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00:00:01:28 [घंटी की आवाज़] हम आपका YouTube में वीडियो देखते हैं गुरु जी। देखिए वो तो देखते हैं मगर इस समय कोई अगर हम लोगों ने लाइव स्ट्रीम रखी है वैचारिक मतभेद के निमित्त रखी है। इसको आप समझिए। मैं आपका आभारी हूं। आप आप समर्थक होंगे। हो सकता है अगर कोई मतभेद है तो आप बताइए तुरंत। हां मुझे मतभेद है। जैसे आप गीता को मानते हैं गुरु जी। यह पहली बात तो यह है कि मैं आपका गुरु नहीं हूं। यदि मतभेद है। इसको सही करिए। गुरु का अर्थ क्या है? ठीक है। गुरु का अर्थ है जो अंधकार को नाश करे। हम [गला साफ़ करने की आवाज़] तो आपका नाश नहीं किया ना मैंने बल्कि आप तो काउंटर कर रहे हो मेरी चीजों को। विरोध है। गुरु जी जब गुरु जी जब पहले इसको एक-एक करके चलेंगे। एक-एक करके चलेंगे। पहले इसको क्लियर करो। आपने गुरु जी कह दिया ये कह दिया वो मिथ्यावाद मत करो चलिए आप बताइए अपना हां मैं कहता हूं जैसे गीता में लिखा है चातुर वर्णम नया सिस्टम आप किसकी तरफ से आए हैं ये बताइए आप आप किसकी तरफ से आए हैं रामपाल नहीं नहीं रामपाल की तरफ से नहीं आए किसकी तरफ से आए हैं हम किस हम ऐसे आए हैं विषय क्या है हम
00:01:17:03 विषय यही है कि आप आप जो बोलते हैं कि जो हम लोग का वन व्यवस्था हम लोग जन्म से जातिवाद होता है। उसके वही है। देखिए पहली बात तो यह है एक गलतफहमी है परंपरा प्राप्त आचार्यों के बारे में कि वो मतलब ब्राह्मणवाद या क्षत्रियवाद ऐसा नहीं है। उसको समझिए सूत्रात्मक जन्म से नामांकन कर्म से चयन अगर कोई ब्राह्मण का जैसे यज्ञ कराना है तो हम किसी ब्राह्मण को ढूंढने जाएंगे। मगर यदि वह ब्राह्मण मदिरापान करता होगा, मांसाहार करता होगा तो उसको त्याग भी कर देंगे, फिर भी कर देंगे। फिर किसी शुद्ध ब्राह्मण को जो ब्राह्मण कर्म से भी हो, जन्म से भी हो उसको लेके आया जाएगा। पहली बात तो ये है। अब अगर हम मान ले कि जो ये वर्ण व्यवस्था है ये जो है कर्म से होती है। ठीक है? तो इसका लाभ क्या है? यह बताइए मुझे। इसका लाभ यही है क्या? जैसे कि देखिए हॉस्पिटल में डॉक्टर का बेटा भी क्लर्क बन सकता है। वहां पर क्लर्क का बेटा भी उसमें डॉक्टर बन सकता है। लेकिन अरे भाई हमने सुनो हमने कहा चार लोगों में ये ब्राह्मण है। ये क्षत्रिय है। कर्म के आधार पर। कर्म के
00:02:32:04 आधार पर कहा। ये ब्राह्मण है। ये क्षत्रिय वैश्य है, शूद्र है। इसका फायदा क्या है? ये क्यों बताया जा रहा है? इसलिए बताया जा रहा है कि हम लोग का जो समाज है वो व्यवस्थित से चले। यानी कि जब हमें ब्राह्मण की आवश्यकता हो तो हम ब्राह्मण को ढूंढ सके ना। हां ढूंढ सके ना। तो अगर हम कर्म के आधार पर ये वर्ण व्यवस्था को मान लेते हैं तो यह भी तो होगा कि हम ब्राह्मण को जब ढूंढने जाएंगे तो ब्राह्मण कहेगा भैया मैंने अपना वर्ण बदल लिया अभी-अभी। उसका क्या करें? तो वो तो क्षत्रिय बन जाएगा। मान लो युद्ध करने चला गया तो क्षत्रिय बन गया। इसका मतलब व्यवस्था कहां रही? लेने गए ब्राह्मण को 5 कि.