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00:00:02:24 सभी को जय श्री राम अभी जो आगंतुक है आज जो आने वाले हैं वो आए नहीं है और आशा करता हूं कि आप लोगों का जो कार्तिक मास का प्रारंभ हुआ है वह सभी के लिए शुभ रहा होगा और सभी जो पावन पर्व आने वाला है मल्लिका सब उसको मनाने के लिए अच्छे से आप सबके घर में तैयारियां चल रही होंगी

00:01:25:02 तो आज हमारी जो चर्चा होने वाली है वो एक भाई साहब है जिनका यह कहना है कि जो मां भगवती है वही सबका कारण बीज है संसार वक्ष का और उनसे [संगीत] भिन्न ब्रह्मा विष्णु महेश इत्यादि है यह सभी परम ब्रह्म नहीं है कारण ब्रह्म नहीं है तो अनन्य होता के भाव से इस बा लिया जा सकता है अपने ईस्ट के प्रति सब में ईस्ट को देखो और सबको अपने ईस्ट में देखो पर हमें जैसा कि बताया गया है कि वॉइस बहुत कम

00:02:17:03 है दबा रहा हूं क्या तो वॉइस ठीक आ रहा है क्या कोई बताएगा कमेंट करके आवाज ठीक आ रही है अच्छा ठीक है वैभव जी ने कहा था कि वॉइस बहुत कम है

00:02:50:15 तो अनन्य के भाव से बात ठीक है कि मा भगवती सेही सबकी पति है कक भगवती ही विष्णु है भगवती ही शिव मगर यदि हम भगवती को अलग मान रहे हैं विष्णु को अलग मान रहे हैं तो फिर यह वाली चीज नहीं आ पाएगी और अनंतता का भाव भी ठीक है मगर उसके लिए भी कम से कम एटलीस्ट जो हमारे सनातन धर्म को सनातन धर्म की बात करने वाली जो परंपराएं है उसम व्यक्ति हो दीक्षित हो तो समझ में आता है मगर जो ये

00:03:28:09 है ये परंपरा से नहीं है संभवत तो ऐसे में फिर सवाल उठता है कि इनकी जो चीज है वो अपने मन से मनमुक चीज इसमें की अनन्य नहीं अन्यों के प्रति हीन भावना ही है अगर ऐसा है तो आज चे हम बात करेंगे और एक बात आती है कई बार की आप केवल वैष्णव से ही बात क्यों करते हैं वैष्णव अपराध क्यों करते हैं इसकन के बार आप कटाक्ष करके या प्रश्न खड़े करके आप वैष्णव अपराध कर रहे हैं इस तरह की बातें आती है और यह भी कहते हैं कि सव और सा से आप कभी नहीं करते तो आज अगर य भाई साहब आते तो एक अच्छा उदाहरण मिलेगा देखने को कि हम पक्षपात विहीन बात करते हैं और वैष्णव से प्रश्न करने वाली अगर बात बात की जाए तो

00:04:30:18 स्कन क्या है शील प्रभुपाद जी के सिद्धांतों पर चलने का दावा करने वाली संस्था ठीक है यन अब यदि स्कोन पर प्रश्न करके हम वैष्णव अपराध कर रहे हैं और हम वैष्णव नहीं है क्योंकि हम वैष्णव पर प्रश्न कर रहे क्यक उनके हिसाब से वैव तो उसम फिर एक क्वेश्चन आ जाता है किन के शल प्रभुपाद जी के ही जो शिष्य गण है उन ही आपस में एक दंद है त्विक को लेकर के अभी कुछ समय पहले हरे कृष्णा सेंटर वाले आए थे तो कुछ अंशों में यह भी इकोन का विरोध करते हैं स्न की चीजों पर प्रश्न उठाते हैं और इकोन भी जोद है इन पर प्रश्न उठाते पर य सब चलता है तो अब क्या यह वैष्णव अपराध नहीं है और अगर वैष्णव अपराध है तो जो कर रहा है क्या व वैव नहीं है इसका अर्थ है

00:05:34:08 कि बात धर्म और अधर्म की है न्याय और अन्याय की है नीति और अनीति की है अब किसी ने खुद को अगर वैष्णव घोषित कर दिया तो इसका अर्थ ये नहीं है कि वो अगर कोई मर्यादा का उल्लंघन करते हुए कोई कार्य करेगा तो अगर उस पर प्रश्न किया जाएगा तो वैष्णव का भंग हो रही है उससे आवाज कम है तो मैं एक बार जाके वापस आ जाता हूं क्योंकि आवाज कहा जा रहा है कि कम

00:06:35:07 है कुछ लोग कह रहे आवाज सही है फिर भी एक बार देख लेते हैं कुछ दिक्कत होगी तो लीव का ऑप्शन कहां पर है आवाज सही बता रहे हैं लोग क्या करें फिर तो भाई साहब आ नहीं रहे हैं काफी देर हो चुकी है ध्वनि स्पष्ट नहीं है अब लीजिए

00:08:06:26 अब आवाज ठीक आ रही है चलिए आप ऐसा करिए कि लिंक को सार्वजनिक कर दीजिए जब तक वह नहीं आ रहे तब तक कोई अन्य अगर आना चाहता हो ध्यान रखिए कि जिन पर हमने प्रश्न खड़े किए हैं वही आए नास्तिक हो रामपाल वाले हो कन से हो आर्य समाज से हो और ईश्वर का अस्तित्व सर्व सामर्थ्य परम स्वतंत्र मोक्ष और शाश्वत धर्म के बारे में ही हम प्रचार कर रहे हैं अगर कोई आना चाहता है

00:08:51:26 उसको शंकराचार्य के विरोध में ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध कर सकते हैं तो आप आए आपका स्वागत है और हां बात यह भी है कि एक तो मेरा मोबाइल बिजी बिजी हो जाता है एक बार ट्राई करता हूं जाके आप लोग वेट करिए फिर हम

00:12:14:08 तो अभी हमने उनको एक बार और मैसेज किया है शायद उनमें से कोई आए और हमने एक बहुत अच्छा सा वीडियो बना दिया है भगवान के अवतार के ऊपर यह हमने लिंक दे दिया है कोई अगर चर्चा के निमि वैचारिक मतभेद को लेकर चर्चा हो उसके निमित्त अगर आना चाहे तो आ सकता है प्रश्न पूछने के लिए ना आए किसी बात को काउंटर करने के लिए आए हां आशुतोष जी आपको अ पीडीएफ ये प्रोवाइड हो जाएगा ये पीडीएफ है यह पीडीएफ वहां पर है जो रामपाल जी के लिए हमने छह पार्ट बनाए हैं ना रामपाल का जो जो प्रलाप है उसको धस किया था उसम छह वीडियो बनाए थे उसम अंतिम जो छवा वीडियो है उसमें यह है पीडीएफ वहां से आप डाउनलोड कर सकते ठीक है तो बात कर रहा था वैष्णव की कि क्या स्कन की ऐसी चीजें जो

00:13:30:16 विवादित है आपत्ति जनक है उन पर प्रश्न करना या उनको लेकर के जागरूकता लाना उन चीजों को लेकर के क्या यह वैष्णव अपराध है तो अभी कुछ समय पूर्व हालांकि स्कोन ने नहीं सिखाया जाहिर सी बात है कोई नहीं सिखाता मगर कुछ समय पूर्व स्कोन के द्वारा नियुक्त एक पदाधिकारी है उनके बारे में बहुत सारी आपत्ति जनक विवादास्पद बातें बाहर आई मैं उनको यहां पर बताना नहीं चाहता मगर फिर भी क्या उन आपत्ति जनक बातों पर यदि हम उस व्यक्ति को पॉइंट आउट करें तो क्या व स्पन को पॉइंट आउट करना होगा उस व्यक्ति को पॉइंट आउट करें तो क्या वैष्णव को पॉइंट आउट करना होगा तो जिस प्रकार से उस व्यक्ति को पॉइंट आउट करने जिस जिस प्रकार से उस व्यक्ति के आधार पर उस व्यक्ति को पॉइंट आउट करते समय पूरे पूरे इकोन को आधार नहीं बनाया जा सकता इसी प्रकार से यदि हम स्कोन की बात कर रहे हैं तो पूरी की पूरी वैष्णव पर आक्षेप नहीं है व वैष्णव का में तो मैं स्वयं भी आ जाता हूं

00:15:00:13 मुझे लगता नहीं है कि आज कोई सार्थक चर्चा हो पाएगी क्योंकि जिनको आना था वह आ नहीं रहे हैं और हमने लिंक को पब्लिक भी किया है पर कोई जुड़ नहीं रहा है दोबारा से कर दिया गया है लिंक पब्लिक अगर कोई वैचारिक मतभेद के निमित्त आ सकता है तो आए शंकराचार्य के विरुद्ध सनातन के विरुद्ध प्रामाणिक आचार्यों के विरुद्ध वेदा आदि शास्त्रों के विरुद्ध अपने ईश्वर को सर्वशक्तिमान और यदि नास्तिक है तो स्वयं को मानव सिद्ध करे

00:15:42:13 आगे कहीं कोई अलंकार समास से हो या क्राव यानी स्कन से हो आ सकता है बहुत जल्द हम लोग एक बड़ा महा संगम लेकर के आ रहे हैं जिसमें कि हम करीब 100 से 150 आपत्ति जनक ग्रंथ जिसमें की अ जिसमें की मिलावट की गई है भगवत गीता के श्लोक वही है मगर मिलावट कर दी गई ब्रह्मर्पनम में

00:16:29:02 या कोमती मां की गोद में हम समर्पित कर देंगे सम्मान क्योंकि उसमें भगवान की प्रति प्रति भी बनी हुई है छवियां है और गलत तरीके से सनातन धर्म को प्रस्तुत किया जा रहा है तो इस तरह का एक आपको देखने को मिलेगा कोई रामपाल वाला भी नहीं आ रहा है वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है अब इन्होंने रामपाल वालों ने एक चीज और ढूंढ लिए कहीं कबीर जी का वर्णन दिया है जो उसमें भविष्य पुराण इत्यादि तो वहां से ला रहे हैं देखो यहां कबीर कबीर को शायद कबीर बाना है जो भी है मगर वहां यह ध्यान नहीं दे रहे कि वहां किस कबीर की बात हो रही है जो प्रहलाद जी का दूसरा जन्म बताया गया है उस कबीर की बात हो रही है या फिर राम भक्त कबीर की बात हो रही विष्णु भक्त कबीर की बात हो रही तो वो तो नहीं मानते प्रमाण नहीं मानते तो नहीं मानते आप अपना प्रमाण बताइए अच्छा एक चीज बहुत हसी वाली आती है मुझे कबीर पंथिया को लेकर के कबीर पंथी नहीं सॉरी रामपाल

00:17:44:07 पंथी कवि पंती तो ऐसे नहीं रामपाल जैसे तो एक चीज मुझे बहुत सी आती है पहले कहते हैं कि तुम शास्त्र शास्त्रो चित भक्ति नहीं कर रहे हो मनमुक भक्ति कर रहे हो हम तुम्हें शास्त्र उचित भक्ति बता रहे हैं उसके बाद जब उनसे पूछा जाता है कि कबीर या कबीर देव कबीर कैसे बन गया तो बोलते हैं कि तुम भी तो कान्हा को तुम भी तो कृष्ण को कान्हा बना देते हो अरे भैया हमारे विरोध में ही तो आप खड़े हुए हो क्योंकि हम शास्त्र उचित कार्य नहीं कर रहे हैं तो आप हमारा ही आधार क्यों ले रहे हो और अगर हमारा आधार लेना है तो पूरा लो

00:18:28:27 आपके लिए प्रमाण नहीं है ना तो प्रमाण आपके लिए वेद है शास्त्र है हमारा आधार बना कर के आप ये कैसे कह सकते हैं कि आप यह सही कर रहे हैं कृष्ण को काना बना रहे हैं यह बहुत बड़ा एक झोल है हमने कर लिया है मगर क्या करें वो जुड़ नहीं पा रहे उनके पास कोई दिक्कत है शायद इंटरनेट की प्रॉब्लम है शायद चलिए फिर मुझे लगता है कि व्यर्थ का समय गवाना बेकार है ऑफ करते हैं इसको आज कोई आ भी नहीं रहा है खैर मैं मां भगवती के बारे में बता दूं कि देखिए सबसे पहले तो एक बात आती है कुछ लोग यह कहते हैं कि ब्रह्मवर्त पुराण में भगवान श्री कृष्ण की ही परब्रह्म सिद्ध है मगर ऐसा नहीं है ब्रह्म व पुराण में ही गणपति खंड में भगवान गणेश की परब्रह्म भी सिद्ध है 13 अध्याय के 43 से 53 श्लोक के बीच में विष्णु भगवान गणपति जी का पूजन कर रहे हैं और उसी चैप्टर में

00:19:43:28 आगे य भी बताया गया कि वह कारण ब्रह्म के रूप में भी है गणपति और कार्य ब्रह्म के रूप में लीला रूप लीला पूर्वक वो उत्पन्न होते हैं किससे हिमाचल पुत्री से हिमाचल नंदिनी यानी कि पार्वती माता तो उनके द्वारा उत्पन्न दिखाई जाते तो इसमें विष्णु भगवान द्वारा गणेश जी को संसार का मूल कहा गया है तक में ना आ सकने वाला व्यवहार में ना आ सकने वाला और यह सारी चीजें हैं अच्छा अगर देवी भागवत की बात करें तो देवी भागवत में ही भगवान श्री कृष्ण से उत्पत्ति दिखाई गई है

00:20:28:22 माता की भी और शिव पुराण में शिव जी से उत्पत्ति दिखाई गई है माता की तो जिस प्रकार भगवती से उत्पन्न हो रहे हैं ब्रह्मा विष्णु महेश उसी प्रकार ब्रह्मा विष्णु महेश से भी उत्पत्ति दिखाई दे रही है वस्तुतः जो उत्पत्ति जहां से हो रही है वो परम तत्व एक है उसमें कोई वो नहीं है वो ना स्त्री है ना पुरुष है जैसे माता से जब दिखाई दे रही है उत्पत्ति संसार की तो उसमें माता कह रही है एक जगह मैं ना स्त्री हूं ना जो वो रूप है उनका जो कारण ब्रह्म वाला निर्गुण कह र ना तो स्त्री है ना पुरुष है ना नपुंसक ही है वो खुद कह रही है इसी प्रकार से सबके बारे में बात हुई है जब वो मूल के बारे में बात की जाती है उसके बाद फिर वो कभी गणेश बन के पहले प्रकट हो जाते हैं और बाकी सब उनके परक इत्यादि के रूप में और फिर कभी वो कार्य ब्रह्म में जब उत्पन्न होते तो माता भी इसी तरीके से होती है मगर हम यह कह दे कि नहीं सिर्फ माता से ही उत्पन्न हुआ है संसार ये कहना गलत है परम तत्व है उसको कहीं पर माता कहा गया है कहीं पर विष्णु कहीं पर शिव कहीं पर गणेश कहीं पर ब्रह्मा भी कहा गया सौर्य भी कहा भी कहा सूर्य भी कहा गया अब इसमें एक बात और आती है जैसे मुझे

