⬜ Not used yet · 00:00:03:03 – 00:04:22:28 (4:20)
00:00:03:03 तो आप सभी का स्वागत है आज एक रैंडम ये ऑर्गेनाइज हुई है लाइव स्ट्रीम इ प हमारा एक अकाउंट है एक महानुभाव है स्कन से तो उनसे मैंने सुबह एक पोस्ट डाली थी रील डाली थी ा पर जिसमें मैंने ये कहा था कि अगर हम इस कन की शिक्षा को फॉलो करते तो उस शिक्षा के द्वारा जो स्पित होने वाला जो ईश्वर है यानी कि भगवान श्री कृष्ण वो पूर्ण नहीं है बाद है अपूर्ण है
00:00:58:27 तो उनसे काफी देर से बातचीत हो रही थी सुबह से तो वो भी अपनी तरफ से कुछ चीजें प्रस्तुत कर रहे थे होता क्या है कि जब मैसेजिंग के थ्रू या चैट के थ्रू सारी बातें सब अपने सारे विचार प्रकट कर पाने में काफी दिक्कत आती है तो तो इसीलिए एक शॉर्ट नोट य होता है कि भाई अगर आपको बहुत ज्यादा बिलीव है आपको फेथ है अपनी चीजों पर तो आप एक बार सामने आ जाए तो कई बार क्या होता है कि हम कुछ पूछना चाह रहे हैं किसी प्रश्न का जवाब हम जानना चाह रहे मगर उस प्रश्न पर बात ना हो कर के बारबार उससे भिन किसी अलग विषय पर बात चली जाती है यह भी होता है हम चैट के जरिए टाइप कर करके पूछते हैं और उसमें कई बार य भी होता है कि कोई व्यक्ति जो अपनी चीजों को बे बुनियादी तरीके से निराधार तरीके से अगर रखना चाहता है तो वहां पर बहुत अमर्यादित हो कर के भी रख सकता है हालांकि ये जो सज्जन है इन्होंने कहीं पर भी अमर्यादित व्यवहार नहीं किया हां एक दो बार इन्होंने ऐसी
00:02:14:13 कुछ जय सीताराम सिद्धार्थ जी एक दो बार इन्होंने ऐसी कुछ मान्यताएं मुझ पर मण जरूर दी जैसे कि मान लीजिए अगर मैं कोई बात रख रहा हूं तो आप ऐसा करना चाहते हो आप व्यू कमाना चाहते हो आप फेमस होना चाहते हो तो इस तरह की चीजें वहां पर हुई मगर हां यह कहेंगे कि कोई भी अंग लैंग्वेज जो अशली शब्द होते हैं जिसके ऐसे भी कर देते लोग सब अपनी फेक आईडी बनाकर रहते हैं ऐसा इन्होने कुछ नहीं किया तो उनके फाइनली जब मैं काफी देर से हुआ तो मैंने बस यही पूछा कि भाई जिस प्रकार दूध से दही बन सकता है उसी प्रकार दही से दूध नहीं बन सकता तो इस प्रकार जो कृष्ण है आप कहते हैं कि इसी प्रकार कृष्ण तो शिव बन सकते हैं मगर शिव कृष्ण नहीं बन सकते कुशल गोस्वामी जी हा यही है जो लाइव आना चाहते थे मगर कुशल जी आपने अपने फेस को ऑफ कर रखा है आप प्लीज अपने फेस के साथ
00:03:22:24 आइए क्योंकि हम चर्चा तभी कर पाएंगे जब आप अपने फेस के साथ आए फेस रिवील करें जी कुशल जी कैसे हैं जय श्री राम जय श्री राम हरे कृष्णा जी क्या बात है आपका स्वागत है लाइव स्ट्रीम में आपका भी स्वागत है एक
00:03:58:20 मिनट जी कुशल जी मैं यह कह रहा था कि जो सुबह आज मैंने री ाली थी उसम यह था की सीधे हम लोग विषय परही आते हैं और औपचारिकता तो होती रहेगी सुब मैंने ाली थी उसम मैंने यह कहा था कि भाई जिस प्रकार दूध से दही बन सकता
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00:04:22:28 है मगर दही से दूध नहीं बन सकता उसी प्रकार कृष्ण तो शिव बन सकते हैं मगर शिव बनने
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00:04:28:20 के बाद वो वापस जो मूल उनकी फॉर्म थी उसम वापस नहीं आ सकते हैं तो यहां पर आपको नहीं लगता कि कृष्ण बाधित हो रहे हैं एक्चुअली क्या है मैंने आपको समझाने का प्रयास किया दो तीन बार लेकिन आप समझ नहीं पा रहे जब आप बात करते हैं कृषण से शिव बनते हैं तो आप बनने की प्रक्रिया क्या समझते हैं आप बताइए क्या है मैं तो समझना ही चाहता हूं मैंने उस रील में कहा भी है मैंने उस रील में यह कहा था कि मुझे आप सर्व शक्तिमान ईश्वर दे दीजिए मुझे परम स्वतंत्र मोक्ष दे दीजिए मैंने यही कहा था आप मुझे बता दीजिए कैसे बनते है मैं इसलिए पूछना चाह रहा हूं क्योंकि तीन चार बार समझाने के बाद भी आप समझ नहीं आ रहा समझ नहीं आ रहा नहीं आपने हा या ना में कोई उत्तर नहीं दिया आपने य नहीं बताया कि क्या शिव बनने के बाद वापस कृष्ण बन सकते हैं या नहीं दरअसल क्या मैं समझाता हूं आपको जी आपने ये तो पढ़ा होगा जब आप तार या कोई स्वरूप रखते हैं वो दो तरह के स्वरूप होते है एक होता है स्व अंश एक होता है विभान अंश इतना तो पता होगा तो आप बताते जाइए आपको मैं अपनी चीज रखूंगा
00:05:43:25 आप बताते जाइए अच्छा स्वयं अंश जितने भी होते हैं वो चाहे ब्रह्मा हो विष्णु हो या शंकर हो वो स्वयं अंश होते वो भगवान भगवान तुल भी होते लेकिन जब शंभू भगवान से प्रकट होते हैं तो प्रकट होने का अर्थ यह नहीं होता कि श्री कृष्ण अपने वेष भूषा बदल के वो बने नहीं नहीं कृष्ण का अस्तित्व रहा उसके बाद शिवजी का स्वरूप उन्होंने धारण किया दूसरा यानी कि अगर शिव को कृष्ण बनना होगा तो शिव कृष्ण में समा जाएंगे या फिर हेलो जी मैं सुन रहा हूं हा सुन रहे हा या फिर अगर आप चाहते हैं नहीं उसमें समाना नहीं है शिव जो है उनके अस्तित्व को कृष्ण बना है तो ऐसा स्वरूप वो बना सकते हैं क्योंकि महाराष्ट्र में हम पढ़ते हैं और भी लीला में पढ़ते कि कृष्ण के एकदम सदृश उन्ही का स्वरूप उन्होने अपना प्रदान किया उधव महा भागवत में भी आया है उद्धव को जो स्वरूप प्रदान था वो स्वयं कृष्ण जैसे वो अच्छा आप जो श्लोक की बात कर रहे या कि आप ये कह रहे कि भगवान श्री कृष्ण अल्प
00:06:58:27 जो अपना उनका एक अंश है वो शिव का रूप धारण करता है पूरे के पूरे श्री कृष्ण नहीं करते शिव का रूप धारण नहीं अगर सुनि मैं बताता हूं जैसे कि 5200 वर्ष पहले भगवान कृष्ण का पूर्ण अवतार अवतरित हुए थे तो उसके बाद ये नहीं हो गया कि गोलोक धाम खाली हो गया था नहीं ऐसा नहीं होता उनका पूर्ण रूप सदा एक बना रहता है उसके बाद वो अवतार भी लेते हैं यानी कि उन्होंने जब शंभू मैं ये मैं ये नहीं कह रहा हूं मैं ये कह रहा हूं कि एक तरीके से वो पूर्ण पूर्ण रूप पूर्ण रूप आप यह कह रहे हैं कि शिव जब वो बने तो आपके हिसाब से आपके अनुसार वो पूर्ण पूर्ण शक्तियों के साथ शिव बने या फिर उन्होंने अपने कुछ कुछ शक्तियों को शिव रूप दिया हा मैं वही बताना चाह रहा हूं जी बनने का मतलब होता है प्रकट करना जो शंभु रूप प्रकट हुआ वो भगवान कृष्ण से हुआ और जी भगवान कृष्ण में ही समा जाएगा आपकी भाषा में कह तो वो दोबारा शिव बन जाएंगे और मेरे मेरी भाषा में वो कृष्ण समा जाएंगे दूसरी बात आपने बोला कि सारी शक्तिया प्रकट नहीं होते सारे गुण प्रकट नहीं होते तो शास्त्र में ऐसा कोई भी स्वरूप नहीं है जिसमें पूर्ण शक्ति प्रकट की हो भगवान कृष्ण के अतिरिक्त जैसे कि अब आप कहेंगे ये तो मैं एकदम गलत बात क रहा हूं भवान
00:08:14:18 देखिए ये क्या है ना विषयात हो रहा है अगर हमारा जो टॉपिक है वो यह है कि वो जब वो शिव ब जो वहां पर दूध दही का उदाहरण दिया गया है वो उनके अल्पा के लिए दिया गया है या पूर्णा अंश के लिए दिया गया है विभिन लिए स्वस के लिए नहीं आप समझ नहीं रहे बात को आप पूरा लोक ध्यान से पढ़ेंगे उसमें क्लियर लिखा है जैसे ई और दूध होता है दोनों में भेद नहीं है दोनों में भेद नहीं है फिर भी वो अलग है इसलिए च महाप सुनि सम इसलिए चैत महाप्रभु ने सिद्धांत बताया शंभु का व अच बताया क्यों बताया उन्होने अचिंत भदा भेद जो बताया है ना पहली बात तो अचिंत वेदा भद का जो उपयोग किया जाता है स्कोन की तरफ से वो फिर विषयात हो जाएगा वही वाली बात है नहीं नहीं वो मैं समझ रहा हूं वो अचिंत वेदा भद का जो उपयोग किया जाता है स्कोन की तरफ से वो दर्शन के लिए किया जाता है ना कि हरि हर के भेद के लिए मगर जहां पर बात पड़ती है व हरि हर के भेद के लिए भी उपयोग हो जाता है अब अगर मूल तत्व के साथ देखा जाए तो अचत वेदा भेद नाम का उनका दर्शन है इस बारे में कोई प्रमाणिक सिद्धांत है ही नहीं क्योंकि उनके आठ ही श्लोक प्राप्त है हम हा अब आते अब आते है इस लाइन तो नहीं इस लाइन
00:09:29:25 प मत आइए आप पहले वो क्लियर करिए कि दूध जिस प्रकार दूध से दही बन जाता है पर दही से दूध नहीं तो उसी प्रकार कृष्ण तो शिव बन सकते हैं पर शिव बने हुए कृष्ण वापस कृष्ण नहीं बन सकते तो ये जो ईश्वर है वो बाधित हुआ कि नहीं हुआ नहीं देखिए आप पहली लाइन पहले क्लियर करेंगे उसके बाद दूसरी लाइन प आएंगे पहली लाइन क्या है पहली लाइन ये है कृष्ण से शंभू प्रकट होते हैं प्रकट होना और बनना दूसरी चीज है जब जो चीज जिसे प्रकट होगी अंत में उसी में लय हो जाएगी उसी में सम जाएगी तो तो आप किस चीज में किस बेस पर लेकर बोल रहे कि शिव जी को कृष्ण ही बनाना अगर शिव जी कृष्ण भी बनेंगे तो बनने में कोई वो नहीं है लेकिन उनका मूल सूप तो रहेगा जिससे शिवजी प्रकट हुए मतलब आप यह कहना चाहते हैं कि अगर उनका अल्पा अलग होता है एक तरीके से अल्पा विश और स्वांश में इस फरक जानि पले विनाश क्या है बता स्वयं अंश होता है जिसकी सारी शक्ति उनके स्वरूप में हो लेकिन प्रकट ना हो प्रकट व उतनी होती है जितनी उनके कार्य के लिए जरूरत है जैसे कि हा जैसे की राम अवतार हुए 12 गुण की आवश्यकता थी 12 गुण हुए ये भी विष है ये भी चैलेंजेबल है जो आप 12 गुण वाली बात बता रहे
00:10:45:06 र चलिए आप अपनी बात बोलिए नहीं नहीं ये तो तुलसीदास जी ने खुद स्वीकार किया और उन्होंने बोला 12 12 गुण प्रकट हुए उतने ही मेरे काफी है और होना भी चाहिए इसमें भेदभाव नहीं होना चाहिए क्योंकि भगवान राम में भी 16 गुण पूरे थे लेकिन जरूरत के मुताबिक जितने प्रकट होने चाहिए उन्होने अच्छा य तो दूसरा टॉपिक है हा तो आप वो श्लोक पढ़ेंगे उसम क्लियर लिखा है दोनों में भेद नहीं है लेकिन तत्व रूप से उन्होंने बताया कि कृष्ण से संभू प्रकट होते हैं और फिर आगे की रचना होती नहीं वहां तो जो डायलॉग है जो आपके जोन के जो प्रतिनिधि डायलॉग देते हैं वो सीधे सधे कहते जिस प्रकार दूध से दही बन सकता है पर दही से दूध नहीं उसी प्रकार कृष्ण तो शिव बन सकते हैं पर शिव कृष्ण नहीं बन सकते नहीं नहीं वो एक्चुअली लोगों को समझाने के लिए है जब मतलब वो बात ठीक नहीं है नहीं क्यों ठीक नहीं है मैंने आपका वो लेक्चर भी देखा था प आपने उसम भी यही ऐसे बोला था यह बात ठीक नहीं है बिल्कुल ठीक है अ जिसको समझना है वो स सही तरीके से समझ सकता है मेरे ख्याल से जो कमेंट मेरे पढ़े होंगे लोगों ने समझा भी होगा मैं क्या कहना चाह रहा हूं मैं ये कहना चाह रहा हूं कि और ये नहीं देखिए स्कोन के सिद्धांत को आप गलत राना चाहते हैं जबक वैष्णव सिद्धांत में हर जगह यही मान्य है वो देखिए वो तो
00:12:00:06 फिर अगला विषय हो जाएगा मेरे पास भी ग्रंथ रखा हुआ है जो रामानुजाचार्य परंपरा के हैं श्री मधवा चार्य जी उनका ग्रंथ रखा है और जो इसन जो सिद्धांत दे रहा है उसका पूरा पूरा खंडन है उसम तो अब कन के हिसाब से प्रमाणिक है रामर तो र संप्रदाय आप समझ नहीं रहे तत्विक सिद्धांत एक होता है तत्विक सिद्धांत वैष्णव का एक हैने मायावा श्लोक को स्वीकार किया है पदम पुराण के हा इसको ने स्वीकार किया है कि नहीं किया है पदम पुराण का जो श्लोक है
00:12:41:27 मायावादी नहीं करते मैं नहीं अद्वैत की बात नहीं कर रहा हूं मैं पूछ रहा हूं इस कन ने मायावादी किया है या नहीं बिल्कुल किया है ब हा तो राम चार परंपरा तो कह रही है कि नहीं भाई वो मूर्ख है जो उसको स्वीकार करते हैं वही प्रमाणिक है वही वही मैं समझाना चाह रहा हूं जी तक जो सिद्धांत है वो सबसे पहले ये माना जाता है कि विष्णु राम या कृष्ण को सुप्रीम मानना बाकियों को उनके अवतार या स्वांश मानना त सिद्धांत होता है बाकी आगे जाके पद्धति में कितने बदलाव होते हैं वो हर जगह होते रहेंगे जैसे की आपके गद्दी धारी चार शंकर चार सबके थोड़े थोड़े मतभेद है अलग नहीं वो तो व्यावहारिक मतभेद है ना परमार्थिक रूप से मतभेद थोड़ी आपको मैं उसम दिखा दूंगा सिद्धांति मतभेद दिखा दूंगा और बताइए सिद्धांति मतभेद आप मुझे दिखाइए मैं बिल्कुल दिखाऊंगा फिलहाल फिलहाल फिलहाल हम लोग फिर विषय से हट जाते हैं आप मुझे ये बताइए कि एक एक बिल्कुल सरल तरीके से कि जिस प्रकार दूध से दही बन सकता है पर दही से दूध नहीं बन सकता तो शिव जो जो कृष्ण है विभिन्ना में जब वो शिव बन रहे हैं तो अपनी पूरी शक्तियों के साथ बन रहे हैं या पूरी शक्तियों
00:13:57:01 के साथ नहीं बन रहे हैं कैसे बन रहे हैं देखिए और क्या वो वापस अपने अपने मूल फॉम में आ सकते हैं वहां से कि नहीं आ सकते हैं मैं समझ रहा हूं समझ रहा हूं जी आप सबसे पहले यह जो श्लोक है दूध और दही का यह भौतिक प्राणियों के लिए है क्योंकि ये एक जो हमने कल्पना द है दूध और की ये एक भौतिक लोगों समझाने के लिए अब बात हो रही है मतलब आपका कहने का मतलब है कि ये व्यवहारिकता के लिए है परमार्थ के लिए नहीं है नहीं दे बात कर ये लोगों को समझाने के लिए आप जो क रहे भौतिक उसको व्यवहारवाद कहते
00:14:40:04 हैं भ व्यवहारवाद नहीं होता माया माया माया के अंदर जो भी चीज है व भौतिकवाद हमारी नजर में व उसी को व्यवहारवाद भी कहते हैं ववा वरवा तो सबका अलग है माया के अंदर एक ही नियम होता है सब माया के अंदर है फिर विष हो रहा है आप उस द वाले हा मैं दूध दही वाले प दूध दही वाला जो एग्जांपल दिया गया वो तो दही दृष्टि से दिखाने के लिए दिया गया लेकिन जो मेन सिद्धांत है शंभू जब कृष्ण से प्रकट होते हैं उसी में ले होंगे जब उसम ल होंगे तो आप उनको शिव स्वरूप कृष्ण स्वरूप मान लीजिए आप य बताइए चलिए मैं इसको ऐसे ले लेता हूं जब वो शंभू कृष्ण से प्रकट हो रहे हैं तो शंभू में उतनी पावर नहीं है जितनी पावर श्री कृष्णन का भी गचार का भी लेचर नहीं है अच्छे से तो हमेशा ये बोलते हैं कि उनमें पूर्ण शक्ति है जब जब स्वांश जो होते हैं उनमें पूर्ण शक्ति होती है लेकिन जरूरत के मुताबिक प्रकट होती है जो शंभू अवतार हुआ वो संघार के लिए हुआ और आगे सृष्टि के लिए हुआ तो उतनी शक्ति उनमें यूज होगी यानी कि ये जो ये जो लाइन है कि वो वो बनते हैं ये परमार्थ रूप से देखने के लिए मनुष्य के पर्सपेक्टिव से नहीं है बिल्कुल बिल्कुल मनुष्य के पर्सपेक्टिव से नहीं है ना ये लाइन
00:15:55:21 मनुष्य पर्सपेक्टिव से आप देखेंगे तो दूध दही तक ही रह जाएंगे ना हां तो मतलब ये जो ये जो क्रिया दिखाई गई है परमार्थिक क्रिया है पारलौकिक क्रिया है बिल्कुल बिल्कुल तो पारलक अब बात ये आ जाती है कि यहां पर आपका वो जो सिद्धांत है कि दुनिया माया नहीं है सत्य है वो कट जाता है क्या कट जाता है जब मतलब कि आप यह कह रहे हैं कि कृष्ण के दो रूप है जो वहा हां वो जब आए थे धरती पर तो एज इट इज आए थे ये आपका कहना है जिस रूप में वो वहां रहते हैं उसी रूप में यहां आए थे अच्छा पता नहीं मैं क्या समझा द आप कंटेस्ट कहां ले जाते मैंने तो ये कहा ही नहीं कृष्ण के दो स्वरूप है य आते तो माया के भीन हो जाते तो आप ये जो क्रिया हो रही है परमार्थिक क्रिया है ना नहीं मैंने ये लोगों को समझ में ना लोगों के व्यवहार का विषय नहीं है ना ये क्रिया य व्यवहार का विषय है नहीं मैं बताना चाह रहा हूं जैसे कि ईश्वर ईश्वर की आप कोई भी कल्पना कर ले हम भौतिक से बने हैं हम उतना ही सोचेंगे तो दही और दूध का एमल तो बाद की बात है ये ये वो वाली बातें खत्म करने वाली मैं ये पूछ रहा हूं ये जो क्रिया है है यह मनुष्य के व्यवहार का विषय है या फिर परमार्थ का जीव के परमार्थ का मनुष्य को समझाने के मतलब मनुष्य को समझ में आने वाली चीज है पारलौकिक चीज है यह तभी
00:17:10:28 पता चलेगी जब वो जीव बन के वहां पहुंचेगा लोक में परलोक में य जीव माया को नहीं समझ सकता ईश्वर को क्या समझेगा भैया तो हमारा धर्म तो इसी पर खड़ा हुआ है था तो धर्म जिज्ञासा था तो ब्रह्म जिज्ञासा इसको कहां ले जाए जब समझना ही नहीं है तो कुछ भी सुनिए ईश्वर सर्वशक्तिमान असीमित है असीमित है का मतलब होता है कि उसे समझाया नहीं जा सकता हां आप एक स्टेज तक उसे जान सकते हैं जब ऐसा नहीं है नहीं नहीं यहां पर मेरा ओपिनियन अलग है ईश्वर सर्वशक्तिमान है मुझे बताइए आद शंकराचार्य ने क्यों बोला एकम शास्त्र देव की पुत्र गीतम तो उसमें गीता का अर्थ आपका वाला क्यों ले उन्हीं की गीता का अर्थ लेंगे ना भाई जब उन्होंने कहा एकम शास्त्रम देव की पुत्र गीता तो उन्ही की उन्ही के अर्थ लेंगे वहा पर उन्होंने तो अर्थ में ऐसा नहीं किया उन्होंने तो अर्थ में सबको स्वीकारा है आप गीता उसकी लेते हो प्रमाण रूप में और अथ अपना देते हो हमारी ए इट वाली उन्होंने तो अल्लाह को नहीं दिया कि भाई कृष्ण अल्ला एक समान है अगर सुनिए अगर इसन की ए गीता में अगर ऐसा लिखा होगा तो आप बतान की एट गीता वो जो अभी थोड़े दिन
00:18:25:28 पहले वायरल हुई थी वन की ए गीता नहीं वो किसी भक्त ने किसी को समझाने के लिए ट्रांसलेट किया आपके लखनऊ में आप आपका परिचय बता दीजिए थोड़ा सा कौन से किस प्रकार से आप संबंधित है मैं नोएडा रहता हूं और अभी इटेड नहीं लेकिन काफी टाइम से फलो करर अच्छा मतलब आप कोई पदाधिकारी नहीं हैन के नहीं वो तो मैंने कमेंट में आपको पहले बताया तो इकन के जो पदाधिकारी है लखनऊ इकन मंदिर के अध्यक्ष उनका स्टेटमेंट है कि शिवजी भगवान नहीं है शिवजी भगवान के वो परम ब्रह्म नहीं है सुन लीजिए सुन लीजिए और कृष्ण अल्लाह और जो बाइबल का ईश्वर है यहोवा यानी क्राइस्ट उसमें कोई भेद नहीं है वो एक ही है तो तो अब अब देखिए बाद कहां कहा से निकलता है अगर अल्लाह से हम कृष्ण को जोड़ते हैं तो अल्लाह और हमारे जो इस्लाम दर्शन है और हिंदू सनातन दर्शन है उसमें एक सबसे बड़ा फैक्ट यही है कि सनातन धर्म का ईश्वर बाधित नहीं है वो कण कण में है और जो इस्लाम का ईश्वर है वो एक जगह बैठ दुनिया को बनाता है वो कण कण में नहीं है उसकी शक्ति हर जगह पर है और दूसरी बात वो ये कहता है वो ये कहता है कि मैं अवतार नहीं लेता मेरी कोई संतान नहीं हो सकती और कृष्ण कहते हैं कि जब
00:19:41:01 जब धरती पर पाप बढ़ेगा मैं अवतार लूंगा तो फिर ये दोनों की जब अलग-अलग बिल्कुल प्योर फीचर इसके अलावा कुछ शिक्षाओं में भी बहुत भेद है शिक्षाए अगर हम पकड़े तो हमें सिखाया गया राम के द्वारा रघुकुल रीत सदा चली आई प्राण जाई परवचन ना जाई उनके यहां कुछ और सिखाया गया इसके विपरीत बिल्कुल अर्थ निकलता है तो फिर यहां पर ये दोनों अलग शिक्षा देने वाले और दोनों अलग क्वालिटी वाले एक हो रहे हैं इससे बाधित सिद्ध होते हैं दूसरा आपने दूध दही का उदाहरण जब दिया तो दूध दही एक व्यावहारिक चीज है मनुष्य को समझ में आने वाली चीज है उससे आपने कंपेयर किया भगवानों को तो यहां से यह अर्थ निकलता है कि जो यह जो क्रिया है यह भी व्यवहारिक क्रिया है परमार्थिक क्रिया नहीं है मगर आप कह रहे हो कि परमार्थिक क्रिया है तब वहां पर अगर आप परमार्थिक क्रिया उ मान भी लेंगे तो क्या कहते वहां पर यह हो जाएगा कि आपको यह मानना पड़ेगा कि यहां पर इस दुनिया में जो है भगवान श्री कृष्ण अग अगर शिव बनेंगे तो शिव भी कृष्ण बन जाएंगे यह तो मानोगे ना तो परमार्थिक क्रिया पर रह रहे हो आप अभी आपका प्रश्न है ना अभी तीन प्रश् जब हम जब हम ऐसा मान लेंगे तो इसका मतलब हमें ये मानना पड़ेगा कि जो कृष्ण है उनका एक पारलौकिक स्वरूप अलग है और यहां पर दिखाई देने वाला व्यवहार
