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00:00:02:14 जय श्री राम सभी को जय श्री राम मयंक जी जी हरे कृष्णा जी हरे कृष्णा तो जैसा कि आप लोगों को पता है आज हम स्कन विषयक चर्चा के लिए उपलब्ध है यहां पर और हमारे साथ में मयंक जी हैं मयंक जी थोड़ा सा अपना परिचय दे दीजिए कि आप आप अपने बारे में बता दीजिए इस कन में कहां से जुड़े हुए हैं यह बता दीजिए आपके गुरुदेव कौन है जिनसे आप इस कन की शिक्षाए प्राप्त करते हैं जी तो मेरा नाम ऑफिशियल ने आपकी आवाज बहुत स्लो आ रही मुझे लगता है ब्लूटूथ बंद कर

00:00:48:27 लीजिए अभी ब्लूटूथ अभी ठीक आ रही है हेलो ठीक नहीं आ रही थोड़ ब थोड़ी लो आ रही है आवाज कम आ रही है ब्लूटूथ बंद करके देखिए आप एक बार मैं थ जी जी अब अच्छे से हरे कृष्णा जी आप अपना परिचय दे दीजिए दर्शकों को और थोड़ा सा बता दीजिए आप कहां से जुड़े इस कन से

00:01:25:20 जी तो मेरा नाम वैसे तो अभिषेक है लेकिन मैं मैं अपना जो निकनेम है व यूज करता हूं ट म और मैं पिछ एक साल से अच्छा तो इटावा में जो स्कन मंदिर है वहां पर कौन शिक्षा देते हैं स्कन की जो आप जिनम आप गुरु भाव रखते हैं र य एक [संगीत] सेकंड प्र अगर य यूज नहीं कर रहा हूं तो मुझे आवाज नहीं आ रही मेरी आवाज स्लो आ रही है क्या आपको हा बिल्कुल बहुत ज्यादा कोई बताएगा आपको आप एक काम करिए पहले लीव करके एक बार दोबारा आ जाइए आप लीव हो

00:02:19:26 जाइए तो तब तक हम लोग कुछ बातें कर लेते हैं हम तो एक तो बात यह कि हम लोग जब यहां पर जो होने वाली चर्चाएं हैं या जो हम पॉडकास्ट करते हैं अन्य महानुभावों के साथ वहां पर उनके यहां पर जा जा कर के उसकी जब रील्स बनाकर डालते तो कुछ लोग ऐसा भी बोलते हैं कि आपने जो है काट पीट के आप डाल रहे हो पहली बात यह है कि हम लोग लोग भाव को चेंज नहीं होने देते हैं जो व्यक्ति जो संदेश देना चाह रहा है आप उससे पुनः पूछ लीजिए आप यहां पर अगर और कुछ कहना चाह रहे थे हमने आपके भाव को बदला है तो हम क्षमा मांगते हुए अपनी उस रील को डिलीट करेंगे कि हमने आपके भाव को बदल दिया दूसरी बात कि रील काट के निकालना तो सभी निकालते हैं जिससे कि उसके छोटे छोटे एक तरीके से प्रचार के रूप में ही उसको देख कर के और लोग यहां पर आकर के पूरा वीडियो देखें हां अगर हम रील काट दे और यहां से हम उस जो मुख्य वीडियो है उसको डिलीट

00:03:34:28 ही कर दें सच्चाई अगर आपके अनुसार वो झूठ है और यह सच्चाई तो हम व्यक्ति को सच्चाई तक पहुंचने का अवसर ही ना दे तब तो ये कहा जा सकता है कि हम रील कार्ड जो भाव यहां पर दिए जाते हैं उन्हीं का संक्षिप्तीकरण करके हम लोग रील बनाते हैं तो ये वाली जो बात है गलत है आप लोगों कहना जी हरे कृष्णा अभिषेक जी अभी आ रही है म आपको मेरी आवाज हां जी आ रही है आ रही है जी आप अपना परिचय देते हुए और इटावा में आप किसके सानिध में अध्यनरत है उनका थोड़ा सा तो मेंटर गोविंदी

00:04:17:01 प्र थो थोड़ा मुझे लग और लाउड हो थो बोलिए अभी बीच में आवाज बहुत अच्छी आ रही थी अभी थोड़ी कम आ रही है कोशिश करता थ ते तो गोविंद गिरिधारी प्रभु जी के सानिध में रह के मैं अभी आगे कर रहा और जो गुरुदेव है वो श गोपाल कृष्ण स्वामी महाराज को मानता हूं अभी दीक्षा नहीं हुई परर कर अच्छा तो आज जैसे की हम लोगों ने टॉपिक रखा है कि क्या कन जो गुरु परंपरा को क्लेम करता है कि हम इस गुरु परंपरा से तो क्या आप मानते हैं तलन की गुरु परंपरा है जो प्रामाणिक है प्रभु जी एक बात मैं पहले क्लियर कर दूं कि मैं इसकन को यहां पे रिप्रेजेंट नहीं कर रहा हूं पूरी तरीके से हां वो तो हमें पता लग गया आप फॉलोअर है आप वहां के वो रिप्रेजेंटेटिव नहीं है आप एक फॉलोअर मात्र है हां वो तो पता लग गया जी जी तो अभी मैं आपको पूछ रहा हूं क्या आपके अकॉर्डिंग आपकी जानकारी में जो स्कन की गुरु परंपरा है वो प्रामाणिक है जी बिल्कुल अच्छा

00:05:30:26 तो श्रीमद् भागवत के अनुसार यह कहा गया है कि जो ब्रह्म का ज्ञान दे वो हमारा परम गुरु होता है जी है ना ठीक है तो चैतन्य महाप्रभु को ब्रह्म का ज्ञान किसने दिया चैतन्य महाप्रभु आपके अनुसार मधुवा चार्य जी की परंपरा में आते हैं ना चैतन्य महाप्रभु को जो उनके गुरुदेव थे उनका नाम था ईश्वर पुरी ईश्वर पुरी जीने ब्रह्म का ज्ञान दिया ईश्वर

00:06:10:28 का अ गुरु भी इसकी व उनकी शिखा भी नहीं नहीं नहीं मैं पूछ रहा हूं कि ब्रह्म का ज्ञान उन्होंने किससे लिया ब्रह्म यानी ईश्वर श्वर जन परमेश्वर का ज्ञान किससे लिया ईश्वर पुरी हा उनसे ही लिया तो इस बारे में आप कोई रेफरेंस दे सकते हैं कि उन्होंने ईश्वर पुरी से भगवान श्री कृष्ण का ज्ञान लिया परमेश्वर का ज्ञान लिया देखिए मैंने बहुत ज्यादा शास्त्र नहीं पढ़े हैं तो मैंने आपको जो मैंने जो फॉर्म भरा था उसम एटली मैंने क्वेश्चन पूछे थे मुझे येय क्वेश्चन के आंसर चाहिए आपसे जो मुझे डाउट है मैंने बस इसके लिए मुझे नहीं मैं ठीक है मैं उस आऊंगा मगर मैं आप आज यहां कुछ क्वेश्चन दे कर के जा रहा हूं मतलब आपको कुछ चीज बता रहा हूं आप इनको जाके सर्च करिएगा है ना कोई बात नहीं आपके पास नहीं र्च आप अध्ययन करिएगा और इसको पूछिए वहा जाके मठ में तो मुझे आप जरा स्क्रीन प वो दिखा दीजिए जिसमें चैतन्य महाप्रभु यह कह रहे हैं कि मैं जानता हूं भगवान श्री कृष्ण को श्रीधर

00:07:26:00 स्वामी के द्वारा हा श्रीधर स्वामी से हां ऑफस मैं दिखा देता हूं एक बार यहां स्क्रीन पर ठीक स्क्रीन पर जरा शेयर कर दीजिए मैंने आपको शेयर किया हुआ है ये कैसे करना हैको थोड़ा बड़ा करके दिखा दीजिए जहां पर वो लिखा है चैतन्य चरता मृत का रेफरेंस और मैं जानता हूं भगवान श्री कृष्ण को श्रीधर स्वामी के द्वारा

00:07:57:25 हम जी प्रभु जी एक बार यह मुझे बताइए कि य जो चैतन्य चता मृत है यह मतलब किस मतलब यन का है या फिर ग परपरा कान कान का अब इसमें लिख कर के आ रहा है कि मैं श्रीधर की कृपा से भागवत को समझता हूं जो भागवत आपके अनुसार सबसे मेन शास्त्र है और मैं मानता हूं कि व ब्रह्मांड के आध्यात्मिक गुरु जगतगुरु है आप शीर स्वामी के आगे मतलब ये किसी और को कह रहे हैं कि आप श्रीधर स्वामी के आगे जो भी कुछ लिखते हैं वह मैं पहले से ही बता रहा हूं कि वह गलत होगा व यहां पर लिखा है उन्होंने इस भाव को कि वह गर्भ से वास्तविक अर्थ की विपरीत होगा तो प्रभ जी

00:09:02:08 जी आप कंटिन्यू कर कंटिन्यू करिए अच्छा इसमें श्री कृष्ण वाला भी आया है भागवत को समझ पाया हूं श्री कृष्ण को जान पाया हूं तो ये दोनों चीजें यहां पर दी गई है अब बात ये आती है कि श्रीमद् भागवत के अनुसार इसको हटा लीजिए प्रमाण को हटा लीजिए इसमें है आगे हां अब इसमें ये आया है कि श्रीमद् भागवत के अनुसार जो परम गुरु होता है मेन जो मेन गुरु होता है ऐसे तो गुरु हमें कोई रास्ता भी दिखा रहा है वो भी मार्गदर्शक है मगर मेन जो गुरु होता है जिसको हम गुरु की संज्ञा देते हैं वो वो होता है जो हमें ईश्वर के बारे में बता देता है भगवत प्राप्ति का मार्ग बता देता है भगवान के बारे में बता देता है ठीक है अब यहां पर यह कह रहे हैं कि मैं भगवान को समझ पाया हूं श्रीधर स्वामी के द्वारा तो इनका जो परम गुरु है वह श्रीधर स्वामी है अगर ये अन्य किसी से भी छोटी मोटी शिक्षाए लेते रहेंगे तो वो एक बात मगर श्रीधर स्वामी जो है वो इनके मेन गुरु है श्रीधर स्वामी श्रीधर स्वामी जो है अपने समय के शंकराचार्य है मैं पूरी कर लू बहुत सी बात शीर स्वामी अपनी समय के शंकराचार्य वो शंकराचार्य थे

00:10:17:08 तो अगर चैतन्य महाप्रभु उनसे जान रहे हैं भगवान को तो उनके नीचे चैतन्य महाप्रभु के बाद आने वाले जो फॉलोअर्स है जो चैतन्य महाप्रभु को जो फॉलो करते हैं वह अपने आप को मधवा चार्य जी का वो कैसे कह रहे हैं जबकि उनके जो गुरु है सीध स्वामी के व शंकराचार्य ठीक पास दीक्षा हु दीक्षा वाली बात तो मैंने की नहीं कि उन्होंने दीक्षा ली थी केशव भारती जी से सन्यास की दीक्षा उन्होंने केशव भारती जी से ली थी वो शंकराचार्य परंपरा के आचार्य थे वो ठीक है मैं वो बात नहीं कर यहां मैं बात कर रहा हूं श्रीमद् भागवत के अनुसार मैं वोह श्लोक भी बता देता हूं कहां लिखा है भागवत के अनुसार जो व्यक्ति का परम गुरु होता है वह होता है जो आपको ब्रह्म की प्राप्ति

00:11:23:22 कराए ठीक है ये देखिए भागवत दसवा स्कंध 8 अध्याय 32 वा श्लोक है मनुष्य के तीन गुरु होते हैं पहले जन्मदाता प्रथम गुरु होता है उपनयन संस्कार आदि सत कर्मों की शिक्षा देने वाला दूसरा गुरु होता है वो भी पूज्य है मगर ज्ञानो उपदेश करके परमात्मा को प्राप्त कराने का मार्ग प्रशस्त करने वाला गुरु परम गुरु होता है यह भागवत के अनुसार है तो उनके गुरु हो सकता है वो ईश्वर पुरी हो या कोई भी हो या जिनसे उन्होंने सन्यासी दीक्षा ले ली मगर वो को सम रहे परमात्मा को समझ रहे जान पा रहे भागवत को जान पा रहे श स्वामी केडिंग तो उनके अंतिम निर्णायक गुरु सिद्ध होते हैं श्रीधर स्वामी ठीक है ठीक श्रीधर स्वामी मचार परंपरा के नहीं थे श्रीधर स्वामी मचार परंपरा के नहीं थे श्रीधर स्वामी शंकराचार्य परंपरा के अधिकृत शंकराचार्य थे र इसम कुछ ऐसे कुतर्क भी किए जाते हैं कि स्वामी जो है छुपे हुए सुद्धा द्वैत को मानने वाले थे सुद्धा द्वैत को तो अगर वह सुद्धा द्वैत को भी मानने

00:12:38:26 वाले थे तब भी उस हिसाब से इस्कोन का यह क्लेम गलत है पहली बात तो ऐसा व बहुत सारी चीजें हो जाएंगी सीध स्वामी झूठे सिद्ध हो जाएंगे झूठ बोलने वाले सिद्ध हो जाएंगे फिर वह प्रामाणिक आचार नहीं रह जाएंगे फिर प्रामाणिक आचार्य को आचार मानने वाले चेतन महाप्रभु प्रामाणिक नहीं रह जाएंगे बहुत सी चीजें मगर अभी थोड़ी देर के लिए अगर ये मान ले सीध स्वामी जो है हुए सुद्धा दैत को मानने वाले थे हालांकि चेतन चरता मृत के अनुसार वो शुद्ध द्वैत जो वल्लभाचार्य जी ने प्रतिपादित किया है उन्हीं को मना कर रहे हैं कि नहीं श्रीधर स्वामी के विरोध में जाकर आप कुछ मत लिखो यही कहा उन्होंने तो वो उनके हिसाब से जैसे जो आपके केशव दास प्रभु जी इत्यादि इन्होंने वीडियो बनाए तो उसमें कहा है कि वो छुपे हुए जो है सुद्धा दत इत्यादि को

00:13:28:03 वैष्णवास्त्र मचार से नहीं आ रही है वो सीदर स्वामी से आ रही है और सीदर स्वामी अगर सुद्धा दैत के है तो आप लोग मधवा चार वाले नहीं वल्लभाचार्य वाले हो गए बट इस तरीके से तो चेंज होता है जैसे की अगर इसी तरीके से अगर कहने की बात है तो आईस वल्लभाचार्य के संप्रदाय में भी चेंज हुआ पहले विष्णु की पूजा होती थी फिर उसके बाद कृष्ण की उपासना देखिए महाभारत का एक श्लोक है जिसमें स्पष्ट लिखा है

00:13:53:25 किसी के कर देने से प्रमाण नहीं बनता है शास्त्रों के द्वारा स्वीकार किए जाने पर प्रमाण बनता

