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00:00:01:21 तो सभी को जय श्री राम हम लोग एक बार आपके समक्ष फिर से प्रस्तुत हैं अपनी जो वैचारिक गोष्ठी है उसको लेकर के जो धर्म और ब्रह्म को लेकर तियां और मत मता हो रहे जिसके कारण हमारा सनातन समाज बहुसंख्यक होते हुए भी निर्बल दिखाई देता है और उसके प्रति किसी को भी किसी भी दुरा को कोई भी दुरा चरण करने में कोई जजक कोई भी डर नहीं होता भय नहीं होता सभी को जय श्री राम और जितने भी छोटे भाई हैं उन सबको आज ढेर सारा आशीर्वाद तो आज हमारे साथ है रामपाल जी की शिक्षा को मानने वाले एक अनुयाई है रामपाल जी के और इनका नाम है लोकेश पांचाल जी लोकेश

00:00:57:06 पांचाल जी पहले आप अपने बारे में थोड़ा सा यह बता दी जी होता क्या है कि जब हम किसी के साथ बता दू मैं समझ गया हमें समझ गया जी जी तो मैं बताता अपने बारे में हां मैं लोकेश पांचाल हूं ठीक मैं इंदौर लोकेशन से हूं एमपी इंडिया और मैंने रामपाल जी महाराज जी से अभी अभी रिसेंटली फरवरी में नाम दीक्षा लिए मुझे छ सात महीने हुए हैं ज्यादा टाइम हुआ नहीं और उसके बाद में मैंने फिर ज्ञान गंगा पुस्तक से मुझे भी ज्ञान प्राप्त हुआ था मेरा कोई पहले मतलब ऐसे विशेष गुरु नहीं थे राधा स्वामी पंथ से जुड़ा हुआ था पहले में आ 10 साल क् था पहले कबीर पंथ में तो इसलिए क्या हुआ कि जब ये ज्ञान गंगा पुस्तक और ये थोड़ा बहुत ज्ञान मुझे मेरे पिताजी जुड़ गए थे पहले तो उन्होंने मुझे बताया कि राम महाराज जी है तो फिर क्या हुआ था कि थोड़ा बता द मैं दो मिनट अपने बारे में मैं कैसे जुड़ गया नहीं नहीं ये नहीं जानना है असल में मेरा क्वेश्चन दूसरा था ठीक है होता क्या है कि जब भी हम किसी से बात करते हैं हम तो बाद में जो जिस कम्युनिटी के व्यक्ति से हम बात कर रहे हैं उसकी कम्युनिटी वाले ये कहते हैं कि आप जो है किसी एरे गैरे को पकड़ के उसके साथ चर्चा करते हो अब हमने किसी को रोका नहीं है आपने वहां पर अप्लाई

00:02:12:08 किया फॉर्म भरा तो हम आपके समक्ष आ गए अब जो सामर्थ्य वान है वह क्यों नहीं प्रयास कर रहे संपर्क करने का तो यह इस बारे में हमें नहीं पता है मगर इस पर मेरा प्रश्न यह है कि रामपाल जी की तरफ से किसी को भी एक अधिकृत व्यक्ति समझने के लिए क्या व्यवस्था है क्या नियमावली है कि हम किसी को अधिकृत समझे अथवा ना समझे भाई साहब देखो आप जिस विषय में बात कर रहे ना मतलब मैं तो यहां इसलिए जवाइन किया है कि आपने एक वीडियो में बोला था कि अगर रामपाल जी महाराज के किसी शिष्य ने मां का दूध पिया है तो व मुझसे ज्ञान चर्चा करे ठीक है आपने जो बोला था अभी आप मुकरना चाहो तो मुक सकते हो देखो मैं तो सत्य को मानने वालां मेरे गुरु जी ने सत्य बोल सिखाया अब उस उस कांटेक्ट में मैं नहीं आया हूं मेरे गुरु जी का क्या ज्ञान है क्या नहीं है मैं अपने एक गुरु का शिष्य का फर्ज निभाने के हिसाब से मैं आपसे ज्ञान चर्चा करने आया हूं बस इतना ही है मैं ज्ञान चर्चा तो करने बैठे हैं वो आप सही कह रहे हैं और थोड़ा सा वर्डियर चेंज है माता जी का माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध तो पिलाया ही होगा ऐसा वर्डिक दूध है मतलब हां ऐसे नहीं बोला जी वडिंग

00:03:27:16 थोड़ी चज जी जी ठीक है तो वो दास जो दास वो गुरुजी का जो अभी मैं देखिए मेरा जो प्रश्न है मैं वो ज्ञान चर्चा के लिए आप आए हैं मैं ऐसे ही जस्ट फॉर एक जनरल क्वेरी कर रहा हूं क्या रामपाल जी के द्वारा या रामपाल जी के शास्त्रों में उनकी ओर जैसे रामपाल जी आज हैं हो सकता है वो कल को परलोक चले जाए या स्वर्ग में मतलब अपने जो आपके अनुसार वो भगवान है ना आपके अनुसार भगवान गुरुजी सतलोक में चले जाए देखो आप आपके हिसाब से बता दो फिर मेरा क्या काम है मेरा प्रश्न य हैरा जो प्रश्न है वो कर रहा हूं कि रामपाल जी जब उपलब्ध नहीं है उस दशा में उनकी तरफ से अधिकृत व्यक्ति कौन है जो उस ज्ञान को बाकी के लोगों को देगा इस बारे में कोई व्यवस्था है कि नहीं है बस यह मैं जानना चाह रहा हूं रामपाल जी महाराज के द्वारा ऐसी व्यवस्था की गई है कि अगले 1000 साल तक सिर्फ रामपाल जी महाराज के सत्संग सुनाए जाएंगे टीवी पर जो आज व जेल में 10 साल से होते हुए उनके सत्संग आज भी चल रहे हैं आज भी नाम दीक्षा उन्ही के द्वारा दी जा रही है और अगले 1000 साल तक की व्यवस्था कर दी गई है नहीं 1000 साल नहीं षष्ठी तो उसके बाद भी रहेगी व्यवस्था क्या है उसके बाद

00:04:42:21 की 1000 साल के बाद तो को है कि नहीं है रामपाल जी के ना होने की स्थिति में कोई व्यवस्था है कि नहीं है अगले 1000 साल तक कीय दास गारंटी लेता है उसके बाद की तो प्रलय आनी है फिर प्रलय आने पर तो कौन बचेगा आप ही बताओ मतलब अगम है अगर रामपाल जी नहीं है तो उस दशा में उनकी तरफ से कोई अधिकृत व्यक्ति नहीं है इस बारे में कोई वो नहीं है व्यवस्था अच्छा अगर मैं जानना चाहूं कि आप शंकराचार्य के से जैसे शंकराचार्य हो और आप भी अपने आप को क्या मानते हो म आपको क सर्टिफिकेट दे रखा है क्या ज्ञान चर्चा करने का आपके दूसरा मैं दूसरा प्रश्न पूछ रहा हूं सर्टिफिकेट मैं आपको मैं आपको ब्लेम नहीं कर रहा हूं मैं केवल ये जानना चाह रहा हूं कि क्या ऐसी कोई आपके यहां पर कोई व्यवस्था है जिसमें रामपाल जी की अनुपस्थिति में उनकी ओर से किसी को उनका उत्तराधिकारी या उनका जो है अधिकृत नहीं उत्तराधिकारी तो इसका मतलब जब रामपाल जी नहीं है तो किसकी माने किसकी ना माने ये कुछ फिक्स नहीं है शायद आपने सुना ही नहीं मैंने क्या बोला कि आप सुनना नहीं चाहते हो मुझे सुनना चाहते हो आप हा मैं बोल रहा हूं कि आज रामपाल जी महाराज जी को 10 साल हो गए जेल धाम

00:05:57:24 गए हुए ये बात आप जानते हो कि नहीं जानते हो 10 साल से टीवी पर सत्संग चल रहे हैं जानते हो या नहीं जानते हो साधना चैनल है 7:30 बजे रोज आता है आज उनके 514 नामदान सेंटर है देल धाम जाने के बाद खुले गए ठीक है तो वो चल रहे देखिए वो चर्चा थोड़ी बदल रही है देखिए मैं आपको प्रैक्टिकली बताता हूं दिक्कत क्या है जैसे आपने कहा कि उनके 514 नामदान सेंटर है ठीक है अब उसमें रामपाल जी तो नहीं है 514 जगह रामपाल जी तो जेल में है रामपाल जी के नाम से जो वहां पर शिक्षा दी जा रही है वह कुछ और लोग दे रहे हैं तो जब कुछ और लोग रामपाल जी के नाम से शिक्षा वहां पर दे रहे हैं रामपाल जीने नियम बनाया ना व वो नियम सेही चल देखिए मैंने मैंने आपको एक ज्ञान गंगा पुस्तक पकड़ाई ठीक है अब ज्ञान गंगा पुस्तक में वही लिखा है जो रामपाल जी ने लिखा था या बदल दिया गया यह आपको कैसे पता चलेगा व तो हमारे गुरु जी वो जो पुस्तक छपा जब तक आप जेल नहीं जाओगे जब तक आप रामपाल जी के पास नहीं जाओगे तब तक आपको पता नहीं चलेगा ना या तो आपको मान

00:07:12:28 या तो आपको विश्वास करना पड़ेगा जो रामपाल जी के नाम से आपको पुस्तक दे रहा है आपको एक मानना पड़ेगा कि चलो इस पर विश्वास कर लेते हैं य वही ये वही ज्ञान दे रहा है जो रामपाल जी ने दिया मानना पड़ेगा है ना यानी कि आपने किसी और पर रामपाल जी की तरफ से विश्वास किया तो मैं यह कह रहा हूं यह जो विश्वास करने वाला नियम है यह रामपाल जी ने अपनी किसी पुस्तक में दिया है कि नहीं दिया है दे रखे उन्होने जो भी देखो भाई साहब है ना अपन उस पॉइंट प आते जहा से ज्ञान चर्चा करनी ठीक है क्या देखिए यय भी ज्ञान चर्चा है मैं देखिए इसमें कोई हार जीत वाली बात नहीं मैं आपसे बस जानकारी ले रहा हूं क्या रामपाल जी ने विश्वास किस पर करना है मेरी तरफ से और किस पर नहीं करना है इस बारे में कोई नियम दिया है क्या

00:08:00:02 जैसे हमारे पास एक नियम दिया जैसे मैं अपनी बात बताऊ आदि शंकराचार्य जी ने ममना मानुष आश्रम लिखा उसमें उन्होंने लिख दिया जो मेरे द्वारा स्थापित पीठ पर आरूढ़ लक्षण संपन्न सन्यासी होगा वह मुझ शिव का रूप ही मान्य है तो यह क्या हुआ नियम दे दिया अब भाई उनकी ओर से जो भी आएगा उनका उनके द्वारा उनका शिष्य फिर उनका शिष्य फिर उनका शिष्य तो वो हमारे लिए उसी रूप में मान्य हो जाएगा तो यह नियमावली हमें प्राप्त है और यह नियम ये भी जो नियम है ये आधारित है शास्त्रों के जो आदि शंकराचार्य जी ने जो नियम लिखा 62 श्वेता शत्र उपनिषद के आधार पर उन्होंने लिखा तो कहने का अर्थ ये है क्या ऐसा कोई नियम उन्होंने बनाया है मैं मान लीजिए मैं अभी एक ज्ञान गंगा छपवा लू प्रिंटर से और उसमें कुछ ऐसी बातें लिख दूं जो रामपाल जी ने नहीं लिखी है तो आपको कैसे पता चलेगा कि यह जो चीजें हैं वो रामपाल जी ने नहीं लिखी आप तो उसको रामपाल जी की मानोगे नहीं तो हो सकता है स्के उसमें क्या है मतलब करने वाले तो इसका मतलब इसका कोई सही ढांचा आपके पास नहीं है किस पुस्तक को लेना है किसको नहीं लेना है ठीक है हां मान गए पर सत्संग तो सुन रहे हैं उनके लाइव वो वो तो सुन सकते हैं सत्संग सुन रहे हैं मगर फिर भी सत्संग में पूरा वृहद ग्रंथावली तो नहीं

00:09:15:06 आ जाएगी ना सत्संग में उनके 3000 से ज्यादा एपिसोड है जिसमें 1000 ज्ञान गंगा पुस्तकें और बनाई जा सकती है यानी कि उन्होंने इतना सत्संग कर दिया है कि उसी से सब कुछ हो जाएगा सत्संग सुनने से सब अब मुझे भी तो वहीं से ज्ञान प्राप्त हुआ अब मे को ये पैदा होते से रामपाल जी महाराज का शिष्य तो थाा अच्छा एक बात बताइए सत्संग से सब हो जाएगा अभी आजकल एआई का जमाना आ गया है एआई से किसी ने रामपाल जी की कॉपी करते हुए रामपाल जी के नाम से गलत सत्संग बना दिया फिर क्या करेंगे अच्छा एक काम करते पहले मेरा सवाल का जवाब दे दीजिए नहीं नहीं मैं हम लोग अपनी मेन टॉपिक प आएंगे मगर अभी अभी जैसे आप पूरी तरीके से आप पूरी तरीके से डिपेंड हो गए हैं वीडियो पे तो वीडियो अगर किसी ने यह जो एआई वगैरह का जमाना आ गया इसमें वीडियो वो ऑडियो मिक्सिंग हो रही है तो रामपाल जी के नाम से रामपाल जी के चित्र आदि का एडिटिंग डिटिंग करके आपको कुछ गलत उसमें दिखा दिया सत्संग में तो आप फिर वहां पर आपका वो क्या है सोर्स निर्णायक आप मुझे बताइए ना कि वो जो वीडियो है वो वीडियो है वो कौन डालेगा आप बताओ कोई गलत व्यक्ति जो रामपाल जी की शिक्षा आप तक नहीं पहुंचाना चाहता है हां तो वो व्यक्ति साधना टीवी 7:30 बजे जो जाता है तो उस पर कोई आधिकारिक व्यक्ति उन्होने बिठा रखा रामपाल जी महाराज जी ने ये आज का स

00:10:30:21 हा मतलब की मतलब की साधना टीवी उनका आधिकारिक चैनल है वहां प आधिकारिक चैनल उनका नहीं भाई साहब उसके मतलब उनकी ओर से सही चीज दिखाता है हां वहां पर कोई बैठा है जो उनका सत्संग प्रसारित करने वाला कोई बैठा होगा ना हा तो मैं मेरा कहना यही है कि आज वो अच्छा व्यक्ति है साधना चैनल वाले का ओनर बदल गया कंपनी एक दूसरे से खरीद लेती है हा उसका मन बदल गया अब मुझे रामपाल के विरोध में दिखाना है मिक्सिंग करनी है तो हमारे पास कोई पैरामीटर होना चाहिए ना कि हमें क्या चीज किस पैरामीटर के हिसाब से सही माननी है किसके हिसाब से नहीं माननी है अब हमारे पास पैरामीटर सेट है बकुल सही बकुल और आपके पास वो सेट है कि नहीं मैं ये पूछ रहा था चलिए अब हम मुख्य विषय पर आते हैं समझ गया समझ बताता नहीं मैं बता देता हूं अब मैं समझ गया तो जवाब भी सुन लीजिए रामपाल जी महाराज ने अपनी तरफ से कोई ज्ञान दिया नहीं है जो भी ज्ञान दिया है उन्होंने कहां से दिया है एक है कबीर सागर दूसरा है गरीब दास जी का अमर ग्रंथ ठीक है तो जहां पर भी गड़बड़ होगी तो कबीर सागर मेरे पास रखा हुआ है देखो दिखा दूं नहीं तो आप बोलोगे आपके पास कबीर सागर नहीं है देख लीजिए तो जिस दिन मुझे लगे पढ़ रखा है दास ने तो वो समझ जाएगा कि इसमें मिलावट हो रही है आपके लिए अंतिम प्रमाण कबीर सागर है या वेद है वेद

