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00:00:02:09 तो सभी को जय श्री राम लाइव स्टार्ट होते समय हम बता दें कि जो हम चर्चाएं करते हैं वह किसी भी प्रकार से किसी मत पंथ संप्रदाय संस्था समाज के अस्तित्व को नष्ट करने के लिए नहीं है पितु उसमें व्याप्त जो ऐसी कुछ शिक्षाएं हैं जो हम सनातनी हों को बांट रही हैं उन शिक्षाओं को सार्वभौम अकाट्य सिद्धांतों के द्वारा शोधित करने का हमारा उद्देश्य है जिससे कि हम हिंदुओं को संगठित कर सके जो छोटे-छोटे समूह में बटक रह गया है और समय आने पर अपनी रक्षा के लिए हिंदू एक शत्र हो कर के खड़ा हो सके और हम हिंदुओं को दुनिया का कोई भी नेतृत्व हम हिंदुओं की जो सबसे बड़ी परेशानी है वह है बहु नित वाद हम कहते अवश्य है कि हम सनातनी है हम हिंदू है मगर हम बहु निवाद में फसे हुए हमारे पास सार्वभौम तत्व शास्त्रों द्वारा है तर्क प्रमाण द्वारा है मगर हम
00:01:18:01 उसका आलंबन नहीं ले रहे ल् विकल्प के रूप में भी हमने मान लीजिए हम शास्त्र और प्रमाण के आधार पर तत्व नहीं लेना है मगर फिर भी वैकल्पिक भी हमने जो तव बनाया है वो बहु नेतृत्व एक से ज्यादा है जिस कारण से हम बटे हुए हैं तो हमारा उद्देश्य विभिन्न मत मता तरों में बटे हुए सनातन समाज में जो भ्रांतियां है उनको सार्वभौम सिद्धांतों द्वारा दूर करते हुए सनातन समाज को संगठित सुरक्षित करना एक मात्र हमारा उद्देश्य है और हमें संगठित सुरक्षित कौन कर सकता है गुरु गोविंद और ग्रंथ इनके सानिध्य में संगठित हो सकते हैं मैं कहीं
00:02:06:27 [संगीत] पर मैं कहीं पर काफी देर तक धर्म के बारे में धर्म चर्चाएं हो रही थी मैंने उस सभा को देखा काफी उसम बीच-बीच में जिसके हिसाब का जो पॉइंट होते थे वो उसमें ताली बजाता था उसमें वो पार्टिसिपेट करता था मगर अंत में जब जय श्री राम का नारा लगा तो जय श्री राम सभी ने बोला तो इससे क्या पता लगता है कि हमको कोई सरकार कोई नेता कोई मीडिया तंत्र कोई शासन तंत्र एक छत्र नहीं कर सकता है हिंदुओं को संगठित कर सकता है उसका गुरु गोविंद और ग्रंथ अगर हमारा गोविंद एक होगा तो हम एक हमारा ग्रंथ एक होगा तो हम एक हमारा गुरु एक होगा तो हम एक और हमारी ऐसी कोई मेंटालिटी नहीं है कि हम सबको कह रहे हैं कि भाई आप जो है जो जगतगुरु शंकराचार्य उनसे आप दीक्षित हो जाइए उनसे आप उनके शिष्य बन जाइए जो व्यावहारिक स्तर पर पूज्य शंकराचार्य जी द्वारा जो मान्य सिद्धांत है वही व्यवहारिक स्तर पर रामो जाचार्य जी द्वारा भी
00:03:22:01 स्वीकार सिद्धांत है व्यवहार मतलब कि हमें वर्ण व्यवस्था कैसे माननी है कर्म कांडों का आलंबन कैसे लेना है यह सब ऑलमोस्ट सेम है इसमें कहीं कोई वैचारिक मतभेद नहीं है ब्रह्म को लेकर के वैचारिक मतभेद ब्रह्म को लेकर के शाब्दिक रूप में दिखाई देने वाले भेद है वोह बाद की बात है मगर जो व्यवहारिक जो धर्म है क्या कहते हैं धर्म मे मांसा वो सबकी एक है तो ऐसा नहीं है कि रामानुजाचार्य जी जो धर्म बता रहे हैं वह गलत होगा
00:04:00:16 निंबार्क निंबार्काचार्य जी जो धर्म बता रहे हैं वह और शंकराचार्य जी द्वारा बताया गया धर्म अलग है कहीं पर एक कोई शाब्दिक भेद अवश्य दिखाई दे सकता है ब्रह्म को लेकर के बाकी सब परंपरा प्राप्त जितने भी आचार्य गण है उनका धर्म उनके द्वारा प्राप्त होने वाला जो धर्म है वो एक ही है ठीक है तो गुरु के सानिध्य में प्रामाणिक आचार्य यदि सबके हैं प्रामाणिक परंपरा प्राप्त आचार्य सबके हैं तो हमारा जो व्यवहार होगा एक जैसा हो जाएगा सबका व्यवहार का मतलब मतलब युद्ध की स्थिति में क्या करना है हम लोग एक है है ना तो यह हमारा एकमात्र उद्देश्य है इसको याद रखें और धर्म की रक्षा करनी है धर्म के लिए थोड़ी भी सांस आती है दिन भर की सांसों में से कुछ भी सांस आती है आपके अंदर तो सबसे पहले स्वयं को उसके योग्य बनाए उपासना सेवा संकीर्तन स्वाध्याय उपासना करें भगवान की दिन भर में कम से कम सवा घंटा की भक्ति करें सेवा संकीर्तन अभी हम लोग कुछ दिनों में नाम जप के सुबह के सेशन शुरू कर देंगे तो उसमें जो भी आना चाहे आ सकते हैं सेवा संकीर्तन संकीर्तन आप जो गोष्ठी होती है हिंदू राष्ट्र गोष्ठी जो गुरुदेव
00:05:15:19 की तरफ से हो रही है उसके द्वारा कर सकते हैं उसमें आप साप्ताहिक रूप से एक जगह हिंदुओं को एक मठ मंदिर को दुर्ग बनाइए वहां पर एकत्रित होइए वहां संकीर्तन करिए भगवान के नाम संकीर्तन सेवा भी वही से हो जाएगी सब लोग मिलकर के कुछ आयोजन कर दे मेडिकल कैंप लगवा दे चेक अप कैंप या कोई शिक्षाप्रद क्लासेस या कोई शिक्षा प्रद क्लासेस लगवा दे वहां पर वैदिक मैथमेटिक्स की क्लासेस लगवाए यह सेवा हो जाएगी और सेवा के लिए आप प्रसाद बांट सकते हैं सब लोग मिलजुल कर के तो इस तरह से सेवा और स्वाध्याय उपासना सेवा संकीर्तन स्वाध ये चार चीजें अपने जीवन में अवश्य लाए और इन सबके लिए आवश्यक है कुछ भी ना समझ में आए तो सबसे पहले नाम जप भगवान के नाम का जप तुरंत अभी से स्टार्ट कर ठीक है तो आज का हमारा जो विषय है वो है वर्ण व्यवस्था जन्म से या कर्म से और हमारे सामने हैं रविंद्र कुमार जी इनको मैं सेल्फ स्टडी हिंदू कहूं स्वा अध्ययन करने वाले है
00:06:30:19 ना ठीक है कह लीजिए प्रभु जी भैया जी जो भी आप क वैसे मैं बता रहा हूं मैंने भगवान शंकराचार्य जी को य के माध्यम से बहुत बार सुना है और वहा से बहुत जानकारिया प्राप्त की है इसकन के भी लगभग 50 बार मंदिर गया हूं वहा से कुछ जानकारी मिली लेकिन वहा से संतुष्ट नहीं हुआ मैं इसके अतिरिक्त हा स्वाध्याय भी किया है हनुमान प्रसाद पदार जी की श्रीमद रामचरित मानस पड़ी है तुलसीदास जीत उनका टीका का है तो आप जो वो कह ले नहीं इसमें एक अंतर है देखिए ऐसा नहीं है कि जवाब नहीं होता है नास्तिक का जवाब है सनातन विरोधी ईश्वर को मानने वाले का जवाब है उसके बाद जब सनातनी हो गए तो परंपरा प्राप्त गुरु विरोधी सनातनी कहने वाले का भी जवाब है मगर होता क्या है कि जब हमें यह मालूम पड़ जाता है कि सामने वाली व्यक्ति के पास निश्चित नियमावली कौन सी है तो हम उस नियमावली के अंदर रहते हुए उससे बात करते हैं समझ रहे हैं जैसे कि किसी ने कह दिया जैसे किसी ने कह दिया कि मैं नास्तिक हूं मगर उसने यह मान लिया कि मानव हूं तो
00:07:45:21 फिर हमें ज्यादा उधेड़बुन करने की जरूरत नहीं है उससे यही बस पूछेंगे कि मानवो चित मूल्य जो आपने स्वीकार किए उसका आधार आपका क्या है तो फिर हम उसको बहुत ज्यादा डिटेलिंग में बाद में जा सकते हैं मगर पहला हमारा यही हो जाएगा अगर उसने कह दिया कि हम मानव इसी प्रकार यदि उसने कह दिया कि मैं ईश्वर को स्वीकार करने वाला हूं मगर सनातनी जो वेदों द्वारा प्राप्त होने वाला ईश्वर है सनातन ईश्वर है उसको नहीं मानता मैं इस्लाम के द्वारा बाइबल के द्वारा ईश्वर को मान लिया तो फिर हम और बहुत सारी तर्क और और बहुत सारी चीजें लाने की वजह सबसे पहले यही पूछेंगे क्या आपका ईश्वर सर्वशक्तिमान है है ना जब ईश्वर है ब तो ईश्वर इसीलिए कि वो पावरफुल है है ना ईश्वर इसीलिए हा अल्टीमेट पावरफुल है ना तो फिर यही बात पूछ ली जाएगी तो सनातन विरुद्ध जितने भी तंत्रों ने ईश्वर खड़ा किया है वो बाधित है अब उसके बाद उसके बाद यदि यह हमें मालूम पड़ जाता है कि वो सनातन के अंदर रहते हुए वेदों के नाम पर मगर बाधित ईश्वर की ही व्याख्या कर रहा है तो कम से कम उस के जो तंत्रों के द्वारा
00:09:01:12 जितने जितने संदर्भ में वेद को स्वीकारा गया है उसके आधार पर हम प्रश्न कर सकते हैं पूछ सकते हैं जैसे मान लीजिए स्कोन वाले हैं वो अगर यह कहेंगे कि हम जो है स्कोन वाले हैं इकोन का कहना है कि हम चैतन्य महाप्रभु को मानते हैं तो चैतन्य महाप्रभु श्रीधर स्वामी को मानते हैं उनका भा भाष्य कहां है श्रीमद भागवत का बहुत सारे वहां से प्रश्न खड़े हो जाएंगे तो इसलिए अपना जो जब व्यक्ति अपना स्टैंड क्लियर करता है तो फिर उससे बात करने में आसानी रहती है कि हम किस विषय को आधार बनाते हुए उससे बात करें अब आपने कहा कि आपने हनुमान प्रसाद पौदार को भी पढ़ाया आपने कहा आपने कहा पूज्य शंकराचार्य जी को भी आपने सुना है जगतगुरु शंकराचार्य जी को आपने कहा कि मैं स्कन वालों को भी फॉलो करता हूं मगर यदि आप शंकरा यदि आप शंकराचार्य को फॉलो कर रहे हैं तो आप स्कोन के कई अंशों में आप स्कोन की जो शिक्षाए है उनको स्वीकार नहीं कर सकते ने कहा उतर से हा तो अब दूसरी बात आती है कि आप संतुष्ट तो जाहिर
00:10:16:14 सी बात यदि आप यहां पर है तो आप संतुष्ट नहीं है पूज्य जगतगुरु शंकराचार्य जी के उत्तर से भी यही बात है ना अभी त अभी तक तो यही है अब इसके बाद आपने कहा हनुमान प्रसाद पौदार अगर आप यहां पर है तो जो पूरी गीता प्रेस गोरखपुर है उसने वर्ण को जन्म से माना है वर्ण को जन्म से माना है तो अगर आप यहां पर है वर्ण जन्म से को लेकर के तो भी आप मतलब आपने पूरी तरीके से संतुष्ट नहीं है तो अब मामला ये आ जाता है कि जब आपका कोई गुरु नहीं है तो आपको क्या कहा जाए क्योंकि आप किसी से किसी में गुरु भाव नहीं देख पा रहे हां वैसे गुरु भाव देख रहा हूं किंतु जो कहते हैं ना लाइसेंसी अप्रूव्ड ऐसे गुरु चेला नहीं बन पाया हूं अभी तक मैं संतुष्ट नहीं हो पा नहीं गुरु भाव तो मतलब य होता है जिसके प्रति विरोधी भावना ना आए विरोधी भावना ना आए जिसके सिद्धांतों के विरुद्ध भावना ना आए भावना ऐसा मन करे किसी दिन गुरुदेव मिल जाएंगे तो यह वाली शंका जो है पूछ लूंगा मगर विरुद्ध भावना निर्मित ना हो कि नहीं कर्म से होता है अगर शंकराचार्य कह रहे जन्म से होता है तो विरुद्ध
