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00:00:01:25 तो सभी को जय श्री राम अ आशा करते हैं सभी कुशल पूर्वक होंगे और जितने भी छोटे हैं अनुज है छोटी प्यारी बहने हैं उन सबको यथोचित उनके ढेर सारा प्यार आशीर्वाद जो बड़े हैं उनको प्रणाम सभी को यथोचित अभिवादन और आज की जो चर्चा है वह भी काफी रोचक होने वाली है क्योंकि हमारे पंडित जी जो हैं उनके पास बहुत सारे प्रश्न हैं जो आहवान से पूछे जाते हैं तो उनमें से कुछ ऐसे प्रश्न जिनका हमने उत्तर नहीं दिया है वह आज हम लेने वाले हैं सारे तो पंडित जी के पास वो सारे प्रश्न है पंडित जी को हम ले लेते

00:00:56:15 हैं पंडित जी श्री रामराम हर हर महादेव हर हर महादेव कैसे हैं आप बस बढ़िया राम की कृपा है जैसे आपके पास आपकी है वैसे नहीं नहीं बस उन्हीं की कृपा है और मैं एक बात याद दिला दूं कल एक बहुत ही रोचक अ स्ट्रीम हुई थी जिसमें मैं अकेला था हालांकि मुझे लगता है कि इस चैनल के जो दर्शक है उनमें मैं उनको मैं अकेला जब बोलता हगा तो उतना ज्यादा इंटरेस्ट नहीं आता होगा क्योंकि उन्होंने ज्यादातर यही देखा है फिर भी उसमें बहुत रोचक तथ्य आपको जानने को मिलेंगे और तो वो स्ट्रीम जरूर देखिएगा सर्वशक्तिमान ईश्वर के ऊपर जो कटाक्ष किए जाते हैं उनका निराकरण प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है अभी पंडित जी हमारे लिए बहुत सारे प्रश्न लेकर के आए हैं विरोधाभासी प्रश्न भी है उसमें से काफी सारे हो सकता है हम कहीं कहीं पर फस जाए पंडित जी पहले तो सबसे पहले मैं आपको ये बता दूं कि जितने भी दर्शक है ना वो आप को मिस बहुत करते हैं मतलब कहते हैं कि पंडित जी कहां गए पंडित जी लाइए थोड़ी काम की विस्ता रहती है तो उसकी वजह से बाकी जैसा राम रास्ता दिखाया वैसे ही चलता है

00:02:11:26 जी तो आज का जो स्ट्रीम है वो मैं हाईजैक कर रहा हूं क्षमा चाहूंगा ठीक है आज का होस्ट मैं हूं और ये ये स्ट्रीम आज जो है वो आवाहन के ऊपर प्रश्न होंगे इस सर्वशक्तिमान धर्म जो जो चैनल है इस पर आवाहन और वह किस परंपरा से है या जो भी अन्य प्रश्न है वह पूछे जाएंगे मैं कोशिश करूंगा कि बहुत ही ज्यादा वस्तु प्रश्न ना लू और वह लूंगा भी नहीं जितने भी सैद्धांतिक प्रश्न है मैं मैं उसको कलेक्ट किया है मैंने अमुक अमुक जगहों से लेकर तो शुरू करता हूं एक बार मैं बस भगवान का नाम ले लेता हूं हरि ओम तसत

00:02:52:01 श्रीमते रामचंद्राय नमः ओम नमः परमहंसा स्वाद चरण कमल चन्म करय भक्त जन मानस निवासा श्री रामचंद्राय श्री राम जय

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00:03:02:00 राम जय जय राम श्री राम जय राम जय जय राम श्री राम जय राम जय जय राम शम ठीक है शुरू करते हैं श्री गणेशाय नम तो सबसे पहले मैं मेरे पास एक्चुअली प्रश्न की बहुत सारी लिस्ट है झड़ है और कुछ कुछ प्रश्न जो होंगे वो एक दूसरे से कनेक्टेड भी हो सकते हैं ठीक है तो अगर आपको लग रहा है कि एक क्योंकि ये प्रश्न मेरे नहीं है ये प्रश्न जनता के द्वारा दिए गए हैं तो कई लोगों ने बहुत कोशिश की है कि वो एक ही बार में कई सारे प्रश्न पूछ ले मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश करूंगा कि आप उसको हिस्सों में बांट दूं ताकि आपको सुविधा हो बाकी देखते हैं तो शुरू करने से शुरू करते हैं तो सबसे पहले ना आपका बहुत सारे लोगों ने परिचय मांगा है कि आप है कौन मतलब ये व्यक्ति है कौन जो एकदम से जिसने आतंक मचा रखा है समाज में इस समय के समाज में तो तो कृपया आप अपना परिचय देने की कृपा करें और वहां से शुरू करें जी मेरा संक्षिप्त परिचय तो मैंने वैसे अपने कुछ वीडियोस में कई बार दिया है जब मुझसे मेरी पूछी गई कि यात्रा कैसे चालू हुई आपकी मगर अगर एक संक्षिप्त परिचय कह सकते कि मैं श्रीमद जगदगुरु शंकराचार्य पुरी पीठाधीश्वर जी का एक अल्पज्ञ शिष्य और प्रभु श्री राम का

00:04:17:02 एक साधारण सा भक्त जो कुछ वर्षों पूर्व तक एक साधारण एक सामान्य जीवन जी रहा था दिशाहीन जीवन जी रहा था उसको नहीं मालूम था कि जीवन का उद्देश्य क्या है और वो भी यह जो भोग विलास है उसी में ही लिप्त था उसी में ही जीवन के सार्थकता समझता था जैसे कि यह ले लिया वो ले लिया या यह देख लू यह फिल्म देख लू यहां घूम लू वहां घूम लू ऐसा ही कोई ऐसा कोई बहुत महान जीवन नहीं रहा कि बचपन से कुछ हां मगर बस एक भगवान की कृपा रही या प्रारब्ध रहा या माता-पिता के संस्कार रहे जिसके का बचपन से ही श्री राम के अंदर रुचि रही जी और श्री राम के प्रति आस्था होने के कारण कुछ दुर्व्स से या जो गलत चीजें होती है जिनसे की जीवन खराब हो सकता है उन चीजों से शायद बच गया थोड़ा-थोड़ा अछूता रह गया और शायद वही कृपा रही कि एक दिन जाकर के मेरे जीवन में वह जगत गुरु आ गए जो संसार के गुरु थे वह मेरे जीवन में आ गए और जिस दिन वह मेरे जीवन में आए उस दिन से मेरे जीवन को एक दिशा मिल गई जो दिशाहीन जीवन था मैं हमेशा सोचता रहता था कि मुझे करना क्या है क्या मेरी लाइफ का गोली ये ये जो प्रश्न है ना

00:05:32:04 ये ये था मेरे अंदर ये जो प्रश्न है ना असतो मा सत गम तम सुमात्र ये था मेरे अंदर और मैं कहूंगा कि इस प्रश्न को ही कॉपी किया गया है मैट्रिक्स मूवी में आप मैट्रिक्स मूवी देखो तो उसमें नियो से जो शुरू में उसका फिल्म का नायक है उससे पूछा जाता है कि वो सवाल है जो तुम खोज रहे हो वो हमेशा कुछ खोज रहा था उससे पूछा जाता है कि तुम क्या खोज रहे हो तो वो तुम वो सोचता रहता दुनिया में कुछ तो गड़बड़ है है ना तो ये एटली ऐसी सिचुएशन है सबके साथ वो क्योंकि पूरी अपनी ये असतो मा सद गम जमय उसम यह जो क्या कहते हैं य पंक्तियां भी उसमें गीत के रूप में बनाई गई है उस मूवी में अत में आई है जी जो थर्ड पार्ट है उसम आई है तो यही मेरी स्थिति थी कि मैं भोग में ढूंढ तो रहा था अपने जीवन की सार्थकता मगर यह प्रश्न मेरे अंदर कोनते रहते थे कि मेरे जीवन में कुछ तो दिक्कत है कुछ गड़बड़ है और वह गड़बड़ कभी-कभी इस रूप में भी सामने आती थी कि मैं जब मैं आज मान लीजिए अगर एक अच्छा ड्रेस खरीद रहा हूं तो क्या मैं जब 80 साल का हो जाऊंगा 70 साल का हो जाऊंगा तब भी यह ड्रेस में पहन पाऊंगा मैं आज अगर बॉडी बना रहा हूं सिक्स

00:06:47:08 पैक एप्स बना रहा हूं तो क्या मैं 80 साल में भी ऐसा दिख पाऊंगा ये वो जो चीज है नातो सद सत की प्यास यह चीज अलग तरीके से सबके जीवन में आती है वो मेरे अंदर भी आती थ इसके साथ ही साथ एट द सेम टाइम मुझे इस बात की चिंता हुई मेरे जीवन के वैसे बचपन से रहती थी कोई हमारे धर्म को जरा सा टच ना कर दे छू ना ले जरा सा चू तक ना कर दे धर्म को मगर वो उसने एक स्वरूप ले लिया एक जीवन के उद्देश्य का जब कुछ बड़े बड़े घटनाक्रम जीवन में हो गए जिसके कारण वह एक जीवन का उद्देश्य ही बन गया तो व्यक्तिगत उद्देश्य तो सबका वही हैतो सद तम और अगर समष्टि रूप से देखे तो जीवन का एक मात उद्देश्य धर्म की स्थापना धर्म की रक्षा ये दोनों ही चीजें एक सागर ज्ञान का मुझे मिल गया शंकराचार्य जी भगवान के रूप में जगतगुरु शंकराचार्य के रूप में तो ये दोनों ही चीजें वहां से मुझे प्राप्त होगी यह मेरा छोटा सा परिचय और इसको अगर शॉर्ट में अगर कहे तो बस वही कि जगतगुरु शंकराचार्य जी का अल्पज्ञ शिष्य अल्पज्ञ शिष्य कोई बहुत बड़ा ज्ञानी शिष्य नहीं और श्री राम का साधारण सा भक्त तो मैंने अपने जीवन के जो दो उद्देश्य बताए ना इसमें

00:08:02:08 भी देखिए दोनों का परवन व्यक्तिगत वाला श्री राम जी और धर्म की रक्षा शंकराचार्य श्री राम जी धर्म की रक्षा से भी जुड़े हुए हैं और श्री राम जी के लिए शंकराचार्य जी के द्वारा प्राप्त होने वाला जो मार्गदर्शन तो ऐसे दोनों में सामंजस जी जय श्री राम तो ये एक्चुअली ये प्रश्न का य बैकग्राउंड ये था क्योंकि हमारे कई भाई बहनों ने आपके पुराने चित्रों को भी दिखाया है है ना तो लोग के मन में डाउट आता है कि यह जो व्यक्ति है यह मतलब क्या यह एक्टिंग कर रहा है या मतलब अपना इसका कुछ निजी स्वार्थ है क्योंकि य पहले तो ऐसा नहीं था है ना तो बैकग्राउंड इस जो कि आपने इसका उत्तर दे दिया है क्योंकि आपने स्वयं ही बताया कि आप पहले कैसे थे और अब कैसे है और उसका कारण क्या है तो मैंने अप इं आईडी इं आईडी पर हाईलाइट लगा रखी है जो लोगों ने किया है ना उनका ही चित्र लगा कर के मैंने अपनी हाईलाइट लगा रखी कोई पुराना जीवन देखना चाहे तो देख सकता था और मैं कहूंगा कि अगर भौतिकता की दृष्टि से देखा जाए तो पहले का जीवन बहुत समृद्ध था अगर आज के लोग जो जिनके लिए भौतिकता प्रधानता है मेरे मेरे लिए आज का जीवन जो हाईएस्ट लेवल हो सकता है पीक में हो सकता है सबसे ज्यादा सुखी जो मैं हो सकता हूं वो मैं आज हूं

00:09:18:03 ठीक है मगर लोगों के पर्सपेक्टिव से उन्हे ऐसा दिखाई देगा कि वो वो जीवन मेरा ज्यादा उन्नत था ऐसा उन्हें दिख सकता है तो वो मेरी हाईलाइट पर वहां जाकर के चेक कर सकते मैंने वो शॉर्ट इसमें भी डाला है य वीडियो में भी डाला है जी क्योंकि आपने इस समय जगतगुरु का कई बार नाम लिया आपने शंकर संप्रदाय यानी जगतगुरु के बारे में आपने बहुत बार बोला अपने इन शब्दों पर तो मैं जानना चाहूंगा कि आप शंकर संप्रदाय से ही क्यों जुड़े और यही मेरा दूसरा प्रश्न होगा जो पूछा गया है समाज के द्वारा आपसे कि आप शंकर संप्रदाय से ही क्यों जुड़े म क्या आपने कभी दूसरे संप्रदायों को पढ़ा जाना शंकर संप्रदाय से जुड़ने से पहले कि बस आपने बस देख लिया कि नहीं यही है और मैंने चुन लिया देखिए अगर मैं सभी संप्रदाय का अध्ययन करने अगर निकलूंगा तो ऐसा नहीं है कि मतलब मैं बहुत बड़ा एक बहुत ब्रेन मास्टर व्यक्ति हूं जो सारे संप्रदायों को पढ़ लू और जो है एक ही जीवन में उस फिर धर्म की रक्षा भी कर लू फिर य आपको वीडियोस भी बना लू तो ऐसा नहीं है मगर जो ऐसा नहीं है कि आपको जैसे मैंने ये उदाहरण कई बार दिया कि जैसे हमने किसी को

00:10:33:06 वेट लॉस करना है मैंने वेट लॉस कई लोगों का किया है वेट गेन किया मसल बिल्डिंग की है तो मैं इस इस शैली में ज्यादा अच्छे से बता पाता हूं है ना तो इसमें क्या होता है कि हम जैसे मान लीजिए कोई व्यक्ति आया और उसको वेट लॉस करना है तो मैंने उसको एक न्यूट्रिशन दिया अब न्यूट्रिशन में मैंने उसको 15 20 चीजें लिख दी कि तुम्ह येय इतने इतने बजे ऐसे ऐसे खाना है अब क्या है कि वो जो है उसके अंदर की सारी चीजें आपके लिए अच्छी है उस चार्ट के बाहर की अच्छी चीजें भी आपके लिए बुरी जैसे कि कोई व्यक्ति फोन करे भाई मैं यहां आया हूं यहां पर दूध मिल रहा है एक गिलास उस चार्ट के बाहर अब यह दूध भी आपके लिए हानिकारक है आपके गोल में सहायक नहीं है क्योंकि वो दूध है अच्छी चीज है मगर वह आपकी जो पूर्ति होनी थी वो आपके न्यूट्रिशन की पूर्ति हो चुकी है वो क्वांटिटी आपकी ज्यादा हो जाएगी वो भी आपके लिए हानिकारक हो जाएगा आपके उस गोल के लिए जो आपको वेट लॉस करना है तो हमें अपनी जो एक सही रास्ता पकड़ने के लिए हमें दुनिया के सारे रास्ते चेक करने की आवश्यकता नहीं होती है हमें एक सही रास्ता पकड़ना होता है उसके बाहर के सारे रास्ते जितने आपके अनुरूप है वह सब आपके लिए सहायक सिद्ध हो जाते हैं और जितने

00:11:48:13 आपके विरुद्ध है वो विरोधी सिद्ध हो जाते हैं तो अब अगर इसको उल्टा करके देख ले कि वो व्यक्ति छोले भटूरे की ठेल पर खड़ा हुआ है फिर वो मुझे फोन करेगा सर क्या मैं छोले भटूरे खा सकता हूं नहीं खा सकते क्या मैं चाय प पाच मिनट बाद क्या मैं चाय पी सकता हूं नहीं क्या मैं वो घिसा बर्फ खा सकता हूं घिस के जो मिलती है वो चुस्की वाली बर्फ खा सकता हूं नहीं क्योंकि वो चार्ट में नहीं है है ना तो मैं उसको पूरे दिन यही बताता रहा नहीं ये नहीं ये नहीं य नहीं नहीं तो इसका तरीका क्या है भाई मैंने तुम्ह जो चार्ट दिया है वही तुमको खाना है उसके बाहर की सारी चीजें आपको नहीं खानी है जो उसके बाहर की मतलब जो उसका विरोध कर रही है इसी प्रकार से जो प्रामाणिक आचार्य क्या त है हमारे शास्त्रों के द्वारा प्रतिपादित और जो तर्क संगत है वोह यही है कि सबसे पहले वोह जो लक्षण क्या होना चाहिए ब्रह्मचारी सन्यासी होना चाहिए विभिन्न शास्त्रों को आप एक करके देख लो तो यही आंसर आएगा कि तत्वदर्शी वही है जो ब्रह्मचारी सन्यासी पहला लक्षण दूसरा लक्षण वह परंपरा प्राप्त होना चाहिए तो जो शंकर परंपरा है वोह तार्किक रूप से भी हमारी बहुत मजबूत कड़ी सिद्ध होती है क्योंकि बौद्धों के समय जब धर्म का पतन हो चला जब कोई नहीं है

00:13:03:18 वहां से लेकर के धर्म को अपने खून से सींच करके परंपरा यहां लेके आ रही है ठीक है तो एक वो तार्किक प्रमाणिकता भी हो गई उसकी आवश्यकता भी हो गई उसकी तीसरा क्या है कि समस्त शति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा देता हो तो लक्षण भी सन्यासी उसके बाद परंपरा प्रमाणिक और तार्किक भी साथ ही साथ है ना इसके बाद अ क्या कहते हैं समस्त शति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा देने वाली अर्कट ने नहीं किया कि नहीं शिव पुराण नहीं मानेंगे वहां पर क्रेडिबिलिटी व्यास जी की खराब कर देंगे यह सब नहीं किया और अंततोगत्वा इन सब चीजों को भी हम लेकर के फिर आखिरी में पूछे कि क्या ईश्वर सर्वशक्तिमान है क्या तो उनके द्वारा क्योंकि कहा गया कि गुरु भाई जो संशय दूर कर दे और मेरे मन में संशय आता था मैं आपको सच बता रहा हूं मैं अपनी बाइक चलाते चलाते सोचता था कि ईश्वर ने सृष्टि कैसे बनाई होगी अगर पहले से अगर पहले से खाली स्पेस है और ईश्वर उसमें प्रकट हुए तो हमें मानना पड़ेगा प्रकृति पहले से है ये सब चीजें चिंतन मनन चला करता था हमें मानना पड़ेगा प्रकृति पहले से है तो इन सारे संश हों का जो निराकरण मुझे मिला गुरु वही संशय दूर कर दे मेरे जो थॉट्स है वो क्लियर

00:14:18:18 किससे हुए वो गुरु से हुए तो उन्होंने मेरा संशय दूर किया तो ये सिद्धांत जहां पर अप्लाइड हो जाए अप्लाई हो जाए वो आपका गुरु है वो भले ही रावण संप्रदाय से हो वो भले ही वल्लभाचार्य संप्रदाय से प्रमाणिक परंपरा होनी चाहिए और आपका संशय दूर होना चाहिए शास्त्रों का खंडन नहीं होना चाहिए जो जहां पर भी यह सिद्धांत अप्लाइड हो जाएंगे वो आपका अब यदि वह सिद्धांत यहां शंकर परंपरा में अप्लाइड हो ग ये बाय प्रोडक्ट है मैंने तो वो सिद्धांत ढूंढे वो कहां मिलेंगे जहां पर सन्यासी हो जो गुरु हो वो सन्यासी हो वो परंपरा से हो वो शती वो अर्ध कोट न्याय ना करते हो वो अपने जो अपना जो शिष्य है उसका संशय दूर कर देते हो मैंने तो इनको लेकर चला मैं शंकर परंपरा को ढूंढने नहीं चला मैं इन शास्त्र सत सिद्धांतों को लेकर चला यह शास्त्र समत सिद्धांत मुझे य मिल गए तो मैं इनका हो गया इसी सेही आपने चक अब दूसरे संप्रदाय के गुरुओं के बारे में भी बोला इस समय जैसे तो यह प्रश्न भी उठता है कि फर कितने जगतगुरु क्योंकि शंकर संप्रदाय भी आदि शंकराचार्य भगवान थे फिर रामाज रामानुजाचार्य भी जगतगुरु कहे जाते हैं माधवाचार्य भी कहे जाते हैं तो ऐसे तो इतने सारे जगत गुरु हैं तो

