⬜ Not used yet · 00:00:01:16 – 00:01:17:27 (1:16)
00:00:01:16 [संगीत] तुम [संगीत] अब यहां तक हमने जो है निग्रह संप्रदाय की स्पष्टता उसकी प्रामाणिकता पर बात कर ली और उससे इसका संबंध कितना उस पर हर तरह से बात कर ली। अब हम दूसरा विषय जो उसने कहा कि मेरे आचरण को देख के ये तय करो कि मैं आचार्य हूं कि नहीं। प्रामाणिक मेरे आचरण को मेरे आचरण को देख के तय करो कि भगवती ने मुझे वरदान दिया है कि नहीं। तो अब उसकी पोस्टमार्टम करते हैं। तो बहुत पोस्टमार्टम करता है ना। अब इसकी करते हैं। तो
00:01:09:10 नीचे हमने यहां पर लिंक दे दिए गए हैं। आपको वीडियो आप देख रहे हैं तो इसमें आपको वीडियो लगा दिया जाएगा। ऐसे में
✅ This part is already used · 00:01:17:27 – 00:06:54:09 (5:36)
→ Used in: A · Video मुसलमानी साधना बेचने वाला वैदिक आचार्य at 0:02 ↗
→ Used in: B · Video भागवतानंद की गुरु परंपरा क्या है | Discussion with Supporter of Bhagwatanand at 2:14 ↗
00:01:17:27 हमने वीडियो दिखा इसमें दिखाए हैं कि यह जो है कालिया जिनकी की पूजा करता उसकी आवश्यकता होने की बात कहता है। जिसमें भागवतानंद अभी आपको वीडियो आगे दिखा दिया जाएगा जिसमें भागवतानंद स्वयं कालिया जिन एवं परिसाधना जैसी इस्लामिक पूजा पद्धति लोगों को सिखाने की बात कर रहा है जो किसी भी प्रकार से वेद सम्मत नहीं है। यदि तुम किसी परंपरा का नाम दे दो वहां पर भी तो होता है तो वहां तुम ये चेक नहीं करोगे कि नहीं शास्त्र से है कि नहीं शास्त्र के बाहर नहीं होना चाहिए ना नाम बताओ किस परंपरा में कहा है किसने यह मंत्र आपको दिया है कालिया जिन का परिसाधना का शास्त्र में बात हो रही ना तस्मा शास्त्र प्रमाणम भाई शास्त्र बाहर यदि गुरु भी हो तो उसका भी वो करना चाहिए निग्रह ना तो तुम्हें उनका निग्रह करना चाहिए जो ऐसा दे रहे हैं तुम उनके आधार पर अपनी चीजों अपनी गलत चीजों की पुष्टि कर रहे हो कहां चला गया तुम्हारा निग्रह या निग्रह संप्रदाय से तुमको मिला कालिया जिन परिसाधना का एक व्यक्ति ने मुझे बहुत परेशान कर रखा था कि मुझे साधना दीजिए सिद्धि दीजिए साधना दीजिए सिद्धि दीजिए उनको कालिया जिन का मंत्र मंत्र चाहिए था। तो कालिया जिनका मंत्र किससे लेकर गए? हमसे लेकर गए। इस फोटो को मैंने भेज दिया और कहा
00:02:33:03 कि ऐसे-सा कुछ कर ले। तो इतना सत्य है इसमें। फोटो सत्य है। फोटो मैंने भेजा क्योंकि जो डॉट लगे हैं फोटो के नीचे वो मैंने लगाए थे। ये मुझे याद है। क्योंकि जो डॉट लगे हैं फोटो के नीचे वो मैंने लगाए थे। ये मुझे याद है। क्योंकि जो डॉट लगे हैं फोटो के नीचे वो मैंने लगाए थे। ये मुझे याद है। क्योंकि जो डॉट लगे हैं फोटो के नीचे वो मैंने लगाए थे। ये मुझे याद है। लेकिन ये सब जो लिखा है ना कि इसे पहले मेरे पास भेजना पड़ेगा। ये मुझे याद नहीं आया। गुरु पूर्णिमा से लेकर अगले पूर्णिमा तक खुले में बैठकर आसमान के नीचे सावन आया बहार आई तेरे बाप शैतान को सजदे की मार आई। परी तू ना आई तो तुझे तेरे बाप शैतान की मार आई। 51 माला जप करना है। प्रत्यक्ष होने पर हाथ में फूल गुलाब देना है और साथ रहने को बोलना है। तीन वचन ले लें एवं मृत्यु समय ना बिगाड़ने बोले। इसकी वास्तविकता क्या है? पहली बात कि सावन आया बहार आई। तेरे बाप शैतान को सजदे की मार आई। यह जो मंत्र है यह वास्तविक मंत्र है। और यह मंत्र मैंने आदित्य वैभव को दिया। 29 जून 2021 को मैंने इसको यह साधना भेजी थी। कब भेजी थी? सुबह 8:50 में। तो क्या है इसमें? रात्रि को 12:00 बजने के ठीक बाद यदि संभव है तो स्नान करके अन्यथा हाथ पैर लिंग आदि धोकर कुल्ला आदि करके सफेद कपड़ा पहन के इत सुगंधित वस्तु लगाकर खुले आसमान में एकांत में चले जावे। पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठ जावे। एक धूप जला लें। इसके अतिरिक्त कुछ भी और काम करने की आवश्यकता नहीं
00:03:48:09 है। आकाश की ओर दृष्टि रखकर यदि चंद्रमा दिखे तो और भी उत्तम। निम्न मंत्र को स्फटिक की माला से सात माला पढ़ें। यह मंत्र शुक्रवार अथवा पूर्णिमा को करें। सावन आया बार आई तेरे बाप शैतान को सजदे की मार आई। लाली तू ना आई तो तुझे शैतान की मार आई। प्रयोग पूर्ण होने पर उससे तीन वचन लें। मेरे स्मरण करने पर सदैव आकर मेरा बताया कार्य करें। मेरे और मेरे परिवार प्रियजनों को किसी प्रकार की क्षति कभी ना करें। मृत्यु के बाद मेरी उर्ध्वति में किसी प्रकार से बाधक ना हो। यदि देवी की प्रत्यक्ष सिद्धि हो जावे तो उसके बाद आप गुरु दक्षिणा में मेरे बताए किसी भी एक दो कार्य को पूर्ण करा दें। प्रयोग से पहले प्रयोग के बीच या प्रयोग के बाद में कभी भी इस बात का उल्लेख मेरे अतिरिक्त किसी से अन्य से ना करें। बहुत सरल है। यद्यपि दीपावली की रात्रि से तीन रात मिट्टी के बर्तन में खीर बनाकर और दक्षिण दिशा होकर रात 12:00 बजे 108 बार जप करना है। प्रत्यक्ष होने पर पैसा ले लेना है। अधिकतम 10 करोड़ और इसका 25% मुझे देना है। अब विधि तो सही है। कालिया जिन वाला यह मंत्र मैंने तीन चार लोगों को दिया था। जिनकी आर्थिक स्थिति मुझे लगी कि बहुत गड़बड़ है। और बहुत गरीबी में था वो बाद में बहुत अमीर भी हो गया था। और उड़ीसा के एक व्यक्ति जिसका मैंने संदर्भ दिया, उसको भी यह सिद्ध था और वो चार लोग मिलकर इसको सिद्ध किए थे। तो उसमें शर्त यही थी कि जो मंत्र देता है मतलब बताता है वह 25% उसको देने पर ही वह धन उसको लाभ करता है।
00:05:03:13 उन्होंने अरबी फारसी के मंत्रों से किसी शक्ति की आराधना कर रखी थी अपने किसी गुरु से प्राप्त करके वो पीर शक्ति की। तो बहुत बाद में किसी समय मुझे भी कुछ आवश्यकता पड़ी तो हमने कहा कि आप जरा बताइए इसमें क्या होना चाहिए। तो बहुत बाद में किसी समय मुझे भी कुछ आवश्यकता पड़ी तो हमने कहा कि आप जरा बताइए इसमें क्या होना चाहिए। तो बहुत बाद में किसी समय मुझे भी कुछ आवश्यकता पड़ी तो हमने कहा कि आप जरा बताइए इसमें क्या होना चाहिए? तो ऐसी कई शक्तियां हैं जो पीरवाणी तंत्र में मुसलमानों के साथ कनेक्ट करती हैं। पीरवाणी है जिसमें खुदा सुलेमान ये सब शब्द आते हैं। आयतल कुर्सी कक्ष कुरान आगे पीछे तू रहमान धड़ राखे खुदा सब राखे सुलेमान यद्यपि मैं अपनी व्यस्तता के कारण उसे नहीं कर सकता। यद्यपि मैं अपनी व्यस्तता के कारण उसे नहीं कर सकता। यद्यपि मैं अपनी व्यस्तता के कारण उसे नहीं कर सकता। यद्यपि मैं अपनी व्यस्तता के कारण उसे नहीं कर सकता। यह मैंने खुद लिखा है। मंत्र दे दीजिए, कोई तंत्र दे दीजिए, कोई सिद्धि दे दीजिए और मैं बहुत टालता हूं, टालता हूं। फिर एकाद किसी को कुछ दे देता था पहले लेकिन अब इन प्रकरणों के बाद मैं और भी सतर्क हो गया हूं। अब इन प्रकरणों के बाद मैं और भी सतर्क हो गया हूं। अब इन प्रकरणों के बाद मैं और भी सतर्क हो गया हूं। अब इन प्रकरणों के बाद मैं और भी सतर्क हो गया हूं। अब प्रश्न ये उठता है कि इस प्रकार की अवैदिक पूजा पद्धति भगवतानंद को किस प्रामाणिक संप्रदाय से प्राप्त हुई है? प्रथम तो कोई भी प्रामाणिक संप्रदाय इस प्रकार की अवैदिक पूजा पद्धति का समर्थन नहीं करता। यदि
00:06:18:19 करता भी है तो निग्रह संप्रदाय में प्रमाण्य बुद्धि होने के कारण किसी संप्रदाय द्वारा किए जा रहे इस प्रकार के शास्त्र विरुद्ध कृत का निग्रह ना करते हुए उसका प्रचार करना यह दिखाता है कि भागवतानंद की प्रमाण्य बुद्धि निग्रह संप्रदाय में भी नहीं है। क्योंकि उसने स्वयं निग्रह संप्रदाय को श्रुति सम्मत बताया है। ऐसे में अपने संप्रदाय की सीमा का उल्लंघन करते हुए किसी और संप्रदाय की वेद विरुद्ध सामग्री का समर्थन करना भागवतानंद को उसी के द्वारा परिभाषित निग्रह संप्रदाय को ना मानने वाला सिद्ध करता है। तेरे
⬜ Not used yet · 00:06:54:09 – 00:07:29:03 (0:35)
00:06:54:09 ही द्वारा तू निग्रह संप्रदाय जो तूने तथाकथित बनाया उसका विरोधी सिद्ध होता है। क्यों? क्योंकि जब तू अपनी अवैदिक सामग्री का पक्ष लेता है तो उसके लिए अन्य परंपराओं का आलंबन लेता है। बोलना निग्रह संप्रदाय से प्राप्त हुई है जिससे हमें पता चले कि वो पूर्णतया श्रुति सम्मत नहीं अवैदिक भी है। बोल फंसेगा मैं बता रहा हूं जितना भिड़ेगा उतना फंसेगा। मैं बता रहा हूं। फंसता चला जाएगा। करियर खाना था। तेरा करियर खा जाऊंगा मैं। हैं? खा करियर।
00:07:28:14 इसके साथ
✅ This part is already used · 00:07:29:03 – 00:08:54:04 (1:25)