00:21:43:27 किसी ने आज एक तर्क दिया कि हम शैव पुराण क्यों पढ़े वो तो शैव केंद्रिक तो कोई शक्त पुराण क्यों पढ़े भाई शाक्त आप जन्म से हैं या फिर शक्ति के प्रति आस्था होने के कारण आप शाप अगर आप जन्म से थे तो उसका कारण क्या था तो शक्त कुल में जन्म लिया है इसलिए आप केवल वो शाक्त पुराण पढ़ेंगे या फिर क्योंकि आप शक्ति के रूप में ईश्वर को स्वीकार करते हैं इसलिए आप शाक्त पुराण पढ़ते हैं वो तो लॉजिकल सिद्ध नहीं होता है क्योंकि जब आप जब तक आपकी निष्ठा हुई नहीं है शास्त्र पढ़ने पहले तो तब तक तो आपके लिए सनातन धर्म के जितने भी प्रामाणिक ग्रंथ है वो सब इक्वल होने चाहिए तो फिर आप शिव पुराण को क्यों नहीं मानेंगे क्यों नहीं उसम आस्था दिखाएंगे उन्हीं वेदव्यास जी ने वो लिखा है श्रीमद् देवी भागवत उन्ही ने शिव पुराण लिखा है ये गलत बात है इसी प्रकार के प्रलाप का फायदा उठाती है ये संस्थाए इसकन इत्यादि टाइप कि देखो वो सात भी तो ऐसा कर रहा है अरे भाई अपने ईस्ट में अपनी अनंतता रखिए

00:23:01:02 अपने इष्ट में अनन्य होता का भाव रखिए मगर बाकियों को उन्हीं का रूप देखिए ना मां भगवती ही यहां पर खड़ी हो गई है शिव बन के मैं एक बार आलो पी माता के मंदिर गया आप कभी प्रयागराज जाएंगे तो वहां पर आपको बड़ा अच्छा मिलेगा आज भी भगवत पाद शंकराचार्य जी की प्रतिमा है उनके नाम से एक पूरा चौराहा है व लोपी माता के मंदिर गया वही पास मेंही था उसमें मैं जब अंदर प्रवेश कर रहा था तो एक दिव्य अनुभूति सी हो रही थी वहां पर दिव्य अनुभूति और वह अनुभूति क्या थी नगाड़े बज रहे हैं जैसे इसी समय ईश्वर अवतरित हो रहा है और जब मैं अंदर पहुंचा तो नगाड़े बसते बसते माता की आर हो रही थी अब मुझे क्या दिख रहा है कि प्रभु श्री राम कितने सुंदर रूप में यहां पर विराजमान है मां भगवती के रूप ऐसा भाव लाने में क्या प्रॉब्लम मां भगवती ही विराजमान है शिव के रूप

00:24:15:12 में एक हो जाएगा सनातन हम जो पटे हुए हैं ये बात आप सही कह वो श्री राम भक्त बन गए हैं धीरे धीरे कई लोगों के फोन आए मेरे पास कबीर पंयो के और उनको बड़ी जागरूकता हो गई है सुधर रहे हैं थोड़ा भी तर्कशील व्यक्ति है तो वो जो है यह कोई आए हैं लिंगु मी आप अपना चेहरा

00:24:53:02 दिखाए पना लो ल क्या नाम चेहरा दिखाए तो आना है ये बात क्लियर समझ लीजिए बिना चेहरे के हम लोग बात नहीं करते हैं अ तो कई लोगों फोन आया और क्लास में भी जुड़ रहे हैं रामपाल को फॉलो करने वाले और कईयों की बुद्धि खुली है स्कोन वालों का भी कई कई लोगों का फोन आया है और जो भी थोड़ा बहुत तर्कशील है ध्यान देगा वो समझेगा चीज और जो कसम खाकर बैठा है कि नहीं मुझे जो है

00:25:41:13 जो मुझे जो है बस मैंने जो एक बार स्वीकार कर लिया मैं उसके विरुद्ध नहीं जाऊ मैं तो आज भी कहता हूं आप ईश्वर को बाधित मत कहिए धर्म को बदलने वाला मत कहिए और मोक्ष को परतंत्र मत कहिए अंत और मैं भले ही गुरु भाव है आदि शंकराचार्य जी के प्रति परंपरा के प्रति सब कुछ है मैं अपना व्यक्तिगत वो निर्वाह करता रहूंगा मगर मैं आपका प्रचार करूंगा सर्वशक्तिमान ईश्वर ईश्वर बाधित नहीं होना चाहिए सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म तीन चीजें मुझे दीजिए मैं चलूंगा आपके साथ कहां चलना है बताइए ईश्वर वादित नहीं होना चाहिए क्रिश्चन जैसा नहीं होना चाहिए कहीं एक जगह बैठा है वह तर्क देते हैं तुम्हारा ईश्वर कैसा है जो कुछ भी अरे भाई जहां पर अपराध हो रहा है वहां तुम्हारे ईश्वर की सत्ता नहीं है क्या यह तर्क देते हैं कौन ईसाई तुम्हारे ईश्वर की सत्ता है कि नहीं तो क्यों नहीं रोक देता

00:26:57:07 का ईश्वर की दृष्टि में जो हमारे लिए अच्छा बुरा है वो उसके लिए अच्छा बुरा नहीं है ईश्वर ईश्वर इसीलिए है क्योंकि उसके लिए भी अच्छा बुरा यदि मायने रखता होता तो वो ईश्वर ही कैसा वो तो दुखी होगा और होता भी है ई का ईश्वर तो व ईश्वर कैसा ईश्वर सिद्धि नहीं होती वहा आज फॉर्म भरा था लेकिन जान नहीं पाया कि आपको मिला नहीं मैं बहुत ज्यादा आपके क्लासेस अटेंड करने आपने फॉर्म भरा है तो हमारी टीम आपसे संपर्क करेगी जरूर चिंता ना करें ठीक है आप चिंता ना करें आपसे संपर्क किया जाएगा तो आपको मानना पड़ेगा कि यह जो ईसाई है उनकी बात कर रहा हूं ईसाइयों का कहना है कि उनका ईश्वर किसी एक जगह पर बैठा हुआ है वही इस्लाम की तरह और वहां से व ट करता है वो कण कण में नहीं है उसकी शक्ति कण कण में है तो पहली बा तो अगर वो कण कण में नहीं है उसकी शक्ति है मगर उसकी सत्ता तो सिद्ध है कि वहां पर उसकी सत्ता है जहां गलत

00:28:12:13 कार्य हो रहे हैं व होने दे रहा है और गलत कार्यों को करने वाले को व बना रहा है उसको मालूम है कि रेप करेगा फिर भी वो बना रहा है तो मूल में कौन गा हा ईश्वर हुआ अब आपका ईश्वर ऐसा होगा जो शायद भविष्य ना देख पाता हो अब आप कह दोगे फ्री विल दी है इसी प्रकार फ्री विल दी है उसकी इच्छा है ना ना दो ना फ्री विल गलत काम करने से रोक दो ईश्वर के लिए व अच्छाई और बुराई नहीं है क्योंकि अगर ईश्वर के लिए भी कुछ अच्छाई और बुराई होगी तो ईश्वर भी प्रताड़ित होगा दुखी होगा और यदि वो भी दुखी हो रहा है तो व आपको सुखी करने वाला कैसे सिद्ध होगा फिर हैरी पॉटर जी अपना चेहरा

00:29:12:12 दिखाएं अब इसके बाद क्या बात आती है कि अब बात करते हैं वो जरा दार्शनिक ता प उनका कहना है ईसाई और इस्लाम का कि ईश्वर जो है हमारा कण कण में नहीं है वो तो एक जगह बैठा है उसकी शक्ति कण कण में है ठीक है अगर आप यह कह रहे हो कि उसकी वो नहीं है उसकी शक्ति कण कण में है इसका मतलब आपने यह माना कि शक्ति ईश्वर से अलग है क्योंकि ईश्वर नहीं है शक्ति है दो पदार्थ आपने मान लिए शक्ति और ईश्वर अब जाहिर सी बात है जब शक्ति है और ईश्वर है तो शक्ति जो है ईश्वर के कंपेरटिवली कहीं ना कहीं वीक है तभी तो अलग है रा सर्वगुण संपन्न है अगर तो वो तो ईश्वर ही हो गया फिर कहीं ना कहीं कुछ डिफेक्ट है शक्ति में तभी वह उसमें कमी है तो फिर हमें क्या मानना पड़ेगा हमें यह मानना पड़ेगा अगर दो तत्व मान लिए कि जहां कण कण में ईश्वर नहीं है उसकी शक्ति है वहां पर ईश्वर की उतनी सत्ता नहीं है जहां पर ईश्वर स्वयं है तो क्या हुआ ईश्वर

00:30:27:22 की जो सत्ता है वो फ्लकचुएट हो रही है ईश्वर जहां स्वयं खड़ा है वहां पर तो ज्यादा है पावर जहां वो है तो यानी सर्व सामा समान रूप से एक रस उसकी शक्ति सत्ता सब जगह नहीं है फिर क्या होगा अगर आपको यह यह कहना है कि जहां पर मैं नहीं हूं वहां भी मेरी उतनी सत्ता जहां पर मैं हूं तो तो आप शाश्वत हो पाएंगे और अगर आप ये कह देंगे वहां पर मेरे उतनी सत्ता नहीं है तो तो आप शाश्वत ईश्वर नहीं कहला सकते और अगर आपने यह मान लिया ईश्वर को शाश्वत रूप से सर्वशक्तिमान सामर्थ्य मान सिद्ध करने के लिए आपको मानना पड़ेगा फिर कि जहां पर मैं नहीं हूं वहां पर भी मेरी उतनी ही सत्ता है जितनी जहां पर मैं हूं वहां पर है तो फिर क्या हुआ जब हमने यह मान लिया तो क्या हुआ आपको यह मानना पड़ेगा कि आप ही वहां पर अकट रूप से हैं शक्ति के रूप में हो गया कण का में आ गए फस जाओगे भैया मत पढ़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर आपको कह रहा हूं इस्लाम और

00:31:42:26 ईसाई वाले बाइबल वाले आप आइए ना ईश्वर को अबाध सिद्ध करिए अबाध सिंपल मैं नहीं आपके वो क्वेश्चन उठाऊंगा कि वहां बहन से विवाह क्यों होता है ये है वो है वो सब क्वेश्चन नहीं वो सब काम नहीं है अपने पास सवाल सैद्धांतिक प्रश्न ईश्वर सर्वशक्तिमान है क्या है तो आ जाइए मैं सनातन धर्म छोड़ दूंगा वैदिक धर्म छोड़ दूंगा सनातन का विरोध करने वाले तंत्रों के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर को सर्वशक्तिमान मिलने वाले मोक्ष को परम स्वतंत्र और अनुकरण किए जाने वाले धर्म को शाश्वत सिद्ध कर दो तोड़ दूंगा नहीं हो पाएगा कोई नहीं है टक्कर में अब य इस समय सनातन की बात कर रहा हूं इस समय ली बात नहीं करर अंकर परंपरा या जो परंपरा प्राप्त आचार है अब तो पूरे सनातन की बात कर कोई नहीं है टक्कर में मत पड़ो चक्कर नहीं कर पाओ इसलिए अब आज कोई एक उ पटांग बात कर रहा था कोई

00:32:58:01 पता नहीं बहरूपिया था कोई क्योंकि मैंने देखा नहीं ज्यादातर उ पटांग बात कर रहा था तो क्या है कि सांप और बिच्छू शेरों को काटा नहीं करते दूर ही दूर से रंग कर निकल जाते हैं वो वाली बात अब यहां पर लिंक दिया जा रहा है तो देखो कोई नहीं आ रहा और कमेंट सेक्शन में आप देखो जा कर के यह है वो आई एम राइट करके एक आईडी है जब मैंने उससे कुछ तार्किक सवाल कर दिए अभद्रता प उतर आए

00:33:49:28 तो आज का अना व्यर्थ रहा वो एक्चुअली छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं और वहां जो है नेटवर्क का शायद इशू रहा हो वैसे मैंने उनसे कंफर्म किया था कि आप जहां पर वहां नेटवर्क आता है कि नहीं तो उन्होंने बोला कि आता है और मेरे घर के पास एक दो किलोमीटर प टॉवर भी है तो किसी को आना हो चर्चा के लिए तो आ सकते हैं कोई आया है रोनी रोनी जी चेहरा दिखाएं

00:34:25:13 अपना चेहरा दिखाएं रोनी जी रोनी जी आप हमें दिख नहीं रहे हैं गायत्री चंद जी बात कर रहे हैं शिवांश भाई जुड़ नहीं पा रहा हूं ईमेल की वजह से सभी पुराण रामायण को लेकर बैठा हूं पहली बार मुझे मेरे ईमेल धोखा दे रहा है शायद सेटिंग में गड़बड़ है अच्छा आप ही आने वाले थे क्या आप ही आने वाले थे य ये गायत्री चंदन नाम की आईडी आपकी

00:35:20:20 है अब बताइए क्या करें तो वैसे मैं आप सबको याद दिला दूं आज आपने एक वीडियो देखा होगा बहुत हार्ट टचिंग लगा था मुझे वह दृश्य तो इसलिए मैंने कहा कि उसको आपको दिखाना चाहिए हम सब लोग मिलकर के सुबह सुबह नाम जप करते हैं भगवान का तो आप सनातन परंपरा प्राप्त जो शास्त्र है उसमें प्रमाण बुद्धि रखने वाला कोई भी व्यक्ति है वह हमारे साथ आ सकता है निष्ठा रखता है उनके प्रति व आ सकता है और नाम जप कर सकता

00:36:06:01 राष्ट्र यह प्रणव की छवि दिख रही है इनके आईडी में वो आए थे शायद आर्य समाज से होंगे जी वो हार्ट टचिंग दृश्य लगा मुझे कि आप लोगों को शेयर करना चाहिए तो इसलिए हमने शेयर किया तो आप आप लोग भी नाम जप में जुड़िए अगर हमारे साथ नहीं जुड़ पा रहे हैं तो इतना तो कहूंगा कि भगवान की भक्ति करना शुरू करिए राम नाम का जप कृष्ण नाम का जप शिव नाम का जप मां दुर्गा के नाम का जप श्री गणेश जी के नाम का जप जो भी आपके इट उसी से सनातन को बहुत शक्ति मिलेगी और अगर हमारे साथ में आकर के कर सकते हैं तो और भी अच्छा है क्योंकि विप्लव की स्थितियां बन रही है तो हमें संगठित होकर रहने की बहुत आवश्यकता है

00:37:22:09 और इनके पास जो आने वाले थे उनके पास शायद ब्राह्मण को नगन हो केर नहाना क्यों नहीं चाहिए हा मनुस्मृति में कहा गया है जिन कार्यों को करते समय छिपाने का भाव उत्पन्न हो उसे कम से कम किया गया धर्म के द्वारा कम से कम नगन के नहाने में भी छिपाने के भाव वाली बात है

00:37:58:16 तो छिपाने का भाव उत्पन्न कम से कम हो ब्राह्मण के जीवन में जिससे कि उसकी प्रज्ञा शक्ति अपग्रेड होती रहे जितना उसकी प्रज्ञा शक्ति अच्छी होगी वह धर्म को धारण कर पाएगा दूसरों को धारण करवाने के निमित्त इस कारण से व प्रज्ञा शक्ति का बहुत महत्व है सारा सारी चीज उस ही है प्रज्ञा शक्ति आपकी वो जो चेतना शक्ति है कितनी तो इसीलिए नग नोकर नहाना झूठ बोलना निंदा करना य सब चीज छुपाने वाले भाव उत्पन्न

