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00:00:01:10 सभी को जय श्री राम तो हमारे साथ में मदन दास जी हैं रामपाल जी की ओर से और आज हम लोग एक लाइव कर चुके हैं पहले ही और यह दूसरी लाइव है एक ही दिन में आज तो अपने बारे में थोड़ा सा बता दें आप किस प्रकार से जुड़े हुए हैं रामपाल जीरा नाम मदन दास है मैं महाराष्ट्र से हूं मैं दो साल से जुड़ा हूं संत रामपाल जी महाराज जी के नाम दो साल पहले आपकी नामदान मिला था आपको दो साल पहले दो साल पहले 202 में अच्छा
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00:00:47:16 तो यह संत रामपाल जी जो हैं उनकी जो गुरु उनकी जो गद्दी है किस प्रकार से ऑपरेट होती है मतलब उनकी प्रामाणिक चीजें आप तक कैसे पहुंचती हां पहले तो मैं टीवी प जब पहली बार उनका सत्संग देखा हम तो बाद में धीरे-धीरे मैंने उनका ज्ञान ज्ञान सीखा बाद में पुस्तकों का अध्ययन किया शास्त्रों का अध्ययन किया तो वो जो बता रहे और शास्त्र में जो लिखा है ये मुझे थोड़ा सा लगा कि ये सही है और उनकी गुरु गुरु परंपरा ऐसी है कि संत गरीबदास जी महाराज स्वामी राम देवानंद जी महाराज उनके गुरु थे नहीं वो परंपरा नहीं पूछ रहा मैं यह पूछ रहा हूं कि उनकी चीजें आप तक कैसे पहुंच रही है
00:01:55:00 हा य से और चैनल से टीवी से क्या हमारे शास्त्र में कहीं वर्णित है कि आपको जो गुरु की शिक्षा है वह ट से मिलेगी या चैनल से मिलेगी शास्त्र में तो वर्णित नहीं है तो फिर जो अभ प्रामाणिक चीज क्या है प्रामाणिक गुरु का सानिध आपको कैसे प्राप्त हुआ गुरु का ज्ञान आपको कैसे मिल रहा है उसमें य आदि को प्रमाण नहीं माना जा सकता य चैनल इत्यादि को वो माध्यम हो सक उनका सहारा लिया जा सकता है मगर उस स्थिति में जब हमारे पास उसे वेरीफाई करने के लिए प्रामाणिक पद्धति भी हो समझ रहे हैं जैसे आजकल एआई आ गया है रामपाल जी की आवाज बदल करके कोई एआई का वीडियो बना दिया जाएगा यट पर अपलोड कर दिया जाएगा तो आप क्या करेंगे आपको कैसे पता लगेगा कि नहीं यह जो है उनका प्रामाणिक वीडियो नहीं है तो वो कौन सी प्रणाली है जिससे कि आपको पता लगता है कि यह यह जो है रामपाल दास जी का प्रामाणिक हम तक पहुंच रहा है हा तो उन्होंने हम जो आते हैं कबीर पन से आते
00:03:10:00 हैं उनका जो ज्ञान है वह जो ज्ञान दे रहे हैं व जिनको परमात्मा बता रहे हैं पूर्ण परमात्मा जिनको बता रहे वह कबीर जी है मतलब 600 साल पहले जो संत कबीर ई साब मेरा प्रश्न य है जो ज्ञान दिया है उन्होंने जो कबीर कबीर सागर कबीर मैं कह रहा हूं आज रामपाल जी आज रामपाल जी आपको कुछ ज्ञान देते हैं आपको कैसे पता वह ज्ञान रामपाल जी ने ही दिया है हा वही तो बोल रहा हूं ना जब मैंने मतलब रामपाल जी कौन से रामपाल जी कौन सी प्रामाणिक प्रणाली का उपयोग करते हैं जिससे कि उनकी चीजें फिक्स हो पाती है कि हां यह जो मेरे को ज्ञान मिला यह रामपाल जी का ही है अभी सोट जैसे कि आपकी कई किताबें छप रही है ठीक है ज्ञान गंगा अब मैं चाहूं तो उसमें ज्ञान गंगा में थोड़ा सा रद्द बदल कर दूं एक नई ज्ञान गंगा छपवा दूं बिल्कुल उसके जैसी डुप्लीकेट और उसमें थोड़ा सा रद्द बदल उनके शब्दों में कर दूं कबीर की जगह वहां पर शिव लिख दूं पूर्ण परमात्मा की जगह ठीक है या
00:04:25:02 फिर और कुछ ऐसा छोटा मोटा रद्द बदल जिसको आप जो आपकी नजर में ही ना आ पाए मगर वो हो तो फिर आप उसको जब पढ़ेंगे ज्ञान गंगा को समझ के किय भाही उन्हीं की है ज्ञान गंगा किसकी रामपाल दास जी की तो फिर आपको पता कैसे लगेगा कि यह जो ज्ञान गंगा में पढ़ रहा हूं यह नकली नहीं है असली ही है उसके लिए कबीर सागर है ना जो संत कबीर थे आप जिनको संत कबीर मान रहे हैं उन्होने उन्होंने जो कबीर सागर लिखा है उनमें सब बातें सब ज्ञान एज इट इज है जो शास्त्रों से मेल खाता है और सभी शास्त्रों से मेता है श्रीम कबीर साहब ने जो लिखना था लिख दिया आज के प्रासंगिक विषय के अनुसार रामपाल जी कोई बात बताते हैं जो कबीर साहब के टाइम पर थी ही नहीं वह बात मान लो कंप्यूटर के बारे में कुछ बोल रहे हैं मोबाइल के बारे में कुछ बोल रहे हैं यह सब चीजें तो थी नहीं कबीर साहब के टाइम प अब इसके बारे में वो इसके बारे में इसके बारे में रामपाल दास जी आज कुछ धर्म और अधर्म बताते हैं कि ये टीवी नहीं देखना मान लीजिए कह रहे हैं टीवी नहीं देखना चाहिए तो अब वह चाहते हैं कि टीवी नहीं देखना चाहिए
00:05:40:06 यह संदेश लोगों तक पहुंचे मगर आपके पास जो किताब आ रही है उसमें किसी ने द्वेश बस यह मिला दिया कि नहीं टीवी जो है देखना चाहिए आपको कैसे पता लगेगा हां उसके लिए हमने ज्ञान उनका जो था उन्होंने जो बताया व सब कुछ ग्रहण कर लिया है अपने अंदर समा लिया है इसलिए हमको तुरंत पता चल जाता है कि कहां पर गड़बड़ हुई यानी कि कोई नया व्यक्ति अगर कोई रामपाल जी को चुन रहा है उसके लिए क्या प्रणाली होगी आपने तो उनका सारा ज्ञान पी लिया आपको पता लग जाएगा जो नया व्यक्ति रामपाल दास जी के बताए हुए मार्ग पर चलना चाहता है वह किस प्रणाली को फॉलो करे जिससे कि उसके पास रामपाल दास जी का ही ज्ञान आए किसी और का ना आए कबीर सागर अ फिर वही बात घूम फिर के आप वहीं आ जाते हैं मेरा कहने का मतलब है कि वह कौन सी व्यवस्था है जिसको फॉलो करके रामपाल दास जी के ही सही ज्ञान तक कोई व्यक्ति पहुंच सकता है वह कौन सी प्रणाली है इस बारे
00:06:55:07 में कोई समाधान नहीं है क्या अभी तो हमा पास होगा आपको इस बारे में नहीं पता तो हमारे पास पता हा वो बताइए क्या है पता है अगर ऐसा कुछ होगा तो हमारे पास शास्त्र अवेलेबल है श्रीमद श्रीमद भगवदगीता है आप समझे नहीं मेरी बात जैसे मैंने अभी उदाहरण दिया आपको मैंने कि यदि रामपाल दास जी यह संदेश देना चाहते हैं अपनी किताबों के माध्यम से कि भाई इसमें जो है ऐसे से ऐसा हो कंप्यूटर को लेकर के टीवी को लेकर के कोई संदेश व देना चाहता तो आपको कैसे पता लगेगा अब कोई नया व्यक्ति है चलिए आपने सारे शास्त्र पढ़ रखे उनके कोई नया व्यक्ति है वह नया व्यक्ति जोड़ अभी अभी जाना ही है बस और अब वो रामपाल दास जी को फॉलो कर रहा है उसको मैंने जाकर के मैंने करके उसको एक नई किताब छाप के दे दी और उसमें लिख दिया कि रामपाल दास जी ने उल्टी कुछ उल्टी बातें लिख दी उनके नाम से तो उस व्यक्ति
00:08:10:16 के पास किसी किताब को वेरीफाई करने का और ना करने का क्या ठोस आधार है वह बताइए उसके लिए हमारे जो सेवक है जो सेवादार है हा सेवादार जाता यानी कि उन्होंने जिसको अपना उत ि घोषित किया है वो उत्तराधिकारी किया सब उनके शिष्य तो अगर मैं कल को तो अगर मैं कल को यह कहने लगू मैं रामपाल दास जी का सेवादार हूं और मैं उनके नाम से गलत किताबें देने लगू लोगों को तो उससे कोई दिक्कत नहीं है ऐसा हो ही नहीं सकता जो उनके शिष्य बन गया ऐसा गलत काम कर ही नहीं सकते अरे भाई मैं कह रहा हूं कि मैं द्वेष वस उनके विरुद्ध षडयंत्र पूर्वक उनके नाम से गलत बात फैलाने लगूं और मैं कहूं कि मैं उनका शिष्य हूं तो इसको कैसे रोकेंगे आप आप तो कह रहे हैं कि सेवादार ऐसे हैं वैसे हैं मैं अपने आप को झूठा ही सेवादार घोषित कर लू कि मैं रामपाल दास जी का सेवादार हूं और मैं वह किताब छपवा और छपवा करके लोगों को बांटने लगू तो वह ठोस प्रणाली क्या है अगर आप उत्तराधिकारी को नहीं मानते
00:09:25:24 हैं तो ठोस प्रणाली क्या है जिससे कि हम रामपाल दास जी की यथावत चीजों तक पहुंच सके बताइए उनकी पुस्तकें अभी तक सुरक्षित है उनका जो सत्य ज्ञान है जो उन्होने पुस्तक बने है अभी सुरक्षित है सेवादारों के हाथ में भाई साहब मैं आपसे यह कह रहा हूं कि उनकी पुस्तकें सुरक्षित है अभी कोई नया व्यक्ति उनसे जुड़ा हुआ है और अब वह जो नया व्यक्ति है वह जाता है वह सोचता है कि मुझे कहीं से उनकी ज्ञान गंगा नाम की पुस्तक मिले अब उनको मेरे जैसा कोई एक व्यक्ति मिलता है जो कहता है मैं उनका सेवादार हूं यह लो नई पुस्तक ज्ञान गंगा छाप के उनको दे दी और उसमें सब गलत सरा लिख दिया उसमें लिख दिया फुटबॉल खेलो क्रिकेट खेलो यह करो वो करो ठीक है सब उल्टा लिख दिया अब वह तो व्यक्ति यही सोचेगा ना अगर अगर उसके पास कोई प्रॉपर प्रोटोकॉल नहीं होगा तो वो व्यक्ति तो यह सोचेगा रामपाल दास जी ने कहा है कि फुटबॉल खेलो हां नए व्यक्ति ऐ सोचेगा इस समस्या का निराकरण क्या है अब आप आप अभी एक निराकरण तक पहुंचे थे उत्तराधिकारी राम दास जी ने अपना किसी को उत्तराधिकारी बनाया कि भाई यह जो है यह जो किताब देगा वह यह सत्यापित करेगा वह मान्य होगी और जब व व नहीं होंगे तो उनका भी कोई उत्तराधिकारी होगा
00:10:41:02 वह नहीं होंगे तो उनका भी कोई उत्तराधिकारी होगा तो अगर उत्तराधिकारी वाली बात को स्वीकार किया जाता रामपाल दास जी के द्वारा तो तो यह बात ठीक है कि हां इससे हम रक्षा कर सकते हैं शुद्ध ज्ञान की अन्यथा तो कोई तरीका मुझे नहीं दिखाई देता है तो आप मुझे बताओ यह जो उनका जो आश्रम है उनके जो संस्था उनके संस्था में सेवादार का मेरे को तो मेरे पास तो अ इसका जवाब नहीं है कि इसको कैसे रोका जा सके य उनका इंटरनल रोका नहीं देख रोक सकते नहीं रोक सकते व एक अलग बात है मगर प्रामाणिक प्रणाली है कि नहीं वह एक अलग बात है प्रामाणिक प्रणाली है कि नहीं वो एक अलग बात है कि रामपाल दास जी ने किसी को यह कहा यह मेरा उत्तराधिकारी है मेरे ना होने की स्थिति में यह सारी चीजों को देखेगा और अगर वह नहीं होगा तो वह भी अपना एक उत्तराधिकारी घोषित करेगा कि यह मेरा उत्तराधिकारी है मैं नहीं होंगा तो यह उन सारी चीजों को देखेगा अगर ऐसे उत्तराधिकारी है आपके यहां पर तो तो रामपाल दास जी का ही ज्ञान आपके पास आ रहा हैय माना जा सकता है वरना इस बात को सत्यापित करने के लिए ही बड़ी टेढ़ी खड़ हो जाएगी कि जो आप बता
00:11:56:04 रहे हैं वो रामपाल दास जी का है कि नहीं है आप देखो अभी तक अभी तक तो उत्तराधिकारी कोई नियुक्त किया नहीं तो यह तोय तो फिर नहीं वही उतरा वो नहीं किया वो ठीक है मगर कहीं पर उन्होंने इस व्यवस्था के संबंध में बताया है कि ऐसा ऐसा होता है ऐसा होना चाहिए नि अरे भाई साहब दिक्कत आती तब धर्म का ज्ञान दिया जाता है क्या सतयुग में वेद क्यों दिए गए सतयुग में तो कोई दिक्कत थी ही नहीं धर्म का ज्ञान तो दिया जाता है उसमें दिक्कत से क्या मतलब है चलिए खैर सही प्रश्न है आपका हां तो इस बारे में आपको जानकारी जुटा चाहिए कि आपके पास जो ज्ञान आ रहा है वह रामपाल जी का ही ज्ञान है ऐसा हुआ है कुछ सेवादार रामपाल जी से अलग ज्ञान दे रहे हैं और आपस में झगड़ा है रामपाल जी ने जेल से फोन पर यह बातें बताई हैं लो
00:13:05:02 बताइए मैं जिस समस्या की और आपका ध्यान लाना चाहता हूं वह बहुत गंभीर समस्या है अगर हमने किसी प्रॉपर उत्तराधिकारी की व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया तो कोई भी कुछ भी बोले उनके नाम से वह तो जेल में वह तो बता नहीं पाएंगे मैंने बोला कि नहीं बोला समझ रहे हैं आप और ऊपर ऊपर के लोग आराम से खेल खेलते रहेंगे भोली भाली जनता के साथ अगर चाहे तो खेल रहे हैं ऐसा नहीं है मगर वह चाहे तो जो नादान जो निर्दोष जनता है उसके साथ आराम से खेल खेल सकते हैं क्योंकि वह लोग जो बैठे हैं उनके द्वारा प्रामाणिक उत्तराधिकारी तो घोषित किया नहीं है उन्होंने रामपाल दास जी इसका मतलब है आपने पुस्तक पढ़ा है और आपको वो बातें सही लगी ऐसा है क्या नहीं नहीं नहीं वो एक अलग विषय है कि उनकी बातें मुझे सही लग रही है कि नहीं मगर अभी बात यह है कि मैं जो पुस्तक पढ़ रहा हूं इतनी चिंता में पड़ गए आपने इतना चिंताजनक आप मतलब इन जब कोई व्यक्ति धर्म और अधर्म जब कोई व्यक्ति धर्म और अधर्म का निर्णायक बन रहा है तो उसके जो महत्त्वपूर्ण घटक है उन पर हम पूछेंगे ना बात करेंगे ना उन परे तो अभी बात यह है कि अभी हम जो ज्ञान
00:14:20:07 गंगा पढ़ रहे हैं या गीता तेरा ज्ञान अमृत पढ़ रहे हैं यह वही गीता तेरा ज्ञान अमृत है जो उन्होंने लिखी है यह कैसे पता चल कैसे फिक्स होगा आदेश देते रहते ना आश्रम में क्या आदेश देते क्या उपाय योजना करनी चाहिए क्या नहीं कौन देता गुरुजी देते गुरुजी आश्रम में मिलते है क्या आपको आश्रम में नहीं जेल से व आदेश देते है जेल से किसको आदेश देते एक मिनट जेल से किसको आदेश देते हैं जो आश्रम के सेवादार है मुख्य सेवादार से आश्रम के सेवा को वो देते हैं जो जो आश्रम के सेवादार है वह आपको यह बता देते हैं कि उन्होंने जेल से हमें यह आदेश दिया है है ना उन सेवादार पर आपको विश्वास क्यों है क्या उनको उन्होंने अपना प्रामाणिक उत्तराधिकारी माना है उनको उन्होंने अपना प्रामाणिक घोषित किया है कि ये जो आश्रम के सेवादार है यह मेरी तरफ से बोलेंगे आप लोगों से ऐसा कुछ कहा है उन्होंने नहीं हो तो बातें मेरे को मालूम नहीं तो फिर तो फिर उन परे विश्वास कैसे हो मैं अभी आपको कह दूं कि भाई जेल से मेरे पास फोन आया
00:15:35:13 उन्होंने ये कहा है मान लोगे एक महीने तक मैं बोर्ड बोर्ड और लगा दूं बढ़िया जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल और बढ़िया नाम दान केंद्र तथाकथित खोल दूं एक महीने तक और फिर मैं बोल दूं जेल से मेरे पास फोन आया है मान लोगे मेरी बात अगर उनका पुस्तक किसी ने गलत छपवा या लाइट चली ग आप मैं जिस जिस र आपका ध्यान आकृष्ट करना चाह रहा हूं उस और आप जा नहीं पा रहे हैं मेरा कहने का अर्थ ये है आप आप दिख नहीं रहे इस
00:16:11:09 समय मेरा कहने का अर्थ यह है कि रामपाल दास जी के द्वारा जो शिक्षा आपको दी जा रही है हां वो कैसे आपको पता लग रहा है कि वो रामपाल दास जी की ही शिक्षा है या तो आप यह मानो कि हां सेवादार उनकी तरफ से बोलने वाले प्रामाणिक हैं तब तो आगे बढ़ सकती है गाड़ी वरना तो यहां अटक रही है गाड़ी सेवादार प्रामाणिक है मैंने उनके ऊपर विश्वास किया और पुस्तक यानी कि आपको सेवादार पर विश्वास है कि भाई यह जो है वही बात बोलते हैं जो रामपाल जी इनको कहते