00:11:31:16 भावना है कि नहीं कर्म से होता है अगर यह भावना आ रही है तो इसका मतलब है गुरु भाव नहीं रख रहे हा आप ऐसा कह सकते हैं लेकिन मैं यह नहीं कह रहा हूं कि आप गलती बोल रहे हैं मैंने पहले भी कहा था कि मेरी शंका है और मैं उसका समाधान चाहता हूं ऐसे मैंने कहा था कि भाई मेरे कुछ प्रश्न उनका आप आंसर दीजिए संतुष्ट होता हूं तो निश्चित रूप से आपका शिष्य बनूंगा आज जीवन के लिए ऐसा ही मैंने उनसे कहा था और यही मेरी य पर अभिला है जी अरुण याग वलक जी बस प्रभु श्री राम की कृपा है हम पर थोड़ी बहुत जो भी है उसी की वजह से जो भी दिख रहे हैं आपको जैसे भी आप ही बताए
00:12:18:24 कैसे तो अब बात ऐसी है कि वर्ण व्यवस्था के बारे में आपका जो दृष्टिकोण है वो क्या है आप क्या मानते हैं मेरा मानना है जब मैंने श्रीमद् भगवत गीता का अध्ययन किया तो उसमें है कि स्वभाव से उत्पन्न जो गुण हमारे होते हैं उनके द्वारा हमारे जो कर्म होते हैं उनके आधार पर होनी चाहिए वर्ण व्यवस्था ना कि जन्म पर और ना केवल कर्म पर इसका मैं एक छोटा सा एग्जांपल दूंगा अभी हमारे बरेली का ही एक फरीदपुर थाना है वहां के इंस्पेक्टर महोदय साढ़े लाख रुप की घुस लेते हुए पकड़े गए और फरार चल रहे हैं यह घुस लीय उनका स्वाभाविक कर्म था व इंस्पेक्टर थे ये उनका कर्म था केवल ड्यूटी की धन अर्जित करने के लिए कर्म कर रहे थे लेकिन घुसली उनका स्वाभाविक कर्म था तो मैं कह रहा स्वाभाविक कर्मों के आधार पर हमको यह मानना चाहिए मेरा यह मतलब है ठीक अब मुझे आप यह बताइए कि स्वाभाविक कर्म के आधार पर जो वर्ण व्यवस्था बनाई जाएगी उसका परव सान किसम
00:13:20:15 है पर्यान मतलब थ और अर्थ बताइए इसका उससे लाभ क्या है उससे लाभ ये है जो अभी हमारी आपने देखा होगा भारतवर्ष में छिटपुट घटना होती रहती है कुछ जगह ब्राह्मण विरोधी नारे लगते हैं अथवा किसी विरोधी नारे लगते है यह सारे के सारे समाप्त हो जाने चाहिए क्या जैसा अभी आप हा बता रहा हूं ना हमारे भारतवर्ष में मुझे आप प्रैक्टिकली बताइए कि हमें इस तरह से वो काम में आएगी जैसे कि पहले अखबारों में आता था वर्गीकृत एक पेज आता था क्लासिफाइड अब भी आता है नहीं मुझे नहीं पता उसमें वर वधु की तलाश करते थे वधु का भी आता था उसम क्या होता था उसमें क्या होता था लिखा होता था कि भाई ब्राह्मण लड़की ब्राह्मण लड़का ठीक है तो यह फायदा हुआ जब हमने जन्म से माना तो हमको ब्राह्मण परिवार को ढूंढने में आसानी हुई ठीक है अब आप बताए कि स्वभाव से मानी जाने वाली जो वर्ण है उसके आधार पर इस तरह का कोई एक उदाहरण देते हुए बताइए यह फायदा हुआ ठीक
00:14:35:18 है आपने जो जन्म से मानी कि हमें बर चाहिए अथवा बधु चाहिए इसमें भारत में और उसम तो खर कमी है लेकिन फिर भी इक्का दुक्का या जो भी कहे एक दो परसेंट ऐसे केसेस मिलते जिनम तलाक उर्दू का शब्द है हिंदी में कहे तो अलग हो जाते हैं सेपरेट हो जाते हैं विवाह के बाद यदि हम पहले ही है आपसे मैंने जी आप मेरी में ोट मत निकालिए मैं अभी अपनी चीजें बताऊंगा अभी आप जो आपने स्वीकार किया वह बताइए मैं वही बता रहा हूं जो मैं वही बता रहा हूं भाई साहब आप सुनिए ना मैं बता रहा हूं जो हमने जन्म से माना उसमें इका दुका तलाकी समस्या आती है यदि हम स्वभाव से ऐसा ढूंढने लगेंगे तो फिर यह समस्याएं भी नहीं आएंगी अरे भाई तो ढूंढ के बताओ ना कि ऐसे ढूंढा जा सकता है वो उदाहरण तो दो कि ये ये लोग स्वभाव से हैं ऐसा कोई अखबार छापोल से कैसे ढूंढोगे उसको एमप्लीफाई करके दिखाओ एग्जांपल दो स्वभाव के हमारे लिए ऐसे क किसी के चेहरे पर लिखा हुआ नहीं होता स्वभाव जब हम उसके साथ चार छह बार मैं बता रहा हूं जब हम उसके बा चार छ बार मैत्री संबंध के स्वरूप में उससे मिलेंगे तब हमें उसका स्वभाव पता लग जाएगा गुड गुड और जाहिर सी बात है
00:15:50:19 कि शादी विवाह केवल एक बार में नहीं हो जाता गुड गुड तो आपका कहने का मतलब है कि हम किसी से चार छह बार मिले और तब उसके स्वभाव का पता लगाए ये बात बिल्कुल सही है तो हम लोग जब मिलने उससे जाएंगे तो क्या सोच के जाएंगे मन में किससे मिलने जा रहे हैं शुरुआत कहां से करोगे हां बता रहा हूं ना जैसा कि पहले ही मैंने कहा कि जब हम शुरुआत करेंगे तो हम से मिलने जाएंगे मान लिया मेरी एक पुत्री हो उसके लिए एक ब ढूंढने जा रहा हूं तो मेरे दिमाग में पहला तो यही आईडिया है कि मुझे एक अपनी पुत्री के लिए उपयुक्त चाहिए मैं गया मुझे लगा भ इसका चेहरा ठीक है स्वभाव ठीक है इसका चेहरा ठीक है सॉरी शकल से शकल से आपका प्रारंभिक वो होगा चुनाव प्रारंभ शकल से बता रहा हूं ना यानी आप यानी आप यानी आप घर से बाहर निकले सड़क पर कोई अच्छी शक्ल वाला मिल गया तो आप उसको चेक करेंगे उसके साथ फिर हां उसके पश्चात प्रथम दृष्टांत जो होगा वो सकल से होगा कि सकल भाई अनुरूप है हमारी पुत्री के लिए य कोई रिक्शे वाला भी रि रिक्शा चालक जा रहा है टेंपो चालक जा रहा है कोई पान की दुकान पर
00:17:05:20 खड़ा हुआ है आप वहां जाकर के अगर उसकी शक्ल आपको अच्छी लगी तो उसी से आप चालू कर देंगे कि भाई मुझे आपको पांच छ दिन जानना है और उसके बाद जो है मैं आपसे अपनी पुत्री का या बहन का विवाह करूंगा नहीं नहीं नहीं नहीं ये हम डायरेक्ट नहीं कहेंगे मैं बता रहा हूं ना हम डायरेक्ट नहीं कहेंगे अप पुत्री का अथवा अपनी बहन का आपसे विवाह करूंगा हम उससे मैत्री संबंध बनाएंगे जैसी हर हर महादेव जो भी हमारा अपना स्लोगन होगा उसे बोलेंगे मत मतलब आप अपने मंतव्य को उससे छुपाए शुरू में हा कुछ समय के लिए छु पाएंगे निश्चित रूप से छु पाएंगे गुड गुड बहुत बढ़िया फिर तो मतलब आपका चुनाव होगा आपका चुनाव यही है कि सड़क पर उतर जाओ और कोई भी अच्छी शक्ल वाला मिले वहां से शुरू कर दो केवल सड़क पर उतरना नहीं होता है हमारे जो और पूर्व समय के मैत्री स रिश्तेदार उनसे हम कहेंगे कोई एक बर बताइए हमारे लिए आपना ये जो प्रारंभिक बिंदु आपने चुना कि मेरे जो मैत्रीय संबंध होंगे उनसे हम बताएंगे यही प्रारंभिक बिंदु होता है जन्मना वर्ण व्यवस्था आपने अभी एक प्रारंभिक बिंदु चुना ना कि हमारे जो और मि मित्र गण होंगे उनसे हम कहेंगे कोई अच्छा वर बताइए तो इसका मतलब क्या है कि आपके मित्रगण जो वर बता देंगे
00:18:20:20 वो अच्छा ही होगा मैं नहीं कह रहा हूं कि वो अच्छा ही होगा भाई वो बताएंगे उसके बाद हम ये जो मेरा कहने का मतलब ये है भाई साहब कि ये जो प्रारंभिक बिंदु आपने बताया है कर्म तो चेक किए जाएंगे आचरण चेक किया जाएगा स्वभाव चेक किया जाएगा मगर प्रारंभिक बिंदु क्या होगा वो प्रारंभिक बिंदु ही जन्मना वर्ण व्यवस्था है ऐसा नहीं है कि जन्म ले लिया ब्राह्मण के घर में तो उससे शादी करनी ही करनी नहीं उसके बाद भी जाएंगे ब्राह्मण घर को देखेंगे तो यह जो जो आपने नाम लिया ना अपने मित्र बंधु अब जैसे आप आप ब्राह्मण है मान लीजिए थोड़ी देर के लिए मान ली क्षत्रिय तो क्षत्रिय है आपने अपने मित्र बंधु बंधु में भाई आ गए ठीक है तो आपने उसको क्षत्रिय नाम ना दे कर के आपने उसको जो है वर्ण का नाम नाना दे कर के आपने भी एक पॉइंट स्टार्टिंग पॉइंट ले लिया कि अपने मित्र बंधुओं में देखेंगे लिया ना यही अब ऐसा नहीं है कि मित्र बंधु मित्र बंधु के संपर्क में जितने भी लोग होंगे जितने भी लड़के होंगे उनके यहां पर उनके घर में या उनकी जान पहचान में वो सब अच्छे
00:19:35:24 होंगे मगर एक स्टार्टिंग पॉइंट के रूप में आपने लिया कि भाई इससे मेरी जो तलाश का जो क्राइटेरिया है ना मेरी खोज का जो क्राइटेरिया है वो पूरी पृथ्वी नहीं है अब मेरी खोज का क्राइटेरिया मेरे अपने हैं उनके बाद मैं वो उन अपनों के द्वारा बताए गए लड़के को भी चेक करूंगा यही है जन्मना वर्ण वस्था जो हमने प्रारंभिक क्राइटेरिया ले लिया ब्राह्मण वै शूद्र उसके बाद भी मैं उस ब्राह्मण समाज में भी चेक करूंगा कि कौन सा लड़का हमें मिल रहा है उसके आचरण कैसे हैं उसके स्वभाव कैसा है उसके कर्म कैसे हैं जैसे कि जैसे कि एक उदाहरण मैंने कल भी दिया था
00:20:19:02 कि यह क्या कहते हैं एक नौकरी जब रिक्रूटमेंट होता है कई बार भर्ती होती है तो वहां पर उस प्रतियोगिता में आने से पहले उसके लिए जो कंपटीशन हो रहा होता है एक क्राइटेरिया फिक्स किया जाता है कि भाई ओनली 10थ पास ही आ सकते हैं ओनली 12थ पास ही आ सकते हैं ऐसा नहीं है कि वहां से आने के बाद उनको चेक नहीं किया जाएगा वहां के परफॉर्मेंस प भी बात है मगर वहां नॉमिनेशन अपनी जो खोज है उसका क्राइटेरिया छोटा करने के लिए खोज में मेहनत कम लगे इसलिए वहां पर एक शुरुआती पॉइंट दे दिया कि जो जिसके पास 10थ का 10थ पास आउट का सर्टिफिकेट होगा वही इस कंपटीशन में आ सकता है और उसके बाद उनकी परीक्षा ली गई तब तो आपने तब तो आपका क्राइटेरिया बहुत छोटा रहा वरना आपका कोई क्राइटेरिया है ही नहीं शुरुआत करने का पूरी दुनिया का कोई क्राइटेरिया नहीं है दो साल का बच्चा भी उस रिक्रूटमेंट में आ सकता है क्यों जरूरी है कि 20 साल वाला योग्य हो समझ रहे हैं तो एक क्राइटेरिया व्यवस्था बनाने के लिए क्राइटेरिया है जो जिसको आपने दूसरे शब्दों में कहा कि भाई मैं मित्रों में देखूंगा बंधुओ में देखूंगा उसी
00:21:34:04 को यहां पर ब्राह्मण नाम का क्राइटेरिया दिया गया छत्रिय नाम का क्राइटेरिया दिया गया यही है जन्मना जन्म से नॉमिनेशन जन्म से नॉमिनेशन और कर्म से सिलेक्शन ठीक है अब मैं आपसे सवाल पूछूंगा कि आपने जो कहा है कि उसके स्वभाव का पता लगाए और आपने कहा कि चार छ दिन यह बात आपकी क्यों मानी जाए हम यह बात आपकी क्यों मानी जाए आप मुझे ये बताइए क्यों नहीं मानी जाए आप जन्म से देखते हैं तब भी य करते हैं देखिए पहली बात तो अभी आपके बात करने के तेवर से मुझे पता लग गया जैसे आपने कहा ना स्वभाव का पता लगाए तो मैंने आपके स्वभाव का पता लगाया है आप यहां पर आए हैं प्रतिकार करने यह कहते हुए कि मैं जो है जिज्ञासा बसाया हूं ठीक है यह आपके स्वभाव से मुझे पता लगा जैसे पान की दुकान प आप ने बताया था ना पान की दुकान पर आपने बताया था तो आपके बात करने के तरीके से स्वभाव से पता लग गया कि आप जो है यहां पर जिज्ञासा बस नहीं आए हैं आप प्रतिकार स्वरूप आए खैर कोई बात नहीं किसी भी तरीके से आए हो हा ये आपका अपना क्यों क्यों नहीं माना जाए हां य यह बात मैं करूंगा यह बात मैं करूंगा यह भी बात मैं करूंगा
