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00:00:03:01 जय श्री राम सभी को आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और मुख्य विषय पर आने से पहले मैं आपको एक सूचना दे दूं हां तारेंद्र जी आप जुड़िए लिंक भेजा हुआ है आपको ब्लॉक बता रहा है ब्लॉक है आप अनब्लॉक कीजिए क्या कहा पर ब्लॉक बता रहा है जब उसे लिंक को टच किया हां तो फिर थोड़ा घूम और ब्लॉकेड बता रहा है। यू आर ब्लॉक यू आर ब्लॉकेड

00:00:38:02 अच्छा तो देखिए भाई ऑपरेटर जी उनको ब्लॉक बता रहा है वो अब आप किसी दूसरी आईडी से जुड़ जाइए। किसी दूसरी आईडी से जुड़ जाइए। हेलो तो मुख्य विषय पर आने से पहले आपको एक सूचना दे दूं कि जो हम लोगों ने जो उस दिन विरोध प्रदर्शन किया था उसमें कुछ अपडेट्स हैं। विरोध प्रदर्शन हमने एक समोसे वाले के समोसे वाले का विरोध किया था। उसका नाम है संजय गुप्ता। वह और उसका भाई दोनों ही लोग वहां पर समोसे बेचते हैं। एक सुबह एक शाम और उसी से उनका आजीविकोपार्जन उनका घर घर

00:01:28:00 और जब हमने विरोध किया तो वहां पर कई लोगों ने आपत्ति जताई हां तारेंद्र जी बताइए वो अभी ब्लॉकेट ही बता रहा है अगर आगे मांगेगा दूसरी आईडी तो मैं दूसरी खोल लूंगा लेकिन वहां तक जाने का मिल ही नहीं रहा ना मैं आपका नंबर दे रहा हूं अपने ऑपरेटर जी को वह आपसे बात करेंगे ठीक है ठीक है। तो शुभ सूचना यह है कि जिस समोसे वाले का हमने लखनऊ में पुतला दहन किया था रामपाल का जिस दिन हमने रामपाल का पुतला दहन किया था। उसी दिन हमने रामपाल के एक समर्थक वो जो समोसे बेचता है उसका नाम संजय गुप्ता है। उसका भी विरोध किया था और जो सामान्य

00:02:43:01 हिंदू वर्ग है उससे अपील की थी कि आप जो है इस समोसे वाले का बहिष्कार करिए। सामाजिक बहिष्कार और लोगों ने किया। सामाजिक बहिष्कार किया। लोग आपत्ति जताने लगे। कई लोग वापस लौटने लगे हैं। पहले तो दो दिन उसकी दुकान ही नहीं खुली थी। उसने ठेल नहीं लगाई थी दो दिन तक और वह शायद अपने बाबा जी के जो अड्डे हैं वहां पर चक्कर काट रहे थे कि हमारी मदद करिए। आपने एक रिकॉर्डिंग भी सुनी होगी हमारे चैनल पर जिसमें कि रामपाल का एक भगत और रामपाल के जो स्टार प्रचारक हैं उनको फोन लगा के कह रहा है कि भाई इसको इन बातों का क्या जवाब दें? वो हमारा जीना दुश्वार किए हुए हैं। तो अह

00:03:31:25 जब यह सब चीज़ें हुई तो वह व्यक्ति जो है परेशान हुआ और वैसे वहां वहां से हमारा जो बोर्ड है वो किसी ने हटाया जाहिर सी बात है उसी ने हटाया है। पर वो यह बात स्वीकार नहीं करेगा कि मैंने ही हटाया है। ठीक है? हटाने के बाद भी उसको जब संतुष्टि नहीं पहुंची क्योंकि उसका जो बिजनेस वहां पर हो रहा था भीड़ लगती थी समोसे के लिए वह कम होने लगी गिरावट होने लगी वो पहुंचा थक हार करके अपनी नजदीकी पुलिस चौकी और उसका यह कहना है कि वो अपनी दुकान पे जो फोटो लगा के रखता था बाबा की जेल कट्टू बाबा की वो फोटो उसने हटा दी है हाथ जोड़ के माफी मांग रहा है कि भाई अब मैं जो है आगे से इस बात इनका इनका प्रचार नहीं करूंगा। मुझे क्षमा कर दीजिए। तो हमने समय लिया है। हमने समय दिया है कि हम भाई हम तो दोबारा विरोध करेंगे और इस बार जब ठेल लगी होगी और लोग समोसे खा रहे होंगे और तब वहां पर जाकर के पर्चे बांटेंगे जिसमें तुम्हारी जानकारी लिखी हुई होगी। हमने यह कहा है तो उसको समय दिया गया है और जो पुलिस विभाग है उसने भी आश्वासन दिया है कि वह बातचीत कर रहे हैं।

00:04:48:02 हमने ये कहा कि आप प्रचार करो या ना करो। अब गाड़ी आगे आ चुकी है। प्रचार बंद करना था तो पहले करना था। अब बात आगे बढ़ चुकी है। अब तो वो घातक मूवी का डायलॉग था ना एक बढ़िया। अब तो अब तो जिसके गुर्दा होगा वही जि वही जिएगा। है ना? जिसके पास गुर्दा है उसी को जीने का हक है। जैसे घातक का एक डायलॉग था। तो वो एक सिचुएशन अब पार हो चुकी है कि अब हम करें या ना करें। तो अब क्या है कि हमारे साथ हमारे हिंदू समाज के साथ उसी का व्यवहार होगा जो हिंदू समाज के प्रति कम से कम अपमानजनक बातें नहीं करता है। अपमानजनक चीजों से जुड़ा हुआ नहीं। आपकी श्रद्धा अपनी किसी में भी है, जो भी है, वह आप मान रहे हो, ठीक है। मगर आप ऐसी सामग्री से यदि जुड़े हुए हो तो आप हमारे विरोधी हो। जो हिंदू प्रतीक चिन्हों का, हिंदू देवी देवताओं का जितने भी हिंदू के सम्माननीय घटक हैं उन सब का यदि तिरस्कार हो रहा है, अपमान हो रहा है। ठीक है? ऐसी चीजों से यदि आप जुड़े हुए तो आप हमारे विरोधी हो। हम अपने समाज का आह्वान करेंगे कि आपका बहिष्कार किया जाए सामाजिक

00:06:03:03 आर्थिक हर तरह से और वह अब होगा मैंने कहा तो अब कुछ छह सात दिनों में इसके आगे की चीजें होंगी अगर कुछ उधर से ऐसा कुछ आता है वापसी का मार्ग प्रशस्त होता है उसका सनातन में आने का तो ठीक है और नहीं होता है क्योंकि बाबा जी रक्षा करेंगे ना होता है तो हम पर्चे बांटेंगे और उसके बाबा जी उड़ के बचा लेंगे उसका सब धंधा पानी सब कुछ तो यह अपडेट्स हैं और कुछ टेक्निकल मुझे लग रहा है दिक्कत आ रही है जो आज आने वाले हैं तारेंद्र जी उनको जुड़ने में मैं एक बार देख लेता हूं

00:09:37:13 तो कुछ तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं। ज्यादातर जो जैसा कि गरिमा गीता की में लिखा हुआ है गरिमा गीता की में लिखा है कि जो रामपाल को मानने वाले लोग लोग होते हैं वो अनपढ़ होते हैं ज्यादातर तो जो आने वाले फॉलोअ हैं जो रामपाल के वो जो है उनको जुड़ने में दिक्कत आ रही है। दूसरी आई भाई एक आईडी शायद उस दिन वह कुछ ऐसा कर रहे होंगे जिसकी वजह से उन्हें ब्लॉक किया गया होगा तो आज जो है

00:10:25:13 अब वो दूसरी आईडी से जुड़ने में उनको परेशानी आ रही तो उसी को लेकर के कुछ देर लग रही है। आ जाते हैं तो हम बात शुरू करते हैं तब तक अगर पहाड़ी जी या शास्त्रवाद जी उपलब्ध है तो वह आ सकते हैं। कुछ चर्चा हो जाए कुछ चीजों की। आप लोग कुछ क्वेश्चन पूछना चाहते हैं तो आप पूछ सकते हैं। रामपाल के जो Instagram पर फॉलोअ हैं वह 10 लाख पर थे और अब

00:11:04:24 जय जय श्री राम। ये संख्याओं पर मत जाइए। जुगनू

00:11:11:20 और उल्लू सूर्य के प्रकाश की ओर आकर्षित नहीं होते हैं। टिमटमाते हुए दिए की ओर आकर्षित

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00:11:17:10 होते हैं। एक ही परम तत्व स्वयं को जीव जगत और जगदीश्वर के रूप में प्रकट करता है। उसके बाद ब्रह्मा रूप से वो सृष्टि बनाते हैं। विष्णु रूप से पालन करते हैं और शिव रूप से सृष्टि का लय कर लेते हैं।

00:11:56:19 सृष्टि की उत्पत्ति एक बार नहीं हुई है। कई बार हुई है। तो कल्प भेद से किसी में परम तत्व के परम तत्व को शिव नाम परम तत्व के शिव नाम की परम तत्व के शिव नाम को प्रधानता दी जाती है। किसी कल्प में विष्णु नाम को और फिर उसी को प्रधान मानते हुए अन्य को उनसे प्रकट दिखाते हुए उसमें महिमा का गान होता है। हां जी शास्त्रवाद जी जय श्री राम। जय श्री राम भैया जय श्री राम जी आज आज तो हमारा विचार में है कि आज बहुत अच्छा डिस्कशन होगा जो भी आएंगे लेकिन अब तक तो वो यहां नहीं रहे एक एक शुभ सूचना यह है कि जो व्यक्ति पहले रामपाल का प्रबल प्रचारक था रामपाल की फोटो चिपका के रखता था अपनी समोसे की ठेल पे उसने अपने समोसे की ठेल से अपने बाबा जी की फोटो फोटो हटा दी है। खुद हटाई है। क्यों हटाई है? क्योंकि उसको धंधा करने में क्योंकि उसको धंधा करने में दिक्कत आ रही थी। इसलिए उसने अपने बाबा जी की फोटो हटा दी है। अब वो छुप करके अपने बाबा जी की भक्ति

00:13:11:25 करेगा। मगर बाबा जी का नाम प्रचारक नहीं बनेगा। नाम बता करके लोगों को प्रचारक नहीं बनेगा। यह उसने खुद ने कहा है कि अब मैं कभी प्रचार नहीं करूंगा। फोटो भी हटा दी ठेल से और बाबा जी रक्षा करने के लिए नहीं आए। जी जी भैया ये तो बहुत बढ़िया बात है कि आखिर इस प्रकार के वो कर रहा है कि इधर से करने से आपने कुछ आपने कुछ हेडफोन वगैरह लगाया है क्या?

00:13:47:03 नहीं नहीं बिल्कुल नहीं। कुछ आवाज कट रही है क्या मेरी? बहुत डिस्टर्ब आ रही है। आ गए आ गए तारण जी आ गए शास्त्रवाद जी चर्चा के बाद आपको लेते हैं। ठीक है। [गला साफ़ करने की आवाज़] आवाज नहीं आ रही है आपकी तारेंद्र जी

00:14:27:10 तारेंद्र जी जय श्री राम दोबारा जुड़िए एक बार तारेंद्र जी आपकी आवाज नहीं आ रही है अब आ रही है हां तो हां अब आई आपकी आवाज तो मैं शुरू करता हूं परमात्मा की दया से आप उस दिन एक भगत को कह रहे थे कि मैं गायत्री मंत्र का जाप करता हूं बोले सेना तो कृप गायत्री मंत्र का अर्थ बनवाएंगे हम लोग हम लोग किस विषय में बात करने बैठे हैं ये बताएंगे शास्त्र पर शास्त्र किसे कहते हैं देखिए आप आपने कहा है मत पड़ो कोई चक्कर में नहीं है कोई टक्कर में तो आपके टक्कर में कोई नहीं है मतलब आप सर्वज्ञानी है हम तो अनपढ़ गवासी है हम तो गुरु के शिष्य है ना ये आप हम अरे हम अरे भाई तुम बोलते ही रहोगे कि हम मुझे भी बोलने दोगे पहले मुझे बोल लेने दो उसके

00:15:42:16 बाद बोलने दो तुमने तुमने तीन चार बातें बोली उसमें से किसी एक आध बात में हमें आपत्ति है तो हमें तुरंत बोलना पड़ेगा सुनो तो जैसे तुम गुरु के शिष्य हो नहीं अवसर मैं लूंगा अपने आप सुनिए जैसे तुम किसी गुरु के शिष्य हो वैसे ही मैं किसी गुरु का शिष्य हूं। ठीक है? पहली बात और मत पड़ो चक्कर में कोई नहीं है। टक्कर में का मतलब है कि जो भी व्यक्ति परंपरा प्राप्त सनातन सिद्धांतों के विरुद्ध खड़ा हुआ है। यह उनको उद्घोष है कि मत पड़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में। अब आपने तीन दो तीन बातें कही है। एक तो आपकी चर्चा शास्त्र पर है। एक तो आपकी चर्चा शास्त्र पर है। दूसरी कि आप अपने गुरु के शिष्य हो। तो आप मुझे पहले देखो ऐसा है कि यहां पर आकर के वही बात बोलो जिसको सिद्ध कर पाओ। एक भी पॉइंट ऐसा बोलोगे जिसको सिद्ध नहीं कर पाओगे मैं उसी को खींचूंगा। उसी को पकड़ लूंगा। अब आपने कहा है कि मैं गुरु का शिष्य हूं। है ना? हम तो गुरु का अर्थ क्या होता है? जो अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए।

00:16:58:28 जो अंधकार से प्रकाश हो वही गुरु कहलाता है। जो सत्य का मार्गदर्श करे जो मोक्ष दे वही गुरु कहलाता है। जो मोक्ष मार्ग बतलाए वही गुरु कहलाता है। हो गया। हां। अच्छा इधर सामने रहिए। थोड़ा अपना फेस सामने ले रखिए। हां। देखिए इधर पानी आने लगा। इधर पानी आने लगा। तो मैं स्थान भी चेंज किया हूं। हवा भी चल रही है। फिर ये देख रहे हैं। आप भी देख रहे हैं। मैं भी देख रहा हूं। तो भैया मैं इसमें क्या कर सकता हूं? यह बताइए। आप स्टैंड ले खरीदिए। एक 500 एक स्टैंड खरीदिए उसमें लगाइए उसको मोबाइल को अगर करनी है चर्चा तो। स्टैंड है वो रखा हुआ है लेकिन कोई काम का नहीं। तो मैं आप हिलिए मत बार-बार। हम हां। मैं हाथ में रख के चलना। है ना? आपने कहा है कि गुरु का अर्थ है जो अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए।

00:17:59:13 इसका मतलब है कि क्या आप मान लीजिए आप आपके घर में बत्ती नहीं आ रही है और ये अंधकार नहीं हां ये अंधकार रूपी अंधकार अज्ञान रूपी अंधकार से जो अज्ञान रूपी जो ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले जाए ज्ञान रूपी यानी कि कुल मिलाकर के जो आपको तत्व का ज्ञान दे दे हां तत्व किसे कहते हैं जो शास्त्रों का मर्म है भेद है। वही तत्व है। कहां लिखा है?

00:18:34:26 यह लिखा नहीं है। इसके लिए किसी तत्व ज्ञान बताने के लिए किसी को आना पड़ता है। ये लिखा है। तत्वों के विज्ञानों में भी तत्व है। पांच तत्व है। तो वो तत्व ले जाएंगे क्या? ऐसा कोई नहीं है जो सूक्ष्म सूक्ष्म बात बतला दे वही तत्व ज्ञान है हर चीज के बारीकी में कोई ना कुछ पार के पीछे होता है जो उसको बता दे वही तत्व ज्ञान है सूक्ष्म से सूक्ष्म बात वाह वाह वाह बहुत बढ़िया सूक्ष्म से सूक्ष्म बात बता दे वो तत्व ज्ञान है तो रामपाल ने आपको क्या सूक्ष्म ज्ञान दिया है सूक्ष्म ज्ञान गीता का दिया है वेदों का दिया है मंत्रों का दिया है साधना का दिया है वो क्या वो क्या दिया है बताया क्या है जो सूक्ष्म है उसका सूक्ष्म ज्ञान यह है कि जो गीता में वर्णित विधि गीता में लिखी नहीं है। लेकिन गीता में जो कहा गया है कि उस तत्व ज्ञान को तू तत्वदर्शी संतों के पास जाकर समझ। तो वो जो तत्व ज्ञान है सूक्ष्म ज्ञान है वही संत रामपाल जी महाराज ने हमें दिया है। वो क्या दिया है? वो बताओ। वो वो जो बताया कि वो ऐसा है वैसा है वो नहीं। यहां से ले वहां से ले। वो दिया क्या? जैसे जैसे मैंने एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट जैसे मैंने कहा कि

00:19:50:04 भाई आप जो है आपको जो है ये जो चीज है जिस जो आपके काम की है वो Honda के शोरूम पर मिलेगी और वहां पर वो तारेंद्र तारेंद्र करके कोई व्यक्ति होगा वो देगा ये सब तो मैंने बता दिया पर वो चीज क्या है एग्जैक्ट मोटरसाइकिल वो नहीं बता रहे हो आप वो बताओ वो क्या दिया उन्होंने बताया है वेदों और गीता के अनुसार एक पूर्ण परमादिक भक्ति करना चाहिए। अन्य अंत देव अन्य देवताओं का सम्मान करना चाहिए। लेकिन भक्ति से एक पूर्ण परमादिक करना चाहिए। यही गीता का सार है। सूक्ष्म है। ये सूक्ष्म बात है। सूक्ष्मतम बात है। ये और इससे सूक्ष्म अगर मैंने आपको बता दिया। इससे सूक्ष्म इससे सूक्ष्म अगर मैंने आपको बता दिया तो

00:20:39:01 अगर आपने कहा आपने आपने कहा [चीखने की आवाज़] आपकी बात चालू हो रही कि परमेश्वर परमेश्वर की सही भक्ति जिसने बता दी और अन्य देवताओं का सम्मान मगर भक्ति केवल परमेश्वर की ये आपने कहा ये आपका सूक्ष्म ज्ञान है जो रूप में एक परमात्मा की भक्ति करना चाहिए ये सूक्ष्म ज्ञान है ये सूक्ष्मतम ज्ञान है एक इसके अलावा इसके अलावा और इसके अलावा और वो सूक्ष्म ज्ञान है जो पुराणों में तो लिखा है लेकिन कथावाचक पुराणवाचक उसे समझ नहीं सके उसके पीछे का है मैंने क्या कहा है आपको सूक्ष्म ज्ञान क्या मिला है वो बता दीजिए सूक्ष्मतम ज्ञान वही तो बता रहा हूं ना कि जो वेद शास्त्रों में लिखा है जिसे अन्य अन्य आचार्य नहीं समझ सके मैं कथावाचक [हंसी] समझ सके ये मत बताइए कि कौन क्या नहीं कर पाया। आपका सूक्ष्म ज्ञान क्या है वो बता दीजिए। अब ठीक है। यहां पर देखिए उन्होंने जो भी बताया उसके अनुसार हम भक्ति कर रहे हैं। है ना? और ये मैंने कहा बताया। मैंने कहा क्या बताया? मैंने कहा क्या बताया? हमें जो बताया कर रहे हैं। नहीं नहीं वो सूक्ष्म

