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00:00:01:15 जय श्री राम सभी को आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और आज चर्चा में आने का विशेष कारण यही है कि जो हमारे आज आने वाले हैं इस चर्चा से जुड़ने वाले हैं वो थोड़ा सा उनको भी विलंब हो रहा था और हमें भी [गला साफ़ करने की आवाज़] ठीक है हम सबसे पहले उनको ले लेते हैं जय श्री राम।

00:00:36:26 जय श्री राम। आपको आवाज आ रही है मेरी? जय श्री राम। मुझे मुझे बोल रहे हो? जी आप ही को बोलो। हां। अच्छा जय श्री राम। ओम शांति। जी महेंद्र जी। महेंद्र जी थोड़ा सा अपने बारे में एक छोटा सा एक संक्षिप्त परिचय दे दीजिए। ब्रह्मा कुमारी से कब से जुड़े हैं? कहां से जुड़े हैं? और राइट नाउ आपकी वर्तमान स्थिति क्या है? हां जी मैं ब्रह्मा कुमारी से 2015 से जुड़ा हूं।

00:01:11:15 10 साल से ज्ञान अच्छा कहां कौन से वाले ब्रह्माकुमारी? वही मुंबई वाले मुंबई मुंबई में कहां मुंबई में भांडूप है भांडूप सेंटर भांडूप भांडूप सेंटर अच्छा हां ठीक है तो आपने हमारी जैसे कि बहुत सारी चर्चाएं देखी है तो मैं सीधे पॉइंट पर अगर आता हूं कि चलेगा

00:01:50:02 कोई भी व्यक्ति स्पिरिचुअल से इसलिए जुड़ता है कि बल्कि ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार धर्म क्या है? ये थोड़ा सा बता दीजिए। अच्छा जब मैं इस संस्था में जुड़ा तो वैसे तो मैं थोड़ा थोड़ा बहुत जानता था कि जैसे कि सत्संग में आपके साथ क्या हुआ वो मत बताइए।

00:02:23:03 ब्रह्मा कुमारीज का कंक्लूजन क्या है? धर्म क्या है? वो बता दीजिए। ठीक डायरेक्ट पॉइंट की बात करेंगे। चलो ठीक है। तो ब्रह्मा कुमारी के संस्था से धर्म का मतलब यह है कि हमारा स्वधर्म ही धर्म है। मैं लक्षण नहीं रूप नहीं मैं मैं पूछ रहा हूं कि ब्रह्मा कुमारी के अनुसार धर्म की आवश्यकता क्यों है किसी को? वही तो मैं धर्म धर्म के ब्रह्मा कुमारी के ज्ञान के मुझे जो मुझे जितना ज्ञान समझ में आया है उसी अनुसार आपसे बात कह रहा हूं कि मुझे धर्म की व्याख्या यही समझ में आई है कि आत्मा का जो स्वधर्म है वही हमारा सत्य धर्म है।

00:03:12:19 आपसे मैं आपसे पूछ रहा हूं एक व्यक्ति सामने आपके खड़ा हुआ है। अभी तक तो वो यह भी नहीं जानता है कि मैं आत्मा हूं या क्या हूं। आप वो आपकी बातों को या आपके द्वारा आत्मा के अनुसार बताई जाने वाली बातों को क्यों सुने और क्यों माने? उसको क्या फायदा है उससे? वो फायदा क्या है? क्यों? क्या आवश्यक फायदा यही है? हां जी जैसे गीता में जैसे कहा है कि स्वधर्म सुख देता है पर धर्म दुख देता है। यानी कि धर्म को पालन करने हमारे हां तो हमारे निजी स्वरूप में हम जब टिकते हैं तो हम अपने स्वधर् में टिकते हैं। तो हमारा जो जो बाकी जो मनुष्य ने जो बनाए धर्म है वो तो अपने धर्म है। लेकिन धर्म का पालन करने धर्म का पालन करने धर्म का पालन करने से सुख की प्राप्ति होती है। ठीक है जी जी जी सत्य धर्म से वो सत्य का है कि आत्मा का निज गुण में हमें समझ गया मुझे दूसरी बात पूछनी है ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार जो सत्य धर्म है उसके उसका पालन करने से सुख की प्राप्ति होती है तो प्रश्न यहां पर ये आता है कि सुख

00:04:27:22 की प्राप्ति फिल्म देखकर के भी होती है सुख की प्राप्ति स्वादिष्ट भोजन करने से भी होती है तो फिर कौन सा अंतर आ रहा है जिस सुख की प्राप्ति होती है ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार जो धर्म का पालन करने से होती है। जी स्वधर्म यानी मैं तो बोल रहा हूं कि जो आत्मा का निजी गुण है उसी के आधार पे हम जो स्थित होंगे उसी के हमें सुख अनुभव होता है। वो भौतिक सुख की बात अलग है कि खाने पीने की बात अलग है। तो अंतर बताइए ना दोनों में अंतर है। जैसे कि जी हमारा सत्य सनातन धर्म जो है वो आत्मा से निजी गुणों के आधारित धर्म है। जो सनातन धर्म है। आप आप यहां से आप यहां से शुरू करिए कि मैं ब्रह्मा कुमारीज आकर के स्पिरिचुअल सेशन क्यों लूं और उसके बाद उसको फॉलो क्यों करूं जबकि मुझे पहले से ही अमुक अमुक जगह पर सुख की प्राप्ति हो रही है। और ब्रह्मा कुमारी भी यही कह रहा है कि हमारे पास भी आओगे तो सुख मिलेगा। तो दोनों सुख में अंतर क्या है? वो बताइए। आत्मा की बात जब आप करने लगते हैं। आत्मा की बात जब आप करने लगते हैं वो तो तब की बात है। जब आप उसको सेशन दे दें और यह सिद्ध कर दें उसको

00:05:43:13 बता दें कि आत्मा हो तुम्हारी यह चीजें हैं वो तो सेशन की बात है मगर प्रायोरिटी में हम उसको क्या बताएंगे आने के लिए कि वो आत्मा की वो जो डेफिनेशन है वो सुने जी जी तो मैं यही इसीलिए बता रहा हूं कि ब्रह्मा कुमार से जुड़ा तब तक तो मुझे धर्म के आयु तो मुझे जैसे भौतिक धर्म है हम जानते हैं कि हिंदू मुस्लिम ये सब इनको हम धर्म ही कहते थे पहले मैं एक आप मेरी आप मेरी बात समझिए तो थोड़ा सा क्या है ना बहुत चर्चा हो भी चुकी है। मैं ये पूछ रहा हूं कि एक सामान्य व्यक्ति है अभी वो ब्रह्मा कुमारी आया नहीं है। ठीक है? उसको मालूम है कि मैं रसगुल्ला खाऊंगा तो मुझे मिठास जो मीठा सुख है मीठे का स्वाद मिलेगा सुखी होऊंगा। उसको मालूम है मैं फिल्म देखने जाऊंगा धुरंधर पार्ट टू मैं उसको देख के सुखी हो जाऊंगा। ठीक है? तो उसको सुख मिल रहा है तो कुमारी क्यों आए? वहां वहां मिलने वाले सुख में और यहां मिलने वाले सुख में अंतर क्या होगा? हां जी। तो मैं इसीलिए कहूंगा कि ब्रह्मा कुमारी में आके जब हमें सत्य ज्ञान का परिचय मिलता है। सत्य ज्ञान अर्थात हमें स्वयं का परिचय मिलता है। स्वयं के आधार से हमें ईश्वर का परिचय मिलता है। ईश्वर के पूरा ड्रामा का

00:06:58:14 मिलता है। समझ में आता है कि कैसे क्या होता है। अरे भैया सुख सुख में अंतर क्या आया वो तो बताओ। सुख में क्या अंतर आया? यहां मिलने वाले सुख में होता है। आप मेरी बात समझिए जो परमेश्वर का परिचय है, जो अपना परिचय है, इस सबका पर्यावसान इसमें है ना कि मुझे सुख प्राप्त होगा तो सुख तो बाहर भी प्राप्त हो रहा है इन परिचय के बिना तो अंतर क्या है दोनों प्रकार के सुख में? हां जी। तो मैं इसीलिए वही बात कह रहा हूं कि जब हमें स्वयं का परिचय पता होता है तो हमें सुख का अनुभव समझ में आता है और जो हम खुद को देह समझने लगते हैं तो वो भौतिक सुख का अनुभव होता है। तो भौतिक सुख का अलग बात है। देह का सुख अलग है। अलग आत्मा का सुख अलग है। वो अलग है। निर्भय हमारे हमारे में अंदर वही निर्भयता पैदा होती है कि आत्मा अगर अविनाशी है। तो दुख की चिंता तो अलग होती है। हर इंसान को सुख की अपेक्षा होती है। तो सुख कैसे प्राप्त किया जाता है? सच्चा सुख आज हम कोई भी इस दुनिया में मुझे लगता है मुझे लगता है आप मुझे लगता है आप ये कहना चाहते हैं। मैं अभी

00:08:13:20 आपकी मदद कर देता हूं। शायद आपको वो शब्द एग्जैक्ट नहीं मिल रहा है। कि ये जितने भी सुख है ना भौतिक संसार वाले ये इन सभी सुखों का हम अरे भाई साहब बोलने तो दो। बोलने दो। मैं आपकी मदद कर रहा हूं फिलहाल [गला साफ़ करने की आवाज़] कि यह जितने भी भौतिक सुख हैं भौतिक संसार वाले ये सभी सुख बाधित हैं। इनका अंत हो जाता है। जी अगर हमने फिल्म अगर हमने फिल्म देखी तो फिल्म खत्म हो जाती है। रसगुल्ला खाया तो एक खाया दो खाया तीसरे रसगुल्ले में खराब लगने लगता है। यहां भौतिक संसार से जितने भी सुख हमें मिल रहे हैं उनका अंत होता है। तो हम आध्यात्मिक विश्वविद्यालय यानी कि आपके आपके अनुसार जो ब्रह्मा कुमारी है वहां इसलिए जाते हैं कि वहां का सुख अनंत सुख होता है। ऐसा है अनंत सुख अनंत सुख होता है। ऐसा है कभी ना खत्म होने वाला हम अनुभव करने हम अनुभव करने लगते हैं। हम ज्ञान के आधार पर मैं कह रहा हूं ब्रह्मा कुमारी जाने पर अनंत सुख मिलेगा ना

00:09:25:22 जी अनुभव होने लगता है। अनंत सुख मिलेगा ना। मैं प्रैक्टिसिंग में अनुभव की बात ही नहीं कर रहा हूं। हां जी मैं जो मैं जो दूसरा डायमेंशन है जो दूसरा डायमेंशन है पारलौकिक मैं कह रहा हूं ब्रह्मा कुमारी जाने पर वहां की चीजों को फॉलो करने पर उसमें स्थित होने पर अंततवा वहां पर अनंत सुख की प्राप्ति होती है। हां जी जी ठीक है तो यह बताइए अनंत सुख की प्राप्ति होती है और जो इसलिए ब्रह्मा कुमारीज के यहां जो जो नियम और अविनाशी सुख अब यहां पहली बात आ जाती है कि ब्रह्मा कुमारीज के यहां जो जो नियम और सिद्धांत है ठीक है ब्रह्मा कुमारीज के यहां पे जो भी नियम और सिद्धांत है यानी कि वो धर्म जी है ना क्योंकि ब्रह्मा कुमारी अविनाशी अरे भाई आप मेरी बात समझने का प्रयास तो करो हां क्योंकि ब्रह्मा कुमारी मैं बाद मेंता हूं क्योंकि ब्रह्मा कुमारीज अनंत सुख प्रोवाइड करवा रहा है। इसलिए

00:10:40:26 ब्रह्मा कुमारीज के द्वारा बचा बताए जाने वाले जो आचरण है वह धर्म है। वह नियम है। क्योंकि ब्रह्मा कुमारी अनंत सुख दिलवा रहा है। ठीक है? ठीक है जी अब ये बताइए कि ब्रह्मा कुमारीज इस्लाम को बाइबल को कुरान को इनको धर्म क्यों कहता है क्योंकि ब्रह्मा कुमारीज का जो आचरण है वो तो अलग है और कुरान का जो आचरण है वो अलग है। बाइबल का जो आचरण है वो अलग है। तो फिर इनको धर्म क्यों कहता है?

