुक्त निरुक्त से कल मैंने वो शेयर किए थे रात को निरुक्त में अगन को कहा गया है जिसका वध नहीं किया जा सकता निरुक्त में कल मैंने रात को शेयर किए थे वो जरा दिखा [संगीत]
02:24:39:21 दीजिए देखिए रामपाल दास जी लोकल भाषा और संस्कृत भाषा में बहुत फर्क है रामपाल दास जी कहते हैं कि हमारे लोक जा जाइए ऊपर जाइए हां और ऊपर जाइए बस बस बस नीचे आइए हां यह देखिए अन्या निरुक्त कारों के अनुसार थोड़ा सा ऊपर चलिए थोड़ा सा नीचे सॉरी नीचे चलिए नीचे निरुक्त कारों के अनुसार यह मेघ का वाचक है याज को के अनुसार यज्ञ में दुही जाने वाली गाय और नीचे आते आते इन्होंने किया इसका अर्थ ना मारने योग अवज्ञ य देख लो अगन यह पूरी विवेचना निरुक्त में मैं इधर से बता देता हूं यह देखो यह निरुक्त निरुक्त आप हटा लीजिए यह निरुक्त है वैदिक नरी और ये अगन अगन अगन भी नहीं है अगन ठीक है आधा धा आधा ना और अग का 744 पृष्ठ पर 745
02:25:54:26 पृष्ठ पर विवेचना की है यासिका चार्य जी ने वो बहुत दूर की चीज है वैसे मगर फिर भी सुन लीजिए 745 ये आ गया ये देखिए ये चैप्टर आ गया अग्न्या ठीक है अच्छा हां अब इसमें मैं आपको दिखा दूं कि मेन जो अर्थ इसका किया गया है अवद ये देखिए
02:26:53:00 अध्य ठीक है ये पता है क्या है ये ये लौकिक डिक्शनरी भी नहीं है यह डिक्शनरी भी ईश्वर प्रदत मान लीजिए ये वैदिक डिक्शनरी है ईश्वर प्रदत्त डि डिक्शनरी ये देखिए जिसका वध नहीं किया जा सकता हेलो तो यहां पर दूर दूर तक कहीं पर भी कुमारी गाय का कोई अर्थ नहीं है गाय को अग्न्या कहा जाता है और अग्न इसलिए कहा जाता है क्योंकि व हमारे लिए मान्य है सम्माननीय है उसका वध करने योग्य नहीं है ठीक है तो यह एक चवा उड़ाया गया पहले तो खा को धा कर दिया गया यह अदन और फिर उसको हरियाणवी बना दिया गया ठीक है दे देखेंगे उस सचा क्या तो आपके पास देख रहे एक बात बताइए मैंने तो आपको जैसे वो प्रमाण दिखाते हैं वैसे ही मैंने आपको अन लिखा हुआ था आपके अन लिखा हुआ बात य अंतर आ रही है
02:28:09:19 ना खा आपने लिखा हुआ देखा है क्या मैं आपसे पूछ रहा हूं आपकी आपने वेद कहां से पढ़े हैं वेद कहां से चेक किने बता बता नहीं अरे गुरु जीी ने कौन सी पब्लिकेशन के वेद आपको दिखाए थे व ध्यान नहीं दे बता भाई साब कैसी बातें करते हैं शास्त्र प्रमाणित भक्ति करते मगर शास्त्रों से कोई मतलब नहीं है ने जो बोल दिया वो मान लेंगे दयान भा दिजिए गोविंद गुगुल जी जन को दयानंद जी का भाष्य दिखा दीजिए चलिए आपने जो कहा था ना ऊपर से गोल होता है लाइन नहीं होती व आपको दिखा देता य दयानंद सरस्वती जी के ऋगवेद है ठीक है इसके अंदर मैं आपको पढ़ा देता हूं चलिए थोड़ा आपकी हर एक मसला हल करने के लिए तो हम बैठे हुए हैं ना हम तो आपके दास है
02:29:17:08 जैसे गु देख लेते ना फिर आप जब ध को घ या घ को ध प कर दिखा रहा करके दोबारा आ जा थोड़ी आवाज आपकी कम आ रही है कोई डिस्टरबेंस वहां अन्याय लिखा है रामपाल दास जी वहा अगन लिखा है आप कोई सी भी उठा के देख लीजिए अग लिखा है आप अपने कहीं से वेद छपते हो तो उसम चेक कर लीजिए
02:30:09:19 पहले कोई पहले से हमारा वही घ और ध में फर्क होता है जैसे व और ब में फर्क होता है नहीं फिर दूसरी बात ये भी तो है कि हमें ये क्या कहते हैं ये ये भी तो चेक करना पड़ेगा फिर उसका पाणिनी सूत्र में या क्या कहते हैं अष्टाध्यायी तो देखना पड़ेगा नहीं ये लोग तो ये बोलते हैं कि शास्त्रों का ज्ञान लेने के लिए संस्कृति की आवश्यकता नहीं है पढ़ने के लिए हां इनको लिंक भेज दीजिए आपको हिंदी में आ तो तो हिंदी में किसने करे उनका रूपांतरण रामपाल दास जी ने करे या कंप्यूटर ने कर भाई साहब मैं आपको य बात पूछ रहा हूं आपके पास वेद का म अगर संस्कृत में सभी दुनिया को देंगे तो 80 पर मैं वो नहीं क रहा वो नहीं क रहा
02:31:11:08 संस्कृत मैं पूछ रहा हूं भाई साहब संस्कृत का शब्द क्या लिखा है वहां पर देख रहा हूं अरे लिंक दे दो भैया दोबारा गुरुकुल गोविंद जी जुड़ना चाह रहे हैं हां हाथ हो गए जी मैं एक मिनट आपको मैं वो प्रमाण दिखा देता हूं रामपाल दास जी जो जहां से आपके जो गुरुदेव हैं वो जहां से बातें करते हैं मैं वो प्रमाण आपको दिखा रहा हूं ठीक है मैं आपको दिखा रहा हूं परेशान मत हो दयानंद जी के भाष्य दिखाते हैं वो वो सबसे सस्ते भाष्य है वही दयानंद जी दयानंद जी का जो पब्लिकेशन है आर्य समाज का वह सबसे सुलभ है इस समय आसानी से मिल जाता है ढूंढना नहीं पड़ता है तो दयानंद जी का भाष्य वो दिखाते हैं हालांकि दयानंद जी की विचारधारा से वह सहमत नहीं है क्योंकि दयानंद जी की विचारधारा के अनुसार ईश्वर निराकार है वो साकार हो ही नहीं सकता और की विचारधारा के अनुसार अंत कवा ईश्वर साकार है वह निराकार नहीं है ठीक है
02:32:26:20 मगर फिर भी भ हे जी के दयानंद जी के दयानंद जी के ऋग्वेद से आप देख लीजिए कि उन्होंने क्या दिखाया ऋगवेद है ठीक है यह ऋग्वेद है इसको ऋग्वेद कहते हैं किसके द्वारा प्रकाशित है यह श्री महर्षि दयानंद सरस्वती जी के द्वारा ठीक है जो आपके रेटर जी इनका इनका बड़ा कर दीजिए इनका स्क्रीन बड़ा कर दीजिए गोविंद जी का जी दिखाइए गोविंद जी थोड़ा जूम हो सकता है तो और कर लीजिए या मैं करूं अपनी तरफ से ट्राई आप आप आप करिए आप आप जूम करिए हां मैं करता हूं
02:33:12:18 रुकिए अभी दिखाई दे हो गया पूरा मंत्र हो सके तो ना दिखाइएगा केवल वो अग् वाला दिखा दीजिएगा तो ये देख लीजिए ठीक है ये है अभी ठीक है ये है आगे पढ़ लीजिए क्या है ये मम जुड़ा हुआ है आगे ये अब ये घ है या ध है ये आप खुद फैसला करोगे क्योंकि आपने बताया था ठीक है और न ये देखिए पास से बिल्कुल अब इतना पास से देख रहे हैं इतना पास से कोई नहीं दिखाएगा आपको क्या लिखा है मम आधा घ और आधा न
02:33:55:16 अच्छा आपकी उली के पास कुमार अवस्था आपको दिखा तो दिया म नहीं भा अच्छा यवे का मंडल नंबर न है सूक्त नंबर एक है और मंत्र नंबर न है ये कोई पर्दा नहीं है आपके साथ क्यक हमारी आपसे कोई स्पर्धा नहीं चल रही अब ऐसा करें ऑपरेटर महोदय बढ़िया बात है देखिए धोखे बना रहे कोई कहीं भी रहे संत रामपाल जी हमारे गुरुदेव य या फिर अपने शंकराचार्य कोई धो बना रहे पहले मैं आपको पहले मैं आपको कंपैरेटिव भी दिखा देता हूं ऑपरेटर जी आप वो स्क्रीन अभी दिखा रहे थे ना जो वो दिखा दीजिए दोबारा हा जो रामपाल जी महाराज दिखा रहे हैं ना वही दिखा दीजिए फिर तो विश्वास करेंगे य
02:34:55:16 हसने के बाद नहीं ब मिनट एक मिनट देख लीजिए बड़ा करिए भैया जरा बड़ा करिए देखिए यहां पर इन्होंने क्या चालाकी की है किसी ने लिखने वाले ने यहां आपको धा दिख रहा है अ धन्य हा अरे भाई सुन लो पहले ये हमने लिखवाया है यह था है और जो मंत्र में है वो बड़ा करो भैया जो मंत्र में बड़ा कर दो जरा
02:35:37:08 अग्न्या मूल संस्कृत के मंत्र पर ले चलिए थोड़ा जूम अच्छा य ये रामपाल जी ने जो ये अन्या लिखा है ना ये यह देखिए नीचे यह जो राम पाल जी ने जो लिखा है वोह अधनूर है यह रामपाल जी का लिखा हुआ है और ऊपर जो मंत्र में आया है जो शब्द वह क्या है वो यह ब्रैकेट में देखिए क्या लिखा है बड़ा करिए उसे इतना ही बड़ा होगा अगन यह देखिए इसमें आपको धा दिख रहा है क्या घ दिख रहा मुझे हां और नीचे देखिए आपके रामपाल जी जो है तत्वदर्शी जिनको आप कहते हैं नीचे करिए नीचे करिए
02:36:34:06 भाई क्या हुआ नीचे कर दीजिए व धा दिखा दीजिए दोबारा हा वो बोल रहे हा ठीक है वो साब दिखा तो दीजिए एक बार उन्होंने क्या लिखा है रामपाल जी ने नेटवर्क इशू आ रहा है लग रहा है नहीं वो मुंह से बोल रहे हैं उन्होंने मुंह से जो बोला है वो बोला हुआ दिखा दीजिए लिखा नहीं है रामपाल जी ने लिखा नहीं है मुंह से बोला हुआ दिखा दीजिए वो जो बताते हैं वो दिखा दीजिए ये देखिए धा में और घ में आपको अंतर दिखता है कि नहीं दिखता है
02:37:21:20 हां ठीक है ऊपर से घूमी हुई होती है वो लाइन तो ये धा अलग है अधनूर बात वो ये कहते हमारे संस्कृत वो हरियाणवी का शब्द है तो यह जो वेद लिखे गए हैं यह हरियाणवी में नहीं लिखे गए हैं वेद लिखे गए हैं संस्कृत में संस्कृत के शब्द चलते हैं अच्छा अब ये तो बात हो गई जी गोविंद जी आप बात कर लीजिए जो बात करनी है अब देखिए भगत जी बात य ग में कवि सागर में तो सत्य कुरी गा से दूर किया कबीर साब जीने लीला करने के लिए कबीर सागर को पूरा मानते है आप आपके जो गुरु है कबीर सागर को मानते हैं पूरा ही मान जाएगा मान जाएगा मानते हैं ना अच्छा भाई बात और सुन एक बात और सुनो जै सतगुरु सुनो सुनो कबीर साहब सतगुरु भी रूप बनकर आते हैं ै परमात्मा सतगुरु में इसलिए आते हैं अब यही नहीं है वो अपनी भक्ति बताते वो ब्रह्मा विष्णु महेश की बताते दुर्गा जी माता जी बताते हैं भाई साहब प्रमाण है सुनिए आप मेरी