00:21:54:09 वो वो सूक्ष्म ज्ञान क्या है? जिसके कारण वो आपके गुरु है। उसके लिए आप गुरु जी का सत्संग सुन लेना आपको मिल जाएगा। अब रही बात इसकी मैं आपसे पूछता हूं। नहीं आप मुझसे अभी अभी आपने अभी आप रामपाल को अपना गुरु सिद्ध करिए और गुरु सिद्ध करने के लिए आप अपने सूक्ष्म सूक्ष्म ज्ञान को यहां प्रस्तुत करिए। बताइए क्या है सूक्ष्म ज्ञान? यानी कि एक मिनट एक मिनट एक मिनट। यानी कि जो उन्होंने आपको एक परमेश्वर की भक्ति करना सिखाया है वह एक परमेश्वर की भक्ति करना और भक्ति कैसे की है ये कैसे की जाएगी ये और किसकी की जाएगी ये ये सिखा है ये सूक्ष्म ज्ञान है हम और वो सब सूक्ष्म वेद में लिखा है अरे भाई मैंने कहा ये सूक्ष्म ज्ञान है क्या हां है हां तो अगर मैंने ने और इससे पीछे का ज्ञान दिया तो आप मैं आपका गुरु हो जाऊंगा। वो ज्ञान आप अपने पास रखे रहिए। हमें उसकी जरूरत नहीं है। क्योंकि आपका ज्ञान सूक्ष्म क्योंकि मैं ये सिद्ध करूंगा कि आपका ज्ञान सूक्ष्म नहीं है। उससे सूक्ष्म बातें मैं

00:23:09:10 करूंगा आपसे। आपकी मान्यता हो सकती है लेकिन हमारे कोई काम की नहीं है। नहीं है। मान्यता नहीं है। मैं ये बताओ ये बताओ। उसने उसने ये बताया आपको बाबा रामपाल ने। उन्होंने ये बताया आपको कि क्या कहते हैं? इसकी भक्ति नहीं करनी। सम्मान करना है। इसकी भक्ति करनी है। यह बताया। हम ये बताया कि भक्ति क्यों करनी है? मोक्ष प्राप्ति के लिए भक्ति करना है। मोक्ष है ये सिद्ध कैसे होता है? ईश्वर है सिद्ध कैसे होता है? क्योंकि वो शास्त्रों में लिखा है। ईश्वर है ये सिद्ध कैसे होता है? क्योंकि वो शास्त्रों में लिखा है। शास्त्रों में क्या शास्त्रों में क्या लिखा है ईश्वर के बारे में जिससे ईश्वर सिद्ध होता है? शास्त्रों में लिखा है कोई परमात्मा है। किसी लोक में रहता है उसके पास जाने को ही मोक्ष कहते हैं। मतलब कि आप आप एक मिनट मैं समझ लूं जरा। मतलब कि आपने कहा कि कोई ऐसा ग्रंथ है जिस पर आपको विश्वास है। उसमें लिखा है कि कोई दुनिया में एक परमात्मा है। है ना? जिसके पास जाने से मोक्ष जिसके पास जाने से मोक्ष मिलता है। ठीक है हम बस इसके

00:24:24:19 अलावा और कोई और कोई युक्ति इत्यादि नहीं है ना क्या है कि उस परमात्मा की भक्ति करने से उस लोक को चले जाना को ही मोक्ष कहते हैं। अरे भाई मैं कह रहा हूं ईश्वर ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध करने के लिए और कुछ है या शास्त्र का नाम है केवल इसके लिए और ये है कि जिन संतों को परमात्मा मिले उनके [हंसी] ये शब्द ये सब सब कुछ शब्द प्रमाण में आ गए ये सब कुछ शब्द प्रमाण हो गया जिसप हमारी आस्था उसने क्या कहा ये इसमें आ गया वही ग्रंथ हो गए वही वाणी हो गई ठीक है अभी मैं पूछ रहा हूं इन प्रमाणों से अलग तर्कसंगत कोई आपके पास उपाय है ईश्वर की सिद्धि का

00:25:16:02 इसके अलावा और क्या रहेगा? अच्छा इसका मतलब यह है कि जो व्यक्ति एक मिनट जो व्यक्ति आपके द्वारा माने जाने वाले बाबाओं में जो व्यक्ति आपके द्वारा मानी जाने वाली किताबों में बिलीव करता होगा आप केवल उसके ही सामने सिद्ध कर सकते हो कि इस दुनिया में ईश्वर है। वरना नहीं सिद्ध कर सकते क्योंकि उनको परमात्मा मिला है इस कारण वो सत्य है और मैंने क्या पूछा मैंने क्या पूछा है मैंने क्या पूछा है मैंने क्या मैंने क्या पूछा मैंने क्या पूछा है मैंने पूछा है जैसे आपने कहा कि उसको ही परमात्मा मिला है इस बात पे आपकी आस्था है ना आपकी आस्था है ना अब मान लीजिए कोई मुस्लिम है उसकी उसकी आस्था नहीं है कि उसको परमात्मा मिला। उसने झूठ बोला। कोई नास्तिक है। उसको उसको बिलीव नहीं है कि उसको परमात्मा मिला। वो कहेगा रामपाल ने झूठ बोला। ऐसे बहुत से लोग हैं जिनको आपकी मान्यताओं पर आस्था नहीं है। वो कहेंगे कि हमें बिलीव नहीं है उसको परमात्मा मिला। और बात तो यहां परमात्मा को सिद्ध करने की हो रही। उससे पहले परमात्मा को मिलना कैसे मान ले हम?

00:26:32:07 ठीक है। जिनको वारसा नहीं है वो मत मान एक मिनट एक मिनट भाई साहब एक मिनट एक मिनट तो क्या कहते हैं [गला साफ़ करने की आवाज़] जो लोग आपके द्वारा स्वीकार किए जाने वाले धर्म ग्रंथ या आपके द्वारा स्वीकार किए जाने वाले महापुरुषों में आस्था नहीं रखते हैं। उनके समक्ष आप ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध नहीं कर सकते। जो नहीं मानेंगे उसको उसके सामने करने की जरूरत भी नहीं है क्योंकि नहीं मानेंगे हम कह रहे हैं निरुत्तर कर सकते हो उसे उसको लॉजिकली उसको गलत साबित कर सकते हो हम उसे गलत क्यों करें उसको जबरदस्ती मनाना थोड़ी तुम मान जाओ जबरदस्ती जबरदस्ती मनवाना नहीं जबरदस्ती मनवाना नहीं तर्क तर्क और युक्ति से उसको ये साबित कर सकते हो समाज के समक्ष कि ये व्यक्ति गलत है युक्ति क्या है बस यही युक्ति है कि जिसमें हमारी युक्ति यही है कि जिसमें हमारी आस्था उसको तुम भी मान लो। यही युक्ति है। वो कहेगा मेरी आस्था वो कहेगा मेरी आस्था एकंगा बिल्ला में है। उनको परमात्मा मिला था और वो कह रहा है बच्चे खाओ।

00:27:47:18 तो उसको मानोगे आप नहीं मानेगा। वो अपनी मानता जहां रखा वो रखा रहे। हमें जबरदस्ती नहीं मनवाना है। तुम्हारी बात मान जाओ। एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट हां वो अपनी मान्यता जो मानता है उसको रखे रहे आपको जबरदस्ती नहीं मनवाना है इस पर बात कर लेते हैं आप ये बताओ कि कोई व्यक्ति बच्चों को काट करके खा रहा है उसकी मान्यता है कि उसको एक परमात्मा मिला था जिसने कहा था बच्चों को काट काट करके खाओ तो आप उसको बलपूक रोकोगे या नहीं रोकोगे उसको ज्ञान से रोकेंगे कि बच्चे को काट के खाना ये शास्त्र किसी साहब को नहीं लगता। अरे तो वो आपके शास्त्र को मानता ही नहीं है ना। ये बताओ ये बताओ इंग्लैंड का ड्राइविंग लाइसेंस क्या भारत में काम करता है क्या? नहीं करेगा। भारत का ड्राइविंग लाइसेंस इंग्लैंड में काम करेगा? नहीं करेगा। नहीं करेगा। इसी प्रकार से जिस व्यक्ति की आस्था आपके शास्त्रों में नहीं है उसको अपने शास्त्रों का हवाला दे कर के आप ये सिद्ध नहीं कर सकते। आप यह नहीं कह सकते कि हमारे शास्त्र में लिखा है तुम जो कर रहे हो गलत है। उसको आप लॉजिकली सिद्ध करिए। ऐसी चीजों से आपको प्रमाण लाना होगा जिन चीजों को वो भी मानता है तब वो लॉजिकली

00:29:02:19 गलत सिद्ध होगा। है आपके पास कोई तरीका? हां गुरु जी ने तो उनहीं के शास्त्रों से ही बता दिया है कि आपके शास्त्रों में लिखा हुआ है। नास्तिकों के शास्त्र क्या है? नास्तिकों के शास्त्र क्या है? नास्तिकों के शास्त्र क्या है? बताओ। अगर मान लो कोई जीव हत्या करता है मान लो मुसलमान है तो मुसलमानों के लिए उनहीं के शास्त्र से बता दिया है कि भाई मोहम्मद साहब ने कोई हत्या नहीं की आप क्यों कर रहे हो नास्तिकों के शास्त्र क्या है नास्तिकों के शास्त्र क्या है नास्तिकों कोई शास्त्री ही नहीं है क्योंकि वो नास्तिक कुछ मानते ही नहीं उनके लिए क्या करते थे कोई कुछ नहीं कर सकता तो क्या करोगे वो जब गलत कर रहे होंगे खुद के लिए कुछ नहीं कर सकते तो मतलब वो अगर कुछ गलत कर रहे तो गलत करने दोगे। अगर कहना नहीं मानता तो करने देंगे। अगर मानता है तो बहुत कुछ बताएंगे। नहीं नहीं नहीं कहना नहीं कहना नहीं मानेगा। अगर तुम्हारी बात या तो तुम्हारी बातों में श्रद्धा रख ले आंख बंद करके वरना तुम्हारे पास कोई उपाय नहीं है उसको तार्किकता से गलत सिद्ध करने का। प्रमाण प्रमाण देंगे ना प्रमाण। फिर वही आ गए तुम। तुम्हारे शास्त्रों में उसकी अवस्था नहीं तो प्रमाण क्या दे दोगे?

00:30:18:12 कोई सुनती है। देखिए अगर वो सुनने को तैयार होगा तो बताएंगे और नहीं होगा तो कोई जबरदस्ती नहीं है। तू अपनी रास्ते में हट जाओ। अच्छा ठीक है। इसका मतलब ये है इसका मतलब ये है कि अगर कोई वैश्यालय खोलना चाहेगा आपके बगल में नास्तिक है ना तो आप उसको रोकोगे नहीं। सामाजिक हिसाब से तो रोकेंगे। क्यों रोकोगे? उसको उसको बताना पड़ेगा ना कि मैं क्यों रोक रहा हूं। क्या बताओगे? शास्त्र वाली बात नहीं है। अच्छा अब आप इसको छोड़िए आप एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट बात यह नहीं है बात हो रही है बात हो रही है आपके सूक्ष्म ज्ञान की आपको सूक्ष्म ज्ञान मिला है ना बाबा जी से वो आप बताइए यहां पे सूक्ष्म ज्ञान आप परमेश्वर की एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट भाई साहब एक मिनट मुझे पानी दे दो भाई जरा पानी दे दो एक मिनट सूक्ष्म ज्ञान की बात ये हो रही है कि आपने जो पहले से परसी परसाई थाली है। यानी कि ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध है। इसको आपने स्वीकार करके चले और कहा कि बाबा जी ने बताया किसकी भक्ति करनी है, किसकी नहीं करनी है। ईश्वर है ये कैसे सिद्ध होता है? मोक्ष क्या है? मोक्ष क्यों

00:31:33:22 आवश्यक है? मोक्ष है ये कैसे सिद्ध होता है? इन सब का तो कोई बात ही नहीं है। पहले ईश्वर ले आओ। ईश्वर पका पकाया आम है। अब बता दो ये वाला आम नहीं तोड़ना है। वो वाला आम तोड़ना है। ये सूक्ष्म ज्ञान है। ये सारा ज्ञान लिखा है आप पूछ रहा हूं आप सूक्ष्म वेद में लिखा हुआ मुझे नास्तिकता का खंडन बताइए नास्तिक को क्या उत्तर देते हैं सूक्ष्म आपका जो सूक्ष्म ज्ञान है वो मुझे नास्तिक को आस्तिक नहीं बनाना कि तुम आस्तिक बन जाओ हां ये है कि आपने कहा कोई नहीं मेरे चक्कर में प्रश्न का उत्तर दीजिए आप कहते मैं गायत्री मंत्र का जप करता हूं गायत्री मंत्र का आगे नहीं आगे आगे नहीं बढ़ने का। आगे नहीं बढ़ने का। आगे मत बढ़ो।

00:32:26:02 आगे मत बढ़ो। बताऊंगा। [हंसी] मैं अर्थ बताऊंगा। अभी बात चल रही है आपके सूक्ष्म ज्ञान की। आप अपना सूक्ष्म ज्ञान यहां दिखाइए। लोगों को मैंने बता दिया ना? बता दिया। उसे कुछ मिनटों में सिद्ध नहीं किया जा सकता। अभी नास्तिकता के खंडन की बात चल रही है। नास्तिकता के खंडन की बात चल रही है। करनी है। करनी है। करनी है। अपना गुरु सिद्ध कर पाओगे रामपाल को या सिद्ध कर पाओगे। उसने तत्व ज्ञान दिया है। अगर इस मैटर पे बात करनी है तो बात आगे बढ़ेगी वरना जा सकते हो। बोलो। मुझे मालूम है यहां पे यहां पे तुमको अब वहां आना है जहां पे जहां की तुमने तैयारी कर रखी हो रटंत विद्या उस पे भी मैं बात करूंगा। मगर आपने यदि यह कहा है कि आप उसके गुरु के शिष्य हैं तो अभी हम लोग सूक्ष्म ज्ञान की बात कर रहे हैं। आपका सूक्ष्म ज्ञान क्या है? आपको करनी है। इस पर बात करनी है। हां या ना में जवाब दीजिए। हां या ना में जवाब दीजिए। करनी है। आपकी आवाज सुन नहीं रहा कोई। आप म्यूट है। आप म्यूट है। मैंने म्यूट किया आपको। हां या ना में जब आपको बात करनी है। सूक्ष्म ज्ञान पे सूक्ष्म ज्ञान पर बात करनी है। मैं पूछ रहा हूं हां या ना मुंडी हिला के

00:33:41:06 बता दीजिए। सूक्ष्म ज्ञान पर बात करनी है। सूक्ष्म ज्ञान पर बात करनी है। सुनाई नहीं दे रहा है। केवल मुंडी हिलाइए। करनी है। करनी है। करनी है ना? कुछ अब ये आगे मत भागना। आगे मत भागना। जब तक यह बात खत्म नहीं हो जाएगी ना सूक्ष्म ज्ञान वाली तब तक आगे मत भागना। ठीक है? बोलो हां।

00:34:13:10 हां ठीक है। चलो इसीलिए कहते हैं मत पड़ो चक्कर में कोई नहीं टक्कर में। अब जब आप हारने लगते हैं ना तो मुझे मालूम है सूक्ष्म ज्ञान पर बात करनी है। आपकी आवाज म्यूट है। मैं कोई भी ऐसी चीजें अपने प्लेटफार्म से निर्गत नहीं होने दूंगा जो अधूरी छूट जाए। जितनी बातें आप बोलोगे वो ऐड होती चली जाएंगी। बाद में मुझे कुछ याद रहे या ना रहे इसलिए टू द पॉइंट अभी जो बात चल रही है वो पूरी करिए सूक्ष्म ज्ञान की बात पूरी करिए वो गुरु है ना आपके तत्व ज्ञान दिया है ना तो भैया पका पकाया परमेश्वर क्यों पहले परमेश्वर की सिद्धि तो करो पका पकाया मोक्ष क्यों पहले मोक्ष की सिद्धि तो करो और फिर हम देख लेंगे उसके अनुरूप आपका ईश्वर है कि नहीं

00:35:07:13 हां भाई तो नास्तिकों का उत्तर क्या है? आपके बाबा जी ने जो दिया हो? आपके बाबा जी का ज्ञान यहां से शुरू हो रहा है। आपके बाबा जी का ज्ञान यहां से शुरू हो रहा है। अरे यार आपको बात नहीं करनी है क्या? हेलो। आपको बात नहीं करनी। इसको हटाइए। फोटो को हटाइए। फोटो को हटाइए। फोटो को हटाइए। फोटो को हटाइए। हटाइए फोटो को। फोटो को हटाइए। आप यह कह दो कि मेरे बाबा जी से मुझे नास्तिकता का खंडन नहीं पता चला है तो हम आपके आगे बढ़ते हैं। आपके प्रश्न पर आते हैं।

00:35:49:13 कहोगे हां या ना में मुंडी हिलाओ। नास्तिकता का खंडन दिया है क्या बाबा ने? रामपाल ने? ये पूछ रहा हूं मैं। उन्होंने सभी के लिए नहीं किया है। जो नास्तिक है वह नास्तिक ही रहेंगे। आस्तिक आस्तिक ही रहेंगे और आस्तिकों के लिए उन्होंने दिया है। नास्तिकता का खंडन दिया है क्या बाबा रामपाल ने? मैं फिर पूछ रहा हूं। और इस तरीके से फिर चर्चा बिगड़ती है। मुझे अब आपको मजबूरी में हटाना पड़ेगा। मैं आपके आपके टॉपिक पर आ सकता हूं। आप यह बताइए कि नास्तिकता का खंडन बाबा रामपाल ने तत्व ज्ञानी ने दिया है कि नहीं दिया है।

00:36:39:06 मैं आपको ऑन कर रहा हूं। फालतू की बातें मत बोलिएगा। सीधे टू द पॉइंट बताइए। हां जी बोलिए। एक मिनट। एक मिनट मैं दोबारा प्रश्न रख रहा हूं। नास्तिकता का खंडन बाबा रामपाल ने दिया है कि नहीं दिया है? यह मैंने कहीं नहीं पढ़ा। तो हम अभी यही माने कि नहीं दिया है। कैसे मान ले मैंने पढ़ा ही नहीं तो मैं कैसे कह दूं कि दिया है या नहीं दिया है। तो यहां क्यों चले आए मुंह उठा के? आप आप जो तैयारी करके आते हैं ना कि नास्तिकता का खंडन दिया है कि नहीं?

