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00:00:01:01 [संगीत] तो सभी को जय श्री राम बिना विलंब किए हम हमारे जो अतिथि आज के उन्हे ले लेते हैं धर्म सनातन जी आप हमारी जिनसे चर्चा हुई है वही है या कोई और है थोड़ा सा अपना फेस दिखा देंगे आप भैया हमारे यहां लाइट नहीं है मैं अयोध्या दास जी पर जड़ते हु नहीं बन रहा था तो मैं उनको जोड़ना सिखा रहा था मैं आउट हो रहा हूं वो आएंगे
00:00:47:07 अच्छा जय श्री राम युगल किशोर जी जय श्री राम जय श्री राम जी जय श्री राम अमित जी आपका स्वागत है आवाज क्लियर आ रही है आपको आवाज ठीक आ रही है मैं एक निवेदन करूंगा कि आप एक बार ना बिना हेडफोन के भी ट्राई कर लीजिए ज्यादातर ऐसा होता है कि बिना हेडफोन के ज्यादा अच्छी आवाज आती है जी महाराज जी अब देखिए आ रही है बढ़िया अब ज्यादा ज्यादा अच्छी आवाज आ रही है सभी को जय श्री राम हरष प्यारी बहना जी और जितने भी यहां पर समर्थक हैं या फिर श्रोता गण है ज्यादा इंतजार ज्यादा दायित्व दे रखा है आप लोगों ने तो क्या करें ज्यादा इंतजार तो कराना ही पड़ेगा ज्यादा सारे काम है ज्यादा कार्य है ज्यादा दायित्व है तो होता
00:01:56:22 है हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे कृष्णा राजेश सिंह जी अब तो ऐसा हो गया कि हमारे मुख से हरे कृष्णा अपराध जैसा ना [संगीत] लगता व एक पहचान हो चुका है किसी विशेष तंत्र की तो आज हम उपस्थित हुए हैं जो मुख्य रूप से तो एक आधारभूत चर्चा है वो उसका आधार है कि इकोन के द्वारा जो एक श्रीमद् भागवत उनके द्वारा नाम दिया जाता है श्रीमद् भागवत जी श्रीमद् भागवत का एक पूरा चैप्टर उससे गायब है जिसका नाम है भागवत महात्म चैप्टर से पूरा गायब है और वो क्यों गायब है जबकि वो व्यास जी जी ने लिखा है आगे जिसको हम श्रीधर स्वामी जी को वो भी प्रमाण मानते हैं उन्होंने भी अपनी टीका में उसको लिया
00:03:11:26 है और उसके बाद आज वो गायब है तो यह तो हमारा एक वस्तुनिष्ठ विषय है इसके इर्दगिर्द जो एक अभियान है कि सनातन या सनातना भास धर्म या धर्मा आस तो उसमें फिर विवेचन इनका भी आ जाएगा जैसे जो अलंकार समाज है या फिर वो जो ये स्वघोषित तत्वदर्शी स्वघोषित जगतगुरु रामपाल इत्यादि कैंपेन चलता है तो वो भी सब इसमें समाहित है तो सर्वप्रथम मैं अंकित जी से कहूंगा कि अपना परिचय देते हुए एक जो प्रारंभिक वक्तव्य होम आप दे जी सभी को जय जय सीताराम मैं अंकित शर्मा पूज्य पाराशर जी द्वारा दीक्षित हूं तो रामानंदी संप्रदाय से हम जुड़ चुके हैं सोशल मीडिया के आधार पर अगर देखा जाए तो गुरु जी ने मुझे नाम दे रखा है अयोध्या दास अयोध्या दास गुरु जी ने नाम दे रखा है
00:04:27:09 और मैं आज इस यहां जुड़ने का मेरा मकसद केवल एक ही था कि यह जो स्कोन है या फिर आर्य समाज इत्यादि है और मैं हिमाचल से बिलोंग करता हूं तो यहां पर एक और समाज चलता है जिसको राधा स्वामी कहा जाता है एक संप्रदाय और चलती है जो राधा स्वामी के नाम पर है पर सनातन से बिल्कुल विमुख चलती है जिसके बारे में थोड़ी मैं चर्चा करने के लिए आज यहां जुड़ा हूं कि जो भी थोड़ी बहुत शंकाएं हैं उसका निवारण हो सके सभी को जय जय
00:05:06:14 सीताराम जी तो हम लोग ऐसा करते हैं कि जो हमारा जो सामग्री है उसके आधार पर चर्चा चालू करते हैं जी और फिर वह अपने आप उसमें समावेश हो जाएगा अन्य विषयों का भी जी तो जैसे युगल किशोर जी मैं आपको यह तो यहां पर रामानंदी बैठे हैं तो सबसे अच्छी बात तो एकय है जो एकत्व है जो परंपराओं में और आ स्वित जो दीक्षित है वो भी जो युगल किशोर जी भी जो रामानुज परंपरा के हैं ठाकुर जी के नाम से प्रसिद्ध है व कथा वाचन करते हैं वहां से दीक्षित है उनके द्वारा और अध्ययन के लिए शंकर मत का भी आलंबन लेते हैं ल किशोर जी आप अपना थोड़ा सा परिचय स्वयं ही दे दे और फिर हम लोग हमारा जो मुख्य वो है उसको स्टार्ट करते हैं पूर्व में भी हमने अपना परिचय दे ही चुका है तो कई सारे लोग परिचित भी होंगे हमसे
00:06:23:09 कि पूर्व में भी कई सारे लोग हमसे परित होंगे पूर्व में भी हमने परिचय दिया था आपका नेटवर्क शायद ठीक से नहीं आ रहा युगल किशोर जी क्योंकि आपका जो चित्र है वो रुका हुआ है हर हर महादेव पहाड़ी जी और तब तक ले लेते हैं कई लोगों को सवाल ले लेते हैं ये इतने सारे पेक पंथ कैसे पैदा हो गए हमारा प्रमाद ही तो इन सबका अस्तित्व है अभी आज इग्राम पर हमने जगतगुरु पुरी शंकराचार्य जी उनकी एक स्टोरी उनका एक वक्तव्य है जो स्टोरी पर लगाया हुआ है गुरुदेव बता रहे हैं कि बीच में ऐसी हरि भक्ति लोगों के ऊपर आ गई मतलब हरि भक्ति का प्रमाद उसका विकृत स्वरूप हो गया वो क्या था कि फेरे पढ रहे हैं तो हरि भक्ति से व हरे कृष्ण का जाप हो रहा है फेरे पढ़ते समय ऐसा आ
00:07:38:09 गया गंगा किनारे खड़े मगर हम गंगा स्नान नहीं करेंगे क्योंकि हम तो हरे कृष्ण का जाप कर रहे हैं जबकि इन्हीं बातों के इसी समय की सिचुएशन के बारे में पदम पुराण में जो 10 नाम अपराध दिए गए हैं उसमें से एक अपराध है कि जो हमारे शति का विधि विधान है शति वचनों का स्मृति वचनों का विधि विधान उनके प्रति अनास्ता वान हो जाना कि हम तो बस नाम के सहारे चल रहे तो हम कर भी सकते हैं तो भी हम नहीं करेंगे स्नान कर सकते हैं गंगा का तब भी हम अ मानना करेंगे यह कहते हुए कि हम तो नाम जप के सहारे चल रहे तो यह 10 अपराधों में से एक नाम अपराध है तो ऐसा आलंबन जब लेने लगते हैं केवल कीर्तन हो जाता है और कर्तन साइड हो जाता है छात्र धन गायब हो जाता है भक्ति के नाम पर तो इस तरह के प्रमाद उत्पन्न हो जाते हैं जी युगल जी जी तो पूर्व में हमारा परिचय हो ही चुका है तो हम विषय पर आते हैं विषय ये है किन ने जो श्रीमद् भागवत है उसके अंदर जो महात्म था वो पूरा गायब कर दिया इन लोगों ने आपका चित्र फिर कट रहा है क्या मुझी को इनका चित्र ऐसा दिख रहा है या बाकी सबको दिख रहा है आपका चित्र
00:08:53:15 पॉज है नेटवर्क ठीक से नहीं आ रहे क्या आपके यहां शायद नेटवर्क प्रॉब्लम होगी आप एक बार लीव करके दोबारा आ जाइए सही है नहीं यहां तो ठीक आ रहा है ठीक आ रहा है आपको जी जी ठीक रहा अच्छा तो फिर बोलिए फिर फिर कोई बात नहीं मुझी को दिख रहा होगा हा तो जो कन की भागवत है उसके अंदर क्या है जो महात्म श्रीमद् भागवत के अंदर बताया गया उसके अंदर एक पूरी विधि बताई गई है एक तो सप्ताह यज्ञ की विधि है कि जो साप्ताहिक भागवत होती है जो सप्ताह यज्ञ की पूर्ण विधि होती है उसम क्या क्या विधि का आलंबन लेकर के हम श्रीमद भागवत सकते तो पहले दिन जो श्रीमद भागवत होती है उसके अंदर जो व्यास
00:09:50:10 जी तो जो श्रीमद् भागवत का महात्म होता है जो पहले दिन व्यास जी होते हैं वो क्या करते हैं श्रीमद् भागवत का महात्म कहते हैं अब महात्म में कथा दुकारी की भी आती है नारद जी की भक्ति जी से भेट होती है वो कथा भी आती है अब उसम सप्ताह यज्ञ की विधि भी आती है जो वक्ता होता है श्रोताओं को बताता है कि भाई सप्ता यज्ञ की विधि य है अमुक अमुक तरीके से जो है भागवत के अंदर य नियम बताए गए है तो वक्ता और श्रोता दोनों ही जो है नियमों का यथारूप पालन करें अब जहां पर हमारे अनुकूल बात लिखी हुई है वहा बात हमने लेली हां हमारे प्रतिकूल बात लिखी हुई है वो बात उसम से हमने हटा दी तो यहां हमने अ कर दिया आधी मुर्गी तो रखी है आधी मुर्गी हमने खाली आधी मुर्गी रख दी अंडा देने के लिए पूरा का पूरा भागवत का जो महात्म होता है व उन्होने गायत किया सप्ता यज्ञ की विधि के अंदर एक बात लिखी है गणनाथम प्रज माने की जो विघ्न आते हैं हम कोई भी पूजा का कार्य करते हैं तो विघ्न नाशक के लिए भगवान गणेश जी की पूजा करते हैं तो श्रीमद भागवत के अंदर भी य विधान है कि भगवान गणेश की पूजा की जाए किंतु वहां पर भी ने क्या किया पूरा महात्म गायब कर दिया तो गणेश जी की पूजा का तो विधान आता ही नहीं है अगर आप बताएंगे तो
00:11:05:18 मैं अगर आप बताएंगे तो मैं वो चैप्टर खोल के य दिखा सकता हूं वो भी श्रीधरी टीका से हो सकता है गीता प्रेस का दिखाऊ तो ये ना माने मर पास जी श्रीमद भागवत का जब अध्ययन किया तो मैंने मैंने कुछ बातें देखी उसके अंदर तो मेरे को लगा ये श्लोक देखना चाहिए मेरे को कि इस श्लोक का ट्रांसलेशन इस कौन की भागवत के अंदर क्या है मैं गया भागवत पढ़ने के लिए वहा पर मे को शलोक मिले नहीं मिले क्यों नहीं मैंने दे महात्म यब तो शलोक से आएंगे तो इन्होने आर से मंगलाचरण से जन्मा व सेने आरंभ कर दिया तो आप दिखा दीजिए एक बार जो श्रोता देख रहे हमारे उनको पता चलना
00:11:51:00 चाहिए पिछली लाइव में हम दिखा चुके हैं ये जो सबसे ऊपर आपको पहले सबसे पहले आपको जो महात्म दिख रहा है इसमें करीब अध्याय है वह पूरा का पूरा एक महात्म नाम का जो चैप्टर है इसका व हटा दिया गया है और इसी में जो युगल किशोर जी बात कर रहे सप्ताह यज्ञ की विधि है और इसी में वो गणेश जी की वंदना की बात है क्या जी जी स मैं एक मिनट ये प्रश् संख्या 62 है इसम खोल के देख
00:12:40:12 किस किस प्रकार से उसम बाकी देवी देवताओं का आहवान किया जाए इत्यादि कई सारी बातें उसम लिखी जी ये 62 नंबर पृष्ठ संख्या पर हम आ गए इसमें यहां साध्य तो तक अत्यंत दुर्लभ कोई लोक क्रमांक आपको याद होगा जिसमें सीधे-सीधे वो बात हो रही हो सप्ताह यज्ञ की विधि में देखिए आप उसम 14 श्लोक या फिर कुछ 18 या 28 के बीच में कुछ ऐसा श्लोक है उधर
00:13:26:08 देखिए मैं देख रहा हूं 18वां वक्ता को अभिमुख होना चाहिए श्रोता को पूर्वा भिम मुख होना चाहिए यदि वक्ता पूर्वा भिम हो तो श्रोता उत्तरा विमुख रहे उससे आ उस आ अगर 28 प आ जाए तो उसके पश्चात श्रीमद् भागवत महापुराण की भी प्रयत्न करके विधि पूर्वक धूप इत्यादि के द्वारा पूजा करनी चाहिए ये श्रीम हा गणेश जी की वंदना जी जी अपने यह आ रहा है है कि अपने जो नित्य कर्म होते हैं अपने संध्या बंधन आदि नित्य कर्मों को संक्षेप में पूजा करके कथा में संभावित विघ्नों का विनाश करने के लिए गणेश जी की पूजा करनी चाहिए तो ये भागवत कह रहा है अब क्या हु अब इसमें समस्या यह है कि जो कौन है उसके द्वारा एक स्लोगन फिट किया गया है कि जब हम पेड़ को पेड़ की मूल में पानी डाल रहे हैं तो फिर पत्तों पर पानी क्यों डाला जाए तो एक तरीके से इसीलिए भागवत को यहां से कट किया गया उन्ह पत्तो पर पानी नहीं डालना है अगर मुझे कोई स्कोन वाला
00:14:41:10 सुन रहा है तो ध्यान दे कि क्या इसीलिए पूरा भागवत का चैप्टर हटाया कि आपको पत्तो पर पानी नहीं डालना इसलिए व्यास जी के व्यास जी द्वारा कहा गया श्रीधर स्वामी द्वारा स्वीकारा गया जो चैप्टर है पूरा का पूरा वो गाय जो जड़ होती है जब जड़ जहां से आरंभ होती है वहीं से तो आरंभ होगा श्रीमद् भागवत का जो महात्म वही तो उसकी जड़ है सबसे पहले वही से तो आरंभ करेंगे अब महात्म का अर्थ क्या होता है महात्म का अर्थ होता है महत्व यदि किसी व्यक्ति को हम महत्व नहीं बताएंगे किसी वस्तु का तो उसकी उसम प्रीति कैसे होगी किसी व्यक्ति को
00:15:24:16 मैं 24 वा सबसे ऊपर वाला श्लोक है इसमें आप लोग ध्यान से देखें गणेश जी की पूजा करनी चाहिए यह भागवत कह रहा है और यह चैप्टर यह जो स्वयं को भागवत को सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ मानने वाला कहते हैं उन्होंने पूरा का पूरा चैप्टर ही चबा लिया है हजम कर लिया है है ना जब श्रीमद भाग अब ये कहते है जड़ के अंदर पानी डालो पेड़ पत्तो पानी मत डालो तो हम ये कह रहे हैं जब श्रीमद् भागवत के अंदर महात्मा लिखा हुआ है पहले से तो तुम होते कौन उसको हटाने वाले जब पुराण के अंदर यदि उसके अंदर ना लिखी होती तो तो बात थी ही नहीं भाई चलो लिखी नहीं है उसके अंदर किसी ने ऐड कर दिया कि गणेश जी की पूजा करनी चाहिए लेकिन ऑलरेडी जब भागवत में वो बात लिखी हुई है तो लिखे हुए को जब तुम काट रहे हो उसका अर्थ क्या हो गया कि भागवत जो संदेश देना चाहती है उस संदेश को तुम श्रोताओं तक पहुंचने देना नहीं चाहते इसका सीधा सधा पता चल रहा है कि यहां पर मिलावट कर रहे हो
00:16:33:18 आप कुछ बोलेंगे अंकित शर्मा जी शर्मा जी आपको आवाज आ रही है जी कटकट के आ रही थोड़ी आपकी आवाज आपको युगल जी मेरी आवाज कैसे आ रही है क्लियर आ रही क्लियर आ रही है क्लियर आ रही है क्लियर आ रही है जी जी इस विषय पर आप कुछ अपना बताएंगे कुछ इस विषय पर यही कहना चाहूंगा महाराज जी कि स्कन जो है वो कुल मिला करर के टोटल ही कहा जा सकता है कि सनातन को खत्म करने की उनकी यह साजिश चल रही है हमारा यह सबसे बड़ी दुर्भाग्य की बात है मैं वृंदावन में जैसे तीन चार साल से हूं तो वृंदावन में भी काफी देखने को मिलता है कि कोई हमारा जो भारतीय व्यक्ति कोई भी होता है उस कोन ज्यादातर इसीलिए जुड़ता है कि उनको ये चाहिए कि वो अंग्रेज को देखें या उनका कीर्तन सुने या यह सुने हमारे लोग इस चीज को नहीं देख पा रहे हैं कि वह जो स् कोन है वो अंदर ही अंदर साजिश क्या चल रहा है महात्म की बात आ रही है तो महात्म
00:17:48:21 इतना विशेष है संपूर्ण भागवत के लिए कि अब अगर इनकी इनकी बात में मैं समझाऊं कि अगर कोई व्यक्ति कोई बच्चा कोई डिग्री कर रहा है कोई कोर्स कर रहा है तो व अगर किसी कोर्स को किसी स्ट्रीम को अपने से जोड़ रहा है कोई बीए कर रहा है कोई बीएससी कर रहा है तो व इसी उद्देश्य से करता है क्योंकि उसे पता है कि बीएससी करने से उसको क्या लाभ होगा बीकम वाले को पता है कि वह अपना बैंक में काम कर सकता है पर जब तक किसी को उसकी महिमा ही नहीं मालूम तब तक वह उसमें श्रद्धा जो है उसकी नहीं हो सकती कोई भी आप काम करो अब भागवत में महात्म इसीलिए कहा गया है ताकि भगवान के बारे में बताया जा सके पहले श्लोक महात्म में भी पहले ही अध्याय में पहले श्लोक में भगवान के रूप रूप का वर्णन है भगवान करते क्या है भगवान का गुण क्या है भगवान को प्रणाम किया गया भक्ति महारानी का चरित्र है ज्ञान वैराग्य का चरित्र है दुंदु कारी का चरित्र है कि पतित से पतित जो भी जिसने जीवन भर पाप किया हो वह भी इस भागवत को सुनकर के तर सकता है अब इस पूरे महात्म को खत्म ही कर देना यह तो कुल मिलाकर कि भागवत का ही अपमान है और जब भागवत का अपमान है तो यह साक्षात
00:19:03:21 भगवान कृष्ण का अपमान है क्योंकि भगवान की ही वांक में प्रति स्वरूपा या श्रीमद् भागवत है तो ये पूर्ण रूप से इसको उनकी एक साजिश चल रही है ये मैं बता दूं कि ये हमारा एक विषय है समस्या है जो हमने प्रदर्शित की है यहां पर और यदि आपके पास इस समस्या का कोई समाधान है स्कोन वालों से कह रहा हूं मैं तो वो समाधान प्रस्तुत करें सार्वजनिक करें उस समाधान को कि व्यास जी ने भागवत लिखी उसम महात्मा नाम का चैप्टर सबसे पहले लिखा उसके बाद श्रीधर स्वामी जी जिनकी टी का प्रामाणिक मानते हो उन्होंने उसको स्वीकार किया और आप अपने मन मर्जी से कैसे भागवत को भागवत का पूरा का पूरा एक चैप्टर कच्चा चबा सकते हैं और इसके बाद भी यह कहते हैं कि हम श्रीमद भागवत बहुत सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ है यही कहते हैं ना य लोग आप ये बताइए जो सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ होता है क्या उसके कुछ अंश को हम मानने वाले और कुछ अंश को ना मानने वाले होते हैं क्या तो फिर रामपाल में हम तो बारबार यही कहते हैं कि रामपाल दास के नाम से जो इस समय सेक् चल रहा है
