⬜ Not used yet · 00:00:02:16 – 00:19:31:18 (19:29)
00:00:02:16 जय श्री राम सभी को। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे। और अ आज हमारे साथ इस से एक स्कॉन के एक फॉलोअ हैं। देवेश जी आप अपना कैमरा ऑन कर लीजिए। थोड़ा सा मैं मूल विषय पर चर्चा जो स्टार्ट हो उससे पहले कुछ बता दूं। आज मेरे संज्ञान में एक बात आई थी कि अवतार विरोधियों का यह कहना है कि अवतार यदि अ नित्य स्वरूप नहीं है हम है ना तो जो है उसको फिर ईश्वर क्यों माना जाए? उसमें कई सारे प्रश्न है। पहली बात यह है कि आप जब तक तत्वत जानते नहीं है ईश्वर को तब तक उसको आप यह नहीं सिद्ध कर सकते कि वो नष्ट होता है। और व्यवहार में ईश्वर जो है अविनाशी है। जो अवतार है वो अविनाशी है। और अविनाशी इसलिए है क्योंकि अगर वो वो अपनी ओर से क्या कर रहे हैं
00:01:17:18 केवल अपने स्वरूप को केवल प्रकट और अप्रकट कर रहे हैं। यानी कि अगर वो ये लीला भी दिखा रहे हैं कि मैं नष्ट हो रहा है मेरा शरीर तो उसके बाद वो अपनी ओर से क्या कर रहे हैं? केवल अप्रकट हुआ और प्रकट हुआ। केवल वह इतना कर रहे हैं तो व्यवहार में वह अविनाशी है और क्योंकि वह जो तत्व है जिस जो तत्व जो आपके सामने प्रकट हुआ है क्योंकि वो तत्व वही तत्व है जो प्राप्तव्य है आपका जो व्यवहार में ना आ सकने वाला परम तत्व है। इस कारण से जो है उसे ईश्वर का अवतार कहा गया है। ये तो नहीं कहा गया कि मोक्ष के समय पे जो ईश्वर प्राप्त होता है उसका वही स्वरूप है। अब दूसरी बात है कि यदि वो वो वाला स्वरूप नहीं है अल्टीमेट वाला तो फिर उसको ईश्वर भी माना जाए। तो जो अवतार का विरोध करते हैं यद्यपि मैंने बहुत सारे तर्क कल की वीडियो में दिए थे जो अवतार का विरोध करते हैं है ना तो वो इस बारे में बात नहीं करते कि निर्गुण सगुण कैसे हुआ जो एक रस है वो कम ज्यादा कैसे हुआ इसमें बात नहीं करेंगे क्योंकि बात करेंगे अगर इसमें खुल के तो उनको अवतार वही पर स्वीकार कर लेना पड़ेगा सृष्टि की रचना ही नहीं हो सकती जो ईश्वर किसी भौतिक
00:02:32:24 पदार्थ के अंदर और बाहर दोनों है। एक रस है। बराबर रूप से विद्यमान है। वह जब धक्का लगाएगा शक्ति अपनी लगाएगा तो अगर वो एक रस है तो अंदर और बाहर दोनों जगह शक्ति लगेगी तो कुछ होगा ही नहीं। उसको निश्चित करना होगा कि बाहर से शक्ति लगे जिससे वो सरके अंदर से ना लगे। तो कुछ जब तक ईश्वर सगुण नहीं होगा निर्गुण से एक रस से भेद वाला नहीं होगा क्रियाशील होने के रूप में तब तक सृष्टि की रचना ही नहीं हो सकती तो वहीं पर अवतार आपको मान लेना पड़ेगा। तो जब आप वहीं पर अवतार मान लेंगे हां तो आप यह कहेंगे कि ईश्वर ने नहीं बनाई सृष्टि क्योंकि ईश्वर तो निर्गुण है। ईश्वर तो एक रस है। फिर ये अलग-अलग कैसे हो रहा है? कहीं पे कहीं पे ज्यादा पावर के रूप में ईश्वर है, कहीं पे कम पावर के रूप में ईश्वर है। यह वाला बहुत महत्वपूर्ण प्रसंग है जिसमें इस बात का कहीं पर भी इस पर खुल के बात ही नहीं की जाती है अवतार विरोधियों के द्वारा तो करनी चाहिए उन्हें। है ना? अब वो यह कह देते कि अगर वो यह कह देते वो वहां पर इच्छा है, शक्ति नहीं है ईश्वर की तो फिर ईश्वर को सर्वशक्तिमान कहना बंद करो। शक्तिमान कहना बंद करो। केवल यह कहो वो इच्छावान है। फिर शक्तिमान का आप क्यों कहते हैं? कि ईश्वर शक्तिमान भी है। अगर शक्तिमान है तो वहां शक्ति
00:03:47:27 यूज़ हो रही है। हम तो शक्ति यूज़ होने के रूप में ईश्वर वहां पर कम और ज्यादा हो रहा है शक्ति के रूप में। और जब ईश्वर कम और ज्यादा हो रहा है तो वो एक रस नहीं है। एक रस नहीं है तो फिर उसको ईश्वर मत मानो। क्योंकि ईश्वर का जो अल्टीमेट रूप है वो एक रस है। नित्य शाश्वत शाश्वत जो परिवर्तनशील नहीं है और ये तो परिवर्तनशील हो रहा है। अपने हिसाब से कहीं ज्यादा है कहीं कम है। तो जो परिवर्तनशील हो पा रहा है उसको आप फिर एक रस से क्यों जोड़ रहे हैं? तो यह मानना पड़ेगा कि उसको आप ईश्वर इसीलिए मानते हैं सगुण निराकार को क्योंकि निर्गुण निराकार ही सगुण निराकार के रूप में अवतरित होता है। तो इसीलिए हम भी सगुण साकार को ईश्वर इसलिए मानते हैं क्योंकि निर्गुण निराकार ही पहले सगुण निराकार और फिर जो है सगुण साकार के रूप में अवतरित होता है। तो इस बारे में जब आप सोचेंगे ना यह ठीक कैसे है? जैसे कि मैंने कहा कि भाई यह मैंने यह ग्रंथ उठाया। ठीक है? अब मैं कहूं अब कोई आके कहने लगे ये शिवश ने थोड़ी ना उठाया। ये तो उसके एक हाथ ने उठाया। तो शक्ति शक्तिमान को वो नहीं करती है। क्या कहते हैं? द्वैत भाव में नहीं
00:05:02:28 डालती है। मेरे हाथ से मैंने ही उठाया है। ये कहना पड़ेगा ना। उसी प्रकार से सगुण निराकार रूप का उपयोग करते हुए ईश्वर ने ही सृष्टि की है। उसी प्रकार से सगुण साकार रूप का क्या कहते हैं? सगुण साकार रूप का आलंबन लेते हुए ईश्वर ने ही स्वयं को अभिव्यक्त किया है। यह मानना पड़े। ठीक है? और दूसरी एक बात और है कि अभी भी मैंने कुछ चीजें जानी है कि लक्षण इत्यादि पर फिर से बात हो रही है। हमारी जो कल की लाइव हुई है सनातन शंकर चैनल पर उस लाइव में अभी वह लक्षण वाली बातों का यथोचित वैसे मैंने जवाब दिया है फिर भी और अच्छे से अभी वो पॉइंट आया ही नहीं लक्षण का जो शुरू के पांच पॉइंट पर ही हमारी बात हुई बाकी पांच पॉइंट पर बात ही नहीं हुई तो जिस पर हमने अभी बात ही नहीं कर पाए उन बातों का भी जो है लक्षण पर दोबारा से बात करने का वो कोई औचित्य दिखाई नहीं देता है बाकी अभी हम उस उन बातों को पूरा कर लेंगे ठीक है है ना? चलिए अब जो है अब हम ले लेते हैं इनको
00:06:08:21 जो अवतार के पक्षधर हैं। परंतु देवेश जी आपका आपका कैमरा ऑन नहीं है। आप अपना कैमरा ऑन करें। कृपया करके कृपा करके। कृपया अपना कैमरा ऑन करें। कृपा करके अपना कैमरा ऑन करें। इनका ऑप्शन नहीं आ रहा इनको ऊपर लेने वाला देवेश प्रमाणिक जी का देवेश जी
00:06:42:26 हम आप समझ रहे हैं ना कि सबसे पहली बात कि तत्व की दृष्टि से वो शाश्वत है। जिस तत्व से वो अवतार बना है वो जो पदार्थ है वो शाश्वत पदार्थ है। इसलिए उसे ईश्वर कहते हैं। ठीक है। अब बात यह है कि अगर क्योंकि वह बन रहा है तो बना तो वहां पर भी जहां निर्गुण से सगुण हो गया। हम देवेश जी कैमरा ऑन करें। दूसरी बात अगर आप जब तक आप वो तात्विक दुनिया में नहीं पहुंचते यानी कि ईश्वर को स्वीकार नहीं करते। ईश्वर को स्वीकार करने के लिए ईश्वर का सर्वशक्तिमान वाला जो रूप है वह होना आवश्यक है और सर्वशक्तिमत्ता के लिए कम से कम अवतार का तो विरोध नहीं किया जा सकता। इतना तो मानना ही पड़ेगा। हां आप अपने ब्राउज़र की सेटिंग में जाइए। ब्राउज़र में ऊपर थ्री डॉट्स आ रहे होंगे। उसमें टच करिए। नीचे सेटिंग्स पे जाइए। और सेटिंग्स में जाने के बाद कुछ ऑशंस आएंगे। एक ऑप्शन
