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00:00:02:03 [संगीत] सभी को जय श्री राम तो आज एक विशेष संस्करण लेकर आए हम विशेषांक इनकी ओर से अब तक ये दावा किया जाता रहा कबीर पंथिया की तरफ से कबीर पंथी नोट जो वो वाले जो अपने ही उसमें मगर जो रामपाल दास जी के द्वारा फैलाई जाने वाली जो मिथ्या प्रपंच और प्रचार प्रसार हो रहा है और उनके शिष्यों के द्वारा जय श्री राम हरजी जय श्री राम

00:00:52:28 तो यह विशेषांक है इस बात पर कि यह लोग जो खूब चिल्लाते जैसे पहले चिल्ला शुरू किया था कि वेदों में प्रमाण है आज तो मैं लेट नहीं हूं प्यारी बहना जी आज तो मैं समय से आ गया हूं फिर भी आप लेट कह रहे हैं मुझे एक मिनट ही लेट हुआ हूं तो अ कबीर के लिए कहते हैं कि भाई ब्रह्मा विष्णु महेश जो है अविनाशी है और और कबीर अविनाशी नहीं है इसलिए वो ईश्वर है अब बात य आती है कि जब हमने य पूछा कि लीला में कबीर का जो शरीर है वोह विनाश उसका हो सकता है कि नहीं लीला में लीला का अर्थ क्या है कि हमें वोह चीजें दिखाई जाए जो वास्तविक नहीं है मगर लीला पूर्वक हमें दिखाई जाती जो जैसा दिख रहा है वैसा नहीं है तो लीला में लीला में भी उनका शरीर यह सब कर सकता है कि नहीं तो इनका कहना था कि नहीं लीला में कर पहले पहला था कि लीला में भी अविनाशी है और मुझे जहां तक

00:02:08:00 है कि इनके जो शीर्ष के जो नेतृत्व करने वाले लोग हैं उनका अभी भी यही मानना होगा कि लीला में उनका जो शरीर है वह परिवर्तित नहीं हो सकता है शाश्वत मगर क्योंकि इनके जो कहूंगा कि क्या कहू उनके लिए मूर्ख श शब्द निकलता है उनको इससे मतलब नहीं है कि वो अपने जिस मत को मान रहे हैं उसकी रक्षा कर रहे हैं कि नहीं उनको इससे मतलब नहीं है कि वह धर्म की रक्षा कर रहे हैं कि नहीं उनको इससे मतलब नहीं है कि वह ईश्वर के अस्तित्व की रक्षा कर रहे हैं कि नहीं उनको इससे मतलब है कि हम शिवांश नारायण द्विवेदी का या आहवान का मुझे मेरा य नाम ज्यादा पसंद है आहवान आहवान

00:02:57:27 का आवान से कैसे उसका मुंह बंद कराए कैसे उसको जो है पछाड़े और भले ही पछाड़ के लिए हमें अपने ही मत का खंडन क्यों ना करना पड़ जाए अपनी मत को छोड़ना क्यों ना पड़ जाए तो ऐसे ही कुछ इनके मूर्ख शिष्य कहूंगा पिछले कुछ समय में आए और उन्होंने यह स्वीकार कर लिया कि लीला में जो है उनका शरीर जो कबीर कबीर जी हैं उनका शरीर प्रभावित होता है ये स्वीकार कर लिया पंक्चुअल प्यारी बहना कह रही है मैं पंक्चुअल हो गया हूं इतना मत कहिए पता नहीं अगली बार कब आ पाऊंगा टाइम पर तो उन्होंने स्वीकार कर लिया कि लीला में जो है कबीर का जो शरीर है वह प्रभावित होता है परंतु जो शाश्वत शरीर है वो प्रभावित नहीं होता है शाश्वत शरीर जो लीला के बाहर का शरीर है अच्छा ब्रह्मा विष्णु महेश के बारे में भी हम लोग यही बताते चले आ रहे कि लीला पूर्वक उनका आविर्भाव तिरोभाव होना तो सिद्ध होता है और अभी भी देखिए कबीर यहां पर नहीं है तो आविर्भव है ना कबीर का खैर ब्रह्मा

