⬜ Not used yet · 00:00:28:28 – 00:04:43:13 (4:14)
00:00:28:28 सभी को जय श्री राम थोड़ा सा लेट हो गए हमलोग पाच मिनट संभवत तो अभी हमारे जो मित्र है वह अभी आए नहीं है तक हम लोग मैसेज पढ़ लेते हैं भगवान विष्णु सुप्रीम भगवान शिव जी और विष्णु जी एक है लॉर्ड इ सुप्रीम वैष्णव
00:01:02:19 जगतगुरु शंकराचार्य भगवान की जय राम राम हमने उन्हें लिंक दे दिया है वो आ नहीं अभी आए नहीं है महाराष्ट्र
00:03:30:09 से हूं कृपया बताइए कि शंकराचार्य जी से कैसे जुड़े वर्तमान में तो सबसे अच्छा जो अवसर है वो आप प्रयागराज जाने का प्रयास करें जय श्री राम मैक्स नियोन जी आर्थिक सहायता प्रदान करने हे तो आपका आभार और गुरुदेव का वहां पर पाच से लेकर 15 तारीख तक प्रवास है उसमें आप आ सकते हैं और या फिर आप प्रतीक्षा कर सकते कि गुरुदेव आपके निवास स्थान निवास क्षेत्र के निकट से कब
00:04:13:21 निकलेंगी का जी का जी ने आपने अभिवादन किया है आपका जी ये हमारे जो मित्र है इसकन से वो आ चुके हैं संभवत जी भया जय श्री राम
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→ Used in: A · Video शिव,दुर्गा काली माँ को कृष्ण जी के सम्मान समझने वाला मूर्ख है अपराधी है ? - #isk... at 0:03 ↗
00:04:43:13 हरे कृष्णा प्रभु जी जय श्री राम हरे कृष्णा आप ही आपसे ही बात हो रही थी अभी जो दिन भर कन्वर्सेशन हो रहा था जी जी जी प्रभुजी जी हां जी तो तो आपको किस चीज से असहमत है आप हमारी जो आपने हमसे संपर्क किया था प्रभु जी जैसे आपकी मैंने वीडियोस देखी है कि आप एक ही चीज को टारगेट करते हो कि जो शिव जी है जो विष्णु जी है उसको लेके तो उसमें मैं थोड़ा असहमत था अच्छा इसके अलावा बाकी की चीजें जो है हमारी उससे आप सहमत है
00:05:32:13 जी बहुत कुछ चीज ऐसा देखा है कि हम सिर्फ शिव विष्णु के बारे में बात करते हैं या फिर अन्य चीज भी जानते हैं आप हमारी अन्य थोड़ी बहुत जानता हूं जैसे कि अभी शंकराचार्य प्रभु जी की बातें चल रही है हाल फिलहाल में उनके मैंने आपने हमारा कबीर पंथिया के साथ वीडियो देखा है नहीं नहीं प्रभु जी आपने हमारा आर्य समाज के लिए वीडियो देखा है नहीं नहीं प्रभु जी आपने हमारा इस्लाम के लिए वीडियो देखा है थोड़ा थोड़ा देखा है आर्य समाज के लिए भी मैंने थोड़ी सी वीडियो देखी थी आज ही और इस्लाम के लिए भी मैंने थोड़ी वीडियो देखी थी अच्छा अच्छा जी जी तो स्कोन को लेकर के जो वैचारिक स्पष्टता है संशय है या फिर जो हमारे प्रश्न है वो केवल एक नहीं है कि हरि और हर में भेद क्यों यह बहुत सारे प्रश्नों में से एक प्रश्न है तो ठीक है तो बताइए आप कि केवल विष्णु ही भगवान है उनको ही भगवान मानना चाहिए या सीधे इस पर आ जाते हैं कि आपके श्रीमद् भागवत में न 1525 में लिखा हुआ है कि शिव दुर्गा
00:06:47:16 काली के नाम को कृष्ण के नाम के समान समझने वाले मूर्ख है अपराधी हैं उनका नाम जप करना मतलब उनको भगवान समझना कृष्ण के समान भगवान समझना उन्हें पाप है मूर्खता है तो यह इससे आप सहमत है इस बात से जी जी प्रभु ऐसे मूर्ख नहीं कह सकते क्योंकि वो भी जो देवी देवता है वो भी उनके अंश है ऐसे म नहीं मैं पूछ रहा हूं क्या वह उनके समान है कि नहीं नहीं समान नहीं है प्रभु जी समान नहीं है अच्छा समान ना होने के लिए आपका ऐसा क्यों बिलीफ है समान नहीं है क्यों प्रभु जी बहुत सारी चीजें है जो कि मैंने भगवत गीता में पढ़ी है और श्री विष्णु पुराण में पढ़ी है बहुत सारी चीजें है जो आपने उपनिषदों में भी प्रमाण देखा है क्या प्रभु जी देखो अभी मैंने सिर्फ अभी मैं प्राण पुराण पढ़ना आरंभ किया मैंने अभी उपनिषद नहीं पढ़े तो जब आपने पूरा पूरा अभी आप आप अभी किसी निर्णय पर नहीं पहुंचना चाहिए ना जब आपने अध्ययन कंप्लीट नहीं किया है तो फिर आप क्यों कह रहे हैं कि नहीं उनको समान समझना पाखंड है पाखंड तो मैंने शब्द यूज नहीं किया प्रभु
00:08:02:22 जी क्योंकि ये जोख विचारधारा का समर्थन कर रहे हैं जो पाखंड कह रही है अब आप मुझे बताइए चलिए मैं पूछता हूं आपसे क्या शिव दुर्गा काली को कृष्ण के समान समझना मूर्खता है या नहीं नहीं मूर्खता नहीं है क्योंकि गरुण प्राण में मूर्खता नहीं है तो मतलब आप ये जो भगवत श्रीमद् भागवत भाष्य में लिखा है प्रभु जी पहले मुझे हम पहले सुनिए तो हम पहले एक विषय तय करेंगे फिर उस पर व्याख्या हम आपकी सुनेंगे विषय इसलिए तय करना आवश्यक होता है जैसे मैंने आपसे ये नहीं कहा क्यों मैं यह पूछ रहा हूं तो आप जब यह कह रहे हैं कि मूर्खता नहीं है तो आपका जो इसकन का श्रीमद भागवत भाष्य है उसमें जो य लाइन मेंशन है कि उसको समझना मूर्खता है व सही लाइन है या गलत लाइन है इस बारे में आप मूर्खता और पाखंड इन दोनों शब्दों में बहुत बड़ा अंतर है मूर्ख ये दोनों शब्द हमें स्कन से प्राप्त है मूर्ख दोनों शब्द हमें स्कन से प्राप्त है मूर्खता आपकी ग्रंथ में मेंशन है और पाखंड आपके अधिकृत व्यक्ति ने बोला है दूसरी बात मैंने प्रश्न आपसे पाखंड का नहीं किया मैंने बोला मूर्खता मैं दोबारा अपना प्रश्न क्लियर कर देता हूं कि
00:09:17:27 क्या क्या शिव दुर्गा काली को क्या कद पहले यूज किया था तभी मैं पाखंड हमने इसलिए बोला क्योंकि स्कोन के अधिकृत व्यक्ति ने यह बात बोली है पाखंड बो प्रभु जी मैं यहां पर स्कन की बात करने के लिए नहीं आया आप तो आप आप स्कन की इस बात से सहमत है उसे पाखंड बोलना मैं आपसे पूछ रहा हूं अभी नहीं पाखंड पाखंड बोलने से सहमत है आप पाखंड अगर शब्द यूज हुआ है तो वो गलत है मूर्खता आप उसका विरोध करेंगे यहां से जाने के बाद किसका जिसने पाखंड शब्द यूज किया है नहीं प्रभु जी ऐसे तो हमें देखा जाए बहुत सारे एग्जांपल है हमारे पास मैं आपसे पूछ रहा हूं विरोधाभासी भावना रखेंगे जैसे आपने हमारा विरोध किया एक तरीके से कमेंट किया मान लीजिए कमेंट ही किया कमेंट के द्वारा आपने असमर्थ अपना प्रकट किया तो इसी प्रकार से कम से कम आप असमर्थ प्रकट करेंगे उनका जो पाखंड कह रहे हैं नहीं असमर्थ नहीं मैं उनसे प्रश्न जरूर करूंगा जैसे कि मैं आपसे कर रहा हूं अस समर्थन नहीं करूंगा क्योंकि मेरा जा आप इसका विरोध नहीं करते हैं कि पाखंड बोला है इस बात से आपको विरोध नहीं है बस आप जानना चाहते कि क्यों बोला
00:10:32:28 है हा क्यों बोला उसका रीजन क्या है जब तक मुझे वो पूरा नहीं पता होगा तो अब आप ये तो मानते हैं मूर्खता जी जी मूर्खता तो कही जगह कई जगह यूज हो जाता बड कभी ऐसा हो जाता है कि आप क्या स्वीकार कर रहे हैं क्या शिव दुर्गा काली को मानने वाले कृष्ण के समान समझने वाले मूर्ख हैं आप क्या मानते हैं फिलहाल मूर्ख है या नहीं है प्रभु जी वो मूर्ख है क्योंकि वह परम ब्रह्म है और परम ब्रह्म को अगर देवता से मूर्ख मानते है ना बस अब य अब ये थोड़ा सेट हुआ है अब हम उससे आगे आपकी व्याख्या सुनते हैं कि क्यों आप क्यों कह रहे हैं कि वो मूर्ख है जी जी जैसे प्रभु जी आप एक चीज देखो एक पिता होते हैं एक पिता होते हैं उनका पुत्र होता है और जब वो पुत्र हो जाता है क्या वो पुत्र दोबारा वही पिता बन जा जिससे वो आया है अच्छा ये बताइए पुत्र क्या अलग से कहीं से निकलता है उसका हा अलग होता है में क्या उतनी ही एबिलिटीज होती है जितनी पिता में है या सेम होता है पुत्र अपने पिता पर निर्भर करता