→ Used in: A · Video मुसलमानी साधना बेचने वाला वैदिक आचार्य at 5:48 ↗
00:07:29:03 ही साथ यदि यह माना जाए कि इस प्रकार की इस्लामिक सामग्री से युक्त पूजा पद्धति उसे निग्रह संप्रदाय से ही प्राप्त हुई है तो ऐसे में निग्रह संप्रदाय को ही वेद विरुद्ध मानना होगा जो भी हो इस प्रकार की सनातन विरुद्ध सामग्री को प्रामाणिक एवं फलदायक मानते हुए उसका प्रचार समर्थन एवं महिमागान करने वाले भागवतानंद को अवैदिक और सनातन विरोधी ना मानकर सनातन वैदिक कार हिंदू धर्म का प्रामाणिक आचार्य क्यों माना जाए? क्योंकि भागवतानंद ने कहा है यही नहीं शक्ति संगम तंत्र एक आठ 32 एक नौ 41 51 पहला खंड आठवां अध्याय 32वा श्लोक पहला खंड नौवा अध्याय 51वा श्लोक इसके अनुसार ब्राह्मण के लिए वेद विरुद्ध आचरण सर्वथा निषिद्ध है। वेद विरुद्ध आचरण सर्वथा निषिद्ध है। काली खंड में वेद रहित भूत प्रेत आदि को सिद्ध करने की विधि का आलंबन लेने वाले को चांडाल कहा गया है। ऐसे में यह जो इस्लामिक पूजा करने करवाने वाले को चांडाल क्यों ना माना जाए? अ्राह्मण क्यों
00:08:44:07 ना माना जाए? पतित ब्राह्मण क्यों ना माना जाए? अयोग्य क्यों ना माना जाए? क्योंकि भागवत आनंद ने कहा है
⬜ Not used yet · 00:08:54:04 – 00:15:48:07 (6:54)
00:08:54:04 यू तो भागवत आनंद अपने लगभग हर दूसरे वीडियो में किसी ना किसी की चारित्रिक छवि को नष्ट करते हुए उस पर आपत्तिजनक रूप से अश्लीलता से भरी टिप्पणियां करता हुआ दिखाई देता है। भले ही सामने कोई दुराचारी हो अथवा साधु हो परंतु फिर भी उदाहरण मात्र के लिए नीचे दिए गए लिंक में अथवा उपलब्ध वीडियो में पाठक पीडीएफ जो लोग देख रहे होंगे उनके लिए लिंक है वैसे इस वीडियो में वीडियो दिखा दिया जाएगा। पाठक यह देख सकते हैं कि किस प्रकार भागवतानंद द्वारा पूरी पीठ के परिकरों पर वहां जाने वाली महिला श्रद्धालुओं पर बिना किसी ठोस आधार के अत्यंत आपत्तिजनक एवं अमर्यादित शब्दों का पूर्णतः निराधार एवं गंभीर आरोप पूर्णत निराधार एवं गंभीर आरोप सार्वजनिक रूप से लगाते हुए सनातन धर्म की सर्वोच्च आचार्य पीठ के प्रति जन सामान्य को अनास्थावान बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इस प्रकार असत्यवादी होते हुए भागवतानंद का शास्त्र विरुद्ध आचरण सिद्ध होता है। ध्यातव्य है कि भागवतानंद के इन्हीं दुष्कृत्यों के प्रति प्रतिकार स्वरूप एक जागरूक हिंदू होते हुए सनातन धर्म की सर्वोच्च आचार पीठ के प्रति
00:10:09:06 जन सामान्य को अनास्थावान होने से बचाने के निमित्त ही हमने विवश होकर भागवतानंद से प्रश्न करते हुए वीडियो बनाना प्रारंभ किए थे। जिसके कारण इसने हमें 100 करोड़ का नोटिस भेजा। तो अब वह टिप्पणियां क्या-क्या हैं? यह सब आपको आगे दिख जाएगा वीडियोस में। सचिव जी का महिलाओं और भाबियों से अवैध संबंध भी रहा है। या मठ में रहने वाले और रायपुर वाले मठ में रहने वाले बहुत अच्छे से जानते हैं। तो अश्लीलता के पुजारण युवती किस अधिकार से भगाने का अधिकार रखती है? गोवर्धन मठ के अन्नपूर्णा भोजन का देखरेख इस नग्नता के प्रचारक युवती को क्यों दिया गया है? वह युवती भोजन प्रसाद पाने से सामान्य भक्तों को क्यों रोकती है? उसने किसने उस विजया श्री को एकाएक मठ में ऊंचा मान सम्मान और पद दिया। वह नीच कौन है? यह लिखा हुआ है। इसमें तीनचार बार विवाह कर चुकी पति बदलू महिला को केवल अर्थ संपत्ति पाने के लालच से क्यों इतना महत्व दिया गया? और भी कई चरित्रहीन महिला युवतियों को सिर्फ धन और वासना की तृप्ति के लिए मठ और शंकर परंपरा के मान्य सन्यासी जो पूरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य जी के तक पहुंचाया जा रहा है। क्यों पहुंचाया
00:11:24:19 जा रहा है? सचिव जी को कितने ही बार पिज़्ज़ा, कोल्ड ड्रिंक, बर्गर, गुटखा, रजनगंधा आदि अभक्ष पदार्थ का भक्षण करते देखा गया है। क्या यह ठीक है? गोवर्धन मठ की अधिष्ठात्री देवी को चढ़ने वाले दान, आभूषण और धन की चोरी। परिकरों का चरित्रहीन महिलाओं, युवतियों के साथ संबंध। ये पहला विषय है। इसमें आगे देखिए समलैंगिकों का गोवर्धन मठ में प्रवेश। समलैंगिक संबंधों के आरोपी ब्रह्मचारी ऋषिकेश को आदि गुरु शंकराचार्य जी के द्वारा स्थापित मठों में ऊंचे पद पर स्थापित कर शंकर परंपरा को विकृत किया जा रहा है। मठ में वेश्यावत्ति को बढ़ावा देना जबकि यहां तक के वक्तव्यों को निर्गत करते समय जो आपने वक्तव्य देख लिए हैं भागवतानंद के पास आने वाले अज्ञात फोन, मैसेज इत्यादि को पढ़ने का नाटक करते हुए दुष्प्रचार किया गया है। यह दिखाया गया है कि मतलब मैं किसी के द्वारा भेजे गए संदेश को पढ़ रहा हूं। ठीक है? वह यह जो वक्तव्य जो दिए गए हैं जो अभी आपने वीडियोस में देखे तो वह किसी संदेह किसी संदेश को पढ़ने के रूप में दिखाया गया है। इस वीडियो में कहीं भी भागवत आनंद द्वारा इन अक्षरों की प्रामाणिकता पर कोई प्रश्न नहीं किया गया। क्यों नहीं किया गया? भाई तुम्हारे पास कहीं से कोई संदेश आया है। वह व्यक्ति कौन है? उसको सामने लाओ या फिर किसी के भी द्वारा
00:12:39:25 कोई भी मैसेज भेज देने को और जो है बढ़िया थाली सजा के परोस दोगे तुम चाहे किसी के लिए भी कोई भी बात हो रही हो तुम्हारे घर की स्त्रियों के रूप में तुम्हें मैसेज भेज दिए जाए उल्टे सीधे और फिर वो पढ़ोगे तुम YouTube पर बिना पुष्टि किए उनकी हम तो ये कुककृत नहीं करेंगे भागवत आनंद पर तुमसे हमें ये पूरी अपेक्षा है कि तुम किस किसी भी हद तक गिर सकते हो। जैसे कि तुम्हारे घर की स्त्रियों को गाली देने वाले व्यक्ति से तुमने हमें जोड़ा।
00:13:18:28 आगे इन आक्षेपों के समर्थन में ही भाव भी व्यक्त किए किए गए हैं। तो पहली बात क्या किया कि अगर वह लेटर को पढ़ने का दिखावा कर रहा है। यद्यपि हो सकता है आए हो कहीं से तो पढ़ने का दिखावा कर रहा है। परंतु इस तरह से पढ़ रहा है। वो कहीं पर भी प्रश्न नहीं उठा रहा है कि यह बात तो जांच का विषय है। ऐसा कुछ नहीं कह रहा है जिससे कि यह सोचा जा सके कि इसका अनुसंधान अभी बाकी है। इस तरह से उसको प्रस्तुत किया गया है कि यह जो जानकारी जो जो पत्र के रूप में इसके पास आई है, मैसेज के रूप में इसके पास आई है या ऑडियो कॉल इसके पास आई है। यह सारी जानकारी बिल्कुल यथावत अक्षरस सत्य है। कोई प्रश्न नहीं उठाया। और उसके बाद क्या किया इसने? उन जो वो जानकारियां जो अज्ञात लोगों के द्वारा अनाधिकृत रूप से भेजी जा रही हैं उन जानकारियों की पुष्टि करने वाले भाव भी प्रस्तुत किए हैं।
00:14:15:22 अच्छा कहीं-कहीं तो इन आक्षेपों से जुड़ी सामग्री पर इस प्रकार से कई वक्तव्य कहे हैं जिनके द्वारा इन आक्षेपों को सत्य के रूप में प्रचारित किया जाना सिद्ध होता है। यदि यह नाटक नहीं भी था कि यह पत्र हम जो कह रहे हैं पत्र पढ़ने का नाटक जो हो रहा है या फिर ऑडियो कॉल तुम ही ना बनवाई हो अगर यह नाटक नहीं बीता तो सुनो दुर्जंतोष न्याय तो भागवतानंद को इतने गंभीर आरोप लगाने वाले को सामने लाना चाहिए उसका नाम बताना चाहिए जिससे कि लोग विश्वास कर सके यह व्यक्ति के बोलने की बात इस व्यक्ति की बात पर हम विश्वास कर सकते यह निर्णय ले सके
00:14:55:06 यदि वह सामने नहीं आना चाहता तो ऐसे में उसकी विश्वसनीयता उसका अस्तित्व अस्तित्व अथवा उस अज्ञात व्यक्ति के पास इन आक्षेपों को सिद्ध करने हेतु क्या सामग्री है? इन सब बातों का मूल्यांकन किए बिना ही उसके द्वारा भेजे गए संदेश को सार्वजनिक रूप से पढ़कर इस प्रकार किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति की छवि को क्षति पहुंचाने का प्रयास करने से बचना चाहिए था। यदि तुम सिद्ध नहीं कर पा रहे तो तुम्हें उसको सार्वजनिक करने से बचना चाहिए। इसी क्रम में अन्य कई वीडियो सहित इस वीडियो में भी आगे भागवतानंद द्वारा स्वयं से भी इसी प्रकार के अनर्गल आक्षेप लगाने के रूप में आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई हैं। जिनमें से दो उदाहरण स्वरूप आगे आपको वीडियो में दिखाए जा रहे हैं। भगवान को पूरी शंकराचार्य से मिलवाया जा रहा है। वेश्याओं को मिलवाया जा रहा है। लेकिन तुम लोग को नहीं मिलने दिया जा रहा है। तब लगता है कि निर्विकल्प आनंद
✅ This part is already used · 00:15:48:07 – 00:16:03:03 (0:15)
→ Used in: A · Video धर्मयुद्ध अहंकार या व्यापार | क्या है पूरा विवाद | at 1:12 ↗