00:16:53:16 हैं है ना नहीं इस बार अभी तक तो इस बारे में मैंने सोचा नहीं था मैं फर्स्ट टाइम दो साल हो गए ना तो मैंने आपको सोचना चाहिए कि रामपाल दास जी के नाम से जो किताबें हमें मिल रही हैं उन किताबों में वही लिखा है जो वह लिखना चाहते थे या कहीं कुछ बदल तो नहीं किया क्योंकि हमसे ऐसे लोगों ने संपर्क किया है जो यह कह रहे हैं कि रामपाल दास जी की किताबों में भी बदलाव हो गया है बहुत सारा ऐसे लोग हैं जिनका हमें फोन आया है हां हो सकता है ऐसा हो सकता है तो इसलिए यदि उतरा अधिकारी उन्होंने घोषित नहीं किया तो उन्हें करना चाहिए जिससे कि उनके भक्तों को उनके फॉलोअर्स को यह पता रहे कि हमें शुद्ध ज्ञान कहां से मिलेगा क्योंकि वह तो है नहीं व तो जेल में है है ना तो उनके द्वारा दी जाने वाली शुद्ध शिक्षा कौन देगा उनको यह बताना चाहिए कि तब तक आप इनसे जब तक मैं नहीं हूं तब तक आप इनके पास जाओ यह कहे कि फलानी दुकान है वहां से किताबें ले लेना तो ले लो ये कहे वहां से मत लेना तो मत लो वरना तो कोई भी आपको रामपाल दास जी के नाम पर चिपका सकता है कुछ भी हां ऐसा हो सकता
00:18:09:21 है तो अभी जो आप पढ़ रहे हैं मैं फिर से पॉइंट पर आता हूं अभी जो आप पढ़ रहे हैं वो रामपाल दास जी की किताबें हैं यह कैसे सिद्ध होता है एक मिनट एक मिनट सर हेलो आप दिख नहीं रहे
00:19:26:22 हैं अब प्रॉब्लम यह है कि अगर यह जो व्यक्ति गुरु परंपरा के सिद्धांत को नहीं मानता है तो क्या होगा जो व्यक्ति गुरु परंपरा के सिद्धांत को नहीं मानता है उत्तराधिकारी के सिद्धांत को नहीं मानता है तो उसके सामने य अड़चन आएगी कि भा मैं जो बोल रहा हूं वह कैसे प्रमाणित हो कि वही है उनके द्वारा कहा गया और यदि वह गुरु परंपरा के सिद्धांत को मान लेता है उत्तराधिकारी वाले सिद्धांत को मान लेता है तो फिर प्रश्न यह बनेगा कि रामपाल दास जी को किसने किसके सामने अपना उत्तराधिकारी ठहराया था फिर प्रश्न ये बनेगा कि उसको किसने किसके सामने अपना उत्तराधिकारी ठहराया था फिर वह उसने तो इसमें यह जो है मामला सब गड़प झिम हो जाएगा यह चीज आर्य समाज पर भी लागू होती है आर्य समाज ने परंपरा वाले सिद्धांत को अपनाया नहीं है ठीक है कि गुरु जो है परंपरा प्राप्त होना
00:20:34:10 चाहिए के आधार पर ही यह बात कह दी जाए कि भाई आज के टाइम में सत्यार्थ प्रकाश जो है वह वही सत्यार्थ प्रकाश है जो दयान ऋषि दयानंद जी ने लिखी है तो कैसे उसका निर्णय करेंगे यह लोग इनका इनके पास इसका उत्तर नहीं होगा और अगर इन्होंने परंपरा का आलंबन लेने की बात की तो फिर इनका बन जाएगा बताइए पूर्णानंद के गुरु का नाम क्या है अपनी बातों को मनवाने के लिए आप परंपरा को लाना ही होगा और दूसरों की बातों का कुतर्कों द्वारा विरोध कर दो ये गलत है लिंक दे दीजिए भाई क्योंकि वो भाई साहब चले गए हैं फिलहाल आ नहीं रहे हैं एक ऐसे ही कुतर्क कायों ने एक दो कुछ वीडियो बनाए हैं पहले से जी भैया आ गए तो मैं वही पूछ रहा था कि इस बारे में आपके यहां क्या व्यवस्था है कि कोई व्यक्ति गलत प्रचार प्रसार ना कर पाए रामपाल
00:21:49:24 दास जी के नाम पर कोई व्यवस्था नहीं है आपकी जानकारी में नहीं है मेरी जानकारी में नहीं है व्यवस्था होगी लेकिन मेरी जानकारी में नहीं है तो आप तो अभी कह रहे थे कि आपने उनके सारे ग्रंथों को घोट रखा है वो अलग चीज है ना ज्ञान की और मतलब आपने सारे सारे नियमावली हों को नहीं घोटा है सब कुछ नहीं आपने कुछ रह गया है नहीं नहीं नहीं वो ज्ञान की बात नहीं ना आप जो बोल रहे हैं वो वो ज्ञान की बात नहीं ना अच्छा वो ज्ञान की बात नहीं है तो वो जो नियम है वो वो उस नियम के लिए कौन सी किताब होगी उनकी जिसमें वो नियम लिखा हो सकता है जो आपने पढ़ी नहीं है उसका कोई
00:22:40:16 नाम अभी तक तो नियम तो मैंने पढ़ा नहीं नहीं पढ़ा नाम भी नहीं मालूम ऐसी कोई किताब उनकी छपी हो हम नियमावली की हां ऐसी नियमावली की कोई किताब हो वह भी आपको नहीं पता है ना मेरे ज्ञान में नहीं है पता करिएगा बताइएगा अगर इस तरह की नियमावली कोई हो तो हा अच्छी बात है ये तो अब मुझे बताइए कि आपका ऐसा मानना क्यों है रामपाल दास जी यह कहते हैं कि जो ब्रह्मा विष्णु महेश है वह अविनाशी नहीं है हमारे ग्रंथ में ही लिखा है ना व व अविनाशी नहीं है अच्छा आप अविनाशी हो कि नहीं हो मैं तो अविनाशी हूं आप अविनाशी हो मगर ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी नहीं है मैं नाशवान
00:23:55:27 हूं मैं एक पंच महाभूत का मेरा शरीर है और हो और मैंने आपको अगर रामपाल दास जी के वीडियो में दिखा दिया कि आप नाशवान नहीं हो अविनाशी हो तो आत्मा अविनाशी है शरीर नाशवान है मेरा तो यानी कि शरीर का जो नाश हो रहा है या बन रहा है या बिगड़ रहा है उससे आपका नाश सिद्ध नहीं होता जबकि यह कहा जा सकता है कि आपका भी जीवन और मरण है तब भी आप अविनाशी हो आत्मा के रूप में हा आत्मा मेरी अविनाशी है आत्मा के रूप में आप अविनाशी
00:24:38:26 हो हा आत्मा के रूप में अविनाशी हूं इसी प्रकार से परमात्मा के रूप में ईश्वर भी अविनाशी है ब्रह्मा विष्णु महेश भी अविनाशी वो जो जीवन मरण वाली बात आप कह रहे हैं वो इसी प्रकार से शरीर धारण किए हुए के लिए कह रहे हैं जो शास्त्रों में कहा गया है कि हमारा भी जीवन म होता है वह कहा गया है जब उन्होंने कोई पर्टिकुलर देह धारण की हुई है और इसके लिए भगवत गीता में भगवान ने कहा कि वह लोग जो मुझे मानव देह में र देखकर मेरे ब्रह्म रूप को समझ नहीं पाते हैं वह मूर्ख होते हैं अब यह जो अविनाशी वाली बात है या दुर्गा मात से उत्पन्न होने वाली बात है इसके लिए आप कौन से शास्त्र का रेफरेंस देते हैं श्रीमद देवी भागवत पेज नंबर 123 पेज नंबर नहीं अध्याय अध्याय कौन सा है वो बताइए देवी भागवत केवल गीता प्रश्न ही छपता
00:25:42:03 है देवी भागवत केवल गीता प्रश्न ही छपता है कहां गए भाई साहब हां यही हूं मतलब आपको व प्रमाण चाहिए कि कहां पर लिखा है कि अविनाशी नहीं है [संगीत]
00:26:28:13 श्रीमद् देवी भागवत निकालिए अपना नहीं मैं निकाल लूंगा आप बोल दीजिए उसका 123 पेज निकालिए 130 12 अध्याय लोक क्रमांक बताइए अध्याय और श्लोक क्रमांक ठीक है आप एक बार निकालिए वही पर मैं बता देता हूं अध्याय कौन सा है अध्याय बताइए अध्याय मेरा देवी नहीं है ना गीता प्रस वाला अध्याय बताइए
00:27:29:09 अध्याय नहीं बताया क्या रामपाल दास जी ने पूर्ण ज्ञानी तत्वदर्शी ने नहीं बताया क्या अध्याय नहीं पता क्या भाई पेज नंबर तो बदल जाता है नाया कि वो गीता प्रश्ने छाप दिया तो फलाने पेज पर है बनारस वालों ने छाप दिया तो फलाने पेज पर है यह कौन सी बात है क्या इसीलिए मैंने अपने वीडियो में कहा था भाई अध्याय दो ना पूर्व पक्ष को रखने के लिए कम से
00:28:22:07 कम चले गए जीत जितेश जी आपने फॉर्म भरा था फॉर्म भरा था आपने हां जी भरा था शिवा जी हमें तो नहीं मिला किस नाम से भरा था जितेश के नाम से ही भरा था दोनों भरे हैं मैंने वो चर्चा वाला ही भरा है और कक्षा वाला ही भरा है आप तो कक्षा में आई है यहां पर तो आप आप तो जिज्ञासु है ना कक्षा में आइए आप यहां क जुड़ रहे हैं ठीक ठीक
00:29:06:15 है मयंक जी जय श्री राम जय श्री राम बिटिया प्यारी है आपकी बिटिया बाबू है बाबू है बाबू जी बताइए परिचय क्या है आपका जी राजस्थान के जयपुर जिले से हूं अच्छा मदन दास जी आप आ गए हैं आप मयंक जी आप थोड़ी देर म्यूट हो जाइए आप रामपाल जी की तरफ रामपाल जी की बात ही करेंगे ना नहीं नहीं अच्छा नहीं ठीक है तो मुझ इनकी रामपाल जी महाराज की कुछ
00:29:56:01 बातें एक मिनट आपको ले जी मैं मदन दास जी बताइए श्रीमद् देवी भागवत स्कंध [संगीत] तीसरा स्कंद तीन अध्याय
00:30:32:14 पेज नंबर 123 निकालिए ना फर पेज नंबर अरे भैया पेज नंबर नहीं अध्याय बताओ स्कंद तीसरा निकालिए उसी में है स्कं तीसरा है मेरे पास उसमें आप अध्याय नंबर तो बताइए याद नहीं है लेकिन आप खोलिए उसम में लिखा है संदीपन रॉय आपका खंडन कर रहा है मेरे ख्याल से खंडन केवल एक कमरे में बैठ कर के कुछ कह देने से नहीं होता है सामना करने से होता है अगर मन में मैं सोचूं कि मैं खंडन कर रहा हूं तो ऐसे सोच करके भी मैं खंडन कर सकता हूं ऐसे सोचा मैंने और हो गया सबका खंडन यह तरीका नहीं है ना सामने आकर के बात करते हैं तब पता लगता है दूध का दूध और पानी का पानी होता है वो आ नहीं रहे हैं उनको मैंने बड़े संभ्रांत तरीके से कहा भी था एक बार कि आप सामने आइए भाई ऐसा ना करिए बंद कमरे में बैठकर कार्बो टारगेट गेम खेलना बहुत आसान होता है अब सामने आइए चर्चा करते हैं क्या है क्या नहीं है पता लगेगा हम जी बोलिए अध्याय क्या है
00:31:51:01 आपका बोलिए वो जो बा वो जो बात कही है ना आयु भाव होता है तिरो भाव होता है अरे भाव तो आपका भी होता है भैया फिर भी आप अविनाशी हो कि नहीं हो मेरा आत्मा अविनाशी है और मैं ऐसे ही ब्रह्मा विष्णु महेश का आविर्भव होता है रूप में दे धारण करते हैं देह से जाते भी है मगर वह अविनाशी रूप में भी वो अविनाशी रूप में भी विद्यमान है यानी की यह सिद्ध हुआ कि वो अविनाशी नहीं है कहां से अना हो क्या आपकी देह हो रही है सुनो देह के नाश से आत्मा का नाश नहीं होता और देह के भेद से आत्मा का भेद नहीं होता आत्मा कहां से प्रकट हुई इसका जवाब दीज आत्मा कहीं से प्रकट नहीं हुई आत्मा सदैव नित्य है कैसे नित्य हुई किसी ने तो प्रकट किया होगा उसको आप मुझे अध्याय नंबर बताइए भाई साहब अध्याय नंबर है आपके पास आप संत कबीर को मानते हैं यह बताइए 6 साल प संत कबीर को एक मैं संत कबीर को एक भगवत भक्त के रूप में जानता हूं
00:33:06:16 मगर यदि उनकी मगर यदि उनकी कही हुई कोई बात परंपरा प्राप्त प्रामाणिक आचार्यों से प्राप्त होने वाले ग्रंथ अथवा उनकी वाणी के विरुद्ध जाएगी तो उतने अंश में मैं उनको नहीं मानूंगा वह प्रमाण नहीं होंगे परंपरा के विरुद्ध में व पाचवा वे कहते उनके वाणी को कबीर सागर को आपने कबीर तो पढ़ होगा आप तोन लग रहे आप ये बताइए क्या आपने कबीर सागर प है मैंने आपको समझ लिया है आप जो कह रहे समझ तो हो गया आपने बता ही दिया कि उनका आपने सिद्ध कर दिया कि वो अविनाशी नहीं है ठीक है ये आप कह रहे होय हम नहीं कह रहे ये आप क
00:33:51:00 रहे भगवत गीता सुना नहीं है केवल बोलना है भन श्री कृष्ण क्या कहते मैं अजन्मा अविनाशी होते हुए भी अपनी योग माया को अपने अधीन करके प्रकट होता हूं सजाम में हम व काल सजन करता सुनो है कि जब आपकी देह के नाश से आपका नाश सिद्ध नहीं हो रहा तो ब्रह्मा विष्णु महेश की देह का नाश वो भी उनके कंट्रोल में है जो उनके कंट्रोल उनका देह का नाश होगा कि नहीं होगा उनके कंट्रोल में नहीं सिद्ध करूंगा वो मैं अभी सिद्ध करूंगा वो भी उनके कंट्रोल में कि होगा कि नहीं होगा ऐसा है इस तरह से बात नहीं होगी जब मैंने आपको सुनने के लिए रुका रहा अब आप मुझे सुनने के लिए रुके रहिए एक नाश से आप अपना नाश मानते हैं क्या मैं यह पूछ रहा हूं
00:34:57:22 आपकी दे मैं आपसे पूछ रहा हूं आपकी देह का नाश हो जाएगा तो आप खत्म हो जाएगा आपका अस्तित्व वो तो बोल रहा ह ना सुनिए आप मेरी बात
⬜ Not used yet · 00:35:07:14 – 00:35:30:07 (0:23)
00:35:07:14 सु बोलिए मेरी बात सु हमारी आत्मा इस काल लोक में फसी हुई है और हमें रहा महाराज आप
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→ Used in: B · Video रामपाल का झूठा मोक्ष at 34:47 ↗
00:35:30:07 आप आप मैं पूछ रहा हूं आपका वास्तविक रूप क्या है आपका वास्तविक रूप क्या है मदन जी आपका वास्तविक रूप क्या है मैं पंच मैं पंच महाभूत तत्व से बना हूं मेरा वास्तविक रूप मनुष्य है मुझे मनुष्य योनि प्राप्त हुए है 84 लक्ष योनि योनियों के बाद प्राप्त हुक रूप है ये मैं पूछ रहा हूं ये आपका वास्तविक रूप है जो आपका भूतो से बना हुआ जो शरीर है यह वास्तविक रूप है य नाशवान है यह वास्तविक रूप नहीं है नहीं बादाम काजू सतलोक में जाकर कौन खाएगा यह रूप खाएगा या आपका कुछ कोई और रूप खाएगा बादाम का सेब केला य सब है ना सतलोक में सतलोक में हैय सबन गा य वाला शरीर य रूप खाएगा या दूसरा रूप कौन सा रूप खाएगा आत्मा तो
00:36:31:21 आप भाई साहब आप बात करने नहीं आए क्या मैं पूछ रहा हूं इसका मतलब आपकी देह का नाश हो जाएगा तो भी आप अपना नाश नहीं मानते मानते हैं क्या देखिए आत्मा ने आप 8 लक्ष योनियों को मानते है क्या मानता हूं बताइए हा तो मनुष्य जन्म किस लिए मिला है यही जानने के लिए कि आत्मा में भाई साब भाई साहब आप विषय को बदलिए नहीं बात ये हो रही है आप अपनी देह के नाश से अपना नाश मानते हैं या नहीं मानते हैं यह
00:37:13:12 बताइए मैं नष्ट हो जाऊंगा मेरी आत्मा अविनाशी है य तो बोल रहा हूं ना आत्मा आपसे अलग है क्या हम कहां रहते मृत्यु लोक में रहते हैं ना आत्मा आपसे अलग
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00:37:25:20 है क्या हा आलग आपना आत्मा आपसे अलग हैलिए आमा अलग आत्मा आपसे अलग है क्या आत्मा अलग है मेरे ार अलग है यानी की
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00:37:41:04 यहां पर कर्म आप करोगे और कोई और वहा पर जाकर फल भोगे ऐसा है आप फल नहीं भो गोगे हेलो आमा को आपने अलग माना यानी की कम माफ करोगे और फल कोई और भोगे बोलो कि आप ही भोगो आत्मा ही भो गगी ना सतलोक जाके मैं अभी पूछ रहा हूं आपने कहा आत्मा आपसे अलग है तो आपकी आत्मा अलग है और वह फल भोगे गी आप तो भोगो ग नहीं आप नहीं भोगो ग ना मेरे से अलग है या नहीं इससे मतलब नहीं है हम आत्मा कोतल नहीं रे से कैसे छुड़ा सकते हैं वो इंपोर्टेंट नहीं है मतलब इसलिए नहीं है क्योंकि आपको अपना पॉइंट सिद्ध करना है और मतलब इसलिए है क्योंकि आपकी देह के नाश से आप अपना नाश नहीं मान रहे हो और अगर मान रहे हो तो फिर आपकी भक्ति करने का कारण वोह क्या रहा क्योंकि वहां पर फल तो कोई और भोग रहा है बादाम काजू तो किसी और को खाने को मिलेगा सतलोक आश्रम में देखिए मैं क्या कह रहा हूं अब मैं आपको प्रमाण दे देता हूं आप प्रमाण ले
00:38:56:13 लीजिए विष्णु महेश के अविनाशी होने के बहुत देर तक मगज मारी नहीं कर सकते हां बताइए प्रम सबसे पहली सबसे पहले क्या है कि देवी ही ब्रह्म है इस बात का प्रमाण लीजिए नौवा नौवा स्कंद पहला अध्याय आठ से 10 लोक खोलिए खोलिए पुस्तक पुस्तक नहीं मेरे पास क्यों नहीं है क्यों नहीं है जो रामपाल जी ने कहा उसको वेरीफाई किया कि नहीं किया हा वेरीफाई किया तो बताओ क्या लिखा है न स्कंद में पहले अध्याय में