00:37:22:21 नहीं लगता। कोई हराने वाला पैदा नहीं हुआ है। दुनिया का माई का लाल कोई आप हटे [हंसी] नास्तिकता का खंडन है आपके पास? अरे ये पंचरंगी ड्रामा हटाओ सामने से अभी हटाओ। नास्तिकता का खंडन बताओ। नास्तिकता का खंडन हटाओ इसको। हटाओ हटाओ। सुनो। अब ध्यान से सुनो। ठीक है? थोड़ा तसल्ली से बात करो। आपने कहा कि मेरे बाबा जी ने मुझे यह बताया किसकी भक्ति करनी है। मुख्य रूप से किसकी नहीं करनी है। ठीक है? यह आपका सूक्ष्मतम ज्ञान है बाबा जी का। अब मेरा प्रश्न है। मेरा प्रश्न ये है कि भाई मैं मानू कैसे कि इस दुनिया में कोई परमेश्वर है। अब ये बताइए। अब आप नहीं मानेगा तो हम तो मना नहीं सकते। तो मेरा प्रश्न है उसप भी। मेरा प्रश्न है उसप भी। सुनो ध्यान से। आपके बगल में कोई नास्तिक अगर वैश्यालय खोलेगा तो उसको आप मना कैसे करोगे या खोलने दोगे यह बताओ हम उस पर नहीं जाएंगे आप शास्त्र की चर्चा कीजिए कोई उदाहरण मत दो क्यों उदाहरण ना दे शास्त्र पे भी मैं आऊंगा

00:38:38:00 शास्त्र पे भी मैं आऊंगा शास्त्र की चर्चा करो शास्त्र की अच्छा चलिए शास्त्र क्या है ये बताइए प्रामाणिक शास्त्र किसे कहते हो आप बताइए चलिए जो पूरा हो चुकी है जो घटनाएं पूर्व काल में घट चुकी और जिनका लेख संकलन है वही शास्त्र कहलाते हैं। वही शास्त्र उनहीं को भी कहते हैं। ठीक है। ठीक है। ठीक है। तो कई अखबारों में छपा है कि जब रामपाल पकड़ा गया था तो एक किलो निरोध पकड़े गए थे वहां से आश्रम से। ऐसे मैं नहीं कह रहा हूं। ये अखबारों में छपा है। ठीक है? इसको जानते होंगे आप। बबीता नाम की किसी महिला के साथ उसके अवैध संबंध थे बाबा रामपाल के और उसका यौन शोषण किया था बाबा रामपाल ने ये सब जो लिखा है ऐतिहासिक घटनाओं के रूप में लिखा है ये शास्त्र है आपके लिए नहीं है शास्त्र नहीं है वो झूठ फैलाया गया है संत को प्रणाम करने के लिए तो आपने आपने जो पहली परिभाषा दी है शास्त्र की कि जो घटनाएं घट चुकी है उसका संकलन शास्त्र है पहली चीज लिखने वाला व्यक्तित्व होना चाहिए जैसे वेदव्यास जी है हां एक मिनट एक एक मिनट एक मिनट मैं समझ रहा हूं। आपके आपके मुख से सही परिभाषा आएगी अभी धीरे-धीरे

00:39:53:15 तो पहला हो गया इतिहास का संकलन केवल इतिहास का संकलन शास्त्र नहीं है। है ना? नहीं एक मिनट एक मिनट भाई साहब भाई साहब बहुत आनंद आएगा। बिल्कुल स्ट्रक्चरल तरीके से चले। है ना? इतिहास का संकलन संकलन केवल इतिहास का संकलन शास्त्र नहीं है। किसी प्रामाणिक व्यक्ति का किसी प्रामाणिक व्यक्ति के द्वारा [गला साफ़ करने की आवाज़] व्यक्ति द्वारा लिखा गया शास्त्र शास्त्र है। इतिहास का संकलन शास्त्र है। ठीक है? तो जो प्रमाणिक व्यक्ति है उसकी प्रमाणिकता का आधार क्या होता है? मतलब ऐसा होता है जैसे ये अखबार वाले झूठ बोल रहे हैं। और यही अखबार वाले कहीं-कहीं पे ऐसी खबरें भी छापते हैं जो आपको सच लगती होंगी। लगती है कि नहीं? कहीं की सच होती है कहीं की झूठ भी होती है। हां सब सच हो ऐसा नहीं। जैसे आपने कहा कि वेदव्यास जी इत्यादि आपके लिए वेदव्यास जी जो लिखे वो शास्त्र है। तो वेदव्यास जी की बातें भी कई जगह बाबा रामपाल ने कही है कि झूठी है। वेदव्यास जी की बातें भी कई जगह बाबा रामपाल ने कहा है

00:41:08:16 कि ये वेदव्यास अज्ञानी है। ब्रह्मा विष्णु कहा है? कहा है? गरिमा गीता की बता रहा हूं। बता रहा हूं बता रहा हूं। भैया ऑपरेटर जी वो ब्रह्मा विष्णु महेश का उसमें कोर्ट मटेरियल वाले फोल्डर में पड़ा हुआ है। एक वो बना है ना उसमें ब्रह्मा विष्णु महेश को अज्ञानी कह रहा है रामपाल वो तब तक आप वीडियो निकालिए तब तक हम इनको इनकी किताब से बताते हैं। बाबा वेद गरिमा ये जो गीता है वो किसने लिखी है? गीता वेदव्यास जी ने लिखी है व्यास जी ने। ठीक है? तो यानी कि गीता का एक एक अक्षर, एक एक शब्द, एक एक श्लोक प्रमाणिक है क्योंकि वेदव्यास आपके लिए पूर्णत प्रमाणिक है। एक भी कुछ भी कटिंग तो नहीं करेंगे। कटिंग तो नहीं करेंगे। नहीं करेंगे। ठीक है। तो संभवत छठव अध्याय में गरिमा गीता की में रामपाल लिख रहे हैं कि गीता जी में जो गीता है भगवत गीता उसमें जो हठ योग बताया है छठव अध्याय में वो हमें नहीं करना है। वो गलत है। वो वेद विरुद्ध है। शास्त्र विरुद्ध है। हम तो यहां तो वेदव्यास की वाणी कट गई।

00:42:25:22 यहां पर जो गीता था वो बताता है कि ह उनकी अंकल है उनका नहीं इसका मतलब इसका मतलब पूरी तरीके से गीता का एक एक अच्छा स्वीकार नहीं है ना अरे का जैसे इसका मतलब ये तो वही बात हो गई ना जैसे अखबार अखबार में भी दो प्रकार का ज्ञान है एक उन्होंने अपने मन से लिख दिया और एक सत्स लिखा है पहले इस चीज को समझिए। पहली चीज समझिए मेरी बात। ये जो तत्व वाली बात है वही तत्व ज्ञान है कि संत रामपाल जी महाराज ने बताया कि गीता में दो प्रकार का ज्ञान है। एक उसमें गीता ज्ञान दाता ब्रह्म का जिसने अपने बारे में खुद कहा है और दूसरा उसने पूर्ण परमात्मा ज्ञान दिया है वो भी है। अब गीता ज्ञान दाता का अपना ज्ञान है कि आप भट योग कीजिए ऐसे बैठिए वैसे बैठिए फलाना ढिकाना आसन बना लीजिए ये गीता ज्ञान दाता का ज्ञान है। जो हमें मांगने नहीं क्योंकि उससे मोक्ष नहीं मिलेगा। और जो परमात्मा वाला ज्ञान है वो अलग है और वो तत्व ज्ञान है और वही रामपाल जी महाराज ने कहा है यानी कि यानी कि भगवत गीता पूरी तरीके से स्वीकार नहीं है ना तो जो परमात्मा वाला ज्ञान है वो स्वीकार है कि

00:43:39:13 ये बताओ भगवत गीता मान लो मेरे पास ये भगवत गीता है हां ये भगवत गीता है हेलो ये भगवत गीता है। अब इसमें से मैंने इसमें से मैंने आपने कहा कि कुछ श्लोक कुछ चीजें ऐसी हैं जो कुछ चीजें कुछ श्लोक ऐसे हैं जो कि उसका अपना ज्ञान है वो हमारे काम का नहीं है। वो हमें नहीं चाहिए। झूठ है वो झूठ है। हां सच है। वो झूठ है। करना चाहिए। क्योंकि वह गीता ज्ञान दाता ने अपनी भक्ति के विषय में बताया है और अपना ज्ञान बताया है। उससे पूर्ण मोक्ष नहीं मिलेगा। इसलिए वो हमें नहीं चाहिए और जिस ज्ञान से हमें मोक्ष मिलेगा वो गीता में ही लिखा है संकेत रूप में। उसे गुरु जी ने बताया है। एक मिनट एक मिनट एक मिनट। शास्त्र किसे कहते हैं? शास्त्र उसको कहते हैं जो मोक्ष की बात करे या मोक्ष और बिन मोक्ष दोनों की बात करे। मतलब फसाने की और मोक्ष की दोनों की बात करें। हां उसमें सभी प्रकार का सामंजस्य रहता है।

00:44:56:04 सभी प्रकार का सामंजस्य रहता है। तो फिर तो फिर जो अखबार हैं जो सत्य बोल रहे हैं कि ये ये घटनाएं हुई और उसमें रामपाल के बारे में आपके अनुसार गलत भी लिख दिया तो वो भी फिर शास्त्र हो गया। सामंजस्य हो गया सभी प्रकार का। नहीं हो सकता। हम समाचार पत्र को शास्त्र कह ही नहीं सकते। वो शास्त्र नहीं है तो वो बताओ अंतर बताओ अंतर क्या है दोनों देखो जो बात माननी है वो भी उसमें लिखी हुई है जो बात नहीं माननी है वो भी उसमें लिखी हुई है वही बात आप यहां कर रहे हो कि भगवत गीता में भी जो बात माननी है वो भी लिखी हुई है और जो नहीं माननी वो भी लिखी हुई है तो फिर शास्त्र कहां से रहा देखो शास्त्र तो फिर पूरे 18 पुराण है 18 पुराण पूरी भगवत कथा कहानियां है तू बातें मुझसे मत करो अभी बात ये हो रही है कि तुमने ने अभी थोड़ी देर पहले कहा था कि मैं गीता का एक एक अक्षर मानता हूं। बिल्कुल रियल है। अब तुम कह रहे हो कि उसमें कुछ बातें नहीं मानने की है। तो लिखा हुआ मानता हूं कि सत्य लिखा है। लेकिन अब क्या मानना क्या नहीं मानना ये मेरे मन की मेरे अंदर की बात है। क्या स्वीकार करना क्या? लिखा तो है। जो लिखा है सत्य लिखा है। गलत नहीं लिखा। लेकिन मानना ना मानना मेरी बात है। ठीक है। ठीक। उसमें जब

00:46:11:08 यह हठ योग का मना कर रहे हैं कि हठ योग हमें नहीं मानना है। ठीक है? तो वहां रामपाल यह नहीं कह रहे हैं कि वहां पर ये जो काल का है वो अपना मत है। वहां ये कह रहे हैं कि ये बात वेद से मैच नहीं करती है। ये बात वेद से मैच नहीं करती है इसलिए नहीं माननी है। अपना मत जहां पर इसका खंडन किया है ना छठवे अध्याय का हठ योग का खंडन किया है। वहां पर काल का अपना मत नहीं है। काल का अपना मत बाद में है। ऐसा मेरा मत है। ये बात ये बात बाद में है। छह जगह लिखा है। ऐसा मेरा मत है। ऐसा मेरा मत छ जगह है। वो काल का अपना मत है। वो [हंसी] नहीं लिखा है। हठ योग में नहीं लिखा है। हठ योग को ना मानने का कारण दूसरा बताया है रामपाल ने। देखो उन्होंने कहा कि कौन सा स्थान हो? मृगला हो। यार मैं आपसे क्या कह रहा हूं। मैं आपसे क्या कह रहा हूं? बेकार में वो मोक्ष मार्ग नहीं है सर उसे हमें नहीं मानना बस मोक्ष मोक्ष मार्ग नहीं है ये गीता में कहां लिखा है कि हट मार्ग मोक्ष मार्ग नहीं है क्योंकि अगर मान लो जो उस प्रकार की प्रक्रिया करके ओम मंत्र का जाप करेगा उसे ब्रह्मलोक की

00:47:26:12 प्राप्ति होगी तो गीता अध्याय आठ श्लोक 16 में कहा गया है कि गीता में गीता में ये लिखा है क्या कि मोक्ष वो जो है वो क्या कहते वो मोक्ष मार्ग नहीं है जो हठ योग है आसन बिछा के बैठना हठ योग है उससे जो ब्रह्मलोक की प्राप्ति होगी ब्रह्मलोक जाना मोक्ष पूर्ण मोक्ष नहीं है मैंने आपसे पूछा क्या है गीता में लिखा है क्या जो हठ योग वाला मामला है वो मोक्ष मार्ग नहीं है ऐसा गीता में नहीं लिखा है और जो बता रहा है वही तत्व ज्ञान है वही सूक्ष्म ज्ञान है वही ज्ञान है मोक्ष नहीं मिलेगा आप मुझे बताइए कि यह कैसे सिद्ध होता है कि हठ योग वाला जो ज्ञान है वो मोक्ष मार्ग नहीं है। बताइए क्योंकि जितने भी योगी तपस्वी है जिन्होंने इस प्रकार हठ किया है गीता में तपस्या करने को मना किया है कि ये योग कौन सा योग परमार तप पाने वाला योग किसी प्रकार के हठ से प्राप्त नहीं होता है और वही हट गीता ज्ञान दाता बता रहा है। ठीक है ठीक है। यानी कि यह कहां लिखा है कि वो वाला योग से प्राप्त नहीं होता है। यह कहां लिखा है? यह कहां लिखा है? यह योग ना

00:48:42:09 व्रत से उपवास से अध्याय छ में है। निकालो। अध्याय छ में ही तो मना कर रहे हैं। अध्याय छ में ही तो मना कर रहे हैं कि आसनवासन बिछा के वो जो हठ योग है वो नहीं करना है। उसकी अपनी अटकल है ना। गीता को कौन सा गीता का कौन सा वाक्य है जो उसको काट रहा है यह बताओ ये इधर काट रहा है यहां पर जो उन्होंने कहा है कि ये योग मैंने सबसे पहले सुर को दिया था सूर्य ने कुछ ऋषियों को दिया राजियों को फिर वो तत्व ज्ञान है उधर तत्वदर्शी संत जो ज्ञान बताएंगे वो इसको काट रहा है कि तत्वदर्शी संत इसको सही नहीं करेंगे कि ठीक नहीं की गीता से यानी कि तत्वदर्शी जो बताएगा वो है ना शास्त्र फिर गीता शास्त्र नहीं बचा शास्त्र किसे कहते हैं ये बताओ जिस शास्त्र उसको कहेंगे ना जिसकी एक एक बात को मानना हो अगर उसमें आप ये करोगे ये यहां से ये काट दो वहां से वो काट दो तो वो शास्त्र का बचा एक मैं आपको उदाहरण देता हूं उदाहरण

00:49:52:09 सब कुछ लिखा स्वीकार कर ऐसा नहीं है एक मिनट भाई साहब एक मिनट एक मिनट मैं बताता एक मिनट जैसे मान लो ये भगवत गीता है। ठीक है? हां। और आपके हिंदू वो है जो इस भगवत गीता को प्रणाम करता है। अपने माथे से लगाता है। इसका सम्मान करता है भगवत गीता का। ठीक है? बिल्कुल। आप कह रहे हैं कि इसमें कुछ बातें ऐसी है जो हमारे मानने योग्य नहीं है। ठीक। हां। ठीक है। तो अब बात ये है कि जो जो बातें मानने योग्य नहीं है इसका मतलब व्यर्थ है। व्यर्थ है ना? हमारे लिए तो व्यर्थ है। पूर्ण होना नहीं है। तो उस उस पन्ने को यदि मैं फाड़ दूं तो कोई दिक्कत नहीं आएगी। कोई दिक्कत नहीं है। उस पन्ने को यदि मैं फाड़ दूं हां। हमारे लिए कोई दिक्कत नहीं है। आपके लिए समाज के लिए हो सकती है। एक तो आप ही तो तत्व ज्ञान के चेले हैं ना। आपके अनुसार तो दिक्कत नहीं है। वही सच है ना। यानी ये श्रीमद् भगवत गीता जो शास्त्र है इसमें से कुछ पन्ने जो आपके अनुसार काल का अपना मत है वो अगर फाड़ दिए जाए तो आपको कोई दिक्कत नहीं है रामपाल को

00:51:07:10 कोई दिक्कत नहीं है ना नहीं है नहीं है हां ये है रियलिटी रामपाल की हां तो अब बात ये आती है कि पन्ने एक मिनट एक मिनट एक मिनट पन्ने फाड़ देने के बाद पन्ने फाड़ देने के बाद यह वही भगवत गीता रह जाएगी जिस पर हिंदू विश्वास करता था, माथे से लगाता था। ये भगवत गीता होगी। सेम हां सुन एक बात बताता हूं। बहुत लोगों ने मैंने क्या पूछा है? पन्ने फाड़ देने के बाद मैंने कहा पन्ने फाड़ दे। मैंने कहा पन्ने फाड़ देने के बाद यह वो भगवत गीता होगी जिसको हिंदू सम्मान करता है। मैं यह पूछ रहा हूं। मैं आपको इतनी पतली गीता गीता का सार बता दूंगा बहुत सारी उनके लिखा ही नहीं इसमें है

00:52:06:07 मैंने क्या पूछा है मैंने क्या पूछा है भगवत गीता जिसको हिंदू मानता है आपके हिसाब से उसमें से कुछ पन्ने फाड़ दिए जाएंगे कोई दिक्कत नहीं है क्या पन्ने फाड़ने के बाद क्या पन्ने फाड़ने के बाद आपकी बात सुनूंगा भी तो सुनो ना मेरा प्रश्न यह है मैं प्रश्न बोल लूं श्रीमद् भगवत गीता को हिंदू सम्मान करता है श्रीमद् भगवत गीता हिंदू की आस्था का विषय है रामपाल बाबा के अनुसार और आपके अनुसार श्रीमद भगवत गीता के कुछ पन्ने व्यर्थ हैं फाड़ दिए जाए तो कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए तो यदि पन्ने फाड़ दिए जाएंगे तो क्या जो श्रीमद् भगवत गीता होगी वो वही भगवत गीता रह जाएगी जिसको हिंदू सम्मान करता है।