00:38:45:09 करती एक बार और दे दीजिए लाइव स्ट्रीम का लिंक आपको दिया गया है कोई आना चाहता है किसी भी प्रकार की चर्चा के निमित्त तो आ सकता है ब्रह्मा सरस्वती विवाह के बारे में कोई पूछ रहे ब्रह्मा सरस्वती विवाह के लिए एक उदाहरण देता हूं मैं आपको जैसे मान लीजिए हम कोई ऐसी सब्जी बनाए कि जिसमें की दूध और पनीर दोनों का यूज ऐसी सब्जिया बनती है दूध भी डलता है अब क्या है कि पनीर क्या है दूध से उत्पन्न है तो इसको भी व्यवहारिक दृष्टि से दूध की पुत्री कहा जा सकता है तो जो सरस्वती माता है वह ब्रह्मा जी की बायोलॉजिकल डॉटर नहीं है समय जो मैथ सृष्टि है उसकी तो रचना ही नहीं हुई ना व बायोलॉजिकल वाला मामला नहीं है मगर व्यावहारिक दृष्टि से उनको पुत्री कहा गया क्योंकि व उनसे उत्पन्न सचित रसने य तो आ चुके हैं लगता है

00:40:03:06 पहले राम राम भैया क्या कर रहे हो जी मैं एक अपना व जो चल रहा था उसको जरा पूरा कर लू पूरा कर लीजिए तो जो सरस्वती जी है व ब्रह्मा जी से उत्पन्न नहीं है मगर व्यवहार की दृष्टि से उनको उनकी पुत्री कहा गया अब अब वो क्योंकि पनीर जैसे उत्पन्न है दूध से इसलिए पनीर भी डॉटर जैसी हुई अब एक कढ़ाई में अगर इनको डाला गया तो यह इनका समागम है तो यही है ब्रह्मा सरस्वती विवाह और फल स्वरूप प्राप्त क्या हुआ दूध पनीर रूपी संतान दूध पनीर की सब्जी रूपी संतान उसी प्रकार से ब्रह्मा सरस्वती विवाह से प्राप्त क्या हो रहा है सृष्टि संतान रूपी सृष्टि और इसका जो आदि भौतिक अर्थ है वह है कि शास्त्रों में सूर्य को ब्रह्मा कहा गया सूर्य जो है ब्रह्मा ही ब्रह्मा ही है प्रजापति ब्रह्मा सूर्य को कहा गया

00:41:18:04 तो सूर्य जब सर्दियों के दिनों में उगता है तो सूर्य देव के आने से पहले ही आकाश में एक लालिमा छा जाती है वह लालिमा सूर्य के कारण उत्पन्न हो रही है उस लालिमा को यहां पर कहा गया सरस्वती सरस्वती जी ने उस लालिमा का रोल प्ले किया है और ब्रह्मा जी ने सूर्यदेव का रोल प्ले इसके बाद जैसे जैसे सूर्य निकलता है तो लालिमा जो है आगे बढ़ती तो इसको क्या कहा गया सूर्य पीछे पीछे लालिमा आगे आगे ब्रह्मा जी पीछे पीछे सुस्ती आगे तो ये और फल स्वरूप क्या होता है कि जो सूर्य के प्रभाव से जो वायुमंडल में जो वाष्प व्याप्त है वही ठंड के दिनों में संगत होकर के कोरे के रूप में बरसती है तो यह क्या हो गया ब्र ब्रह्मा सरस्वती का समागम और कोरा रूपी संतान य भागवत में दिया गया है य वाली व्याख्या कि कोरा हुआ जब जब ब्रह्मा जी ने अपने शरीर को त्यागा वहां पर ये वाली स्टोरी कि ब्रह्मा जी ने जब मरीच जो पुत्र थे उनके

00:42:33:19 उन उनके समझाने पर ब्रह्मा जी ने अपने शरीर को त्याग दिया अब यहां देखिए सबसे पहली बात कि यहां से अधर्म का उद्भव क्यों नहीं हो रहा है कि अगर उस स्टोरी में दिखाया जा रहा है कि पिता पुत्री के पीछे जा रहा है तो आफ्टर ऑल वो गिल्ट पूर्वक उसके मन में पश्चाताप हो रहा है और वो जो है अपने देह का नाश करके दिखा रहा है तो पहली बात ये हो गई मोरल आपको गलत नहीं मिला स्टोरी से दूसरी बात ये हो गई कि उन्होंने बहुत छोटी सी लीला के द्वारा और रोचक तरीके से वो जो सूर्य उसका वो था वो दिखा दिया आदि भौतिक अर् और जब वो भागवत में ही आया है कि जब वह अपना शरीर का त्याग करते हैं तो वह चारों और अंधेरा छा जाता है कोरे के रूप में तो वो कोरा रूपी संतान प्राप्त हुई ये ब्रह्मा सस्ती के विवाह का वो है इसको हम प्रमाण के साथ अलग से एक वीडियो में ले भी ले लिखा हुआ है हमारे पास बहुत लंबी लिस्ट है वीडियो बनाने की बहुत सारे संशय है जी बताइए सचित जी जी जय श्रीराम जय श्री राम भया भैया मेरे को मेरा परिचय बोल लीजिए कि मैं एक मैं एक विद्यार्थी हूं कंप्यूटर साइंस

00:43:48:27 और एआई का कोरिया में अभी मैं पढ़ता हूं तो मेरे को धर्म से रिलेटेड थोड़ा बहुत क्या है संशय हुए हैं तो उनका आपका जो आपका जो पक्ष है वो मैं जानना चाह रहा हूं बताइए ठीक है तो एक चीज मैंने देखी कि जो शंकर परंपरा है और जो राघवाचार्य जी की परंपरा है उसमें गौतम बुद्ध को अवतार नहीं मानते हैं पुरी शंकराचार्य जी की एक चलचित्र है उसमें आप उने स्पष्ट बोला ये चीज लेकिन कुछ दूसरी परंपराएं हैं जैसे उदाहरण के लिए मैं आप को देता हूं कि जो बध गया के जो मंदिर था 1925 में योगीराज जी ने शुरुआत ही गलत हो गई है हा भया गौतम बुद्ध दो हुए हैं पुरी शंकराचार्य जी और जो शंकर परंपरा है वो बुद्ध को अवतार मानती है मगर उस बुद्ध को नहीं जिसके कारण जिसके शिक्षाओं में मिलावट करके या जो भी है यह बौद्ध मत स्टार्ट हुआ है वो बुद्ध नहीं दो बुद्ध हुए हैं जो विष्णु का अवतार है वो ब्राह्मण कुल में जन्मे और

00:45:03:27 उनका जो समय काल था वो अलग था और जो सिद्धार्थ जो गौतम जी वाले जो बुद्ध है सिद्धार्थ वाले इनका समय काल अलग है दोनों का जो देश है उत्पन्न होने का वो भी अलग है एक इधर नेपाल में हुए हैं ये सिद्धार्थ वाले और उनका जो है कीकट देश सिद्ध होता है तो एक ग्रंथ है आक्षेप परिहार पुरी शंकराचार्य जी का उसमें उन्होंने यह पूरा दिया है हा व ठीक है माना व बुद्ध जी को अवतार माना यह ठीक है आपके अनुसार है कि एक ब्राह्मण कुल में कीकट देश में कोई बुद्ध हुए थे जो अवतार है लेकिन कुछ परंपराओं का मानना है कि जो जो नेपाल वाले वही उसके अवतार है उसका वो लोग प्रमाण देते मानना है कि विष्णु जी भगवान नहीं है कुछ का य भी मानना है शिवजी भगवान नहीं है कुछ मान प्रमाण शास्त्रों से वो लोग देते हैं आपको एकता

00:46:15:09 देखि कि मुख्यमंत्री जो होते हैं या किसी भी व्यवस्था में सर्वोच्च पद की अवधारणा होती क्यों ये बताइ अरे व वो चीज भैया मैं मानता हूं तो वो मैं पूछ रहा हूं मैं पूछ रहा हूं सर्वोच्च पद की अवधार सर्वोच्च पद की अवधारणा होती क्यों है कि उनके अनुयाई उनके नियम को माने मतलब कोई उनके अनुयाई नहीं सर्वोच्च पद की अवधारणा उसम कोई चुनाव थोड़ी ना होता है राष्ट्रपति हम लोग क्या चुन सकते हैं राष्ट्रपति जो है स है जब वोट पड़ेंगे तब पड़ेंगे आज तो राष्ट्रपति जो कहेगा वो करना पड़ेगा ना ठीक है बहुत सारे मुख्यमंत्री हैं उनकी अवधारणाएं अलग-अलग है मगर सर्वोच्च पद की अवधारणा होती ही इसलिए है जिससे कि हम एक मत पर आ पाए बाय बुक और बाय क्रुक ओके हम लोग बिखरे हुए ना रहे किसी भी टीम की जो जीत है वो इस पर निर्भर करती है वहा कैप्टनशिप है कि नहीं आप किसी ऐसी टीम की कल्पना करेंगे जो बिना कैप्टन के हो तो जब तक हम इस चीज पर रहेंगे ये कह रहा है वो ये कह रहा है हमको आप वैकल्पिक ही सही

00:47:30:26 मैं नहीं कह रहा हूं शंकराचार्य को मानो जबकि शंकराचार्य का जो सार्व बहुमत है वो शास्त्रों से प्रमाण से युक्ति और प्रमाण दोनों से सिद्ध है मगर मैं फिर भी रहा आपका परिपेक्ष एक श्लोक प क्या है मेरे को मेरे को पता है कि आप यह बोलेंगे कि वो बुद्ध अवतार अलग है वो मेरे को भी पता है मेरे को बस एक आपसे लोग क्या है हम लोग आवान क्या है समझ लीजिए हम लोग सैद्धांतिक उन्मूलन करते हैं जो वस्तुनिष्ठ प्रश्न है वस्तुनिष्ट प्रश्न प वस्तुनिष्ट प्रश्न का मतलब है ये जो है कि बुद्ध जो है भगवान है कि नहीं हम है ना वही वाले बुद्ध इससे आपके धर्म ब्रह्म पर क्या आंच आ रही है बताइए मुझे कुछ नहीं आएगी हम लोग इस पर चर्चा करते हैं जिससे कि धर्म और ब्रह्म प आच आए हम समझ रहे हैं आप इससे कोई आंच नहीं आनी है जैसे कि मान लीजिए अभी कोई यहां पर आए अचानक से मुझसे कह दे मुझे मालूम है कि शिखा का महत्व क्या है साइंटिफिकली और आध्यात्मिक पूर्वक मगर थोड़ी देर के लिए मान लीजिए मुझे नहीं मालूम और कोई आ कर के कह दे शिखा क्यों बानते हैं ठीक है ठीक है इससे मैं

00:48:45:28 यह भी कह सकता हूं भाई मुझे नहीं पता यह वस्तुनिष्ठता है इससे मेरे धर्म ब्रम पर कोई आंच नहीं आ रही अच्छा अगर मुझे नहीं पता है धर्म ब्रम पर आच कब आएगी ईश्वर है कि निराकार है द्वैत है क्या अद्वैत है व्यवहार क्या है परमार्थ क्या है शक्ति है अगर उसकी शक्ति कण कण में है यह सब धर्म ब्रह्म पर आच आने वाली बात ये सब तो ये सब तो वो चीज है जो हम जब हम निष्ठावान किसी गुरु परंपरा के प्रति गुरुओ के प्रति हो गए तो वहां स्व अध्ययन स्वविवेक और भक्ति का बल साथ में और यह सब आपको ग्रहण होता रहेगा आजी आपको मिल जाएगा कल को कोई और प्रश्न आएगा जो वस्तुनिष्ट होगा है ना मगर होता क्या कि जब हम निष्ठावान हो जाते हैं आस्थावान हो जाते हैं उसमें और अभी की स्थिति में जब हम नहीं है उसमें अंतर यह होता है कि तब जब हमारे पास ये वाले प्रश्न आते हैं ना वस्तुनिष्ठता वाले तो हमारे मन में एक संतोष होता है कि जब मैं गुरु के पास जाऊंगा तो वहां से मुझे इसका सटीक उत्तर मिल जाएगा ठीक है और जब हमारी निष्ठा नहीं है आस्था नहीं है तो य हमें सर्फ परेशान करते हैं हमारे पास इसका वो संतोष हमें नहीं मिलता है कि इसका उत्तर मुझे मिलेगा कि नहीं ठीक है ठीक है तो आप एक बार जैसे आपने दूसरे

00:50:01:07 का पक्ष पढ़ा है मैंने आपको बुक का नाम बताया है कि आक्षय परिहार वाला मेरे पास है रखा है यह ग्रंथ आप पढ़िए मैं देखता हूं आपको दिखा सकू ये इसमें है उन्होंने दिया है एक बार आप इस पर टाइम बताइए और आपको नहीं मिले तो हमें लिख के भेजिए वस्तुनिष्ट प्रश्नों के लिए यहां पर चर्चा करने की कोई आवश्यकता ही नहीं हैसे आपके धर्म और ब्रह्म पर कोई फर्क नहीं पड़ना प्रॉब्लम तब आती है भगवान अवतार ले सकता है या नहीं अगर वो सर्वशक्तिमान वो तो वो तो अधर्म भी कर सकते हैं अगर अधर्म के मार्ग भी दे सकते हैं अगर कौन सर सर्वशक्तिमान अगर भगवान सर्वशक्तिमान है तो व तो अधर्म का मार्ग भी दे सकते हैं जितने अंश में वो अधर्म का मार्ग देंगे उतने अंश में हमारे लिए अनुकरणीय अनुसरण पूजनीय नहीं होंगे हम कह देंगे रूपिया है कोई व्यवहार में जैसे की मैंने एक बार आपको बताया था उदाहरणार्थ हनुमान जी

00:51:16:08 के लिए प्रसिद्ध है कि वो बाल ब्रह्मचारी थे ठीक है अब हनुमान जी को भी ईश्वर का स्वरूप ही कहा गया है अवतार माना गया ईश्वर का ठीक है तो अब हम ये कहेमान क्या हनुमान जी सब कुछ कर सकते हैं अगर सब कुछ कर सकते हैं तो क्या वो विवाह कर सकते हैं तो व्यवहारिक रूप से उनका विवाह ना करना सिद्ध है अब क्या होगा कि भाई वही ईश्वर हनुमान बन रहा है वही ईश्वर शिव बन रहा है वही ईश्वर कृष्ण बन रहा है तो ईश्वर आया उसने हमें बताया देख मैं भाई गधा है मेरे पास देख पहाड़ तोड़ के दिखा दूं मैं हनुमान हूं हमने कहा ठीक है अब मैं विवाह कर रहा हूं तुम हनुमान नहीं हो हनुमान तो वो है जो रामायण द्वारा प्रतिपादित है और जो बाल ब्रह्मचारी है हम मना कर देंगे यही तो कहानी बुद्ध की है देख भाई मैं ईश्वर हूं मैं विष्णु का अवतार हूं यज्ञों को मत मान यज्ञों को मत कर वेदों को मत मान नहीं भैया हम आपको नहीं मानेंगे ठीक है तो वही वाली बात है जल सर्वत्र व्याप्त है मगर हमारी प्यास जल का वो रूप बुझाता है जो हमारी व्यवहार की सीमा में आ जाए जो वैद शास्त्र सनातन शास्त्र संबध जो मोक्ष का मार्ग दिखाए