00:22:49:04 कि आपका मत है ठीक है झगड़े की फसाद तो यही होती है ना अब आपने वहां पर उस लड़के को अपने मत के अनुसार कर दिया कि तुम ब्राह्मण नहीं हो तुम क्षत्रिय नहीं हो आपकी बात क्यों मानी जाए वो भी कहेगा यह आपका मत है आप उसका आचरण है वो अच्छा नहीं है मगर आपने घोषित कर दिया ये जो है ये जो स्वभाव है इसका ये जो है वो नहीं है ब्राह्मण का नहीं है तो आपकी बात क्यों मानी जाए जिसके तलाश में मैं मैं बता रहा हूं ना जिसकी तलाश मुझे है इस
00:23:29:03 उसके स्वभाव से आप ये घोषित करेंगे कि नहीं ये क्षत्रिय नहीं है हां अपने लिए करूंगा ना भाई मैं अपनी पुत्री बहन के लिए मतलब अपने लिए करेंगे मतलब वास्तविकता में वो क्षत्रिय होगा वास्तविकता पूरी दुनिया का हमने ठेका नहीं ले रखा है भाई किसी और के लिए पसंद आ रहा है तो वो जाने पसंद की बात आपने कहा ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य सूत्र जो है वो स्वभाव से होना चाहिए और आप जब अपनी बहन के लिए क्षत्रिय को ढूंढने जा रहे हैं तो आप आपने उसके स्वभाव सेय जांचा कि ये जो है क्षत्रिय नहीं है आप यह कह सकते हैं लड़का मुझे पसंद नहीं है मगर यह नहीं कह सकते कि ये क्षत्रिय नहीं है क्षत्रिय नहीं है कहेंगे तो आपसे क्वेश्चन किया जाएगा कि आपने किस पैरामीटर के हिसाब से किया या फिर आप ये जैसे अभी आप मुझे कह रहे हैं कि आपका ये आपका व्यक्तिगत वो हो सकता है तो फिर उसको क्षत्रिय क्यों ना माना जाए मैं क्या कह रहा हूं पसंद ना पसंद नहीं पसंद ना पसंद नहीं जो आप स्वभाव देखने जाएंगे उससे यह तय करेंगे किय लड़का मेरी बहन के लिए उपयुक्त है कि नहीं या यह तय करेंगे क्षत्रिय है कि नहीं हम छत्री देखने नहीं जा रहे हैं आपने प्रश्न पहले ही किया था कि आप अगर किसी को देखने जाएंगे य मैं अपने व का देखने हं बस यानी आप
00:24:44:12 व पर ये तय करेंगे यानी आप वहां पर ये तय करेंगे लड़का मुझे पसंद है कि नहीं वहां ये तय नहीं करेंगे वहां ये तय नहीं करेंगे कि ये क्षत्रिय है कि नहीं हां तो फिर हम लोग बात किस पर कर रहे आपने हम लोगों का विषय हम लोगों का विषय य हैट मैं अपना विषय क्लियर कर दूं हम लोगों का विषय ये है कि किस आधार पर ब्राह्मण क्षत्रिय व शूद्र घोषित किया जाएगा फिर बाद में वो बात अलग है मगर आप आप किसकी बात कर रहे हैं कि मैं स्वभाव से क्या पता लगाऊंगा कि वह मुझे पसंद है कि नहीं भाई आप पता लगाने गए हो कि वो क्षत्रिय है कि नहीं मुझे आप यह बताओ क्षत्रिय का पता कैसे लगाओगे हा अब आप ये प्रश्न आया क्षत्रिय वाला आपका प्रश्न ये था कि आप कैसे तलाश होगे अपनी पुत्री अथवा बहन के लिए एक
00:25:34:18 रिश्तेदार अपनी बहन के लिए ठीक है अभी मैं पूछ रहा हूं आप कैसे तलाश होगे अपनी बहन के लिए क्षत्रिय चलिए हा क्षत्रिय आपने यह कहा फिर मेरा वही सेम उत्तर होगा कि मैं जाऊंगा उसका स्वभाव देखूंगा कय वास्तव में शूरवीर भी है इसके अंदर तेज है मुझे लग रहा करगे फिर आप य घोषित कर दोगे क्षत्रिय नहीं है अपने लिए घोषित मैंने कर दिया अपनी लिए बताता तो बताओ किसी आदमी का वर्ण कैसे तय होगा वो वास्तविकता तो बताओ ये तो आपने अपने लिए कर दिया वो वास्त बताओ कैसे तय होगा हा तो क्षत्रिय ऐसे तय होगा अब यदि उसका कहीं पर उसके समुख कहीं पर कोई गलत अपराध हो रहा है और चकि मैं उ क्षत्रिय के स्वभाव सेने गया हूं वह उसम एक न्यूट्रल कोई कार्य नहीं कर रहा है इसका अर्थ क्या हो रहा है वो क्षत्रिय नहीं है बात इस दिन तक अगर आपके सामने उसके सामने कोई ऐसा कार्य नहीं हुआ जिसम उसकी रक्षा की आवश्यकता हो तो य जो है वो पड़ा रहेगा कोपड ये
00:26:41:08 मामला हा बकुल जब तकने नहीं होगी उसके सामने जब तक वो घटना नहीं होगी तब तक ना वो ब्राह्मण क्षत्रिय वै ना शूद्र है उससे पहले वो क्या है यह मुझे जानकारी नहीं है हो सकता है वो ब्राह्मण हो हो सकता क्षत्रिय हो अच्छा अच्छ जानकारी नहीं है ठीक है अब मुझे बताइए जैसे आपने आपने कितना इस बारे में सोचा है कि किसी का जो ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र हो ब्राह्मण हो क्षत्रिय हो शूद्र वैश्य यह कितने दिन की जांच के बाद हम लोग निर्णय कर सकते हैं कि इतने दिन में हम लोगों ने स्वभाव देखा वो कितने दिन की जांच के बाद हम घोषित कर सकते हैं क्षत्रिय है यह ब्राह्मण है य शूद्र है ये वैश्य है यह प्रत्येक व्यक्ति की अपनी अपनी मेंटालिटी है क्या पता कौन कितना बुद्धिमान है कुछ लोग तो एक ही बार में हाई स्कूल कर लेते हैं कुछ लोगों को चार छ चार वर्ष लग जाते तने दिन का किसी के ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र के जो टैग दिए जाए किसी को वो कितने दिन के जांच के बाद होना चाहिए कम से कम मैं बता पटर बता रहा हूं ना जो व्यक्ति जांच कर रहा है उसकी बुद्धि मानता यहां पर पैरामीटर है भाई कुछ लोग बुद्धिमान होते हैं एक वर्ष में या इसका कोई पैरामीटर यानी कि इसका कोई निश्चित पैरामीटर नहीं
00:27:56:13 है जो व्यक्ति जांच करने गया है उसकी बुद्धि पैरामीटर है वो कितने दिन में कर पाएगा हर किसी के पास ये ये जो पैरामीटर आप बता रहे हो ये निश्चित नहीं है ना हर व्यक्ति की बुद्धि अलग है हा प्र मतलब वो पांच छ दिन वाली बात अलग है अब एक बात और बताए हर व्यक्ति की बुद्धि अलग है हर व्यक्ति की बुद्धि अलग है तो पांच छ लोग उसको देखने जाएंगे आपने कहा कि ब्राह्मण है दूसरे ने कहा शूद्र है तीसरे ने कहा वैश्य है चौथे ने कहा कि फलाना है तो क्या माना जाए उनमें से उसको जरूरी क्या है पाच छ लोग जाए अरे भाई जैसे आप गए हो अपनी बहन के लिए क्षत्रिय ढूंढने कोई और भी गया है मगर उसने पता लगाया क्षत्रिय है ही नहीं तो फिर उसकी आइडेंटिटी क्या हुई तो वो मुझे आकर थोड़ी ना बताएगा अरे अरे भाई उसकी आइडेंटिटी क्या हुई समाज के लिए उसकी आइडेंटिटी कैसे घोषित होगी समाज जाना जाए समाज के लिए उसकी जो पहचान है वो उसी कर्मों से घोषित होगी अब र आप पा लोग जाए सुनिए पा लोग गए यदि उसका स्वभाव है घुस
00:29:11:21 लेना तो पाच छ लोगों के सामने भी घुस ही लेगा ना केवल एक के सामने घुस लेगा दूसरे सामने ईमानदार बन जाएगा अरे भाई कहा मैं आपको कह रहा हूं क्या ऐसा हो सकता है कि पाच छ लोगों की राय उसके लिए अलग अलग हो भाई साहब पाच छ लोग हो सकता है मौखिक रा अलग हो लेकिन उसका स्वभाव पाच लोग के लिए अलग अलग नहीं हो सकता मैं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं जो आप बोलोगे वही पांच छ लोग दूसरे बोलेंगे बिल्कुल ऐसा फिक्स है हा यदि उसका स्वभाव सभी लोग देखने गए तो वो यही बोलेंगे नहीं बोला तो नहीं बोला तो तो वो व्यक्ति मता 400 बीसी कर रहा है यही अर्थ हुआ ना जिस सामने सुनिए आपके सामने उसने घूस दी दूसरे के सामने उसने दान दे दिया तीसरे के सामने उस पर बात ही नहीं हुई सबने अपने अपने एंगल से जितना अंश उन्होंने देखा उस पाच छ दिन में अपने अपने हिसाब से वो दे दिया तो उसका ब्राह्मण चत्र वैश शूद्र कैसे घोषित हुआ फिर भाई साहब उसके लिए टाइम और लिया जाएगा ना हां वो टाइम बताइए कोई तो लिमिट होगी ना उस टाइम की वो टाइम क्या है तो टाइम की लिमिट कोई जरूरी
00:30:26:26 थोड़ी है टाइम की लिमिट हो भाई साहब भा ये हमारा टारगेट है हम इस करेंगे या कुछ भी निश्चित है ही नहीं सुनिए यानी की कुछ भी निश्चित है ही नहीं कुछ है हा समय निश्चित नहीं है बाकी हम उसकी आडर पता ही करनी है ये निश्चित हम पता करेंगे तो वह पता करने से आपकी बात समाज क्यों मान ले कई बार समाज ने उनको दूसरे रूप में देखा है कोई 10 गवा आपको मिल जाएंगे जो ये कहेंगे व्यक्ति तो दानी है दान करता है
00:31:00:20 उसकी जो मौलिक आइडेंटिटी होगी वह क्या रहेगी वह एक क्षत्रिय होते हुए बुरा क्षत्रिय हो सकता है वह आप लेकर के चले आए मगर जो उसकी मूलभूत आइडेंटिटी है वह क्या रहेगी अब मैं आपसे पूछ हं वही तो बता रहा व चलिए चलिए इसको थोड़ा आगे बढ़ाते तो समझ में आ जाएगा अब मैं आपसे पूछ रहा हूं आपने जो नियम बताए मिनट मिनट सेकंड केवल मैं ये कह रहा था उसकी आइडेंटिटी जो आप कह रहे हैं भाई साहब स्वभाव किसी का छड़ छड़ नहीं बदलता स्वभाव व्यक्ति का नेचुरल ही रहता है बहुत ज के बता जिसको आपने स्वभाव माना है उसी को दूसरा भी स्वभाव मान रहा है यह गवाही किसकी मान्य होगी आपकी क्यों मान ये गवाही हम स्वभाव के अनुसार देखेंगे शास्त्र बताते है ना जिसको आप स्वभाव मान रहे हैं उसको दूसरा स्वभाव नहीं मान रहा वो उसकी और किसी चीज को स्वभाव मान रहा है जब भाई साहब हम पांच छ लोग गए हैं तो हम एक मत के गए हैं ना आप एक बात आप क्या क्या होके गए आपने अभी कहा मैंने य अभी कहा आपने कहा पाछ लोग जाइए जब हम पाछ लोग जाएंगे
