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00:00:02:12 तो सभी को जय श्री राम आज का टॉपिक जैसा कि आपने देखा ही होगा कि रामपाल की तरफ से वैसे तो हमने विस्तृत रूप से एक पूरा छह वीडियोस की सीरीज बना दी है जिसमें की रामपाल के द्वारा उठाए जाने वाले जितने भी मिथ्या प्रचार है आक्षेप है उन सबका यथा योग्य उत्तर दे दिया गया है पर जो वो सीरीज बनाई थी वह एक इस तरह से बनाई थी कि उसमें आपको कंप्लीट एक थ्योरी मिल जाए और कम से कम समय में आपको ज्यादा से ज्यादा जानकारी मिल जाए तो हम धीरे-धीरे करके उसके एक एक चैप्टर पर जब भी हमें समय मिलेगा तो हम बात करेंगे आज हमने उसमें से एक टॉपिक उठाया कि उनकी तरफ से क्लेम किया जाता है कि जो ब्रह्मा विष्णु महेश है
00:01:07:00 वो अविनाशी नहीं है है ना और मां दुर्गा से उनका प्रादुर्भाव हुआ है इसलिए वह अविनाशी नहीं है कहीं स्तुति में उन्होंने ऐसा कह दिया कि हमारा भी जीवन और मरण होता है यह है वो है इस तरह से उन्होंने कह दिया तो इस कारण से जो है वो अविनाशी नहीं है अब इस बारे में एक बहुत फेमस कबीर जी का वह है कि मैं कुत्ता राम का तो वह सच में कुत्ते थे या यह एक क्वेश्चन बनता है कि अगर वो कुछ है उनका इस तरह का दोहा खैर मैं उस पर नहीं जाऊंगा और हमने जो भी बात बोली है बहुत सोच समझ के बोली अपनी वीडियोस में जैसे हमारी एक बात हमने बोली कि हम उस कबीर की बात नहीं कर रहे जो इनके द्वारा पूजित हो रहा है हम उस कबीर की हम उस कबीर की बात मतलब एक कबीर वो है जि का हम सम्मान करते हैं मगर इनके द्वारा जो पूजित होने वाला जो कबीर है वो तथा कथित है हमने ऐसा क्यों बोला क्योंकि जो जिस कबीर को हम जानते हैं वह स्वयं को ईश्वर नहीं कहते थे ठीक है अब आपके अनुसार उसी कबीर ने आपके अनुसार उसी कबीर ने अपने आप को ईश्वर भी कहा मगर हम यह नहीं मानते और अगर
00:02:22:01 ऐसा कोई कबीर है तो हम उसे वह कबीर नहीं मानते जिसको हम जानते कहने का भाव हमारा ये है ठीक है तो आज हम इसी पर बात करेंगे कि अ क्या ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी नहीं है और क्या केवल ऐसा ही है इतना ही है कि दुर्गा माता से ही उनका प्रादुर्भाव हुआ है ऐसा तो नहीं हुआ कि दुर्गा माता का प्रादुर्भाव भी उनसे हो गया हो तो ये सब हम चेक करेंगे आज फैक्ट ऑफिक मगर इस पॉइंट पर आने से पहले मैं एक बहुत जरूरी बात आप लोगों को बताना चाहूंगा सभी को जय श्री राम लोकेश कुमार जी जय श्री राम वो जरूरी बात यह है कि अभी यहां आने से जस्ट पहले मुझे किसी का मैसेज आया और वह बहुत परेशान था जिसने मुझे मैसेज किया उसमें किसी पौराणिक घटना को लेकर के कुछ बौद्ध अगामी या फिर नास्तिक कहे तो ज्यादा अच्छा होगा या फिर यह कहे जो जिनके पास
00:03:37:24 ईश्वर का अस्तित्व नहीं है तो ज्यादा अच्छा होगा या फिर यह कहे कि जिनके पास धर्म नहीं है तो ज्यादा अच्छा होगा या फिर यह कहे कि जिनके पास माता बहन और पत्नी में अंतर करने वाले सिद्धांत नहीं है तो ज्यादा अच्छा हो या फिर यह कहे कि जो मनुष्य नहीं है पशु है पशु ही है तो ज्यादा अच्छा होगा कुछ इस तरह के लोग थे वह जो पुराण की किसी देवीय घटना को लेकर के और उपास उड़ाने का प्रयास कर रहे थे वहां पर एक कोई कम जानकार व्यक्ति बैठा हुआ था जो उनकी बातें सुनकर के आहत हो रहा था और उस वीडियो को सुनक के जो जिस व्यक्ति ने मुझे मैसेज किया वो भी आहत हुआ तो आप लोग स ऐसा क्यों सोचते हैं सामान्य कि हम कोई भी जब हमारे धर्म ग्रंथों पर प्रहार करें आक्षेप करें तो हम उसका शास्त्रोक्त उत्तर दे दे आप ऐसा क्यों सोचते आप एक सामान्य हिंदू बन के क्यों नहीं रह सकते मैं जो कहना चाह रहा हूं अभी थोड़ी देर में आप समझ जाएंगे एक सामान्य
00:04:52:26 हिंदू बनना सीखिए सामान्य हिंदू बनकर अपने धर्म की रक्षा कैसे कर सकते हैं मैं आज वो आपको बताने जा रहा हूं क्या हमेशा आपको सारे श्लोक सारे मंत्र सारे वह अध्याय क्रमांक य सब रटे होना आवश्यक है तब आप अपने धर्म के लिए खड़े हो पाओगे तब अपने धर्म की रक्षा कर पाओगे नहीं ऐसा नहीं है हर व्यक्ति को स्पाइडरमैन और मिस्टर इंडिया बनने की आवश्यकता नहीं है एक साधारण व्यक्ति भी अपने धर्म की रक्षा कर सकता है उसको हमेशा नहीं उस गैजेट की जरूरत हैमो से लड़ते हुए मिस्टर इंडिया अपने गैजेट को बंद कर देता है कि मैं आपको एक सामान्य व्यक्ति बनकर आज मुग से क मैं आज तुझे एक सामान्य व्यक्ति बन कर के हराऊ तो आप यह क्यों चाहते हैं कि मेरे पास जो है असाधारण शक्तियां आए और उसके बाद में अपने धर्म की रक्षा करू आप अपने धर्म की रक्षा सामान्य रह के क्यों नहीं कर सकते हैं कर सकते हैं मैं आज वही आपको बताने वाला हूं कैसे जब भी कोई आपके धर्म पर प्रहार करेगा जब भी कोई आपके ईश्वर संबंधित विषयों पर प्रहार करे जब भी कोई आक्षेप लगाएगा वह भले ही सनातन विरुद्ध कोई विचारधारा हो पंथ हो मत हो या फिर
00:06:07:26 सनातन के अंदर रहने वाला ही कोई सनातन का चोला ओढ करके आक्षेप लगाना लगाने वाला कोई व्यक्ति हो हर प्रश्न का एक उत्तर है आपके पास हर प्रश्न का और वो क्या है तुम्हारा गुरु कौन है यह है हर प्रश्न का उत्तर जब बौद्ध आपसे प्रश्न करेंगे
00:06:43:07 कि भाई तुम्हारे यहां पर यह हुआ शिव जी का लिंग ऐसे हुआ आप उनसे सीधे पूछो उसी शिव पुराण में जहां पर य घटनाए दी गई है उसी शिव पुराण में गुरु तत्व की गुरु का महात्म बताया गया है अनेका अनेक पुराण में बताया गया है स्कंद पुराण में बताया गया जिसका गुरु नहीं वो मूर्ख है पशु है तो हमें नहीं पता कि शिव वाली जो घटना है इसका क्या अर्थ है हमें नहीं पता ये ब्रह्मा वाली जो घटना है उसका क्या अर्थ है हमें नहीं पता ये शिव मोहिनी प्रकरण का क्या अर्थ है रास लीला क्या क्या अर्थ है नहीं पता हमें यह पता है कि इन शास्त्रों को गुरु से पढ़ना है इतना पता है तो क्या करेंगे सामने वाला जो आक्षेप कर रहा है उसने गुरु से उसका अध्ययन नहीं किया है उसने किया है तो उसके गुरु नहीं होंगे परंपरा प्राप्त गुरु नहीं होंगे उन तो आप उनसे सीधे पूछो आपका गुरु किस परंपरा से आपने किस परंपरा से शास्त्र का अध्ययन किया बस इस एक सवाल को आप रट लो कभी भी कोई आप आपके धर्म पर आपके ईश्वर पर आपके शास्त्रों पर गुरु गोविंद ग्रंथ पर उंगली नहीं उठा सकता भाई जिस शास्त्र को आप पढ़ रहे हो उसी शास्त्र में लिखा है इसको गुरु के पास जाओ जाके पढ़ो
00:07:58:13 यह भी लिखा है कि मनुष्य चाहे चारों वेद पढ़ ले सारे उपनिषद पढ़ ले स सारे पुराण पढ़ ले जप तप व्रत दान पुण्य कर्म तीर्थ यज्ञ सब कुछ व्यर्थ है यदि उसका कोई गुरु नहीं है क्योंकि यह सभी चीजें गुरु के बिना आपकी मति को भ्रष्ट करने वाली है तो इस एक पॉइंट पर आप क्यों नहीं आ रहे हो भाई वह यही तो कहेगा कि तुम ही बता दो तुम तो तुम्हारा तो गुरु है तो आप उससे यह कहो नहीं मैंने गुरु से ये वाला अध्ययन नहीं किया मैं नहीं बताऊंगा मुझे पता भी होगा तो भी नहीं बताऊंगा इस इस ये जो शास्त्र तुम पढ़ रहे हो इसका अर्थ करने का अधिकार इसी शास्त्र ने गुरु को दिया है तो आपने इसका किस गुरु परंपरा से अध्ययन किया बस इतना एक प्रश्न अगर आप अपनी पॉकेट में रख के चलेंगे तो एक छोटा सा बच्चा भी अपने धर्म की रक्षा कर पाएगा जब भी कोई गलत बात हो सीधे पूछो कौन सी परंपरा से हो किस परंपरा से आपने अध्ययन किया पूछो और यह जितने ये द क्या नाम है साइंटिफिक साइंस जर्नी और यह हिस्ट्री वाला यह जितने भी है ना इन्होंने
00:09:13:14 कभी तथ्यात्मक बातों पर बात नहीं की है इनके चैनल मैंने देखा है बस उठाई गिरी बातें होती रहती निचले स्तर की निम्न स्तर की बातें होती रहती है भाई इनसे बस यह पूछ लो कि तुम्हारा धर्म और अधर्म का किस पर आधारित है उत्तर ही नहीं मिल पाएगा निष्ठा पूर्वक माता जी ने यदि इनको दूध पिलाया हो तो इनको जाकर बताए कोई क्या आए हमसे बात करें चेहरा दिखाए कौन सा ऐसा कुकर्म कर बैठे हो जो अपना चेहरा नहीं दिखा पा रहे हो मुह काला करवा लिया है और
00:09:53:00 यदि आपके अंदर सामर्थ्य नहीं है लूले हो गए लंगड़े हो गए हो एसिड फेंक दिया गया चेहरे पर कुरूप हो गए हो शर्म आती है लज्जा आती है माता-पिता का नाम नहीं पता शायद इस वजह से नहीं आ पा रहे हो इनमें से भी अगर कोई बात है तो कोई तो आज तक आपके चैनलों को देख करके खड़ा हुआ होगा कोई तो माइका लाल ऐसा होगा जो आकर के सामने से बात कर सकेगा आए और सामने से बात करे क्या बौद्ध मत के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर सर्वशक्तिमान है मिलने वाला मोक्ष परम स्वतंत्र है
00:10:31:27 फॉलो किया जाने वाला जो धर्म है वो शाश्वत है यदि ईश्वर नहीं है मोक्ष नहीं है तो धर्म नहीं है तो फिर मानवता कहां से है ठीक है ना तो यह है आप इस पॉइंट को पकड़ के चलो आपको सारे ग्रंथों को रटने की जरूरत नहीं आपको गुरु की आवश्यकता है गुरु जिस दिन आप इसके पीछे पड़ जाएंगे कोई भी आकर के आपकी भावनाओं को आहत नहीं कर पाएगा सीधे पूछिए कहां से स्टडी किया उसी में लिखा है गुरु महात्मा शिव पुराण मेंही लिखा है भागवत पुराण में लिखा है गुरु कौन होना चाहिए सारी व्याख्या परंपरा प्राप्त गुरु भाई परंपरा चार दो चर एकती 16 भगवत गीता परंपरा कहां है आपकी परंपरा और यदि परंपरा नहीं है तो अपने मन से तुम बता रहे हो हम क्यों माने आपकी बात सब झूठ है भाई यदि अपने ही मन से है पढ़ाई करनी है तो आपने पढ़ाई कहां से की अपने मन से की जो भौतिक शिक्षा प्राप्त की है कहां से प्राप्त की है तो उसके लिए आप गए ना किसी स्कूल में सर्टिफाइड
00:11:47:16 स्कूल में किसी दिन होगा आमना सामना अगर इनके अंदर गुर्दा होगा आमना सामना करने का नहीं होगा तो ठीक है मुंगेरी लाल के असीन सपनों की दुनिया में ख र तो ये एक बात है जो हम लोग पांच सिद्धांतों का प्रचार कर रहे हैं उनमें से एक जो चौथा सिद्धांत है ज्ञान वही प्रमाणिक जो परंपरा से प्राप्त हो कोई भी व्यक्ति आपके अ सिद्धांतों पर आपके भावनाओं पर जब आक्षेप लगाए तो उससे एक ही प्रश्न करो किस परंपरा से आपने य ज्ञान प्राप्त किया है यदि नहीं किया तो परंपरा से प्राप्त करना होता है तर्क भी है प्रमाण भी है प्रमाण उस ग्रंथ में तर्क उसी से पूछ लो थ कहां से पास किया बताएगा स्कूल का नाम जब आपको अपनी भौतिक शिक्षा का स्कूल का नाम पता है तो जब आप किसी के मत पंत और धर्म के बारे में बातचीत कर रहे हैं तो वहां पर स्कूल ऑफ थॉट का नाम क्यों नहीं पता
00:13:00:13 तो यह है अब आ जाते हैं सबसे पहले कि मां भगवती से ही सबका प्रादुर्भाव हुआ आज नौमी भी है तो सबसे पहले हम शिव पुराण में बात करेंगे और उस वीडियो में एक शिकायत और थी कि इन्होंने शास्त्रों को खोल खोल करके नहीं दिखाया तो आज हम प्रयास करेंगे कि शास्त्रों को खोल खोल करके
00:13:41:26 दिखाए तो शिव पुराण में रुद्ध समता है और सृष्ट खंड है इसमें लिखा हुआ है षष्टि खंड में चवा श्लोक में पढ़ रहा हूं वैसे तो जगह-जगह पर इनके ब्रह्म रूप की व्याख्या है भगवान शिव के मगर यहां पर भी कर देता हूं जिस परम ब्रह्म के विषय में ज्ञान और अज्ञान से पूर्ण उक्ति हों इस प्रकार विकल्प किए जाते हैं उसके कुछ काल के बाद सृष्टि समय आने पर द्वितीय होने की इच्छा प्रकट की उसके भीतर एक से अनेक होने का संकल्प उदित हु परम ब्रह्म की बात हो रही है तब उस निराकार परमात्मा ने अपनी लीला शक्ति से अपने लिए मूर्ति की कल्पना की तो जो एक ही हम कहते ना एक ही परम सत्ता स्वयं को पांच अलग-अलग रूपों में प्रकट करती है तो यहां पर पांच अलग अलग रूपों में प्रकट कर रही है तो अब उनमें से जो अभी यहां पर किस रूप में प्रकट कर रही है वह मूर्ति संपूर्ण ऐश्वर्य गुणों से संपन्न सर्वज्ञान मय
00:14:57:09 शुभ स्वरूपा सर्वव्यापक सर्वर ूपा सर्व दर्शनी सर्व काणी सबकी एकमात्र वंदनीय सर्वा द्या सब कुछ देने वाली और संपूर्ण संस्कृतियों का केंद्र थ उस शुद्ध रूपिणी ईश्वरी मूर्ति की कल्पना करके वह अद्वितीय अनादि अनंत सर्व प्रकाशक चिन्मय सर्वव्यापी अविनाशी कौन आया अविनाशी परब्रह्म अत निहित हो गया जो मूर्ति रहित परब्रह्म है उसी की मूर्ति चिन्मय आकार भगवान शिव है अर्वाचीन और प्राचीन विद्वान उन्हीं को ईश्वर कहते हैं किसको ईश्वर कहते हैं भगवान शिव को उस समय एका की रहके रहकर स्वेच्छा अनुसार विहार करने वाले उन सदाशिव ने अपने विग्रह से स्वयं ही एक स्वरूप भूता शक्ति की सृष्टि की तो यहां पर जो भगवती स्वरूप है पर का शक्ति उनका प्रादुर्भाव शिव से हो रहा है अपने विग्रह से स्वरूप भूता शक्ति की सृष्टि की जो उनके अपने श्री अंग से कभी अलग नहीं होने वाली थी अलग
00:16:12:14 नहीं हो सकती ठीक है उस पराशक्ति को प्रधान प्रकृति गुणवती माया बुद्धि तत्व जननी तथा विकार रहित बताया गया है वह शक्ति अंबिका कही गई उसी को प्रकृति सर्वेश्वरी त्रिदेव जननी नित्या और मूल कारण भी कहते हैं सदाशिव द्वारा प्रकट की गई उस शक्ति की आठ भुजाएं हैं शुभ लक्षणा देवी के मुख की शोभा यात्रा अब यहां पर आगे यह प्रसंग है तो शिव महापुराण से हमने सिद्ध किया कि शिव जीी से मां भगवती की उत्पत्ति हो रही है और इसके साथ ही साथ हम लोग और शिव जी के पर्र होने के बारे में यहां से लेते चले अविनाशी होने के बारे में उसके [संगीत]
00:17:09:10 लिए हम शिव पुराण विदेश्वर ममिता और उसका नौवा अध्याय है
00:18:02:20 इसमें शिव भगवान अपने रूप के बारे में बता रहे हैं ब्रह्मा विष्णु महेश ब्रह्मा और विष्णु जी को तो क्या कह रहे हैं मेरे कृत्यों को समझना शिव जी बोल रहे हैं य पर मेरे कृत्य को समझना अत्यंत गहन है तथापि तथापि मैं कृपा पूर्वक तुम दोनों को उनके विषय में बता रहा हूं हे ब्रह्मा हे अचत सृष्टि स्थिति संहार तिरो भाव और अनुग्रह बताते हैं ना कि एक ही ईश्वर स्वयं को पांच अलग अलग रूपों में प्रकट करते हैं तो ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश तो सृजन के उससे वो ब्रह्मा कहलाते हैं जब सृजन करते हैं तो उस कृत के निर्वाह के कारण व ब्रह्मा कहलाते हैं पालन जब करते हैं तो उस कृत के निर्वाह
00:19:18:02 के कारण वह विष्णु कहलाते हैं और संहार करते हैं तो उस कृत के निर्वाह के कारण वो शिव कहलाते रुद्र कहलाते हैं इसके अलावा दो और कार्य होते हैं अ यहां पर लिखा है तिरो भाव और अनुग्रह निग्रह अनुग्रह तो यह मां भगवती और गणेश के कार्य हो जाते हैं तो मुझसे पालि होकर सृष्टि का सु स्थिर रूप से रहना ही उसकी स्थिति कहा गया है उसका विनाशी समार है ठीक है तो यह सारी चीजें अपने बारे में बता रहे हैं भगवान शिव यहां पर सृष्टि का जो उदय है वह शिव जी से हो रहा है