02:38:36:22 बात समझिए हम लोग एक सुन सुन के पके हैं वो क्या है ना वेदों में प्रमाण है ओ कबीर साहब भगवान है तो हमको आज ये जानना है हम पिछले इतने दिनों से मेहनत इसलिए कर रहे हैं क्या वेदों में प्रमाण है है कि कबीर साहब भगवान है तो पहली बात तो आप जितनी बार भी हम वेदों पर आते हैं आप वेदों से आपको हटना पड़ता है कबीर सागर पर आना पड़ता है अब हम कबीर सागर पर ही आ रहे हैं कि आपके जो तत्वदर्शी जी है वह कबीर सागर को कितना मानते हैं ठीक है तो कबीर सागर दिखा दीजिए जरा इनको वोह कबीर सागर के कुछ एक फैक्ट फुल वो नोट्स है जो
02:39:22:25 कबीर सागर के व वक्तव्य दिखा दीजिए क्या रामपाल जी कबीर सागर को प्रमाण मानते हैं या नहीं मानते हैं यह भी हम उन्हीं की बुक ज्ञान गंगा से देख लेते हैं एक बार ठीक मैं बस कैमरा सेट कर रहा सिर्फ एक मिनट लगेगा बस जी महाराज उनकी मिट गोविंद जी मिनट य पर देखिए कबीर सा कबीर जी की कोई बात आ रही है सामने इसको हम पढ़ते हैं तो क्या बात आ रही है तब जुलाहा मन कीन तिवाना रामानंद सो कही उत् पाना मैं सुत पायो बड़ गुणवत्ता कारण कौन कारण कौन बख नहीं संता इसका कोई इसको कोई ब्रेक डाउन करेगा यह जो कहा है कबीर साहब जी ने कबीर सागर में यह थोड़ा सा य तो जूम कर दीजिए क्योंकि मेरे को आती है यह भाषा हा जूम कर दीजिए भैया
02:40:37:25 तब जुलाहा मन कीन तिवाना रामानंद सो कहीं उत् पाना मैं सुत पायो ब गुणवंता कारण कौन बखे नहीं संता हम तब जुलाहा मम कीन तिवाना रामानंद सो कही उत पाना यहां पर बताया जा रहा है शद ये उनकी माता जी है क्योंकि हमारे पास सुनिए सुनिए सुन लीजिए दो मिनट सुनिए जब बोल रहे हैं सुनने का धैर्य रखिए ठीक है यहां पर वो बताया जाता है कि शायद इनकी माता जी कह रहे हैं ठीक है कि रामानंद जी की कृपा से जो है वो उत्पन्न हुए हैं ठीक है ये वही री है अगर मैं गलत नहीं हूं तो ठीक है मैं सुत पायो बड़ गुणवंता यानी कि मैंने पुत्र पाया बहुत गुणों वाला कारण कौन भक है नहीं संता उसका कारण कोई ठीक है संत भी व्याख्यान उसकी नहीं कर सकते ठीक रामानंद ध्यान तब धारा रामानंद जी ने ध्यान धारा जुलाहा सो तब वचन उचार जुलाहा से तब वो वचन कहते हैं पूर्व जन्म त ब्राह्मण जाति यानी कि उसकी ब्राह्मण
02:41:53:07 जाति थी त शब्द आया मैं नहीं आया पूर्व जन्मत ब जन्म में अपनी ब्राह्मण जाति बता रहे हैं पूर्व जन्म में ब्राह्मण जाति बता रहे हैं हरि से न हैसी भली भाति यानी कि उसने पूर्व जन्म में ब्राह्मण की जाति धारण की और हरि सेवा उन्होंने भली भाति की थी कछु तु सेवा ह की चूका हरि की सेवा में हो गई थी ताते भयो जलाहा को रूपा इसलिए अब उसे जुलाहे के रूप में रूप मिलेगा या रूप में जन्मे का ठीक है प्रीति प्रभु कही तोरी लीन ताते उन में सुत तोही दना तो इस प्रकार से जो वन में है वह पुत्र जो है वह तुम्हें प्राप्त
02:42:42:25 होगा तो य पू जन्म में पूर्व जन्म में य इन्होने पूर्व जन्म में यहां पर उन्होंने मान लिया हरि की सेवा की थी कबीर दास जी और ब्राह्मण थे नहीं नहीं नहीं उल्टा हाथ मत करो ये उनके लिए नीर निमा बना दिए गए ना तोसे मुसलमान वैसे तो ब्राह्मण थे गौरी शंकर और सरस्वती उनके ऊपर झूठा पानी रक दिया था तो घर के अपने ब्राह्मण लोग ने ेक दिया था बजा उनका साथ देने की क्योंकि वो उस समय हिंदू ध प्रचार ज्यादा कर थे शंकर जी कथा सुनाते थे कौन कौन कबीर जी नहीं नहीं नाम रख दिया बाद में गरी
02:43:26:06 शंकर बात हो रही है किसको किसको आप टहला रहे हो मैं कोई छ महीने का बच्चा हूं क्या वत जन पूरा पढ़ना उ शु हरि की सेवा तो हो रही है जुलाहा कौन बन रहा है जलाहा कौन था बता रहा क उनको कपड़ पर झूठ पानी र दिया अपने काजी मुला अपने दिया बताइए
02:44:08:12 क देख लेते तर्शी जी कबीर सागर को कितना मानते हैं चलो बोलो ठीक है तो यह है ज्ञान गंगा ठीक है य ज्ञान गंगा है से दिखा रहा हूं आपको ठीक है गौरी शंकर सरस्वती मुसलमान दि ग थे रामपाल जी महाराज ठीक है टोहाना रोड बरवाला या जो भी रखा है वो हिसार टोहाना रोड जिला हिसार हरियाना ठीक है 19 नंबर पेज पर चलते हैं यदि किसी के पास बुक है तो वो अपनी बुक खोल भी सकता है हमें कोई आपत्ति वाली बात नहीं है ठीक है एक बार लिंक ब लिक दे दीजिए जो लोग एक बार लिंक पब्लिक कर दीजिए कुछ लोग मांग रहे बना दिए गए महाराज
02:44:51:12 तो यहां पर यह देख लीजिए यहां पर बताते हैं आज बहुत हो चुके हैं मैं अभी आपको बताता हूं इसमें ऑलरेडी इन्होने बताया है कि इसमें मिलाव क सागर मुस्लिम कैसे बना दिया गया था कबीर साब माय आ रहा आ रहा आ रहा हूं चिंता ना करिए ठीक है उसी पर आ रहा हूं आय आ गया है एपिसोड निकाल ठीक अभी निकाल यहां पर एक मिनट मिट अरे दो मिनट ना धैर्य रखिए मैं बोल रहा हूं तो आप मेरी बात काट दोगे फिर यहां रहे ध्यान रहे कबीर थोड़ा तेज बोलिए गोविंद जी बहुत कम आवाज आ रही है एक सेकंड एक सेकंड अभी मेरी आवाज आएगी आपको ये यहां से जाएगा अब मेरे को मेरी आवाज आ रही है आपको क्लियर आ रही है क्लियर आ रही ठीक है तो यहां पर बताते हैं ध्यान रहे कबीर सागर में काल के दूतों ने मिलावट करके सत्य को ना जानकर अपनी अटकल बाजी से असत्य प्रमाण दिए हैं उसका नाश करने के लिए परमेश्वर कबीर जी ने अपने ठीक है तो यह गरीब द्वास द्वारा यथार्थ ज्ञान प्रचार करवाया
02:46:06:25 यानी कि कबीर सागर प्रमाण नहीं है ठीक है इसी बात की पुष्टि कबीर सागर के संपादक कनकी स्क्रीन गोविंद जी की स्क्रीन बड़ी कर दीजिए एक मिनट बड़ी कर दीजिए गोविंद जी की स्क्रीन बड़ी कर दीजिए हां हां थोड़ी जूम ये भाई ज्ञान गंगा में लिखा हुआ है जो लिखा है वो जरा पढ़ के बता दीजिए कबीर सागर को कितना प्रमाण मानते हैं रामपाल जी दोबारा बता दीजिए ध्यान रहे कबीर सागर में काल के दूतों ने मिलावट करके सत्य को ना जानकर अपनी अटकल बाजी से असत्य प्रमाण दे दिए हैं ठीक है तो और बताते हैं गरीब दास जी की वह जो यथार्थ रूप से प्रचार करवाया है ठीक है वो उसी रूप में कबीर सागर जो आज जो है वो प्रमाण नहीं है पूरी तरीके से वो उतनी उतना ही उसरा ये तो ये तो जो है ये तो टिप्पणी है ना अभी प्रमाण भी दे रहे हैं अपनी ही बात का ठीक है और इसी को कह पुष्टि कबीर कबीर सागर के संपादक कबीर पंथी श्री युगला अंद बिहारी जी की उस टिप्पणी से होती है जो उन्होंने अनुराग सागर तथा ज्ञान सागर की भूमिका में की है कहा है कि कबीर पंथिया ने ही कबीर पंथ के ग्रंथों का कर रखा है चलिए अब बताइए
02:47:22:16 जरा भाई साहब सामने आ जाइए जरा अब रहने दीजिए वो प्रमाण है ही नहीं आपके लिए व आपके ग्रंथ में आपके ग्रंथ में ही वो कट गया रहने दीजिए एक बार इनको जरा यह पब्लिक कर दीजिए जो लोग जुड़ना चाहे जुड़ जाएंगे परमाण है परमाण परमाण जन से दे रहे हा असत्य प्रमाण दिए हैं काल के दूतों ने ये भैया देख लीजिए आ गया
02:48:03:10 हैना ठीक रामपाल दास जी हमने अभी आपसे दो बातें की थीना फिर बताया एक दूत आया था आवाज बहुत कम आ रही है पता नहीं क्यों किसकी हमारी आपकी नहीं अभी हम लोग बात कर ले रामपाल दास जी हमने अभी तक आपसे दो बातें की है पहली यह कि क्या कुंवारी गाय का दूध पीना वेद से सिद्ध होता है आपने वेद का कोई प्रमाण नहीं दिया जो दिया उसमें हमने आपको बता दिया कि वे के मंत्र में अग्न्या आया अग्न्या और आपके जो तत्वदर्शी जी है वो आपको अग्न्या को
02:49:04:20 अधनोम दे दूंगा आपको ठीक है वो आप ढूंढ के जब देंगे तब देंगे अभी आपके पास ठोस बात नहीं है उसके लिए कहने के लिए ठीक है हमने आपको दिखा दिया प्रमाण आपको दिखा दिया खोल के ठीक है इसलिए कोई गथ नहीं है भाई साहब हमने तो इसमें फिर वही बात फिर हम आपसे कहे कि जब जब रामपाल दास जी ने जिन जिन लोगों को आपके अनुसार प्रमाण दिखाए थे उन उन लोगों को यह मौका दिया था कि तुम जाकर के चेक कर
02:49:37:14 लो बात मान लिया थाना क पूरा उसम दिखाया था वही सुनिए कबीर सागर को उन्होंने कह दिया कि उसमें मिलावट हो चुकी है कबीर सागर में तो कबीर सागर की किस बात को प्रमाण माना जाए किस बात को ना माना जाए कुछ कहा नहीं जा सकता वो वही वो अपनी अपने मन की बातें बता देंगे और जो उनको पसंद नहीं आएगी वो छोड़ देंगे नहीं नहीं माना जागा जिसम कबीर गड कबी परमात्मा बताया गया वो बात सब मान्य है और जिसम किसीने कहा लिखा है कि शास्त्र में जहा पर कबीर को परमात्मा बताया गया होगा वही माना जाएगा ये कहां लिखा है और कौन से शास्त्र में लिखा