00:11:48:03 है या नहीं करता है प्रभु जी पहले आप एक चीज क्लियर करो कि जब एक पुत्र पैदा होता है पिता से तो क्या वो दोबारा वही पता वही पर जा सकता इसको और करता हं यही अंतर है मानवों में और ईश्वर में ईश्वर से जब कुछ निकलेगा तो पूर्ण ही निकलेगा क्योंकि ईश्वर पूर्ण है मानव पूर्ण नहीं है उससे जब कुछ निकलेगा तो व पूर्ण निकलेगा दूसरी बात इसको और आगे चलते हैं क्या आप वेदों के
00:12:22:21 या तो सिर्फ परब्रह्म है बा जो इनके तत्व है वो तो अपूर्ण है वो पूर्ण नहीं है पर कह रहे हैं कि वो पर्र बाकी सब उनके तत्व है जी ग्रंथों के आधार परही कह रहा हूं प्रभु जी श्री विष्णु पुराण उठा के देख लो उसमें स्वयं भगवान शिव उनकी आपको वेदों का वाक्य दिखा दूं कि शिव की भक्ति करना मोक्ष दायक है उपनिषद का वाक्य दिखा दूं तब आपका फैसला क्या होगा प्रभु जी गरुण प्राण में 12 12 ऐसे आप मुझे पुराण का उदाहरण दे रहे हैं मैं आपको श्रुति का वो दे रहा हूं प्रमाण श्रुति मैं भी प्रभु जी मैं आपको श्रुति का दे रहा हूं अगर मैं आपसे आपको उपनिषद का वाक्य दिखा दूं कि शिव की भक्ति करना मोक्ष दायक है तो आपका निर्णय क्या होगा क्या आपका निर्णय बदल जाएगा या यही रहेगा जो अभी है जो अभी है प्रभु जी जो मैंने पढ़ा मैं अपने निर्णय पर रहूंगा जो आपने पढ़ तो आप श्रुति को नहीं मान जब मैं आपको पढ़ा दूंगा मैं तब की बात कर रहा हूं तो क्या आप कुरान को नहीं मानते हो पुराण को मानता हूं फिर मैं भी उपनिषदों को मानता हूं जब मैं पढ़ूंगा तब मैं उसको तो मैं पुराण को मानने से मना कहां कर रहा हूं जब ये कहा गया कि विष्णु
00:13:38:03 जी परम ब्रह्म है तो मैंने उनको परम ब्रह्म माना जब यह कहा गया कि शिवजी परम ब्रह्म है तो मैंने उसको भी परम ब्रह्म माना आपने जब विष्णु को कहा गया तब तो माना मगर जब शिव को कहा गया तब नहीं माना दूसरी बात आपने कुछ श्लोकों सेय आप किसी भी श्लोक से सिद्ध नहीं कर सकते कि शिव और विष्णु में भेद है मगर भेद नहीं हैय ये मैं नारद पुराण से सिद्ध कर सकता हूं भेद नहीं है ये मैं भागवत से सिद्ध कर सकता हूं मुझे पूरा कर ले दीजिए भेद नहीं इसके अलावा इसके अलावा एक वचन है पुराणों का ही वचन है मत्स पुराण 145 वा अध्याय 5वा श्लोक सभी श्रुति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा साधु सम्मत धर्म है अगर कोई ऐसी शिक्षा है जो दूसरे का खंडन कर रही है तो हमको ऐसा अर्थ निकालना पड़ेगा खंडन वाला अर्थ नहीं हमें ऐसा अर्थ निकालना पड़ेगा जिसमें किसी का भी खंडन ना हो तो श्रुति शास्त्रों में शिव की भक्ति को मोक्ष कहा जा रहा है उपनिषद में कहा जा रहा है मैं आपको अभी श्लोक खोल के दिखा देता
00:14:57:20 हूं जब विष्णु को परम ब्रह्म कहा जा रहा है तो हमने मानने से मना थोड़ी ना किया है मगर ये कहीं नहीं लिखा है कि विष्णु और शिव में भेद है नहीं भेद ये तो मैं ये यजुर्वेद का श्लोक है यजुर्वेद यजुर्वेद का श्लोक है इसका संस्कृत का उच्चारण मैं नहीं पढ़ूंगा मगर सीधे-सीधे इसमें शिव स्वरूप कल्याण दाता और मोक्ष दाता कहा गया है मोक्ष ओके ओ अब इसको आप नहीं मानेंगे प्रभु जी ज जब मैं उसको अच्छे से मैं पढ़ूंगा पूरा जब अभीर आपको आने की आवश्यकता नहीं है आप पहले अपना अच्छे से अध्ययन करिए तब आते आप फिर आप आए क्यों है प्रभु जी इसमें मेरी जो मैं बातें बोल रहा हूं इतना पढ़ लिया है तो हम उसके आधार पर आपसे बात करें जना आप पढ़ के आए हो उसके बाहर से हम बात ना करें जबक उसके बाहर भी आपको कितना लग रहा है प्रभु जी कि आपने आप मेरी बात कंप्लीट नहीं होने दे रहे आपको
00:16:13:07 जने जो चीने बात बोलिए अपनी बात बोलिए हा हा बोलिए अपनी बात जो वीडियो में आपने मैंने जो कमेंट किया था उसम आपको ने बताया कि गरुण प्राण में ऐसा मेंशन है कि ब्रह्मा विष्णु और शिव में कोई अंतर नहीं है और कोई भी उनमें भेद करता है तो उसको गौ हत्या के बराबर पाप लगता है ठीक है प्रभु जी अब अब आते हैं उसके आगे कि परब्रह्म जो है वो विष्णु से भी ऊपर है जिनको हम श्री कृष्ण कहते हैं भगवत गीता में ऐसा वर्णन है जहां पर वो खुद कहते हैं कि मैं ही परम ब्रह्म हूं किसी भी जितने भी शिव जी है और ब्रह्मा जी हैं और यह अपने विष्णु जी है यह कहीं भी ऐसा नहीं कहते कि मैं परब्रह्म हूं पर श्री कृष्ण भगवान ने भगवत गीता में कहा है अर्जुन को और उन्होंने अपना प्रमाण भी दिया है विश्वर रूप दिखा के अर्जुन को क्योंकि उस टाइम उसको भी विश्वास नहीं हो रहा था एक मिथ्या है अब हो गई आपकी बात पूरी हो गई मैं बोलू अब जी जी जी बो ये एक मिथ्या है कि केवल श्री कृष्ण भगवान
00:17:28:14 ने स्वयं को परम ब्रह्म कहा है मिथ्या हैय जो फैलाई गई है शिव पुराण में शिव जी ने स्पष्ट कहा है मैं हूं परम ब्रह्म राम गीता में अध्यात्म रामायण में राम जी ने कहा है मैं हूं परम ब्रह्म भगवती पुराण में भगवती भगवती ने कहा है मैं हूं परम ब्रह्म यह एक मिथ्या फैलाई गई है शिव पुराण में आपको दिखाऊ प्रभु जी विश्वरूप किसने दिखाया फिर अगर ऐसा कह दिया उन्होंने तो विश्वरूप य सनातन सिद्धांत है कि जो विश्वरूप दिखाएगा उसको ही परम ब्रम माना जा जाएगा यही तो मेन प्रमाण है नहीं तो कलयुग में ऐसे लोग आप ये सनातन सिद्धांत है कि जो विश्वरूप दि अब मैं कह दूं हलाहल विष किसने पिया भाई प्रहलाद महाराज आप मुझसे पूछोगे हलाहल विष पीने से सिद्ध नहीं होता कि विष पीने वाला ही परम ब्रह्म है हलाल पार्वती माता के साथ विवाह किसने किया भाई अब आप मुझसे पूछोगे यह कहां का सिद्धांत है कि जो पार्वती से ब्याह करेगा वही वही परम ब्रह्म है तो यह आपका अपना व्यक्तिगत तर्क है जब मषि वेदव्यास स्मति दो एक व्यक्तिगत तर्क अमान्य व्यास जी को पुराणों को मानते हैं ना तो व्यास जी ने कहा है व्यक्तिगत तर्क अमान्य आप इसका शास्त्रों से मुझे दीजिए
00:18:43:16 कि जो विराट स्वरूप दिखाएगा वही परम ब्रह्म माना जाएगा दूसरी बात अब ये बताइए सीधे इस आ जाते हैं कहते प्रभु जी वही बताते हैं कि अर्जुन कहते हैं कि अगर आप परम ब्रह्म हो तो मुझे अपना वही स्वरूप दिखाओ तब कृष्ण भगवान ने उनको विश्वर रूप दिखाया था तो तो शिवजी ने शिव जी से किसी ने नहीं कहा शिव जी को वो चीज नहीं करनी थी शिव जी को दूसरी चीजें करनी थी शिव जी से किसी ने नहीं कहा ये चीज उनकी लीलाए अलग है उनकी कथा अलग है अच्छा चलो अब सीधे आ जाते हैं क्या इसकन के द्वारा पूजित होने वाला जो ईश्वर है कृष्ण वो सर्वशक्तिमान है इसकन के साथ नहीं प्रभु जी उनको पूरा जगत पूछता है इसकन ही नहीं मैं कोईन इस कोन की विचारधारा के अनुसार पूजित होने वाला जो कृष्ण है क्या वो सर्वशक्तिमान सिद्ध होता है जी प्रभु अच्छा तो जी जो ईश्वर है उसकी एक चीज है कि वह अबाध है सर्वशक्तिमान है वह किसी भी नियम के नीचे नहीं है बल्कि सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है अब आप ये बताइए जिस प्रकार दूध से दही बन जाता है पर दही से दूध नहीं उसी प्रकार कृष्ण तो शिव बन जाते हैं पर शिव से कृष्ण नहीं बन पाते तो यहां पर