00:20:19:13 उसका ही एक बहुत अच्छा सा भव्य सा स्वरूप है जो स्कोन के रूप में चल रहा है क्योंकि इनका भी भगवान ऐसा जो स शरीर कहीं पर बैठा है और वो सीधे नीचे आता है रामपाल वालो का और ऐसे ही इनका भी है इनकी भी मुक्ति वही है कि अंत में आपको एक बहुत भव्य नगरी मिलेगी है ना वो थोड़ा सा शब्दों का ऐसा भेद है कि यह आपको थोड़ा सुनने में रस लगे पवित्र सा लगेगा और जो उनका लगेगा उसम आपको हीनता अगर आप थोड़ा सा पहले से आपका कुछ बैकग्राउंड होगा तो आपको व हीन भावना जैसी आएगी
00:21:01:00 मगर कुल मिलाकर के वही इर्द गि उसी कहानी के इर्दगिर्द घूमेगा जिस प्रकार से वहां कह दिया जाएगा कि पूरे पूरी चीजों को हम नहीं जान सकते इस्लाम में कह दिया जाएगा आज मैं वो देख रहा था है ना जो एक्स मुस्लिम है आपके पीछे शोर हो रहा है शर्मा जी अंकित शर्मा जी एक मिनट मिनट जी तो मैंने एक्स मुस्लिम साहिल का आज एक वीडियो देखा हालाकि ये चीज मैं भी जानता हूं मगर एकदम से वो रिफ्लेक्ट कर गया ना जो हम जानते हैं तब भी सामने से देख ले तो याद आ जाती है वो चीज तो उससे कोई इंटरव्यू ले रहा है तो वो पूछ रहा है कि भाई कुरान का जो अल्लाह है वो साकार है कि निराकार अब वो बताते हैं कि है तो वो निराकार भी मगर एक तरफ बोलो कहते वो स्पेस से बाहर है वो टाइम से बाहर है ठीक है फिर दूसरी तरफ कहते हैं कि जो कुरान का ईश्वर है उसके हाथ है व अपने हाथों से आपको शराब पिलागा जब आप मुक्त हो जाओगे उनके अनुसार
00:22:16:06 जो मुक्ति है वहां पर व अपने हाथों से जब हाथों से पिलाए तो उसके हाथ हो गए या फिर उसकी उसके हर जगह क्या कहते उसके हर जगह मुख है बहुत सारे मुख वाला है तो उसका मुख हो गया तो यहां पर उनका जो सेक्ट है वो यह कहता है कि भाई देखो वह स्पेसलेंस हाथ है उसके वह चेहरा है तो लिखा है तो मानना पड़ेगा अब उसमें लॉजिक में आपस में अगर कांट्रडिक्शन हो रहा है लॉजिकली वो आपस में मैच नहीं हो रहा है आपको संतुष्टि नहीं मिल पा रही है तो सवाल मत करो अब जो हम लोगों का जो जानकारी में ईश्वर का स्वरूप है एक वाणी का अ विषय वाणी के द्वारा प्रतिपाद्य नहीं है फिर वही जो अ विषय है वो एक ऐसा स्वरूप लेता है जो वाणी के द्वारा प्रतिपाद्य हो जाता है उस को उसकी भक्ति करके उसका अनुसरण अनुकरण करके जो व्यवहारिक स्वरूप है भगवान का उसका वो स्वरूप उसके उस स्वरूप तक की प्राप्ति होती है जो वाणी के द्वारा अनिर्वचनीय है
00:23:31:21 मगर यहां पर क्या हो रहा है कि आप ही तो भगवान को पहले कह रहे हो कि भगवान जो है वो यहां से शुरू हो रहे हैं वहां पर जा रहे हैं य ये सब आपी कर रहे हो और फिर जब उनकी किसी चीज में बादिता उत्पन्न हो रही है कि अगर व यहां से शुरू हो रहे हैं वहां खत्म हो रहे हैं तो क्या व अपने रूप को बदल सकते हैं अगर रूप को बदल सकते हैं तो उनका शाश्वत कैसे रूप तो इन सब चीजों पर जब उनके ही सिद्धांत कि वो सर्वशक्तिमान है कि नहीं उनके ही सिद्धांत खंडित होने लगते हैं तो वो कह देते भाई देखो ये विषय अचिंत है अचिंत है विषय मगर आप उसको पहले चिंतनीय बना रहे हो और उस चिंतनीय बनाने के कारण भगवान की सर्वशक्ति मत्ता और अ बाध्यता को खंडित कर रहे हो फिर जब आपसे प्रश्न किया जा रहा है तब आप अचिंत को ला रहे हो अचिंत को आपको पहले लाना था यहां भगवान का एक जो स्वरूप है वो अचिंत है और फिर उसके बाद एक ऐसा है चिंतनी तब तो समझ में आता है तो ये सारे फैक्टर ये सारे फैक्टर्स इनम मिलते हैं कि रामपाल दास भी यही कर रहे हैं कि भगवत गीता में 5 पर मानने लायक है जो 5 पर मानने लायक नहीं है जो काल ने बोला है और बाकी
00:24:46:21 का मानने लायक है और यह भी वही कर रहे हैं भागवत में एक चैप्टर मानने लायक नहीं है उसको हटा दिया पूरा का पूरा अच्छा मैंने पूछा भी अभी कोई स्न से पिछले उसमें जुड़ा था तो मुझे लगा शायद कुछ आंसर होगा तो उसने इसका उत्तर देते हुए कहा हमने कहा कि अ भाई इसमें जो महात्म है वो कहां है तोव बोला कि महात्म है ना 13वें स्कंद में है ना बवे स्कंद में है ना तो जब ऐसा हुआ तो बवे स्कं में इसमें भी महत्व है मगर जब अ क्या कहते भागवत के शुरू होने से पहले ही पहले स्कंद से पहले ही व्यास जी उसका म बता रहे हैं श्रीधर स्वामी उसका अनुवाद कर रहे हैं भाष्य लिख रहे हैं तो आपको कैसे अधिकार प्राप्त हुआ कि आप जो अपने मन मुताबिक कि पूरे पूरे चैप्टर को गायब कर दो और क्या यही परंपरा सिखाती है कि पीछे से जो गुरुओ ने दिया है उसको हम अपने अनुसार जो है बदल दे और इस तरीके की और भी कुछ चीज है जो भगवत गीता में मिलेंगी जिस पर बात करेंगे जी आप कुछ कह रहे थे यल जी मैं यह कह रहा था एक तरफ तो यह बात करते हैं शास्त्रों की वही
00:26:01:24 दूसरी ओर यह कहते हैं कि भाई हरि नाम संकीर्तन अत्यंत आवश्यक है जब हरि नाम संकीर्तन तुम्हारे लिए अत्यंत आवश्यक है तो हम यह कहते हैं कि किस मुख से तुम शास्त्रों की बात कर रहे हो फिर अधिकार नहीं बनता है तुम्हारा कि तुम शास्त्रों की बात करो क्यों क्योंकि अपने मुख से जब तुम कह रहे हो कि हरि नाम ही सर्वोच्च है हरि नाम कीर्तन ही कलयुग का तार है तो जब हरे ना हरेर नाम हरेर नाम हरेर नाम केवलम ही तुम्हारे लिए सब कुछ है तब तुम मुह से शास्त्रों की बात कर रहे हो एक व्यक्ति से मेरी बात हुई इस कौन का मेरे को ये जब मेरी इनसे बात हुई मेरे को जानकर खेद हुआ कि इनको अपने ही सिद्धांतों के बारे में ज्ञान नहीं है और य दूसरों के ऊपर आक्षेप कैसे कर देते हैं क्योंकि इनको मूल सिद्धांत का भी ज्ञान नहीं है मैंने इनसे पूछा आप ये बताइए कि आपको यज्ञ पवित आपने धारण किया हुआ है आपको मालूम है किस आयु पर धारण किया जाता है बोले नहीं किस आयु पर धारण किया जाता है किस शास्त्र के अंदर प्रमाण है अब जिस व्यक्ति को यह नहीं पता कि किस पुराण के अंदर यज्ञ प के बारे में बताया गया है किस आयु पर उसको धारण करवाया जाता है उस व्यक्ति से क्या बात की जाए वही एक दूसरा व्यक्ति से मैंने बात की तो उसने क्या उत्तर दिया मैंने उससे पूछा क्या आप जो पुराण है 18 के 18 पुराण उनको
00:27:16:27 प्रमाण मानते हो उसने बोला हा मानता हूं मैंने कहा व्याज कृत 18 पुराण है आप मानते हो किय व्याज कृत है बोले हां मानता हूं मैंने कहा ठीक है तो अब ये बताओ कि श्रीमद भागवत को सर्वोच्च मानते हो तो क्या जो विवाह आदि के मंत्र है वो तुमको श्रीमद् भागवत से प्राप्त होंगे उसके लिए तुमको वेदों का सहारा लेना पड़ेगा या नहीं लेना पड़ेगा या गीता के श्लोकों के माध्यम से ही तुम किसी का विवाह करवा दोगे नहीं करवा सकते ना गीता के लोको से या भागवत के लोको से भाई भागवत के अंदर कुछ मिलता है हमको देवी भागवत के अंदर कुछ मिलता है अब ऐसा नहीं है कि श्रीमद् भागवत के अंदर जो बातें है वो देवी भागवत के अंदर भी हो या विष्णु पुराण के अंदर भी हो अब जैसे आर्य समाज जी आक्षेप करते हैं कि विष्णु पुराण के अंदर जो है राधा जी का नाम नहीं है महाभारत के अंदर जो है राधा जी का नाम नहीं है अब हम ये कह रहे हैं कि हम 18 पुराणों को मानते हैं किंतु जिस पुराण के अंदर जैसे कि विष्णु पुराण के अंदर यदि राधा जी का नाम नहीं है तो तुम केवल विष्णु पुराण का नाम क्यों ले रहे हो तुम क्यों नहीं बता रहे हो कि शिव पुराण के अंदर भी राधा जी का नाम है देवी भागवत के अंदर भी राधा जी का नाम है भाई 18 पुराणों को हम लोग मानते हैं जब तुम कह रहे हो कि विष्णु पुराण के अंदर राधा जी का नाम नहीं है तो यह बात तुम कह रहे हो जो पुराणों को नहीं मानते तो तुम विष्णु
00:28:32:00 पुराण को क्यों मान रहे हो इसका मतलब क्या हुआ जहां से तुम्हारा मतलब सिद्ध हो रहा है तुम केवल उन्ही बातों को लेकर के प्रस्तुत हो रहे हो देवी भागवत का नाम नहीं लोगे है ना और जो जितनी अन्य पुराण उनका नाम नहीं लोगे केवल एक विष्णु पुराण को लेकर के राधा जी के ऊपर आक्षेप कर दोगे तो ये कहा की बात हुई बात करनी है तो पूरी 18 पुराणों की करो क्या क्या ज्ञान विज्ञान है फिर उसको हम बताएंगे 18 पुराणों के अंदर क्या है क्या नहीं है तो जो एकन की व्यक्ति से जब मेरी बात चल रही थी ये वाली इनको क्या करना है कि तर्क से जब प्रमाण नहीं है इनके पास तो तर्क से सिद्ध करने का प्रयास करते हैं तो तर्क त प्रमाण व्यवस्थित परजने ना सोय अनपूर्ण उपनिषद में कहा गया है कि ब्रह्म वेदा आदि जो ज्ञान है उसको सिद्ध करने के लिए तर्क की नहीं उसके लिए शास्त्र प्रमाण सिद्ध है तो वहा पर हम शास्त्रों की बात करेंगे भाई तर्क की बात नहीं करेंगे तर्क से तो कुछ भी सिद्ध भी किया जा सकता है सिद्ध भी किया जा सकता आज ऐसे कई सारे लोग है जो भगवान को ना मानने के लिए तर्क देते हैं भगवान लेकिन भगवान है या नहीं है ये हमें कहां से पता चलेगा भगवान के क्या लक्षण है क्या नहीं है अवतार लेते हैं नहीं लेते हैं कहां से पता चलेगा य शास्त्रों
00:29:47:04 से पता चलेगा आप ऐसे ही एक कन्वर्सेशन लेकर के बैठ जाओ डिबेट लेकर के बैठ जाओ क्या भगवान अवतार लेते हैं तो आप कभी सिद्ध नहीं कर पाओगे कि भगवान अवतार लेते अथवा नहीं लेते जब शास्त्र का आलन व्यक्ति ने नहीं लिया तर्क के आधार पर वो कभी इस बात को सुद्ध नहीं कर सकता कि भगवान एस्ट करते हैं अथवा नहीं करते हैं तो यहां पर बात तर्क की नहीं है यहां पर बात है शास्त्रीय प्रमाण की जब हम शास्त्रीय प्रमाण आपको दे रहे हैं तो भाई शास्त्रीय प्रमाणों से बात करो शास्त्रीय प्रमाणों से बात क्यों नहीं करते क्योंकि उनके पास शास्त्रीय प्रमाणों का अभाव अभाव चल अभाव होने के कारण शास्त्रीय प्रमाणों का बात फ तर्क की फिर बात करते हैं वो कुतर्क की तर्क भी नहीं पाता तो यहां पर मैं एक बात याद दिलाना चाहूंगा कि भगवान को मानने के संबंध में जितने कुतर्क भगवान को ना मानने वाले कर सकते हैं उससे ज्यादा तर्क भगवान को मानने के संबंध में पूर्व पक्ष के आधार पर या न केन प्रकार लीलाओं का वर्णन करते हुए हमारे शास्त्रों में दिए हुए हैं आप कैसे भी आओगे
00:31:02:06 कहीं से भी आओगे तो मुकी खाओगे तो इसलिए ही व्यास जी ने एक जगह कहा व्यक्तिगत तर्क मान्य शास्त्र के विरोध में दो 11 ब्रह्म सूत्र शास्त्रों के विरोध में अगर आप व्यक्तिगत तर्क ला रहे हो तो वह अमान्य है वो तर्क जो है रिलेट करना चाहिए मान लीजिए हम कह रहे हैं कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है तो ईश्वर को सर्वशक्तिमान कहा गया हो शास्त्रों में और कहा गया है तब हम बोलते हैं ना किसी से कि ईश्वर तो पूर्ण है वो अपूर्ण कैसे हो रहा है दूध दही और दूध दही पर इतने लॉजिकल जवाब आ रहे हैं कुछ लोग हमारे चैनल को टैक करते हुए बना रहे हैं इतने इलॉजिकल जवाब कि एकने जवाब दोनों ने एक ही जवाब दिया है कि राजा ने यदि किसी को मंत्री बनाया है तो यदि वो वापस मंत्री से राजा नहीं बन सकता है तो इसलिए वो राजा राजा नहीं है ये हमको कुतर भरा जवाब दिया गया जब मैं याद दिला दूं दूध दही की थ्योरी क्या है दूध दही वो दूध दही वो मटेरियल है जो सबसे पहले जब हम इकन मंदिर में गए थे और हमने जब पूछा था वहां के अध्यक्ष से कि भाई बताइए जिस प्रकार आप लोग
00:32:17:08 कहते हो जिस प्रकार दूध से दही बन सकता है पर दही से दूध नहीं उसी प्रकार कृष्ण तो शिव बन सकते हैं पर जो शिव है वो कृष्ण नहीं बन सकते तो इस पर वहां वही आ गया अचिंत है सवाल मत पूछो 51 कुरान सवाल मत पूछो और रामपाल के द्वारा भी यही बात आ जाती है जब फसने लगते हैं कि सवाल मत पूछो तो अब बात यह आती है कि इन्होंने उसके उत्तर में यह कुतर्क किया यदि राजा किसी को मंत्री बना देगा कलेक्टर बना देगा और वह कलेक्टर राजा नहीं बन सकता है तो इसका मतलब राजा राजा नहीं है अरे मेरे भाई ध्यान से सुनो मेरी बात जब कोई प्रधानमंत्री या राजा किसी को कलेक्टर बनाता है या किसी को मुख्यमंत्री बनाता है तो वह किसी और को बनाता है खद थोड़ी ना वहां पर जाकर के मंत्रालय में मुख्यमंत्री बन जाता है यहां तो आप ही कह रहे हो ना कि कृष्ण ही शिव बनते हैं अपनी ही बात को भूल जाते हो क्या
00:33:28:18 आपका कीर्तन दूसरा होना चाहिए हरे राम हरे हरे कृष्ण हरे राम का कीर्तन आपको सूट नहीं करता है केवल अंधे अंधे अंधे अंधे अंधे अंधे यह अंधे वाला कीर्तन होना चाहिए अरे भाई खुद ही तो कह रहे हो कि कृष्ण जी शिव बनते हैं शंकर बनते हैं और वहां आप क्या उदाहरण में क्या दे रहे हो कि प्रधानमंत्री ने किसी को कलेक्टर बना किसी को वहां पर किसी है प्रधानमंत्री से भिन्न कोई एंटिटी है उसको बना रहे हो कलेक्टर उसको बना रहे हो मुख्यमंत्री हां वो नहीं बन सकता क्योंकि क्योंकि वो ईश्वर उसकी ईश्वर भंग होगी उसमें तो अब यहां पर बात आती जब कृष्ण भगवान स्वयं शिव के रूप में विराजमान है तो क्या वह उनकी शक्तियों में छय हो गया है ना अभी मैंने एक इंटरव्यू और देखा इस बारे में कि अमोग लीला जी बैठे थे न्यूज चैनल पर और वहां पर ू चैनल वालों ने वही प्रश्न उठा दिया कि कन जो है शिव और विष्णु में भेद करता है ऊंच नीच का हालांकि वो खींचा नहीं गया वो क्यों नहीं खींचा गया थोड़ा सा उनके प्रति उदारता बरती गई वो बात अलग है मगर उदारता बरती गई वहां पर मगर उन्होंने जवाब दिया
00:34:43:27 हा उन्होंने उत्तर ये दिया कि तत्व से जो शिव और विष्णु है वो एक है और लीला का भेद है तो भाई लीला का भेद है तो वही तो हम भी कह रहे हैं लीला का भेद है फिर पीछे क्यों पढ़े जब लीला भेद तत्व से वो एक है तो कर लेने दो शिवजी को परम ब्रह्म यहां प एक छोटी सी बात कहूंगा जैसे ने जैसे ये लोग कहते है ना कि लीला भेद है जैसे भगवान शिव जो मोहिनी अवतार के पीछे भागते हैं तो इनकी गीता में उनको काम बताया गया है श्रीमद् भागवत का जब ये श्रीमद् भागवत का अध्ययन करते हैं तो उसी के अंदर माता पार्वती क्या कह रही है अयम मु लोके श दंड धरा प्रभु अस्मा दुदा नाम दुष्टा नाम निर्लज्जा नाम प्रत यानी कि च चित्र केतु है वो जब अपमान करता है भगवान शिव के साथ माता पार्वती बैठी है और वो समझ लेता य तो कामी है तो वहा पर माता पार्वती कहती है कि ये दुष्ट और निर्लज ही मतलब य दुष्ट य निर्लज वैकुंठ में रहने योग्य नहीं है वहा पर तक्षण माता पार्वती उसको श्राप दे देती है की बड़े बड़े जो नावेद धर्मम किल पदम योनी ना ब्रह्म पुत्र भु नारद ना कुमारा कपिलो मनुष यानी कि जहा पर उनके नारद
00:35:59:03 जी पुत्र कपिल जी जो बड़े बड़े सिद्ध है उन लोगों ने कभी आपत्ति नहीं जताई भाई तुम कौन हो आपत्ति जताने वाले तुम उनसे बड़े सि हो गए क्या भागवत का आठवा स्कंध सातवा अध्याय और 33 से 34 श्लोक है जिसके बारे में बात हो रही है और यह एक काट भी है कि कैसे यह पता चलता है कि जो शील प्रभुपाद जी है उन्होंने जो लिखा है हम एटस प्राप्त है कि नहीं हम हम यह स्पष्ट नहीं कह सकते क्यों नहीं कह सकते क्योंकि यहां पर शील प्रभुपाद जी ने भी इसको क्यों की त्यों माना है कि जो शिव जीी है उनको पार्वती के साथ देखकर कामी समझने वाले मूर्ख है और दो 62 में उनको पार्वती के साथ देख कर के लिखने वाले ने लिखा है कि वह कामी है काम इंद्रियों के अधीन है तो इसका मतलब या तो वो श्री प्रभुपाद जी ने नहीं लिखा है फय श प्रवाद जी ने नहीं लिखा है है ना तो ये प्रश्न खड़ा हो जाता है मैं
