⬜ Not used yet · 00:00:03:24 – 00:14:29:04 (14:25)
00:00:03:24 तो सभी को जय श्री राम आज की य जो चर्चा है हमारी रिकॉर्ड नहीं होने वाली है तो अगर आपके फोन में जो भी हमारे दर्शक है जो देख रहे हैं अगर कोई इस रिकॉर्डिंग को रिकॉर्ड करना चाहता है स्क्रीन रिकॉर्डिंग आदि के माध्यम से तो रिकॉर्ड कर ले क्योंकि कुछ टेक्निकल चीज थी जो अभी रेंडम उनका निदान नहीं हो पाया है और ये लाइव स्ट्रीम जो है पहले से थी तो आपके फोन में अगर मेमोरी हो तो आप उसको रिकॉर्ड कर लीजिएगा जिससे कि बाद में हम आपसे ले पाए तो आज हमारे साथ में है अभी हमने पिछले कुछ दिनों पूर्व माग में एक सज्जन थे जिनका हमने जिनके साथ चर्चा की थी माग मेले में उस कैप में जो मुख्य संदेश हमें प्राप्त हो रहा था वो यह था कि कलकी का अवतार हो चुका है सदानंद जी महाराज के रूप में
00:01:07:12 और और उनके पर उनके दृष्टिकोण से वहां पर अध्यात्मिकता का प्रचार किया जा रहा था सनातन धर्म से जोड़ करके तो वोह वीडियो जिन लोगों तक गया है उनमें से कुछ जो उस तंत्र को फॉलो करते हैं सधन जी वाले तंत्र को संस्था को तो उनमें से आज हमारे सामने उपस्थित है यहां पर रोहित कुमार शुक्ला जी और उनके साथ में भी कोई है तो आप पहले अपना परिचय स्वय थोड़ा सा दे दीसे आपको समझ ले सभी लोग देखने
00:01:45:24 वाले इस शरीर का नाम रोहित शुक्ला जी और हम लोग लगभग भगवान सदानंद के शिष्य है साल से ऊपर हो गया 14 साल 13 14 साल से थोड़ा सा तेज बोलेंगे क्योंकि मुझे जो है आपकी आवाज कम सुनाई दे रही है तो हम लोग भगवान सदानंद के शिष्य हैं जी और उन्हीं के ज्ञान विधान सिद्धांत का हम लोग प्रचार करते हैं यह वही ज्ञान है जो पूर्व में भगवान विष्णु जी राम जी और कृष्ण जी ने
00:02:27:16 दिया अच्छा ठीक है जन का प्र तो मैं सीधे से मुख्य विषय पर आता हूं बहुत ज्यादा मेरे पास चीज नहीं होती है जानने के लिए गाजियाबाद से हमारे एक फ्रेंड है वो शायद अगर देख रहे हो तो उनसे भी मैं कहूंगा कि स्क्रीन की रिकॉर्डिंग करें क्योंकि यह जो लाइव स्ट्रीम है रिकॉर्ड नहीं होगी बाद में जो है आपकी आपकी तरफ के कोई लोग हो तो आप उनको बोल दीजिएगा कि रिकॉर्ड कर ले इसको
00:03:01:02 ठीक है आगे चला तो मेरे जो दो मेरे जो मुख्य दो प्रश्न है उसमें से पहला यही है कि सदानंद जी को भगवान आप किस आधार पर मानते हैं कल्कि का अवतार अगर इस प्रश्न का उत्तर हम एक प्रश्न में दे जी कि भगवान राम जी को भगवान कृष्ण जी को भगवान किस आधार पर स्वीकार किया शास्त्र श शास्त्र शास्त्र था तब रामायण तो राम जी के जाने के बाद बनी भागवत महापुराण तो कृष्ण जी के जाने के बाद बना अब शास्त्र अवतार जब चला जाता है तब शास्त्र का निर्माण होता है और उसके बाद आप भागवत प को सनातनी मानते हैं आप देखेंगे उसके महात्म में ही पूछा गया है कि आखिर यह भागवत कब कब सुनाया गया तो भगवान कृष्ण के चले जाने के लगभग 30 वर्ष के बाद सको सुनाया गया और उसके लगभग 50 सु मतलब लगभग 1 स साल बाद एप्रोक्सीमेट सुना
00:04:16:10 यानी भगवान कृष्ण के चले जाने के बाद महर्षि व्यास का संतोष एक चैप्टर आता है भागवत में यानी महर्षि व्यास जब सारे वेद वेदांग की रचना कर दी लेकिन उनको संतुष्टि नहीं हुई नारद जी आए तो उने पूछा हमको तो संतुष्टि नहीं हो रही है जबक हमने वेदों का सरलीकरण करके इतने सारे थोड़ा सा विषयात हो रहा है थोड़ा सा थोड़ा विषयात हो रहा है आपने थो देखिए आपने मुझसे प्रश्न किया था कि आप राम जी को भगवान किस आधार पर मानते हैं क्योंकि हमारे शास्त्र कहते हैं आपने कहा कि शास्त्रों की रचना राम के बाद हुई है तो ये एक अलग परिपेक्ष हो जाएगा कि वो शास्त्र जो है जिन शास्त्रों के आधार पर हम मानते हैं या नहीं मानते हैं वह शास्त्र मानने है कि नहीं मानने ये एक अलग विषय हो जाएगा है ना अभी मैं आपसे य पूछ रहा हूं कि आप किस आधार पर मानते हैं यह बताइए साब आप हमारी बात को पकड़ नहीं पाए अवतार जब धरती पर आता है तो तुरंत उसकी मान्यता कहा कृष्ण जी को भगवान लोगों ने स्वीकार कर लिया स्वीकार आपसे अपना प्रश्न दोबारा पूछ रहा हूं कि आप
