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00:00:02:02 तो जय श्री राम सभी को। जैसा कि आप सबको पता है हम विभिन्न जो धार्मिक विचारधाराएं हैं उनको आपके समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करते हैं। और आज हम यहां पर आध्यात्मिक विश्वविद्यालय ये केंद्र है यहां पर दिल्ली में पालम में और ये ऐसा बताया जा रहा है कि मतलब ब्रह्म जो ब्रह्मा कुमारीज हैं उन्हीं से ही स्फुटित है इनका भी। तो इनके साथ थोड़ा सा आज हम इसको देखेंगे कि यहां क्या बताया जा रहा है। सनातन धर्म के मतलब हिसाब से सनातन धर्म का आलंबन लेते हुए क्या शिक्षा दी जा रही है? तो थोड़ा सा बताइए हमें क्या है मामला आपका? देखो जी पहले सबसे पहले मेरा ये संदेश है। जी अभी जो हमारा ये जो चल रहा है जी। इसमें सबसे पहले यही संदेश है कि अभी ये जो है सृष्टि का लास्ट टाइम चल रहा है और इस समय जो है परमपिता परमात्मा शिव इस सृष्टि पे आए हुए हैं आकर नई दुनिया का स्थापना कर रहे हैं और पुरानी दुनिया का विनाश होने वाला है तो वो है अभी हमारे बीच में कहीं क्या चीज है परमात्मा शिव ये कार्य चल रहा है इसके लिए फिर कोर्स करना पड़ेगा ना ये चीज जो अगर इसको नहीं वो सृष्टि में आए हुए हैं परमात्मा तो वो मतलब कहीं पे हैं आसपास यही

00:01:17:06 चीज मैं आपको बताऊंगा जी जी जी जी कि जो परमपिता परमात्मा 1936 से ये कार्य चल रहा है। अच्छा अच्छा तो यह जो दादा लेखराज आपने सुना ही होगा हां हां इनके दादा लेखराज को जब साक्षात्कार हुए थे तो साक्षात्कार होने से उनको ये पता लगा कि अभी उनको तीन चार साक्षात्कार हुए एक तो पुरानी दुनिया जाने वाली है नई दुनिया आने वाली है साक्षात्कार अच्छा जी जी जी हां हां और उसके बाद जब साक्षात्कारों का रहस्य उनको नहीं मिला तो उसके लिए फिर वो अपना उसका रहस्य जानने के लिए वो अपने जहां उनका जो स्थान था सिंध हैदराबाद वहां से फिर वो इधर बनारस गई और अपने गुरु किए थे उनसे भी पूछा मगर उसका कहीं पर उनको वो मिला नहीं उसका आंसर 1936 में जो जन्मे थे अच्छा क्या नाम था उनका नहीं नहीं जन्मे नहीं थे 1936 में उनको साक्ष्यतार हुआ दादा लेखराज दादा लेखराज उनके अंदर से मुरलियां चली अच्छा अच्छा अच्छा ठीक जी जी तो मुरलियां जो चली ये चली उनके अंदर 1947 1947 क्योंकि उस समय 60 साल की अवस्था थी। हां तो कहते हैं कि जब तक 60 साल मतलब एक बुजुर्ग अवस्था नहीं होती है तब तक

00:02:32:14 शिव जो है प्रवेश नहीं करते हैं तब तो उनको साक्षात्कार उस समय की बात है। मगर यहां पे उनके अंदर शिव ने प्रवेश किया। जी तो प्रवेश किया तो फिर ये मूल्यां चली। जो मूल्य अभी ब्रह्मा कुमारी में चलती है तो उनहीं मूल्यों के अनुसार जो भी हमारा यह चल रहा है उसी के अनुसार सारे ये तो कार्य तो मतलब कौन है जो मतलब इसमें आपके जो वहां से मुरलियों को लेकर के और थोड़ा सा मुझे लगता है ब्रह्मा कुमारी से थोड़ा सा डिफरेंट भी है। जी तो कौन है जो थोड़ा सा डिफरेंट आपको बताते हैं? वहां से जो मूलियां चली दादा लेखराज के द्वारा वो मूलियां का सारा मनन चिंतन मंथन हुआ। हां। उसके बाद फिर उसका विस्तार हुआ। किसने किया? मतलब मनन चिंतन विस्तार किसने किया? मनन चिंतन मंथन हमारे जो माध्यात्मिक शिक्षा केंद्र के जो हमारे जो शंकर पारधारी हैं हां हां शंकर पारधारी हां जैसे ब्रह्मा विष्णु शंकर हां हां तो इसीलिए मैं कह रहा हूं ना इसके लिए नहीं नहीं कुछ नहीं कुछ आप सतई लेवल पे तो मैं तो एक मोटा मोटा बता हां मोटा मोटा ही चाहिए तो वो उनका कुछ नाम है जो व्यक्ति हैं आध्यात्मिक विश्वविद्यालय में जो वीरेंद्र देव दीक्षित थे अभी उन्होंने भी शरीर

00:03:47:18 ही छोड़ दिया अच्छा अच्छा हां 2012 तो अभी कौन मतलब इसको कौन ऑपरेट कर रहे हैं ऑपरेट में यही कन्याएं माताएं इसको आगे बढ़ा रही है नहीं कोई एक होता है ना कैप्टन होता है जो नहीं ऐसा कैप्टन तो कोई है नहीं वही कन्याएं माताएं ही इसको अभी आगे चला रही है कैप्टन नहीं उनमें भी कन्याओं माताओं में भी तो कोई कैप्टन होगा ना कि जो जिसकी बात सब मानते हो नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं है क्योंकि ये जो है ना गृहस्ती है तो इसमें क्या होता है कि गृहस्ती में एक मुखिया तो होता है ना कि जिसकी बात अंतिम हो ये होगा ये नहीं होगा। नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं बनाया। मुखिया हमने कोई नहीं बनाया। जिसका जो मन आए वो करें। नहीं नहीं करें नहीं। मूल्य के हिसाब से ही चलते हैं हम लोग। मगर मुखिया कोई एक ऐसा नियमित कुछ नहीं है। अच्छा जी जी। अच्छा जैसे ये जो आपने बताया परमात्मा जो शिव हैं। ये वही वाले शिव हैं जो क्या कहते निराकार पार्वती माता के जो पति हैं वो नहीं है ये पार्वती माता निराकार है निराकार मतलब इसमें देखो दो चीजें हैं एक शिव शंकर भोलेनाथ बोलते हैं ना जब हम शिव शंकर भोलेनाथ बोलते हैं तो प्रवृत्ति मार्ग हो जाता है तो उसमें शंकर पार्वती वो पार्वती के पति होगी जो शंकर को बोलते हैं तो वो वही निराकार वो बनते हैं या कोई और निराकार जैसे निराकार मतलब सोल

00:05:02:19 जैसे सोल होगी हमारी अच्छा वो होगी सोल जब वो सृष्टि पे आते हैं तो वो साकार कार तन में आते हैं तो उनको चाहिए पांच तत्वों का पुतला। नहीं वो तो एक अलग बात हो गई। वो सृष्टि में आते हैं वो पांच तन का पुतला जो अभी जैसे आपके बताया जाता है कि दादा लेखराज के यहां है। हां जैसे ये आत्मा और परमात्मा नहीं मैं वो पूछ रहा हूं कि वो जो शिव जो पार्वती माता के जो पति हैं वही शिव को आप परमात्मा कह रहे हैं कि और किसी कोई और शिव है उनसे अलग है? वो शंकर को बोलते हैं। शंकर पार्वती जब वो साकार में आएंगे तो वो वही साकार बनते हैं ना। हां जब साकार बनेंगे मतलब मतलब शिव भगवान ही साकार पार्वती माता के साथ जो है शंकर हो जाते हैं जी जी तो अलग नहीं है दोनों शिव शंकर जब हम दोनों शरीर और आत्मा को मिलाएंगे तब वो प्रवृत्ति में होंगे अगर शिव बोलेंगे तो निर्वती मतलब अकेला उनका रूप का नाम अलग है नाम अलग है कि अगर जैसे शिवलिंग के द्वारा जो है निराकार का ध्यान और उनका ही अवतार एक तरीके से शंकर का वो दिखाते हैं शंकर की मूर्तियां दिखाते हैं वो साकार हो गया तो उसको पुरुषार्थी स्टेज पुरुषार्थी मतलब जब उन्होंने इस इस अच्छा अब ये बताइए थोड़ा सा कि इसमें हमारे गीता वेद पुराण

00:06:17:25 इत्यादि का क्या महत्व है मतलब क्योंकि हम यहां खड़े इसीलिए आप आए हो आप गीता के लिए आए हो ना तो जो वो मुरलियां निकली हम जो अभी हम मुरलियां कहते हैं अभी इस ज्ञान में जी वही द्वापर युग से उसको वेद बोलते हैं। अच्छा द्वापर कलयुग में वो वेद जिसको आज वेद बोलते हैं ना हम भक्ति मार्ग में अभी हम जैसे हम अपने आप को ज्ञान मार्ग बोलते हैं जो ये ज्ञान में चलते हैं वो ज्ञान मार्ग हो गया। भक्ति मार्ग में उसको बोलते हैं वेद। वेद और ज्ञान मार्ग में ये होगी मूल्यां। हम्म। तो ये वेद जो है जैसे वेद वो किसी के समझ में नहीं आते क्योंकि बहुत टफ है पढ़ने में भी और उनका उसको वेद को मतलब बहुत कम लोग वो करते हैं और गीता जो है सहज है मतलब सरल है उसको हर कोई पढ़ भी लेता है समझ भी जाता है तो वेद जो हो गया वो मुरलियां होगी और उसके बाद जब उसका मनन चिंतन मंथन किसने किया वही जो मैंने बोला ना शंकर पाठधारी यानी राम वाली आत्मा बिरंद दीक्षित उन्होंने जब इसका मन मन चिंतन मंथन किया विस्तार किया तो वो बन गई गीता गीता ज्ञान नहीं तो गीता तो भगवान श्री कृष्ण वाली है ना जो उन्होंने बोली हां तो वो भगवान श्री कृष्ण वाली ने