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00:39:31:28 आ से शलोक में वेरीफाई किया तो क्या लिखा है आप बोल रहे ना आप बताइ आप तो बोलने दे आप बताइए जितनी चाबी ब आपको बता रहा आप शांत रहिए आपको बता रहा
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00:39:55:13 भाई साहब शांत रहिए बिल्कुल भी अननेसेसरी टॉक नहीं चाहिए ठीक है शांत रहिए मैं आपको बता रहा हूं आपका जो अर्थ है और डायरेक्ट भाई साहब आप अगर आप बोलेंगे व्यर्थ व्यर्थ बोलेंगे मुझे आपको हटाना पड़ेगा मैं आपको प्रमाण दे रहा हूं तब तक आप धैर रखिए शांत रहिए ठीक है ये पहले देख लीजिए देवी भागवत दर्शन कर लीजिए इसी से शायद मुक्ति मिल जाएगी आपको क्योंकि वहां तो सिद्धांत है नहीं
00:40:37:02 कुछ देवी भागवत नौवा स्कंद देवी भागवत नौवा स्कंद और उसके बाद प्रथम अध्याय 12000 1216 पेज नंबर आपका कहीं ना ऐसा तो नहीं ना जीव ही ब्रह्म है मैं जो ग्रंथ में लिखा है प्रमाण सहित आपको बता रहा हूं ठीक है वो आपको मैं बता रहा
00:41:11:27 हूं आपको केवल प्रमाण चाहिए तर्क की कोई आवश्यकता नहीं आपको तर्क अगर बताएंगे तो आपके वो सर से ऊपर चला जाएगा सब 9 एक आ से 10 1216 1216 देवी भागवत का नवा स्कंद
00:41:52:13 और इसमें पहला अध्याय श्लोक क्रमांक आठ से 10 क्या कहा जा रहा है सृष्टि के आदि में जो देवी विराज है उसे प्रकृति कहा गया है सृष्टि करने के लिए योग माया का आश्रय लेकर परमात्मा दो रूपों में विभक्त हो गए उनका आधा दाहिना भाग पुरुष और बाया आधा भाग प्रकृति कहा गया देवी प्रकृति ब्रह्म स्वरूपा नित्या एवं सनातनी है कौन है जो प्रकृति है जो देवी है मां भगवती है नित्य है सनातनी है परमात्मा के सभी गुण परमात्मा के सभी गुण उसमें उसी प्रकार निहित है जिस प्रकार अग्नि में दाह कत्व शक्ति विद्यमान रहती है ठीक है इसके बाद जो भी सत असत जो कुछ भी दृश्य मान जगत है वह सब ब्रह्म मय है ब्रह्म मय और सुनो आगे क्या है तत्पश्चात आनंद कंद भगवान श्री कृष्ण चंद्र के मन में सृष्टि करने की इच्छा होती है किसके मन में होती है भगवान श्री कृष्ण चंद्र
00:43:07:21 के उनकी मूल प्रकृति त तत्पश्चात परमात्मा की आज्ञा के अनुसार वह पांच प्रकार की बन जाती है इस तरीके से यहां पर भगवान श्री कृष्ण से सृष्टि का बनना बताया जा रहा है और जो भगवान की वो है शक्ति वो अनादि है अविनाशी हैं अनंत है और सुनो देवी भागवत नौवा स्कंद पहला अध्याय
00:43:45:16 और 12 से 13 श्लोक 12 से 13वां श्लोक कृष्ण चंद्र की आज्ञा से ही वे सृष्टि करती हैं और उनकी जो सबसे परम प्रिय जो पांच रूप धारण करती हैं उनमें से जो कृष्ण को प्रिय है वह है मां भगवती का जो राधा स्वरूप है वह भगवान श्री कृष्ण को सबसे ज्यादा प्रिय है इसके अलावा भगवत गीता चार छ भगवान स्वयं कह रहे हैं मैं अजन्मा हूं मैं अविनाशी हूं ठीक
00:44:37:09 है और इसके अलावा अनेकानेक जगह ऐसे प्रमाण है जिसमें कि भगवान को ब्रह्मा विष्णु महेश को अविनाशी परमात्मा कहा गया है जैसे कि विष्णु पुराण दूसरा अध्याय पहले से तीसरा श्लोक उसमें क्या लिखा हुआ है ब्रह्मा विष्णु और शंकर रूप से जगत की उत्पत्ति स्थिति एवं संहार के कारण विकार रहित शुद्ध अविनाशी परमात्मा कौन सा परमात्मा अविनाशी परमात्मा सर्वदा एक रस सर्व विजय भगवान वासुदेव विष्णु है ठीक
00:45:53:07 है और सुनो देवी ऋग्वेद दसवा मंडल 125 वा सूक्त उसमें क्या कहा जा रहा है देवी परम ब्रह्म से भिन्न नहीं है अपितु परमेश्वर परमात्मा नित्य सनातन सच्चिदानंद स्वरूप परम तत्व ही है देवी परम ब्रह्म से अभिन्न है यह ऋग्वेद में लिखा है और सुनो जो देवी शक्ति है वही परमात्मा है और जो परमात्मा है वही शक्ति है देवी भागवत तीसरा स्कंद सातवा अध्याय और 14 से 15 श्लोक देवी भगवती ही ब्रह्म और ब्रह्म शक्ति है देवी भागवत तीसरा अध्याय छठवां तीसरा स्कंद छठवां अध्याय दूसरा श्लोक और इसी तरीके से अनेकानेक प्रमाण है अब बताइए क्या किया जाए भगवत गीता में जो बताया है तीन पुरुष मैंने आपको देवी भागवत से भी बताया उसको नहीं मानोगे क्या नहीं आपने बताया लेकिन मैं क्या बता रहा हूं आपकी बात ठीक है
00:47:08:15 प्रमाण पुरुष परम अक्षर पुरुष य तीन पुरुष पुरुष माने तो परम अक्षर आ गए पहले एक बात खत्म करो अक्षर की बात पर भी आएंगे पहले एक बात खत्म करो पहले एक बात खत्म करो अविनाशी है या नहीं है माने आपको शास्त्र से बता दिया विष्णु पुराण से देवी भागवत इत्यादि से कि ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती गणेश पांचों के लिए अविनाशी शब्द आया है अविनाशी नित्य सनातन अब इसको मानोगे कि नहीं श्रीमद श्रीमद् देवी भागवत कंद तीसरा उसमें लिखा भाई साहब भाई साहब लीला पूर्वक भगवान लीला पूर्वक ये बात कह रहे हैं कि हमारा भी जीवन मरण होता है वस्तुत नहीं होता है होता भाव होता है आप आप ये बताइए कबीर साहब के कोई गुरु थे या नहीं थे थे थे उनके गुरु हा उन्होने लीला की थी वो क्या जनी वो क्या ज्ञानी थे जो उनको गुरु करना पड़ा समाज को एक मार्गदर्शन मिले की गुरु पर ब ऐसे ही समाज को मार्ग दिखाने के लिए वो लीला पूर्वक अपनी देह का नाश करते हैं ऐसे ही जैसे आपने आपके कबीर दास जी ने समाज को दिखाने के लिए
00:48:23:19 लीला की ना गुरु बनाने की ऐसे ही वो समाज को दिखाने के लिए लीला करते हैं अपनी देह का नाश करके अब मैं आपसे अब मैं आपसे पूछ रहा हूं सीधी बात मैं आपसे ज्यादा मगज नहीं मार सकता मैं आपसे सीधी बात पूछ रहा हूं क्या आप जिसको ईश्वर मानते हैं वह सर्वशक्तिमान है या नहीं यह बताइए बस इसीलिए ज्यादा उसको खोलने का कोई मतलब नहीं रहता है सब लोग कहते हैं ना प्रमाण दिखाओ खोल के दिखाओ खोल के दिखाओ उससे कोई फर्क नहीं पड़ना है उससे कोई मतलब नहीं है आप तो मुझे ये बताओ रामपाल दास जी के अनुसार प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है वो सर्वशक्तिमान है या नहीं यह बताओ इसका भी आंसर देता हूं और इससे पहले का भी आंसर देता हूं इसके पहले का मत दो भाई साहब मत दो भाई साहब आप मुझे ये बताओ आप मुझे बताओ वो सर्वशक्तिमान है या नहीं होगा आपको एक अच्छा आदमी मिलेगा आपको एक बढ़िया जो आपको ग्रंथ दिखाएगा सद ग्रंथ दिखाएगा ठीक है भाई साहब मुझसे ज्यादा व्यर्थ की बातें ना करिए मुझे सीधे-सीधे जवाब दीजिए क्या ईश्वर सर्वशक्तिमान है जिसको आप मानते हो बताओ सर्वशक्तिमान है अविनाशी है
00:49:38:20 परम पुरुष सर्वशक्तिमान क्या वो सब कुछ कर सकता है सब कुछ कर सकता है अपनी देह का नाश कर सकता है अपनी देह का भी नाश कर सकता है यानी कि उसकी देह अविनाशी नहीं है लीला वश कर सकता है उस नहीं मैं पूछ रहा उसकी दे अविनाशी है कि नहीं अविनाशी है उसकी दे अविनाशी है किसी नियमों से उनकी दे नष्ट नहीं हो जा उसकी दे उसकी देह अविनाशी है कि नहीं वो खुद करेंगे देह का नाश तो ऐसा नहीं है कि वह अविनाशी नहीं है हा अगर किसी नियमों से बात है किसी नियम के अंदर व है जैसे ब्रह्मा विष्णु की आयु लिखी है हमारे सत ग्रंथों में भाई साहब मुझे आपको हटाना पड़ जाएगा भाई साहब आप जो है सर में दर्द वाली बात कर रहे हैं मेरी बात आप समझिए मैंने आपको म्यूट किया है प्लीज मेरी बात समझिए मैं हाथ जोड़ रहा हूं मैं आपके बोलने के अधिकार का हनन नहीं करना चाहता आप मुझे यह बता दीजिए आप मुझे यह बता दीजिए कि आपके जो कबीर है आपके अनुसार जो कबीर भगवान है वह सब कुछ कर सकता है या नहीं यह बताइए
00:50:54:19 सब कुछ कर सकते प्रारब्ध नष्ट कर अपनी देह का नाश कर सकते हैं अप दे देह का लीलाव अपनी देह का नाश कर सकते हैं अपनी देह का नाश कर सकते हैं कर सकते हैं ना कुछ भी कर सकते हैं तो कर सकते हैं तो यानी कि उनकी देह अविनाशी नहीं है ना अविनाशी कब कब नहीं होगी जब वो निय में होंगे जब हा ब्रह्मा सते भाई साहब आपने देख लिया आप लोगों ने देख लिया इनके जवाब क्या आ रहे हैं ठीक है आपने अपनी बात कह दी हमने अपनी बात कह दी अब लोग यहां पर डिसाइड कर लेंगे वह अपनी दे का नाश कर सकते हैं फिर भी उनकी दे अविनाशी है आपके अनुसार ये है ना एक मिनट सुनिए ना बोलज मेरे को एक मिनट दीजिए एक मिनट मैं एक मनुष्य हूं मुझे मोक्ष चाहिए यदि आपका ज्ञान सही लगा मैं ज्ञान चर्चा में इसके लिए आया हूं यदि आपका ज्ञान मेरे को सही लगा तो मैं आपके मार्ग पर चलूंगा यदि मेरे आप जो
00:52:09:20 है आपकी बात समझ सम में समझ लेता हूं मेरे भाई मैं समझ गया आपकी बात मेरी बात सुनिए हम दोनों शास्त्र निकाल रहे हैं देखो देखो देखो बोलने नहीं दोगे भाई मेरी बात सुनिए आप ध्यान से मेरी बात सुनिए ध्यान से आपने कहा कि उनकी देह अविनाशी है अगर उनकी देह अविनाशी है तो कबीर अपनी देह का नाश नहीं कर सकते अगर उनकी देह अविनाशी अगर वह कर सकते हैं तो उनकी देह अविनाशी नहीं है तो अगर आप ये कह रहे हैं कि उनकी देह अविनाशी भी है और वो वो भी कर सकते हैं तो जनता डिसाइड करेगी आप क्या कह रहे हैं ठीक है हमने सव शक्तिमान हमने देवी भागवत से अनेकानेक प्रमाण दे दिए हैं कि विष्णु महेश जो है अविनाशी है वो लीला पूर्वक अपनी देह का नाश करके दिखाते हैं वो लीला पूर्वक च दिखाते हैं हा क्या आप अभी बोल रहे है अविनाश अभी बोल रहे वो लीला नाश कर सकते हैं अरे मेरे भाई लीला में अपनी देह का नाश करते हैं मैं वही तो कह रहा हूं देह का नाश ठीक है आप ठीक है भाई साहब जनता देख लेगी जनता देख लेगी ठीक है आप
00:53:24:20 आए अच्छा लगा सता से बातें की आप आए अच्छा लगा आपने सहता
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00:53:29:09 से बातें की हम और लोग ले ले जी वंदना जी जय श्री राम मेरा उ कैसे मरी करनी पड़ती है सर में दर्द होता है बहुत सना पड़ता है मेरा एक क्वेश्चन था उनसे कि अगर उनके कबीर जी सर्वशक्तिमान है परमात्मा है भगवान है तो फिर जो व ये स्टोरी बनाते हैं कि काल ने ऐसा कर दिया वैसा कर दिया तो अगर वह सर्वशक्तिमान है तो उन्होंने काल को रोक क्यों नहीं लिया हा वो सर्वशक्तिमान कहने को है मगर वो भविष्य नहीं देख सकते काल क्या करने वाला है नहीं देख सकते कहां क्या हो रहा है उनको नहीं पता बुराइयों को उन्होंने बनाया नहीं क्योंकि बुराई में वह है नहीं बुराई उनसे बनी नहीं है बहुत सारी बाधाएं लग जाती है ईश्वर पर तो कहां से फिर कहां से प्रकट हुआ है अपने आप कैसे से हो गया है जब उनको कोई बेस ही नहीं है उनकी बातों का मैं आप लोगों को एक चीज और बता देता हूं परम अक्षर ब्रह्म के बारे में वैसे मैंने वीडियो बनाया हुआ है य लोग ये जो परम अक्षर की बात करते हैं उस पर भी हमने ताबड़ तोड़ प्रमाण प्रस्तुत किए
00:54:43:25 थे य जो परम अक्षर की बात करते हैं ना एक बहुत बढ़िया चीज दिखाऊंगा परम ब्रह्म के जो परम अक्षर की बात करते हैं ऋग्वेद में परमेश्वर को अक्षर कहा गया है परम ब्रह्म को ऋग्वेद में परम ब्रह्म को अक्षर कहा गया है दसव मंडल के 164 म सूक्त के 39 में मंत्र में परम ब्रह्म को जो है अक्षर कहा गया परम अक्षर नहीं कहा गया है दूसरी बात नि जो वैदिक डिक्शनरी मान लीजिए आचार्य यास के द्वारा जिसका भाष हुआ है निरुक्त का वहां क्या है 13 अध्याय के दव प्रकरण में वह बात कर रहे हैं उसमें भी उन्होंने परम ब्रह्म का जो अर्थ अक्षर का जो अर्थ बताया वह परम ब्रह्म परमात्मा बताया है इसके अलावा आपको एक अच्छी चीज दिखा दूं
00:56:03:07 वाल्मीकि रामायण और युद्ध कांड वाल्मीकि रामायण युद्ध कांड और इसमें 624 युद्ध कांड का 117 वा
00:56:50:02 सर्ग जब हम इनको प्रमाण दिखाएंगे तो उनकी बात ही नहीं करेंगे देवी भागवत सही प्रमाण दिखाए कि कृष्ण परमेश्वर है कृष्ण परम ब्रह्म है तो उनकी बात नहीं करेंगे उसी देवी भागवत से अपनी बात को स्वीकार करवाएंगे कि ब्रह्मा विष्णु महेश जो है अविनाशी नहीं है क्योंकि उन्होंने कहीं पर भक्ति भाव में कह दिया कि हमारे रूप का तो आविर्भव तिरो भाव होता है अगर वह यह नहीं कहेंगे तो ईश्वर में बाधा लग जाएगी ना ईश्वर की देह का नाश नहीं कर सकते
00:57:22:09 ईश्वर इसीलिए भगवान भक्त भक्त और भगवान दोनों रूपों में अपनी लीलाएं करते हैं यह देखिए श्री राम के लिए लिखा है जो भी देख रहे हो रामपाल दास के फॉलोअर्स देखे वाल्मीकि रामायण उसी गीता प्र से प्रकाशित है जिस गीता प्र के पेज नंबर के आधार पर अपनी बातों को सिद्ध करते हो ना आप लोग ये देखो रघुनंदन आप अविनाशी परम ब्रह्म है देखो दिख रहा है रघुनंदन आप अविनाशी परम ब्रह्म है और इसी में इनको अक्षर भी कहा गया है इसका अर्थ है अक्षर परम अक्षर ब्रह्म परम ब्रह्म यह सब कोई अलग-अलग नहीं है बात करते टाइम कहीं शास्त्रों में ब्रह्म कह दिया गया कहीं शास्त्रों में परम ब्रह्म कह दिया गया
00:59:00:03 यह देखिए अक्षरमनामलाई करते हैं प्रॉब्लम फॉलो करने वालोने शास्त्र एकचल में पढ़े नहीं है बस उस उसी के आधार पर रते उसी को य कोई भगत जी है इनको हम ले लेते हैं
00:59:41:02 ऊपर भगत जी आप चेहरा दिखाए अपना शिवांश द्विवेदी ज्यादा बोला बोली मत बोला करो शिवाज भाई आपके पास जो सारे ग्रंथ है वो सारे गीता प्रस के हैं क्या नहीं जहां से जो मिलता है वोह ले लेते हैं चेहरा दिखाएं अपना भगत जी अगर आपको ऊपर आना है तो मयंक कुमार जी आप पहले आ चुके हैं
01:00:24:08 क्या पहले आए क्या कल आप ही आए थे क्या जी जय श्री राम जय श्री राम आप पहले आए नहीं मुझे लग रहा कल आप ही थे शायद लाइव में नहीं मैं भी थोड़ी देर पहले आया था फिर मैं डिस्कनेक्ट हो गया था नहीं आप पहले आ चुके हैं या नहीं आ चुके हैं कल नहीं नहीं मैं आज ही आया हूं हां
01:01:04:00 बताइए मैं सर बताइए क्या कहना आपसे कुछ चीज जानना चाह रहा था मैं नहीं जानने के लिए आप वहां पर आए क्लासेस में यहां जानने के लिए बिल्कुल नहीं है समय व्यर्थ होता है आप तो ये बताइए क्या आप कबीर पाल जो ये संत रामपाल है इनका जो ज्ञान गंगा है इत्यादि है ये सब आप सही मानते हैं नहीं नहीं अच्छा अभी आप थोड़ी देर आप थोड़ी देर पहले स्टेज प थे आप जी है ना तो आपको कोई जिज्ञासा है तो आप क्लासेस में आइएगा यह हमारा जो एक धारा है बिगड़ जाती है यहां पर वैचारिक मतभेद के निमित्त हम लोग चर्चा करने वाला यह वीडियो है जिस दिन हम प्रश्नोत्तरी वाला रखेंगे उस दिन आप आइए ठीक है वो धारा बिगड़ती चली जाती है जी ठीक है सर जय श्री राम नंबर है आपके पास हमारा नहीं सर नंबर नहीं है नंबर नोट कर लीजिए 740 869 न मिनट सर वापस बोलिए एक मिनट