00:15:48:07 वहां इतने साल से क्या सेटिंग कर रहा है। दिव्य चैतन्य को बनाने के लिए शंकराचार्य दिव्य चैतन्य जी अगर शंकराचार्य बन भी जाते हैं या बनने का चिंतन करते भी हैं ना तो इतने टुकड़े करके फिकवा दिए जाएंगे निर्विकल्पानंद के गैंग के द्वारा कि पता नहीं चलेगा दिव्य चैतन्य जी कहां गए
⬜ Not used yet · 00:16:03:03 – 00:17:05:01 (1:02)
00:16:03:03 तो दिव्य चैतन्य जी की यही नीति इस वीडियो में भी स्वतंत्र रूप से निराधार आक्षेप अब यहां पहले उसने पत्र को पढ़ने का दिखावा किया कि मैं पत्र पढ़ रहा हूं है ना जो आक्षेप लगाए पहले पत्र को पढ़ने का दिखावा किया और दूसरे में क्या है कि अब जो है वह स्वतंत्र रूप से निराधार आक्षेप लगाने के साथ-साथ पूर्व वाले वीडियो की भांति भी किसी अज्ञात व्यक्ति के संदेश को पढ़ने के रूप में भी कुछ आक्षेप लगाए गए हैं। जिस संबंध में हम पूर्व में ही अपना पक्ष प्रस्तुत कराए हैं। प्रश्न उठाना चाहिए था और उनको प्रामाणिक अथवा सत्य के रूप में व्यक्त करने वाले वक्तव्य निर्गत नहीं किए जाने चाहिए थे। उनकी पुष्टि किए बिना, अनुसंधान किए बिना। तो यह जो दूसरा वीडियो है, इसमें जो कुछ मुख्य आरोप जो लगाए गए हैं जो हम जो देख पाए, ढूंढ पाए, वो आगे आपको वीडियो में दिखाए जा रहे हैं। देख लीजिए।
00:17:04:19 जींस
✅ This part is already used · 00:17:05:01 – 00:17:15:06 (0:10)
→ Used in: A · Video धर्मयुद्ध अहंकार या व्यापार | क्या है पूरा विवाद | at 10:56 ↗
00:17:05:01 टॉप पहनी हुई स्त्री और कुत्ते को लिफ्ट टू लिप किस दे रही है। मुंह से मुंह लगाकर चुम्मा ले रही है। ऐसी स्त्री पूरी शंकराचार्य जी के साथ साझा कर रही है। बताओ
⬜ Not used yet · 00:17:15:06 – 00:17:39:27 (0:25)
00:17:15:06 महिला का नाम तो नहीं लूंगा क्योंकि हर बात की अपनी एक सीमा होती है। लेकिन उस सीमा में रहते हुए हम आपको संकेत करना चाहते हैं कि सन्यासी की भी एक सीमा होती है और सीमा से बाहर जाकर जब सन्यासी मर्यादा का अतिक्रमण करता है तो उसकी वह सीमा खंडित होकर विप्लव का कारण बनती है। तो हम इस बात की सीमा को समझते हुए आप सब को संकेत करना चाहते हैं
✅ This part is already used · 00:17:39:27 – 00:17:54:24 (0:15)
→ Used in: A · Video धर्मयुद्ध अहंकार या व्यापार | क्या है पूरा विवाद | at 1:31 ↗
00:17:39:27 कि स्वामी निर्विकल्पानंद सरस्वती का जिन महिलाओं के साथ यह अवैध संबंध बताया जाता है। उनमें से बहुत सी महिलाओं की पुत्र वधूओं ने ही अपनी मर्यादा की सीमा में रहते हुए हमको परोक्षत यह संदेश भी भिजवाया था।
⬜ Not used yet · 00:17:54:24 – 00:18:24:00 (0:29)
00:17:54:24 लोग जैसे तथाकथित योगाचार्य स्त्री पर भूल से भी दृष्टि पड़ने पर स्नान के पश्चात ही शुद्धता मिलेगी। ऐसी विचारधारा अनिवार्य नहीं हो जानी चाहिए। श्री नाम की लड़की ने कुंभ शिविर की बिक्री पूरी शंकराचार्य के यहां ₹55,000 प्रति व्यक्ति की और गुरुदेव के नाम से अपने योग की ऑनलाइन कक्षाएं बेचना शुरू कर दी हैं और हम सभी गुरुदेव के शिष्य जिस मूर्खा को इतना भी ज्ञान नहीं कि मृच्छ भूमि में जाना निषेध है वह मठ में कैसे बैठे रहती है? ऊपर से उसका और उसके धर्म विरुद्ध षड्यंत्र का पोषक मठ सिद्ध होगा या नहीं इसका उत्तरदाई कौन है? कौन है? कौन है?
✅ This part is already used · 00:18:24:00 – 00:18:30:16 (0:07)
→ Used in: A · Video धर्मयुद्ध अहंकार या व्यापार | क्या है पूरा विवाद | at 47:37 ↗
→ Used in: A · Video क्या है भगवती के वरदान का सच । भगवती की तपस्या या परी साधना at 1:21 ↗
00:18:24:00 अब जिस स्त्री की बात चल रही थी, जिसका नाम विजया बताया गया था, मैं इस स्त्री को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानता हूं। हां
⬜ Not used yet · 00:18:30:16 – 00:25:56:24 (7:26)
00:18:30:16 ये जरूर है कि शिवश नारायण द्विवेदी इत्यादि लोग जो आह्वान चैनल के हैं वो लोग निकटता से जानते हैं। संवाद इत्यादि होता रहता है। ये सब बातें भी सार्वजनिक हैं। इस पर सही नहीं। उनसे संवाद ही किया। उनके साथ दुष्कर्म भी कर चुके हैं। अब देखिए यह बात कथित तौर पर यहां अब आपको एक वीडियो और दिखाया जाता है। इसमें भी उन आक्षेपों के उन आक्षेपों के समर्थन में उनकी पुष्टि करने के निमित्त यह वीडियो भी बनाया गया है। जो पहले आपने आरोप देख लिए उनकी पुष्टि इस वीडियो में की जा रही है। यह भी देख लीजिए। क्योंकि विजयश्री के पास ऊपर और नीचे दोनों दृष्टिकोण से ऊपर और नीचे मतलब मैं लोक परलोक कहना चाह रहा हूं। बाकी आप जो अर्थ समझना चाहे वो समझ सकते हैं। भाई आपकी चिंतन नियंत्रण थोड़े है। हर वो चीज है जो मेरे पास नहीं है। तो जो भी है उसको पता नहीं है शायद। अगर वो सच में भोलीभाली है जो कि है नहीं मुझे नहीं लगता। जिस लेवल पर उसने अपने अधंगी तस्वीरें सार्वजनिक कर रखी हैं और जिस प्रकार की पुस्तकें उसने लिख रखी हैं। मुझे नहीं लगता कि वो महिला किसी छोटे-मोटे प्रोजेक्ट के चक्कर में है और जितने शीघ्रता से सीधे पूरी शंकराचार्य जी पांडे जी अभी ध्यान दीजिएगा। शिवश इतनी सिंपिंग कर रहा है। कि ये लड़की खुलेआम कहे कि यूनिवर्सिटी आचार्य का टाइटल नहीं और पूरी के शंकराचार्य जी के चेले कमेंट करते हैं मेरे वीडियो में कई बार कि विश्वविद्यालय को आचार्य की उपाधि मिली है। देख
00:19:45:22 रहे हैं इन लोगों का विरोधाभास ये रिश्ता क्या कहलाता है? हमको समझ में नहीं आता है। तुम्हारे जैसे ही युवाओं को धर्म में रुचि रखनी चाहिए। चाहे विजय जो है वो अंडरवियर में और ऊपर के ब्रेट में फोटो खिंचाए घूम रही हो। लेकिन विजय तुम्हारी तो वाणी में हमको स्वामी करपात्री जी का रागस्तव वाला लक्षण दिखाते हुए वचन का अनुभव होता है। इतना ही नहीं यह कुछ बातें वह न्यायपालिका के पर्सपेक्टिव से भी लिखी है क्योंकि भाई न्यायपालिका में जा रहे हैं तो यह भी तो पता चले न्यायपालिका को न्यायपालिका के बारे में भी इसने क्या कहा है जब न्यायपालिका को लेकर के उसकी शरणागत होकर के हमसे अपनी रक्षा करना चाह रहा है ये व्यक्ति है ना कि हम इसके दुराचरण इसके जो इसके द्वारा किया जाने वाला की जाने वाली जो वितंडा है उसका प्रतिकार ना करें इसलिए जो न्यायालय की शरण ले रहा है तो न्यायालय को पता होना चाहिए ना कि न्यायालय के लिए इस व्यक्ति ने कितनी धर्तता से क्या बोला है। आगे चलते हैं। भागवतानंद को अद्वैत से मेल खाने वाले अव्यक्ता द्वैत सिद्धांत के रूप में ब्रह्म तत्व का ज्ञान देने वाले गुरु कौन है? यह विषय तोचाराधीन है। परंतु इतना सर्वविदित है कि भागवतानंद ने कई बार पूरी मटके वर्तमान शंकराचार्य स्वामी निश्चनंद सरस्वती जी
00:21:00:26 महाराज के चरणों में बैठकर आध्यात्म का ज्ञान प्राप्त किया है। तो गरुड़ पुराण के अनुसार गरुड़ पुराण में कहा गया है कि जिससे आप थोड़ा सा भी पढ़ाई कर लेते हैं वो आपका गुरु होता है। पूरी के शंकराचार्य भी भागवतानंद के गुरु सिद्ध होते हैं। परंतु भागवत आनंद सीधे तौर पर पूरी शंकराचार्य के विषय में अनेक बार अमर्यादित ढंग से उपस पूर्वक वक्तव्य निर्गत करता है। तूतग की भाषा करता है। हम यह कहता है कि शंकराचार्य जो है किसी प्रवचन में आने के लिए करोड़ों रुपए लेते हैं। हम ये आक्षेप लगाता है। ऐसे नहीं मैं आ जाता हूं। आप एक करोड़ देकर चारों शंकराचार्य को बुलाकर ले आइए। आपका सामर्थ होगा। वो आ जाएंगे। हमको कोई मतलब नहीं है। ग्रहचार्य को बुलाने के लिए धन नहीं साहस और सदाचरण चाहिए। बता दे रहा हूं। और इसके दोगलेपन की बात तो हमने वहां बता ही दी आपको। एक तरफ कहेगा विश्व के वो हैं धर्म के वरिष्ठतम प्रतिमान और दूसरी तरफ ये आरोप लगाएगा वो मुसलमानों के हितषी हैं। सनातन धर्म के विरोधी है वो। हैं। अरे थोड़ा बहुत जो धर्म बच गया है रह जाने दे भाई। इन आचार्यों
00:22:16:12 पर अनास्था जगा देगा ना इन आचार्यों के प्रति तो तेरे जैसे मुंह वाले के कभी अनुगत चल सकेगी क्या दुनिया देखा है अपना चेहरा कभी धर्म रक्षा के नाम पर आचार्यों के लिए विष्ठा निकलती है तेरे मुंह से [संगीत] यह अंत नहीं है। उदाहरण है। इन वीडियोस के पूर्व ये जो हमने आपको दिखाए हैं और उपरांत भी कई ऐसे आपत्तिजनक वक्तव्य निर्गत किए जा चुके हैं। वर्तमान में भी लगातार किए जा रहे हैं जिनके कारण भागवतानंद के विरुद्ध को कोई भी ठोस कारवाई ना हो तो यह अन्याय होगा। इसीलिए ठोस कारवाई हर प्रकार से कर रहे हैं।