00:07:32:26 बोली वो तो ठीक है मगर मतलब आपकी गीता अलग है नहीं नहीं गीता तो सब वही है मगर यही चीज है ना अब इसको मैं अगर बताऊंगा तो बहुत विस्तार में जाना पड़ेगा क्योंकि नहीं नहीं इसमें ये बात जैसे बोलते हैं ना अचुतम केशवम राम नारायणं कृष्ण दामोदरम तो इसमें सभी जितने भी देवी देवता एक ही में आ जाते तो यहां पर भी हम सारा जो एक पर्सनालिटी है हम उसी को नहीं नहीं जैसे वीरेंद्र देव दीक्षित आपने नाम लिया तो उन्होंने एक मनन चिंतन करके अपनी एक एक तरीके से एक ग्रंथ तैयार किया मुरलियों को मनन चिंतन मुरली से नॉट फ्रॉम गीता ना ना तो फिर गीता का महत्व यहां क्या है फिर तो वेद का भी कोई महत्व नहीं क्योंकि मुरली उन्होंने मुरली से किया है वेद का मतलब ये हुआ जब तक हम उसको समझ ना पाए ठीक है नहीं मुरलियां वेद हो गई ठीक है जो अभी मुरलियां है वो वेद हो मगर उसका फिर जब मतलब आप यह कह रहे हो कि जो जो हमारा जो हमारे वेद है ऋग्वेद यजुर्वेद सामवेद अथर्ववेद यही वेद जो है मुरली के रूप में आपको प्राप्त है। हां जी हां जी फॉर एग्जांपल एक आध कोई मुरली एक कोई मुरली आप बताइए जो वेद का मंत्र हो जैसे मुरलियां अभी हम जो हम नहीं जैसे कोई एक एक मुरली जो वेद का मंत्र हो जिस जो मुरली है उसका संबंध हो वेद के मंत्र से देखो इतना तो

00:08:48:04 हमने वेद तो मैंने पढ़े नहीं है मैंने उतने वेद पढ़े नहीं नहीं जैसे हम हम जब ये कह रहे हैं ना लोगों को कि जो हमारी मुरलियां हैं वो वेद ही हैं। तो कोई एक मुरली कोई भी एक मुरली जो वेद के किसी एक मंत्र का अर्थ हो क्योंकि हम कह रहे हैं वेद कठिन है और मुरली आसान है। नहीं नहीं मुरली और वेद मैंने बोला एक ही है एक ही है। मगर उसका जब विस्तार हुआ मुरलियों को मुरली का विस्तार विस्तार हुआ। विस्तार मतलब जब उसका तो मुरली भी संस्कृत में आती है क्या? नहीं नहीं हिंदी में ही आती है। तो मुरली उसका अर्थ है ना वेद का वेद का अर्थ हो गया। एक का जैसे तो वही मैं कह रहा हूं कि एक कोई मुरली ऐसी जो वेद के किसी एक मंत्र का अर्थ हो। ऐसा कोई अब ऐसे तो मैं कुछ बता नहीं सकता। अच्छा वर्बल ही नहीं आ रहा। कोई बात नहीं। अब एक बात और आती है कि जैसे एक चीज आती है हमारे पास कि जो ये आपके पास जैसे आपने कहा वेद ही मुरली है। आपने उसमें वो नहीं किया रिसर्च कि वो वेद से मैच कर रही है कि नहीं कर रही। इसमें ये चीज आती है कि आपको जैसे मान लीजिए किसी ने रिसर्च कर भी लिया है जैसे कोई मंत्र बता दे देखो ये मंत्र ये वाली मुरली से मैच कर रहा है तो इसमें दिक्कत और गीता का भी कुछ ऐसा है जैसे आपने यहां पे हमें बताया कि गॉड इज नॉट ओमनी प्रेजेंट सर्वव्यापी परमात्मा सर्वव्यापी नहीं है। तो इसमें कई जगह भगवान को

00:10:03:13 भगवत गीता में और वेद में भी सर्वव्यापी कहा गया जैसे विष्णु कहा गया है। तो विष्णु का अर्थ होता है व्यापक। तो फिर हम यहां पर उसका एक दूसरा अर्थ नहीं निकाल रहे। मतलब ऐसा नहीं लग रहा आपको। देखो हमारा ये है कि नहीं नहीं मैं बस आपका आपका जो भी है मैं ये कह रहा हूं गीता का अगर हम अर्थ ले रहे हैं तो गीता में भगवान को कहा गया है कि सर्वव्यापी है और वेदों में भी कहा गया है। भरभर के पुराणों में भी कहा गया है। है ना? सर्वव्यापी मतलब ओमनी प्रेजेंट। हम कह रहे हैं कि हम कह रहे हैं कि नहीं है। तो हम किस मतलब शास्त्र के किस संदर्भ से ऐसा कह रहे हैं? उसमें शास्त्र है या मुरली है आपकी? हम मुरलियों के अनुसार जो हमें यानी कि मुरली कहीं-कहीं पर वेद के डिफर भी है। नहीं नहीं वेद के डिफर नहीं है। हम तो मुरली जो है वेद है। नहीं वेद कह रहा है कि भगवान सर्वव्यापी हैं। गीता भी कह रही है सर्वव्यापी है। हां। उसमें तो आप कह रहे हो कि नहीं है तो शास्त्र से डिफर हुआ ना थोड़ा सा डिफर हां डि हो गया विपरीत हो गया ना विपरीत ये हो गया है जैसे कोई भी चीज हम जब पहली पहली बार आती है उसमें सच्चाई होती है जैसे-जैसे उसका वो बढ़ता जाता है ना यानी कि एक तरीके

00:11:18:19 से शुरुआत में आप मैं ये मैं समझ गया मैं समझ गया कि उसमें मिलावट हो गई गीता में आपके अनुसार जो प्रेजेंट टाइम में जो गीता है उसमें मिलावट है मिलावट हो गई तो अब बात ये यह है कि जैसे अभी जो गीता है हम कह रहे हैं उसमें मिलावट है तो जो शुरू की गीता है क्या वो है हमारे पास शुरू की गीता का जो मतलब देखो श्लोक तो सेम है हम गीता के जो 700 श्लोक है ना तो विष्णु का अर्थ तो ओमनी प्रेजेंट ही है ना श्लोक जो है वो सेम है श्लोक में मिलावट नहीं हुई अर्थ में मिलावट हुई हां अर्थ का अनर्थ कर दिया तो अब बात ये है कि वो जो गीता है जिसका आप कह रहे हैं कि अर्थ बदल दिया है लोगों ने असली गीता है वो कहां है तो वही मैं कह रहा हूं हां जी हां

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00:11:58:21 जो गीता और वेद हैं वो हमारे पास तक कैसे आए? क्योंकि वो आज से 2 अरब वर्ष पूर्व या आपके अनुसार 5000 5000 साल 5000 वर्ष पूर्व सृष्टि है और 5000 साल में वो क्वेश्चन दूसरा है कि जो वेद हैं वो आज से 5000 साल पहले आए आपके अनुसार और हमारे अनुसार 2 अरब वर्ष हुआ है। ठीक है? तो जो 5000 वर्ष पूर्व जो वेद आते हैं प्रकट होते हैं जो भी है हम कह रहे हैं कि आज के समय में जो उसका अर्थ कर रहे हैं उसको अनर्थ कर दिया है गलत कर दिया है तो वो जो वेद के मंत्र हैं और वो जो वेद गीता के श्लोक हैं वो हमारे पास तक आपके पास तक कैसे आए हैं 5000 वर्ष से यहां तक कैसे आएगी

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00:12:40:21 हां ठीक है हमारे अनुसार जो 5000 का जो ड्रामा है मतलब जो सृष्टि है जिसमें चार उसके चार भाग हो गए। चार भाग का मतलब सतयुग 12 नहीं नहीं आप समझे। नहीं देखो फिर मैं बताऊं। नहीं नहीं वो थोड़ा क्या है कि 5000 वर्ष पूर्व कोई छपाई केंद्र था जहां से वो छपा फिर फिर दूसरी कंपनी ने छापा फिर उसके बाद दूसरी कैसे आए? सिस्टम क्या था? वो मैं पूछ रहा हूं। मैं वो अर्थवर्थ नहीं पूछ रहा। हां। वह जो श्लोक हैं, आप कह रहे हो गीता में 700 श्लोक है, वह शुद्ध है। वेद में जो 18,000 के लगभग श्लोक है, वह शुद्ध है। वह मंत्र है, वह शुद्ध हैं। तो, वह मंत्र कैसे आए? वो गीता के श्लोक कैसे आए? अच्छा। वहां से यहां तक प्रैक्टिकली क्या था? उनका साधन क्या था? क्योंकि छपाई की मशीन मेरे ख्याल से अभी बिल्कुल चालू हुई है। पहले तो थी नहीं। तो कैसे आए वो? कैसे आए? हां देखो जब हमारे ज्ञान के अनुसार जो यह अपना जो ज्ञान है जो ढाई हजार साल के बाद जब द्वापर युग शुरू हुआ ना उससे पहले ढाई हजार साल के पहले की कोई हिस्ट्री ज्योग्राफी नहीं है नहीं है अभी हमारे पास जैसे बोलते हैं आज से 2000 साल पहले क्राइस्ट आए ना 2000 साल पहले की तो बोलते हैं क्राइस्ट आया फिर उससे पहले की तो बुद्ध की है ना हां हां 2250 मतलब 2200