00:04:13:06 विष्णु महेश का भी जो भगवान के रूप है उनमें से तीन जो रूप है ब्रह्मा विष्णु महेश उनका भी आविर्भाव रो भाव लीला पूर्वक ही सिद्ध होता है वस्तुतः व अजर अमर अविनाशी है मगर लीला पूर्वक ब्रह्मा विष्णु महेश का यदि शरीर जो है अविर भाव तिरो भाव होगा प्रकट अपक होगा तो उसको पकड़ के ये लोग गाना गाएंगे और लीला पूर्वक हालांकि इनके मत के द्वारा यह नहीं माना जाता फिर भी इन्होंने स्वीकार कर लिया कि कबीर जी का जो शरीर है वोह आविर्भाव तिरोभाव होगा मगर वह तब भी ईश्वर है अगर यह आधार है ईश्वर को ईश्वर कहने का कि लीला में भी उसका शरीर जो है वो बदलेगा नहीं वो आविर्भाव तिरोभाव को प्राप्त नहीं हो सकता तो ऐसे में फिर यदि अगर नहीं हो सकता है आविर्भाव तिरोभाव को प्राप्त तो वो सब कुछ कर सकने वालाला सर्वशक्तिमान नहीं रह जाएगा तो इन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि नहीं लीला में हो सकता है तो जब लीला में हो सकता है तो उसी आधार पर कि वो बदल रहा है या शाश्वत नहीं है शरीर नित्य नहीं है शरीर उसी आधार पर ब्रह्मा विष्णु महेश के लिए बहुत चिल्लाते ब्रह्मा विष्णु महेश नाशवान है नाशवान

00:05:28:07 है नाशवान है नाशवान है तो पहले तो आज हम शास्त्रों में देखेंगे ब्रह्मा विष्णु महेश को नाशवान कहां कहा गया है शास्त्रों में देखेंगे कि परम पुरुष किसे कहा गया है पुरुषोत्तम किसे कहा गया है जो य चिल्लाते हैं भगवत गीता में जो पुरुषोत्तम है आज थोड़ा डिटेल में जाएंगे और शास्त्रों के आधार पर देखेंगे कि शास्त्रों के आधार पर देखेंगे कि भाई ब्रह्मा विष्णु महेश मूलतः अविनाशी है या केवल लीला में ही मतलब मूलतः उनका आविर्भाव तिरोभाव होता है या केवल लीला में ही होता है तो इसको हम लोग आज देखने जा रहे हैं और जब शुरू की हम लोग कुछ बातें कर लेंगे तो उसके बाद हम लोग लिंक भी शेयर करेंगे कोई आना चाहता है तो आ सकता है अपनी बात को रखने के लिए तो मैं बहुत सारे प्रमाण दिखाऊंगा बोलूंगा मगर

00:06:30:15 शास्त्रों से कुछ एक दो उदाहरण के लिए दे दूंगा क्योंकि सारे प्रमाण दिखाने के लिए क्या होता है पूरी टेबल पर सारे शास्त्र नीचे उतर आते हैं टेबल भर जाती है तो मैं प्रमाण बहुत सारे बोलूंगा रेफरेंसेस मगर और एक बात और है कि यदि हम यह भी कह रहे हैं कि जो यहां से लीला से बाहर का शरीर ईश्वर का कम से कम वो तो अजर अमर अविनाशी होना चाहिए यदि ये कह रहे हैं कि ईश्वर का अंततोगत्वा जो रूप है वो साकार है तो वो आयु से प्रभावित नहीं दिखना चाहिए मगर इनका जो शरीर है कबीर का वो आयु से प्रभावित दिखता है वो अजर नहीं है आयु से प्रभावित दिखता है सफेद दाढ़ी वाला दिखता है जबकि अगर लीला से बाहर वाला ही रूप आप मान रहे हो कि वो शाश्वत है तो वहां पर फिर दाढ़ी नहीं होनी चाहिए उनका वैसा रूप होना चाहिए यंग रूप होना चाहिए उससे प्रभावित रूप नहीं होना चाहिए जिस जिस रूप से व्यक्ति यहां पर बचता है इस जीवन में व्यक्ति बुढ़ापे वाले रूप से बचता है और वैसा ही बुढ़ापे का जो शरीर है वह कबीर जी का दिखाया जाता है