00:23:16:14 अच्छा इसके अलावा एक बात और है इस सब प्रसंग से हटकर इसकी नीचता की पराकाष्ठा देखो कि यदि कोई व्यक्ति अज्ञता वशव वश अपने घर में कुत्ता पाले हुए है और उसके प्रति स्नेह प्रकट करता है तो यह व्यक्ति क्या कह रहा है कि कुत्ते के साथ अपनी माता को सुला दो। इतनी नीचता साथ कुत्ता सुला रहे हो अपने साथ बिल्ली सुला रहे हो अपने साथ सूअर पाल रहे हो अपने साथ कुत्ता सुला रहे हो उससे रक्षाबंधन कर रहे हो हां कुत्ता के माथा में तिलक लग रहा है कुत्ता को राखी बांधी जा रही है कुत्ता से राखी बंधवाई जा रही है अरे भैया कुत्ता को अपनी मां के पास भेजो एक आध भाई पैदा करवा लो बुरा लगेगा सुनने में लेकिन सुनो और अब जो गुरु का अपमान है वो अनेक शास्त्र वचनों द्वारा दुराचरण कहा गया है कुछ उदाहरण हम दे देते देते हैं। अध्यात्म का ज्ञान देने वाला गुरु के गुरु का सम्मान ना करने पर नरक की प्राप्ति होती है। गरुण पुराण दो चार 49 सज्जनों गुरुजनों की निंदा करने वाले यम यम मार्ग में प्रताड़ित प्रताड़ित होते हैं। गरुण पुराण दो चार नौ गुरु तथा अन्य पूज्य जनों का अपमान करने वाले वैतरणी नदी में गिरते हैं। गरुण पुराण दो चार 14
00:24:31:20 ऐसे लोग नरकगामी होते हैं। गरुण पुराण दो चार 36 जिसकी भगवान में जितनी भक्ति है उतनी यदि भक्ति गुरु में भी है तभी वह व्यक्ति परमार्थ को प्राप्त कर पाता है। श्वेता शतपनिषद छ 23 तो सनातन धर्म के सभी प्रामाणिक शास्त्रों द्वारा किसी को भी अब ये अगला आ रहा है। अभी तक तो गुरु की अवेलना की थी। अब इसने कैसे अशास्त्रीयता दिखाई है? सनातन धर्म के सभी प्रामाणिक शास्त्रों द्वारा किसी को भी गाली देना निषेध किया गया है। किसी भी स्थिति में जबकि स्वयं को सनातन धर्म का प्रामाणिक आचार्य कहने वाले भगवतानंद द्वारा अत्यंत निर्लज्जता पूर्वक पुरुषों की तो बाद दूर महिलाओं तक को अश्लील टिप्पणियां सहित गालियां भी दी गई हैं। उदाहरण के लिए आपको यहां प्रस्तुत कर दिया जाएगा। [संगीत]
00:25:24:00 भागवतानंद स्वयं उसके द्वारा गाली दिए जाने सहित भविष्य में भी दृढ़ता पूर्वक गाली देने की गाली देते रहने की घोषणा कर रहा है। साथ ही साथ वह स्वयं इस कृत्य को शास्त्र विरुद्ध भी बता रहा है। मैं मानता हूं कि यह शास्त्रीय है। यह भी देख लो। अशास्त्रीय भी कह रहा है। इसको भगवती से वह प्राप्त है ना कि अशास्त्रीय कार्य नहीं करेगा। है ना? तो कर रहा है। तुम मेरा क्या दुष्प्रचार करोगे? मैं स्वयं वो स्क्रीनशॉट अटैच करके वीडियो में डाल रहा हूं। मैं गालियां देता हूं। मैं
✅ This part is already used · 00:25:56:24 – 00:26:04:14 (0:08)
→ Used in: A · Live Discussion with Supporter Of Bhagwatanand at 41:36 ↗
00:25:56:24 गालियां देता हूं और मैं गालियां दूंगा। कैसे? कब? किस परिस्थिति में यह देखो। अब लोग कह रहे हैं इसका शास्त्रीय विधान है क्या? बिल्कुल नहीं।
⬜ Not used yet · 00:26:04:14 – 00:26:29:27 (0:25)
00:26:04:14 लेकिन अब समस्या क्या है यहां पर? अब कुछ लोग तर्क दे रहे थे कि गाली तो भगवान कृष्ण ने भी नहीं दी कभी किसी को। अरे भैया उनके पास माथा काटने का सिस्टम उपलब्ध था। भगवान श्री कृष्ण के पास सुदर्शन चक्र था। इसीलिए उन्होंने चक्र का प्रयोग करके गाली देने वाले का मस्तक उड़ा दिया। मेरे पास नहीं है तो मैं क्या करूं? वाचिक प्रतिकार भी नहीं करूं। तो गाली देना शास्त्रीय है। बिल्कुल सही बात। लेकिन मैंने क्या पूर्व पक्षी बनकर गाली दी है? क्या
✅ This part is already used · 00:26:29:27 – 00:26:57:18 (0:28)
→ Used in: A · Live Discussion with Supporter Of Bhagwatanand at 13:19 ↗
00:26:29:27 है? गाली। तो मैं गाली देता हूं। यदि कोई गाली सुनने का काम करे। मैं ऐसा संत नहीं हूं कि तुम मुझे मां बहन की गालियां देते रहो तो मैं माथा झुका कर सुन लूंगा। ऐसी सारस्वत सिद्धि हमारे पास नहीं है कि कोई मुझे गालियां दे और मुझे अपनी सिद्धि बचाने के चक्कर में माथा झुका कर सुनना पड़े। बिल्कुल नहीं। कदापि नहीं। किसको मानोगे? वेद को मानोगे प्रमाण। पुराण को मानोगे, स्मृति को मानोगे, तंत्र को मानोगे, इतिहास को मानोगे, आधुनिक नीतिकारों को मानोगे, किसको मानोगे? जहां से मानोगे, वहां से प्रमाण देंगे। चलो प्रारंभ।
⬜ Not used yet · 00:26:57:18 – 00:32:06:02 (5:08)
00:26:57:18 तो गाली देना कितना शास्त्री है यह तो भागवत ने स्वयं ही बता दिया। परंतु साथ ही साथ हम गाली हम यहां गाली देने के निषेध करने वाले कुछ शास्त्र वचन उपलब्ध करा रहे हैं। जिसकी सदा वाणी शुद्ध हो वही वेदांत के फल को पाता है। मनुस्मृति दो3 मनवाणी द्वारा किसी से द्रोह ना करना धर्म है। महाभारत शांति पर्व 162.21 कठोर वचन बोलना व्यसन है। मनुस्मृति 7 51 तथा व्यसनी नरकगामी होता है। मनुस्मृति 753 जिससे किसी को भी दुख पहुंचे ऐसी वाणी ना बोले दो 161 मनुस्मृति गाली अपशब्द आदि प्रयोग करने पर दंड विधान दिया गया है 8238
00:27:49:10 82 68 से 82 [संगीत] 78 तक जो स्वभाव का कठोर हो, दूसरों को मर्म पहुंचाता हो, तीखी बातें बोलता हो और कठोर वचन रूपी कांटों से जुड़कर मनुष्यों को पीड़ा देता हो, उसे अत्यंत लक्ष्मीहीन अर्थात अभागा समझे वह कड़वी बोली के रूप में अपने मुंह में बंधी हुई एक पिशाचिनी को ढो रहा है। महाभारत [संगीत] आदि पर्व 87 नौ जब कोई किसी को उसकी माता बहन इत्यादि से जोड़ते हुए गाली देता है तब गाली के रूप में कहा गया कथन स्वतंत्र रूप से असत्य भाषण तो होता ही है। साथ ही साथ जिसको गाली दी जा रही है उसके सहित जिस महिला अथवा पुरुष से जोड़कर उसे गाली दी जा रही है। उक्त महिला सहित पुरुष पर भी उनका चरित्र दूषित होने का आरोप भी लग जाता है। अतः इस दृष्टि से गाली के रूप में तथा स्वतंत्र रूप से भी भागवतानंद द्वारा अनेक निर्दोष जनों पर निराधार रूप से अत्यंत गंभीर आक्षेप लगाए गए हैं। जबकि सनातन धर्म शास्त्रों द्वारा झूठी गवाही देना झूठा आक्षेप लगाना निषेध किया गया है। झूठ
00:29:04:14 बोलने पर सभासद मारे जाते हैं। मनुस्मृति 8 14 झूठ बोलने पर दोषी होता है। झूठ बोलने वाला दोषी होता है। मनुस्मृति 836 झूठी गवाही देने पर दंड का विधान किया गया है। मनुस्मृति 8257 [संगीत] किसी व्यक्ति को उसकी माता अथवा बहन से जोड़ते हुए अथवा किसी महिला को सीधे तौर पर गाली देने पर असत्य भाषण एवं झूठी गवाही देने के रूप में शास्त्र के किन वचनों का उल्लंघन होता है। यह हम पूर्व में बता चुके हैं। मगर धातव्य यह है कि भागवतानंद ने गाली के साथ-साथ स्वतंत्र रूप से विजय श्री सहित कई महिलाओं पर दूषित होने का असिद्ध आरोप लगाया है। असिद्ध और मनुस्मृति में लिखा हुआ है आठवें अध्याय के 225वें श्लोक के अनुसार कि किसी महिला पर दूषित होने का आरोप लगाकर उसे प्रमाणित ना कर पाना। सिद्ध ना कर पाना विशेष रूप से दंडनीय है। कर सिद्ध। कर सिद्ध वैश्या कहा है ना तूने स्त्रियों को मठ में आने वाली नीच सिद्ध कर उन्हें वैश्या
00:30:16:19 इस समूचे प्रत्युत्तर द्वारा अनेकानेक बार भागवतानंद का असत्यवादी होना सिद्ध हो गया शास्त्र के विरुद्ध जाना सिद्ध हो गया स्वयं उसने कह दिया कि गाली देना शास्त्रीय है इतना तो मानना पड़ेगा ना उदाहरण के लिए नीचे दिए गए लिंक में आगे वीडियो आपको दिखा दिया जाएगा। पीडीएफ में लिंक मिल जाएगा। भागवतानंद द्वारा पूरी मठ के परिककरों पर उपरोक्त बताए गए आक्षेपों को पुष्ट करने के समर्थन में कुछ वीडियो दिखाने की बात कही जा रही है कि वीडियो सुरक्षित है। आरोप लगा दिया। बहुत सारे वीडियो सुरक्षित है, साक्ष्य सुरक्षित है, गवाह सुरक्षित है। तो यह ठोस प्रमाण दी जाने की बात कही जा रही है। जो कि आज न्यायालय तक की शरण लेनी पड़ गई। आज तक इसने सार्वजनिक नहीं किया। इसने ये कुकृत तो किए मगर इसने वो ठोस प्रमाण आज तक नहीं किए जिनके आधार पर यह कहता है कि मैं जो है आरोप लगा रहा हूं। हम जिससे स्पष्ट है कि भागवतानंद द्वारा इस वीडियो में प्रमाण के नाम पर दिखाई गई जो वह सामग्री है अप्रासंगिक जिसका प्रसंग से कोई
00:31:31:20 मतलब ही नहीं है जिससे कुछ भी सिद्ध नहीं होता उसके अतिरिक्त कोई ठोस प्रमाण नहीं है दिखाने के लिए ऐसे में उसको झूठ बोलने वाला असत्य भाषण क्यों ना माना जाए वरना दिखा समलैंगिकता वैश्या गमन ये सब के प्रमाण दिखा नहीं तो तेरा वो वचन झूठा होगा मेरे पास प्रमाण सुरक्षित है
00:32:03:13 संकेत में अपनी बात कह दी है रही बात प्रमाण की