मी. का सफर किया। वहां पे वो कह रहा है भैया मैं क्षत्रिय बन गया। भगवान श्री कृष्ण कह रहे हैं अर्जुन से यानी कि कर्म के आधार पर वर्ण कर्म के आधार पर प्राप्त होने वाली जो वर्ण व्यवस्था है, उसके द्वारा हम किसी को उसके धर्म के लिए, वर्णाश्रम धर्म के लिए बाध्य नहीं कर सकते। जबकि श्री कृष्ण वाध्य कर रहे हैं अर्जुन से तू क्षत्रिय है तेरा धर्म है रक्षा करना तो बाध्य कैसे कर सकते हैं क्योंकि वह तो कभी भी बदल सकता है वो कहेगा अर्जुन मैंने अभी-अभी जो है कथा कथा
00:03:47:08 करने का सोच लिया सत्यनारायण की कथा करने जा रहा हूं मुझे युद्ध नहीं लड़ना क्या करोगे फिर वर्ण बदल गया मगर वर्ण नहीं बदल सकता इसीलिए भगवान कहेंगे ऐसी बात के भाई तू जन्म से क्षत्रिय है तू इसको बदल नहीं सकता है लड़ तेरा काम है तो हम हम मैं पूछना चाहता हूं कि क्या उसका बेटा भी जब ब्राह्मण नहीं होगा क्या अगर वो क्षत्रिय का काम करता है तो उसका बेटा क्षत्रिय बन जाएगा। सुनो उसके अंदर उसके अंदर गुणवत्ता होगी क्षत्रिय बनने की मगर जब वो उन गुणवत्ताओं का यूज़ करेगा जीवन में तब उसे सेलेक्ट किया जाएगा। मैंने कहा ना नॉमिनेशन बनेगा तो क्षत्रिय बन जाएगा वो। अगर मान ले उसके अंदर क्षत्रिय क्षत्रिय गुण होगा तो क्षत्रिय बनेगा। अगर क्षत्रिय से जन्मा है और फिर उसने क्षत्रिय आचरण को ब्राह्मण लेकिन क्षत्रिय जैसा गुण है उसके अंदर वो हमेशा लड़ना चाहता तो क्षत्रिय बनेगा वो ब्राह्मण ही कहलाएगा देखिए आपातकालीन स्थितियों में तो हम लोग आलंबन ले सकते हैं वैकल्पिक ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र आदि का मगर जो परफेक्ट तरीका है कि अगर रोटवेलर है और हमें फैक्ट्री की रक्षा करवानी है और हमें रोटवेलर प्राप्त है जन्म से तो तो फिर हम किसी लेब्राडोर को रोटवेलर की ट्रेनिंग क्यों दें?
00:05:03:25 जब हमें ब्लड से प्राप्त है जिसके अंदर खून भी रोटवेलर का हो उसी को ट्रेनिंग दें। वो रक्षा करने वाली जबरदस्ती हम लेब्राडोर को रोटवेलर क्यों बनाएं? उसमें समय भी जाएगा। उसमें उसमें श्रम भी जाएगा और एट दी एंड हमें शुद्ध रोटवेलर तो कभी नहीं मिलेगा। जितना रोटवेलर जो खतरनाक होता है उतना खतरनाक लेब्राडोर को हम फिर भी नहीं बना पाएंगे। है ना? तो इसलिए वर्ण व्यवस्था अब जैसे अब जैसे हमने स्वीकार कर लिया कर्म से वर्ण व्यवस्था को स्वीकार कर लिया तो माना जाता है कि जो अंतर अंत वर्ण विवाह होगा तो उसमें वर्ण संकरता आती है। प्रज्ञा शक्ति गिरती जाती है। चेतन शक्ति तो क्या है कि ब्राह्मण ब्राह्मण मान लो कर्म से ही मानना है। ठीक है? तो ब्राह्मण की बिटिया का विवाह ब्राह्मण से हो। क्षत्रिय की बिटिया का विवाह क्षत्रिय से हो जिससे आने वाली जो नस्ल है उसकी प्रज्ञा शक्ति बची रहे। ठीक है? अब हम लोगों ने जब कर्म से माना है तो जब हम अपने घर की बिटिया का विवाह करने निकलेंगे तो हम क्या पैरामीटर सेट करें वहां पे? किसके यहां सबसे पहले जाएं? ये जो सबसे पहले जाने वाली बात है इसी के लिए जन्म से है बस और कुछ नहीं है। भाई हम रोड पर उतर के हर व्यक्ति के गुण और कर्म तो चेक