00:20:56:03 में आने वाला स्वरूप अलग है तो य जो आप लोग कहते हो कि नहीं भा ये दुनिया वो मनुष्य को जो व्यवहार का विषय है जो भगवान का वैसा भौतिक स्वरूप दिखाई देने वाला वो जो है आप कहते हो कि नहीं वो तो एज इट इज आया तो फिर वहां पर आपका वो सिद्धांत खंडित हो रहा है तो इसके बारे में थोड़ा प्रकाश डाले देखिए आपके तीन प्रश्न हो गए है ना अभी एक्स्ट्रा मत पूछ पहला भूल जाऊगा जी और लास्ट में जो आपने बोला ऐसा मैंने बिल्कुल नहीं कहा कृष्ण के दो स्वरूप है ये अवत सिद्धांत है कि कृष्ण के दो स्वरूप थे एक माया इसको क्लियर कर लेते हैं अगर दो स्वरूप नहीं है तो फिर वो जो क्रिया है वो पारलौकिक नहीं है व्यवहारिक है वो पहला सवाल से स्टार्ट होगा हा चलिए चली पहले से कर लीज था आप लखनऊ के आचार्य गुरुजी प्रभुजी उन पास मुझे मुझे एक मिनट का समय
00:21:57:01 द जी बोलिए हा जी आपकी वीडियो एकदम ब्रेक हो चल रही है क्या हो गया अच्छा आ रही है हा हा तो लखनऊ वाले प्रभु जी का आपने जो टॉपिक छड़ा मुझे नहीं पता नहीं मैंने केवल उन्ही का नहीं अमोक लीला जी ने भी कई जगह ऐसा इंडिकेशन दिया है कि बाइबल का ईश्वर ये ईश्वर हमारा ईश्वर एक है वो पहला सवाल नहीं पहला सवाल है की शिवजी और वो अलग है या नहीं पहला सवाल य था आपका नहीं अलग नहीं है यहां पर देखिए विषयात हो जाएगा शिवजी बात ये नहीं है जो अगर कृष्ण को भी भगवान मानू तो कम से कम उसको सर्वशक्तिमान तो सिद्ध करें आप मैं कह रहा हूं ठीक है कृष्ण के अलावा अन्य कोई रूप नहीं है वो एक अलग चर्चा का विषय हो सकता है कह रहा वो चर्चा का एक अलग विषय हो सकता है चदा का सिद्धांत क्या था चत महाप्रभु क्या मानते थे पहले मैं या वैष्णव आचार का सिद्धांत बता दू कि वैष्णव संप्रदाय
00:23:12:09 में विष्णु तत्व को सुप्रीम मानते हैं और उनके जितने भी स्वरूप है मैं ये नहीं मैं ये नहीं कह रहा मैं यह कह रहा हूं जोभी आपने बोला लखनऊ में गया था उन्होने बोला बा वाले बाद वाले बोला कि वहां पर उन्होंने अल्लाह को कंपेयर किया था कृष्ण से हा अब अल्लाह को क्यों किया मैं बताता हूं सु हा वो बताइए आप बुरा मत मानिए इकन के अलावा शायद ही कोई ऐसी संस्था होगी जिन्होंने इंडिया से बाहर निकल के प्रचार किया मेरी पूरी बात सुनिए देखिए ये भी चर्चा का एक अलग विषय है चर्चा के बहुत विषय है सुनिए मैं बताऊ बता जी है ना इंडिया से बाहर निकल के किसी ने प्रचार किया और जब देखिए आप इस तरह से अगर करेंगे तो फिर मुझे मुझे भी बोलना पड़े क्योंकि ये तो भाई पूरी दुनिया देख सकती है इस वीडियो को तो मुझे बताना पड़ेगा कि जिस चीजों का आप प्रचार कर रहे हो वो चीजें आपके हाथ में आई कहां से कैसे आई गीत गीता गीता हमारे इसको ने तो बनाई नहीं नहीं बनाई जिन श्लोकों का अर्थ आपने किया है वो श्लोक आपको प्राप्त कैसे हुए शंकराचार्य ने बौद्धों को हराया ना होता लुप्त हो चुका था हिंदू हिंदू धर्म उसके बाद भी आज भी हम सबसे पुरानी जो वो देखते हैं भाष्य वेदों
00:24:27:14 का तो वेदों पर जो सबसे पुराना भाष्य प्राप्त है वो सायण भाष्य शकरा शंकर परंपरा के है तो आपको मिला कहां से अगर हमने धर्म की रक्षा ना की होती तो आप आप जो भी है आप बाहर जाकर जो कर रहे वो तो अलग पर्सपेक्टिव हो सनातन को फैला रहे हैं सनातन के नाम पर वो सनातना भास है वो एक अलग विषय है इसीलिए तो मैं चाह रहा हूं पहले दूध दही वाला टॉपिक क्लियर हो आप आप आप पहले जवाब सुनते नहीं दूसरा जवाब कर देते अलग टॉपिक आपने अलग बात कही ना मैं ये बताऊंगा पूरी दुनिया में कोई नहीं है जो उसके जैसे काम कर रहा हो ये अलग टॉपिक ले आए ना नहीं नहीं आपने अल्लाह और जीसस की बात करी तब मैंने जाके ये टॉपिक छ आप वही वही उसी जो सिद्धांत प बात हो रही है जिस विषय प आप वही बोलिए अगर आप अपनी चीजों को बोलेंगे तो मुझे भी बोलना पड़ेगा ना जब तक आप सुनोगे नहीं तो फिर कैसे समझ आएगा भाई साब आपने एक ऐसी बात बोली जिससे हमारी इस चर्चा का कोई संबंध नहीं है आपने उसकी तारीफ की स्कन की कि भाई हमारा जो स्कन है वो पूरी दुनिया में वो कर रहा है प्रचार तो मुझे वहां बताना पड़ेगा ना कि भाई हम क्या कर रहे हैं ये कोई ऐसा तो है नहीं कि सिर्फ दो लोग बातें कर रहे हैं पूरी दुनिया जी अरे आप सुन नहीं मैंने आपको ये बताया कि अल्लाह को रेफरेंस में या फिर जीसस को रेफरेंस में हम क्यों लेते
00:25:42:25 हैं चलिए बताइए क्योंकि अगर हम रेफरेंस ना ले तो रशिया जैसी जगह जहां प इस कन प इतने केस हो चुके हैं लोग बोलते हैं क्रिश्चन एजेंडा है स्कन ये बताइए जितने स्कन प केस हुए रशिया में कोई साथ खड़ा हुआ कोई खड़ा नहीं हुआ स्न फिर भी जीता और मैं जानता हूं मैं आपका ये जो तर्क है मैं जानता हूं कई स्कन वालों ने मुझे दिया अब मुझे ये बताइए इसका अर्थ ये है कि ये जो शिक्षाएं दी जा रही है जिसमें अल्लाह और बाइबल के ईश्वर को कंपेयर किया जा रहा है कृष्ण के साथ ये एक छलावा है क्या जी यह केवल उन लोगों को मनाने के लिए झूठ है ना ये इसमें सत्यता नहीं है ना एक सिद्धांत तो हर जगह सही होता है क्या सिद्धांत नहीं पहले इसको उत्तर तो दीजिए आप आपने कहा ऐसा इसलिए कहना पड़ता है जी उसी का उसी का उत्तर दे रहा हूं जी जी एक सिद्धांत तो सब में मान्य होता है कि सभी जीव ईश्वर की उपासना कर रहे हैं फिर चाहे वो अपने किसी भी मत से कर रहे हो ये बात का टॉपिक है ठीक है चाहे भाई साहब ईश्वर की उपासना कर रहे हैं मगर जिसकी आप बात कर रहे हैं वो ईश्वर नहीं है वो वो अलग चीज है वो कहां से डिफाइन हुई है किस किससे डिफाइन हुई है उससे आप कैसे कंपेयर कर देंगे ईश्वर की उपासना कर रहे हैं आप वो सिद्ध तो करिए कि वो ईश्वर है भाई कृष्ण ब्रह्म है तो आप ये सिद्ध करिए कि वो ब्रह्म है
00:26:58:01 अरे भाई आप समझ नहीं रहे हो एक अज्ञानी है वो ये मान रहा है किय ईश्वर है मैं इनको पूज रहा हूं ठीक है वो उस अज्ञानी को झूठ बोला गया ना व क्या बोला गया अरे कि भाई तुम्हारा य ये जो है और ये कृष्णा एक है यह झूठ बोला ना मुझे मुझे एक भीटी दिखाई है जो जीसस जीस जप रहा हो अल्लाह अल्ला जप रहा हो मैं भाई साहब देखिए अब आप बात को बदल रहे हैं जपने की बात नहीं हो रही स्टेटमेंट आपके अधिकृत व्यक्तियों का है आपकी किताबों में मेंशन है ऑफिशियल वेबसाइट पर है कि प्रभुपाद जी ने उनको वैष्णव बोला है मोहम्मद साहब को जब जब लोग यह बोलते हैं कि गीता की आड़ में बाइबल पढ़ाई जा रही है आप एक चीज देखिए कि गांधी जी को कितना कहा जाता है आज के टाइम में कि ईश्वर अल्लाह एक है जो उन्होंने कह दिया गाने में है ना सुंदर विग्रह मेगा श्याम की जगह उन्होंने वो लाइन गाधी ईश्वर अल्ला गांधी को कितना टारगेट किया जाता है और वही चीज तो स्कन भी कह रहा है तो ऐसा अब आपने कहा कि ऐसा उनको मनाने के लिए कहा जाता है क्योंकि वहां पर सरवाइव करना बहुत ही डिफिकल्ट होता है तो मैं उससे वो नहीं कर रहा मैं क्लियर करना चाह रहा हूं क्या वो वहां पर जो है छलावा होता है उनके साथ हमारे साथ नहीं क्या वो छलावा होता है उनके साथ या
00:28:13:16 वो संत कहते हैं जो कहते हैं ईश्वर अल्लाह एक है या नहीं है वही बताता हूं अगर थोड़ा कोई किसी को साइकोलॉजी से कोई देख रहा होगा य वो समझेगा अगर किसी का फेथ किसी पर अड़ गया है किसी को मारने लग गया तो वो फेथ ऐसे नहीं हटेगा मैं सीध बोल अरे भगवान कृष्ण को मानो तो यानी कि वो थोड़ी देर के लिए सुनिए सुनिए फर मैं क्या बताऊंगा आपके जो प्रोफेट मोहम्मद आए थे या जीसस आए थे अब आप अब आप ये बताइए चलिए प्रोफेट मोहम्मद का मैं मान भाई साब मैं ये नहीं पूछ रहा कि उन्होंने सही किया या गलत किया मैं य पूछ रहा हूं यह सत्य है असत्य है आप विषय अंतर हो रहा है मैंने पूछा यह सत्य बात है ईश्वर अल्लाह एक है या असत्य है आप ये बोल रहे हो कि नहीं उन्होंने किया तो है पर उसमें कोई गलत नहीं है मैं सही गलत का आरोप नहीं लगा रहा हूं मैं यह पूछ रहा हूं यह सत्य है असत्य है मुझे मुझे पहले आप यह बताइए जीसस को आप किस कैटेगरी में गिने क्योंकि निश्चलानंद सरस्वती महाराज जी ने बोला है कि पुरी में रहे थे जीसस 12 साल और वैष्णव रिचल फॉलो करे थे और य तक भविष्य पुराण में जीसस का उसका फिर भाई साब विषयात हो रहा है यह राजनीतिक बहस हो रही है मेरा प्रश्न य है क्या ईश्वर अल्ला एक है तो आप पहले समझा रहे थे आपने आपने शुरू किया कि भाई ईश्वर वैसे वाले शंकराचार्य जी ने जो कहा
00:29:28:21 है उसका सब बहुत संतुष्टि जनक जवाब है मगर अभी क्या है विषयात हो जाएगा और ऐसे विषयात होते होते विषयात होते होते सुनिए तो विषयात होते होते बात हो ही नहीं पाएगी ईश्वर अल्लाह को एक कह रहे हैं तो यह उनको उनके पर्सपेक्टिव से जहां वो कह रहे हैं वो सत्य बोल रहे हैं या असत्य बोल रहे हैं ये बताइए वो गलत नहीं कर रहे मैं भी नहीं कह रहा वो गलत है सही है बाद में देखेंगे सत्य है या असत्य है मैं बता रहा हूं जैसा कि पूरी शंकराचार्य जी में जैसे जितना उन्होंने समझाया ना भाई साहब मेरा जो वीडियो था मेरा जो वीडियो था उसमें मैंने बात कही थी क्या स्कोन के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर वादित है अगर आप उसको सर्वशक्तिमान सिद्ध कर दे तो मैं आपका हो जाऊंगा अब आप आपके लोग उसको जोड़ रहे तो आप जो है दूसरे दूसरे टॉपिक उठा रहे हो आपके पास जवाब नहीं है मैं आपसे सिर्फ क्लियर बात पूछ रहा हूं वो असत्य है या सत्य है आपने जो वहां पर वो कह रहे हैं वो क्रिश्चन क्रिश्चन देशों में जाकर कह रहे हैं कि बाइबल का ईश्वर और गीता का ईश्वर एक है और जो कहते हैं अमोग लीला जी कहते हैं कि बाइबल जो है वो क्या वो जो भगवत गीता है वो बाइबल का अगला भाग है वो ये सब जो कहते हैं के शंकराचार्य जी ने कहा सेम ऐसा ही स्कोन वाले समझाते हैं पुरी के शंकराचार्य जी ने ये कहा
00:30:43:24 है कि 10 साल वो जब यहां पर रहे थे तो उस उन दिनों उन्होंने जितनी शिक्षा प्राप्त की वही शिक्षा वहां पर जो है वो मान्य है बाकी एकट एकट यही इस कोन में बोला जाता है आप एक थोड़ी ना कहा पूरी शंकराचार्य जी का वीडियो दिखा दूंगा मैं एकट कैसे आप कह रहे दिखा दूंगा शंकराचार्य जी का वीडियो आप देख लीजिएगा ईश्वर अल्ला एक नहीं और सीधे सधे मना करते हैं नहीं ईश्वर अल्लाह एक नहीं है सब लोग एक ही ईश्वर को पाना चाहते परर देख तो लो कि ईश्वर के बारे में मान्यता क्या है आप कैसे कहोगे ईश्वर अल्ला एक है साईं बाबा के बारे में शंकराचार्य ने बताया दुनिया को साई बाबा कौन थे आप समझ रहे हो अमो वडियो में कई बार बोला है जितनी शिक्षा उन को देनी चाहिए थी जीसस ने दी उस भाई साहब आप जो है मगर मतलब उत्तर के बगल से निकल जाओगे मगर सही उत्तर आप दोगे नहीं मैं पूछ रहा हूं वो जो शिक्षा दी जाती है ईश्वर अल्लाह एक है वहां के लोगों को मनाने के लिए जो भी है समझाने के लिए वो सत्य सत्य शिक्षा है असत्य है यह बताइए इसका पर्सपेक्टिव दो नजरियों से देख सकते हो बताइए दुनिया में कोई भी परम सत्ता है जो जिसको जो भी अगर परम सत्ता किसी को मान रहा है वो
00:31:58:25 भगवान है चाहे भगवान कृष्ण कहो शिव कहो आपके जो हो उसको ठीक है अच्छा वो वही है अब वो किसी और नाम से बोले अगर आप ये बोल दो परम सत्ता का मीनिंग आप क्या समझते हैं अगर वो मान रहा है तो परम सत्ता अगर वो किसी को सुप्रीम पावर बोल सुप्रीम पावर तो वही है ना जो कुछ भी कर सकता हो सर्वशक्तिमान हो बिल्कुल इस्लाम के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर 611 में कह रहा है मेरी संतान नहीं हो सकती आप सर वही वाली बात इसका अर्थ है कि जो देखिए आप उसको परम सत्ता कहिए आप उसको परम सत्ता कहिए आप उसको अल्लाह तो मत कहिए आप उसको परम सत्ता कहिए ना कि परम सत्ता और कृष्ण एक है मगर व जो व्यक्ति है जो वहां पर अल्लाह को मानता है क्रिश्चियनिटी वाले ईश्वर को मानता है वो उसको परम सत्ता नहीं कहता वो अल्लाह कहता है जब हम अल्लाह कह देते हैं तो अल्लाह का मतलब है कुरान के द्वारा परिभाषित होने वाली शक्ति कुरान के द्वारा तो कुरान के नियमों के हिसाब से देखा जाए तो बिल्कुल मिसमैच है कृष्ण में और उसम बिल्कुल मिसम है मिसम है तो फिर अब मुझे बताइए क्या ये जो शिक्षा दी जाती है कि ईश्वर और अल्ला एक है यह गलत है या सही शिक्षा है वहा पर वहा पर जो दी जाती है यहां पर बाद में आएंगे प्रभुपाद जी ने जीसस को हमेशा ईश्वर
00:33:14:03 का पुत्र बताया कभी ईश्वर नहीं बताया नहीं जीसस नहीं क्राइस्ट की बात हो रही है अंतर है बाइबल का ईश्वर क्राइस्ट है बाइबल का ईश्वर जो है व क्राइस्ट है यहोवा उन्होंने यहोवा से एक किया है जो यहां के जो वो है प्रभु जी आपके स्कोन मंदिर के उन्होंने यहोवा का नाम लिया जीसस का नाम नहीं लिया इंटरव्यू में उन्होंने कहा जीसस और क्या कहते हैं आपका ये अल्लाह और कृष्ण जो है एक है इनम कोई भेद नहीं है उन्होने उन्होने क्या इसम अब मैं अपनी कुछ चीज बोल दू क्योंकि आप उस चीज को बोलेंगे नहीं पहली चीज है की क्या वो शिक्षा असत्य है अच्छा चलिए मान लीजिए कि किसी के भले के लिए आप दे रहे हैं तो वो शिक्षा उन लोगों को क्यों दी जा रही है जो लोग पहले से सनातनी है पहला दूसरा यह है कि जब आप दूसरे को बहलाने फुसला के लिए य कह सकते हो कि भाई तुम्हारे और तुम जिसे ईश्वर मान रहे हो उसम और कृष्ण में कोई अंतर नहीं है तो आपको अपने भाई बहनों के लिए यह बात याद नहीं आती जब आप शिव के लिए कहते हो कि शिव जी भगवान नहीं है तब आपको ये बात नहीं याद आती कि इनको भी बहलाया फुलाया जाए इनको भी कहा जाए शिव और कृष्ण आओ आओ तुम हमारे मंदिर आओ तब ये बात याद नहीं आती आपको तो पहली बात तो ये है कि इसीलिए कहा जाता है कि जो पीछे से मधवा चार्य
00:34:29:04 जी है आपके गड़िया संप्रदाय के अन्य आचार्य है क्या इन्होंने कहीं पर कहा ईश्वर अल्लाह एक है तो जब गुरु ने नहीं कहा और आप ऐसी शिक्षा को परोस रहे हैं तो किस अधिकार से परोस रहे हैं य शिक्षा यानी कि आपने अपने मंतव्य से चुनाव किया महा ऋषि वेदव्यास स्मृति कहती है दो एक 11 व्यक्तिगत तर का मान्य भय से लोभ से क्रोध से मोह से किसी भी कारण से धर्म का त्याग मत करो जैसे ही करोगे वैसे ही वो धर्म आप ही के लिए हानि पहुंचाएगा देखिए आप अगर अजीब गरीब बात करेंगे आप बोल रहे हैं कि मधवा चार ने क्यों नहीं बोला मधवा चार के समय इंडिया में कौन से मुस्लिम थे हां मुझे बताए तो मुस्लिम मुस्लिम नहीं थे मान लीजिए मान लीजिए मुस्लिम नहीं थे परिस्थिति के हिब परिथि मैं ये कह रहा हूं क्या इस तरह की कहीं पर कोई सिद्धांत है कि आप इस तरह से करने के लिए दूसरा अगर नास्तिक हो या किसी अन्य को राक्षस को ईश्वर मान रहा हो या किसी भी शक्ति किसी भी दैवीय शक्ति को मान रहा हो किसी भी चमत्कारिक शक्ति को मान रहा हो जो उसके लिए हो तो उसको आप ब्रह्म के साथ मिला दीजिए ऐसी कोई सनातन सिद्धांत है सुनि मैं बताता अगर अगर यह बात और ये बात तो तब की है जब हम पहले य माने कि हा उन्होंने असत्य कहा तो पहले तो इसको क्लियर कर दीजिए उसके बाद हम आगे बढ़े सुनिए सुनि मेरी
00:35:44:04 बात अगर यह बात बताकर किसी को कृष्ण भक्ति में लगाया जा सकता है तो यह बात एक बार नहीं हजार बार कहनी चाहिए क्यों ये बात सत्य है कि असत्य है यह बताइए प कौन सी बात ईश्वर वो कृष्ण और अल्लाह एक है कृष्ण और यवा एक है अरे मैं मैं क्या कह रहा हूं अगर कोई भी आप बोलेंगे ही नहीं देगा आप उसको साइड से निकलेंगे आप उसको अरे आप क्योंकि आप तत्व समझ नहीं रहे हो कोई भी स परम सत्ता मैं समझ रहा हूं वो बात की बात है कि वो अच्छा है कि बुरा है पहले आप ये बताइए शिक्षा अब आप अपनी लाइन खुद बोल चुके ये बात की बात है वो अच्छा है या गलत है कुरान में नहीं पता क्या गलत है या सही है अगर वो किसी व्यक्ति ऐ को मान रहा है परम सत्ता को मान रहा है तो वो श्री कृष्ण भगवान राम ही है हमारा य मान क्या अगर कोई किसी को परम सत्ता को मान रहा है तो हा वो भगवान कृष्ण या राम ही है अच्छा और वो वहा पर कह रहा है कि मैं जन्म नहीं लेता य राम कह रहे है मैं जन्म लेता हूं मगर राम को ही मान रहा है सुनि सुनि उनके सिद्धांत में जो बात की गई है वो धीरे धीरे आएगा और आते हैं प्रमाणिक हमने देखे चाहे मुस्लिम हो क्रिन भाई साब आप ये बताइए कि जो यहोवा है जो इलाम के ईश्वर है ये कौन है और कहां से प्रतिपादित होते हैं
00:37:00:03 सुनिए जी जीसस कहां से प्रतिपादित होते हैं सुनि जीसस 2020 साल पहले पैदा हुए नहीं नहीं प्रतिपादित कह रहा हूं आप कैसे जानते हैं जीसस को किस माध्यम से जानते हैं देखिए तस्मा शास्त्र प्रमाण उनका जो शास्त्र प्रमाण है बाइबल उनके थ्रू हम जानते हैं हम शास्त्र के तो तो उसकी जो कैरेक्टरिस्टिक है उनको छोड़ देंगे क्या केवल नाम को लेंगे क्या अभी अभी आपने बोला ना ये तो बात की बात है सही है या गलत है ये तो बात की बात है अरे सही है गलत कैसे भाई हम इस बात पर बात कर रहे हैं कि सत्य के असत्य कृष्ण और अल्लाह एक है बस ये बताइए ये सत्य है कि असत्य इस पर बात करते हैं ये ये असत्य होते हुए भी कहना यह बात की बात है कि सही है कि गलत है हम बात कर रहे य सत्य है या असत्य है मुझे बताइए शंकराचार्य जी ने भाई साहब आप फिर वही सही गलत पर जा रहे हैं असत्य बोलना सही है कि गलत है वो बात की बात है आप मुझे बताइए यह जो शिक्षा दी जा रही है कृष्ण और अल्ला एक है यह सत्य है कि असत्य है अगर इस शिक्षा से कश्चन फिर वही बात देखिए आप घुमाएंगे अब अब आप देखिए अब आप विषयात कर अगर इस शिक्षा से किसी का घर बस रहा है किसी का भला हो रहा है तो आप फिर बजा रहे मैं पूछ