00:07:58:04 होगा सेटिंग में जाने के बाद क्या ऑप्शन होगा देखता हूं। साइट सेटिंग्स जो देवेश प्रमाणिक जी है उनका कहना है कि उनका ब्राउज़र अलऊ नहीं कर रहा है तो देवेश प्रमाणिक जी अगर आप सुन पा रहे हैं मेरी बात है ना तो आप ब्राउज़र जब आपका ये पेज जहां पर ओपन है वहां पर ऊपर थ्री डॉट्स हैं थ्री डॉट्स को टच करिए उसमें सेटिंग्स में जाइए और सेटिंग में जाकर उसमें एक ऑप्शन आएगा नीचे साइट सेटिंग्स उसमें जाइए। ठीक है? तो आप इसमें खुलकर बात करें जो अवतार का विरोध कर रहे हैं कि भाई सगुण साकार कैसे हो रहा है? निर्गुण निराकार सगुण निराकार कैसे हो रहा है? वो उस पर जरा खुलकर बात करिए। कैसे वह जो एक रस है वह जो है कम ज्यादा क्योंकि एक रस अगर कम ज्यादा हो जाएगा तो उसके रूप में फ्लेक्सिबिलिटी आ गई कम अभाव आ गया कि कहीं है कहीं नहीं है कहीं कम ज्यादा परिवर्तनशील हो गया शाश्वत नहीं रहा तो शाश्वत गुण हट गया तो इसका
00:09:13:06 मतलब ईश्वर ने सृष्टि नहीं बनाई ये मानोगे क्योंकि तत्व से सगुण निराकार भी वही नित्य ईश्वर नित ईश्वर का स्वरूप है इसलिए वो कहते हैं कि ईश्वर ने ही सृष्टि बनाई क्योंकि तत्व से हाथ भी मेरा ही काम कर रहा है। मेरा ही एक अभिवंजक संस्थान है। मेरा ही एक कार्य करने वाला एक वो है। इसलिए माना जाएगा कि शिवश नारायण द्विवेदी नहीं बुक उठाई। ठीक है? और यह बातें आपको सोचनी चाहिए। दूसरी बात यदि कोई व्यक्ति जिसके समक्ष ईश्वर की सर्वशक्तिमत्ता सिद्ध नहीं हुई क्योंकि अवतार में बाधित है तो उसके समक्ष जब ईश्वर सर्वशक्तिमान सिद्ध नहीं हुआ तो उसके लिए पारमार्थिक विषय का वही नहीं है। तो जब परमार्थ के द्वारा हम तत्वत ये जान नहीं पा रहे हैं कि इस रूप का सृजन हो रहा है। है ना? सृजन हुआ तो इसका मतलब वो शाश्वत नहीं है। तो इस रूप का क्योंकि सृजन हो रहा है। तो अ
00:10:14:28 अगर वह यह बात हम जान नहीं सकते जब तक हम ईश्वर को ईश्वर स्वीकार नहीं कर ले तो ईश्वर को ईश्वर स्वीकार ना करने से पहले तक ईश्वर को क्या है वो तो गायब होगा प्रकट हो जाएगा इसका मतलब वो नष्ट नहीं हुआ उसने अपने आप को केवल प्रकट और अप्रकट किया जितनी बार कहेंगे उतनी बार आ जाएगा जिस कल्प में कहेंगे उस कल्प में आ जाएगा जिस युग में कहेंगे उस युग में आ जाएगा तो उसका नाश कहां से हो रहा है कैसे सिद्ध करोगे वो अविनाशी नहीं है और तत्व की दुनिया में तब जा पाओगे जब उसकी प्रवक्ता स्वीकार कर लो हम तो ऐसे चलना पड़ता है।
00:10:58:12 कौन कह रहा है चर्चा करूंगा। इस विषय पर मैं आपसे कौन से विषय पर थोड़ा क्लियर करें? अद्वैत वेदांत जी कौन से विषय पर विरोध रखते हैं? देवेश जी आ नहीं रहे हैं। फिलहाल अद्वैत वेदांत जी का कहना है कि इस अवतार लेने वाले नहीं इस अवतार लेने वाले विषय में तो ठीक है मगर आपका पक्ष क्या है जो मैं जो मेरे विरुद्ध है अरे भाई डायरेक्ट नहीं करता है अद्वैत जी
00:12:06:26 डायरेक्ट नहीं करता है वही तो मैं कह रहा हूं कि पहले वह अवतार लेता है वो अपना नित्यत्व वाला रूप छोड़ता नहीं है कि उसी में उसने परिवर्तन कर लिया वो अपने उस स्वरूप को रखते हुए भी अवतरित होता है। एक अपनी माया के आलंबन द्वारा। वही तो मैं कह रहा हूं। वहां पर उसको अवतार लेना होता है। क्योंकि अगर वो उसी रूप में ही परिवर्तित कर लेगा तो उतनी वो नित्यत्व कहां रह गया? फिर परिवर्तन आ गया ना। तो माया के आलंबन से वो एक और रूप लेता है। तो माया के द्वारा एक डायमेंशन एक तरीके से तैयार की जाती है। उस डायमेंशन में वह अवतरित होता है। सगुण निराकार के रूप में।
00:12:53:13 जी जय श्री राम हरि बोल प्रभु हरी बोल आ रही है आवाज मेरी हां आ रही है ओके भाई आप कहां से हैं क्या नाम है आपका ब्रो मेरा नाम है देवेश मैं पश्चिम बंगाल हसीना मैं आपको काफी फॉलो करता हूं आप अच्छा वीडियोस बनाते तो काफी मतलब सनातन धर्म को लेकर के जैसे एक फ्लैग बियरर का आप अच्छा काम कर रहे हो आपने जितना कुछ शर्ट किया यार मेरा ना आपसे एक ये था प्रभु इफ यू डोंट माइंड आप इस पे भी एक बार कर सकते हो जैसे मेरे पेरेंट्स कभी-कभी ये विजिट कर देते हैं राधास्वामी अगर आप सुनाओ राधा वो लिस्ट बहुत लंबी है लिस्ट बहुत लंबी है जहां पहली बात तो दो तरीके से काम करते हैं एक तो सुनिश्चित जो गोल है कुछ वो छांट रखे हैं फिर दूसरी बात कि चलते हुए यदि कुछ अधर्म दिख जाए तो उसको भी छोड़ना नहीं है। यह वाली बात है। और सुनिश्चित बोल तो है कि रावण का यदि वध किया जाएगा तो रावण के साथसाथ बहुत सारे छोटे-छोटे राक्षसों का वध हो जाएगा। हां एक्सजेक्टली नहीं सही पॉइंट है तो वही आप काफी मतलब आप ये करते हो बोलते हो तो मुझे लगा कि
00:14:08:28 वहां पर भी थोड़ा हमें वॉइस रे करना पड़ेगा क्योंकि उन्होंने अभी रिसेंटली एकदम अपना ही सिस्टम बना दिया वैदिक कल्चर एकदम हटा ही दिया है अपना संडे मंडे भी खुद का निकाल लिया है व्रत आदि तो खुद का कर ही रहे हैं खैर तो बहुत ज्यादा हरीबो हाल है वहां का मैं चेक कर रहा था और वो लोग मतलब फोर्सफुली मतलब पेरेंट्स को भी कॉल करके बोलते हैं आप आते नहीं हो आओ आया करो करके वरना आपका ऐसा वैसा हो जाएगा तो वही राधास्वामी और यह लोग जो है अच्छा तो जब आपसे सहमत है और हमारे समर्थक है तो फिर किस बात का लेकर के विरोध है? नहीं एक्चुअली क्या है कि जैसे कुछ कुछ पॉइंट्स थे जैसे अगर देखा जाए क्योंकि मैं पर्सनली इस आइडियोलॉजी को थोड़ा सा अपोल्ड करता हूं। मैं उनसे ज्यादा सहमति रखता हूं और मे बी आप जैसे निराकार में बिलीव करते हो हम जैसे साकार ब्रह्म में जैसे मान देना तो ये सब आई थिंक थोड़ा सा किसने कहा कि हम निराकार में ही बिलीव करते हैं। निराकार प्राप्तव्य है और साकार हमारा व्यवहार है। भक्ति हम भी साकार की ही करते हैं। ये किसने कहा आपको? वो निराकार को ही मानते हैं। निराकार प्राप्तव्य है। आप आप मुझे एक बात बताओ कि मान लिया जाए कि भगवान जो है अंत में भी भगवान जो है साकार ही मिलेंगे। हम
00:15:24:16 ठीक है। तो आप ये बताओ कि भगवान को देखने मात्र से आप मोक्ष को प्राप्त हो जाएंगे या वो क्या उनको देखने से आपको क्या प्राप्त होगा? जिसके लिए आप मोक्ष के लिए कार्य कर रहे हैं। क्या प्राप्त होगा आपको? प्रभु को देख के अगर बोला जाए अगर भागवतम का अगर उससे मतलब हम कोरिलेट करें तो जैसे ध्रुव महाराज को दिखे थे तो उन्होंने मतलब उनको सर्व ज्ञान सब खुद ही आ गया तो फिर वो श्लोक देखिए अभी अभी है ना स्वतंत्र रूप से बातें करी क्योंकि शास्त्र की बात आती है ना तो शास्त्र में फिर ये दिक्कत आएगी कि आपने अपना अर्थ निकाल रखा है अलग तो एक वो व्याख्या फिर अलग बदल जाएगी परंपरा बचाना पड़ेगा हमको उसको चेक करना पड़ेगा किसका अर्थ माना जाए तो अभी इसीलिए मैंने कहा है कि अभी स्वतंत्र रूप से एक न्यूट्रल सवाल सवाल है मेरा कि जैसे आपने कहा कि जो अंत में भी भगवान का जो व्यवहार में ना आ सकने वाला स्वरूप है हमारा कहना है कि वो प्राप्त होगा जो अभी जो इंद्रियों का जो अभी हमारी इंद्रियां इनका विषय नहीं है ऐसा स्वरूप वो प्राप्त होगा ठीक है जो हमारी इंद्रियों का विषय नहीं है आपका कहना है कि जो भगवान का अंतिम स्वरूप है वो भी ऐसा ही यही स्वरूप है इंद्रियों का जो विषय ठीक है तो बात ये है कि सुनिए तो द्वैत के अनुसार जैसे जो
