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00:00:04:24 तो यह संत रामपाल जी जो हैं उनकी जो गुरु उनकी जो गद्दी है वो किस प्रकार से ऑपरेट होती है मतलब उनकी प्रामाणिक चीजें आप तक कैसे पहुंचती हैं? हां पहले [गला साफ़ करने की आवाज़] तो मैं टीवी पर जब पहली बार उनका सत्संग देखा हम तो बाद में धीरे-धीरे मैंने उनका ज्ञान ज्ञान सीखा बाद में पुस्तकों का अध्ययन किया शास्त्रों का अध्ययन किया तो वह जो बता रहे हैं और शास्त्र में जो लिखा है यह मुझे थोड़ा सा लगा कि यह सही है। और उनकी गुरु गुरु परंपरा ऐसी है कि
00:00:54:09 संत गरीब दास जी महाराज स्वामी रामदेवंद जी महाराज उनके गुरु थे। नहीं नहीं उनसे वो गुरु परंपरा नहीं पूछ रहा हूं मैं। मैं ये पूछ रहा हूं कि उनकी चीजें आप तक कैसे पहुंच रही हैं? हां YouTube से और चैनल से टीवी से क्या हमारे शास्त्र में कहीं वर्णित है कि आपको जो गुरु की शिक्षा है वह YouTube से मिलेगी या चैनल से मिलेगी शास्त्र में तो वर्णित नहीं है हम तो फिर लेकिन जो अभी तक प्रामाणिक चीज क्या है प्रामाणिक गुरु का सानिध्य आपको कैसे प्राप्त हुआ गुरु का ज्ञान आपको कैसे मिल रहा है उसमें YouTube आदि को प्रमाण नहीं माना जा सकता YouTube चैनल इत्यादि को वो माध्यम हो सकते हैं। उनका सहारा लिया जा सकता है। मगर उस स्थिति में जब हमारे पास उसे वेरीफाई करने के लिए प्रामाणिक पद्धति भी हो। समझ रहे हैं? जैसे आजकल एआई आ गया है। रामपाल जी की आवाज बदल करके कोई एआई का वीडियो बना दिया जाएगा। YouTube पे अपलोड कर दिया जाएगा। तो आप क्या करेंगे? आपको कैसे पता लगेगा
00:02:09:10 कि नहीं। यह जो है उनका प्रामाणिक वीडियो नहीं है। तो वह कौन सी प्रणाली है जिससे कि आपको पता लगता है कि यह यह जो है रामपाल दास जी का प्रमाणिक हम हम तक पहुंच रहा है। हां तो उन्होंने हम जो आते हैं कबीरपं से आते हैं। उनका जो ज्ञान है, वो जो ज्ञान दे रहे है, वो जिनको परमात्मा बता रहे है, पूर्ण परमात्मा जिनको बता रहे है, वो कबीर जी है। मतलब 600 साल पहले जो संत कबीर थे भाई साहब मेरा प्रश्न ये है जो ज्ञान दिया है उन्होंने जो कबीर बीजक कबीर सागर कबीर मैं कह रहा हूं आजपाल जी आज रामपाल जी आपको कुछ ज्ञान देते हैं। आपको कैसे पता वो ज्ञान रामपाल जी ने ही दिया है। हां वही तो बोल रहा हूं ना। हम जब मतलब रामपाल जी कौन से रामपाल जी कौन सी प्रामाणिक प्रणाली का उपयोग करते हैं जिससे कि उनकी चीजें फिक्स हो पाती है कि हां यह जो मेरे को ज्ञान मिला यह रामपाल जी का ही है। अभी सपोज दैट जैसे कि आपकी कई किताबें छप रही हैं। ठीक है? ज्ञान गंगा। अब मैं
00:03:24:14 चाहूं तो उसमें ज्ञान गंगा में थोड़ा सा रद्दो बदल कर दूं। एक नई ज्ञान गंगा छपवा दूं। बिल्कुल उसके जैसी डुप्लीकेट और उसमें थोड़ा सा रद्दोबदल उनके शब्दों में कर दूं। कबीर की जगह वहां पर शिव लिख दूं पूर्ण परमात्मा की जगह। ठीक है? या फिर और कुछ ऐसा छोटा-मोटा रद्दोबदल जिसको आप जो आपकी नजर में ही ना आ पाए मगर वो हो। तो फिर आप उसको जब पढ़ेंगे ज्ञान गंगा को समझ के कि ये भाई उन्हीं की है ज्ञान गंगा। किसकी? रामपाल दास जी की। तो फिर आपको पता कैसे लगेगा कि यह जो ज्ञान गंगा मैं पढ़ रहा हूं यह नकली नहीं है। असली ही है। उसके लिए कबीर सागर है ना। जो संत कबीर थे आप जिनको संत कबीर मान रहे हैं उन्होंने उन्होंने जो कबीर सागर लिखा है उनमें सब बातें सब ज्ञान एज इट इज है। जो शास्त्रों से मेल खाता है। और सभी शास्त्रों से मेल खाता है। श्रीमद्दी कबीर साहब ने जो लिखना था लिख दिया। आज के प्रासंगिक विषय के अनुसार रामपाल जी कोई बात बताते हैं जो कबीर साहब के टाइम पर थी ही नहीं वह बात मान लो कंप्यूटर के बारे में कुछ बोल रहे हैं मोबाइल के बारे में कुछ बोल रहे हैं ये
00:04:39:20 सब चीजें तो थी नहीं कबीर साहब के टाइम पे अब इसके बारे में वो कुछ इसके बारे में इसके बारे में रामपाल दास जी आज कुछ धर्म और अधर्म बताते हैं कि ये टीवी नहीं देखना मान लीजिए कह रहे हैं टीवी नहीं देखना चाहिए तो अब वो चाहते हैं कि टीवी टीवी नहीं देखना चाहिए। यह संदेश लोगों तक पहुंचे। मगर आपके पास जो किताब आ रही है उसमें किसी ने द्वेष बस यह मिला दिया कि नहीं टीवी जो है देखना चाहिए। आपको कैसे पता लगेगा?
00:05:12:26 हां। उसके लिए हमने ज्ञान उनका जो था उन्होंने जो बताया है वह सब कुछ ग्रहण कर लिया है। अपने अंदर समा लिया है। इसलिए हमको तुरंत पता चल जाता है कि कहां पर गड़बड़ हुई है। यानी कि कोई नया व्यक्ति अगर कोई रामपाल जी को चुन रहा है उसके लिए क्या प्रणाली होगी? आपने तो उनका सारा ज्ञान पी लिया। तो आपको पता लग जाएगा जो नया व्यक्ति रामपाल दास जी के बताए हुए मार्ग पर चलना चाहता है वो किस प्रणाली को फॉलो करें जिससे कि उसके पास रामपाल दास जी का ही ज्ञान आए। किसी और का ना आए। कबीर सागर अरे फिर वही बात घूम फिर के आप वही आ जाते हैं। मेरा कहने का मतलब है कि वो कौन सी व्यवस्था है जिसको फॉलो करके रामपाल दास जी के ही सही ज्ञान तक कोई व्यक्ति पहुंच सकता है। वो कौन सी प्रणाली है?
00:06:12:00 इस बारे में कोई समाधान नहीं है क्या? अभी तो ऐसा कुछ हुआ नहीं। 20 चल रहा है। अभी तक हुआ ही नहीं। हमारे पास अगर शायद होगा हम आपको इस बारे में नहीं पता। होगा तो हमारे पास शास्त्र है। नहीं नहीं नहीं पता है। हां वो बताइए क्या है? पता है अगर ऐसा कुछ होगा तो हमारे पास शास्त्र अवेलेबल है। श्रीमद् श्रीमद् भगवत गीता है। आप समझे नहीं मेरी बात। जैसे मैंने अभी उदाहरण दिया आपको मैंने कि यदि रामपाल दास जी यह संदेश देना चाहते हैं अपनी किताबों के माध्यम से कि भाई इसमें जो है ऐसे ऐसा हो कंप्यूटर को लेकर के टीवी को लेकर के कोई संदेश वो देना चाहता है तो आपको कैसे पता लगेगा अब कोई नया व्यक्ति है चलिए आपने सारे शास्त्र पढ़ रखे हैं उनके कोई नया व्यक्ति है वो नया व्यक्ति जुड़ अभी अभी जाना ही है बस और अब वो रामपाल दास जी को फॉलो कर रहा है उसको मैंने जाकर के मैंने जाकर के उसको को एक नई किताब छाप के दे दी और उसमें लिख दिया कि रामपाल दास जी ने उल्टी कुछ उल्टी बातें लिख दी उनके नाम से तो
00:07:27:01 उस व्यक्ति के पास किसी किताब को वेरीफाई करने का और ना करने का क्या ठोस आधार है वो बताइए उसके लिए हमारे जो सेवक है जो सेवादार है हां वो सेवादार यानी कि उन्होंने जिसको अपना छपवाया जाता है यानी कि उन्होंने जिसको अपना उत्तराधिकारी घोषित किया है वो उत्तराधिकारी ने घोषित किया सब उनके शिष्य है तो अगर मैं कल को तो अगर मैं कल को यह कहने लगूं मैं रामपाल दास जी का सेवादार हूं और मैं उनके नाम से गलत किताबें देने लगूं लोगों को तो उससे कोई दिक्कत नहीं है। ऐसा हो ही नहीं सकता। जो उनके शिष्य बन गए ऐसा गलत काम कर ही नहीं सकती। अरे भाई मैं कह रहा हूं कि मैं द्वेष वश उनके विरुद्ध षड्यंत्र पूर्वक उनके नाम से गलत बात फैलाने लगूं और मैं कहूं कि मैं उनका शिष्य हूं। तो इसको कैसे रोकेंगे आप? आप तो कह रहे हैं कि सेवादार ऐसे हैं वैसे हैं। मैं अपने आप को झूठा ही सेवादार घोषित कर लूं कि मैं रामपाल दास जी का सेवादार हूं और मैं वो किताब छपवाऊं और छपवा करके लोगों को बांटने लगूं। तो वह ठोस प्रणाली क्या है? अगर आप उत्तराधिकारी
00:08:42:12 को नहीं मानते हैं तो ठोस प्रणाली क्या है जिससे कि हम रामपाल दास जी की यथावत चीजों तक पहुंच सके। बताइए उनकी पुस्तकें अभी तक सुरक्षित है। उनका जो सत्य ज्ञान है जो उन्होंने पुस्तक बनाई है अभी सुरक्षित है सेवादारों के हाथ में। भाई साहब मैं मैं आपसे यह कह रहा हूं कि उनकी पुस्तकें सुरक्षित है। अभी कोई नया व्यक्ति उनसे जुड़ जुड़ा हुआ है और अब वो जो नया व्यक्ति है वो जाता है। वो सोचता है कि मुझे कहीं से उनकी ज्ञान गंगा नाम की पुस्तक मिले। अब उनको मेरे जैसा कोई एक व्यक्ति मिलता है जो कहता है मैं उनका सेवादार हूं। ये लो नई पुस्तक। ज्ञान गंगा छाप के उनको दे दी। और उसमें सब गलत सरल लिख दिया। उसमें लिख दिया फुटबॉल खेलो, क्रिकेट खेलो, यह करो, वो करो। ठीक है? सब उल्टा लिख दिया। अब वह तो व्यक्ति यही सोचेगा ना अगर अगर उसके पास कोई प्रॉपर प्रोटोकॉल नहीं होगा तो वह व्यक्ति तो यह सोचेगा रामपाल दास जी ने कहा है कि फुटबॉल खेलो। हां नए व्यक्ति इसका निराकरण इस समस्या का निराकरण क्या है? अब आप आप अभी एक निराकरण तक पहुंचे थे उत्तराधिकारी कि रामपाल दास जी ने अपना किसी को उत्तराधिकारी बनाया कि भाई यह जो है यह जो किताब देगा वो यह सत्यापित करेगा वो मान्य होगी और जब वो वो नहीं होंगे तो वो उनका भी कोई उत्तराधिकारी
00:09:57:15 होगा वो नहीं होंगे तो उनका भी कोई उत्तराधिकारी होगा तो अगर उत्तराधिकारी वाली बात को स्वीकार किया जाता रामपाल दास जी के द्वारा तो तो यह बात ठीक है कि हां इससे हम रक्षा कर सकते हैं शुद्ध ज्ञान की अन्यथा तो कोई तरीका मुझे नहीं दिखाई देता है तो आप मुझे बताओ यह जो उनका जो आश्रम है उनके जो संस्था उनके संस्था में जो सेवादार काम तो उत्तराधिकारी कह रहा हूं मेरे मेरे को तो मेरे पास तो अभी इसका जवाब नहीं है कि इसको कैसे रोका जा सके ये उनका इंटरनल रोका नहीं लेकिन रोक सकते हैं नहीं रोक सकते हैं वो एक अलग बात है मगर प्रामाणिक प्रणाली है कि नहीं वो एक अलग बात है प्रामाणिक प्रणाली है कि नहीं वह एक अलग बात है कि रामपाल दास जी ने किसी को यह कहा यह मेरा उत्तराधिकारी है। मेरे ना होने की स्थिति में यह सारी चीजों को देखेगा और अगर वह नहीं होगा तो वह भी अपना एक उत्तराधिकारी घोषित करेगा कि यह मेरा उत्तराधिकारी है। मैं नहीं होऊंगा तो यह उन सारी चीजों को देखेगा। अगर ऐसे उत्तराधिकारी है आपके यहां पर तो तो रामपाल दास जी का ही ज्ञान आपके पास आ रहा है। यह माना जा सकता है। वरना इस बात को सत्यापित करने के लिए ही बड़ी टेढ़ी खीड़ हो जाएगी कि
00:11:12:24 जो आप बता रहे हैं वो रामपाल दास जी का है कि नहीं है। आप देखो अभी तक अभी तक तो उत्तराधिकारी कोई नियुक्त किया नहीं। तो यह तो यह तो फिर नहीं वही उत्तरा वो नहीं किया वो ठीक है मगर कहीं पर उन्होंने इस व्यवस्था के संबंध में बताया है कि ऐसा ऐसा होता है ऐसा होना चाहिए नियमावली है या अरे भाई साहब दिक्कत आती है तब धर्म का ज्ञान दिया जाता है क्या सतयुग में वेद क्यों दिए गए सतयुग में तो कोई दिक्कत थी ही नहीं धर्म का ज्ञान तो दिया जाता है। उसमें दिक्कत से क्या मतलब है? चलिए खैर मैं प्रश्न है आपका। हां तो इस बारे में आपको जानकारी जुटानी चाहिए कि आपके पास जो ज्ञान आ रहा है वो रामपाल जी का ही ज्ञान है। ऐसा हुआ है कुछ सेवादार रामपाल जी से अलग ज्ञान दे रहे हैं और आपस में झगड़ा है। रामपाल जी ने जेल से फोन पर यह बातें बताई हैं। लो बताइए।
00:12:23:08 मैं जिस समस्या की ओर आपका ध्यान लाना चाहता हूं वह बहुत गंभीर समस्या है। अगर हमने किसी प्रॉपर उत्तराधिकारी की व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया तो कोई भी कुछ भी बोले उनके नाम से वो तो जेल में है। वो तो बता नहीं पाएंगे ये मैंने बोला कि नहीं बोला। समझ रहे हैं आप? और ऊपर ऊपर के लोग आराम से वो खेल खेलते रहेंगे भोलीभाली जनता के साथ। अगर चाहे तो खेल रहे हैं ऐसा नहीं है। मगर वह चाहे तो जो नादान जो निर्दोष जनता है उसके साथ आराम से खेल खेल सकते हैं। क्योंकि वो लोग जो बैठे हैं उनके द्वारा प्रामाणिक उत्तराधिकारी तो घोषित किया नहीं है उन्होंने। रामपाल दास जी मतलब है आपने पुस्तक पढ़ा है और आपको वो बातें सही लगी। [गला साफ़ करने की आवाज़] ऐसा है क्या? नहीं नहीं नहीं। वो एक अलग विषय है कि उनकी बातें मुझे सही लग रही है कि नहीं। मगर अभी बात ये है कि मैं जो पुस्तक पढ़ रहा हूं आप इतनी चिंता में पड़ गए आपने इतना चिंताजनक आप मतलब इन फ्यूचर जब कोई व्यक्ति धर्म और अधर्म जब कोई व्यक्ति धर्म और अधर्म का निर्णायक बन रहा है तो उसके जो महत्वपूर्ण घटक हैं उन पर हम पूछेंगे ना बात करेंगे ना उनप तो अभी बात यह है कि अभी हम जो ज्ञान गंगा पढ़ रहे