00:38:15:04 रहा हूं गलत है मतलब गलत मतलब यह सही सत्य लाइन है या असत्य लाइन है यह बताइए मुझे यन केन प्रका म क किसी का अगर मन कृष्ण लग रहा है कृष्ण में नहीं लग रहा है भाई साहब कृष्ण में नहीं लग रहा भगवान ने ये भी कहा है जो लोग गलत धारणाओं के द्वारा अलग देवी देवताओं को ध्या रहे वो ढूंढ तो मुझे ही रहे हैं मगर अधि पूर्वक अ विधि पूर्वक होने की वजह से वो मुझ तक नहीं पहुंचते ये कहा है कि नहीं में वो धार भगवान कृ ल तो अगर तो इसका अर्थ ये है कि वो अधि विधि गलत होने की वजह से हम ये नहीं कह सकते कि नहीं साहब तुम सही तरीके से ईश्वर को ध्यान कर रहे हो तो ये शिक्षा सही है या गलत है कुल मिला के फिर वही बात आ गई कृष्ण शरण में आने के बाद विधि कौन सी चेंज हो गई तो भगवान कृष्ण की विधि लगी ना तो वो कृष्ण की शरण में आए कहां वो तो नाम बदल गया केवल वो भाई साहब वो तो नाम बदल गया वो केवल नाम बदल गया अगर ईश्वर और कृष्ण और अल्लाह को हमने एक बता दिया कि कृष्ण और अल्ला एक है और कोई कृष्ण का नाम जपने लगा तो वो तो कृ अल्लाह का ही नाम जप रहा है वहा तो क आया कृष्ण की शरण में नाम जपने की स सिद्धि आपको फिर पता ही नहीं है जिस व्यक्ति जिसका
00:39:30:10 चित्त होगा उसी का नाम माना जाएगा अगर जैसे की वाल्मीकि जी ने रमा मरा मरा जपा जी तो मरा का फल नहीं मिला उनका चि भगवान राम में था तो उसका फ इसका अर्थ यह है कि आप उन्हें यह कहते हुए कि अल्लाह और कृष्ण एक आप उन्ह कृष्ण का नाम पकड़ते हो वस्तुतः अल्लाह और कृष्ण एक नहीं है दे वस्तुत नहीं है मैं बताता हूं क्यों नहीं है तो ये लाइन गलत है ना कृष्णा अल्ला एक है सुनिए मेरी बात जी उनको यह बोला जाता है कि जो भी परम सत्ता है फिर से आप उसको अल्लाह कहते हो कुछ भी कहते हो वो एक ही है फर उनको धीरे धीरे समझाया जाता है कि स्वग मतलब शुरुआत में जो शिक्षा दी जाती है व भ्रामक होती है ना भ्रामक नहीं भाई साहब आप जो है वो ठीक से आप जैसे शुरू में आप कट टू कट रह रहे थे मगर अभी आप कट टकट नहीं रह रहे अरे आप समझ ही नहीं रहे हो जहार बोनिया समझ रही हैया जी आप एक प्रश्न का जवाब नहीं दे रहे हो कि वहां पर वो उनको कृष्ण से जोड़ने के लिए थोड़ी देर के लिए ये झूठ बोलते हैं कि कृष्ण और अल्लाह एक है ये झूठ बोलते हैं थोड़ी देर के लिए मुझे ये बताइए निश्चल जी ने झूठ बोला मैं ये नहीं कह रहा ये बात की बात है वो अच्छा काम है बुरा काम है बाद में बात करेंगे
00:40:45:14 झूठ बोलते हैं कि नहीं ये बताइए नहीं तो निश्चलानंद महाराज जी ने झूठ बोला मैं पूछ कब बोला यही की बो जीसस जो इंडिया रहे थे उन्होंने सनातन धर्म सीखा था ये झूठ बोला उन्होंने भैया ऐसा तो है नहीं दुनिया में जितने भी दार्शनिक वो है अध्याय उन सारे दर्शनों में ऐसा थोड़ी नाय पूरी अवद चीज भरी पड़ी है कहीं ना कहीं उनका जो मूल स्रोत है वो तो वैदिक ही है अगर आज के टाइम में कोई अपनी आप आ ग लाइन प आप आ ग लाइन प इसका मतलब य इसका मतलब ये हुआ वो कहीं ना कहीं उस परात्पर सत्य को खोज रहा है उसकी मानता अलग हो तो आप उससे ये कहिए ना कि वो परास्त एक है जिस परस्पर सत्य को आप आप ढूंढ रहे हो वो और कृष्ण एक है आप यह क्यों कह रहे हो कि अल्लाह और कृष्ण एक है अल्लाह जब आप कर दोगे तो सिर्फ और सिर्फ वो ईश्वर है जो कुरान के द्वारा कुरान की सीमा के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर है जब आप यहोवा कह दोगे तो सिर्फ और सिर्फ बाइबल के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर है आप परस्पर सत्ता कहो आप वो जो आपने अभी पहले कहा था परम सत्ता कहो कि भाई देखो जिस भी परम सत्ता को तुम ढूंढ रहे हो वो और कृष्ण एक ही है आप ये कहो आप जब ये कह दोगे अल्लाह यानी आपने सीमित कर दिया उस किताब के द्वारा जो डिफाइन होते हैं वो कैरेक्टरिस्टिक वाला जो ईश्वर है वो
00:42:01:10 है डिपेंड करता है आप उस बुक से आप क्या पढ़ा रहे हो प्रभुपाद ने उसी बुक से पढ़ाया कि जीसस जो है भगवान कृष्ण के पुत्र है और सब समझे कृष्ण को फादर स्वीकार करा और कृष्ण की भक्ति में लग भाई साहब मैंने तो उस बुक में बहुत सी ऐसी चीज पढ़ी है जो बिल्कुल भी वद मैं 10 मिनट रुकने को तैयार हूं आप भगवत गीता में से एक भी लोक ऐसा दिखाता प्रभुपाद ने गलत लिखा हो मैं कहा मैं तो यह कह रहा हूं प्रभुपाद जी ने गलत लिखा है मैं दिखा दूंगा 50 चीज मगर अभी बात जो हो रही ना विषय बदल जाएगा विषय बदल जाएगा आप विषय बताइए आपके अधिकृत लोग जो य टिप्पणी करते हैं ईश्वर अल्ला एक है यह सही टिप्पणी है या नहीं चाहे अल्लाह हो कोई भी परात्पर सत्य हो पपर सत्य नहीं कहते वो वो अल्लाह कहते हैं और अल्लाह का एक ही मतलब है जो कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर वो है भाई मुस्लिम को क्या समझाओ नहीं बोलोगे तो वो तो चला जाएगा तो जो उनकी भाषा में जो बात है वो वो भाषा अलग है ये नाम है ये संज्ञा है ये ये कोई वो कैरेक्टरिस्टिक डिफाइन नहीं हो रही है ये अल्लाह नाम है नाम दिया गया है वहा भागवत में एक श्लोक आया है जी अनंत नाम रूपाय
00:43:16:10 तो आप ये कह रहे हो कृष्ण का नाम अल्लाह है अनंत नाम हो सकते उन आप अल्लाह के बारे में क्या जानते देखिए य पर आपकी चीज सामने आ गई है कि आप अल्लाह और कृष्ण को एक मानते हैं नहीं हम मानते सुनिए हम भगवान बुद्ध को भगवान का अवतार मानते हैं सिद्धांत नहीं मानते हम कुरान को नहीं मानते उनका सिद्धांत नहीं मानते अरे तो भाई उसी सिद्धांत में तो अल्लाह की व्याख्या की गई है अल्लाह को आप जानते कहां से हो कृष्ण के माध्यम से जानते हो क्या आप समझ नहीं रहे हो आप भगवान को बाधित कर रहे हो कि उनका ये नाम नहीं हो सकता वो नाम नहीं हो सकता आप वादित कर रहे हो मैं बाद व्यावहारिक रूप से वादित कर रहा हूं परमार्थिक रूप से बाधित कर रहा हूं भगवान सुनिए भगवान के दो तरीके के रूप है एक परमार्थ वाला एक व्यवहार वाला परमार्थ वाला जो रूप है व बाधित है भाई ऐसा तो नहीं हो सकता सुन लीजिए एक लाइन बोल दे लीजिए ऐसा तो नहीं हो सकता कि कोई वेदों का मार्ग अपना भगवान उसके साथ अन्याय कर दे मगर कहां परमार्थ में यहां कर सकते हैं रावण के रूप में वो अन्याय कर दिया नहीं मुझे मुझे बताइए आपने बोला भगवान के दो रूप है जब य आते बाधित हो जाते नहीं यहां नहीं परमार्थ में परमार्थ में यहां तो कुछ भी कर सकने वाले हैं सुनि भगवान का सर्वशक्तिमान है उनका कोई रूप बाधित नहीं होता है आप मुझे
00:44:31:13 भैया देखिए ये हो गया शब्दों का खेल आप मुझे ये बताइए क्या आप कृष्ण और अल्लाह को एक मानते हैं या नहीं देखिए ईश्वर के अनेक नाम हो सकते हैं है अल्लाह का जो मैं अल्लाह नाम से वो ख्या पित कर रहा हूं जो कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर है अब बताइए क्या कृष्ण और कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर एक है नहीं उ नहीं उसमें प्रता होने वाला एक ईश्वर नहीं है तो फिर वो क्यों कह रहे हैं ईश्वर अल्ला एक है अरे नाम अनेक हो सकते हैय बताइए यानी वो वो वो समय आने पर लोगों को यह भी कह सकते इसन के लोग कि भाई नाम अनेक हो सकते हैं तो अल्लाह का जाप कर लो जब नाम अनेक हो सकते हैं नहीं क्यों नहीं क्योंकि जो कुरान का कहना है उसमें निराकार की उपासना है बिना रूप की उपासना है जबक का सिद्धांत है बिना रूप के उपासना करते ही अलग है तो आप उस सिद्धांत वाले नाम को यहां क्यों आप एक कर रहे हैं सिद्धांत नाम यह बताइए मुझे वाल्मीकि ने मरा नाम जपा किस शास्त्र में लिखा है मरा नाम तो उने अनंत नाम हो सकते तो हम ये समझाते हैं की भगवान के अनेको नाम है आप जो जप रहे हैं वो भी हो सकता है लेकिन उससे
00:45:46:15 आगे का मार्ग कृष्ण मार्ग है जहा आपको रस रूप लीला गुण धाम सब अच्छा अच्छा अच्छा ठीक है ठीक है अब मैं इस आ गया वाल्मीकि जी से आपने तुलना की वाल्मीकि जी से आपने तुलना की वाल्मीकि जी ने गलती से मरा मरा जपा था ना नहीं गलती से नहीं हा नहीं उस टाइम उनकी पता नहीं क्या उनकी उस टाइम उतनी चेतना स्थर नहीं थी उस लेवल प ठीक है तो उन्होने वो उन्होंने उन्होंने सही नाम नहीं जपा फिर भी व मोक्ष को पा गए ना तो इसका मतलब जब जब उनको यह कहा जा रहा है कि अल्लाह और कृष्ण एक है तो यह बात सही नहीं है वो बात अलग है कि वो उससे मोक्ष पा जाएंगे जब आप वाल्मीकि से जोड़ रहे हैं तो यही बात हुई ना देखिए अगर मैं भागवत का ये श्लोक मानता हूं कि भगवान कृष्ण के अनेको नाम है अनंत नाम है तो आप ये बात मानते हो कि कृष्ण को अल्लाह भी कहा जा सकता है कृष्ण को कृष्ण के अनेकों नाम है अनेकों अल्लाह नाम कहा जा सकता है या नहीं सुनिए मेरी बात हां या ना में जवाब नहीं होता है तो आप आप क्लियर बात आप कर ही नहीं रहे ना शुरू से आप कोई भी उपनिषद उठाइए उसमें हां या ना में जवाब नहीं दिया गया नहीं तो आप उपनिषद थोड़ी ना पढने बैठे हैं नहीं आप उपनिषद पढ़ा रहे हैं क्या मुझे बात तो उसी की हो रही है ना अरे तो बात हो रही तो बात
00:47:01:18 हो रही है जब हम व्यवहारिकता से आमने सामने है ना हम पढ़ थोड़ी ना रहे ग्रंथ यहां प देखिए शास्त्र में कहा गया नाम नाम आकारी बहुदा अगर हाया ना की बात मैं आपको करूं तो ऐसे बहुत से उदाहरण दे दूंगा ज राम ने कुछ पूछा और उनको आया ना में उत्तर मिला सुनि जैसे कि एक क्या नाम है अरबी शब्द है जिसमें बोलते है रब अब रब को ट्रांसलेट करेंगे वो विष्णु निकल के आता है मतलब मैं एक बात ये समझ लेता हूं कि इकोन वाले लोग जब ये कह रहे होते हैं कि क्या कहते कृष्ण और अल्लाह एक है तो उनकी वो ये कह रहे होते हैं कि एक परम शक्ति है जिसको तुम जानते नहीं हो वो एक है और समझने वाला ये समझ लेता है उसका अर्थ कि भाई मैं जिसको बाधित को जानता हूं जो कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाले को जानता हूं ये उसकी बात कर रहे हैं हा वो समझ सकते हैं तो एक तरीके से ये भी तो वहां पर उनको जो जानते हुए कि आदमी मिसगाइड हो जाए तो ये उनको एक तरीके से छलावा ही हुआ ना कि वो हम यह जानते हैं कि मेरे इस शब्द का अर्थ ये क्या लेगा देखिए देखिए जैसे सूर्य होता है सूर्य को इंग्लिश में सन कहते हैं अंग्रेजी मुस्लिम जो है चांद कहते हैं लेकिन सूर्य एकही है भया देखिए मेरी मेरा सिद्धांत समझ लीजिए मैं कभी भी कृष्ण को अल्लाह नहीं कहूंगा मैं कभी भी
00:48:16:18 कृष्ण को अल्लाह नहीं कहूंगा आप कहिए आपके सिद्धांत से सृष्टि नहीं चलती है भगवान ने जब बोल दिया अनेको नाम तो अने में कुछ भी हो सकते है तो अनेको तो आप आप ये पोस्टर लगाइए ना भैया कृष्ण अल्ला एक है कृष्ण बराबर अल्ला फिर आप इसको स्वीकार नहीं कर रहे हम सिद्धांत को स्वीकार नहीं करते हैं किसको स्वीकार किया आपने हम भागवत के श्लोक को स्वीकार करते हैं भागवत के श्लोक को स्वीकार किया आपने अल्लाह को स्वीकार किया उसके आधार पर की नहीं अल्लाह को क्यों करेंगे अल्लाह को आप कह तो रहे हो कि उसके अनेको नाम हो सकते हैं सुनिए आप समझ नहीं रहे हो आपने भारत का लोक स्वीकार कर लिया कि भगवान के अनेको नाम है तो फिर आपको अगर कुछ बोल हा ये नाम हो सकता है तो आप क्या मना कर देंगे नहीं य नहीं हो सकता नहीं नहीं मना नहीं करेंगे मगर जब हमें मालूम होगा कि हम जब अल्लाह बोल रहे तो अल्लाह के बारे में हमें पता होगा कि वेल नोन वो अल्लाह कौन है तो हम कहेंगे भैया देखो हम अल्लाह बोल तो रहे हैं मगर इसको वो अल्लाह मत समझना जो तुम्हारी कुरान से प्रतिपादित हो रहा है हा ये नाम का खेल खेल रहे ना तो आप इस पर सुनिए कि जब हम ये बोल रहे होंगे ना तो उस अल्लाह को मत लेना कुरान से प्रतिपादित हो रहा है फिर हम तो ये कहेंगे ना ये अल्लाह शब्द नाम हो सकता है मगर वो अल्लाह नहीं जो कुरान से प्रतिपादित हो रहा है या यहोवा शब्द की बात हो सकती मगर वो यहोवा नहीं जो बाइबल से प्रतिपादित हो रहा है
00:49:31:22 अरे सिंपल सी बात है जिस तरह हमने भगवान बुद्ध को स्वीकार किया उनका सिद्धांत को स्वीकार नहीं किया हमने अपने भागवत के श्लोक को स्वीकार किया भ हमने भगवान बुद्ध को इसलिए स्वीकार किया है क्योंकि हमारे प्रमाणिक जो आश ग्रंथ है उनमें उनका उल्लेख है अल्लाह का उल्लेख नहीं है यहोवा का उल्लेख नहीं है हमारे य बिल्कुल नहीं है तो उ सिद्धांत को नहीं माना लेकिन ये तो शलोक मानो अरे ऐसे कैसे हम श को मानते हैं ना शास्त्र को मानेंगे व्यक्तिगत तर्क को मानेंगे आप समझ नहीं शास्त्र ही कह रहा है अनेको नाम है तो अनेकों नाम है तो हम जब जब जब हम ये जान जब हम यह जानते हैं कि हम जो नाम ले रहे हैं वो वेल नोन नेम है दुनिया जानती है कि वो नाम किसका है तो हम ये जब कहेंगे तो हम ये बात तो याद दिलाएंगे कि हम जब अल्लाह कह रहे हैं तो हम एक परम शक्ति की बात कर रहे हैं उस शक्ति की बात नहीं कर रहे जो कुरान के द्वारा प्रतिपादित हो रही है तो हम उतना ही हम कभी कुरान का प्रचार करते हैं इसको हमने देखा कुरान का प्रचार करते हुए अरे तो ये भी एक मैं प्रचार की बात ही नहीं कर रहा खूब करिए भाई वो भी वो भी एक आइडल जीी है जैसे आपकी आइडल जीी वैसे उनकी आइडल जीी है उनका कोई वो थोड़ी ना है ठीक है अपनी अपनी आईडियोलॉजी मगर मैं यह कह रहा हूं क्या कृष्ण यानी भगवत गीता के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर और कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर एक है तो आपने कहा नहीं है नहीं है
00:50:47:06 अब मेरे जो अगले सवाल है वो ये है कि अगर आप सिर्फ नाम को यूज कर रहे हैं तो आपको फिर यह साथ में बोलना चाहिए ना इतना वेल नोन नेम है पूरी दुनिया जानती है कि अल्लाह कौन है तो जब आप कहते हो कि कृष्ण और अल्लाह एक है तो आपको कहना चाहिए मैं उस अल्लाह की बात नहीं कर रहा जो कुरान से प्रतिपादित हो रहा है देखिए हम जैसे समझाते हैं हम ये समझाते हैं परम सत्य को अनेको नाम से बोला जाता है राम आप यहां पर घुमा रहे हो आप भी वहां पर लोगों को घुमा ही रहे हो उनको जोड़ने के लिए सही व देखिए ये दुनिया देखेगी ये वीडियो आप उन लोगों को घुमा ही रहे हो ठीक है आप लोगों को घुमा रहे हो कि भाई कृष्ण अल्लाह एक है तो जब आपसे प्रश्न किया गया कि कृष्ण अल्ला एक है तो भैया आपने कह दिया हजारों नाम हो सकते वा वा क्या बात है नहीं तो आप क्या चाहते हो सनातन धर्म ना अपनाए कृष्ण नहीं अपनाए बिल्कुल अपनाए मगर सत्य के साथ अपनाए कृष्ण को कृष्ण जानते हुए अपनाए बिल्कुल अपनाए कृष्ण को कृष्ण जानते हुए राम को राम जानते हुए ईश्वर को ईश्वर जानते हु ब्रह्म को ब्रह्म जानते हुए चोटी र ये नहीं नहीं भाई हमारा कृष्ण तुम्हारे ही जैसा है तो इसलिए कृष्ण का नाम जपो साब अरे कौन सा नमाज पढ़ते हुए देख लि तुमने नहीं देखा ना ये बात बाद की है और आप करके बात कर रहा तो कपया आपसे मुझे अपेक्षा करता हूं कि आप भी आप करके बात करें बिल्कुल आप बो आपने क
00:52:03:02 हम मुस्लिम धर्म का प्रचार कर नहीं नहीं भागवत का जो हमारे शास्त्र में जो जो बताया अनेक रूप आपके द्वारा खित होने वाला जो ईश्वर है व सेम वैसा ही ईश्वर है जो ईश्वर बाइबल और कुरान के द्वारा प्रतिपादित होता है तो आडलज आप दुनिया को दे क्या रहे हो आइजी दे रहे हो ब्रा चलिए र दो चीज थी एक वो आपने वो परमार्थिक है वहां पर आपका वो चीज कट गई कि भाई वो अपने मूल रूप से आए थे जो मेन था कि दूध से दही बनता है तो आपने कहा कि वो परमार्थिक क्रिया है यानी कि व व्यवहारिक क्रिया नहीं है और व्यवहारिक क्रिया नहीं है इसका मतलब वहा जो व रूप है जो रंग है वो है वो जो मनुष्य है उसके व्यवहार का विषय नहीं है आपने स्वीकार किया उस व्यवहार का विषय नहीं है वो तो जब भगवत प्राप्ति होगी तब समझ में आएगा लेकिन जब लौकिक प्रक्रिया होती है तो उसम समझाने के लिए दूध और दही का एग्जांपल लिया जाता है ना नहीं वो मैंने आपका मान लिया मैंने ये इससे निष्कर्ष निकाला कि जो आपके अनुसार भी आप कह रहे हो कि भगवान के दो रूप है एक व्यवहार का विषय और एक अव्यावहारिक भाई आप क्यों बारबार मेरे अपने मत को मेरे मत प छ मैंने कब बोला भगवान के आप घुमा फिरा के बात तो वही बोल रहे हो वही बोल रहे हो सुनिए ये अद सिद्धांत है
00:53:18:02 भगवान के अपना बता दीजिए आप अपना बता दीजिए यह मनुष्य के व्यवहार का विषय है कि नहीं ये जो क्रिया है कि वो जो भगवान श्री कृष्ण शिव बनते हैं मगर शिव बनने के बाद वापस कृष्ण नहीं बन सकते मैंने ये नहीं बोला मैंने बोला कृष्ण से प्रकट होते हैं कृष्ण में समा जाते हैं कृष्ण से प्रकट होते हैं कृष्ण से कृष्ण में समा जाते हैं अच्छा जितनी देर वो कृष्ण से प्रकट हुए हैं उतनी देर वो पूर्ण ऐश्वर्य वान है कि नहीं कौन जो शिव है क्यों नहीं तो पूर्ण ऐश्वर्य वान है सर्वशक्तिमान वो भी है उस समय मैंने क्या बोला आपने स्टार्टिंग में पूछा था मैंने तभी बोला अभी अभी मैं क्लियर कर रहा हूं एक एंडिंग एंडिंग सेशन का एंडिंग कर रहा हूं मैं पूछ रहा हूं कि जितनी देर वो प्रकट हुए हैं अपने आप में वो शिवजी सर्वशक्तिमान है सब कुछ कर सकने वाले हैं कि नहीं भगवान सचिदानंद है कि नहीं बिल्कुल सच्चिदानंद आप का लेक्चर सुनिए बोला गया भगवान हा भगवान शिव का जो है भगवान कृष्ण भेद नहीं है तो देखिए जब आपने ये मान लिया कि जितनी देर वो मैंने आपने जब ये मान लिया कि जितनी देर शिवजी प्रकट हुए वो भी पूर्ण है तो बात ही खत्म हो गई जब शिवजी भी पूर्ण है तो फिर कोई बात ही नहीं है फिर तो कोई भेद ही नहीं रहा अब यहां पर तो आपकी जो आडलज
00:54:33:18 है वो विरुद्ध दिख रही है मुझे इस कन के अब यहां प तो आपने उसके विरुद्ध अगेंस्ट लॉजी और ये जो अगर आप चाहे तो अब हम दूसरी चर्चा कर सकते हैं मधवा चार्य चैतन्य महाप्रभु जो भी आपको बोलनी है बिल्कुल लेकिन ये जो आईडियोलॉजी मैंने बोली ये गडिया वैष्णव स्कोन का सिद्धांत है आपको एक नहीं कम से कम दस लेक्चर दिखा दूंगा जिसमें अमोग लीला प्रभु सहित बहुत सारे लेक्चर में बोला है कि भगवान शिव में और कृष्ण में भेद नहीं है लेकिन आदि कारण हम कृष्ण को मानते हैं समझ रहे आप नहीं देखिए 2.2 की व्याख्या में आपकी भगवत गीता एज इट इज में लिखा हुआ है कि ये जो ब्रह्मा विष्णु और शिव विष्णु और ब्रह्मा ये तीनों ही जीव है और ये कृष्ण की तरह पूर्ण ऐश्वर्य वान नहीं है ये लिखा है बोल के देखिए नहीं सुनिए अब आप पली आप कह रहे हो कि वो पूर्ण श्वान है जब आप डीली जाएंगे तब ना आप गही से पढ़ते नहीं आप ब्रम समता भी सही से पढ़ेंगे तो उसम सदाशिव ब्रम समता तो र बाद में चलिए आप ये बताइए वो पूण आप ये मानते हो शिव भगवान भी पूर्ण स्वान है सुनि आपने अभी दो दो ब्रह्मा जी की बात करी इसलिए थोड़ा डिटेल में समझा दे रहा आपको