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00:13:59:20 है तो इस हिसाब से अगर देखा जाए किसी ने अगर कुछ कर दिया तो उसके लिए हम लोग थोड़ी ना यहां बात करने बैठे हैं शास्त्र में वो नियम दिया गया है क्या शास्त्र तो कहता है कि गुरु विरोध स्त्री गमन के समान है भगवान और गुरु में कुछ नहीं होना चाहिए अंतर स्वेता सत्र उपनिषद 6 इसके बाद तन सता का आप दे रहे हैं बारे में जानकारी नहीं है तो हम इसको छोड़ सकते हैं मैं एक बात और यहां पर कहना चाहूंगा मैं जी [संगीत] बोलिए तो चैतन्य चता मृत में मैं कह रहा हूं कि उसम एक और मतलब आता है सार्वभौम भट्टाचार्य के बारे में आता है स सार्वभौम भट्टाचार्य वो भी एक अद्वैतवाद थे आप ये मानते हैं नहीं मैंने मैंने नहीं पढ़ी आप बोलिए अपनी बात तो सार्वभौम भट्टाचार्य को महाप्रभु मतलब सार्वभौम भट्टाचार्य जब महाप्रभु जगन्नाथ पुरी में थे तो सार्वभौम भट्टाचार्य उनको शास्त्र अध्ययन कराया करते थे द्वैतवाद के तरीके से जिस पर चैतन्य महाप्रभु उनकी बातें सुनते थे लेकिन वो कभी कुछ पूछते नहीं थे तो एक बार सार्वभौम भट्टाचार्य उनसे पूछते हैं कि आप मतलब कुछ भी क्वेश्चन नहीं करते काउंटर क्वेश्चन नहीं करते यानी कि आपको सब समझ आ गया तो इस पर महाप्रभु उनको पूरा का पूरा ज्ञान

00:15:14:22 देते हैं कि किस तरीके से जो वो ज्ञान बता रहे हैं वो गलत है और जो चेतन्य महाप्रभु उनको षड भुजा रूप में यानी छह हाथों के रूप में जिनके छह हाथ है ऐसे महाप्रभु का दर्शन कराते हैं जिसके बाद सार्वभौम भट्टाचार्य खुद अद्वैतवाद को छोड़ के महाप्रभु के मतलब फलोर बन जा तो महाप्रभु ने श्रीधर स्वामी का ज्ञान दिया वहा उनको या किसी और का दिया उन्होने कृष्ण के उपासना का ज्ञान दिया बस नहीं नहीं श्रीधर स्वामी से वो भागवत को समझ पाए ये हमने आपको दिखा दिया तो हो सकता है कि जो हो सकता है जो आप कहानी बता रहे हैं वो कितनी प्रमाणिक मैं नहीं जानता मगर हो सकता है कि जो उनको पढ़ा रहे थे वो सही चीज जो श्रीधर स्वामी के द्वारा प्रतिपादित नहीं पढ़ा रहे थे उन्होंने वो पढ़ा दिया उन्हे बता दिया इसका तो ये अर्थ भी है भाई जब वो ये कह रहे हैं कि मैं बात ये है कि ये विषत हो गया मैं पूछ रहा हूं कि जब वो ये कह रहे हैं मेरे गुरु है श्रीधर स्वामी श्रीधर स्वामी को मैं जगत का गुरु मानता हूं और मैं भागवत को उनसे समझ पाया हूं श्री कृष्ण को उनसे जान पाया हूं तो फिर या तो ये दोनों बातें कंटक्ट हो गई फिर फिर इसका निदान होना चाहिए दो अलग अलग बातें हो रही है इसम मैं ये भी

00:16:29:25 तो इसम ये भी तो कहा जा सकता है ना जैसे अगर मैं कहूं आप जैसे बोल रहे हो कि जो सार्वभौम भट्टाचार्य है उनकी स्टोरी कुछ अलग हो सकती है तो मैं आपके इस पर ये तर्क दे सकता हूं ना कि ऐसे तो श्रीला प्रभुपाद जो थे वो भी पहले एक मतलब अद्वैतवाद गीता रखते थे उससे पढ़ाया करते थे लोग को लेकिन वो ज्ञान जो देते थे वो ऑफकोर्स कृष्ण की उपासना का और मतलब मतलब आपका कहने का मतलब है श्रीधर स्वामी को वो गुरु मानते थे मगर उन्होंने ज्ञान उनके विरुद्ध दिया है नहीं गुरु के विरोध दिया जो भी लिखा है उसका विरोध तो कोई कर नहीं सकता ना नहीं नहीं चैतन्य महाप्रभु श्रीधर स्वामी को गुरु मानते थे अब जो वो ज्ञान दे रहे हैं वो श्रीधर स्वामी का आगे दे रहे हैं या नहीं दे रहे हैं नहीं वही तो मैं कह रहा हूं ना कि वो उसम क्या है ना कि अद्वैतवाद ऐसा तो है नहीं कि अद्वैतवाद गलत है और द्वैतवाद ही सही है या अचिंत भेद अभेद भी सही है डल रियलिटी भी कुछ होती है मैं मैं अभ देखिए ये बदल रहा है मैं बोल रहा हूं जो श्रीधर स्वामी ने ज्ञान दिया क्या चैतन्य महाप्रभु ने आगे वही ज्ञान दिया आपके अनुसार या नहीं दिया आगे अगर ऐसी बात है तो फिर तो नहीं दिया क्यक चैतन्य तामृत में ही आगे आता है क्योंकि मतलब उन्होने गुरु इसका मतलब उन्होंने गुरु विरोध किया जबक

00:17:44:26 भगवान को वह समझ पाए हैं भागवत को समझ पाए हैं श्रीधर स्वामी के द्वारा मगर उन्होंने जो समझा था जो समझ पाए हैं वो ना देक के झूठा ज्ञान दिया वहां पर विरोध कैसे हो गया बातो में फसा रहे हो विरोध क्यों नहीं जब वो अपने गुरु से लिया हुआ जिसके कारण वह श्री कृष्ण को समझ पा रहे हैं वह ज्ञान आगे नहीं दे रहे हैं उस ज्ञान को काट रहे हैं आपके अनुसार जो आपके अनुसार जो आचार्य थे उनसे उने वो बस उसम अपना ज्ञान ड कर र है वो ऐड कर रहे हैं यानी कि अद्वैत भी पूरी तरीके से गलत नहीं है पूरी तरीके से गलत नहीं है शास्त्र में आता है ना क्या नाम है सॉरी मतलब भगवान निराकार भी है और साकार भी है दोनों ही रूपों में प्रेजेंट है और हमारे अंदर जो है ईश्वर का एक अंश ही है तो हम भी ईश्वर के एक अंश है मतलब स्न का श्रीधर स्वामी या शंकराचार्य परंपरा से कोई शैक्षिक विरोध नहीं है इसकन का एस सच हा मायावादी संप्रदाय में यानी कि कुछ ऐसा है जिसका खंडन किया जाता है जी हां यानी कुछ

00:19:00:01 ऐसा है जिसका श्रीधर स्वामी का खंडन किया जाता है गुरु का खंडन किया जाता है पॉइंट ये है ये चीज समझने की जरूरत है कि यहां प मायावा का खंडन किया जाता है लोग जाएंगे आगे जाएंगे अभी हमको ये क्लियर करना है गुरु का विरोध हुआ कि नहीं हुआ मैं उस पर कुछ नहीं कह सकता अभी क्योंकि मैंने मुझे उस बारे में नॉलेज ज्यादा है अच्छा अब मैं एक दूसरी चीज आपको बताता हूं मुझे वो स्क्रीन दिखा दीजिए जरा जिसमें की श्रीधर स्वामी के विरुद्ध लिखने वाले को वैश्या की उपमा दी गई है श्री चैतन्य महाप्रभु के

00:19:45:13 द्वारा मैं कैसे दिखा सकता हूं आपसे नहीं बोल रहा आपसे नहीं बोल रहा नहीं नहीं ये नहीं नहीं यह वाला नहीं जो अभी आपने खोला था ना पहले उसी को दोबारा बोल दीजिए जो अभी इससे पहले खोला था ना श्री चैतन्य महाप्रभु का हा वही दोबारा खोल दीजिए हा इसमें थोड़ा बड़ा करिए तो एक जगह उन्होंने कहा है कि मेरे अनुसार वो वैश्या के देखिए पहली बात तो व यह कह रहे हैं कि जो भी श्रीधर स्वामी की अवेल करता है वो मेरे लिए उसे वैश्या में गिना जाना चाहिए और जो भी श्रीधर स्वामी के अगेंस्ट जाकर के लिख रहा है वो जो है गलत होगा यह दो चीज मतलब कुल मिलाकर के अगर इन दोनों को हम यहां पर देखे तो वो सीधे सधे कह रहे चैतन्य महाप्रभु कि जो भी श्रीधर स्वामी के अगेंस्ट जाकर के लिखता है वो वैश्या के समान होगा ठीक है यहां पर क्लियर

00:21:02:28 है वा हमा आचार्य भी मतलब नहीं नहीं अभी मैं वही दिखा रहा आपको कितना एक्सेप्ट किया है उन्होंने कहा जो भी स्वामी के एक मिनट उन्होंने कहा जो भी सीधा स्वामी के अगेंस्ट लिखा है वह गलत होगा और उसे वव में गिना जाना चाहिए अब आप जरा वेदा बेस का वो खोल लीजिए स्क्रीन मैंने आपको जो शेयर की थी नहीं बोल रहा जो हमारे ऑपरेटर है उनको बोल रहा ठीक है ठीक हम श्रीमद् भागवत इसको बड़ा करिए अनुवाद को

00:22:01:13 इसमें लिखा हुआ है और बड़ा नहीं हो पाएगा इसमें देखिए शिव जी की स्तुति जो हो रही है उसमें यह लिखा हुआ है कि हे प्रभु आप संपूर्ण ब्रह्मांड के बंधन और मोक्ष के कारण है क्योंकि आप इसके शासक हैं जो लोग आध्यात्मिक चेतना में उन्नत है आपकी शरण में आते हैं इसलिए आप उनके कष्टों को कम करने के कारण आप उनकी मुक्ति का कारण भी है यह यहां पर कहा जा रहा है 22 में इसके आगे का देखिए जहां पर शिव जी के लिए कहा जा रहा है माया के बारे में अगला अगला अगला श्लोक 23 देखिए 23 में क्या है यहां पर इन्होंने लिख दिया कि वास्तव में य जो स्तुति हो रही है यह रही है विष्णु भगवान की अब 23 नंबर का खोलिए जरा उसी वेबसाइट में आगे होगा 23 नंबर

00:23:12:03 का अगला अगर आप टच कर देंगे तो आ जाएगा वो हां 23 इसमें जाइए जरा हां इसको बड़ा करिए हां ये देखिए अब इसमें अनुवाद में लिखा हुआ है हे प्रभु आप स्वयं प्रकाशमान और सर्वोच्च है आप अपनी व्यक्तिगत शक्ति से यहां देखिए कैसे व्यक्तिगत शक्ति ऊपर जरा संस्कृत दिखा दीजिए क्या लिखा है संस्कृत

00:23:46:09 में गुण मया यहां माया की बात हो रही है नीचे अनुवाद दिखा दीजिए आप अपनी व्यक्तिगत शक्ति से इस भौतिक जगत का निर्माण करते हैं यहां इन्होने य लिखा पीछे इन्होने यह नहीं माना कि यह जो है भगवान शिव की स्तुति है ठीक है अब आगे आगे चलिए इसमें क्या है आप सभी कारणों के कारण है स्वयं प्रकाशमान अचिंत निराकार ब्रह्म है जो मूलता परब्रह्म है आप इस और आगे एक और आगे कर दीजिए

00:24:34:20 इसमें क्या है भौतिक सृष्टि करते हैं धार्मिक प्रणालियां है एक और आगे करिए जिसमें लिखा है ना कि आप ही ब्रह्मा विष्णु महेश का रूप धारण करते हैं वो कहां गया ये हा ये 23 23 वाला ही है 23 प आ जाइए 23 प पीछे

00:25:15:20 जाइए और पीछे आ जाइए हां यह 23 है इसका अनुवाद देखिए आप स्वयं प्रकाशमान और सर्वोच्च है और आप अपनी व्यक्तिगत शक्ति से जगत का निर्माण करते हैं जब आप सजन पालन और संहार करते हैं तो आप ब्रह्मा विष्णु और महेश्वर का नाम धारण करते हैं ठीक है अब पहली बात यह है कि यह जो स्तुति हो रही है यह यहां पर पीछे हमने बा बताया कि यह स्तुति यहां पर दिखाई जा रही है कि यह भगवान विष्णु की स्तुति हो रही है जबकि श्रीधर स्वामी का ये टीका हमारे पास जी जी बोलिए बोलिए पहली बात य कि मैं डिबेट करने के लिए नहीं आया था तो आप यह सब दिखा के टाइम वेस्ट मत करिए अच्छा अ बात हो रही तो इसको पूरी

00:26:13:16 करले जी वैसे हमारा जो फॉर्म है जो आपने भरा है व है आईडियोलॉजिकल डिस्कशन ऑन डिस्कशन ऑन आडलज डिसएग्रीमेंट मब आपको मे ट भी लेने चाहिए ना कि जिन टॉपिक्स प मुझे चर्चा करनी है ठीक है अब ले लेते हैं अब जब ये हो गया है शुरू कर किया था आप तभी टोक देते तो ना भी लेते बगर ये हो गया तो ले लेते हैं तो मैं ये कह रहा था कि यहां पर पीछे स्कन ने ये माना है वेदा बेस में स्कन के भाष्य में ये माना गया है कि ये विष्णु की स्तुति हो रही है और जो आपको 23 नंबर का श्लोक दिखाया उसमें स्कन ने ये माना है कि वहां पर भगवान अपनी व्यक्तिगत शक्ति के द्वारा जगत का निर्माण करते हैं और निर्माण करते समय जगत का निर्माण करते समय ब्रह्मा विष्णु ब्रह्मा विष्णु महेश का नाम धारण करते हैं कौन विष्णु भगवान ठीक है अब ये मेरे पास श्रीधरी टीका आ चुका है श्रीधर स्वामी जिनका टीका चैतन्य महाप्रभु ने पढ़ के भागवत को समझा अब इसमें आप वो वाला श्लोक लगा दीजिए 22 नंबर का जिसमें शिव

00:27:28:24 की स्तुति माना जा रहा है भगवान शिव की स्तुति दिखाई गई है आ

00:28:10:20 गया हां इसमें वह 21 नंबर 21 नंबर का लगाइए जरा बड़ा करिए 21 इसका प इसका अगले पेज पर वो दिया है अनुवाद अगले पेज प अनुवाद दिया है अरे हमारे साथ वाले कहां चले गए कहां के चले गए भाई आ गए आ गए आ कट गया था कि प्रकार

00:28:54:01 से हां जी यह जो अगले पेज पर इसका भाव प्रकाशिका दिया गया है वह देखिए जरा 21 नंबर का हां इसको बड़ा करिए इसमें देखिए यहां पर इसकी जो स्तुति बताई गई है श्रीधर स्वामी के द्वारा और बड़ा कर सकते हैं क्या

00:29:28:26 इसमें लिखा हुआ है कि

✅ This part is already used · 00:29:30:13 – 00:29:38:02 (0:08)

→ Used in: A · Live श्रीधर स्वामी चैतन्य महाप्रभु #iskcon #iskcondevotees at 1:24:45 ↗

00:29:30:13 दोनों प्रकार के शिव की स्तुति करने वाले प्रजापति हों ने उन दोनों में नाम मात्र का ही अंतर माना नाम का अंतर माना

⬜ Not used yet · 00:29:38:02 – 01:18:29:14 (48:51)

00:29:38:02 और स्तुति किसकी हो रही है शिव जी की इसकन के द्वारा किसका कहा गया है विष्णु जी की तो जहां पर भागवत में शिवजी की परब्रह्म को स्वीकारा गया और विष्णु भगवान और शिव जी की एकता को स्वीकारा गया वहां पर शब्दों को बदल दिया श्रीधर ध टीका के विरोध में और इसके आगे मैं आपको बता दूं यहां पर श्रीधर स्वामी ने जो 23 नंबर का अर्थ निकाला है 23 2 वाला नीचे करिए थोड़ा ज्यादा नीचे नहीं हा बड़ा

