Used:
SRT: ⬇ SRT ⬇ Original file

.srt or .vtt (Hindi). The old file is backed up. After that the match for this video is rebuilt (may take a few minutes, keep the page open).

⬜ Not used yet · 00:00:02:15 – 00:13:09:28 (13:07)

00:00:02:15 तो सभी को जय श्री राम आर्य समाज की ओर से एक सज्जन आने वाले हैं व अभी तक जवाइन नहीं किया है उन्होने लिंक हमने उन्हें दे दिया है और आप सब लोग जितना हो सके यथा सामर्थ नाम जप अभियान से अवश्य जुड़े ऑपरेशन नाम जप नामा स्त्र समय आ गया है कि जो कलयुग में हमें भगवान की ओर से सबसे बड़ा शस्त्र मिला है उसको धारण करें उसका उपयोग करें धर्म संस्थापन के लिए अपने व्यक्तिगत उत्थान के लिए भौतिक उत्थान के लिए आध्यात्मिक उत्थान के लिए सभी प्रकार के जितने भी आपके उद्देश्य हो सकते हैं मनोकामनाएं हो सकती हैं जो आपके हित में हो उन सबके लिए हम सबको मिलकर के यह शस्त्र यह अस्त्र उठाना

00:01:17:24 है और इस तरह से हमारा संगठन का बल भी निर्मित होगा जो दूसरा घटक है अगर आपने फ भरा है तो आपको अवश्य ही कल से जो प्रारंभ हो रहा है सुबह से तो आपको अवश्य ही उससे जोड़ दिया जाएगा आप उसके लिए निश्चिंत रहिए थोड़ा सा संसाधनों का कर्मठ लोगों का अभाव होता है तो उसके चलते थोड़ा सा ऊपर नीचे होता रहता है इस विषय में आपसे अपेक्षा है कि

00:02:01:27 आप इसको अन्यथा ना लेते हुए इसमें सहयोग की भावना रखेंगे धैर रखेंगे लिंक आपको मिलेगा 7483 869 यहां पर अच्छा तब तक हम कुछ और बात कर लेते हैं जब तक य आर समाज के सज्जन आ रहे हैं या नहीं आ रहे तब तक एक रियल इंटेंशन नाम के व्यक्ति हैं जिनको निरुक्त में कहीं पर यास्का चार्य जी का एक कथन मिल गया कि जब तुम्हारा कोई गुरु नहीं होगा तो तुम्हारा गुरु तुम्हारा तर्क होगा इसका आलंबन लेते हुए वह हमारे इस प्रश्न का उत्तर देने का प्रयास करते हैं उनको ऐसा लगता है स्वांता सुखाए के लिए उनको ऐसा लगता है कि जब हम उनका गुरु पूछेंगे उनसे आमने सामने वैसे संभवत व आ नहीं पाएंगे हमने कई बार उनको प्रयास किया कि आइए उन्होंने भी किया मगर उन्होंने अपने कुछ जानकारी वाले चैनलों पर बुलाने का वो किया जिस पर हमें जाना उचित नहीं दिखा हम हमारी ओर से भी उनको सुझाए गए कि आप यहां पर आ जाइए मध्यस्थ चैनल पर जो न्यूट्रल होकर के बात करता है तो वहां नहीं आए

00:03:17:08 तो ना आने की स्थिति में हमने ऐसा नहीं कहा कि तुम्हारे यह नहीं है वो नहीं मगर उनकी ओर से जाहिर सी बात है ज धर्म पूर्ण रूप से स्थापित नहीं होता है तो वहां पर आप धर्म नियंत्रित आचरण की अपेक्षा भी नहीं कर सकते वह कहीं ना कहीं विस्फोट होगा ही और व्यक्ति का जो अधर्म नियंत्रित आचरण है वह सामने आएगा या फिर धर्म की सीमा के बाहर का जो आचरण है वो सामने आएगा तो निरुक्त के मैं जो यास्का चार्य जी का जो कथन है उसको लेकर के वो यह सोचते हैं कि जब उनसे पूछा जाएगा कि आपके गुरु का नाम क्या है तो व कह देंगे मेरे गुरु का नाम तर्क है ठीक मगर उनको यह नहीं पता है कि निरुक्त में ही आचार्य यासक ने कितनी बार कहा है कि यह जो परंपरा प्राप्त अर्थ है वो मैंने यहां बताया यह जो परंपरा प्राप्त अर्थ है यह मैंने बताया यह जो परंपरा प्राप्त अर्थ है गुरुओं के द्वारा प्राप्त अर्थ है ये मैंने बताया ये उन्होंने ना जाने कितनी बार उसमें कहा है ठीक है अब बात आ जाती है कि अगर उन्होंने यह कहा है कि परंपरा प्राप्त अर्थ है ये मैंने बताया और दूसरी और उन्होंने यह लिख दिया है कि कलयुग में गुरु का भाव होगा या ऐसी स्थितियां आएंगी जब गुरु नहीं होगा तब तुम्हारा तर्क ही तुम्हारा गुरु होगा तो क्या उसका आलंबन हम इसमें ले कि निरुक्त जी

00:04:32:10 नि जो यास्का चार्य जी हैं आचार्य यासक है उनकी ही बात को हम ना माने जहा दूसरी ओ उन्होंने कहा है कि परंपरा प्राप्त अर्थ मैं आपको बता रहा हूं है ना तो इसका अर्थ हमें यह लेना चाहिए कि हमें जब गुरु प्राप्त नहीं हो रहा है मिल नहीं रहा है उस समय जो हमारी तर्क शक्ति है उसके आधार पर बुद्धि और विवेक के आधार पर ही हम आगे बढ़ते हैं मगर यदि इसका अर्थ यह माना जाए कि गुरु की आवश्यकता ही नहीं है तो यह जो भाई साहब है जो निरुक्त के आधार पर यह बोल रहे हैं कि मुझे गुरु की आवश्यकता नहीं है क्योंकि आचार्य यासक ने ऐसा कहा है ठीक है और वहां पर वो तर्क के साथ य भी कहते क्या आप आचार्य यासक से भी बड़े हो गए तो मेरे भाई मैं आपको यह कहना चाहूंगा य यदि तर्क ही आपका गुरु है तो फिर आपका यह प्रमाण दिखाना सिद्ध ही नहीं होता है आप मुझे प्रमाण दिखा क्यों रहे हैं प्रमाण का अर्थ है आप किसी ना किसी ऐसे की वाणी मुझे बता रहे हैं जिस वाणी को मैं भी प्रमाण के रूप में स्वीकार करता हूं यास्का आचार्य यासक जी की वाणी आप मुझे प्रमाण के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं वो भी तो गुरु ही है आपके जो आपको यह बता रहे हैं तो आप अपनी बात को सिद्ध करने के लिए गुरु का ही तो आलंबन ले रहे हैं

00:05:47:25 और फिर कह रहे हैं कि गुरु नहीं है तो आपने अपनी बात को बताने के लिए भी गुरु का ही आलंबन लिया गुरु की कही हुई बात को लिया अगर वो वाली बात छोड़ दे कि आप अर्ध कुकुट न्याय कर रहे हो उन्होंने ही अनेका अनेक जगह श्रुति परंपरा की बात की है मगर अगर आप उन बातों को नेगलेक्ट भी कर दे तब भी आपने यहां पर अपनी बात को रखने के लिए किसी गुरु वाणी को ही तो प्रस्तुत किया कि ये देखो इसको तो तुम्हें मानना पड़ेगा ना यह भी बता यह भी कहा अपने वीडियो में कि आपके आचार्य आस्क से भी आगे हो गए यानी आप वहां पर गुरु की वाणी को प्रमाण मान रहे हो माना ना प्रमाण गुरु की वाणी को तो फिर फिर गुरु तत्व का खंडन कैसे कर रहे हो खुद ही तो प्रमाण के रूप में गुरु की वाणी को प्रस्तुत कर रहे हो आप यह चाहते हो कि आपने जैसे आचार्य यासक को गुरु रूप में प्रस्तुत किया और हम भी उनको स्वीकार करते हैं निर्विवाद रूप से जाहिर सी बात है मगर अगर आप गुरु तत्व का खंडन कर रहे हैं उनकी किसी बात को लेकर के अर्ध कोट न्याय करते हुए तो फिर आप उनकी बात का आलंबन कैसे ले रहे हैं वहां पर तो आपने गुरु तत्व को स्वीकार कर लिया तो ये ना

00:07:03:08 करें सामने आए और आचार्य आस्क ने कई जगह पर गुरुओं की बात कही है कि गुरुओं के द्वारा ही परंपरा के द्वारा ही यह अर्थ मुझे प्राप्त हुआ है तो अपनी परंपरा बताएं भागे नहीं जब तार्किक बात आएगी कि आचार्य यास का आप मुझे प्रमाण बता रहे हैं तो आचार यासक का वो जो कथन है वो आप तक कैसे पहुंचा बताओ मुझे ये है तर्क तर्क ये है इसमें मैंने गुरु का आलंबन नहीं लिया आपका खंडन करने के लिए यह है ओनली तर्क की बात आचार्य यासक की बात आपने रखी आपने तो आचार्य आस्क का आलंबन लिया अपनी बात मनवाने के लिए मैं आपसे पूछ रहा हूं आचार्य आस्क का वो जो तर्क है वो जो कथन है वो आप तक कैसे आया यह तर्क है इसमें गुरु नहीं है मैं आपसे पूछ रहा हूं कैसे आया आप तक सपने में आके दे गए आचार्य आस्क जी या भाही जो परंपरा के बारे में अलंकार समाज की ओर से बताया जाता है कि वहां से ब्रह्मा जी ने उधर से कैच किया इधर जमनी ऋषि तक आया जमनी ऋषि ने उधर से बॉल फेंक दी तो सीधे लपक लिया क्या कुछ इस तरह का है क्या कैसे आया अब

00:08:14:01 तक अरे 500 ईसवी पूर्व के क्यों ाज ईसवी पूर्व के आदि शंकराचार्य जी का नाम ले लीजिए 500 ईसवी पूर्व का ही नाम क्या बताए आदि शंकराचार्य जी के बाद से हर प्रत्येक आचार्य जो है सभी के नाम हमारे पास उपलब्ध है और पहली बात यह है कि अगर आप परंपरा को नहीं मानते हैं कि यह परंपरा नहीं है तो फिर आप यह नहीं सिद्ध कर पाएंगे कि आप जिन वेदों को अपना प्रमाण मानते हैं वह वेद अनादि काल से चले आ रहे ग्रंथ है जहां तक का आपके पास इतिहास है वहीं तक का आप मान सकते हैं अगर आप इतिहास को स्वीकार नहीं करते आदि शंकराचार्य के ठीक है और जब वेदों को स्वीकार नहीं करेंगे तब भी हम छोड़ेंगे नहीं वेद विरुद्ध होते ही हां वो आए नहीं है वेद विरुद्ध होते ही क्या होगा आप सनातन विरुद्ध हो जाएंगे सनातन विरुद्ध होते ही आप सर्व शक्तिमान सत्ता के विरुद्ध हो जाएंगे सर्वशक्तिमान सत्ता के विरुद्ध होते ही आप नास्तिक हो जाएंगे नास्तिक होते ही आप जानवर हो जाएंगे इसीलिए कहता हूं मत पढ़ो चक्कर में कोई

00:09:30:00 टक्कर कहीं से भी इधर से उधर से नास्तिक होकर सनातना भासी होकर तंत्र के रूप में या धर्मा भासी होके धर्म के रूप में किसी भी तरह से आओगे तो चोट खाओगे मत आओ वही रहो सुखी रहो अपने सपनों के संसार में वो जो मुंगेरी लाल के जो भव्य सपनों का संसार है उसमें सुखी रहो कि हम बिल्कुल सही क्योंकि आप एन केन प्रकार निन कहीं से भी आप करेंगे तो आपको चोट लग

00:10:21:00 जाएगी भाई साहब आ नहीं रहे हैं क्या बताया जाए अगर कोई फिलहाल यहां दिए जा रहे व्यक्त वक्तव्य से सहमत नहीं है और कायर नहीं है तो वह सामना कर सकते हैं आ सकते हैं ऊपर एक सौहार्द पूर्ण चर्चा के निमित्त आप आ जाए या वैचारिक मतभेद के निमित्त आ जाए वह आप ऊपर आ सकते

00:11:22:13 हैं हां शास्त्री जी आ नहीं रहे उन्होंने समय तो दिया था हमको पर वो आ नहीं रहे हैं इसका क्या कारण वही जानते हैं हो सकता है उन्होंने हमारा वक्तव्य सुना हो कि मत पढ़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में तो उन्होंने शायद देख लिया हो कि वह चक्कर क्या हो जाता है अब आपने देखा जो आहवान के द्वारा पांच सिद्धांत जो प्रतिपादित किए जाते हैं इन पांच सिद्धांतों का हमको इतना प्रचार करना है कि हर हर बच्चे तक वृद्ध से लेकर हर बच्चे तक यह बात पहुंच जाए यह पांच सिद्धांत ऐसे हैं कि आप कहीं से भी किसी भी प्रकार से सनातन का या सनातन के किसी घटक का जो है पक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं पांच सिद्धांत पहला संसार का प्रत्येक मनुष्य भगवान को ही ढूंढ रहा है फिर वह भले ही स्वयं को नास्तिक ही क्यों ना कहता हो दूसरा य ये किसके लिए नास्तिकों के लिए दूसरा ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है इसमें धर्मा भास भी आ जाते हैं और सनातना भास भी आ जाते हैं धर्मा भास शुरू होता है कि भाई हमारा ईश्वर वादित है जन्म नहीं ले सकता

00:12:37:13 अवतार नहीं ले सकता यह सारी चीजें मगर फिर क्या होता है कि कुछ सनातना भा सनातन के नाम पर भी ऐसे प्रचार तंत्र शुरू हो जाते हैं जो अपने मंतव्य की सिद्धि के लिए या उनके प्रचार प्रसार में कहीं विदेशों में दिक्कत आ रही है तो सनातन ईश्वर को वहीं के ईश्वर जैसा प्रस्तुत कर दो इन सबके कारणों से सनातना भास लाते हैं जहां सनातन नाम से होता है वस्तुतः वो आभास होता है तो इन दोनों ही प्रकार के तंत्रों के लिए भी यही है ईश्वर वही है जो कुछ भी

00:13:09:28 कर सकता है तीसरा ईश्वर के विषय में केवल वही शास्त्र प्रमाणिक जिन्ह ईश्वर ने भी ना

⬜ Not used yet · 00:13:17:08 – 00:33:39:25 (20:23)

00:13:17:08 रचाओ हम वेदों को क्यों मानते हैं अपौरुषेय क्रिश्चियनिटी के ईश्वर ने बाइबल को रचा अगर वेद को भगवान रच देते तो वेद की क्रेडिबिलिटी पर वो हो जाता है क्यों हो जाता है क्योंकि बुराई को भी बनाने वाले भगवान ही हैं तो वह शास्त्र बुराई नहीं है यह कैसे पता अगर वह यह कहते कि नहीं बुराई को बनाने वाले भगवान नहीं है तो फिर उन्हें मानना पड़ेगा कि बुराई का रचता कोई और है जैसे कल वो महानुभाव आए थे हमने उनसे पूछा उन्होंने सोचा होगा अ जीवन मरण वाला प्रश्न पूछेंगे कि क्या ईश्वर अपनी देह का नाश कर सकता है तो हमने उसमें कहा उनसे प्रश्न को बदल दिया मैंने कहा क्या आपका ईश्वर झूठ बोल सकता है तो ईश्वर की सर्वशक्ति मत्ता को स्वीकार करने के चक्कर में बोले हां कर सकता है तो मैंने कहा कि जब ईश्वर झूठ बोल सकता है तो जो कबीर वाणी है जो आपके अनुसार कबीर ने लिखी है वो सच कैसे फस गए चक्कर में ये तीसरा सिद्धांत यह उनके लिए भी है जो कहेंगे

00:14:32:20 आपसे कि हमारे पास तो स्वयं भगवान आए थे उन्होंने य कहा है भा इस्लाम की शुरुआत भी तो इसी आधार पर है कि भगवान नहीं डायरेक्ट किसी फरिश्ते को भेजा और व सारी हो गई चीजें तो भगवान ने आकर के स्वयं कोई बात कही सनातनी वह नहीं जो उसको मान ले अगर वह वेद विरुद्ध है तो उसको भी नहीं मानेगा उसका नाम सनातनी है बुद्ध के रूप में भगवान विष्णु ने आकर के यज्ञों की रक्षा की के लिए ही सही पर उन्होंने यज्ञों का खंडन किया था हमने उनको भगवान माना मगर उनके सिद्धांत को नहीं माना है ना तो ईश्वर के विषय में केवल वही शास्त्र प्रमाणिक जिन्ह ईश्वर ने भी ना रचा हो चौथा ज्ञान वही प्रमाणिक जो परंपरा से प्राप्त हो इसमें आपके सभी वो सारे घटक टूट जाएंगे जो राम कथा मर्मज्ञ बनते हैं तथाकथित आचार्य बनते हैं कहते हैं आदि शंकराचार्य जी के सिद्धांतों को पढ़ाने और मानने वाले हैं और उन्हीं का खंडन करते हैं उन्हीं का बुराई करते हैं उनके सिद्धांतों की कमी निकालते हैं

00:15:48:03 अपने मनगण बातें करते हैं मातृ शक्ति से यूटरस निकाल दो यह कर दो वो कर दो संसार को ही चेंज कर दो अंत तो गत्वा जा तो उधर ही रहे हो तो इन सबका निवारण क्या होगा इन सबका निवारण है ज्ञान वही प्रमाणिक जो परंपरा से प्राप्त और फिर जब परंपराओं में भी दिक्कत आने लगे जब कोई परंपरा के नाम पर भी अ ऐसे सिद्धांतों का प्रतिपादन कराने लगे जो सार्वभौम नहीं हो सकते ऐसे सिद्धांतों का प्रचार करने लगे जो जिसमें परंपरा का आलंबन लेते हुए परंपरा की आड़ में तब वहां पर आता है कि परंपरा में कौन सी परंपरा तो सार्वभौम सर्वमान्य परंपरा नारायण समारंभा शंकराचार्य मध्यमाम अवदा चार्य पर्यंत वंदे गुरु परंपरा

00:17:02:19 निर्गुण और सगुण में ईश्वर वही है जो शुद्ध रूप से जिसमें बुराई ना हो हा ठीक है हम मान लेते हैं तो बुराई को बनाने वाला कौन है यानी संसार में कुछ ऐसा है जिसे ईश्वर ने नहीं बनाया जो ईश्वर की मर्जी के बाहर है उसके बिना मर्जी के बन गया है यह सब व्यवहारिक धरातल पर है ये सब बातें ठीक है इनको अंततोगत्वा आप यह नहीं कर सकते हो कि लिंक डाल दीजिए भाई वो आ नहीं रहे

00:17:39:13 हैं आ जाइए जो चेहरा दिखा सकते हो लिंक डाल दिया गया है साइंस जर्नी वाले बहुत सारी हिस्ट्री इत्यादि लेकर के खंडन करने का प्रयास करते हैं सनातन का कभी भी उन्होंने वहां पर कोई दार्शनिक धरातल पर मुझे नहीं लगता कोई वीडियो बनाया है ईश्वर की सर्वशक्ति मत्ता पर नास्तिक आस्तिक इन सब चीजों पर कभी कोई वीडियो मैंने नहीं देखा मैंने वीडियो हमेशा देखे कि वहां तुम्हारे य लिखा है शूद्रों के साथ लिखा है उसने यह किया था महाभारत में यह हुआ था वो हुआ था यह सब चीजें है भाई सीधी बात है आपके पास माता बहन और पत्नी में अंतर करने का आधार क्या है तो वह आधार आएगा धर्म यदि आप स्वयं को मनुष्य कहते हैं तो आपको स्वीकार करना होगा कि इस संसार में कोई सर्वशक्तिमान सत्ता है

00:18:54:24 जिसे प्राप्त करने के निमित्त आपने उन नियमों का आलंबन ले रखा है जिसे धर्म कहते हैं और यदि आप यह मानते हैं कि इस संसार में कोई सर्वशक्तिमान सत्ता है तो आपको यह मानना होगा कि आप वेदों के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर को और धर्म को मानते हैं और यदि आप यह मानते हैं कि वेदों के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है वो सर्वशक्तिमान है तो इसका अर्थ होगा कि आप शंकराचार्य भगवत पाद आदि शंकराचार्य जी द्वारा निर्धारित जो सीमाए हैं ईश्वर के विषय में जो उनके सिद्धांत है उनकी सीमा में रहते हुए भगवान का भजन ध्यान स्मरण जो भी है वह करते हैं कोई आ गए हैं राम जी

00:19:52:15 शरण जी राम जी शरण जी स्मार्थ जय श्री राम ये मेरी कमेंट आपके लाइव स्ट्रीम में नहीं जा रही हा आपके वीडियो पर लाइव स्ट्र पर मेरी पया नहीं जा अच्छा पता नहीं हमें इस बारे में नहीं पता है शायद कुछ होगा बताइए

00:20:29:00 है नाय का कमेंट वाला मामला मुझे भी नहीं समझ में आता है कई बार कई लोगों की शिकायत आती है कि वह कुछ कमेंट कर देते हैं तो य विबल नहीं करता है का थोड़ी देर बाद अपने आप कर देता है कभी कभी करता ही नहीं है आवाज आपकी साफ नहीं आ रही है य का मैं कह रहा थाय का अधिक अनुभव मुझे नहीं है हम लोग क्या फ पर भी अ रहते और वहा परही चर्चा होते हमारी भी चैनल है य

00:21:18:18 पर कोई आ गए हैं मैं एक काम करता हूं आप रहिए मैं ले लेता हूं इनको य जुगल किशोर जी को लेता जी जुगल जी आप अपना चेहरा रिवील करें न जय श्री राम गुरुदेव जय श्री राम सर मेरा एक प्रश्न है आप किसी वैचारिक मतभेद के निमित्त नहीं आए नहीं नहीं नहीं मैं तो केवल मैं स्वाध्याय करता हूं तो उसका मतलब मुझे कोई व्याकरण के बारे में जानना था आपसे आप जानने के लिए आप क्लासेस में आइए पा मिनट का पाच मिनट कुछ छोटा सा क्वेश्चन है मेरा बोलिए सर जैसे दुर्गा शस्ती में एक मंत्र आता है यादवी सर्व भूतेषु विष्णु मायती शब्द ता तो इसमें विष्णु माया का अर्थ क्या होता है विष्णु माया

