⬜ Not used yet · 00:00:02:04 – 00:09:38:12 (9:36)
00:00:02:04 तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और जैसा कि आप जानते हैं आज की लाइव ब्रह्मा कुमारी के एक फॉलोअर हैं उनके साथ है। और रामपाल के विषय में भी बहुत सारी बातें हैं आपको करने को। पर फिलहाल क्योंकि विलंब हो गया है आज की लाइव में। पहले 9 का टाइम था फिर 10:30 का और अभी हम लोग 10:30 से भी ऊपर निकल चुका है। तो हम को सबसे पहले स्टेज पर ले लेते हैं। आज के जो हमारे वक्ता हैं ब्रह्मा कुमारी की ओर से उपस्थित
00:00:36:19 जय श्री राम संजय जी जय श्री राम। जी संजय जी अपना एक संक्षिप्त कनेक्शन ब्रह्मा कुमारी से और मतलब इस रूप में आप अपना एक परिचय बता दीजिए। मेरा नाम संजय चावड़ा है और अबाउट 12 साल से ब्रह्मा कुमारी से जुड़ा हुआ हूं। आप कुछ हेडफोन से बात कर रहे हैं क्या? कैसे बात कर रहे हैं? नहीं हेडफोन नहीं कुछ कुछ साइड की आवाजें आ रही है ना वो तो कोई साइड में आवाज नहीं आ रही है पंखे की आवाज अच्छा ठीक तो जी आप 12 साल से लगभग जुड़े हुए हैं ब्रह्मा कुमारी से
00:01:29:18 तो [गला साफ़ करने की आवाज़] और कहां किस ब्रह्मा कुमारी से जुड़े हुए हैं भावनगर सर भावनगर गुजरात हां जी तो मतलब आपके कोई मेंटोर रहे होंगे ना ब्रह्मा कुमारी की ओर से जो आपको गाइड करते रहे होंगे वैसे तो वो कोई खास टीचर फेशियल नहीं है अबाउट जो था गुरु ऐसा
00:02:04:21 हो सके तो पंखे की आवाज बंद हो सकती है क्या कर डिस्टर्ब ओके नहीं फिर आपको वहां गर्मी लगेगी ना कोई बात नहीं कोई बात नहीं नहीं नहीं नहीं सुनिए सुनिए कोई बात नहीं चला गया हां अब साफ आ रही है आपकी आवाज जी अब साफ आ रही है हम अब बोलिए तो वो दीदी बहुत बोलती थी तब मैंने कमेंट किया था चार पांच दिन पहले ठीक मैं समझ रहा हूं आपकी भावना समझ रहा हूं मैं मैं आपकी भावनाएं समझ रहा हूं तो आपके इस समय भावनगर के जो ब्रह्मा कुमारी के वो हैं शिक्षक प्रशिक्षक जो भी हैं उनका नाम क्या है वर्तमान में नम्रता दीदी है अच्छा उषा दीदी अच्छा नम्रता दीदी वो भावनगर में है नम्रता उषा दीदी भावनगर में है हां भावनगर अच्छा अच्छा ठीक है तो आप मुझे थोड़ा सा बताएंगे कि ब्रह्मा कुमारी से क्यों जुड़े हैं
00:03:21:25 बस मुझे अपनी ओर आकर्षित करता था वो जो ध्यान का है ना ध्यान का सब्जेक्ट था ना तो ध्यान में मैं अपनी ओर खींचता था ब्रह्म कुमारी तो देखने गया था कभी क्या है क्या नहीं ध्यान के बारे में ध्यान सीखने आज तो परमात्मा है नहीं है कैसा है वो तो सब बाद की बात है लेकिन जो मैं नहीं मानता हूं उसके बारे में तो बोलूंगा ही नहीं मैं जो मैं मानता हूं उसके बारे में ही बोलूंगा जो आप नहीं मानते मतलब
00:04:06:16 जो मैंने देखा नहीं है मुझे कहा गया है ब्रह्मा कुमारी से ऐसा ऐसा है मतलब ब्रह्मा कुमारी कुछ ऐसा ब्रह्मा ब्रह्मा कुमारी की कुछ बातें ऐसी है जो आप नहीं मानते कोई बातें है मैं पर्सनली नहीं मानता हूं वो लोग मालूम नहीं मानते पर्सनली पर्सनली नहीं जो जो जिसको हम सत्य नहीं मानते वो सब तरीके से असक्ति होता है ना हमारे लिए। जैसे मान लीजिए किसी ने कहा कि चांद निकला हुआ है और मैं कहूं कि पर्सनली मैं मानता हूं कि चांद निकला हुआ नहीं है तो क्या सार्वजनिक रूप से चांद निकला हुआ है क्या हमारे लिए? नहीं है ना? ऐसा नहीं कुछ बातें ऐसी है कि जो एक ओर से ऐसा कहते हैं कि परमात्मा निराकार है। ठीक है? और दूसरी ओर ऐसा बोलते हैं कि परमात्मा लाइट स्वरूप बिंदु स्वरूप है तो तो आकार हो गया। तो निराकार कैसे हुआ? सही आपने पूछा नहीं उषा दीदी से उषा दीदी से पूछा नहीं तर्क का मेरा विषय नहीं है। जो मैं मानता हूं वही लेता हूं मैं जो नहीं मानता नहीं लेता और वो जो परमात्मा की
00:05:21:18 बात है तो लेखराज दादा केतन में जो अवतरित हुए थे तो वो भी ब्रह्म कुमारी से हां वो भी ब्रह्म कुमारी सब बोला गया है मुझे मैंने तो देखा नहीं क्या आप वो मानते हैं कि लेखराज के तन में ब्रह्मा जी आए थे वो मैं देखा ही नहीं लाइव देखा ही नहीं क्या मैं पर्सनली नहीं मानता हूं वो लोग तो सारे ब्रह्म कुमारी वाले मानते हैं अरे पर्सनली ना मानना ना मानना ही है चाहे जैसे कह लो उसको पर्सनली ना मानना ना मानना ही है यानी कि आपकी आपके आपकी आपके हिसाब से ब्रह्मा कुमारी का यह जो क्लेम है कि लेखराज जी के अंदर जो है ब्रह्मा जी आते हैं यह क्लेम झूठा क्लेम है। नहीं ऐसा तो नहीं कह सकता लेकिन पर्सनली मैं नहीं मानता हूं। मानने वाले नहीं मानने वाले मानते हैं। आपके जहां आपके अनुसार क्या है? मैं वो पूछ रहा हूं ना। आप ही के अनुसार तो पूछा मैंने। देखिए थोड़ा सा क्लियरिटी आपने नहीं देखा तो नहीं मानते ना। नहीं मेरी बात सुनो। मैं खास तो यह बोलने के लिए आया हूं जो आपको ब्रह्मकुमारी से नहीं जानने को मिला है उसको बोलने का मौका ही नहीं दिया आपने ऐसा
00:06:38:00 है तो मैं वो बोलूंगा जो आपने आप बोलिए आप बोलिए कुछ आप बोल लीजिए कुछ चीजें क्लियर होनी चाहिए कुछ चीजें क्लियर कर ले फिर बोलिए क्लियर करने वाली बात यह है कि आपको लगता है कि ब्रह्मा कुमारी की सारी बातें सत्य नहीं है ना सत्य नहीं ऐसा नहीं बोल रहा हूं वो सत्य है मैं नहीं मानता कुछ कुछ ऐसी बातें आपने उस उन बातों को जब वो मैंने मैंने कहा मैंने कहा कि ब्रह्मा कुमारी ये कह रही है कि बाहर चांद निकला हुआ है। आप कह रहे हो मैंने नहीं देखा मैं नहीं मानता कि चांद निकला हुआ है। तो इसका मतलब आपकी जानकारी में चांद नहीं निकला हुआ है ना
00:07:23:20 वो तो दिख रहा है दिखता है वो बोलूंगा तो फिर तो फिर आप ये बोलोगे ना कि इस मैं मैं जो जो बोलूंगा वो प्रश्न भी मैं करूंगा उसका प्रमाण भी मैं दूंगा जवाब भी मैं दूंगा सब में इतना बड़ा लिस्ट मुझे क्या क्या पॉइंट आपसे बोलना है जो ब्रह्मा कुमारी साहब आपको नहीं मिला है देखिए ऐसा है ऐसा है एक एक चीज को आपको समझना होगा कि यह जो हमारा चैनल है यह चैनल इसलिए नहीं है कि ब्रह्मा कुमारी कुछ कहना चाहता है तो वह हमारे चैनल पर आकर के कहे। यह चैनल इसलिए है कि ब्रह्मा कुमारी को लेकर हमें जो जो आपत्तियां हैं जो आपत्ति मैं आपसे पूछ रहा हूं उस संबंध में आपका स्पष्टीकरण यदि है तो वो स्पष्टीकरण आप दे दें और आपको हमारी चीजों पर जो आपत्ति है यदि आपको हमारी चीजों पर जो आपत्ति है उस चीज का स्पष्टीकरण मेरे पास यदि हो तो मैं दे इसलिए इसलिए नहीं है कि आपने अपनी एक कुछ थ्योरिकल तैयारी की है और उसको आप मेरे मंच पर आकर के बोलो आप उषा दीदी के मंच पर जाओ आराम से मेरी बात सुनो ये जो लिखा है ना वो
00:08:38:21 पूरा ब्रह्मकुमारी का भी नहीं लिखा है वैसे मैं मानता हूं वो बुध गौतम बुद्ध और अष्टावक्र ये तीनों को मानता हूं ज्यादातर बातें तो इसकी होगी चलिए अब हम ऐसा करते अब हम अब हम थोड़ा बहुत आपको समझ अब हम थोड़ा बहुत आपको समझ चुके हैं। मेरी बात सुनो अब हम एक एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट अच्छा पहले एक चीज क्लियर कर लीजिए। कुछ बातें आपको ब्रह्मा कुमारी की छूट लगती है। विश्वास नहीं है आपको उनकी बात पे।
00:09:23:10 हां जी। हां। ठीक। ये क्लियर हो गया। अब बात आती है इसी से कनेक्टिंग बात है कि आप जैसे वहां पर ध्यान लगाते हैं। है ना? हां जी। ध्यान लगाते हैं ना?
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00:09:38:12 तो वो जो ध्यान लगाने के लिए ब्रह्मा कुमारी का जो क्या क्लेम है वहां पर ध्यान लगाओ तो क्या होगा इससे? ऐसा है राजयोग ऐसा बताया जाता है वहां कि लाइट प्रकाश जो ईश्वर है वो लाइट स्वरूप है बिंदु स्वरूप है तो उसको मन में लाने का है वो बिंदु स्वरूप जो लाइट स्वरूप है ना ये आंखें बंद करके और लाइट उसको देखना है अंदर मन में तो उसमें मुझे क्या होता था कि मेरा मन शांत होने के बजाय और ज्यादा भारी हो जाता था क्योंकि खींचना पड़ता है ना और प्रकाश चला जाता है फिर से खींच के लाता हूं इधर प्रकाश को फिर चला जाता है फिर पकड़ के लाता हूं तो इतने में माइंड मेरा कंट्रोल होने के बावजूद वो मेरा मीनिंग और हो जाता था भारीभारी हो मैंने मैंने आपसे ये पूछा मैंने आपसे ये पूछा है कि ब्रह्मा कुमारी जब आप मेडिटेशन करते हैं ब्रह्मा कुमारी में तो वो क्या क्लेम करता है कि इस मेडिटेशन से आपको यह मिलेगा। क्या क्लेम करता है?