00:20:18:13 और शिव जी से होने के बाद अब हम आ जाते सीधे अच्छा इसमें शिव पुराण में शिव पुराण में जो तुलसी माता के रूप से पहले जो उनका पिछला रूप था वृंदा उस रूप में जो वृंदा माता है वह परब्रह्म के रूप में स्वीकार करती थी शिवजी को यह कहां लिखा है यह युद्ध समता में लिखा है ठीक है तुलसी जी तुलसी जी किसकी प्रिय है विष्णु जी यहां जो हरिहर में भेद करने वाले वो भी ध्यान से सुने कि युद्ध कंड युद्ध खंड में शिव पुराण युद्ध खंड और 26 वा अध्याय उसमें य सब वर्णित है किसी और दिन हम इसको लेंगे अभी हम देख रहे हैं ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है और ब्रह्मा विष्णु महेश से क्या देवी की उत्पत्ति हुई है या नहीं ठीक है अब हम ले लेते हैं एक वेल नोन ग्रंथ है ब्रह्मवर्त पुराण यह बहुत इंटरेस्टिंग है
00:21:33:13 क्यों है बताते हैं इसलिए क्योंकि इसके आधार पर जो समाजी है अलंकार समाजी वह आक्षेप लगाते हैं कि इसमें जो है वह रास ला है इत्यादि इत्यादि और जो इकोन वाले हैं वह इसके आधार पर बस ठहराना चाहते हैं कि और कोई मत पढ़ो केवल ब्रह्म वैवर्त पढ़ लो ब्रह्म वैवर्त में क्योंकि कृष्ण के द्वारा ही सबकी उत्पत्ति हुई है इसलिए कृष्ण को ही केवल मानो और किसी को मत मानो और किसी को मानोगे तो मैंने एक वीडियो देखा आज आया था मेरे सामने तो उसमें बैठ के जनता को कैसे पागल बनाया जाता है मैंने देखा उसमें कि एक व्यक्ति बोल रहा है कि अगर शिव जीी की पूजा करोगे तो शिवलोक में जाओगे वहां शिवलोक में जाकर के विष्णु जी के ध्यान हो रहा होगा तो जब वहां पर ध्यान होना ही है तो यहीं पर कर लो और नमो भगवते वासुदेवाय यह सब जो मंत्र है य कृष्ण के लिए ही है ऐसा नहीं कृष्ण के लिए ही है मगर उस कृष्ण के लिए जो ब्रह्मा विष्णु महेश से अलग नहीं है उस कृष्ण के लिए नहीं है जो ब्रह्मा विष्णु
00:22:48:19 महेश से अलग है और अल्लाह के साथ है उस कृष्ण के लिए नहीं तो अब यहां पर देख ले कि भगवान श्री कृष्ण से सबकी उत्पत्ति हो रही है ब्रह्मवर्त पुराण और इसका है तीसरा अध्याय पहले दूसरा दूसरा अध्याय देख लेते इसमें भगवान श्री कृष्ण
00:23:22:01 का व्याख्यान हुआ है कि व परब्रह्म है और एक बात और है कि आपसे जब कोई यह कहता है कि वह अविनाशी नहीं है वह परब्रह्म नहीं है तो भाई अपने 18 के 18 पुराण किसी ना किसी ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती गणेश इनम से किसी ना किसी एक के निमित्त है तो आप केवल उनका शुरुआत का इंडेक्स देख लोगे ना खोल के तो उसमें हेडिंग डली होगी यहां पर परब्रह्म की विवेचना हुई है और उसको खोल के देख लो हर पुराण इनम इन पांचों में से किसी ना किसी एक को समर्पित है तो जब आप कोई भी पुराण खोलोगे तो उसमें केवल वो जो विषय सूची होती है उसमें जाकर के देख लेना उसी से आपको मिल जाएगा कि इसमें परब्रह्म कहां पर कहा गया है जिसके निमित्त यह वाला पुराण है ज्यादा आपको अध्ययन करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और अगर वो पुराण अवेलेबल ना हो तो पीडीएफ फॉर्म पर अवेलेबल है वहां से पढ़ो इन लोगों ने तो गीता प्रेस छपती नहीं थी तो इन्होंने वो दे भगवती पुराण जो है देवी भागवत व उसमें पृष्ठ संख्या वाला ही प्रमाण बना दिया भाई पृष्ठ संख्या प्रमाण नहीं होती है
00:24:37:27 अध्याय बोला जाता है क्रमांक बोला जाता है तब प्रमाण बनता है श्लोक क्रमांक बोला जाता है श्लोक क्यों नहीं पता है भगवान है ना रामपाल जी भगवान है ना तो श्लोक क्रमांक क्यों नहीं पता है जहां किताब में श्लोक क्रमांक छपा है वहा तो पता है जहां श्लोक क्रमांक नहीं पता वहा नहीं पता क्यों भाई एक सवाल और आता है कि भाई वह अवतार है कबीर के और कबीर जो है परब्रह्म है तो जेल में क्यों है अच्छा अय बात आती भाई कृष्ण भी तो जेल में हुए थे तो भाई उस समय कंस का शासन था आपके हिसाब से इस समय कंस का शासन है क्या और अगर कंस का शासन है तो वध क्यों नहीं कर रहे कृष्ण तो जन्म लिए थे ना जेल में जैसे ही परिपक्व हुए जा कंस को मार
00:25:37:27 दिया नाटक करवाओ पता नहीं कौन से लोग होते हैं इनकी बात सुन भी लेते हैं इसमें दूसरा अध्याय है भगवान श्री कृष्ण के रूप में परब्रह्म का निरूपण हो रहा है ब्रह्म वत पुराण गोलोक धाम की व्याख्या हो रही है
00:26:33:00 श्री नारायण जी यहां पर जो भगवान श्री कृष्ण चंद्र है उनकी बात कर रहे हैं आप ही सब कुछ के कारण तथा कर्म के स्वरूप कारण समूह के सभी कारण के भी कारण कर्म के कारण आप ही मैं आपकी वंदना करता हूं आप निष्काम होकर सर्व कामना रूप है तथापि आप ही कामनाओं के नाशक तथा काम स्वरूप भी हैं
00:27:31:27 आप ही वेद हैं तथा वेद के फल भी हैं आपसे बढ़कर कोई नहीं है आप सर्व बीज रूप है सभी लोग आपसे ही वेदोक्त फल की प्राप्ति कर पाते हैं आप वेदज वेदोक्त विधान के ज्ञाता है समस्त वेदज के शिरोमणि है मैं आपको प्रणाम अर्पित करता हूं इस प्रकार भगवान नारायण ने भक्ति भाव के साथ जो कृष्ण भगवान है उनका स्तव किया और परमात्मा के आदेश से व उनके स्थित रमणीय रत्न सिंहासन पर बैठ गए तो यह यहां पर उसके बाद देखिए आगे आ रहा है दूसरा अध्याय चल रहा है अब यहां पर आगे आ रहा तदनंतर परमात्मा कृष्ण के वाम पार्श्व से शुद्ध स्फटिक के समान शुक्ल वर्ण पंचमुख दिगंबर महादेव महेश्वर अब यहां पर ब्रह्मा विष्णु महेश की जो उत्पत्ति हो रही है वो किससे हो रही है भगवान श्री कृष्ण से हो रही है वहां पर ब्रह्मा विष्णु महे की उत्पत्ति कहां से हुई शिव जी से दुर्गा माता की उत्पत्ति कहां से हुई शिव जी से यहां पर पूरी सृष्टि जो है वोह कृष्ण भगवान से ही उत्पत्ति हो उत्पत्ति उनकी हो रही है तो मैं एक ही परम तत्व स्वयं को पांच
00:28:46:27 अलग-अलग रूपों में प्रकट करता रहता है कभी वो विष्णु बन के सर्वप्रथम विष्णु रूप में आकर के और वहां से उत्पत्ति कर देता है सबकी कभी वो शिव रूप में आता है और वहां से सबकी बाकियों की उत्पत्ति कर देता है कभी वो भगवती रूप में आता है वहां से सबकी उत्पत्ति कर देता है सृष्टि की रचना कई बार हो चुकी है और केवल एक ब्रह्मांड नहीं है कई ब्रह्मांड उनके सबके कल्पा कल्प भेद और सृष्टि भेद सेय सारी कथाएं लिखी हुई है तत्व एक है रूप पांच है उसके बाद उसके अवतार है
00:29:33:13 ब्रह्मा जी आ गए इनसे तर अंतर कृष्ण के नाभी कमल से एक महा तपस्वी कमंडलु धारी वृद्ध प्रकट हो गए जो ब्रह्मा थे लो अब आप तो कह रहे हैं ना कि नहीं देवी से इनका प्रादुर्भाव हुआ है नहीं यहां तो कृष्ण से हो रहा है भगवान श्री कृष्ण चंद्र से हो रहा है अब क्या होगा अब क्या होगा अब एक अच्छी बात बताता हूं जिसमें आपको आनंद आएगा थोड़ी थोड़ा सा थ्योर कल चल रहा है ना इस समय इसलिए मैं आपको वो बताता
00:30:17:21 हूं आनंद वाली बात क्या है कि ब्रह्म वैवर्त पुराण में ही एक विशेष खंड है जिसको कहते हैं गणपति खंड अब इस ब्रह्मवर्त पुराण के आधार पर जो है खंडन किया जाता है कि कृष्ण के अलावा सभी जो है परब्रह्म नहीं है इत्यादि इत्यादि और यह रामपाल वाले तो जानते ही नहीं होंगे कि ब्रह्मवर्त पुराण दुनिया में है भी कि नहीं इनको तो वही पृष्ट संख्या वाला जो देवी भागवत है संक्षिप्त वही पता होगा इनकी सारी वीडियो देख लेना वही मिलेगा रामपाल जी के जितने भी वीडियो होंगे उसमें सब में वही होगा संक्षिप्त देवी भागवत पृष्ठ संख्या ये क्योंकि जब वो जेल गए होंगे इस समय जेल में ही है कि नहीं मुझे कंफर्म नहीं है मगर अगर जानकारी सही तो जब वो जेल गए होंगे तो उससे पहले तक ता प्रस छाप नहीं रही थी श्लोकों के साथ तो वो संक्षिप्त था उनके पास भाई वो तो परम ब्रह्म है ना परमेश्वर के रूप है कहां गए श्लोक
00:31:17:01 क्रमांक आएगा कोई लिंक दे दीजिए भाई आना हो तो किसी को हम तो ब्रह्म वैवर्त पुराण में एक खंड है गणपति खंड और गणपति खंड में भगवान गणेश को यहीं पर परब्रह्म कहा गया वो गणेश गणेश तानी उपनिषद अलग है जो गणेश पुराण है वो अलग है मगर यहीं पर ब्रह्मवर्त में ही गणेश जी को किया गया है परब्रह्म कहा गया वो मैं आपको दिखा रहा हूं तो गणपति खंड 630 नंबर पेज
00:32:14:14 8 बहुत ज्यादा मेहनत की आवश्यकता नहीं है पांचों ब्रह्म का जो स्वरूप है पांचों आप केवल ग्रंथ अरे भाई आपके पास नहीं है ना तो आप आप आपके घर के आसपास कहीं शॉप तो होगी वहां चले जाओ वहां चले जाओ वहां जाकर उससे रिक्वेस्ट कर लो जरा हमें खोल के देख लेने दो पुराण एक एक पुराण खोल के देखते जाओ उसके इंडेक्स में ही लिखा होगा और इतना करने देंगे व आप 698 मैं भी पृष्ठ संख्या प आ गया
00:33:11:19 898 800 यह आ गया 8008 हम यह मंगलाचरण हो रहा है तो इसमें जो है गणेश जी को परब्रह्म कहा जा रहा है
00:34:11:22 तुम शिव तुल्य हो तथा परमायु तुम्हारे समान परम तुम्हारे तुम मेरे समान पराक्रमी हो जाओ और तुम यश जगत में व्याप्त रहे हो और तो यहां पर गणेश जी तुम परब्रह्म हो ब्रह्मा विष्णु महेश तुम्हारे बारे में इनका व्याख्यान करना इनके द्वारा वह संभव नहीं है तुम परब्रह्म हो सर्वव्यापी हो सर्वेश्वर हो तो ये गणेश जी के लिए हो गया यह कौन सा है ब्रह्म वैवर्त पुराण उसमें गणपति खंड है गणपति खंड यानी तीसरा खंड है और उसमें दूसरे अध्याय से लेकर के और दूसरा नहीं आप सीधे इस पर आ जाइए कि गणेश जी के मंगल हेतु मंगलाचरण गणेश जन्मोत्सव ठीक है तो यहां पर जहां इनका मंगलाचरण हुआ है जन्मोत्सव हुआ है इसमें
00:35:27:01 ये सारा को इनका ब्रह्म गणेश जी का क्या कहते हैं वो मिल जाएगा परम परब्रह्म का और एक जगह और मिलेगा 9 ये 13 अध्याय में मिल जाएगा आपको 915 इसी गणेश गणपति खंड के 13 अध्याय में मैं आपके सामने बिल्कुल एक र वीडियो बना रहा हूं पहले से कोई तैयारी नहीं करके बैठा हूं है ना बिल्कुल रॉ बना रहा हूं एक सामान्य व्यक्ति की तरह बिल्कुल
00:36:21:16 915 गणेश जी का मंत्र तक है इसमें है ना ब्रह्म रूपाय ब्रम गणेशाय ब्रह्म रूपाय यह सब हे ईश्वर विष्णु कह रहे हैं गणेश जी के लिए कह रहे विष्णु विष्णु भगवान आप स्वरूप तर्क से परे हैं आप उसका निरूपण करने में मैं असमर्थ हूं आप सभी देवगण से प्रवर सिद्ध योगी गण के गुरु सर्व स्वरूप सर्वेश ज्ञान रसमय आप अव्यक्त अक्षर नित्य सत्य नित्य नित्य क्या हो गया नित्य का अर्थ क्या हो गया
00:36:58:21 नित्य का अर्थ क्या हो गया अविनाशी नित्य सत्य आत्म स्वरूप वायु तुल्य निर्लिप्त अक्षर तथा सर्व साक्षी हैं सब मोक्ष देने वाले हैं और यहां पर फिर पहले विष्णु भगवान ने की फिर शिव जी ने की इसी तरीके से उसके बाद फिर अन्यों ने की और विष्णु कृत विष्णु कृत इस गणपति स्तव को जो समाहित अ करता है ना
00:38:08:16 तो विष्णु कृत इस गणपति स्तव को जो समाहित होकर भक्ति के साथ प्रातः मध्या तथा साय काल करता है गणेश उसके सभी विघ्नों का सतत नाश कर देते हैं लो भाई मोक्ष दायक हो गए उसके सभी कल्याण की वृद्धि हो जाती है व्यक्ति कल्याण जनक हो जाता है जो इस स्तव को भक्ति पूर्वक यात्रा काल में पढ़ता है उसके सभी अभीष्ट की सिद्धि हो जाती है निसं सय और आगे भी अनेकानेक इनका जो है इसी तरीके से महिमा मंडन हुआ है गणेश जी का तो यह ब्रह्मवर्त पुराण से हमने जान लिया कि भगवान श्री कृष्ण चंद्र से सृष्टि की रचना हुई ब्रह्मा विष्णु महेश का प्रादुर्भाव हुआ और शक्ति का भी प्रादुर्भाव हुआ गणेश जी को इसमें परब्रह्म कहा गया और और अब हम देख लेते हैं विष्णु पुराण देख लेते हैं भगवान श्री कृष्ण ने भगवत गीता में तो कहा ही है कि मैं अजन्मा अविनाशी होते हुए भी संपूर्ण भूतों का ईश्वर होते हुए भी ऐसे ही गणेश गीता में गणेश जी ने कहा है इसी प्रकार से शिव गीता में शिव जी ने कहा है इसी प्रकार से ईश्वर गीता में कहा गया है राम गीता
00:39:23:21 में कहा गया है तो इतने इतने भरे पड़े कहां तक दे इतने प्रमाण है अब बात य आती कि वहां पर उन्होंने यह क्यों कह दिया कि जन्म मरण मेरा तो जन्म मरण होता है मैं पूछ रहा हूं कुत्ता क्यों कहा कबीर जी ने अपने आपको को कुत्ता क्यों कहा कुत्ता है क्या नहीं है ना तो क्यों कहा लीला पूर्वक आप यही कहोगे ना अपने कबीर जी के लिए लीला पूर्वक तो यही लीला पूर्वक न्याय करो ना यार ऐसे क्यों करते हो न्याय करो
00:40:03:14 न्याय अब आ जाते हैं विष्णु भगवान का महिमा मंडन देख लेते हैं तो श्री पारा सर जी बोल रहे हैं जो ब्रह्मा और शंकर रूप से जगत की उत्पत्ति और संहार के कारण है तथा अपने भक्तों को संसार सागर से तारने वाले हैं उन विकार रहित यह क्या है विष्णु पुराण प्रथम अंश दूसरा अध्याय में पढ़ रहा हूं उन विकार रहित शुद्ध अविनाशी कौन है अविनाशी परमात्मा सर्वदा एक रस सर्व विजय भगवान वासुदेव विष्णु को मैं नमस्कार विष्णु को नमस्कार है य कबीर का नाम तो नहीं आया भाई हा कहां है कबीर कबीर का नाम दिखाओ ना
00:40:55:14 भाई थ गया प्रमाण दिखाते दिखाते फिर भी उसी तरीके से बिल्कुल जैसे जूमबीज नहीं होते हैं उनको कुछ सुनाई नहीं देगा कोई आए हैं क्या जितेश बारा जी हां जी जितेश जी जय श्री राम जय श्री आप आ चुके क्या पहले हां मैं पहले भी आया मेरे तो वही सवाल है कुछ नहीं नहीं सवाल नहीं आप यदि कोई काउंटर करने आए तो बताइए काउंटर यही है कि जैसे आप अभी शास्त्र में पढ़ रहे हैं कहीं ब्रह्मा जी को सर्वशक्तिमान कहा गया है कहीं शिव जी को कहा गया है पहले आप अपनी पहचान बताइए आपकी पहचान क्या है आध्यात्मिक दृष्टि से मतलब आपके पीछे कौन सा सोर्स ऑफ इंफॉर्मेशन है मैं जिज्ञासु हूं अभी तो नहीं तो जिज्ञासु है तो आप क्लासेस जवाइन करिए ठीक है आप क्लासे जन करिए आपको यदि कोई काउंटर करना है हमारी किसी बात को क्योंकि आपके पास क्योंकि कोई मत है कोई विचार है तो आप बताइए विचार मेरा यही है कि जैसे आप आपका विचार है कि
00:42:10:25 आपका कोई विचार है ही नहीं ना क्योंकि आपने अध्ययन किया नहीं क्योंकि आप जिज्ञासु है तो आप पहले जाइए कहीं पर जाकर के अध्ययन करिए फिर अपना विचार बनाइए फिर उस विचार को लेकर के आप काउंटर करिए होता क्या है कि जिज्ञासु के नाम पर आया जाता है और हम जो है तरीके से यहां पर उस चर्चा के लिए नहीं बैठे हैं हमारी क्लासेस लगती है आप वहां पर आइए आपकी जिज्ञासा शांत की जाएगी ठीक है ठीक जी चक्र पाणी
00:42:46:12 जी आपका चेहरा दिख पाएगा या जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम भाई साब जय श्री राम जी आप पहले भी बात हो गई है मैं जरा इसको पूरा कर लू जो टॉपिक चल रहा है जी जी आप उसको कपलीट जी जी तो क्या है यहां पर विष्णु भगवान को कहा जा रहा है विकार रहित शुद्ध अविनाशी परमात्मा सर्वदा एक रस सर्व विजय भगवान वासुदेव विष्णु को नमस्कार है जो एक होकर भी नाना रूप वाले हैं स्थूल है तथा भैया देख लेना विष्णु पुराण है आ में यह ना कना सद ग्रंथों को नहीं दिखाया विष्णु पुराण है और पढ़ लिया करो थोड़ा बहुत फिर नहीं तो चिल्लाते रहते हो वेदों में प्रमाण है ओ वेदों में प्रमाण है वेदों में प्रमाण है कबीर नहीं भगवान है जब पूछा जाए कि लिखा हो कहां प्रमाण है कबीर भगवान है तो फिर कहेंगे भैया वह कवि है कवि से कबीर बना है और वह
