⬜ Not used yet · 00:00:00:02 – 00:19:47:13 (19:47)
00:00:00:02 सभी कुशल पूर्वक होंगे। अ आज हमारे साथ रामपाल वालों की ओर से एक व्यक्ति हैं जो जुड़ने वाले हैं। संभवतः आने वाले होंगे। जी फोन को सीधा कर लीजिए या फिर आप ऑटो ऑटो रोटेट ऑन कर लीजिए आप अपने फोन की
00:00:36:28 हां अभी ठीक जय श्री राम तो हां तो ये मैं कोई भी चर्चा शुरू करने से पहले एक बात आपसे कहूंगा कि आपको मैं गढ़ा कहूं और ये कहूं कि आपके सर पर दो सींग है तो कैसा रहेगा? देखो मैं बात मुद्दे की करूंगा जो आप पहले देखो इस लड़ाई के से नहीं करूंगा मैं। अब आप जो आपकी बात है वो तो करेंगे ही। एक छोटा सा एक इंट्रोडक्शन मैं ले रहा हूं। तो क्या आप गधा मैं आपको अगर गधा कहूं या ये कहूं कि आपके सर पर दो सींग है तो क्या ये ठीक है या बात करें? देखो मैं बता रहा हूं अगर आप उस मार्ग में जो मेरे को गलत साबित करो तो आप बोल सकते हो किसको गलत साबित करो मेरे को अगर गलत साबित करोगे उस चीज मैं तो मेरे को गधा कह सकते चीज बोलोगे आप वो आपकी इच्छा होती है यानी कि यानी कि जब हम किसी को गलत साबित कर दे उसके बाद उसे हम गधा कह सकते हैं जी आप एक बात बताइए अगर आप किसी को अनपढ़ जो कोई सरकारी नौकरी करने के बाद भी उसे आप अनपढ़ कहोगे
00:01:53:06 अरे मैं आपसे मैंने मैंने आपसे प्रश्न पूछा है यानी कि यानी कि यानी कि किसी को गधा तभी कहना चाहिए जब उसे हम गलत साबित कर दे सामने से बुलाकर। जी वही बात है ना जब या फिर वो शिकारी नौकरी करता हो उसे अनपढ़ जहा जाता है। मैंने आपसे मैं जो पूछ रहा हूं वो बताइए ना कि आप गधा कभी देखो जी देखो आपसे मैं जो आपने कहा जो मैं आपकी बात मानता हूं मगर आपने भी जो उस बोर्ड में आपने जो पिछली वीडियो में पहला जो आपने पहला भाग बनाया उसमें जो आपने कितने गलत सवाल किए हैं उसके बारे में आप खुद सुन लीजिए। देखिए सवाल रिपीटर क्या किए हैं वो एक बात अलग है। मैं कह रहा हूं कि किसी को गलत साबित जब तक सामने से बुलाकर नहीं कर दे तब तक उसे गधा नहीं कहना चाहिए। कहना चाहिए क्या? तो फिर मैं आपको गधा कहूं। आपको स्वीकार है। फिर मेन बात आ रही है ना देखो जी बात वही आ रही है। बात वही आ रही है। अगर आप किसी को अनपढ़ कह रहे हो तो पहले आप उससे देखो कि हां भाई वो सरकारी जॉब करता था नहीं करता था। उसके डॉक्यूमेंट देखो पता हम तो देख चुके हम तो देख चुके ना देख चुके
00:03:02:00 हमने किसको गधा कह दिया है गधा किसको गधे वाली बात आप अनपढ़ कह रहे हो तो अनपढ़ मूर्ख वो तो एक ही बात होगी ना अरे भाई यदि कोई अंग्रेजी नहीं बोलता है और अंग्रेजी बोलने का प्रयास करता है दिखावा करता है तो वो अंग्रेजी के क्षेत्र में अनपढ़ी तो कहा जाएगा यदि कोई संस्कृत नहीं बोलता सुनिए संस्कृत नहीं बोलता है संस्कृत बोलने का प्रयास करता है तो संस्कृत के संस्कृत के क्षेत्र में अनपढ़ी तो कहा जाएगा विकास कहता है आप किसी का खंडन कर रहे हो तो पहले उसे आप मैच करके देख लो ठीक है देखो आप अपने मैच कर लिया था सवाल ये है कि आप किसी को आप किसी को सवाल ये है कि आप किसी को गधा कहेंगे क्या हमने आपको गधा कहा था क्या हम मुझे बाद में पता चला ना यह बात कि आपने मेरा एक फोटो लगाया अपने चैनल पर और उसमें मेरा फोटो लगा के वहां गधा लिखा फिर वहां पर जो है सी लगाए हैं तो हम उसमें आप ही बस नहीं है उसमें दो चार जने और है उस वीडियो में आप देख सकते हो ठीक तो मैं भी तो अरे मैं भी तो हूं बात ये है मैं भी तो हूं ना जी अगर किसी को आप बच्चे को अगर छेड़ते हो उसकी
00:04:17:01 गाली भी सुननी पड़ती है तो आपको गाली तो मैं आपको यहां गाली दूं। गाली देने का उद्देश्य नहीं है हमारा। तो फिर आप यहां गाली कोई आप यहां गाली तो बता रहे हो कि किसी छोटे बच्चे को छेड़ते तो गाली सुननी पड़ती है, सहनी पड़ती है। तो मैं आपको बोलोगे तो भाई वो भी बोलेगा ना थोड़ा बहुत के भाई उसमें ऐसा लेगा। यानी कि गरा बोलने का अगर कारण हो तो बोले। घरा बोलने का अगर कारण हो तो बोले। आप अपनी बात को ले बैठे हैं। मगर आप अपनी बात को पूरी नहीं सुन रहे हो। आपने क्या बोला उस वीडियो में? आप अपनी बात अपनी वीडियो तो सुनिए। बोला है क्या? मैं अनपढ़ हूं। मैं सुनो मैं सुनो मैं अनपढ़ हूं। इंग्लिश के क्षेत्र में मैं अनपढ़ हूं। मैं अनपढ़ हूं। क्या कहते हैं जो ये तुर्की भाषा है। मैं नहीं जानता उस मामले में मैं अनपढ़ हूं। इसमें और गधे में अंतर है। आपने मेरे को पशु ऋतु वो दी ना। तो मैं पूछ रहा हूं कि जो पशु की उपाधि आप दे रहे हो आपने मेरे बारे में क्या जान लिया? क्या जान लिया? आपने ऐसे कई वीडियो उल्टस बताया आपने। कई वीडियो में ऐसे उल्टस बोला हमारे गुरु जी के प्रति तो हम भी तो थोड़ा बहुत हमने क्या भाई तो वो हमारे भगवानों के प्रति बोल
00:05:32:04 रहा है तो हम बोलेंगे ना उसको। वो हमारे भगवान के प्रति बोल रहा है। वो हमारी मां के प्रति बोल रहा है। उल्टा सीधा तो हम बोलेंगे ना उसे। आप प्रमाण दिखाओ ना। मानसी जी आप प्रमाण दिखाओ। हां तो प्रमाण हमने प्रमाण दिखा के ही बोला है। सुनो अब जिस वीडियो को कहोगे उस जिस वीडियो को सुनो जिस वीडियो को कहोगे उस वीडियो में हम दिखाएंगे कि हमने प्रमाण दिखाए थे। बोलो प्रमाण दिखा के ही बोला है। हम वीडियो खोलने प्रमाण दिखा के ही बोला है। तुमने जरूर जो गधा बोला है वो बिना प्रमाण के बोला है। आप ये बताइए हमारी फोन पे बात क्या हुई थी? फ़ पे बात हुई मुझे बाद में ये पता चला था ना कि तुमने गधा कहा है या तो उसको तुम्हें स्वीकारना चाहिए कि हां भाई गधा गलत कहा है। मैं गधा क्यों स्वीकार करूं? जब तुमने उस वीडियो अपनी वीडियो में जब अनपढ़ नहीं स्वीकार किया तो हम कैसे कह दे कि भाई तुम गधे हो? क्या? क्या कह रहे हो? मतलब मतलब ये कह रहा हूं जब आप तुम हमारी मेरे मुंह से उल्टा निकल गया थोड़ा। मैं ये कह रहा हूं जैसे आप वीडियो में कह रहे हो कि आप अनपढ़ हो। ठीक है। गुरुजी अनपढ़ बोल रहे हैं। कोई सी भी आपको मैंने गधा बोल दिया। ठीक है। मैंने मैंने अभी सिद्ध किया है कि तुम्हारे गुरुजी अमुक अमुक
00:06:47:13 क्षेत्र में जिसमें वो विद्वान बनने का प्रयास करते हैं उसमें अनपढ़ हैं। अब तुम मुझे गधा सिद्ध कर दोगे क्या? वही है कि जब तुम अर्थ सही नहीं लगाओगे तो उसमें सिद्धि होएंगे। तुमने गधा बोल के ठीक नहीं किया। गधा बोल के तुमने ठीक नहीं किया। समझे? और आप अपने बात ले आइए। जिस बात पर आपके टॉपिक पर बात चल रही थी उस बात पर आइए आप। हम अब आप बताइए कि क्या आप बात करना चाहते हो? हां मैं क्या करना चाहता हूं? तुमने कहा था कि तुम आओगे चैनल पे लाइव छ तारीख को तो तुम उसके बाद आए नहीं। तुमने वो स्क्रीनशॉट भी शेयर नहीं किए। जो स्क्रीनशॉट बता रहे थे तुमने वो फोन लगाया। हिमांशी जी मेरे पास है ना स्क्रीनशॉट नहीं पड़े रहते हैं। मैं वीडियो एडिटिंग में वो काट देता हूं। नहीं नहीं स्क्रीनशॉट नहीं कह रहा हूं। वो स्क्रीनशॉट मैं नहीं कह रहा हूं। मैं ये कह रहा हूं जो नंबर आपने दिया था वो नंबर मेरे से कट गया। मैंने जो नंबर दिया था वो आपसे कट गया। मतलब जो आपने वीडियो में नंबर बताया था ना जो आप पहाड़ी जी के चैनल पे आए थे उस वाली वीडियो में आपने जो नंबर बताया
00:08:02:14 था वो नंबर मैंने आपको लगा दिया। उसमें रिचार्ज नहीं है। उस नंबर पे ऐसा बताया जा रहा था। ठीक है? मगर फिर वो कौन सा नंबर था? कौन सा नंबर था वो? हिमांशी जी देखो मैं आप ये कह रहा हूं नंबर तो वो आपने जो आप या तो बोलो मत अगर बोलो तो उसको सिद्ध करोगे ना कि आपकी बात सुन के हम अपना मुंह बंद कर ले। मत बोलो या तो आपने अभी कहा कि आपने एक फोन नंबर मिलाया था। मैं कह रहा हूं कौन सा नंबर मिलाया था। वो जो नंबर मिलाया था उसी का स्क्रीनशॉट दे दो। दर्शकों को मैं बता दूं यहां पर क्या बात हो रही है कि हम लोग एक बार पहाड़ी जी के चैनल पर लाइव चर्चा में हमारे बीच में बात हुई वहां मैंने अपना इनको नंबर दिया इन्होंने अपना भी दिया इनका कहना है कि मेरा नंबर इन्होंने मिलाया था चर्चा के बाद और उस नंबर पर जो है ये संदेश प्राप्त हुआ कि मेरा नंबर जो है बंद है या रिचार्ज ना होने के कारण चालू नहीं है। अब सभी लोगों को मालूम है मेरा जो नंबर है 7408301869 वो सदैव चालू रहता है। हम तो जब वो चालू रहता है अनेकानेक पूरी दुनिया से फोन आ जाते हैं। मगर इनका कहना है कि भाई वो नंबर बंद था। उसमें रिचार्ज नहीं था। उसमें ये था उसमें वो था। तो मैंने इनसे सरल सी भाषा में
00:09:17:18 कहा कि कम से कम आपने जो नंबर डायल किया है वो वाला स्क्रीनशॉट तो दिखा दो। इनका कहना हो सकता है मैंने गलत सुन लिया हो। नंबर गलत हो। मैंने कहा वो गलत नंबर जो गलत नंबर डायल किया था वो तो दिखा दो। तो इन्होंने नहीं दिखाया उस बारे में बात हो रही है। खैर आगे चलते हैं। अब हम मुख्य बात पे आ जाते हैं। तो मुझे आप ये बता दीजिए कि आपके जो रामपाल है जो इस समय जेल में बंद है और आपराधिक मुकदमों में सजा काट रहे हैं। इनको तत्वदर्थी किस आधार पर माना जाएगा? पहली बात तो देखो जेल की बात नहीं हुई थी हमारी फोन पर तत्व रस्सी पहचान की बात हुई थी ठीक है हम तो हम किस व्यक्ति के बारे में बात कर रहे हैं वो तो बताएंगे ना व्यक्ति के बारे में तो बाद में होती है तत्वदर्शी संत की पहचान के बारे में बात हुई थी हां तो तत्वदर्शी संत क्यों कहते हो आप रामपाल को बताओ जो पेड़ से पेड़ के पत्ते तक से लगाकर जड़ की पहचान बता दे बल्कि टनी तक की पहचान बता दे वो तत्व संत है। कहां लिखा है? अब मैं तुमको अब सब चीज बता रहा हूं। गीता खोलिए। आप गीता के हर एक श्लोक में बता देता हूं आपको। हम बताओ बताओ।
00:10:52:02 आपको अरे बड़ी देर लग रही है तो साधारण बच्चों को रटा रहता है ये सब दो मिनट बस निकालने में टाइम थोड़ा इनके पास एक तो ये है कि गीता अध्याय 17 श्लोक 23 में है जो बताया गया है ओम तत सत भाई साहब अभी आपने 15 वे अध्याय का कुछ बोला था वो बताओ आप 15वा अध्याय पहले 16 जो 17 अध्याय है उसमें खोल के उल्टे वृक्ष की बात बताइए कहा लिखी है 15 अध्याय श्लोक दो के में देखिए उसमें लिखिए दो क्या लिखी है क्या लिखी है पढ़िए आप खोलिए उसमें हमने इसमें अरे भाई अरे मैंने पढ़ा हुआ है इसलिए कह रहा हूं। आप पढ़ के सुनाइए। आप जो कह रहे हैं वो पढ़ के सुना दीजिए मुझे। क्या लिखा है उसमें? उसमें वही लिखा है जो जड़ से लेकर वर के पत्ते तक का विभाग बता दे और तना तक का वो बता दे ततशी संत है। ठीक है। उसमें तत्वदर्शी शब्द लिखा है क्या?