00:13:38:09 हैं या गीता तेरा ज्ञान अमृत पढ़ रहे हैं यह वही गीता तेरा ज्ञान अमृत है जो उन्होंने लिखी है यह कैसे पता चलता है कैसे फिक्स तो गुरु जी आदेश देते रहते हैं ना आश्रम में क्या आदेश देते हैं क्या उपाय योजना करनी चाहिए क्या नहीं कौन देता है से होता है कौन आदेश देते हैं गुरु जी देते हैं गुरु जी आश्रम में मिलते हैं क्या आपको आश्रम में नहीं जेल से वो आदेश देते हैं जेल से किसको आदेश देते हैं एक मिनट जेल से किसको आदेश देते हैं जो आश्रम के सेवादार है मुख्य सेवादार जेल से आश्रम के सेवादार को वो देते हैं जो जो आश्रम के सेवादार हैं वो आपको यह बता देते हैं कि उन्होंने जेल से हमें यह आदेश दिया है।
00:14:26:09 है ना? उन सेवादार पर आपको विश्वास क्यों है? क्या उनको उन्होंने अपना प्रामाणिक उत्तराधिकारी माना है? उनको उन्होंने अपना प्रामाणिक घोषित किया है कि यह जो आश्रम के सेवादार हैं यह मेरी तरफ से बोलेंगे आप लोगों से। ऐसा कुछ कहा है उन्होंने? नहीं वो तो बातें मेरे को मालूम तो फिर तो फिर उनप विश्वास कैसे हो मैं अभी आपको कह दूं कि भाई जेल से मेरे पास फोन आया उन्होंने यह कहा है मान लोगे एक महीने तक मैं बोर्ड बोर्ड और लगा दूं बढ़िया जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल और बढ़िया नाम दान केंद्र तथाकथित खोल दूं एक महीने तक और फिर मैं बोल दूं जेल से मेरे पास फोन आया है मान लोगे मेरी बात अगर उनका पुस्तक किसी ने गलत छपवाया लाइव चलेगी। आप मैं जिस जिस ओर आपका ध्यान आकृष्ट करना चाह रहा हूं उस ओर आप जा नहीं पा रहे हैं। मेरा कहने का अर्थ यह है आप दिख नहीं रहे हैं इस समय। हम मेरा कहने का अर्थ यह है कि रामपाल दास जी के द्वारा जो शिक्षा आपको दी जा रही है वो कैसे आपको पता
00:15:41:13 लग रहा है कि वो रामपाल दास जी की ही शिक्षा है। या तो आप यह मानो कि हां सेवादार उनकी तरफ से बोलने वाले प्रामाणिक हैं। तब तो आगे बढ़ सकती है गाड़ी। वरना तो यहां अटक रही है गाड़ी। सेवादार प्रामाणिक है। मैंने उनके ऊपर विश्वास किया और यानी कि आपको सेवादार पर विश्वास है कि भाई यह जो है वही बात बोलते हैं जो रामपाल जी इनको कहते हैं। है ना? नहीं इस अभी तक तो इस बारे में मैंने सोचा नहीं था। मैं फर्स्ट टाइम 2 साल हो गए ना तो मैंने आपको सोचना चाहिए कि रामपाल दास जी के नाम से जो किताबें हमें मिल रही हैं उन किताबों में वही लिखा है जो वो लिखना चाहते थे या कहीं कुछ बदल तो नहीं किया क्योंकि हमसे ऐसे लोगों ने संपर्क किया है जो यह कह रहे हैं कि रामपाल दास जी की किताबों में भी बदलाव हो गया है बहुत सारा ऐसे लोग हैं जिनका हमें फोन आया है हां हो सकता है ऐसा हो सकता है तो इसलिए इसलिए यदि उत्तराधिकारी उन्होंने घोषित नहीं किया तो उन्हें करना चाहिए जिससे कि उनके भक्तों को उनके फॉलोअर्स को यह पता रहे कि हमें शुद्ध ज्ञान कहां से
00:16:56:16 मिलेगा क्योंकि वो तो है नहीं वो तो जेल में है। है ना? तो उनके द्वारा दी जाने वाली शुद्ध शिक्षा कौन देगा? उनको यह बताना चाहिए कि तब तक आप इनसे जब तक मैं नहीं हूं तब तक आप इनके पास जाओ। यह कहे कि फलाने दुकान है वहां से किताबें ले लेना तो ले लो। यह कहे वहां से मत लेना तो मत लो। वरना तो कोई भी आपको रामपाल दास जी के नाम पे चिपका सकता है कुछ भी। हां ऐसा हो सकता है। तो हम तो अभी जो आप पढ़ रहे हैं। मैं फिर से पॉइंट पे आता हूं। अभी जो आप पढ़ रहे हैं वो रामपाल दास जी की किताबें हैं। ये कैसे सिद्ध होता है? एक मिनट एक मिनट सर
00:18:26:26 हेलो आप दिख नहीं रहे हैं। अब प्रॉब्लम यह है कि अगर यह जो व्यक्ति गुरु परंपरा के सिद्धांत को नहीं मानता है तो क्या होगा
00:18:59:03 जो व्यक्ति गुरु परंपरा के सिद्धांत को नहीं मानता है, उत्तराधिकारी के सिद्धांत को नहीं मानता है तो उसके सामने यह अड़चन आएगी कि भाई मैं जो बोल रहा हूं वो कैसे प्रमाणित हो कि वही है उनके द्वारा कहा गया और यदि वह गुरु परंपरा के सिद्धांत को मान लेता है उत्तराधिकारी वाले सिद्धांत को मान लेता है तो फिर प्रश्न यह बनेगा कि रामपाल दास जी को किसने किसके सामने अपना उत्तराधिकारी ठहराया था। फिर प्रश्न यह बनेगा कि उसको किसने किसके सामने अपना उत्तराधिकारी ठहराया था। फिर वह उसने तो इसमें यह जो है मामला सब गड़बड़ जिम्म हो जाएगा। यह चीज आर्य समाज पर भी लागू होती है। आर्य समाज ने परंपरा वाले सिद्धांत को अपनाया नहीं है। ठीक है? कि गुरु जो है परंपरा प्राप्त होना चाहिए। तो
00:19:52:19 के आधार पर ही यह बात कह दी जाए कि भाई आज के टाइम में सत्यार्थ प्रकाश जो है वह वही सत्यार्थ प्रकाश है जो दया ऋषि दयानंद जी ने लिखी है तो कैसे उसका निर्णय करेंगे ये लोग इनका इनके पास इसका उत्तर नहीं होगा और अगर इन्होंने परंपरा का आलंबन लेने की बात की तो फिर इनका बन जाएगा कि बताइए पूर्णानंद के गुरु का नाम क्या है फिर अपनी बातों को मनवाने के लिए आप परंपरा को लाना ही होगा और दूसरों की बातों का आप कुतर्कों द्वारा विरोध कर दो। यह गलत है।
00:20:30:09 लिंक दे दीजिए भाई क्योंकि वो भाई साहब चले गए हैं फिलहाल। आ नहीं रहे हैं। एक ऐसे ही कुतर्ककारियों ने एक दो कुछ वीडियो बनाए हैं पहले से। जी भैया आ गए। हम तो मैं वही पूछ रहा था कि इस बारे में आपके यहां क्या व्यवस्था है
00:21:02:16 कि कोई व्यक्ति गलत प्रचार प्रसार ना कर पाए रामपाल दास जी के नाम पे कोई व्यवस्था नहीं है। आपकी जानकारी में नहीं है। मेरी जानकारी में नहीं है। व्यवस्था होगी लेकिन मेरी जानकारी में नहीं है। तो आप तो अभी कह रहे थे कि आपने उनके सारे ग्रंथों को घोट रखा है। नहीं वो अलग चीज है ना ज्ञान की और मतलब आपने सारे सारे नियमावलियों को नहीं घोटा है। सब कुछ नहीं आपने कुछ रह गया है। नहीं नहीं नहीं वो ज्ञान की बात नहीं ना। आप जो बोल रहे हैं वो वो ज्ञान की बात नहीं ना। अच्छा वो ज्ञान की बात नहीं है तो वो जो नियम है वो वो उस नियम के लिए कौन सी किताब होगी उनकी जिसमें वो नियम लिखा हो सकता है जो आपने पढ़ी नहीं है उसका कोई नाम
00:21:58:26 अभी तक तो नियम तो मैंने पढ़ा नहीं नहीं पढ़ा नाम भी नहीं मालूम ऐसी कोई किताब उनकी छपी हो हम नियमावली जी हां नहीं ऐसी नियमावली की कोई किताब हो वो भी आपको नहीं पता है ना मेरे ज्ञान में नहीं है पता पता करिएगा बताइएगा अगर इस तरह की नियमावली कोई हो तो हां अच्छी बात है ना ये तो अब मुझे ये बताइए कि आपका ऐसा मानना क्यों है रामपाल दास जी ये कहते हैं कि जो ब्रह्मा विष्णु महेश है वो अविनाशी नहीं है
00:22:54:19 हमारे ग्रंथ में ये लिखा है ना वो वो अविनाशी नहीं है अच्छा आप अविनाशी हो कि नहीं हो मैं तो अविनाशी हूं आप अविनाशी हो मगर ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी नहीं मैं नाशवान हूं। [गला साफ़ करने की आवाज़] मैं एक पंच महाभूत का मेरा शब्द है और नाशवान हो और मैंने आपको अगर रामपाल दास जी के वीडियो में दिखा दिया कि आप नाशवान नहीं हो अविनाशी हो तो
00:23:29:03 आत्मा अविनाशी है। शरीर नाशवान है मेरा। तो यानी कि शरीर का जो नाश हो रहा है या बन रहा है या बिगड़ रहा है उससे आपका नाश सिद्ध नहीं होता। जबकि यह कहा जा सकता है कि आपका भी जीवन और मरण है तब भी आप अविनाशी हो। आत्मा के रूप में मैं अविनाशी हां आत्मा मेरी अविनाशी है। आत्मा के रूप में आप अविनाशी हो। हां आत्मा के रूप में अविनाशी हूं। इसी प्रकार से परमात्मा के रूप में ईश्वर भी अविनाशी है। ब्रह्मा विष्णु महेश भी अविनाशी। वह जो जीवन मरण वाली बात आप कह रहे हैं वह इसी प्रकार से शरीर धारण किए हुए के लिए कह रहे हैं। जो शास्त्रों में कहा गया है कि हमारा भी जीवन मरण होता है। वो कहा गया है जब उन्होंने कोई पर्टिकुलर देह धारण की हुई है। और इसके लिए भगवत गीता में भगवान ने कहा कि वह लोग जो मुझे मानव देह में देखकर मेरे ब्रह्म रूप को समझ नहीं पाते हैं। वह मूर्ख होते हैं। अब यह जो अविनाशी वाली बात है या दुर्गा मा से उत्पन्न होने वाली बात है। इसके लिए आप कौन से शास्त्र का रेफरेंस देते हैं? श्रीमद्
00:24:45:06 देवी भागवत पेज नंबर 123 पेज नंबर नहीं अध्याय अध्याय कौन सा है? वह बताइए। देवी भागवत केवल गीता प्रश्न ही छापता है। देवी भागवत केवल गीता प्रश्न ही छापता है। कहां गए भाई साहब? हां यही हूं।
00:25:35:25 मतलब आपको वो प्रमाण चाहिए कि कहां पर लिखा है कि अविनाशी नहीं है। हम श्रीमद् देवी भागवत निकालिए अपना नहीं मैं निकाल लूंगा आप बोल दीजिए। उसका 130 पेज निकालिए। 130 अध्याय श्लोक क्रमांक बताइए। अध्याय और श्लोक क्रमांक। ठीक है।
00:26:30:00 आप एक बार निकालिए वहीं पर मैं बता देता हूं कि अध्याय कौन सा है? अध्याय बताइए। अध्याय मेरा देवी भागवत वो नहीं है ना गीता भ्रश वाला। अध्याय बताइए। अध्याय नहीं बताया क्या रामपाल दास जी ने? पूर्ण ज्ञानी तत्वदर्शी ने नहीं बताया क्या अध्याय नहीं पता क्या
00:27:17:15 भाई पेज नंबर तो बदल जाता है बनाया कि वह गीता प्रस ने छाप दिया तो फलाने पेज पे है। बनारस वालों ने छाप दिया तो फलाने पेज पे है। यह कौन सी बात है कि इसीलिए मैंने अपने वीडियो में कहा था भाई अध्याय दो ना पूर्व पक्ष को रखने के लिए कम से कम चले गए। जीतेश जी आपने फॉर्म भरा था
00:27:56:28 फॉर्म भरा था आपने हां जी भरा था शिवा जी हमें तो नहीं मिला किस नाम से भरा था जितेश के नाम से ही भरा था दोनों भरे हैं मैंने वो चर्चा वाला ही भरा है और कक्षा वाला ही भरा है तो आप तो कक्षा में आइए यहां पर तो आप आप तो जिज्ञासु है ना कक्षा में आइए आप यहां क्यों जुड़ रहे हैं ठीक ठीक है मयंक जी जय श्री राम जय श्री राम
00:28:34:09 बिटिया प्यारी है आपकी बिटिया है बाबू है बाबू है बाबू हम [गला साफ़ करने की आवाज़] जी बताइए परिचय क्या है आपका? जी राजस्थान के जयपुर जिले से हूं। हम अच्छा मदन दास जी आप आ गए हैं। आप मयंक जी आप थोड़ी देर म्यूट हो जाइए। आप रामपाल जी की तरफ रामपाल जी की बात ही करेंगे ना। नहीं नहीं अच्छा नहीं ठीक है। तो इनकी रामपाल जी महाराज की कुछ बातें हैं।
00:29:14:09 एक मिनट आपको लेते हैं। जी मैं मदन दास जी बताइए। श्रीमद् देवी भागवत स्कंध तीसरा हम स्कंद तीन अध्याय
00:29:49:20 पेज नंबर 123 निकालिए ना फिर पेज नंबर अरे भैया पेज नंबर नहीं अध्याय बताओ स्कंद तीसरा निकालिए उसी में है स्कंद तीसरा है मेरे पास क्लास उसमें आप अध्याय नंबर तो बताइए। नंबर तैयार नहीं है लेकिन आप खोलिए। उसमें लिखा है संदीपन रॉय आपका खंडन कर रहा है। मेरे ख्याल से खंडन केवल एक कमरे में बैठकर के कुछ कह देने से नहीं होता है। सामना करने से होता है। अगर मन में मैं सोचूं कि मैं खंडन कर रहा हूं तो ऐसे सोच करके भी मैं खंडन कर सकता हूं। जैसे सोचा मैंने और हो गया सबका खंडन। ये तरीका नहीं है ना। सामने आकर के बात करते हैं तब पता लगता है दूध का दूध और पानी का पानी होता है। वो आ नहीं रहे हैं। उनको मैंने बड़े सब्रांत तरीके से कहा भी था एक बार कि आप सामने आइए भाई ऐसा ना करिए। बंद कमरे में बैठकर कार्डबोर्ड टारगेट गेम खेलना बहुत आसान होता है। आप सामने आइए। चर्चा करते हैं। क्या है क्या नहीं है। पता लगेगा। [गला साफ़ करने की आवाज़] हम जी बोलिए। अध्याय क्या है आपका
00:31:09:08 बोलिए वो जो वो जो बात कही है ना आविर्भाव होता है तिरोभाव होता है उसी अरे आविर्भाव और तिरोभाव तो आपका भी होता है भैया फिर भी आप अविनाशी हो कि नहीं हो मेरा आत्मा अविनाशी है और मैं ना ऐसे ही ब्रह्मा विष्णु महेश का आविर्भाव होता है रूप में देह धारण करते हैं। देह से जाते भी हैं। मगर वो अविनाशी रूप में भी वो अविनाशी रूप में भी विद्यमान है। यानी कि यह सिद्ध हुआ कि वो अविनाशी नहीं है। कहां से सिद्ध अविनाशी हो क्या? आपकी देह नाश हो रही है। सुनो देह के नाश से आत्मा का नाश नहीं होता। और देह के भेद से आत्मा का भेद नहीं होता। आत्मा कहां से प्रकट हुई? इसका जवाब दीजिए। आत्मा कहीं से प्रकट नहीं हुई। आत्मा सद नित्य है। कैसे नित्य हुई? किसी ने तो प्रकट किया होगा उसको। आप मुझे अध्याय नंबर बताइए। भाई साहब अध्याय नंबर है आपके पास? आप संत कबीर को मानते हैं? ये बताइए। 600 साल मैं संत कबीर को एक मैं संत कबीर को एक भगवत भक्त के रूप में जानता हूं। मगर यदि