00:13:56:04 और जो है महाभारत की हिस्ट्री है हमारी हां मतलब जो भी है शंकराचार्य जी की वो हिस्ट्री मतलब टोटल 25ज़ साल का हिसाब है। नहीं 2500 साल से भी पहले का। अच्छा आप बात बताइए। आप अपनी मान्यता बताइए। हमारे हिसाब से 25ज़ साल से द्वापर युग शुरू हुआ। हमारे जो ज्ञान के हिसाब से ढाई हजार से पहले हां त्रेता युग था। उससे पहले सतयुग था। ठीक है? तो जो 25 हजार साल में जो द्वापर शुरू हुआ तो उस समय जो वेद है जैसे अभी आप कह रहे हो ना कैसे आए? तो वो जब इस संगम युग में जब भगवान आते हैं इस सृष्टि पे अभी जो मैं बोल रहा हूं अभी आए हुए हैं तो उस समय भी आज से 5000 साल पहले जो सेम टू सेम ये सृष्टि जब रिपीट होती है ना उस समय भी जब आए थे तो उन्होंने जो ज्ञान दिया उसको जिसने सुना सुना या समझा जैसे वो वेद जिसको बोलते हैं वेदव्यास वेदव्यास भी हम किसको बोलते हैं राम वाली आत्मा राम मतलब जो नहीं किसी एक व्यक्ति ने बोल दिया उसने पूरा ले लिया जैसे

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00:14:57:03 अभी मैंने वीरेंद्र देव दीक्षित जी का नाम लिया उन्होंने पूरा उसको तो वो कौन व्यक्ति था जिसने लिया वहां पे 5000 साल पहले वेदव्यास वेदव्यास जी फिर उनसे फिर उन फिर गद्दीियां चल जाती है ना फिर वो गद्दी कौन सी थी क्या नाम था इतना मेरे को नहीं आप समझे नहीं मैंने ये प्रश्न क्यों किया मैं इसको क्लियर करूं बात ये है कि हमको गीता वेद पुराण प्राप्त होते हैं परंपरा से गुरु शिष्य परंपरा चलती थी वो तो चलती है मुंडकोपनिषद में एक से ले चार तक बताया गया है वो तो हर चीज की परंपरा मुंडकोपनिषद में एक से ले चार तक यह बताया गया है कि मेरे ये गुरु थे, मेरे ये गुरु थे। ऐसे करके विद्या मुझ तक आई है। भगवत गीता में भी चार दो तीन 16 में परंपरा की बात कही है भगवान ने कि ज्ञान जो है परंपरा से प्राप्त हो रहा है। अच्छा वेद के जो मंत्र होते हैं ना उसका अर्थ करने के लिए हमको नॉर्मल डिक्शनरी नहीं चाहिए होती है। एक डिक्शनरी है निरुक्त नाम सुना है? नहीं मैंने उतना ग्रस्त है। मैं बता रहा हूं। निरुक्त जो है उसको निरुक्त को रचने वाले उसके रचनाकार हैं यासकाचार आचार्य यास तो वो भी उसमें कहते हैं कि श्रुति परंपरा से ही ज्ञान प्राप्त होता है। यानी कि हमारे पास जो वेद के मंत्र आ रहे हैं वो श्रुति परंपरा से आ रहे हैं। अगर परंपरा नहीं है तो वेद के मंत्र भी नहीं है। अगर परंपरा है तो वेद के मंत्र

00:16:12:07 हैं। गीता के मंत्र गीता के श्लोक हैं। तो कहने का तात्पर्य यह है कि जैसे मान लीजिए कि हमको परंपरा से अब वो परंपरा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मधवाचार्य इत्यादि के रूप में आज भी है आपको गीता का अर्थ बताने के लिए वेद का अर्थ बताने के लिए। अब दिक्कत क्या है कि अगर हम यह कह देते हैं कि उन्होंने अर्थ को बदल दिया है। ठीक है? तो हमें वेद के मंत्र किससे मिल रहे हैं? उन्हीं से मिल रहे हैं। गीता के श्लोक किससे मिल रहे हैं? उन्हीं से मिल रहे हैं। तो अगर हम यह कहते हैं कि उन्होंने अर्थ को बदल दिया है तो अगर हमें उन पर विश्वास नहीं है। है ना? उनके उन्होंने अर्थ को बदल दिया तो इसका मतलब हमें उन पर विश्वास नहीं है। तो फिर हम ये कैसे विश्वास करें कि ये जो वेद के मंत्र हैं ये वही मंत्र हैं जो भगवान ने दिए थे 5000 साल पहले। या तो विश्वास करना पड़ेगा तो पूरा करना पड़ेगा कि भैया परंपरा से गीता प्रेस तो हमारी कोई धर्म धर्माचार है नहीं। गीता प्रेस या फिर चौखंबा ये सब कोई हमारे धर्माचार्य नहीं है। हमारे जो धर्माचार्य होते हैं वो गुरु शिष्य परंपरा से मंत्रों को लेके आए हैं। अब आप उनको झूठा समझे या सच्चा समझे वो बात अलग है। मगर मंत्रों को तो वही लाए हैं। श्लोकों को वही लाए हैं। गीता उन्होंने ही आपको दी। तो अगर हम ये कह देंगे कि हमें इन पर भरोसा नहीं है। हम तो अपना अर्थ करेंगे।

00:17:27:20 हम अपना अर्थ करेंगे या या फिर हमारे पास कोई दिव्य एक मिनट या फिर या फिर हमारे पास कोई दिव्य शक्ति आ रही है हम उसका अर्थ मानेंगे और श्लोक लेंगे इनसे मंत्र लेंगे इनसे और अर्थ लेंगे इनसे तो अगर इस पे हमें भरोसा नहीं जिससे हम मंत्र ले रहे हैं या अर्थ ले रहे हैं तो उनके मंत्रों पर भी हमें भरोसा उसके अर्थ पर हमें अगर भरोसा नहीं है तो उनके मंत्रों पर भी हमारा भरोसा करना सिद्ध नहीं

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00:17:52:16 जैसे एक आदमी हमें झूठ बोल रहा है मान लीजिए मैंने आपको एक किताब दी ठीक है आपको यह विश्वा विश्वास है कि किताब जो है मेरे से पहले जिसने मुझे दी है। मान लीजिए कि श्याम नाम के व्यक्ति ने मुझे एक किताब दी। ठीक है? अब मैं कह रहा हूं आपको यह श्याम की किताब है। ठीक है? आप उसको कह रहे हो ये किताब तो सही है। मगर मैं कह रहा हूं कि इसमें श्याम ने कहा है कि घर जल्दी आ जाना। वो कह रहा है ये झूठ है। घर जल्दी आ जाना झूठ है। तो अगर मुझे आपको झूठ ही बोलना होगा तो मैं आपको पूरी किताब नहीं बदल दूंगा जो श्याम ने दी थी। कहने का अर्थ यह है कि अगर हम यह कहेंगे कि हम आज अर्थ को बदल दिया गया है तो ये सबसे बड़ी प्रॉब्लम आ जाएगी कि भाई वेद के मंत्रों पर विश्वास कैसे? गीता के श्लोकों पर विश्वास कैसे? और आप अपनी जो हम ये दावा कर रहे हैं हमारी कोई अलग से परंपरा है नहीं। उनकी परंपरा तो नारायण तक है। शंकराचार्य रामानुजाचार्य जी की परंपरा सृष्टि के प्रारंभ तक है। उनसे आप नाम पूछते जाइए, पन्ने पलटते जाइए। उनके गुरुओं के नाम आज 100 आज 100 मिलेंगे। आज 145वें शंकराचार्य की गद्दी पर पूज्यपाद जो बैठे हुए हैं भगवान जो शंकराचार्य वर्तमान के हैं पूरी पीठाधीश्वर वो 145वें शंकराचार्य हैं और अगर भगवान से उनको गिना जाए तो वो 155वें गुरु हैं उस परंपरा में सृष्टि के प्रारंभ से तो इसमें आपका क्या कहना है? देखो

00:19:07:27 इसमें हमारा यही कहना है कि हम जो हमें जो हमने जो यह ज्ञान लिया जो भी ये मूल्यों के द्वारा जो भी हमें ज्ञान मिला है उस ज्ञान के हिसाब से हमारा यही मानना है कि 5000 साल के बाद भगवान वो वो ठीक है 5000 साल से भी अगर माने तो यहां तक कौन आदमी आया ट्रांसफर किससे हुआ तो वही चीज आपने जैसे बताया ना या मान लीजिए 5000 की