00:12:02:04 शब्द लिखा है क्या? ततशी संत की पहचान बताइए ना। तो तत्वदर्शी शब्द कहां पर है? क्यों जाए हम तत्वदर्शी के पास इसमें भी लिखा हम तत्वदर्शी को ढूंढ क्यों रहे हैं तभी ढूंढेंगे ना जब उसके बारे में कहीं पर बात शुरू की होगी कि तुमको तत्वदर्शी के पास जाना है जो गीता है जो गीता अध्याय देखो जो गीता अध्याय सात ठीक है श्लोक गीता अध्याय सात श्लोक 18 में है जो लिखा है उसमें के इसे तेरे लिए कर्तव और कर्तव बल्कि की शास्त्री ही प्रमाण है। उसमें लिखा है भाई साहब तत्वदर्शी नाम की कोई चीज होती है। पहले इसको तो बताओ कहां से है? कौन होता है तत्वदर्शी? आप सीधे पहचान पे पहुंच गए। तत्वदर्शी होता कौन है? पहले ये तो बताओ प्रमाण से। चारो वेद का वर्ण देते और पुराणों का वर्ण कहां लिखा है? ये कहां लिखा है? ये बताओ। ना गीता में लिखा। मैं बता रहा हूं इसमें। कहां लिखा है?
00:13:12:06 सच्चिदानंद धर्म की वाणी में बताया गया है बताया गया अरे यार तो कच्चे खिलाड़ी आ गए। कच्चे खिलाड़ी नहीं है जी ऐसी बात नहीं है मगर निकालने में टाइम लगता है क्योंकि और भी पेज है ना इसमें इसलिए कह रहा हूं। यार ये वाली बातें तो रटी हुई है बच्चों बच्चे बच्चे को रटी हुई है जो रामपाल को जानता है वो तो बात सही है वो तो अच्छी बात है मगर जो कहा ना जो प्रमाण सहित है वो उसमें सच्चिदानंद ब्रह्म की वाणी में बताया गया है जो कहां पे है कहां भगवत गीता में कहां कहा गया है कि तुमको जो है क्या कहते हैं ये तत्वदर्शी के पास जाना है पहले ये तो पता चले कि कहां पे
00:14:27:08 कहा गया है कि तत्वदर्शी नाम का कोई अस्तित्व है तब तो हम तत्व दर्शी को ढूंढेंगे जाकर के 15 अध्याय में इसलिए तो मैं कह रहा हूं जी आपने गीता अध्याय 17 श्लोक 23 अरे भाई साहब तत्वदर्शी होता क्या है क्यों जाए हम तत्वदर्शी के पास ये तो बताओ पहले क्यों जाए आपसे अध्याय खोलिए आप खोल ना रहे बताइए अरे तो बताओगे पेज नंबर कौनसा है अध्याय नंबर कौन सा है खोल तो रहे है की गीता अध्याय बता तो दिया 17 श्लोक 23 में खोलिए तत्वदर्शी शब्द है क्या उसमें सच्चिदानंद कहां पे लिखा है गीता में जो पांचवा वेद है ना पांचवा वेद के बारे में बताया गया है उसमें जो पांचवा वेद है जो चारों वेद से अलग है पांचवा वेद हम क्यों माने वो वेद है वो है ना तुम्हारे शंकराचार्य ने खुद बताया जो कैलाश पर्वत पे है क्या तुम्हारे गुरुजी ने बताया ना कैलाश पर्वत कहां लिखा है कहा लिखा है बताओ अपने गुरुजी के उसमें पढ़ी है अरे कहां पे पढू आप तो वही बात है आप तो एकदम है जब क्लेम आप कर रहे हैं तो आपको बताना होगा ना कि अध्याय पढ़ाने में इतने इतने पृष्ठ क्रमांक में इतने अध्याय में इस श्लोक में कहा है मैं कह दूं तुम्हारे गुरु जी ने कहा है कि सुनो मैं कह दूं तुम्हारे गुरु जी ने कहा है कि
00:15:42:09 तू गधा है तुम गधे हो तुम्हारे गुरु जी ने कहा है बताओ मैं कह रहा हूं सुनो सुनो सुभाष जी आप गधे वाली बात पे चिढ़ के आओ ना नहीं नहीं मैं कह दूं मैं कह दूं कि तुम्हारा पूरा खानदान गधा है तुम्हारे गुरु जी ने कहा है तुम्हारे गुरु जी ने कहा है कि वो गधे हैं स्वयं तो तुम मान लोगे तुम प्रमाण मांगोगे ना प्रमाण मांगोगे ना हमने कुछ मैं क्या मैं क्या पूछ रहा हूं तुम अगर अगर कोई क्लेम कर रहे हो भाई साहब अगर कोई क्लेम कर रहे हो तो उसको आप बताइए कहां लिखा है कहा है हम कह रहे कि भाई बोलो तभी तो बताएंगे अब खोलना कौन सा तुम मुझे ये बताओ की तत्वदर्शी का शब्द कहां पर आया है भगवत गीता में तुमको यही नहीं पता
00:16:30:28 लो भैया अब इनको क्या बता जब 17 खोले गए उसे आगे की कहानी तो बताऊंगा फिर आप खोल ही ना रहे तो हम अरे तत्वदर्शी लिखा है क्या 17 में 17 में तत्वदर्शी नहीं लिखा है उसे खोलो तो एक बार कहां लिखा है तत्व अभी बात हो रही है तत्वदर्शी कहां लिखा है पहले वो तो निकालो देखो जी आपसे कहा कि मैं पहले आप बुक श्लोक तो खोले उसके बाद मैं बता रहा हूं अरे भाई मैं मैं मैं क्यों खोलूं जब मैं वो चीज आप बता ही नहीं रहे हो कि आपको खोलनी है। बुक को खोलने की आवश्यकता मुझे तब पड़े जब आप कहो कि हां ये चीज यहां लिखी हो। मुझे ये लगता हो कि नहीं लिखी है तब मैं खोलू। मैं तो मान रहा हूं आपकी बात। पहले आप बोलो तो कि यहां पे लिखा है इस श्लोक में। बताइए ये हाल है। देखो हिमांशी जी अपनी बात रखने के लिए तुम पता नहीं क्या क्या कर लेते हो। अगर हम जो बता रहे वो आप बोलेंगे तो हम क्या बता रहा हूं भाई? मैं आपसे पूछ रहा हूं कि हम तत्वदर्शी को ढूंढे क्यों उल्टे वृक्ष की पहचान क्यों देखने जाए क्या क्या पहचान है तत्वदर्शी की हम क्यों ढूंढे आपने कहा कि भैया गधे को ढूंढो गधे को ढूंढो अरे क्यों ढूंढे गधे को अब कह रहे हो ना अध्याय चार श्लोक 34 में खोले एक बार उसमें तो खोल के देखो एक बार अब आई ना तुमने अब की बात
00:17:46:07 अब पढ़ो उसको अब मैं मानता हूं पढ़ो उसको अब पढ़ो उसे हम क्यों पढ़े आप खोलो तो स्क्रीन पे दिखाओ उसे मैं क्यों खोलूं जो तुम बात कह रहे हो वो उसको पढ़ो। मैं क्यों बोल रहा हूं? तुम क्लेम तुम क्लेम कर रहे हो। तुम प्रमाण दे रहे हो तो उसको पढ़ो। मुझे मालूम है वहां तत्वदर्शी लिखा है। मुझे मालूम है तत्वदर्शी लिखा है। मैं कोई इस पर अविश्वास नहीं कर रहा हूं कि तत्वदर्शी नहीं लिखा है। सुनिए। हिमांशु जी 17 23 पे आओ एक बार। मैं पहले कह रहा हूं। आप 434 को मुझे पढ़ के सुनाइए कि तत्वदर्शी क्या है वहां पर? क्या लिखा है? उसमें लिखा है के मैं कहा के रुको मैं बता रहा हूं एक मिनट अब मुझे तो अनपढ़ तुम साबित करोगे ना मैं भाई मैं मानता हूं क्योंकि हमारे गुरु को भी अनपढ़ साबित कर रहे हो
00:18:37:15 साबित करने की आवश्यकता नहीं है उसने कहा कि मैंने कहा कि उसका दर्शी संत को पहचान ठीक है उसे पूर्ण परमात्मा उसे भलीभूति उसे तनवत प्रणाम कर उसका पट छोड़ कर उसे उसमें लिखा है एक बार खोल खोल के देखिए आप खोल के देखिए आप देखो हम मैम बात करेंगे बहुत याद रहना चुप हो जाओ आप चुप हो जाओ खोल रहा हूं ना आप चुप हो जाओ हम चुप ही है
00:19:32:09 ये कहा जा रहा है उस ज्ञान को तू तत्वदर्शी ज्ञानियों के पास जाकर समझ। इतना काफी है। इतना काफी है। आगे पढ़िए ना उसे। अरे भाई आगे लिखा है
✅ This part is already used · 00:19:47:13 – 00:19:58:28 (0:12)
→ Used in: A · Live गीता के नाम पर रामपाल के बोलबचन अध्याय 4 Ep-7 #satlokashram at 1:02:05 ↗
00:19:47:13 भलीभांति दंडवत प्रणाम करने से उनकी सेवा करने से कपट छोड़कर सरलता पूर्वक प्रश्न करने से परमात्मा तत्व को भलीभांति जानने वाले ज्ञानी महात्मा तुझे उस तत्व ज्ञान का उपदेश करेंगे
⬜ Not used yet · 00:19:58:28 – 01:37:42:00 (1:17:43)
00:19:58:28 अभी बोलिए अध्याय 17 श्लोक 23 अरे भाई रुक जाओ यहां पे अभी प्रश्न है जो आपने प्रमाण दिया यहां पे कुछ प्रश्न है वो सुनो तो यहां पे कहा जा रहा है कि आपको तत्वदर्शी ज्ञानी के पास जाना है ठीक ठीक है ये कहा जा रहा है और आपके हिसाब से जो रामपाल है वो तत्वदर्शी है। ठीक है? अच्छा तो ये इसमें कहा जा रहा है उस ज्ञान को तू तत्वदर्शी ज्ञानियों के पास जाकर समझ। उस ज्ञान को ये कौन सा ज्ञान है? वो ज्ञान है जो अर्जुन को कह रहे हैं अर्जुन को कह रहे है जो गीता गीता अध्याय दो। ठीक है? गीता दो मेरे भाई जब सुनो सुनो सुनो जैसे मैंने बात की कि ये रमेश है ठीक है मैंने कहा ये रमेश है फिर मैंने कहा कि इसको तुम अपने घर पर ले जाओ उसको तुम अपने साथ में ले जाओ तो हम उस इस का उपयोग तब करते हैं जब उससे जस्ट पहले बता चुके होते हैं कुछ उसके उसको संज्ञात्मक रूप से उसको कुछ बता उसके बारे में कुछ विवरण दे चुके होते हैं तो
00:21:14:02 यहां जब यह कहा जा रहा है कि उस ज्ञान को तू तत्वदर्शी के पास जाकर समझ तो इसका मतलब है कि पिछले श्लोकों में बताया गया है कि किस ज्ञान की बात हो रही है। समझ रहे हो ना? तो 433 अब तुम खोलो। चार3 हां 433 खोल ले लो। क्या लिखा है? पढ़ो। अरे क्या हुआ? पढ़ना नहीं आता क्या? अभी ये लिखा है इसमें जो लिखा आपने बताया 433 में बताया गया है। हां एक मिनट एक मिनट ये मैं निकाल लूंगा। डाउनलोड हो रही
00:22:27:19 है। अभी तो ऐसा लगता था कि अभी चालू कर दिया पढ़ना और फिर रुक गए। जैसे पिटी हुई ट्रेनें नहीं होती है। हल्का सा काफी देर तक इंतजार करती है। पब्लिक अंदर बैठी हुई ट्रेन में। अब चलेगी अब चलेगी। अब चलेगी। हल्का सा सड़क करके दिखा देती है। फिर खड़ी हो जाती है। वही हाल आपने किया। इसमें ये लिखा है मैं बता रहा हूं मैं बता रहा हूं उसके बाद फिर रुक गए बताइए [संगीत]
00:23:01:18 के बारे में बता रहे इसमें तो चार 33 में क्या लिखा है उसमें तो वही बताया भाई इसमें संस्कृत में अरे मेरे पास हिंदी में नहीं आ रहा मैं हिंदी नहीं आता मुझे संस्कृत नहीं आती है अरे अपने पास वो वाली भगवत गीता हो तो जरा खोल के दिखा दीजिए गीता पृष्ठ प्रकाशित जो चार3 ये देखिए पढ़िए इसमें क्या लिखा है हिंदी हे परम तप अर्जुन द्रव्यम में यज्ञ की अपेक्षा ज्ञान यज्ञ श्रेष्ठ है तथा यावन मात्र संपूर्ण कर्म ज्ञान में समाप्त हो जाते हैं। यानी ज्ञान यज्ञ को श्रेष्ठ कहा जा रहा है। ठीक है? ज्ञान है ज्ञान है कि है कौन सी है अभी बताओ आप अभी मैं बताऊंगा अभी एक एक करके चलो बहुत जल्दी भड़भड़ी में मत रहो मैं दम बताऊंगा ठीक है यहां से क्या निकला बताया गया उसे भी पढ़िए तत्व ज्ञान समस्त लीला अभी अभी मैं अभी अभी बात करेंगे बस हटा लीजिए हटा लीजिए स्क्रीन से इसको हटा लीजिए एक बार एक बार उसमें देख लीजिए ना पिछली वाली लेयर में क्या उसमें भी तो तत्व ज्ञान को बताया है अरे भाई ठीक है अभी यहाँ पर किसकी
