⬜ Not used yet · 00:00:04:14 – 00:00:04:28 (0:00)
00:00:04:14 भारतीय
✅ This part is already used · 00:00:04:28 – 00:08:07:09 (8:02)
→ Used in: B · Video अध्ययन प्रारम्भ DAASBODH LECTURE #1 at 14:25 ↗
00:00:04:28 विचारशीलों ने बहुत कुछ सोच विचार कर अंत में यही निश्चित किया है कि मनुष्य को सत्य के मार्ग पर लगाए रखने के लिए सदा आस्तिक और सतचरित रखने के लिए यदि सबसे अधिक किसी चीज को सहायता किसी चीज से सहायता मिल सकती है तो वह भक्ति से ही मिल सकती है। यही बात अभी कुछ दिनों पहले मैंने अपने एक वीडियो में भी कही एक लाइव स्ट्रीम हो रही थी और उसमें कोई इस्लाम को मानने वाला व्यक्ति जो है हमारे धर्म के बारे में बहुत ही आपत्तिजनक कुछ वक्तव्य वहां पर कमेंट्स में लिख रहा था। मैं सदैव यही कहता हूं कि अपने जीवन की सभी विपरीत परिस्थितियों से गुरुदेव भी यही बताते हैं कि आपको आपके जीवन की सभी विपरीत परिस्थितियों से संघर्ष करने में सबसे अधिक जो लाभप्रद है वो है भक्ति। भक्ति का बल बढ़ाइए और जीवन में सरलता पाइए। विषम से विषम परिस्थितियों में भी आप चट्टान की तरह सीना तान कर खड़े रह सकते हैं। तो वह भक्ति के कारण इसलिए भक्ति का बल बढ़ाएं। तो वही समर्थ रामदास जी भी कह रहे हैं। सच चरित्र रखने के लिए मैंने इस बारे में बहुत से उदाहरण दिए हैं कि किस तरीके से आपके जीवन में भक्ति के कारण जो बल आता है उसके कारण आप यह निर्णय कर पाते हैं।
00:01:20:14 जैसे मान लीजिए मैं एक छोटा सा उदाहरण दे दूं। मैंने किसी को कहा कि मैं आपको जो है अमुक दिनांक को मैं जो है आपसे मैंने धन लिया है। मैं आपको यह धन आपको वापस कर दूंगा या फिर वापस कर दूंगा। छोड़ दीजिए। मैंने किसी को कहा कि दान स्वरूप भेंट स्वरूप मैं आपको जो है धन यह दे दूंगा। इतना धन मेरे पास मैं इतनी दिनांक को आपको दे दूंगा। या फिर अ कोई मेरे अनुगत कार्य कर रहा है और उसका वेतन मान है मुझे उसको देना है। मगर कई बार होता क्या है कि जब वह राशि वह धन मेरे हाथ में आ गया जिस समय उस समय मेरे अंदर लालच आ जाता है। अरे आज नहीं किसी और दिन दे देंगे। जैसे वेतन किसी को देना है और मैं आज ना दे के चार दिन के बाद दूध हो सकता है कि आज उसको कोई औषधि लेनी हो अपने घर में किसी के लिए। कोई रोगी हो उसके यहां वो उस चिंता में बैठा हो और मेरे मन में लालच आ गया कि कुछ दिन और इस पैसे को देख लूं अपने पास। ₹100 उसको देने हैं। कुछ दिन और बाद दे दूं। ऐसा लालच आ गया। या फिर मैंने किसी को दान स्वरूप भेंट स्वरूप दे देने को कहा था कि ठीक है मैं तुम्हें इतनी मदद
00:02:35:18 कर दूंगा। परंतु जिस समय मेरे पास धन आ गया तो मैंने सोचा कि अरे क्या फायदा या मैंने कुछ और बहाने ढूंढे उसको ना देने के। या फिर मैंने किसी से लिया है और मेरे पास आ गया या फिर मुझे उसके लिए प्रयत्न करना है। कोई कठिन कार्य करना है तो मेरे पास जब वह आ गया या कठिन कार्य के लिए तो मैं सोचूं कि क्या करना है? उसके पास जाना है। ये अभी अभी मेरे पास हरी हरी गड्डी है। वो गायब हो जाएगी। आता है। निश्चित रूप से आता है विचार। आपके पास हरी हरी गड्डी है। यह