00:16:39:20 आपने आपने कहा कि भाई ठीक है आपने कहा कि जो है हम भगवान का अंतिम स्वरूप जो है प्राप्त वाला व्यवहार में ना आ सकने वाला नहीं व्यवहारिक स्वरूप ही है तो बात ये है कि उसको देख के भी आपको कुछ ना कुछ प्राप्त होगा ना वहां पर क्या प्राप्त होगा जिसके कारण आप उसको देख के संतुष्ट होंगे वो क्या होगा आनंद आनंदम बुद्धि वर्धनम आनंद आनंद प्राप्त होगा ना भगवान को देख के तो इसका मतलब भगवान आपके साधन मात्र है आनंद के नहीं साधन है भगवान हां साधन है जी मतलब अपने लिए कर रहे हैं आप भक्ति नहीं हमारे साध्य आई थिंक उसको साध्य बोलेंगे ना कि साध्य है और जो आपकी भक्ति आपकी भक्ति सिद्ध कहां हो रही है वहां आप तो अपने लिए कर रहे हैं भगवान तो एक भगवान एक वो है क्या कहते हैं इंस्ट्रूमेंट जिनको आप यूज़ कर रहे हैं आपकी भक्ति का सिद्धि प्रेम कहां सिद्ध हुआ? भगवान तो एक इंस्ट्रूमेंट सिद्ध हुए। हमने क्या किया है कि आप जिसको कह रहे हैं ना सतचित आनंद प्राप्त होगा भगवान को देखकर। अभी मैं वही एंडिंग मान रहा हूं आपकी वाली। तो हमारे यहां क्या है कि हमने इस सतचित आनंद को भी
00:17:54:26 भगवान कहा है। ये अल्टीमेट रूप है। हमने इसको अलग नहीं कहा। जिससे कि हमारी जो भक्ति है वह सिद्ध हो पा रही है। वरना भगवान तो एक इंस्ट्रूमेंट हो गए कि भैया मैंने उसको देखा इसलिए मुझे सुख प्राप्त हुआ। तो हमने जो यह सुख हमने जो यह सुख प्राप्त हुआ है यह जो सुख प्राप्त हुआ है भगवान को देखकर ही जो सुख प्राप्त हुआ है इसको भगवान का अल्टीमेट स्वरूप कहा है सच्चिदानंद को जो आपको प्राप्त हो रहा है जिससे आप एक ही भूत हो के मोक्ष को फील कर पाए अनुभव ले पाए कहा गया है ना विष्णु पुराण में जगह जगह पे भगवान को ज्ञान स्वरूप कहा गया है ना ज्ञान स्वरूप है ना? तो भगवान का जो व्यवहार में आ सकने वाला रूप वो सामने अगर उसको एंडिंग में माने तो भी वहां पर उसको देख के आपको ज्ञान प्राप्त हुआ सुखी होने का। हुआ ना वो ज्ञान ईश्वर है। ईश्वर का अंतिम स्वरूप वो है। हमारे उसमें हमने उसको नकारा नहीं है। मगर अल्टीमेट जो अंतिम स्वरूप है वो इसको माना है। मगर ये मिला कैसे? मिला कैसे कि उसको ही देख के मिला। हमने उसको नकारा कहां? उसके ही जरिए
00:19:10:00 हम यहां तक पहुंचे। उसके इस रूप को हमने स्वीकार। अगर हम इसको भगवान नहीं कहेंगे जो हमें मिल रहा है तो हम स्वार्थी हो जाएंगे। जो भक्ति का हम ढिंढोरा पीट सकते हैं वो नहीं पीट सकते। फिर स्वार्थी कहलाएंगे। अपने लिए कार्य कर। इसका पता नहीं किसी शास्त्र का वचन कोट करते हैं। पूरी शंकराचार्य जी। जगतगुरु भगवान कहते हैं
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→ Used in: A · Video ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं केवल इच्छावान है। भयभीत अलंकार समाज कॉल रिकॉर्डिंग भाग २ at 2:56 ↗
00:19:31:18 कि अन्यों में प्रीति आत्मा के लिए है। आत्मा में प्रीति अन्यों के लिए नहीं
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00:19:37:13 है। अन्यों में प्रीति आत्मा के लिए है। आत्मा में प्रीति अन्यों के लिए नहीं है। इसको जब खोलेंगे आप तो आप अगर अपनी बिटिया को खुश देखना चाहते हैं तो इसलिए क्योंकि आपकी आत्मा को उससे प्रसन्नता हो रही है। तो देखने में तो ये लग रहा है कि आप परोपकार की भावना से कर रहे हैं। अगर उसमें खुशी अंत तो गत स्वयं को दे रहे हैं ना इसी प्रकार से ये जो पुत्री को खुशी देख के मतलब मुझे खुशी हो रहा है मतलब आत्मा को खुशी हो रहा है आपने आत्मा को बोला ना पर आत्मा तो एक्चुअली देखा जाए तो उसका जो कॉन्स्टिटुएंट प्रॉपर्टी है तो सच्चित आनंदी हुआ ये जो हमारा सूक्ष्म शरीर है मन बुद्धि मिथ्या अहंकार का आई थिंक हम उस लेवल पे कहीं ना कहीं क्योंकि आत्मा का तो प्रॉपर्टी वो तो मम जी लोक जीवा भूता सनातन वो तो भगवान का अंश निकला है तो वो तो कभी साइड मगर वो मगर वो भटक गई है ना बंद हो गई ना नहीं तो फिर अंतर क्या रहा फिर उसको पाना क्या है जब वो सच्चिदानंद है ही है तो फिर उसको पाना क्या शेष है पाना शेष है कि वो जो वो जो बद्धता का अनुभव कर रही है उसको दोबारा से स्वतंत्र का अनुभव करना है वो वो करना है और ये बद्धता का अनुभव क्या है कि भैया ये है
00:20:52:16 ये नहीं है वो है मैं यहां नहीं हूं मैं वहां नहीं हूं मैं ये हूं मैं वो हूं जो बाधित सुख है बाधित सुख है वो बाध्यता का ही वो है। तो पहले जो यह वाली बात है ना कि हम निराकार को ही मानते हैं। आप साकार को मानते हैं। इसको आप सही करिए कि हम निराकार साकार दोनों को मानते हैं। बस भगवान का जो प्राप्त होने वाला स्वरूप है जिसको हम प्राप्त कर रहे हैं। वहां पर आपने भगवान को अलग कर दिया है। वही है भगवान सामने है। और हमने क्या किया है कि जो भगवान से हमें प्राप्त हो रहा है उसको भी हमने भगवान कहा है। ज्ञान स्वरूप ठीक है। उसको हमने अल्टीमेट कहा और अब क्या है कि उसको ज्ञान स्वरूप यदि नहीं कहेंगे तो कहीं ना कहीं जो हमारा प्रेम है भगवान से सिद्ध नहीं होगा। फिर ठीक है अभी इतना अभी के लिए इतना जान लीजिए क्योंकि ये हमारा मुख्य विषय नहीं है। अभी के लिए इतना समझ लीजिए कि हमने उस अंतिम जो प्राप्त होने वाली चीज है प्राप्तव्य है जो जो हमारी वाणी का व्यवहार का विषय ही नहीं है। मगर भगवान को देख के हमको वो होगा। ठीक है? वो फील होगा। उस फील को हमने भगवान कहा है। उस फील को हमने भगवान का अल्टीमेट स्वरूप कहा है। ठीक है? चलिए और अब आती है बात कि स्कॉन विरोध
00:22:07:22 क्यों? ठीक है। यही प्रश्न है ना आपका। हां चलिए। ठीक है। तो देखिए हमारा वैसे जो ब्रह्म के स्वरूप की बात है कि भाई ब्रह्म के स्वरूप की बात हम क्यों करते हैं? इसलिए करते हैं जैसे यह सवाल कई बार आता है कि अन्य आचार परंपराओं का ब्रह्म स्वरूप भी तो अलग है। मगर जो ब्रह्म स्वरूप की बात होती है उसमें यह बात होती है कि ब्रह्म के स्वरूप का जो वर्णन है वो आपके परमार्थ का हेतु है। आपके परमार्थ में सहायक है। जैसे कि आपको मुक्ति मिलेगी कि नहीं मिलेगी या कौन सी मुक्ति मिलेगी? परम स्वतंत्र मोक्ष मिलेगा कि नहीं मिलेगा? ठीक है? वो इसमें सहायक है। तो उसमें हमें क्योंकि हमारा जो समाज है व्यवहार उससे प्रभावित नहीं है कि आपको मुक्ति मिलेगी कि नहीं मिलेगी या कोई व्यक्ति मुक्ति को अंतत गतवा प्राप्त कर पा रहा है कैवल्य मोक्ष को प्राप्त कर पा रहा है कि नहीं कर पा रहा है तो उसमें हमारे को मतलब ऐसा नहीं है कि हमें जो है योजनाबद्ध तरीके से वहां पर जो है अड़ंगा डालने की आवश्यकता है। हम ओके परंतु होता हमें अड़ंगा डालने की आवश्यकता कब होती है?