00:15:34:01 कई सारे जगत गुरु होंगे तो एक ही जगत है और उसमें इतने सारे जगतगुरु कैसे और उसी का फॉलो अप क्वेश्चन है कि आप शंकर संप्रदाय में देख ले कई जगतगुरु आ जाते हैं है ना सबसे पहली बात है सबसे पहली बात है कि जगतगुरु क्या कहते आपने कहा कि कितने जगतगुरु ठीक है सबसे पहली बात है कि इस प्रश्न से आपका धर्म और कहां प्रभावित हो रहा है अगर जगत गुरु एक नहीं है दो है तो इससे आपका धर्म ब्रम प्रभावित हो रहा है क्या अगर आपको यह पता चल गया कि ये येय ये मुझे चाहिए मुझे सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म चाहिए यह जहां से मिल रहा है वो आपके जगतगुरु ये जहां से मिल रहा है वो आपके जगतगुरु है ना तो अब जो भी इसके विरोध में जाएगा जो भी ऐसा ईश्वर देगा जो क्या कहते हैं जो बाधित है जो ऐसा मोक्ष देगा जो परम स्वतंत्र नहीं है जो ऐसा धर्म देगा जो शाश्वत नहीं है तो वो आपका जो गुरु नहीं हो सकता व अब इसमें अगर यह उपाधि अगर कई जैसे कितने जगत गुरु की बात आती है तो शंकराचार्य जी ने भी अन्य जो संप्रदाय हैं उनका कहीं पर भी

00:16:49:01 अपमान नहीं हुआ है शंकराचार्य के द्वारा भी और अगर देखा जाए तो दूसरी परंपराओं के द्वारा भी इनका कोई अपमान नहीं हुआ है तात्विक विवेचना करते समय अपने सिद्धांत की की गई है ठीक है और उसकी भी आवश्यकता थी कि जो व्यक्ति 100% जैसे अब मैं सोच रहा हूं बाइक चलाते समय के ईश्वर ने सृष्टि की रचना कैसे की होगी मैं इतना ज्यादा आगे तक सोच रहा हूं कोई व्यक्ति नहीं सोच रहा है उसको चाहिए भगवान का एक सौम्य सा स्वरूप जिसकी वो भक्ति करना चालू कर दे वो सोच ही नहीं रहा है कि भाई भगवान ने सृष्टि बनाई होगी तो कैसे बनाई होगी भगवान यहां पर अगर य यहां पर रुक गया यहां है वहां नहीं है तो फिर वो सर्वशक्तिमान कैसे रहा वो सो कोई वति हर व्यक्ति ऐसा सोचने वाला नहीं है तो उसकी भक्ति उतने में ही पुष्ट हो जाए क्योंकि कई बार ऐसा होता है कि अगर हम उसको ओवरलोड कर देंगे ऐसा ज्ञान दे देंगे जिसका वो अधिकारी नहीं है तो वहां पर उसका माथा भी भ्रष्ट हो सकता है तो अमुक अमुक जो व्यक्ति की निष्ठा है उसको वहीं पर पुष्ट कर देने के लिए जिसकी जैसी प्रज्ञा शक्ति तो यह इसको कहा जाता है सत्य सलता की क्रमिक अभिव्यक्ति ठीक है तो अब जो अन्य परंपरा जिनम की जगतगुरु की उपाधि मिली भी है तो अन्य परंपराएं अगर पहली बात तो यहां से कहीं उनका ऐसा नहीं है कि

00:18:04:04 उनका अपमान किया गया है तो अन्य परंपराओं को भी सम्मान दे देना में कोई हर्ज नहीं क्योंकि उनके द्वारा भी व्यक्ति की निष्ठा पुष्टि निष्ठा की पुष्टि हो रही है और सबसे बड़ी बात है कि जितनी भी प्रामाणिक परंपराएं है वो वैदिक है मतलब वेद को वो वेद के वाक्यों का सम्मान है उन सब में अचरण धर्मा आचरण के मामले में लगभग सब में मतक है कुछ एक थोड़ा बहुत ऊपर नीचे होगा विधियों में बाकी जो मोटी मोटी चीजें वर्णाश्रम धर्म है ना मूर्ति पूजा जो आचरण है वो सब में सेम है खानपान संबंधी चीजें तो ये सब में सेम है तो इसलिए अगर आपको वहां जगतगुरु ऐसे मिल रहे हैं रामानुज परंपरा के जो आपके संशय का निवारण कर रहे हैं सर्वशक्तिमान धर्म व सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म दे रहे तो आप आप वो भी जगतगुरु वो भी पूज्य है और इस तरह से भी जगतगुरु है कि उन्होंने अमुक अमुक स्थितियों में अमुक अमुक लोगों के जिस प्रकार की प्रज्ञा शक्ति थी उन प्रज्ञा शक्ति वाले लोगों की निष्ठा को पुष्ट करने के लिए उतने में ही वह सिद्धांत देना भी आवश्यक था जैसे कि एक जो क्या कहते हैं मनुष्य जो जन्म लेता है ठीक है जन्म से देखिए उसके जीवन में

00:19:19:16 पहली बार जो भक्ति आती है अध्यात्म आता है वो द्वैत भाव से आता है कि अद्वैत से आता है सोचिए पहली बार जो भाव आएगा आता व पहली बार मूर्ति की र तब देखता है जब उसकी मां वहां खड़ी होती है तो उसकी यात्रा चालू होती है द्वैत से और द्वैत से चालू होकर के उसकी यात्रा पूरी होती जाकर के अवत क्या व बचपन से अद्वैत के बारे में सोचना शुरू करेगा बच्चा पागल हो जाएगा व कहेगा मेरा रोज बाल उतारो मे जा य करेगा तो वो अपना हेयर ट्रीटमेंट कराएगा ब्रेन ट्रीटमेंट कराएगा यही सब करता घूमेगा बचपन में उसको अत का मालूम पड़ा यात्रा शुरू कहा से हुई दत से तो द के सिद्धांत भी तो हो ना तब ना द्वैत के सिद्धांत भी होंगे तभी ना तो द्वैत से यात्रा शुरू हो कर के अद्वैत तक पहुंचती है है ना जब फिर द्वैत से चालू होता है फिर व्यक्ति की रुचि आई अध्यात्म को जानने में क्या कहते हैं खुद को जानने में ईश्वर को जानने में फिर उसने विवेचना शुरू करी कि ईश्वर अगर यहां रुक गया तो वहां तक कैसे तो ये और वो सर्वशक्तिमान कैसे ईश्वर अगर कहीं पर खड़ा है तो उसके अगल बगल क खाली है वहा भी ईश्वर है अगर वहां भी ईश्वर है तो ये स्ट्रक्चर वो है पूर्ण तत्व ये बहुत

00:20:34:19 सारी चीज उसम आती जैसे कबीर वालों से अगर बात करो राम पालियो से तोव क्यों भागते हैं इन प्रश्नों से कहते तत्वदर्शी तत्वदर्शी तत्व से जानते क्या हो भाई तुम व तत्वदर्शी इसलिए है क्योंकि काल ने कहा है इसके अलावा तत्व तो दो कुछ कुछ तात्विक विवेचना तो करो वो नहीं है वो इन्होंने की है रामानुजाचार्य जी ने शंकराचार्य जी ने इन लोगों ने की है तात्विक विवेचना तो ये जो वाली बात है अगर कुछ स्टेटमेंट दू फाइनल तो फाइनल स्टेटमेंट यही है कि पहली बात तो हम केवल उस चीज पर वर्क करते हैं जो हमारे धर्म ब्रह्म से रिलेटेड हो अगर आप शंकर परंपरा के जगत गुरु जिनको उपाधि प्राप्त है उस उन जगत गुरु से दीक्षा ना लेकर के उसी परंपरा के जो एक गुरुकुल चलाने वाले आचार्य है उनसे भी अगर दीक्षा ले लेंगे उनके अनु हो कर के भी सैद्धांतिक जो नियम है उनका पालन करेंगे तब भी आपको वही मोक्ष मिलेगा जो जगतगुरु से डायरेक्ट दीक्षा लेने पर मिलेगा यह तो अपना अपना वो है कि आपकी निष्ठा डायरेक्ट जगतगुरु में ही हो गई तो उनसे दीक्षा ले ली मगर जगतगुरु की उपाधि कई लोगों के पास होने से आप आपका धर्म ब्रह्म कहीं प्रभावित नहीं हो रहा है ठीक

00:21:49:19 है समझ इसी में एक छोटा सा प्रश्न और आता है कि ये भी प्रश्न पूछा गया है कि जैसे आपने जैसे बता दिया कि चलिए अलग अलग संप्रदाय में अलग अलग जगतगुरु हो सकते हैं तो शंकर संप्रदाय में ही चार चार पांच पाच जगतगुरु है जैसे इसका उदाहरण देता हूं एक व्यक्ति ने पूछा कि पूरी प एक तो गुरुदेव भगवान स्वयं है और एक अदान नाम के व्यक्ति है वो भी अपने आप को जगतगुरु बोलते हैं तो फिर ऐसे पूछती कैसे हो देखिए बोलने को तो जो जो प्रश्न करता है है ना उससे भी कोई व्यक्ति यह कह सकता है कि मैं तुम्हारा भाई हूं मैं तुम्हारा पिता हूं अब किसी का मुंह पर कोई पाबंदी तो है नहीं अगर हिंदू राष्ट्र होता हिंदू राष्ट्र का अर्थ क्या है कि स्वयं को आचार्य वही कहेगा जो आचार्य है स्वयं को जगतगुरु वही कहेगा जो जगतगुरु है स्वयं को धर्माचार्य वही कहेगा जो धर्माचार्य है स्वयं को शंकराचार्य वही कहेगा जो शंकराचार्य है अब क्या है यह आर समाज जैसे तंत्रों ने यह अपना एक विकृत सिस्टम बना तो लिया लोकतंत्र की सहायता से ठीक है अब क्या हु नकली आर समाज उनका ही कहना नकली आर समाज खुल गए हैं वो लोग भी अपने आप को आर समाजी धर्माचार्य कह रहे हैं

00:23:05:15 तो उन्होंने जो किया था कुछ समय पूर्व नकली धर्माचार्य के रूप में नकली धार्मिक तंत्र के रूप में खुद को उ भाषित किया था आज वो रो रहे हैं आज नकली आ समाज बन रहे हैं उनका ही कहना है वो छाती पीट पीट के रो रहे हैं और आ समाज के नाम से मैं तो यह नहीं जानता हूं कि इसमें सच्चाई कितनी है ठीक है अब कैसे कैसे निर्णय करेंगे कि जिसने मुस्लिम से विवाह कराया वो आर समाजी नहीं है भाई तुम्हारे यहां तो ये है ना कि मुस्लिम वो तुम घर वापसी करा तो रहे हो मुस्लिमों की तो घर वापसी होकर के वो हिंदू बना तो उन्होंने अगर हिंदू से विवाह करा दिया तो आर समाज ही नहीं रहेगा ये कोई लॉजिक थोड़ी ना है आपने कहीं सिद्धांत थोड़ी ना बनाया कि जो मुसलमान हिंदू बन जाएगा तो वो पहले से जो जन्मजात जो हिंदू होंगे उनकी बेटियों से विवाह नहीं करेगा ऐसा कहीं आपने सिद्धांत नहीं बनाया है जी और बनाया भी होगा तो आपका उसमें भी सनातन का आधार चाहिए होगा पीछे से तो ये विकृत करने वाली चीज है कि कहने को कोई भी व्यक्ति मैं भी कह सकता हूं मैं मोदी हूं मैं प्राइम मिनिस्टर हूं मैंने कह दिया लो मान लो ऐसा होता है क्या तो कैसे मानोगे कि मोदी जहां से जहां से प्राइम मिनिस्टर प्रूव हो सकता है कि ये प्राइम मिनिस्टर है वहां से मानोगे तो पूरी पीठ

00:24:20:21 के जो वर्तमान के जो शंकराचार्य हैं जिस तरीके से शंकराचार्य की नियुक्ति होती है उनको पद प्राप्त होता है उन्हें ही व वैसे ही नियुक्त है वैसे ही उनको पद जो है व प्राप्त है और जो पूर्वा चार्य महाराज जी थे उनसे वा मतलब बाकायदा उनको पद प्राप्त हुआ अब कोई स्वयं को और चार लोग खड़े हो जाए कल को कि मैं भी आवान हूं मैं भी आवान हालाकि मुझे तो अच्छा लगेगा सब लोग आवान आवान बोलो स्वयं को मगर अब जैसे उसने कोई चोर है क्या कहते हैं आर समाज यों के य का कोई अनथ डायरेक्ट कनेक्शन नहीं ने अपने आप को धर्म सम्राट लिख लिया तो वो धर्म सम्राट हो गया क्या धर्म सम्राट तो वही रहेंगे सर्व भूत हृदय धर्म सम्राट कृपा जी महाराज वो थोड़ी धम साट हो गया वो तो लिख ले लिखने को कोई भी लिख सकता है जो प्रश्न करता है वो भी लिख सकता है कि मैं ऋषि हुच हू जी व ऋषि विवाज नहीं होगा ऋषि वाज तो वही है जो अलंकार समाज का एक अनऑफिशियल गुंडा है है ना जी मैं कुछ कमेंट्स पढ़ रहा था राजेश जी आपसे प्रार्थना करूंगा कि कि आप ये गाली गलौच ना करें यहां पर चाहे वो दयानंद सरस्वती जी के बारे में हो चाहे स्कन के बारे में हो कृपया अभद्र भाषा का प्रयोग ना करें

00:25:35:21 ठीक है ये हमारी संस्कृति बिल्कुल भी नहीं ठीक है आप स्वतंत्र है इस चैनल से जाने के लिए अगर आपको इस तरह की भाषा का प्रयोग करना क्षमा चाहूंगा लेकिन कृपया इस बात का ध्यान दे हम ठीक है चलिए अमित कुमार जी ने कुछ मेल पे मेल किया था कुछ समय पहले और उन्होंने उनके कुछ दो तीन प्रश्न थे मैं वो भी ले लेता हूं जैसे उन्होंने आपसे पूछा था कि आप कौन से दर्शन को मानते हैं जिससे आपको लगता है कि आप इन्होंने एक्चुअली स् कन को टारगेट किया था या स्कन के संदर्भ में प्रश्न पूछा था ये कि आप कौन से दर्शन को मानते हैं जो आपको लगता है कि इसकन के विरुद्ध प्रभावशाली

00:26:16:00 है इसकन के विरुद्ध प्रभावशाली तो जितने भी परंपरा प्राप्त आचार्यों के दर्शन सब सब प्रभावशाली है क्योंकि इकन तो वो है ना कहीं की ईट कहीं कर रोड़ा भानुमति का कुनबा जोड़ा उनका तो ताश के पत्तों का महल है जहां से छू दोगे वहीं से चरमरा के गिर जाएगा तो उसमें आपको ये सोचने की आवश्यकता नहीं है कौन से दर्शन को मानते हैं सभी दर्शन उनके लिए पर्याप्त है वो कोई भी दर्शन हो सभी दर्शन अपने आप में पर्याप्त है स्न जैसी संस्था के लिए और एक बात मैं कहना चाह रहा था वो जो बात हुई थी इतने सारे जगतगुरु की उसके लिए कि ऐसा होता है जैसे भगवान ने कहा ना तू मेरी शरण में आा तेरी प्राप्ति की रक्षा और प्राप्ति की चिंता मैं करूंगा तो आपके जो मूल मूल प्रश्न है उनका तो जवाब निवारण होना आवश्यक है ठीक है सर्वशक्तिमान धर्म सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स तंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म मगर यदि आप इन जो आधुनिक प्रश्न भी आ रहे हैं क्योंकि जैसे जो शंकराचार्य होते हैं शंकराचार्य की बात ही कर ले तो शंकराचार्य उनका एक आध्यात्मिक स्वरूप है एक पार मार्थी स्वरूप है दैवीय स्वरूप है कि वो जो उस गद्दी बैठता है वो शंकर साक्षात शंकर कहा जाता है ये आदि दैविक स्वरूप हो गया मगर एट द सेम टाइम वो एक मनुष्य के रूप में भी है तो जहां

00:27:31:01 पर आदि दैविक स्वरूप होते हुए उनके सिद्धांति मत एक्य होगा ठीक है वहीं पर मनुष्य होते हुए उन सबके दृष्टिकोण धर्म रक्षा के धर्म के पथ पर चलने के ये सब अलग अलग हो सकते हैं जी ठीक है तो उनकी जो धर्म ब्रह्म की जो वो है परिभाषा वो सब आपको एक ही मिलेगी तो आप इसमें ना पढ़के कि उनके मतक क्यों नहीं है या वो एक ही जैसा कार्य क्यों नहीं कर रहे हैं आप उनसे अपना धर्म ब्रह्म लीजिए जिससे भी आपकी निष्ठा जिसके प्रति भी आपके मन में निष्ठा उत्पन्न हो रही है और यदि सब लोग अपने धर्म ब्रह्म में धर्म ब्रह्म को प्राप्त करने लगेंगे सही जगह से प्रामाणिक आचार्यों से तो हमारा जो हमारी स्थिति सुधरने लगेगी साफ होने लगेगा इतनी भी गंदगी है तो अपनी जो ये दिमाग जो मस्तिष्क की जीवी है ना मैं खाली रखता हूं मैं केवल उन प्रश्नों पर जोर देता हूं जिन प्रश्नों से हमारा कोई तात्पर्य निकलना अब जैसे मैं यज्ञ करने बैठा उसमें कपूर डालना है यह क्यों लगाना है इन सबके भी जवाब है ऐसा नहीं है सबके जवाब है सनातन सब बताता है मगर यदि मैं अपनी जीवी इनसे भरू तो फिर मैं सर्वशक्तिमान ईश्वर के बारे में तर्क कहां से ढूंढू है ना वह सारी

00:28:46:02 चीजें कैसे करूंगा राम जी के बारे में अवा उड़ाई जा रही है उस पर वीडियो कैसे बनाऊंगा तो मैं अपनी जीवी को खाली रखता हूं जिन प्रश्नों से तात्पर्य है अब जैसे मैं फील्ड में उतरा क्रिकेट के मैदान में और मेरा कैप्टन मुझे कह रहा है कि जाके ऑफ ऑफ साइड में फील्ड करो फील्डिंग करो अब मैं मैदान में उससे पूछ रहा हूं यहां यहां क्यों भेज रहे हो कोई तार्किक बात है क्या इसमें कुछ तो ये क्या उचित रहेगा इन फील्ड मुझे उससे पूछना बार-बार मैं उधर क्यों जाऊं मैं उधर क्यों जाऊं कप्तान ने बोला चल जाना है तो जाना है जो भी आपको डिसाइड करना है वो मैच के बाहर करना तो ऐसे ही है कि जिन चीजों से आपको तात्पर्य है कुछ उन चीजों प अपने जीवी को भरिए और जो ये वाली चीजें हैं कि वो उनमें मतक क्यों नहीं है ये केवल अ क्वेश्चन करने के लिए इनसे आपका कोई तात्पर्य हल नहीं होना तात्पर्य हल होगा असतो सद तमसो जति ये पूछो जाके शंकराचार्य से पूछो जा कर के जो शंकराचार्य इसका जवाब दे वो जगतगुरु है देंगे जवाब ये है आपकी वास्तविक प्यास इसके लिए ढूंढ गुरु जी एक कमेंट में एक व्यक्ति ने प्रश्न किया था ये आर्य आयुष यादव ने प्रश्न किया इस उत्तर मैं दे देता हूं उन्होने पूछा है कि आपकी परंपरा ने कभी कभी एक भी ग्रंथ इस्लाम के विरोध में क्यों नहीं किया देखिए