00:30:14:06 करिए भगवान अपनी गुणमककुम व्यक्तिगत शक्ति के द्वारा यह श्रीधर स्वामी है जिनको चैतन्य महाप्रभु पढ़ रहे हैं और वह वोह है जो अब स्कोन के द्वारा पढ़ाई जा रही है तो अब बात य आती है अगर अगर चैतन्य महाप्रभु ने यह कहा

00:30:48:06 है है कि जो भी श्रीधर स्वामी के अगेंस्ट में लिखेगा जाएगा वो गलत होगा वो मेरे लिए के समान होगा तो मुझे नहीं पता है कि यह किसने लिखा है मैं ज्यादा इसकी तह में नहीं गया तो आप मुझे बताइए तन महाप्रभु की बात माने कि वो जो लिखने वाला है वैश्या है या क्या माने जी आप उस जो क रहे है उसम बहुत ज्यादा भेद नहीं है आप शब्दों को घुमा रहे इसके लिए उसम भेद आ रहा है एक्चुअली तो वहा लिखा हुआ है कि जब विष्णु ही महेश्वर का रूप धारण करते गुणा अवतार है महेश्वर शिवजी है व अर है विष्णु के तो आप वहाई साब य शिव जी की स्तुति माना गया है शिव जी की स्तुति वहां पर विष्णु की स्तुति जब विष्णु की जब विष्णु की स्तुति हो रही है तो शिव की भी स्तुति वैसे ही होगी ना अगर वो अवतार ही उनका है तो जब भेद ही नहीं है तो आप यह भी तो मानिए इसका मतलब हरि हर में भेद नहीं है नहीं भेद है लेकिन आप कह रहे हो ना कि जब भेद नहीं है तो

00:31:58:09 जब हरि और हर में भेद है तो यहां पर इन्होंने हर की स्तुति माना है तो फिर उसको आप विष्णु की स्तुति क्यों कर रहे हो भेद नहीं है यानी कि यानी कि जब भगवान शिव की परब्रह्म की बात होगी तो दोनों एक है इसलिए ऐसा कहा गया विष्णु की स्तुति व कह दिया गया और जब हमें बताना हो कि अलग अलग है तो दोनों अलग अलग है यहां पर तो विष्णु की स्तुति हो रही है ज सुनि दोनों एक मिनट दोनों एक है एक है तो जब यह कहा जाता है कि विष्णु के अलावा किसी की भी भक्ति भ्रम फैलाने के लिए है तो वहां यह क्यों नहीं सोचा जाता है कि विष्णु का मतलब शिव भी

00:32:42:25 है आपकी आवाज चली मैं कह रहा हूं जब यह कहा जाता है कि जो विष्णु के विष्णु से भिन्न किसी की भी भक्ति जो बताई गई ब्रम फैलाने के लिए है वहां यह अभेद क्यों नहीं स्वीकार किया जाता जहा विष्णु की बात हो रही है वहां शिव की भी बात हो रही है जैसे कि यहां पर शिव की बात को आपने विष्णु की बात मान लिया और दूसरी बात य बो जब गु जब गुरु कह रहे हैं जब गुरु लिख रहे हैं कि शिव जी की स्तुति तो य शिव जी की स्तुति लिखने में दिक्कत क्या हो रही है देखिए पहली बात यह मैं कहूंगा कि आप जो कह रहे हो कि शिव जी जो है वो उनकी यहां पे ये कहा जा रहा है कि शिव जी की भक्ति या फिर किसी और देवी देवता की भक्ति भ्रम फैलाने के लिए तो पहली बात तो ऐसा है नहीं यहां पर ये कहा गया है भगवत गीता में भगवान क्या कह रहे हैं भगवत गीता में भगवान कह रहे ही भगवत गीता की बात अभी नहीं हो रही मैं पूछ रहा हूं श्रीधर स्वामी ने य लिखा है या तो आप इस टॉपिक को बंद कर सकते हैं अगर चलाएंगे तो फिर बहुत अच्छे से लंबा चलेगा और लंबा इसलिए चलेगा क्योंकि भगवत गीता की बात अभी हम नहीं कर रहे श्रीधर स्वामी जी ने ये लिखा कि यहां शिव जी की स्तुति है और आप हरि और हर में भेद मानते हैं तो फिर यहां पर

00:33:57:26 आपने विष्णु की स्तुति क्यों करा और अगर कर सकते हो तो पदम पुराण में जब ये कहा जाता है कि विष्णु से भिन्न किसी की भी स्तुति जो है वो भ्रम फैलाने के लिए तो वहां क्यों नहीं करते कि शिव की भी बात हो रही है वहां पर ठीक है इसको मैं उसी को समझाने के लिए भगवत गीता का श्लोक बता रहा था लेकिन अब आप मान नहीं रहे हो तो फिर अभी कुछ नहीं देखिए भगवत गीता का जो आपका ट्रांसलेशन है वो बहुत ज्यादा कॉम्प्रोमाइजिंग है उसका हिंदी के शब्दों में उसम भाव केवल नहीं चेंज किया गया उसके शब्द भी बदले गए हैं शब्द मतलब जब आप ट्रांसलेशन कर रहे हो संस्कृत से हिंदी में तब भी आप कृष्ण भावना भावित कर दे रहे हो ब्रह्म का अर्थ कृष्ण भावना भावित हो गया तो इसलिए आप जब भगवत गीता का प्रमाण देंगे तो वो एक दूसरा चैप्टर खुल जाएगा अभी मैं सिंपल बात कर रहा हूं जब श्रीधर स्वामी ने यहां पर शिव की स्तुति लिखी तो इसकन ने क्यों नहीं लिखी अगर नहीं लिखी तो फिर वो लिखने वाले को क्या माना दूसरी बात दूसरी बात दूसरी बात श्रीधर स्वामी की जो शिक्षा है वो आप कैसे प्राप्त कर रहे हैं सीदर स्वामी की जो प्रामाणिक अध्ययन है वह आप कैसे चैलेंज कर रहे हैं कि वहां पर उन्होंने यह नहीं

00:35:12:27 लिखा है जब वह स्पष्ट लिख रहे हैं कि शिव की स्तुति यहां हो रही है ठीक है तो यह टॉपिक आपका हो गया मैं कुछ बोलू तो आपको इस टॉपिक पर आगे नहीं बढ़ना है हम लोग आपका टॉपिक ले ले आपका क्वेश्चन ले ले अब कुछ हेलो मैं बोल रहा हूं हम लोग आपका क्वेश्चन लेले मेरी आवाज आ रही है जी पहले मैं य हां अभी आ रही है आ रही है हेलो तो मैं पूछ रहा हूं आपको इस टॉपिक प आगे नहीं बढ़ना है मैं आपका क्वेश्चन ले लू अब जी तो पहले मैं एक चीज क्लियर कर जो गीता है भगवत गीता आप क रहे बत कंप्रोमाइज है तो एक्चुअली वो भक्ति योग के लिए है वो उन लोगों के लिए भक्तियोग फलो कर वो इसलिए इधर उधर नहीं उसम सनातन सत्य नहीं है सनातन का समते क सना नहीं है आप क्या जितना चैप्टर खोलेंगे मैं वहा काउंटर करता जाऊंगा या तो खोलिए मत अब मैं पूछ रहा हूं सनातन सत्य है गीता में या नहीं

00:36:29:06 हां बिल्कुल है अच्छा आपने अभी एक परिस्थिति बताई कि वो उन लोगों के लिए जो भक्ति में होते हैं जी तो फिर सनातन सत्य कहां रह गया जो किसी भी देश काल परिस्थिति से प्रभावित ना हो उसका नाम सनातन है ठीक है तो आप ये मानते क नित्य स्थाई ना वो वो अकार सत्य होता है ना वो भक्ति के रेफरेंस से होता है ना वो ज्ञान के रेफरेंस से होता है वो सत्य होता है तो मानते सतयुग और कलयुग दोनों ही सेम है अलग-अलग है मगर जो अलग-अलग है उसकी व्यवस्था पहले ही कर दी गई है जी अलग अलग पह कर दी गई है ना कलयुग में क्या रिकमेंड किया गया कलयुग में क्या रिकमेंड किया गया है सब कुछ रिकमेंड किया गया है आप य बताइए अच्छा इसको इसको थोड़ा वो कर लेते खोल लेते हैं इस बात को क्या भक्ति के कारण उसमें ट्रांसलेशन को बदला गया है कुछ जगहो प कहीं पर ये नियम कहीं पर ये सिद्धांत है कि भक्ति करा भक्ति के लिए आप जो है संस्कृत का जो अर्थ हो जो हिंदी में लिखा जाता हो उसको बदल दीजिए संस्कृत अर्थ चेंज नहीं किया गया है लेे मैं दिखाऊ

00:37:44:09 आपको अगर आप किसी और की अगर आप किसी और की टीका लेंगे आप पहले अगर आप किसी और की टीका लेंगे तो उसम जो शब्द मैं आपसे ही मैं आपसे ही यहां पर मनवा लूंगा कि अर्थ चेंज किया है मैं आपसे ही मनवा लूंगा अभी मैं उस टॉपिक प ट करने आया नहीं क्लेरिफिकेशन दे रहा था देखिए तरीका ये होता है तरीका ये होता है जैसे भक्ति के उसम लिखना है भाव में ठीक है तो कमेंट्री में लिखना चाहिए ना जब हम अनुवाद कर रहे तो अनुवाद ना उसमें अनुवाद में भी चेंज है ना दिक्कत ये है प्रॉब्लम ये है ठी उसमें ट्रांसलेशन भी चेंज है श्लोक सेम है श्लोक सेम है श्लोक का ट्रांसलेशन बदल चर अगर व की जगह भावना का शब्द किया गया है तो उसम मुझे नहीं लगता कि कोई दिक्कत है आप देखिए बात ये हो रही है कि ट्रांसलेशन क्या कोई यह कहता है कोई सनातन सिद्धांत के भक्ति योग में लाने के लिए आप अनुवाद को बदल दो जबकि भगवत गीता की भूमिका में जो प्रभुपाद जी है वह यह लिख रहे हैं कि एक गुरु का काम होता है भगवान की बात को यहां से उठाए और बिल्कुल उसमें कोई भावना मिलाए हुए और आगे के पास कर दे क्योंकि जब

00:38:59:12 भी कोई भक्ति की भावना के नाम पर एक मिनट मुझे पूरा कर ले दीजिए जब भी कोई भक्ति की भावना के नाम पर या अन्य किसी कारण को बताते हुए उसमें बदलाव करेगा तो सबको मौका मिल जाएगा बदलाव करने का रामपाल भी खड़े हो जाएंगे और वो कहेंगे हमने अपनी भावना भर दी कलयुग के अनुसार हमने अपनी भक्ति भर दी तो ट्रांसलेशन को बदलने का अधिकार प्रभुपाद जी ने कहा नहीं माना उन्होंने अब मैं आपको खोल के दिखाऊ ट्रांसलेशन कितना उसम नहीं अभी उसकी जरूरत नहीं है आप मेरे क्वेश्चन ले लीजिए यहां तक कि यहां तक कि प्रभुपाद जी ने जो लिख दिया उ उनके लिखे हुए को भी बदला जा रहा है उसको भी चेंज कर दिया कितना चेंज है फिर उसका नाम एज इट इज है तो पहली बात तो यह भगवत गीता जो प्रभुपाद ने लिखी वो आ रही है परंपरा से तो बलदेव विद्याभूषण ने जो गीता लिख नहीं होई आपने वो मैटर छोड़ दिया है बलाल आपको याद दिला दूं आपने वो मैटर क्लोज करवा दिया परंपरा आपकी सिद्ध नहीं हो रही जब चैतन्य महाप्रभु को भागवत पढ़ने के लिए जाना पड़ रहा है शंकराचार्य परंपरा वालो के एक मिनट जब जब चैतन्य महाप्रभु को भागवत पढ़ने के लिए जाना पड़ रहा है श्रीधर स्वामी के पास

00:40:14:21 तो मधवा चार्य जी मधुवा चार्य जी उनके परमाचार्य कैसे हो गए उनकी परंपरा मधवा चार्य के पास कैसे चली गई जब आपका परंपरा प्राप्त ज्ञान है तो श्रीधर स्वामी के पास क्यों जा रहे हो मधवा चार्य के पास जाओ उनसे वाले आचार्य के पास जो भागवत समझने पहली बात यह चैतन्य महाप्रभु स्वयं परमेश्वर है तो उनको जरूरत नहीं है कि वो किसी और से ज्ञान ले लीला करने के लिए किसी यानी कि उन्होंने जो यह कहा है चैतन्य महाप्रभु ने व झूठ कहा है कि मैं उन्हें जगतगुरु मानता हूं किसको उन्होंने झूठ बोला है ना लीला की है ना लीला में झूठ बोला उन्होंने वास्तविकता में जगतगुरु नहीं मानते उन्हे कृष्ण ने भी तो किया हैय लीला में लीला पु भगवान कृष्ण तो लीला पुरुषोत्तम है ठीक है जी हा वो भी लीला पुरुषोत्तम थे कर देते कृष्ण ही कृष्ण ही है जो कष्ण ही जब राम बनते है तो धर्म कहलाते हैं कृष्ण ही जब राम बनते हैं तो धर्म कहलाते हैं सत्य प्रतिज्ञ कहलाते हैं रामो दना भाष कहलाते हैं तो ज कृ महा के रूप में कुछ कर रहे हैं अगर वो अपना अगर अपनी परंपरा जन वो वाक्य झूटा है क्या ये बताइए

00:41:29:24 मुझे गलत है क्या बकुल नहीं बिल्कुल भी तो क्या है वो क्या है वो देखिए या तो आप उस टॉपिक को छोड़ दीजिए अगर आपको जानकारी नहीं है मैं फिर आपको याद दिला रहा हूं या फिर अगर जाएंगे तो उसम हमें खोलना पड़ेगा एक एक तार निकालेंगे उसका वही कह रहा हूं मैं उस टॉपिक को छोड़िए मेरे क्वेश्चन लीजिए वो कह रहा तो फिर आप ये क्लेम मत करिए अपनी बात को सिद्ध करने के लिए परंपरा से आ रही है क्योंकि वो टॉपिक आपका छूटा हुआ है ठीक है फिर आप भी उसको आगे मत निकालिए ना आप भी निकाल रहे हो मैं क निकाल रहा हू मैं तो आपसे कहने लगा क्वे कर आप जब मैंने आपको आपका क्वेश्चन करने को कहा तो आपने उसको डिफेंड किया जो अभी भगवत गीता इत्यादि की बात हुई आपने उसको डिफेंड करने के लिए परंपरा लाई कि वो परंपरा से आ रही है जब मैं परंपरा जा रहा आपकी जो भागवत है आपके अकॉर्डिंग व परंपरा से नहीं आई है जिस परंपरा को आप प्रामाणिक बताते हो उसी से नहीं आई है आपकी भागवत शंकराचार्य से आ रही है तो आप कैसे कह नहीं है लॉजिक अच्छा है खैर आप आगे बढ़ अभी हां नहीं नहीं आपने क्या बोला अभी उसको जरा रिसाइट करिए क्या बोला नहीं कुछ नहीं अभी रहने दीजिए अब नहीं तो वो और आगे जाएगा फिर वो बात आगे लंबी चली जाएगी चलिए आप बोलिए आपका क्या प्रश्न है तो देखिए