00:23:23:18 जब कोई धार्मिक व्याख्या को बदल देता है तो जितनी भी प्रामाणिक परंपराएं हैं जैसे गड़िया वैष्णव परंपराएं प्रामाणिक रूप से जो चल रही है ठीक है या फिर मधवाचार परंपरा या फिर जितनी भी परंपराएं हैं उन सबका जो मोटे मोटे तौर पर जो धर्म है वो हमसे अलग नहीं है ना उनका हमसे अलग है ना हमारा उनसे अलग है मूर्ति पूजक दोनों है मूर्ति पूजक दोनों है वर्णाश्रमी दोनों है स्त्री का यज्ञपवि दोनों नहीं कराते यह सारी चीजें कॉमन आपको मिलंगी। ठीक है? अब वहीं पर ब्रह अब क्या हुआ कि जब धर्म हमारा छेड़छिड़ नहीं रहा है। धर्म से क्या दिक्कत आती है? धर्म रक्षकों को क्यों बोलना पड़ता है? ब्रह्म के बारे में क्यों बोलना पड़ता है? धर्म धर्म से जब भेद आता है ना जैसे मान लीजिए कि हमने कहा कि भाई अ ये बहन से विवाह नहीं करना चाहिए। ये धर्म है। ठीक है? अब कोई यह कहने लगा कि नहीं भाई बहन से विवाह भी कर लो। ठीक है? तो हमने उसके भगवान की बात क्यों की? क्योंकि भगवान के द्वारा निर्गत होने वाले सिद्धांत ही धर्म है। जो उन्होंने कहा है शास्त्रों के द्वारा श्रुति स्मृति मम आज्ञा।
00:24:40:02 ठीक है? आपकी पिक्चर चिपक रही है क्या? इंटरनेट नहीं है आपके यहां? नहीं नहीं नहीं मुझे बराबर आ रहा है एक सेकंड आ रही है आवाज हेलो हरी बोल हां आ रही है आवाज आ रही है मगर थोड़ा सा आपका जो है ना अभी चिपक रहा था अब ठीक आ रही है तो हमें क्यों बोलना पड़ता है कि जब धर्म व्यवहार व्यवहार में गलत नियम प्रतिपादित होने लगते हैं, गलत चीजें फैलाई जाती हैं तो हम सीधे उसके ब्रह्म पर बात करते हैं। अगर हमने ब्रह्म को अगर हमने ईश्वर की व्याख्या को ही गलत सिद्ध कर दिया तो उसके नाम पर आने वाली जो आपकी व्यवहारिक व्याख्या है वो स्वतः गलत हो जाएगी। क्योंकि हम आपकी व्यवहारिक व्याख्या को कितना भी काउंटर करते रहेंगे मगर आप वहां पर यह कह सकते हो कि भाई ईश्वर से आ रही तो हम तो यही मानेंगे। हम हम समझ रहा हूं इसलिए ईश्वर के विषय में उन तंत्रों का उन संस्थाओं का विरोध
00:25:55:13 करना होता है जो संस्थाएं धार्मिक विषयों में परंपरा से चले आ रहा जो धर्म है धर्म ब्रह्म की व्याख्या नहीं जो परंपरा से चली आ रही धर्म की व्याख्या है उसमें हेरफेर करते उन तंत्रों का विरोध करना पड़ता है। ठीक है? एक बात तो ये हो गई क्लियर। अब धर्म की व्याख्या इस ने क्या गलत की है? ठीक है? तो दो मोटे-मोटे पॉइंट्स हैं। ठीक है? पहला पॉइंट है कि आप जो है कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर और बाइबल के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर इसको हमारे सनातन कृष्ण के साथ क्यों जोड़ते हो? यह जो मायावादी कहने वाली बात है कि भाई आपको मायावादी कहा गया है। यह सब तात्विक वो ब्रह्म वाले विषय के जो अंतर है वह है। अगर आपका धर्म धर्म है आपका जो तात्विक विषय है उससे छेड़खानी करने की हमें कोई आवश्यकता नहीं है। अब जैसे गौ वैष्णव परंपरा है प्रामाणिक रूप से जो धर्म चला आ रहा है परंपरा से वही धर्म का पालन कर रही है गड वैष्णव। ठीक है? तो हम कभी नहीं कहने जाते कि भैया वहां पर जो है मोक्ष क्या है या ईश्वर की तत्व की विवेचना क्या है? जी है। मगर जब आपका धर्म आप हेरफेर करते हैं जैसे गडिया वैष्णव संप्रदाय
00:27:11:01 के कुछ कई प्रमाणिक आचार्य एक से तो मैंने चर्चा भी की है। वो रघुनाथ दास शास्त्री जी हैं। है ना? उन्होंने स्पष्ट कहा कि भाई उनके पहले जन्म से नॉमिनेशन और फिर कर्म से सिलेक्शन यही वाली बात है। ठीक है? विश्वनाथ विश्वनाथ पाद जी की मेरे पास भगवत गीता रखी हुई है चार 13 में। उन्होंने भी कह दिया कि भैया जन्म से जन्म जो है वो व्यवहार का व्यवहार का हेतु है कि व्यवहार में उसे क्या उसका क्या होगा क्या नहीं होगा और कर्म से उसका परमार्थ सेट होगा ये बात कही है विश्वनाथ पाद जी ने ठीक है अब अगर इसको भी नहीं मानते तो पुंडरेक जी तो है प्रामाणिक पुंडरिक जी ने भी कह दिया अपने मीठे शब्दों में कह दिया इसन को थोड़ा सा जो वैदिक वर्णाश्रम व्यवस्था है उस पर ध्यान देना चाहिए उन्होंने मीठे स्वर में कह दिया क्योंकि क्योंकि वो विरोधी उसमें नहीं जाना चाहते हैं इस के प्रति विरोधी स्वर में ध्वनित नहीं होना चाहते हैं। ठीक है? अब उनका अपना अपना काम करने का सबका तरीका है। मगर जब आपका हो जाए तो मेरे को हां मैं बताऊं मगर क्या हुआ कि यहां से चालू होता है कि भैया ये जो है आप जो है ये कर रहे हैं धर्म में छेड़छाड़ तो इसलिए अब हम आपसे ब्रह्म की बात कर रहे हैं कि ईश्वर सर्व शक्तिमान है कि नहीं परम स्वतंत्र
00:28:26:04 मोक्ष है कि नहीं। ठीक है? तो प्रारंभिक स्तर पर क्या है कि आपके यहां वर्णाश्रम और ये जो ये हो रहा है ना जो कि शिव और कृष्ण तो एक नहीं है मगर कृष्ण और अल्लाह एक है। है ना कि हम वही वही शिक्षा दे रहे हैं जो बाइबल में दी गई है। जी जी जी मैं सहमत रहूं। आज भी मेरे मैंने एक वीडियो देखा है इस काउंटर लगा हुआ है विदेश में वह भगवत गीता के साथ कुरान भी बेच रहा है। अब पुस्तक सेवा यदि आप कह रहे हो कि हम गीता कितनों को आपने गीता बांटी ये किया वो किया तो आप कुरान से सेवा कर रहे हो सनातन की कुरान देके अभी अभी का वीडियो है लेटेस्ट यहां आने से पहले तो ये दो चीजें हो गई अब इसमें थोड़ा क्रमबद्धता बता रहा हूं मैं आपको क्रम कम क्रम से बता अब इसमें क्या होता है कि जब हम धर्म के पहले धर्म पर बात करते हैं। फिर ब्रह्म पर आते हैं। फिर ये हो जाता है कि आप तो मायावादी मायावादी हो। ठीक है? फिर वहां परंपरा की बात आती है। तो परंपरा से जुड़े हुए सवाल आ जाते हैं। फिर ये श्रीधर स्वामी और ये वाले ये क्रम है। पहले धर्म पे बात होती है। फिर ब्रह्म पे बात होती है। फिर इस पर बात आ जाती है परंपरा पे। कि अच्छा चलो परंपरा के कारण कर रहे हो तो परंपरा पे ले लेते हैं। परंपरा कितनी मजबूत है। ये सब करना इसलिए पड़ रहा है कि जो ऊपरी सतही स्तर पर जो
00:29:41:10 दो मुख्य बिंदु है वो क्लियर नहीं वो बिगड़े हुए ठीक है ना बाकी और भी बहुत कुछ है। अगर अगर मोटा-मोटा पकड़ ले मोटा-मोटा तो ये उन सबका वो सर्वव्यापक ईश्वर का जो अवतार होता है ना ऐसे ही सर्व्यापक गलतियों का अवतार मोटा मोटा वर्णाश्रम और ईश्वर अल्लाह ठीक तो अब आप बताएं कि इस जो है ईश्वर अल्लाह एक क्यों करता है अब बोले आप हां ठीक है मैं एक बार फिर से बोलूंगा कि मैं इतने समय से नहीं हूं मेरे को ज्यादा कुछ नहीं पता पर ना प्रभु ऐसा है कि जहां तक मैंने डिवोटीज से बात किया जो मुझे लगा है उन लोगों का एक्चुअली मकसद क्या है किसी किसी भी तरह ना हम जो भी बाहर के लोग हैं उनको धर्म के रास्ते पर लाना। अब भले ही इससे अगर हम लोगों को यह करना पड़े कि अब हम वो लोग अल्लाह को कैसे देखते हैं ऑल प्रोपराइटर जिसका सब मतलब जो सर्वशक्तिमान जिसको बोलते हैं और इसीलिए हम उनको अल्लाह से बेसिकली हम इक्वेट करते हैं कृष्ण को ताकि वो समझे कि वो कृष्ण और अल्लाह एक ही है तो हम उनके भी शरण में जा सकते हैं। ऐसे करके जब वो धीरे-धीरे आते हैं ना फिर हम उनको धीरे-धीरे चटिंग बताते हैं। फिर चार नियम का पालन बताते हैं। फिर ब्रह्मचर्य का उसके बाद फिर वो माला करते-करते धोती कुर्ता फिर सब में वो बेसिकली उससे आते हैं। तो यह आप कह सकते हैं कि प्रलोभन देने का काइंड ऑफ ना तरीका है कि हम उनको बता रहे हैं कि आप प्लीज आप कैसे भी करके हमारे धर्म में आओ। उसके बाद आप नाम जप करो प्रसाद पाओ ताकि