00:19:58:19 जो आपका कृष्ण है इसकन का कृष्ण यह कृष्ण रुक क्यों रहा है शिव बनने से वापस कृष्ण क्यों नहीं बन पा रहा है ये जैसे एक वो है बल्ब है बल्ब के अंदर लाइट होती है तो क्या वो लाइट बल्ब बन सकती है ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है बन सकती है ईश्वर है यहां बात बाधित चीजों की नहीं हो रही है श कृष्ण है इसका मतलब आप ये कह रहे ईश्वर भी कुछ कार्य है जो नहीं कर पाता है आप ये कह रहे हैं ना कुछ कार्य है जो ईश्वर भी नहीं कर सकता ये कह रहे हैं ना आप मैंने तो ऐसा नहीं कहा मैं तो बोल रहा तो बल्ब से आप जो मैच करा के कह रहे हैं क्या बल्ब से वो लाइट बल्ब बन सकती है तो वही तो मैं कह रहा हूं ईश्वर से शिव बन रहे हैं तो शिव से निकल कर के पूर्ण से पूर्ण ही निकलता है वेदों में वाक्य है पूर्ण से पूर्ण ही निकलता है तो पूर्ण जब निकल रहा है तो जब वो पूर्ण है तो वो वापस क्यों नहीं बन सकता है पूर्ण
00:21:05:01 आपकी आवाज आपकी आवाज वो हो रही है संतुलन नहीं आ रहा है आपका बोलिए दोबारा बोलिए आपकी आवाज जी बोलिए व्यवहार में भिन्न है परमार्थ में नहीं है व्यवहार में नहीं बन सकता परमार्थ में बन सकता उसी को अद्वैत कहा जाता
00:21:50:13 है नहीं नहीं आपने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया मैंने आपके सवाल का जवाब दिया व्यवहार में नहीं बन सकता परमार्थ में वही उसकी प्राप्ति है वही लक्ष्य है उसका मोक्ष आपका वो चेहरा नहीं दिख रहा है आप एक काम करिए एग्जिट हो जाइए दोबारा से जवाइन
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00:22:26:28 करिए कभी-कभी मैं स्कन के कुछ फॉलोअर
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→ Used in: A · Video शिव,दुर्गा काली माँ को कृष्ण जी के सम्मान समझने वाला मूर्ख है अपराधी है ? - #isk... at 17:51 ↗
00:23:03:02 से बात करता हूं तो मुझे कभी-कभी वैसा लगने लगता है कि जो इनको मालूम है बस यह उतना ही बोलेंगे उतना ही पढ़ेंगे उसके आगे ना एक इंच इनको जानना है ना जानने की उत्सुकता है तो यह सब देख के बड़ा हृदय को दुख होता है और यह हमारे हिंदू भाई है जो हमसे छीने जा रहे हैं एक जब तक ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध नहीं करेंगे तब तक हम धर्म की स्थापना नहीं कर पाएंगे और तब तक हमारी मातृ शक्ति सुरक्षित नहीं हो पाएगी धर्म अधर्म की जो लड़ाई है वो मूलत एक आधार पर मातृ शक्ति का शोषण या मातृ शक्ति की रक्षा तो मैं जोय लोगों से जाकर के प्रश्न करता हूं ना बार-बार कि आपका ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं ईश्वर को बाधित करने की आड़ में दुनिया में शोषण शुरू होता है अधर्म शुरू होता है कि भाई सर्वशक्तिमान ईश्वर ने तो बात वो दे दी है
00:24:18:25 मर्यादा तोब कैसे कैसे मर्यादा को लांगाह शोषण किया जाए तो चलो एक नया ईश्वर लाते हैं फिर उसे किया जाता है जी जी जी बोलिए प्रभु जी तो मैं यह कह रहा था कि इसका अर्थ य आप यह मानते हैं कि श्री कृष्ण भी कुछ कुछ कार्य है जो नहीं कर सकते नहीं मैंने तो ऐसा बोला नहीं प्रभु कि हा वो को कोई कार्य नहीं कर सकते आप कुछ बोलते नहीं है मगर मगर अपनी परिभाषा में जो बात करते हैं तो प्रभु वही है जो सब कुछ कर सकते हैं जी तो अब जब वो शिव बने तो उसके बाद वापस कृष्ण क्यों नहीं बन पा रहे हैं शिव वो नहीं बने शिव शिव उनका एक अंश है तो यानी हां इसको थोड़ा मैं समझ लू अच्छा है आपने य बात बोली कि शिव उनका एक अंश है तो यानी कि उनके उनका कोई एक हिस्सा अगर उनसे अलग हो जाता है एक मुझे पूरा करने दीजिए मुझे पूरा करने दीजिए मुझे पूरा करने दीजिए मुझे पूरा करने दीजिए मुझे पूरा करने दीजिए आप पूरा नहीं करने देंगे उन 64 गुण है पूरा नहीं करने देंगे आप पूरा नहीं करने देंगे जी जी जी बोले
00:25:34:04 बोले तो जब उनका कोई एक हिस्सा उनसे अलग हो जाता है तो वह अपने उस कण में वो इतना सा हिस्सा है मान लीजिए उस कण में वह पूर्ण नहीं है क्या उनको वो तभी तक पूर्ण है जब तक वह पूरे रहेंगे उनका अगर वह अंश अलग हो जाएगा तो उस अंश में उस अंश में वो पूर्ण नहीं है क्या जी जी अंश में पूर्ण नहीं है तभी तो वो उनका अंश है अगर वो पूर्ण होते अंश में पूर्ण नहीं है इसका मतलब आप ये कह रहे हैं कि जो ईश्वर है वो अपने अंश में पूर्ण नहीं हो सकता पूर्ण हो सकता है पर वह उन्होंने अपना पूर्ण रूप दिया नहीं उस अंश को जैसे मतलब ये आप कह रहे कि ईश्वर की इच्छा पर निर्भर है कि वो अगर अपने अंश को पूर्ण दे तो वो पूर्ण होगा नहीं देंगे तो नहीं होगा इच्छा पर है ना जी तो फिर तो इसका मतलब इसको छोड़ दीजिए जब उनकी इच्छा तो वो तो चाहे जो करें वो देंगे पूर्णता नहीं देंगे फिर आप वादित क्यों कर रहे हैं कि वो नहीं कर सकते ऐसा कहीं प्रमाण है कि उन्होंने ये किया किन्ने वो नहीं देते शिव जीी को अपनी संपूर्ण शक्तियां ऐसा कुछ लिखा है शिवजी जब उनसे निकलते हैं तो शिवजी को अपनी संपूर्ण हा प्रभु जी बहुत सारे प्रमाण है जहां पर शिव जी का
00:26:49:10 और कृष्ण भगवान का युद्ध हुआ है वहां आप देख सकते हो और सबसे सबसे मेन चीज जो परब्रह्म होता है वो कभी मोह माया नहीं पड़ता पर जब विष्णु भगवान ने मोहिनी अवतार लिया था तब शिवजी भी मोह मोह बस उनमें फस गए थे और उन्हें विष्णु भगवान ने बोला कि आप समझो आप तो वो त्रि देव में से एक हो आप इस मोहमाया के चक्कर में क्यों फस हो आपने बहुत अच्छा किया ये आपने बहुत अच्छा किया एक मिनट आप होता तो वो मोहमाया में फसता है क्या अब ठीक है अब आपने बहुत अच्छा किया ये कह कर के इसका अर्थ यह है कि परब्रह्म जो है मोह माया में नहीं फस सकता बाधित हो गया ना जी सीमा लग गई ना जी जी जी जी जी बाधित हो गया जी जी मोह माया में नहीं फस सकता ना जी जी बोलिए बोलिए अरे मैं आपसे पूछ रहा हूं एक सीमा आ गई ना कि परब्रह्म जो है मोह माया में नहीं फस सकता ये क्या है ये कोई सीमा ये सीमा अच्छा ये सीमा नहीं है ये क्या
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00:27:54:20 है ये ये नियम नहीं है मोहमाया आपसे पूछ रहा हूं ये नियम नहीं है क्या ये नियम नहीं है क्या लिए कोई सीमा ही नहीं है ठीक है ये नियम है कि नहीं मैं पूछ रहा हूं य नियम
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→ Used in: A · Video शिव,दुर्गा काली माँ को कृष्ण जी के सम्मान समझने वाला मूर्ख है अपराधी है ? - #isk... at 22:59 ↗