00:10:55:27 पहली बात तो ये जो बोलने का सही ऐसा बोलूंगा वहां कुछ प्राप्त नहीं होता। छूटता है आप आप मेरे छूट जाता है जो कुछ कुछ बात है जो धारण करेंगे ध्यान में ध्यान लगाएंगे कुछ छोड़ना नहीं है वो ऑटोमेटिकली छूट जाएगा
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00:11:15:18 क्रोध है आपका पिक्चर अटक आपका पिक्चर अटक अटक के क्यों आ रहा है ठीक है ठीक है ना हां ठीक ठीक। तो क्या क्लेम है ब्रह्मा कुमारी का?
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00:11:35:25 मैंने कहा आप अपनी डेफिनेशन मत दीजिए। अभी आप हमें मुझे ब्रह्मा कुमारी का क्लेम बताइए कि वो मेडिटेशन करने से आपको क्या मिलता है। एक तो परम शांति ये उनका क्लेम है। ये उनका क्लेम है। उनका भी है मेरा भी है। उनका उनका उनका क्लेम क्या है? वो बताइए अभी आप क्योंकि आपके थोड़े बहुत उसमें अंतर है ना कुछ ओष भी है कुछ बुद्ध भी है बौद्ध भी है ऐसा है ना तो आप अभी केवल ब्रह्मा कुमारी का बता दीजिए क्या क्लेम है
00:12:10:00 यही मन की शांति और आत्मा का जो गुण है प्रेम शांति आनंद पवित्रता वो सब गुण आत्मा का ओरिजिनल गुण है जो बाहर दिखाई देगा ध्यान करने से आत्मा का ओरिजिनल गुण है आत्मा का ओरिजिनल गुण है शांति शांति शांति प्रेम आनंद ये आत्मा ये सब आत्मा के ओरिजिनल गुण है। ठीक है। अच्छा तो ये बताइए कि जैसे वहां पर आपको मेडिटेशन करने से परम शांति मिलती है। आपके घर में कौन-कौन है?
00:12:51:03 तीन लोग, दो बच्चे, पांच लोग। बच्चे कितने बड़े हैं? एक 11वीं पढ़ता है और एक छठी चौरण पढ़ता है। अच्छा दोनों दोनों बच्चे बॉयज हैं। बालक हैं। बड़ी लड़की है। छोटा बेटा है। बड़ी लड़की है। हां जी। अच्छा। तो जो जैसे बिटिया है जब बिटिया आपकी हुई होगी तो आपने उसको कभी गोद में लिया है? बिटिया को जैसे गोद में ले खिलाते हैं ना उसको कंधे पर रखा उसका सर रखते हैं ऐसे कभी तो लिया है आपने कभी
00:13:37:08 मेरी समझ में नहीं आता है ये बात और ये बात कंपेयर करना एक पिता अपनी बटिया को गोद में ले खिलाता है ना उस तरह से आपने लिया है कभी तो जैसे वो उसने तो जब आपने लिया होगा तो आपको शांति शांति मिली थोड़ी सुख मिला था आनंद आया था उसका सर जब कंधे पर रखा था आएगा कौन बाप है जो नहीं आएगा ना गुड गुड अब ये अब ये बताइए कि इस शांति में और वो जो ब्रह्मा कुमारी वाली शांति है उसमें अंतर क्या है
00:14:20:02 जमीन आसमान का वो बताइए क्या अंतर है जमीन आसमान का अंतर है। अरे तो मुझे समझाइए तो कि वहां पर ऐसा है इसलिए वो जमीन आसमान का अंतर है। नहीं तो फिर तो मुझे ये मानना पड़ेगा कि वहां पे वहां पर मुझे यह मानना पड़ेगा कि वहां से जो शांति आ रही होती है वो नीचे से आ रही होती है या वहां की शांति ऊपर से आ रही होती है। यहां की शांति नीचे से आ रही होती है। फिर तो ये मानना पड़ेगा। आप मुझे बताइए जमीन आसमान का अंतर क्या है
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00:14:49:01 मामला? जी आत्मा परमा आत्मा परमात्मा की बात आती है तो खोलनी पड़ेगी आपकी आपकी आवाज वॉइस वगैरह कट रही है भाई साहब आपके यहां नेटवर्क ठीक नहीं है क्या एक मिनट अरे भाई थोड़ा बस भी किया करो। लगे रहते हो लगातार अपनी चीजें रटी रटाई बोलने में। हद होती है। कोई पूछ रहा है तुमसे? आना है नहीं सामने। बकवास किए रहते हो बस कमेंट सेक्शन में।
00:15:44:00 बस रटी रटाई चीजें बोलते रहना है। बोलते रहना है। जोंबीज हो जाओ ब्रह्मा कुमारी की। हां जी अब तो ठीक आ रहा है मुझे लग रहा है। हां जी। हां। अब
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00:16:02:14 मुझे बताइए कि ब्रह्मा कुमारी का जो मेडिटेशन से जो आपको सुख मिल रहा है वो उसमें और आपकी बिटिया जब आपके कंधे पर सर रखी थी छोटी सी या कभी भी जब आप ऐसे आलिंगन करते होंगे अपने प्रियजन का तो उससे मिलने वाले सुख में और उसमें जो मेडिटेशन आप कर रहे हैं उससे मिलने वाले सुख में अंतर क्या है? मेडिटेशन करने पर जो शरीर का भाव है ना शरीर का भाव वो छूट जाएगा। धीरे-धीरे छूटता जाएगा और आत्म स्वरूप में स्थित होते जाएगा। वो आनंद अलग ही है। जैसा आनंद नहीं है। इससे पर है। आत्म स्वरूप में स्थित होता जाएगा। हां वो आनंद से भी पर है। अच्छा तो आप जैसे आप इससे पहले आत्म स्वरूप में स्थित थे क्या कभी? इससे पहले
00:17:08:26 सर जी मैं शायद दसवीं पढ़ता होगा। दसवीं तो दसवीं कक्षा में तब से इस ज्ञान मार्ग में आया हूं। नहीं नहीं नहीं मैं कह रहा हूं अभी जब ब्रह्मा कुमारी से जुड़कर आप आत्म स्वरूप में स्थित हुए हैं तो इससे पहले आप क्या थे? भक्ति मार्ग में था। उससे पहले भक्ति मार्ग में था। अरे उससे भी पहले भक्ति मार्ग से पहले बच्चा था। पहले कुत्ते की उम्र थी उससे पहले
00:17:51:08 उससे पहले तो जन्म ही हुआ होगा। जन्म से पहले नहीं था। जन्म से पहले आप एक्सिस्ट नहीं करते थे। हां क्या मान्यता है उस बारे में? क्या मान्यता है उसकी? क्या मान्यता है? सर जी दूध दूध में घी है वो दिखाई देता है दूध में घी है उसमें क्या मंज मैं ये कह रहा हूं मतलब आपका ये पहला जन्म है ये पहला जन्म है आपका अनेकों हां ना इससे पहले मतलब आप अपने आत्म स्वरूप में थे ना हां ना थे तो फिर यहां कैसे आए यहां कैसे आए मतलब आत्म स्वरूप में तो आप पहले भी थे ना
00:18:51:25 पहले भी रह चुके हो ना आत्म स्वरूप में आप हां ये सुनो मेरी बात सुनो हां मेरी बात सुनो आप समझ गए अब आप समझ गए एक ये बात है जो मैं नहीं मानता जो आत्मा है भगवत गीता हमें शायद कहा है कि ऐसा भी नहीं है। अर्जुन को समझाता है ना कृष्ण ऐसा भी नहीं है कि पहले हम नहीं थे। मैं या तू नहीं था। ऐसा अर्जुन को बोलता है ना। आप इस बात को नहीं नहीं नहीं अरे मैं ये पूछ रहा हूं आप किसी समय पे उस जगह पर थे जिस जगह पे आज आप जा रहे हो। ये पूछ रहा हूं।
00:19:39:13 ब्रह्मा कुमारी की जो थ्योरी है ब्रह्मा कुमारी की जो थ्योरी है उसके अनुसार आप किसी समय पर देवता थे ठीक है देवता से फॉल देवता से फॉल डाउन होकर के आप बने वो त्रेता वो द्वापर पहले आता है उनके द्वापर फिर सतयु त्रेता जो भी है फिर आज कलयुग में हुआ यानी कि किसी समय पर आप जो है उस स्टेज पर थे जिस स्टेज पर आज जाने का प्रयास कर रहे हो है है ना? अ ये तो सब आपने जान लिया ब्रह्मा कुमारी से क्या था क्या नहीं। मैं जो मानता हूं वही बोलूंगा मैं। देखिए आप जो मानते हैं वही बताइए मुझे। अभी मतलब यह कुल मिलाकर के ब्रह्मा कुमारी की लेखराज वाली जो थ्योरी है वह आपको नहीं स्वीकार है और ब्रह्मा कुमारी का जो ये कहने का मतलब है जो वो जो देवता थे देवता से ये बने ये भी आपको स्वीकार नहीं है नहीं है ना तो वो बताइए फिर खुल के खुल के बताइए थोड़ा थोड़ा क्लियर फटाफट चलिए ना स्ट्रेट रहिए थोड़ा बातों में जी क्या क्या जानना चाहते हो देवताओं के बारे ब्रह्मा ब्रह्मा कुमारी
00:20:54:24 ब्रह्मा कुमारी के अनुसार आज आप देवत्व को प्राप्त करने पहले देवता रह चुके हैं ना आप अरे भाई ब्रह्मा कुमारी के हां तो वो जो फॉल डाउन होता है कि आज आप कलयुग में है और निकृष्ट जीव की जीवन को जी रहे हैं देवताओं के कंपैरेटिवली वो फॉल डाउन कैसे हुआ कारण क्या है उसका अभी जो
00:21:26:26 देवता पद से नीचे उतरे उसकी बात कर रहे हो ना? हां हां तो हर युग अपना काम करती है। सतयुग उसका काम करता है। आत्मा प्योर होती है। इसके बाद त्रेता युग आता है। थोड़ी कला कम होती है। इधर द्वापर युग आता है। कम होती है। कला कम होती है। कला कम होती है और थोड़े अवगुण भी बढ़ते हैं कि पाप कर्म इत्यादि। हां जी। बढ़ते हैं ना। द्वापर से बढ़ते हैं। ठीक। गुड। द्वापर से भक्त है। इसका मतलब ये कहा जा सकता है हमारे हमारे शास्त्र ऐसा बोलता है कि द्वापर युग में भगवान कृष्ण का जन्म बोलता है ना मैं मैं शास्त्र की बात अभी कर ही नहीं रहा। अभी मैं शास्त्र की बात कर ही नहीं रहा हूं। मैं तो आपकी केवल थ्योरी समझने का प्रयास कर रहा हूं। शास्त्र की बात जब मैं पूछूं आपसे प्रमाण तो दे दीजिएगा। अभी तो मैं केवल आपकी मान्यता समझने का प्रयास कर रहा हूं। कि आपकी जो मान्यता है कहने का अर्थ यह है कि आपका जो फॉल डाउन हुआ है वह पाप की वजह से हुआ है।
00:22:31:20 है ना? ठीक है। अभी आप अभी आपने कहा था कि जो आत्मा का मूल स्वरूप है ना? मूल जो गुण है मौलिक गुण आत्मा के वह है प्रेम शांति और जितनी भी अच्छी-अच्छी चीजें हो सकती है वो सब ना ये मूल हैस ठीक है इसका मतलब किसी समय पर ये गुण आत्मा में नहीं थे कुछ समय ऐसा कोई ना कोई समय ऐसा होता है अच्छा तो जब जब आप वही मेरी बात सुनो वही समझाना चाह रहा हूं लेकिन एक एक मिनट मैं क्लियर कर लूं। यानी कि जब आप जो देवत्व को प्राप्त वाला है तब भी आप में ये सब बुराइयां थी।