00:30:56:24 आपका जो अगला जीवन है क्योंकि जो वैष्णविज़्म बेसिकली है वो लोग पर दुख दुखी था जिसको बोलते हैं वो लोग दूसरे का दुख दे रहे है कि ये लोग तो मांस खा रहे हैं मदिरा खा रहे हैं। इन लोगों को कैसे किसी भी तरह तो इन लोगों को उपकार करना पड़ेगा। इनको कैसे भी तो लाना पड़ेगा। तो इसमें इतना तत्वदर्शी मतलब दर्शन हो गए और अगर हम षट संदर्भ वगैरह ये सब अगर हम देखने लगे तो थोड़ा सा कहीं ना कहीं वो लोग समझ नहीं पाएंगे। हम अभी क्लास टू के बच्चे को इंटीग्रेशन और ये सब तो नहीं समझा सकते। तो इसीलिए उन लोगों को कम से कम क्लास 12 तक का पहले हम लोग को समझाने के लिए मुसलमान क्रिश्चियन लोग को हम लोग एक इक्वेट एक फंडामेंटल एस्टैब्लिश करने के लिए कि हां हम दोनों का यहां पे सेम है। तो अब कोई बात नहीं आप यहां भी आ सकते हो। हमारा भी संडे लव फीस्ट होता है। फिर तो उनको लगा कि हां हमारे क्रिश्चियनिटी में भी होता था। तो मतलब आप समझ रहे हो ना कि वो एक ये एस्टैब्लिश कर पाएंगे। एक सेंस ऑफ रिलेशनशिप। उसके बाद फिर वैसे जब हम उनसे माला वाला कराते हैं धोती कुर्ता पहनाते हैं फिर वो भक्ति में आते हैं तो एक कारण हो गया और दूसरा वर्णाश्रम का जैसे आपने बोला नहीं अभी मैंने वर्णाश्रम पूछा नहीं है वर्णाश्रम में भी नहीं पूछा वो बात वो अगला पॉइंट है उस पर जाएंगे आपने कहा कि वो प्रलोभन प्रलोभन देते हैं ठीक है वो रियल रियल नहीं होता है मगर प्रलोभन के लिए बोल देते हैं पहली बात ये है पहली बात ये है कि आपके अनुसार सारी दुनिया को वैष्णव होना चाहिए
00:32:10:00 सनातन धर्म ही तो होना चाहिए। सनातन धर्म ही नहीं वैष्णव होना चाहिए कि वैष्णविज्म ही सनातन धर्म है ना वास्तविकता में इस के अनुसार है ना सनातनी होना चाहिए मतलब ऐसा तो मैंने मतलब जो भी चलो सनातनी अगर कोई व्यक्ति इस के अनुसार अगर विष्णु को नहीं मान रहा है किसी और देवी देवता की पूजा कर रहा है तो वो वास्तविकता में अंतत गतवा मूलत सनातनी है सनातनी तो बिल्कुल है सनातन के अंदर ही तो सब भाग गया जब तक वो आचमन कर रहा है जब तक वो शिव दुर्गा को मार रहे सब तो सनातन के अंदर ही आते नहीं सब बाहर छोड़े हो गए सनातन के तो फिर मूर्ख क्यों कहा जा रहा है उसे सिद्ध दुर्गाकारी के पाठक को ये एक्चुअली प्रभु देखा जाए तो भगवत गीता में 7 28 में काम से अरे भाई बात ये नहीं है मैं ये कह रहा हूं कि वो गलत है कि नहीं वो उसका कारण शास्त्र है वो बाद की बात है ना उसका कारण आप शास्त्र ला रहे हो वो बाद की बात है मगर गलत मान रहे हो ना आप उसे शिव दुर्गा काली के पास। चलो इस प्रश्न को ऐसे ले लेते हैं थोड़ा सीधे तरीके से कि आप प्रलोभन देने के लिए कह देते हो कि अल्लाह और कृष्ण एक
00:33:25:01 है। ठीक है? अब ये बताओ प्रलोभन देने के लिए ये क्यों नहीं कहते हो कि शिव और कृष्ण एक है। वहां क्यों अड़ जाते हो? नहीं नहीं शिव और कृष्ण एक नहीं है। नहीं ठीक है। आप सही बोल रहे हो। एक्चुअली अगर आप प्रभु हमारे क्लास आगे की बात सुनिए। आगे की बात सुनिए। आपने कहा कि वह एक को बोलते हैं और वह आ जाता है धोती कुर्ता वाला हो जाता है। आप यह क्यों नहीं सोचते हैं कि वह जो बोल जो जब आप बोलते हो जब आप किसी से बोलते हो तो क्या कहते हैं वह व्यक्ति चार लोगों को बताता है देखो इस कौन जो परंपरा है मधवाचार्य जी की वो कह रही है कृष्ण अल्लाह एक है वो 50 जगह उस चीज को बताता है वो तो आके धोती कुर्ता पहनने लगता है मगर उसने जितनी ज्यादा जगह ये चीज बांट दी होती है उसमें से कई लोग ये सोचने लगते हैं कि अरे कृष्ण अल्लाह एक है तो मैं कुरान क्यों ना पढूं नमाज क्यों ना पढूं नमाज में भी तो चले जाएंगे। सीधी सी बात है। अगर आपने अपने मन मुताबिक एक ब्रिज बनाया है हम कि यह जो है इससे लेकर के आए मिथ्या के अनुसार मिथ्या के द्वारा प्रलोभन के द्वारा तो जिस ब्रिज से कोई मुस्लिम हिंदूज़्म में आएगा उसी ब्रिज से कोई हिंदू भी मुस्लिम में जा सकता है।
00:34:41:01 दूसरी बात। तीसरी बात यह है कि यदि आप ऐसा कर रहे हो कि भैया मुस्लिमों को यहां लाने के लिए तो इसकी जरूरत तो बाहर के देशों में है। भारत में वो किताबें क्यों बिक रही है? भारत में क्यों कहा जा रहा है? है ना? और चौथी बात जब वह प्रलोभन है जब वह प्रलोभन है तो जो प्रलोभन वाले शास्त्र है उनको आप सनातनी शास्त्र क्यों कह रहे हो आप क्यों कह रहे हो देखो हमने धर्म का प्रचार किया है ना हम एक विंग है जो कि षड्यंत्र पूर्वक प्रलोभन इत्यादि दे के व्यक्ति को कन्विंस कर रहा है कि किसी तरीके से वो जो है इधर देखे सनातन की ओर देख ले मगर हमारे जो शास्त्र इत्यादि है वो सनातन शास्त्र नहीं है उनमें सनातनी बातें नहीं लिखी उनमें सब मिक्सचर लिखा है। ये तो स्वीकार करना पड़ेगा ना। भाई जो हिंदू जो जो हिंदू है उनको क्यों बता रहे हो कि ईश्वर अल्लाह एक है। फिर वो कस्टमाइज करो ना उसको कि केवल मुसलमान कोई किताबें जाए वो स्टॉल बना दो। मुसलमान के लिए ये वाली किताब हिंदू के लिए ये वाली किताब। क्यों? हिंदू भी तो उसको पढ़ के भटक रहा है ना।
00:35:56:02 भाई कोई लड़की जब यह समझती है किसी मुस्लिम लड़के को देख के कि इसका भी वही सिद्धांत होगा जो मेरा सिद्धांत है र सदा च प्राई पर वचन ना जाए जब वो ऐसे समझती है क्यों समझती है क्योंकि उससे किसी ने कहा होता है ईश्वर अल्लाह तेरो नाम सबको सद्गति दे भगवान सबको सन्मति दे भगवान उससे किसी ने कहा होता है इसलिए वो अल्लाह में अपने कृष्ण को ढूंढने लगती है जबकि कृष्ण का सिद्धांत क्या है रकुल सदा चली आई प्राण जाए प्रवचन ना जाए और अल्लाह का सिद्धांत क्या है अगर तुमने किसी को मां बहन बेटी बोल भी दिया है तब भी आप उससे मुकर सकते हो मुख की बातों का कोई ये सब तुम्हारे मुंह की बातें हैं इनका कोई वो मोल नहीं है नहीं सही बात है प्रभु जी इसमें मैं ये चीज बोलना चाहूंगा कि आप अगर फैक्ट्स एंड फिगर्स निकालोगे ना अगर अगर नंबर्स पे बात करोगे तो आपको दिख जाएगा कि हमारे यहां से जितने भी लोग जुड़े हैं क्योंकि हम जब भी क्लास लेते हैं तो हम उनको ऑब्वियसली ये अल्लाह वगैरह ये सब हमारा बाहर के प्रचार के लिए है। हमारा जब क्लास होता है तो हम अपना चार भाई सुनो जो धर्म होता है ना उसमें यह सब झूठी बातें नहीं आती है कि हम लोग फलाने के लिए बोलते हैं और जब बोलते हो तो घोषित करो ये सनातन ज्ञान नहीं है इन किताबों में ये घोषित
00:37:11:03 करो लिखो ये सनातन ज्ञान नहीं है क्योंकि सनातन क्या है एक मिनट सनातन क्या है जो किसी भी देश काल परिस्थिति में ना बदले वो सनातन है। अब आप जो है किसी कारण से ऐसा कर रहे हो। ठीक है? अच्छा दूसरी बात यह है कि नंबर्स पर जाएंगे। नंबर की बात ऐसी है कि जो लोग आपकी यह मिस कसेप्शन से प्रभावित हो रहे हैं। मतलब आप आप जितनों को ले आए वो आंकड़े तो सब पॉजिटिव है क्योंकि आप ले आए हो। आपने उनका नाम दर्ज कर लिया कि हम जो मुस्लिम को ले आए, विदेशी को ले आए। मगर जो उसके विकर्ण फैल रहे हैं जो लड़कियां जो ईश्वर अल्लाह को एक समझ के फंस रही हैं या बाइबल और गीता को एक समझ के फंस रही है वो थोड़ी ना बताती है कि हमने इस कौन के कारण इसको ऐसा समझा था मरते टाइम वो कटने से पहले बता के थोड़ी ना जाएंगी कि हम क्यों फंसे थे इसके चंगुल में वो मानसिकता इसलिए कहा गया धर्म के साथ छेड़छाड़ मत करिए धर्म तो फिर उसको एज इट इज भी कह रहे हो आप सबसे बड़ी देखिए आप बात आप प्रलोभन दे ला रहे हो आप झूठी किताबें लिख के ला रहे हो फिर एज इट इज भी बोल रहे हो अरे एक बात पे तो ठहर जाओ गीता से ड्रोन है हमारा ये रहता है कंक्लूजन रहता है जो आप बोल रहे हो कि जो हम शास्त्र लिखते हैं वो सारा तो उसी