02:50:25:03 हु दो बात आप नहीं बता पाए दूसरी बात कुमारी गाय वाली बात आप बता नहीं पाए अब मैं आपसे एक बात पूछ रहा हूं प्रमाणों पर हम लोग बहुत हुज्जत करते हैं हालांकि प्रमाण से कुछ होना नहीं है अब मैं आपसे पूछ रहा हूं कि जो कबीर दास जी है उ आपके अनुसार जो ब्रह्मा विष्णु महेश है वो अविनाशी नहीं व नाशवान है जो कबीर क्या हैना है ना उससे हो क्या चीज ब्रह्मा विष्णु महेश दे दुर्गा जीी यह सब नर अस है ना शरीर तो नावान है तो कबीर दास जी का शरीर नाशवान है कि नहीं है नहीं वो शरीर रूप में यही तो खासियत हैब लीला करने के लिए रूप में शरी होता है अपनी मर्जी से गायब कर देते हैं पर य यहां आप जो बोल रहे थे के कौन सा बो था जर अजर अजर है उनका शरीर जैसा आप कहते अजर जरर का मतलब होता है जो जैसे कोई बिल्डिंग है घर जाता उनका शरीर गिरता नहीं इसलिए अजर अमर है
02:51:40:22 मैं ये पूछ रहा हूं अजर का अर्थ क्या है अजर का ये जैसा हमारा कोई मकान है ज नया बनाया कोई साब मुझे वो अर्थ बताइए जो अर्थ किसी शास्त्र में लिखा हो शास्त्र दिखाई दे रहा क सा बता जो वाणी मेरे पास वही संस्कृत हिंदी डिक्शनरी है जिस संस्कृत हिंदी डिक्शनरी के आधार पर आपके जो तत्वदर्शी गुरुदेव है वो ब्रज का अर्थ बताते हैं वही डिक्शनरी है उसमें लिखा है अजर का अर्थ उसमें लिखा है जो कभी बूढ़ा नहीं होता सदा जवान रहने वाला अच्छा बूढ़ा तक हो ग उसके बाद ये ना दिखाया जब आदमी मर जाता है उसे पूरी तरह बताया जाता कि ये जर वस्त आ गया वो जस्त कहां है वो तो गायब हो गए थे ना भाई साहब मैं आपसे कबीर जी का जो मुख्य स्वरूप है मूल आप कहते हो कबीर जी का जो कबीर जी जो सतलोक में बैठे हैं वो सतलोक से सीधे उठके नीचे आते हैं जो रूप वहा पर है वही रूप य पर है ऐसा है
02:52:56:06 क्या भगत जी देखिए वहा भी जैसा हम जैसी इच्छा करते हैं ना शरीर रूप में देखना है मालिक को सतलोक में शरीर रूप में बैठे परमात्मा ठीक अनामी जो लो है वहा पर जा आमा परमात्मा एक हो जाते है व शन सागर परमा हो जाते बिल्कुल अनामी लोक में अच्छा ये कहां लिखा है संत रामपाल जी मुह से सुनवा दूंगा तु और बताओ अच्छा आत्मा परमात्मा एक है तो भैया जो ये कहते हैं जो ये कहते हैं कि आत्मा परमात्मा एक नहीं है वो सुन लीजिए ये आपके भाई कह रहे हैं आत्मा परमात्मा एक हो जाते हैं ठीक है हा बिल्कुल बिल्कुल सब सुनना भगत भाई जितने भी है पर जिसे जितना ज्ञान समझ में आता है गुरुजी व हिसाब से देते हैं उन्होने पूरा ज्ञान दे दिया चार अवस्था ज्ञान दिया पा दिया गुरुदेव कुल मिला कर के आप ये बताइए अभी कुल मिला कर केय बताइए जो कबीर जी का दाढी वाला स्वरूप है वो असली है कि नकली है वही स्वरूप सतलोक में है या फिर वही वो जो हमें दिख रहा है वही शरीर है तेज पुंज के रूप में करोड़ करोड़ चंद्र में करोड़ जैसे सूर्य मिला इतना तेज का शरीर
02:54:11:08 व बैठे जैसे यहां दिख रहे हैं वैसे ही है वहां पर हा बै जैसा बना सकते पर उसी रूप में बैठे गुरुजी के अ यानी की नानक देव जी मिलने गए थे तो उन्हे ऐसा ही रूप दिखाया था य से गए थे ना नानक साब जी आत्मा को लेकर तो वही जाक समा गए थ अब ये नहीं बना बा अभी कई बातें हो गई है बहुत सारी बातें हो गई है एक एक करके ब्रेकडाउन कर लेते हैं पहली बात तो आप ये कह रहे हैं कि कबीर दास जी का जो स्वरूप सतलोक में वही स्वरूप यहां पर होता है ठीक है हा जी ठीक है वो सीधे बस अपना प्रकाश कम कर लेते हैं डायरेक्ट यहां आ जाते हैं अच्छा तो फिर ये जो यहां प रूप ये आया था बच्चे के रूप में शिशु के रूप में वो क्या था अब बताता रहा हूं बना मैंने आपसे पीछे ना कर नहीं अपनी इच्छा से बना लेते हैं बनाया था रूप बच्चे वाला अगर रूप बना लेते हैं उनका बच्चे का रूप भी है उनका किशोर अवस्था का भी है तो आपको कैसे पता कि यह वाला जो रूप है यही सतलोक का रूप है तो बच्चे रूप में य लीला करर
02:55:26:12 थी इसलिए या यानी की उनका रूप परिवर्तनशील है वो अपना रूप बदल सकते हैं हा अपनी इच्छा से कर सकते हो जहा सागर रूप में समुद्र रूप जा भाई भाई देखिए एक एक बात करिए आपने कहा कि वो अपने रूप को बदल सकते हैं ठीक है हां जी हा यानी कि उनका जो रूप है वोह शाश्वत रूप नहीं है हेलो बदल भी लेते हैं वो सर्व शक्तिमान कैसे कर ऐसा नहीं कर सके तो बताओ भाई मैं आपसे पूछ रहा हूं उनका जो रूप है जो हमें दिख रहा है यह दाढ़ी वाला रूप शाश्वत है या शिशु वाला रूप शाश्वत है कौन सा रूप श शाश्वत शाश्वत वो है जो अनामी लोक में है वो कौन सा है दाढ़ी वाला वो दाढ़ी वाला शाश्वत है कौन सा है लोक में कौन सा है अनामी लोक में अनामी लोक में भगत जी है परम तत् परब्रह्म आत्मा परमात्मा परने आपसे सतलोक में जो उनका
02:56:41:13 रूप है वो दाढ़ी वाला है या कोई और रूप है सतलोक में दाढ़ी वाला अनामी लो है व अपने परमात्मा स्वरूप है अब मैं आपको बता मान लीजिए मान लीजिए यह सतलोक में बैठे हुए कबीर जी है ठीक है हा जीय शाश्वत है ना शाश्वत यह शाश्वत है नालो में है सतलोक में जै तुम बता रहे हो मतलब की जो जो अपना लीला का रूप है भगवान का वो शाश्वत वो सतलोक से आते है ना सतलोक से आते रहा हूं य जो लीला में रूप होता है वो शाश्वत नहीं है ना नहीं उसे बदल सकते है जब इच्छा बदल सकते है उसे है यानी ये जो दाढ़ी वाला रूप जो हम यहा दिख रहा है वो शाश्वत नहीं है हा वो वा नहीं बदल सकते जब उ अच्छा तो अब बात ये आती है कि जो रूप हमें य उनका दिखता है वो शाश्वत नहीं है उसी के जैसा एक दूसरा रूप है जो सतलोक में बैठा है वो शाश्वत है ठीक है अब इसका प्रमाण दे दीजिए हम कहां पर
02:57:54:00 है अ भगत जी जिसम बात आ रही है ना हमारी बात हो रही है इसी में वीडियो डालो गुरुदेव जी अब मैं निकालू कैसे बात य है अरे भैया वीडियो डालो गुरुदेव ने बोला होगा उनका कोई शास्त्र भी होगा उन्होंने किसी शास्त्र के आधार पर बोला होगा हा बना शास्त्र बोलती नहीं है वो तो फिर व आपको नहीं आ र अब जैसे मैं याद नहीं वीडियो दिखा देता सुनता सतगुरु देव के मुह से पर बात ये हमारी बात हो रही है ना इसमें डाउनलोड है अ मैं अगर हटा तो आपको कट लो चलो इस बात को ऐसे ले लेते हैं कि आपने ये मान लिया ये जो हमें रूप दिखाई दे रहा है यह जो है बदलता है तो इसका मतलब वास्तविक रूप कुछ और है हा वास्तविक परम तत्व है जैसे हमारी आत्मा दिख नहीं सकती स्वरूप ज्ञान वैसे मालिक का है तो वास्तविक रूप हमारी आत्मा तो निराकार है स्वरूप ज्ञान है निराकार होती हैरा हमारी आत्मा का कोई फोटो है क्या नहीं नहीं बिल्कुल नहीं हो सकता आप तो कह रहे हो ना में क सतलोक में जो कबीर का रूप है उसको तो आप कह रहे हो उसका फोटो है वो तो नरी है नरी
02:59:09:07 तो आप वहां पर सतलोक में बैठे हुए कबीर का आपको मालूम है ना कि वो क्या कहते हैं वो है साकार फोटो है ना आपके पास हा जन हा सतलोक त जैसा गुरुदेव ने बताया हम सतलोक में रहना है तो आत्मा परमात्मा अलग अलग रहते है जैसे हम जब दर्शन कर सकते माक ऐसे जैसे स्वर्ग लो में विष्णु जी मिल जाते है ऐसे ही व हमें देखने को मिलते है पर हम कहते हैं मालिक हमें य नहीं ना मोक्ष पाना है तो उस मालिक में जा स जाते फर अनामी लोग में चले जाते अगर वो भ
02:59:43:19 करेंगे चलो भैया आप लोग अपनी अपनी बात सुनते रहिएगा इनके मुख से तो अभी मैं ये कह रहा हूं सभी के लिए जी आत्मा परमात्मा एक हो जाते अभी मैं आपसे ये कह रहा हूं जो हमको रा दिया है गुरुदेव जीने हमय पूछ रहा हूं हमको अब ये प्रमाण चाहिए की ये जो शरीर य इनका दिख रहा है ये जो शरीर य हमको इनका दिख रहा है यह शरीर असली है या नकली है सतलोक में यही है असली है हमारा विश्वास बिल्कुल असली है पर जैसा चाहे क कर सकते हा असली अगर अगर भाई साहब मेरी बात समझिए अगर यह पेन जो है अगर यह कम बड़ हो सकता है तो फिर इस पेन का वह स्वरूप असली नहीं है क्योंकि व बदल रहा
03:00:44:20 है बात हमा अनामी लो में रूप में बैठे हैं वहा से आते हैं वहा से उनकी इच्छा अपनी इच्छा से एक रूप तोही है मालिक का बै अरे भाई सुनिए सुनिए अनामी रूप से यहां पर आने के बाद उनका शरीर शाश्वत नहीं रहता है क्या नूरी त रहता है जब जब वो सतलोक से नीचे धरती पर आते हैं सृष्ट में आते हैं तो उनका क्या जो स्वरूप है वो शाश्वत नहीं रहता है क्या नहीं वो बदलता है अपनी मर्जी जब चाहे बदल सकते हैं उ अरे मेरे भाई तो जब जो जो बदल रहा है वो शाश्वत कैसे हुआ तो मैं कब कह रहा शाश्वत है वो तो नरी त है भगत जी बो में उनका शाश्वत स्वरूप है वो ये है और आप कह रहे हो यही आता है में भगत जी सुनोरा वो अना लो में अना लोक में सतलोक में है जब व से खड़े होते हैं नीचे धरती पर आते हैं धरती आने के बाद उनका जो स्वरूप है व शाश्वत नहीं रह जाता है सतलो की बात कर