00:06:18:26 नहीं करेंगे। ए भाई रुक मेरी बहन से विवाह करेगा क्या? रुक जा भाई तेरे घर गुण कर्म बता। हम लोग अपने माइंड में एक पैरामीटर सेट करेंगे कि भाई कोई अच्छा घर हो। अब यह जो मैंने अच्छा घर हो कहा ना अच्छा घर हो। तो अब यहां पर सवाल ये बनता है कि जिसका अच्छा घर होगा क्या उसका बेटा अच्छा होगा क्या? जैसे आपने मुझसे कहा ब्राह्मण का बेटा ब्राह्मण नहीं। हम अच्छे घर से शुरुआत कर रहे हैं ढूंढाई करने की। उसी प्रकार से ब्राह्मण घर से शुरुआत करते हैं ढूंढने की। उसके बाद भी उसे चेक किया जाएगा कि वो ब्राह्मण वाले आचरण है कि नहीं। मगर शुरुआत कहां से करें? उसके लिए जन्म से वर्ण व्यवस्था है। हां उसके लिए शुरुआत से वर्ण व्यवस्था केवल केवल एक बन सकता है। केवल एक प्रारंभिक पैरामीटर लेने के लिए जन्म से वर्ण व्यवस्था स्वीकार किया जाता है कि प्रारंभ कहां से करें? कहीं ना कहीं से तो प्रारंभ करेंगे। अगर हमने कुछ भी कहा। हमने ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र नहीं कहा। ठीक है? तो हम ये कहेंगे कि भाई ऐसा घर देखें जहां पर दिन और रात भगवान की भक्ति होती हो। तो यह भी हमने क्या कह दिया कि जहां दिन और रात भगवान की भक्ति भक्ति होती होगी तो उससे सिद्ध नहीं होता कि उसका लड़का भी भगवान की भक्ति करता होगा। नहीं फिर भी हमें उसको चेक करना पड़ेगा। मगर प्रारंभिक पैरामीटर हमने लिया ना
00:07:34:02 तो उसी प्रारंभिक पैरामीटर पर ये ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र है। बस कि नॉमिनेशन कहां से आए? हम लोग अपनी बहन का विवाह करने के लिए सड़क पे तो नहीं उतर जाएंगे। चल मेरे साथ और हर हर व्यक्ति का कॉलर पकड़ के दिखा अपने गुणकर्म। दिखा अपने गुणकर्म। ये तो नहीं कर सकते। तो प्रारंभ कहां से करें कि भाई किसी ब्राह्मण का अगर ब्राह्मण से विवाह कराना है तो किसी ब्राह्मण के घर से प्रारंभ करें। फिर उनके बेटों से हां अगर ब्राह्मण का घर बचा ही नहीं तो आप आपातकालीन स्थिति हो गई। वैसे तो इस बारे इसके लिए भगवान ने कहा ना कि मैं क्यों आता हूं मैं क्यों आता हूं? की रक्षा के लिए आता हूं। धर्म की रक्षा के लिए आगे भी एक लाइन है। आगे भी एक लाइन है। अधर्म की नाश के लिए। साधु भक्तों के उद्धार के लिए साधु भक्त तो जब हम ये कह रहे हैं कि ब्राह्मण जब रहेंगे नहीं तो वो आना भगवान उस चीज को आने ही नहीं देते हैं उससे पहले ही वो आ जाता है कि यदा यदा धर्मस भवती भारत तो ये सब हमारी अपनी बात को रखने के लिए की जाने वाली कल्पनाएं मात्र है कि जब ब्राह्मण नहीं होंगे तो किससे करेंगे या क्षत्रिय नहीं होंगे तो किससे करेंगे जिस दिन ब्राह्मण नहीं होगा क्षत्रिय नहीं होगा वैश्य शूद्र नहीं होंगे परंपरा प्राप्त उस दिन धर्म नष्ट हो चुका होगा और भगवान धर्म धर्म को नष्ट होने नहीं देते हैं। जैसे ही नष्ट