00:44:01:16 क्या है कबीर कबीर से कबीर देव से कबीर देव बना है और फिर पूछे कवि कबीर कैसे बना कबीर कबीर कैसे बना अरे तुम आप जैसे कहते हो ना वो अपने क्या कहते हो आप कृष्ण को काना कहते हो हमने हम भैया हम यह नहीं कहते कि वेदों में प्रमाण है काना भगवान है जब वेदों की बात करते तो हम कहते वेदों में प्रमाण है विष्णु भगवान है हम ये नहीं कहते वेदों में प्रमाण है काना भगवान है और दूसरी बात तुम्हारे हिसाब से तो हम लोग शास्त्रो चित भक्ति नहीं कर रहे ना तो तुम हमसे क्यों सीख रहे हो क्या करना है क्या नहीं करना है आप तो आप तो शास्त्र सम्मत बात करने वाले व्यक्ति हो ना आपके हिसाब से तो हम शास्त्रों के आधार पर भक्ति नहीं कर रहे ना तो आप हमारी यह बात क्यों ले रहे हो कि आपने कृष्ण को काना कह दिया यह क्यों सीख रहे हो शास्त्र से बताओ कबीर कबीर कबीर कैसे बना कवि कबीर कैसे बना व कबीर है ही नहीं वैसे कवि है शास्त्र से बताओ हमसे मत सीखो हम तो आपकी नजरों में आपने कहा ना कि आप शास्त्रों शास्त्रों की शास्त्रो चित भक्ति नहीं कर रहे हो यही सिखाया गया ना जेल जाने से पहले तक आपको उसके बाद उन्हीं के वीडियोस को तोड़ मरोड़ के तोड़ मरोड़ के तोड़ मरोड़ के उन्हीं के वीडियोस को रिपीट किया जाता है और कुछ नहीं कोई नया वीडियो नहीं बनता उनका
00:45:17:10 व जो पहले रिकॉर्डेड हो चुके हैं बस वही वीडियो चलते रहते जहां तक मुझे मालूम है कोई नया वीडियो हो भैया सलाखों के पीछे से तो बात अलग है मैंने नहीं देखा तो जो एक होकर भी नाना रूप वाले हैं स्थूल सूक्ष्म मय है अव्यक्त एवं व्यक्त रूप है तथा मुक्ति के कारण है किसके कारण है मुक्ति के कारण यहां कबीर तो नहीं लिखा है मुक्ति के कारण अभी मैं इस बात पर भी आऊंगा अभी जरा कबीर वाली बात प जरा आज तरीके से बाल की खाल निका
00:46:00:14 जो भी आए वह चेहरा लेकर आए अपना अन्यथा उसे ऊपर नहीं लिया जाएगा इसमें जो विश्वर रूप प्रभु विश्व की उत्पत्ति स्थिति और समार के मूल कारण है उन परमात्मा विष्णु भगवान को नमस्कार है यह वाला प्रमाण विष्णु पुराण से ठीक है अब मैं आपको ऐसा प्रमाण दिखाऊंगा जिससे आपको ज्यादा संतुष्टि मिलेगी वो प्रमाण कौन सा है वो भी देख लो देवी भागवत करते हो ना भाई लो भाई बड़ा सा देवी भागवत पुराण दिख रहा है इतना बड़ा देखा है कभी देवी भागवत नहीं देखा नहीं देखा होगा भाई संक्षिप्त वाला ही देखा है आगे आ है गीता प्रस से ले लो जाकर के संस्कृत हिंदी छापने लगा है गीता प्र
00:46:59:26 तो देवी भागवत में देवी भागवत में पहले आ जाते हैं नौवे स्कंध प पृष्ठ क्रमांक मुझे भी पृष्ठ क्रमांक बोलने की आदत हो गई इनको सुन सुन के देख लो भैया बहुत बड़ा देवी भागवत है फिर मत कहना पहली बार देखे होंगे
00:47:41:27 ये नवम स्कंद आ गया अब इसमें क्या है इसमें जो सृष्टि की उत्पत्ति हो रही भगवती पुराण की बात कर रहा हूं देवी भागवत की बात कर रहा हूं सृष्टि की उत्पत्ति जो हो रही है इसी में देवी भागवत में कल्प भेद से किससे हो रही है यदा यदाई धर्मस्य गन भवती भारता अनम धर्मस्य तदात्मानं सजाम में हम लीला पुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण चंद्र कहते हैं
00:48:22:27 इन्ह क्या लिखा है भगवान नारायण ने कहा हे देव ऋषि नारद गणेश माता श्री दुर्गा लक्ष्मी सरस्वती सावित्री तथा राधा यह पांचों देवियां प्रकृति कही जाती है क्या कही जाती है प्रकृति और वहां पर शिव पुराण में प्रकृति का उत्पत्ति अंबिका की उत्पत्ति किससे हुई शिव जी के द्वारा यहां पर किससे हुई कृष्ण भगवान से और उधर किससे हो रही विष्णु पुराण में विष्णु भगवान से ऐसे ही जो ब्रह्म पुराण है ब्रह्मा जी से ब्रह्मांड पुराण ब्रह्मा जी
00:49:01:27 से गणेश पुराण गणेश जी से और देवी पुराण है तो उसमें प्राथमिकता से देवी जी से बाकी कल्प भेद से जैसे ब्रह्म वैवर्त पुराण में कृष्ण भगवान से उत्पत्ति तो है मगर गणेश जी को भी कहीं पर क कहा गया है परब्रह्म इसी प्रकार से भागवत पुराण पूरा समर्पित है कृष्ण भगवान को मगर उसमें भी शिव जीी को भी कहा गया परब्रह्म है ना तो ये क्यों कहा जाता है क्योंकि सृष्टि के निर्माण का जो वोह तत्व है वह एक है तो वह कल्प भेद से कल्प मतलब एक कल्प में य सृष्टि बनी अगले कल्प में दोबारा से महाप्रलय से उद्भव हुआ दोबारा से आविर्भाव हुआ तो वह जो आविर्भाव हुआ कभी उनका मन हुआ विष्णु रूप में पहले आ गए और विष्णु रूप से सारी सृष्टि कर डाली तो वहां पर विष्णु जी प्रधानता से दिखे उस चैप्टर में हम तो क्या है कि यह जो प्रकृति कही जाती है इन्हीं पर सृष्टि का कार्य अवलंबित है वह प्रकृति कैसे प्रकट हुई यह बताया जा रहा है ठीक है उस मूल प्रकृति के लक्षण यह कौन बोल रहा है यह विष्णु भगवान बोल रहे हैं
00:50:17:15 उस मूल प्रकृति के लक्षण भली भाति बताने में यद्यपि कोई समर्थ नहीं हो सकता तथापि मैंने धर्म के मुख से जो कुछ श्रवण किया है व संक्षेप में बता रहा हूं ध्यान से सुनो पहले प्रकृति शब्द की तपति सुनो यह सब चीजें तो व्याकरण संबंधी है वो सर के ऊपर से जाएंगी तो इसलिए रहने देते हैं आगे चलते हैं क्या
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→ Used in: B · Video रामपाल का झूठा मोक्ष at 41:18 ↗
→ Used in: B · Video रामपाल एक्सपोज़: एलईडी दीक्षा से लेकर कबीर के देह नाश तक, चेलों की बोलती बंद at 23:08 ↗
00:50:49:10 है सृष्टि के आदि में जो देवी विराज रहती है उसे प्रकृति कहा गया है सृष्टि करने के लिए योग माया का आश्रय लेकर परमात्मा दो रूपों में विभक्त हो गए वहां क्या कह रहे हैं मैं अपनी योग माया को अपने अधीन करके भगवत गीता में कह रहे ना यहां क्या कह रहे हैं कि सृष्टि करने के लिए योग माया का आश्रय लेकर परमात्मा दो रूपों में विभक्त हो गए उनका आधा दायना भाग पुरुष और आधा भाग प्रकृति कहा गया
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00:51:17:28 तो अब य अद्वैत भी आएगा देखिए कैसे वे देवी प्रकृति ब्रह्म स्वरूपा नित्या एवं सनातनी है कौन है ब्र स्वरूपा नित्या नित्या का अर्थ समझ रहे हो ना नित्य अविनाशी प्रकृति भी अविनाशी है नित्या एवं सनातन है सनातन का मतलब ही है जो किसी भी देश काल परिस्थिति में प्रभावित ना हो एज इट इज रहे तो प्रकृति भी व जो देवी है मां भगवती वह भी सनातनी है परमात्मा के समान सभी गुण है इनम और क्या है इनमें निहित है इसलिए परम ज्ञानी योगी जन स्त्री पुरुष का भेद नहीं मानते दोनों को एक तरह से देखते हैं परब्रह्म परम ब्रह्म और परम ब्रह्म स्वरूपिणी देवी है जो उनका कहना है कि सत असत जो कुछ भी दृश्य मान जगत है वह सब एक ब्रह्म मय है सर्व तंत्र स्वतंत्र आनंद कंद भगवान श्री कृष्ण चंद्र के मन में करने की रचना होते ही उनकी मूल प्रकृति परमेश्वरी एका एक आविर्भव हो
00:52:33:02 गई सुनाई दिया देवी भागवत में ही जो सृष्टि की उत्पत्ति है भगवान श्री कृष्ण से हो रही है अब लगाओ अपनी शरण रामपाल जी के पास हा और सुनो इसमें एक खास बात वो क्या है इसमें खास बात ये है पहली बात तो हम सिद्ध कर चुके सृष्टि हो रही है यह दुर्गा है और ऐसे ही दुर्गा ऐसी दुर्गा नहीं यह भी कहोगे वही दुर्गा क्यों है तो सर्वप्रथम जो उन्होंने पांच रूप धारण किए थे उनमें से सर्वप्रथम जो है वह रूप है गणेश जननी भगवती दुर्गा का लो संशय बाकी मत रखना
00:53:19:22 भैया ये लोग इतने उटांग वीडियो बनाते हैं पता नहीं वाकई मेंही ऐसा लगता है कि कुछ नो किया है क्या किया है म हमने जितने भी प्रमाण दिए थे ना उन पर बात ही नहीं की इन्होंने अपने प्रमाण दिखा दिए अरे भाई वो तो हम तुम्हारे जो जिन प्रमाणों का सहारा लेकर के तुम अपनी बात कह रहे हो हमने नकारा क्या उनको कि ये नहीं लिखा है नहीं हमने तो यह कहा कि यह भी तो लिखा है ऐसी बात कहो जिसमें दोनों बातों का मान हो ऐसी बात मुंह से निकालो जिसमें दोनों बातों का मान हो केवल तुम जो एक पॉइंट पकड़ रहे हो उसकी बात ना हो वरना तो मैं कह दूं कि कबीर कुत्ता है तो क्या करूं मैं यही मानने लगू क्या परमेश्वर आपके हिसाब से वह परमेश्वर भी है उन्होंने लिखा है उन्होंने यह भी लिखा है मैं कुत्ता राम का तो क्या करूं केवल इसी को पकड़ लू मैं तो क्या कहा जाएगा आज के बाद वेदों में प्रमाण है और कबीर वाणी में प्रमाण है और आगे की लाइन क्या होनी चाहिए
00:54:30:13 बोलने में भी अच्छा नहीं लग रहा है तो यहां पर सृष्टि उनसे उत्पत्ति हुई और एक खास बात वह क्या है 90 नंबर का जो श्लोक है उसमें कहा जा रहा है कि यह जो देवी है यह परमात्मा कृष्ण की परम भक्त है लो ब्रह्मा विष्णु महेश मा पूजा करते थे ना देवी की यहां तो देवी मां परम भक्त हो
00:55:07:03 गई अब इसमें एक और चमत्कारिक बात है और लो भरा पड़ा है भाई बस केवल उठाने की देर है जिसने शास्त्र उठाए नहीं ना कभी उनको ये लोग बर गलाते हैं उठाने की देर है यह भी नहीं कि आप सारे पढ़ डालो केवल उठा लो जो आगे जो विवरणिका होती है उसमें पढ़ लो उसमें ही आपको इतना भर्ग प्रमाण मिल जाएगा कि उसमें ही आपको इतना प्रमाण मिल जाएगा कि पूछो
00:55:43:22 नहीं अब हम आ रहे हैं 1500 67 कोई आया क्या भाई दीपक कुमार जी अथवा जो अक्षत जी आए हैं य अपना चेहरा लेकर आए अता व्यर्थ का प्रयास करना बेकार है आप चेहरा लेकर आएंगे तो ही आपसे बात होगी यह कौन है यु आर्य तेरे में दम है तो हां तो आओ ना भाई यु
00:56:28:24 आइए आप ऊपर आइए और चेहरा दिखाइए क्या हुआ कुछ कालिक लगी है चेहरे पर धो लीजिए चेहरा क्यों नहीं दिखा रहे कुछ हो गया था क्या भूतकाल में आपके साथ पकड़ लिए गए थे कहीं किसी अपराधिक कार्य उसमें गतिविधि में पकड़े गए थे क्या चेहरा दिखाइए आइए स्वागत है आपका सम्मानित जो जगह होती है संभ्रांत जगह जहां होती है वहां पर सब ब्रांतो की तरह जाइए ना चोरों से कायरों से बात नहीं करते हम वीरों से बात करते हैं यदि आपको लगता है कि आप सत्य के पक्षधर है तो उस जो सत्य है ना जिसकी आप रक्षा कर रहे हैं उससे थोड़ा बल एकत्रित करिए फिर आइए क्योंकि यदि आपको लगता है कि जिस सत्य की आप रक्षा कर रहे हैं उसके लिए अपने प्राणों को भी न्योछावर कर सकते हैं तो आइए
00:57:29:00 क्योंकि हम इसी भाव से निकले हैं यहां कोई बिजनेस करने नहीं बैठे हैं य हाइपर क्वेस्ट की तरह पहले मूर्ति पूजा का समर्थन कर दिया मूर्ति पूजा की फोटो डाल दी फिर जो है मूर्ति पूजा के विरोध करने वालों को अपने चैनल पर बुला बुला के प्रमोट कर दिया ये बिजनेस है बिजनेस करने नहीं बैठे सहा नहीं गया था धर्म के ऊपर हो रहे आघात प्रहार को
00:58:12:12 देखकर एक अलंकार समाजी आए हुए वो कह रहे हैं दम है तो मुझ में ले मैं चैलेंज करता हूं और उनके अंदर इतनी दम नहीं है कि माता-पिता से प्राप्त जो चेहरा है उसको दिखा सके समाज के सामने बताइए माता-पिता भी लज्जा का भाव अपने अंदर लाएंगे ऐसा हमने कौन किसको जन्म दे दिया जो ऐसे कार्य करके बैठा है जो अपना चेहरा तक नहीं दिखा पा रहा है समाज को यह आ गया अब इसमें क्या है महिषासुर के वध के लिए दोबारा से देवी का प्रादुर्भाव हो रहा है और कैसे हो रहा है तो 12वां स् बारवा स्कं है नहीं दसवा स्कं है बारवा अध्याय और उसमें श्लोक क्रमांक बता
00:59:07:01 दूं 15 इस प्रकार सभी देवताओं के तेज से भगवती महे महेश मदनी देवी का आविर्भाव हुआ लो तो यहां पर आविर्भाव किससे हो गया मां भगवती का आविर्भाव किससे हो गया य पर ब्रह्मा विष्णु महेश और भी अनेकानेक देवताओं के तेज से हो गया लो इसको कहते हैं ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है यदि ईश्वर किसी नियम के नीचे है ईश्वर किसी नियम के नीचे है तो वह ईश्वर नहीं है आप यह है हमारा ईश्वर जो किसी भी नियम के नीचे नहीं आ सकता लाक
00:59:55:01 दिखाओ हितेश जी जी हितेश शर्मा जी नमस्ते जय श्री राम जय श्री राम ज श्रीम जी भैया मैं देवी भागवत का ही बताना चाह रहा था कि जो नवम स्कंद है ना उसमें प्रमाण है कि शिवजी की अमृता दिखाई गई है उसम वो तो सभी कई जगह देवी भागवत में केवल वहीं पे नहीं बहुत जगह पे है बहुत जगह है अमरता शिवजी बस बहुत सारी जगह मतलब उसको आप गिन नहीं सकते इतनी जगह
01:00:38:03 है हा जी तो अभी हम लोग ना अ अविनाशी हो गया और मां भगवती का प्रादुर्भाव भी हो गया अब मैं जरा कबीर जो शब्द है उस परे हम लोग बात करेंगे आप बता दीजिए मैं दिखा दूं आप आए हैं तो आप बहुत बता बता दीजिए बोल भया ये होगा श्रीमद् देवी भागवत का नवा स्कंद 21 वा अध्याय 2 अध्याय जिसमें कृष्ण भगवान से सृष्टि हो रही है वही है ना शंख चूड़ नामक देते हैं जो उनका और महादेव जी का युद्ध होता है अभी खुला था नौवा अध्याय थोड़ा पहले आ जाते न स्कंद खोला था ये बड़ा भारी है ना ये पुराण भारी है खोलने में टाइम लग जाता है इसी कारण से तो नहीं खोलते लोग और इसी कारण से संक्षिप्त वाला खोल लेते हैं वो हल्का जाने से पहले इतना कर
01:01:46:02 जाऊ कहां है भाई निष्ठा पूर्वक माता जी ने दूध नहीं पिलाया क्या कहां गए विदों में प्रमाण है ओ कहां कौन सा इसका स्कंद का कौन सा है अ कावा अध्याय 21
01:02:42:16 नौवे स्कंध का 21 हां 1352 24 से लेकर 27 तक होगा कौन सा श्लोक है 24 से लेकर परमात्मा श्री कृष्ण का परम भक्त शंख चूड़ आनंद पूर्वक शयन करने के बाद ब्रह्म महूरत में ध्यान प्रियो उपरांत अपनी पुष्प सया से पूर्ववत उठा और स्वक्ष जल से ये शंख चूड़ का मामला चल रहा है और शिवजी से इसका युद्ध होना है श्लोक क्रमांक क्या कहा आपने 24 भैया
01:03:28:19 2 हा तो भया इसमें मतलब शंख चूड़ की बता शांत एवं भक्तों के मृत्यु भय को दूर करने में पूर्ण समर्थ है तपस्या का फल एवं समस्त प्रकार की संपदा हों से उसे भरपूर रखना स्वाभाविक गुण है वे आशुतोष कहे जाते हैं हां जी उस समय भगवान शंकर बट वृक्ष के नीचे विराजमान थे उनका विग्रह करोड़ों सूर्य के समान चमक रहा था वह योगासन की मुद्रा में बैठे हुए थे उनका मुख मंडल मुस्कान से भरा था ब्रह्म तेज से उ भाषित वे इस प्रकार प्रदीप्त हो रहे थे मानो शुद्ध स्टिक मणि चमक रही हो उनके हाथ में त्रिशूल और पट्टी तथा शरीर एट वो लाइन क्या है वो लाइन बता दीजिए मैं ढूंढ ा भैया ये 24 वा है भक्त मृत्यु हरम शांतम गौरी कांम मनोहर तप साम फल दाताराम दाताराम सर्व संपदा अपने भक्तों की एक मिनट में अपने भक्तों की मृत्यु तक को टाल देने वाले शांत स्वभाव मनोहर तपस्या का फल तथा सभी प्रकार की संप्रदाय
01:04:43:19 प्रदान करने वाले शीघ्र प्रसन्न होने वाले प्रसाद मुख मंडल वाले भक्तों पर अनुग्रह करने के लिए व्याकुल विश्वनाथ विश्व बीज विश्वरूप कारणों के भी कारण नरक समुद्र समुद्र से पार करने वाले ज्ञान प्रद ज्ञान बीच ज्ञानं था सनातन उन गोरी पति महादेव को देखकर उस दानेश्वर शंख चूड़ने विमान से उतरकर सबके साथ वहां विद्यमान शंकर को सिर झुकाकर भक्ति पूर्ण पूर्वक प्रणाम किया मतलब भैया इसमें बताने का मतलब यह है कि मृत्यु को भी टाल सकते हैं जो और सनातन लिखा है उनको तो वो अविनाशी अपने आप हो गे