00:32:24:12 उनकी कही हुई मगर यदि उनकी कही हुई कोई बात परंपरा प्राप्त प्रमाणिक आचार्यों से प्राप्त होने वाले ग्रंथ अथवा उनकी वाणी के विरुद्ध जाएगी तो उतने अंश में मैं उनको नहीं मानूंगा वो प्रमाण नहीं होंगे परंपरा के विरुद्ध प्रमाण नहीं है वो पांचवा वेद कहते हैं उनके वाणी को कबीर सागर को आपने कबीर सागर तो पढ़ा ही होगा आप तो विद्वान लग रहे आप ये बताइए क्या आपने कबीर कबीर सागर पढ़ा है या नहीं मैंने आपको समझ लिया है आप जो कह रहे हैं मैं समझ गया भाव तो वो तो हो गया आपने बता ही दिया कि उनका आपने सिद्ध कर दिया कि वो अविनाशी नहीं है ठीक है ये आप कह रहे हो ये हम नहीं कह रहे ये आप कह रहे एक अरे भगवत गीता सुनना नहीं है केवल बोलना है भगवत गीता भगवान श्री कृष्ण क्या कहते हैं मैं अजन्मा अविनाशी होते हुए भी अपनी योग माया को अपने अधीन करके प्रकट होता हूं। सजाम में हम वो काल का सजन करता हूं। सुनो नहीं बात ये है कि जब आपकी देह के नाश से आपका नाश सिद्ध नहीं हो रहा तो ब्रह्मा विष्णु
00:33:39:22 महेश की देह का नाश वो भी उनके कंट्रोल में है। जो उनके कंट्रोल में है कि उनका देह का नाश होगा कि नहीं होगा? उनके कंट्रोल में नहीं है। आप वो मैं अभी सिद्ध करूंगा। वो मैं अभी सिद्ध करूंगा। वो भी उनके कंट्रोल में कि होगा कि नहीं होगा। मगर प्रचार हो रहा है। भाई ऐसा है इस तरह से बात नहीं होगी। जब मैंने आपको सुनने के लिए रुका रहा अब आप मुझे सुनने के लिए रुके रहिए। देह के नाश से आप अपना नाश मानते हैं क्या? मैं ये पूछ रहा हूं। आपकी देह का नाश हो जाएगा। आपकी देह मैं आपसे पूछ रहा हूं। आपकी देह का नाश हो जाएगा तो आप खत्म हो जाएगा। आपका अस्तित्व वो तो बोल रहा हूं ना सुनिए आप मेरी बात सुनिए बोलिए आप मेरी बात सुनिए हमारी आत्मा इस कालोक में फंसी हुई है और हमें साल पहले
00:34:38:07 आत्मा को मैं पूछ रहा हूं रामपाल जी महाराज जी प्रयत्न कर रहे हैं और आप आप मैं पूछ रहा हूं आपका वास्तविक रूप क्या है? आपका वास्तविक रूप क्या है? मदन जी आपका वास्तविक रूप क्या है? मैं पंच मैं पंच महाभूत तत्वों से बना हूं। मेरा वास्तविक रूप मनुष्य है। मुझे मनुष्य योनि प्राप्त हुए है। 84 लक्ष योनियों योनियों के बाद प्राप्त हुई। ये आपका वास्तविक ये आपका वास्तविक रूप है। ये मैं पूछ रहा हूं कि ये आपका वास्तविक रूप है जो आपका ये पंचभूतों से बना हुआ जो शरीर है ये वास्तविक रूप है। ये नाशवान है। ये वास्तविक रूप नहीं है।
00:35:24:00 बादाम काजू सतलोक में जाके कौन खाएगा? यह रूप खाएगा या आपका कुछ कोई और रूप खाएगा? बादाम, काजू, सेब, केला यह सब है ना सतलोक में? सतलोक में है ना यह सब? वो कौन खाएगा? यह वाला शरीर ये ये रूप खाएगा या दूसरा रूप कौन सा रूप खाएगा? आत्मा। तो आपका जो इसका मतलब इसका मतलब भाई साहब आप बात करने नहीं आए क्या? मैं पूछ रहा हूं। इसका मतलब आपकी देह का नाश हो जाएगा। तो भी आप अपना नाश नहीं मानते। मानते हैं क्या? ये देखिए आत्मा ने आप 84 लक्ष योनियों को मानते हैं क्या? मानता हूं बताइए। हां हम तो मनुष्य जन्म किस लिए मिला है? यही जानने के लिए कि आत्मा भाई साहब भाई साहब आप विषय को बदलिए नहीं। बात ये हो रही है आप अपनी देह के नाश से अपना नाश मानते हैं या नहीं मानते हैं यह बताइए।
00:36:31:18 मैं नष्ट हो जाऊंगा। मेरी आत्मा अविनाशी है। यही तो बोल रहा हूं ना। आत्मा आपसे अलग है क्या? हम कहां रहते हैं? मृत्यु लोक में रहते हैं ना। आत्मा आपसे अलग है क्या? हां आत्मा अलग है मेरी से। अपना आत्मा आपसे अलग है। आत्मा की है। इसलिए आत्मा अलग है। आत्मा आपसे अलग है क्या? आत्मा अलग है मेरी से। पूछ रहा हूं आत्मा उससे अलग है। यानी कि यहां पर कर्म आप करोगे और कोई और वहां पर जाकर फल भोगेगा। ऐसा है आप फल नहीं भोगोगे।
00:37:07:25 हेलो भाई साहब आत्मा को आपने अलग माना। यानी कि कर्म आप करोगे और फल कोई और भोगेगा। बोलो कि आप ही भोगोगे। आत्मा ही भोगेगी ना सतलोक जाके मैं अभी पूछ रहा हूं आपने कहा आत्मा आपसे अलग है तो आपकी आत्मा अलग है और वो फल भोगेगी आप तो भोगोगे नहीं आप नहीं भोगोगे ना मेरे से अलग है या नहीं इससे मतलब नहीं है हम आत्मा को मतलब क्यों नहीं है से सकते इसलिए नहीं है मतलब इसलिए नहीं है क्योंकि आपको अपना पॉइंट सिद्ध करना है और मतलब इसलिए है क्योंकि आप आपकी देह के नाश से आप अपना नाश नहीं मान रहे हो और अगर मान रहे हो तो फिर आपकी भक्ति करने का कारण हो क्या रहा? क्योंकि वहां पर फल तो कोई और भोग रहा है। बादाम काजू तो किसी और को खाने को मिलेगा सतलोक आश्रम में। देखिए मैं क्या कह रहा हूं? अब मैं आपको प्रमाण दे देता हूं। आप प्रमाण ले लीजिए। ब्रह्मा विष्णु महेश के अविनाशी होने के। बहुत देर तक मगजमारी नहीं कर सकते। हां बताइए सबसे पहली
00:38:23:15 सबसे पहले क्या है कि देवी ही ब्रह्म है। इस बात का प्रमाण लीजिए। नौवा नौवा स्कंध पहला अध्याय आठ से 10 श्लोक खोलिए। खोलिए। पुस्तक नहीं है। पुस्तक नहीं है मेरे पास। क्यों नहीं है? क्यों नहीं है? जो रामपाल जी ने कहा उसको वेरीफाई किया कि नहीं किया? हां वेरीफाई किया। वेरीफाई किया तो बताओ क्या लिखा है? नौवे स्कंध में पहले अध्याय में आठ से 10 श्लोक में वेरीफाई किया है तो क्या लिखा है आप बोल रहे हैं ना आप बताइए ना आप तो बोलने दे नहीं रहे मेरे को आप बताइए बाद में बताता हूं जितनी चाबी बड़ी रामपाल है आप शांत रहिए मैं आपको बता रहा हूं आप शांत रहिए अब मैं आपको बता रहा हूं शांत रहिए भाई साहब शांत रहिए अब बिल्कुल भी अननेसेसरी टॉक नहीं चाहिए ठीक शांत रहिए। मैं आपको बता रहा हूं। आपका जो अर्थ है और डायरेक्ट भाई साहब भाई साहब आप अगर आप बोलेंगे व्यर्थ व्यर्थ बोलेंगे मुझे आपको हटाना पड़ेगा। मैं आपको प्रमाण दे रहा हूं तब तक आप धैर्य रखिए शांत रहिए। ठीक है?
00:39:41:20 ये पहले देख लीजिए। देवी भागवत दर्शन कर लीजिए। इसी से शायद मुक्ति मिल जाएगी आपको क्योंकि वहां तो सिद्धांत है नहीं कुछ देवी भागवत नौवा स्कंध देवी भागवत नौवां स्कंध और उसके बाद प्रथम अध्याय 1216 पेज नंबर आपका कहना ऐसा तो नहीं ना जीव ही ब्रह्म है। मैं जो ग्रंथ में लिखा है प्रमाण सहित आपको बता रहा हूं। ठीक है? वो आपको मैं बता रहा हूं।
00:40:30:09 आपको केवल प्रमाण चाहिए। तर्क की कोई आवश्यकता नहीं है आपको। तर्क अगर बताएंगे तो आपके वह सर से ऊपर चला जाएगा सब। 9 एक आठ से 10 1216 1216 देवी भागवत का नवा स्कंध और इसमें पहला अध्याय है श्लोक क्रमांक आठ से 10 क्या कहा जा रहा है?
00:41:23:20 सृष्टि के आदि में जो देवी विराजती है उसे प्रकृति कहा गया है। सृष्टि करने के लिए योग माया का आश्रय लेकर परमात्मा दो रूपों में विभक्त हो गए। उनका आधा दाहिना भाग पुरुष और बाया आधा भाग प्रकृति कहा गया। देवी प्रकृति ब्रह्म स्वरूपा नित्या एवं सनातनी है कौन है जो प्रकृति है जो देवी है मां भगवती है नित्य है सनातनी है परमात्मा के सभी गुण परमात्मा के सभी गुण उसमें उसी प्रकार निहित है जिस प्रकार अग्नि में दाहकत्व शक्ति विराज विद्यमान रहती है। ठीक है? इसके बाद जो भी सत असत जो कुछ भी दृश्यमान जगत है वह सब ब्रह्ममय है। ब्रह्ममय और सुनो आगे क्या है? तत्पश्चात आनंद कंद भगवान श्री कृष्ण चंद्र के मन में सृष्टि करने की इच्छा होती है। किसके मन में होती है? भगवान श्री कृष्ण चंद्र के। उनकी मूल प्रकृति तत्पश्चात परमात्मा की आज्ञा के अनुसार वह पांच प्रकार की बन जाती है। इस तरीके से यहां पे भगवान श्री कृष्ण से सृष्टि का बनना बताया जा
00:42:38:21 रहा है। और जो भगवान की वो है शक्ति वो अनादि है अविनाशी हैं। अनंत है और सुनो [गला साफ़ करने की आवाज़] देवी भागवत नौवा स्कंद पहला अध्याय और 12 से 13 श्लोक 12 से 13वा श्लोक कृष्ण चंद्र की आज्ञा से ही वे सृष्टि करती हैं और उनकी जो सबसे परम प्रिय जो पांच रूप धारण करती हैं उनमें से जो कृष्ण को प्रिय हैं वह हैं मां भगवती का जो राधा स्वरूप है वो भगवान श्री कृष्ण को सबसे ज्यादा प्रिय है।
00:43:34:24 इसके अलावा भगवत गीता चार छ भगवान स्वयं कह रहे हैं मैं अजन्मा हूं। मैं अविनाशी हूं। ठीक है [गला साफ़ करने की आवाज़] और इसके अलावा अनेकानेक जगह ऐसे प्रमाण हैं जिसमें कि भगवान को ब्रह्मा विष्णु महेश को अविनाशी परमात्मा कहा गया है। जैसे कि विष्णु पुराण दूसरा अध्याय पहले से तीसरा श्लोक उसमें क्या लिखा हुआ है? ब्रह्मा विष्णु और शंकर रूप से जगत की उत्पत्ति स्थिति
00:44:49:25 एवं संहार के कारण विकार रहित शुद्ध अविनाशी परमात्मा कौन सा परमात्मा? अविनाशी परमात्मा सर्वदा एक रस सर्व विजय भगवान वासुदेव विष्णु है। ठीक है? और सुनो देवी ऋग्वेद दवा मंडल 125वा सूक्त उसमें क्या कहा जा रहा है देवी
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00:45:22:28 परम ब्रह्म से भिन्न नहीं है। अपितु परमेश्वर परमात्मा नित्य सनातन सच्चिदानंद स्वरूप परम तत्व ही है। देवी परम ब्रह्म से अभिन्न है। यह
⬜ Not used yet · 00:45:33:08 – 02:02:49:00 (1:17:16)
00:45:33:08 ऋग्वेद में लिखा है और सुनो जो देवी शक्ति है वही परमात्मा है और जो परमात्मा है वही शक्ति है। देवी भागवत तीसरा स्कंध सातवा अध्याय और 14 से 15 श्लोक देवी भगवती ही ब्रह्म और ब्रह्म शक्ति है। देवी भागवत तीसरा अध्याय छठवा तीसरा स्कंद छठवा अध्याय दूसरा श्लोक और इसी तरीके से अनेकानेक प्रमाण है। अब बताइए क्या किया जाए? भगवत गीता में जो बताया है तीन पुरुष मैंने आपको देवी भागवत से भी बताया है ना उसको नहीं मानोगे क्या? क्या है? नहीं नहीं नहीं आपने बताया। लेकिन मैं क्या बता रहा हूं? आपकी बात ठीक है सुन मुझे अब मैं अक्षर पुरुष परम अक्षर पुरुष ये तीन पुरुष पुरुष माने तो परम परम अक्षर पे आ गए पहले एक बात खत्म करो अक्षर की बात पे भी आएंगे पहले एक बात खत्म करो पहले एक बात खत्म करो अविनाशी है या नहीं है माने आपको शास्त्र से बता दिया विष्णु पुराण से देवी भागवत इत्यादि से कि ब्रह्मा विष्णु
00:46:48:09 महेश भगवती गणेश पांचों के लिए अविनाशी शब्द आया है अविनाशी नित्य सनातन अब इसको मानोगे कि नहीं श्रीमद् श्रीमद् देवी भागवत स्कंध तीसरा उसमें लिखा है भाई साहब भाई साहब लीला पूर्वक भगवान लीला पूर्वक ये बात कह रहे हैं कि हमारा भी जीवन मरण होता है वस्तुत नहीं होता है आप यह बताइए कबीर साहब के कोई गुरु थे या नहीं थे
00:47:20:21 थे उनके गुरु हां उन्होंने भी लीला की थी वो क्या अज्ञानी वो क्या अज्ञानी थे जो उनको गुरु करना पड़ा समाज को एक मार्गदर्शन मिले कि गुरु ऐसे ही समाज को मार्ग दिखाने के लिए वो लीला पूर्वक अपनी देह का नाश करते हैं। ऐसे ही जैसे आपने आपके कबीर दास जी ने समाज को दिखाने के लिए लीला की ना गुरु बनाने की। ऐसे ही वो समाज को दिखाने के लिए लीला करते हैं। अपनी देह का नाश करके। अब मैं आपसे अब मैं आपसे पूछ रहा हूं सीधी बात मैं आपसे ज्यादा मगज नहीं मार सकता। मैं आपसे सीधी बात पूछ रहा हूं। क्या आप जिसको ईश्वर मानते हैं वो सर्वशक्तिमान है या नहीं? यह बताइए। बस इसीलिए ज्यादा उसको खोलने का कोई मतलब नहीं रहता है। सब लोग कहते हैं ना प्रमाण दिखाओ, खोल के दिखाओ, खोल के दिखाओ। उससे कोई फर्क नहीं पड़ना है। उससे कोई मतलब नहीं है। आप तो आप तो मुझे यह बताओ रामपाल दास जी के अनुसार प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है वो सर्वशक्तिमान है या नहीं? ये बताओ आप। इसका भी आंसर देता हूं और इससे पहले का भी आंसर देता हूं। इसके पहले का मत दो भाई साहब। मत दो भाई साहब। आप मुझे ये बताओ। आप मुझे बताओ वो सर्वशक्तिमान है