00:32:16:08 तो हम सबका एक टारगेट होगा हा एक मत होंगे एक मत मतलब आप य कहना चाह रहे हैं कि हम लोगों की बुद्धि एक जैसी होगी हा हम लोग परीक्षा बुद्धि लगभग लगभग एक जैसी होगी 100% नहीं क रहा ल हम उनको लेके जाएंगे जिनकी बुद्धि हमारे जैसी हो हेलो हेलो जी सुन रहा हूं भाई साहब हम उनको लेकर जाएंगे जिनकी बुद्धि हमारे जैसी हो अरे मैं पूछ रहा हूं हम उनको लेकर जाएंगे जिनकी बुद्धि हमारे जैसी हो यदि हम पुत्री अथवा बहन के लिए गए हैं तब तो हम ऐसे लोगों को लेकर जाएंगे जो हमारी बुद्धि के जैसे हो बिल्कुल हमारे जैसे हो बिल्कुल हमारे जैसी सोच विचार हो सब कुछ हो ठीक है लगभग हमारे जैसे सोच हो हा हां तो यह जब आप जब आप पुत्री के पुत्री का विवाह करने जाएंगे तब आप ऐसा करेंगे कि अपने जैसे पांच छ लोगों को इकट्ठा करेंगे कि भाई हम लोगों की बुद्धि बिल्कुल एक जैसी वैसे आपके घर में ऐसे लोग होंगे जो बिल्कुल वैचारिक मतभेद नहीं होगा अमूमन क्या होता है आजकल ऐसे घर भी नहीं मिलते हैं जहां पर एक जैसे विचार भाई भाई के बिल्कुल सेम विचार हो खैर फिर भी मैं मान ता हूं कि आपके पास ऐसे भाई होंगे जो पांच छ भाई जो उसको डिसाइड करेंगे कि ये
00:33:31:08 जो है क्षत्रिय है कि नहीं है ना हम अब बात वही आ जाती है घूम फिर कर के कि समाज उन छह भाइयों की बात क्यों माने अगर उन्होंने कह दिया कि क्षत्रिय नहीं है स्वभाव से भाई साहब समाज इसलिए मानेगा जैसे मैंने अभी सबसे पहले एग्जांपल दिया था हमारे र में द बोल रहे हो ये क्यों माने ये क्यों मानेगा आप सच ही बोल रहे बता तो रहा हूं सुनिए तो मैं बता तो रहा हूं भाई साहब आप सुनते नहीं बोल देते हैं बता हमारे दरोगा जी पकड़े ग सा लाख घुस लेते हुए जब उसका पूरी दुनिया ने कहा घुस लेते पकड़े गए अब कोई भी व्यक्ति य नहीं कहेगा कि बा घूसखोर नहीं है इने सुनि भी कोई कह रहा है यह व्यक्ति घूसखोर नहीं है यह तो बहुत दानी है तो यह भाई साहब वो नैन का अंधा है नैन होते हुए भी अंधा कहा जाएगा ठीक है तो ये यानी की आपका मानना ये है कि जब तक कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं होगा तब तक उसको जो है उसका जो वर्ण है वो घोषित नहीं होगा हा समाज तो तभी घोषित करेगा जब उसके लिए प्रत्यक्ष मिल जाएगा उसका स्वभाव प्रत्यक्ष प्रमाण यानी कि स्वभाव कुछ भी हो व्यक्ति का अगर कोई प्रत्यक्ष प्रमाण उसके लिए मिल गया उसी से उसका वो घोषित होगा भाई साहब प्रत्यक्ष प्रमाण देगा
00:34:46:08 कहां से अपने कर्म से नहीं देगा स्वाभाविक कर्म से देगा ना अरे भाई स्वभाव उसका कुछ रहा हो उस पाच मिनट के बीच में उसके घुस लेने की लालच आ गया उसने पूरी जिंदगी जो अच्छा काम किया तो उसका वो घोषित हो जाएगा ना प्रत्यक्ष प्रमाण से भाई साहब क्या उसकी प जिगी किसी पले आप य बताइए स्वभाव उसका मूल स्वभाव कुछ भी रहा हो फिर भी इंद्रियों के वशीभूत हो कर के व ठीक स्वभाव से उलट काम कर देता है इंसान की नहीं कर देता है ददा कदा कर देता है कर देता है ना उसी समय प्र प्रमाण बन गया तो उसका ब्राह्मण क्षत्रिय व शूद्र वही से घोषित हो जाएगा बिल्कुल वही से नहीं होगा भाई साहब अगर किसी ने 10 दिन एक कार्य किया है ठीक है मेरा एक नर्मल उ आपकी बात सम हा सुनाइए सुना अगर कोई व्यक्ति मैं भाई कोई व्यक्ति 10 दिन जीवित रहा 10 दिन उसने न दिन दान धर्म किया 10 दिन उसने घुस ले ली तो उसका न दिन का रिजल्ट रहेगा ना रहेगा एक दिन में हम थोड़ कर तुम तो शद हो या तुमय हो अब बात ये आ गई अब बात ये आ गई कुल मिलाकर के मैंने आप कुछ नियम समझे कि पहली बात तो हम जब अपनी बेटी के लिए रिश्ता देखने जाएंगे तो
00:36:01:09 अपने जैसे लोगों को लेकर जाएंगे मगर बात यह हो रही है कि समाज जो है समाज आपकी बात को क्यों माने कि भाई आपने एक नियम दिया कि जब हम अपने बेटी के लिए रिश्ता देखने जाएंगे तो अपने जैसे लोगों को देखने जाएंगे तो यानी कि आप वहा पर किसी ब्राह्मण क्षत्रिय वैश शूद्र को ब्राह्मण क्षत्रिय वैश शूद्र घोषित करने नहीं जा रहे हैं बल्कि अपने लिए अपनी बिटिया या बहन के लिए लड़का देखने जा रहे हैं है ना मगर फिर ये बात चाह रहे हैं कि हमने उन पाछ दिनों में 10 दिनों में जो भी देखा समझा जाना तो उसको समाज जो है स्वीकार कर ले अब उसके बाद आपने अपनी बात को बल देने के लिए पूरा करने दीजिए अपनी बात को बल देने के लिए आपने कहा कि प्रत्यक्ष प्रमाण हम रखेंगे जैसे कि शायद आजकल के युग में फोटोग्राफी वीडियोग्राफी उसका कोई पकड़ लिया गया रंगे आतो है ना वह हम रखेंगे तो समाज मानेगा ठीक है और तीसरी बात यह कि पा 10 दिन में उसका जो है निचोड़ आ ही जाएगा ठीक हो सकता है ये निश्चित नहीं ये भी निश्चित नहीं है ये भी निश्चित नहीं मैंने समय किसी भी टाइम पर निश्चित नहीं कि किसी एक भी बार मैंने नहीं कहा कि समय पा
00:37:17:02 बताइए ना कि हम कब तक किसी को देखे कब तक किसी को चेक करते रहे कि ब्राह्मण क्षत्रिय वैश सूद है कि नहीं यदि हम अपने बहन या पुत्री के लिए देखने गए हैं तो हम पाच दिन में देख लेंगे हमें पसंद आ रहा अगर हम ये घोषित करने गए हैं हा अगर हम य घोषित करने गए हैं अगर हम ये घोषित करने गए हैं कि यह सामाजिक दृष्टिकोण से ब्राह्मण क्षत्रीय वैश शूद्र है कि नहीं तो क्या है उसका नियम सामाजिक दृष्टिकोण से हम देखने गए तो उसका हम जो जीवन गुजरा है 20 22 244 25 साल का उसके बारे में उसके जो मित्र संबंधी है अथवा और जो संबंधी है उनसे जानकारी लेंगे कि इसका कैसा रिकर्ड रहा है इन्ही आधार पर हम उसका अपने लिए घोषित कर लेंगे यानी कि वो जो मित्र संबंधी होंगे उन्ह उन पर आपको विश्वास होना चाहिए मैं भाई साहब अगर उसके 10 मित्र है दस से मैं पूछूंगा अब उसम रिजल्ट निकलेगा अगर छ कह रहे गलत है डेफिनेटली बात खत्म हो गई य पर मित्रों से पूछेंगे या कितनों से पूछेंगे उसके कितने मित्र होने चाहिए कम से कम जितने भी मैक्सिमम मिल जाएंगे जरूरी नहीं है 10 15 20 2 अगर मुझे सकता अच्छा चलिए ठीक है अब मैं आपसे पूछता हूं आप जो नियमावली बना
00:38:32:19 बता रहे हैं कि किसी को ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र घोषित करना है तो कैसे किया जाए सबसे पहले तो य ये बताइए कि ये आप करेंगे इसके लिए क्या पैरामीटर है शास्त्र का शास्त्र का मतलब आप ये चाह रहे हैं कि मैं शास्त्रों से कोई आपको एविडेंस दूं शास्त्रों भाई आपकी बात जैसे आपने जिम्मेदारी ली कि मैं आज घोषित करने जा रहा हूं किसी को कि ब्राह्मण क्षत्रिय वैश शुद्र है कि नहीं तो फिर दुनिया आपकी बात क्यों माने कि यू आर एलिजिबल और नॉट आप अधिकृत है कि नहीं किसी को ब्राह्मण क्षत्रीय वैश शूद्र घोषित करने के लिए मैंने ये नहीं क कि हां मैंने ये नहीं क कि मेरी बात इस फर्क यानी कि बात ये आपको इससे मतलब नहीं है कि समाज माने ना माने मैं मैं अपना समझ लूंगा इतनी सी बात है सुनिए बात भाई साहब आप कह रहे हैं समाज क्यों माने तो समाज मानेगा उसके स्वभाव देखकर ठीक है उसके स्वभाव क्या अपना काम धाम छोड़ कर के उसका स्वभाव देखने बैठ जाएंगे क्या उसके पास क्यों बैठ जाएंगे स्वभाव देखने क्यासे देखो स्से क्या पूरा समाज बै उसको स्व दिखेगा स् तोई साबता किसको बताओ किसको
00:39:48:08 अरे बोल रहा बोलने दीजिए मिनट बोल रहा बोलने दीजिए किसको किस आधार पर भेजा जाए ये बताइए पूरा समाज ना जाए किसी को एक को किसी को एक को निश्चित करके भेजा जाए वो किस आधार पर भेजा जाए भाई साहब कोई एक व्यक्ति नहीं जाएगा अरे चार जाएंगे 10 जाएंगे किसको किस आधार पर चुना जाए कि यह जाकर के चेक करेगा इसका स्वभाव क्या है किसको किस आधार पर वो सेना किस आधार पर चुनी जाएगी मैं कह तो रहा हूं क्यों चुनी जाएगी सेना भाई साहब अरे किसी का ब्राह्मण क्षत्रिय वैश शूद्र घोषित करना है कि नहीं आपको स्वभाव के आधार प नहीं करना है भाई साब मुझे नहीं करना ये उसका स्वभाव स्वयं घोषित कर रहा है यानी कि वो खुद बताएगा कि मैं छत्रिय में ब भाई साहब वो नहीं बताएगा उसका स्वभाव बताएगा स्व पता कैसे चलेगा इसका ये स्वभाव है कैसे चलेगा जब तक उसको देखोगे नहीं कुछ दिन जो आपने कहा जो आपने कहा जब तक उसको कुछ दिन तक देखोगे नहीं कैसे पता चलेगा हां हां जैसे आपने मेरे बारे में पता कर लिया कि मैं यहां पर प्रतिकार स्वरूप बैठा हूं ठीक है आपने कर लिया ना आपने मान लिया आपने माना मेरी बात को
00:41:03:14 नहीं माना मतलब इसका मतलब सिद्धांत ये सिद्धांत नहीं है हमें एक करने वाला ये मेरा व्यक्तिगत निर्णय हो सकता है सुनिए ये मेरा व्यक्तिगत निर्णय हो सकता है मगर ये काउंटरेक्ट तो हमें सिद्धांत चाहिए व्यवस्था करे जो लड़ाई करवाए वो वाला नहीं आप मुझे वो बताइए अगर किसी को ब्राह्मण क्षत्रिय वै सूत्र घोषित करना है तो उसको उसके स्वभाव को जानने के लिए किसको किस आधार पर भेजा जाएगा भाई साहब कोई भी व्यक्ति दूसरे का ब्राह्मण क्षत्रिय सूत्र घोषित नहीं करेगा पहली बात अब आप कहेंगे उ कौन करेगा कौन करेगा अब आपका दूसरा क्वेश्चन उसका स्वभाव कन मतलब उसे कौन घोषित करेगा तो ये उसके जो जीवन गुजरा है वो घोषित करेंगे और द जो ग्रंथ के अकॉर्डिंग है उसको घोषित करेंगे उसके गुरुदेव जैसा कि मैंने मनुस्मृति में पढ़ा है मैं आपसे पूछ आपसे आऊा एक एक करके बातें चलूंगा आपने क्या करा आपने क्या कहा कौन घोषित करेगा मैं आपने क्या बताया कोई घोषित नहीं करेगा बण सूत्र है कि नहीं
00:42:18:26 हा मनुस्मृति के अनुसार तो यही होगा होना चाहिए म के अनुसार गुरु घोषित करेंगे ब्राह्मण क्षत्रिय वै सूत्र है कि नहीं हाब बा लीजिए केवल मेरे अनुसार नहीं य हमारा ग्रंथ है मन स्मति उसके अनुसार भी है ठीक है ठीक है अभी आएंगे ग्रंथ पर भी आएंगे हम ग्रंथ पर भी आएंगे अभी मैं पूछ रहा हूं यह कहीं पर नियम है कि उसके गुरु उसका जो वो है घोषित करेंगे हा हा यह नियम है मनुस्मृति में वहा पर एक लोक है खा है गुरु घोषित करेंगे उसका उसका वर्ण क्या हैय गुरु घोषित करेंगे बताइए अभी बता रहा हूं एक मिनट
00:43:20:09 [संगीत] हम आप आप केवल श्लोक क्रमांक बता दीजिए हम देख लेंगे हा मेरे पास लिखे हु बता रहा हूं भाई साहब यह बताइएगा कि गुरु घोषित करता है हां यही तो मैंने भी कहा जी हां यह है अपना मनु स्मृति ठीक है भाई साहब और अध्याय नंबर है दो और श्लोक नंबर है 148 अध्याय दो हां श्लोक है