00:42:45:06 सबसे पहले तो मेरा पहला क्वेश्चन यह है कि अवतारवाद के बारे में आपकी धारणा क्या है किस परिपेक्ष से पूछ रहे हैं होता है अवतार कि नहीं होता है हां नहीं अवतार होता है और अगर होता है तो क्या होता है यह धारणा यह मतलब हमारी कही हुई किसी बात को आप सीधे काउंटर करिए य आप जो इस तरह का होता है ना वहां क्या लिखा है इसके बारे में आप क्या जानते हैं यह नहीं हमने कुछ बात य पर कही है आप उसको क्लेम करिए ये गलत है जी वही तो मैं वही कोशिश कर रहा हूं पहले आप एक बार अपना उस मत रखिए कि आप क्या कहना चा उस उस टॉपिक आप क्या विचार भवान भगवान जो है भगवान जो है व्यवहार में ना आ सकने वाला रूप है जो भगवान का भगवान सा भक्तो के उद्धार के लिए भाई मेरी आवाज आ रही है या नहीं आ रही है सभी

00:43:44:28 को आप एक बार रिपीट करेंगे आ रही है अभी आ रही है आपको आवाज आपका नेटवर्क थोड़ा आपने क्या लास्ट लाइन य बोली थी क्या वह अद्वैत वादी नहीं है ऐसा कुछ बोला था क्या आपने हेलो आपकी आवाज नहीं आ रही भाई साहब अभिषेक

00:44:19:03 जी हां मेरी आवाज क्लियर आ रही है ठीक है ठीक है तो स्कोन को लेकर के मैंने एक अपनी एक उसमें संक्षिप्त दिया है आप लोग इसको बना सकते हैं रील के रूप में इसकन यह कहता है कि हम प्रभुपाद जी के फॉलोअर है मगर उनकी लिखी हुई गीता में बदलाव हो रहा है इसलिए व प्रभुपाद जी के फॉलोअर सिद्ध नहीं होते इसकन यह क्लेम करता है कि वह चैतन्य महाप्रभु का फॉलोअर है मगर क्योंकि चैतन्य महाप्रभु ने श्रीधरी टीका पढ़ा और वह जो आज टीका पढ़ रहे हैं वो श्रीधरी टीका के बहुत सारे अगेंस्ट है तो वो चेतन महाप्रभु के फॉलोअर सिद्ध नहीं होते फिर स्कोन का एक क्लेम है कि मधवा चार्य जी के के परंपरा में आते हैं मगर क्योंकि वो खुद कह रहा है कि हम भागवत पढ़ने जाते हैं श्रीधर स्वामी के पास जो कि उनके अनुसार शुद्ध द्वैत वाले थे अद्वैत नहीं थे मगर फिर भी वो मधवा चार्य जी की परंपरा वाले सिद्ध नहीं होते फिर स्कोन ये कहता है कि हम जो है भगवान कृष्ण के भक्त है ये क्लेम करता है मगर भगवान कृष्ण को अल्लाह से जोड़ कर के बाधित ईश्वर से जोड़ कर के वो कृष्ण के भक्त सिद्ध नहीं होते और सब कुछ कर सकने वाला ईश्वर ना मानते हुए वो ईश्वर को मानने वाले सिद्ध नहीं होते तो ऐसे बहुत सारी एक पंक्ति में अगर कहेंगे तो बहुत सारी चीजें आ जाएंगी वह अपनी भगवत गीता को एस इट इज कहता है मगर जब वो ट्रांसलेशन

00:45:34:03 में आता है तो भक्ति भाव के नाम पर वो कुछ भी लिख देता है क्योंकि व भक्ति भाव से आ रही है पहले कहता है प्रामाणिक है परंपरा से आ रही है मगर यहां पर हमने भक्ति भाव से लिख दिया तो भाई वो वो नहीं है ना जो परंपरा से आया भक्ति भाव से लिख दिया तो ट्रांसलेशन को भी बदल देता है इसलिए उसकी जो भगवत गीता है व ए इट सिद्ध नहीं होती तो सिद्ध क्या होता है प्रश्न य र जाता मेरी बात सुनिए हरे कृष्णा स अभी नेट लास्ट लास्ट एक लास्ट वर्ड और है वो क्या है कि वो कहता है कि हम वैष्णव है मगर 2.2 में ये भी लिख देता है कि भगवान नारायण भी कृष्ण के सामने कुछ नहीं है तो जब वो विष्णु को मानने वाले नहीं हुए सर्वोच्च मानने वाले नहीं हुए तो वह वैष्णव भी सिद्ध नहीं होता है यह चीज है अब आप ना क्वेश्चन करिए आप चले गए थे तो मैंने कहा कि यहां पर बोल लू तो पहला था कि अवतारवाद की घना पहले आप उस पर आइए

00:46:27:22 मैंने कहा ना आप हमारी किसी कही हुई बात को काउंटर कर दीजिए तो थोड़ा छोटा हो जाएगा ना अवतारवाद को मैं बताने लगूंगा हमारी धारणा क्या बहुत लंबा है मानते हो अवतार होता है कि नहीं होता बिल्कुल होता है बिल्कुल होता है मानते हैं और अवतार अगर है तो व किस तरीके से है ला परम ब्रम स्वयं आते हैं अवतार लेके अवतार जो है वो है कि यह संसार जो दिख रहा है वस्तुतः तो ये भी भगवान ही दिख रहे हैं संसार के रूप में मगर ये जो भगवान दिख रहे हैं यह सावरण ब्रह्म है इस ब्रह्म के ब्रह्म जो हमें ये दिख रहा है कुर्सी टीवी फ्रीज कूलर इत्यादि के रूप में ये कपड़े पहने हुए हैं सावरण ब्रह्म है कपड़े कौन से हैं माया के कपड़े माया से ढका हुआ ब्रह्म है ये जो टीवी फ्रीज कुर्सी ये सब हमें दिख रहा है यह माया से ढका हुआ ब्रह्म है मगर माया रूप चादर में ही एक चीरा लगता है उस आकृति का चीरा जिन आकृतियों को हम भगवान राम कृष्ण आदि के रूप में जानते हैं उस चीरे से दिखाई देने वाला जो ईश्वर होता है वह निरा वण ब्रह्म हो जाता है निरा वण

00:47:43:00 ब्रह्म उसी को भगवान का अवतार कहते हैं जी तो इससे क्वेश्चन निकला कि अगर आप कह रहे हो कि ब्रह्म को माया ने ढका है तो क्या ब्रह्म इतना शक्तिशाली नहीं है कि ब्रह्म को माया ने ढक लिया पहली बात य है कि ब्रह्म की सहमति से हो रहा है उसकी उससे तो ब्रह्म की शक्ति का कोई ही नहीं है अगर कोई अगर कोई चाहता है जानबूझकर ऐसा करना दूसरी बात अगर मान भी लेते कि ऐसा हो रहा है और वो शक्ति के बाहर है दुर्जन तोष नय तो यह पार मार्क धरातल की बात है रिक धरातल की बात है ही नहीं तो उसके आधार पर हम उस तो आपके जिस रूप में आप ईश्वर को ित कर रहे मगर जिस रूप में आप ईश्वर को उसम वो व्यवहार में ही हो जाता है बाधित जैसे कि आपने कहा कि भगवान कृष्ण ही शिव बनते हैं मगर व शिव से कृष्ण नहीं बन पा रहे व्यवहारिक स्वरूप हो गया उनका व्यवहार में बाधित हो रहे हैं व शिव बनने के बाद वास व शिव के रूप में आते ही वह जो है बा देते यह आप कह रहे हो सब कुछ कर सकने वाले नहीं है मैं यह कह रहा हूं कि जब ब्रह्म है और माया अलग नहीं और ब्र अलग नहीं है

00:48:58:01 आप तो क सभी कुछ ब्रम ही है तो माया और ब्र अलग नहीं ठीक अगर माया ही ब्र है ब्रहम ही माया है तो फिर दोनों अगर एक दूसरे को एक दूसरे को कवर किए हुए यह मतलब कुछ समझ नहीं आया तो इसके लिए आप हमारी क्लासे में आ सकते हैं समझने के लिए हमने आपको सिद्धांत बता दिया उसको काटिए समझ ना आने से कुछ नहीं होगा आप उसको काटिए हमने आपको वो भी बताया कि क्या जब आप वीडियो गेम खे तो क्या वीडियो गेम के अधीन होते हैं आप जब चाहे तब उसके स्वामी नहीं होते उसका प्लग निकाल सकने वाले ठीक है लेकिन जब हम मूवी देखते हैं मान लेते हैं अगर हम मूवी देख रहे हैं तो अगर हम मवी देख रहे तो क्या हम व इमोशन आते हैं मूवी को देख के व जो मोशन आने का र वही तो है वही तो ब्रह्म का व रूप है जो इसम फसा जो हमारी ब्रह्म की चेतना जो हमारे आपके रूप में फसी हुई है मगर एट द सेम टाइम उ बाहर भी आ सकता है एट द सेम टाइम उसका इतना अधिकार है कि ब्रह्म वहां से उठ कर के बाहर भी आ सकता है वो उसकी इच्छा है कि उसने ऐसा किया हुआ है ठीक है तो अगर अधीन होता तो उसके हाथ में अगर वो अधीन

00:50:13:06 होता तो उसके हाथ में यह सब कुछ नष्ट करने का वो नहीं होता अधिकार अब मैं इसको दूसरे तरीके से आपको समझाता हूं आप एक बात बताइए कि इसकन के अनुसार जो है मोक्ष क्या है मोक्ष भगवान के धाम में जाना इस संसार के जो जन्म मृत्यु का चक्कर है इससे मुक्त होना ही मोक्ष है बेसिकली जन्म और मरण के उससे मुक्त होना ही मोक्ष है भक्ति करने से आपको क्या मिलता है भक्ति करने से बेसिकली भक्ति करने के कई रीजन हो सकते हैं कुछ भी भौतिक रीजन भी हो सकते हैं आध्यात्मिक मेन जो पर परम चीज मानी गई है वो क्या मिलता है भगवान की सेवा भगवान की सेवा तो मुझे थोड़ा मतलब आपको यह मिलता है कि जब आप वहा बैकुंठ में जाएंगे तो भगवान की सेवा करेंगे वही आपका मोक्ष है वैकुंठ जाना ही नहीं है पॉइंट यही है कि अगर हम यहां पर भी हम मोक्ष के अगर हम इसन में देखे तो हमारे य तो मोक्ष को ही नहीं माना जातारे ठीक है भाण बात है मगर गोलोक गोलोक जाना है ना गोलोक की बात होती है कि नहीं परम मोक्ष परम शांति कहां पर है गोलोक में है ना जी परम शांति गोलोक में है तो गोलोक में आपको क्या मिलेगा जो आपको परम शांति

00:51:28:08 प्रदान करेगा परम शांति एक्चुअली वो लोग में नहीं है अगर भगवान की सेवा में अगर कोई इंसान है तो उसको वही परम शांति मिल रही है वह चाहे यहां हो या कहीं और अरे भाई गोलोक गोलोक जो है नित्य धाम है कि नहीं ये जो जहां पर वो है वो नित्य नहीं है ना यहां की शांति नित नहीं है ना यहां की शांति नित्य नहीं है ना तो गोलोक नित्य है ना वहा की शांति तो नि चा ठीक है तो भगवान की हा तो भगवान की भक्ति करने से अंतत गत्वा आपको मिलता है भगवान की सेवा करने का अवसर नित्य सुख है ना ठीक है अब मुझे बताइए कि सेवा को थोड़ा सा प्रैक्टिकल करिए कि वहां पर वो सेवा क्या कर रहे होते हैं जो उसको नित्य सुख मिलता है जैसे भगवान के पैर दबाना या भगवान के लिए नाचना या क्या कर रहे होते हैं वहां पर जो नित्य सुख तो यहां पे कहा जाएगा कि भगवान को वैसे तो किसी भी सेवा की जरूरत नहीं है ईश्वर को नहीं नहीं नहीं वो नहीं कह रहा उनको आवश्यकता नहीं है आपकी वो है कि आप सेवा करो तो अभी मुझे आप बताओ वो सेवा क्या जैसे क्या होती है पैर दबाना या गुदगुदी करना

00:52:43:13 भगवान को आनंद देना किसी प्रकार से वो क्या होती है बहुत अलग-अलग तरीके की सेवाएं होती है और मतलब उसम तो शास्त्रों में बहुत ही अलग तरीके से कोई भी एक दो बता दीजिए कोई भी एक दो बता दीजिए सेवा है भगवान को जिस भी चीज से खुशी होती है हर चीज से ला जो भी चीज भगवान को अच्छी लग रही है जिस भी चीज से भगवान को प्रसन्नता हो रही है उस चीज से जैसे कोई एक उदाहरण के लिए बोल दीजिए कोई एक उदाहरण के लिए बोल दीजिए जैसे कि जो गोलोक धाम की मंजिया होती है वो भगवान के लिए भगवान का श्रृंगार करती है और एट द सेम टाइम जब या एक मिनट एक मिनट अब बस इतना काफी है श्रृंगार बोल श्रृंगार कर रही है यानी कि भगवान बैठे हैं और फिर हमने श्रृंगार किया है ना ठीक है हम श्रृंगार किया तो श्रृंगार लगातार चलता रहता है या जैसे हमने ये किया उसके बाद एक आज सजा दिया भगवान को फिर कल सजाएंगे ऐसे होता है या जन्म जन्मांतर त अलग-अलग टाइम पे अलग-अलग भाई साहब मैं ये पूछ रहा हूं जैसे आप श्रृंगार है तो करते ही चले जा रहे हैं श्रृंगार को या रुक जाते हैं दोबारा से अगले दिन करते हैं रुक जाते रुक जाते हैं तो जब तो हमने यह कहा कि हमको श्रृंगार

00:53:58:25 करने से यानी सेवा करने से सुख की प्राप्ति होती है ठीक है अब हमने जब वहां पर आज श्रृंगार भगवान का कर दिया तो हम रुक गए तो ये तो सुख नित्य नहीं रहा नहीं वो नित्य कैसे नहीं है उसके बाद कोई दूसरी सेवा होगी या यानी जैसे मैंने य जैसे मैंने आईलाइनर लगाया मान के चलिए मैंने आईलाइनर लगाया भगवान के या टीका लगा दिया भगवान के मान लीजिए तो टीका लगा ने के बा य से मैं दूसरी जगह जब तक जाऊंगा तब तक व नित्य नहीं रहा बीच में रुकावट आ गई नहीं आई ना ये कैसे आ गई आपने कैसे मान लिया कैसे आ ग अगले दिन फिर श्रंगार करना है ना और ये तो भगवान का ही स्वरूप है नहीं सबसे बड़ा सुख सेवा है ना तो जितनी देर आप सेवा नहीं कर रहे उतनी देर नित्य नहीं रहा ना फिर वो जितनी देर आप इंतजार कर रहे सेवा करने का उतनी देर वो नित्यता कैसे रही तो आप यह चीज ना कि जितनी देर अगर हम सेवा नहीं कर रहे हैं तो उस टाइम में जो सुख मिल रहा है वो भी एक वो भी नित्य सुख है जितनी देर में उसका सुख सेवा अंतिम सुख नहीं है सिर्फ पहुंच जाना ही सुख है क्योंकि हम वहा पर सेवा का इंतजार करते हुए भी सुखी रह सकते हैं