00:24:16:24 बात हो रही है ज्ञान यज्ञ और अगले श्लोक में कहा जा रहा है कि उस ज्ञान को तू तत्व ज्ञानियों के पास जाकर ले। ठीक है? यानी कि यानी कि ज्ञान यानी कि उस ज्ञान यानी ज्ञान यज्ञ का ज्ञान। पिछले श्लोक में क्या बताया जा रहा है? पिछले श्लोक में क्या बताया जा रहा है? उस ज्ञान को इस श्लोक में बताया जा रहा है उस ज्ञान को उस ज्ञान को तू तत्व दर्शी और ज्ञानियों के पास जाके ले और पिछले श्लोक में क्या है ज्ञान यज्ञ श्रेष्ठ है तो ज्ञान यज्ञ श्रेष्ठ है उस ज्ञान को तू तत्वदर्शी ज्ञानियों के पास जाके ले यानी कि
00:25:01:24 यानी मुक्ति के लिए यज्ञ करना पड़ेगा मुक्ति के लिए यज्ञ करना पड़ेगा इसका मतलब कहा मैंने कहा है क्या? मैंने कहा है क्या? मैं अभी आप भागिए मत। मैं कह रहा हूं ना जब आपसे मैं पूछ रहा था तो आपने कहा आप पढ़ो आप पढ़ो। अब जब मैं पढ़ रहा हूं बता रहा हूं तो आप बीच-बीच में बोल रहे। तो पिछले श्लोक में कहा गया कि ज्ञान यज्ञ अत्यंत श्रेष्ठ है। इस श्लोक में बोला गया उस ज्ञान को तू तत्वदर्शियों के पास जाकर ले। सहमत है आप इससे? यानी कि यानी कि ज्ञान यज्ञ का ज्ञान जिसको होता है। ज्ञान यज्ञ वो वाला यज्ञ नहीं होता है जो हवन किया जाता है। आहुति दी जाती है। ज्ञान यज्ञ का मतलब वो नहीं है। ज्ञान यज्ञ का मतलब मैं बताऊंगा। ग्रंथों से ही बताऊंगा। मगर फिलहाल बात ये है कि ज्ञान यज्ञ का ज्ञान जिसके पास होगा वो तत्वदर्शी है। ठीक है। ठीक है। आप आप साबित करिए। अरे साबित क्या करना है? यहां से साबित तो हो रहा है कि ज्ञान यज्ञ अत्यंत श्रेष्ठ है। उस ज्ञान को तू पा जाने तत पॉइंट तो वही आ रहा है ना जब ततशी ज्ञान यज्ञ बता दिया तो ज्ञान यज्ञ में और तत्व ज्ञान में क्या अंतर होता है गुण क्या है उसके नहीं नहीं
00:26:17:03 मैं कह रहा हूं तत्वदर्शी वो है जो ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देगा ठीक है ठीक है वो बात मानता हूं कि वो कौन सा ज्ञान है बताइए मैं मैं आगे चल रहा हूं भाई एक एक बात क्लियर करो बिल्कुल कि तत्वदर्शी कौन है जो ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देगा। ठीक है? क्लियर हो गया? जी क्लियर हो गया। अब आगे आपके अनुसार आपके अनुसार जो रामपाल है वो तत्वदर्शी है। ये भी क्लियर है। यानी कि वो ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देने वाले व्यक्ति हैं। क्लियर है ना? सुने आपने ज्ञान यज्ञ की बात करी है। ठीक है। वो ज्ञान देने वाले हैं। ठीक है? हम हमारा ज्ञान तो आपको जमना सही ना लग रहा है। भाई मैंने गीता से बात की है। तत्वदर्शी उसे कहा गया है जो ज्ञान यज्ञ का ज्ञान दे। ठीक है? और आपके अनुसार रामपाल जो है वो तत्वदर्शी है। यानी कि उनको ज्ञान यज्ञ का ज्ञान है। वो ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देते हैं। इसलिए वो तत्वदर्शी है। ठीक है? ज्ञान का भी देखो ज्ञान यज्ञ का भी ज्ञान देते हैं और जीवन का सफल करने के लिए भी ज्ञान यहां पे यहां पे तत्वदर्शी सुनो
00:27:32:19 मेरी बात को समझो बहुत सारी बातें करने की जरूरत नहीं है मेरे भाई यहां पे तत्वदर्शी आपने जो चार 34 बोला है उसमें तत्वदर्शी ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देने वाले को कहा गया है अगर आपको और कुछ मिलाना है इसमें तो दूसरा श्लोक बता दो नहीं मिलाना नहीं आप अब उसका आप जो बोल ना जीवन का ये करते हैं वो करते हैं वो वो श्लोक बताइए यहां श्लोक में ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देने वाले को तत्वदर्शी कहा गया है। अब मैं आगे चलूं। हमें सिद्ध करिए। हमने तो बता दिया। हमने तो बता दिया भाई जो पेड़ से लेकर पेड़ की जड़ से लेकर पत्ते तक का विभाग बता दे वो अवैध लिखा है क्या? एक मिनट एक मिनट वो श्लोक खोलो आप श्लोक खोलो। से वाला वो तो वही है 15 अध्याय
00:28:26:13 श्लोक खोल लिया। बोल लिया पढ़ो 15 चार पढ़ो उस तत्व को ततशी ज्ञानी महापुरुष के पास जाकर समझ उनको दंड अरे अरे ये नहीं है 15वा अध्याय लगाओ ये हटाओ वही खोल दिया आपने आप आप अपने पास है कि भगवत गीता है कि नहीं आपके पास मेरे पास नहीं मैं ऑनलाइन देख रहा हूं मैं खाली वो लाइन देख रहा वो संस्कृत में आ रही है मेरे पास युगल सरकार डालो युगल सरकार आ जाएगा युगल
00:29:11:09 सरकार 15 चार में लिखा है कि उसके पश्चात उस पर 15 चार पढ़ना है ना पढ़िए पढ़िए हां बिल्कुल 15 चार पढ़ना है क्या पढ़ना है 15 एक दो पढ़ना 15 चार नहीं पढ़ना है। एक दो तो जब मैं पढ़ रहा हूं तो फिर क्यों कह रहे हो? पढ़िए पढ़िए आप पढ़िए। क्या है ये? मैं सुन नहीं पाया मैं उसी। हां तो सुन के बोलो ना। सुन नहीं पाया तो पूछो। चलो पढ़िए आप पढ़िए।
00:29:45:13 यहां क्या शादी में आए हो क्या? पढ़ो पढ़ो आप पढ़ो। आदि पुरुष परमेश्वर रूप मूल वाले और ब्रह्मा रूप मुख्य शाखा वाले जिस संसार रूप पीपल के वृक्ष को अविनाशी कहते हैं तथा वेद जिस पत्ते कहे गए हैं उस संसार रूप वृक्ष को जो पुरुष मूल सहित तत्व से जानता है वह वेद के तात्पर्य को जानने वाला है। इसमें कहां लिखा है तत्वदर्शी? तत्व को जानने वाला तत्व ज्ञान को जानने वाला है। अब भाई मैं कह रहा हूं यहां पर तत्वदर्शी शब्द आया है क्या? एक बार आप स्क्रीन पे शब्द आया है क्या?
00:30:30:21 मैं ये कह रहा हूं मैं ये कह रहा हूं। तुमने चार 34 से तत्वदर्शी उठाया है कि नहीं उठाया है? चार 34 को मानते हो कि नहीं मानते? सही बात लिखी है। गीता में मैं कहता हूं गीता में जो भी लिखा है वो सही लिखा है। मगर उसे दो प्रकार का ज्ञान है। मैं आपसे मैं आपसे ये पूछ रहा हूं भाई साहब कि चार 34 का जो श्लोक है वो सही है कि गलत है ये बताओ। वो सही है। सही है। वहां लिखा है कि तत्वदर्शी वो है जो ज्ञान यज्ञ का ज्ञान दे। ठीक है। तो ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देने वाले आपके जो महाराज जी है वो है इसलिए उनको तत्वदर्शी आपने कहा। मैंने तो पहले बताया ज्ञान से पहचान हुई हमारी तो हमने तो तुम पता नहीं किस उसे बता रहे हो। पता नहीं भाई साहब मैंने कहा यहां पे तत्वदर्शी जिसको कहा गया है। तत्वदर्शी उसे कहा गया है जिसको ज्ञान यज्ञ का ज्ञान है। अब भले ही तत्व से जानने वाले को कुछ भी कहा जाता हो। तत्व ज्ञाता कहा जाता हो। तत्व तत्व साक्षी कहा जाता हो, तत्व क्या कहते हैं? तत्वता कहा जाता हो, तत्व वक्ता कहा जाता हो, मगर तत्वदर्शी किसको कहा गया है? तत्वदर्शी कहा गया उसे जिसके जो ज्ञान
00:31:45:25 यज्ञ का ज्ञान दे। समझ गए? अच्छा तो वो आप ज्ञान आप तो बताइए फिर अब हमें नहीं पता तो आप बताइए। नहीं आप मैं नहीं कह रहा हूं। पहले आप ये चीज क्लियर कर लो कि पहले आप ये चीज पहले आप पहले आप ये चीज क्लियर कर लो कि जो रामपाल जी है वो तत्वदर्शी है कि नहीं ये बताओ पहले तो हमारे गुरु जी तत्वदर्शी है तत्वदर्शी है यहां पे तत्वदर्शी किसे कहा जा रहा जिसको ज्ञान यज्ञ का ज्ञान हो और जो आपने पढ़ा जो 15 श्लोक दो तीन में देखा एक और तत्वदर्शी नहीं लिखा है उसमें तत्व ज्ञाता तत्व वेदों को जानने वाला लिखा है। तत्वदर्शी नहीं लिखा है। भाई फिर ज्ञान है कि मतलब पहले तो तुम एक बात पहले तो तुम एक बात क्लियर करो। मतलब तुम्हें चार 34 को नहीं मानते। मैं मानता हूं क्यों नहीं मानता हूं। तो मानते हो तो ये वाली बात मानते हो ना ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देने वाला तत्वदर्शी है। हां है वो मैं मानता हूं। मगर मैं ये कहना चाहता हूं। आप समझे मैं क्या कहना चाहता हूं? पहले समझिए। बताइए जो ज्ञान बता रहे हो आप ज्ञान जानने वाला वो तत्व संत है ठीक है जो ठीक है 15 अध्याय
00:33:01:08 श्लोक एक और दो में बताया तत ज्ञान है बताने वाला वो वो तत संत हमने उससे पहचान कर ली कोई लिखा है क्या लिखा है क्या तत्व ज्ञान लिखा तत ज्ञान बताने वाला है तत्व ज्ञान रखने वाला तत्व ज्ञानी होता है तत्वदर्शी तो केवल वो भी हो सकता है जिसने दर्शन कर लिया किसी चीज का बस जी आप बात कहीं और ले जा रहे हो आप लेके जा रहे हो आप इस मामले से भटक रहे हो आपने 434 खुलवाया कि नहीं खुलवाया आपने खुलवाया आपसे मैं पूछना चाहता हूं वो ज्ञान कौन है चलो हमें नहीं है पता आप बताइए मैं अभी ये सब बातें नहीं कर रहा हूं कि वो ज्ञान किसका है मैं गलत हूं कि तुम गलत हो मैं अभी केवल ये जानना चाह रहा हूं कि क्या राम रामपाल जी चार 34 वाले तत्वदर्शी है कि नहीं है? वो है। है। ठीक है। यानी कि रामपाल जी तत्वदर्शी है क्योंकि उनके पास ज्ञान यज्ञ का ज्ञान है। हां है। ठीक है। हां। क्योंकि वो ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देते हैं इसलिए उनको तत्वदर्शी कहा जाता है। जी। ठीक
00:34:16:08 है। ठीक है ना? हम अब एक काम करिए आप कि रामपाल जी द्वारा रचित गीता तेरा ज्ञान अमृत खोलिए नौवा अध्याय गरिमा गीता जी की गरिमा गीता की खोलिए नौवा अध्याय आप खोलिए बोलिए ऑपरेटर
00:35:01:12 महोदय मैंने आपको अलग से भी उपलब्ध कराया था वो इस जगह का पिक्चर है जो अब हम लोग बात कर रहे हैं कि ज्ञान यज्ञ है क्या और उससे क्या मिलता है? ठीक है। ज्ञान यज्ञ है क्या? जिसका ज्ञान देने वाले को तत्वदर्शी कहा जा रहा है वो ज्ञान यज्ञ क्या है? तो पेज नंबर एक 180 गरिमा गीता जी का पिक्चर मैंने उपलब्ध कराया था। वो ऑपरेटर महोदय से एक बार दोबारा खुलवाइए। वो जो आपने अभी स्क्रीन पे खुलवाया था दोबारा खुलवाइए। आएगा आएगा। अभी आएगा अभी आएगा सामने