01:05:26:07 शाश्वत धर्म स्वरूप ज्ञान के बीज भू और साक्षात ज्ञानानंद है हा जी हासे ब फर आगे आगे जाकर जो न स्कंद का 21 वा श्लोक मतवा अध्याय है उसी का 47 और 48 वा जो श्लोक है वही यह बताया गया है कि शिवजी मृत्युंजय है और उन्होंने असंख्य प्र देख लिए अभी तक और आगे भी वह देखेंगे ऐसे करके क्योंकि मेरे पास गीता प्रस गोरखपुर का है देवी भागवत तो उससे फर्क पड़ रहा होगा थोड़ा नहीं संस्कृत श्लोक सेम बोला था आपने वो शब्दार्थ में अंतर
01:06:17:06 है क्या लिखा है आपने क्या बोला आपने ये है 47 और 48 वा 2 अध्याय हा जीी 21 अध्याय में है 47 सॉरी गय 57 से होगा भया य 47 बोल दिया 57 होगा एक निश्चित समय पर सभी लोग नष्ट हो जाते हैं यहां से जी काले नति विश्वानी काल परम ब्रम परमात्मा से काल की क्षमता की जा सकती है हा जी उन्हीं की कृपा से मुझे मृत्युंजय होने का अवसर प्राप्त हुआ क्योंकि जिसे कोई नहीं दे सकता उस प्राकृत प्रलय को मैं बारबार देखता हूं अतः मेरे विचार से वे परमेश्वर प्रकृति रूप है उन्हीं को पुरुष भी कहा जाता है तो यहां पर मेरे ख्याल से इनकी कृष्ण की वंदना हो रही है इनके द्वारा और यह अविनाशी रहे हां
01:07:31:20 जी क्योंकि यहां ऐसा लिखा हुआ है कि मृत्युंजय है और साथ में य लिखा है कि मैंने असंख्य प्राकृत प्रलय देखे हैं तथा आके भी बारबार देखूंगा और साथ में भैया जैसे आप अद्वैद के लिए बोलते है वैसे यहां भी लिखा है कि परमेश्वर ही आत्मा है और व ही जीव है तो अगर परमात्मा की मृत्यु हो रही है तो इसमें तो दुख होना नहीं चाहिए वैसे भी और परमात्मा ही जीवित है अमर है तो वो तो आपने पहले ही बताया है कई बार जी बहुत सारे हैं परमात्मा और देवी और इनकी एकता का बहुत जगह निरूपण हुआ है देवी परब्रह्म से भिन्न नहीं है अतु परमेश्वर परमात्मा नित्य सनातन सच्चिदानंद स्वरूप परमात्मा तत्व ही है लो ऋगवेद 10 125 में बहुत जगह गिनते गिनते थक
01:08:32:06 जाएंगे लेकिन यह पढ़ना नहीं चाहते हैं इनको यह बताया गया है कि सब काल ने बाकी बोला है जो हमने बता दिया है वही भर सही है काल ने बोला है तो ऐसा ग्रंथ बोलो लाओ ना जो काल ने बिल्कुल ना बोला हो पूर्णत विश्वास होऐ ग नहीं ते ग्रंथ को क्यों देख रहे काल ने बोल दिया भाई भगवान के मंदिर में क्या एक एक एक और झूठा रख दोगे
01:09:05:05 [संगीत] क्या अब नवरात्र पूजा रुकवाने वाले रामपाल के चेले अब लाइव पर क्यों नहीं आते नहीं है भाई निष्ठा पूर्वक निष्ठा पूर्वक का अभाव है अभी अभी तो इसमें भी आएंगे महाकुंभ में भी पधारेंगे लोग एक भाई साहब आए हैं इनका नाम है राम कुमार जी जय श्री राम राम कुमार जी चेहरा
01:09:50:15 दिखाए चेहरा दिखाए राम कुमार जी ठीक है हमें हटाना पड़ेगा क्षमा करिएगा तो अब मैं उस एक टॉपिक पर बात करूंगा जरा कि क्या वेदों में जो कवीर शब्द आया है उसको हम लोग कबीर से जोड़े कि ना जोड़ इस पर आज मैं बात करू नहीं जोड़ना चाहिए सबसे पहली बात है कि वेदों में कबीर शब्द नहीं आया है कवि शब्द आया कवि और जब किसी और शब्द के साथ में लिखा जाता है संधि होती है उसके कारण वहां पर कबीर रा जो है उद भाषित हो जाता है कवि का अर्थ है सर्वज्ञ क्रांत दर्शी सीमाओं के पार भी देख सकने वाला मतलब परमेश्वर का एक गुण है कवि कवि होना जैसे सर्वशक्तिमान होना का एक गुण है व्यापक होना सर्वव्यापक होना परमेश्वर का एक वो है तो इसी तरीके से कवि होना भी एक गुण
01:11:05:20 मतलब भगवान की एक शक्ति तो अब बात य आती है कि पहली बात यह है कि जब कवि शब्द जो आया है वहां से करेक्ट कबीर नहीं आ रहा है मगर हम फिर भी कह रहे हैं कि वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है मगर व पर वेदों में स्पष्ट रूप से भगवती का आया है देवी का आया है विष्णु का आया है रुद्र का आया है शिव का आया है गणपति का आया है स्पष्ट आया है तो यह क्यों नहीं कह रहे कि वेदों में प्रमाण है गणपति भगवान अब यह यह कहते हैं कि जिस गणपति की बात वेदों में हो रही है वह गणपति कबीर ही है आदि गणेश आदि सदाशिव और या फिर आदि विष्णु आदि राम यह कहते हैं पहली बात तो यह है कि वोह जो कबीर है वो आदि राम आदि विष्णु आदि शिव सदाशिव है कि नहीं यह तो बात बाद में हम देखेंगे पर पहले अभी अभी क्या बात है अभी की बात यह है कि अगर मान भी लिया जाए कि है थोड़ी देर के लिए यह मत सोचना कि मान लिया थोड़ी देर के लिए दुर्जन तोष न्याय
01:12:20:22 कहते हैं इसे सब नहीं पढा होगा तो थोड़ी देर के लिए अगर मान भी लिया जाए तो मेरे भाई तुम एक बार कहो तो वेदों में प्रमाण है सदा सेव भगवान है वेदों में प्रमाण है गणेश जी भगवान है यह क्यों नहीं कहते क्योंकि दिक्कत हो जाएगी मामला फेल हो जाएगा दुकाने बंद हो जाएंगी दूसरी बात अब यह कहते हैं अब इसमें इनका काउंटर क्वेश्चन आता है जब इनसे पूछा जाता है कि कवि को कबीर क्यों कह रहे हो अब उसमें यह आता है कि जैसे तुम प्यार से कृष्ण को कहाना कहते हो वैसे ही हम लोग कवि को कबीर कहते हैं तो भाई हम तो है ना आपकी नजरों में हमारी चीजों को देख के तुम सीखो ग क्या तुम तो शास्त्रों पर चलने वाले हो ना संक्षिप्त संक्षिप्त शास्त्र संक्षिप्त शास्त्रों पर चलने वाले हो तो हमें देख के क्यों सीख रहे हो आपके नियम कहां है कवि कबीर कैसे बना और हमने कभी नहीं कहा वेदों में प्रमाण है काना भगवान है हम रस में काना गाते हैं जब हम वेदों की बात करते तो हम कहते वेदों में प्रमाण है विष्णु भगवान है श्रुति में प्रमाण है कृष्ण भगवान श्रुति में प्रमाण है रुद्र भगवान है शिव भगवान है हम तो नहीं कहते काना भगवान है वो तो हम जब गाना गाते गा लेते हैं
01:13:37:00 ठीक है तो आप पहली बात तो यह है कि हम यह कहते नहीं है दूसरी बात य कि आप हमसे कब से सीखने लगे आप तो हमें सिखाने आए हो ना आप तो हमें सिखाने आए हो ना तो आप हमसे क्यों सीख रहे हो आपका प्रमाण कहां है कि कवि को कबीर क्यों कहा जाए इस बारे में हमसे सीखो तो हमसे बाकी की चीज क्यों नहीं सीखो अब एक बात और आती है यह लोग कहते हैं कि परमात्मा ऐसा होगा ऐसे जगमगाए सात में आसमान में बैठ जाएगा यह सब क्योंकि कबीर ने किया एक अफ्रीका का बच्चा है काले कलर का उसने भी किया है तो उसको मान ले बताइए अश्वेत है वो अफ्रीका में नाइजीरिया में यहां पर रहता है और वो भी वो सारे वो कवि वो काव्य रचना भी करता है वो वो सारे गुण है उसमें जो सारे गुण इन्होंने बताए सारे गुण है अब बताओ उसको भगवान मान लोगे उस किसी भी एंटिटी को जब वेदों में आने वाले किसी तत्व से जोड़ा जाएगा तो वहां पर यही वो है इस ये कैसे सिद्ध होगा कि यही वो है
01:14:52:01 क्योंकि ये वैसा वैसा काम कर रहा है दिख रहा है इसलिए मान ले नहीं किसी ना किसी साक्ष्य की आवश्यकता होगी कि हां यही वह है उसको कहते हैं गुरु जिन परंपरा प्राप्त आचार्यों से आपको वेदा दि शास्त्र प्राप्त हुए वही परंपरा प्राप्त आचार्य य बता सकते हैं कि इन शास्त्रों में दिया गया अवतारों का जो वर्णन है भगवत स्वरूपों का जो वर्णन है वह भगवत स्वरूप यहां जो संसार में आए हुए व्यक्तित्व उनमें से कौन है नहीं तो आप प्रमाण बताओ भाई आप कह रहे हो कबीर के अंदर य क्वालिटिया थी इसलिए वो जो वेदों में बात व जो शास्त्रों में बात हो रही है व कबीर की हो रही है मैं कह रहा हूं एक और एक और है मेरे पास व्यक्ति उसकी हो रही है और आदि कवि कौन से कहे गए हैं वाल्मीकि आदि काव्य कौन सा है संसार का वाल्मीकि रामायण आदि कभी कहा गया उन्हें जगह जगह उनको मान लो फिर ईश्वर वाल्मीकी जी को नहीं मान पाओगे प्रॉब्लम है तो ना तो तो पहला पहली बात कि कवि और कबीर में अंतर है कबीर जो रा आ रहा है वह संधि होने के का कारण आ रहा है अगर कबीर को तुम कबीर कह रहे हो तो कैसे कह रहे हो
01:16:07:12 हमें देख के कह रहे हो तो हमारी बाकी की बातें क्यों नहीं मान रहे हो हमें देख के कह रहे हो तो हमारे को तो तुम गलत मानते हो शास्त्रों पर ना चलने वाला मानते हो तो हमसे क्यों सीख रहे हो कुछ भी और जय श्रीी रामे राधे धे तो हमसे क्यों सीख रहे हो कुछ भी आपको हमारी आवश्यकता क्यों पड़ रही है आप अपना वो बताओ ना सिद्धांत जिसके आधार पर आप कबीर को वो कर दो प्रामाणिक नहीं है उसके बाद मैं मान लेता हूं कि कबीर में वह सारे गुण है थोड़ी देर के लिए जो आप बता रहे हो मैं मान लेता हूं थोड़ी देर के लिए वो सारे गुण है फिर भी उसी को क्यों माना जा मैं भी तो कह रहा हूं कि दूसरी जगह कोई और इंसान ऐसा है फिर उसको क्यों नहीं मानोगे बिल्कुल अभी पांच लोग और खड़े हो जाएंगे कि हमारी भी जानकारी में हमारे दादाजी 80 साल के उनके दांत सारे गिर चुके हैं और वो उनके अंदर भी वही सारे गुण है कबीर वाले वो क्यों नहीं मानोगे इसका मतलब हा हमें एक जगह आना पड़ेगा जिसकी हम गवाही मान सके वो प्रमाण आपके पास नहीं है कि यही वो कबीर है जिसके बारे में शास्त्रों बात समझे
01:17:22:14 उस दिन आप उस दिन आपके वीडियो में आए थे वो कह रहे थे ना कि जो कवियों की तरह आचरण करता हो तो कवियों की तरह आचरण कौन करता है अरे भाई तो कवि तर आचरण तो बहुत लोगों ने किया रादास ने भी कि तुलसीदास जी ने किया सबने किया मीराबाई ने किया य सब के सब इन सब की वाणी पढ़ी है ब्रह्म विद्या ही है तुलसीदास जी ने कभी तर आचरण नहीं किया उनकी पूरी वाणी ब्रह्म विद्या ही तो है और है क्या क्या रादास जी ने कभी जैसा आचरण नहीं किया क्या सूरदास ने सूर सागर पूरा ग्रंथ बना हुआ उन्होने कवि की तर आचरण नहीं किया क्या मीराबाई ने कभ की तर आचरण नहीं किया तो फिर क को
01:17:58:20 जाए बो य किस आधार पर माना जाए कवियों की तर आचरण जो करता है क बहुत हु बहु ने किया है कवियों का चंद कबीर से पहले के उनको ही मान लो फर अरे मैं कह रहा हूं आदि कवि तो हमारे वाल्मीकि रामायण के व है ना रचता और क्या सबसे आदि क तो रामायण ही है सबसे पहला लोक ही लिखा वाल्मीकि जीने उनको मान लो भाई एक उनका जी कबीर दास जी का जो जन्म हुआ है वो किसी माता पिता के गर्भ से नहीं हुआ वो कमल के फूल से हुआ है तो एक उस विषय को मा हम भी एक ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जिसका जो प्रादुर्भाव हुआ है कमल के फूल से हुआ है बोलो अब क्या करें हम जानते दूसरा चीज जो इनकी मृत्यु हुई है तो स शरीर ये गए ये ये दो विषय को लेके चलते हैं मतलब ऐसे को जानते हम ऐसे को जानते हैं जो स शरीर गए हैं अब बताइए भाई
01:18:57:09 देखिए कुल मिला के बात ये आती है किसी की वाणी हमारे लिए प्रमाण क्यों होगी क्यों माने ों माने हमारे गुरुजन है जिनसे हमें शास्त्र प्राप्त हुए उनकी गवाही मान्य होगी अगर हम उनको नहीं मानेंगे तो उन शास्त्रों को कैसे मानेंगे शिवांश भैया शिवांश भया कबीर जी के बारे में ऐसा भी लिख के आता है कि मसी कागज यो नहीं कलम गई नहीं हाथ मतलब कबीर दास जी ने जीवन में कभी ना तो कागज छुआ है ना कलम छुआ है ये प्रमाणिक है उन्होंने खद से कुछ लिखा ही नहीं ये आप पढ़ लीजिए बड़े बड़े पीएचडी स्कलर लोग होते हैं इस बात को पढ़ते हैं कोट करते हैं इस लाइन को कि मसी कागज छु नहीं कलम गई नहीं हाथ हाथ से कभी का कागज छुआ नहीं कलम छुआ नहीं तो दूसरे व्यक्ति ने लिखा कबीर सागर जिसने भी लिखा वाला वो वाला दोहा बताओ वो उसम जो कबीर कुत्ता राम का वो क्या है बोला उन्होने वो दोहा है प्रमाण है कबीरा कुत्ता राम का मतिया मेरो नाम गले राम की जेवण जित खोजे तित जा ज ख जाऊ उन्होने स् उन्होंने स्वयं को कुत्ता कहा माना सु जैसे य ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती की पूजा करते समय अ अनन्य का भाव के प्रकट करने के लिए कह रहे आईम नथिंग मेरा जीवन और मरण होता है वो कह दे रहे हैं ठीक है
01:20:12:22 तो उनकी बात को आपने सत्य मान लिया बिल्कुल कि हा भैया य जो है जीवन मरण होता है अविनाशी नहीं है बस उसी बात को बाकी सब जगह लिखा विनाशी उससे नहीं अब मैं पूछ रहा हूं क्या यहां से जब वो अपने आप को कुत्ता कह रहे तो कुत्ता माने उन्हे बताइए हमसे तो नहीं कहा जाएगा कबीर कुत्ता है आप क हमने तो बनाया नहीं य दोआ हमने बनाया है क्या और इस प्रकार की पंक्तियां इस प्रकार की पंक्तिया से बचते हैं हम बोलने से कि हमें ऐसा बोलने की जगह बोलना पड़ जाए हमारे सनातन धर्म में तो बड़ा आदर है कबीर जी का हमारे ऐसा माना जाता हैलिए मैंने एक अच्छा सुनिए इसीलिए मैंने एक दिन कह दिया कि हम भैया उस कबीर को जानते हैं जिसने अपने आप को भगवान नहीं क राम का भक्त तो उसके भी बात का बतंग बना र तुम्ह इतना ही नहीं पता हम किस कबीर की पूजा करते हैं अरे भैया तुमने एक नया नया कबीर बनाया है तुमने वो कबीर जिसने स्वयं को परमात्मा कहा हम नहीं जानते उसे हम उसको जानते जो राम का भक्त था जो राम का कुत्ता था अब हमारे यहां देवी पुराण में भागवत पुराण में वर्णन है कि देवी दुर्गा जी ने महिषासुर का वध किया अब ऐसे भी लोग है क मसर का पूजा करेंगे वो राजा है हमारे तो अपने मन से कोई कुछ भी बनाले इसका क्या मतलब है
01:21:25:18 की पूजा हो रही है हमारे देश में छत्तीसगढ़ में विरोध करते हैं विरोध करते हैं छत्तीसगढ़ में बात रहे अपने को भगवान श्री कृष्ण का वंश मानते हैं जी जी म की पूजा कर रहे आज मैंने देख यादव नाम से देखा था अरे वो महिषासुर की पूजा कर रहे कह रहे मसर जी हमारे आराध्य है महिष सर जिनका वध किया कह रहे हिंदू लोग अपमान कर रहे हमारे पूर्वज जीय है आदिवासी क्षेत्र में है दूसरा चीज वो भी विरोध कर रहे
01:22:05:13 हैं आ बोते दीपक जी आपका परिचय जय श्री राम क्या क्या मेरा नाम दीपक है मैं नोएडा से हूं आध्यात्मिक बैकग्राउंड क्या है आपका मैं जगतगुरु रामपाल जी महाराज जी के शिष्य हूं अच्छा बताइए क्या कहना है आपको बो नहीं आपको पूछना क्या है यह बताइए या फिर मैं बोलू आपको नहीं पता मुझे क्या पूछना है नहीं मैं बोलू क्या फिर कबीर सर्व शक्तिमान है क्या नहीं आप जिस प्रश्न परी डिबेट कर रहे थे मैं उसी प्रश्न पर आऊंगा उसी टाइम से मुझे ड नहीं किया जा रहा था आप चेहरा लेक नहीं आए थे हां हां वो चेहरा उस टाइम में ऐसा है मेरा परमिशन नहीं था ना समस इंटरनेट का उससे परमिशन नहीं वो आपका प्रॉब्लम ठीक है ओके मैं यह कहता हूं देवी भागवत के तीसरे सेकंड में 123 नंबर पेज पर लिखा है मैं ब्रह्मा विष्णु हम सभी के अभ भाव