आएगा जब वह गड्डी जा रही होगी ना तो हृदय में उसकी अभाव की अनुभूति होगी। उस अनुभूति से लड़ने के लिए उस विचार को परास्त करने के लिए आपके पास एक भावना होनी चाहिए और वही भावना है हमारे साथ श्री रघुनाथ तो किस बात की चिंता हमें जब ये विचार आते हैं निर्णय लेने की ये गड्डी कम करनी है कि नहीं करनी है यह धन इतना मोटा अमाउंट जाना है कि नहीं जाना है उस समय जब व्यक्ति विचार करता है नहीं रघुकुल रीत सदा चली आई प्राण जाई पर वचन ना जाई तो व्यक्ति वहां पर धर्मज्ञ हो पाता है। क्यों हो पाता है? क्योंकि उसको मालूम है कि दुनिया इधर से उधर हो सकती है। मगर मेरे पीछे खड़े
00:03:50:24 कौन है? राम। और ये राम के पीछे खड़े होने की भावना आपको आती है भक्ति से। यह जो भावना है मेरे पीछे खड़े हैं राम। यह भावना आपको भक्ति से मिलती है। इसीलिए कहा जाता है कि भक्ति का बल एकत्र करिए। तभी आप अपने धर्म पर अक होकर के खड़े रह सकते हैं। आज हमने देखिए बहुत क्या कहते हैं हमें ऐसे बहुत से वीडियोस प्राप्त हुए हैं अलंकार समाजियों के जिसमें कि वो गाली बक रहे हैं सीधे-सीधे और गाली बक रहे हैं और बहुत गंदी गंदी अश्लील बातें वहां पर कर रहे हैं। हो सकता है कि जो सामने उनके प्रतिद्वंदी है उनका वो और भी ज्यादा निकृष्ट व्यक्ति हो। मगर गाली- बकना मर्यादा नहीं है। यदि रावण ने मंदो सीता माता का हरण किया है तो श्री रामचंद्र जी ने मंदोदरी का हरण करने की मर्यादा को स्थापित नहीं किया है। आप गाली नहीं बख सकते। महाभारत के एक श्लोक का उदाहरण ले ले के क्योंकि कहीं भी किसी भी अंश में गाली को स्वीकृत नहीं किया गया। हर जगह गाली को निषेध किया गया है। तो ऐसी विपरीत परिस्थितियों में भी आप अपने धर्म पर कैसे टिके रह सकते हैं? विपरीत परिस्थितियों में जब आपके अंदर भक्ति का बल होगा तब
00:05:05:27 आप अपने प्राणों को भी न्योछावर कर दे कर देने पर भी धर्म की रक्षा के लिए धर्म के निर्वाह के लिए खड़े हो पाएंगे। तो इसीलिए कहा जाता है कि आपको कोई सत चरित्र रखने के लिए सबसे सरल साधन है अच्छा चरित्र रखने के लिए तो वो है भक्ति। क्यों नहीं रह पाते ये अलंकार वाले? क्योंकि इनके पास भक्ति नहीं है। क्यों नहीं रह पाते ये इस्लाम को मानने वाले? क्योंकि इनके पास भक्ति नहीं। भक्ति है ही नहीं। तो जब भक्ति ही नहीं होगी तो आपके अंदर अपने धर्म के प्रति निष्ठा कहां से आएगी? और फिर वह सर्वशक्तिमान ईश्वर की जो आवश्यकता है वह क्यों है? जब तक ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं होगा, मोक्ष परम स्वतंत्र नहीं होगा तो आपका धर्म शाश्वत नहीं होगा। ये सब क्रम है। जब तक ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं होगा। उसके साथ एकत्व के रूप में प्राप्त होने वाला मोक्ष परम स्वतंत्र नहीं होगा। तो आपका धर्म शाश्वत कहां से होगा? बदलेगा। अरे कर लेता हूं। अरे उसको चार दिन बाद दे दूंगा यार। 10 दिन और इस गड्डी के दर्शन कर लो। यह विचार आते हैं तो जो व्यक्ति अपने धर्म से चूकता है ना उसके पास भक्ति का बल नहीं है। यह मानना चाहिए तो फिर वो कालिया जिन अथवा परी की साधना में व्यस्त है।