00:30:01:22 दार्शनिक जो अगर आप विरोध देखेंगे या उनके अगेंस्ट बात कहनी हो तो गुरुदेव ने पुरी पीठाधीश्वर ने 1 स से 200 से ऊपर ग्रंथ लिखे हैं वो सारे ही ग्रंथ अब्राम रिलीजन के अगेंस्ट बोलते हैं ठीक है करपात्री जी ने बहुत ग्रंथ लिखे क्या आपने सारे ग्रंथों का अध्ययन कर लिया आप करपात्री जी का कोई भी ग्रंथ उठा के देख लीजिए वो आपको मिलेगा अब्राम रिलीजन के अगेंस्ट ही कोई भी कोई भी ग्रंथ ठीक है इसम कुछ कहना चाहूंगा इन भाई साहब की कहानी ऐसी है कि अगर इन्होंने जापान नहीं देखा तो इस दुनिया में जापान है ही नहीं इन्होंने जितना देखा है बस इस दुनिया में उतना ही है तो पहले तो आपको देखना चाहिए परंपरा प्राप्त ज्यादातर जितने भी आचार सबने कहीं ना कहीं खंडन अवश्य किया है अपनी अपनी शैली में किया है दूसरी बात यह है कि मैंने अभी तक आर्य समाज पर काफी सारे वीडियोस बनाए हैं ठीक है अब आर्य समाज ने जब ऐसा नहीं है कि आर समाज का कहीं पर ऐसा कोई वीडियो नहीं होगा जो कहीं ना कहीं मेरे कोई सिद्धांत वीडियो के खंडन हो रहा है कि नहीं हो रहा व बात अलग है मगर मेरे द्वारा बताए गए सिद्धांत के जो जिन सिद्धांतों का हम प्रचार कर रहे हैं आवान के द्वारा उन सिद्धांतों के विरोध में क्या आर्य समाज का कोई वीडियो नहीं बना होगा बना होगा मगर मेरा नाम लेकर नहीं बनाया तो मैं यह कहूंगा तो मैं यह कहूंगा कि

00:31:16:25 तुम्हारे व आर समाज ने आज तक आवान का खंडन क्यों नहीं किया तो क्या इस बात को मानोगे तुम नहीं मानोगे ना लॉजिकल है तो सोचने वाली बात है थोड़ा तक से सोच तक के साथ सोच जील से हा एक और प्रश्न करते हैं कि उन्होने पूछा कि हिंदू धर्म में ईश्वर का क्या कांसेप्ट है और उनका यह डाउट है कि क्या वह साकार है या निराकार बहुत लोगों का प्रश्न है साकार है या निराकार पहली बात तो इस पर हम लोग वीडियो बना चुके हैं दत अवत और मायावा वाप में बता दीजिए एक परम तत्व है जो किसी के व्यवहार में नहीं आ सकता जब तक आप आपके व्यवहार में नहीं आ सकता वह सिर्फ प्राप्ति का विषय है जैसे कि कैलोरी जैसे हमको जब भूख लगती तो हमें वास्तविकता में क्या चाहिए हमें कैलोरी चाहिए मगर वह प्राप्त कहां से होती है प्राप्त होती है वह जो कैलोरी का सोर्स ऑफ फूड फूड्स होते हैं ना उनसे हमें कैलोरी हमें चाहिए कैलोरी मगर हम ढूंढते हैं डबल रोटी पिज्जा या अपने जो भारतीय खानपान है उसके अनुसार दाल रोटी चावल हम इसको ढूंढते हैं कैलोरी

00:32:32:00 के लिए हाथ पैर में हाथ पैर नहीं मारते ना मार सकते हैं हम ऐसे नहीं कर सकते लाओ कैलोरी ला कैलोरी लाओ व्यवहारिक नहीं है तो उसी प्रकार से ईश्वर का एक स्वरूप है अव्यावहारिक वो व्यवहार में नहीं आ सकता है फिर उसके बाद ईश्वर आपकी दुनिया में एक आपके वहार में आ सकने वाले रूप में आते हैं मैं कह रहा हूं वो जो दार्शनिक भेद की बात है अभी थोड़ी देर के लिए न्यूट्रल अगर हो जाए तो ये मान लीजिए कि ईश्वर साकार ही है मगर वह आपके व्यवहार में नहीं आ सकता है ठीक है वो आपके व्यवहार में नहीं आ सकता है जब तक आप इस दुनिया में हो तो वह इस दुनिया में एक ऐसा रूप लेते हैं जो आपके व्यवहार की सीमा में आ जाए जिसके साथ आप व्यवहार कर सको तो इस प्रकार से ईश्वर साकार भी हो गया और ईश्वर निराकार भी हो गया अच्छा एक बात और आती भगवान श्री कृष्ण ने कही कि वो जो निराकार है वो भी मेरे ऊपर डिपेंड ठीक है तो यह क्यों कहा उन्होंने इसलिए क्योंकि जो भगवान का जो अव्यावहारिक रूप है वो अपनी सत्ता को अपने अस्तित्व को हम मनुष्यों के समक्ष सिद्ध करने के लिए निर्भर है किस पर भगवान के अपने ही सगुण साकार स्वरूप पर

00:33:47:26 जैसे कि एक काट की लकड़ी में दाह क्षमता है मगर वो दाह क्षमता अपना अस्तित्व नहीं प्रकट कर सकती जब तक वो जलेगा नहीं लपट बन के जब तक वो लपट बनके कोई एक हिस्सा जलेगा नहीं तब तक व्यक्ति के मन में यह नहीं आएगा कि इस लकड़ी में दाह क्षमता है दाह क्षमता किस पर निर्भर है उस लपट पर तो भगवान ने क्या कहा कि वो जो निराकार है वो भी मेरे ही अधीन है तो मनुष्य की ओर से इंपॉर्टेंट कौन सा हिस्सा हुआ भगवान का सगुण साकार स्वरूप ही इंपोर्टेंट हुआ क्यों क्योंकि वो जो निराकार है उसका अस्तित्व ही इस पर निर्भर करता है सगुण साकार पर बिल्कुल जैसे आर्य समाजी है वो भगवान के सगुण साकार को नहीं मानते मगर सगुण निराकार को तो मानते हैं सगुण निराकार को तो मानते हैं तो वहां पर भी जो व्यवहार में ना आ सकने वाला ईश्वर है वो निर्भर हो रहा है किस ईश्वर के ऊपर जो अंतःकरण में प्रेरणा कर रहा है ऋषियों के वह सगुण हो रहा है सगुण हो रहा है ना ऋषियों के अंतःकरण में प्रेरणा की बगल में कुत्ता बिल्ली थे उनके तो अंतःकरण में प्रेरणा नहीं की तो उसने आपको उसने अपने आप कस्टमाइज किया कि मैं कहां पर व्यवहारिक हो जाऊं और कहां पर व्यवहारिक ना रहू

00:35:03:08 ठीक है तो बस इसी का अगला चरण होता है कि भगवान अपने आप को और कस्टमाइज करता है कि मैं वहां मैं किसकी आंखों का विषय बन जाऊं और किसकी आंखों का विषय ना बनू जब वो ऐसा करते तो उनका स्वरूप बन जाता है अवतार कहते जिसे माया को चीर के जो धारण करते हैं वो जैसे भग शंक गुरुदेव कहते कि जो अवतार है भगवान का भगवान के जो साकार स्वरूप है सगुण साकार स्वरूप है वो निरा वण ब्रह्म है और ये जो पूरा हमें दिख रहा है ये सावरण ब्रह्म है जैसे हमारे सामने एक माया रूपी एक अविद्या रूपी एक चादर है तो उस चादर में एक स्ट्रक्चर के रूप में जो एक चीरा लगाया जाता है उस चीरे से दिखाई देने वाला जो उस चादर के उधर का जो ब्रह्म है है ना वो जो बिल्कुल वास्तविक ब्रह्म दिखाई देता है निरा ब्रह्म तो वो भगवान का अवतार होता है तो कुल मिलाकर के क्या हुआ कि एक ही परम तत्व अपने आप को एक अव्यावहारिक व्यवहार में ना आ सकने वाला परम तत्व अपने आप को व्यवहार में आ सकने वाले रूप में प्रकट करता है साधु भक्तों के उद्धार के लिए धरती मां की रक्षा के लिए धर्म के लिए और सृष्टि के संचालन के लिए ऐसा नहीं है इसके बिना नहीं कर सकता वो मगर ऐसा करने

00:36:18:14 की वजह से लो जो मनुष्य है उसका जो उसको भक्ति की भक्ति का सरल रास्ता मिल जाता है भगवान तो ये धर्म की स्थापना तब भी कर सकता मगर जिनको उन्हें ऐसा फल ही देना है कि तुम्हारा मुझे रास्ता सरल कर देना है तो उसके लिए वह रूप भी लेते हैं ले सकते हैं ठीक है इसमें एक बात और आती है जो लोग यह कहते हैं कि वो जब द्रौपदी को बचाने आए थे तो निर्भया को बचाने क्यों नहीं आए तो मैं कह रहा हूं जब चार ऋषियों के अंतःकरण में प्रेरणा की थी तो आज हमारे और पंडित जी के अंतःकरण में प्रेरणा क्यों नहीं कर रहे

00:36:57:24 भी कर दो क्यों नहीं कर रहे कहां गया ईश्वर अब नहीं है क्या तो मानना पड़ेगा कि ईश्वर किसके साथ क्या व्यवहार करेगा ये ईश्वर उसके उसमें फिर एक ब बताएंगे कि उसने पिछले पिछले कल्प में अच्छा अच्छा कार्य किया होगा उनके पुण्य का फल होगा वो चार ऋषि बन के प्रकट हुए क्योंकि उ चार ऋषियों को तो यूं ही दिया ना उन्होने अंतःकरण में प्रेरणा तब तक तो उनको वेद मालूम ही नहीं है तो धर्म का पालन कहां से करेंगे तो चार ऋषियों को उन्होंने यूं ही दिया अंतःकरण में प्रेरणा ठीक है बिल्कुल क्योंकि उनके पास वो तपोबल था क्योंकि उन्होंने उनके पूर्व के जन्म के कारण तो ईश्वर किसके साथ कैसा व्यवहार करेगा यह ईश्वर निर्धारित करते हैं क्योंकि उन्हें प्रत्येक जीव का सब कुछ खाका खाता मालूम है तो उन्होंने किसके किसको बचाने आना है किसको बचाने नहीं आना है ऐसे भी ईश्वर देख सकते हैं है ना एक तो य ये बात रही और जो ईश्वर का कांसेप्ट है और मैं समझा दूं जैसे बिजली आप देखते हो बिजली यह भागवत पुराण में दिया गया है उसको गुरुदेव ने भी अपने प्रवचन में बताया था जैसे बिजली आप देखते हो तो बिजली सब जगह ऊर्जा के रूप में विद्यमान है मगर अभी वो निर्गुण निराकार है छुओ के तो करंट नहीं मार रही है उसके बाद फिर हम उद्योग करते वही बिजली तारों

00:38:12:27 में दौड़ने लगती है अब क्या है कि वो बिजली सगुण निराकार हो गई क्योंकि अभी भी दिख नहीं रही है मगर अब उसको छुओ ग तो वो करंट मार देगी तो सगुण निराकार पहले निर्गुण निराकार थी अब सगुण निराकार उसके बाद वही बल्ब के माध्यम से प्रकाशित हो जाती है ऐसा रूप ले लेती है जो किसी की आंखों का भी विषय बन जाए अभी तक ये छूने का विषय था है ना मगर अब वो आंखों का भी नेत्र का भी विषय बन गई तो वो सगुण साकार इसी तरीके से भगवान का रूप होता है और तो इस तरह से मनुष्य के पर्सपेक्टिव से यह कहा जाएगा कि ईश्वर निराकार भी है और ईश्वर साकार भी है फिर इसी का ही एक कंटिन्यू क्वेश्चन है अ उससे पहले हनुमान जी ने एक प्रश्न पूछा था कमेंट में पूछा था कि हिंदू धर्म को समझने के लिए कोई एक ग्रंथ एक बुक बता द देखिए ऐसा है भाई की मैं इसका जवाब उत्तर दे देता हूं कोई एक ग्रंथ नहीं है मैं आपको तीन चार बता देता हूं एक मिनट लूंगा इसका एक तो आप रामचरित मानस का अध्ययन कर सकते हैं आपको हिंदू धर्म समझ में आ जाएगा अ संत एकनाथ ने भागवत पर एक बहुत ही सुंदर सी टीका लिखी है 11 स्कं पर इसका नाम है एकनाथ ही भागवत उसका

00:39:28:00 अध्ययन कर सकते हैं आपको हिंदू धर्म समझ में आएगा समर्थ राम सुख दास जो शिवाजी महाराज के गुरु थे उन्होंने जो शिवाजी महाराज को उपदेश दिए थे वो एक ग्रंथ में लिखा गया है उसका नाम है दास बोध उसको पढ़ेंगे आपको हिंदू धर्म समझ में आएगा और पुरी पीठाधीश्वर का एक ग्रंथ है जिसका नाम है गर्भ सिकम हिंदू है उसका अध्ययन करेंगे तो आपको हिंदू धर्म समझ में आएगा और आपको गर्व भी होगा ठीक है तो बस ये तीन चार ग्रंथ है मेरी तर ओके बरल कंटिन्यू करते हैं तो अमित कुमार जी का अंतिम प्रश्न जो मेल पर उन्होने लिखा था वो यह है कि आपके द्वारा फिर परम भगवान कौन है हिंदू धर्म में और जो य देवी देवता है जैसे माता लक्ष्मी क्षमा करिएगा दुर्गा शिव गणेश कृष्ण इत्यादि यह सब फिर कौन है यह देवी देवता नहीं है यह भी भगवान के ही अन्य स्वरूप है देखिए कार्य कारण भेद से और अपना दास भाव दिखाने के लिए भगवान ऐसी लीला भी कर सकते हैं जिसमें वोह दास भाव अपना प्रकट कर रहे हो और यदि नहीं करते हैं तो एक बात सोचने की है कि क्या एक यह सिद्धांत नहीं लागू हो जाएगा कि नहीं भगवान दास नहीं हो सकता तो भगवान ऐसी लीलाएं भी करते हैं जिसमें वह अपने ही रूपों

00:40:43:09 का दासत भी ग्रहण करते हैं और जो भगवत तत्व है उसको भी ग्रहण करते हैं तो जैसे माता लक्ष्मी एक तरफ अगर कहीं पर किसी लीला में आपको दिखाई देंगी कि वो जो है दास भाव में तो कहीं पर वो आपको परम उस भाव में भी दिखाई देंगी तो एक ही ईश्वर स्वयं को पांच अलग-अलग रूपों में प्रकट करते हैं ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश इन्हीं पांच जो रूप है ईश्वर के यही पांच रूप अलग-अलग अवतारों में जो आते हैं जो हमारे शास्त्रों द्वारा स्वीकार्य हैं वो सब भगवान के रूप है जो आपको मोक्ष दिला सकते हैं ऐसे तो भगवान के रूप सभी है दुनिया में सभी भगवान के रूप है मगर मोक्ष दायक भगवान का रूप जिनका पू जो पूज्य है जिनके जिनका पूजन हो जिनका अनुकरण हो अनुसरण हो तो वो सारे रूप भगवान जो हमारे शास्त्रों द्वारा बताए गए जैसे जो पानी होता है वो सर्वत्र व्याप्त है मगर वो सर्वत्र व्याप्त पानी आपकी प्यास नहीं बुझा सकता आपकी प्यास पानी का वही रूप बुझा सकता है जो आपके व्यवहार की सीमा में आ जाए इसी प्रकार से भगवान तो सर्वत्र व्याप्त है सब कुछ भगवान ही है मगर आपकी मोक्ष की प्यास वही ईश्वर का वही रूप बुझा सकता है जो शास्त्रों द्वारा बताए गए व्यवहारिक स्वरूप में आपके व्यवहार में आ

00:41:58:18 जाए जी एक ही बहुत ही एक इसका मैं कु आप मैं कहूंगा क्या बहुत ही छोटा उत्तर दे एक दिन प्रश्न कि आप चर्चा में किसी को बोलने नहीं देते इसका उत्तर दे हा ये सा ऐसा है कि देखि मेरे अंत मतलब अंदर से जो मेरे यह मेरा ईश्वर साक्षी है कि मैं एक अंदर से मैं ये सोचता हूं कि मैं न्याय प्रिय ही रहूं और मैं किसी के साथ अन्याय ना करूं यह मेरी अंतर भावना है अब जो बो ना बोलने की बात है वह आती क्यों है आती इसलिए जैसे मैंने सामने वाले से पूछा कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं आपका उसने बोला हां है तो मेन प्रश्न क्या है सब जानते मेन प्रश्न है कि क्या वो यह कर सकता है कि नहीं तो अब मैंने पूछा क्या वो कर सकता है कि नहीं अब व्यक्ति उसका जवाब ना दे कर के पूछ रहा है कि वो उसकी आवश्यकता क्या है जबकि जब ये पूछा जा रहा है कर सकता है कि नहीं तो इससे क्या रिलेशन है कि वो आवश्यकता क्या है पूछा जा रहा है सामर्थ्य है कि नहीं ठीक है तो ये आवश्यकता क्या हैसे कोई ऐसा रिलेशन नहीं है फिर मैं उसको याद दिलाऊंगा अच्छा जब वो फसने लगता है तो वह क्या

00:43:13:21 करता है कि गाजी इतने चले गए इतने वहां पर हत्या हुई लूट बलात्कार हुआ क्यों नहीं आया तुम्हारा ईश्वर तो तो इसका मतलब तुम्हारा जो ईश्वर है वो अन्याय कारी है जो तुम्हारे हिसाब से अन्या हो रहा है जो लोग मारे जा रहे हैं तुम्हारे हिसाब से अन्याय हो रहा है ना तो तुम्हारा ईश्वर अन्याय कारी हुआ तुमको मानना पड़ेगा अगर उसका व्यवहारिक स्वरूप तो यही है कि व अन्याय हो रहा है मगर तुमको भी मानना पड़ेगा कि उसके गुण अर्थ में भी भगवान का कोई हेतु है तुम्हारे भगवान का भी जो लोग मर रहे हैं ठीक है तुमको भी उसके गुण अर्थ में स्वीकार करना पड़ेगा व्यवहारिक स्वरूप तो है कि अन्याय हुआ और हम उसके लिए लड़ेंगे भी मरेंगे भी य नहीं होना चाहिए मगर जब तुम ईश्वर को दोष देने लगोगे तुम ईश्वर को जिस ईश्वर को तुम मानते हो उसको जब दोष जाने लगेगा तुम भी कहोगे उसका भी कोई हेतु है ना आने का नहीं तो अन्याय कारी तुम मान लो तुम्हारे ईश्वर की सत्ता तो व्याप्त है तो अब क्या होता है कि जब व्यक्ति के पास प्रश्न का उत्तर नहीं होता है तो व दूसरे टॉपिक्स खोलना चालू करता है अब दूसरे टॉपिक्स से होगा क्या जब वो टॉपिक्स खुल जाएंगे जैसे उन्होंने गुरुदेव को कुछ कह दिया अपशब्द कह दिया कि तुम्हारे शंकराचार्य ऐसे वो बोलते रहते ना तुम पंगे हो तुम पंडे हो अब जब

00:44:28:22 वो ये सब बोल देगा तो मुझे क्या करना पड़ेगा वहां पर मेरी मजबूरी है कि उसके उस पंगे का जवाब दूं उस पंडे का जवाब दूं फिर जब मैं उसका जवाब दूंगा तो फिर एक टॉपिक खोलेगा है ना अगर मैं बोलने दे रहा हूं तो उस परिपेक्ष की बात है जब मैं उसको बोलने दे रहा हूं व्यर्थ की बात तो वो क्या करेगा फिर एक टॉपिक खोलेगा तो मुझे उसका जवाब देना देना पड़ेगा तो क्या होगा कि जब वो ऐसा करने लगता है कि जो विषय है ही नहीं उस विषय को वो खोल रहा है तो विषय जो चल रहा है उसकी रक्षा करने के लिए उसको मुझे रोकना पड़ता है और मैं रोकूंगा ऐसा नहीं है कि मैं उसको जवाब देने से रोक रहा हूं आप देखो वो वाली लाइव जो कुलदीप विद्यार्थी आया उसने उस बारे में बात नहीं की कि उसके आर्य समाज को पहचाना कैसे जाएगा अरे तुम मैं जानता हूं तुम क्यों चढ़ रहे हो इसी बात से तो चिढ़ ये वो उसकी समीक्षा हम लोग करेंगे समय प मगर आप देखिए ये सारे जो सवाल थे ये भी हम करेंगे भाई करेंगे तेरे अंदर जितनी चीजें सब लेके आना तू मगर एक चीज जब तक एक चीज खत्म ना हो जाए तब तक दूसरी चीज क्यों निकाल रहा है इसलिए क्योंकि तू यहां कच्चा पड़ रहा है इसलिए क्योंकि तू यहां से भागना चाहता है और तू नई नई चीजें खोलता जाएगा हम उसका जवाब देते फिर तू अगले तीसरे पर जाएगा इससे क्या मतलब निकलेगा अब यहां प जब वो नया विषय