01:23:20:18 माने जन्म तथा त्र भाव माने मृत्यु हुआ करता है क्या यह गलत लिखा है य देवी भागवत में मैं पूछ रहा हूं कबीर ने कहा मैं कुत्ता हूं ये गलत है कहां पे कहा है मुझे प्रमाण दिखाइए आप इस चीज का प्रमाण दिखाओ भैया इने दिखाइए पर वो कबीर सागर में लिखा होना चाहिए बाकी जगह लिखा होगा तो मैं नहीं मानूंगा उस चीज को तो फिर ये आपकी प्रॉब्लम है आप जिसे प्रमाण मानते हो हम उसे नहीं मानते हम जिसे मानते हैं उसे आप नहीं मानते जाइए अपना काम कर कबीर सागर को क्यों प्रमाण माने बता अब आप एक काम करिए सुनिए अब आप एक काम करिए जी अब मुझे आप वेदों में दिखाइए कि कबीर भगवान है चलिए नहीं आप देखिए अभी आप गुलमुल रहे है अभी आप जिस चीज पर डिबेट कर रहे थे उसे पहले दिखाइए कबीर जी कहां पर कहते कुत्ता फिर आप इसी चीज को रिकॉर्ड करके डालेंगे कि कबीर जी अपने आप को कुत्ता कहता है रामपाल जी के शिष्य ने मान लिया आप मुझे पहले अभी ये प्रमाण दिखाइए प्रमाण आपको बोला तो भैया बताओ प्रमाण अभी बताते हैं दिखाइए दिखाइए अभी बताते हैं अभी बताते हैं महादेव थोड़ा पाच मिनट रुकिए आपको प्रमाण दिखाते कहां लिखा है ओके जी तब तक हम दूसरी बात कर ले हां बताइए आप क्या कह रहे हा वेदों में प्रमाण है कबीर साहब भगवान है यह बात सही है
01:24:39:04 क्या हेलो हेलो जी जी बताइए सुन रहा हूं हां बताइए वेदों में प्रमाण है कबीर साहब भगवान है बात सही है क्या जी बिल्कुल सही है हां बताइए कहां से सही है एक सेकंड पर खा कबीर भगवान बताइए कौन से मंत्र में लिखा है कबीर भगवान है एक सेकंड रुकिए थोड़ा सा हमारा नेट भी सलो है एक सेकंड हम निकाल के दिखाते हैं आपको उनके हा मंत्र नहीं श्लोक चलता है उनके हमारे य मंत्र है
01:25:34:19 शिवान जी क्षमा चाहूंगा थोड़ा लेट देखा आपका मैसेज अच्छा अच्छा कोई बात नहीं कोई बात नहीं मैं उनसे कहूंगा जो य प्रमाण आया है क्या कबीर वाला बड़ा कर दीजिए भाई साहब कबीर [संगीत]
01:26:14:12 ग्रंथावली इसमें तो लिखा हुआ है क्या लिखा है पढ मैं हां पढ़िए बताऊ कबीर दास जी कहते हैं मैं राम का कुत्ता हूं और मेरा नाम मुतियार गले में राम नाम की रस्सी पड़ी हुई है और उस रस्सी को पकड़कर मेरे स्वामी राम जिधर मुझे घुमाते हैं मैं उधर घूम जाता हूं वाह बात बहुत बढ़िया लिखी है उन्होंने कही है तो यहां पे जो शब्दार्थ नीचे लिखा हुआ है उसके अर्थ में कुता का अर्थ लिखा है कुत्ता और जेवड़ी का अर्थ है जेवरी यानी रस्सी हम अब बताइए दीपक जी
01:26:59:10 लिखा है यहां पर कबीर दास जी ने बताइए दीपक जी जी बता रहा हूं एक सेकंड अरे कबीर ने कहीं पर स्वयं को राम का भक्त कहा है क्या कि नहीं कहा है नहीं कहीं पर नहीं कहा है राम के भक्त अच्छा वो सब मैंने आपने जो दिखाया ये तो प्रमाणित ही नहीं था किसी भी बुक में होली बुक्स में लिखा ही नहीं था अच्छा तो तुम जो बता रहे हो कि कबीर भगवान है वो कहां से होली बुक में है बताओ अभी दिखाते हैं वेद में दिखाएंगे हम ऐसे ऐसी जगह पर नहीं दिखाएंगे एक बात बताओ पहले कि तुम्हारी बुक मान्य है और हमारी बुक मान्य नहीं है यह किस आधार पर है वेद ना हमारी है ना आपकी है यह परमात्मा का है अच्छा उसमें तुम दिखा दोगे कि कबीर भगवान है हा हा मुसी में दिखाएंगे कबीर देव भवान और कोई और किसी ग्रंथ को मत जोड़ना फिर वेद से ही बताना वेद से ही दिखाएंगे ना आपको रुक जा एक मिनट अरे कब दिखाओगे भैया दिखाओ ना एक
01:28:13:01 [संगीत] मिनट राम जय राम जय जय राम दिखाओ भाई क्या हुआ एक से दिखाते आप कमजोर हो तुम क्योंकि हमने दे है व सब रटे हुए होते हैं कबीर सागर की प्रामाणिकता आपको बतानी होगी किस आधार पर प्रमाण मानते हो कबीर सागर धर्मदास जी ने लिपि की है कबीर सागर कबीर साने बो कौन धम क माने धर्मदास को भाई क्यों माने धर्मदास को तो फिर आप क्यों कह रहे हो कबीर सागर किसने लिखी है आपको क्या अरे तुम ये कह रहे हो ना हम कबीर ग्रंथावली को नहीं मानते हैं हम कबीर सागर को क्यों माने अरे आप आप डिपेंड करता है आप मानो चाहे मानो अरे तुम ही तो कह रहे हो कि भैया जो ईश्वर के ग्रंथ होंगे उससे मानेंगे तो कबीर सागर से आप य सिद्ध कर रहे हो कि कबीर जो है कवि थे और उस कवि होने के कारण ही उनको जो है वहा वेदों में नाम है सक्षम आधार पर लिखा है
01:29:29:14 चलो एक एक करके चलते पहले आप जो कर रहे हो वो करो हमको वेदों में प्रमाण दिखाओ कबीर भगवान दिखाओ वेद यज यजुर्वेद के मंत्र नंबर पाच में सक नंबर एक में लिखा है कबीर साहेब भगवान है पढ़ के बताओ प आप खुद आप खुद पढ़िए ना हम क्यों पढ़े आप पढ़िए आप ख देखो ऐसा है भैया देखो मेरे पास समय नहीं है आप अगर बात करनी है अपना प्रमाण पढ़ के बताइए एक सेकंड फिर मैं पिक्चर निकालू फिर पढ़ के बता पाऊंगा सेक हा बताओ कबीर होना चाहिए कबीर कवि नहीं हो टा कबीर देव हा कबीर देव है ना तो क्यों कर रहे हो बेकार का व्यर्थ समय मालूम है तुमको हम लोग क्या कहेंगे उस बारे में फिर भी तुम समय को व्यर्थ नष्ट कर रहे हो बता बताओ तुमने वेद कहां से पढ़ रहे हो बस ये बताओ कहां से पढ़ रहे हो कौन सी कंपनी का वेद पढ़ रहे हो किस पब्लिकेशन का पढ़ रहे हो गीता प्रेस वालो का और किसका है छपता है छपती है बु झूठ भी बोलना सिखाया
01:30:44:27 जी ने एक मिनट मि मिनट झूठ बोलना सिखाया गया क्या तुम्हारे य आप पूछ क्या रहे ये दोबारा से मुझसे क्वे पूछा किस कंपनी का छपा हुआ वेद पढ़ रहे हो तुमने बोला गीता प्रेस गीता प्रेस वेद छपती नहीं है दिखाओ मुझे वेद कहां है गीता प्रेस का प्रमाण दिखाओ अरे नहीं मैं सॉरी पुराणों की बात कर रहा था वेद की बात नहीं कर रहा हूं वेद गीता प्रेस का नहीं होता है हा किसका है बताओ तो वो मे देखना पड़ेगा मैंने उतना सही से देखा नहीं उसका तो देख के आओ बेटा देख के आया करो देख के आओ जाओ फिर आना दोबारा ठीक है नहीं चलिए ठीक हा
01:31:29:02 कितने घंटे से आया ले दे आया कबीर देव उसी की चर्चा हम कर रहे देर से कबीर देव कबीर देव हाया बताया क का मतलब कबीर होता है विष्णु का मतलब पणी अ में बताया गया है शिव का मतलब बताया गया रुद्र का मतलब बताया गया है उसी आधार पर आचार ने अथ किया य कबीर कौन से भगवान पतंजलि ने महाभाष्य में लिख दिया है क्या कवि का मतलब कबीर होता
01:32:01:06 है क्याक का गोल है व्याकरण गोल तो य व्याकरण सु परंपरा सुन आचार्य आचार्य चरणों के परंपरा से पूर्णता सुनने जो म दीपक जी आप अपना प्रमाण लेकर आए जिसको आप दिखा दिखा सके हमें स्क्रीन पर और अगर दिखाने में दित आ रही हो तो अपने प्रमाण को हमें ट कर दीजिए हम आपका दिखा देंगे यहां ठीक है संदाय भी है कबीर पंथ संप्रदाय जो इनसे अलग है इन लोगों से अलग है लोग इस बात को मानते हैर दास जीने लिखा नहीं अपने हाथों से कुछ अपने हाथों से कुछ लिखा ही नहीं मसी कागज यो नहीं कलम गई नहीं हाथ हा उन्होने काग कलम ु ही नहीं तो फिर जो दूसरे व्यक्ति कबीर सागर लिख रहे हैं उनकी आपता किस प्रमाण पर आधारित होगी वो आप्त पुरुष है कैसे माना जाए भ्रम प्रमाद दीपक सेय कह रहा हूं दीपक अगर आपके पास प्रमाण है तो आप हमें व कर सकते हैं नंबर नोट कर लीजिए
01:33:05:27 74836 नंबर नोट कर लीजिए इस ट करिए हम आपका प्रमाण य दिखा देंगे बिल्कुल य लोग आर्य समाज के थर्ड क्लास वर्जन है वो लोग नसे अधिक पढ़े लिखे उनसे थोड़ साथ करने में अ एक वीडियो मैंने कहा है आप मैंने उनको कहा अलंकार समाज को आप जो एडवांस वर्जन रामपाल रामपाल एंड कंपनी का भैया उन लोगों से बात करने थो आनंद आता है थोड़ी सी बुद्धि लगानी पड़ती है है देखिए एक दिक्कत ये भी होती है कि जब व्यक्ति बिल्कुल ही कोरा कागज होना तब भी बुद्धि ज्यादा लगानी पड़ती है तब भी बुद्धि ज्यादा लगानी पड़ती है तब बहुत मेहनत करनी पड़ती बिल्कुल ही कोरा कागज अब जैसे मान लो ये लोग वेदों की बात कर रहे हैं अभी मैं इनसे निरुक्त की बात करूंगा ना ये कहेंगे हम नहीं मानते अब बताओ वेदों को मानने वाला निरुक्त को नहीं मानेगा तो कैसे होगा अच्छा एक बात और आप ध्यान रखिएगा वेदों को उसी आधार पर मानते हैं जैसे आ समाज के लोग मानते हैं वैसे ही मानते हैं आपने जो वीडियो बनाया था ना ग गणा नाम गणपति उस मंत्र प तो उस आपके खिलाफ जिसने वीडियो बनाया उसने आर्य मंतव्य से पेज डाउनलोड किया उस श्लोक का और अत उसने अपने वीडियो में दिखाया
01:34:21:18 अरे भाई तो फिर उन्हीं का वो मान लो ना ज उनका मानते हुए दिनेश दास आए भाई चेहरा दिखाइए दिनेश जी दिखाइए भाई हां भाई दिनेश जी बताइए वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है बताइए कैसे फ दर्शन दे दिया आपने बढ़िया आप भी दर्शन देते रहते हैं तो हम भी आ गए बताइए वेदों में प्रमाण कबीर भगवान ने कहां लिखा
01:35:01:19 है बताइए फिर वही बोलेंगे बता दिया कई बार जो आप पढ़ते हैं जो आप पढ़ते हैं वही लिखा हुआ है वो जो कवि लिखा है वो आप कबीर कह रहे हो क्या तो ये कवि कबीर क्यों माना जाए ये [संगीत] बताइए कबीर ही मान लो कबीर नहीं मानते तो कबीर ही मान लो मानेंगे वहा प क मेरे प्यारे भाई को भगवान नहीं मानते का अन किया थोड़ा बहुत हिंदी का व्याकरण संस्कृत की बात नहीं कर रहा हिंदी व्याकरण पढ़े हो कभी देख सुनिए सुनिए व्याकरण और संस्कृत इस चीज का अध्ययन करना किस लिए जरूरी है बताओ कबीर जी ने कबीर जी ने तो क व्याकरण का अध्ययन नहीं किया तो वो तो भगवान है आप भगवान
01:36:01:10 मिटवा मिनट मिनट एक मिनट एक मिनट आपके अनुसार वो भगवान है आप भी भगवान हो क्या बता रहा एक चीज क्लियर तो करिए आपके अनुसार भगवान है आप अपनी तुलना उनसे कर रहे हो आप भी भगवान हो क्या मैं बता रहा हूं मैं बता रहा भाई पहले इसको क्लियर कर दो इसको क्लियर कर दो फिर बता को करूंगा थोड़ा बोलने दे दो कबीर जी ने कभी कोई शास्त्र कभी कोई शिक्षा नहीं ली जैसे कि अभी भा ले भगवान हैके अनुसार तो कबीर जी ने तो इसीलिए कह रहे हैं सारी संस्कृत का ज्ञान होना जरूरी नहीं है आज हमारे पास ऐसे सॉफ्ट भी उपलब्ध है मिनट मिनट मिनट मिट भाई साहब आपने बात का जवाब नहीं दिया आप अपनी तुलना कबीर से कर रहे हो यानी कि आप भगवान हो अरे हम नहीं कर रहे मैं नहीं कर रहा मैं ये कह रहा
01:36:57:13 अरे मेरी बात सुनिए अगर जो अ है करने जल्दी ले मुझे जवाइन करने दीजिए हा जी जी ब अब आपका कहना है कि कवि जो है उसको आप लोग कबीर कहते हैं जी जी इसका सनातन सिद्धांत क्या है कि कवि को कबीर कहा जाए कबीर मत क कबीर कह लो हम क्यों कहे कबीर हम तो कबी कहेंगे ना हम तो हम तो कभी कहेंगे उसको हम कबीर कहते हैं हम उसको कबीर कहते हैं हमा इच्छा है कबीर कते क यानी एक मिनट एक मिनट यानी कि आप शास्त्र के अलावा भी किसी इच्छा के आधार पर भक्ति कर रहे हो जी जी कबीर जी ने कहा है ना कबीर जी ने सारे पॉइंट बताए हैं मनम भक्ति कर रहे हो मनमुक नहीं कबीर जी हेलो मैं जो पूछ रहा हूं बताओ आप मनम ब कर रहे हो नहीं मनमुक भक्ति नहीं है आपने ना अपनी इच्छा से कर रहे हैं हम अपनी नहीं कबीर जी ने बताया है कि अरे भाई वेदों में कहां प्रमाण है वेदों का बताओ वेदों में बताओ शास्त्रों में बताओ शास्त्रों
01:38:12:15 की भक्ति जिस कबीर जीने बताया कबीर जी ने बताया है कि कबीर भगवान है ये मत कहो कि वेदों ने बताया कबीर भगवान उस कबीर नेही बताया आगे का ज्ञान अरे तो वो कबीर प सिद्ध तो हो कि वो भगवान है तब तो हम उसकी बात मानेंगे अरे आप कहते हो ना कि वो कबीर नहीं है आपके कहने से मैं ये कहता हूं कि जो जिस कबीर को तुम भगवान कह रहे हो वो कबीर भगवान है ही नहीं मैं ये कहता हूं आप मुझे पहले इस बात के लिए संतुष्ट करो वेदों के आधार पे कि वो जो कबीर जिसकी बात आप मान रहे हो कि वो वही कबीर है जो वेदों में जिसका वर्णन है वो कबीर हां वही है
01:38:58:08 करो नेटवर्क प्रॉब्लम है इनका हा भाई कौन आए है आकाश तिवारी जी बोलिए जय श्री राम जी [संगीत] राम शीराम बोल के चले गए एक बार पहले भी आए इन्होंने कहा था कि कवियों की तरह जो आचरण करता है कवियो क की तर बहुत लोग आचरण करते हैं और सुनिए आद कवि कहा गया वो कहा गया भगवान गणेश को वाल्मीकि जी को गश जी भी कवि
01:39:37:09 है लेट कर बातें कोई नहीं करेगा हा भैया लेट कर बातें मत करिए आप लोग सभ्यता के साथ आए हेलो दीपक जी अगर ंग तो हम आपका यहां शो कर देंगे आपने एक लाइन लिखी है कि ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी नहीं है इसका क्या प्रमाण है हम बोलिए तो इसका तो स्पष्ट प्रमाण है स्वयं इसमें श्रीमद् देवी भागवत महापुराण में बताया गया मैं आप मैंने क्या इसमें ये नहीं बताया कि वो देवी भागवत में मैं क्या मना कर रहा हूं देवी भागवत में ऐसा नहीं लिखा है जो आप बता रहे हैं मैंने मना किया क्या जो देवी भागवत ने दूसरी चीजें लिखी है उनका क्या करोगे देखो मत्स पुराण सुनो मत्स पुराण 152 वा अध्याय 45 वा श्लोक समस्त सुति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा धर्म है सामंजस कहां है अगर आप ब्रह्मा विष्णु महेश
01:40:52:14 को एक जगह मृत्यु वाला मान लोगे और दूसरी जगह अविनाशी कहा गया तो दूसरे का खंडन करोगे ना देवी भागवत में ही कहा गया है तो ऐसी बात हमें सोचनी सुनो ऐसी बात हमें सोचनी पड़ेगी जिसमें की किसी का भी खंडन ना हो यहां पर भी ना हो यहां पर भी ना हो तो यहां पर उन्होंने अपनी अनन्य को प्रकट करने के लिए कहा जैसे अपनी अनन्य को प्रकट करने के लिए कबीर ने स्वयं को कुत्ता कहा देखो हम पुराणों में जो जैसे एक तो ऋषि ने जो पुराण है बताए जाते हैं ऋषियों का अनुभव है लेकिन वो उस अनुभव में जो चीज लिखी है उसमें ऋषि अनुभव कैसा लिख रहे हैं क्या बात जो भगवान बोल यानी कि कहीं कहीं पर आपके अनुसार ऋषि ने गलत लिख दिया है और कहीं कहीं पर सही लिखा है देखो जैसा उनका ज्ञान था ले था भाई मैं ये पूछ रहा हूं आपसे आप गोल गोल बातें ना करें मैं पूछ रहा हूं कि कहीं कहीं प आप कह रहे हैं कि ऋषियों ने गलत लिख दिया अपने अनुभव के अनुसार लिख दिया है और कहीं कहीं पर उन्होंने सही लिखा है वह आपके लिए उचित
01:42:08:28 है उन्होंने अपने अनुभव के हिसाब से लिखा जैसा अरे भाई मैं इसीलिए भी दिक्कत होती है मैं हर बार यहां से आने से पहले हर बार जब मैं लाइव आता हूं तो पता है मैं क्या सोचता हूं कि लोग मुझे बहुत शिकायत करते हैं मैं आक्रामक खेलता हूं तो मुझे लोग ये शिकायत करते हैं कि मैं बहुत ज्यादा वैसा रहता क सागर लिखा है ना उनका प्रमाण कैसे माना जाए मेरे भाई आकाश तिवारी जी हा भम दस जी ने कबीर सागर अपने अनुभव से लिखा है ना उसका अनुभव को कैसे प्रमाण माना जाए देखिए उनका प्रमाण कई एक जगह है हमारा प्रमाण परपरा हा मैं ये कह रहा हूं मैं ये कह रहा हूं पहले इस बात को आप मानिए एक मिनट जी एक मिनट पहले इस बात को मानिए कि आप यह कह रहे हैं कि पुराणों में देवी भागवत में ही उन्होंने कहीं कहीं पर गलत लिख दिया है जिसने उसको लिखा