00:23:23:06 तब नहीं थी। पर यानी कि एक यानी कि एक समय ऐसा यानी कि एक समय ऐसा होता है जब ये सब बुराइयां आत्मा में नहीं होती। हां प्योर होती है। गुड बहुत बढ़िया। बहुत अच्छे। उसका अब ये बताइए वातावरणी पॉजिटिव होता है ना? हां। ठीक है। ठीक है। तो एक समय ऐसा होता है जब ये बुरे विचार पाप कर्म के विचार इत्यादि नहीं होते हैं आत्मा में। ये क्लियर है। नहीं होते। ये क्लियर है ना? ये ये क्लियर है। हां। ठीक। अब यह बात है कि यह जो विचार है विचार को धारण कौन विचार को धारण कौन तक कर सकता है कोई चेतन तक एक मिनट जो विचार है एक एक मिनट भाई साहब मैं ये पूछ रहा हूं जो विचार है विचार चाहे अच्छे हो चाहे बुरे हो कुछ भी विचार जो विचार करने की प्रवृत्त या कुछ भी यह इसको धारण कोई चेतन तत्व ही कर सकता है ना
00:24:32:26 नहीं कर सकता तो कौन कौन करता है धारण फोन में कौन सब संग्रह करता है फोन हमारा होता है उसमें संग्रह करने की चीज क्या होती है सर मेमोरी कार्ड होता है मोबाइल के अंदर मेमोरी कार्ड होता है मेमोरी कार्ड होता है तो इसमें सूक्ष्म शरीर शरीर को कैसे भूल गई आप सूक्ष्म अरे भैया तो मेमोरी कार्ड मैं ये कह कह रहा हूं ये जो बुराई है बुराई ठीक है बुराई या अच्छाई इसको सूक्ष्म शरीर को धारण कौन करता है
00:25:14:14 आत्मा तो है ही उसका कटका नहीं हो सकता कट नहीं हो सकता बिंदु स्वरूप नहीं हो सकता भाई साहब आप आप मेरी बात सुनिए संजय जी हम लोग थोड़ा सा स्ट्रेट और जो टू द पॉइंट मैटर चल रहा है उस पर थोड़ा सा बात करें आपने कहा आत्मा जो है उसका जो मौलिक स्वरूप है वह शांति इत्यादि है। ठीक है? यह सब भी शांति और ये प्रेम करुणा ये सब भी विचार ही है ना विचार है ना ये सब भी आत्मा सबसे पहले अच्छे विचार धारण कर रही है तो आपका ये स्टेटमेंट तो गलत हो रहा है कि विचार धारण नहीं करती आत्मा। आत्मा नहीं करती। सूक्ष्म शरीर है। आत्मा तो बॉडी छूट जाने आत्मा शुद्ध है। आत्मा तो शुद्ध है। उसमें कोई विचार है ही नहीं। सूक्ष्म है ही नहीं। विचार है ही नहीं। अरे विचार है ही नहीं। विचार है ही नहीं। विचार है ही नहीं ना। हां गुड। ही नहीं। वो तो कोई विचार कोई विचार नहीं है। इस थोड़ा सा मैं कंफ्यूज अरे भाई आप मेरी बात भी तो सुनो। मैंने मांगा आपसे प्रमाण। मैं कुछ और पूछना चाह रहा हूं। आप कहीं और ले जाना चाह रहे हैं। बात ये है मैं
00:26:29:22 ये पूछ रहा हूं। आपने अभी थोड़ी देर पहले ये कह दिया था ना कि आत्मा का मूल जो गुण है वो शांति इत्यादि है। यह आपने थोड़ी देर पहले कहा था। अब आप कह रहे हो नहीं आत्मा तो इससे भी फ्री है। यह सब तो सूक्ष्म शरीर धारण करता है। नहीं वो विचार की बात कर रहे हो ना विचार नहीं है। ये ये विचार नहीं बोल सकते। क्या है? उसका ओरिजिनल गुण है। आत्मा मतलब एक ऐसी ऊर्जा जो मात्र अस्तित्व को दिखाता है। उसमें कोई दाग नहीं लगता। विचार नहीं रहता। अरे भाई अरे भाई किस जब हम किसी को प्रेम कह रहे हैं प्रेम कर रहे हैं तो प्रेम की भावना आ गई ना मन में विचार हो गया ना ये प्रेम किसको करोगे आप
00:27:18:02 प्रेम करोगे ना प्रेम की भावना हो गई ना मन में विचार ही तो है क्या है ये जो आप समझ लो वही है गुण है गुण है पर गुण है ना आत्मा का ओरिजिनल सनातन है वो तो अरे भाई मैं कहा मैं वो तो वो तो मैंने आपसे पूछा है आत्मा मिटती है कि नहीं मिटती? बात ये चल रही है कि आत्मा ये जो विचार वैचारिक जो चीजें हैं विचार वैचारिक सामग्री इनके बिना आत्मा का अस्तित्व हो सकता है। सीधी बात यह है तो इनका इनका अस्तित्व ये एक्सिस्ट कहां पर करते हैं? जो किसी समय पे आत्मा के साथ कनेक्ट हो जाते हैं। जैसे आपने कहा कि एक समय पे आपके पास ये सब चीजें नहीं थी। आप फ्री थे, शुद्ध थे। फिर फिर समय के साथ यह चीजें आपके साथ कनेक्ट हो गई। चाहे अच्छे विचार हो, चाहे बुरे विचार। तो बुरे विचार की मैं बात कर रहा हूं। यह कहां पर स्थित थे जो समय आने पर आपके पास आ गए? उनका अधिष्ठान क्या है बुरे विचारों का? सर वही तो बताने की कोशिश कर रहा हूं। आप सुनोगे तब ना। ठीक है। सुनोगे? ठीक है।
00:28:33:08 गीता में कहा है आप मुझसे शास्त्र का नाम मत लीजिए अभी आप केवल अपनी मान्यता बताते जाइए मैं आपसे पूछ लूंगा बाद में शास्त्र का नाम आप सबूत वहां तो ढूंढ रहे हो शास्त्र सबूत वही था मैंने कहा मैंने कहा कि अगर आप आप यह मानते हैं कि आत्मा कभी इन चीजों से मुक्त रह सकती है। जो आपने बुराइयां बुराइयां बताई है इन चीजों से आत्मा किसी ना कभी मुक्त रह सकती है। शुद्ध स्वरूप उस समय उसके पास प्रेम शांति इत्यादि होता है गुण। ठीक है? तो यह जो विचार वैचारिक सामग्री है पाप करने की प्रवृत्ति बुराई किसी के बारे में घृणा यह सब यह एक्सिस्ट कहां पर करता है? जो समय आने पर आ जाता है आत्मा के अंदर। इसका धारक तत्व क्या है? अरे भैया मैं पूछ रहा हूं क्या आपसे? अचल वचल क्यों बोल रहे हो? आप सीधे बात करो ना ये वाला तत्व यहां पे रहता है वो और समय आने पे आत्मा के साथ आ जाता है। अब बोलने ही नहीं देता। क्या बोलूं? ब्रह्मकुमारी
00:29:49:03 वाला तर्क नहीं करता है। इतना बहुत कम बोलता है। आप बताइए। [गला साफ़ करने की आवाज़] बोलने दोगे तो बोलूंगा वरना लेफ्ट हो जाएगा। आप अगर आप अगर आप अगर बेकार की चीजें बोलेंगे तो आपका स्वागत है। आप लेफ्ट हो सकते हैं। आप मैंने आपने अभी बोला आत्मा अचल है। मैंने पूछा है कि आपसे कि वो चलती है कि नहीं चलती है। मूवमेंट करती है कि नहीं करती है? बताइए। क्यों बोल रहा अचल? हां। जी बोल रहा हूं। आप सुनोगे तब ना। देखा मैंने अभी अभी प्रश्न। अब मैं एक एक मैं एक क्लियर प्रश्न एक मिनट आपने अभी एक मैं एक क्लियर प्रश्न आपसे कर रहा हूं। ध्यान से सुनिए। मैंने आपसे पूछा था कि आत्मा मूवमेंट करती है कि नहीं करती? पूछा था
00:30:35:25 तो मेरा जवाब में पहले आत्मा ही आना चाहिए। शब्द ऐसा जरूरी तो नहीं है। आत्मा को समझाने के लिए मुझे मुझे आप मुझे अचल है क्यों बता रहे हैं? आप जो विषय से संबंधित जो बात चल रही है वो बताइए। अचल है से क्या मतलब है? और अगर आप बताएंगे तो मैं टोकूंगा। चलिए बताइए। वो अचल अडोल है आत्मा और जो हिलता है आता है वो सूक्ष्म शरीर आता है और उसमें ही विकारों से भरे होता है। हमारे [गला साफ़ करने की आवाज़] पूर्व जन्मों का जो भी आप मानते हैं सूक्ष्म शरीर में वो एक मुख से दूसरी योनि में जाता है। एक योनि से दूसरी योनि दूसरी से तीसरी ये आवागमन करती है। आत्मा तो स्थिर है उसका कटका नहीं हो सकता। ठीक है। समझ रहे हो आप? समझ गया। आपने जो कहा आप जो कहना आप जो कहना चाह रहे हो वो मैं सुन लिया समझ गया। अब मैं उसमें और क्लिटी चाहता हूं। यह सूक्ष्म शरीर किस तत्व से बना होता है? प्रकृति से बना होता है या अपने आप में एक स्वतंत्र रूप से एक तत्व है सूक्ष्म शरीर
00:31:51:06 नहीं नहीं यह बोल सकते हैं हम वो कॉस्मिक एनर्जी वाला कॉस्मिक एनर्जी बना हां जी इसको समझाइए थोड़ा सा लाइट की बिजली को कैसे समझाओगे लाइट की बिजली है। नहीं नहीं उसकी व्याख्या करनी है तो कैसे समझाओगे? लाइट की बिजली की व्याख्या करनी है। लाइट की बिजली कैसे दिखाओगे? नहीं नहीं बिजली बोल रहा हूं। मैंने मैंने दिखाने की बात कही है। [हंसी] मैंने कहने की बात कही है। देखिए आप तो पता चलेगा। मेरी बात सुनिए। मेरी बात सुनिए। मैंने आपसे पूछा है कि यह जो यह जो सूक्ष्म शरीर है यह बना किस चीज से होता है? तो इसमें जड़ प्रकृति का मटेरियल यूज किया जाता है। या फिर हम यह मान ले कि पर एक मिनट एक मिनट एक मिनट या फिर हम यह मान लें कि परमात्मा और आत्मा और
00:33:06:24 प्रकृति इसके अलावा एक तत्व और है जिससे कि सूक्ष्म शरीर बना है। सीधी बात एक तत्व और एक्सिस्ट करता है। सर पहली बात तो यह है कि मन बुद्धि से पर है। मनुष्य बुद्धि नहीं कह सकती इसकी व्याख्या। मतलब आपको नहीं पता। आपको नहीं पता। किसी को पता नहीं रहेगा। इसका किसी को भी मतलब ब्रह्मा कुमारी के पास यह ज्ञान नहीं है। नहीं नहीं किसी के पास। ठीक है। कोई बात आप ये मुझे वो किसी किसी के पास होगा कि नहीं होगा? मैं ये पूछ रहा हूं भाई साहब मैं ये पूछ रहा हूं ब्रह्मा कुमारी का ये क्लेम गलत हो गया ना कि तीन ही तत्व है जीव प्रकृति और आत्मा परमात्मा जीव और प्रकृति ये तीन तत्व मानती है आप एक चौथा और बता रहे हो सूक्ष्म शरीर और उसका उपादान आप बता नहीं रहे हो वो तो अपने आप में ही मान लेता हूं सूक्ष्म शरीर अपने आप में एक शाश्वत तत्व है और दुनिया भर में जितनी आत्माएं उन सबका सूक्ष्म शरीर एक्सिस्ट करता है शाश्वत
