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00:00:01:16 [संगीत] तुम [संगीत] तो सभी को जय श्री राम। निग्रह प्रवेशिका बाबा जी गुप्ताचार्य हैं जो इन्होंने कई बार ये कहा हमसे कि भैया निग्रह प्रवेशिका आएगी आएगी। जैसे वो करण अर्जुन आएंगे आएंगे। मेरे करण अर्जुन आएंगे। मेरे करण अर्जुन आएंगे। मेरे करण अर्जुन आएंगे। वैसे ही गुप्ताचार्य जी महाराज कहते हैं निग्रह प्रवेशिका आएगी आएगी। यद्यपि आएगी भी। मगर यह निग्रह प्रवेशिका वर्तमान समय तक तो इनकी प्राप्त हमें नहीं हो पाई। परंतु अभी तक इन्होंने जो अपनी प्रामाणिकता के लिए दावे किए हैं उसके संबंध में हमें निग्रह निकासिका लिखने का अवसर अवश्य प्राप्त करा दिया इन्हीं महानुभाव ने। कैसे वह भी मैं

00:01:16:16 बताऊं। तो आप इस वीडियो को मिस ना करें। यह वीडियो बहुत जल्द आपको प्राप्त हो जाएगा जिसमें कि इनकी निग्रह प्रवेशिका के ऐसे ऐसे तार खोले गए हैं। है ना प्रवेशिका नहीं अभी स्वयं की निकासिका ही लिखेंगे अब इसके आने के बाद तो इसको जरूर देखिएगा और अभी कुछ कुतर्क किए गए थे इनके द्वारा जैसे हरि नारायण तिवारी कोई करके हैं जिन्होंने पूरी के शंकराचार्य के विरोध में काफी कुछ बोल दिया है अपमान पूर्वक बोल दिया है तो ये हमसे अपेक्षा कर रहे हैं कि शिवश नारायण द्विवेदी इनका विरोध यदि करते हैं नहीं तो हमें ज्ञात हो जाएगा कि उनका जो विरोध है शिवश नारायण द्विवेदी इत्यादि का वह हम तक ही सीमित है। क्यों भाई तुमको दिख नहीं रहा है क्या रामपाल का विरोध? इसन का विरोध हर उस व्यक्ति का विरोध जो सनातन धर्म को क्षति पहुंचा रहा है। यद्यपि तुम्हारे साथ हम सामंजस्य बिठाना चाहते थे। पर तुम्हें तो पसंद था धार्मिक कैरी मिनाटी बनना। है ना? उसके चक्कर में तुमने सबको समेटना शुरू कर दिया। मैं धार्मिक कैरी मिनाटी बन के फेमस होऊंगा। तो ठीक है बन जाओ कैरी मिनाटी। ऐसा थोड़ी ना है। हर शेर को किसी दिन सवा शेर मिल ही जाता है।

00:02:32:02 अच्छा इससे पहले इसके कुछ दोगले व्यवहार पर भी नजर डाल लेते हैं। यह क्या करता है कि आचार्यों ने क्या लिखा क्या नहीं लिखा उसका अपने अनुसार अर्थ निकाल करके लथखोर इत्यादि जैसे शब्दों का उपयोग भी कर लेगा। सबके लिए एक ही लकड़ी से सबको हाक देगा। मगर अपना बाप यदि व्यास गद्दी पर स्त्री के बैठ जाने की बात कहेगा तो वहां बहुत मुलुर मुलुर करके कहेगा मेरे पिताजी के लिए बड़ी दिक्कत हो रही है इनको ज्योतिष पीठ वालों को ना वो वहां आयोजक थे ना वो वहां पर श्रोता थे ना वो वहां पे वक्ता थे है ना कुछ थे ही नहीं मगर सबसे बड़ी वकालत यही कर रहे हैं अपने में से मैं नाम बताना चाहूंगा एक वशिष्ठ त्रिपाठी है दूसरा रामनारायण द्विवेदी है तीसरा एक विनय कुमार पांडे चौथा रमाकांत पांडे जो कि भगवान विष्णु को किंग कर्तव्य विमूढ़ बता रहा था। फिर कोई रामकेश्वर त्रिपाठी है। एक हर प्रसाद दीक्षित, एक विवेक कुमार पांडे और आप सबों को आश्चर्य होगा गोवर्धन मठ के भागी शंकराचार्य