00:48:35:22 या नहीं? स्वीकारना ही होगा और आपको एक अच्छा आदमी मिलेगा आपको एक बढ़िया जो आपको ग्रंथ दिखाएगा। सत ग्रंथ दिखाएगा। ठीक है भाई साहब मुझसे ज्यादा व्यर्थ की बातें ना करिए। मुझे सीधे-सीधे जवाब दीजिए। क्या ईश्वर सर्वशक्तिमान है जिसको आप मानते हो? बताओ। सर्वशक्तिमान है। अविनाशी है। परम पुरुष सर्वशक्तिमान क्या वो सब कुछ कर सकता है? सब कुछ कर सकता है। अपनी देह का नाश कर सकता है। अपनी देह का भी नाश कर सकता है। यानी कि उसकी देह अविनाशी नहीं है। लीलावश कर सकता है। उसकी देह अविनाशी है कि नहीं? मैं पूछ रहा हूं उसकी देह अविनाशी है कि नहीं? अविनाशी है। उसकी देह अविनाशी है। किसी नियमों से उनकी देह हम नष्ट नहीं हो जाती। उसकी देह अविनाशी उसकी देह अविनाशी है कि नहीं वो खुद करेंगे देह का नाश तो ऐसा नहीं है कि वो अविनाशी नहीं है हां अगर किसी नियमों से बाधित है किसी नियम के अंदर वो है जैसे ब्रह्मा विष्णु महेश की आयु लिखी है हमारे सद ग्रंथों में भाई साहब मुझे आपको हटाना पड़ जाएगा भाई साहब आप सर में दर्द वाली बात
00:49:51:25 मेरी बात आप समझिए मैंने आपको म्यूट किया है प्लीज मेरी बात समझिए में मैं हाथ जोड़ रहा हूं। मैं आपके बोलने के अधिकार का हनन नहीं करना चाहता। आप मुझे यह बता दीजिए। आप मुझे यह बता दीजिए कि आपके जो कबीर हैं, आपके अनुसार जो कबीर भगवान है, वह सब कुछ कर सकता है या नहीं? यह बताइए। सब कुछ कर सकते हैं। प्रारब्ध नष्ट कर सकते हैं। अपनी देह का नाश कर सकते हैं। अपनी देह का लीलावश अपनी अपनी देह का नाश कर सकते हैं। कर सकते हैं ना कुछ भी कर सकते हैं। वो तो कर सकते हैं। तो यानी कि उनकी देह अविनाशी नहीं है ना। अविनाशी कब कब नहीं होगी? जब वो नियम में होंगे। जब आप जा सकते हैं भाई साहब
00:50:49:15 आपने देख लिया। आप लोगों ने देख लिया इनके जवाब क्या आ रहे हैं। ठीक है। आपने अपनी बात कह दी। हमने अपनी बात कह दी। अब लोग यहां पर डिसाइड कर लेंगे। वह अपनी देह का नाश कर सकते हैं। फिर भी उनकी देह अविनाशी है। आपके अनुसार यह है ना। एक मिनट सुनिए ना। बोलिए। मेरे को एक मिनट दीजिए। एक मिनट मैं एक मनुष्य हूं। मुझे मोक्ष चाहिए। यदि आपका ज्ञान सही लगा मैं ज्ञान चर्चा में इसके लिए आया हूं। यदि आपका ज्ञान मेरे को सही लगा तो मैं आपके मार्ग पर चलूंगा। हां यदि मेरे सतगुरु का ज्ञान आप जो है मैं आपकी बात समझ गया। आपका मैंने समझ लिया। मैं समझ गया संक्षिप्त में समझ लेता हूं मेरे भाई। मैं समझ गया आपकी बात। मेरी बात सुनिए। अब दोनों हम दोनों शास्त्र निकाल रहे हैं। देखो देखो देखो देखो देखो बोलने ही नहीं दोगे भाई मेरी बात सुनिए आप ध्यान से मेरी बात सुनिए ध्यान से आपने कहा कि उनकी देह अविनाशी है। अगर उनकी देह अविनाशी है तो कबीर अपनी देह का नाश नहीं कर सकते। अगर उनकी देह अविनाशी अगर वो कर सकते हैं तो उनकी देह अविनाशी नहीं है। तो अगर आप ये कह रहे हैं कि उनकी देह अविनाशी भी है और वो वो भी कर सकते हैं तो अब ये जनता डिसाइड
00:52:04:16 करेगी आप क्या कह रहे हैं। ठीक है हमने भागवत हमने देवी भागवत से अनेकानेक प्रमाण दे दिए हैं कि ब्रह्मा विष्णु महेश जो है अविनाशी हैं। वो लीला पूर्वक अपनी देह का नाश करके दिखाते हैं। वो लीला पूर्वक जन्म ले दिखाते हैं। क्या आप अभी बोल रहे हैं अविनाश है अभी बोल रहे हैं वो लीलावश नाश कर सकते अरे मेरे भाई लीला में अपनी देह का नाश करते हैं मैं वही तो कह रहा हूं देह का नाश ठीक है आप जा सकते आप ठीक है आप ठीक है भाई साहब ठीक है आप जनता देख लेगी जनता देख लेगी ठीक है आप आए अच्छा लगा आपने सहजता से बातें की आप आए अच्छा लगा आपने सहजता से बातें की और धर्मेंद्र जी
00:52:54:14 बताएं आपका परिचय हेलो आपका परिचय अन म्यूट कर लीजिए सुन पा रहे हैं जवाब दीजिए जी सुन पा रहे हैं सर मैं चाहूंगा आपको पहले तो क्या करना चाहेंगे नमस्कार कहना चाहूंगा मैं आपको पहले तो अच्छा जय श्री राम जी
00:53:33:25 जय श्री राम सर मैं काफी दिनों से आपका वीडियो देख रहा हूं और डिबेट भी देख रहा हूं बहुत सारा जी तो मुझे एक चीज समझ में नहीं आ रही है हम कि आप जो आध्यात्मिक ज्ञान है उस पहलू को छोड़ के आप पहले तो ऐसे क्वेश्चन करते हो कि जो समझ में नहीं आता किसी के [हंसी] क्योंकि आप दोहरे क्वेश्चन करते हो आपके उसमें मुझे मालूम है भाई साहब मेरी बात सुनिए मैं मेरी बात सुनिए भाई साहब मेरी बात एक मैं आपको टोकूंगा यहां पे आप हमारी समीक्षा मत करिए हमारी समीक्षा करने के लिए जिनको अधिकार है वह हमारी समीक्षा करते हैं। गलती पाए जाने पर डंडे भी पड़ते हैं, मार भी पड़ती है। आप हमारी समीक्षा ना करें। आप हमें यह बताएं कि आपको कहां पर कौन सी बात है जो हमने गलत कही है वो प्रतिकार करिए आप। आपकी आपकी समीक्षा नहीं करूंगा क्योंकि हम तो उस मार्ग के लोग हैं कि ना काऊ से दोस्ती ना काऊ से। आप तो डंडे व्यर्थ
00:54:49:08 की कोई चर्चा नहीं चाहिए भाई साहब मैं फिर कह रहा हूं व्यर्थ की चर्चा नहीं चाहिए विषय रहिए विषय पे ही बात करूंगा विषयों पे ही बात करूंगा पहले तो हम ये पहले तो हम ये जानेंगे कि कबीर साहिब को संत रामपाल जी महाराज ने पूर्ण परमात्मा क्यों कहा गया है भाई इस पे भी तो आप जाओ आप एक एक बात बताइए पूर्ण का अर्थ क्या होता है? चलिए इसी पे आज करते हैं बात। पूर्ण का अर्थ क्या है? पूर्ण का भी प्रश्न है जो पूर्ण का पूर्ण परमात्मा और अगर ये कबीर जी है तो आधा परमात्मा कौन है? सभा परमात्मा कौन है? ये बता दीजिए। पूर्ण ये है देखिए सर सभी धर्म अपनी अपनी ढपली पीट रहे हैं। सभी धर्म अपनी अपनी ढपली पीट रहे हैं। मैंने आपको कहा ना मुझे मालूम है। बासी भर के आए हैं। आपके चेहरे से प्रकट हो रहा है। आप उसको थोड़ा तसल्ली में धैर्य रखिए। हां भाई धर्मेंद्र जी विषय पर रहकर अगर बात करना चाहे तो कर सकते हैं। अंतिम बार आपको एक अवसर प्रदान कर रहे हैं। बताइए वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है। मतलब आप ज्ञान चर्चा
00:56:04:19 का अर्थ यह होता है कि सामने वाले की भी सुनी जाए। आप एक क्वेश्चन ले लेते हो। भाई साहब ये बताइए रामपाल दास जी ने कितने वीडियोस में या उनके भक्तों ने कितने ज्यादा कमेंट्स में अपने ये कहे हैं कि वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान ने कहा है कि नहीं कहा है? नहीं मैं पूछ रहा हूं पहले एक पहले एक बात को खत्म करिए भाई साहब है वेदों में प्रमाण है कबीर साहब भगवान है आप इस बात को मानते हैं जी बिल्कुल मानते हैं तो अब मैं यही तो आपसे कह रहा हूं कि आप वेदों में प्रमाण दिखाइए कि कबीर कहां भगवान है बताइए मैं ये कह रहा हूं कि संत रामपाल जी महाराज क्या वेदों में प्रमाण नहीं है क्या कबीर कबीर भगवान है
00:56:59:10 क्या वेदों में प्रमाण नहीं है क्या कबीर भगवान है आप उनसे आप उनसे चर्चा कीजिए ये उनका वाक्य है वो कह रहे हैं मगर आप नहीं मानते आप नहीं मानते नहीं मानते हैं ना तो फिर आप बताइए वेदों में कहा प्रमाण है कबीर भगवान है टू प्लस टू टू टू प्लस टू फोर होता है और टीचर बता रहा है तो बच्चा थोड़ी पूरा पूरा उसका सिलेबस रट के आएगा। हां ठीक है। सिलेबस रट के नहीं आएगा। फिर वो अपने वो रामपाल दास जी की तरफ से उनका पक्ष रखने भी नहीं आएगा। देखिए सर पक्ष रामपाल दास जी की तरफ से पक्ष रखने नहीं आएगा वो बच्चा। वो टीचर की तरफ से कहीं शास्त्रार्थ में नहीं पहुंचेगा। नहीं क्यों नहीं पहुंचेगा? भाई साहब आप जा सकते हैं भाई साहब। आपको नहीं पता है रामपाल दास जी के ज्ञान के बारे में आपको नहीं पता है आप मत आइए कोई और आएगा आप आप आप घबरा रहे हैं आपको मालूम है आप [हंसी]
00:58:03:13 इसलिए इसलिए प्रॉब्लम होती है देखिए [हंसी] अपनी बात सिद्ध नहीं करनी है कि हम टू प्लस टू वाले बच्चे हैं और रामपाल टीचर है अभी तक ताना झंडा लेके चलते थे वेदों में प्रमाण है ये झंडा इनका नीचे हो हो गया। अब देखिए उस बात को सपोर्ट नहीं कर पा रहे हैं। यह बहुत बड़ा अचीवमेंट है। बहुत बड़ा अचीवमेंट है। क्योंकि ये लोग रट लगाए रहते थे। भाई रट मैं तो अपने कमेंट्स देख देख के परेशान था। उसमें जो दो लाख व्यूज आए हैं ढाई लाख उस मेले वाले उसमें वीडियो में उसमें हर दो तीन मिनट के बाद एक कमेंट आता था। वेदों में प्रमाण है पूरी लिस्ट ऋग्वेद मंडल इतना सूक्त इतना मंत्र इतना ऋग्वेद मंडल इतना अथर्ववेद सामवेद ये उसमें लिस्ट आती थी पूरी मैं तो उसको देख अब अब जब हम इनसे खोल रहे हैं कि भाई खोल भाई ऋग्वेद में कहां लिखा है तो अब ये हट रहे हैं कि वो मैं तो टू प्लस टू वाला बच्चा हूं हमारे उन्होंने जो कहा वो जो है क्या कहते हैं उन्होंने जो कहा वो मान लिया हमारे टीचर ने मान लिया अब जब इनसे कहेंगे अब जब इनसे कहेंगे कि टीचर ने अगर कहा है तो तुमने टीचर को टीचर माना क्यों? किसी आधार पर मानोगे ना टीचर
00:59:18:24 ना तो वो परंपरा से है टीचर। वो टीचर परंपरा से तो नहीं है। तो कैसे तुमने मान लिया उसको टीचर? अपने माता-पिता का खंडन करके ही तो तुमने उसको टीचर माना है। बताइए माता-पिता का खंडन किया ना? क्योंकि यही कहते हैं कि कबीर साहब से पहले वो ज्ञान नहीं था। तो अपने पूर्वजों का खंडन करके ही टीचर माना आपने उनको। बिल्कुल परंपरा नहीं है। हां [गला साफ़ करने की आवाज़]
00:59:55:15 मैं तो इस बात से हैरान हूं। शिवशु भैया जिसका वो अनुवाद लेते हैं जिससे वो मंत्र लेते हैं उसी का खंडन करते हैं कि ये मूर्ख था। इसको इसको ज्ञान नहीं था। अज्ञान था। हां इस बात को हम कैसे फसा ले बताइए आप यह देखिए अब से थोड़ी देर पहले तक यह लोग एक ध्वज बना के चलते थे दौड़ लगाते थे मैराथन वाली कि वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान अब इनको शर्म आ रही है अब लज्जा आ रही है इनको यहां इस चैनल पे आ करके अब हम नहीं बोलेंगे कि वेदों में प्रमाण है वो तो आप कबीर वो रामपाल से ही पूछना वो आप रामपाल दास जी के पास जेल में जाओ वहां पे मुलाकात क्या कहते हैं मिलाई कहते हैं वो संडे संडे को होती कब होती है उसमें जाओ उसमें पूछना हां वो तो जेलधाम है इनके लिए। हां जेल जाना पड़ेगा। वहां जाकर के जो है वहां पूछना भाई और हम यहां पे अपना वो बोलते यही है वो बोलते यही है ऐसे ही मुझे एक रामपाल जी के शिष्य से एक चर्चा हुई। मैंने कहा आप वेदों को मानते हो? बोले हां मानते हैं। मैंने कहा 100% मानते हो? बोले हां 100% मानते हैं। अच्छा जो गीता में जो काल है जिसको आप काल कहते हो अगर गीता अगर चारों वेदों में उनका उनको परमात्मा सिद्ध कर दूंगा तो मानोगे? बोलेगा वो बोलने लगा नहीं हां ठीक है मान लेंगे जब चारों वेदों में मैंने सिद्ध किया तो बाद में उसको वेदों से डिनाई करने लगे वो
01:01:11:03 कुछ ज्ञान इसमें काल ने दे रखा है [हंसी] आपको कैसे पता है कि कौन सा ज्ञान काल ने दिया है कौन सा ज्ञान परमात्मा ने दिया है वो तत्वदर्शी संत बताते हैं। मैंने कहा तत्वदर्शी संत कौन है? वो संत रामपाल जी महाराज है जो गीता बताती है तत्वदर्शी संत वो है जी तत्वदर्शी संत रामपाल जी है मतलब कि अभी तक मोक्ष किसी को प्राप्ति नहीं हुआ मतलब जो अभी अब जो मोक्ष प्राप्त होने लगा है वो रामपाल जी के उससे होने लगा है बोले हां मैंने कहा गीता में तो श्री कृष्ण जी कह रहे हैं कि कर्म योग से तो राजा जनक जैसे बहुत से राजाओं को मोक्ष की प्राप्ति हुई है और जनक राजा तो त्रेता युग में थे ये तो कलयुग में हो या रामपाल जी तो बिल्कुल अरे तत्वदर्शी संत गुरु बिल्कुल गीता बताती है मनुस्मृति तो 12 अध्याय 12 11 12 14 बताती है अथर्ववेद 11 सात 16 बताती है छंदोग उपनिषद छ 14 दो बताती है चार 9 तीन बताती है मंडकोपनिषद एक दो 12 बताती है भरभर के है प्रमाण लेकिन [हंसी] बोरे भरभ के इतने प्रमाण है कि इनके बातों का खंडन गीता से ही होता है अध्याय तीन के 20व श्लोक में श्री कृष्ण जी कहते हैं कि कर्म ही कर्म के कर्म योग से ही राजा जन जैसे