00:52:59:06 पहले भी बहुत सारे पूछा है क्या वो भगवत गीता रह जाएगी जिसका हिंदू सम्मान करता है। दूसरों की आड़ मत लो। आप अपना बताओ दूसरों की आड़ मत लो आप। संक्षिप्त गीता ज्ञान लिख दे और क्या पन्ना निकाल के लिख दे संक्षिप्त ज्ञान गीता। बहुत सारे लेखों ने तो लिखा है। एक मिनट एक मिनट एक संक्षिप्त ज्ञान गीता है। अगर मैं कहूं इस ज्ञान गंगा यह ज्ञान गंगा है ना तुम्हारी अगर मैं कहूं इसमें कुछ पन्ने जो हैं भूत ने लिख दिए हैं उसको फाड़ दूं मैं तो तुम्हें बुरा तो नहीं लगेगा वो तो तुम करवा ही चुके हो वो तो करवा चुके हो आगे भी आगे भी मैं तो तुम्हें बुरा नहीं लगा ना बुरा तो लगा क्योंकि तुमने समझा नहीं अरे भाई तो इसका मतलब ये है कि आपको बुरा लगे लगेगा जिसमें हमारी आस्था है उसको आपने छेड़ दिया उसमें इंटरप्ट कर दिया उसमें नहीं छेड़ा है आप समझे नहीं है आप भी नहीं समझे सुनो सुनो सुनो सुनो अभी मैं वापस विषय पे वापस विषय पे आ रहा हूं वापस विषय पे आ रहा हूं सातव अध्याय में गीता सातवें अध्याय में गीता ज्ञान दाता ने कहा है कि मैं सनातन बीज हूं सनातन

00:54:14:24 बीज इस सृष्टि का सातव अध्याय में यह बात सत्य है कि गलत है कौन से श्लोक में है? सातवा अध्याय कौन सा श्लोक है? बता रहा हूं। [नाक से की जाने वाली आवाज़] कहां है? बड़ी वाली। ये दसवा श्लोक अच्छा

00:55:12:04 ठीक है हम अच्छा अब ये सनातन गीत तो कह रहा है अपने आप को ना [हंसी] अब आप निकालिए अध्याय आठ के श्लोक मुझे मुझे आप ये बताइए ये सनातन बीज का क्या करें झूठ माने या सच माने? 21 ब्रह्मांड के लिए सनातन बीज यही है। सनातन का अर्थ क्या है? मूर्ख व्यक्ति अरे सनातन का अर्थ है जिसका ना आदि है ना अंत है और उसका तो काल का अरे काल का आदि है ना? काल का आदि है कि नहीं? काल का आदि है कि नहीं? हां। तो फिर उसको सनातन [हंसी] कैसे कह रहे हो? उसको सनातन क्यों कह रहे हो? सुनो सुनो सुनो हे अर्जुन तेरे मेरे बहुत जन्म हो चुके हैं। उन्हें तू तू नहीं जानता मैं जानता हूं क्योंकि उसकी भी जन्म मृत्यु होती है। यानी कि

00:56:16:16 यानी कि गीता ज्ञान दाता के अध्याय चार के श्लोक सात से ये अध्याय सात का श्लोक 10 कट रहा है। ठीक। यही बात है ना? यही बात है ना कि और कोई बात है? हां कटेगी बात। हां तो यह निर्णय तो यह निर्णय एक मिनट एक मिनट यह निर्णय आपने कैसे किया कि चार सात से सात 10 काटना है। ये क्यों नहीं कर सकते कि सात 10 से चार सात काटना है। यह निर्णय कैसे किया? जैसे एक एक ग्रंथ में दो वाक्य हैं। विपरीत वाक्य है। एक कह रहा है सनातन बीज, एक कह रहा है जन्म मृत्यु। यह निर्णय आपने कैसे किया कि चार सात के आधार पर चार 7 10 काटना है। 7 10 के आधार पर चार सात नहीं काटना है। उसको काट दो। 7 10 को मान लो। चार सात को रख चार सात को काट दो। रख लो चार 10 को। देखो वो यहीं पर लिखा है। यहीं पर लिखा है। मैं एक उदाहरण देता हूं। सुनिए। आपका स्टूडियो बहुत सारे ग्रंथ रखे हैं। इस पर कहेंगे कि भाई ये मेरे खरीदे हुए ग्रंथ है। स्टूडियो मैंने बना सब कुछ मेरा है। ठीक है? आपका जितनी है वो आपकी है। लेकिन अगर मैंने कहा सनातन मैंने कहा सनातन

00:57:31:27 जिसका कोई आदि नहीं होता है तो वो दूसरा जिसका कोई अरे मेरे भाई ये कहां लिखा है? दूसरा सनातन कहां लिखा है? ये बताओ अध्याय आठ श्लोक 20 निकालो। हां परंतु उस अव्यक्त से भी परे अति दूसरा विलक्षण सनातन अव्यक्त भाव है। इसमें ये लिखा है कि ये सात द वाले सनातन की बात हो रही है। ये इसमें लिखा है मैंने कहा मैंने कहा इसमें ये लिखा है कि सात 10 वाले सनातन की बात हो रही है। और मैंने तुमको क्या कहा? मैंने तुमको क्या कहा? मैं मैंने कहा मैंने कहा मैंने क्या कहा है आपसे मैंने यह कहा है कि 7 10 को आप 7 10 को आप इसलिए काट रहे कि 8 20 से मैच नहीं खा रहा है तो आप 710 से 820 को काट दो ना आप 8 20 को क्यों रख रहे हो आपने तय कैसे किया मैं वो जानना चाह रहा हूं कि गीता में अगर दो अगर गीता में एक अभी तक आप ये कह रहे थे कि भाई एक बात कट वो कटेगी नहीं वो उसने अपने बारे में बताई मगर आप ये कह रहे हो अब जो है जो

00:58:47:01 गीता कहने वाला है उसको सनातन नहीं मानना है। कुल मिलाकर के उसको मानना है कि वो पैदा होता है। यही है ना? यही है ना? गीता गीता ज्ञान गीता ज्ञान दाता का जन्म होता है। ये मानना है ना? वो सनातन नहीं है। ये मानना है ना? हां। ये मानना है तो [हंसी] एक जगह वो खुद एक जगह वो खुद कह रहा है। एक जगह वो खुद कह रहा है कि मेरी जन्म मृत्यु होती है। एक जगह वो खुद कह रहा है कि मेरा कोई भी सनातन मुझसे पहले कुछ नहीं। मैं ही सनातन हूं। मैं ही सनातन बीज हूं। ठीक है? अब हमने ये निर्णय कैसे किया कि सनातन बीज वाले को काटना है जन्म मृत्यु वाले से या आठ बीज से। हम यह क्यों नहीं करते कि हम लोग जो है सात 10 को रखें कि नहीं सनातन बीज ही है और वो जो बोला है चार सात में वो गलत बोला है और वो जो बोला है आठ 20 में वो गलत बोला है हम ये क्यों नहीं कर सकते मैं आपसे ये इसलिए पूछ रहा हूं जिससे कि ये निकल के आए कि भगवत गीता

00:59:54:02 आवाज नहीं आ रही आपकी चार्ज नहीं अब आ रही है आवाज हां मैं आपसे ये पूछ रहा हूं है ना इसलिए पूछ रहा हूं मैं ये जिससे कि हमको ये स्पष्ट हो पाए कि भगवत गीता आपके लिए अंतिम प्रमाण नहीं है। अंतिम प्रमाण कुछ और है जिसके आधार पर आप ये सेलेक्ट कर रहे हो कि भगवत गीता में क्या रखना है क्या नहीं रखना है

01:00:34:00 समझ रहे हो वही बात समझ रहे हो हां सुनो सुनो सुनो सुनो अब बात ये है हम लोग जो है भगवत गीता को ऐसे नहीं मानते हैं कि किसी की और किसी से उसको जो है जांच कर लो और उसमें जो बातें उसके अनुसार सही हो वो मान लो और जो बात उसके अनुसार सही ना हो वो ना मानो। हम ऐसे नहीं मानते। भगवत गीता हमारे लिए अंतिम एक मिनट किसी में लिखा है तो नहीं मानोगे क्या? इसी में लिखा है। अरे अरे अरे मेरे भाई मैं क्या कह रहा हूं? मैं ये कह रहा हूं भगवत गीता में काल ने अपने आप को सनातन कहा है। सनातन कहा है ना काल ने? तो सनातन का मतलब होता है जिसका कोई आदि नहीं है। जिसकी शुरुआत नहीं है। मगर तुम्हारे अनुसार काल जन्म लेता है। ठीक है। अब तुम कह रहे हो कि वो नहीं वो खुद कहता है। वो खुद कहता है। वो खुद वो वो बिल्कुल सही। बिल्कुल अच्छी बात है। वो खुद कहता है। मैं आपकी बात मान ली अभी के लिए। मैंने आपकी बात अभी के लिए मान ली। मैंने आपकी बात मान ली अभी के लिए। मैं मेरा प्रश्न कुछ और है। जब वो यह भी कह रहा है कि मेरा कोई शुरुआत नहीं है। जब वो यह भी कह रहा है कि मेरी शुरुआत है तो इसमें से

01:01:49:10 मेरी शुरुआत है। आपने कैसे तय किया कि ये सच है? और ये मेरा मेरी शुरुआत नहीं है। ये आपने कैसे किया तय कि ये झूठ है। ये पूछ रहा हूं। सवाल ये नहीं है कि वो गीता में ये भी कह रहा है कि नहीं कह रहा है। सवाल ये है आप उसकी दोहरी बात में से एक को प्रमाण दूसरी को प्रमाण क्यों नहीं? कैसे मान रहे हैं? इस बात को मैं पहले बता चुका हूं कि गीता दो प्रकार का ज्ञान है। एक गीता ज्ञान खुद के बारे में बता रहा। मेरी बात तो सुनो। ये कहां लिखा है गीता? ये गीता में कहां लिखा है? जो जिसको निकाल दे वही तो तत्वदर्शी संत है। वही सूक्ष्म ज्ञान है। यानी कि तत्वदर्शी संत यानी कि गीता में क्या सच है? क्या झूठ है? ये तत्वदर्शी संत बताएगा। ऐसे बोलो ना। झूठ ऐसा नहीं है जो लिखा है जो लिखा है उसको बता दे विभेद कर दे वही तत्वदर्शी है वही तत्व ये तो इस सच इस सच झूठ से मतलब नहीं है कि ये सनातन है कि नहीं काल झूठ से मतलब नहीं है ये सीमित है

01:02:52:19 मैंने क्या कहा मैंने क्या कहा मैंने क्या कहा मैंने क्या कहा मैंने क्या कहा है मैंने कहा कि इसको सनातन नहीं मानना है ना तत्व के आधार पे ये उतना सनातन नहीं है जितना चाहिए। अरे यार ये आप कौन से शब्दकोश एक मिनट ये कौन से शब्दकोश में लिखा है इतना उतना वाला सनातन शब्दकोश कहां है? अध्याय 18 श्लोक 62 निकालो। क्या बताओ?

01:03:26:00 अध्याय 18 श्लोक 62 में लिखा है कि हे अर्जुन तू सर्वभाव से उस परमेश्वर की शरण में जा। उसकी कृपा से ही तू कृपा से ही तू परम शांति तथा सनातन परमधाम को प्राप्त होगा। एक सनातन ये है सनातन सनातन परम तो ये वो नहीं है। ये कहां लिखा है? ये वो नहीं है। ये कहां लिखा है? अब देखो इसे तत्व बताएगा। मैंने हां ऐसे बोल ऐसे बोलो ना भाई सीधी बात करो ना तत्वदर्शी संत बताएगा क्या सच है क्या झूठ है आप गीता से सिद्ध नहीं कर पाओगे गीता की सीमा में रह के आप ये सिद्ध नहीं कर पाओगे कि एक बताएंगे ना बताएंगे अरे अरे रुको अरे रुको अरे भाई रुको मेरी बात सुनो जो प्रश्न है ना वो ये है प्रश्न ये है कि आप गीता में दो प्रकार के श्लोक है आप गीता में यह तय कैसे करेंगे कि इस श्लोक के आधार पर वो श्लोक काटना है। उस श्लोक के आधार पर यह श्लोक नहीं काटना है। इसको समझो। इसको समझ लो मेरी बात। जब गीता में दो प्रकार के श्लोक हैं तो आप ये कैसे तय करोगे

01:04:41:01 कि इस श्लोक के आधार पर वो श्लोक काटना है। उस श्लोक के आधार पर यह श्लोक क्यों नहीं काटोगे? जैसे कि जैसे कि अभी आपने कहा कि भाई आपके हिसाब से गीता में 18 62 में किसी और को परमधाम या सनातन कहा गया है। ठीक है? ठीक है? और सातव में सातव अध्याय के 10व श्लोक में जो गीता कह रहा है वो खुद को सनातन कह रहा है। ठीक है? तो आप 7 10 के आधार पे 18 62 काट दो ना। 7 10 के आधार पे 18 62 क्यों नहीं काटा? 7 10 के आधार पे ये आपने 8 20 क्यों नहीं काटा? 7 10 के आधार पे आपने चार सात क्यों नहीं काटा? अन्यों के आधार पे इसको क्यों काट रहे हो? वो तो कटा कटाया ही है। काटेंगे उससे क्या है? है ना? अरे अरे कहां से कटा कटाया है? जैसे रामपाल की नाक कटी हुई वैसे कटा कटाया क्या? आप तो लोगों क्रोध कर रहे हैं। क्या समझ लो ऐसे ऐसे ही आप नहीं समझ रहे हो। ऐसे ही आप नहीं समझ रहे हो। तो समझाओ तो समझाओ तो समझाओ। हमें नहीं समझाओ। नहीं समझाना यहां से। भाग यहां से

01:05:56:26 भाग भाग मेरे ही चैनल पर आकर के वो कटा कटाया बोलेगा भगवत गीता को कटा कटाया बोलेगा और फिर कहेगा मुझे नहीं समझाना अगर कोई क्लेम कर रहे हो तो उसको सिद्ध करो सिद्ध करो गीता में रह के गीता में रह के गीता का ज्ञान कैसे कट रहा है वो सिद्ध करो बोलो दो प्रकार का ज्ञान है। आपसे गायत्री मंत्र का अर्थ नहीं आता। अरे भाई चुप चुप बात हो रही है कि गीता का ज्ञान गीता से कैसे कट रहा है वो बताओ। दो प्रकार का ज्ञान बाहर से ले आ रहे हो। तत्वदर्शी बाहर से ले आ रहे हो। अभी तत्वदर्शी पे मैं आऊंगा।

01:06:52:09 गायत्री मंत्र का अर्थ है हे सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर मेरी बुद्धि को आप उसमें लगाएं सद्बुद्धि में मैं आपका वरण करता हूं। हां बस हां अब हम लोग फिलहाल ये बात कर रहे हैं कि गीता में गीता एक मिनट एक मिनट भाई साहब देखो हम थोड़ा सा मुख्य विषय पर वापस आ जाए मुख्य विषय पर वापस आ जाए गीता में दो प्रकार का ज्ञान आपने कहा इसका कोई प्रमाण गीता में नहीं है गीता में नहीं लिखा लिखा है। आपने अपने हिसाब से तय किया है। एक मिनट आपने अपने हिसाब से तय किया। हमने तय नहीं किया है। सुन लीजिए। मेरा मेरी बात सुन लीजिए। मैं क्या पूछ रहा हूं। आपने अपने हिसाब से तय किया है और मैंने अपने हिसाब से तय नहीं किया। मैं आपका हिसाब नहीं मानता हूं। मुझे आपको सिद्ध करना होगा कि गीता में दो प्रकार का ज्ञान है और एक ज्ञान से दूसरा ज्ञान कटेगा तो उसका आधार क्या होगा। अगर यह बात मान ली जाए कि गीता में दो प्रकार का ज्ञान है। तो किस ज्ञान से कौन सा ज्ञान कटेगा? इसका फैसला किस आधार पर होगा? गीता के अंदर से। यह आप मुझे सिद्ध करिए। या तो ये कहिए गीता के बाहर

01:08:07:13 से हम तय करेंगे। है ना? ठीक है? समझ गए ना सवाल? हां। एक समझ गए? जहां गीता ज्ञान दाता कहता है कि मेरी भक्ति मेरे गुण मेरे तत्व मेरे सब कुछ वो गीता का गीता ज्ञान दाता खुद का ज्ञान है। और जब अरे मेरे [हंसी] भाई गीता मेरे भाई मैं पूछ ये रहा हूं। गीता के अंदर से सिद्ध करो कि ऐसा ऐसा है। यह मुझे न्यूज़ बुलेटिन मत सुनाओ। गीता के अंदर प्रमाण कहां है? वो बताओ। हम निकाले क्या निकाले? अध्याय सात श्लोक 29

01:08:50:00 मेरे साथ होकर जरा और मरण से छूटने के लिए यत्न करते हैं वे पुरुष उस उस अलग कर रहा है गीता ज्ञान दाता से उस ब्रह्म को संपूर्ण अध्यात्म को तथा संपूर्ण कर्म को जानते हैं कर रहा कर दिया अलग कर दिया है अलग कर दिया नहीं अभी और है अध्याय आठ निकालो श्लोक आठ हे पार्थ यह नियम है कि परमेश्वर के ध्यान के अभ्यास रूप योग से युक्त दूसरी ओर ना जाने वाले से निरंतर चिंतन करता हुआ मनुष्य परम प्रकाश दिव्य पुरुष को अर्थात परमेश्वर को ही प्राप्त होता है। यहां ये नहीं कहा मुझे प्राप्त होता है। परमेश्वर को ही प्राप्त होता है। यह भी अलग हो गया। जो पुरुष सर्व अनादि सबके नता सूक्ष अति सूक्ष सबके पोषण करने वाले अच स्वरूप सुख के श्रद्धा से नित चेतन प्रकाश रूप और अविद्या से अति पर सच्चिदानंद परमेश्वर स्मरण करता

