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00:00:02:03 शम तो सभी को जय श्री राम और हम लोगों का जैसा कि आज हमने अपने दर्शकों को समर्थकों को जो भी फॉलो कर रहे हैं हमारे चैनल्स को को बताया था कि आज कुछ इकन से जुड़े हुए लोग जो इकन से किसी ना किसी प्रकार से वैचारिक रूप से व्यवहारिक रूप से दूर हो चुके हैं तो वह आज हमारे चैनल पर आने वाले हैं और क्या क्या की जीवनी रही कैसे उनको क्या परेशानियां हुई या किन बातों को लेकर के उनका जो मत है वो एक नहीं है इस बारे में हम लोग डिस्कशन करेंगे मगर इससे पहले मैं अपने सभी जितने भी दर्शक है उनको मैं यह कहना चाहूंगा कि जैसे एक अभियान है कि जब कोई ब हो गया मुस्लिम हो गया या कोई क्रिश्चियन हो गया तो वहां से जब हम किसी को वापस लाते हैं तो उस अभियान को नाम दिया जाता है घर वापसी तो ये जो हमारे जो भटके हिंदू भाई हैं जो ब्रह्मा कुमारी रामपाल इस्कोन आ समाज इस प्रकार के जो अभी पिछले 100 डेढ स सालों में जो तंत्र भर कर के आए हैं सामने इस प्रकार के तंत्रों में जो फस गए हैं स्वामी

00:01:17:07 नारायण और भी कई है नाम जो मुझे अभी रबली याद नहीं हो रहे हैं तो इस प्रकार के तंत्रों में जो फस गए हैं वहां से अगर हम लोग किसी को शुद्ध परंपरा निष्ठ उसम लाते हैं विचार में तो उस अभियान को क्या नाम दिया जाए ये आप लोग सजेस्ट करिए आने वाले टाइम में आप लोग जिसके मन में जो जो नाम आता जाए वो हमें कमेंट के द्वारा बताते रहे तो हम इस अभियान को एक नाम देना चाहते हैं कि इस अभियान को क्या नाम दिया जाए वो हो सकता है जैसे समथिंग लाइक हम कह सकते हैं भटका हिंदू वापसी अभियान या इस तरह से पैटर्न हो सकता है इस अभियान को एक नाम देना है हमें तो सभी से आग्रह है कि व अपने हिंदु हिंदुत्व जागृत अभियान भी बोल सकते हैं हां कैसे वो उस चीज को हम लोग लाइमलाइट कर सकते हैं कि कोई विकृत धर्म के स्वरूप को छोड़ कर के शुद्ध धर्म के स्वरूप में वापस आ रहा है वो भले ही निंबार्क परंपरा में आ रहा है वो भले ही शुद्ध रामानुजाचार्य परंपरा में आ रहा है वो भले ही शुद्ध शंकराचार्य परंपरा में आ रहा है मगर वो शुद्धता में आ रहा है ये जो विकृत स्थितियां है जो तंत्रों के रूप में ख्या पित हुई है तो इनसे वो वापस आ रहा है है ना इस बारे में सभी अपने सुझाव दीजिएगा तो अभी

00:02:32:12 हमारे साथ सब कई लोग हैं विनय जी है पुणे से हैं विनय जी और दीपक जी और मिहिर जी भी है हमारे साथ तो सबसे पहले मैं चाहूंगा दीपक जी आप अपने बारे में थोड़ा सा बता दीजिए कि कैसे क्या है और आपका इस समय का क्या है अपने बारे में बताए जैसे कि मैं दीपक नाम तो है लिखा हुआ टाइटल में मैं 2016 में मतलब बहुत मतलब क्यूरियोसिटी रहता है जिज्ञासा रहता है जब भी मतलब बचपन से मेरे जो माता पिता है वो पहले से मतलब ये सत्संग वगैरह में जाते थे बट वो सत्संग में जाते थे किसी मतलब एक गुरु जीी है उनका नाम सतपाल जी महाराज आपने शायद सुना रहेगा तो उसम जाते थे तो वहां से जो मेरा भक्ति धीरे धीरे वहा से मेरा स्टार्ट हुआ था भक्ति जब मैंने 2016 में जब मेरा पवी जब खत्म हुआ पवी का एग्जाम तो मुझे लगा कि मतलब य परफेक्ट टाइम है मतलब और धर्म को जानना मतलब शास्त्र वगैरह का बात करते हैं तो मतलब क्या है हिंदू मतलब क्योंकि उसके पहले इतना इतना पूरा अवे नहीं था उसके बारे में इतना जागृत नहीं था मैं बस

00:03:47:22 सुनता था हिंदू हिंदू ू ना कुछ शास्त्र के बारे में पता था हा लेकिन भगवत गीता सुनने का मतलब ऐसा होता था कि और सुन और सुन मतलब लेकिन कहां से सुनू क्योंकि अभी जैसे हम लोग जो शहर में रहते मुंबई में तो वहां पर ऐसा जैसे कि आप देखेंगे धाम धाम वगर साइड में देखेंगे तो वहां पर आपको हर एक मठ मिल जाते हैं हर एक अलग संप्रदाय का ये मिल जाता है जहा पर आपको इ मतलब इजी हो जाता है आपको जो भी भक्ति वगर का पा मिल जाता है ब मुंबई जैसे य पर क्या होता है कि थोड़ा स्ट्रगल करना पड़ता है जल्दी मिलता नहीं है यहां पर तो उस टाइम पर उस टाइम पर य हुआ था मेरे साथ में जब 2015 में जब मे एगजाम मतलब एम अंतिम अंतिम एग्जाम का मेरा सेमेस्टर चल रहा था तो मेरा एक मित्र थे तो वो मित्र ने मतलब जो इकन का है हर सेंटर ता हर एक एरिया में तो फिर उनके जरिए मैं वहां पर गया था फर्स्ट सेमिनार मैंने अटेंड किया था वहां प तो एक्चुअली सेमिनार तो नहीं बोलते वो लोग प्रोग्राम बोलते उसको कि हर वीक में प्रोग्राम होता है तो फर्स्ट टाइम में जब वहां पर गया फिर एक ये अपने टेंपल के ब्रह्मचारी आए हुए थे वहां प तो जो भगवत गीता के जो भी भगवत गीता ता उसका को टाइटल ले लेते लोग उसके उसके इस पर डिस्कस

00:05:03:00 करते हैं वो मतलब भगवत गीता तो नहीं बोल सकते बस एक मोटिवेशन आप बोल सकते हो कि कैसा क्या मतलब डिवोशनल डिवोशनल ये क्या होता है तभी मेरा उससे मतलब फर्स्ट टाइम जब मैं गया तो मुझे अच्छा लगा अच्छा इसलिए लगा क्योंकि पहले तो मैं अवेयर था नहीं बट जब उनकी वाणी मैंने सुना तो मुझे अच्छा लगा कि हा नहीं बराबर हैय तो उस टाइम से थोड़ा मेरा वहां से स्टार्ट चालू हुआ वहां पर फिर जाना चालू हुआ हर वीक में फिर लेक्चर सुनता था हर एक हर एक वीक में अलग अलग ब्रह्मचारी आते थे मंदिर से और वो जो भी एक टाइटल प्रोग्राम का एक टाइटल होता था वो उसके ऊपर दो घंटा चलते थे प्रोग्राम फिर भजन होता था कीर्तन होता था फिर अच्छा लगने लगा फिर और थोड़ा डीप में गया मैं तो ये मेरा तो इंट्रोडक्शन पार्ट हो गया फिर उसके आगे तो और भी जानकारी है तो वो भी मैं आगे बताता आपको तो उसके पहला तो मैं एक बोलता जो महिर करके है ये मेरे से पहले आए हुए हैं इनको कम से कम लगभग सात से आ साल हो गया इनको हा मैं आपका परिचय ले लिया है हमने महर जी आप भी थोड़ा सा परिचय दे द अपने बारे में हा हा जय श्री राम जय श्री राम मैं मेरा नाम मिहिर पाठक

00:06:18:00 है और मैं भी मुंबई में ही रहता हूं और इसकन 2011 में मैंने जवाइन किया था पहले तो मेरे घर पर परंपरा जो थी वो अभी भी वही परंपरा है पंच देव की उपासना और मेरा ज्यादा करके लगाव जो ी गणेश जी और भगवान महादेव में तो मैं उनकी ही उनके जो जो भी है उनके व्रत है वही करता रहता था संकष्ट है ये सब तो और मुझे इच्छा थी की कुछ श्रीमद भगवत गीता के बारे में कुछ जान मुझे कुना शास्त्र का ज्ञान नहीं था बस सिर्फ ये है हम महादेव हमारे आराध्य है और श्री गणेश जी है उनको हम पूछते थे और रामायण महाभारत का बेसिक जो नॉलेज रहता है हर हिंदुओ को हम हमें भी था इच्छा थी हमें भी हमें जानने की इच्छा थी श्रीमद भगवत गीता के बारे में जाने तो हमारे हमारे एक मित्र थे तो उन्होंने मुझे बोला वो हमारे मतलब इतने हाय हेलो वाले दोस्त मतलब एकदम क्लोज नहीं तो उन्होने बोला मैं यहा पर जाता हूं स्न में कोई स्कूल था हमारा य प बो स्कूल है वहा प वो प्रोग्राम लेते यथ यूथ पिंग बोलते है ना य यूथ को मतलब प्रोत्साहित करते है इसके इसके लिएन के लिए उनकी

00:07:33:02 जो टीचिंग के लिए हमें पता नहीं था कि क्या हो रहा है तो हम गए वहां पर तो कीर्तन व सब हो रहा था और थोड़ जो श्रीमद भगवत गीता के कोई भी रैंडम कोई भी अध्याय है सातवा अध्याय हो या 18 अध्याय हो उसके ऊपर वो प्रवचन देते थे और हर बार मैंने एक चीज देखा है उन्होने 18 अध्याय का 66 नंबर का लोक है सर्वधर्म 6 तो वो जो उस लोग को हर बार बताते थे कि यही है इसका यही परम वही है इसम कुछ जाने योग्य दूसरा कुछ नहीं है तो हमें तो स्टार्टिंग में तो अच्छा लगा कि सब प्रसाद प्रसाद मिल रहा है डांस भी करते सब लोग हमें तो अच्छा लगा हम तो थोड़े सस गए बाद में धीरे धीरे हमें पता चला एक महीना हो गया उन्होने हमें बोला चलो उ जा रहे उ श्री कृष्ण म है वहा माधवाचार्य जी का है वहा पर हम जा रहे हैं तो आप भी चाए बहुत अच्छा है बड़ी बड़ी बोलते है ना लालच बोलते है ना गोलोक का वो सबका अरे बहुत पवित्र है आप आपका मतलब आगे का आपका मार्ग सरल हो जाएगा भक्ति में तो हम ठीक है हम चले जाएंगे जाते चलो जाते घर प भी परमिशन ली वो समय प हम

00:08:48:04 20 साल के थे तो गए कभी गए तभी हमारा वो समय प संकष्ट आया हमने कहा संकष्ट है हम संकष्ट करते है तो अरे तुम संकष्ट क्यों करते हो संकष्टी एक बार क्लियर कर दूं जो गणेश चतुर्थी का एक व्रत आता है बीच में अभी आके गया है कुछ दिनों पूर्व ही है ना जी हा हा जी तो संकष्ट करते थे तो हमने हम बोला लो थोड़ा नाश्ता कर लो हमें संकष्ट है तो संकष्ट के ऊपर हमारे बीच में आधे घंटे की बहस हो गई बोले की जो गणेश जी है वो डेमी गड है और तुम सुप्रीम पर्सनालिटी ऑफ गड हैड जो कृष्णा हो उनको तुम मानते हो उन उनके पास जा रहे हैं हम और उनको ही भजना है हमें ये तो मतलब ये स्टार्टिंग का ये सब है जो भक्ति जो स्टार्टिंग की है आप गणेश जी प्रसन्न हुए इसलिए आपको भगवान श्री कृष्ण के पास आपको भेजा है तो ये सब उन्होंने हमें बोला और हमें हम थोड़ी उनके बाद में भी आ गए कि हां हा सही है उन्होने बहुत बड़ा पूरा उनका वो मैप रहता है ना जो ये लोग के बाद ये लोग वसा वो रहता है पहले भूलोक है उसके बाद वैकुंठ लो उस ब्रह्म लो उसके बाद वैकुंठ उसके बाद साकेत लोग उसके बाद सबसे ऊपर गोता है उन्होने

00:10:03:09 सब ऐसा सब वो करा करा के बो सुप्रीम जो है वो भगवान श्री कृष् नहीं है तो हमें बाद में ला दिया हमने सम सं तो पहली बार ऐसा हुआ हम ऐसा ऐसा करना पड़ा हमें हमें पता नहीं था क्या हो रहा है पर हम थोड़ा उस समय इतना पता नहीं चला बाद में धीरे धीरे धीरे आगे हम आपको बताएंगे वैसा हमारा स्टार्ट हुआ और उनका जो रेगुलर प्रोग्राम था जाते उसम और आगे हम बाद में बताएंगे हमें क्या ऐसा लगा कि हम हमने ये छोड़ दिया जी जी मैं समझ रहा हूं जी विनय जी आप भी अपने बारे में थोड़ा बताते हम आपको साधुवाद देते हैं आप बहुत ही अच्छा कार्य कर रहे हो यह कार्य हम भी नहीं कर सकते य मुंबई में र आप इतना वहा सेना कर रहे हो सची में आपको बहुत बड़ा साधुवाद है जी जी आभार आपका और ये सब कृपा है गुरु गोविंद ग्रंथ की हम लोग निमित्त मात्र है विनय जी आप अपने बारे में बताएं कैसे क्या थोड़ा सा आपकी शुरुआत रही है आप सुन पा रहे हैं विन जी हा जी जय श्री राम सबको जय श्री हा जी मैं सुन पा रहा हूं मेरा मेरी आवाज आ रही है

00:11:18:28 जी आ रही है हा अटक रहा है शायद लाइव थोड़ा थोड़ा बी आपके य शायद नेटवर्क का प्रॉब्लम है क्योंकि हमारे पास क्लियर आ रहा है सब अच्छा आपकी जी आपकी आवाज आ रही है हमको क्लियर आप बोलिए मेरी आवाज भी अटक रही है आवाज थोड़ी सी अटक रही है जी हेलो अभी आप बोल अभी आप कुछ बोलिए तो हम आवाज आ रही है आप बोलिए

00:12:01:27 हां जी मेरा नाम विनय है पुणे से और मेरे को एक्चुअली 12 साल हो गए इकन 2008 से मैं इकन में हूं और मैं जब कॉलेज में था तभी मेरे एक दोस्त ने करवाया इस कन से और लेके गया टेंपल में तो बीच में रास्ते में मुझे बताया कि सबका बाप बैठा है व उधर जाना है तो मैं सोचा कौन कौन बाप बैठा है तो तभी मेरे को कुछ पता नहीं था तो इस इसकन में जो कृष्ण का मूर्ति है उधर उसने दिखाया कि ये हमारा बाप है तो ऐसे इंट्रोडक्शन हुआ फिर बाद में डायरेक्टली मेरे को माला पकड़ा दिया और बिठा दिया 16 माला करने के लिए और 16 माला पूरा होने तक वो मेरा दोस्त मेरे बाजू में बैठा रहा फर उसके बाद स माला खत्म होने के बाद वो मेरे को एक उधर एक ब्रह्मचारी रहते तो उनसे इंट्रोड्यूस करवाया फिर उन्होंने मुझे बताया कि आप हमारे होते एवरी संडे तो आते जाइए फिर प्रसाद होता है फीस्ट होता है बहुत बड़ा फिर फिर मैं बोला ठीक है आता हूं फिर ऐसे करते करते मुझे एक बात बहुत अच्छी लगी इसकन की वह है उनका कीर्तन उनका कीर्तन से मैं इतना अट्रैक्ट हो गया कि मैं उधर हमेशा जाता रहा कंटीन्यूअसली

00:13:17:24 तो कीर्तन ने मुझे खींच लिया इसन ने तो इस हिसाब से मैं कीर्तन करता गया फिर बाद में ऐसे ही बहुत सारे साल बीत गए फिर उसके बाद में जरा स्पिच मतलब भगवत गीता में घुसने लग गया फिर उसके बाद मुझे बहुत कुछ ऐसी ऐसी बातें पता पता चली कि इसकन में बोलते कुछ अलग है लेकिन गीता में कुछ अलग लिखा है तो यह मुझे खटक नहीं लगा तो ऐसे मैं उनको सवाल करने लग गया फिर फिर उसके बाद मुझे हमेशा हमेशा ये बोलते थी ज्यादा शास्त्र में घुसो मत तुम तुम्हारा दिमाग खराब हो जाएगा जितना प्रभुपाद ने बोला है उतना ही करो तो उनका सिर्फ एक ही स्टेटमेंट है फॉलो प्रभुपाद ओनली उनके जो सन्यासी है वह लोग भी यही बोलते कि रीड ओनली प्रभुपाद बुक्स डोंट रीड एनी अदर बुक्स तो जी ऐसे करके करके फिर मैं थोड़ी दिन के बाद फिर मैंने छोड़ ही दिया फिर इसन पूरा फ अभी मैं जैसे महाराष्ट्र पुना से हूं यहां पर वारकरी संप्रदाय है जैसे आपको पता है संत तुकाराम स संत ज्ञानेश्वर इन्होने इनके संप्रदाय में मैं ज्ञान प्राप्त करने लग गया और अचानक मे को एक गुरु मिल गए जो शंकर संप्रदाय से तो उनके

00:14:32:27 साथ मैंने बैठ के पूरी ज्ञानेश्वरी पढ़ली अच्छा और दास बध भी पूरा पढ़ लिया है तो और दो किताब पढ़ना बा बाकी था लेकिन मेरे गुने दे का अंत कर दिया अच्छा अच्छ चलिए ठीक है तो अभी ोड अच्छा इंट्रोडक्शन पार्ट हो गया है सभी का तो अभी एक बात यहां पर हम याद आई जैसे एक इन्होंने बात कही महीर जी ने और मेहर जी ने कहा कि आधे घंटे तक इस बात को लेकर डिबेट हो गई क्योंकि वह इस चीज के पीछे पड़े हुए थे कि आपको जो है य गणेश जी के व्रत में इंटरेस्टेड नहीं होना चाहिए संकष्ट का जो व्रत है ना तो और इधर आपने बात कही कि भाई आपको जो है और किसी की बुक्स नहीं पढ़नी चाहिए अब मैं यहां पर कोई पक्षपात नहीं रख रहा हूं मगर एक बात बता रहा हूं अगर आप प्रेमानंद जी से पूछे भगवत गीता किसकी पढ़ेंगे तो प्रेमानंद जी निर्विवाद रूप से कह देंगे साधक संजीवनी पढ़ लो जो गीता प्र छपती है जो जो

00:15:48:07 उसको उसके उसको लिखने वाले हैं जो स्वामी राम सुख दास जी वो उनके कोई परंपरा के नहीं है कि उनकी जो श्री हित हरिवंश की जो परंपरा है परंपरा उस परंपरा की नहीं है राम सुखदास जी मगर निष्पक्षता से न्याय पूर्वक बात वो करते हैं उन्होंने बोला कि आप जो है इनकी पढ़ लो अच्छा देखा जाए तो ज्ञानेश्वरी मा ज्ञानेश्वरी जो गीता है ज्ञानेश्वर महाराज की पुरी के शंकराचार्य जी पूछा जाता है कि प्रारंभिक अध्ययन कहां से शुरू करें तो गुरुदेव जगतगुरु शंकराचार्य व क्या कहते हैं कि ज्ञानेश्वरी गीता पढ़िए ज्ञानेश्वर ऑफिशियल ज्ञानेश्वर महाराज ऑफिशियल हालांकि उनका दिया हुआ ज्ञान शंकर संप्रदाय का ही है मगर ऑफिशियल वो लाइनेज में कहीं नहीं दिखते हैं उनका कहीं ऐसा कोई स्त्रोत नहीं मिलता है प्रामाणिक रूप से और दूर से उनको यह माना जा सकता है कि हां उनके द्वारा दिया जाने वाला ज्ञान भी क्योंकि अद्वैत वाला ही है तो वह मिलता जुलता है अच्छा जो तुलसीदास जी है वो गुरुदेव तीन जो है ग्रंथ प्रमुखता से बताते हैं ज्ञानेश्वरी गीता और