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00:19:33:13 हिस्ट्री नहीं है आपने कहा ₹200 की है मैं तो वो वेद वेदों को तो मान रहा हूं मगर उसका जो अर्थ है ना शुरुआत आपका मानना सिद्ध नहीं होता ना जैसे मैंने कहा कि मैं जो है क्या कहते हैं ये ये आपने लिखा है आध्यात्मिक विश्वविद्यालय मैं आध्यात्मिक विश्वविद्यालय को तो मान रहा हूं आपने लिखा है अच्छा लिखा है मगर इसका मतलब है आध्यात्मिक विश्वविद्यालय का पागलखाना तो फिर सही बात होगी क्या

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00:19:56:28 ये या तो क्योंकि ये आपने लिखवाया तो मैं आपसे पूछूंगा ये पोस्टर आपने लगवाया तो मैं आपसे पूछूंगा कि आध्यात्मिक विश्वविद्यालय का क्या मतलब है आप बताओगे हम माता माता जी रहती हैं, बहनें रहती हैं जो आध्यात्मिक पढ़ाई करती हैं और करवाती हैं। है ना? मगर मैं कहूंगा नहीं इसका मतलब है पागलखाना और मैं आपका अर्थ क्यों मानूं? मैं इसको तो मान रहा हूं पर मैं इसका अर्थ नहीं मान रहा।

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00:20:16:00 तो ये थोड़ी सी दिक्कत आएगी। ये पोस्टर अगर आपने लगवाया है। ये पोस्टर अगर आपने हमें दिया है और इसके थ्रू हम इस लाइन को जान रहे हैं कि आध्यात्मिक विश्वविद्यालय तो हमें आपके अर्थ पर भी विश्वास करना होगा और नहीं करेंगे तो हमारा इस पोस्टर पर भी विश्वास सिद्ध नहीं होगा।

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00:20:30:28 तो वो तो हम यह कह रहे हैं कि जो भी वेद और गीता जो आ रखी है ना जो आज के हिसाब से जो चल रहा है उसका नहीं वो जो अर्थ दे रहे हैं ना वो वही परंपरा प्राप्त आचार्य है जो व्यास जी से डायरेक्ट कनेक्टेड है और व्यास जी वही है जो डायरेक्ट नारायण जी से कनेक्टेड है। हां, ठीक है। पर फिर भी देखो। यह विश्वास की बात है। नहीं नहीं देखो एक चीज़ ऐसा होता है। वह आपकी बात ठीक है। चलो आप ठीक है। मगर कोई भी चीज़ अगर जैसे यहां से अगर शुरू होगी ना कुछ ना कुछ थोड़ा बहुत उसमें चेंज तो हम अंदाजे को प्रमाण नहीं मान सकते ना। कुछ ना कुछ चेंजिंग तो होती है। जरूर अंदाजे को हम प्रमाण नहीं मान सकते। अंदाजा लगा करके कि चेंजिंग हुई होगी तो मैंने कहा आपने पोस्टर लगाया कुछ ना कुछ चेंजिंग हुई होगी। तो इन्होंने जो है पागलखाने को विश्वविद्यालय लिख रखा है। फिर अंदाजे पर बात नहीं। अच्छा एक चीज और है जैसे आपने कहा ना जैसे कि भगवान को आप सर्वव्यापी नहीं मानते तो भगवान सर्वशक्तिमान है। ये तो मानते हैं आप। सर्वशक्तिमान तो है। हां। तो जैसे जो सर्वव्यापी वाली जो बात आई है वो ये बात आई है कि जब भगवान इस सृष्टि पर आते हैं। यानी जैसे अभी आए हैं जब हम उनको याद करते हैं। ठीक है? उनकी याद जो है हर मनुष्य आत्मा के अंदर छप जाती है।

00:21:46:02 तो वो याद की वजह से वो योग की वजह से वो सर्वशक्तिमान कहे जाएंगे। नहीं नहीं मेरा जो मेरा एक्चुअली क्वेश्चन दूसरा था। मैं ये कह रहा था वो जैसे जैसे वो सर्वशक्तिमान है। मतलब जैसे कण-कण में है, मिट्टी में है, पत्थर में है। ये चीज गलत है। तो हमारा कहने का मतलब है कि वो निर्जीव चीज है। उसमें भगवान नहीं है। भगवान केवल एक है। वो है निराकार शिव। हां जब वो सृष्टि पर आते हैं आकर जब वो पाठ बजाते हैं पाठ मतलब जब वो ज्ञान देते हैं तो वो किसी साकार के द्वारा देते हैं तब वो साकार और निराकार के मील को ही भगवान कहते हैं। शिव शंकर भोलेनाथ बोलते हैं। अच्छा ठीक है। तो अब मैं इसमें दो चीजें आती हैं। एक ये आती है कि अ जैसे भगवान सब जगह नहीं है और निराकार है। तो उसका कोई तो स्ट्रक्चर बनेगा ना। मतलब जैसे हवा भी है मान लीजिए हवा दिख नहीं रही है आंखों का विषय नहीं है मगर यदि वो सब जगह नहीं है तो कुछ एक घेरा बन जाएगा ना उसका कि इतने एरिया में वो है तो वो स्ट्रक्चर कहां पर लिखा हुआ है कैसा है उसका स्ट्रक्चर स्ट्रक्चर जो हमें ये दिखाई देता है ना शिवलिंग जो मंदिरों में हम पूजा करते हैं वो उसका ये कहीं पे मेंशन है कि यही स्ट्रक्चर है उसका मेंशन नहीं है और साकार में जो शंकर

00:23:01:08 मतलब ये हमारे जैसे ये सामने शंकर की मूर्ति है नहीं ये तो मूर्ति है जैसे हमारे हमारे शास्त्रों पे कहीं पे ये नहीं लिखा है कि ये उसका आकार है। ये तो उसका सिंबल है। हां सिंबल है। प्रतीक के रूप में तो है मगर ये उसका आकार है। ये नहीं लिखा है। तो कहीं अपने शास्त्रों में आपके अनुसार लिखा है? नहीं नहीं हमारे अनुसार नहीं है। हम तो यही जो भी चल रहा है तो इन्होंने इन्होंने बताया है कि उसका आकार ऐसा है। शिवलिंग के जैसा हां शिवलिंग का ही है ना शिवलिंग। उसका डायमेंशंस वगैरह भी दिया है कि कितने इंच है क्योंकि शिवलिंग भी बड़ी छोटी होती है। नहीं नहीं वो तो है देखो वो तो फिर मतलब डिजाइन डिजाइन बताया है अनुपात नहीं बताया जैसे हम बोलते हैं ना देखो मैं एक एग्जांपल देता हूं जैसे हवा है महसूस होता है ना तो ऐसी ही ये चीजें हैं। नहीं नहीं। मैं वह हवा का लेकर मैंने पूछा ना कि हवा सब जगह नहीं है अगर तो जितनी जगह पर वह होगी उसका एक स्ट्रक्चर बनेगा क्योंकि अगर कोई चीज़ यहां तक है यहां के बाद नहीं है तो ये उसकी सीमा हो गई एक तरीके से। है ना? तो ऐसे करके उसकी चारों तरफ सीमा होगी। तभी तो वो दूसरी जगह नहीं है। नहीं तो पूरे फैला होगा। तो जब उसकी चारों तरफ सीमा होगी तो ये सीमा कहीं पे वर्णित है कि उसकी डायमीटर इतना है। ऐसा कुछ नहीं है। अच्छा ये नहीं है। अच्छा एक इसमें दूसरा क्वेश्चन ये आता है कि जैसे आपने हमने कहा कि वो ओमनी प्रेजेंट नहीं है। मगर कंट्रोलर तो है। हां कंट्रोलर

00:24:16:12 कंट्रोलर है। जैसे वो चाहे तो ये सीढ़ी हिला सकता है। नहीं नहीं ऐसा क्यों बताएगा? नहीं नहीं। चाहे तो वो चाहे तो वो कुछ हिला सकता है। डब्बा कुछ ऐसा नहीं ऐसा नहीं है। सर्वशक्तिमान नहीं है वो। सर्वशक्तिमान है तो यह थोड़ी कि वो हम बोलेंगे कि हम नहीं मैं मैं बोलने को कहां कह रहा हूं मैं ऐसे नहीं हो सकता मैं गलत मैं वो तो जब मतलब जैसे आंधी आ रही है इस यहां पर आंधी आ रही है या कोई कुछ और करना है तो ईश्वर अगर सर्वशक्तिमान है तो वो मन में सोचेगा और वहां पर वो चीज हो जाएगी ना नहीं जैसे मान लीजिए वो चाहे कि टेबल खिसक जाए नहीं तो फिर सर्वशक्तिमान का अर्थ क्या है सर्वशक्तिमान का अर्थ ये है हमारी ये जो ज्ञान के हिसाब से उसकी जो याद है जो जो हम इस अभी जो भगवान इस सृष्टि पर आए हुए हैं उसको जो हम याद करते हैं उसकी जो याद हमारे अंदर जो छप जाती है ना वो सर्वशक्तिमान क्योंकि हर आत्मा के अंदर सृष्टि भाई साहब याद को अगर शुद्ध हिंदी में कहेंगे तो स्मरण कहेंगे स्मरण सर्वस्मरण मगर सर्वशक्तिमान का क्या मतलब है शक्ति सर्वशक्ति इसका क्या मतलब है शक्ति ये है कि जितना हम उससे पावर लेंगे उतना ही हमारे हमारे अंदर नहीं सर्व का मतलब होता है सब कुछ और शक्ति