01:02:07:15 7483 830 74836 ठीक है सर जी जय श्री राम जय श्रीराम अभी अवधेश जी हैं जी अवधेश जी बताइए अ जय श्री राम जय श्री
01:02:44:14 राम रामपाल जी की जो य इनकी कथा जो भी बुक्स है सब इनका ही अपना खुद का आडलज है और कलजी कह रहे लजी बोलो हमारी खुद की हमने ु बनाया तो हमारी फजी बो आइजी बोलो जो शास्त्र समत है उनकी उस हिसाब से आडलज नहीं है उनकी पर्सनल आडलज है जो उनके भक्त जो उनके शिष्य है व जानते हैं और जबतक कोई जब तक तपस्या नहीं करेगा शास्त्र का नहीं करेगा उसको सत का ज्ञान कहां से होगा एक चीज की समस्या एक व्यक्ति इतनी बार मैंने कहा कि भाई आओ दिखाओ मुझे वेदों में कहां प्रमाण है कि कबीर भगवान है आप गणेश को नहीं मानोगे आप शिव को नहीं मानोगे विष्णु को नहीं मानोगे मां भगवती को नहीं मानोगे जिनका स्पष्ट वेदों में प्रमाण दिया है मगर जिससे मिलता जुलता नाम दिया है आप उसको कह रहे हो वो भगवान है
01:03:56:19 कहां गए अक्षर परम अक्षर और तीन अक्षर वाले क्यों नहीं आ रहे भाई वाल्मीकि रामायण में इनका सबसे जवाब लिखा हुआ है छवा अध्याय टवे कांड में देख लीजिएगा श्री राम को परम ब्रम भी कहा गया और अक्षर पुरुष भी कहा गया है बिल्कुल है ही वो और यह सूरज जी आप अपना चेहरा दिखाए तो अवदेश जी आप कहां से हैं कहां से अ जी आप हम यूपी के हैं अच्छा अंबेडकर नगर से
01:04:52:21 अच्छा इसीलिए कहता हूं मत पढ़ो चक में कोई नहीं है टक्कर में सनातन धर्म से उलझना परंपरा प्राप्त सनातन धर्मा परंपरा प्राप्त सनातन धर्मावलंबियों से उलझना इतना आसान नहीं है व तभी तक है जब तक वह शता दिखा रहे अजीब बात यह लगती है एक चीज को कितनी बार बताया जा चुका है व कबीर देव जो लोग बारबार बोलते हैं उसको कितनी बार आप क्लियर कर चुके हैं सेम क्वेश्चन हर कोई लेकर आता है कुछ नया लेकर के आइए अगर आपके पास है
01:05:36:09 तो अरे भैया वेदों में रुद्र तो दिया है शिव तो दिया है चलो ठीक है वेदों में रुद्र शिव तो दिया है बोलना चालू करो वेदों में प्रमाण है शिव जी भगवान है बोलो जो नहीं दिया है जिससे मिलता जुलता दिया है उसको क्यों बोलते हो कबीर दिया नहीं है कवि दिया है कवि की संधि होती तो कबीर होने लगता है वोह अरे भाई ठीक है चलो कबीर भी मान ले वो कबीर कहीं पर तो अलग से लिखा हो वहां संधि हो रही है वहां का मंत्र का भाव कुछ और है व प्रकरण कुछ और है वो संधि होने के कारण रा आ गया तो उसको आपने कर लिया कबीर तब भी वो कबीर हुआ कबीर तब भी नहीं हुआ और कहीं पर तो लिखा हो कबीर चलो मान लो कबीर का अर्थ है कबीर तो कहीं अलग से कबीर लिखा हो ना फिर नहीं है हर जगह वहां ट्रांसलेशन में आया है कवि कवि से इन्होंने कबीर बना लिया फिर कहते हैं कि गुण देखो तो फिर यह कहो कि गुणों का प्रमाण है कबीर भगवान यह मत कहो वेदों में प्रमाण है वेदों में प्रमाण है तो वेदों में दिखाना पड़ेगा गुण भी तो बहुत सारे भक्त ऐसे हुए हैं जो कविताएं लिखे हैं रसखान जी है मीरा भाई है कितने पद लिखे हैं तो ये सब
01:06:51:10 भगवान है सब भगवान है कवि है ये सब सब भगवान है कोई आ नहीं रहा है विशाल भाटिया जी हैं विशाल भाटिया जी आप अपना चेहरा दिखाए
01:07:26:24 विशाल जी वेद शस्त्र गीता के आधार पर रामपाल वाले क्यों बोलते हैं डायरेक्ट बोल देते कबीर शिक्षा के आधार पर भक्ति करते हैं बढ़िया है डायरेक्ट बोलो कि कबीर प्रमाण है और कबीर भगवान है बोलो डायरेक्ट वेद का आलंबन क्यों लेते हो
01:08:17:10 भाई यह देखो एक और आए शिवांश जी जैसे भ्रमित करने वाले सतलोक में भी थे इसका मतलब वहां भी वही बैकुंठ सतलोक में भी प्रॉब्लम्स है टेंशन फ्री नहीं है आपका सतलोक है ना क्या बात है यहां से सारी यह मेहनत करके सब प्रकार की मेहनत करके आप जहां पहुंचो पहुंचेंगे वहां पर क्या है भ्रमित करने वाले लोग दिक्कतें समस्याएं यह सब वहां भी है
01:08:56:01 एक बार लिंक दे दीजिए लिंक दे दीजिए एक बार सतलोक में भी असत है वही मैं कह रहा हूं सतलोक में भी असत है भ्रमित करने वाले लोग हैं सतलोक में भी देखिए जो भी आए लिंक के द्वारा वह अपने चेहरे को लेकर आए मैंने भाई को शेयर किया है देखिए आते हैं कि नहीं पहले भी शेयर किया था आ प्रूफ कर दीजिए आप बो उनको ऐसे बोला करिए वो तो बहुत चैलेंजिंग रूप में बोल रहे हैं कि अगर अपना ये किया हो वो किया हो तो आ जाना अभी किया मैंने क आपको बहुत ज्ञान है ना तो भी आप आ करिए विशाल भाटिया
01:10:00:21 जी जय श्री राम जय श्री राम शिवांश हम जी बोलिए कहां गए चले ही गए जोगेंदर जी आप अपना कैमरा आपका चेहरा नहीं दिख रहा है ठीक से थोड़ा उजाले में रहिए जी बताइए जय श्री राम जय श्री राम भाई जी मैं ना थोड़ा बोलने वाला था ड़ ये जो रामपाल जो है रामपाल जी इनसे थोड़ा मेरा भी एक बार थोड़ा ऐसा हो गया था कनेक्शन मतलब मैं भी थोड़ा इनसे बात इनकी सुनी थी ना मैंने बोलते ब्राह्मण सारे जो मतलब य कलयुग के आ क्या बोलते क्या बोलते ब्राह्मणों को य जो राक्षस बोलते हैं मतलब ये जो रामपाल जी इस बात से थोड़ा मैं भी इससे थोड़ा मतलब मेरा मन विचलित हो गया तो मैं भी किसी और मतलब दृष्टि मतलब किसी नहीं देता बाद में यह बात सुनके
01:11:17:04 इकी मैं भी जो है श्री वृंदावन धाम में वृंदावन श्री अचार जी महाराज इनकी कथा सु जी तो मैंने इनकी वीडियो सुनी थी ना ब्राह्मण जितने ब्राह्मण है राक्षस मतलब उनकी फोटो ला लाकर भेजते हैं हर बार वीडियो अपनी अपलोड करते हैं डाल देते हैं कभी बागेश्वर धाम उनको डाल देते कभी प्रेमानंद जी महाराज को डाल देते हैं ऐसे डाल के उसके लिख ब्रा े नहीं डालेंगे क्योंकि हा इसको लिखते थे वो कलयुग सतयुग के जो राक्षस है वही कलयुग के ब्रा लेे य पर आएंगे तो यहां पर आएंगे तो चोट लग जाएगी उनको इसी वा से थोड़ा मेरा ही मन भटकने लगा था उस बा सुनके तो फिर मैंने देखा जब मेरे को पता लगा राक्षस देख सकते अपनी आखों से जैसे क्या कोई ब्राह्मण है ब्राहमण के रूप में कोई क्या बो दारू पी रहा है या फिर मानसून खा रहाय सब खा रहा है तो मतलब हम उसको दे सकते गलत आचरण कर रहा है मतलब उसको हम राक्षस कह सकते हैं मतलब सबके लिए बात नहीं है जो गलत काम कर रहा है उसके लिए हम कह सकते अरे भैया में लिखा हुआ है रामायण महात्म में रामायण महात्म में क्या लिखा
01:12:32:21 है कलयुग के लोग काम वेदना से पीड़ित और लालची होंगे तो क्या यह रामपाल दास जी को काम वेदना से पीड़ित वाला समझते हैं क्या लालची समझते हैं क्या या जो उनके सेवादार है जो उनके सेवादार है जो इनके वीडियो रिकॉर्डिंग दिखाते हैं या नाम दान केंद्र में बैठते हैं वह सब क्या काम वेदना से पीड़ित रहते हैं क्या वह लालची होते हैं इसका कोई उत्तर नहीं है आगे आगे देखिए इसी में लिखा है कि कलयुग की स्त्रियां और यह देखिए व्यभिचार हम यहां पर सब लिखा है तो हमारे घर की माताएं बहने हैं वो तो नहीं है भई ऐसी हम तो नहीं मानते आप क्योंकि वहा के ब्राह्मणों की बात हो रही है तो आप कलयुग के सभी ब्राह्मणों को ब्र राक्षस सोच रहे हो तो आप यहां पर जब कलयुग की स्त्रियों की बात हो रही तो अपनी स्त्रियों को आप क्या समझते हैं सवाल य आ जाए तब उनका लेगा नहीं नहीं ग्रंथों में जो लिखा है वो सभी
01:13:47:27 स्त्रियों के लिए नहीं लिखा है उसी प्रकार से ग्रंथों में जो लिखा है वो सभी ब्राह्मणों के नहीं लिखा है यह बात ठीक हैसे ये सब ब्राह्मण को मतलब ये लोग देखते हैं तो इसी हिसाब से जब इसको सिद्ध करना चाहते य भी सब सही है तो मतलब अपनी घर में जो इनकी घरवाली जो मानना इन लोग के लिए मतलब उसको नहीं मानते म इसको सिद्ध करते हैं य लोग वो अपनी बात को सिद्ध करने के लिए जी विशाल जी जय श्री राम जी मेरा नाम मशाल भाटिया विशाल भाटिया मेरे पिताजी का नाम है अच्छा आपका नाम क्या बताया आपने मन भाटिया एम ए डबल एन मन भाटिया अच्छा आपका अध्यात्मिक बैकग्राउंड जी मैं भी अब ग्रंथों को पढ़ ही रहा हूं मैं मेरा अभी मैं किसी से जुड़ा नहीं संप्रदाय से अच्छा बताइए प्रयोजन आपका आने का मैं बस आपको ही शुभकामनाए देते आ रहा हूं कि आप ऐसे ही आप कार्यरत ऐसे ही रहते रहिए सनातन धर्म के लिए बहुत-बहुत आभार आपका बहुत बहुत आ आप ऐसे ही आगे बढ़ते रहिए आपको श्री हनुमान जी आपको पूरा सामर्थ्य दे शक्ति दे इस चीज के
01:15:03:07 लिए आप जय श्री राम जय श्री राम मैं एक सेकंड देखता हूं कि मुझको भी एक प्रमाण देना है शिव पुराण से इनके खंडन में अगर मेरे को समय मिलता है तो मैं आपको दिखाता हूं अभी ठीक है ठीक है तो अभी आपको स्टेज से हटा देना जी मैं बस देखता हूं अभी आप हटा दीजिए तबतक जी मैं आपको भैया बोल हा क्यों नहीं बोल बो एक बात बो ये लोग क्या बो प्रमाण देते मतलब हर बार मतलब गीता मतलब इस पुराण से मतलब प्रमाण देते तो मतलब पूरी नहीं पढ़ते लोग आधी आ क्य मतलब बीच के पने क्यों पढ़ के दिखाते सबके लिए उसका आगे पीछे थोड़ पढ़ता लिए इसके अंदर ये भी लिखा हुआ है मगर उसको काट देंगे बीच में दिखा उसको बताएंगे सब लिखा हु ये तो पूरा दिखाना चाहिए उनके लिए खा मैं इसीलिए ज्यादा ग्रंथों की बात नहीं करता हूं क्योंकि वह जो ग्रंथ में खोल के दिखा दूंगा यह कर दूंगा वह कर दूंगा उसके बाद व उसकी बात ही नहीं करेंगे जो मैंने दिखाया वह उसी की बात करेंगे जो उन्होंने रटा है बस उसके अलावा तो सब बाउंसर जाएगा ना शायद वो ब्रेटली की बॉल होगी ग्लेन मैगरा की बॉल होगी जो बिल्कुल
01:16:18:12 सर के ऊपर से चली जाएगी गन की बड़ी लाइन और लेंथ की तारीफ होती थी ना जहां चाहे वहां पर उसका वो बल का हो जाता है तो थोड़ी देर थोड़ी देर पहले कोई महानुभाव आए थे उनको देख के मैं आया हूं हम और वो भव्या जी के साथ भी मैंने उनको लाइव स्ट्रीम पर देखा है तो किसके साथ देखा है जो आपके मित्र है वो भव्य क्या नाम है उनका भव्य क्या नाम है राधा कृष्ण दास जी भव्य जी अच्छा जो ये ये आए थे जो विशाल भाटिया जी जी जी जी तो मैं पूछ रहा हूं कि अगर आपके मन में ये भावना आ गई है क्योंकि उस दिन तो ऐसी भावना नहीं थी तो आ गई है तो बहुत अच्छी बात है कि जो अभी शुभकामनाए दे रहे थे जो हां जो अभी शुभकामनाए दे रहे थे अच्छा भावना आपके अंदर आ गई है तो बहुत अच्छी बात है ठीक है और बाकी तो राम जानते ही है तो अच्छा है देख के थोड़ा आश्चर्य लगा था एकदम से उनको देखकर ये तो जाना लग रहा है तो देखा अभी वो गए नहीं है अभी वो है अभी वो गए नहीं है वो कुछ निकाल के दिखाना चाहते हैं वो है अभी विशाल हां जी विशाल जी मैं कुछ प्रमाण दिखाना
01:17:33:19 चाहता हूं आपको शिवरा जी जी बताइए जी जील जी उस दिन जिस दिन आप भवेश जी के साथ आए थे तो उस समय आपको थोड़ा कुछ समस्याएं थी आपकी तो अब आशा करता हूं दूर हो गई होंगी सुनकर बहुत ही ज्यादा परिवर्तन आया आपके विचारों में जी के नाम से कमेंट लिखता हूं फोन पर आपको तो मैं आपको कुछ प्रमा चाहता से चलिए आप आप आप भ के भव्य के साथ में लाइव स्ट्रीम में थे क्या ऐसा कुछ बता रहे भाई साहब भ राधा कृष्ण दास जी हा जी था मैं कुछ और था मेरा कोई मतलब कुछ वो नहीं मे को जो जैसा काम होता था भन से संबंधित श से तो उस चीज में मेरे को होता था अच्छा ठीक है ठीक है बताइए प्रमाण मैं प्रमाण आपको दिखाना चाहूंगा शिवपुराण से मेरा कैमरा उल्टा हो सकता है थोड़ा सा मैं प्रमाण ऐसे आप बैक बैक कैमरा चालू कर दीजिए एक सेकंड बक प्रमाण दे दीजिए ना देख लेते हैं कहां पर है प्रमाण बोल
01:18:48:19 दीजिए हमारे पास है शिव पुराण जी मेरे पास संक्षिप्त शिव पुराण है संपत आप अध्याय बताइए अध्याय अध बताइए सेक खोल के दिखा रहा रुद्र संहिता के सृष्टि खंड में जाइएगा ठीक है किस बारे में है प्रमाण प्रमाण किस बारे में य जो ब्रह्मा विष्णु महेश में जो शिव जी है और जो सदाशिव जी है जिनको य काल ब्रम बोलते हैं वो उनकी एकता का प्रतिपादन है व मैं उसम दिखाना चाहता हूं
01:19:27:19 अच्छा एक सेकंड हा सट अब वो संक्षिप्त में है तो अध्याय मुझको पता नहीं वो एक सेकंड ट खंड आप देखिए वो जो है ना षष्ठी खंड में जो आपने पेज नंबर खोला होगा पर वो खत्म हो रहा होगा चेंज हो रहा होगा वहा लिखा होगा अध्याय इतने से इतने तक है ये जहां पर खत्म हो रहा हो उसमें देखिए अध्याय कहां से कहां तक बोला है शव पुराण सृष्टि खंड रुद्र संहिता सृष्टि खंड अध्याय नंबर अध्याय नंबर न अध्याय नंबर न जी इसमें है उमा सहित भगवान शिव का प्राकट्य उनके द्वारा अपने स्वरूप का विवेचन तथा ब्रह्मा आदि तीनों देवताओ की एकता प्र प्रतिपादन जी जी अब मैं इस
01:20:30:28 235 एक सेकंड मे पास व संस्कृत वाला है नहीं अभी वो मैं पढा कोई बात नहीं पढ़ बता दूंगा बस मुझे बोल दीजिए क्या पढ़ना है जो सुन पहले उनको उनको जो देख रहे उनको पहले उसम दिखा देता हूं कि जो ब्रह्मा जी और विष्णु जी जब बोलते हैं कि आप कोई अपने रूप में आइए उतार लीजिए तो उसम पहले श्री महेश्वर बोलते हैं मैं सृष्टि पालन और संहार करता हूं और सगुण और निर्गुण तथा सच्चिदानंद स्वरूप निर्विकार परब्रह्म परमात्मा हूं उस परे जाइएगा ठीक है अब ये देखि जो ब्रह्मा विष्णु मश जो तीसरे रुद्र है वो पिता नहीं है वो सब एक ही है इसमें देखिए ब्रह्मा जी को बोल रहे भगवान महेश्वर सदाशिव ब्रह्मण आपको
01:21:20:06 दिखा मेरा ऐसा ही परम उत्कृष्ट रूप और संहार करता सगुण निर्गुण निर्विकार सच्चिदानंद लक्षण वाला तथा परम ब्रह्म परमात्मा हूं अब इसम आगे गुण अथवा कार्यों के भेद से मैं ही ब्रह्मा विष्णु और रुद्र नाम धारण करके तीन स्वरूपों में विभक्त होता हूं अब य सदाशिव कह आप विष्णु पुराण पढ़ोगे तो विष्णु जी कहते हैं कि मैं विष्णु जी का उसम बताया गया कि वो तीन रूप धारण करते हैं ठीक है अब इसमें देखिए वो ब्रह्मा जी से कह रहे भगवान सदाशिव पहले कि विष्णु तुमने और ब्रह्मा ने मेरे अवतार के निमित्त जो स्तुति की है तुम्हारी उस प्रार्थना को मैं अवश्य सच्ची करूंगा क्योंकि मैं भक्त वत्सल हूं वो उसमें शिवजी बने तो इसलिए ऐसा वो है ये देखिए ब्रह्मण मेरा ऐसा ही परम उत्कृष्ट रूप तुम्हारे शरीर से ब्रह्मा जी की विट से प्रकट हुए थे ना तुम्हारे शरीर से इस लोक में प्रकट होगा जो नाम से रुद्र कहलाएगा मेरे अंश से प्रकट हुए रुद्र की सामर्थ्य मुझसे कम नहीं होगी जो मैं हूं वही यह रुद्र है पूजा की विधि विधान की दृष्टि से भी मुझ में और उसमें कोई अंतर नहीं है जैसे ज्योति का जल आदि के साथ संपर्क होने पर भी उसमें स्पर्श दोष नहीं लगता उसी प्रकार मुझ निर्गुण निर्गुण परमात्मा को भी किसी से