00:07:45:26 इस बारे में हमने बहुत सी पड़ताल की सबसे पहली बात है कि कबीर बूढा दिखता है यदि वो उसम भी है लीला से बाहर यहां पर लीला में अगर दिखे तो पहली तो इन्ह अपना सिद्धांत बताना पड़ेगा कि वो शरीर उसका जो है वो शाश्वत नहीं है लीला में आने के बाद यह सिद्धांत स्वीकारा गया है रामपाल दास के द्वारा वो बताना पड़ेगा फिर इनका अपना ही एक मत है उसका खंडन हो जाएगा कि भाई लीला में ही ब्रह्मा विष्णु महेश यदि अपने शरीर का आविर्भाव तिरोभाव कर रहे हैं तो उससे आपको दिक्कत है मगर वही आविर्भाव तिरोभाव यदि कबीर का हो रहा है तो उससे आपको दिक्कत नहीं है और आप नाशवान इसको आवि भाव को तिरो भाव को नाशवान कहते हुए ब्रह्मा विष्णु महेश के ईश्वर का खंडन कर देते हो मगर आविर्भाव तिरोभाव होने पर भी कबीर के ईश्वर का ईश्वर की रक्षा करते हो तो यह क्या है ढोल में पोल अब बात आती है कि इन्होंने जब यह मान लिया कि लीला के अंदर तो उसका शरीर बदलेगा बुढ़ापे को भी प्राप्त होगा आविर्भव तिरोभाव भी होगा ठीक है अभी हमय मान के चल रहे रामपाल का मत ऐसा ही है जबकि रामपाल दास जी का मत ऐसा नहीं है हमसे जीतने के लिए इस बात को मात्र उन्होने रखा था और जब

00:09:01:00 बात पूरी नहीं हो पाई तो यह कहते हुए चले गए कि भाई हम अगली बार आएंगे मगर यदि लीला से बाहर भी उसका शरीर अजर अमर अविनाशी है तो व अजर दिखना चाहिए ना बुढ़ापे का दतक तो नहीं होना चाहिए मगर बुढ़ापे का दतक हो रहा है आप जब भी कबीर की फोटो देखेंगे तो वह सफेद दाढ़ी वाली फोटो आपको दिखेगी तो बुढ़ापे का असर वहां पर है कबीर अब क्या है कि अथ वेद में कहा गया है 108 32 में कि ईश्वर का जो ईश्वर पर आयु का फर्क नहीं पड़ता प्रभावित नहीं होता है इसके साथ ही साथ जो योगा अग्नि मय दिव्य शरीर होता है स्वेता शत्र उपनिषद दो 26 के अनुसार उस पर भी आयु का प्रभाव नहीं पड़ता है और भागवत के अनुसार एक 1926 जो भगवान है वो सदैव 16 वर्ष दिखते हैं तो लीला में आने के बाद भी उनका शरीर कन्वर्ट होना है कि नहीं होना है यह भगवान के ऊपर है वो चाहे तो अपने स्वरूप स्वरूप को एज इट इज बना कर के रखें जैसे कि राम कृष्ण के रूप में बनाते हैं और वो चाहे तो उसको आयु से प्रभावित होने वाला दिखा

00:10:16:04 भी सकते ठीक है तो राम और कृष्ण का जो रूप है वो अजर दिखाया गया हमारे शास्त्र राम और कृष्ण के रूप में भगवान जो है वो अजर होते उनका शरीर आयु से प्रभावित भी नहीं होता है तो वो अपने अजर को यहां पर आपको प्रस्तुत कर देते हैं सबूत दे देते हैं कि मैं अजर हूं लीला के बाहर वाला जो अजर हूं मैं देखो अजर हूं मैं अविनाशी हूं मैं परमेश्वर हूं वो आपको प्रमाण दे देते हैं इस बात का जब वो राम कृष्ण के रूप में आते अब बात करते हैं शिव जी का शरीर अविनाशी है ये शब्द बहुत बार आता है कि वो अविनाशी है क्या तो हम शिव जी का शरीर अविनाशी है कि नहीं इसके लिए हम देख लेते हैं शिव पुराण विदेश्वर समता सातवा अध्याय 19 से