00:35:58:20 आएगा कहां गए ऑपरेटर महोदय बहुत देर कर रहे हैं चलिए मैं तब तक यहीं से पढ़ देता हूं वेद मंत्रों या गीता के श्लोकों या संतों की वाणी व सत्संग सुनने को ज्ञान यज्ञ कहा जाता है। इससे मोक्ष नहीं होगा। ज्ञान यज्ञ क्या है? वेद मंत्र, गीता के श्लोक, संतों की वाणी और
00:36:33:02 सत्संग 180 पेज नंबर 180 पेज नंबर 180 इस बात को मैं मानता हूं। उससे मोक्ष एक मिनट एक मिनट भाई साहब भाई साहब एक मिनट एक मिनट एक मिनट 180 हां इसमें दूसरा पैराग्राफ अरे निकल गया ऊपर जाइए हां इसमें दूसरा पैराग्राफ दूसरे पैराग्राफ की चौथी लाइन दूसरे पैराग्राफ की चौथी लाइन हम बस बस का ऊपर क्यों जा रहा है ज्यादा चौथी लाइन क्या है कि गीता के श्लोकों या संतों की वाणी व सत्संग सुनने को ज्ञान यज्ञ कहा जाता है। इससे मोक्ष नहीं होता। यानी ज्ञान यज्ञ से मोक्ष नहीं होगा। ठीक है और बता देते हैं जो वो पांच यज्ञ वाला भी है एक मिनट भाई साहब मुझे अपनी बात पूरी कह देने दो। मेरे को अपनी बात पूरी कह देने दो। एक जगह और कहा है ना ज्ञान यज्ञ से मोक्ष नहीं। यज्ञों से मुक्ति नहीं होगी। वो आपको मैंने अलग से उपलब्ध कराया
00:37:48:25 है। वो वहां से निकाल के दिखाइए। यज्ञों से मुक्ति नहीं होगी। फोटो के रूप में उपलब्ध है आपको। इसको हटा दीजिए। हो गया। तो एक जगह और इन्होंने कहा है कि यज्ञों से मुक्ति नहीं होती है और यज्ञ पांच प्रकार के हैं। उसमें से एक ज्ञान यज्ञ है। यानी कि ज्ञान यज्ञ से मुक्ति नहीं होती। और तत्वदर्शी कौन है? जो ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देता है। ये देखिए यज्ञों यज्ञों से केवल सांसारिक सुविधाएं मिलती है। मुक्ति नहीं पढ़ लीजिए। ठीक है? और इसमें नीचे एक मिनट भाई साहब एक मिनट इसमें नीचे जाइए तो इसमें देखेंगे कि पांचो यज्ञ पांच प्रकार के यज्ञ उनमें से एक ज्ञान यज्ञ भी है। दिखाइए इनको ज्ञान यज्ञ भी है।
00:39:05:10 बड़ा करिए इसको। ये देखिए ज्ञान यज्ञ पर इस समय अंडरलाइन कर दी गई है। तो ज्ञान यज्ञ भी है। यानी कि ज्ञान यज्ञ से मुक्ति नहीं होती। ये हमने आपको रामपाल द्वारा लिखित पुस्तकों से बता दिया। इसका मतलब रामपाल के अनुसार इसका मतलब रामपाल के अनुसार यदि वो यदि उसको तुम तत्वदर्शी कहते हो तो रामपाल के अनुसार वो मोक्ष देने वाला नहीं है। क्यों नहीं है? क्यों नहीं है? क्यों नहीं है? बताइए बताइए कैसे है? बताइए। आपने जो बताया है जो आपने बताया कि ज्ञान यज्ञ है। ठीक है? ज्ञान यज्ञ से मुक्ति नहीं होएगी। एक होता है मंत्र जाप करने का कोई ज्ञान होता है सुख प्राप्त मैंने कहा ज्ञान यज्ञ है देखिए बात को भटकाइए मत मुझे लिखा दिखाइए ज्ञान यज्ञ से मुक्ति होती है ये लिखा दिखाइए ज्ञान से कैसे मुक्ति हो जाएगी उससे तो यहां पर वर्तमान के सुख प्राप्त होएगा ना तो तो तत्वदर्शी कौन है संत रामपाल जी महाराज उसका ज्ञान भाई साहब मैं क्या कह रहा हूं तत्वदर्शी कहा किसे गया है गीता में जो ज्ञान यज्ञ को जानने वाला है वो तत्वदर्शी संत है तो जो ज्ञान यज्ञ का जो ज्ञान
00:40:20:16 यज्ञ का ज्ञान देगा वो तत्वदर्शी है ज्ञान यज्ञ से मुक्ति होगी नहीं होगी नहीं तो हम क्यों जाए रामपाल के पास आप कहां बात ले बैठ गए आप कहां सो रहे हो पहले ये बताओ अब उन्होंने उसमें क्या लिखा पहले समझो तो सही क्या लिखा है समझाओ समझाओ मैं क्या समझ मेरी औकात नहीं है समझाने की परमात्मा जा रहा है उसमें लिखा है जो ज्ञान यज्ञ को जानने वाला वो ततशी संत है ठीक है। पांच यज्ञ है जो आपने पहले बता मैं पूछ रहा हूं मैं पूछ रहा हूं तत्वदर्शी के पास जाना क्यों है? क्यों जाना है? ये बताइए गीता के अनुसार अपने अनुसार नहीं क्यों जाना है? गीता के अनुसार क्या लिखा है? क्यों जाना है? इसलिए जाना है अर्जुन को कह रहे अगर तू अगर सनातनी धर्म को प्राप्त भाई गीता के अनुसार तत्वदर्शी के पास जाने के लिए इसलिए कहा जा रहा है कि उसके पास जाके तुझे ज्ञान यज्ञ लेना है ज्ञान यज्ञ के लिए तुझे तत्वदर्शी के पास जाना है वही तो श्लोक 15 के दो में भी तो बताया है कि तत्व ज्ञान देगा ज्ञान अग्नि देगा वहां पे तत्वदर्शी नहीं है वहां पे तत्वदर्शी शब्द नहीं है तत ज्ञान की तो बात हो रही है ना तज्ञ आप मुझे मुझे तत्वदर्शी के पास क्यों जाना है ये दिखाइए गीता से चार 34 को छोड़ के दिखाइए करवाने
00:41:36:14 के लिए जाना है उसमें उसमें मुक्त करवाने के लिए तो जाना है ना मोक्ष करवाने के लिए मोक्ष करवाने के लिए देखिए तत्वदर्शी शब्द की शब्द जो उभाषित होता है वो होता है यहां से आपके अनुसार चार से चार 34 में तत्वदर्शी उसे कहा गया है जो ज्ञान यज्ञ देगा और ज्ञान यज्ञ से मुक्ति है नहीं यानी यानी कि अगर रामपाल तत्वदर्शी है एक मिनट एक मिनट यदि रामपाल तत्वदर्शी है तो वो मुक्ति देने वाले नहीं है। क्यों नहीं है? यज्ञ की बात हो रही है। मुक्ति देने की बात नहीं हो रही उसमें। अरे मेरे भाई वो तत्वदर्शी कौन है? बताओ। संत रामपाल जी महाराज है। गीता के अनुसार तत्वदर्शी की व्याख्या क्या है यहां पे? चार 34 में पांचो यज्ञ को जानता हो। उस तत्वदर्शी के पास उस तत्वदर्शी के पास तुझे ज्ञान यज्ञ का ज्ञान लेने जाना है। ज्ञान यज्ञ का ज्ञान तत्वदर्शी कौन है? एक मिनट तत्वदर्शी कौन है? जो ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देता है। ठीक है? और ज्ञान यज्ञ के ज्ञान के लिए ही तत्वदर्शी
00:42:51:20 के पास जाना है। वरना कहीं नहीं लिखा कि उसके लिए तू तत्वद के पास जा। आप जो 15 चार बताएंगे 15 दो बताएंगे 15 एक बताएंगे वहां पर तत्वदर्शी नहीं लिखा है तो पहले सुनो वेदों वहां पे वेदों को जानने वाला लिखा है बताई गई है आप दो जवाब फिर आप दो जवाब आप दो जवाब आप कह रहे हो कि ज्ञान है कि मोक्ष नहीं होता है ठीक है उसमें कहां लिखा है कि मोक्ष नहीं होएगा उसमें लिखा है कि ज्ञान है बगैर तेरा कुछ नहीं होएगा ज्ञान जरूरी है उसमें लिखा है आप ये आपके रामपाल लिखते हैं। हम नहीं कह रहे हैं। ये आपके रामपाल कह रहे हैं। रामपाल से कहो गलत क्यों लिख रहे हो? सुनो सुनो। ज्ञान है ना जो उसको चाहने वाले से मुक्त नहीं होएगा। से मुक्ति नहीं होगी। ये रामपाल लिख रहे हैं। आप रामपाल को कहिए क्यों लिखा है? हम तो यही कह रहे है ना कि रामपाल ने खिचड़ी पकाई है। गलत मत सिद्ध करिए मुझे। हिमांशी जी गलत सिद्ध मत करिए। वो गलत है तो गलती सिद्ध होंगे। हम अपना अपना पक्ष रख रहे है केवल। पहले सुनिए आप सुन रहे नहीं है जो को है ठीक है जो ज्ञान है वो उससे मोक्ष नहीं होएगा कैसे हो जाएगा सत्संग सुनने से कभी मोक्ष होता है मैंने क्या कहा भाई साहब आप जो भी बोल रहे है लिखा दिखाइए
00:44:07:03 मैंने जो भी बोला है लिखा लिखाया है सुनो मैंने जो भी बोला है लिखा लिखाया है आप जो है मुझे आप मुझे तत्वदर्शी के पास जाना आप शास्त्रों से आप शास्त्रों से तत्वदशी आप शास्त्रों से सिद्ध करिए कि तत्वदर्शी कोई होता है। सुनिए आप शास्त्रों से पहले तत्वदर्शी कोई होता है। यह सिद्ध करिए और फिर शास्त्रों से मुझे ये दिखाइए कि उसके पास मुझे जाना है। सुनिए उसमें बता तो दिया गया संत के पास जा। तो वहां पे वहां पे ये बताया गया ना किस लिए जाना है वहां ये बताया गया ना किस लिए जाना है वहां ये बताया गया तुझे ज्ञान यज्ञ के ज्ञान को लेने जाना है मान जी ज्ञान यज्ञ को लेने जाना है बहुत सही बात है अब ठीक है बात अच्छी बात है तुम्हें ज्ञान के लेना पड़ेगा नहीं तो उससे मुक्त नहीं होएगा उसे उसे भी जरूरत है पांच है तो पांच एक जरूरी है ठीक है आप आपने भी कुछ बनाया है तो खाली सेक्शन सुनने से नहीं हुआ मुझे भाई साहब ये बताइए मैं तत्वदर्शी के पास वो कौन सी चीज है जिसको लेने में जाऊं? शास्त्रों से बताइए
00:45:18:14 शास्त्रों से वही प्रमाण है। देखो जी आप कर रहे हो देखो मैं वही कहना आप आप है ना वो बात नहीं कर रहे हो जो आपके पास प्रमाण है। इसके अलावा तत्वदर्शी के पास जाने के लिए तत्वदर्शी कौन होता है? या तत्वदर्शी होता है? है प्रमाण कोई? हां है ना है ना रुको और भी देते प्रमाण तो आपको तत्वदशी लिखा होना चाहिए ये ध्यान रखिएगा अब बताइए मुझे तत्वदर्शी के लिए तो कई ऐसे श्लोक है जो मैंने उस मुद्दे पे नहीं आया था खाली परमात्मा के बारे में बताने आया था लिखा दिखाइए मुझे जो आप कह रहे हैं कि तत्वदर्शी के पास ये भी होता है वो भी होता है उसके लिए मुझे तत्वदशी वहां लिखा दिखाओ
00:46:05:15 एक मिनट बोल दिखाते कोई अध्याय दो श्लोक 15 और 16 में भी कहा गया है। ठीक है गीता अध्याय दो श्लोक 15 और 16 खोलिए एक बार हां हां बताइए गीता अध्याय दो 15 श्लोक 15 खोलिए पहले फिर उसके बाद शब्द पढ़िए आप पहले 15 खोलिए अरे भाई साहब मैंने तो पढ़ा है इसको इसमें तत्व तत्वदर्शी के बारे में लिखा हुआ है इसको आप बताइए आप सिद्ध क्या कर रहे हैं वो बताइए मुझे हिमांशु जी आप कह रहे और बताइए तत्वदर्शी कहां लिखा है तो 16 में तो लिखा 16 तो भाई इसको अपनी मामले से कनेक्ट तो करो इसको अपने मामले से जोड़ोगे कि नहीं जोड़ोगे ऐसे तो सुनो ऐसे तो तत्वदर्शी बहुत जगह लिखा है। तत्वदर्शी महाभारत में भागवत में लिखा है। आप वो आपसे कनेक्ट होना चाहिए। आप उसको अपने प्रसंग आप उसको अपने प्रसंग से कनेक्ट करो। भगत जी सुनिए पहले बात। आपने कहा है पांच यज्ञ बगैर