00:11:17:27 अगर अगर ब्रह्मा अगर ब्रह्मा कुमारी अगर ब्रह्मा कुमारीज के द्वारा बताया जाने वाला जो व्यवहारिक आचरण है वो धर्म है तो उसके ठीक विपरीत कुरान के द्वारा बताया जाने वाला या बाइबल के द्वारा बताया जाने वाला वो फिर आचरण धर्म कैसे है उसको धर्म क्यों कहता है ब्रह्मा कुमारी जी बताता हूं ब्रह्मा कुमारी में जो हम धर्म स्थापित करने की प्रयत्न में है। समझ में आ रहा है कि हमारे अंदर पहले वो धर्म स्थापित करने का वो प्रयास है। हम प्रयासरत है। तो हम प्रयासरत में जो हमें नियम कुछ धारणाएं उस पर चलने का प्रयत्न करते हैं। तब जाके हमारे अंदर वो धर्म स्थापित होगा। क्योंकि हम बहुत काल का अभ्यास करेंगे। तब आत्मा में वो एक मिनट भाई साहब। भाई साहब मैंने पूछा क्या है? आप मुझे बता रहे हो कि हम ऐसा करेंगे तो ये मिलेगा। ऐसा करेंगे तो ये मिलेगा। मेरा प्रश्न क्या है कि ब्रह्मा कुमारी एक मिनट भाई साहब आप गलत चीजें बोलते हो ना एक्स्ट्रा तो उसमें भी टाइम लगता है थोड़ा ज्यादा मैंने प्रश्न ये पूछा है कि ब्रह्मा कुमारीज की जो नियमावली है डस एंड डोंट्स वो बिल्कुल ठीक विपरीत है कुरान के डज

00:12:33:01 एंड डोंट से तो फिर ब्रह्मा कुमारी कुरान को धर्म क्यों कह रहा है इस्लाम को धर्म क्यों कह रहा है ये पूछा है क्या करने से क्या मिलेगा ये मेरा प्रश्न नहीं है ब्रह्मा कुमारी जो भी है जो भी है अगर वो धर्म है तो कुरान के द्वारा मिलने वाला जो आचरण है या बाइबल के द्वारा मिलने वाला जो आचरण है वो धर्म कैसे क्योंकि दोनों चीजें अलग है ब्रह्मा कुमारी की डस एंड डोंट्स अलग है अलग है हां अलग है अब बताइए तो अलग इसीलिए है अलग इसीलिए है कि ब्रह्मा कुमारी अलग अलग अलग अलग इसलिए नहीं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं यदि ब्रह्मा कुमारी का डूज एंड डोंट है धर्म तो फिर कुरान का जो एंड डोंट्स है वो धर्म क्यों उसको धर्म क्यों कह रहा है ब्रह्मा कुमारी वही जब मुझसे कुछ सुनेंगे मुझे बात करने दोगे तो आपको पता चलेगा ना आपने बताया है आप आप देखिए आपने अभी क्या बोला आपने बोला कि वो अलग इसलिए है मैं नहीं पूछ रहा हूं कि वो अलग क्यों है? मुस्लिम जो कुरान है वह अलग क्यों मैंने नहीं पूछा। मैं पूछ रहा हूं वो अलग है तो फिर उसको आप धर्म क्यों कह रहे हो? यह पूछ रहा हूं। जैसे कि मान लो

00:13:51:01 मैं एक एग्जांपल मैं एक एग्जांपल दे दे रहा हूं। जो सिविलाइज्ड है जो जिसके पास मर्यादा है वो मनुष्य है। ठीक है? और जिसके पास मर्यादा नहीं है वो पशु है। यानी कि मान लो कुत्ता बिल्ली इन सबके पास मर्यादा नहीं है। ये ये जानवर है और जिसके पास मर्यादा है वो मनुष्य है। ठीक है? तो अब मैं ये पूछ रहा हूं कि जब उस फलाने किसी के पास मर्यादा नहीं भी है। यहां पे मैं इस्लाम की बात नहीं कर रहा हूं। नहीं बाइबल की बात। अब मैं क्योंकि यहां मैंने उदाहरण दिया तो मैं एक एग्जांपल दे रहा हूं कि जिसके पास मान लीजिए धर्म नहीं भी है। जिसके पास नियम नहीं भी है उसको हम क्यों कह रहे हैं कि वो मनुष्य है। समझ में आया आपको? जिसके पास नियम है वो मनुष्य है। तो जिसके पास नियम नहीं है उसको हम मनुष्य [नाक से की जाने वाली आवाज़] क्यों कह रहे हैं? हां अब अब आप समझ गए। अब मैं आपकी बात और मेरे ख्याल से मैं 14 बज के 14 मिनट की लाइव हो चुकी है। मैं लगभग दो मिनट तक सिर्फ सुनूंगा। आप मेरे मेरे सवाल का आप आंसर जी जय श्री राम। कि बाकी जो धर्म है वो देह के आधार आधारित धर्म है। देह के गुणों के आधारित धर्म है और

00:15:06:04 हमारा सत्य धर्म जो है वो आत्मा के निजी गुणों के स्थापित किया हुआ धर्म है। यानी अपना स्वरूप में स्थापित है। तो वो बाकी भी धर्म है। लेकिन देह के आधार पर धर्म है। इसलिए हम उनको धर्म नहीं कहते हैं। लेकिन उनका स्वरूप अलग है। उनका भस अलग है। हमारा भस अलग है क्योंकि ईश्वर ने जब ज्ञान देकर जो स्वधर्म आत्मा के निजी धर्म पर जो सनातन धर्म स्थापित किया है वो आत्मा के ज्ञान के आधार स्थापित किया हुआ है और उनका जो धर्म है देह में आने के बाद यानी जब त्रेता युग के बाद जो बाकी धर्म स्थापित हुए हैं यानी द्वापर से द्वापर युग से तो पिछले अा हजार साल में हम मनुष्य देहिक बन गए हैं तो उसके के आधार पर उनके धर्म जो स्थापित हुए हैं उनके में तो त्रुटि आएंगी जो स्वधर्म में और उनमें तो अंतर होगा ही जरूर यानी आत्मा के आधार पे जो हमारे में अंदर जो पांच विकारों ने प्रवेश किया उसी के आधार पर उनके धर्म है। हमारा जो धर्म है वो संपूर्ण निर्विकारी धर्म था। यानी हमारे सत्य धर्म में यानी सनातन धर्म में कोई भी विकार नाम की अंश मात्र चीज नहीं थी। यही फर्क

00:16:21:13 है कि वो देह के आधार पर स्थापित धर्म है और हमारे निज गुणों के आधार पर स्थापित धर्म यानी आत्मा स्वधर्म में वही सच्चा स्वधर्म सुख देता है और पर धर्म दुख देता है यानी बाकी में हमारे अंदर जब ये काम क्रोध ये सब पैदा होते हैं वो तो दुखी दायक दुखी संसार हो जाता है यही फर्क है दोनों धर्म में सनातन धर्म में और इस्लाम और बाकी धर्मों में निर्विवाद रूप से मैंने आपको दो मिनट तक सुना। आपने मुझे मोटी मोटी बातें जो बताई है मैं उनको बताऊं कि जी जो ब्रह्मा कुमारी जो धर्म बता रहा है वो देह देह का नहीं आत्मा का धर्म है। ठीक है और धर्म क्या था भाई साहब बीच में मत बोलिए अब ठीक अब बीच में मत बोलिए मैंने आपको सुना अब मैं बोल रहा हूं समझिए अच्छा तो हां ब्रह्मा कुमारीज के द्वारा बताया जाने वाला जो धर्म है वह आत्मा का धर्म है और बाकी यह सब जो धर्म है यह देह के ऊपर आधारित धर्म है। ठीक है? और मेरे ख्याल से आपने यह भी कहा ये भी आपने यह भी कहा है कि देह के ऊपर आधारित धर्म से सुख

00:17:36:16 की प्राप्ति नहीं होती है। पर आत्मा के ऊपर आधारित धर्म से ही सुख की प्राप्ति होती है। ठीक है? ये दो बातें मोटी मोटी आ गई। ठीक? अब पहली बात क्या है? जब हम शुरू से चले थे तो हमने यह देखा था कि धर्म उसे कहते हैं जिसमें कि अनंत सुख प्राप्त हो। तो यह वाली बात तो खारिज ही हो गई। या तो आप यह कहो कि उसको भी धर्म कहते हैं जिसमें अनंत सुख प्राप्त ना हो। फिर तो फिल्म जाना भी धर्म है। फिर तो मीठा रसगुल्ला खाना भी धर्म है। क्योंकि अनंत सुख नहीं मगर सुख तो प्राप्त हो ही रहा है। अनंत सुख की प्राप्ति नहीं हो रही है। उसको हम धर्म नहीं मान रहे थे शुरू में। अब आपने कहा मान रहे हैं। हां उसको दहिक धर्म कह रहे हैं। तो यानी कि फिल्म जाना भी धर्म है। तो दुख तो उसके है नहीं। इसलिए तो मैं बता रहा हूं क्यों पूछ रहा हूं। मैं पूछ रहा हूं कि मैं अभी एक चार पांच चीजें लिख दूंगा। शिवश नारायण द्विवेदी ने ये कहा है और फिल्म जाना है और मीठा खाना है, रसगुल्ला खाना है, छोले भटूरे खाने है, नान खानी है, कुलचा खाना है और यह धर्म है। मैंने कह दिया। तो आप इसको धर्म कहने लगोगे क्या?

00:18:43:27 सुख इसीलिए कहेंगे कि हम नहीं हम बोलचाल व्यवहारिक प्रयोग करने के लिए हम धर्म तो कहेंगे जरूर है नहीं वो ये कहूंगा सीधे है नहीं है नहीं वो जब नहीं नहीं नहीं हमें हो या ना हो वो उसका आधार अलग है जैसे कि पार्टी का गुणधर्म भाई साहब आप भाई साहब आप सत्य बोलने आए ना सत्य बोलने आए ना ये मत बताओ कि हो या ना मैंने पूछा वो अधर्म है कि नहीं कुरान और बाइबल फिर मैं दो थोड़ा सा तो समझा दो समझाने दो थोड़ा सा कि जैसे पानी का गुणधर्म है वो तो पानी का भी कुछ धर्म है ठंडक देना अग्नि का धर्म है ऊर्जा देना गर्मी देना तो हर अपना अपना हर कुछ धर्म ही होता है जैसे ही पर्सनली उसका गुण होता है जैसे अभी हर कुछ धर्म है हर एक का गुण गुण धर्म है। गुणों के आधारित वो धर्म है। सुनो किसी का स्वभाव क्या है? मैं वो नहीं पूछ रहा हूं। आपके हिसाब से धर्म के सुनो भैया भैया सुन लो सुन लो। यानी कि स्वभाव के आधार पर धर्म बदल जाता है। ये बात है।

00:19:59:22 जी। यानी कि उनका स्वभाव के आधार पर उनका धर्म है और हमारे स्वभाव के आधार पर हमारा धर्म है। जी। उनका धर्म हिंसा सिखाता है। हमारा धर्म हिंसा नहीं सिखाता है। भाई साहब मैं प्रश्न क्या कर रहा हूं? आप मैं प्रश्न कुछ और कर रहा हूं। भाई साहब मुझे करने दो। धर्म की डेफिनेशन यह है कि धर्म का पालन करने से अनंत सुख मिलेगा या धर्म की डेफिनेशन यह है कि जिसके स्वभाव के अनुसार उसने जिन बातों को मान लिया कि मुझे यह करना है, यह नहीं करना है, वह वो धर्म कही जाएंगे। इसमें से धर्म की डेफिनेशन कौन सी है?