00:03:29:08 के रूप में जिसको प्रोजेक्ट किया जा रहा है ना दिव्य चेतन ब्रह्मचारी का भी नाम

⬜ Not used yet · 00:03:32:19 – 00:04:48:12 (1:16)

00:03:32:19 है। ये लोग कहते हैं कि व्यास कृष्ण पर सबका अधिकार है। भागवत चर्चा सब लोग कर सकते हैं और वेदव्यास जी और वाल्मीकि जी ब्राह्मण ऋषि थे। अरे लथखोरों मैं सतर्क करता हूं तुम लोगों को। ये जो है यात्रा पूर्ण होते ही तुम लोगों का पोस्टमार्टम करूंगा। मेरे पिताजी ने भी महिला कथा वाचिका का समर्थन किया और उन्होंने गलत किया। तो मैं तो ना पिता के विरोध में जा सकता हूं ना शास्त्र के विरोध में जा सकता हूं। तो मैंने तो कुछ नहीं कहा पिताजी को। मुझे अपनी प्रतिष्ठा के अपेक्षा उनकी प्रतिष्ठा अधिक प्रिय है। अपने बाप के लिए लथोर शब्द नहीं निकलेगा। अन्यों के लिए लथोर शब्द निकलेगा। उनका पोस्टमार्टम करेगा। अपने बाप का पोस्टमार्टम नहीं करेगा। हैं? क्योंकि हम तो ऐसा कृत कभी किए ही नहीं जो अच्छा शंगेरी में गलत तरीके से प्राप्त किया हुआ धन आया और उसका उपयोग करना अनुचित था। उपयोग में उसे लेना अनुचित था। यह बात तुमने खुद कही। मगर क्या शंगेरी वाले इस बात को मानते हैं? श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य जी ने स्वामी विमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के सन्यासाधार को पुष्ट करते हुए उनके शंकराचार्य के रूप में होने की मान्यता को दृढ़ किया। आप कहते हैं किसान सरस्वती

00:04:48:12 जो है शंकराचार्य नहीं है। श्रृंगेरी ने अभिषेक किया तो श्रृंगेरी अराजक हो गई। मतलब आपके लिए बाकी तीन पीठ कुछ नहीं है। वह जो द्रव्य दोष लगा है श्रृंगेरी को उसके कारण श्रृंगेरी की बुद्धि में ऐसी राजनैतिक विकृतियां घुसती जाती हैं जो कई बार उनसे साईं के चमचों की भी वृदावली बखान करवा देती है। जो लोग साईं को

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00:05:09:03 शिव जी का अवतार बताते फिरते हैं। ऐसे ब्राहणाधमों का सम्मान भी श्रृंगेरी कर बैठती है। तो श्रृंगेरी के माननीय शंकराचार्य जी ने स्वामी भारती तीर्थ जी ने उन्होंने एक वैश्य वर्ण के व्यक्ति को दंड सन्यास दिया है। जब एक दूसरे अब ब्राह्मण को दंडी मानते आप शंकराचार्य बनाएं इस बात में कैसे हम आपत्ति नहीं करें। यदि अभिमुक्त सुरानंद सरस्वती ब्राह्मण नहीं है तो आपकी बात को पुष्ट कैसे माना जा सकता है? जब आप स्वयं ही एक अब ब्राह्मण को दंड सन्यास दे चुके हैं। तो यदि तुम्हारे लिए शंगेरी वालों का शब्द प्रमाण है तो शंकर परंपरा की शंगेरी पीठ पर तुम उंगली कैसे उठा रहे हो? और यदि उनका शब्द तुम्हारे लिए प्रमाण नहीं है तो इस बात का आलंबन लेते हुए कि अमुक शंकराचार्य ने अमुक शंकराचार्य को घोषित किया है। इसलिए मान लेना चाहिए कि वह शंकराचार्य हैं। क्यों डंका पीट रहे हो? क्यों तबला बजा रहे हो? क्योंकि तुम्हारा दोगला चरित्र है। दोगला नंबर वन मैं हूं दोगला नंबर वन क्या सोचा था तुम्ही को आता है रोस्ट करना हैं कोई मिलेगा नहीं तुमको और क्या है हम भाई बहुत शास्त्रों को मानने वाले हैं बहुत शास्त्र के अनुरूप चलने