01:10:05:01 है और भक्ति पुरुष अंत काल में भी योग आपका प्रमाण मैंने एक दो से पर्याप्त है बहुत सारे लाइन लगाने की जरूरत नहीं है। आपने उसका दिया है ना उस उसका दिया है ना सुन लो सुन लो सुन लो मैंने सवाल ये किया है मैंने सवाल ये किया है कि जहां पर परमेश्वर को गीता ज्ञान दाता से अलग किया जा रहा है आपके हिसाब से। ठीक है? और एक जगह पर गीता ज्ञान दाता स्वयं को ही कह रहा है। ठीक? तो हम यहां पर ये निर्णय कैसे करेंगे कि वो जिसमें उसने अलग किया है अपने को उस श्लोक को तो रखना है और जिसमें उसने खुद को बताया उसको नहीं रखना है। सवाल ये है सवाल ये नहीं है कि गीता में अलग किया है कि नहीं किया है। सवाल ये है सवाल ये है कि अगर अलग किया है तो दो में से एक को किस आधार पर रखेंगे? वो आधार गीता में नहीं है।

01:11:06:04 कहने का तात्पर्य यह है। कहने का तात्पर्य यह है कि जिसके प्रति हमारी प्रमाण्य बुद्धि नहीं होती है। इस बात को समझो थोड़ा जिसके प्रति हमारी प्रमाण नहीं समझा है। नहीं समझा है। 10 बार एक सवाल नहीं समझा है। मेरे बीच में मत बोलो। मेरे बीच में मत बोलो। आपको मैंने सुना। आपने प्रमाण दिए दो तीन प्रमाण जब दो तीन दे दिए उसके बाद मैंने आपको रोका। मैं अपनी बात रख रहा हूं। जिसके प्रति हमारी प्रमाण्य बुद्धि होती है उसका एक भी अक्षर हम कट नहीं करते हैं। भैया ऑपरेटर जी तब तक आप वह उस वाले वो निकालिए शास्त्र में से इनके तथाकथित शास्त्रों से उस वाली लाइनें निकालिए ऑपरेटर जी हां तो

01:11:56:21 जिसके प्रति हमारी प्रमाण बुद्धि प्रमाण्य बुद्धि होती है उसके प्रति हमारी दोष दृष्टि नहीं हो सकती कि हमको इसका ये काटना है ये रखना है और अगर जिसके प्रति दोष दृष्टि है तो उसको उसमें से क्या काटना है क्या रखना इसके लिए हमारे पास तीसरा कोई ना कोई प्रमाण्य बुद्धि वाला व्यक्ति चाहिए। जैसे कि रामपाल की जो किताबें हैं उसमें क्या एक भी अक्षर आप ये कहोगे कि ये गलत है? ये रामपाल ने गलत बोल दिया है नहीं कहेंगे। नहीं कहेंगे। इसलिए नहीं कहेंगे क्योंकि वो आपके लिए प्रमाण है। ठीक है? तो यदि आप ये गीता में मान रहे हो कि दो प्रकार की बुद्धि दो प्रकार के बातें हैं उसमें तो प्रॉब्लम ये आ रही है दो प्रकार की बातें दिख रही हैं। है नहीं हमारी जब हम उसका अर्थ बताते तब मगर फिलहाल अगर आपकी बात मान ली जाए कि दो प्रकार का अर्थ है तो दो प्रकार के अर्थ में किस अर्थ के कारण दूसरे अर्थ को काटे इसका समाधान गीता के अनुसार नहीं हो सकता। जिसको भी आप ले आओगे सनातन बीज वाली बात को काटने के लिए आप जो भी श्लोक ले आओगे मैं आपसे यह पूछूंगा कि भैया सनातन बीज के आधार पे आपने इसको क्यों नहीं काटा आपने उसके आधार पर सनातन बीज को क्यों काट दिया ये बताओ तो

01:13:11:27 गीता की सीमा में रह के आप नहीं बता सकते समझ रहे हो दो में से एक को किस आधार पर चुनना है ये गीता में डिसाइड नहीं हो पाएगा क्योंकि गीता हो गई गीता के प्रति हमारी दोष दृष्टि हो गई कि इसमें कहीं कहीं पर गलत है। तो गीता ये नहीं अब बता सकती कि भैया कहां पे गलत है कहां सही है। गलत नहीं कह रहे हैं। उसे गलत नहीं कह रहे हैं। क्योंकि गीता ज्ञान दाता खुद के बारे में बता रहा है। वो उसका अपना ज्ञान है। और जो परमात्मा के बारे में आपके आपके व्यक्ति ने स्वयं ये लिखा है कि कहीं कहीं पे वो मिथ्या ज्ञान है। झूठ ज्ञान है। मैं बता देता हूं कहां लिखा है।

01:14:13:27 ये सब छोड़ो गीता का ज्ञान जो हो ना हो सो ठीक क्यों छोड़े आपके आपके बाबा जी अपनी किताब में यह कह रहे हैं कि गीता के गीता कहने वाले ने कई जगह झूठ बोला है और वो झूठ बोलता है अपना उल्लू सीधा करने के लिए बोला नहीं बता रहा हूं बता रहा हूं उसका ज्ञान करने लायक नहीं है ये बोला होगा अरे अरे झूठ बोला है यार ये हमें तुमने हमारी किताबें पढ़ ली है और ये देखो ये देखो काल ब्रह्म ने अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए झूठ सच का सहारा भी लिया है। झूठ सच का सहारा भी लिया है। ये लिखा है गरमा गीता की पेज नंबर 24 अब क्या ये बताओ इसलिए कहा है क्योंकि अर्जुन को कह रहा था कि अगर तुम जीत जाओगे जीत जाओगे तो अरे मूर्ख व्यक्ति अरे भैया काल झूठ बोलता है ना और मर जाओगे तो स्वर्ग कागे मैं मैं पूछ रहा हूं काल झूठ मैं पूछ रहा हूं काल झूठ बोलता है ना बोल तो गया ना

01:15:29:13 बोल तो मैंने बोलता है काल झूठ बोलता है बोलता है ना गीता किसने गीता गीता गीता किसने बोली गीता किसने बोली काल ने काल ने काल तो झूठ बोलता है गीता काल ने बोली है अर्जुन को कह रहा था पूरा पूरी जब कहानी पुराण पढ़ोगे तब सभा समझ में अरे भैया मैं कह रहा हूं जो झूठा व्यक्ति है वो कहीं भी झूठ बोल सकता है ना ये कैसे तय होगा कि उसने गीता में झूठ नहीं बोला है हम्। युद्ध कराने के लिए उसने जबरदस्ती प्रेर। अरे यार फालतू की बातें करोगे। फालतू की बातें करोगे। मैं बात को नहीं मानूंगा। आगे नहीं बढ़ाऊंगा। मैं पूछ रहा हूं जो झूठ बोल बोलता है वो तो कहीं भी बोल सकता है ना। विषय को दूर रखो। उस विषय को दूर रखो। थोड़ा क्यों दूर रखें? क्यों दूर रखें? क्यों दूर रखें? क्यों दूर रखें? क्यों दूर रखें? क्यों दूर रखें? इसका आधार क्या है? इसका आधार क्या है? इसका आधार क्या है? दूर रखने का आधार क्या है? मैं पूछ रहा हूं दूर रखने का आधार क्या है मेरे भाई? विषय पर बात करनी है आपको।

01:16:44:19 विषय पर बात करनी है आपको। विषय पर बात करनी है आपको। विषय पर बात करनी है आपको। विषय पर बात करनी है आपको? करनी है। करनी है। अच्छा ठीक दूर क्यों रखें इसलिए कि आपको समझना नहीं है समझना चाहते नहीं है इसी कारण और फिर यहां क्यों आए हो तो फिर यहां क्यों आए हो तो फिर यहां क्यों आए फिर तो कोई बात मत बोलो जब मुझे समझनी नहीं है तय हो चुका ये कहो कि तुम्हारे तत्व ज्ञानी की तत्व निकल चुका अब सुनो वो जो उस कर रहे थे आपने ढूंढा ऑपरेटर जी वह उस वाला

01:17:41:27 ऑपरेटर जी आपने उस वाला ढूंढा क्या? इनकी किताब में उस लिखा है। अब मैं आपको दिखाता हूं। हां भैया गरिमा गीता की पृष्ठ क्रमांक 63 इसमें आपका परमात्मा कबीर साहब की वाणी दिखाई जा रही है। पष्ठ क्रमांक 63 63 63 में लिखा हुआ है कि वह परमात्मा जिसका

01:18:26:00 काल ना हो यानी अविनाशी। यह कौन कह रहा है? यह कह रहा है कबीर। कबीर कह रहे हैं ये बात। ठीक है? कबीर साहब कहते हैं इसी शब्द रमायणी में वो रमायणी लिखी हुई है। उसके बाद उसका भावार्थ लिखा गया है आपके रामपाल जी के द्वारा। तो रामपाल जी भी कह रहे हैं यह बात और कबीर भी कह रहे हैं। क्या कह रहे हैं कि 63 आ गया। इसमें नीचे आइए जरा इससे पहले इनको दिखा दो। ये किसकी वाणी है? पहले दिखा दो पृष्ठ क्रमांक। पृष्ठ क्रमांक दिखा दो। इधर पीछे इससे पहले वाला। इससे पहले वाला हां हां ये देखो ये ये लिखा है कबीर साहब। कबीर साहब कहते हैं इसी शब्द रमायणी में और फिर शब्द है और फिर वहां से उसका भावार्थ है और अब उसमें नीचे आओ 63 अब इसमें 63 में लिखा हुआ है लगभग बीच का हिस्सा है उसमें लिखा है कि वह परमात्मा जिसका जैसे अकाल मूरत वह परमात्मा

01:19:36:19 जैसे अकाल मूरत मुझे दिख रहा है बिल्कुल सेंटर में है इस समय ऊपर से आठवीं दसवीं लाइन होगा मिल गया ये मेरा हां मिल गया क्या लिखा है वह परमात्मा जिसका जिसका काल ना हो यानी अविनाशी अंडरलाइन कर दीजिए दर्शकों के लिए कर दीजिए अंडरलाइन वह परमात्मा जिसका काल ना हो यानी अविनाशी यह इस समय स्क्रीन पर जितनी लाइनें लिख रही है वह गिन के बता दूं एक दो तीन चार पांच छ सात आठवीं लाइन इस समय जितनी लाइन दिख रही है उसमें आठवीं लाइन है।

01:20:19:27 अंडरलाइन कर दीजिए। वह परमात्मा जिसका काल ना हो यानी

01:20:24:12 अविनाशी। सत्पुरुष वह सच्चा परमात्मा जिसका नाश ना हो यानी अविनाशी। शब्द स्वरूपी राम वह परमात्मा जिसका वास्तविक स्वरूप सप्त है। शब्द है। और शब्द खंड नहीं होता। वह नाश में नहीं आता। यानी अविनाशी। ये

⬜ Not used yet · 01:20:39:25 – 01:24:13:22 (3:34)

01:20:39:25 वह वह अपने से अलग कर दिया कबीर जी ने इसके ऊपर है इसके ऊपर थोड़ा तीन चार लाइन वा का क्या अर्थ निकल रहा है वह कोई और है ना अपने लिए तो मैं कहेंगे ना जैसे वहां वो उस परमात्मा कह रहे हैं वह परमात्मा क्यों कह है कबीर अलग है क्या कोई हिंदी ग्रामर पढ़ी है व्याकरण पढ़ी है कबीर अलग है और कबीर कबीर अलग है अविनाशी परमात्मा अलग है वही अविनाशी परमात्मा कबीर ही अविनाशी परमात्मा है तो कबीर कहेगा ना मैं मैं हर बार जैसे तुम कह रहे होगे भगवत गीता में काल ने कहा उस उस क्यों कहा उस

01:21:34:26 उसने अपने बारे में अलग और परमात्मा के बारे में अलग ज्ञान यहां पर भी यहां पर भी परमात्मा के बारे परमात्मा को अपने से अलग कर रहा है वो कबीर और सुनो और परमा और और ले लो और ले लो और ले लो और ले लो इसमें वो वाला निकालिए जरा जिसमें वो कहा था कि वो क्या कहते हैं प्रहलाद वगैरह सब जो है [गला साफ़ करने की आवाज़]

01:22:25:18 वो प्रह्लाद वाला पृष्ठ निकालिए जिसमें प्रह्लाद कहा है। प्रह्लाद प्रह्लाद और व्यास ये सब नारद जी इन सबको कहा है कि वो सब परमात्मा है। ये परमात्मा की वाणी है। गुरु बिन वेद पढ़े ज्ञानी अरे भाई साहब अरे रुक जाओ भैया रुक जाओ रुक जाओ तुम्हारी एक एक बात तो हम काटेंगे हम तुम्हारे जैसों के लिए हमारा जन्म हुआ है दिखा रहे है रुक जाओ

01:23:18:28 अच्छा तब तक इनको गीता 13 ज्ञान अमृत का दिखाओ 30 शंका समाधान का प्रश्न संख्या 30 हां यहां पे ये आ जाओ 59 गरिमा गीता की 59 पे आ जाओ और वह भी निकाल लो तब तक गीता तेरा ज्ञान अमृत

01:23:53:18 59 में आ जाओ 59 में यह कबीर की वाणी चल रही है। कबीर रामायणी नंबर 36 और उसका भावार्थ कर रहे हैं। रामपाल ऊपर ही है ऊपर ऊपर पैराग्राफ में ऊपर हां और ऊपर हां संसार के नर

01:24:13:22 नारी सनक सनंदन सनातन तथा संत कुमार तथा नारद जी व्यास जी उनके पिता ऋषि पाराशर जी प्रह्लाद तथा मुनिंद्र ऋषि जो स्वयं परमात्मा कबीर जी ही थे।

⬜ Not used yet · 01:24:31:20 – 01:54:40:24 (30:09)

01:24:31:20 यह व्यास जी स्वयं कबीर हैं। तो अब आप आज से कहेंगे वेदों में प्रमाण है व्यास देव भगवान है। और दिखाओ भैया आप तब तक गरमा की वो गीता तेरा ज्ञान अमृत निकालिए। हां भाई तो दो बातें यहां पर आ रही हैं। एक अपने से अलग के बारे में कबीर भी बात कर रहे हैं। दूसरा कबीर व्यास जी को भी कहा जा रहा है। और तीसरा अब हम आपको बंपर धमाका दे रहे हैं। फिर से भगवान बताया जा रहा है। श्री कृष्ण को गीता का ज्ञान देने वाला भगवान श्री कृष्ण ही थे। शंका समाधान में और प्रश्न जो प्रश्न है वह है 30 नंबर का

01:25:31:01 नीचे आइए प्रश्न संख्या से नहीं ढूंढेंगे वो उसमें देखिए कॉन्टक्स्ट में हां ये 15 चल रहा है हां ये रहा प्रश्न नंबर 15 वह परमात्मा कौन है जो कुल का मालिक है कहां प्रमाण है यही है यही है जहां अभी आपने किया था 15 नंबर कौन सी पुस्तक तेरा ज्ञान अमृत गीता तेरा ज्ञान अमृत अभी आए तो थे आप ऑपरेटर जी 15 नंबर पे आपका ऊपर नीचे क्यों हो गए हां और नीचे आइए प्रश्न संख्या और नीचे आइए और नीचे आइए और नीचे आइए अभी बता रहे हैं आपको प्रश्न संख्या और नीचे आइए इसमें नहीं है इसमें नहीं है और नीचे आइए 30 30 नंबर पे आओ

01:26:20:12 हां इसमें हां ये देखिए जिंदा बाबा का प्रश्न है कि हे परमात्मा धर्मदास गीता का ज्ञान किसने दिया? धर्मदास बता रहे हैं कुल के मालिक सर्वशक्तिमान भगवान श्री कृष्ण ने यही श्री विष्णु जी भी हैं। कहां पर पढ़ रहे हैं? प्रश्न संख्या 30 अरे तुम्हारे यहां पर जो है वह प्रश्न बदलते रहते हैं। घपला है ना किताबें छपती कहां पर है? यह मामले को लेकर के घपला है। तो अपना देखो ये प्रश्न संख्या 30 कहां पर है?

01:27:04:00 कितना बज गया? डेढ़ घंटा हो गया। सबसे प्रश्न संख्या क्या है? प्रश्न संख्या कुछ लिखा है 31 31 30

01:28:21:15 इसमें तो प्रश्न संख्या 30 अरे भाई स्क्रीन पर देख लो ना शंका समाधान में लिखा हुआ है 30 आया हम हां क्या कह रहे है हम क्या कह रहे इसमें क्या बता क्या बता रहे है अरे पढ़ो ना क्या बता रहे है पढ़ो इसी को पढूं क्या लिखा है हां पढ़ो पहले 30 पढ़ता हूं मैं है ना जिंदा बाबा कहता है हे महात्मा धर्मदास पवित्र गीता का किसने दिया धर्मदास का उत्तर है कुल के मालिक सर्वशक्तिमान भगवान श्री कृष्ण ने यही श्री विष्णु जी हैं। ये धर्मदास धर्मदास का ज्ञान था। फिर जिंदा बाबा धर्मदास कौन है? धर्मदास कौन है? धर्मदास बांधवगढ़ के बनिया थे। कहने चाहिए जिन परमात्मा मथुरा मिले थे। ये वहां की चर्चा है। उनकी चर्चा हो रही थी। धर्मदास के साथ इनकी चर्चा ये धर्मदास का ज्ञान है। ये धर्मदास का ज्ञान है। तो ये भगवत गीता तुम्हारी ले लो। ये गरिमा गीता की निकालो। गरिमा गीता की निकालो। धर्मदास तुम्हारे लिए प्रमाण नहीं है ना। धर्मदास झूठ

01:29:36:19 बोल सकता है। धर्मदास को जितना ज्ञान था वही बता रहा था कि गीता ज्ञान किसने दिया लेकिन परमात्मा ने बताया मतलब धर्मदास भी झूठा है। झूठ अज्ञानी था। झूठा अरे उसे जितना ज्ञान था बता रहा था। मैं 23 नंबर प्रश्न प्रश्न संख्या 23 निकालो। जिनका जितना ज्ञान होता है उतना बताता है उसे पष् संख्या 23 निकालो गरमा गीता ये पहला पैराग्राफ यही ज्ञान भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को श्री गीता जी के माध्यम से दिया है तो इसके ऊपर से पढ़े पहले मैं पढ़ता हूं सर्व उपस्थित संगत जिनता तथा ज्ञान के वचनों पर सबसे ज्यादा प्रभावित हो गई उसके तीन दिन तक रात्रि व दिन के सत्संग ऐसे ही किए उसने बताया कि उसने बताया कि मैंने देखा एक व्यक्ति रो रहा है। यह नकली संत की कथा है ना। कारण पूछा तो बताया कि मेरे पैर में असनी पीड़ा हो रही इसलिए रो रहा हूं। वह संत कहता है कि मैंने उस मूर्ख को कहा क्यों चिल्लाता है अज्ञानी? यह कष्ट तो शरीर को है। तुझे क्या? बस यह विचार कर वह दुखी व्यक्ति