00:20:38:02 अपने मूल स्वधर्म से आधारित धर्म को स्वधर्म कहेंगे। बाकी तो परधर्म कहेंगे। तो ये बताइए कि शरीर मैंने पूछा ना आपसे कि शरीर के आधार पर शरीर के आधार पर अनंत सुख तो नहीं मिल रहा है। और धर्म तो वो है जिससे अनंत सुख मिले। और यदि थोड़ा सा सुख मिलने वाला भी धर्म है तो फिर गोलगप्पा खाना भी धर्म है। वो सब धर्म इंसान के लिए वही धर्म है जो वही धर्म है ना वो ठीक है ठीक है ठीक है इसका मतलब ब्रह्मा कुमारी का जो धर्म है उसके अलावा भी दुनिया में और भी धर्म हो सकते हैं उसको उससे मुक्ति मिल जाएगी गुणों के धर्म है हां उनके गुणों के उनको मुक्ति उसको मुक्ति अनंत सुख मिलेगा या नहीं मिलेगा उसको

00:21:34:19 अभी अभी उनका धर्म बताएगा। मुझे थोड़ी मालूम है कि उनका तो वो मिलेगा कि नहीं। ठीक है। ठीक है। चलो ये भी ले लेते हैं। तो आपको यदि नहीं मालूम है तो ब्रह्मा आप कह क्यों रहे हो? आपको यदि नहीं मालूम है तो उसको धर्म कह क्यों रहे हो? धर्म तो वही है ना जहां अनंत सुख प्राप्त हो। मैंने क्या कहा? एक मिनट भाई साहब। धर्म वो है जहां अनंत सुख प्राप्त हो। तो क्यों कह रहे हो कि कुरान में भी धर्म है। क्यों कह रहे हो? वो आप कहते नहीं आप यही कह रहे हो कि अनंत सुख की बात अलग है वो तो हम अपने स्वी यानी कि धर्म की धर्म की परिभाषा ये नहीं है कि जिसको करने से अनंत सुख प्राप्त हो ये नहीं है ना धर्म की परिभाषा

00:22:18:07 वो परिभाषा नहीं है तो क्या है धर्म के लिए वो व्याख्या नहीं है यानी परिभाषा वही हम यानी एक मिनट धर्म इसका मतलब मतलब यह हुआ कि आप कुछ भी करो उसको आप धर्म का नाम दे दो तो ब्रह्मा कुमारी कहने लगेगी यह भी धर्म है। यही हुआ ब्रह्मा कुमारी उनके लिए धर्म धर्म इसीलिए व्यवहार में समझने के लिए हम धर्म की बात करते हैं। उनको धर्म मानते हैं। अरे उसका आधार क्या है भाई? जब हम धर्म कह रहे है वो है जिससे अनंत सुख मिलेगा। अभी आपने शुरू में कहा था अनंत सुख मिलेगा वही धर्म है। अब आप कह रहे हो वो धर्म नहीं है। इसको कहते हैं झूठ बोलना। नहीं नहीं इसको इसको कहते है झूठ नहीं जी भाई साहब नहीं सुनिए सुनिए सुनिए हम उसका उनको धर्म कहते इसका मतलब ये नहीं कहते कि हम अपने स्वधर्म छोड़कर अपना धर्म छोड़कर उनके धर्म में जाओ मैंने ये कहा मैंने मैंने मेरा प्रश्न पूछा मैंने कहा उसको धर्म क्यों कह रहे हो जब वो धर्म नहीं है तो उसको धर्म क्यों कह रहे हो बोलचाल के लिए कहते हैं हम धर्म जब हमारे संविधान भी कहता है धर्म मतलब मतलब यूं ही कहते हो ना तो यूं ही कहते अच्छा संविधान का आपने नाम लिया संविधान संविधान वो सारे रूल्स एंड रेगुलेशन

00:23:33:08 मानता है जो ब्रह्मा कुमारी मानता है नहीं नहीं मैं क्या बता रहा हूं कि वो मानते हैं नहीं मानते वो तो हर एक अपना तो संविधान तो संविधान को बीच में मत लाइए आप ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार जो धर्म है एक मिनट भाई साहब ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार जो धर्म है यदि वही धर्म है जो नियम और कानून ब्रह्मा कुमारी ने बनाए यदि वही धर्म है तो कुरान और बाइबल को धर्म कहना बंद करिए ना फिर आप हम धर्म को संवाद मुझसे संवाद करने के लिए धर्म का उच्चार करते हैं। हम उनका धर्म नहीं है ये बात नहीं कि उनका जैसे जैसे आप आप मैं पूछ रहा हूं आप किसी को भी धर्म क्यों कहोगे जब वो धर्म नहीं है तो आप सत्य बोलते हो कि झूठ बोलते हो और चलो कभी मुख से निकल जाए चलो कभी मुख से निकल जाए कभी इधर उधर हो जाए जीभ सिसल गई कुछ हो गया भैया बोलचाल में है इसलिए कहते हैं आप तो उसको सदैव आप तो उसको सदैव लगा के रखे हो हां तो यू और चलो ठीक है चलो ये वाली बात चलो ये वाली बात भी मान ली भैया दुनिया को एक मिनट एक एक मिनट चलो मान

00:24:48:12 लिया कि यूं ही कहते हैं तो यूं ही कहने वाली बात आपकी किसी दीदी ने कही है सार्वजनिक मंच पर कि वो धर्म है नहीं हम यूं ही कहते हैं बोलचाल की भाषा में कही है बोलचाल में यूं ही नहीं कहते यूं ही नहीं कहते हैं हम उनको धर्म मानते हैं लेकिन धर्मों का अंतर बताते हैं अंतर बताते हैं कि उनका धर्म कैसे स्थापित हुआ है। उनके धर्म में कितना सुख मिलता है और हमारे स्वधर् में कितना सुख मिलता है। तो फिर आप ये तो फिर आप इस बात को छोड़ दो कि धर्म वो है जिससे अनंत सुख प्राप्त हो। इस बात को छोड़ दो। फिर आप यह बोलो कि किसी व्यक्ति ने अपने जीने के लिए कुछ सिद्धांत प्रचारित कर दिए तो हम उसको कहने लगते हैं यह भी धर्म है।

00:25:31:10 भाई साहब हम इसीलिए उनको बात करते हैं कि जब हम हमसे उनको बात करना है तो धर्म के ही बात भाषा में ही बात करेंगे ना। आप सत्य बोल धर्म बोलने से हमको नहीं पूछ रहा हूं। सत्य धर्म बोलने से हमको तकलीफ क्यों होनी चाहिए? इसलिए क्योंकि वो धर्म नहीं है। जो मानता है जो मानता है तो है आप नहीं है वो भी नहीं मानता वो कहां अपने आप को धर्म कहता है वो तो मजहब कहता है अपने आप को दीन कहता है अपने आप को

00:26:07:20 मैं जब गीता में लिखा है गीता में लिखा है कि मैं सत्य धर्म की स्थापना करता हूं बाकी धर्मों का विनाश करता हूं आप दूसरी बात धर्म का विनाश करता हूं बातें मत करिए। इस चीज को प्रश्न पूछिए। यदि ब्रह्मा दीदियों से आप आप दीदी से जाकर के पूछिए। यदि ब्रह्मा कुमारीज के द्वारा बताई गई नियमावली धर्म है तो फिर जो जो उस चीज को नहीं मान रहे हैं उसको धर्म कहना बंद करें। झूठ है ये। अब अब आ जाते हैं ब्रह्मा कुमारीज के धर्म पर। ठीक है। अब ब्रह्मा कुमारीज

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00:26:41:20 पर आ जाते। जी मेरे हिसाब से धर्म [गला साफ़ करने की आवाज़] है जो सच्चिदानंद सुख की प्राप्ति कराए। है ना? जी हां। ठीक है। तो सच्चिदानंद सुख की प्राप्त सच्चिदानंद को प्राप्त कराने वाला जो नियमावली है वो धर्म है। और आपके यहां पर सच्चिदानंद सुख को प्राप्त कराने वाला जो ज्ञान है वो देता है कोई ईश्वर। आपके किसी प्रकार से किसी माध्यम से ईश्वर आकर के वो देता है। तो मुझे आप यह बताइए ईश्वर है यह सिद्ध कैसे होता है?

00:27:27:25 ईश्वर है जब वो सारा सृष्टि का ज्ञान समझाता है। हमें स्वयं का परिचय देता है और खुद को परिचय देता है। खुद का जब हमें ईश्वर का पता ही नहीं था। जब हमें सच्चा ज्ञान मिलता है, हमें ईश्वर के बारे में हमें पूरा निश्चय होता है कि यही ईश्वर है। मैं थोड़ा सा सीधा कर दूं। अपना परिचय जो आकर के दे देगा जिसका हमें परिचय नहीं मालूम होगा। हम ये मानेंगे ईश्वर है ये। अफ्रीका के जंगल में कोई रह रहा है। नीग्रो रह रहा है कोई कहीं पर उसको हम नहीं जानते। वो आकर के अपना परिचय दे देगा तो हम मान लेंगे ईश्वर है। और इससे सिद्ध हो जाएगा कि दुनिया में कोई ईश्वर है। ईश्वर का हमें पता था तो सिद्धांत बताइए भाई साहब कि ईश्वर है या सिद्ध कैसे होता है? हम क्यों ढूंढ रहे हैं ईश्वर को? क्यों ढूंढ रहे हैं? हां

00:28:20:26 ईश्वर सुनिए आप आप ईश्वर की सिद्धि के विषय में बता रहे हो कि ब्रह्मा कुमारी जाने के बाद हमें ईश्वर अपना परिचय देता है जिससे सिद्ध होता है कि वो ईश्वर है? जी तो मैं अगर परिचय देने के आधार पर किसी को ईश्वर माना जाएगा तो मैंने प्रश्न किया क्या साउथ अफ्रीका में रहने वाला कोई व्यक्ति है जिसको आप नहीं जानते हो वो अपना परिचय दे दे मैं साउथ अफ्रीकन हूं तो आप कह देंगे आप मानेंगे कि ईश्वर है और इस प्रकार से ईश्वर की होती है वो जो परिचय देगा उसी आधार से मैं समझूंगा कि वो क्या चीज है ईश्वर है या नहीं है तो मैं आज से पहले आप मुझे जानते थे क्या नहीं मेरा परिचय जानते थे नहीं मैं ईश्वर हूं नहीं था मैंने अपना परिचय दे मैंने अपना परिचय दे दिया मैं ईश्वर हूं अब मेरी बात मानेंगे आप हां तो बताओ सिद्ध करो मुझे कि आप कैसे ईश्वर हो हां तो वो सिद्ध करने वाली बात क्या है वहां पर वो बताओ वो क्या है हां तो वही करने वाली बात वही तो पूछो वही पूछा मैंने सिद्ध कैसे हुआ ईश्वर तो हां तो वही तो मैं समझाने जा रहा हूं आपको कि वहां मुझे जब पता जब ज्ञान लिया मैंने ज्ञान लिया तो मुझे पूरा

00:29:36:07 पूरा यकीन कैसे किस आधार से हुआ ये बता रहा हूं कि पहले वहां पे मुझे मुझे स्वयं का परिचय दिया उन्होंने ठीक है स्वयं परिचय दिया तो मुझे स्वयं का परिचय महसूस हुआ कि मुझे हां ये बात तो सही है कि यही बात सच है आत्मा के बारे में मुझे जो बताया तो आत्मा का पिता भी कोई होगा तो आत्मा का पिता कैसा होगा तो आत्मा ही जैसा होगा जैसे जैसे पंछी का पंछी जैसा होता है। यानी समझ गया। जैसे किसी ने बताया कि आप आत्मा हो। इससे ये सिद्ध होता है कि आत्मा को कोई पिता भी होगा। यानी कि आत्मा के अस्तित्व से ये पता चलता है कि आत्मा को कोई पिता भी होगा। हां जी। आत्मा के पिता होगा ना। मैं शरीर के अस्तित्व है। मैं आ रहा हूं। मैं आ रहा हूं भाई साहब। मैं मैं आ रहा हूं। मैं आ रहा हूं। आपका प्रश्न ले लिया मैंने। आत्मा है इसलिए यह सिद्ध होता है कि आत्मा को कोई पिता भी होगा। ठीक है? ठीक है ना? जी। ठीक है। तो फिर ईश्वर है तो इसका मतलब ये भी होता है फिर ईश्वर का कोई पिता भी होगा।

00:30:47:06 ईश्वर का वही ईश्वर होगा जिसका कोई पिता नहीं होगा। तो भाई साहब इसका मतलब किसी के होने से उसके उसके पिता की सिद्धि नहीं होती है। इस किसी के होने से उसके पिता की सिद्धि नहीं हो रही है। किसी के होने से उसका पिता है। ये सिद्ध बात नहीं है। हम वो कारण बताइए कि किसी के होने से वो कारण बताइए कि किसी के होने से किस प्रकार उसके पिता की सिद्धि होती है। वो कारण बताइए सिद्धांत। जी सिद्धांत यह है हम कि जब हम हमारे पिता के पास होते हैं तो जैसे कि अपना बच्चा अपने आप को सेफ महसूस करता है हम और जब जब हम पिता से दूर जाते हैं हम कोई छोटा बच्चा तो वो डर महसूस करता है कि कहीं मैं या दुख भी महसूस कर सकता है क्योंकि आज हम भगवान भगवान का हाथ छोड़कर भगवान को भूलने से हमारे जीवन यानी कि आपका वहां पर जाने के बाद भय मिट गया इसलिए आप ये मानते हो कि वो ईश्वर है। हां तो वो समझ में तो