01:02:26:09 बहुत से राजा थे उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई तो भी उनको देखते हुए यह निहित कर्म प्रमाणिकता का खंडन अरे भाई देखिए जो भी ज्ञान इनके विरुद्ध सुनिए इसका एक ही खंडन है मैं रामपाल दास जी की तरफ से हूं उस समय सुन लीजिए इन सब बातों का एक ही खंडन है जो भी हमारे मंतव्यों के विरुद्ध होगा लिखा हुआ वो हम नहीं मानेंगे वह काल ने मिला दिया है जो भी है कुछ अज्ञानता वश है कुछ भी वो हम नहीं मानेंगे जो भी हमारे विरुद्ध होगा। इसका अर्थ क्या है कि वेद हमारे लिए प्रमाण नहीं है। या तो वह बोलने वाला या उसके द्वारा जो कहा गया है सूक्ष्म वेद वो प्रमाण है। वेद हमारे लिए प्रमाण नहीं है। हां वो सब सेम इसी तरह की बात है। कुछ अन्य पंथ भी करता है। जैसे ये इतना हिस्सा तामसिक है तो ये ये तामसिक है तो ये सात्विक है। तो इसको नहीं करना इसको भी पढ़ना है। सही [गला साफ़ करने की आवाज़] [हंसी] दिलीप दास जी जय श्री राम एक क्वेश्चन और था मेरा ये लोग अपने नाम के आगे दास क्यों लगाते हैं ये लोग तो डायलॉग मारते हैं बंदी छोड़ मतलब किसी की दास्तानी करनी है तो नाम के आगे खत्म हो चुकी है ये बंदी छोड़ का अर्थ क्या होता है दिलीप दास जी बंदी
01:03:42:00 छोड़ का मतलब होता है कि बंधनों से मुक्त कराने वाला परमात्मा का नाम अच्छा कहीं-क पे वो बिना आ की मात्रा कहीं लिख देते हैं तो वो बंदी छेड़ हो जाता है कहीं-कहीं पे वो लिखने में गलती हो जाए थोड़ा सा तो बंदी छोड़ की बजाय वो कुछ और ही हो जाता है। खैर मुक्ति के लिए लिखा जाता है। हां नहीं वो कभी-कभी नहीं जैसे किसी पेंटर ने लिखा अब उसमें जो आ का डंडा है वो मिट गया किसी तरीके से मिस प्रिंट हो गया तो वो पढ़ने में आ रहा है बंदी छेड़ तो वो अजीब हो जाता है। खैर वो बंदी छोड़ है। मुक्ति का है तो बात अलग है। जी बताइए दिलीप दास जी। तो क्या आज कोई नया क्वेश्चन ले लेते हैं क्योंकि वही वाले क्वेश्चन से वो थोड़ा ना बोर हो गई होगी जो दर्शक होंगे। ये बताइए आपके हिसाब से क्या रामपाल जी तत्वदर्शी संत है या नहीं? इस आखरी क्वेश्चन के साथ ही हम लोग हैं। तत्वदर्शी है कि नहीं है? बताइए। है तत्वदशी संत ही है वो अच्छा वो किस कैसे सिद्ध होता है कि वो तत्वदर्शी संत है
01:04:55:27 कैसे सिद्ध होता है वो तत्वदर्शी संत मतलब होता है कि जो तीन प्रकार के मंत्र होते हैं तीनों प्रकार के मंत्र बताए जाते प्रमाण के साथ बात करिए हां ठीक है बोलिए चलो इस टॉपिक के ऊपर मैं बात नहीं करना चाहता। आपको प्रमाण चाहिए था ना कबीर साहब जी के बारे में? कबीर साहब जी के बारे में प्रमाण। चलिए वही बता दीजिए। ठीक है। अर्थवेद
01:05:30:02 कांड नंबर चार अनुवादित नंबर एक मंत्र सात में प्रमाण है। क्या लिखा है वहां? अथर्ववेद। वहां लिखा है योग हां। अर्थवेद कांड नंबर चार अनुवादिक नवंबर एक मंत्र सात में प्रमाण है कबीर साहब कवि देव क्या लिखा है क्या लिखा है बताएं क्या लिखा है बताइए क्या लिखा है ये यथोणाम पित्रम अरे भैया केवल वो शब्द बता दीजिए जो आप प्रमाण के रूप में बोल रहे हैं। मंत्र मत पढ़िए हमारे चैनल पे आप केवल वो बताइए कबीर देवो क्या लिखा है कबीर देव
01:06:13:06 कबीर कबीर लिखा है या कबीर लिखा है? कबीर कबीर क्या लिखा है? कबीर मैं आपको लिख के बता रहा हूं। ये बता दीजिए जरा। खामखा मुझे वेद शाम रात के टाइम में निकालना नहीं चाहिए। यह तो नहीं लिखा है। यह लिखा है क्या? हां कभी देवो। अरे भाई ये लिखा है क्या जो पूछ रहा हूं वो तो बताओ आगे क्यों बढ़ जाते हो हां तो हम तो ये पूछ रहे हैं ना कि ये कहां पे लिखा है तो ये कहां लिखा है ये कहां लिखा है ये बताओ इससे क्या मतलब होता है कबीर बोलो या कबीर बोलो क्यों नहीं मतलब है मतलब वर्णन किया गया कबीर कबीर कबीर कैसे बना? कौन सा ग्रामेटिकल वो नियम है? व्याकरण का कौन सा नियम है जिसके अनुसार कबीर कबीर बनता है? और अगर कबीर जो कबीर है वो कोई नाम है तो वो कबीर अलग से क्यों नहीं लिखा? उसके आगे कोई ना कोई दूसरा शब्द क्यों है?
01:07:29:15 क्योंकि वो कबीर साहिब जी जैसे आपका कोई नाम है तो घर पे कुछ और बोल थोड़ा सा। तो फिर उसमें थोड़ा नाम में डिफरेंट हो सकता है लेकिन आईडी में मेरा नाम लिखा है शिवश नारायण द्विवेदी जी नहीं लिखा है शिवश [गला साफ़ करने की आवाज़] नारायण द्विवेदी लिखा है जब मेरा नाम ऑफिशली कहीं पे लिखा जाएगा नाम तो उसके साथ जी नहीं जुड़ा रहेगा तो ऐसा कहीं पे है क्या कि केवल कबीर लिखा हो उसके आगे दूसरा शब्द जुड़ा ना हो उससे क्या घर पे अपना और ये कबीर कबीर बना कैसे
01:08:02:16 घर के जो भी सदस्य तो अपना नाम शुद्ध से शुद्ध रूप से लेते हैं। मगर जब मगर जब आवश्यकता पड़ती है तो शुद्ध रूप से भी लेते हैं। मगर जब आवश्यकता पड़ती है तो शुद्ध रूप से भी लेते हैं। जैसे कि अभी जो रामपाल दास जी है सुनोत्मा की महिमा का। जैसे सुनो मेरी बात। मेरी बात सुनो। मैं उदाहरण देता हूं। मैं उदाहरण देता हूं। जैसे रामपाल दास जी हैं वो जब पेशी पर अदालत जाते हैं तो भले ही आप लोग उनको कहते हो बंदी छोड़ या आप लोग उनको कहते हो तत्वदर्शी संत रामपाल मगर वहां पर जब उनका नाम बोला जाता है तो पता है उसकी पेशी है रामपाल हाजिर हो या इस तरह से वहां बिल्कुल शुद्ध नाम बोला जाएगा रामपाल दास बनाम ये वहां कुछ नहीं बोला जाएगा आगे पीछे कुछ भी के कागजों में जो नाम लिखा होगा बिल्कुल रूप से लिखा अनुवाद्ताओं ने त्रुटि कर दी है। अनुवाद कर्ताओं ने त्रुटि कर दी। अरे मंत्र की त्रुटि अनुवाद की बात नहीं हो रही है। यहां पे मंत्र की बात हो रही है। अनुवाद बाद में पहले आप बताओ कबीर कबीर कैसे बना मंत्र में कबीर है। कबीर कबीर कबीर नहीं है। एक ही तो मतलब होता है इसका। वो आप लगाओ मतलब लेकिन कबीर आप सिद्ध करो कैसे मतलब होता है एक ही। कबीर कबीर कबीर
01:09:17:25 कैसे बना वो बताओ भाई साहब। वो बताओ। मैं क्या बोल रहा हूं? और अगर मान लो अगर मान अगर मान लिया कि कबीर का अर्थ कबीर है ये मान लिया तो फिर आप ये बोलो कि वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है। कबीर भगवान नहीं बोलो और वहां पे जितनी भी जगह आप बोल रहे हो ना कबीर सुनो जितनी भी जगह आप बोल रहे हो ना कबीर का अर्थ कबीर है वहां पे वो शब्द पूरा कबीर है ही नहीं वो शब्द है कवि और जो रा आया है वो रा संधि संधि होने के कारण वहां देव किसको बोला जाता है जब उस परमात्मा की महिमा लिखी गई तभी तो उसको देव बोला जाएगा जब परमात्मा के बारे में जानकारी दी बोला जाएगा कभी कभी क्यों बोला है मैं लिखा हुआ है साफ साफ मैं ये नहीं कह रहा हूं कि उसको देव क्यों बोला गया मैं ये कह रहा हूं जब दो शब्द आपस में जुड़ रहे हैं वहां पर रा उत्पन्न हो रहा है संधि के कारण व्याकरण संबंधी नियम है वो और वहां पर जो शब्द है मूल शब्द है वो है कवि कवि का अर्थ है सर्वज्ञ यह सब वहां पे कवि शब्द नहीं है वहां पे कवि शब्द है
01:10:32:12 यजुर्वेद ठीक है यजुर्वेद का मतलब हिंदी संस्कृत में बोलता है यजुर ठीक है उसके पीछे दो मात्रा लग जाता है ठीक है हलंत लग जाता है इसका मतलब यजु का मतलब अच्छी बात आपने कह दी देखिए बहुत अच्छी बात आपने कह दी जैसे यजु में लिखा है ये बताओ यजु में जैसे यजु में पीछे विसर्ग होता है और जब साथ में वेद लग जाता है तो यजुर्वेद रा उत्पन्न हो जाता है तो इसका मतलब वहां पे यजुर नहीं लिखा है वहां पे यजुर नहीं लिखा है वहां यजु लिखा है संधि होने के कारण वहां र उत्पन्न हो रहा है यानी कि वहां मूल शब्द क्या है यजु इसी प्रकार से जो कबीर देव में र आ रहा है वो उत्पन्न हो रहा है संधि के कारण वहां पे जो मूल वहां पे जो शब्द है पूरे ग्रंथ में कहीं पे कबीर क्यों नहीं लिखा है? कहीं पे तो लिखा हो कबीर और अगर नहीं लिखा है तो आप ये कहो ना वेदों में प्रमाण है कवि भगवान है। कवि कबीर मत कहो। कवि नहीं कबीर कबीर लिखा है। नहीं आप कबीर कह रहे हो। कहीं-क कबीर देव वो जो कवि है वो कबीर कैसे बना?
01:11:44:19 कबीर देवो लिखा है। कबीर देव नहीं लिखा कबीर देव लिखा है। संधि के कारण कबीर आ रहा है। बोला जाएगा तो उन्होंने कबीर क्यों लिखवाया वेद में? क्या उन्हें नहीं पता था कि भविष्य में लोग उन्हें कबीर कहेंगे। तो उन्होंने कबीर ही क्यों नहीं लिखा वेद में? परमात्मा को नहीं पता था। संस्कृत लिखी गई। उन्होंने त्रुटि कर दी। अब आप अब आप भाई साहब परमात्मा की महिमा महिमा लिखी गई। अब सुनो अब आपकी अब सुनो कवि का अर्थ क्या आप परमात्मा मानते हो कवि का अर्थ परमात्मा मानते हो आप परमात्मा को मानते हैं नहीं नहीं कवि का अर्थ परमात्मा मानते हो कि नहीं हेलो हेलो एक कवि का नहीं मानते उसमें कबीर देव लिखा गया मैं मैं अभी पूछ रहा हूं कवि का अर्थ परमात्मा मानते हो कि नहीं कवि कवि का अर्थ
01:12:42:00 कवि नहीं कवि लिखा गया है कवि मैं आपसे पूछ रहा हूं कवि परमात्मा मानते हो कि नहीं उसमें परमात्मा का अगर आगे महिमा लिखी होगी तो वो कवि का मतलब भगवान ही होगा मतलब केवल केवल क्यों कर रहे हैं मतलब भाई साहब आप महिमा लिखी गई है ना आप व्याकरण मतलब केवल नाम आने से यह सिद्ध नहीं होता कि वो कभी कवि जो है वही कबीर है जिसको आप कह रहे हो केवल नाम आ जाने से तो फिर वहां पर उस श्लोक में अनुवाद उसमें परमा अरे एक एक करके मैं चल रहा हूं एक एक करके पूछ रहा हूं आपसे केवल नाम आ जाने से ये माना जाएगा या नहीं माना जाएगा ये बताओ पहले केवल नाम से नहीं माना जाएगा ना हेलो हेलो हेलो हां सुन केवल नाम आ जाने से ये मानोगे या नहीं मानोगे कि वो जो बात हो रही है वो कबीर के ही बारे में बात हो रही है।
01:13:42:24 कबीर के बारे में ही बात हो रही है। क्योंकि उसमें क्या बहुत अच्छा लगा आपसे बात करके परमात्मा का पूरा मेरा प्रश्न जो मैं पूछ रहा हूं आप उसका उत्तर नहीं दे रहे हैं। मेरे पास इतनी एनर्जी नहीं है कि मैं आपको बार-बार अपना प्रश्न समझा सकूं। आपकी हमारी चर्चा लोगों ने देख ली है। आप जा सकते हैं। अगर देव लगने से कोई परमात्मा सिद्ध हो जाता है तो फिर तो नरसिंह देव वामन देव सबके आगे देव लगा हुआ है। सब परमात्मा है दिनेश दास जी देवी जी तीसरी चौथी बार आपका स्वागत है लाइव में
01:14:23:10 जी आप कुछ नया लाए हैं या पुराना ही है आपका बताइए नया सुनोगे या पुराना सुनोगे पुराना सुन चुके हैं वो तो नहीं सुनना है। आप बताइए वेदों में कहां प्रमाण है? कबीर भगवान है। अभी जो आप कह रहे थे कि कहीं पर भी कबीर नहीं लिखा हुआ है और वो कबीर की बात कबीर की बात रहे थे। कबीर कबीर कबीर नहीं। कबीर कहां लिखा है? कबीर कबीर तो हम उसको बोलते हैं ना। कबीर क्यों बोलते हो? क्यों बोलते हो? कहां कौन सा नियम है जो ऐसा बोलते हो? क्यों बोलते हो भाई? क्यों बोलते हो? शंकर जी क्यों? अब बता रहा हूं। सुन लीजिएगा। शिव जी को शंकर जी क्यों बोलते हो? भोले क्यों बोलते? क्यों बोलते हो? हम बोलेंगे। क्यों बोलते हैं? दुनिया वाले क्यों बोलते हैं? आप चुप गए। अरे भैया शिव और शंकर दोनों का अर्थ है। अभी उससे नहीं आते आप कबीर की बात। शंकर नाम भी शंकर नाम भी शास्त्रों में दिया गया है। शंकर नाम भी शास्त्रों में दिया गया है। और अगर कोई उनका ऐसा नाम बोलेगा जो शास्त्र
01:15:38:19 सम्मत नहीं होगा तो हम उसको गलत कहेंगे। ये गलत है। अब बोलो बोलो। अब कान्हा बोलते हैं वो उनको अलग-अलग नामों से गलत है। वो गलत है। मत बोलो। कोई जरूरी नहीं है कान्हा बोलना। कान्हा बोलना कोई जरूरी नहीं है। कान्हा बोलना कोई आवश्यक नहीं है। कान्हा बोलना कोई आवश्यक नहीं है। मेन उनका नाम है कृष्ण। अगर कोई कान्हा बोल रहा है तो बोले मगर हम यह कहेंगे वेदों में प्रमाण है। ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती गणेश भगवान है। उनका बाद में नाम जो भी पड़ जाए मगर जो उनका मूल नाम है वह वेद में है। आपका मूल नाम वेद में कहां है?