03:01:59:21 बताओ स बात कर रहा हष्ट की बात कर रहा हूं सट की सतलोक से अपया की बात कर रहा संसार की बात कर रहा हूं जब सतलोक से कबीर जी संसार में आते हैं तो वो शाश्वत शरीर है वो लेके आते हैं या फिर उनका जो शरीर है नकली हो जाता है य नरी लेते न बदल सके यानी कि उनका जो शरीर है संसार में आने के बाद शाश्वत नहीं रह जाता है शाश्वत हमारे तुम्हारे हिसाब से समझ सकते तो नहीं रहता पर उनका उनके अंदर काल नहीं जा सकता व का नहीं ले सकता देखिए शरीर की बात हो रही है पहले शरीर की बात हो रही है अभी अभी शरीर की बात हो रही है तत्व से वो बचे रहेंगे हम तत्व से वो बचे रहेंगे हम भी मान रहे हैं जब वो संसार में आते हैं तो उनका शरीर शाश्वत रह जाता है कि नहीं इसको एक बार और क्लियर कर दीजिए भगत जी जब नरी तो जब अपनी मर्जी से बदल लेंगे व मा के रहता इसका मतलब संसार में आने के बाद उनका शरीर शाश्वत नहीं है
03:03:14:22 ना अब वो नूरी त मजी से समलो कैसा अरे तो भाई मैं कह रहा हूं इसका मतलब उनका शरीर शाश्वत नहीं है ना शरीर नूरी त का है कै शाश्वत नहीं है ये बोलने में दिक्कत है बाकी सब बो है ना भग जी परमाण दे शावत रहा है जब वो कह रहे हो कि वो अपनी मर्जी से बदल लेता है तो वो शाश्वत कहां से रहा अच्छा हमारी आत्मा जो आ परमात्मा से कैसे मानते आप क्या तीन गु में है क्या आत्मा हमारी अच्छा सावत इसलिए जो रूप धारण करती है यहां पर आक के व बदल सकती है एक शरीर छोड़कर दूसरे में जाती
03:04:00:19 हैने के बाद इसका रूप दिख रहा है आत्मा का जो यह जो रूप दिख रहा है व शाश्वत रूप नहीं है इसके अंदर तत्व शाश्वत है पूछ रहा भाई साब थ कट जवाब दीजिए आपकी बात है इतनी घुमा फिरा करके इतनी मिक्सचर है बकुल घुमाते नहीं है जैसा भाई साब मैं आपसे बोल रहा हूं अगर आपके जो परमेश्वर है कबीर दास जी जो वहां रहते हैं शाश्वत शरीर है वह नीचे आते हैं संसार में आते हैं तो उनका शरीर शाश्वत रह जाता है या नहीं रह जाता है देखिए अनामी लोक में शाश्वत है वहा से शक्ति निकलती सदगुरु रूप में
03:04:51:01 सुनो अब मुझे थोड़ा सीरियस होना पड़ेगा मैं आपसे पूछ रहा हूं संसार में आने के बाद उनका शरीर शाश्वत रह जाता है या नहीं रह जाता है हां कि ना अब य नूरी से चालू मत करना अपनी लाइन संसार में आने के बाद उनका शरीर शाश्वत है या नहीं है संसार में आने के बाद बता तो रहा हूं मैं हमारी तरह य जलाने गाने नहीं आता अपनी मर्जी चले जाते वो भाईब मैंने आपसे सवाल ये नहीं पूछा कि वो कहां जाते कब जाते क्यों नहीं समझ र मेरी बात मैं यह पूछ रहा हूं संसार में आने के बाद उनका शरीर शाश्वत है या नहीं है शाश्वत क गा बदलेगा शावत कैसे हो जाएगा यानी कि संसार में आने के बाद उनका जो शरीर है वो शाश्वत नहीं है नहीं अपनी मर्जी से बदल देते बदल देते हैं उनके उनके शरीर का भी आविर्भव भा हो सकता है नहीं जैसे जलाने में ने में आएंगे तो हो जाएगा न न अरे भाई आर भाव आर भाव रो भाव का मतलब है क्या वह अपने शरीर को गायब कर सकते हैं मिस्टर इंडिया की करेंगे मिस्टर इंडिया
03:06:06:01 की तर अपने शरीर को गायब कर सकते हैं क्या गायब कर देंगे मिल जाते मैं कह रहा देखो ज्यादा बात क्यों करते हो भाई एक एक बात करते चलो करो जदा बात क्यों करते हो ठीक है भाव भाव हो सकता है ना उनके शरीर का अवर भाव या जन्म म नहींन
03:06:39:22 प्रकट अगर दुनिया वालो को यह दिखाना चाहे कि मेरा शरीर अकट उनको मालूम है मैं तो अपने शरीर को और अप प्रकट कर रहा हूं दुनिया के सामने व लीला दिखाना चाहे कि देखो क की मृति हो रही है तो दिखा सकते लीला की नहीं भगत जी फिर अगर ऐसा कर रहे हो तो हम स्वग जा वि जी क्या कर अगर उन्ह किसी को लीला दिखानी हो बेवकूफ बनाना हो या कुछ भी करना हो उनको तमाशा दिखाना हो कुछ भी उनकी लीला है तो क्या वो लोगों को दिखा उन्होंने तो अपने शरीर को अकट कर लिया ठीक हैरो भाव अप प्रकट मतलब तिरो भाव उन्होंने तो वो जानते मैंने अपने शरीर को तिरो भाव किया है लोगों को दिखाने के लिए उन्होंने दिखा दिया मेरा शरीर जो है नहीं रहा मृत्यु हो गई कबीर की क्या व ऐसा कर सकते हैं जीव के रूप में कर जीव कर मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या कबीर जिस रूप में यहां पर आए हैं कबीर स्वयं वो यहां पर आकर केने मान लिया कि वो अपने शरीर को प्रकट यानी कि आविर्भव और यानी कि अपक कर सकते हैं ठीक है हा ठीक है ना तो अब ये बताइए जब वो आविर्भव
03:07:55:16 तिरो भाव कर सकते अपने शरीर का तो इसका मतलब यह है कि वो लोगों को यह भी दिखा सकते हैं कि देखो देखो कबीर की मुक्ति हो गई कबीर अभी था अब उसका शरीर नहीं है दिखा सकते हैं कि नहीं भगत जी दिखा देंगे पर जीव रूप में आकर दिखाएंगे मैं भाई साहब मतलब अपने रूप में नहीं दिखा सकते क्या जीव रूप में ही दिखा सकते फ आज अपने रू दिखा सकते हैं क्या मेरी बात नहीं सुनो अवस्था अपने शरीर को प्रकट अप प्रकट करके अपने रूप में लीला दिखा सकते हैं क्या देखो देखो कबीर का शरीर नावा बकुल दिखा सकते बुल दिखा सते पर उस रूप में मा के गर्भ में नहीं [प्रशंसा] मा कबीर जी का भी आविर्भव रो भाव होता है हो सकता है क्या या बात उस में कैसे हो जाएगा प्रकट अपट न हो गया हो गया ना वो मेरे भाई आप मैं ये बात कर क्यों रहा हूं आप बारबार इस बात की वो लेते हैं कि हमारा भी आविर्भव रो भाव होता है ब्रह्मा विष्णु महेश का ब्रह्मा विष्णु महेश अपना आविर्भव चरो भाव लीला में कर रहे हैं तो आप लोग कहते हो देखो देखो वो नाशवान है मगर आप कबीर के लिए य बात स्वीकार कर
03:09:10:19 रहे हो कि उनका भी आविर्भव चिरो भाव होता है ऐसा नूरी त में अगर आ हम उस रूप में आते बता कसेसे रहा मैं आपसे पूछ रहा क्या उ कर सकते है ना यानी उनका शरीर भी उनके शरीर का भी आ हो सकता है ना हम गा उनके हो सकता है क्या वो जो रूप जो सा वहां से आया है सतलोक से आया है उस रूप का यहां लीला में आने के बाद आपने कहा लीला में आने के बाद वह बदल सकता है उस रूप का आविर्भाव तिरो भाव हो सकता है क्या अर मर कैसा अगर ऐसा हो जाएगा तो भगत जी बताइए जरा भाई साहब अच्छा लगा आपसे बात करके बहुत बढ़िया आपने अपनी बातें कही हमने बातें कही आपने अपनी बातें कई हम बा घुमाते हो बात नहीं आ बात घुमाते हो ना जी को निकालने के लिए करना पड़ता है अब लोगों ने देख लिया आपकी बा नी सी बात समझ इतनी
03:10:25:28 सी बात समझ लो तो बात दिमाग खा लिया भाई और घूम फिर के अंत में देखो देखो मान भी लिया फिर भी मन मना करेंगे नहीं नहीं नहीं मानेंगे शिवांश भाई ये जन्म भर तुम इनसे बोलते रहो ये नहीं मानेंगे ये बस यही एक रट्टा लगाते रहेंगे मैं ये पूछना चाहता हूं इतना मेहनत करनी पड़ी इनके मुख से निकलवाने के लिए हालांकि यह सिद्धांत इनके गुरु का दिया हुआ नहीं है आर भाव और तिरो भाव मगर ये जीतने के लिए अपनी बातें मानते चले जा रहे हैं ये जो ये नूरी शब्द है ये क्या संस्कृत का शब्द है हिंदी का शब्द है या उर्दू का शब्द है ये नूरी अरे होगा इनके अपने ग्रंथों का कोई शब्द होगा रामपाल दास जी आपसे हमारी बातें हो गई है आपको कुछ कहना है क्या समीक्षा करने के अलावा और कुछ कहना है कोई तथ रखना है को प्रमाण रख ना समीक्षा मत करिएगा तर्क और प्रमाण रखना हो तो बताइएगा सच बात जो बताइ मालिक ने दास को परमात्मा आत्मा द्वारा भाई साहब मुझे ा चाहिए प्रवचन चाहिए रामपाल दास जी ना मुझे समीक्षा चाहिए ना प्रवचन चाहिए आपको कोई तथ्य और प्रमाण अपनी बात के समर्थन में रखना हो
03:11:41:00 तो बताइए अभी नहीं रखना वो किसी और रख ठीक है और किसी न जय श्री राम ठीक है जय जय राम स जय श्री राम आपको सतीश कुमार शुक्ला जी और जय श्री राम सूरज प्रकाश जी जी इनका इनका प्रमाण इनके गुरु का लिखा हुआ जो है उल्टा सीधा मटेरियल डाला हुआ जो जेल से लिख देता है वो बंदा भेज देता है भड़काऊ बयान देने के लिए वही रहता है और कोई शास्त्रीय प्रमाण नहीं है नहीं नहीं नहीं वो इस समय जब से वो जेल गए हैं तब से हमने देखा है उनके जो दृश्य दिखाई देते हैं वो अब जो है वैसी मनोकामना नहीं रखते अब जैसी वो करके गए हैं वो तो अब उनके नाम पर जो चल रहा है सो चल रहा है क्योंकि जब हमने उनसे यह पूछा कि आप जो नाम दान लेते हो वह कैसे मिलता है आपको तो वो एलसीडी के थ्रू मिलता है अच्छा ठीक है कुछ नाम दान नहीं है उनका खाली सुनिए तो एलईडी के थ्रू मिलता है अब बात आती है एलईडी के थ्रू मिलता है तो क्या उन्होंने ऐसी कोई घोषणा की है अच्छा किसी एक ने
03:12:56:01 कुतर्क किया कि पहले तो हमारे गुरु बैठे रहते थे तब भी हमने एलईडी से लेते मगर वो गुरु बैठे हैं आपके वो देख रहे हैं कि इसको मिल रहा है क्या मिल रहा है मेरा एलईडी के थ्रू जा रहा है उनके उसमें है अभी वो कहां बैठे हैं वो जान रहे हैं कि नहीं जान रहे आपको कुछ नहीं पता तो अभी तो उनके नाम पर क्या हो रहा है कुछ कह नहीं सकते गोविंद कल एक हर्षित अभिषेक तिवारी या हर्षित तिवारी जी आए थे वो गुरुदेव के शिष्य हैं शायद जगतगुरु शंकराचार्य जी के उनको उनसे हम बात नहीं कर पाए अगर व हमें सुन रहे हैं तो व हमसे संपर्क करें और कभी भी व अभी आ सकते या फिर जब भी आना चाहे वो आ सकते हैं मैं भी ला जुड़ा था वही आप क रहा था हाड जुड़ा था हा कल वो जुड़े थे उनके पीछे शास्त्र भी रखे थे ढेर सारे तो वो हमसे संपर्क करें और लाइव में जब भी आ सके हम क्षमा चाहते आपको समय नहीं दे