00:52:31:21 वो जो रूप हो वो हमारे लिए अनुकरणीय अनुसरण पूजनीय होता है भजनी होता है ठीक और बाकी वो तो असीमित है सब जगह ठीक है ना हा हमारे अंदर भी वही है मगर हमारे अंदर वाले रूप को भी हम नहीं ध्या सकते व्यवहारिक नहीं है हमारे अंदर भी वही है ईश्वर मगर हमारे अंदर वाले चलो वो सब छोड़ दोगे वो कर सकता है कि नहीं इतना तो मानना पड़ेगा ना इतना तो लगभग हर अच्छे जितने भी सम्मान प्राप्त दर्शन उन्होंने माना है ईश्वर तुम्हारे अंदर है हां है ना ऐसे कहीं ना कहीं आ जाती बात इकोन वाले भी कहते तुम्हारे हृदय में ईश्वर है द्वैत को मानने वाले अगर हृदय में ईश्वर है तो जब आप कोई गलत कार्य कर रहे हैं तो वो हृदय का ईश्वर भी उसमें इवॉल्व हो गया ना तो यह वाली बात है कि ईश्वर तो सब जगह समान रूप से व्याप्त है आप का भजनी रूप उसका कौन सा है वो जो आपके व्यवहार की सीमा में आ अब जैसे जब जल पीते हैं तो व्यवहार की सीमा कहां से क्या पैरामीटर होता है गिलास या हमारे हाथ है ना यह व्यवहार की सीमा हो गई इसी प्रकार से जब ईश्वर की बात होती है तो व्यवहार की सीमा क्या है वे

00:53:47:00 की को ईश्वर के वर की भी कोई सीमा तो तो होनी नहीं परमार्थ में नहीं होगी वहार में हमारे लिए हमारे लिए हम किस व्यवहार की सीमा में उसको ग्रहण करेंगे हमारी सीमा क्या है वेद तो हम ईश्वर के उस रूप को ग्रहण करेंगे जो वेद की सीमा में हमारे लिए व्यवहारिक हो जाए ठीक धर्म की सीमा में हमारे लिए व्यवहारिक हो जाए ठी ठीक है कोई आए हैं देख लेते हैं सम्राट

00:54:21:26 दास सम्राट दास जी जय श्री राम जय श्री राम मैं सवाल करना चाहता था आपने कुछ स्टेटमेंट दी थी तो उसके रिगार्डिंग में सवाल करना चाहता था आपका परिचय मैं सम्राट दास मैं शील गोत्र का हूं और शंकर मत से ही मैं मतलब रिलेट करता हूं और वही अध्ययन करता हूं तो आप सवाल क्यों कर रहे हैं क्योंकि आप कुछ मेरे को लगा आपने कुछ गलत बोला है करके ना ऐसे दो चीज आपने कुछ बोली है जो मैच नहीं कर रही थी तो इसलिए बात करू करके जैसे कि यानी कि विरोध नहीं है आप यहां पर कमी बताने आए हैं हां उस तरह से मान सकते हैं तो आपको तो यहां नहीं आना चाहिए था आप हमसे व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर सकते थे आपके गप में भी जुड़ा हूं पर मेरे को पता नहीं चलता कि आपका नंबर कौन सा है तो मैं आपसे डायरेक्टली क्या बात मतलब किस तरह से वो संपर्क 74836 अच्छा पे मैं वैसे टेलीग्राम प जुड़ा हुआ था आपसे ना तो वहां पे मैंने बहुत डीजे सम्राट कहां के दीक्षित है आप मैं दीक्षित नहीं हूं मेरे वो गुरु है मतलब जो ज्ञान के गुरु है मैंने ऐसे नाम दीक्षा नहीं ली है तो ऋषिकेश में रहता

00:55:37:10 कौन गुरु है आपके कैलाश आश्रम सुना आपने नहीं नहीं सुना ऋषिकेश का मसे फेमस आश्रम है तो वो वेदांत प ही करते हैं तो उनके ही एक आचार्य है जिनसे मैं क्लासेस लेता हूं ब्रह्मसूत्र प बताइए आप समस्या क्या है हा तो समस्या य है कि अपने दो चीज बोली ब्रम जी भाव में है ठीक है और एक आप चीज बोलते हैं कि परमार्थिक में अद्वैत और व्यवहारिक में द्वैत तो य दो चीजों को लेकर मेरे को वो है यह किस तरह से आप वो कह रहे हैं आप शंकर मत वाले हैं आपने अध्ययन किया है शंकर मत का हां जी हा जी चल रहा है मतलब वो तो जिस दिन पूरा हो गया वो तो मैं फिर मुक्त हो जाऊंगा चलिए ठीक है मगर इसमें वो भाव कहां है कि आपकी कोई मुझे गलत लगी आपको समझ में ना आना अलग चीज है और गलत लगना अलग चीज है जो द चीज बोलते वहार में दत मतलब शंकर शंकराचार्य जी कहा पर कह रहे की व्यवहार में दत आपने सक्तिमान वाला वीडियो देख लिया होगा हा नहीं अभी आपने परसे मैंने इसका जवाब दे दिया है आपके लिए बेहतर होगा वो वीडियो हमने बना दिया वो देखिएगा

00:56:53:02 उसम प्रमाण भी दिए एक प्रमाण आपको दिखा देता हूं शंकराचार्य जी कहां दे रहे लोगों ने तो बेवकूफी की है वीडियो बना के क्योंकि अपने वो रामानंदी के साथ बैठे थे विश वालो के साथ आप बोल रहे थे कि हम सेम है मेरे को लगता कि मतलब रामानंदी हम सेम नहीं [संगीत] है आपने आप अगर वो देखिए जो गुरुदेव के वचन है व हम मुदत कर रहे हैं स सत्य सता की क्रमिक अभिव्यक्ति जो द से किसी की यात्रा स्टार्ट हो द्वैत पूरी होती है मतलब वही है अभी मैं आपको आदि शंकराचार्य जी का वो बता रहा हूं क्या था वोह चैप्टर एक चैप्टर एक का था कौन सी किताब में

00:57:57:02 उन्होंने बहुत बड़ी गलती कर दी है वो वाला जो वीडियो बनाया है नहीं किसी और का वीडियो नहीं देखा अभी आप उनके साथ बैठे थे ना विशेष किशोर कुछ करके नाम था उनका श्री संप्रदाय वाले जो थे उनके साथ आप बैठे थे उनके साथ चर्चा हो रही थी आपने शायद वो वाला वीडियो देखा है ना इसम उन्होंने बात कही है शंकराचार्य जी ने व्यवहार परमार्थ की बात कहां पर की है मतलब द्वैत की बात कहां पर करी है आर समाज का वीडियो देखा है आपने अभी आपका दिन पहले का वीडियो था जिसमें आप इनके साथ बैठे थे विशद वालो श्री संपद का भाष्य है दिख रहा है हां जी हां जी इसमें लिखा हुआ है व्यवहारिक भेद हां जी हां जी सही है और ज्ञान हां जी सही ज्ञान द्वारा व्यवहारिक भेद और ज्ञान द्वारा मोक्ष का प्रदर्शन तो व्यवहारिक भेद जब अलग हो गया वहा मोक्ष की बात हो रही परमार्थ की बात हो रही है इसमें परमार्थ के बारे में बहुत सारे व है हम जब व्यवहार की बात कर रहे हैं तो आप बोल रहे हैं कि भक्ति को व्यवहार मान रहे कि जो सब भेद है जो ईश्वर और हम में भेद है वो व्यवहार के लिए है और यहां इन्होंने यही लिखा है

00:59:12:06 देखिए परमात्मा को अद्वितीय मानने पर तो जीव और ईश्वर का भी विभाग ना रहने से कुछ सुतिया जो है असंगत हो जाएंगी परमात्मा को अद्वितीय मतलब मान लेने से कि हम और वह अलग नहीं है तो कुछ सुटिया है वो असंगत हो जाएंगी उनका विरोध हो जाएगा शियों का तो उनका शयों का परवन किसम है तो उसमें क्या लिखा है उनका परवन किसम है कि ऐसा करके व्यवहार व्यवहारा अवस्था में उपाधि वश जीव और ईश्वर विभाग दिखला करर जीव और ईश्वर विभाग दिखला करर श्रुति परमात्मा के विज्ञान से अमृत अमृत की प्राप्ति प्रदर्शित करती है मतलब व्यक्ति का जो अमृत है उसको प्रदर्शित करती है जीव और ईश्वर में भेद दिखला ये आदि शंकराचार्य जी का कोट ये वो है शप हा बहुत बोला है भगवत गीता में बोला है दूस अध्याय का पढ़िए 67 से लेकर 69 तक 67 से लेकर 69 तक तो व्यवहार परमार्थ की बात की

01:00:27:07 है पूरे में ही की है जगह जगह की है व्यवहार परमार्थ वो तो ठीक है वो समझ आ रहा है ना कि वो बोल रहे है कि जो मिथ्या में है और जो सत्य है उसको वो उस तरह से देख रहे हैं कि व्यवहार और परमार्थ पर वो द नहीं नहीं नहीं व्यवहार के लिए जीव और ईश्वर का भिन्नता व्यवहार कैसा करें जीव और ईश्वर अलग अलग है और प्राप्त क्या होगा फल स्वरूप जीव ईश्वर की एकता पर द्वैत नहीं हुआ ना फिर भी क्यों जब जीव और ईश्वर अलग अलग मान लिया वहार में तो दत हो गया ना क्योंकि जीव जो है वो तो मिथ्या हुआ ना वो एक तत्व नहीं है ना मिथ्या कहां से है व्यवहार में थोड़ी मिथ्या है

01:01:11:14 म मुक्त मुक्त की दृष्टि से वो मिथ्या है यहां जो जो हम लोग है हमारी दृष्टि से मिथ्या थोड़ी ना है दो विषय है सनातन शास्त्रों के दो विषय है एक है धर्म और एक है ब्रह्म ब्रह्म का आधार है अद्वैत धर्म का आधार है द्वैत धर्म यानी की किसके साथ क्या करना है धर्म यानी की किसके साथ क्या करना है हा जी तोके साथ क्या करना में तो अनगिनत हो गया ना उसम द्वत नहीं हुआ या तो हो ग दो हो गए मत जैसे अंधेरा है ठीक है अंधेरा बस रोशनी का अभाव है अंधेरा दूसरा तत्व नहीं है अरे भाई वो परमार्थ वो सब बाहर से है जो फसा हुआ उसकी बात करो अभी आपके लिए पृथ्वी चपटी है कि गोल है व वो बात अलग है ठीक है अलग क्यों है जिनको समझ आ गया व तो गोल है नहीं है गोल व्यवहार क्या करेंगे व्यवहार क्या करेंगे एमप्लीफाई क्या करेंगे आपको समझ आ गया आपको समझ में आ गया आपको समझ में आ गया पथवी गल है क्या आप गल फॉलो कर रहे हैं मतलब हम चपटा

01:02:26:25 चपटा समझ नहीं रहे हैं ठीक है मतलब वो अगर कोई सोच रहा है ना कि गोल है व्यवहार क्या कर रहे हैं आपको थ्योर कली मालूम पड़ गया है कि पृथ्वी गोल है आप व्यवहार कैसा कर रहे हैं उसके साथ मतलब गोल का ही व्यवहार हो रहा है ठीक है व्यवहार कहां होहा व अच्छा तो आप ये बताइए मुझे आप कहां रहते हैं ऋषिकेश में ऋषिकेश में यानी उत्तर भारत हम अच्छा ऋषि केश से हिमाचल हिमाचल के लिए दिशा दिखाइए मुझे कहां है हा नॉर्थ की तरफ हुआ नहीं नहीं उंगली दिखाई उंगली कन्याकुमारी के लिए दिखाईए कन्याकुमारी पीछे की तरफ अब य आपने ये जो उंगली की है य ऐसे होनी चाहिए थी ऐसे तो वही वही तो मैं बता रहा हूं ना मतलब जो हम पता ठीक है आप व्यवहार करते हैं ठीक है अभी दर्शको ने देख लिया है यह बात आपकी जो है व्यवहारिक नहीं है आप जो है गोल व्यवहार नहीं करते हैं किसी को भी रास्ता दिखाएंगे आप सुनिए यह सत्य नहीं है ये झूठ की लड़ाई है और आप मुझे नहीं लगता कि आप शंकर परंपरा के प्रति निष्ठावान है क्योंकि आप कह रहे हैं मैं उ गोल व्यवहार करता हूं पृथ्वी के साथ नहीं

01:03:41:28 करते हैं ये झूठ है अगर आप करते हैं तो ठीक है जनता ने आपको देखा है जनता सोच लेगी सही जो जो सोच र है कि वो मतलब एक बंदा है जिसने सोचा ही नहीं चपटा है या गोल है वो जिसने सोचा नहीं वो भी गोल व्यवहार कर रहा है नहीं चपटा व्यवहार कर रहा है आप इसको छोड़ दीजिए इसको छोड़ दीजिए आत्मा अविनाशी है आत्मा कैसे अविनाशी होगी अविनाशी नहीं है मतलब अविनाशी नाश को उल्टा होता है मतलब नाश नहीं होता जिसका कभी नाश नहीं हो सकता हा आत्मा अविनाशी हा अविनाशी है ना आपका मौलिक स्वरूप क्या है आत्मा ही है तो अभी आप जब यह जानते हैं कि मैं मारा नहीं जा सकता तो क्या व्यवहार में आ गया आपके हा यही ना अद्वैत क्यों बताया उन्होंने ना उपासना के लिए बताया मैं आपको पूछ रहा हूं ये व्यवहार में आ गया आपके वही ना जब तक हम जी वही जी भाव मैं वही कह रहा हूं व्यवहार में करने के लिए द्वैत है और अंतिम रूप से प्राप्त होने के लिए अद्वैत है वही मैं बोल रहा हूं ना देखो अगर हम बोलते देखिए देखिए आप

01:04:57:06 गोल व्यवहार करते हैं पृथ्वी के साथ ये हमको आपने बताया आप किसी दिन क्लास में आइए हम लोग क्लास में वैसे आप जो आपने जो अपने बारे में बताया वो तो सिद्ध नहीं हो रहा है वो निष्ठा तो पता चल नहीं रही है आपकी कि मैं शंकराचार्य को फलो अब पता नहीं आपका क्या रूप है खैर आप गोल व्यवहार करते हैं पृथ्वी के साथ और दूसरी बात यह है कि हमने जो अपनी बातें आपको बतानी थी वो बता दी है नहीं मिल रही है तो उसके लिए हम कुछ नहीं कर सकते दूसरा स्टेटमेंट आपने बोला था कि ब्रह्म जीव भाव में है हम वो किसी और दिन हम ले लेंगे किसी और दिन लेंगे कोई और भी आ गया है हम किसी और दिन लेंगे ठीक है ठीक है और आप जो है इनका अध्ययन करिए आदि शंकराचार्य जी आपके गुरु है

01:05:51:28 ना मुझे लगता नहीं है कि निष्ठावान है कुछ अपने बारे में गलत बोल रहे हैं शायद जो भी है आप जवाइन करिएगा क्लासेस उसमें आइएगा बात करेंगे राहुल जी अपना चेहरा दिखाएं हां जीी सर जय श्री राम बताइए राहुल जी जय श्री राम नहीं जैसे आप मेरी आवाज मुझे रिपीट सुनाई दे रही है

01:06:26:01 तो फिर कैसे करू माइक तो ऑन करना पड़ेगा मुझे एक बार जाके दोबारा आइए आप मतलब मुझे ऐसा लगता है कि व्यक्ति को आजकल लोगों को सच से मतलब नहीं है किसी को चुप कराने से किसी को नीचा दिखाने से अपने को ऊंचा दिखाने से इससे मतलब सच्चाई से मतलब नहीं है बंदे से मैं पूछ रहा हूं कि आप व्यवहार में क्या करते हैं पृथ्वी के साथ तो व कह रहे कि मैं गोल व्यवहार करता हूं किसी को रास्ता दिखाते तो यूं दिखाते हैं और जब मैंने कहा कि रास्ता दिखाओ तो सीधा दिखा दिया क्या बात है मोटरसाइकिल चलाते हैं तो व मौत के कुए वाली मोटरसाइकिल चलाते हैं