00:32:02:07 आया। हां ठीक है। अगर कोई ये कहे अगर कोई ये कहे कि मैं जो है आईएस आईएस के किसी आतंकवादी के पास गया और वहां पर मुझे मेरा भय मिट गया तो उसको ईश्वर मान लें। वो उस बच्चे के लिए तो उसका भय खत्म ही होगा। आईएसआई वाले अरे ईश्वर ईश्वर माने कि ना माने ये बताइए। आप क्या बता रहे हैं आईएसआई वाले के बारे में? आपने सिद्धांत बताया है कि भैया उसके पास जाने से मेरा भय मिट गया। इसलिए मुझे लगा कि वो ईश्वर है। यानी कि यानी कि मेरा भय खत्म होने से पता चलता है कि ईश्वर है। तो मेरा भय तो भैया मेरी माताजी के पास भी खत्म हो रहा है। पिताजी के पास भी खत्म हो रहा है जाने से। अच्छा किसी का आतंकवादी के पास जाकर के भय खत्म हो रहा है। इससे सिद्ध हो गया कि दुनिया में ईश्वर है और वो भी वो ईश्वर वही है जिसके पास जाने से हमारा भय खत्म हुआ है। हां तो मेरा सिद्धांत ये है कि भगवान ने मुझे जब स्वयं का परिचय आत्मा अजर अमर अविनाशी है। हां। थोड़ा सा ऐसी बात करिए मेरी बात सुनिए मेरी बात मेरी बात समझिए आपको कई लोग देख रहे हैं और आगे देखेंगे भी ठीक है आप ब्रह्मा कुमारीज में आठ साल से जुड़े हुए हैं 2015 से

00:33:17:08 आपने बताया शायद 10 साल हो गए 10 11 साल ठीक है उस बात आप उस बात को लेकर चलिए बार-बार एक तो आपको अपने जो क्लेम्स है उसको बदलना ना पड़े पहली बात दूसरी बात ये है ऐसी बात बोलिए जो सॉलिड हो कुछ समझ में यहां पर उसको स्वीकार किया जा सके आपने कहा सुनिए जो अपना परिचय बता रहा है इसलिए मां सिद्ध हुआ कि दुनिया में कोई ईश्वर है। यानी किसी के द्वारा उसका परिचय बताने से सिद्ध हो रहा है कि दुनिया में ईश्वर है। वाह उसके बाद जो परिचय बता रहा है वो ईश्वर है। ऐसा नहीं है। मैंने उदाहरण दिया।

00:33:54:21 उसके बाद आगे आगे आगे उसके बाद उसके बाद आगे चले। जब हम उसके बाद जब हम जब हम आगे चले आगे मैं बता रहा हूं। अरे मैं मैं बता रहा हूं। आपने आगे चलके क्या किया? मैं बता रहा हूं। उसके बाद जब हम आगे चले तो आपने कहा कि उसके पास उसके पास जाने से मेरा भय समाप्त हुआ। तो इसका मतलब कि दुनिया में कोई समाप्त नहीं हुआ। समाप्त की बात नहीं है कि मुझे समझ आई। क्या? क्या समझ आई? ज्ञान जब मिलता है हां जब ये ज्ञान समझ में ज्ञान समझ में आने की बात नहीं कर रहा हूं जो समझ में आने के बाद आपको पता चला ईश्वर है ये ऐसे सिद्ध होता है वो सिद्ध होने की प्रक्रिया बताइए मुझे जी जी जी जी जी जी जब मैं ज्ञान लिया जब मुझे यह समझ में आया कि मेरा परिचय क्या है? मेरा पिता कौन है? और वो मेरे लिए क्या करता है? और मेरा कैसे वह मुझे मेरी रक्षा करता है? कैसे मुझे दुख से छुड़ाता है। यह सारा ज्ञान जब मुझे सृष्टि चक्र का मिला। मैं क्या था और आज मैं क्या हो चुका हूं। यह जब मुझे समझ में आता है। यानी कि हमें जब ये

00:35:10:09 यानी कि हमें अगर यह जानना है ईश्वर दुनिया में है। ये कैसे सिद्ध होता है तो पहले हमें वहां जाना पड़ेगा। सारा ज्ञान लेना पड़ेगा। तब हमें महसूस होगा कि ईश्वर है ये सिद्ध होता है। यानी कि यहां पे आप मेरे समक्ष वो सिद्धांत नहीं रख सकते कि ईश्वर है ये कैसे सिद्ध होता है। सिद्धांत नहीं रख सकते। सिद्धांत की बात वही है। सिद्धांत कहने का मतलब ये है। मैं आपको एक एग्जांपल बता दूं। मैं आपको एक एग्जांपल बता दूं। मैं आपको एक मैं आपको एक एग्जांपल बता दूं। मैं आपको अगर कहूं इस दुनिया में टीवी है। यह कैसे सिद्ध होता है? जी टीवी है। हां। इस दुनिया में टीवी है। कैसे सिद्ध होता है? क्या बताएंगे? जब उसमें कोई फिल्म दिखेगी, चित्र दिखेगा तब वो टीवी है। हम टीवी इसका मतलब चित्र होगा। इससे पहले हां हमें ये चेक करना होगा कि टीवी है क्या? अगर टीवी क्या कहते हैं? टीवी वो है जो एक काले कलर का एक पतला सा आजकल एलईडी टीवी चल रहे हैं। वो है तो और उसमें फिल्म आती है और मैं जानता हूं कि वो LG का है या वो है

00:36:25:10 या वो Samsung उस पे लिखा होता है। उसके उसके अंदर कई सारी वायर्स जा रही होती है। ये सब टीवी के लक्षण हो गए। टीवी का रूप हो गया। ठीक है? दिखाई नहीं दे सकने वाला। तो फिर मैंने कहा कि एक मिनट भाई साहब। एक मिनट 1 मिनट फिर मैंने कहा कि भैया टीवी है भी कोई जो चल सकता है जो चल सकता है ऐसा है आपके पास तो आप आप कहोगे कि हां देखो आपकी आंखों को दिखाई दे रहा होगा मेरे पीछे टीवी है ठीक है यानी कि मेरी आंखों का विषय वो बन पा रहा है और उसमें वो अमुक अमुक लक्षण भी है जिसके अनुसार टीबी होना टीवी का अस्तित्व होना सिद्ध हो गया आपने सिद्धांत बताया तो इसी प्रकार से ब्रह्मा कुमारी का ज्ञान लेने कोई क्यों जाए उसको कैसे बताओगे कि ईश्वर है चल मेरे साथ फिर मैं तुझे ज्ञान दिलवाऊंगा वो ज्ञान जैसे आपने टीवी के विषय में कहा जैसे टीवी के विषय में कहा कि भैया वो देखो दिखाई दे रहा है ना मेरे पीछे टीवी है है ना अगर टीवी को मैं जानता हूं आपने मुझे जनवा दिया ये टीवी है उसके बाद फिर कोई आपने सिद्धांत बताया इस सिद्धांत के आधार पर ये सिद्ध होता है कि इस दुनिया में टीवी का अस्तित्व है और आपने पीछे पीछे अपने दिखा दिया टीवी का

00:37:40:14 अस्तित्व। तो ऐसे ही मुझे ईश्वर के विषय में सिद्धांत बताइए। अच्छा अगर हम ये कहे कि पहले ब्रह्मा कुमारी का ज्ञान लो आप 10 साल हो गए आपको लेते लेते। तब आपको ये पता चलेगा कि ईश्वर है इस दुनिया में। ठीक? तो अगर मैं ऐसा करूंगा तो हर दूसरा व्यक्ति भले ही वो ब्रह्मा कुमारी हो। [गला साफ़ करने की आवाज़] आर्य समाज होन हो ऐसे बहुत फिर कुरान बाइबल सब है। फिर आगे लाइन। ऐसे बहुत से लोग हैं जो भगवान को प्राप्त कराने का मोक्ष को प्राप्त कराने का दावा करते हैं। तो यदि वो ये कहे कि भैया मैं कहूं कि भैया ईश्वर है ही नहीं मैं तो मानता ही नहीं तो वो कहे कि नहीं तुम जब हमारे यहां 10 साल प्रैक्टिस कर लोगे तो तुम्हें अनुभव हो जाएगा ईश्वर का। तो मैं ऐसे सबके यहां 1010 साल जाके चेक करता रहूं। नहीं जरूरत नहीं है। 10 साल की जरूरत नहीं है। तो मुझे अकाट्य सिद्धांत अभी यहां पर दो ना राइट नाउ। अकाट्य सिद्धांत यहां पर दो कि ईश्वर है वो बताओ। जो मेरा अपना एक्सपीरियंस वही बताऊंगा। सिद्धांत एक्सपीरियंस लेने के बाद सिद्धांत क्या प्राप्त हुआ कि ऐसे सिद्ध होता है दुनिया में ईश्वर है। जैसे मैं आपको देख सकता हूं। इसलिए यह सिद्ध है।

00:38:55:18 यह सिद्ध हुआ कि आप हो। मैं टीवी को देख सकता हूं। इसलिए सिद्ध हुआ कि टीवी है। अच्छा मैं आपकी आवाज सुन सकता हूं। इसलिए यह सिद्ध हुआ कि आवाज है आपकी। और किस प्रकार से सिद्ध हो रहा है। किन किस तरीके से किन विषयों से सिद्ध हो रहा है कि इस दुनिया में कोई ईश्वर भी है जिसके पास हमें जाना चाहिए और ज्ञान लेना चाहिए कि भैया वो मुक्ति दिलाएगा। हम्म। जी। तो हमें वहां पे जाने के बाद जो ज्ञान मिला तो उस ज्ञान में हमारे सारे सवाल खत्म। भाई साहब मैं वहां गया क्यों? मुझे अभी आप कह रहे हो वहां सवाल आपके खत्म हो गए ना? प्रश्न खत्म हो गए। ठीक है। ठीक है। तो बताइए ईश्वर है। कैसे सिद्ध हुआ? इस प्रश्न का उत्तर दीजिए।

00:39:43:27 वही तो भगवान ने मुझे सारे प्रश्नों के उत्तर दिए कि ये सारा सृष्टि चक्र कैसे चलता है? भाई साहब अच्छा कोई अगर हमारे मन के प्रश्नों का उत्तर दे दे तो इससे सिद्ध होता है कि ईश्वर है। हां तो वही तो ज्ञानी है ना वही तो सबको बता सकता है। मैं मैं कह रहा हूं कोई अगर हमारे प्रश्नों का उत्तर दे दे तो उससे सिद्ध होता है कि वो ईश्वर है। मेरे मन को समाधान कर कर सकता है जो कि मेरे मन के कोई भी प्रश्नित समाप्त हो जाए मेरा मन तभी मुझे वो सुख अनुभव कर सकूंगा तो मैं आपको एक प्रश्न मैं आपको एक प्रश्न दे रहा हूं इस दुनिया में कोई ईश्वरीय सत्ता है ये कैसे सिद्ध होता है इस प्रश्न का उत्तर दीजिए ना फिर जब आपको उत्तर मिल गए सारे तो जी जी तो उसके लिए हमें पूरी हिस्ट्री जग्राफी सुननी पड़ेगी ठीक है? अनुभव करनी पड़ेगी। तभी तो उसकी सत्ता काम करती है नहीं करती है महसूस होगा। अरे भाई सत्ता काम करती है। पहले सत्ता है कि नहीं ये बताओ ना। कैसे पता चलता है सत्ता है। यानी अभी आपके पास सिद्धांत नहीं है। आप सीधे उसको मोक्ष दिला के मुक्ति कराओगे उसकी। सिद्धांत नहीं है बताने वाला।

00:41:00:19 बताया ठीक ठीक है ठीक है मैं मैं इसको क्लियर कर देता हूं बहुत देर खींचेगा एक तो पहले सिद्धांत को क्लियर कर लेते हैं आपने कहा कि जो हमारे प्रश्नों का उत्तर दे देगा वो ईश्वर है उससे सिद्ध होगा कि वो ईश्वर है। अच्छा तो एक बच्चा बच्चा पूछता है कि एप्पल की स्पेलिंग क्या है और उसको बता दिया किसी ने एप्पल की स्पेलिंग क्या है? तो सिद्ध हो गया कि दुनिया में ईश्वर है। वो ईश्वर वही है जो एप्पल की स्पेलिंग बता रहा है।