00:44:07:16 148 इसका संस्कृत है आचार्य तस यम जाति विधि बद वेद पारगी सावित्र सा सत्य सा अजरा अमरा ठीक है परंतु वेदों के पारंगत गुरु जो विधि पूर्वक सावित्री के द्वारा उसके लिए जन्म उत्पन्न करते हैं वह वास्तविक क्या उत्पन्न करते हैं क्या उत्पन्न करते हैं जन्म तो ये तो उसका दूसरा जन्म हो रहा है क्योंकि उसका यज्ञ पवित हुआ है इसमें ये कहा आ रहा है कि गुरु डिसाइड करेंगे गुरु घोषित करेंगे कि उसका वो क्या है और कैसे घोषित किया जाएगा ये घोषित नहीं हो रहा ये आपको नहीं लग रहा है मतलब यहां पर क्लियर सुनि अच्छा ठीक है इस क्लियर कर लेते हैं ब्राह्मण का जनेऊ किस समय हो रहा है बताइए हम ब्राह्मण के जनेऊ की मियाद क्या है मनुस्मृति में नहीं भाई साहब ये हमने नहीं पढ़ा है ये नहीं पढ़ा है हमने प पढ़ो पढ़ो दूसरे में है दूसरे ही उसम ठीक है पढ़ लेंगे ब्राह्मण का जने मैं बता रहा हूं
00:45:20:25 आपको ब्राह्मण का जनव होता है आठ से 12 वर्ष की उम्र के बीच आयु के बीच आठ से 12 वर्ष की आयु के बीच और अगर और अच्छा बनाना है और अच्छा बनाना है उसे ब्राह्मण तो उसका पाच से 11 या 12 वर्ष की आयु के बीच होता है ठीक है ठीक है ना पा से 12 से 12 पहला वाला आपका आ से 12 था अरे आठ से 12 भी है और अगर आपका मन है कि आप उसे और अच्छा ब्राह्मण बनाना चाहते हैं ज्ञानी बनाना चाहते हैं तो पांच से भी है वो भी लिखा है मिल जाएगा ठीक है ठीक है अच्छा तो यहां इस उम्र तक इस आयु तक वह गुरु के पास रहा नहीं होता है हां ठीक है तो यहां पर गुरु किस आधार पर उसको ब्राह्मण क्षत्रिय अथवा वैश के आधार पर उसका उपनीत कर रहा है जो उसका दूसरा जन्म हो रहा है वह आठ या पाच की उम्र में हो रहा है तो यहां पर किस आधार पर गुरु उसको ब्राह्मण क्षत्रिय अथवा वैश्य बना रहा है यह भाई साहब उस आधार बनाएगा कि व्यक्ति मेरे पास पाच वर्ष रहा है 12 वर्ष रहा है या अपने घर रहा है घर से मुझे मतलब नहीं है नहीं नहीं वो आया
00:46:36:01 ही वहां प है ना पाच वर्ष की उम्र में अब उसको क्या बनाए वो गुरु अब अब उसके लिए बनाने के लिए आठ से 12 मतलब कुल मिलाकर के आठ या 12 वर्ष तक उसके पास रहना पड़ेगा कुल मिलाकर के 12 भाई सुनिए पहले आप अपनी वो ठीक करिए जानकारी ये जो यज्ञ पवित है ब्राह्मण क्षत्रिय अथवा वै के अनुसार यह बताया गया है कि बालक की आयु जब आठ वर्ष की हो तब उसको उपनीत करा दीजिए आठ से लेकर 12 वर्ष के बीच में ब्राह्मण के लिए ये नहीं है वो आठ से 12 वर्ष तक रहेगा गुरु के साथ ना आठ वर्ष का जब वो हो वहां से लेकर 12 वर्ष के बीच में उसका यज्ञ पवित हो जाना चाहिए गुरु के द्वारा और उसके बाद वो गुरु के पास रहकर पढ़ता है तो पढ़ने से पहले गुरु के साथ रहने से पहले उसको किस आधार पर ब्राह्मण क्षत्रिय अथवा वैश्य बनाया जा रहा है बताइए ये भाई साहब आप कहां से बता रहे हैं कि मतलब पाच से 12 वर्ष के बीच ही बताया जाएगा अब मुझे भी लोक बताइए मनु स्मृति सेही बता रहा हूं यार अभी बताता
00:47:48:01 हूं रुको ढूंढना पड़ेगा यह देखिए मनुस्मृति दूसरा अध्याय 36 वा श्लोक गर्भ से आठवें वर्ष में ब्राह्मण का उपनयन संस्कार कराना चाहिए ठीक है ठीक है गर्भ से आठवा गर्भ से गर्भ से 11वें वर्ष में क्षत्रियों का और गर्भ से बवे वर्ष में वैश्य का उपनयन संस्कार कराना चाहिए तो यहां पर जब तक वह गुरु के साथ नहीं रहा है यज्ञ पवित्र होने के बाद उसको रहना है गुरु के साथ तो यहां पे गुरु किस प्रकार उसको घोषित कर रहा है कि वह जो है ब्राह्मण है वैश्य अथवा क्षत्रिय
00:48:45:26 है यदि वो घोषित कर रहे हैं इस आध जो आपने बताया कि भाई वो गर्भ से लिख रहे हैं ठीक है बढ़िया बात है इसे मैंने अभी पढ़ा नहीं है पढ़ लूंगा उसके बाद आपको मैं फिर से बता दूंगा दूसरी बात यदि हम इसको मानले तो आ वर्ष का बच्चा केवल चेपो चेपो करना जानता है बहुत जदा होशियार नहीं होता इस आधार में आप मनुम विरोधी है इतने में म विरोधी है उसका आप दूसरे को सुनेंगे भी मैं य नहीं मनुस्मृति विरोधी हूं मैं यह केवल इसको सही मान ले तो स्कंद पुराण स्कंद पुराण और ये है खंड 18 अध्याय 239 श्लोक संख्या 31 से 34 तक इसका विरोध हो रहा है ग्रंथों में ही जन्मने जाता बात करूंगा मैं इस पर बात करूंगा जन्मना जाते सूत्रा बोलिए अब आप यही बोलेंगे हा ये पूरा श्लोक है जन्मना जाति शूद्र बोलेंगे ना हां कहा पर आया है एक जगह पर आया है धर्मे हीना पशु भी समाना हां जिस व्यक्ति के पास जिस व्यक्ति के पास धर्म नहीं है वह पशु
00:50:01:07 है पशु है हा इसका मतलब क्या है कि वो माता पिता भी उसके पशु थे या वह उसका शरीर पशु वाला है मनुष्य का शरीर नहीं है इसका मतलब क्या है नहीं इसका देखि उसम लिखा है धर्म हीना म मनुष्य पशु ही समाना ठीक है पशु के समान है ना कि उसका स्कंद पुराण गुरु गीता में लिखा है जिसका गुरु नहीं है वो पशु है सीधे लिखा है पशु समान नहीं इस जिस जिसका गुरु नहीं है वह पशु है तो इसका अर्थ क्या हुआ कि वह शरीर से पशु पैदा हुआ है जानवर पैदा हुआ है या यह माने कि वह पशु वत है पशु वत है इसी प्रकार से जब इसी प्रकार से जब तक किसी चीज का किसी का उपनयन नहीं हुआ है तब तक वो शूद्र वत है शूद्र ही नहीं है शूद्र वत है उस कांटेक्ट में यहां पर ये जन्मना जाते आता है अब दूसरी बात ये आती है कि आप प्रमाणों की अगर बात कर रहे हैं कि यहां पर ये लिखा है यहां पर ये लिखा है कांट्रडिक्शन हो जाता है आपने किस परंपरा प्राप्त आचार्य के पास जाकर के इनका अध्ययन किया है आपने परंपरा प्राप्त
00:51:16:10 आचार्य से पूछा कि भाई अगर क्या कहते वो चैपो चैपो करता है आठ से 11 वर्ष की उम्र में तो फिर वो ये जन्मन जा शूद्र क्यों लिखा है आपने पूछा परंपरा प्राप्त आचार्य के पास जाकर उसी मैं आज आपके पास आया हूं आप आचार्य नहीं है लेकिन किसी आचार्य के शिष्य है ये मैंने पहले तो मैं आचार्य द्वारा बताया गया जो निर्णय है वो आपको बता रहा हूं जहां पर जन्मन जाते आया है वहां पर कहा गया है कि वहां शूद्र वत है वो राम जी का जने जब तक नहीं हुआ था उनके लिए कहीं भी शूद्र लिखा हुआ नहीं आया है बचपन से कृष्ण जी का जब तक जनेऊ नहीं हुआ था एक जगह उनको शूद्र नहीं बोला गया है बचपन से कोई एक एक ऐसा उदाहरण आप देख कर के बताइएगा शास्त्र में जिसका जनव नहीं हुआ हो तब तक उसे शूद्र कहा गया हो अगर वो क्षत्रिय कुल में जन्म लिए तो उन्हें क्षत्रिय कहा जा रहा है राघव कहा जा रहा है इसका चंद खैर आप है खैर खैर आप परंपरा प्राप्त आचार्यों का निर्णय पूछने आए थे यह रामानुजाचार्य जी का निर्णय है रामानुजाचार्य परंपरा का एक ग्रंथ है क्यों इसमें इन्होंने जन्म बनाम कर्म
00:52:31:21 गुण ये सब इसमें इनका संशोधन किया हुआ है इन्होंने इसमें प्रमाण भास भी बताए हैं कि कौन-कौन से प्रमाण भास है जिनका आलंबन लेते हैं लोग और उनका खंडन किया है यह परंपरा प्राप्त है ठीक है शंकराचार्य जी परंपरा प्राप्त है उनका भी कहना है कि जन्मना जाते शूद्र का अर्थ है कि जो जन्म जन्म से जो यज्ञ पवित होने तक वो शूद्र वत होता है क्योंकि शिक्षा नहीं होती उसके पास अज्ञानी होता है मगर उसका जोव है ब्राह्मण है वो उसका रहेगा ही ठीक है न इवन इकोन के अंदर भी इकोन जो कि पूरी तरीके से वर्ण व्यवस्था जो है जन्म जन्मना नहीं स्वीकार करता है वह भी जन्मना वर्ण व्यवस्था को आंशिक रूप से शाब्दिक भेद से मानते हैं दूसरी बात य है जैसे आपने कहा कि गुण कर्म और स्वभाव तो ो उपनिषद था शायद 10 पा साल छंद उपनिषद में पूर्व जन्म के कर्मों के आधार पर उसको इस जन्म का शरीर प्राप्त होता है और शरीर के आधार पर उसको शरीर
00:53:46:22 के आधार पर उसको कुल प्राप्त होता है वर्ण प्राप्त होता है और उसके आधार पर उसके आधार पर इस जन्म के उसको दोबारा से कर्म प्राप्त होते हैं अब अगर वो अपने वर्ण उचित कर्म को करेगा तो वो शुद्ध क्षत्रिय शुद्ध ब्राह्मण शुद्ध सूत्र शुद्ध वैश्य कहलाएगा अगर वो नहीं करेगा तो पतित ब्राह्मण पतित क्षत्रिय पतित वैश्य पतित शूद्र कहलाएगा इतना है उसको छका जाएगा मगर जो उसका ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र जो जन्म से है वो माना ही जाएगा और आपको दिखा दूं प्रमाण
00:54:23:04 भाष भाई साहब मेरा एक प्रश्न है अब आपसे यहीं पर आप सुनेंगे क्या जी भैया जी क्या आप मुझे सुन रहे हैं एक मिनट एक मिनट बताता हूं एक मिनट ठीक है यह देखिए यह रामानुजाचार्य परंपरा के आचार्य मैं अपनी परंपरा नहीं बता रहा हूं जगतगुरु शंकराचार्य जी की परंपरा से नहीं बता रहा हूं यह वो परंपरा है जो इकोन के द्वारा भी प्रामाणिक मानी जाती है कोई भी प्रामाणिक परंपरा ऐसी नहीं है रामानंदाचार्य निबार काचार्य रामानुजाचार्य हो कोई भी परंपरा ऐसी नहीं है जो जन्म से नहीं मानती है सिर्फ परंपरा का आलंबन लेते हुए तथाकथित जो स्कोन वाले हैं व कहते हैं नहीं जन्म और कर्म उसम मिक्स बात कहते हैं क्लियर बोलते ही नहीं है कुछ जब भी पूछो वो क्लियर नहीं बोलेंगे उनके फॉलोअर्स बोल देंगे लीडर्स क्लियर नहीं बोलेंगे अमोग लीला जी से पूछा गया कि भाई राम जी का कौन सा वो है वर्ण माना जाए राम जी कहीं पर ब्राह्मण दिखते हैं ज्ञान दे रहे हैं कहीं पर वो क्षत्रिय दिखते हैं वध कर रहे हैं तो कौन सा माना जाए तो वहां अमोग लीला जी ने कह दिया व वो कुछ नहीं है वो तो भगवान