00:45:44:00 खोल रहा है तो मैं कोशिश करता हूं वो नया विषय ना खोल पाए अगर उसने खोल दिया अगर मैंने उसकी आवाज सुन लेने दी मेरे चैनल पर और दर्शक है वो सुन ले मान लीजिए गुरुदेव के लिए भगवान के लिए को अपशब्द उसने क दिया अब या तो मैं उसका जवाब दूं अपना विषय छोड़ कर के और या फिर उसका वो जो उसने वो जो कहा जो अपमान किया वो हो जाने दूं और अपने विषय को अपने विषय पर वापस आ जाऊ तो क्या होगा दर्शकों को यह कहेंगे कि आपने उसका जवाब क्यों नहीं दिया आपने उस बात को जाने क्यों दिया यह बात आएगी ना मन में तो इसलिए मैं वो बात उसको करने ही नहीं देता हूं मैं जान रहा हूं जब देख रहा हूं कि विषय से दूसरी बात बोल रहा है जो मामले को भड़काने के लिए तो मैं उसको वो करने ही नहीं देता हूं ना करने दूंगा वो विषय पर रहेगा कट टू कट अपनी बात बोलता रहे मैं हमेशा करता रहूं अब ये तीन चार प्रश्न है मुझे लगता है कि इसका उत्तर एक ही होगा लेकिन मैं वो एक साथ रख देता हूं एक पूछा है पूछा गया है कि जो भी हो इसकन के लिए स्कन आर्य समाज के एक साथ प्रश्न है ये कि जो भी हो इसकन इतने बड़े स्तर पर युवाओं और लोगों को हिंदू धर्म की तरफ खींच तो रहा है इसमें परेशानी क्या है आपको क्या समस्या है इससे आवान जी ठीक है दूसरा आर्य समाज इतने लोगों को कन्वर्ट होने से बचा रहा

00:46:59:06 है घर वापसी करवा रहा है इसमें बुराई क्या है क्यों पीछे पड़े हो आप हाथ धोके इनके ठीक है और अंत आप क्या कर रहे हैं आप अंत में सनातनी भाइयों भाई बहनों को बांट रहे हैं अब इसका उत्तर द देखिए इसका उत्तर यह है इसमें कई सारे हमें चीजें देखनी पड़ेंगी पहले तो हमें य जानना पड़ेगा कि हिंदू धर्म है क्या जो प्रश्न करता है वोय बताए मुझे हिंदू धर्म है क्या ठीक है जीव की चाह का वास्तविक विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को परिभाषित कर सकने वाले वेदा आदी शास्त्र द्वारा जीव की चाह सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त करने के निमित्त बताई गई विधि का नाम धर्म है सनातन धर्म है अब दूसरी बात यह आती है क्या इसकन और आर्य समाज दोनों क्या वह इस धर्म की ओर ला रहे हैं परांत काल का तो मोक्ष दे रहे हो तुम कहां से निष्ठा रहेगी अपने लोगों का आचरण देखो कहां से रहेंगे वो निष्ठावान तुमने मोक्ष कैसा लिखा है उसम चलो तुम्हारा ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं है तुमने मोक्ष भी नहीं दिया उसको खुद ही कह रहे हो वो सदा लीन रहना चाहता है मोक्ष की दुनिया में और खुद ही कह रहे हो

00:48:14:13 वापस आएगा और जब वह वापस आने वाली समय की अवधि जो होगी उसको काट रहा होगा तब भी उसके मन में एक दुख होगा क्या मुझे वापस जाना है मुझे वापस जाना है जैसे पेरोल पर आदमी छूटता ना पेरोल होता है ना जेल चला गया रामपाल ने बहुत पेरोल की एप्लीकेशन लगवाई है जी हा वो उसको मिलती नहीं है जमानत ल लगवाता रहता है वो पता नहीं क्या चक्कर है उसका तो तो जैसे जैसे पेरोल पर आदमी व्यक्ति छूटता है जेल से ऐसे ही छोड़ रहे हो तुम थोड़ी देर के लिए जाओ भैया बाहर घूम घाम के आ जाना तो जो पेरोल पर छूटा हुआ व्यक्ति होता है क्या वोह वैसे ही महसूस करता है जैसे जेल से सर्वदा मुक्त रहने वाला जो होता वो करता है करता है क्या पेरोल पर छूटा हुआ व्यक्ति य जानता है मुझे जेल वापस जाना है तो उसके मन में वो दुख है तो वो जितनी देर आपने प्रांत काल माना उतनी देर भी वो पूर्णतया सुखी नहीं है यह तो तुम उसको मोक्ष दे रहे हो तो इसमें होता क्या है कि आपकी जो धर्म के प्रति निष्ठा हमें कोई दिक्कत नहीं कैसा भी मोक्ष दो कैसा भी ईश्वर दो मगर इसमें दिक्कत य आती है कि आपकी धर्म की जो व्यक्ति की धर्म के प्रति निष्ठा है वो बाधित हो जाती खंडित हो जाती है वो व्यक्ति कभी भी धर्म के लिए जीने मरने वाला नहीं बन पाएगा अच्छा दूसरी बात है चलो

00:49:29:19 बन भी जाएगा फिर तुम खुद ही उसको सिखा रहे हो कि तुम हिंदू हिंदू हो ही नहीं ये भी तो कह रहे हो आपने कहा वो हिंदू बना रहे हैं लोगों को कहां बना रहे हैं वो तो कह रहे हैं हिंदू का मतलब है चोर काफिर लुटेरा मुझे हिंदू हिंदू शब्द मैं इस मैं इसके डिफेंस में बोलता हूं कम से कम वो ये तो बोल रहे हैं कि वो सनातनी है आप सनातनी है कम से कम एक तो कर रहे हैं वो अच्छा ठीक है कम से कम कृष् में कृष्ण में क्या बोलते हैं उनका मन लग रहा है भक्ति कर रहे हैं पूजा पाठ कर रहे हैं आपको ये सोचना होगा कि कृष्ण कौन है कृष्ण एक नाम है कृष्ण कृष्ण नाम का तो कोई जय भीम वाला भी आपको मिल जाएगा उस कृष्ण की पूजा करवा कर के आप जो है ये सोच रहे हैं कि वो आपके धर्म में वापस आ रहा है व सामने वाला नहीं आपको उसी कृष्ण तक वापस लाना है जो कृष्ण हमारा सनातन धर्म का कृष्ण है तो जब हम यह बात करते हैं कि वो सनातनी कृष्ण के पास आ रहा है तो वो नहीं आ रहा है तो सनातनी कृष्ण के पास वापस नहीं आ रहा है ये क्या आ रहा है लेकिन पेरोल पर आ जाने वाला जानबूझ के जेल जाता है तो फिक्स द ऑर्डर बट ही इज फ्री मैं समझ नहीं पाया क्या कह रहे व यह कह रहे हैं कि पेरोल पर तो आ जाते हैं रामपाल जी लेकिन लेकिन जो लेकिन आ जाते हैं बाहर तो तो

00:50:44:24 ठीक है मतलब ी मतलब व स्वतंत्र है व आ जा सकते हैं भले वरल से क्यों ना आ रहे नहीं उनके मन में जेल वापस जाने का दुख है मैं यह बता रहा हूं जेल वापस जाने के दुख से फ्री नहीं है वो व्यक्ति जब वो पेरोल पर बाहर है तो वो जेल से मुक्त है मगर जेल वापस जाने के दुख से फ्री नहीं है और मोक्ष क्या बताया जाता है मोक्ष तो वो है जिसमें सभी प्रकार के दुखों से मुक्त हो जाए तो जितनी देर आप व फ्री भी हो तो आप इस प्रपंच संसार से तो मुक्त हो मगर इस प्रपंच रूपी संसार में वापस आने के दुख से तो मुक्त नहीं हो ना वो तो तुम्हारी उतनी एक फास है ना मन में कि वापस जाना है आज चार दिन हो गए पाच दिन हो गए छ दिन हो गए अरे दादा रे अब जाना है फिर रोवा रोवाई शुरू करनी है घर में होना है ना ऐसा तो वो है पेरोल वाला और अभी जो बात चल रही थी वो क्या थी हा सनातन वाली देख देखिए वो कृष्ण जो है अगर जब तक आप उस कृष्ण की बात नहीं करोगे जो सनातन कृष्ण है जो वेदा दी धर्म का पालन करने वाला कृष्ण है शाश्वत धर्म का पालन करने वाला कृष्ण है तब तक वो वो कृष्ण नहीं है जिसके लिए आप समझ रहे हो अब आप देखो

00:52:00:04 यह सब चीजें जो होती हैं जो कुछ ऐसी चीजें होती इसमें स्कन कितना इवॉल्व होते हैं स्कन वाले कितना इवॉल्व हो जाते हैं जो कुछ ऐसी सोशल एक्टिविटीज होती है बिना इकन के इकन वाले कहां जाकर के मोर्चा निकाल देते कि नुपर शर्मा के लिए कोई मोर्चा निकाल दिया हो या बांग्लादेशी हिंदुओं के लिए यहां मोर्चा निकाल दिया ऐसा कितने कहां कहा हुआ बताइए इस कौन की तरफ से जो हिंदू जाएगा व अपने से जाएगा इस कन के बैनर के द्वारा ऐसा बहुत ही ना के बराबर है बहुत बड़ी बात है हो जाए तो क्यों इसका मतलब कन से जुड़ा जुड़ने वाला व्यक्ति वोह धर्म की रक्षा धर्म जो जुड़ने वाला व्यक्ति जो आप सोच रहे हो वो धर्म से जुड़ रहा है धर्म से नहीं जुड़ रहा है वहां पर आपको यही न्यूट्रल हिंदू मिलेगा हुंडा हिंदू मिलेगा बजरंग दल वाले मिलेंगे विश्व हिंदू परिषद वाले मिलेंगे भटके हुए हिंदू मिल जाएंगे आपको जिनके कोई सिद्धांत नहीं होंगे यह सब लोग मिल जाएंगे या कुछ बहुत कम संख्या में परंपरावादी मिल जाएंगे मगर आप को ये सब लोग नहीं मिलेंगे जो विदेशी षड्यंत्र के तहत जो हिंदू बनाए जा रहे हैं और उसमें रहने वाले हिंदू अगर मिलेंगे तो वो इस कोन के कारण नहीं मिलेंगे वो अपनी उनकी निष्ठा कुछ बाकी रह गई होगी उसके कारण आपको मिलेंगे यानी कि अगर वो वहां मिल रहे हैं आपको तो इसका मतलब आप ये समझ लो कि अभी वो पूरी तरीके से कन से लिप्त

00:53:15:15 नहीं हो पाए जिस दिन हो जाएंगे तो वो भी मिलना बंद हो जाएंगे तो तो दो चीजें ये हो गई कि पहली बात तो वो हिंदू धर्म या सनातन धर्म में नहीं ला रहे हैं वो अपने द्वारा सनातन के नाम से नकली सनातन सनातना भास में लेकर आ रहे हैं तो ऐसा सोचना गलत है कि वह सनातन धर्म से जोड़ रहे हैं पहली बात दूसरी बात यह है कि आप यह सोच रहे हैं कि उनसे आपको फायदा मिलने वाला है तो नहीं नुकसान ही मिलेगा अच्छा कैसे नुकसान क्या मिलता है हम जीत सकते हैं पूरी दुनिया से तुरंत जितनी आडलज सनातन के विरोध विरोध में बनाई गई पाच मिनट के अंदर जीत सकते हैं पाच मिनट वैचारिक जब क्रांति की बात आती है भाई विचारों से अगर हमने किसी को जीत लिया तो व्यवहार में जीतने की आवश्यकता ही नहीं रह जाएगी मगर दिक्कत तब आती है जब हमारे ही लोग हमारे उन सिद्धांतों का खंडन करते हैं पहली बात जैसे कि मैंने कहा ईश्वर वही है जो सब कुछ कर सकता है मुसलमान हार जाएगा मगर मुसलमान उससे क तुम्हारे य के आर समाजी भी तो यही कहते ईश्वर अवतार नहीं ले सकता लो भाई तो हमारे हमें हराने वाला कौन हुआ वही जो आपके अनुसार सना की रक्षा कर रहा है वो हमें हरा रहा है ऐसा सिद्धांत दे कर के

00:54:30:21 वो केवल सिद्धांत अपना दे ही नहीं रहा है वो हमारे सिद्धांत का विरोध कर रहा है वो निराकार ईश्वर की पूजा करना चाहता है खूब करे कोई दिक्कत नहीं है मगर वो यह कह के कर रहा है कि ईश्वर अवतार नहीं ले सकता ईश्वर साकार नहीं हो सकता यह गलत हमारे यहां भी निराकार ईश्वर के प्रतीक के रूप में शिवलिंग है और साकार ईश्वर के स्वरूप के रूप में उनका विग्रह है भगवान का चाली ग्राम भगवान है निरा के रूप में और वैसे उनका विग्रह है सगुण साकार का ठीक तो ऐसा नहीं है अगर वोह निराकार की भक्ति करना चाहते हैं उन्होने निराकार स्वरूप को चुना है तो वो एक बात अलग है मगर वह जब विरोध करते हैं तो हमारा सिद्धांत कमजोर कहां हमारे जो वैचारिक क्रांति वो कमजोर कहां पड़ती है जो विरोधी है शत्रु है उनके सामने तो इसका मतलब आपने ऐसे सिद्धांतों का प्रचार करके आपने रक्षा नहीं की बल्कि आपने कमजोर की आज हमारे जो ज्यादातर जो यूथ है उसको हमारे मूलभूत सिद्धांत नहीं पता है ईश्वर भैया कुछ भी कर सकता है यह सब सिद्धांत नहीं बताया आप लोग आप जैसे लोगों कारण ठीक है दूध दही की थोरी फैला दी शिवजी बन सकते हैं ये है वो अपने मन गणन चीज फैला दी नई नई लीलाए बता दी जो है ही नहीं जो परंपरा प्राप्त आचार्य

00:55:45:26 मान ही नहीं रहे हैं खुद ही कह रहे हैं इसकन धनवाद का आप वीडियो देखिए खुद ही कह रहे हैं कि भैया हमने नए सिद्धांत बनाए हैं फिर थोड़ी देर बाद खुद ही कह रहे हैं कि हम वही तो कर रहे जो पूर्वा चार कर खुद ही कह रहे कि हम जो है विरोध कर रहे हैं पूर्वा चार्य का और फिर खुद ही कह रहे वही तो कर रहे जो पूर्वा चार्य कर रहे वा हो गया तो इसी में ही एक आखरी आंसर रह गया दो आंसर तो ये हो गए पहला कि वह सनातनी नहीं बना रहे और दूसरा आपको इससे कोई रक्षा नहीं हो रही आपके पास कुछ नहीं हो रहा है कोई रक्षा नहीं हो रही वो व्यक्ति आपके साथ खड़ा नहीं हो रहा है अरे भैया तुम मंदिर बचाने जा रहे हो वो भी वही कह रहे मूर्ति तोड़ो मंदिर बचाने के नाम पर अपनी सत्या प्रकाश दे देंगे धीरे धीरे तुम्हारा वो विग्रह लुप्त हो जाएगा तुम्हारे साथ उन्होंने मंदिर की रक्षा करने का दिखावा कर दिया आ समाज यों ने और उसके बाद आप उनके फैन बन गए वाह तो बहुत अच्छे हैं फैन बनने के बाद उन्होंने आपको दी सत्या प्रकाश उसम लिखा है कि मूर्ति पूजा धर्म पाप है तो क्या हुआ जिस मंदिर की रक्षा की उसको लुप्त कराने का इंतजाम उन्होंने ही कर दिया तो यह रक्षा नहीं हो रही है यह सनातन के नाम सनातना भास फैलाया जा रहा है आभास है यह सनातन नहीं है तीसरी बात

00:57:01:08 100 की सीधी एक बात हाथ मु धो के कहां पीछे पड़ गए भैया मर्डर कर दिया चाकू चला दिया गोली मार दी क्या पीछे पड़ गए अरे भैया सैद्धांतिक बातें रख रहे हैं कौन सा उनका हमने खंजर मार दिया गला घोट दिया जाकर के कि फांसी लगा दी या बम बम मार दिया तो इसका मतलब य इसका मतलब ये हाथ मुह धोकर पीछे पड़ना नहीं हाथ र पीछे पढ़ना अलग चीज है जी इसी में एक प्रश्न आता है कि पूछा गया है कि आप होते कौन है हिंदू संप्रदाय पर टिप्पणी करने वाले हमारे बीच में करने वाले आपको अधिकार किसने दिया हिंदू संप्रदायों को सही और गलत बताने का मनुम मनुम मनुस्मृति कहती है कि मनुस्मृति कहती है कि मौन रहने से अच्छा होता है सत्य बोलना ठीक है तो पहली बात तो मैं सत्य बोल रहा हूं मैं किसी पर टिप्पणी नहीं कर रहा हूं मैं सत्य बोल रहा हूं मैं मौन नहीं हूं मैं सत्य बोल रहा हूं तो य मैं अपने धर्म का पालन कर रहा हूं दूसरी बात यदि मुझे अपने धर्म पर आच आती हुई दिख रही है तो मैं उसकी रक्षा के लिए बोल रहा हूं क्योंकि जो अपने धर्म की रक्षा करता है य भी मनुस्मृति में लिखा है धर्म उसकी रक्षा करता है और

00:58:16:18 तीसरी बात यह भी लिखा हुआ है कि यदि आपको शास्त्र यदि आपको कहीं से आज्ञा ना भी मिले फिर भी आप सिद्धांतों की रक्षा अगर कर रहे हैं तो करते रहिए अगर आपको आज्ञा कहीं से प्राप्त नहीं भी हुई है तो भी अपने धर्म की अपने सिद्धांतों की रक्षा करते रहिए ठीक है तो हम अपने सिद्धांतों की रक्षा कर रहे हैं और हम सत्य बोल रहे हैं हमने कोई किसी को गोली थोड़ी मार दी है वही बात है ना हमने तो अपने सिद्धांतों को यथावत कहा है और जो हमारे सिद्धांतों का कोई विरोध कर रहा है उसको यथावत हमने उत्तर दिया है जी सुप्रीम कप जीने से आपको पा डॉलर का डोनेशन किया और कह रहे हैं कि आर्य समाज एंड कन मुस्लिम्स के खिलाफ खड़े हैं आप कब खड़े होंगे तब आपकी बात की वैल्यू होगी तब तक तब तक नहीं मित्र लेकिन आप डर जाते हो पंडित जी ओके तो यही मेरा अगला प्रश्न था जो सुप्रीम य सुपरमैन कपटर जी ने पूछ लिया है कि आप किसी अन्य पंथ वालों से क्यों नहीं भते ठीक है क्यों नहीं हमा हमारे चैनल पर

00:59:27:04 जो जो सो कॉल्ड मतलब हिंदू धर्म को फैला रहे हैं उनके पीछे पड़े हुए हैं आप दूसरे पंथ वालों को पीछे नहीं पड़े हु ऐसा नहीं है यह कहना गलत होगा अगर हम हिंदू राष्ट्र गोष्ठी कर रहे हैं धरातल पर हिंदू राष्ट्र गोष्ठी अब तक करीब हिंदू राष्ट्र गो के बारे में बताइए क्या है यह मतलब क्या करते ू राष्ट्र गोष्ठी का मतलब है हिंदू जो सनातन सिद्धांतों के सिद्धांतों पर आधारित राष्ट्र का निर्माण है ना एक तर जहां पर हमारे जो आदर्शों की जहा रक्षा हो सके और इसको अगर एक उसमें कहा जाए एक क्रमबद्ध वाक्य में तो सुशिक्षित

✅ This part is already used · 01:00:07:00 – 01:00:17:04 (0:10)