01:07:30:01 पता नहीं क्या बात है भाई राहुल जी आइए चेहरा दिखाइए राहुल जी जी से राहुल जीन से हाज आप लीड हटा दीजिए आप अभी बोलिए बो जैसे द्वैत अद्वैत की बात की थी शंकर संप्रदाय में तो अद्वैत फिसत सिद्धांत का पालन किया जाता है दत कहा से आ गया आपने शंकर संप्रदाय के बारे में अध्यन कहां से किया है शंकर संप्रदाय के बारे में तो मैंने य सुना है कि अद ब्रह्म और परब्रह्म एक है व इस हो जाता है

01:08:26:03 जाता प्रभुपाद जी की बु यह तो गलत बात है प्रभुपाद जी की क्यों ये तो गलत बात है नहीं प्रभुपाद जी की बुक्स में आपको चैतन्य महाप्रभु की भविष्य बताइए कि मैं कोई इसकन के विरोधी द्वारा कोई बुक छाप दी जाए और उसके आधार पर मैं अपने यह बना लू कि आपके यहां यह होता है तो क्या य आपकी नजरों में उचित है कोई और बुक से बात नहीं कर रहा मैं शास्त्र से ही बात कर रहा हूं श्रीमद् भागवत च प्रभुपाद जी की बुक से मैंने अध्ययन किया है प्रभुपाद जी ने उसम टिप्पणी दी है लेकिन वो श्रीमद् भागवत भाई साहब मैंने आपसे एक प्रश्न पूछा कि आपके इकन के लिए यदि कोई विरोधी अपने मंतव्य की सिद्धि करने के लिए उसम कुछ का कुछ कुछ का कुछ लिख दे तो उसके आधार पर मैं अपने निर्णय कर लूं कि स्कन ऐसा है क्या ये सही है देख इकन की जो बुक होती है अगर मैं अगर मैं अगर मैं आदि शंकर अगर मैं इकोन को लेकर के कोई भी टिप्पणी करने वाला हूं या इकोन के किसी भी सिद्धांत से मुझे दिक्कत है या विरोध है तो वह तब मुझे होना चाहिए जब मैं उसको

01:09:41:10 बिल्कुल जो मुझे समझ में आ रहा है जो मुझे बताया जा रहा है उसको मैं उनके प्रामाणिक लोगों द्वारा बिल्कुल वो कर लूं कि हां जो मैं समझ रहा हूं वही सही है जैसे कि फॉर एग्जांपल स्कोन ने अपनी जो बुक है आत्म साक्षात्कार का विज्ञान उसमें कई जगह कृष्ण अल्ला को एक कहा ठीक है और जो कृष्ण यह वाली बुक है जो लीला पुरुषोत्तम श्री कृष्ण है ना एक बुक है ना कृष्णा नाम कृष्णा नाम की बुक है उसमें तो पेज को खोलते ही फ्रंट पेज में जो भूमिका आती है उसमें कोई अंग्रेजी मूल का व्यक्ति है उसके द्वारा वहां पर भूमिका में लिखा गया है कि कृष्ण अल्लाह और जवा एक है ये मैंने इस कौन की किताबों से पढ़ लिया मगर फिर भी मैं शांत नहीं हुआ मैं शांत नहीं हुआ सुनिए मैं शांत नहीं हुआ मैंने अपना निर्णय नहीं किया नहीं पहले मैं इकोन मंदिर गया इकोन मंदिर जाकर के इकोन के द्वारा नियुक्त जो प्रामाणिक आपके शिक्षक हैं उनके सामने बैठा बाकायदा और मैंने पूछा कि कृष्ण अल्लाह का क्या मामला

01:10:56:15 है तो उन्होंने बिल्कुल ठोस तरीके से कहा कृष्ण अल्लाह और यहोवा एक है और कृष्ण और शिव एक नहीं तो यह तरीका है अपने किसी मैं कुल मिलाकर के हमें उन बातों पर बात करनी चाहिए जो सामने वाला स्वीकार कर रहा हो मेरी किताबों का मिस इंटरप्रिटेशन करके आपको कुछ पढ़ा दिया गया आपने कुछ पढ़ लिया उन परे नहीं बात करनी चाहिए उन बात जैसे आप स्वीकार कर रहे हैं कि कृष्ण जो है वो परमात्मा है और व अल्लाह है और व सेम य आप स्वीकार कर रहे तो हम इस पर कटाक्ष कर सकते हैं इस पर हम क्वेश्चन कर सकते हैं और

01:11:36:02 अभी मैं औरन इस चीज को स्वीकार नहीं करता कि अल्लाह जो होवा एक है हम यह कहते अखिल ब्रह्मांड का नायक है जब भगवान द अध्याय के आ लोक में कह रहे सर्व प्रभ स मतवा भज बुव आध्यात्मिक सृष्टि हो य भौतिक सृष्टि है वो मेरे से ही प्रकट होती है तो वो कहते हैं कि अल्लाह ने सब कुछ किया है तो मैं बोला अल्लाह वही है है तुम अल्लाह कहते हो हम कृष्ण कहते हैं तो कृष्ण को ही स्वीकार कर लो आप अपना जो अधिकृत थोड़ा सा बताए कि आप क्या है इस कन में क्या आपका वो है मैं इस कन इस कन को फॉलो करता हूं सात आठ साल से और मैं एक बात बता अब आप एक बात बताइए जब स्कोन का अधिकृत व्यक्ति कह रहा है कृष्ण अल्लाह जवा एक है और आप कह रहे हो कि नहीं य नहीं मानता दूसरी बात दूसरी बात अगर अल्लाह को अपना प्रश्न पूछ रहा हूं मैं अपना प्रश्न पूछ रहा हूं भाई साब मैं अपना प्रश्न पूछ रहा हूं अगर अल्लाह को क्योंकि अल्लाह को मानने वाले सुप्रीम मानते हैं अल्लाह को तो इस नजर से आप लोग कह देते हो कि कृष्ण और अल्लाह एक है ठीक है जबक

01:12:51:06 आप मानते नहीं हो कि कृष्ण अल्ला एक है मगर क्योंकि उसको मानने वाले उसको सुप्रीम मानते हैं उस सुप्रीम की दृष्टि से आप कह देते हो तो शिव को मानने वाले भी तो एक मिनट एक मिनट शिव को मानने वाले भी तो शिव को सुप्रीम मानते हैं उस दृष्टि से आप क्यों नहीं कह देते शिव और कृष्ण एक है दूसरी बात दूसरी बात मैं आपको एक बात बताऊ अब अधिकृत व्यक्ति की बात बता दूं एक मिनट एक मिनट अधिकृत व्यक्ति की बात बता दूं मैं कि जैसे लोग आजकल आरोप लगा रहे हैं कि भाई वो उन्होंने अलो उपनिषद पर बात की या लोप निषद को वो नकारा नहीं यह सब आरोप चल रहे हैं

01:13:31:01 या तरह तरह की मिथ्या भाई कौन से स्टेज पर खड़े होकर के इसकन के किसी व्यक्ति ने सीधे-सीधे कुरान के ईश्वर का खंडन किया कि वो ईश्वर नहीं है पुरान के द्वारा प्रतिपादित किया क्या कहीं कहीं किसी बुक में छापा है क्या कुरान का ईश्वर ईश्वर नहीं है जो अवतार नहीं नहीं है इसकन वालों को कोई दिक्कत नहीं है देवी देवताओं की उपासक उपासना करो इस्लाम धर्म में सिख हो तो गुरुद्वारे जाओ इसकन का तो यही है कि भागवत और श्रीमद् भगवत गीता के हिसाब से एकला ईश्वर कृष्ण आर सवत जार जैसे नछ कर नित्र अच्छ जगना अच्छा श्री भागवत श्रीमद भागवत आप किसकी पढ़ते हैं प्रभुपाद जी की ही पढ़ते हैं श्रीमद् भागवत मैंने गीता गोरखपुर की पड़ी है नहीं नहीं गीता प्र छोड़ दीजिए श्रीमद भागवत में क्या आपकी श्रीमद् भागवत वो श्रीमद भागवत है जो चेतन महाप्रभु मानते थे जी प्रभु जी जी हां जीने चैतन्य महाप्रभु ने श्रीमद्

01:14:46:09 भागवत इनकी पढ़ थी शीला प्रभुपाद जी की किसकी पड़ी थी शीला प्रभुपाद जी ने अपना कोई कोई टिप्पणी अपनी कोई टीका नहीं द है उसम प्रभुपाद जी ने सारे आचा जब अपना नहीं दिया तो लिखा ही क्यों वही वाली फ्रेश करके छाप देते हैं के जो आचार्य पह पूरी बात सुन लीजिए का जो मत है वह सारे आचार्यों का मत है परंपरा में जितने भी आचार्य उन मेरे भाई मैं आपसे यह पूछ रहा हूं कि चैतन्य महाप्रभु श्रीमद् भागवत किसकी पढ़ते थे चैतन्य महाप्रभु ने हमको रिकमेंड किया श्रीधर स्वामी की टी हां विश्वनाथ ठाकुर की टीका श्रीधर स्वामी श्रीधर स्वामी ने जो लिखा है भागवत में श्रीधर स्वामी ने जो लिखा है वही लिखा है क्या प्रभुपाद जी ने श्रीधर स्वाही मैं बोल रहा हूं प्रभुपाद जी की जो भागवत प टीका है उसम एक आचार्यों की टीका नहीं है उसको कंपाइल किया ई साहब भाई साहब प्रश्न मेरा यह है चैतन्य महाप्रभु ने सभी आचार्यों का नाम लिया श्रीमद् भागवत के लिए या श्रीधरी टीका का नाम लिया है दोनों का लिया श चैतन्य महाप्रभु शिष्य सनातन गोस्वामी पाद उनकी भी टीका है

01:16:01:28 रूप गोस्वामी की चैतन्य महाप्रभु ने किसका नाम लिया कि मैं भागवत किससे समझ पाया हूं यह बताइए चैतन्य महाप्रभु ने तो भागवत का चैतन्य महाप्रभु को तो भागवत समझ लेकिन महाप्रभु ने रिकमेंड किया है कि श्रीधर स्वामी की टीका नहीं रिकमेंड नहीं किया है उन्होने कहा है कि उन्होंने कहा है कि मैं समझ पाया भागवत को श्रीधर स्वामी के द्वारा ऐसा कुछ नहीं है श्रीधर स्वामी की टीका नहीं पढ़ते नहीं मैं आपको प्रमाण बताऊ मैं आपको प्रमाण बताऊ भागवत पढ़ते थे वो अपने अतरंग जो पूछ रहा हूं मैं उसका जवाब दीजिए मैं आपको प्रमाण बताऊ मैं वही बोल रहा हूं आपर स्वामी की टीका प आवश्यकता चैतन्य महा को नहीं है चैतन्य महाप स्वयं भगवान है चैतन्य महाप ने िक किया है हम जैसे लोगों के पूछ रहा हूं भाई साहब अगर वो कुछ कह रहे हैं तो उसको आप सत्य मानेंगे या नहीं मानेंगे बकल मानेंगे तो वो ये कह रहे मैं भागवत को समझ पाया हूं व्यवहारिक सत्य य है कि चैतन्य महाप्रभु ने निर्भरता दिखाई श्रीधर स्वामी के ऊपर ये आपका वर स हो गया जैसे कि आप जन्माष्टमी क्यों बनाते हैं बताइए

01:17:16:28 श्रीधर स्वामी की टीका चैतन्य महाप्रभु ने पढ़ी यह प्रमाण कहीं नहीं मिलता है हमको चैतन्य चैता में चैतन्य महाप्रभु से संबंधित किसी ठीक है मैं अभी प्रमाण दिखा दे रहा हूं आपको मैं अभी आपको प्रमाण दिखा दे रहा हूं मैं प्रमाण दिखा दे रहा हूं हम

01:18:26:07 श्री चैतन्य चरता मृत है उसमें तीन सा 114 में वल्लभाचार्य जी कह रहे हैं श्रीधर स्वामी के अगेंस्ट वल्लभाचार्य सुद्धा दत वाले यह आपकी चेतन चरता मृत है इस कौन से शक्ति है श्रीधर स्वामी जो कुछ भी पढ़ते हैं उसकी व्याख्या परिस्थिति के अनुसार ही करते हैं इसलिए उनकी व्याख्या में एक रूपता नहीं है मतलब कुल मिलाकर के य वो विरोध कर रहे हैं उन्हें प्रमाणित नहीं माना जा सकता इस प्रमाणित ना माने जाने के जवाब में चेतन चरता मृत में 115 से 116 तक वह कहते हैं चैतन्य महाप्रभु एक कर्कश मुस्कान के साथ श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा जो कोई श्रीधर स्वामी की अवेल करता है उसे व्या में गिना जाना चाहिए यानी कि जो श्रीधर स्वामी का टीका प्रमाणिक नहीं मानेगा उसे वैश्या में गिना जाएगा और आगे ये भी कहा है इसी में इन्होने कि जो भी कोई लिखेगा वो गलत ही होगा जो सीदर के विरोध में होगा जरा सा भी वो गलत होगा मेरे हिसाब से

01:19:41:13 ठीक है और जो विरोध कर रहा वो व में गिना जाना चाहिए अच्छा इस बयान को सुनकर सभी को संतोष हुआ आगे वो कह रहे हैं मैं श्रीधर स्वामी की कृपा से भागवत को समझ पाया हूं यह स्पष्ट लिखा है 3 सा 133 से 135 में और वो बंगाली भाषा में भी बता दूं मुझे पढ़ना नहीं आता मगर कोशिश करता हूं बंगाली भाषा में व क्या कहा है श्रीधर स्वामी प्रसाद भागवत जानी जगत गुरु श्रीधर स्वामी गुरु कारी मणि श्रीधर उ पारे गर्वे किछु लिख अर्थ व्यस्त लिखना सेही लोके न मवे श्री धरेर अनुगती य करे लिखना सब सवा लोक मान्या करी करिवा ग्रह यह सब बंगाली है क्या है मतलब मैं सही से उच्चारण नहीं कर पाया शायद तो श्रीधर स्वामी की कृपा से मैं भागवत को जानता हूं क्या है श्रीधर स्वामी प्रसाद भागवत जानी बंगाल बंगाली में मैं मानता हूं कि व ब्रह्मांड के आध्यात्मिक गुरु है जगत गुरु है जगत गुरु कितना प्रमाणिक माना उन्होंने श्रीधर स्वामी को तो अब मैं पूछ रहा हूं कि प्रभुपाद जी की जो टीका है वो श्रीधर स्वामी के बिल्कुल साथ में है कि जरा बहुत थोड़ा बहुत विरोध भी है साथ में

01:20:56:25 है और भी आचार और भी आचार का मत विरोध तो नहीं है चाहे जितने आचार्य का श्रीधर स्वामी का विरोध तो नहीं है नहीं है ना ठीक है अब हम निकालते हैं [संगीत] बहुत लेट आए आप सारी एनर्जी डिप्लीट हो चुकी उसके बाद आए बा कोई बात नहीं फिर समय मिलेगा फिर दोबारा चर्चा कर [संगीत] लेंगे आप ब्रह्मचारी तो नहीं है नहीं सर मैं ब्रह्मचारी नहीं हूं लेकिन मैं ब्रह्मचारी बनने वाला

01:21:49:07 हूं ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं इसन का बक क सर्वशक्तिमान है इकोन का क्या है आपका न के द्वारा कन के द्वारा परिभाषित होने वाला ईश्वर तो कुरान का भी है व हमारा थोड़ी ना एकला ईश्वर कृष्ण स कृष्ण सर्वशक्तिमान है तो सब कुछ कर सकते हैं बकल सब कुछ कर श्रीमद भागवत में आठवा स्कंद सातवा अध्याय