00:55:38:04 है अरे भाई भगवान है तो हमारे आदर्श कैसे हो गए भगवान आदर्श नहीं होते हैं मानवो चित रूप में जब भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम हुए तब व हमारे आदर्श हुए भगवान आदर्श थोड़ी ना भगवान तो पृथ्वी बना रहे चंद्रमा बना रहे हैं सूर्य को खा जा रहे हैं वो आदर्श कैसे हो गए वो हमारे लिए टपल रूप में नहीं हो सकते उदाहरण नहीं है वो हमारा क्योंकि हम वो जो कर सकते हैं व हम नहीं कर सकते उदाहरण के लिए राम है अगर राम है तो हम उसको यह कहते वो तो भगवान है उनको अलग कर दो नहीं अलग नहीं कर सकते मर्यादा पुरुषोत्तम रामो विवान धर्मा तो वोह अपनी बातें कभी स्पष्ट कहते ही नहीं है ठीक है ये निषे प्रमाण है ये निषे प्रमाण है निषे प्रमाण में इन्होंने कहा ऋगवेद विश्लेषण भी करेंगे एक 149 पांचवा मंत्र अयम सा होता यो द जन्मा जन्म से जो जन्म से दज होता है वही वेदोक्त कर्मों में अधिकृत है र आप अब बात करते हैं कि
00:56:53:06 आपने परंपरा प्राप्त आचार्य से शास्त्रों का अध्ययन किया शस्त्र का संदर्भ साब और बात बाद में कर लेना पहले जो अभी आपने अपने प्रमाण दिए उनसे मेरा कुछ प्रश्न है सबसे प आपने लास्ट वाला एक प्रमाण दिया श्री राम जी का भगवान श्री राम जी का इन्होंने जो अवतार लिया जिसे हम जन्म कह सकते हैं कुछ लोग कहते हैं वैसे नहीं भी कहना चाहिए जैसा सूटेबल लगे ठीक है कौन से कुल में लिया था भाई साब क्षत्रिय कुल में जी क्षत्रिय कुल में लिया था अब क्षत्रिय कुल में लेने के बाद क्षत्रिय हो गए ठीक है अब क्षत्रिय कुल में जन्म लेने के बाद उनके जो श्रीमद भगवत गीता के अनुसार उनके जो कार्य होने चाहिए थे वीरता शक्ति संकल्प दक्षता युद्ध में धैर्य उदार था नेतृत्व यह उनके पास थे लेकिन अब वो ज्ञान भी देते हैं सा वो तो क्षत्रिय में थे उनका तो वण क्षत्रिय है वो ब्राह्मण वाले कर्तव्य क्यों कर रहे हैं अरे भाई इसीलिए तो मैं कह रहा हूं कि कर्म के आधार पर आपका वर्ण सुनिश्चित नहीं होता है इसीलिए तो ये कह रहे हैं कर्म तो एक ही दिन में सुनिए एक ही दिन में माता का स्वभाव है अपने बच्चे की रक्षा करना वो हो गई क्षत्रिय
00:58:08:27 उसका स्वभाव है बच्चे की सेवा करना वो हो गई शूद्र उसका स्वभाव है अपने बच्चे को खाना खिलाना वो गई वैश्य उसका स्वभाव है क्या कहते हैं अंदर जाकर के वो बच्चे को पढ़ाना वो गई ब्राह्मण कितनी बार बदलेगा वण यह कोई व्यवस्था है क्या आपकी व्यवस्था देखिए सुनिए आपकी व्यवस्था देखिए पहले भाई साहब आप सुनिए एक मिनट मुझे पूरा करने दीजिए आपकी आपकी वस्था देखिए आपकी व्यवस्था देखिए पहले कि भाई कौन जाएगा सुनिश्चित करने पता नहीं कितने दिन तक चेक किया जाएगा पता नहीं उसको दूसरे लोग मानेंगे कि नहीं मानेंगे पता नहीं जब आपसे मैंने पूछा कि भैया ये यहां पर लिखा हुआ है कि आ वर्ष की उम्र में जनेऊ हो रहा है वहां पर गुरु आपने कहा गुरु घोषित करेगा तो जब मैंने कहा कि गुरु तो भैया आठ वर्ष की उम्र में कर रहा तो आपने कहा पता नहीं तो आप पहले ये सब चीज पता कर दूसरी बात अब सीधी बात आ जाती है जब आप जब आप प्रमाण की बात करते हैं ग्रंथ की बात करते हैं तो आपको ग्रंथ प्राप्त कैसे हुए यह बताइए हा ग्रंथ प्राप्त कैसे हुए यदि आपका ये सवाल है किंतु आप यह ध्यान रखना कि आपने अपना प्रमाण दिया और उनके जो मैं प्रश्न कर रहा था उनके उत्तर नहीं दिए आपने तब तक आपने अपना प्रश्न कर आपने से प्राप्त किएरा
00:59:24:12 प्रश् ठीक आप बताइए होता जाएगा इसलिए आप बताए ग्रंथ की अगर आप बात कर रहे हैं तो आपने ग्रंथों का अध्ययन कहां से किया है मैं आपको विषय ध्यान दिला देता हूं विषय ध्यान दिला देता हूं मैंने कहा कि आठ से 11 वर्ष की उम्र में ब्राह्मण का जनेऊ होना चाहिए तो गुरु वहां पर किस आधार पर उसका जनेय करेगा ब्राह्मण क्षत्रिय अथवा वैश्य के आधार पर तो आपने मुझसे कहा किय मैं पढ़ूंगा एक मिनट तो आपने मुझसे कहाय मैं देखूंगा क्योंकि यहां पर विरोध हो रहा है जन्मना जा शूद्र का ठीक है तो अब जब आपने यहां पर विरोध किया तो फिर मैं कहूंगा कि यह जो ग्रंथ की वजह से आप असमंजस में है वोह ग्रंथ आपने पढ़े कहां से हैं यह प्रश्न आएगा ना आपको कैसे मिला स्कंद पुराण हा तो आपने जब ये पूछा तो बता द समस्या का कारण है जो आपकी समस्या का कारण है वो समस्या आपके पास आई कहां से है हा आप यह पूछ रहे आपने ग्रंथ कहां से प्राप्त किए तो श्रीमद् भगवत गीता गीता प्रस गोरखपुर से प्राप्त की गीता कैसे आए यह उनको पता होगा उनसे पूछिए आप तो फिर जब आपको पता ही नहीं है फिर आपसे बात क्या करें भाई गीता प्रेस गोरखपुर आपके लिए
01:00:39:20 गीता प्रेस गोरखपुर आपके लिए प्रमाण है या नहीं आपने मुझसे यह पूछा आपके पास ग्रंथ कहां से आए मैं आपसे अगला प्रश्न पूछ रहा हूं अगला प्रश्न गीता प्रेस गोरखपुर आपके लिए प्रमाण है कि नहीं के द्वारा जो ग्रंथ आए हैं उम जो श्लोक लिखे हुए उसका अथ लिखा हुआ है गीता प्रेस गोरखपुर आपके लिए प्रमाण है कि नहीं भाई वो पढ़ूंगा सब बताऊंगा हा प्रमाण है एक प्रकार से प्रमाण का आधार क्या है प्रमाण का आधार क्या है आपका क्या है प्रमाण का आधार प्रमाण का आधार भाईब आपको यह लगता है कि नहीं कि उसने सच छापा है कि झूठ छापा है हा अब ये सच छापा है झूठ छापा है ये आपके लिए या मेरे लिए केवल मैं आप वो निश्चित नहीं करेंगे इसके लिए बहुत पब्लिक है पूरी दुनिया है यदि सभी लोग सही मान रहे हैं जैसा कि भगवान राम के सम हुआ संख्या बल के आधार पर तय होगा कि सच है या झूठ है बिल्कुल तो दुनिया में सबसे ज्यादा ईसाइयों की तादाद है उनका कहना है हमारे जो ग्रंथ है उनके बाद मुस्लिम उनका कहना हमारे ग्रंथ सब गलत
01:01:54:25 है हम तो मान ले इस बात को क्यों मान ले यदि मैं ईसाई होता तो मैं मानता यदि मैं मुस्लिम होता तो मैं मानता ना चलिए चलिए ठीक है आपसे बात करके अच्छा लगा बहुत बढ़िया अच्छा लगा और आप परंपरा प्राप्त आचार्यों के सानिध्य में अध्ययन करें और उसके बाद समझ में ना आए क्या आपने जो आंसर दिया जो आपने आंसर दिया उनके तर्क है उनका उत्तर देना चाहेंगे या नहीं आपसे मैंने पूछा आप आपकी बातें सारी खत्म हो रही है ना जब आप कह रहे हो मैं ईसाई हगा तो ई की बात मानूंगा भाई शाश्वत सत्य क्या है आपकी प्रमाण बुद्धि क्यों है स्कंद पुराण में गीता प्रश् पर विश्वास है कि नहीं है अरे विश्वास है मैंने कहा तो था और कैसे कहूंगा फिर आपने कहा किस आधार प तो गीता प्रने माना है क्या जन्म से ब्राह्मण क्षत्रिय वै शूद्र नहीं होते मैंने तो ये नहीं कहा हा मैंने कुछ किताबें पढ़ी है उनमें लिखा हुआ है कि जन्म से नहीं होते श्रीमद रामचरित मानस में भी लिखा हुआ है आप जो कह रहे हैं ना कि भाई जन्म से होता है य यह सब सही है तो गोस्वामी श्री तुलसीदास जी ने य जो राम चरित मानस है इसम गलत लिख दिया और उसके टीका का की श्री हनुमान प्रसाद जीता क्या लिखा है क्या लिखा है इसम बता रहा
01:03:09:25 एक मिनट भाई सा इसमें है उत्तर कांड और श्लोक नंबर है व सॉरी दोहा नंबर 86 861 [संगीत] भैया रामचरित मानस का वो जो दोहा है जरा वह कोई टाइप कर दीजिए शूद्र शूद्र ना पूजू वेद प्रणा वाला वो कोई टाइप कर दीजिए जरा
01:03:55:03 [संगीत] पहले इस मैं बोल दू एक बार सब लोग सुन भी लेंगे आपके दर्शक है हां 86 पॉइंट क्या बताया आपने उत्तरकांड हां 861 ये है एक पिता के विपुल उत्तरकांड ठीक है हम एक पिता के विपुल कुमारा होय पतक गुण शल अचारा को पंडित को तापस ज्ञाता और को धनवंत सूर को उदाता अब यहां पर लिख रहे हैं कोई भाई एक ही पिता के पुत्र है कोई पंडित है कोई तपस्वी कोई ज्ञानी है कोई धनी है कोई शूरवीर है और कोई दानी है य पर य पर आपके मत के अनुसार जन्म से होना चाहिए था एक पिता यदि ब्राह्मण है तो उसके सभी पुत्र ब्राह्मण होते इसलिए कह रहा हूं क्योंकि इसीलिए तो मैं कह रहा हूं कि कर्मों के आधार पर नहीं डिसाइड होता है वर्ण योग्यता ड होती है मैंने और क्या कहा अब यह बताइए आप रामचरित मानस आपके पास कैसे आई फिर आपने भाही प्रश्न कर लिया मैंने आपको पहले बताया मेरे पास राम चरित मानस गीता प्र से आई अब अब मैं आपको दोआ पढ़ के बता रहा हूं इसका वो श्लोक क्रमांक भी दे दीजिए पूज विप सकल गुनीना शूद्र न पूजू वेद
01:05:11:22 प्रणा इसी में लेख लीजिए पूज विप सकल गुण ना शूद्र न पूज वेद प्रवीणा जब वेद प्रवीण होने से ही ब्राह्मण तय हो रहा है तो फिर वेद प्रवीण होने के बाद उसको कहते हुए ना पूछने की बात क्यों की जा रही है यही रामचरित मानस में इसीलिए कह रहा हूं रामचरित मानस रामचरित मानस लिखी है तुलसीदास जी ने सुनिए तुलसीदास जी है रामानंदाचार्य परंपरा के जो है आचार्य उसके बाद उस परंपरा के जो वर्तमान के आचार्य है वह है रूप नरेशा आचार्य उनसे जाकर के आपने पढ़ा रामचरित मानस को कि यहां पर ये लिखा है यहां पर य लिखा है अगर वेद में प्रवीण होना अगर ज्ञानी हो जाना अगर ज्ञानी हो जाना ही यह तय करता है कि वोह जो है शूद्र नहीं ब्राह्मण है तो फिर वेद प्रवीण हो जाने के बाद भी उसको शूद्र कहते हुए ना पूछने की बात क्यों की जा रही है
01:06:15:13 बताइए मेरी बात भी सुन लीजिए आपरी चर्चा आपसे काफी देर तक हो गई है जनता को जो समझना था वो समझ चुकी है आपके पास कई सारी चीजों का आपने उत्तर नहीं दिया आपने नहीं बताया कि उसको 10 दिन देखना है कि 50 दिन देखना है आपने नहीं बताया कि घोषित कौन करेगा एक मिनट एक मिनट जब घोषित करने की बात आई तो आपने यह कहा कि भाई गुरु घोषित करेगा बहुत देर के बाद आई वो बात हालांकि कि गुरु घोषित करेगा जब मैंने शुरुआती पैरामीटर पूछा था तब भी आपने ये बता दिया कि भाई मैं अपने मित्रों में देखूंगा जिसको हमने क्लेरिफाई किया यही होती है जन्म एक मिनट एक मिनट मुझे पूरा कर मुझे पूरा करने पूरा करने दीजिए मैं बोल रहा हूं उसके बाद आप भागना नहीं मुझे बोलने मिनट एक मिनट ये सब कुछ हुआ उसके बाद क्या हुआ कि जब यह वाली बात आई मैंने कहा जब आपने यह कहा कि गुरु घोषित करेगा तो मैंने आपको बताया कि गुरु आठ वर्ष की उम्र में कैसे घोषित कर रहा है जब वो पहली बार संभवत मिल रहा है शिष्य से एक मिनट पूरा बोलने दीजिए अब जब गुरु की बात आ गई तो आपने कहाय फिर तो एक कांट्रडिक्शन है इसका मतलब आप प्रमाण के आधार पर ही मानते हो आपके पास तर्क तो प्र प्रमाण के आधार पर आप यह मानते हैं कि जो है वर्ण