01:22:35:09 संयोग से बंधन नहीं प्राप्त होता यह मेरा शिव रूप ही है तो यहां पर कह रहे हैं कि मैं और वो एक ही है पूजा की दृष्टि में भी कोई नहीं है अब इस 38 में श्लोक में ये भी लिखा है कि मैं आप ब्रह्मा तथा जो ये रुद्र प्रकट होंगे ये सब के सब एक रूप है इनमें कोई भेद नहीं है भेद मानने पर अवश्य बधन हो अवश्य ही बंदन होगा तथापि मेरा शिव रूप ही सनातन है हां अब इसमें जो उनकी शक्ति है उमा ठीक है इसमें जो उनकी शक्ति है अब उन्हीं के तीन भाग हुए हैं ठीक है एक तो सरस्वती जी हो गई जो ब्रह्मा जी को प्रदान लक्ष्मी जी हो गई जो विष्णु जी को और काली हो गई जो रुद्र को अगर यह लोग इनको पिता पुत्र मानते हैं तो फिर ये जो तीन शक्तियां उमा जी से प्रकट हुई है ये तो आपस में भाई बहन हो गए ना फिर पत्नी पति प अरे वो सब लफड़ा है वो हमने पीडीएफ दे दी है वो वो पूरा वो सब झोल है वो सब ऐसा इसके सवाल का जवाब दे ये लोग ये लोग आपस में भाई बहन हो गए ना फिर जो तीन वो प्रकट हुए सदाशिव से उनसे उमा से जो तीन शक्तिया प्रकट हुई लक्ष्मी सरस्वती काली ये विष्णु पुराण के ये लोग कहते हैं कि
01:23:50:22 जो भगवत गीता है वो काल ने बोली है अब काल कौन देख मैं उसका खंडन महाभारत से दिखाऊंगा दिखाऊं आपको नहीं मैं मैं जिस जिसका काल के उसको समझाने के लिए जो खोलते हैं मैं उसी से दिखाऊंगा विष्णु पुराण बताते हैं दूसरा अध्याय दूसरा अंश और दूसरा अध्याय प्रथम अंश नहीं नहीं भगवत गीता में ही खंडन है काल का मिट विष्णु पुराण का ने लिया है ना प्रथम अंश और दूसरा अध्याय उसमें विष्णु जी की पहले स्तुति की गई उनको परमात्मा उसम दूसरे अध्याय में बताया गया कि वही
01:24:35:22 ब्र विष्णु पुराण मेरा एक क्या लिखा है 14 से 15 में यह कुछ दिख रहा हो इसमें खा है जगत के रूप से तथा इसके साक्षी पुरुष और महा काण काल बता हां हां हा इसमें पेज नंबर है 10 नंबर 10 मेरे पास है हा इसमें लिखा है कि नंबर पेज नंबर 10 आपका संस्कृत हिंदी वाला है ना जी हां तो इसमें ता वही
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→ Used in: A · Live रामपाल की भक्ति मनमुखी या शास्त्र सम्मत at 1:47:11 ↗
01:25:27:14 वही इन सब व्यक्त और अव्यक्त जगत रूप से तथा इसके साक्षी पुरुष और महा काण काल के
⬜ Not used yet · 01:25:33:22 – 01:29:56:13 (4:23)
01:25:33:22 रूप से स्थित है हे द्विज परम ब्रह्म का प्रथम रूप पुरुष है लो यहां पर काल कौन है परम ब्रह्म यहां पर काल हो गए परम ब्रह्म और देखिए ये लोग आधा कॉन्टेक्स्ट ही दिखाते हैं उसके उसका वहा से को बता रहे हैं वहीं पर परम ब्रह्म लिखा है और अभी मैं बताता हूं आपको नहीं नहीं अब देखिए मैंने शिव पुराण से जो दिखाया आपको कि भगवान सदाशिव तीन रूप धारण करते हैं अब ये विष्णु पुराण के दूसरे अध्याय में लिखा है जो ब्रह्मा विष्णु महेश्वर शंकर रूप से जगत की उत्पत्ति स्थिति और संहार के कारण है तथा अपने भक्तों को संसार सागर से तारने वाले उन विकार रहित शुद्ध अविनाशी परमात्मा सर्वदा एकरस विजय भगवान वासुदेव विष्णु को नमस्कार है वही दूसरा दूसरा अध्याय पहले अंश का दूसरा अध्याय पहला और दूसरा श्लोक हां अब श्री राम गीता में हम देखते हैं
01:26:33:24 कि दूसरा अध्याय और पहला मुझको बस एक महाभारत से भी दिखाना है काल का मैं दिखा दूं आप आप लोग आप तब तक दिखा दीजिए ये देखिए मेरे पास महाभारत है छह खंड की है ना जो गीता प्रस वाली महाभारत हम उसका छठा खंड आप लीजिए आपके पीछे छह खंड वाली रखी हुई है महाभारत जी जी एक सेकंड आप काफी पूरा सब देखे हुए हैं कौन कन सी कहां कहा रखी है हमको गीता प्रस का अच्छा लगता है क्योंकि उन्होंने भी काम ही किया है हमारी सनातन संस्कृति को बचाने का मगर मगर जो भव्य राधा कृष्ण दास है वो तो कहते हैं इसने बड़ा ही फेक ट्रांसलेशन कुछ दिखा दिया वो तो ऐसा कुछ कहते हैं रील बना के अब वो कन है तो वो अपना सबका अपना अपना वो है कोई बात नहीं आप उस परे हम ध्यान नहीं देंगे ये देखिए महाभारत है छठा खंड महाभारत का छटा
01:27:48:25 खंड अनुशासन पर्व उसका उसका है अध्याय नंबर 147 148 148 मैं मुझे निकालने की आवश्यकता है आप बता दीजिए क्या लिखा है बता 148 य चैप्टर है इसका इसमें महाभारत के के बाद जब पांडव भीष्म पितामह से उपदेश लेते हैं ना बा लेट होते पिता तो उस समय जो उदेश देते हैं शांति पर हो गया फिर अभी य अनुशासन पर आया है अब इसमें जो पितामह भीष्म है वह भगवान श्री कृष्ण की महिमा बता रहे हैं तो मैं कुछ श्लोक बताऊंगा जिससे सिद्ध हो जाएगा कि काल और कृष्ण में कोई अंतर ही नहीं है
01:28:36:10 देखिए य अनुशासन परव पेज नंबर 687 ये देखिए संसार में श्लोक नंबर 35 संसार में कौन सा ऐसा जो ऐसा है जो मेरे इस कथन को अन्यथा सिद्ध कर सके पितामह कह रहे हैं श्री कृष्ण का जैसा है उसे सुनो जहा भगवान श्री कृष्ण है वहां सर्वोत्तम पुष्टि विद्यमान है ठीक है अब ये लोग कहते हैं कि श्री कृष्ण की जन्म होता है महाभारत का सबसे पहला अध्याय पढ़ेंगे ना तो उसमें भगवान श्री कृष्ण को सबसे पहले अध्याय में परमात्मा बताया गया यह भी बताया गया कि भगवान श्री कृष्ण से ही जन्म मृत्यु वगैरे उत्पन्न होते है वो तो आप सही कह रहे हैं वो तो अनेकानेक ऐसे शास्त्र है जहा भगवान श्री कृष्ण की परब्रह्म राम की परब्रह्म सिद्ध है मगर मैं तो तो जिस शास्त्र को यह हाथ में लेकर बात कर रहे हैं मैं उस शास्त्र को बिना बदले ही इनको बता रहा हूं ना कि वहीं पर भगवान श्री कृष्ण को परम ब्रह्म कहा जा रहा है नौवे स्कंध में अब मैं यहां पर आया हूं उसी अध्याय के 39 श्लोक में ठीक है 39 से 40 श्लोक में ये दो श्लोक पढ़ूंगा जब श्री कृष्ण विषव रूप दिखाते हैं तो कहते हैं ना कि मैं काल हूं और अर्जुन ये सब जो क्षत्रिय लोग है पहले ही मेरे हाथों आए गए हैं तुम बस निमित मात्र हो इनको मारने के लिए
01:29:51:12 तुम निमित बन जाओ अब इसके आगे आप ये
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01:29:56:13 सब राजा लोग युद्ध के मुहाने पर काल के द्वारा मारे गए हैं हम भी काल से ही मारे जाएंगे क्योंकि काल ही परमेश्वर है
⬜ Not used yet · 01:30:03:26 – 01:34:09:25 (4:06)
01:30:03:26 एक सेकंड ठीक है एक सेकंड रुकिए मैं म्यूट करके आया हूं ठीक है दो मिनट मैं बताता हूं मैं भी एक दिखा दूं आप आप जा सकते हैं ये अद्भुत रामायण का 11 से 14 अध्याय है जिसमें कि श्री राम गीता दी गई है श्री राम गीता में भगवान कह रहे हैं मुझ अव्यक्त से मुझ अव्यक्त से काल की उत्पत्ति होती है किससे होती है मुझ अव्यक्त से और उससे प्रधान नामक तत्व और परम पुरुष की तो परम पुरुष की उत्पत्ति यहां पर राम से हो रही श्री राम और आगे क्या लिखा है इसके 22 में श्लोक में
01:31:01:09 की मुझ एक मैं सर्वव्यापी परमेश्वर शांत और ज्ञान स्वरूप हूं मुझसे परे कुछ नहीं है मुझे जान य हनुमान जी को उपदेश दे रहे गीता संग्रह में हा और मेरे सानिध्य से यह काल सारे जगत की सृष्टि का करता है तो यहां पर क्योंकि सृष्टि से उत्पन्न है तो यहां पर जो काल है माया पति में लीला पूर्वक काल के सहयोग से इस संपूर्ण जगत की सदा सृष्टि और इसका संघार करता रहता
01:31:40:01 हूं तो यह सारे हैं कोई और आना चाहे तो बताए भाई कौन-कौन है मैं आपको इनकी एक चीज और बताऊ बताऊ एक जी हा बोलिए का छवा श्लोक है सर्व धर्मा पर माम शरण 18 अध्याय का उसमें जो ब्रज शब्द आया है ब्रज शब्द उसम इनका मानना है कि ब्रज शब्द का मतलब जाना होता है आना नहीं होता तो इन लोगों ने उसका अर्थ पता है क्या किया जैसे उसमें हम पढ़ते हैं कि समस्त पूजा को त्याग कर समस्त समस्त धर्मों को त्याग कर त एक मात्र मेरी शरण में आ मैं तुझे संपूर्ण पापों से मुक्त कर दूंगा तो करते मेरी श से य कह रहे कि इसमें उन्होने अर्थ किया है समस्त पूजा को मुझ में त्याग कर मेरी समस्त पूजा को मुझ में त्याग कर त उस एक परमात्मा की शरण में चला जा मैं तुझे संपूर्ण पाप से छुड़वा दूंगा और य धर्म का भी अन्ने बदल दिया पूजा वही शलोक में नहीं लिखा
01:32:39:06 सजान समझ में नहीं आता मुझे भी बतानी थी जैसे मैंने बताया शरीर के भाया जो व मतलब अपनी एक अलग स्टोरी बना के बैठे निराकार है उनसे जो पुरुष प्रकट पुरुष है और उन्होंने सबको काल बंधन में फसा दिया मतलब सारा ब्लेम जो है सारा टेंशन जो है कर्म बंधन का जो भी है वो सब काल के सिर पर डाल दिया और जो परमात्मा है निराकार वो इनके कबीर है और वो एकदम निर्दोष है मतलब उनका कोई दोष नहीं है जो जीवात्मा जो सह रही है और वगैरह जो भी चीजें हो रही है उसमें उनका कोई दोष नहीं है तो ये स्टोरी बना के भी लोगों को समझाई जा रही है तो अगर कोई ये भी कह देता है मतलब ये भी ये चीज प्रूव करते है कि देखो कृष्णा ही काल है या महादेव ही काल है तो फिर उससे ये मतलब कृष्णा कृष्णा ही काल है मगर कृष्णा ही परम ब्रह्म भी है ये भी तो कह रहे हैं हां दूसरी बात दूसरी बात ये है क्या कबीर भविष्य नहीं जानते थे कि जिसको मैं बना रहा हूं काल को ये लोगों को फसाए हा उसमें बताते जाते उनको पता नहीं था वो अनजान थे तो भा थे जय श्री राम जय श्री अच्छा अच्छा विशाल जी आने के लिए आपका बहुत-बहुत आभार जी बहुत आनंद आ गया जय श्री राम ब आभार
01:33:54:10 आपका आप आए और आपने अपना समय यहां पर दिया अच्छा लगा आपसे बात करके जय श्री राम जय श्रीम जय श्रीम
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→ Used in: B · Video रामपाल का झूठा मोक्ष at 52:50 ↗
01:34:09:25 धर्मेंद्र जी बताएं आपका परिचय हेलो आपका परिचय अन म्यूट कर लीजिए जवाब दीजिए सुन पा रहे हैं सर मैं आपको पहले तो क्या करना
01:34:43:18 चाहेंगे नमस्कार कहना चाहूंगा मैं आपको पहले तो अच्छा जय श्री राम जी ज राम सर मैं काफी दिनों से आपका वीडियो देख रहा हूं और डिबेट भी देख रहा हूं बहुत सारा जी तो मुझे एक चीज समझ में नहीं आ रही है आप जो आध्यात्मिक ज्ञान है उस पहलू को छोड़ के आप पहले तो ऐसे क्वेश्चन करते हो जो समझ में नहीं आता किसी के
01:35:24:15 क्योंकि आप दोहरे क्वेश्चन करते हो आपके उसम मुझे मालूम है भाई साहब सुनि मेरी बात सुनिए भाई साहब मेरी बात एक मैं आपको टोकू यहां पर आप हमारी समीक्षा मत करिए हमारी समीक्षा करने के लिए जिनको अधिकार है वह हमारी समीक्षा करते हैं गलती पाए जाने पर डंडे भी पड़ते हैं मार भी पड़ती है आप हमारी समीक्षा ना करें आप हमें यह बताए कि आपको क पर कौन सी बात है जो हमने गलत कही है वो प्रतिकार करिए आप आपकी समीक्षा नहीं करूंगा क्योंकि हम तो उस मार्ग के लोग हैं के ना काऊ से दोस्ती ना काऊ
⬜ Not used yet · 01:36:04:27 – 01:37:09:10 (1:04)
01:36:04:27 सेर आप तो डंडे प्रॉब्लम यह है कि हम अननेसेसरी जो कंटेंट है वो नहीं लाना चाहते हैं कि यहां से इनके प्रवचन निष्कासित हो फिर वहां वो कटिंग करके दिखाए कि देखो इसने यह बोला था वहां जाकर के यह सब हम नहीं कर ना चाहते हैं भाई आपको मैं बता रहा हूं आप कट टू कट बात करिए पॉइंट टू पॉइंट क्या कबीर भगवान है वेदों में प्रमाण है अगर आप मानते हैं तो क्या आप प्रूफ दे सकते हैं इस तरह की बातें आप करिए आध्यात्म की आपको अगर चर्चा चाहिए आध्यात्म सुनने के लिए आप गुरुदेव के प्रवचन सुने गुरुदेव के वहां जाए पुरी शंकराचार्य जी के वहां पर जाएं उनका य चैनल है वहां पर जाकर के उनको देखें वहां आपको अध्यात्म की बहुत अच्छी अच्छी चीजें सुनाई देंगी हम तो क्या कौन होते अध्यात्म का वो प्रवचन करने वाले तो आप जो है कृपा करके यह बताइए क्या वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है अगर है तो हमें वो प्रमाण दिखाए ठीक है मैं दोबारा ले रहा हूं व्यर्थ
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→ Used in: B · Video रामपाल का झूठा मोक्ष at 54:49 ↗
01:37:09:10 की कोई चर्चा नहीं चाहिए भाई साहब मैं फिर कह रहा हूं व्यर्थ की चर्चा नहीं चाहिए विषय विषय प रहिए विषय प ही बात करूंगा विषयों प ही बात करूंगा पहले तो हम यह जानेंगे कि कबीर साहेब को संत रामपाल जी महाराज ने पूर्ण परमात्मा क्यों कहा गया है भाई इस भी तो आप जाओ बा बता आप एक बात बताइए पूर्ण का अर्थ क्या होता है चलिए इसी पर आज करते हैं बात पूर्ण का अर्थ क्या है पूर्ण का मतलब य है अगर ये कबीर जी है तो आधा परमात्मा कौन है सवा परमात्मा कौन है य बता दीजिए पूर्ण का य देखिए सर सभी धर्म अपनी अपनी ढपली पीट रहे हैं सभी धर्म मैंने आपको कहा ना मुझे मालूम हैसी भर के आए आपके चेहरे से प्रकट हो रहा है आप उसको थोड़ा तसल्ली में धैर
⬜ Not used yet · 01:38:12:13 – 01:46:21:07 (8:09)
01:38:12:13 रखिए आप एक तो बिना फॉर्म भरे जो लोग आते उनसे य प्रॉब्लम होती है वो न्यू सेंस फैला देते हैं और जो फॉर्म भर के उनसे हम पहले ही बात करके संतुष्ट हो जाते हैं कि इनको स्क्रीन पर लाना है कि नहीं लाना है यह प्रॉब्लम हो जाती है अब कोई व्यक्ति बिना बनियान के आ गया भाई कैमरा ऑन कर दिया यह भी सोचना पड़ेगा जीब है घर में बैठे हैं वहा टीशर्ट कंधे पर डली और अब अरे यार यह कैसी लाइव स्ट्रीम होती है लोग य भी देखेंगे य कैसा चैनल है किस प्रकार के लोग यहां चर्चा कर रहे हैं यह भी अब क्या करें उनसे बात करनी पड़ेगी नहीं करोगे तो कहोगे कि भाई वो देखो देखो कायर है हा जवाब नहीं है इसके पास लिए हटा दिया अब वो व्यक्ति जो आया था अभी कुछ दिन पहले रतन रजत करके उसका कुछ नाम था वो आ कर के ऐसे मैंने बोला कबीर क्या वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है अरे आपको यही नहीं पता तो मैंने कहा अरे भाई इसको हटाओ अब उसने वहा फेसबुक पर डाला है भगोड़ा मेरे लिए आवान भगोड़ा तो या तो इनकी यह सब कारस्तानी झेले