→ Used in: A · Video कैसे करती इस्कॉन जैसी संस्थाएँ धर्म का व्यवसायीकरण at 45:36 ↗
00:28:11:27 है कि नहीं क्या है ये जो आप बोल रहे हैं ऐसे ही कुछ दिन पहले अब मैं एक बात बता दूं ऐसे ही कुछ दिन पहले हमारी कबीर पंथिया से बात हुई कबीर पंयो से हमने पूछा क्या आपका ईश्वर सब कुछ कर सकता है बोले हां मैंने पूछा क्या वो माता के गर्भ से जन्म ले सकता है बोले ना मैंने बोलाय तो नियम लग गया तो पता है वो क्या बोले यह नियम नहीं है तो क्या है ये क्यों बोल रहे हो जब नियम नहीं है तो अगर यह कुछ है ही नहीं इसका अस्तित्व नहीं है तो बोल क्यों रहे हो यह नियम ही तो है कि परब्रह्म माया से प्रभावित नहीं हो सकता क्या है ये चलिए वो दर्शक देख लेंगे आपका कहना है परब्रह्म माया से प्रभावित नहीं हो सकता परब्रह्म अपने अंश में पूर्ण नहीं हो सकता मगर फिर भी वो सर्वशक्तिमान है जी क्योंकि परब्रह्म ईश्वर की जो हमारी डेफिनेशन है अब मैं बता दूं ईश्वर की जो हमारी डेफिनेशन है वह है पहला नंबर है अस्तो मा सद गमय तमसो मा ज्योतिर गमय मृत मा मतम गमय इसका अर्थ है अगर भाव में जाएंगे तो दुनिया के प्रत्येक प्राणी के अंदर सत चित आनंद की चा है और अगर इसको देखेंगे तो वह ढूंढ रहा है सब कुछ कर
00:29:27:01 सक ने वाले को सब कुछ किसी भी तरीके की बाधा से रहित तो इस चाह का जो सब्जेक्ट होता है जैसे भू भूख का विषय क्या होता है खाना जो भूख को मिटा सके तो सत चित आनंद की चाह का जो विषय होता है वह होता है सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर अगर हमारा जो परमेश्वर है जिसको हम परमेश्वर कह रहे हैं वह सब कुछ कर सकने वाला नहीं है तो वह मनुष्य की चाह का विषय नहीं है इसका अर्थ है कि ऐसे ऐसे ईश्वर को मनुष्य अपने विकल्प के अनुसार या तो प्राप्त करना चाहेगा या तो प्राप्त करना नहीं चाहेगा तो नास्तिकों के सामने इस ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध नहीं कर सकते जो कहेगा कि मैं माया से प्रभावित नहीं हो सकता समझने का प्रयास करिएगा हम क्यों करते हैं क्यों क्यों ईश्वर का सर्व शक्तिमान सिद्ध होना आवश्यक है नास्तिकों के सामने इस ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध हम नहीं कर पाएंगे जो खुद ही कह रहा है कि मैं माया से प्रभावित नहीं हो सकता जब नहीं कर पाएंगे तो क्या है धर्मेन हीना पशु भी समाना सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में से कौन माता है कौन बहन है कौन पिता है यह हमें धर्म से पता लगता है और धर्म क्या है सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त करवाने वाली मर्यादा का नाम धर्म
00:30:42:01 है तो जब सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर सच्चिदानंद स्वरूप हो ही नहीं रहा है वह अबाध हो ही नहीं रहा है तो फिर उसको प्राप्त करने की कोई प्रयास क्यों करेगा जो मर्यादाओं का आलंबन ले तो जब मर्यादाओं का आलंबन नहीं लेगा तो उसके पास धर्म होने का कोई आधार नहीं बचा तो हमारा जो ईश्वर है तो वो है मनुष्य की इस चाह का विषय असतो मा सद्गमय तमसो मा जोगम मृत्य मतम गम इसका विषय है सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रम ईश्वर किसी भी प्रकार के नियम के नीचे नहीं है वह सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है इसीलिए अगर कोई कहे कि ईश्वर जन्म नहीं ले सकता तो वो राम कृष्ण आदि के रूप में जन्म लेकर दिखाएगा अगर कोई कहे कि वो अपनी देह का नाश नहीं कर सकता तो अपनी देह का नाश भी करके दिखाएगा अगर कोई कहे कि वह कुर्म नहीं बन सकता वह कुर्म अवतार लेगा वरा नहीं बन सकता वरा अवतार लेगा कोई कहे वह वामन नहीं बन सकता मत्स नहीं बन सकता वो सारे अवतार ले कोई कहे कि वो आधा जानवर आधा इंसान नहीं बन सकता वो वो भी बन के दिखाएगा कोई कहे कि वो झूठ नहीं बोल सकता वो कृष्ण बनेगा कोई कहे कि वो छल नहीं कर सकता वो मोहिनी बनेगा कोई कहे कि वो रा वो सच नहीं बोल सकता तो वो राम बनेगा यह है ईश्वर वो हर उस बाधा को तोड़ सकता है जो एक मनुष्य सोच सकता है इसका अर्थ क्या हुआ
00:31:57:21 कि दुनिया में किसी भी कार्य के कारण हम यह नहीं कह सकते कि सनातन ईश्वर के सामने एक लाइन लिखी जा सकती है कि दुनिया में कोई भी कार्य ऐसा है जिसके लिए उसके सामने लिखा जा सके कि ही कांट डू इट यही लाइन है जो सनातन को सर्वशक्तिमान ईश्वर प्रदान करती जिसकी वजह से सनातन अलग हो जाता है दुनिया की सारी सनातन विरोधी विचारधाराओं से अगर केरल स्टोरीज वाली लड़कियों से जब पूछा जाएगा ये तुम्हारा कैसा ईश्वर है जो रो रहा है य तु कैसा ईश्वर है जो रास रचा रहा है यह तुम्हारा कैसा ईश्वर है जो अपनी पत्नी के खो जाने पर वानरों की सहायता ले रहा है तो हमको उन बच्चियों को केवल एक नियम बताना होगा कि ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है तो भगवान ने जो विभिन्न प्रकार की लीलाएं की है उसमें उन्होंने बहुत सारे साइंटिफिक स्पिरिचुअल फिलोस फिकल अर्थ बताए ब्रह्मा सरस्वती विवाह गणेश जी का सर काटना शिव जी का मोहिनी के प्रति आकर्षित हो जाना भगु ऋषि की पत्नी का गल काट देना विष्णु जी के कान से मधु कटप का उत्पन्न हो जाना जिससे विष्णु जी ही नहीं जीत पा रहे हैं माता को आकर के उनका वध करना यह सब लीलाओं के अपने अपने अर्थ तो है मगर एक बात भगवान बार-बार हमें बता रहे हैं
00:33:12:28 ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है इसी बात को भगवान ने भगवत गीता में भी कहा कि वोह लोग जो मुझे मनुष्य देह में देख कर के मेरा ब्रह्म ब्रह्म तत्व भूल जाते मेरा ब्रह्मवरा वो मूर्ख है वो बताने आए कि भाई मेरे ऊपर ये मर्यादा लागू नहीं होती मुझे फिनिश कर लेनी मिनट मि पूरा करले दीजिए मुझे पूरा करने दीजिए मुझे पूरा करले दीजिए तो वो आपको इन लीलाओं के माध्यम से बता रहे हैं मोहिनी के प्रति आकर्षित भी होंगे उनके कान से मधु कटप भी उत्पन्न होंगे व माता बनके भी रक्त बीज का वध करेंगे ब्रह्मा विष्णु महेश तीनों एक साइड खड़े हो जाएंगे और काल्या वन से श्री कृष्ण के रूप में भागेंगे भी रण छोड़ कर के भागेंगे व ये भी करके दिखाएंगे कि मैं भाग रहा हूं देखो मैं डर भी सकता हूं वह सब कुछ करके दिखाएंगे क्योंकि ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है हमें इसी बात को हम प्रचारित प्रसारित करने का प्रयास कर रहे हैं आपका ईश्वर कौन है जो बाधित हो रहा है जो माया से मोहित नहीं हो सकता उस पर एक बाधा लग रही है और जब जब ईश्वर पर बाधा लगती है तब तब अधर्मी तंत्र उत्पन्न होते हैं अब बताइए आप