03:13:54:24 जी आप सही करते हैं इनको बकुल इनकी जी आप अपनी बात पूरी कर लीजिए इनके पास कोई शास्त्रीय प्रमाण है नहीं इतनी दुकान चला रखी है कबीर दास जी के मिट मि गोविंद गुगुल जी अपनी बात पूरी कर अपनी दो मिनट में पूरी कर लूगा क्योंकि वरिष्ठ जन बैठे हुए हैं अच्छा नहीं लगता ठीक है इनका कहना यह है कि तुम शुद्ध स्वरूपिणी हो वो माता को कह रहे हैं तुम नित्य हो और हमारा आविर्भव तिरो भाव होता रहता है अर्थात यह बनता है इसका कि जो मां है ठीक है वो क्या है वो तो नित्य है ठीक है और हमारा आविर्भाव तिरोभाव होता है ठीक है तो चलिए इसी चीज के बारे में एक और चीज जब मैंने नवा स्कंद खोला तब देखिए मेरे को एक और चीज क्या मिली है ठीक है देखिएगा ध्यान से फिर इनसे हम पूछेंगे क्या रामपाल जी की ये भी पॉलिसी गलत थी उन्होंने आपको ये भी पॉलिसी गलत बताई श्रीमद् देवी भागवत पुराण है गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित है ठीक है अंदर चलते हैं थोड़ा सा और यहां पर देखिए बड़ी एक अच्छी बात मेरे को नजर आई ये कह रहे हैं विप्र इतने में श्री कृष्ण की उपासना
03:15:09:28 करने वाली देवी दुर्गा का सहसा आविर्भाव हुआ तो क्या यह मानते हैं कि देवी दुर्गा का भी जन्म होता है क्योंकि यदि जिस दिन इन्होंने यह बात मान ली उस दिन इनका सारी की सारी बात वहीं पर खंडित होकर चूर चूर हो जाएगी कि ये जो बोलते हैं कि तुम नित्य स्वरूपा हो या तो तुम्हें माता को नित्य स्वरूपा मानना पड़ेगा और अगर तुम आविर्भाव तिरो भाव का मतलब जन्म मृत्यु मानते हो तो तुम्हें यह भी मानना पड़ेगा आज के बाद कि देवी का भी जो है जन्म मृत्यु होती है आर बात इतनी सी है इसमें बात इतनी सी है जब परम तत्व को देवी के रूप में व्याख्यान किया जा रहा है संबोधित किया जा रहा है उस समय जो लीला के अंदर वाला भगवान का स्वरूप है जैसे इन्होने कहा ना वो लीला में आकर के उसका आविर्भाव तिरोभाव होता है लीला के अंदर का स्वरूप तो लीला के अंदर जो भगवान का परम तत्व का जो स्वरूप है वो लीला के बाहर का जो स्वरूप है परम तत्व का उसके लिए कह रहा है कि तुम नित्य हो और हम तो हमारा तो आविर्भाव तिरोभाव होता है लीला के अंदर वाला स्वरूप लीला के बाहर वाले परम तत्व के स्वरूप से बात कर रहा है है ना वही वही मैं कह रहा हूं ना वही तो मैं कह रहा हूं कि आज के बादय झूठ फैला कर देखे फिर इस बात के ऊपर
03:16:25:18 आज के बाद झूठ फैलाए जरा की आविर्भव का मतलब जन्म मृत्यु होता है और भौतिक होता है और ब्रह्मा विष्णु पहले तो पहले तो इसको हिंदी शुद्ध बोलना आता नहीं है हिंदी में क्या लिखा है क्या पढ़ना है क्या बोलना है इसको पता ही नहीं है इसके फॉलोअर्स को जो हरियाणा के हैं सब ठीक है सब हरियाणा वाले शुद्ध हिंदी बोल ही नहीं पाते हैं ना पढ़ पाते हैं तो उसका शब्द और अर्थ उनको मालूम कैसे होगा कि आविर्भाव का मतलब जन्म मृत्यु से लेकर है कि आविर्भाव का मतलब है कि एक शक्ति का उत्पन्न होना यह भाव हो जाएगा जब इसको यही नहीं मालूम है कि किसी शक्ति का जो तेज है वह किस समय प्रकट होता है और किस अवस्था में प्रकट होता है इसको यह नहीं मालूम करने के लिए क्या मालूम है यह केवल सनातनी हों को छोटी जाति बड़ी जाति करके लड़ाने का काम करता है और यही इसकी पॉलिसी है वही फॉलोअर्स है और कोई इसके फॉलोअर्स नहीं है चलिए चलिए आप आपके अंदर बहुत ज्यादा मेरे ख्याल से उनके लिए रोश है थोड़ा
03:17:40:21 सा कहूंगा कि थोड़ा सा और थोड़ी मीठी भाषा हो जाए क्योंकि जितना सुंदरता से हम लोग अपनी बात को सशक्त करके मीठे शब्दों में रख सकते हैं उतना उखड़े हुए शब्दों में उतना आनंद नहीं आता है देखिए ऐसा है ऐसा ऐसा है देखिए हम आपको बता रहे हैं उखड़ी हुई बात की बात यह होती है कि आदमी जब कोई बहुत धर्म के प्रति बहुत लोगों का जो उल्टा सीधा वक्तव्य है यह सुन कर के जब एकदम वो हो जाता है ना तभी हमको किसी ने दिया कि आप इस लिंक में जाइए तो फिर नीचे चल रहा था एक में आपका स्ट्रीम यार्ड का तो हम भी जुड़ गए ठीक है तो हम तो इसको लेने वाले थे बि बढ़िया लपेटे में लेने वाले थे उसमें हम छोड़ने वाले नहीं थे इसको लेकिन पहले सुन लेते कि बोल क्या रहा है ना इसका एक एक एक है कोई वह एक दिन बता रहा था कि गीता में लिखा है कि यह मांस खिलाओ वो मांस खिलाओ ऐसा खिलाओ ऐसा खिलाओ इसको इसको और इकान वाले को हा और गायत्री परिवार वाले को यह सभी इतने भ्रष्ट हो गए हैं कि क्या क्या गीता का अन्वय और व्याख्या कर दिए हैं और किस प्रकार से कर दिए हैं कि इनको बोलने की मतलब
03:18:56:13 जो भी बोल दिया जाए व भी कम है जी चलिए रामपाल वालो में से कोई आने वाला था जी तो आज हमने कुछ महत्त्वपूर्ण चीजें जानी है सराइज कर ले क्योंकि काफी लंबी चर्चा हो चुकी है पहली बात ये है कि कुमारी गाय वाला जो मामला है सरासर झूठ है वेदों में कहीं कुछ कुमारी गाय का वर्णन नहीं है अग शब्द आया है उसको इन्होने अधनोम अधनूर बात हमने ब्रज शब्द के अर्थ के बारे में जाना कि यदि वहां पर किसी और की शरण में जाने को कह रहे हैं उसकी शरण में जाने को कह रहे तो वहां पर उसकी का संस्कृत शब्द वहां पर नहीं है तस्य है तस्य नहीं है वहां पर संस्कृत में और अगर किसी और की शरण में जाएगा तो मुक्ति वो देगा ना इसीलिए तो भेजा जा रहा है मगर वो वहां पर कह रहे है कि अहम मैं तुम्हें मुक्त कर दूंगा पिछले श्लोक में भी वही बात कर रहे हैं मेरी पूजा कर मेरा जजन कर और इसके साथ ही साथ गल प भी आप करके देखोगे तो मामे कम शरणम का जो अर्थ आएगा वो आएगा कि मेरी शरण में मेरी शरण लो मेरी शरण में आ जाओ और इसके साथ ही साथ आज हमने ये जाना कि ब्रज
03:20:11:20 का जो मूल अर्थ है मूल अर्थ वो है गतिशील ना उसका अर्थ है जाना ना उसका अर्थ है आना अब वो डिपेंड करेगा कहां से कनेक्टेड है तो उधर वो गति करेगा ठीक है और इसके अलावा भी हमने दो संस्कृत की पंक्तिया प्राप्त की थी कि अगर वो उसकी शरण में जाने की बात हो रही तो संस्कृत में क्या कहा जाएगा और मेरी शरण से जा यह बात हो रही होगी तो क्या कहा जाएगा इसका भी हमने आज देख लिया अब जो कुतर के कता है कि वो तो शरण में पहले से ही है वो शरण में पहले से है मगर अभी तक वो उनका वो परमार्थिक रूप नहीं जानते थे वो विराट स्वरूप नहीं देखा था अब उनको विराट स्वरूप को परब्रह्म को स्वीकार करते हुए श्री कृष्ण भगवान की अब उस उस रूप से शरण में आने को कहा जा रहा है पहले भौतिक रूप से शरण में थे अब आध्यात्मिक रूप से शरण में आने को कहा जा रहा है अगर इस पर भी आपकी आपको संतुष्टि नहीं पहुंचती है तो हम भी पूछ सकते हैं कि जब कबीर स्वयं परमेश्वर है तो वह खाना किससे मांग रहा है और जब रामपाल दास जी स्वयं तत्वदर्शी है तो फिर वोल जेल में तो दूसरी बात है मगर वो स्वय मैं कुत्ता हूं मैं दो कौड़ी का हूं मैं ये हूं मैं वो हूं वो स्वयं कह रहे हैं यह सब बातें है अच्छा इसी से एक बात और आ जाती है कि अभी फिर हमने
03:21:26:24 लास्ट में जब इनसे बात करने का प्रयास किया तो अच्छा एक चीज हमने और जानी है कि कबीर जो है वो अजर नहीं है क्योंकि जो सतलोक में जो बैठे हैं सतलोक में कैसा भी रूप हो चलेगा मगर यहां लीला में जो उनका रूप हमें प्राप्त है वो अजर नहीं है वो जो रूप है वो अजर नहीं दिख रहा है ठीक है वो दाढ़ी वाला दिख रहा है वो रूप तो वो अजर नहीं है उम्र पर प्रभाव पड़ रहा है उनके सभी दाढ़ी है इसके बाद जो अंत में हमने छानबीन की बहुत तहकीकात की और बहुत ज्यादा खोजबीन करने के बाद वो जो व्यक्ति जो निर्णायक वक्तव्य दे ही नहीं रहे थे उनको धीरे धीरे करके निर्णय पर लेकर के आए जहां पर उन्होंने यह स्वीकार किया कि जो कबीर दास जी जब लीला में होते हैं तो उनका शरीर भी उनके शरीर का भी आविर्भव और तिरो भाव हो सकता है यानी कि वह शाश्वत स्वरूप नहीं
03:22:27:01 है कबीर दास ये देखिए कबीर यह लिखा है यह लिखा है इनकी कबीर सागर लिखा है बिना गुरु के तुम्हारा जब साधु लोग कबीर सा पर इस प्रकार का कटाक्ष करने लगे तब आपने रामानंद स्वामी को गुरु करने का संकल्प लिया जिस समय आपने स्वामी रामानंद को गुरु करने का संकल्प किया उस समय आपको प्रकट हुए पूरे पांच वर्ष हो चुके थे और आपकी प्रसिद्धि भारत के बहुत से भागों में थी आप रामानंद स्वामी के पास गए विनय किया कि स्वामी जी मुझे दीक्षा देकर अपना शिष्य कीजिए और मुझे गुरु दक्षिणा लीजिए अब ये बताइए कि