00:17:04:04 क्या कहते हैं रामचरित मानस और दासबोध इनमें से एक भी ग्रंथ ऐसा नहीं है जो प्रामाणिक रूप से शंकर संप्रदाय का ही हो के किसी शंकराचार्य ने लिखा हो एक भी ग्रंथ ऐसा नहीं है तुलसीदास जी रामानंद संप्रदाय के ज्ञानेश्वर महाराज उनका एक अपना अलग इतिहास और दासबोध समर्थ रामदास तो इनका जो ज्ञान है वह तो मैच खाता है जब यदि सत्यता का ज्ञान होगा गुरु गुरु का यह कर्तव्य होता है कि वह सत्य बताए अपने शिष्य को तो जब वह सत्य बता रहे हैं तो उनको इससे मतलब नहीं है कि यह जो समर्थ रामदास जी है शंकराचार्य थे कि नहीं थे तुलसीदास जी शंकराचार्य थे कि नहीं थे या ज्ञानेश्वर महाराज है शंकराचार्य थे कि नहीं थे क्या इन्होंने सत्य का स्वरूप बताया अपने गीता में तो इससे पता चलता है एक तरफ कहा जा रहा है सिर्फ इनके द्वारा लिखी हुई किताबें पढ़िए आप एक तरफ निष्पक्षता से यह बताया जा रहा है कि कहां-कहां से आपको सत्य प्राप्त होगा यह यह ध्यान र इस पर कोई ध्यान ना देते हुए कि जिनका हम नाम ले रहे हैं क्या ऑफिशियल वो लोग हमारे से जुड़े हुए हैं क्या उनका नाम लेने से हमारा जो

00:18:19:09 संप्रदाय है हमारी जो परंपरा है वही प्रचलित होगी वही प्रसारित होगी उसी का प्रचार होगा यह सब ध्यान नहीं दिया जाता है अच्छा एक चीज और आती है कि प्रभुपाद जी का भी नाम आया हमने आज तक अपने द्वारा कभी भी प्रभुपाद जी ही नहीं प्रभुपाद जी तो हमारे लिए सम्माननीय है किसी के लिए भी कोई भी अभद्र अमर्यादित अश्लीलता भरे शब्दों द्वारा कोई भी किसी के लिए संबोधन हमने आज तक नहीं किया बहुत सारे हमने वैचारिक ऐसे वीडियोस बनाए जिसमें कि हमने प्रश्न किया कि भाई ऐसा है तो ऐसा क्यों या यह है तो यह क्यों मगर हमने आज तक कभी भी ऐसा नहीं कि प्रभुपाद जी के विशेष रूप से आज क्योंकि स्न की बात हो रही है तो प्रभुपाद जी के लिए हमने आज तक ऐसा कोई शब्द उपयोग में नहीं लाया जिसको कि णा मूलक कहा जा सके मगर जब से जब इकन की तरफ से कोई प्रतिक्रिया मेंक कोई वीडियो बनाया जाता है हमारी तरफ तो उसमें इतने सारे अभद्र टिप्पणियां हमारे व्यक्तिगत लिए की घटिया निर्लज और तरह तरह से नाम बिगाड़ना शक्ल बिगाड़ना यह सब कुछ करने का प्रयास किया जाता है तो इसमें मुझे इतना आश्चर्य होता है कि भाई एक तरफ

00:19:34:15 तो यह परंपरा से अपने आप को बताते हैं वह सारी बातें अलग है कि परंपरा उनकी है कि नहीं है मगर क्या इस कोन में तैयारी कराई जाती है कि यदि आपकी शिक्षाओं पर आपके सिद्धांतों पर यदि कोई व्यक्ति प्रश्न कर दे तो उसको आप घटिया बोलो उसको आप निर्लज बोलो उसके उसके द्वारा जो मान्यता है ईश्वर के विषय में उसको आप घटिया बोलो उसके संप्रदाय को आप गट छाप बोलो यह सारी चीजें बोली जा रही यह सारी चीज तो मुझे आश्चर्य होता है कि इस इतनी निम्न लेवल की बातें करने वाले लोग अपने आप को परंपरावादी कैसे कहते हैं कैसे अपने आप को परंपरावादी कहते हैं जी दीपक

00:20:16:04 जी देखिए शिवान जी शीला प्रभुपाद ने जो भी किया है सरा नहीं है मतलब एकदम बेस्ट है मतलब जो बाहर गए उन्होने प्रचार किया ठीक है बहुत अप्रिशिएट है वो क्योंकि ऐसा करना मतलब एक दुर्लभ होता है कि बाहर जाक पा देश में जाके भगवान के नाम का हरि नाम का प्रचार करना ठीक है उसम कुछ मब उसम कुछ भी मुझे मतलब उस विषय में कुछ अगेंस्ट में बहुत अच्छा लगता है दूसरा चीज प्रेमानंद महाराज राजेंद्र दास महाराज का ज जब भी सुनेंगे तो वो क्या करते हैं वो बेस्ट बताते है प्रभुपाद को हमेशा उन्होने कभी उन्होने पता प्रभुपाद ने कितना बे काम किया सब किया अब ब वाले पता है क्या करते जहा पर प्र प्रभुपाद का नाम आ गया उसका शॉर्ट क्लिप बना देंगे देखो प्रेमानंद महाराज ने शीला प्रभुपाद का तारीफ किया देखो राजेंद्र दास राजेंद्र दास जी महाराज ने उनका तारीफ किया बट उसी जगह प आप अगर जो हमारे जो भी संत है उनका नाम लेंगे नहीं दे आर नॉट जेन वो वो जेनन नहीं है प्रभुपाद के साथ डिवटी कोई मिलेगा नहीं अरे मानते हैं उन्होंने स्ट्रगल किया संघर्ष किया भक्ति के लिए उन्होंने बाहर गए बट ऐसा नहीं है कि अगर जो जो हमारे धाम के जो हमारे धाम के जितने भी संत उन्होंने स्ट्रगल नहीं कि ऐसा नहीं है आज आज अगर वो

00:21:31:04 जिस पद पर बैठे हैं जिस यहां पर बैठे हैं वो तो उनका जो भी तजुर्बा है जो भक्ति में गए हैं उससे पूरा पता चलता है वो अभी प्रेमानंद राजेंद्र दास जी महाराज अभी जो अपने शंकराचार्य जी है वो खुद बोलते हैं कि जो वो जो लिमिटेशन में जो शास्त्रों का अध्ययन उन्होने जो किया है प्रॉपर उसके जैसा अभी संत जो मिलना दुर्लभ है वो प्रेमानंद महाराज के विषय में बोलते हैं राजें जी महाराज के विषय में बोलते हैं बट प्रभुपाद प्र प्रभुपाद के विषय में उन्होने शंकराचार्य है कुछ गलत नहीं बोलते वो भी सही बोलते व बाहर गए अच्छा मतलब जो भी कार्य किया अच्छे कार्य उने ब य पर क्या होता जो भी जो इनके शिष्य है जो भी डिपल है बारे में मेरी जानकारी है प्रभुपाद जी के बारे में वो ये है की उन्होंने क्रिश्चन को प्रभावित करने के लिए एक ताना बाना जो है बनाया है और मगर क्या है कि उसी सामग्री को यदि आप हिंदू को देने लगोगे तो जिस प्रकार को क्रश्न जिस प्रकार कोई क्रिश्चन उस सामग्री के द्वारा अपने मूल उसको अस्तित्व को त्याग कर हिंदू जम की तरफ प्रभावित हो सकता है उसी प्रकार

00:22:46:06 उसी सामग्री से कोई हिंदू अपने मूल अस्तित्व को त्यागकर क्रिश्चियनिटी की तरफ भी प्रभावित हो सकता है एक अगर ब्रिज अगर बनाया गया है क्रिटी से और हिंदू जम के बीच में तो जिस ब्रिज से कोई क्रिश्चन हिंदुत्व की तरफ आएगा उसी बृज से कोई हिंदू भी क क जा सकता है तो प्रभुपाद जी का उद्देश्य था इधर से इधर वाला है ना और अब क्या हो रहा है कि वह है नहीं तो दिखाई ऐसा दे रहा है कि हमारे हिंदू ही आडलज क्रिश्चियनिटी की ओ प्रभावित हो रहे हैं क्योंकि व व सारी सामग्री कई बार ऐसा इनके जो लीडर्स भी है वो भीय कहते बाहर के देशों में प्रचार करना था इसलिए ऐसा कहा गया ठीक है अच्छी बात है आप वही करो ना आप वही करो आप फिर उसको यहां क्यों ला रहे हो आप सेम सामग्री यहां पर क्यों दे रहे हो यहां की जो सामग्री जो पहले से हिंदू है उसको वो सामग्री क्यों दे रहे हो जो हिंदू बनने के लिए दी जा रही है ये कुछ क्वेश्चन आ जाते हैं खैर मैं अब इस प्रकाश डालने चाहूंगा कि आपको कैसे क्या हुआ जो आपके सामने जो है स् कन को लेकर के कौन सी ऐसी सच्चाई यां है

00:24:01:08 जिनके कारण आप आपके मन में वैचारिक मतभेद उत्पन्न हो वो आप कुछ प्रकार पहले पहली से जो चीज है वो एक है कि जलेबी बनाना बातों को मतलब एक एक ब्रह्मचारी कुछ अलग बात कर रहे है फिर वही हम दूसरे अगर ब्रह्मचारी से बात करते हैं तो वो बात अलग हो जाता है अभी जैसे कि मैंने फॉर एग्जांपल अभी मैंने हा हाल में मतलब पूछा था एक दो महीना हो गया रहेगा तो एक ब्रह्माचारी को मैंने पूछा कि जो बोलते हैं कोटी आपके पीछे से आवाज आ रही है दीपक जी मेरे पीछे से आवाज आ रही है एक्चुअली खाली है यहां प तो नहीं कुछ लोग बातें कर रहे हैं ना किसी के पीछे वो आवाज आ रही है अच्छा घर का शोर आ रहा है एक

00:24:56:10 मिनट हां शिवा जी जी हा तो अभी शिवन जीी मेरे साथ में मैं आपको बताता हूं फॉर एग्जांपल अभी मैंने जैसे एक हाल में पूछा था कोटी मतलब क्या होता है जब हमारा मतलब ऐसा मंथली में प्रोग्राम होता है ठीक है और कैंप वगैरह भी लेकर जाया जाता है तो मैंने कैंप में उनको पूछा था कि जो कोटी है कोटी शोर आ रहा है आपके पीछे से आपके पीछे से ही आ रहा है क्या घर पीछे तो नहीं है वो तो काफी दूर है किसी के पीछे से आ रहा है क्या शोर मेहर जी आपके पीछे शोर हो रहा है क्या बातें करने का कुछ

00:25:38:25 नट अब शोर बंद हो गया दीपक जी शायद आपके पीछे सेही क्योंकि आपने बंद किया ना माइक तो अभी आ रहा है अब नहीं आ रहा आवाज जोर से आ हा तो अभी अभी मेरा यह हुआ कि मैंने एक को पूछा कि कोटी मतलब क्या होता है ठीक है तो उन्होंने बताया कोटि मतलब होता है करोड़ बोला ठीक है करोड़ होता है एस पर मतलब जैसे उन्होंने बताया कि शीला प्रभुपाद ने बोला है कोट मतलब होता है करोड़ मतलब जो देवी देवता करोड़ देवी देवता ठीक है अभी सेम टेंपल के ब्रह्मचारी से मैंने फिर से पूछा कोट क्या होता है अभी वो क्या बोलते कोट मतलब होता है जैसे कि जो 12 12 देवी देवता बताते ना इतने रुद्र है इतने वासु है तो ये बताया उन्होने मैं बोला कि एक ही संस्था में है तो ये अलग-अलग क्यों मतलब बोलना है अगर आप जब एक ही चीज का पालन कर रहे हो अी मैं कोई चीज का पालन कर तो मुझे पता होना चाहिए वो चीज का क्या है बराबर अभी वो क्या करते हैं ये अलग बताएंगे आपको वो अलग बताएंगे तो यहां प बात पूरा जलेबी जले घूमता है मतलब यहां प मैं खुद कंफ्यूजन में कौन सही है ठीक है अभी जभी फिर मैंने य में सर्च मारा ठीक है सेम ब्रह्माचारी अलग-अलग बात कर रहे दो अलग-अलग ब्रह्मचारी मैं बोला इनका खुद कांसेप्ट क्लियर

00:26:54:00 है नहीं तो मेरे को पहली बात तो दिक्कत यहां पई अब दूसरी दिक्कत य ये हुई कि एक बार मैं गया प्रोग्राम में लेके इस मैं एक इस मैं एक चीज याद दिलाना चाहूंगा इसमें ऐसा होता है कि जब इनसे कोई भी क्वेश्चन बोलो यस और नो कुछ भी क्वेश्चन करो तो ये सारी बातें बोल देंगे यस भी बोलेंगे नो भी बोलेंगे सब कुछ बोल देंगे जिससे कि बाद में जब आए नहीं इसका ये राइट आंसर था तो हमने कहा तो था मान लीजिए हमने कहा जैसे एक से लेकर 10 तक के बीच में से कोई एक आंसर है तो ये क्या करेंगे सारी बातें बोल देंगे टू 3 4 5 6 7 8 9 10 अब उसके बाद हमने कहा कि भाई इसका आंसर था नाइन तो हमने बोला तो था नाइन हमने तो नाइन बोला था इन्होंने जो बाकी के बाकी की संख्या बोली वह गलत नहीं है इन्होंने जो नाइन बोला वो सही था जैसे अभी लास्ट में एक सज्जन आए थे ना एक तरीके से है भी और एक तरीके से नहीं भी है तो क्या हुआ सब कुछ बोल दिया और कुछ भी नहीं बोला जिससे कि बाद में जब हम यह कहे कि आपने मान ली थी अपनी नहीं मैंने कहा तो था एक तरीके से नहीं कर सकता और हम नहीं कर सकता पर जाएंगे तो बाद में बोलेगा नहीं मैंने कहा था ना कर सकता है जी आगे बताइए अपना कांसेप्ट क्लियर नहीं है आपने बोला था हां तो कांसेप्ट एक तो क्लियर नहीं होता है मुझे अभी

00:28:09:00 अभी सीन ये हुआ था कि मैं गया था गीता प्रेस गोरखपुर का भगवत गीता लेके उनके पास में तो मैंने पूछा प्रभु जी मतलब ये तो मैं पाट कर रहा हूं तो इसमें से मुझे सब आंसर मिल जाएगा ना मतलब अगर ये इसका पाट कर तो मेरा जो कांसेप्ट है क्लियर हो जाएगा तो मुझे बोला नहीं नहीं नहीं नहीं ये बुक बोनाफाइड नहीं है तुम कुछ भी मत पढ़ो या क्या पढ़ गीता प्र का आपको सिर्फ शीला प्रभुपाद का ही बुक पढ़ना है और उसम जब आप पढ़ोगे तो आपको परा कांसेप्ट क्लियर हो जाएगा क्योंकि एक तो आपको ट्रांसलेशन मिल जाएगा प्रॉपर्ली फिर हर एक ट्रांसलेशन का जो अनुवाद है जो जो भी मतलब श्लोक है व श्लोक के आपको अनुवाद पूरे मिल जाएंगे दूसरा आपको तात्पर्य है एकदम प्रभु किसने नहीं लिखा है तो आपको पढ़ना है बोला ठीक है अबन ये होता है कि मतलब मैं भी जाता था बुक डिस्ट्रीब्यूशन के लिए दिसंबर में लगता है बुक का मैराथन तो मैं भी उसम पार्टिसिपेट करता था अब मेरे एक बार मेरे मित्र ने मुझे पूछा तो तुम बोलते हो कि बुक जो शीला प्रपात का बुक है वो एज इट इज है तो मुझे ये प्रूफ करो एज इट इज मतलब होता क्या है मैं बोला जैसा का तैसा मतलब जैसा लिखा जैसा परंपरा में लिखा गया वैसे का वैसा ही मिलेगा आपको कुछ अलग नहीं है तो उसने उसने मुझे बोला चलो ठीक है दूसरे चैप्टर का नाम क्या है तो मैंने बोला दिव्य ज्ञान बोला दिव्य ज्ञान

00:29:24:06 कैसा हो गया दूसरे चैप्टर का नाम दूसरे चैप्टर का नाम तो सांख्य योग है तो एस इट कैसा हो गया यह परंपरा में कैसा तो को वहा पर थ डाउट लगा मुझे कि नहीं व तो बराबर है ए इट मतलब तोसे होना चाहिए अभी य पर सायोग का मतलब दिव्य ज्ञान हो गयाने थ टाइटल चेक किया मतलब जो हेडलाइन जो भी चैप्टर है उसका ज मैंने चेक करना चालू किया तो पता चला य लोग ने तो व वहा पर इसकी टोपी उसके स वहा पर पता चल पूरा अलग लिखा है अब जब आप अंदर जाते हो कमेंट्री पढ़ने अब उसम सबसे पहले तो डर है डर मतलब बोलते डर किसी में भी एक डर बिठाने का डर क्या बिठाने का अगर तुम्हारे पास ये जन्म है यह जन्म है तो अगर तुम जैसे शीला प्रभुपाद ने अपने बुक में लिखा है जो भी मुझे फॉलो करेगा मैं उसको बैक टू गड हेड लेकर जाऊंगा ये मेरा प्रॉमिस है जो भी 16 माला करना चाहिए चार नियमों का पालन करना चाहिए जो यह करता है जो भी मैं डिपल में मैं मैं खुद आके उसको गोलो धाम लेकर जाऊंगा एक तो पहला दिमाग में आ जाता कि भाई इतना तो हम लोग डेली कर तो अभी सबको तो एक रहता है ना कि बा कौन सा किसको जन्म लेना है य प एक जन्म में इतना टेंशन है तो किसको लेना है तो डर बै जाता है दूसरा कैसा

00:30:39:16 अगर तुम इसकन डिवटी से हट के रहोगे अगर तुम किसकी बात सुनोगे तो तुम पूरे मायावादी हो तुम पूरा माया के जाल में फस गए हो इसलिए तुमको इकन डिवटी के साथ हर दम असोसिएशन में रहना है अभी उनका ए बी सीडी है ए बी सीडी का कांसेप्ट है ए मतलब एसोसिएशन बी मतलब बुक रीडिंग बुक डि कौन साला ओनली शीला प्रभुपाद का बुक डिंग सी मतलब चैटिंग और डी मतलब प्रभु डांसिंग ये चार हो गया ठीक है अभी इसमें क्या रहता है अभी एक तो दिक्कत क्या होता मुंबई में आपको बताता हूं कि बाकी तो मतलब यहां पर इतना कोई मट है नहीं कोई भी मतलब कोई संप्रदाय रहेंगे ऐसा नहीं है बट जहां पर हम लोग जिस जगह पर रहते है उस जगह पर ऐसा कोई मतलब है नहीं तो हम लोग क्या लगता है नहीं टेंपल बराबर है यहां पर डिवटी का असोसिएशन मिल रहा है दूसरी बात डिवटी हर दम कांटेक्ट में रहते कुछ भी डाउट हो गया तो उनको पूछ सकते है तीसरी बात उनके साथ उनके साथ जितना क्लोज में रहेंगे तो और भी मतलब और भी भक्ति में प्रोत्साहन मिलेगा और भी आगे बढ़ने का मतलब म भटक नहीं एक तो यहां प ये चीज होता है अब तीसरा चीज य होता है ये सारे चीज में चौथ चीज में आके फसा देते फसा देते पूरा जलेबी एक जगह बोलते ऐसा करना चाहिए और दूसरी जगह पर बात घूम जाता है इनका ऐसा नहीं करना चाहिए ठीक है अ ये क्या बोलते है एक

00:31:54:20 जगह प तुमको ना वेदों का का अध्ययन करना चाहिए और तुमको शास्त्र पढ़ने चाहिए ठीक है ये इनका पहला पॉइंट अब दूसरे पॉइंट में क्या बोलते है अरे प्रभु शास्त्र मत शास्त्र पढ़ोगे तो आपका मतलब जो जन्म है वो 60 70 साल का है आप इतना शास्त्र अगर पढ़ोगे तो आपसे तो होगा नहीं आपको सिर्फ प्रभुपाद ने जो बोला है सोला माला करना है एक तो वो आपको करना है सोला माला और दूसरा एसोसिएशन में ही आपको रहना है और जो बताया जा रहा है मतलब जो सीनियर डिवटी हमारे जो सीनियर डिवटी है जो हमको बता रहे उनके आज्ञा में रहके करना है मतलब अपना बुद्धि मत लगाओ आप अगर आपको आपका बुद्धि भी लगाना है तो आप यूज मत करो मतलब आप रंग हो आपको उसके पहले ये लेना पड़ेगा आपके सीनियर से परमिशन लेना पड़ेगा बुद्धि लगाने का भी अभी मेरे साथ में क्या होता है जो मेरे अभी जो मेरे अभी जो मेरे सीनियर थे मेरे सीनियर थे वो क्या मुझे क्या बोलते थे अरे तुम यहां पर जा रहे हो तो यहां पर ऐसा मत जाया करो तुम बिना तुम बिना सला के कैसे जाते हो तुम डायरेक्टली भक्ति ऐसा करोगे तो भक्ति कभी भक्ति जो होता है वो वो सीनियर डिवटी के शेल्टर में जाके होता है तुम अपना मन मानी करोगे तो तुमरा भक्ति कैसा होगा तुम तो माया में फस जाओगे और माया इतनी प्रबल है कि तुम थोड़ा भी बाहर गए तो