00:22:18:09 हां यह तो जो प्रकरण चल रहा है पीछे से उसके हिसाब से देखा जा सकता है वो अलग-अलग आचार अपने हिसाब से कर सकते हैं विष्णु माया का एक अर्थ भी होता है विष्णु की माया उनकी माया शक्ति है जो हां विष्णु भगवान की माया शक्ति और इसका निक भ्रम का मानसिक भ्रम व्यवहारिक धरातल और परमार्थिक धरातल को देखना होगा कि किस धरातल के अनुसार निकाला जा रहा है इसका वास् करते से क्या होगा स्विक अर्थ तो विष्णु की माया ही कहा जाएगा

00:23:04:18 क्योंकि इ पावर हा मतलब उनकी जो खुद की जो शक्ति है मतलब ही माना जाएगा उनको हां उनकी शक्ति सजन शक्ति जो जिसके जिसके द्वारा संसार बनता है इसका मतलब भ्रम तो नहीं होता ब्रम माया माया तो माया का श होता इसलिए भ्रम भी होता है इसलिए देखना पड़ेगा कि भ्रम भी होता है माया का माया का अर्थ कुछ आचार्यों ने लिखा है कि जो नहीं है उसको माया कहा जाता

00:23:44:22 है जी साहब सिंह जी ठीक है आप क्लासेस क्लासेस आप जवाइन करिए उसम आइए साहब सिंह जी आप अपना कैमरा ऑन करें तो हम आपसे चर्चा करें नहीं करेंगे तो हटाएंगे आपको हटा दीजिए किरमाड़ा जी आप चेहरा अपना

00:24:25:21 दिखाएं नहीं दिखा रहे चलिए फिर वह नहीं दिखा रहे साहब सिंह जी चेहरा नहीं दिखा रहे और कोई अगर आना चाहे तो आ सकता है मगर मैं एक रिक्वेस्ट करूंगा केवल वैचारिक मतभेद के निमित्त आए जिज्ञासाओं के लिए क्लासेस में आए जिज्ञासाओं के लिए ना आए

00:25:00:15 अरे भेजो ना भाई भेज दीजिए ना उसे आपको लगता है कि जो आपकी विश्व विख्यात अंतरराष्ट्रीय जो मातृ शक्ति है जिन्होंने कहा कि जो वर्ण है वो उन्होंने कुछ कही थी कुछ बातें वर्ण के बारे में जो आपके ही विरोध में है कि हां जो जो जनेऊ होता है यज्ञोपवित संस्कार होता है व पूर्वजों के आधार पर होता है उसके पूर्वज क्या करते थे उस आधार पर होता है तो वर्ण को यहां पर उन्होंने जन् से मान लिया अब आपको लगता है कि जो आपकी अंतरराष्ट्रीय व मातृ शक्ति है आर्य समाज के

00:25:49:06 प्रचारक उनको नहीं पता है और आपके अनुसार यह जो क्या है आप इनका नाम अजय आर्य इनको ज्यादा पता है भेजिए भेजिए ना हमने कहां मना किया है 7408 30169 इस पर उनको कहिए ट करें और ट करके फॉर्म भर दे साहब सिंह जी की बात हो रही है यहां पर हां बताइए साहब सिंह जी जय श्री राम कहां से हैं आप

00:26:31:02 आवाज नहीं आ रही साब सिंह जी आपकी टूट टूट के आ रही कट कट के अरे आवाज नहीं आ रही आपकी आपको नहीं आ रही होगी आपके नेटवक खराब है आपका नेटवर्क खराब है बाकी सबको आवाज आ रही है और भाई साहब कपड़े पहन लीजिए आप बनियान बनियान में कोई तरीका थोड़ी ना आने

00:27:14:19 का तो इस इस प्रकार के लोग हैं कल एक भाई साहब आए थे जो गर्मी के कारण वो टीशर्ट को ऊपर डाले हुए थे सही बात है लोग आजकल क्या है एक तोय स्वाध्याय श बड़े ही आसानी से लोग प्रयोग कर लेते हैं परंतु सूत्र को नहीं जानते हैं स्वाध्याय अवा परंपरा से ही स्वाध्याय संभव है एक विधि है जो आचार्य के द्वारा ही पहले त्र संस्कार हो गायत्री प्राप्त

00:27:54:16 हो ये आर्य समाज के द्वारा सिखाया जाता है देखिए क्या भाषा है इनकी नपुंसक इत्यादि शब्दों का उपयोग किया जा रहा है जो यह कह रहे हैं कि उससे अजय आर्य से जो है वो कर ले भाई तरीका है कोई मर्यादा है कि नहीं कहां से सीखे आप लोग आप लोग राम को मानने वाले कहां से हो गए बताइए आप राम ने कहां पर प्रस्तुत कर दिया कि आप किसी भी कारण से ये अश्लील बातों को आप बीच में ले आए लोगों के प्रति अश्लील हो जाए कि कहां से आप लोगों को इस धर्म की शिक्षा मिल रही है भले ही वह आर्य समाज को मानते हो भले ही वह शंकराचार्य जी को मानते हो इस कौन को मानते हो किसी को भी मानते हो मगर सनातन धर्मावलंबी को यह कार्य बिल्कुल शोभा नहीं देता है कि अपनी कहीं पर

00:28:48:02 अगर कहीं बात छोटी हो रही है खंडन हो रहा है बात नहीं चल पा रही है या आपका पक्ष सिद्ध नहीं हो पा रहा है तो आप मर्यादा को लांग गए तो क्या फायदा हुआ गिरो लड़ो लड़ो गिरो गिरो मगर उस झरने की तरह जो गिर के भी अपनी सुंदरता को भंग नहीं होने देता आप लड़ अपनी चीजों के लिए रखिए अपना पक्ष मगर मर्यादा में शी अगर कोई सामने वाला भी आपको कह रहा है तब भी आपकी एक मर्यादा होनी चाहिए अगर सामने वाला पहली बात तो य है जब कोई व्यक्ति अश्लील भाषा का उपयोग करने लगता है तो सबसे पहले अश्लील भाषा का करने में ही उसका खंडन हो जाता है जैसे आप जिस अजय आर्य की बात कर रहे हैं वो कितना गाली अप शब्द इत्यादि का आलंबन लेते हैं तो इसमें ही उसका खंडन हो जाता है कि उसके पास अपने तार्किक और प्रामाणिक वो नहीं है बिंदु जिनके ऊपर बात हो सके इस कारण से उसे गाली का आलंबन लेना पड़ रहा है ऐसा ना

00:29:54:09 करिए संबंध में हमारे आचार्य ने एक बार कहा था जो अपशब्दों का अ भाषा का प्रयोग करता है उसकी सरस्वती उससे रु हो जा इसलिए सबको बड़ी सावधानी से ही शब्दों का चयन करना चा भाने रावण ने सीता माता का हरण कर लिया तो श्री राम ने तो हमें यह नहीं सिखाया कि आप मंदोदरी का हरण कर लेना तो ये ध्यान रखना पड़ेगा कि हम राम को मान वाले हैं इस्लामिस्ट नहीं है इस्लाम वाले एक अपनी उसमें यह बातें कर रहे थे कि जब उनसे प्रश्न आया कि उसमें यह क्यों दिया गया है कि वहां की स्त्रियों का हरण कर लो इसलिए दिया गया कि वह कर रहे हैं धर्म और धर्म का निर्णय इस बात प होगा कि सामने वाला क्या कर रहा है उसके अनुसार तुम यह कर लो तुम भी उसकी स्त्रियों को ले आओ हा

00:30:58:01 आप आ जाइए भाई आप बहुत दिन से संपर्क में आप आ सकते हैं और आइए इस कोन के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध करिए अजय आर के रिकॉर्डिंग्स या फिर कोई साईं बाबा को मानने वाले हो जय श्री राम या फिर कोई साईं बाबा को मानने वाले हो तो वो आए वो जो है साईं बाबा को आकर के अवतार सिद्ध करें ऐसा कोई भी व्यक्ति है जो अभी आ सकता है राजा राय जी अरे आप दिल्ली से अच्छा अच्छा जय श्री राम जय श्री राम तो भाई साहब आज अजय व जो आने वाले थे आचार्य नाम था उनका उन्होंने हमको आप

00:32:13:07 जराय प्रदर्शित कर दीजिए जो आने वाले थे वो उनका विजिटिंग कार्ड था क्योंकि लोग पूछ रहे हैं कि कौन आने वाले थे क्या हुआ वो शास्त्री जी है उनका विटिंग कार्ड [संगीत] वसे आ समायो का इतिहास रहा है इतने जल्दी ट में आते नहीं है वैसे हम डिबेट करते ही नहीं है हम डिबेट नहीं चर्चा करते हैं डिबेट हम नहीं करते हमारा चर्चा ही इतना कमाल का हो जाता है कि ट की जत नहीं

00:33:02:18 तो जो भी रियल इंटेंशन को जानते हैं उनको बताए जाके भाई तर्क के लिए आप प्रमाण उपयोग उपयोग में ना ले क्योंकि जब आप प्रमाण उपयोग में लेंगे तो अपने आप आपने गुरु का ही आलंबन लेकर के वो किया है और और तर्क और तर्क पर बात हम कर रहे हैं किके पास आचार्य यासक का वो जो कथन है वो आया कैसे ये तसे सबसे बड़ी बात यही है मेन बात यही है आपके पास कहां से आया किस परंपरा से आ दरही राजकुमार वो राजकुमार एक फिल्म अभिनेता थे उनका एक डायलॉग था मुझे याद आता

✅ This part is already used · 00:33:39:25 – 00:33:47:27 (0:08)

→ Used in: A · Live श्रीधर स्वामी चैतन्य महाप्रभु #iskcon #iskcondevotees at 33:05 ↗

00:33:39:25 है कि सांप और बिू सांप और बिच्छू शेरों को काटा नहीं करते दूर ही दूर से रंग कर निकल जाते

⬜ Not used yet · 00:33:47:27 – 01:11:21:21 (37:34)

00:33:47:27 हैं हा पिक्चर में देखा र ये वो वाली बात है फिट हो जाता है भया कहीं का ट कहीं का रोड़ा भानुमती ने कुवा जो एक देख रियल इंटेंशन की रियल इशन रियल इंटेंशन की एक चीज आप देखिए एक चीज आप देखिए रियल इंटेंशन की की जब स्कन का

00:34:28:00 हा इन्होंने एक विजिटिंग कार्ड दिया था ना यह इन्होंने हमको विजिटिंग कार्ड कल दिया था संपर्क सूत्र को हमने ब्लर कर दिया है इसको थोड़ा बड़ा कर दीजिए अच्छा अच्छा भैया इसमें क्या लिखा है देखिए नामकरण मुंडन यप विवाह तथा कथा आदि वैदिक संस्कारों के लिए संपर्क करें ये कितने बड़ी देखि कितना बड़ा छलावा हैय देखिए नहीं वो जो भी हो छलावा वो जो भी हो मगर फिलहाल हमारा यह बताने का वो है कि ये इनका विजिटिंग कार्ड था जो इन्होंने हमको दिया था और एक बजे आने वाले थे मगर नहीं आए अब इसका कारण क्या है वही जाने मगर नहीं आए अब हो सकता है कि जो हमारे लिए जो एक वो भेजा गया था ना पूरे आर समाज में ल ओवर इंडिया एक पर्चा निकाला गया था कि इनके साथ चर्चा ना करें किसी बड़े विद्वान को लाए इत्यादि हम उस पचय को पढ़ कर के एक बात की प्रसन्नता हुई थी गुरुदेव कहते

00:35:43:02 हैं जब विरोधी भी आपके मन की बात करने लग जाए वो है आपकी वास्त जादू जादू वो जो स चढ़कर बोले तो वो सामने उनके उनके परिचय में लिखा था कि करपात्री जी का अनन्य भक्त उनके पचे में लिखा था हमारे बारे में तो हमने कहा हमने कभी अपने आपको को अनन्य नहीं समझा क्योंकि हमको लगता है कि हम बहुत छोटे से वो है पता नहीं कितनी 100 गलतिया करते होंगे दिन भर में मगर वो सामने वाले ने लिखा वो अच्छा लगा वो सुखद था भैया इस बारे मुझे भी एक चीज याद आ गई कि जैसे जो वेदांत पारिजात जो ग्रंथ लिखा धर्म सम भगवान ने तो उसका खंडन करने के लिए समाजी थे विशुद्धानंद मिश्र वो उठे यद वो कर नहीं पाए क्योंकि उनके तर्को का पूर्व में रख प्रमाणों को पूर्व पक्ष में रखकर अपने सिद्धांत का प्रतिपादन व नहीं कर पाए लेकिन उन्होने शुरुआत में क्या ऐसा श्लोक लिख दिया कि जब वेदों की हानि हुई तो भगवान श्री हरि ने दयानंद सती को स्वर्ग से नीचे भेजा स्क्रीनशॉट लेकर भेजा है अब देखिए दु दुबे जी चले चौ बने दुबे भी ना रहे अरेई तुमने स्वर्ग को मान लिया ह को मान लिया अवतार मान लि आए थे खंडन करने पौराणिक बन ग और उससे बड़ मजे की बात सुने नाम लिखा वेदा

00:36:58:14 कल्पम अरे भाई तो पारिजात ष तो स्वर्ग में होता है हमारी मान्यता है आपने कब से मान लिया वेदा क नाम लिख कर अपना खंडन करा लिया आपने और लोक आपको भेजूंगा भया आप देखिएगा उस ग्रंथ के पहले पाच नंबर शलोक में लिख रहे है कि जब संसार में वेदों की हानि हुई तो श्री हरि ने प्रमोद लोक से यानी स्वर्ग से सरती को भेजा वेद की स्थापना करो पढ़ के हसते हसते रह गया और मैंने पता कहां पड़ा के जो पूर्व शंकराचार्य महाग जो थेमी निरंजन देवती जी महाराज उन्होने उसका जो खंडन किया ऐसे कैसे जब मैंने खुद ग्रंथ पढ वही बात लिखी हुई थी कितने बड़ आश्चर्य की बात है तुम आए हो हमारा खंडन करने हमारे तक से इस कहते सनी पात्र खुद ही नहीं मालूम अच्छा अपना उन्होने परिचय क्या दिया भैया ग्रंथ के शुरुआत में उन्होने अपना परिचय दिया भगु वंशी गोत्री ब्राह्मण हूं अरे भाई तुम जन्म से मान लिया तुमने वण परंपरा व परंपरा मान लिया मुझे ऐ लहा है मुझे ऐसा लग रहा है वेदार्थ पारिजात का खंडन करने के नाम पे वो वेदार्थ पारिजात का समर्थन करने के लिए उन्होंने वो ग्रंथ लिखा होगा जब तुमने ये लिख दिया कि मैं भगु गोत्री वंश का ब्राह्मण हूं तो तुमने मान लिया जन्म से वंश परंपरा

00:38:13:16 भाई भृगु वंश से गोत्र के ब्राह्मण कैसे हो जाओगे जब तक ये नहीं मानोगे कि वंश परंपरा जन्म से है जन्म से मान लिया ना तुम अपना खंडन करवाने आए हो हम करने आए हो एक आर्य जी आए हैं आर्य जी आप अपना फेस रिवील करें तो हम आपको ऊपर ले अन्यथा हम तब तक लेते हैं दुर्गेश जी को इन्होंने शाय अपने नाम की स्पेलिंग ग लिख दि है जी दुर्गेश जी आपका नाम दुर्गेश या दर्श

00:38:47:19 है आपको सुनाई दे रहा है दृश जी आपको सुनाई दे रहा है हा जी आपका नाम दीर्घ है या दुर्गेश है दीर्घ भाई साहब आप थोड़ा कपड़े पपड़े पहन लीजिए ना इस तरह से क्यों आ रहे हैं बदहाल में इतना भी नहीं है कि हमको सारा देश देखने वाला है तो कम से कम कपड़े तो वस्त्र तो धारण कर ले और अगर फिर अगर फिर उसमें हो या तो पारंपरिक जो वेष है कि धोती और अचले में हो अचला हो उपवत उसम

00:39:35:24 हो या तो उस तरह का आपको शूट ही करना हो कि आप आपके कई बार होता है कि ऐसा भी दृश्य दिखाना होता है यज्ञ पवित संस्कार हो रहा है या इस तरह का कोई दृश्य दिखाना है उस समय आपने ऐसा अपने आपको को प्रस्तुत किया मर घर में बैठे हैं कहीं पर भी बैठे हैं और अपना कैमरा ऑन कर दिया आर्य चले गए जो स्वयं को कहते हैं कि हम पूर्ण वैदिक हैं चले गए और कोई नहीं आ रहा है चलो हमें लग रहा है कि उन्होंने हम हमारी जो बात है कि मत पढ़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में इसको मान लिया है इसको मान योगदान देने

00:40:32:27 जाए परिचय वाला काड दिखाया था उसम मेरे मन में एक प्रश्न आया र मैं अभी विचार कर रहा था सत्र के आधार परकार करवाते होंगे क्योंकि हमारे यहां तो प्रक ब्राह्मण कुल की शाखा होती है श के अनुसार होता

00:41:10:07 है की श के अनुसार आपकी आवाज थोड़ी सी ऐसी है कि जो कम मतलब समझ में आ रही है या तो आप फोन से दूर है या कोई और बात है जिसके कारण उतनी स्पष्ट नहीं आ रही आवाज कोईम हा दोबारा फिर कभी आते हैं अभी उस उना वो नहीं है जय

00:41:47:16 श राधे राधे राधे राधे राधे देखिए ठाकुर जी अरे वाह दर्शन हो रहे हैं ठाकुर जी के दर्शन आप जहां पर है वहीं के हैं भगवान ये नहीं है गार्डन है उसम अच्छा अच्छा बहुत [संगीत] बढ़िया हरि दासो हम आप ऊपर आए हां कोई साईं बाबा साईं के नाम से चांद मिया को मानने वाले हैं तो वो भी आ सकते

00:42:36:02 हैं कोई अगर चांद मिया को मानता हो कि वह भगवान के अवतार थे भगवान है उनके साथ राम को जोड़ दिया जाता है कोई ब्रह्मा कुमारी वाले हो तो आ सक प्रणव प्रणव को जोड़ दिया जाता है तो वह सब आए अपने पक्ष को यहां रख सकते हैं और वेदों में परमाण कबीर साहब भगवान कहां गए वो कहां गए भाई मतलब जिनका वहां पर नाम स्पष्ट लिखा है रुद्र शिव विष्णु स्पष्ट लिखा है वो भगवान नहीं है है ना मगर उसी लॉजिक के अनुसार जिका नाम स्पष्ट नहीं लिखा है वो जो र आ रहा है वो अगले शब्द के साथ संधि होने के कारण व रा उत्पन्न हो रहा है तो वो जो है आपके अनुसार भगवान भगवान पणी ने पता नहीं कौन सा सूत्र बनाया है अष्टा में और देख जो रामपाल दास जी जो वीडियो बनाते हैं उसमें देखा है जो उनकी कक पॉइंट होते हैं ना उस पर बहुत ज्यादा बात ना करके आगे बढ़ जाते हैं तुरंत हा कक पॉइंट होता है जो उस पर ज्यादा बात नहीं करते जैसे कि अभी

00:43:51:09 अभी एक नया प्रे में बता रहे हैं विष्णु पुराण में काल के बारे में बता रहे हैं ये देखो काल का यहां लिखा है ठीक है उसके वहीं प लिखा है कि काल यहां पर्र परम ब्रह्म को काल भी कहा जा रहा है हां हां ये ये मैंने पढ़ा है तो तुरंत उन्होंने कहा ये अज्ञानता वश हो गया ज्यादा देर रुके नहीं ये अज्ञानता वश हो गया आगे बढ़ गए पकड़े जाएंगे ना पकड़े वहां कोई टिप्पणी वहां ज्यादा टिप्पणी नहीं की जैसे इनके मतलब की बात आ जाती टिप्पणी करते हैं ना ये देखो हो गया ना इनका बाप हो गया ना ऐसे बोलते हैं है ना वेद पार जात की भूमिका में लिखा है कि जैसे रात्रि के अंधेरे में घर में चोर घुसता है ना रात्रि के अंधेरे में चुपचाप कोई ना देख रहा हो और फिर उसमें सामान लेकर तुरंत भाग जाता है दिन के प्रकाश में घुसेगा तो पकड़ा जाएगा इसलिए शास्त्रों के प्रकाश में जब घुसो ग तो फिर पकड़े जाओगे तुरंत भागना पड़ता है चोर के समान हा यह बात सही कह रहे हैं ये भाई साहब एक लिख रहे हैं कि पोप आर्य समाज से द्वेष क्यों करते हैं पहली बात तो द्वेष आपका छलक रहा है जब आप पोप कह रहे हैं हा

00:44:57:06 और अगर बा अगर बात विरोध की शुरू की जाए कि किसने किसका विरोध किया तो विरोध आपने किया सत्यार्थ प्रकाश में आपकी तरफ से विरोध शुरू हुआ है शुरुवात आपने किया है हम दूसरी बात ये है निषे प्राप्त वस्तु का निषेध किया जाता है ना ये परंपरा कहीं से प्राप्त ी तभी तो आपने निषे किया दूसरी बात ये आप निराकार को मानिए कि भगवान अवतार नहीं ले सकते ये है वो है वो बात बाद में सबसे पहले आप गैर सनातनी तो हो जाइए सम अपने सिद्धांतों का वो प्रचार क्यों कर रहे हैं नहीं कर सकते अच्छा एक मैं लॉजिक बताऊ आपको कि ईश्वर अवतार नहीं ले सकता इसके संबंध में इनकी तरफ से प्रमाण दिया जाता है अर्ध कुट न्याय से हां ईश्वर का अवतार है वो ना लेकर के जहां ईश्वर का अवतार नहीं है केवल वो ईश्वर निराकार है केवल उ उसका प्रमाण दिया जाता है इसी प्रकार से इनके द्वारा क्या किया जाता है मैंने एक शैली नोट करने मैंने शैली को देखने का प्रयास किया प्रकाश के अनुसार उसमें क्या है कि जैसे ये लोग कहते हैं अरे ये कैसा ईश्वर है जो वहां रास हो रहा है वहां जो है यह हो रहा है वो हो रहा है ठीक है तो इन्होंने अब ईश्वर का जो आधार है वो