01:22:41:00 [संगीत] आठवा स्कंद सातवा अध्याय ये धर स्वामी की टीका ठीक है ठीक है

01:23:52:12 कर त्रिलोकी की अभिनति के लिए सती देवी के साथ कैलाश पर्वत पर बैठे हुए मुनियों ने मुनियों के अभिमत और उन सबों की मुक्ति के लिए तपस्या करने वाले शिव जी की प्रजापति हों ने स्तुति करने करते हुए प्रणाम किया अब आगे शिव जी की परब्रह्म के बारे में बात हो रही है हे देव देव महादेव भूतात्मा भूत भावन त्रैलोक्य दहना विषत शरणा पना न पही य का उनका श्रीधर स्वामी का टीका हे देवताओं के भी आराध्य महादेव हे समस्त प्राणियों के आत्मन और उनको जीवन प्रदान करने वाले त्रैलोक्य को भस्म कर देने वाले विश्व से हम शरणागत की आप रक्षा करें श्री हरि के पराक्रम से निर्गुण और सगुण दोनों प्रकार के शिव जी की स्तुति करने वाले प्रजापति हों ने उन दोनों में नाम मात्र का अंतर ही माना नाम का अंतर माना

01:24:54:27 अंतर संपूर्ण जगत के बं एवं मोक्ष के एक मात्र नियामक आप ही है शिव इसलिए ज्ञानी पुरुष शरणागत के कष्ट को दूर करने वाले सबों के स्वामी आप ही की अर्चना करते हैं लो इसके बाद उन्होने आगे लिख दिया अपनी गुणमककुम स्वतः सिद्ध ज्ञानवान आप ब्रह्मा विष्णु और शिव की संज्ञा को धारण करते हैं कौन शिवजी क्या यहां पर प्रभुपाद ने प्रभुपाद जी ने माना है कि शिव जी ब्रह्मा विष्णु महेश का रूप धारण करते हैं अपनी माया शक्ति के द्वारा उन्होंने कह दिया ये जो स्तुति है विष्णु भगवान की है उन्होंने कह दिया य माया की जगह दिव्य शक्ति है माया को हटा दिया माया से थोड़ी दिक्कत है चलो ठीक है कोई बात नहीं मगर यहां पर बात हुई है शिव जी की और उन्होंने सीधे लिख दिया यहां यह जो स्थिति वस्तुत विष्णु के लिए ये तो विरोध हो गया अब इसको कैसे समझे

01:26:10:13 अब प्रभुपाद जी हमारे जितने भी वैष्णव आचार्य हैं सब तत्व की दृष्टि से समझते हैं तत्व अलग है चार तत्व य आपने श्रीधर स्वामी का मैंने आपको कोट करके बताया है क्या आपको सिखाया गया है कि ब्रह्मा विष्णु महेश एक है क्योंकि श्रीधर स्वामी ये सिखा रहे हैं कि ब्रह्मा विष्णु महेश एक है ब्रह्मा विष्णु महेश एक नहीं है भाई साहब मैं आपसे ये नहीं पूछ रहा वो एक है कि नहीं मैं आपसे पूछ रहा हूं आपको ये सिखाया गया है नहीं सिखाया गया है और एक भी नहीं है नहीं तो ये श्रीधर स्वामी यही सिखा रहे हैं अब आप इनके पक्ष में है कि नहीं है नहीं नहीं है तो चैतन्य महाप्रभु जिनको प्रमाणिक मान रहे हैं जिनको जगतगुरु मान रहे हैं जिनके द्वारा वो भागवत को समझ रहे हैं आप जो है उनके विरुद्ध चीजों को स्वीकार करते हैं नहीं आदि शंकराचार्य आदि शंकराचार्य जो है भाई साहब आदि शंकराचार्य जी की बात नहीं हो रही य बात हो रही है चैतन्य महाप्रभु ने सीदर स्वामी को माना वो बताइए आप उसी का आंसर दे रहा हूं मैं आपको आदि शंकराचार्य है वो स्वयं शिव जी है शिवजी से अभिन्न है शिवजी से अलग तो नहीं शंकराचार्य लेकिन जो वो सिद्धांत लेकर आया

01:27:25:13 अद्वैत सिद्धांत देखिए आप जो है अगर व्यर्थ की चर्चा करेंगे मुझे आपको कट करना पड़ेगा चैतन्य महाप्रभु ने भागवत को कहां से समझा यह बताइए चैतन्य महाप्रभु ने भागवत को अपने अतरंग जो परिकर थे उनके साथ बैठक महाप्रभु पड़ा करते मतलब सीदर स्वामी से नहीं समझा सीदर स्वामी की टीका को महाप्रभु बिना पढ़े ही जानते थे वो जो मैं आपसे पूछ रहा स्वामी से समझे कि नहीं समझे नहीं समझे नहीं समझे नहीं समझे तो यानी कि यहां पर जो उन्होंने कहा है वो लीला मात्र है झूठ लिखा है झूठ नहीं लिखा है महाब ने रिकमेंड किया है कि श्रीधर स्वामी की टीका भाई साहब वो रिकमेंड नहीं कह रहे हैं वो ये कह रहे हैं कि मैं उनसे समझा हूं इसको क्या करें और ये ट्रांसलेशन भी आपका आपका कौन का ट्रांसलेशन है एज इट इज चलो मान लीजिए मान लीजिए उन्होंने सीख लिया चलो श्रीधर स्वामी की टीका से सीख लिया मैं वही चीज बता रहा था शंकराचार्य जी ने सिद्धांत दिया है शंकराचार्य जी के सिद्धांत भाई साहब एक एक करके चलिए एक एक चीज क्लियर कीए प्लीज एक

01:28:40:13 एक चीज आप मुझे बताइए चैतन्य महाप्रभु के द्वारा आ रहा ज्ञान आप दे रहे हैं या फिर अपना दे रहे हैं चैतन्य महाप्रभु के नाम पर महाप्रभु का ही ज्ञान दे रहे हैं उसके बाद जन तो चैतन्य महाप्रभु का ज्ञान तो वो है जो श्रीधर स्वामी का ज्ञान है यह सिद्ध हो गया नहीं नहीं ऐसा नहीं है बिल्कुल भी बता एक जरा बात क्लियर कर ले इसमें यह कहा है कि जो भी उनके विरोध में लिखेगा वह वैश्या के समान होगा तो इतनी बात ये मानते हैं उनकी चेतन महाप्रभु की कि नहीं बिल्कुल मान तो सीदर स्वामी से विरोध है कि नहीं है आपकी जो पढ़ रहे हैं इस समय आप भागवत किसने किसने लिखी मुझे नहीं पता नहीं है विरोध विरोध नहीं है बिल्कुल एक है तो ब्रह्मा विष्णु महेश आप भी मानते हो एक है नहीं है नहीं है तो ये तो मान रहे हैं श्रीधर स्वामी की टीका जो आप पढ़ रहे हैं अब कैसे मैं मानू कि वो ठीक है कि नहीं है अा एक बात बए अच्छा एक बात बताइए प्रभुपाद जी की टीका पढ़ रहे मैं आपको कैसे मानू कि

01:29:55:15 आप प्रभुपाद जी की पढ़ रहे हैं अब मैं कैसे बताऊ कि आप आपको कैसे मैं समझाऊ कि मैं प्रभुपाद सिंपल सी बात है इकोन की अगर किसी किताब को पढ़ने का क्लेम करेंगे तो इकोन के जो अधिकृत लोग होंगे इकोन के जो अधिकृत परंपरा होगी उससे जुड़े हुए लोग यह कह देंगे कि भैया हा भया यह वाली जो है हमारी है तो ये श्रीधर स्वामी कहां के है अभ आपको जो शक है कि हम प्रभुपाद जी की प रहे नहीं पढ़ रहे लेकिन आपको भी तो श है अब शंकराचार्य शंकराचार्य वालो सेही आप पूछोगे भैया आप शंकराचार्य जी का पढ़ रहे नहीं प रहे तो आप बताओगे अच्छा चलिए ठीक मान लीजिए स्वामी की जो टी पहा नहीं है लेक्चर सुनते हैं प्रभुपाद जी के मुख से हमने सुना है खुद ऑडियो लेक्चर

01:30:49:07 है बमा नहीं शर स्वामी के लिए सुना है वो बताइए भाई साहब श्रीधर स्वामी के टीका में से कई श्लोक है जो प्रभुपाद जी ने अपनी टीका में डाले हैं बस मतलब नहीं है क्या एक जगह भी विरोध है क्या विरो ऐसे तो बहुत ऐसे बहुत सी चीज आपकी सबसे मिल जाएंगी उससे मतलब नहीं है एक भी जगह विरोध है क्या विरोध प्रभुपाद जी ने कहीं नहीं किया अरे तो य ये कह रहे ब्रह्मा विष्णु महेश एक है इसका क्या करें आप तो सीधे सधे लिख दे रहे हो विष्णु की बात हो रही है इन्होने नहीं लिखा विष्णु की बात हो रही इन्होने लिखा इन्होने लिखा है शिव की बात हो रही शंकर की बात हो रही महादेव की बात हो रही है वही तो मैं बोल रहा हूं तीनों एक कैसे हो गए आप बता दीजिए मुझे आपके बात है अभी मैं पूछ रहा हूं आप इसको मानते हैं कि नहीं श्रीधर स्वामी को प्रमाण मानते है कि नहीं को मानता हूं आप सीधी सधी प्रभुपाद जी को खंडित कर रहे तो आप अपने हिब सेरे को समझा दीजिए कि ब्रह्मा विष्णु महेश एक कैसे हैं भाई साहब मैं फिलहाल अभी हम प्रमा प बात कर रहे हैं हम लोग तर्क पर भी बात करेंगे अभी एकएक करके चल रहे हैं अभी मैंने आपको बताया श्रीधर स्वामी कह रहे हैं महादेव की स्तुति हो रही है आपकी बुक कह रही है कि विष्णु की स्तुति हो रही

01:32:04:10 है तो पहले बात तो विरोध हो गया जब विरोध हो गया तो चैतन्य महाप्रभु कह रहे हैं कि जो विरोध करेगा वो वैश्या है उसे वैश्य में गिना जाना चाहिए तो क्या आप गिने गे पता नहीं श्रीधर स्वामी के तो कई श्लोक यहां पर प्रभुपाद जी ने दिए हैं उसमें तो हमको एक सुनिए अगर ठीक है आप ठीक है आप कर आप इस विरोध को चेक कर लीजिएगा फिर आइएगा आप इस विरोध को चेक कर लीजिए फिर आइए पता नहीं से काम नहीं चलता है ना पता नहीं से काम नहीं चलता है आप इस सुनिए आप इस विरोध को चेक कर लीजिए फिर आप आ जाइए नहीं नहीं नहीं नहीं ऐसा है कि प्रभ को ले ले प्रभुपाद जी के गुरु को ले ले या पूरे गड़िया वैष्णव संप्रदाय को ले ले पद्म पुराण में भी ये श्लोक आता है मैं श्लोक दे सकता हूं उन सबके जवाब है मेरे पास इस समय में बात कर रहा हूं श्रीधर स्वामी ने यहां पर भगवान शंकर की स्तुति मानी और आपके पास जो भागवत है उसमें उन्होंने विष्णु की स्तुति मानी अब मुझे बताइए किय विरोध है श्री दव स्कंद का 91 अध्याय का 50 श्लोक खोलिए उसम श्रीधर स्वामी ने क्या कहा है

01:33:19:18 अरे तो उससे क्या मतलब है मेरे भाई सीदर स्वामी ने जगह जगह पर ऐसी बात कई जगह मिल जाएगी जो आपके सुनिए ऐसे तो ऐसे तो कृष्ण की भक्ति करने को आदि शंकराचार्य जी ने भी कहा है तो मान लो उनको प्रमाण हा तो प्रमाण मान लिया हमने उसको भज गोविंद प्रमाण मानोगे तो पूरा मानोगे अट न्याय करोगे प्रमाण मानोगे पूरा नहीं मानोगे ना तो ये तो पूरा मानने को कह रहे है ना चैतन्य महाप्रभु आपने तोय है ते हो कि नहीं आपने तो आपके सिद्धांत य है किछ र चैतन्य महाप्रभु को पूरा मानते हो या अधूरा मानते हो गणेश को बरा बड़ा कहा है तो निष्कर्ष क्या निकला निष्कर्ष तो आपके हिसाब से ये निकला कि सबको ही भगवान बना दो तो ब्रम तो एक ही है ना अने भाई साहब मैं आपसे य प कुतर्क सुनने के लिए नहीं बैठा हूं अगर आप अपने मन की बातें बोलने आए तो क्षमा कीजिएगा मुझे आपसे बातें बंद करनी पड़ेगी नहीं कर रहा रही है फिर भी आप वहा पर अपनी चीज आपको अपनी चीज प्रचारित करनी है कहीं और जा कर के करिए आप मुझे बताइए चैत महाप्रभु को पूरा मानते हैं

01:34:34:22 अधूरा मानते हैं मानते हैं पूरा मानते वो कह रहे हैं सीदर स्वामी का विरोध मत करो करोगे तो वैश्या हो जाओगे मानते हैं इस बात को कि नहीं मानते हैं बकुल मानते हैं लेकिन धर स्वामी की जो टीका आप पढ़ रहे हैं शायद वो चैतन्य महाप ने पढ़ी हो अच्छा तो फिर आप यह बता दीजिए श्रीधर स्वामी की जो शिक्षा है उसका आपने आपके य परंपरा प्राप्त अध्ययन किया गया है उनके शिष्यों से पढ़ाई की है आपने श्रीधर स्वामी के शिष्य से स्वामी के प्रामाणिक शिष्य से आपने अध्ययन किया उनका चलिए हम लोग तो गलत पढ़ रहे हैं गौड़ वैष्णव आचार्य के प्रमाणिक आचार्य चैतन्य महा केने पूछ रहा श्रीधर स्वामी के प्रामाणिक शिष्यों से आपने भागवत अर्थ लिया कि नहीं लिया नहीं हमने वैष्णव वाद लिया है खाली तो फिर अरे क्यों लिया भाई वो श्रीधर स्वामी कह रहे हैं क्या मैं वैष्णव वादी हूं

01:35:36:12 केवल श्रीधर स्वामी वैष्णव वादी नहीं कह रहे हैं अपने आप को वही मैं बोल रहा था आपने मेरे कोया तो फिर आपने मैं आपसे पूछ रहा हूं अगर आपका यह मानना है कि हम जो टीका पढ़ रहे हैं वो गलत है ठीक है थोड़ी देर के लिए मान लेते हैं आपने श्रीधर स्वामी की अगर भागवत आपने आपको जाननी है कि हमारे पास वही भागवत है कि नहीं जो चैतन्य महाप्रभु ने स्वीकार की है तो आपको अध्ययन कहां जाकर करना होगा श्रीधर स्वामी की परंपरा में ना किया है देखो श्रीधर स्वामी और शंकराचार्य की परम उनके दोनों के ज्ञान में दोनों फर्क फर्क तो कोई मिलेगा नहीं क्योंकि एक ही संप्रदाय से है दोनों इसम मैं क्या करू आपके जिनको आप प्रमाण मानते हैं चैतन्य महाप्रभु वो इनको प्रमाण मान रहे हैं मैं क्या करू इसमें मेरे भाई कि उनके सिद्धांत क्या है क्या नहीं है पहले आप इसको नाय करिए कि मैं चैतन्य महाप्रभु को इतने अंशों में नहीं मानता तब तो हम आगे बढ़े वही मैं बोल रहा हूं कि आदि शंकराचार्य ने गीता महात्मा एकम श चैतन्य महा प्रभु प्रभु ने यह कहा है कि श्रीमद भागवत प्रमाणिक है श्रीधर स्वामी की उनके विरोध में जो भी लिखा जाएगा वह गलत होगा तो अब अब आपके पास जो श्रीमद् भागवत है वो सीदर स्वामी की है कि नहीं आपको पता है कि नहीं पता है