00:08:49:10 होने के कगार पर आता है उससे पहले आ जाते हैं। तो यह ऐसा है। मेरा एक प्रश्न आया आपसे कि क्या शूद्र का बेटा ब्राह्मण बन सकता है? कई जन्मों के जन्मांतर के बाद उसी जन्म में भगवान बना सकते हैं। भगवान प्रकट हो जाए। भगवान कोई ऐसी मान लीजिए वो चारों वेदों ज्ञाता है तो वो ब्राह्मण कहलाएगा। वो सुदुल का बेटा मैंने आपको पूछा ना कि आप एक लेब्राडोर को रोटवेलर की ट्रेनिंग दे दो। बहुत बढ़िया। क्या वो ओरिजिनल रटलर बन जाएगा? नहीं बनेगा। बस उतना ही अंतर है। उतना सा ही अंतर है। दूसरी बात चलो हम चलो हमारे अंदर हमारे अंदर यह है कैपेसिटी कि हम उसको ट्रेनिंग देंगे और 99% उसको बना देंगे। ठीक? क्यों करें? जिस दिन रटवेलर मर जाए सारा का सारा नस्ल खत्म हो जाए तब करें ना। हमारा उद्देश्य है भगवान की भक्ति करना, भगवान को प्राप्त करना। हम अपनी एनर्जी कहां यूज कर रहे हैं? लेब्राडोर को रोडवेलर बना के छोड़ेंगे। और रवेर को ये वाल्मीकि जी शूद्र से दो ब्राह्मण बने। वाल्मीकि जी के जो पिता हैं उसका वर्णन पढ़ लीजिएगा। वाल्मीकि रामायण जो गीता से प्रकाशित है। उसी को पढ़ लीजिएगा। उसी में बताया गया है। उसमें रेफरेंस दिया
00:10:04:14 गया है मनुस्मृति के आधार पर। उनके पिता जो थे ब्राह्मण थे। उनके बारे में गलत धारणा फैलाई गई है। लेकिन ये तो पक्का है ना कि उन्होंने उंगली डाकू बन गए थे। हां हो सकता है। ये सब वस्तुनिष्ठ प्रश्न है। इस पर तो आगे बात हो सकती है। ठीक है। डाकू जब बने तो वो शूद्र कहलाएंगे कि क्या आप ये बताओ मैं आपसे पूछता हूं। मैं आपको बताता हूं। मैं आपको बताता हूं। पतित हुए उन्होंने पश्चाताप किया। ये सब चीजें हैं हमारे कि मान लो एक ब्राह्मण जो है वो शराब पी ले तो उसमें बताया गया कि वो जलती हुई सलाख का आलिंगन करे अगर तो ऐसे जो दोष हो जाते हैं तो उसके लिए पश्चाताप है। उसके बाद बहुत सारी प्रैक्टिसिंग है। उसके बाद वो दोबारा अपनी जगह वापस आता है। जो लोग ये कहते हैं कि भैया जन्म से सब लोग शूद्र होते हैं। जन्म ना जाते शूद्रा का बहुत उपयोग किया जाता है। उसका वास्तविक अर्थ है कि शद्रवत होते हैं। शूद्र नहीं होते हैं। शद्रवत होते हैं। शद्रवत होते हैं। अच्छा अब बात यह आती है कि कुछ लोग कहते हैं कि भाई कुछ कर्म ऐसे हैं जिनको करके वो जो शूद्र है वो ब्राह्मण बन जाएगा। क्षत्रिय है जो ब्राह्मण बन जाएगा। वो कौन से कर्म है एक्सजेक्टली और कहां लिखे हैं? और कौन घोषित करेगा? और
00:11:19:18 कौन घोषित करेगा? कौन घोषित करेगा कि ये बन गया? ये भी बात है। कौन घोषित करेगा? और बहुत सारी उसमें चीजें हैं। मनुष्य के जीवन का उद्देश्य कहीं पर ये लिखा हो कि तुम्हारे जीवन का उद्देश्य ब्राह्मण बनना। अगर तुम कहीं भी जन्म लिए हो ब्राह्मण बनना, क्षत्रिय बनना, शूद्र बनना ये तुम्हारे जीवन का उद्देश्य है तो आप दिखाइए लाके। अथातो धर्म जिज्ञासा, अथातो ब्रह्म जिज्ञासा आपके जीवन का उद्देश्य नहीं है। ब्राह्मण कहलाना। यह आपके मन में डाला गया है। इंजेक्ट किया गया है कि तुमको वेद पढ़ोगे डायरेक्ट जिस रूप में वेद विद्यमान है उनकी रिचाएं हैं। उसको जब पढ़ोगे वही तुम्हारे जीवन का उद्देश्य है। भगवत भक्ति को भूल जाओ। उसी में सारी लड़ाई लगा दो।
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वर्ण व्यवस्था जन्म या कर्म
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