00:46:12:09 यह माना कि हमारी नैतिकता क्या कहती है जो हमारी नैतिकता की सीमा में आएगा वो वो ईश्वर हम स्वीकार करेंगे भले ही उसके संबंध में प्रमाण हो मगर वो हमारी नैतिकता के मगर वो हमारी नैतिकता के सीमा में नहीं है इसलिए हम उसे स्वीकार नहीं करेंगे इसी और इसी तरीके शैली में दयानंद जी ने बात की है प्रमाण से प्रमाण से अगर सर्वशक्ति मत्ता की सिद्ध करने की बात करेंगे तो वहा तर्क लाएंगे और तर्क से जब उनकी बात का खंडन होगा तो वहा प्रमाण

00:46:48:00 लाएंगे तो उसम क्या हुआ आगे चल कर के मैंने जब नियोग वाला चैप्टर उनका मैंने देखा उसके बारे में बहुत ज्यादा प्रश्न नियोग नियोग के बारे में तो अब इन्होंने क्या कहा कि हम रास लीला को इसलिए नहीं मानते क्योंकि ये सामर्थ्य वान गुरुओ के पास गए नहीं तो पुराणों कोय समझ नहीं पाए मगर हम नहीं मानते क्योंकि वो नैतिकता की सीमा के अंदर नहीं है ठीक है इनके हिसाब से नहीं है मगर आगे जब इनके यहां पर नियोग का चैप्टर आता है और वहां पर पूर्व पक्ष के रूप में जब यह प्रश्न रखा जाता है कि भाई ये जो मातृ शक्ति से कहा जा रहा है कि इससे नहीं तो उसके साथ नियोग कर लो उसके उससे नहीं तो उसके साथ नियोग कर लो ऐसा कर लो ऐसा कर लो देवर का अर्थ है दूसरा वर मातृ शक्ति जिसको भी दूसरा वर बनाएगी अपना वो देवर है अपने पति का छोटा भाई देवर नहीं है देवर का अर्थ है मात शक्ति जिसको भी दूसरा वर बनाएगी उसके संबंध में भी व अपने कुछ अपने हिसाब से गैर परंपरा प्राप्त जो किसी तरीके से उसको अपने करते हैं मगर ठीक है जब वहा पर इन्होने पूर्व पक्ष के में प्रश्न आया ये मुझे व्यभिचार जैसा दिख रहा है मतलब वहा पर उसने यह बताया कि यह मेरी नैतिकता की

00:48:03:03 सीमा के अंदर नहीं आ रहा है तो वहा पर उन्होने क्या जवाब दिया मालूम है स प्रकाश में कि भाई तुम्हारी जो नैतिकता है वो कहां से आ रही है धर्मशास्त्रों से धर्मशास्त्रों ने जब नैतिकता बताई है तो धर्मशास्त्रों के द्वारा अगर यह चीज बताई जा रही है तो यह भी आपकी नैतिकता है तो जब उन्हे भगवान श्री कृष्ण के जो यह जो आदि दैविक आदि भौतिक आध्यात्मिक अ समझाने वाली जो उनकी लीलाए है इनका खंडन करना था तो अपनी नैतिकता की सीमा में तब ये बात नहीं सोची कि भा जब धर्म से ही हमारी नैतिकता है तो धर्म से ही नैतिकता और धर्म से ही जो ये जो स्मृतियां है वो है तो हमें इसका खंडन नहीं करना हमें इसका ऐसा अर्थ निकालना है जो कि लोगों को समझ में आ सके और वेदों का और वेदों की के लिए इन्होंने किया भी है जहां जहां पर इनके अनुरूप बातें नहीं है वेदों में उसमें वहां पर इन्होंने अपने हिसाब से किया है मगर जब इनसे प्रश्न किया जाए मगर मगर जब इनसे प्रश्न किया गया कि भाई यह मुझे नैतिकता नहीं दिखाई दे रही तो इन्होंने उसके ऊपर प्रमाण लाद दिया भाई यह प्रमाण है

00:49:18:12 इसको तुम्हें मानना पड़ेगा मगर तो एक जगह क्या हो रहा है प्रमाण का खंडन क्योंकि मेरी नैतिकता के अंदर नहीं है और एक क्या हो रहा है नैतिकता का खंडन क्योंकि व प्रमाण है वहा तो वही साइकलिंग अपने हिसाब से कहीं पर हा कोई आए हैं पंडित जी आए हैं फकी जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम महादेव किया व कोई आर समाज जी से होने वाला था लेकिन क्या हुआ वो चर्चा नहीं हुई क्या उनसे वो आए नहीं ही हो

00:50:01:21 गए आकाश जी आप अपना चेहरा रिवील करें आकाश नहीं अक्षत जी चेहरा दिखाए अक्षत जी जय श्री राम राधे राधे जय श्री राम आपका शुभ नाम अक्षत तिवारी अक्षर तिवारी तो आप संभवत कौन का पक्ष रखने आए हैं नहीं प्रभु जी मतलब मेरा यह प्रश्न है कि आप यह कह रहे हैं कि श्री कृष्ण परम सत्ता नहीं है नहीं हम यह नहीं कह रहे इस कन के अनुसार इकोन के अनुसार श्री कृष्ण सर्वशक्तिमान सिद्ध नहीं होते हम यह कह रहे हैं इकोन जिस ईश्वर ईश्वर इकोन की परिभाषा के अनुसार जो श्री कृष्ण है वह सीमित है हम यह कह रहे हैं

00:51:04:00 बोलिए हा तो मेरा प्रश्न इतना ही था अगर आपका अगर ये टॉपिक ऐसा है कि श्री कृष्ण अगर हम श्री कृष्ण को सर्वशक्तिमान ही मानते हैं परम ब्रह्म परम सत्ता परमेश्वर ही मानते हैं मगर अगर स्कोन की सीमा में आ जाए स्कोन की धारणा को स्वीकार करना पड़े तो उसके अनुसार श्री कृष्ण बाधित है यह कह रहे हैं इकोन के अनुसार जो श्री कृष्ण है वो बाधित है इकोन का ही आप कोई ग्रंथ पढ़ेंगे जो पूरा सारांश है व भगवत गीता का सारांश ऐसा कोई ग्रंथ है उस ग्रंथ में सबसे पहले उन्होंने ईश्वर को पूर्ण कहा है पूर्ण जिसमें कोई कमी नहीं आ सकती किसी भी प्रकार से न केन प्रणन एक बार जब मुस्लिम्स के साथ में बैठा हुआ था तो उन्होंने मुझे तर्क दिया कि भाई व्यक्ति को छोटा होने की आवश्यकता क्या है इसको समझिए मतलब अगर यह यह तर्क जो है आर समाज हों की ओर से भी आता है यह तर्क जो है बाधित करने वाले जितने लोग हैं सबकी तरफ से आता है कि अगर कोई प्रधानमंत्री है तो उसको जो है वहां जाने की आवश्यकता क्या है मगर आपने देखा होगा चुनावी दौरे पर

00:52:19:03 तो होते हैं तो प्रधानमंत्री भी लोगों के जा जाकर भोजन करने लगते हैं झाड़ू लगाकर दिखाने लगते हैं कि हम स सफाई भी कर रहे हैं करते हैं ना उनकी उनको सफाई करने की आवश्यकता नहीं होती म लीला कर रहे होते हैं वोट वोट के लिए वोट के लिए लीला कर रहे होते हैं ना तो अब तर्क ये आता है कि अगर भगवान स्वयं को रेगुलेट नहीं कर सकते अपना जो असीमित रूप है उससे वो सीमित नहीं हो सकते है ना जो व्यवहार में आ सकते हैं ऐसे रूप में नहीं आ सके आ सकते तो इस सृष्टि का निर्माण ही नहीं हो सकता हो सकता है क्या सोचो ईश्वर सर्वज्ञ है समान रूप से अगर ईश्वर यह नहीं कर सकते कि मैं मेरा केवल इतना ही हिस्सा इस समय काम करे तो पृथ्वी बन पाएगी क्या नहीं भाई जब हरकत होगी तो पूरे संसार में एक साथ होगी ना तो पृथ्वी बन ही नहीं पाएगी पृथ्वी तभी बनेगी जब ईश्वर जो सर्वज्ञ निर्गुण निराकार व सगुण हो जाए और जैसे ही सगुण हुआ तो अवतार हो गया जैसे ही उन्होंने पृथ्वी बनाने के लिए अपने अपने किसी एक हिस्से को एक्टिव किया पूरा अगर

00:53:34:09 पूरा हिस्सा एक्टिव होगा तो संसार में किसी भी चीज का निर्माण ही नहीं हो पाएगा तो वह अपने को सोच समझ के किसी एक हिस्से में एक्टिव करेंगे है ना तो तभी तो संसार बनेगा अन्यथा संसार बन ही नहीं सकता जब भी हरकत होगी जब भी वो एक्टिव होंगे पूरा पूरा ब्रह्मांड में एक साथ होंगे तो वो एक्टिव होना होना सब बराबर एक्टिव जब वो किसी एक स्थान में एक परिस्थिति में जब वो एक्टिव होंगे उनका एक हिस्सा एक्टिव होगा तभी तो सृष्टि का निर्माण होगा तो यह कहना गलत है कि वो अपने से अच्छा इसको मैंने वहां पर जो मुस्लिम्स के साथ बात हो रही थी तो वहां मैंने इस बात को ऐसे रखा था कि एक शेर है वो चूहे को खाना चाहता है अब चूहा बिल में घुस गया ठीक है अगर शेर के अंदर ये शक्ति नहीं है कि वह चूहे के बराबर छोटा हो सके तो यहां पर शेर असफल सिद्ध हो जाएगा है ना तो ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है ईश्वर पूर्ण है श्री कृष्ण पूर्ण है मगर इकोन

00:54:50:00 के अनुसार यदि श्री कृष्ण की व्याख्या को हम धारण करेंगे अपनाएंगे तो श्री कृष्ण वादित है इसका अर्थ यह कि श्री कृष्ण इकोन के द्वारा पूजित होने वाले जो कृष्ण है वह वोह कृष्ण नहीं है जो हमारे सनातन सर्वशक्तिमान कृष्ण है क्यों क्योंकि जब हम उनसे पूछेंगे कि जिस प्रकार दूध से दही बन जाता है पर दही से दूध नहीं आप कहते हो उसी प्रकार कृष्ण से शिव बनते हैं मगर शिव से कृष्ण नहीं तो जब आपने यह कह दिया कि कृष्ण ही शिव बने मगर शिव से वह वापस कृष्ण नहीं बन सकते तो फिर यहां पर शिव के रूप में कृष्ण बाधित हो गए अच्छा पूर्ण का क्या है परिभाषा कि पूर्ण से अगर कुछ निकाला जाएगा तो वोह भी पूर्ण होगा पूर्ण से अगर कुछ निकाला जाएगा वो भी पूर्ण होगा तो अगर कृष्ण से शिव निकल रहे हैं हमने मान लिया हमने शिव पुराण को अलग हटा दिया हमने देवी भागवत को अलग हटा दिया हमने श्रीमद् भागवत के उन श्लोकों को भी अलग हटा दिया जिसमें कि जो शिव है उनसे सब कुछ निकल रहा है श्रीमद् भागवत में आठवें स्कंद के सातव अध्याय में शिव से सब कुछ निकल रहा है उनकी स्तुति में बताया जा रहा है शिव से हमने उसको भी अलग हटा दिया अब हम तो यह कह रहे हैं मान लिया कि श्री कृष्ण ही मूल है और उनसे शिव निकल रहे हैं तब

00:56:05:04 भी शिव अगर निकल रहे हैं तो शिव पूर्ण होने चाहिए ना और यदि शिव पूर्ण होने चाहिए तो शिव जी पूर्ण हो गए तो व ईश्वर हो गए फिर कोई अंतर नहीं रहा उनमें और कृष्ण में कोई अंतर नहीं रहा आप भले ही शिव रूप में भगवान का ध्यान कर लो आप भले ही शिव रूप में भगवान का ध्यान कर लो और भले ही कृष्ण रूप में कर लोय आपके प्रारब्ध है आपका पूर्व जन्म का या इस जन्म के संस्कार है तो यह नहीं हो पाएगा उनसे उनसे शिव भक्तों का आदर नहीं हो पाएगा उनसे माता के भक्तों का आदर नहीं हो पाएगा हां इस्लाम के भक्तों का आदर हो जाएगा इस्लाम के भक्तों के लिए कह देंगे कि कृष्ण कृष्ण अल्लाह एक है कृष्ण यहोवा एक है मगर शिव भक्तों का सम्मान नहीं हो पाएगा शिव को भगवान बनने वाले शिव को कृष्ण के समान मानने वाले पाखंडी है मूर्ख है पापी

00:57:06:26 हैं प्रभु जी जो चैतन्य महाप्रभु ने जो मायावादी शंकराचार्य जी के जो संप्रदाय उस पर लागू होता है कि नहीं होता है जैसे आपने पछ नहीं होता क्योंकि चैतन्य महाप्रभु खुद शक चार्य के ही परंपरा के हैं यह तो उनके द्वा उनके नाम पर यह फैलाया गया कि नहीं चेतन महाप्रभु ने आदि शंकराचार्य जी का विरोध किया प पढ़ाई तो वो उसी की कर रहे हैं सी धरी टीका तो उसी का मान रहे हैं भाई जो आपका गुरु है वो वोह कहलाता है जो आपको ब्रह्म का मार्ग प्रशस्त करे यह भागवत का सिद्धांत है गुरु कौन है गुरु वो है जो

00:58:05:16 यह अभी मैंने लास्ट जो स्ट्रीम की थी उसमें मैंने बताया था भागवत के अनुसार गुरु वो है जो आपको ब्रह्म का प्रतिपादन कराए और अगर चैतन्य महाप्रभु समझ पाए भगवान को किसके द्वारा श्रीधर स्वामी के द्वारा तो उनके गुरु जो हुए वास्तविक गुरु भागवत के अनुसार उनके जो गुरु हुए वो कौन हुए वो हुए श्रीधर स्वामी श्रीधर स्वामी अब जब वो उनके गुरु हुए तो व श्रीधर स्वामी का ही खंडन करने वाले हैं क्या श्रीधर स्वामी ने कई जगह व माया की बात हो रही है गुण गुण माया मया उन्होंने कितनी बार लिखा है मैं आपको दिखाता हूं एक मिनट रुक यह देखिए भागवत पुराण का व है दसवा स्कंद 80 वा अध्याय 32 वा श्लोक मनुष्य के तीन गुरु होते हैं ज्ञानो उपदेश करके परमात्मा को प्राप्त कराने वाला गुरु सबसे बड़ा होता है परमात्मा के बारे में जिसने बताया परमात्मा समझा दिया और वह भागवत को समझ पाए कहां से श्रीधर स्वामी के यहां से

00:59:21:01 और तो और श्रीधर स्वामी के विरोध में यदि कोई टीका लिखता है तो व गलत होगा तो श्रीधर स्वामी के विरोध में पूरी टीका है इसकन की देख लीजिए जहां शिव की स्तुति स्वीकार की जा रही है वहां भी इस कोन ने विष्णु की स्तुति डाल दी अपने मंतव्य के लिए अभी मैंने लास्ट वाली स्ट्रीम में खोल के बताया था यह बात एक आए थे सज्जन इटावा से वह फिर आउट हो गए प्रभु जी पर चैतन्य महाप्रभु तो मधुवा चार्य जी के संप्रदाय से आते हैं ना मधुवा चार्य से तो मधुवा चार्य जी के संप्रदाय से आते हैं तो उन्होंने मधुवा चार्य जी की भागवत क्यों नहीं

01:00:07:25 पढ़ी प्रॉब्लम य है मतलब वही वाली बात इसकी ईट उसका रोड़ा भानुमति का कुनबा जोड़ा अरे भैया आप पढ़ने जा रहे हो श्रीधर स्वामी के पास भागवत को समझ रहे हो श्रीधर स्वामी से आप जो भगवान को समझ रहे हो श्रीधर स्वामी से ठोक के कह रहे हो कि इनके अलावा सभी टीका मेरे लिए अमान्य है इनके विरोध में हर टीका मेरे लिए मान्य है फिर आपने कह दिया कि मैं नवाचार का फॉलोअर हूं यह होता है ना इसको कहां तक ले जाएंगे महाप्रभु जी ने कहा था क्या वो मधु आचार्य से आते हैं या ये खुद से बनाया गया है यह सब खुद से बनाया है मधवा चार वाले खुद नहीं मानते महाप्रभु जी के जो पहले के जो गुरु दिखाए गए हैं इस कोन की तरफ से उनको स्वीकार नहीं किया जाता मधवा चार्य जी के

01:01:09:03 द्वारा ईश्वर साकार नहीं हो सकता ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं है आर समाज के अनुसार अपनी बात को रखने के लिए प्रमाण और प्रमाण को काटने के लिए तर्क तर्क को काटने के लिए प्रमाण प्रमाण को काटने के लिए तर्क इसी में खेला है पूरा सत्यार्थ प्रकाश में आप देखोगे तो तर्क को काटने के लिए प्रमाण लाएंगे प्रमाण को काटने के लिए तर्क लाएंगे या तो मान लो कि तर्क ऊंचा है प्रमाण ऊंचा है या तो दोनों में सामंजस्य बिठा लो जब तर्क कहा जाएगा कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है तो वेदों का कोई मंत्र दिखा देंगे वो बात अलग है अपने हिसाब से अर्थ किया जो भी किया मगर वेदों का मंत्र ले आए देखो य देखो वेद में कहा जा रहा है अच्छा भैया और जब तर्क दिया जाएगा तो प्रमाण प्रमाण दिखा देंगे नियोग रख रहा अरे तो प्रमाण है [संगीत] तो मैंने खुद पढ़ प्रकाश में जब ईश्वर के साकार पर प्रश्न आया तो दयान जी खुद ही लिख रहे हैं कि अगर साकार है सव सर्वव्यापक है तो एक जग

01:02:24:06 कैसे हो सकता है ख तक दे रहे उन्ही के तर्क में उत्तर है और अगर अग जो कहो अग जो कहो कि एक जगह व्यापक है सब जगह कैसे हो सकता है और अगर जो कहो उसने खुद से शरीर बना लिया तो शरीर बनाने से पहले निराकार था या नहीं कि फस गए आपने खुद ही कह दिया जो कहो अगर उसने खुद सेही शरीर बना लिया तो व शरीर बनाने से पूर्व निराकार अरे भया हम भी तो यही कह रहे हैं विपे सुर संत हित लीन मनुज अवतार निज इच्छा निर्मित तनु माया गुण गोपाल यही कह हम और क्या कह रहे भैया भगवान अपनी शरीर स्वेच्छा से उद्धव जी ने कहा था ना भागवत में कि आप भगवान भगवान यहां पर एक बात क्लियर करना आवश्यक है कि भगवान का जो पार मार्थी स्वरूप है वो साकार है निराकार है इस बात को लेकर हम किसी से नहीं बड़ते पमा मगर भगवान साकार हो सकते हैं कि नहीं हमारे व्यवहार में आ सकते हैं कि नहीं हां वो अवतार ले सकते हैं हमारे हमारे व्यवहार का विषय बन सकते

01:03:31:18 हैं काफी लोग हैं यहां पर आए हैं रुक्मण आपके साथ तो अलग से एक दिन रखा जाए हरि ओम जी ह माधवदास जी हरि ओम जी जय श्री राम जय जय श्री राम जी मैं बस दो मिनट लूंगा क्योंकि आपकी चर्चा चल रही है ठीक है मैं बीच में बस एक बात बोल र हूं कि शिवांश जी मैं बड़ी आप हाथ जोड़ के प्रार्थना करना चाहूंगा आप एक सेशन कम से कम ज्ञान गंगा पुस्तक के ऊपर जरूर रखिए जिसमें पुस्तक की समीक्षा की जाएगी अलग से आप उसकी तैयारी कर लीजिए हमें बता दीजिए डन है मेरी तरफ से तो फिर कल कल कर लेंगे बस ठीक है चलेगा ठीक है आप अभी अपनी चर्चा जारी रखिए मैं बस यही प्रार्थना करने आया था अक्षत जी कहां चले गए धन्यवाद धन्यवाद जी धन अक्षत जी कहां चले गए शायद चले गए अक्षत जी अपना फेस कम ऑन [संगीत]

01:04:40:26 करिए तो इसके साथ ही साथ जोन है उसके द्वारा इसकन के द्वारा विष्णु और कृष्ण में भी भेद किया जाता है कि विष्णु थोड़े से कम है कृष्ण ही सुप्रीम है अगर यह अनन्य की रक्षा के लिए है तो यही बात तो हम भी कह रहे हैं कि पुराणों में अनन्य होता की रक्षा के लिए ही विष्णु भग व्यास जी ने कहीं कहीं पर विष्णु को छोटा और शिव को बड़ा कहा और कहीं कहीं पर शिव को छोटा विष्णु को बड़ा कहा तो उसे हमें अन्यता के भाव से स्वीकार कर लेना चाहिए यही तो हम भी कह रहे हैं मगर वोह अपनी बात को तो अन्यता रक्षा के हिसाब से बनवा लेते हैं व अनंता की रक्षा के लिए कहा है और वेद व्यास जी के ऊपर आरोप लगा देते हैं कि उन्होंने शिव और विष्णु में भेद कहा जबकि शिव और विष्णु के लिए यह भी लिखा वेदव्यास जी ने कि इनमें भेद करने वाला नरगा होता है यह सारी चीजें आप वो कहते हैं कि हम भगवान के निराकार मानते नहीं भगवान के दो स्वरूप है एक स्वरूप जिसको सिर्फ प्राप्त किया जा सकता है जो व्यवहार का विषय नहीं है वाणी का विषय नहीं है