00:11:45:26 नहीं है भाई साहब मैं वही तो पूछना चाह रहा हूं कि वेद का ज्ञान किसने दिया ये मेरा पहला सवाल ही आपसे है जी जी वेद किसने अभी इन सब हम लोग एकएक करके चलते हैं पहले एक फिर दूसरा फिर तीसरा हां बाद तो सवाल नहीं इस पर हम लोग सबसे पहले आते हैं कि अगर हम ये कहते हैं कि कबीर साहब भगवान है कबीर साहब भगवान है हम तो क्या वो सर्वशक्तिमान है सर्वशक्तिमान है हां है क्या वो सर्व नियामक है नहीं अभी रुको ना भाई साहब अभी रुको ना अभी एक एक पे चलते हैं ना आपके हिसाब से उसको भी क्लियर करते चले कि आपने जो ज्ञान आपने जो समझा है क्या वो सही भी है या नहीं है भाई साहब देखिए पहले मैं बता दूं आपको एक बात बता दूं पहले क्लेम सुनिए क्लेम आपने पहले शुरू किया है कि भाई वेदों में प्रमाण है कवि साहब भगवान है यह क्लेम आपने शुरू किया है पहले ठीक है अभी आप अभी आप उनकी तरफ से आए हो ना हमारे पास अभी आप उनकी तरफ से ही आए हो ना अब जब हम हम जब यह मानने को तैयार हो जाए कि कबीर साहब भगवान है तो हमें य जानना होगा ना कि वो भगवान वाले उनके पास है कि नहीं कि

00:13:00:28 यूं ही कह रहे हैं भगवान है और मैं मेरे को ये नहीं चाहिए कि आप कुछ करके दिखा दो कबीर साहब की तरफ से नहीं बस वो नियम तो बताओ कि क्या ये नियम आपने स्वीकार कर रखे हैं जो जो नियम ईश्वर होने के लिए आवश्यक है तो अभी मैं पूछ रहा हूं बोल रहा हूं कि आपने किस कौन से आधार पर नियम बना रखे कि ईश्वर की ये नियम है आप कैसे पहचानोगे कल को अगर ईश्वर अवता देखिए ये जनता तय कर लेगी अभी हम लोग कन्वर्सेशन करते हैं कि मैंने जो चीजें बोली है वो गलत है या सही है वो जनता तय करेगी हम यहां किसी जिदो जहद के लिए नहीं आए ठीक है एक एक करके चलते हैं अभी मैं पूछ रहा हूं आपसे क्या रामपाल दास जी के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है कबीर नाम है जिसका वह सर्वशक्तिमान है या नहीं सर्वशक्तिमान है व व क्या उसके ऊपर कोई भी नियम एक मिनट भाई अब हमारे को तो बोलने दो जन आया आपके द्वारा प्रतिवाद जब एक बात खत्म आप उसको पॉइंट को लिख लो मैं बताऊंगा मैं आपको हमारे द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर बताऊंगा ठीक है अभी जब एक पॉइंट इसको कंप्लीट होने दो पहले इसको आप कंप्लीट होने दो हा इसको आप कंपलीट होने दो तो यदि वो सर्वशक्तिमान है

00:14:16:10 यदि आपका कबीर सर्वशक्तिमान है तो क्या वह किसी भी प्रकार के नियम के नीचे है कि नहीं है बिल्कुल वो उनके बनाए हुए नियम के नीचे है मैं मानता हूं अच्छा मतलब ऐसे बहुत से काम है जो नहीं कर सकता बिल्कुल हा सत्य सत्य तो फिर वो बाधित है सीमित है उसकी शक्तिया सीमित है बिल्कुल सर्वशक्तिमान तो है पर उसकी सीमित है ऐसा नहीं सव शक्तिमान का अर्थ क्या होता है मैं आपसे जानना चाह रहा हूं भाई क्या सर्वशक्तिमान का अर्थ आप बताओ मुझे स सर्वशक्ति सर्व शक्ति सभी कार्य सर्व यानी सभी सभी कार्यों को करने की शक्ति को रख वाला सर्वशक्तिमान अब सभी कार्यों में आप कह रहे हो कि नहीं नहीं कुछ कार्य ऐसे जो वो नहीं कर सकता क्या प्रैक्टिकल हैय आप जो बोल रहे हो क्या प्रैक्टिकली सही है बिल्कुल प्रैक्टिकल मैं बिल्कुल सिद्ध कर दूंगा पहले अभी आपको पहले एक्सेप्ट करना होगा कि वो स अरे भाई मैं ये कह रहा हूं कि मेरे पास ईश्वर है ही नहीं मैं अभी आपको कह रहा हूं है ही नहीं ईश्वर अब आप अपने ईश्वर को सर्वशक्तिमान तो सिद्ध करोगे कि नहीं करोगे य दुनिया को नास्तिक बना दोगे कि क्योंकि किसी के पास नहीं है क्योंकि किसी के पास

00:15:31:15 नहीं है इसलिए मेरा सही है नहीं नहीं ऐसा क्योंकि किसी के पास क्योंकि किसी के पास टिकट नहीं है इसलिए मेरे पास भी टिकट ना होना उचित है ऐसा तो नहीं है दूसरे के पास टिकट है या नहीं है डजन मैटर आपके पास टिकट है कि नहीं यह मैटर करता है अभी आपसे बात हो रही है शमान ईश्वर है वो उसके कुछ नियम है उस नियम को फॉलो करता है वो ऐसे नहीं कि यानी वो अपने बनाए हुए नियम नहीं तोड़ सकता बिल्कुल सही अपने नियमों को तोड़ने की शक्ति उसमें नहीं है नहीं है शक्ति वो शक्ति नहीं है उसके अर तो सर्वशक्तिमान कैसे हुआ तो फिर वो नहीं हु सर्वशक्तिमान आपका श्वर बोलो पहले आप ये पहले जनता के सामने थोड़ा एक्सेप्ट करो कि हा वो क्लियर की कबीर सर्वशक्तिमान नहीं है तो भाई एक बात बताओ मुझे आपने ऐसा बोला ठीक है अरे भाई आपने बोला ना नहीं है अब बोलो आपने बोला नहीं है सर्वशक्तिमान पहले बोलो बोलो मेरा ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं है बोल दिया मेरा नहीं कबीर कबीर सर्वशक्तिमान नहीं है बोलो कबीर सर्वशक्तिमान नहीं है बोल दिया बढ़िया अब आप बताइए जब वो सर्वशक्तिमान नहीं है जब वो सर्वशक्तिमान नहीं

00:16:46:19 है अब आप श्वर को लेना चाहिए ना य पर चलो अच्छा अब हमारे ईश्वर के बारे में पूछो हा सक्तिमान हैते ठीक जी अभी श्रावण के महीने में 12 बच्चे मना रहे थे उसमें से नौ बच्चे उनके ऊपर दीवार गिर गए और मर गए उ दबकर सर्वशक्तिमान ईश्वर जो थे उन्हों क्यों नहीं बचा पाए अच्छा ठीक है अब मुझे आप एक बात बताओ क्या यह जो संसार है यह भगवान के लिए क्या है हमारे हिसाब से तो ये तो आपके ईश्वर के हिसाब से ये सब चीजें हमारे हिसाब से तो काल का जाल है मैं जिस ईश्वर को जानता हूं आपके ईश्वर के यहां पर होने वाली घटनाएं क्या आपके ईश्वर को प्रभावित करती है या नहीं मतलब की नहीं करती मतलब कि यहां पर किसी का रेप हो रहा है तो उसको दुख होगा या नहीं होगा मेरे ईश्वर को इस बात से दुख होता जरूर है ठीक या ईश्वर को भी दुख होता है हा बिल्कुल उनको दुख होता है उनके बच्चे सब कबीर को दुख होता है बिल्कुल वो बोलते है मे रोव सृष्टि को यष्टि तो अब आप ईश्वर की व्याख्या करिए जरा अब

00:18:01:25 ईश्वर से ईश्वर का अर्थ क्या समझते हैं आप अब मैं तो बता रहा हूं ना कि जिस ईश्वर ने हमें जन्म दिया या जिसने हमारी उत्पत्ति करी है वो श्वर हम दुखी होते तो ईश्वर को भी दुख होता है ठीक है हम हमारे अज्ञान के कारण इस काल के लोक में बैठकर दुखी हो रहे हैं मतलब कि यहां से जो सभी जो मुक्ति कही गई है वो मुक्ति भी मुक्त नहीं क्योंकि हमारा ईश्वर भी दुखी होता है क्यों नहीं दुखी होंगे बताओ उस ब तो फिर मुक्त कहां से तो फिर हम हम हम मुक्ति जो हमें कह रहे हैं कि हम इन सारे रो दोष कलेश से मुक्त हो जाएंगे दुखों से मुक्त हो जाएंगे वहां जाकर के जब जिसका जो हमारा भगवान है वही दुखी हो रहा है तो हमारे को उस भगवान तक जाने की क्या आवश्यकता है भाई तोब आपका भगवान भी दुखी हो रहा है भगवान सुख तो है जब य से आत्मा सतलोक को चले जाती तो सुखी भी तो होता है वो अरे ऐसे तो हम यहां भी खुश होते हैं य हम खुश नहीं होते क्या य सारे सुख ही नकली है भाई कौन सा सुख मैं कह रहा हूं सुख नकली है दुख नकली है ठीक है मगर वहां भी जाकर के दुख तो है ना मुक्ति नहीं है ना दुखों से सवाल का जवाब नहीं दिया भाई कि वो ईश्वर भाई मैं जब आपका जब ई बात यहां पर खत्म हो रही है क्योंकि

00:19:16:26 मैं तो सारे सवालों के जवाब देने बैठा हूं नहीं मेरे ईश्वर के साइड हो गए ना अब तो आपके ईश्वर की बात चल रही है कि आपका ईश्वर उन बच्चों को क्यों नहीं बचा पाया सर्वशक्ति क्योंकि सुनिए मैं बता रहा हूं बचा पाने की बात नहीं है बचा पाने की बात नहीं पहले सुनिए क्योंकि इस संसार को बनाने वाले ईश्वर हैं इसका अर्थ यह है कि उन बच्चों के साथ जो घटना हो रही है ना उस घटना को भी भगवान नहीं बनाया है और बच्चों को भी भगवान नहीं बनाया है भगवान के लिए भगवान के लिए यह केवल एक खेल है और इससे ज्यादा कुछ नहीं है इसलिए यहां पर होने वाली अच्छाई अथवा बुराई भगवान से नहीं चिपकती क्योंकि भगवान ने बुलाया जैसे मान लीजिए फॉर एम एक पेंटर है जो पेंटिंग कर रहा है ठीक है एक स्त्री की पेंटिंग कर रहा है वो क्या उस जब वो पेंटिंग करेगा उसकी आंखों में कलर भरेगा तो उसके जो नीचे के पार्ट्स होंगे जो आपत्ति जनक होते हैं हमारी दृष्टि से स्त्री के लिए मगर क्या पेंटर जब पेंटिंग करेगा उसके उन पार्ट्स में जहां पर आपत्ति हो सकती मनुष्य दृष्टि से तो क्या वह बुरा माना जाएगा पर आपने मेरा जवाब मतलब है सुनिए इसका मतलब है जो निर्माता है एक मिनट यार एक मिनट अभी मुझे पूरा करने दो

00:20:31:28 जो निर्माता है उसके अनुसार जो अच्छाई और बुराई है उसमें कोई फर्क नहीं है क्योंकि दोनों को उसी ने बनाया है फर्क हमारे लिए है हमारे लिए अच्छाई और बुराई है क्यों क्योंकि हमें ईश्वर को प्राप्त करना है ईश्वर को किसी को प्राप्त नहीं करना है जिससे जिस लिए उसके लिए कुछ भी अच्छा बुरा नहीं है सब कुछ एक समान है हम लोग घबरा रहे हैं जैसे कि घर में जब छोटे बच्चे होते हैं वो बेकार की चीजों को लेकर रोने लगते हैं बेकार की चीजों को लेकर के एक्साइटेड होने लगते हैं अरे मुझे वो दिला दो वो दिला दो हम लोग सच्चाई जानते हैं ये बेकार में ही टेंशन ले रहा है ऐसे ही ईश्वर सच्चाई जानते हैं कि बेकार में टेंशन ले रहा है वस्तुतः तो ये मुक्त है इसको मुक्त होना है इसका वास्तविक स्वरूप तो कुछ और है नैनम छिंदंति शस्त्राणि नैनम दहति पाव का ना चैन क्लेप न शति मारता जब आत्मा को कोई नुकसान होता ही नहीं है तो भगवान उससे क्यों दुखी हो मगर आत्मा जो जीव भाव को प्राप्त मनुष्य शरीर के अंदर आ गई है उसको टेंशन होती है क्योंकि वह अज्ञानता में है ईश्वर अज्ञानी नहीं है जो वोय ना समझ पाए बेकार मेंही हो रही है परेशानी तो बच्चे जो मरते हैं यह होते हैं आत्मा को कुछ नहीं होता यह बात भगवान जानते हैं दुखी हम होते हैं क्योंकि हम जीव भाव को प्राप्त है भगवान जीव भाव को प्राप्त नहीं है

00:21:47:01 मगर आपका भगवान हैका भगवान है आपका जवाब बिल्कुल गलत बता रहा हूं देखो दिल्ली में हत्याकांड हुआ था हत्याकांड उसम मेरी बात सु एक बस में एक लड़की के साथ पांच दरिंदे जबरदस्ती सामयिक बलात्कार कर रहे थे उनके गुप्तांगों में रोहे की ला रा डाल दी थी तो उस लड़की को दर्द नहीं हो रहा था क्या उस आत्मा को दर्द नहीं हो रहा था अच्छा चलिए ठीक है कबीर को हो रहा था क्या ठीक कबीर को हो रहा था मैं पूछ रहा हूं कबीर नहीं हो रहा भाई नहीं सुनिए आत्मा अज्ञानता वश स्वीकारा कि मेरा परमात्मा सर्वशक्तिमान आपने आपने आपने कुछ आपने एक प्रश्न पूछा है सक्तिमान नहीं ना भाई सिद्ध हो गया आप आपके परमात्मा की बात चल रही है कि आपका अरे तो मैंने तो बता दिया ना दुख नहीं हो रहा नन चि सत्रा नन पाव मैंने गीता से बता दिया अरे मेरे भाई मैंने मैंने गीता से बता दिया है आपको सुनना नहीं है आपको सुनना नहीं है मैंने गीता से बता दिया आत्मा को कुछ नहीं होता है तो यह जो मरना जीना है यह हम अज्ञानता वश देख रहे हैं वस्तुतः आत्मा को कुछ नहीं होता है मैंने गीता से प्रमाण दे दिया और भी ेर सारे प्रमाण अ ब्रह्मा लिखा हुआ है सुनिए ना आपके