00:47:20:21 मोक्ष नहीं पा सकते। भगत जी पहले आप ये ध्यान दीजिए। भाई साहब मैंने क्या पूछा है आपसे? आप मेरे को तत्वदर्शी कौन है? यह शास्त्र से सिद्ध करो। और उसके पास मुझे जाना है। ये शास्त्र से सिद्ध करो। बस अब बता तो दिया आपके कितनी बार बताया जो क्या बता दिया आपने कहा दो श्लोक 16 खोलो अब मैं कह रहा हूं कि इसमें क्या लिखा है आप पढ़ के सुना दो जनता को भाई इससे आपका मामला कहां से हल हो रहा है आप स्क्रीन पे खोले स्क्रीन पे खोले ना उसे स्क्रीन पर खोले एक बार आपके पास नहीं है क्या भगवत गीता नहीं है क्या हो चलो खोलो भैया हिमांशु जी आप तो वैभवी बात कर रहे हो। दूसरे अध्याय का 16वा श्लोक खोलिए। जय दयाल गो का जी वाला। अध्याय दो श्लोक 15
00:48:14:04 अरे हमें पता है तत्वदर्शी कहां कहा गया है उसमें? 16व में कहा गया है। बोलो भैया। 16 15 दोनों में ही है। अच्छा आप एक बात और बता दीजिए। एक मिनट हटा लो एक मिनट एक मिनट और हटा लो एक मिनट हटा लो इसको आपके हिसाब से काल तत्वदर्शी है कि नहीं है काल गीता बोलने वाला काल तत्वदर्शी कैसे हो गया वो काल तत्वदर्शी हो गया तो फिर क्या बात अलग हो जाएगी ना वो ततशी ज्ञान अलग अरे मैं पूछ रहा हूं मना कर दो ना यार इतना लंबा क्यों बोलते हो आप लोग वो मना कर दो नहीं काल तत्वदर्शी नहीं है ऐसा नहीं है वो काल तत्वदर्शी है वो अलग कहानी है वो उसकी अलग व्यक्ति तत्वदर्शी है नहीं है वो नहीं है नहीं है वो है ही नहीं है तत्वदर्शी संत रामपाल जी कितनी तरह की बातें बोलोगे अभी कह रहे थे है क्यों नहीं है वो अलग ज्ञान दे रहा है ना उसका अलग तत्व है मैं कह रहा हूं काल तत्वदर्शी है आपके अनुसार कि नहीं है ये बताइए नहीं है नहीं है श्री कृष्ण भगवान तत्वदर्शी है कि नहीं है नहीं है नहीं है हां
00:49:29:27 अब खोलिए भैया। पढ़िए भाई। दो में तत्वदर्शी किसे कहा गया? पढ़िए। मैं पढ़ देता हूं। असत वस्तु की सत्ता नहीं होती और सत का अभाव नहीं होता। इस प्रकार इन दोनों का ही तत्व तत्वदर्शी पुरुषों द्वारा देखा गया है। ठीक है? तो यहां पर कहा गया असत वस्तु की सत्ता नहीं होती और सत वस्तु का अभाव नहीं होता। इस प्रकार आपने वो हिमांशु जी वो नीचे श्लोक क्यों कर दिया ऊपर कर अभी निकाला था हटा दिया वो निकाला था निकाल दो भैया दोबारा लगा दो 16वा है 16वा 16वा इसके आगे वाला अलग अलग कर कोई बात नहीं 15वा निकाल ये आ गया। अब दोबारा सुन लो। असत वस्तु की सत्ता नहीं होती और सत का अभाव नहीं होता। इस प्रकार इन दोनों का ही तत्व तत्वदर्शी पुरुषों द्वारा देखा गया है। ठीक
00:50:44:27 है? तो यहां पर तत्वदर्शी कौन है? पहले तो आप अपना पक्ष रख दो। फिर मैं अपनी बात बताऊं। इस श्लोक के अनुसार तत्वदर्शी कौन है? इस श्लोक के अनुसार तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ही रहेंगे। मैं ये नहीं पूछ रहा हूं कि उसका नाम क्या है? उसके लक्षण क्या है? उसके गुण क्या है? वो बताओ इस श्लोक के अनुसार। समा गुण तो वही है ना जो तत्व ज्ञान दे। अब वाली बात का है पांच में इस श्लोक में इस श्लोक में तत्वदशी के कुछ लक्षण बताए गए हैं। अब 16 खोलिए उसमें लक्षण पूरा मिल जाएगा आपको। 16 ही तो पढ़ा है ये। इसमें लक्षण बताए तो गए हैं। असत वस्तु को असत वस्तु की सत्ता नहीं होती और सत वस्तु का अभाव नहीं होता। इस प्रकार जो दो इन दोनों को तत और असत को इस प्रकार जानता है वो तत्वदर्शी कहा गया है दो6 में कौन कहा गया है दोबारा बताइए तत्व सत्य को ना जानते है ना वो तत्वदर्शी संत को कहा गया है ठीक
00:51:59:27 है मगर तुम यार भाई आगे क्यों भागते हो इस श्लोक के अनुसार तत्वदर्शी वो है जो सत्य और असत कि इस प्रकृति को जानता हो, इस भाव को जानता हो, इस लक्षण को जानता हो कि सत्य का अभाव नहीं होता और असत का कभी असत की कभी सत्ता नहीं होती। जो इसको जानता है वो तत्वदर्शी है। वो है वो तो पहचान है। ठीक है। ठीक है। हां। अब ये बताओ कि ये बात यहां बताई किसने है? असत वस्तु की सत्ता नहीं है और सत का अभाव नहीं है। किसने बोली ये बात? ये काल ने बोली है अर्जुन के सामने काल काल ने बोली है तो यानी कि वो ये जानता है कि एक मिनट यानी कि काल ये जानता है कि असत वस्तु की सत्ता नहीं है और सत वस्तु का अभाव नहीं है। काल ये जानता है। तभी तो बोल रहा है। उसे अभाव नहीं है। उसे पता नहीं है। उस परमात्मा के बारे में पता नहीं है कि यहां पर है वो। ठीक है। उसे अभाव नहीं है सत्य के बारे में। देखो समान बाकी तुम्हारी [हंसी] मेरी बात सुनो। एक मिनट हटाइए। ये
00:53:15:06 बात कौन बोल रहा है? असत वस्तु की सत्ता नहीं है और सत वस्तु का अभाव नहीं है। ये बात कौन बोल रहा है? ये तो श्री कृष्ण के शरीर में प्रवेश करके काल बोल रहे है। ना काल। ठीक है? तो काल जो बोल रहा है और यहां यह भी बताया गया है कि इस प्रकार जो बोला गया है उस प्रकार दोनों को तत्व से जानने वाला तत्वदर्शी है। इस प्रकार तो यानी कि काल अगर बोल रहा है कि असत वस्तु की सत्ता नहीं होती। सत वस्तु का अभाव नहीं होता। तो काल ये जानता है ना कि असत वस्तु का क्या होता है? और सत वस्तु का क्या नहीं होता है। काल जानता है ना दोनों समझने वाला दोनों को समझने वाला मैं कह रहा हूं इस प्रकार मैं कह रहा हूं इस प्रकार जो बताया जा रहा है उस प्रकार दोनों प्रकार मैं कह रहा हूं मेरी बात आप देखिए आप जो बोल रहे हैं वो लिखा दिखाइए चलिए अब से लिखा दिखाया आप खुद ही मैं बोल तो रहा हूं जो यहां पे पहली लाइन लिखी हुई है उसके बाद लिखा हुआ है इस प्रकार दोनों का ही तत्व से जानने वाला दोनों को ही तत्व से जानने वाला तत्वदर्शी है। इस प्रकार
00:54:30:09 किस प्रकार सत वस्तु का अभाव नहीं होता और असत वस्तु की सत्ता नहीं होती। तो यानी कि काल ये जानता है काल जो बोल रहा है वो ये जानता है कि सत वस्तु का अभाव नहीं होता और असत वस्तु की सत्ता नहीं होती। और क्योंकि वो ये जानता है तो इस प्रकार जानने वाला होते हुए काल तो यहां पर तत्वदर्शी सिद्ध हो गया। अगर तुम इस श्लोक को वो नहीं मानते काल ने अपने मन से बोला है अपने मन से तो नहीं बोला सुनिए आप सुनिए आप एक मिनट एक मिनट पहले तो तुम ये क्लियर एक मिनट पहले तो तुम ये क्लियर कर दो कि काल ने श्लोक अपने मन से बोला है कि नहीं बोला है अगर बोला है तो इस श्लोक के हिसाब से काल तत्वदर्शी सिद्ध हो रहा है
00:55:16:24 ततशी संत है ना वो अलग है ठीक है आप कह रहे हो उसमें सिद्ध हो रहा है वो कैसे काल सिद्ध हो जाएगा समान अभी हमको आप अभी हमको यहां पर लेकर आए हो। दो 16 पर लेकर आए हो। हां बिल्कुल 16 तो यहां पे यहां के श्लोक के अनुसार काल जो है वो तत्वदर्शी सिद्ध हो रहा है। अब आप ये बताइए श्लोक को आप मानेंगे कि नहीं मानेंगे? नहीं हो रहा। तत्वदर्शी संत हो ही नहीं रहा वो सिद्ध। किस हिसाब से आप उसका अर्थ ही उल्टा लगा रहे हो? क्या अर्थ है आप बताओ? चलो दुनिया की बात छोड़ दे। काफी लंबी वीडियो होगी आपकी। आप बताइए तदशी तत्व कौन है उसकी पहचान आप बताइए चलो हम तो पागल है जैसे भी अब आप बताइए हम लोग तो पागल है अब हमें तो जगाओ फिर आप जगाओ आप चलो हम तो लोग तो पागल है आप जगाओ के कहां पहचान है कौन है शंकराचार्यदर्शी संत तो बताओ आप बताओ चलो आप बता दो फिर ब्रह्मा बता देते हैं बताओ फिर आप बताओ ऐसा है कि वेद में कहा गया है कि ब्रह्मचारी ही आचार्य बनता है। 11 पांच 16 मनुस्मृति
00:56:32:19 में कहा गया है 112 से 100 14 में 12 अध्याय में कि धर्म में संशय होने पर अधिष्ठाता एक मिनट अब बोलो मत बीच में धर्म में संशय होने पर धर्म में संशय होने पर अधिष्ठाता ब्रह्मचारी को बनाए और भगवत गीता में अनेकानेक बार वैराग्य की बात हो रही है किसकी बात हो रही है वैराग्य विरक्त कि जो भी व्यक्ति उसका जो लक्षण होता है उसके अंदर जो प्रमुख लक्षण है वो है वैराग्य यानी कि सन्यास विरक्त होना चाहिए तो पहला लक्षण क्या आया विरक्ति ठीक है दूसरा लक्षण क्या आया कि एवं परंपरा प्राप्तिमम भगवत गीता चार दो मुंडकोपनिषद में जो ऋषि हैं वो अपनी परंपरा बता रहे हैं जो वैदिक डिक्शनरी जिसे कहा जाता है निरुक्त उसमें कहा जा रहा है कि परंपरा से प्राप्त ज्ञान ही होता है ज्ञान परंपरा परंपरा के बारे में बात की जा रही है उसमें 13 वे अध्याय के संभता दूसरे पाद में कहा जा रहा है कि भले ही व्यक्ति के पास तर्क हो
00:57:47:25 मगर श्रुति परंपरा से परंपरा से जो श्रुति परंपरा श्रुति वाक्य में प्राप्त होते हैं श्रुति उसका प्रमाण ना हो तो उसका तो ज्ञान है वह अमान्य होता है। इस प्रकार से परंपरा हो जाता है। दूसरा लक्षण तीसरा लक्षण होता है समस्त श्रुति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा ही साधु सम्मत धर्म है। ठीक है? और चौथा लक्षण है। चौथा लक्षण है। अद्वैत का उपनिषद जो तीसरा लक्षण बताया मैंने मत्स्य पुराण से था। 145वा अध्याय 52वा श्लोक श्रोत स्मार्थ धर्म का युक्ति युक्त मतलब पूर्ण रूप से पालन करने वाला ही साधु संवत धर्म का अंत में अद्व तारका उपनिषद के अनुसार गुरु शब्द की जो व्याख्या है गुरु गुरु शब्द की व्याख्या है उसके अनुसार गुरु का मतलब अंधकार गुरु का मतलब निकालने वाला जो व्यक्ति अज्ञानता को मिटाए वही आपका गुरु हो सकता है अंधकार को मिटाए तो ये चारों जिस पर अप्लाइड हो जाएंगे। लक्षण से वो सन्यासी हो। ज्ञान उसका परंपरा प्राप्त हो। आउटपुट में वो