00:34:14:24 हां जी और एक और एक बात इससे जुड़ी है बोल देता हूं कि मनुष्य शरीर का जो सूक्ष्म शरीर होता है ना वो मनुष्य योनि में ही जाते हैं। हां स्त्री पुरुष हो सकते हैं दूसरे जन्म लेकिन वो बिल्ली कुत्ता कोई पशु पक्षी उसमें एडजस्ट नहीं करते हैं। मतलब सूक्ष्म शरीर एक ऐसा तत्व है जिसकी अपनी चेतना होती है जिस कारण से वह बुराई और अच्छाई के विचारों को अपने पास स्टोर कर सकता है। सूक्ष्म शरीर वो वही वही मेमोरी कार्ड है। वही आती जाती है। यानी वो चेतन सत्ता है।
00:34:58:16 चेतन सत्ता तो वो आत्मा को बोलेगा। चेतन सत्ता इससे एक्सेस करती है आत्मा से आत्मा है तो वह काम कर सकती है वरना तो मैंने इसीलिए पूछा ये जो बुराई और अच्छाई है ये विचार है इसको धारण वो कर सकता है जो चेतन हो इसको जड़ तो धारण कर नहीं सकता जो चेतन नहीं वो जड़ हुआ आप कह रहे हो वो जड़ नहीं है जड़ नहीं तो चेतन है नहीं तो क्या है आप बता दो नहीं नहीं आत्मा की व्याख्या नहीं हो सकती इसकी व्याख्या सिर्फ इतनी हो सकती है कि वो हां हां हां वो वो वो पूर्ण ज्ञान भी नहीं कहेंगे उसको उसको पूर्ण अज्ञानी भी नहीं कहेंगे उसको पूर्ण प्रकाश भी मैं समझ गया मैं समझ गया इसको इसको पूर्ण भी नहीं इसको दूसरी तरीके से समझ लेते हैं तो अभी जब आपने कहा कि आत्मा अपने मौलिक स्वरूप में जा रही होती है तो आपने यह माना कि आपका कभी ऐसा होगा जब आप सूक्ष्म शरीर से भी अलग हो जाओगे और या फिर आपका जो एंडिंग पॉइंट है वो यही है कि सूक्ष्म शरीर के साथ तो हमेशा रहोगे ऐसा है क्या? सूक्ष्म शरीर से भी अलग हो जाओगे। ऐसा होता है
00:36:08:19 आत्मा तो हिलेगी नहीं। सूक्ष्म शरीर ही अर्ज करता है। आत्मा उसमें भी है लेकिन उसका नहीं हो सकता। भाई साहब मैंने क्या पूछा नहीं समझा नहीं। मैंने कहा कि अभी आपने ये बात कही थी कि भाई जो आत्मा का मौलिक स्वरूप है ना उसमें शांति इत्यादि है। है ना? और जब हम मेडिटेशन करते हैं तो जो मौलिक स्वरूप है वो हम प्राप्त करने लगते हैं अपना। ठीक है? हां जी। यही गाना आपने। इसके बाद हम इस पे आ जाते हैं। इसके बाद हम इस पे आ जाते हैं कि अ इसके बाद हम इस पे आ जाते हैं कि आपने यह माना कि ये जो वैचारिक सामग्री है इसको धारण करता है सूक्ष्म शरीर। अब वो सूक्ष्म शरीर चेतन है। जड़ है ये मैं नहीं कह सकता। हां चेतन आप उसे मानते नहीं। जड़ उसे आप मानते नहीं। आप क्या मानते हो वह तो आप बता नहीं पा रहे हो बात एक अलग है मगर फिर भी यह वैचारिक जो चीजें हैं वैचारिक सामग्री यह धारण करता है सूक्ष्म शरीर तो अब मैं यह पूछ रहा हूं कि आपने जो कहा कि ध्यान करने से आत्मा मौलिक स्वरूप में स्थापित होने लगती है स्थित होने लगती है तो मौलिक स्वरूप सूक्ष्म शरीर के बिना वाला मौलिक स्वरूप या मौलिक स्वरूप सूक्ष्म शरीर के साथ वाला मौलिक स्वरूप
00:37:22:19 किसको कह रहे हैं मौलिक स्वरूप आप मौलिक किसे कह रहे हो? ओरिजिनल जो उसका वास्तविक स्वरूप है। मतलब सूक्ष्म शरीर के बिना भी उस आत्मा एक्सिस्ट करती है ना। हां जी। ये हो गया। यानी कि यह जो सारी गंदगी है यह शरीर में होती है सूक्ष्म शरीर में और आत्मा जो है आप जब ध्यान लगाते हैं तो आप जो है अपने सारे शरीरों से मुक्त हो के सूक्ष्म शरीर के वो आपने मौलिक स्वरूप में जाकर के वो भोगते हैं। क्या कहते हैं? ठीक है। ठीक है ना? हां। तो अब इसमें बहुत सारे प्रश्न हो जाते हैं। मगर मैं जो मेरा जो मुख्य विषय चल रहा है कि बुराई उसके अंदर आई कहां से मैं उस पर ही रहता हूं। तो अब आप यह बताइए कि आत्मा सूक्ष्म शरीर जब सूक्ष्म शरीर में आने से ही पाप आना है तो सूक्ष्म शरीर से आत्मा कनेक्ट क्यों हो रही है? कौन कर रहा है कनेक्ट उसे? एक तरीके से मान लीजिए कि ये जो बुराई है वो सूक्ष्म शरीर में रहती है और सूक्ष्म शरीर सूक्ष्म शरीर से आत्मा को जोड़
00:38:37:25 के आत्मा को पापी जो बुराई करने की वो है दे दी जाती है तो कौन कर रहा है ये अरे वो खुद पे ही करता है सूक्ष्म उसका संस्कार उसका संस्कार खुद से ही करता है कि मुझे कहां समझ गया मैं समझ गया मैं थोड़े से से समझ जाता हूं भाई साहब इतना सा बोलते मैं समझ जाता हूं खुद से करता है बस समझ गया हां अब इसमें आगे चलते हैं इसका मतलब यानी कि उसको मालूम है कि उसमें उसमें जाकर के मैं पापी बन जाऊंगा और फिर भी वह उससे जुड़ता है खुद से। अरे उसका संस्कार ही ऐसा है ना वो पवित्र पवित्र शरीर उसका संस्कार ऐसा है कि उसको मालूम है कि वो पाप से जुड़कर के सूक्ष्म शरीर से जुड़कर के पापी बन जाएगा। मगर फिर भी वो उससे जुड़ता है। नहीं नहीं पापी तो है ऑलरेडी। वो पाप को लेकर ही जाता है दूसरे शरीर में। यानी आत्मा जब सूक्ष्म जब सूक्ष्म शरीर से अलग है तब भी आत्मा पापी होती है। पाप होते हैं उसके पास।
00:39:47:13 सूक्ष्म शरीर में रहता है। अरे भाई साहब मैंने कहा मैंने कहा सूक्ष्म शरीर से जब आत्मा अलग हो गई है तब उसके पास पाप है कि नहीं है? आत्मा में बोल रहे हो। आत्मा में हां हां आत्मा में कहां पाप रहेगा? आत्मा नहीं रहेगा वो तो शुद्ध है। तो अब अब आप ये अब आप ये मुझे बताइए सुनिए सुनिए मैं मैं बताऊं मान लीजिए ये हो गई आत्मा इसको मानिए आत्मा है और ये उसका सूक्ष्म शरीर है। सूक्ष्म शरीर में पाप है। ठीक है? इससे जुड़कर के पापी हो जाएगी आत्मा। तो आत्मा को पाप इस सूक्ष्म शरीर से कौन जोड़ रहा है? क्यों जोड़ रही है वो? जब वो इधर पापी हो रही तो नहीं नहीं पापी हो जाएगी ऐसा नहीं वह पाप लेकर जाती है उसका मन है ना वो मन ही मान लो सूक्ष्म शरीर जो है उसका संस्कार भर के दूसरे शरीर में जाती है अभी वो सूक्ष्म शरीर से अलग है मैं क्या पूछ रहा हूं अभी वो सूक्ष्म शरीर से अलग है ना आत्मा मैं तब की बात कर रहा हूं
00:40:58:04 सूक्ष्म शरीर से कनेक्ट क्यों हो रही है आत्मा भैया आपको एक तो पूर्ण मूर्ख मिले या तो पूर्ण ज्ञानी मिले। मेरे जैसा बच्चे का नहीं मिला आपको। आप जा सकते हैं। यह सवाल मैं क्यों पूछ रहा हूं? वो आप लोग समझ लीजिए। आप जा सकते हैं। भाई साहब मैं समझ गया आपका आंसर क्या है। यह सवाल मैं इसलिए पूछ रहा हूं कि यह लोग यह कहते हैं कि आत्मा का जो मूल स्वरूप है वो शांति, करुणा, प्यार इत्यादि पाप रहित है। दूसरी ओर यह भी कहते हैं कि भैया जो आत्मा है वो सदा सुखी नहीं हो सकती। हर 5000 साल में वो उसका इनका एक साइकिल है। उनको मोक्ष पूरी थ्योरी आप समझ लीजिए। शुरू से अंत तक मैंने क्या और क्यों पूछा है? उसको आप लोग भी जान लीजिए। देखिए जब मैंने उससे यह पूछा इनसे भाई साहब से कि जब आपने बिटिया का सर कंधे पर रखा था तो आपको कुछ सुख की अनुभूति हुई होगी तो उसमें और इसमें अंतर क्या है? तो इन्होंने बताया परम सुख है जमीन आसमान
00:42:13:06 का अंतर है और इसमें हम अपने मौलिक स्वरूप में आते हैं। ठीक है? तो सीधी सी बात है इसमें अंतर यह होता है आध्यात्मिक सुख में और इस सुख में यह सुख अनंत होता है। आध्यात्मिक सुख इसको समझना है। अगर यह अनंत नहीं है तो इस सुख में भौतिक भौतिक चीजों से मिलने वाले सुख में और अध्यात्म से मिलने वाले सुख में कोई अंतर नहीं है। अगर यह सुख अनंत नहीं है तो अनंत है तो ही वो परम सुख है। वो अनंत सुख है और वही सच्चिदानंद वाला मामला है। मोक्ष वाला। तो अब पहली बात इनके यहां की थ्योरी यह है ब्रह्मा कुमारी के यहां की कि अनंत सुख तो है नहीं। तो पहली बात इस सुख में इस सुख में अंतर क्या आया? अब यह तो एक बात हो गई कि इस सुख में उस सुख में कोई अंतर नहीं है। जो भौतिक दुनिया से जो सुख प्राप्त कर रहे हैं वही सुख वहां से भी मिल रहा है क्योंकि वहां वो खुद क्लेम कर रहे हैं कि वहां पर भी आपका इतनी देर का ही सुख है और तमाम सारी दुनिया की दुनियादारी की चीजों को छोड़ के व्यक्ति से कहा जाए कि हम तुम्हें इतनी देर के लिए जैसे जेल पर जेल से बाहर छोड़ते हैं ना पेरोल पे पैरोल कहते हैं क्या कहते हैं जेल से थोड़ी देर के लिए बाहर तो उस समय उस व्यक्ति को कैसी अनुभूति होगी जब वो पैरोल पे बाहर होगा है ना और दूसरी बात यह होती है कि पैरोल पे जो मुक्ति होती
00:43:28:09 है ना पैरोल वाली वो मुक्ति भी पूरी तरीके से मुक्ति नहीं होती। यही हो कि पैरोल वाली जो मुक्ति है वो पूरी मान ली जाए क्योंकि उसमें उसके एक कष्ट होता है कि बस 15 दिन में वापस जाना है। एक महीने में वापस जाना है। जैसे राम रहीम पैरोल पर बाहर आता जाता है। तो जितनी देर वो बाहर आता है और वापस जाता है उतनी देर उसके अंदर सारे दुख भले ही खत्म हो जाए जेल से संबंधित। एक दुख दोबारा उसके मन में होता है कि मुझे दोबारा जाना है। ठीक है? तो एक तो यह हो गया कि यह वह जो जिस ब्रह्मा कुमारी में जा रहे हैं लोग वहां पर अंतर क्या है यह कोई नहीं बता पाएगा। वही भौतिक सुख यहां का भी बाधित है और ब्रह्मा कुमारी के द्वारा आध्यात्मिक दुनिया का जो सुख है वह भी बाधित है। वह खुद यह क्लेम कर रही है। दूसरी बात अब इसमें ये लोग जब बातें करते हैं मीठी-मीठी बातें करने के चक्कर में तो इनको यह कहना पड़ता है कि आत्मा का जो मौलिक स्वरूप होता है वो शांति होता है। शांति और यह जैसे अभी आपने हमारी पिछली कुछ चर्चाएं हुई है उसमें देखा होगा। तो जो शांति है शांति और ये अच्छी-अच्छी मीठी मीठी बातें प्यार प्रेम करुणा दया है यह सब यह उसका मौलिक होता है तो वह मौलिक भी होने लगती है। अब दिक्कत यह आती है कि इन्होंने जब यह माना कि यहां से छूट करके वहां जाना है