01:16:27:10 म्यूट कर दीजिए इनको। बोलिए। म्यूट है। म्यूट है बोलिए बोलिए। अरे भाई मैं अनम्यूट कर रहा हूं। आप अपने आप को म्यूट कर ले रहे हो। फिर हो गया म्यूट। आप टच कर रहे हैं क्या कुछ? बोलिए। बताइए। ठीक है ना? मुझे आप मुझे आप मुझे आप सुनिए अब सीधी बात इस पर आ जाइए मुझे प्रमाण से बताइए कि कबीर कबीर कैसे बना बस प्रमाण से मनमुखी बातें कुछ नहीं प्रमाण दीजिए जैसे प्रमाण दीजिए प्रमाण मैं पूछ रहा हूं प्रमाण दीजिए अपनी बात के लिए प्रमाण दीजिए इस अध्याय में लिखा है ऐसा ऐसा होता है करो प्रमाण दो अनोखी बातें नहीं ये प्रमाण अरे तो ये प्रमाण कबीर कबीर कैसे बना? कन्हैया कृष्ण जी हो गए या कान्हा? अरे भाई मैं नहीं मानता कन्हैया कृष्ण हो गए। मैं तो कृष्ण कृष्ण बोलो मैं तो कृष्ण मानता हूं। वेदों में कृष्ण भगवान है। अरे भाई उसका वास्तविक नाम कबीर है। हम उसको कबीर बोलते हैं। बस इतना अंतर है। इसमें कौन सी बात? अरे तुम कौन से नियम
01:17:42:19 के आधार पे बोलते हो भाई? और अगर अगर बोलते हो अगर बोलते हो अगर बोलते हो तो उसमें यह बोलो वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है कबीर भगवान नहीं बोलो कबीर कबीर भगवान है ये अब आप लगा लो ना हम तो कबीर जो भगवान की महिमा है भगवान की महिमा है उसको क्या क्या बोलोगे आपसे बोलो जरा रिपीट करो क्या बोलोगे आपसे हम तो हम तो जो बोलेंगे जो परमात्मा ने कहा है वही बोलेंगे ठीक है नहीं कभी कबीर जी ने खुद कहा है कि बस
01:18:21:01 मुंह जोरी करने आते हैं लोग मुंह जोरी बंदी छोड़ने से इनका मतलब होता है कि भाई देखिए सद ग्रंथों को वेदों को गीता जी को समझ नहीं सके पुण्य आत्माओं पवित्र चारों वेद और पवित्र वह प्रमाण दिखा दीजिए जो शिव पुराण का एक फोटो है जिसमें कि जहां पर यह बता रहे हैं कि वामदेव आए थे उनका जो शास्त्रार्थ हुआ था मनु महाराज से और फिर वो जो है वो तो वामदेव को ये बता रहे हैं कि जो वामदेव आए थे ये सत सुकरत ऋषि ही थे सत सुकृत थे जो कबीर ही थे जो आए थे उनके रूप में तो आप देखिए कि परमात्मा इनका जो है गर्भ से उत्पन्न होता है और चार वह भी थे चार नाम बताए गए हैं जो गर्भ से उत्पन्न होने के संबंध में चार पांच संतों के रूप में आते हैं इनके परमात्मा और वो सारे संत गर्भ से उत्पन्न होते हैं और फिर वह मृत्यु को भी प्राप्त होते हैं तो
01:19:36:02 यह वामदेव जी का जो प्रमाण है वो आपको अभी यहां पर हम दिखा रहे हैं। क्या हुआ भाई? नहीं दिखाएंगे क्या? मुझे ही पुराण खोलना पड़ेगा। कहां चले गए ऑपरेटर जी? खैर एक वीडियो है जिसमें कि ये बात करते हैं कि बताते हैं वामदेव के बारे में। उसी में बताते हैं और उसी में ही लिखा है। इवन यह बोलते भी हैं अपने मुख से ही कि जो परमात्मा है वह अलग-अलग रूपों में आया है और उनमें से एक वो सुकृत ऋषि का है रूप शायद गुरु नानक भी है उसी में। तो ये सभी शायद गरीब दास जी भी है उसी में से एक। तो ये सभी वही लोग हैं जो क्या कहते हैं मैं एक मिनट देख ही लेता हूं। तो चलिए तब तक जब तक वह प्राप्त हो रहा है तब तक हम लोग और भी चीजें देख लें। एक चीज सामने आई थी मेरे विष्णु सहस्त्र नाम विष्णु जी का नाम काल भी है। है ना? महाभारत
01:20:51:15 से है ये विष्णु सहस्त्र नाम और विष्णु जी का नाम काल भी है। मैं अभी थोड़ी देर में दिखा दूंगा। तो आदरणीय धर्मदास जी, आदरणीय मलूक दास जी, आदरणीय नानक देव साहब जी, आदरणीय दादू साहब जी, आदरणीय गरीब दास साहिब जी और ये सब अवतार हैं। झज्जर वाले तथा आदरणीय घीसा दास साहब जी गांव यह वो और यह सब परम अक्षर ब्रह्म सत्पुरुष के अवतार थे। अब भाई यह सभी लोग लगभग लगभग इनकी जानकारी प्राप्त है। ये सब माता के गर्भ से उत्पन्न होने वाले थे। परम अक्षर ब्रह्म तत पुरुष के अवतारों की जानकारी यानी कि यह गर्भ में आता है। गर्भ से उत्पन्न होता है। अवतार लेता है। ये ठीक है माता के गर्भ। अब एकदम वो वाला वो दिखा दीजिए जरा जो शिव पुराण में जो ये वामदेव का वो दिखा रहे हैं जो रूप में प्रकट वामदेव। ये देखिए माता के गर्भ से बाहर निकलते हैं।
01:22:07:03 कहां से आते हैं? माता के गर्भ से बाहर कबीर जी को उस सतकृत रूप में प्रकट सतकृत नाम से प्रकट परमेश्वर को वाम देव कहने लागे। वह उनका व्यत्मक नाम वाम देव रख दिया। पूर्व काल में कर्म में महामुनि वामदेव माता के गर्भ से बाहर निकलते ही शिवताओं के ठीक है बस इतना काफी है तो
01:22:43:19 [गला साफ़ करने की आवाज़] क्या क्या अर्थ निकला इनकी लग कोई एक बात ही नहीं है जो सत्य सिद्ध हो जाए इनकी कोई भी ऐसी बात नहीं होती है लगभग लगभग हर बात ये झूठ ही बोलते हैं हर बात झूठ बोलते हैं अब इसी श्रंखला में हम लोग एक बात करते हैं कि अह आज हम इनकी ये ऐसे ही दिखते हैं ना आपको तो हमने भी इनकी किताबों में ही चिप चिपकाना शुरू कर दिया। है ना? टिट फॉर टैट। तो इनकी ये जो गीता तेरा ज्ञान अमृत है इससे हमें एक बहुत मजे की बात पता चली है। आनंद लीजिए। अब इसमें कुछ वैसा ऐसा नहीं है कि आपको कोई ब्रह्म ज्ञान प्राप्त होना है। जिसको एंटरटेनमेंट करना हो वो वो है। एंटरटेनिंग पार्ट है ये। पता करते रहिए। सब चीजें हमने पहले ही खोल के दिखा दी है। बस आनंद प्राप्त करिए। तो क्या है? क्या आनंद है भाई? इनके ही अनुसार। इनके ही अनुसार। परमात्मा इनका जो कबीर है वह यह बोल रहा है कि गीता का ज्ञान किसने
01:23:58:21 दिया है? परमात्मा विष्णु ने। हां परमात्मा कृष्ण ने। कौन बोल रहा है? इनका कबीर। कहां पे बोल रहा है? इनकी किताब में। इनकी किताब को किसने लिखा? इन्होंने। ठीक है? तो इससे ज्यादा बड़ा तमाचा भरा प्रमाण और कौन सा मिलेगा इनके लिए? तो भैया इनको गीता तेरा ज्ञान अमृत का पेज दिखाइए।
01:24:31:22 52 बुक के हिसाब से। इसमें प्रश्न नंबर 32 है। प्रश्न नंबर जो प्रश्न दिख रहे हो ना उनमें 32 नंबर प्रश्न पर आ जाइए। यह कबीर कह रहे हैं धर्मदास से प्रश्न नंबर 32
01:25:14:24 प्रश्न नंबर 32 है क्या? पेज थोड़ा सा आगे पीछे होगा आपका और मेरा प्रश्न प्रश्न चेक कर लीजिए 32 प्रश्न प्रश्न नंबर ये धर्मदास जी और कबीर दास जी के बीच में बातें हो रही हैं। गीत नहीं आप किस में हैं? गीता तेरा ज्ञान अमृत में है। किस में है?
01:25:58:09 हम तो प्रश्न नंबर हां ठीक है। इसमें लगभग पहुंचिए। ये शंका समाधान में जो प्रश्न नंबर 32 है ना वहां पहुंचना है हमें। और आगे चलिए। हां? ये तो ज्यादा आगे आ गए क्या? 83 पीछे है पीछे पीछे जाइए। हां भाई फैक्ट बाय अरुण। प्रश्न 47 पे आ गए। आ जाओ भाई थोड़ा बता दो गीता का ज्ञान किसने दिया है?
01:26:44:00 हम आज नहीं आएंगे। अब इनकी बोलती बंद होने लगी ना। क्या हुआ? बोल तो रहा हूं। 32 32 नंबर प्रश्न पे जाइए। 32 ये 21 है ये। 32 पे जाइए। धीरेधी चलिए नहीं निकल जाएगा। गीता तेरा ज्ञान अमृत का 5% नहीं 100% ज्ञान काल ने ही दिया है।
01:27:33:25 ये बात अपने लिए भी तो सोचनी चाहिए। भाई जब तुम हमारी ग्रंथों को पढ़ पढ़ के बताते हो हम भी तो कह सकते हैं कि तुम गलत पढ़ के बता रहे हो। हम [गला साफ़ करने की आवाज़] तब नहीं सोचते न्याय नहीं है। अन्याय है। हां भाई ये देखिए जिंदा बाबा के रूप में भगवान जी का इनको पीछे से दिखा दो जिंदा बाबा कौन है जरा। पीछे 29 नंबर में लिखा है। कबीर जी जिंदा रूप में। पीछे 31वा दिखा दो जिंदा जिंदा बाबा के रूप में परमात्मा का ब्रैकेट ऊपर दिखाओ थोड़ा सा पीछे जाओ हल्का सा ज्यादा पीछे चले गए हल्का सा पीछे जाना था वापस आइए परमात्मा जिंदा वेश में नहीं वो तो ठीक है बिल्कुल 31 वो 31 नंबर जब प्रश्न शुरू हो रहा है ना तो वहीं पे ब्रैकेट में लिखा है हां ये जिंदा बाबा रूप में परमात्मा ठीक ठीक है? तो ये जिंदा बाबा रूप में परमात्मा है। तो 32 में क्या कह रहे हैं परमात्मा? देखिए ध्यान से। गीता का ज्ञान किसने दिया है? रामपाली फॉलोअर्स ध्यान से देखें। हे धर्मदास गीता शास्त्र आपके परमपिता
01:28:49:06 भगवान कृष्ण उर्फ विष्णु जी का अनुभव तथा आपको आदेश है कि इस गीता शास्त्र में लिखे मेरे अनुभव को पढ़कर इसे इसके अनुसार भक्ति करोगे तो मोक्ष प्राप्त होगा। किसका आदेश है भाई? कृष्ण का विष्णु का गीता शास्त्र वह भी परमपिता भगवान है। क्या कर रहे हो यह ऐसे नहीं करना चाहिए था तिरछेद जी कितना गलत लिख दिया आपने ऐसे नहीं करना चाहिए खैर होगा कोई माई का लाल जो आकर के जवाब देगा इन बातों का कि क्या लिखा है तो गीता का ज्ञान किसने दिया परमात्मा ने परमपिता परमपिता विष्णु कृष्ण ने दिया उनका आदेश है कि इसके अनुसार तुम्हें चलना ठीक है? तो ये रामपाल ही अपनी जिस डाल पर बैठे हैं, ज्ञान गंगा की डाल पे, गीता तेरा ज्ञान अमृत की डाल पे जिस डाल पर वो बैठे हैं, उसी डाल को वो स्वयं ही काट के गए हैं जगह-जगह से। वैसे काटना होता है वैराग्य रूपी शस्त्र द्वारा वो माया रूपी जो वृक्ष है संसार का उसके मूल
01:30:04:07 को काटना होता है। मगर यहां उस पर तो जा नहीं पाए। वैराग वगैरह तो है नहीं। तो यह अपने को ही काट के गए हैं जगह जगह। अरे [गला साफ़ करने की आवाज़] भाई यह क्यों ना खोले फैक्ट बाय अरुण यह यह क्या गलत लिखा है तुम्हारे तत्वदर्शी ने इसका क्या करें वो भी तत्वदर्शी अपनी ओर से नहीं बोल रहा है परमेश्वर की ओर से बोल रहा है कि परमेश्वर ने बोला कि गीता जो है परमपिता विष्णु कृष्ण द्वारा दिया गया आदेश है क्या करोगे इसका बहुत बहुत ज्यादा
01:30:44:21 हां तुम तुम बड़ा व्यवस्थित रूप से पढ़ते हो ना पुराण को शुरू से ले अंत तक है ना टीवी चैनल्स पर अच्छा ये जाने से पहले एक वो इनको वीडियो और दिखा दीजिए इसी बात पे इसी बात पे एक वीडियो और दिखा दीजिए भाई इनको वो क्या वीडियो है जिसमें कोई डाउट ना रह जाए कि गीता जो ज्ञान है वह परमात्मा ने ही दिया है। वह वीडियो दिखा दीजिए इनको। ज्ञान है। ऐसी बातें नहीं करते। कच्ची गोलियां नहीं खेलते। गीता आत्माओं पवित्र चारों वेद और पवित्र श्रीमद् भगवत गीता यह गॉड गिवन स्पिरिचुअल नॉलेज है। यह परमात्मा का दिया हुआ आध्यात्मिक ज्ञान है। और
01:31:34:12 किसका दिया हुआ ज्ञान है भैया? हेलो टू स्टॉप द ट्रेन पुल द चैन। [हंसी] अब क्या करें? तत्वदर्शी झूठ बोल रहा है। हां। तो तो ठीक है भाई। अब इनका एक नया मामला आ गया है कि अब इनको इससे मतलब नहीं है कि इनका तिरछादर्शी स्वयं बोल रहा है कि यह परमात्मा का दिया हुआ ज्ञान है। इनका तिरछादर्शी स्वयं लिख रहा है कि भाई कबीर ने कहा कि जो गीता का ज्ञान है वह जो है विष्णु ने कृष्ण ने बोला अब इसको दूसरी बातों से मतलब है। यह इतनी टाइम लगती है क्या तेरे को क्या वह पेज निकालने में कहां का ज्ञानी यह सब इनके पास रह गया है। विषय से हटकर बातें हैं इनके पास बस। चलिए दूसरा कुछ निकालते हैं। है ना? दूसरा क्या निकालते हैं? इनकी इनकी इन किताबों
01:32:49:22 में ही बहुत सारा ऐसा ज्ञान है बहुत ही उत्कृष्ट स्तर का जिसको आप अच्छा अब देखिए गीता तेरा ज्ञान अमृत पष् संख्या है मेरे पास जो इनकी छपी हुई है पुरानी है शायद थोड़ा बहुत पष् संख्या में आगे पीछे होगा पर प्रश्न नंबर ये 34 है जिसमें कि इन्होंने माना है कि गीता अध्याय 17 श्लोक 23 में यह कहा गया है कि सच्चिदानंद
01:33:34:21 घन ब्रह्म अर्थात परम अक्षर ब्रह्म की प्राप्ति के लिए ओम तत्सत इस मंत्र का निर्देश है। इसके इसके स्मरण की विधि तीन प्रकार से है। तो परम अक्षर ब्रह्म प्राप्ति के लिए क्या बताया है? ओम तत्सत और यह गीता अध्याय 17 23 के हिसाब से है। ठीक है? तो यह कहा गया है 17 23 में अब 17 23 को आप छोड़ तो सकते नहीं हो गलत तो है नहीं वो तो ये परम अक्षर ब्रह्म की प्राप्ति के लिए है ये मान लिया तो क्या हुआ यानी कि वो जो प्रणव तत्सत वाला मंत्र है वो लेना है कि नहीं लेना है वो हमने अपनी उसमें व्याख्या में भी कहा कि भाई ठीक है अगर वो ले भी लिया तो उस बहुत सी बातें हैं मगर ये यही बोल रहे हैं कि गीता में परम ब्रह की प्राप्ति के लिए मंत्र ज्ञान दिया गया है। तो इनकी वो वाली बातें सब गलत हो जाती है कि गीता में जो भक्ति बताई गई है वो केवल ब्रह्म तक की है। ठीक है? क्योंकि यह खुद मान रहे हैं कि गीता में कहा गया है कि परम अक्षर ब्रह्म की प्राप्ति के