00:33:09:25 तुमको खींच लेगी तो इसलिए जो भी तुम करो अगर तुमको समझो फॉर एमल हमारे यहां पर ऐसा बोलते हैं अगर तुम वृंदावन धाम जा रहे हो तो तुम अकेले नहीं जा सकते उसके पहले तुम्हें सीनियर डिवटी का परमिशन लेना पड़ेगा वृंदावन धाम जाने का कोई भी धाम जाने का आप ऐसे नहीं जा सकते अगर वो बोलेंगे कि हा जाओ तो आपको जाना है नहीं तो आपको पाप लगेगा पाप क्या लगेगा क्यक जो जैसे मैंने पूछा था प्रभु वृंदावन में जा सकते है नहीं नहीं नहीं वृंदावन में ऐसे कैसे जा सकते है जब त तुमको राधा रानी बुलाएंगे नहीं जब तक तुम सीनियर डिवटी से पूछोगे नहीं तो ऐसे कैसे जाओगे और ऐसे जाना मतलब सबसे बड़ा सबसे बड़ा तुम गलत कर रहे हो मतलब तुम माया भटक जाओगे और भक्ति ना इतने भक्ति इतने जल्दी करना नहीं मतलब इतना इंक्रीज नहीं करना चाहिए उसका लेवल अगर तुम जितने ज्यादा लेवल इंक्रीज करोगे तो माया देवी तुमको नजर में रखेगी और तुमको नजर में रखेगी तो तुमको खींच लेगी तो तुम्हारा भक्ति जैसा बढ़ रहा है ना वैसा खींच के नीचे आ जाएगा तो ये डाउट रता था मैं बोला नहीं बराबर क कसा कहीं कहीं ऐसा से होता था कि नहीं मैं भक्ति कर तो आज ये प्रॉब्लम आ ये समस्या आया तो शायद मैं ज्यादा भक्ति कर रहागा इसलिए आ गया एक तो ये कंफ्यूजन होता था फिर दूसरे पॉइंट में क्या बोलते थे कि थोड़ा मंदिर आया करो थोड़ा डिवटी डिवटी से एसोसिएशन किया करो थोड़ा भक्ति बढ़ाओ मतलब कन्फ्यूज तो मैं

00:34:24:28 ये हो रहा हूं कि भक्ति ज्यादा करू कि कम करू कि नहीं करू मतलब करना क्या है अगर मैं ज्यादा करता हूं तो दिक्कत है अगर मैं कम करता हूं तो दिक्कत है अगर मैं इनसे संपर्क में ता तो दिक्कत है मुझे करना क्या है एक तो पूरा ये भा ठीक है फिर धीरे धीरे जानना चालू किया मतलब और भी जब थोड़ा वीडियो देखना चालू किया और भी लोग से जब मिला जैसे मेरे एक फ्रेंड ने बोला देख यहां प एक तो कैसा है ना अगर तुम अपने सीनियर डिवटी से पूछोगे नहीं तो वहां पर वैष्णव अपराध मतलब यहां पर य प डर बट गया ना पूरा अभी वैष्णव अपराध कौन करना चाहेगा वैष्णव अपराध कोई नहीं करेगा अगर आप उनसे थोड़ा भी अनबन होता है सीनियर से तुमने वैष्णव अपराध जाओ अब तुम्हारे आगे सा देखो क्या होगा तुम तुम तुमने जो शीला प्रभुपाद ने जो वैष्णव बनाए थे तुम उनका अपमान कर रहे हो वैष्ण मतलब क्या होता है तो एक डर रता था कि नहीं बराबर है इनका भी बराबर है अगर ये मतलब इतना अपराध हो रहा है और मतलब मेरे साथ तो हुआ है मैंने मतलब मैं तो प्रैक्टिकली प सेवा में रहता था तो मैं जब जवाइन किया तो जो भी सेवा का कार्य होता था यहां प जाना कांटेक्ट करना डेटा बेस लेना बुक प्रीचिंग करना तो मेरा वो सब कार्य होता था अब उसम क्या होता था कभी उनको समझो नंबर दिया नहीं डेटा बेस जो मेरे पास कलेक्ट हो थे नंबर दिया नहीं तो उसम क्या होता था वैष्णव अपराध ये वैष्णव अपराध तुम कर रहे हो ऐसा नहीं होना चाहिए तुम्हा तो ये पूरा डर बट गया था मेरे अंदर मतलब अगर इनका संगत

00:35:40:01 में छोडूंगा तो मतलब मैं इनका अगर संगत छोड़ता हूं तो फिर भक्ति मेरा मिलेगा नहीं फिर मैं वापस से भटक जाऊंगा वापस से माया में आ जाऊंगा तो एक डर रहता था मेरे साथ तो मैंने पूरा इसके साथ कंटिन्यू मतलब कंटिन्यू उसके साथ मैंने जारी रखा था बट काफी सारी चीज मतलब काफी सारी चीज होने लगी जिसकी वजह से से फिर थोड़ा और डीप में मैं गया कि मतलब फिर पता मतलब बहुत सारी चीज पता चले जैसे कि ये पता चला कि जो एक मिनट एक मिनट थोड़ा मीर जी मीर प्रभु आप थोड़ा कंटिन्यू कर करो एक मिनट बस देना मुझे जी जी मिहीर जी आप आप बताएं कैसे आपको क्या ऐसी चीजें हैं जो जिनके कारण आप एक निर्णय कर पाए कि भाई यह जो जहां मैं जुड़ा हुआ हूं यह ठीक जगह नहीं है और कहीं ना कहीं ये हमें जो है जो शुद्ध सनातन वैदिक कार्य हिंदू धर्म है उससे दूर ले जा रही

00:36:33:06 है आपकी आवाज नहीं आ रही एक मिनट माइक चालू करो माइक मैं करता मैं करता हूं एक मिनट जी मर जी बोलेर जी आपने अपना माइक ऑफ किया है क्या आपकी आवाज नहीं आ रही चालू नहीं

00:37:07:15 चालू आ कंटिन्यू मेरा करता अभी आप पूरा कर लो हा अभी दूसरा दिक्कत य होता था मुझे मेरा एक कांसेप्ट क्लियर नहीं हुआ है पर श्रीमद भागवत के हिसाब से मतलब मतलब मैंने बचपन से तो जो विष्णु जी थे विष्णु जी से विष्णु जी से काफी सारे मेनिफेस्टेशन मतलब उन्होंने अलग अलग फॉर्म लिए जैसे की परशुराम का फम परशुराम भगवान का फॉर्म लिया है राम जी का फॉर्म लिया है रा फर्म लिया है तो मैंने मतलब बचपन सुनता कि विष्णु जी ने फर्म लि अब य पर ठीक है भगवान वो भगवान है वो कुछ भी कर सकते है उसम कुछ ये नहीं पुराण भी तो झूठ नहीं बोलते ये भी ठीक है यहां तक मेरा कांसेप्ट है कि भगवान कुछ भी कर सकते है जो उनका मर्जी है मतलब वो संकल्प मात्र से जो भी चाहे वो कर सकते है अभी यहां पर इशू क्या होता है मुझे जो विष्णु है जो विष्णु है वो पूर्ण नहीं है पूर्ण नहीं है क्यों क्योंकि वो कृष्ण जो कृष्ण है उनसे उनका मेनिफेस्टेशन उ उनसे उनका फॉर्म आया ठीक है येय ये 2.2 के अनुसार बोल रहे हैं भगवत गीता में भगवत गता के अ

00:38:22:22 भगवता 2 में कहा गया है कि जो विष्णु है वो पूर्ण ऐश्वर्य वान नहीं है नहीं है नहीं है क्योंकि क्योंकि जो कृष्ण है कृष्ण कृष्ण से भी तीन नारायण निकले हुए एक एक तो बोलते है शिरो दक्षा विष्णु गर्भ दक्षा विष्णु और महाविष्णु ठीक है तो अभी यहां पे मुझे पहली बात तो कांसेप्ट क्लियर हो कि ठीक है नारायण है वो तो अलग-अलग फॉर्म मतलब सेम मतलब जो नारायण है तो सेम है ना उसमें अभी क्या भेद अभी वही अभी वो अपना शिव रूप ले ब्रह्मा रूप ले तो उनका फॉर्म है अभी उसमें मैं अपना बुद्धि क्यों लगाऊ मुझे इतना पता है कि नारायण का मुझे सेवा करना है अभी बट यहां पे क्या होता है नहीं जो राम है ना वो भी इनके फॉम है कृष्ण के तो कृष्ण कौन है सुप्रीम पर्सनालिटी ऑफ ग ठीक है सुप्रीम कोई कोई दिक्कत नहीं अब दिक्कत क जो विष्णु है वो पूर्ण नहीं है उनके पास जो कृष्ण के पास जो भी 64 कलाए है व विष्णु जी के पास नहीं है पूरी कला ठीक है अब पूरी कला नहीं तो इससे अभी पहली बात तो इससे दिमाग में मतलब पहली बात तो दिमाग में य होता है कि मतलब जो हमने बचपन से सुना होआ है कि जो विष्णु है अलग-अलग अवतार के माध्यम से अलग-अलग अपना लीला करते हैं ठीक है अब यहां प पता चला है ठीक है कृष्ण में से विष्णु विष्णु जी का जो फॉर्म है कृष्ण

00:39:37:24 में से आया ब दिक्कत यहां पे है कि इसमें भी जो भगवान का फॉर्म है वो एक लिमिटेड है मतलब अनलिमिटेड नहीं है लिमिटेड है लिमिटेड मतलब जैसे महाविष्णु है तो महाविष्णु जो उनका सिर्फ काम क्या है जो सृष्टि मतलब जो सृष्टि का उत्पत्ति वगैरह होता है अलग अलग जो ब्रह्मांड है सि उसका कार्य कर स मैं इसको थोड़ा समझ क्लेरिफाई कर दूं आपका कहने का मतलब यह है कि वो विष्णु कृष्ण से निकले हैं यह तो चलो एक बार को मान भी सकते हैं मगर एट द सेम टाइम विष्णु लिमिटेड भी है वो कृष्ण के समान सर्वशक्तिमान नहीं है नहीं है नहीं है नहीं तो एक तो यहां पे मैं बोला कि ठीक है वही मतलब सेम नारायण है उनका सेम फॉर्म है सेम जो भी परब्रह्म उनको मतलब कहा जाता है तो फिर लिमिटेड कैसे हो गए तो यहां पर तो एकय आ गया तो मैंने एक जो सीनियर मतलब सीनियर वैष्णव थे उनको मैंने पूछा कि प्रभु ये कैसा तो उन्होने बोला हां बराबर है तुमने जो सुना ना तुम पहला सुनते थे कि जो विष्णु में सबया तो ऐसा नहीं है श्रीमद् भागवत क्या बोलता है कि जो कृष्ण में से बाकी सारे फॉर्म कृष्ण में से तो ये सही है और फिर जो शिवजी है जो बलराम जी है बलराम जी तो बलराम जी में से शिव जीी आए शिवजी का जो उत्पत्ति बलराम जी में से हुआ तो मैं बोला कि ठीक है मतलब हो सकता है क्योंकि इतना तो

00:40:53:07 शास्त्र मैंने पढ़ा नहीं था मैंने मान लिया अब धीरे धीरे ये पता चलने लगा एक बार तो बोलते कि जो विष्णु है मतलब प्रभुपाद लिख रहे प्रभुपाद के जब श्रीमद् भगवत गीता पढ़ेंगे तो बहुत जगह पर उन्होंने ऐसा वर्णन किया जो विष्णु है ना ही द सुप्रीम ठीक है सुप्रीम बट थोड़ा जब आगे जाके पढ़ेंगे ना तो उसम क्या आता है उसम ये आता है कि जो कृष्णा है ही सुप्रीम पर्सनालिटी ऑफ गड विष्णु है वो लिमिटेड फॉर्म में है उनको जितना कार्य दिया गया वो उतना ही करेंगे उसे आगे नहीं करेंगे ठीक है मतलब यहां पर क्या होता है कला की कला की बात करते वो 64 जो गुण है वो कृष्ण में है बाकी किसम भी नहीं बाकी जो विष्णु वगैरह है उनमें कम है फ राम जी उम 60 है मतलब जो भी है अभी जितना क्लियर उना बता रहा आपको तो ये तरीके से फिर मतलब बात होता है तो य पर आता मतलब अभी भी मैं प्रॉपर जगह पर हूं की नहीं हूं क्योंकि मैं य पर भटक रहा हूं य इसलिए भटक रहा हूं कि भगवान में भी भेद कर रहे अ जब मेरे प्रीवियस क्लास में गया था तो वहा उन्होने बताया जो विष्णु है ना तो लिमिटेड ही है तो विष्णु में इतने गुण है कृष्णा सुप्रीम पर्सनालिटी ऑफ तो मतलब यहां पर मेरा दिमाग जलेबी जै आपरा अभी शब्द सुन रहे तो आपको ल जलेबी जलेबी क्या घूम रहा हू तो मैं खुद घूम रहा हूं

00:42:08:09 जलेबी में जलेबी में घूम रहा हूं क्योंकि अभी तक मुझे ये क्लियर नहीं कना यहां पर एक दो चीज सामने आती है जब कृष्ण अंतिम रूप से जो कृष्ण भगवान है वह अंतिम स्वरूप है भगवान का तो फिर जब हम यह कहते हैं कि द सुप्रीम पर्सनालिटी ऑफ गॉड हैड यानी कि जो श्री कृष्ण है इसका मतलब क्या बताया जाता है आप थोड़ा सा बताएंगे इसका एजेक्ट मीनिंग क्या बताया जाता है हिंदी में हिंदी में तो कृष्ण मतलब तो सर्वा आकर्षित ल अट्रैक्टिव सुप्रीम पर्सनालिटी ऑफ गड हैड इसका हिंदी अर्थ क्या बताया जाता है हिंदी अर्थ तो य है कि जो मतलब ऐसे मैं आपको बोल सकता हूं जो भवान

00:43:03:24 स्वरूप सर्वच स्वरूप यानी कि अभी भी भगवान का जो मूल स्वरूप है वो खुद ही इस लाइन से बाहर निकल रहा है सुप्रीम पर्सनालिटी ऑफ गॉड हैड यानी अभी भी यह कहा जा रहा है कि एक जो प्राप्त वाला स्वरूप है भगवान का जो व्यवहार में नहीं आ सकता है वो स्वरूप जो है अभी भी इस लाइन से ही क्लियर हो रहा है कि जो भगवान श्री कृष्ण है डायरेक्ट वो गॉड उनके लिए नहीं कहा जा रहा है उनके लिए कहा जा रहा है कि सुप्रीम पर्सनालिटी ऑफ गॉड हैड तो इसमें भी एक वो आ रहा है जो आपको ध्यान आप अगर ले जाए तो उनका एक मूल स्वरूप और भी है जो अंतिम स्वरूप अगर हम कृष्ण को मानेंगे तो हम केवल यह कहेंगे कृष्ण इज गॉड है ना मगर हम यहां क्या कह रहे हैं सुप्रीम पर्सनालिटी ऑफ गॉड हैड मतलब अगर जो गॉड हैड है जो गॉड है उसकी जो सबसे सुप्रीम पर्सनालिटी हो सकती है वो कृष्ण है ना यानी कि अभी भी हमने भगवत तव का एक ऐसा स्वरूप मान रखा है जो भगवान का जो सगुण साकार स्वरूप है उससे थोड़ा भिन्न है जो व्यवहार में आ सकने लायक नहीं है व्यवहार में

00:44:18:24 आ सकने लायक स्वरूप को हमने कृष्ण के रूप में स्वीकार किया है इस कन के अनुसार तो ये चीज है दूसरी चीज आप बात कही कि जो वहां यह कहा जाता है कि विष्णु जी भी वो नहीं है पूर्ण नहीं है तो इसके बारे में उनके पास एक कुछ सामग्री है वो मैं आपको ध्यान दिला दूं वो यह कहते हैं जब वह विष्णु और राम में भेद करते हैं विष्णु राम और कृष्ण में भेद करते हैं तो वोह यह कह देते हैं कि यह तो हम लीला की दृष्टि से कह रहे हैं रस की दृष्टि से कह रहे हैं क्यों क्योंकि अगर यह लीला और रस की दृष्टि से नहीं होगा तो फिर उन्होंने तो एक जगह यह भी कहा है ना कि यह तीनों एक है है ना यह तीनों एक है उन्होंने कहीं कहीं पर लिखा है कि इनमें कोई अंतर नहीं है जो अंतर है लीला की उससे अंतर है विष्णु राम और कृष्ण में ठीक है यही चीज तो व्यास जी ने भी लिखी है उन्होंने कहीं पर विष्णु को कहीं पर शिव को बड़ा छोटा किया रस की दृष्टि से लीला की दृष्टि से मगर एट द सेम टाइम उन्होंने भी तो लिखा एक जगह कि ब्रह्मा विष्णु महेश में अंतर नहीं है ब्रह्मा विष्णु महेश में अंतर करने करना पाप है तो अपनी चीजों को

00:45:34:03 सही करने के लिए कि हमने भेद नहीं किया हम भेदवाद नहीं है हरि हरि में उसके लिए तो इनका प्रमाण ले लेंगे कि देखिए शीला उपाद जी एक भी कह रहे हैं मगर व्यास जी जब एक कह रहे हैं तो कह रहे हैं यहां व्यास जी ने झूठ बोला है व्यास जी झूठे हैं व्यास जी झूठे हो सकते हैं मगर प्रभुपाद जी झूठे नहीं हो सकते है ना बकुल सोचने सोचने वाली बात तो मेन ये है कि जो व्यास जीने जो बाकी पुराण लिखा है बाकी पुराण में भी भेद है इनके बाकी पुराण में भी भेद जो जैसे 18 पुराण जो है उसमें से ये क्या कहते हैं अगर आप कैटेगरी इज करोगे 18 पुराण को तीन में मतलब छह छ का पुराण लोगे आप तो इसमें भी इनका कैसा है एक सतोगुण में आता है एक रजोगुण में आता है एक तमोगुण में आता है ठीक है जो सतोगुण में है जो सतोगुण में है तो उसको श्रीमद् भागवत बोलते हैं ठीक है जो तमोगुण में है उसको बोलते शिव पुराण मैं बोला मतलब अभी इन अगर इस विषय परर आप चर्चा करेंगे उनसे तो क्या बोलते है कि एक बावड़ी का बच्चा रहता है अगर उसको दवी का बुक दे देंगे पढ़ेगा क्या वो तो बसली बात नहीं पड़ेगा वो कक उसका बुद्धि का पहली बात तो विकसित हुआ ही नहीं तो कैसा पड़ेगा वो ठीक है तो ये उसका

00:46:49:07 एग्जांपल देख क्या बोलते बराबर तो वैसा ही जो एक बालक है वो अपना धीरे धीरे मतलब भक्ति में धीरे धीरे गु तो कैसे गु करेगा पहला गणेश भक्ति करेगा पहला शिवजी भक्ति करेगा पहला जो भी अन्य देवी देवता है उनकी भक्ति करेगा जब उनकी भक्ति करेगा तो क्या होगा कि वो उसको प्रेरणा देंगे आगे का आगे बढ़ने का आगे जो आगे का पा कौन सा है हरि ठीक है तो इसम क्या होता है य पर क्वेश्चन य उठ जाता है यदि ऐसा है तो जबन की शिक्षा किसी को दी जा रही है भागवत की शिक्षा तो क्या यह चेक किया जा रहा है कि यह तमोगुण है या रजोगुण है चेक तो नहीं किया जा रहा सबको इक्वल से बांटी जा रही है है ना जबकि वो तो हायर लेवल की शिक्षा है तो आप कोई वो डिटेक्टर मशीन होती है ना जिससे लाइट डिटेक्टर होता है उस टाइप का कुछ चलते हो क्या साथ में इसका पहले वो डिटेक्ट किया किय सतोगुण है कि रजोगुण है तब हम इसको भागवत देंगे तब तो आप तो बिना देखे दे रहे हो दूसरी बात ये है यदि भागवत सतो रजो गुणी लोगों के लिए नहीं है तमो गुणी लोगों के लिए नहीं है तो आपको यह मानना पड़ेगा