01:39:27:24 हम लोग यहां बैठ कर के तीन घंटे चार घंटे नहीं नहीं नहीं नहीं भाई और अगर हमने इनको हटाया इनकी कारस्तानी हों को नहीं झेला तो जैसे वह तथाकथित कृष्ण भक्त मैंने आवान रा दिया वो मेरे से डर गया उस दिन तो मतलब सबका सर दर्द हो गया था लेकिन छ हा अरे उस दिन आपकी माता जी ने क्या कहा था उस दिन की चर्चा के बारे में अरे छोड़िए मेरी माता जी तो मेरी माता जी वो हो जाती है ना भाव हा तो कहते है अरे इस पापी को समझ में नहीं आ रहा है क्या एक बार में कितनी बार समको वो थोड़ा ऐसे हो जाती है तो मैंने कहा मम्मी लास्ट में वो जो साढ़े तीन घंटे के बाद जब हुए थे और वो बात जब हो रही थी ना कि वो ईश्वर अगर वो है सृष्टि की रचना और वो इच्छा नहीं है तो फिर अगर वो सच्चिदानंद है तो वो वो निर्गुण कैसे है उस समय मैं इतना मतलब थ एक तो पूरा शायद व संडे का दिन था क्या पता नहीं संडे का नहीं था कोई और दिन था पर मैंने अपना जो भोजन प्राप्त किया था उसको भी कि काफी समय हो गया था और मेरे
01:40:42:25 हा दिन स्प कर दिया था दोपहर का स्किप किया था सुबह लिया था और बहुत लेट हो गया था रात भर उससे जदा एनर्जी बर्बाद हुई थी चिल्लाने में सा लगातार वोकल य वॉइस का यूज हो रहा है तो मैंने उसको हटाने का निर्णय पता है कब लिया जब मैंने गिलास उठाया पानी पीने के लिए और मैं अपने हाथ को देख रहा हूं कि मेरा हाथ काप रहा है तो मैंने कहा कि अब एक चर्चा किसी और दिन रख लेंगे और मैंने उससे कहा भी कि हट जाओ हट जाओ मगर जाएगी य बात करते हुए य भीय भी कटिंग लग जाएगी तो मैंने उससे कहा भी काफी देर हो चुकी है चर्चा किसी और दिन ल उसके अंदर एक बवासी भर चुकी थी कि इसने जो है मेरे ईश्वर को बाधित सिद्ध कर दिया है उसने थोड़ी देर पहले ही मान लिया था ना कि एक नियम है लगा हुआ है ईश्वर अपनी देह का नाश नहीं कर सकता ईश्वर की इच्छा नहीं हो सकती अपनी देह का नाश करने की उसने मान लिया था वादित हो गया ईश्वर अब उसके अंदर य बवासी थी नहीं मैं नहीं जाऊंगा तो तब मुझे ऐसा निर्णय लेना पड़ा कि भाई हटाओ और किसी और दिन स विवेक से विवेक पूर्ण आदर सम्मान के साथ दोबारा रख लिया जाएगा मगर उसने उतनी
01:41:57:28 देर में क्या किया वहां जाके अपने ा इत्यादि इत्यादि पर चालू कर दिया कॉमेडी बनाना चेहरा बिगाड़ना सब कुछ उसने चालू कर दिया और फिर हमने इधर से कुछ सच्चा भरे बनाए तो फिर उसके प्रतिकार में तो उसने फिर अर्थ का अनर्थ ही कर दिया वो सब लंबी कहानी जी कौन आए हैं धर्मेंद्र जी आप आप रहने दीजिए आप आपसे हम चर्चा नहीं करेंगे क्योंकि आपको चर्चा नहीं करनी आपको जो है कुछ और नैरेटिव के साथ आप आए ठीक
01:42:35:12 है जी हर हर महादेव शिवांश भैया हर हर महादेव आप दिख नहीं रहे आपका केवल वो भैया मैं एक्चुअली अभी ऑन ड्यूटी में हूं मलेशिया से कनेक्ट हूं मैं अच्छा अच्छा मलेशिया में कहां से मलेशिया में मैं शिलांग गढ़ में हूं कोलपुर से थोड़ी दूरी में अच्छा आप बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं क्योंकि देखो अंधविश्वास इतना फैला हुआ है कुछ चर्चा मेरी भी होती रहती है एक चीज आपको बताना चाहूंगा शं भैया जैसे ये लोग बोलते हैं कि किसने कहा जैसे परमात्मा है तो वेदों में क्यों नहीं है परमाण उसका पर वेदों में उनकी क्वालिटी बताई गई है ज जैसे चारों वेदों में है जो कति शास्त्रों में भगवान श्री कृष्ण का प्रमाण है पहली बात तो यह है मैं रेखा बता देता हूं आपको शति शास्त्रों में भगवान श्री कृष्ण का प्रमाण है और रामचंद्र जी के बारे में भी प्रमाण है चुटियों में
01:43:47:15 जी जी जैसे ये अध्याय 11 का 32 वा श्लोक खोल के दिखा एक एक 75 और चार में हे तेजस्वी कृष्ण आप हम भक्त जनों के बंधु मित्र और प्यारे हो अतः हम सभी जनों के सखा होने के कारण सर्वथा स्तुत्य हो जी अभी मैं मूर्ति पूजा वाला चैप्टर है उससे निकाल के आपको बहुत सारे प्रमाण बता देता हूं जी जी नहीं जो वो सहस्त्र शीर्ष जो विराट रूप दिखाया था श्री कृष्ण जी ने गीता में देखिए श्री राम के वैदिक प्रमाणों का यहां पूरा संक्षिप्त में जी जी विवरण है श्री राम के वैदिक प्रमाण और जी श्री कृष्ण के वैदिक प्रमाण भी हैं
01:44:57:15 जैसे अर्थ वेद के अवेद का अध्याय 21 और 32 जो विराट परम पुरुष का रूप दिखाया गीता जी में उन्ही परमात्मा कहा गया दोनों उसम अजन्मा अभिनाशी मोक्षी दाता व लक्ष्मीपति है यह देखिए वैदिक प्रमाण श्री कृष्ण का वासुदेव के पुत्र श्री कृष्ण भगवान साक्षात नारायण विष्णु है जीय मिलाय तत्र आरण्यक में है यह पढ़ते ही नहीं है देखो चारों वेदों में जो सहस्त्र शीर्ष जो विराट स्वरूप दिखाया था चारों वेदों में उनका वर्णन है उन्ही को परमात्मा कहा गया है जैसे सामवेद आक पर्व अध्याय छ खंड चार मंत्र तीन से आ अर्थ वेद में कांड 10 सूक्त सात और कांड 19 सूक्त छ है यजुर्वेद में अध्याय 31 और 32 और ऋगवेद में मंडल 10 सक्त 90 वही सहस्त्र शीष वाले जो श्लोक है जो उसमें जो गीता में जो विराट स्वरूप दिखाया उसे ही परमात्मा कहा गया है जी तो यह नहीं पढ़ते धर्मेंद्र जी आए इनको हम ऊपर
01:46:12:18 लेते हैं देखें कुछ अगर यह कुछ बताए वेदों में प्रमाण है कबीर कैसे भगवान है
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01:46:21:07 हां भाई धर्मेंद्र जी विषय पर रहकर अगर बात करना चाहे तो कर सकते हैं अंतिम बार आपको एक अवसर प्रदान कर रहे हैं बताइए वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है मतलब आप ज्ञान चर्चा का अर्थ यह होता है कि सामने वाले की भी सुनी जाए आप एक क्वेश्चन ले लेते हो भाई साहब यह बताइए रामपाल दास जी ने कितने वीडियोस में या उनके भक्तों ने कितने ज्यादा कमेंट्स में अपने यह कहे हैं कि वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है कहा है कि नहीं कहा है जी बकल पहले पहले एक बात को खत्म करिए वेदों में प्रमाण है कबीर साहब भगवान है आप इस बात को मानते हैं जी बिल्कुल मानते हैं तो अब मैं यही तो आपसे कह रहा हूं कि आप वेदों में प्रमाण दिखाइए कि कबीर कहां भगवान है बताइए मैं यह कह रहा हूं कि संत राम जी महाराज भाई साब क्या वेदों में प्रमाण नहीं है क्या कबीर भगवान
01:47:29:13 है क्या वेदों में प्रमाण नहीं है क्या कबीर भगवान है आप उनसे आप उनसे चर्चा कीजिए ये उनका वाक्य है वो कह रहे हैं मगर हमय कह रहे आप नहीं मानते आप नहीं मानते नहीं मानते हैं ना तो फिर आप बताइए वेदों में कहां प्रमाण है कबीर भगवान है 2 प्स टूट 2 प्लसटू फो होता है और टीचर बता रहा है तो बच्चा थोड़ी पूरा पूरा उसका सिलेबस रट के आएगा हां ठीक है सिलेबस रट के नहीं आएगा फिर वह अपनी वो रामपाल दास जी की तरफ से उनका पक्ष रखने भी नहीं आएगा देखिए सर रामपाल दास जी की तरफ से पक्ष रखने नहीं आएगा वो बच्चा वो टीचर की तरफ से कहीं शास्त्रार्थ में नहीं पहुंचेगा क्यों नहीं पहुंचेगा भाई साब आप जा सकते हैं भाईब है जी के ज्ञान के बारे में आपको नहीं पता है मत आइए कोई और आएगा आप घबरा रहे हैं आपको मालूम
01:48:33:13 है इसलिए इसलिए प्रॉब्लम होती है देखिए अपनी बात सिद्ध नहीं करनी है कि हम ू प्लसटू वाले बच्चे हैं और रामपाल टीचर है अभी तक ताना झंडा लेकर चलते थे वेदों में प्रमाण है ये झंडा इनका नीचे हो गया अब देखिए उस बात को सपोर्ट नहीं कर पा रहे यह बहुत बड़ा अचीवमेंट है बहुत बड़ा अचीवमेंट है क्योंकि यह लोग रट लगाए रहते थे भाई रट मैं तो अपने कमेंट देख देख के परेशान था उसमें जो दो लाख व्यूज आए ढाई लाख उस मेले वाले उसमें वीडियो में उसमें हर दो तीन मिनट के बाद एक कमेंट आता था वेदों में प्रमाण पूरी लिस्ट ऋग्वेद मंडल इतना सक्त इतना मंत्र इतना ऋग्वेद मंडल इतना अथर वेद सामवेद य उसम लिस्ट आती थी पूरी मैं तो उसको देख अब अब जब हम उनसे खोल रहे हैं कि भाई खोल ऋगवेद में क लिखा है तो अब ये हट रहे हैं कि मैं तो ू प्लस टू वाला बच्चा हूं हमारे उन्होंने जो कहा वो जो है क्या कहते हैं उन्होंने जो कहा मान लि हमारे टीचर [संगीत] ने कहेंगे अब जब इनसे कहेंगे कि टीचर ने अगर कहा है तो तुमने टीचर को टीचर माना क्यों किसी आधार
01:49:48:15 पर मानोगे ना टीचर ना तो वो परंपरा से है टीचर वो टीचर परंपरा से तो नहीं है तो कैसे तुमने मान लिया उसको टीचर अपने माता-पिता का खंडन करके ही तो तुमने उसको टीचर माना है बताइए माता-पिता का खंडन किया ना क्योंकि यही कहते हैं कि कबीर साहब से पहले वह ज्ञान नहीं था अपने पूर्वजों का खंडन करके ही टीचर माना आपने उनको बिल्कुल परंपरा नहीं है
01:50:25:18 हां मैं तो इस बात से हैरान हूं शिवान से भैया जिस जिसका वो अनुवाद लेते हैं जिससे व मंत्र लेते हैं उसी का खंडन करते हैं कि ये मूर्ख था इसको इसको ज्ञान नहीं था अज्ञान था हां इस बात को हम कैसे फसा ले बताइए आप ये देखिए अब से थोड़ी देर पहले तक ये लोग एक ध्वज बना के चलते थे दौड़ लगाते थे मैराथन वाली कि विदों में प्रमाण है कबीर भगवान अब इनको शर्म आ रही है अब लज्जा आ रही है इनको यहां इस चैनल पर आक के अब हम नहीं बोलेंगे कि वेदों में प्रमाण है वो तो आप कभी वो रामपाल से ही पूछना व आप रामपाल दास जी के पास जेल में जाओ वहां पर मुलाकात क्या कहते मिलाई कहते वो संडे संडे को होती कब होती है उसम जाओ उसम पूछना हा व तो जेल धाम है इनके लिए हा जेल जाना पड़ेगा वहां जाकर के जो है वहां पूछना भाई और हम य बोलते ही बोलते े रामपाल जी के शि से चर्चा हुई मैंने कहा वेद को बोले हा मानते मैंने 100% मानते बोले 100% मानते हैं अच्छा जो गीता में जो काल है जिसको आप काल कहते हो अगर गीता अगर चारों वेदों में उनका उनको परमात्मा सिद्ध कर दूंगा तो मानोगे बोलेगा वो बोलने लगा नहीं हा ठीक है मान लेंगे जब चारों वेदों में मैंने सिद्ध किया तो बाद उसको वेदों से नाय करने
01:51:41:06 लगे कुछ कुछ ज्ञान इसम काल ने दे रखा है आपको कैसे पता है कि कौन सा ज्ञान काल ने दिया कौन सा ज्ञान परमात्मा ने दिया है वो तत्वदर्शी संत बताते हैं संत कौन है वो संत राम बती है जो गीता बताती है तत्वदर्शी संत वो है जी तो द संत रामपाल जी मतलब की अभी तक मोक्ष किसी को प्राप्त नहीं हुआ मतलब जो अभी अब जो मोक्ष प्राप्त होने लगा वो रामपाल जी के उससे होने लगा बोले हा मैंने कहा गीता में तो शर जी कह रहे हैं कि कर्म योग से तो राजा जनक जैसे बहुत से राजाओ को मोक्ष की प्राप्ति हुई है और जनक राजा तो त्रेता युग में थे ये तो कलयुग में हुए रामपाल जी तो बकुल अरे तत्वदर्शी संत गुरु बिल्कुल गीता बताती है मनुस्मृति दो 12 अध्याय 12 112 14 बताती है अथर्ववेद 117 16 बताती है ष 6 14 दो बताती है 4 नती बताती है मको उपनिषद एक दो 12 बताती है भर भर के प्रमाण बोरे भर भर के इतने प्रमाण है कि इनके बातो का खंडन गीता से ही होता है अध्याय तीन के 20 श्लोक में श जी कहते हैं कि कर्म ही कर्म के कर्म योग
01:52:56:08 ही राजा जनक जैसे बहुत से राजा थे उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई त भी उनको देखते हुएय नित प्रामाणिकता का खंडन भाई देखिए जो भी ज्ञान इनके विरुद्ध सुनिए इसका एक ही खंडन है मैं रामपाल दास जी की तरफ से उस समय सुन लीजिए इन सब बातों का एक ही खंडन है जो भी हमारे मंतव्य के विरुद्ध होगा लिखा हुआ वो हम नहीं मानेंगे वो काल ने मिला दिया जो भी है कुछ अज्ञानता वश कुछ है वो हम नहीं मानेंगे जो भी हमारे विरुद्ध होगा इसका अर्थ क्या है कि वेद हमारे लिए प्रमाण नहीं है या तो वो बोलने वाला या उसके द्वारा जो कहा गया है सूक्ष्म वेद वो प्रमाण है वेद हमारे लिए प्रमाण नहीं है हां वो सकाल ने बोला सेम इसी तरह की बातें कुछ अन्य पंथ भी करता है जैसे ये इतना हिस्सा तामसिक है तो ये ये तामसिक है तो ये सात्विक है तो इसको नहीं करना इसको ही पढ़ना है दिलीप दास जी जय श्री राम एक क्वेन और था मेरा ये लोग अपने नाम के आगे दास क्यों लगाते हैं ये लोग तो डायलॉग मारते है बंदी छोड़ मतलब किसी की दास्ता नहीं करनी है तो नाम क्या खत्म हो चुकी है ये बंदी छोड़ का अर्थ क्या होता है दिलीप दास
01:54:11:16 जी बंदी छोड़ का मतलब होता है कि बंधनों से मुक्त कराने वाला परमात्मा का नाम है अच्छा कहीं कहीं पर वो बिना आ की मात्रा के लिख देते तो व बंदी छेड़ हो जाता है कहीं कहीं पर वो लिखने में गलती हो जाए थोड़ा सा तो बंदी छोड़ की बजाय व कुछ और ही हो जाता है खैर मुक्ति के लिए लिखा जाता है सम छो होता है हा नहीं वो कभी कभी नहीं जैसे किसी पेंटर ने लिखा अब उसमें जो आ का डंडा है वो मिट गया किसी तरीके से मिस प्रिंट हो गया तो वो पढ़ने में आ रहा है बंदी छेड़ तोव अजीब हो जाता है खैर वो बंदी छोड़ है मुक्ति का है तो बात अलग है जी बताइए दा जी तो क्या आज कोई नया क्वेश्चन ले लेते हैं क्योंकि वही वाले क्वेश्चन से वो थोड़ा सा बोर हो गई होगी जो दर्शक होंगे यह बताइए आपके हिसाब से क्या रामपाल जी तत्वदर्शी संत है या नहीं इस आखरी क्वेश्चन के साथ ही हम लोग तत्वदर्शी है कि नहीं है बताइए है स त शांति है अच्छा वो किस कैसे सिद्ध हो होता व तत्वदर्शी संत
01:55:25:27 है कैसे सीत होता है बस तत्व संत मतलब होता है कि जो ने तीन प्रकार के मंत्र होते हैं तीनों प्रकार के मंत्र बताए जाते हैं प्रमाण के साथ बात करिए हा ठीक है बोलिए चलो इस टॉपिक के ऊपर मैं बात नहीं करना चाहता आपको प्रमाण चाहिए था ना कबीर साब जी के बारे में कबीर साहब जी के बारे में प्रमाण चलिए वही बता दीजिए ठीक
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01:55:57:25 है अवेद कांड नंबर च अनुवाद नंबर एक मंत्र सात में प्रमाण क्या लिखा है व अथर्ववेद व लिखा यो हा अर्थ वेद कांड नंबर चार अनुवादक नंबर
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01:56:14:07 एक मंत्र सात में प्रमाण है कबी सा क्या क्या लिखा है बताए क्या लिखा है बताइए क्या लिखा यथम पितम अरे भैया केवल व शब्द बता दीजिए जो आप प्रमाण के रूप में बोल रहे मंत्र मत पढ़ हमारे चैनल पर आप केवल वो बता कबीर देवो क्या लिखा है कबीर देवो कबीर कबीर लिखा है या कबीर लिखा है कबीर कबीर क्या लिखा है कभी मैं आपको लिख के बता रहा हूं यह बता दीजिए जरा खामा खाम मुझे वेद शाम रात के टाइम में निकालना नहीं चाहिए यह तो नहीं लिखा