00:55:49:08 ब्रह्मा और शिव भी दो प्रकार के होते हैं सदाशिव और शिव और जो ब्रह्मा होते वो भी दो होते आपने कभी पुराणों में पढ़ होगा एक जीव ब्रह्मा होते है एक स्वा ब्रह्मा होते है जब जी ब्रह्मा किसी पोस्ट पर नहीं होता है होते हैं संभालने के लिए तो स्वयं अंश अपना भगवान कृष्ण स्वयं बन जाते ब्रह्मा ये ये आपन की आइजी बता रहे हो यानी कि एक जो नारायण जीव है नारायण नाम का जो जीव है प्लीज इस शब्द को वापस ले क्योंकि आईडियोलॉजी पूरे वृंदावन की पूरे वैष्णव संप्रदाय की वो मैं आऊंगा पूरे वैष्णव संप्रदाय की है कि नहीं मैं आपको अभी खोल के दिखा लजी आप मेरे पास किताब सामने है मैं खोल के दिखाऊंगा आपको आडलज नम ये सिद्धांत सारे वृंदावन के आचार्य का है चाहे कृपालु महाराज का ले लीजिए आप चाहे प्रेमानंद महाराज का ले लीजिए चाहे प्रेमानंद महाराज तो साफ कहते हैं जैसे दो आख वैसे हरि हर में कोई अंतर नहीं है इसके आगे य नहीं कहते अंतर है इसके आगे अंतर है आप कहते हैं अरे उनका आप पूरा लेक्चर सुनिए उन्होंने खुद बोला है कि भगवान कृष्ण से प्रकट होते हैं ब्रह्मा विष्णु महेश और अने कृष्ण तो भगवान कृष्ण से प्रकट होते हैं तो कृष्ण और शिव में कोई अंतर नहीं है ना यानी कि जब जहां पर जिस कृष्ण की बात हो रही है वहीं पर शिव की भी बात हो रही है
00:57:05:07 जैसे जीव ब्रह्मा होते हैं आपने गीता का श्लोक पढ़ा होगा कि ब्रह्म लोक तक जाके भी वहां देखिए ये एक एक पॉइंट क्लियर करते चले एक बात ये हो रही है क्या जितनी देर वो प्रकट होते हैं शिव जी वो सर्वशक्तिमान और पूरी तरीके से कृष्ण के बराबर पावर रखने वाले होते हैं कि नहीं ब्रह्मांड को संचालित करने वाले होते हैं कि नहीं बिल्कुल होते हैं क्यों नहीं होते वो पूर्ण ईश्वर होते हैं बिल्कुल आदि आदि कारण हमने माना कृष्ण को आपने माना मगर वो शिव जी जब प्रकट होते हैं आपके अनुसार तो वो पूर्ण ही होते हैं अपूर्ण नहीं होते हैं अपूर्ण े अपूर्ण होंगे तो वो ईश्वर नहीं है फिर हां तो अब देखिए यहां प देखिए यहां प वही वाला कैच है जैसे आप कह रहे हो ना वहां पूर्ण वाले को आप कह रहे हो कि चलो चलो कृष्ण को पकड़ो खैर मैं आपको अभी भगवत गीता दिखा देता हूं
00:57:59:21 कार्तिक जी पूछ रहे हैं डेमी गोड किस शास्त्र में लिखा है मुझे बताइए कि महादेव का कौन सा शब्द होता है इंग्लिश में अंग्रेजों को महादेव का शब्द भैया महादेव होता है इंग्लिश में कृष्ण का कौन सा शब्द होता है इंग्लिश में अच्छा महादेव कहने आप ना ये बहलाने वाली बातें बंद करिए महादेव का कौन सा शब्द होता है भाई कृष्ण को इंग्लिश में आप कृष्ण कह रहे हो तो महादेव को महादेव को अरे गड क्यों उनके लिए आपको अंग्रेजी का शब्द चाहिए क्यों भगवान के लिए गॉड यूज होता है नहीं होता है आपने कहा ना वो भी भगवान है अरे महादेव शब्द के लिए हमें यूज करना पड़ा क्योंकि अंग्रेजी में ऐसा कोई शब्द था नहीं अरे भैया तो आपने तो माना ना कि भगवा वो भी भगवान है गॉड शब्द यूज करो आप उनको क्यों नहीं कर रहे सुनिए जब हमें सुप्रीम पर्सनालिटी कृष्ण को इंग्लिश में कृष्ण कहोगे महादेव के लिए आपको शब्द चाहिए इंग्लिश वाला अरे कृष्ण नाम है कृष्ण नाम है और भगवान जो है उनका
00:59:01:03 तत्व दो प दो यह देखिए इसमें आपको शायद दिख रहा हो आपने पढ़ा होगा य वाला कि नहीं बिल्कुल है मेरे तोय आप इसम पास में जाके दिखा रहा हूं एक
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00:59:16:27 मात्र कृष्ण ही ऐसा दावा कर सकते हैं क्योंकि वह भगवान है ब्रह्मा शिव
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00:59:26:26 नारायण दिख रहा हो सभी को आशा करता हूं सहित कोई भी जीव 2 ना हा कृष्ण के समान पूर्ण ऐश्वर्य वान नहीं है आपने कहा वो कृष्ण के समान ही है 2 प2 बोला आपने जी कौन सी लाइन है ये इसकी व्याख्या में है व्याख्या देखिए नेक्स्ट पेज 5 नंबर पेज आ
01:00:05:20 मिली ऊपर से न टूथ पहला पैराग्राफ छोड़ करके न टूथ फ फिथ लाइन में है अच्छा य आप हां अब देखिए अब यही तो मुझे समझ में नहीं आता आप सही से क्यों नहीं पढ़ते जब मैंने आपको पहले बोल दिया कि भगवान के दो स्वरूप होते हैं एक विवांश एक स्वांश इसमें क्या बोला है ब्रह्मा शिव या नारायण कोई भी जीव श्री कृष्ण के जीव के लिए यूज हुआ है विनाश के लिए मैंने बो ये लोग जीव है अरे आप समझ ही नहीं रहे हो शिव जी और ब्रह्मा जी भी ये दो प्रकार के होते हैं नारायण सुनिए आप गीता का श्लोक तो टाल नहीं सकते गीता में बताया है ना कि ब्रह्म लोक तक जाने के बाद वापस आ जाते हैं उस मैं नारायण पूछ रहा हूं नारायण भी दो प्रकार के होते हैं जब ब्रह्मांड में रचना होती है तो ब्रह्मा विष्णु महेश हर जीव का एक अलग स्वरूप बनाते है जैसे कि विष्णु जो है वो तीन प्रकार के अब आप वो भी नहीं मानोगे कारण वो वो ठीक है वो बात करेंगे आप मुझे प्रूव करिए कि जो नारायण स्वरूप है वो पूर्ण पूर्ण श्वा
01:01:20:24 नहीं है पहले मेरे को ये बताइए आपने श्लोक में ये पूरा क्यों नहीं पढ़ा यहां पर जीव शब्द यूज हुआ है ईश्वर शब्द नहीं जीव मैंने पढ़ा अभी पूरा पढ़ा जीव के साथ पढ़ा मैंने तो ये जीव क्यों माने जा रहे हैं और अगर जीव माने जा रहे हैं आप ये मान रहे हो कि भगवान के दो स्वरूप हो रहे हैं जितनी भी क्रियाए हो रही है आध्यात्मिक उनके दो स्वरूप हो रहे हैं एक व्यवहारिक और एक परमार्थिक तो फिर आप आपकी वो चीज खंडित होती है कि आप इसको दुनिया को माया नहीं मानते हैं सु पहले प पहले वाले का आंसर देता हूं हा आपके सिद्धांत में ये मानते हो ना मानते हो लेकिन हमारे व सिद्धांत में ये मानते हैं कि हर कोई ब्रह्मा तक बन सकता है और रुद्र के भगवान शंकर के 11 में रुद्र तक पोस्ट ले सकता है हा तो उन जीव की बात हो रही है य पर नहीं मतलब कि परमार्थिक जीव या व्यवहारिक लौकिक जीव ये आप अपने सिद्धांत मत करिए ना कि परमार और लक अरे भाई मनुष्य को समझ में आने वाला ईश्वर का रूप है ये या मनुष्य को समझ में ना आने वाला ईश्वर का रूप है ये भगवान भगवान अपने एक चेला अपने गुरु को भी नहीं समझ सकता भगवान को क्या समझेगा नहीं क्यों नहीं राम जी को समझते हैं हम देखते हैं कंधा इधर से चालू
01:02:35:28 हुआ इधर तक खत्म हुआ यह नाक है भगवान के दो क्वालिटीज हो गई ना एक परमार्थिक और एक व्यवहारिक ये हमारा सिद्धांत है मगर आप जब ये कहते हो कि दुनिया माया नहीं है ये दुनिया जो है भ्रम नहीं है अभी आपने गीता खोली उसी में आगे लिखा है नहीं लिखा कि ना मुझे देवता गढ जानते ना मुझे ऋषि मुनि जानते अरे तो तो वो उसम य भी तो उसम ये भी तो लिखा है मैं राम हूं मैं सिंह हूं मैं ये हूं मैं वो हूं ये भी तो लिखा है अब देखिए वो विषयात हो जाएगा शास्त्रार्थ करने नहीं बैठे हैं मैं एक बात पूछ रहा हूं आपसे क्या आप यह मानते हैं कि भगवान के दो स्वरूप होते हैं एक व्यवहारिक और एक परमार्थिक नहीं नहीं मानते नहीं मानते सुनिए मेरी बात भगवान के आप मुझे नहीं पता आपके सिद्धांत में क्या पढ़ा जाता है मेरे सिद्धांत में और विवांश पढ़ा जाता है विवांश तक पोस्ट हम ले सकते हैं व उपाधि हम ले सकते हैं भैया ये उपाधि की बात आ कहां से रही है मैं आपसे ये पूछ रहा हूं भगवान के दो स्वरूप होते हैं कि एक जो हम दिखाई दे रहा है एक जिसकी हम पूजा कर रहे हैं एक जो हम नहीं जानते कि वो क्या है मामला तो ये जो दो स्वरूप है आप मान रहे हैं कि नहीं मान रहे हैं हमें हमें कौन सा दिखाई दे रहा है मैं समझा नहीं भाई आपने जैसे कहा कि ये जो ब्रह्मा विष्णु महेश है जीव की बात हो रही
01:03:51:01 है तो ये जीव जो है मनुष्य के व्यवहार का विषय वाला जीव मतलब वो विष्णु है जिसकी पूजा होती है वो विष्णु है जिसको परमेश्वर माना जाता है वो शिव है जिसको परमेश्वर माना जाता है उसकी बात हो रही है यहां पर या फिर कोई और किसी और परलोक में कोई छोटे मोटे विष्णु बना दिए गए हैं उनकी बात हो रही है ये यह जीव वह है जो माया से परे हो गया है लेकिन सदा जीव ही रहेगा मतलब पारलौकिक बात है ना ये हा तो इसका अर्थ ये हुआ कि आपके यहां भी दो चीजें मानी जा रही है कि य अच्छा यहां का जो विष्णु है वो अलग है ना फिर जिसको हम परमेश्वर मानते हैं धरती पर आप मुझे पता नहीं आप क्या समझाना चाह रहे हो धरती पर आप किस विष्णु की बात कर रहे हो चलिए खैर चलिए ये टॉपिक ये टॉपिक ये टॉपिक फिर ये टॉपिक छोड़ दीजिए ये बड़ा होता जा रहा है और भी हमारे पास ब्रह्मांड के विष्णु होते हैं धरती के विष्णु नहीं होते हैं क्या विष्णु ब्रह्मांड के होते हैं धरती के नहीं होती मैं वो पूछ रहा हूं जिस विष्णु की हम पूजा करते हैं ओम जय जगदीश हरे हां विष्णु भगवान जो शेष नाग पर लेटते हैं लक्ष्मी माता उनके पैर दबाती है वो आपके सिद्धांत मानते है एक बा आपके विष्णु है ही नहीं क्या हम विष्णु को सर्वोपरि मानते हैं
01:05:06:28 सर्वोपरि मतलब माया माया नहीं मान मैं माया मतलब आपका कहने का मतलब है व माया मतलब यह मनुष्य की आंखों से देखे जा सकने वाले नहीं है विष्णु नहीं अगर भगवान कृपा करेंगे वो दिव दृष्टि देंगे तो मगर फिलहाल उने क्र नहीं है कि विष्णु को आप विष्णु आपकी आंखों का विषय बने नहीं जब तक भगवत कृपा नहीं होगी कैसे देख सकते वो एक अलग बात है कि भगवत कृपा हुई कि नहीं भगवत कृपा नहीं होगी तो मैं आपसे बात नहीं कर पाऊंगा भाई साहब व भगवत कृपा नहीं होगी तो मैं आपसे बात ही नहीं कर पाऊंगा कहने का अर्थ ये हुआ कि जो विष्णु का स्वरूप भागवत में भागवत के अनुसार य मूर्तियां बनाई गई है वो सारे जो वो है वो व्यवहार के विषय नहीं है मगर मूर्तियां बना दी गई है नहीं नहीं नहीं अच्छा आप य ले जा देखिए डिपेंड करता है कि आपकी पात्रता क्या है आपकी पात्रता जितनी होगी ना उस मूर्ति में भगवान उतने ही प्रकट होंगे अगर आप मूर्ति के भाव से देखोगे तो मूर्ति ही रहेगी लेकिन अब उसम ईश्वर का भाव लेकर आओगे जितनी पात्रता आपकी साफ होगी उतना ही प्रकट मैं भाई साहब आप जो यह कह रहे हैं कि यह जो विष्णु है यह वो विष्णु नहीं है जिनको आप परमेश्वर नहीं कह सकते य अलग विष्णु है अलग विष्णु कह रहे है ना मैंने ऐसा बिल्कुल नहीं कहा
01:06:23:00 मैंने ने कहा कि जैसे ब्रह्मा होते हैं वो जीव भी होते हैं और भगवान के स्वरूप भी होते हैं और जैसे शिव होते हैं उनके 11 रुद्र में एक रुद्र की उपाधि हम ले सकते हैं उन उनके बारे में गीता में बताया तो उनके बारे में बताया है तो वही विष्णु तो यहां पर सर्व शक्तिमान है जिनकी हम पूजा कर रहे हैं तुम पूर्ण परमात्मा तुम अंतर्यामी पारम परमेश्वर तुम सबके स्वामी वही विष्णु है अलग है नहीं वही है और कौन से वही है तो जब वही है तो उनके लिए क्यों लिखा है कि तुम पूर्ण ऐश्वर्य वान नहीं अच्छा आप ये कह रहे कि वो विष्णु एक रोल निभाने जा रहे हैं जब जीव का तब कहा जा रहा है एक सिंपल सा आंसर बताता भागवत कान मध्यम ब्रहम परमा भगवान शब्द य हुआ है निराक तीनों एक है उसम य हु तीनों एक है निराकार ब भगवान कृष्ण का ही रूप है है लेकिन उसम सार शक्तिया प्रकट नहीं होती परमात्मा तीन स्वरूप का होता है कारणो शरो और गर्भ लेकिन उनमें भी लिमिटेड शक्तियां प्रकट होती है जैसे विष्णु उनमें भी लिमिटेड होती है भाई साहब मैं एक सिद्धांत आपको बता दूं असतो मा सद गमाया तमसो मा ज्योतिर गमाया मृत्युर मा अमृतम गमाया
01:07:38:01 सत चित आनंद की चा है जहां से यह सारा जो सारी जो यात्रा है वो प्रारंभ होती है मनुष्य की उसके अंदर ये तीन तरह की चा है सत चित आनंद की चा सब कुछ कर सकने वाला बनने की चाह अगर इसका निचोड़ हम निकाल द मैंने अपने अन वीडियोस में इसके बारे में कई बार बातें की है सब कुछ कर सकने वाला बनने की चाह तो का नहीं आप सचित आनंद को य चा में कैसे कर रहे आनंद अलग होता है चाहत अलग होती है आनंद सत चित आनंद भैया जो ये मनुष्य जीव का जीव की चाहा य बताई जा रही है ये जो बात देखिए जैसे मैंने आपकी बात सुनी ना पूरी अब मुझे कह लेने दीजिए असतो मा सद गम तमसो मा जति गम मत इसके अनुसार प्रत्येक जीव इसी के आधार पर हम नास्तिकता का भी खंडन कर सकते हैं इसी के आधार पर इसके आधार इसके अनुसार प्रत्येक जीव की चा का चाह है कि वह जो है सच्चिदानंद स्वरूप को ढूंढ रहा है तो उस इस चा का जो विषय है ना वही होगा जो सच्चिदानंद स्वरूप हो मगर आप कई जगह पर विष्णु को बाधित कर रहे यानी कि वो इस चाह का विषय नहीं है आप कृष्ण को भी वादित कर रहे हैं क्योंकि वह दूध
01:08:53:08 से दही बन सकता जब मैंने पूछा दूध से दही तोय पारलौकिक घटना है विष्णु को ऐसा कहा जाना पारलौकिक घटना है फिर आप कहते हैं कि यह दुनिया भ्रामक नहीं है आपकी अपनी कडिटिंग चल रही है आप आप क्या करते आप जवाब लेते लेकिन अपने तरीके से प्रकट करते आप क्लियर करके कुछ भी चल ही नहीं रहे शुरू से आपने ना तो दूध दही वाला क्लियर किया बिल्कुल ना ही आपने वो कृष्णला एक वाला क्लियर किया भल भल मैंने पूछा आपसे कि भैया य बता मान लो उनको मनाने के लिए प करते ठीक भगवान कृ प्रकट होते हैं उनमें लय हो जाते हैं कुछ तो आप ये मानते हो कि भगवान शिव भी पूर्ण ऐश्वर्य वान है भगवान भगवान शिव भी पूर्ण श्वर के साथ प्रकट होते हैं पूर्ण ऐश्वर्य वान है कि नहीं सर्वशक्तिमान है कि नहीं वहां पर कृष्ण के समान सर्वशक्तिमान है कि नहीं आपने शायद सही से पढ़ा नहीं है इसन बुक को वहां पर क्लियर बोला गया है कि शिवजी और कृष्ण भेद नहीं है लेकिन उनका मगर एक लाइन आगे जोड़ दना वो नहीं भेद है नहीं उनका आधार जो है वो कृष्ण है इसलिए अभेद भी है इसलिए
01:10:08:19 यूज किया गया तो मैं वही बता रहा हूं जो भगवान शिव है वो सर्वशक्तिमान पूर्ण स्वान है कि नहीं आपने मुझसे इतने सवाल पूछे आपसे पूछना चाहता हूं क्या हम भगवान ईश्वर बन सकते हैं भगवान में समा सकते बिल्कुल सकते ईश्वर बन सकते है ना बिल्कुल बन सकते हैं यही तो चा है ईश्वर यही तो मनुष्य की चा है मगर यह जो है ईश्वर बन सकने वाली बात यह परमार्थ का विषय व्यवहार में द्वैत है आदि शंकराचार्य जी ने कहीं पर भी ऐसा नहीं किया कि द्वैत को माना ही नहीं द्वैत मनुष्य को व्यवहार के विषय और जो अद्वैत है वो मनुष्य का परमार्थ का विषय है जब आप द्वैत के मार्ग पर चलोगे तब आपको अद्वैत की प्राप्ति होगी सुनि ईश्वर एक होता है नहीं बनते ठीक है ना जब आपको जब आपको शिव को छोटा करना होता है तो आप यह कहते हो जब आपको विष्णु को छोटा करना होता है हजार नहीं होते फिर जब आपको जब आपको किसी को किसी को भ्रम फैलाना होता है तो आप कहते हो नहीं भाई ईश्वर के हजारों नाम हो सकते हैं मैंने पहले स्वांश और विवांश की परिभाषा आपको बता दी थी नहीं नहीं जैसे अभी आप कह रहे हो ईश्वर एक होता हजार नहीं हो सकता ये आपको तब नहीं याद आता जब आप कृष्ण और अल्लाह को एक करते हो य आपको तब नहीं याद आता जब आप कृष्ण यवा को एक करते हो वहा
01:11:23:20 तो नहीं ईश्वर के हजारों नाम हो सकते तो शिव क्यों नहीं हो सकता ईश्वर का नाम हमने कुरान के अल्लाह को स्वीकार नहीं किया है हमने अपने भागवत के श्लोक को स्वीकार किया है अल्ला अल्लाह नाम से अल्लाह नाम से ना अनेको नाम से अनेको नाम से तो तो फिर आपको यह कहने में दिक्कत क्यों आती है कि शव और अल्लाह भी एक शव और कृष्ण भी एक है मैं तो अभी दो मिनट पहले स्वीकार किया है और ये भी बताया कि उसम अच भेद क्यों यूज किया गया है आधार श्री कृष्ण ने इसलिए भेद अभेद बताया दूध का एपल देखिए अचत वेदा वेद की बात तो ऐसी है कि वो फिर चैतन्य महाप्रभु वाला चैप्टर खुल जाएगा सुनिए मेरी बात य आप आपने जो उत्तर दिया ईश्वर एक है ना कोई बन सकता है ना रावण बना ना हिरण कशु बना जिसने चाहा उसका अच्छा मनुष्य मनुष्य की चा क्या है ये बताइए चलिए अब अगर ईश्वर ईश्वर कोई बन नहीं ईश्वर में कोई समा नहीं सकता है ल नहीं हो सकता है तो मनुष्य की चाह क्या है ये बताइए आपके हिसाब से मनुष्य की चाह क्या है पशु पति कीत आदि जो भी सृष्टि में है सबका एक ही उद्देश्य है आनंद पाना ईश्वर वो आनंद है उनको पा उनकी सेवा में लग सकते हैं हम ईश्वर नहीं बन सकते अच्छा अब मुझे एक बात बताइए कि क्या मनुष्य के अंदर यह चाह
01:12:38:27 आती है कि मैं भविष्य देख सकू भक्तों के अंदर नहीं आती जानियो के अंदर आती है अच्छा ये चा देखिए दो चीज है एक आता है कि मन में ख्याल आना और दूसरा होता है कि उसको इंप्लीमेंटेशन करना मैं जो कल इंडिया पाकिस्तान का मैच होगा चार मार दे चार मार दे ये कर दे वो कर दे दूसरी बात दूसरा देख लीजिए क्या लोगों के अंदर य बात आती है कि भाई क्या कहते बारिश ज्यादा हो रही है तो कम हो जाए धूप ज्यादा पड़ रही है तो कम हो जाए यह चा आती है कि नहीं ये कर्मियों के अंदर आते हु मैंने भक्तो के अंदर तो नहीं देखी अच्छा भक्त व्यक्ति बनेगा कब सुनिए मेरी बात इसलिए ठी मान लीजिए भक्तो के अंदर नहीं आती नर्मल व्यक्ति तो भक्त बनता है एक दिन थ सुन गीता में भी केवल भगवान कृष्ण ने भक्तों को अलाव किया उन्होंने बोला भक्त माम अभ जान केवल भक्त मैं आपकी बात मान लूंगा भाई साहब एक स्टेप वाइज अगर चले आप गीता को बीच में लाएंगे फिर मैं अपने शंकराचार्य वाले अर्थ दूंगा मैं आपसे पूछ रहा हूं आप एक साधारण व्यक्ति के पर्सपेक्टिव से बताइए जो अभी तक जिसने ईश्वर को स्वीकार नहीं किया है उसके अंदर ये चाह आती है कि नहीं कौन सी कि मैं भविष्य देख सकू मैं पास्ट में जा सकू बोला कर्मी अंदर आ
01:13:53:27 है साधारण लोगों के अंदर आती है इस चा का मतलब क्या है अतो मा सदम तम जति म मतम का अर्थ क्या है क्या लेते आप अ अगर कोई भविष्य देखना चाहता है ना तो उसे भविष्य में इंटरेस्ट नहीं है भविष्य में देखने में जो आनंद मिलेगा वो इसलिए देखना चाहता है मैं आपसे य पूछ रहा हूं भाई साहब आप जो है किसी भी बात का उत्तर सीधा सीधा देंगे ही नहीं शुरू से ते मैं ये पूछ रहा हूं क्या मनुष्य अंदर सब कुछ कर सकने वाला बनने की चाह है या नहीं है बिल्कुल है है तो आप उसे मोक्ष में क्या दे रहे हो वह सब कुछ कर सकने वाला बना आनंद मनुष्य की परम गति क्या है आपके हिसाब से मनुष्य की परम गति क्या हुई भगवान का अस्तित्व सिद्ध होता है अतो मा सद गम से आपके सिद्धांत नहीं वो वो मैं वही तो पूछ रहा हूं आप आप जो है जिस ईश्वर को पकड़ा रहे हो कि आप जो है अंत में जाकर के ईश्वर को देख लोगे आपको आनंद प्राप्त होगा ठीक है और मनुष्य बनना क्या चाहता था शुरू में कि मैं प्रकृति को कंट्रोल कर सकू कर सकने वाले को देख सकू यह नहीं था प्रकृति