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00:34:23:04 अब मुझे प्रभु जी एक चीज बताओ कि माया में भगवान कब एक दो मे को तथ ब टेस्ट लेने आए वस्तुनिष्ठता का नहीं आप सिंक बात करिए आपका सिद्धांत क्या अपने पॉइंट को रखिए आप जी जी जी मैं वही रख रहा हूं कि आपने अभी बोला कि भगवान माया में भी फस सकते हैं तो मुझे एक दो जगह बताइए जहां पर व माया में फसे हो जो परब्रह्म है वह कहां पर माया में फसे अरे भाई शिवजी के रूप में फस गए रूप में फस ग माया में परब्रह्म माया में फसते तो वो वृंदावन से वहां नहीं जाते मथुरा नहीं जाते वो माया में फस के वही रह जाते क्योंकि उनको मैं आपसे ये कह रहा हूं कि शिवजी के रूप में वो माया से प्रभावित हो गए अब बताइए लीला करके दिखा दी मगर इसका अर्थ ये नहीं है कि ये मान लिया जाए कि वो जो है उनसे अलग हो गए उन्होंने लीला करके भाई शास्त्रों में तो ये भी वर्णन है कि राक्षसों ने ब्रह्मा जी के साथ दुष्कर्म किया है अब बताइए कौन से साथ ब्रह्मा जी के साथ दुष्कर्म हुआ है तो इसका अर्थ क्या है ब्रह्मा जी इतने ग उनके साथ दुष्कर्म हो जाए भगवान य जो पटांग लीलाए है इसको करके स्ल और तरह तरह के अर्थ तो देते हैं परंतु
00:35:38:10 एक अर्थ व बारबार दे रहे हैं कि ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है चलिए अब य वाला टॉपिक आपने स्वीकार कर लिया कि यदि ईश्वर ईश्वर आपने कौन से शास्त्र में ब्र जी के साथ दुष्कर्म हुआ है मैं भी जरा देख ल प्रभु जी मुझे चलिए अब दिखा देता हूं जी जी जी
00:36:45:09 यह वैसे यह हेडिंग देख रहे हैं साइड में कर थ राइट में राइट में करिए राइट में प्रभु जी ये अरे राइट में करो प्रभु जी लेफ्ट में नहीं राइट में आपका राइट ट मेरा राइट अब दिखा थोड़ा इधर करो अभी ददा पढ़ लिया से आगे इधर करो थोड़ा लेफ्ट में करो सही से दिख नहीं रहा प्रभु जी कैमरे में सही से लगाओ कोई बात नहीं आप बाद में पढ़ लीजिएगा ये बुक का नाम है बाद में पढ़ाऊंगा मैं आपको और शलोक क्रमांक दे रहा हूं आपको पेज नंबर ओपन कर हा 433 नाम
00:37:41:03 बताओ इसका वैदिक स्वरूप भी है श्रीमद् भागवत में तीसरा स्कंध 20वां अध्याय 26 से यह देखिए श्रीमद् भागवत का श्लोक है दिख रहा है श्लोक क्रमांक दिया गया है बाकी मैं और दे दूंगा आपको मैसेज कर दूंगा श्रीमद् भागवत का है यह ठीक है अब चलिए आगे चले अब या हो गया और कुछ आपको प्रूफ करना है आपकी आवाज नहीं आ
00:38:25:15 रही आवाज नहीं आ रही आपकी आप ऐसा करिए एग्जिट हो जाइए और दोबारा से हम आपको ले लेंगे अभी इनको ले लेते हैं जिष्णु शर्मा जी को ठीक है आप पहले ये ये तो क्लियर कर लो ये तो क्लियर कर लो कि कौन से पुराण कौन सा है और श्रीमद भागवत बताया तो आपको जी जी जी आप एक बारी दिखाओगे पढ़ के बताओगे मेरे को क्या लिखा गया है तो आप पढ़ लीजिएगा ना बाद में भाई इस पर क्या आपको आपको विश्वास नहीं आप पढ़ लीजिएगा आराम से उसको आपने वैसे भी कहा मैंने बहुत सारे अभी ग्रंथ नहीं पढ़े पढ़ लीजिएगा मैंने यहां डाला है अगर ऐसा कुछ होगा तो अपने प अनाउंस करेंगे कि उस दिन हमने गलत बोल दिया था ठीक है ये जो माधवाचार्य शास्त्री श्री संप्रदाय रामन चार संप्रदाय उनकी ब उस उने कहा प भागवत लिखा है भागवत कहां पे है यह भागवत तो है नहीं अरे भाई यह एक ये एक संकलन है जिसमें
00:39:40:15 की जितने भी पौराणिक आक्षेप लगाते हैं ना आर्य समाजी पुराणों पर आक्षेप लगाते हैं उसका जवाब दिया है रामानुजाचार्य संप्रदाय के आचार्य इन्होंने जवाब दिए सारे आक्षेप के तो इसमें वो सारी घटनाए है शिव मोहिनी प्रकरण भी है गणेश जी का सर भी है जितनी भी पौराणिक घटनाएं हैं जो आक्षेप लगाए जाते हैं खास विशेष तौर पर आर्य समाज यों के द्वारा पुराणों पर उसका इसमें उत्तर है आप ले लीजिएगा अच्छी अच्छा ग्रंथ हैय आप आप आप मेरे को वो पूरा प्रसंग पढ़ के बताओ ना थोड़ा लोग भी जाने कि हां ऐसा है नहीं वो मैं निर्णय करूंगा कि अभी क्या करना है कौन सा प्रसंग पढ़ के बताना है आपने इच्छा प्रकट की है मगर फिलहाल मैं इसमें नहीं हूं कि उस प्रसंग पर बहुत ज्यादा समय बिताऊ अच्छा अभी आप अभी अभी अभी एक निर्णय आ रहा है सामने कि आपने ये माना आपने ये माना कि जो परब्रह्म है वो जो है माया से प्रभावित होकर नहीं दिखा सकता दिखा सकता है पर वो प्रभावित हुआ नहीं है ऐसा कहीं भी वर्णन नहीं है अरे भाई तो शिव जीी के रूप में कौन प्रभावित हो रहा है शिव जी उनके अंश है वो मोह माया में अंश के रूप में अंश के रूप में वो सर्वशक्तिमान नहीं रहता क्या मैं पूछ रहा हूं अंश के रूप
00:40:56:21 आप बोललो फिर पूछूंगा हा जी क्या आपने राम जी को देखा मोहमाया में फसते हुए क्या वो घर पर रुके थे इसको भी समझ लीजिए ईश्वर बोल लीजिए ईश्वर वो है जो सब कुछ करता है ठीक है अब इसमें आगे देखे तो जैसे हनुमान जी हैं हनुमान जी को हम लोग ब्रह्मचारी कहते हैं इसका अर्थ है कि वह स्त्री को नहीं छूते स्त्रियों से दूर रहते हैं मगर जब भगवान ने विराट स्वरूप लिया तो उनका एक सर हनुमान जी का था कि नहीं था कृष्ण भगवान ने स्त्रियों को छुआ था कि नहीं छुआ था इसका अर्थ क्या हुआ व्यवहार में बजरंग बली ब्रह्मचारी है परमार्थ में बजरंग बली कृष्ण भी है है ना तो क्या हुआ इसका अर्थ इसका अर्थ ये है कि ईश्वर तो सब कुछ कर रहा है सुनिए ईश्वर तो सब कुछ कर रहा है मगर हम ईश्वर को हनुमान तब मानेंगे हनुमान के रूप में तब ग्रहण करेंगे जब वोह ब्रह्मचारी हो राम जी को हम राम जी तब मानेंगे राम जी को राम जी हम तब मानेंगे जब वो एक ही विवाह करे श्री कृष्ण को हम श्री कृष्ण तभी मानेंगे जिसने रुक्मिणी माता से विवाह किया होगा जिसने राधा जी के साथ रासलीला प्रसंग किए होंगे उनको हम श्री कृष्ण जिसने गीता का ज्ञान दिया होगा उसको हम श्री कृष्ण मानेंगे तो ये हमारी सीमा है ईश्वर सीमित नहीं है हमारी
00:42:11:26 सीमा है कि हम अपने वाल्मीकि रामायण महाभारत इनसे सीमित है कि हम किसी को भी हनुमान तब मानेंगे अब जैसे भगवान ने तो हनुमान का अवतार दोबारा ले लिया वो आके विवाह कर ले वो कहे मैं हनुमान हूं सुन तो लीजिए वो कहे वो कहेंगे मैं हनुमान हूं पर हम हनुमान उन्हे मानेंगे नहीं पर ब्रह्म के जो परब्रह्म के जो मूल 10 अवतार है उनमें से जो ब्रह्मचारी है वो परशुराम भगवान मैं आपसे ये पूछ रहा हूं जब उन्होंने 10 जब उन्होंने विराट स्वरूप दिखाया था उसमें से एक स्वरूप एक मुख उनका हनुमान जी का था कि नहीं उसमें तो सूर्यदेव भी थे उसम तो चंद्र देव मतलब कि उस कृष्ण के कृष्ण के रूप में बजरंग बली ने स्त्रियों को छू लिया ना मगर वो परमार्थ है व्यवहार में बजरंग बली ब्रह्मचारी है व्यवहार और परमार्थ का अंतर है अंश के भी अंश है प्रभु जी आप देखिए आप मुझसे प्रमाण मांग रहे थे हमने बात की अब अब जो है उस आ जाते हैं अब उस आ जाते तर्क प प्रमाण प्रमाणों प हमने बात की अब तर्क प आ जाते हैं सीधी सीधी सी बात बताइए क्या श्वर सारे बोलने का मौका तो दे