✅ This part is already used · 00:32:06:02 – 00:32:31:27 (0:26)
→ Used in: A · Video धर्मयुद्ध अहंकार या व्यापार | क्या है पूरा विवाद | at 22:15 ↗
00:32:06:02 तो जितना प्रमाण चिल्लाओगे तुम्हारी ही फजीहत होगी तुम्हारी ही बदनामी होगी फिर भी तुमने मांगा है तो एक सैंपल दे दे रहा हूं जैसे पहले एक सैंपल दिया था हमने ना कीचड़ होली वाला वैसे ये भी एक सैंपल दे रहा हूं इसके आगे भी बहुत सारे सैंपल अगर मांगोगे तो दिए जाते रहेंगे समय अनुसार। बाकी जितने लोगों को ऋषिकेश ब्रह्मचारी ने धमकी दी है, जितने लोगों के सामने इस प्रकार के समलैंगिक गतिविधियां की है, वह सारे लोग भी हमारे संपर्क में हैं और सारे लोगों के पास प्रमाण सुरक्षित हैं।
⬜ Not used yet · 00:32:31:27 – 00:33:51:01 (1:19)
00:32:31:27 हम ऐसे में स्वतंत्र रूप से असत्य भाषण का निषेध शास्त्र के किन वचनों द्वारा किया गया है? यह बताना आवश्यक तो नहीं है। फिर भी विपक्ष की संतुष्टि के लिए भागवत आनंद की संतुष्टि के लिए यहां हम एक मात्र राम का नाम लिख दे रहे हैं। राम हां मैं श्री नहीं लगाता राम के आगे मैं नहीं लगाता। मुझे राम से बल प्राप्त होता है। राम में ही सब कुछ है। प्रसंगु श्री लगा दूं, प्रभु लगा दूं। मगर मेरे लिए राम पर्याप्त है।
00:33:11:10 नहीं लगाता मैं श्री राम राम राम जपता हूं मैं राम राम कहता हूं मैं राम के पीछे चलने का प्रयास करता हूं तो जैसे लुप्ताचार गुप्ताचार के पीछे चलेंगे क्या हमें राम प्राप्त है हमें गुरु प्राप्त है गोविंद प्राप्त है ग्रंथ प्राप्त है तू है कौन सिंगल चेचिस जहां एक और वाल्मीकि रामायण 337 13 के अनुसार श्री राम धर्म का साक्षात स्वरूप है। वहीं दूसरी ओर साक्षात धर्म का स्वरूप भगवान श्री राम कहते हैं।
✅ This part is already used · 00:33:51:01 – 00:33:57:06 (0:06)
→ Used in: A · Video शबरी शंका समाधान : भाग १ माता शबरी ब्राह्मण या शूद्र? क्या प्रभु श्रीराम ने जूठे... at 12:37 ↗
00:33:51:01 मैंने पहले कभी भी झूठी बात नहीं कही है। और भविष्य में भी कभी असत्य नहीं
⬜ Not used yet · 00:33:57:06 – 00:51:19:03 (17:22)
00:33:57:06 कहूंगा। यह है राम। यह है धर्म। तेरी तरह नहीं। प्रमाण सुरक्षित है। जब कहा जाए दिखाओ तो इधर उधर की बातें करने लगेगा। वाल्मीकि रामायण 4 82 मैंने कभी भी भागवतानंद पर अब ये वो वाली बात है जो इसने आरोप लगाया है ना अब ये वो वाली बात है जिसमें इसने आरोप लगाया है कि इसने जो है मुझ पर यौन रोगी होने का कथन कहा है तो यद्यपि मैंने भागवतानंद पर इस तरह का कोई आरोप नहीं लगाया हां प्रश्न पूछा क्योंकि बात यह भी प्रश्न पूछ रहा है ना सार्वजनिक रूप से असिद्ध बातों को यह तो आक्षेप के रूप में प्रस्तुत कर रहा है तो हम प्रश्न भी नहीं पूछ सकते वह भी तब हम
00:34:48:21 इस संबंध में अनुसंधान पूर्वक स्पष्टीकरण मात्र मांगा था मैंने तो और जिसके प्रतिकार स्वरूप भागवतानंद द्वारा 100 करोड़ की मानहानि का दावा नोटिस मुझे भेजा गया जबकि आगे आप वीडियो देख लीजिए यह व्यक्ति व्यक्ति स्वयं कह रहा है कि मेरा यदि कहीं कोई आचरण पर आपको संशय हो शास्त्र विरुद्ध दिखे लगे प्रतीत हो तो आप मुझसे सार्वजनिक रूप से पूछिए वही तो किया वही किया था ना और जो मेरे कृत या वक्तव्य के विषय में सोच रहा है कि मैं गलत हूं मैं अशास्त्रीय पक्ष में हूं तो सार्वजनिक रूप से सभा में वो हमसे प्रश्न कर सकता है स्पष्टीकरण मांग सकता है हम तो अब यदि यदि मैंने तेरे ही कथन के अनुसार तुझसे सार्वजनिक रूप से पूछ लिया कि तू जोधपुर गया था कि नहीं अपने गुप्त रोग का इलाज करवाने के लिए चिकित्सा प्राप्त करने के लिए या गुप्त या जोधपुर के चिकित्सक से संपर्क किया था कि नहीं तो आज तूने मुझे महारानी का नोटिस भेज दिया इसका मतलब क्या हुआ कि तू अपने वचन से मुकर गया सार्वजनिक रूप से तुझसे प्रश्न ना किए जाए
00:36:04:09 जहां पर तू गलत दिख रहा हो यदि वह गंभीर विषय हो तो तुझसे प्रश्न ना किए जाए तो तूने क्यों कर दिए प्रश्न? तूने क्यों आक्षेप लगा दिए सार्वजनिक रूप से? जबकि वो असिद्ध थे। हम प्रश्न नहीं कर सकते और तू आरोप लगाएगा निर्णायक होगा। जहां एक और न्यायालय एवं न्यायाधीशों का मुख भी ना देखने की शिक्षा भागवतानंद द्वारा प्रचारित की जाती है। हम न्यायाधीशों में न्यायाधीश के लिए क्या-क्या कहा है? क्या कहा है? जुारी, शराबी, कबाबी, व्यभिचारी हैं। क्राइम कैसे किया जाए? यह योजना बनाने वाले कोठे के दलाल बैठे होते हैं। कभी मुंह नहीं देखना है। कभी मुंह नहीं देखना चाहिए ऐसे लोगों का, ऐसी अदालतों का, ऐसे न्यायालयों का। फिर महारानी का दावा भेजकर अपने इस अपनी शिक्षा की वो कर दी ना। विरोध कर दिया ना। अगर तू यह कहे कि भैया हमने तुझे मजबूर किया। हमने तुझे विवश किया। यानी कि सामने वाले की प्रतिक्रिया
00:37:19:13 के अनुसार तुम अपने सिद्धांतों को अपने वचनों को तोड़ दोगे ना नहीं देना चाहिए ना ऐसा सिद्धांत जिसको तोड़ने की आवश्यकता पड़ जाए रामो नाभि भाषते राम दो प्रकार की बातें नहीं करते जो भी बोलते हैं सोच समझ के बोलते हैं कि आज मैं लोकतंत्र लोकतांत्रिक व्यवस्था में हूं ऐसा तो नहीं कल को मुझे न्यायालय का आलंबन लेना पड़ जाएगा। तो इसलिए मुझे यह बात नहीं कहनी चाहिए कि न्यायालयों का न्यायाधीशों का मुंह भी नहीं देखना चाहिए। अब देख मुंह
00:38:02:26 तो यहां पे तेरे जो है ये दोगले वचन की पुष्टि हो गई। हो गई ना? तो भागवतानंद के दोगले वचन की पुष्टि यहां से भी हो गई। कोई अदालत रक्षा नहीं करेगी उस समय। तो जो अदालत हमारी रक्षा नहीं कर सकती। हम बार-बार न्याय के लिए उस अदालत का मुख क्यों देख आया और सीधे पूरी पीठाधीश्वर से मिला और किसी संप्रदाय से नहीं मिला उस समय और किसी पीठ से भी नहीं मिला। उधर से आने में तीन-तीन पीठ रास्ते में पड़ते हैं अलग-अलग दिशाओं में लेकिन सीधे मिला पूरी वाले से। अच्छा कोई व्यक्ति कहे मैं गोवर्धन गोवर्धन पूरी जगन्नाथ पुरी का पंडा हूं। कोई व्यक्ति कहे मैं गोवर्धन मठ का शंकराचार्य हूं। कोई कहे कि मैं गोवर्ध मैं पूरी पीठ का पीठाधीश्वर हूं। तीनों एक विषय नहीं है। पूरी में केवल पूरी पीठ का अर्थ यह नहीं होता कि पूरी पीठ केवल शंकराचार्य जी की पीठ को कहा जाता है। वहां पर रामानुज संप्रदाय की भी पीठ है। पूरी में है तो पूरी पीठ के रामानुजाचार्य भी हो सकते हैं। जो पूरी में रामानुजाचार्य जी की पीठ होगी उसको रामानुज पीठ रामानुज गंध कहेंगे। जी स्वामी इत्यादि का मठ है वहां पर। तो पूरी पीठ का आचार्य होना। पूरी में गोवर्धन मठ का शंकराचार्य होना। पूरी का देवालय का अर्चक होना एक ही बात थोड़ी है। की मुझे यह भी सूचना मिली कि ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती
00:39:18:09 भी इसके कार्यक्रमों में आते जाते रहे। अब स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के मत में अगर हम देखें तो अपने निकट संबंधियों के मृत्यु के बाद भी देवकीन नंदन ठाकुर जो सामान्य मुंडन इत्यादि भी नहीं कराता, वो धर्म रत्न था। और शंकराचार्य बनने के बाद भी कोई बदलाव नहीं है। अपितु कुमार स्वामी जैसे पाखंडी के धर्मद्रोही के जो स्वयं को ब्रह्मर्षि कहने के बाद भी संतुष्ट न हो सका तो महा ब्रह्मर्षि कह रहा। अब ये शंकराचार्य बन गए हैं या बना दिए गए हैं या उस रूप में प्रचारित हो रहे हैं। अगर यह इस प्रकार का कृत करेंगे तो शंकराचार्य जी की परंपरा जो लुप्त हो जाएगी। जिसकी भविष्यवाणी शक्ति संगम तंत्र में है कि मुख्य परंपरा जो शंकराचार्य जी की वो छिन्न हो जाएगी। भिन्न हो जाएगी, विखंडित हो जाएगी। वो क्यों हो जाएगी? ऐसे ही लोगों के ऐसे कुकृत्यों के कारण हो जाएगी। जहां पर स्वयं को शंकराचार्य के रूप में स्थापित करने वाले व्यक्तित्वों के द्वारा भी कुमार स्वामी जैसे दंडनीय और बहिष्कृत किए जाने योग्य व्यक्ति के प्रति इस प्रकार का व्यवहार किया जाएगा। उसके कार्यक्रमों में वो सम्मिलित होंगे। उसके साथ उठेंगे, बैठेंगे और उसको उस रूप में मान्यता प्रदान करेंगे। अभी क्या है केवल अपने मठ में डोनेशन आ जाए। हमारे शिष्य समूह बड़े लंबे चौड़े हो जाए। हम सनातन धर्म के सर्वोच्च के रूप में बैठ जाएं। यहां तक कि सगे गुरु भाई हैं