00:05:31:16 किस आधार पर मानते हैं हमने मैं अपनी बात बता दूंगा आपको जन भवान विष्णु राम और कृष्ण ने दिया जो ज्ञान भगवान राम और कृष्ण ने दिया उस ज्ञान को वर्तमान में भगवान सदानंद ने दिया इस आधार प क्योंकि ज्ञान ही पहचान है भगवान का उस ज्ञान को उन्होंने दिया उसके आधार पर उनको भगवान स्वीकार किया जा यानी कि आपका जो ज्ञान जो ज्ञान राम और कृष्ण ने दिया था उस ज्ञान के आधार पर क्योंकि सदानंद जी भी बात करते हैं तो इसलिए आप यह मानते हो सदानंद जी भगवान बात नहीं करते थे व प्रत्यक्ष दिखाते थे ठीक है प्र प्रत्यक्ष दिखाने वाली बात प्रत्यक्ष दि प्रत्यक्ष दिखाने वाली बात प भी आएंगे अभी हम एक टॉपिक को पकड़ ले क्योंकि सदानंद जी ने भी वही ज्ञान दिया जो राम कृष्ण ने दिया इसलिए आप य मानते कि सदन जी भगवान है थे तो अब मेरा प्रश्न कुल मिला के आपका भी तो आपका भी जो आधार है वो शास्त्र ही हो गया ना शास्त्र क आपको जो आपको आपको जो मैच करने का जो पैरामीटर
00:06:47:07 मिला है वो किस आधार पर मिला शास्त्र से ही मिला ना देखिए बिल्कुल शास्त्र भी है प्रत्यक्ष प्रमाण भी है आप देखिए एक एक करके चलिए आपका एक साथ बहुत सारे चैप्टर खोल देंगे तो कोई चैप्टर क्लियर नहीं हो पाएगा एक एक करके चलते कर नहीं हो रहे आप ऐसा करिए आप जो है नोट पन लेकर के आपको कौन ककन से चीज बोल विषय आपके वो लिख लीजिए जिससे कि वो रह ना जाए मगर एक साथ सारे चैप्टर आ आपने य बात
00:07:30:02 भगवान की पहचान का आधार है ज्ञान तो क्योंकि जो ज्ञान श्री कृष्ण और राम ने दिया था और वही ज्ञान इन्होंने दिया इसलिए हम य मानते हैं कि वोह है भगवान ठीक है अब इस तर्क में बात य आती है कि आपका भी आधार उ मानने का शास्त्र ही है क्योंकि शास्त्र के बिना आपको कैसे मालूम पड़ा कि भगवान मैं बोल रहा हूं तो बोलने दीजिए ना क्योंकि शास्त्र के बिना आपको मालूम नहीं पड़ेगा कि मम जी ने या कृष्ण जी ने क्या ज्ञान दिया था बिलकुल सही है नहीं पड़ेगा ना है ना हां तो अब मेरा अगला प्रश्न है कि वो शास्त्र शाप तक आए कैसे
00:08:18:13 अच्छा आप इस विषय में कहना क्या चाहते हैं मल जो शास्त्रों के आधार पर मैंने आपसे दूध नि दूध आ आप हमसे कहने का प्रयोजन क्या है मैं सीधा दूध पही आ रहा हूं ना जो शास्त्र आपके लिए प्रमाण है जीवन का जो शास्त्र आपके लिए प्रमाण है जीवन का वह शास्त्र आप तक कैसे आए वेदस जीने उसका रचना किया रचना करने के पश्चात क्रमश वो ऋषियों द्वारा आज प्राप्त हुआ वो ऋषियों की वंशावली क्या है आपकी 10 पीढ़ी तक की तो वंशावली बताइए पीछे की क्या करेंगे उसको जानकर उसको जानने प्रयोजन अरे भाई मुझे मुझे ये जानना है कि आपकी आपकी जो परंपरा है वो वहां से व्यास जी से कनेक्टेड है कि नहीं वो बताइए आप परंपरा अपनी क्या है गीता प्राप्त हुई कि नहीं गीता हमको प्रात हु आप इसको नहीं मानते व्यास जी ने लिखा उसको
00:09:34:04 मैं वही तो कह रहा हूं मानते हैं मगर उसका जो अर्थ है जिसने हमको किताब दी है जिसने हमको ग्रंथ दिया है उसी उसी का अर्थ मान रहे हैं हम एक हम उसी का अर्थ मान रहे हैं या हम अपने मन से अर्थ मान रहे हैं आपके पास वेदव्यास का लिखा हुआ या दो अरब खरब दो खरब वर्ष पहले के जो वेद आदि शास्त्र है वो कैसे आए यह बताइए और अगर परंपरा से आए हैं तो अपने पिछले कम से कम 10 12 गुरुओं के नाम बताइए सदानंद जी से पहले के देखिए कहने का अभिप्राय यह है कि जितने भी शास्त्र है करोड़ों वर्ष की गणना तो आपके पास भी नहीं होगी हमारे पास वर्ष की गणना आपके पास भी नहीं है हा हमारे पास है आप भी शंकराचार्य जी के बाद शंकराचार्य जी के बाद में आप बता देखिए विषयात मत करिए मैंने देखिए मैं गलत हूं मैं मान लेता हूं सुनिए थोड़ी देर के लिए दुर्जन तोष न्याय के आधार पर मैं मान लेता हूं मैं गलत हू मेरे पास नहीं है मगर मेरे गलत होने से आपका सही सिद्ध होना सिद्ध नहीं होता है तो
00:10:49:09 आप अपने पक्ष के लिए मुझे बताइए कि आपके पास जो शास्त्र है वो कैसे आए शास्त्र तोसे आए अगर हम सीधा कहे गीता प्रेस गोरखपुर ने छापा उसको और उसने छापा और उसके माध्यम से दुकानों में गए उसके माध्यम से हम लोग को प्राप्त हुए तो गता को ब्यास जी ने स्वयं दिया था क्या गीता प्रेस को वेदव्यास जी ने स्वयं दिया था क्या लेकिन आप क्या प्रमाण है रिकॉर्ड बताइए ना कैसे गीता प्रेस पर पहुंचे मैं वही तो पूछ रहा हूं आपसे मैं एक जिज्ञासु बनके आपके सामने खड़ा हुआ हूं अभी मैं आपसे प्रश्न कर रहा हूं मेरे प्रश्नों का समाधान करिए तो प्रचलित शास्त्र मैं आपसे पूछ रहा हूं गीता प्रेस के पास वो जो शास्त्र है कैसे आए नहीं इसका कोई प्रमाण नहीं है हमारे पास कि गीता प्रेस को कैसे आए ये तो गीता प्रेस में बताएगी हम लोगों का जब जन्म हुआ तो हमने गीता को आप जिस देखिए देखिए देख देखिए जो शास्त्र आते हैं जो शास्त्र आते हैं मैं आपको बता दूं ये