00:55:14:25 हां तो मतलब सेवा सेवा अंतिम चरम सुख नहीं है सेवा सुख है सेवा ही अंतिम सुख है है तो इसका मतलब वो जो अंतिम सुख है व बाधित हो रहा है ना जब हम रुक रहे हैं अगले दिन के लिए नहीं वो बाधित कैसे हो गया ना जब आप सेवा के लिए इंतजार कर रहे हो तब भी आपको उतना ही आनंद उससे ज्यादा आनंद मिल रहा है उ अगर देखिए इंतजार करना भी सेवा के समतुल्य है तो सेवा फिर सेवा और इंतजार करना अलग अलग नहीं है फिर यानी कि वहां पर पहुंच गए वही सुख है फि सेवा करो या ना करो वहां पर पहुंचने के पहले जो प्रोसेस है ना वो सबसे ज्यादा सुखमय मानी गई है मतलब वो जो गोलोक धाम है वो नित्य नहीं है ये नित्य यही का मान लिया गया नित्य है नित्य है तो यहां का फिर कम हो गया ना ये वाला जो मैटेरियल वर्ल्ड में रहते हुए जो हम कर रहे हैं वो उतना वैसा नहीं है आपने कैसे कह दिया कि हम मटेरियल वर्ल्ड में है जब हम भगवान की सेवा में है जब हमने अपना सब कुछ लाइक हम आत्म समर्पण कर चुके हैं तो फिर हम मटेरियल वर्ड में हमारा शरीर है मैं बता देता हूं कैसे हैं मैं बता देता हूं कैसे है प्यास लगती है प्यास लगती है जी

00:56:30:03 ये मटेरियल वर्ल्ड है भूख लगती है ये मटेरियल वर्ड है सच जाते हैं हम ये मटेरियल वर्ड है और मूत्र मूत्र त्याग के लिए जाते हैं ये मटेरियल वर्ड है अच्छा आपकी ओर कोई जब घूंसा मारेगा चेहरे की ओर चाटा घुमा देगा आपको डर लगेगा कि नहीं लगेगा पलक झपके गी कि नहीं झपके गी अगर आपने खुद को आत्म समर्पण करके रखा है अगर करके रखा है मैं कह रहा हूं अगर आपको उतना ज्ञान है जितना शास्त्रों में है तो हमारे आचार्य उस लेवल तक पहुंचे हुए हैं जो कुछ आचार्य हुए हैं जो कि उस लेवल तक पहुंचे हुए थे कि उनको इन सभी में से किसी भी चीज का उनको खाना खाने का भी नहीं इसका मतलब जो परम मुक्ति धाम है वो जो गोलोक आप जो क्लेम करते हो वो नहीं है यहीं पर है

00:57:32:26 गोलोक है तो फिर उसको परम की संज्ञा क्यों दी जा रही है जब यहां और वहां में कोई अंतर नहीं है वहां पर परम की संज्ञा क्या दी जा रही है वहां पर सेवा करने को वो मेरा परमधाम भगवान का परमधाम है वहां पर भगवान एज एंजॉयर रहते हैं अरे भाई मुक्ति जो परम मुक्ति आपको जो नित्य सुख मिलेगा वो गोलोक जाकर के मिलेगा यहां नहीं मिलेगा ऐसा अभी तक मुझे मालूम था मगर आप कह रहे हो कि यहां पर भी नित्य सुख मिल जाएगा मिल सकता है बिल्कुल य मिल तो फिर फिर यहां में और वहां में अंतर नहीं रहा ना फिर वो कुछ रहा क्या अगर हम ये कहा जाता कि अगर हम उस लेवल पर पहुंच गए हैं तो फिर आप पता है क्या है आप उसको तह तक पहुंचने नहीं दे रहे हो खामा खा के टॉपिक पर आप अटक रहे हो यह सच्चाई है कि स्कन जो है गोलोक को वो मानता है परमधाम मगर आप यहां पर भी उसको जो है मिक्स अप करके आगे नहीं बढ़ने दे रहे हो बात को आपने कैसे कह दिया हमने तो इसम मुझे नहीं लगता कांट्रडिक्शन होना चाहिए था मगर ठीक है आप करो इसी करो तो आप बताओ कि फिर अंतर क्या है दोनों में आप

00:58:48:00 वही तो बात है ना आप सुनना नहीं चाह रहे हो कुछ भी आप बीच में ही सब कुछ कर रहे हो बोलिए बोलिए बोलिए तो गोलोक धाम एक्चुअली में नित्य ही है गोलोक धाम में भगवान एंजॉय करते हैं वहा पर उनको जरूरत नहीं है कि हम वहां पर जाए और उनको करें लेकिन हां भगवान उनको अपनी सेवा में बुलाते हैं सब कुछ करते हैं अप ए लीला पुरुषोत्तम लीला करने के लिएब मेरा प्रश्न देखिए मैं इसलिए इसलिए इंटरप्ट करना पड़ता है मेरा प्रश्न यह है कि यहां जो हम लोग आप कह रहे हो यहां पर भी आपको नित्य सुख मिल जाएगा तो फिर परमधाम और यहां पर अंतर नहीं होना चाहिए अंतर बताइए क्या है जो यहां नहीं

00:59:24:12 है जब हम यहा पर जो सेवा करते हैं तो हम यहां पर ये कह ही नहीं रहे ना कि हम मैटेरियलिस्टिक वर्ल्ड में है हम मैटेरियलिस्टिक वर्ड में त अंतर बताइए दोनों में अंतर क्या है आप कुछ भी कहते रहे मुझे अंतर बताइए दोनों जगह में अंतर क्या है परमधाम में और यहां पर जो है इस वर्ल्ड में क्या अंतर है झूठे की हद तक और चोर के घर तक जाना चाहिए जाना अच्छा होता है आइए भैया वापस आइए दिख नहीं रहे कहां चले

01:00:24:28 गए एक पियूष नाम का बच्चा जो है पहले आया था काफी दिन पहले हमारी लाइव स्ट्रीम प एक बार आया फर दोबारा आया शिवा भैया मुझे एक बार और करना है फिर रट के आया था कुछ उसको सिखाया गया था तो बच्चा आया वो अभी वह मुझसे संपर्क करके कह रहा है हां भाई ये जो है अनाधिकृत इकन के जो अनाधिकृत व्यक्ति है भव्य श ऑफिशियल यह देखिए इनकी भाषा शैली आपको दिख रही है भोकना बंद करो और सामने वाले को जवाब दो यह इनकी भाषा शैली हटा दीजिए भैया आप भी हमारे दर्शक हैं भव्य जी अच्छा लगा देख कर तो वो बच्चा आया था पीयूष वादवानी वह अभी कल मुझसे कह रहा है ट में जरा वो दिखाइए पियूष वादवानी जी का वो पड़ा होगा कल मैंने अपने ग्रुप में शेयर किया कि अब मैं रामानुजाचार्य परंपरा से हो गया हूं मुझसे आप लाइव कर लीजिए और बच्चों से बात करने में य दिक्कत एक आती जैसे भवे से बात की थी वो भी यही कर रहा था व

01:01:40:02 अपना जो मेन टॉपिक है उस पर बात ना करके इधर उधर की खूब सारी बातें करना और मेन टॉपिक से बचने का प्रयास करना वहां तक आना ही नहीं है तह तक जाने ही नहीं देना बात को अब वोह चले गए हैं आ नहीं रहे हैं तो ठीक है एक घंटे का हमारा हुआ है आज का तो अभी हमने जाना क्योंकि स्कोन कृष्ण और विष्णु में भेद करते हुए स्वयं को कृष्ण को सर्वोच्च मानने वाला प्रकट करता है तो वह वैष्णव नहीं सिद्ध होता कृष्णव और कृष्णव क्योंकि कृष्ण एंड क्राइस्ट आर सेम तो उनको क्राइस्ट भी कहा जाए तो कोई गलत नहीं है वैष्णव सिद्ध नहीं होते प्रभुपाद जी को फॉलो करने वाले सिद्ध नहीं होते चेतन महाप्रभु को फॉलो करने वाले सिद्ध नहीं होते मधवा चार जी को फॉलो करने वाले सिद्ध नहीं होते सनातन को हिंदू धर्म के द्वारा प्रतिपादित ईश्वर को मानने वाले सिद्ध नहीं होते कृष्ण की भक्ति करने वाले सिद्ध नहीं होते मेरे भाई तो क्या ही सिद्ध होते हैं वह कोई समझाए सब उलझा हुआ है वही जब भी कोई प्रश्न पूछो तो उसका उसका आंसर आएगा कोई भी प्रश्न कि ए फॉर एपल

01:02:55:10 होता है क्या वो बोलेगे नहीं ए बी सी डी एफ जी एच आई जे के एल एम एन ओ पी क आर एस टी डब् एक्स वाई जड इसका अर्थ क्या हुआ हम बाद में बो नहीं नहीं ए फॉर होता है तो हमने बोला तो ए से लेकर जड तक हमने सब बोल दिया उसमें सब कुछ है जैसे कि वर्ण व्यवस्था जन्म से है कि कर्म से दोनों से है दोनों से है अच्छा हरि हर एक है कि नहीं नहीं नहीं जब जहां पर शिव की बात हो रही होगी वहां एक जहां विष्णु की बात हो रही होगी वहा एक नहीं है अच्छा विष्णु और कृष्ण एक है कि नहीं नहीं नहीं जहां पर कृष्ण की बात हो रही जहां विष्णु की बात हो रही होगी परब्रह्म की वहां एक है जहां पर कृष्ण को सर्वोच्च कहा जा रहा होगा वहां अलग है वहां कृष्ण सर्वोच्च है ना तो वो सारी चीजें बोल दो झूठ नहीं है गलत है इसका मतलब यह नहीं है कि वो एजिस्ट ही नहीं करता मैंने श्रीधर स्वामी वो जो वैष्णवास्त्र

01:03:56:01 गलत थोड़ी ना कह दिया है ये भी ये भी हो गया अच्छा फिर बाद में आगे कि मैंने उनको अपमा नहीं कहा है मैंने उनके द्वारा द जाने ली शिक्षा को अप्र माणिक कहा है भाई अपमा शिक्षा से ही सिद्ध होता है ना कि कौन आचार प्रामाणिक है कौन नहीं है हा यदि गलत शिक्षा देने वाला उसको आप प्रामाणिक आचार कहेंगे तो दोनों बातें हैं श्रीधर स्वामी को इन्होंने पूरा ये श्रीधर स्वामी का टीका है हमारे पास श्रीधर स्वामी का कितना विरोध हुआ है वह आप देखिए श्रीधर स्वामी जी ने आठवे स्कंद के सातवे अध्याय के 21 से लेकर 23 के बीच कहा है शिव जी की स्तुति मानी है और शिव जीी ब्रह्मा विष्णु महेश का रूप धारण करते माना है एकत्व माना है और अपनी माया के द्वारा करते हैं ऐसा माया शक्ति ईश्वर की जो माया शक्ति उसके द्वारा उसको कैसे मलेट किया जाता है [प्रशंसा]

01:05:02:00 मायावादी मायावादी काने वाले अगर इनके हिसाब से प्रभुपाद जी नहीं हालांकि उन्होंने भी अपने भाष्य में माया की बात की है जो ईश उपनिषद इत्यादि में तो अब इनके हिसाब से वह मायावादी नहीं है यह मायावादी है फिर भी इनका खंडन करने के लिए इनके द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों का खंडन करने के लिए इन्हीं के शास्त्रों का सहारा वाह भाई बहुत अच्छी बात तो अभी वह चले गए हैं आ नहीं रहे हैं मुझे वो आशा है कि वह कि वह जो है हां हम लोग बहुत जल्द राघवाचार्य जी इत्यादि के साथ भी पास भी जा रहे हैं और जो रामानुज परंपरा के अन्य वो हैं मानने वाले उन सबको इस प्लेटफॉर्म पर लाएंगे निंबार्क चार वाले को लाएंगे मधवा चार वालों को लाएंगे रामानुजा चार वालों को लाएंगे सबको लाएंगे दिखाएंगे यहां पे सनातन की एकता की शक्ति अखंडता की शक्ति वर्णाश्रम

01:06:22:15 धर्मयोद्दा का वो जरा शेयर करिए यहां पे वो यह कह रहा है कि वो पिन कमेंट शेयर करिए कल एक स्क्रीनशॉट मैंने शेयर किया था कैसे अपने सिद्धांतों को त्याग करना पड़ता है कोई अपनी बातों को रखने के लिए अ विपुल सिंह जी हैं अपना चेहरा

01:07:37:27 दिखाइए तब तक आप स्क्रीन शेयर कर दीजिए मैंने आपको भेज दिया है ट पर भेजा है मैंने आपको पीयूष वादवानी का स्क्रीनशॉट ये बड़ा करिए क्या कह रहे हैं वादवानी

01:08:13:15 जी मैं रामानुज संप्रदाय से हूं तो ये है अब इनको इस कौन को क्यों छोड़ना पड़ा यह भी अपनी स्टोरी किसी दिन शेयर करेंगे भव्य आपको तो पहले माफी मांगनी होगी आपने बहुत अभद्र आचरण कर दिया अब तक तो आप क्षमा मांगे वीडियो यब पर व रील बना कर के मैंने गलती की है मैंने भद्रा चरण किया यसा ऐसा अच्छे से मन से माफी मांगिए फिर किसी दिन आपके साथ चर्चा होगी विपुल सिंह जी महाराज जी प्रणाम आवाज आ रही है मेरी आपको जी आ रही है जय श्री राम जी गुल जी बताए महाराज एक शंका निवारण है आपसे पूछना था मुझे जैसा कि आपकी मैंने आप अपना परिचय दे दीजिए मेरा नाम विपुल सिंह है जाति से हम राजपूत क्षत्रिय और मैं अभी किसी परंपरा से नहीं जुड़ा हूं और ज्ञान आर्जन में लगाऊं य के माध्यम से या कई जो ग्रंथ है अपने उनको पढ़ने की कोशिश स्वयं करता हूं अभी ऐसा सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ किसी आचार्य के माध्यम से ज्ञान प्राप्त कर सकूं और आपकी

01:09:28:25 आपकी वीडियो देखिए उसके माध्यम से मैं आपको जान पाया हूं एक शंका है अगर आप निवारण कर पाए तो बहुत कृपा होगी आप वैसे देखिए यह जो स्ट्रीम हमने रखी है ये है वैचारिक मतभेद के निमित्त जो है चर्चा यहां पर होती है तो यदि कोई व्यक्ति सहमत नहीं है ना उससे हम यहां पर करते हैं क्योंकि वो कंटेंट थोड़ा गड़बड़ हो जाता है दूसरी तरह का कंटेंट हो जाता है तो आप जो है एक टेलीग्राम ग्रुप बनाया हुआ है वहां पर एक प्रश्नोत्तरी वाला ग्रुप है टेलीग्राम चैनल पर वहां आप अपनी शंका लिख कर के भेज देंगे तो ऑफिशियल हम आपको जवाब भेज देंगे है ना पाच मिनट का टाइम लगेगा अगर आपके पास हो समय तो कर सके तो अब चलिए बोलिए बोलिए सर जैसे आप परंपरावादी है तो आप ये चाहते हैं कि जो व्यक्ति ज्ञान प्राप्त करे वो किसी परंपरा से हो तो ज्यादा सही रास्ता है क्योंकि आपने नग के भी वहा पर प्रमाण दिए थे वीडियो में ज आप किसी आर सवाजी व्यक्ति से चर्चा कर रहे थे त तो मुझे ये पूछना था तो जो परंपरावादी व्यवस्था है उसमें जो वर्ण व्यवस्था है व कर्मनाशा