01:30:51:22 चुप हो गया। फिर वही रोया। फिर नहीं रोया। दुख का अंत हुआ। इसी प्रकार अज्ञान वश नादान पानी कष्ट पाता है। यही ज्ञान भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को श्री गीता जी के माध्यम से बताया। यानी कि उसको भी ये ज्ञान था कि गीता का ज्ञान किसने दिया? तू क्यों रोता है? तू क्यों दुख पाता है? तू क्या ले आया है? तू क्या ले जाएगा? यही कृष्ण यही ज्ञान किसने दिया? इस प्रकार किसका ज्ञान था? नकली संत का। तो ये लिखने वाला का नहीं है ज्ञान। ये उसका ज्ञान है जो नकली संत यानी जो नकली संत यहां पे बता रहा है वो बात झूठ है बात उसकी अगर मान लो कोई पुस्तक कोई लेखक है जो कहानी लिखता है तुतलों की दो तुतलों की तीन तुतलों की के जैसे हम नहीं गए नहीं गए हम तो उठाना उठा रहे टूिया ठान उठा रहे ऐसा तो वो लेखक ततला थोड़ी है वो तो कहानी बना रहा है अरे भाई मैं ये कह रहा हूं मैं ये कह रहा हूं कि उसने बताया कि मैंने देखा देखो इसको नकली संत की कथा पहले सुना कौन रहा है ये बताओ जरा हां तो नकली संत का ज्ञान है कि गीता का ज्ञान नकली संत की कथा सुना कौन रहा है ये बताओ सुना कौन रहा है रामपाल जी महाराज नकली हां नकली संत की कथा कौन सुना

01:32:06:24 रहे हैं रामपाल जी महाराज ठीक है लेकिन रामपाल का ज्ञान नहीं है कि गीता ज्ञान किसने किया नहीं है नहीं नहीं मैं बता रहा हूं मैं बता रहा हूं उसमें फिर उन्होंने चालू इन्होंने कहा हरियाणा प्रांत के जींद जिले में एक पिंडारा नामक तीर्थ है यह रामपाल जी कह रहे हैं वहां पर दो आश्रम है। यह रामपाल जी कह रहे हैं। एक समय वहां पर ऐसा ऐसासा हुआ। यह सब हुआ। सेक्रेटरी ने दी थी। उस महात्मा जी ने अपने वचन सुनाए। यह अभी तक रामपाल ने ही कहा है कि उस महात्मा ने अपने वचन सुनाए। अब इसके आगे उसने अपने वचन क्या सुनाए? यह महात्मा अजर अमर है। यह ना मरती है, ना जन्मती है। ना ही सुखदख का भोगता है। आत्मा तो कोई कष्ट नहीं होता। यह वह वचन सुना रहे हैं। यह अज्ञानी यह जन समूह अज्ञान वश दुख दुखी सुखी होते हैं। जो भी कष्ट है वह शरीर को उसके कर्म का दंड होता है। यह सब फिर वो संत अपनी अच्छी-अच्छी बातें सुना रहे हैं। और फिर यहां पर आकर के उन्होंने यह कहा कि उसने बताया कि मैंने देखा कि एक व्यक्ति कारण पूछा तो बताया सहनीय पीड़ा हो रही थी। वह संत कहता है कि मैंने उस मूर्ख को क्यों चिल्लाता है अज्ञानी? यह कष्ट तो शरीर को है। तुझे क्या है? बस यह विचार कर कि वह दुखी व्यक्ति चुप हो गया फिर नहीं रोया दुख

01:33:22:00 का अंत हुआ इसी प्रकार दुख का अंत हो गया इसी प्रकार अज्ञानवश जब उस बाबा ने उस अब यहां पर ये बाबा जो कह रहा है वो नहीं चल रहा है उसने ये बताया तो ये कौन लिख रहा है ये कौन लिख रहा है उसने ये बताया उसने बताया यानी कि यह लेखक लिख रहा है उसने यह बताया उसने उसको यह बताया यह लेखक लिख रहा है और उसने उसको क्या बताया उसने उसको बताया कि यह जो शरीर है यह जो शरीर है उस मूर्ख को उसने उसको बताया कि मैंने उस मूर्ख को कहा कि क्यों चिल्लाता है अज्ञानी है कष्ट तो शरीर को होता है बस यह विचार वह व्यक्ति चुप हो गया फिर नहीं रोया दुख का अंत हुआ दुख का अंत हो गया रामपाल दास ये बोल रहे हैं कि उस संत ने उस व्यक्ति को बताया जो रो रहा था कि भैया ये शरीर आत्मा को कुछ नहीं होता तू बेकार में ही रो रहा है। जब उस व्यक्ति ने ऐसा विचार किया और यह भी रामपाल बता रहे हैं। जब उस व्यक्ति ने ऐसा विचार किया तो वह व्यक्ति चुप हो गया फिर नहीं रोया। यह रामपाल बता रहे हैं। नकली संत की कथा बताते हुए रामपाल यह बात बोल रहे हैं कि एक संत ने एक रोते हुए व्यक्ति को कहा कि भाई दर्द जो होता है वो आत्मा को होता है। शरीर

01:34:37:01 को नहीं होता है। ठीक है? और शरीर को नहीं। एक मिनट। जब तुम विचार करोगे जब उसने ऐसा विचार किया तो उसका दर्द खत्म हो गया। यह कौन बता रहा है? यह कहानी सुना रहा है रामपाल और फिर जब ये कहानी खत्म हो गई कि जब वो चुप हो गया। फिर रामपाल कह रहे हैं इस प्रकार अज्ञान वश नादानी नादान प्राणी कष्ट पाता है। यही ज्ञान भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को श्री गीता जी के माध्यम से दिया है। एक अब बात ये आती है अब बात एक लेकिन रामपाल जी का ज्ञान नहीं है ये। अरे मेरे भाई कहानी कौन सुना रहा है? कहानी तो यहां खत्म हो गई ना कि उसको ऐसा ऐसा हुआ। चौथे दिन की भी रात्रि कहानी है। पूरी कहानी कहां है? चौथे दिनकर महात्मा जी ने ऐसे ही ज्ञान योग से मुक्ति का मार्ग बताया। तो यहां पर उसके खुद के वचन नहीं है। उसके खुद के वचन नहीं है। जहां पर है वहां पर वो रामपाल बता रहे हैं कि उसने ये वचन कहे। दूसरी बात ये है। ठीक है। ठीक है। ठीक है। ठीक है। मैं मैं बताता हूं। आप नहीं मान रहे। मैं बताता हूं। अब ये बताइए कि यहां पर तो लिख दिया है कि यही ज्ञान भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को श्री गीता जी के माध्यम से दिया है। ठीक। और पीछे आपको ऐसा कुछ मिल रहा है जिसके आधार पर

01:35:52:12 ऐसा नहीं माना जा सकता कि यही ज्ञान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता जी के माध्यम से दिया है। ठीक। ठीक है? ठीक है ना? ऐसा नहीं माना जा सकता। यहां पर लिखा है कि भगवान श्री कृष्ण ने ही अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया है। यहां पर यह लिखा है। इसके पीछे कुछ ऐसा भी लिखा है जिसके कारण ये नहीं माना जा सकता कि अर्जुन को श्री कृष्ण ने गीता का ज्ञान दिया है। ठीक। ठीक है। हम अरे समझ में आ रही मेरी बात कि नहीं? नहीं आ रही। चक्कर आ गया। चक्कर नहीं आ क्या बोल दिया [हंसी] थोड़ी कोई व्यक्ति निकला इधर ध्यान बढ़ गया था अच्छा ठीक है बताता हूं हां बताओ ये जो ये जो लाइन है यही ज्ञान भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को दिया है ठीक है हम ये ये लाइन में ऐसा लग रहा है कि भगवान श्री कृष्ण ने ही अर्जुन को ज्ञान दिया है गीता का लग रहा है एक मिनट एक मिनट अब आपका कहना है कि इसके पीछे कुछ ऐसी ऐसी लाइन है जिससे कि यह बात कट जाती है कि कृष्ण ने अर्जुन को ज्ञान दिया गीता का

01:37:09:10 है ना अरे सही कह रहा हूं ना ठीक है ना तो तो अब बात ये आती है कि हम ये क्यों माने कि पीछे वाली लाइन से ये बात ये बात काट दे हम ये क्यों ना माने इस बात से पीछे वाली लाइन काट दो देखो तुम पूरी पुस्तक काट दो नहीं नहीं नहीं पूरी पुस्तक नहीं आप भागिए मत प्रश्न से मत भागिए प्रश्न ये है प्रश्न ये है कि हम ये क्यों ना मान ले कि यहां भी दो तरह का ज्ञान है हम ये माने यहां दो तरह का ज्ञान है एक रामपाल ने अपने मन का दे दिया और एक परमेश्वर का दिया है रामपाल भी काल है हम ये क्यों ना माने आपको जैसा मानना हो मान लीजिए हमें जैसा मानना था हमने मान दिया तो तो तुम तो हमारे टक्कर में अब तुम हाथ जोड़ रहे हो तो कहां तुम कहां तुम सिद्ध कर पा रहे हो कुछ कहां तुम सिद्ध कर पा रहे हो अरे भैया सुनो सुनो गीता जी में दो तरह की बातें आई तुमने थोक दिया कि एक काल का ज्ञान है एक अपना ज्ञान है परमेश्वर का ठीक जबकि तुमने कहा कि काल भी झूठ बोलता है ठीक अब यहां पे

01:38:24:14 दो तरह की बातें दिख रही यहां पे दो तरह की बातें दिख रही तो तुम उन दोनों बातों में सामंजस्य बिठा रहे हो यहां पे ये नहीं कह रहे कि दो तरह एक मिनट यहां पे ये नहीं कह रहे कि दो तरह का ज्ञान है और जो है एक को छोड़ दो एक को पकड़ लो यहां नहीं कह रहे क्योंकि बाबा ने कहा है वहां पे जो है तुम्हारे हिसाब से किसी ऐसे ने कहा है जो झूठ बोलता है इसलिए और तुम्हारे लिए गीता जो है शास्त्र है कहानी शुरू हुई थी शास्त्र क्या होगा शास्त्र वो होगा जो प्रामाणिक व्यक्ति बोले कहानी यही चल रही थी ना शास्त्र क्या होगा शास्त्र किसे कहते कहते हैं जो कोई प्रामाणिक व्यक्ति बोले हां कोई डरा रहा है क्या आपको कैमरे के पीछे खड़ा हुआ बार बार देख रहा हूं ना नहीं वो दिखाओ मत दिखाओ मत अभी आपने कहा था ना कि कोई लड़की है जो आपको परेशान कर रही है विश्वामित्र जी इधर कोई आई थी ना मतलब लड़की परेशान नहीं कर रही मतलब इनके लिए ध्यान बढ़ गया था अच्छा तो मैं मैं ये कह रहा हूं मैं ये कह रहा हूं हमारी बात ये चल रही कि शास्त्र उसे कहते हैं। शास्त्र उसे कहते हैं जो किसी प्रामाणिक व्यक्ति के द्वारा लिखा गया हो। हम ठीक है। हां

01:39:40:04 तो क्या काल प्रामाणिक व्यक्ति है? काल हम काल क्या कह रहा है? प्रमाणिक व्यक्ति हम यहां पहले एक बात जो अधूरी लगेगी उसको पूरा कर देता हूं। मैं उसे सुन लीजिए। शुरू में गीता ज्ञान दाता ब्रह्म जो श्री कृष्ण से कहता कि अर्जुन तू युद्ध कर अगर युद्ध में जीत गया तो पृथ्वी फालतू की बातें मुझसे मत लो यार मैं हलवा खाने नहीं आया हूं यहां लपसी चाटने नहीं आया हूं यहां आप आप जो है आप जो है मुझे टू द पॉइंट रहिए मुझे आपकी बकवास बातें आपकी जो फेंटसी भरी दुनिया है वो बिल्कुल नहीं सुननी है बिल्कुल भी नहीं सुननी है टू द पॉइंट रहिए काल प्रामाणिक व्यक्ति है या नहीं बस यह बताइए

01:40:31:03 तो फिर अर्जुन को उस समय अर्जुन को फिर झूठ का बोला अरे तो झूठ यानी यानी झूठा व्यक्ति है ना यानी झूठा व्यक्ति है ना हो गया झूठा हो गया झूठा मैं अरे यार भैया ऐसा है मैं आपको बहुत देर तक झेल चुका हूं। अब अगर आप जो है पॉइंट से हटकर बात करें मैं क्लियर आपसे पूछ रहा हूं। आप मुझे शास्त्रों का प्रमाण मत दीजिए। मैं अभी आपसे आपकी मान्यता पूछ रहा हूं। क्या काल प्रामाणिक व्यक्ति है?

01:41:05:25 हम नहीं जानते हैं कि नहीं है। आपको जो मान हो गया इसीलिए कहता हूं। इसीलिए कहता हूं मत पड़ो चक्कर में। कोई नहीं है टक्कर में। अब आप जा सकते हैं। अरे तुमने कह तो दिया हम नहीं जानते। और क्या? मैंने कहा क्या हम नहीं जानते। हारा हुआ किसे कहते हैं? जो कहता है हाथ खड़े करता है। मैं नहीं मैं मैं नहीं जानता यह कहता है वो हारा हुआ है। वो निरत्तर होता है। सुनो अब ध्यान अब सुनो शास्त्र उसे कहते हैं जो किसी ऐसे की वाणी हो जिस पर हमें अक्षरस विश्वास हो। अगर हमारी उसके प्रति दोष दृष्टि है तो हमारा उस पर विश्वास होना सिद्ध नहीं होता। वो हमारे लिए शास्त्र नहीं है और आपके कई जो आपके बुद्धिजीवी गुरु भाई वगैरह है उनसे पूछ लेना उनके लिए गीता अंतिम प्रमाण नहीं है तो यहां बात ही खत्म हो जाती है आप इसको शास्त्र मत कहो गीता को ये शास्त्र नहीं है आपका शास्त्र ये उसका है जिसको इसकी एक एक लाइन पर विश्वास हो ये शास्त्र उसका है आप लोग क्या कर रहे हो रामपाल क्या कर रहा है वो भी बता दूं। रामपाल यह कह रहा है कि मैं तुम्हें शास्त्र

01:42:20:26 की शास्त्र की बात बता रहा हूं और शास्त्र की बात बताने के नाम पर रामपाल ये कह रहा है कि ये शास्त्र जो है एक झूठे ने बोले हैं। इसलिए इनकी बातों पर विश्वास मत करो। मेरे साथ चलो। ये है उसकी शास्त्रों के प्रति बताई जाने वाली श्रद्धा आस्था। हमारे लिए काल जो गीता ज्ञान दाता है वो भगवान श्री कृष्ण है हमारे लिए। और वो झूठ नहीं बोल रहे हैं गीता में। समझ गए? क्योंकि वेदव्यास जी ने कहा वेदव्यास जी हमारे आचार्य हैं और प्रमाण है। गुरु वाणी प्रमाण है। अब अब बात एक रह गई हमारी जो आपने कहा था कि परमेश्वर को उसने अलग किया। वो भी दिखा दो भाई। परमेश्वर को अलग करने वाला पेज था ना जो 59 नंबर वो आप बता दीजिए। परमेश्वर को अलग क्या किया है?

01:43:13:15 गीता अध्याय 62 श्लोक 18 गीता अरे मैं कह रहा हूं 59 नंबर पर तुम्हारी गरिमा गीता की में लिखा हुआ है। कबीर कह रहा है वो परमात्मा वो परमात्मा अपने से अलग कर रहा है परमात्मा को। वो बताओ क्यों कर रहा है? 59 नहीं है और कोई था वो 63 था शायद हां 63

01:43:49:18 यहां एक बात ये है कि जो हम बताते हैं उसे आप स्वीकार करते नहीं है। अपनी जबरदस्त तेज आवाज में हमारी बात को दबाते हैं और कहते हैं कि जो मैं कह रहा हूं वही नहीं नहीं जो मैं कहता हूं उसको आप स्वीकार कर रहे हैं। आपने भी तो कहा आप मानो हम नहीं मानते। आपने भी तो कहा आप अपनी बात तर्क और आप अपनी बात तर्क और प्रमाण से रखिए। आप इस तरीके से आप तो आए थे ना कोई नहीं है चक्कर में। कोई नहीं है टक्कर में। मत पड़ो चक्कर में ये करने आए थे ना। अब क्यों ढीले पड़ रहे हो? हवा निकल गई। तो बताओ ये अरे तो तुम जो कह दोगे तुम तुम जो कह दोगे वो दिन को रात कह दोगे तो मैं रात मान लूं क्योंकि तुमने कहा है तुमने कहा कि गीता तुमने कहा कि गीता ज्ञान दाता ने गीता में कुछ श्लोकों में जो परमेश्वर है उसको अपने से अलग किया है अब मैं यहां पर कबीर की वाणी में कबीर के द्वारा परमेश्वर को अलग करना सिद्ध कर रहा हूं 63 नंबर पृष्ठ और अभी वो अकाल मूर्त वाला वो था कहां अभी आपने निकाला 63 नंबर आ गया प्रश्न

01:44:57:10 इसमें वही पे आइए बीच में थे बीच में से अकाल मूरत परमात्मा दिख रहा है बीचो बीच ऊपर ऊपर इससे ऊपर थोड़ा तीन चार इसके छवी लाइन हां ये वह परमात्मा जिसका काल ना हो यानी अविनाशी बार-बार वह कहा है सत्पुरुष वह सच्चा परमात्मा जिसका नाश ना हो। यह अपने से अलग क्यों कर रहा है कबीर? कबीर परमात्मा नहीं है। इसका मतलब रामपाल तो बहुत दूर की बात है।

01:45:33:03 तुम्हारी तुम्हारी उससे युक्ति से तुम्हें जवाब दिया है। ये सही लिखा है। इसको अपन गलत कैसे ठहरा सकते हैं? तो ऐसे ही वो भी सही लिखा उसको गलत कैसे ठहरा सकते हैं कबीर परमात्मा से कोई अलग परमात्मा है मैं कह रहा हूं कबीर से कोई अलग परमात्मा है वही तो परमात्मा है उससे अलग कोई कैसा होगा तो फिर वो यहां पे वो वो यहां पे सर्वनाम का उपयोग क्यों कर रहा है थर्ड पर्सन की तरह वो उसको कहना चाहिए कि मैं परमात्मा मैं वो परमा मैं मैं परमात्मा हूं जिसका नाश नहीं होता मैं मैं मैं वह मैं वह मैं मैं वह मैं वह मैं वह मैं वह मैं वह मैं मैं वह मैं वह क्यों कर रहा है अच्छे से पढ़ो। देखो यह कहता है हां जैसे अकाल मूर्त वह परमात्मा जिसका काल ना हो यानी अविनाशी। यानी यानी मतलब अर्थ यानी मतलब समझ रहे हैं ना? यानी समझ रहा हूं। सब उस परमात्मा को जो अविनाशी है उसको शब्द स्वरूपी राम अकाल मूरत प्रस आदि नामों से जाना जाता है वो आना है वो तो ये उस उस शब्द भी आ गया जो तुमने उस शब्द कहा था ना उस उस परमात्मा ये उस आ गया उस उस