00:11:07:21 30 पहली बात तो यह जो हमने जो शास्त्रों का रेफरेंस लिया कि ईश्वर जो है उसका शरीर अविनाशी अजर होना चाहिए अजर अजर होना चाहिए ईश्वर तो यदि यह कबीर को अजर कह रहे हैं तो ना तो उनका लीला के अंदर वो अजर दिख रहा है उस पर तो पर्दा डाल दे रहे हैं कि भाई चलो लीला पूर्वक दिख रहा है या वो नाशवान प्रकृति में है इसलिए ये दिख रहा है और वो लीला से बाहर भी अजर नहीं दिख रहा है बूढ़ा दिख रहा है तो ये क्यों बूढ़ा नहीं दिखना चाहिए और यदि उसको बूढ़ा नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे यह भी सोचने वाली बात है मैंने कई बार पूछा य आपको बूढ़ा दिख रहा है युवा दिख रहा है बालक दिख रहा है शिशु दिख रहा है किशोर दिख रहा है अधेर दिख रहा है क्या दिख रहा है है ना तो नहीं बता पाते तो शिव पुराण विदेश्वर सातवा

00:12:07:14 अध्याय देखि पहले तो एक अच्छा अच्छी चीज है वोह देख लीजिए कि भगवान साकार और निराकार दोनों है यह हम लोग उपनिषद से भी दिखा चुके हैं और यह लिखा है मेरे दो रूप है सकल रूप और निष्कल रूप ठीक है भगवान के दोनों रूप होते हैं इसके साथ ही साथ यह विद्वेष समता है उसमें नौवा अध्याय है और 30 से 32 लोक है इसमें भगवान कह रहे हैं मेरे दो रूप है सकल और निष्कल दूसरे किसी के ऐसे रूप नहीं है मेरे अतिरिक्त यहां ध्यान देने वाली बात है भगवान के अतिरिक्त यदि हम किसी की सत्ता को भगवान सेत रूप में स्वीकार करते हैं तो वो ईश्वर नहीं है यह भाव है ब्रह्म भाव मेरा निष्कल रूप और महेश्वर भाव मेरा सकल रूप भगवान कह रहे देखो मेरा निष्कल निराकार रूप और साकार रूप दोनों ये दोनों मेरे ही सिद्ध रूप है मेरे अतिरिक्त किसी दूसरे के नहीं है इस कारण तुम दोनों का अथवा अन्य किसी का ईश्वर नहीं है मुझ परमेश्वर में अपनी बुद्धि स्थित

00:13:22:22 करो देखो मुझ परमेश्वर शिव जी कह रहे और ये जो लोग ऐसे कहने लगते हैं वो आदि शिव है आदि शंकर है तो भैया यहां स्टोरी देखो पहले कि कौन से शिव है कहां से आए कब बोल रहे हैं ऐसे थोड़ी ना कि अचानक से कोई दूसरा शिव प्रकट हो जाएगा वही शिव है जो अपनी शिवलिंग की पूजा की बात कर रहे हैं वही शिव है जो अपनी विग्रह की बात कर रहे हैं वही शिव है जो अपने को महेश्वर भी कह रहे हैं महेश ठीक है सब जगह आदि लगा के काम नहीं चलेगा इसके बाद यह कहते हैं मैं ही परम ब्रह्म हूं इसी अध्याय में मतलब आप जब अ विद्वेष समता का विद्वे सवर समता का आप नौवा अध्याय जब पढ़ेंगे तो उसमें जो मैंने आपको श्लोक बताया है 30 से 32 वहां से लेकर के और काफी देर तक उनके जो परम ब्रह्म है भगवान शिव उन्हीं की बात हो रही है और यहां पर देख लीजिए जैसे स्कोन वाले भी कई बार कहते हैं कि सबने कहा है कि वो भगवान है वो भगवान है मगर कृष्ण ने कहा है मैं भगवान हूं मैं भगवान तो यहां पढ़ लीजिए भगवान स्वयं कह रहे हैं अहम परम ब्रह्म अहम परम ब्रह्म