00:23:02:08 हिसाब से ईश्वर इस शरीर की मदद करने कभी नहीं आएंगे आ सकता उसका मन है उसका मन है उसका मन है अच्छा ये बताइए उसका मन है वो आए या ना आए मगर वो प्रभावित नहीं हो सकता कि नहीं नहीं बचाना ही है बाउंड नहीं हो सकता तो अगर मान लो ईश्वर को रक्षा के समय याद करने पर भी ईश्वर नहीं आता है तो फिर वो वो कण कण में व्याप्त होते हुए वहां प होते हुए व वहां प ईश्वर है वो देख रहा है अरे मेरे भाई ये ये पॉइंट तो आपके ईश्वर पर भी लागू हो रहा है ये मैं आपसे भी पूछ सकता हूं मेरा सर्वशक्तिमान नहीं आपका सर्वशक्तिमान तो सर्वशक्तिमान नहीं है तो कौन-कौन सी शक्ति पहले ये बता दो कबीर में है कौन-कौन सी शक्तियां मैं बताऊंगा तो आप सुनोगे भी हां सुनूंगा बताओ जब वो जब वो जब आप ये कह रहे हो कि वो बचाने नहीं आ सकता है कौन सी शक्तियां है फिर उसके अंदर मेरे ईश्वर जो कबीर परमेश्वर है उन्होंने तो पहले बोल दिया कि आप लोग काल के लोक में बैठे हो यानी कि सुनिए एक मिनट एक मिनट मैं पॉइंट विषयात हो रहा है हो रहा इसलिए बता दू आप जब कबीर का प्रमाण दे रहे हो तो व हम माने मैंने अपना प्रमाण दे दिया मैंने अपना प्रमाण दे दिया कि हम वस्तुतः आत्मा है आत्मा को कुछ नहीं होता मनजी का मन मर्जी हो गए वो कोई रक्षा के बुलाएगा तो आपका ईश्वर वहां नहीं पहुंच सकता तो सर्वशक्तिमान कैसे हो

00:24:17:08 गया बताओ फिर क्यों भक्ति कर अरे भाई वो मजबूर नहीं है पहुंचने के लिए वो पहुंच सकता है वो मजबूर नहीं है मैं मजबूरी की बात आप मजबूर कर रहे हो वो मजबूर नहीं है पहुंचने के लिए के लिए वस्तुत ये खेल है जिसके साथ रेप हो रहा है वो याद सुनिए हां को याद कर रहा है कि भाई भगवान मुझे बचाओ ये लोग मे साथ बड़े गलत व्यवहार कर रहे हैं तो वो क्यों नहीं प अरे तो भाई ये बताइए जब बच्चे को खामा खा का दुख हो रहा होता है तो क्या मां-बाप उस समय दुखी होते हैं आपके घर में मतलब आपके हि ब खाम खा ब ये दुख अरे तो अच्छा अच्छा एक बात बताओ जी अच्छा अच्छा एक बात बताओ जीव अविनाशी है कि नहीं मैं बोल रहा आपके हिसाब से बताओ मुझे मैंने पूछा वो तो बताओ मैंने जो पूछा है वो तो अरे भाई आप झक मारने आए हो समझ गया झक लड़ाने आए हो मैं समझ गया सर्वशक्तिमान जीव को अविनाशी मानते हो कि नहीं मानते हो जीव तो अविनाशी है तो गीता जी भी बोलती है मैं मानता गीताज भी गीता अब गीता जी की बात छोड़ो रामपाल भी तो कहते हैं जीव अविनाशी है ठीक है तो इसका मतलब वो भीय मानते हैं देह के नाश से आत्मा का नाश नहीं होता

00:25:32:20 नहीं होता सही बात है नहीं होता तो वो बच्चे मरे तो उनका नाश हो गया क्या बच्चों के देह का तो नाश हो गया अरे उनका नाश हुआ क्या अच्छा देह वा देह उनका वास्तविक स्वरूप है क्या नहीं वास्तविक स्वरूप नहीं था भाई पर व वो भी तो देह के जो यहां पर देह मिली थी जो वो दुख है देखिए पहली बात तो य है अभी कंक्लूजन निकाल ले अभी तक की का पहली बात तोय आपने स्वीकार कर लिया कबीर सर्वशक्तिमान नहीं है दूसरी बात ये स्वीकार कर लिया कि वो भी दुखी होता है वो मुक्त नहीं है वो भी दुखी होता है ना दुख होता है उनकी मर्जी से जैसा आपका ईश्वर मर्जी से आता है मर्जी से जाता है उनके मन में आता है दया करके आ जाते ज्ञान देने नहीं मन में आता खुद कहा है ना वो दुखी होता है तो उनके मर्जी का है ना हो सकता है वो अपने बच्चों को मुझे दुखी होना है कि नहीं होना है किस बात प होना है मेरी मर्जी है मेरी मर्जी बिल्कुल सही ठीक ठीक है तो अभी जो आप मैंने आपसे पूछा कि यहां के जो लोगों पर जो गड़बड़ होती है उनके साथ यहां के लोगों के साथ कि मैं मर रहा हूं मैं जी रहा हूं मुझे दर्द हो रहा है मुझे ये हो रहा है इन सबका प्रभाव कबीर पर होता है कि नहीं कबीर जी पर होता है वो तभी तो यहां आते है भाई मैं झूठ क्यों बोलूंगा होता है हम कबीर पर होता है हा ये काल के लोग तो यानी वो भी वो भी वो भी यहां के जो रोग दोष क्लेश

00:26:47:27 है इनसे प्रभावित होते हैं बिल्कुल हम उनके बच्चे हैं यार हम दुखी है तो दुखी होते हैं आपका ईश्वर नहीं होता होगा मेरा ईश्वर होता है बिल्कुल या कबी भी मुक्त नहीं है दुख से मुक्त नहीं है कबीर जी आपकी ईश्वर को दुख होता है कि नहीं आप ये बताओ अरे मैंने बता तो दिया मेरे भाई कि मेरे ईश्वर के लिए जो ये वो ये जानता है कि यह जो जीव है यह अज्ञानता वश अपने आप को दुखी कर रहा है वस्तुतः इसकी स्थिति अविनाशी है यह खामा खा भय कर रहा है वस्तुतः इसकी स्थिति जो है अविनाशी है इसलिए वो जब मन आता है उस खेल सुनिए जब मन आता है तो उस खेल में उसको बचाने आता है जो उसके लिए खेल है और जब मन आता है तो नहीं भी आता है वो की मर्जी है मगर आपका ईश्वर तो अ वो है जो दुखी होता है वो मजबूरी में आता है आपके हाथ में गर्म शरीय पकड़ा दिए जाए तो आप बोलोगे जीव अपने आप ही दुखी हो रहा है ये जो दुख हो रहा है जिससे बोले आ रहे हैं आपके हाथ में गर्म शरीय पकड़ा दिए जाए तो आपका ईश्वर ये सोचेगा कि ये तो जबर रहा है सुनिए ये सुनिए ये व्यवहार और परमार्थ का अंतर होता है सुनिए जैसे पृथ्वी जो है जैसे पृथ्वी जो है वो वास्तव में गोल है ठीक है सेटेलाइट इत्यादि

00:28:03:02 के द्वारा जब हम देखें तो पृथ्वी क्या है गोल हमें दिख कैसी रही है फ्लेट है दिख फ्लेट हैट दिख रही है तो इसी प्रकार से जो हमारा वास्तविक स्वरूप है वह अविनाशी है मगर हमें दिख कैसा रहा है कि उसका विनाश हो रहा है उसको दर्द हो रहा है उसको वो हो रहा है यह हमारे दृष्टिकोण पर निर्भर जब हम मुक्त हो जाएंगे तो हम भी कहेंगे य पृथ्वी गोल है मतलब पृथ्वी से जब व्यक्ति मुक्त हो जाएगा तो वो भी पृथ्वी को देख के कहेगा हा यार ये तो गोल थी अच्छा मुझे होने के लिए आपको होता अगर कोई आपको पीछे से चार लट मार दे जम देखिए अब जो है हमारी जो चर्चा है ना वो बेकार की हो रही है सुनिए बेकार की हो रही है आपका ईश्वर सर्व शक्तिमान नहीं है आपका ईश्वर दुखी भी होता है वो मुक्ति नहीं है वहां जाना आप ये बताइए मुक्ति का क्या मतलब है आपके अनुसार मुक्ति का क्या मतलब मुझे एक बात बताइए पहले मुक्ति का मतलब क्या है भाई साहब भाई साहब मतलब भाई साहब क्या है मेरे सवाल का जवाब दे दो गुरु आप एक मैंने दिया तो है आप रिपी कर रहे हो अलग अलग तरीके से सुनो आपने देखिए एक ही सवाल को अलग अलग तरीके से रिपीट किया मैं बता देता हूं पहले आपने कहा पहले आपने कहा 12 बच्चे ठीक उसी तरह का दूसरा सवाल लड़की के साथ एक जो

00:29:18:06 हत्याकांड हुआ था ठीक वही सवाल था बस उसम जो पात्र थे पात्र बदल गए घटना का आपने बताया ये क्यों नहीं बचा पा रहा है ठीक अब आ गया आपके हाथ में बारबार मैं वही आपको उत्तर दे रहा हूं आप एक नई घटना लेकर के आ रहे हैं अभी आप अपना अंतिम प्रश्न पूछ लीजिए घटना नहीं ला रहा मैं घटना नहीं ला रहा हूं आपको कैसे पता चला कि ईश्वर सर्वशक्तिमान ही है यह कहा से यह आपका प्रश्न है हा य प्रश्न है सुनिए असतो मा सद गमाया तमसो मा ज्योतिर्मया मृत मा मतम गम मुझे असत से सत की ओर ले चलो ब उपनिषद एकती 28 असतो सद आप जिसका बोल रहे हो उसका क्यों मान उप अरे मैं मान नहीं रहा हूं मैं नहीं कह रहा हूं उसको आप मान लो मैं मान नहीं रहा

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00:30:10:18 मैं समय सि बोल रहा हूं समय सि बोल रहा हूं शलोक पर विश्वास नहीं लोक आप बोल रहे विश्वास मत करना आप मना कर देना मुझे नहीं मानना है ठीक है मैं अपना अपनी जो बात कहूंगा तर्क और प्रमाण दोनों से कहूंगा बिना तर्क के नहीं कहूंगा वो लोक कहां

00:30:29:00 से आया किसने लिखा वो मैं सब बताता जाऊंगा मैं सब बताते जाऊंगा ठीक है अभी मैं तर्क और प्रमाण दोनों पर बात कर रहा हूं ठीक ठीक है असतो मा सगम तमसो मा ज्योतिर्मया ममा मतम एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी कभी ना मरने की चाह विद्यमान है नास्तिक भी है भगवान को नहीं मानता है मगर वह कभी मरना नहीं चाहता है एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी समस्त समग्र ज्ञान अखंड ज्ञानी बन जाने की चाह विद्यमान है सब कुछ जान लेना चाहता है और एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी सदा आनंदित रहने की चाह विद्यमान है सत चित आनंद अब इसका निचोड़ अगर करें तो एक नास्तिक व्यक्ति के मन में भी कभी-कभी यह बातें आती हैं कि बारिश ज्यादा हो रही तो कम हो जाए धूप ज्यादा पड़ रही तो कम हो जाए यानी कि वह मौसम को भी कंट्रोल करने वाला बनना चाहता है ठीक है और इसी प्रकार से उसके मन में ये भी चाह कभी-कभी आती है कल भारत पाकिस्तान का अगर मैच है तो उसमें कौन जीते कौन नहीं जीते क्या हो भविष्य देखना चाहता है भविष्य देख लेना चाहता है इसका अर्थ क्या है वो प्रकृति के सभी जितने भी नियम उसे बाधित कर रहे हैं वह सभी पर पजेशन कब्जा कर लेना चाहता है

00:31:44:09 तो ये उसके अंदर की ऐसी इनबिल्ट चाह है नास्तिक के अंदर भी जो वो अपने से अलग नहीं कर सकता उसके मां बाप बूढ़े होंगे तो उसको दुख होगा जब वो भर्ती होंगे अस्पताल में जब वो मरने की भाव उसके अंदर आएंगे तो वो डरेगा चाहे उसको कितना भी बता दो कि इस दुनिया में कोई अमर नहीं है फिर भी वह डरेगा यानी कि वो विज्ञान के विरुद्ध अपनी जो अमरता की चाह है उससे अलग नहीं हो पा रहा है ठीक है तो विज्ञान के विरुद्ध जो प्रकृति पर कब्जा कर लेने की प्रकृति को अपने अधीन कर लेने की चा उसके अंदर जो विद्यमान है उसी से य सिद्ध होता है कि इस दुनिया में कोई ऐसी सर्वशक्तिमान सत्ता है जिससे की जिसके अधीन यह प्रकृति है ठीक है अरे भाई मेरे को पूरा कर लेने दो फिर तुम क्रॉस करना फिर तुम क्रॉस करना हमको भी सुनना अच्छे से कभी दास बोले तो आप तो सु सुने आपके सारे व दे

00:32:48:25 सुने सुनि अरे भाई साहब सुनिए तो इसका अर्थ यह है जैसे हमारी अंदर अगर भूख है तो उससे सिद्ध हो जाता है कि दुनिया में भोजन है हमारे अंदर प्यास है तो उससे सिद्ध हो जाता है कि दुनिया में पानी है हमारे अंदर देखने की क्षमता है तो उससे सिद्ध हो जाता है कि दुनिया में दृश्य है हमारे अंदर सुनने की क्षमता है तो उससे य सिद्ध हो जाता है कि दुनिया में क्या है धुनि आवाज स्वर तो जिस प्रकार एक नास्तिक के अंदर भी व्याप्त भूख से भोजन का अस्तित्व सिद्ध होता है प्यास से पानी का अस्तित्व सिद्ध होता है प्रकार एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी व्याप्त जो सत चितता आनंद की चा है उस चा से सच्चिदानंद का स्वरूप परमेश्वर का अस्तित्व सिद्ध हो जाता है ठीक है तो अभी हमने यहां से जाना कि परमेश्वर का अस्तित्व कैसे आया मनुष्य के अबाध बन जाने की चाह से मनुष्य अबाध बनना चाहता है उससे सिद्ध होता है कि इस दुनिया में कोई अबाध है तो अब जब मनुष्य के अंदर अवाद बन जाने की चाह है तो इस अवाद बन जाने की चाह का जो सब्जेक्ट होगा वो कौन होगा जो अवाद हो जो सर्वशक्तिमान हो मनुष्य क्या बनना चाहता है सर्वशक्तिमान