00:43:26:28 नहीं रहे हो आप ही बोल रहे हो आप बोलो फिर आप जो बताना चाहते हो आप को मौका दे रहा हूं आप बोलो बताओ क्या बोलना है बताइए आप मैं वही बोल रहा हूं कि जो भगवान के 10 अवतार जो परब्रह्म के 10 अवतार है वो अलग है वो जो शिवजी उनके अंश है उनके भी अंश है हनुमान जी आपका पूरा हो जाए जब आपका पूरा हो जाए तो मुझे बताइएगा सुन अच्छा मैं आप मैं आपसे कुछ प्रश्न करना चाहता हूं क्या अभी अभी जो आपने बोला उसके बाद मैं उस पर एक बात कहना चाहता हूं उसके बाद आप पूछिए जो पूछना है ओके जैसे ब्रह्मचारी का आपने वो किया है बताया है कि हनुमान जी आपने जो अभी जो ईश्वर सर्व शक्तिमान है जो विषय चल रहा है उस पर अपनी बात जब आपकी खत्म हो जाए तो मुझे बताइएगा मुझे उस पर बात बोलनी है मतलब बोलने तो दो मुझे पहले तभी तो मैं बोलू अभी आप बीच में दूसरा टॉपिक लाने लगे थे इसलिए मैं क्लियर कर रहा हूं अच्छा परब्रह्म की मैं बातें कर रहा हूं परब्रह्म जो है वो श्री कृष्ण है उन्हीं से सब कुछ आता है वो जो शिव जी है वो उनके एक अंश मात्र है है वो भी आते वही उसी में आते हैं वो भी मुक्तिदाता है यही मैं बात आपसे पहले कहना चाह रहा था कि गरुण प्राण
00:44:42:07 में यह वर्णन आता है कि जब हम शिव जी की भी भक्ति करते हैं तब भी हमें मोक्ष प्राप्त होता है उसी बात को मैं आपसे पहले कहना चाह रहा था पर आप सुन ही नहीं रहे हो आप अपना बोले जा रहे हो वो उनके अंश है उनकी पूजा करके भी मुक्ति मिल सकती है ये भी वर्णन है यानी कि उनको उनको भगवान समझने वाले लोग पापी और मूर्ख नहीं है नहीं भगवान तो एक ही है वो तो उनका अंश है भगवान का मैं पूछ रहा हूं उनकी पूजा करने वाले उनको भगवान समझने वाले पापी और मूर्ख नहीं है नहीं है तो वो भागवत का जो आपका श्लोक है न 15 25 उसका क्या करें कौन से भागवत का ये वो करता है ना मैटर करता मैं तो न से नहीं हू प्रभु जी मैंने तो बोला ही नहीं तो आप उससे समर्थन नहीं करते मैं पूछ रहा हूं आपसे आप उसका समर्थन नहीं करते मैं तो सबका समर्थन करता हूं मैं आपसे पूछ रहा हूं उसकी जो ये लाइन है उसका समर्थन आप करते हैं कि नहीं श्रीमद् भागवत में 3 1525 में लिखा है कि शिव दुर्गा काली को कृष्ण के समान भगवान समझने वाले पापी और मूर्ख हैं नहीं प्रभु जी अगर उनको समान नहीं माना जा सकता जैसे एक पिता को पुत्र के समान नहीं माना जा सकता वैसे ही परब्रह्म को
00:45:57:09 उनके अंश के बराबर समान नहीं माना जा सकता तो तो ठीक है तो इसका अर्थ यह है कि आप यह कह रहे हैं कि जो जब अंश अलग होता है ईश्वर से उस अंश में वह सर्वशक्तिमान नहीं हो सकता सर्व बाकी शक्तिमान है पर पर ब्रह्म के बराबर श्वर के समान सर्वशक्तिमान नहीं हो सकता ना नहीं उनमें कुछ गुण कम होते 64 गुण है 6 गु य है कि जब ईश्वर अपना अंश अलग करेगा तो उसमें वह पूर्ण नहीं हो सकता हो सकता अगर वह चाहे तो तो वह तो कुछ भी चाह सकता है वह तो शास्त्रों का विरोध भी चाह सकता है अगर आप यह कहो कि विष्णु भगवान ने य सुनो अगर आप यह कहो कि विष्णु भगवान ने स्वयं यह कहा है कि मैं नहीं मान मैं जो है शिव जी को सारी शक्तियां नहीं देता हूं वह अपनी वाणी से पलट भी सकते हैं ईश्वर वही है जो किसी भी नियम से वादित नहीं है यानी कि देखिए उन्होंने उनकी वाणी है भगवत गीता मिनट एक मिनट उनकी वाणी है भगवत गीता एक मिनट उनकी वाणी पूरा बोलने नहीं देते हो बीच में शुरू हो जाते हो मैंने आपको बोलने दिया कि नहीं पूरा एक मिनट मैंने आपको पूरा बोलने दिया कि नहीं
00:47:12:10 अभी मुझे बोलने दीजिए हा तो बताना मैं आपसे बोलूंगा आप बोलो मैं आपसे बोलूंगा कि अब आप बोलो मैं आपसे बोलूंगा जी जी जीकी वाणी है भगवत गीता उसके अलावा उन्होंने बुद्ध अवतार लिया और वेदों का विरोध किया गीता का विरोध कर दिया किया कि नहीं किया अर्थात ईश्वर अपने कहे से मुकर भी सकता है तो इसका अर्थ ये है हम यह नहीं कह सकते कि अगर ईश्वर ने भी कह दिया है कि मैं शिव जी को सारी शक्तियां नहीं दूंगा इसलिए व इसलिए वो शिव जी सर्वशक्तिमान नहीं है मगर नहीं वह अपनी बात से पलट भी सकते हैं ईश्वर तो वो है ईश्वर तो हर जगह है ना जहां पर अपराध भी हो रहा है वहां भी ईश्वर है अपराध नहीं भी हो रहा है पुण्य हो रहा है वहां भी ईश्वर है ईश्वर तो वो है मैं आपको क्या कह रहा हूं मैं भी तो वही कह रहा हूं कृष्ण भगवान ने प्रतिज्ञा की थी महाभारत के युद्ध में मैं अस्त्र शस्त्र नहीं उठाऊंगा 20 में पितामह ने प्रतिज्ञा की थी आप ये कैसे कह सकते हैं कि जब वो शिव बनाएंगे अपने से तो वो उसको सर्व शक्तियां नहीं देंगे मैंने तोय बो प्र मैंने यह बोला कि वो कर सकते हैं वो उनकी इच्छा है फिर हम ये नहीं कह सकते ना कि शिवजी से कृष्ण नहीं बन सकते नहीं बन तो बन सकते है ना
00:48:27:19 बन सकते वो इच्छा ठीक है देखिए वो जो देख रहे है वो समझ गए आप आप वो मुह से स्वीकार नहीं करोगे मगर सोचोगे ठीक है आप प्रश्न बोलिए अपनाते वो बन सकते हैं पर वो नहीं बनेंगे क्योंकि वो उनका स्वरूप है ही नहीं कि वो वहा से पूर्ण होकर वापस आए क्योंकि उन जितने गुण है वो उतने गुणों से रहे देखने वालो को पता लगेगा कि आपके द्वारा पूजित होने वाला जो ईश्वर है वो बाधित है वो बनने के बाद वो पूर्णता पूर्ण कृष्ण को नहीं निकाल पा रहा है वो माया से प्रभावित नहीं हो पा रहा है वो समझेंगे जो आपसे डिस्कशन लाइव इसलिए नहीं किया कि मैं आज आपका शोधन करूं मगर लोगों को पता चलेगा कि क्यों किस तरह से ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध किया जा सकता है जब आप यहां पर सब कुछ होने के बाद ये कहते हैं ना नहीं कर सकते आप कह भी रहे हैं कि नहीं कर सकते उसके बाद ये भी कह रहे हैं कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है ईश्वर तो परब्रह्म तो श्री कृष्ण है ठीक है श्री कृष्ण ऐसे ही जो आपसे पिछले वाले आए थे ऐसे ही रट्टा लगाए थे वो भी उनका काट काट के लगाया था वहां ओके काटोगे यहां प्रभु जी पूरी बात तो डालोगे नहीं तो ढ़ मिनट की ल में हम दो घंटे का वीडियो नहीं दिखा सकते ना यही तो बात है आप मेरे पो काटना पड़ेगा काट के लगाना पड़ेगा और
00:49:42:24 और वो वीडियो भी पूरा का पूरा यहां पर अवेलेबल है जिसको पूरी स पूरा देखना हो य देख लेगा उसम ऐड करूंगा मैं उसमें से कुछ कट नहीं करूंगा आप मेरे चैनल पर आओ मैंने आपका चैनल देखा है जिसमें 38 38 4 4 मिनट की वीडियो है आप चाहे तो इसको भी पूरी डाल सकते हो पर आप नहीं डालोगे क्योंकि आपको भी पता है आप क्यों नहीं डालोगे किसको पूरी नहीं डालूगा किसको पू ये वीडियो पूरी डालूंगा पूरी डली हुई है मैंने अभी तक जितनी भी लाइव स्ट्रीम सब पूरी डली है अभी तो आपने बोला प्रभु जी मैं शर्ट कर करके डालूंगा कट करना पड़गा नहीं ये आप सुन आप समझते नहीं हो वो थोड़ा पता नहीं कहां क्या कर रहे हो यह तो डला ही रहेगा इसके अलावा बनाऊगा इससे इसके अलावा रील बनाई जाएगी मैं यह कह रहा हूं यह तो डला ही रहेगा मैंने नहीं कहा इसको हटाएंगे रील इससे निकाल के बनाएंगे क्या मैं आपसे कुछ प्रश्न कर सकता हूं हा आप बताइए आपका प्रश्न जी प्रभु वैसे एक बात क्लियर कर दूं ये जो हमने लाइव सेशन रखा था इस बात पर इस बात पर रखा था कि हमने कोई बात इस कन से कही एक जिज्ञासु की तरह एक शास्त्रार्थ की तरह नहीं जिज्ञासु की तरह कुछ प्रश्न रखे स् कन के सामने