01:34:49:25 लिए फलाना फलाना मंत्र का निर्देश है। ये गीता में कहा गया है। ये इन्होंने खुद मान लिया। देखो अ [खांसने की आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़] हम ये देखो कहा गया है कि है ना और फिर आ जाओ इधर अर्थात ये घन ब्रह्म अर्थात परम अक्षर ब्रह्म की प्राप्ति के लिए है। यानी परम अक्षर ब्रह्म की प्राप्ति के लिए गीता ज्ञान देने का दावा करती है। भले ही उसको मानते हैं कि नहीं मानते हैं वह बात एक अलग है। मगर वह दावा करती है। वह यह नहीं कहती है कि उसके उसको प्राप्त करने की विधि मेरे पास नहीं है। ये इनहीं की बात से कट रही है क्योंकि ये 17 23 में कह रहे हैं कि भाई परम अक्षर ब्रह्म की प्राप्ति के लिए है। ये खुद ही लिख रहे हैं। और देखिए
01:35:50:28 क्या नाम रखे हैं इनकी इस दिखा दीजिए इनको ये प्रश्न। ठीक से देख लेंगे। यह है प्रश्न संख्या 56 के आसपास है। 56 55 के आसपास और इसमें प्रश्न नंबर 34 का उत्तर दे रहे हैं कबीर साहब। वहां पे है प्रश्न नंबर 34 का। प्रश्न 34 ढूंढ लीजिए बस।
01:36:30:27 [गला साफ़ करने की आवाज़] अभी कौन सा चल रहा है? हां प्रश्न 34 ये देखिए ये आ गया। तो क्या कहा गया है? गीता अध्याय 17 श्लोक 23 में कहा गया है कि सच्चिदानंद गण ब्रह्म अर्थात परम अक्षर ब्रह्म की प्राप्ति के लिए फलाना फलाना मंत्र का निर्देश है। यानी गीता यह दावा कर रही है कि हमारे पास उसकी पूर्ण भक्ति का ज्ञान है। अब तुम नहीं मान रहे हो तो बात अलग है। मगर गीता ये दावा कर रही है। तो तुम जो कर रहे हो या कह रहे हो वो गीता के विरुद्ध कर रहे हो। क्योंकि गीता तुम्हारे हिसाब से कह रही है कि परम अक्षर ब्रह्म की प्राप्ति का ज्ञान यह है। ठीक है? तो यह भी तुम्हारी बात गलत हो गई। [गला साफ़ करने की आवाज़]
01:37:29:10 अच्छा और देखते हैं और क्या है इनके मामले। इनकी बहुत सी चीजें पकड़ में आई है। एक-एक करके चलते हैं। ये लोग बहुत रामायण इत्यादि पर बात करते हैं। अच्छा ब्रह्मकाल की अव्यक्त रहने की प्रतिज्ञा है सब। ठीक है? और यह है भी कि ब्रह्म काल किसी को प्राप्त नहीं होता। वह सदैव अव्यक्त रहता है। वह अपने वास्तविक रूप में किसी के पास किसी के सामने आता नहीं है। तो
01:38:08:00 नीरज दास या महेंद्र जी मैं आ तो जाऊंगा पर इनको इनके शास्त्र से समझाना पड़ेगा। मेरे पास गरुड़ पुराण है। भाई आप कुछ भी बात लेकर के आइए। आप कुछ भी सिद्ध नहीं कर पाएंगे। आप ले आइए। गरुण पुराण ले आइए। आप शास्त्र नाम बताइए। अब इसमें कह रहा है कि ब्रह्म काल जो है वह स्वयं ये कह रहा है कि मैं अव्यक्त रहूंगा। मैं कभी भी प्रकट नहीं होऊंगा और यह है वो है। मगर गीता अध्याय 11 श्लोक 47 तथा 48 में यह मेरा वास्तविक काल रूप है। ठीक है? तो यह अर्जुन को उसने प्रकट कर दिया। तो पहली बात तो ये झूठ बोलता है काल। क्यों? झूठ तो उसका कई बार सिद्ध हो रहा है। मगर यहां पर भी यह सिद्ध हो रहा है। इसने वो लिया और इनके ग्रंथों में कई जगह लिखा है कि काल का वास्तविक स्वरूप कोई देख नहीं सकता। वो तभी देखा जा सकता है जब वो उनको जीवात्माओं को खा रहा होगा। वह भी उसकी भक्ति करने वालों को तब देख सकता है। तो यहां पर और एक जगह यह भी लिखा है कि भक्ति करने वालों को भी काल नहीं मिलता। तो उल्टा पुल्टा खूब लिखा है। मगर फिलहाल क्या है कि
01:39:23:03 काल की अव्यक्त रहने की प्रतिज्ञा है। ठीक है? मगर काल 11:47 में खुद को व्यक्त भी कर रहा है कि यह मेरा वास्तविक स्वरूप है। यह देखो काल की अव्यक्त रहने की प्रतिज्ञा और 1147 में यह मेरा वास्तविक काल रूप है। पढ़ लिया। पढ़ लिया होगा। तब तक आप नीचे लिंक दे दीजिए। कोई आना हो तो आ सकता है।
01:39:59:26 [हंसी] और सुनिए और क्या-क्या है? बहुत सा है। जितना पढ़ते जाएंगे ना इनकी किताबों को उतना ही इनकी ही किताबों का इनसे ही मिलता रहेगा। [गला साफ़ करने की आवाज़] हम [नाक से की जाने वाली आवाज़] और एक चीज और दिखाते हैं इनका 30 मार खानपन स्वयं को बहुत बड़ा 30 मार खान समझते हैं। तो गीता 13 ज्ञान अमृत में जो आपने भेजा था हमको प्रकरण वश अर्थ उसमें यह लिख रहे हैं कि ब्रह्म का अर्थ जो है इन्होंने क्या लिया है देखते हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़]
01:41:16:24 हम हां [गला साफ़ करने की आवाज़] यह सत्य है कि अक्षर का अर्थ अविनाशी होता है। परंतु प्रकरण वर्ष अर्थ अन्य भी होता है। यह है गीता तेरा ज्ञान अमृत और गीता 13 ज्ञान अमृत और पष्ठ संख्या है 17 16 15
01:41:48:24 हां ये भी देख लीजिए ये जो कहते हैं ना कि सूक्ष्म वेद में मुक्ति का ज्ञान है। तो यह कह रहे हैं ज्ञान गंगा में पष्ठ संख्या पांच पर कि कबीर साहब की जो वाणी है वेद गीता पुराण पुराण धर्मदास साहब जी आदि संतों की वाणी है ना इनमें भी मुक्ति नहीं है इनके अध्ययन से भी मुक्ति नहीं होगी इनके अध्ययन से मुक्ति नहीं होगी
01:42:31:10 यह भी कह दिया इन्होंने। नहीं नहीं बचे हैं कुछ रामपाली आए हैं आज। आज कुछ हैं कुछ आए हैं भाई साहब। रंजीत सिंह आए हैं कोई और आए तो थे चले गए क्या? रंजीत सिंह जी अपना चेहरा दिखाएं। अरे हम नहीं हम तो ये बोलने आए थे नीरज जी करके कोई थे। उनको ऊपर बुला लो। उनको ऊपर बुला लो। वो जवाब देते हैं। हमने इनसे पूछा था सुनो सुनो पहले हमने इनसे हमने इनसे कहा था इनके सामने हमने एक चैलेंज रखा था इन लोगों के सामने कि हम इनके भक्त बन जाएंगे यार बट ये हमको ना हमारे जो चार वेद है छह वेदांक हैं और इसके बाद 108 उपनिषद है 18 पुराण इनमें कहीं भी हमको जो है कबीर भगवान परमात्मा का कोई मंत्र हमको बता दीजिए
01:43:24:28 और एक चीज हम बताएं अभी बहुत अच्छी अच्छी न्यूज़ है कि तीन हमारे मतलब हमारे एक मित्र थे वो जो है उनके रामपाल जी के चंगुल से हमारे यहां से भी मुक्त हो गए हैं। ये बहुत अच्छी न्यूज़ है। बहुत बढ़िया। काफी दिन से काफी दिन से पगलाए हुए थे। हमारे साथ ही थे वो। जी जी जी जी जी थोड़ा सा मैं कहूंगा कि भाई वो नीरज जी है जो वो आए और नहीं हम हम देखो हमने एकदम इनको क्लियरली कहा है यार हम आपके जो है आपकी हर बात मानने के लिए तैयार हैं बट आप कबीर इज गॉड ये हमको दिखा दो हमारे जो हम जिनको मानते हैं उसमें दिखा दो बस बाकी आपका ज्ञान गंगा क्या कहता है कबीर सागर क्या कहता है आई डोंट अबाउट इट रमेश प्रजापति जी हां इस बात से हमने कभी इंकार नहीं किया कि हां कबीर जी ने अच्छे दोहे लिखे हैं। उन्होंने पाखंड और आडंबर का एक बात इस बात से जरा मैं बात पूरी कर लूं। एक बात चल रही थी। इन्होंने क्या है? गीता 13 ज्ञान अमृत में कहा है कि अक्षर का अर्थ अविनाशी होता है। परंतु प्रकरण वश अर्थ अन्य भी होता है। गीता
01:44:40:00 अध्याय 15 16 श्लोक में कहा है कि क्षर और अक्षर ये दो पुरुष होते हैं। ठीक है? और यहां पर इन्होंने परम [गला साफ़ करने की आवाज़] ब्रह्म कहा है और अक्षर का अर्थ अविनाशी है। परंतु यहां पर परम अक्षर ब्रह्म कहा जाएगा। तो इन्होंने प्रकरण वश अर्थ अलग मान लिया। अच्छा इसी प्रकार से इन्होंने प्रकरण वश जो अर्थ है वो क्या अलग माना है? यहां पर जो ब्रह्मण शब्द आया है ब्रह्मण यह
01:45:23:10 आठ श्लोक 17 है ना इसमें ब्राह्मण शब्द आया है तो उसका अर्थ इन्होंने ब्राह्मण का अर्थ सच्चिदानंद 17 श्लोक 23 में ब्रह्मण का अर्थ सच्चिदानंद घन ब्रह्म किया है। वह अनुवादकों ने ठीक किया है। मगर आठ श्लोक 17 में ब्रह्मन का अर्थ अक्षर ब्रह्म बनता है। मतलब यह स्वयं तय करेंगे कि कहां पे कौन सा अर्थ लेना है। प्रकरणवश जो लिया जाता है। मगर वहीं पे जब व्यक्ति प्रकरण वश
01:46:05:03 इन्होंने ब्रह्मण का अर्थ एक जगह सच्चिदानंद परम परम ब्रह्म ले लिया और ब्रह्मण का ही अर्थ एक जगह ले लिया अक्षर ब्रह्म पूर्ण ब्रह्म नहीं लिया तो इन्होंने तय कर लिया यहां पर पूर्ण ब्रह्म नहीं है यहां पर पूर्ण ब्रह्म है मगर व्यक्ति इसी प्रकार से जब प्रकरण प्रकरण वश जब 432 में ब्रह्म का अर्थ वेद लेता है जो कि शास्त्रों में भी है ब्रह्म का अर्थ शब्द ब्रह्म कहा गया वेदों को तो यह वहां पर कहते हैं नहीं नहीं ये ब्रह्म का अर्थ कैसे ले लिया इन्होंने चार 32 इनको दिखाया जाए
01:46:38:21 ब्रह्मन का अर्थ अक्षर ब्रह्म बनता है 17 श्लोक 23 में ब्रह्मण का अर्थ सच्चिदानंद स्वरूप है सांकेतिक है ब्रह्मन का अर्थात सच्चिदानंद ब्रह्म की भक्ति ये वो तो ये अपने मन से ब्रह्म का अर्थ कहीं पर भी सच्चिदानंद घन ब्रह्म ले सकते हैं और ये अपने अनुसार कहीं पर भी ब्रह्म का अर्थ अक्षर ब्रह्म ले सकते हैं। मतलब ब्रह्म से थोड़ा छोटा वाला है ना वो बात और है कि निरुक्त में अक्षर ब्रह्म और परमात्मा सबको एक कहा गया है। खैर वो सब बातें डिफेंड काफी कर चुके मगर फिलहाल जो श्लोक चार 32 है उसमें जब देखिए अब उसमें उन्होंने जब ब्रह्म का अर्थ प्रकरण के अनुसार वेद किया है तो अनुचित है। तो कुल मिलाकर के इन्होंने अनुचित कई बार कई तरीके से सिद्ध किया है कि इनका जो करने का प्रयास किया है कि इनका गीता का ट्रांसलेशन ट्रांसलेशन करने वालों का अर्थ जो है वो गलत है। तो देखिए अगर आप उनको गलत कह रहे हैं तो आप स्वयं को सबसे पहले संस्कृतज्ञ तो सिद्ध करिए। आप तो संस्कृतज्ञ नहीं है। तो आप किस शब्द का कौन सा अर्थ लेना है? कौन सी विभक्ति
01:47:54:04 है? कौन सा क्या है? वो तब आपको कैसे पता कि उन्होंने सही किया है कि गलत किया है। भाई अगर आप किसी के ट्रांसलेशन को गलत कह रहे हैं तो आपको ट्रांसलेशन करना आना चाहिए। तभी तो आप किसी के ट्रांसलेशन को गलत कह सकते हैं। खैर [गला साफ़ करने की आवाज़] या फिर आपके पास सही ट्रांसलेशन हो। किसी किसी का आपके पास सही ट्रांसलेशन हो तब आना चाहिए। तो यह इनकी एक पोल है कि अपने मन से जहां पर भी प्रकरण के अनुसार लेना होगा ले लेंगे और अपने मन से जब जब कोई दूसरा व्यक्ति प्रकरण के अनुसार जब अर्थ लेगा तो ये कह देंगे अरे ब्रह्म का अर्थ देखिए वेद ले लिया इन्होंने। अरे तुम जब ब्रह्म का अर्थ एक जगह अक्षर और एक जगह परम अक्षर ले रहे हो तो दूसरा व्यक्ति ब्रह्म का अर्थ शास्त्रों में दिए गए शब्दों के हिसाब से शब्द ब्रह्म नहीं ले सकता। वाह भाई वाह। हद है। तो हमने आज क्या-क्या जाना कि कबीर माता के गर्भ से जन्म लेता है और जो वेद जो गीता वेद का ज्ञान है वो परमात्मा ने दिया है। ठीक है? और परमात्मा ने दिया है। कबीर जी एक जगह कह रहे हैं किसने दिया है? कृष्ण और विष्णु ने। तो इनके ही ग्रंथ के द्वारा सिद्ध
01:49:09:08 हो गया। कबीर की वाणी है। परमात्मा की वाणी। परमात्मा का रूप की वाणी भी नहीं है। परमात्मा की वाणी है। उसको कैसे मना करोगे? और हमने वो भी दिखा दिया कि वामदेव के रूप में माता के गर्भ से जन्म लिया। अब एक चीज और दिखा देते हैं कि ये ये बात करते हैं कि महाभारत में लिखा है वो कोई ठाकुर लगाती अपने नाम के आगे। हालांकि ठाकुर लगाना नहीं चाहिए था क्योंकि वह तो अब इन चीजों से परे हो गई है, मुक्त हो गई हैं। ठाकुर लगाती हैं। तो उन्होंने अपने किसी वीडियो में कहा कि अरे वो कृष्ण भगवान जो है वो कह रहे हैं वो मोक्ष नहीं दे सकते या प्रारब्ध को नहीं बदल सकते। तो भैया कबीर भी मोक्ष नहीं दे सकता है। कबीर भी मोक्ष नहीं दे सकता है। इस चीज को आप देखिए। लगाइए भैया वीडियो चलाइए। जहां पर यह कहा जा रहा है इनके तथाकथित जेलधाम निवासी तत्वदर्शी के द्वारा कि कबीर मोक्ष नहीं दे सकता
01:50:20:16 हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेव दिखाइए भैया जी पहाड़ी जी तब तक आपसे बातें कर लेते हैं आज मतलब फुल पोस्टमार्टम चल रहा है आज भी अब ये पोस्टमार्टम क्या है ये ऐसा है जैसे इस शरीर से तुम बाहर नहीं हो सकोगे अब मेरे इस जीवन से तो मैं यहां आया हूं क्योंकि मुझे मालूम है तुम्हें नहीं तुम्हारे अंदर दोष तब कहा बेटा इस शरीर से तुम बाहर नहीं हो सकोगे अब मेरे इस जीवन से तो मैं यहां आया हूं इस शरीर से कल्याण नहीं हो सकता है ये जो वीडियो हमने जहां से लिया है वहां पर दोनों बातें हैं मेरे इस शरीर शरीर से तुम्हारा कल्याण नहीं हो सकता। ठीक है? भगवान स्वयं परमेश्वर कह रहे हैं कि नहीं हो सकता। अब तुम्हारा कल्याण मेरे इस शरीर से दिक्कत है भगवान को। सामने खड़ा है व्यक्ति। मेरे इस शरीर से तुम्हारा कल्याण नहीं हो सकता। अच्छा इसमें दो दूसरी एक बात भी ठलक मार रही है। क्या इसके अलावा भी कोई शरीर है क्या भगवान का? यह तो वास्तविक में वो शाश्वत रूप है। यह भी एक दिक्कत है। इससे
01:51:35:20 नहीं हो सकता तो किसी से हो सकता है वह अलग है। फिर कोई और शरीर है वो मेरे इस शरीर से नहीं हो सकता। तो दे दीजिए भैया इनको। अरे अपनी बात को ऊपर रखने के लिए यहां तक यहां तक कह दिया सामने वाले ने हम कि मेरा मेरी जो पैदाइश हुई है वो भगवती से हुई है। अच्छा मां जगदंबा से अच्छा अब देखो कहां तक जाएंगे ये कहां तक?