00:59:03:06 समस्त शति स्मृति शास्त्रों का सामंजस्य करते हुए शिक्षा देता हो। अंतत गथवा अपने शिष्य का संशय दूर कर देता हो। वो होता है तत्वदर्शी, तत्वज्ञानी, आचार्य या गुरु। तो इसके लिए हमें बेराग होना पड़ेगा। एक मिनट एक मिनट आपको नहीं। अब जैसे मैं आपको एक उदाहरण दे रहा हूं। एक मिनट एक मिनट हिमांशु जी आपने कहा कि होकर ही वो प्राप्ति होएगी। ठीक है। आपने खुद अपने तो क्या बैराग होने से हमारी मोक्ष हो सकती है? और जो दुनिया आपने मुझसे ये पूछा है कि तत्व ज्ञानी तत्वदर्शी किसे कहते हैं? तो शास्त्रों के अनुसार उसकी जो व्याख्या बताई गई है उसका जो लक्षण बताया गया है वो विरक्तता है। उसके अंदर विरक्ति होती है। केवल विरक्ति होना ही मात्र इस बात का कारण नहीं है कि उससे मुक्ति हो जाएगी। इस बात को भी समझिए। किसी व्यक्ति ने तुम्हारे रामपाल ने ही कहा है। सुनो। रामपाल ने ही कहा है कि व्यक्ति के पास व्यक्ति जो है इंद्रियों पर नियंत्रण कर ले हठ पूर्वक। ठीक है? और वो
01:00:18:19 अपने मन में भगवान की भक्ति ना करे, चिंतन मनन उसका अच्छा ना हो तो भी उसकी मुक्ति नहीं होगी। मगर केवल ऐसा नहीं है कि उसके अंदर वो विरक्त दिखाई दे रहा है। परंतु उसके अंदर जो है भक्ति भाव नहीं है, चिंतन नहीं है, ज्ञान नहीं है। और उसके बिना ही वो अपनी इंद्रियों पर कंट्रोल कर रहा है। तो एक ना एक दिन उसका वो जो इंद्रियों का कंट्रोल है वो छूट जाएगा। मगर जिसको तत्व ज्ञान हो जाता है उसका एक परम लक्षण है कि उसके अंदर विरक्ति दिखाई देती है और मैं तो यह कह रहा हूं कि सब बातें हटा दो सब बातें हटा दो आप विरक्तता को एक साइड कर दिए शास्त्र प्रमाण है उसमें ढेर सारे विरक्तता के लिए इसी भगवत गीता में शास्त्र प्रमाण है ढेर सारे वैराग के ठीक है इसको एक साइड कर दो जैसे दूसरे अध्याय में कहा जा रहा है राग द्वेष दूर हो जाता है लाभ हानि नहीं देखता है। यह सब कहा गया दूसरे अध्याय में आपकी इसी इसी में दूसरे अध्याय में आपके रामपाल जी ने भी ये स्वीकार किया है कि भैया उसके वो जो है राग द्वेष से फ्री हो जाता है। लाभ हानि से मुक्त हो जाता है। ऐसा हो जाता है वैसा हो जाता है। ये सब इन्होंने कहा है। तो यही तो विरक्तता है। यही तो
01:01:34:07 यही विरक्ति है ना मगर इसको एक साइड कर दो। सब कुछ एक साइड कर दो। तो मगर अंत में एक बात आती है कि गुरु वही जो अपने शिष्य का जो संचय है वो दूर कर दे। अज्ञानता दूर कर दे। मगर उसको क्या कहा जाएगा जो खुद अज्ञानी हो। उसको आप गुरु कह सकते हैं क्या? जो खुद अज्ञानी हो जो अज्ञानी हो उसे हम गुरु क्यों कहेंगे? मगर आप क्या सिद्ध करना चाहते? वो अभी मेरे समझ में नहीं आ रहा है। आगे मैं बता रहा हूं। मैं बता रहा हूं। ऐसा है
01:02:12:08 कि ऐसा है कि मैंने अभी एक बात बताई कि आप सब कुछ बातें एक साइड कर दो। शास्त्र के प्रमाणों को एक साइड कर दो। मगर एक लक्षण तो होना चाहिए ना कि गुरु वही जो अपने शिष्य का संशय दूर कर दे। इतना तो मानोगे ना। कितना तब मैं पूछ रहा हूं कि आपके रामपाल जी ने कहा है पहले आप यह बता दीजिए कि रामपाल जी जो आत्मा है उसे नित्य मानते हैं कि नहीं मानते हैं अविनाशी मानते हैं कि नहीं मानते हैं आत्मा अविनाशी है और नित्य नित्य भी है मतलब मतलब मतलब वो मरती भी आत्मा आपके कहना है मैं संस्कृत नहीं जानता हिंदी में बोल मरती नहीं जो थी है और रहेगी हमेशा से थी हमेशा तक रहेगी थी और रहेगी है तो आत्मा नित्य है वो है और रहेगी अच्छा ठीक है अच्छा इनको इनकी भगवत गीता का है है और रहेगी नहीं वो वो हमेशा से थी है और रहेगी जैसे परमात्मा
01:03:27:27 हमेशा हमेशा से था है और रहेगा। ऐसे ही आत्मा नित्य थी है और रहेगी। हां बिल्कुल अच्छा तो अब इनको इनकी जो गरिमा गीता की है उसका पेज क्रमांक दिखाइए। तीन तीन नहीं तीन नहीं उसका पेज क्रमांक
01:04:08:03 है 17 17 निकालिए। 17 में इसका आप निकालिए नीचे से दूसरा पैराग्राफ नीचे से 17व पेज का नीचे से दूसरा सेकंड लास्ट हां इसको थोड़ा बड़ा करिए। हां इसमें
01:04:40:08 देखिए ये जो पैराग्राफ है नीचे से दूसरा दूसरा पैराग्राफ उसमें नीचे से तीसरी लाइन देखिए परमात्मा लिखा है। नीचे से तीसरी लाइन नहीं नहीं ये वाला नहीं पहले आप इससे ऊपर वाले पैराग्राफ में जाइए। हां अब इस पैराग्राफ में नीचे से हां ये इसको इसको परमात्मा के अतिरिक्त कोई नित्य नहीं है। ये देखिए क्या लिखा है भाई साहब। हेलो के सुनिए अब आपने तो अपनी बात रख ली पिछली वीडियो में बात आपने कही भाई साहब पहले आप एक बात बताइए आत्मा नित्य है कि नहीं आत्मा नित्य है मगर परमात्मा के बगैर है अगर परमात्मा के साथ है वो तो नित्य है परमात्मा के साथ परमात्मा के साथ वो अविनाशी है नित्य का मतलब है क्या वो थी वो है वो रहेगी मगर ये कह रहा है यहां पे कहा जा रहा है कि परमात्मा की भी उत्पत्ति होती है। मतलब एक समय ऐसा था जब परमात्मा वो आत्मा का अभाव था। यहां कहा जा रहा है कि आत्मा की भी उत्पत्ति होती है। मतलब एक समय ऐसा था जब आत्मा नहीं थी। यहां लिखा है। देखिए
01:05:55:20 देखिए कहां लिखा है। इसी पैराग्राफ में खोलिए भैया। उसी लाइन को पढ़िए। भाई साहब कहां चले गए अपना थोपड़ा दिखाइए सॉरी चेहरा दिखाइए भाई साहब थोपड़ा दिखा दिया जीने हां भाई अब तुम गधा कहोगे तो थोड़ा बहुत तो हम भी चुटकी ले ही सकते हैं कुछ भी कह लो कुछ भी कह लो कोई प्रॉब्लम
01:06:28:06 नहीं तो ये देखिए परमात्मा के अतिरिक्त कोई भी नित्य नहीं है आगे इसी को और अंडरलाइन कर दीजिए ब्लू वाला क्योंकि क्योंकि आत्मा की उत्पत्ति परमात्मा से हुई है। उत्पत्ति हुई है। यानी कि एक समय ऐसा था जब वो नहीं थी। तो पहली बात तो आपको अपना ही ज्ञान नहीं है कि हमारे बाबा जी कह के क्या गए हैं। तो आप उनका पक्ष रखने आए हो। आगे मेरा प्रश्न सुनिए। मेरा प्रश्न सुनिए। मेरा प्रश्न सुनिए। दीजिए। अच्छा इसका इसका कोई उत्तर है आपके पास? आपने कहा कि आत्मा नित्य है वो थी है और रहेगी। आपके बाबा जी कह रहे हैं कि नहीं आपके बाबा जी कह रहे हैं वो एक समय ऐसा था जब वो नहीं थी। उसकी उत्पत्ति परमात्मा से हुई है।
01:07:25:01 वो आत्मा थी जो हमारी आत्मा है थी जो हमारी आत्मा है। ठीक है? हम परमात्मा के साथ ही है। ठीक है। पहले भी थी और अभी भी है। परमात्मा परमात्मा के वचन से हम थे। ये भाई साहब लिखा दिखाइए। लिखा दिखाइए। आपके बाबा जी के द्वारा लिखा दिखाइए। हमने आपको लिखा दिखाया है। एक समय ऐसा था जब परमात्मा आत्मा नहीं थी। परमात्मा के अतिरिक्त आप भाई साहब आप संस्कृत को नहीं जानते हैं ना। नित्य का मतलब होता है जो था है और रहेगा। आपके बाबा जी कह रहे हैं कि आत्मा नित्य नहीं है। परमात्मा के अतिरिक्त कोई भी नित्य नहीं है। यानी कि सब कुछ जो परमात्मा के अतिरिक्त है एक समय ऐसा था जब वो नहीं था। तत्व से तत्व से वो नहीं था। तो अब बात आती है कि पहले तो यहां पर हम लोग ये मान लेते हैं कि आपको ये बात पता नहीं थी। आज आपको पता चल गई। ठीक है? नहीं ये बात पता थी। बता दिया ऐसी बात नहीं है। तो बताइए फिर आत्मा को आत्मा को आप क्या मानते हैं? नित्य मानते हैं कि अविनाशी मानते हैं? क्या मानते हैं? आत्मा वचन से हुई है। परमात्मा के तो अविनाशी होगी। अब अविनाशी है। ठीक है मान लिया। आप उससे पहले की बात कर रहे हो। आपका टॉपिक की बात
01:08:40:02 कर रहे हो। आत्मा परमात्मा से भी पहले थी। आपका कहने का उद्देश्य यही है ना? परमात्मा से पहले नहीं थी। आत्मा सदा से थी। भाई मैं ये थोड़ी ना कह रहा हूं कि जब वो थी तो परमात्मा उस समय नहीं था। परमात्मा भी सदा से है। आत्मा भी सदा से है। मैं आपसे पूछ रहा हूं आप ये मानते हैं कि नहीं कि आत्मा सदा से है। मैं आपसे पूछ रहा हूं। आत्मा सदा से मगर परमात्मा का उसे मतलब भाव नहीं था कि परमात्मा है कि ठीक है। आत्मा को पता नहीं था कि परमात्मा है। मैं आपसे पूछ रहा हूं कि परमात्मा सदा से था है और रहेगा। क्या आत्मा भी इसी तरह से थी है और रहेगी है या फिर वो किसी समय पे नहीं थी। परमात्मा ने उसको अपनी वचन शक्ति से उत्पन्न किया जो कि यहां लिखा है। आप क्या मानते हैं? मैं मानता हूं कि आत्मा थी। अगर उसे परमात्मा का अभाव नहीं था कि परमात्मा है। परमात्मा ने भाई साहब आप जो बोल रहे हैं पहले तो ये वाली बात लिखी कहां है आपके महाराज जी ने वो बताइए। पहले तो गरिमा गीता गरिमा गीता को पूरी पढ़ लीजिए। ठीक है समाज। अरे पूरी पढ़ लूं। कौन सा मैं तो आपको पेज नंबर के साथ बता रहा हूं। ये बकवास बातें आप किया करो समझे। देखो
01:09:55:20 जी हम कह रहे आपसे गरीब आप प्रश्न संख्या बताइए नहीं तो जाकर के आपको ज्ञान लेना है तो ब्रह्म सूत्र पढ़ लीजिए शंकर भाष्य भाष्य फिर आप बताइए फिर कौन से कौन सी साधना करनी चाहिए फिर आप बताइए चलो हम तो मैं बताऊंगा अभी जो टॉपिक चल रहा है पहले उसको खत्म करिए अभी जो टॉपिक चल रहा है पहले उसको खत्म करिए ये आपका क्या मानना है आत्मा आपका क्या मानना है आत्मा थी या नहीं थी उसके उत्पन्न होने से पहले थी थी तो ये आपके बाबा जी ने कहां पर कहा है
01:10:38:19 भाई अब मैं क्या बताऊं मैं गरिमा गीता नहीं है स्क्रीन शेयर करके मैं बता देता ठीक है अरे तो भाई तुमको ये बताओ क्या यहां अगर गरिमा गीता की होती तो क्या तुम उस पूरी किताब को पढ़ते क्या जादू मंत्र टोने के लिए जो आपने लाइन बताई उस पेज को पढ़ते आप खोल ही ना रहे हो उसको लाइन पूरी पढ़िए एक बार भाई इनको गरमा गीता खोल के बता दो गरमा गीता खोल दो वो पेज पढ़ो भैया आराम से इसमें इसमें क्या परमात्मा के कोई भी नित नहीं है ठीक है इसमें ये लिखा