00:37:04:22 आठवा सातवा अध्याय आपको दिखा देता हूं आठवा स्कंद आ सा 33 सातवा अध्याय और यह आ हां देखिए यह इनका अनुवाद पहले पढ़ देता हूं फिर दिखा दूंगा सारे विश्व को उपदेश देने वाले महान आत्म तुष्ट व्यक्ति अपने हृदयं में आपके चरण कमलों का निरंतर चिंतन करते हैं किंतु जब आपकी तपस्या को ना जानने वाले व्यक्ति आपको उमा के साथ वि चरते देखते हैं तो वे आपको ब्रम वश कामी समझते हैं ब्रम वश ठीक है अथवा जब मैं आपको बस य ब्रम वश समझते हैं तो यह देखिए अब यहां पर यह श्रीमद् भागवत का यह है श्रीमद् भागवत कन की और इसका आठवा स्कंध है आठवा स्कं का 33 वा श्लोक है इसका
00:38:19:27 अर्थ करते हुए अर्थ यहां पर है यहां पर यह अर्थ है ठीक है इसी में उन्होंने कहा है कि जो लोग उनको ब्रम कामी समझते हैं ये ये देखिए इनके का समझते और इसके ठीक विपरीत जो इनकी भगवत गीता वो भी दिखा देता हूं जिने ना देखी वसे देखी हो का
00:38:56:15 [संगीत] पुनी पुरानी वाली गीता नहीं है आपके पास य है हमारे पास यह भगवत गीता और दूसरे अध्याय का 6वा श्लोक हम खोल लेते हैं इंद्रिय विषयों का चिंतन अब इसमें देखिए य 62 में उन्होंने क्या लिखा
00:39:32:04 है इस भौतिक जगत में हर एक प्राणी इंद्रिय विषयों के अधीन है यहां तक कि ब्रह्मा तथा शिवजी भी शिव ध्यान मगन थे किंतु जब पार्वती ने विषय भोग के लिए उन्हें उत्तेजित किया तो व सहमत हो गए तो क्या हुआ सती के साथ उमा के साथ शिव जी को देखकर यहां जो लिखने वाला है वो उन्हें काम के अधीन समझ रहा है यख ने वाला और प्रभुपाद जी क्या कह रहे हैं कि जो ऐसा समझता है वो मूर्ख है वो ब वो भ्रम में है तो या तो वो उन्होंने नहीं लिखा है इसीलिए हम लोग कहते कि श्रील प्रभुपाद जी को भी फॉलो नहीं किया जा रहा है इस कोन के द्वारा इस कोन को इस बात का उत्तर देना चाहिए कि प्रभुपाद जी एक जगह पर यह लिख रहे हैं अगर यह भागवत उनके द्वारा लिखी गई है तो है ना अब क्या उनके द्वारा लिखित है क्या नहीं है ये तो वही लोग जाने मगर एक चीज और है जो मैंने अभी अभी मेरी नजर में आई जब मैं यहां पर इसको देख रहा था दृष्टि गोचर हुई वो चीज वो क्या थी कि सातवा अध्याय और 33 वा श्लोक इसमें देखिए यहां कहा जा रहा है शिवजी सर्वोच्च वैष्णव है जो कि पूरे सब लोगों के द्वारा
00:40:47:06 कहा जाता है सर्वोच्च वैष्णव ये तो फेमस डायलॉग है वैष्णवास्त्र ठाकुर जी से हुई है कि शिवजी अपने ऊपर नियंत्र नियंत्रण नहीं रख पाए मगर भगवत भक्त यानी की भगवत भक्त शिवजी को भग भगवत भक्त नहीं कहा गया इनको कहा गया भगवत भक्त हरिदास ठाकुर को माया देवी के अवतार ने मोहित करने का प्रयास किया किंतु विशुद्ध कृष्ण भक्ति के कारण व इस कसौटी में खरे उतर तो यहां पर लिखने वाले ने शिवजी से श्रेष्ठ हरिदास ठाकुर जी को सिद्ध कर दिया शिवजी से श्रेष्ठ बिल्कुल हां तो दो बातें कटी यहां पर प्रभुपाद जी की एक कि शिवजी सर्वोच्च वैष्णव है और दूसरी कि शिव जी को पार्वती मां के साथ देखकर उन्हें कामी समझने वाले मूर्ख होते हैं ये दोनों बाटे दो में कट गई तो अब बताइए क्या यहां से यह निकलता है कि प्रभुपाद जी को फॉलो किया जा रहा है कन के द्वारा जो प्रभुपाद जी के नाम पर अपनी रोटिया सेकते हैं कि भाई हम बहुत महान प्रभुपाद जी के वो हैं भाई उनकी सामग्री कौन सी है कौन सी नहीं
00:42:02:09 पहले वो तो बता दो उनका लिखा हुआ बदल दे रहे हो नित्य शब्द को हटा दे रहे हो बहुत से शब्दों को हटा दे रहे हो इस नाम पर कि हमको परमिशन दी है प्रभुपाद जी ने प्रभुपाद जी भागवत के भूमिका में लिख रहे हैं भागवत की भूमिका में प्रभुपाद जी लिखते हैं कि भगवान के कहे हुए को यथावत पहुंचाना है अगर हम भाष्य के नाम पर कुछ भी करते हैं यथावत नहीं पहुंचाते और भाष्य के नाम पर अपने मन को लिख देते हैं तो वह गलत होता है यह प्रभुपाद जी लिख रहे
00:42:42:02 हैं लिखा इस भूमिका में यह लिखा है इन्होंने कि अगर आप भाष्य के नाम पर उनका यथावत अर्थ ना करते हुए भाष्य के नाम पर कुछ भी लिख रहे हो तो फिर इससे क्या होगा सबको अपने अपने मन की बात लिखने का प्राप्त हो जाएगा बकल और यह इन्होंने इसमें लिखा भी है यथावत होना चाहिए और इसके बाद भी भाष्य के नाम पर इकोन की जो भगवत गीता है उसमें ढेर सारी मिलावट हमको देखने को मिलती जहां पर शब्द का बिल्कुल बिल्कुल बदल दिया गया हास्य के नाम पर भाष्य के नाम पर अनुवाद भी बदल दिया गया जैसे कि ब्रह्मर्पनम
00:43:37:08 ब्रह्म शब्द इतनी बार आया है कि पूछिए नहीं मैं पढ़ देता हूं एक बार पास में ही है चौथा अध्याय 24 शलोक य देखि दिख रहा है चौथा अध्याय 24 शलोक ब्रह्मर्पनम ब्रह्म हर ब्रह्मा ग्र ब्रह्मणा होतम ब्रह्मण ते गंतव्य ब्रह्म कर्म समाधि नाम ब्रह्म शब्द आपने कितनी बार सुन लिया ब्रह्म शब्द का उपयोग इसके अनुवाद में एक भी बार नहीं हुआ जो व्यक्ति कृष्ण भावना कृष्ण भावना मृत में पूर्णतया लीन रहता है उसे अपने आध्यात्मिक कर्मों के योगदान के कारण अवश्य ही भगवत की प्राप्ति होती है क्योंकि उसमें हवन आध्यात्मिक होता है और हभ भी आध्यात्मिक होती है वा पूरा गाब तो यह सोचने वाली बात है जी आप
00:44:41:25 बोले य युगल जी बोले ल जी को सुनाई नहीं दे रहा है म्यूट है क्या आवाज नहीं आ रही है तो मैंने ऐसे बहुत सारे उदाहरण है मेरे पास आ थ दो 62 भी देखना चाहिए की जो गीता है नवीन गीता उसके अंदर भी कुछ इस तरह का ही थोड़ा सा मतलब गलत अर्थ के साथ या गलत भाव के साथ प्रकट किया गया ऐसा मेरा मानना है दो 62 दो सेकंड चैप्टर में तो बहुत इस तरह के मि लेकिन यह समस्या य आती है लिख रहे हैं कि जी मैं बस अपनी बात पूरी कर लेता मैं क जब आप लिख रहे हैं कि जब यह गीता एज इट इज है तो या तो ए इट की संज्ञा नहीं दी जानी चाहिए ठीक है इसको फिर आपको कुछ और कहना चाहिए नहीं तो फिर आपको एसी देना चाहिए यह मेरा मत है जी जी बताइए धर्म सनातन जी बोलिए
00:45:57:27 युगल जी एक कारण यह भी हो सकता है हया है तो एक कारण सबसे प्रमुख कारण यही होगा के जो भागवत जी के महात्म का सटम अध्याय है जिसमें भागवत श्रवण विधि बताई गई है तो इसकन क्या करता है कि जितना उनके लिए ग्राही है उतना ग्रहण करता है बाकी वह छोड़ देता है तो जो भागवत जी के महात्मा का सटम अध्याय है उसमें भागवत श्रवण विधि बताई गई जिसम कई जगह लोक आते हैं कि वक्ता कैसा होना चाहि श्रोता किस प्रकार होना चाहिए ण वेदु
00:46:33:13 दता इसम वक्ता के गुण बतान के पास इस प्रकार के वक्ता है ही नहीं तो उन्होंने यह सब नियम हटा दिए महात्मा हटा दिया ताकि किसी को पता ना चले अने खंडवा पंडित जो ब्राह्मण झूठ भी बोलता है उसका त्याग कर देना चाहिए उससे हमें भागवत कथा नहीं करानी चाहिए परंतु इसन में कई लोग भ्रांति फैला रहे ठ बोल रहे हैं और श्री प्रभुपाद जी ने जो भाष्य किए हैं उनका अर्थ का मतलब स्वच्छा से व जितना ग्राही है उतना ग्रहण करते हैं बाकी वह हटा देते हैं
00:47:14:24 जी जील जी आप कुछ कहना चाह रहे हैं युगल जी आपको आवाज नहीं आ रही है क्या यल जी बोलिए आ रही है आ रही है आ रही तो मैं ये अब जैसे कि इन्होंने भागवत जी से भागवत का महात्म गायब कर दिया अब श्रीमद भगवत गीता जैसा कि आपने अभी कहा था कि भगवत गीता का नाम एज इट इज नहीं होना चाहिए इसका नाम कुछ और होना चाहिए तो इनको लिखना चाहिए कि भगवत गीता और जो भाष्य का है जो जिस जिस व्यक्ति ने भाष्य किया जैसे प्रभुपाद जी भाष्य किया तो उनका नाम लिखे और भगवत गीता लिखे ये ना लिखे एज इट इज क्योंकि वहां प एज इट इज जैसा कुछ भी नहीं है जब गीता से इतने सारे श्लोकों का अर्थ बदल दिया गया आपने भागवत का महात्म गायब कर दिया महात्म में से सप्ताह विधि जो भी महात्मा पूरा सब कुछ चा पूरा सब कुछ चाट ग सब कुछ उड़ा डाला और फिर कहते हैं कि भाई हम तो शास्त्र की बात करेंगे शास्त्र की बात आप किस आधार पर कर रहे हो मेरे तो यह बात नहीं समझ में आती किस आधार पर आप शास्त्र की बात करो किस मुख से कर रहे हो आप जब सभी को ये ज्ञात हो रहा है धीरे धीरे कि आपकी गीता में वो श्लोक नहीं है आपके भागवत में वो बातें नहीं है और वहां पर बात
00:48:30:02 श्रीमद भागवत में चैतन्य महाप्रभु की कहीं बात नहीं आर तो चैतन्य महाप्रभु की बात आ गई उसके अंदर कहां से आ रही है सारी बात भाई जो भागवत में 18000 लोक है मूल बध जो श्लोक बध जो भागवत है 18000 लोको की उन 18000 लोको में कहां पर चैतन्य महाप्रभु की बात आई है यह तो बताइए इन्होने आरंभ कर दिया चेतन महाप्रभु की बात उसके अंदर आद अंकित जी आप बोले कुछ का कर्तव्य होता है जो मूल श्लोक बद्ध भागवत है उसकी मूल बातों को बताना जी जी ये नहीं आप कुछ कुछ भी चेंज कर देंगे यहां का वहां कर देंगे जो चित्र केतु की कथा है वो भी छठे स्कंद में है इनका आठवे स्कंद में जा रही है कथा मतलब इन्होंने मतलब भाष में इतना कुछ लंबा चौड़ा लिख दिया है कहीं की बातें कहीं मार दी है इन लोगों ने तो वही बात है कि कहीं स्कंद कहीं जा रहा है सब कुछ तितर बतर कर दिया है भागवत की ना जाने कितनी वॉल्यूम इनकी है द हज का सेट इनका भागवत की वॉल्यूम का चल रहा है तो आप देखिए क्या ये एक धन कमाने काया बन रहा है क्या इनका भागवत अय गीता जो है फ्री में बांटते हैं क्या भागवत का सेट भीय फ्री में देते
00:49:45:14 हैं जोज का भागत ये गलत है ये गलत है गीता फ्री में नहीं बांटते हैं ये क्या करते हैं कि जब उनके यहां पर संडे के दिन क्लास होती है या जो इनके समृद्ध फॉलोवर्स होते हैं वो जाकर जब वहां प्रवचन में बैठ जाते हैं जो प्रवचन करता होते हैं वो या फिर उनके जो परिक इत्यादि होते हैं वो वो कोर्स करते हैं कि आप प्रण लीजिए 1100 गीता बांटने का अपने प्रियजनों को ये कभी स्कोन संस्था स्वयं अधिकृत रूप से भगवत गीता फ्री में किसी को नहीं देती वो क्या करते हैं जो उनके यहां पर आ चुके हैं फस चुके हैं वो उनको बोलते हैं कि भाई आप यहां से 1100 गीता ले लो और 1100 गीता अपने प्रियजनों को बांटो आपको कभी रोड में कोई फ्री में गीता देने वाला मिला क्या स्कोन से वो बेच रहा होता है फ्री में नहीं देता है वो बेचता है मगर वो बोलता है अवश्य बोलता है कि ये फ्री में है गीता फिर इसके बाद वो बोलता है कि फिर हमें सपोर्ट के लिए पूछ दीजिए प्रिंटिंग प्राइज बताता गीता
00:51:00:14 तो अंकित जी को चाहूंगा वो अपना वक्तव्य जी अक जी मैं फ्री की बात अगर बात आप कर रहे हैं तो फ्री इनका एक बड़ा सुंदर तरीका है गीता को लोगों में देने का मैंने दो तीन जगह उनको देखा तो वोय ये क्या करते हैं य पहले उनको प्राइस बताते हैं ये गीता का ये प्राइज है और फिर जब प्राइस बताते फिर कहते हैं जैसी आपकी इच्छा हो आप उतनी दे दो दे दो 20 दे दो अब इन्होंने प्राइस बता दिया 400 और 10 20 देने की बात कर रहे तो आदमी मुझे नहीं लगता कोई ऐसा होगा कि 400 प्राइस सुन करके देगा या देगा व 10 20 कम करके है बिल्कुल है ऐसा और यह मेरा जी बिल्कुल सही कह रहे वो हेडफोन की वजह से आपकी आवाज कम आ रही
00:51:51:09 है ऐसा देखिए मैं अपने छोटे भाई को भ्राता को अपने भी भेजता था उस समय जब मैं गीता की क्लासेस करने के लिए बाद में उसके साथ यही समस्या होने लग गई थी कि फिर उसको प्रवोक इस तरह से करते थे कि अब आपको इतना सेट दे दिया अब आपको य सेल करना है बेचना है बेचना है ये सारी चीज करके अब मैं उससे रोज पूछता था कि तुम्हें आज क्या बताया आज क्या बताया तो मैंने कहा अच्छा बता रहे हैं चलिए पढ़ते रहिए पढ़ते रहिए पढ़ते रहिए लेकिन जब यह सब बातें आने लग गई कि अब ये करना है तो फिर मुझे लगा कि अब ये अब अब्जॉर्ब कर रहे हैं तो मुझे अब इनसे दूर हट जाना चाहिए उन्हे और आप मानेंगे नहीं मेरे ही घर की एक सदस्य है जो उनको उनके साथ में ट्रेवल कर रहा था कहीं पर और मुझे उनको कहीं पर ड्रॉप करना था तो मेरी उनसे बातचीत भी हुई थी कि और वो हुई थी हरि और ह के बीच में हरि और हर की तो बात ही नहीं कर रहा हूं मैं ठीक है उसके भेद की बात ही नहीं कर हरि और हरि यानी मैं राम और कृष्ण की बात कर रहा हूं और उस समय अब क्या है कि बचपन से हमने भी जाना है सीखा है समझा है राम को ही जाना है है ना तो और हमें य भी पता है संस्कार बचपन से य मिले कि राम और कृष्ण में तो कोई अंतर है ही नहीं ठीक है राम और शिव की तो बात मतलब मैं बात ही नहीं कर रहा उसम तो है ही नहीं अंतर हरिहर में तो भेद है ही नहीं हरि हर भेदी नरक गामी वो तो दिमाग
00:53:06:19 प बना हुआ था लेकिन मैं राम कृष्ण की बात कर रहा हूं अभी तो अब बिल्कुल स्कन वाले श्रेष्ठता है कृष्ण की होनी भी चाहिए अन्यता के भाव से आप कर भी सकते हैं कोई उसमें कोई दिक्कत नहीं है अब कोई रामानंदी संप्रदाय का होगा तो वो कृष्ण राम को ही परब्रह्म मानेगा तो उसमें भी कोई गलत नहीं है ठीक है लेकिन वो कुछ छोटी दृष्टि से कृष्ण को नहीं देखेगा ठीक है तो वो वाली बात है अब क्या है कि मैं जब उनके साथ ड्राइव कर रहा था मैं वही ड्राइव करके लेके जा रहा था तो मेरी कुछ डिस्कशन हुई थी उसका सगा छोटा भाई था जो वहां पर हा हा मेरा सगा छोटा भाई जी जी जी मेरा सगा छोटा भाई था उस समय वो गया था आपने उसे स्न भेजा था अच्छा ये तो आज सुन रहा हूं देखिए ऐसा है कि उस समय क्या होता था कि मैं भी पढ़ाई कर रहा था उस समय मेरा आ थंक लास्ट र था कॉलेज का और मुझे भी इतना समय नहीं मिलता था कि मतलब मैं उसको पढ़ा दिखाऊ त इन सब चीजों के बारे में कुछ बताऊ पिताजी भी थोड़ा व्यस्त रते थे तो मैंने उसको बोला कि जब अब शुरुआत जब करनी है धर्म समझना है तो गीता तो बहुत अच्छा है आप उसे सीखिए अब मेरे मन में भी यही भाव था कि और मैं पढ़ता और मैं आपको य भी बता दूं मैं जिस स्कूल में पढ़ता था व वो स्कूल आर्य समाजी था ठीक है
00:54:22:10 ठीक है हा और और वहां पर लेकिन वहां पर सरस्वती माता की पूजा होती थी बैसाख पंचमी के दिन मूर्ति लगाकर पूरी विधि विधान से ठीक है और बहुत सारी चीज भी होती थी जिससे मैं मेरे को अच्छा नहीं लगता था जैसे उनकी कुछ मोरल एजुकेशन की पढ़ाई होती थी उसमें जो मुझे इतनी ज्यादा ठीक नहीं लगती थी तो मैं मुझे अच्छा नहीं लगता था बट अभी बहरहाल उसकी बात नहीं करते हैं तो मैं छोटे भाई को अपने स्कन भेजता था तो व जाता था तो जब शाम को सेशन करके आता था तो उसको बोलते थे कि कि मैं उसे पूछता था कि आज तुम्ह क्या बताया क्या पढ़ाया तोव बताता था मुझे मुझे भी सुनने में अच्छा लगता था कि चलो भाई अच्छा बता रहे अच्छा बता रहे हैं तो फिर इसके बाद उसको अब क्या है कि मेरे जो माता-पिता है वो रामानंद संप्रदाय से दीक्षित है है ना तो अब शुरू से अब उसको अब हमारे यहां तो मतलब सेवा होती है प्रभु की ठाकुर जी की इस तरह से उस भाव से होती है राम ही जानते हैं मानते हैं मेरे माता-पिता तो है ना अब क्या है कि जब वो जब राम की बातें करने लग जाए तब उसको और ध्यान से सुनिए का मेरी बात यह बात य कि उसको बोलते थे कि राम के लिए तुम अब उसको अंतर बताते थे राम और कृष्ण में क्या अंतर है भेद ठीक है यहां