01:52:13:20 जहां तक जाएंगे वहां वहां तक जहां तक जाएंगे वहां तक हम पीछे पीछे आएंगे। एक्चुअली बात चल रही थी गुणों की हम और उसमें एक श्लोक है हमारे गीता में कि जो ये गुण है प्रकृति से पैदा होते हैं। जड़ जितने भी ये शरीर है प्रकृति से पैदा होते हैं। तो आप उसकी लाइव में गए थे ना अमित दास की। हां हां हां हां [हंसी] हां तो अमित दास की लाइव में जो है उसने क्या किया कि कुछ कटिंग वटिंग करके हम हम आपका कुछ वीडियो बना के उसने डाल दिया है। अच्छा चले संपर्क करेंगे हम उनसे कि क्या किस बात का डर है कि आपने इसमें काट छांट किया। अब डर तो नहीं होता वो यहां से भागा क्यों था? पूछा था क्या आपने उससे भागा क्यों? तो बिल्कुल काट छांट करने का मतलब यही हुआ ना कि कुछ तथ्य आप छुपा रहे हैं जिससे भय है आपको जी या तो सीधा साधा डालिए जैसे आप शिवश भाई डालते हैं पूरा का पूरा वीडियो बिना काटे बिना कांटे तो
01:53:28:21 बात चल रही थी गुणों की उधर अरे भाई परिवार वाले आ जाओ ना ऊपर भाई आते क्यों नहीं हो बचपन में माता जी का दूध नहीं पिया क्या निष्ठा पूर्वक पूर्वक नहीं पिलाया क्या उन्होंने केवल यही के लिए ताकत है आ जाओ आते क्यों नहीं हो टीआर पहाड़ी जी ने कल वहां जाकर बहुत अच्छी तरह से समझाया था राजेश राजेश करके कोई संत था पर वो भी इतना निकम्मा है वो समझने की कोशिश नहीं कर रहा है अरे उन्होंने ये कह दिया अपनी बात ऊपर रखने के लिए मैंने कहा कि आपकी उत्पत्ति आप कहां से पैदा हुए हो उन्होंने ये कह दिया मैंने कहा कि क्या आप जो भगवती मां है वहां कहां से पैदा हुए हो? वो बोले हां मैं वहां से पैदा हुआ हूं। कुतर्क है कुतर्क उनसे कहो तुम्हारे पास बर्थ सर्टिफिकेट वगैरह कुछ है?
01:54:19:26 [हंसी] एक्चुअली जब ये इनका ये गुण छोड़ने की बात का अर्थ ये क्या लेते हैं कि ब्रह्मा विष्णु महेश की भक्ति नहीं करनी है। सुनो सुनो एक मिनट। देखो ये क्या कुतर्क कर रहे हैं नीचे कि आप अंधेरे में क्यों भाई वो अंधेरे में है कम से कम स्क्रीन पे कुछ तो है उनका तुम तो वो भी नहीं हो [हंसी] तुम तो उस स्थिति में भी नहीं हो निर्लज लज्जा नहीं आती तुम लोगों को इस तरह कुतर्क करते हुए इस तरह से तुम अपने जो रामपाल है उनका ही नुकसान करते हो खैर तो अगर कोई आना चाहता है कोई माई का लाल हो जो आकर के यह चीजें जो हमने चीजें खोली है आकर के हमसे कबीर को भगवान और गीता ज्ञान दाता को कृष्ण से अलग और क्या कहते हैं तुम्हारे रामपाल को तत्वदर्शी सिद्ध कर सको है तो आ जाओ भाई जो कह रहे हैं कबीर गॉड ये वो
01:55:23:13 आ जाओ लोगों के लोगों के बाल सफेद हो जाते हैं दाढ़ी सफेद हो जाती है मूछे सफेद हो जाती है पर अकल वहीं की वही रहती है कुछ लोगों की हम एक्चुअली उन्होंने जो है जो महानुभाव थे उन्होंने कहा कि काल हमें भ्रमित करता है काल रूप में महा ब्रह्मा महा विष्णु और महा शिव रहते हैं मैंने कहा कि प्रमाण दिखाइए आप हमें कहां लिखा है ये बोले प्रमाण नहीं है हमारे पास अभी तो बोल क्यों रहे हो या ऐसी बात बोलनी है ना कि जो काटी ना जा सके कोई उनका कोई संत आए तो उससे पूछा करो जहां कबीर बैठा है वो वो जगह किसने बनाई है ये तो बताओ ये हाई लेवल के क्वेश्चन हो गए ये वही रुक जाएंगे नहीं इनको शास्त्रों के अनुसार ही खुद अपने मुंह से बोल रहे हैं वो पढ़ के सुना रहे हैं कि ये गुण प्रधान है गुण प्रधान है ये मैंने कहा गुण प्रधान और गुण होने में क्या फर्क है ये देखो ये ये पाल दास जी कह रहे हैं कि भाई मानोगे नहीं तो क्या करें? तो ऐसे तो हम भी कह सकते हैं कि तुम मानोगे नहीं तो क्या करें? ब्रह्मा विष्णु महेश भाई तर्क और प्रमाण लाओ ना। शास्त्र सम्मत भक्ति करते हो ना
01:56:38:21 ले आओ शास्त्र यहां पर हम तुम्हें तुम्हारे ही शास्त्रों से दिखाएंगे। ये अभी तो कुछ पांच से आठ चिट लगी है इसमें। अभी थोड़े दिनों में हमारे पास आपकी सारी किताबें होंगी। उन सब में चिट ही चिट होंगी। आपका तो कोई भी पेज खोलो उसमें चिट लग जाती है। कोई भी पेज खोल लो इनकी बुक्स का उसमें आपको कुछ ना कुछ ऐसा मिल जाएगा जिससे इनकी ही बात कट रही हो। ऐसा हलवा बना के रखा है। कोई नहीं है भैया। कोई है परमात्मा कह दिया। सामने वाले ने काल को परमात्मा कह दिया। हम परमात्मा मानते हैं उनको। हां। अरे पूरी क्वालिटी ईश्वर की बताई। भगवान श्री कृष्ण कृष्ण की गीता में बहुत से जगह क्वालिटी पूरी ईश्वर की बताई है सब चीज भगवान श्री कृष्ण जी ने बनाया विष्णु जी ने बनाया तो कबीर दास जी ने क्या बनाया वो तो बता दो कबीर दास जी के नाम पर लोगों को उल्लू बनाया गया है मूर्ख बनाया गया हां बोले पुराणों को पूरा मानते हैं हम जी ये चलिए बोल रहे हैं। पुराणों को
01:57:53:25 पूरा मानते हैं। हां पूरा मानते हैं। उन्होंने बोला कि पुराणों को पूरा मानते हैं। तो मैंने बोला विष्णु पुराण में विष्णु जी से ही सब कुछ उत्पन्न हो रहा है। बोले हां मानते हैं। शिव पुराण में शिव जी से सब कुछ उत्पन्न हो रहा है। बोले हां मानते हैं। देवी पुराण में देवी जी से सब कुछ उत्पन्न हो रहा है। हां मानते हैं। तो इसका अर्थ क्या लिया जाए? तो इसका अर्थ ये लिया जाए उनके हिसाब से कि ये काल रूप बोल रहा है। कहां है प्रमाण? अरे एक मिनट काल रूप बोल रहा है या नहीं बोल रहा है उसको छोड़ो यह बात सत्य मानते हो कि नहीं मानते तुमने कहा मानते हैं
01:58:30:28 मानते हो एक ही क्षण में इस क्षण में बोल रहे हैं कि हां मैं मानता हूं अगले ही क्षण उसका फिर खंडन हम दो बातें जी जी जी और सामने वाले की बात को बिल्कुल जैसे भी उसको झूठा साबित करना यहां तक कह देना कि मेरी उत्पत्ति मां दुर्गा से हुई है। मेरी शरीर से प्रमाण मांगना चाहिए था आपको। अरे परम मांग गए वो कल दूंगा कल दूंगा।
01:59:05:13 अच्छा ढाई घंटे की डिबेट खाली देवी भागवत पुराण का कुछ अंश और विष्णु सहस्त्र नाम महाभारत से है विष्णु सहस्त्रनाम महाभारत का अंश है ये और इसमें विष्णु भगवान का एक नाम है काल देख लो इसको कहते हैं शास्त्र और तर्क देखा और इनहीं का एक नाम पुरुषोत्तम भी है इसमें। ठीक है? कहां तक जाओगे भाई? इसीलिए कहा था शुरू में ही मत पड़ो चक्कर में। कोई नहीं है टक्कर में। मगर नहीं। हमें तो आना है चक्कर में। तो इसी में एक नाम जो है उनका पुरुषोत्तम भी है। जी जी आप बोलिए। उसको तो मानना पड़ेगा ना। ना ना वो अरे ऐसा है कि जिन लोगों ने कभी शास्त्रों को देखा नहीं है उनको लपेटे में लेकर के ये जो है अपने हिसाब से उनको जो अपना समझाना है वो भी अपनी ऐसी कहानी अपनी ऐसी कहानी जिस कहानी में वो स्वयं के सिद्धांतों की भी पग
02:00:20:21 पग में हत्या कर रहे हैं। पग पग में वह कहानी चिपका कर चले गए हैं और अब वहां पर अपनी बंदी छूटने की प्रार्थना कर रहे हैं और वो बंदी पता नहीं कब छूटेगी। कुछ लोग कह रहे हैं कि अभी छूटने वाली है। छूट जाए भाई उन्हीं से बात हो जाएगी डायरेक्ट क्योंकि इनके तो किसी भी व्यक्ति को अगर चित्त कर भी देंगे तो फिर इनके मन में ये रह जाएगा हमारे उनको करो तब देखें। है ना? यह लोग बड़े आसानी से जो धर्म गुरु हैं, जो हमारे ऋषि मुनि उनको नकली कह देते हैं। किस बेस पर कहते होंगे? अभी तक समझ में नहीं आया मेरे। आज तक समझ में नहीं आया। देखिए सावन के अंधे को सब हरा हरा दिखाई देता है। यह उनके जेल धाम प्रवास से जस्ट पहले अंधे हुए लोग हैं। तो उस समय इनके कानों में जो बात पड़ी है वही इनके लिए बस हरा हरा रहा है। सब वही अच्छा एक पर एक जो जब मैं लाइव में गया था तो एक बात आई वहां पर कि उन्होंने मैं उन्होंने कुछ बात कही तो मैंने कहा कि प्रमाण दिखाइए बिना प्रमाण के कुछ नहीं होता है। ऐसे
02:01:36:00 बोल देने से अगर सब कुछ सही हो जाता तो जो जेल में है एक बार बोल देते वो बाहर आ जाते तो इतने में वो क्रोधित हो गए कि उनके बारे में कुछ मत बोलिए ये सो कहने लगे मेरे से तो मैंने कहा कि जब आपके गुरु हमारे ये देख लो भैया विष्णु सहस्त्र नाम पुरुषोत्तम दिखाओ भैया बड़ी स्क्रीन कर दो जरा केशव पुरुषोत्तम देख लिया हमारे
02:02:14:16 पास इतने प्रमाण है ना इतने कि ये जो है सामना अगर हो तो रोने ही लग जाए कहो बस करो ऐसे कहने लगे मुक्त नाम परमागति ठीक है परमात्मा लो परमात्मा और जो परम गति है जिस परम गति की बात कर रहे हो परम गति में जाने की बात होती है भगवत गीता में वो परम गति मुक्त नाम परमागति
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रामपाल का झूठा मोक्ष
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