00:06:24:12 वाले हैं पूरी में कोई भी ऐसी घटना जो हमें समझ में नहीं आ रही होगी या जहां पर भी हमको मौका मिल जाएगा अशास्त्रीयता प्रकट करने का तो वहां हम जरूर जरूर कर देंगे। मगर जिनका हमको जिनका हमको समर्थन प्राप्त है। यदि उनके यहां कुछ दोष निकलेगा तो हम राजा हैं। हम ईश्वर हैं। इसलिए हम कह देंगे कि चलो मान लिया। मैम यद्यपि दो पीठों पर एक ही शंकराचार्य नहीं हो सकते। पर चलो मान लेते हैं। क्योंकि तुम ही से निर्णय कराएंगे ना चारों शंकराचार्य। कौन शंकराचार्य है कि नहीं? तुम ही तो हो एक। जोधपुर वाले गुप्ताचार्य हैं। तुम ही से लेने आएंगे ना निर्णय चलो मान लेते हैं। हालांकि मैं एक पीठ पर दो आचार्य और दो पीठ पर एक आचार्य का समर्थन नहीं करता। मेरी शास्त्री दृष्टि इस बात को स्वीकार नहीं करती। लेकिन ठीक थे। चलिए आप थे। आप थे और अच्छी बात है। ठीक। ये है दोगलापन। जिनका समर्थन प्राप्त है उनकी चीजें आ जाने पर दोगलापन दिखा दो। और जिनका समर्थन प्राप्त करने की आकांक्षा है मन में उमड़ रहा है किसी तरह से मुझे शंकराचार्य के बगल में बैठने को मिल जाए पूरी वाले उनका यदि समर्थन प्राप्त नहीं होगा तो हर चीज पर उंगली उठाएंगे

00:07:39:25 पूरी शंकराचार्य जी किस बारे में किस किस विषय में किस दृष्टिकोण से क्या कहे उससे कोई मतलब नहीं है मतलब जानते हुए भी गलत मतलब निकालेंगे हम खुद तो मुसलमानों की जहां पर परंपरा रही होगी उनकी पुस्तकें लिखेंगे मगर पूरी शंकराचार्य जी राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए जो वक्तव्य देंगे उनका अपने अनुसार गलत मतलब निकाल करके ढिंढोरा पीटेंगे टचई कैरी मिनाटी की टचई नकल करेंगे पूरी शंकराचार्य जी की आत्म मुग्धता हम मेरी गुरु परंपरा क्या है ये मेरे गुरु ने बताने को मना किया तब क्या हो गया तुम्हारी आत्म मुग्धता को

00:08:21:20 अब मैं थोड़ा गुरु परंपरा का भी संकेत कर देता हूं यद्यपि मेरे गुरु गुरुजनों ने मना किया। कामाख्या की परंपरा से और तारापीठ की परंपरा से मेरा संबंध है। इससे अधिक मैं अभी नहीं बता सकता। गुरुजनों ने मना किया। तब

⬜ Not used yet · 00:08:32:26 – 00:10:09:20 (1:37)