00:44:43:10 इसके लिए हमें अच्छे काम चाहिए। तो वहां से छूट वहां से इनको यहां आना है जो ये माने बैठे हैं कि वहां से आना है। उसके लिए बुरे काम चाहिए। तो अगर यहां से वहां जाने के लिए अच्छे काम आत्मा का वास्तविक धर्म है तो वहां से यहां आने के लिए बुरे काम आत्मा का वास्तविक धर्म मानना पड़ेगा। इसका अर्थ क्या हुआ कि अधर्म करना, पाप करना, व्यभचार करना, ब्रह्मा कुमारी के अनुसार झूठ बोलना यह सब उसका मौलिक धर्म होगा। यह सब भी उसी प्रकार से जैसे जितना सच बोलना, जितना शांति प्राप्त करना, शांति की ओर जाना, जितना यह सब उसका धर्म है आत्मा का उतना ही दूसरी चीजें भी धर्म है। तो क्या ब्रह्मा कुमारी के अनुसार कभी धर्म स्थापना हो पाएगी? धर्म संस्थापना हो पाएगी ब्रह्मा कुमारी के अनुसार क्योंकि
00:45:33:08 बुराई से अच्छाई की ओर जाना भी धर्म है और अच्छाई से बुराई की ओर आना भी धर्म है। ये इसलिए क्वेश्चन था। ठीक है? और अगर हम यह कहते हैं कि नहीं नहीं आत्मा जो है पाप कर्मों के बिना रह सकती है आत्मा। अब यह तीसरा पॉइंट आ गया बचने के लिए कि आत्मा पाप कर्मों के बिना उसका मौलिक स्वरूप है। तो पाप कर्मों के बिना जब मौलिक स्वरूप है तो मौलिक स्वरूप जब वो पहुंच रही है तो वहां से इधर आ रही कैसे है? पाप कर्मों से कौन डाल रहा है? अच्छा माया ये मानते नहीं है। प्रपंच रूपी संसार ये मानते नहीं है। नहीं तो सब कुछ उसमें आ जाए। समस्त कर्मों को करते हुए भी तू मुझे अकर्ता मान। यह सनातन फिलॉसफी है भाई अकाट्य सिद्धांत कहीं से भी आ जाओ गिरा दिए जाओगे इसको कहते हैं सिद्धांत खैर तो वो तो ये मानते नहीं है तो अब ये मानना पड़ेगा कि वो जो बुराई इसमें नहीं थी वो आई कहां से किसने डाली परमात्मा बुराई डाल डालेगा नहीं इनके यहां क्योंकि वो वो नहीं है सर्वशक्तिमान परमात्मा तो ये वाली चीजें करता ही नहीं है तो परमात्मा बुराई डालेगा नहीं तो क्या होगा जब परमात्मा बुराई डालेगा नहीं तो बुराई से कने अच्छा पहले इन्होंने काफी देर तक बचने के लिए जो सूक्ष्म शरीर में डाल दिया बुराई मतलब विचारों को जबकि विचार जो है यहां पर भी ये फंसे विचार जो
00:46:48:09 है धारण कर सकता है कोई चेतन तत्व चेतन तत्व केवल दो हैं परमात्मा और जीव तो परमात्मा तो बुराई धारण नहीं कर सकता इनके अनुसार क्योंकि माया इत्यादि ये मानेंगे नहीं प्रपंच मानेंगे नहीं तो वो धारण नहीं कर सकता तो क्या होगा फिर तो जीव या तो जीव में मानना पड़ेगा कि हां उसके अंदर बुराई पाप कर्म वगैरह भी सदा से थे हैं और रहेंगे। इसका मतलब जब कोई हत्या भी कर रहा है तो वह अपना मौलिक धर्म निभा रहा है। जब कोई रक्षा कर रहा है तो वह भी धर्म कार्य कर रहा है और जब कोई भक्षण कर रहा है वो भी धर्म कार्य कर रहा है। यह है इस पॉइंट में मैं लाना चाह रहा हूं। इस सच्चाई को आप समझिए। ब्रह्मा कुमारी के सिद्धांतों के अनुसार या जैसे जो दूसरे सेक्ट हैं इनके अनुसार जितना धर्म आचरण जिसे हम कहते हैं सदा सदाचरण जिसे हम कहते हैं वो धर्म है उतना ही जो दुराचरण है वो भी धर्म सिद्ध हो जाएगा क्योंकि हमें यह मानना पड़ेगा कि बुराई उसमें इनबिल्ट है आत्मा में इनबिल्ट है बुराई और बुराई सच है माया तो है नहीं प्रपंच तो है नहीं सच है तो बुराई अगर सच है तो वह आत्मा में इनबिल्ट है तो इनबिल्ट है तो जब कोई हत्या करता है बलात्कार करता है चोरी
00:48:03:10 करता है पाप करता है तो ब्रह्मा कुमारी जैसे तंत्रों के अनुसार वो भी धर्म है क्योंकि जिस जिस प्रकार से अशांति से शांति और शांति की यात्रा इनके यहां निश्चित है उसी तरीके से शांति से अशांति की यात्रा भी इनके यहां निश्चित है। तो जिस तरीके से सच्चाई का आलंबन लेकर के शांति की यात्रा करते हैं तो उसी तरीके से झूठ का आलंबन लेकर के अशांति तक की यात्रा भी इनके यहां सुनिश्चित है। ठीक है? तो अब क्या हुआ कि धारक तत्व इन्होंने सूक्ष्म शरीर मान लिया। तो सूक्ष्म शरीर से कनेक्ट कौन कर रहा है? मानना पड़ेगा। या तो वह खुद कर रही है। अगर खुद हो रही है तो फिर यह बुराई आ गई। सूक्ष्म शरीर से कनेक्ट होने का विचार ही बुराई है। भाई जब मालूम है कि यह पाप है तो इससे कनेक्ट क्यों हो रहे हो? तो यह विचार भी बुराई है। लो तो ये बुराई कहां रहती थी? आत्मा में ही रहती थी। इसका मतलब पाप कर्म भी आत्मा का शाश्वत धर्म है। ठीक है? इस तरीके से इनकी सारी बातें खंडित होती हैं। आशा करते हैं आपको चीजें समझ में आ रही हो।
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00:49:13:10 अच्छा। यही बात हमने बहुत अच्छे से समझने का प्रयास किया है जो ब्रह्मा कुमारी का लाइव जो वो है नीलमा जी उनके साथ का काफी हॉट टॉक सा हो गया था उस सब और यह हो कि दोनों में धैर्य था तो एक झगड़ा जैसा नहीं हुआ मगर आप देखेंगे तो उसमें बहुत मधुर संबंध होने के बाद भी जिस समय वैचारिक चीजें चल रही थी उस समय हॉट टॉक का दृश्य बन गया था आप लोग वो जरूर देखना कल आह्वान पर मेन चैनल पर हमारे कल सुबह 10:00 बजे वो डाल दिया जाएगा तो उसे आप अवश्य देख लीजिएगा। और दूसरी बात वो
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00:49:54:02 एक राघव दास नाम का व्यक्ति रामपाल की ओर से उससे मेरी बात हुई। हालांकि जब मैंने उसे दिन भर में चार बार फोन मिलाया था और लाइव मिलाया था तो उसने फोन नहीं उठाया था। दिन में उसने पूरे पूरे पूरे दिन उसको फोन उठाने का नहीं आया। अब वो अपना कहीं पर मुझे फोन लगा रहा है। मैंने उसे ब्लॉक पर डाला है। क्यों डाला है? इनके पास इस तरह के लोगों के पास रामपाल और उसकी कंपनी है जो इनके पास चर्चा से भागने के कई तरीके हैं। उसमें पहला तरीका है सबसे पहली बात तो ताल तो खुप टोको कि मैं चैलेंज करता हूं मैं चैलेंज करता हूं। पर उसको उस चैलेंज के क्रियान्वयन हेतु कोई भी इंतजाम ही मत करो। जैसे रामपाल रामपाल ताल ताल तो खूब ठोकता है मगर क्या उसने ऐसा कहा कि भैया चर्चा सुनिश्चित करने के लिए यह मेरा नंबर है इससे मेरी बात होगी नहीं ऐसा कोई उसने नंबर नहीं किया जहां पर चर्चा सुनिश्चित करने के लिए कोई उसने नंबर सार्वजनिक किया हो दूसरी बात इसी प्रकार से उसके जो चेले चापड़ है वो ताल ठोका करते हैं धनाना चला जा धनाना चला जा धनाना जाने के लिए भी कोई समय सारणी इत्यादि उन्होंने ऐसी कोई जारी नहीं की है कि आप अगर इस समय आएंगे यहां प्रश्नोत्तरी होगी। जैसे हमारे गुरु गुरुजन
00:51:09:06 होते हैं तो आप देखो वह कहीं पर ट्रैवल करते हैं। कहीं उनका शिविर लगता है तो उसमें लिखा होता है कि इतने से इतने बजे तक प्रश्नोत्तरी होगी। दर्शन दीक्षा होगी। यह सब ऐसा कोई टाइम टेबल कोई शेड्यूल रामपाल के सेक्ट के द्वारा कोई सार्वजनिक नहीं किया जाता। दूसरी बात जब रामपाल स्वयं एक विवादास्पद व्यक्ति है। आपराधिक मामलों से जुड़ा हुआ व्यक्ति है तो क्यों अपने बिल में छुप करके बैठा रहता है? भाई आगरा पहुंच, हैदराबाद पहुंच, ग्वालियर पहुंच, झांसी पहुंच, एमपी में जबलपुर पहुंच, इंदौर पहुंच, जहां-जहां तूने अपने सेंटर्स बनाए सब जगह जा। और तुझे अगर शंकराचार्य जी का ज्ञान बुरा लग रहा था तो सबसे पहले तू ही उनके यहां चला जा। वो थोड़ी ना जेल काट के आया। तू आया है काट के। तो तू ऐसा कैसे सोच रहा है कि कोई तेरे दरवाजे पे आ जाए। वो मूर्ख होगा जो तेरे दरवाजे पे जाएगा। हालांकि बीच में मैंने देखा कई आर्य समाजियों ने बोला भैया तेरे ही यहां पे चर्चा कर ले। चल। तो इनकी ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया इन बातों के लिए रामपाल के यहां पर चर्चा करने के लिए। यह हो गया। अच्छा अब इनके पास एक तो यह आ गया कि यह सोचते हैं कि यह इनका जो बदनाम अड्डा है जहां पर खीर की चीजें हैं या वो सामग्री या कैमरों की चीजें हैं, गोलियों की गोलियां चलाई गई है, हत्या के मुकदमे हैं, देशद्रोह के मुकदमे हैं वहां पे कोई