00:55:37:20 पर हमारे गुरुजन ठीक है जो अभी कुछ कुछ समय पहले पुनीत जी भी आए थे य लाइव प इसी आवाहन चैनल प उनके जो दादा श्री थे वो मेरे माता-पिता के गुरु थे वो कृष्ण और राम को एक बताते थे वृंदावन के रहने वाले हैं वो भी ठीक है राम भक्ति है उनकी उसम अंदर लेकिन राम और कृष्ण को एक बताते थे उसका पूरे सब सब इंफॉर्मेशन जो व शेयर करते थे शास्त्र से लेकर वो बहुत ही सटीक और बहुत बढ़िया तरीके से समझाते थे अब वो क्या करते थे कि व राम और कृष्ण में अंतर बताना शुरू करते थे कि राम में यह कमी है तो कृष्ण में ये कमी है अब वो आके अब उसको पता नहीं है उसको तो मुझे पता है भैया ऐसा है देखो राम में ना ये कमिया है ठीक है और ऐसे मैंने कहा था ठीक है मतलब जब वो बोले कृष्ण में तो यह है बहुत अच्छा बहुत अच्छा जब राम बताने लग जाए तो मुझे भी थोड़ा ऑकवर्ड लगा उस सम लेकिन मैंने ध्यान नहीं दिया मैंने कहा कि कोई बात नहीं हो सकता है कि ये अभी बीच का चैप्टर के बीच में कोई चीज होती है ना जो अभी बीच में बताई गई है लेकिन अंत में उसको पूरा बता दिया जाएगा कि नहीं नहीं अंत में एक ही है देखिए अभी मैं अंतर बता रहा हूं लेकिन अंतर अभी के लिए है अंत में सब कर दिया जाएगा खेल खत्म तो अब आज एक दिन हो जाए दो दिन हो जाए फिर उसको फिर उसको पता नहीं लग जाए अब वो क्या होता था कि अब हमारे यहां क्या
00:56:52:22 होता है कि मेरे यहां परंपरा है घर में कि हर भगवान मतलब तुलसी रामचरित मानस जी का पाठ होता है एक दोहा दो दोहा दोहे के बीच में इस तरह से मतलब हो ग ही होगा होगा ही होगा ठीक है तो कोई ना कोई बैठ के करता था वो भी करता था तो अब उसको थोड़ा जल्दी हो रहा था उस दिन कि मैं मुझे क्लास करने जानी है तो मैं आज नहीं कर पाऊंगा उसकी टर्न थी तो हमारे घर पिताजी क्या करते थे ऐसे टर्न्स बनाते थे ताकि सब लोग ही करे और मतलब वो संस्कार डालने की अपनी अपनी प्रक्रिया होती है थोड़ मेरे पिताजी थोड़े फौजी मिजाज के थे तो वो थोड़ थोड़ रूल्स के बनाया करते थे तो उस दिन तो उसने नहीं पढ़ा आके उसने बताया कि मैं मैं अपने जाक वहां पर गुरु जी को बता रहा था कि मैं तुलसीदास जी की पढ़ता हूं ये सारी चीजें कर रहा था और आज मैं छोड़ के क्लास करने आया लेट हो गया था क्योंकि मुझे वहां पर पढ़ना पड़ा तो फिर बता रहे हैं कि तब उसके मुंह से मैंने जीवन में पहली बार अपने छोटे भाई के मुंह से यह बात सुनी कि तुलसीदास जी मायावादी है ठीक है अब मैंने बोला कि मायावादी है यह होता क्या है मुझे तो नहीं पता ठीक है तब मैंने थोड़ा बहुत रिसर्च की देखा पता लगा फिर उस टाइम भी मैं इतना ध्यान नहीं दिया उसको और वो भी तुलसीदास जी ये है वो है उन्होने शिव की भक्ति कर दी है सरस्वती की भक्ति कर दी है गणेश की भक्ति कर दी है सबकी भक्ति कर रहे हैं ऐसा है वैसा है
00:58:08:00 करके उन्होंने बोला तो मुझे थोड़ा अब फिर मुझे थोड़ा सा समस्या होने लग गई थी तो मैंने उसको बोला कि एक काम करो तुम अपना तो वैष्णव तिलक लगाओ रामानंदी वाला जो जैसे अंकित शर्मा जी ने लगाया है उसी तरह से और तुम धोती बहन के जाओ अब सेशन करने ठीक है तो एक दो दिन में आए प्रभु जी आए हैं हमारे रामानंदी प्रभु जी आए ये व है फिर उन्हीं के जो टीचर थे वो बोलते थे कि आप पीली धोती क्यों पहन के आते हैं हमारे यहां परंपरा नहीं है पीली धोती पहनने की अब पीरी धोती इसलिए पते क्योंकि उनके कुछ रूल्स होंगे कि पीरी धोती शायद कोई मतलब पोजीशन होती है वही लोग पहन सकते हैं ऐसा कुछ करके है या फिर जैसे कंठी पहनी है मैंने है ना तो अब ये कंठी क्या है कि ये दो लाइनस है इसमें तो उनके क्या होता है कि तीन कंठी वाला थोड़ा अपर लेवल का होगा दो कंठी वाला उससे लोअर होगा सबसे स्टार्टर जो होगा वो अब उसने दो कंठी पहनी थी थी ठीक है तो उसको फिर इसलिए टोक रहे थे छोटी को टोकना शुरू कर दिया और फिर एक दिन क्या हुआ थोड़ा वो बंडल ले आया अलग-अलग किताबें लेके आया था कुछ ग्रंथ लेके आया था जो स्कन से छपे हुए थे उसमें गीता भी थे कुछ पूरा बैग भर के उसको दिया था ठूंस के ठीक है अब उसको बोला कि मुझे ना उसका कोई मित्र था मैं नाम बदल देता हूं कार्तिक कह देता हूं मैं अभी ठीक है कार्तिक के साथ में जा रहा है और कार्तिक जो है मुझे उसके साथ उस चौक प जाना है फलाने चौक प जाना है
00:59:23:04 और वहां पे मतलब मेरे मुझे टारगेट मिला है अगर मुझे टारगेट ये मैं ये कंप्लीट करूंगा तो मेरी भक्ति और बढ़ेगी मेरी भक्ति और बढ़ेगी ये वाला चीज है तो मैंने कहा तुम पढ़ाई लिखाई करनी है कि तुमहे अ ये अभी यही सब काम करना है ठीक है तो फिर मैंने इसको धीरे फिर मैं एक दिन गया फिर मैंने देखा बातचीत की तो मुझे कुछ ठीक नहीं लगा तो मैंने छोड़ दिया ठीक है मैं उस कौन का नाम नहीं लूंगा यहां पर लेकिन ऐसा ऐसा हुआ दूसरी घटना यह हुई कि अभी जो मैं बता रहा था जब शिवान जी थोड़ा दूर थे यहां पर कि मेरी सदस्या है मेरे परिवार की वो मतलब मेरे नानी की के साइड की है तो वो क्या बोलते हैं कि वो भी स्कन से जुड़ी हुई है ठीक है और शिवान जी जिससे मिलक आए थे उन्हीं की है शायद डिसाइल है ना शिष्या तो अब मैं बोलिए लखनऊ के प्रेसिडेंट है जो मंदिर लखनऊ मंदिर के जी जी जी जी उन्हीं की शिष्या है जिनका हमने इंटरव्यू लिया था जी जी तो जो बता रहे थे शास्त्रों की गहराई में जाना हमारा उद्देश्य नहीं है जी बिल्कुल मैं
01:00:38:07 स्वयं इस बात को कहता हूं कि मैं अवल दर्जे का मूर्ख हूं ये उनके उत्तर थे जब हमने बहुत ही सामान्य से प्रश्न किए थे उनसे जी तो अब देखिए मतलब कैसे जोड़ता हैका उनका शिष्य प्राप्त है जी जी उनका उन्हीं का है और फिर वो अपने मतलब अब चल रहा है जैसे नहीं एक रेफरल बोनस चलता है वहां प म रेफरल टाइप जो चलता रहता है व वैसे ही चल रहा है तो बस ठीक है तो वो भी किसी के रेफर से ही आई थी वो अपने भाई के रेफर से आई थी ऐसे ऐसे करके जो भी हुआ था अब क्या हुआ कि वो हमारे मतलब घर पे आई हुई थी कुछ फंक्शन था उस लिए तो उस समय मम्मी जो थी हमारी जो माता जी थी वो शनिवार का शायद समय था उस दिन सुंदरकांड का पाठ था तो पिताजी को हमारे लगा कि चलो भाई ये भी तो बहुत अच्छी बड़ी वैष्णवी है तो उन्होने बोला कि यहां आप आई है तो सुंदर कान का पाठ चल रहा है जाइए एक घंटा कराइए आपको पापा ने मेरे पिताजी ने इस भाव से बोला था कि अब भाई वैष्णव है तो इनको इनका अब हनुमान जी के सुंदर का पाठ तो इनको बहुत मजा आएगा क्योंकि हम लोगों को तो आता ही है लेकिन वो गई नहीं ठीक है तो पापा ने फिर बोला कि अरे चले जाइए मतलब कि बहुत अच्छा होता है यहां पर सारी चीजें
01:01:53:07 और मजा आएगा बहुत अच्छा है सारी ची लेकिन वो लोग ग जो नहीं कॉलोनी में लोग कराते रहते हैं मंदिर में हमेशा चलता रहता है तो उस समय नहीं गई वो थोड़ा बिजी है ये है व कुछ काम करते उने टाल दिया तो हमने उसको ध्यान नहीं लेकिन जब मैं कड़िया जोड़ रहा हूं तोत मुझे थोड़ा समझ में आ रहा है अब क्या हुआ कि फिर वो अपना भक्ति करती थी बहुत अच्छी बात है और अपना भगवान का नाम का जब तो करती ही है जो मैं मैं गलत नहीं बोलूंगा ऐसा नहीं है वो हरे कृष्ण महामंत्र का जब करती है ठीक है हरनेस जब भी उनको समय मिलता है है ना अब लेकिन अब मैं उनको जब वापस लेक आ रहा था तो मैं राम जी की और शिव जी के उसके बारे में थोड़ा मेरी बात चल रही थी कि ऐसा ऐसा है और अब मैं जब मैं अब क्या है कि मैं हूं काशी से है ना तो हमारे य जो ग्रीटिंग करने का तरीका है ना उसमें क्या होता है कि वो हम अब अब बाबा जो है वो हमारे घर के सदस्य है ठीक है महादेव तो तो हम भी जब फोन कभी उठाएंगे तो जैसे कोई जय श्री राम बोलेगा को जय श्री कृष्ण बोलता है है ना तो हमारा सीधा हां भैया महादेव क्या हाल है महादेव महादेव यही चलता है है ना मतलब ग्रीटिंग में यही है कि बस बाबा का नाम लेना है महादेव का नाम लेना है ठीक है बिल्कुल सही उसमें कोई गलत नहीं है तो अब हमारे यहां कुछ भी हो जाए कोई बात हो मतलब कोई भी आका लग रहा है कोई हसी हो रही है
01:03:08:08 तो नमः पार्वती पतय हर हर महादेव ही होता है ठीक है ठीक है तो ये तो नॉर्मल है तो अब वो उसमें भी उतना ज्यादा सम्मिलित नहीं होती थी वो करती थी थोड़ा ड़ लगता था उनको कि ये सब चीजें हो रही है और महादेव महादेव क्या है कि कृष्ण कृष्ण का करो ये सब चीजें करो वो इनडायरेक्टली बोलती थी बट मैं इतना ध्यान मैंने कहा चलो भाई मैं यह सोचता था और बहुत अच्छी मतलब मेरे मन में य भाव था कि ये इतनी बड़ी अनन्य भक्त है देखिए मुझे इनसे सीखना चाहिए ठीक है अन्यता सीखनी चाहिए इतनी बड़ी भक्त है कि वो कृष्ण के अलावा किसी को जानती नहीं तो बहुत अच्छी बात है आप बोलिए कि जैसे बोल लीजिए कि मैं इनको नहीं समझता कुछ कृष्ण को नहीं समझता राम को मान लीजिए मान लीजिए मैं राम का भक्त हूं और मैंने बोल दिया कि मैं कृष्ण को नहीं जान समझता या फिर शिव को नहीं समझता तो यह बोलना ठीक नहीं होगा मुझे ऐसा लगता है कि अगर आप यह बोल कि मैं राम के अलावा को जानता ही नहीं मैं शिव में भी राम को देखता हूं गुरुदेव बोलते हैं ना कि अगर ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश इसमें से जो भी आपके ईस्ट है उसको ईस्ट मानकर उसको सर्वश्रेष्ठ मानकर बाकी चार ब्रह्म के स्वरूप को इस भाव से पूजा करनी चाहिए जैसे मान लीजिए मैं राम का भक्त हूं कि हे ब्रह्मा हे भगवती हे गणेश हे महादेव हे शिव हे भगवान सूर्यनारायण मुझे राम की और
01:04:23:09 भक्ति मिले इस भाव से तो उससे क्या होगा उनकी भी बच जाएगी साख रह जाएगी और मतलब कि आपकी भक्ति भी हो जाएगी तो ये मुझे ये तो मुझे बहुत अच्छी बात लगी मैंने कहा ये तो ये तो बहुत ही जबरदस्त सामंजस्य बैठ गया है इसमें इसमें तो मेरे ही घर में अब जैसे मेरी मेरी जो पत्नी है वो शिवकी बहुत अनन्य भक्ति भक्त है तो वो अपनी भक्ति करती रहती रहती है उसमें करके मैं भगवती की उपासना करता हूं तो वो वाली बातें हैं तो जब गाड़ी वाड़ी में हम बातचीत हमारी चल रही थी बस थोड़ा सा समय लूंगा पांच मिनट और बोलूंगा मैं ज्यादा नहीं तो तो उस समय जब राम की बात हुई तो उन्होंने मुझे टोक दिया कि राम परब्रह्म थोड़ी ना है कृष्ण है और उन्होंने उसका आर्गुमेंट ये दिया ठीक है ध्यान से सुनेगा कि राम ने कभी नहीं बोला कि मैं हूं कृष्ण ने देखो हर जगह बोला है कि मैं यह हूं मैं वो हूं मैं ही सब कुछ करने वाला हूं राम ने कभी बोला है राम नहीं है वो तो उनका एक इनकार्नेसियों
01:05:23:12 नहीं होगा भाई तो मेरे राम के लिए आप ऐसा बोल रहे हैं ठीक है तो फिर मतलब उस टाइम मेरी थोड़ी से बहस हो गई गाड़ी में अब मेरी जो हमारी जो मालकिन थी वो आप कर कंट्रोल कर ड्राइव भी कर रहा था अब दुख क्या हुआ खून खोल गया था मेरा ठीक है उस समय लेकिन मैंने कुछ उस समय कुछ मैंने उसको बोला कि तुलसीदास जी ने इतने इतनी बार इतनी मतलब चीजों के उनकी परबता सिद्ध की है ठीक है अपने ग्रंथों से अपने लिख के और शास्त्रों से ठीक है शास्त्र प्रमाण से सिद्ध की है तुलसीदास जी ने तो उसके ऊपर उनका ये आर्गुमेंट था अरे ऐसे तो कोई कुछ भी लिख के चला जाएगा तो थोड़ी ना मान लेंगे येला ये था उनका तो मुझे लगा कि तुलसीदास जैसे परम वैष्णव मतलब उनकी तो मतलब मिट्टी के धूल भी नहीं है हम मुझे लगता नहीं कि य जितने दर्शक बैठे होंगे शायद कोई हो भी तुसी जितना बड़ा वैष्णव आज के समय तो कोई मुझे लगता है कोई नहीं होगा ठीक है तो लेकिन उनको भी उन्होंने बोल दिया कि कोई कुछ भी लिख के चला जाएगा ना मान लेंगे तोय ये तर्क होता है ठीक है तो उस समय तो चलिए थोड़ा रिलेशन के सम्मान में मैंने इतना नहीं तक किया लेकिन मैंने अपने फिर छोटे भाई को बताया उसको भी बहुत दुख हुआ क्योंकि वो भी राम का ही भक्त है मतलब
01:06:38:24 वो ऐसा है कि मतलब वो राम के अलावा किसी को जानते नहीं वो वाली भावना है उसकी ठीक है मतलब इसका अर्थ यह नहीं है कि हमारे यहां किसी को भी मतलब किसी भी ब्रह्म के किसी स्वरूप को किसी देवी देवताओं को किसी उस दृष्टि से देखा जाए कि नहीं नहीं छोटे हैं बड़े हैं ऐसा बिल्कुल नहीं है ठीक है मैं अगर दर्शन करने जाऊंगा भी तो राम नाम का श्री राम जय राम जय जय राम त्रयो दरी मंत्र जो है यह हनुमान जी महाराज का दिया हुआ वो जपता ही रहता हूं ठीक है और महादेव महादेव करता रहता हूं उस उसम कोई समस्या नहीं है मुझे मुझे कोई दिक्कत नहीं और ऐसा नहीं है लेकिन मुझे अब अब ये चीज जो है ना ये है फंडामेंटल डिफरेंस आप समझिए चीज ठीक है कि आपके रूट्स को मतलब इतना रिजट कर रहे हैं और यह जो दृष्टिकोण है ना पॉइंट ऑफ पूरा का पूरा अमिक है अगर आप इसको ध्यान से समझिए अगर ठीक है तो ये पूरा अब्राह्मिक है बिल्कुल देयर इज वन गॉड ये सारी चीजें है लेकिन उनकी जो फिलॉसफी है ना वो पूरी मैच करती है अब जिसके अगेंस्ट जिसके डिफेंस में ये लोग यह बोलते हैं कि अब उनको समझाना है तो उनकी भाषा में समझाना पड़ेगा ना मतलब बिल्कुल ठीक है ठीक है लेकिन उन्हीं की भाषा में आप यहां क्यों समझा रहे हो फिर यहां तो मत समझाइए ना फिर उनकी भाषा में जब आपने डिफरेंशिया है कि अमुक अमुक देश के
01:07:53:26 प्रांत के लोगों को को ऐसी मतलब उनको अब्राम पॉइंट ऑफ व्यू से समझाना पड़ेगा तभी उनको बात समझ में आएगी तो यह तो अब्रिक देश है नहीं अगर मैं इस भारतवर्ष की बात करूं तो तो ऐसा नहीं है ठीक है तो उनको इस भाषा में समझाने की क्या आवश्यकता है तो फिर उसका जवाब नहीं होता कि ऐसा है वैसा है भक्ति करनी पड़ेगी करनी पड़ेगी य पर एक बड़ी बात याद दिलाऊंगा जब उनका इंटरव्यू चल रहा था मोग लीला जी का तो उनसे पूछा गया क्या भाई तुम ये शिव और विष्णु में भेद आप क्यों करते हैं देखिए वो तात्विक तात्विक है रस में मतलब लीलाओं का भेद है और तत्व से भेद नहीं है तो जैसे हमें प्राप्त है श्री कृष्ण भगवान को परम ब्रह्म के रूप में स्थापित करने वाली लीला है वैसे ही हमें व्यास जी के द्वारा ही प्राप्त है शंकर जी को परम तत्व के रूप में स्थापित करने वाली लीलाए वैसे ही हमें प्राप्त है राम जी को परम तत्व के रूप में स्थापित करने वाली लीलाए तो फिर आप एक यह एजेंडा लेकर क्यों चलते हो कि नहीं उन लीलाओं पर ध्यान मत दो जी तव तो एक ही है अच्छा फिर अगर ये कहेंगे हम वैष्णव है तो बात ये आ जाती है कि पहले आप वैष्णव हुए हैं इसलिए आप विष्णु को या कृष्ण को मानते हैं या
01:09:09:02 पहले कृष्ण को मानते थे तब आप वैष्णव हुए हैं मतलब आपने शास्त्रों को पढ़ के कृष्ण की महिमा को जाना तो सारे शास्त्र पढ़ोगे तब तो मानोगे बिल्कुल त तो आपकी आस्था एक में जगी जी तो आपको यह कहना चाहिए या फिर आप यह प्रचार मत करो कि हम सनातन का प्रचार कर रहे हैं आप य कहो कि सनातन में जो हमें अच्छा लगता है हमारा जो मन करता है हम उस भाव का सनातन के उस अंश का प्रचार कर रहे हैं हालांकि वो अंश भी सनातनी अंश नहीं है पूरी तरीके से जी क्यों क्योंकि फर विष्णु से भी अलग कर दिया हरेर नाम हरेर नाम केवलम तो हरि का नाम लो फिर फिर आप ही तो विष्णु को अलग कर रहे हो कृष्ण से दो 62 में लीलाओं के भेद के आधार पर यदि कृष्ण सर्वोच्च सिद्ध होते हैं तो लीलाओं का भेद आपने मान लिया तो 2.2 में कि विष्णु भगवान भी थोड़ा सा इतर है कमतर है थोड़ा सा लीलाओं का भेद मान लिया जब आप जब आप कृष्ण को विष्णु से अलग मानते हैं हरि से कृष्ण को अलग मानते हैं लीला में तत्व से तोय सब एक है आप ही कह रहे हो तो लीला में अलग होने के कारण यदि आप ऊंच नीच कर रहे हैं तो विष्णु से यदि आप ऊपर मानते हैं कृष्ण को तो फिर आप कहां से हुए हरे नाम केवलम वाले आप कृष्ण नाम केवलम करो फिर वो लिखा नहीं है