→ Used in: B · Video अध्ययन प्रारम्भ DAASBODH LECTURE #1 at 2:39 ↗

01:00:07:00 सुसंस्कृत सुरक्षित स्वस्थ संपन्न सेवा परायण व्यक्ति और समाज की संरचना और वो भी अन्यों के हित का ध्यान रखते हुए

⬜ Not used yet · 01:00:17:04 – 01:23:06:24 (22:50)

01:00:17:04 मगर जब हम हिंदू राष्ट्र की बात कर रहे तो अपने आप में ही क्या क्रिश्चन का विरोध नहीं है क्या यह मुस्लिम का विरोध नहीं है क्या यह बौद्धों का विरोध नहीं है तो ये आप कैसे कह सकते कि हमने उनका विरोध नहीं किया है भाई हमारा हिंदू राष्ट्र कहना ही उनका विरोध हो गया ना कि हम हिंदू राष्ट्र के पीछे पड़े हैं तुम इसकन से कलवा हिंदू राष्ट्र कहां कह रहा है इसकन कलवा पता चल जाएगा अभी वो तो कह रहा है ईश्वर अल्लाह एक है कुरान भी वो उसका व कुरान और उसमें सामंजस्य दिखाई दे रहा है उसको वेदों में वो तो यह कह रहा है और दूसरी बात आपने पिछले प्रश्न में एक बात कही थी कि आप होते कौन है हिंदू संप्रदाय पर उंगली उठाने वाले तो नहीं मैंने ू संप्रदाय सनातन संप्रदाय पर उंगली नहीं उठाई है मैंने सनातना भाषी तंत्रों पर उंगली उठाई है संप्रदाय हमारे जो जितने भी प्रामाणिक संप्रदाय सबका हमने सम्मान किया हमने किसी को भी ऐसा नहीं किया कि किसी का तिरस्कार किया हो और हमने उंगली उठाई है जो सनातन का चोला ड़ कर के सनातना भासी जो संस्थाए आ गई है जो एक पैरेलल अपना वो तैयार कर रही जाकर देखिए मायापुर का जो बहुत बड़ा टेंपल बन रहा है कौन से एंगल से आपको टेंपल लग रहा है अपने मंदिरों में आपने कम नीला कलर देख लिया बताइए कौन से अपने आपने अपने मंदिरों में

01:01:32:04 नीला कलर देखा है वो आपको टेंपल कहां से लग रहा है भगवान को कपड़े तो पहनाए जाते हैं शायद नीरे नहीं विग्रह पे विग्रह में भगवान को कपड़े नहीं पहनाए जाते हमारे यहां ज्यादातर नीले कलर को छोड़ा गया इसके बारे में जो वर्बल मुझे ध्यान नहीं है स्मरण में हमारे यहां ज्यादातर नीला कलर जो है छोड़ के चला गया हमारे मंदिरों पर कम से कम मंदिर काला मंदिर हमारे हा कभी भी हमारे नीले कलर के मंदिर नहीं बने वहां देख के आइए आप जा के वो चर्च मंदिर तो नहीं बनना चाहिए लगता है लगता है मतलब ये एक ग्रंथ है बहुत ही अच्छा वास्तु रत्नाकर नाम का ग्रंथ है उसके अंदर निषेध किया गया है वास्तु में नीले रंग को बाहर अरे मैं अभी प्रवचन चल रहा था गुरुदेव का वहां पर कोई व्यक्ति नीले कलर के कपड़े पहन करके आया था तो गुरुदेव ने तुरंत उसको टोक दिया था है ना तो नीला कलर हमारे यहां मेरे ख्याल से जहां तक अभी मैंने बकुल सही है नीला नीला यजली नेटी अट्रैक्ट करता हैय साइंटिफिक प से बता रहा हूं इस वजह से इसको फिर आप कह रहे हो कि हिंदुत्व की रक्षा हो रही है वहा वो शांता बना रहे हमारे राम को हमारे कृष्ण को शांता बना रहे हैं आप कह रहे हो हिंदुत्व की रक्षा हो रही है क्राइस्ट को ऊपर रख

01:02:47:07 कर के नीचे काली दुर्गा देवी इन सबको रख रहे शिवजी को नीचे रख रहे क्राइस्ट को ऊपर रख रहे आप क हमारी वो हो रही है और आर तो खुद ही कह रहा है वो आचार्य श्री आए थे इनके आ समाज आर समाज वालों के वो कह रहे ऋषियों जो ऋषि गण जो लिख के गए हम समय समय पर अपना वो छोड़ देते हैं बदल देते हैं ये शाश्वत धर्म है क्या जो शाश्वत नहीं वो सनातन नहीं तो आपने जब यह प्रश्न मैंने आपसे किया था तो आपने मनुस्मृति का संदर्भ दिया था आपने प्रमाण मनुस्मृति से दिया था कि मौन रहने से अच्छा है कि प्रश्न करना है ना ऐसे ही कुछ कहा था जी इसी प ही द्वेष

01:03:26:08 रखते हुए आपसे प्रश्न किया गया है कि आप मनुवादी है ठीक है आप मिसज निस्ट है मिनिस्ट यानी कि नारी द्वेष है आप औरतों को हीन भाव से देखते हैं ऐसा लगता है क्योंकि आप बोलते हैं कि जैसे एकन का वो हुआ था उसमें डिस्कशन तो आपने सु था कि आप अपने औरतों का उपनयन करवाते हो क्या अपने य तो इसका मतलब आप भी इस बात से सहमत है कि औरतो को अप नहीं करवाते य सब करके तो कुल मिलाकर मतलब मलू वादी है आप नारी द्वेष है आप सौज निस्ट है एक चीज मैं यहां पर क्लियर कर दूं पहले इस प्रश्न को लेने से पहले नारी वाला थोड़ा सा मुझे दोबारा याद दिला दीजिएगा कि जैसे ये लोग ये कह रहे हैं कि भाई जैसे प्रश्न कर्ता ने ये कहा है कि आप जो है संप्रदायों का विरोध क्यों करते हैं तो जैसे आचार्य प्रशांत है वो भी यही कह रहा है कि मैं भैया हिंदू बना रहा हूं लोगों को और ये आर समाजी भी यही कह रहे हैं कि मैं सनातनी बना रहा हूं वो कहते हिंदू बना रहा हूं अगर फिर उनसे पूछो तो कहते हिंदू शब्द काफिर चोर है वो बात अलग है फिर उसके

01:04:34:10 बाद उसके बाद क्या है कि इकन वाले भी यही बोलते कि हम हिंदू बना रहे हैं तो जब ये सब ये बोल रहे हैं कि हम हिंदू बना रहे हैं यह सब एक दूसरे का विरोध क्यों कर रहे हैं आर्य समाज ने स्कोन का भी विरोध किया आचार्य प्रशांत का भी विरोध किया आचार्य प्रशांत ने इकोन का भी विरोध किया समाज का भी विरोध किया इकोन ने आचार्य प्रशांत का विरोध किया और समाज का भी विरोध किया तो अगर हिंदू बना रहा इनके द्वारा यह कहा जाना सत्य है कि ये हिंदू बना रहे हैं तो फिर ये दोनों ये आपस में एक दूसरे का विरोध क्यों कर रहे हैं इसका मतलब यह हुआ कि केवल यह कह देने से कि हम हिंदू बना रहे हैं उससे ये नहीं सिद्ध होता है कि हम हिंदू बना रहे हैं आपको ये मानना पड़ेगा दूसरी बात एक चीज और है जैसे अभी कलर की बात चल रही थी तो कई प्रकार के नीले कलर होते हैं ऐसा नहीं है कि सभी नीले कलरों का निषेध है और पहनने में तो उतना निषेध है भी नहीं मगर जो मंदिर की गुम्मत इत्यादि है उसमें अमुक अमुक जो नीले शेड्स होते हैं उनका निषेध है ऐसा नहीं है कि पूरी तरीके से नीला कलर मतलब वही कर दिया गया है जी जी उसके शेड्स है वो जो शेड है वो स्वीकार नहीं है और कहीं पर स्वीकार है भी मगर कहीं पर नहीं भी है ठीक है जैसे अब आप आप देखो

01:05:49:24 हमारी गुंबद लाल भी नहीं होती है बिल्कुल जो टमाटर वाला लाल है वो भी नहीं होती है मगर वहीं पर माता दुर्गा की साड़ी रेड होती है है ना तो उसका कहां पर किस कौन सा यूज होना है वो अलग है तो हमने अपने मंदिरों का शिखर कभी भी नीला नहीं देखा है हिंदू मंदिरों का हां हमने वो जरूर देखे हैं चर्च जरूर देखे हैं ऐसे मस्जिदें जरूर देखी इस तरह की जैसे वो बना है ठीक है अच्छा दूसरी बात आपने वो नारी वाला पूछा है हां हां आप नारी देष है अब ये क्या कह रहे हैं सुपरमैन क्रिप्टो नाइट सारे पंथ गलत बस आप इसको ऐसे कहना देखिए इसको ऐसे कहना गलत है कि सारे पंथ गलत है बस आप स कक्ष कर रहे कटाक्ष कर रहे हैं ये ये आपके ऊपर कटाक्ष कर रहे हैं ठीक है मैं मैं उसको सही कर रहा हूं मैं उसको सही कर रहा हूं देखिए ऐसा है कि जैसे कोई यह कहे कि भगवान ने सारे जन्म भारत में ही क्यों लिए भगवान ने सारे जन्म भारत में ही क्यों लिए तो इसको यह जो तरीका है ना कहने का यही गलत है भगवान ने सारे जन्म भारत में नहीं लिए भगवान ने सारे जन्म जहां लिए है वो भारत

01:07:05:06 है ठीक है ऐसे कहिए इसी तरीके से एक वो आया था कि क्या ग्रेविटेशनल फोर्स के बिना ईश्वर सृष्टि का संचालन कर सकते हैं तो ग्रेविटेशनल फोर्स से सृष्टि का संचालन नहीं होता है जिस फोर्स से सृष्टि का संचालन होता है उसे आप लोग ग्रेविटेशनल फोर्स कह रहे हैं अब ठीक है आप आप यह कहे ग्रेविटेशनल फोर्स को छोड़ दो तो ईश्वर जिस भी तरीके से धरती को चलाएगा या वो वाली क्रिया जो ग्रेविटेशनल से संबंधित है वो जब होंगी तो य तो ग्रेविटी है आपने मान रखा है ना वो ग्रेविटी है तो ये आपकी इंफॉर्मेशन है तो इसी प्रकार से जो यह वाली बात है कि जो अभी प्रश्न आया था कि एक आप ही सही हो भाई मैं नहीं कह रहा हूं मैं ही सही हूं मैं हर उसके साथ हूं हर उस मत पंत संप्रदाय संस्था उस के भी साथ में हूं जो मुझे तीन चीजें दे देगी वो तीन चीजें क्या है सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म जो जो दे रहा है मैं उसके साथ हूं चलो कहां आर समाज के नारे लगाने हैं झंडा उठाना है चलो भैया सर्वशक्तिमान ईश्वर दे दो मैं नहीं खिलाफ हूं आर समाज के तो मैं मैं ये नहीं कह रहा हूं मेरा ही पंथ सही है मैं ये नहीं कह रहा हूं मैं ये कह रहा हूं कि मैं किसके साथ खड़ा हूं सर्वशक्तिमान ईश्वर

01:08:20:18 परम स्वतंत्र मक्ष शाश्वत धर्म जो जो देता जाएगा वो वो मैं मैं मैं उसके साथ हमारी टीम उसके साथ खड़ी होती जाएगी अच्छा लॉजिक य है कि जो जो य देता जाएगा वो खुद परंपरा प्राप्त सिद्धांतों को स्वीकार करने वाला बनता जाएगा यह एक अलग बाय प्रोडक्ट है मगर हम इसको ऐसे ना कहे अगर ऐसे कह दे कि आर समाज अगर ईश्वर को सर्वशक्तिमान कहने लगे कहने मतलब उसकी परिभाषा से सिद्ध हो है ना कहते तो सभी है और उसका जो य धर्म को बदलना है कि हम वो जो होता है क्या कहते हैं क्या कहते देश काल परिस्थिति के अनुसार ऋषि गण जो लिख गए हैं हम उसको बदल देते हैं तो उसका ऐसा कहना बंद हो जाए और जो मोक्ष का व परांत काल बनाया हुआ है उसको बदल दो बात खत्म हो गई बात खत्म हो गई हम और वो एक तो हम सही के साथ है भाई जो जो सही है हम उसके साथ है हम ही सही नहीं है हम सही के साथ है यह कहना ज्यादा उचित होगा है ना जी जीने क्लास्ट लाइन क क्योंकि सबसे ज्यादा पाखंडी भारत में ही हुए हैं इसलिए भगवान को यही आना पड़ा ऐसा कोई जरूरी नहीं है ये तर्क भी ठीक नहीं है और आपने मुझे नहीं लगता कि आपने ऐसा कौन सा स्टेटस्ट कल एनालिसिस कर लिया यहां पर कि आपने सब हर प्रांत में जाके

01:09:35:19 पता कर लिया कि कितने पाखंडी हुए हैं उस विश्व भर में तो यह तर्क थोड़ा बेसलेस है भगवान ने धरती का एक केंद्र बनाया जहां से मैं अपना जो धर्म का धर्म होगा वो स्फुट होगा पूरे संसार में जब उसको केंद्र बनाया उसी को भारत कहा गया ऐसे समझिए अब ये तो आप क्वेश्चन ये भी कर सकते हो मान लो भगवान ने भारत को नहीं बनाया होता किसी और जगह को बनाया होता भगवान ने कुछ भौगोलिक चीजें की कि भा ये धरती मुझे पसंद आ रही है इसी को मैं केंद्र बनाऊंगा ठीक है अब यही केंद्र उन्होने कहीं और बताया होता तो इसको आप वहां भी क्वेश्चन पुट अप कर सकते कि यही क्यों हुआ यही केंद्र क्यों बना अब जैसे कि ईश्वर के लिए हम लोग एक क्या कहते जेंडर वाचक शब्द बोलते हैं लिंग वाचक शब्द कि ईश्वर ऐसा करता है ठीक है तो दो ही जेंडर है बोलने के लिए क्योंकि ईश्वर तो अव्यावहारिक है तो व्यवहार में लाने के लिए हमको उसको लिंग वाचक रूप में बोलना पड़ रहा है अब हम अगर स्त्री उसम बोलेंगे तो आप कह सकते हो कि स्त्री में क्यों बोल रहे हो पुरुष में क्यों नहीं बोल रहे हो जब पुरुष पुरुषवाचक में बोलेंगे तो आप क पुरुषवाचक में क्यों बोल रहे हो स्त्री वाचक में क्यों नहीं बोल रहे हो तो यह क्वेश्चन तो हमेशा हो सकता है निरर्थक क्वेश्चन

01:10:46:03 है तो ठीक है यह क्वेश्चन आर समाजी से भी बनता है कि जब उनका ईश्वर अवतार नहीं ले सता है और उसका कोई जेंडर नहीं है जेंडर नहीं है उसका कोई तो वो उसको करता है करता है क्यों बोल रहा है करती करती है क्यों नहीं बोल रहा है ईश्वर तो यहां फसगे र समा अवतार तो लेता नहीं है उनका ईश्वर तो व्यवहारिक यहां पर व्यवहार की बात आएगी कि वो नहीं है मगर व्यवहार में हमने माना कि वह करता है या करती है है ना व्यवहारिक व्यवहारिक नहीं था वो ईश्वर मगर व्यवहार एक व्यवहार में हमने उसको माना है ना एक व्यवहार में उसको उसके बोलने के लिए हमने एक शब्द का उपयोग किया व ऐसा करता है इसी प्रकार से जैसे हमने शब्द का उपयोग किया ऐसे ही उसका अवतार होता है

01:11:35:21 जी ठीक है एकला प्रश्न मैं लेता हूं हा की अब कुछ प्रश्न आते हैं मेरे पास हा क्या क्या ईश्वर लॉजिकल कार्य कर सकता है जैसे दो और दो को पांच कर सकता है वंद स्त्री को तान बंद स्त्री से संतान को जन्म दे सकता है शाति शुधा व्यक्ति को कुवारा बना सकता है यह प्रश्न क्या ऐसा ईश्वर कर सकता है

01:12:09:01 आपता हा मैं बोल रहा सबसे पहली बात तो यह है कि इसका इस क्वेश्चन का आंसर मैंने वैसे कल भी दिया है अरे क्षमा करिएगा क्षमा करिएगा य मिनी आपने अपना पॉइंट नहीं दिया कि आप नारी द्रोही आपको कता हा तो सबसे पहले हमें ये चेक करना पड़ेगा कि नारी द्रोही कहते किसे हैं नारी द्रोही कहते किसे हैं यदि को मना कर रहे हैं ना आप उप मना कर रहे हैं आप बोल रहे हैं कि उने नहीं हुआ तो वेद मंत्र नहीं पढ़ेंगे सब करेंगे तो जब संस जब हमने जब ईश्वर ने हम में कोई अंतर नहीं रखा तो आप कौन होते हैं अंतर रखने वाले ईश्वर ने हम में अंतर नहीं रखा तो आप कौन होते अंतर करने वाले पहली बात तो ईश्वर ने हम में अंतर रखा है ऐसा नहीं है दूसरी बात दूसरी बात यह है कि अगर मेरा जो अगर उनका जो है उपनयन नहीं होता तो इसलिए मैं स्त्री द्रोही सिद्ध होता हूं तो क्या मैं मांग नहीं भरता हूं इससे वह स्त्रिया जो मुझे कह रही है कि तुम मांग मत भरा करो तुम्ह मांग नहीं भरनी चाहिए वह क्या पुरुष द्रोही साबित होंगी क्या मेरा जो वो होता गोद भराई नहीं होती है है ना

01:13:24:21 एक लड़के की वक्षा होती है गोद भराई नहीं होती है गोत भराई एक मातृ शक्ति की होती है तो मात्र तो एक लड़के की गोद भराई नहीं होती है और उसको जो य स्त्रियां बता रही है बेटा लड़के की गोद बराई नहीं होती लड़के की परीक्षा होती है तो उसको जो य बता रही है जो स्त्रियां वह सब क्या पुरुष द्रोही है ठीक है तो यह आप मुझे पहले सिद्ध करिए कि स्त्री द्रोही होना होता क्या है और इन सबके कारण है बहुत सारे कि उपनयन किसका होना चाहिए किसका नहीं होना चाहिए किसकी मुक्ति का पथ किस शरीर की किस शरीर में विद्यमान जीवात्मा किस शरीर में जीवात्मा किस शरीर में विद्यमान जीवात्मा की मुक्ति का पथ क्या है यह अलग अलग पथ है कोई भी मंजिल से वंचित नहीं किया गया है भगवान ने न 32 में कहा मेरी शरण में वो लोग भी आक के मुक्त हो जाते हैं स्त्री इत्यादि भी होते हैं तो उनका पथ अलग है कह रहे कि व्यवहारिक रूप से अंतर है लेकिन फल चौरे नहीं है नहीं हां व्यवहारिक रूप से अंतर है शारीरिक भेद होने के कारण आपके रास्ते अलग किए गए हैं मगर उस रास्ते से मिलने वाला जो फल है उससे आपको वंचित नहीं किया गया है अब य आप कहते चाहे वो कोई

01:14:39:22 भी हो कोई भी हो चाहे शूद्र हो चाहे अंत क्यों ना हो चाहे चांडाल योनि में कुल में उत्पन्न होने वाला क्यों हो ऐसा नहीं है कि वो मुक्त नहीं हो सकता है तो हा तो अब यहां पर क्या है कि जो समाज की जो व्यवस्था है ना वो भेद से ही है अगर भेद नहीं है तो समाज है कहां इस दुनिया में इस संसार का अस्तित्व तभी तक है जब तक भेद है तो आप भेद को नकार नहीं सकते बस ये है कि जिसका जैसा शरीर है उसके अनुसार उसकी मुक्ति का रास्ता दिया गया है तो हम अच्छा अगर कोई ये कहे कि नहीं नहीं मेरे को मुक्ति से कोई मतलब नहीं है मुझे तो इन रास्तों से मतलब है कि मुझे जो वो जो वो जिस रास्ते पर चल रहा है उस पर मुझे चलना है कोई अगर ये कहे मुझे मुक्ति से मतलब नहीं मुझे तो उस रास्ते पर चलना तो उसका क्या किया