03:23:19:00 यहां पर जब वह पहले से ज्ञानवान है तो उनको गुरु बनाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है वह तो परमेश्वर है सब कुछ कर सकते हैं बिना गुरु के ठीक है तो गुरु दीक्षा का गु गुरु दीक्षा का गुरु दीक्षा का संबंध इससे हमारे हिसाब से नहीं हो सकता क्योंकि दत्तात्रेय महाराज जी भी स्वयं देव स्वरूप थे और 27 गुरु बनाया था और उसके बाद में भी आप देखिए श्री कृष्ण को अगर हम मानते हैं श्री कृष्ण को अगर हम मानते देव रहे कि भाई भगवान लीला पूर्वक गुरु भी बनाते हैं सब करते हैं ये लोग कह रहे कि नहीं भगवान ने अगर कह दिया मेरा आरो भाव होता है और भगवान ने कह दिया मेरी शरण में आ जा तो य तो बिल्कुल रियल बात है भाई लीला भी तो है लीला को कहां ले जाओगे भगवान लीला करते हैं भगवान गुरु बनाते हैं भगवान अपने भगवान अपने भक्त के भक्त बन जाते हैं भगवान को हम ये बात मान रहे हैं मगर ये क्या करते हैं जब ब्रह्मा विष्णु महेश कहेंगे कि अरे अरे हम हम तो लीला पूर्वक जब वो ये कहते हम तो हमारा हम कुछ नहीं है
03:24:34:04 त्र भाव होता है आविर्भव होता है तो वो कहते ये देखो ब्रह्मा विष्णु महेश अपने बारे में क्या कह रहे हैं और जब रामपाल दास कह रहे कि मैं कुत्ता हूं तो ये जो है ये तो इन्होने सांकेतिक कहा समझ रहे हैं आप तो यह प्रश्न हम इसलिए उठा रहे हैं हम लीला को स्वीकार करते हैं मगर तब जब आप दूसरे की लीला को स्वीकार करो उनकी आपकी लीला लीला आपकी लीला लीला और ब्रह्मा विष्णु महेश की लीला वो सत्य है उन्होंने अगर कह दिया कि आविर्भव होता है त्र भाव होता है भले ही उन्होंने दूसरी जगह 50 जगह कहा हो मैं परम ब्रह्म हूं मैं अविनाशी हूं मैं नित्य हूं मैं संपूर्ण रामपाल का रामपाल का एक मैंने सुना था उसने कहा था ये देखो ब्रह्मा एक आदमी है कैरेक्टर बन गया है मैं ऐसा हूं मेरे नीचे सब काम करने वाले हैं और ब्रह्मा जी ऐसा हो गया व ब्रह्मा को विष्णु को महेश को अपने लड़के के भी तरह नहीं बोलता है रामपाल वो तो ऐसा बोलता है जैसे उसके घर नौकरी करने वाले ससंग सुनाई ना हो जिसको ज्ञान ही ना हो क्या बताएगा जिसने गुरु परंपरा से कभी सत्संग ही ना सुना हो ज्ञान ही नहीं है तो क्या बताएगा तो खाली दुकान खोल करके
03:25:49:12 बैठा हुआ है जो लोगन सत्संग बताएंगे एक बार अंत में और दे दीजिए लिंक और अगर कोई नहीं आता है तो फिर हम लोग पूरा करें गोविंद जी आपको और कुछ रखना है प्रमाण एक बात हमारी सुनिए अभी एक बात जो राम भद्राचार्य जी बोले कलो के ऊपर क्या रामभद्राचार्य जी सही बोल रहे हैं कौल की परिभाषा इनको मालूम
03:26:26:18 है गुरुकुल गोविंद जी जी पहाड़ी जी आप आप कुछ कह रहे हैं क्योंकि आप काफी देर से मुझे लग रहा है कहना चाहते हैं आप अपनी बात बोलिए इनको बोल जी को नहीं मैं ये देवी भागवत पुराण से देवी देवी भाई साहब एक बात एक बात मैं कहूंगा भाई साहब कहां चले गए समझ नहीं आ रहा है मगर यहां पर जो परंपरा प्राप्त आचार्य गण है वो किसी भी परंपरा से हो उनकी समीक्षा हम नहीं करते बिल्कुल है ना परंपरा प्राप्त आचार्यों की समीक्षा हम नहीं करते यहां पर और हमें करनी भी नहीं चाहिए नहीं चाहिए बिल्कुल मैं य बो चा गोविंद गुरुकुल जी आप देवी भागवत पुराण का स्कंद सात का अध्याय 33 वा निकालिए श्लोक 11 और 12 उसमें देवी के देवी जी कह रही है कि मतलब कि ब्रह्मा विष्णु महेश के तत्व से मैं मैं ही हूं एक बार वो दिखा दीजिए और दूसरी बात यहां शरणागत की बात जब होती है तो अध्याय 18 के 56 में श्लोक से शरणागत की बात शुरू हो जाती है कि अर्जुन को समझाते हैं अर्जुन हो जाते सातवा स्कंद है और
03:27:41:20 अध्याय कितना है 33 33 करिए अपनी बात करिए तो शरणागत की बात शुरू होती है अध्याय 18 के 56 में श्लोक से उनको अर्जुन जी को मनाते हैं उनको धमकाते भी हैं श्री कृष्ण तू मेरी बात नहीं मानेगा तो तेरा पतन हो जाएगा तो 61 श्लोक में बोलते हैं कि हृदय रूप में अंतर्यामी रूप से ईश्वर रहता है 62 श्लोक में बोलते हैं कि तू उसी की ही शरण में चले जा 64 श्लोक में बोलते हैं कि तू मेरा मानने वाला हो जा 65 श्लोक में मेरा मानने वाला हो जा मेरा पूजने वाला हो जा तो मेरे को ही प्राप्त होगा 66 लोक में बोलते हैं कि सब धर्मों को को त्याग के तू केवल मेरी शरण में आ जा तुझे मैं समस्त पापों से मुक्त कर दूंगा 72 श्लोक में बोलते हैं कि जो मैंने तेरे को यह ज्ञान दिया तूने क्या एकाग्र चि होक तूने सुना तो 73 श्लोक में अर्जुन जी अर्जुन बोलते कि हां मेरी जो शंका थी वो मेरी पूरी मिट गई आप जैसा कहते हो मैं वैसा ही करूंगा तो पूर्ण शरणागत कब हुए अध्याय 18 के 73 श्लोक में शरणागत का अर्थ य नहीं होता कि किसी से बोल दे मैं तुम्हारे शरण में हूं शरणागत का अर्थ होता है कि उसकी बातो को मानना जब अर्जुन श्री की बातों को नहीं मान रहे थे तभी तो उनको धमकाया कि तेरा पतन हो जाएगा 57 श्लोक में उन्होंने उन्होंने मुख से कह जरूर दिया
03:28:56:22 था कि मैं आपकी शरण में हूं मगर बीच बीच में उनके संशय थे वो पूरी तरीके से मान नहीं बैठे थे और अंत में उन्होंने 73 में में कहा कि अ जैसा आप जो कहेंगे आपने बताया मैं वो करूंगा बहुत बढ़िया पूण शरणागत उधर हुए 73 श्लोक में बिल्कुल तो अध स्कंद नंबर सात है 33 वा अध्याय है बोलिए 12वां और 13वां श्लोक लिखिए उधर लिख रखा है हे धधर देवी जी बोल रहे हैं य समग्र जगत मुझसे ओत प्रोत है मैं ईश्वर हूं मैं ही सूता आत्मा हूं तथा मैं ही विराट आत्मा हूं मैं ही ब्रह्मा विष्णु तथा रुद्र हूं तो यहां एक तत्व की बात हो रही है कि देवी जी ब्रह्मा विष्णु महेश से एक ही तत्व है यहां जो विराट स्वरूप शी श्रीम भगवत गीता में दिखाया था वही विराट स्वरूप यहां भी दिखाया गया दिखाया देवी जी ने तो यहां कहा कि मैं ही ब्रह्मा हूं मैं ही विष्णु हूं मैं ही रुद्र हूं मैं ही शिव हूं अब एक बात बताओ जब ज्ञान गंगा पुस्तक शुरू होती है तो अभी ये आए थे जो कह रहे थे आत्मा परमात्मा एक हो जाती है ज्ञान गंगा पुस्तक जब शुरू होती है तो शंकराचार्य का खंडन करते हुए वहां पर लिखा है
03:30:14:09 कि अगर आत्मा परमात्मा एक ही है तो आत्मा परमात्मा एक ही है तो फिर पूजा किसकी करे यह शंकराचार्य के खंडन में लिखा और उनका व्यक्ति आकर के बोल रहा है कि आत्मा परमात्मा एक हो जाती है शंकराचार्य का सिद्धांत मानते हैं चोरी छुपे मानते हैं सामने से नहीं मान मानते उन्होने जहा से जितना सुन लिया जितना पक लिया
03:30:49:02 जो मैंने आपको बताया दि दिखा दीजिए बड़ी स्क्रीन में कि मैं ही ब्रह्मा विष्णु महेश तो उनके पुत्र कैसे हो गए य देवी जी के खुद सोचो ना ला होना चाहेंगे तो हो भी जाएंगे एक पूरी बनाई है ना क्या कहते उसको एक प्लेलिस्ट बनाई है ना इनके उसमें ये वाला कोट किया हमने कि जब वो परम तत्व के रूप में है तो वो बोल रही है कि मैं ही ब्रह्मा हूं मैं ही विष्णु हूं मैं ही देवी वो हूं ब्रह्मा एक सबसे बड़ी बात इसमें इन्होने और कही है पता है क्या कि ना तो मैं स्त्री हूं ना ही मैं पुरुष हूं और ना ही मैं नपुंसक ही हूं है ना ना तो स्त्री हूं ना पुरुष हूं तो फिर कहां से आ गया वो मां वाला पत्नी वाला भाई स्त्री तो वो खुद कह रही मैं स्त्री भी नहीं हूं वो परम तत्व अपने बारे में बता रहा है परम तत्व जिसको यहां पर देवी के रूप में खपत किया जा रहा है बस इतनी सी बात है य साफ साफ लिखा है जैसे माया के प्रभाव से जीव अनेक प्रतीत होते हैं
03:32:04:03 जो वास्तव में अनेक नहीं है वैसे ही माया के प्रभाव से ईश्वर भी विता का विता का क्या लिखा है वि विता का भान होता है ना कि अपने स्वभाव का स्वस मतलब की हमारे आंखों का विषय बनता है किय बहुत से है पर वो एक ही तत्व है कह रहे हैं एक कौन से लोक में अध्याय स्कंद सात के 33 अध्याय के आठवे और नवे में न श्लोक में इसी में लिखा नवा श्लोक भी दिखा दीजिए आठवा और नवा उसको अंडरलाइन कीजिए
03:32:49:18 अगर शय लिखा हुआ देह और इंद्रिय आदि संघात रूपी वासना भेद नहीं जस ऊपर जाइए इसके आठवा नवा जैसे माया के प्रभाव से जीवने एक प्रतीत होते हैं स्क्रीन अटक र वास्त जो वास्तव में अनेक नहीं है वैसे ही माया के प्रभाव से ईश्वर अलग हायने हुआ है जैसे एक ही आकाश घटा काश मठा काश आदि नामों से त होता है वैसे ही मैं एक होती हुई भी उपाधि भेद से भिन्न हूं जिस प्रकार सूर्य उत्तम निकृष्ट सभी वस्तुओं को सदा प्रकाशित करता है परंतु दूषित नहीं करता वैसे मैं भी कभी दोषों से युक्त नहीं होती ठीक है वस्तुत जीव और ईश्वर का विभाग माया द्वारा कल्पित है तो यह कल्पना है ये अद्वैत सिद्धांत की बात यहां पर हो रही है कि जीव और ईश्वर का विभाग माया द्वारा कल्पित है तो आूप में बताया तभी आगे य कहा ही ब्रह्मा मैं ही विष्णु हूं मैं ही शिव हूं घटा काश और महाकाश की बाती जीवात्मा एवं परमात्मा के भेद को भी काल्पनिक मानना चाहिए अर्थात आत्मा परमात्मा के