01:10:24:02 कहीं एक बहुत ही बहुत ही बड़े आचार्य है वैष्णव आप सब जानते होंगे थोड़ा सा अंकित जी को सुनना चाहूंगा अंकित जी क्योंकि काफी देर से कुछ बोलना चाह रहे हैं और पहली बार चैनल पर आए भी है तो उन्ह थोड़ा सा समय देना चाहू जी अंक जी बोलिए स्वागत है जी जी जी जी धन्यवाद महाराज अब इतना आप विद्वान लोगों को सुन रहे हैं तो मन कर नहीं रहा था वैसे बोलने का पर कुछ एक बातें मैं जरूर रखने चाहूंगा परकन की बात चल रही है कि ये भेद रखते हैं या यह रखते हैं यह केवल कुछ एक जो अपने ही ढंग से बनाए हुए संप्रदाय हैं जैसे कह सकते हैं य सुकन हो गया आर्य समाजी हो गए रामपाल वाले हो गए यह जितने भी हैं यह सब ही हमारी संप्रदायों को तोड़ने का काम करते हैं अब मैंने पूज्य गुरुदेव से जब दीक्षा ली तो गुरुजी ने अब रामानंदी संप्रदाय है तो राम जी की है ना उपासना के बारे में बताया पर मैंने गुरुजी से कहा गुरुजी मैं भागवत पढ़ता हूं आगे भागवत करूंगा तो गुरु जी ने कहा खूब करो कोई दिक्कत नहीं भगवान राम भगवान कृष्ण भगवान शिव कोई अंतर नहीं है शिवस हृदयम विष्णु विष्णु हृदयम शिव दोनों एक दूसरे के
01:11:39:04 ह में है ठीक है अगर आप इसम भेद करेंगे तो आप गुरु जी ने मेरे को एक बात बोली गुरु जी बोले अगर आप व्यास पीठ पर बैठ कर के कथा कर रहे हैं और फिर भी व्यास जी द्वारा रचित आप ग्रंथों में भेद कर रहे तो आपका व्यासपीठ पर बैठना निरर्थक है आप व्यासपीठ पर बैठने के अधिकारी नहीं है ही बात अगर कोन की हम बात कर रहे हैं तो कोन तो मैं अगर बात कह तो बात गलत नहीं होगी जैसे पूर्व में ब्रिटिश सरकार आई थी कब्जा करने के लिए ऐसी एक तरह से ब्रांच चली हुई है जो धीरे धीरे कब्जा करने का प्रयास कर रही है हमारे सभी ग्रंथों में भेद ने का काम कर रही है हमारे वेदों को ना मान कर के हमारे शास्त्रों को ना मान कर के हमारे सभी पुराणों में अंतर डाल रही रामचरित मानस को नहीं मानती है अच्छा ये तोन की बात कर रहा एक जय कृष्ण नाम संप्रदाय है अब आपने शायद सुना सुना कृष्ण नाम संप्रदाय है मैं वहा के महामा पजाब में मिला उन्होंने मुझसे क्या बात करी देखिए मतलब मानसिकता कैसी है इनकी दिमाग जो है इनका य इतना खाली
01:12:54:09 हो चुका है नहीं पा रहे बोल क्या रहे उन्होंने मुझसे बात करी कि जो श्रीमद् भगवत गीता है वह भगवान द्वारा रचित है मैंने कहा बिल्कुल ठीक है भगवान की वाणी है भगवान ने बोला है बोले जो बाकी ग्रंथ है वो व्यास जी महाराज ने लिखे इस मानते केवल भगवत गीता को हम मानते हैं तो उनसे अगर यह पूछा जाए कि भगवत गीता जो है वह महाभारत से ही ली गई है तो महाभारत किसने रचना करी बोले वेदव्यास जी महाराज ने अगर व्यास जी ने भागवत की रचना करी उस उस महाभारत की रचना करी महाभारत में आप गीता जी को ले रहे हैं तो आप महाभारत को क्यों नहीं मान रहे आप तो फिर तो या तो आप किसी को मत मानो त भी हम माने ठीक है अगर हमें कोई आ कर के मुस्लिम कोई हमसे डिबेट करे कि तुम्हारे सारे ग्रंथ है ना यह निष्फल है कोई इसमें कोई शक्ति नहीं कोई कुछ नहीं तो उसकी बात को एक समय के लिए हम यह कह सकते हैं कि वो जो अपने तरीके से तर्क दे रहा है वो ठीक है उसको जो सिखाया जा रहा है ठीक है पर ये अपने ही देवताओं में भेद कर रहे हम वेद शास्त्र तो यहां तक कहते हैं कि तुम लोगों में भेद नहीं है जी तुम आपस में जो हो तुम लोगों में भेद नहीं है और हमने लोगों की तो बात छोड़ो देवताओं में
01:14:09:10 भेद कर दिया मराज अरे देवताओं में अरे हरि और हरि में ही भेद कर दिया अय देखिए ना हरि और हर में हरि और हर में अरे भया याद आया बीच बीच में एक टॉप अप देता चलू मैं चर्चा में सामग्री का पहली बात तो कोई हमारे सज्जन है जो अभी मैंने कहा वो इंग्लिश वाली भगवत गीता कौन सी पढ़नी चाहिए तो मेरे ख्याल से गीता प्रस से प्रकाशित है इंग्लिश में ट्रांसलेशन जी देखिए अगर मैं इसमें जोड़ना चाहूंगा अगर आपको ज्ञानेश्वरी अंग्रेजी अनुवाद है इसका अगर आपको मिल जाएगा तो वो आप अवश्य पढ़िए और आपको जहां तक मेरी जानकारी मैंने अंग्रेजी एक दो ग्रंथों देखे हैं मतलब पब्लिकेशन देखे हैं उन्होंने एज इटस ही ट्रांसलेट किया है उसको उसमें अंतर नहीं किया है जो संत ज्ञानेश्वर जी महाराज ने जो लिखा है मराठी में उसका हिंदी में भी एस इट ही किया है और उसी का अंग्रेजी मेंट किया तो अगर आपको मिल जा रही है ज्ञानेश्वरी उस गीता का नाम ही ज्ञानेश्वरी साधक सुदा साधक संजीवनी तत्व वि वेचनी यह सब गीता के अलग अलग वर्जन है जिन कमेंट्री की है महापुरुषों ने वैसे ही ज्ञानेश्वरी संत ज्ञानेश्वर द्वारा अपनी कमेंट्री दी गई है अगर आपको वो अंग्रेजी अनुवाद मिलता है तो अवश्य ले लीजिए उसको पढ़िए मुझे याद आई
01:15:25:04 हम लोग एस इट की बात कर रहे थे भगवत गीता और अभी भेद की बात चल रही थी तो आप देखि भगवत गीता में स्पष्ट स्पष्ट दै से मुक्त होने की बात हो रही है श्लोक है पांचवा अध्याय और पवा लोक इसको आप देख सकते हैं जी लते ब्रम निर्माण वि से मुक्त होने की बात हो रही है तो हिंदी जब इन्होने की है तो हिंदी में तो इनको लिखना प क्यों लिखना पड़ गया क्योंकि य तो अपने म मनमोजी है कहीं लिखते क नहीं लिखते इट मगर यहां परने अनुवाद कम से कम लिखा जो लोग संशय से उत्पन्न होने वाले द्वैत से परे है द यानी की गुरुदेव क्या कहते हैं भेद हमें दिख रहा है भेद का नाम संसार भेद का निर्वाह करके अभेद की प्राप्ति य हमारा लक्ष्य तो भेद क्या है द तो संशय से मोह से उत्पन्न माया से उत्पन्न जो द्वैत है इसको हमें पार करना है तो जो लोग संशय से उत्पन्न होने वाले द्वैत से परे हैं है ना जिनके मन आत्म साक्षात्कार में रत है यहां द्वैत का खंडन
01:16:40:04 हो गया मैं द्वैत का वैसा खंडन नहीं मान रहा हूं तात्विक रूप से मगर जिस दैत का प्रचार ऐसे किया जाता है अद्वैत के खंडन में जिस द्वैत का प्रचार किया जाता है क्योंकि द्वैत हमारे उसम है जिस मार्ग में बकुल मगर यदि आप अद्वैत का खंडन करते हुए द द्वैत की स्थापना करते हैं तो यहां पर इस प्रकार के द्वैत का निराकरण किया जा रहा है कि जो लोग संशय से उत्पन्न होने वाले द्वैत से परे हैं यह भगवत गीता इसकन की है भैया पा प जिनके मन में आत्म साक्षात जिनके मन आत्म साक्षात्कार में रत है तो जी आत्म साक्षात्कार में रत है जो समस्त जीवों के कल्याण कार्य करने में सदय व्यस्त रहते हैं तो आगे ऐसे लोगों को मुक्ति वाला कहा गया द्वैत से परे भगवत गीता एज इट इज तथाकथित एज इट इज है ना तो द्वैत से परो को परे जो है उनको मुक्ति प्राप्त हो अब यहां पर पता है क्या है नीचे तात्पर्य आ जाता है भाई बच के नहीं जा पाओगे अब इसके नीचे आ जाता है तात्पर्य फिर क्या होगा अब
01:17:55:08 यहां पर घुट लाएंगे घुट पिलाएंगे पिलाएंगे तो फिर क्या होगा अब यहां पर कह दिया गया केव वही हा जी जी ल जी बोलिए जी मैं कुछ कह रहा था मैं यह कह रहा था मैं अभी कुछ बातें रखकर अभी य से जाना चाहूंगा क्षमा चाहूंगा मेरा नेट जा रहा था इसीलिए खमरा इसलिए बात रख द फिर अभी यहा से जाता हूं मैं ये जो बात कह रहा हूं इन्होने कैसे उस बात को मोड़ा दत वाली बात को मोड़ा वो मैं पूरा कर दू फिर ये कह रहे है केवल वही व्यक्ति सभी जीवों के कल्याण कार्य में रत कहा जाएगा केवल वही व्यक्ति सभी जीवों के कल्याण कार्य में रत कहा जाएगा जो पूर्णतया कृष्ण भावना भावित हो कृष्णा कॉशसनेस इंग्लिश में अगर ट्रांसलेट करें क कॉशसनेस तोय ब्रेन सिस्टम क्या है जहा पर व शब्द नहीं भी है वहा पर भी कृष्णा कनेस औरन क्या है इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ कृष्णा तो व्यक्ति सोचे तो शास्त्र में बात हो रही कृष्णा
01:19:10:09 कॉशसनेस की हर जगह और द्वैत से परे हो करर के भी वो सब दत को मिक्सचर कर दिया भगवत गीता ही इस प्रकार के अवद द का खंडन कर देती र जी युगल जी आप अपनी बात रख ले अरे बस लाइन बोलूंगा मैं जी बोलिए बोलिए यल जी बोलिए आप बोलिए जी जी तो मैं ये कह रहा था जैसे की इन्होंने बताया कि हम पंच देव को उपासना मान जैसे एक ईट को आप अपने रखिए जैसे राम हो गए कृष्ण हो गए शिव हो गए बाकी जो हो जाते हैं हम जैसे शिव जी के मंदिर में जाए तो हम केवल उन्हीं को प्रणाम करके हम ये उनसे मांगे कि हमको भगवान कृष्ण की भक्ति दीजिए यदि हम उनके हम यदि वो हमारे ईट है तो तो जैसे हमारी दीक्षा ई श्री संप्रदाय के अंदर तो हमारे गुरुदेव ने भी यही कहा था कि देखो किसी से घृणा मत करना अब तुम श्री वैष्णव हो गए हो श्री वैष्णव का अर्थ यह नहीं होता कि भाई तुम भगवान शिव से घृणा करने लग जाओ दुर्गा जी के मंदिर में नाक मु से उड़ने लग जाओ जाकर के अभी मैंने वीडियो भी डाली थी गुरुजी की तो उसम बता रहे थे कि कोई बा के मंदिर में जाएंगे तो राधा वल्लभ जी के नहीं जाएंगे राधा वल्लभ जी के में जाएंगे तो राधा रमण नहीं जाए
01:20:25:12 तो एक घटना बताई गुरुदेव ने कि कई लोग सोच रहे थे कि जो ठाकुर जी है वो तो श्री वैष्णव है तो श्री वैष्णव है तो ये महादेव के मंदिर में नहीं जाएंगे भाई अब ऐसा होता है कि क्या पता ऐसे कट्टर श्री वैष्णव हो की महादेव के मंदिर में नहीं जाएंगे गुरुजी के पास बात पहुंचाई गई की आप तो ठाकुर जी श्री वैष्णव हो तो क्या आप शिव जी के मंदिर में जाओगे तो गुरुदेव ने कहा क्यों नहीं जाएंगे शिवजी के मंदिर में अवश्य जाएंगे और शिव जी से प्रार्थना करेंगे कि हमारी कृष्ण भक्ति और बढ़ाए बिल्कुल नव दुर्गे आते हैं हम दुर्गा जी के मंदिर में जाते हैं उनसे प्रार्थना करते हैं कि भाई दुर्गा जी की भक्ति हमारी बढे भगवान कृष्ण के प्रति और आकर्षण बढ़े तो ये सारी बात है और एक बात ये कि कलयुग के अंदर जैसे की जो कौन कहता है कि हम हर जगह जो गीता बांटते हैं गीता से प्रचार करते तो मैं ये बात बता दूं कि भागवत का जो महात्म इन्होंने खाया है महात्म के अंदर ये स्पष्ट रूप से लिखा हुआ है कि जब ज्ञान और वैराग्य रो रहे थे वहां प वृद्ध अवस्था को प्राप्त हो गए तो भक्ति माता रो रही थी दुखी हो रही थी मेरे ज्ञान और वैराग्य दोनों पुत्र है वो वृद्ध अवस्था को प्राप्त हो गए हैं तो नारद जी उनके कानों में गीता का भी पाठ करते हैं यह भी लिखा है गीता का पाठ करते किंतु जन वैराग्य को होश नहीं आता
01:21:40:26 है तो गीता का पाठ करने से भी उनको होश नहीं आ रहा है तो वहां पर स ऋषियों से भेट होकर के नारद जी की उनको यह बात पता चलती है कि श्रीमद भागवत का साप्ताहिक पाठ किया जाए तब ज्ञान और ञ जो है वो पुनः उनको अपनी जो यवन अवस्था है जो योन है वो प्राप्त होगी तो इसका अर्थ क्या हुआ कि जोय कहते हैं कि हम गीता का प्रचार करते हैं गीता बांटते हैं इसका अर्थ गीता नहीं आपको फिर तो श्रीमद् भागवत ही मा चाए गीता को भी मत मानिए फिर तो क्योंकि गीता के पाठ से भी ज्ञान वैराग्य को होश नहीं आए कहा लिख रहा है श्रीमद भागवत के अंदर जो आप सात्विक पुराण जिसको कहते सात पुराण ही इस बात को बता रही है तो फिर आप गीता को भी मत मानिए इसके हिसाब से य जाए जी ये आप तर्क करेंगे इनको पहले से पता था इसलिए पूरा महात्म उड़ा दिया ना इसलिए दिया इसी वजह से उन्होने
01:22:38:08 महाया है श्रीमद भागवत से भक्ति भी मिलेगी ज्ञान भी मिलेगा और वैराग्य भी मिलेगा तीनों की पुष्टि होगी तो तीनों की पुष्टि श्रीम भागवत से ही हो रही है तो वहां पर आपको गीता बाटने की आवश्यकता नहीं है फिर श्रीमद् भागवत का हर जगह प्रचार करिए गीता का मत करिए सब जी भागवत जी ही यही है ना जैसे आपने बताया की गीता का पाठ का भागवत जीस नेय लि गीता पाठ एक बार बार किया नहीं हु थोड़ा होश आया किंतु फिर बे की अवस्था में हो गए तो ही श्रीमद भागवत के पाठ से ही उनको होश आया तो भाई आपको सबको होश में लाने के लिए जैसे नारद जी ने श्रीमद भागवत की कथा करी आपको महा श्रीमद भागवत की साप्ताहिक विधि से कथा करनी पड़ेगी जब जाकर भक्ति ज्ञान वैराग्य पुष्ट होंगे यदि साप्ताहिक विधि से आप पाठ नहीं कर रहे हो तो इसका अर्थ है कि आप ज्ञान वैराग्य भक्ति को पुष्ट नहीं कर रहे हो भक्ति रानी आपके यहां पर रो रही है केवल भक्ति को नचा रहे हैं मराज जी और कुछ नहीं कर रहे हैं केवल भक्ति को नचाने का काम किया जा रहा है ज्ञान वैराग्य से को दूर ले जा जब लखनऊ के प्रेसिडेंट से शिवा
01:23:53:18 जी का इंटरव्यू हु उन्होने एक बात कही थी हम शास्त्रों के डीप में जाते ही नहीं है जब आप शास्त्रों के डीप में नहीं जाते इसका मतलब ज्ञान वैराग्य लुत हो गया और ज्ञान वैराग्य भक्ति रानी रो रही है और भक्ति रानी रो रही हैव क्या है सीधी सी बात हो गई बिल्कुल जी बिल्कुल ब इसम एक पॉइंट आपने बीच में एक पॉइंट कह दिया था ये सात्विक ग्रंथों का है ना तो वो बात देखिए अब इसम एक पॉइंट जोड़ना बड़ा इंटरेस्टिंग बात है इस कि आपके ये पद्म पुराण के उत्तर कांड में ये 236 वा चैप्टर है उसमें आई थिंक 18 से 21 के बीच में इन पुराणों की लिस्ट दी गई है कि सात्विक कौन से हैं राजसिक कौन से हैं तामसिक कौन से हैं ठीक है अब देखिए ठीक उसी ठीक है उसी के उलट स्कंद पुराण में वैष्णव पुराणों को तामसिक और शैव पुराणों को ये सात्विक बताया गया है अब क्या करें इसका
01:24:56:09 कि जो उध पुंड लगाते हैं ना उनको वो भी नरक गामी होते हैं ये भी लिखा है उसके फिर इसका क्या करोगे जो भक्ति करते हैं वो भी नरक गामी होते ऐसा भी लिखा है फिर उसका क्या करोगे इसका अर्थ क्या हो गया कि ये इसीलिए दोष पूर्वक नहीं इसीलिए लिखा है सबकी जो भक्ति है वो अपने इष्ट के प्रति रहे वो एकाकी रहे अनन्य रहे यहां प मैं निराकरण थोड़ा सा सरल भाषा में दूं वो यही है कि जिसका जो ईस्ट है उसका मन उसमें रमेश यदि किसी के ईष्ट शिवजी है तो उसके लिए जो वैष्णव पुराण है वो तांक हो ग क्योंकि वो ट ईट की लीलाए नहीं होंगी उसम तो उसका मन जो है एकाग्रता उसकी चंचलता आएगी एकाग्रता जाएगी उसी प्रकार से जिसके ईट भगवान विष्णु है उनके लिए जो श पुराण है वो तामसिक हो गए क्योंकि वो उसकी मुक्ति में बाधक होंगे क्योंकि वहां पर विष्णु की लीलाए कम होंगी शिवजी की लीलाए बहुत ज्यादा होंगी इसी प्रकार से अब इसका सबसे अच्छा तो तरीका वो है ना भगवान ने कहा कि जो मुझसे अतिरिक्त देवी देवता अतिरिक्त देवी देवताओं की पूजा करता है वह कभी मुक्ति को प्राप्त नहीं होता इसका अर्थ क्या है
01:26:11:09 कि यदि आप किसी एंटिटी की सत्ता कृष्ण से स्वतंत्र रूप में समझ रहे हैं तो आप मुक्ति प्राप्त नहीं कर पाएंगे तो जो यहां पर वर्ड आया ना कि आप ने उर्द कुंड लगा लिया अब आप हो भगवान आपके ईट है भगवान शिव और आपने वैष्णव टीका लगा लिया और इसके साथ साथ वो अर्थ भी मिला हुआ है कि आपने भगवान विष्णु की सत्ता को भगवान शिव से अतिरिक्त स्वीकार कर लिया स्वतंत्र भगवान विष्णु की स्वतंत्र सत्ता को स्वीकार कर लिया शिव से अलग तो वहां पर व आपके लिए नन गामी हो गया इसी प्रकार से आप हो वैष्णव और आपने जो है मतलब ये भाव दर्शा दिया कि हम शिव जी की स्वतंत्र सत्ता को स्वीकार करते हैं भले ही हमारे ईस्ट जो है विष्णु है तो स्वतंत्र सत्ता को स्वीकार करने के उसमें वह आपके लिए तामसिक हो गया वह आपके लिए अनुकरणीय नहीं रहा तो ऐसे लेंगे तो तो ठीक है वरना फिर वही वाली बात कुरान को लिखने वाला ही ईश्वर कह रहा है कि हम अपनी आयतों को बदल देते हैं दो 106 ठीक है अब जब वो ये खुद कह रहा है कि हम अपनी आयतों को बदल देते हैं तो पता नहीं