00:50:58:03 कि भाई श प्रभ सुन लीजिए सुन लीजिए मुझे मुझे पूरा कहने दीजिए पूरा कहने दीजिए मुझे पूरा कहने दीजिए पूरा नहीं कहने देंगे हमने पूछा शील प्रभुपाद जी के द्वारा लिखी गई बात को इस कन क्यों बदल रहा है इसका उत्तर हमें नहीं मिला व आप उनसे पूछिए प्रभु हा तो आप वहां पर इन बातों का विरोध करने आए थे हमारा करने आप आए थे और आपने सुनिए आपको मैंने सुबह एक डिजाइन तैयार करके दिया था जिसको आपने अपनी स्टोरी पर शेयर किया उसमें आपकी पहचान लिखी हुई थी स्कन डिवटी उसको आपने अपनी स्टोरी पर शेयर कर दिया उसके बाद आपको किसी ने समझाया आपके दिमाग में आया पता नहीं क्या सुन लीजिए पूरा सुन लीजिए आपका आता है कि भाई मुझे स्न डिवटी मत कहिए आपने अपनी पहचान को छिपाने का प्रयास किया भाई मुझे स्कन डिवटी मत कहिए मुझे दूसरी चीज कहिए ठीक है दास का दास हूं मैं कोई डिवटी नहीं हूं मैं इस सं नहीं आप अपना प्रश्न रखिए व जनता जो देख रहे हैं वो सब समझ जाएंगे आपकी यह वाली क्लिप्स भी लगाएंगे कि आप कौन है आप अपनी अपनी आइडेंटिटी को रिवील
00:52:13:12 नहीं कर पा रहे आपने तो अपने गुरु का नाम दिया आपने अपने गुरु का नाम दिया जोन से है मगर फिर भी आप से नहीं अब मैं कुछ प्रश्न करू आपने अपने गुरु का नाम दिया था कि नहीं दिया था ठीक है कर लीजिएगा आपने अपने गुरु का नाम दिया था कि नहीं दिया था कुछ प्रश्न करता हूं आपसे कि आप कर लीजिएगा मैं पूछ रहा हूं आपने अपने गुरु का नाम दिया था कि नहीं दिया था बा सुन लीजिए बा सुनूंगा मैं आपसे आगे बढूंगा अभी जब आपकी आइडेंटिटी की बात हो रही है आपने अपने गुरु का नाम दिया था कि नहीं दिया था मैं इससे ऐसे आगे नहीं बढूंगा मैं पूछूंगा पहले इसका आप उत्तर दीजिए आपने अपने गुरु का नाम मुझे दिया था कि नहीं दिया था जिनसे मैंने क्लास ली मैंने उनका नाम दिया गुरु जिसे कुछ भी सीखते हैं जिससे हम कुछ भी सीखते हैं वो हमारे गुरु होते हैं य प आप कु वो कौन है वो कौन है सब गुरु जहा से मुझे कुछ भी सने जिसका नाम आपने दिया वो कौन है सीधी बात नहीं करेंगे आप भी गु जिसका नाम आपने दिया वो कौन है सब गुरु है आप भी गुरु है भी गुरु मैं आपसे पूछ रहा हूं जिसका नाम आपने मुझे दिया था वह कौन है क्या नाम है उनका गुरु है मैंने बताया था मैंने उनसे भगवत भगवत गीता क्लासेस ली है हा
00:53:30:16 हा क्या नाम है उनका जिसका नाम आपने मुझे दिया था उनका क्या नाम है आप चेक कर लो आप बोलने में आपको दिक्कत हो रही है जैसे आपको प्रभु जी अभी वो बोलने में श्लोक बोलने में दिक्कत हो रही थी पढ़ के बताने में आपका थोड़ा टाइम जा रहा था तो आपने तो उनसे दीक्षा नहीं ली है ना ऑफिली तो आप नाम बोल सकते हैं नहीं जी जी नहीं ली ना तो आप नाम बोल सकते हैं नहीं प्रभु जी क्यों आप भी वो श्लोक पढ़ के बता सकते हो कहां ब्रह्मा जी के साथ में दुष्कर्म हुआ अभी वो वो तो टाइम की वजह से आप समय की वजह से समय की वजह से नहीं बता रहे अभी भी आप टाइम वेस्ट ही कर रहे हो प्रभु जी ये तो वास्तविकता को बाहर लाना चाह रहा हूं मैं आपसे ये पूछ रहा हूं आप जो ये छुपा रहे हो कि मैं इसकन से नहीं हं आप ये कह रहे हो आप स्कन से नहीं हो क्या क्या शंकराचार्य कर कर अगर आप अपनी आइडेंटिटी को नहीं बताएंगे मैं आपको रिमूव कर दूंगा शंकराचार्य समाज क्या लोगों के ऊपर हाथ उठाता है वो मुह से डिबेट करते हैं से ट करते आप अगर आप अगर अपनी आइडेंटिटी नहीं बताएंगे मैं आपको रिमूव कर दूंगा लास्ट बार बोल रहा
00:54:45:18 हूं आइडेंटिटी बताइए वो जो आपके गुरु है कौन से हैं कि नहीं अब अपने प आई शंकराचार्य प्रभु को मैं बात करने को तयार हूं मैं बात करूंगा मुझे आपकी बातें अभी सुनाई नहीं दे रही मुझे आप पहले अपनी आइडेंटिटी बताइए आपके गुरु इसन से जिससे आपने शिक्षा ली है आवाज नहीं आ रही ठीक है मैं आपको रिमूव कर देता हूं बस यही करोगे प्रभु जी जब अपनी क्या कर आप अपनी आइडेंटिटी क्यों छपा रहे अपने गुरु को क्यों छिपा रहे हैं आप मेरे है नहीं आप भी गुरु है आपके गुरु जिससे आपने श्रीमद् भागवत पढ़ी है भगवत गीता पढ़ी है व कौन से हैं कि नहीं मैंने अटेंड की कुछ क्लासेस अटेंड की व स्कन की क्लासेस थी कि नहीं कितनी शर्म आ रही है कितनी शर्म आ रही है अपनी अपनी जहां से आप अध्ययन कर रहे हो उसको बताने में शर्म आ रही है रहे वो आपको आ रही है मे मुझे नहीं आ रही मैं तो तैयार हूं मैं आपके प्रश्न को जानता हूं और डेली कम से कम 10 लोगों से बातें करता हूं इसी सब बारे में जहां से भी कुछ भी सीखता हूं वो सब मेरे गुरु है मैं ग्रंथों से सीखता हूं आपसे पूछ रहा हूं क्या आपने जो आपने भगवत गीता की क्लासेस की बात कर रहे हैं वन
00:56:00:19 है कि नहीं नहीं प्रभु मैं तो घर मैंने भगवत गीता घर पर पढ़ आपने जो क्लासेस की बात की है वन की क्लासेस नहीं थी मैंने तो घर पर ली है मैंने कहा वन के द्वारा आयोजित नहीं थी कितना झूठ बोलोगे झूठ के लिएन के दवारा आयोजित नहीं थी व बोला ही नहीं झूठ मैं तो खुद बोल रहा हूं मैंने घर पर पढ़ी है दो बारी भगवत गीता मैं आपसे पूछ रहा हूं आपने अभी बोला मैंने क्लासेस अटेंड की थी वो किस ऑर्गेनाइजेशन के द्वारा आयोजित थी वो मंदिर में जाके की मैंने जगन्नाथ भगवान के मंदिर में जाके क्लास अटेंड की व इसकन वो इकन के द्वारा तो नहीं था वो नहीं ये कृष्ण मंदिर था वहा प गया मैंने वन से रिलेटेड नहीं है वो ये मुझे इतना वो नहीं है सग खा कए आपको पता नहीं है मैं आप आप उसकी शिव पुराण की सौगंध खाके कहिए कि आपका जो संप्रदाय किसी ने हाथ नहीं उठाया किसी मीडिया वाले प हाथ उठाया क्यों नहीं उठाया द्रोणाचार्य ने हाथ उठाया विश्वामित्र ने हाथ उठाया वशिष्ठ ने हाथ उठाया किसने नहीं उठाया आपके गुरु हां वशिष्ठ जी ने
00:57:15:22 हाथ उठाया ना श जो शंकराचार्य संप्रदाय है उसमें ये एक बहुत बड़ा बहुत बड़ा आधार है कि वो कभी भी हाथ पैरों से बात करते ये कहां लिखा है विषम परिस्थितियों में हथियार तक उठाने का आदेश है शास्त्रों में ब्राह्मण के लिए लड़ने का आदेश है क्षत्रिय धर्म का छात्र धर्म का आलंबन लेने का आदेश है फिर आप राम मंदिर क्यों नहीं गए राम मंदिर नहीं जा पाया राम मंदिर राम मंदिर में आपके जो चार आचार्य है वो क्यों नहीं गए उन्होंने क्यों विरोध किया राम मंदिर का के पूर्ण नहीं हुआ जब शिवजी का एक मंदिर बना था कासी में तब वो भी पूर्ण नहीं हुआ था पर वहां पे वो गए उन्होंने प्राण प्रतिष्ठा कराई और जब राम मंदिर की बात आई वो डिबेट करनी शुरू कर दी उन्होंने फैक्ट और फिगर्स दिखाइए फैक्ट और फिगर्स क्या है पूरा इंटरव्यू जाके देख लीजिए अपने शंकराचार्य वो वो इंटरव्यू मैं देखूंगा उसके बाद आपसे इस विषय प बात करूंगा फैक्ट और फिगर्स तो आप बता नहीं रहे कौन सी डेट में हुआ था क्या था लेके आए हो फिर आप भी थोड़ा इतना सा ज्ञान लेके आए हो मेरे से डिबेट कर बात ये है सुनिए बे पता आपको प्रभु जी अपने बारे मैं बता दूं आपको मैं बता दूं मैं क्यों ऐसा बोल