01:11:13:19 है 17 में भी अविनाशी आत्मा की महिमा बताई गई ठीक है परमात्मा के कोई भी कोई भी आत्मा कोई परमात्मा के बच से अपने शरीर की से पहले आत्मा अभी अभाव था। पहले भले ही वर्तमान में आत्मा भी अविनाशी है परंतु परमात्मा का उस समय भी अभाव नहीं था। ठीक है? इसमें लिखा है जो गीत जो उसमें लिखा है आपने वो लाइन तो पढ़ी नहीं है। बताओ बताओ। आप नीचे पढ़िए उसमें जो देखिए आप उसमें क्या लिखा है कि अविनाशी परंतु आत्मा अभी वर्तमान में है। ठीक है? उसमें अभाव नहीं था। आत्मा मतलब आत्मा को अभाव नहीं था कि मैं हूं। उसे आत्मा का अभाव नहीं है। तुम्हारा क्या दिमाग खराब है क्या? यहां क्या लिखा है? उत्पत्ति से सुनो। उत्पत्ति से पहले आत्मा का अभाव था। अभाव क्या होता है? अभाव क्या होता है? मतलब आत्मा थी। अब आप था का मतलब आत्मा नहीं थी। भाई साहब आप है ना अब जैसे कोई कह रहा है कि भाई उधर हैगा तो आइसक्रीम वाला आया तो भाई क्या होता है भाई साहब एक मिनट अभाव का मतलब
01:12:28:19 क्या होता है अभाव का मतलब का मतलब क्या होता है है कि स्थल है मतलब है कि हवाब का मतलब है होता है ये देख लो भैया रामपालियों का ज्ञान भाई अब अब तुम क्या कर भाई सारे तुम्हारे भाई्राइ मुझे एक बात एक बात बताओ अभाव का मतलब अभाव का मतलब था होता है और भाव का मतलब क्या होता है एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक एक मिनट एक मिनट भाई साहब एक मिनट अभाव का मतलब तो है होता है अभाव है अभाव का मतलब है होता है और अभाव का मतलब क्या होता है अभाव में थी मतलब मतलब अभाव भय थी। ठीक है। अरे भाई अरे भाई तुम्हारे बाबा जी कह रहे हैं कि उसका अभाव था वो नहीं थी एक समय क्योंकि उसकी उत्पत्ति हुई है। जिसकी उत्पत्ति हुई है तो उत्पत्ति से पहले वो नहीं था। नहीं तो उसकी उत्पत्ति नहीं होती। और अगर आत्मा की उत्पत्ति होते हुए भी तुम कह रहे हो कि उसका अभाव था इसलिए वो है तो इसका मतलब परमात्मा का भी अभाव वो मानना पड़ेगा। परमात्मा का अभाव था क्योंकि उसकी उत्पत्ति नहीं हुई। परमात्मा की भी उत्पत्ति माननी पड़ेगी।
01:13:44:26 क्या आप अपने शरीर आपका जो शरीर चला जाएगा ठीक है? एक बहन की बात सुनिए। आपका शरीर चला जाएगा। आपकी आत्मा होगी क्या? हम हम लोग कहेंगे वो आत्मा मेरी बात सुनो। विषय को भटकाओ मत। विषय को भटकाओ मत। अगर अभाव का मतलब है मैं पूछ रहा हूं। अगर अभाव का मतलब मैं पूछ रहा हूं। इतने तो बड़े से आते हैं अनपढ़ गवार कहीं के जिनको यह नहीं पता है कि अब का मतलब क्या होता है? अब आपका मतलब होता है कि वो नहीं थी और यह बताओ अगर वो थी अगर वो थी तुम्हारे बाबा जी ने ये क्यों लिखा कि उनकी उत्पत्ति हुई है परमात्मा से बताइए उत्पत्ति निराकार में थी आत्मा निराकार में थी ना आत्मा निराकार में थी तो ये बात आपके बाबा जी ने कहा लिखी है बताइए अरे भाई लाइन पढ़ तो ली नीचे अब क्या मैं अब मैं हौप आगे मैं क्या बताऊं निराकार वाली बात कहां लिखी है कि वो निराकार कार में थी फिर उसको उत्पन्न किया साकार में ये कहां लिखा है अभाव में थी परमात्मा के शरीर में थी कहेंगे हट भगा इनको यहां से अभाव का मतलब नहीं पता
01:14:58:08 है बेवकूफी की हद होती है अब आप का मतलब है आज जी देखो आप बात करना चाहते हो ना किसी को बेवकूफ गधा बोलो कोई बात नहीं अगर आपको जाना चाहता नहीं करनी बात मत करो पहले आप चीज सुनो आप समझ जाओगे लेकिन जाना तो य पर पड़ेगा ऐसा है ना सुनो इनको भाई साहब म्यूट करो फिर लो हां दिखाइए चेहरा
01:15:37:13 मैं कहना चाहता हूं सुनो एक मिनट मेरी बात सुनो मेरी बात सुनो बोल रहा हूं मैं। मेरी बात सुनो। मैं तुम्हें अपना प्रश्न समझा दूं। मैं तुम्हें अपना प्रश्न समझा दूं। मैं तुम्हें अपना प्रश्न समझा दूं। मेरी मेरा प्रश्न समझ लो कि यहां पे लिखा है कि आत्मा का किसी ना किसी समय अभाव था। और दुनिया की सारी डिक्शनरी देख लेना। अगर कहा जा रहा है कि अभाव था तो उसका मतलब है कि उसकी सत्ता नहीं थी किसी समय। ठीक है? और यदि अभाव का मतलब यह होता है कि है तो क्या तुम कह सकते हो कि परमात्मा का भी अभाव था। क्या तुम ये बात बोलोगे? अच्छा इसके साथ ही साथ तुम्हारे बाबा जी ने कहा है कि उसकी उत्पत्ति हुई। एक मिनट भाई साहब इनको म्यूट करो भैया। इनको म्यूट करो। अब सुनो तुम्हारे बाबा जी ने कहा है कि आत्मा की उत्पत्ति हुई। तुम्हारा कहना है कि आत्मा उससे पहले निराकार रूप में थी। तो यह बात तुम्हें दिखानी पड़ेगी ना कि बाबा जी ने कहीं पर कहा हो कि निराकार रूप में थी और शारीरिक रूप में उत्पत्ति हुई है। जबकि बाबा जी क्या कह रहे हैं? तीन बड़ी-बड़ी बातें परमात्मा के अतिरिक्त कोई भी नित्य नहीं है। यानी कि कोई भी ऐसा नहीं
01:16:52:14 है जो आ है और रहेगा। यही बात खत्म हो गई। फिर तुम्हारे बाबा जी कह रहे हैं कि आत्मा की उत्पत्ति परमात्मा से हुई है। फिर तुम्हारे बाबा यहां ये नहीं कह रहे कि साकार रूप में उत्पत्ति हुई है। बाबा जी कह रहे हैं कि आत्मा की उत्पत्ति परमात्मा से हुई है। फिर तीसरा कह रहे हैं कि आत्मा का किसी समय पर अभाव था। परमात्मा का नहीं था। अगर अभाव का मतलब अगर अभाव का मतलब है होता है तो वो जरा पेज खोलो जरा वो वाला समाज जी पहले बात सुनो एक मिनट एक मिनट आपको सबूत दे दूं नहीं मुझे सबूत नहीं चाहिए मेरे को सबूत बहुत देखो एक मिनट एक मिनट आपने माना है कि परमात्मा वो आत्मा का जो अभाव था अभाव का मतलब होता है नीचे देखिए परमात्मा का उस समय भी अभाव नहीं था यानी यानी कि नीचे लिखा कि परमात्मा उस समय नहीं था। अभाव का मतलब है होता है ना। अभाव का मतलब है होता है। तो परमात्मा उस समय नहीं था। ये लिखा है नीचे।
01:18:04:04 तो आप आप क्या सिद्ध करना चाहते हो? ये बताओ। सिद्ध ये करना चाहता हूं। पहले आपको ये मानना होगा कि आत्मा एक समय पर नहीं थी। आपके राम के अनुसार हमारे गुरु जी के अनुसार हमारे गुरु जी कहते हैं आत्मा थी पहले भी थी मगर भाई साहब आप मुझे लिखा दिखाइए भाई साहब लिखा दिखाइए क्या लिखा है ये मैं बोल तो रहा हूं ये दिखा तो रहा हूं आपको कि परमात्मा का उस समय भी अभाव नहीं था आप अगर कह रहे हो आप अगर कह रहे हो आप अगर कह रहे हो आप अगर कह रहे हो कि आत्मा का अभाव था। अभाव का मतलब है आत्मा थी। तो जब परमात्मा के लिए आएगा अभाव नहीं था। तो इसका मतलब परमात्मा नहीं था। तो क्या आप ये मानते हो परमात्मा नहीं था किसी समय पे? अब मेरी तो सुन लो आप। हम बोलिए। कह दी। ठीक है। आप कह रहे अब आप नहीं था। ठीक है। आपकी बात हम मानते हैं। आपने जो कहा आप जीते मैं हारा। ठीक है। ज्ञान चर्चा में मैं हारा। आप ठीक है। टॉपिक है ये आप आप जीत गए। अभी कह रहा हूं आप जितने एपिसोड बना रहे हो जिस भी ग्रंथ को खोल लो ठीक है यहां से सुनिए देखो मेरी बुराई नहीं है आपसे आप ज्ञान चर्चा में हार गए तो आप ज्ञान मत दीजिएगा
01:19:19:22 ठीक है नहीं दे रहा हूं मैं लास्ट बात बोल रहा हूं आना उसी रास्ते पड़ेगा अगर परमात्मा को पाना है ना तो उसी रास्ते आना पड़ेगा राम राम भाग गए इसको कहते हैं क्लीन चिट बोल्ड ऐसे किया है क्या कभी किसी है जो व्यक्ति हाथ जोड़ के गया हो और बात ऐसी नहीं है कि इनको हराना इनको इस तरह से निरुत्तर करना या निशब्द करना कोई बहुत बड़ी बात होती है इनके कुतर्कों का भी जवाब देने के लिए मेरा जन्म हुआ है। ऐसे कुतर्कियों के लिए बहुत लो लेवल के बहुत निम्नतम लेवल के सड़े हुए अगर ज्ञान की दृष्टि से देखा जाए तो दो कौड़ी के बातें लेकर के जो तुम परंपरा प्राप्त सिद्धांतों का खंडन करने निकलते हो गवार अनपढ़ कहीं के मगर मैं तुम्हारे कुतर्कों को भी कुचलूंगा
01:20:38:28 तुम्हारे कुतर्कों की दुनिया में जाकर के वहां पे तुम्हारा मुंह बंद कराऊंगा। हालांकि उसकी आवश्यकता नहीं है। जब तुम यह मुंह से निकाल रहे होते ना यह चीजें तो वहीं से समझ में आ रहा होता है कि अभाव का मतलब है ये सब चीजें हम निकाल रहे होते हैं तो दुनिया को वही समझ में आ जाता है कि तुम कितने बड़े वो हो मगर मैं तुम्हारा मुंह बंद कराऊंगा ऐसे ही उन कुतर्कों की दुनिया में उतर के कब तक बोलोगे तुम
01:21:20:21 एक जन और जुड़े हैं। 7408301869 किसी को चर्चा करनी हो तो इस नंबर पर संपर्क करें, WhatsApp करें और चर्चा सुनिश्चित करें। अब चर्चा के लिए अब और किसी को नहीं लेना है। डेढ़ घंटा हो चुका है। भैया श्री सीताराम रोशनी में आ जाइए सीताराम चेहरा दिखाइए भाई साहब पुष्पेंद्र ये आ चुके हैं कई बार आ चुके हो ना जी जी जी हां जी हां बोलिए हां
01:22:11:07 बताइए आपके जो महाशय हैं बाबा जी हैं वह तत्व ज्ञानी है। जी बिल्कुल आत्मा नित्य है कि अनित्य है? आत्मा अनित्य है जो आप अभाव के पीछे पड़ रहे हो। अभाव का मतलब होता क्या है? क्या होता है? आप बताइए क्या होता है अभाव? आप बताइए ना आप बताइए आप। मतलब यह 16 में 216 में देख लो। सुनो सुनो सुनो सुनो हम तो अज्ञानी लोग हैं मूर्ख है पागल है अज्ञानी हो आप बताइए बता दिया अभाव का मतलब एक समय ऐसा था जब वो नहीं थी उसका अभाव था यही है अभाव का मतलब अच्छा अभाव का मतलब ये होता है मतलब होता है किसी अभाव का अभी तुमने क्या कहा म्यूट करो इनको अभी इन्होंने क्या कहा कि हम तो अज्ञानी है अब जब ज्ञानी व्यक्ति जब ज्ञान दे रहा है तो क्यों बोल रहे हो
01:23:09:08 म्यूट हो तुम म्यूट हो म्यूट हो म्यूट हो पहले प्रेशर अपना कम करो सुनाई दे रहा है म्यूट हो तुम्हारी आवाज नहीं आ रही यहां अरे भाई ये कुतर्की आदमी अपना कुछ कंटेंट लेके फिर भाग जाता है ये हटा दो इसको इसको केवल बकबक करने आना है अब किसी को मत लीजिए विरोधी व्यक्ति को थोड़ी सी बात करके पूरा करेंगे आज एकादशी का व्रत भी था तो ठीक है। इतनी एनर्जी काफी है। निखिल जी जय श्री राम। ओनली खंडन भाई गोपाल जी कैसे हैं?