00:25:31:22 का मतलब शक्ति यानी सारे कार्य करने की शक्ति जितना पावर में तो सर्व नहीं आएगा ना सर्व विशेषण का अर्थ ही है कि सब कुछ सर्वशक्तिमान का अच्छा वो सर्वज्ञ है कि नहीं सर्वज्ञ मतलब ऑल नोइंग वो सब जानता है वो तो है ही ज्ञान ही तो है सर्वज्ञ है तो सर्व का मतलब वहां क्या हुआ कहां पे सर्वज्ञ में सर्वज्ञ मतलब सब कुछ क्योंकि देखो ज्ञान के हिसाब से नहीं समझे आप मेरा क्वेश्चन क्वेश्चन यह है अब आप दूसरे वे में ले जा रहे हो मैं ज्ञान के हिसाब से जा रहा हूं नहीं नहीं दूसरे वे से नहीं ले जा रहा मैं कह रहा हूं कि अगर हमने कहा कि सर्वज्ञ या सर्वज्ञाता ठीक है इसका मतलब हुआ ऑल नोइंग फिर उसमें ये नहीं है कि फलानी जगह पे कोई कीड़ा है उसको वो नहीं जानता वो जानता है हर चीज जानता है ना वो तो है ही हां तो सर्व का मतलब हमने क्या लिया सब कुछ तो जब हम यहां पे सर्व का मतलब सब कुछ ले रहे हैं तो जब हम कहेंगे सर्वशक्तिमान तो वहां पर भी हमको यही लेना पड़ेगा कि सब कुछ कर सकने की शक्ति जिसके अंदर है वो है सर्वशक्तिमान तो उनके अंदर सब कुछ कर सकने की सब शक्ति नहीं है। क्यों नहीं है सर्वशक्ति आप ही जो 5000 का जो ड्रामा बना हुआ है ना उस हिसाब से जो कुछ चल रहा है वो तो होना ही है वो तो घटित होना ही नहीं वो है ठीक है मगर मैं जैसे पूछ रहा हूं जैसे सीढ़ी रखी है

00:26:46:28 तो इसको वो हिलाने की क्षमता रखते हैं कि नहीं अब ऐसा तो नहीं है ऐसा वो तो फिर एक वो हो जाएगा आप बोलोगे कि मैं नहीं बोलूंगा मैं नहीं बोलूंगा मैं कोई नास्तिक थोड़ी ना हूं जो बोलूं मेरा प्रश्न दूसरा है हां तो आप दूसरी वे में कह रहे हो मैं दूसरी नहीं नहीं अगर हम कह रहे हैं सर्वशक्तिमान भाई साहब तो हमें मानना पड़ेगा। वो सब कुछ कर सकता है। अगर वो चाहे तो यहां हवा चला सकता है। मैं ये थोड़ी ना करूंगा। चला के देखो। उसका मन नहीं चला रहा। भाई मैं अगर यह कह दूंगा कि ये अभी खिसकवा के दिखवाओ तो आप ये कह दोगे ना उसका मन है नहीं खिसक कर रहा। मगर हमें ये तो मानना पड़ेगा कि उसके अंदर कैपेबिलिटी है। चीजों को हिला सकने की या कुछ भी कर सकने की कैपेबिलिटी है। तभी तो उसको सर्वशक्तिमान कहेंगे। क्षमता है। क्षमता वो तो आप देखो आप किसी वे में ले जाओ। हमारे ज्ञान के हिसाब से हम हम ये मानेंगे कि वो जब इस सृष्टि पर आते हैं आके जो वो ज्ञान देते हैं ना तो वो तो सर्वज्ञ ज्ञाता हो गया ना भाई साहब ज्ञान देके जो हम ज्ञान लेते हैं योग पावर लेते हैं वो पावर हमारे अंदर आ जाती है हर आत्मा के अंदर आ जाती है तो वो उसको सर्व तो इसको शाब्दिक अंतर करके दिखाइए फिर मुझे कैसे इसका अर्थ कैसे आ रहा है सर्वशक्तिमान वो तो सर्व अध्यापक हो गया। अगर वो पढ़ा रहे हैं हम लेते हैं

00:28:02:00 या सर्व योग अध्यापक हो गया। उसमें सर्वशक्तिमान तो आ ही नहीं रहा कहीं भी। सर्वशक्तिमान का अर्थ तो यही है ना कि वो सब कुछ कर सकता है। और अगर नहीं कर सकता तो वो ईश्वर कैसा दिक्कत ये है वो तो फिर लंबा हिसाब हो ही जाएगा। तो इसका मतलब वो सुप्रीम कंट्रोलर नहीं है। नहीं है। सुप्रीम तो है। सुप्रीम पावर है वो। भाई साहब जब आप कह रहे हो वो इसको नहीं हिला सकता तो काहे काहे का सुप्रीम? फिर ये ये बात हम कह नहीं सकते ना कि अभी आप बोलोगे भी हिला दे। अरे भाई मैंने आपको बताया तो है कि मैं नहीं बोलूंगा। अब आप सच बोलिए। हम तो ये कह रहे हैं कि मैंने क्या कहा? अगर अगर मैं कहूंगा कि हिला दे तो आप कहना आप ये कहोगे कि उसका मन है नहीं हिला रहा। हमारे आर्डर पे थोड़ी ना चलता है वो। कि हम तो अपने ज्ञान के हिसाब से चलेंगे। हां। ज्ञान के हिसाब से तो मतलब उसके हिसाब ज्ञान के हिसाब से अभी मैं आपको ऐसे नहीं कि जैसे आप कह रहे हो कि वैसे आपके हिसाब से वो कर दूं मगर ज्ञान के हिसाब से हमारा क्या होता है ना कि हमारा भी एक सब्जेक्ट होता है इसका कोर्स होता है इसको जानना पड़ेगा फिर उसके हिसाब से आप समझ पाओगे इसको अच्छा हां जी अच्छा चलिए दूसरा कुछ पूछ लेता हूं ये बताइए कि हमारे आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के अनुसार ईश्वर है यह सिद्ध कैसे होता है

00:29:18:02 ईश्वर है। कैसे सिद्ध होता है? कैसे सिद्ध होता है? हां भाई ये हम लोग यह दुनिया देख रहे हैं तो इसमें ईश्वर है। ये सिद्ध कैसे हुआ? हम कैसे मान लें कि कोई ईश्वर नाम की सत्ता भी है। परमेश्वर भी है कोई इस बारे में विवेचन है कुछ चिंतन? हां बताइए। देखो आध्यात्मिक जो शब्द बना हुआ है। हम अधि वाला अंदर हम आत्मिक वाला आत्मा। हम आत्मा के अंदर जो ज्ञान भरा हुआ है। ठीक है? अभी जो हमारे आत्मा है उसके अंदर जो भी नॉलेज भरा हुआ है उसी को बोलते हैं आध्यात्मिक। अच्छा तो वो आत्मा के अंदर ज्ञान किसने भरा है? उसी परमात्मा ने। नहीं ये तो आप कह रहे हो कि उसने भरा है। मगर हम माने कैसे कि कोई है भरने वाला। अगर वही चीज है जैसे मैंने अभी बोला हवा है। हम ठीक है? तो यानी अगर मैं यह कह दूं कि यहां पे अभी एक अम्मा खड़ी हुई है नरि पिशाचिनी तो आप मान लोगे क्योंकि मैं आपको उदाहरण दे रहा हूं। हवा है तो आप मान लोगे क्या? देखो वही चीज है। जैसे समझे नहीं आपके बगल में मैं कहूं कि भैया यहां पे एक अम्मा खड़ी हुई है। नर पिशाचिनी वो मर गई थी और जो है वो आपका खून पीना चाहती है। तो आप मान लोगे। अब आप कहोगे कि भाई कैसे मान लूं? तो मैं आपको तर्क दूंगा क्योंकि हवा है। हवा को आपने बिना देखे माना कि नहीं माना? तो आपने अम्मा को बिना देखे मान लो। देखो ये लंबी बहस हो जाएगी।

00:30:33:15 वो हो जाएगा। जी कहने का अर्थ ये है मैं बताऊं आपको। मैंने ये प्रश्न क्यों पूछा? मैं बताता हूं। इसलिए पूछा कि जब तक हम इस रूट में नहीं जाएंगे रूट ऑफ गड। रूट में नहीं जाएंगे तब तक हम ये नहीं समझ पाएंगे ईश्वर को सर्वशक्तिमान कहना है कि नहीं कहना। तो अब मैं बता रहा हूं। ईश्वर सिद्ध हमारी पढ़ाई को जब तक ये पूरा कोर्स को जैसे हमारा पांच दिन का कोर्स है ना इसको अच्छे से नहीं करेंगे। इसका डिटेल में नहीं जाएंगे तब तक नहीं। वो चीज आप समझ नहीं पाए। ठीक है। आप जो अपने जिस लक्ष्य से आए हैं वो आप उस हिसाब से कर रहे हैं। मगर ठीक है मैं आपको उस हिसाब से सेटिस्फाई नहीं कर पा रहा हूं। मगर है उसका है। नहीं वो है। मैं आपको ये क्वेश्चन क्यों किया वो है वो क्वेश्चन क्यों किया मैं बता दूं आपको। होता क्या है कि हमने कह दिया कि ईश्वर जो है ये नहीं सरका सकता है। या ईश्वर ये नहीं कर सकता या ईश्वर जन्म नहीं ले सकता। ईश्वर अवतार नहीं ले सकता। ऐसे कई लोग कह देते हैं। जैसे कुरान कुरान में भी कह दिया मेरी कोई संतान नहीं हो सकती। तो जब हम यह कह देते हैं ना कि ईश्वर फलाने फलाने काम नहीं कर सकता है तो हम ईश्वर को बाउंड करते हैं और जब बाउंड करते हैं तो ईश्वर लिमिटेड सिद्ध हो जाता है लिमिटेड कि भाई ईश्वर की ये सीमा है इसके बाहर वो नहीं जा सकता जब वो लिमिटेड सिद्ध होता है तो अब बात आती है कि ईश्वर की अवधारणा