01:10:56:00 लाने के लिए यज्ञ के लिए होता लाने के लिए हम किसी ब्राह्मण के कुल को देखेंगे ब्राह्मण कुल हो ठीक है उसके बाद उसको जो है वेद मंत्रों का उच्चारण आता हो समग्र रूप से व वेद पाठी ब्राह्मण हो व यज्ञ में निपुण यह कर्म हो गया तो जन्म से क्या हुआ नॉमिनेशन वह व्यक्ति हमारी रडार पर कैसे आया हमने उसी को क्यों चेक किया और किसी को चेक क्यों नहीं किया क्योंकि उसका कुल ब्राह्मण का है ठीक है और फिर हमने उसके कर्मों को किया उसके बाद उसको तो जन्म से नॉमिनेशन कर्म से सिलेक्शन अगर कर्म नहीं होंगे तो भी वो तिरस्कृत हो जाएगा मगर कर्म किसके चेक करें क्या रास्ते पर उतर जाए चेक करने हर रिक्शे वाले के हर ऑटो वाले के किसी के भी चेक करने लगे साइकिल वाले के चेक करने लगे पान की दुकान वाले का चेक करने के ल तू बता भाई तेरे गुण कर्म क्या है चेक करने के लिए जो प्रारंभिक बिंदु है वो है कुल तो कुल के कुल के नाम से हम किसी परिवार में गए जहां पर वंशा परंपरा के अनुसार वो चीजें आ रही है वहां गए फिर अब देखा कि वो लड़का विलायत पढ़ने चला गया एमबीबीएस करने तो नहीं भाई वो हमारा होता नहीं है व हम फिर और किसी ब्राह्मण कुल में जाएंगे और किसी में जाएंगे तो ये

01:12:12:15 है जी बोलिए तो सर जैसे आपने सत्यकाम जवाली जोका नाम सुना होगा जो कि मुझे आईडिया नहीं किस उपनिषद में उनकी चर्चा उपनिषद में है सत्यकाम वाली जो कि जिनकी माता हमने वीडियो बनाया है ना सकाल वाला का उपनिषद में है अभी वीडियो बनाया तो है ी बात पे हा जो जावाल है माना नहीं माना जाएगा क्योंकि वो उनको ब्राह्मण सुनिए वहां पर क्या लिखा है हिंदी पढ़िए उनको ब्राह्मण मानकर ही उनका संस्कार कराया गया मतलब इस बात को माना गया कि जन्म से ब्राह्मण है तब उनका संस्कार कराया गया जैसे हम सब वो किसी का वो चाहिए होता ना प्रमाण तो उन्होंने अपनी आस्था को प्रमाण माना कि मैं जो है इसको ये ऐसा नहीं हो सकता ये ब्राह्मण ही है तो जन्म से उसके ब्राह्मण को स्वीकार किया गया फिर उसका संस्कार कराया

01:13:11:06 गया और मर्ष विश्वामित्र का क्या करेंगे वो तो जन्म से क्षत्रिय थे फिर वो ब्राह्मण माने जाएंगे यानी कि यहां पर जो है ये क्रॉस कन्वर्सेशन है यह जिज्ञासा नहीं है जिज्ञासा के नाम पर क्रॉस कर चलिए जो विश्वामित्र जी है पहली बात यह थी कि अगर आप विश्वामित्र जी के जन्म की कथा देखेंगे तो उन्होंने ब्राह्मणों चित खीर खा ली थी उनकी मां ने जैसे परशुराम जी की माता जी ने क्षत्रियो चित खीर खा ली थी ठीक है अच्छा परशुराम जी ने क्त्र क्षत्रियो चित आचरण किए कहीं पर उनके लिए क्षत्रिय आया क्या प्रभु श्री राम से जब वो ल

01:13:52:27 जाते क्षत्रियो शार नहीं कि वो लड़ाई नहीं की उन्होंने लड़ाई देखो क्षत्रिय के कर्म क्या होते हैं शासन करना राज्य में व्यवस्था बनाना अपनी आत्मरक्षा के लिए युद्ध करना ये क्षत्रिय वर्ण में थोड़ी आ जाएगा वो तो हर व्यक्ति का मा उसका धर्म ही है तो अच्छा चलिए ठीक है द्रोणाचार्य ने क्या किया था आत्मरक्षा बिल्कुल सही बात है द्रोणाचार्य द्रोणाचार्य मैं बताता हूं आपको द्रोणाचार्य पहली बात तो अधर्म कर रहे थे सजा उसे उही बात मिली शि शिक्षक को स वो बात की बात है क्या उनके लिए क्षत्रिय शब्द का उपयोग

01:14:38:04 हुआ रावण क्या रावण के लिए क्या कहेंगे रावण के लिए क्या कहेंगे रावण तो ब्राह्मण था लेकिन उसने गद्दी खुद ही प्राप्त करी ना ऐसा नहीं था परंपरा से आ रही है उसने अप ग बना क्या उस मैं पूछ रहा हूं क्या उसके लिए क्षत्रिय शब्द का उपयोग किया गया अब आ जाते अब आ जाते विश्वामित्र पर विश्वामित्र जी की माता जी ने ब्राह्मण उचित खीर खाई उसके बाद विश्वामित्र जी जो परंपरा प्राप्त आचार्य थे वशिष्ठ जी उनके पास बार-बार गए कि भाई मुझे जो है ब्राह्मण घोषित कर दो मगर वशिष्ठ जी ने ब्राह्मण घोषित नहीं किया कि आप राज ऋषि तो हैं मगर ब्रह्म ऋषि नहीं है इनकी फोटो रुक गई है ब्रह्म ऋषि नहीं है इस कारण से वशिष्ठ जी के साथ उनकी शत्रुता भी हुई युद्ध हुए ठीक है तो यहां से पहला फैक्ट निकल कर के आ रहा है यदि वो वशिष्ठ जी के पास जा रहे हैं कि मुझे क्षत्रिय घोषित कर दो इसका मतलब वह

01:15:53:09 स्वयं को जन्म से क्या मान रहे हैं ब्राह्मण मान रहे है जन्मना वर्ण व्यवस्था को मानने वाला मानने वाले यहां से वो सिद्ध होते हैं ठीक है दूसरी बात जब उन्होंने जब उन्होंने अनेका अनेक वर्षों तक जाने कितनी तपस्या कर ली तब भगवान ने प्रकट होकर के उनके क्षत्रिय तोव को स्वीकार किया यही हम भी कहते हैं भगवान प्रकट होकर के आपको आपका बदला हुआ वर्ण घोषित कर दे ठीक है भगवान ने व ब्रह्मा जी ने वहां प्रकट हो कर के कहा कि हां तुम्हारे जो क्षत्रिय वाले वो है वो लुप्त हो गए तो तीन चीजें हो गई पहली बात तो वो जन्मना को मानने वाले सिद्ध हुए दूसरी बात उनकी माता जी ने खीर खाई थी तीसरी बात यहां पर भी मनुष्य की मर्जी से ये नहीं हुआ कि उनका जो है वर्ण बदल गया भगवान ने ही घोषित किया अंततोगत्वा

01:16:46:24 जी नहीं तो फिर वो उनके पिता क्षत्रिय थे उनकी माता छत्रिय है तो खीर खाने का ये तो फिर हम आउटर चीज जोड़ रहे हैं ना उसमें अगर एक पिता के औरत का पुत्र है तो वो तो क्षत्रिय हो जाएगा अपने आप ही उसके सिद्ध करवाने की जरूरत क्या है उसे किसका पुत्र जैसे अगर मान लो पिता क्षत्रिय है माता क्षत्रिय है विश्वामित्र की तो वो तो अपने आप ही औरस पुत्र क्षत्रिय हो गए ना तो उसके लिए सिद्ध करने की जरूरत क्यों थी वो उनके अंदर की कामना थी कि मैं ब्राह्मण को प्राप्त करूं उनके अंदर की कामना थी मैं प्राप्त करूं ब्राह्मण तो हो र वण व्यवस्था जो है जन्मना नहीं है बल्कि कर्म उन्होंने चाहा जो ये मैंने बताया तो जो ये प्रक्रिया सिद्ध उन्होंने कहा उन्होंने करा मगर ये सिद्ध कब हुआ जब भगवान ने उतर के उनको गारंटी दे दी हां अब तुम हो गए भगवान उतर के जिसको हम मान रहे आप ऐसे कर्म करो भगवान आके गवाही दे दे कि आप ब्राह्मण हो गए मान लेंगे सिंपल भगवान का परंपरा प्राप्त जो आचार्य थे मनुष्य के रूप में उन्होंने नहीं माना मना कर दिया प्रामाणिक आचार्य और प्रामाणिक आचार्य के पास पूछने जाना यह भी प्रामाणिक आचार्य की प्रामाणिकता को सिद्ध करता है विश्वामित्र जी उनके पास

01:18:01:24 पूछने जा रहे हैं य तो यह पता लगता है कि ब्राह्मणों की उच वो नहीं जब तक स्वीकारें तब तक समाज में उस को स्वीकृति नहीं दी जाएगी ना जब तक व बात य नहीं है बात है सनातन सिद्धांत क्या है सनातन सिद्धांत व तो गीता का लोक है भगवान सा कहते कि मैंने गुण कर्म स्वभाव से विवाह किए चार इसम जन्म आप डाल सकते थे जन्म से मैंने डाल दिया जन्म की बात छंद उपनिषद में की जा रही है

01:18:29:14 पूर्व जन्मों के कर्मों के आधार पर इस जन्म का शरीर प्राप्त होता है शरीर की सीमा में इस जन्म का वर्ण प्राप्त होता है और वर्ण की सीमा में इस जन्म

⬜ Not used yet · 01:18:36:14 – 01:51:24:00 (32:48)

01:18:36:14 के तुरंत दोबारा से कर्म प्राप्त होते हैं और उन्होंने क्या कहा गुण कर्म विभाव सा उसमें उन्होंने कहा मया सिस्टम मैं करता हूं ना तो जो जो मनुष्य की इच्छा के अनुसार बदल रहा है उसमें भगवान की मर्जी कहां रह गई उसमें तो आपकी मर्जी आ रही है अभी आपने किसी रक्षा कर दी अभी आपने किसी की रक्षा कर दी जाकर के तो आप क्षत्रिय हो गए आगे जाकर के दो कदम आगे आपने किसी को ज्ञान दे दिया ब्राह्मण हो गए कहा रह गया जो जो कार्य व्यक्ति अपने जो मुख एक होता है मुख्य कार्य जो जीवन उपार्जन के लिए करता है जसे ब्राह्मण होता है अब चाहे वो किसी भागते हुए हिरण को बचा ले सि से इसका मतलब ये तो नहीं है कि वो क्षत्रिय हो जाएगा लिखा है ये कहां लिखा है ये कहां लिखा है ये वाला जो कार्य वो के लिए कहेगा ये कहा लिखा है वर्ण कार्थ होता है चुनाव करना अपने लिए अरे भाई साहब देखिए बहुत सी चीज है इस पर हमने कई बार बातें कर ली है और हमने कई वीडियो भी बनाए इस बारे में यह जो ण चलिए ठीक है इसका उपयोग क्या माना जाएगा बताइए इसको इसको जो वर्ण को डिसाइड कौन करेगा अंततोगत्वा व्यक्ति का जब दीक्षा

01:19:51:19 समारोह हो जाएगा जब स्नातक हो जाएगी उसकी पूरी स्नान दिया जाएगा शिक्षा के प ये कहां लिखा है संस्कारों में है ना व्यक्ति की शिक्षा हो जाती है ऐसे थोड़ी होता है जब आप आपने अपनी बातों को रखने के लिए प्रमाण लाया विश्वामित्र जी के पास ऐसा हु प्रमाण प्रमाण देरहा प्रमाण पुराण का जो लोक है आपने सुना ही होगा की ज जन्मना शूद्र और शिक्षा पश्चा दज बन जाता है तो फ जन् से तो सी शिक्षा प्रा जन्म से राम के लिए कहीं पर शूद्र आया है क्या ज नहीं राम के लिए आ वो राम की जीवनी है राम के दूसरे तरीके से लेते हैं स्कंद पुराण में ही उमा महेश्वर संवाद में लिखा हुआ है जिसका गुरु नहीं है वह जानवर है आपके अभी आपने बताया कोई गुरु नहीं है तो आप जानवर हो नहीं गुरु मत किस सेंस में कह रहे आप शास्त्रों के बिना बिना शास्त्र पढ़ने के लिए इसका गुरु नहीं है वो जो गुरु के बिना स्वा अध्ययन करता है शास्त्रों का वह जानवर है यह स्कंद पुराण में मेंशन आप जानवर शस्त्र में ऐसा लिखा

01:21:06:26 है कि गुरु के बिना जानवर तो हो सकता जानवर जानवर हो सता नहीं आप क्लियर बताइए आप क्लियर बताइए आप जानवर है या नहीं है सांस के र सभी जानवर है भी जानवर नहीं सभी मत कहो हमारा गुरु हम जानवर नहीं है आपका गुरु नहीं है आप जानवर हो कि नहीं जिसके संस्कार नहीं हुए गुरु के अभाव में वो जानवर ये क्यों बोलना पड़ रहा है दिक्कत आ रही है ना सत्य को बोलने में स्पष्ट बोलो ना भाई कि मैं जानवर हूं अच्छा ठीक है मैं जानवर ह इससे क्या सिद्ध हो गया अब बात ये आती है कि आप जानवर नहीं है आप जानवर वत है पशु वत है पशु यानी की अगर वहां ये कहा गया अगर वहां ये कहा गया कि जिसका गुरु नहीं है वह जानवर है तो वहां वोह पशु है तो वह पशु वत है आपकी योनि नहीं बदल गई आप अभी भी मनुष्य योनि में ही माने जाएंगे मगर क्योंकि आपके कर्म जो है वैसे है तो आप पशु वत है मगर पशु नहीं है इसी प्रकार से जो जन्मना जाते शूद्र वाली बात है वहां पर भी शूद्र वत है जैसे यहां पर पशु वत है वैसे ही वहां पर शूद्र वत है अब मैं आपसे पूछूंगा कि

01:22:22:00 आपके पास भगवत गीता आई कहां से मेरे पास गीता प्रेस गोरखपुर गीता प्रेस गोरखपुर के पास कहां से आई सर यह तो उनके एडिटर को पता होगा यह तो मुझे नहीं पता से पता करिए पता करिए गुरु शिष्य परंपरा से हमारे पास शास्त्र आते हैं गुरु शिष्य परंपरा से तो जो शंकराचार्य परंपरा है रामानुजाचार्य परंपरा है इनके पास जाइए आप पढ़ने के लिए और पूछिए जन्म से है हमारे शास्त्रों में के कर्म से है सिंपल हा आप जो है आप जो है इस कर्म का तमका लगा दीजिए ना तो उसकी कोई व्यवहारिक उपयोगिता है ना ही वह शास्त्रों से सिद्ध हो रही है आप उस पर कर्म का तमका लगा दीजिए मगर मगर फिर यह नहीं कह सकते शास्त्र सम्मत है जो हम कह रहे हैं क्योंकि शास्त्र सम्मत की बात तब आएगी जब आप गुरुओं के पास जाकर के उसको अपने कहे हुए वचन को ठप्पा लगवा लेंगे किसके पास से ठप्पा लगवाया आपने