01:27:26:10 कौन सी बात कब बदल दी जाए भाई कैसे उस पर रिलाई करोगे शाश्वता तो खत्म हो गई हा दो 187 में कह भी दिया कि वो जो पवित्र रोजे होते हैं उन दिनों में स्त्री सं करना पहले मना था मगर आज क्योंकि हमें फॉलो करने वाले किसी व्यक्ति के द्वारा कंट्रोल नहीं हुआ और उसने वो कर दिया तो इसलिए आज से हम अलाउ कर दे रहे हैं जाओ सबको छूट हो गई आज से वाह 187 में है तो वो ठीक है उनका अपना है भाई व अपना जैसे भी मगर वहां पर स्वीकार किया जा रहा है कि जो आपको प्रामाणिक चीजें दे रहा है वह वही सोर्स ऑफ इंफॉर्मेशन जो है बातों को बदलने वाला भी हो सकता है और एक जगह और कहा गया है सातवे उसम सेन पॉइंट समथिंग है कि मैं भटका हूं तो यदि जो उस ग्रंथ को लिख है वो भटकाने वाला है तो वो जब आपको भटका जाएगा तो बताएगा थोड़ी ना यदि व्यास जी भटकाने के लिए भ्रम फैलाने के लिए एक शब्द भी लिख सकते हैं तो वो जब आपको भटका रहे होंगे तो बताएंगे क्या आप तो खुद ही अपनी पूरी उसको
01:28:41:12 चरमरा दे रहे हो तो ये सब कॉपी है ये सारे जो तर्क है ये वही से कॉपी है इसीलिए मैं कहता हूं इस्लामिक वो है ये तक क्यों क्योंकि सारे तर्क वहीं से आ रहे हैं देखो जब हम लोगों ने आशियाना में जो पावर हाउस चौराहा है वहां पकड़ा था इनको दो लड़के जो भगवत गीता दे रहे थे लोगों कोने आपने दूसरा चैप्टर ख खोला था आपने जी जी हा उसके बाद जैसे ही अच्छा उसमें दो लोग थे एक नया था और एक जो है सीनियर था तो नया वाले न वाले के साथ क्या हुआ कि नया वाला थोड़ा प्रभावित होने लगा हमारी बात सुन कर के वो थोड़ा सा न्यूट्रल बिहेव करने लगा भैया बात तो सही कह रहे पढ़ना पड़ेगा ये वो है ऐसे कर जो पुराना वाला था वो उसके कान में कहने लगा अरे अ भक्त है इनसे बात मत करो अब इसका रूपांतरण समझिए इस्लामिक भाषा में अरे ये काफिर है इनसे बात मत कर हो गया ना बकुल इन बना हुआ था जो ये जो ये भगवान कृष्ण के अनन्य भक्त अपने आप को बताते हैं कोर मैंने देखा बना हुआ जहां प ये लोग लिख रहे
01:29:56:15 हैं कि हम यहोवा को प्रसाद अर्पण करेंगे हम इनकी बुद्धि में यहोवा चल रहा है ये देखिए आप नरसिंह भगवान की जगह इनकी बुद्धि में यहोवा आ रहा है इसका अर्थ क्या हो गया मतलब महादेव भी बुद्धि में दूर दूर तक इनके नहीं है है ना वहां पर राम जी दूर दूर तक नहीं है इनके पोस्टर पे नरसिंह भगवान लिखा है तो नरसिंह भगवान का फोटो तो है किंतु लिखित में क्या दे रहे हैं यहोवा को हम प्रसाद आपका अर्पण करेंगे हमको प्रसाद लाकर के दीजिए अब बताइए ये क्या है अनन्य है ये यहोवा के प्रति मतलब बुद्धि में सपनों में यवा आ रहा है अल्लाह आ रहा है वाह और जो फ्री में नहीं देते हैं उसका मैं आपको प्रमाण बता दूं कि उस दिन हमने क्या किया था इन लोगों से बात पूरी करने से पहले ये भागे नहीं भाग जाएंगे ना तो हमने पहले जाके इनके एक दो ग्रंथ ले लिए थे पढ़ने के बहाने कि लाओ देखे क्या है क्या नहीं तो हमने हाथ में रख लिए उसके बाद हमने अपने सवाल किए तो भागे नहीं क्योंकि ग्रंथ वाप ना तो हमने पैसे दिए तो जो फ्री में नहीं देते हैं उसका य पर उदाहरण आपको बता रहा हूं कि पहले हमने कहा भा देखो सवाल का जवाब दोगे तो तो हम तुमको य वापस करेंगे भगवत गीता नहीं दोगे मतलब इस तरह से उनको सवाल का उत्तर देने पर
01:31:11:18 वो किया विवस किया तो पहले वो जाने लगे दिखाने के लिए ठीक है हम भगवत गीता नहीं चाहिए हम जा रहे हैं उसके बाद 50 मीटर 100 मीटर दूर से दौड़ के आए लाओ भगवत गीता लाओ मतलब बिना पैसों के नहीं देंगे जो हमारी एक भ्रांति के भगवत गीता फ्री में बांटते हैं ये भगवत गीता फ्री में नहीं बांटते हैं हमारे ही नाते रिश्तेदारों को वहां पर उकसाया जाता है जो समृद्ध होते हैं कि आप 50 आप 100 आप एक 1100 भगवत गीता हम से खरीदिए और फिर अपने रिश्तेदारों को बाट आप देखिए जो भी आपके समृद्ध रिश्तेदार होंगे यदि वो इसकन से जूझ हुए होंगे या फसे हुए होंगे उनके यहां प आपको पेटी पेटी भगवत गीता की गड्डी रसी मिलेगी उनके घर प कि पीछे साउंड आ रहा है वो बंद कर ले अपना साउंड तो जब मैं थ क्लास में था मैं बताऊ थ क्लास में जब मैं था तो मेरे स्कूल के अंदर ही स्कोन की तरफ से कंपटीशन करवाया गया था भगवत गीता का तो वहां पर इन लोगों ने भगवत गीता फ्री में डिस्ट्रीब्यूशन करने के लिए स्कूल के अंदर हमारे दे दी थी सारी भगवत गीता तो वहां पर 20 रप में भगवत गीता डिस्ट्रीब्यूशन कर रहे थे लोग नहीं वो जो भगवत गीता डिशन करेंगे मगर वो अधिकृत
01:32:26:20 रूप सेन की तरफ से वो नहीं होगा स्नसर वो कोई ना कोई एक ढूंढा जाएगा किसको हलाल किया जाए वो किसी डिवटी को ही पकड़ा जाएगा वो करेगा ऐसे अधिकृत रूप से स्न नहीं करेगा वो किसी को स्पनर कर बनाया जाएगा कि भा आप ये जो है करो ऐसा नहीं है कि वहा से विदेश से चला आ रहा है भगवत गीता फ्री बाटो मैं स्वयं भुक्त भोगी रहा हूं आपको अंदाजा कितने स्न के ग्रंथ है ठीक है कहा मैंने पहुंचा
01:33:00:07 दिए ग देने के लिए ठीक है आही एक मिनट इस्लामिक करण से बात याद आ रही थी अभी हमको किसी जो व्यू है बता रहे थे कि आपका वो जो एक कोई नीच व्यक्ति था जिसके बारे में हमने बात की थी अभी अपनी ल में वो स्वयं को योगी कहता है कलयुग का और यह व्यक्ति वही है जो वहां पर उपस्थित था जब हमारे घर की मातृ शक्तियों के बारे में बात की जा रही थी इसका ये कहना है कि समय के साथ साथ जो है धर्म को बदलना धर्म धर्म नहीं उसके नियमों को बदलना चाहिए हालांकि इसको अबोध है इसको ये नहीं मालूम कि धर्म है क्या सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त कराने वाली नियमावली का नाम ही धर्म है और देश काल परिस्थिति के साथ साथ जो भी उसमें बदलाव होने उसकी व्यवस्था ईश्वर ने कर रखी है पहले से ही दूसरी बात अंततोगत्वा अंतिम निर्णायक के रूप में आपको परंपरा प्राप्त आचार्यों की गद्दी प्राप्त है जो आपको बताएगी कि एट द एंड बिल्कुल इस सिचुएशन में क्या करना है अगर नहीं समझ में आ रहा है और क्या नहीं करना है मगर इन सब चीजों को तिलांजलि देते हुए अगर हम मन मुताबिक चीजों को अपने अनुसार करने
01:34:15:18 लगे तो क्या होगा कि पहली बात तो सनातन नहीं रह गया धर्म है ना धर्म सनातन रह गया दूसरी बात जब हम ये करते हैं कि ब बदलना चाहिए तो रामपाल भी बदलेगा है ना स् कन भी बदलेगा जाकिर नायक भी बदलेगा वो कहेगा मुर्गा चढ़ाओ कृष्ण भगवान को नियमों में बदलाव आ गया धर्म थोड़ी ना बदला है कृष्ण भगवान को मुर्गा चढ़ दो है ना और उनका जाप करने की बजाय नमाज पढ़ो नियमों में बदलाव आया है धर्म में थोड़ी ना आ गया तो ये सब सोचने वाली बात है अब वो यह सब हमने उसको बताया भी और एक जगह वो यह भी कह रहा है गायत्री मंत्र के जाप के निषेध के बारे में विधि निषद का विरोध करते हुए कह रहा है कि भाई गायत्री मंत्र से क्या प्राप्त होगा ये तो तब पता चलेगा ना जब उसको जपा जाए तो इसका अर्थ ये व्यक्ति ये सिखा रहा है समाज को
01:35:16:27 कि अगर हमसे कहा गया धर्म के द्वारा कि माता और बहन के बहन के साम समक्ष माता और बहन के साथ गमन नहीं करना है उनके उनके उनकी ओर जो पत्नी की दृष्टि होती है उस दृष्टि के साथ नहीं देखना है तो यह पहले मानेंगे नहीं उसे पहले उसे करके देखेंगे यह समाज को सिखाना चाहते पहले करके देखो और उसके बाद प्रैक्टिकली जब वो अप्लाई करने लायक नहीं रहे उसके बाद य स्वीकारें यह इनकी अजल गगरी चलकत जाय वाला मामला है और तो और मैंने छोटी सी एक स्टोरी बना करके हमने यह भी दिया भाई देखो ठीक है आपको लगता है बहुत बड़े ता तार्किक है तुरम खा है ठीक है बहुत बड़े ठीक है हमने अपना नंबर दिया 74036 आप आइए सामना करिए है ना और वो क्या कहते पी पीछ
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→ Used in: A · Live रामपाल रिहा : क्या अब लखनऊ पुलिस उसे गिरफ्तार करने वाली है? Rampal Case Update at 14:59 ↗
→ Used in: A · Video चाटुकारों के कुतर्कों का निराकरण at 1:15:26 ↗
→ Used in: B · Live लुप्त संप्रदाय और गुप्त आचार्य का सच Reply of 5th live at 22:07 ↗
→ Used in: B · Live सच के आस-पास वाला झूठ at 45:30 ↗
01:36:14:12 वार करने वाला शेर नहीं गीदड़ होता है और दुश्मन अगर कायदे का हो तो उसे मारने का मजा ही अलग होता है
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01:36:24:27 वसे परामर्श य है कि छोटे हो मत पड़ो चक्कर में कोई है नहीं टक्कर में कोई भया गायत्री मंत्र का आपने बात करी तो इसके विषय में चर्चा जरूर आपसे पूछना चाहूंगा कि एक कोई देवी जी है मैंने पीछे वीडियो देखी थी काफी समय पहले जिन्होंने अपने ऊपर से ऐसे यज्ञ धारण किया था कि भैया उस के मामले में आपको पता नहीं जी जी [संगीत] जी मामले में हमने जो है उनको पूछ लिया कि वेदों में लिखा हुआ है कि कपन और मेखला पहनकर ब्रह्मचारी यज धारण करता है आप जो है सलवार सूट में कर रहे हो साड़ी भी नहीं है तो यदि आप अपनी किसी चीज को शास्त्रोक्त रूप में प्रस्तुत कर रहे हो शास्त्रीय प्रश्न आपसे पूछे जा सकते हैं या तो आप कहो मत शास्त्रोक्त है आप बोल दो मैं जो जो यह धागा पहन रही हूं यह जो है ड्रामा है यह यज पवित नहीं है यह वेदा में अधिकार दिलाने वाली प्रक्रिया नहीं है अगर दिखा तो आप वैसे ही रही हो लोगों को और फिर उसम प्रश्न किया जा रहा है तो आप कह रहे हो कि कपड़ों में प्रश्न कर रहा है हम कपड़ों में प्रश्न तब नहीं करेंगे
01:37:40:20 जब आप अपनी उस चीज को शास्त्रो धार्मिक रूप में प्रस्तुत नहीं करेंगे हमें कोई मतलब नहीं अने निजी जीवन में क्या कर रहे हैं तो उसी उसी मामले को वो करते हुए और हमारे पूरे विरुद्ध एक पूरा षड्यंत्र रचा गया बहुत सारे अलंकार समाजिक एकत्रित हो गए तरह तरह से और जो हमारे परिवार की मातृ शक्तियों को भी उसम जो छवियां उन्ह प्राप्त हो गई पुरानी जब हम भटके हुए थे दिशाहीन व्यक्ति थे उस समय की उनको फोटो प्राप्त हो गई और उसके नाम पर वो अपनी रोटिया सेकने लगे ये करने का अर्थ क्या ये करने का अर्थ क्या निकला इनके पास सक उत्तर नहीं ये देखो यहां पर लिखा है यह वाले वस्त्र भी धारण कर सकते हैं अरे भाई मैंने वहा पर ये भी कहा कि अगर सीता माता का उदाहरण लेते हो जो कि गलत है उसका भी उदाहरण नहीं लिया जा सता वो उसम अलग तर्क है मगर आप यदि सीता माता का उदाहरण लेते भी हो या आप जो है र्गी मैत्र का उदाहरण लेते हैं तो क्या इन लोगों ने तलवार सूट धारण करके इस तरह की जो वेदोक्त विधिया उनका पालन किया होगा बताइए तो यह वाली
01:38:55:25 बात थी व उसको पर्सनल दिखा रहे हैं हमारी टिप्पणी उस बात पर थी आपने जो विधि दिखाई है व शा है कि नहीं और वो उसी के मामले पर हमारे ऊपर प्रहार हुआ है और उसके बाद हमने एक जो है एक उस वीडियो के बारे में यथोचित जाच पड़ताल करते हुए हम जो है एक कानूनी सलाह ले रहे हैं कर सकते क्या नहीं कर सकते उपयुक्त रूप से यच कारवाई करेंगे क्योंकि उसमें जिनका रोल नहीं भी था हमारे वीडियो में उनको भी घसीटा गया है तो ठीक हैलिए याद आई किसी को कभी हम छेड़ते नहीं किसी को कभी हम छेड़ते नहीं कोई हमें छेड़ दे तो छोड़ते नहीं ड़ते नहीं हा हमारे पुराने फोटो आप देखेंगे तो उसम हम गल लगा के गल तो अभी भी लगाते हैं वस्त्र थोड़ा अलग हो गए गोगल अभी भी लगाते हैं तो मेरा उनसे कहना है जो उस पर जो टिप्पणियां की है हमने अपने काम करने के तरीके बदले हैं जीवन को जीने के तरीके बदले हैं सेवर नहीं
01:40:11:06 बदले ठीक है ना जदा खतरनाक होता है हा बोलिए अंकित जी घायल नहीं ेर जी कर रहा य बात इसलिए स्मरण में आई क्योंकि मैं हिमाचल से हूं पंजाब साथ में लगता है यहां एक और संप्रदाय महाराज जी चलती हैको राधा स्वामी कहा जाता है नाम राधा स्वामी है पर वो मानते नहीं है किसी भी इस चीज को पर ऐसे मानने वाले कुछ एक बिटिया है बहने कह सकते हैं कुछ एक बहनिया जिन्होंने कुछ समय पहले मुझसे यह प्रश्न पूछा था जैसे आपके य जने का यत का तो जहां तक मुझे ज्ञान था मैंने थोड़ा बहुत बताया भी था और मुझे याद है कि आपकी वीडियो आ चुकी थी और मैंने भेजी थी खुद सुनने में नहीं वो समय लग पाया खुद नहीं सुनी थी पर भेजी जरूर थी आज के समय में जितना भी जिसको भी जो भी शंका होती है तो वीडियो आपकी भेज दी जाती है कि भैया यहां सुन लो प्रमाण भी मिल जाएगा ग्रंथ भी पता लग जाएगा पृष्ठ नंबर भी पता गा श्लोक भी पता चलेगा जो आपकी शंका हो पूछो आपको पूरा जवाब मिलेगा अ ये सुकन की बात थी ना स्कोन में अभी यहां पर हमारे नजदीक में भी कुछ है
01:41:26:08 जैसे मैं पहले मैंने आपको बताया कि लोग सिर्फ नाचने के लिए स्कोन मंदिर जाते हैं तो उनको यह लगता है कि भाई देखने में कितना सुंदर है साफ सफाई है और लोग नाच रहे हैं बस कीर्तन चल रहा है वो नाच रहे हैं इसीलिए स्कन का पीछा कर रहे हैं और इतना स्कोन के पीछे जैसे अनन्य भैया ने बात करी कि अनन्य ऐसी उसमें हो गई है उन स्कोन वालों के उनके पीछे कि वो ऐसा उसमें रीच चुके हैं पूरी तरह से कि जो वो बोल रहे हैं वो चीज व मान दे रहे और किसी अगर मैं यहां अपने इधर किसी को पूछूं कि क्या वह राजेंद्र दास जी महाराज को जानते हैं क्या शंकराचार्य भगवान को जानते हैं शंकराचार्य भगवान का नाम इनको तब सुनाई पड़ा जब इनको यह राम मंदिर का विवाद सामने आया यूर्त को लेकर के जब बात चली तब इनको पता लगा कि कोई शंकराचार्य नाम की भी पदवी हमारे यहां है य हमारे चार शंकराचार्य है ऐसे ऐसे लोगों को बत ब बदलाव आया इसीलिए मेरे जीवन में बहुत बड़ा बदलाव आया मेरा माथा ठनक गया पहले तो मुझे जब मेरे वही मैंने कहा भगवत कृपा थोड़ी सी रही बचपन से पिताजी के द्वारा शंकराचार्य शंकराचार्य इस तरह से सुनते रहे पिताजी बताते भी है बचपन में उन्होंने करपात्री जी की सेवा भी की है जो पूज्य पूज्य
01:42:41:10 पाद ब्रह्मलीन स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी है वो उनका जब शिविर लगा होगा घर के आसपास तो उन्होंने काजू बादाम वगैरह खाने को दिए थे पिताजी ऐसा बताते हैं तो कुछ ऐसी ईश्वरीय अनुकंपा क्योंकि स्कंद पुराण गुरु गीता में लिखा है ना कि अनेक जन्मों के पुण्य कर्मों के बाद ये प्राप्त होता है तो मैं आपको बताऊं कि जब मुझे मैं आपको दिखाई देता हूं मैंने एक बुक लिखी थी बहुत मतलब प्रयत्न कर कर के मैंने एक बुक लिखी तो उस बुक का जो उद्देश्य था वो यह था कि किसी भी नास्तिक को नास्तिक से और धीरे-धीरे उसको यथोचित जितने भी प्रासंगिक विषय उसके बारे में बताते हुए और कि भक्ति की ज्ञान कर्म और भक्ति निराकार साकार द्वैत अद्वैत जो बेसिक नॉलेज है उसको देते हुए राम ने सीता जी सीता माता का परित्याग क्यों किया कृष्ण कृष्ण भगवान की जो रास लीला उसका क्या अर्थ है शिव मोहिनी प्रकरण का क्या अर्थ है विष्णु ये सारे जितने भी प्रासंगिक विषय थे इनके बारे में बताते हुए और तर्क और युक्ति के साथ उनको सार्वभौम जो जगतगुरु शंकराचार्य होते हैं उसके बारे में बताया उनके बारे में उस पद के बारे में बता दिया जाए एक व्यक्ति को जीरो से अगर नास्तिक