00:34:05:01 मनुष्य बनना चाहता है तो इस चाह का जो विषय होगा कौन होगा जो इसकी पूर्ति कर सके तो पूर्ति कर सके मनुष्य सभी दो सभी दुखों से दूर हो जाना चाहता है तो फिर इस चाह का विषय कौन होगा वो ईश्वर जो किसी भी दुख से ग्रसित ना होता हो सत चित आनंद हो मनुष्य सच्चिदानंद बनना चाहता है तो उसका ईश्वर कौन होगा जो सच्चिदानंद हो मगर आप आप जो ईश्वर दे रहे हो संसार को व सच्चिदानंद नहीं है यह आपने खुद ही कहा वो मनुष्य की चाह का विषय ही नहीं है मनुष्य ढूंढ रहा है पानी उसको दिया जा रहा है तेजाब मनुष्य ढूंढ रहा है पानी उसको दिया जा रहा है अल्कोहल प्यास बझाए वो दोना मनुष्य शांति ढूंढ रहा है और शांति के लिए भगवान को पुकारता है तो सर्वशक्तिमान ईश्वर तो आ ही नहीं पाते उस टाइम

00:34:57:27 बातें में समझ गया हूं अब अब देखिए जो हमारी जनता देखिए आप भाही रिपीट कर रहे हैं मैंने आपकी सारी बातों का जवाब दिया है आप रिपीट कर रहे हैं तो सर्वशक्ति आप सर्वशक्तिमान प्रूफ ही नहीं कर पाए भाई अच्छा 3 साल अब आपने पूछा कि आप सुनिए ठीक है मैं प्रूफ कर पाया नहीं कर पाया ये कौन देखेंगे जनता देखेगी अब हम चले आगे बढ़े ठीक है चलो आगे बढ़ते हैं अब मुझे बताइए आप वैदिक है कि नहीं रामपाल जी द्वारा जो ज्ञान दिया जाता है वो वेदा दि शास्त्र सम्मत है कि नहीं वही बात है अब मेरा सवाल य कि वेद कहां से वेद का ज्ञान किसने लिखा वेद का ज्ञान इस बारे में बात करूंगा वेद का ज्ञान वेद सुनिए सुनिए मैं बताता हूं अरे भाई प्रश्न कर लिया मैं जवाब दे रहा हूं आपको जवाब दे रहा हूं ब्रदर उपनिषद दो च 10 उपनिषद यह तो बहुत बाद की बात है भैया किसने लिखा उपनिषद वाला जिसका बात कर रहे ठीक है ठीक है वेद आदि जो शास्त्र है जो शास्त्र जिनके ऊपर हमारे धर्म अधर्म का निर्णय होता है वो शास्त्र अपौरुषेय

00:36:08:19 अरुष का मतलब समझते हैं आप बताइए मैं नहीं समझता अरुष है जिनकी रचना किसी ने नहीं की ईश्वर ने भी नहीं की अष शास्त्र है गब हां तो ठीक आप उनको मत मानो अभी आप ये बताओ अभी आप ये बताओ मानो तब ना कि पता तो चले किसने लिखे किसका ज्ञान ज्ञान भाई वो अप है ना उनको किसी ने नहीं रचा तो हमारे पास कैसे आ गए जब किसी ने नहीं रचा तो आपके पीछे जो तपो बल से तपोबल से हमारे ऋषि गण मंत्र के दृष्टा बनते हैं दृष्टा रचते नहीं है मंत्र के दृष्टा बनते हैं और वह फिर पहले गुरु शिष्य परंपरा के द्वारा श्रुति स्थानांतरित होती है फिर उसके बाद एक समय पर आकर के जब प्रज्ञा शक्ति और कम होने लगती है तो उनको लिखना शुरू कर दिया जाता है गुरु शिष्य परंपरा के आप वही बोल रहे वेदव्यास नहीं वो अपने बुद्धि से लिखे मतलब जो उन्होने दिव दृष्टि से वेदव्यास जी ने अपने मेरे भाई पहले देखिए आपने एक प्रश्न किया था मैंने उसका उत्तर आपको दे दिया वो उत्तर सही है कि गलत है वो उत्तर सही है कि गलत है जनता अभी मैं आपसे पूछ रहा हूं आप वैदिक हो कि नहीं आप वैदिक हो कि नहीं मैं कैसे मैं वैदिक क्यों मानूंगा पहले मुझे बताओ ना वेद कहां से आए तो मैं बोलू अरे मैं नहीं मनवा रहा हूं ना

00:37:23:25 मैं एक एक करके बनवाऊंगा पहले आप कहो तो कि मैं वैदिक नहीं ह तब तो मनवा आप तो कहते हो वेदों में प्रमाण है वेदों में प्रमाण है क्यों कहते हो कना कह दो भैया हम तो अपने कबीर सागर से मानते हैं भगवान हम वेदों से नहीं मानते तो यानी रामपाल झूठ बोलते हैं नहीं वो क झूठ बोलेंगे भैया भाई रामपाल कहते हैं सद ग्रंथ है हा है सद ग्रंथ कहते है सद ग्रंथ का अर्थ क्या है अब देखो कबीर जी ने बोला है जो कबीर को श्वर माता भाई सुनो मैं जो पूछ रहा हूं वो बताओ सद ग्रंथ क्या है सद ग्रंथ ऋ ऋषियो ने जो अपने जो सद ग्रंथ सद ग्रंथ सद सद का अर्थ बताओ पहले सद सद का अर्थ क्या है सद मतलब सच्चे सदगुरु का अर्थ क्या है सच्चे सच्चे सद ग्रंथ सच्चे ग्र सच्चे ना तो फिर वेदों को मानते हो ना नहीं मानता य दास तो नहीं मानता वेद नहीं मानते तो रामपाल को नहीं मानते रामपाल को नहीं मानते अरे तो अरे तो भाई तो वो जब कह रहे हैं कि व सद ग्रंथ है वेद कह रहे हैं ना तो मानते हो कि नहीं मानते कबीर जी ने बोला है भ्रम गए जब वेद पुराना वो बोल रहे वेद का ज्ञान भम हुआ है तो ठीक है आपका आने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

00:38:39:07 भाई साहब हमें आपका कबीर पंथी नहीं सुननी हो गया हो गया ठीक है आप

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00:38:44:13 जा सकते बिल्कुल उल्टे कहां से या बिल्कुल चले जाते हैं ऊपर से तो यह हाल है कबीर को भगवान मानने वालों का कबीर सर्वशक्तिमान नहीं है कबीर भी दुखी होता है वहां भी दुख है इनके जो सतलोक आश्रम है वहां भी दुख है और इसके अलावा यह वेद को नहीं मानते हैं ठीक है रामपाल को मानते हैं वेद को नहीं मानते उसी तरीके से जैसे अब मैं कहूंगा तो किसी को बुरा लग जाएगा मुझे एक ले दे के एक ही उदाहरण याद आ जाता है वह क्या उदाहरण है कि हम शिव जी को बहुत मानते हैं बहुत मानते हैं शिव जीी जो है मगर शिव जीी जो है वह भगवान नहीं है भगवान के दास है मगर हम शिव जी को बहुत मानते बत मानते फिर उसके बाद अगला क्या आता है कि शिवजी तो परम वैष्णव भी नहीं है वो जो दो में बताया ना शिवजी अपनी इंद्रियों को कंट्रोल

00:39:59:20 नहीं कर पाए दो में बताया तो था व अपने इंद्रियों को कंट्रोल नहीं कर पाए बल्कि हरिदास ठाकुर जो थे वह ज्यादा बड़े वैष्णव है क्योंकि उन्होंने अपनी इंद्रियों को कंट्रोल कर लिया तो शिवजी जो है परम वैष्णव भी नहीं है व हम यूं ही कहते हैं अच्छा हम जो है शिव जी पर चढ़ा हुआ प्रसाद भी नहीं खाते हां क्योंकि शिव और विष्णु में भेद है और कहीं पर पुराण में दिया गया है कि किसी अन्य देवी देवता पर लगा हुआ प्रसाद ना खाना तो हम क्योंकि भेद मानते हैं तो इसलिए प्रसाद नहीं खाते हैं मगर हम शिव जी को बहुत मानते हैं आप समझ रहे हो ना शिव जी आप हमारे लिए क्या हो तो शिव जी कहते हैं मैं समझ रहा हूं मैं आपके लिए बेवकूफ हूं तो यह भाई साहब भी रामपाल को रामपाल जी को इसी तरी से मानने वाले हैं कि मैं बहुत मानता हूं रामपाल जी को हां जब वेदों को नहीं मानते तो वेदों से प्रमाण क्यों देते हो अब आगे यह जो अभी लाइव स्ट्रीम हुई है इसमें से निकाल करके शॉर्ट बनाना कि ये है रामपाल दास के फॉलोअर एक तरफ वेदों का प्रमाण रखते हैं विदों में प्रमाण कबीर साहब भगवान है जब इनको दे दिया वेदों से प्रमाण अब इनको पता

00:41:14:20 चल गया इसके पास वेदों में कट्टा भर के प्रमाण है जब इनको वेदों से प्रमाण दे दिया कि कबीर भगवान नहीं कबीर के कबीर कबी कवियों के कवि जो है गणपति है गणेश जी भगवान है कबीर भगवान नहीं जब इनको प्रमाण दे दिया तो अब वेदों को मानते यह रामपाल को तो मानते हैं मगर रामपाल दास जिनको सद ग्रंथ कहते हैं उनको सद ग्रंथ सच्चे ग्रंथ नहीं मानते और इनकी ईश्वर की डेफिनेशन ही कुछ अलग है वह सर्वशक्तिमान नहीं है वो दुखी होता है तो ऐसे ईश्वर को प्राप्त करने के लिए कोई भी व्यक्ति क्यों प्रयासरत हो हा वह भी दुखी होता है फिर क्या होगा कि कैसे जब हम परंपरा प्राप्त आचार्यों की शर गत हो कर के जब हम धर्म का पालन नहीं करते धर्म के लिए प्रतिवाद नहीं बनते हैं तब क्या स्थिति आएगी जब वहां पर मुक्ति नहीं है जब वहां पर सर्वशक्तिमान ईश्वर नहीं है तो धर्म का भी तो लोप होगा भाई धर्म का अर्थ क्या है पहले यह समझना होगा सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को परिभाषित कर सकने वाले शास्त्रों द्वारा सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त करने के निमित्त बता ई जाने वाली विधि का नाम धर्म है

00:42:30:04 तो जब सच्चिदानंद स्वरूप है ही नहीं परमेश्वर तो वह परमेश्वर कहां हुआ तो जब वो परमेश्वर परमेश्वर नहीं है तो उसको प्राप्त करने की कोई विधि कहां से हुई इसका अर्थ क्या हुआ कि जिसका ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं है बाधित है उसके मूल में क्या है सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में कौन माता है कौन बहन है कौन पत्नी है इसमें अंतर करने का जो नियम है वो उसके पास नहीं है अगर वो दिखा रहा है कि है तो उसने कहीं से किया है और वो उसको मानने के लिए प्रतिवाद नहीं है वह कभी भी उन नियमों से भटक सकता है छोड़ सकता है इसलिए क्वेश्चन करते हैं हम इसलिए क्वेश्चन करना आवश्यक होता है किसी का कोई प्रश्न हो तो वह कर ले या अगर लाइव स्ट्रीम में आना चाहता हो तो व आ

00:43:19:12 जाए वेदों में प्रमाण है कबीर साहब भगवान है उसके बाद जब वेदों की बात आई तो हम वेदों को तो मानते ही नहीं है हां बस रटी रटाई पूरे विश्व में एक संत अरे भाई सुनो अपने उसको कहो अभिषेक को अभिषेक को कहो भाई सामना करें हमने अपना नंबर दिया तो है और हमने बताया था इन भाई साहब को भी देखा था इन्होंने भी देखा था निष्ठा निष्ठा पूर्वक माता जी ने दूध पिलाया हो तो सामना करें अब पता नहीं कैसे आपने कौन-कौन सा क्या कर दिया सामने आओ भाई विदों में प्रमाण है

00:44:29:25 एक एक स्टेप करके चलना पड़ता है ना पहले तो व्यक्ति यह कहे कि मैं वैदिक नहीं हूं वेदों से बाहर जाए उसके बाद व्यक्ति जो है जब वैदिक नहीं रह जाएगा तो हम फिर उससे सवाल जब करेंगे तो वह ईश्वर को मानने वाला भी सिद्ध नहीं होगा तो फिर वह आस्तिक भी नहीं रहा और जब वह आस्तिक नहीं रहा तो फिर वह धर्म को मानने वाला भी सिद्ध नहीं होगा तो वहां धार्मिकता से भी बाहर जाएगा और जब धार्मिकता से बाहर चला गया तो फिर वो मानवता को मानने वाला सिद्ध नहीं होगा तो मनुष्य से भी गया कहां पहुंचा धर्मेन हीना पशु भी समान यह लिंक दे दिया गया है डिस्क्रिप्शन में अगर कोई आना चाहता है अपने चेहरे के साथ तो वह आ सकता

00:45:18:18 है फैक्ट बाई अभिषेक को बोलिए सामना करे निष्ठा पूर्वक दुग्ध पान किया है तो वो सा करें सूर्य और ब्रह्मा हमारे श्रुति शास्त्रों के अनुसार भैया आप पांच देवों में ब्रह्मा जी का नाम क्यों लेते हो सूर्य भगवान का क्यों नहीं सूर्य भगवान और ब्रह्मा जी एक ही है शास्त्रों के

00:45:53:04 अनुसार चेहरा दिखाइए सुप्रीम इन जो आए हैं चले गए जिसके पास गुर्दा है उसी को लड़ने का हक है अब गुर्दा ही नहीं है सामने आने का क्या करें पर्दा फास हो गया विश्वजीत सिंह हां वेदों में प्रमाण है कबीर साहब भगवान है उसके बाद हम वेदों को नहीं मानते अरे भाई तो पहले कहो ना कि हम सनातनी नहीं है वेदों को मानने वाले नहीं

00:46:40:24 है ठीक है अगर देखो वो वाली बात बाद में आएगी जब आप ईश्वर को नहीं मानते हो तो फिर बात ये आएगी जब आपका ईश्वर ईश्वर ही नहीं है तो आपका धर्म धर्म कैसे जब धर्म नहीं रह जाएगा तो क्या होगा कि आप मानव कैसे जब मानव नहीं रह जाएगा तो आपको कहना पड़ेगा कि मैं यह हूं मैं वो हूं मैं पशु हूं मैं स्वान हूं मैं यह हूं ये सब बोलना पड़ेगा इसीलिए माता पच्ची आर्य अपना चेहरा दिखाएं नहीं दिखाएंगे चेहरा तो हम आपको ले नहीं सकते ऊपर

00:47:39:04 यह बात गलत आप लोग मेरे ऊपर मिथ्या लगाते हैं इसीलिए हमारे समाज में इतना श्वेता जी ऐसा होता है जो हमारा जो भटकाव है ना समाज में वो क्यों है पता है क्योंकि हम निष्कर्ष तक नहीं पहुंच रहे निष्कर्ष तक क्यों नहीं पहुंच रहे हैं क्योंकि हम अनर गर्ल प्रलाप से प्रलाप को होने दे रहे हैं जब पॉइंट टू पॉइंट बात होती है तब सबको सही होता है व्यक्ति जब या तो रिपीटेशन कर रहा है चीजों का या फिर वो विषय से हटकर बातें कर रहा है तो क्या करेंगे हम अब जब उसने यही कह दिया मैं वेदों को नहीं मानता तो फिर वो उसका सारा जो रामपाल जी के द्वारा फैलाया गया कि वेदों से हमने सब साबित किया सद ग्रंथों से वो रामपाल को मानने वाला सिद्ध नहीं हो रहा है अब उससे हम क्या बात करेंगे यह मेरे ऊपर एक गलत आरोप लगता है कि मैं सुनता नहीं