01:05:56:18 और दूसरा स्वरूप है जिसको जिसके प्रति हम व्यवहार कर सकते हैं भक्ति कर सकते हैं वह साकार है भगवान साकार अवतार लेते हैं क्या दिक्कत है े मानने उनके जो मतभेद है जैसे अद्वैत और द्वत और इसमें जो भेद है तो वो इतनी कड़ी लैंग्वेज क्यों यूज करते हैं समझ में थोड़ा कम आता है सब तो जैसे इकन की जो साइड है जब यह हमें विचार मत जो हमारे हिंदू धर्म में अलग-अलग मत के अनुसार हमें अपनी जर्नी करनी पड़ती है जिससे हम आध्यात्म समझ पाए कभी हम अद्वैत का स् सहारा लेकर ज्ञान मार्ग से चलते हैं और कभी द्वैत का सहारा लेकर भक्ति मार्ग से पर उनके जब हम सुनते हैं कि यह जो जैसे मैं आदि शंकराचा मानता हू और बाकी जितने भी वल्लभाचार्य इन सबको मानता हूं पर जब वो भक्ति मार्ग वाले उनके एकदम कड़ी निंदा कर दे तो फिर ठीक नहीं लगता

01:07:10:26 है ऐसा है कि द्वैत और अ द्वैत दोनों एक तरीके से जैसे बॉलर और बैट्समैन बॉलर की तुलना कभी बैट्समैन से नहीं कर सकते हैं क्योंकि बॉलर के विकेट गिने जा उसने कितने विकेट लिए कितने रन उसने बनाने दिए और क्रिकेट का क्या कर बैट्समैन का क्या करते हैं उसके रन गिने जाते हैं कि इसने शतक कितने मारे कितनी बॉलो में कितने रन बना दिए अगर विकेट के ऊपर देखा जाए तो बॉलर बहुत से बहुत कर लेगा तो उसके 11 ही विकेट आएंगे और रन बनाने की बात अगर देखी जाए तो उसके रन हो जाएंगे 300 बैट्समैन 300 तक मार देता है कितने भी मार सकता है है ना तो 11 की तुलना हम से किस हिसाब से करेंगे तो बॉलर और बैट्समैन का कोई कंपेरिजन नहीं होता है इसी प्रकार से द्वैत और अद्वैत का कंपेरिजन नहीं है द्वैत हमारे व्यवहार का आधार है द्वैत हमारा मार्ग है और अद्वैत उसके द्वारा प्राप्त होने वाली डेस्टिनेशन हमारा लक्ष्य तो हमने जो भगवत पाद आदि शंकराचार्य जी ने द्वैत को नकारा नहीं है व्यवहार द्वैत और और उसका

01:08:26:00 जो लक्ष्य है प्राप्त वो अद्वैत मगर अपनी रोटियां सेकने के लिए लोग इस तरह का कु प्रचार कर देते हैं कि नहीं नहीं वो अद्वैत मानते हैं अरे भाई अगर वो द्वैत को नहीं मानते तो जगन्नाथ मंदिर इत्यादि की पुनर स्थापना क्यों करते मणि रथ माला में क्यों कहते कि जब तुम फस गए जीव भाव को प्राप्त हो गए तो श्री कृष्ण की पूजा करो भज गोविंदम क्यों लिखते तो द्वैत हमारा मार्ग है और अद्वैत उसकी उसका लक्ष्य जिस तरीके से भक्ति हमारा मार्ग है और ज्ञान उसका लक्ष्य हां भक्ति हमारा मार्ग है ज्ञान उसका लक्ष्य यही अंतर व्यवहार और परमार्थ में

01:09:22:13 है हां देवी भागवत में जो नाइंथ चैप्टर है उसमें सृष्टि की उत्पत्ति कृष्ण भगवान से ही दिखाई गई है देवी भागवत में यह कल्प भेद से होता है थोड़ा बहुत अपने शास्त्रों को पढ़ने का प्रयास करेंगे वैसे ही आपको य कल्प भेद समझ में आ जाएगा सृष्टि की रचना एक बार नहीं हुई है कई बार हुई है तो ईश्वर ने सर्व शक्ति मत्ता की सिद्धि के लिए अनन्य की रक्षा के लिए इस प्रकार से किया है कि एक ही परम तत्व कभी विष्णु के रूप में सृष्टि की रचना कर रहा है भी शिव के रूप में षष्टि की रचना कर रहा

01:10:05:28 है हमारे आज जिनके कारण आज की सुनिश्चित हुई थी आज की चर्चा वही वह नहीं आए बाकी सब आ गए कुमार आर्य जी आप अपना य ऑन करें फेस कैम अच्छा यह थोड़ी एक अच्छी चीज हो जाती है कि जो वैसे त होते हैं ना सामाजिक तत्व फेस कैम की वजह से वो फिल्टर हो जाते हैं बिल्कुल जो अप्रिय आचरण करना चाहते हैं आकर

01:10:40:08 के आज तो आज आपने वीडियो देखी व मैंने भेजा था जो मातृ शक्ति का जो जिसको जिसका संज्ञान मथुरा पुलिस ने ले लिया था उ उनसे संपर्क हो स तो शादी है उनको हम लाए अपने चैनल पर है ना करते हैं लेकिन वो उनकी हिंदी अच्छी है लेकिन वो है नहीं यहां के विदेशी है वो ति करके आए हैं कोई जो कल आए

01:11:16:25 थे हां ऋतिक जी जय श्री राम जय श्री राम भैया जय श्री

01:11:21:21 राम कैसे हो आप जय श्री राम हां बस मैं कुशल मंगल आप अपना जो धार्मिक आध्यात्मिक पक्ष है वो एक बार हमें याद दिला दें किसकी ओर से हैं आप जी मैं सामान्य हिंदू समझ सकते हैं क्योंकि अभी तो मैं वही जानने का प्रयास कर रहा हूं कि मुझे कौन-कौन से ग्रंथ पढ़ने चाहिए अध्ययन करने चाहिए सो दैट कि हमें नॉलेज मिल सके क्योंकि आप जानते हो कि जो मॉडर्न स्कूल्स में पढ़े हुए बंदे होते हैं तो हमें उन चीजों की ज्यादा नॉलेज नहीं होती बट ये कि हम लोग क्योंकि हम लोग बचपन से सुनते आ रहे हैं कथा प्रवचन वगैरह देखते आ रहे हैं हमारे दादा लोग या घर परिवार में जो चीजें होती है तो उससे भी कुछ कुछ हमें आईडिया लग जाता है बहुत कुछ मिलता है बाकी फिर जैसे आप लोग के चैनल हो गए और स्वामी जी के प्रवचन हो गए तो पूरी शंकराचार्य भगवान जी के तो बहुत कुछ वहा से भी थोड़ा थोड़ा मिलता है तो लेकिन कुछ कुछ डाउट्स है जो मैं पूछने वाला था और वो जो वो

⬜ Not used yet · 01:12:09:25 – 01:13:00:15 (0:51)

01:12:09:25 भी था मैंने एक बार मतलब बुक के सोर्सेस जैसे हर किसी के पास व मौका नहीं होता कि व गुरुकुल कहीं जाकर के या जाकर के सीख सकेसे डायरेक्टली तो इसीलिए एक बार अगर आप सो बताते पा ग्रंथ ले लीजिए हो सके तो हमा क्लासेस में आइए पांच ग्रंथ ले लीजिए पहला है ज्ञानेश्वरी गीता ज्ञानेश्वर महाराज की और दूसरा है श्री रामचरित मानस तीसरा है एकनाथी भागवत समर्थ रामदास जी द्वारा रचित है वो दास बोध चौथा है भक्ति सुधा और पांचवा है गर्भ से कहो हम हिंदू है दास बोध गीता प्रेस नहीं छपती है वो आपको किसी और पब्लिकेशन का मिलेगा और

01:13:00:15 गर्व से कहो हिंदु है यह आपको गोवर्धन की जो वेबसाइट है जो स्वस्ती प्रकाशन है वहां से मिलेगा गोवर्धन मट से और बाकी के तीनों ग्रंथ आपको गीता

⬜ Not used yet · 01:13:11:10 – 01:16:08:00 (2:57)

01:13:11:10 प्रस से मिल जाएंगे ठीक है इनका आप स्व अध्ययन करिए स् अध्ययन करते समय एक नोटबुक बनाइए स्व अध्ययन वाली नोटबुक जो भी प्रश्न फसे उस प्रश्न को लिख लीजिए जो भी शंका आए उसको उसमें नोट कर लीजिए ये मुझे पूछना है फिर उन शंकाओं को आप हमारे पास भेज यदि सामर्थ हुआ तो हम आपको बताने का प्रयास करेंगे अन्यथा फिर उनको गुरुदेव के पास ले जाए गुरुदेव से आएंगे जो आचार्य उनसे पूछा जाएगा यथा सामर्थ आपकी व शंकाएं दूर हो जाएंगी इसके साथ ही साथ एक रेगुलर प्रैक्टिस के लिए हमारी जो क्लासेस चलती है उनसे जुड़ जाइए आपको मैंने कल नंबर दिया

01:13:58:00 74839 उसमें आप ट करेंगे आपको फॉर्म मिल जाएगा जीया कुछ प्रश्न थे अगर मैं अगर आप कंफर्टेबल हो तो थोड़ा आप वही पर आ जाइए क्लासेस मेंही क्लासेस में कर लेंगे थोड़ी बहुत चर्चा अगर य भी हो जाए तो मुझे एक चीज ऐड कर देता हूं उसम ज्यादा समय नहीं लूगा आपका मेरी आवाज आ रही है रही है हा मैं कह रहा हूं कि गुरुदेव ने बता बता रहे थे कि एक संत एकनाथ द्वारा ना भागवत पर के 11 स्कं पर एक बहुत सुंदर सी टीका लिखी है जिसको एक नाथ भागवत बोलते हैं तो उसका भी अध्ययन करके आपको काफी ज्ञान प्राप्त हो जो पांच ग्रंथ बताए हैं शिवास जी ने वो तो है ही अगर आप और इसमें ऐड करना चाहते तो एक मेरी तरफ से और ड कर लीजिए बिल्कुल अच्छा भैया तो जैसे कल ज मैं पूछ रहा था कि जो परमार्थ ईश्वर है उनकी सिद्धि कैसे होती है तो आप बता रहे थे एक बार वो कंप्लीट कर दिए थोड़ा सा वो रह क्या था सिद्धि व्यवहार के ईश्वर से होती है व्यवहार के ईश्वर से परमार्थ की सिद्धि होती है अच्छ जब हम व्यवहार में किसी को ईश्वर जब हम व्यवहार में ईश्वर को अपनाते हैं तो उसकी वाणी उसके वचन उसके द्वारा परमार्थ की सिद्धि हो जाती जैसे कि

01:15:13:00 अग्नि के प्रकट होने से काठ की लकड़ी जब जलती है ना काठ की लकड़ी से जब लपटे निकलती है तो उस लपट से सिद्धि हो जाती है कि इस काट की लकड़ी पू काट की लकड़ी में दाक शक्ति विद्यमान है जो हमारे व्यवहार का विषय नहीं है उसी प्रकार से जब भगवान व्यवहार में सर्वशक्तिमान व्यवहार सिद्ध होते हैं उनके द्वारा ही परमार्थ का उनका परमार्थिक जो स्वरूप है उसका अस्तित्व सिद्ध हो जाता है लेकिन भ इसमें पॉइंट है जैसे अगर हम किसी भी चीज की सिद्धि करते हैं ना तो सिद्धि उसके लक्षणों से होती है परमार्थ के लक्षण क्या है परमार्थ का लक्षण परमार्थ परमार्थ का लक्षण व्यवहार का ईश्वर है ना तो फ व्यवहारिक ईश्वर की हुई तो फिर परमार्थिक ईश्वर की तो फिर भी नहीं हुई वही तो बता रहा है परमार्थिक उसका क्योंकि देखिए इसमें क्या होता है कि हमा द में किसी को देखिए

01:16:08:00 बात ऐसी है अगर आपने किसी को व्यवहार में ईश्वर अपना लिया जी अगर आपने उसे ईश्वर मान लिया तो जब ईश्वर मान लिया तो उसके अनुसार उसकी परमार्थ की सिद्धि हो गई क्योंकि परमार्थ का जो लक्षण आपने

⬜ Not used yet · 01:16:21:24 – 02:07:29:19 (51:08)

01:16:21:24 कहा ना लक्षण किसी भी चीज की लक्षण से होती है अब जब लक्षण की आप बात कर रहे हैं तो वो तो व्यवहार हो गया लक्षण लक्षण तो व्यवहार हो गया ना तो जब आप लक्षण की बात कर रहे हैं तो व्यवहार से ही तो उसकी सिद्धि होगी बिल्कुल तो सिद्धि अगर हम किसी की कर सकते तो हम व्यवहारिक की ही कर सकते हैं परमार्थिक कर ही नहीं सकते इस दृष्टि से देखा जाए तो वही तो हम कह रहे हैं वाणी का विषय है मतलब परमार्थिक परमार्थिक ईश्वर एक्चुअली उसकी सिद्धि नहीं हो सकती वो केवल प्राप्त का विषय है उसकी सिद्धि सिद्धि नहीं हो सकती ना हां उसके बारे में जो हमारा व्यवहार का ईश्वर है उसके प्रति व्यवहार करके उसको केवल प्राप्त किया जा सकता है अब जैसे ये देखिए जैसे सृष्टि का निर्माण करता है देखिए देखिए आपने कहा सिद्धि तो सिद्धि भी एक कर्म है बिल्कुल बिल्कुल सिद्धि भी एक कर्म है वो भी व्यवहार है बिल्कुल तो सिद्धि जो हो रही है एक्चुअली में व्यवहारिक ईश्वर की हो रही है परमार्थिक की नहीं हो सकती क्योंकि वो व्यवहार का विषय है ही नहीं है ना सीधी बात परमार्थिक की सिद्धि नहीं होती तो हमें कैसे पता चलेगा कि परमार्थ जसा कोई ईश्वर वाणी वाणी वाणी प्रमाण शब्द प्रमाण शब्द प्रमाण विवा हा इसमें जैसे भैया इसमें क्या होता है शब्द प्रमाण की वैलिडिटी तब होती है जब उसकी सिद्धि प्रत्यक्ष अनुमान से होती

01:17:36:26 है लेकिन प्रत्यक्ष अनुमान से परमार्थ की सिद्धि नहीं होती तो फिर वो शब्द प्रमाण की वैलिडेशन तो खत्म हो गई ना नहीं कैसे खत्म हो गई जब हमने प्रत्यक्ष प्रमाण से जान लिया हमें इस पर विश्वास है तो अब वो बोल रहा है कि परमार्थ में ये है तो मानना पड़ेगा जैसे मालिक किसी किताब में कुछ लिखा हुआ है ठीक है उसके विषय में ऐसा लिखा हुआ है जिसके विषय में मुझे ज्ञान नहीं है जो वहां पर लिखा हुआ है उस बात की सिद्धि ना प्रत्यक्ष से हो रही है ना अनुमान से हो रही है तो अल्टीमेटली उसकी सिद्धि शब्द में मानी नहीं जाएगी दर्शन के अकॉर्डिंग तो यही होता है फिलॉसफी वेस्टर्न फिलॉसफी में भी यही रीजन है नहीं नहीं नहीं इसमें आप जो है परंपरा प्राप्त आचार्य आचार्यों के सानिध्य में जाकर के वो करिए स्व अध्ययन करिए मगर परंपरा प्राप्त आचार्यों की सीमा में रहकर करिए जो हमारी आस्था का विषय हो गया निष्ठा का विषय हो गया विश्वास का विषय हो गया फिर वो शब्द प्रमाण से माना जाता

01:18:27:26 जैसे मैं आपको एक बात बताऊ कि हमारे माता पिता ने हमें कहा कि बहन के साथ संबंध नहीं बनाना है बिल्कुल अब इसमें ना तो हमारे पास अनुभव है हमारे पास और कुछ नहीं है केवल एक ही प्रमाण है हमारे माता पिता ने मना किया और हमने उस बात को मान लिया इसमें यह कर सकते हैं क्या पहले उसको पहले उसको चेक करेंगे उसके बाद करेंगे क्या ऐसा किया जा सकता है इसमें जैसे अभी हम मेले में गए थे माघ मेले में तो वहां पर हमारा हमारा सामना हुआ इनसे स्वयं को कल्की कहने वालों से सामना हुआ ऐसे भी लोग आ गए हा हां बिल्कुल आप माग में जाइए कभी देखिए पूरा मेला है पूरा उसम वास्तविक संत भी है और नकली संत भी है नकली संत भी है हां तो उसमें स्वयं को कलकी उसमें स्वयं को कल्की कहने वाला कोई व्यक्ति है कि 2006 में वो हुआ था और उसकी गोली मारकर हत्या भी की गई थी वो ऐसा ऐसा कुछ कलकी वाला मामला था उसको कल्की के रूप में स्थापित

01:19:42:28 करते हुए कि जो भविष्य का जो कल्की अवतार है वो हो चुका है वो हो चुका है और हम उसकी पूजा करते हैं तो के लोगों से जब मेरी भेंट हुई तो उन्होंने हमको कहा कि मानो मत मानो मत जानो मानो मत जानो तो फिर मैंने उनसे पूछा कि जानने का मतलब आप यह है कि जब हमें यह सिखाया जाए कि बहन के साथ विवाह नहीं करना है तो हम पहले उसको ट्र चेक करें जो हमें बताया जा रहा है उसके बाद हम उसको माने तो शब्द प्रमाण भी मायने रखता है अगर शब्द प्रमाण पर हम नहीं रहे ना तो दुनिया एक मिनट नहीं खिसक सकती है एक मिनट नहीं खगी आप अगर ये सोचते हैं कि फलाना ऐसा है फलाना वैसा है जी जैसे मान लीजिए कि मैं टिकट लेता हूं जी वो मैं समझ गया थोड़ा शंख में एक बात जोड़ता हूं आपकी बात तरीका काफी अच्छा है तो स्पष्ट कर देते तो इसमें जैसे क्या है कि आपकी बात ठीक है शब्द प्रमाण की वैल्यू होती है ठीक है हर चीज की वैलिडेशन नहीं मांगते लेकिन फिर भी जो भी शब्द प्रमाण है अगर हम हर एक चीज को मानने लगेंगे

01:20:58:00 ठीक है तो हर चीज को नहीं मान सकते विरोध बोले य लिखा मान लो तो हमें क्या पता है हमें एक बार बुद्धि का प्रयोग करना पड़ता है ठीक है हमें उसकी जो समीक्षा बहुत बार करनी पड़ती है तो आपने य स्वीकार कर लिया ना कि वह वाणी का विषय है तो फिर उसके लिए बुद्धि का प्रमाण क्यों चाहिए जब आप खुद ही कह रहे हो बुद्धि का विषय है तो उस मुझे जानना कि सिद्धि कैसे हो रही है सिद्धि के लिए हमारे पास सिद्धि के लिए सिद्धि करने के लिए प्रमाण चाहिए होते है प्रमाण जो है बता रहा हूं ना सिद्धि कैसे हो रही है जो सर्वशक्तिमान सत्ता है वो आपको ये बता रही है कि ऐसा है आपने अगर उसको सर्वशक्तिमान मान लिया तो उसकी सिद्धि हो रही है अगर सर्वशक्तिमान नहीं माना तो उसकी सिद्धि नहीं हो रही है अच्छा भ सर्वशक्तिमान प ही थोड़ा सा डाउट था जैसे आप जो सर्वशक्तिमान का मतलब लेते हैं कि ईश्वर ऐसा है जो कुछ भी कर सकता है तो आप ये निष्कर्ष पर कैसे निकले कि ऐसा ईश्वर उसको बोलेंगे जो कुछ भी कर सकता आप इस कंक्लूजन प कैसे पहुंचे इस निष्कर्ष पर कैसे पहुचे हा क्योंकि देखिए दुनिया अलग फिलॉसफी है हर को अलल मानता है क्योंकि अतो मा सगम तमस जति मृत मतम जो चाह विद्यमान है मनुष्य के अंदर प्रत्येक जीव के अंदर इस चाह का विषय वही हो सकता है जो किसी भी प्रकार की सीमा से

01:22:13:02 ग्रसित ना हो अबाध हो पूर्ण हो अबाध हो पूर्ण हो जैसे कि हमारे मन में ये सब भाव आते हैं ना हमारे मन में य भाव आता है कि अगर वैज्ञानिकों से पूछा जाए कि वह कौन सा आविष्कार होगा जिसको करने के बाद आप संतुष्ट हो जाएंगे तो वह एक ही अविष्कार हो सकता है ऐसी स्थिति जो जिसमें आप जो सोचो वो कर सकते हो है ना उसी को कहते हैं सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर तो क्योंकि मनुष्य क्योंकि ईश्वर की सिद्धि ही उससे हो रही है कि मनुष्य के अंदर प्रत्येक जीव के अंदर सभी प्राकृतिक सीमाओं को लांग जाने की चा विद्यमान है वो मृत्यु विमुख होना चाहता है वो दुख से विमुख होना चाहता है वो अज्ञानता से विमुख होना चाहता है इन सबका निचोड़ है सर्वशक्तिमान अध्य किसी भी नियम के नीचे ना आने वाला और देखिए आर्य समाज की जो सत्यार्थ प्रकाश है उसमें भगवान ने कहा य मतलब सत्या प्रकाश में उसको लिया गया खंडन किया गया द धर्म सेला

01:23:28:03 भवति भारता बात ये आती है कि अगर ईश्वर अवतार नहीं ले सकता है ईश्वर भी अपनी इच्छा से जन्म नहीं ले सकता है तो अपनी इच्छा से जन्म लेने की कामना श्री कृष्ण क्यों कर रहे हैं वह चाहा एक आप्त पुरुष के अंदर क्यों विद्यमान है क्यों कर रहे ऐसी कामना जो पूरी नहीं हो सकती बिल्कुल बक अ इसम मुझे बात बताइए इसम मुझे बात बताइए जैसे चा तो कामुकता की भी होती है तो क्या कोई ऐसी भी एंटिटी मौजूद है जो कि कामुकता से भरी पड़ी है ईश्वर के अंदर क्या नहीं है जब पूरा संसार ही उसने बनाया है तो हम ऐसा नहीं कह सकते ना कि कामुकता ईश्वर के अंदर नहीं है ईश्वर तो पूर्ण है मतलब हमें मानना पड़ेगा कि ईश्वर जो है वो काम से परिपूर्ण है ये भी मानना पड़ेगा अरे भाई तो फिर उसकी उत्पत्ति कहां से हुई अगर नहीं मानेंगे तो जो सेक्सुअल डिजायर से परप में मानना पड़ेगा फिर तो थोड़ा सा अजीब हो गया देखो इसमें ऐसा है कि ईश्वर सर्वत्र समान रूप से विद्यमान है उसके अंदर सब कुछ है वह सब कुछ कर सकता है मगर हम ईश्वर के उस रूप का अनुगमन करते हैं उस रूप का अनुसरण करते हैं उस रूप की भक्ति करते हैं जो रूप वेदों की सीमा के अंदर हो जो मोक्ष दायक