03:34:04:18 भेद को का जानना चाहिए ये मैं एक चीज बताऊंगा ये लोग ये कहते हैं कि जो देवी मां है वो काल ब्रह्म की पत्नी है जबकि य देवी मां कह रही है कि मैं और ब्रह्म एक ही है कौन सा है देवी भागवत तीसरा स्कंद छवा अध्याय चौथा श्लोक से लेकर छवा शलोक क्या और तो और यह भी लिखा हुआ है ब्रम ये भी लिखा हुआ है कि जो ब्रह्म है वो एक है और सनातन है यह भी वही पर है ब्रह्म एक है और सनातन है मतलब वो रो भाव नहीं होता ना वो ना सनातन नित्य और रचना करते समय वो द्वैत भाव को प्राप्त हो जाता है वही वाली बात व्यवहार में दैत परमार्थ में अवत भगवती सगुणा या निर्गुणा केवल कार्य भेद से प्रतीत होती
✅ This part is already used · 03:35:04:00 – 03:35:11:15 (0:08)
→ Used in: A · Live क्या रामपाल अब भी कामवासना में फँसा हुआ है? पाखंडी का गीता ज्ञान भाग 10 अध्याय 5 at 58:31 ↗
03:35:04:00 है जिस परम पुरुष को त्रिगुणा तीत कहा गया है वही उत्पत्ति स्थिति समार का कार्य संपादन करने वाली महामाया अर्थात भगवती
⬜ Not used yet · 03:35:11:15 – 03:56:16:00 (21:04)
03:35:11:15 है देवी भागवत न 34 से 37 यह सारा दिया है सबसे बढ़िया एक प्रमाण दे द ऋगवेद से ऋगवेद में 10 125 ये इसम अल दिया गया दुर्गा सपत सती में वो ऋग्वेद का जो देवी सूक्त है वो दिया गया है बहुत
03:35:49:24 बढ़िया ऋगवेद उत्तम देवी स देखिए दिख रहा है क्या नीचे नीचे देखिए यय देवी सतम खोलेंगे 237 नंबर प्र यह अलग से जो हा ऋगवेद उतम देवी सक्ति ये आ गया
03:36:28:15 क है ना जी ठीक अब इसमें क्या है पहला मंत्र पढ़े तो इसी में ये आया है कि देवी परम ब्रह्म से अभिन्न है यानी देवी और परम ब्रह्म में कोई अंतर नहीं है देवी नित्य है परमेश्वर है परमात्मा है सनातन है सच्चिदानंद स्वरूप है यह सब इसमें आया है देवी
03:37:05:15 सूक्त मैं बता देता हूं कौन सा मंत्र है देवी सूक्त का मैं शत्रुओं का नाश आकाश शरीर जो अविष्य से मैं संपूर्ण जगत की अधी शवरी साक्षात्कार करने योग परम ब्रह्म को अपने से अभिन्न रूप में जानने वाली देखिए अभिन्न ये इसको आप पढ़ेंगे इसमें पूरी देवी और उनकी एकता है परम ब्रह्म की परमात्मा की मैं इस जगत के पिता रूप आकाश को सर्वा स्न स्वरूप परमात्मा के ऊपर उत्पन्न करती हूं मैं कारण रूप से समस्त विश्व की रचना आरंभ कर तब दूसरों के प्रेरणा के बिना स्वयं ही वायु की भाति चलती हूं स्वेच्छा से ही कर्म में प्रवृत होती हूं और यहां पर इनकी और परम ब्रह्म की देवी सूक्त में 10 125 में पूरी तब इनका लिखा हुआ इसके अलावा देवी भागवत में तो है ही बहुत सारा अरे वेदों में पढ़ने के लिए बहुत चीज सीखने के लिए बहुत गुण रहस्य है वेदों में तो जब पढ़ना सु दिखाई नहीं देता रामपाल वालो को कु नहीं बात
03:38:20:20 को पूरी करेंगे बहुत समय हो गया 957 हो चुका है जल्दी से राम पांडे जी आप अपनी बात रख ले जय श्री राम शिवान जी सभी को जय श्री राम जय श्री राम ज आ जी सुनाई दे रही है मेरी आवाज आप लोग को जी जी जी बोलिए जी नहीं मैं कुछ ऐ कुछ टॉपिक नहीं बस जैसे शुक्ला जी भी आए थे जो बोल रहे थे जो हमारे संत के बारे में जो आपने बोला परंपरा प्राप्त संतो की हमसे मिक्षा नहीं करेंगे ब उसी के डिंग मेरे कुछ कहना था कि जैसे हम धर्म की बात कर रहे हैं तो धर्म में तो हम यह नहीं देखना है ना कि कौन परंपरा प्राप्त आचार्य है अगर व परंपरा प्राप्त आचार्य होते हुए
03:39:07:20 भी कहां गए शिवा जी चाहि अपनी बात करने के लिए जी इस बारे में बारे में यहां ना बात करके हम और आप अलग से बात कर लेंगे वैसे भी एक बहुत फेमस संत है आज के टाइम प शिवान जी मैं नाम नहीं रखना चाहूंगा लेकिन बहुत फेमस संत है आज के टाइम प उनके बहुत करोड़ों फॉलोवर्स है एक बार मैं उनका वीडियो देख रहा था वो उसम किसी ने क्वेश्चन किया था कि क्या रजस्वला स्त्री को भगवान का पूजा पाठ करना चाहिए नहीं करना चाहिए वो उसको प्रमोट कर रहे थे कि हा इसमें कोई दिक्कत नहीं है भगवान ही तो है कुछ दिन के बाद वो जो वीडियो है ना वो से हटा दिया गया था एक ब विद्वान उनका खंडन किया था परंपरा प्राप्त नहीं होंगे वो परंपरा प्राप्त नहीं होंगे
03:40:01:01 परं एक मिनट एक मिनट ऐसा करिए सुनिए मेरी बात सुनिए राम पांडे जी राम पांडे जी मेरी बात सुनिए मा मूट है उनकी उनकी माइक म्यूट नहीं नहीं राम पांडे जी आप हमसे संपर्क करिए आपके पास नंबर है कि नहीं हमारा एक आपने माइक माइक को म्यूट कर रखा है
03:40:36:21 क्या राम पांडे जी एक मिनट भैया माइक म्यूट है उन जी हो गया चालू शिवास जी पाच मिनट ना इस पर बात कर लेते हैं जरूरी बात है नहीं तो मैं बोलता ही नहीं आपको आज का टॉपिक भी क्लियर हो जाएगा साथ ही जी जी राम पांडे जी आप मुझे कॉल करिए हम लोग इस परे बात करते हैं ऐसा कुछ नहीं है कि हमारे अंदर कोई भेद भाव है आप पहले हमें बता दीजिए किस बारे में बात हो रही है हम बात करेंगे उस पर है ना बिल्कुल बिल्कुल नहीं मैं बस ये कह बात हो अन्याय का हम प्रतिकार करेंगे व चाहे कोई भी कर रहा हो मगर उसको जानना होगा कि समीक्षा करने बैठे तो किसकी है क्या है आप हमें पहले कॉल कर लीजिएगा यह नंबर है इस पर आप हमें कॉल करिएगा है ना आप भी करिएगा शुक्ला जी हु शुक्ला जी नंबर आप नोट कर लीजिए 74036
03:41:47:10 जी कब से कब तक कर सकते हैं कॉल आप ट कर दीजिए और आपको रिप्लाई मिल जाएगा मतलब कब कॉल करेंगे आप ट कर दीजिए और थोड़ आराम थोड़ा आराम से बोल दीजिए स्क्रीन है जीय मेरे मेरे चेहरे के नीचे देखिए मेरा नंबर लिखा है हा गोविंद गुरुकुल जी आप बात पूरी कर लीजिए फिर हम समाप्त करें आज की चर्चा हां बस मैं ज्यादा समय नहीं लूंगा सिर्फ पाच मिनट से भी कम समय लूंगा मेरी स्क्रीन अगर बड़ी हो जाती तो अच्छे से देख पाते हैं हम कुछ चीजों को हां हां दिखाइए बड़ी कर इनकी स्क्रीन अच्छा ये ज्ञान गंगा है ठीक है दो मुद्दे हम ले लेंगे कि दुर्गा जी किनकी पत्नी या किनकी अर्धांगिनी है ठीक है और बोलने वाला कौन है क्योंकि ये तो कहते कि ब्रह्मा जी की बात हम मानते नहीं देवी की बात हम मानेंगे नहीं तो किसकी बात मानेंगे यह इसी से प्रमाणित हो जाएगा अभी ज्ञान गंगा है थोड़ा नीचे चलते हैं और देखते हैं जरा एक बार कि यह बातें बोल कौन रहा है ठीक है ये आ गया [संगीत]
03:43:01:01 हमारा अच्छा देखिए य पर बड़ी क्लियर एक बात लिखी हुई है ठीक है कि यह है सरोवर के जल में कमल के फूल पर अवतरित होने के कारण परमेश्वर नारायण कहलाता है ठीक है यहां पर बात जाती है कि जो नारायण है वह परमात्मा है ठीक है इनके अनुसार अब इसी नारायण से पूछते हैं कि देवी भगवती जो है वह किसकी पत्नी है या किनकी भारिया है किनकी धर्म पत्नी है ठीक है यह मैंने पहले आपको ज्ञान गंगा से दिखा दिया कि नारायण जो कहेंगे अर्थात व कबीर जी स्वयं ही कह रहे हैं इनके मुताबिक ठीक अब देवी भागवत खोलते हैं ठीक है यह देवी भागवत मैंने खोल लिया है ठीक है गीता प्र गोरखपुर द्वारा प्र इसके अंदर ही चलते य पूरा रामपाल दास जी की तर्ज में बात करते तो ये है यह क्या लिख रहे हैं जो गणेश की माता देवी दुर्गा है उन्हें शिव स्वरूपा कहा जाता है वह भगवान शंकर की प्रेयसी भारिया है तो यहां पर मैं थोड़ा हाईलाइट कर देता हूं कभी कभी क्या होता है कि विटामिन की कमी के कारण आंखों को नहीं भी दिख पाता सही से ठीक है तो आज के बाद जो भी आपको बोलेगा
03:44:16:02 देवी दुर्गा या प्रकृति जो है व काल की पत्नी है तो उनको यह दिखा दीजिएगा और यह भी बता दीजिएगा यह बात कह कौन रहा है ठीक है यह यहां पर मैंने मार्क कर दिया है ठीक है और यह बात कौन कह रहा है यह कबीर जी स्वयं कह रहे हैं भगवान नारायण कहते हैं ठीक है तो यह ऐसे नहीं ब्रह्मा जी कह रहे य नारायण कह रहे अर्थात कबीर जी कह रहे हैं इनके मुताबिक अभी कबीर जी आगे जाकर कहते हैं कि एक कवार गाय थी उसका दूध पिया था किसी ने कैसी कैसी बातें करते ये ना भगवान नारायण अर्थात वही कबीर जी जो है इनके अनुसार वो कह रहे हैं ठीक है कि देवी सुर भी गोलोक में प्रकट हुई थी व गौओं की अधिष्ठात्री देवी गौओं की आदि गौओं की जननी संपूर्ण गौओं में प्रमुख थी समस्त गौओं में प्रथम वृंदावन में उस सूर भी का जन्म हुआ था ठीक है अतः उसका चरित्र कहता हूं सुनिए अब देखिए क्या हुआ था दरअसल दूध किसने पिया कब पिया था कहते हैं राधा पति कौतुकी भगवान श्री कृष्ण राधा के साथ गोप नांग से घिरे हुए पुण्य वृंदावन में गए कोतुहल वश थक जाने के कारण ये कोतुहल वश लिखा हुआ है ठीक है बहाने ठीक है थक