00:12:06:20 मा गीता प्रस गीता प्रेस के शास्त्र आपके लिए प्रमाण है क्या शास्त्र हमारे लिए जिस में भी जीवात्मा परमात्मा का ज्ञान है वो सब प्रमाण है चाहे कुरान हो चाहे बाइबल हो अरे भाई मैं पूछ रहा हूं गीता प्र से मिलने वाले जो शास्त्र है वो आपके लिए प्रमाण है कि नहीं है पूरी तरीके से बिल्कुल कं प्रमाण है प्रमाण अब मैं आपको ये बता रहा हूं मांड को
00:12:58:03 उपनिषद ये मांड में पहला पहले अध्याय में पहले अध्याय में जो पहला मांड उपनिषद में दिया गया है इसमें ब्रह्मा जी से लेकर और जो सोनक ऋषि है सोनक मुनि है उन तक शास्त्र कस्त्र ज्ञान कैसे आ रहा है य बताया जा रहा है मांड उपनिषद एक से चार पहला अध्याय अब इसमें जो सोनक मुनि है वो तक बता रहे हैं कि हमारी गुरु परंपरा क्या है है ठीक
00:13:37:19 है ये गीता प्र एक और ग्रंथ है इसमें तीसरे अध्याय का सवा श्लोक मुंडकोपनिषद का तीसरे अध्याय का सवा लोक मंड कोप निषद का पहले अध्याय का पहले से चार तक का और भगवत गीता का तीसरे अध्याय का सवा श्लोक जो पुरुष इस लोक में परंपरा से प्रचलित सृष्टि चक्र के अनुकूल परंपरा से प्रचलित किससे परंपरा से परंपरा
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00:14:29:04 से प्रचलित सृष्टि चक्र के अनुकूल नहीं बरतते अपने कर्तव्य का पालन नहीं करते वह इंद्रियों के द्वारा भोगों में रमण करने वाला पापायी
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00:14:41:10 जीता है चौथे अध्याय का दूसरा श्लोक ब्रह्मा जी हो गया आपका चौथे अध्याय का दूसरा श्लोक नहीं हुआ चौथे अध्याय का दूसरा शलोक बता रहा हूं भगवान श्री कृष्ण बता रहे हैं एवं परंपरा प्राप्ति भगवान श्री कृष्ण भी बता रहे हैं ज्ञान प्राप्त हो रहा है परंपरा से भगवान कौन सालोक क बता रहे ज्ञान प्राप्त होता है परंपरा से अब जो अब जो हमारे परमाचार्य गण है ब्रह्मा जी आदि वो अपने पिछले के गुरुओं के नाम बता रहे ब्रह्मा जी के बाद सोनक आते तो सोन ऋषि आदि बता रहे ब्रह्मा जी से हम तक कैसे आए आपको सदानंद जी से पहले का कोई आपके पास व नहीं है गीता प्रेस तक कैसे आया हो जिसके आधार पर आपने सदानंद जी को मान लिया इसका अर्थ ये है कि अगर गीता प्र अगर गीता प्रेस का गीता प्रश्न वो ज्ञान आपको सही पहुंचाया है कि नहीं पहुंचाया है इसका कोई वो नहीं है क्योंकि आपके पास परंपरा तो है नहीं यह बताने के लिए उसम वही शलोक छापे जा रहे जो शलोक
00:15:56:14 पीछे से आए तो कुल मिलाकर के आपकी परंपरा क्या है बो एक चीज बताइए न कितने प्रकार का कौन सा ज्ञान आया क्या कौन सा ज्ञान देखिए विषयात मत करिए अभी एक एक करके हम लोग हर चैप्टर पर आएंगे विषयात करके हर चैप्टर पर आएंगे आप मुझे बताइए जिस ज्ञान के बोलिए बीच में आपको हमने धैर्य से सुना है ना हम अपना बात खत्म करें भा तो ये विषयात कर रहे हैं अब ये क्वेश्चन कर रहे हैं ज्ञान कितने प्रकार के आप मुझे अपनी बात बोलिए आप पूछिए मत जब बात हमारी खत्म हो जाए उसके बाद आप कहिए विषयात है आपका नहीं तो वो ठीक है मगर ये जो प्रश्न ये जो प्रश्न कर रहे हैं ज्ञान कितने प्रकार के हो रहे हैं ये अपनी बात बोले ना बोल दिया आपने हमने हम कृष्ण जी का ज्ञान कह रहे हैं आप ब्रह्मा जी की परंपरा बता रहे हैं आप कृष्ण जी की परंपरा भी बताई है मैंने कृष्ण जी का भी बताया है पास क जी वाला देखिए अगर आपको लड़ना है तो हम लोग चर्चा को बंद कर देते हैं लड़ना है तो चर्चा को बंद कर देते अगर आपको लड़ना है तो चर्चा को बंद
00:17:11:21 कर देते हैं मैं फिर बोल रहा हूं अगर आपको लड़ना है तो चर्चा को बंद कर बंद करना है हा बताइए लड़ने वाला तो शब्द भी नहीं आया बीच में ये लड़ाई कहां से बीच में शबद आ गया लड़ने वाली बात कहां से आई देखिए वो वो जो दर्शक हैइ आपने जिस लोक को बताया है सुनिए सुनि आपने जिस श्लोक को बताया है वो चतुर्थ अध्याय का दूसरा श्लोक ठीक है चतुर्थ अध्याय का दूसरा श्लोक कहता है कि परंपरा से प्राप्त इस योग