01:15:09:09 को कंट्रोल कर सकू और यह तभी होगा जब हम समुद्र की एक बूंद है और बूंद जाकर के जब दोबारा समुद्र में मिल जाएगी और समुद्र बन जाएगी तभी ये सिद्धांत प्रतिपादित होगा वो शुरू में तो आप इस शलोक को नहीं मानते वाले शलोक को आप नहीं मानते अमा ये लोक क्या बोल रहा है और आप क्या समझाना चाह रहे हो आप मैं तो वो बता रहा जो करपात्री जी महाराज ने बताया है उन्होने पता नहीं क्या समझाया होगा लेकिन आपको समझाया गया क्या इसके बारे में मैं पूछ रहा आपको समझाया गया क्या इसके बारे में नहीं मुझे नहीं अच्छा सुन लीजिए तो मैं बता देता हूं ये जरूरी है ये आधार है भैया सु मा ज्योति गमाया और मृत मा मतम गमाया इसका अर्थ है कि पहला है असतो मा सद गम मुझे असत से सत की ओर ले चलो दूसरा है तमसो मा सद गम तमस ज्योति गम मुझे अंधकार से अंधकार से उजाले की तरफ अज्ञानता से ज्ञान की तरफ और तीसरा है क्या कहते मृत मतया मुझे मृत्यु से अमरता की ओर आप ले चलो यह मनुष्य की इनबिल्ट चा है जिसके साथ वो मैं पूरा कर लू
01:16:24:14 मैं पूरा कर लू अब क्या है जब इस चाह का हम निचोड़ देखते हैं ना और इसी एक इसी एक चाह के आधार पर हम ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध कर सकते हैं इसी एक चाह के आधार पर कि चाह है क्यों उसके अंदर ऐसी चाह क्यों हो रही है अब आप अब आप ये कहते हैं कि अब आप ये कहते हैं उसकी जो चा है इसका जब हम निचोड़ निकालेंगे कि ऐसा मेरा अस्तित्व हो जो कभी ना बदला जा सके ऐसा मेरा मुझे सब कुछ दुनिया का मालूम हो और और तीसरा क्या है मैं कभी मृत्यु हीन जीवन को पालू तो इसकी चाह का विषय क्या हुआ चाह इसकी ये है इनका निचोड़ अगर करेंगे कि म हर जीव दुनिया का हर जीव सब कुछ कर सकने वाला दुनिया को कंट्रोल करने वाला सारे नियमों को तोड़ देने वाला बनना चाहता है य आप अंत में जैसे बना चाहता था कंट्रोल तो वो व्यवहारिक व्यवहारिक धर्म की मर्यादा को तोड़ के बनना चाहता था ये इट चा भागवत में ये वाला शलोक भी है जिसम भगवान ने कहा है कि मैंने तुम्ह ऐसा ही पैदा किया है मगर तुम तुम अपने आप को मेरे हवाले कर दो मैंने तुमहे ऐसा ही बनाया है जो आपने शलोक बोला उसम कहीं भी नहीं लिखा की जीव ईश्वर बन सकता है
01:17:39:25 या बनना चाहिए नहीं मैं ये नहीं कह रहा मैं य क नहीं रहा मैं ये कह रहा हूं जीव के अंदर ईश्वर बनने की चा है कि नहीं बताइए आप के अंदर है जैसे रावण के तो य यहा पर फिर हमारी डिबेट आप समाप्त कर दीजिए ने कुछ कुछ निष्कर्ष में बता दूं पहला था कि वो दूध दही वाला वो क्लियर किया नहीं आपने वो आपने बोल दिया उसम आपको समझ नहीं आया और नहीं वो किसी को नहीं आएगा आप आप जो बोल रहे हैं बोलगा जो करता है कि भगवान ने गीता में क्लियर बोला माम एव अंश जीव भूते जीव सनातना सनातन मेरा अंश था है और रहेगा भाई साब भगवान ने तो यह भी बोला है भगवान ने कि जब जब धरती पर पाप होता है मैं अवतार लेता हूं कहते हो कि वो कुरान के जो ईश्वर है उसके समान है जो अवतार नहीं लेता भगवान ने त उपनिषद दूसरे अध्याय में पहले दूसरे अध्याय के पहले श्लोक में तत्र उपनिषद में ये भी कहा है कि भैया सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रह्म सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रम ईश्वर किसी भी प्रकार के नियम के नीचे नहीं है वह सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है तो आप उसको किसी नियम के नीचे कैसे ला देंगे कि वो शिव बनने के बाद वापस शिव नहीं बन सकता फिर आप फिर आप अपने ही लोगों
01:18:55:00 को जब शिव की शिव से कृष्ण की ओर लाना होगा तो उनको कुछ बोल शिव से जब उन्हे कृष्ण की ओर लाना होगा तो आप उनको बोलोगे कि नहीं शिव जी भगवान नहीं है कृष्ण भगवान है ओनली मगर जब इस्लामिक व्यक्ति को लाना होगा तो आप बोलोगे नहीं अल्लाह और कृष्ण एक है अच्छा दूसरी बात जो जो जो भ्रामक शिक्षा आपने वहां के लिए बनाई वो भ्रामक शिक्षा आप यहां हिंदुस्तान में भारत के लोगों को भी बांट रहे हैं मैं भगवान बन सकता हूं मैंने उसका उत्तर दिया था लेकिन आप मैं भगवान के मैं भगवान की स्थिति को प्राप्त कर सकता हूं भगवान में लय हो सकता हूं लय समुद्र की एक बूंद की तरह आपने सुनी नहीं लगता पूरी बात नहीं आपने स्टार्टिंग में बोला हा भगवान बन सकता तो भाई तो पूरी बात सुनोगे ना कि केवल एक ही लाइन एक ही लाइन सुनोगे पूरी बात सुनोगे मैंने बोला कि समुद्र की एक बूंद मेरा मकसद है जीवन का समुद्र में जाकर मिल जाना आपने तो अगर मैंने आखिर में समुद्र के दर्शन कर लिए तो मुझे मोक्ष क मिला परम स्वतंत्रता कहां मिली आखिर में मैं अधीन हूं ना आपने लय होने का उद्देश्य क्या बताया पूरी दुनिया को कंट्रोल करना यह कोई उद्देश होता है भक्तो का नहीं एकदम गलत तो तो यहां से आपका और मेरा वो अलग हो जाता है जब आप इस चीज को नहीं मानते हैं तो आप यहां पर आप आप जाके खुद
01:20:10:00 चिंतन मनन करिएगा क्या व्यक्ति के अंदर सारे प्राकृतिक नियमों को तोड़ने की चाह है कि नहीं है वो भक्त भक्त जो होते हैं वो भले ही उसको बाहर ना निकाले एजीक्यू ना करें उस चा का मगर भक्त के अंदर भी वो चाह है इसीलिए इसीलिए वो भगवान को ढूंढता है इसीलिए भगवान की भक्ति होती है क्योंकि उसके अंदर चाह है प्रकृति से प्राप्त सभी नियमों को तोड़ देने की रावण की चाह थी कि जो प्रकृति में माना जाने वाला जो ईश्वर है वो बन जाने की नहीं थोड़ा सा सुनेंगे वो हमारा परमार्थिक मिशन है यहां का जो इस दुनिया का जो मिशन है व्यवहारिक मिशन वो है भगवान की भक्ति करना परमार्थिक वो है कि भगवान की भक्ति करने से स्वतः प्राप्ति होगी कि भगवान में हम म ध्रुव महाराज की इच्छा थी पूरी सृष्टि उनके अंदर में रहे लेकिन जब भगवान के दर्शन हुए उन्होंने बोला मुझे नहीं चाहिए सब मुझे चाहिए आपकी सेवा ये भक्त ये व्यवहारिक है ये व्यवहारवाद है ये व्यवहारवाद है भैया तो आपका कहने का मतलब है कि भगवान भगवान ने जो जो पुराणों में लीला बताई है केवल वर के लिए बताई है वो उनका कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है क्यों नहीं है प्रतिष्ठित प्रमाण है भगवान ने जो भी लीलाएं की है वो भगवान ने कुछ ना कुछ समझाने के लिए की है मगर अंततः वो जो लीलाए है वो कोई ना
01:21:25:03 कोई प्रतीकात्मक व्याख्या कर रही है और ऐसा भी नहीं है कि वो जो लीलाए है वो कभी घटित नहीं हुई व घटित हुई प्रतीकात्मक व्याख्या दिखाने के लिए गठित हुई ला को गलत बता रहे हो उन्होने क्लियर बोला मुझे संसार में कुछ नहीं चाहि पहले तो ऐसी बात है कि आप जो जो संदर्भ दोगे ना ऐसे तो पूरा शास्त्र ना तो आप लेक बैठे हो आप दीजिए मैं तो मैं का संदर्भ मैं तो आपको भागवत पुराण का अभी वो लोक बता दू शलोक क्रमांक के साथ जय लिखा हुआ है भागवत का एक मात्र प्रति विषय ब्रह्म और जीव की एकता मैं अभी आपको शलोक क्रमांक दिखा दू मैं दिखा देता हूं रुक आप ईश्वर बनना चाहता सुनि इसलिए रावण व्यवहारिक दुनिया का ईश्वर बनना चाहता था भैया व्यवहारिक दुनिया का व्यवहार में रहते हुए कि मैं ये जो मनुष्य इनको कंट्रोल यही की यही कर लू वो उसका परमार्थिक मिशन नहीं था ये परमार्थिक मिशन है तीनों लोग का स्वामी बनना चाहता था आप गलत आपने कहा कि अल्लाह और कृष्ण एक है हमारे लिए मगर वो वो अल्लाह की बात नहीं करते हम वो अल्लाह की बात नहीं करते हम जो अल्लाह कुरान के द्वारा प्रतिपादित हो रहा है यानी कि आप जो है वहां पर झूठ बोलते हैं इसलिए नाम परव नहीं है अनेको नाम है परव नहीं है आप ही कह रहे हो ना आप ही तो कह रहे हो
01:22:40:22 अच्छा सुनो चलो ठीक है भगवान के अनेको नाम है इस बात कर लेते हैं न 15 2 पढ़ आप श्रीमद भागवत का भाष्य उसमें क्या लिख रहे हैं लिखने वाले वो प्रभुपाद जी ने लिखा है कि नहीं मुझे नहीं पता 3 152 3 1525 में वो लिख रहे हैं कि श्री कृष्ण नाम जप की तरह शिव दुर्गा काली के नाम नाम का जप करने वाले समझने वाले मूर्ख है अपराधी है तो भगवान का जब वो नाम हो सकता है सुनिए ये जो आप कह रहे हो ये पदम पुराण का श्लोक है य आपको मैं भेज भी दूंगा क्योंकि पुराण आप मुझे भेज दीजिएगा आप मुझे भेज दीजिएगा फिलहाल वहां पर रेफरेंस दिया नहीं गया है 15 2 भागवत बास्य में ये पद पुराण रेफरेंस नहीं दिया गया है नाम अपराध व पर बता रहे प्रभुपाद जी द नाम अपरा जब हमने पढ़े वहा पर हरि और हर में भेद समझना पाप है और वहां पर क्या हो रहा है हरि हर को एक समझना पाप है आप आप शलोक आपको लोक पता है ला कौन सा यही द नाम अपरा का दूसरा तीसरा है शायद दूसरा श्र विष्णु यही गुण नाम सल य वाला शलोक शलोक का अगर देखेंगे ना रूप गोस्वामी इसकी व्याख्या कर तो उसम भी
01:23:56:03 उसका व्याख्या पूरा पढ़ेंगे आपने थो गोस्वामी महाराज ने रामचरित मानस को जैसे ही पहला पन्ना ओपन होता है तो गणपति की पूजा की है आपने की है क्या नहीं सुनिए आपने किया क्या हम ऐसा मना ही नहीं करते कि उनकी पूजा मत करो अरे पूजा मत करो नहीं उन्होंने माना तुम ब्रह्म हो उन्होंने कई जगह गोस्वामी महाराज के मैं आपको वो दे दूंगा वो पांचों को ब्रह्म मानते हैं राम रूप में ब्रह्म की पूजा करते हैं पाच ब्रम मानते हैं तुलसीदास जी कैसी बातें कर रहे हैं सुनि सुनि मेरी बात शायद य ऑफ होने वाला है अच्छा चलिए एक बात एक [संगीत]
01:24:38:10 और हां बताइए जी बोलिए बो एक बात जब राम गोस्वामी जी की बात आ गई तो मैं आपको बता दूं रामो विग्रहवां धर्म 37 वाल्मीकि रामायण अब राम धर्म का रूप है एक मिनट फिनिश कर लू एक फिनिश कर लू राम धर्म का रूप है अब राम जी बोल रहे हैं कि शिवजी भगवान है प पुराण में बोल रहे हैं सब जगह बोल रहे हैं शिवजी भगवान है शिवजी परम ब्रम है और सुनिए तो उनकी पूजा भी कर रहे हैं मगर उनका भी कर रहे हैं मगर आप कह रहे हो कि नहीं साहब शिवजी का जाप करने वाला दुर्गा काली का जाप करने वाला जो है मूर्ख है अपराधी है नहीं सुनिए पहली बात आप गलत समझ रहे हो जब इकन के हेड क्वार्टर मायापुर में जाओगे ना तो आपको शिव जीी की और विष्णु की आधी आधी मूर्ति मिलेगी दोनों में समाहित आप समझ नहीं रहे हो सिद्धांत तो ये तो ये जो प्रचार हो रहा है कन की तरफ से फिर वो भ्रामक होगा फिर वो गलत लोग कर रहे होंगे बिल्कुल भ्रामक नहीं है आप जब आपको विनाश और स्वांश का अंतर ही नहीं पता तो अब मैं क्या समझाऊ आपको आपको ब तो भैया आपको भी तो नहीं पता जब मूल तत्व आपको अतो सगम त्र आपने इस श्लोक को जाना ही नहीं तो आपने धर्म की बात कहां से की फिर बताओ आपने सुनिए पूरे लोक में एक भी जगह ऐसा
01:25:53:12 नहीं लि जो आपने श्लोक पढ़ा पूरे श्लोक मेंसा क नहीं लिखा कि जो है हम ईश्वर बन सकते हैं लेकिन आप ये क कह रहा हू मैंने कहा ही नहीं है आप गलत बात बोल रहे हैं मैंने एक कब कहा कि श्लोक का ये अर्थ है आपने उसी आपको मैं ईश्वर ईश्वर और जीव की एकता वाला है ना वो मैं आपको बता दूं वो भागवत में भागवत से आपको दे दूंगा कि कि भागवत का एक मात्र प्रतिपाद्य विषय है जीव और ब्रह्म की एकता सुनिए वेदों से लेके सभी अब आप ये बता दीजिए सुनिए सु वो अधूरे ही र जाएंगे चेतन महाप्रभु की बात कर लीजिए चेतन महाप्रभु जी किसको मानते थे गुरु एक सेकंड एक सेकंड एक सेकंड वेद से लेकर पुराण तक सब में द्वैत और अद्वैत की बात हुई है सुनि पूरा सुनिए ठीक है इसलिए चैतन्य महाप्रभु का जो सिद्धांत जैसे आपने पहले बोला अचिंत भदा भेद है जो जहां पर भी एक की बात होती है ना जीव और चैतन्य महाप्रभु का सिद्धांत अचिंत भदा भेद है सिद्ध करिए पहले सुनिए मेरी बात वही मैं बता रहा हूं ये किस बेस प उन्होंने कहा इस बेस प कहा नहीं नहीं उन्होने ये कहा ये तो सिद्ध करिए तब तो हम आगे बात करें सुनि आप चेतन भागवत नहीं मानेंगे आप चेतन चरिता आप लोग खुद कहते हैं चैतन्य महाप्रभु ने सिर्फ आठ श्लोक दिए हैं क्या उसम य है चिंत वेदा वेद
01:27:08:13 अरे मेरी बात सुनिए बताइए क्या उन आठ श्लोकों में अचत वेदा वेद है आप चेतन चरितामृथम क्या इसका कोई प्रमाण है कि चैतन्य चैतन्य महाप्रभु ने ये जो आप ही आप ही ने कहा वो जो वीडियो है ना इसकन अध्यक्ष के इंटरव्यू वाला वो आप देख लीजिएगा उसमें उन्होंने खुद कहा है कि चैतन्य महाप्रभु जी के केवल हमें आठ श्लोक वो है प्राप्त केवल आठ श्लोक क्या उन आठ श्लोकों में अचिंत भदा भेद प्राप्त है हमें सुनिए चैत चैन चैतन्य महाप्रभु का पूरा वर्णन केवल आठ श्लोक में नहीं होता चेतन चता प्रमाण शिष्य ने लिख है अगर आप ऐसे करेंगे तो फिर य भी मान नहीं होगा शंकराचार्य के कौन से असली ग्रंथ है या
01:28:01:01 नहीं सनातन धर्म के आचार्य कोई झूठे नहीं है जो आप य मानेंगे य नहीं मानेंगे आपकी बात जहा मैच होती है आप मान लेते हो जहा मैच नहीं होती उसे गलत बोलते नहीं डिग्री नहीं कर रहा एक पॉइंट को क्लियर करता चल रहा यानी य मानना गलत है कि हमें केवल आठ ही शलोक प्राप्त है उनकी अन्य चीज भी प्राप्त है और क्या प्राप्त है तो ये लाइन उन्होने गलत कही कि केवल आठ चीज आठ लोक प्राप्त है मुझे मुझे ये बताइए चैतन्य प्राप्त है नहीं छट गोस्वामी ने ही बताया आप पता नहीं क्यों नहीं क्लियर करते मैं पूछ रहा हूं ये मानना बंद कर द कि आठ लोक प्राप्त है या नहीं हां या ना उत्तर दीजिए इसमें आप एक्स्ट्रा लैंग्वेज क्यों मिला रहे हैं आठ श्लोक भी प्राप्त है उसके अतिरिक्त भी जो और ग्रंथ है वो भी प्राप्त है वो भी उनके द्वारा लिखे थे वो सब वो छठ गोस्वामी उनके शिष्य द्वारा शिष्यों द्वारा लिखे है अब ठीक है मतलब कि उनके लिखे हुए आठ ही श्लोक प्राप्त है मगर उनकी कही हुई वाणी
01:29:16:04 को सट गो सावियो ने लिखा हां हां इस तरह से प्राप्त है ठीक है जैसे भगवान कृष्ण की गीता को गणेश जी ने लिखा वेदव्यास ने बोला अब आप ये ये मत बोल ठीक है वो मान लिया मान लिया आपकी वो बात मैंने मान ली कि ये कहना गलत होगा इसपे हम बाद में इसपे हम बाद में वो करेंगे अभी हम एक चीज ले लेते हैं यह कहना गलत होगा कि चैतन्य महाप्रभु के द्वारा केवल आठ श्लोक प्राप्त है उनके शिष्य के द्वारा उनके प्रमाणिक शिष्यों के द्वारा हमें और भी कई चीजें प्राप्त है बिल्कुल ठीक है ठीक है ठीक है जो चैतन्य महाप्रभु की सोच थी वो हमें प्राप्त हो गई अब मुझे आप ये बता दीजिए कि चैतन्य महाप्रभु गुरु किसको मानते थे उनके ईश्वर पूरी गुरु थे अच्छा क्या उन्होंने कभी शंकराचार्य के मत को स्वीकार किया शंकराचार्य जी के भाष्य को स्वीकार किया कभी किसने चैतन्य महाप्रभु ने आठ श्लोक में और छट गोस्वामी द्वारा श्लोक में कहीं भी ऐसा वर्णन नहीं है कि उनके मत को स्वीकार किया अच्छा तो अब मैं आपको चैतन्य चरितामृथम आपके यहां से पब्लिश है ना वो चैतन्य चरितामृथम आपको प्रसंग
01:30:31:04 दिखा दूंगा जहां पर वो साफ साफ कह रहे हैं कि भगवान कृष्ण को मैं श्रीधर स्वामी के द्वारा रचित टीके से जानता हूं श्रीधर स्वामी तत्कालीन शंकराचार्य वो साफसाफ कह रहे हैं कि भगवान को मैं उनके द्वारा जानता हूं उनको मैं जगत गुरु समझता हूं और कब और क्यों कह रहे ये भी सुन लीजिए कब और क्यों कह रहे हैं जब वल्लभाचार्य जी उनके पास पहुंचे थे अपना भाष्य दिखाने के लिए ये देखो मैंने भी भाष्य लिखा है तो उन्होंने ये कहा था कि श्रीधर स्वामी के से भिन्न जो भी भाष्य लिखने की प्रयास करता है वो मेरे लिए व्या के समान है प्रोस्टिट्यूट के समान है तो यहां पर उन्होंने ये भी जाहिर कर दिया कि सीध स्वामी से भिन्न कोई भी टीका मत लिख है वो पर्याप्त है आपको समझाने के लिए देख अब आपका भेद बुद्धि मैं दिखाता हूं आपने चेतन चम को उस श्लोक को तो प्रमाणिक मान लिया मैंने आपकी बात को रख लिया है तब मैं आगे बढ़ा हूं मैंने आपकी बात को रख लिया दूसरी बात ये मैं आपके प्रमाण आपके सामने रखूंगा आप चैतन्य चमत के पूरे सिद्धांत कोख नहीं रहे दिख नहीं रहे आप आप दिख नहीं रहे नहीं मेरा ऑन है मैं कह रहा हूं आप चेतन ताम के आपकी स्क्रीन ऑफ हो रही है आपकी ऑफ नहीं है ब्लैक हो गया सब अच्छा सुनिए च अच्छा कोई कमेंट करके बता दीजिए
01:31:46:18 क्या ये भाई साहब दिख रहे हैं सामने वाले कौशल जी कुशल जी कोई कमेंट करके बताएगा स्क्रीन स्क्रीन हैंग हो गई है आपकी भी रुक गई है मेरी भी रुक गई हां कोई कारण होगा दोनों में से कोई दिख रहा है नहीं दिख रहा ये कमेंट कीजिए दोनों में से कोई दिख रहा है कि नहीं दिख रहा है ये कमेंट करके बता दीजिए दुनिया विद्यार्थी जी कह रहे हैं नहीं दिख रहे अच्छा सुनिए मेरी बात मैं दिख रहा हूं मैं दिख रहा हूं रंजीत कुमार जी कह रहे हैं नहीं दिख रहे नवीन शर्मा जी कह रहे हैं आप दिख रहे हैं मैं दिख रहा हूं तो क्या करना चाहिए इसका अब देख लीजिए जैसा आपको उचित लगे हमें तो हमारी चीजें काफी सारी प्राप्त हो गई है
01:32:40:08 अ हां चलिए बात कर सकते हैं कोई नहीं आपको देख तो लिया ही है लोगों ने हा तो मैं ये कह रहा मैं ये कह रहा था कि आपने कहा कि वो कभी भी उन्होंने शंकराचार्य को स्वीकार नहीं किया मगर आपकी जो चेतन तामृत है उसी में लिखा हुआ है कि उन्होंने शंकराचार्य के मत को स्वीकार किया नहीं नहीं ये नहीं लिखा बिल्कुल बिल्कुल देखि आप अलग से मत जोड़िए उसम ये नहीं लिखा उसमें लिखा है कि उनकी उनका जो व्याख्या हुई है उनके द्वारा मैंने कृष्ण को माना उनकी मतलब एक्सेप्ट किया मैं इसको नहीं नहीं उनके द्वारा जानता हूं जानता हूं जानने का मतलब जो कृष्ण के बारे में ज्ञान है जो चीजें हैं वो उन्होंने उनका स्वीकार किया है वही सुनी है मेरी बात पूरी हा अच्छा अब एक बात और बता दूं इस प्रश्न के उत्तर में आपकी ऑफिशियल वेबसाइट पर लिखा है कि वो जो है वो वैष्णव थे अंदर से मगर बाहर से दिखाते थे कि वो शंकर शंकर मत को मानने वाले हैं मैं हा मैं इसी लाइन प आने वाला था अभी देखिए आप आप आप देखिए जब आप इस लाइन प आएंगे तो पूर्व में ही आपकी बात को रख दूं अभी थोड़ी देर पहले आपने कैसे नाक फुलाई थी कि आप जब बोल रहे थे कि क्या सारे सट गोस्वामी वगैरह अपमा है झूठ बोलते हैं सारे आचार्य अब आप उन परे क्या तोत मत लगा रहे हैं कि वो अंदर से वैष्णव
01:33:55:13 वो थे मगर वो दिखाते थे कि मैं शंकर मत को मानने वाला हूं नहीं छठ गोस्वामी पहली बात ये नहीं आ हा ऐसे ही करते हैं ऐसे ही होता है अभी थोड़ी देर पहले देखिए आपने अपने आचार्यों के लिए क्या कहा तो मैंने वहां प उनका अपमान नहीं किया अब आप वहां प कह रहे हां मैं वही बात कहने वाला हूं यानी कि मैंने अपमान सुनिए आप आप क्यों बोल रहे हैं मैंने अपमान कब किया मैंने क्या बोला आपने अभी आपने अभी अच्छा चलिए बताइए आप क्या कहने वाले हैं ठीक है बताइए चैतन्य चमत का आपने केवल एक श्लोक क्यों उठाया पूरा अगर पढ़ेंगे तो पूरा सिद्धांत को मानेंगे ना पूरे सिद्धांत क्लियर लिखा है अचत वेद का सिद्धांत उनका अचिंत वेदा भद का अर्थ आप जो समझते हैं वो मैं नहीं समझता हूं अचिंत वेदा भद का मतलब यह है कि ईश्वर और जीव अंत में एक हो जाने हैं मगर अभी आपको यह नहीं मानना है कि आप और वो एक है क्योंकि अगर आप एक मानेंगे तो आप भक्ति नहीं कर पाएंगे इसके बारे में चिंता मत करिए अचिंत हैय विषय अचिंत भदा भेद का अर्थ हो मैं जानता हूं आप आप दूसरा जान रहे हो कि है भी और नहीं भी आप मेरा विषय सुनेंगे आप अच भदा भेद का मतलब है कि हम ईश्वर की कुछ चीजों में समान है जैसे कि हम हमारी आत्मा भी सनातन वो भी सनातन हम भी चेतन यही तो मैं कह रहा हूं इसीलिए मैं कह रहा हूं क्या वो शंकराचार्य को मानते थे