00:48:39:00 हूं अगर सेविज्म यह कह रहा है कि नहीं भाई विष्णु छोटे हैं और शिव बड़े हैं तो यह गलत है अगर हमारे सामने इस तरह का कुछ आएगा तो हम यथा संभव उसका भी प्रतिकार करेंगे क्योंकि हरि और हर में कोई भेद नहीं है तो जैसे हमा हमारे लिए विष्णु भगवान है वैसे ही हमारे लिए शिव जी भी है और जैसे हमारे लिए शिव जी है वैसे ही हमारे लिए विष्णु जी है अगर कोई भी इसमें बड़ा छोटा करेगा तो हम वैसे ही खड़े होंगे उतने ही सशक्त रूप से यह है सेविज्म पर अगर सेविज्म विष्णु और भगवान शिव की एकता को मानते हुए अपने शिव रूप में भक्ति रस में और जो है भगवान की व्याख्या कर रहे हैं तो अच्छी बात है मगर अंत तो गव शाश्वत सत्य के रूप में वो कह रहे हैं नहीं शिव तत्व ही परम है और जो है विष्णु तत्व जो है अधीन है यह सब बातें अगर कर रहे हैं अगर है तो प्लीज आप लोग हमें वह सामग्री भेजे जहां पर इस तरह का दुष्प्रचार किया जा रहा है मगर यह भी बात है व वो जो है दुष्प्रचार जो है प्रभावशाली भी हो जब उनकी बात ऑलरेडी कोई नहीं सुन रहा है तो हम उनकी बात करके उनको क्यों प्रचार कर दे उनका तो प्रभावशाली यदि कोई दुष्प्रचार किया जा रहा है सवेज में का तो आप बिल्कुल हमें भेजिए हम बिल्कुल उनका प्रतिकार करेंगे

00:50:01:18 एक दिनेश दास जी वाह आप वापस आए यह भाई साहब आपका आपको ले लेते हैं बाकी के तीन लोगों को हटा दीजिए दो लोगों को आर्य और विशाल भाटिया है जो दिनेश दास जी को लेते हैं ड टू स्टेज हां जी दिनेश जी बताइए पता कराए जो आपको पता करना था पिछली वाली हमारी बातचीत हुई थी जो आपकी आवाज नहीं आ रही दिनेश दास जी उसको माइक को ऑन कर लीजिए जी जी जी हां आपने कहा था ना पता करके आऊंगा अगली बार जी पता करा है क्या आपने कहा था ना हमारे कुछ प्रश्न अटक गए थे तो यह बात तो भगवान को ही पता होगी इससे आगे कुछ भगवान ने बताया ही नहीं है ऐसा कुछ कहा था आपने तो ये जो आपने बात कही है यह प्रश्न तो बनता ही नहीं है ना यह प्रश्न तो बनता ही

00:51:06:03 नहीं मुझे लगता है एक चैप्टर तैयार करके आए वो अपना बोलने के लिए आए एक मिनट एक मिनट सुनि आप हटाओ उस चीज का जवाब दूंगा पहले तो ये जवाब दीजिए कि आपने कहा था इससे आगे भगवान ने नहीं बताया है आप वो पता करके आए हैं आपने पूरी बात सुनी पूरी बात सुनी थी आपने वेदों के प्रमाण माने मांगे मैंने 16 16 41 और 16 दो बताया आपने कहा

00:51:38:22 बस मैंने ये कहा उसम लिखा नहीं आपके पीछे वेद रखे हुए अगर ऐसा लिखा हुआ है तो दिखाइए जबक ऐसा है ही नहीं वहां पर लिखा हुआ और दूसरी बात भगवान ने एकवा दिखा रहा मैं दिखा रहा हूं मैं दिखा रहा हूं हा बताओ दिखाओ दिखाओ ये बताइए आप पले मुझे कि यदि मैं उसमें कुछ छपवा दूं नहीं लिखा है और मैं छपवा दूं तो आप उसे मान लोगे नहीं वेदों में छपा मतलब अपनी तरफ से कैसे छ क्यों क्यों आदमी गलत बुक नहीं छपा सकता क्या नहीं अगर जो चीज आप दिखा रहे हो वो हम भी चेक करेंगे ना तो वहां पर है इसका मतलब कि मेरे यहां पर वेद दिखाने से कुछ नहीं होता है मेरे यहां पर वेद दिखाने से कुछ नहीं होगा इसलिए नहीं दिखाता मैं इसलिए प्रमाण की बात नहीं करता किसकी बात क्य मेरे यहां पर प्रमाण दिखाने से कुछ नहीं होगा अरे भाई प्रमाण ही तो दिखाने पड़ेंगे ना जो अरे प्रमाण तुम स्वीकार मैं पूछ रहा हूं ना अगर मैंने उसमें कुछ छपवा दिया होगा तो तुम क्या करोगे अच्छा मैं ऐसे कह दूं कि वेदों में मेरा नाम लिखा हुआ है मैं भगवान हूं तो पब्लिक मान लेगी क्या दिखाना पड़ेगा ना दिखाना पड़ेगा दिखाना पड़ेगा मगर संत रामपाल जी महाराज जी दिखाते हैं वेदों में लिखा

00:52:53:27 हुआ जी जी बताए केवल बोलने आए बताइए ब बोलते तो आप भी है ना आप दूसरे को सुनते है बताइए आप जि आप जिससे प्रमाण ले रहे हैं वेदों को आपको उस पर भरोसा दिखाना पड़ेगा आपको मानना पड़ेगा कि जिस जिसका छपा हुआ वेद मैं वेद मान रहा हूं वो मेरे लिए प्रमाणिक है तब तो उसके वेद पर विश्वास होना सिद्ध होता है अगर हम वेद जिससे ले रहे हैं उस पर हमें विश्वास नहीं है तो हमारा वेदों पर विश्वास होना सिद्ध नहीं होता है सही बात है हां तो आपने वेद किससे लिए वेद गीता प्रेस गोरखपुर वाले देते हैं तो गीता प्रेस ने कहीं कहा है कि कबीर भगवान है गीता प्रेस क्यों कहेगा वेद कहेंगे गीता प्रेस तो छपती है वो वेद कीता है गीता प्रश्न सुनिए गीता प्रश्न कहता है गीता प्रश्न है राम सुख दास जी ने भाष्य किया है गीता का आप पूरी बात कर लीजिए फिर पूरी आप पूरी बात कर लीज के जो प्रभारी प्रभारी लोग है गीता प्रेस के जो प्रबंधक लोग हैं उन्होंने भाष्य किए गीता के क्या उन भाष्य पर आपको विश्वास है अब मैं बोलू मैं पूछ रहा हूं है कि नहीं हां मैं बोलू अब आप थोड़ी

00:54:09:03 देर चुप जाइएगा गीता जी का जो मेन जो श्लोक होते हैं जो वेदों के जो मेन मूल संस्कृत श्लोक होते हैं वास्य करने वाले अनेको है बास्य करने वाले धर्म गुरु बहुत है है ना हर एक राइटर अपने अपने अनुसार कर देता है लेकिन जो मूल संस्कृत जो वास्तव में वेद है मूल संस्कृत वही संस्कृत है जो परमात्मा ने दिए आपको कैसे पता जी मूल संस्कृत वही संस्कृत है जो परमात्मा ने दी है गीता प्रेस आपको मंत्र दे रही है आपको गुरु शिष्य परंपरा से मंत्र प्राप्त हो रहे हैं आपको कैसे पता जो परमात्मा ने जो मंत्र दिए थे वही मत्र के दरा ये वेद व्यास जी ने लिख उनसे आगे ऋषियों के द्वारा हम यानी की यानी की जो व्यक्ति आपको मंत्र दे रहा है आपको भरोसा है ना कि यह झूठ नहीं बोलता यह गलत बात नहीं बताता मिनट सुनि उसका दिया उसने सिर्फ दिया है उसका नहीं है आप उस उसकी मोहर लगा रहे कि उसने दिया है ये उसका

00:55:10:14 नहीं भाईब आपको प्ली आपको यही आता है फिर क्या अगर यही आता है तो फिर क्यों लाते हो किसी को दाराम जी प्रणाम प्रणाम करते आपको शीराम हमारा हमारा कोई मतभेद तो नहीं है मैं तो थोड़ा अपना एक रखना चाहता हूं राय बताइए य क्या होता है जी यह क्या होता है कि जो हमारी सरचा होती है शास्त्रों की अध्यात्मिक की उसके लिए भी क्या होता है ना कि एक योग्यता होनी चाहिए इनको तो शुद्ध हिंदी के शब्द या शास्त्रों के शब्द ही नहीं पता होते हैं उसका अर्थ क्या होता है और आगे चलकर व्याकरण की तो बात ही छोड़ दीजिए तो यह लोग तो अपने शब्दों को ही एक तरह से देखा जाए तो पुष्ट नहीं कर पाते हैं कि बोलने का जो शब्द बोलते हैं उसका अर्थ क्या होता है तो बहुत सारी दिक्कत हमको यह भी दिखती है सरसा में क्योंकि क्या है ना कि अपने गुरु का अपमान नहीं झेलना चाहते हैं तो कहीं से भी आ जाते हैं उठ कर के वो अलग बात है तो हमको

00:56:25:20 थोड़ा सा आपकी बहुत सारी वीडियो में यह भी हमको लगा है कि ऐसा होता है दिक्कत चलिए ठीक है प्रणाम जी चलिए आभार आपका कहां से हैं ताजा राम जी मैं वर्तमान में बेंगलोर में रहता हूं वैसे मैं राजस्थान बाड़मेर से हूं अच्छ चलिए ठीक है बहुत बहुत आभ जय श्री राम वेदों में प्रमाण है

00:57:18:08 ओए हां बिल्कुल आप सही कह रहे हैं यदि जो शिव जी है व परम वैष्णव है तो विष्णु जी परम शब है और इसका शास्त्रों में प्रमाण भी है हरिहर वाला जो भेद वाला हमारा वीडियो है वो देखें और तीन तारीख से 3 सितंबर से तीन अक्टूबर से नाम जप ऑपरेशन नाम जप हम लोग शुरू कर रहे हैं उसका फॉर्म जल्द ही आपको दे दिया जाएगा instagram2 तारीख से उसमें दो तरीके की क्ला वो होंगे सेशन एक होगा सुबह सीधे सवा घंटे का उसमें जो बैठना चाहता है बैठ सकता है और 1515 मिनट के पांच सेशंस भी होंगे जिसमें की जो एक सुबह 6 बजे हो गया फिर 10 बजे हो गया उसके बाद फिर वो जो एक शेड्यूलिंग होगी उसके अनुसार इस तरीके से दिन में पांच बार 1515 मिनट तो आप दोनों में से किसी भी जो प्रोटोकॉल है उसको जवाइन कर सकते हैं और जो पूज्य जगतगुरु शंकराचार्य जी ने बताया है कि उपासना का बल होना चाहिए हम सब में उपासना का बल साथ में मिलकर के थोड़ा सा अच्छा लगता है एक दूसरे के साथ में तो हम लोग कर सकते हैं नाम जप उसमें माता का नाम भी ले सकते

00:58:33:12 हैं उसमें शिव जी का नाम भी ले सकते हैं और उसमें जो है राम का नाम भी ले सकते हैं नाम आपके ऊपर है मगर उसमें व 1515 मिनट के लिए होगा और सवा घंटे के लिए होगा एक आपको मैं वीडियो दिखा रहा हूं यह वीडियो ध्यान से देखिए वह वीडियो आप दिखा दें जो मैंने एक एक लिंक दिया है यहां पर जिसमें कि विष्णु पुराण से बताया जा रहा है कि काल कौन है अपनी बातों को रखने के लिए क्या चाहिए प्रमाण यह देखिए इसको देखिए ध्यान से और प्रकाशक वही है मुद्रक गीता कैसे लोग भ्रमित हो जाते हैं इनकी बातो में देखिए

00:59:26:25 और पृष्ठ नंबर चार पर इसमें संस्कृत भी साथ है यह 14 15 शलोक है यह देख हे दज परब्रह्म का यह काल को परब्रह्म बोल रहे हैं लेकिन इनको ज्ञान नहीं परब कौन है फिर भी अब य देख प कर य पर पॉज कर दीजिए अब देखिए इन्होने क्या किया अपने मत को सिद्ध करने के लिए यह भाई साहब विष्णु पुराण को खोल रहे हैं और उसके बाद विष्णु पुराण में ही परम ब्रह्म अगर आया है किसी के लिए तो कह रहे यह गलत लिख दिया उन्होने अरे भाई गलत लिख दिया है इसका अर्थ है कि जो लिखने वाला है उस पर आपको भरोसा नहीं है ना तो उसकी कही हुई किसी बात को आप प्रमाण के रूप में कैसे उपस्थित कर रहे हो कैसे प्रस्तुत कर रहे हो मतलब इसको कहते हैं कि मैं तो भाई झूठ बोल रहा हूं तुझे बता रहा हूं कि मैं झूठ बोल रहा हूं मगर फिर भी वेद में प्रमाण है और कबीर साहब

01:00:37:03 परब्रह्म प्रथम इसको विष्णु भी कह देते हैं य अज्ञानता में हे द्विज परब्रह्म का प्रथम रूप पुरुष है पुरुष छो बस हो गया दिखाना था दिखा दिया है रहने दीजिए तो मेरे ख्याल से कोई और है नहीं दिनेश दास जी हैं दिनेश दास जी अपना चेहरा दिखाएं थोड़ा सा अरे भाई चेहरा दिखाएंगे तो हम ऊपर आपको ले स्टेज

01:01:19:03 पर हां इस बारे में आपका क्या कहना है आप बारबार स पहले तो यह बताइए कि रिमूव कैसे कर देते हैं आपकी रिमूव इसलिए करते हैं क्योंकि जो एक नैतिकता होती है उसको भंग करते हुए आप ओवरलैपिंग करने लगते हैं नैतिकता आप भंग नहीं कर रहे हैं मैं भंग नहीं कर रहा हूं अच्छा जब मैंने आपसे जि जिस विषय पर बात हो रही है जब मैं बोलने लगता हूं तो मैं आपसे कह रहा हूं कि भाई मेरी बात पूरी होने दीजिए तो आप उसमें ओवरलैपिंग करते हैं तो उससे क्या होता है कि ये जो चर्चा है ये बाद में और लोग जब देखेंगे तो उनको दिक्कत आएगी तो इसलिए मुझे हटाना पड़ता है और मैं जो है सुरी बात पूरी नहीं हु बोलिए बोलिए बोलिए आप बोलिए हां तो मैं जो है आपको म्यूट कर कर के नहीं बोल सकता यह मेरे अंदर नहीं है या तो मैं आपको यहां रखूंगा तो बात करूंगा या फिर नहीं रखूंगा मैं म्यूट कर कर के आपका जो है वो जो बोलने का वो है कि आप यहां पर हो बोल रहे हो और लोगों को सुनाई दे रहा है मैं ये भी कर सकता हूं मैं ये नहीं करता हूं ठीक है तो अभी बात यह है कुल मिलाकर के अभी जो भाई साहब आए थे आपसे थोड़ी देर पहले उन्होंने कहा कि वो रामपाल