00:17:51:04 को बोलिए बोलिए योग और तत्व ज्ञान में अंतर है भगवान कृष्ण के पास जो ज्ञान था है जो परंपरागत आता है या कर्मकांड का जो ज्ञान है व परंपरागत आता है भगवान विष्णु राम और कृष्ण का जो ज्ञान है वो ज्ञान वास्तव में गत नहीं आता है यदा यदा ही धर्म भारत अन अधर्म को तत्व का ज्ञान कहते हैं और आप जिस ज्ञान की बात कर रहे क् परंपरागत आया है व तत्व का ज्ञान ना हो कर के योग या अध्यात्म का ज्ञान अवा कर्मकांड का ज्ञान गीता में भगवान कृष्ण ने कहा ते त ब्र सम आध्यात्म कमलम अर्थात तीन प्रकार के ज्ञान है कर्मकांड आध्यात्म और तत्व का ज्ञान जिनके पास तुम जाओगे दो मिलेगा बात पूरी हो जाए तो मुझे बता दीजिएगा आपकी बात जब पूरी हो जाए तो मुझे बता दीजिएगा मुझे कब बोलना
00:18:59:13 या हमारे कने और क जी वाे अभी आप मुझे बोलने दे रहे थे भाई साब इस तरह से बात नहीं हो पाएगी आपने क दिया बताइए तो आप मुझे बोलने दीजिए अब मैं पूछ रहा हूं मैंने आपको केवल भगवत गता के बारे में बताया है या मुंडकोपनिषद भी बताया है दूसरी बात यह है एक प्रश्न तो यह हो गया दूसरा प्रश्न यह हो गया कि जिस चीज को आप प्रमाण अपने जीवन का मान रहे हैं वह चीज आप तक कहां से आई है जिसके आधार पर आप सदानंद जी को भगवान मान रहे
00:19:52:02 हैं भाई कोई रिकॉर्डिंग कर रहा है कि नहीं कर रहा स्क्रीन रिकॉर्डिंग हां नहीं हुआ है मगर थोड़ा सा बात तो करें इनकी गोली मारकर मैंने ऐसा मुझे पक्का नहीं पता है मगर गोली मारकर हत्या हुई थी सनन जी की जी कोई रिकर्ड कर रहा है क्या जवाब दे मुझे कर रहा है तो
00:20:32:19 देखिए आपको सभी विरोधी तंत्रों से जितने भी तंत्र है ऐसे जो वेदा आदि शास्त्र सम्मत ज्ञान की बात तो करते हैं मगर उसके ज्ञान के बीच में से अपनी बात डाल देते हैं उनसे जो बचाने वाली चीजें हैं वही गुरु परंपरा है जी आ गया तो मैं कह रहा था अ जी मैं यह कह रहा था पहला प्रश्न तो यह है कि मैंने केवल भगवत गीता आपको प्रमाण के रूप में नहीं दी है मेरे पास मुंडकोपनिषद है मेरे पास छंद उपनिषद है जैसे छंद उपनिषद में कहा जा रहा है कि परंपरा प्राप्त आचार्य के पास जाकर के जो विद्या प्राप्त होती है वही फलदाई है मेरे पास निरुक्त का निरुक्त का उदाहरण है जो जो शब्दकोश माना जाता है किसका वेदा शास्त्रों का डिक्शनरी कहते जिसे निरुक्त और मेरे पास सात ये क्या कहते हैं ये मुंडकोपनिषद का मैंने आपको बता ही दिया इतनी जगह पर बात हुई है उसम से एक जगह भगवान श्री कृष्ण की बात है दूसरी बात मैं यह नहीं कह रहा हूं इस प्रमाणों को साइड में हटा दीजिए मैं आपसे सीधे सधे पूछ रहा हूं कि आपने यदि वेदा आदि शास्त्रों
00:21:47:24 को गीता प्रस गोरखपुर के शास्त्रों को प्रमाण रूप में स्वीकार किया तो क्या आपकी आस्था है गीता प्रस गोरखपुर पर खाली खाली हमने गीता प्रेस गोरखपुर के प्रमाणों को मात्र देखकर नहीं स्वीकार किया जो ज्ञान हमारे भगवान सदानंद जी ने दिया दिखाया हम लोगों को जब जीव दर्शन या यानी प्रमा है जब आत्मा दर्शन कराया तो उन्होने कहा देखो ग्रंथ खाली वही नहीं उपनिषद से भी उन्होने प्रमाण दिया और यह कहा कि जो उपनिषद है बात पूरी कर लीजिए फिर बताऊ कनि की बात पूरी कर ली फर बताए और की जो आप बात कर रहे हैं अरे वेद और वेदांग को पढ़ने मात्र से क्या होगा क्या अर्थ है
00:22:46:26 इसका देखि लाम को बंद कर दूंगा य पर आपके प्रवचन सुनने नहीं बैठा हुआ हूं आपके प्रवचन सुनने नहीं बैठा हुआं प्रश्न और उत्तर पर बात होगी ठीक है बोलिए बोलिए आप हा तो मैं आपसे पूछ मैं आपसे पूछ रहा हूं जिन चीजों को आपने प्रमाण के रूप में स्वीकार किया है जहां से आपने उन चीजों को लिया है उस जगह पर आपको विश्वास है कि नहीं बकल
00:23:19:09 आपने यहां पर दो स्थितियां यहां पर दो स्थितियां नजर आ रही है एक कि आपने गीता प्रस के ज्ञान के आधार पर सदानंद जी जी को भगवान माना या फिर सदानंद जी की कही हुई बातों के कारण गीता प्रस को प्रमाण माना एक मिनट श्रीमद भगवत गीता के आधार पर क अरे सुन लीजिए केवल भगवत गीता के आधार पर हा केवल भगवत गीता के आधार पर भगवत गीता नहीं सारे ग्रंथों के आधार पर सारे ग्रंथों के आधार पर तो अब इसको दोबारा क्लियर कर लेते तो उसका मुझे कुछ नाम तो बता दीजिए कि फलानी जगह से छपते हैं तो मैं मानता हूं उनको भाई अभी कोई व्यक्ति अगर भगवत गीता के नाम से आपको आप एक बात बताइए आप एक बात बताइए एक बहुत साधारण सी बात बोल रहा हूं क्या आपको सारे वेदा शास्त्रों के श्लोक याद है क्या ठीक है बिल्कुल नहीं है नहीं है इसका अर्थ यह है कि आप किसी ना किसी पब्लिकेशन पर भरोसा करेंगे ना कि भाई इस पब्लिकेशन पर मुझे भरोसा है ये गलत श्लोक नहीं छापे गी करती हम क्या कर रहे हैं मान्यता प्राप्त है वो आपके नहीं मानने से क्या हो जाएगा हा