00:48:04:14 कि भागवत जो है वह सनातन शास्त्र नहीं है क्योंकि वह देश काल परिस्थिति से प्रभावित हो रहा है है ना अच्छा मैं अब थोड़ा सा आपसे वो लेना चाहूंगा क्योंकि हमारे दो और मेहमा बैठे हुए अतिथि गण तो विनय जी आप अब बताएं आपकी जो क्या है यात्रा विनय जी का शायद नेटवर्क का कुछ इशू चल रहा है मे जी आप बताए आवाज आपका ब्लूटूथ शायद आरही क्षमा चाहूंगा नेटवर्क बलट सबका प्रॉब्लम है पहली बार तो मेरा सबसे पहला जो था की यहां पर कुछ गड़बड़ है वो था हरि हर भेद जैसे कि इकन हमारे यहां पर जो इकन है वहां पर नाइट स्टे भी होता है तो हम एक बार दो कहां पे हम मुंबई मुंबई में हम मुंबई से है मुंबई में हमारे दो स्कन एक है राधा गोपीनाथ टेंपल और एक है राधा राज बिहारी झूम है आपको हमने नाम सुना झू तो हम राधा गोपीनाथ से जुड़े हुए हैं

00:49:19:20 वहां प तो वहां पर नाइट डे भी होता है हम एक बार नाइट डे के लिए गए मॉर्निंग में मंगलारती रहती है प्रात काल चार बजे की मंगला आरती रहती है तो वहा पर स्टे करना रहता है तो स्टे करते हैं बाद में वहा पर सबको सो माला जप करवाते है स्टे करते आरती होती है उसके बाद सो माला जप करवाते हैं तो सोला माला जप करने के पहले आरती हो जाती है उसके पहले 10 नाम अपराध की श्रेणी आती है 10 नाम अपराध इसम जो उसम 10 नाम अपराध में हरि हर भेद करवाते हैं ऐसा बोलते हैं कि श्री कृष्ण को महादेव और ब्रह्मा आदि देवताओ के समान मानना वो भी अपराध है तो दूसरा नाम अपराध हमें बहुत ही पहले तो हमें पता ऐसा ही लगा कि हां शास्त्र में लिखा है तो सही रहेगा तो हम थोड़े तो भी हमें थोड़ा शंका तो थी वहां पर भी कि ऐसा कैसे हो सकता है हम हमें तो बचपन से वही पंच देव की पूजा का विधान सिखाया गया है हमारे हमारे जो माता पिता है उन्होंने वही कहा हैय पंच देवता की पूजा करनी है पूज्य श्री आदि गुरु शंकराचार्य जी के वहां से चलते आ रहे हैं तो हम वही सब करते थे हम सब भगवान को एक ही मानते थे सभी देवताओ तत्व तो एक ही है भगवान ईश्वर तत्व तो हमें यहां यहां प तो कुछ अलग ही देखने को मिला और यहां प जैसे कि दीपक

00:50:34:21 जी ने कहा और जो विनय जी ने कहा था यहां पर हम इसलिए जा रहे थे जैसे कि ये जो भगवान का विग्रह है और कीर्तन है भगवान तो हमें इतने पसंद वहां का जो विग्रह इतना पसंद आता है तो उसको दर्शन करने के जाते है और कीर्तन और प्रसाद जो भी है तो बहुत आनंद होता है इसलिए हम जाते थे और जभी इसकी बात आती थी नॉलेज की बात आथ हमें कुछ इतना ज्यादा उसमें शंका करते थे शंका बहुत आती थी हमें पर ठीक है चलो कुछ नहीं जैसे कि हम मुंबई में है ना तो वहां पर ऐसा कोई भक्ति भाव माला माहौल नहीं रहता है चलो कुछ ना कुछ कुछ नहीं तो भले हम उस वो सब नहीं सुनना है भगवान श्री कृष्ण के लिए जाते है तो पहले तो ये पहले तो हमें विरोध हुआ ये हरि हर भेद का और दूसरा और एक बार क्या हुआ हमने ये रुद्राक्ष रुद्राक्ष से भी उन्होने आपत्ति की अरे तुम कंठी माला नहीं पहनते हो ये करते हो ये ऐसा कि ऐसा तो ऐसा कुछ विधान है ही नहीं कि जो मतलब ये रुद्राक्ष धारण करके हम कृष्ण भक्ति नहीं कर सकते ऐसा कुछ तो हमें तो कुछ ऐसा कुछ पता नहीं कु शास्त्रों में ऐसा कुछ लिखा है तो वहां पर हमें कुछ खटका और दूसरी एक बात कि हमें अभी थोड़ी समय पहले की बात है हमने उन्होंने लिटरली अपने मुख सेको प्रभु जी का हम नाम नहीं बोलना चाहते उन्होंने

00:51:50:02 ऐसा बोला कि प्रभुपाद जी जैसे कि ये देखिए जो एक इस समय लिख कर के आ रहा है य महानुभाव कई दिनों से इसी तरीके की अनर गल अमर्यादित भाषा बोलते हैं कर करेंगे क्योंकि उसको उसके जैसे नालायक मिल गएता यह सोचने वाली बात है एक तरफ राम है एक तरफ राम है जो सिखा रहे हैं कि हर हाल में आप जो है मर्यादा का आचरण करो और एक तरफ य कौन सा धर्म सिखाया जा रहा है इसकन के नाम पर ये सोचने वाली बात है जी आप कंटिन्यू कर बस यही दिक्कत है यही दिक्कत है यही दिक्कत है यहां प आपको बताता हूं अगर आप कुछ दूसरा फॉलो करेंगे तो यहां पर प्रॉब्लम ये आता है कि आप कैसा फॉलो कर रहे हो यहां से भटक कैसे गए हो प्रभु पा भटक कैसे ग हो मेरी एक अभी रिसेंटली थोड़ी समय पहले की बात है भगवत गीता के बारे में चर्चा कह रहे थे जो कह रहे थे अगर वो अधूरा हो तो उसको पूरा करके फिर आप नेक्स्ट चालू करें कहीं रह ना जाए वो आप भूल जाएंगे फिर हम हां हा हम वही कह रहे हैं कि हमारे अभी थोड़े समय पहले की बात है श्रीमद् भगवत गीता के ऊपर थोड़ी चर्चा थ हम ना हम शॉर्ट

00:53:05:10 में बता देते हैं हम स्पन तो मतलब वो प्रोग्राम में जाते थे हमने बोला ना कि हमरा ऐसा कुछ सोर्स नहीं है और हमें बुलाया जाता है कि आप आओ आओ हम जाते भी थे और हम साइड बाय साइड गीता परिवार करके है हम वहां से हम जुड़े थे मतलब वहां प पूजेश की गोविंद देव गिरी जी महाराज जी ने वो शुरू करवाया था वो भी शंकर मत से ही आते हैं तो उन्होंने भगवत गीता के श्लोक का कैसे लोक सिखाना है कैसे लोक बोला जाता है उसके ऊपर कहते है और उसका विवेचन जो होता है ना तो वो ज्ञानेश्वरी से होता है ये ये वाली उन्ही की बुक है आपको शायद सही सही वही वही हम उसम व सीख रहे थे तो क्या हुआ कि उनको पता चला कि ये भगवत गीता य अलग जगह सेय भगवत गीता कर रहा है सीख रहा है तो उन्होंने ऐसा ही बोल दिया जो मतलब मब टोटिंग बोलते जो ताना मारना तो प्रभु जी ने ऐसा बोल दिया कि जो जो भी कोई इन के बाहर से व भगवत गीता पढ़ता है ना उसको कुछ होने नहीं वाला है ये वो ऑथेंटिक जो है जो ओरिजनल है वो इकन की भगवत गीता है अगर इकन के बाग में मतलब जो दूसरे कोई संप्रदाय क्यों नहीं लिखता एज इट इज यथारूप ताकत नहीं किसी में ऐसे लिखने की और मैंने जभी उसके ऊपर प्रश्न किया तो

00:54:20:13 ज्ञानेश्वरी जो है वो तो संत ने लिखी है संत है ज्ञानेश्वरी महाराज तो संत है उन्होंने लिखी है तो बो उनकी तो बात ही मत करो उनकी तो बात ही मत करो मायावादी मतलब कुछ भी होता है मायावादी वो मायावादी भाष हम पढ़ते भी नहीं है मलब मतलब इतना भगवत गीता में भी भेदभाव इतना अपमान मतलब कभी भी मेरा वही होगा कि यहां पर मतलब रहना जैसा है ही नहीं और कुछ भी कुछ भी करते हैं ना हम लोग हमलोग कुछ भी मतलब जैसे की शिवरात्रि करते हैं ये करते उनको पसंद नहीं आता है इनडायरेक्टली वो ऐसा ही करते है कि तुम जिसको भगवान श्री कृष्ण को मानना है तो उनको मतलब य से तुम वहा पर पोगे श्री कृष्ण तक पोगे तो यह सब करने से कुछ लाभ नहीं होगा जहां तक तुम कृष्ण को नहीं पूछोगे शिवजी को पूछोगे शिवजी प्रसन्न नहीं होगे और अगर उनका कोई भी काम हमने अगर कुछ कुछ प्रश्न चिन्ह उठाए तो वैष्णव अपराध हो जाता है वव हमने बीच में कुछ कहा था तो बो तुम आर्ग बहुत करते हो ये व अपरा है और तुलसीदास जी की बा बात की थी हमने कुछ काम के ऊपर कुछ बात चल रही थी लस्ट बोलते है ना उनको लस्ट लस्ट बोलते रहते ये चीज आपने सुनी रहेगी स्न वाले से लस्ट तो जो लस्ट के ऊपर बात लस्ट है ना काम मतलब

00:55:35:19 नाम जब से लस्ट खत्म हो जाता है जैसे कि प्रेमानंद महाराज जी बोलते कि वो जो है काम तो रहता ही है हमें उसको नियंत्रण में लाना है श्रीमद भगवत गीता में वही कहा है भगवान श्री कृष्ण ने नाम जप तो करते है पर उसको नियंत्रण में हमें खुद को लाना पड़ता है तो मैंने उसका उदाहरण दिया श्री तुलसीदास जी के ऊपर उनका जो जीवन चरित्र है उनके श्री तुलसीदास जी को भी ऐसा हो हुआ था सबसे बड़े राम भक्त माने जाते हैं अ कलयुग में उन्होंने रामचरित मानस उन्होंने रचना की है तो बोला की उनके पास कोई आंसर नहीं था तो बो तुम तुलसीदास हो क्या तुम तुलसीदास हो क्या उनके पास कोई आंसर नहीं था कोई आंसर नहीं था तो इससे मुझे एक किस्सा याद आया अभी हम लोग जब इंदौर गए थे तो वहां पर हम लोग वहा ये जो नॉर्थ इंडिया के जो सेक्रेटरी कहे जाते जनल सेक्रेटरी उनके साथ हमारी चर्चा है वो वीडियो पड़ा हुआ है पर ही है तो उन्होंने हमारी जो मतलब ऑफ ऑफ कैमरा जो बात हुई थी तो उन्होंने उसमें यह बताया था कि भाई मैं पहले बहुत वो रहता था जिज्ञासु सीकर टाइप का था और मैं मेरे अंदर सवाल आते थे अपने को लेकर के

00:56:50:22 और एक दिन मुझे प्रभुपाद जी से हुआ उनका कहना था अब हुआ कि नहीं हुआ वो बहुत सारी प्रामाणिक बातें नहीं है कहानियां है कई सारी ऐसा प्रतीत होता है तो अब उन्होंने कहा कि मैं स्कन से जुड़ा और स्कोन से जुड़ने के बाद मुझे मेरे सवालों के जवाब मिल गए और सवालों के जवाब यहां तक का स्टेटमेंट उनका फिर हमारी उसके बाद पूरी कन्वर्सेशन उस कन्वर्सेशन में लास्ट में उन्होंने जब मैंने पूछा कि भाई भगवान श्री कृष्ण यदि पूर्ण है तो उनसे जो भी एक्सपेंशन निकलेगा वो पूर्ण निकलेगा यदि उनसे शंकर निकल रहे तो पूर्ण निकलेंगे वो दही की तरह नहीं हो सकते कि दही वापस वो नहीं बन सकता वो अपूर्ण नहीं हो सकता पूर्ण से तो पूर्ण ही निकलेगा तो जब मैंने यह वाला क्वेश्चन लास्ट में उनसे किया तो उन्होंने कहा यह तो अचिंत विषय है तो जब हमारा क्योंकि बड़े भी थे तो मैं बहुत ज्यादा उनको काउंटर नहीं कर रहा था तो जब कैमरा ऑफ हो गया और मैं जाने लगा मेरा थोड़ा दुखी हुआ मैंने कहा कि आपने शुरू में कहा था कि आपकी जर्नी जो शुरू हुई थी वो जर्नी शुरू हुई थी क्वेश्चनिंग से कि आप आपके मन में वो थे क्वेश्चन उनके जवाब आपको चाहिए थे और आपको जवाब लास्ट में क्या मिल रहा है अचिंत आपको जवाब लास्ट में मिल रहा

00:58:05:26 है कि इस बारे में प्रश्न मत पूछो यही तो हुआ मेरे मन में बहुत सारे प्रश्न है और लास्ट में एट द एंड उसका जवाब क्या है प्रश्न मत पूछो क्वेश्चन मत पूछो इस पर चिंता मत करो यही तो जवाब है फाइनली तो ये कहते हुए मैं बाहर निकला उससे और और इस अचिंत नाम से ही एक चीज और आ जाती है प्रश्न मत पूछन उ से कि जब ये अचिंत विषय है जीव और परमात्मा में भेद है भी और नहीं भी या जो भी ये कहे तो फिर यह जब यह अचिंत कहते हुए मधुवा चार्य जी के कट्टर विरोधी नहीं है तो शंकराचार्य के कट्टर विरोधी कैसे हैं जब ये बीच के हैं जब ये बीच में तो इनको जितना इनके लिए जितना सम्माननीय या जितने प्रामाणिक मधवा चार जी होने चाहिए उतने ही प्रमाणिक इनके लिए शंकराचार्य जी भी होने चाहिए या फिर जितने जितने अपमा शंकराचार्य जी है उतने ही अप्र माणिक इनके लिए मधवा चारज भी होने चाहिए मगर य करते क्या है इनको मधवा चार जी से प्रॉब्लम नहीं है इनकी जो मार्ग में बाधा है वह क्या है शंकराचार्य तो इसलिए बीच का होते हुए भी मधुवा चार्य के तो इनको काउंटर नहीं

00:59:20:27 करना है इनको शंकराचार्य को काउंटर करते रहना है क्योंकि अगर उनसे अपने लोग को दूर नहीं रखा तो वहां तो पर्दा जोड़ गया तो भेद खुल जाएगा जी आप कंटिन्यू करें हां और उनको जैसे कि अने शंकराचार्य जी की बात की तो उनको शंकराचार्य जी से बहुत प्रॉब्लम बहुत ये क्या करते हैं कि भज गोविंदम जो भजन है जो शंकराचार्य जी ने लिखा है वो लेते हैं और बताते कि शंकराचार्य ने अंत में यही कहा था भज गोविंदम कहा था देखो हमें भी यही कहा था स्टार्टिंग में ये जो आप शिव जी को मानते हैं ना ये जो कौन है वो शंकराचार्य खुद शिवजी थे उन्होंने ये भज गोविंदम भज गोविंदम कहा और और एक सबसे बड़ा उनका उत्तम श्लोक है उनका वैष्णव नाम यथा शंभू ये बोलते हर बार ये हर बार बोलते हम वैष्ण यथा शंभू पर उनका बोलना कुछ हमें इतना फर्क नहीं पड़ा हम अभी भी शिवजी को उतना ही मानते है तो मतलब वो हर बार ऐसा ही करते हैं कि तुमय शिवजी का जो शिवरात्रि करते हैं उसके ऊपर बहुत बड़े बड़ी वीडियो आते है शिवरात्रि क्यों नहीं करनी चाहिए शिवरात्रि क्यों नहीं करनी चाहिए उसके ऊपर एक ये सब आपत्ति हमें बहुत है अभी भी मतलब अभी तो है ही पहले भी थी थोड़ी थोड़ी पर हमें क्या कि चलो

01:00:36:03 ये सब अच्छे अच्छे सब मित्र मिले दीपक जी भी वहां ही थे तो हमें उससे अच्छी दोस्ती हो गई थी मित्रता हो गई थी तो उन्होंने बोला कि तुम आ जाओ हमें भी हमें भी पता है तुम आ तो जाओ हम धीरे धीरे करके निकल जाएंगे और चलो आज निकल भी गए पर वैसे तो बहुत सारा चीज है जैसे कि बीच में क्या था हा और और एक चीज बोला था उन्होंने की श्री श्रीमद भगवत गीता के बारे में जो प्रभुपाद की जो लिखी हुई भगवत गीता है उसके अलावा जितने भी भगवत गीता वो सब बोगस है ऐसा बोला था ये शब्द उन्होने यूज किया था बोगस द सब भगवत गीता बोगस तो ये सब है और दूसरा हमें ऐसा लगता है कि ये जो निंदा हम सुनते है ना तो उससे भी हमें पाप लगता है ऐसा कभी कभी अंदर मन में बहुत ऐसा आता भी है कि ये जो हम शिव हरि और हरि हर भेद की जो निंदा सुनते है उससे हमें ऐसा लगता है हमें भी उससे अपराध लगेगा ये ऐसा बोलते ही रहते हर बार और वो तो छोड़ो राम और कृष्ण में भी भेद करते है राम कृष्ण और विष्णु में भी व तो व भी तो हरि दूर की बात है विष्णु विष्णु करते उतार आज इस मामले प वीडियो आज ही डाला है हमने देखी थोड़ी तो देखी हमने बाकी है पूरी देखने की बाकी है चलिए अब हम लोग विनय

01:01:51:04 जी को सुन ले अगर विनय जी उपलब्ध हो तो विन जी सुन पा रहे हैं विनय जी जी विनय जी बताइए नेट का आवाज आपकी नहीं आ रही मेरी आवाज आ रही है आपको जी आवाज आ रही है बहुत स्लो आ रही है हां थोड़ा नेट का इशू चल रहा है य प एक मिनट मैं एक बार आप ना लीव करके दोबारा आइए मुझे लगता है कोई टेक्निकल होगी तो एक बार आप लीव कर दीजिए दोबारा आप आ

01:02:30:28 जाइए तो शिव जी थोड़ा और ड़ चर्चा में जसे जी ठीक है आ आप बोलिए जी बोलिए नहीं बोल हा तो अभी इनका आपको बता कांसेप्ट क्या है ज हम मत हमारा होता हर चार महीने में कहीं ना कहीं कैंप में जाते रहते मतलब जो भी यूथ लोग है यूथ मतलब जो भी 18 साल से कितने 16 साल 16 साल से लेकर जो भी 30 साल तक है उ एक बात मन में आ रही है मैं कह दू छोटी सी है जैसे अभी आपने मर जी ने बताया कि वो जब भी कभी बात आती शंकराचार्य की तो वो कहते हैं उन्होंने अंत में क्या कहा भज गोविंदम तो क्या वो मायावा फैला नहीं आए थे जो सच बोल रहे हैं अगर यह सच है गोविंद गोविंद को भजना सच है तो वो तो माया बात फैलाने आए थे आपके अकॉर्डिंग झूठ फैलाने आए थे गलत फैलाने आए थे तो वो भज गोविंदम जो सच्चाई है वो क्यों कह रहे हैं और यदि वो मायावा फैलाने ही आए थे तो

01:03:45:28 क्या भज गोविंदम भी माया है भज गोविंदम भी झूठी शिक्षा है तो ये ये कभी नहीं सोचते हैं सब कुछ बोलते हैं शंकराचार्य जी ने भज गोविंदम कहा अरे भैया शंकराचार्य तो झूठ बोलने आए थे ना आपके अकॉर्डिंग तो इसका मतलब भज गोविंदम झूठ है क्या और यदि भज गोविंदम सच है तो भज गोविंदम सच है तो शंकराचार्य मायावादी नहीं है नहीं जहा प जहां पर भगवान का हरि का नाम आएगा वो सत्य है बाकी जो भी बाकी जो भी विषय है वो सब मायावादी है और वो सब चीज को नहीं सुनना चाहिए सि जहा पर कृष्ण का नाम आए ये आ बस आपको वही सुनना है यानी शंकराचार्य अंत में सच बोल के गए और एक बात बता चाहता हूं बीच में थो थोड़े समय पहले की बात है ये दीपक जी गए थे तो वहां पर गणेश जी की कुछ बात हुई कि उनको कुछ यात्रा प जाना था यहां प गोवर्धन निकोले करके य प वो पूरा उन्होने मिनी वृंदावन बनाया तो वहा प किसी ने कहा कि गणेश मतलब सा तारीख को कुछ गणेश चतुर्थी यहां पर महाराष्ट्र में हमारे गणेश जी को बहुत ही पूजा जाता है उस समय पर बहुत बड़ा त्यौहार होता है गणपति है अरे क्या गणपति गणपति करने का वहां पर सबके स्वामी बैठे हैं सुप्रीम पस ऑ गड हैड तुम गणपति गणपति करते हो तो ऐसा तुरंत ऐसा