01:02:34:09 दास को मानते हैं पर वह वेदों को नहीं मानते यह सही है नहीं नहीं ऐसा नहीं है उनकी पूरी बात आपने नहीं सुनी व बाद में उसको मानते ऐसा रामपाल जी का कोई भी अनुयाई ऐसा नहीं है जो कि वेदों को नहीं मानता अच्छा मतलब वो झूठ बोल रहे थे झूठ नहीं वो आपने बीच में से ू कर दिया तो इससे य सिद्ध नहीं होता कि मानते नहीं है वो उस बात परि सिद्ध भाई साहब उन्होंने यह कहा मैं रामपाल दास को मानता हूं मगर मैं वेदों को नहीं मानता मैं बारण उपनिषद को नहीं मानता नहीं नहीं ठीक है चलो अब मैं यहां पर उसको आप नहीं समझ पाओगे अब आप आप आगे बात इसको क्लियर कर दीजिए ना उन्होंने जो बोला मैं वेदों को नहीं मानता आप उन्हे रखते वो उस बात पर भी आ जाते किस बात पर तो इस बात का भी क् ठीक है मैं समझ गया आप उसको आप उसको क्लियर नहीं करेंगे आज जाते ये सब हमारी बातें होती है अब अपनी बात रख दीजिए जी हा मैं ये कह रहा था जैसे आप कह रहे थे कि ये जो जो वेद है जो शास्त्र है गीता है उसको आप मतलब सच्चा क्यों मानते हैं क्योंकि जो गीता प्रेस गोरखपुर के पास

01:03:49:10 जो जो भी गुरु है जो इनको छाप रहे हैं तो उ उनके पास जो गीता का ज्ञान है आपका कहना यह है कि यह ज्ञान वो उनका है हमारा और आपका बीच का जो समझने का जो फेर है ना वो क्या हो रहा है ठीक है बो लीजिए बो आपके और हमारे बीच समझने का जो फेर है वो यह है कि आप कहते हो किय जो ज्ञान वेदव्यास जी से अन्य और जिनसे भी ये ज्ञान आया है वो उनका ज्ञान है हमारा कहना है संत रामपाल जी महाराज जी के अनुयायियों का कहना है कि जो ज्ञान है यह भगवान का है इन ऋषियों के पास भगवान ने भेजा है दिव दृष्टि दी थी वेदव्यास जी को उस दिव दृष्टि से वेदव्यास वेस जी कोष्टि दी थी वेदव्यास जी को दि दृष्टि दी थी वेदव्यास जी को दिव दृष्टि दी थी वेदव्यास जी ने ही ये सारे 18 पुराण और 11 उपनिषद और चार वेदों की रचना की थी जैसे कि काम कर वैसे विषय अलग हो जाएगा मगर फिर भी आप मुझे ऐसा करिए किसी मंत्र का दृष्टा वेदव्यास जी को दिखाइए जी वेद है

01:05:04:12 आपके पास वेदव्यास जी को वेद व्यास जी को किसी मंत्र का दृष्टा दिखाइए अच्छा आप बताइए वेदव्यास जी ने कैसे लिखे फिर आप थोड़ा वेदव्यास जी द्वापर में आकर वेदों के चार भाग करते हैं छ वेदांग रचना करते हैं और जो जो हमारा एक अरब लो संख्या वाला महापुराण था उसके 18 भाग करते हैं वेदव्यास जी दृष्टा नहीं थे हा ठीक है वेदव्यास जी से पहले वो ज्ञान मतलब उन्होंने जो राइट जो लिखा ज्ञान तो वो ज्ञान कहां पर था वो उस टाइम था वेदव्यास जी से पहले वो ज्ञान था क्या भाई साहब हमारी चर्चा जो है बिना विषय के हो रही है आप विषय मूल विषय आप समझ लीजिए मूल विषय मैं आपको समझा दूं फिर आप अपना उत्तर दीजिए आपको मल विय देखिए आपने प्रश्न किया था ना आपने प्रश्न किया था ना अंत में फिर लोग कहेंगे मैं बोलने नहीं देता हूं आपने एक प्रश्न किया ना लास्ट में तो इसका अर्थ है कि मुझे बोलना है ठीक है अब मैं बोल रहा हूं बात यह है कि जिससे हम वेदों के मंत्र ले रहे हैं वो वेदों के मंत्र उन्होंने नहीं रचे ईश्वर के ही है अप

01:06:19:12 ज्ञान आ रहा है ऋषियों के ऋषि दृष्टा हुए फिर उनसे आ रहा है गुरु शिष्य परंपरा से आ रहा है गुरु परंपरा से अर्थ भी आ रहा है अर्थ भी आ रहा है शायन भाष्य सबसे प्राचीनतम उठा के देखिए चारों शायन कौन है अपने समय के जो विद्यान स्वामी थे उनके छोटे भाई है विद्यान स्वामी कौन है य सब पता ही नहीं होगा पता किया कभी सबसे प्राचीनतम भाष्य कौन सा है वेदों का बोलिए कौन सा है बोलिए बोलिए मुझे मालूम है नहीं पता आप पूरा कर लीजिए फिर बोलूंगा अरे मैं पूरा करूंगा अभी आपसे पूछ रहा हूं पता किया कभी आपने हाता किया हमने क्या कौन है आप बताइए क्या पूछ रहे हो आप हां वो यही है कुछ नहीं पता है केवल वो लाइने रटी है विद में प्रमाण है चलो फर मैं आगे बढ़ता हूं मैं आगे बढ़ता हूं बताइए तो जो हमारे ऋषि गण है वह मंत्रों के दृष्टा बनते हैं फिर गुरु शिष्य परंपरा से मैं दिखाता हूं आपको गुरु शिष्य परंपरा दिखाइए

01:07:25:25 अच्छा अच्छा ये बताइए आपके जो रामपाल है वो यह कहते हैं कि वो यह कहते हैं कि जो गीता है उसमें कुछ 5 पर ज्ञान जो है काल ने दिया है जी सही बात है हां इस पर रते तो क्या उसमें चौथा चैप्टर आता है क्या 5 परट में तीसरा आता है क्या उसम मिक्स है जहां जहां पर है वो जहां जहां पर है वो आपको दिखा देंगे जहां जहां पर मिक्स है वो आपको दिखा देंगे जहां पर हमें शंका है जहां पर संत रामपाल जी महाराज जी ने कहा है वो आपको दिखा

01:08:18:27 द मुको उपनिषद दो 48 200 28

01:08:56:02 यह देखिए यह गीता प्रेस है गीता प्रेस से प्राप्त मंत्र है मुंडकोपनिषद प्रथम खंड प्रथम श्लोक में ही बताया जा रहा है परंपरा परंपरा क्या क्या लिखा है बताइए पढ़ सर्वशक्तिमान परब्रह्म परमेश्वर से देवताओं में सर्वप्रथम ब्रह्मा प्रकट हुए फिर इन्होंने ही समस्त सब देवताओं महा ऋषियों और मरीच आदि प्रजापति हों को उत्पन्न किया साथ ही अब इनमें बहुत सारी चीजें उसके बाद लिखा है उनके सबसे बड़े पुत्र महा ऋषि अथर्वा थे उन्हीं को सबसे पहले ब्रह्मा जी ने ब्रह्म विद्या का उपदेश किया तो ब्रह्मा जी ने किसको दिया अथर्वा को उसके बाद आगे क्या है अथर्वा ऋषि जो ब्रह्म विद्या ब्रह्मा से मिली थी वही ब्रह्म विद्या उन्होंने अंगी ऋषि को बतलाई विद्या बतलाई केवल मंत्र नहीं विद्या ज्ञान ठीक है उसके बाद बतलाई और अंगी ने भारद्वाज गोत्र में उत्पन्न सत व नामक ऋषि को कही फिर आगे परंपरा आगे बढ़ गई भारद्वाज ऋषि ने परंपरा से चली आती हुई ब्रह्म के ब्रह्म के पर और अपर दन

01:10:11:03 और अपर ब्रह्म के पर और अपर दोनों स्वरूपों का ब्रह्म का पर और अपर परमार्थिक स्वरूप और व्यवहारिक स्वरूप दोनों स्वरूपों का ज्ञान कराने वाली इस ब्रह्म विद्या का उपदेश अंगी नामक ऋषि को दिया अंगी के आगे देखिए वो बता रहे हैं फिर उसके बाद क्या हुआ सोनक नाम से प्रसिद्ध एक ऋषि थे जो बड़े भारी विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता थे पुराणों के अनुसार उनके ऋषिकुल में 88000 ऋषि रहते थे ब्रह्म विद्या को जानने के लिए शास्त्र विधि यह पूरी परंपरा चल रही है अब सुनिए गीता प्रस का आपको पता है कि नहीं 5 पर में कौन आता है कौन नहीं आता है अब पता है अभी यहां पर दिखाना मतलब संभव नहीं है क्योंकि मैं खोल के दिखाता हूं सारा दिखाता

01:11:00:28 क्योंकि एक आप ये बताइए किसके वेद भाष्य आप मानते हैं आपको संस्कृत आती है क्या गीता गीता प्रेस गोरखपुर वालो को दिखा दीजिए गीता प्रेस गोरखपुर के वेद छपते हैं क्या गीता प्रेस गोरखपुर वाले वेद छापते हैं वो वेद नहीं गीता मैं आपसे वेद महर्षि दया दयानंद सरस्वती के जो वेद है वो वही मान तो महर्षि दयानंद सरस्वती के वेद आप मानते हो वेद है ठीक है अब बात ये आती है कि उन्होंने केवल मंत्र तो दिए नहीं है सुनिए देखिए तर्क क्या है वेद महर्षि दयानंद के है क्या अरे भाई मैं जो कह रहा हूं व वो समझो मेरी बात जो मैं पूछ रहा हूं वो तो बताओ केवल मंत्र बोले हैं क्या उन्होंने नहीं उन्होंने उसका हिंदी अनुवाद करा हिंदी अनुवाद करा यानी अर्थ भी बताया है अर्थ भी बताया है ना तो अगर हम उनके अर्थों पर भरोसा नहीं कर रहे इसका मतलब है कि हम समझते हैं य व्यक्ति अज्ञानी

01:12:12:26 है मूल संस्कृत हमारे पास है अगर हम क पर दयान दयानंद जी से ले रहे हो ना वो मलत से लो जाके आप तो दयानंद जी से ले रहे हो ना आप एक गलत बात मत करो आपके पास मूल संस्कृत नहीं है आप दयानंद जी के ऊपर निर्भर हो आप इस सुन तो लीजिए मैं मैं आपसे सुनूंगा मुझे आप ये बताओ आपके लिए जो वेदों का मूल स्त्रोत है संस्कृत स्त्रोत वो क्या है हम तो कहीं से भी ले लेंगे मतलब कहीं से भी ले लेंगे अगर वो मूल संस्कृत सभी जगह की मैच करती मैं पूछ रहा हूं मैं जो छाप वेद नाम से वो ले लोगे मैं अब आप मेरी बात ही नहीं समझ रहे देखा देखा मैं मैं उसी पे आ रहा हूं मैं मैं बता रहा हूं कि मैं परंपरा की बात क्यों कर रहा हूं आप एकएक करके चलते जाइए मुझे आप मुझे आप ये बताइए मैं जो वेद छाप दूंगा वेद के नाम से उसको आप वेद मान लोगे नहीं मानेंगे ना उसका फिर मैच करेंगे मूल संस्कृत सभी वेदों से मैच करती है या नहीं करती है अच्छा मतलब अगर मैं 10 जगह 10 जगह 10 जगह छाप दूंगा तो मान लोगे नहीं जो अरे ऑथेंटिक प्रेस भी है नहीं कोई किसी पर तो भरोसा करोगे टिक कौन स प्रेस है मेरे भाई वो ऑथेंटिक कौन सी है हां आप वो ऑथेंटिक कौन सी है बोलो ना आप बता दीजिए

01:13:28:04 जिस पर आपको अटूट विश्वास हो हमने तो जिस पर आपको अटूट विश्वास हो वो ऑथेंटिक प्रेस कौन सी है हां प्रेस हमने हम बता तो रहे हैं गीता प्रेस गोरखपुर है वहां से हम गीता जी ले तो वेद छप नहीं रही है अरे मैं वे आप मुझे बताइए आपके पास वेदों के लिए ऑथेंटिक प्रेस कौन सी है दयानंद सरस्वती जी की जो जो भाषा भाष्य किया है उसका प्रेस का नाम नहीं पता मेरे को बता द ऑथेंटिक है हां मूल संस्कृत ऑथेंटिक है बाकी जो है वो जो उने मूल सं मतलब वो जो आपको दे रहे हैं वो उसके अर्थ पर आपको भरोसा नहीं है उसके जो है श्लोक वो मंत्र प आपको भरोसा है भरोसे की क्या बात है अगर वो मैच कर रहा है आपको कैसे पता वो जो मंत्र आपको दे रहे हैं वो परमात्मा के दिए हुए मंत्र है सभी वेदों से मिला लेंगे जो भी जितने भी वेद है जो प्रेस और भी है उनसे मिला लेंगे अगर अरे भैया आपके लिए ऑथेंटिक तो दयानंद जी है ना फिर दूसरे से क्यों मिलाओ ग नहीं नहीं हमारे नहीं है हम तो वेद ले रहे उनसे ऐसा नहीं है कि हम मतलब उनसे हम ये नहीं है कि हम आपको दयानंद जी पर अटूट विश्वास है कि नहीं है नहीं उन क्यों होता हम वेद प है हम उन क्यों होता अरे भाई तो वेद तो आप उन्हीं से ले रहे हो ना

01:14:43:04 अरे तो उनका दिया हु थ है भाई वेद उनका ज्ञान है क्या आप ये समझ नहीं पा रहे हो वेद उनके ये नहीं क उनका ज्ञान है कि नहीं आपको आपको आपके रामपाल जी को वेदा मंत्र याद है जो मंत्र है अरे मैं पूछ रहा हूं वेद के मंत्र याद है कौन से वेद के मंत्र याद है सारे किसी किताब पर तो निर्भर नहीं है वेद के मंत्रों के लिए अरे भाई वेदों के या मंत्र याद आप कर लोगे सारे मंत्र नहीं मेरे पास गुरु परंपरा है गुरु शिष्य परंपरा पर भरोसा करता हूं वेदों के लिए आपके पास क्या है वो बताइए हम वेदों पर करते हैं परंपरा पर नहीं करते वो वेद आपके लिए भाई आपके लिए निश्चित पैरामीटर क्या है इसके वेद जो है वही वेद है जो परमात्मा ने छापे अभी 10 लोग 10 किताबें छाप देंगे उसमें मंत्र दूसरे कर देंगे तो आप कैसे पता लगाओगे मल संस्कृत नहीं बदलते मूल संस्कृत कोई भी राइटर नहीं बदलता है आप इस बात को आप एक अंदाजे प हो नहीं आप किसी भी किसी भी प्रेस वाले के पास जाइए वो मूल संस्कृत किसी चलिए आप दयानंद जी की बात मानते हैं मामले में मल संस्कृत बदलते नहीं मानते हम