01:24:43:06 हो यसे जैसे जैसे जैसे जैसे पानी है तो पानी सर्वत्र नमी के रूप में भी व्याप्त है बकल प्यास वो पानी भुजा है जो हमारे व्यवहार की सीमा में आ जाए तरल रूप में बकुल तर रू जो हमारे व्यवहार की सीमा में आ जाए इसी प्रकार से भगवान सर्वत्र व्याप्त है उनमें सब कुछ है है ना मगर हमारी जो मुक्ति की प्यास है मोक्ष की प्यास है भगवान का वो स्वरूप हो जाता है जो हमारे व्यवहार की सीमा में आ जाए जो वे वेदों के द्वारा निर्धारित सीमा में हो कि ये मुक्ति दायक है जैसे इसमें क्या होता हैसे आपने पहले जो आपने बात बताया जो आपने उदाहरण दिया था कि जैसे व्यक्ति की होती हैकी बात आपने कहा था मैं ज्यादा समय नहीं लूंगा बस बसरा फाइनल है काफी देर हो चुकी है दो लोग और भी है आपसे आरी बात कगा आर्य समाज से हैं साहिब सिंह जी आप हा जी जय श्री राम जय श्री राम जी आप पूरा कर लीजिए बताइए जी जी मैं कह था जैसे आपने जो प्रपोजिशन दिया उसे प्रपोजिशन माना जाएगा लेकिन उसे तब तक

01:25:58:09 वो सिद्धांत नहीं माना जाएगा और सिद्धांत की सिद्धि के लिए प्रमाण देने पड़ेंगे क्या वास्तव में ईश्वर ऐसा है जो कि कुछ भी कर सकता है तो वो चीज आप कैसे मत उसकी सिद्धि आप कैसे करते हैं वास्तव में मैं बोल तो रहा हूं यह प्रमाण ही तो है कि हमारे अंदर जो चाह आ रही है सब कुछ कर सकने की वही प्रमाण है जिस चाह को हम अपने से अलग ना कर स वो जैसे हमारे अंदर जैसे हमारे अंदर जो भूख है उससे सिद्ध हो जाता है कि दुनिया में उसको मिटाने वाला भोजन है जैसे हमारे अंदर प्यास है उससे सिद्ध हो जाता है कि दुनिया में उसको उस प्यास को बुझाने वाला पानी है इसी प्रकार से हमारे अंदर सब कुछ कर सकने वाला बनने की चाह है तो इसी से सिद्ध हो जाता है कि दुनिया में सब कुछ कर सकने वाला ईश्वर इस प्यास को मिटा सकने वाला ईश्वर विद्यमान है और अगर नहीं मानते हैं मान लीजिए इसके आधार पर हम नहीं मानते हैं कि ईश्वर है तो फिर हमें यह मानना पड़ेगा कि जो हम इनबिल्ट जो जिस चाह को हम अपने से दूर नहीं कर पा रहे हैं यह मानते हुए कि इसका विषय नहीं है इस दुनिया में तो हमें खुद को मूर्ख मानना पड़ेगा तो जो नास्तिक प्रवृत्ति ऐसा अगर यह कहेगी कि भाई मैं नहीं मानता कि मेरे अंदर जो चाह है उसका कोई अस्तित्व उसके विषय का

01:27:13:12 वो भी वो चाह इसको हम खुद कह रहे हैं कि उसका विषय नहीं है फिर भी मैं उसे चाह रहा हूं तो वहां पर भी आप मूड मती ही सिद्ध होंगे तो कान को कैसे भी पकड़ लो इसका कारण ये है ना उसका कारण जीव का जो स्वाभाविक गुण है व इच्छा क्योंकि वो चेतन तोव इच्छा तो करेगा ही करेगा ठीक है अभी मुझे यह बताइए कि वो इच्छा तो अल्पना तोहा है आप एक काम करिए आप क्लासेस में आइए फर्म भरिए आप क्लासेस में आइए है ना जय श्री राम चलिए ठीक है कोई बात जय श्री

01:27:52:19 राम नि करके भी आए कोई रितिक जी आपने नंबर नोट कर लिया होगा ना जी साहब सिंह जी जय श्री राम बताइए अरे भाई इनको अन म्यूट करो साब सिंह जी अन म्यूट कर लीजिए अपना जगन्नाथ जी आपका चेहरा

01:28:55:22 हां जय श्री राम साहब सिंह जी ब जी आर्य समाज हा आर्य समाज स्वयं को वैदिक होने का आवाज रही दावा करता आवाज आ रही है आप ये लीड बड हटा के बात करिए अनथा दिक्कत आती आप य हटा जी अब आ रही है

01:29:33:25 आवाज अब आ रही है आवाज अब आ रही है आवाज हां आ रही है हेलो आपको आ रही है आ रही है जी आवाज ठीक से नहीं आ रही आप आप नंबर पर ट करिए गोवर्धन मट का ट चैनल है उसे फॉलो कर लीजिए हमारा ा चैनल है ट चैनल है उसे फॉलो कर लीजिए और यह नंबर नोट कर लीजिए 74036 तो यथा सामर्थ आपकी सहायता की जाएगी और गोवर्धन मट का डायरेक्ट जो नंबर है वह व्यस्तता के कारण है तो कई बार रिसीव नहीं हो पाता है जी रमे जीता जय जगन्नाथ

01:30:49:25 जी मैं आपने तो मेरे से बात की हुई है पहले भी अच्छा अच्छा हा तो मेरे को वैसे तो कोई ऐसा विचार मतभेद तो नहीं है पर एक मेरे मैं पन से इकन वालों से और आर्य समाज से पहले य के द्वारा जुड़ा हुआ था तो ये जब जो शिक्षा देते थे तो सबकी शिक्षा के मैच नहीं होता था तो मुझे ऐसा लगता था कि भाई कि जो सत्य है व है क्या मुझे मेरे अंदर भी जो डाउट आते है वो लोग उसका हल दे नहीं पा रहे हैं तो मैं उसके बाद स्कन को फॉलो करते करते एक स्कन वाले ने आपके ऊपर वीडियो बनाया था आपका खंडन करते हुए तो उसमें मुझे आपका खंडन की जगह उसका खंडन ज्यादा लगा और मैंने आपको फॉलो करना चालू किया और उसमें जो आपने मेरे को जो बताया कि अद्वैत और शंकराचार्य से आपके द्वारा जुड़ा मैं पहले तो उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद आपका कि आपने वो मे वहां तक लेके गए और उसके बाद जो मैं इसके इस मार्ग पर आगे चलता गया चलता गया तो मुझे अपने सारे सवालों के जवाब मिलते गए मिलते गए तो मेरा अ खाली इसमें ली एक ही प्रश्न बचा है वो आप उत्तर दे सके तो अगर

01:32:05:04 कोई हमारा अद्वैत कोई अगर ऐ कोई कॉपी करते [संगीत] हुए अगर कोई ऐसा बना दे कि भाई वो एक कोई गुरु परंपरा से हमारे सब बराबर से पूरे से छाप दे कि हमारी फिलॉसफी जो अवत की है वही बराबर से बना दे पर उसके अंदर जो धर्म की शिक्षा है वो उल्टी दे दे कि मांस खाना धर्म है विचार करना धर्म है तो उसका खंडन हम किस प्रकार कर सकते हैं क्योंकि वह भी मास खाने को धर्म में लाएंगे या उसम लाएंगे अ विधि पूर्वक मास खाना अ विधि पूर्वक संबंध बनाना अगर उसको धर्म के नाम से ख्या पित करेंगे तो जो दूसरे सिद्धांत है वो चरमरा जाएंगे क्योंकि च की शि भगवत प्राप्ति होगी कैसे चित्त की शुद्धि से और चित्त की शुद्धि में भक्ति आएगी भक्ति के साथ में कर्म आएंगे तो यदि कर्म यहां पर बाधित हो रहे हैं तो वह फिर मैच नहीं खाएगा वहां पर आपका चित्त की शुद्धि नहीं हो पाएगी तो पहली बात तो यही ब्रेक लग जाएगी दूसरी बात ये भी आती है कि फ प्रमाण केवल वो नहीं है तर्क प्रमाण भी तो चाहिए शब्द प्रमाण भी तो चाहिए शति परंपरा वो तो जब कोई नया व्यक्ति अपना

01:33:20:16 लिखेगा तो जब कोई नया व्यक्ति अपना लिखेगा तो उसके पास चलो तर्क ही तो होंगे हम इतिहास प्रमाण थोड़ी ना होगा इसका गुरु ये था इसका गुरु ये था तो दोनों चीजें चाहिए प्रमाण भी चाहिए युक्ति भी चाहिए दोनों चीजें चाहिए दर्शन विज्ञान और व्यवहार तो युक्ति भी खत्म हो जाएगी और प्रमाण तो है ही नहीं क्योंकि अपना बनाया है इसलिए वो संभव नहीं है एक महानुभाव है वो कह रहे हैं कि

01:33:57:08 मेरा एक और सवाल था अगर आपका बहुत-बहुत आभार इंफो डायरी वाले कह रहे हैं कि आवान जी की वजह से ही मैं सनातन का सही अर्थ समझ पाया हूं बिना लाग लपेट लीपा पोती के आभार आपका कौन सा वीडियो था वो जिसमें आपने हमारा वो देखा था खंडन व बीइंग स्प सोल का था क्या नहीं बनाता नहीं नहीं वो तो एक इन के डिवटी है वो उनको उन्होंने ज्यादा कुछ खंडन किया नहीं था आपका उसने ली ऐसा बोला था कि यह इकन के नाम पर अपना फॉलोअर्स बढ़ा रहा है ऐसा बोल रहे थे वो अच्छा आपने उसके नीचे कमेंट भी किए थे पर मेरा एक सवाल था आखरी मैं पूछ सक तो बोलिए कि कि जो परमाकुडी

01:34:54:15 पर अगर ऐसा है कि अगर हम जीव उसको प्राप्त कर लेते हैं उसके बाद अगर हमारा मन करें कि हम भी भगवान की तरह ऐसे व्यवहारिक धरातल पर अवतार अवतार या कुछ रूप लेकर आ सके तो क्या आ सकते हैं कि नहीं आ सकते हैं हमारे ऊपर वहां जाकर बाधा लग जाएगी कि हम भी बाधा हमारे पर नहीं रहेगी ऐसा मैं पूछना चाहता हूं जब आपका भगवान के साथ में एकत्व हो गया और भगवान वही है जो कुछ भी कर सकते हैं तो उनके रूप में आप ही तो सब कुछ कर रहे होगे हां वो तो बराबर है आपकी बात अलग से आपका स्वतंत्र कोई अस्तित्व नहीं है हम हम स्वतंत्र अपना लेकर के आप जो है वो नहीं कर सकते भगवान को प्राप्त करते हुए ही वो कर सकते हैं आप हम हम कोई आ गए हैं हमारे रोहित सिंह जी आए

01:35:51:26 हैं जी रोहित जी बताए रोहित जी बोले जय श्री राम राम राम भैया राम राम किसकी तरफ किसके पक्ष को प्रस्तुत कर रहे हैं आप हम किसी को किसी के मतलब पक्ष विपक्ष की तरफ से नहीं बोल रहे हैं हम मान लो हम भी हिंदू है कोई गैर मलो जाते उससे धर्म से नहीं बिलोंग करते हैं कहां के रहने वाले हैं आप कानपुर से एक एक एक जगह स्थाई हो जाइए आपके पीछे रोशनी है थोड़ा ऐसे रखिए कैमरा कि आपका चेहरा दिखाई दे अब दिख रहा है ना जी अब दिख रहा है बोलिए

01:36:54:18 तो एक दो प्रश्न थे आपसे पूछना था हमें भाई साहब देखिए अब मैं बताऊं प्रश्न के लिए आप क्लासेस में आइए यहां पर वैचारिक मतभेद के निमित्त आप बताइए कुछ है तो तो क्या पूछ सकते हैं आपसे हम हमने कहा वैचारिक मतभेद है कोई आपको यदि आप रामपाल की तरफ से ब्रह्मा कुमारी की तरफ से हैं या आप आर्य समाज की तरफ से हैं या आप स्कोन की तरफ से हैं या आप मुसलमान की तरफ से हैं बाइबल की तरफ से हैं यदि ऐसा है तो बताइए प्रश्न पूछना है तो आप क्लासेस में आइए अरे मतलब जवाइन करना सोच रहे थे कि हम किसी मतलब जैसे संत रामपाल जी हैं तो इनके सत्संग सुना करते हैं तो उनको मतलब उनको फॉलो करना चाहते थे नाम दीक्षा लेना चाहते थे तो यह एक दो प्रश्न थे जो हम क्लियर लिया नहीं है ना ना क्लियर नहीं है इस वजह से हम आपसे पूछ रहे हैं कि यह मतलब जो आपकी तरफ से जो धर्म गुरु है जो मतलब उसमें उनका उनका भी सुनते हैं इनका भी सुनते हैं तो इनमें यह प्रमाण देक बताते हैं और आपकी तरफ से का कौन सा सुना है

01:38:09:16 आपने अरे जो प्रेमानंद अरे जो प्रेमानंद है राधे राधे कर मतलब जाप देते हैं राधे का और धरेंद्र शास्त्री सवाल क्या है आपका बताइए सवाल ये है कि ज आप गोवा से हैं ना रमेश जी हा हा गोवा से हा वेद मंत्र वेद मंत्र कहते हैं राधा वेद मंत्र है तो वो वेद में लिखा हुआ है स्पष्ट रूप से राधा वेद मंत्र आप मुझे बताइए भाई साहब कि यह वेद आपके पास आए

01:38:58:02 कैसे कौन से वेद जिसमें आपको प्रमाण चाहिए राधा मा का नहीं वही तो आपसे क्लियर करना है मैं मतलब मैं आपको क्लियर करवा रहा हूं आप मुझे सवालों का जवाब देते जाइए आपको क्लियर हो जाएगा वेद मंत्र आपके पास कैसे आए जिनको आप प्रमाण मानते हो अरे जो इनका इनका सुनते हैं ना रामपाल जी महाराज का तो वो वो बताते हैं कि मने आप पूछ है वेद आपके पास आए

01:39:37:27 कैसे वेद हमारे पास में नहीं आए लेकिन हम सुनते हैं तो उनसे नॉलेज मिला हमें उनके पास कैसे आए आप तो विषय आप तो विषय को इधर उधर कर देते हो आप जो हम कह रहे वो आपर नहीं कर रहा हूं मैं आपके प्रश्न का उत्तर ही दे रहा हूं वेद मंत्र उनके पास आए हैं परंपरा प्राप्त आचार्यों से कहां से आए हैं कहां से आए हां जो आपने बोला सही है मान लो लेकिन लेकिन आप बताइए नात सुनि सिर्फ जो पूछ रहा हूं वो समझिए पहले वेद मंत्र उनके पास आए परंपरा प्राप्त आचार्यों से तो वेद मंत्रों का अर्थ कौन बताएगा जिससे परंपरा प्राप्त आचार्यों से वेद मंत्र आ रहे हैं उ परंपरा प्राप्त आचार्यों का खंडन करके आप वेद मंत्रों का अर्थ नहीं निकाल सकते क्योंकि अगर आप अर्थ निकालेंगे तो इससे आपका उन आचार्यों के प्रति अविश्वास सिद्ध होगा क्या सिद्ध होगा अविश्वास तो यदि अविश्वास सि हो जाएगा अविश्वास सिद्ध हो जाएगा अविश्वास सि हो जाएगा भाई साहब भाई साहब रुक जाइए अविश्वास जब सिद्ध हो जाएगा तो उनसे प्राप्त होने वाले वेद मंत्रों पर विश्वास

01:40:53:14 नहीं होगा तो आपको यह कहना छोड़ दीजिए कि भैया वह वेदों में दिखा सकते हैं कि नहीं वोह दिखाते हैं वो उनका अर्थ भी बताते हैं अपने जो वो अर्थ बता रहे हैं उसको सिद्ध करते हैं वैदिक ग्रंथों सेगर आप य विश्वास नहीं क्या वही तो हम जानना चाहते लिखा है तो हमने बता दिया है जो हमने छठवां वीडियो बनाया है रामपाल जी की सच्चाई के बारे में व एक सीरीज है पूरी उसमें जो छठवां वीडियो है उसमें वीडियो के डिस्क्रिप्शन में उसमें वीडियो के डिस्क्रिप्शन में

01:41:40:07 हमने यार इनको हटाओ भैया हटा दो इनको छठवें वीडियो के डिस्क्रिप्शन में हमने पीडीएफ हमने पीडीएफ लिंक भेजी है और उस पीडीएफ लिंक में मां भगवती की वंदना कहां कहा हो रही है वेदों में बताया है पुराणों में कहां क हो रही है वह बताया है फिर पुराणों में राधा मां किस तरह से राधा जी जो है भगवान की जो आलादिन शक्ति है वह भी उसमें दिया गया है उसको आप पढ़ लीजिए मैं एक बात बोलना चाहूंगा हां जी बोलिए दर्शक से कहना चाहूंगा कि आप जो शिवांश ब ने जो पांच ग्रंथ बताए वह पहले पढ़िए उसके बाद इकन वालों से या आर्य समाज वालों से वहां जाकर उनकी बातें या वीडियो देखिए क्योंकि उनके पास अभी हमारे पास तो क्या है जब कुछ पता नहीं होता है तो कुई तर्क शक्ति है नहीं कुछ पता तो है नहीं तो हम उनका बात सुनते हैं हम उनको उनका भी सही लगता है आपका सुनते आपका भी सही लगता है तो व बीच में फसे रह जाते हैं हा पीयूष वादवानी आप आएंगे क्या चर्चा में

01:42:57:19 कोई चेहरा नहीं दिखा रहा है पृथु राज बताइए जय श्री राम यह जो पियूष वादवानी नाम का बालक आया था अभी कुछ दिन पूर्व इसने यहां पर श्री कृष्ण के चरणों की सौगंध खाई थी य कौन के भक्त की बात हो रही है हटा दीजिए कमेंट हटा दीजिए इसने इकन के ये इकन के भक्त हैं और इसने श्री कृष्ण के चरणों की सौगंध खाक कहा था कि मैं आपको जो हैवान कहा वह गलत कहा मुझसे गलती हो गई मुझे क्षमा कर दीजिए आगे नहीं कहूंगा और यह हाल है कि दोबारा चालू कर दिया इन्होंने दोबारा वही कहना कमेंट

01:43:46:03 में पृथ्वीराज जी बताइए पथराज जी मेरी आवाज आ रही है सही से हां आ रही है आप किस आध्यात्मिक मार्ग पर चल रहे हैं मैं दर्शनों का इच्छुक हूं मैंने कुछ दर्शन के इधर उधर की चीज पी है दर्शनों में मेरी बहुत दू है आप किसी के फॉलोअर है क्या फॉलोअर मैं जैसे अभी मैं फॉलोवर तो नहीं हूं लेकिन मैंने पढ़ा है कुछ लोगों को जैसे तो तो ये वो जगह नहीं है ये वो जगह नहीं है यदि आप किसी के फॉलोअर है तो क्योंकि वैचारिक मतभेद के निमित्त ये चल रहा है तो आप आइए अन्यथा आप जिज्ञासु है तो क्लासेस में आइए यह क्लासेस का जगह नहीं है जहा आपकी शंकाओं का समाधान किया जाए मेरे मतभेद है सुन लीजिए मेरे मतभेद है लेकिन मैं किसी गुरु को नहीं वो मतभेद मेरे अंदर से आते है गुरु हम मतभेद बताते हैं बोलिए म मदद बोलिए म मैंने जो है अवेद परंपरा देखी है या अवेद के बारे में जितना मैंने पढ़ा है वो ये ब है कहा पढ़ा कु मेरे अवती दोस्त है उन्होंने मुझे समझाया उ चीजों के बारे में तो मैं आपसे उन्ही के बारे में

01:45:01:21 की जो मेरे अवती दोस्तो ने कहा कि दो तरह की सप्ताह होती है एक परमार्थिक और एक व्यवहार व्यवहार में जो ईश्वर होता है वो अपता लेता है और परमार्थ वाला कुछ नहीं करता तो मेरा इस प्रश्न है एक मिनट एक मिनट एक मिनट इनको पियूष हा भाई पियूष जी इनका जरा माइक ऑन करिए हां जी बो आपने तो चरणों की सौगंध खाई थी श्री कृष्ण जी भगवान के चरणों की सौगंध खाई थी आप आपकी वोय प्रभुपाद जी की मैंने फोटो देखी मैंने बहुत बहुत नीच काम किया है आपके लोगों

01:45:40:26 ने उसका क्या करें इनको आप हटा दो अगर किसी ने हमारे नाम से कोई गलत कार्य किया है तो उसको हमसे जोड़कर आप किस आधार पर देख सकते हैं इनको ना लो भाई असभ्य लोग हैं इनसे दिक्कत होगी इनको ना लीजिए ऊपर हटा दीजिए शया मेरे को एक पूछना था आपसे जो अभी बात कर रहे थे जिनसे वो कहां गए पथराज जी