01:15:35:10 जाएगा इस प्रश्न का उत्तर दे रहे हैं अभी आपको य यही है यही है इसका उत्तर जी बताइए तो उसका क्या किया जाएगा कि मुझे तो भाई मुझे मुक्ति युक्ति से मतलब नहीं है मुझे तो जो है इस रास्ते पर चलना है तो जब आपने यह कह दिया कि मुझे मुक्ति से मतलब नहीं है तो यहां पर आपने शास्त्रों का खंडन कर दिया क्योंकि शास्त्र कह रहे आपका मतलब मुक्ति से ही है धर्म का परवन मुक्ति में ही है तो जब आपने ये कह दिया मुझे मुक्ति से मतलब नहीं है मुझे तो ब्राह्मण का जीवन जीना मुझे तो जिने कराना है मेरे को तो इससे मतलब है यह कहीं भी म जीव की चाह का वास्तविक विषय नहीं लिखा है धर्म का परवन नहीं है इसमें ये तो साधन मात्र है अलग-अलग तरीके के है ना तो धर्म का परवन किसम है मुक्ति में और आप कह रहे हो कि मुक्ति से हमें कोई मतलब नहीं हमें तो इस रास्ते से मतलब है तो आपने धर्म का खंडन कर दिया उस तो उस समय भी जब आपने धर्म का खंडन कर दिया तब भी आपका उन उस धर्म के द्वारा बताए जाने वाले जो विधि विधान है उनका आलंबन लेने का कोई औचित्य ही नहीं रह जाता जब आप वेद को नहीं मान रहे जब आप शास्त्र को नहीं मान रहे तो फिर आप उन शास्त्रों से मिलने वाला जने क्यों चाहिए आपको दोनों ही तरीके से आपको जने की आवश्यकता नहीं है

01:16:43:12 जी करके और नहीं तो फिर उन स्त्रियों को भी कह दो भैया वो स्त्री द्रोही है जो ये बताती है अपने बेटों को कि तुम मांग नहीं भरोगे तुम कुंडल नहीं पहनो ग है ना तुम जो है वो स्त्रियों स्त्री वाले कोई भी कोई भी ऐसा कार्य जिसने एक स्त्री ने अगर पुरुष को बता दिया किय तुम्हारे लिए नहीं है बस व पुरुष द्रोही हो गई है ना और वो कौन होती है हमको बताने वाली कि हम मांग भरेंगे कि नहीं मरेंगे यही तो दुनिया चाहती है पागल हो जाए सब के सब तो इसी पर एक प्रश्न है किक आपने स्त्री और वर्ण का एग्जांपल ले लिया यहां पर तो अवती बैटन मैन नाम के व्यक्ति है हमारे डिस्ड चैनल पर तो उन्होंने एक प्रश्न किया था की एक्चुअली उनका कोई डिस्कशन चल रहा था मैं आपको तो किसी एक अवती से ही डिस्ड पर उनकी डिबेट चल रही थी तो उन्होंने वण व्यवस्था पर जब उन्होंने यह बोला कि वण व्यवस्था पर उसे जब मैंने मनुस्मृति का प्रमाण दिया कि ब्राह्मण का उपनयन आठ से 12 वर्ष की आयु में हो जाता है हो जाना चाहिए तो यहां ब्राह्मण कैसे डिसाइड हुआ जबकि उपनयन तो हुआ ही नहीं तो उसने यह तर्क दिया कित कुतर्क दिया कि वह जन्म वर्ण से नहीं बल्कि गुरु ने कुछ समय तक बच्चे

01:17:58:13 को गुरुकुल में रखने रखकर नोटिस किया और उसके कर्म और गुण के आधार पर फिर डिसाइड किया कि आठ से 12 वर्ष में अब इस ब्राह्मण का या वैश्य का वर्ण का या के हिसाब से उपन किया जाना चाहिए तो ये अद जवाब नहीं दे पाए जी मैं देता हूं सबसे पहली बात ये आएगी कि यह जो रखने वाली विधि है ठीक है ये इनको प्राप्त वो कहां कौन से शास्त्र में लिखी हुई है वह विधि हमें दे दीजिए कि वो कितने दिन रखेगा और कौन-कौन सी चीजों पर ध्यान देगा कि जिससे निर्णय किया जा सके कि ब्राह्मण है वो विधि होनी चाहिए ना बिल्कुल है ना दो बातें दूसरी बात ये है कि जो भाई साहब ये प्रश्न कर रहे हैं क्या उन्होंने वेदों पर भाष्य कर लिया है क्या उन्होंने मनुष प्रति पर भाष्य कर लिया है तो मनुष प्रति हमें दिखा दे जहां से वो अर्थ ले रहे हैं मैं कह रहा हूं आर्य समाज के भी मनुस्मृति में ये नहीं है जी समाज ही तो दतक है इन जैसे लोगों को जन्म देने वाला हर समाज है इन सबका पिता हर समाज है जितनी भी ये संस्थाएं आज खड़ी हो गई है इन सबका पिता मैं कहूंगा आर समाज को और भी कुछ पहले रहे होंगे मगर मेरी नजर में आर समाज ही इन सब का जनक है अब वो ठंडा पड़ गया वो बैठ गया है ये सब लोग बहुत आगे आगे बढ़ रहे हैं तेजी से आचार्य प्रशांत स्कोन ब्रह्मा

01:19:13:20 कुमारी ये सब उन्नत है आर्थ समाज पिछड़ गया मगर स्त्रोत के रूप में ओरिजिन के रूप में वही है इन सबका उसने परंपरा वाद का खंडन करना शुरू किया तो सबने परंपरा पाद का खंडन करना शुरू कर दिया तो मैं कह रहा हूं कि आर्य समाज ने अपने वेदों के भाष्य तो किए हैं मनुस्मृति का भाष्य तो किया है क्या तुम उसकी मनुस्मृति में दिखा दो चलो यह जो प्रमाण तुम बोल रहे हो कि ऐसा ऐसा होगा दूसरी बात ये है दूसरी बात यह है कि आपको अंततोगत्वा बताना पड़ेगा कि वह कौन से सिद्धांत होंगे जिनके आधार पर गुरु यह चेक करेगा कि ब्राह्मण होगा कि नहीं होगा ठीक है जी और आर्य समाज ने भी यह माना है आर्य समाज ने अपनी संस्कार विधि में क्या लिखा है पता है कि जिन माता-पिता को अपने बच्चे को ब्राह्मण बनाना है वो उसका जनेऊ आ से 12 साल की आयु में कराते बताइए अब माता-पिता डिसाइड कर रहे हैं कौन ब्राह्मण बनेगा गुरु नहीं डिसाइड कर रहा तो पहले जाकर के आप लोग तय कर लो और या फिर जो जो व्यक्ति यह बात बोल रहा है वो अपनी मनुस्मृति छाप ले पहले फिर आए हमारे पास बात करें फिर हम उनसे अगले प्रश्न पूछेंगे कि ज्ञान तुम्हें कहां से प्राप्त हुआ परंपरा से हुआ है फिर वो नियम कहां पर है जहां पर यह सब लिखा हुआ है वो नियम कहां पर है जहां पर यह सब

01:20:28:20 लिखा हुआ है ये सब चीजें ठीक है की बातें है तो एक इलॉजिकल का ही एक कंटिन्यूअल क्वेश्चन है कई लोगों के मन में आता है कि आप जोक आप कहते हैं कि आपका ईश्वर सर्वशक्तिमान है कुछ भी कर सकता है तो क्या वह अपने आप को मार सकता है नष्ट कर सकता है ऐसे ऐसे प्रश्न आते हैं तो अरे इनका जवाब मैंने कई बार दे दिया है ऑपरेटर महोदय सेरी प्रा दो लाइन में दे दीजिए बस मैं दे देता हूं देखिए व्यवहारिक रूप से ईश्वर अपने आप को नष्ट करके भी दिखा सकता है ऐसी कई लीलाएं हैं जिसमें कि ईश्वर ने अपने शरीर को नष्ट किया है है ना परंतु परमार्थिक रूप से ईश्वर का अस्तित्व सदैव श शेष रहता है अब यदि आप यह कहे कि परमार्थिक रूप से भी वो अपने आप को मार सकता है कि नहीं तो नहीं मार सकता मतलब अगर इस प्रपंच रूपी संसार से बाहर जो दुनिया है आप ये कहे कि उसमें भी ईश्वर का न अस्तित्व जो है खत्म हो जाए तो वो नहीं हो सकता अब आप कहोगे तो हम नहीं मानेंगे पहली बात तो बात ये है कि आपको सर्वशक्तिमान ईश्वर की सब कुछ कर सकने वाले ईश्वर की आवश्यकता इस प्रपंच रूपी संसार में है इस प्रपंच रूपी संसार से मुक्त होने के लिए आप मुक्त हो जाओगे तब कहोगे ईश्वर कहेगा तुम मुक्त हो गए हो नहीं अभी अभी तुम सब कुछ कर सकते हो कि नहीं क्या मतलब भाई

01:21:44:08 ईश्वर तुम्हे क्या मतलब है तुम तो मुक्त हो गए नहीं पहले सब कुछ करके दिखाओ पहली बात तो ये कोई लॉजिकल प्रश्न नहीं है दूसरी बात ये है कि पार मर्थक रूप से ईश्वर बाधित हो गया इस आधार पर भी तुम ईश्वर को नकार नहीं सकते क्यों क्योंकि परमार्थिक रूप से बाधित हुआ ये आपको परमार्थ की दुनिया का जो पता चला है वो ईश्वर से पता चला है जब आग की लपट जली तो उसने बताया तो तुम्हें पता चला कि इस काठ की लकड़ी में दाह क्षमता है अगर वह आग की लपट जलेगी ही नहीं तुम उसको मानोगे नहीं तो उसकी बात क्यों मानोगे कि इस काठ की लकड़ी में कुछ है इसी तरीके से जब तुमने किसी को ईश्वर माना तब तुम्हारे लिए परमार्थ का अस्तित्व है है अगर तुमने किसी को ईश्वर माना ही नहीं है तो तुम्हारे लिए परमार्थ का अस्तित्व नहीं है तो क्या हुआ कि जब तुम परमार्थ की किसी घटनाक्रम के कारण ईश्वर को नकार दोगे कि मैं नहीं मानता क्योंकि वो बाधित हो गया क्योंकि जो नास्तिक है वो कोशिश करेगा ना बाधित बाधित होने के कारण तो जब वो ये कहेगा मैं नहीं मानता क्योंकि ईश्वर बाधित है तो जैसे ही वो ये कहेगा मैं नहीं मानता तो फिर दोबारा से उसके नॉलेज में परमार्थ का होना एजिस्ट ही नहीं करता है यानी कि ईश्वर का बाधित होना एजिस्ट नहीं करता है क्योंकि परमार्थ नहीं है तो ईश्वर का बाधित होना एजिस्ट नहीं है तो क्या हुआ दोबारा से उससे

01:22:59:10 दोबारा से उसके पास ईश्वर को ना मानने का कारण नहीं रह गया तो यह ठीक इस प्रकार से है कि एक

01:23:06:24 जागा हुआ व्यक्ति यह नहीं कह सकता है कि मैं किसी की आवाज देने के कारण जाग गया क्योंकि

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01:23:11:06 अगर वह सो रहा है तो उसका सुनना सिद्ध नहीं होता और अगर वह सुन रहा है तो उसका क्या कहते सोना सिद्ध नहीं होता बकल सुनने की स्थिति को बताने के लिए उसका जागा हुआ होना आवश्यक है इसी तरीके से परमार्थ में बाधित होने की स्थिति को बताने के लिए उसको ईश्वर को मानने वाला होना आवश्यक है ठीक और जैसे ही को जैसे ही वो ईश्वर को ना मानने वाला होगा तो फिर से व परमार्थ की स्थिति को ना जानने वाला हो जाएगा ठीक है तो इसका अर्थ क्या हुआ परमार्थ के आधार पर आप मेरे ईश्वर को बाधित नहीं कर पाओगे चले आना कोई नहीं है क्यों पड़े हो चक्कर में कोई है नहीं चक्कर में ठीक है तो परमार्थ के आधार पर ईश्वर को नकारा नहीं जा सकता है हां यदि व्यवहार में ईश्वर बाधित हो जाएगा तो उसको नकार सकता है तो इसीलिए ईश्वर के सब कुछ कर सकने की आवश्यकता व्यवहार में है मोक्ष की दृष्टि से भी और ईश्वर के धर्म की स्थापना की दृष्टि से भी यहीं पर है आवश्यकता नास्तिकता को आप हरा नहीं पाओगे आप एक आप एक और बात बोलते हैं कि आपका धर्म सनातन है या सनातन शब्द शाश्वत का आपने प्रयोग कई बार किया है तो धर्म

01:24:26:15 शाश्वत कैसे है जबक यह प्रश्न है कि धर्म शाश्वत कैसे है जबक वो तो चेंज हो रहा है हर युग में अलग अलग धर्म है तो शाश्वत कैसे शाश्वत ऐसे है कि हर युग का धर्म जो है वह शाश्वत रूप से पहले ही व विधान लिख के रख दिया गया है व ऐसे वो जो विधान लिखा हुआ बदल नहीं रहा है कि नहीं अब जो है वो वो जो लिखा हुआ था मिटा रहे आज हम य तय कर रहे हैं नहीं वो जो विधान है सतयुग में यह होना है और द्वापर में यह होना है कलयुग में य होना है यह विधान शुरू से ही लिख कर के रखा हुआ है उसमें हम कोई बदलाव नहीं कर रहे कि आज जो है कलयुग आ गया तो हमने अपना नया आज लिख लिया नहीं वही धर्म चला रहा है ऐसे तो धर्म कलयुग और द्वापर छोड़ो जरा जरा देर में बदल रहा है पिता का धर्म अलग है पुत्र का धर्म अलग है यह भी तो बदल रहा है मगर यह सारे विधान एक ही बार में लिख दिए गए वो शाश्वत रूप से वो नियमावली चलती आ रही है इसलिए वो शाश्वत तो जीवन बड़ा है कि धर्म इसको मानेंगे जीवन बड़ा है या धर्म म है क्या प्रण रक्षा के लिए धर्म छोड़ सकते हैं प्राण रक्षा के लिए जो अमुक अमुक विधिया बताई गई है शास्त्रों के आधार पर उनकी सीमा में रहते

01:25:41:25 हुए क्या कहते जो आपका आपातकालीन धर्म होता है उसका आलंबन लेना अधर्म नहीं हो जाता है वो आपातकालीन स्थितियों में कहा गया कि विश्वामित्र जी ने या किसी हमारे ऋषि ने अगस्त ऋषि ने शायद कुत्ते का मास भी खाना पड़ा जीवन की रक्षा के लिए मनुस्मृति हों के लिए य भी व्यवस्था है कि आपको अगर पशु की भी आवश्यकता पड़े मनुष्य जीवन क्योंकि श्रेष्ठ है बहुत उसके बाद मिला है तो मनुष्य जीवन के के सार्थकता के लिए उसको बचाने के लिए ऐसी व्यवस्था की गई कि यदि इसके प्राणों की रक्षा की बात आ जाए तो अमुक अमुक जो पशु है उनका भी उत्थान होगा और उनकी उनका उपयोग करते हुए आप अपने प्राण की रक्षा कर सकते हो मगर यदि आप विधि का आलंबन लेंगे तो आप तब भी धर्म के अंदर ही कहलाएंगे और जब आप विधि का आलंबन नहीं लेंगे

01:26:56:26 तो आप अधर्मी कहलाएंगे ठीक है तो जो यहां पर जो और एक एक बात में और कह दूं कि घटनाओं का घटित होना प्रमाण नहीं होता है शास्त्रों द्वारा उसे धर्मो चित रूप में स्वीकार किया जाना प्रमाण होता है ठीक है दोनों बातें यदि राजा दर्श जी ने तीन विवाह कर लिए तो ऐसा नहीं माना जाएगा तीन विवाह करना वो हमारे य न दिया किया गया है अमुक अमुक स्थितियों के कारण उन्होंने आपातकालीन अथवा विशेष धर्म का आलंबन लेते हुए तीन विवाह किए मगर श्रेष्ठ क्या है आदर्श क्या है स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल क्या है रामो विग्रहवां धर्मा राम दर्श विग्रहवां धर्मा नहीं है रामो विग्रह मान धरमा तो आइडल क्या है राम ठीक है तो स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल राम है फिर आपातकालीन विशेष जो धर्म है उनकी अलग-अलग व्याख्या है तो यह जो यह जो चीज है ना कि ऋषि ने वो कुत्ता खाया अपने प्राण की रक्षा के लिए धर्म की सीमा में ही खाया उन्होंने धर्म के द्वारा अलाव किया गया है कि अमुक अमुक स्थितियों में अमु अमुक अमुक विधियों का आलंबन लेकर के आप प्राणों की रक्षा कर सकते हैं अथवा प्रवृत्ति से निवृत्ति कह सकते हैं इसी इसी बात को वहां पर प्रसंग वश

01:28:12:10 किसी ऋषि ने ऐसे कह दिया कि जीवन की रक्षा के लिए धर्म को त्याग सकते तो वहां पर धर्म को त्यागने की बात नहीं हो रही है स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल को त्याग कर जो आपत्ति आपत्ति विप ति कालीन जो धर्म है उसको अपनाने की बात हो रही है जी तो मैं ले लेता हूं एक बहुत काफी लोगों ने प्रश्न कर लिया है वैसे मैं कहता हूं कि जो पूरी पीठाधीश्वर है ऐसा लोगों के मन में भ्रांतियां या बात फैली है कि दूसरी आमना पीठों के आचार्यों के और पूरी पीठाधीश्वर के बीच में आपस में मतभेद है कि वो उसको नहीं स्वीकारते ऐसा ऐ इसका उत्तर तो मैंने दे दिया ना कि वो उनका एक आदि दैविक स्वरूप है कि वो शंकराचार्य है साक्षात शंकर है और उनका अपने अपने आप में वह एक मनुष्य भी है तो लीला पूर्वक जब हमारे जो क्या कहते अनेक लीलाए ज विष्णु भगवान में वो ये कह रहे हैं कि दूसरे आमना पीठ के जो आचार्य हैं जैसे ज्योतिष पराध शवर उनको तो उनके बीच में ऐसा प्रश्न है कि उनके बीच में और पूरी पका एक ही जवाब दूंगा इससे आपके धर्म ब्रह्म पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है आप शंकर संप्रदाय के आचार्य से कहीं भी जाकर दीक्षा लीजिए और हमारा जो चैनल है हमारा जो वो सैद्धांतिक वैचारिक क्रांति लाना है

01:29:28:02 ठीक है और जोय ये जो प्रसंग चल रहे हैं कि उनके आपस में मतभेद है यह सब जो क्या सम जो ये क्या कहते आज जो आज के युग की जो व्याख्या है कि आज क्या हो रहा है या कल हो सकता है उनके बीच में कुछ चल रहा हो कि कोई सिद्धांत का प्रतिपादन हो रहा हो कोई धर्म रक्षा के तरीके से कुछ हो रहा हो बहुत सी चीजें है तो ये आचार स्तर वाली बात है मगर हमारा जो हमारा जो कार्य है धर्म और ब्रह्म के विषय में वैचारिक क्रांति लाना और आप इन चारों में से कहीं पर भी जाकर के अपने धर्म ब्रह्म को जानने का प्रयास करिए आपको बिल्कुल सेम धर्म ब्रह्म मिलेगा ठीक और मैंने एक कारण और बता दिया कि मनुष्य होते हुए जैसे वह शंकराचार्य होते हुए मतक मनुष्य होते हुए उनमें अमुक अमुक अपना अपना दृष्टिकोण है कि ये नहीं ये रास्ता सही है यह नहीं ये रास्ता सही है मगर जब धर्म ब्रह्म की व्याख्या होगी तो एक दूसरे का विरोध नहीं होगा और विरोध होगा तो वहां पर कहीं ना कहीं कोई ना कोई शंकराचार्य कहलाने के योग्य नहीं होगा अगर विरोध होगा वैसे है नहीं मैं एक बात बता रहा हूं