01:05:01:00 अपमानित भी कर देते म इजत से बेती करना नसे सीखे बड़ी इजत सेसा बोल तो नहीं सकते तुरत खराब चीज श बो नहीं सकते बड़ी इ करते भगवान गणेश जी की महादेव की महादेव की भी बती करते बहुत दुख होता है इसलिए जी न जी बोले विनय जी हा मेरी आवाज आ रही है अभी जी जी आ रही है बोलिए हां

01:05:34:28 जी हां तो मैंने कुछ पॉइंट्स निकाले थे जैसे मैंने आपको उस दिन फोन पर कहा था कि 11 अध्याय में मेरी आवाज आ रही है जी जी बिल्कुल आ रही है अच्छा मैं थोड़ा ऐसे बैठता हूं शायद आ जाए आप आवाज हां जी तो 11 अध्याय में अर्जुन ने बोला था कि मुझे आपका विराट स्वरूप नहीं देखना है

01:06:13:00 [संगीत] मुझे आपका नहीं आ रहा है क्लियर नहीं आ रहा है आपका क्लियर नहीं आ रही आपकी वॉइस कट रही है और दिक्कत है आपके में नेटवर्क कंपलीटली आ रहे हैं ना चलिए विनय जी अभी नहीं है हा शिवन जी तो मैं थोड़ा जब तक विन जी आते

01:06:48:06 है अभी यहां प ना एक पूरा आपको मैं बताता हूं य पूरा बोते पूरा सीक्वेंस बना म मूवी होता है कब क्लाइम आनाए कब स्टार्टिंग क ए य आपको बताता सन क्या है जब मैं मतलब पिछले साल ज मैं गया था एक हम आपको बता होते रहता है अलग अलग जग तो हमारा नासिक में कैम था तो हमें कैंप में मतलब बताया गया था भागवत से के कैसा होता है ना कैटरपिलर नाम का पता इंसेक्ट होता कैटर जिसे तितली बनती है बराबर तो बता कि एक कैटरपिलर होता है व कैसा मतलब जब वो निकल जब वो अपना पूरा तितली बनने से पहले उसको जो कष्ट होता है तो अभी इकन भी जो मतलब का परंपरा है वो कैसे चला है तो उसके उसके उदाहरण से बताया गया उसके उदाहरण से यह बताया गया कि जो सबसे पहला बुद्ध ज बुद्ध आए थे य बुद्ध जी आए थे तो उन्होने उनका जो कांसेप्ट नि मतलब निर्वाना ऐसा करके कांसेप्ट था ठीक है उसम क्या हो गया उन्होने बताया जो सब शास्त्र

01:08:03:14 जो भी य सब पूरा गलत है और मतलब निर्वाणा का बताय प्रॉपर है तो उस टाइम पर क्या हुआ धर्म का जो सनातन धर्म था तो बहुत जगह मतलब समा बो एक लु लुप्त होने के कागार पर था ठीक है अ बुद्ध जी के बाद व बुद्ध जी के बा बुद्ध जी के बाद आदि शंकराचार्य तो शंकराचार्य ने क्या किया उन्होंने ये खुद ही बोलते हैं उनका वाक्य उनका इसन का वाक्य है अब ये क्या बोलते हैं कि आदि शंकराचार्य आए तो उन्होंने क्या किया उन्होंने फिर से धर्म का जो धर्म का जो बुद्ध जी का जो वाणी था जो उन्होंने बता कि निर्वाणा सही है उसके बाद जब अपने आदि शंकराचार्य आ तो उन्होंने फिर से धर्म का स्थापित किया अलग मतलब पूरा मतलब भ्रमण किया पूरे भारतवर्ष का और फिर से हिंदू धर्म का जो था स्थापना किया स्थापना कैसे किया जैसे की फॉर एग्जांपल अभी साउथ में है तो उन्होंने बताया बता मतलब जगह के और प्लेस के हिसाब से लोगों के कहानी है कि वो जीरो हो गया जीरो से पहले उसको थोड़ा प्रिपेयर किया और उसके बाद फिर फाइनल य दे दिया गया यय

01:09:19:03 होती है क्या नास्तिकता से लड़ने के लिए क्या जो फिलॉसफी स्कन जो दे रहा है क्या वह पर्याप्त नहीं है जो शंकराचार्य को बीच में आना पड़ रहा है हा तो शायद हो सकता है रगा इसलिए उनको लेके आ रहे ना नहीं गा क्लियर इसलिए वो उनको लेके आ रहे बीच में इसलिए लेके आ रहे ताकि उनका काम तो चल जाए ना जब नाक से लड़ना है जब धर्मिल है तो शंकराचार्य से लो और उसके बाद गलत है सही हम है जो कि नास्ति से नहीं लड़ सकते अभी य कांसेप्ट क्या वो भी आपको बताता हूं अभी वो क्या बोले कि अभी यहां पर जी को भेजा भगवान ने किसको भेजा पहला भगवान भगवान आए ठीक है बुद्ध बुद्ध रूप में आ जब बुद्ध रूप में उन्होने निर्वाणा का स्थापना किया मतलब पूरा जो भी शास्त्र वगैरह को उनको प्रमाण नहीं मानते थे वो तो उसके बाद उनको शंकर जी को भेजना पड़ा शंकर जी को क्या भेजना पड़ा ताकि फिर से तुम धर्म का स्थापना करो फिर से जहां जहां प जो लुप्त हुआ है फिर से तुम सनातन सनातन का प्रचार प्रसार करो ठीक है अब क्या होता है तीसरे टम में कौन आता है माधवाचार्य जी आते हैं ठीक है अब यहां प बोलते माधवाचार्य ना हा माधवाचार्य जी अ अभी क्या बोलते अभी माधवाचार्य जी आए अब माधवाचार्य जी ने प्रॉपर प्रॉपर उन्होंने हिंदू की स्थापना की प्रॉपर उन्होंने जो ग्रंथ था इसका

01:10:34:09 पूरा उन्होंने प्रॉपर्ली स्थापना कर दिया अभी अब किसका आना बाकी रह गया अब यहां पे साक्षात चैतन्य महाप्रभु का आना बाकी रह गया ठीक है अब ये विषय में वो क्या बोलते हैं सबसे पहला बुद्ध बुद्ध आए ठीक है उन्होंने क्या किया थोड़ा रास्ता बनाया रास्ता क्या बना कि लोग को पहले तो ये बता दिया कि जो सनातन है ये पूरा झूठ है जो शास्त्र वगैरह झूठ है जो निर्वाणा है वही एकदम मतलब सच है ठीक है अभी जब यहां पर य पर शंकर जी को भेजा तो शंकर जी ने किसका स्थापना किया मतलब थोड़ा थोड़ा धर्म का प्रचार किया कि अद्वैत मतलब जो भगवान है हर जगह प ठीक है अभी उन्होने य स्थापना किया अब यहां पर भी कमी रह गई थी य पर भी कमी रह गई ी जिस माधवाचार्य जी को आना पड़ा ठीक है भगवान ने साक्षात माधवाचार्य जी का रूप लेके आए य प माधव चार्य के रूप में उन्होंने मतलब जो एक मंदिर होता है मंदिर अभी ये सब कौन थे कि मंदिर बन रहा है पूरा बना नहीं है अभी ठीक है अब पूरा कब बनेगा जब चैतन्य महाप्रभु आए तो चैतन्य महाप्रभु के लिए इन्होने पूरा मंदिर बनाना चालू कि किन्ने बनाना चालू किया बुद्ध हो गए फिर आदि शंकराचार्य जी हो गए माधवाचार्य जी माधवाचार्य जी ने क्या किया पूरा टेंपल मतलब एग्जांपल दे रहा आप य मत समझ मंदिर बना रहे मंदिर नहीं बना रहे मतलब निर्माण कैसा हो रहा है पिलर

01:11:49:16 खड़ा हुआ जिसमें नीचे बेस में शंकराचार्य जी ने यहां तक पहुंचाया म जी ने यहां तक पहुंचाया उस य तक पहुंचाया चैतन्य य एक टस्ट है ये कहते हैं कि हमारी जो गुरु परंपरा है वोह सृष्टि के प्रारंभ से है भगवान श्री कृष्ण से लेकर हम तक ठीक है तो फिर ये मधवा चार्य जी का ज्ञान क्या कहीं और था जो यह कहा जा रहा है कि मधवा चार्य जी आए और उन्होंने एक स्टेप और ऊपर किया या क्या क्या मधवा चार या जो चैतन्य महाप्रभु जी ने जो ज्ञान दिया है क्या वो कहीं और था वो था नहीं क्या सृष्टि के अंदर जो यह बताया जा रहा है कि उन्होंने और एक स्टेप ऊपर बढ़ा दिया और य जब य जब यह देश काल परिस्थिति वश दिया जा रहा है तो सनातन सिद्धांत कहां रहा सना को नहीं दिया गया आज के लोगों को दिया गया तो सनातन नहीं है मवी बन रहा हैय बता मवी बन रहा है मूवी में क्या होता

01:12:53:07 है इनका कहने आ भगवान भगवान के आने से पहले उनके भक्त आते हैं ठीक है मैं य पर बोला ओके चलेगा भगवान के पहले भक्त आते हैं वो पूरा वो पूरा मूवी कैसे बननी चाहिए मतलब जो जब हीरो आने वाला है तो उसके पहले पूरा सेटअप ऑलरेडी सब रेडी है अब यहां पर बस भगवान को क्या करना है अपना जो भी हीरो जैसा हीरो अपना कार्य करता है अभी भगवान को लीला करना है तो लीला करने से पहले उनके भक्त आए ठीक है उनके भक्त ने धीरे धीरे पिलर खड़ा किया अब भगवान की यहां प लीला एक्चुअली चालू हुई यहां पर चैतन्य महाप्रभु ने हरि नाम का प्रचार किया यह सब किया बोला ठीक है हरि नाम का प्रचार किया इसमें मतलब जो चैतन्य महाप्रभु का जो ये था उन्होने अपनी पूरा लीला की यहां पे उन्होंने हरिनाम का प्रचार किया उन्होने मतलब सारे बहुत सारे कार्य जो भक्ति का जो उन्होने बोलते ना बीच सभी के ह बोते गली मोहल्ले हर शहर में होना चाहिए हरि नाम का प्रचार तो यहां से पूरा चैतन्य महाप्रभु ने स्टार्ट किया तो य पर दिक्कत य आता है कि ठीक है मतलब भगवान अभी यहां प आ रहे है ठीक है यहां पय एक चीज और बताते हैं एक चीज और ऐड करते हैं जब चैतन्य महाप्रभु को ही पूरा प्रचार करना था जब चैतन्य महाप्रभु को ही पूरी मतलब भक्ति का प्रचार करना था तोय फर चैतन्य महाप्रभु ने ऐसा क्यों बोला कि एक सेनापति आएगा

01:14:08:09 जो पूरे मतलब अलग गली गली मोहल्ले मोहले में हरि नाम का प्रचार करेगा तो मतलब यहां पर य मतलब मेरा ये चीज क्लियर नहीं हुआ कि हीरो तो आ गया अभी कार्य क्या होता है हीरो का कार्य होता है जो मतलब हीरो का कार्य होता है कि वो विलन से युद्ध करे जो भी लड़ाई करे समाप्त करे ठीक है किसका कार्य है हीरो का अब यहां प हीरो आने के बाद भी एक सेनापति आने का बाक्य था ऐसा लिखा म ऐसा बताते हैं इसकन वाले कि सेनापति एक आने वाला है जो पूरा हरि नाम का हर गली मोहल्ले में प्रचार करेगा वो सेनापति कौन है शीला प्रभुपाद मतलब अभी यहां पर ये भी क्लियर नहीं है कि असली हीरो कौन था अभी यहां पर तो मतलब मैं पूरा घूम रहा हूं कि चलो इतने लोग आ गए ठीक है चैतन्य महाप्रभु भी आ गए ठीक है वहां से हरि नाम का प्रचार भी स्टार्ट हो ठीक है फिर एक सेनापति की फिर आने की आवश्यकता क्यों प पढी नहीं प से तक आपकी जो कन्वर्सेशन रही है उसम मुझे ऐसा लग रहा है कि आपका ये मन करने लगता होगा बीच-बीच में कि मैं एक अधा लू और अपने सर अपने सर पर मार लू बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल क्योंकि क्योंकि जब आपने चैतन्य महाप्रभु को जब आपने बताया कि वो साक्षात हरि अभी आ गए हरि ने प्रचार वगैरह करना जो लोगों का भक्ति वगैरह जो नहीं हुआ था मतलब भक्ति का बीज तो आपने यहां से हरि नाम का बीज बो दिया ठीक है जब हरि

01:15:23:14 नाम का आपने बीज बो दिया तो फिर ऐसा आप इसको क्यों बोलते है कि सेनापति के आने की जरूरत पड़ेगी जो पाश्चात्य देश में जाएगा वहां पर प्रचार करेगा हरि नाम का गली महल में प्रचार होगा तो चैतन्य म प्रभु के टाइम पर नहीं होता था उसके बाद नहीं हुआ प्रचार तो हरि नाम का हुआ ही ना ऐसा तो नहीं नहीं हु बहुत लोग गए बाहर प्रचार करने के लिए ठीक है जो सक्सेसफुल उनको श प्रभुपाद ने जो स्ट्रगल किया ठीक है उस टाइम पर आप ये भी बोल सकते हैं जब वर्ल्ड वर युद्ध का ज बोलते ना सेकंड वर्ल्ड वर युद्ध था तो उसम बहुत सारे ऐसे हिस हिप्पस जो अपना मतलब सब त्याग के मतलब क्या कर कुछ नहीं पता था कुछ बिल्कुल नहीं पता था नश नशे में मतलब बो उनके कंट्री के ही उनके कंट्री के लोगों ने ही उनको बाहर भगा दिया बाहर भगा दिया मतलब बाहर कंट्री में नहीं भगाया वही देश में उनको मतलब बोलते है ना अभी अपने यहां प कैसा है अरे तू तू शुद्र है चल तू यहां प मत ते को अंडर एंट्री नहीं है तो फॉर एग्जांपल वहां प जो हिप्पस थे उनको भी वैसा बोलते है ना निकाला गया उनको उनके घर से मतलब तो उस टाइम प अभी क्या र तिरक हा तिरस्कृत लोग थे अब सिंपल सी बात है कोई एक भटका आदमी रहेगा अगर आप उसके पास जाओगे मैं ऐसा नहीं बोल रहा हूं जो शीला प्रभुपाद ने किया बहुत सरय कार्य है इसके लिए मैं मतलब बो उनको दंडवत

01:16:39:03 जितना भी दंडवत करू कम है तो मेरा बत यहां पर क्या आता हिस के पास जब गए तो वहा से जो प्रचार इनका स्टार्ट हुआ ठीक है वहां से ज प्रचार स्टार्ट हुआ अभी इनका य पर मानना क्या है मैं आपको बताता हूं य पर इनका मानना ये है कि जो अंग्रेज को ज्ञान दिया जो इंडिया की मानसिकता क्या है कि जो बाहर देश वाले करेंगे तो वो उससे प्रेरित होकर हम ये कार्य करेंगे ठीक है जो बाहर बाहर वाले जैसा उनका आचरण करेंगे तो वैसा आचरण हम करेंगे फॉर एग्जांपल जैसे वो इंग्लिश बोल रहे तो मतलब उनका तो मतलब लैंग्वेज ही है इंग्लिश बोलना तो यहां पे हमको भी इंग्लिश सीखना चाहिए वो शर्ट पैट पहन रहे तो यहां प हमको भी शर्ट पैट पहनना चाहिए मतलब ये एक प्रोफेशनल टाइप लगता है बहुत अच्छा टाइप लगता है तो अभी इनका मानना क्या है कि जो बाहर देश वाले को प्रभुपाद ने इसलिए बताया इंडिया में ज्ञान इसलिए इन्होने प्रचार नहीं किया क्योंकि यहां पर लडी कोई सुनने वाला था नहीं तो प्रभुपाद को उसके लिए बाहर जाना पड़ा अब जब बाहर गए वो जब बाहर उन्होने प्रचार किया जो वो अंग्रेज आए तो लोग क्या बोलते हैं जोन की इंडिया में इंडिया के लोग आकर्षित हु मतलब इंडिया के लोग य इस मतलब य विचार में पड़ गए जब बाहर वाले भक्ति कर तो हम लोग क्यों भक्ति ना करे फिर से मतलब जो इंडिया का ही चीज है तो इंडिया की चीज कोय ऐसा बोल रहे हैं कि वो बाहर वो बाहर से सीख रहे हैं इंडिया वाले

01:17:54:26 एक एक मिनट जी जी मेहर जी आप हां हां आप बताए जी हां सुनाई दे र आवाज जी जी सुनाई देर विनय जी आ गए विनय जी आ गए विनय जी आपको कई बार हो गया कि हम आपको कोशिश करते हैं सुनने की बट आपका नेटवर्क थोड़ा सा इशू है अभी नेटवर्क में है आप हां जी हां जी नेट का इशू है मेरा मेरी आवाज आ रही है आवाज आ रही है आप ऐसा करिए अपना कैमरा ऑफ कर

01:18:32:03 दीजिए हां ओके अभी आ रही है अब बोलिए हां जी तो मैंने कुछ पॉइंट्स इकट्ठा किए थे जैसे मैंने उस दिन आपको फोन पर बताया कि एक पॉइंट तो मैंने बता दिया था कि अर्जुन रिक्वेस्ट करता है क से कि मुझे आपका चतुर्भुज रूप देखना है जी तो इसकन के सभी पिक्चर्स में जितने भी उन्होंने पिक्चर्स बनाए है उसमें किधर भी कृष्णा का चतुर्भुज रूप नहीं दिखा उन्होने सब

01:19:23:21 द्विभ्ग्योर तो बोलिए वो लोग चतुर्भुज कृष्ण को मानते नहीं है तो यह पहला पॉइंट हो गया और दूसरा पॉइंट वह लोग सिर्फ और सिर्फ प्रचार के ऊपर बहुत ध्यान देते हैं जितना भी हो प्रचार करो प्रचार करो प्रचार करो बुक डिस्ट्रीब्यूटर करो बुक डिस्ट्री ब्यूट करो प्रोग्राम करो बाहर संकीर्तन को जाओ रास्ते पर तो उनका बोलना यह कि सिर्फ प्रचार करो बस क्यों और वह भगवत गीता का 18 अध्याय का एक शलोक कि जो भी मेरे नाम का प्रचार करेगा मेरे बारे में प्रचार करेगा वो वो मेरे से व वो मुझे बहुत प्रिय है मेरी आवाज आ रही है जी जी सुन रहे हैं आप जब नहीं आएगी तो हम आपको टॉक देंगे अभी आप

01:20:18:01 बोलिए बोलिए विनय जी विन जी आवाज आ रही है आपको हेलो जी जी विनय जी बोलिए ठीक है विनय जी आप फिर किसी और दिन आइए क्योंकि आपका थोड़ा नेटवर्क का इशू है या तो आप पहले से थोड़ा सा किसी ऐसी जगह पर होते कि जहां वाईफाई हो मेहर जी आप और

01:21:02:09 कंटिन्यू अभी बराबर आ रहा है हां बराबर आ रही है हा हा तो मैं और एक पॉइंट बोलने को भूल गया जैसे की अभी बात हुई थी कंपटीशन यहां पर कंपटीशन बहुत होती है जैसे की जो 16 रांग जो है 16 माला करना तो उसमें कैसा है कि जैसे कि हम कुछ भी कोई भी जाप करते हैं तो हम एक एकाग्रता से करते हैं कि एक एक मंत्र है जो भी है नाम जप करते हैं या फिर पंचाक्षर मंत्र करते हैं जो भी हरे राम हरे कृष्ण जो भी करते हैं कोई भी हो तो हम आराम से आराम से करते हैं तो वहां पर हमने देखा कि बस ये 16 माला हमें दो घंटे में हमें करना है तो एकदम फास्ट करते हरे ह क राम राम राम एकदम हमने ये चीज देखा है और बाद में उसके बाद सब पूछते हैं तुमने कितना किया कभी कभी कहीं प भी हम प्रोग्राम में जाते है तुम कितना मला करते हो ब दोही करते हो अरे तुम तुम सिंसियर नहीं हो तुम तुम ठीक नहीं हो ये तुम ठीक नहीं करते सला माला तो मिनिमम होनी चाहिए ये तो ये गलत बात है इतना तो होना ही नहीं चाहिए मतलब मतलब जो 16 माला करता है वही भक्त है और जो सोला मला नहीं करता जो समझो कुछ भी करता है जो भी है हमारा हमारे जो भी सनातन धर्म में जो भी आता