00:24:36:10 रा क्लियर करना जरूरी है अब बात अब बात ये आती है अब बात ये आती है कि आपने जो इसको प्रमाण के रूप में स्वीकार किया है वह ज्ञान जो ये ज्ञान जो सदानंद जी ने दिया था उनके ज्ञान के आधार पर इसको स्वीकार किया है या फिर इनके आधार पर सदानंद जी को भगवान स्वीकार किया है इनमें से कौन स्थिति है ग्रंथ के आधार पर आपने सदानंद जी को वो माना ईश्वर या ईश्वर के आधार पर आपने ग्रंथों को माना ग्रंथ क्या है इनम से दोनों एक साथ दोनों एक साथ दोनों एक साथ मुझे थोड़ा प्रैक्टिकली समझाइए प्रैक्टिकली समझा रहे हैं जैसे मान लीजिए आप है शिवास द्विवेदी जी है अब जब तक हमने शिवांश द्विवेदी का नाम खाली सुना है तब तक पूर्ण परिचय हमको आपका प्राप्त नहीं लेकिन जब हम शिवांश दिवेदी जी को आमने सामने देख लेंगे बात व्यवहार हमेशा हो जाएगा तब आपका पूर्ण पर प्राप्त हो जाएगा अर्थात नाम रूप और स्थान ये तीनों यदि आपका प्राप्त हो गया हमको तो हम समझ जाएंगे कि पूर्ण परिचय आपका प्राप्त हो गया अब देखिए अब जो कोई भी ग्रंथ है चाहे वेद
00:25:51:12 है चाहे उपनिषद है चाहे वेदांग है ब्राह्मण है आरण्यक है गीता है या महापुराण है कोई भी है उसमें क्या लिखा है उसम तो शब्द लिखा है ना उसमें रूप तो है नहीं जैसे जीव लिखा है या आत्मा लिखी है या परमात्मा लिखा है तो ग्रंथ में तो खाली शब्द ही ना लिखा है सकल तो है नहीं कि आत्मा कैसे दिख कैसे देख सकते हैं अगर य लिखा भी होगा तो आप उसको पढ़कर तो जान नहीं सकते हैं जानना तो किसी सक्षम गुरु से ही होगा आपको तो जब तक उन्होंने क्या किया हमको पहले प्रत्यक्ष दिखाया पहले रूप को सामने किया कि देखो ये आत्मा है जी उसके आधार पर उन्होने कहा ग्रंथ देखो ग्रंथ जिस प्रकार वर्णन कर रहा है ठीक उसी प्रकार जो हमने दिखाया है कि नहीं है उस दर्शन से ग्रंथ प्रमाणित हो गया और ग्रंथ से दर्शन प्रमाणित हो गया इसका अथ सही है बात य आती है ग आपने देखे जिन ग्र का अथ आपने सुनली हमारी बात आप केवल ग ना केवल दर्शन से कुछ कर सकते हैं क्योंकि ग्रंथ में
00:27:06:19 आज शंकराचार्य जी ने कहा है न गच्छति बिना पानम ब्या ष शब्द बिना परोक्षा अनुभवम शबद ब्रहम मु सा शंकराचार्य जी कहते हैं कि खाली दवा दवा दवा दवा कहोगे तो वास्तव में आपका जो है रोग नहीं जाएगा जब तक प्रत्यक्ष दर्शन नहीं होगा बिना परोक्षा भव ब्रह्म शते ब्रह्म ब्रह्म आत्मा आत्मा परमात्मा परमात्मा चिल्लाने से मोक्ष नहीं होने को है जो पुरुषार्थ मनुष्य जीवन का लक्ष्य है अरे भैया बातो को रिपीट क्यों कर रहे हो मुझे भी तो बोलने दो बोलिए उम हा बात ये आती है क्या आप शंकराचार्य जी की बात स्वीकार की गई बातों को प्रमाण मानते हैं बिल्कुल अभी तक जो तीन बातें अटक रही है व यह है पहली बात कि आपको यह जो ज्ञान है जो मैच कर रहा है सदानंद जी के ज्ञान से यह ज्ञान आपको कहां से प्राप्त हुआ आपको कुछ नहीं पता है पहली बात यसे आपने कहा हमारे पास कोई प्रमाण नहीं है कहा से आया गीता प्रेस के पास दूसरी बात य है आपने
00:28:21:26 जहा से ग मुझे बोलने दीजिए अब मुझे बोलने दीजिए दूसरी बात य है गता प्रस के पास जहां से आया और जो गीता प्रस के शास्त्रों का अर्थ आप ले रहे हैं वो जो वो अर्थ जो सदानंद जी के ज्ञान से मैच खा रहा है उस अर्थ को आपने वहां से वेरीफाई कराया जहां से गीता प्रेस के पास वो ज्ञान आ रहा है नहीं कराया दूसरी बात ये आती है कि जब आप अपनी बात बोल रहे हैं तो आप मुझे उन्ही शास्त्रों का प्रमाण दे रहे हैं जो सनातन धर्म ग्रंथों के नाम से जाने जाते हैं मगर जब मैं अपनी बातो को बोलने के लिए सनातन धर्म ग्रंथ का प्रमाण दे रहा हूं तो उसे आप नकार
00:29:08:02 रहेमा हमने भाई शंकराचार्य की अगर बात को आप प्रमाण मानते हैं तो शंकराचार्य के द्वारा बताया हुआ चीज आप स्वीकार करिए पूरी की पूरी नहीं तो उनके द्वारा उनके द्वारा जो स्वीकारी ग बात उनका उदाहरण मत दीजिए य मत करिए आपने उनकी मान ली स्वीकार नहीं की स की बहा भाई भाई इसमें ंद में लिखा हुआ है छ अध्याय के च इसमें लिखा हुआ है कि जो आपकी जो विद्या है आचार से प्राप्त विद्या ही फलदाई है तो आप सदानंद जी के आचार के आचार के आचार चार पाच नाम बताइए मुझे अन्यथा वो विद्या फ नहीं इसको मानिए सुनिए आप हमने आपको क्या