01:43:10:22 है हेलो भाई साहब सुनाई नहीं दे रहा क्या नहीं सुनाई अरे बोलो बोल रहा हूं हां अरे बोल रहा हूं सुनाई पड़ रहा है तो बोलिए आपके हिसाब से क्या देवी भागवत को लिखने वाले ने कहीं कहीं पर गलत लिखा है कि नहीं बताइए देखिए सीधी बात नहीं करेंगे मेरी बात को समझने की कोशिश करो भाई मैं बात मैं आपसे एक बहुत साधारण प्रश्न पूछ रहा हूं क्या आपके हिसाब से देवी भागवत को लिखने वाले ने कहीं कहीं पर गलत लिखा है क्या देखो उन्होंने अपने हिसाब से सही लिखा उन्होने सनातन सत्य सनातन सत्य लिखा कि नहीं ये पूछ रहा हूं वो छोड़ दो सनातन सत्य लिखा या नहीं यह बताओ जो बदलता नहीं है ऐसा है कि उन्होंने जो अपना अनुभव लिखा है लेकिन उस अनुभव के मतलब वो सत्य नहीं है ना पूर्ण सत्य नहीं है ना कहीं कहीं पर उन्होंने अनुभव लिख दिया ना हां वो पूर्ण सत्य नहीं है हा ये बताओ कि जब उ वो पूर्ण सत्य नहीं है एक जगह लिख रहे हैं कि वो पूर्ण सत्य नहीं लिखने वाले सिद्ध हो गए आपके अनुसार ठीक है इसके पीछे क्या
01:44:25:25 क्या कारण हो सकते हैं जो पूर्ण सत्य ना लिखे बताओ ये ऐसा कारण है क्योंकि जिसने यह सृष्टि बनाई वही पूर्ण सत्य जानता है यानी कि वो यानी की वो अज्ञानी थे इसलिए कहीं कहीं उन्होंने पूर्ण सत्य नहीं लिखा जी जी अज्ञानी ठीक जो अज्ञानी है वो यहां पर सही लिख रहा है यह कैसे सिद्ध कर रहे हो इसको प्रमाण क्यों मानते हो जैसे ये दास अज्ञान है अज्ञानी है बात समझना नहीं भैया भैया भैया मैं मैं ये पूछ रहा हूं जब कोई व्यक्ति गलत बोल सकता है तो वह यहां पर गलत नहीं बोल रहा यह कैसे सिद्ध होगा अगर बोले अगर किसी सुनो अगर किसी की वाणी को किसी की लेखनी को हम प्रमाण मानते हैं तो उसके एक शब्द को भी नहीं खंडित कर सकते इसी को कहते हैं समस्त सुति स्मति शास्त्रों में सामंजस की शिक्षा अगर एक शब्द भी हमने मना किया कि ये जो गलत है तो उससे उस लिखने वाले की पूरी क्रेडिबिलिटी पर क्वेश्चन आ जाएगा फिर आप उसकी लिखी हुई किसी भी चीज को प्रमाण नहीं बता सकते समाज के समक्ष कि ये प्रमाण देखो यहां ये लिखा है
01:45:41:01 हम नहीं तो अच्छा हमें एक बात बताइए या आप मुझे ये बताइए कि आपको कैसे पता चला कि यहां पर इन्होंने सही लिखा है वहां उन्होंने गलत लिखा है कैसे किस आधार पर बताइए इस आधार से कि वहां स्वयं स्वयं ब्रह्मा जी अपनी बात कह रहे हैं अरे तो वहां पर भी तो विष्णु जी कह रहे हैं लिखा किसने ब्रह्मा जी तो बात कह रहे लिखा किसने वो और जहां विष्णु जी लिख रहे हैं वो आप दिखाइए क्या स्वयं विष्णु जीय बात क रहे स् वि स्व विष्णु अभी दिखाया था पढ़ा था थोड़ी देर पहले पढ़ दिया था अभी पढ़ दिया स्वयं विष्णु बोल रहे हैं क्या कह रहे विष्णु जी
01:46:26:07 बताइए तो विष्णु जी कह रहे हैं भगवान श्री कृष्ण से देवी मां का वो होता है प्रादुर्भाव विष्णु जी कह रहे हैं कि जो कृष्ण भगवान है वो सच्चिदानंद स्वरूप परम ब्रह्म है विष्णु जी कह रहे हैं वो सनातन है विष्णु जी कह रहे हैं कि देवी मां और जो परम ब्रह्म है वो एक है अलग अलग है ही नहीं अब बोलो अच्छा ये कहां लिखा है दिखाइए हमें देख भी तो ले नवम स्कंद पढ़ो ना देवी रेफरेंस रेफरेंस दे दीजिए रेरस दिखा दीजिए दिखा दीजिए दिखा दीजिए नहीं एक बात बताइए अगर दिखा दिया फिर क्या होगा उसके बाद क्या है उसके बाद शुरू करेंगे वेद में प्रमाण नहीं है और कबीर भगवान नहीं है अभी आप रेफरेंस मत दिखाइए अभी रेफरेंस दिखा दिया उसके बाद अभी हम उसके बाद क्या होगाय बताइए उसके बाद उसके आपको कसे दिखा इसको दिखाऊ कैसे मैं श्लोक क्रमांक बोल देता हूं अपना चेक करते रहना और कैसे दिखाऊ मैं आपको श्लोक क्रमांक बोल देता
01:47:34:21 हूं मैं स्क्रीनशॉट भेज द आपको मोबाइल नंबर भेजना तिवारी जी अपना शिवा जी क्या य मत बोलिए य मत य मत बोलिए य मत बोलिए प्राइवेट मैसेज कर दीजिएगा मैं ये कह रहा हूं कि शिवा जी मुझे रेफरेंस दे दीजिए रेफरेंस भेजू आपको वो तो पीडीएफ में है ना नहीं नहीं वो क्या है मुझे वो चाहिए कौन से स्कंध में विष्णु [संगीत] जी स्कं बता दीजिए तो मैं शायद यहां पर शेयर कर दूंगा ना नौवा स्कंद है नौवा तो देवी भागवत का ना हम देवी भागवत का मैंने पढ़ा है पूरा वो नौवा स्कंध है और पहला ही जो अध्याय है उसी में शुरू है सब अच्छा [संगीत]
01:48:26:09 करे पीडीएफ डाउनलोड कर लेंगे लेकिन वो ऐसा है ना की गीता प्रेस की जो आती है अरे भैया गीता प्रस में अगर ना लिखा हो तब बताना [संगीत] बताना हमने आज कोई पहली हमने आज कोई पहली बार थोड़ी ना बात बताई है इससे पहले बहुत वीडियो बना दिए आपको पता ही नहीं आपको देख आना चाहि था जी के बे में जो जो बताया था हम उसम पढ़ेंगे क्या क्या अच्छा ये है शिव [संगीत]
01:49:04:08 महापुराण य भैया क्या खोल दिया शिव महापुराण रख यह पुराण नहीं है मगर आपको रेफरेंसेस बता रहे हैं देवी और परब्रह्म एक है देवी भागवत तीन छ दो मानते हो क्या हा ये मानते हो क्या देवी और एक है मां भगवती की पब्र देवी और पर ब्र [संगीत] मानता ये मा दुर्गा स्वयं बोल रही है मैं और ब्रह्म एक ही है अलग अलग नहीं है परम ब्रह्म ब्रह्म
01:49:51:23 [संगीत] फ ये निर्गुण तो एक मात्र परमात्मा अर्थात देवी ही हैय तो कोई का [संगीत] है इस लोक में दुर्गा जी ऊपर करो भैया ऊपर करो ऊपर करो ऊपर ऊपर ऊपर ऊपर वापस जाओ वापस मैं ऊपर और थोड़ा सा [संगीत] ऊपर ये देखिए मैं और ब्रह्म एक ही है मानते हो मैं और ब्रह्म एक ही है मैं ब्रह्म एक और सनातन है रचना करते समय व दत सनातन का अर्थ समझते हो क्या हा हां समझते क्या होता है अरे जिसका आदि नात सनातन ही है सबसे तो मानते हो देवी को सनातन बिल्कुल मानते हैं देवी को देवी सनातन मानते हो यानी अविनाशी नहीं है अविनाशी है देवी देवी को अविनाशी मानते देवी जी हमारे मतलब जो परमात्मा ने बताया है वो उनका एक समय नाश होता है लेकिन इनकी आयु हमारे तुम्हारे जैसी नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं सनातन का मतलब नाश नहीं होता अब मानते हो कि नहीं मानते हो
01:51:07:14 नहीं यह मानते इनका एक दिन इनका सनातन मानते हो कि नहीं मैं ये पूछ रहा हूं सनातन हा सनातन जिसका ना आदि हो ना अंत हो हा हा वही आप दिखा रहे थे टॉपिक हटा क्यों दिया दिखा तो दिया अरे तो अभी देख कहां पाया मैंने ऊपर ही कोई बात नहीं लाइव स्ट्रीम पर वापस देख लेना ठीक है आप दोबारा देखिएगा अच्छे से हा हा देवी पर्र से ब नहीं परमेश्वर परमा अब एक चीज और पूछ रहा हूं यह बड़ा मतलब हास्यास्पद लग रहा है एक मिनट हटाओ भैया जरा हटा दो स्क्रीन हटा दोसे दूसरा सवा अब यह बताओ आपने कहीं पर एक जगह य कहा यह तो ऋषि का अनुभव है ठीक है ठीक है जहां पर देवी बोल रही है कि मैं बोल रही हूं यह किसने
01:52:06:21 लिखा यह लिखा किसने यह लिखा तो ऋषि ने है लेकिन यह देवी यानी यानी की ऋषि ने ही आपको यह बताया है कि देवी ने कहा कि मैं परब्रह्म हूं मैं और ब्रह्म एक है ऋषि नहीं आपको बता बताया ऋषि ने आपको ये बताया कि ब्रह्मा जी ने यह कहा कि क्या कहते हैं वो ब्रह्मा विष्णु महेश नति को प्राप्त होते हैं ऋषि ने ये बताया जी जी तो ऋषि की ही लेखनी तो आप प्रमाण मान रहे हो हो सकता है कि उसने अज्ञानता वस लिख दिया हो ऐसा देखिए अज्ञानता बस अज्ञानता बस वो उन्होंने अपनी अज्ञानता बस नहीं लिखा उन्होंने तो अपनी जानकारी के हिसाब से लिखा
01:52:53:16 कहीं भी बोल सकता है कबीर सागर किसने लिखा है देखिए कबीर सागर धर्मदास जी ने त किया धर्मदास जी का अनुभव है ना कबीर ने थोड़ी लिखा है वो धर्मदास जी का अनुभव है ना कबीर सागर नहीं तो उस कबीर ने भी लिखा हो तो वो भी तो कबीर का अनुभव है हम क्यों माने कबीर का अनुभव अगर आप कबीर को भगवान मानते हो तो कबीर ने लिखा नहीं है ना कबीर सागर धर्मदास ने लिखा है धर्मदास का अनुभव है गलत लिख सकते राजा राय जी ने बात तो सुनिए धर्मदास ने भी लिवत किया है और आज के लगभग ा स साल पहले संत हुए गरीब दास जी महाराज उन्होंने भी एक बाणी लिखी है पूरा ग्रंथ लिखा है गरीब दास जी के नाम से व उनका अनुभव है न उनका अनुभव है वही तो बता रहे हैं
01:53:45:02 तो बताइए भैया सुनिए इसको टॉप द ट्रेन चन करते हैं वेदों में प्रमा कबीर भगवान है बताइए बस हो गया अरे वो [संगीत] तो बताएंगे तुम वही बात करोगे तो उस चीज का क्यों ना करे भैया तुम भी तो वही बात रिपीट करने आए हो हमें बताओ ना में कबीर लिखा आकाश आपसे हाथ और विनती है आपसे हाथ जोड़कर विनती है पिली बारया अपने नाम के आगे पहले तिवारी लिखना बंद कर दीजिए क्योंकि कलयुग में सब राक्षस है ब्राह्मण आप अपने को राक्षस मानते हो देखो वो बताया था जो ये ब्राह्मणों में ये जो हम जो ब्राह्मणों में जो प्राया पाखंड में लगे रहते हैं ये उनके लिए बताया था थोड़ा लॉजिक सबके लिए बोला रामपाल जी ने सबके लिए बोला जब तक हमने ये थ्योरी खोली नहीं थी ना तब तक आप लोग यही चिल्लाते थे हर जगह आकर के कलयुग ब्रा
01:54:56:13 हा अबने ों सबको अगर मानने लगेंगे सबको कहने लगेंगे तो अपने घर की स्त्रियों को भी मानना पड़ेगा प्रम ट कोई ऐसा नहीं है कि हम किसी की गलती देख के या किसी से र हम उससे जुड़े आदमी साब सुब आपन हमको आप य पर प्रवचन ना दीजिए प्लीज जो फैक्ट फुल बात हो रही है वो आप बताइए क्या वेदों में य लिखा है कहीं पर की कबीर कबीर भगवान है लिखा है कहीं अरे क को कबीर कहते हैं एक बात आप कवि को कबीर कहते हैं हेलो हेलो आप कवि को कबीर कहते हैं जी जी इसका आधार क्या है कवि को कबीर कहने का आधार क्या है देखो इसका आधार ये है जैसे गांव में किसी का नाम गरीब गांव वाले मनम गांव वाले अनपढ होते हैं शास्त्र उचित कार्य नहीं करते हैं आपका आधार क्या है वही तो समझ आप शास्त्र उचित कार्य ना करने वाले हो क्या अरे मेरी बात तो पहले पूरी सुन लीजिए फलिए
01:56:12:10 सुन सु सुकी बात बो बोलिए सुन सुना दो सुना दो भैया सुना उसी प्रकार हम कबीर को हिंदी में क बात नहीं अरे वही बात बोली आपने भया भैया भैया मैं कैसे आपसे बात करू मैं आपसे ये कह रहा हूं जी पूछ रहा हं सुनि एक मिनट मिनट मिनट मिनट एक मिनट एक मिनट मॉडरेटर जी वो बंद कर दीजिए मतलब बारबार लोग आने का प्रयास कर रहे हैं ना और यह फुल है तो मेरी स्क्रीन पर बारबार वो आ रहा है उसको बंद कर दीजिए आप मतलब कुछ ऐसा कर दीजिए कि बारबार लोग मतलब अटेंप्ट ना कर पाए बारबार मैं यह कह रहा हूं कि जो गांव वाले हैं उन्होने शास्त्र नहीं पढ़े होते हैं आपने आप शास्त्रों के अनुसार भक्ति कर रहे हैं ना तो शास्त्र से बताइए कि कवि कबीर कैसे बना शास्त्र से गांव वालों को तो आप पढ़ाने जा रहे हो ब्रह्मा विष्णु महेश भगवान नहीं है कबीर भगवान है ये देख शास्त्र में लिखा है तो मुझे शास्त्र से बताइए कि कवि कबीर कैसे बना बताइए जैसे भाई साहब शास्त्र का नाम बोलिए शास्त्र का नाम जैसे नहीं
01:57:27:24 हमको वो मत दीजिए हमको उदाहरण मत दीजिए लोगों का क्योंकि वो सब लोग आपके अनुसार बेवकूफ है आप लोग लिखते हो कि वो क्या कहते हैं ये लोग शास्त्र अनुकूल भक्ति नहीं करते हैं सबको नरक में डाल रहे य सब रामपाल के ग्रंथों में सब लिखा हुआ है और रामपाल के वीडियो में आता है कि शास्त्रो चित भक्ति नहीं करते हैं तो अपनी शास्त्रो चित भक्ति दिखाओ कवि कबीर कैसे बना श द्वारा दिखाओ और सुनो हम जिसको भगवान कहते हैं विष्णु विष्णु कृष्ण शिव राम इन सबका शास्त्र में लिखा है यही भगवान है यही शास्त्र में लिखा [संगीत] है हमारे तुम्हारे नहीं आप शास्त्र बताइए कौन सा है अब ये जैसे आप नाम पूछ रहे थे फिर भाई साब फिर भाई साब मेरे पास देख बहुत सारे लोग वेट कर रहे हैं आप मुझे कबीर कैसे बना शास्त्र बताइए वही तो हम समझाने की कोशिश कर रहे हैं भाई साब शास्त्र का नाम क्यों नहीं बोल रहे शास्त्र आपसे मैं ये पूछ रहा हूं एक मिनट शास्त्र है कि नहीं इस मारे में शास्त्र है कि नहीं देखिए मेरे पास भाई
01:58:43:00 साहब मैं क्या बताऊ यार पता है क्या होता है मेरे पास ऐसे मैसेज आते हैं कि आप थोड़ा कूल डाउन रहा करिए काम डाउन रहा करिए ऐसा का रहा करिए मुझे मतलब अपने ऊपर गलानी होती है कि मैं शायद अच्छा आचरण नहीं दे पा रहा हूं समाज के समक्ष और मैं हर बार यह प्रण लेता हूं आने से पहले कि मैं आज बहुत ही काम मतलब होकर के और जो है शांतिपूर्ण तरीके से प्रयास करूंगा मगर भाई जो फ्रंट पर खड़े होते हैं ना बॉर्डर पर उनकी स्थिति वही जानते हैं कट्टी मुर्गी का दर्द कट्टी मुर्गी नती है उसी तरीके से 10 बार यहां पर जब कोई बात कह दी जाती है और फिर भी व्यक्ति उसी को टेप रिकॉर्ड को वहीं से शुरू करता है तो दिक्कत होती है कब तक सहन करे कोई मैं आपसे पूछ रहा हूं सज्जन महाशय महापुरुष कि आप किस शास्त्र के आधार पर कवि को कबीर कहते हैं शास्त्र है या नहीं है पहले य बता दीजिए है कि नहीं शास्त्र है कि नहीं और कुछ मत बोलिए प्लीज पहले क्लियर कर दीजिए शास्त्र है कि नहीं उसके बाद हम आपकी सुनेंगे है कि नहीं क को कबीर
01:59:58:00 मानने के संबंध में शास्त्र है कि नहीं मैं आपसे पूछ रहा हूं फिर से कवि को कबीर मानने के संबंध में शास्त्र है कि नहीं हां कहना देखो सबसे बड़ी चीज ये है भाई साब फिर देखो फिर देखो से स्टार्ट फिर देखो से स्टार्ट मैं पूछ रहा बो पहले ये बता दीजिए कवि कवि सुनिए सुनिए सुनिए मैं अपना प्रश्न दोहरा दूं कवि को कबीर मानने के संबंध में आप शास्त्र है कि नहीं कोई कि कवि को कबीर माना जाए इस संबंध में कौन सा शास्त्र है अगर है तो बताइए नाम बोलिए देखो मत कहना देखो मत कहना देखिए देखो ये नहीं सीधे नाम बोलिए श्यान बो बोलने दीजिए इनको बो बोलिए
02:00:57:15 शास्त्र कवि को कबीर कहा जाए इस बारे में प्रमाण है वेदों में बिल्कुल जी यह कबी को कबीर कहा जाए यह प्रमाण नहीं है लेकिन प्रमाण ये है कि कबीर प्रमाण शास्त्रों में प्रमाण नहीं है ना कि कवि को कबीर कहा जाए अब देखिए इतने बड़े हम तो आचार्य है अब जो मत नहीं हो तो फिर उसको भेजो बड़ा हो जा प्लीज जय श्रीराम फिर आइएगा बड़े हो जाए तो आइएगा अन्यथा किसी और बड़े को भेजिएगा अगली बार आएंगे तो एक पहले कहिए मैं बड़ा हो गया और या फिर किसी बड़े को लाइगा जय श्री
02:01:43:22 राम हां भाई दीपक कुमार जी ने भेजा क्या बीच में कोई आए थे ना अभी शिवांश भैया आकाश भी ब्रह्म है लिखा है वेद में आकाश ब्रम हा आकाश भी ब्रह्म है इदम इंद्रो सवित राजा राजा भी ब्रह्म हैवे का मंत्रम इंद्रो सत राजा सर्वज्ञ है देखिए कमेंट आ रहा है कि नॉलेजेबल पर्सन से बात करिए अब बताओ मैं कहां से ढूंढू भाई वो हम ढूंढे आकाश तिवारी जी जय श्री राम अरे तो जा आप गए तो थे न पर्सन पर्सन के पास गए थे आप तो उन्होंने फोन ही बंद कर दिया आज आना कल आना गए थे साथ में थे पंडित लोकी जी उन्होंने बंद कर दिया सुना था मैंने और हम तैयार थे जाने के लिए जब उनको पता लग गया तो बस ब टाइट हो गई रा जी आप म्यूट है जी आप जय श्री [संगीत]