01:46:23:02 वो वो लिफ्ट हो गया पता नहीं कैसे हा पथराज जी आपकी समस्या बताइए हा समस्या यह है कि मेरा प्रश्न यह था कि जो व्यवहार में जो ईश्वर है क्या वह सत्य है या नहीं मनुष्य की दृष्टि से हमारे लिए वह सत्य है जब तक हम जीव भाव को प्राप्त है जैसे मैं अगर देख तो भगवान की दृष्टि से भगवान की दृष्टि से वो सत्य नहीं है वह सब भगवान की लीलाएं हैं ईश्वर की दृष्टि से ब्रह्म की दृष्टि से वह सब भगवान की लीलाए हमारी दृष्टि से वह सब सत्य है जब तक हमें किसी के चाटा मारने पर भय हो रहा है हमारी पलक छपक रही है हम जीव भाव को प्राप्त है तब तक हमारे लिए वह सत्य है और यह आपका क्वेश्चन है वैचारिक मतभेद नहीं है मतभेद बताइए आप मदद इसमें यह आता है कि जब कहते हैं कि ईश्वर की दृष्टि से जो है व स तो ईश्वर जानता है कि वह असत्य है फिर भी व असत्य को क्यों नहीं तोड़ता व सत्य को प्रतिपादित क्यों नहीं करता असत्य का सहारा क्यों लेता है व तो सत्य है ना क्योंकि य दुनिया ही मिथ्या है ना

01:47:38:27 मिथ्या के अंदर मिथ्या के अंदर सुनिए पहली बात तोय इसमें आपका काउंटर नहीं है आप क्या मानते हैं वो बताइए इसके विपक्ष में आप क्या मानते हैं वैचारिक मतभेद क्या है यह तो मेरे मतभेद ये है इसमें कि मैं ये मानता हूं जोय सृष्टि है यह मिथ्या नहीं है यह सत्य है जीव भी सत्य है और जीव ब्रह्म से अलग है से जाना आपने मैंने जाना कौन

01:48:10:25 दर्शन मैंने अभी स प्रकाश पढ़ी है फिर प्रकाश यानी आप समाजी पढ़ने का मतलब आप भी स प्रकाश पते तो समा अरे तो आप आपने उस दर्शन को स्वीकार किया हुआ है ना नहीं मैंने पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया ना अच्छा क्या नहीं स्वीकार किया उसका जैसे मैं मेरे को अभी भी आर्य समाज प कुछ डाउट्स है जैसे उनकी परंपरा जो ऋषि दयानंद जो देते परंपरा नहीं उनका सिद्धांत कौन सा स्वीकार नहीं किया आपने ये बताइए सिद्धांत सिद्धांत है कि ईश्वर सब कुछ नहीं कर सकता ठीक है कि वो कुछ चीजें नहीं कर सकता बादिता ऐसा सिद्धांत मैंने नहीं माना उनका अब आपने क्या प्रश्न किया है कि वो अपना प्रश्न दोबारा करिए अगर वो आपका जो ईश्वर है अगर वह सत्य है तो वह मिथ्या का आश्रय क्यों लेता है किसी भी रूप में व मिथ्या का आश्रय क्यों लेता है ठीक है ठीक इसका आंसर य है कि ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है आप उसको बा नहीं कर सक आप उसको बाद नहीं कर सकते व ऐसा क्यों नहीं कर रहा िक में जो आया है कि हर कार्य का कोई ई कारण होता है तोवर आपने आपने सनातन का अध्ययन किस गुरु परंपरा में किया है

01:49:26:03 मैंने परंपरा फिर प्रमाण तो फिर आप प्रमाण क्यों दे रहे हैं मैं प्रमाण इसलिए दे रहा हूं आप दर्शन कोते दर्शन को अरे मैंने मैंने आपको बता तो दिया आपको मैंने बताया ना कि ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है ईश्वर बिना किसी प्रयोजन के सृष्टि का निर्माण करते हैं पार मार्थी धरातल प ईश्वर उसके पास इतनी स्वतंत्रता है इतनी शक्ति है कि व बलात्कार भी कर सकता है क थ सकते किय बलात्कार करता है आप गलत अपराधियों के रूप में ईश्वर बलात्कार भी कर रहा है ना अपराधियों के रूप में कौन कर रहा है अच्छा आप यह मान लीजिए कि ईश्वर नहीं कर रहा है अपराधियों के रूप में वो ईश्वर नहीं कर रहा है ईश्वर की सत्ता से बाहर हो रहा है उसको रोक नहीं सकता है एक मिनट ईश्वर उसको रोक नहीं सकता है रोक सकता है क्यों नहीं रोक रहा आप बोलिए हा तो इसीलिए तो क्योंकि यह जो प्रपंच है वो उसके लिए के बराबर है वो एक खेल है जैसे कि आप जब वीडियो गेम खेल रहे होते हैं तो उस वीडियो गेम में आने वाली जो व्याधि है वो भी आप ही उत्पन्न कर रहे होते हैं जो व्याधि है वो भी आप वो आपने स्वीकार किया होता है कि इस वीडियो गेम को मैं ऑन कर रहा हूं इसमें आने ये व्याधि आएंगी वो

01:50:41:09 एक आपने उसको स्वीकार किया होता है आप उसको रोक सकते हैं मगर जब अगर मैं उसको रोक ही सकता हूं रोक ही सकता हूं तो मेरा जो है इस वीडियो गेम को खेलने का ही कोई मतलब नहीं रह गया ना तो खेलने की बात कर रहे हैं हम वीडियो गेम तब खेलते हैं जब हमें आनंद चाहिए तो ईश्वर को वो तो सच्च आनंद है ना उसको आनंद थो चाहिए तो खेल क्यों रहा है वीडियो गेम कारण नहीं बना हमको आनंद चाहिए मगर हम कई बार कुछ कार्य ऐसे भी करते हैं जो हम बिना कारण के करते हैं वो भी सुन लीजिए जैसे हाथ हिलाना जैसे जैसे अभी आपने चेहरे से हाथ हटाया जैसे आपने अभी चेहरे से हाथ हटाया यूं ही आप बहुत सारे कार्य करते हैं अगर आप आर समाज को भी मानेंगे तो आर्य समाज ने वेदों को अपौरुषेय

01:51:27:26 माना क्या माना वेद का अर्थ क्या हुआ बिना प्रयोजन हो गया नाने नहीं लिखा हो जो निराकार निराकार सर्वज्ञ ईश्वर ने मैं कह रहा हूं बिना प्रयोजन हो गया ना वो भी वेद भी नहीं उनके पास प्रयोजन तो है कि सृष्टि का कल्याण करने के लिए मनुष्य को ज्ञान देने के लिए नहीं नहीं जब वो जब वो अप है उन्होंने बनाया ही नहीं है उसको तो वो तो बिना प्रयोजन हो गया आपने खुद अपनी वीडियो में बताया कि वेद क्यों नहीं बनाया गया है क्योंकि वो उसके पास पहले से था वो बनाएगा क् जब उसके पास पहले से है अगर मुझे पता है तो वही तो मैं कह रहा हूं कि वेदों का प्रयोजन ही नहीं रहा जब उन्होंने भगवान ने उनको बनाया नहीं अरे उन्होंने दिया है ना बनाया भाई देखिए ये चर्चा जो है विषय अलग हो रहा है आपने जो मुझसे पूछा है वो मैंने आपको बता दिया है अगर आपको समझ में नहीं आ रहा है तो आप दोबारा आइए फॉर्म भरभरा के आइए आप अच्छे से आप जो आप मुझे जो प्रश्न पूछ रहे हैं मैं उसी प उत्तर रहा हूं आपको आप खुद विषय लेके जा रहे हैं मैं नहीं लेके जा रहा बताइए आपका जो मूल तह ये है कि ईश्वर बिना कारण को कार्य कर सकता है और वो बलात्कार भी करता है तो क्या अगर को देखिए देखिए मेरी एक बात सुनिए मेरी एक बात सुनिए

01:52:43:21 मैं आपको एक मिनट यहां पर पॉज करूंगा पहले अपनी भाषा का चयन अपनी भाषा का चयन ठीक से करना सीखिए अब मैं आपको बताता हूं कैसे एक मिनट चयन बिल्कुल सही है मैं बलात्कार कह रहा हूं तो आप मुझे म्यूट कर रहे हैं मट भाई इनको म्यूट करो भाई इनको म्यूट करो हां अब सुनिए क्यों जैसे कि आपसे अगर पूछा जाए आपके माता-पिता ने क्या किया जिससे कि आपकी माता के गर्भ में आपके रू आपका जो बीज है वो आया तो इसको आप वैसे ही बोलेंगे जैसे अभी आप ईश्वर के बारे में कर रहे बोलिए आप मुझे वैसे ही बोल के बताइए क्लियर क्लियर माता के एक मिनट एक मिनट माता के घर में बीज आया वो बताओ अपने य क्या इनको म्यूट करो हटाओ यहां पर व व मनता फैलाने आए और इनका कोई अर्थ नहीं

01:53:46:27 है जय श्री राम भैया जय श्री राम जय श्री राम मैं ये कह रहा था जो त सिंह परिहार आए थे ना अभी उनका जो मुख्य उद्देश्य जो मैं समझ पा रहा था वो ये था के वो रामपाल जी से जुड़े हैं लेकिन और वो हमें हमारे गुरुओं के परंपरा प्राप्त आचार्यों को भी सुनते हैं तो उनका ये प्रश्न था के उनमें जो मतभेद है अभी हमने दीक्षा नहीं ली है तो हमारे शंका का समाधान कर दीजिए जिससे कि हम राइट डायरेक्शन में जो है हम पहुंच जाए नहीं उनका ये नहीं था वो व मनता फैलाने आए थे वह इस आड़ में थे कि मैं अभी स्वीकार ना करूं जिससे जीतू तो रामपाल का पक्ष जीते और हारू तो केवल मैं हारू जैसे होता है ना अनऑफिशियल एजेंट जी माता जी जय श्री राम जय श्री राम भैया बताइए जय श्री राम रामपाल जी गुरु महाराज की दीक्षा सास माली है मतलब पूरे घर घर का दिमाग खराब कर

01:54:54:10 ठाकुर जी नहीं पूजो माता नहीं पूजो भोले बाबा की पूजा करते वो नहीं पूजो केवल सतगुरु रामपाल जी को पूजो तो बताइए आप हम यहां पर हमसे क्या कहना चाह रहे हैं मतलब उनका धर्म भी गलत है और हम लोग पूछते भी है पूजा करते हैं क जल ले आ ले में डाल दे और जो भी पैसा है जाती संत रामपाल लोग है वे तो मतलब दिमाग से बिल्कुल ही पैदल हो ना किसी की सुनती है ना कुछ बस अगर फ्रेश हो गया तो जोति कर पूजा हो जो उनकी जो क्या सुधाम है कैसी पूजा है हम एक महीना सुनना हम आपके मतलब बातें अच्छी लगती

01:55:55:02 उनको हमारे वीडियो दिखाया करिए अपने घर में बड़ा टीवी एक टांग के उसमें सब वीडियो आप चलाया करिए दिखाते है भैया लेकिन मान बंद कर दे मतलब एक भू सवार है जो है जो रामपाल है बस उके अलावा कोई भगवान नहीं है कुछ भी नहीं है अगर हम मतलब हम लोग जैसी बातें करें कि रामपाल भगवान नहीं है संत रूप के मान सकते तो क तुम पाप कर रही अगर तुम उनको रा कर रही तो पाप कर र

01:57:39:24 भैया ड्रॉप हो गए क्या भैया का चित्र दिख नहीं रहा ड्रॉप हो ग लगता है आ रहे आ रहे अब अब आप देखिए रमेश जी के इस तरीके से ब्रेन वश हो रहा है आप सोचिए कि परिवार देखिए कि पूरी व्यवस्था को कैसे तोड़ा जा रहा है आप देखिए य इनकी जो है सासु जिनके बारे में उने मा शक्ति ने बताया माता जी ने बताया कि देखिए हमारे परिवार में कैसे हालात है और बहुत से ब से बत्तर होते जा रहे हैं इस तरीके से ब्रेन वश किया जा रहा है इन तंत्रों के द्वारा अब वही बात है ना कि मिथ्या फर इसको प्रचार प्रसार जो है इस तरीके से दिमाग में बिल्कुल अंदर डाल दिया गया है के आप जो है ना कि अब यह जो है ना अंदर तक जो है के कैसे जो है खासकर जो है ग्रामीण क्षेत्र के जो लोग हैं और वो इस तरीके से उनका ब्रेन वश किया जाता है कि आप सब कुछ जो है

01:58:55:21 ना अब ऐसे परिवार नहीं टूटेंगे तो क्या होगा आप सामने दिख रहा है आपके सामने प्रमाण है सब कुछ है उनके पास सिद्धांत नहीं है ना समस्या तो वही आ रही है लेकिन अब जो ग्रामीण क्षेत्र के जो लोग हैं पारिवारिक जो लोग हैं उनको यह बातें समझ में एकदम से नहीं आएंगी अब उनके दिमाग में य चीज तो डाल परिवार टूट रहे चली गई क्या मातृ शक्ति थी जो हा जी यह केवल एक परिवार की कहानी नहीं है ऐसे बहुत से परिवार हैं जो इस समस्या से जूझ रहे हैं ये जो व्यक्ति एक आया था क्या नाम था उसका जो अभी पथराज उस व्यक्ति का भी मंसा जो है यहां पर आकर के जो असामाजिक वो कुछ उन्माद उत्पन्न कर दे जिससे कि जो है इनके उसमें विघ्न आए जैसे वो राक्षस नहीं होते थे जो विश्वामित्र जी के यज्ञ में मास डालने आते थे तो इन लोगों का मतलब होता है केवल यहां पर आकर के यह जो यज्ञ से ऐसा कुछ हो रहा है

02:00:10:22 तो हम कुछ उसमें तो ऐसे शब्दों का उपयोग करो ऐसी वाणी का उपयोग करो जिससे कि सामने वाला इंस्टिगेट हो इसके लिए भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि कई प्रकार के स होते हैं जो हमें परोक्ष रूप में बोलने होते हैं परोक्ष माता पिता ने क्या किया जिससे की गर्भ धारण किया माता ने इसको आप सदा ही परोक्ष रूप में बोलेंगे नहीं बोलेंगे खुल के जैसे अभी ईश्वर के लिए इस तरह से बोल रहे और कुल मिलाकर के बात यह है हमारी सारी बातें मत मानो ईश्वर को अवाद सिद्ध करो सर्वशक्तिमान सिद्ध करो सिंपल अब वो कर नहीं पाएंगे और कुछ ना कुछ बा बो मैंने मैंने उनका मान रखने के लिए मुझे लगा हुई है बातें रटी हुई है हा मैंने उनका मान रखने के लिए मैं चाहता तो उस पंक्ति को जब उन्होंने यह कहा ना ईश्वर बलात्कार भी कर सकता है तो मैंने मैं उनका मान रखने के लिए मैंने कहा कि अपराधियों के रूप में कर सकता है इस प्रश्न का उत्तर होता है कि हां तुम्हारे रूप में वो यह भी कर सकता है तुम बोलते जाओ हम ही से जोड़ते जाएंगे बोलते जाओ जो जो बोलोगे तुमसे जोड़ देंगे तुम्हारे रूप में व य भी कर सकता है और बोलो कितना गिरोगे भाई

02:01:26:00 परमार्थिक सत्ता और जो व्यवहारिक सत्ता है उसमें अंतर होता है ईश्वर ने संसार बनाया है उसने ही अगर कोई पेंटर अपनी पेंटिंग बना रहा है तो उसके लिए आंख और जो अन्य जो आपत्ति जनक अंग होते हैं एक मात्र शक्ति के उसकी अगर पेंटिंग बन रही है तो उसमें नेत्र और बाकी के अंगों में पेंटर के लिए कोई अंतर नहीं होता है ईश्वर वो है और आप वो है जो उस उसके अ पेंटिंग के और उस पेंटिंग के अंदर की ऊपर नीचे की चीजों से आप जुड़े हुए हैं उसके अंतर से ईश्वर भी अगर अच्छाई बुराई से जुड़ गया तो व ईश्वर कैसा रहा अगर उसको भी अच्छाई और बुराई प्रभावित करने लगी दूसरी बात आपके अनुसार जो ईश्वर है वह ईश्वर है ही नहीं वह केवल एक सिस्टम मात्र है एक जैसे जो बौद्धों का ईश्वर था ना कि वो प्रकृति जो होती है वो अपने आप आपको यह देती है वो देती है ऐसा करोगे ऐसा मिलेगा तो इनका जो ईश्वर है वो केवल एक सिस्टम मात्र उसकी भक्ति करो ना करो उससे कोई फर्क नहीं पड़ता है आपको कुछ नहीं मिलने वाला तो वो उसको ईश्वर ना भी कहो तब भी काम चल जाएगा हमने इतने सारे प्रश्न किए उससे कोई मतलब नहीं है केवल वो विवाद खड़ा करने के लिए अच्छा जब वैशेषिक

02:02:41:19 दर्शन की बात कर रहे हो तो इसका मतलब प्रमाण पर आ गए शब्द प्रमाण पर जब शब्द प्रमाण हम पूछ रहे हैं कि आपके पास कैसे आया ग्रंथ तो आप बता रहे हो नहीं पता प्रमाण को बीच में तब लाओ जब शब्द प्रमाण को आप स्वीकार करते हो शब्द प्रमाण को आप स्वीकार ही नहीं कर रहे ना मेरा एक था कीने आपको अपना चेहरा रिल करें तो हम आपको परर जी मेरा एक सवाल था हा जी अभी जैसे कि अगर कोई हिंदू है और वो अगर उसे वेद नहीं पढ़ने है और खाली गुरु दीक्षा लेनी है और मंत्र जाप करना है और नाम जाप कर रहा है वो बस तो उसे क्या जनयुग करना जरूरी है कि नहीं करेगा फिर भी चल सकता है क्योंकि बहुत लोग कहते हैं कि जरूरी है क्योंकि आपको अधिकार है तो आपको करना ही चाहिए ऐसा बोलते हैं करपात्री जी से ऐसा ही एक प्रश्न किया था तो करपात्री जी का गुरुदेव बताते हैं उ उनसे जब ये प्रश्न किया गया था कि मैं ऐसे ऐसे कर लूं चल जाएगा तो करपात्री जी ने उत्तर दिया था चल जाता मगर दुर्भाग्यवश तुम ब्राह्मण कुल में उत्पन्न हो गए हो हा विवेकी का दायित्व ज्यादा होता है जिसको

02:03:56:21 ब्राह्मण शरीर हुआ है वह अपने ब्राह्मण जो आचरण है उससे अगर बचेगा तो हमारे बीच की रक्षा कैसे होगी कोई वैश्य है तो जिसको जिसका जितना अधिकार है उसका उसे त्याग नहीं करना चाहिए यथा सामर्थ उसका आलंबन लेना चाहिए मगर कोई व्यवस्था है तो आगे बढ़ी नाम लेकर प्रभु का अपने मन में भाव ये रखिए कि वो जो व्यवस्था है वही सर्वश्रेष्ठ है मैं पतित हूं जो नहीं कर पा रहा हूं स्वयं के लिए अगर हम नियमों के सीमा में नहीं है या नियमों का आलंबन नहीं ले पा रहे हैं तो स्वयं के लिए नियमों को तोड़ने वाला सुनने के सुनने में क्या आपत्ति है सुन लीजिए हा भाई मैं एक पतित वैश्य हूं मैं एक पतित ब्राह्मण हूं मगर अपने पतित पन को ना स्वीकार करने के चक्कर में हम शास्त्रों को पतित या शास्त्रों में कही हुई बात को नकारना नहीं चाहिए यही बात भगवत गीता भगवान ने कही कि व्यवस्था वस धर्म का अनुकरण ना कर पाने की स्थिति में यदि आपके मन में उसके प्रति निष्ठा है जिसका आप पालन नहीं कर पा रहे हो उसका सम्मान है और मन में पश्चाताप है उसे ना कर पाने का कि सही तो वही है मैं गलत कर रहा हूं तो भी आप

02:05:14:24 धर्मजीवन चाहता हो और एक सही गुरु के नीचे रहकर शास्त्रों का अध्ययन करना चाहता हो तो वो किसी गुरु से कैसे जुड़ेगा मतलब उसके बारे में आप कुछ बता सके तो जो लाइव उसके जब सवाल पूछना चाहे तो सवाल भी पूछ सके वैसे तो गुरुदेव के वीडियो है ही है जो वीडियो देख के पर देखिए चूल्हे से रोटी निकालने के लिए चिमटे को अपना मुंह जलाना ही पड़ेगा हम जिसको अपने सवालों का जवाब चाहिए वाकई में जिज्ञासु है उसको जतन करने होंगे आप देखो कई ऐसे भक्त हुए वो अपने गुरु के मार्ग में लेट गए गुरु ने स्वीकार नहीं किया तो लेट गए तर तरह की परीक्षाएं दी तब जाकर के वो गुरु ने उनको स्वीकार किया गुरुदेव का लाइव उनको बात करनी है गुरुदेव का भी दो दो ढाई महीने तक उनका वो चला चातुर्मास जिनके अंदर जिज्ञासा है है ना वो आ सकते थे मगर व ले दे कर के कितने लोग पहुंचे शायद पूरे चातुर्मास में बहुत ज्यादा नहीं संख्या पहुंची तो कहने जिनके अंदर जिज्ञासा है वो पहुंच जाएंगे हा जिनके अंदर जिज्ञासा है वो पहुंच जाएंगे जी तो ये पियूष वादवानी जैसे डगले और प्रिया चरित्र वाले लोगों का निर्माण हो रहा

02:06:29:25 है क्या ये निर्माण इस कन में हो रहा है यह प्रश्न है और अगर यह आपसे जुड़े हुए हैं तो इनको समझाए कि श्री कृष्ण के चरणों की सौगंध खाने के बाद इस तरह का त्रिया चरित्र यह कैसे कहां से करना सीख रहे हैं क्या इन्ह सनातन के नाम पर इस्लाम की शिक्षा दी जाती है या किसी सनातन विरुद्ध तंत्र की शिक्षा दी जाती है सब बातें हैं ध्यान देने की आवश्यकता है जी साहब सिंह जी बताइए

02:07:04:14 जयम मैं भी आपसे दूसरी आडी से जुड़ा था आवाज नहीं आ रही थी अभी हा बोलिए आपकी डिबेट सुन रहा था अभी काफी हां जी मैं उसी को फॉलो करता हूं तो क्या आर्य समाज के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर

✅ This part is already used · 02:07:29:19 – 02:11:01:25 (3:32)

→ Used in: A · Video Alankar Samaj अपूर्ण ईश्वर or अधर्म ज्ञान #vedpuran #hindu #aniruddhacharyaji at 4:14 ↗