01:43:56:19 भी आएगा ना उसको भी यदि वो सकारात्मक दृष्टि लेकर आएगा उसको भी हम भक्त बना सकते हैं उसको भी हम वेदोक्त मार्ग पर चलने वाला बना सकते हैं ऐसा एक हमने आचार्यों की कृपा से जो हमें ग्रंथ प्राप्त है उनके ग्रंथों को चैप्टर को संकलित कर कर के एक ग्रंथ लिखा और उस ग्रंथ का नाम हमने रखा सर्व मान जगतगुरु शंकराचार्य ये उस ग्रंथ का नाम था क्योंकि उसमें शुरुआत तो नास्तिक से होती है मगर उसका परवन होता है आकर के शंकराचार्य रूपी सागर में ठीक है तो हमने उसका नाम लिख दिया सर्व मान सार्वभौम जगतगुरु शंकराचार्य अब हम उसको जब पहली बार जब आसपास कभी शंकराचार्य जी आए तो मैं अपने मित्रों के पास गया और मैं उनको बोल रहा हूं पागलों की तरह अरे य शिव स्वरूप शंकराचार्य आए हैं चलो चलो तुम्हारे भाग्य खुल गए चलो मैं उनकी महिमा जान कौन है मगर लोग मुझे चल हवा आने दे तो वो क्या है जब आज की परिस्थिति हो गई जब आप गुरु के गुरु का नाम लोगे ना आम समाज में आम जन में तो वो आपको ति निष्ठ समझेगा धर्म नि नहीं समझेगा वो आपको
01:45:12:12 ईश्वर निष्ठ नहीं समझेगा वो आपको व्यक्ति समझेगा कि अपने गुरु से जोड़ना चाहता है जी सब मनय जो संशय है ना मैंने वो शलोक पढ़ लिया था भगवत गीता संशय आत्मा विनती और उस संशय का समाधान एक प्रामाणिक आचार्य के शरण में जाके ही हो सकता है तो मैं उनको हिला रहा हूं कॉलर पकड़ पकड़ के मैं पागलों की तरह वैसे जैसे थोड़ा सा नहीं आउट ऑफ कंट्रोल हो जाता है व्यक्ति खुशी के मारे तो मैं ऐसे करके उनको हिला रहा हूं अपने मित्रों को चलो चलो अरे चलो शंकराचार्य आए चलोगे नहीं ऐसे कर रहा हूं और वो ऐसे अरे चल रे हवा आने दे वो ऐसे कर रहे हैं तो मैं काफी दिनों तक मेहनत जब करता रहा लोगों को अपनी वो जो ग्रंथ लिखा था व सुना ने जाता था कि सुन लो भाई ये ग्रंथ सुन लोय इसमें देखो बहुत सारी अच्छी चीज सुनते नहीं थे क्यों क्योंकि उसके पृष्ठ पर लिखा था सार्वभौम जगतगुरु शंकराचार्य शंकराचार्य तो फिर मैंने एक दिन यह निर्णय लिया कि ऐसे काम नहीं चलेगा लोगों को अपनी बात सुनानी होगी तो क्या करें तो मैंने उसके मेन पृष्ठ पर उसका नाम बदल के ये कर
01:46:19:09 दिया दिख रहा है आपको ना हां दिख रहा है दिख रहा है दिख रहा है जी जी मैंने उसके कवर पेज प जो मैंने वो संकलन किया था विषयों का विभिन्न उसके मेन प्रश् पर उसका नाम बदल के य आवान और वही आवान है जो आज आपको य चरितार्थ होता हुआ यब के माध्यम से या शोभा यात्रा के माध्यम से वही सब कुछ है जी जी वही अब जब मैंने आहवान कर दिया तो व्यक्ति ने मुझको थोड़ा बहुत समय देना चालू किया समझना चालू किया बात को सुनना चालू किया क्योंकि शंकराचार्य का मतलब व्यक्ति निश्ता नहीं है शंकराचार्य का अर्थ ही है धर्म शंकराचार्य का अर्थ ही है वास्तविक धर्म विशुद्ध धर्म जो हमारे प्रामाणिक जितने भी आचार्य है परंपरा प्राप्त उन से कोई भी नाम आप ले लो उसका अर्थ ही है धर्म बस यह है कि गुरु का आलंबन लिए बिना उसके वास्तविक स्वरूप को प्राप्त करना संभव नहीं होता तो वो जो व्यक्ति के बारे में बता दूं थोड़ा सा अब वो एक पॉइंट दे रहा है कि भाई कर तुम भी वही रहे हो जो बदलने की बात करता है ना इस देश काल परिस्थिति के अनुसार जो बदलना चाहिए धर्म को
01:47:34:09 महाभारत में लिखा है भले ही सनातन का अर्थ ही है नित्य नित्य स्थाई व ये भूल जाता है तो अब वो कह रहा है कि भाई कर तुम भी वही रहे हो जो मैं कर रहा हूं है ना या तो तुम समझना नहीं चाह रहे हो समझ नहीं रहे हो भाई जितने अंश में मैं शास्त्र विरुद्ध हूं जितने अंश में मैं शास्त्रों का अनुगमन नहीं कर पा रहा हूं उतने अंश में सीना ठोक के कहूंगा यह बात अशा स्त्रीय है जिससे कि व्यक्ति शास्त्रीय और अशा स्त्रीय में निर्णय ले पाए अगर हम अपनी अशा स्त्रीय चीजों को शास्त्रीय रूप में प्रस्तुत करेंगे कि नहीं नहीं कर तो मैं शास्त्रों के बाहर का काम रहा हूं मगर य शास्त्रीय मानो इसको क्योंकि आज की टाइम की डिमांड है तो जो व्यक्ति कठिनाई पूर्वक शास्त्र का आलंबन ले रहा होगा उसका क्या हो उसको व्यक्ति कैसे पहचाने का जैसे मान लीजिए कि मैं सपोज करिए शास्त्रीय रूप में कैसे चले मान लीजिए एक ब्राह्मण है और उसको सौचा चार के लिए बताया गया कि भाई आप जो है मिट्टी लेकर चलो उसका उपयोग करो इतनी बार वो यह सब कुल्ला वगैरह सब बताया गया अब वो उसका अनुगमन नहीं कर पा रहा क्योंकि आज की समय धारा ऐसी है कि वो अगर घर से बाहर निकलेगा
01:48:49:24 तो अमुक अमुक स्थितियों में सौचा चार का अनुपालन नहीं हो अब वो व्यक्ति यह कहेगा कि नहीं मैं जो कर रहा हूं वो सही है जो शास्त्र में लिखा है वह आज की स्थितियों के लिए उपयुक्त नहीं है फ क्या हुआ शास्त्र में दोष दृष्टि आ गई कहना यह चाहिए भाई मैं जो कर रहा हूं वो मेरी व्यवस्था है श है तो शुद्ध धर्म वही जो शास्त्र में लिखा इससे क्या होगा कि हम जो विशुद्ध है धर्म की उसको बचा पाएंगे अन्यथा हमने अपनी जो हमने जो अपने मन से मिलावट की है उसको ही धर्म बनाक प्रस्तुत कर देंगे तो धीरे धीरे व गायब हो जाएगा जो शुद्धता है उसका पालन करने अब तुम्हारी व्यवस्था है कि तुम नहीं कर पा रहे अगर कोई करना चाहे तो फिर उसको धम नहीं होगा सने की बात कुछ एक भागवताचार्य जैसे हर घरी हर घर में भागवताचार्य निकल रहे हैं तो भागवत का आज वो स्वरूप नहीं र नहीं रहा है आज देखा जाए तो केवल संकीर्तन रह गया है या मानो की केवल बस नाच गाना रह गया है आज मतलब कुछ अब कथा प्रवक्ता को यह बात चाहिए कि वो लोगों को इस बारे में प्रेरित करें कि केवल नाच गाना नहीं है हमारे गुरुदेव भगवान कहते हैं कि ये जो एक संकीर्तन हम करते हैं अब जैसे भागवत में पढ़ा
01:50:04:24 जाए तो भागवत में कहीं नहीं है किस प्रसंग अनुसार सुखदेव जी ने राजा परीक्षित को कोई भजन सुनाया या सका सन काद ऋषियों ने नारद जी को सुना ऐसा कहीं वर्णन नहीं है पर समय अनुसार जैसे आपने कहा समय अनुसार चलना पड़ता है हां थोड़ी बहुत जैसे छोटे बच्चे को कड़वी दवाई देते हैं तो दवाई के साथ थोड़ा बहुत शय दे देते करना पड़ता है तो उसको फिर विशुद्ध धर्म का नाम नहीं देंगे अगर आप अगर आप विदेशों में प्रचार करने के लिए थोड़ा बहुत ट्विस्ट करके धर्म को प्रस्तुत कर रहे हो तो यहां आके ये मत बोलो कि ये गीता जो है सनातनी गीता है ये बोलो ये गीता वो गीता है जिससे मुस्लिमों को बदला जाता है क्रिश्चन को बदला जाता है ये मत बोलो कि ये सनातन की गीता है जिसको बदला नहीं जाता ये बोलोगे तो दिक्कत जी बिल्कुल बिल्कुल एक चीज य ऐड करना चाहूंगा जो अंकित शर्मा जी ने बोली है जो इन्होंने अभी जो इन्होंने कहा ना कि संगीत बहुत वो हां तो यह एक बात है यहां पर कि श्रीमद् भागवत की जो कथा होती है उसके अंदर जो है संगीत को बहुत एक गलत तरीके से कई सारे लोग प्रस्तुत करते हैं किंतु संगीत जो है भगवान से जुड़ने का एक माध्यम भी है तो वहां पर भागवत
01:51:19:26 जी की भागवत जी यदि हम कर रहे हैं और उसकी सीमा शास्त्रीय संगीत का आलंबन लेकर के जो उचित है है ना और कहीं वहा पर फूता ना फैलाए संगीत के रूप में जैसे कि दो प्रकार की ज कथा होती है एक तो व्यास पद्धति की कथा एक नारद पद्धति की कथा तो नारद पद्धति की कथा में क्या है हम संगीत का आलंबन लेते हैं तो संगीत का आलंबन इसलिए लेते हैं भगवान से जोड़ सके क्योंकि संगीत भी एक बहुत ही महत्व महत्व है जीवन में संगीत का भी भगवान से जुड़ने के लिए तो यहां पर लेकिन सीत का प्रस्तुतीकरण उस प्रकार ना किया जाए जहां पर फूता फैले या फिर कोई इस प्रकार से जैसे कि कोई वैश्या नाच रही है इस प्रकार से संगीत या फिर भगवान श्री कृष्ण राधा जी का रास इस प्रकार से प्रस्तुत ना किया जाए उस संगीत को संगीत के तरीके से ही प्रस्तुत किया जाए तो वही उचित होगा जी बिल्कुल आपकी बात से बिल्कुल सहमत हूं जैसे आपको आप ही की उदाहरण दे दूं अगर में कि राजेंद्र दास जी महाराज जी की अगर कथा सुने तो पूर्ण रूप से शास्त्रीय संगीत ही उनका चल शास्त्रीय सं अनुसार हो तो भी तो मैं मना नहीं कर रहा पर मैं उस चीज को ही बोल रहा हूं कि जैसे भजन ही भजन आ रहे हैं और भजन होकर के कथा नहीं आ रही है उस चीज को य बात बोल
01:52:34:26 रहा हूं अगर तीन घंटे की कथा है तो डेढ़ घंटा तो भजन में निकल जा रहा है बात मंगलाचरण तो ठीक है 15 20 मिनट मंगलाचरण लग गया तो थोड़ा सा संकीर्तन कर लिया यह एक अलग विषय है पर बात बात प हर हर प्रसंग में भजन ले आना हर प्रसंग हा और वहा पर जो इस चीज का सहारा ले रहे हैं तो कथा प्रवक्ता का कर्तव्य बनता है कि लोगों को यह बात समझाए कि भाई फिर क वो फिर एक भजन संध्या हो गई फिर तो आप एक तरीके से भजन संध्या समझ लो है ना आज लिख रहे आजकल लोग लिख रहे भागवत संगीत में भागवत फिर पता लग जाता है भाई य संगीत ही संगीत है अब श्रीमद भागवत सप्ताहिक ज्ञान यज्ञ लिखने न घंटे में दो घंटा कीर्तन करो डेढ़ घंटे कीर्तन कीर्तन करो तो वो वो मायने नहीं रखती उस चीज को कि आप कथा सुनाने आए तो कथा विषय होना चाहिए जिस चीज की आप पाच या छ मिनट तक थोड़ा बहुत संकीर्तन आदि हो जाए वो ठीक है जी जी जी जैसे महा भया जी जी बोलिए बोलिए महाराज योल केशर भैया को मैं यह बात कहना
01:53:49:26 चाहता हूं आपने एक व्यास के ऊपर वीडियो बनाई थी जिसकी कथा में मैं गया था उनका नाम है महेश आचार्य जी वो पाच घंटे कथा करते थे पाच घंटे में से दो घंटे वह नाच गाना करते थे जो जिस पर से आपने वीडियो बनाई थी युगल विग्रह को नचा रहे थे और भी अन्य चीजें तो पाच घंटे कथा करते थे पाच घंटे में से दो घंटे नृत्य चल रहा है तीन घंटे में उन्होने कम से कम 101 भजन गाते थे और कथा बिल्कुल ना के बराबर तो आजकल इसी प्रकार की स्थिति हर जगह ही हो रही है कुछ वक्ता को छोड़कर कुछ विद्वान जनों को छोड़ कर के हर जगह इसी प्रकार की स्थिति बनी हुई है कि केवल गाना बजाना ही आजकल कथाओं में रह गया है वृंदावन जाकर के छ महीने में कथा पढ़ते हैं मूल से कभी कथा पढ़ी नहीं छ महीने में कथा पढ़ कर के गांव में शहरों में कथा करते हैं और केवल नाच गाना ही आजकल कथाओं में चल रहा है आपने हर जगह देखा होगा इसीलिए हम ऐसी भागवत करने का वो कर रहे हैं आने वाले निकट भविष्य में कि हम मतलब शास्त्रोक्त मतलब जिसमें की कथा सार ज्यादा हो और यह जो वो भी हो नृत्य भी हो गायन वादन भी हो मगर उतना जितना की ठीक लगे अच्छा अभी मैं एक
01:55:05:24 बीच-बीच में मैंने कहा था ना वो काम की चीजें जो देता रहूं जिस कारण से आवान जाना जाता है तो भैया ये मैं अन पैक कर रहा हूं आपके सामने श्रीमद् भागवत है इकोन का चतुर्थ खंड है इसमें आज हम देखेंगे कि शिव और विष्णु की एकता ली गई है कि नहीं ली गई है या जहां पर शिव जी को कहा जा रहा है बड़ा वहां पर क्या किया गया है जैसे मैंने क्या हुआ था कि जब मैंने एक बार स्पन के स्टॉल पर पहुंचा और मैंने वहां पर रामायण रखी देखी तो यह बात हमारी हुई भी थी पहले भी हो चुकी है मैंने छट से उसको रामायण को लिया और रामायण को खोलकर देखा उसमें युद्ध कांड में जहां पर ब्रह्मा जी ने भगवान श्री राम को परम ब्रह्म कहा है तो मैंने देखा इन्होंने अपना जो इनका जो प्रोपेगेंडा है कि नहीं कृष्ण भगवान से भिन्न कोई भी सब पीछे हैं तो इन्होंने उस इसका यहां जब रामायण का अर्थ करेंगे तो क्या होगा भाई आप कृष्ण के प्रति अनन्य भाव रखना चाह रहे हो रखो फिर आप राम की जहां पर वो चीज है राम को जहां पर कहा गया है तो वहां उसका भाष्य कर ही क्यों रहे हो मत करो केवल भगवान कृष्ण की जहां
01:56:20:28 लीला है उनका भाष्य करते हो उनका भाष भी करोगे फिर उसको नकली गलत लिख दोगे झूठ लिख दोगे तो चौथा अध्याय और चार छ चौथा अध्याय छवा चौथा स्कंद छवा अध्याय बोलते हैं भैया अध्याय नंबर एकन चल रहा है ये आ गया छवा टव का
01:56:54:13 42 अब यहां पर ब्रह्मा जी ने उनको मूल कह दिया है श्रीधरी टीका में कहा गया है ब्रह्मा जी ने कहा शिव जी ने ब्रह्मा जी को नमस्कार किया और देवताओं ने जिनको प्रणाम कर लिया था ऐसे शंकर जी से हसते हुए के समान ब्रह्मा जी ने कहा मैं आपको जानता हूं कि अ आप संपूर्ण जगत के स्वामी हैं जो एक रस ब्रह्म है वह आप ही है एक रस ब्रह्म ठीक है अब यहां इन्होंने क्या कहा है द दृश्य जगत के माता-पिता और दृश्य जगत से परे भी परे परम ब्रह्म है मैं आपको इसी रूप में जानता हूं यद्यपि शिव ने ब्रह्मा को साधन नमस्कार किया था किंतु ब्रह्मा जानते थे कि शिव का पद उनसे बड़ा है शिव के पद का वर्णन ब्रह्म सम भगवान विष्णु तथा शिव की मूल स्थितियों में कोई अंतर नहीं है तो शिव भगवान विष्णु से भिन्न है तो भी शिव भगवान अब देखिए यहां पर बचाने के लिए अपने मत को बचाने के लिए क्योंकि यहां पर ब्रह्मा जी ने शिव जी को एक रस ब्रह्म कह दिया तो
01:58:09:22 कैसे बचाए कैसे बचाए तो जिन चीजों की आवश्यकता नहीं भी है उनको भी यहां लाकर देंगे तब बचाना पड़ेगा कैसे कि भगवान विष्णु तथा शिव की स्थितियों में कोई अंतर नहीं है तो भी शिव भगवान विष्णु से भिन्न है वहां यह उदाहरण दिया गया है कि दही में जो दूध है दूध से जिससे दही बना है भिन्न नहीं है बस कर दिया जो घुट्टी पिलाएंगे कर दिया व्यक्ति कहीं से ऐसा ना समझ ले कि नहीं भैया वो अनुवाद पढ़ कर के व्यक्ति समझ ना ले कि जो परे परम ब्रह्म है अच्छा यहां पर एक चीज और है यहां पर ब्रह्मा जी ने यह नहीं कहा कि मैं आपको इसी रूप में जानता हूं मतलब ब्रह्मा जी की गलत फहमी भी हो सकती है जानता हूं मैं ऐसा समझता हूं तो इन्होंने थोड़ा सा वडिंग को भी कहा है कि भाई वो आप ही है मैं आपको इस रूप में जानता हूं और मैं आपको जानता हूं में अंतर है मैं आपको इस रूप में जानता हूं का मतलब कि वो मेरा भाव हो सकता है मैं जानता हूं वोह सत्य है मैं एज इट इज जानता हूं तो यहां पर थोड़ा सा वर्ड्स को ट्विस्ट किया गया शिव जी की परब्रह्म से शिव जी को परम ब्रह्म से बचाने के लिए क्या आ गया कि
01:59:24:26 वो दूध दही ले आए फिर से दूध दही कर दिया रस्सी बना दी है ना और इसमें आगे भी कहा है हे भगवान आप अपने व्यक्तिगत विस्तार से इस दृश्य जगत की सृष्टि पालन तथा संहार उसी प्रकार करते हैं जिस प्रकार मकड़ी अपना जाला बनाती है शिव जी के लिए कह रहे ब्रह्मा जी बनाए रखती है और फिर अंत कर देती है अब इस श्लोक में शिव शक्ति शब्द महत्वपूर्ण शिव का अर्थ है शुभ और शक्ति का अर्थ है भगवान की कई प्रकार की शक्तियां होती है सभी शुभ है ब्रह्मा विष्णु तथा महेश्वर गुण अवतार कहलाते हैं इस भौतिक जगत में हम तीनों तो भैया श्रीधरी टीका में तो यह सब नहीं लिखा है ना उन्होंने तो मान लिया शिव जी को एक रस
02:00:11:07 ब्रह्म तो यह चीजें हैं ये हमने जो पढ़ा है अभी ये चौथा स्कं है और 42वां छवा अध्याय और 42 वा श्लोक हमने पढ़ा 42 और 43 किस तरह से सिद्धांतों को मटिया मेट किया जाता है वह आप देख सकते हैं तो हम लोगों की काफी देर की चर्चा हो गई है अब हम लोग पूरी करें या किसी को और कुछ भाव अगर रखना बाकी रह गया हो तो रखें