01:30:34:15 जी क्या श्री राम ने क्वे ले लीजिए बारबार स्क्रीन पर रिफ्लेक्ट हो रहा है यदि कोई जन्म से ब्राह्मण है तो फिर कर्म की आव यदि कोई जन्म से ही ब्राह्मण है तो फिर कर्म की आवश्यकता क्यों है और यदि कर्म आवश्यक है तो जन्म से ब्राह्मण का अर्थ क्या रह जाता है अच्छा मैं इसको ऐसे ले लेता हूं यदि कोई ग्रेजुएट है तो उसको पुलिस की भर्ती में परीक्षा देने की क्या आवश्यकता है और यदि पुलिस की भर्ती में परीक्षा देने की आवश्यकता है तो उसके ग्रेजुएट होने का क्या फायदा है है ना तो इसका अर्थ है कि जब हम कोई भी कार्य करने चलते हैं तो अगर हम सीधे कोई भी हम वर्गीकरण ना करें वर्गीकरण है क्यों दुनिया में क्लासिफिकेशन क्यों है दुनिया में क्यों विभाग बनाए जाते हैं यह विभाग अमुक अमुक फिर उसके नेता बनाए गए क्यों बनाए जाते हैं सब विभाग य सब विभाग बनाए जाते हैं व्यवस्था के लिए ठीक है तो जब हम कहेंगे कि हमें भैया यज्ञ करवाना है तो यज्ञ कौन कर सकता है जिसको मंत्र आते जाओ ढूंढ के ला मंत्र मंत्र जिसको आते हो ढूंढ के लाओ तो क्या

01:31:49:16 किसी को भी ढूंढने लगोगे साइकिल वाले को पकड़ लोगे वाले को पकड़ लोगे या चाय की दुकान पर टपरी पर चले जाओगे तुझे मंत्र आते कि नहीं बता बोल मंत्र आते कि नहीं कहीं से शुरुआत करोगे ना कि मंत्र आते हैं यह किससे पूछा जाए और किससे ना पूछा जाए उस रूप में पहले आपको ब्राह्मण विशेषण यूज करना है बिल्कुल जब आपने य तय कर लिया कि भैया हम ब्राह्मण जो जो जन्म से ब्राह्मण होगा हम उसके पास जाएंगे ऐसे चाय की टपरी पर नहीं चले जाएंगे सब्जी की ठेल पर नहीं चले जाएंगे बता तुझे मंत्र आते हैं कि नहीं हम किसी ब्राह्मण कुल में जाए किसी ब्राह्मण के घर में जाएंगे जिसके पिता भी ब्राह्मण रहे हो तो वहां ज्यादा आशंका है कि ब्राह्मण मंत्र बोलने वाला मिल जाए वरना ढूंढते रहो हर आने जाने अपने घर से बाहर निकलते ही खोज शुरू कर दो अगर तुमने कोई भी टैग लगाया कि नहीं हम वहां जाकर के ढूंढेंगे तो वही से वर्गीकरण हो गया जन्मजात जन्मजात वर्गीकरण हो गया ना फिर वहा से कि हमको ब्राह्मण वही मिलेंगे पार्क के उस कोने में तो ये क्या आवश्यक है कि पार्क के को में आपको ब्राह्मण मिल जाए नहीं तो आपको अपने गेट के बाहर से ही व्यक्ति को पकड़ना शुरू करना पड़ेगा बता भाई तुझे मंत्र आते कि नहीं तो मंत्र किसको आते हैं यह ढूंढना कहां से शुरू किया जाए इस रूप में जन्म से

01:33:04:19 ब्राह्मण और फिर जन्म से ब्राह्मण होने के बाद हम जब वहां गए हमने हमने एक फिल्टर लगा लिया गया हम सिर्फ ब्राह्मणों को देखेंगे तो इससे हमारा समय बचा हम हमारा समय बचा हमने फिर ब्राह्मणों को देखना शुरू किया उसमें से कोई एक ब्राह्मण जो मिल गया जिसको मंत्र आते भी है त्रिकाल संध्या करता भी है उसको ले आए और उससे यज्ञ करवाया इसी प्रकार से क्षत्रिय का उपयोग है उसी प्रकार से का है इसी प्रकार से का आपने जो है वो कई बार मनुस्मृति वेदों या पुराणों का जो भी मतलब अने संदर्भ कई सार रेफरेंसेस दिए है अपनी बातो में अपने वक्त में लेकिन प्रश्न यह उठता है कि फिर हम इन वेद वेदों को शति स्मृतियों को प्रमाण क्यों माने वेद समत तर्क काही उपयोग क्यों करे अरे कोई है जो हमारी बातें समझ नहीं पा रहा है एक्चुअली है क्या कि यह जो बात है वेद विरुद्ध व्यक्तिगत तर्क अमान्य है ना व्यक्तिगत तर्क अमान्य की बात एक तो यह है कि वेद समत तर्क भी होना चाहिए वेद समत प्रमाण होना चाहिए यह बात तब कही जाती है जब वेदों को मानने का दावा करने वाले लोग आपस में बात कर रहे हो मुसलमानों को थोड़ी कहेंगे भैया तुम अपनी बात को सिद्ध करने के लिए वेद से दिखाओ ठीक है हा मगर व्यक्तिगत तर्क मानने को तो तब भी मानना

01:34:19:22 पड़ेगा कि अगर कोई कोई मनम तर्क दे रहा है तो उसका तर्क क्यों मान लिया जाए अगर कोई निराधार तर्क दे रहा है जो लॉजिकली सिद्ध नहीं हो रहा तो उसका तर्क कैसे माना जाएगा कोई ना कोई उसकी पुष्टि करने का आधार तो होगा ना ठीक है तो उस रूप में व्यक्तिगत तकमान और वेद सम्मत बात वहां कही जा रही है जहां पर दोनों पक्ष वेद समत बात ऐसा नहीं नास्तिक से भी हम कह रहे तुम वेद को मानो वेद सेही तर्क दो वेद सेही प्रमाण दो ये नहीं कह रहे हम ये वाला ये वाली बात वहां कही जाती है जहां पर दोनों पक्ष वेद को मानने का दावा करने वाले हो तो तो आप वेद मतलब की श्रुति स्मृतियों पुराणों को प्रमाण मानते हैं जी जब आप मानते हैं तो प्रश्न ये उठता है फिर इसमें इतना कांट्रडिक्शन क्यों है आपस में कंट्रक्शन का उदाहरण आपको देना पड़ेगा क्योंकि कई कंट्रक्शन ऐसे है जैसे वेद में कहीं पर जैसे वेद में कहीं पर निर्गुण निराकार ईश्वर की व्याख्या की जा रही है जी तो कहीं पर सगुण निराकार की व्याख्या की जा रही है जैसे मैं बता मैं दे देता हूं जैसे वेद में ही एक जगह रुद्र को परब्रह्म बता दिया रुद्र को वेद में एक जगह भगवान गणपति को परब्रह्म बता दिया तो या भगवती को परब्रह्म बता दिया मैं वेद की

01:35:34:27 पुराण भी नहीं ले रहा हूं मैं वेद की बात कर रहा हूं वेद ने भगवती को परब्रह्म बता दिया वेद में कह दिया कि निराकार की ब्रह्म है निराकार ही है वेद में बता दिया कि साकार भी है उसकी दो पनिया भी है लक्ष्मी भी है और श्री भी उसकी पत्नियां है फलाना फलाना तो ये तो ये तो कांट्रडिक्शन हो रही है ना मतलब तो इसमें मतलब कांट्रडिक्शन कंट्रक्शन नहीं है जैसे मैंने बताया ना कि ईश्वर तीन रूप ईश्वर के तीन एक्सपेक्ट होते कि वो निर्गुण निराकार से सगुण निराकार सगुण निराकार से सगुण साकार तो तीनों तरीके के रूप की व्याख्या हो रही तो कांट्रडिक्शन नहीं है अच्छा ठीक है अब जैसे एक जगह लिखा हुआ है एक जगह लिखा हुआ है व्यवहार में नहीं आ सकता ठीक है ये हो गया निर्गुण निराकार फिर एक जगह वो अग्नि है वो वायु है वो ये है वो ये सब है तो ये हो गया सगुण निराकार फिर एक जगह उसके इतने हाथ है उसके इतने मुख है ये हो गया सगुण साकार जी उसी तरह से मैं एक और एग्जांपल ले लेता हूं जैसे नारद जी का एग्जांपल ले लेते हैं है ना अ मूर्ता सभी पुराणों में नारद जी का संवाद आपको मिलेगा ही मिलेगा तो नारद जी कभी राम को तारक ब्रह्म बता रहे हैं शब्द ब्रह्म बता रहे हैं कभी भगवान विष्णु को ही ब्रह्मा बता रहे हैं कभी कृष्ण को ब्रह्मा बता रहे हैं वो भी कांट्रडिक्शन पुराणों में भी आ गया तो क्या तो तो लिखने वाले ने कुछ मिस्टेक कर दी या फिर ये अलग-अलग

01:36:50:08 समय में अलग लोगों ने बस अपनी बातें जोड़ दी हैं नारद जी को ढाल बनाकर ऐसा कुछ नहीं है कोई कंट्रक्शन नहीं है मैंने बताया कि किसी लीला में वही परम तत्व विष्णु रूप में दास भाव को प्रकट करता है और शिव भाव को भगवान के रूप में प्रकट करता है फिर किसी लीला में वही परम तत्व विष्णु तत्व को भगवान के रूप में प्रकट करता है और शिव तत्व को दास भाव में प्रकट करता है तो यह अलग अलग क्योंकि सट की रचना एक बार नहीं हुई है कई बार हो चुकी है कल्प भेद तो कल्प भेद कद से कभी कभी उसमें शिव जी का दास रहा और विष्णु की प्रधानता रही कभी दुर्गा मा का दुर्गा मां की प्रधानता रही इन लोगों की इन लोगों का दासत रहा यह कल्प भेद है और यह सब उन्हीं पुराणों में लिखा भी हुआ है हम अपने मन से नहीं बोल रहे कल्प भद भी उसमें लिखा हुआ है और एंड बारबार व्यास जी ने ये सब पुराणों में कहा ये सब एक है सब एक है और जब भी आप कभी क्या कहते हैं जो अर्ध कुकुट न्याय है उसको ना लगाने की बजाय जब कोशिश करोगे तो उसका व अर्थ निकल आएगा इसमें एक फन फैक्ट बता देता हूं जो हमारे कल्प में जो पुराण हुआ था व मत्स पुराण है तो किसी को अगर ज्यादा इंटरेस्ट हो हमारे कल्प में हुआ क्या

01:38:05:09 था हमारी हिस्ट्री में क्या हुआ इस कल्प की हिस्ट्री में तो आपको मत्स पुराण का जो मिलेगा इवेंट्स व वो आप मान सते ठीक है तो तो इसमें आता है फिर य एक और प्रश्न इस उठता है कि जैसे नारद जी तो राम और कृष्ण दोनों को ब्रम बताए जा रहे हैं ठीक है तो क्या ऐसे तो और आप एक शब्द का प्रयोग करते हैं अनन्य है ना अनन्य तो क्या अन्यता के नाम पर किसी भगवान को नीचा दिखाना सही है जो वैष्णव संप्रदाय वाले करते हैं जो शैव संप्रदाय वाले करते हैं या जो शक्त संप्रदाय करते हैं भाई बात यह है कि अगर मैं यह कह रहा हूं कि मेरी मां जैसा इस संसार में कोई मां नहीं है तो क्या इसमें दूसरी मांओं का अपमान है बिल्कुल नहीं नहीं तो अगर कोई अगर आचार्य ऐसे बोल रहे हैं कि मेरी मां जैसा कोई मेरी मां जैसी कोई मां नहीं है यानी कि विष्णु भगवान जैसा कोई और भगवान का रूप नहीं है तो ये उनकी अपने भगवान के प्रति अनन्य है इसको हम क्यों ले कि वह जो है जो है भगवान शिव का अपमान कर रहे हैं और जबकि वह भगवान शिव का सम्मान करने वाले आपको कई जगह पर मिल जाएंगे जबकि

01:39:20:27 मुख्य बात है क्या वो वेदों में प्रमाण बुद्धि रखने वाले हैं कि नहीं हैं तो व हमारे अपने हैं वेदों में प्रमाण बुद्धि वो यह ना कहते हो देश काल परिस्थिति के अनुसार हम बदल देते हैं जो यह बदलने वाला है यह खतरा है जिसके आचरण आपसे अलग ना हो देखिए कोई ब्रह्म के स्वरूप को किस रूप में स्थापित करके अपने व्यक्तिगत कार्य को अपने व्यक्तिगत जीवन का उद्देश्य प्राप्त कर रहा है वो अलग है उससे आपको आपको कोई दिक्कत नहीं आनी है कि वह ईश्वर तत्व को किस रूप में देख रहा है किस रूप में भज रहा है ठीक है आपको दिक्कत तब आएगी जब वह व्यवहार आपसे भिन्न आपके विरोध में करने लगे तो जितने भी परंपरा प्राप्त आचार्य उन सबका व्यवहार एक दूसरे के अनुकूल है इसलिए वह सब हमारे अपने हैं जितने भी संप्रदाय है प्रामाणिक उनका जो व्यवहार है आचरण धर्म जो धर्म विषय है वो सबका एक है ब्रह्म विषय थोड़ा थोड़ा सा अलग है कुछ कुछ हिस्से में जाकर के ठीक है तो हमारी जो हमारा उनसे जो संबंध है वो क्या है व्यवहार व्यवहार ही तो है ब्रह्म थोड़ी हमारा उनसे ब्रह्म तो सबका अपना अपना है अपनी मुक्ति अपने हाथ में भाई अपनी मुक्ति लेकर चलो ठीक है तो तो वो उस विषय में हमसे वो अलग है वो

01:40:36:00 उनकी अपनी अपनी अनुकूलता है अपनी अपनी जो उनकी निष्ठा है उसकी पुष्टि है उन सिद्धांतों में तो वो अगर अलग-अलग रूपों में ब्रह्म ब्रह्म की व्याख्या अलग हो रही है या ब्रह्म को अलग रूप में वो देख रहे हैं तो उससे कोई दिक्कत नहीं दिक्कत तब है जब उनके आचरण आपके विरोध में आ जाए का धर्म आपके विरोध में हो जाए वो आपको कट करने लगे तब दिक्कत है और यह जो संस्थाएं हैं यह जितनी भी संस्थाएं हैं यह सारी संस्थाएं जो आपका धर्म आचरण है आचरण उसमें आपका विरोध करती है ये जो संस्थाएं जितनी भी परंपरा प्राप्त आचार्यों के विरोध में खड़ी हुई आज संस्था है इनका आचरण विरोध में आ जाता है तब इनके इनके पीछे जाना पड़ता है ईश्वर अल्लाह को ही एक करने लगे कौन सा संप्रदाय ऐसा है जो ईश्वर अल्लाह को एक कर रहा है भाई प्रामाणिक संप्रदाय कौन सा ऐसा वो मूर्ति पूजा कोई खराब पाप कहने लगे अधर्म कहने लगे कि जो जो राम लीला देख लेगा उसको इतना पाप पड़ेगा जितना 100 बार अमे यज्ञ से जो पुण्य मिलता है उतना उसको पाप लगेगा राम लीला जो देखेगा ये आर समाज बताइए तोय जो धर्म है वो हमारे दिक्कत में आ रहा है ना ब्रह्म अपना कोई विष्णु तत्व में देख कर के अगर पूजा कर रहा है कह रहा है नहीं विष्णु जैसा कोई नहीं उससे हमें क्या दिक्कत हो रही है वो उसके अपने अपनी उसके

01:41:51:02 स्नता सुखाए के लिए उसका ऐसा कहना ठीक है हम हम भी तो ऐसे ही कहेंगे अपनी मां के लिए हमारी मां जैसी मां दुनिया इस दुनिया में कोई नहीं है इसका मतलब य नहीं सारी मा जो है वो है और हम उनके वचनों का जो आचार्य गण ऐसा कह रहे हैं हम उनके वचनों का अनादर क्यों करें जब तक व वो वेद विरोधी वो धर्मा आचरण में हमारे विरोधी नहीं है क्यों करें हम अनादर हम उसमें अच्छाई जब तक ढूंढ सकते हैं तब तक हम क्यों बुराई देख ले जब भी मेरा मेरा एक सिद्धांत है इसको प्रैक्टिकली मैं बताऊं जब भी कोई व्यक्ति मुझे दोषी लगता है तो पहले मैं पता है क्या करता हूं पहले मैं उसका अधिवक्ता बन जाता हूं वकील और मैं सोचता हूं कि जिसको मैं दोषी समझ रहा हूं वो मेरा वो मेरा क्लाइंट है और वो इस समय कटघरे में खड़ा हुआ है अब मैं उसको किस किस तरीके से कौन-कौन से तर्क दे सकता हूं प्रमाण दे सकता हूं जो मैं उसको बचा लू मैं उसका वकील हूं जो मुझे दोषी लग रहा है मैं उसका वकील अब मैं हर तरह के हथकंडे सोचता हूं कि मैं इसको कैसे सही प्रूफ करूं जब एक भी पॉइंट नहीं बचता है उसको सही प्रूफ करने का तब मैं मानता हूं कि वह दोषी है तो हम दोष ना ढूंढे हम अच्छाई ढूंढे और जब अच्छाई मिल ही नहीं सकती तब

01:43:06:08 दोषी को वो दोष को देखें तब जो दोष दिखाई दे रहा है उसको दोष समझे बस दो तीन प्रश्न और है फटाफट ले लेते हैं यह प्रश्न है काफी फेमस क्वेश्चन है और बहुत मतलब कई लोगों का है लोग परेशान है इसको लेकर कि अगर ईश्वर ने दुनिया बनाई है तो इतना दुख क्यों है क्या दुनिया में दुख नहीं है क्या दुनिया का मतलब दुख है नहीं नहीं वो कह र है कि अगर ईश्वर ने दुनिया बनाई है तो इतना दुख क्यों है ईश्वर मतलब पाप क्यों कर रहा है आई थिंक यह सवाल भव्य राधा कृष्ण जी के ने भी किया था ये प्रश्न लेकिन आप उसका उत्तर दोबारा दे सकते हैं कि अगर ईश्वर ने इतना दुख मतलब इतना दुख क्यों है क्या ईश्वर दुख देने वाला है पापी है जो पाप कर रहा इसको इसको ऐसे समझना इना दुख क्यों है अगर ईश्वर ने दुनिया बनाई है तो हमें दुख क्यों है इस बात यहां पर भी वही वाला लॉजिक आ जाएगा कि सो रहे हो तो सुनना सिद्ध नहीं होता सुन रहे हो तो जागना सिद्ध नहीं होता यदि आपने उसको ईश्वर मान लिया तो आप इस आधार पर उसका खंडन नहीं कर सकते कि इतना दुख क्यों क्योंकि आपने दुनिया को उससे बना हुआ माना और दुनिया दुख से अलग थोड़ी ना है जब आपने दुनिया को बनना मान लिया तो आप ये नहीं कह सकते दुख क्यों बनाया दुख कोई

01:44:21:12 अलग से वो तत्व थोड़ी ना आया दुनिया का ही एक हिस्सा है तो जब आप उससे आपने दुनिया का बनना मान लिया तो आप ये नहीं कह सकते दुख क्योंकि दुख दुनिया में उसने दुख दिया इसलिए हम उसे नहीं मानते है ना तो यहां पर भी वही सोने जागने वाला कांसेप्ट आएगा कि यदि आप सो रहे हो तो जागना सिद्ध नहीं होता व आपका सुनना सिद्ध नहीं होता सुन रहे हो तो सना सिद्ध नहीं होता यदि आप मान रहे हो कि उसने दुनिया बनाई है वो ईश्वर है तो दुख देने के कारण दुख दुनिया में दुख होने के कारण आपका उसको ईश्वर ना मानना या उसके द्वारा सृष्टि का बनना सिद्ध नहीं होता ठीक है ठीक और दूसरी बात वास्तविकता में ये जो