00:08:32:26 तुम्हें परेशानी नहीं हुई। संसत्मा विनश्यति याद नहीं आया। भगवत गीता 4:40 मेरी गुरु परंपरा क्या है? ये मेरे गुरु ने बताने को मना किया है। पहले खुद पता कर लूंगा तब बताऊंगा गुरु का नाम। पूरी शंकराचार्य जी जिन विषयों में मौन रहते हैं उत्तर नहीं देते वहां तुम टाइटल डालते हो ना आत्म मुग्धता हैं दोगला कहीं का इससे अधिक मैं अभी नहीं बता सकता गुरुदेव ने मना किया है इससे अधिक मैं अभी नहीं बता सकता गुरुदेव ने मना किया नागलोक की सेना मधुमक्खी अरे भैया ये सारी बातों के आधार पर कोई कहता है क्या कि तुम शंकराचार्य मान लो क्योंकि उनकी उनके पास नागलोक की सेना उन पर आस्थानित लोगों के लिए वक्तव्य है। मानना हो मानो नहीं मानना हो मत मानो। मुझे आचार्य कथन पर विश्वास हो सकता है। दब बल से कर दे अलग बात है। मुझे आचार्य कथन पर विश्वास हो सकता है। देवब बल से कर दे अलग बात है। मुझे आचार्य कथन पर विश्वास हो सकता है। दैवब बल से कर दे अलग बात है। तुमने अपने वीडियोस में नहीं कहा। मानना हो मानो नहीं मानना हो नहीं मानो। अब इससे ज्यादा क्या प्रमाण दे दे तुमको। अगर तुमको इसमें प्रमाण नहीं मानना है तो अपनी कंबल तानो और सो जाओ। अगर तुमको इसमें प्रमाण नहीं मानना है तो अपनी कंबल तानो सुनाओ। क्यों कहा था?

00:09:48:24 वहां क्या तर्क था तुम्हारे पास? भगवती तुम्हें वरदान देने आती हैं। तुम कहते हो नहीं मुझे कुछ नहीं चाहिए। क्यों नहीं मांगा था हिंदू राष्ट्र? क्यों नहीं मांगा था? गौ हत्या बंद हो जाए। झूठा। मां भगवती आती है वरदान देने। इन जैसों को वरदान देने आएंगी। गुप्ताचार्यों को जोधपुर वाले।

00:10:09:20 और भगवती ने मुझे यही वरदान दिया। इस बात की भी मैं शपथ कर सकता हूं।

⬜ Not used yet · 00:10:13:25 – 00:17:04:07 (6:50)

00:10:13:25 जब सिंपैथी गेन करनी होगी तो क्या करोगे कि देखो देखो जो पूरे जगत की विश्व की जो वरिष्ठतम धर्म की जो वरिष्ठतम प्रतिमान है उनके साथ देखिए उनके ही परिकर कैसा छल कर रहे हैं। अरे भैया त्रिकाल संध्या वाला व्यक्ति जो एक सन्यासी के स्थानांतरित होने वाले शिविर के साथ लगातार चल सके ढूंढ के दे। देखा नहीं होगा। ऐसे ऐसे इंस्ट्रूमेंट्स हैं जो यूज हो रहे हैं वहां पर। यद्यपि वह मंगवाए नहीं गए हैं। कोई ना कोई देके ही गया है श्रद्धालु।

00:10:53:08 लगातार स्थानांतरण हो रहा है। चीजें आप बार-बार स्थानांतरित होते समय बहुत आसान होता है क्या? और वहां कोई क्या प्रोफेशनल बैठे हुए हैं क्या? कैमरामैन सब वही है ब्रह्मचर्य आश्रम में जो अभी प्रवेश हुआ है और अपना पढ़ाई भी हुई है थोड़ी बहुत और चल रही है और सहायता कर रहे हैं ले ढूंढ के ऐसा प्रोफेशनल व्यक्ति जो जापान से आने वाले क्या कहते हैं माइक वगैरह को यूज़ करना चाहता जानता हो कौन सा माइक कौन से कैमरे के साथ किस स्थिति में कंपैटिबल होगा लगे उड़ाने मजाक हर बात का हमारी कहने पर यह आएंगे या नहीं आएंगे। यह संदिग्ध विषय है। अपेक्षित सहयोग का नितांत अभाव इस आंदोलन को क्षीण कर रहा है। हर जगह दोष दिख रहा है। मगर वहां जहां जिनका समर्थन प्राप्त है वहां चलो मान लेते हैं। कोई बात नहीं। क्यों? क्यों मान लिया? तस्मात शास्त्रम प्रमाणम। कैसे मान लिया? क्योंकि तू दोगला व्यक्ति है। इसलिए मान लिया। हम इस बात को कभी नहीं कहते कि दो पीठों पर नहीं होने चाहिए। तूने उठाई ना। क्यों मान लिया? जो जहां गलत