00:38:26:04 से मतलब जो शास्त्र मतलब जो भी हमारा पब्लिशिंग रहता है वो सारा आपका पद्म पुराण से आपको रेफरेंस मिल जाएगा स्कंद पुराण से भगवत गीता अल्लाह का रेफरेंस क्या है बताइए जरा ईश्वर अल्लाह एक है कुरान का ईश्वर और यहां का ईश्वर एक है क्या रेफरेंस है इसका नहीं ये तो हमने कभी मैं वही आपको बता रहा हूं ना कि ईश्वर और अल्लाह को हम क्यों करते हैं? क्योंकि इसका एक बस यही पॉइंट है कि वो अगर रिलेट कर पाए कि मैंने आपको बताया ना कि वो गलत है। वो गलत है। ये पहली बात तो ये करना गलत है। अगर सुनिए सुनिए क्रम में सुनिए। क्रम में सुनिए। पहली बात तो यह करना गलत है। दूसरी बात जो आप तर्क दे रहे हैं कि वहां पर वह सर्वशक्तिमान है। नहीं वहां पर वो जो अल्लाह है वो उनकी मान्यता ये है कि अल्लाह अवतरित नहीं हो सकता है। अल्लाह झूठ बोलने की मीन इट। आप इतना अंदर क्यों जा रहे हो? हम मीन ही नहीं करते। अल्लाह व्लाह क्या है? मुझे अरे भाई अंदर अंदर इसलिए जा रहे हैं। पहली बात तो ये है कि हम इस की तरफ से कही जाने वाली कोई बात ऑथेंटिक कब समझे? जब उसकी किताब से छपी हो जब उसका कोई प्रमाणिक व्यक्ति बोल रहा हो या उसका केवल एक कोई फॉलोअ बोल रहा हो कब समझे हम बताइए अगर प्रभुपाद का वाणी है तभी तो प्रभुपाद तो
00:39:41:06 बोल रहे हैं ना कि हम जो है बाइबल की शिक्षा दे रहे हैं वो प्रभु वही है कि देखिए आपने ये चीज बोली है आपने ये चीज बोली है सुनिए आपने ये चीज बोली एक मिनट आपने ये चीज बोली है कि अंदर से ऐसा नहीं है। बाहर से ऐसा है। भाई आपकी बात कैसे मान ले कोई जो आप कर रहे हो जो आप दिखा रहे हो उसी पर तो हम बोल रहे हैं। हम भी अंदर से विरोध नहीं कर रहे। लो हम भी अंदर से विरोध नहीं कर रहे। बाहर से ही कर रहे हैं। लो यही तो है। कहने का मतलब यह है पहली बात वो सर्वशक्तिमत्ता वाला बात जो है वो फिट नहीं बैठती। दूसरी बात यह है कि अगर आप केवल प्रलोभन दे के कर रहे हैं तो वह जो है नहीं करना चाहिए क्योंकि उसके बैड इफेक्ट भी है। बैड इफेक्ट ज्यादा है। जब धर्म की आप व्याख्या बदलेंगे तो बैड इफेक्ट ज्यादा है। तीसरी बात यह है कि अगर आप प्रलोभन देकर के कर भी रहे हो तो फिर हमसे कम से कम हिंदुओं से झूठ मत बोलो। उसको सनातनी शास्त्र मत बताओ। उसको बताओ मैनपुलेटेड शास्त्र। कन्वर्शन के लिए लिखे गए शास्त्र हिंदू उससे दूर रहे। यह सब कहना शुरू करो। ठीक है और चौथी बात यह स्वीकार करो कि वो झूठ है। सबसे पहले तो यह मानना
00:40:56:14 पड़ेगा कि वो झूठ है ना। ईश्वर अल्लाह है जो एक लिखा गया है वो झूठ है ना? हां ये वाला चीज ऑब्वियसली अलग है। कृष्णा जो है वो तो प्रपाद जी ने झूठ बोला ना कि मैं बाइबल की शिक्षा दे रहा हूं। आप समझ मतलब देखो ऐसा है कि वो एक भी अलग भी जैसे अरे मैं पूछ रहा हूं झूठ बोला कि नहीं बोला? नहीं झूठ तो नहीं बोला। खैर झूठ प्रभुपाद झूठ तो नहीं बोलेंगे प्रभुपाद मतलब बाइबल की दीक्षा ही दे रहे थे प्रचार के बेसिस के लिए करा उन्होंने आपको ये समझना भाई साहब प्रचार के बेसिस के लिए सत्य बोला कि झूठ बोला नहीं सत्य ही बोला बिल्कुल सत्य बोला है क्योंकि सब मतलब बाइबल की शिक्षा है ना बाइबल की शिक्षा है ना इस में क्वालिटेटिवली हम एक ही है हम क्वांटिटेटिवली हम अलग है पर हम में बाइबल की शिक्षा है कि नहीं नहीं क्यों होगी बाइबल की शिक्षा क्यों होगी हमारा जी तो कह रहे है ना आत्म साक्षात्कार का विज्ञान में कि बाइबल की शिक्षा दे रहा हूं मैं। कह रहे हैं वो तो चौथे चैप्टर में कुछ कुछ हो सकता है जो मतलब कह सकते हैं जैसे बाइबल में बोला गया है कि वो लोग जैसे मीट खाते हैं तो कुछ कुछ के अनुसार तो ये भी कह सकते हैं कि हम आईएस आईएस की शिक्षा दे रहे हैं। नहीं कुछ कुछ चीजें सेम हो जाएंगी। बाइबल में कुछ कुछ ऐसा चीज है जो ओवरलैप करता है। हमारे आईएस आईएस में भी कुछ कुछ
00:42:11:18 ऐसी चीजें हैं जो हमसे मैच करेंगी। तो वो आप देते होगे हम लोग तो नहीं देते। अरे तो आप आप लिखोगे कि मैं आईएस आईएस की शिक्षा दे रहा हूं। जब हमारे पास सनातन ज्ञान है। हमारे पास भगवत गीता है तो क्या हमारे पास इतना सामर्थ्य नहीं है कि उसमें अपना ढकोसला उसका रूप परिवर्तित किए बिना उसमें कोई मायाजा डाल किए बिना और हम सामने वाले को अपने ज्ञान से प्रभावित कर पाए। दूसरी बात क्या इस देश के समस्त एक मिनट क्या इस देश के समस्त सनातनी उस वैष्णव ज्ञान को जान चुके हैं जो हमें मुसलमानों को लाना पड़ रहा है क्रिश्चियनों को लाना पड़ रहा है क्यों भगवान को सब जोड़ने में क्या दिक्कत है सब तो भगवान अरे सबको जोड़ने में जब हम जब हम झूठ का सहारा लेकर के जोड़ रहे हैं प्रोपेगेंडा करके जोड़ रहे हैं मैनपुलेट करके जोड़ रहे हैं एक मिनट भाई साहब भाई साहब एक मिनट एक मिनट एक मिनट तो पहले हम जो हमारे पास जो है जिसमें इसमें हमको विकार नहीं डालना है। उससे जितना जोड़ सकते वो तो जोड़ ले। पहले शिव वालों को तो आप जो है विष्णु भक्त बना लीजिए। देने जाते आधे लोग यही बोलते हैं हमारे पास भगवत गीता पड़ी है। हमारे पास ये पड़ी है। अब उनको संप्रदाय से जुड़ना ही नहीं है। तो इसलिए तो प्रभुपाद को बाहर जाना पड़ा। हम लोग
00:43:26:21 यहां पे जब ये कर रहे थे प्रचार कर रहे थे। कोई ना भगवत गीता ले रहा है। कोई ना संप्रदाय से जुड़ रहा है। कोई ना भगवान को भोग लगा रहा है। तो बोले भाई साहब देखिए देखिए तो बनाइए ना उनको। मतलब आप जो है जो व्यक्ति जो जिस व्यक्ति का गीता पर विश्वास नहीं है एक मिनट एक मिनट जिस व्यक्ति का गीता एक मिनट भाई साहब एक मिनट आप मतलब ये कह रहे हैं कि जिस व्यक्ति का गीता पर विश्वास नहीं है उस व्यक्ति को आप गीता पर विश्वास ला के फिर उसको सही करने का प्रयास करोगे मगर जिस व्यक्ति का पहले से ही गीता पर विश्वास है जहां झूठ बोलने की आवश्यकता नहीं है उसके लिए आप प्रयास नहीं करोगे उसके लिए तो चल ही रहे है उसके लिए तो क्लासेस चल ही रहे हैं उसके लिए तो लोग आते ही है जिनको आना होता है अब जो सतोगुण में वो तो आते हैं जो सतोगुण में नहीं है तो झूठ तो झूठ क्यों लिखा है फिर हिंदू हिंदू सब कोई क्या सतोगुणी है हिंदू सारे तभी तो मैं कह रहा हूं तो झूठ क्यों लिखा फिर जब आप जो गीता पर पहले से ही भरोसा करते हैं उनको गीता का ज्ञान दीजिए उसमें क्यों लिखा अल्लाह और कृष्ण एक है मैं बाइबल का ज्ञान दे रहा हूं मैं आपको फिर से वही बोल रहा हूं कि जो अल्लाह और जो कृष्ण का आप जो ज्ञान बोल रहे हो ये बस हम एक सेंस ऑफ एस्टैब्लिशमेंट के लिए करते हैं भाई साहब ये झूठ है कि नहीं मैं थोड़ा सा थोड़ा सा कठोर ोर होना पड़ेगा मुझे क्षमा करिएगा अब ये बताइए वो झूठ है कि नहीं नहीं झूठ नहीं है क्योंकि वो क्वालिटेटिवली
00:44:42:07 वो एक है क्वांटिटेटिवली अलग है क्वांटिटेटिवली एनी टाइम एनी डे कृष्णा इसको थोड़ा सा इसको थोड़ा सा बताइए मुझे कि झूठ कैसे नहीं है हिंदी बताइए ठीक है जैसे हम पालन करते हैं सॉरी मेरा हिंदी मे बी उतना ज्यादा स्ट्रांग नहीं हो सॉरी तो एक्चुअली क्या है कि जैसे मैं बता रहा था पहले तो आपका क्लेम क्लेम मैं समझ लूं कि वो झूठ नहीं है सत्य है जो उन्होंने बोला है तो फिर आप ये क्यों कह रहे हैं कि वो केवल ये होता है वो सेंस वाली बात होती है। क्या कह रहे हैं आप? वो केवल उनको जो है प्रलोभन के लिए होता है। वो तो सत्य होता है। तो प्रलोभन काहे के लिए फिर प्रलोभन इन द सेंस कि वो ये देख आप फिर ये क्यों कह रहे हैं कि भाई वो अंदर से ऐसा नहीं है। वो तो केवल लालच दे के लाते हैं। वो तो सत्य बात है। वो तो यहां आकर यहां आ के भी वही कहते हैं ना। तो लालच आपका वही हो गया कि हम कृष्ण को अल्लाह के उनको तौर पे दिखा रहे हैं। हम एक फॉल्स इमेज क्रिएट कर रहे हैं। हम एक झूठ है ना? फॉल्स इमेज क्रिएट करना झूठ हो गया ना? उनको समझने के लिए ना वो क्लास टू का अरे भाई झूठ है कि नहीं? मैं क्या पूछ रहा हूं? एक इमेज क्रिएट कर रहे हैं हम बेसिकली। भाई साहब अभी आपने फॉल्स शब्द का उपयोग किया ना। हां वो गलती हो गई। उसको हिंदी में क्या कहते हैं? शैडो शैडो एक परछाई परछाई क्रिएट कर