00:31:49:13 आती कहां से है तो ईश्वर की अवधारणा कहां से आती है वो मैं आपको बता रहा हूं एक ब्रहधारण उपनिषद का एक मंत्र है असतो मा सद्गमया तमसो मा ज्योतिर्गमया मृत्युमा मृतम गमाया इस मंत्र में बताया गया है कि एक जीव मात्र के अंदर कभी ना मरने की सदा सुखी रहने की और अखंड ज्ञानी बन जाने की चाह विद्यमान है। इसी चाह को शुद्ध हिंदी में कहते हैं सतचितानंद की चाह। है ना? सच्चिदानंद की हमारे अंदर चाह है। तो होता क्या है कि हमारे अंदर जितनी भी चाह है ना उस चाह के होने से ही उनके विषय का अस्तित्व सिद्ध होता है। जैसे कि हमारे अंदर सुनने की चाह है तो इसका

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→ Used in: A · Live Live Discussion With Vivek Ji From Adhyatmik Vishwavidyalaya at 2:18:08 ↗

00:32:28:02 मतलब दुनिया में आवाज है। हमारे अंदर देखने की चाह है तो इसका मतलब दुनिया में दृश्य है। तो जिस

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00:32:34:14 प्रकार सुनने से श्रवण सुनने से ध्वनि और क्या कहते हैं? देखने की चाह से दृश्य का अस्तित्व सिद्ध होता है। उसी प्रकार एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी प्राणी मात्र के अंदर ये जो सच्चिदानंद की चाह है ना जिससे वो अपने आप को हटा नहीं पा रहा। इसी से सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर का अस्तित्व सिद्ध होता है। एक नास्तिक व्यक्ति भी ये चाहता

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→ Used in: A · Live Live Discussion With Vivek Ji From Adhyatmik Vishwavidyalaya at 2:19:02 ↗

00:32:54:24 है कि धूप ज्यादा पड़ रही है तो कम हो जाए। बारिश ज्यादा पड़

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00:32:57:18 रही है तो कम हो जाए। चाहता है ना? ऑफिस जा रहा है लेट हो रहा है। नास्तिक है भगवान को नहीं मानता। मगर थोड़ी बारिश कम हो जाए। यानी मौसम को कंट्रोल करने की चाह। क्यों आ रही है? क्योंकि इस दुनिया में कोई है जो मौसम को कंट्रोल कर सकता है। तो अब यहां से हमने जाना कि इस तरीके से ईश्वर को और कोई दुनिया में तरीका ही नहीं है कि हम ईश्वर को सिद्ध कर सकें। अब बात ये है कि ईश्वर सिद्ध कैसे हुआ? कि मनुष्य के अंदर अबाध्य यानी सर्वशक्तिमान यानी मुक्त हो जाने की चाह विद्यमान है। तब ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध हुआ। तो ईश्वर कौन होगा? अबाध्य। ईश्वर कौन होगा? मुक्त। किसी भी बाधा से मुक्त। इसलिए जब हम कहते हैं कि ईश्वर यह नहीं कर सकता तो बाधा है। मुक्त नहीं है। जब हम कहते हैं कि यह नहीं कर सकता तो सर्वशक्तिमान नहीं है। जबकि अस्तित्व ही सिद्ध होता है कहां से? जब मनुष्य सब कुछ कर सकने वाला बनना चाहता है। इसका मतलब इस दुनिया में कोई है जो सब कुछ कर सकता है। तो हम कह दे कि वो सब कुछ नहीं कर सकता। तो फिर वो ये वो ईश्वर नहीं है जिसकी वजह से ईश्वर सिद्ध होता है। और जब ईश्वर सिद्ध नहीं होगा तो धर्म सिद्ध नहीं होगा। धर्म सिद्ध नहीं होगा तो कौन माता है, कौन बहन है, कौन पत्नी है? यह अंतर हम नहीं कर पाएंगे क्योंकि जानवरों और हम में केवल एक ही अंतर है। हमारे पास, हमारे पास धर्म है। धर्म और बुद्धि। बुद्धि का है? हमारे पास धर्म है। हमारे पास धर्म है। ऐसी बुद्धि है कि हम

00:34:12:19 धर्म को समझ पाए और उनके पास नहीं है। जिस कारण से वो धर्म धर्म को नहीं समझ सकते। उसको प्रज्ञा कहते हैं प्रज्ञा शक्ति। तो ये तो हुई ये वाली बात। अच्छा अब एक बात आ जाती है आफ्टर ऑल अह कि हम लोग एक डेली जो है एक मुरली के रूप में एक कोई दिव्य प्रकाश होता है, आवाज होती है जो आपको कोई संदेश देती है। तो इसमें एक बात यह है कि जैसे दुनिया में जो कुछ गलत चीजें हो रही है वो ईश्वर की मर्जी के बिना हो रही हैं या उसकी मर्जी से हो रही है। मतलब इस दुनिया में जो भी कुछ है उसका कारण ईश्वर है या अपने ईश्वर की मर्जी के बिना भी कुछ बन जाता है। दुनिया में अपने कर्मों का हिसाब है। नहीं तो कभी सृष्टि बनी ना जैसे देखो पहाड़ बना कर्म कर्म तो तब जब इंसान है। देखो हमारे ज्ञान के हिसाब से जब भगवान इस सृष्टि पे आते हैं आके जब वो नॉलेज देते हैं नॉलेज देने मतलब भगवान नॉलेज के लिए बाकी वो कुछ करते नहीं है करते करते भी हैं तो तो इस दुनिया में जैसे कोई बना इंसान तो उसका कारण भगवान है भगवान से ज्ञान लेगा तभी तो बनेगा नहीं ज्ञान देते हैं वो इंसान बना कैसे बिना भगवान की मर्जी से बना या अपने आप बन गया कैसे बना बना उसका पार्ट बना हुआ है

00:35:28:00 नहीं उसको बनाया भगवान ने कि नहीं बनाया? अब आप बोलोगे कि ये चांद तारे ये सूर्य ये सब भगवान ने बनाए। देखो ये जो है ये सृष्टि जो है बना बनाया ड्रामा है। मतलब भगवान ने ये सब नहीं बनाया है। भगवान ने बनाया नहीं बनाया ये तो फिर एक लंबा क्वेश्चन हो जाएगा। ठीक है? तो ज्ञान के हिसाब से ये क्या है? 5000 साल का ड्रामा है। 5000 साल के बाद भगवान इस सृष्टि पर आते हैं। आकर नॉलेज देते हैं। नहीं नहीं मैं एक बात कह रहा हूं कि प्रॉब्लम क्या है कि आपने कहा हमारा भगवान सुप्रीम कंट्रोलर है। सुप्रीम सोल है। सुप्रीम सोल है। कंट्रोलर नहीं है। सुप्रीम सोल कंट्रोलर माना मतलब उसका कुछ है ही नहीं। यहां ना तो वो सीढ़ी हिला सकता है ना वो कंट्रोल कर सकता है। किसी के किसी दुनिया में कुछ हो रहा है। उसके हाथ में कुछ है कि वो सिर्फ इसीलिए मैं ज्ञान दूंगा। तुमको इधर से उधर ले जाऊंगा कुछ है क्यों नहीं है जो तो सुप्रीम पावर कहते हैं ना भगवान को तो है वो क्या कहते हैं ऑलमाइटी क्या कहते हैं ऑलमाइटी ओमनीपोटेंस मतलब हर चीज कर सकने की क्षमता होती है तो वो केवल ज्ञान देगा और आपको इधर से उधर ले जाएगा बाकी अगर कोई मान लो उधर से इधर ले जाने के बीच में कोई राक्षसी आ गया तो उस राक्षस से आपको लड़ना होगा भगवान नहीं लड़ेगा ऐसा है देखो आप इस

00:36:43:01 ये चीजें जो है ना ये तो फिर लंबी चली जाएगी अब इसके लिए मैंने बोला ना कि हमारे ज्ञान के हिसाब से इसका पूरा कोर्स होता है। तो उसको फिर समझेंगे। फिर यह जो अभी जो बहस है यह फिर लंबी छिड़ जाती है। मैं इसमें ज्यादा नहीं नहीं बहस बहस की बात नहीं। मैं आपको कोई बहस करने थोड़ी ना आया हूं। मैं तो एक ये प्रश्न पूछ रहा था बस कि बात ये है कि अगर हम ये कहते हैं कि भगवान ही सबका कारण है। भगवान को सर्व कारण कहा गया है। सबका आधार मैं ही हूं। सनातन बीज मैं ही हूं। उसमें कहा गया गीता में। गीता में बोला मैं सनातन बीज हूं हर चीज का तो उसमें और गीता में बोला गया समस्त कर्मों को करते हुए भी तू मुझे करता जा मतलब कि इस दुनिया में जो भी कुछ है अच्छा है या चाहे बुरा है उसका कारण मूलभूत कारण एकमात्र भगवान ही है बीज रूप बस ये है क्योंकि जैसे एक पेंटर ने पेंटिंग बनाई महिला की मान लीजिए तो जब पेंटर पेंटिंग बनाता है महिला की तो उसमें उसका ऊपर का हिस्सा होता है आंख फिर ऐसा हिस्सा भी आता है जो आपत्तिजनक मगर वो पेंटर के लिए केवल एक चित्र होता है। वो उसमें कहीं भी रंग भर सकता है। इसी तरीके से भगवान के ऊपर अच्छाई बुराई का फर्क नहीं पड़ता क्योंकि वो उस दुनिया का हिस्सा नहीं है। समझ रहे हैं उसको? यही तो हम भी कह रहे हैं।