00:12:08:09 होगा उसको तू गलत कहता है। और कहता है कि अगर कोई भी आचार्य तो अगर तू तेरे पास कोई ऐसा गुरु ही नहीं है जो कहीं पर गलत ना दिखाई दे तुझको। तो तेरे पास शब्द प्रमाण क्या है? वेद का? क्या शब्द प्रमाण है वेद का तेरे पास? तेरा बाप तक तुझे गलत दिखाई दे रहा है जो कि है भी दिखाई दिया ना व्यास गद्दी पर नहीं बैठना चाहिए था ना कौन है जो तेरे हिसाब से गलत नहीं है तो शब्द प्रमाण क्या है वेद का ये वही वेद है जो ईश्वर ने दिए थे

00:12:50:19 गुरु का शब्द प्रमाण होता है और अगर गुरु के लिए व्यक्ति उसमें भगवान को देख रहा है तो उसमें कोई गलत नहीं है। श्वेता शत्रपनिषद छ 23 में लिखा है जिसकी भगवान में जितनी श्रद्धा होती है उतनी श्रद्धा यदि गुरु में होती है वही व्यक्ति भवसागर को पार कर पाता है। भूल गया तू कैसे याद रख पाएगा इन नियमों को? तेरे जीवन में तो कोई गुरु है ही नहीं। स्वषित आचार्य [संगीत] गुरु की अवेलना केवल दो स्थितियों में की जा सकती है। एक गुरु स्वयं यह कह दे मैं यहां शास्त्र विरुद्ध आचरण कर रहा हूं। मैं यहां पर धर्म का निर्वाह नहीं कर रहा हूं।

00:13:41:08 अथवा उसने जो सिद्धांत बताया हो उसका आचरण उसके विपरीत हो। धर्म अधर्म का निर्णय स्वयं करके उस निर्णय के अनुसार गुरु को नहीं आ सकते। वरना उसको गुरु मत कहो। क्योंकि धर्म का धर्म की व्याख्या तुम्हें गुरु से प्राप्त होगी। स्वयं से नहीं। गुरु की चीजों पर उंगली उठाई जा सकती है। मगर तब जब गुरु स्वयं कह रहा हो कि हां हां मैं गलत हूं। और अगर ऐसा ना करके गुरु के विपरीत जाकर के धर्म बोध होते धर्म बोध होने का दिखावा करते हुए गुरु के विपरीत व्याख्या करते हुए धर्म और ब्रह्म की और तब तुम यदि गुरु पर उंगली उठाओगे तो वो तुम्हारा गुरु सिद्ध नहीं होगा जिस पर तुम उंगली उठा रहे हो क्योंकि गुरु वो है जो अज्ञानता रूपी अंधकार से बाहर निकाले

00:14:40:12 नहीं उठाई जाएगी गुरु पर उंगली गुरु के द्वारा निर्देशित व्याख्यानों के विपरीत जाकर के गुरु पर उंगली नहीं उठाई जाती है। गुरु यदि कह दे हां यहां पर मैं अधर्म कर रहा हूं तब उसके विपरीत आप हो जाइए। गुरु ने जो सिद्धांत प्रतिपादित किया हो, गुरु ने जो सिद्धांत आपको सिखाया हो, यदि वो सिद्धांत के विरुद्ध कहीं पर जाता हुआ दिख रहा है तो उसके विपरीत हो जाओ। अपनी ओर से व्याख्या करके शास्त्रों की अपनी ओर से अर्थ निकाल करके गुरु से उस बारे में कोई संवाद स्थापित ना करते हुए बस गुरु विरोध करने लगे तो फिर वो गुरु नहीं है ना तुम्हारा क्योंकि तुम व्याख्या अपने आप कर रहे हो समझ में आया और इनके कुछ चेले चापड़ क्या कहते हैं अंधभक्त क्या कहते हैं हमारे गुरु जी निग्रचार्य भागवत आनंद मैं तुम्हारी रिस्पेक्ट इसलिए करता हूं कि तुम शास्त्र से बोलते हो। पूछा जा रहा है अद्वैत में भक्ति क्यों नहीं है? इस कौन ऐसा आरोप लगाता है? यह महाशय क्या बता रहे हैं? यदा यदा धर्मस भवती भारत क्योंकि हमें संस्कृत आती है क्योंकि हमने श्लोक पढ़े हैं तो