00:30:06:04 कहा भवान अब आप इसको मानेंगे कि नहीं पहले तोय बताइए पहले आप मुझे बताइए इसको मानेंगे कि नहीं मानेंगे अरे भाई भगवान श्री राम जब होते हैं तो वो स्वयं वशिष्ठ के पास जाते हैं ज्ञान लेने सदानंद जी के गुरु के गुरु के गुरु दो चार नाम बताइए मुझे खुद आक के पैरो में गिरे हैं प्रभु छोड़ देते हम काफी देर हमने काफी देर बात कर ली परंपरा वाली बात अब लोगों को जो भी निष्कर्ष निकालना होगा निकाल ठीक अब अब हम चर्चा को आगे बढ़ते दूसरा चैप्टर खोलते हैं अब य बताइ आपे जी वालान राम जी हो गया आपके पास है नहीं उस बात नहीं करेंगे नहीं चर्चा आगे नहीं बढ़ेगी वो चैप्टर बदलते परंपरा वाली बात छोड़ देते हैं अब मुझे एक बात बताइए आप कह रहे प्रत्यक्ष को देखा मैंने प्रत्यक्ष देख कर के मुझे ऐसा समझ में आया वो जरा समझा दीजिए आपने क्या
00:31:14:00 देखा जैसा भगवान कृष्ण ने अर्जुन को दिखाया ठीक उसी प्रकार अरे भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को जो दिखाया था वो जहां से आपके पास आ रहा है उनका अ आप मानोगे क्या शास्त्रों का आपको लगता है कि गीता प्र सारे अ बदल दिए नहीं बदले मगर गीता प्रेस तो मान रही है गीता प्रेस के पास जो चीज आई शंकराचार्य आद जो हमारे राव से आई है और यह जोय जो बोल रहे व क कलकी अवतार होना अभी बहुत साल बाकी है उसम कलकी अवतार [संगीत] में या तो या तो परंपरा प्राप्त आचार्य को आपको मानना होगा या नहीं हो दोनों में से एक चीज चूज करिए ना अपनी बात को रखने के लिए परंपरा की चीज आप ला रहे हो और जब मैं वो बात कह रहा हूं तो आप फुकरा रहे हो आपने गीता प्रेस के जो अर्थ आप समझ रहे हैं वो अर्थ किसी परंपरा प्राप्त आचार्य के पास जाकर के वेरीफाई किए हैं क्या रामानुजाचार्य परंपरा निंबार्काचार्य परंपरा वल्लभाचार्य परंपरा शंकराचार्य परंपरा कि भैया मैं सोच रहा हूं ये 2006 में जो ज्ञानानंद जी जो दर्शन रूप दिखा रहे विराट स्वरूप ये वही स्वरूप है जो श्री कृष्ण ने
00:32:29:02 दिखाया था मैं सही समझ रहा हूं कि नहीं समझ रहा हूं ये बताइए मुझे देखिए एक बात आपने नहीं किया है तो अब अब मैं आपसे पूछ रहा हूं कि जो जो रूप सदानंद जी ने दिखाया विराट रूप के रूप में वह स्वरूप वही रूप था जो श्री कृष्ण ने दिखाया अर्जुन को यह कैसे पता चला आपको बोले मतलब यह है कि अगर मैंने आपको ग्रंथ दिया है और मैं उसका अर्थ भी आपको बता रहा हूं आप दोनों चीजों को स्वीकार कर रहे हैं तब तो आपका प्रमाण के रूप में उस ग्रंथ को उपयोग करना उचित सिद्ध होता है आपने ग्रंथ तो मुझसे लिया मगर उसम अर्थ अपनी दृष्टि से देख रहे हो मैं कह रहा हूं भाई सुन इसका अर्थ भी लेता जा मगर आप मना कर रहे हो नहीं तुम्हारा अर्थ गलत है तो यह तो वो हो गया ई शंकराचार्य क्या मान रहे है क्या सदानंद जी ने शंकराचार्य ने शंकराचार्य मान रहे क्या सदानंद जी ने जो दर्शन दिखाया है विराट स्वरूप का वही विराट स्वरूप श्री कृष्ण ने दिखाया था सदानंद जी मान रहे इस बात को शंकराचार्य वो तो कराही भगवान सदानंद तो कराए ही वो दर्शन शंकराचार्य के पास दर्शन ही नहीं
00:33:44:04 था नहीं नहीं करा वो दर्शन वही दर्शन था जो जो श्री कृष्ण ने दिखाया था यह शंकराचार्य जी ने स्वीकार किया है क्यार जी का स्वीकार करेंगे तब सदानंद जी थे ही नहीं सदानंद जी थेरे भाई तो शंकराचार्य जी की गुरु गद्दी परक की गुरु गद्दी शंकराचार्य जी ने ममना अनुशासन में बोला ना कि मेरे द्वारा प्रतिष्ठित पीठ पर आरू होने वाला जो सन्यासी है वह अंतिम निर्णायक होगा वो मेरा स्वरूप माना जाएगा और अगर अगर आपको अगर आपको अपने मन का ज्ञान लेना है तो ठीक है ये परंपरा प्राप्त शास्त्र छोड़ दीजिए सीधे कहिए हम ज्ञान दे रहे स जी नाम से एक नया धर्म खोल
00:34:31:01 लीजिए छो शंकराचार्य से पहले क्या ग भाई मेरा कोई मेरा कोई कॉपीराइट नहीं है आप मुझे बताइए आपके पास ग्रंथ कैसे आए शंकराचार्य से पहले ग्रंथ नहीं थे क्या उनके बाद मान लीजिए शंकराचार्य के पहले शंकराचार्य के पहले की गुरु परंपरा भी है ना अरे सुन लीजिए सुन लीजिए आपने कहा इसीलिए कह रहा परंपरा वाले टॉपिक को छो टॉपिक पर आते हैं फर आप टॉपिक बदल रहे इसीलिए कह रहा हूं सुनिए इसीलिए कह रहा हूं परंपरा वाले टॉपिक को छोड़िए सीधे अगले टॉपिक पर आते वो समझ में आ गया जो दर्शक है व अपना निर्णय निकाल लेंगे दर्क आपसे कह रहा दूसरे टॉपिक पर बात करेंगे मैं य कह रहा हं दर्शक जो है वो अपना निर्णय निकाल लेंगे आपको अगर दूसरे टॉपिक पर बात करनी है तो बताइए ना इसको ए करे हो गया परपरा वाले टॉपिक बात नहीं करेंगे अगला टॉपिक लेले पर को भगवान कृष्णम की कोई परंपरा थी नहीं उन्होने ज्ञान दिया उ किसने कहा यही तो बात है अपनी को सि करने के लिए आप श दिखाते