00:41:35:03 वाला प्रश्न भाई साहब का प्रश्न है। हमारा का प्रश्न है। क्या हो गया भाई? चले गए। ट्रक के पीछे एक शायरी लिखी होती है। जिन्हें जल्दी थी वो चले गए। देखी है क्या किसी ने? पढ़ी है? कौन-कौन सी शायरियां होती है ट्रक के पीछे? ऐसी होती है। जिन्हें जल्दी थी वो चले गए।

00:42:16:26 ठीक है। तो आप देख रहे होंगे 10 साल से जुड़े हुए हैं और ब्रह्मा कुमारीज की ओर से ब्रह्मा कुमारी का पक्ष रटने आए थे। मैं एक बात क्लियर कर दूं। आपने अपने इस बेफिजूल तर्क का आंसर ले लिए। ब्रह्मा की भाई अस्ति को बुलाओ। मासूम भाई से छल पूर्वक बात करने से क्या होगा? आपके अंदर जो प्रश्न कीड़ा है। अरे भाई तो तुम क्यों नहीं आते हो? और यदि तुम्हारे पास और कोई अ वो है विद्वान तो उससे मिलवा दो

00:42:56:12 और यदि तुम्हारे अंदर सामर्थ नहीं है तो विरोध यहां क्यों कर रहे हो जाओ उसको भेजो विरोध करने के लिए जो सामर्थ हो जिसके अंदर हमने तो अपना नंबर दे रखा है ये देखो 7408301869 उस व्यक्ति को हमने सुना उसके पास उसको हमारे सवाल ही समझ में नहीं आ रहे हैं आप आ सकते हो यदि चेहरा दिखाने में इंटरेस्टेड हो वैसे आज नहीं करते आप जो है अशोक जी हैं या आने को कह रहे हैं तो अशोक जी आप जो है कल आइए फॉर्म भर दीजिए यहां यहां पर WhatsApp करिए थोड़ा इंटेलेक्चुअल चर्चा हो जाए

00:43:39:18 ठीक है। बातों में फंसाती तो आप लोग हो। सीधी जवाब देना ही नहीं है। उसने अपना परिचय दिया, यह हुआ, वह हुआ। अरे भैया जब परिचय दे दिया, ज्ञान मिल गया, उसके बाद की तो बात बताओ। अब तो बता दो ईश्वर है। सिद्ध कैसे होता है? अच्छा महसूस करना यानी कि आपके पास हमें दिया जा सकने वाला कोई थ्योरिकल ज्ञान नहीं है। आप सिर्फ वो कर सकते हो। महसूस करवाओगे सीधे व्यक्ति को और महसूस करने जाने के लिए अपना द साल इन्वेस्ट करने के लिए पहले व्यक्ति आप पर विश्वास करे भले ही आप उसको दो बातों का जवाब ना दे सको है ना

00:44:27:08 हां जी महेंद्र जी हां जी जी क्या हुआ जी उसका उस सवाल का आंसर मुझे आप बता बता रहा हूं कि भगवान है या इसका आंसर क्या ये कैसे सिद्ध होता है हां जी जब हमारे मन में दुख से छूटने की तड़प है किससे उसको दुख से छुड़ाने वाला कोई तो होगा [हंसी] सुना है सुना है किसी से किससे सुन के आए बताओ नहीं नहीं नहीं भाई नहीं भाई साहब भगवान की कसम मैं किसी से नहीं सुना जब आपसे बात करने लगता हो ना तो कोई प्रश्न मन में उत्तर नहीं आता है। कभी-कभी अपना मन कंफ्यूज हो जाता है प्रश्न जवाब होकर भी लेकिन हम स्वयं अगर शांत खड़े होते तो सारे जवाब आने लगते हैं। ठीक है। ठीक है। ठीक है। मन की भी एक अवस्था होती है कि हम डिस्टर्ब हो जाए तो आपकी बात मैं समझ गया। आपकी बात मैं समझ गया। मैं आपकी बात को सरल शब्दों में दोहरा देता हूं। कि हमारे अंदर सतचित आनंद होने से ही यह सिद्ध होता है। कि इस दुनिया में कोई सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर है। है ना?

00:45:42:16 हां। बहुत बढ़िया। सही बात। यानी यानी कि इस दुनिया में सच्चिद। अच्छा हमारे अंदर ये सतचित आनंद की चाह है। ये कैसे सिद्ध होता है? जी जी। जैसे कि हम परेशान होते हैं दुख में या अशांत मन होता है तो मन ऐसा तो कुछ लगता है कि कहीं तो शांति शांति शांति अनुभव हो ऐसा मन हो कि जहां पे हमें दुख ना टच करे हां मैं एक मैं इसको क्लियर कर देता हूं जैसे कि मान लीजिए चाहते हैं मैं जब जैसे कि मान लीजिए कि मैं अपनी छत पर बैठा हूं और मैंने अपनी सोने की अंगूठी निकाल के साइड में छत की बाउंड्री पर रख दी। अब उसको कोई कौवा आया और लेके उड़ गया। उस समय मैं उसका पीछा नहीं कर सकता। बराबर है। क्यों नहीं कर सकता? क्यों नहीं कर सकता? क्योंकि मैं उड़ नहीं सकता। है ना? है ना? उड़ नहीं सकता। हां। तो इसका मतलब ये है कि मेरे अंदर ना उड़ पाने की जो उड़ सकने की जो भावना आ रही है। है ना? इसका मतलब इस दुनिया में कोई है जो उड़ सकता है।

00:46:58:00 है ना? इस दुनिया में कोई है जो उड़ सकता है। इसी प्रकार से हमारे जीवन में तरह-तरह से जो प्राकृतिक बाधाएं उत्पन्न होती हैं। कहीं ना कहीं इनके प्रकार प्राकृतिक बाधाओं के पार जाने की इच्छा उत्पन्न होती है। होती है ना? होती है ना? कहीं-क एक मिनट भाई साहब एक मिनट आगे मत बढ़िए आगे मैं कुछ यहां पर क्लियर कर रहा हूं तो इसका मतलब यह है कि हमारे अंदर प्रकृति की सभी बाधाओं को तोड़ने की कामना आ रही है जो जिसका जिसके अंदर गहराई में हमारी सच्चिदानंद की कामना है इस तो सच्चिदानंद से जब ये पता चलता है कि इस दुनिया में कोई है जो सच्चिदानंद है उसी प्रकार से जो प्रकृति प्राकृतिक बाधाओं पर नियंत्रण कर लेने की जो चाह हमारे अंदर आ रही है तो इसका मतलब इससे पता चलता है कि इस दुनिया में कोई है जो प्रकृति को नियंत्रित कर सकता है। प्रकृति की सीमाओं के परे जा सकता है। है ना?

00:48:02:26 ठीक है। यानी कि हमारे अंदर हमारे अंदर सर्वशक्तिमान प्रकृति के सभी बंधनों को के परे जाने की जो भावना आ रही है। उसी से सिद्ध होता है कि इस दुनिया में कोई सर्वशक्तिमान प्रकृति के परे जा सकने वाला ईश्वर विद्यमान है। बहुत बड़ी बात। जी सर है। अब आगे बात ये आती है यानी कि कुल मिलाकर के हम अबाध्य अबाध्य बन जाना चाहते हैं कि हमें कोई रोक ना पाए। तो इसका मतलब है इस दुनिया में कोई है ऐसा जिसे कोई जिसे कोई रोक ना पाए। ठीक है? जी इसका मतलब ये है कि हम सभी नियमों से मुक्त हो जाना। हम सभी प्रकार के नियमों से मुक्त हो जाना चाहते हैं। इसका मतलब इस संसार में कोई है सभी ऐसा ऐसा भी एक मिनट ऐसा भी जीवन चाहते हैं वहां पे कोई दुख ना हो। वो वो जो जीवन चाहते हैं उसका जो वो है ना प्रमाण वो यही है कि हम सभी नियमों से मुक्त हो जाना चाहते हैं। प्रकृति के सभी प्रकार के नियमों से मुक्त हो जाना। मुक्त हो जाना। नहीं जीवन भी चाहते हैं ना कि ऐसा भी जीवन हो। अरे भैया मैं कहां कह रहा हूं कि मुक्ति का मतलब मौत ही है। मैंने ये कहा

00:49:18:00 क्या? मैंने ये कहा क्या? मैं कह रहा हूं कि हम सभी प्रकार के प्राकृतिक नियमों नियमों के नियमों के पार चले जाना चाहते हैं। तो इसका मतलब है इस दुनिया में कोई है ऐसा जो सभी प्रकार के नियमों के पार जा सकता है। यानी कि ईश्वर वही है जो किसी प्रकार के नियम के एक मिनट एक मिनट भाई साहब ईश्वर वही है जो किसी प्रकार के नियम के नीचे नहीं है। वही हुआ ना ईश्वर ईश्वर वही है जो हर नियम का सम्मान करे। तो फिर तो फिर वो सच्चिदानंद से सिद्ध नहीं होगा। भाई मौत एक नियम है। मैं बता रहा हूं। मौत एक नियम है। हम हम ये चाहते हैं कि हम हम कभी ना मरने वाली स्थिति में पहुंच जाए। हम यही चाहते हैं ना। अब ईश्वर है वो कहे नहीं तू तो मरेगा ही। हां इसीलिए हम हम इसीलिए चाहते हैं बहुत सिर्फ इसीलिए हम जब हमारा शरीर हमें इसीलिए चाहते हैं। हम इसीलिए चाहते हैं। बोल रहा हूं मैं। सुनो तो पहले

00:50:33:06 सुनो। हम मौत इसीलिए चाहते हैं। है इनकी आवाज नहीं आ रही है। आपकी आवाज अटक रही कुछ समझ में नहीं हमारा शरीर पुराना हो आपकी आवाज अटक रही है भाई साहब आवाज अटक रही है आपकी

00:51:22:07 हो गया ठीक है चलिए ऐसा करते हैं उनकी आवाज अटक रही है मुझे लगता है नेटवर्क प्रॉब्लम है नेट चेहरा नहीं आ रहा आपका आपका भाई साहब आप जो है अगर हो सका तो एकद दिन में आपके साथ जो है कंटिन्यू करेंगे। ठीक है आप तब तक और थोड़ा अध्ययन बढ़ाइए। अच्छा राम मनोहर जी आपको मैं लिंक दे देता हूं।

00:51:55:25 यहां लिंक सबको मत दीजिएगा। ज्यादा टाइम नहीं है। राम मनोहर जी को ले लेते हैं और हर्ष जी को ले लेते हैं और अनिकेत जी को ले लेते हैं।

00:52:35:06 महेंद्र जी अब आपसे कल बात मतलब फिर कभी बात करेंगे काफी बात हो गई आपसे आपका वो बार-बार अटक रहा है हां जी देखिए देखिए थोड़ा करेंगे बात थोड़ा ओपन करना सर कर ओपन कर कर ओपन हां हां अब तो आपकी पिक्चर पहले से ज्यादा क्लियर आ रही है मोबाइल बदल लिया दरवाजा खिड़की बंद किया था तो इसलिए थोड़ा प्रॉब्लम आ रहा था। अच्छा तो मैं यह कह रहा हूं कि हम क्योंकि सभी नियमों से मुक्ति चाहते हैं। मैं उड़ नहीं पा रहा हूं तो उड़ सकूं। गायब नहीं हो पा रहा हूं तो गायब हो सकूं। कुल मिलाकर के हम जो है प्राकृतिक बाधाओं के परे जाना चाहते हैं। इस क्योंकि इससे सिद्ध होता है कि इस दुनिया में कोई प्राकृतिक बाधाओं के परे जाने वाला ईश्वर है। जी हां बंधन मुक्त जीवन तो यदि ऐसा है तो ईश्वर वही है जो किसी प्रकार के नियम के नीचे दबा हुआ नहीं है। बंधन में नहीं है। ठीक है? नहीं तो अगर ऐसा नहीं है वो बंधन में है तो आप उस ईश्वर को फिर सिद्ध करें अलग से। मतलब कहने का यह है कि हमारे अंदर बंधन मुक्त