01:23:26:10 गीता प्रेस में ही गीता प्रेस में ही जन्म से मानने वाले में आपको प्रमाण दे देता हूं चलो ठीक है आप मान ले रहा हूं आप शास्त्र की ज्यादा ज्ञाता है उतना नहीं ठीक बात है सर आपसे सवाल क्यों कर रहा हूं अगर हम जनम व्यवस्था को चले क्योंकि विरोधियों के द्वारा यह जो वर्ण व्यवस्था है इसके नाम पर जहर घोला गया है और जो व्यवस्था व्यवस्था मूलक जो शब्द है कि ब्राह्मण क्षत्रिय वैश शूद्र इसमें ये ये करेगा इसमें ये ये करेगा उसको घणा मूलक रूप में पेश करा गया है प्रस्तुत किया गया लोगों के साथ जैसे कि केवल गायत्री मंत्र पढ़ के ही मोक्ष मिलेगा ऐसा नहीं है राम जप करके भी मिलेगा कृष्ण का नाम का जप करके भी मिलेगा हरे कृष्ण महामंत्र का जप करके भी मिलेगा ऐसा है और भी कई रास्ते हो सकते हैं मगर क्या किया गया कि पहले जो है गायत्री मंत्र को ही सबसे ऊपर बना दिया कि नहीं गायत्री मंत्र से ही केवल मुक्ति मिल सकती है वही सबके लिए वो है उपयोगी और जब लोगों की मेंटालिटी ऐसी हो गई कि भाई नहीं गायत्री मंत्र को जपना ही सबसे ज्यादा वो है जरूरी और वो मोक्ष दायक तब क्या किया गया अरे देख वो तुझसे

01:24:41:10 घणा करते हैं गायत्री मंत्र को नहीं पढ़ने देते तुझे मना करते हैं उसके अपने अपने बहुत सारे रीजन है कि ब्राह्मण क्षत्रिय वै शूद्र का जो क्लेरि और सब करते हैं सबके यहां होता है कल्प रूप में सबके य होता है खैर मैं इस बारे में बात कर चुका हूं आप किसी दिन फॉर्म भर के आए तो हम लोग इसमें और चर्चा ये बहुत लंबा टॉपिक है हम लोग कई बार बात कर चुके हो आप जो है फॉर्म भरिए 74836 और फिर दोबारा से हम लोग वर्ण व्यवस्था पर किसी दिन बात करते हैं ठीक है इस पर मैं कई बार हमारी बातें हो चुकी है आप आइए दोबारा आपका स्वागत है ठीक धन्यवाद जी

01:25:25:09 रजत जी डेढ़ घंटा हो चुका है अभी बढ़ाए क्या इसको आगे भाई आज के टॉपिक पर अगर किसी को बात करनी है तो वह हमें ब बताए

01:26:28:15 आयुष मिश्रा जी हैं रजत जी भी है बताइए रजत जी जी आवाज आ रहीम आवाज आ रही मेरी जी आ रही है शिवांश जी मुझे मतलब आपका परिचय परिचय मेरा नाम रजत गुप्ता है मैं कानपुर उत्तर प्रदेश से हूं और मैं से बात हो चुकी है ना हमारी फोन प हो चुकी है और आपका आज के विषय को लेकर के कोई वो है क्या जो आज जो हमने विषय रखा है स्कन से रिलेटेड बोलिए मैं ये जानना चाहता हूं जैसे कि फिलोसोफी सारी एजिस्ट करती है ऐसा नहीं है कि अद्वैत एजिस्ट नहीं करता है या द्वैत एजिस्ट नहीं करता है मतभेद अद्वैत और द्वैत का शुरू से देखिए प्रॉब्लम क्या है मैं आपको क्लियर कर दूं द्वैत अद्वैत को मानने वाले हम है अद्वैत को ना मानने वाला दूसरा व्यक्ति है जैसे कि ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश पांचों ब्रह्म है ये हम है मगर विष्णु के अतिरिक्त या विष्णु भी नहीं कृष्ण के अतिरिक्त ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश को ना मानने वाला दूसरा व्यक्ति है प्रॉब्लम वहां है तो बांधने

01:27:43:18 वाला संगठित करने वाला कोई और है हम उस तरफ से खड़े हैं कि संगठित कैसे हो जब ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश पांचों की उसको परब्रह्म को स्वीकार किया जाए मगर को काउंटर कर रहा है किसी की आस्थाओं को ठेस पहुंचा रहा है शिव और विष्णु में भेद कर रहा है विष्णु और कृष्ण में भेद कर रहा है सिव दुर्गा काली गणेश का तो कहना ही क्या है तो उसको तो हमें काउंटर करना पड़ेगा ना जी जैसे मैंने काफी स्टडी किया पूरा मतलब सनातन धर्म में जैसे स्मार्थ होते हैं आपका जो देखिए मैं आपके आपसे बातें कर चुका हूं इसलिए आप मुझे विषय बताइए आपने स्टडी किया है वो आपने कहां से किया ये भी आपने बताया मुझे तो उसम बहुत स वो तो इसलिए आप मुझे ये बताइए हा आपने कन से किया है ना सारा स्टडी नहीं नहीं इसकन को इकन को मैंने मतलब एस अ रिफरेंस मैंने पढ़ा था ऐसा नहीं कि मैं केवल इकन से मैंने गीता प्रस से भी स्टडी किया है तो आपका सनातन सनातन सिद्धांत के रूप में आपने कौन सी परंपरा से प्राप्त ज्ञान को स्वीकार किया है यही जो हमारे शंकराचार्य जी बताते हैं हमारा जो धर्म है वो प्योर अगर हम कहेंगे कोई जैसे आजकल सनातन धर्म बहुत ज्यादा फेमस हो रहा है लेकिन जो टोटल हम

01:28:58:20 अपने अपना धर्म को अगर पहचाने तो हमारा जो जो सनातन वद कार हिंदू हा हा जी जी जी जी जी और बस मेरा य यह प्रश्न है जैसे कि इकन वाले जो आप पर या फिर शंकराचार्य जी पर ये जो आक्षेप लगाते हैं कि वो लोग निराकार को मानते हैं ऐसा कुछ जैसे मैं मैं बस आपसे यह जानना चाह रहा हूं कि जैसे की जो परम सत्य के तीन रूप बताए गए हैं एक ब्रह्म परमात्मा और भगवान परम सत्य के तीन रूप है ब्रह्म परमात्मा भगवान तो यह इन लोगों का यह मानना है कि आप ब्रह्म से ही सारे अवतार मानते हैं उनका यह मानना है जैसे की एक वृंदावन के बहुत बड़े ये थोड़ा समझिए आपको हमको यह ध्यान रखना पड़ता है कि कंटेंट किस उसम में जाए तो आप मुझे यह मत बताइए कौन क्या मानता है आप मुझे सीधे बताइए कि आपकी य चीज से मुझे दिक्कत है और मेरा ये सवाल उसके लिए बहुत ज्यादा प्रीफिक्स देने की आवश्यकता नहीं है तो मेरा सवाल ये है कि कि जैसे कि आप जो अवतार

01:30:14:04 मानते हैं कि जैसे ब्रह्म को सगुण और साकार दोनों माना शंकराचार्य जी तो आप क्या अवतार जो मानते हैं कि वो निराकार से आता है ऐसा कुछ है कि ब्रह्म ब्रह्म को ही मैं यहां पर सीधे ये बात कहूंगा कि वह अंततोगत्वा साकार हो निराकार हो अगर हम लोग संगठित करने की बात कर रहे हैं सनातन समाज को वो जो भी हो वह व्यवहार में आ सकने लायक नहीं है तो उस दृष्टि से देखेंगे व्यवहार में ना आ सकने लायक मतलब हम उसके बारे में वो हम जो है उसको डिस्क्राइब नहीं कर सकते व्यवहार में आ सकने ना आ सकने लायक अब वो आप जो है साकार भी कह दो मान लो साकारी मगर वह ऐसा साकार है जिसको हम व्यवहार में नहीं ला सकते वो एज इट इज यहां पर कृष्ण जो आते हैं वो गलत फिलॉसफी है क्योंकि एज इट इज आ रहे हैं अगर व्यवहार में अगर आ रहे हैं तो बाधित हो जाएंगे नियमों के अधीन हो जाएंगे उनका वो स्वरूप जो है वो व्यवहार में नहीं आ सकता उसी को अगर हम निर्गुण कह दे निर्गुण निराकार कह दे तो ठीक उसको हम आध्यात्मिक रूप से साकार कह दे तो भी ठीक अगर हम इस बात को ही लेकर चले कि एकत्व कैसे आए तो उसको निर्गुण निराकार कह दीजिए इंद्रियों का विषय नहीं है आंख का विषय नहीं है कान का विषय नहीं है व्यवहार में नहीं आ सकता निर्गुण निराकार किसी ने

01:31:29:08 कह दिया आध्यात्मिक साकार उनकी बॉडी तो है पर वो मटेरियल मैटेरियलिस्टिक बॉडी नहीं है वैसी है वो मटेरियल जो हमें जो इंद्रिया प्राप्त है इनका विषय नहीं है बात तो वही हो गई अगर आज की जो हमें इंद्रिया प्राप्त है कर्मेंद्रियां ज्ञान इंद्रिया इनके द्वारा वो व्यवहार में नहीं आ सकता उस रूप को कोई आध्यात्मिक साकार कह दे या उस रूप को कोई निर्गुण निराकार कह दे उससे फर्क क्या पड़ता है यहां भगवान साकार होके आ रहे हैं हमारे व्यवहार का विषय बन रहे है तो आप मतलब यह मानते हैं कि वो ब्रह्म ही सगुण ही है वो वही ब्रह्म ही सगुण भी है और साकार भी है ऐसा व्यवहारिक धरातल पर व सगुण हो जाता है जी जी मतलब कहने का मतलब मेरा यह है कि जैसे कि जो इकन मानता है वो कहता है कि ब्रह्म जो है वो अल्टीमेट रियलिटी नहीं है वो ये कहता है कि जो भगवान अभी मैंने इनसे भाई साहब से एक बात पूछी वो अल्टीमेट रियलिटी नहीं है वो कृष्ण से स्टार्ट हो रही है जब कृष्ण से स्टार्ट होगी चीजें भगवान श्री कृष्ण जो यहां पर आए हो सकता है उनका वहां का रूप भी हो वैसा ही मगर वह अभी हमारी इंद्रियों का विषय नहीं है तो जो यहां पर भगवान श्री कृष्ण आ रहे जिनके बारे में बात कर रहे हैं अगर इनको अल्टीमेट बताएंगे अल्टीमेट रियलिटी तो दिक्कत आएंगी क्या दिक्कत आएगी

01:32:44:13 भगवान जहां बैठे हैं वो दुनिया किसने बनाई भगवान अपनी देह का नाश नहीं कर सकते यह दिक्कत आ जाएंगी भगवान बाधित हो जाएंगे अगर उसको रिलिटी बना लेंगे तो हो सकता है वो ऐसे ही दिखते हो हो सकता है मगर हम अभी उसको डिस्क्राइब नहीं कर सकते व्यवहार में आ सकने वाला नहीं है अगर व्यवहार में ना आ सकने वाले रूप कोही आप व्यवहारिक बना दोगे तो क्या होगी दिक्कत दिक्कत यही होगी भगवान जो होंगे बाधित हो जाएंगे सर्वशक्तिमान सिद्ध नहीं होंगे अब जैसे कि वो कहते हैं कि वो अपनी देह का नाश क्यों करेंगे ठीक है यहां से शुरू हुई यहां नाश हो गया यहां से शुरू हुई य नाश हो गया इसके बाद इसके बाद नहीं है ना बॉडी उनकी तो नाश हो गया और उन्होंने कई उसमें कहा है कि तेरे और मेरे कई जन्म हो चुके हैं किस रूप में कहा तेरे और मेरे अब तक कई जन्म हो चुके हैं इस रूप में कहा जब वो जाएंगे तभी तो जन्म लेंगे तो व्यावहारिक धरातल पर वो जो है जन्म और मरण की लीला भी करके दिखाते हैं देह का नाश करके भी दिखाते हैं सब कुछ कर सकने वाले हैं कुछ भी कर सकते और अगर हम इसको ही अल्टीमेट रियलिटी मान लेंगे तो और क्या क्या होगा

01:34:00:02 जो ईश्वर है व ब्रा जैसा क्यों होगा अब्राह्मिक ईश्वर क्या है एक जगह बैठा है और सृष्टि की रचना कर देता है जहां मनया सूर्य को टांग दिया जामन आया पृथ्वी को टांग दिया ठीक है तो पहला क्वेश्चन तो यही है कि जहा वो बैठा है वो स्पेस उसने नहीं बनाया अंतिम रचता नहीं है वो संसार का पहला इसको भी हटा दो फिर दूसरा क्या आया कि उसने कुछ भी बनाया नहीं है उसने केवल शेप दिया है कुमार की तरह एक कुमार होता है जो मिट्टी लेकर घड़ा बनाता है मिट्टी को उसने नहीं बनाया ये भी बात आ जाती है ये बहुत सी बातें हैं और फिर अभी हमने बोला कि अगर भगवान अंत तो गत्वा आपको भगवान के साथ एकत्व प्राप्त नहीं हो रहा है तो यहां पर दावा किया जाता है कि हम भगवान से बहुत प्रेम करते हैं तो यदि गोलोक धाम पहुंच कर के इनको सुख मिल गया तो इसका मतलब प्रेम भगवान से नहीं था भगवान केवल माध्यम थे गलोक धाम पहुंचने का ठीक है ठीक है और दूसरी बात क्या आ जाएगी कि वहां जाकर के भी अभी क्या कह रहे थे भाई साहब कि सेवा करते हैं फिर अगली अगले दिन फिर सेवा करने का प्रयास मौका मिलता

01:35:15:03 है है ना अब वहा पर जो सुख म वहां पर जो सुख मिल रहा है वो बाधित सुख है नित्य सुख नहीं मिल रहा है क्योंकि जो सेवा कर रहे हैं फिर जब अभी जब एक तिलक पूरा लग जाएगा फिर अगले दिन सेवा करेंगे उन्होंने कहा तो जब तक वो दोबारा सेवा नहीं करेंगे तब तक व परेशान रहेंगे ना अगली बार सेवा करने के लिए नित्य सुख नहीं है ना तो अल्टीमेट रिटी य पर मैं प्रश्न य पर मैं य पर क्लेरिफाई करना चाहता हूं जैसे की वहां पर यह बताया गया है जो नित्य धाम है वहा पर माया और काल का प्रभाव नहीं पड़ता है धाम मतलब जैसे समय है ना व पर माया ना माया है ना काल है मतलब वहा पर माया नहीं अब बात आती है कि वहां से जो सृष्टि की रचना होती है वह कृष्ण अपराध से ही होती है यह क्या है जहां पर माया का आवरण ही नहीं है जरा भी काल का आवरण ही नहीं है वहां पर कृष्ण अपराध कैसे हो रहा है बैकुंठ में कुंठा कैसे आ रही

01:36:22:06 है जो जिसका नाम ही है जहां पर कुंठा ना हो वहां कुंठा कैसे आ रही तो अपनी बात को जहां रखना है वहां कुंठा आ गई जहां नहीं रखना व माया का प्रभाव नहीं है य है ना तो प्रभु जी एक मेरा एक प्रश्न है जैसे कि राजेंद्र दास जी को महाराज जी को आप जानते होंगे विशिष्टा के वृंदावन के तो उन्होंने भी उनका भी थोड़ा मतभेद बार सुना था कि जी जो जब भगवान अवतार लेते हैं तो माया युक्त ब्रह्म मानते हैं आप उसको पूरा करिए पूरा सुनिए उसको कटिंग टिंग करके दिखाया गया था और देखिए मैं यह नहीं कह रहा हूं कि एक स्तर पर जाकर के बहुत 0.5 समथिंग समथिंग जो हमारे बड़े आचार्य उनके बीच में मतभेद है मगर हमारा जो धर्म है ब्रह्म को लेकर मतभेद है धर्म को लेकर मतभेद नहीं है और धर्म की के लिए धार्मिक रूप से हमारे आचरण एक जैसे हो ना कम से कम तो जो गुरुदेव बताते हैं अच्छा वो गुरुदेव को बहुत सम्मान करते हैं उनके वैसे वीडियोस भी है पॉजिटिवली वाले तो गुरुदेव यह