01:22:17:13 है शास्त्र के हिसाब से जो भी करता है वो करता रहेगा वो तो भी वो ठीक नहीं है वो अगर गायत्री मंत्र भी करता रहेगा तो व भक्त है ही नहीं क्यक वो सो माला जाप नहीं कर हमने देखा है हमने अनुभव भी किया है य पर और कंपटीशन बहुत होती रहती है इससे अच्छा यह है देखो उससे सीखो वो देखो मंदिर आता है तो मंदिर नहीं आते हो तुमय तुमय सोला माला करते हो तुम सो माला नहीं करते हो तुम ली दो ही माला करते हो मतलब ऊच नीच बहुत होती है बहुत होती है य पर और हमय चचनी से चचनी भी हम पसंद नहीं आई वहा बत बहुत बार हम भी हो गए हो रहे थे अगर एक पंक्ति में मैं अगर मैं मुझसे पूछा जाए कि स्कोन के बारे में क्या है मामला क्या विचार तो अगर एक पंक्ति में कहा जाए तो सबसे पहले मैं कहूंगा कि भाई इसकन का यह कहना है कि हम जो भगवत गीता देते हैं वो एज इट इज है भगवत गीता का ज्ञान तो एज इट नहीं है जैसे

01:23:31:26 कि चौथे अध्याय का 24 वा श्लोक मान लीजिए उसम हा वो पूरा उसमें जो एज इट इज है तो शील प्रभुपाद जी ने भी लिखा है इसकी भूमिका इत्यादि कि वो एज इट इज दे उस पर जब व्यक्ति कोई भाष्य करने लगता है या कुछ अपनी चीजें डालने लगता है तो वो फिर उसका रूप बदल जाता है हो सकता है कि श्री प्रभुपाद जी का भाष्य वो यह मानते हो कि वह वही भाव है जो भगवान बोलना चाह रहे थे क्योंकि हमें गुरु परंपरा से वो प्राप्त हुआ ठीक है मगर अगर अनुवाद की बात आती है हास्य में आप अपने मन का लिखिए व एक बात आती है मगर जब जब अनुवाद हो रहा है तो अनुवाद में हम कैसे छेड़छाड़ कर सकते हैं जैसे कि चौथे अध्याय का 24 वा श्लोक है जो ब्रह्मा ब्र ब्रत ब गंतव्य ब्रह्म कर्म समाधि तो इसमें ब्रह्म शब्द इतनी बार आया है कि कोई साधारण व्यक्ति भी सुन कर के समझ जाएगा भा ब्रह्म की बात हो रही है मगर जब अच्छा इसमें एक जगह ब्रह्म का अर्थ ब्रह्म स्वीकार भी किया गया शब्दार्थ में है ना ये फिर इसमें क्या कहा

01:24:47:02 जा रहा है आगे एक भी बार ब्रह्म की बात नहीं हुई ट्रांसलेशन में ट्रांसलेशन में आप भाष्य में लिखो अपने मन की बात मगर ट्रांसलेट तो एज इट इज करो जब आप एज इट इज कह रहे हो तो उसको एज इट इज दो तो एज इट इज के नाम पर आप तो बदला हुआ दे रहे हो ब्रह्म का अर्थ कहीं भी ब्रह्म नहीं लिखा है क्या लिखा है जो व्यक्ति कृष्ण भावना मृत अच्छा इसका जो सही ट्रांसलेशन है वो भी मैं बताऊंगा मगर अभी ट्रांसलेशन क्या है जो

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→ Used in: A · Live Iskcon भागवत महात्म्य कहाँ है? #Thakurji #Indreshji #bhaktipath #shrimadbhagwatk... at 44:16 ↗

01:25:10:27 व्यक्ति कृष्ण भावना मृत में पूर्णतया लीन रहता है उसे अपने आध्यात्मिक कर्मों के योगदान के कारण अवश्य ही भगवत धाम की प्राप्ति होती है क्योंकि उसमें हवन आध्यात्मिक होता है उसमें भी आध्यात्मिक होती है

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01:25:27:09 और इसका जो सही ट्रांसलेशन है वह क्या है यहां पर एक तरीके से अवत की स्थापना हो रही है क्योंकि उसम कहा जा रहा है की जिस ब्रह्म में जो सामग्री भी ब्रह्म है क्रिया भी ब्रह्म है फल स्वरूप प्राप्त होने वाला भी ब्रह्म है तो ब्रह्म शब्द जब आ रहा है तो उसका कम से कम एक बार तो कहीं पर उपयोग होता ब्रह्म के अर्थ का मगर कहीं भी नहीं हुआ और चौथा अध्याय और इसका है 24 वा श्लोक

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→ Used in: A · Live गीता के नाम पर रामपाल के बोलबचन अध्याय 4 Ep-7 #satlokashram at 36:50 ↗

01:26:10:12 जिस यज्ञ में अर्पण अर्थात स्वा आदि भी ब्रह्म है हवन किए जाने योग्य द्रव्य भी ब्रह्म है तथा ब्रह्म रूप कर्ता के द्वारा ब्रह्म रूप अग्नि में आहुति देना क्रिया भी ब्रह्म है उस ब्रह्म कर्म में स्थित रहने वाले योग योगी द्वारा प्राप्त किए जाने योग्य फल भी ब्रह्म

⬜ Not used yet · 01:26:29:12 – 02:12:17:00 (45:48)

01:26:29:12 है अब इन्होंने न्याय किया ये एज इट इज नहीं है इन्होंने शब्दार्थ में वही लिखा जो संस्कृत से हिंदी हुई मगर इन्होंने शब्दार्थ में बदल दिया मगर एज इट इज ही है वो एज इट इज नहीं अच्छा एक मैंने अभी निर्गुण की बात चली थी कि भगवान निर्गुण नहीं तो मैंने अब अपना तो अध्ययन ठीक है मैंने देखा ये क्या कह रहे हैं जहां पर भगवान ने निर्गुण की बात की भगवत गीता में वहा यह क्या कह रहे हैं तो निर्गुण पर 13 अध्याय के 31 में मुझे क्या मिलता है जहा भगवान ने निर्गुण शब्द का उपयोग किया अपने लिए तो 13 अध्याय के निर्ग अना परमा

01:27:14:07 शरीर मैं बस ल इसको 1 अध्याय का 31 वा श्लोक नहीं 13 का नहीं है और कोई है देखना पड़ेगा उसम उन्होंने निर्गुण शब्द का उपयोग चय यह रहेगा आठवे अध्याय का आठवे अध्याय का मेरे खल से 25 वा लोक है निर्गुण शब्द आया है वहा प अव्यक्त अव्यक्त ऐसा कुछ आ रहा है अव्यक्त आ रहा है आया निर्गुण निर्गुण भी आया है मैं एक मिनट देख लेता हूं एक मिनट मैं देख के बताता हूं

01:28:35:04 अध्याय 13 का 30 वा है य अध्याय 13 का 30 वा यह भी नहीं है क्या 32 वा श्लोक है अध्याय 13 का इसमें अनादि निर्गुण शब्द स्पष्ट दिखाई दे रहा है है ना इसमें इन्होने क्या किया क्योंकि ने निर्गुण सत्ता नहीं माननी है तो इनको क्या किया निर्गुण का अर्थ लिख दिया दिव्य जी जब निर्गुण का अर्थ भी निर्गुण नहीं है तो फिर ये प्रश्न ही नहीं बनता कि वह निर्गुण है कि नहीं दिव्य है कि नहीं और यह कैसी भगवत गीता है जिसमें उसके शब्दार्थ में ट्रांसलेशन में भी लिखने वाले ने अपने मन का डाल दिया है अब

01:29:50:21 इसमें इसमें अच्छा एक चीज और आपको बहुत काम की दिखाता हूं पांचवे अध्याय का 25वां श्लोक है वो देखिए कि जगतगुरु शंकराचार्य कहते हैं किस आचार्य को कहां पर जाकर के भगवत आदि शंकराचार्य को मानना पड़ जाएगा यह कोई कह नहीं सकता है क्योंकि कहीं ना कहीं सभी को मानना पड़ जाता है तो पांचवे अध्याय का 25वां श्लोक है इसमें देखिए क्या कहा जा रहा है इसमें ट्रांसलेशन में क्या कहा जा रहा है जो लोग संशय से उत्पन्न होने वाले द्वैत से परे हैं द्वैत का खंडन हो गया भगवत गीता में और इसकन की भगवत गीता आई क्योंकि भाई वो होता है ना कि हमको कितना भी हम कर ले हमको याद रखना पड़ता है झूठ की एक कमी होती है झूठ को याद रखना पड़ेगा तो कहीं ना कहीं तो हमसे गलती होगी ही होता है ना कि कहीं पर हम जाते हैं तो हम सबूत छोड़ आते हैं कोई हमने ऑफेंस कार किया तो अब ये क्या है जो लोग संशय से उत्पन्न होने वाले द्वैत से परे हैं तो द्वैत का खंडन तो ये खुद ही कर रही है इस कोन की भगवत गीता हालांकि इसके आगे भाष्य में कुछ और किया गया होगा उसका निराकरण मगर क्या हुआ कि एक कैसी गीता है जो कहीं

01:31:05:26 कहीं पर तो अपने ही सिद्धांत का खंडन कर रही है कहीं पर ब्रह्म का अर्थ ब्रह्म नहीं है वहां पर जो है ब्रह्म कर्म समाधि नाम उसका अर्थ हो रहा है कृष्ण भावना मृत अंतरराष्ट्रीय सोसाइटी है ना और निर्गुण का अर्थ निर्गुण नहीं है निर्गुण का अर्थ दिव्य है तो भाई फिर जब निर्गुण का अर्थ दिव्य है तो फिर दिव्य किसको कहेंगे दिव्य को क्या कहा जाएगा और फिर निर्गुण का अर्थ जब दिव्य है ही तो फिर निर्गुण को लेकर के विवाद कैसा शंकराचार्य से जब निर्गुण का अर्थ आप दिव्य मानते हो तो विवाद क्यों शंकराचार्य से या तो निर्गुण का अर्थ निर्गुण मानो मगर नहीं जहां पर हमें प्रॉब्लम आएगी वहां हम क्या करेंगे अब ये बात ये है कि ये शील प्रभुपाद जी ने लिखा है कि नहीं लिखा है यह भी एक डाउट का मामला है क्यों डाउट का मामला है डाउट का मामला इसलिए है क्योंकि ये 1972 में पहला वर्जन इन्होंने लिखा इसमें मोटे मोटे करीब 108 के करीब है मगर कुछ थोड़े बहुत की भी अगर बात की जाए तो दूसरे अध्याय का 30 वा श्लोक है जिसमें इन्होंने प्रभुपाद जी ने 1972 में लिख दिया कि भाई ही हु ड्वे इन द बॉडी इज टर्नल इटरनल यानी

01:32:21:21 जो आत्मा है उसको सनातन मान लिया शाश्वत ठीक और हमारा जो सनातन धर्म है वो इसी पर टिका हुआ है कि आत्मा कभी मरती नहीं है पूरा इस पर ही है सनातन तभी है उसका नाम ही सनातन इसलिए आत्मा और जो ब्रह्म है दोनों इटरनल है अगर उसको द्वैत से देखे तो भी और अद्वैत से देखे तो भी तो इन्होंने भी टर्नल मान लिया मगर ये जो श्लोक है ये टर्नल जो लिखा हुआ है इसमें यहां पर देखिए श्रील प्रभुपाद जी ने टर्नल शब्द का उपयोग कर लिया है ठीक अब जो ये 1972 का वर्जन है अब आज का वर्जन देखिए आज के वर्जन में इसका अर्थ बदल दिया गया टर्नल शब्द को हटा ही दिया गया है ना हां ये देखिए इसमें क्या है इसमें कहीं भी आपको टर्नल नहीं दिखेगा नहीं दिख रहा है इसमें इन्होंने सीधे लिख दिया ही हु डल्स इन द बॉडी कैन नेवर बी स्लेन उसको मारा नहीं जा सकता म ही हु डल्स इन द बॉडी इ टर्नल ये नहीं लिखा अब टर्नल शब्द हटा दिया तो यहां से दोनों की प्रामाणिकता पर प्रश्न चिन्ह लग गया

01:33:37:00 भाई आज जो हमें प्रभुपाद जी के नाम से परोसा जा रहा है वो प्रभुपाद जी का है कि नहीं है यह बहुत बड़ा एक विचारणीय प्रश्न हो गया ये बोलते है कि इसम जो ग्रामर एक मिनट बोलता हूं ये बोलते बात ई है इन्होने लास्ट में उसका दिया है कि क्या कहते हैं इसमें जो ग्रामेटिकल फॉल्ट्स है उनको सही करने की अनुमति दी है मैं कह रहा हूं द है ठीक है मगर जब आप किसी का लिखा हुआ चेंज कर रहे हो उसमें नाम लिखो ना कि ये प्रभुपाद जी की नहीं यह फलाने व्यक्ति के द्वारा संशोधित की गई भगवत गीता है यह लिख लिखना पड़ेगा ना आप उसको वही उसी नाम से नहीं जैसे आदि शंकराचार्य जी ने भगवत गीता पर भाष्य किया भगवत गीता पर उनके बाद भी भाष्य किया गया उन्होंने भग शंकराचार्य के विरुद्ध नहीं किया मगर जब उन्होंने किया तो उनको शंकराचार्य का नाम नहीं दिया उसी परंपरा के अनाचार ने जब उस पर भाष्य किया उसमें कुछ तोड़ा मरोड़ा कुछ चीजें और उनको समझ में आई कि लिखनी चाहिए तो लिखी उन्होंने मगर उन्होंने यह नहीं लिखा शंकराचार्य जी का ही भाष्य उन्होंने अपना नाम दिया तो यदि आपको प्रभुपाद जी के ट्रांसलेशन में कोई दिक्कत लग रही है आप बदल रहे हो तो बदलो मगर उसको अपना

01:34:52:07 नाम दो प्रभु जी का नाम मत दो फिर है ना प्रभुपाद जी के ही नाम से आप कैसे लिख सकते हो अब जब ये हमें क्लियर हो गया कि उनकी प्रमाणिकता सिद्ध नहीं होती इसके बाद फिर हम लोग जब यह देखते हैं कि भगवत गीता में कई जगह ऐसी जगह बहुत सारी जगह जहां पर वर्ड का मीनिंग जो है वो छुपा लिया गया अब इसमें एक एक कोई है बंगाल के हैं जो जिनका बहुत वायरल हुआ था वो बोगस फिलोसोफी ही केम फॉर हिज न ब्लोगन बोगस फिलोसोफी वो एक वायरल हुआ था आदि शंकराचार्य जी के लिए कि बंगाल के कोई हैं कोई प्रभु जी है पतले पतले से हैं सावले कलर के तो उनका बड़ा फेमस हुआ था तो उनका एक वीडियो मिलता है कि भाई उसमें लि वो एक क्वेश्चन का आंसर करते हैं कि भाई कई बार लोग कहते हैं कि जो भगवत गीता एज इट इज है उसमें सब जगह कृष्ण कृष्ण कृष्ण कर दिया तो ऐसा क्यों है तो वोह आंसर देते हैं हमने सब जगह कृष्ण कृष्ण इसलिए दिया है लिख दिया है कि जो भक्त होता है ना उसको सिर्फ कृष्ण ही दिखाई देते हैं ये आंसर

01:36:07:18 अब इस आंसर को का ये दो लोग ने बोला है दो लोग ने बोला एक तो एक तो अमरेंद्र अमरेंद्र दास की बात कर रहा उने बताया शीला प्रभुपाद ने जो लिखा है भक्तिमय लिखा है ब व अगर भक्ति इसको कहना चाह रहा हूं मैं अपनी बात पूरी कर लू अब इसमें बात ये आती है कि एक भक्त जो होता है उसको केवल वो भक्ति दिखती है तो ये सनातन नहीं रहा इट्स नॉट द इटरनल ट्रुथ फिर य भगवत गीता प्रभावित है किससे किसी के दृष्टिकोण से यह न्यूट्रल होकर के लिखा गया भाष्य नहीं रहा यह फिर एक व्यक्ति की अपनी वो भक्ति भावना है वो उसमें ई गई सनातन सत्य नहीं रहा पहली बात दूसरी बात यह है कि अगर उनको सिर्फ कृष्ण ही दिखते हैं तो इस पूरी भगवत गीता में कहीं पर भी कोई दूसरा शब्द आना ही नहीं चाहिए था सिर्फ कृष्ण लिखा होना चाहिए था पूरे सारे श्लोकों का अर्थ क्या है कृष्ण कृष्ण कृष्ण कृष्ण कृष्ण कृष्ण हर श्लोक का अर्थ यही होना चाहिए था क्योंकि भक्त को तो भगवान ही दिखते हैं ना मगर जहां पर उनका मंतव्य सिद्ध हो रहा वहां भगवान नहीं दिख रहे वहां प तो दिव दिव्य

01:37:22:21 दिख रहा है द्वैत दिख रहा है द्वैत दिख रहा है सब माया वाद भी दिख रहा है है ना सब दिख रहा है मगर जहां पे दिक्कत आ रही दिक्कत आ रही है भगवान वो किसी चीज को छुपाना है भगवान के नाम से वहां पर उनको जो है भगवान दिख रहे हैं एक ये बात हो गई तीसरी बात ये हो गई क्या ऐसा करना सही है कि आप सत्यता को छोड़ कर के अपनी बात लिख दो जो हमें दिखाई दे रही है अगर ऐसा माने तो जो वाल्मीकि जी थे वो बहुत बड़े भक्त थे भगवान के राम के तो हमको उसमें राम ही राम दिखाई देता फिर तो राम राम राम राम क्या हमें वाल्मीकि रामायण प्राप्त हो पाती कभी नहीं राम राम राम राम ये है भाई वाल्मीकि रामायण ये कौन सा तर्क हुआ भाई कि हमको जो है भक्त हम भक्त है तो हमें तो ईश्वर दिखते हैं बस भाई तो फिर आप उसको लिख उसको बेचते समय कहो ना ये यथारूप गीता नहीं है यह भक्ति भाव से प्रभावित गीता है उसको क्यों कह रहे हो एज इट इज वो न्यूट्रल होकर के लिखा गया भाष्य नहीं है ये मेरा कहना का ब जी आप बोले दीपक वमा हा श जी तो एक्चुअली प्रॉब्लम यहां पर आ जाता है कि इनको जैसे बताते हैं कि जो प्रभु पादने बुक लिखा तो परा भक्ति में मतलब

01:38:38:07 कृष्ण को पूरा सेंटर में रख के भक्तिमय लिखा तो दूसरा क्वेश्चन य आ जाता ठी उने भक्तिमय लिखा जब उन्होने भक्तिमय लिखा तो उनको क्या बोलते है बराबर है कि उनको सि मतलब भगवान के विषय में पूरा लिखना चा फको गीता पह गीता नहीं बोल सकता जहारा भक्ति का लिख रहा भगवान का विषय निकल रहा तो भगवत गीता हो मतलब नहीं होगा वो क्यों नहीं मतलब भगवत गीता व इसलिए नहीं होगा भगवान भगवान अर्जुन को उद्देश्य दे रहे तो वो उद्देश तो रहा नहीं गया ना उद्देश तो रहा नहीं गया वहा प वहा खंडित हो गया वहा प क भगवान अर्जुन को क्या बताना चाह रहे और ये हमको क्या बरा अलग हो गया मैं मानता हूं कि भक्ति करनी चाहिए लेकिन भक्ति का उसका निचोड़ हो सकता है उन वाक्यं का अर्थ नहीं हो सकता नहीं चेंज हो सकता नहीं चेंज हो सकता तो वहां पे आप चेंज कर रहे हो और उसको फिर भी आप बोल रहे एज इट इज एज इट इज तो कैसा मतलब एज इट इज पहली बात तो जो मतलब जो भगवत गीता जो अर्जुन को भगवान ने बता और आप जो बता रहे हो उसम बहुत ही अंतर है मतलब एक अगर एक दृष्टि से देखा जाएगा तो आप भले भगवत गीता हमको दे रहे हो जो हमको मतलब जो मतलब कृष्ण ने अर्जुन को बताया था तो वो ज्ञान हमको प्राप्त