00:53:48:14 है। जी कोई तो बंधन मुक्त है। बहुत बढ़िया वो बंधन मुक्त है। बहुत बढ़िया। बहुत बढ़िया। ईश्वर वो है जो बंधन मुक्त है। किसी प्रकार के बंधन में नहीं है। ठीक है। जी। ठीक है ना? अब ये बताइए क्या वो अवतार ले सकता है? जी अवतार वो नहीं लेता। बंधन में है मतलब अवतार इसीलिए लेता है उसको अवतार देने की जरूरत ही नहीं है। वो अवतरित होता है। अवतरित होता है। उसको ज्ञान प्रवेश करके उसको ज्ञान देने की जरूरत क्या है? हमारे ऊपर रहम की भावना है उसके मन में। तो रहम की भावना के लिए ये रहम की भावना के लिए भाई साहब भाई साहब सुन लीजिए। जानता हूं आप क्या मैं जान गया रहम दिल है इसलिए परकाया प्रवेश करके ज्ञान देता है तो रहम दिल है इसलिए अवतार लेकर के ज्ञान देता है लो अवतार हां तो तो तो अवतार लेकर के देता है लो तो जन्म लेने की जरूरत नहीं उसको ज्ञान ज्ञान ही देना है ना उसको अरे भैया भैया पर परकाया प्रवेश की भी जरूरत नहीं है क्या वो मन में आ

00:55:03:20 के दे सकता है सीधे मैं बता रहा हूं सीधे मन हां जी मन में क्या ईश्वर सीधा घुस सकता है? हां मन में घुसने के लिए पहली बात कि किस हर एक के मन में घुसेगा कैसे घुसेगा क्योंकि हमारा मन ही उसके संकल्प करने के लिए यानी कि यानी कि ईश्वर एक साथ सबके मन में नहीं घुस सकता क्योंकि वो घुसने का बात अलग है कि वो हमेशा हम उसके संकल्प तो कैच कर हमारी क्षमता होनी चाहिए। मैं मैं पूछ रहा हूं क्या वो ऐसा कोई इंतजाम कर सकता है जो दुनिया में सबके साथ सबके मन में एक साथ घुस जाए और ये ईश्वरीय अज्ञान प्रदान करे क्यों परकाया में प्रवेश करेगा कि जो उसको सुनने आए एक एक मिनट एक मिनट एक मिनट कि जो उसको एक मिनट जो उसको सुनने आए बस वही ज्ञान ले पाए अरे भैया ईश्वर तो सर्वशक्तिमान है वो एक साथ पूरी दुनिया में समस्त जितने भी लोग हैं फंसे हुए उन सबके मन में घुसेगा देगा नहीं इसीलिए फर्क नहीं पूछ रहा हूं मैं पूछ रहा हूं घुस सकता है कि नहीं

00:56:16:07 वो घुसता नहीं है घुस सकता है पूछ रहा हूं मैं पूछ रहा हूं घुस सकता है ना घुस सकता है ना हां घुस सकता है हां ठीक है घुस सकता है तो इसका मतलब बहुत आवश्यक नहीं है कि वो परकाया प्रवेश ही करे पर वो करता है क्योंकि उसका मन है आवश्यक है कि परकाया प्रवेश करता है। इसलिए आवश्यक क्यों है? बताओ बताओ। हां जी जी जब हमें कानों से सुनने का आदत हुआ है ज्ञान का समझने का तो हमें समझाने के लिए उसको मुख की जरूरत होगी। तो कोई का आधार एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट भाई साहब एक मिनट इसका मतलब यह है कि ब्रह्मा कुमारी के लिए उसके ब्रह्मा कुमारी के पास उसका कोई इंतजाम नहीं है जो कि व्यक्ति बह रहा हो। जो व्यक्ति बह रहा हो क्या है? उसका उसका भी इलाज है। क्या क्या है? उसको लिखवा के तो पढ़ा सकता है। यानी कि ये यानी कि ये मैटर नहीं करता है कि किसी के मुख से निकली हुई आवाज को सुनकर ही ईश्वरीय ज्ञान प्राप्त करना आवश्यक है। ये मैटर नहीं करता। हां अवश्य मैटर कर किसी भी किसी भी प्रकार से

00:57:31:15 वो ज्ञान उसके मन में आ जाना चाहिए। जब वो ज्ञान आ जाएगा तो उसका ये वाला जो ये वाली जो मूर्खता है कि मैंने मैं सुन के मेरी आदत है सुनने की तो मैं सुन के ही ज्ञान लूंगा। वो इससे भी तो मुक्ति पा लेगा भाई। जब ज्ञान आ जाएगा तो सीधे ज्ञान दे दो ना। पर काया प्रवेश की भी क्या जरूरत है? सीधा ज्ञान कैसे देगा भाई साहब? सीधा लेकिन हम तो सर्वमान नहीं है ना समझने के लिए हमारी तो क्षमता होनी चाहिए यानी कि वो वो जो है इस तरीके से ज्ञान नहीं दे सकता जिसको हम समझ सके।

00:58:12:07 हमारे मन में घुसकर इस एक मिनट हमारे मन में घुसकर वो इस तरह से ज्ञान नहीं दे सकता जिसको हम समझ सके और वही पे नहीं दे सकता बाधित हो गया बाधित हो गया कैसे कैसे बाधित हुआ आपने कहा ना फलाना काम नहीं कर सकता वो वो तो सर्वशक्तिमान है करेगा जरूर कर सकता है कि नहीं मैं पूछ रहा हूं कर सकता है कि नहीं वो उसका विधि अपनी विधि से ही कार्य करेगा ना वो मैंने पूछा कर सकता है कि नहीं अपनी विधि से यानी यानी कि आवश्यक नहीं कि परकाया प्रवेश में ही करना है। आवश्यक नहीं है। अच्छा सुनने की बात मैं बता रहा हूं। परकाया प्रवेश की क्या आवश्यकता है? आकाशवाणी नहीं कर सकता भाई। पर काया प्रवेश की भी क्या आवश्यकता है? सीधे आकाशवाणी कर दे। जी जी पर काया आकाशवाणी करेंगे। आकाशवाणी करेगा। तो उसके लिए उसको मुख भी चाहिए। क्या चाहिए? वो तो एक आत्मा है ना। भगवान के लिए मुख तो चाहिए। यानी कि आकाशवाणी नहीं कर सकता वो बिना मुख के बिना मुख आकाशवाणी क्यों करेगा कैसे करेगा कैसे कौन समझेगा उसको कैसे

00:59:27:13 निकली वाणी तो काहे के लिए उसको सर्वशक्तिमान कह रहे हो बोल दो ना कि नहीं हां जी जी जी इसी सवाल का जवाब दे रहा हूं मैं सर्वशक्तिमान की व्याख्या इसका मतलब सर्वशक्तिमान की व्याख्या नहीं बोल रहा हूं सभी बंधनों से मुक्त है कि नहीं यह आप बंधन लगा रहे हो तो बंधन से मुक्त भी है। हां हां बताओ कैसे? वो शरीर के बंधन से मुक्त है। शरीर के बंधनों से मुक्त है। मतलब वो ऐसा है सबको जो है एक मिनट जैसे हमने हमने जो ये सिद्ध किया था कि हम क्योंकि प्रकृति के सभी बंधनों से मुक्त नहीं हो पा रहे हैं। और मुक्त होने की चाह है। इसका मतलब इस दुनिया में कोई है जो प्रकृति के सभी बंधनों से मुक्त है। तो इसका मतलब सिद्ध हुआ कि कोई भगवान है, कोई भगवान है जो प्रकृति के सभी बंधनों से मुक्त है। यानी कि अगर इसको हम ऐसे देखें अगर हम उड़ नहीं पा रहे हैं तो कोई है जो उड़ सकता है। अगर हम गायब नहीं हो पा रहे हैं कोई है जो गायब हो सकता है। अगर हम कहीं पर भी हम प्रकृति के कारण बाधित हो रहे हैं तो कोई है जो वहां पर बाधित ना हो। मगर अभी आप कह रहे हो कि जो ईश्वर है वो प्रकृति के कई कई ऐसे कारण है जिनसे वह बाधित है।

01:00:44:02 हां जी इसका जवाब यह है। हम कि वो इस खेल में ही आता नहीं है। तो खेल के बाहर है ताकि यहां पर मैं पूछ रहा हूं मैं पूछ रहा हूं प्रकृति के सभी बंधनों से मुक्त है कि नहीं? जैसे मैं उड़ नहीं सकता तो क्या वो उड़ सकता मैं पूछ रहा हूं जैसे मैं उड़ नहीं सकता तो क्या वो उड़ सकता है? मैं गायब नहीं हो सकता तो क्या वो गायब हो सकता है? मैं पहाड़ नहीं उठा सकता तो क्या वो पहाड़ उठा सकता है? यह जो मेरे ऊपर प्रकृति के दबाव है इनहीं से पता चलता है कि मेरे अंदर सच्चिदानंद की चाह है। ठीक है? हमारे अंदर हम हम

01:01:22:19 हमारे अंदर चाह है कि हम हम असली स्वरूप को भूलने के बाद हम खुद का स्वरूप भूलने के बाद आपको दे समझने से हम दुखी है। लेकिन हम तो है आत्मा तो हमारी चाह तो वही दुखों से छूने की। आप एक काम करिए दोबारा से ईश्वर को सिद्ध कर दीजिए। बताइए ईश्वर है आपका ये सिद्ध कैसे होता है? हां सिद्ध यही है कि हमारे अंदर दुखों से छूटने की भावना है। हां तो हमारे अंदर तो हमारे अंदर यानी कि हमारे यानी कि हमारे अंदर जो भावना है जिससे जिसके बिना हम नहीं रह पा रहे हैं उसके होने से सिद्ध होता है कि कोई है जो उन भावनाओं का पूर्ति करने वाला है उसके पास उन सभी चीजों का निवारण है। यही ना यही ना? हां जी। हां तो ये जो दुख की भावनाएं हैं ये जो दुख की भावनाएं हैं यह प्रकृति के बंधन से मुक्त हो जाने से ही निकल के आ रही हैं। यानी कि हमारे अंदर प्रकृति के बंधन से मुक्त हो जाने की भावना है। इसका मतलब कोई है जो प्रकृति के बंधनों से मुक्त है। यानी कि हमारे अंदर जो उड़ ना सकने जो उड़ पाने की भावना है। गायब हो पाने की भावना है। सर्वशक्तिमान बन जाने की भावना है। इसका मतलब है कि कोई इन सब कार्यों को करने वाला सर्वशक्तिमान इस दुनिया में है। मगर आप कह रहे हो कि नहीं वह सब कुछ नहीं कर सकता

01:02:37:22 तो फिर हमारी भावनाओं के आधार पर उसकी सिद्धि नहीं होती। हमारी भावनाओं के आधार पर ईश्वर की सिद्धि फिर नहीं होती। क्योंकि हमारे अंदर इन प्रकृति के सभी नियमों के पार जाने की भावना है। आप कह रहे हो वो ऐसा ईश्वर वो नहीं है जो प्रकृति के सभी नियमों के पार चल जाकर दिखा दे। इसका मतलब हमारी भावनाओं से ईश्वर का होना सिद्ध नहीं होता। अब कोई दूसरा तरीका लाइए ईश्वर को सिद्ध करने के लिए। जी बहुत प्रकृति को अधीन करके पर काया प्रवेश करके हमें जो ज्ञान सुनाता है कि फिर भाई साहब मैंने ये नहीं पूछा वो करता क्या है? मैंने पूछा ईश्वर सिद्ध कैसे होता है? यह बताइए। हमारे अंदर भावना होने से ईश्वर सिद्ध नहीं होता क्योंकि आप ये कह रहे हैं कि हमारे अंदर प्रकृति के बंधनों से मुक्त प्रकृति के बंधनों पर नियंत्रण कर देने की जो भावना है उससे यह सिद्ध नहीं होता कि प्रकृति पर कोई ऐसा है दुनिया में जिसका प्रकृति पर नियंत्रण हो। ठीक है? तो हमारे अंदर भावना होने से ईश्वर की सिद्धि आप नहीं मान रहे। ठीक है? अभी फिलहाल हटा देते हैं। अंदर भावना हमारे अंदर भावना होने से ही तो भगवान ईश्वर है। सिद्ध होता है। लेकिन आप इस तरह से समझाते हैं तो फिर तो फिर प्रकृति के बंधनों पर नियंत्रण करने की जो भावना है हमारी उससे भगवान का प्रकृति के बंधनों पर नियंत्रण करने वाला क्यों नहीं सिद्ध होगा?