00:37:58:07 निराकार है वो इस दुनिया का हिस्सा नहीं है। मगर वो जब साकार में आता है ना कर्मों कर्मों को करने वाले के रूप में की बात कर रहा हूं। तो अभी बात आती है कि इस दुनिया में अगर झूठ बोलने वाले का भी अस्तित्व है तो उसका कारण भी भगवान है। अगर इस दुनिया में कुरान का अस्तित्व है जो गलत बता रही है तो उसका कारण भी भगवान है। है ना? जिसको हम लोग शायद कहते हैं कि कुरान और बाइबल में गीता में एक ही बात लिखी है। हालांकि हम लोग वो बात नहीं मानते। हां वो जैसे खुदा के तख्त जब विनाश होगा जब आठ फरिश्ते उठाते हैं बोलते हैं ना वो लोग भी बोलते हैं अच्छा एक बात नहीं समझ में आती जब आप इसको कुरान के साथ ऐड कर देते हो गीता को तो फिर इसको सनातन क्यों कहते हो नहीं नहीं गीता को हमने ऐड नहीं किया हम जैसे कुछ बातें जो आपने बोला ना कि कुछ बातें आई ये जो जैसे बोलते हैं ना कि जब खुद खुदा के बंदे उठाएंगे जी जी जी ना और यहां बोला है कि जब विनाश होगा तो जो भगवान के जो आठ अष्ट देव हैं वो उसके उसको उठाएंगे हम तो वहां पे वो वाली बात आई है अच्छा तो जैसे बाकी आप कुरान को भी मानते हो क्या चीज कुरान को वो तो हर चीज जब इस सृष्टि में जो कुछ है वो तो अपने

00:39:13:08 हिसाब से चल रहा है मगर हमारा तो मेन तो मुरली है मुरली है यानी कि हम हमारा जो मुरली आपका अंतिम प्रमाण मुरली है मुरली है हम मुरली आपका अंतिम प्रमाण वेद नहीं है वेद नहीं तो फिर आप सनातनी वैदिक कैसे हुए? हिंदू कैसे हुए? मतलब फिर आपको यह कहना पड़ेगा हमारा एक अलग सेट है। सेट देखो यह तो फिर वही मैं बोल रहा हूं ना। देखो ये वही चीज है कि जब तक हम आप इस चीज का पूरा कोर्स नहीं करेंगे। माना इसको अच्छे से जानेंगे नहीं तब तक हम आपको समझा भी नहीं सकते। अच्छा वो जो कोर्स आप कराते हो उसकी रिकॉर्डिंग करने देते हो। जैसे हमारे भी जैसे हम कोर्स कर रहे हैं उसमें हम आए हम जॉइ हो जाएंगे कोर्स में ज्वाइन हो जाएंगे तो क्या हम उसकी रिकॉर्डिंग कर पाएंगे आप बात कर सकते हैं मैं पूरी रिकॉर्डिंग क्योंकि हम वहां पे क्वेश्चंस भी करेंगे ना अपने क्योंकि कोर्स कोर्स के नाम पे चलिए हम आ गए पांच दिन कोई बड़ी बात नहीं है। ठीक है? मगर जो क्वेश्चन रेज होंगे उनको हम करेंगे। फिर वहां उसकी रिकॉर्डिंग कि भाई हमारे सवालों के सही जवाब दिए जा रहे हैं कि नहीं दिए जा रहे या सनातन के नाम से सनातन ही बताया जा रहा है या कुछ और बताया जा रहा है। तो ये तो इतनी तो छूट होगी ना आपके कोर्स में। नहीं होगा। वो तो जब कोर्स करेंगे पूरा पहले आप पूरा कोर्स करोगे ना फिर कोर्स के हिसाब से ही फिर समझाया जाएगा। कोर्स में समझाया जाएगा ना?

00:40:28:09 हां। कोर्स में समझाते चलेंगे वो। हां। तो ठीक है। तो वो कोर्स कैसे ज्वाइन करने को मिलेगा हमें? ऑनलाइन भी हो जाता है, ऑफलाइन भी होता है। ऑनलाइन मतलब कोई नंबर वगैरह पे हमें कॉल करना है, क्या करना है? वही देवी जी हैं जो आपकी उनके नंबर पे कॉल कर लें। कॉल कर लें। उनसे बोल दीजिए कि हमें कोर्स करना है। अच्छा तो कोर्स करने के बाद फिर वो आपको टाइमिंग दे देंगे क्या-क्या टाइमिंग है। अच्छा तो ऑनलाइन कर सकते हैं आप। ठीक है। मैं एक बस एक लास्ट बात बोल के अपना आज के यह पूरा करते हैं। बात यह है कि भगवान सभी कारणों का भी कारण है। मूल कारण है। तो हमें ये मानना पड़ेगा कि दुनिया में अगर कोई झूठ बोल रहा है उसका भी कारण भगवान है। कुछ भी हो रहा है उसका भी कारण भगवान है। बस ये है कि व्यवहारिक रूप से भगवान उससे जुड़ा हुआ नहीं दिख रहा है। मगर जब मूल में जाएंगे तो उसका भी कारण भगवान दिखाई देगा। मैं पूरी में भी लिखा हुआ है। मैं मैं पूरी कर लूं बात अपनी। तो अब बात यह है कि अगर भगवान बुराई का भी मूल कारण है तो अगर भगवान हमसे कुछ कह रहे हैं जैसे कि आपने कहा मुरली आती है तो हम यह कैसे मान लें कि ये जो है भगवान हमको भटकाने के लिए नहीं कह रहे क्योंकि भगवान के ही कारण दूसरी और किताबें भी छपी है। आपके ही हिसाब से ऐसा अर्थ किया जा रहा है जो गलत है। वो भी भगवान की मर्जी के बिना थोड़ी ना हो रहा है। इसका मतलब जब भगवान की मर्जी से ही अच्छाई बुराई दोनों हैं तो

00:41:43:13 भगवान आपसे आकर डायरेक्ट अगर कुछ कह रहे हैं तो हम विश्वास कैसे कर लें कि भगवान हमें भटकाने के लिए नहीं कह रहे हैं। में सही रास्ते पर ले जाने के लिए कह रहे हैं। इसका क्या है? हमारे पास तो है इसका बृहधारण उपनिषद में लिखा हुआ है कि जो वेद है वो ईश्वर की स्वास के रूप में विद्यमान है। स्वास स्वास क्या होती है? जैसे हम दो प्रकार के कार्य कर सकते हैं। एक चाहकर और एक बिना चाहकर। अगर हम चाह के कुछ करते जैसे मान लीजिए मेरे सामने दो बटन है बोर्ड में। है ना? तो मैं चाहूं तो लेफ्ट वाला दबाऊ। मैं चाहूं तो राइट वाला दबाऊं। क्योंकि मैं चाहता हूं कुछ करना। मगर कुछ काम हम ऐसे होते हैं जो बिना चाह के करते हैं। ऐसा ही एक कार्य है सांस। बच्चा माता के गर्भ से जन्म ले रहा है और सांस ले रहा है। तो जो वेद हैं उनको कभी नहीं कहा गया कि उनको किसी ने रचा है। वो भगवान की सांस के रूप में विद्यमान है। इसलिए हमारे लिए प्रमाण है। इसीलिए विष्णु भगवान जब बुद्ध के रूप में आते हैं और वेदों का खंडन करते हैं। है ना? तो हम बुद्ध को सम्मान तो देते हैं मगर वेदों का विरोध नहीं करते क्योंकि हमारे लिए परम प्रमाण सनातनी वो है। वैदिक वो है हिंदू वो है जिसके लिए परम प्रमाण वेद है। तो अगर हम कह रहे हैं कि वेदों के विरुद्ध जाकर के हमको मुरली के रूप में कोई दिव्य शक्ति आ रही है और वो ये बता रही है कि ऐसा करो वैसा करो वेद की मत