02:02:58:12 राम जय श्रीराम मुझे तो लगता मुझे तो लगता है वो पिछले वा हेलो जी अक्ष जी हेलो जी अक्षत जी बोलिए हा मुझे तो लगता है कि जो हां जो पीछे आए थे वो सिर्फ समय वे कर रहे थे अपना घुमा घुमा के बोल रहे थे कब से मैं देख रहा हूं उनको देखिए देखिए देखिए एक किसी और को भी ले लेते हैं ये दीपक फिर से आए क्या दीपक कुमार वही है क्या ये हां भाई दीपक जी प्रमाण मिल गया नहीं मैं प्रमाण आप जो कह रहे कबीर देव कबीर देव ही कबीर परमात्मा है उसका वास्तविक नाम कबीर देवी है कलयुग में उनका नाम कबीर साहिब होता है आप मुझे बताइए ये कहां से प्रमाणित है कि जो कवि है वहां पर वेदों में वही कबीर है हम ये कबीर परमेश्वरी क इनका सतलोक में कबीर देव नाम है यहां प क बताइए मुझे बताइए कवि को कबीर कहां किस आधार पर किस पाणिनीय सूत्र के आधार पर निरुक्त के आधार पर कहां कहा गया को आपने कैंसिल किया आपको सभी ने बताया आप नहीं मानने वाले इस चीज को है ना तो फिर आए क्यों तो आप आप बताइए कि
02:04:13:13 कौन से पाणिनी के सूत्र से अष्टाध्यायी सूत्र से निर के सूत्र से आपने कौन से व्याकरण के सूत्र से आपने व को ब बना दिया परने लोगों को एक बात बता दूं कि कवि जो है शब्द आया है वेदों में यदि आपके पास जो वेद का प्रमाण है जहां से आप कवि उठा रहे हो या क्या वहां पर कबीर के अर्थ में कबीर लिखा है दिखा दो कौन सी पब्लिकेशन से आपका वेद छपा है दिखा दो वहां पर अर्थ में लिखा होगा कवि का अर्थ सर्वज्ञ या फिर क्या कहते हैं क्रांत दर्शी है ना अब बात ये आती है कि यदि आप उसके अर्थ को नहीं मानोगे अपना कबीर डालोगे तो आपको उस वेद मंत्र को छापने वाली किताब पर विश्वास नहीं है यदि विश्वास नहीं है तो बिल्कुल भी विश्वास नहीं होना चाहिए मंत्र उनका अर्थ अपना यह नहीं चलेगा पहली बात दूसरी बात जो हमारा मेन क्वेश्चन है वह यह है कि फिर भी कवि या कवि कबीर कैसे बन रहा है यह बताइए आप कैसे बन रहा है
02:05:21:25 कबीर कैसे बन रहा है इस बारे में शास्त्र का क्या प्रमाण है जैसे तुम कह लेते हो तो हम तो गलत करते हैं हमें क्यों कॉपी कर रहे हो हम तो गलत करते हैं आपके हिसाब से हमें कॉपी मत करो और करो तो फिर पूरा करो ठीक है तो इनको अब हटा दो दीपक जी के पास और कुछ है नहीं कट्टर हिंदू है राहुल जी चेहरे के साथ गुरु चरण और कट्टर हिंदू जी आप अपना व चेहरा
02:06:01:00 दिखाए जी राहुल शर्मा जी बताइए आपका परिचय जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम मैं शास्त्र का अध्ययन कर रहा हूं अच्छा तो आपका यहां आने का उद्देश्य हमारी बात का प्रतिकार है क्या है चले गए क्या चले गए दीपक जी आपके पास कोई और प्रमाण है तो आपको हम ऊपर ले
02:06:55:20 हां प्रमाण है है हां या ना क्या कर रहे हैं हां आप बोल रहे हैं क्या बोल रहे हैं है कि नहीं हाथ उठाइए दीपक जी बताइए आप लीजिए एक बार ऊपर मैं यह पूछना चाह रहा हूं आप जिस हिसाब से प्रमाण देते हैं गणपत मतलब गणेश जी कहां पर भाई साहब अभी बात यह हो रही है आप आप अभी देखिए विषय मत करिए विषयात मत करिए मैं प्रमाण दूंगा आपको विषयात मत करिए अभी विषय य चल रहा है क्या कवि को कबीर मानने के संबंध में शास्त्र प्रमाण है आपके पास या नहीं अभी तो नहीं है लेकिन आप उस देखिए मैं बताऊंगा मैं बताऊंगा पहले इसमें आप मैं बताऊंगा आपको दीपक जी मैं बताऊंगा आपको मगर आप पहले दूसरी बात ना छेड़ने की बजाय आप यह बताइए क्या कवि को कबीर मानने के संबंध में शास्त्र प्रमाण है आपके पास अब मैं ऊपर ले रहा हूं
02:08:10:28 अगर आपने कोई दूसरी बात बोली तो मैं हटाऊ आपको मैं आपको आपकी बात का जवाब भी दे दूंगा जाने से पहले मगर अभी विषय ये चल रहा है अभी विषय ये चल रहा है कवि को कबीर मानने के संबंध में कबीर को कबीर मानने के संबंध में शास्त्र प्रमाण है आपके पास मैं पहले य पूछ रहा हूं हां के ना दूसरी बात नहीं दूसरी बात नहीं पहले ये हां के ना दूसरी बात नहीं मैं पूछ रहा हूं क को हां कहना दीपक जी हां कहना कवि को कबीर मानने के संबंध
02:08:49:00 में नहीं बोलेंगे नहीं बोलेंगे नहीं बोलेंगे नहीं बोलेंगे भैया इनको अब आने ही मत देना अभी टॉपिक थोड़ा हेलो मेरा भी आपके साथ मत भेत है पर वो पिछले बार पिछले बार जैसे आपने इकन वाले के साथ जो चर्चा की थी स्कन वाले आए थे गु गुरु कौन है आपके
02:09:24:27 मेरे गुरु मैं प्रेमानंद जी महाराज को फॉलो कर रहा हूं प्रेमानंद महाराज सा है नहीं विवाद इस बात पे है कि जो आपने कहा कि जो लोक में हम जब सेवा करते हैं तो हमें वो दिव्य आनंद नहीं प्राप्त होता जो अनंत अन मतलब जो निरंतर रहे अगर आप आपके साथ अगर आप अंत तो सुनो प्रेमानंद जी महाराज के पास अच्छे से जाके आप पूछ लो अंततोगत्वा वो भी मानते हैं कि धाम और धामी को एक मानते होए यदि इस भाव के साथ आप अगर किसी लोक में हो धाम और धामी को एक मानते हुए तो ही आप मोक्ष को प्राप्त हुए हो अब आपसे मैं एक बात पूछ रहा हूं छोटी सी ठीक है आप भक्ति करते हो तो क्यों करते हो या भगवान की सेवा करते हो तो क्यों करते भगवत प्राप्ति के लिए भगवान को भगवान आपका नेटवर्क दिक्कत आ भगवान की प्रसन्नता के लिए करते हो
02:10:35:13 ना ये टॉपिक छड़ गया तो इसको कंप्लीट कर लेते हैं और रामपाल जी के विषय में ही रहेंगे आप जो भक्ति जो भक्ति करते हो सेवा करते हो वो भगवान को प्रसन्न करने के लिए करते हो ना ठीक है भगवान को प्रसन्न करने के लिए करते हो क्या ठीक है उससे आपको मिलता क्या है उनकी प्रसन्नता से आपको क्या मिलता है आ आनंद आनंद यानी आप अपने लिए भक्ति करते हो भगवान के लिए नहीं पर वो मैं अभी उस उच उस तिथि पर नहीं हूं पर जो जैसे भक्तों का चरित्र देते तो उसम सेवा करने से आपको आनंद मिलता है इसलिए आप भगवान की भक्ति करते हो ना है ना या अपने लिए भगवान के लिए नहीं कर रहे हो अंत का सुख आपका है नहीं पर सेवा करने से भगवान को भी आनंद मिलता है अरे भाई तो उस आनंद से आपको आनंद मिल रहा है इसलिए कर रहे हो ना केवल भगवान तक सीमित नहीं है ना वो अंत का अनंत तो आपका है जैसे मैं अपनी बिटिया से प्रेम करता हूं मैं अपने माताज से प्रेम करता हूं मैं अपने भाई से प्रेम करता हूं ठीक है
02:11:50:14 अगर उसको को अच्छा लगेगा तो मुझे अच्छा लगेगा तो उसको अच्छा लगने के लिए मैं बहुत सारे कार्य करता हूं मगर वो सारे कार्यों में मैं अपने लिए कार्य कर रहा हूं क्योंकि मुझे अच्छा लग रहा है तो क्या ऐसा ही है आपका भगवान के साथ संबंध जो जैसे प्रारंभ में हमको ऐसा ही संबंध मानना पड़ता है कि हमें आनंद मिल रहा है पर जैसे जैसे स्थिति आती है भक्त की उसके बाद एक निश्चित मैं आपको एक चीज और बता दूं एक चीज और आपको भगवान आपने कहा भगवत प्राप्ति ठीक है तो आप जब धाम में पहुंचे तो आप सुखी हो गए ठीक है आप सुखी हो गए और भगवान वहां दूर बैठे हैं आप दूर बैठे हो मगर आप सुखी हो गए तो इससे तो यही माना जाएगा ना कि आपका जो प्रेम था जो भाव था वो अपने सुख के लिए था भगवान के लिए नहीं क्योंकि भगवान तो अभी भी आपसे दूर बैठे हैं नहीं नहीं नहीं नहीं इसमें बात आपको य समझनी पड़ेगी जब भक्त जो भगवत धाम में चला जाता है तो अज्ञानी नहीं रहता व ज्ञानी हो जाता है और भगवान खुद बोलते है कि हम ब्रह्मा तो हम ब्रह्म से अलग नहीं हो
02:13:06:07 सकते भगवान के साथ एकत्व हो जाता है क्या नहीं हम भगवान के साथ एकत्व में है यह ज्ञान है हम जब एक में रते नकीब सेवा करते उ प्रेमानंद जी महाराज जी जो बात बोलते हैं वही हम मानते हैं उसी एकत्व को उनके मुख से निकलवाने के लिए मैं ये बातें बोल रहा था जैसे आप बोल रहे हैं ना अ ब्रह्मास्मि ऐसे ही अगर वो बोलते तो सब सही है मगर वो नहीं मानते हम ब्रह्मा वो ज्ञानी वाली बात को नहीं मानते हैं इसलिए उनसे बो बोला था कि वहां पर जब तक आपको आम ब्रह्मासि का बोध नहीं होगा जब तक आपको ज्ञानी का अज्ञानता से दूर नहीं होगे तब तक मोक्ष मोक्ष नहीं है तो वो नहीं मानते हम ब्रह्मास्मि वो नहीं मानते कि हम ज्ञानी हो जाते हैं धाम में जाकर के नहीं इसलिए है समझ रहे और प्रेमानंद जी महाराज कोई ऐसी बात नहीं बोलते जो शंकराचार्य जी के विरोध में हो आदि शंकराचार्य जी के विरोध में हो ठीक है अब हम लोग टॉपिक पर आएंगे वास आपका आने के लिए आभार आप हमसे वो मत रखिएगा उनका प्र नहीं करते कहीं खंडन शमान जी महाराज से जो भी बात बोलते वो सारी बात मानते
02:14:21:14 हैं प्रेम जी महाराज उनका सुन लेना एक परमार्थ व्यवहार वाला वीडियो है जिसम वो लीला के बारे में बात कर रहे हैं एक है ये वाली इसको कहते हैं तामसिक लीला जो यहां भौतिक संसार में हो रही है और एक होती है सात्विक लीला जो वैकुंठ लोक इत्यादि में होती है ठीक है मगर इस सबसे परे जो ब्रह्म स्वरूप है ब्रह्म के साथ एकत्व वो अम ब्रह्मा वाला फील वो जो परम धाम है वहां पर आ जाता है समझ गए तो अगर आप परम धाम में जाके अज्ञानता से मुक्त हो जा रहे ज्ञानी हो जा रहे भगवान के साथ एकत्व को महसूस कर रहे हैं तो तो आप मुक्त है व तो तो आप नित्य लीला में रहिए और धाम और धामी एक हो जाते हैं यह भी है तो तो आप रहिए वहा पर और अगर आप वहां पर जाकर के भी भगवान से अलग है भगवान से दूर भगवान वो बैठे हैं और आपको य फील नहीं हो रहा हम ब्रह्माम आपको वहा पर भीय फील नहीं हो रहा तो आप मुक्त नहीं है आपकी वहा सेवा बाधित हो जाएगी त सुख नहीं रहेगा हां तो कुल मिला कर के आप में और उनमें यही अंतर है कि आप ये मानते हो कि वहां पर ज्ञानी हो जाता है आप ये मानते हो वहां हमम ब्रह्मास्मि का बोध हो जाता है ये मानते हो आप वो नहीं मानते ऐसा वो बोध तो हो जाता है पर भक्त खुद
02:15:36:20 से स्वीकार नहीं करता जैसे वहां भी गया तो भगवान की सेवा के लिए वो ये ये सब बातें भाई साहब रस के लिए है आप महाराज जी से दोबारा पूछना ये सब बातें रस की है र की है रस की चीज हैय सब ठीक है जय श्री राम अक्षय तिवारी जी य जिज्ञासु प्रश्न गुरुदेव भगवान से कीजिए ना इस जगह पर थोड़ी की जाती है सब बात उस कीजिए ना भास्कर दास जय श्री राम राज जी ब्राउंड बोलिए भास्कर दास जी [संगीत] आध्यात्मिक अ क से है और कितना है ये बता दीजिए हमारा आध्यात्मिक मतलब ज्ञान तो हमारे गुरु जी के सत्संग से ही है कौन गुरु जी हमारे गुरु जी संत रामपाल जी महाराज अच्छा ठीक है तो आप यहां पर कौन सी बात को रखने आए हैं वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है या फिर क्या अच्छा एक नई
02:16:51:25 चीज पूछता हूं मैं आपसे थोड़ा हट मैं ये पूछ रहा हूं क्या इस संसार की प्रत्येक वस्तु रामपाल दास के द्वारा बताए जाने वाले ईश्वर ने बनाई है पूरा संसार उसी ने बनाया है कबीर ने जी बिल्कुल अच्छा आसमान खाली जगह सब कुछ उसी ने बनाया है स्पेस भी उसी ने बनाया है हां हां सब बनाया है स्पेस बनाया एक मिनट हां सारा चीज उसम ऋग्वेद में प्रमाण मैं अभी पूछूंगा भाई साहब मैं पूछूंगा मैं पूछूंगा आप अभी प्रमाण पर मत आइए प्रमाण में पूछा हम लोग बात करेंगे प्रमाण की मैं पूछ रहा हूं क्या स्पेस भी कबीर नेही बनाया है जी जी सभी कुछ बना है सब कुछ जो आप सो स ठीक है अब ये बताइए जहां पर कबीर बैठे हैं वो किसने बनाया वो तो कबीर जहां बैठे हैं वो भी तो कबीर बनाया हुआ वो असंख्य ब्रह्मांड में बैठे हैं असं ब्रह्मांड के
02:18:07:15 जैसे ये मान लीजिए ये कबीर है ये कहीं पर बैठे हैं तो ये जहां पर बैठे हैं वो जगह तो पहले से हो गई ना वो कबीर ने नहीं बनाई ना जी कबीर ने नहीं बनाई ना हां ऐसा तो ऐसे तो इस हिसाब से फिर नास्ति हो एक मिनट एक मिनट आप टॉपिक चेंज मत करिए पूछ रहा क्या कबीर ने सब कुछ बनाया कबीर ने सब बनाया आपने कहा अब मैं पूछ रहा जहा कबीर बैठा है वो जगह किसने
02:18:45:03 बनाई जो कबीर जी है उन्होंने सारे ब्रह्मांड की रचना की वीर बैठे हैं वो जगह किसने बनाई थोड़ा रोचकता आ गई इस प्रश्न से हां बहुत रोचकता आ गई है ये यह तो अभी हमको मतलब अभी इतना मेरे को यह बात जो आपने अभी पूछी है इसके बारे में भी हमको वेदों से मतलब जानकारी नहीं है इसके बारे में प्रमाण नहीं म आपके गुरु ने आपको ये नहीं बनाया बताया एक मिनट बताया होगा पर मैंने अभी इतना तो है नहीं कि पूरा ज्ञान है अपन को अभी आप देख ही रहे होंगे मैं कितना बड़ा हूं दिख रहा होगा सामने तो मेरे को जितना जन मि मिन दोबारा आइए पहले पता कर आप अ कर आपको प्रमाण दे रहा हूं ना आप अपनी बात रख दे रहे हैं बारबार जो भी आ रहा है आप अपनी बात रख के उसको अलग कर दे
02:19:36:15 रहे सुनिए भाई साहब भाई साहब सुनिए पहले आपकी आवाज नहीं आ रही है अभी मैं मैं आपसे कुछ बात करना चाह रहा हूं मुझे मालूम है कि आप भर के आए टेप रिकॉर्ड वो आपको खाली करना है य रुक जाए भा इको अनूट करो भाई मानेंगे नहीं ये छोटे हैं अभी अभी इनको अभी इनको ज्ञान नहीं है उतना आपकी आवाज नहीं आ रही भाई साहब आपकी आवाज नहीं आ रही मत बोलिए इस हिसाब से तो आप आप नास्तिक हो गए ना आपके कौन कौन इनको कौन इनको अन म्यूट कर रहा है वो अपने आपको को ही कर रहे हैं अन म्यूट इनको फोर्स म्यूट करिए भैया फोर्स म्यूट कर दिया करिए यह कुछ का कुछ बोलने लगते
02:20:27:25 हैं वो क्या कहते हैं उसको मुझे बहस करनी है उसको बहस कर द है अनज कुमार जी को वो वो केवल वो अपनी जो भर के आए थे वो निकालना था आवाज आही आवाज आ रही है मेरी हेलो मेरी आवाज आ रही है आपको यह क्या आया था पोलियो का एडवर्टाइजमेंट आया था हां भाई मेरी आवाज आ रही हैकी जी आप थोड़ा संभालिए मैं थोड़ा जल पी लू बहुत देर हो गई मैं कह रहा हूं आपको आवाज आ रही है मेरी हां मुझे आ रही है आवाज बस ठीक है दो बूंद हर बार पोलियो पर जीत रहे बरकरार चलो ठीक है बढ़िया है ये भी शुरू कर दिया मैं ये कह रहा हूं कि उनको जरा उनको ले उनको ले लीजिए उनको पूछ लीजिए और दीजिए थोड़ा संयम रखिए हम आपकी बात सुनेंगे थोड़ा संयम रखिए पूरी बात आपकी होने देंगे एक एक करके चलेंगे आप आगे मत बढ़ ठीक है जी सुन र है ना जी
02:21:42:26 जी आगे मत बढ़ ठीक है अब पहली बात मेरा यह कहना है कि आपके गुरु ने आपको ये नहीं बताया है कि अगर कबीर ने संसार बनाया है तो जहां पर कबीर बैठा है बैठे हैं वह जगह किसने बनाई हा तो बस किसी को जी आप ब सु इस बारे में नहीं पता है आपको इस बारे में अभी नहीं पता है ठीक है आप अगली बार जो है पता करके आइएगा दूसरी बात ये है अब आपको आपके प्रश्न का उत्तर दे दूं हम नास्तिक नहीं हो रहे हैं जैसे एक मकड़ी अपने अंदर से ही निकाल के मटेरियल जाला बनाती है ना ऐसे ही हम ईश्वर को मानते हैं जिनका जो ईश्वर जगत बनाता ही नहीं जगत बनता भी है इस कारण से श्वर कौन है आप वो भी बता दीजिए मुझे हम वो भी ढूंढने का प्रयास करेंगे उस ईश्वर को भी ढूंढने का प्रयास करेंगे ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश इन पांच रूपों में परम सत्य अपने आप को प्रकट करते हैं मनुष्यों के समक्ष एक मिनट सुनिए मैं भी आपको कुछ प्रमाण देना चाहता हूं जो ब्रह्मा विष्णु महेश है इनकी तो खुद की जन्म मृत्यु होती है ये तो आपने प्रमाण में देखा ही होगा बहुत पहले नहीं देखा क्या अभी तक आपने ये नहीं देखा ये जो चल रहा है इतनी देर से अभी अभी आए हैं आप हां मैं तो अभी आया हूं