00:45:57:10 को हिंदी में परछाई कहते हैं। अरे शैडो बोल रहा हूं भाई आप ले भाई साहब अभी आपने फॉल्स बोला कहा फॉल्स इमेज फॉल्स इमेज एक वो उसका शैडो क्रिएट बेसिकली ये मतलब था मैंने क्या कहा फॉल्स का हिंदी अर्थ क्या है फॉल्स का हिंदी अर्थ क्या है अरे भाई स्लिप ऑफ टंग हो ही सकता है मैं बोल तो रहा हूं कि वो शैडो मैं कहना चाह रहा था मतलब फॉल्स इमेज तैयार नहीं करते वो रियल इमेज तैयार करते हैं शैडो शैडो शैडो परछाई परछाई भाई परछाई हरी बोल परछाई मतलब परछाई मतलब परछाई यार परछाई मतलब एक सबर्डिनेट एक सबोर्डिनेट एक थोड़ा प्रैक्टिकली समझाइए जरा इस बात को मुझे मैं समझना चाहता हूं क्या वो परछाई की बात आप कर रहे हैं तो अब मुसलमान जो है ये लोग सिर्फ और सिर्फ अल्लाह को मानते हैं राइट और जो क्रिश्चियन है ये लोग सिर्फ जीसस को मानते हैं आप मुझे रीजनिंग मत दीजिए भाई साहब भाई साहब रीजनिंग मत दीजिए कि वो इसलिए ऐसा करते हैं ना आप मुझे वो परछाई बताइए क्या करते हैं वो उसमें परछाई क्यों कह रहे हैं वो सत्य है या सत्य की परछाई है जो बोला जा रहा है वो बताइए किसको आप परछाई कह रहे हैं वो बताइए जो अल्लाह है वो आ तो रहे हैं कृष्ण से ही आ रहे हैं और जो जीसस क्राइस्ट है वो भी कृष्ण से ही आ रहे हैं तो अगर देखा जाए तो अल्लाह आ रहे हैं कृष्ण से
00:47:12:14 अल्लाह आ रहे हैं कृष्ण से सब कोई कृष्ण से ही आ रहे हैं जब तो इसका मतलब आप समय आने पे ये भी कह देंगे कि भैया वो स्वान और कृष्ण एक है ये कह देंगे आप नहीं वैसा नहीं ऐसा नहीं है क्या कृष्ण से नहीं आ रहा है ये ये मटेरियल भौतिक हो गया ये आध्यात्मिक जगत नहीं है ये भौतिक का मतलब अल्लाह जो है तात्विक अल्लाह जो है तात्विक रूप से भी जो है रियल है अल्लाह जो है तात्विक रूप से रियल है अब जो उनको मानते हैं अब उनको तो उनके हिसाब से बात करना पड़ेगा ना अब मैं और आप थोड़े तो आपका हिसाब क्या है वही तो मैं कह रहा हूं आप उनके हिसाब से क्या बोल रहे हो आपका हिसाब क्या है ये तो आपने फिर रीजनिंग दे दी कि उनके एक मिनट आपने ने फिर रीजनिंग दे दी कि उनके हिसाब से बात करनी पड़ेगी। ये तो रीजनिंग हो गई। सत्य क्या है? सत्य क्या है? क्या कुरान के अनुसार जो कुरान के अनुसार प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है वो क्या ईश्वर है? आपके अनुसार
00:48:16:07 कुरान के हिसाब से तो खैर गलत ही है। कुरान में तो जो लिखा है वो आपके आपके अनुसार क्या है भाई साहब? कुरान का ईश्वर रियल है। वो है एक्सिस्ट करता है। वो ईश्वर ही है। या नहीं है यह बता दीजिए। एक्सिस्टेंस छोड़ दीजिए। कुरान के हिसाब से जो वो बताते हैं वो तो गलत है। कुरान में जो लिखा है। अरे भाई मैं कह रहा हूं आपके हिसाब से क्या है? हां मेरे हिसाब से मैं बता रहा हूं। कुरान में जो खैर लिखा है वो तो गलत ही है। वो उन लोगों को मैं ये नहीं मैं ये नहीं कह रहा। आपके हिसाब से अल्लाह ईश्वर है। वो सर्वशक्तिमान है। आपकी जानकारी में आपकी जानकारी में। कुरान का ईश्वर आपके सिद्धांतों पर फिट बैठता है। कृष्ण के सिद्धांतों पर फिट बैठता है। वही कह रहा हूं बार-बार कि फिट नहीं बैठता है। नहीं बैठता का बात नहीं है। फिलहाल ये है कि उन लोगों को किसी तरह हम लोग को धर्म में लाने के लिए फिर आप रीजनिंग पे चले गए। टॉपिक क्या चल रहा है कि आप झूठ बोलते हैं कि नहीं बोलते? टॉपिक ये चल रहा है। टॉपिक ये नहीं चलता क्यों बोलते हैं? समझिए बात को। टॉपिक ये नहीं चल रहा है कि आप क्यों बोलते हैं? टॉपिक ये चल रहा है कि क्या बोलते हैं? सत्य बोलते हैं कि झूठ बोलते हैं? बिलकुल आप बिलकुल और पर सत्य बोलते हैं। आप लोग ही मिथ्यावादी होंगे। हम तो नहीं है। अरे भाई केवल क्लेम करने से कुछ नहीं होता है। आपकी चीजों
00:49:31:13 का आधार भी तो आप बोलो। आपने क्लेम कर दिया कि आप सत्य बोलते हो। फिर जब मैं आपसे पूछ रहा हूं, फिर जब मैं आपसे पूछ रहा हूं, एक मिनट। जब मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या कुरान का ईश्वर सत्य है? तो आप कह रहे हो नहीं गलत है। आपकी आवाज नहीं आ रही, गायब हो रही है। आवाज आ रही है? हेलो हां आ रही है तो मैं वही कह रहा था कि जैसे अपने वर्णाश्रम पे भी सवाल उठाया अगर आपने अभी एक बात कही है मिथ्यावादी तो आप लोग हैं क्या कहा है आपने एक मिनट आपने क्या कहा है भवनती भवेत ऐसा आता है न जात ब्राह्मण भवेत न जात्य क्षत्रिय भवेत इसमें शांति पर्व में आता है महाभारत के 188 में साफ-साफ लिखा हुआ है वर्णाश्रम की बात हम कर रहे हैं क्या अभी भाई साहब ईश्वर अल्लाह की बात हो गई क्या बता रहा हूं मैं कि आपका जो क्लेम है वो आपकी आवाज कट रही है। आपकी आवाज कट रही है। आप जो है चैप्टर को बदलिए मत। पहले ईश्वर अल्लाह की बात करिए। हेलो हां आपने कोई ब्लू वो ये ब्लूटूथ वगैरह तो नहीं लगाया है? नहीं ब्लूटूथ तो नहीं है कुछ भी। ब्लूटूथ नहीं है। हां। तो बार-बार आपकी आवाज कट रही है। हां तो ईश्वर ईश्वर अल्लाह की बात चल
00:50:46:14 रही है। अभी वर्णाश्रम पर आएंगे। पहले ईश्वर अल्लाह की बात कर लेते हैं। तो आप मुझे बताइए कि ये मेरा प्रभु आई थिंक इंटरनेट कृष्ण और अल्लाह को जो कृष्ण और अल्लाह को जो एक कहा जाता है स्पोन के द्वारा ये सत्य कह रहे हैं आप ये सत्य है। ये अचिंत भेद तत्व से क्वालिटेटिवली एक क्वालिटेटिवली अलग है। तो मैंने अभी यह बोला है कि क्या स्वान और कृष्ण को भी अचिंत इसी बात से बोलेंगे आप एक ये भौतिक है वो आध्यात्मिक है। वो लोग तो मान तो यानी अल्लाह अल्लाह है ना फिर अल्लाह है ना अल्लाह भी आध्यात्मिक अल्लाह की अल्लाह की जो आध्यात्मिक बातें हैं आध्यात्मिक चीजें हैं कुरान की वो सत्य है फिर क्या पता कोई यक्ष हो ही सकते है वो जिनको अल्लाह मानते हो कोई ऐसे ही मतलब आपको ये पता नहीं है कि अल्लाह क्या है मगर आप ये कह रहे हो कि अल्लाह और कृष्ण एक है यानी कि आपको ये भी नहीं पता कि कृष्ण क्या है कृष्ण तो खैर आपसे बेटर ही पता है हमें क्या है क्योंकि हम उनका देखो व्यक्तिगत व्यक्तिगत उसप उस मत जाओ। आपसे क्लेम जो
00:52:01:15 ये कर रहे हो ना ये मत करो। अभी प्रश्नों पर रहो। आप आप जो ये व्यक्तिगत ये कह रहे हो आपसे बेहतर पता है। आपसे बेहतर पता है। ये ये जो कर रहे हो ना व्यक्तिगत व्यक्तिगत कटाक्ष इससे बचो। मैं पूछ रहा हूं कि जो आपने कहा कि अल्लाह क्या है? वो तो हम जानते ही नहीं है। वो यक्ष भी हो सकता है। तो इसका मतलब क्या कृष्ण के बारे में भी ऐसा ही है। कृष्ण के बारे में क्यों होगा कृष्ण के बारे में पता है तो फिर क्यों कह रहे हो कृष्ण और अल्लाह एक है झूठ है कि सत्य है ये तो समझाने के लिए भाई उनको अपने धर्म अरे भाई तो पहले ये बोलो ना कि हां हम झूठ बोलते हैं आप झूठ बोलते हम बोलते हैं हम सब शास्त्र के आधार पे बोलते हैं हम बस उनको प्रचार करने तो बताओ शास्त्र में कहां लिखा है कृष्ण और अल्लाह एक है शास्त्र में कहां कहीं नहीं लिखा है अल्लाह का तो वर्णन ही नहीं क्यों अभी अभी बोल रहे थे हम जो बोलते शास्त्र से बोलते अब शास्त्र प्रणाम बताओ चलो शास्त्र चलो शास्त्र से ये बता दो अभी तक ये समझ में आ गया ये बात झूठ है वो मुंह से ना बोलो बात अलग है मगर अब तुम मुझे बता दो आप मुझे ये बता दीजिए कि शास्त्र में आज्ञा कहां पे दी गई है कि शास्त्र की जो व्याख्या बदल के आप जो है किसी को लेके आओ धर्म में वो तो सर कमेंट्री होते परपट पढ़ोगे कमेंट्री पढ़ोगे तो आप अरे शास्त्र बताइए ना कमेंट्री तो कमेंट्री