01:07:30:21 व्यवस्था जो है जन्म से क्योंकि आप जन्म सूद को ले आए ठीक अब मैं ज जन्मना जाते शूद्र को जब लाया तो मैंने आपसे पूछा आपके गुरु कौन है आपका गुरु कोई नहीं है ना गीता प्रेस है ना ही रूप नरेशा आचार्य है ना शंकराचार्य ना राघवाचार्य है कोई आपका गुरु है ही नहीं आप मुझे बताइए कहां लिखा है इंटरनेट से या फिर ग्रंथों को खरीदकर स्वयं पढ़े मैं स्कंद पुराण में आपको दिखा रहा हूं गुरु गीता में साफ साफ लिखा हुआ है मैं यहां पर बाद में डाल भी दूंगा इसके डिस्क्रिप्शन में कि मनुष्य चाहे चारों वेद पढ़ ले सारे शास्त्र पढ़ ले सारे उप पुराण पढ़ ले
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→ Used in: A · Live Discussion with Rampal follower क्या ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी नहीं है? #rampa... at 8:04 ↗
01:08:10:12 पुराण पढ़ ले जप तप व्रत दान पुण्य कर्म तीर्थ दान यज्ञ सब कुछ व्यर्थ है अगर उसका कोई गुरु नहीं है क्योंकि ये सभी चीजें आपकी मति को भ्रष्ट
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01:08:19:28 कर देंगी और वो हो रहा है भाई आपको अगर कोई चीज समझ में नहीं आ रही है तो आप को गुरु के पास जाने की आवश्यकता है आप किस गुरु के पास गए ग्रंथों के लिए हमारे हमारे सनातन धर्म में केवल ग्रंथ पर आधारित बात नहीं है गुरु गोविंद और ग्रंथ राम जी व के पास गए रामो विक्रय वान धर्मा आपके गुरु कौन है कौन है आपके गुरु मैंने बताया था भाई साहब मैंने जिन जिन से शिक्षा लिए उनके नाम मैंने आपको बताए अरे आप उनका विरोध कर रहे हो आप उनका विरोध कर रहे हो तुलसीदास जी की शिक्षा का आप विरोध कर रहे हो तुलसीदास जी कह रहे शिक्षा का मैं प्रमाण दे रहा हूं आपको विरोध लगर ना तुलसीदास जी के जो अच्छा ठीक है चलिए एक बात बताइए तीन बेर खाती थी वह तीन बेर खाती है इसमें बेर शब्द का उपयोग दो बार हो रहा है अब आप दोनों का मुझे अर्थ बताइए कि किस बार बेर का शब्द का उपयोग किस वजह से लिया है अब आपके प्रश्नों का उत्तर मैं बाद में दूंगा पहले जो आपने विश्लेषण किया ना कि आ से 12 वर्ष के बीच और राम जी का वर्ण क्या आप उस पर उत्तर देंगे अपने केवल आप प्रश्न करने आए है या आप अपने भी उत्तर देने आए हैं मैं आया था आपकी जिज्ञासा शांत
01:09:35:03 करने मैंने को जो पब्लिक को दिखाना था वो दिखा दिया जिज्ञासा मेरी शांत होनी थी तो मेरे प्रश्न होते ना आप जिज्ञासा मैंने आपको बता दिया आप गुरु के पास जाइए परंपरा प्राप्त गुरु के पास जाइए वहां से जब वहां से जब आप अध्ययन कर ले तब आइए तब आप जिज्ञासा यदि आपके बस का नहीं जिज्ञासा सांत करना तो क्यों आए यहां पर आप कहते थे भाई मैं तुम्हारी जिज्ञासा शत नहीं कर सकता मेरी बात मान ही नहीं रहे हो तो मैं क्या करूंगा मैं आपके करके आपको अपनी बात बुलवा आपसे मैंने कहा आपका गुरु कौन है आपका गुरु कौन है फिर पूछ रहा हूं मैं कह तो रहा ह आपसे मैं आपकी सुनिए तो मैं आपकी बात मानूंगा आपने मुझसे कहा ये ये होना चाहिए अब मैं उसमें कह रहा हूं ठीक है आपकी बातें मेरा इसमें कुछ प्रश्न उठ रहा है आप उसका उत्तर देंगे अब आप मेरे गुरु के पास जाओ दे तो दिया और नहीं दिया ना बता बताइए सबसे पहले आपने दो प्रमाण दिए थे एक तो दिया था राम जी का वर्ण तो जन्म से अगर हम ण माने तो उनका वर्ण हो गया क्षत्रिय भाई साब फिर वो ज्ञान क्यों दे रहे मुझे इसका उत्तर दीजिए अरे क्षत्रिय होने का मतलब ये नहीं है कि वो कुछ भी बोलेंगे ही नहीं कि तुम ये करो या तुम्हे ये करना चाहिए इसीलिए कह रहा हूं कर्म से इसीलिए कह रहा हूं कर्म से वर्ण घोषित नहीं
01:10:50:03 होता है क्योंकि वो जो क्षत्रिय भी है वो भी य काम करता है वो भी ब्राव की दृष्टि से देख सकते हो नहीं समझना है आपको मना करना है तो आपकी बात है मेरा प्रश्न यह नहीं था कर्म से होता नहीं होता मेरा प्रश्न था राम जी का वर्ण जब क्षत्रिय है तो उनको सूर वरता वाले कार्य करने चाहिए फिर वो ज्ञान क्यों दे रहे हैं ये कार्य तो ब्राह्मण के लिए दिया जन दे रहे हैं अमुक अमुक स्थितियों में ज्ञान देना उस क्षत्रिय की सीमा में भी आ जाता है मगर ऑफिली वो ज्ञान नहीं दे सकते ऑफिली वो ज्ञान नहीं मतलब अमुक अमुक समय में मतलब अमुक अमुक समय में व्यक्ति का जो कर्म है वो बदल जाएगा मतलब कर्म सनातन नहीं धर्म नहीं बदलेगा नहीं कर्म संता कैसे आ जाएगी कर्म संता कैसे आ जाएगी वो व्यास ग में बैठ सुनिए ब्राह्मण मैं बता रहा हूं ब्राह्मण क्षत्रिय वैश शूद्र होने के नाते उनका जो ऑफिशियल जो वर्ण का काम आएगा वो व्यास गद्दी में बैठे क्या या व्यास गद्दी बैठे क्या उन्होंने यज्ञ करवाया क्या उन्होने ज उन्होंने ज्ञान दिया अरे भाई ज्ञान तो ये भी है कि अगर मैं ए फर एप्पल सिखा दूं वो भी ज्ञान हो जाएगा उसको उसका वर्ण थोड़ी ना मान लेंगे वर्ण के बाहर की बात
01:12:05:08 कर रहा है उन्होने एल नहीं सखा उन्होने भक्ति का ज्ञान दिया था नवदा भक्ति दिया रामचरित मानस में हा उन्होने जो उसको भगवत चर्चा कहते हैं उसको व्यास बनना नहीं कहते हैं वो व्यास नहीं बने उसको भगवत चर्चा कहते हैं उन्होने अगर अगर उससे किसी को ज्ञान मिल रहा है तो उस ज्ञान को क्षत्रिय की सीमा में लिया जा सकता है अच्छा ये कहा से अने प्रमाणित कर दिया ये गुरुओं से परंपरा प्राप्त आचार्यों से अच्छा मतलब गुरुओं ने कर दिया ग्रंथों ने नहीं किया गुरुओं ने कर दिया चलिए बढ़िया बात है परंपरा प्राप्त गुरु कर सकते हैं इसीलिए तो इसीलिए तो परंपरा प्राप्त आचार्य होते हैं वो सवाल ही नहीं है दूसरा मेरा ये प्रश्न था आपने जो कहा ब्राह्मण का जन् आ से 12 वर्ष के बीच मतलब जो ब्राह्मण है अब आठ से 12 वर्ष के व्यक्ति के लिए ब्राह्मण बना दिया अब उसके पश्चात उस पर नियम लागू हो जाते हैं ब्राह्मण बनने के बाद अब क्या कार्य करेगा सुनिए ठीक है उसे शांति प्रिय रहना है आत्म संयम रखना है तपस्या करनी पवित्रता रखनी है ससता रखनी है सत्य निष्ठा रखनी ज्ञान रखना है अब आ से 12 वर्ष के व्यक्ति को आपने अभी से जन पहना दिया वो क्या ज्ञान देगा क्या ज्ञान है उसके पास यानी कि आप मनुस्मृति को नहीं
01:13:21:15 मानते मेरा प्रश्न यह नहीं है मनुस्मृति वाला मेरा प्रश्न कुछ है और आप उत्तर कुछ भी दे रहे हैं अरे भाई तो पहले मैं डिसाइड करूं ना कि आप सनातनी है सनातन की सीमा के बाहर है मैं आपको जवाब दूंगा पहले आप अपना स् है क्लियर करिए आप आप अपना उत्तर नहीं दे रहे जिस प्रकार आप दूसरे से उत्तर चाहते हैं कि इसी का उत्तर दो जस्ट आप उत्तर नहीं देते आप उसने सवाल को छड़ते हो मैं उत्तर दे चुका हूं दे भी रहा हूं आपको उत्तर दूंगा आप अपना स्टैंड क्लियर करिए इतनी जगह पर आपको मनुष पति पर शंका हो रही है या नहीं इतनी जगह पर आपको ये आपके दर्शक देख रहे हैं ठीक है आपने उत्तर मेरे प्रश्न का दिया है या नहीं दिय आपके दर्शक देख रहे हैं मेरा प्रश्न था आ से 12 आ से 11 वर्ष के व्यक्ति का ब्राह्मण ने गुरुदेव ने जने कर दिया उसे ब्राह्मण बना दिया उसके बाद व कहां से ज्ञानी हो गया कहां से उसके अंदर ये सब गुण आ गए ब्राह्मण वाले ये ये सब गुण आएंगे उसम वो सीखेगा लर्न करेगा उसका ब्राह्मण सुनिए ब्राह्मण के अनुसार उसका जनेऊ हो गया है अब वो अपनी क्या कहते हैं जो क्या कहते गुरु गुरुकुल है वहां रह कर के वेदा अध्ययन करेगा पाठ करेगा नियम संयम सीखेगा और यदि वो इन सब में फेल हुआ तो वो पतित ब्राह्मण हो जाएगा अगर पास हुआ अगर वो
01:14:36:19 करना सीख गया तो वो ब्राह्मण ब्राह्मण उचित ब्राह्मण कहलाएगा ब्राह्मण उचित कार्य करने वाला ब्राह्मण मतलब वो प्रॉपर एक परफेक्ट ब्राह्मण बनके बाहर निकलेगा अन्यथा जो ब्राह्मण के वेदोक्त कार्य होंगे उनसे बहिष्कृत किया जाने वाला तिरस्कृत किया जाने वाला पतित ब्राह्मण बनकर बाहर निकले यह आपने गुरु परंपरा से बोल दिया है या किसी ग्रंथ से बोला है कि ग्रंथ में ऐसे लिखा हुआ है कैसा जो आपने अभी बोला ने जो भी बताया है वो ग्रंथ के आधार परही बताया है ग्रंथों के आधार पर ही बताया है मगर आपकी भाषा में आपके शब्दों में बिल्कुल एज इट इज लिखा हुआ हो यह कोई आवश्यक नहीं है मैंने आपको बताया ऋग्वेद में ऋग्वेद में क्या बताया कि जन्म से जो होता होगा जन्म से जो दज होगा वही यज्ञ में होता हो सकता है जन्म से और यह आपको मैंने प्रमाण दिखा दिया ऋगवेद का अब यहां पर लिखा हुआ जन्म जन्म से होने के बाद उसके कर्म अगर होंगे तो वो होता बनेगा कर्म नहीं होंगे तो हटा दिया जाएगा मगर मगर हमक किसको करेंगे जो जन्म से होगा जैसे आपने कहा हम चेक किसको करेंगे बिटिया की विवाह के लिए अपने भाई बंधुओं में देखेंगे यह जो शुरुआती पैरामीटर है यही है जन्म से वर्ण मगर ऐसा
01:15:51:26 नहीं है कि उसको हटाया नहीं जाएगा अगर उसके कर्म जो है उसके अनुसार नहीं होंगे तो हटा दिया जाएगा अब आपसे कात चर्चा हो गई है जो हमें सामने लाना था आपले आए जनता डिसाइड करेगी आपका आने के लिए आभार रविंद्र कुमार जी ठीक है आभार और आपने जो आंसर दिया उनको जनता देख रही है आपने कितने सटीक आंसर दिया राम जी का आपने बताया ज उरण करके बता दिया