01:57:06:00 है यह लिखा है क्या हा कभ देव अरे भाई य है क्या जो पूछ रहा व तो बताओ आगे क्यों बढ़ जाते हो हां तो हम तो यह पूछ रहे हैं ना कि यह कहां पर लिखा है तो बताया यह कहां लिखा है यह बताओ इससे क्या मतलब होता है कबीर बोलो या कबीर बोलो क्यों नहीं मतलब किया गया कबीर कबीर कैसे बना कौन सा गटल नियम है व्याकरण का कौन सा नियम है जिसके अनुसार कबीर कबीर बनता है और जो कबीर है वो कोई नाम है तो वो कबीर अलग से क्यों नहीं लिखा उसके आगे कोई ना कोई दूसरा शब्द क्यों है क्योंकि वो कबीर साहेब जी जैसे आपका कोई नाम है तो घर प कुछ और बोलते थोड़ा सा तो फिर उसम थोड़ा नाम में डिफरेंट हो सकता है लेकिन नहीं वोटर आईडी में मेरा नाम लिखा है शिवांश नारायण द्विवेदी जी नहीं लिखा है शिवांश नारायण द्विवेदी लिखा है जब मेरा नाम ऑफिशियल कहीं पर लिखा जाएगा नाम तो उसके साथ जी नहीं जुड़ा रहेगा तो ऐसा
01:58:21:07 कहीं प है क्या केवल कब लिखा हो उसके आगे दूसरा शब्द जुड़ा ना हो उससे क्या घर अपना घर के जो भी सदस्य अपना नाम शुद्ध रूप से लेते हैं मगर मगर जब आवश्यकता पड़ती है तो शुद्ध रूप से भी लेते हैं मगर जब आवश्यकता पड़ती है तो शुद्ध रूप से भी लेते है जैसे मेरी बात सुनो मैं उदाहरण देता हूं मैं उदाहरण देता हूं जैसे रामपाल दास जी है वो जब पेशी पर अदालत जाते हैं तो भले ही आप लोग उनको कहते हो बंदी छोड़ या आप लोग उनको कहते हो तत्वदर्शी संत रामपाल मगर वहां पर जब उनका नाम बोला जाता है तो पता है उसकी पेशी है रामपाल हाजिर हो या इस तरह से वहां बिल्कुल शुद्ध नाम बोला जाएगा रामपाल दास बनाम ये वहां कुछ नहीं बोला जाएगा आगे पीछे कुछ भी कोर्ट के कागजों में नाम लिखा अनुवाद करता ने त्रुटी कर द है अनुवाद करता ने ु कर अरे मंत्र की अनुवाद की बात नहीं हो रही है य पर मंत्र की बात हो रही है अनुवाद बाद में पहले आप बताओ क कबीर
01:59:36:16 कैसे बना मंत्र में कबीर है कबीर क तो मतलब होता है वो आप लगा म करो कैसे मतलब होता कबीर कबीर कैसे बना वो बताओ भाई साहब वो बताओ मैं क्या बोल रहा हूं और अगर मान लो अगर मान अगर मान लिया कि कबीर का अर्थ कबीर है यह मान लिया तो फिर आप यह बोलो के वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है कबीर भगवान नहीं बोलो और वहां पर जितनी जग बोल रहे क सुनो जितनी भी जगह आप बोल रहे हो ना कबीर का अर्थ कबीर है वहां पर वो शब्द पूरा कवि है ही नहीं वो शब्द है कवि और जो रा आया है वो रा संधि संधि होने के कारण व ता है जब उस परमात्मा की महिमा लिखी तभी तो उसको देव बोला जाएगा जब परमात्मा के बारे में जानकारी द बोला
02:00:37:03 जाएगा हु साफ साफ मैं यह नहीं कह रहा हूं उसको देव क्यों बोला गया मैं यह कह रहा हूं जब दो शब्द आपस में जुड़ रहे हैं वहा पर रा उत्पन्न हो रहा है संधि के कारण व्याकरण संबंधी नियम है वो और वहा पर जो शब्द है मूल शब्द है व क कवि का अर्थ है सर्वज्ञ यह सब वहा पर कबीर शब्द नहीं है वहा पर कवि शब्द है यजुर्वेद ठीक है यजुर्वेद का मतलब हिंदी संस्कृत में बोलते यज ठीक है उसके पीछे दो मात्र लग जाता ठीक है हलंत लग जाता इसका मतलब बहुत अच्छी बात आपने क देखिए बहुत अच्छी बात आपने कह दी
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02:01:16:24 जैसे यसे यु में पीछे विसर्ग होता है और जब साथ में वेद लग जाता है तो यजुर्वेद रा उत्पन्न हो जाता है तो इसका मतलब व यजर नहीं लिखा है वहा पर
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02:01:31:25 यजुर नहीं लिखा है व यज लिखा है संधि होने के कारण व रा उत्पन्न हो रहा है यानी कि वहा मूल शब्द क्या है यजू इसी प्रकार से जो कबीर देव में रा आ रहा है वो उत्पन्न हो रहा है संधि के कारण वहा पर जो मूल साहब पूरे ग्रंथों में कहीं प कबीर क्यों नहीं लिखा कहीं पर तो लिखा हो कबीर और अगर नहीं लिखा है तो आप य कना वे में प्रमाण है कवि भगवान है कवि कबीर मत कहो कभी नहीं कबीर कबीर लिखा है आप कबीर कह रहे
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02:02:05:14 हो क कवि है वो कबीर कैसे बना कबीर देवो लिखा है कबीर देव नहीं लि है कबीर बोला जाएगा तो उन्होने
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02:02:23:26 कबीर क्यों लिखवाया वेद में क्या उन्हें नहीं पता था कि भविष्य में लोग उन्ह कबीर कहेंगे तो उन्होंने कबीर ही क्यों नहीं लिखा वेद में परमा को संत लिख ग उन्होने त्रुटी कर द अब आप अब आप भाईब परमात्मा की महिमा लिखी सुनो अब आपकी अब सुनो कवि का अर्थ क्या था आप परमात्मा मानते हो कवि का अर्थ परमात्मा मानते हो आप परमात्मा को मानते हैं नहीं नहीं कवि का अर्थ परमात्मा मानते हो कि नहीं हेलो हेलो क मानते उसमें कबीर देवो लिखा गया मैं मैं अभी पूछ रहा हूं कवि का अर्थ परमात्मा मानते हो कि नहीं कवि कवि का
02:03:12:03 अर्थ कवि नहीं कवि लिखा गया कवि मैं आपसे पूछ रहा हूं कभ का परमात्मा मानते हो कि नहीं उसम परमात्मा का अगर आगे महिमा लिखी होगी तो कवि का मतलब भगवान ही होगा मतलब केवल केवल ना मतलब केवल नाम आने से य सिद्ध नहीं होता कि व कभी कवि जो है वही कबीर है जिसको आप कह रहे हो केवल नाम आ जाने से परक उसम
02:03:51:27 पूछ रहा हूं आपसे केवल नाम आ जाने से ये माना जाएगा या नहीं माना जाएगा यह बताओ पहले केवल नाम से नहीं माना जाएगा ना हेलो हेलो हेलो हा सुन रहे केवल नाम आ जाने से मानोगे या नहीं मानोगे कि वह जो बात हो रही है वह कबीर केही बारे में बात हो रही है कबीर के बारे में ही बात हो रही है क्योंकि उसम आप बहुत अच्छा लगा आप बात कर परमात्मा कारा मेरा प्रश्न जो मैं पूछ रहा हूं आप उसका उत्तर नहीं दे रहे मेरे पास इतनी एनर्जी नहीं है कि मैं आपको बारबार अपना प्रश्न समझा सकू आपकी हमारी चर्चा लोगों ने देख ली है आप जा सकते
02:04:36:06 हैं अगर देव लगने से कोई परमात्मा सिद्ध हो जाता है तो तो नरसिंह देव वामन देव सबके आगे देव लगा हुआ है सब परमात्मा है दिनेश जी तीसरी चौथी बार आपका स्वागत है लाइव में नारायण जी आप कुछ नया लाए हैं या पुराना ही है आपका बताइए नया सुनोगे या पुराना सुनोगे पुराना सुन चुके हैं वो तो नहीं सुनना बताइए वेदों में कहां प्रमाण है कबीर भगवान
02:05:12:04 है अभी जो आप कह रहे थे कहीं पर भी कबीर नहीं लिखा हुआ है और वो कबीर की बात कबीर कबीर कबीर नहीं कबीर क लिखा है कबीर कबीर तो हम उसको बोलते हैं ना कबीर क
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02:05:31:14 बोते क्यों बोलते हो कौन सा नियम है जो ऐसा बोलते हो क्यों बोलते हो भाई को शकर जी बता रहा सुन लीजिएगा शिवजी को शकर जी क्यों बोलते हो बोले क्यों बोलते बो बोलते दुनिया
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02:05:48:28 वाले क्यों बोलते हैं अब चुप गए अरे भैया शिव और शंकर दोनों का अर्थ है अभी उस नहीं आते कबीर की बाकर शंकर नाम भी शंकर नाम भी शास्त्रों में दिया गया है शंकर नाम भी शास्त्रों में दिया गया है और अगर कोई उनका ऐसा नाम बोलेगा जो शास्त्र सम्मत नहीं होगा तो हम उसको गलत कहेंगे यह गलत है बल अब बोलो बोलो अब और काना बोलते हैं वो उनको अलग अलग ना वो गलत है वो गलत है मत बोलो कोई जरूरी नहीं है काना बोलना काना बोलना कोई जरूरी नहीं है काना बोलना कोई आवश्यक नहीं है काना बोलना कोई आवश्यक नहीं है मेन उनका नाम है कृष्ण अगर कोई काना बोल रहा है तो बोले मगर हम यह कहेंगे वेदों में प्रमाण है ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती गणेश भगवान है उनका बाद में नाम जो भी पड़ जाए मगर जो उनका मूल नाम है व वेद में है आपका मूल नाम वेद में कहां
02:06:57:12 है म्यूट कर दीजिए इनको बोलिए म्यूट है म्यूट है बोलिए बोलिए अरे भाई मैं अन म्यूट कर रहा हूं आप अपने आप को म्यूट कर ले रहे हो फिर हो गया म्यूट आप टच कर रहे हैं क्या कुछ बोलिए बताइए ठीक है ना मुझे आप मुझे आप मुझे आप सुनिए अब सीधी बात इस पर आ जाइए मुझे प्रमाण से बताइए कि कबीर कबीर कैसे बना बस प्रमाण से मनमुक बातें कुछ नहीं प्रमाण प्रमाण दसे जैसे प्रमाण दीजिए प्रमाण मैं पूछ रहा हूं प्रमाण दीजिए अपनी बात के लिए प्रमाण दीजिए इस अध्याय में लिखा है ऐसा ऐसा होता है करो प्रमाण दो प्रमाण अरे तो ये प्रमाण कबीर कबीर कैसे बना कन्हैया कृष्ण जी हो गए या काना हो अरे भाई मैं नहीं मानता कन्हैया कृष् हो गए मैं तो कृष्ण कृष्ण बोलो मैं तो कृष्ण मानता हूं वेदों में प्रमाण है कृष्ण भगवान है अरे भाई उसका वास्तविक नाम कबीर है हम उसको कबीर बोलते हैं बस इतना अंतर है इसमें कौन सी ब
02:08:12:13 बात हो कौन से नियम के आधार पर बोलते हो भाई और अगर बोलते हो अगर बोलते हो अगर बोलते हो तो उसम यह बोलो वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है कबीर भगवान नहीं बोलो कबीर भगवान अ आप लगालो हम तो कभी जो भगवान की महिमा है क्या बोलोगे आजसे बोलो जरा रिपीट करो क्या बोलोगे आपसे हम तो जो बोलेंगे जो परमात्मा ने कहा है वही बोलेंगे ठीक कबीर
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02:08:45:18 जी ने ुद कहा है मुजरी करने आते हैं लोग मुजरी कृष्ण जी को तो ऐसे भी यशो मैया बाकी वात्सल्य भाव से उनको मानती है तो उन्ह प्यार से कान्हा कन्हैया प्यार से वात्सल भा में उनका कोई प्रमाणिक नाम नहीं हो जाता है अगर कोई अगर प्रेम भाव में कुछ बोल रहा है कोई प्रामाणिक नहीं होता है इस बारे में गुरुदेव ने बताया है कि नाम जप इत्यादि अगर करें तो उनका वही जो बिल्कुल शुद्ध नाम है उसी का करें और बाकी प्रेम भाव में जो अपभ्रंश हो जाता है भाषा में चेंज हो जाता है वो बात अलग है मगर प्रमाणिकता नहीं बदल जाएगी उनके जो म य नहीं होता नल ने
02:09:34:21 होता कृष्ण और कृष्णा कृष्णा तो द्रौपदी मा विशाल जी आपको दोबारा आना है क्या शी जी कानाम क जी जी चक्रपान जी एक स्टेज पर आए हुए हैं काफी देर से कबीर जी जो थे वो खुद भगवान राम के भक्त थे भाई संत रामानंद आचार्य जी के शिष्य थे यह पता है चक्र पाण मिश्रा जी जय श्री राम बताइए जय श्री राम जय श्री राम काफी देर से आपका वीडियो देख रहा था और आपसे चर्चा हुई है कॉल से शिवा जी आपसे बात हुई हैद फन से अच्छा हा हा भविष्य पुराण को विषय था किस विषय में आपसे फोन से बात किया था छत्तीसगढ़ से बोल रहा हूं विषय क्या था थोड़ा सा स्मरण करा दे वो भविष्य पुराण को मंगवाना था उसको पढ़ लीजिए आपको हा तो अच्छा आप भी रामपाल दास जी के द्वारा प्रताड़ित
02:10:48:16 है अरे मैं कुछ बोलू सुनिए सुनि मैं कुछ बोलू बोलिए विशाल जी भाटिया जी पहले सुन ले नहीं नहीं अभी इससे पहले जो दिनेश दास जी आए थे या जो भी कोई आए जितने भी आए हैं या आएंगे जो इनके फॉलोवर्स है ये मेरे सवाल का जवाब दे दे ठीक है ये लोग अगर चिल्लाते हैं कि बोलते हैं कि वेदों में प्रमाण है कबीर जी भगवान है तो महाभारत में महाभारत में वेदव्यास जी ने दो श्लोक लिखे हैं एक श्लोक में सुना देता हूं आलो सर्व शस्त्राणि विचार च पुनः पुन इदम एकम सुनिप यो नारायण सदा अनुशासन प्र का श्लोक है इसका अर्थ है समस्त शास्त्रों का अवलोकन करके बारंबार विचार करने पर एकमात्र यही सिद्धांत स्थिर हुआ समस्त शास्त्रों का अवलोकन करके कि भगवान नारायण का ही ध्यान करना चाहिए अब एक दूसरा श्लोक मैं बता रहा हूं वो हरिवंश पुराण का है महाभारत की भाग है वो उसमें लिखा है वेद रामायण चैव पुराणे भारते तथा आदि मध्य तथा चाते हरि ही सर्वत्र गीय वेद रामायण पुराण महाभारत इन सबके आदि मदत में सर्वत्र भगवान श्री हरि का ही कीर्तन किया गया है तो आप अब व्यास जी ऐसा लिख रहे महाभारत में जो पंचम वेद है तो बताइए इसको आप मानोगे कि नहीं और वो लिख रहे तो हम क्यों सुने आप लोगों की अगर व्यास जी ने ये लिख दिया कि उन्हीं का ध्यान करने
02:12:03:20 को कहा गया उन्ही का यश गाया गया बोलिए शि ये सब तो काल ने बुलवा दिया भाई समझते क्यों नहीं कबीर जी खु श्री हरि के भक्त थे मालूम है श्री हरि के भक्त दे रामानंदाचार्य जी के शिष्य थे चलिए एक एक ये एक ग्रंथ पर आएंगे कबीर सागर नाम है उसका अगर कोई ग्रंथ नहीं मिलेगा लेकिन वो ग्रंथ जो है वो फर्जी है पूरा वो कबीर जी का उससे लेना देना नहीं है वो कबीर सागर जिस पर उ चलते हैं कि उसमें कबीर जी को भगवान बताया गया है वो कबीर जी के निधन के बाद लिखा गया था वो कबीर सागर
02:12:47:14 हम हा कबीर बीजक है उसको पढ़ सकते हैं उसमें वो ऑथेंटिक है वो कबीर बीजक उसमें भी भगवान राम भगवान हरि की भक्ति का उसमें वो उल्लेख है एक रोहित रोहित करके आए हैं रोहित जी आए हैं जी रोहित जी अपना चेहरा रिवील करें कुछ बोलने से पहले पियूष वादवानी बोल रहे हैं रामपा रामपा के खिलाफ बोल सकता हूं आऊ [हंसी]
02:13:32:21 क्या और लगता है बिना पेंदी के लौटे हैं जिंदर पाए वही धनक जाते हैं पीयूष जी श्रीराम क्यों पीयूष जी है कौन पियूष वादवानी वही जो अभी दो दिन पहले आए बोले कि मैं श्री कृष्ण के चरणों की सौगंध खाकर कह रहा हूं कि अब आपको हैवान नहीं बोलूंगा अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा ये रामपाल विषय के बारे में थोड़ा सा बताना था इनका वीडियो अगर जैसे टीवी में जो इनका चलता है तो जैसे पूरा एपिसोड जाने के बाद जो है लास्ट में कोई एक जो है उनके अनुयाई आते हैं और अपना अनुभव यह बताते हैं कि उनके जीवन में चमत्कार हुआ तो बहुत लोग उस चमत्कार को सुने वो सही था गलत था कैसा था यह अब तो सामने जो सुनाई दे रहा है तो लोग तो यही मानते हैं कि हां उनके जीवन में ऐसा यह वाला चमत्कार वो जो क्रिश्चन द्वारा धर्म परिवर्तन होता है पंजाब हरियाणा की साइड में मैंने देखा है उसमें भी वो एकदम उछलने लगेंगे और व्हील चेयर का व्यक्ति जो है वो डांस करने लग जाएगा खड़ा हो जाएगा हला ऐ से और किसी ने एक मीम