00:40:33:13 दोनों लेकिन द्वारिका वाले परम आराध्य नहीं बन पाए और परम धर्माधीश नहीं बन पाए लेकिन ज्योतिष पीठ वाले परम आराध्य भी बन गए परम धर्माधीश भी बन गए और बयान क्या जारी करते चल रहे हैं कि शूद्र वर्ण के पास पैसा नहीं था समय नहीं था इसलिए बेचारे वेद ना पढ़ सके टीपू सुल्तान के समय परशुराम भाव इत्यादि के द्वारा जो मराठा सेना चल रही थी वहां पर पिंडारी मुसलमानों के द्वारा मराठा सेना के बैनर तले पिंडारी मुसलमानों के द्वारा श्रृंगेरी पर जो आक्रमण करके लूट मार मचाई गई थी उससे त्रस्त होकर तात्कालिक शंकराचार्य ने जो टीपू सुल्तान से सहायता मांगी थी और पाई भी थी वो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण घटना है श्रृंगेरी के इतिहास में पूरे सनातन धर्म के इतिहास में लेकिन वह जो द्रव्य दोष लगा है श्रृंगेरी को उसके कारण श्रृंगेरी की बुद्धि में ऐसी राजनैतिक विकृतियां घुसती जाती हैं जो कई बार उनसे साईं के चमचों की भी विरुदावली बखान करवा देती है जो लोग साईं को श्रद्धा रहने देनी है कि नहीं रहने देनी है आप लोगों को आप कहते हैं कि सरस्वती जो है शंकराचार्य नहीं है श्रृंगरी ने अभिषेक किया तो श्रृंगरी अराजक हो गई मतलब आपके लिए बाकी तीन पीठ कुछ नहीं है वहां के लोग शिव स्वरूप नहीं है वहां के लोग शंकराचार्य नहीं है वहां के
00:41:48:14 लोग कुछ नहीं बस जो है आप ही है तो एक जोत्वाकांक्षा होती है ना कि पूरे हिंदू धर्म में एकमात्र सर्वोच्च हम बने रहे हमारे अलावा कोई भी नहीं पहले तो बाकी आचार्यों को नकार दिया इन लोगों ने रामानुजाचार्य मधवाचार्य सब गरुड़ पुराण दो चार 11 और दो एक 15 के अनुसार मन में स्वयं को प्रतिष्ठित समझने वालों का भी शास्त्र द्वारा विरोध किया गया है। जहां एक ओर भागवतानंद की दृष्टि से दिखाई देने वाले अपमान के प्रतिकार स्वरूप भागवतानंद ने हमारे विरुद्ध आपत्ति प्रकट की है। वहीं दूसरी ओर शास्त्रों के अनुसार ब्राह्मण मात्र को सम्मान की नहीं अपितु अपमान की चिंता होनी चाहिए। मनुस्मृति के अनुसार क्योंकि ब्राह्मण को चाहिए मनुस्मृति के अनुसार कि वह सम्मान के विष सम्मान को विष के समान समझे डरता रहे और अमृत के समान अपमान की सदा चिंता करता रहे। अर्थात तिरस्कार होने पर खेद ना करे। मान अपमान दोनों को सह ले। ऐसे में कम से कम स्वयं को प्रामाणिक आचार्य घोषित करने वाले व्यक्ति द्वारा तो इस सिद्धांत का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। हम मनुस्मृति विरोधी हो गए, गरुड़ पुराण विरोधी हो गए।
00:43:04:19 एक आचार्य का जीवन अत्यंत पारदर्शी होना चाहिए जिससे कि उसे देखकर उसके द्वारा किए जाने वाले धर्माचरण की स्थापना उसके शिष्यों में हो सके। गालीबाज शिष्य तैयार होंगे ना तुम्हारे तो गालीबाज। मेरे पास शस्त्र नहीं है इसलिए मैं गालियां दूंगा। इसी नाम पर बने हैं नए-नए मत संप्रदाय दुनिया में यह पंथ मत इसी नाम पर बने हैं। बस जहां मन आया कोई भी निर्णय ले लो। शास्त्र में उसका अभाव है। इसलिए आज मैंने इसलिए सिगरेट पी ली। आज मैंने इसलिए दूसरे विवाह कर लिया। आज मैंने इसलिए चार विवाह अलऊ कर दिए। आज मैंने इसलिए अनगिनत स्त्रियां जो हर वह स्त्री जो स्वयं को मुझे सौंपना चाहे हर वो स्त्री जो है मेरे लिए वो है हलाल स्मृति 1237 के अनुसार जिन कार्यों को करते समय छिपाने का भाव उत्पन्न हो वह कार्य तामसिक होते हुए त्याज्य कहे गए हैं। एवं जिन कार्यों को करते समय बताने का भाव उत्पन्न हो वह कार्य सात्विक अर्थात ग्राह करने योग्य कहे गए हैं। इसी कारण
00:44:19:22 से मनुस्मृति अध्याय दो 79 से दो 180 तथा अध्याय चार तीन से चार और 45 से 46 के द्वारा इस तत्व की पुष्टि और अधिक हो जाती है क्योंकि यहां बताया गया है कि ब्राह्मण को नग्न होकर नहाना नहीं चाहिए। किसी की निंदा नहीं करनी चाहिए और ना ही प्राण रक्षा से अधिक धन संचय करना चाहिए। तो क्या भागवतानंद के संबंध में प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों द्वारा प्राप्त तथ्यों के अनुसार स्वयं को प्रमाणिक आचार्य कहने वाले भागवतानंद का इन छिपाने वाले कार्यों से दूर रहने के निर्देश का पालन दिखता है। जो ये छिपाने वाले कार्य समझ रहे हैं ना गाली देना मंच पर बैठकर गाली दे वही कार्य कर YouTube पर जो तू मंच पर बोल पाए
00:45:20:24 अन्यथा क्या सिद्ध होगा? छिपाने वाले कार्य। तामसिक कार्य सात्विक नहीं। ठीक है? इसी कारण से फिर क्या है? तो जहां एक और मत्स्य पुराण 145 30 145 वे अध्याय के 30 वे श्लोक द्वारा अत्यंत विनम्र एवं मृदुल स्वभाव वाले को आचार्य कहा गया है। वहीं दूसरी ओर भागवतानंद द्वारा अश्लील टिप्पणियां की जाती हैं। अत्यंत निंदनीय कठोर वचन कहे जाते हैं। झूठे निराधार आरोप लगाए जाते हैं। अपने ही वचनों का विरोध किया जाता है। असत्य भाषण किया जाता है। क्या इनमें से अधिकांशतः छिपाने वाले कर्म नहीं है? क्या वह अपनी भागवत कथा के मंच पर न्यायालय में माता और बहनों से जुड़ी अश्लील गालियां बकेगा? न्यायालय में बकेगा? अपने मंच पर बकेगा? गालियां? है ना छिपाने वाले भाव? तो यदि नहीं तो उसे छिपाने वाले तामसिक कार्य करने वाला मानते हुए उसके द्वारा मनुस्मृति के मर्यादा का उल्लंघन क्यों ना माना जाए क्योंकि भागवतानंद ने कहा है यही
00:46:36:00 नहीं भागवतानंद द्वारा उसके गुरु के संबंध में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में स्पष्ट ना बताते हुए बताने की घोषणा की जाती है। यह कैसी सात्विक परंपरा है जिसे छिपाना पड़ रहा है। तामसिक ऐसे तामस आचरण करने वाले को सात्विक परंपरा का आचार्य किस प्रकार माना जाए? क्योंकि भागवतानंद ने कहा है शास्त्रों एवं भागवतानंद के अनुसार भी आचार्य सदाचारी होना चाहिए। जिसे देखकर उसके शिष्य भी स्वयं में सदाचरण को स्थापित करते हो। हो सकता है भागवतानंद द्वारा इस व्याख्या में उठने वाले प्रश्नों को नकारने का प्रयास किया जाए। परंतु गाली बकने की बात तो उसने स्वयं स्वीकार की है। उसे किस प्रकार नकारा जाएगा? बोल।
00:47:25:22 क्या सदाचार और धर्माचरण के नाम पर उसके शिष्यों की टोली में माताओं और बहनों से जुड़ी हुई गालियों की स्थापना की जाएगी। उनके आचरण में [संगीत] लतखोर। जिस आचरण को भागवतानंद ने स्वयं शास्त्र विरुद्ध माना है। उस आचरण को शास्त्र सम्मत सदाचार किस प्रकार माना जाए? क्योंकि भागवतानंद ने कहा है निग्रह संप्रदाय के तीन मुख्य मार्ग बताए गए हैं। शास्त्रार्थ द्वारा अधर्म का निग्रह करना, शस्त्र द्वारा युद्ध में धर्म का निग्रह करना एवं योग द्वारा संयम पूर्वक आत्म निग्रह करना। यहां प्रश्न उठता है कि भागवतानंद द्वारा शास्त्रार्थ के माध्यम से जिस जिसजिस के निग्रह का प्रयास किया गया है। क्या उन सबका निग्रह हो चुका है? यदि नहीं तो शस्त्र के द्वारा उनका निग्रह कब से प्रारंभ करने वाले हो? हैं घचाचार्य
00:48:30:16 क्या भगवती ने निग्रह संप्रदाय का दायित्व सौंपते हुए इस संघर्ष हेतु आवश्यक असाधारण शक्तियों से युक्त कोई दिव्यास्त्र नहीं दिया था क्या? मां भगवती होती तो देवी देती परी थी ना। जिसके अभाव में भागवतानंद को गालियों का आलंबन लेना पड़ रहा है। मां भगवती ने कहा था गाली देना मैं शस्त्र नहीं दे रही हूं।
00:49:03:08 क्या शास्त्र के अभाव में गालियों का विकल्प उसे निग्रह संप्रदाय द्वारा प्राप्त हुआ है? यदि नहीं तो सनातन धर्म शास्त्रों की बात तो दूर की है। भागवतानंद को स्वयं उसके द्वारा ही विचित निग्रह संप्रदाय को मानने वाला किस प्रकार माना जाए? क्योंकि भागवतानंद ने कहा है कुल मिलाकर आचरण की दृष्टि से समीक्षा करने पर भागवतानंद के आचरण में बहुत सारी अशास्त्रीयता प्राप्त होती है। जो उसे सनातन धर्म के प्रामाणिक आचार्य के रूप में स्वीकार करने में बाधक है। क्या-क्या है? अवैदिक अप्रामाणिक इस्लामिक सामग्री से युक्त पूजा पाठ करना करवाना असत्य भाषण झूठी गवाही झूठे आक्षेप या फिर असिद्ध गवाही असिद्ध आक्षेप वचन भंग दोगली बातें गाली अभद्र भाषा का उपयोग गुरु निंदा गाली के रूप में अथवा स्वतंत्र रूप से प्रमाणित ना कर पाने की स्थिति में भी किसी महिला पर दूषित होने का आरोप विशेष रूप से दंडनीय है। छिपाने वाले कर्म करना, सम्मान की चिंता करना, दुराचरण करना, षड्यंत्र करना यह सब जो है आपके बाधक हैं। आपके अनुसार जो आचार्य के रूप में स्वीकार करने वाली