01:35:10:15 या नहीं कौन वो उन्होंने कभी शंकराचार्य जी के बारे में जिक्र नहीं है चेतन चत में अगर है तो आप ये श्रीधर स्वामी कौन थे श्री श्रीधर श्रीधर स्वामी की जो भाष्य है वो स्वीकार किया था लेकिन किस वजह से उनको उन्होंने जगतगुरु कहा है पूरी दुनिया के गुरु आप मानते हैं शंकराचार्य जगतगुरु होते हैं मैं पूरी चेतन चरितामृथम के उस से जानता हूं मैं भागवत को श्रीधर स्वामी के उस से जानता हूं और आप स्वामी को पढ़ेंगे जाकर के तो वो तो पूरा अद्वैत दर्शन है अरे आप मुझे ये बताइए जब चैतन्यम में आप ये पढ़ रहे हैं तो चैतन्य चरम का पूरा भाष्य पढ़ेंगे ना वो मानेंगे ना फिर आप तो बताइए क्या है बताए के केवल एक कांटेस्ट थोड़ी उठाएंगे उसमें से नहीं तो एक कांटेस्ट का अर्थ तो बताइए कि वो अगर कंट्रा टिंग लाइन है तो क्यों है अगर वो मधुवा चार्य ने भी मधवा चार्य जी ने भी भाष्य लिखा था तो उन्होंने अपनी गुरु परंपरा के भाष्य को क्यों नहीं लिया उन्होंने शंकर गुरु परंपरा के भाष्य को क्यों लिया जो कि आपसे बिल्कुल अपोजिट है क्यों लिया मचार जी का भाष्य काफी नहीं था क्या भागवत पर
01:36:25:24 सुनिए अगर अपोजिट होते तो चेतन चरता में क्यों उनका नाम होता आप खुद सोचिए जरा अरे यही से तो देखिए जो झूठ होता है ना उसको उसको झूठ को झूठ को उसको याद रखना पड़ता है और कई बार ऐसा होता है कि हम सही करते करते करते करते भी गलती कर बैठते हैं ये झूठ की खासियत होती है तो आप जब चैतन्य चरितामृथम खुद ही अपना ही तोड़ लिख रखा है जैसे की एक बात बताता हूं आपको सुनि भगवत गीता यथारूप में दूसरे अध्याय के 62 श्लोक में लिखा हुआ है जो शिवजी है वो अपनी इंद्रियों पर कंट्रोल नहीं कर सकते इंद्रियों के अधीन है और भागवत के भाष्य में लिखा हुआ स्कोन के द्वारा प्रकाशित पुस्तक में ही शिवजी को उनके पार्वती के साथ देख करके इंद्रियों के अधीन समझने वाले मूर्ख है तो ये क्या हु मुझे बताइए आप लोग हमेशा आधा अधूरा क्यों मानते हो अभी आधा अधूरा आप मान रहे भया आप चीजों को सही कर दीजिए वो शंकराचार्य को स्वीकार करते हैं कि नहीं करते हैं की वीडियो देख रहा था उन्होंने भी बोला कि पदम पुराण में कुछ श्लोक अलग से ऐड कर दिए हैं वो भी ऐसे बोल रहे थे आप किसकी अभी मैं वीडियो देख रहा था कल निश्चलानंद स्वरूप महाराज जी की तो उन्होंने भी बोला कि
01:37:41:13 वो जगतगुरु शंकराचार्य ने हां जी तोन उन्होंने बोला कि पदम पुराण में कुछ श्लोक ऐड कर दिए गए आप चेतन चरम की बोल रहे हो कि ये श्लोक कर दिया बाकी जो है हम नहीं मानेंगे मानो तोरा मानो ना शरार हम आपके प्रमाणों को आपके सामने रख रहे हैं आपके प्रमाण जो बातें आप बोल देखिए धर्म अधर्म की क्या होती है अच्छा सुनि अधर्म की जो लक्षण होते हैं वो ये होते हैं कि जिन सिद्धांतों को हम स्वयं स्वीकार करते हैं ना हम उन्ही सिद्धांतों को कुछ ही क्षणों बाद छोड़ देते हैं अभी आप अभी आप छोड़ेंगे अब मुझे बताइए श आदि शंकराचार्य जी का जो अवतार हु क्यों हुआ था आप पदम पुराण के इस श्लोक को नहीं मानेंगे मुझे पता है मैं नहीं मानूंगा क्योंकि आपके रामानुजाचार्य संप्रदाय के जिसको आप प्रमाणिक बोल रहे हैं वो कह रहे कि इसको प्रमाणिक मानने वाला लोक को मूर्ख है यानी कि आपके अनुसार आप मूर्ख हो या तो आप इस सिद्धांत को छोड़ दोगे रामानुजाचार्य परंपरा प्रमाणिक है आपको खोल के दिखा देता हूं मैं दिख रहा हूं कि नहीं आपको अभी आपरा आप दिख रहे हो अभी आप मैं दिख रहा हूं मैं एक मिनट आपको दिखाता
01:38:50:03 हूं हा तब तक आप बोलते रहिए मैं पुस्तक दिखा देता हूं देखिए य ये बिल्कुल भी स्वीकार नहीं होगा आप पदम पुराण को भी बता दो कि उसमें भी गलत लिखा है तो यानी कि आपके अनुसार रामन चार संप्रदाय प्रमाणिक नहीं है देखो यही मैं कह रहा था ना कि अपने ही सिद्धांत को खुद ही छोड़ेगा व्यक्ति ये अधर्म के लक्षण होते हैं छोड़ हमारा हमारा सिद्धांत गडिया सिद्धांत है ना तो रामानुजाचार्य परंपरा को प्रमाणिक मानते हैं कि नहीं मानते हैं यह बताइए बिल्कुल मानते हैं तो राम जाचार्य के जो कह रहे वो प्रमाणिक चीज नहीं है हम प्रमाणिक इसलिए मानते हैं क्योंकि श्री संप्रदाय का वर्णन पदम पुराण में है इसलिए मानते हैं हम अरे तो जहां से मिलने वाली शिक्षा भ्रामक होगी या सही होगी ये बताइए श्री संप्रदाय में जो भाई साहब आप कभी भी जब कट टू कट की बात आती है आप बिल्कुल उसको टालने लगते हो मैं पूछ रहा हूं यहां से मिलने वाली शिक्षा श्री संप्रदाय से मिलने वाली शिक्षा भ्रामक होगी या फिर सही होगी प्रमाणिक
01:40:05:04 होगी मैं वही बता रहा हूं श्री संप्रदाय काही बता रहा हूं श्री संप्रदाय में आदि शंकर जा को अवतार जो माना वो इसी विषय में माना जो पदम पुराण में बताया गया है इस विषय में जो क्या कहते हैं कि वो भ्रम फैलाने आए थे जिसे कि लोग वापस आ पाए हां बिल्कुल उसपे उस परे हम आ जाएंगे अभी आप मुझे बता दीजिए य जो पुराण दिग दर्शन है ये आपके श्री संप्रदाय है बहुत ही महान आचार इनके तो मैं चरणों की वंदना करू सुनि भाई आप मुझे बता दीजिए क्या ये झूठे हैं अभी आप नाक फुला के बोल रहे थे ना सर गोस्वामी हमारे सारे आचार्य अच्छा ये बताइए वैष्णव तो ये व वैष्णव चार्य झूठे है क्या नहीं मुझे ये बताइए जब मैं आपसे भाई साब पूछ रहा हूं अभी मैं आपको श्लोक दिखा देता हूं अरे मैं माया आप अपनी तब तक बात बोलिए मैं यह कह रहा हूं श्रुति ग्रंथ में और कृति ग्रंथ में जब मतभेद होगा तो अब किसको आप स्वीकार करेंगे श्रुति ग्रंथ को स्वीकार करें कृति ग्रंथ को तो ये जो ये जो बात बोल रहे हैं ये तो बात ये बात जो ये बोल रहे हैं ये तो उसी के बारे में बोल रहे हैं ना कि वो चीज मान्य नहीं है प्रक्षिप्त है और इन्होने इन्होंने ऐसा नहीं है कि अपने मन से बोल दिया इन्होने प्रमाण के साथ बोला है आप इसका इसका अर्थ ये है ना इसका अर्थ ये है कि आप ये मानते हैं कि आचार्य झूठ बोल सकते हैं
01:41:20:14 नहीं मैं य मानता हूं कि कृति ग्रंथ में और शति ग प्रमाणिक परंपरा के आचार्य भी झूठ बोल सकते हैं कि नहीं ये बताइए अरेब यह बताइए आप शास्त्र को पदम पुराण को झूठ बोल रहे हैं आप क्लियर पदम पुराण में मिक्सिंग की गई है उस पूरे के पूरे शास्त्र को थोड़ी झूठ बोल रहा हूं उसम एक लोक है जो मिलावट है जो हमारे प्रमाणिक आचार्य प्रमाण के साथ प्रस्तुत कर रहे दिखाता आपको आपके सिद्धांत को वो प्रत्यक्ष नहीं करता इसलिए व आपको झूठ लग रहा अरे तो आपसे प्रमाणिक कह रहे हैं वो कह रहे हैं ना उसे आप मेरे अनुसार प्रमाणिक नहीं है मेरे अनुसार तो है सम्माननीय प्रमाणिक भी है मगर वो आपके अनुसार है मैं आपका आपके द्वारा दिया जाने वाला सिद्धांत आपको बोल रहा हूं ये प्रमाणिक आचार्य है कि नहीं है बिल्कुल है क्यों नहीं है है तो फिर फिर है तो फिर इनसे द्वारा प्राप्त होने वाली शिक्षा भ्रामक है सुनिए सुनिए पदम पुराण में ही श्री संप्रदाय के बारे में बताया गया है इसलिए प्रमाण है उसी में आदि शंकराचार्य वाले के बताया है वो भी प्रमाण है आप एक शंकराचार्य के लिए नहीं वो कालिको के लिए आया था दक्ष के यज्ञ में माता सती ने जब आत्म द कर लिया तब पहले इन्होंने शिव गणों ने उनको श्राप दिया उनकी मुक्ति के लिए वैष्णव आगम शास्त्र लिखे गए जिसमें से एक ब्राह्मण
01:42:36:00 आगम शास्त्र है ब्रह्म समिता और जो देवी भागवत पुराण है उसमें साफ मेंशन है कि जो आगम शास्त्र है ये कहीं कहीं प अवद भी हो जाते हैं तो इनके उतने ही अंश को स्वीकारा जाए जो वैदिक है सुनिए सुनिए अगर आप पूर्णतया यानी कि इनके सत्यापन के लिए हमें पीछे के ग्रंथों को देखना पड़ेगा पर रिलाई नहीं कर सकते पूरी तरह से पीछे पीछे के अगर आप पदम पुराण को बेस नहीं मानेंगे तो उसके बाद के बात को शास्त्र भैया देखिए जो सनातन धर्म है ना वो ना तो केवल ईश्वर पर आधारित है ना ही वो केवल गुरु गोविंद पर आधारित है ना ही वो केवल ग्रंथ पर आधारित है ना ही वो केवल क्या कहते गुरु पर आधारित है जब गुरु गोविंद और ग्रंथ इन तीनों के परस्पर उससे संगम से शिक्षा हमें प्राप्त होती है वो होती है अगर गोविंद हमारा बाधित हो जाएगा शास्त्र कहेंगे गुरु कहेंगे तो हम नहीं मान पाएंगे अगर श हमारा हो जाएगा और कभी भी कृति ग्रंथ का प्रमाण देखना हो तो श्रुति से मैच करना होता है कभी श्रुति प्रमाण का ग्रंथ वो शति है ही नहीं पहली बात वो शति है कहां से बताइए क्या शति शास्त्र है वो स्मृति स्मति स्मति है तो आप उसको शति क्यों बोल रहे वही अगर कृति गं का प्रमाण
01:43:51:02 स्मृति का प्राण देखना हो तो श्रुति से यह सिद्धांत कहता है कहां लिखा है जितने भी वैष्णव आचार सबका सिद्धांत यही है मैं आपको पूछ रहा हूं लिखा कहां है क्या लिखा है कहीं क्या चीज य सिद्धांत जो आप बोल रहे हैं सुति से देखना चाहिए भाई हम तो सुनिए बोला गुरु का और ये मैच होना चाहिए तब होगा कहां पर लिखा है गुरु के आवश्यक वो मैच होने चाहिए बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल पुराण का मैं श्लोक क्रमांक दे दे रहा हूं हा दे दीजिए गुरु गुरु जो है सभी संश का वेदन करते हैं प्रमाण युक्ति और तर्क से तो प्रमाण क्या हुआ नहीं नहीं प्रमाण से प्रमाण शास्त्र हु है ना हा शास्त्र हा गुरु गुरु गुरु प्रमाण नहीं है गुरु श तो यानी कि आप आप जो है जब गुरु कहेगा कि बेटा ये जो श्लोक है प्रमाणिक नहीं है छाप दिया गया है तो आप गुरु को नहीं मानेंगे आप उसको मानेंगे देखिए आप आपके
01:44:52:09 सुनिए पूरे गडिया आचार्य में वृंदावन में किसी ने भी ऐसा नहीं आपके अनुसार ये झूठे है ना ये जो मधवा चार्य जी है झूठे हैं पदम पुराण में किसी भी वैष्णव आचार्य ने ऐसा देखो आप आप सत्य को कभी जिस चीज को आप अपने आचरण एक्शन स्पीक्स लाउडर देन वॉइस आप अपने आचरण से जिस तथ्य को खपत करते हैं जब मैं उसे क्लियर कट स्वीकार करने को कहता हूं तो आप बचते हैं यही उन्होंने भी किया था हमेशा आप जो है सत्य से के बगल से निकलते हैं अरे आप कर हमारा समाज तर रहेगा अभी तक आपने तीन शास्त्र ऐसे बोल दिया जो बोल दिया आगम है मिश्रित है अरे ऐसे थोड़ी होता है आप हर किसी को आप तो आर समाज हो रहे होरे आ आ समाज नहीं हो रहा हं आप हो रहे गैर सनातनी आप हो रहे गैर सनातनी देख गैर सनातनी ऐसे हो रहे क्योंकि आप गुरु परंपरा को नहीं मान रहे गुरु जो कह रहा है गुरु आपके हिसाब से प्रमाणिक गुरु जो कह रहा है बेटा ये लोक जो है प्रमाणिक नहीं है इसको प्रमाणिक समझने वाले आप कह रहे हो कि नहीं साहब गुरु की बात नहीं मानेंगे पदम पुराण तो आपको जो पदम पुराण प्राप्त कैसे हुआ ये बताइए कैसे प्राप्त होता है आपको आपको आपको कहां से होते है सारे सा मेरे को तो गुरु गुरु परंपरा से मिलता है भाई तो मेरे तो अगर गुरु कहेगा
01:46:07:14 कि गीता प्रेस के गोरखपुर में अगर फलाना श्लोक प्रक्षिप्त है तो मैं उसको प्रक्षिप्त मानूंगा ये जो आपके पास बुक है ये कहीं से प्रिंट होके आई है ना हां तो फिर तो इसका मतलब ये है कि आपके यहां पर भी जो भी ग्रंथावली है वो मानी जा सकती है व संदेहास्पद है नहीं मेरा कहने का मतलब है हमारे गुरु ने प्रमाणिक माना सारे शास्त्रों को तो जब आपके द्वारा आपके गुरु ने इनको प्रमाणिक कहा है तो इनकी बात आप मानेंगे की नहीं मानेंगे कल को अगर वेदों में भी आपके सिद्धांत के अकॉर्डिंग नहीं मिलेगा देखिए हाइपोथेटिकल बात मत करिए नहीं मिलेगा टिकल नहीं मैंने बार बोली टिकल बात कर रहे अरे आप जो बोल रहे हो वही बता रहा आपने पदम पुराण को गलत बोल दिया आप जो पुराण को गलत नहीं बोला है उस श्लोक को गलत बोला है और उसके बाद भी अगर उसे आप लेंगे तो वो कापालिक के ऊपर फिर बैठता है अच्छा तो ये बताइए वो श्लोक किसने ऐड किया होगा कौन करेगा वैश्णवा चार्य अरे कोई भी ऐड कर दे जिसका मन है वो ऐड कर दे क्या बात है इसीलिए तो गुरु परंपरा होती है कि परंपरा प्राप्त जो गुरु गण है वो हमको बताएंगे कि कौन सा श्लोक सही है कौन सा नहीं है आज वेद हमें जो प्राप्त है कैसे प्राप्त है परंपरा से अब हम गुरुओं को जब गुरु ये कहेगा कि नहीं भाई ये श्लोक जो है तो हम कहते नहीं हम तुम्ह नहीं मानते हम तो उसको मानते
01:47:22:19 हैं जो किताब है अरे मैं अपने गुरु परंपरा बता रहा हूं ना वैष्णव आचार आपकी परंपरा ही तो कह रही है ये भी आपकी है किसी ने नहीं नकारा केवल आपसे आपसे मैं पूछ रहा हूं ये भी तो किसी ने नहीं नकारा की बात तो फिर कर लेंगे फिलहाल मैं पूछ रहा हूं आपके अनुसार य प्रमाणिक है कि नहीं पूरा पदम प्राण प्रमाणिक है नहीं नहीं ये यह प्रमाणिक है कि नहीं ये क्या जो माधवाचार्य जी है अभी मैंने आपके स गो स्वामियों बात आ रही थी मैं भी कह दू कि भाई उनके द्वारा लिखित जो आठ श्लोक है आप कह रहे हो वो है और सट गोस्वामी ने हो सकता है अपने मन से मिला दिया झूठ कह दिया मैंने तो ऐसा नहीं कहा मैंने तो आपकी बात रखी सट गो स्वामियों के सम्मान को रखा अब आप अपने ही द्वारा मैं ये नहीं क रहा शंकराचार्य जी को आप प्रमाणिक मानिए आप अपने ही द्वारा स्वीकार गए प्रमाणिक आचार्य को कह र नहीं उन्होने झूठ लिखा आपने चेतन ताम का अपने श्लोक माना केवल उसके अलावा अचिंत भदा भेद को नहीं माना अचिंत भदा भेद का अर्थ आप ले रहे हैं वो अलग है मेरे हिसाब से व मेरे हिसाब से है कि भगवान और जीव में कोई भेद नहीं है मगर इस अभेद के बारे में सोचना नहीं है अभेद स्थिति है व प्राप्त होगी य आपको दत का निर्वाह करना है तब अवत की स्थिति प्राप्त होगी जैसे की जैसे की सुनिए जैसे की पृथ्वी जैसे की सुनिए तो एक अच्छा त अच्छा
01:48:37:19 लगेगा आपको सुन लीजिए एक जैसे की पृथ्वी जो है वो मूल जो वस्तुत है वो गोल है मगर जो पृथ्वी के साथ व्यवहार करते हैं वो चपटी होने का व्यवहार करते हैं इधर चले जाओ उधर चले जाओ पूर्व दि में भाषा बो रहे हम तो कभी चपटी नहीं मानते उसे अरे भाई आपका व्यवहार तो चपटे अनुसार है ना आप क्या गोल प मोटरसाइकिल चलाते हैं नहीं सुनिए हमारे आप गोलाई में मोटरसाइकिल चलाते हैं क्या ईस्ट वेस्ट सुनिए व्यवहार आप समझ ही नहीं रहे मैं क्या बोल रहा हूं हम लोग व्यवहार सुनिए व्यवहार हम लोग क्या करते हैं पृथ्वी के साथ हम लोग व्यवहार करते हैं चपटी होने वाला अरे व्यवहार व्यवहार वो करता है ना जो अज्ञानी हो जिसे अरे भाई साहब आप ईस्ट वेस्ट साउथ साउथ नॉर्थ ये सब बोलते हैं आदमी को कि नहीं आदमी रास्ता पूछता है उसको उंगली दिखाते है कि नहीं उधर चले जाओ अरे यह बताओ जिसको ज्ञान हो चुका है कि यह चपटी नहीं है वो क्यों व्यवहार करेगा वैसा तो इसका मतलब आप व्यवहार गोल का करते हैं पृथ्वी के साथ और क्या गोल है चलिए ठीक ये बात भी नोट कर लो आप व्यवहार गोल का करते हो यानी कि आप जब उंगली दिखा रहे हैं कि ईस्ट में है तो आपकी उंगली मालूम है गोल के आधार प आपकी उंगली अंतरिक्ष में जा रही है अगर आप वर चप
01:49:52:07 आपसे मैं पूछ रहा हूं आपने कभी उंगली दिखाई कि उधर चले जाओ किसको किसी को मार दिखाया कि भाई वो उधर है सुनिए ये ये तो आपसे मैं पूछ मैं आपसे पूछ रहा हूं आपने आज तक किसी को रास्ता दिखाया कि उधर चले जाओ अभी अभी अभी आपकी बात कट जाएगी दो मिनट में ही आप मुझे ये बताइए जब साइंटिस्ट ने व समुद्र के किनारे था व जब तक उसे अज्ञान था लेकिन समुद्र किनारे पर जाकर उसने क्या बोला यह तो धरती गोल है उसे ज्ञान हुआ हु अरे मैं वही तो कह रहा हूं आपसे धरती गोल है मगर वो तब आपको व जो आपके व्यवहार जो आपको वो चीज बिल्कुल वस्तुत समझ में आती है तब जब आप धरती से बाहर निकल के देखते हो जैसे एरोप्लेन एरोप्लेन की जो परम स्थिति होती है वो होती है उड़ना मगर धरती से छूट जाना मगर धरती से छूटने के लिए वो पहले धरती पर ही दौड़ता है सुनिए मेरी बात इसी प्रकार से जो पृथ्वी का जो मूल स्वरूप है वो आपको पता करने के लिए आपको उस पर्सपेक्टिव से देखना पड़ेगा जब पथवी को छोड़ के बाहर से देखो तब समझ में आएगा ये गोल है व्यवहार आज भी आप और मैं दोनों सिर्फ आप भले ही आप रबली कह ले आप और मैं दोनों पृथ्वी के साथ व्यवहार जो करते हैं चपटी वाला करते हैं जब हम किसी को मार्ग दिखाते हैं ना इधर चले जाओ तो उसमें हमारी जो उंगली होती है धरती को छोड़ के आकाश की ओर जा रही होती है
01:51:07:16 मगर हमें लगता नहीं हम उसको सामने भेज रहे हैं जिसको ज्ञान हो चुका है धरती गोल है वो आपका ज्ञान है मेरे भाई आपका व्यवहार नहीं है वो व्यवहार आपका चपटी वाला है आप समझ नहीं रहे मैं क्या कह रहा हूं हा देखिए अभी तक आप समझ रहे थे अब आप ये भी नहीं समझ रहे मैं जो कह रहा हूं आपको ज्ञान है मगर आपको व्यवहार वो आपके व्यवहार में अभी वो गोलाई नहीं आई है आपके व्यवहार में अभी चपटा है आपको ज्ञान है कि ये धरती गोल है वस्तुत बस यही जो भेद है ऐसा ही भेद है सुनि आदमी की जो परम स्थिति है वो अद्वैत अवश्य है मगर यहां पर उसको इस चीज पर ध्यान ना दे कर के व्यवहार का विषय द्वैत कि भगवान वो सामने खड़े हैं मुझे उनसे पूछना है मुझे उन्हें पूछना है वो मेरे ईस्ट है मेरे सब कुछ है मेरे प्रेम का विषय मेरी भक्ति का विषय सब कुछ और उनको पूछने से ही मेरी को वो स्थिति वि स्थिति जो भी है प्राप्त नी हो जाएगी अद्वैत अद्वैत केवल इसलिए कहा गया क्योंकि हम सनातन है और चेतन है ईश्वर सनातन है और चेतन है इसके अतिरिक्त शास्त्रों में कोई भी वर्णन नहीं है कि कोई ईश्वर बना हो या बन सकता आपने जो एक बात कही ना कि हम धरती के साथ चपटे का व्यवहार नहीं करते आप पूरे पूरे संसार को घूम लेना भाई साहब हर मनुष्य जो है संसार का हर मनुष्य धरती के साथ चपटा व्यवहार करता है आप इस मुझे किसी वेद शास्त्र में