00:53:16:28 तो हमारी मैं कमेंट्री बता दूं आपको चलेगी कमेंट्री कमेंट्री यानी आपके पास कमेंट्री नहीं है आपके पास शास्त्र नहीं है कमेंट्री है सब आपका भी अपना शास्त्र का कमेंट्री है। हर एक संप्रदाय का अपना कमेंट्री होता है। इनके तो मुझे मुझे कमेंट्री में बता दो कि वो किसी को लाने के लिए शास्त्र की झूठी व्याख्या करें। ब्रह्म की झूठी व्याख्या करें। ये ला दो। कहां है? कमेंट्री में जो शास्त्र से सद्ध दिख रहा हो कि ये इस जो है शास्त्रीय वचन का भाष्य है। बताओ कहां है? नहीं अद्वैतवाद जैसे हम ये नहीं करते। हम गलत कमेंट्री हम नहीं देते। वो मैं नहीं बोल रहा हूं। मैंने क्या पूछा है भाई साहब? मैंने क्या पूछा है? आपके पास पर्सनल अटैक्स के अलावा कोई सैद्धांतिक आधार नहीं है। जो बीच-बीच में आप आप बीच-बीच में सामने वाले को आप बीच-बीच में सामने वाले को क्या कहते हैं? उसका मोरल डाउन करने के लिए या फिर विषय को भटकाने के लिए आप व्यक्तिगत कटाक्ष कर रहे हो। बस और कुछ थोड़ी ना कर रहे हो। आपकी बातें आप खुद ही कह रहे हो। आपकी बातें आप जब मैं दुरुपयोग करूंगा अपने अधिकारों का तो आपको तकलीफ हो जाएगी। नहीं जो भी आपको करना है करो पर आप ऑलरेडी कर रहे हो आप वो मत करो आप सीमाओं का उल्लंघन मत करो मुझे बताओ मुझे बताओ कौन से शास्त्र के भाष्य के
00:54:32:09 कौन से शास्त्र के भाष्य के आधार पर भाई साहब हेलो कौन से शास्त्र के भाष्य के आधार पर अब एक बार भी और आपने कोई व्यक्तिगत वो किया क्लेम कि आप यह करते हो आप यह करते हो ठीक है अगर व्यक्तिगत आप हुए तो मैं आपको रिमूव कर दूंगा ठीक है चर्चा करनी है तो सैद्धांतिक बात करिए हां ठीक है बाय चलो निकलो जल्दी निकलो जल्दी निकलो ये है ईश्वर अल्लाह एक की बातें हो गई उसका जवाब नहीं है तो वर्णाश्रम पे ले आए फलाना एक कोई श्लोक रटा हुआ है और जो है बुरा लग रहा है भाई जवाब नहीं है तो भाई व्यक्तिगत कटाक्ष कर लो है ना तो ईश्वर अल्लाह एक करने के विषय में क्रमबद्धता से चीजें समझ लीजिए। पहली बात सैद्धांतिक विरोध है। कुरान कुरान इसलिए अल्लाह अल्लाह इसलिए है क्योंकि कृष्ण कृष्ण है। कृष्ण और अल्लाह एक होता अगर कृष्ण और अल्लाह एक होता तो फिर वो कुरान कुरान ना होता वो अल्लाह अल्लाह ना होता या फिर ये कृष्ण कृष्ण ना होता। यह कृष्ण कृष्ण है इसलिए वह अल्लाह अल्लाह है। अब बात आती है सब सब कुछ कृष्ण से ही आ रहा है। तो सब कुछ कृष्ण
00:55:47:10 से ही आ रहा है तो यह लोग फिर जीव और ब्रह्म को अलग-अलग क्यों कहते हैं? जब सब कुछ कृष्ण को ही आ रहा है। कृष्ण से ही आ रहा है तो जीव और ब्रह्म की एकता भी स्वीकार कर लो भाई। हम अच्छा और जब तुम अल्लाह और शिव और कृष्ण की एकता क्यों नहीं वो शिव जी कृष्ण से नहीं आ रहे। आपके अनुसार कृष्ण से आ रहे हैं तो क्यों नहीं बोलते हो गला? फाड़ फाड़ करके क्यों नहीं छापते हो कि शिव और कृष्ण एक है। अभी तक वो जो भाई साहब थे कौन दिल्ली वाले उन्होंने कह तो दिया मैं दिखाऊंगा प्रभुपाद की पुस्तकों में कहां पर शिव और कृष्ण की एकता बताई गई है। आज तक कोई वहां से प्रमाण नहीं आया। हम इसके बाद अगर जो है कि उनहीं से आ रहे हैं। इस कारण से वो मान लो। अब सैद्धांतिक विरोध है तो सैद्धांतिक विरोध शिवजी के साथ भी है। मगर वहां पर तो तुम कह देते हो कि नहीं नहीं शिवजी अलग है। कृष्ण अलग है। अच्छा अब बात आती है मनाने की। मनाने की बात है तो पहले तो घोषित करोगे झूठ है किताब में तो तुम वहां पर टेप लग जाएगा। वहां पर सिल लोगे अपना मुख को हम कि नहीं भैया हम जो है झूठ नहीं बोलते। प्रलोभन देते हैं। है ना? फॉल्स इमेज बनाते हैं। सब कुछ करते हैं। मगर
00:57:02:12 हम जो है झूठ नहीं बोलते। वाह क्या बात है। अब बात आ जाती है और आगे चलो क्रमबद्धता से कि चलो भाई सामने वाला स्वीकार नहीं कर रहा कि वो झूठ बोलता है और वो जो है मुसलमानों को अपने में लय कराने के लिए तो बोलेगा कि कृष्ण और अल्लाह एक है। मगर शिव जी वालों को अपने में लय कराने के लिए नहीं बोलेगा कि शिव और कृष्ण एक है। उनको अपने में लय कराने के लिए क्या बोलेगा? नहीं नहीं कृष्ण ही सुप्रीम है। वहां ऐसे लय होंगे। समझ रहे हो? क्योंकि वहां पर सहिष्ता है ना। और एक बात आप ध्यान रखिए जो धर्म होता है धर्म की जब व्याख्या होती है तो उसमें झूठ चपेट नहीं आता है ब्रह्म के विषय में झूठ बोल दो भगवान के विषय में ही झूठ बोल दो उसके स्वरूप के विषय में झूठ बोल दो ये सब धर्म ने कहीं नहीं सिखाया तेरे लिए कर्तव्य और कर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण है और ये वाला जो लॉजिक है ना बच्चे को वो दिया जाता है बच्चे को वो दिया जाता है कम दिया जाता है मगर झूठ नहीं बोला जाता बच्चे को झूठ नहीं बोला बोला जाता है कम दिया जाता है यहां पर इतना इस ज्ञान वो आगे चलकर के ए बी सी डी गलत नहीं हो जाती जो हमने तुम्हें ए बी सी डी सिखाई थी गलत थी हम वो रहती है उसके आगे का ज्ञान मिलता
00:58:17:13 जाता है ये तर्क भी गलत है अब दूसरी बात ये है कि कि भैया मैच करता है इसलिए आत्म साक्षात्कार का विज्ञान नामक पुस्तक में चौथे चैप्टर में बातों का अंत होते समय प्रभुपाद जी की ओर से एक वचन लिखा हुआ है। क्या लिखा है? मैं मेरी बात पर विश्वास करो। मैं जो भी तुम्हें शिक्षा दे रहा हूं बाइबल से दे रहा हूं। बाइबल किससे शिक्षा दी जा रही है भैया? बाइबल की शिक्षा है। हम कम से कम जो आर्य समाज वाले हैं वो टू द पॉइंट रहते हैं। जो उनके बिलीफ्स है वो क्लियर बोलते हैं। ये नहीं यहां हम झूठ बोलते हैं। मतलब झूठ बोल भी रहे हैं। प्रलोभन भी दे रहे हैं। वो झूठ नहीं है। फॉल्स फॉल्स इमेज है। फिर फॉल्स को पकड़ लिया तो फॉल्स नहीं है। स्लिप ऑफ टंग हो गया। भाग गए। इसीलिए कहते हैं मत पड़ो चक्कर में कोई नहीं टक्कर में।
00:59:22:24 अच्छा ये कह रहे हैं कि ऊपर उठो छोटी-छोटी बातों से। शायद यह कह रहे हैं। ऊपर उठ के मतलब कहां जाए मतलब समझे नहीं। कहां जाना है हमको? तो क्रम क्या बना? पहली बात सैद्धांतिक विरोध। उसके बाद यह स्वीकार करो कि झूठ है। उसके बाद धर्म नहीं सिखाता। ऐसा करना। उसके बाद जो है वो ए बी सी डी वाला कि कम ज्ञान दिया जाता है। नर्सरी के बच्चे को पीएचडी का ज्ञान नहीं दिया जाता। कम दिया जाता है मगर झूठा ज्ञान नहीं दिया जाता। ठीक है? और यदि प्रलोभन दे ही रहे हो मुस्लिमों को तो शबों को क्यों नहीं दे रहे हो? वहां पर क्यों अनादर कर रहे हो? ये प्रश्न ये प्रश्न आ जाता है। और अंतत गतवाएं घोषित करो कि आप सनातन ज्ञान नहीं दे रहे हैं इन किताबों के द्वारा। और एक बात और आ जाती सातवीं बात कि भाई यह कह रहे हैं ऐसा क्लेम कर रहे हैं इस की ओर से कि ऐसा होता नहीं है। मान लो हम कैसे माने कि जो आप
01:00:37:25 बात कह रहे हैं वो इस की तरफ से कही जा रही है। कैसे माने बुक में लिखो छवाओ उसको इस की तरफ से कि हम मुसलमानों को मैनपुलेट करने के लिए उनको जो है वहां से यहां लाने के लिए ऐसा बोलते प्रलोभन देते हैं। भाई हम कैसे माने? हम तो आप जो कर रहे हैं जो दिखा रहे हैं वही तो देखेंगे। आपने अपने मन से कह दिया हम क्या करें उसका जो आप क्लेम करेंगे सार्वजनिक मंचों से वह हम स्वीकार करेंगे ऑफिशली जो क्लेम आएंगे और ऑफिशियली क्लेम यही है ऊपर उठने की बात यह है कि अभी आपको पता नहीं है लगता है सामर्थवान गुरु की शरण में नहीं है वरना इस तरह की बातें ना करते ऊपर उनको उठना चाहिए जो कृष्ण और अल्लाह को एक कर रहे हैं
01:01:26:04 ठीक है। चलिए सभी को जय श्री राम। और सनातन शंकर जी के चैनल पर एक लाइव हुई है लगभग दो घंटे की। उसमें हमने वो पांच पॉइंट्स पर बात की है पहले और फिर हम बाकी के पांच पॉइंट्स पर अ बात करेंगे। और अनिकेत दुबे जी के साथ भी चर्चा होनी है। पर जो है इसको कल शेड्यूल करेंगे। हां। चलिए जय श्री राम सभी को।
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इस्कॉन ईश्वर अल्लाह को एक क्यों बताता है Live Discussion With Debesh
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