01:36:52:03 देखो मैं इस चीज से कन्फर्म नहीं श्रीधर स्वामी शंकर संप्रदाय थे आपको ये शुरू में ही कह देना चाहिए था कि मैं कंफर्म नहीं हूं इस मामले में वो श्री शंकर संप्रदाय से हैं या वैष्णव संप्रदाय से हैं मैं ये पूछ के कंफर्म करके आपको बता ये कंफर्म करिएगा वो शंकराचार्य थे अपने समय के मेरे भाई शंकराचार्य चलो मान लिया पहली बात सुनो पह पहली बात सुन लो एक वैष्णव हो सकता हैन क्या सुनो शर स्वामी मैं जो बोल रहा हूं मैं जो बोल रहा हूं वो सुनो श्रीधर स्वामी वही है सब जानते हैं ये भी कहते हैं वो शंकर संप्रदाय के थे मायावादी थे ये भी कहते हैं आपके य इकन वाले इसकन के ही जाके पूछना वो मानते हैं कि वो शंकराचार्य भी थे वो मायावादी भी थे मगर वो ये कहते हैं कि वो अंदर से वैष्णव थे बताते नहीं थे किसी को यानी कि वो झूठ बोलते थे पहली बात तो ये हो गया शंकराचार्य प भी ऐसा ही आरोप लगाओगे आप वो भी वो भी भक्त थे भगवान के मायावादी विरोध आरोप लगा दिया ऐसा अरे भक्त तो मैं भी हूं भक्त तो शंकराचार्य है आप मध्य लीला का मध्य मध्य लीला छठ अध्याय 167 नंबर शलोक लिए देखिए विषयात मत करें

01:38:07:08 विषयात ना करें मैं अभी आपसे पूछ रहा हूं मैंने आपसे य पूछा है कि श्रीधर स्वामी की जो शिक्षा है आपके पास श्रीधर स्वामी के परंपरा प्राप्त शिष्यों के द्वारा आई है या अपने मन से आ गई है मनम तरीके से आद शंकर श्रीधर स्वामी के हमको बकायदा लोक के साथ प्रभुपाद जी ने ट सारे शलोक नहीं सारे श कौन बात है भाईब आप कैसी बात कर रहे होतक वाली कि उन्होंने अगर दो चार लोक उत कर दिए शलोक उत कर दिए तो उन्होंने कॉपी कर लिया सीर स्वामी को तो फरे केवल केवल एक लोक में भी अगर विरोध हो गया तो व विरोध होता है हम भी सुनिए स्वान होता है ना जो स्वान और हम में ढेर सारी समानताएं है तो उन समानता के कारण यह हो गया कि हम भी स्वान के जैसे ही है आप आप आप जो है दांतो से चबा के खाना खाते हो ना इतने अंश में आप में और स्वान में समानता हो गई ना तो क्या ये मान लिया जाए स्वान और आप एक ही होय बात

01:39:22:10 है किसी दो अंश में किसी तीन अंश में समानता होने से समान हो गए भा तो बोहा पूरी तरीके से कॉपी नहीं होगा जब तक कहीं भी एक लेश मात्र का भी विरोध नहीं होगा तब यह माना जाएगा कि हा यह श्रीधर स्वामी की शिक्षा [प्रशंसा] है परब्रह्म की परिभाषा क्या देते हैं परब कौन पहले इस चीज को क्लियर करिए कि वो क्या है क्या नहीं है वो बताइए आप खुल के पहले इस विषय में जो विषय चल र है वैष्णव थे या शंकर संप्रदाय मैं कंफर्म करके आपको बताऊंगा यहां पर बात क्लोज होती है कंफर्म करूंगा फिर मैं आपसे बात करूंगा इस बारे हा ठीक है अभी आपका क्या है कि परब्रह्म तो क्या स्पन के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है वो सर्वशक्तिमान है य सर्वशक्तिमान है अच्छा आपके य पर एक वो है मान्यता कि श्री कृष्ण जैसे गोलोक धाम में रहते वहां से उठके एज इट आते हैं

01:40:25:12 तो श्री कृष्ण के ऊपर कोई भी नियम लागू होता है या नहीं होता है बिल्कुल नियम लागू नहीं होता सर्व नियंता है सर्व नियामक है ना वो जी अच्छा तो उनकी जो देह है वह सनातन है शाश्वत है क्या है शरीर उनका सनातन है शाश्वत है शाश्वत का अर्थ क्या है शाश्वत का अर्थ यह हो गया कि वो बदलता नहीं है वैसा ही रहता है नित्य स्थाई नित स्थाई किसी भी दे काल परिस्थिति में ना बदलने वाला हा ये कह सकते हैं लेकिन भगवान अपनी लीला को करने के लिए कुछ भी हो सकता है भगवान कर एक करके आगे चलेंगे एक एक करके आगे चलेंगे उनका शरीर उनका शरीर बदलता है कि नहीं बदलता है यह बताइए बदल भी सकता है नहीं भी बदल सकता है भगवान की अपनी शक्ति तो फिर वो शाश्वत कहां रहा तो शाश्वत ही है ना शाश्वत का मतलब दिव्य सच्चिदानंद का मतलब अभी आपने बताया जो बदलता नहीं है हा जो बदलता नहीं है मतिक नहीं होता है आध्यात्मिक

01:41:40:21 होता है अरे मेरे भाई अभी आपने बताया बदलता नहीं है अब आप कह रहे हो बदलता है वही मैं बोल रहा हूं कि भगवान छोटे रूप में भी प्रकट हो सकते हैं बढ़ता हुआ भी दिख सकता है शरीर भगवान का ये कहना पड़ेगा उनका जो शरीर है व शाश्वत नहीं है चेंज हो रहा है वो वो कर सकते सब कुछ ठीक है अच्छी बात है आप तो हमारी जगह गोलोक के तीन पार्ट है एक मथुरा तो उनको शाश्वत मत कहो शरीर को और या फिर या फिर वो फिर बदलने वाले नहीं है दोनों में से एक मान लो वही मैं बोल रहा हूं तर्क से भगवान को नहीं समझ सकते हम जन्म

01:42:21:14 कर्म समते तो फिर आप यहां पर क्यों आए हैं तर्क से समझाने ही आए ना क्यों आए अंडरस्टैंडिंग तर्क से तर्क से किस लेवल तक जाना है किस लेवल तक नहीं जाना है यह कौन डिसाइड करेगा आप डिसाइड करेंगे जो आपके डायरेक्टली जो मिस अंडरस्टैंडिंग है इसन को लेके वब अंडरस्टैंडिंग की बात खत्म हो गई तक करना ही नहीं है तर्क करना ही नहीं है ू स्टॉप द ट्रेन पुल द चेन मैं तर्क नहीं कर रहा हूं कर रहे आप य आए क्यों थे सीधे कह दे तर्क से इसलिए आया हूं तर्क से नहीं समझा जा सकता भगवान को बात खत्म अचिंत है भाई साहब सुनिए ये जो सुनिए ये जो ये जो अचिंत और अनिर्वचनीय जो शब्द होते हैं इनका आलंबन लिया जाता है ऐसा नहीं नहीं लिया जाता मगर वहां पर नहीं जब हम अपनी ही बात को खंडित कर रहे हो और फिर जब हमसे पूछा जाए तो तुम्हारी बात खंडित हो रही है तो हम कहते अचिंत है अरे भैया कुछ चीजें है जो हमारे तर्क में नहीं आ सकती व्यवहार में नहीं आ सकती जो हम उसको जो है स्पेसिफाई नहीं कर सकते शब्दों में वो तो प्राप्त है मगर आप सुनिए भगवान को आपने क्या कहा शब्द कृ से जोड़ भी रहे फिर बोल रहे सक्ति मैं पूछ रहा हूं भगवान को आप तर्क से नहीं समझ सकते सुनिए

01:43:36:28 मैं मैं प्रश्न आपसे कर रहा हूं आपने कहा भगवान को आप तर्क से नहीं समझ सकते आप ही तो बता रहे हो भगवान का कंधा है भगवान के वो है आप ही तो भगवान को तर्क से समझने में आने वाला बता रहे हो रहे भगवान का जो मौलिक रूप है वो तर्क से समझने में ना आने वाला है आप कह रहे हो भगवान एट चे आते हैं तो ए इट नीचे आते तो उनको आंखों का विषय आप बना रहे हो उनको छूने का विषय आप बना रहे हो बनाएंगे भगवान साकार है निराकार नहीं है अरे तो नहीं है तो फिर आपने उनको तर्क से समझने वाला बना दिया ना फिर ये क्यों कह रहे हो तर्क से समझ में नहीं आ सकते

01:44:15:07 मतलब लोगों ने आपको सुन लिया लोगों ने आपको सुन लिया आप कह रहे हैं कि वो परस्पर वो जो है सनातन शरीर है उनका और वो जो है उनका शरीर बदलता भी है अब ये लोग डिसाइड कर लेंगे आपने क्या बातें की है यहां पे ठीक है ठीक है ठीक है वो डिसाइड कर लेंगे मैं एक चीज बोल रहा था आपको मैं एक चीज और बोल रहा था बोलिए कि भगवा आपने बोल रहे हैं कि तर्क से समझ लिया तर्क से नहीं समझाने श्रीमद् भागवत में भगवान के रूप का वर्णन तो बता रहे उनकी दो आंखे हैं दो पैर है ये क्या है व्यवहार में आ सकने वाला तर्क में आ सकने वाला ईश्वर हो गया आप समझा करते र्क में ला रहे हो खैर करते हैं भक्तों के साथ देखिए वो बात रिपीट मत करिए हो गई लोगों ने सुन लिया वो अपना डिसाइड करेंगे किसका क्या रहा आपने एक बात में ये कहा कि मैं पढ़ के आऊंगा जान के आऊंगा दूसरी बात में आपने ये कहा कि भैया वो सनातन तो है ना बदलने वाला तो है मगर वो बदलता है मैंने यह नहीं बोला तो आपने वादित कर दिया ना भगवान को आपने ही वादित कर दिया ना भगवान को नहीं ब सकता उनका शरीर बदल नहीं सकता उनका शरीर ब नहीं सता बदल सकता है मैं ये नहीं कह

01:45:30:07 रहा कि वो गोलोक में जैसे रहते वैसे आते हैं मैं ये नहीं कह रहाय नहीं कह रहा सुनिए मैं ये नहीं कह रहा कि वो अपने शाश्वत शरीर में य आते हैं मैं ये नहीं कह रहा वो अपने शरीर में आते हैं व्यवहारिक शरीर में और वो कुछ भी कर सकते हैं वो अपने शाश्वत शरीर में य नहीं आते मैं ये नहीं कह रहा शाश्वत शरीर में आते आप कह रहे हो देखो शाश्वत शरीर में भगवान आते हैं मैं फिर भी वही कह रहा हूं में ले आओगे तो जगह जगह इतनी जगह बाद होगा पूछो नहीं शाश्वत शरीर में आ मेरी बात सुन ली श शरीर में शाश्वत का अर्थ होता है कभी ना बदलने वाला शास्त्रों से सिद्ध है नित्य स्थाई होता है शाश्वत कार् और वो बालक के रूप में शिशु रूप में फिर वो किशोर होते हैं फिर वो बड़े होते हैं शाश्वत कहां रहा शरीर भगवान कृष्ण के आध्यात्मिक जगत में तीन लोग है गोलोक के तीन पाठ है जिनको मथुरा द्वारका और गोलोक वृंदावन में विभाजित किया गया है अब तो आप ऐसे भी कह दोगे कि चैतन्य महा स् कृष्ण नहीं है कृष्ण तो मुरलीधर बा म कर की बात मत करिए पॉइंट

01:46:45:13 प रहिए आप व्यर्थ की बात आप कर रहे हैं तर्क आप कर रहे उसका जवा जवाब दे रहा बो और कोई बात है इस विषय से हट कोई बात और है इस विषय से हटके कोई और बात है आपकी नहीं इस विषय पर बात कर लेते हैं ना पहले क्लियर कर लेते वो हो गया ना आप निर्णायक मत बनिए वो जनता देख लेगी क्या कह रहे आप मैंने क्या कहा आप निर्णायक मत बनिए आपका निर्णय सुनने के लिए मैं आपको यहां नहीं रख सकता जय श्री

01:47:21:25 राम कोई शिव भक्त है यहां पर जो आए हैं चलिए अब नेक्स्ट टाइम रखेंगे ठीक ठाक रहा आज का भी शिवांश नारायण द्विवेदी आपको चुनौती है भाई आपको चुनौती है दुनिया में संसार में रामपाल का कोई भी ऐसा शिष्य हो जो आकर के जो कबीर थे उनको भगवान सिद्ध कर दे वो वाला जो तुम बता रहे हो उस रूप में वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है पूरे संसार में कोई भी एक ऐसा व्यक्ति हो कोई ऐसा माइका लाल हो कोई तो होगा ना माइका लाल जो आएगा किसी माने तो ऐसा जना होगा ना किसी को जो सिद्ध कर दे तो भेजिए स्वागत है उनका ठीक है

01:48:34:04 बहुत बड़ा तोड़ है पंडित फ्लोकी जी आप आ जाइए पंडित फ्लोकी जी अरे पंडितलो ू स्टेज कहां है पंडित जी महादेव कैमरा नहीं चल रहा है मेरा मैं वही देख रहा हूं क्या दिक्कत आ गई है लगता है नया खरीदना पड़ेगा मैं तो बस अंत में यही बोलने आया था जब आप चैलेंज कर रहे थे तो भाई क्या जगत कोई मत प चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में दो डायलॉग होते हैं एक तो ये तो लास्ट में उससे पहले एक और कि जिसकी माता ने निष्ठा से दुख लाया हो वो आए और चर्चा करे ये रामपाल वालों के लिए है ठीक है कोई भी पूरे संसार में इसीलिए अंत में पता नहीं कहां चले गए फैक्ट विद अभिषेक है एकम अद्वितीय है यह सब लोग क्या व वन साइडेड गेम खेलना ही जानते हैं क्या मैदान में आओना भाई कभी नहीं आे कभी नहीं

01:49:46:06 आएंगे अकेले ही कर पाते हैं जो कर पाते हैं जहां पर शिवांश हो ना वहां पर बोलने के लिए य तुम गलत बोल रहे हो आओ भैया जरा आमने सामने करो मगर मुझे वो डायलॉग याद आ जाता है कि सांप और बिच्छू शेरों को काटा नहीं करते दूरी दूर से रैंकर निकल जाते हैं तो वो एक बात है ये जो भाई साहब अभी आए थे इनकी बातें आपने देखी यार ये मैं मुझे पता है क्या लग रहा है अब मैं बहुत ज्यादा वीक हो रहा है स्कोन मुझे लग रहा है कि स्कोन वालों के लिए मुझे अध्ययन करके उन्हें कुछ देना पड़ेगा बहुत वीक आर्गुमेंट वो लोग पेश करने लगे