01:45:01:04 अ क्या कहते हैं ये जो प्रपंच है दुख है सुख है इसी का नाम संसार है अगर इसमें से एक भी घटक आप हटाएंगे तो संसार का अस्तित्व ही नहीं रह जाता तो आपको प्रश्न ऐसा करना होगा कि जो तत्व है संसार उसका अस्तित्व रहे और उसके बाद आप प्रश्न करो जब आप दुख को अलग कर दोगे तो संसार का अस्तित्व ही नहीं है यानी कि अगर आपने यह कह दिया कि दुख क्यों बनाता है इसका मतलब दुख के बिना भी संसार की स्थिति आप मान रहे हो जबकि संसार की स्थिति दुख के बिना है ही नहीं संसार का अस्तित्व ही नहीं है दुख के बिना तो दुख संसार का एक हिस्सा है उसको आप अलग नहीं कह सकते तो अगर मैं मतलब ईश्वर को मानू ही नहीं तो उसम समस्या क्या है मान लीजिए कि मैं बहुत अच्छा कार्य करता हूं कर्म करता हूं अपना पर ईश्वर को नहीं मानता हूं तो उसम बुराई क्या है हम कहां किसी से कह रहे हैं जब तुम आते हो मना करने की ईश्वर नहीं है तब हम तुम्हें काटते हैं ना मानो अच्छा कार करते रहो किसी दिन गलत काम करते हुए मिले तो उठा पटक देंगे हम कहा है तुम्हारे घर के नहीं ईश्वर को मानते हो कि नहीं मत मानो मगर जिस दिन तुम खंडन करने निकलोगे कि नहीं ईश्वर नहीं है नास्तिकता फैलाने निकलोगे तब हम आएंगे क्योंकि हो सकता है तुम्हारी प्रज्ञा शक्ति इतनी अच्छी हो कि ईश्वर के अस्तित्व को स्वीकार किए बना ही तुम महात्मा बने

01:46:16:06 रहो मगर वास्तविकता अधिकांश वही है कि ईश्वर है तभी अच्छाई और बुराई में फर्क करने का आधार और यदि आप अच्छे कार्य कर रहे हो तो इसका मतलब आपके पास भी आपने भी इनडायरेक्ट वे में ईश्वर को माना हुआ है हमें कोई आपत्ति नहीं है अगर आप अच्छे कार्य करने वाले हो तो आप आप ये भले ही कहते रहो मैं ईश्वर को नहीं मानता मगर वास्तविकता तो यही है कि आप भी ईश्वर को मानने वाले वरना आप बताइए क्या आधार है आपके अच्छे और बुरे का चयन करने का ठीक है और यदि आप अच्छे और बुरे का चयन नहीं करेंगे आप कह रहे अच्छा कार्य कर रहा हूं जबक आप अच्छा कार्य नहीं कर रहे तो हम रोकेंगे आपको और फिर जब हमें पता चलेगा कि आप ईश्वर को नहीं मानते तो ईश्वर को हम सिद्ध करेंगे ठीक है तो तो हमने तो मतलब ये भी पढ़ा है कि अंत में सब प्रलय की ओर ही जा रहा है मतलब ये तो यूनिवर्स का एक बेसिक कांसेप्ट है कि एवरीथिंग इज गोइंग टुवर्ड्स डिस्ट्रक्शन ठीक है अंत की तरफ ही जा रहा है मतलब अगर कोई चीज खाना रखा है तो सड़ता है आदमी पैदा होता है तो मरता है कोई फल है तो वो सड़ेगा अंत में कुछ भी चीज है तो वो खत्म होता ही होता है तो जब अंत में सब खत्म होना ही है तो फिर तो तो अच्छा और बुरा भी खत्म हो जाएगा तो क्यों और बरा करना चार बाग जीवन ही जिए आदमी यह भौतिक सत्यता है कि सब कुछ जो है खत्म होना ही है ईश्वर

01:47:31:07 उसका नाम है जो सनातन है जो खत्म नहीं होना है और अगर ईश्वर है नहीं तो फिर हमारे मन में उसकी प्यास क्यों है तो यहां से सत्यता खत्म हो जाती है कि सब कुछ खत्म होना है ईश्वर का खत्म नहीं होना है वो एक ऐसी ऐसा सुख है जो हमें अनंत काल के लिए प्राप्त हो सकता है और हमें हम लोग उसको प्राप्त करने के लिए सब माथा मतया कर रहे हैं ठीक हैने दो शब्द दो शब्दों का कई बार प्रयोग किया व्यवहार परमार्थ तो मतलब ये भी शास्त्र में आता है व्यवहार परमार्थ हां बिल्कुल आता है वोह एक जगह लिखे हुए हैं हमने अपना एक वीडियो बनाया था जब इन्होंने शंकराचार्य जी को वो कहा था क्या कहते हैं शंकराचार्य जी ने अवतार को नहीं माना है आर्य समाज यों ने कहा था कि शंकराचार्य अवतार को नहीं मानते तो हमने जवाब दिया था जिनका ईश्वर जगत बनाता ही नहीं बनता भी है अद्वैत में ईश्वर अद्वैत में जो परम तत्व वही तो जगत बनके उद् भाषित हो रहा है तो वो उससे एक ऐसे कह रहे हैं कि व अवतार नहीं लेता उनका ईश्वर जिनका ईश्वर जगत बनाता है बनता भी उन्ही का ईश्वर अवतार लेता है तो हमने उस वो वीडियो आप दिखा दीजिए अलंकार समाज को उत्तर दिया था एक उस वीडियो में सारे प्रमाण दिए हैं और इस इसके उसमें भी दे देंगे लगा के आर समाज के ग्रंथ में भी एक जगह ऐसी बात आती है व्यवहार और परमार्थ की

01:48:46:22 आर समाज के ग्रंथ में भी आता है व्यवहार परमार्थ आज ही देखा है मैंने शायद वो जो नवम लास नवा समुल्लास उसमें आता है व्यवहार परमार्थ परमार्थ शब्द आया है और एक एक जगह उन्होंने कहा 175 नंबर पेज पर दयानंद जी ने कि उस समय जो स्थिति होती है वह तर्क में नहीं आ सकती है अव्यावहारिक हो गया तर्क में नहीं आ सकता व्यवहारिक हो गया ना तो इस तरह से दूसरे शब्दों में व्यवहार परमार्थ उन्होने माना है और हमारे शास्त्रों में दिया गया है व्यवहार परमाण दोनों चीजें दी

01:49:21:21 गई और व्यवहार और परमार्थ कोई अलग से चीजें नहीं आई है धरती को देखने के दो पर्सपेक्टिव है एक सैटेलाइट के द्वारा और एक जो आप स्वयं की आंखों से देख रहे हो सैटेलाइट के द्वारा विज्ञान के अनुसार धरती गोल है आज का जो विज्ञान है वो यही कह रहा है ना धरती गोल है सैटेलाइट के द्वारा और हमारी आंखों के द्वारा हमें धरती चपटी दिख रही है तो एक पर्सपेक्टिव हो गया ये व्यवहार धरती कैसी दिख रही चपटी और एक पर्सपेक्टिव हो गया सेटेलाइट के द्वारा धरती कैसी दिख रही गोल अब हमें वास्तव में धरती को गोल फील करना है हमें थ्योर कली मालूम पड़ गया हमें थ्योर कली मालूम पड़ गया कि हमारी जो आत्मा है वो सनातन है नैनम छिंदंति सण नन दती पाव ये कैसे मालूम पड़ा थ्योर कली थ्योर कली मालूम पड़ा प्रति भाषिक उससे अनुमान से अनुमान प्रमाण और शब्द प्रमाण से हमें मालूम पड़ा मगर अभी हमें फील नहीं हुआ है प्रत्यक्ष प्रमाण से हमें मालूम नहीं पड़ा आत्मा को जो है यह सब नहीं हो सकता तो क्या है कि जैसे हमें थ्योर कली मालूम पड़ गया कि धरती गोल है मगर अभी हमने उसको फील नहीं किया फील कैसे होगा फील कैसे होगा जब हम कोई स्पेसशिप

01:50:36:25 बनाएंगे फिर हम जाकर के धरती प्रदी से मुक्त होंगे मुक्त हो कर के वहां से जब देखे हां पृथ्वी गोल है जब वो वो आंखे हमको मिल जाएंगी सेटेलाइट वाली तब हम जो है देखेंगे हां पृथ्वी गोल हैवसी होनी चाहिए बना लवें के हो नहीं पाए तो अब क्या है कि धरती की पदी से मुक्त होने के लिए हमको एक स्पेसशिप तो बनाना होगा ना धरती पर रहकर और जब तक हमें वो स्पेस शप बनाना है तब तक हमें जो चपटी धरती है उसके अनुसार व्यवहार करना होगा तो ये हो गया व्यवहार और वो हो गया परमार्थ व्यवहार का व्यवहार को साधक परमार्थ की प्राप्ति और ये द्वैत और द्वैत में अंतर है वो भी यही है धर्म का विषय है द्वैत धर्म क्या है व्यवहार तो धर्म का विषय है द्वैत और ब्रह्म का विषय अद्वैत यह सिद्धांत है अच्छा आप एक लास्ट प्रश्न है मेरा अंतिम प्रश्न है जी आप कृष्ण से द्वेष करते हैं आप क्योंकि यह प्रश्न भीन की तरफ से था कि आप मलत आप कृष्ण से या वैष्णव से दश करते हैं और और राम को ही सब कुछ मानते हैं इस तरह से करके और बाकी देवताओं को

01:51:51:26 देवी देवताओं को उनके राम के स्थान पर राम जैसा के स्थान पर सम्मान नहीं देते ठीक है मूलत कृष्ण से द्वेश करते हैं और इसलिए उ उसके अगेंस्ट होने जो चल रही संस्थाओं के पीछे आप पड़े हुए हैं ऐसा कुछ नहीं है हमारे सामने जो आ जाता है वह धर्म का खंडन करने वाला होता है रास्ता चलते मिल जाता है तो हम उसको पकड़ लेते हैं ठीक है क्या क्या आपके हिसाब से कृष्ण भी परब्रह्म परमेश्वर है हां बिल्कुल कृष्ण भगवान परमेश्वर है मैं रोया हूं उनके लिए कितना जब मैंने उनके यदा यदाई धर्म से वाले जब मैं मुसलमानों से परेशान हो गया था तब मैंने जब ये श्लोक जाना था ये मुसलमानों खंडन है ये य खंडन है मुस्लिम धर्म का जिसको आर समाज ने एक कोने कर दिया एक आचार्य हैं वो अभी कुछ दिनों पहले आए थे यह देखिए आज ही मैंने बनाया ये विष्णु द्रोही या शिव की भक्ति ज्यादा करने वाले के रूप में देखते हैं वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि भगवान आदि शंकराचार्य जी के जो ईस्ट थे वो कृष्ण भगवान ही थे और वर्तमान पूरी पीठाधीश्वर जी के जो ईस्ट ईस्ट है वो भी कृष् ही है और मैंने उनसे राम जी की भक्ति करने के लिए मंत्र लिया है श्रीमत जगदगुरु शंकराचार्य जी

01:53:06:26 से जो भी ज्ञान मैंने प्राप्त किया उसका फल यह है जब मैं भगवान के पैर छूता हूं ना तो सदैव मुझे कृष्ण का वही स्वरूप याद आता है भगवान ने अर्जुन को दिखाया था विराट जब भी मैं किसी के पीछे पीछे चलना चाहता तो मुझे श्री राम दिखते हैं जब भी मैं सनातन का कोई सिद्धांत बताना चाहता हूं तो मुझे कृष्ण सुनाई देते हैं जब भी मुझे एक पिता के प्रोटेक्टिव बस की जरूरत होती है तो उस समय मेरे पीछे मुझे शिव जी दिखाई देते हैं जब भी मुझे कभी सुकून चाहिए होता है थक जाता हूं तो मुझे माता की गोद मिल जाती है और जब भी मैं कुछ अच्छा करने जा रहा होता हूं तो ऐसा लगता है गणेश जी मुझे आशीर्वाद दे रहे यह सब अलग अलग नहीं है दोस्तों एक ही परम तत्व स्वयं को अलग अलग रूपों में प्रकट कर रहे ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश जय श्री राम बकुल जय श्री राम चलिए बहुत बढ़िया तो मैं इस बात को जरा पूरा कर दूं यह श्री कृष्ण वाली बात जो है एक तो मैं भगवान श्री कृष्ण के लिए मैं रोया

01:54:22:00 हूं एक अपना एक घटनाक्रम है वो मैं अभी बताऊंगा मगर बात यह है कि जो मेरा वो है मैं जहां भी जाता हूं तो मेरे साथ में कुछ मेरी जरूरी चीज वो सदैव रहती है एक तो रोड है जैसे ये वाली चीज बतानी नहीं चाहिए एक तो ड है जो अगर किसी से पंगा हो जाए तो वो जो है थोड़ा बहुत लड़ सके भाई धर्म की रक्षा में है और साथ ही साथ कुछ ऐसे इंस्ट्रूमेंट्स वगैरह है कि अगर कोई गलत कार्य करते हुए मिल जाए तो वही उसको जो है हम लोग प्रतिकार कर सके यह सब रहता है अब जैसे इन्होंने कहा कि भाई तुम केवल कृष्ण वालों के पीछे लगे हुए क्यों हमको वो कलकी खुद को कहते थे हमने उनको नहीं पकड़ा व कुंभ के मेले में भाई जो ज्यादा दिखेगा जो ज्यादा अपना परचम लहराएगा उसी को पकड़ा जाएगा ऐसा नहीं है कि ऐसे ऐसे शव नहीं होंगे जो खूब ज्यादा जो है कृष्ण का कृष्ण विष्णु तत्व को परहेज करते होंगे ऐसे शब होंगे मगर वो उतना नहीं लाइटेड है ना जिस दिन होंगे जिस दिन वो ज्यादा अपना परचम लहराएंगे तो हम उनसे भी बात करनी पड़ेगी है ना अगर विष्णु का अपमान करते हुए देखेंगे और एट द सेम

01:55:37:08 टाइम कृष्ण और अल्लाह को एक करेंगे यह भी बात है नहीं तो फिर अ वहां पर उनकी अन्यता मानी जाएगी कृष्ण अल्ला को एक ना करे और कृष्ण की भक्ति करे कृष्ण की भक्ति सिखाए और कृष्ण की अन्यता का प्रचार करे अन्यों की न का नहीं करेंगे तो कहीं ना कहीं हमें बात करनी पड़ेगी फिर तो यह तो एक बात रही दूसरी बात ये क्या है कि हम सदैव तैयार रहते कि कोई भी धर्म का कुछ भी बाल भी बांका अगर करता हुआ मेरी आंखों के सामने अगर करेगा तो मैं उसको रोकूंगा है ना फिर वो फर्क नहीं पड़ता मेरे करने से वह पूरी दुनिया पूरी दुनिया में वो हो रहा है कि नहीं हो रहा है कर्मन वादी का रस्ते मा फले कदाच तो मेरे सामने अगर होगा तो मैं उसको रोकूंगा वो किसी प्रकार से हो रहा हो कृष्ण का विरोध हो रहा हो भगवान शिव का विरोध हो रहा हो विष्णु का विरोध हो रहा हो राम का विरोध हो रहा हो मां दुर्गा का विरोध हो रहा हो गणपति महाराज का विरोध हो रहा हो ब्रह्मा जी का विरोध हो रहा हो किसी का भी विरोध हो रहा होगा इस तरह से अनावश्यक रूप से तथाकथित तंत्रों के द्वारा हमारे धर्म का खंडन हो रहा होगा तो मैं उनका जरूर प्रतिकार करता हूं और करूंगा और इस जीवन का उद्देश्य ही यही है ऐसा ही करते रहना जी आपने जो प्रश्न किया उत्तर

01:56:52:14 दिया जा चुका है पहले भी इनका प्रश्न बोल देता हूं मैं कि अगर प्राप्त व्य ही का विषय ही सिर्फ निराकार ब्रह्म है तो हमारे शास्त्रों में धर्म का वर्णन क्यों किया गया है तो इसका उत्तर दिया जा चुका है द्वैत से अद्वैत जाने का रास्ता समझाया गया है आपको अभी थोड़ी देर पहले ही स्पेस सैटेलाइट और स्पेस का और अर्थ का जो एग्जांपल दिया गया है वो यही उसका उत्तर यही है जो आपने प्रश्न किया आप दोबारा देख लीजिएगा मेरे तो सारे प्रश्न पूरे हो गए आक्षेप जो मैं आप के ऊपर लगा रहा था काफी अच्छे काफी अच्छा उत्तर अच्छे उत्तर दिए आपने और मैं तो संतुष्ट हूं मैं इसलिए संतुष्ट नहीं हूं कि मैं आपको सपोर्ट करता हूं मैं इसलिए संतुष्ट हूं कि आपने संतुष्ट किया है ठीक है और आगे भी आने वाले समयो में जब हमारे पास कोई प्रश्न आएंगे तो हम जदा कदा हम इस तरह की लाइव स्ट्रीम को दोबारा भी करेंगे और जिसमें प्रश्नोत्तरी वाला जो सेशन है वो दोबारा भी लेंगे जी जी और कोशिश करूंगा मैं कि रिप क् ना हो तो मैं छाट कर जो अब प्रश्न प्रश्नोत्तरी श्रंखला में आ गए हैं अब उसको दोबारा नहीं लिया जाएगा है ना और बस इतना ही बोलूंगा बाकी तो मेरी तरफ से मेरा एक प्रयास मात्र किया है बाकी

01:58:07:15 तो अल्पज्ञ है कहीं कोई गलती हो गई होगी कहीं पर कुछ शब्दों का इधर उधर हो गया होगा तो उसके लिए क्षमा प्रार्थी रहूंगा गुरु गोविंद ग्रंथ की कृपा से जो भी सामर्थ्य पूर्वक एक प्रयास मात्र करते हैं तो आप लोग यथोचित सुनने और समझने का प्रयास करें यही आपसे अपेक्षा है बाकी यही कहूंगा कि भाई आप जो है यह ना सोचे कि यह आवान जो है मैं शंकर परंपरा से जोड़ने का प्रयास करता है गुरुदेव भी यही कहते कभी भी किसी को स्वयं से मत जोड़ो या स्वयं के वह व्यक्ति निष्ठ संस्था निष्ठ इनसे मत जोड़ो भगवान से जोड़ो धर्म से जोड़ो तो हमें कोई एक कर सकता है तो वो हमारे भगवान कर सकते हैं आप सब भूल जाओ कि शंकर संप्रदाय के कौन सा संप्रदाय या कौन सी संस्था या कौन सा समाज सब भूल करके एक मिनट के लिए आंख बंद करके ईश्वर को सर्वशक्तिमान कहो और उसको सर्वशक्तिमान कहने के पीछे पड़ जाओ कि हमारा ईश्वर बाधित नहीं होगा पीछे पड़ जाओ उसके तो हम और आप एक ही पायदान पर खड़े मिलेंगे यह मेरी सबसे प्रार्थना है हम और आप सब लोग एक जगह खड़े हो जाएंगे

01:59:22:28 केवल ईश्वर के पीछे पड़ जाइए कि मेरा ईश्वर बाधित नहीं हो सकता मेरे मेरा वो ईश्वर है जिसको नास्तिक नकार नहीं सकता मेरा वो ईश्वर है ऐसा ईश्वर दे दो हम सब एक जगह हो जाएंगे मेरे भाई ऐसा ईश्वर दे दो फिर अपने आप को खूब आर्य समाजी कहो खूब स्कन वाला कहो ठीक है ठीक है फिर दो घंटे की लाइव स्ट्रीम हो गई है अगर आप लेना चाहते हैं किसी को तो आप ले सकते हैं मतलब मेरा तो नहीं नहीं ठीक है दो घंटे हो गए ऑलमोस्ट जी जी चलिए तो सभी को समय देने के लिए बहुत-बहुत आभार आज के होस्ट हमारे पंडित जी है पंडित जी आपका समय देने के लिए बहुत बहुत आभार और आशा करता हूं कि आज की लाइव स्ट्रीम भी लाइ लाभप्रद रहेगी हमारे दर्शकों के लिए सभी को जय श्री राम जय श्री

02:00:20:28 राम h

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B: SARVASHAKTIMAAN DHARMA Live 2:00:23 · 18 Mar 2025

शंका समाधान #iskcon #aryasamaj #atheist

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A · Video क्या ईश्वर ऐसा पत्थर बन सकता जिसको वह स्वयं ना उठा सके Part-2 #iskcon...
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A · Live क्या रामपाल के पास नास्तिकों का खंडन है? #rampaljimaharaj #satlokashra...
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