00:06:20:28 ऐसा फिर मान लेना चाहिए। अच्छा भक्ति ही मनुष्य में सबसे अधिक गुणों की स्थापना कर सकती है और संसार को अनेक प्रकार के अनर्थों से बचा सकती है। श्री समर्थ की सूक्ष्म दृष्टि से भला इतनी बड़ी बात कैसे छूट सकती थी। इसलिए उन्होंने धर्म मार्ग में भक्ति को बहुत बड़ा स्थान दिया है। उन्होंने जनसाधारण के लिए तो भक्ति की व्यवस्था दी ही है। पर साथ ही ऐसे लोगों के लिए भी भक्ति की आवश्यकता बतलाई है जो संसार से सब प्रकार से विरक्त होकर उनके उच्च आदर्श तक पहुंच गए हो। उनकी आज्ञा है कि जो लोग परमात्मा तक पहुंच गए हो उन्हें उन्हें भी भक्ति यानी तत्वदर्शी संत सन्यासी विरक्त संत उन्हें भी भक्ति मार्ग का कभी त्याग नहीं करना चाहिए बल्कि सदा उस पर आरूढ़ रहना चाहिए। मनुष्य मात्र को सन्मार्ग में लगाए रखने वाले इस दूसरे साधन का भी श्री समर्थ ने जो विवेचन और प्रतिपादन किया है वह भी उनकी लोक कल्याणकारिणी बुद्धि का एक अच्छा नमूना है। संसार के सभी लोग विरक्त त्यागी और वीतराग नहीं हो सकते। अधिकांश
00:07:36:00 लोगों को संसार में रहकर गृहस्थ घर गृहस्ती के कामों में ही जीवन बिताना पड़ेगा। ऐसे अधिक से अधिक साधन करें। ऐसे लोगों के लिए श्री समर्थ का आदेश है कि वह गृहस्थ आश्रम में रहकर ही परमार्थ का अधिक से अधिक साधन करें। उन्होंने इस गस्थ आश्रम का बहुत अधिक महत्व बतलाया है। इन लोक तथा परलोक के साधन का मुख्य आधार है।
⬜ Not used yet · 00:08:07:09 – 00:08:09:00 (0:02)
00:08:07:09 [संगीत]
Plans for this video (0)
No Plans yet. Press "✂️ Open Clip Cutter" to make one.
-
⬜Hindi SRT Required
YouTube Studio → Subtitles → Hindi → upload the SRT file. (Checked automatically once OAuth is connected.)
-
⬜English SRT
YouTube Studio → Subtitles → Add language → English → upload the SRT file.
-
⬜Title (per Rules)
Check the title against the RULES on honorifics, names and terms.
-
⬜Description
YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.
-
⬜End Screen
YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.
-
⬜Cards
YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.
-
⬜Playlist Automatic
YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.
-
⬜Thumbnail
YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.
"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.
Playlists
Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).
भक्ति कैसे किसी को चरित्रवान बनाती है DAASBODH LECTURES
Description
(empty)
History
No changes yet.
✂️ Clip Cutter
⌨️ Keyboard shortcuts
Space Play/Pause · I Set start · O Set end · ←→ 1 second (Shift: 5) · ,. 1 frame · P Preview · Enter Add clip · Esc Stop
Start
End
✂ Remove (middle part: bad audio, bad section)
Move the video to that spot (click the SRT or the bar), then press "Start"/"End".
Clips () · Total
Add clips above. They will appear here; drag (⋮⋮) to reorder.
-
⋮⋮