00:52:24:09 व्यक्ति जो है चला जाए और तो और इनकी आपराधिक स्पष्ट रूप से गतिविधियां जो सिद्ध हैं। जैसे कि किताबों पर झूठ झूठा पता डालना यह सब सिद्ध प्रत्यक्ष प्रमाण है। इसके बाद भी कोई व्यक्ति इनके यहां पर जाएगा रामपाल से प्रश्न पूछने के लिए। ठीक है? पहली बात। यह ऐसा एक्सपेक्ट करते हैं और नहीं आ रहा है तो वह जो है चर्चा करने का उसमें सामर्थ्य नहीं है। फिर दूसरा इनका बहाना क्या है कि चर्चा के लिए कोई स्पष्टीकरण, कोई स्पष्ट जो विवरण है वह उपलब्धि ना कराना। केवल ताल टोकते रहो। विवरण उपलब्ध मत कराओ। ऐसा ही कुछ इन्होंने किया था। फैक्ट भाई अभिषेक और राघव दास इत्यादि ने। ताल तो कुपटों की उसमें यह नहीं कहा। यह मेरा नंबर है जिसको भी वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा करनी हो चर्चा कर लेना। फिर तीसरा इनका है कि दो हो गए विवरण ना उपलब्ध कराना और अपने बिल में घुसे रहना। फिर तीसरा है कि अगर चर्चा होने के लिए चर्चा करने के लिए बात हो रही हो तो उसमें ऐसे शब्दों का उपयोग अपनी ओर से करने लगो कि मामला चर्चा से हटकर के वाद विवाद तू तड़ाक और गंभीर धारण कर ले। वो जो तर्क वितर्क युक्ति प्रमाण इत्यादि है वो सब गायब हो जाए। जैसे राघव दास को मुझसे चर्चा करनी है। चर्चा सुनिश्चित करनी है भाई। तो राघव दास का फोन आया
00:53:39:25 तो मैंने उससे क्या कहा? और मैंने पहले ही कह रखा था तूने तो फोन भी मूर्ख पने में किया है। बेवकूफ व्यक्ति मैंने तो अपनी जिस लाइव में तेरे को तेरी औकात याद दिलाई थी। तुझे सब सिद्ध किया था ना कि तू कैसे रामपाल की पत्नी है। रामपाल कैसे कबीर की पत्नी है। फिर कैसे तुम्हारे वो जो स्त्री अंग होता है चिपकाया जाता है फेविकॉल से नाखूनों के द्वारा। ये सब सिद्ध किया था तेरी किताबों से। इसीलिए तेरी जो है बुद्धि भ्रष्ट हो गई होगी। पादुर्भाव पादुर्भाव यह सब सिद्ध किया था अपनी लाइफ में। तो इसका दिमाग खराब हुआ। यह मेरी तात्यात्मक चीजें थी कि चर्चा जो होगी वो बीच के चैनल पर होगी। बीच के स्थान पर होगी। तुम्हारे चैनल पर नहीं होगी। तुम लोग कुख्यात लोग हो। एक होता है विख्यात। एक होता है साधारण। एक होता है कुख्यात। तो तुम साधारण भी नहीं हो। तुम लोग कुख्यात हो। निचली स्तर के व्यक्ति हो। तब भी तुम्हें मौका दे रहे हैं कि तुम्हारे साथ बीच के स्थान पर चर्चा कर सकें समाज सुधार के लिए, लोगों की जागरूकता के लिए। तो खैर मैंने यह सब बातें उसमें अपने उसमें कही थी। अब इसका फोन आता है तो जब मैं कहता हूं कि भाई फैक्ट भाई अभिषेक के चैनल पर चर्चा क्यों होगी? तो ये व्यक्ति क्या कहता है कि क्यों हवा निकल गई। अब यह देखो हवा निकल गई। बात ठीक शब्दों से हो रही है। हवा निकल गई वाला शब्द क्यों आया? पहले भाई तुमने अपने चैनल पर खूब गरमा
00:54:55:03 गर्मी दिखाई। मैंने भी दिखाई। अब बात करनी है, अगर चर्चा करनी है तो हमें ऐसे शब्दों का उपयोग करना पड़ेगा एक दूसरे की मर्यादा की सीमा में रहते हुए कि वह चर्चा हो सके। अब अगर तुम वहां पर गाली देने लगो चलो अभी तो तुमने कहा कि हवा निकल गई। तुम गाली देने लगो आगे उसने भौकनावकना भी ये सब भी कहा। तुम गाली देने लगो उसके बाद भी मैं कहूं हां हां मैं तुम्हारे चैनल पे आऊंगा चर्चा। ये कहां का सिद्धांत है भाई? ये कोई तार्किक बात है क्या? यह मूर्खों की बातें हैं। मूर्ख जिन्होंने जहां मल के द्वार से बह के दूध आता है ना और फिर उस दूध की खीर बनती है समाचार पत्रों के अनुसार वो खीर ग्रहण की हुई हो ऐसा बर्ताव इस तरह के दिमाग वाले करते हैं जो तुम इस समय कर रहे हो। है ना? तो इससे क्या सिद्ध होता है? वो खीर की बातें सही सिद्ध होती है कि नहीं? ये निर्णय स्वयं करो और अपने लोगों को कहो तुम भी करो भाई। तो पहली बात जब चर्चा सुनिश्चित करने के लिए बात
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00:55:49:13 हो रही है तो उसमें यह अपशब्द हवा निकल गई इत्यादि कौन ला रहा है? तू ला रहा है। अब क्या हुआ? मैंने बताया ना इनके इनके तरीके हैं चर्चा से बचने के। तो तीसरा तरीका है कि भैया चर्चा से बचने के लिए चर्चा की बात तो करो। मगर ऐसे शब्दों में बात करो। गालियां बकने लग जाओ। जैसे सुबह मैंने एक वीडियो डाला। उसमें एक व्यक्ति बौखलाया हुआ है एटा का। वह फोन करता है शिवम दास नाम है उसका पहले आ चुका है चैनल पर कुछ कर नहीं पाया था बेचारा तड़प तड़पता रह गया था भटकती हाथ में उसका फोन आया तो उसने चर्चा के लिए फोन तो किया फिर वो गाली नहीं दे
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00:56:22:12 रहा है अबे मूर्ख व्यक्ति गाली के पीछे गोलियां चलती है चर्चा नहीं होती गाली के बाद और तू गाली दे रहा है तो गाली दे रहा है फिर चर्चा कहां से होगी तो ये हवा निकल जाना भोकना ये सब क्या है अपशब्द है अब तू अपशब्द कहेगा तेरे ही द्वारे पे आकर के हम तुझसे चर्चा करें खैर ये सब जो फूहड़ बातें हैं। यह सब तुम्हारे जो टट्टू भगत है ना जो खीर इत्यादि के स्वाद में डूबे रहते हैं वह सब लोग पचा सकते हैं। जो बुद्धिजीवी है वो सब इस तरह के पुतर्कों को नहीं पचा पाते। अब दूसरी बात क्या है कि फिर कहता है कि भाई कि जब हमारे लोग तेरे चैनल पर आते तब तू बीच की बात क्यों नहीं करता? इसका मतलब यह है कि रामपाल के यहां से भले ही 500 लोग आए। उनके कहने पर मैं किसी भी नए चैनल पर जाने लगूं। हैं। यही करूं ना? अरे यह तो मेरा बड़प्पन है भाई कि मैंने तुम्हारे यहां के हर छोटे से छोटे और बड़े से बड़े व्यक्ति को यहां पर आकर अपनी बात रखने का अवसर प्रदान किया। तूने कितनों को कर दिया? फैक्ट बाय अभिषेक ने कितनी लाइव चर्चाएं कर ली है। किसके साथ कर ली? बता मैं करवाऊं भाई तुझे 50 कॉल नए-नए लोगों से। सबको सबके साथ अपने तेरे ही चैनल पे तू नहीं करेगा। तेरे ही चैनल पे तू नहीं करेगा। ये औकात है तुम लोगों
00:57:37:13 की। मैंने तो 13 लोगों को मौका दिया कि रख लो भाई। अब बात यह है कि भाई मैं यह मेरा निर्णय होगा ना कि मैं किसी के चैनल पर जाऊं कि ना जाऊं। भाई तुम लोगों की औकात ऐसी है ही नहीं। चाहे तुम्हारा जो चरित्र प्रमाण पत्र है वह गिरा हुआ है निकृष्ट कोटि का नीच लोगों के टाइप का है नीच हरकतें करने वाले झूठा झूठा पता डालने वाले अपने वीडियोस में झूठ बोलने वाले बात बातबात में झूठ ऐसे नीच लोगों का जो प्रमाण पत्र तुम्हारा है चरित्र प्रमाण पत्र उसके चैनल पर मैं क्यों जाऊं भाई और अगर मैं भी वैसा ही था तो तू अपने लोगों को मना कर कि मत जाओ उसके चैनल पे ये मैंने कमाया ये मेरी अचीवमेंट है कि तेरे लोग मेरे पास मेरे मेरे चैनल पर आते थे और आते हैं और आएंगे तू नहीं रोक पाएगा उन्हें
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00:58:27:06 समझ रहा है तो तेरा ऐसा चारित्रिक चरित्र का सर्ट तेरा चरित्र ही ऐसा खराब है तुम लोगों का कि भाई मैं नहीं ये निर्णय कर रहा हूं कि मैं तुम्हारे चैनल पे जाऊं अगर चर्चा करनी है तो बीच के स्थान पे अच्छा मैंने ये भी
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00:58:42:26 नहीं कहा कि तू मेरे स्थान पे आ ये भी बात देखो मैंने तो ये नहीं कहा क्योंकि जब मैं किसी से ये कह रहा हूं कि मुझे तुम पर भरोसा नहीं है तो तो मैं उससे उससे उससे एक्सपेक्ट कभी नहीं करूंगा कि वो मुझ पर भरोसा कर ले। मगर ये बेवकूफ देखो ये बेवकूफ क्या है? महाभारत में क्या लिखा है कि अन्यों के साथ वही व्यवहार करें जो स्वयं के लिए स्वीकार हो। तो जब तू यह दिखा रहा है कि तुझे मुझ पर भरोसा नहीं है। तेरे कितने ही भगत आ गए हो। मगर तुझे तो भरोसा नहीं है ना। तो भरोसा नहीं है तो तू यह क्यों सोच रहा है कि मैं तुझ पर भरोसा कर लूं। ये कहां का न्याय है? यह न्याय नहीं है। यह फड़ बाबा के फड़ चेलों की खीर वाली टोली है। जेल कट्टू बाबा की तो यह हो गया। तो कहने का तात्पर्य यह है कि भाई मैंने किसी को पकड़ पकड़ के बुलाने नहीं गया था कि आ जाओ आ जाओ मेरे यहां चर्चा कर लो। मैंने मौका दिया था किसी को। अगर किसी को आपत्ति है और वो यहां आने में अगर उसको सहज लगता है तो वो आकर के कर सकता है चर्चा। ठीक है? मुझे सहज नहीं लगता तेरे चैनल पर तुम लोग अपराधी टाइप के लोग हो जिसकी तुम पूजा कर रहे हो अपराधी है मुकदमे चल रहे हैं उसके ऊपर हथियार पकड़े गए थे देशद्रोह का मुकदमा चल रहा है ऐसे घृणित
00:59:58:00 ऐसे घृणित लोगों के ऊपर मैं विश्वास कैसे कर लूं कि मैं उनके चैनल पर जाऊंगा तब वो मुझे बोलने का बराबरी का मौका देंगे अगर तेरे लोगों को नहीं है भरोसा तो ना भरे ना फॉर्म मैं फॉर्म भरवाता हूं उसको इस बात की तकलीफ है तो भाई अपने लोगों को कहना कि मत भरो फॉर्म मत जाओ। यह तुम्हारी ड्यूटी है। फिर उनको मना करो। मेरी नजरों में तू ऐसा व्यक्ति नहीं है जिसके यहां पर जाया जा सके।
⬜ Not used yet · 01:00:23:06 – 01:00:40:07 (0:17)
01:00:23:06 अगर तेरे ये मैंने कमाया है कि तेरे लोग मेरे आ सकते हैं। तू कमा ले कि शिवश नरेंद्र द्विवेदी तेरे यहां आ जाए। और जिस समय ऐसे न्यूज़ पर पिछले दो साल पहले डेढ़ दो साल पहले इन लोगों ने मेरे ऊपर वीडियो बनाया था। उस समय की बात ये थी कि इनके चैनल पर मैं जा नहीं सकता था। मगर उसके बाद तो