01:39:53:19 हो रहा है मतलब अगर देखन हमको प्राप्त नहीं हो रहा है अगर हम दूसरे की भगवत गीता पढ़ते हैं तो वो गलत है मतलब बोगस है तो मतलब अगर पढ़े भी तो हम कहां से भगवत गीता लेके भाई हम किसकी पढ़े अगर आपकी पढ़ते हो तो आप तो डायरेक्ट बो हमारा प्रमाणिक है और प्रमाण में भी आप इतने अमल आपको बता प्रमाण में हमारे पास य है कृष्ण कृष्ण कृष्ण कृष्ण जो जाप करना है नाम का वही जन वही हमारा आपको किसी का और आपको किसी का सु अगर आप दूसरे का सुनोगे तो आप फिर मतलब माया की जाल में फस आप मायावादी मतलब बोते माया अभी बोलते एक शब्द कोलोग पकड़ के बैठ गए मायावादी भाष्य सुने हो होए विनाश कुछ मतलब आता है चैतन्य चरिता में तो मायावा जैसे माया जाता है अ फर एपल मतलब य प्रभु मुझे बताते प्रभु कि एक बार क्या हुआ कि इन्होने एक विषय मतलब कुछ विषय निकाला किसी के मतलब माया शकर का जिसम उन्होने क्या बोला उनको नहीं नहीं प्रभु मायावा का मत सुनो मत ये क्या आप शंकराचार्य कब से बनने लगे हो मतलब

01:41:17:03 मायावादी गया वैदिक मायावा एक मायावा य है कि भगवान के बारे में जब सिद्धांत निकाल तो उसम माया की बात हो जाती तो मायावा उसको कहा जा सकता है तो माया की बातें माया के नाम से तो इनकी किताबें छप रही है अभी आपने बताई कहानी के तुमको माया जो है घसीट लेगी आपको ऐसे डराया जाता था यानी माया के अस्तित्व को तो स्वीकार किया जा रहा है और माया का मैंने एक शील प्रभुपाद जी का एक वीडियो देखा जिम वो कह रहे हैं कि माया वोह है जिसका माया का अर्थ है जो नहीं है जो एसिस्ट और जो भव साढ़े तीन घंटे उसने जो सर पटका था य प वो एस्ट ऐसा नहीं है इसका मतलब मतलब प्रभुपाद जी कह रहे हैं कि व माया का अर्थ ही है जो एजिस्ट नहीं करती और वो माया के अस्तित्व को स्वीकार रहे हैं उनकी आवाज की रिकॉर्डिंग है वीडियो में और उसने व्यक्ति ने कम से कम एक घंटे बर्बाद किए थे वो झूठ झूठ नहीं गलत है वो मेरे पास वो चीज इंफॉर्मेशन आनी नहीं चाहिए मगर वो इंफॉर्मेशन है रियल एक नजर अगर एक नजर से देखा जाए तो जो गौड़े संप्रदाय है गड़े संप्रदाय वो भी इनको वो भी इनको एग्री नहीं करते मतलब जहा मैंने सुना है मतलब पूछा है मैंने जो मतलब अ इतना डिटेल नहीं पता ब इतना पता है मुझे कि

01:42:32:03 जो गौड़ संप्रदाय इनको अपना नहीं मानते दूसरी बात जो माधव माधव चार्य के संप्रदाय है माधव माधव संप्रदाय वो भी उनको नहीं मानते और यह क्या लिखते हैं ब्रह्म गड़ माधव संप्रदाय ये क्या बोलते हमारा जो आता है ब्रह्म गौड़े माधव जहा से हम ब्रम जो ब्रह्म संप्रदाय गौड़े संप्रदाय माध से हमने कुछ कुछ चीजें ली हुई है मतलब कुछ कुछ चीजें इनको लेनी पड़ी मतलब इनका इनका कुछ है नहीं बट इनको लेनी पड़ी फिर भी वो पूर्ण तरह से मतलब पूर्ण तरीके से वो भी फिर भी कंप्लीट नहीं है इस इसमें एक और बात आता है जी इसम एक बात एक मैं संक्षिप्त में बताऊं कि अगर यह लोग यह कहते हैं कि हम जो है भगवान का ज्ञान एज इट इज कहते हैं तो क्योंकि भगवत गीता में मीनिंग बदल दिए गए हैं तो इनकी गीता एज इट इज नहीं रही फिर ये कहते हैं हम श्री प्रभुपाद जी के शिष्य हैं तो क्योंकि वो भी अंतर आ रहा है कई जगह कंट्रक्शन भी है 262 में कहा जा रहा है कि भगवान जो शिव थे वो अपनी इंद्रियों पर कंट्रोल नहीं कर पाए थे और भागवत में श्री प्रभुपाद जी के रेफरेंस से कहा जा रहा है कि जो पार्वती

01:43:47:10 के साथ शिव को देखकर उन्हें कामी समझते हैं काम इंद्रियों के अधीन समझते हैं मूर्ख होते हैं तो एक प्रभुपाद जी के स्टेटमेंट में कंट्रक्शन है है ना एक तरफ कह रहे हैं कि वोह काम वो नहीं कर पाए नियंत्रण और एक तरफ कह रहे हैं कि जो उनको नियंत्रण नियंत्रण में ना रहने वाला समझता है जो वो मूर्ख होता है तो यह भी वो सिद्ध कर रहा है कि प्रभुपाद जी का कौन सा प्रमाणिक है कौन सा नहीं है वो नहीं समझ में आ रहा तो अगर यह कहा जाए कि प्रभुपाद जी को मानते हैं फॉलो करते हैं तो यह भी सिद्ध नहीं होता फिर फिर इनको कहा जाए फिर अगर यह कहते हैं कि हम वैष्णव है तो वैष्णव के अनुसार विष्णु को क्योंकि सुपर मानना चाहिए वैष्णव का अर्थ ही हो गया कि हम विष्णु को सुपर मानते हैं मगर ये 2.2 में कह देते हैं कई जगह कहते थे विष्णु भी थोड़ा सा निम्न है तो इनको अगर ये कृष्ण विष्णु के कृष्ण रूप को सुपर मानते हैं तो कृष्णव हो सकते हैं इनका वैष्णव होना भी सिद्ध नहीं होता अच्छा यह कहते हैं कि हम चैतन्य महाप्रभु को मानते हैं तो हमारे पास जो है अगर हम लोग अध्ययन करें तो चैतन्य महाप्रभु ने श्रीधर स्वामी जी को प्रामाणिक माना श चैतन्य प्रभ इनके अनुसार ही यह कहा कि जो भी चैतन्या के अगेंस्ट जाकर के कुछ लिखेगा वोह मेरे लिए प्रोस्टिट्यूशन के समान होगा

01:45:02:18 या वो मेरे वो जो है मैं पहले ही कह रहा हूं कि वो गलत होगा और श्रीधर स्वामी जी का जो टीका है उसमें और इनके टीके में जमीन आसमान का फर्क मिलता है हरि हर भेद उन्होंने नहीं माना जो है श्रीधर स्वामी जी ने और इन्होंने मान लिया तो अगेंस्ट हो गया तो फिर क्या हुआ ये इस तरह से चैतन्य अच्छा जब चैत जी एक मिनट पूरा कर ल हा चले जब चैतन्य महाप्रभु भागवत पढ़ के समझ रहे हैं कृष्ण को तो चैतन्य महाप्रभु श्रीधर स्वामी के शिष्य हो गए वो कृष्ण को कैसे जाने गुरु कौन होता है भागवत के अनुसार गुरु कौन है परम गुरु जो आपको ब्रह्म के बारे में बताए और ब्रह्म कौन है कृष्ण कृष्ण को जान पा रहे हैं कहां से श्रीधर स्वामी के द्वारा तो चैतन्य महाप्रभु जो शिष्य सिद्ध होते हैं सीधा स्वामी के होते हैं तो चैतन्य महाप्रभु की कही हुई बातों को फॉलो ना करने के कारण चैतन्य महाप्रभु के भी वंशावली में फिट नहीं बैठते तो चैतन्य महाप्रभु के फॉलोअर भी सिद्ध नहीं होते फिर अगर कहा जाए कि ये मधवा चार जी की परंपरा के तोय वो भी सिद्ध नहीं होते क्योंकि चैतन्य महाप्रभु ने श्रीधर स्वामी को माना है तो आप जो पढ़ा रहे हो व आप अगर

01:46:17:25 मतलब आपने चेंज कर दिया मगर आप नाम तो आपका सीध स्वामी का ही चलेगा क्योंकि आप ये तो नहीं कह रहे हम चेंज किया है आपने किया है वो बात सही है मगर आप कह तो नहीं रहे क्योंकि कहोगे तो पकड़े जाओगे तो ये मधवा चार्य जी के भी सिद्ध नहीं हो रहे क्योंकि मधवा चार्य जी का अपना भाष्य है अपनी उनकी पढ़ाई है सीध स्वामी और अगर आपका परंपरा प्राप्त ज्ञान है भगवान श्री कृष्ण से तो आपको क्यों जाना पड़ रहा है श्रीधर स्वामी के पास पढ़ने के लिए भाई अब वो शंकराचार्य वो शंकर परंपरा के थे ठीक है अब इनका कहना है कि वो शुद्ध द्वैत वाले थे मान लिया शुद्ध द्वैत वाले थे द्वैत वाले तो नहीं थे मधवा चार वाले तो नहीं थे तो फिर भी आप मधवा चार की लाइनेज के तो नहीं हुए आप जिसके कह रहे हो उसके हो गए आप शुद्ध द्वैत के हो गए आप मान लो थोड़ी देर दुर्जन तोष नय कि आपके अनुसार वो शुद्ध द्वैत थे तो आप सुद्धा द्वैत वाले हो गए फिर क्योंकि आप जिनको फॉलो कर रहे हैं वोह यह कह रहे हैं कि मैं कृष्ण को जान पाया हूं श्रीधर स्वामी के कारण और अब यह ना तो ये ना तो इनकी गीता यथारूप सिद्ध हुई ना ही वैष्णव सिद्ध हुए ना ही ये प्रभुपाद जी के फॉलोअर सिद्ध हुए ना ही ये चेतन महाप्रभु के फॉलोअर सिद्ध हुए ना ही ये मधवा चार्य जी के फॉलोअर सिद्ध हुए अब

01:47:33:12 अगर हम यह कहे कि यह धर्म की शिक्षा देते हैं तो क्योंकि यह खुद कहते हैं कि हमको बाहर शिक्षा देनी होती है इसलिए हम थोड़ा सा ट्विस्ट करते हैं बातों को तो यानी कि इनका इनके द्वारा दिया जाने वाला जो ज्ञान है वो सनातन ज्ञान सिद्ध नहीं होता क्योंकि वो परिस्थिति से प्रभावित ज्ञान है परिस्थिति से प्रभावित ज्ञान है तो इस धर्म की शिक्षा देने वाले भी सिद्ध नहीं हुए उसके बाद यदि ये क हम कृष्ण के भक्त है तो क्योंकि कृष्ण कौन है सनातन सर्वशक्तिमान ईश्वर जिसके ऊपर कोई भी नियम लागू नहीं होता मगर य खुद ही उस पर नियम लागू कर देते हैं तो ये कृष्ण के भक्त भी सिद्ध नहीं होते तो भैया सिद्ध क्या होते हो आप जलेबी जलेबी जलेबी बस घूमते

01:48:21:22 रहो तो हा अभी तो अभी मैं जैसे कि जैसे मुझे कुछ चीज पता चला अ मुझे ऐसा मतलब पता चला है कि जो शीला प्रभुपाद के जो गुरु थे भक्ति सिद्धांत स ठाकुर महाराज तो उन्होंने जो दीक्षा ली थी दीक्षा ली थी वो जो गौर किशोर दास बाबा जी का जो फोटोग्राफ था उसके सामने लिया था ठीक है उनके सामने ये बातें तो काउंटेबल होती है हम लोग तो केवल उसी बात प जो आउटपुट आ रहा है उसी परर बात कर तो बतर होगा बता रहा

01:49:02:08 बताहा उसम फोटो में देख स्वयं को दीक्षित किया था सुना हा मैं इसका पॉइंट बता रहा आगे जाके अभी सन य होता ठीक य तो जो भी बात है अभी आगे य होता हैन इनका आपस में आपस में एक त् आपको पता ठीक है अभी हमारे अभी जो हमारे सीनियर डिवटी है सीनियर डिटी एक जगह पर क्या करेंगे एक जगह बुराई करते किसका रितिक वाले लोग का ति वाले क्या बुराई करते बराबर नहीं है मतलब ये शीला प्रभुपाद के फूट प्रिंट पर नहीं चल मार्गदर्शन में नहीं चल र भटक गए इन्होंने अपना खुद का रि बना लिया और एक जगह पर य पर क्या आता है जो इकन है वो मतलब बराबर है क्योंकि जीबीसी है गनिंग बॉडी क येय है गनिंग बॉडी कमीशन तो ये बराबर है क्योंकि ये लोग जीबीसी फॉलो करते हैं तो जो इनका इनिशिएटिव

01:50:05:03 में क्या होता है कि आप आप मतलब जो ऋत में क्या होता है कि जो शीला प्रपात का जो फोटो रहता है उसके सामने आपको इशन देते है तो वो गलत है मतलब मैं इसलिए इसमें कंफ्यूज ये हुआ अच्छा अच्छा मतलब ये खुद ही उसको क्लेम कर रहे हैं गलत करते य अगर फोटो से दीक्षा लेना गलत है तो फिर इनके इनकी जो परंपरा खंडित हो जाएगी जाए उसको स्वीकार कर रहे त्विक वही काम कर रहा है तो उसको गलत कह रहे के विरुद्ध पॉट पॉइंट है य हा तो मैं यहां प आ रहा हूं ये बोल रहा था मैं कि मेरे को यहां से थोड़ा लगा कि अच्छा भक्ति वो क्या बोलते भक्ति सि सरस्वती महाराज जो थे वो उच्च लेवल के भक्त थे मतलब ऐसे भक्त थे ना जो कर सकते हैं जो मतलब जो उनके गुरु के फोटो के सामने दीक्षा ले सकते हैं तो ठीक है जो रितिक वाले जो कर रहे हैं फिर वो गलत कैसा हो गया वो भी तो प्रभुपाद का मतलब जो प्रभुपाद के फॉलो मतलब उनके हिसाब से दीक्षा ले रहे हैं अभी इनका क्या होता है कांसेप्ट जो ये कर रहे हैं ना ये बराबर है दैट इज 100% करेक्ट ये जो है सास समत के हिसाब से कर रहे बाकी जो लोग कर रहे गलत कर रहे हैं तो यहां प मुझे प्रॉब्लम यह होता है कि जब आपको आप हर चीज में आपको बता रहे

01:51:20:08 हो कि आप अच्छे हो अच्छे हो अच्छे हो तो आप दूसरे का बुरा क्यों कर रहे हो ठीक है ना भाई उसका जो भी है जो भी गुरु परंपरा फॉलो कर रहा है व अगर अग भक्ति कर रहा है तो आप उसको भक्ति बेकार बोल रहे मत बोलिए वो आपको भक्ति जिसका अव ही दूसरे की बुराई से बना है क्या करेगा अगर बुराई नहीं करेगा तो जैसे इलाम की बात करें तो उसम इस्लाम में क्या है कि अगर वहां पर दिन में पूजा हो रही है तो हम रात को करेंगे अगर व रोटी सीधे तवे पर बनती है तो हम उल्टे तवे बनाएंगे तो हर चीज हम विरुद्ध चलेंगे है ना अगर वह सूर्य को देख के करते तो हम चांद को देख के करेंगे चांद को देखेंगे विरु चलेंगे उल्टा चलेंगे हर चीज उल् जिसका अगर जिसका अस्तित्व ही किसी के खंडन पर बना हुआ है भाई शंकराचार्य जी ने तो अपने में नहीं लिख दिया स्कोन का खंडन कि वो फिसपी ऐसी है वैसी है मगर क्या हुआ कि शंकराचार्य जी का नाम लेके वो मायावादी है और जिस जिस ने सत्य का सिद्धांत दिया तुलसीदास जी की जो उसको भी मायावा कह दिया ही गट मायावा टच ही इ नॉट प्योर वेश्णव अब वैष्णव की जब इनसे इनसे कुछ कहो तो हम वैष्णव हमें ऐसे क्यों कह रहे हो

01:52:35:08 और आप तुलसीदास जी को कहने के अधिकारी हो गए वो कैसे हो गए व भी तो वैष्णव है और आप कौन कौन होते हुए तय करने वाले कौन वैष्णव है कौन नहीं है यह भी दिक्कत है और यदि आप तय कर सकते हो फिर हम क्यों नहीं कर सकते यदि आप तय कर सकते हो कौन वैष्णव नहीं है तो हम भी तो कर सकते हैं तो यह कैसी तानाशाही है कैसा व परतंत्रता है यह सारी चीज है आपको अगर जी बहुत सारी चीज

01:53:08:24 हैने बात जन पूछी थी केतन महाप्रभु जी ने उनसे दीक्षा ली थी सने प्रश्न के मत से आते थे तो हमने कहा ऐसा कैसा मतलब आप तो वैसे तो ऐसे ही पूछ लिया प्रश्न कि उन्होंने तो शंकर मत से तो लिया आया दीक्षा तो हम ऐसा क्य शंकराचार्य को नहीं मानते वो तो कैसा वो समय प कैसा था कि जो मेन जो दीक्षा थी वो नाम जपता वो नाम जप तो उन्होंने जो उनके जो गौड़ीय से लिया है और ये तो उन्होंने इससे लिया है सन्यास दिखता तो ठीक है व लेना पड़ा वो समय प शंकराचार्य जी का वर्चस्व ये था कि जो शंकराचार्य से दीक्षा ले तो उनका महत्व गिना जाता है मतलब ऐसी सब बात कर लेते अभी क्या बोलू आपका हल है ना दीपक जी ऐसा ही लगता है भैया मैं अपने सर पर एक अधा मार लू आप पढ़ने पढ़ने जा रहे हो श्रीधर स्वामी के पास मगर आप श्रीधर स्वामी के शिष्य नहीं हो आप पढ़ नहीं रही हो पढ़ नहीं रहे हो मधुवा चार्य जी का ज्ञान मगर आप मधवा चार्य जी के शिष्य हो आप दीक्षा ले रहे हो ऑफिली शंकर संप्रदाय मगर आप फिर भी शंकर संप्रदाय

01:54:23:27 के नहीं हो और आप जो है नाम ले रहे हो एक किसी से तो आप जो है उसके शिष्य हो जाते हो सो जाते और उसके बाद भी आप जिनको आप ही प्रमाण मान रहे हैं वोह जो कह रहे हैं उसके विरुद्ध आप कार्य कर रहे हो फिर भी आप उसके फॉलोवर हो जाते हो भाई अभी जो मैंने पांच छ स्टेप बताए ना कि अंत गत्वा आप सिद्ध क्या होते हो व वो समझ पाना और जन्मना कर्मणा में भी है यही बात जन्मना कर्मणा में पता है क्या सामने आ रहा है भैया से भी है और कर्म से भी है जिसका जैसा मनो वैसा मान ले अरे मेरे भाई यह तो ऐसा हो गया जैसे कि बहन से विवाह नहीं भी करना है और करना भी है जिसको जैसा मानना हो मान ले यह कौन सा नियम हुआ भाई अगर मैं किसी के पास जाऊ भैया क्षत्रिय किसी को क्षत्रिय स्वीकार करने का पैरामीटर क्या है तो वह कहेगा कि यदि क्षत्रिय ने तलवार हाथ में घुमा दी तो उसको माना जाएगा तलवार घुमा दी ऐसे ऐसे करके तो मान लिया जाएगा हालांकि य शास्त्र में वर्णित नहीं है मर थोड़ी देर के लिए मान लेते हैं तो फिर जन्म नाव खत्म हो जाती है जैसे ही आपने कर्मण से मान लिया कि कर्म के अनुसार किसी को क्षत्रिय घोषित किया जाएगा तो तो जन्मना का स्पेस ही नहीं रह जाता है ऐसा नहीं हो सकता है कि जन्मना और कर्मणा साथ में चल पाए तो ये कौन सा वो है जन्मना और कर्म