02:07:29:19 सर्वशक्तिमान है हां जी क्या वो अवतार ले सकता है नहीं वो अनंत सामर्थ वान मानते हैं आप उसे हा तो जब वो अनंत सामर्थ वान है तो फिर वो अवतार क्यों नहीं ले सकता और यदि वो अवतार नहीं ले सकता है तो फिर वो अनंत सामर्थ वान कैसे अवतार लेने की जरूरत ही नहीं है अवतार ले मैंने पूछा ले सकता है कि नहीं साहब सिंह जी नहीं ले सकता है जी

02:08:21:20 ये बताइए कि जब वोह अवतार नहीं ले सकता तो अनंत सामर्थ वान कैसे हुआ बोलिए क्यों जो यह बताओ जी जैसे अवतार सामर्थ का अंत हो रहा है ना मैं पूछ रहा हूं उसकी सामर्थ्य में सीमा है ना कि वो अवतार नहीं ले सकता है सीमा है ना उसकी अच्छा जी बोलिए सीमा है ना ये तो जब सीमित हो गया तो अनंत

02:08:59:01 कैसे क्यों अवतार ये बताओ आपने कहा अवतार देगा तो उसम बाद हो रहा अवतार नहीं ले रहा है तो ठीक है हा तोय बताओ अवतार लेगा तो फिर जन्म भी लेगा फिर उसका मरण भी होगा तोर ये बताइए आपके अनुसार जीव है अनुस हा जी वो जन्म लेता है जम लेता इन तो जन्म लेही रहा है लेता है उसका मरण होता है और क्या फिर भी आप जीव को अनाद अनंत कहते हैं कि

02:09:45:20 नहीं फिर भी आप जीव को अनादि अनंत कहते हैं कि नहीं आपका मेरी समझ आपका सवाल नहीं आ रहा है जी आप समझ नहीं रहे जब जन्म और मरण से जन्म और मरण से जन्म और मरण होने के बावजूद भी आप जीव को अनंत कह पा रहे हैं तो जन्म और मरण से आपको ईश्वर को अनंत मानने में क्या दिक्कत हो रही है और कुल मिलाकर के सवाल यह है ही नहीं सवाल तो यह है यदि एक मात्र भी सीमा है तो वह अनंत कैसे एक मात्र भी सीमा है एक नियम है जो उस पर लागू है तो वह फिर असीमित कैसे अनंत कैसे उसको आप ईश्वर कहो मगर अनंत सामर्थ वान मत कहो अच्छ उसको आप ईश्वर कहो कोई दिक्कत नहीं है अनंत सामर्थ वान मत कहो जैसे आप जो भी जने आप जो वेदों में जो परिभाषा बताते हैं आप कहते हैं आर्य समाज के वेद है ना यानी पारंपरिक नहीं है वो हमारे वेद जो आए हैं वो विय बदल रहा है विषय

02:11:00:26 बदल रहा है

⬜ Not used yet · 02:11:01:25 – 02:11:22:16 (0:21)

02:11:01:25 एक मिनट सुनो तो सही आप अचार उसम भी गए थे क्या अचार जी के उसम गए थे क्या हा मैं गया था हां मैं गया था हा मैं गया था वहां पर उनसे मैंने कुछ सवाल भी किए थे अब मुझे ठीक है काफी है अब मुझे आप बताइए

✅ This part is already used · 02:11:22:16 – 02:19:36:14 (8:14)

→ Used in: A · Video Alankar Samaj अपूर्ण ईश्वर or अधर्म ज्ञान #vedpuran #hindu #aniruddhacharyaji at 7:48 ↗

02:11:22:16 कि अगर ईश्वर की सामर्थ्य की सीमा है तो फिर ईश्वर अनंत क्यों या तो आप आज य बोलिए ईश्वर अनंत सामर्थ वान नहीं है यह बताओ जी भाई साहब जो आप ये कह रहे हो अवतार नहीं ले सकता है तो वो सा नहीं है मैंने आपसे पूछा अगर उसकी सामर्थ्य की सीमा है तो उसको अनंत मत कहिए अच्छा जी हां अब बोलिए अब ईश्वर क्या है अनुसार अनंत आपके अनुसार ईश्वर अनंत सामर्थ्य मान है क्या

02:12:09:26 है अब यह बताओ बड़े भाई सा यह बताओ आप यह कहते हो कि अवतार नहीं लेता तो आपका ईश्वर है आप ये बताओ आप जो बता रहे हो आपके जो अनुसार जो अर्थ है जो भी है अभी बताओ आपका गुरु परंपरा क्या उनका आप ये कहते हो आर समाज का जो वेद है वो उन्होंने अर्थ अलग से लिया है दूसरा विषय पहले आप ईश्वर के ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध करिए अनंत सिद्ध करिए या तो यह कहिए कि ईश्वर अनंत नहीं है फिर आगे बढ़ते हैं बड़े भाई जी इसका जवाब है ना हमारे गुरु जी वो दे पाएंगे अच्छा तो आपके पास का इसका उत्तर नहीं है कौन है आपके गुरुजी मेरे पास उत्तर नहीं है कौन है आपके गुरु सदानंद सर स्वामी सच्चिदानंद मुझे अब आप मुझे ये बता दीजिए आप हमारा चैनल कब से दे रहे हैं देख रहे हैं आप हमारा चैनल कब से देख रहे हैं हो गए कम से कम छ महीने से ज्यादा हो गया छ महीने से तो आपने हमारा ये सवाल सुना था कि नहीं ईश्वर सर्व शक्तिमान है कि नहीं तो ये आप अपने गु से पूछ नहीं आज तक मेरा अभी वहां

02:13:25:02 जाना नहीं हुआ है अनचार सभा में तो आप चले गए अनिरुद्धाचार्य जी की सभा में तो आप चले गए मगर अपने गुरु के पास नहीं पहुंच पाए वो मेरे गांव के पास में अचार्य जी वृंदावन मेरे गांव के पास में अच्छा नजदीक में छ महीने में छ महीने में आप फोन के माध्यम से जा करर के किसी भी प्रकार से आपको मौका नहीं मिला कि आपने गुरु से पूछ पाए कि जब ईश्वर अवतार नहीं ले सकता उसकी य सीमा है तो फिर ईश्वर अनंत सामर्थ्य वान क्यों कैसे है आपको छ महीने में इतना समय नहीं मिला चलिए र आपने कह दिया गु दे पाएंगे कह दिया आपने गुरुजी दे पाएंगे कोई बात नहीं अगली बार बात करेंगे अब बात आती है परंपरा की तो मैं मैं यह कह रहा हूं कि आर्य समाज को जो वैदिक ग्रंथ है वो कैसे प्राप्त हुए यह बताइए मैं आपको अपने बारे में बताऊंगा बताऊंगा पर उसका एक क्या है क्लेरिफिकेशन होता है इस तरह से आर समाज के पास वेद कैसे आए वो ऋषि परंपरा से आए ऋषियों के द्वारा वो नाम बताइए बजान के गुरु पूर्णानंद और दो चार गुरु और बताइए पीछे के गुरुओं का नाम

02:14:40:03 बताइए क्यों आपने बता तो दिया बजान जो दयानंद जी के गुरु बजान गजानंद के पीछे पूर्णानंद थे पूर्णानंद के पीछे कौन थे ये तो ऋषियों के द्वारा आए अब त भाई साहब नाम होता है ना कुछ कौन से ऋषि थे जिन्होने पूर्णानंद को वेद दिया अरे भाई जी एक बात बताओ आप आप ज शंकराचार्य जी की बात करते हो ठीक है आज गुरु शंकराचार्य जी की बात करते हो है ना उनके गुरु कौन थे आप बताओ गोविंद योगेंद्र मस अच्छा जी अब ये बताओ जैसे बौद्ध मत का 500 ईसा पूर्व आया उन सं कौन सी परंपरा आ रही थी ये बताओ आप मेरे को नारायण समार बता रहा हूं ना भाई सुनो पहली बात ये नारायण समारंभा शंकराचार्य मध्यमाम ये नारायण से आ रही थी ये परंपरा जो जिसका खंडन बहुत बौद्धों के काल में आके आदि शंकराचार्य जी ने किया मगर अगर यह बात मान ले कि शंकराचार्य जी की भी गुरु परंपरा पर आपको विश्वास नहीं है तो फिर यह हो जाएगा कि वैदिक वांग में अनादिन अनंत नहीं है अभी जो 100 200 साल का इतिहास आपका है तभी रचे गए हैं जैसे बड़े भाई

02:15:55:09 जी शंकराचार्य जी ने वेद का शंकराचार्य जी ने वेदों का भाष्य तो किया नहीं वेदों का भाष्य सायनाचार्य ने तो किया उनकी परंपरा में आने वाले सा अरे भाई आप यह बताओ दयानंद सरस्वती जी ने सब पर भाष्य किया है क्या जिसकी आवश्यकता हो रही है कर रहे नहीं हो रही नहीं कर रहे फिर आगे चल कर के दोबारा जब प्रासंगिक भाष बदल गई फिर किसी ने भाष्य किया आवश्यकता दिखाई देगी तब भाष्य करेंगे कि यूं ही भाष करते चले जाए तो बड़े भाई जी आवश्यकता थी तभी तो दयानंद सरस्वती ने उनका व भाष्य किया अरे तो भाष्य किया वो जो ज्ञान था व उनके पास आया कहां से उनके गुरु कौन थे पूर्णानंद

02:16:43:21 के आप बात ही नहीं समझ रहे हो मैं तो समझने के लिए बैठा हूं चैनल खोल रखा है और क्यों खोला चैनल अरे नहीं बड़े भाई जी या आप यह बताइए कि आपके पास जो पूर्णानंद जी है विजानंद जी के गुरु विजानंद जी है दयानंद सरस्वती के गुरु दयानंद जी के पास जो ज्ञान पूर्णानंद से आ रहा है पूर्णानंद जी के पास व ज्ञान कहां से आया था अगर वोह उनके पास सुनिए अगर उनके पास अपना कोई वो नहीं है कि हमारे पास यहां से आया और जिसके पास है जो ये बता रहा है मेरे पास यहां से आया अगर उस पर विश्वास नहीं है अप्रत्यक्ष रूप से आप यह कह रहे हैं कि वेदों का अस्तित्व तब का है जब वो साल पहले जितना आपका दयानंद जी मानते हैं बस दयानंद जी से जो आया दयानंद जी ने कभी वेदों का जो समय वो 100 200 वर्ष नहीं माना अरे भाई उनकी गुरु परंपरा क्या है तो गुरु परंपरा क्या है बड़े भाई जी बजान जी थे ना व्याकरण के बहुत बड़े आचार्य थे उसके अनुसार उन्होंने वेदों का वो अनुवाद किया था क्योंकि वेदों में लोग मैंने पूछा है गिरजानंद जी की गुरु परंपरा क्या

02:18:01:27 है चलो यह भी माना के चलो गुरु परंपरा से वेद आए आपकी मेरी बात चलो मानी तो उस समय वेदों में किसने माद में आपको यह एन केन प्रकार मानना पड़ेगा कि आपके पास जो वेद आए हैं वो इन्हीं परंपराओं से आए हैं जिनका आप खंडन करते हो जिनका आप अनादर करते हो जिनको आप कोप कहते हो जिनको आप पौराणिक कहते हो जिनका मजाक उड़ाने के लिए आप उनकी सभा में जाकर के उलल प्रश्न करते हो उल जूल कोई प्रश्न नहीं करता बड़े भाई नहीं नहीं वो ठीक है कोई नहीं करता मैं देखूंगा आपका वो वीडियो जिसम आप गए हैं मगर अभी फिलहाल बात में ये कर रहा हूं कि जिनसे आपको मिले हैं उनका आप खंडन करते हो उनके प्रति अविश्वास प्रकट करते हो बात य आती है कि जिनसे आपको वेद मिले हैं हा जी यदि आपको उनके ऊपर विश्वास नहीं है तो उनसे मिलने वाले वेदों पर विश्वास होना सिद्ध नहीं होता और जिनसे मिले हुए वेदों पर विश्वास है उनके ऊपर जिनसे आपको वेद मिले हैं जिनसे मिले हुए वेदों पर विश्वास है आपको

02:19:16:28 तो उन पर अविश्वास होना आपका सिद्ध नहीं होता या तो अगर गुरुओं पर विश्वास नहीं है परंपरा प्राप्त तो वेदों पर विश्वास मत करो और यदि वेदों पर विश्वास है तो गुरुओं पर विश्वास करो आया कुछ आपके समझ में मैं आपकी बात

⬜ Not used yet · 02:19:36:14 – 02:21:02:21 (1:26)

02:19:36:14 समझ रहा हूं तो आप मेरी बात सुनो एक मिनट जैसे आप जो बता रहे उनका जो नाम ले रहे हो जो आचार्य जी थे वो उन्होंने तो वेदों में बलि को भी स्वीकृत किया है यज्ञ में बलि को भी किया है और मूर्ति पूजा ये अगला चैप्टर होगा हम अगला चैप्टर लेते हैं मगर अभी आपके पास उनके ऊपर अविश्वास ना करने का कारण आप ठीक है आपको बलि खराब लग रही है ठीक है आप ये कहो भैया हम वो है जो वेदों को नहीं मानते क्योंकि वेद शंकराचार्य से आए हैं रावण जाचार्य से आए हैं हम वेदों को नहीं मानते मगर हम जो है बलि का खंडन करते हैं हम अवैध बलि के विरोधी है ये कहो हम अवैध है आप आप बलि को नहीं मानते क्योंकि शंकराचार्य ने अपने उसमें वो बलि को माना है और आपको शंकराचार्य पर विश्वास नहीं है तो आपका उनके ग्रंथों पर उनके जो वेद है उन पर विश्वास होना सिद्ध नहीं होता तो जब आपको वेदों पर विश्वास नहीं है आप यह कहो बली गलत है यह मत कहो हम वैदिक है यह मत कहो स्वयं को वेदों से क्यों जोड़ रहे हो जैसे आपको ईश्वर को निराकार बाधित सिद्ध करना है आप कहो कि ईश्वर निराकार है ईश्वर वादित है और ईश्वर जो है

02:20:51:16 बली बली वगैरह य सब गलत है यह कहो मगर स्वयं को वैदिक नहीं कह सकते कि हम को मानने वाले भाई आप आप तो ब कहते हो आप कसे

✅ This part is already used · 02:21:02:21 – 02:21:33:16 (0:31)

→ Used in: A · Video Alankar Samaj अपूर्ण ईश्वर or अधर्म ज्ञान #vedpuran #hindu #aniruddhacharyaji at 16:05 ↗

02:21:02:21 सिद्ध होते हो आप भी आप भी तो मानते पहले देखो वेदों का अर्थ जो भी निकले वो नैतिक है अनैतिक हैय एक अलग विषय है मगर वेद जहां से आए हैं उस पर हमें भरोसा करना पड़ेगा कि इससे हमने अगर वेद लिए हैं तोय हमारे लिए विश्वास पात्र है तभी उसके द्वारा दी गई सामग्री पर विश्वास होना हमारा सिद्ध होगा तो अपने को वैदिक कहने के लिए सबसे पहले हमारी गुरु परंपरा पर हमें विश्वास होना करना होगा ठीक

⬜ Not used yet · 02:21:33:16 – 02:48:50:00 (27:16)

02:21:33:16 है अब बात आती है बलि अब बात आती है बलि तो बलि का अर्थ है भेंट पहली बात तो बलि बहुत बड़ा चैप्टर है मगर इसको मैं अभी ऐसे समझा दूं कि क्या श्वर का अर्थ ये है कि संसार में कोई भी मरेगा नहीं जिसने जन्म लिया उसे तो मरना पड़ेगा मैं मतलब की लोगों की मृत्यु होती है ना हा होती है होती है वहा ईश्वर वहा ईश्वर पर दोष नहीं लगेगा य मरने क्यों दे रहा है लोगों को जिसका जन्म हुआ उसे तो मरना पड़ेगा कोई भी सही भाई ईश्वर चाहे तो रोक सकता है ना मरने से या य भी वादत है

02:22:23:00 क्यों सता तो उस पर दोष नहीं लगेगा क्यों मरने दे रहा है भाई जिसने जो जैसे जिसने जो कर्म किया उ उसे तो उसका फल मिले रोक सकता है कि नहीं मुझे यह बताओ कैसे मैं आपकी बात समझा नहीं ईश्वर मरने से बचा सकता है कि नहीं मरने वालों को बचा सकता है बताओ तो फिर उस दोष नहीं लग रहा कि तुम क्यों नहीं बचा रहे हो मरने से इसका अर्थ है मैं आपको यह समझाना चाह रहा हूं भगवत गीता के 2.1 आपकी भगवत गीता में कितना कितना है वो नहीं पता नॉर्मल जो सामान्य जो सच्ची जो परंपरा प्राप्त भगवत गीता है उसका जो दूसरा अध्याय है उसके 17 श्लोक से लेकर 31 श्लोक तक भगवान ने यह समझाया है कि ना कोई मरता है ना कोई मारता है जो ऐसा सम मूर्ख है सम हा तो वास्तविक सत्ता क्या है ये तो अविद्या है ना आर समाज के अनुसार बताऊ आपको कहां लिखा है यह तो अविद्या है जिसको आप जीना मरना समझ रहे हो यह तो अविद्या है और बोलो आर

02:23:38:13 समाज के अनुसार बता देता हूं वास्तविक तो ईश्वर की नजर में य सब क्या है किसी का मरना जीना क्या है क्या है ईश्वर की नजर में बताइए आप ईश्वर की नजर में यह सब नथिंग है कुछ नहीं और यह जो दृष्टि हमें प्राप्त है अविद्या युक्त दृष्टि जिसमें हमें किसी के मरने जीने से फर्क पड़ रहा है इसी दृष्टि से मुक्त हो जाना ही मुक्ति है इसी दृष्टि से मुक्त हो जाना ही मोक्ष है तो जब हमें जब जब हमारा मुक्ति के विषय में मुक्ति की स्थिति में जब हमारा यह मुक्ति की स्थिति में जब हमें किसी के मरने जीने से फर्क नहीं पड़ रहा है तो हम यह क्यों सो सोच रहे हैं कि ईश्वर वही है जिसको किसी की हत्या होगी तो उसको अच्छा लगे या बुरा लगे ईश्वर का निर्धारण इस बात पर भी नहीं कर सकते आप कि नहीं ईश्वर वही है जो अच्छाई है जिसके अंदर से अच्छाई है ईश्वर सर्व शक्ति है ईश्वर ने सब कुछ बनाया है ईश्वर ने वो विचार भी

02:24:53:15 बनाया है जो विचार ये कह रहा है कि इसकी बलि दो पहली बात अब दूसरी बात आ जाती हैय एक पॉइंट हो गया बलि के संबंध में अब दूसरा आ जाता है एक जगह आपके भाष्य में लिखा है कहीं पर कि फलानी फलानी स्थिति में गाय को मार दो वो दिखा दीजिए जरा गाय वाला प्रकरण दिखाओ हम भी तो दे हम भी चेक करेंगे दिखाओ मारने वाला प्रकरण दिखाओ व गाय को मारने वाला प्रकरण दिखा जरा आर्य समाज के भाष्य में आ जा

02:26:02:00 [संगीत] हेलो मैं आपसे बड़े भाई एक बात कहना चाहता हूं सुनिए सुनिए सुनिए आपको मैं दिखा दू एक जगह पर सुनिए जो बलि है पहली बात जो बलि का प्रावधान है सनातन वैदिक वांगम में जो परंपरा प्राप्त गुरु के द्वारा स्वीकार किया जाता है वो मासा हार के संकुचन में है उसका परवन सर के प्रोत्साहन में नहीं संकोचन और प्रोत्साहन का अर्थ समझिए जैसे कि कहीं पर निर्विवाद रूप से कोई कार्य हो रहा है ठीक है और वोह ऐसा कार्य है कि उसको डायरेक्ट हम लोग मना करके उसको खत्म नहीं कर सकते हैं सीधे तो वहां पर एक नियम लागू कर दिया गया जैसे कि मान लीजिए अभी आप और हम भी आजकल

02:27:17:22 समय पड़ने पर दवाइया यूज करते हैं कई बार दवाइयों में हा इसको बड़ा करिए जरा जहा मारने की बात हो रही है लाइट कर सकते हैं क्या थोड़ा बड़ा करके कहां पर है

02:28:00:00 इसमें हां यह लिखा है जहां एरो है इस समय वहां देखिए वहां पर लिखा हुआ है कि वन में रहने वाले गौ से फलाना फलाना होता है और उसको मार देना चाहिए और यह कहां पर लिखा है कौन से ग्रंथ का नाम है कौन सा ग्रंथ है

02:28:39:02 ये ये महर्षि दयानंद कृत भाष्य है और इसकी डिटेल भी हम डाल दंग नीचे ठीक है ये कौन सा कौन सा ग्रंथ है बड़े भाई जी आप आप ऐसा करिए ग्रंथ का नाम लिख दीजिए अलग से इसमें स्पष्ट दिखाई नहीं देगा अलग से यहां लिख दीजिए पट्टी लगा दीजिए कौन सा ग्रंथ मंत्र मंडल अध्याय सूक्त य सब लिख दीजिए तो अब बात य आती है कि जैसे एक डॉक्टर होता है ना एक डॉक्टर होता है वो भी मास को काटता है ऑपरेशन के टाइम पर काटता है मगर उसके प्रयोजन को अगर हटा लो पीछे से तो उसमें और एक हत्या करने वाले में मास को काटने वाले में अगर कोई आपके द्वेष वश एक कांटा भी चुबे वो भी हिंसा है मगर वहीं पर डॉक्टर यदि आपका इलाज करने के लिए आपका मास काटे वो भी हिंसा नहीं है इसी प्रकार से जो अमुक अमुक स्थितियों से निकलने के लिए बचने के लिए अमुक अमुक चीजें हुई है अमुक अमुक स्थितियों से निकलने के लिए अमुक अमुक विधियों का आलंबन लेते हुए जहां जहां पर गौ