00:50:18:09 परिभाषा को बताया गया उसी के उसी में और हां आगे और है। ऐसे अशास्त्रीय आचरणों से युक्त व्यक्ति को सदाचारी मानकर किस प्रकार सनातन धर्म के प्रामाणिक धर्माचार्य के रूप में स्वीकार किया जाए क्योंकि भागवतानंद ने कहा है इतने पर भी यदि किसी को भागवतानंद में दोष दिखाई नहीं दे रहा है तो ऐसे अंधों के लिए अंधों के लिए हमारे गुरु जी तदा जो है शास्त्र से बात करते श्लोक पढ़ देते हैं हमारे गुरु जी हम निग्र चाय की सम्मान करते हैं भाई ज्ञान है उसको चाहे वो जो ज्ञान प्रस्तुत कर रहा हो प्रासंगिक हो अथवा प्रासंगिक सामना तो कर भाई सामना तो कर चितड़े उड़ जाएंगे। चितड़े कपोल कल्पित जो संसार बनाया है ना ढोंग रच रच के
00:51:17:08 तो ऐसे अंधों के लिए
✅ This part is already used · 00:51:19:03 – 00:51:24:04 (0:05)
→ Used in: A · Video क्या है भगवती के वरदान का सच । भगवती की तपस्या या परी साधना at 0:46 ↗
00:51:19:03 यहां दो उदाहरण हम आगे दे रहे हैं जिसमें स्वयं भागवतानंद ने स्वयं के दोष को ही स्वीकार किया
⬜ Not used yet · 00:51:24:04 – 00:53:16:28 (1:53)
00:51:24:04 है। तो दोष क्या है? गोवर्धन मठ के पूरी परिकरों में से एक ऋषिकेश ब्रह्मचारी जी के नाम से बनाई गई एक फर्जी YouTube आईडी द्वारा की गई एक टिप्पणी को बिना किसी सत्यापन के भागवतानंद ने सोशल मीडिया पर ऋषिकेश ब्रह्मचारी जी के विरोध में प्रस्तुत किया था। जिसके उपरांत वास्तविकता ज्ञात हो जाने पर ऋषिकेश ब्रह्मचारी जी के नाम से बनाई गई फर्जी आईडी द्वारा किसी की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के संबंध में बिना किसी निरीक्षण परीक्षण के दिए गए अपने सार्वजनिक वक्तव्य को भागवतानंद ने हटा लिया था। क्यों हटाया था? अगर वह सत्य था तो रहने देते और हटाया था तो इसका मतलब वो असत्य था जो कहा था। और ये अस्थाई क्या होता है भाई? विश्वास नहीं है क्या अपने वक्तव्यों पे? सार्वभौम सिद्धांत नहीं है क्या? क्या होता है? अस्थाई अस्थाई अस्थाई।
00:52:22:21 सनातन धर्म के आचार्य बने फिरते हो। तो सनातन नित्य स्थाई और अस्थाई का रोना रोते हो अपनी हर पोस्ट में ऐसे ही होते हैं ना धर्माचार्य सनातन धर्म के जो हर बात को कहते हैं अस्थाई बात है [संगीत] हम हटा लिया गया और कई अपनी पोस्ट को आए दिन यह व्यक्ति त्रया चरित्र वाला अस्थाई कहता रहता है। क्यों? अस्थाई झूठ होता है। असत होता है। सत्य अस्थाई नहीं होता है। ठीक है?
00:53:08:16 तो इसी प्रकार आगे जो है एक वीडियो प्रस्तुत किया गया है।
✅ This part is already used · 00:53:16:28 – 00:55:13:22 (1:57)
→ Used in: A · Video धर्मयुद्ध अहंकार या व्यापार | क्या है पूरा विवाद | at 46:00 ↗
→ Used in: A · Video चाटुकारों के कुतर्कों का निराकरण at 57:05 ↗
→ Used in: A · Video क्या है भगवती के वरदान का सच । भगवती की तपस्या या परी साधना at 0:19 ↗
00:53:16:28 यदि तुम्हारी बुद्धि कभी अधर्म में लग रही होगी तो क्रिया पर तुम्हारा नियंत्रण होगा। बुद्धि खराब होने से तुम्हारा कर्म खराब नहीं होने दूंगी। और यदि कभी तुम क्रिया ही गलत करने जा रहे हो तो बुद्धि भ्रष्ट नहीं होगी। तुम्हारा विवेक तुम्हें रोक लेगा। बोला था कि विजय की क्लिप ऐड करूंगा। वाकलन से हो गया होगा। वाकलन से मैंने वो बोलने के समय अलग-अलग विषयों में गड़बड़ हो गई थी। इस मानवीय त्रुटि को हम सुधार लेते हैं। लेकिन उसी त्रुटि के कारण बोलने में हो गया था वाकस्खलन। अब जिस स्त्री की बात चल रही थी जिसका नाम विजयाश्री बताया गया था। मैं इस स्त्री को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानता हूं। हां, मैं इसी वीडियो में एक वीडियो अटैच करूंगा आप लोगों के लिए जिसमें आप देखिएगा कैसे पूरी के शंकराचार्य जी के मंच पर वो स्त्री बैठी हुई है और सम्मान के साथ वाकस्थलन से हो गया होगा वाकस्थलन से। तो इस लड़की का Facebook हैंडल भी हमने बता दिया और इसका एक पॉडकास्ट का लिंक भी दे दिया। वहां आप स्पष्ट सुन सकते हैं कि ये विदेश इत्यादि भी आती जाती रही है। वहां से भी इसका उठना बैठना है। और पूरी के शंकराचार्य के मंच पर एक संदिग्ध सूत्रों वाली स्त्री का अचानक से आना और अचानक से उसका मठ में इतने महत्वपूर्ण स्थान पर बैठ जाना वाकस्थलन से हो गया होगा। वाकलन से मैंने और पूरी के शंकराचार्य के मंच पर रिदमम कपूर को बैठने दिया जा रहा है। वाकस्थलन से हो गया होगा। वाकलन सेशन उसका है यूआईएसएफ
00:54:32:16 यूनिवर्सल योगा स्पोर्ट्स फेडरेशन जिसकी उत्तराखंड प्रेसिडेंट है रिदमा कपूर। तो भूरी शंकराचार्य जी के साथ मठ में मंच साझा कर अलग-अलग शिविरों में मंच साझा कर रही है। वाकस्थलन से हो गया होगा वाकलन से यूआईएसएफ की उत्तराखंड स्टेट प्रेसिडेंट मंच साझा किसके साथ कर रही है? पूरी शंकराचार्य जी के साथ और वाकस्थलन से हो गया होगा वाकलन से रिदमम कपूर को और रिदमम कपूर जो है वो पूरी शंकराचार्य जी के साथ मंच साझा कर रही है। वाकस्थलन से हो गया होगा वाक। यदि तुम्हारी बुद्धि कभी अधर्म में लग रही होगी तो क्रिया पर तुम्हारा नियंत्रण होगा। बुद्धि खराब होने से तुम्हारा कर्म खराब नहीं होने दूंगी। और यदि कभी तुम क्रिया ही गलत करने जा रहे हो तो बुद्धि फ्रष्ट नहीं होगी। तुम्हारा विवेक तुम्हें रोक लेगा।
⬜ Not used yet · 00:55:13:22 – 00:55:45:20 (0:32)
00:55:13:22 जिसमें उसने यह स्वीकार कर लिया है कि उसकी जीवा द्वारा वाकलन हो जाने के चलते उसने विजयश्री नाम से किसी और महिला के वीडियो को दिखा दिया। या फिर किसी और महिला के वीडियो को उसने वाकलन के चलते विजयश्री बोल दिया। वह बात और है कि एक बार नहीं बोला है। कम से कम पांच छह बार बोला है। ठीक है? मगर बोला है। उसको उसने वाकलन कहा है। अब फिर भी [संगीत]
✅ This part is already used · 00:55:45:20 – 00:56:25:20 (0:40)
→ Used in: A · Video क्या है भगवती के वरदान का सच । भगवती की तपस्या या परी साधना at 2:31 ↗
00:55:45:20 इस वीडियो में जो आपको अभी-अभी दिखाया गया है। भागवतानंद ने स्पष्ट किया है कि उसकी कर्मेंद्रियों द्वारा ऐसा कोई आचरण हुआ, जो उचित नहीं था। भाई वाकलन से निकला तो क्या असत्य भाषण निकला ना वाकलन से जी्हा फिसल जाने के कारण तुम्हारे मुख से असत्य भाषण निकला ना ह तो क्या हुआ ऐसा कोई कार्य हुआ तुम्हारी कर्म इंद्री से जो कि उचित नहीं था तुमने स्वीकार भी कर लिया अशास्त्रीयता तो तुमने स्वीकार कर ही ली है गाली देने के रूप में
⬜ Not used yet · 00:56:25:20 – 00:58:24:00 (1:58)
00:56:25:20 तो अच्छा यहां राम का विरोध हो ही गया क्योंकि राम जो भी बोलते हैं सोच समझ के बोलते हैं। अब तुम राम की भी कोई बात ले आना। ये देखो यहां पर भी राम ने दोहरी बात की है। तुम तो यही करोगे ना। विधर्मी की यही पहचान होती है। वो जिसको मानने का दावा करता है एक दिन उसी पर उंगली उठाता है। उसी का विरोध करता है। करो आओ सामने। बता दो समाज को तुम राम के कितने बड़े शत्रु हो। यह भी कर लेना। पहले शंकराचार्य का पूरी शंकराचार्य का की महिमा गान करते नहीं थकते थे। है ना? जब पूरी शंकराचार्य ने पूरी शंकराचार्य के यहां दाल नहीं गली तुम्हें हवा नहीं दी गई मां। तो आज उनका उपस उड़ाते नहीं थकते हो। है ना? हम तो यह बताने की आवश्यकता तो नहीं है कि श्री राम धर्म का साक्षात स्वरूप है। तो ऐसे असत्य भाषण कर देना बिना सोचे समझे वाकलन के अनु कारण पांच छह बार लगातार छूट निकाल देना असत्य भाषण निर्गत कर देना ये अधर्म माना जाएगा ना अधर्म अधर्म हुआ तुम्हारी
00:57:40:26 कर्म इंद्री से हम अब क्या बात आती है कि उसको अब उसके द्वारा अधर्म होना अशास्त्रीयता होना भागवतानंद ने स्वयं स्वीकार किया है कि हां शास्त्रीय गाली देना इतना तो है झूठ बोलना हमने सिद्ध कर दिया मनुस्मृति का विरोध हमने सिद्ध कर दिया अनेकानेक शास्त्रों का विरोध हमने सिद्ध कर दिया वाकलन उसने स्वयं स्वीकार कर लिया जबकि देवी के द्वारा उसको यह वरदान प्राप्त था कि जबकि देवी के द्वारा
✅ This part is already used · 00:58:24:00 – 00:59:09:18 (0:46)
→ Used in: A · Video क्या है भगवती के वरदान का सच । भगवती की तपस्या या परी साधना at 0:02 ↗
00:58:24:00 भागवतानंद को यह वरदान प्राप्त है कि यदि उसकी कर्मेंद्रियों द्वारा कोई अनुचित कार्य होने वाला होगा तो उसका विवेक उसकी बुद्धि उसकी कर्मेंद्रियों का निग्रह करेंगे। पर यहां तो भागवतानंद के कथन अनुसार ही यह सिद्ध होता है कि अनुचित आचरण करते समय उसकी कर्मेंद्रियों का निग्रह उसके मन बुद्धि विवेक इत्यादि के द्वारा नहीं किया गया। तुम्हारी जीवा फिसल कैसे सकती है? तुम्हें तो वरदान प्राप्त है ना देवी का कैसे हो गया वहांन? तो या तो वाकलन नहीं था और या फिर वह देवी नहीं थी और या फिर वह वरदान नहीं था। समझे? आखिरकार कोई तो वजह होगी जो हम शंकराचार्य के शिष्य हैं