00:42:58:14 मानो तो हमारे लिए वो प्रमाण नहीं हो सकता। क्यों नहीं हो सकता? क्योंकि वही दिव्य शक्ति दूसरी लीलाएं भी कर रही है। वही दिव्य शक्ति किसी झूठ बोलने वाले को झूठ बोलने की शक्ति भी प्रदान कर रही है। आपने कहा सबके मन में होता है ना स्मरण याद भगवान की याद होता है। यानी कि वो दिव्य शक्ति वहां होती है जहां झूठ बोला जा रहा है। शराब पी जा रही है। फिर भी वहां नहीं रोकती। वह तो फिर देखो जब पुरुषार्थ करता है ना जब भगवान इस सृष्टि पर आते हैं कि हर आत्मा अपना अपना जो पुरुषार्थ करती है तो कोई अच्छा भी करती है कोई बुरा भी नहीं वो ठीक है मगर भगवान का कंट्रोल है ना वो चाहे तो फट से रोक सके मगर वो नहीं रोकती क्योंकि वो एक लीला रूप में उस कार्य को होने देती है इसका मतलब कि हमको जो वो कह रहे हैं हम विश्वास इसलिए नहीं कर सकते क्योंकि झूठ बोलने वालों का अस्तित्व भी उन्हीं के कारण है। इसीलिए हम लोग वेद पे विश्वास करते हैं। परम प्रमाण वेद को मानते हैं। मुरली को नहीं मानते हम लोग क्योंकि वेद अपौरुषय हैं। इनको अपौरुषय ग्रंथ कहा गया है। मुरली पौरुषय है। वो कह रही है आपसे आकर के वो अपौरुषय ग्रंथ नहीं है। ये थोड़ा सा आ जाता है। चलिए अब आपने कहा है कि आपका जो है कोर्स करने पे हमको सारे क्वेश्चंस के आंसर्स मिल जाएंगे। क्वेश्चनों के आंसर आप कोर्स करेंगे जानेंगे तब उसका पूरा आपको मिल जाएगा। क्योंकि अगर अगर भगवान सब कुछ नहीं कर सकते। सर्वव्यापक नहीं

00:44:13:18 है तो फिर वो मनुष्य की चाह का विषय सिद्ध नहीं होंगे। फिर उसका अस्तित्व ही नहीं सिद्ध कर पाएंगे हम लोग। नास्तिकों का खंडन ही नहीं हो पाएगा और दुनिया नास्तिक हो जाएगी। ऐसा ईश्वर देंगे कि वो ये नहीं कर सकता वो नहीं कर सकता। वो बाध्य है वो लिमिटेड है। अगर ऐसा ईश्वर देंगे तो नास्तिक लोग जीत जाएंगे। हम लोग हरा ही नहीं पाएंगे नास्तिक को। क्यों नहीं हरा पाएंगे? क्योंकि ईश्वर तो वहीं से सिद्ध होगा कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है। और जब हम यही कह देंगे नहीं सर्वशक्तिमान सब कुछ नहीं कर सकता। बाधित है तो वो नास्तिकों का पक्ष मजबूत हो जाएगा। नहीं शक्तिमान और सर्वव्यापी मैंने बोला कि सर्व्यापी जैसे आपने शक्तिमान भी नहीं माना ना उनको शक्तिमान सर्वक्तिमान शक्तिमान तो है गीता मैंने आपसे बार-बार पूछा सीढ़ी हिला सकता है कि नहीं आपने कहा नहीं हिला सकता वो सीढ़ी हिला सकता है वो वाली बात कैसे मैं आपसे ये आप गलत करते होगे अभी आप ये बोलोगे आप ये क्यों सोच रहे हो मैं ऐसा बोलूंगा भाई मैंने तो मैंने आपको 10 मैंने आपको 10 बार कहा मैं नहीं बोलूंगा मेरे भाई क्योंकि आप उसका उत्तर ये दे पाओगे कि भगवान की मर्जी वो नहीं हिला रहा हिला सकता है कि बात है हां हिला सकता है भगवान की मर्जी नहीं हिला सकता सर्वशक्तिमान तो है ही वो तो सब कुछ कर सकता है हां तो क्या वो अवतार ले सकता है मां के पेट से जन्म ले सकता है नहीं तो बाधित हो गया वो केवल गर्भ में किसी के शरीर में आता है हां तो मैं तो मैं अभी कह रहा हूं

00:45:28:19 किसी माता के कोख से जन्म ले सकता है ले सकता नहीं ले सकता अच्छा झूठ बोलने वाले को बना सकता है झूठ बोलने वाले को बना सकता है ये तो मैंने बोला फिर वही कोर्स वाली बात वही वही मैं कह रहा हूं ना आप कहीं ना कहीं उसको लिमिटेड कर रहे हो फिर वही चीज आ जाएगी ना हमारा जो सनातन ईश्वर है उसके बारे में कोई एक बात नहीं लिखी जा सकती कि ही कांट डू इट यह नहीं कहा जा सकता अगर कोई कहे वो मत्स्य नहीं बन सकता मत्स्य अवतार लेता है अगर वो अवतार है नहीं अगर कोई कहे कि वो पूर्व नहीं बन सकता पूर्व लेता है अगर कोई कहे कि आधा जानवर आधा इंसान नहीं बन सकता वो नरसिंह बनता है अगर कोई कहे कि वामन नहीं हो सकता वामन अवतार लेता है अगर कोई कहे कि वो छल नहीं कर सकता मोहिनी बनता है कृष्ण बन बनता है और कोई कहे वह सत्य प्रतिज्ञ नहीं हो सकता वो राम बनता है। मतलब दुनिया सनातन की क्वालिटी क्या है? सनातन ईश्वर वो ईश्वर है कि पूरी दुनिया में जितने भी सनातन के विरोध में खड़े हुए ईश्वर हैं उनमें सब में कहीं ना कहीं लिमिट लगी हुई है। और एकमात्र सनातन ईश्वर ऐसा है। हम सनातनियों का ईश्वर हम ऐसा है जो जिसके लिए एक पंक्ति नहीं लिखी जा सकती कि ही कांट डू इट। और अगर हम यह कह दें कि भैया वो झूठ बोलने वालों जैसे झूठ बोलने वाला अगर हमने यह मान लिया कि

00:46:43:25 झूठ बोलने वालों का भी कारण वही है तो हमें ये मानना पड़ेगा कि मुरली पे हमें भरोसा कैसे और अगर नहीं मानेंगे झूठ बोलने वालों का कारण भगवान को तो वो सर्वशक्तिमान सिद्ध नहीं होगा। दिक्कत है। या तो सर्वशक्तिमान सिद्ध कर लो या फिर उसको झूठ बोलने वालों को बनाने वाले कारण सिद्ध मान लो। अगर मान लेंगे तो मुरली पर भरोसा सिद्ध नहीं हो। फिर वेद अपसाय ग्रंथों के पास जाना पड़ेगा। वही अंतिम प्रमाण। फिर मुरली अंतिम प्रमाण नहीं रह जाएगी। खैर आप लोगों को समझ में आया होगा। हम लोग आए थे आध्यात्मिक विश्वविद्यालय। आपने इतना सारा समय भी हमको दिया और हमारा आपसे यही रिक्वेस्ट है। जी जी और हम हम जो है आपका कोर्स करने के लिए विचार कर रहे हैं। भाई साहब का हम कोर्स भी करेंगे। ये हमको जो है प्रोवाइड करेंगे और हमको जो है उसको रिकॉर्ड करने की अनुमति भी प्रदान करेंगे। हम इनके कोर्स में आएंगे और वहां पर जो क्वेश्चंस रेज हो रहे होंगे। मेरे ख्याल से अमोल कोकने जी है ना जो कोर्स कोर्स कौन कराता है? माताएं करा अगर माताएं उत्तर नहीं दे पाई तो तो अमोल कोकने जी आएंगे। नहीं वो तो देखो वो तो वकील साहब है। वह तो अपना उस पर बिजी रहते हैं। वो अपना सेमिनार नहीं मैं उनको देखा है ना प्रश्नोत्तरी वगैरह गीता का वो देते हैं। ज्ञान व्यान देते हैं वो गीता के जैसे सेमिनार करते हैं। तो वही हेड तो वही है ना इसके हेड हेड ऐसा नहीं है वो नहीं है। हमारे वहां पर जो इसको अच्छा

00:47:58:28 ठीक वो ठीक है। मतलब माताएं माता जी उत्तर नहीं दे पाएंगी तो कोई और देगा उत्तर या खत्म व नहीं देंगे आपका उत्तर जरूर मिलेगा। जी जी जी चलिए ठीक है तो मैं अब अब आप लोगों कोर्स के लिए इंतजार करिए कि इनसे हमें जो है कोर्स का एक्सेस मिले और हम उसमें ज्वाइन करें और जो थोड़ी सी ये अंतर आ रहे हैं हो क्या रहा है ना कि छोटी-छोटी सी अवधारणाओं के कारण हम सनातनी बट रहे हैं और इसका फायदा जो है दूसरे लोग उठाते हैं क्योंकि छोटी-छोटी सी अब जैसे हमने कह दिया ओमनी प्रेजेंट नहीं है तो हमारा जिसजिस बुक में ओमनी प्रजेंट कहा गया उसके प्रति अनास्था आ गई अरे गलत इंटरप्रिटेशन है अनास्था आ गई या हमने कह दिया वो तार नहीं लेता मूर्ति के लिए अनास्था आ मंदिरों के लिए अनास्था आ गई। अब कोई आक्रमण कर रहा है मंदिरों पे और जो अनास्था वाले लोग बैठे हैं चलो भैया बचा लो मंदिर को चल के। नहीं नहीं हम तो विश्वविद्यालय वाले लोग हैं। हम नहीं मानते कि भगवान का कोई अवतार होता है, मूर्ति थोड़ा सा इससे अंतर आ रहा है। हो सकता है कि आपका कोर्स करने से हम लोग एक मत हो जाए। ठीक है। जी। आपने बहुत सारा समय दिया। आपको आभार ढेर सारा। जय श्री राम।

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 49:07 · 20 Dec 2025

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