02:29:54:18 मास जो मास है मा बली इत्यादि का वो किया गया है वो केवल उसके उसका परवन जो है मांसाहार के संकुचन में है अगर ऐसा होता कि बलि को स्वीकार करते तो आप बलि को बलि का प्रोत्साहन करते तो आप यह बताइए करपात्री जी के ऊपर अभी आलम वो लगाया जाता है आक्षेप शंकरा उन्होंने कितनी बार बलि दी और कितनी बार मास खाया इसमें ऐसा है इसमें ऐसा होता है कि आवश्यकता पड़ने पर जब आपकी स्थिति ऐसी है कि मास से ही काम चलना है तब उस काम के लिए आपको विधि दी गई कि ऐसे ही खाना ऐसे नहीं खाया तो आपके लिए और पाप हो जाएगा खाना तो ऐसे ही खाना उस विधि के कारण आप निर्विवाद रूप से जब उसका सेवन नहीं करेंगे तो आप अनुशासित रहेंगे और से आपके मन में उसके प्रति उससे प्रथक होने की भावना उत्पन्न होगी जैसे एक डॉक्टर के पास दो लोग जाते हैं एक सिगरेट बहुत पीता है बेत सिगरेट पीता है और एक सिगरेट पीता है सिर्फ दो तो यजुर्वेद

02:31:10:03 13 अध्याय और उवा मंत्र देख लीजिएगा हा मेरे पास हा तो जैसे दो लोग अगर उसके के पास गए डॉक्टर के पास तो एक को डॉक्टर ने कहा कि आज से तुम केवल आज से तुम सिगरेट नहीं पियोगे जिसने दो जिसने जिसने जो दो सिगरेट पीता था और जो बिना किसी सीमा के सिगरेट पीता था उसको डॉक्टर ने कहा कि आज से आप केवल आठ सिगरेट पिएंगे केवल आठ तो क्या हुआ जो 50 पी रहा था उसको आठ के रूप में उन्होंने संकुचित कर दिया तो उसका परवन अंत उससे पतक होने में आ आज कहा गया अगली बार डॉक्टर के पास फिर जाएगा अब तुम छह पिया करो ये क्या हो रहा है उसकी जो असीमित जो सीमित सीमा रहित था उसका सिगरेट का सेवन उसको उन्होंने मर्यादित किया इसी भाव को यहां पर वेदों में जहां जहां पर बली को स्वीकार किया गया है परंपरा प्रात आचार्य के द्वारा यही भाव है वहा पर परि संख्या विधि आज के टाइम में आर समाज को मानने वाले कई लोग जब दवाई लेने जाते हैं ना मेडिकल स्टोर प तो उनका उसमें कई कई दवाइया ऐसी होती है जिसमें की पशुओं

02:32:25:13 का उपयोग किया होता है मगर मगर वहां प वो वहां प उस तरह से उसको ग्रहण करना अ विधि पूर्वक है ऐसी स्थितियों से बचने के लिए ही विधि दी गई है ऐसी स्थितियों से बचने के लिए ही विधि दी गई है ये करपात्री जी ने गौ माता पर एक पूरा ग्रंथ लिखा है गाय एक समग्र चिंतन और आप लोग कह रहे हैं कि वो ग के वो थे पक्षधर है नरी बात सुनो एक मिनट मेरी बात सुनलो अप बात मैं अपनी पूरी बात कर लू तो पहली बात हमने ये जानी ईश्वर के होने का अर्थ ये नहीं है कि कोई मरेगा नहीं दूसरी बात हमने यह जानी कि ईश्वर ने हमको ही यह शिक्षा दी है कि आपको इस मरने जीने की दृष्टि से मुक्त होने वाली दृष्टि को प्राप्त करना है जिसे हम मोक्ष कहते हैं तीसरी बात यह है कि द्वेष वस किसी को कांटा चुप देने पर भी वो हिंसा कहलाए गी मगर अगर हित के लिए वो कार्य किया जा रहा है तो वहां पर वो हिंसा नहीं कहलाए गी जैसे डॉक्टर जब किसी का ऑपरेशन करते टाइम मास्क काटता है तो वो हिंसा में नहीं आता वो कार अभी मैं अगर चाकू से आपका मास काटू तो आप वो हिंसा होगी ठीक है अब इसके बाद

02:33:40:19 फाइनल बात ये है कि अमुक अमुक स्थितियों में आपके ग्रंथों में भी जीव हत्या का वो है निर्देश जीव हत्या का तो हम हमें इससे कोई आपत्ति नहीं क्योंकि वो स्थिति वश है इसी प्रकार की स्थितियों से निपटने के लिए विधियां दी गई है उन विधियों का जो परवन है वो मास के प्रोत्साहन में नहीं बल्कि उसके संकुचन में है जैसे कि मान के चलिए आजकल आपने हलाल सर्टिफाइड का नाम सुना है हां सुनाला सुना उसमें क्या कर रहे हैं लोग कि ज्यादातर आज के टाइम में यदि कोई हिंदू खा रहा है मास हम तो नहीं खाते मगर यदि कोई हिंदू मास खा रहा है आज के टाइम में तो वह ज्यादातर अगर उत्तर भारत की बात करें तो ज्यादातर उन दुकानों से ले रहा है जहां पर हलाल करके मास को काटा गया हो ठीक है ठीक अब क्या हो रहा है कि जब आप किसी किसी मुस्लिम से मास खरीदते तो उसम एक वो लगाई जा रही है कि वहां से वहा जो आपसे जो अर्थ ग्रहण किया जा रहा है उस अर्थ का नियोजन कहां होता

02:34:55:21 है जब कोई जब कोई मुस्लिम आपसे पैसे कमा रहा है एक तरीके से तो पहली बात तो आपने जब उसने हलाल करके काटा तो अप्रत्यक्ष रूप से आपने उसकी उस बात को स्वीकार कर लिया कि नहीं नहीं है कोई और पूजनीय सिवाय अल्लाह के कर लिया ना अल्ला हा क्योंकि आपने उस मास को सही मान लिया कि मैं खा सकता हूं सड़क में पड़ा हुआ मास तो आप नहीं खा सकते आप कलमा पढ़ के काटते है ना मैं मा कुछ नहीं खाता नहीं नहीं आप नहीं जो हिंदू मास खाते हैं वो हिंदू मास लेने जाते हैं कहां मुस्लिम मुस्लिमों की दुकान अब मैं मैं एक शाकाहारी व्यक्ति हूं मैंने मास कभी नहीं खाया ना ही मैं मास को प्रोत्साहन देता हूं मगर मैं मन में एक आईडिया सोचू कि भाई हमारे हिंदू भाई जो मास खा रहे हैं अभी मास को छोड़ने की स्थिति में नहीं है वो मास खरीदने जाते हैं मुसलमानों के पास और हमारी जानकारी में एक हिंदू ऐसा है जो रहता छत्तीसगढ़ में है मगर वह मास बेचता है तो मैंने क्या किया कि तू एक काम कर भाई तू अपनी दुकान यहां खोल ले जिससे कि यहां के जो हिंदू जो मास खाते हैं वह मास लेने वहां ना जाए तेरी दुकान से ले तो यह करके क्या मैंने मास

02:36:10:28 का प्रोत्साहन किया या फिर मैं एक समस्या से लड़ा बताइए समस्या से लड़ना हो गया य हां इसी प्रकार से वेदों में जहां जहां पर यह दी गई है बलि व्यवस्था वो समस्या से लड़ने के निमित्त है मास का कहीं भी प्रोत्साहन नहीं है जिसको परंपरा प्राप्त परंपरा प्राप्त आचार्य ने स्वीकार किया है कहीं भी अगर ऐसा होता तो हमारे मंदिरों में आदि शंकराचार्य जी गोवर्धन मठ में कहां पर बलि दी जाती है बताइए गोवर्धन मठ में हमारे आचार्य गण तो सन 66 में गाय माता के लिए आंदोलन कर रहे हैं उनको चोट लग गई उसके कारण वो जेल गए जेल की उस जेल में लगी हुई चोट के साथ ही उन्होंने अपनी देह का त्याग किया और उन पर आराम से आकर के खंडन करने के चक्कर में आराम से आकर के वीडियो बन जाता है कपात जी तो बलि के समर्थक के समर्थक थे गौ माता की बली के समर्थक नहीं है समस्या से लड़ने के निमित्त अमुक अमुक स्थितियों में अमुक अमुक विधियों का आलंबन लेने के रूप में बलि व्यवस्था है और इन सब का परवन अंत गत्वा प्रवृत्ति से निवृत्ति और निवृत्ति से निर्वत में कि आप अपनी उस चीज से दूर हो पाओ अगर आपको खुला छोड़ दिया

02:37:26:03 जाएगा तो आप उसी मेंही उलझे रहोगे अगर आपको खुला छोड़ दिया जाए जैसे विवाह इत्यादि में जो संबंध बनाए संबंध होता है संभोग इत्यादि के विषय [संगीत] में संभोग इत्यादि के विषय में अगर विवाह की सीमा नहीं डाली जाएगी तो क्या होगा व्यक्ति निर् रूप से कहीं भी संबंध बनाता रहेगा तो कभी निकल पाएगा संबंध बनाने से नहीं निकल पाएगा क्योंकि उसके गर्भ से वही निकलता जाएगा और और और तो इसलिए विवाह की एक विवाह की सीमा मर्यादा कि विवाह में रहकर व्यक्ति सीमित हो जाए फिर धीरे धीरे धीरे धीरे उसके जीवन में वैराग्य आए प्रवृत्ति मार्ग का आलंबन लेते हुए निवृत्ति उसी प्रकार से है तो इसको भी सामर्थ वान गुरुओं से समझने वो है अगर सामर्थ्य वान गुरुओं के पास जाकर के हम समझने का प्रयास करें सकारात्मक बुद्धि के साथ तो ऐसा नहीं है सब चीजों का निवारण है सारे प्रश्नों का उत्तर है मगर होता क्या है व्यक्ति सामर्थ वान गुरुओं के पास जाता नहीं है और दूर ही दूर से जो उनके बारे में कु प्रचार किया जा रहा है उस कु प्रचार को आधार मान कर के अपनी अपने

02:38:41:03 सिस्टम बना लेता है बना लो कोई बात नहीं मगर स्वयं को वैदिक मत कहो क्योंकि वेदों को मानोगे तो परंपरा को मानना होगा और अगर परंपरा को नहीं मानते तो वेदों को नहीं मानने वाला बनना होगा जी मेरी बात मेरी बात सुनोगे बड़े भाई मैं ये कह रहा हूं सुनो पहली बात तो मैं आर्य समाज को फॉलो करता हूं क्योंकि मुझे कुछ बातें आर्य समाज की बहुत अच्छी लगती है और जतर अच्छी बातें लगती है मेरे को और मैं रियल बताऊ मैं ये चाहता हूं देखिए यहां बात ये नहीं हो रही आप किसको फॉलो करते किसको नहीं बात ये हो रही है अगर आप परंपरा का खंडन करेंगे तो आप वैदिक सिद्ध नहीं होते आप आर समाज को मानिए स्वयं को वैदिक मत कहिए कहिए सीना चौड़ा करके कि मैं वैदिक नहीं हूं आप आप जो है ईश्वर को बाधित करिए आप निराकार ईश्वर की पूजा करिए कोई दिक्कत नहीं है मगर फिर ईश्वर को अनंत सामर्थ्य वान मत कहिए आप सु पहले आप सुनोगे पहले जी मैं ये कह रहा हूं जैसे आप वेदों के बारे में चर्चा कर रहे हो मैं वेदों का विद्वान तो नहीं हूं पर मैं यह चाहता हूं कि आप मैं किसी विद्वान से आपकी

02:39:56:10 चर्चा कराना चाहता हूं चलो डिबेट नहीं करोगे चर्चा करोगे फिर क्यों नहीं करेंगे मैंने तो कितनी बार कहा है जो आना चाहे आ सकता है जैसे आपकी वीडियो देखी जैसे आप आर समाज के उन में जाते हो मंदिरो में काफी मंदर में आपने वीडियो काफी देखता हूं फलो आपको भी कर रहा हूं कर रखा मोबाइल पर तो मैंने देखा है उनको सही तरह से जानकारी नहीं है आप सही वालों को ले आइए जैसे मैं जानता हूं जैसे अंकुर आर जी अंकुर आर जी गौतम खट्टर जी है और राहुल आर्या जी मैं इन सबको जानता आप उनको ले आइए हा मैं सुनो मैं खुद चाहता हूं कि एक बार दूध का दूध पानी का पानी हो जाए जो सही हो वो सही हो बिल्कुल बिल्कुल ले आइए आप ठीक है और क्या चलिए आने के लिए आभार और सकारात्मक रवैया दिखाने के लिए अच्छा लगा आप लाइए उनसे चर्चा करेंगे ला मेरी एक बात सुनो आप जी आप एक बात सुन मैं आपकी जो जो आपने वो दिखाया था ना ग के बारे में बताया था जो करपात्री महाराज की बुक है जो उसका नाम क्या आपने बताया गाय एक समग्र एक बार और दिखा दीजिए

02:41:12:09 उसको मगाऊ ना कहा मिलेगी वैसे अगर मिले तो पीडीएफ तो मिल जाएगी नेट पर तो होगा पीडीएफ हा नेट प है चलो मैं लोड कर लूंगा उ गाय एक समग्र चिंतन स्वामी करपाती जी महाराज चलो मंगाऊ मैं उस पुस्तक को मंगाइए पढ़िए और हो सके तो पाच ग्रंथ भी पढ़िए मन से पढ़िए विरोधाभासी बनकर ना पढ़े आपको बहुत सारे प्रश्नों के उत्तर मिलेंगे बड़े भाई सुनो मैंने स्टार्टिंग में गोरखपुर की गीता जी पढ़ी थी और मेरे पास भगवत पुराण भी है और आप मेरी बात समझिए एक सीमा होती है परंपरा प्राप्त गुरुओं के जो सिद्धांत है ना उनकी सीमा में जब हम स्वा अध्ययन करते हैं तब हमें समझ में आता है अगर हमारे गुरु नहीं है सुनिए तो हम स्वाध्य जो करेंगे उससे हमारी मति भ्रष्ट होगी ये भी शास्त्र में ही लिखा है बड़े

02:42:27:14 भाई जी मेरे सवालों का जवाब नहीं मिला था नहीं मिलेगा आप सामर्थ मान गुरुओं के पास जाइए तब मिलेगा आप ये कहते हो कि सामर्थ वान गुरुओं के पास जाओ वो केवल ब्राह्मण को ही शिक्षा देते हैं और किसी को देते ही नहीं है कहां कहां लिखा है बताइए कहां खा भाई जी लिखा नहीं है मैं खुद बृंदावन गया हूं वो खुद लेते ही नहीं है साहब अभी अभी अभी चातुर्मास लगा है अभी जो गुरुदेव शिविर चल रहे हैं लोगों के प्रश्नों के उत्तर देते हैं जब वहां माइक लेकर खड़ा होता है व्यक्ति तो उससे जात जात उसकी पूछी जाती है क्या किस जात के हो आप अनिरुद्धाचार्य जी के उसम गए थे एक मिनट आप अनिरुद्धाचार्य जी की सभा में गए थे तो उन्होंने कौन सा बड़े भाई सवालों का जवाब दे दिया मैं नहीं नहीं नहीं मैं आपसे पूछ रहा हूं गए थे कि नहीं गए थे हां गया था मैं गए थे क्या क्या उन्होंने आपसे अपनी जात आपकी जात पूछी थी क्या जात नहीं पूछी तो उन्होंने सवालों का जवाब कौन सा दे दिया बड़े भाई जी सवाल का जवाब यह कहते हुए नहीं दिया था कि तुम ब्राह्मण नहीं हो हम तुम्हें उत्तर नहीं देंगे उन्होंने कैसे भी नहीं दिया था अभी आप अभी आप यहां पर आए हैं मैंने आपसे कहा कि मैं आपको जवाब नहीं दूंगा आपने तो नहीं कहा ना मन गंत

02:43:42:15 बात है कि वो केवल ब्राह्मणों को ही शि ये तो ये क्या है ना ये द्वेष है फिर अभी तक मुझे लग रहा था आपके अंदर द्वेष नहीं है ये साबित करिए पुरी शंकराचार्य जी का एक वीडियो दिखाइए जहां पर उन्होंने जात को पूछकर उत्तर दिया या ना दिया हो मना कर दिया होगा तुम जात हो तुम्ह उत्तर नहीं मिलेगा मैं शंकराचार्य जी की बात नहीं कर रहा हूं बड़े भाई जी परंपरा प्रात आचार कौन है परंपरा प्राप्त आचार्य कौन है जैसे वृंदावन में गुरुकुल खुल रख परंपरा परंपरा देखिए वृंदावन में ऐसे ऐसे लोग हैं जो वैष्णव टीका पैरों में लगा रहे हैं फिर क्या करेंगे वृंदावन में ऐसे वृंदावन में तो स्कन वाले भी है विदेशों से आ रहे गुरु हमारे इंपोर्ट हो रहे हैं वहां से गुरु वि फिर क्या करेंगे मैं सुनो देखो बड़े भाई मेरे बच्चे हैं तो ठीक है मैं उनके एडमिशन के लिए पूछने गया वृंदावन में तो उन्होने क्लियर मना कर दिया देखिए दो चीज है अब य पर विषयात हो रहा है हम लोग फिर बात करेंगे आप उसको लेके आइए हां कर लेना एडमिशन बात अलग होती है शिक्षा बात अलग होती है एडमिशन में व से निकलती है

02:44:58:10 नहीं ऐसा नहीं है ऐसा नहीं है आप आपका वर्ण क्या है वैसे जन्म से जन्म से हम तो प्रजापत क्या है प्रजापति हां मतलब प्रजापति अर्थात कुमार है कुमार हां अच्छा हां जी ठीक है तो आप अब आपसे फिर किसी दिन होगी चर्चा और आप अपने प्रश्न कहीं पर भी जाकर पूछिए आपको पूरा प्रश्न का उत्तर देने का प्रयास किया जाएगा हमने आपसे आपका वर्ण नहीं देखा आप पूरी शंकराचार्य जी की सभा में जाएंगे आपसे वर्ण नहीं पूछा जाएगा आपका आप अनिता चार्य जी की सभा में जाएंगे आपसे आपका वण नहीं पूछा जाएगा ठीक है तो यह बात गलत है कि शिक्षा देने से मना कर दिया जाता है तो भी तो जन्म से ही मानते हैं भाई साहब अब आप किसी और को लेकर आइएगा वरना मैं एक घंटे वो दूंगा अपनी समाधान आप लास्ट में कह दोगे मैं किसी और को लेके आऊंगा तो आप किसी और को ले ठीक है चलो भी चाहता य हा जय श्री

02:46:09:21 राम चलिए आज का समाप्त करते हैं बहुत सारे लोग हैं चेहरा नहीं दिखा रहे जो दो बाकी के हैं समाप्त करते हैं आज का भी बहुत ज्यादा मुझे नहीं लगता है कि उपयोगी रही आज की चर्चा क्योंकि लगभग तीन घंटे होने जा रहे हैं और कोई एक एक धारा में हम लोगों की बात नहीं हुई ठीक है सभी को जय श्री राम कुमार आर जी आप किसी दिन आए दो घंटे 46 मिनट की हो चुकी है यह आप किसी और दिन आए जय श्री

02:47:02:15 राम एक मिनट में पूछ लू और सभी को एक बार फिर से मैं याद दिला दूं हमारा नामा स्त्र ऑपरेशन नाम जप शुरू हो रहा है कल से आप लोग इस अभियान से जुड़ सकते हैं ना मास्त्र को उठाइए और उसमें संग की शक् का भी आलंबन है और भगवान की ईश्वर की भक्ति का भी आलंबन है नामा स्त्र उठाइए और साथ में मिलकर के भगवान के नाम का आहवान करिए नास्त्र ऑपरेशन नाम जप से जुड़िए फॉर्म के लिए आपको हमारे नंबर पर ट करना है कॉल ना करें ट करें 7408 30169 पर इस पर ट करने पर आपको प्राप्त होगा

02:48:19:10 एक ऑटो जनरेट मैसेज उसमें कई फॉर्म होंगे एक यह भी फॉर्म होगा नाम नामा स्त्र से जुड़ने का और किसी प्रकार के वैचारिक मतभेद के निमित्त अगर आप लाइव चर्चा करना चाहते हैं तो उसके लिए भी उसमें फॉर्म होगा सभी को जय श्री राम हम

Plans for this video (0)

No Plans yet. Press "✂️ Open Clip Cutter" to make one.

🤖 Ask AI for suggestions

AI reads the remaining (unused) parts of this video and gives ideas for new videos: from where to where, hook, and what to remove from the middle. Suggestions follow the RULES and appear here as "AI Suggestion". You can review, edit or approve them.

Live: Required tasks are not set on the Rules page yet.

  • ⬜
    Hindi SRT

    YouTube Studio → Subtitles → Hindi → upload the SRT file. (Checked automatically once OAuth is connected.)

  • ⬜
    English SRT

    YouTube Studio → Subtitles → Add language → English → upload the SRT file.

  • ⬜
    Title (per Rules)

    Check the title against the RULES on honorifics, names and terms.

  • ⬜
    Description

    YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.

  • ⬜
    End Screen

    YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.

  • ⬜
    Cards

    YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.

  • ⬜
    Playlist Automatic

    YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.

  • ⬜
    Thumbnail

    YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.

"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.

Playlists

Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).

A: AHVAAN - Call Of Dharma Live 2:48:50 · 02 Oct 2024

Discussion with Arya Samaj Follower आर्यसमाज का ईश्वर #aryasamaj #vedpuran #snatandharm

% not set
☁️ Drive Not in Drive yet

🔗 This video is made from parts of these videos

A · Video A Reply To Neech Follower Of Iskcon #iskcon #iskconfollowers #iskconde...
Open at 00:45:32:07

Notes

Description

(empty)

History

No changes yet.

✂️ Clip Cutter

⌨️ Keyboard shortcuts

Space Play/Pause · I Set start · O Set end · ←→ 1 second (Shift: 5) · ,. 1 frame · P Preview · Enter Add clip · Esc Stop

▶

Start

End

🔍 zoom
Already used Plan clips
⚠️ () of this clip is already used in another video (green part). Fine if on purpose, otherwise change the times.
✂ Remove (middle part: bad audio, bad section)

Move the video to that spot (click the SRT or the bar), then press "Start"/"End".

Clips () · Total

Add clips above. They will appear here; drag (⋮⋮) to reorder.

Hook, full note for editor, status