⬜ Not used yet · 00:59:09:18 – 01:06:12:00 (7:02)
00:59:09:18 और आखिरकार कोई तो वजह होगी जो हम राम के भक्त हैं। वाक्य स्कलन तुम्हारी कर्मेंद्रियों द्वारा होने वाली एक गलती है। जबकि तुम्हें वरदान प्राप्त है कि तुम्हारे द्वारा ऐसा नहीं होगा। तुम्हारा मन, बुद्धि, विवेक, चित्त इत्यादि उसका निग्रह करेंगे। ऐसे में देवी का वरदान निरर्थक सिद्ध होते हुए उस वरदान के असत्य सिद्ध हो जाने की स्थिति में भागवतानंद द्वारा उसके प्रामाणिक आचार्यत्व के विषय में कही गई पूरी कथा को जब देवी की देवी का वरदान कपोल कल्पित तो देवी से जुड़ी हुई अलग-अलग अन्य चीजों को कपोल कल्पित क्यों ना माना जाए। क्योंकि भागवतानंद ने कहा है अंतत गत जब यह सिद्ध हो ही चुका है कि भागवतानंद ने कुछ कार्य ऐसे किए हैं जो उसे नहीं करने चाहिए थे क्योंकि श्रीमद् भगवत गीता 16 24 के अनुसार कर्तव्य तथा अकर्तव्य के विषय में एकमात्र शास्त्र प्रमाण है। ऐसे में कम से कम स्वयं को आचार्य कहने वाले के द्वारा शास्त्र विरुद्ध आचरण को तो वही कार्य मानना पड़ेगा, जो उसे नहीं करना चाहिए था।
01:00:25:06 ऐसे में भागवतानंद द्वारा बताया गया मां भगवती का वह वरदान भी सार्थक सिद्ध नहीं होता जिसके अनुसार भागवतानंद द्वारा किसी भी प्रकार से ऐसा कार्य ना किए जाने का दावा किया गया था जो अनैतिक अशास्त्रीय हो। कुल मिलाकर उसे वरदान प्राप्त था कि उसके द्वारा कोई भी दुराचरण नहीं होगा। ऐसे में भी उसके द्वारा इस प्रकार के अनेक दुराचरण का होना यह सिद्ध करता है कि या तो उसे देवी के रूप में दिखाई देने वाला तत्व वास्तविकता में देवी नहीं बल्कि तुम्हारा वो कालिया जिन परी इत्यादि थे। कोई बुरी शक्ति है जो भागवतानंद के माध्यम से धर्म का क्षय और अधर्म का प्रचार करने हेतु कार्यरत है। अथवा भागवतानंद द्वारा वर्णित वरदान वाली बात असत्य है। कोई वरदान नहीं मिला। देवी ही नहीं दिखी या तो दिखी तो पूरी शक्ति दिखी और या फिर दिखी नहीं। वरदान मिला ही नहीं। यदि ऐसा है तो इस प्रकार भागवतानंद के असत्यवादी होने के कारण उन सारे घटनाक्रमों के अस्तित्व पर भी प्रश्न चिन्ह उड़ जाता है जिनकी प्रामाणिकता के लिए मात्र भागवतानंद के शब्द ही प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किए जाते हैं। एवं जिसके लिए बात बार बात मैं जनेऊ ले सकता हूं हाथ में मैं गंगा में उतर सकता हूं। मैं जनेऊ ले सकता हूं। जाकिर नायक भी बोलेगा मैं जनेऊ हाथ में ले सकता हूं। मान लेना उसकी बातें वो
01:01:40:12 सनातनियों से कह रहा हूं। जो बनते हैं निग्र आचार्य सब कुछ शास्त्र से बोलता है तो क्या है मानना पड़ेगा असत्य मानना पड़ेगा सब पर प्रश्न उठ जाएगा हम जिनके उसकी वेद सम्मतता निग्र निग्रह संप्रदाय से उसके संबंध निग्रह संप्रदाय का अस्तित्व निग्रह संप्रदाय का स्वरूप स्वरूप जो उसके द्वारा विचित है। इन सब चीजों पर प्रश्न उठ जाएगा। इनकी कैसे प्रमाणिकता सिद्ध होगी? फिर [संगीत] भागवतानंद के सब सब पर हो जाएगा। तो ऐसे में भागवतानंद द्वारा बताए गए वृतांत को कपोल कल्पित क्यों ना माना जाए। क्योंकि भागवतानंद ने कहा है ध्यातव्य है कि अनादि काल से प्राप्त सनातन वैदिक शास्त्रों के विरुद्ध नया शास्त्र लाने पर उसे लाने वाले को सनातन विरुद्ध मत पंथ अथवा विधर्मी नास्तिक कहा गया है। एवं पूर्व से ख्यापित वैदिक तात्पर्य को विरुद्ध
01:02:55:15 अथवा पूर्व से ख्यापित वैदिक तात्पर्य के विरुद्ध नवीन सिद्धांत अर्थात वेद उपनिषद ब्रह्मसूत्र भगवत गीता अथवा अन्य तात्विक विवेचना करने वाले सनातन शास्त्रों पर किसी नवीन सिद्धांत को उद्भाषित करने के समर्थन में भाष्य करने पर ही किसी को स्वतंत्र रूप से संप्रदाय माना जाता है। वह बात और है कि उस स्थिति में भी उसके द्वारा दिए जाने वाले सिद्धांत की प्रमाणिकता अथवा युक्ति के आधार पर प्रश्न उठाया जा सकता है। होगा। परंतु जब कोई जब तक कोई श्रुति और उसके अर्थ के लिए किसी भी पूर्व से ख्यापित परंपरा पर ही निर्भर करता है। तब तक उसे स्वतंत्र रूप से किसी नवीन अथवा लुप्त संप्रदाय के आचार्य के रूप में स्वीकार किया जाना बिल्कुल भी युक्ति युक्त सिद्ध नहीं होता। अब जैसा कि भागवत आनंद द्वारा निग्रह संप्रदाय के बारे में बताया गया उस व्याख्यान के अनुसार निग्रह संप्रदाय का श्रुति अथवा उसके अर्थ के लिए किसी ना किसी पूर्व से स्थापित संप्रदाय पर निर्भर होना सिद्ध होता है। निग्रह संप्रदाय की ना ही धर्म की व्याख्या नवीन है ना ही ब्रह्म की व्याख्या। ऐसे में उसे किस आधार पर स्वतंत्र रूप से प्रामाणिक
01:04:10:21 संप्रदाय एवं भागवतानंद के कथित व्याख्यान के अनुसार निग्रह संप्रदाय में नियुक्त किसी को स्वतंत्र रूप से निग्रह संप्रदाय के रूप में स्वीकार किया जाए। क्योंकि भागवतानंद ने कहा है जब भागवतानंद के आचार्यत्व की प्रामाणिकता के संबंध में होने वाले प्रत्येक प्रश्न का एक ही उत्तर है कि भागवतानंद को सनातन धर्म का प्रामाणिक आचार्य इसलिए मानना है क्योंकि भागवतानंद ने कहा है तो ऐसे में स्वगोषित आचार्य उसे क्यों ना कहा जाए। भागवतानंद को आचार्य किसने घोषित किया? इस प्रश्न के उत्तर में जब भागवतानंद स्वयं यह कहता है कि उसे आचार्य घोषित करने में केवल वह स्वयं अधिकृत है। अर्थात उसे आचार्य घोषित करने वाला वह स्वयं है। जबकि विपक्षी द्वारा नोटिस में बताया गया है कि साक्ष्य संप्रदाय द्वारा उसे यह उपाधि प्राप्त हुई है। हम नहीं हुई है। उसी ने दी है या भगवती ने दी। भगवती के लिए वचन चाहिए। प्रमाण चाहिए और किताब में कहा है कि खुद खुद मैं खुद ही खुद को दे सकता हूं। तो ये सब सरासर झूठ हो गया। हम विपक्षी को सनातन धर्म विपक्षी यानी भागवतानंद हम भागवतानंद को सनातन धर्म का प्रामाणिक आचार अथवा निग्रचार कहने का पुरजोर विरोध
01:05:25:22 करते हैं। क्योंकि जिस प्रकार किसी भी अनाधिकारी को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, एसपी, कलेक्टर यह बात न्यायपालिका को बताई जा रही है। इत्यादि महत्वपूर्ण उपाधि दे देना समाज के लिए घातक है। उससे कहीं अधिक सनातन धर्म के प्रमाणिक धर्माचार्य की उपाधि किसी भी अनाधिकारी को दे देना मानवता के लिए धर्म के लिए अत्यंत घातक है। तो यह हुआ आचरण के अनुसार युक्ति के अनुसार भागवतानंद के द्वारा बताए गए कथित निग्रह संप्रदाय के स्वरूप का खंडन अगर वह है तो और भागवतानंद के निग्रहचार्य होने का खंडन उसके आचार्यत्व का खंडन यह हुआ
01:06:10:21 [संगीत]
Plans for this video (0)
No Plans yet. Press "✂️ Open Clip Cutter" to make one.
-
⬜Hindi SRT Required
YouTube Studio → Subtitles → Hindi → upload the SRT file. (Checked automatically once OAuth is connected.)
-
⬜English SRT
YouTube Studio → Subtitles → Add language → English → upload the SRT file.
-
⬜Title (per Rules)
Check the title against the RULES on honorifics, names and terms.
-
⬜Description
YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.
-
⬜End Screen
YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.
-
⬜Cards
YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.
-
⬜Playlist Automatic
YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.
-
⬜Thumbnail
YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.
"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.
Playlists
Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).
सदाचारी या दुराचारी @swaminigrahacharya गुरु परंपरा क्या है | The Nigrah Nikasika Chapter 4
🔗 This video is made from parts of these videos
Description
(empty)
History
No changes yet.
✂️ Clip Cutter
⌨️ Keyboard shortcuts
Space Play/Pause · I Set start · O Set end · ←→ 1 second (Shift: 5) · ,. 1 frame · P Preview · Enter Add clip · Esc Stop
Start
End
✂ Remove (middle part: bad audio, bad section)
Move the video to that spot (click the SRT or the bar), then press "Start"/"End".
Clips () · Total
Add clips above. They will appear here; drag (⋮⋮) to reorder.
-
⋮⋮