01:15:58:09 जो वेदों का उन्होंने मूल संस्कृत ठीक ठीक है यहां तक हमारी ये चर्चा हो गई हो गई अब लोगों ने देख लिया आपका पक्ष सुन लिया और हमारा भी सुन लिया कि परंपरा की बात हम क्यों करते हैं देखो आगे बढ़ हो सकता है मैं अभी दुर्जन तोष न्याय से बात कर रहा हूं हो सकता है कबीर जी ही भगवान है हो सकता है मगर वेदा दी मंत्रों के अर्थों के द्वारा भगवान सिद्ध नहीं होते क्योंकि वेदा दि मंत्र जिनसे हमने लिए हैं उन्हीं से हमें अर्थ प्राप्त हुआ है उस अर्थ में कहीं भी कबीर को भगवान नहीं माना गया आप भगवान मानो मगर वेद मंत्रों के आधार पर भगवान आप सिद्ध नहीं कर सकते अगर परंपरा को नहीं मानते तो ठीक है दूसरी बात परंपरा देखो देखो आपकी और मेरी दोनों की बातें सुन ली है लोगों ने ठीक है परंपरा की बात मैंने आपको मुंडकोपनिषद से दिखा दी अभी मैं आपको भगवत गीता तीसरे अध्याय से दिखा रहा हूं हम दिखाओ

01:16:55:02 आपके तो अपने भाष्य भी नहीं है गीता पर उसके लिए भी आप जो है निर्भर करते हो उस अपने भाष्य करेंगे फिर आप तो फिर तो बिल्कुल भी नहीं मानोगे अरे हम तो अभी भी बिल्कुल नहीं मानते हैं नहीं नहीं तो फिर क्यों कह रहे आप बकल नहीं मानोगे होगी तब तो भाष करोगे संस्कृत आती होगी तब तो भाष्य करोगे ना भाई ये लो ख रामपाल जी ने ये लो देख

01:17:27:20 जो जो इस इस लोक में इस प्रकार से परंपरा से प्रचलित कैसे प्रचलित परंपरा से प्रचलित सृष्टि चक्र के अनुकूल नहीं बरत परंपरा से प्रचलित वह अपने कर्तव्य का पालन नहीं करता वह इंद्रियों द्वारा भोगों में रमण करने वाला पापायी ही जीता है परंपरा को ना मानने वाले का खंडन ठीक है ये गीता कह रही है अब अच्छा अब एक बात जरा हम लोग दोबारा से रिवाइज कर ले एक बात दोबारा रिवाइज कर ले क्या कबीर सर्वशक्तिमान है या नहीं ये बताओ अब आपका भगवान सर्वशक्तिमान है या नहीं पहले आप इसका मैंने 50 बार सिद्ध कर दिया भाई और आपको अगर कोई क्वेश्चन है उसको लेके वो क्वेश्चन करो हां हां क्वेश्चन है क्वेश्चन है सब कुछ कर सकता है आपका भगवान बिल्कुल

01:18:26:28 गलत करवाता है पाप करवाता है वो निठारी के रूप में पाप भी होता है उसके द्वारा निठारी हत्याकांड में जो सरदार था जो बच्चों का मास खाता था उसके रूप में भगवान पाप भी करते हैं आप जैसे लोगों के रूप में वो धर्म का कु प्रचार भी करते हैं और बोलो नहीं नहीं और इसम समझो अब इसमें समझो भगवान बता रहा हूं अब सुनो भगवान भगवान देखा चलो बोलो बोलो हां ऐसे ही सुनो तो अब इसमें समझो क्या है मामला कि भगवान तो निर्विवाद रूप से सर्वज्ञ है सब जगह ईश्वर ही ईश्वर है जैसे कि जो पानी है वो सब जगह है मगर हमारी प्यास कौन सा पानी बुझाता है जो हमारे गिलास के अंदर आ जाए जो हमारे व्यवहार का विषय बन जाए वायु के रूप में नमी के रूप में पानी सर्वज्ञ व्याप्त है मगर हमारी प्यास कौन सा पानी भु जाता है जो ग्लास के रूप में आ जाए जो रू बीच में मत बोलिए मत बोलिए मुझे पूरा करने दीजिए पूरा करो जो हमारे चुल्लू में आ जाए जो हमारे मुख में आ जाए जो हमारे व्यवहार का विषय बन जाए भगवा पानी का वो रूप हमारी प्यास बुझाता है इसी प्रकार से भगवान

01:19:42:02 भी सर्वज्ञ व्याप्त है सब कुछ भगवान ही है मगर हमारी प्यास भक्ति की प्यास मोक्ष की प्यास बुझाने वाला भगवान का वो रूप है जो वेदा शास्त्रों की सीमा में आता है जो वेदा शास्त्र बताएंगे जो हमारे सनातन शास्त्र बताएंगे कि भैया इसकी भक्ति करने से मोक्ष मिलेगा व सीमा में जो आएगा भगवान का वह रूप हमारे लिए अनुकरणीय है अनुसरण पूजनीय है सम्माननीय है बाकी तो सब जगह ईश्वर ही ईश्वर है मगर व हमारे लिए मगर वो हमारे मगर वह हमारे व्यवहार का विषय नहीं है और उदाहरण ले लीजिए जो सूरज है सूरज से आने वाली ऊर्जा को ही हम वो करते हैं ना हम लोग हम लोगों की जो जीवन चर्या है वो किस पर चलती है कहां से मिलती है हमें सूर्य की सूर्य से ना सूर्य प्रकाशित होता है तो पौधे जो है उसका उसका उससे ऊर्जा प्राप्त करते हैं वनस्पति और वनस्पति को हम खाते हैं तो हमें वो ऊर्जा मिलती है तो सूरज से आने वाली जो ऊर्जा है वह सर्वत्र व्याप्त है ऊर्जा मगर हमारे लिए हमारी भूख वही ऊर्जा मिटा सकती है जो हमारे व्यवहार का विषय बन जाए भोजन इत्यादि के रूप में समझ में आ रहा है मैं जो कह रहा हूं इसी तरीके से

01:20:57:02 भगवान वो है जो सर्वत्र वो पाप में भी है वो पुण्य में भी है वो सब में है वो निठारी में भी है वोन वो जो वो जो उन्होंने अभी दो तीन केस बताए थे सब जगह वही वही है क्योंकि उसने सब कुछ बनाया है अगर आप यह कहे कि वो यह कर सकता है वो नहीं कर सकता मगर फिर भी आप यह नहीं मानते कि कबीर जी ने जो है वो जो कांड हुआ था निठारी कांड या जो निर्भया केस हुआ था जो कबीर ने वो नहीं किया ठीक है मगर कबीर का वहां पर नियंत्रण तो था ना था कि नहीं था नहीं नहीं मैं तो अभी अभी आपकी बात का मैंने जो पूछा उसका जवाब द तो तो मैं तो मैं वही बता रहा हूं कि अगर हम यह भी नहीं मानेंगे कि सब कुछ भगवान है मगर सब कुछ भगवान के कंट्रोल में तो मानना पड़ेगा तो भगवान के कंट्रोल में जब मानेंगे तब भी उस पर वो दोष लग जाएगा तो इसी हिसाब से भगवान के लिए जो पेंटिंग है भगवान के लिए पेंटिंग है उसमें कोई छोटा बड़ाई नहीं है यह छोटा बड़ाई हमारे लिए है क्योंकि हमें यहां से मुक्ति पानी है भगवान को नहीं मुक्ति पानी है भगवान तो मुक्ति का स्वरूप है क्यों ऐसे अनय होने देता ऐसे अन्याय होने देता है भगवान

01:22:12:14 अरे गीता जी में लिखा है ना कोई मरता है ना कोई मारता है तो अन्याय कहां से हो गया भगवान की तरफ से अभी आपसे हमारे एक अनुयाई ने बात विषय वो सवाल किया कि भाई आपके हाथ में अगर कोई गर्म सरिया पकड़ा दे आपको दर्द होगा या नहीं तो क्योंकि मैं अज्ञानी हूं भगवान अज्ञानी नहीं है क्योंकि मैं अज्ञानी हूं एक मिनट इसलिए होगा अज्ञानी सुनिए अज्ञानी है इसलिए दर्द होगा आपको ज्ञान है आपको तो नहीं होना चाहिए ना मैंने आपको बता दिया मैंने आपको क्या बताया पृथ्वी गोल है हमें पता चल गया अभी पूछ मैं आपको आप फ उत्तर दे रहा हूं हा बताए मैं आपको उत्तर दे रहा हूं मैं आपको उत्तर दे रहा हूं कि आप तो ज्ञानी हो ना यहां पर जिस ज्ञान की बात हो रही है वो हो रही है मुक्ति मुक्त हो क्या अभी अभी हम बता रहा मुझे पूरा बोलने मेरा बोलिए बोलिए आपको मालूम है ना पृथ्वी गोल है ये सुन लिया मैंने वो मैं सारी वीडियो देख रहा था लेकिन सुन लि मुझे बताइए पृथ्वी के साथ आप गोल व्यवहार करते हैं या चपटा करते हैं मैंने आपसे सवाल किया अरे मैं आपका जवाब दे रहा आपका जवाब दे रहा

01:23:27:20 के साथ गोल वर करते चप करते हम तो गोल व्यवहार करते हैं चपटा कैसे करते है बताइए गोल बहुत बहुत धन्यवाद बहुत बढ़िया एक मिनट आप किसी को रास्ता दिखाते हैं कि भाई वो जो मल है व इधर है तो कैसे दिखाते य जाओ या य जाओ अच्छा तो पृथ्वी इतनी छोटी है ऐसे बता द गोल है उसके साथ वर करते हैं अब सवाल पर आ जाए अच्छा एक बात बताइए आप कहां पर रहते हैं बहुत घुमा क प रहते हैं आप कहां पे रहते हैं आप कहां प रहते हैं आपको आप कहां प रहते हैं आप कहां प रहते देखिए यहां पर अगर अनर्गल प्रलाप करेंगे तो मैं आपको हटाऊ तुरंत आपको लग रहा जाए ये सब मत करिए मैं आपसे जो पूछ रहा हूं वो बताइए आपको लग रहा है कि मैं कर रहा हूं भाई मैंने आपसे सल आपसे ये पूछ रहा हूं कि आप कहां रहते हैं मुरादाबाद मुरादाबाद तो जो आपसे जो यह कन्याकुमारी है यह किस दिशा में है हमसे

01:24:36:20 है दक्षिण में दक्षिण में उंगली करिए दक्षिण की ओर अच्छा अब जब हम गोल पर बैठे हुए हैं तो क्या आपकी ये उंगली कन्याकुमारी की तरफ गई गोलाई बहुत हां गई नहीं गई गोलाई के हिसाब से आपकी उंगली जब आपने य उंगली की है ना तो वो पृथ्वी से बाहर गई आकाश की तरफ भाई आपको आपने सुनिए आपने कहा था गोल व्यवहार करता हं उसको मैंने सि किया सुनिए मुझे पूरा कर इतना बड़ा है आपकी उंगली आपकी उंगली जो आपने की है वो गोल के हिसाब से बाहर गई है आपने जो व्यवहार किया है चपटा किया है कब भी कोई दिशा में उली कर रहे हैं वो वो जो उंगली जब भी होगी वह वोह पृथ्वी से आकाश की ओर जाएगी वो क्योंकि पृथ्वी गल अपनी वीडियो आप अपनी वीडियो देखते हो उसमें लगता है आपको कि आप बोलने देते हो दूसरे को भाई पृथ्वी कोई छोटा सा बॉल का टुकड़ा नहीं है बहुत बड़ी है देखिए देखिए मैं आपसे संतुष्ट हो चुका हूं मेरी बात सुनिए मेरी बात सुनिए मैं जीत और हार के लिए यहां

01:25:51:25 पर नहीं आता हूं मेरी बात सुनिए संतुष्ट हो चुका मुझे अनर बात नहीं करनी है दिया आपका ताछ नहीं कर सकता आपके की बात कर रहा था आप बोले जनता साइड कर लेगी सुनिए आप एक मिनट सुन ली आपने प्रश्न को घुमाया जैसे आपको हम अगर गर्म सरिया पकड़ा दे तो आपको ज्ञान हो गया आपको दर्द होगाया नहीं होगा पीड़ा

01:26:47:00 मत पढ़ो चक्कर में भाई जो इंटेलेक्चुअल लोग होंगे वो कहेंगे कहां पर क्यों इनसे मगज मारी कर रहा है इनको हटाना चाहिए तुरंत हे भगवान हां जी विद्यारण्य स्वामी जी का नाम यही था इनकी बात सुनकर मुझे हंसी लग रही हाने लग रही है कि वह पहले वाले बच्चा होता है ना जो हमें फर्स्ट क्लास में पढ़ाया जाता है समझ में नहीं आता नहीं इसकी बातों का इसके लिए बोल रहे हैं इंडियास ब भाई इस प्रकार जो तुम जिस प्रकार बोल रहे हो ना कि वेद में कबीर जी का नाम है उसे उस प्रकार वेद में ईशा का भी नाम है मेरा भी नाम है आर्य का भी नाम है सर मैं दर्द कराने के लिए बुलाता हूं क्या विशाल भाटिया जी आपको आना है ऊपर तो आप अपना चेहरा दिखाए और मुझे लगता है कि मैं आपको जानता हूं चलिए मुझे लगता है काफी देर की चर्चा हो गई है और बहुत ही व्यर्थ रही आज की चर्चा जो व्यक्ति

01:28:02:07 वेदों को नहीं मानता है वही व्यक्ति डिडोरा पीट रहा है वेदों में प्रमाण है कबीर साहब भगवान है वेदों को क्यों नहीं मानता है पता है क्यों बोला उसको मालूम है इसके पासस कट्टा भर के प्रमाण अरे किसी ने अपना नाम ही रख लिया वेदों में प्रमाण होए वाह अब कौन है