02:14:47:28 बनाया था उसने दिखाया था कि पहले व्हील चेयर पर बैठा जो व्यक्ति है वो चलने लगा और वहां पर जो क्रिश्चन के सबसे बड़े पद पर बैठे हुए पोप है वो व्हील चेयर पर चल रहे हैं वो खड़े नहीं हो पा रहे अब उनको आशीर्वाद कौन दे हा तो उन तक आशीर्वाद नहीं पहुंच रहा है अच्छा एक बात जब कहे आप कि सतलोक में जो है काजू किशमिश जो है तो मुझे एक बात याद आई कि जैसे मुस्लिमों में वो बताया जाता है कि 72 हूरे मिलेंगी वही जो इनको भी जो है गाजर पकड़ाया जा रहा है कि जो है आप जाइए सतलोक में और वहां जो है आपको काजू किशमिश आपको मिलेंगे हा बोलते तो है कि वहां पर बढ़िया काजू है किसमिस है जी भाई साहब रोहित जी स्वागत है जय श्री राम सभी को नमस्कार जय श्री राम मेरी कुछ क्वेरी है वो मैं जानना चाहता हूं क्वेरी के लिए आप क्लासेस में आए क्वेरी के लिए आप क्लासेस में आए अभी वैचारिक मतभेद के चर्चा है तो आप अगर उसमें कुछ आप कहां से हैं रामपाल जी से जुड़े हुए हैं या किसको फॉलो करते हैं मैं बहुत टाइम से कबीर को स्टडी कर रहा हूं
02:16:03:02 और अच्छा मतलब मेनली है कि पहले आस्तिक फिर नास्तिकता फिर इस तरफ और नास्तिकता ऐसे चालू हुई थी कि क्वेरी जो पैदा हुई उसके आंसर नहीं मिलते थे इस नास्तिकता चालू हुई थी तो वो क्वेरी अभी भी है कि अगर मैं मान लीजिए मैं एक नास्तिक कभी स्टडी कर कभी हटा देते हैं अग अगर मैं एक नास्तिक हूं तो मेरे अंदर जो क्वेश्चन है उसके आंसर मतलब सही से नहीं मिल पाते वो एक है मैं जो देख आप क्लासेस में आइए हमारे जो सनातन धर्म वाले हैं वो जो बात बताते हैं उसम ऐसा लगता है कि कहीं ना कहीं गॉड को हमेशा पॉजिटिव लाइट में दिखाया जाता है उन्हे दयावान दिखाया जाता है बहुत लेकिन मुझे लगता नहीं कि ऐसा कुछ है क्योंकि रोज हजारों गाय कटती है हजारों मतलब लोगों को बहुत कष्ट होता है तो वो लकता नहीं कि गड दयालु है आपने अभी तक किसी मत को स्वीकार किया है या नहीं किया है या केवल स्टडी कर रहे हैं मैं स्टडी कर रहा हूं देखिए भगवत गीता में भगवान श्री कृष्ण ने 17वें दूसरे अध्याय के 17वें श्लोक से लेकर 31 में श्लोक
02:17:18:08 तक अर्जुन जी को केवल ये बताया है कि वास्तविकता में कोई मरता नहीं है वास्तविकता में ना कोई किसी को मारता है ना कोई मरता है जो अगर किसी को मारने वाला अथवा मरा हुआ समझ रहे हैं तो वह अज्ञानता अविद्या के कारण है ठीक है इतना समझ में आ रहा है आपको अब हम जब बात करते हैं मुक्ति की तो मुक्ति का मतलब क्या है मुक्ति का मतलब है यहां जो हमें जरा जन्म और व्याधि इत्यादि जैसे दुख क्लेश दिखाई दे रहे हैं उनसे हम प्रताड़ित हो रहे हैं इन सभी से इन सभी विकारों से हम मुक्त हो जाएंगे यह मुक्ति है ठीक है अब सपोज करिए कि कोई व्यक्ति यहां से मुक्त हो गया उसने खूब अपना भक्ति की और वह मुक्त हो गया मगर उसकी फैमिली तो अभी भी यहीं पर है वो मुक्त हो गया उसकी फैमिली यहीं पर है तो आप मुझे बताइए जो व्यक्ति मुक्त हो गया क्या उसकी फैमिली के साथ जो यहां पर क्लेश हो रहा होगा उसके जाने के बाद भी
02:18:33:13 क्या उससे वह प्रभावित होगा जो मुक्त हो गया है तो उसके लिए सब चीजें क्या होंगी जो यहां पर हो रही है कुछ खेल तमाशा नथिंग कुछ नहीं उसके लिए मुक्त के लिए क्या होंगी यहां की चीजें खेल तमाशा यह सब जो अच्छाई और बुराई है यह हमारे लिए है हमारे पर्सपेक्टिव से दुनिया में कुछ अच्छा हो रहा है कुछ बुरा हो रहा है क्योंकि हम अविद्या से ग्रसित है और जब हम मुक्त हो जाते हैं तो हमें पता लग जाता है कि वो सब चीजें थी जिनको हम रियल मान रहे थे हम अपने से जोड़ रहे थे उसको कि मैं मर रहा हूं मेरे ये हो रहा है मेरे वो हो रहा है वो सब वास्तविकता में अविद्या के कारण था वस्तुत तो मैं मुक्त हूं यह मेरा सच्चा स्वरूप है तो जब उसको मुक्त होने के बाद उसकी फैमिली दिखाई देगी कि सुनामी आ रहा है प्रलय आ रही है भूकंप आ रहा है रोड एक्सीडेंट हो रहे हैं कुछ भी हो रहे है वो उसकी फैमिली वहां पर तड़पेगी चिल्लाएगी अरे मैं मरा अरे मैं यह हुआ वो हुआ मगर वह जो मुक्त अगर होगा उसको देख रहा होगा तो उसको कोई फर्क नहीं पड़ेगा वो बल्कि हसेगा अरे इनको पता ही नहीं है अल्प बुद्धि है समझ रहे हैं नहीं तोय अविद्या विकार ये सब कहां से आए य सब तो गौर
02:19:48:18 नहीं देय जो दुनिया में जो क्राइसिस हो रहे हैं यह मुक्त आत्मा की दृष्टि से इन क्राइसिस की कोई वैल्यू नहीं है पहली बात समझ में आया तो अब जब दूसरी बात आती है जब मुक्त आत्मा को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है यहां होने वाली इस अविद्या रूपी संसार में होने वाले चीजों से जब उसको मुक्त आत्मा को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है तो हम यह एक्सपेक्ट क्यों करते हैं कि ईश्वर को भी फर्क पड़ना चाहिए जब मुक्त आत्मा उन प्रभाव से रहित है तो वो तो परम मुक्त है वो तो पहले से ही मुक्त है वोह तो अभी मुक्त हुई है अब दूसरी बात आती है ये आती कहां से है ठीक है यह अविद्या रूपी संसार आता कहां से है यह अविद्या रूपी संसार उसी प्रकार से आ जाता है जिस प्रकार से आप कभी वीडियो गेम खेलने लगते हैं या अपने मन में कुछ अपना संसार कल्पित करने लगते हैं या आप कहीं पर फिल्म देखने चले जाते हैं यह अविद्या रूपी संसार वहीं से आता है उसी प्रकार से आता है फिल्म देखने जाने में आप कोई उस फिल्म के अधीन नहीं होते हैं आप स्वेच्छा से जाते हैं यूं ही जाते हैं आपको उसकी आवश्यकता नहीं होती यूं ही ऐसे ही
02:21:04:02 भगवान अपनी माया शक्ति से संसार का निर्माण कर देते हैं यूं ही बिना किसी प्रयोजन के और अगर हम माने कि नहीं हर चीज का प्रयोजन होना चाहिए भगवान बिना प्रयोजन के कुछ नहीं करते है ना अगर हम यह कहेंगे तो इसका अर्थ यह माना जाएगा कि संसार में कोई ऐसा है ही नहीं जो पूर्ण हो तो फिर इसका अर्थ यह माना जाएगा कि जब संसार में ऐसा कोई है ही नहीं जो पूर्ण है तो हमारे अंदर पूर्णत्व की चाह विद्यमान क्यों है फिर हमें यह मानना होगा कि जब पूर्णत्व की चा विद्यमान है और पूर्णत्व है ही नहीं दुनिया में तो इसका मतलब पूर्णत्व की चाह रखने वाला मंद बुद्धि है मूल बुद्धि है तो जो ईश्वर को नकार रहा है ईश्वर के द्वारा संसार की रचना को नकार रहा है वस्तुत व स्वयं को मूर्ख कह रहा है क्योंकि उसके अंदर भी ईश्वर की चाह विद्यमान
02:22:04:28 है ठीक है हा ठीक है तो आप बाकी हमारी क्लासेस होती है वीकली क्लासेस होती है उसमें आप आए आइए उसमें आप अध्ययन करिए हर शनिवार रात 9:00 बजे होती है ठीक है ठीक हम प्रणाम श्री राम जय श्री राम जय श्री
02:22:40:03 राम हरा शंकर जी बोल रहे हैं मुंह में कृष्ण दिल में कंस कौन हर हर शंकर मुह में कृष्ण दिल में [हंसी] कंस अरे यार एक से एक कॉमेडी है यहां प किरमाड़ा क्या किरमाड़ा भी आए हैं
02:23:21:01 श्री राम जय राम राम अखिलेश जी है राम अखिलेश जी आप अपना चेहरा दिखाए श्री राम जय राम जय जय राम सर जय श्री राम जय श्री राम महादेव जय श्री कृष्ण पहले भी आया था आपको याद है ना स्मरण नहीं है बताइए मैं वर्णाश्रम पर बात करने
02:23:53:20 आ आपने फॉर्म नहीं भरा वर्ण आश्रम के लिए देखिए यही आपका एक बहाना हो जाता है ना सवाल बस फम भर के आइए सारे बहाने आपके हो जाएंगे चलिए अब काफी हो गया दो घंटे 24 मिनट कल से नामा स्त्र भी प्रारंभ है सभी लोगों को एक बार बता द बहाने बहाने नंबर दे दीजिएगा जाने से पहले हां ये शाश्वत जी अब फिर किसी दिन आइएगा हो गए हम लोग 8:30 बजे से बैठे हुए हैं
02:24:31:27 और कल से हम लोग नामा स्त्र उठा रहे हैं अपना आप लोग भी उठाएं साथ में ना मास्त्र और सुबह 5 बजे से 5:30 बजे से सवा घंटे वाला सेशन होगा नाम जप का जो सवा घंटे एक साथ करना चाहते हैं उसमें जुड़े और जो 15 15 मिनट दिन में पांच बार वाले जुड़ना चाहते हैं वह आप फॉर्म भर दीजिए आपको जिसमें सुविधा जनक हो व आपके व आपके पास ऑप्शन रहेगा उसम जुड़ सकते हैं जिसमें आप जुड़ना चाह तो कल सुबह 5:30 बजे नाम जप प्रारंभ हो जाएगा नामा स्त्र ऑपरेशन नाम जप जो भी लोग हमारे साथ मिलकर के भगवान के नाम का जप करते हुए आवान करना चाहते हैं वह इसमें जुड़ सकते हैं जुड़ने के लिए फॉर्म है फॉर्म के लिए नंबर है 74836 यहां आप मैसेज करें और वह फॉर्म भर दे इसके अलावा यह जो भगवान के नाम का जप होगा यह पांच राउंड में होगा 6 10 दो 6 10 15 15 मिनट तो जो सवा घंटे की भक्ति का बल होना चाहिए हर हिंदू में उसको हम पुष्ट करेंगे अर्जित करेंगे पुष्ट
02:25:47:09 करेंगे और इस नाम जप अभियान में कोई भी जुड़ सकता है व हमारे विचारों से सहमत हो या ना हो कोई भी जुड़ सकता है जो भी भगवान का नाम लेना चाहता है वो सब जुड़ सकते हैं पियूष धवानी जी फिर जबाती हो गए हैं मुझे लिख और मोटे मोटा तो मैं हूं यार उसमें क्या दिक्कत है विशाल जी आप बताए कुछ कहना चाहते हैं बोलिए विशाल जी अभी कल परसों जो आपने आर के ऊपर वीडियो बनाया था तो उसका खंडन हो रहा है चारों तरफ वो तो होना ही चाहिए जो पुराणों को लेकर राधारा जी को लेकर जो उनकी बातें होती हैं अब वह क्या करें अभी आपने एक पुस्तक बताया था जो कपाती जी महाराज का है राधा सुधा निधि करके कुछ वही है ना एक पुस्तक मेरे पास एक मेरे पास है आप उसको भी एक बार चाहो तो पढ़ सकते हैं ये राधा माधव चिंतन गीता प्रेस से है ये हनुमान प्रसाद पदास जी जो पूज्य भाई जी थे उन्होंने ये लिखी है आप एक बार इस पुस्तक को आप एक बार जरूर पढ़िए इस पुस्तक को आप पढ़ेंगे ना तो उसमें राधा तत्व का तो वर्णन किया गया है और जो आय
02:27:02:20 समाज की जितने चीज है कि जैसे वो कहते हैं कि श्री कृष्ण को हम महापुरुष मानते हैं वो ईश्वर नहीं है और जो राधा जी को भी लेकर जो इनके मंतव्य होते हैं उनका आधा खंडन तो आपको उस पुस्तक में मिल जाएगा और जो ब्रह्म पुराण है उस पर भी ये लोग बहुत जो ये लोग उछलते हैं उसपे भी बातें इसमें कही गई है भाई जी ने कही है इसमें तो आप एक बार इस पुस्तक को जरूर पढ़िए बिल्कुल बिल्कुल तो ऐसा है जो आर्य समाज के जो लोग हैं अगर हमें सुन रहे हैं अ मैं उनसे कहूंगा पहली बात तो एक चैनल है कार्ते कार्य के नाम से है शायद तो वह भी कुछ प्रयास करते हैं सबसे पहले उनको साहस जुटाना चाहिए अपने चेहरे को दिखाएं और सामने से आकर के धर्म रक्षा के लिए उतरे कायरों की तरह व्यवहार करना बेकार है क्योंकि आपने एक दो महीने पहले उनको पत्र लिखा था उनको रा गौतम खट्ट को वो लोग देखिए आए नहीं है हां मैंने लिखा था मैंने कहा था जिसको भी कोई प्रॉब्लम है वह आए और यहां आमने सामने बैठ के करें ऑनलाइन करें जैसे भी करना हो करें संपर्क करें तो वह तो किया नहीं और जाकर और हमने अपना नंबर भी पब्लिक कर रखा है फिर
02:28:17:22 भी वो अपने चैनल पर कह रहे हैं कि देखो हम लाइव कर ले कर लेंगे पता नहीं पुरा क्या प्रॉब्लम हैट के साथ खिलवाड़ हमने नहीं किया है जिसने किया है आपको उससे कहना चाहिए मुझे नहीं समझ में आता उनको प्रॉब्लम य है कि देखिए जिसका अस्तित्व ही किसी के विरोध में तैयार होता है तो उसको तो आजीवन करना पड़ेगा ना विरोध अब जैसे इस्लाम का अस्तित्व ही है कि वो सनातन के विरोध में ही अपने से पहले जो है उनके विरोध में ही वह बना है तो वह तो आखिरी दम तक वह करेगा ही ना सनातन नहीं तो फ सनातन से अलग कैसे होगा वह तो आर्य समाज का अस्तित्व ही तभी है जब वह परंपरा प्राप्त सिद्धांतों का विरोध करे तो फिर वह अगर वह समर्थन कर देगा तो फिर उसमें अलग क्या रह जाएगा फिर कैसे व कैसे वह मां-बाप की इच्छा के विरुद्ध जो जोड़े विवाह करने पहुंच जाते हैं उनका विवाह कैसे होगा सेसे अगर कोई मुस्लिम हिंदू बिटिया से विवाह करना चाहता है तो उसका वही की वही सर्टिफिकेट बना करके भैया इसने इस्लाम को अपना लिया इसकी हम विवाह को विवाह करा दे रहे हैं 00 रप की वहां पर वो
02:29:32:24 हो जाती है फीस शुल्क जो भी है तो यह सब कैसे होगा ये आ समाज वाले बोलते कि ईश्वर कभी साकार नहीं हो सकता य सतलोक वाले बोलते कि ईश्वर कभी निराकार नहीं हो सकता और ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है अगर ईश्वर के सामने कोई इनको इनको आ रही है तो जिसके बारे में ब्र हमने स्टोरी में रखा था हमने कौन सी स्टोरी में रखा था हमने स्टोरी में नहीं रखा हैय गलत बात है झूठ हैय आप स्क्रीनशॉट लाइए हमने कब उसको स्टोरी में लगाया था जी हा पियूष जी दो अक्टूबर था आज है ड्राई डे है य सम मत करिए आज इनको ब्रह्म पुराण इससे पहले के जो पुराण है पद्म पुराण शिव पुराण यह भी तो एक पढ़े ना उसमें राधा कृष्ण का क्या संबंध है उसमें खाली ब्रम पुराण ही उनको दिखता है लि भी होगा तो मिलावट व ग्रंथों में हमारे हुई है तो उल्टा सीधा उत मिने उस कर दिया होगा नहीं नहीं होगा पर बात नहीं करते हैं अगर ग्रंथ में कहीं पर मिलावट
02:30:48:04 होगी तो इसका निर्णय करने वाले परंपरा प्राप्त आचार्य हैं बस और कोई नहीं करेगा ऐसी बातें नहीं कहते हम अंग्रेजों ने मुगलों ने कुछ नहीं किया था तब जो किया है वह हमारे जो आचार्य गण है उन्होंने उसको बताया है कि यहां पर किया यहां नहीं किया है मगर जो रास लीला है या राधा माधव जो संघ है वो जो परमेश्वर है उनकी जो आराधी शक्ति है वो लीला पूर्वक अपनी कार्य करने की प्रणाली को दर्शाने के लिए इस प्रकार की लीलाएं करती हैं इसके साथ ही साथ और भी बहुत सी चीजें हैं जो उसमें आ जाती है अब जैसे म श्रीमद भागवत के गवे स्कं के अध्याय 15 के अनुसार सिद्धियां होती हैं जो बागेश्वर जी के लिए प्रश्न किया जा रहा था क्या उनके पास सिद्धियां है आप ऐसा मानते हो कि नहीं बिल्कुल गुरुदेव ने खुद कहा था कि भाई विद्या है जब तक व समझ में नहीं आती है तब तक ऐसा हो सकता है कि वह आपको चमत्कार लगे मगर जब आ जाती तो विद्या कहलाती है वो तो हनुमान जी ने कुछ उनको सिद्धि कुछ कृपा करके दिया कि लाखों में किसी एक को ही सिद्धि
02:32:03:13 हनुमान जी से मिलती है एक वो भी है हनुमान जी के भक्त है वो तो जी चलिए आप आए विशाल भाटिया जी अच्छा लगा और अब हम किसी और दिन रखते हैं सनातन शंकरा आए हैं अब हम किसी और दिन रखते हैं अपना और कल से एक नया आरंभ करने वाले हैं बड़े अ अभियान का सभी को जय श्री राम जय श्री राम आप भी जुड़िए हो सके तो नामा आस्क में आप भी जुड़िए नाम जप तो जुड़ अ हां प आप स्वागत है यह मोटा आपके साथ नाम जप करेगा चिंता मत करिए जय श्री राम जय श्री राम हर हर महादेव जय बजरंग
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