00:15:55:20 बस अपना प्रभाव उत्पन्न करने के लिए हम संस्कृत बोलेंगे। श्लोक बोलेंगे। हर बात के उत्तर में संस्कृत और श्लोक दिखा देंगे। यद्यपि वो संस्कृत और वो श्लोक उस बात का उत्तर ना हो जो बात पूछी जा रही है तुमसे ज्यादा संस्कृत आती होगी आर्य समाजियों को कई अंशों में बड़े व्याकरणी होंगे तुमसे तो उनके सिद्धांत मान लिए जाए और ऐसे अंधभक्त ऐसे अंधे फॉलोअर्स जो भी बोलते हो शास्त्र से बोलते हो

00:16:32:19 भाई भाई जो बोलना है वो उस बात के उत्तर में बोलना है और तब शास्त्र का उपयोग हो तब उसका मान होता है। [संगीत] हमारे गुरु जी शास्त्र से बोलते हैं शास्त्रों का आलंबन लेते हैं। दोगलापन दिखा रहे हैं तुम्हारे गुरु जी वो नहीं दिख रहा है। वो शास्त्रीय दिख रहा है। खुद कह रहा है आदमी मुझे मां भगवती से वरदान मिला है कि मेरे से कोई गलत कार्य होने वाला होगा तो वो रोक देगी।

00:17:04:07 यदि तुम्हारी बुद्धि कभी अधर्म में लग रही होगी तो क्रिया पर तुम्हारा नियंत्रण होगा। बुद्धि खराब होने से तुम्हारा कर्म खराब नहीं होने दूंगी। और यदि कभी तुम क्रिया ही गलत करने जा रहे हो तो बुद्धि भ्रष्ट नहीं होगी। तुम्हारा विवेक तुम्हें रोक लेगा।

⬜ Not used yet · 00:17:20:04 – 00:18:36:00 (1:16)

00:17:20:04 हम्म और फिर खुद उसका वाक स्कलन हो रहा है। क्यों नहीं रोका भगवती ने? वाकलन से हो गया होगा वाकलन वाकलन से हो गया होगा वाकलन वाकस्थलन से हो गया होगा वाकलन झूठा वरदान है वो या फिर वो कोई देवी नहीं है जो वरदान देके गई है वो वही है परी जो आई होगी और जो तुम्हारे द्वारा जो है सनातन धर्म का सत्यानाश कराने पर तुली होगी आए बड़े वरदान मिला है इनको पूरी के शंकराचार्य नाग लोक की सेना का उपयोग तुरंत कर ले। पूरी के शंकराचार्य मधुमक्खी की सेना का उपयोग तुरंत कर ले। मगर इनके पास स्वयं मां जगदंबा आएगी और पूछेगी क्या चाहिए? तो गौ हत्या बन दो। ये वरदान नहीं मांग पाएंगे।

00:18:07:27 हमारे गुरु जी शास्त्र से बोलते हैं। [संगीत] तो आ रही है इसकी निग्रह प्रवेशिका। का समाधान। जो इसके मन की प्रवेशिका है उसका समाधान। निग्रह निकासिका वो क्यों लिखनी पड़ी यह भी वीडियो में पता चलेगा। तो ध्यान से देखें आने वाला है। जय श्री राम। [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 18:45 · 14 Aug 2025

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