01:55:39:04 अच्छा जितने भी आचार्य गण है मधवा चार हुए रामन जाचार्य हुए जितने भी जो प्रामाणिक हमारे संप्रदाय है वो सब जन्म से मानते हैं सब टोटली तो फिर आप वर्ण व्यवस्था कहां से ले आ रहे हो दोहरी दो मुही और इसका इसका विनियोग किसम है इसका परवन किसम है ये सब कुछ बिल्कुल आउट ऑफ द सिलेबस हो जाता है कुछ कुल मिला कर के हमारा जो एक सेशन हुआ था लखनऊ के जो प्रेसिडेंट थे उनके साथ उसमें भी ऐसा देख था ये जो साढ़े तीन घंटे का सरदर्द था वो भी ऐसा ही था क्योंकि व्यक्ति अपनी बातो से जो वो कह रहा है उससे मुक रहा है तो उसको पकड़े कहां पे उसको कहां प पकड़े जैसे मैं जिस चीज प जैसे मैं मैंने बोला कि अच्छा 19वीं सदी के है तो आप उसे प्रमाणिक नहीं मानेंगे यह सिद्धांत है आपका तो बोलते मैंने अभी तक उसको प्रॉपर वो नहीं कहा है प्रॉपर मैंने उसको अन ऑथराइज नहीं करा कि क्या हुआ पहले बोल दिया खुल के कि मैं उसको अप्र माणिक मानता हूं फिर थोड़ी देर बाद बोलता है मैंने प्रॉपर नहीं कहा भाई तुम एक स्टेटमेंट दोना क्लियर क्लियर कि मानते हो कि नहीं झूठ नहीं है गलत है और अंत में ईश्वर सर्व शक्तिमान है कि नहीं तो भैया वो है भी और नहीं भी वो कर भी सकता है नहीं भी कर सकता है यह क्या है तो ये कन्फ्यूजिंग का समुद्र है

01:56:54:06 उनके पास कुछ प्रश्न नहीं रता तो ऐसा बोलते प्रभुपाद जी ने कहा है खतम प्रभुपाद जी ने कहा बात खतम हो जाती है अपनी बात को रखने के लिए शास्त्र ले आएंगे जब शास्त्र पर बात करोगे तो आचार को ले आएंगे आचार पर बात करोगे तो फिर शास्त्र को ले आएंगे जिस चीज हा शकरा े शंकराचार्य जी को भी ले आे देखो गोविंद को लेे जगनाथ गाते उन लोग जगन्नाथ अष्टकम गाते साड़ी बीज रहती है ना कभी जगनाथ जगन्नाथ अष्टकम गाते है क्यों वो क्यों वो क्यों गाते हो वो तो शंकराचार्य जी ने लिखा है वो तो मायावादी है उनका क्यों गाते हो अरे जैसे मान लीजिए मैंने कहा कि भाई इसमें ऐसे से ऐसा क्यों कि क्योंकि भाई देखो प्रेमानंद जी भी कह रहे हैं देखो भाई वो जो है ना एक और नाम है जिनका वो प्रेम मंदिर है उनका नाम याद नहीं आ रहा है उनका नाम कृपालु जी महाराज कृपालु तो कृपालु जी महाराज का नाम जब जब हमारी किसी बात को काटना होगा तो कृपालु जी महाराज प्रेमानंद जी महाराज अच्छा जब आप किसी आचार्य को प्रमाण के रूप में स्वीकार करवाना चाहते हो तो हम भी तो किसी आचार्य का नाम ले सकते हैं जैसे ही हम आचार्य का नाम लेंगे तो शास्त्र ले आओगे फिर हम

01:58:09:08 शास्त्र का नाम लेंगे तो आचार्य ले आओगे आप एक चीज पर स्टेबल ही नहीं हो आप अगर आचार्य से सिद्ध करना चाह रहे हो तो हम भी तो आपको आचार्य का ही नाम दे रहे हैं जब हम दे रहे हैं तो आचार्य वो ऑथराइज नहीं है हम उन्हें अथॉरिटी नहीं मानते और जब हम शास्त्र दे तो आप आचार ला रहे हो देखो देखो प्रेमानंद जी कह रहे हैं कुल मिला के ये अपने उसम ही जैसे नहीं वो फस जाता है व्यक्ति और फिर कहते है कि शंकराचार्य जी का भाष्य जो सुन लेगा वो उसका सर्वनाश होगा खुद आदमी इतना बड़ा कन्फ्यूज है खुद कन्फ्यूज है व्यक्ति व्यक्ति जो प्रेसिडेंट उस पर बैठा है वह कह रहा है ज्यादा शास्त्र की गहराई में मत जाओ शा की गहराई में जाना हमारा उद्देश्य नहीं है हम तो बस वो 16 माला करते रहो और य मंदिर आते रहो य की संख्या बढ़ाते रहो और जो भी यहां पर जो आगे की चीज है वो करते रहो इसमें तो व बात हो गई इसम तो वही वाली बात हो गई है कि बस आप आप बस भक्ति जो है वो मेन करना है आपको बाकी दुनिया में बम फूट रहा है क्या क्या हो रहा है उस पर आपको ध्यान नहीं देना है आपको सिर्फ एक ध्यान देना गोलोक धाम जाना है आपको बस य आप दिमाग भरो और आपको हा और आपको वहा प क्या गोलोक धाम में क्या होता है जब जब इंसान

01:59:24:19 जो होता है जब भगवान की सेवा करता है म हम जो आत्मा होती है जब भगवान की सेवा करती है उनके धाम में तो उनको उनको वहां प ना ऐसा थॉट्स आता है कि काश मतलब मेरा भी ऐसा सेवा होना चाहिए मेरा भी ऐसा मतलब सेवा होना चाहिए तो उसके लिए भगवान वो तो भगवान है तो क्या बोलते है ठीक है मेरा भक्त है इसकी भी इच्छा पूरा कर मतलब मैं पूरी करता हूं तो उसके लिए भगवान क्या करते हैं ठीक है भाई उसके लिए ये भूलो मतलब ये मृत्यु लोक मेंको भेज देते हैं मटेरियल उसम उसको भेज देते हैं अब जा तू भोग कर जो ते को भोग करना है मतलब व से रिटन आ रहा है इंसान वहा से वहा पर जाने के बाद भी विचार चल रहे है

02:00:01:16 मतलब हा वो धाम में तो भगवान का सेवा उसम आनंद है तो वहा बुद्धि अपनी कैसे चलेगी पहली बात तो इंसान ज जब कोई भक्त होता है श्रेष्ठ भक्त होता है जब भगवान के पास जाता हैसे तुलसीदास जी तो उनका मेनन डेस्टिनेशन क्या था कि मुझे भगवान के पास जाना है और उनकी सेवा में लीन होना है मुझे ठीक है जब उनकी सेवा में मैंने खुद मैंने खुद ये निर्णय बनाया है कि मुझे सेवा करना है उनकी उनका मुझे सेवा करना है वहां पर जाके उनकी लीला देखना है मुझे तो वहां पर जाने के विचार कैसा करू कि मैं भाई नहीं भाई को मेरा भी ऐसा मतलब जैसा भगवान का श आराम सेय हो रहा है वैसा मेरा भी होना चाहिए वहा मेरी बुद्धि कैसे चल रही है तो यह विषय आ जाता है तो जहा मतलब स्पष्टता कुछ नहीं है मतलब जो क्लेरिफिकेशन है वो कुछ भी नहीं है बस यहां पर क्या है ना आप अंदर आ जाओगे ना बस गोल गोल घूमते रहोगे आप आप प्रसाद खाओ च ठीक है बहुत अच्छ आप कार्य कर रहे ठीक हैसे प्रसाद डि तो अंत में एक आंसर मिलेगा अचत आप मायावादी हो आप मायावादी हो आप जब ज्यादा प्रश्न कर आप मायावादी हो जब ये में जब ये मैंने इनसे रोड पर बात की थी स्कन वाले जो दो नवयुवक थे

02:01:16:18 जब मैं उससे कन्वर्सेशन करने लगा तो जो सीनियर था वो जूनियर के कान में बोलता है अरे ये लोग अ भक्त है इनसे बात मत करो ऐसे कान में बोलता है काफिर काफिरो से दोस्ती मत करो अक्त से दोस्ती मत करो य सब है आपको में र भक्ति करना है बाकी अगर आप बाहर होते हो आप मतलब आपको माया ने पकड़ लि और आप मायावादी हो तो मतलब इनका एक सिंपल सी बात है भक्त के साथ रगे ना तो बार मतलब भगवान के विषय में सुनने य सब मिलेगा बट बट वही भगवान के विषय में कोई दूसरा आपको संप्रदाय वाला बताएगा तो वो वो बराबर नहीं है क्यों बराबर नहीं है क्योंकि जो उनका फिलोस हैट डिफरेंट फम आवर फिलोस उनका फिलोस हमारे फिस ऐसा नहीं है तो इनका य पूरा मतलब आ जाता है बहुत कुछ है मतलब बोलने के लिए बट ठीक है

02:02:13:13 अभी और सबसे बड़ी बात की यहां पर ये सनातन धर्म को तोड़ना चाहते है जैसे कि शिव और कृष्ण में करते हैं पर वही पर जीसस और कृष्ण एक है बाद में जीसस और अल्लाह एक है तो मतलब य इस पता च जा स्टेटमेंट है इनका ऑफिशियल स्टेटमेंट कृष्णा नाम की इनकी बुक है उसमें इन्होंने लिखा है कृष्ण अल्लाह और यहोवा एक है यवा य यवा जो बाइबल का ईश्वर कुरान का ईश्वर और जो हमारा ईश्वर है कृष्ण वो एक है तो जो हमारा ईश्वर है अगर अगर वो हमारा ईश्वर है तो वो बाइबल और कुरान का ईश्वर सेम नहीं हो सकता और अगर वो सेम है बाइबल और कुरान का ईश्वर के साथ तो फिर वो हमारा ईश्वर नहीं हो सकता क्योंकि वो सच्चितानंद स्वरूप है आबाद है सर्वशक्तिमान है अगर हम उसको बाइबल और कुरान की सीमा के ईश्वर के सिमिलर कह रहे हैं तो बाइबल और कुरान की सीमा का जो ईश्वर है वो बाधित है वो जन्म नहीं ले सकता बहुत से काम है जो नहीं कर सकता अब यहां पर कुछ लोग कहते हैं कि वो वहां की सुप्रीमेसी ली गई क्योंकि उस किताब के अनुसार व सुप्रीम है तो पहली बात तो यह है कि कुरान की

02:03:28:14 सीमा का ईश्वर बात हो रही कुरान की सीमा कुरान क्या है व यह कहती है कि मैं सबसे ज्यादा प्रामाणिक किताब हूं ईश्वर के विषय में तो यदि आप यह बात कहोगे कि उसकी हम सिर्फ सुप्रीमेसी ले रहे हैं तो व इसकी बात कट जाएगी इसका मतलब जो जिस अल्लाह को आप कृष्ण के समान खड़ा कर रहे हो अगर आप यह कहते हुए कर रहे हो कि हम सुप्रीम के कारण ले रहे वहां से अल्लाह को तो इसका मतलब व आप कुरान का खंडन करते हुए ले रहे हो यानी कि वो अल्लाह कुरान की सीमा का ईश्वर नहीं है वो कुरान और बाइबल की सीमा का ईश्वर नहीं है तो फिर आपका एक क्लेम गलत हो गया कि कुरान का ईश्वर और बाइबल का ईश्वर और कृष्ण एक है आपका क्लेम गलत हो गया क्योंकि कुरान यह नहीं मानती कि गीता जो है ज्यादा प्रमाणिक है कुरान खुद कहती है सबसे ज्यादा प्रमाणिक मैं हूं और आपने अगर यह कह दिया कि हमने वहां से सिर्फ सुप्रीम एसी लिए तो य ने कुरान का खंडन कर दिया तो अब जो अल्लाह आप ले रहे हो वो कुरान की सीमा का ईश्वर नहीं है फिर तो फिर आप ये नहीं कह सकते कि कुरान का अल्लाह और भगवत गीता का जो कृष्ण है वो एक है दूसरी बात ये आ जाती है दूसरी बात ये आ जाती है कि क्या आप यह लिखते हो वहां पर जहां यह कहते हो कि कुरान का अल्लाह

02:04:43:24 और हम लोग जो है यूं ही कह रहे हैं जिससे कि वो लोग अच्छा जब व्यक्ति हमसे यह कह सकता है कि जो गुरु होता है वो कौन होता है सत्य बोलने वालात गुरु कौन होना चाहिए सत्य बोल जब आप हमसे कह रहे हो कि वो तो उनको धर्म परिवर्तन कराने के लिए हम बोल देते हैं मगर वास्तविकता य हम ऐसा नहीं मानते जब मुस्लिम यह पूछता होगा नहीं कुरान का ईश्वर तो यह कहता है वो जन्म नहीं ले सकता और क्योंकि इंटेलेक्चुअल वहां भी होंगे ना ऐसा थोड़ी ना बिल्कुल वहा बिल्कुल दही बेच के है वहां भी होंगे ना वहां भी पूछेंगे कि आप तो कहते हो कि वो जो है कुरान य कृष्ण जन्म लेते हैं ईश्वर तो जन्म नहीं लेता तो वहा क्या कहते होंगे सोच के देखो यही लाइन कि हम लोग अंदर से ऐसा नहीं सोचते हैं हम लोग सिफ कहते हैं व कृष्ण है वाला क नहीं है व सनातन का वो वाला जो पुराणों में जो कृष्ण व वाला नहीं है अल्ला ही है मगर हम हम कहना पड़ता है क्योंकि हमें इंडिया में प्रचार करना है तो ऐसा कोई सगा

02:05:44:10 नहीं की बात इधर हमारे मन की बात कह दी उधर उनके मन की जब हमसे ू बोल सकता है हम से झूठ बोल जो हमसे किसी और के लिए झूठ बता सकता है कि मैं वहा झूठ बोलता हूं तो वहा से उसका जो विश्वास का धागा टूट गया वो खुद अपनी क्रेडिबिलिटी पर उंगली उठवा रहा है मैं झूठ बोल सकता हूं तो वो हमसे झूठ नहीं बोल रहा इसका क्या अर्थ इसका क्या प्रमाण अकी बात है व जहा जैसे जिसको फिट करना है बस वो बोलते अच्छा एक चीज और आ जाती है यदि आप सुप्रीम मेसी के कारण आप जो है यह कह देते हो कि अल्लाह और कृष्ण एक है तो सुप्रीम मेसी के कारण भैया आप शिव पुराण का ईश्वर और भागवत का कृष्ण एक क्यों नहीं कह देते ही कता क्योंकि भैया वहां से डर लगता है और सिर्फ भगवान के भक्त है भोले भोले बाबा के भक्त बोले उनसे डर नहीं लगता सीधी सिंपल बात है ये लोग आपकी सुन लेंगे हा हरे कृष्णा भैया हरे कृष्णा और जो है शिवजी भगवान नहीं है शिवजी तो भगवान के बहुत बड़े भक्त है शिवजी भगवान के बहुत बड़े भक्त भी नहीं है वो तो हरिदास ठाकुर है क्योंकि शिवजी अपनी इंद्रियों में कंट्रोल का कर पाए व सबसे बड़े भक्त नहीं है और शिवजी शिवजी का प्रसाद भी नहीं खाना है क्योंकि वो देवता है जब वो

02:06:59:10 कृष्ण प लगा होगा तभी प्रसाद खाना है हा आप समझ रहे हो ना शिवजी हम आपकी कितनी रेस्पेक्ट करते हैं तो शिवजी कहेंगे समझ रहा हूं अ ला आखरी है एक आखरी है अभी जैसे गीता परिवार ने मतलब आपके माध्यम से बता रहा गीता परिवार ने जो वो 24 आवर्स जो गीता का प्रचार कर रहे तो अधिक से अधिक लोग उसम जवाइन करे ताकि उनको जो गीता का परा श्लोक का भी सीखने का मतलब सीखने मिले उनको अभी य पर क्या होता है इसम इसम ये होता है कि अगर आपको पढ़ना है भगवत गीता इस में अगर आपको भगवत गीता पढ़ना है तो आपको पैसे देने पड़ेंगे ठीक है वो भी कंप्लीट नहीं होता है इनका इनका कंप्लीट नहीं होता है तो मैंने इसम य चीज देखा जब से मैं जब से मैं स्न में हूं चार पा साल से तभी से देखा गता इन्होने कंप्लीट किया हुआ है नहीं करते बस आओ आप सुबह सुबह श्रीमद भागवत लेक्चर में बैठो अब वो भी सीक्वेंस में नहीं चलता है जो जो मतलब वो चाहे मतलब जो भी लोक वो चाहे वो रखेंगे बाकी सीक्वेंस में कुछ नहीं देता ये सिंपल सी बात मैं आपको बता र तो ठीक है बहुत अच्छा लगा आप लोगों ने इतना समय दिया लगभग दो घंटे हम

02:08:14:10 लोगों ने बहुत ही मतलब फैक्ट फुल बातें की तथ्य पूर्ण और निष्कर्ष पूर्ण बातें की और मैं दो चीजें बताने वाला हूं कि पहली बात है कि हमारा डिस्कॉर्डेंस का लिंक है यहां पर आपको भी शेयर किया गया था उसको हम पिंड कमेंट में भी कर देंगे तो डिस्कॉर्डेंट हम लोग शुरू कर रहे हैं 3 तारीख से नामा स्त्र ऑपरेशन नाम जप में पांच सेशन में हम लोग 15-15 मिनट के नाम जप करेंगे जो सवा घंटे की भक्ति का अभियान है उसको पूरा करने के लिए एक दूसरे के परस्पर सहयोग के भावना से शुरू हो रहा है यह निशुल्क है पूरी तरीके से आप लोग इसके लिए हमारा व नंबर है 740 830

02:09:21:18 अपना वो सर्वर उसको क्या कहते हैं मैं टेक्निकल भाषा मुझे नहीं मालूम है मगर जो जो लोग जानते हो डिस्कॉर्डेंस का हमारा चालू चालू हो गया है तो उस पर आप लोग आए और एक सूत्र में जैसे कि अभी मैंने बीच में कहा था कि क्योंकि इकोन विष्णु को सुप्रीम ना मान कर के उनके कृष्ण रूप को सुप्रीम मानता है तो वह वैष्णव सिद्ध नहीं होता और क्योंकि वह देश काल परिस्थिति वस धर्म की शिक्षा देता है तो सनातन सिद्ध नहीं होता प्रभुपाद के वर्ड्स को बदलता है तो प्रभुपाद का फॉलोअर सिद्ध नहीं होता चेतन महाप्रभु के विरुद्ध हो जाता है तो चेतन महाप्रभु का फॉलोअर सिद्ध नहीं होता श्रीधर स्वामी का टीका पड़ता है तो मधवा चार्य जी का फॉलोअर सिद्ध नहीं होता कृष्ण को सर्वशक्तिमान नहीं कहता है तो कृष्ण का भक्त सिद्ध नहीं होता और जब एज इट इज अर्थ नहीं किया गया है तो जो उनकी भगवत गीता है वो एज इट इज सिद्ध नहीं होती है ना और ये कुछ मोटे मोटे से हैं जिसमें कि चक्कर आ जाता है ज्यादा सोचते हैं तो तो इसके साथ ही साथ सभी का जुड़ने के लिए आभार आप सभी का और हम लोग अब आपसे आज्ञा लेना चाहेंगे ये

02:10:37:15 आपको दिखाई दे रहा है डिस्कर्सेस हैं वहां पर हम लोग एक्टिव हो रहे हैं अब और सभी को जय श्री राम सभी लोग उपासना सेवा संकीर्तन स्वाध्याय चार चीजें हैं अपने जीवन में जरूर करें उपासना सवा घंटे की भक्ति दिन भर में सेवा संकीर्तन सेवा संकीर्तन के लिए आप मठ मंदिरों को अपने दुर्ग बनाए शिक्षा रक्षा सेवा के प्रकल्प चलाए और स्वाध्य स्वा अध्ययन करने के लिए जो मुख्य तीन और प्लस उसमें मेरा जो वो है जगतगुरु शंकराचार्य द्वारा बताए गए जो ग्रंथ है वो है रामचरित मानस ज्ञानेश्वरी गीता और क्या कहते हैं हिंदी दास बोध समर्थ रामदास जी ये तीन और इसमें जो और तात्विक रूप से समझने के लिए गर्व से कहो हम हिंदू है पुरी शंकराचार्य जी द्वारा रचित है बहुत उसमें आपको जो है ना एक बेसिक पूरे सारे कांसेप्ट के पांच देव उपासना कैसे कहां गणेश को सुप्रीम कहा है कैसे एक ही परम तत्व अपने आप को पांच रूप प्रकट करता है बहुत विवत उसम बताया गया हिंदू हिंदू हमारा नाम क्यों है और हमारे ऊपर एक आरोप लगता है अने केश्वर वाद का तो कैसे एक वा सिद्ध होते हैं

02:11:52:16 वो सब उसमें है हर चीज का जवाब प्रमाण और तर्क के साथ प्रमाण और यति के साथ और जो पांचवा पांचवा जो वो है वो है भक्ति सुदा वो करपात्री जी महाराज का ग्रंथ है वो आप लोग अवश्य पढ़े इसके साथ ही साथ सभी को जय श्री राम आने के लिए नवाद न धनवाद जय श्री राम

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Live 2:12:17 · 22 Sep 2024

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