03:45:31:02 जाने के बहाने थके नहीं है थक जाने के बहाने अर्थात लीला है सहसा किसी एकांत स्थान में बैठ गए और उस स्वेच्छा में अपनी इच्छा से प्रभु के मन में दूध पीने की इच्छा हो गई उसी क्षण उन्होंने अपने वाम भाग से लीला पूर्वक सुरबी गौ को प्रकट किया बछड़ा उस गौ के साथ था उसके थन में दूध भरा था उसके बछड़े का नाम मनोरथ था सब उस सवत सा गौ के सामने देखकर श्री दामा जी ने नूतन पात्र में उसका दूध दुहा वह दूध जन्म और मृत्यु को दूर करने वाला दूसरा अमृत ही था स्वयं गोपी पति भगवान श्री कृष्ण ने उस स्वादिष्ट दूध को पिया था फिर हाथ से वह भांड फोड़कर गिरा दिया और दूध धरती पर फैल गया फिर इसी प्रकार दूध आगे चला था यह बात कह कौन रहे हैं स्वयं कबीर जी इनके मुताबिक नारायण ठीक है यह देख लीजिए इस गऊ का कोई बैल नहीं था क्योंकि वह गौ की अ अधिष्ठात्री देवी है और वह प्रकट हुई थी वह आदि गौ है गौओं की आदि गौओं की जननी संपूर्ण गौओं में प्रमुख अर्थात पहली थी ठीक है तो यह है कुवारी गौ का पूरा व्याख्यान इस प्रकार किसी चीज का ना व्याख्यान दिया जाता है
03:46:46:10 अघन्य को अघन्य कह देने से बातें नहीं चलती शास्त्र का प्रमाण देना पड़ता है और शास्त्र का प्रमाण यहां मिल जाता है ठीक है तो ये कहानी आज के बाद किसी और को सुनाइए नवा स्कंद है 49 इसका अध्याय ठीक है एक बार पढ़ लीजिएगा आदि गऊ सरबी देवी का उपाख्यान तो यह हमारा आज का यह भी बात सिद्ध हो जाती है और कहने वाले कौन है कबीर जी स्वयं कह रहे हैं ये बात ठीक है ये बात याद रखिए उन्होने कभी इतना ध्यान से पढ़ा नहीं वो क्या बताएंगे
03:47:30:18 है इनका एक और ड्रामे बाजी क्या है मैं खत्म कर रहा खत्म कर रहा इनकी और ड्रामे बाजी क्या है ये लेखक पूछ रहे थे उस दिन जब मैंने गीता से इनका झूठ पकड़ा ठीक है तोय उसका तो नहीं था श्रीमद् देवी भागवत गीता प्स गोरखपुर द्वारा प्रकाशित संपादक हनुमान प्रसाद पोदार जी और चिमन लाल गोस्वामी जी सेम जो आपके बाबा जी पढ़ाते हैं इंटरनेशनल टीवी पर बा जी जी मैं कह रहा था कि आज हमने अपने इनके जो तीन नैरेटिव और है वो ब्रेक किए हैं एक ब्रज शब्द का सही अर्थ गतिशील है और वहां पर उसका उपयोग आने के उसम हुआ है संस्कृत के विभिन्न नियमों के अनुसार दूसरा हमने टिव आज तोड़ा है कोई कुमारी गाय का दूध कबीर जी के रेफरेंस से वहा पर सिद्ध नहीं होता है बिल्कुल नहीं और अगर होता है कुमारी गाय का दूध पीना तो कृष्ण जी के लिए सिद्ध होता है कबीर जी और कहने वाले स्वयं आपके अनुसार हमारे अनुसार नहीं आपके अनुसार कहने वाले आपके अनुसार कबीर है आप उला नहीं सकते और
03:48:46:14 अग वाला वो डोर संख है मतलब उसम कुछ नहीं है कुछ सब मनगण बात है वो और इसके साथ ही साथ आज आपके व्यक्ति ने रामपाल दास नाम के रामपाल दास के फॉलोअर ने रामपाल दास नाम के रामपाल दास जी के फॉलोअर ने आज स्वीकार कर लिया कि कबीर जी का भी आविर्भाव रो भाव होता है हो सकता है है ना उनका शरीर भी आना जाना उनका प्रकट अपक सिद्ध हो जाता है और फिर वो देवी भगवती किसी की पत्नी नहीं हो सकती हो परम तत्व के रूप में य सब बातें हम कई बार कर चुके फिर भी याद रख लीजिए कि देवी मां जब उनको उत्पन्न करने वाली है उस समय परम तत्व के रूप में है वो ना स्त्री है ना पुरुष है तो उनका किसी की मां किसी का किसी की पत्नी होना वहां पर सिद्धि नहीं होता लीला रूप में वो किसी के पत्नी रूप में दिखाई देती है तो लीला रूप में ही ब्रह्मा विष्णु महेश अपने आप को आविर्भव रो भाव या अविनाशी या नहीं मानते नाशवान मान ले मगर तात्विक रूप से वो स्वयं प्रभु है ठीक है यह सब जाना एक और नई चीज पता चली है अनामी लोक पहले सतलोक था
03:50:01:18 अब उसके ऊपर भी एक नई बिल्डिंग डाल ली है चलो धीरे धीरे धीरे धीरे देखिए होता क्या बातचीत करते करते व व्यक्ति हो गया बातचीत करते करते वक्ति अ हो गया बकुल तो अब हम किसी को लेंगे फलोर भी परर बना पज पज किसी और दिन नए लोग पर यहां से उ उसको खदेड़ करके हम लोग भगाए उसी नए लोग पर जाओ और जी आपको सुन नहीं पाए बस आप अपनी कु बात ना बोला कैंसर हो तो उस हाथ को काट ही देना चाहिए फैले नाड़ी जी आपको सुन लिया ना हमने जी जी जी सात्विक जी बताए जी महादेव महादेव अ एक बार एक बार चेहरा दिखा दीजिए वैसे आपने दिखाया है जब भी आप आए एक बार दिखा दीजिए एक मिनट
03:51:12:12 मिनट हां बोलिए [संगीत] हां मैं ये कहना चाहता था कि जो आपके विरोधी है ना इन्होंने जो हमारे भी है उन्होंने एक नया प्रलाप किया है अभी ग्राउंड लेवल पर हो सकता है शायद आप तक पहुंचे हो सकता है शायद आप तक पहुंचे क्या यह जो हमारे धर्म की जो बहने है ना इनको यह हमारी विवाह प्रणाली बताकर उसकी रगल व्याख्या करके उन्हें कबीर पंथी बना रहे हैं अच्छा मैं एक बात कहूंगा कि रामपाल दास जी के एक वीडियो मैंने देखा कि वोह कह रहे हैं बस वो लड़की के मां बाप ने कह दिया हमें आपका लड़का पसंद है आपकी बिटिया हमें पसंद है बस यह विवाह है और रामपाल दास जी के अनुसार जो अभी तक जो विवाह पद्धति चली आ रही है कम से कम पिछले 6700 साल से वो तो गलत थी और वो जो अब बता रहे वो सही है तो इसका अर्थ यह है कि रामपाल दास जी को जो मानने वाले हैं जिनके अनुसार जो पुरानी विवाह पद्धति है वह गलत है और रामपाल दास जी के द्वारा पिछले 50 10 20 सालों में बताई गई जो
03:52:27:18 विवाह पद्धति है वह सही है वो लोग वो है जो अपने ही मां-बाप को अपने ही उत्पन्न होने को कहते हैं कि हम जो है अवैध संतान है वो अवैध संतान सिद्ध हुए ना भाई जो विवाह की पद्धति है वो तो गलत है तत्वदर्शी संत के अनुसार तो जो इस बात को मान रहा है वह कह रहा है कि मैं अपने मां-बाप की अवैध संतान हूं यही सिद्ध होगा ना तो निर्णय स्वयं ले कि आप अवैध संतान है या वैध संतान है है ना विवाह पद्धति अगर मानते हैं पुरानी वाली सात फेरे लेते हैं सात वचन होते हैं मांग में सिंदूर भरा जाता है मंगल सूत्र मारा जाता है मंत्र उच्चारण होता है यह सारी विवाह पद्धति अगर आप मानते हैं और भी अनेका अनेक चीजें होती है तो अगर मानते हैं तो इसका मतलब उतने अंश में आप तत्वदर्शी संत को नहीं मानते और अगर तत्वदर्शी संत को पूर्णतया मानते हैं तो फिर इसका मतलब यह है कि आप अपने आप को अवैध मानते हैं अवैध संतान मानते हैं उसके कई और लौकिक उच्चारण भी होते हैं जो मर्यादा के बाहर है तो हम वो यहां पर उपयोग में नहीं लाएंगे मगर जो अपने माता पिता के विवाह को नहीं मानता कि वह सही था
03:53:42:28 और तत्वदर्शी जी जो बता वो सही है वह स्वयं को अवैध संतान कह रहा है तो अब स्वयं तय करें वह किसी की अवैध संतान है या वैध संतान है हम नहीं कह रहे आप स्वयं ही कह रहे हैं ठीक है नहीं बाकी बाकी कहीं बातें यहां बताना उचित नहीं होगा अगर आप मुझसे कॉल पर बात कर सके तो मैं आपको बता दूं जो मुझे पता है चलिए आने के लिए समय देने के लिए सभी को आभार सात्विक जी आपका भी आभार और बहुत आप लोगों का वो मिल रहा है मैं एक बार यह पूरा होने से पहले इसको ऑफ करने से पहले फिर कहूंगा हमारे अभियान पर प्रहार किया जा सकता है किया जा रहा है अब आप लोगों की बारी है दायित्व उठाने की सबसे पहला दायित्व है कि कम से कम प्राथमिकता से हमारे जो कंटेंट है उसको लाइक अवश्य करें जिससे कि यटय को यह इंफॉर्मेशन जाए कि हम लोग दर्शन विज्ञान व्यवहार की सीमा में रहकर जो शास्त्रोक्त बातें हैं बता रहे हैं सत्य को उजागर कर रहे हैं बिल्कुल दूसरा यदि सामर्थ्य है तो चैनल की सदस्यता जरूर ग्रहण कर ले इससे
03:55:07:04 [संगीत] कोई फर्क नहीं है कोई फर्क नहीं है नहीं तो कुछ मॉडिफिकेशन तो होना चाहिए ना तीनों में सबके लिए बराबर आप आप चाहे तो ज्यादा से ले लीजिए सदस्यता आप चाहे तो कम से ले लीजिए सदस्यता फर्क कुछ नहीं है तो सदस्यता अवश्य ले ले इससे एक इंफॉर्मेशन और पहुंचेगी कि भाई ये लोग अच्छा कार्य कर रहे हैं अच्छा इन्हें अच्छा कहने वाले लोग भी हैं क्योंकि गलत कहने वाले लोग तो अपनी बातें पहुंचा रहे हैं ठीक है इसमें कोई संशय है ही नहीं आप बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं इसमें कोई संशय नहीं है एक मलब डंके की चोट पर बहुत सुंदर हम आपका बहुत समर्थन करते हैं और बढिया आनंद की अनुभूति होती है जब आप विरोधियों के पक्ष में अपना बिल्कुल तार्किक जवाब रखते हैं चलिए सभी को जय श्री राम जय श्री
03:56:07:29 [संगीत] राम m
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व्रज अर्थ आना है या जाना kabir और कुंवारी गाय #rampaljimaharaj #kabir
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