01:52:22:19 आप प्रमाण दे दीजिए कि किसी ने ईश्वर की स्थिति प्राप्त करी हो ईश्वर बना हो क्या चीज कोई भी जीव ईश्वर बना हो मुझे प्रमाण दे दीजिए कोई भी जीव ईश्वर बना हो हां भाई मोक्ष क्या है मोक्ष मोक्ष ईश्वर की स्थिति है हां तो मोक्ष ईश्वर की स्थिति है तो ईश्वर सुनिए ईश्वर तो ईश्वर बन जाना है आपको ईश्वर का मतलब नहीं पता आपको नहीं पता भाई साब ईश्वर का मतलब होता है जो सर्जन करता प्रलय करता जो जिसके अंडर में होता हो मोक्ष ईश्वर का अर्थ होता है सत्यम ज्ञान अनंतम ब्रह्म सुनिए मेरी बात हा सर्जन कौन करता है मोक्ष कण के बाद कोई अतो मा सदम तमस मा ज्योतिर गमाया मृत मतम गमाया इस इच्छा का चाह का विषय वो ईश्वर है जो सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रम वो है ईश्वर सुनिए मेरी बात सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रम अगर अगर उसम जीव में और उसम कोई भेद है तो वो अनंत नहीं हुआ फिर मुझे मुझे यह बताइए अगर दुनिया में कोई ऐसी जगह है जहां पर ईश्वर नहीं है मेरा शरीर भी तो फिर वो ईश्वर बाधित है मेरे शरीर के अंदर वो नहीं आ पाया मोक्ष होने के बाद सिर्फ एक ही चीज होती है जो आनंद ईश्वर में होता है वो गुरु या
01:53:37:21 उसके भक्त को प्रदान कर देते हैं बाकी सर्जन करता संघार करता ईश्वर कार खुद करते हैं वही ईश्वर की देखिए अभी देखिए टॉपिक चेंज हो गया मैंने आपको पृथ्वी का उदाहरण दिया आपने वो माना कि मैं पृथ्वी के साथ च बिहेव नहीं करता हूं मैं तो गोल बिहेव करता हूं यानी कि जब आप मोटरसाइकिल चला रहे होते तो फ्लैट धरती पर नहीं चला रहे होते आप सोच रहे होते कि मौत के कुए में गाड़ी चला रहा हूं व्यवहार मस्तिष्क से होता है आपके मस्तिष्क में जब है धरती गोल है तो आप वैसा ही नहीं नहीं ऐसे कैसे अभी आपने वहा पर स्वीकारा व पारलौकिक वो है क्रिया वो समझाने के लिए बता दिया गया मगर वो पारलौकिक क्रिया है वो क्या आपकी आवाज कट रही है मैं आपको जरा एक मिनट आप मुझे दीजिए मैं आपको मायावादी
01:54:40:09 मायावा वर्णन आक्षेप और उसका समाधान दोस्तों आपकी स्क्रीन रुक चुकी है मुझे दिख नहीं रहा है कुछ ये बुक कौन सी है वैसे नाम बता दीजिए मुझे पुराण दिग्दर्शन किसके द्वारा ख माधवाचार्य शास्त्री जी और इन्होंने अपने मन से नहीं लिखा है इन्होने वहा प्रमाण दिए वही दिखा रहा हूं मैं आपको असल में पीडीएफ में पूरा सब कुछ है मगर वो मोबाइल के अंदर है मोबाइल इस समय चालू है तो इसलिए मैं उसको छेड़ नहीं रहा हूं मुझे मुझे आपकी स्क्रीन बिल्कुल दिखाई नहीं दे रही है हैंग हो चुकी है कोई कमेंट करके बताएगा
01:55:15:22 कोई मैं दिखाई दे रहा हूं क्या आपको कोई कमेंट करेगा अच्छा आपकी काफी देर से आपका फेस नहीं दिख रहा है तो आप अपना फेस रिवील कर लीजिए अरे कैसे करूं मैं क्या करूं इसमें बताओ तो फिर किसी दिन रख लेते हैं क्योंकि आज की पूरी व्यर्थ चली जाएगी मुझे यह बताइए एक तो यह बुक जो आप दिखा रहे हो मैं दिख रहा हूं कि नहीं जरा आप आपकी स्क्रीन दिख रही है ये झूठ बोल रहे हैं अब आप आ ग अब आप आ गए अच्छा समय आ गया 200 17 पेज नंबर भाई जो ये बोल रहे हैं कि ये झूठ बोल रहे हैं नहीं नहीं वो ठीक है वो हो गया अब ये देखिए भैया मैं क रहा इस पर ध्यान दीजिए पेज नंबर 217 नहीं मुझे ये बताइए बुक कौन सी है और किसने लिखी है पहले पुराण दिग्दर्शन माधवाचार्य शास्त्री राम अजाचार परंपरा के प्रमाणिक आचार्य इनकी फोटो भी दिखा देता हूं आपको और इन्होंने भी सामंजस्य के उसको माना है ये इन्होंने ही पुस्तक लिखी है क्यों जिसमें हमारे धर्म पर लगने वाले बहुत सारे आक्षेप है जिनका खंडन है नहीं माधवाचार्य जी ने लिखी है या उनके अनुयायियों
01:56:31:04 ने लिखी है माधवाचार्य शास्त्री माधवा माधवा मधवा नहीं अच्छा अच्छा अा येल मधवा नहीं माधवाचार्य शास्त्री ठीक है ठीक है जैसे जैसे श्री प्रभुपाद जी ऐसे ही माधवाचार्य शास्त्री जी वैसे ही वर्तमान के शंकराचार्य लगा जगतगुरु माधवाचार्य वो वो मधवा चार्य है माधवाचार्य नहीं है मधवा चार बोल रहे मधवा चार्य ये मैं बोल रहा हूं ना आपको माधवाचार्य तो इन्होंने जो प्रमाण दिए है वो माधवाचार्य जी के दिए है माधवाचार्य जी ने प्रमाण के साथ ये दिया है देखिए क्या है अब मैं इसमें आपको पढ़ के बता रहा हूं इसमें लिखा है नहीं ये श्लोक किस ग्रंथ का है वही पद पुराण वाला मायावा अ शास्त्र हां जी हा जीी
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→ Used in: B · Video शंकराचार्य को मायावादी कहने वाला #iskcon अर्धपागल निकला @swamiRaghvacharya जी ने... at 6:22 ↗
→ Used in: A · Live Discussion with iskcon-Follower #iskcon #iskcondevotees at 52:03 ↗
→ Used in: A · Live Discussion With Iskcon follower AHVAAN - Call Of Dharma is live! at 1:13:25 ↗
01:57:20:28 प्रतिवादी को मानो आक्षेप करने के लिए किसी पुराण का कोई मूल श्लोक मिलता ही नहीं है इसलिए व प्रक्षिप्त श्लोकों के आधार पर आक्षेप की इमारत खड़ी करता है पद पुराण के जिस मायावा श्लोक को ऊपर के आक्षेप में प्रमाण के रूप में प्रस्थ किया गया है यह भी वस्तुतः प्रक्षिप्त है श्री पंडित कालूराम शास्त्री आदि ने इसको प्रक्षिप्त ही सिद्ध किया है कदाचित मास है जिसे जी इसे मूल मानने का आग्रह करें तब भी पूर्व लिखित व्यवस्था के अनुसार त्रिकालदर्शी त्रिकालदर्शी वेदव्यास जी ने अपने से परिवर्ती श्री शंकराचार्य का मायावादी बात नहीं है इसके अतिरिक्त हम पूर्व में कह चुके हैं कि उक्त आचार्य ने किसी नवीन मत का प्रचार नहीं किया बल्कि वेदोक्त किंतु कालक्रम से विलुप्त सिद्धांतों का ही पुनरुद्धार मात्र किया है यदि मायावादी वैदिक जाननी हो तो नीचे लिखे प्रमाणों का मनन कीजिए
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01:58:18:07 इंद्रो माया भी पुरूप ते ऋग्वेद 6 47 18 ये मायावादी कि मायावादी है देखिए इनका चता एक मिनट स्वेता उपनिषद का फिर दिया है जिसम ये क्या कह रहे हैं और फिर दिया उन्होने आगे ऋग्वेद का फिर से दिया अब इसमें इस तरह यदि अनादि वेदोक्त मायावादी के प्रचारित मायावा को ये देखिए सबसे पहली आप य बात देखिए कि यह किस तरह से प्रस्तुत कर रहे हैं शंकराचार्य जी ने ऐसा मत नहीं दिया है जो कि वो मूर्ख कह रहे उसको उपयोग करने वाले और यह कह रहे अपने मन से नहीं दिया है वेदोक्त है वो वेदों में दिया गया है व मत और इन्होंने इस बात को माना है कि शंकराचार्य ने भी वही बात कही है जो घुमा फिरा करके माधवाचार्य जी ने कही है जो घुमा फिरा कर के अन्य शब्दों में रामर जाचार्य जी ने भी वही बात कही है विशिष्टा दत में और सबसे ज्यादा बे मेेल है वो है शंकराचार्य का मत और माधवाचार्य जी का मत मगर माधवाचार्य जी ने भी अपने गीता के भाष्य में लिखा है उसमें उन्होंने क्या लिखा है कि सभी जीव अंत में विष्णु के शरीर में रहते हैं अब अगर
01:59:33:13 मान लीजिए आप अद्वैत को नहीं मानते अंत में आप क्या हो रहे अच्छा ये दूसरा टॉपिक है मैं पहले इनका बोलता हं ठीक है इनके चरित्र के बारे में मैंने पढ़ा नहीं माधवाचार्य के चरित्र मैंने पढ़ा है श्री संप्रदाय के रामाचार्य के चरित्र में पढ़ा है सबका मत शंकराचार्य जी के मत आप मुझे प्रमाण दिखाइए प्रमाण मैंने आपको प्रमाण दिखाया है रामानुजाचार्य जो है इसको वो प्रक्षिप्त मानते हैं प्रमाण दिखाइए मैंने आपको दिखा दिया अरे उनका सिद्धांत ही दोत दोत है वशिष्ठ तो मुझे मुझे आप प्रमाण दिखाइए कि वो इस श्लोक को प्रक्षिप्त मानते हैं मुझे आप प्रमाण दिखाइए आपको कुछ पढ़ने की जरूरत नहीं है आप दोनों का गीता भाष्य पढ़ लीजिए मैंने मैंने मैंने वो सब चीजें देखी ये जो ये जो महान आचार्य है ना इन्होंने ऐसा नहीं है कि अपने सब लिखा है कि किसके भाष्य में क्या मेल है क्या मेल नहीं है ये जो गीता जो मधवा चार्य जी के बारे में बोल रहा हूं यह भी इन्हीं से मुझे प्राप्त हुआ है तो आप सबसे बड़ी बात है कि मैंने आपको प्रमाण दिखा दिया कि रामानुजाचार्य संप्रदाय इसको मानता है कि ये प्रक्षिप्त है आप कह रहे हैं कि नहीं रामानुजाचार्य प्रक्षिप्त नहीं मानता तो आप मुझे प्रमाण दिखाइए कि रामानुजाचार्य ने कहीं पर इसको यूज किया उस श्लोक को कि जो शंकराचार्य जी है वो माया फैलाने आए थे आपने मुझे जो
02:00:48:14 दिखाया और उसके बाद भी अंत में भी मैंने आपको वेदों के प्रमाण भी दिखा दिए जो इन्होंने दिखाए हैं जो इन्होंने दिखाए हैं ना आप पहले तो बात सुनिए आपने मधवा चार्य के प्रमाण नहीं दिखाए आपने उनके संप्रदाय में कोई पंडित मधवा चार्य की तो बात ही नहीं हो रही मेरे भाई साहब मधवा चार्य की बात ही कहां हो रही है मधवा चार तो आपके वो है आपके द्वारा बताए जाने वाले कि हमारे सबसे पहले गुरु मधवा चार्य है आदि दैविक तो इनका चरि इनका चरित्र तो शायद 99 पर कोई आचार्य जानते नहीं होंगे आप ये बहुत बड़ी भूल कर रहे हैं अब अब आप बहुत बड़ी भूल कर रहे हैं चलिए ये भी नोट कर लिया इसका मतलब यह है ना कि आपके अनुसार य झूठ बोल रहे हैं कुल मिला के नहीं नहीं मैं यह कह रहा हूं आप उनकी बात को नकार भी रहे हैं और आप ये भी कह रहे कि वो झूठ नहीं मैं किसी के जब उनको जानता ही नहीं उनके चरित्र को जानता ही नहीं तो मैं क्या उन पर टिपड़ी करूं लेकिन मैं जाड़ी है कि वो जो शिक्षा है शिक्षा को आप मान रहे हैं कि नहीं मान रहे हैं वो जो शिक्षा दे रहे हैं प्रमाणिक है कि नहीं है हम जो स्वीकार करते हैं हम अरे मैं पूछ रहा हूं ये इनकी शिक्षा प्रमाणिक है कि नहीं है देखो सच बोलने से क्यों कतराते हो भाई जिस चीज को आप अपने कृत्यों से जाहिर कर रहे हो उसको वाणी के द्वारा क्यों नहीं स्वीकार करते हो आप इनके ये जो यहां पे इन्होंने कहा है
02:02:03:27 उसको स्वीकार क्यों नहीं कर रहे हैं आप मैं इनको क्यों स्वी तो प्रमाणिक या अपमा नहीं मैं इनको क्यों स्वीकार करूंगा जो तो नहीं करेंगे तो आप तो आपके हिसाब से अपमा है ना जो पुराण कहती है सुनिए जो पुराण क आपके हिसाब से अप प्रमाणिक है ना जो पुराण कहती है जो आचार्य कहती है पुराण क्या आपके पास डायरेक्ट आए हैं तो यह भी आपके पास डायरेक्ट नहीं आई है तो नहीं आए तो यह तो गुरु परंपरा से आज जो इनके शिष्य जैसे मैंने सड़ गो स्वामियों पर बिलीव किया था आपके कहने पर नहीं तो ना करता क्या डायरेक्ट आपके पास आया था आपने कहा कि उनके शिष्य थे तोई गुरु परंपरा तो मानना पड़ेगा स गो स्वामियों के द्वारा प्राप्त होने वाला उनके अगर गुरु परंपरा पर भरोसा नहीं है तो आज के टाइम में धर्म बचेगा कैसे मेरी गुरु परंपरा 18 पुराण पूरे पूरे के पूरे प्रमाणिक बताए अगर उस पर कोई उंगली उठाता है तो किसने बताए किसने बताए हमारे गुरु परंपरा में सबने बताए हा तो आपके द्वारा सबने ये भी तो कहा है कि ये गुरु परंपरा प्रमाणिक है अगर कोई भी पुराण को मि मैं आपसे पूछ रहा हूं आपके आपके पूरे संप्रदाय में ये भी तो बताया गया है कि रामन चार संप्रदाय प्रमाणिक है वो नहीं सुनिए वो पदम पुराण बताता है इसलिए हमारे मान नहीं आप आप उसको स्वीकार करते हैं कि नहीं करते ये बताइए पदम पुराण की बात को पदम पुराण की एक एक बात को हम स्वीकार करते हैं
02:03:19:02 स्वीकार करते हैं तो फिर उसमें उन्होंने कहा कि ये जो जो ये परंपरा है ये प्रमाणिक है अब जो हमारे जो वो है लक्षण ये सन्यासी है ये परंपरा से आचार्य है अब आप कह रहे हो नहीं मैं इनकी बात को नहीं मानता तो इनडायरेक्ट वे में आप कह रहे हो कि ये इनकी बात हमारे लिए प्रमाणिक नहीं है आप पहले तय कर लो रामानुजाचार्य परंपरा परंपरा जो है वो प्रमाणिक है या नहीं है आपको सिद्धांत ही नहीं पता है पूरे पूरे उनके आचार्य जो है वो द्वैत सिद्धांत प चल रहे हैं और आप कह रहे हो वो दो नहीं वो तो शंकराचार्य के सिद्धांत को मानते थे जब उनके सिद्धांत को मानते थे तो पता ऐसा नहीं है दत सिद्धांत पर तो हम भी चल रहे हमने कने कब कहा हम नहीं चल रहे द सिद्धांत प जो अद्वैत है वो प्राप्ति का विषय है वो हमारे व्यवहार का विषय नहीं है तो व्यवहार तो हम भी द काही कर रहे हम भी राम केही भक्त है हम भी कृष्ण के भक्त है नहीं आपका अंतिम जो सिद्धांत वो क्या है वो प्राप्ति का विषय है नहीं आपका सिद्धांत क्या है आप क्लियर करिए मनुष्य की दृष्टि से दैत और ब्रह्म की तरफ से देखने पर अवत ये है सिंपल मनुष्य होते हुए अगर तो आप भगवान बारे में सोचेंगे तो द्वैत है ईश्वर और जब ब्रम मुक्त की तरफ से जब ब्रह्म की तरफ से आप इस दुनिया को देखोगे तोय सब क्या है प्रपंच माया मुझे बताइए आपकी परम गति क्या होगी द्वत अद्वैत भगवान में ल हो जाना अवत अद्वैत आप ईश्वर बन जाओगे
02:04:34:02 मतलब आप कह सकते हो बिल्कुल ईश्वर को प्राप्त कर लेंगे ईश्वर की स्थिति को प्राप्त कर लेंगे किसी भी वैष्णव चार संप्रदाय में य फिलस है ही नहीं कि हम ईश्वर बन जाएंगे बात खम यह तो मेरा है ना मैं तो नहीं कह रहा कि य बात य बोल रहे मैंने कहासे कह रहा हूं यह कह रहे हैं मायावा जो वाला जो श्लोक है वो प्रक्षिप्त है प्रक्षिप्त है इन्होंने माना अब इसको आप मानते हो कि नहीं इसमें मुझे क्यों ला रहे हो आप नहीं आप मुझे क्यों ला रहे हो मैं बात ये चल रही है क्या आप इनको प्रमाणिक मानते हैं या नहीं मानते ये बताइए नहीं नहीं नहीं हम पदम पुराण को ही प्रमाणिक आप इसको इनको प्रमाणिक नहीं मानते नहीं मैंने इनके चरित पढ़ तो इसलिए मैं कुछ कह नहीं सकता तो बात ही खत्म हो गई जब आप जब आपके अनुसार आप कह रहे हो रामाचार्य परंपरा जो है प्रमाणिक परंपरा है उसके अनुसार आप इसके बारे में चेक कर लीजिएगा फिर आइएगा दोबारा ये प्रमाणिक है कि नहीं नहीं मैं इनको दुनिया जानती है रावण चार संप्रदाय का शायद ही कोई ऐसा प्रमाणिक आचार्य जो इनको ना जानता हूं अरे अरे श्री संप्रदाय में माधव संप्रदाय में द्वत ही भैया श्री संप्रदाय की ही बात कर रहा हूं मैं आपसे एक एक करके आगे बढ़ेंगे सबको मत लीजिए श्री संप्रदाय की आपसे बात कर रहा हूं किसी भी किसी भी श्री संप्रदाय में जो है अद्वैत का जिक्र ही नहीं किया है कि हमें अद्वैत सिद्धांत मानना है मैंने कब कहा कि आप इन्होने अद्वैत के लिए कहा है कहा क्या
02:05:49:19 नहीं मैंने कहा आपसे आप आप क्या कर रहे हो ना जैसे होता है ना वो जब अदालत में कोई केस बस चल रहा होता है तो पहले दिखाते जस साहब देखिए ये फोटो ये फोटो भाई उन फोटो से तो कुछ नहीं हो रहा है आप अपनी बात में वजन डालने के लिए उन बातों को यहां पर बोल रहे हो जिससे कोई मतलब नहीं है इस विषय का मैंने आपको बस ये पूछा है ये शिक्षा दे रहे हैं कि मायावादी है ये बोल रहे हैं अब आप कह रहे हो मैं नहीं मानता आप कह रहे हो मैं ी संप्रदाय को प्रमाणिक मानता हूं पद पुराण को मानता हूं अब आप उसी के द्वारा प्रमाणिक आचार्य है उसको आप नहीं मानते तो आपका किसी भी आचार्य को चयन करने का आधार क्या है फिर सुनिए सुनिए किसी भी जब संप्रदाय के आ को चयन करने का आधार क्या है आपका किसी भी आचार्य केब प्रमुख ग्रंथ हमारे पास हो श्री संप्रदाय के तो फिर पहले उन्हें माना आपने कहा श्री संप्रदाय
02:06:44:19 मायावादी प्रमाण आप मुझे प्रमाण दे दीजिए मायावा को माया वाले श्लोक को प्रक्षिप्त नहीं मानता है अब उन उनका मुझे नहीं पता ना मेरे तो इसका मतलब आपका ये जो है ये अंदाजा है नहीं नहीं हां पढ़ा नहीं है आपने पढ़ा है उन्होने कहीं प उन्होंने कहीं प ये श्लोक यूज किया है कि भा ऐसा ऐसा कहा गया है शंकराचार्य के बारे में अरे उनका मैं क्यों लूंगा मैं तो अपने अरे भाई अजीब बात है आप कह रहे हैं कि सभी श्री संप्रदाय वाले उसको मायावादी मानते हैं आप कह रहे हैं ना तो ये मायावादी संप्रदाय वाले मैं क्या कह रहा हूं किसी भी संप्रदाय में वैष्णव संप्रदाय में ऐसा नहीं कहा गया कि पदम पुराण में मिश्रित किया गया है श्लोक और ये आपने जो दिखाया इसके बारे में मैंने कुछ पढ़ा नहीं है ना आप पढ़ लीजिए फिर आइए आप पढ़ लीजिए फिर आइए ठीक है आप जानकारी कर लीजिए पढ़ लीजिए शी श्री संप्रदाय श्री संप्रदाय पर ये जो मायावादी मानता है कि नहीं मानता यदि आपके अनुसार मानता है तो मेरे को प्रमाण लाके दिखाइए आप जैसे मैंने आपको प्रमाण दिखाया सु फिलहाल मैंने आपको प्रमाण दिखा दिया आपके पास प्रमाण नहीं है सुनि सुनिए मेरी बात जी मैं किसी के सिद्धांत को मानूंगा तो श्री संदाय के रामानुज आचार्य के सिद्धांत को तो रामानुजाचार्य का प्रमाण ला
02:07:59:22 दीजिए कि उन्होंने इस वाले श्लोक को जो है वो किया हो एक्सेप्ट उनका सिद्धांत ला दीजिए प्रमाण और दूसरी बात आप ये बात तो मत करिए फिर तो मैं ये कहूंगा आप मधवा चार को मानिए सीधे मधवा चार तो आज है नहीं चैतन्य महा प्रभु तो आज है नहीं तो इसका मतलब आपको गुरु की प्राप्ति नहीं हो सकती फिर तो गुरु परंपरा का आप खंडन कर रहे हैं चार का कोई भी ऐसा दिखाइए जिन्होने बोला हो कि पुराण में मिश्रित हो ग मैं तो ये कह रहा हूं ना कि आप आप जो है रामानुज जैसे मैंने आपको परंपरा से किसी प्रमाणिक गुरु का दिखा दिया आप श्री संप्रदाय के किसी प्रमाणिक आचार का लि आइए मैंने कब कहा कि राण आचार का लाइए मैंने कहा आप उस परंपरा से जो वर्तमान के उस परंपरा से जो वर्तमान के आचार्य गण हो उनका आप ले आइए प्रमाण जो उन्होंने ये स्वीकारा हो कि माया ये जो श्लोक है मायावादी नहीं है आप समझ जो जिसको संदेह है जिसको पुराण में संदेह है वो लिखेगा ना जिसको संदेह नहीं है वो क्यों लिखेगा तो मैं आपको प्रमाण कहां से लाऊंगा फिर अरे मेरे भाई यह बताओ गुरु परंपरा पर आप विश्वास करते हो कि नहीं करते हो बिल्कुल करते हैं तो यह परंपरा प्राप्त प्रमाणिक गुरु है आप इनको नहीं जानते तो सॉरी अरे हम अपनी परंपरा पर विश्वास करेंगे ना लेकिन अरे तो आप इस परंपरा प नहीं करते तो क्यों बोलते
02:09:14:24 हो कि श्री संप्रदाय प्रमाणिक है श्री श्री संप्रदाय प्रमाणिक उसम जो आचार उन्होने क्या लिखा अच्छा श संप्रदाय प्रमाणिक है मगर उसके जो परंपरा होगी गुरु परंपरा वो हमारे लिए प्रमाणिक नहीं है हेलो हेलो आप ऐसा करिए मधवा चार जी को जान लीजिए माधवाचार्य जी को और भी कई टॉपिक है ये जो चेतन चरितामृथम पाते श्री कृष्ण वादित है कि नहीं श्री कृष्ण अल्लाह में अंतर है कि नहीं अगर अंतर नहीं है तो श्री कृष्ण शिव में अंतर है कि नहीं आप यह बात जो है आपने इस बात का भी उत्तर नहीं दिया कि जब वो वहां पर उनके लिए कह सकते हैं कि उनको बुरा ना लगे और उनकी बात चल जाए तो यहां क्यों नहीं ध्यान रखते शिवजी की शिव जी के भक्तों को बुरा ना लग जाए यहां प भी वो शिव को स्वीकार कर ले कि चलो शिव और कृष्ण एक आओ हरे कृष्ण का जाप करें देखिए सुनिए आप घुमा फिरा के वही सवाल पूछते हो जिसका उत्तर मैं दे चुका हूं आपको पहले ही बता चुका सुनि सुनिए नहीं दिया है खैर आपसे बात करके अच्छा लगा आप थोड़ी सी तैयारी करिए और ये जो श्री संप्रदाय है इसका प्रमाण लेके आइए किसी भी आचार्य ने कि भी आचार्य ने मायावा वाले लोक