01:46:48:24 मेरी भगवत गीता से उस निकाला था ना तुमने ये उस भी आ गया उस उसमें घुस यहां उस कहां लिखा है ये क्या परमात्मा परमात्मा जिसको शब्द स्वरूपी राम अकाल मूरत और सतपुरुष आदि नामों से जाना जाता है वो तो पाना है यह तो इस प्रकार है जैसे जल के तीन पर्यायवाची नाम जैसे जल पानी नीर ऐसे कहते रहने से जल प्राप्त नहीं हो सकता इसके लिए हेडपंप लगाना पड़ता है आदि आदि मतलब है ना अरे यार ये सब बातें क्यों बता रहे हो आप ये अपने से अलग क्यों किया है परमात्मा को अपने से अलग क्यों किया है? अब आप यहां से जा सकते हैं। अब आप यहां से जा सकते हैं। इसीलिए कहते हैं इसीलिए इसीलिए कहते हैं मत पड़ो चक्कर में। इसीलिए कहते हैं मत पड़ो चक्कर में। मेरे परमात्मा के लिए बोलता है आ के अपने से अलग कर दिया। और जब अपनी किताब में निकल आया था डब्बा डब्बा चब्बा हो गया। [हंसी]

01:47:59:18 मजा आ रहा था भैया। [हंसी] ये देखो [खांसने की आवाज़] साधक के लक्षण कहूं रहे जो पति पतिव्रता नारी कह कबीर परमात्मा को लगे आत्मा प्यारी इसमें क्या है

01:48:32:04 इसके आगे भावार्थ निकालिए भावार्थ अपनी किताब पढ़ेंगे तो पूरी पढ़ेंगे। पीछे का भी लो भाई पीछे का काट दो ना। वो भी काल ने बोला काट दो पीछे। नकली संत की कथा काट उसको। अपनी चीज पढ़ेंगे तो पूरी पढ़ेंगे। देखो पीछे क्या लिखा है। हमारी चीज पढ़ेंगे तो उसको काट दो। यहां ये लिखा है वो काट दो। मूर्ख कहीं के ना शास्त्र का पता ना गुरु का पता गुरु का सूक्ष्म ज्ञान देखा है इनका देख लिया इनका सूक्ष्म ज्ञान यही सूक्ष्म ज्ञान मिलता है खीर के माध्यम से विभिन्न द्वारों से बहती हुई बहता हुआ दूध जब आता है तब ये परम सूक्ष्म ज्ञान मिलता है जो शुरू जब तुम्हारा ये सूक्ष्मतम ज्ञान खत्म हो जाता है ना जय श्री राम जब तुम्हारा ये सूक्ष्मतम ज्ञान खत्म हो जाता है ना वहां से मनुवादियों का ज्ञान शुरू होता है शंकराचार्य का ज्ञान शुरू होता है ध्यान रखना सब खत्म हो जाएगा। जिस दिन शंकराचार्य की सुरक्षा का घेरा हट गया। ध्यान रखो शंकराचार्य है तो हम हैं। सूक्ष्म ज्ञान ले फिर रहे हैं। तुम्हारे

01:49:47:06 जो बाबा जी है ना उनकी खीखी निकल आएगी। जिस दिन नास्तिक के तौर पर उनसे बात हो गई। सिद्ध कर ईश्वर को। परमेश्वर कौन है? कौन नहीं है? ये हम बताते हैं। परमेश्वर है ये हम नहीं बताते। ये अपना सीख के आओ शंकराचार्य से। क्यों? दो दो सनातन जानने मिला भैया।

01:50:23:13 शास्त्रवाद जी को ले लीजिए। जी भाटी जी बोले जय श्री राम। ये इनका दोगलापन देख के हंसी आ रही थी। पूरा पढ़िए। तुम एक श्लोक आगे पीछे नहीं पढ़ते और अपना जजमेंट पारित कर देते हो और हमें ज्ञान दे रहे हो पूरा पढ़ लीजिए। क्यों पढ़े पूरा? भूल जाते हो। नहीं इनसे ये कहो जैसे आप इस इनसे ये कहो जैसे आप पिछले श्लोक से पहला श्लोक काट रहे हो। पहले से बाद वाला काट रहे हो अपने अनुसार वैसे ही हम काट रहे हैं। पूर्ण संत की कथा कट। अभी ले तेरी किताब में लिखा है। सही है। सही है। हां जी। इनके साथ यही तरीका ठीक है। बिल्कुल ये सही तरीका है। इनके साथ यही तरीका अपना चाहिए। जी ये ये जो है उस उस करके हमें अलग करता है। ठीक है? हमारे भगवान कृष्ण को और उस परमात्मा वो परमात्मा बोल के परमात्मा को कृष्ण से अलग करता है। ठीक है? तो भाई अभी यहां पे जब उस आपने दिखा दिया तो फिर वहां पे एक्सप्लेनेशन देने लग गया। ऐसे ऐसे ऐसे कुछ नहीं कितना फिर तो फिर तो हैंडपंप चला रहा है। [हंसी] फिर हैंडपंप चला रहा है। वही बात है। मैंने मैंने कमेंट किया है एक ठो कि उसको ठूस रहा हूं खाली। [हंसी] ठूस नहीं

01:51:38:14 पा रहा बेचारा। [गला साफ़ करने की आवाज़] अब हजम नहीं हो रहा है उसको। भाई उस ये ठीक है। उसका मतलब कबीर कहां लिखा है? ये बताओ ना। ये तो आगे की बातें यह तो आगे की बातें हैं। चलो देखो मिल जाए तो मैं आपको एक चीज दिखाता हूं। बहुत बढ़िया जाते-ते विराम होने से पहले दिखा दूं। अगर अर्जुन को मोक्ष वाला चीज जी आप बोलिए आप बोलिए। सेवक राज आया था ना और चला गया क्या?

01:52:15:13 जो [गला साफ़ करने की आवाज़] चेहरा नहीं दिखाते उनको हम भगा देते हैं तेज स्पीड में। हां, ठीक। ठीक है। ये लोग इतने बेशर्म टाइप के लोग हैं। ऐसी बात बोलने में इनको जरा भी वो तकलीफ नहीं होती जो सामने वाले की आस्था पर चोट पहुंच रही है। बहुत आराम से बोलते हैं। फाड़ दो। कोई फर्क नहीं पड़ता। देख रहे हो? और जब उसके ही किताब को फाड़ने की बात आई तब वहां पर क्या बोल रहा है कि बुरा तो लगेगा भाई। अपने पे उसको उठाते हुए उसे नहीं लगता है बुरा। हां जी क्या कह रहे हैं? कुछ कह रहे थे प्रेम सिंह भाटी जी।

01:53:02:21 नहीं मैं तो नहीं बोला था। कोई और ही बोले भाई साहब वो खीर खीर का नशा है खीर का ये खीर का नशा है पता नहीं जी कौन सा नशा [हंसी] भाई इतना भी खीर कैसे खा लिए भाई दिमाग ही उल्टा हो गया इसका अरे वो वो खीर तो एक बूंद भी खीर पा लोगे तो नशा हो जाएगा ऐसे वो नहीं देखा पादुभूत पादुरभूत [गला साफ़ करने की आवाज़] वाला बहुत खतरनाक [हंसी] वाह वही नशा है। अरे वही मैं बताया ना अभी नहीं जी कौन सा नश

01:53:48:02 ये इसका पेज नंबर जरा 99 निकालिए 99 पीडीएफ के अनुसार 99 कौन सा पेज अब ये लोग फिर से उतर के लड्डुओं पर आ गए हैं। हम मैंने देखा था एक तो एक इनका वीडियो जिसमें देखो भाई खोजने के लिए कुछ जाते हैं। प्रश्न हम सबको बिल्कुल छोटा-छोटा कर दो इसको ये भी दिखा दें जो कह रहा है ना कि अर्जुन ये देखिए प्रश्न क्रमांक 99 गरिमा गीता की

01:54:29:18 अर्जुन को तो तत्व ज्ञानी मिला नहीं था। झूठा व्यक्ति मिला था। है ना? [हंसी] और यह देखिए क्या लिखा है? अर्जुन यज्ञ में प्रतिष्ठित पहला पैराग्राफ लास्ट की तीन लाइन है।

01:54:40:24 अर्जुन यज्ञ में प्रतिष्ठित पूर्ण परमात्मा को इष्ट रूप में मानकर यज्ञ करता है तथा यज्ञों के साथ-साथ वास्तविक नाम का सुमिरण करके पूर्ण

⬜ Not used yet · 01:54:51:25 – 02:18:51:00 (23:59)

01:54:51:25 मोक्ष रूपी अमंत को प्राप्त हो जाता है। अर्थात पूर्ण परमात्मा को प्राप्त हो जाता है। लो भाई अर्जुन की मुक्ति हो गई। ये देख लेना तारेंद्र जी और ये लोग ये लोग क्या कहते रहते हैं कि भाई ये लोग कहते रहते हैं कि भाई मोक्ष कहां हुआ पांडवों का ये कहां हुआ वो कहां हुआ देख भाई तेरे ही में लिखा है ये भांग के नशे में जो किताबें लिखी है तुमने समझ गए बाबा जी ने भांग खा भांग खा के जो किताबें लिखी है ना उसी में लिखा है अर्जुन को मोक्ष हो गया हम लोग हमारी किताबें हम तुम लोग खोलते अपनी किताबें कभी देखी नहीं तो तुम पक्के सनातनी हो जाते [हंसी] उनका

01:55:42:07 बस छोटा कर दो अर्जुन को मोक्ष भी मिल गया तारेंद्र देख लेना अपना आंखें फाड़ फाड़ के देख लेना थोड़ा हां जी और कौन-कौन आए हैं आपका शुभ नाम क्या है भाई साहब आपके खेत में टहल रहे हैं जी आपकी आवाज नहीं आ रही। जी जय श्री राम। जय श्री राम। भाई जी। जय श्री राम। भाई जी मैं तो आपकी साइड में हूं। मैं तो सिर्फ मैं इसलिए आया हूं लाइव। यह इतने बेशर्म है ना यह रामपाल वाले जो चेले हैं यह मतलब हमारे जो ग्रंथ है जो हमारे जो भी पुराण है हमारे ये उनको कुछ समझते ही नहीं है। इनके लिए तो बस ज्ञान गंगा ही सब कुछ है। वही सच है सब कुछ है। इसीलिए तो मैंने आज फाड़ने की बात कही ना। मैं कह रहा इतने डीप है ना ये ये पता नहीं कहां-कहां से लेके आते हैं। कहां-कहां से लाइनें निकाल के लेके आते हैं। जी हमारे उसमें ये लिखा है। हमें तो वो लाइन आज तक नहीं मिली जो ये पढ़ पढ़ के सुनाते हैं। नहीं नहीं नहीं ये बात गलत है। हमें पता है ये कहां से लेके आते हैं। हम उन लाइनों को निकाल के इनका मुंह मुंह तोड़ते हैं।

01:56:57:10 हमें पता है कहां से लाते हैं। और कितना भी इनको कह लो इतने बेशर्म है ना फिर घूम फिर के वं आ जाते हैं। हर बार इनकी एक ही बात होती है कि हमारे तो जी तत्वदर्शी यह है। हमारे तत्वदर्शी वो हैं। अरे भाई बताओ जब सृष्टि की रचना हुई थी तब बात वहां तक भाई इनके तत्वदर्शी का तत्व भी निकाल दिया। मैं कह [गला साफ़ करने की आवाज़] रहा हूं जी जब सृष्टि की रचना हो रही थी तब कहां थे ये मेरी ये नहीं समझ में आ रहा। जब महाभारत का युद्ध हो रहा था तब कहां था इनका तत्वदर्शी जब

01:57:32:14 सबसे बड़ी बात है पका पकाया आम आपने मान लिया परमात्मा इसकी नहीं इसकी यही तत्व ज्ञान है इसकी नहीं इसकी मैंने कहां से जी मैंने रात भी आपका देखा था लास्ट टाइम का जो लाइव था उसमें एक वो आ रहा था कोई सोनीपत से था कुछ कोई नाम भूल गया मैं उसका वो भी बोल रहा था कि आप यह दिखाओ जी आप मेरे को हमारे उसमें तो वो जो अपनी गीता जी में जो श्लोक है उसके बारे में बोल रहा था ऊतपटांग ये वो जी फलाना है आप तो अपनी तरफ से बनाते हो ये हमारे उसमें तो यह है जी मैं यह कहता हूं इनको कि भ तुम समझते क्यों नहीं हो कि जो ग्रंथ पुराण है वही सच है और सनातन ही सच है। यह कितना भी कितना भी यह कोशिश कर ले सनातन के अलावा कुछ भी सत्य नहीं है। यह समझ नहीं पाते इस बात को। इनको कितना भी समझाओ आप ये बेशर्म है पूरे हम वही खीर वाली बात आ गई इन्होंने खीर खाई है ना जी उसका असर दिख रहा है इनके ऊपर वो खीर इनके दिमाग में चढ़ गई है सबसे बड़ी बात आप धूर्तता देखिए दोगलापन देखिए अपनी किताब मानेंगे तो पीछे आगे सब पढ़ेंगे हमारे में मानेंगे तो पीछे हमारे मानेंगे तो पीछे वाले से आगे वाला आगे

01:58:47:15 वाले से पीछे वाला अपने मन मुताबिक काट देंगे देखो ये कट रहा है अरे काट दे नकली संत की कथा नकली संत की कथा जो लिखा हुआ है टाइटल वो काट फिर मान गीता का ज्ञान कृष्ण ने दिया हालांकि उस उस पैराग्राफ में उस पैराग्राफ में वो जो लाइन है ना गीता का ज्ञान श्री कृष्ण ने दिया है वो लाइन रामपाल की ही लाइन है क्योंकि रामपाल [गला साफ़ करने की आवाज़] तो कहानी सुना रहा है नकली संत की कथा और नकली संत ने किसको क्या कहा ये भी रामपाल बता रहे हैं और वो कथा खत्म हो गई जब वो रो रहा है जब व्यक्ति रोता हुआ चुप हो गया अब चुप होने के बाद रामपाल बता रहे हैं कि इसी तरीके जैसे अज्ञानी लोग जैसे वो नकली संत का जो वो रोगी था रोता हुआ अज्ञानता के कारण वो लोग भटक रहे हैं अज्ञानता के कारण और यही बात भगवान श्री कृष्ण ने भगवत गीता में बताई कितनी अच्छी बात है नैनती शस्त्राण नैन धरती पावका तो यहां पे ना चाहते हुए भी जाने अनजाने में भांग के नशे में रामपाल से ये गलती हुई होगी संभवता जो उसने मान लिया लिख दिया हां जी अनिकेत जी बोले

01:59:57:10 बोलना वही कह रहा हूं कि हर जगह से हार जाते हैं लेकिन वो कहते हैं ना कि रस्सी जल गई लेकिन बल नहीं गया इनके पास बोलने के लिए एक ही चीज है कि शिवा नारायण द्विवेदी हमको बोलने नहीं देता है बोलने नहीं अरे क्या बोलने नहीं देता है क्या बोलते हो तुम वही बात को बार-बार रिपीट करोगे तो वही सुनने के लिए हम बैठे हैं एक ही चीज को बार-बार अजीब ही नशा है। से हट के बोलते हैं भाई। दिन को रात दिन को रात हां नहीं नहीं दिन भाई जो दिन निकलता है वो रात है। अभी इधर देखो इधर देखो एक चीज एक चीज ये जो लोग हैं कबीर ये लोग ये रामपाल के जो है अपने आप को भगत कहते हैं। मगर इनका उद्देश्य पता है क्या है? अपने चैनल को हिट करना। रोज वो हमारा जो वो छोटा भाई है जय। रोज वह अलग-अलग नाम वहां पहुंच करके और इनकी बैंड बजा रहा है। रोज वहां इतनी ततड़ी इनकी हो रही है। उसने फलाना पूछा अरे ये तो हम पूछना पूछ करके आएंगे। ये हो रहा है इनके चैनल पे और ये लोग हमको न्योता दे रहे हैं। हां। बरसात से बचने की हैसियत नहीं तुम्हारी और गोलीबारी

02:01:12:16 की बात करते हो। सही है। सही है आपकी बात। बिल्कुल सही है। बिल्कुल सही बात है। अरे तुम्हारे चैनल पेत्त करके आया था। हां भाटी जी जाके निरत्तर कर रहे हैं। इनको इनको निरुत्तर होने से भी ये बेशर्म लोग हैं। आप निरत्तर कर दोगे फिर भी दूसरे दिन लाइव दूसरे दिन फिर भी लाइव का चैलेंज देंगे लोगों को। क्यों? क्योंकि उनको लग रहा है वहां कंटेंट बन रहा है। अपना चैनल चलना चाहिए। हमारी हार होगी तो होगी। वो कौन सा वो है ना 100-100 जूते खा के तमाशा ऐसा कुछ है ना हां 100-100 जूते खा के तमाशा नहीं वो अलग है 100-100 जूते खा के तमाशा घुस के देखूं ऐसा कुछ है तरफ है भैया 100-100 जूते खासा घुस के देखता था ना बाबू वही है वही है जो भी हो जो भी हो कोई भी हो बाबू हो कोई हो मगर बात यह है कि तुम निरोत्तर रोज हो रहे हो तुम्हारा बैंड बज रहा है फिर भी तुम्हारी यह है कि भाई शिवश नारायण द्विवेदी आए तुम्हारे चैनल पे अरे तुम जाओ अपने बाबा से लिखवा

02:02:27:22 लो अपना नाम हम आ जाएंगे तुम्हारे चैनल पे तुम्हारे बाबा से अपना नाम लिखवा लो फिर एक बीच का चैनल निकाल करके हम लोग उस पर आपसे चर्चा कर लेंगे लिखवा लो नाम अपना बाबा कह दे भाई यह मेरी ओर से बाबू लड़ेगा हैप्पी रेंट वाइट चम वाला [हंसी] बेशर्म है इनको कोई असर नहीं है क्या [हंसी] पक्के बेशर्म है इन लोगों को है ना सेंटर फ्रेश खा के सेंटर फ्रेश का दांत लेकर आते हैं।