01:28:47:02 पंडित ड टू स्टेज हां जी स्वेतांक जी बताइए जय श्री राम हर हर महादेव जय श्री राम अरे मैं तो समझाने आया था पथवी गोल चपटी हा मैं लाइव देख रहा था मैं समझाने आया था पृथ्वी गोल चपटी अभी समझाता है इनको आपने निकाल दिया अभी सारा सम देता मुझे पता है क्या होता है मुझे प्रॉब्लम ये होती है कि कहीं ऐसा ना हो रहा हो कि कंटेंट हमारा बहुत निचले स्तर का हो रहा हो जिस दिन वो वो आए थे जो भव्य राधा कृष्ण दास उसके बाद एक मेरे पास फोन आया बहुत मानते थे भैया मैं आपसे छोटा हूं मैं क्षमा मांग रहा हूं मगर भैया ऐसे लोगों को मत बुलाया करिए तो अब हम तो अपना यहां सर मार रहे हैं हमारी तो परिश्रम हो रहा है वो टाइमिंग भी चल रही है मगर अगर बुद्धिजीवियों के नजरिए से देखेंगे तो वो मुझे भी बुद्धू समझेंगे ना इतने हमारे मेरे पिताजी देख रहे थे उनका सर दिमाग सर घूम गया कि मतलब ये समझ क्यों नहीं रहा एक बार में बात मतलब लिटरली मुझे समझ में नहीं आ रहा कि आपका क्या कितना पेशेंस कैसा है इतने ब और उसके बाद भी लोग मुझसे ऐसे ऐसे कमेंट कर देते हैं कि शिवान जी आपसे बात नहीं हो सकती आप जो है वो बोलने नहीं देते सुनते नहीं मैं क्या सुनू भाई तीन बार एक ही प्रकार का सवाल कि वहां यह घटना हुई वहां यह

01:30:02:03 घटना हुई वहां ये घटना हुई सवाल तो वही है कि बुराई हो रही है ईश्वर को क्यों नहीं रोक रहा है हा और इन्होंने क्या बोला मेरा ईश्वर जो है दुखी भी होता है सतलोक आश्रम का सच इसको जो है अलग से कटिंग डाल के बनाना पड़ेगा हा आप यह समझिए कि यहां पर आप उसका फेशल एक्सप्रेशन देखिए ना वो खुद इंटरेस्टेड नहीं है आपकी बात सुनने में उसके दिमाग कुछ और ही चल रहा है आप इतनी मेहनत कर रहे हैं उसको समझाने के लिए चलो भाई बाकी लोग तो सुन रहे हैं वो जिसको समझा रहे हैं वो खुद इंटरेस्टेड नहीं है सुनने में वो कहां से ये रहेगा चलिए कोई बात नहीं आप कंटिन्यू करिए मैं तो उनको पृथ्वी गोल समझाने आया था अभी मैं चपटी गोल सब समझा देता हूं उनको लेकिन कोई बात नहीं कन्य नहीं उसने उंगली की ना उंगली जब कर दी तो पृथ्वी के सरफेस से बाहर चली गई उंगली तो उसने गोल व्यवहार नहीं किया अरे भाई उंगली ऐसे करनी जी अगर पृथ्वी जो है वो सूरज से भी बड़ी हो जाए फर अगर व ये दिशा कर देगा तो वो बाहर ही जाएगी ठीक हैनी बड़ी हो जाए अब वही वही बात है ना ना तो गणित का अध्ययन है ना फिजिक्स का अध्ययन है तो उसको तो ये बोलने में भी टाइम लगा था कि मुरादाबाद से कन्याकुमारी दक्ष में आपको आपको उसे जापान पूछना चाहिए था कि जापान कहां है फिर वो ऐसे करता ये

01:31:17:24 जापान तब आती बात समझ में चलिए ठीक है कोई बात नहीं कंटिन्यू करिए कोई तो है नहीं रुक जा जाते हैं जी जी रही है थोड़ी देर कोई और है क्या ऋषि जी राम अखिलेश जी चक्रपान जी कोई है जो आना चाहता है जय श्री राम कोई नहीं है चेहरा लेकर नहीं आते हैं लोग यह प्रॉब्लम हो जाती हैम अच्छा वो इसको भी इसको भी वो लोग अपने लिए यूज कर लेते हैं अब जैसे मैंने बेकार की बातों को बंद करने के लिए हटाया ना तो फैक्ट फुल डिबेट वाले या वो एकम अद्वितीय मोटा चश्मा जो व्यक्ति लगाता है वो इसको भी ऐसे प्रूव करेगा देखो देखो वो हो गया आपने वो एक चलचित्र आया था गरम मसाला देखा है क्या अक्षय कुमार का देखा जी जब मैं देखता था मेरे पाच छ साल से बंद हो गया है मैं छोटा था तो मैंने देखा कि जिससे उनको भय था मामा असरानी जी तो जब वो असरानी आता है जिससे उनको भय था असरानी के लिए पहले से ही चिल्लाने लगते हैं अरे मामा आ गए मामा आ गए हा मामा आ गए मामा आ गए तो असरानी कहता है क्या हो

01:32:32:24 गया भाई ऐसा क्या मैं ब मैं कोई अजूबा हूं क्या जो ऐसे चिल्ला रहे हो वो पहले से ही ओवरलैप इतना कर देना चाहते हैं कि जो मूल सच्चाई है उससे व्यक्ति दूर हो जाए पहले से ही इतना जैसे जैसे वर्ण व्यवस्था का वर्ण व्यवस्था की सबसे बड़ी काट है चातु वण मया सटम ये सबसे बड़ी काट है तो इसी कान के द्वारा अरे चातु मया सटम काया सटम चातु तो इसी को ही चालू कर दिया इतना ज्यादा कि भाई वही आज सबसे बड़ा दिखाई नहीं देगा अरे चातुर्य मया सिस्टम तो सबसे बड़ा कर्मणा वर्ण व्यवस्था वाला है अरेया सिस्टम भी तो कौन कह रहा है य भी तो समझना चाहिए ना मया सिस्टम मेरी सृष्टि है फिर उसम हस्तक्षेप कैसे हो रहा है इंसान का अच्छा एक चीज और है अब जैसे मालूम पड़ा कि जैसे वो हम लोग प्ले बना रहे हैं थिएटर प्ले उसमें हम लोग सीन दिखा रहे हैं कि एक क्या कहते हैं जहां से तैयारी होती है शंकराचार्य का विरोध करने की और अधर्म अधर्म फैलाने की तो उसमें जो पहला सीन है ना वो यही है कि तुमको वहां जाकर जब तुम अधर्म फैलाने निकलोगे तो तुम्हें शंकराचार्य को परास्त करना होगा शंकराचार्य को परास्त तो नहीं कर सकते उससे दूर रह सकते हो कैसे कि जाते ही वहां चिल्लाने लगना

01:33:47:25 मायावादी कि वो लोग उनकी बातें सुनने जाए ही ना कितना भी मूल सत्य उन बातों में इनके हिसाब से तो हमारे जो वैष्णवास्त्र वादी है और एक वो है जो सरफिरा क्या नाम है उसका वो द बीइंग स्पिरिट सोल वाला वो लिखता है वो बोलता है पुराण दिग दर्शन एक व्यक्ति ने लिखी है उसको मालूम नहीं है क्या चीज है पुराण दिग दर्शन सोचिए पुराण दिग्दर्शन जो आर्य समाज ने इतने सारे आक्षेप लगाए पुराण को मानने वालों पर उसका तोड़ वो ग्रंथ महान ग्रंथ मैं कहूंगा और उस ग्रंथ के लिए वो व्यक्ति अपने मत की सिद्धि के लिए बिना सोचे समझे बोल रहा है निर्लज के साथ एक व्यक्ति ने लिखा है पुराण दि दर्शन सोचिए

01:35:03:21 अपने मत के लिए हमें कोई मतलब नहीं है धर्म और अधर्म से हमें सिर्फ इससे मतलब है कि हम जो मानते हैं हम उसको जो है उसी को जो है ऊपर रखेंगे चाहे उसके लिए कुछ भी करना पड़ जाए कुछ भी का मतलब कुछ भी यह देखिए आ गया कमेंट भाई ऐसे अज्ञानी लोगों को क्यों बुलाते हो आप जो कहना चाहते हो वो समझने लायक नहीं है अब यह मेरे ऊपर ब्लेम आता मैं क्या करूं अब या तो यह है कि इनको सुनू बैठ के और अपना माता फड़वा भ भ राधा कृष्ण दास जैसे लोगों को सुनता रहू तीन तीन साढे तीन तीन घंटे झूठ नहीं है गलत है झूठ नहीं है गलत है एक तरीके से है वो तो अब आपको बोलने के लिए सब तो ये शब्द के इस्तेमाल तो करने ही पड़ेंगे जब आपको उस बात को सत्य करना है तो एक तरीके से ऐसे वैसे प्रक्ष लास्ट में भी बोलता है ईश्वर सर्व शक्तिमान जब नहीं है लास्ट में बोलते हैं कि मैंने दोनों तरीके बता दिए भाई मतलब इनके पास दोनों तरीके हैं मास खाना है नहीं खाना है दोनों है ये इनके धर्म ब्रह्म का निर्णय है दो तरीके दो तरीके से और फिर भीय कट्टर द्वैतवाद है ये कट्टर द्वैतवाद है

01:36:19:12 शंकराचार्य का विरोध करने के लिए ये कट्टर द्वैतवाद दिखाते हैं स्तु तो कटर दवादी नहीं है क्य अचिंत लग गया वहा हा अचिंत लग गया ब भाई अचिंत तो तो प्योर शंकर का विरोध करने वाले कैसे हो गए जब अचिंत लग गया तो जैसे आप प्योर जैसे आप शंकर का विरोध अगर कर रहे हो प्योरिटी के साथ तो ऐसे ही मधवा चार जी का भी करो मगर मधवा चार्य जी के विरोध की उतनी आवश्यकता नहीं है इसलिए शंकर का विरोध करने के लिए हम कट्टर दत वाले हैं वस्तुत तो हम अचिंत बीच के है हम लोग बीच के वस्तुत

01:36:55:18 लेकिन चलिए और और कोई आना चाह रहा है क्या हां कोई आया तो है राम राम अखिलेश जी आए जी चक्र पानी जी अपने अपना चेहरा नहीं दिखा रहे हैं राम कलेश कुमार यादव अपना कैमरा ऑन करेंगे तो जुड़ेंगे ड टू स्टेज हां जी राम अखिलेश कुमार जीम जय श्री राम जय श्री राम हां सर मैं वर्ण व्यवस्था पर कुछ चर्चा करने आया हूं वर्ण व्यवस्था पर हम लोग फिर किसी दिन रख लेंगे अगर आज ईश्वर की सर्वशक्ति मत्ता से कोई बात है तो बताइए क्योंकि लाइव स्ट्रीम जो है डेढ़ घंटे की हो चुकी है ऑलमोस्ट और मैं थक भी चुका हूं सुबह से वो उस दिन मैंने साढ़े तीन घंटे के बाद ऑफ कर दिया था तो लोगों ने कह दिया कि भाई वो जब वो गया वो लास्ट के 10 पा मिनट में व जीत गया है तो यह आप किसी और दिन कर लीजिएगा आप एक नंबर नोट कर लिए किसी को भी कोई वैचारिक मतभेद के निमित्त अगर चर्चा करनी है तो वह एक नंबर नोट करें 740

01:38:12:21 8369 आप इस पर जब ट करेंगे कॉल मत करना भाई बहुत कॉल आते हैं कॉल मत करिएगा कॉल मत करना उस पर ट करना आपको एक ऑटो जनरेट मैसेज हो जाएगा उसमें आप फॉर्म भरिए हम लोग विधिवत आपको समय देंगे और समय के साथ आएंगे ठीक है अभी लाइव स्ट्रीम है अभी कर लीजिए ना अभी भाई साहब मैं आप आप देख रहे हैं ना मैं डेढ़ घंटे हो चुके हैं अभी मैं वो एक बृहद विषय उस पर चर्चा करना मतलब एक घंटा और तो अभी जो ऑलरेडी जो टॉपिक चल रहा है ना ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं परंपरा यह इस पर बात करनी हो तो आप कर सकते हैं अरे मैं तो पहले से आपको बोला था तो आप बोले कि ऐसे करो मोबाइल से उतना होता नहीं है तो मैं आपको अभी लाइव स्ट्रीम कर रहे हैं तो इसमें बात रख लीजिए पा 10 मिनट में इसका भी तो निर्णय आ जाएगा ना कि आप वर्ण व्यवस्था को जन्म से मानते हैं कि कर्म से महाराज जी वो क्या बोलते हैं पा 10 मिनट चलेगा नहीं ये ये खींचेगा लंबा बिल्कुल हो जाएगा पा 10 मिनट में नहीं होगा अभी बता देता हूं मैं एक सेकंड में हम हम क्या बोलते हैं भी मानते हैं बताइए आप मानते हैं

01:39:28:20 जन्म से मानते यही तो प्रॉब्लम है ना हा तो कौन से कर्म से मानते हम पिछले जन्म के कर्म से मानते हैं तो सर सुनिए शास्त्र के आधार पर मैं बता रहा हूं देखिए भाई साहब देखिए देखिए ठीक है ठीक है हम लोग शास्त्र के अंदर क्या लिखा है यह चर्चा हम लोग कर लेंगे फिर किसी दिन अभी हम लोग ये बात पूछते हैं शास्त्र आपको मिले कैसे ये बताइए शास्त्र वर्ण व्यवस्था को मानने या ना मानने का भाई साहब भाई साहब मुझे मुझे अपना प्रश्न प्रश्न स्पष्टता से रख लेने दीजिए आपका वर्ण व्यवस्था को कर्म से मानने का आधार शास्त्र है ठीक है शास्त्र है ना हा अब मैं आपसे प्रश्न ये वाला जो शास्त्र के अंदर क्या लिखा है ये वाला विषय हम किसी और दिन रखेंगे आप हमें फॉर्म भरिए हम आपसे कांटेक्ट करेंगे रखेंगे अभी मैं आपसे पूछ रहा हूं मैं आपसे पूछ रहा हूं मैं आपसे पूछ रहा हूं मेरा वीडियो अटक रहा है आप कई बार भाग चुके हैं और अभी भी भागने का प्रयास कर रहे यही तो गलती है नानको इनको जो है ये इसलिए आते [हंसी] हैं

01:40:43:21 इनको मैं वीडियो ढूंढ रहा था मैं कनको एक चर्चा लाइव दे दूं आराम से बैठ के देख ले वहां प उनको सारा इन उनको उससे मतलब नहीं है उनको तो आके य करना है इतना बोल के जाना है कि आप जो है ऐसा करते हैं रहा ठीक है तो अब हम पूरी कर रहे हैं जी लाइव स्ट्रीम ऑफ कर रहे हैं कोई है नहीं जो अपने चेहरे के साथ आ सके चलिए तो हर हर महादेव जय श्री राम और अगर किसी को ऐसा कोई कंटेंट मिलता है ना जिसमें की

01:41:26:09 उस पर जो है कार्य करेंगे और प्रतिकार करेंगे अगर हरि निंदा कहीं पर हो रही विष्णु की कृष्ण भगवान की कहीं निंदा हो रही है राम जी की कहीं निंदा हो रही है तो ऐसा हमें कंटेंट कोई मिलता नहीं है अब यह देखिए यह क्या कह रहे पंडित जी कह रहे हैं कि जिनको ये राम ल के पास रामपाल के लोगों के पास शास्त्र का ज्ञान होता नहीं है टाइम पास के लिए आते हैं अब किसको संभाले पंडित जी शास्त्रों का का जिसका ज्ञान है उसके साथ डिबेट करने की करने से अच्छा लगता है य

01:42:11:20 राम शिवसेना वाला भी वो करते हैं ठीक है तो हम लोग लाइव स्ट्रीम को ऑफ कर रहे हैं सभी को जय श्री राम आने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद आपका स्वेतांक जी जय श्री राम शम

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Live 1:42:31 · 15 Sep 2024

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