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01:00:40:07 इतनी सारी चीजें हो रही। इतने फ्रॉड टाइप के चीजें तुम्हारी खुलती परते जा रही हैं। ना तुम्हारा मुनि धर्म धर्म ट्रस्ट सच्चा है। तुम कहते हो कि बाबा मेरे उड़ के करंट के तारों से बचा लेते। युवराज सिंह पीटा जाता है। घर में ही पीटा जाता है। फिर तुम अफवाएं फैलाते हो कि उनके खिलाफ एफआईआर हो गई। वो लोग नंगे थाने में बंद है कच्छा पहन करके। पता चलता है कि वो तो छूट गए। अरे कितने झूठ बोलते हो तुम पसेरी भर के। और फिर तुम यह सोचते हो कि तुम्हारी ये थोबड़े थूथुन से जिससे झूठ टपक रहा है उस पर कोई व्यक्ति विश्वास कर ले। तो अपने आप को पहले ऐसा बना तो सही अपनी औकात अपनी योग्यता ऐसी प्रस्तुत कर जिससे कि शिवश नारायण द्विवेदी तेरे चैनल पर आ सके और वरना 100 की सीधी एक बात है जिसके हो जिसके है दम तो बीच में आके बात कर ले ना तेरा ना मेरा मैं तो नहीं कह रहा तू मेरे ऊपर भरोसा कर तू क्यों कह रहा है मैं तेरे ऊपर भरोसा कर लूं भाई तेरे लोगों ने मेरे ऊपर भरोसा किया है मेरी गलती थोड़ी ना है और भी कर रहे हैं करेंगे आगे हो सकता है मेरी साइड का कोई तेरे ऊपर मुझे नहीं है तेरे ऊपर भरोसा मैं निर्णय करूंगा कि मैं किसके यहां जा सकता हूं किसके यहां नहीं जा सकता हूं नहीं तो बीच के चैनल पे तेरी मां ने तुझे निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया तो आजा हां तेरे जेल कट्टू के द्वारा खीर के
01:01:55:08 माध्यम से मल के द्वार से बहकर आए दूध के माध्यम से जो चीजें तुझे प्राप्त हुई है जो इसमें तू अश्लील बातें बोलता है अश्लील गालियां बकता है वो सब बातें मैं तुझे रिपीट नहीं करूंगा
⬜ Not used yet · 01:02:09:13 – 01:03:56:04 (1:47)
01:02:09:13 महाभारत का सिद्धांत है। यह सब जो बोलता है गाली गलौज इत्यादि वह व्यक्ति खुद ही वह जो गाली इत्यादि और मेरा जो मौन है इन सब चीजों पे वही तुझे सत्यानाश तुझे भस्म कर देगा। मुझे कोई दिक्कत नहीं। मुझे मेरी लड़ाई है वैचारिक क्रांति की। तू तुझ जैसे कीड़े मकोड़े तो कहां डले फिरेंगे? अभी देख एक जगह पुतला जला है। पूरे भारत में पुतले जलेंगे तेरे। उन सब का कारण होगा शिवश नारायण द्विवेदी। लिख ले लिख ले जहां पे लिखना है। पूरे भारत में आग लगेगी रामपाल के पुतलों में। और ऐसे ही गजब बेइज्जतियां होंगी। गजब बेेज्जती गजब बेेज्जती करते रहना। पोस्टर चिपकेंगे तेरे जैसे लोगों के घर के बाहर यह व्यक्ति दुर्गा माता के बलात्कार का समर्थक है। क्योंकि यह उसी रामपाल का समर्थक है जो रामपाल फूहड़ रामपाल पाखंडी रामपाल जेल कट्टू रामपाल दुर्गा माता के बलात्कार की का भ्रामक निराधार दुष्प्रचार करता है। समझ में आया खोपड़ी? ब्रह्मा विष्णु महेश के पिता कौन है? पिता कौन है? यह तुम नहीं बता पाए। अरे कोई है ही नहीं उनका पिता। कोई नहीं है। ब्रह्मा विष्णु महेश का पिता। परम सत्य जो है परम तत्व वही स्वयं ब्रह्मा विष्णु महेश के रूप में उत्पन्न होता है। और लीला भेद से कभी वो माता के द्वारा उत्पन्न हो रहे
01:03:24:14 हैं। कभी ब्रह्मा जी के द्वारा सृष्टि बनती है। कल्प भेद से एक ही कल्प नहीं है। तुम्हारे यहां तो इतने क्वेश्चंस हो जाएंगे ना कल्प नहीं मानोगे तो। काल मर के फिर बन रहा है। ये क्या है? काल जब मरा तो आत्माएं मुक्त हो जानी चाहिए ना। काल नहीं तो आत्माओं को पकड़ के रखा है। काल तो मरता है। पता नहीं कितने 70 बार उनके मरने के बाद काल मरता है एक बार। और तुमने माना भी है कि काल खुद कह रहा है कि मेरा मरण है। गीता के अनुसार मानते हो। मूर्ख कहीं के
✅ This part is already used · 01:03:56:04 – 01:05:10:12 (1:14)
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01:03:56:04 जिस दिन बात होगी थूथनी उतनी सब निकल जाएगी। अपने लोगों को बेवकूफ बनाते रहो। बंद कमरे में फोटोग्राफी करके बीच बीच के स्थान में आने में पकी ढीली हो गई ना नपुंसकता का प्रमाण दे दिया वहां पर मैंने कैसे बात की भाई फैक्ट भाई अभिषेक पे क्यों आएंगे बीच के चैनल पे आओ क्यों हवा निकल गई ये हवा निकल गई वाली बात क्यों आई जब सभ्रांत तरीके से चर्चा हो चर्चा कब हो सकती है जब दोनों लोग सभ्य रहे सीधी बात अगर तुम सभ्य नहीं रहोगे तो चर्चा नहीं लड़ाई होगी तो लड़ाई करनी तो लड़ाई तो हो ही रही है पुतले जल ही रहे जहांजहां जलेंगे वहां पर कहीं पे आ जाना देख लेंगे किस में कितना है दम उठा के पटक नहीं दिया ना चार पांच बार तुझ जैसे को दो ले आना तू एक नहीं दो आना अपने जैसे बन रहा है ना तू बहुत चौधरी दो ले आना जहां पुतला जला रहा होगा वहां और तुझे पटक दूंगा उठा के चार बार पटकूंगा गिन करके गिन लियो और ये सब बातें मेरी जो है साफ सुथरी होती है। इसमें मुझे गाली गलौज मिलाने की जरूरत नहीं है। मैं तेरे जैसों की पट गीली करने के लिए इतना ही काफी होता है। उठा उठा के पटकूंगा हमारी दुर्गा मां को गाली दी है ना तुम लोगों ने आ जाना पुतला जलाऊंगा और कह के जलाऊंगा आ जाना रोकने
⬜ Not used yet · 01:05:10:12 – 01:08:54:24 (3:44)
01:05:10:12 समझा पुतला जलेगा पूरे भारत में पुतला जलेगा एक एक सुन लो और जो जो इसके समर्थक हैं जहां जहां पर भी हैं उन सबकी भी आली रे आली आली रे आली अ तुजी बारी आली समझा सब समझ लो रामपाल का नहीं रामपालियों को पकड़ो तुम्हारे घर के आसपास जहां भी रामपाली रह रहा है पोस्टर चिपकाओ वहां उसकी हकीकत सबको बताओ पुलिस प्रशासन जनरल स्टोर हर व्यक्ति जाने उसको वो कौन है अपने आप उनकी बुद्धि ठिकाने आती जाएगी जितने इसके सपोर्टर्स घूम रहे हैं वीडियो बना रहे हैं अभी जैसे उसका बहिष्कार हुआ है ना तुम्हारे युवराज का सतलोकी युवराज [हंसी] कूटा गया घर में समझे बाबा पहुंच नहीं पाए बचाने के लिए तो खैर पूरे भारत में विरोध होगा अभी देखते जाओ और कह रहा है कि भाई वो भाग गया ये है वो है अबे मैं भागा मैं तो तुझसे खुला निमंत्रण दे दिया तो कि भाई बीच की जगह पे आजा तू ना तेरा ना मेरा ना मुझे तुझ पर विश्वास है ना तुझे मुझ पर विश्वास है जो
01:06:25:15 भगत तेरे आए थे उन्हें मुझ पर विश्वास था और वो ना आते तो मैं उनसे थोड़ी ना कहता नहीं नहीं तू बीच की जगह पे आ वो तो मेरे लिए मायने नहीं रखते थे तू मायने रखता है थोड़ा बहुत इसलिए मायने रखता है क्योंकि भैया तू जुड़ा हुआ है वहां पे सीधे ये तेरे भगत जो आते थे उनके मत्थे पे लिखा भी नहीं रहता है ना कि वो कहां से जुड़े हुए हैं तू तो रामपाल से जुड़ा भी हुआ है दिखता है इसलिए मैं तेरे लिए इतना सोचा कि चल इसके लिए बीच के चैनल पर चले जाएंगे इसके मुंह पर टेप लगाने के लिए समझ में आया वो मुझसे कहते हैं ना कि बीच के चैनल पे आ जाओ तो उनके लिए तो मैं बीच के चैनल पे अभी ना जाओ जाऊं। यह तो मेरा बड़प्पन है जो मैंने उनको अवसर दिया और आगे भी दूंगा जिससे उनके बुद्धि का शोधन हो सके। उनको देख के औरों का शोधन हो सके। समझ में आया? और या तो तू अपने आप को भी उन्हीं छुआरों जैसा समझता है तो बात अलग है कि भाई मेरे मेरे साथ भी वैसा ही व्यवहार करना जैसा उनके साथ किया। तो इसका मतलब तू अपने आप को उनके जैसा ही समझता है। वो सूखे सूखे चेहरे वाले आते हैं। हालांकि बुद्धि के स्तर पर तो तुझ में उनमें कोई अंतर नहीं है। हां जो व्यवहारिक भौतिकता है तेरी रामपाल के साथ ज्यादा है। इसलिए मैंने तुझे ये प्रिविलेज दिया कि भाई मैं तेरे लिए बीच के चैनल पे आ जाऊंगा। नहीं तो वास्तविकता यही थी कि तेरे साथ भी वही व्यवहार होना चाहिए कि आना है मेरे चैनल पे आ वरना मत आओ। और बना फन्नेखा घूम
01:07:40:19 रहा है। ठीक है? तो ये सारी बातें थी। बाकी और दो रिकॉर्डिंग अब एक रिकॉर्डिंग आपने सुन ली है कि जैसे किसी भगत ने इसको जब फोन किया होगा और अपनी तकलीफ बताई होगी वो मेरे पास वायरल होते होते आई और उसमें तकलीफ बताई होगी कि भाई यहां पर सुभाष द्विवेदी ने हमारा जीना दुश्ववार कर रखा है तो फोन कट करके भाग गए ये है तुम्हारे गुरु भाई ये करेंगे तुम्हारी रक्षा अब भी समय है जितने सनातनी है और ये भटक गए हैं इस पर विचार करो और इस पर आहान कॉल धर्मा पे YouTube उस पर श डला हुआ है। व्यक्ति रो रहा है। कह रहा है कि भाई मैं चैन से नहीं रह पा रहा हूं। कुछ उपाय बताओ। वो यह पूछता है किताबें कहां छपती है। फोन काट के भाग गए। फोन काट करके भाग गए। अब देखो यह एक व्यक्ति है। यह कह रहा है तुमको कोई जानता भी नहीं है। भाई अरे तू मुझको यह आकर के बता रहा है। इससे ही सिद्ध हो गया कि तू मुझे जानता है। और तू तेरा नाम ही समझ ले। मोबाइल कंपनी वाला है। तेरी आइडेंटिटी क्या है? कुछ है सीधी बात है ना? जिसमें है दम तो फक्त बाजीराम सिंघम। समझ गए?