01:03:54:12 वो प्रकृति के बंधन में आता ही नहीं है। अरे तो कारण कुछ भी हो वो प्रकृति के बंधनों को तोड़ सकता है कि नहीं? यह पूछ रहा हूं मैं वो आता है कि नहीं आता डज मैटर कैपेबिलिटी है कि नहीं उसकी कैपेबिलिटी है लेकिन उसी ये बात है कि वो हमें छुड़ाने के लिए आता है वो जन्म लेने के लिए नहीं आता है उसकी हमारे जैसे जन्म लेने की इच्छा होती है वैसे उसकी जन्म लेने के लिए नहीं है वो वो हमारे लिए रुका हुआ है बाहर कि हमारे बच्चे जब वो दुखी होंगे तो उनको छुड़ाने के लिए वो रुका है

01:04:33:25 कोई बाहर हो तो ही तो खेल से दुखियों दुखियों को छुड़ा सकता है। जैसे एग्जांपल कोई क्रिकेट चल रहा है। क्रिकेट की मैच चल रही है। मैच खेलतेखेलते बच्चे लोग आपस में झगड़ा करने लगेंगे। तो खेल के जो बाहर के लोग हैं वही तो उनका अगर झगड़ा छुड़ा सकते हैं। फिर से उनका खेल शुरू कर सकते हैं। वो अगर वही खेल खेल का हिस्सा होंगे। समझ गए कोई अगर खेलता है हां जी ठीक है समझ गए तो आपका कहने का मतलब है कि जो क्रिकेट खेल रहे हैं जो क्रिकेट खेल रहे हैं वो जो है खेल के अंदर नहीं आते हैं इसलिए वो सब कुछ नहीं करते हैं ठीक है हां खेल के बाहर है वो पहली बात तो ये है पहली बात तो ये है कि जो खेल के बाहर है वो बाधित है उस पर एक नियम लागू है कि तुम किसी से बिना पूछे अंदर नहीं जा सकते हो पहली बात दूसरी बात आप कह रहे एक भाई साहब पूरा सुन लो पूरा सुन लो पूरा सुन लो दूसरी बात कि वो अंदर चला जाएगा तो खेल कैसा रह जाएगा अरे भैया तो फिर आपका आप उसको जो है पर आया प्रवेश करने वाला क्यों मान रहे हो वो भी तो खेल के अंदर ही आ रहा है बस खुद नहीं खुद का शरीर नहीं धारण कर रहा है दूसरे के शरीर के द्वारा खेल तो वही रहा है खेलने तो आया ना

01:05:50:00 खेलने नहीं आ रहा है खेल के नियम समझाने के लिए आ रहा है तो खेल के नियम सुनो फिर क्रिकेट मैच जो क्रिकेट मैच के जो नियम होते हैं वह खेल के बाहर समझाए जाते हैं। तो फिर क्रिकेट मैच से उसका वो मत करो। क्रिकेट मैच से उसका तुलना मत करो। तुलना नहीं तुलना है कि क्रिकेट के बाहर वाले वो खिलाड़ी उनके संपर्क में आएंगे तभी तो उनको संवाद करेंगे। भाई साहब मैं अब आपको थोड़ा सा मेन जगह पे दोबारा से ले आता हूं। मुझे बता दो प्रकृति अपने हिसाब से नहीं आप अपने हिसाब से आप अपनी बात सिद्ध करते हैं लेकिन हमारे भी हिसाब से हमको बात सिद्ध करने नहीं देते हैं। आपने जो बात बोली है क्रिकेट से उसका मैच इसलिए नहीं हो रहा है कि आप यह कह रहे हो कि क्रिकेट के अंदर आकर के वो खेलेगा थोड़ी ना। वो तो ज्ञान देने आएगा। तो हम ये कह रहे हैं ठीक है वो परकाया प्रवेश करने आता है ज्ञान देने। तो फिर जब वो अवतार लेगा तो क्यों कह रहे हो? जब वो अवतार लेगा तो क्यों कह रहे हो कि वो जो है खेल का हिस्सा हो जाएगा। उसको खेलना नहीं है। हो गया हो गया अरे तो मैं कहां कह रहा हूं कि खेलना है ज्ञान देने आएगा वो और अगर अगर अवतार से उसका ज्ञान देना नहीं सिद्ध हो करके उसका खेलना सिद्ध होता है तो पर काया प्रवेश करके भी तो उसका ज्ञान देना ना सिद्ध हो करके खेलना सिद्ध होगा फिर नहीं

01:07:05:18 खेलने के लिए आता ही नहीं आता है इसीलिए इसीलिए मैं सीधे मूल पॉइंट पे आ रहा है तो भाई साहब वो अवतार धारण करके भी तो दे सकता है अच्छा एक बात बताइए यह जो जैसे जैसे कोई भी प्राकृतिक चीज है जैसे पेड़ के पत्ते ग्रीन होते हैं ये क्यों होते हैं ग्रीन क्यों होते हैं पेड़ के पत्ते ईश्वर मतलब इनको कलर कलर वगैरह ईश्वर ही देता है अपने आप ग्रीन होते हैं मतलब ईश्वर चाहता है कि ग्रीन हो तब ग्रीन होते हैं कि ऐसे ही हो जाते हैं अपनी मर्जी से वो प्रकृति का नियम है मतलब उस पर कोई नियंत्रण नहीं है ईश्वर के उससे नहीं हो रहा है ये नहीं नहीं वो प्रकृति का काम है वो प्रकृति कर रही है ठीक है ठीक है खेल खेल कैसे चल रहे है वो समझिए पहले मैं भाई साहब मुझे मुझे इधर उधर की बातें नहीं मुझे मूल प्रश्न पे आने दीजिए प्लीज मूल प्रश्न

01:08:04:04 मूल प्रश्न ये है कि हमारे अंदर इच्छा होने से ईश्वर की सिद्धि नहीं हो रही है क्योंकि आपने कहा था कि हमारे अंदर दुख से मुक्त हो जाने की इच्छा है इसका मतलब है कोई दुख है तो हमारे अंदर प्रकृति के नियमों के परे जाने करने की इच्छा है। इसका मतलब होना चाहिए कि जो जो दुख से मुक्त है वह प्रकृति के परे भी जा सकता हो। परंतु आप यह कह रहे हैं कि वह प्रकृति के परे नहीं जा सकता। प्रकृति के परे जाने की इच्छा तब होती है जब हमें प्रकृति दुख देने लगती है। अरे भैया तो हमारे दुख दुख का प्रमाण यही है ना कि हम प्रकृति के परे जाना चाह रहे हैं। कैसे पता कि हमारे अंदर दुख है। कैसे पता? मैं बता रहा हूं। कैसे पता? कैसे पता कि दुख है? क्योंकि हम कूदना चाहते हैं क्योंकि हम गायब होना चाहते हैं, उड़ना चाहते हैं। इससे पता चलता है कि हमें दुख है। क्योंकि हम नहीं उड़ पा रहे हैं। इससे पता चल रहा है कि हम दुख हैं।

01:09:01:10 दुख इसीलिए है। प्रकृति मैं ये नहीं भाई साहब मैं ये नहीं कह रहा हूं। आप मेरी बात को समझिए। मैं क्या कह रहा हूं। थोड़ा सा कोशिश करिए सुनने की कि कुल मिलाकर के हमारे अंदर सच्चिदानंद की प्यास है जिससे सिद्ध होता है कि दुनिया में कोई सच्चिदानंद ईश्वर है। तो हमारे अंदर वो सच्चिदानंद की प्यास सिद्ध कैसे होती है? प्रकृति पर नियंत्रण कर लेने के प्रयास से। तो जब हमारी सच्चिदानंद से सच्चिदानंद की सिद्धि हो रही है तो हमारे प्रकृति पर नियंत्रण कर देने के कर लेने के प्रयास से प्रकृति पर नियंत्रण कर एक मिनट प्रकृति पर कर लेने वाले कर लेने वाले का अस्तित्व सिद्ध होना चाहिए। परंतु आप सच्चिदानंद से सच्चिदानंद की सिद्धि तो मान रहे हैं। परंतु प्रकृति पर नियंत्रण कर लेने वाले प्रकृति पर कर लेने की चाह से आप प्रकृति पर नियंत्रण करने वाले की सिद्धि नहीं मान रहे हैं। ये बात है। ठीक है?

01:10:01:27 यानी सर्वशक्तिमान नहीं है। कुल मिलाकर के ईश्वर सर्वशक्तिमान है। इसलिए सर्वशक्तिमान है कि उसी में वो क्षमता है कि बिगड़े हुए वो बहुत से कार्य है जो वो नहीं कर पा रहा है। ठीक है? बहुत से कार्य नहीं। नहीं नहीं सुनो पहले सुनो। हम सर्वशक्तिमान इसीलिए कहते हैं। आप जिसके जिस आधार पे उसको सर्वशक्तिमान कहते हैं उस आधार पे हम सर्वशक्तिमान नहीं कहते हैं। हम सर्वशक्तिमान इसीलिए कहते हैं सर्वशक्तिमान का संधि विच्छेद करते हुए आप उसका अर्थ बता दीजिए हिंदी में। जी कि सर्वशक्तिमान यही इसीलिए है कि किसी भी में भाई साहब मैं ये कह रहा हूं मैं ये कह रहा हूं सर्वशक्तिमान का दो शब्द है। तोड़ते हुए आप जो है उसका अर्थ बता दीजिए। आप जोड़तोड़ करिए। हम कर्तव्यवाचक शब्द कहते हैं उसको। क्या कर्तव्यवाचक शब्द? हां उनका ये कर्तव्यवाचक शब्द उनका ये टाइटल है सर्वशक्तिमान। वो कुछ भी कर सकते हैं। इसीलिए टाइटल नहीं है उनका। हां। उनमें वो क्षमता है कि मनुष्य दुखी जीवन करना। सर्व का मतलब क्या होता है? सर्व का मतलब सर्व का मतलब सर्व का मतलब सर्व आत्माओं में। उसके जैसा कोई नहीं है।

01:11:17:15 में सर्व का मतलब सर्वात में जी टीवी का मतलब क्या होता है? टीवी का मतलब टीवी होता है। टेलीविजन होता है। टीवी का मतलब सर्व आत्माओं में क्यों नहीं होता? मैं इसीलिए बता रहा हूं कि मैं कह रहा हूं मैंने आपसे मैंने आपसे अभी एक प्रश्न किया है। मैंने आपसे प्रश्न किया है। टीवी का मतलब सर्व आत्माओं में क्यों नहीं होता? बताइए। टीवी में आत्मा कहां है भाई साहब? तो सर्व में आत्मा कहां है भाई साहब? हां जी। तो मनुष्य जितने धरती पर है मैंने क्या पूछा है भाई साहब? भाई साहब मैंने क्या पूछा है? सर्व मैंने पूछा है सर्व का अर्थ क्या है? समझिए मेरी बात को। मेरी बात को समझिए। मैंने कहा अभी आप अभी आप अभी आप स्पिरिचुअलिटी से बाहर आ जाइए। मैं पूछ रहा हूं सर्व का अर्थ क्या है? ये पूछा मैंने। सर्व का अर्थ है सब। सब सब जी सब ना सब अच्छा क्या ऐसा सब है जिसके बाहर भी कुछ हो

01:12:22:14 सब मतलब सब आत्माओं के प्रति भाई साहब मैंने आत्मा की बात ही नहीं की फिर मैं टीवी पूछूंगा मैंने आत्मा की बात नहीं की मैं सर्व का मतलब पूछ रहा हूं सर्व का मतलब सर्व सब हो गया सब सर्व का मतलब सब क्या सब का मतलब ऐसा कुछ कह रहे हो कि उसके बाहर कुछ ना हो उसके बाहर हो कुछ हां सब सब आया सब कुछ आया सब कुछ आया कोई उसके बाहर नहीं कुछ रह तो नहीं गया नहीं नहीं रह गया कुछ तो नहीं गया पक्का लॉक कर दिया जाए यानी कि सर्व का मतलब है सर्व का मतलब है कि कुछ भी उससे बाहर ना रह जाए उसके अंदर आ जाए सब कुछ हम ठीक है सर्व का मतलब तो अब अब इस सब कुछ वाले सर्व को आप सर्व शक्तिमान के साथ लगा दीजिए। जी कि सर्वशक्तिमान इसीलिए है कि ऐसी कोई चीज नहीं है ऐसा कोई धरती पर अवेलेबल नहीं है। उसी के सिवा कि हमें वापिस दुखों से छुड़ाकर सुख में ले जाए। ना कोई व्यक्ति है ना वस्तु है। भाई साहब वो तो अद्वितीय होगा ना।