00:35:46:24 जब शास्त्र दिखाता तो आप मना कर देते हैं राम जी के गुरु ान को मैं तुम्ह दिखा रहा हूं तुझसे पहले किसी ने नहीं देखा स्पष्ट होता है कि वो परंपरागत ज्ञान है वो ज्ञान परंपरागत परंपरा अगर किसी ने नहीं देखा तो इसका मतलब जो वेद है वो झूठे है आपके अनुसार श्री कृष्ण भगवान वैदिक नहीं थे एक नया धर्म उन्होने चलाया था भगवत गीता धर्म वेद में कर्मकांड भरा है वेद में कर्मकांड है अरे और वेद का चलिए ठीक है ये भी बात ये भी बात आपकी ये लोग सुनेंगे वेद में वेद में कर्मकांड भरा है ये भी बात लोग देखेंगे जांच पेंगे दर्शक ये दर्शकों पर छोड़ दीजिए दूसरे दूसरे टॉपिक पर आए क्या भाई साहब आपको बात सुननी नहीं है आपको लग रहा है बोलने आए केवल बोलने नहीं आए हैं आप बोल रहे हैं तो हम चुप हो रहे हैं तो हम बोल रहे तो आप ही तो सुनने की क्षमता होनी चाहिए आपके पास आप उसको सुन नहीं रहे हैं चलिए अब अगला नया टॉपिक लाए ये टॉपिक छोड़ कर के दूसरा टॉपिक लाए 47 11 अध्याय का ऐसे भाई साहब मैं कह रहा हूं दूसरा टॉपिक लाए
00:37:02:18 दूसरा टॉपिक लाए इसको शोता तो क्लियर हो आपकी आवाज समय लोग नहीं सुन रहे हैं मैं कह रहा हूं दूसरा टॉपिक लाए अब आप मुझे बताइए आप दूसरे टॉपिक पर बात करेंगे मैं कह रहा हूं दूसरे टॉपिक पर बात करें अब कौन सा टॉपिक है आपका ये क्लियर है नहीं हुआ हा मैं ये कह रहा था आप यह कह रहे थे कि जो आपके पोस्टर जो मैंने माग मेले में लगे हुए देखे थे उसम मैंने देखा था
00:38:17:12 कि जो ये भगवान कण कण में नहीं है एक जगह बैठा हुआ है बिल्कुल हां इस पर बात करनी है तो भगवान जब कड़कड़ में नहीं है तो भगवान क्या सर्वव्यापक रूप से नित्य नहीं है क्या स्याप
00:38:49:00 तो तो आप तो कह रहे हो ककड़ में नहीं है लेकिन आपकी आप जिस प्रकार से समझ रहे वसा कण कण में नहीं है अर्जुन ने जब देखा आर एकज बताइए जिसने भी कहा है क क में है क कण में है उसने तो मुझसे अर्जुन वगैरा की बात मत करिए अब मुझे आपक पर बात करिए प्रमाण मत दिखाइ स परमात्मा आप अपने दर्शन को समझाइए मुझे उदाहरण गीता से मत दीजिए देखिए आप गीता से उदाहरण मत दीजिए अपने दर्शन समझाइए अपना
00:39:28:10 ष गीता से आप गीता से आप गीता से उदाहरण मत दीजिए का दर्शन नहीं था आत्मा का दर्शन मैं आपको हटा देता हूं ठीक है आपसे आप आए अच्छा लगा ओ भैया कहा जा रहे मैं लास्ट बात पूछ रहा हूं ना आपसे आप मुझे ग्रंथों का मत दीजिए प्रमाण क्योंकि ग्रंथ आपके लिए प्रमाण नहीं है आप अपनी बात बताइए मुझे जाइए कि भगवान कड़कड़ में है कि नहीं है बस वो बताइए मुझे ग्रंथों का प्रमाण मत दीजिए क्योंकि ग्रंथों का प्रमाण आपने स्वीकार नहीं किया है कण कण में अनक शियस एनर्जी है जड़ शक्ति है जिसको भगवान कृष्ण ने कहान अरे फिर आप फिर आप भगवत गीता की बात करने लगे फिर मैं पूछूंगा भगवत गीता का जो अर्थ आप ले रहे हो कहा से आया आपके पास वो कहोगे से आया मगर शब्द वो लेना इसलिए कि खुद को सनातनी दिखाना है बहुत सारे तंत्र आप जैसे समय कार्य कर रहे हैं आप मुझे अपनी बात बताइए भगवत गीता अध्यात्म शास्त्रों का कोट मत करिए अपनी बात बताइए जो आपका दर्
00:40:44:00 वो समझाइए हा तो परमात्मा जो है परमात्मा जो है व परमात्मा सारी सृष्टि को घेर करके स्थित है ना कि सब में स्थित है सारी सर्वम आव सबको घेर करके थित है भाई साहब मैं आपको हटा रहा आपसे रहा नहीं जाएगा क्योंकि आप सनातन शास्त्रों का कोट करेंगे और मेरे सनातन शास्त्रों द मेरे जो प्रमाण है व आपने ठुकरा दिए परंपरा को आप मान नहीं रहे आप बता नहीं रहे आपके पास ग्रंथ कैसे आए तो मैं आपसे चर्चा नहीं कर पाऊंगा या तो आप अपने पर नियंत्रण रखिए आप जो सनातन शास्त्र है उनको कोट मत करिए केवल अपना दर्शन समझाइए शंकराचार्य की ठीक है जागीर नहीं है मैंने आपसे पूछा आपके पास जो आप प्रमाण के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं कहां से आया तो आपके पास कोई जवाब नहीं है आपने कहा प्रमाण नहीं है मेरे पास कहां से आया आपके पास बस आ गया कहां से आया नहीं पता जहां से आया है मैं बता रहा हूं तो उन पर आपको विश्वास नहीं है जहां से आया है उनके नाम मैं आपको गिना रहा हूं तो उन पर आपको विश्वास नहीं है तो जब जहां से ग्रंथ आ रहा है उस पर विश्वास नहीं है तो से प्राप्त ग्रंथ पर आपको विश्वास