01:23:44:12 बढ़िया बढ़िया जय श्री राम। आया आनंद आया। कैसे कैसे ये लोग रामपाल बिल्कुल आनंद आया। रामपाल का ज्ञान लोग शिवा मेरे को लगता है कि रामपाल को अथॉरिटी दे दी है कि अपना भी ज्ञान तुम बांट सकते हो मेरे नाम से अगर अगर खोजेंगे तो कोई लेटर वगैरह मिल जाएगा जेलधाम से कि मेरी तरफ से आप लोगों को जो मन करे वो आप लोग बोल सकते हैं समाज में
01:24:29:08 उसमें वो कहेंगे रामपाल जी ओ सुनू बेटा ओ सुनू बेटा ये जो ये है ना जो वो क्या कहते हैं उसको जो उसके वो होते हैं जो इनके एजेंट होते हैं उसको कुछ नाम दिया है कोऑर्डिनेटर और सुन बेटा ओ वो कोऑर्डिनेटर है ना वो वो सब मेरे ही बनाए हुए हैं तू चिंता ना करियो सुन बेटा जेलधाम से आया था ना एक वीडियो हां गोपाल जी जय श्री राम जय श्री राम एक ये जो मनोज दास मनोज दास करके करके था ना जिन्होंने आपके ऊपर भी कुछ वीडियो बनाए थे। हां उसके साथ मेरी ज्ञान चर्चा हुई। मैंने उससे पहले एक ही सवाल पूछा था कि आत्मा ने काल को देख के हाथ खड़ा किया। ये बात कहां पे लिखी है? इसका प्रमाण बताओगे? वो बातें घुमाने लग गया। फिर उसको वही सवाल पूछता हूं। फिर घुमाता है। मैं बोला आपका नाम क्या है? तो बोलता है मनोज दास। बोला अभी कैसे डायरेक्ट बोल दिया? घुमा के बोलना चाहिए था। गुड। बाद में बाद में वो गीता जी पे आ गया। गीता जी के बारे में बोल रहा है कि अध्याय चार के 34 में बोला तत्वदर्शी के शरण में जा। मैं बोला पहले ये बताओ
01:25:44:14 अध्याय चार का 38 पढ़ा बोला पढ़ा बोला बताओ क्या पढ़ा है? पता नहीं। मैं बोला अध्याय चार का नाम क्या है? पता नहीं कोई जवाब नहीं। फिर वो वहां से भाग गया देवी भागवत पुराण पे। मैंने उसको वहां पे पूछ लिया। वहां पे वो चुप हो गया। फिर बोलता है हम सनातनी है यह है। बोला अच्छा बताओ तो सनातनी में कितने गुण होते हैं? सनातनी हो ना आप में कितने गुण है सनातनी के? वहां चुप हो गया। वो जहांजहां भागा उसके वहीं सवाल खड़ा कर दिया। लास्ट में वो फोन काट के भाग गया। हालांकि जो प्रभुत्व वर्ग है समाज का उसको जागरूक करने के लिए रामपाल के विरोध में इतना विश्लेषणात्मक वीडियो बनाना आवश्यक नहीं है। मगर हमारा जो एक बहुत बड़ा वर्ग है जो अज्ञानता वश और इस तरीके से इन इस प्रकार के लोगों के जाल में जो फंस रहा है तो कई बार ऐसा होता है ना कि जो घर का जो कमजोर बालक होता है ना जी उसकी ज्यादा देखभाल करनी पड़ती है। उसी प्रकार से वास्तविकता यही है कि इनकी चीजें सब पूर्ण है। कोई मेहनत की आवश्यकता
01:26:59:25 नहीं है। पर फिर भी जो हमारा जो यह वाला वर्ग है जो छोटे भाई हैं बहुत सारे जो भटक रहे हैं इनके कारण तो इसलिए आवश्यक है कि उनको दिखाना कि देखो तुम क्या छोड़ के और कहां जा रहे हो और यह देखो इनका हाल क्या है पहाड़ी जी ने इन पर वीडियो बना दिया तो यह स्ट्राइक भेज रहे हैं ज्ञान नहीं है ना सामने आने का साहस तो है नहीं सामर्थ्य तो है नहीं तो टीआर पहाड़ी जी को कॉपीराइट क्लेम भेजा है है
01:27:35:16 ना? कौन से चैनल से भेजा है भाई? कोई अगर किसी को चर्चा करनी है तो वह हमसे संपर्क करें। WhatsApp के द्वारा हमारा नंबर यहां पर प्रदान किया जा रहा है। यदि कोई सहायता करना चाहता है तो सहायता कर सकता है। आर्थिक बल हमें प्रदान कर सकता है। बहुत सारे कार्य हैं। जो हम कर रहे हैं आप लोगों को संभवत पता हो और बारकोड इत्यादि भी यहां पर उपलब्ध करा दिया गया है। यदि आप सहायता करना चाहते हैं तो आप स्वेच्छ अनुसार कुछ सहायता कर सकते हैं। हमें बल प्राप्त होगा और जिसको भी वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा करनी है। जैसे कोई राजस्थान नाम से आया है, दंग बॉस नाम से आया है, कोई पता नहीं क्या-क्या नाम है। तो भैया एक बार शेयर कर दीजिए। स्क्रीनशॉट ले लूं। किस बात का? बारकोड जो अभी शेयर किए थे वो एक बार थोड़ा शेयर कर दीजिए। शेयर कर दीजिए बारकोड ऑपरेटर महोदय।
01:28:51:20 ठीक है? ये हमारा बारकोड है संस्था का तो आप इसमें कर सकते हैं। बाकी बहुत अच्छा लगा आज चर्चा में और जिसको भी चर्चा करनी है वो हमसे WhatsApp द्वारा संपर्क करें। वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा। मैंने जो बुक भेजी थी आपको वो आपने देखी। जेलधाम से छूट कर आए हैं। हां कुछ लोग 15 से भी अधिक लोग जेलधाम से छूट कर वापस आ गए हैं। बताएं ओनली खंडन जी। हां जी। 10 से 15 परिवार निकल गए हैं रामपाल के जाल से। सनातन धर्म में वापसी हो गई है। जी बहुत बढ़िया। बहुत बढ़िया। जी। और इनके अंदर डर डाला हुआ है। डर काल का डर कि आप नाम छोड़ देंगे तो ऐसा हो जाएगा, वैसा हो जाएगा। आपके घर में ऐसा हो जाएगा। बहुत कुछ और ये पैसों का धंधा देखिए किस तरीके से खोल रखा है। इनके घर में अशांति फैल जाती है। फिर इनको बोलते हैं अर्जी लगवाओ। अर्जी लगाने के पैसे लेते हैं। किसी से 11000 किसी से 5100 हां ये सारी रिकॉर्डिंग है मेरे पास। अच्छा मैंने मैंने बहुत रिपोर्ट पढ़ी थी जिसमें आया था कि जब ये अरेस्ट
01:30:06:21 हुए थे तो उधर निकला था कि जिस सिंहासन के ऊपर ये बैठते थे जेल धाम वासी बाबा जी जिस सिंहासन के ऊपर बैठते थे उस सिंहासन के नीचे राइफल रखी रहती थी ऐसी हां ये तो बरवाला कांड में देखे ही थे ना इनके चेले भी सब हथियार ले खड़े थे तो और ये सारनाम 31,000 में देते हैं सारनाम जो तीसरा इनका सारनाम है। आज आप पहले तो उसकी एक लाख कीमत थी।
01:30:43:20 आप देखिए वो व्यक्ति भागा कैसे? अरे राजेश सिंह जी हां चलो निष्कर्ष गुरु जी। आशीर्वाद भैया कैसे हैं आप? बस दया है आपकी। आज का कैसा लगा? बहुत बहुत ही अच्छा बहुत अच्छा गोपाल जी जय श्री राम। जय श्री राम। जय श्री राम। ठीक है। तो सभी का समय देने के लिए आभार। और फिर मिलेंगे। यदि कोई आता है अपनी अपनी क्या कहेंगे? मृत्यु को पुकारता है तो जरूर उसका उसकी इच्छा पूरी करेंगे। तो भाई किसी को भी वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा करनी है तो वो संपर्क कर सकता है और जो अपनी अज्ञानता है उसकी मृत्यु के लिए वो मैं आमंत्रित कर सकता है। ठीक है? मैंने मैंने बुक का पीडीएफ भेजा था उसको आपने देखा। अभी समय नहीं मिला है थोड़ा सा। हम देखने वाले हैं। कई सारी चीजें चल रही हैं। तो बहुत
01:31:58:28 सारे कार्य रहते हैं। बहुत सारे कभी कभी कार्य पूरे नहीं होते। मैं मैं बताऊं वैसी छह सात बुक्स ऐसी देखो ये देखो प्रशांत कुमार क्या कह रहा है? रिपोर्ट मारो इसको। यह इनका तरीका है। सामना करने का हिम्मत नहीं है क्योंकि मालूम है ना मत पड़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में। मैंने मैंने छ सात बुक ऐसी रखी जिसमें शास्त्रों से प्रमाण है कि ऐसे शद्रों के साथ हुआ था। हम लोग बात करेंगे फिर सभी का आभार। समय देने के लिए सबको आभार और राजेश सिंह जी आपको भी आभार। आप आए गोपाल जी आपको आभार और जिसको भी बात करनी है वो हमसे WhatsApp पर संपर्क करें और उसके बाद हमारी चर्चा सुनिश्चित हो जाएगी कब कितने बजे हम लोग बैठने वाले हैं जो भी अभी आने की सोच रहे हैं कि मुझे लिंक दो मुझे लिंक दो वो ये बात ध्यान रखें कि पहली बात हमारी चर्चा में चेहरे के साथ आना होता है तो वो ये सोच रहे हो कि अपनी आइडेंटिटी छुपा कर आएंगे जिससे कि जब वो निरत्तर होंगे। उनका मुंह काला होगा तो वो अपनी
01:33:14:09 जो असफलता है उसको छिपा सके। तो ऐसा नहीं है पॉसिबल। वो आए अपने चेहरे के साथ। उनके अंदर यदि साहस है यदि वो स्वयं को सत्य के पक्षधर समझते हैं और बचपन में मात निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया है तो जितने रामपाल के फॉलोअ हैं उनमें से जो भी ऐसा हो गुर्दा रखता हो वो सामना करें प्रत्यक्ष साहस के साथ आए अपने चेहरे के साथ। ठीक है? और और भैया एक लेके आया करो मन की बातें मत बोला करो कई बार अपने बाबा जी के विरुद्ध भी चले जाते हो अपने को बचाने के लिए ये सब बातें भी है ठीक है बाबा जी ने दे दिए चेहरे के साथ आए और इस नंबर पर संपर्क करें 7408301869 पहाड़ी जी जय श्री राम जय श्री राम हर हर महादेव सभी लोगों को आज बड़ा आनंद आया जिस प्रकार से निरुत्तर होकर गए थे जिस प्रकार से जो दहाड़ रहे थे ना उस दिन ये कि हम आपसे डिबेट करेंगे हम आपको निरुत्तर करेंगे मतलब कि बोलते है ना एक क्या है बड़े दर्शन छोटे दर्शन वाला क्या था एक
01:34:29:19 कहावत बड़े बोल दर्शन छोटे वाले हिसाब वही हुआ आज ऊंची दुकान फीका पकवान नाम बड़े और दर्शन छोटे। मुझे तो ये भी प्रतीत हुआ कि शायद हिंदी तक पढ़नी नहीं आती इनको जो आए थे। शायद हां हिंदी नहीं। अभाव का मतलब कह रहे हैं कि है और फिर मैं पूछ रहा हूं परमात्मा का अभाव नहीं था। तो इसका मतलब परमात्मा नहीं था। अभाव का मतलब है सत्ता है। तो इसका मतलब परमात्मा की सत्ता नहीं थी किसी समय। हम [संगीत] अभाव का मतलब है छोटी छोटी रीले कटेगी पता चलेगा ज्ञान कैसा है ऐसे ही लोग तो फसे हैं के ऐसे ही लोग फसे हैं यही यही फंसते हैं रामपाल के चंगुल में जिनको ये तक नहीं पता है भाव का मतलब अभाव का मतलब क्या है बिल्कुल ठस बुद्धि ठस बुद्धि बिल्कुल ठस बुद्धि
01:35:34:12 भैया व्याकरण भी तीन धर्म टनी लेके और हथौड़ा मारना पड़े तब जाकर के थोड़ा सा वहां पे कुछ कुछ चीज घुसेगी। टैनी ले हथोड़ा मार मार। इनकी ऐसी बुद्धि कैसे हो गई जो पांच मंत्र देते हैं ना शुरू में। ये उनका जप करते हैं अपवित्र अवस्था में। कहीं पर भी इनको ये भी नहीं बताया गया कि ये कहां पर जप करना चाहिए, कैसे करना चाहिए। पांच पांच मंत्र जपते हैं अपवित्र अवस्था में। बुद्धि तो भ्रष्ट होएगी। हां एक मिनट इन लोगों को ले लूं मैं बोल दूं। दिनेश कुमार करके कोई जुड़ा है। दिनेश कुमार और एक और थे कोई वो कहां गए? काफी देर से थे। पी ओ करके उनकी स्पेलिंग थी कुछ तो आप सभी लोग संपर्क करें। किसी और दिन आप नंबर ले लीजिए 7408301869 ये नंबर आ रहा है इस पर हमें WhatsApp कर दीजिए हमारी चर्चा सुनिश्चित हो जाएगी उस दिन समय लेकर के हम और आप जुड़ेंगे ठीक है ठीक है ना दिनेश
01:36:48:25 जी सुन रहे हैं आप मुझे दिनेश [संगीत] जी रिपीट कीजिएगा एक बार नंबर रिपीट कीजिए 7408301869 ठीक है दिनेश जी चलिए सभी को जय श्री राम जय श्री राम राजपूत जी जय सिंह जी जय श्री राम पहाड़ी जय श्री राम जय श्री राम ओनली खंडन गोपाल भाई जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम हर हर महादेव जी हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर
01:37:39:09 महादेव कल
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सतलोक आश्रम का अधिकृतवक्ता #तत्त्वदर्शीसंत#rampaljimaharaj
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