02:10:30:01 को स्वीकार किया उत्तर नहीं सुनेंगे तो फिर आप कुछ अपनी बात रखना चाह रहे हो केवल मैं भाई साहब आपका 50 बार सुन चुका हूं आप शुरू से बारबार अपनी जो बात बोलते हो उसको जब मैं क्लियर क्लियर शब्दों में पूछता हूं तो आप बगल से निकल जाते हो आपने यह बताइए भागवत का श्लोक यह माना नहीं माना कि भगवान के अनेक नाम है बहुत नाम है हा बिल्कुल माना बिल्कुल माना बिल्कुल माना तो सारे नाम एक ही है ना अरे मेरा भी नाम है फिर तो उसम और बिल्कुल हैय तो आप ये कहना चालू करो शिव और कृष्ण शिवांश और कृष्ण एक है फिर अपना भी नाम लो उसम अरे तो हमने अरे हमने मना की किया मैंने तो 10 बार बोला फर फिर दिक्कत हो जाएगी नहीं शिव दुर्गा काली के नाम का जप करने वाले नाम को समान समझने वाले अपराधी है आप इसका भी श्लोक नहीं मानोगे ये भी पदम पुराण का श्लोक है मैं इसको मान लूंगा आप लाइए मैं तो भाई मैं गुरु परंपरा पर मैं तो गुरु गोविंद और ग्रंथ पर चलने वाला व्यक्ति हूं मुझे आप सर्वशक्तिमान ईश्वर दे दीजिए परम स्वतंत्र गति दे दीजिए मनुष्य की जीव की और मनुष्य के लिए व्यवहारिक जो धर्म है वो अटल दे दीजिए कभी ना बदलने वाला लचर धर्म नहीं कि वहां पर गए वहां पर गए और वहां जाकर के उन लोगों को प्रभावित करने के लिए जो हमने बातें लिख दी जो ब्राह्मण थी वही बातें आकर के आप हिंदुओं को बढ़ा रहे
02:11:45:16 हैं और फिर जब हिंदू पूछ रहा है क् कृष्ण अल्ला एक कैसे तो आप बता रहे हो मैंने जब अल्ला कहा तो मैंने उस कांटेक्ट में कहा जो परम शक्ति अरे भाई तो इसको आपने क उजागर किया सत्य को आप बोल रहे आपने कहीं बुक में लिखा जब हम अल्लाह कह रहे तो ये वाला वो कुरान के द्वारा प्रतिपादित ईश्वर नहीं आपने कहीं बुक में लिखा आपने अधिकृत रूप से कहीं पर स्वीकार किया ये आज आप कह रहे हो आप ये बात बुलवा देना आप ये बात किसी प्रमाणिक जो आप तो अधिकृत हो नहीं आप कुछ भी बोल दोगे वो लोग नाय कर देंगे आप ये बात बुलवाना आप किसी प्रतिनिधि से बात बलवा दो कि जब हम अल्लाह कह रहे हैं तो वो अल्लाह वो नहीं है जो कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला है जब हम अल्ला कह रहे हैं तो वो तो परम शक्ति की बात कर रहे हैं बात खत्म हो जाएगी आप पता नहीं कहां की बात कहां ले जाते हैं आप यह बताइए कि मैंने यह बोला कि अल्लाह का नाम अल्लाह का नाम इसलिए बोला गया क्योंकि हमारे भागवत के श्लोक में अनेक नाम बताए गए लेकिन मैं आपसे ये पूछ रहा हूं आपने जब अल्लाह वहां पर बोलते हो तो वो उनकी कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला अल्लाह नहीं होता वो तो परम शक्ति होती है यही तो बात है सुनिए पहले पूरी बात यही बात है क्या आप पूरी बात खत्म क्यों नहीं होने देते चलिए बोलिए बोलिए बोलिए बोलिए बोलिए जिस तरह हमने बुद्ध को स्वीकार किया लेकिन उनके बुद्ध को बुद्ध को हमने कहां स्वीकार
02:13:00:27 किया कौन सा उनका मंदिर हम पूछते हैं जाकर के उन्हे किस मंदिर में हमारे बुद्ध की मूर्ति मिलती है हमें बताइए कहां स्वीकार किया हमने ये मान लिया हम कोई बुद्ध बुद्ध रूप में अवतार लिया था उन्होने वेदों की रक्षा करने के लिए अवतार लिया था सुनिए श्रीमद् भागवत में 10 अवतार में उनका नाम है तो मैं मैं कहां कह रहा हूं अल्लाह का नाम है क्या अरे बात सुनिए ना मेरी हां हां तब आपने ये स्वीकार कर लिया ठीक है वही आप मुझे आप देखिए आप बहुत लंबा खींचते हैं इसीलिए मैं उसको शॉर्ट करता हूं आपने खुद अभी ये थोड़ी देर पहले स्वीकार किया है कि हम वहां पर जब अल्लाह नाम लेते हैं किसी से ये कहते हैं कि अल्लाह और कृष्ण एक है तो हम उस अल्लाह के बारे में बात नहीं कर रहे होते हैं जो कुरान के द्वारा परिभाषित किया गया है कर रहे होते हैं क्या मैंने ये नहीं बोला मैंने ये बोला आपने बोला भाई साहब ड है ठीक है इसको मैं बोल दू इसको मैं दिखा दूंगा आपको आपने बोला सुनिए मैंने क्या बोला मैंने बोला आप भैया सुनिए सुनिए फर्स्ट ऑफ ल अब आप ऐसा करिए या तो अपना फेस रिवील करिए क्योंकि आप जो बातें बोलेंगे वो फिर हम बता नहीं पाएंगे लोगों को आपने बोली तो आप अपना फेस रिवील करिए हम लोग किसी और दिन रख लेते हैं आज काफी देर भी हो गई है0 ब आप जो रिवील रिवील कर रहे हैं ना मैंने स्क्रीनशॉट ले लिया है ठीक है ये मैंने कोई बंद नहीं किया यह हैंग हो रखा है अभी भी मेरा फेस उसी प है नहीं वो ठीक है बात वो नहीं है
02:14:16:01 जैसे अभी जो आपसे दोबारा से चर्चा गुण तत्व चालू हो रही है हम इसको वीडियो में यूज नहीं कर पाएंगे मैं रखते रखते अपना क्लियर कर दूं जो आपके प्रश्न थे उनके ठीक है पहला प्रश्न यह शंभू कृष्ण के स्वरूप है और उन्हीं में समा जाते हैं एक हो जाते हैं और सुनिए उनमें कोई भेद नहीं है और लेकिन आधार सुनि और आधार श्री कृष्ण से है इसलिए हम अभेद भी बानते हैं उन्हेल मिला कुल मिलाकर के आप क्या है नान का खंडन अप्रत्यक्ष रूप से का खंडन और जो है शंकराचार्य का समर्थन करते हैं सुनि वही वाली बात है
02:14:57:19 जैसे के सारे जितने भी लोग है अगर उनकी स्त्रियो पर अगर बात आ जाए मात्र शक्तियों पर बात आ जाए तो उनकी रक्षा में हिंसा करने लगेंगे जबक बौद्ध धर्म में लिखा हुआ किसी भी हाल में हिंसा मत करना तो क्या हुआ उतने अंश में खुद को बध कहते हु भी व हिंदू बन गए अरे तो वही तो मैंने बोला उनका सिद्धांत स्वीकार नहीं है क्या सिद्धांत स्वीकार नहीं है बहुत दिखा सिद्धांत स्वीकार नहीं है हमें आपने मेरी बात समझी नहीं दोबारा बोल रहा हूं मैं दोबारा बोल रहा हूं कि बौद्ध धर्म में क्या है मैं उस बौद्ध धर्म की बात कर रहा हूं जो ये सुनिए सुनिए एक और चीज मैं वीडियो डालूंगा जिसमें इकन के प्रभु जी ही कह रहे हैं कि शिवजी और कृष्ण भेद नहीं है आपको कोलब करूंगा आपको एक्सेप्ट करनी पड़ेगी आप जो कह रहे होन केवल ये बोलते हैं कि एक नहीं है मैंने तो नहीं कहा मैंने जहां आप अच्छी बात बो बो आपका स्वागत है मैंने तो नहीं कहा कि केवल यही बोलते हैं मैंने कहा ये क्यों बोलते हैं मैंने नहीं कहा केवल ये बोलते हैं ये केवल शब्द आप लगा रहे हो जहां जहां प आप अच्छी बात बोलोगे आपका स्वागत है आइए हम दोनों एक साथ हो कर के प्रचार करेंगे धर्म का मैंने आपको यह भी बताया कि अभेद शब्द क्यों यूज किया गया जो बौद्ध धर्म मेरे मुह से गलत निकल गया जो बौद्ध वो है आईडियोलॉजी उसके अनुसार उसमें एक कहा गया कुछ
02:16:12:20 भी हो जाए किसी भी स्थिति में आप हिंसा मत करना ऐसी स्थिति में जब कोई व्यक्ति अपने मन में यह सोचता है कि मैं जो है मेरे साथ अगर कोई अधर्म हो रहा होगा तो मैं जरूर अपनी आत्मरक्षा करूंगा तो उतने अंश में वो व्यक्ति बौद्ध वो हिंदू बन जाता है वो बौद्ध उसी प्रकार से जैसे जहां जहां प आप ये चीजें स्वीकार करते जा रहे हैं ना वहां वहां प आप स्कन के अगेंस्ट और शंकराचार्य के साथ में खड़े हैं यही मैंने कहा था अपने वीडियो में जो रील जिससे आपसे चर्चा शुरू हुई मैंने कहा था जिस दिन जिस दिन आप ऐसा ऐसी बात बोलेंगे जिसमें कि ईश्वर सर्वशक्तिमान मैंने भी बात कही है वो परम स्वतंत्र और जो धर्म है शाश्वत प्राप्त होगा तो वो जो वो जो बात होगी वो शंकराचार्य की बात होगी शंकराचार्य की हम सिद्धांत नहीं मानते हमने इकोन की बात करी है और इकोन आप इकन का सिद्धांत का मान मुझे लिखा दिखा दीजिए इसन की तरफ से कि वहां पर कुरान के ईश्वर की कुरान के अल्लाह की बात नहीं हो रही होती है दिखा दीजिए आप मैंने तो आपको दिखा दिया अधिकृत लोगों के द्वारा आप कहीं पर अधिकृत लोगों के द्वारा अपनी बात दिखा दीजिए कि वहां पर जब वो अल्लाह कह रहे होते कुरान का अल्ला नहीं होता है बता दीजिए ये तो य ये ऐड आपने करा अलग से मैंने आपने खुद बोला अभी थोड़ी देर पहले अब आप पलट रहे हैं चलो आप है ना एक काम करना आप रिकॉर्डिंग चल रही है ना आप
02:17:27:22 दिखा देना अगर मैंने ये लाइन बोली हो तो आपने बो हां बोला है आपने हां बोला हां आप अपने कांटेस्ट प बोलोगे तो तब मैं समझाने के लिए बोलूंगा लेकिन मेरा कहने का मतलब ये था हमारे सा अब ये बताइए कि अब कब क अच्छा चलिए इसका फैसला कैसे होगा आप कब मे समझाने के लिए बोल रहे हैं और कब बिल्कुल क्लियर कट सत्य बोल रहे हैं ऐसे तो मैं आपकी हर बात को यही मानू कि भैया आपने जितने भी मुझे तथ्य बताए वो सब आपने कुछ और दृष्टि से बनाए भाई जब अविश्वास आ गया तो अविश्वास तो सब पर आएगा आप भगवान के अनेको नाम मानने को रेडी नहीं हो पहली बात तो मैं भगवान केने को नाम मानने को रेडी नहीं हूं मगर मैं उस ईश्वर को मानने को रेडी नहीं हूं जो क्या अरे तो नाम तो हर किसी के व्यक्ति के हो सकते हैं हम उनके सिद्धांत को नका ना हम अपने अरे भाई मैं यह कह रहा हूं आपने पर य उल्लेखित किया है क्या कि हम जब कह रहे हैं कि बाइबल का ईश्वर और कुरान का ईश्वर और कृष्ण एक है तो कहीं पर जो आप बात बोल रहे हैं मगर हम उस ईश्वर की बात नहीं कर रहे आप जब कह रहे कुरान आप जब कह रहे एक मिनट मिनट गलत निकल गया जब आप कह रहे हैं कि कृष्ण अल्लाह एक है जब आप कह रहे हैं कि कृष्ण और यहोवा एक है आपने कहीं पर उल्लेखित किया है कि बाइबल के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो यहोवा हम उसकी बात नहीं कर रहे कुरान के द्वारा प्रतिपादित
02:18:43:00 होने वाला यवा है उसकी बात नहीं कर रहे कहीं प आपने मेंशन हैय आप अपने मन से बोल रहे हैं हमने तो यह भी नहीं बोला कि जो कुरान में लिखा है हम उसको फॉलो कर रहे हैं उसको फॉलो करो हमने तोय आपने कहा कि अल्लाह और कृष्ण एक है आप य बताइए हमने इसलिए बोला आपने कहा अल्लाह और कृष्ण फिर आपने ये कहा कि अल्लाह हम लोग जब अल्लाह कह रहे हैं पूरा संसार यहोवा और अल्लाह को जो जानता है वो ये जानता है कि बाइबल के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर कृष्ण के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर तो उसमें आप एक कैच बता रहे कि हम जब अल्लाह कहते हैं तो क्य उस पर्सपेक्टिव से कहते कि भगवान के कई नाम हो सकते हैं इसलिए हम कहते मगर वो कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर नहीं है हमारा अल्लाह हमारा यवा बाइबल के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर नहीं है तो यह जब आप कह रहे हैं तो क्या इसका कोई आपके पास प्रूफ है कि इसकन ऐसा मानता है इसकन ने हमेशा हर वीडियो में यह बोला है कि भगवान के अनंत नाम है यह भी हो सकता है और लेकिन हमने कभी कुरान को या बाइबल को सपोर्ट नहीं किया कि इसके सिद्धांत को मानो अगर किया है तो मुझे आप एक वीडियो दिखा दीजिए मैं आपसे जो पूछ रहा हूं वो बताइए आप यह बोल रहे हो कि जब व अल्लाह बोलते पूरी दुनिया जानती है कि अल्लाह कौन है यहोवा कौन है यहोवा बाइबल के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर है और जो अल्लाह है वो कुरान के द्वारा प्रतिपादित
02:19:58:07 होने वाला ईश्वर पूरी दुनिया जानती है अब आप वहां जाकर के ऐसा नाम जो हर कोई जानता है उस नाम के लिए आप कहते हो कि भाई मैंने तो अल्लाह का अब आप फिर बाद में एक मन की बात जो है जो बताते नहीं दुनिया को कि भाई मैंने तो इस कॉन्टेक्स्ट में कहा कि उनका कृष्ण का नाम अल्लाह भी हो सकता है क्यों नहीं हो सकता है भगवान मेरे अनंत नाम है तो क्यों नहीं हो सकता है आप क्यों अरे तो फिर इस बात को आप लिखा दिखाइए ना कि हमने उस कांटेक्ट में कहा है हमने उस कांटेक्ट में कहा है इसको लिख कर दिखाइए चलिए खैर आपसे बात करके अच्छा लगा और क्या कहते हैं मतलब एक लेवल बातचीत हुई अच्छा लगा आपसे बात कर और ये माधवाचार्य जी के बारे में पढ़िए माधवाचार्य जी के बारे में श्री संप्रदाय के बहुत ही प्रमाणिक आचार्य है और शायद ही ऐसे कोई आचार्य जोको विश् विख्यात है
02:20:52:13 नके ग्र है इनके ग्रंथ विश्व विख्यात है उन्होने पदम पुराण के सभी लोको को माना है अरे तो पहले ठीक है आप अपनी बात बोल लीजिए मैं तो यह कह रहा हूं आप इनके बारे में जान तो लीजिए जा दूसरी बात बो क उन्होने सभी लोको को माना है और क्या माने कपा महाराज सुनि कृपालु महाराज ने भी वो भी जगतगुरु उपाधि हुए उन्होने अरे भाई ये जगतगुरु की उपाधि की बात बाद में कर लेंगे आपने एक बात कही मैं इनको नहीं जानता हूं भाई आपने एक बात कही मैं इनको नहीं जानता हूं मैं कह रहा हूं आप जान के आइए दोबारा बात करेंगे काफी टाइम हो गया बक बिल्कुल इनके बारे में पंगा लेकिन मैं पढ़िए और इनसे इनके इनके पास जाके पूछिए कि आपने क्यों लिखा कि वो मायावा का श्लोक जो है प्रक्षिप्त है हम आपको प्रमाणिक कहते हैं आप अपमा बातें करते हैं नहीं नहीं मैं आचार्यों की बात कर रहा हूं कृपालु महाराज और पवान महाराज और गड़ी आचार कोई वो नहीं है उन्होने आचार नहीं है क्या बकल आचार नहीं मानते आप बिल्कुल होंगे आपके आपके मतलब की बातें थी आपने मा मेरे मतलब की नहीं इसम इसमें मनुष्य मात्र के मतलब की बात है भैया इन्होने ऐसे ग्रंथ लिखे है ना उसम कहीं कोई वो है ही नहीं कोई लड़ाई की बात है ही नहीं मगर आपको वो जाननी नहीं है
02:22:07:18 फोन कटने के बाद एक छोटा सा देख लीजिएगा य पर डा लीजिएगा कृपालु महाराज आपको मैं एक लोक दे दूंगा भागवत पुराण का आप कपाल महाराज को मानो के लिए पदम पुराण का श्लोक उन्होने प्रमाणित दिया है भागवत पुराण का वो श्लोक मानोगे जहा लिखा है जीव और आत्मा की एकता ही प्रतिपाद्य विषय है जीव और ब्रह्म की एकता भागवत में अनेको जगह लिखा है कि भिन्न भी है और अभिन्न भी है भिन्न मैंने कब कहा भिन्न नहीं है व्यवहार में भिन्न है और परमार्थ में एक है मैंने कब कहा आप मानो एक कहां प मान रहे हो चलो आप एक कहां प मान रहे हो बोलो मैंने पहले भी तीन चार बार को बता दिया सनातन है और चेतन है इस पर माना हमने अरे तो उसको रप से समझे सनातन ईश्वर माना जो अद अद्वैत का सिद्धांत श्लोक है अह ब्रह्मा और त्सी इसका भी अर्थ यही है कि हम ईश्वर की तरह चेतन है और सनातन है इसलिए इस तर तर तरह वाला वो आया है क्या इसम क्या इसमें तरह की संस्कृत है क्या ब्रह्मा में मतलब तरह की संस्कृत है क्या इसमें प्रकार जब आप आप प्रकार की बात कर रहे हो ना प्रकार की संस्कृत है क्या इसमें और दूसरी बात चलो चलो आप ये जो मान रहे हो कि हम ईश्वर के समान है
02:23:22:18 आपने ये माना हमने समान है सनातन में में हमारी जीव आत्मा जो है सनातन है जब से भगवान जब से हम सनातन का अर्थ क्या होता है बताइए जिसको ना कभी कभी पैदा हुआना जिसकी मृत्यु होगी वो सनातन जिसकी ना शुरुआत ना अंत नहीं नहीं नहीं सनातन का अर्थ केवल इतना नहीं है सनातन का अर्थ है किसी भी देश काल परिस्थिति में ना बदल वाला वो ये नहीं है वो भी है लेकिन आत्मा नहीं वो भी नहीं है जो सही परिभाषा तो यही है आप तो अधूरी बोल रहे हो कि जिसका ज जो जन्म हुआ है जिसको ना मारा जा सकता है वो नहीं है सनातन किसी भी देश काल परिस्थिति में जो ना बदले वही शाश्वत है वही सनातन है शाश्वत भी है अनादि भी है उसको भी आत्मा को भी बोलते हैं वो समझने तो बात ये है आप 10 लाइन अलग बोल के व्यक्ति अपने को भगवान जैसा समझे या ना समझे बिल्कुल ना समझे भगवान का ना समझे तो आप क आप कह रहे हो फिर मैं मानता हूं अद्वैत को तो कौन से हिस्से में मानते हो आदमी समझे क्या खुद कोने पूरी गीता करने के बाद उन्होने पर ब्रम स्वीकार किया और खुद को दास स्वीकार किया तो मैं भी करता हूं मैं भी करता हूं मगर ये व्यवहार का विषय है करने का विषय है जैसे की बर्गर
02:24:37:21 बर्गर किस रूप में हमारी आथ को इंटेस्टाइन की को फुलफिल करेगा वो अलग बैटर है मगर मैं प्रयत्न करता हूं बर्गर के लिए शास्त्र में कहीं भी प्रमाण नहीं है कि हम ईश्वर बन सकते हैं आपके सिद्धांत में है तो आप बनो य बमा क्या है फिर अ बमा का मतलब है मैं ब्रम उनका अंश सनातन हू तो ये तो आप निकाल रहे हो ना भाई ब्रमी का शब्द वाला अर्थ करिए शाब्दिक अर्थ गीता के च अर्थ क्या है अर्थ क्या है ब्रह्मा का अपनी टप मत दीजिए मत दीजिए आप शिक अर्थ बताइए ब्रह्मा का शादिक अर्थ बताइए भैया मैं भ्रम हूं शाब्दिक अर्थ बताइए सुनिए मैं भ्रम हूं यह शाब्दिक अर्थ है तो तो यानी कि अगर संस्कृत को हिंदी में कर रहे तो मैं ब्रम हूं वो आप वो आपकी व्याख्या है आपने पूछा शास्त्र में कहीं प्रमाण दिखा दीजिए कहीं लिखा हो आप ही बोल रहे हो मैं ब्रह्म हूं वो आपकी व्याख्या है पीछे की जो आप ऐड कर रहे हो उस व्याख्या को हम माने या ना माने वो अलग मैटर है आपने कहा प्रमाण दिखाइए ठीक है अब मैं बताऊ अब मानोगे हा बताओ अध शलोक में भगवान श्री कृष्ण कह रहे ब्रह्मण ही पति ब्रम
02:25:52:21 की प्रतिष्ठा मुझ से है यानी कि जो आत्मा है उनकी प्रतिष्ठा परमात्मा से है शलोक क्रमांक बताइए जरा इसकी भी हिंदी वि करले आप बहुत देर से भगवता भगवत गीता अध्याय 14 लोक 27 बोलेते ऐसा करें यू आर लाइव लाइव लाइव बोलो बोलो बोलो दोबारा चालू हो गई क्या आपने लेफ्ट करा था फिर चालू हो गई मेरे ख्याल से कुछ मामला है इतनी देर से ज्यादा नहीं होगा मेरी तो स्वा अध्याय और 27 वा श्लोक उसमें भगवान क्लियर कह रहे हैं कि भ्रम की प्रतिष्ठा मुझसे है यानी कि जिससे प्रतिष्ठा खोल लू जरा खोल जिस प्रतिष्ठा हुई है कौन सा कौन सा श्लोक अध्याय 14 श्लोक
02:26:57:06 27 और गीता में पहले भी कह दिया कि सनातन अंश है सनातन अंश है मतलब सनातन हमेशा ही अंश रहेगा पूर्ण कभी नहीं होगा अच्छा ठीक है तो आप ये कह रहे हो कि जो ब्रह्म का जो ब्रह्म से भी ऊपर कृष्ण बैठे हैं कहीं ये कह रहे हो बिल्कुल मतलब कृष्ण और ब्रह्म एक नहीं है एक है गु प्रकट नहीं होते उ मैंने भागवत का श्लोक आपको स्टार्टिंग में सुनाया था वदंति त तव यज्ञन मध्यम भ्रम परमात्मने ति शब्द तीनों एक ही है लेकिन भ्रम में सारे गुण प्रकट नहीं होते आदि शंकराचार्य ने भी बोला ब्रह्म में शक्तियां नहीं है फिर बाद में माना भी शक्तिया है अरे मेरे भाई मैं तो आपको कही रहा हूं ना कि हम खुद को पूछने वाले लोग नहीं है यह आप लोगों ने भ्रामक चीजें फैलाई है कन हम गीता की ब्रा चीज फैला रहे हैं अगर 14 14 अध्याय का 27 श्लोक में बता रहा हूं भ्रामक
02:27:55:16 है हेलो ार कर आप अपने पिता काको प्यार दज जबल हो तो दो दिन के लिए आप चले जा दिन के लिए जैसे रा कर पा मा जब सामने पड़े
02:28:45:18 तो सब कु छोड़या कर वृति धारण करना चाहते हैं तो आप का आदर कीजिए अपने पिता का
02:29:45:15 आदर ब
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