00:41:59:08 होना तार्किक सिद्ध नहीं होता नहीं बता सारा प्रमाण हम शास्त्र ग्रंथों से दे रहे हैं आपने मुंडकोपनिषद बताया मुंडकोपनिषद से प्रमाण दिया आपने गीता बताया हमने गीता से प्रमाण दिया अब आप भाई ये लोग कहां से आते हैं मैं समझ नहीं पाता हूं कल्की का अवतार करा देते
00:42:38:24 हैं हां किसी का कोई प्रश्न हो तो पूछ ले आप लोग बताइएगा कि आपको यह जो समीक्षा हुई है न्याय प्रिय लगी कि नहीं लगी व वो ऐसा है ना मैं इनको यह सब प्रमाण विश्वत जी मैं इनको प्रमाण इसलिए नहीं देता हूं कि जब मैं इनको प्रमाण देने चलूंगा तो ये उसको म मानते मानते नहीं है ये लोग इसलिए इनके द्वारा स्वीकार किए गए तथ्यों पर बात करते हैं जब मैं इनको अपने प्रमाण दूंगा कि भाई यहां पर यह कह रहे नहीं तुमने अपना अर्थ कर लिया है यह कहेंगे प्रॉब्लम ये है कि प्रभु जी ने किया सुखदेव जी मोक्ष को प्राप्त हुए ये सब नहीं मानेंगे सुखदेव जी जो मोक्ष को प्राप्त हुए भाई जो शंकराचार्य परंपरा के गुरु है ये सब ये नहीं मानेंगे
00:43:34:16 तो वही है कि अ ये इसकी ईट उसका रोड़ा और भानुमती का कुनबा जोड़ा अपने मन से जितनी बात गीता प्रेस गोरखपुर से लेनी है अपनी मंतव्य को सिद्धि के लिए उतनी गीता प्रेस से ले ली हमसे अपने मंतव्य की सिद्धि के लिए जितना आपको लेना है कुरान से वो से उससे ले लिया बाइबल से लेना उससे ले लिया और उसके बाद अपना एक स्ट्रक्चर खड़ा कर दिया मगर स्वयं को सनातनी जरूर सनातनी कहना आवश्यक है नहीं तो हमारा जो धर्म उसको व प्रसिद्धि नहीं मिल पाएगी सनातन है यह सारी बातें हैं कल्की पुराण में भगवान कल्की के डिटेल्स है जी हा बिल्कुल होंगे कल की पुराण होगा तो उसमें है तो इसीलिए मैं इनको पहले जब मैं इनको अर्थ बता रहा हूं जब मैं इनको खोल खोल के दिखा रहा हूं कि भाई जो सोनक मुनि है वो तक बता रहे हैं कि मेरी गुरु परंपरा क्या है आपके पास जहां से ज्ञान आ रहा है वेदार शास्त्रों का आप वेदार शास्त्रों
00:44:49:27 को प्रमाण के रूप में अपने अनुसार अर्थ करके जो है और अपने मंतव्य को सिद्ध करना चाह रहे हो मगर जहां से वो वेदा शास्त्र आप ले रहे हो वो वो जो अर्थ बता रहा है वो आपको नहीं मानना है तो इसीलिए ये होता है जब गुरु परंपरा से बाहर जाता है ना व्यक्ति तो वो यह करता है कि शब्द ले लिए इसके जिससे कि हम सनातनी कहलाए अर्थ लगा दिया अपना परंपरा प्राप्त गुरुओ का अर्थ लगाया नहीं इसलिए परंपरा एक बहुत बड़ा हमारे पास शस्त्र
00:45:23:18 है अपना दर्शन सिद्धांत नहीं है उनका वो अब उन्होंने कहा कि जो शक्ति है वो जड़ है जो कड़कड़ में व्याप्त जो शक्ति है वो जड़ है इसका अर्थ क्या हुआ इसका अर्थ यह हुआ कि जो भगवान है वो अलग बैठे हैं शक्ति अपने आप निर्णय नहीं ले सकती जिस समय कोई गलत पाप कर्म हो रहा है कुछ हो रहा है तो उस समय वो शक्ति निर्णय कुछ भी करना है भगवान को तो शक्ति भगवान अवेलेबल नहीं है थोड़ा सा टाइम लगेगा भगवान को वहा आने में जब जो है वो शक्ति अपना कार्य कर पाएगी क्योंकि कॉशसनेस तो है नहीं उसम है ना ये चीज
00:46:04:16 चलिए हां इन्होने इनको मिला है दिव चक्षु मिला है और ये दर्शन कराते थे इसलिए मानते हैं वो जो है भगवान है इसीलिए कहा जाता है कि गुरु गोविंद और ग्रंथ के माध्यम से प्रतिपादित होने वाली जो शिक्षा है ज्ञान है वही फलदाई ऐसा नहीं है कि आपसे भगवान भरोसा कर लो जो भगवान आपके पास आए हैं वो भगवान ही है ये भी आपको गुरु ग्रंथ के आधार पर मानना होगा ना अब मालूम पड़ा जो भगवान आए हैं वो खुद ही ऐसी चीजें कर रहे हैं जिनको आप भगवान समझ रहे हो जबक वो खुद ऐसी बातें कर रहे है कि वो सब शक्तिमान नहीं है हो सकता है कोई चमत्कारिक शक्तियों युक्त कोई बुरी शक्ति आपके पास भगवान का रूप लेके आई हो तो इसलिए भगवान को भी वेरीफाई कौन करेगा गुरु और ग्रंथ गुरु को वेरीफाई कौन करेगा गोविंद और ग्रंथ ग्रंथ को वेरीफाई कौन करेगा गुरु और गोविंद यह तीनों इंटरडिपेंडेंट है आपस में इन तीनों में से एक भी पाया अगर हटा दिया जाएगा गुरु गोविंद और ग्रंथ में से तो जो धर्म है वह अपने निश्चित जो सही स्वरूप है उसमें आपको प्राप्त नहीं हो पाएगा चलिए ठीक है आप लोग आए सभी को जय श्री
00:47:25:25 राम ब
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