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01:08:54:24 तो लाइफ में कुछ भी करने का जयकांत सिगरे के ईगो को हर्ट नहीं करने का। अपना उसी बिल में घुसे रहो। अपना वो वीडियो वगैरह बनाते रहो। ये
⬜ Not used yet · 01:09:03:15 – 01:16:33:00 (7:29)
01:09:03:15 कच्चा पापड़ पक्का पापड़ कच्चा पापड़ पक्का पापड़ दोनों एक दूसरे से करते रहो। मीठे हो जाओ करतेकरते एक दूसरे से। वह तो सिद्ध कर ही दिया मैंने तुम्हारी किताबों से तुम्हारी थ्योरी से कि तुम सब रामपाल की पत्नी हो रामपाल कबीर की पत्नी है और फिर पत्नी भी तब बनते हो जब वो स्त्री इंद्री जो है तुम्हारे चिपकाई जाती है फेविकॉल फेविक्विक से तब तुम स्त्री वो बनते हो पत्नी नाखूनों से ठीक है तो ये सारी बातें हैं राघव दास के द्वारा फैलाई जा रही भ्रांति के लिए और आप सब लोग जितने भी सनातनी हैं अपने अपने यहां पर अगर अगर आपके आसपास कोई रामपाली रह रहा है तो उस रामपाली के बारे में लोगों को बताइए। हमें किसी से कोई झगड़ा नहीं करना है। किसी से कोई मारपीट, गाली गलौज कुछ नहीं। केवल उसके बारे में वहां के लोगों को बताना शुरू करिए। अपने आप वो व्यक्ति सुधर जाएगा। रामपाल को आप ऐसे ही मार देंगे। रामपाल का जो बुरा तंत्र है जो जो उसने वैचारिकता फैला रखी है, ऐसे ही वो नष्ट हो जाएगा। उसको शारीरिक रूप से मारने की कोई आवश्यकता नहीं है कभी भी। आप अपनी लड़ाईयां लड़िए सैद्धांतिक लड़ाईयां वैचारिक लड़ाई उससे जीतिए ज्ञान की लड़ाई
01:10:18:24 लड़िए ये लोग कहते हैं ज्ञान का जवाब ज्ञान से दो अबे कहां दे दे तेरा गुरु है क्या कहीं दरबार लगा रहा हो अपने बिल से बाहर निकल कर के कि भैया प्रश्न पूछो कहां दे दे ज्ञान का जवाब ज्ञान से नंबर जारी किया उसने कोई अपना कि पूछो प्रश्न ज्ञान का जवाब ज्ञान से दे दे अपने द्वारा खरीदे हुए चिरपोटन प्रेस रिपोर्टर को खड़े कर लेंगे कपड़े कपड़े कपड़े की दुकान पर कपड़ा बेचता हुआ व्यापारी जैसा बाबा आ जाएगा। आइए क्या दिखाएं आपको? सिल्क दिखाएं कि बनारसी दिखाएं। कौन सा दिखाएं? कांजीवरम दिखाएं। ये सब तो चला करता है तुम्हारे यहां। और ज्ञान का जवाब ज्ञान से दे दें। कहां पे दे दे भाई? जब तुम उपलब्ध ही नहीं हो और ज्ञान का जवाब खूब ज्ञान से दे दिया गया है। और तुम्हारे बाबा को मालूम है ज्ञान का जवाब ज्ञान से मिल जाएगा। इसीलिए बाबा अन अवेलेबल है। समझो अनवेलेबल और तुम्हारे लोग भी जितने भी शीर्षिक हैं जो बाबा से जुड़े हुए हैं वो भी इसी तरीके से अनवेलेबल है पब्लिक के लिए क्योंकि ज्ञान का जवाब ज्ञान से उन्हें मालूम है मुंह तोड़ दे दिया मुंह तोड़ जवाब दे दिया जाएगा। इसीलिए अनवेलेबल है और इसीलिए इस तरह से क्रांति लानी पड़ती है। नहीं तो वो समोसे वाले के यहां पर वोट टांगा गया है और अभी और भी लखनऊ में और पूरे भारत में होने वाले हैं। कहीं पर आ जाओ ज्ञान से ज्ञान जवाब
01:11:34:02 दे दो वहां पर जहां पोस्टर लग रहा हो व पहुंचो और जवाब दे दो। मैं देता हूं जवाब। यहां यह लिखा है। यहां लिखा है। देखो अभी दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। समझ में आया? तो राघव दास की यह बात है। वह जो यह कह रहा है कि भाई वह मेरे चैनल पर नहीं आएगा तो मुझे तेरे पर विश्वास नहीं है। तेरे भगत लोग मेरे चैनल पर आए तो उनसे पूछ तूने शिवश पर विश्वास क्यों किया? ठीक है। और फिर भी अगर नपुंसकता ना आई हो पूरी तरीके से थोड़ा बहुत पुरुषत्व शेष हो तेरे पास और बचपन में माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया हो। यह सब बातें तो तेरे को बोलना भी नहीं आएंगी। मूर्ख व्यक्ति अनपढ़ गवार अशिक्षित तेरे बाबा ने ही लिख दिया है तुम लोगों को गरिमा गीता की पढ़ हमारी किताबें दिखाता घूमता है ना यहां ये लिखा है वहां वो लिखा है तेरी किताबों में लिखा है तू गवार है तू पिछड़ा हुआ है पिछड़ा हुआ मतलब निम्न निम्न को अगर दूसरी तरीके से कहेंगे तो नीच ये सब तेरे बाबा ने लिखा है है ना पढ़ाई के मामले में नीच ज्ञान के मामले में नीच ये सब तुमने तुम्हारे बाबा ने गरिमा गीता में लिखा हुआ है तेरे बारे में तो जान अपने आप को अपने बाबा की नजरों
01:12:49:03 से जान मैं नहीं जानवा रहा हूं। तेरे बाबा की नजरों से जान ले कि तू कौन है और दम हो माताजी ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया हो तो बीच में आ बीच बीच मैदान में आ ना तेरी जगह ना मेरी जगह बीच मैदान ठीक है वैसे तू आएगा नहीं कायर है बहुत पीढ़ी दर पीढ़ी वो एक कुछ आई होगी नपुंसकता या फिर वो जो विशेष प्रकार की खीर चलती है तुम्हारे यहां पर उससे आई होगी चलिए जय श्री राम कुछ लोग कह रहे हैं साइंस जर्नी से डिबेट करो। साइंस जर्नी कौन है? यह बता दो मुझे। क्या नाम है उसका? क्या परिचय है उसका? अगर पता हो तो भेज देना। फोन नंबर वगैरह मेरा फोन नंबर है। सार्वजनिक है उसको दे सकते हो जिससे भी आपको हमारी चर्चा करानी है। और यह जो अर्पित द्विवेदी से करने को कह रहे हैं वो भी। ठीक है। बाकी रामपाल का नहीं रामपालियों को पकड़ो। ठीक है? और जहां पर भी जो लोग भी यह रामपाल के समर्थक रह रहे हैं उनको मैं बता देता हूं। अभी आने वाले टाइम में उत्तराखंड का मामला सामने आया। हिमाचल का मामला सामने आया है। अ हिमाचल का जहां पे नैनी माता का मंदिर है। है
01:14:04:04 ना? जिला लगता है बिलासपुर। वहां पर भी एक प्रदर्शन होने वाला है। एक फैमिली है जो एक परिवार है जो अपने बेटे पर दबाव डाल रहा है। वह विवाह ऐसी कन्या से करना चाहता है बेटा जो कन्या सनातन सिद्धांतों को मानती रामपाल को नहीं मानती फुअर को तो उस पर दबाव डाला जा रहा है कि नहीं नहीं अगर यह कन्या जो है रामपाल को मानेगी तो ही जो है इसका विवाह जो है हमारे बेटे से हम होने देंगे। तो इस तरह का वहां पर एक तरीके से दहेज मांगा जा रहा है। दहेज रूप दहेज में क्या मांगा जा रहा है कि रामपाल को मानो बाबा की खीर खाओ है ना यह सब मांगा जा रहा है। नाम दान दीक्षा लो तो वहां पर प्रदर्शन की तैयारी है निकट में और दिल्ली में है पटना वाराणसी और और जहां पर होगी तो आपको बताया जाएगा। आप लोग भी अगर कर रहे हैं स्वतंत्र रूप से आप करें और हमको अपनी वो जो वीडियोस फोटो हैं वो दीजिए अपने चैनल पर डालेंगे। अगर आपके आसपास व्यक्ति नहीं रहता है तो कोई नहीं विरोध करिए कैसे पुतला जला करके और अगर रहता है तो उसके आसपास अगर उसके घर पर तो हम चिपका चिपकाने जाएंगे नहीं उसके आसपास के पेड़ पे उसके आसपास की दीवारों पे उसकी प्रॉपर्टी पर ना चिपका के उसके आसपास जो है प्रचार करिए कि वो कौन है
01:15:19:08 बताइए लोगों अपने आप उसकी शर्म शर्म से आंखें नीची होंगी ठीक है चलिए जय श्री राम सभी को और किसी भी प्रकार का मतभेद है यदि वैचारिक तो वीडियो के अंत में दिया गया जो नंबर है WhatsApp उस पर WhatsApp करिए और चर्चा सुनिश्चित करिए और चर्चा के माध्यम से आपको यह अवसर दिया जाएगा कि आप अपनी बात को रख सके। देखिए वो व्यक्ति कब गया जब वो ये सब बातें करने लगा कि आपको तो फलाना समझा सकता है फलाना समझा सकता है मतलब वो नहीं समझा सकता उसने हैंड्स अप कर दिया विड्र कर दिया उसने अब उसके बाद व्यर्थ में उसको रखने की कोई आवश्यकता नहीं है ना ठीक है अब होता क्या है कि कुछ अनाप शनाप बके कुछ गरमा गर्मी हो मेरे पास इतना समय नहीं है कि मैं एक एक व्यक्ति से केस लडू ये करूं वो करो हालांकि वो तो जो आए थे वो ना बकते मगर एक बात कह रहा हूं इसलिए ऐसा कुछ वो स्थिति कि मुझे कुछ कारवाई करना करने के लिए विवश होना पड़े उससे पहले ही मैं हटा देता हूं। जय श्री राम सभी को।
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ब्रह्माकुमारी के अनुसार रामायण काल्पनिक है फिर क्यों जाते हैं राम मंदिर? Discussion with bk Sanjay
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