01:13:37:20 एक मिनट एक मिनट भाई साहब वो अद्वितीय का अर्थ है कि उसके जैसा कोई ना हो ये समझिए आप अभी हम बात कर रहे हैं सर्वशक्तिमान मैंने क्या कहा वो अद्वितीय का अर्थ है कि उसके जैसा कोई और ना हो अतुल्य अद्वितीय जिसके जैसा कोई दूसरा ना हो आप आप सर्वशक्ति आप सर्वशक्तिमान का अर्थ बताइए जिसमें सर्व का अर्थ है सब कुछ ये सब कुछ के साथ सर्वशक्तिमान का अर्थ बताइए सर्व में वो शक्ति है सर्व में कि हमारा खेल को वो फिर से सुधार मुझे मुझे सर्वशक्तिमान का ऐसा अर्थ बताइए जिसमें सब कुछ का उपयोग हो ठीक है ये सब कुछ जो है ना अभी आपने कहा सर्व का मतलब सब कुछ तो इसका उपयोग होना चाहिए बताइए नहीं नहीं जी आप आप जिस हिसाब से भाई साहब आप आप जी भाई साहब सुनिए पहले सुनिए अब आप जा सकते जा सकते हैं आप आप जा सकते मैं समझ गया अब आप थोड़ा थोड़ा बिगड़ने वाले हैं। मैं समझ रहा हूं। अब आप बिगड़ने वाले हैं। मैं व्यक्ति का देख के समझ जाता हूं। ठीक है। हो गया। आपके साथ काफी मगजमारी कर ली। आपने काफी देर तक जो है हमें हमने आपने हमें झेला आप तो कहा ही ठीक है। आप

01:14:52:21 जा सकते हैं। इतना ज्यादा सर में दर्द हो होता है। बिल्कुल ही आईक्यू लेवल समाप्त हो चुका है। जय श्री राम। सुश भैया जय श्री राम ठीक है जय [गला साफ़ करने की आवाज़] श्री राम भैया जय श्री राम जय श्री राम समझ में आया कुछ एक से बढ़कर [हंसी] एक से बढ़कर एक आते एक [गला साफ़ करने की आवाज़] से बढ़कर एक आते शिवश भैया आप जो फॉर्म अब एक काम करिए अब जो फॉर्म आप जो डलवा रहे हैं ना इनको डिबेट के लिए आने के लिए उनमें पांच सवाल आप पहले से डाल करके रखिए कि सर्वशक्तिमान से आप समझते क्या है? सबसे पहला प्रश्न आप समझे नहीं बात यह है कि अगर हम चाहे तो जो इस तरह के आते हैं जो बिल्कुल ही मतलब जिनका आईक्यू लेवल बहुत लो होता है हम चाहे तो इनसे बात हम चाहे तो इनसे बात ना करें यहां पर और जो है फोन पर ही हमारी हमारी टीम में से कोई बात कर ले और वहीं की व फैसला हो जाए भैया इनसे बात करके टाइम वेस्ट मगर बात ये है कि इस तरह से जब इनका जब जनता

01:16:08:00 देखती है उसको उसको सूचनाएं जाती है। जैसे रामपाल रामपाल वालों से हमारे को भिड़ने की क्या जरूरत है भाई? कोई एक से बढ़के कोई जरूरत नहीं है। मगर जब हम ऐसा करते हैं तो जनता को पता चलता है कि ये ये इनका आईक्यू लेवल है। जैसे उस दिन बाबू आए बाबू बोल रहे सच्चिदानंद का कुछ अर्थ नहीं होता। उसका नाम है। ना इनको संधि का पता है ना समास का पता है ना सूार्थक शब्द का पता है। कुछ भी पता नहीं है इन लोगों को। कर्ता कर्ता कारक का भी पता नहीं है इन लोगों को। हिंदी के सामान्य व्याकरण से भी ये लोग बहुत दूर है और बात करते हैं धर्म की। इनको तो धर्म का अर्थ भी नहीं पता। मुझे पता नहीं है। हो जाने पर भी जब हम ऐसे किसी को हटाते हैं तो लोग कहते हैं कि भाई पीछे हट गए। पीछे हटने का मतलब सुबह 4:00 बजे तक इनको सुनते रहो, झेलते रहो। अब मतलब जिस बात का कोई निष्कर्ष ना निकले जो जिसको यही पता नहीं है कि एक साधारण सा शब्द सर्वशक्तिमान का क्या अर्थ है उनको क्या क्या उनसे बात की जाएगी बताइए जरा मैंने लोगों को बताया मैंने अच्छा इसके बाद अगला

01:17:23:01 प्रश्न और तैयार था मगर ये कुछ क्या है कि भड़कते हुए मुझे नजर आया मैंने देखा कि इनको सवा घंटा दे चुका हूं ऑलरेडी तो मैं क्या करता हूं भड़कने वाली स्थिति देख लेता हूं तो मैं क्या करता हूं उनको हटा देता व्यक्ति को क्योंकि भड़केगा अगर कुछ हां भड़कने की ही भड़कने की ही स्थिति थी अब सिर्फ दो मिनट की बात थी दो मिनट के बाद फिर एकदम से ना आग बबूला हो के और फिर बस वही वाली राम कहानी करके और फिर हो जाते यहां से ये जो परिभाषा है ना ये परिभाषा ये परिभाषा इनके ईश्वर पर सेट ही नहीं होती है क्यों नहीं होती है? क्योंकि अगर सच्चिदानंद से सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर की सिद्धि करोगे तो सच्चिदानंद की सिद्धि होगी आपकी उससे प्रकृति पर नियंत्रण कर लेने की चाह से तो अगर सच्चिदानंद से सच्चिदानंद की सिद्धि होगी तो प्रकृति के नियंत्रण से प्रकृति पर नियंत्रण कर लेने वाले की सिद्धि होगी और नहीं हो रही है तो फिर यहां से भी उसकी सिद्धि [गला साफ़ करने की आवाज़] मत है ना तो नास्तिकों का रूपांतरण जी अनिकेत जी आप

01:18:34:24 पहली बात तो ये लोग कुछ समझ ही नहीं पाते हैं कि आप कहना क्या चाहते हो। मुझे लगता है खाली ये लोग इसीलिए लाइव आ जाते हैं कि एक्चुअली क्या है मेरे को लगता है ना जितने भी ऐसे लोग है ना सब लीडर बन लीडर बनना चाहते हैं और ऐसे सब ब्रह्मकुमारी और इत्यादि जो है ना ये देखिए हमेशा ना लीडर बना रहा है दास और भक्त कोई नहीं बनना चाहते लीडर बनना चाहता है इसलिए ज्यादा आकर्षित होकर चला जाता है [गला साफ़ करने की आवाज़] इसलिए कोई भी आता है कोई भी आकर कुछ भी मतलब कोई रिप्रेजेंट करने के लिए आता है ना तो हर संस्था में से कोई भी आ जाता है। [हंसी] नहीं आने फिर दोबारा ज्ञान देके चला जाता है। दिक्कत क्या है कि व्यक्ति जो है अगर पॉइंट टू पॉइंट बात करे इधरउधर की खामखा की बातें ना करे इधरउधर वो ना करे तो हम लोग भी बहुत अच्छे से बात करते हैं। अब व्यक्ति क्या उससे पूछा जा रहा है खेत वो बात कर रहा है कल्याण की। [हंसी] क्रिकेट मैच और सब क्रिकेट मैच और सब लेकर आ गया था। वही होता है ना अभी आपने बाबू का नाम लिया था। नहीं नहीं भैया आपने बाबू का नाम आपने बाबू का नाम लिया था। वो पिछली बार क्या किया उसने? वो पूछता है तुम्हारा नाम क्या है? तो आप बोले शिवश

01:19:50:07 बोले शिवांश का अंश क्या होता है? आप बोले शिव का अंश बोलता है इससे क्या सिद्ध होता है? [हंसी] एक से बढ़कर एक है। ये लोग ये लोग बिल्कुल जो है ना ये समय और बुद्धि से परे जाकर के बात करने की चेष्टा कर रहे हैं। मुझे लग रहा है इनको मतलब बेसिक मुझे लग रहा है कि ये स्वयं प्रकृति से परे जा चुके हैं। वो लोग हैं। प्रकृति के अंदर सीमित [हंसी] प्रकृति से परे जा चुके हैं।

01:20:28:14 लेकिन लेकिन आज शिवश भैया ने गुस्सा नहीं किया। कंट्रोल दिख रहा था। [हंसी] नहीं अब एक खुशी की बात है। एक दो डिबेट थे शिवश भैया परशुराम अवतार ग्रहण नहीं कर रहे हैं। जो है ना वो परशुराम अवतार ग्रहण नहीं कर रहे हैं। एक दो डिबेट थे। ये एक बहुत सराहनीय बात है। कंट्रोल कंट्रोल कर कंट्रोल [हंसी] वरना इतने में तो इतने में तो इतने में तो क्या से क्या हो जाता था [हंसी] वो वो बजरंगबली कहते है ना माता जानकी से कि मात दिवस जननी धर धीरा कपिन सहित यही रघुवीरा तो अबांश भैया बिल्कुल फॉलो करता है [हंसी] सर्व का मतलब सर्व का मतलब माना सब कुछ उसके बाद सर्वशक्तिमान का मतलब ए बी सी डी एफ जी एच आई जे के एल एम ओ पी क्यू आर [हंसी] एस डब्लू सब

01:21:28:14 ये दिक्कत है इन लोगों के साथ में ये सबका उत्तर एक ही जैसा रहता है इन सबका उत्तर देखो एक ही जैसा रहता है ए टू जेड बोल देंगे मैंने ये बोला तो था जो भी अल्फाबेट बोलो तो उसमें था ना ए टू जेड में अच्छा अच्छा धर्म में भी मैंने इनको कुछ खींचा है धर्म में भी इनके पास कुछ था नहीं बोलने को झूठ बोलते हैं ये लोग कि मैं जो हम जो है धन नहीं मानते यू ही कह देते यूं ही के चक्कर में हमारी जो है समाज जो है विप्लव हो गया यूं ही के चक्कर में यूं ही कहते हैं हम वाह यूं ही नहीं वही बात है झूठ है लेकिन गलत नहीं गलत है लेकिन झूठ नहीं गलत है लेकिन झूठ नहीं अच्छा मैं अभी ये प्रश्न करने वाला था इनसे कि ठीक है वो सब कुछ नहीं कर सकता फिर भी सर्वशक्तिमान है। अब तुम ये बता दो जो सब कुछ कर सकेगा वो कौन होगा? उसको क्या कहेंगे? वो कौन होगा? [हंसी] हम सोच रहे थे कि अभी अब बोलेंगे अब बोलेंगे। अब बोलेंगे लेकिन तब तक की स्थिति में आ गए। भाई साहब उनको कहा भाई तुम चले जाओ। चलो ये सर्वशक्तिमान वाली बात तो हमारे लोगों को अब बिल्कुल फिक्स हो गई होगी

01:22:44:12 और बिल्कुल फिक्स है। जो वो है ना अलंकारी भाई है हमारा एक निर्भय उसने अभी कुछ डाला था कुछ चीजें उसकी उसकी शुरू में मैंने स्किप कर दी थी मुझे लग रहा था अभी इसने बोलना चालू नहीं किया है तो मैंने उनके काफी देर तक उन्होंने बोलना चालू कर दिया उसके बाद से उसे सुना बाद में मुझे जो है रील्स वगैरह किसी ने वो टैग किया Instagram तब मुझे पता चला बहुत गंदा बोला और फिलहाल जो हमारे बीच में जो व्यक्तिगत संपर्क स्थापित था वो अब बंद हो गया है। मैंने जब वो सुना तो और उस पर एक प्रतिक्रियात्मक वीडियो मुझे देना है। मैं बना दूंगा और अच्छा नहीं लगा वो सुन के जो उसने बोला था। ठीक है। चलिए फिर बहुत-बहुत अच्छा लगा। सबका समय देने के लिए आभार। सभी को जय श्री राम। जय श्री राम। जय श्री राम। जय श्री राम। यस

01:23:56:12 ओम

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Live 1:24:27 · 29 Mar 2026

क्या ब्रह्माकुमारी धर्म की शिक्षा देती हैं Live discussion with Bk Mahendra

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