02:03:19:10 सेंटर फ्रेश का जी संजीव कुमार जी बोले जय श्री राम जय श्री राम भैया भैया आवाज आ रही है जी आ रही है भैया मैं भी इनसे डिबेट करता रहता हूं ये जो है रामपाल जी मैं तो सीधा इनसे एक ही बात पूछता हूं कि इनकी बुक में लिखा है कि जो मुस्लिम मोहम्मद है वो भगवान शिव का बेटा है। मैं सीधा इनसे पूछता हूं कि रेफरेंस कहां है? और उनके पास उसका कोई रेफरेंस नहीं होता। इनकी सृष्टि रचना का भी कोई रेफरेंस नहीं है। उल्टा सीधा वही इनके पास कोई रेफरेंस नहीं है। और सीधा ये बात करेंगे कि आगे की बताओ ब्रह्मा का पिता कौन है? विष्णु ऐसे उनका पिता कौन है? तो मैंने गुरु ग्रंथ साहब जी में एक वाणी पढ़ी थी कबीर महाराज जी की। वो भगवान कृष्ण को कह रहे थे कि तू ही मेरा परमेश्वर है। तू ही मेरा पति है। तो सीधा मैंने भी उनसे पूछ लिया। बताओ कबीर जी का पति पिता कौन है? पति कौन है? फिर उनके पास जवाब नहीं होता है। वो कहते कबीर जी का पति कैसे हो सकता है? मैंने कहा ये तो वाणी में लिखा हुआ है। हम ऐसे ऐसे मैं भी इनसे डिबेट करता हूं। फिर जब पॉइंट की पॉइंट टू पॉइंट चलता हूं तो फिर इनके पास जवाब नहीं होता है। फिर गाली गलौज करके वो निकालते हैं। हम

02:04:35:03 हमने अपने चैनल पर ये दिखाया है गुरु ग्रंथ साहिब का कुछ बातें जहां पे इनके सारे कथन का एकदम खंडन हो जाता है। सिरे से कबीर बीज में दिए वो वो दिखाया था सुनिए ये गुरु ग्रंथ साहब में है कबीर मोक्ष का दान मांग रहे हैं किससे कि रावण का रावण को हराने वाले वानर सेना वाले और सारण पानी यानी धनुरधारी राम और दुर्योधन का घमंड चूरचूर करने वाले कृष्ण मतलब आपने इतना अलौकिक कार्य किया है तो मेरा भी मुझे भी मोक्ष का दान दे दीजिए और जो गुरु ग्रंथ साहिब की जो वाणी है वह सबसे प्रमाणिक कबीर के मरने के सबसे बाद वो संकलित है। ये बाकी कप बहुत बाद की है। 300 साल बाद की भी है वो भी प्रमाणिक है। बिल्कुल कबीर बीजक में लिखा हुआ है कि [गला साफ़ करने की आवाज़]

02:05:35:03 ये वाला जरा चलाइए जरा। इसमें राम जी से वह प्रार्थना कर रहे हैं कि भाई इसी जन्म में नेत्रों को दर्शन दे दीजिए। कबीर जी प्रार्थना कर रहे हैं राम जी से दर्शन की ये भी नहीं कि निर्गुण निर्गुण उपासक राम जी के दर्शन की बात कर रहे हैं और यह भी कह रहे हैं कि इस इस जन्म का वो मुझे सार्थक कर दीजिए वरना फिर जो है जन्म मरण में आना पड़ेगा। मगर मतलब कबीर मोक्ष मांग रहे हैं। राम को भगवान मान रहे हैं। कबीर का जन्म मरण होता है। तीनों बातें इसी एक ऐसी एक उससे सिद्ध हो जाती है। ये फिर भैया गुरु ग्रंथ साहब में हमने बहुत बहुत जन्म मरण देख लिया। अब हमें मुक्ति दो। राम रघुनाथ रघुनाथ मुक्ति हां ये कह रहा है फर्जी लाइव डिबेट चल रहा है। एंट्री नहीं दे रहा है। डर के मारे कांप रहा है। मरने के बाद भाई मेरे क्या काम आएगा? साफसाफ

02:06:32:24 जो लोग कबीर को परमात्मा मानते हैं उनको ये शाखी दिखा दो। भाग ही जाएंगे। रुकेंगे नहीं आसपास। कबीर जग 270 साखी है ये ठीक है उसमें कबीर क्या कह रहा है कि मुवे दर्शन देवगे आवे कमने काम प्रभु धनुषधारी दशरथ नंदन प्रभु श्री राम जी से प्रार्थना कर रहे हैं कि प्रभु मुझे दर्शन दे दो मरने के बाद दर्शन दोगे मेरे क्या काम आएगा साफ साफ आप मोह शब्द का आप देख रहे हो ये जो पाखंडी लोग बोलते हैं कबीर की मृत्यु नहीं होती कबीर की मृत्यु तो होती है ये आप आप लोगों को बेवकूफ बना के क्योंकि आपने कबीर भजन ठीक से पढ़ा नहीं अब यहां से कितनी बातें सही सिद्ध हुई है। देखो पहली बात राम जी की भक्ति कौन से राम की? धनुरधारी राम की। ठीक है? वो उसमें भी पंचंगी ड्रामा करते हैं ना ये लोग भाई जो है कौन सा राम कौन सा? धनुरधारी राम। और फिर तीसरा कि जन्म मृत्यु होती है और मोक्ष कौन देते हैं? राम। ये कबीर विचक से सिद्ध है। हालांकि वो लोग। हालांकि वो लोग बोलेंगे कि काल ने बोला इतने महामूर्ख है रघुनाथ लिख रहे हैं कबीर उसको नहीं मान रहे उसका कोई और अर्थ कर रहे हैं।

02:07:46:19 चलिए ठीक है सभी का समय देने के लिए आभार और अगर आपको चर्चा करनी है तो फॉर्म भरिए और सामने आकर बात करिए। ठीक है? जिसको भी चर्चा करनी है वीडियो के अंत में दिए गए नंबर पर यह नंबर आपके सामने स्क्रीन पर आ रहा है। आप इस नंबर पर WhatsApp करिए और चर्चा करिए आकर के जिसको भी वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा करनी है। बात यही है जो बोलने की बात है वही वो सीधी बात है कि आप अगर विषय से भटके बात करेंगे बार-बार प्रश्नों को प्रश्न जो पूछा जा रहा होगा उसे छोड़कर के दूसरा दूसरी बातें करेंगे तो मुझे आपको टोकना पड़ेगा। ठीक है? और यदि आप चाहते हैं कि भाई मैं आपके आपके साथ किसी न्यूट्रल चैनल पर आऊं तो आप अपने बाबा से यह बात लिखवा लाइए कि आप उसकी ओर से आ रहे हैं। मैं न्यूट्रल चैनल पर आ जाऊंगा। राघव और ये जो ये जो टच्चे टाइप के लोग हैं क्या नाम है? राघव और फैक्ट बाय अभिषेक। जो खीर के नशे में पादुभूत पादुभूत करते हैं। जिनको खीर की गंध आती रहती है लगातार। इसीलिए उनको पादुभूत याद रहता है। ऐसे लोग हैं

02:09:01:25 जिनको जो बहुचरर्चित हैं, स्टार प्रचारक हैं रामपाल गैंग के ऐसे लोगों के साथ भी मैं बीच के चैनल पर आने को तैयार हूं। बीच के स्थान पर आने को तैयार हूं। तो या तो रामपाल द्वारा घोषित हो या फिर रामपाल से सीधे तौर पर जुड़ने के मामले में वो प्रसिद्ध हो। मैं बीच के स्थान पर उससे चर्चा कर लूंगा और उसके मुंह में टेप चिपकाऊंगा। ठीक है? और यदि इन दोनों चीजों का अभाव है आप गए गुजरे हो अपने यहां पर आपकी कोई वह ऐसी खास वैल्यू नहीं है तब भी आपका अपमान नहीं होगा आपका स्वागत है आप हमारे यहां पर आइए और चर्चा करिए मगर अपने शब्दों का ध्यान रखिए कि आप क्या बोल रहे हैं और अनुशासन का ध्यान रखिए कि विषय से भागिए मत जैसे वो एक तरतड़ी ले आए भाई कि गायत्री मंत्र का अर्थ बता दो हे सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर हम तेरा ध्यान करते हैं तू हमें सद्बुद्धि की ओर प्रेरित तू हमारा मन सद्बुद्धि में लगा। सद्बुद्धि विचारों में लगा। यह उसका अर्थ है। अब वो साहब वो जो तैयारी करके आया था वो तो वही खत्म देखो ऐसा है कि यहां पर आकर के आप यह क्लेम मत करो कि मैं यह हूं, मैं फलाना हूं, वह परमात्मा है। क्लेम करोगे, फंस जाओगे।

02:10:17:13 अब गुरु का क्लेम किया शुरू में तो गुरु का सूक्ष्म ज्ञान का तत्व निकल गया। सब सारा निकल गया। ग्लूकोज लेवल डाउन हो गया गुरु के तत्व ज्ञान का। सब डाउन हो गया। सेवक राज चेहरा दिखाएं। जिसने भी रामपाल की ओर से जिसने भी अपनी मां का दूध पिया है और वह रामपाल की बातों को किस्से कहानियों को रामपाल के द्वारा किताबों में लिखे गए कीचड़ को यदि वह सही सिद्ध कर सकता है तो वह आ सकता है। यदि तुम वहां के बहुचरर्चित व्यक्ति हो तो हम तुम्हारे साथ बीच में चर्चा करने का बीच के स्थान में चर्चा करने का विचार करेंगे। यह हम तय करेंगे कि तुम इस्ला तुम बहुचरर्चित हो कि नहीं। यह नहीं कि हमारे 2500 सब्सक्राइबर हैं। बहु चर्चित हैं। हम आ गए। वह हम देखेंगे कि हमारे अनुसार तुम बहुचरर्चित हो कि नहीं। तो अगर बहु चर्चित हो रामपाल गैंग की ओर से तुम्हें जाना जाता है रामपाल वालों में तुम्हारा तुम्हें तुम्हारी प्रसिद्धि है तो हम तुम्हारे साथ बीच के स्थान पर चर्चा करने को तैयार हैं। और यदि ना यदि प्रसिद्धि नहीं है और ना ही रामपाल या अगर प्रसिद्धि नहीं है तो रामपाल के द्वारा घोषित करवा लो अपने आप को। यह मेरा व्यक्ति चर्चा करेगा आपसे।

02:11:33:10 ठीक है? और अगर ना प्रसिद्धि है मेरे अनुसार मेरी जानकारी जैसे राघव की प्रसिद्धि है। है वो भले ही टच्चे मगर रामपालियों के बीच में राघव और अभिषेक की प्रसिद्धि है। इसलिए मैं उसके साथ बीच में चर्चा करने को तैयार हूं। अन्यथा मैं उसको भी कहता चल भाग बाबा के साथ बीच में चर्चा होगी। मगर ठीक है बाबा अभी नहीं मिल रहा है तो उसके ये चेले चापड़ ही ठीक है यही मिल जाए इन्हीं को दबोच लें तो प्रसिद्धि भी नहीं है और बाबा का बाबा की घोषणा भी नहीं है तो क्या है आप यहां चैनल पर आइए अनुशासित रहिए विषय से मत भागिए और शब्दों की मर्यादा बनाए रखिए आपके साथ स्वार्थ पूर्वक चर्चा होगी और चर्चा में विघ्न तब पड़ता है जब आप सामने वाले की जो चीजें हैं उनके लिए निर्विवाद रूप से निर्भीक रूप से होकर के और गलत बातें बोलते हैं या फिर भागने की कोशिश करते हैं विषय से तो विघ्न पड़ता है और उत्तेजना आती है और रोकना पड़ता है टोकना पड़ता है। ठीक है? जैसे बड़े आराम से तुमने मान लिया भगवत गीता को फाड़ दो कोई फर्क नहीं पड़ता। और जब तुम्हारे

02:12:48:12 बाबा की किताबें फटने की बारी आई तो तुम्हारा मुंह सूख गया। टूतड़ी निकल गई। इसको कहते हैं मत पड़ो चक्कर में कोई नहीं टक्कर में। अब यह जो सेवक राज है इनका मुंह नहीं दिखाने लायक है। लगता है कि रामपाल के यहां पर इनके साथ कुछ ऐसा हुआ है जिसके कारण ये किसी को मुंह दिखाने के योग्य नहीं रह गए हैं। छापा पड़ा था शायद उस समय पकड़ धकड़ हुई थी। इसीलिए तो मुंह छुपा रहे हैं। तो यहां वही व्यक्ति आए जो अपनी पहचान के साथ आ सकता है। जिसके गुर्दा है वह आए। जिसके गुर्दा नहीं है वह ना आए। ठीक है। जिसके पास गुर्दा है उसी को जीने का हक है। क्यों अनिकेत जी

02:13:33:15 है? आपका बैकग्राउंड किसी का बैकग्राउंड से आवाज आ रहा है? किसी के बैकग्राउंड से आवाज आ रही है। चलिए ठीक है पूरा करते हैं। दो घंटे 13 मिनट हो गए हैं। सभी को जय श्री राम। किसी को कुछ बोलना तो नहीं है। जय श्री राम भाई। जय श्री राम। जय श्री राम। सेवक राज सेवक राज अगर तुम्हारे अंदर तुम्हें माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया है तो अपना थोबड़ा लेकर के आओ। चोरों की तरह नहीं। नपुंसक नपुंसक हो क्या? वाला दूध पिया है। नपुंसक हो क्या? इन्होंने तो रामपाल वाला दूध पियो है। जी। रामपाल वाला दूध। इसीलिए मुंह मुंह दिखाने लायक नहीं बचे हो क्या? क्या ऐसा हो गया तुम्हारे साथ? गैंग गैंग बना के तो कुछ नहीं गलत कर दिया गया तुम्हारे साथ। जिसके कारण तुम मुंह दिखाने लायक नहीं हो। ठीक है? तो मुंह दिखाने लायक हो करके आओ फिर आना। अपने बाबा जी से कहो और खीर पिलाओ जिससे मैं मुंह दिखाने लायक बन जाऊं। जय श्री राम। तो गरम गरम खीर गरम गरम खीर

02:14:46:16 गरम गरम खीर हो गरम [गला साफ़ करने की आवाज़] नहीं गरम नहीं गरम होकर के ठंडा हो के ही दूध आएगा तभी तो उसके साथ जो तत्व आएंगे वो जो इनके लिए अमृतुल्य तत्व होते हैं जो मल द्वार गुदा द्वार इत्यादि से बह के दूध आता है तो जो तत्व होते हैं इनके लिए अमृतुल्य तत्व होते हैं तभी तो वो शेष रह जाएंगे अगर दूध आने के बाद उसको उबाला गया तो ये सब मर जाएगा ये सब अमृत अमृत तुल्य तत्व तो ठंडे ही दूध की बनानी पड़ती है। ठंडी जहां तक मेरा अनुमान है यदि मीडिया की खबरें सत्य है तो

02:15:25:13 हां ये लोग ये लोग जो है कितने मूर्ख होते हैं भाई यहां पर आ कर के नहीं कर सकते चर्चा ये लोग सेवक सेवक जो है ये बहुत अभद्रता करता है अपने हर लाइव में आप देखे होंगे ये चर्चा नहीं कर सकता। मैंने नहीं देखा। नहीं मेरे मेरे चैनल पे आया है कई बार। इससे एक सवाल पूछा भाई 21 ब्रह्मांड कहां लिखा है? आया कई बार और पर और आज भी आप देख ही रहे होंगे भैया। एक वो जो व्यक्ति आया था 21 ब्रह्मांड बोलने लग गया था। आपने जो सुनाया उसको भाई सनातन का अर्थ क्या होता है? चुप [हंसी] हो गया। अच्छा ये भी बोल रहा था क्या? ये भी बोल रहा था क्या? अरे जब आपने बोला था ना कि सातव अध्याय में जब भगवान कहते हैं कि मैं ही सनातन सनातन हूं इस तरह से तो आप पूछते हैं काल सनातन है क्या तो बोलता है भाई काल अपने लिए अपने 21 किस ब्रह्मांड के लिए बोल रहा है वो सनातन है तो आपने बोला था ना उसे कि अरे मूर्ख सनातन का अंश अर्थ पता है आपने बोला था ना उसे अभी अरे भैया दो सनातन है दोद सनातन हां फिर दोद सनातन पे आया तो यही बात है कि वो 21 ब्रह्मांड को लाया था ये जब भी जब भी भगवान भगवान की सर्वश्रेष्ठता की बात आएगी। ये 21 ब्रह्मांड

02:16:40:21 लेकर आएगा। तो पूछ लीजिए 21 ब्रह्मांड कहां लिखा है? तो बोलते बंद [हंसी] नहीं इसमें बात ये आती है कि जब हमने कहा कि यह सनातन है। तो अगर 21 ब्रह्मांड का भी है तो वो सनातन नहीं है। सनातन तो कहीं से शुरू नहीं होना चाहिए। चाहे 21 ब्रह्मांड के लिए सनातन हो। 21 ब्रह्मांड के लिए वो सनातन कहां है? भाई अगर 21 ब्रह्मांड का मालिक है तो मालिक है। सनातन नहीं है। सनातन तो उसकी शुरुआत नहीं होनी चाहिए। सनातन तो वो है ना। बिल्कुल बिल्कुल। अच्छा 21 ब्रह्मांडों के लिए है तो उसमें हमारा पृथ्वी लोक आता है कि नहीं आता है? आता है। तो हमारे लिए वो सनातन है। फिर तो हम मान रहे हैं सनातन। क्या दिक्कत है अब तुम्हें?

02:17:29:06 21 ब्रह्मांडों के लिए सनातन है तो हम उसको सनातन मान रहे हैं तो फिर तुम्हें क्या परेशानी है? फिर वो कहेगा नहीं सनातन है नहीं तो इसका मतलब सनातन नहीं है ना फिर क्यों कह रहा है 21 ब्रह्मांडों के लिए सनातन है समझ में आ रहा है शास्त्रवाद जी 21 ब्रह्मांडों के लिए सनातन है तो हमारे लिए सनातन है वो हम मान रहे हैं उसे सनातन तो वो कहेगा नहीं ये वास्तविक सनातन नहीं है हां तो वहां लिखा है क्या वास्तविक सनातन है क्या नकली सनातन है कि मैं इस संसार मैं इस संसार का नकली सनातन बीज हूं। [हंसी] लिखा है क्या वहां?

02:18:13:20 चलिए जय श्री राम। जबरदस्त जय श्री उसका रील बहुत अच्छा कटेगा लेकिन कल नेपाली वाला भी बढ़िया था भैया। वो पुराना है नेपाली वाला। अच्छा ऐसा क्या ठीक है। जय श्री राम सभी जय श्री राम। [संगीत]

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