00:58:30:24 रहा हूं है ऐसा कि जो वाराणसी है वहां पर शिवलिंग जो है प्रकट होती है अगर प्रकट होती है तो उसकी प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम अलग से नहीं होता है उसमें जाया जा सकता है प्राण प्रतिष्ठा जब होगी किसी विग्रह को बना कर के अलग से लाया जाएगा तो उसमें बिल्कुल जो शास्त्र सम्मत कार्यक्रम होंगे उसके अनुसार होंगे आपके यहां भी जो जो भी आपका वैष्णव का जैसे आप ये तो स्वीकार कर नहीं रहे हो कि मैं आपने भी अलग अलग कर दिया ना आपका मतलब राम भगवान आप अलग हो ईश्वर को बाधित नहीं कहता हूं आप अलग हो मैं इस बात को गर्व के साथ कहता हूं कि मैं इसन से अलग हूं द प्र होने वाला ईश्वर है समान अलग कर रहे हो तभी आप यह सारी चीज कर दो वैष्णव वर्सेस वो आप यह चीज करते हो क्योंकि आप वो करना चाहते हो ठीक है
00:59:27:20 चलिए जिष्णु शर्मा जी आप आएंगे कभी-कभी मुझे जॉम्बीज याद आने लगते हैं हर बात का एक ही जवाब कि वो माया से प्रभावित नहीं हो सकते मगर वह सर्वशक्तिमान है उनके अंश में पूर्ण पूर्णता नहीं है मगर वह सर्वशक्तिमान है क्या बात
01:00:14:25 है भाई जो भी देख रहा है इनका मैं आपको बता दूं इनसे आप लोग संपर्क कर सकते हैं स्वयं भी कर सकते हैं क्योंकि यह थोड़े से विषयों से विषयात करते हुए केवल अपने कुछ बवासी में आए थे कुछ इनको बोलना था इसी के लिए आए थे ये जो कि आपने देखा होगा कि कुछ चीजें तैयार करके लाए थे कि हमें शंकराचार्य के लिए ऐसा ऐसा बोलना है जा कर के निराधार तर्क हीन तरीके से बात कर रहे थे तो इसलिए हमने इनको रिमूव किया है अगर कोई इनसे बात करना चाहता है तो
01:01:21:08 वो एच ए आर आई अंडर स्कोर एन ए आर ए वाई ए एन अंडर स्कोर डी ए एस एस हरि नारायण दास यह इनकी आईडी है तो आप इनसे जाकर के जो भी इनसे संपर्क करना चाहे कर सकता है जिष्णु शर्मा जी आप आएंगे
01:02:32:02 हम यहां पर उपस्थित होते हैं कि दार्शनिक धरातल पर आध्यात्मिक धरातल पर सैद्धांतिक अंतर क्यों आ रहा है लोगों में वह मिटाया जाए तो उनके पास वो तो है नहीं कुछ भी कि सिद्धांतों में बात कर सके कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं द्वैत या द्वैत चैतन्य महाप्रभु कोई भी ऐसा उनके पास नहीं है उनके पास य है कि शंकराचार्य ने हाथ उठाया और यह उनको नहीं बताया कि हमारे जो जिस परंपरा से हम आ रहे हैं उसमें छात्र धर्म का आलंबन लेने की बात भी की गई है समय पढ़ने पर धर्म की रक्षा के लिए खैर तो मैंने एक अतिथि और है उनके लिए भेजा है मैं तब तक मैसेजेस देख लेता हूं आर एस पदा जी जय श्री राम जय महाकाल पदा जी प्रणव का उच्चारण से बचा करें नमः शिवाय बोला करें बहुत अच्छा लगेगा आनंद आएगा राज डांगर जी आप श्री वैष्णव और मधुवा वालों से कब बात करोगे कि वह क्यों हरि हर भेद करते हैं जब समय मिल जाएगा जब सामर्थ्य हो जाएगा तब बात करेंगे और अभी प्रायोरिटी क्या है स्कन आर्य समाज कबीर
01:03:47:03 पंथी ब्रह्मा कुमारी आचार्य प्रशांत जी और भी अगर कोई सेल्फ प्रोक्लेम जो है तो प्रायोरिटी इनसे है और समय मिलने पर उनसे भी बात की जाएगी हरिहर भेद अगर करते हैं तो वैसे जो अगर आप यह वाला ग्रंथ पढ़ेंगे रामानुजा चार की परंपरा के ही है ये और इन्होंने बहुत सामंजस बिठाया है सभी विचारधाराओं में तो पढ़िए बहुत अच्छा ग्रंथ है और सबसे बड़ी बात है ईश्वर के साकार स्वरूप को नकारने वालों को ये बहुत अच्छे जवाब देते है पुराणों का मजाक उड़ाया गया है सत्यार्थ प्रकाश में तो इसमें बहुत अच्छे उत्तर है तो आप उनको पढ़े जिससे कि कभी इस्कोन वाले शुद्ध धर्म को नाश कर देंगे अल्लाह को यीशु को कृष्ण के समान मानते हैं लेकिन शिव को कृष्ण के समान नहीं मानते
01:04:43:24 जी हर धार्मिक संस्था में कुछ लोगों की वजह से विवाद पैदा हो जाते हैं हिंदू धर्म तो पॉलिटिक्स बन गया धर्म नहीं बना है समाज बना है धर्म अगर नहीं धर्म अगर पॉलिटिक्स बन जाएगा तो माता को माता की दृष्टि से देखने का आधार नष्ट हो जाएगा और हम पशु बन जाएंगे सारे के सारे जब तक एक भी व्यक्ति धर्म का आलंबन लेने वाला जीवित है तब तक हमारा धर्म जीवित है और तभी तक मनुष्य मनुष्य मैं गुरुदेव के जो भी गुरुदेव के प्रति जो भी आस्थान वित है शंकराचार्य के प्रति जो भी आस्थान वित है जो भी उनके शिष्य हैं जो मेरे गुरु भाई हैं मैं उन सबसे कहना चाहता हूं गुरुदेव एक बात बहुत कहते हैं कि बहुत सारे लोगों की आवश्यकता नहीं है एक मनुवादी एक मनुवादी पर्याप्त है धर्म की स्थापना के लिए तो मेरा उन सारे गुरु भाइयों से यह निवेदन है कि जब भी वह अपने बारे में सोचा करें तो स्वयं को वही मनुवादी सोचा करें जिसके बारे में गुरुदेव बात कर रहे हैं आप सोचिए कि जब गुरुदेव क क एक मनुवादी मुझे चाहिए तो वो एक मनुवादी आप ही हो
01:05:59:07 यही अपनी आइडेंटिटी आप माना करो तभी हम लोग अधर्म से लड़ पाएंगे विष्णु पुराण ने कहा है भगवान विष्णु से निकले सभी अवतार पूर्ण है हा वो सही बात है व पूर्ण से पूर्ण ही निकल सकता है वेदों का भी प्रमाण है और अगर वह पूर्ण से पूर्ण नहीं निकल रहा है तो वो अपूर्ण है अगर पूर्ण जो अंश निकल रहा है वो पूर्ण नहीं है तो और और भी बातें देखें कि अगर ईश्वर सर्वत्र व्याप्त है तो कोई अंश मान लीजिए यह ईश्वर है इससे अगर कोई अंश निकलेगा तो जहां निकला वहां भी ईश्वर है और हर कण में ईश्वर है तो अलगाव आया कहां कहां अलग हुआ इसीलिए अद्वैत को माने बिना आप ईश्वर को सर्वशक्तिमान सर्वव्यापक सिद्ध नहीं कर
01:06:58:09 पाएंगे तो कुल मिलाकर के जो दुनिया में जो भेद आया है ना वह आया है इस व्यवहार और परमार्थ को ना समझने के कारण कि व्यवहार हमें द्वैत का करना है फल स्वरूप प्राप्त होगा अद्वैत गुरुदेव का भी वचन है भेद का निर्वाह करते हुए अभेद स्थिति को प्राप्त करना मनुष्य जीवन है अब वह कह रहे हैं कि भाई शिव जी की भक्ति भी मोक्ष दे सकती है तो भगवान का जो अस्तित्व का जो उद्देश्य है वो तो यही है मोक्ष प्रदान करना तो जब व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त हो जा रहा है फिर भी उसकी पूजा उसकी भक्ति उसको भगवान समझने वाले लोग जो है पाखंडी हैं मूर्ख हैं अपराधी है कितनी अच्छी बात है बिल्कुल अच्छी बात कही आपने मोक्ष से कई गुना बड़ी है भगवान की भक्ति बहुत अच्छी बात है सही बात है सबसे ज्यादा तो भगवान की भक्ति में ही
01:08:00:16 है जय श्री राधे कृष्ण ठीक है चलिए अब मुझे लगता है कोई नहीं आएगा समाप्त करते हैं नारायण समारंभा शंकराचार्य मध्यमाम अस्म चार्य पर्यंत वंदे गुरु परंपराम सभी को जय श्री राम
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