01:17:05:16 वह अपना द्वेष कुछ द्वेष था उनके मन में उसके लिए वह आए थे और कह रहे थे कि भाई मुझे कोई वह नहीं है एक माइंड सेट होता है ना पता होता है खैर इनके पास इस बात के जवाब नहीं है कि अगर हम कर्म के अनुसार किसी व्यवस्था को स्वीकार करते तो वो व्यवस्था एमप्लीफाई कैसे होगी समाज में एमप्लीफाई करने की तो जगह ही नहीं है कि अगर किसी को पहचान करनी है तो हम कहां से शुरुआत करें अगर हमने कोई भी स्टार्टिंग पॉइंट बोल दिया तो हम वहां पर एक काउंटर कर सकते हैं कि नहीं भाई क्या जरूरी है कि पान की दुकान पर खड़ा हुआ व्यक्ति वही हो अच्छा हो क्षत्रियो हो वैश्य शूद्र हो स्टार्टिंग पॉइंट हर कोई अपने घर में अगर आर समाजी भी है अगर वो आर समाज में तो कई जगहो पर कुल की बात की गई है कि अपने से उच्च कुल में करें सत्यार्थ प्रकाश तो लोग अपने घर में अच्छा घर हो अब ये अच्छे घर का जो पैरामीटर लिया गया है इससे सेट नहीं होता है कि अच्छे घर का लड़का अच्छा होगा तो इसका मतलब ये जो हम लोग वैकल्पिक वर्ण व्यवस्था तो तब भी ले रहे हैं जन्म से अच्छा कर कह के अपने मित्रों में देखूंगा ये कह के मगर जो शास्त्रो चित है परंपरा प्राप्त गुरुओं द्वारा दी गई
01:18:20:16 है उसको हम नकार क्योंकि हमारे मन में बीज डाला गया है नकारने का भाई आप किसी रिक्शा चालक के यहां क्यों नहीं जाते यह देखने कि उसका बेटा अच्छा है कि नहीं क्यों जाएंगे आप किसी अच्छे घर में ही जो आपके अनुरूप अच्छा हुआ आप किसी किसी भी श्रम कार्य करने वाले श्रमिक के घर क्यों नहीं जाएंगे चेक करने कि उसका बेटा कहीं विदेश में नौकरी तो नहीं कर रहा है आपकी शुरुआती नजर अच्छे घर पर ही क्यों होगी जो आपके अनुसार अच्छा है यही तो आपकी वैकल्पिक जन्मना वर्ण व्यवस्था है जिसको आपने स्वीकार कर रखा है बस वो नाम नहीं लेते आप ब्राह्मण क्षत्रिय वैश शूद्र का क्योंकि आपको विरोध करना है परंपरा का परंपरा प्राप्त आचार्यों का तो पूरी जो सार है जब इनसे बोला गया कि कुल मिलाकर के बात आई प्रमाण कि जब उसका जने होता है बचपन में तो वहां पर पहली बात इन्होंने कहा कि गुरु घोषित करता है गुरु घोषित गुरु के द्वारा घोषित होने पर जब इनसे कहा गया प्रमाण दो तो इन्होंने प्रमाण नहीं दिया गुरु घोषित करता है इन्होंने कहा कि गुरु वहां पर उनका अच्छा प्रमाण जब इन्होंने वहां पर प्रमाण प्रस्तुत किया तो उसी से निकल के आया भाई जब गुरु यज्ञ पवित करता है जब उसको दूसरा जन्म देता
01:19:35:21 है तो वहां घोषित हो जाता है ठीक है इसको घोषणा मान ली गई अब क्या आ रहा है कि वो यज्ञ पवित कब होता है 11 वर्ष की उम्र तक तो इनको पता नहीं है फिर ये शास्त्रों का मजाक उड़ा रहे हैं चैपो चैपो कि उसको यह हो जाएगा वो हो जाएगा तो फिर ये सब है फिर इनके मन में कंट्रक्शन है शास्त्रों को लेकर जन्म शूद्र तो फिर ये पूछा गया आपने शास्त्र कहां से पढ़े तो वो पता नहीं है वो आधा आधा इसकी ईट उसका रोड़ा और भानुमति का कुनबा जोड़ा है तो जिनका आप शास्त्र लेकर पढ़ रहे हो उसी में लिखा हुआ है कि भैया गुरु के पास जाकर अध्ययन करो तो अध्ययन क्यों नहीं किया अब जिसने किया है यदि उससे शंका पटानी है तो उसने अपने गुरु के द्वारा क्या बात बताई गई बता दिया आपको कि जहां पर जन्मना जाते शूद्र है वो शूद्र वत कहा गया है शूद्र नहीं कह दिया गया है जैसे जिसका गुरु नहीं वो पशु है तो पशु नहीं है अब ऋग्वेद में कहा गया जो भ्रूण की हत्या करते भ्रूण को खाते हैं वो राक्षस है वोह राक्षस योनि में नहीं है राक्षसों जैसे हैं मगर उनको राक्षस कहा गया सीधे-सीधे जो अंडा खाते हैं है ना तो उनको सीधे-सीधे राक्षस कहा गया रूण हत्या करने वालों को राक्षस कहा
01:20:51:08 गया तो ये सारी बातें हैं इसके बाद इनको बस को तर्क करने हैं कि क्या कहते हैं वो शुरू में आए थे कि भाई मैं तो अपनी जिज्ञासा शांत करने आया हूं तो जिज्ञासा शांत करनी है तो आपको बता दिया गया कि जो आपके रेफरेंसेस है उसमें शूद्र वत की बात हो रही है तुलसीदास जी की बात पूछी गई तो तुलसीदास जी का ही प्रमाण भी दे दिया गया कि पूज वि प्र सकल गुण हीना और शूद्र ना पूजू वेद प्रवीणा वो भी दे दिया गया तो उसमें भी नहीं राजी है मतलब हम मानेंगे शास्त्र को मगर आंशिक रूप से जितना जितना हम तय कर उतना मानेंगे यह सारी चीजें हैं तो आज हिंदू राष्ट्र गोष्ठी का आयोजन
01:21:35:00 है अ सभी शुद्ध सनातनी हा अंतरजातीय ववा करने से बचे और इसका जो मेन उद्देश्य है वो यही है कि जो वंश परंपरा द्वारा आपको जो प्राप्त है वो जो जीनस है वो जो जेनेटिक्स मिल रहे हैं आपको वंश से उसकी शुद्धता बनी रहे इसके लिए आवश्यक है कि जितना हो सके हम शास्त्रोक्त नियमों के अनुसार विवाह करें जिससे कि एक शुद्ध ब्राह्मण बचा रहे पृथ्वी पर एक शुद्ध क्षत्रिय एक शुद्ध वैश्य एक शुद्र शुद्ध शूद्र बचा रहे अब बात ये आती है कि यदि इसके उलट इनसे जब पूछा जाएगा तो इनके पास कोई उत्तर नहीं है कि गुरु कैसे घोषित कर रहा है भाई इनकी व्यवस्था क्या है वो तो इन्होने बताई नहीं कि किसके द्वारा किसी का ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र घोषित होगा इनके पास क्या व्यवस्था है इसके बारे में क्योंकि जो य व्यवस्था बता रहे वह शास्त्रों में तो है नहीं जब इन्होने शास्त्रों से आंसर दिया तो काउंटर हो रहा है क्योंकि वो आ साल की उम्र वाली बात आ गई तो इनके पास ये क्या है कि कोई व्यक्ति किस आधार पर अपने आप को अधिकृत
01:22:50:03 करेगा कि मैं इसका ब्राह्मण क्षत्रिय वैश और शूद्र घोषित करूंगा तो इन बातो में इनका व रहा यह समरी मैंने आज की चर्चा की बताई हालांकि रोचक थी व्यक्ति ने कई तरह से विषयात कर करके कर करके काफी देर तक चर्चा की आगे आप लोगों के ऊपर है जो भी निर्णय ले और सर जी राम यह शिवलिंग का क्या अर्थ है आप जरा बताएं फिर किसी दिन हम बता देंगे जो शिवलिंग है राम राम य शिवलिंग का अर्थ क्या है शिवलिंग जो प्रतीक भी है लिंग का अर्थ केवल वो गुप्तांग ही नहीं होता है प्रतीक भी होता है लिंग का अर्थ और कई जगहो पर शास्त्रों में प्रतीक के रूप में ही लिंग की वही है उपस्थिति बहुत कुछ आप देखो बहुत मजा आएगा
01:23:46:20 आपको देखिए परंपरा प्राप्त आचार्य का मापदंड पूछ रहे हैं वो गलत बात बोल सकता है बिल्कुल बोल सकता है मगर यदि आप उस पर विश्वास नहीं है तो उसकी किसी चीज पर विश्वास मत करो ना उस धर्म को छोड़ दो जो आपको परंपरा से प्राप्त हुआ है उस धर्म को छोड़ दो कह दो मैं नहीं मानता सनातन खुद को वैदिक क्यों कह रहे हो फिर मत कहो पहले वेदों से बाहर जाओ सनातन से बाहर जाओ विधर्मी बनो फिर हम आपको आंसर करेंगे हम आंसर करेंगे मगर सबसे पहले अपनी जोय संज्ञा है कि हम सनातनी है सनातनी क्यों है परंपरा प्राप्त आचार्य द्वारा प्राप्त होने वाले परंपरा प्राप्त ग्रंथों को मानने के कारण अब जब आप परंपरा प्राप्त जो आचार्य पर अविश्वास प्रस्ताव ला रहे हैं तो लाइए मगर फिर आप वैदिक नहीं हुए ना ठीक
01:24:37:13 है गुरु होते ही इसलिए हैं कि जब दो एक दूसरे के विरोधी बातें आने लगे शास्त्रों में मति भ्रष्ट होने लगे तो उसको क्लेरिफाई करें इस पर हमने एक वीडियो बनाया था शिवांश भाई मैं खुद आयुष पासी प्रयागराज में खुद पासी समाज से आया हूं आपके अवध में रावत वर्मा इत्यादि नाम के नाम से जाने जाते हैं और सनातनी है यद्यपि भारत में जनरल ओबीसी एससी में सभी आते हैं जी बहुत बढ़िया बहुत अच्छे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि हम लोग वर्ण से क्या है बस अपने वर्ण की सीमा में रहकर यदि हम अपने धर्म का पालन कर रहे हैं तो हम श्रेष्ठ है
01:25:27:26 आपका पहला वीडियो है जो बेकार लगा हो सकता है भाई शिवांश भाई हमने निर्णय ले लिया है कि वह मूड था और कुछ नहीं मूर्ति पूजा का रेफरेंस बहुत जगह है हम लोग यह मूर्ति पूजा का रेफरेंस आप देखिएगा इसके डिस्क्रिप्शन में हम लोग डाल अथर्ववेद में है ऋग्वेद में है जहां तक
01:26:16:27 है चलिए आने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद आपको जिसको भी कोई वैचारिक मतभेद है और उसको लगता है कि वह सशक्त है अपने विचारों को लेकर के और रख सकते हैं तो वह आए और अपने विचार यहां पर रख सकते हैं हमसे चर्चा कर सकते हैं चर्चा करने का तरीका आप नंबर नोट कर ले 7408 30169 और वहां जब आप ट करेंगे तो आपको फॉर्म मिलेंगे एक फम होगा वैचारिक मतभेद के निमि निमित्त चर्चा उसको आप भरिए और हम आपसे लाइव में आ करके बातचीत करेंगे दूसरा एक फॉर्म होगा धर्म रक्षा अभियान से जुड़ने के लिए अगर आप वहां जुड़ना चाहते जुड़ सकते हैं एक फॉर्म होगा आवान की जो क्लासेस चलती है उनमें आने के लिए तो आप उस फॉर्म को भी भर सकते हैं जो आइडल जिकल डिसएग्रीमेंट के अलावा
01:27:19:25 जो क्या कहते हैं जो दो फॉर्म है उनको जब आप भर देंगे तो उसके बाद एक प्रक्रिया होगी आपका वेरिफिकेशन वगैरह किया जाता है उसके बाद ही आपको उन ग्रुप्स में जोड़ा जाएगा तो उसके लिए उसको आप जान मतलब यथा योग्य तरीके से जानते हो तभी उस फॉर्म को भरे राम जी हैं हमारे ईस्ट श्री राम जी हैं राम जी का जब करते हैं अच्छा अभी तो सबको सॉरी ता है जिसको इंजीनियर बनना उसके लिए शिक्षा उपलब्ध
01:28:02:10 है शुरुआत से पढ़िए नास्तिक भी आस्तिक से पढ़े पर पात्र जी की जो बुक हो उसको इसके लिए जन्मना वर्ण व्यवस्था के लिए उनके बहुत सारे ग्रंथ है आदि शंकराचार्य जी के उनका आप अध्ययन कर सकते हैं ममना मा अनुशासनम में ये चीज मिल जाएंगे आपको इफ यू कैन डिफीट ए फेमिनिस्ट यू कैन बी ए यू कैन बी हिंदू पता नहीं क्या लिखा है समझ में नहीं आ रहा लास्ट में ठीक है तो सभी को जय
01:28:53:01 शीराम ब
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वर्णव्यवस्था जन्म से यह कर्म से? #equality #वर्ण
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