01:50:30:24 हैं मुझे उनका अध्ययन करके उनको देना पड़ेगा भाई तुम यह बोला करो थोड़ा तो बराबरी का सा दिखा करे ना ले दे के बात उसी प आ जाती है ना ईश्वर स शक्तिमान है ना तुम्हारा धर्म शाश्वत है क्यों क्योंकि चैतन्य महाप्रभु ने कुछ और धर्म बताया था आप कुछ और धर्म बता रहे हो वो जगतगुरु कह रहे हैं श्रीधर स्वामी को फिर यहां आ कर के कह देते तो हमें इस बारे में पता नहीं है भगवान है भगवान है अगर चेतन महाप्रभु भगवान है तो फिर उनकी अगर भगवान है उनकी इस भगवान है इसलिए उनके कहे हुए को प्रमाण नहीं माना जा सकता तो फिर किसी भी बात को नहीं माना जा सकता वही बात क्यों जो आपको अच्छी लग रही है बिल्कुल बिल्कुल मैं यह कह रहा हूं कि वो अपना एक लाइन सोच के आए थे तीन दो बार ट्राई कर चुके थे वो कौन सा कि गो लोक तीन भाग में बटा हुआ है अंत में उनको बोला ही बिना ठीक बिना किसी मतलब बेस के बस उनको बोलना था और वो किस बात का तर्क किसी बात का तर्क नहीं मतलब कहीं से भी जरा मैं श्रीमद् भागवत में क्या लिखा है उन्होंने मैं जरा दिखा दूं इन्होंने वहां विरोध कैसा किया है जी एक बात देखिए यदि ये

01:51:45:28 ये कहेंगे कि आप जो टीका पढ़ रहे हैं वो श्रीमद उनका नहीं है श्रीधरी टीका तो फिर इनको ये दावा करना होगा कि हमने जो अध्ययन किया श्रीमद् भागवत का वह जो है हमने परंपरा से किया है इनको यह दावा करना पड़ेगा जब यह दावा कर दोगे तो आपकी परंपरा शंकराचार्य से जुड़ जाएगी शीर स्वामी से जुड़ जाएगी आपकी यह वाली परंपरा खत्म हो जाएगी मधवा चार कहां से भागोगे भाई कोई रास्ता है ही नहीं इसीलिए कहता हूं मत पढ़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में मैं दिखाता हूं मेरे पास इस कन की भागवत भी है

01:52:58:28 लोग कहते होंगे कितनी तैयारी करके रहता है क रहा एकम सब कुछ एकदम सामने रेडी टू सर्व हाय यह लोग कहते होंगे यार यह कितना बड़ा वाला है ये हमारी भागवत भी रखे बैठा है हां भैया आपकी भागवत जी रखे और ये अभी हमारे गुरु भाइयों का अनुग्रह हुआ तो यह प्राप्त हो गई उनके सहयोग से ईश्वर की कृपा से यह देखिए इसकन की भागवत भी रखते हैं हम है ना बहुत बढ़िया अष्टम स्कंद सातवा अध्याय जी

01:53:54:13 अब देखते हैं भैया श्रीधर स्वामी का कितना वो है अब श्रीधर स्वामी का परंपरा प्रात अध्यन बता देंगे तो य श्रीधर स्वामी के परंपरा प्राप्त स हो जाएंगे य मायावादी हो जाएंगे स्वयं क्या करें करे तो करे क्या कहां भागे य ऐसा राता फैला के रखा है कहो कि हमने उनका प्रमाणिक वो किया अन कहो नहीं एकली शुरू में मानेंगे ना कि हां बिल्कुल उन्हीं का ही है लेकिन जब तर्क आने लग जाएंगे तो फिर ऐसी बातें आती है कि तक क्यों कर रहे हैं तर्क से नहीं सिद्ध होंगे अा सुनिए इसम भी एक बहुत रोचक बात है जब ये लोग अचिंत कहते हैं भाई जब तुम पर क्वेश्चन आया तो तुम अचिंत कह रहे हो फिर तुम ही कह रहे हो भगवान की दो आंखें है दो पैर है दो ये क्या है तर्क मिला दिया तुमने जी फिर अचिंत कहां रहे भगवान अचिंत तो रखो ना उन्हे हम भी तो य कह रहे हैं व्यवहार में नहीं आ सकते वो तुम व्यवहार में आने वाला बता रहे हो फिर तुमसे क्वेश्चन चिंत भगवान आपने भगवान को कह दिया भगवान की दो आंखें ये है वो है अभी दिन में मुझसे कोई कह रहा था य कैसा ब्रह्म जो माया से ढक जाता है मैंने उससे क्वेश्चन किया भगवान श्री कृष्ण वस्त्र पहनते हैं कि नहीं बोले पहनते हैं तो जितनी जगह वस्त्र है उनका ओरिजिनल स्किन दिखाई देती

01:55:09:14 है क्या नहीं दिखाई देती तो वो तो ढक गए वस्त्रों से ढक गए यहां तो ब्रह्म माया से ढक रहा है फिर बकुल वो भागा भागा भाई तेजी से भागा मैं बैक स्टेज हो जा रहा हूं बार-बार कैमरा चालू करते ही पता नहीं क्या गड़बड़ आ हो गई है कैमरा इ ऑन नहीं कर पा रहा हूं मैं श्री राम जय राम जय जय [संगीत]

01:55:49:10 राम तो ये आप ये वही श्लोक दिखा रहे है ना जो उस समय उनको दिखा रहे थे जब देखिए यहां 22 में श्लोक में इन्होंने अपना मंतव्य घुसे दिया वास्तव में विष्णु ही सारे सौभाग्य के पालन पोषण हारे हैं यदि मनुष्य विष्णु की शरण ग्रहण करता है तो सबकी शरण ग्रहण हो जाती है उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि व भौतिक संसार सृष्टि के शिव जी के माध्यम से ये सब घु सड़ दिया और अंत में कह दिया यह सब जो बातें हैं जो हो रही है वास्तव में विष्णु जी के लिए ही हो रही है

01:56:24:16 लेकिन ऐसा तो श्रीत स्वामी जी ने कहा नहीं ना यहां पर इन्होंने यह बात लिखी ही नहीं अपने तात्पर्य में कि शिवजी ब्रह्मा विष्णु महेश बनते हैं नहीं लिखी दिक्कत है ना शिव जी की पावर शिव जी का शिव जी की परब्रह्म स्वीकार करने में दिक्कत है प्रॉब्लम है सारा सिस्टम मिल जाएगा आपको याद है वृंदावन में राम जब रामायण देख रहे थे तो वहां पर भी भगवान राम के बारे में ही बात हो रही थी ना उनकी परब्रह्म के बारे में बदल दिया हां बदल देते हैं रामायण में कई जगह बदला है तो ये इसमें कह दिया इन्होंने देखिए वहां लिखा है कि शिवजी ब्रह्मा विष्णु महेश बनके शृष्टि की उत्पत्ति स्थिति और समार को संभालते हैं और इन्होंने क्या लिख दिया कि ब्रह्मा जी सजन करते हैं शिव जी समार करते हैं किंतु ब्रह्मा तथा शिव दोनों ही विष्णु के अवतार हैं साता वेष अवतार है उन्हें सर्वव्यापी विष्णु के ही समान विशेष शक्ति प्राप्त

01:57:39:26 रहती है अतः जब भी रक्षा के लिए शिव जी की स्तुति की जाती है तो वास्तव में भगवान विष्णु के लिए होती है हो गया विरोध हो गया क्या करोगे अब आप कह दो हमने जो हमारा जो अध्ययन है वह परंपरा से हुआ है सीदर स्वामी की अगर ऐसा कहोगे तो हो गए तुम शंकर मत वाले बिल्कुल र कोई हमारे गेस्ट आए हैं अशोक सुथ जी आप अपना परिचय दे दीजिए विषय दे दीजिए और हमारा नंबर नोट कर लीजिए आज हम आपको नहीं दे पाएंगे क्योंकि 10 बज 10 मिनट हो चुका है और सुबह हमको प्रातः काल जल्दी उठना रहता है आपका परिचय क्या है जय श्री राम शिवान जी जय श्री राम मैं जोधपुर से बोल रहा हूं जी जी बोलिए कई दिनों से मैं आपकी चर्चाएं सुन रहा हूं बहुत अच्छा काम कर रहे हो आप धन्यवाद आपका आभार ये मैं थो मेरा थोड़ा अनुभव कई

01:58:55:00 सालों से सभी को सुन रहा हूं लेकिन जो आपसे जो मैंने सुना है वह कभी किसी से नहीं सुना है आपका ज्ञान समझ मतलब क्या कहे अरे भैया ऐसा कुछ नहीं है ऐसा मत कहो घबराहट होने लगती है नहीं नहीं इतने से इने से गुरुदेव के पास जगत गुरुओ के पास जाइए कभी इतने से कुछ नहीं है नथिंग लेकिन हमारे जिस को ज्ञान समझ में आए ना व वही वही मान है क्या कि आप मैं भी पहले भेद करता था कि वो कोई क्या बोलता कोई किसी भगवान को बोलता कोई किसी को बड़ा बोलता किसी को छोटा बोलता जिस तरह से आपने समझाया ना तो कोई नहीं समझा सकता ऐसा मेरा अनुभव है ये लेकिन वान वाले हैं रामपाल वाले हैं इनको तो कभी समझ में नहीं आएगा ये इनका ब्रेन वश पूरा हो चुका है इनको नहीं आएगा क्योंकि अी इनका विवाह हो चुका है वो वाली बात है ना विवाह हो गया तो अब दो तरीके के लोग होते हैं एक तो या तो आर या पार का फैसला लेते हैं जब पता चला कि जिससे विवाह हुआ है वो त्रिया चरित्र है तो दो तरीके के लोग होते हैं एक तो ठोस बदलाव लाते हैं परिवर्तन मैं निर्णय लेता हूं कि

02:00:10:01 मैं गलत चीज का साथ नहीं दूंगा दूसरे होते हैं जो उसको ढकने में लग जाते हैं नहीं नहीं नहीं त्रिया चरित्र नहीं है तो यह बात हम कह सकते हैं कि इट्स बेटर ट केयर देन क्यर जो हा चीजों को देख लेंगे जो अभी जुड़े नहीं है वो तो जुड़ गए तो अपनी रक्षा करने में लगे रहेंगे जब यहां पर कोई बात घुस नहीं ही होगी तो अपने आप को कह द अचिंत हैय भाई भगवान को पहले आपने चिंता में ला दिया फिर कह रहे हो अचिंत आप ही तो भगवान को कह रहे हो भगवान समझ में आ रहा है भगवान दिखाई दे रहा है भगवान जो है यही उसका मौलिक स्वरूप हम भी भगवान दिखाई देने वाला मानते हैं मगर एक और रूप है जो जो व्यवहार में नहीं आ सकता हो सकता है दिखाई भी देता हो मैं यह भी कह रहा हूं व्यवहार में नहीं आ सकता हमारी आंखों का विषय नहीं हो सकता हमारे कानों का विषय एक वो रूप है वो प्राप्त है और जो वो है एज इट इज य नहीं आता यहां आता है व्यवहारिक हो जाता है तो वो जो व्यवहार में ना आ सकने वाला रूप है वह व्यवहार में आ सकने वाला रूप धारण करके मनुष्यों के बीच में आता है क्यों आता है परित प्राणाया साधु नाम साधु भक्तों के उद्धार के लिए मैं भी एक छोटा शिव भक्ति हूं और मैं शिवजी

02:01:25:10 को सब कुछ मानता हूं लेकिन अभी समझ में आ गया सब कुछ ईश्वर अपना अपना रूप अलग अलग नाम से बनकर आते हैं वो राम कृष्ण जो भी है ब्रह्मा सब एक ही है व ईश्वर एक ही परम तत्व है वह सब अपने को भेद दिखता है वर में आने के कारण अब सब में आप शिव को देखिए अगर कहीं पर राम जी के मंदिर पहुंच जाए तो वहा भी शिव को देखिए शिव जी खड़े धनुष लेकर के कितना मतलब अगर इस चीज को हम धारण करेंगे चलो तो शास्त्रोक्त तारक वो सब बातें छोड़ दो मगर सोचिए कि हमारे जो सनातन धर्म का समाज है उसकी कैसी स्थिति होगी कितनी सुंदर स्थिति होगी विवाद खत्म हो

02:02:05:14 जाएंगे ब गया इतना बढ़ गया इतना मतलब हर कोई मनमानी कर रहा है गलत गलत गलत विचार रहा है हिंदू धर्म को इतना बद हमा हमारी एक चीज देखिए कि हमारा अस्तित्व क्या है जो स्मार्ट है जो पांचों परमेश्वर के रूप को स्वीकार करते उनकी क्या स्थिति है अगर विष्णु मंदिर पर कोई बात आएगी कोई जाए या ना जाए हम जाएंगे वैष्णव तो जाएंगे ही विष्णु मंदिर पर बात आएगी तो हम जाएंगे वैष्णव जाएंगे और हम जाएंगे सात मंदिर पर बात आएगी तो सात जाएंगे हम जाएंगे हा और शिव मंदिरों पर शव मंदिर पर बात आएगी तो शव जाएंगे हम जाएंगे सौर मंदिर पर बात आएगी तो सौर जाएंगे हम जाएंगे नपत मंदिर पर बात होगी नपत जाएंगे हम जाएंगे तो हमें तो हर जगह अगर कोई निराकार को मानने वाला जो समाज है जो स्वयं को सनातन से जुड़े हुए वेदों में प्रमाण बुद्धि रखता है हमें उसकी भी उसके लिए भी खड़ा होना है फिर वो भले आर समाज क्यों ना हो क्योंकि उसकी वेदों में प्रमाण बुद्धि है इतनी बात प हम उसके भी साथ खड़े होंगे अगर निराकार मंदिरो पर हमला होगा

02:03:20:27 हा सबसे जदा तो मेरे को इ इन रामपाल जी वाले लोगों को देखकर बहुत मतलब गणा होती है कि इतने कुछ भी समझ नहीं इतना आप भाई है भगवान से प्रार्थना करते हैं कि सुधर जाए इन्होने कोई शास्त्रों का अध्ययन नहीं सिर्फ रामपाल की किताबें पढ़ी है और अपना ब्रेन वश कर लिया मतलब इनको कुछ भी समझ में नहीं आता है अगर कबीर कबीर साहब खुद बता दे ना तो भी ये नहीं मानने वाले हैं कि ये भगवान नहीं है कबीर साहब अच्छा लगा भाव व्यक्त किए बहुत अच्छा लगा और और नोट कर लीजिए और धरातल पर जो सहायता हो सकती है वो करने के लिए जुड़िए नाम जप अभियान से जुड़िए हम सब लोग नाम जप करते हैं जुड़े मैं आपसे बहुत बढिया हाड़ बहुत बढ ये मेरे को मतलब एक भ्रम और डाउट होता है कि ये जो रामपाल जी है कबीर कबीर पंथी है जो भी लोग है वह मतलब हमारे हिंदू शास्त्रों को वेदों को नहीं मानते ये बोलते हैं कि इनमें कुछ नहीं है काल का लोग है जीवों को फसा के रखा है और हमें मतलब सत लोग जाना है और मानते नहीं वो मानने का दिखावा करते किसी की भक्ति नहीं करनी है और मंत्रों से जब से तब से मतलब कोई किसी का कल्याण नहीं होने वाला है ये ऐसा बताते हैं जी लेकिन ये

02:04:36:02 सब गलत लगता है मेरे को अगर कुछ गलत होता तो हमारे वेद पुराण शास्त्र ऐसे थोड़ी लिखे जाते सब में सब में गुड र से छुपा हु कोई समझ नहीं पाता हर कोई बुद्धिहीन समझ नहीं पाता है चलिए ठीक फिर आपसे चर्चा होती है आने के लिए हो आप बहुत-बहुत धन्यवाद बहुत-बहुत शुभकामना जय श्री राम जय श्री राम सभी को जय श्री राम

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Live 2:05:08 · 19 Oct 2024

श्रीधर स्वामी चैतन्य महाप्रभु #iskcon #iskcondevotees

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