02:22:57:27 तो प्रमाण हम भी तो आपको दे रहे हैं कि वो अविनाशी है उसका क्या करें प्रमाण आप देवी भागवत गीता में आप प्रमाण दे देवी भागवत देवी देवी भागवत से ही प्रमाण दिया भाई मेरे आप देर से आए शुरू से देख देवी भागवत महापुराण में स्कं नंबर तीन पृष्ठ नंबर 123 में आप देखिए उस इनको बंद करो ये अपना रड खाली करने आए उन्होने इसको देखा नहीं पीछे से हमने प्रमाण दिया कि नहीं दिया कम करिए आप दोबारा देख के आइए पूरी और जब पूरा ये होमवर्क कर लीजिए पहले अपना फिर आइएगा प्रमाण दे दिया जा चुका है पहले ही ठीक है जाके अ सुनिए मैं आपको बता द जाने से पहले कहां गए चले गए क्या ठीक है अनुज कुमार जी बोलिए राहुल शर्मा जी आ जाइए रामपाल के विषय में ही कोई बात हो तो आए
02:23:50:28 अनुज कुमार जी को बहस करनी थी ना अच्छा हा लिखा हुआ है उन्होंने बस कर अनुज कुमार जी शर्ट पहन के आइए [हंसी] जाइए शर्ट नहीं है क्या रामपाल जी के द्वारा बताई गई भक्ति के अनुसार शर्ट भी गायब हो जाती है व्यक्ति की क्या प्रोफेट कबीर साहिब भी आए हैं प्रियांशु परमार जी जय श्री राम जय श्री राम भाई जी जी आपका परिचय मैं एक एडवोकेट हूं वैसे मैं हिस्ट्री वगैरह के बारे में पढ़ता हूं तो काफी दिनों से हम रामल का चर्चा आपके में देख रहा था चैनल पर भी पूरी थरी को मैंने पढ़ने की कोशिश करी कि यह कबीर शब्द आया कहां से पहली बात तो यह है कि यह जो शब्द है व पारसी का शब्द है आप सऊदी अरेबिया में जाएंगे दस्ते कबीर द यह सब नाम से डेजर्ट होते हैं वहा पर तो वहां से क्योंकि उस वक्त लोधी लोदिया का शासन था तो वहां से एक नाम था जो आप पर्शियन से कुरान में से देख के उठाया गया जिसका जो मतलब है कुरान के हिसाब से कबीर द ग्रेट जिसे
02:25:06:02 बोलते हैं हम तो सबसे बड़ा जो ग्रेट कुरान के हिसाब से माना गया वह अल्लाह को माना गया है तो जो यह रेफरेंस है वर्ड का वह अल्लाह के लिए दिया गया है अब वहीं से रामपाल जी एक वर्ड उठाते हैं वो एक थ्योरी प्रोपेट कर करते आप इनके थोड़े बहुत और चैनल देखेंगे तो इन्होंने अल कबीर इस्लामिया नाम का चैनल बनाया हुआ है अच्छा हां जी तो सबसे बड़ी प्रॉब्लम हम हिंदुओं में ये आ रही है मैं काफी दिनों से आपकी वीडियो देख रहा था कि हम देख रहे थे कि हिंदू संगठित क्यों नहीं हो पा रहा तो यह पथ भ्रष्ट करने के लिए यह लोग बहुत ही अच्छे तरीके से काम कर रहे हैं कि कबीर ही अल्लाह है और जो आप देखेंगे कबीर की जो स्टोरी बनाई गई है रामपाल के द्वारा क्योंकि ना तो ये आपको गवर्नमेंट की साइड पर देख आप इंडियन गवर्मेंट ओजी कल्चर में जाकर देखेंगे वहा पर कोई मगर कबीर दास जी जो थे जो वास्तविकता है उनकी उनका नाम वह कबीर कैसे भी पड़ा मगर जो कबीर दास जी थे वोह रामानंदाचार्य जी के शिष्य बने उन्होंने जो है उनसे दीक्षा शिक्षा दीक्षा प्राप्त की जो भी है और एक अच्छा उन्होंने काव्य मतलब राम की भक्ति उन्होंने प्रतिपादित की और हमारे आचार्य गण जो है उनकी चीजों को अपने उसम लेते हैं उनकी लिखे
02:26:21:09 हुए को उन्होने बहुत अच्छी अच्छी चीजें लिखी है मगर ये उनके नाम प ये सब वो चला रहे हैं गिरो अब अभी क्या है अभी का सीन देखिए जो रामपाल जी है वो स्वयं जेल में है वो बना के चले गए जितना वीडियो बनाना था अब वो हो सकता है सुधर चुके हो अंदर जाके उनके मन में आ चुका हो मैंने गलत कर दिया मगर अब उनके नाम पर जैसे कबीर जी के नाम पर ये चल रहा था अब उनके नाम पर ये चल रहा है हो सकता है वो अंदर से कह रहा हो बंद कर दो मेरे चैनल मेरे वीडियो तो मत दिखाया करो नहीं नहीं भाई जी ऐसा नहीं है क्योंकि रामपाल जी करेंगे नहीं नहीं मेरे से कुछ लोगों ने कांटेक्ट किया है इस बारे में वो कहते हैं कि वो हां रामपाल जी के बारे में यह कहा गया है मुझसे अब वो कितना सच है कितना झूठ है नहीं जानता मगर ऐसा कहा है कुछ लोगों ने रामपाल जी को उनके ही लोगों ने फसा रखा है और वह आना नहीं मतलब उनको बाहर नहीं आने देना चाहते वो दबाव बनाए हुए हैं जिससे कि उनकी एबेंस में ये सारा चलता रहे जो साम्राज्य फैल गया है ना एक हुकूमत वो चलती रहे तो वो ऐसा कुछ आया मैसेज कितना सत्य है कितना नहीं है नहीं पता देखिए वही बात है ना कि अगर हम सत्य जो ईश्वर है उसके अलावा
02:27:36:16 किसी और नई थ्योरी को प्रोपागेट करेंगे तो वो पथभ्रष्ट होनी है ये इसीलिए तो दिन और रात एक कर रहे हैं कि लोग जो है संगठित हो जो प्रामाणिक आचार्य गण है उनकी शरण में जाए परंपरा प्राप्त बिल्कुल बिल्कुल भाई जी यह जो अभी जो आए थे ना शायद वही कह रहे हैं कि अगली बार मैं आऊंगा और सबकी पोल खोल दूंगा लेकिन तुम चला ग करने वाला रिमूव कर
02:28:08:18 देते ऐसा है वैसा है करके जब आप बात बोलोगे तो रिमूव किए जाओगे जो प्रश्न पूछा हां या ना हो सकता है कि नहीं हो सकता उसम नहीं बात बोलेंगे देखिए ऐसा है वैसा है नहीं तो भरे रहेंगे मैं प्रमाण लाया हूं ना छूटते ही हां हेलो अपना परिचय दीजिए परिचय नहीं ऋगवेद में प्रमाण है ये शुरू हो जाओ वही पे तुरंत अब अब अब ये लोग वेद की बात नहीं कर रहे आप देखो अब ये लोग ऊपर आके वेद नहीं बोलते अब इनका बंद हो गया वेद बोलना क्योंकि वो पूछ लिया गया ना कि कबीर कैसे बना अब आवाज नहीं निकल रही वेदों के लिए थोड़े दिन में स्लोगन बंद हो जाएगा अबे चुप इना एंटरटेन करना ही नहीं था आपको पहले ही बोल थे कौन से व्याकरण के सूत्र से आपने कवि को कवि बना दिया या कवि को कवि बना दिया इतना बता दीजिए बस अच्छा बीच बीच थोड़ा सा दार्शनिक दार्शनिक वाला भी पूछना सही रहता है जैसे ईश्वर सर्वशक्तिमान वो वो भी पूछना अच्छा रहता है वो आउट ऑफ सिलेबस हो जाता है उनके लिए आप समझ जैसे अभी वाला पूछा इसकी तैयारी होगी एक महीने तक जहां कबीर बैठा है वो जगह किसने बनाई बिल्कुल बिल्कुल है ना तो उसकी तैया मेरी वच की है फसिल की नहीं है
02:29:24:07 मैं ये सुनिए कि बल्ब आपके सामने हो जाए अभी बल्ब पीछे तो व वो आ रहा है फ्लश लो सर लो हा अब बढ़िया है सर ये बताइए सर प्रॉब्लम है मेरी एक प्रॉब्लम है आपका परिचय दे दीजिए पहले मेरा नाम सर रितिक है रितिक तिक आगे तो बोलिए तो सर मैं ना मैं ना मसीही हूं मैं क्या हो मसी क्रिश्चियन हूं मैं क्रिश्चियन क्रिश्चियन अच्छा बताइए तो सर मेरी ना प्रॉब्लम यह थी यह जो है कहते है बाइबल में प्रमाण है कबी साहिब भगवान है इनका
02:30:31:25 य य भी बाइबल वाला भी है तो सर इन प्रॉब्लम पता क्या है बाइबल में पढ़ रखी है मैंने बाइबल बाइबल का ज्ञान और जो ज्ञान देते हैं य बिल्कुल अलग साब सुनिए हमें क्षमा करिएगा हम यहां पर आपके द्वारा कबीर का प्रतिकार नहीं सुनेंगे क्योंकि आप क्रिश्चियन है और इस रूप से देखा जाए तो व हमारे भाई है हम यहां पर आपके द्वारा उनका खंडन नहीं सुनेंगे क्षमा करिएगा आप कहीं और जाइए और ये अपनी बातें रखिए हमें प्रॉब्लम नहीं हमें प्रॉब्लम उ बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया हमें प्रॉब्लम उनसे है मगर ऐसा नहीं है कि हम जो है क्रिश्चन के द्वारा भी उनका जो है वो सुने जी जी लेकिन य देखि धर्म के साथ जीने में कितना आसान हो जाता है जीवन बकुल फिक्स रहता है यही करना है खत्म हो गई बात डंके गुरु ने सिखाया परंपरा प्राप्त आचार्य ने सिखाया क्या करें बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल संबंधों का त्याग करना पड़ जाए पर सिद्धांत का त्याग मत करना बिल्कुल गुरुदेव ने बोला है ये मैं एक बात कह दूं उनसे क्रिश्चन से जो आप अनुज कुमार जी मैं आपको यह कहना चाहूंगा कि
02:31:48:04 क्या बाइबल के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं आप आ करके सिद्ध करिए अगर इस बारे में बात करनी हो तो आपका स्वागत करेंगे लेकिन शिवा जीय क्लिप जरूर निकलवाए ये वाली बोल देता हूं नवीन जी नवीन जी अगर सुन रहे हैं तो ध्यान ध्यान दीजिएगा यह क्लिप जो है जरूर निकलवाए अनुज कुमार जी आपसे बोल रहा हूं बाइबल के द्वारा प्रतिपादित होने वाला यदि सर्वशक्तिमान है तो आ सकते हैं आप इसम बात कर सकते हैं नारायण आएंगे आएंगे हां आएंगे पक्का सोच लीजिए हम तो घर से निकले
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→ Used in: B · Live परंपरा क्यों आवश्यक है? at 49:34 ↗
→ Used in: A · Live हमारी लाईव चर्चा से समाज को क्या फायदा at 17:50 ↗
02:32:36:19 ही थे बांध करर सर पे कफन लो जहां हथेली पर लिए लो बढ चले हैं ये कदम
⬜ Not used yet · 02:32:44:27 – 02:34:16:09 (1:31)
02:32:44:27 अभी छोटे हैं वो आयु में रहने दीजिए कह रहे हैं हैकर है ये कह रहे हैं हैकर है ये हैकर है भैया श्री राम चलिए फिर आज का पूरा करते हैं अनुज कुमार जी आप जो है कभी आइए हमारी लाइव स्ट्रीम में और बाइबल के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर को जीव की चाह का वास्तविक विषय सिद्ध करिए सच्चिदानंद स्वरूप सिद्ध करिए भगवान सिद्ध करिए इस पर बात करेंगे किसी दिन आपसे हा और जो रामपाल को फॉलो करने वाले हैं उनके बारे में आपको जो भी करना है आप उसमें हम आपकी सहायता नहीं कर सकते हमारे भाई है अनुज जी आप क्या बोलते हैं अगर आपको इसके बारे में कोई बात करनी है कबीर जी के बारे में तो तो उसके बारे में बात हो चुकी है अगर आपको जो प्रश्न किया है सिद्ध करने वाला उस पर कुछ करना है तो आप अभी बोल सकते हैं क्योंकि आपको बहुत बड़ी बात कौन सी करनी है वो हमें नहीं पता कौन है प्रोफेट है कौन है नहीं अनुज कुमार जी लिख रहे हैं ना साइड चैट में मुझे बहुत बड़ी बात करनी है प्रोफेट जी तो परेशान है कब से बोल रहे हैं हमें बुलाइए हमें बुलाइए प्रोफेट जी अपना चेहरा नहीं दिखा
02:34:01:00 रहे चलिए आपके बाल जल् ब था गुरुदेव ने बताया था ना न के कि कौरवों और पांडवों के बीच में जब युद्ध होता है
✅ This part is already used · 02:34:16:09 – 02:34:22:14 (0:06)
→ Used in: A · Live अवैध समाज की छिछोरी चाल #vedpuran #sanatandharma at 4:27:20 ↗
02:34:16:09 तो वो 100 हम पांच मगर बर का कोई आ गया तो हम 105
⬜ Not used yet · 02:34:22:14 – 02:39:09:00 (4:47)
02:34:22:14 हां बिल्कुल ये तो [संगीत] है ये बय जी अल्ला उपनिषद के ऊपर ऑलरेडी वीडियो बना चुके हैं बना चुका है आवाहन आपको देखना चाहिए आप देख लीजिएगा स्टेटस भी ल बना दिया टा प भी मिल जाएगा आपको च अब नहीं लेते किसी को हो गया बहुत टाइम हो गया सा बजे से मैं चिल्ला रहा हूं हां बहुत ज्यादा आपके जो मुझे लग रहा है कि बाल बालके पूरे नुच
02:34:54:22 जाएंगे मैं क्या करूं मेरा जो पाला पड़ता है वो दीवारों से पड़ता है मैं अपना सर मारता उसम अच्छा नहीं करे तो य सब चीज सामने नहीं आए फैक्ट अब जैसे अ यह सोचेंगे जो जो लोग थोड़े से थोड़े भी बुद्धिजीवी होंगे व सोचेंगे कबीर जहां बैठा है अगर उसने सब कुछ बनाया है तो वो जगह किसने बनाई या तो ये मानना पड़ेगा कि उसने सब कुछ नहीं बनाया करे है ना य बिल्कुल चलिए बहुत लोग वेट कर रहे हैं बाकी आप लोग कैमरा चालू करके आएंगे तो फिर आपको लिया जाएगा नहीं तो ऐ कमरा किसी का चालू नहीं बढ़ाते हैं आपको नामा स्त्र के बारे में एक बार फिर से बता द हमारा अभियान चल रहा है नामजप अभियान उसमें हम दिन भर में पांच बार भगवन नाम का स्मरण कर रहे हैं पांचों परमेश्वर का और सुबह एक बार राम नाम का जब भी करते हैं उसमें मैं स्वयं होता हूं तो हम लोग सीधे सुबह जो करते हैं 5:30 बजे उसमें मैं सवा घंटे का जब करता हूं उसमें साथ में जो भाई है काफी लोग जुड़ रहे हैं आप भी लोग अपने जीवन में सवा घंटे की भक्ति का बल एकत्र करने के लिए नामा स्त्र में जवाइन कर सकते हैं उसके लिए या फिर किसी भी प्रकार के वैचारिक मतभेद के लिए या फिर हमारी
02:36:09:22 जो क्लासेस है उनके लिए या फिर धर्म रक्षा अभियान से जुड़ने के लिए आपको एक नंबर है यहां पर 7408 30169 स्प आपको करना है कॉल मत करना बहुत कॉल आते हैं ओनली ना है आपको और हां पर अ आपको एक मैसेज प्राप्त हो जाएगा ऑटो जनरेटर उसमें ये चार प्रकार के फॉर्म होंगे नामा स्त्र से जुड़ने का धर्म रक्षा अभियान से जुड़ने का क्लासेस से जुड़ने का और एक फॉर्म होगा कि वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा तो आपको अपने अनुरूप जो फॉर्म हो वो आप भर सकते हैं दूसरी बात यह है कि जो जो पूज्य जगतगुरु हैं पूरी पीठ के शंकराचार्य जी उनका जो गोवर्धन मठ है उसका ऐप आ गया है सभी उसमें वह ऐप डाउनलोड कर द हमारे पास बहुत फोन आते हैं कि भाई गुरुदेव से दीक्षा लेनी है कहां जाएं कहां पे हैं तो उस ऐप में गुरुदेव का पूरा प्रोटोकॉल रहता है कि गुरुदेव का शिविर इस समय कहां लगा हुआ है उस ऐप को डाउनलोड कर ले उसमें भी बहुत सारी चीजें जो आपको जानने को मिल जाएंगी जो भी गुरुदेव के दर्शन करना चाहते हो तो उसमें गुरुदेव का पूरा प्रोटोकॉल होता है कि अब गुरुदेव इस समय कहां है और उनसे अगला वाला प्रोटोकॉल भी उसमें में होता है तो वो गोवर्धन मठ पप जो है वो डाउनलोड कर ले और
02:37:25:02 इसके साथ ही साथ रामपाल वालों से मैं कहूंगा कि अगली बार आए तो तैयारी करके आए वेदों में प्रमाण अभी तक नहीं बता पाए कहां से सिद्ध हुआ कि कबीर भगवान है आप कहते हो कि कवि ही कबीर है मगर कवि कबीर है यह आपकी वाणी है शास्त्र नहीं है आपके एक बंदे ने यह भी कहा कि वो हमारी इच्छा है तो फिर बात ही खत्म हो गई जब तुम स्वयं इच्छा पूर्वक ले रहे हो तो तुम दूसरे पर आरोप कैसे लगा सकते हो कि मनमुक भक्ति कर रहे हैं शास्त्रो चित भक्ति सिद्ध करो शास्त्र उचित भक्ति और एक अलंकारी भी आए थे मुझे ले लो मैं बैंड बजा दूंगा तो उनसे कहूंगा अगली बार थोड़ा फेशियल वगैरह करा ले एक वो आता है क्या कहते हैं थ उसका टेन बहुत अच्छा होता है उससे कालिक साफ हो जाती है तो उससे आप टेन कराए अपने चेहरे पर जाकर के और थ का डिटेन अच्छा होता है वो डिटेन करा लीजिए और फिर आइए चेहरा दिखा सके इस इस लायक स्वयं को बनाइए तो ठीक है इसी के साथ सभी को जय श्री राम करते हैं ज आपका भी बहुत बहुत धन्यवाद फलकी जी आप आए और फिर मैं वही बात कहूंगा निष्ठा पूर्वक माता जी ने जिसको भी कराया हो तो वो आए और यहां पर बताए कि वेदों में किस प्रकार प्रमाण है कि कबीर साहब भगवान है और
02:38:40:06 नहीं आप थोड़ा ठीक से नहीं बोलते हैं जिसकी मां ने निष्ठा से दुग्ध पान कराया हो वो आए और चर्चा करे य और अंत फेस टू फेस अंत में मैं आपको एक बार बात बोलना चाहूंगा आपको यह मेरी व्यक्तिगत सलाह है व्यक्तिगत मेरा परामर्श है मत पढ़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर जय श्री राम जय श्री राम
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Discussion with Rampal follower क्या ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी नहीं है? #rampaljimaharaj #kabir
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