01:37:37:09 बताते हैं किई 97 इनसे मैच खाता है 98 इनसे मैच खाता है 99 से खाता है ठीक है इसको गुरुदेव ने कहा कि यह सत सता की क्रमिक अभिव्यक्ति है व्यक्ति के जीवन में आध्यात्म आता कहां से द्वैत से द्वैत से आता है पहली बार व ईश्वर के बारे में जानना शुरू करता है पहली बार वह अपनी मां को देखता है भगवान की पूजा करते हुए यह द्वैत है और खत्म कब होगा अद्वैत प जाता द्वैत से शुरू अद्वैत प पूरा बीच में विशिष्टा द्वैत तो यह क्रमिक अभिव्यक्ति है जैसे कि हम हमारा जो मार्ग है वो क्या है द्वैत पर चलना और दत पर चलकर प्राप्त क्या होगा अद्वैत इस बात को हम लोग कई बार बता चुके हैं ठीक है अब अन्य लोग भी है हम लोग किसी को ले ले और और शिवा जी मेरा एक प्रश्न यह भी है कि जैसे की अद्वैत में जैसे आपकी फिलॉसफी में जो अल्टीमेट रियलिटी है किसे मानी जाती है अच्छा क्याम अल्टीमेट रियलिटी किसे मानते हैं

01:38:53:26 मतलब सचिदानंद स्वरूप परमेश्वर को तो वो कौन है ब्रह्म है या फिर कोई मतलब नारायण है या फिर नारायण का व्यवहार में ना आ सकने वाला स्वरूप है देखिए इसमें क्या हुआ है भगवान ने एक जगह यह कहा है कि वो जो निराकार ब्रह्म है वो भी मेरे ही अधीन मेरे ही वो है मुझ पर निर्भर है डिपेंड है उसका यह मतलब निकालते हैं कि नहीं नहीं वो निराकार ब्रह्म पर वो है वो भगवान के सब वो है तो अब बात ये है कि भगवान कौन है भगवान श्री कृष्ण जो है वो हमारे जीवन में ब्रह्म का अस्तित्व सिद्ध करने के लिए कौन कौन है भगवान श्री कृष्ण जैसे काठ की लकड़ी है उसमें दाह क्षमता है मगर वह दाह क्षमता को अपना अस्तित्व प्रकट करने के लिए जब वह कहीं से भम भम भम भम जलने लगती है दिखाई देने वाला सगुण साकार स्वरूप होता है तब जाकर के व्यक्ति को पता चलता है इसमें दाह क्षमता है तो अपने अस्तित्व को मनुष्य के समक्ष सिद्ध करने के लिए अभिव्यंजना अभिव्यंजना संस्थान पर निर्भर है तो इस रूप से देखा जाए तो हमारे हम

01:40:09:03 जिधर खड़े हैं उस तरफ वो जो निराकार जो निर्गुण निराकार ब्रह्म का जो भी स्वरूप है व किस पर निर्भर कर रहा है भगवान श्री कृष्ण पर तो इसका मतलब ही बदल दिया गया उनकी गीता में जैसे कि कान है जो हमारी श्रवण शेंद्री हमारी कहां है कहीं शरीर के अंदर मगर ये चमड़े का कान है हम इसको फोकस करते हुए किसी के कान की ओर कोई बात कहते हैं है ना तो वो जो मूल है जो श्रवण इंद्री है वह अपने अस्तित्व के लिए किस पर निर्भर है चमड़े वाले प निर्भर है ना अपने अस्तित्व के लिए तो अभ व्यंजन किस पर निर्भर हुआ अ व्यंजक पर जो थोड़ा बहुत गुरुदेव की कृपा से जो उनका टूटा सुना है मैंने वो मैं बताने का प्रयास करता हूं ठीक है अब हम किसी और को ले ले प्रभु जी एक एक लास्ट सवाल मैं पूछना चाहूंगा पहले वाला अच्छा बस एक ये चीज की जो मैंने सुना है कि परम सत्य के जो है तीन स्वरूप बताए गए ब्रह्म परमात्मा और भगवान तो यह तीनों एक ही एक ही रूप के मतलब एकही एक ही चीज के तीन रूब हमारे वहार मेंब में आ सकने

01:41:24:06 वाला है तो सगुण साकार हो गया वही ब्रह्म वही ब्रह्म एक स्तर पर प्रति भाषिक सत हो गया तो व हो गया सगुण निराकार ब्रह्म और वही ब्रह्म जो प्राप्ति का विषय केवल व्यवहार में ना आ सकने का विषय वाणी का अ विषय वो हो गया जो है निर्गुण निराकार अब जैसे इसको बिजली के माध्यम से समझ लीजिए भागवत में दिया गया य वाला उदाहरण श्रीमद् भागवत में अंतिम 11 या बवे स्कं में दिया गया है क्या है और गुरुदेव भी देते हैं जो ऊर्जा है ऊर्जा के रूप में जो विद्युत है वो सब जगह व्याप्त है ऊर्जा मगर अभी जहां मैं बैठा हूं वहां पर ना तो वो मुझे झटका मार रही है विद्युतीय ऊर्जा ना ही मुझे दिख रही है ठीक है तो यह हो गया विद्युत का निर्गुण निराकार स्वरूप उसके बाद यही ऊर्जा उद्योग आदि करने पर तारों में प्रवाहित हो गई जो हमारे घर में वायरिंग होती है उसमें हित हो गई तो क्या हो गया अब वो उसको छुए तो झका मार देगी अब विद्युतीय शौक लग जाएगा ना तो झटका मार देगी मगर अभी भी वो दिख नहीं रही है तो यह क्या हो गया सगुण निराकार स्वरूप

01:42:39:14 और इसके बाद वही बिजली बल्ब के माध्यम से प्रकाशित हो जाएगी तो क्या हुआ सगुण साकार स्वरूप इसी तरह से भगवान के भी तीन रूप है एक है सगुण निर्गुण निराकार एक है सगुण निराकार और एक है सगुण साकार जी बताइए अल्टीमेट रियलिटी आप बता दीजिए कि क्या है आपके मतलब आप मानी जाती है अल्टीमेट रियलिटी ब्रह्म को मानते हैं परमात्मा को या भगवान को इनमें अंतर कहां है जब हम व्यवहार कर रहे हैं उनके लिए जैसे अल्टीमेट भूख कौन मिटाएगा कैलोरी या बर्गर बर्गर बर्गर मिटाएगा और मिल क्या रहा है बर्गर से आपको बर्गर से आपको मिल क्या रहा है कैलोरी कलोरी तो इनमें अंतर अंतर नहीं कर सकते तो अल्टीमेट रियलिटी जो बरगरी है वही आपकी भूख मिटा रहा है कैलोरी के रूप में ऐसे ही जो भगवान सगुण साकार है वही निर्गुण निराकार के रूप में आपको प्राप्त हो रहे हैं क्योंकि वह सगुण साकार होंगे तो आप प्राप्त कैसे करोगे बताइए अलग रह जाओगे ना अंदर घुसने का प्रयास करोगे तो सर मारोगे उनकी छाती है अंदर नहीं जा पाओगे विष्णु भगवान के है

01:43:54:19 ना ठीक है ठीक थय चलिए जय श्री राम जय तो आज की हम समाप्त करते हैं दो घंटे हो गए हैं फिर किसी दिन होते हैं लाइव जिनका ईश्वर जगत बनाता ही नहीं बनता भी है उनका ही ईश्वर श्री राम कृष्ण आदि रूपों में अवतार ले सकता है और यदि इस संसार के कण कण में ईश्वर नहीं है तो इसका अर्थ है कि उसकी सत्ता वहां पर उतनी नहीं है जहां पर वह स्वयं है और यदि उसकी सत्ता बराबर है हर जगह समान है तो फिर आपको मानना पड़ेगा कि वही हर हर जगह व्याप्त है और यदि वह हर जगह व्याप्त है तो जो उसका एक रूप दिख रहा है वो

01:44:56:14 क्या हो रहा है भाई आजा बेटा मेरे साथ लाइव बालक है बालक है बालक है पियूष पियूष और ये भव्य आदि अभी किशोर अवस्था में है किशोर अवस्था में होता है एक बार एक मेरे पिताजी ने मुझे एक वो सुनाया था उनका किस्सा कि एक पांडे जी थे पांडे जी तो उनको जो है शाम को फलदान में दहेज मिलने वाला था दो लाख रुपए नगद पुराने जमाने में तो जब नगद मिलने वाला था तो उसकी खुशी में सुबह पांडे जी जो मोटरसाइकिल पर बैठ के एक्सलेटर को मार घुमाए पड़े मार घुमाए पड़े उसको बिल्कुल एक्सलरेटर का कान मरोड़े दे रहे हैं बाइक का अच्छा उस समय मैं भी युवा था तो पिताजी ने जब ये किस्सा मुझे सुनाया था तो मैं उस समय यही कर रहा था पल्सर 220 थी तो उसको मार तेजी से भगा रहा था तो मेरे पिताजी ने कहा बेटा ज्यादा तरंग में ना हो तो किशोर अवस्था में जो होता है बालक बुद्धि होती है तो तरंग में रहता है बिल्कुल हर एक को पीछे छोड़ दूं सबसे आगे

01:46:11:14 निकल जाऊं ये इस बुद्धि से गाड़ी चलाते हैं कई बार तो ऐसा होता है कि बस जब भी बाहर निकली गाड़ी तो 100 पे कब पहुंचे 150 प कब पहुंचे तो कुछ ऐसे ही चल रही थी तो पांडे जी जो थे जिनको शाम को पिताजी ने किस्सा सुनाया कि पांडे जी को पांडे जी इसी तरीके से तरंग में थे और वह तरंग में क्या हुआ कि वह अपनी मोटरसाइकिल का एक्सलरेटर खूब उमेट रहे थे कान मरोड़े दे रहे थे उसका और उनके तरंग किस बात की थी क्योंकि साय काल को उनको फलदान में उनके बेटे का विवाह था तो फलदान में उनको दो लाख रुपए नगद मिलने वाला था हालांकि दहेज इत्यादि को इस तरह से लेनदेन के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होता दहेज का रूप होता है कि वो अपनी बिटिया को कोई उपहार स्वरूप कुछ दे वो होता है मगर वो पांडे जी का किस्सा है उसमें ऐसा हो रहा था तो अब क्या होता है कि पांडे जी जब मार एक्सलेटर जो है वह कर रहे हैं तो साय काल को वह जो है फलदान में उपलब्ध नहीं हो पाए वह पड़े थे उर्सला अस्पताल में कानपुर में एक उर्सला नाम का अस्पताल है सरकारी वहां पर उनकी दोनों टांगे ऊपर थी पांडे जी की और उसम प्लास्टर था उनको जो कोरी से नहीं लटकाया जाता टांग को तो ये तो पिताजी ने मुझे एक

01:47:26:14 सबक दिया कि तरंग में आकर के वही गुरुदेव कहते हैं कोरी भावुकता के वशीभूत होकर के कुछ भी नहीं करना है तो बालक है अभ यह सब उनकी उनका वो किशोरावस्था का उास है जो उनके द्वारा उन्हीं की द्वारा जो सिद्धांत है उन्हीं का खंडन उनसे करवाता है उन्हीं के द्वारा स्वीकार जो सिद्धांत जिनका वो सम्मान करते हैं उन्हीं का अपमान करवाता है और इस तरीके से अपनी बातों को प्रस्तुत करते हैं बालक बुद्धि से कि वो अपमान हो उन्हीं का ही भाई मुझे तो नहीं लगता कि शील प्रभुपाद ने आजा बेटा इस तरह से ये सब भाषा सिखाई होगी तो खैर ठीक है यथोचित कारवाही की जाएगी समय संसाधन होने पर इतना ही कहूंगा इनके लिए ज्यादा कड़ी कारवाई कर देंगे तो अभी किशोरावस्था है जीवन भी दुर्गति में चला जाएगा अन्य भाई हैं पर अभी लाइव नहीं करेंगे अब गोपेश्वर जी भी हैं आयुष जी भी हैं आयुष मिश्र जी आयुष मिश्र जी काफी देर से जुड़े थे तो इनको थोड़ा सा देख लेते इनका विषय अगर व हुआ आयुष मिश्र जी अपना कैमरा ऑन कर लीजिए गोपेश्वर जी आप फॉर्म भर दीजिए आपके साथ किसी और दिन हम लाइव में जुड़ेंगे है ना आभार आपका मगर अभी क्या है ना दो घंटे हो चुके हैं बात करते करते तो एक हमारी

01:48:41:20 भी सीमा होती है शरीर की आयुष मिश्र जी आप जो है अपना वो कर दीजिए कैमरा ऑन आयुष मश जी कैमरा ऑन नहीं कर रहे हैं गोपेश्वर जी आपसे हम किसी और दिन आप हमें लगता है कि स्कन से ही है है ना इस कन से है ना तो हम आपके साथ किसी और दिन रखते हैं नहीं है आप इसकन से आपके साथ हम किसी और दिन कर लेते हैं आप एक फम एक नंबर नोट कर लीजिए नाम जब होने वाला है चालू न तारीख से तो दिनांक तीन से नामजप अभियान नामा स्त्र शुरू कर रहे हैं उससे जुड़ने के लिए वैचारिक मतभेद के निमि चर्चा के लिए साप्ताहिक कक्षाओं से जुड़ने के लिए धर्म रक्षा अभियान से जुड़ने के लिए किसी भी प्रकार से वो करने के लिए आप ये 7483

01:49:52:21 उसम आप किसी भी मत को मानते हो भगवान की अगर पूजा करते हैं नाम जब हमारे साथ में करना चाह रहे हैं तो आप कर सकते हैं आप इस कौन से हो आप आर्य समाज से हो किसी से भी हो नाम जप यदि आप करना चाहते हैं हमारे साथ तो आप कर सकते हैं उसके लिए आप फॉर्म भर सकते हैं सारे जो पर परंपरा प्राप्त संप्रदाय वो तो है ही इसमें और आप नाम जप के लिए इससे जुड़ सकते हैं तो धर्म रक्षा के लिए वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा के लिए नाम जप के लिए और एक और

01:50:32:22 है हां धार्मिक कक्षाओं के लिए इन चार चीजों के लिए यदि आप हमसे जुड़ना चाहते हैं तो व करें इस नंबर पर 7483 18 69 और अब हम लोग अगली बार मिलते हैं आयुष जी आप अपना चेहरा नहीं दिखा रहे हैं और गोपेश्वर जी आप फॉर्म भर दीजिए हम लोग आपके साथ हो सकता है कल ही रख ले या आने वाले एक दो दिन में ही रख ले कोई बहुत लंबी टाइमिंग नहीं है अभी के लिए थोड़ा क्षमा चाहता हूं मैं आपसे जय श्री राम सभी को जय श्री राम आने के लिए धन्यवाद

01:51:21:16 और m

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Live 1:51:23 · 28 Sep 2024

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A · Live Live Discussion सत्यार्थ प्रकाश के अनुसार ईश्वर क्या है? #aryasamaj #s...
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