02:00:49:14 और भाई साहब बाब जी म पुराण 145 वा अध्याय 5वा श्लोक है बाबू नाम यादव जी समस्त सुति स्मति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा धर्म है ऐसे नहीं कि कहीं से पकड़ लिया बस ये येय ये इसको मान लो इसको मान लो ऐसे नहीं इधर जो लिखा है वो इधर जो लिखा है वो उन दोनों को मिलाओ और उनसे जो एक निचोड़ निकले वो आपको मानना होगा अगर हम यह मान लेंगे कि गंगा स्नान करने दिक्कत है तो स्कंद पुराण में जहा महात्म बताया जा रहा है गंगा स्नान का मोक्ष बताया जा रहा है उसका क्या करोगे उसको झुला दोगे तो वहां पर हमें देखना होगा कि क्या कहा जा रहा है या तुम्हारे तत्वदर्शी ने उसमें शटर घोट करके कुछ मसाला तो नहीं डाल दिया है वह सारी बातें देखनी पड़ेंगी सबसे बड़ा काल काल तो हमें यही दिखता है कि जो मिलावत करती जाती है अपने मन से हा एक एक बात को जो उन्होने कहा कि गंगा स्नान करने से पुण्य नहीं मिलता तो जो एक लाइव स्ट्रीम आपने की थी किसी के स्कोन वाले के साथ तो वहां पर वो कह रहा था गणेश जी की आवश्यकता ही क्या है यदि भगवान श्री कृष्ण सर्वशक्तिमान है
02:02:04:24 तो भाई आवश्यकता जब भगवान कृष्ण सर्व शक्तिमान है तो ना गंगा की आवश्यकता है ना यमुना की आवश्यकता है फिर तो किसी वस्तु की आवश्यकता ही नहीं तुमको भी किसी को यजमान बनाने की आवश्यकता नहीं है किसी से धन लेने की आवश्यकता नहीं है डायरेक्ट भगवान श्री कृष्ण से धन ले लो आपके अनुसार बाबूराम यादव जी का बाकी का उत्तर मैं दे दूं आपके अनुसार यदि कहीं पर ये लिखा भी है कि गंगा में स्नान करने से पुण्य नहीं मिलेगा हां नहीं मिलेगा अगर आप गंगा में स्नान करोगे और वापस आकर के जो है जो मातृ शक्तियां होंगी उनको कुदृष्टि से देखोगे तो तुम्हें मोक्ष मिलेगा क्या मैं बता तो रहा हूं मेरे पास ऐसे कई लोग आते हैं भाई मुझे फैट लॉस करना है ठीक है मुझे अपना वजन कम करना है मस्कुलर बॉडी बनानी है उसके बाद पूछेंगे सर यह बताइए कि आपको मुझे जो है क्या कहते ज्यादा वर्क आउट तो नहीं कराएंगे नहीं नहीं ज्यादा नहीं थोड़ा थोड़ा अच्छा और सर मैं वो मतलब क्या कहते हैं ज्यादा मैं डाइटिंग नहीं कर पाऊंगा अच्छा ठीक है थोड़ी बहुत डाइटिंग तो कर लोगे ठीक है भाई कोई बात नहीं यह भी मान लेते हैं कि सर मुझे रेगुलर रेगुलर व्यायाम तो नहीं करना पड़ेगा अच्छा ठीक है तुम
02:03:19:24 एक काम करो बाहर चले जाओ वापस लौट जाओ अरे भाई मैं कोई वाशिंग मशीन थोड़ी ना हू जिसमें तुम अपने आप को डालो और मैं तुम्ह बटन दबा कर के धुल के बाहर निकाल दूंगा चूहे से रोटी निकालने के लिए चिमटे को अपना मुह जलाना ही पड़ेगा ना तो उसी प्रकार से व्यक्ति यही सोचने लगे केवल गंगा स्नान से गंगा स्नान के साथ साथ आपको बाकी की चीजों का भी यथोचित पालन करना पड़ेगा ऐसा थोड़ी ना कि मातृ शक्तियों को आपको दृष्टि से देखो और जो है व्यभिचार करो पाप करो चोरी करो ती करो और यह सोचो मैं गंगा स्नान करके मुक्त हो जाऊंगा जब व्यक्ति ऐसा सोच के गंगा स्नान करेगा तो फलित नहीं होगा यह भी शास्त्रों में वर्णन है बिल्कुल य का कहां से निवारण हो जाएगा कहां से अपराध का वो कटेगा पाप और यह जानकर यह सोचकर अपराध करेगा कि मैं वहा गंगा ज नहा लूंगा तो नहीं होगा पाप नहीं कटता और बाकी भाई कल रखेंगे ला रामपाल एंड फैक्ट्स के बारे में कल लाइव रखेंगे आप आइएगा और बताइएगा एक बात जोड़ना चाहूंगा जैसे मतलब हर चीज की विधि होती जैसे ल किशोर जी की बात भी रख दूंगा यहां पर और बाबूराम
02:04:35:01 जी की भी की बम को प्राप्त करने की भी विधि है ना जैसे कृष्ण सर्वशक्तिमान है भगवान गणेश की आवश्यकता नहीं है तो दूध में पहले से ही घी विद्यमान है तो सीधा घी क्यों नहीं निकाल लेते हो गाय से पहले दही बनाओगे फिर घी निकालो घी आवश्यकता घी की है ना आवश्यकता कृष्ण की है तो उसके लिए भगवान गणेश की आवश्यकता पड़ रही है मतलब उनके माध्यम जाना पड़ रहा है तो बस वैसे ही वाली बात है ठीक है जब घी चाहिए तो उसकी सही बात है च का सार करने के लिए तो श्री कृष्ण नहीं आए थे ना वो भी तो देवी का सहारा लेना ही पड़ा वहां पे हां एक एक चीज और मैं कहूंगा कि अगर भगवान गणेश के बारे में कहीं लिखा है भागवत में और वह लिखा होना इस बात का द्योतक है कि भगवान श्री कृष्ण सर्वशक्तिमान नहीं है तो फिर राधा का लिखा होना राधा मां का लिखा होना भी आपके अनुसार व्यर्थ है अगर अगर गणेश जी के विवरण होने से यह सिद्ध होता है कि भगवान श्री कृष्ण सर्वशक्तिमान नहीं है तो अर्जुन का भी नहीं लिखा होना चाहिए अर्जुन की आवश्यकता क्या है
02:05:50:07 जब श्री कृष्ण सर्वशक्तिमान तो कौरवों की आवश्यकता क्या है किसी की भी आवश्यकता ही नहीं है तो फिर ग्रंथ क्या बनेगा उस पर लिखा हो कृष्ण अंदर खोलो क ब हो गया लीला फिर तो ये सब लीला है हो गया बस अच्छा भागवत पढ़ रहा हूं क्या पढ़ रहा हूं कृष्ण कृष्ण अरे लीला तो सुनाओ कृष्ण तो यह भी यह भी एक स्टेज हो सकती है मगर य प्राप्त वाली स्टेज है जब आपको वैराग्य हो गया आपने सब कुछ ग्रंथों का मक्खन निकाल करके धारण कर लिया उसके बाद ऐ ऐसी स्थिति आ सकती है कि आपको लीला ला सब में कृष्ण ही सुनाई दे मगर वो आमजन के लिए तो प्रस्तुत करने के लिए नहीं है ऐसे इनका एक कुतर्क था मैंने देखा था कि भाई वो प्रभुपाद जी ने हर जगह जो है भक्ति भक्ति भक्ति कर दिया है क्यों कर दिया है कि व वो जो कृष्ण भक्त होते हैं ना उनको हर जगह कृष्ण ही दिखाई देते हैं अरे मेरे भाई जब हर जगह कृष्ण दिखाई देते हैं तो अर्जुन की जगह कृष्ण क्यों नहीं दिख रहे जहां कौरव शब्द आ रहा है वहां तुम्हें कृष्ण क्यों नहीं दिख रहा है जहां तुम्हें अपनी मंतव्य की सिद्धि करनी है वहां तुम अपने लॉजिक को अप्लाई कर रहे हो और वाल्मीकि रामायण में जो वाल्मीक जी थे व तो राम राम करके
02:07:05:10 मोक्ष को प्राप्त हुए थे उल्टा जब के मरा मरा मरा मरा करके चैतन्य म प्रभु उनको राम अगर यह बात होती हमें राम के अलावा कुछ और नहीं दिखता है और इसलिए हम लोग राम तो हमें आज वाल्मीकि रामायण प्राप्त होती क्या केवल राम लिखा होता उसम राम और देख लो आप लोग छाप के केवल कृष्ण ही दिखता है इसलिए हम कृष्ण लिखेंगे एक बुक छाप दो कृष्ण अंदर भी कृष्ण लिखा हु हर पन्ने प और उसको भागवत नाम से आप सेल करो लेकिन शिवा जी अपने ये रामायण के साथ कोशिश तो की थी ना उन्होंने रामायण जो छापी है उन्होंने थोड़ी सी उसम में उनकी वो वो अगर वो भगवत भक्ति का स्वरूप वही है तो उनकी भगवत भक्ति उतने ही अंश में है जहां अपना प्रोपेगेंडा जहां अपनी स्ट्रेटेजी अप्लाई करनी होगी जी वही पर है बाकी अन्य जगहो पर नहीं है अन्य जगहो पर सिस्टमिकली चलेंगे मगर जब ब्रह्म कर्म समाधि नाम आ जाएगा ब्रह्मे गंतव्य आ जाएगा तो जरूर उसम कृष्ण भावना कृष्ण भावना भावित और सुनिए वो भी अपनी संस्था का नाम डालेंगे उसमें ऐसा नहीं है कृष्ण डाल दे भाई जब कृष्ण ही है तो कृष्ण कृष्ण कृष्ण करो कृष्ण भावना भावित क्यों कर रहे हो इसी बात प बस एक लाइन और जोड़ देता हूं मैं इसमें मैं जो अपने
02:08:20:14 सदस्य के बारे में बता रहा था अभी जो कन से है लखनऊ से वो मुझे जन्मदिन पर भी जो विश करती है ना जो आशीर्वाद देती है उसम भी लिखती है हैप्पी कृष्ण कॉन्शियस बर्थडे बेटा हा हा ययय हर एक ता हैप्पी कृष्णा कॉन्शियस बर्थडे और एक बात और जोड़ना चाहूंगा ठीक है आप जो य कह रहे हो कि अगर कि अगर गणेश जी अगर गणेश जी का आना हो गया तो भगवान श्री कृष्ण सर्वशक्तिमान क्यों नहीं रहे तो भैया फिर भागवत को मत मानो यह क हम व्यास जी से दिक्कत है यह भी तो स्वीकार
02:09:03:20 करो चैतन्य महाप्रभु भी जब तीर्थ करने के लिए गए थे तो उन्होंने भगवान शिव के दर्शन किए थे और चैतन्य महाप्रभु की लीला के अंदर ही ऐसी बात आती है कि उनके भगवान श्री राम के भक्त भी थे तो भगवान श्री राम के जो भक्त थे उनसे उनके बड़े भाई ने कहा कि आप जो की भक्ति कर लो तो दोनों भाई मिलकर क्या करेंगे भगवान कृष्ण की भक्ति करेंगे किंतु उनकी अनन्य भगवान श्री राम के प्रति इतनी थी कि उन्होंने कह तो दिया कि चलो ठीक है हम भगवान कृष्ण की भक्ति कर लेंगे जब रात में सोने के लिए जाते हैं तो उनकी आंखों से अश्रु बहने लगते हैं और केवल भगवान श्री राम का नाम लेकर के रोने लगते हैं और कहते हैं कि नहीं मुझसे यह नहीं हो पाएगा मैं केवल भगवान श्री राम की भक्ति ही कर सकता हूं राम की भक्ति ही करूंगा तब वहां पर वो जिन्हो जो बड़े भाई थे वो कह रहे थे कि कृष्ण भक्ति कर लो तो उन्हो फिर रात में जा कर के उन्होंने उनसे कहा कि देखो मैं कृष्ण भक्ति नहीं कर सकता मैं केवल राम भक्ति ही कर सकता हूं और भगवान श्री राम क्योंकि मेरे इष्ट हैं तो मैं उन्हीं के प्रति समर्पित हूं तो उन्होंने बदले में यह कहा कि इनसे हमको सीखना चाहिए कि ईष्ट के प्रति अनन्य कैसी होती है ऐसी होती है कि जिस प्रकार सेय भगवान श्री राम के प्रति समर्पित है हमको भगवान कृष्ण के प्रति समर्पित होना चाहिए तो हम आपको फोर्स नहीं करेंगे
02:10:18:22 कि आप भगवान कृष्ण की भक्ति करो हमने तो आप भगवान श्री राम की भक्ति करो बाद में फिर वह साकेत धाम को भी गए तो चेतन्य महाप्रभु की लीला के अंदर भी कई सारी बातें ऐसी आती हैं और सनातन जो स्वामी थे उनके तो कुष्ठ रोग हो गया था शरीर पर तो उनकी ऐसी मर्यादा थी कि मंदिर के दूर से दर्शन करते थे हालांकि वह समर्थ थे किंतु फिर भी मंदिर के दूर से ही दर्शन करते थे और चेतन्य महाप्रभु के पास जब मिलने के लिए जाते थे तो जगत्नाथा पुरी का एक द्वार है वहां से होकर नहीं जाते थे कि किसी भक्त से मेरा स्पर्श ना हो जाए किसी भक्त से क्योंकि अगर यदि स्पर्श हो जाएगा तो उसको समस्या हो जाएगी और मेरे को पाप लगेगा तो इस प्रकार से उनकी मर्यादा ऐसी थी उससे चैतन्य महाप्रभु इतना प्रसन्न हुए चैतन्य महाप्रभु उनको हृदय से लगाना चाहते थे अरे तुम तो मेरे हृदय से लग जाओ उसमें भी सनातन स्वामी को कष्ट होता कि अरे महाप्रभु मेरे हृदय से लग रहे हैं मेरे शरीर में कुष्ठ रोग हुआ है और महाप्रभु मेरे हृदय से लगेंगे तोय अच्छी बात नहीं है इससे अच्छा मैं आत्महत्या कर लू वो आत्महत्या करने के लिए जाना चाहते थे कि अब यात्रा होगी भगवान जगत नाथ के रथ के नीचे आकर के मैं अपनी जो है शरीर को समाप्त कर दूंगा ये बात चेतन्य महाप्रभु को चली महाप्रभु फिर भी नहीं मैं तो तुमको अपने हृदय से लगाऊंगा लेकिन सनातन स्वामी से यह सीखना चाहिए
02:11:33:26 हमको अब कई सारे लोग मर्यादा का उल्लंघन करने के लिए इस बात को तो कह देते हैं कि भगवान जो है शुद्ध को अशुद्ध को किसी को भी जो है स्वीकार करने को तैयार है किंतु यहां पे भक्त से सनातन जी से यह मर्यादा भी तो सीखनी चाहिए कि उनको कष्ट कितना हो रहा है कि भाई मे मेरे शरीर में देखो कुष रोग है मैं कितना नीच हूं मैं कितना ये भक्त की जो सरलता होती है कि देखो मैं कितना नीच हूं होते प्रस्तुत करता है वो ऐसा है वो एक अलंकारी गुंडा है ना अंडर कवर्ड उसका क्या नाम है वाच तो उसने एक बार बोला था उसको हमने उसी की भाषा में उत्तर दिया था गीला गीला कवा कवा थ गीला गीला गप कवा कवा थ मीठा मीठा हा मीठा मीठा मीठा मठा मीठा मीठा गब गप कड़वा कड़वा ये जो ये जो भूलने वाली बात है ना ये इतने तरह के प्रसंग होते हैं अभी कुछ दिनों पहले क्या हुआ था उसने इतना ज्यादा अपनी बातों को बदला फिर बोला कि यह सूक्त फिर वो सूक्त तो मैं भी उससे कह रहा हूं कि नहीं चारों वेदों में सूक्त दिए गए हैं हालांकि यजुर्वेद में सूक्त नहीं दिया गया है वो सिर्फ अध्याय और मंत्र है उसमें मगर वो इतना ज्यादा ब्रेन
02:12:48:28 उस समय वर्क वर्किंग में होता है कि चीज स्लिप होने लगती है फिर अब मीठा मीठा की जगह गीला गीला हो गया मैं खुद एक जगह मैं खुद एक जगह जाकर के एक दिन इंटरव्यू में बोल गया कि वो वेदों के जो श्लोक है वो आपके पास कैसे आए जबक वेदों के मंत्र होते हैं ये सब है जो हो जाती है दिक्कत कभी कभी तो भाई ठीक है अब हम लोग समाप्त करते हैं अंकित जी आने के लिए आपका धन्यवाद बहुत-बहुत आभार आपका और इसी प्रकार से आप लोगों का समर्थन मिलता रहे और हम लोग सनातन को एक रा में लाने का प्रयास कर रहे हैं मैं फिर कहूंगा यदि किसी के पास ईश्वर को ये जो हम जो वि जो भी हम सिद्धांत प्रचार प्रसार कर रहे हैं उससे आप सहमत नहीं है और आपके पास सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म है तो हमें अपना बना लीजिए हमें आकर के बता दीजिए हम आपका प्रचार प्रसार करेंगे ठीक है हमें तीन चीजें चाहिए सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष और शाश्वत धर्म कभी ना बदला जाने वाला धर्म है ना जो किसी भी देश काल परिस्थिति में ना बदले प्रभावित ना हो नित्य स्थाई तो हम आपका
02:14:04:00 प्रचार करेंगे व भले ही रामपाल हो व भले ही कन हो व भले ही आर्य समाजी हो ठीक है दूसरी बात यह है कि किसी भी प्रकार के वैचारिक मतभेद के लिए आप संपर्क कर सकते हैं 74839 और हम कल आएंगे एक टॉपिक ले कर के कि एक वो तोड़ना है कि ब्रह्मा विष्णु महेश नाशवान है वो नैरेटिव जो इनका तोड़ना है रामपाल कोई आना चाहे सामने बैठ कर के बात करना चाहे तो संपर्क कर सकता है दूसरी बात यह है कि हा नहीं छोड़ेंगे नहीं नहीं रामपाल वालो रामपाल के द्वारा फैलाई जा रही जो गलत शिक्षा उनको छोड़ेंगे नहीं और दूसरी बात यह है कि ना मास्त्र मारा अयान चल रहा जिसम हम सब भाई बैठ कर के नाम जप करते हैं सुबह सुबह प्रातः काल 5:30 बजे एक सेशन चालू होता है जो सवा घंटे नाम जब एक साथ होता है उसमें मैं स्वयं होता हूं अगर जुड़ना चाहे तो वहां जुड़ सकते हैं और इसके अलावा पांच अलग-अलग सत्र भी होते हैं 1515 मिनट के पूरे दिन में टुकड़ों में अगर करना चाहते तो कर सकते हैं तो नामा आस्त्र धारण करिए जिससे कि सभी प्रकार के जो बंधन है भले ही
02:15:19:01 अज्ञानता रूपी बंधन हो धर्म को ना जानने के विषय में ईश्वर को ना जानने के विषय में राष्ट्र की रक्षा के लिए स्वयं की रक्षा के लिए परिवार की रक्षा के लिए आप जो है नामा आस्त्र उठाइए नामा आस्त्र को जवाइन करिए दूसरी बात यदि आप अध्ययन करना चाहते हैं तो हमसे जुड़ सकते हैं इसी नंबर से ट करें केवल और यदि आप धर्म रक्षा के अभियान में साथ देना चाहते हैं तो भी इस नंबर पर ट कर सकते हैं और भैया एक हाथ जोड़ के विनती है सबसे विशेष तौर पर जो रामपाल जी के फॉलोअर्स है जिनका बिल्कुल ब्रेन एक ही दिशा में चलता है चाबी भर दी तो बस उधर ही चलेंगे काजल काजल काजल तो वो वो वाली स्थिति हो गई है वो क्या करते हैं मेरा ट नंबर ले लेते हैं यह वाला जो हम ले रहे हैं और फिर उस परे ना तो कोई बात ना कोई सवाल ना कोई जवाब कुछ नहीं ना कोई प्रश्न ना कोई उत्तर वीडियो सीधे वीडियो तत्वदर्शी संत रामपाल जी ने सिद्ध किया शास्त्रों से ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी है उनके पति का नाम क्या है उनके पिता का नाम क्या है भाई मैं कहता हूं भैया य व्यर्थ
02:16:34:04 के मैसेज मत भेजो व्यर्थ के मैसेज भेजोगे तो ब्लॉक करना पड़ेगा आपको फॉर्म मिल गया फॉर्म भरो सामना करो ठीक है आपके वो तथाकथित तत्वदर्शी के कई वीडियोस टैली करके अध्ययन करके तब आए हैं ऐसे नहीं आए है ना आपकी तरह नहीं पहुंचे हैं कि बस हवा में मारने लगे ठीक है तो ट पर य बेकार के व्यर्थ के मैसेज ना करें और सीधे सीधे जो है फॉर्म भरे और सामना करें और यदि समझ गए हैं कोई वैचारिक मतभेद नहीं है तो आइए साथ निभाए धर्म की रक्षा करने में अगर वैचारिक मतभेद है तो आइए अपने पक्ष को प्रस्तुत करिए ठीक है सभी को जय श्री राम जय श्री राम अंकित जी जय श्री राम जय श्री राम ज श्रीम जय श्री राम सभी को जय श्री राम जय श्री राम
02:17:31:15 [संगीत]
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