00:14:38:18 दिख रहा है श्लोक क्रमांक 36 है अे परम ब्रह्म मैं परम ब्रह्म हूं ठीक है तो [संगीत] ठीक है मैं ही परम ब्रह्म हूं और सगुण और निर्गुण यह दोनों मेरे ही रूप है मैं ही ब्रह्म हूं मैं ही ईश्वर हूं तो यह सब कुछ कह रहे हैं अपने आप ठीक है और यही अपने लिंग के पूजन की बात कर रहे हैं शिवलिंग के रूप में यही अपने विग्रह के पूजन की बात कर रहे हैं मूर्ति के रूप में अब आ जाते हैं सातवे अध्याय प जहां इनको वह शब्द चाहिए ना एजेक्ट कि भाई वह अजर अमर अविनाशी तो अविनाशी शब्द देख लीजिए भगवान शिव नाशवान है कि नहीं सातवा अध्याय आ गया सातवे अध्याय का 29 से 30

00:16:00:25 उस अंत से आदि और अंत से रहित शरीर वाले आप परमेश्वर के विषय में क्या हुआ हे करुणाकर आदि और अंत से रहित शरीर वाले आप परमेश्वर के विषय में मैंने मोह बुद्धि से बहुत विचार किया यह कौन कह रहा है ब्रह्मा जी कह रहे हैं किसको कह रहे हैं देखिए विष्णु भगवान की कोई बातचीत चल रही प्रसंग अनुसार ब्रह्मा जी के साथ और फिर वहां पर विष्णु भगवान और ब्रह्मा जी के बीच में भगवान शिव आ जाते हैं

00:16:47:13 और जब आ जाते हैं तो लिंग से प्रकट होकर आते हैं व शिवलिंग था वहां पर उससे प्रकट होकर महेश्वर प्रकट हो गए तो ये महेश ब्रह्मा विष्णु महेश महेश्वर परमेश्वर को प्रकट हुआ देखकर विष्णु उठ खड़े हुए और कांपते हाथों से उनका चरण पकड़कर कहने लगे हे करुणाकर आदि और अंत से रहित क्या बोले आदि और अंत से रहित शरीर वाले देखो भैया इनका शरीर जो है नाशवान नहीं है देख अ आदि और अंत से

00:17:27:02 रहित शरीर वाले आप परमेश्वर ठीक है पहला ठीक है भैया पहला हो गया दूसरा ले लेते हैं शिव पुराण रुद्र समिता और दसवा अध्याय यहां से इसका पृष्ठ संख्या देख लेते हैं शिव पुराण रुद्ध समिता का और इसका जो है दवा अध्याय श्री हरि की सृष्टि की रक्षा का भार शिव का अंतर्धान 241

00:18:03:02 तो अब इसकन वाले कभी कहे आपको कहते हुए मिल जाए कि केवल कृष्ण ने कहा है कि मैं भगवान हूं तो आप क्या कहेंगे उन्हें आप कहेंगे कि शिव भगवान ने भी कहा वैसे भगवान के सभी रूपों ने यहां वहां कहा है बस क्या है कि जैसे योग पहले भी था मगर पतंजलि वालों ने उसका उपयोग करके बाबा रामदेव जी ने उसका उपयोग करके प्रचार करके आज जो है जब हम योग का नाम लेते हैं तो बाबा रामदेव की शक्ल आ जाती है वैसे अब थोड़ा कम होने लगा है मगर बीच में ऐसा हो गया था योग का मतलब ही था बाबा रामदेव इसी प्रकार से भगवान के सभी रूपों ने स्वयं को बिल्कुल ठोक के कहा है कि मैं हूं परम ब्रह्म बिल्कुल ठोक के ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती गणेश राम कृष्ण सबने यहां वहां कहा है गणेश जी ने भी कहा है मगर क्या हुआ कि उस एक डायलॉग का जैसे कृष्ण भगवान स्वयं इस इस एक डायलॉग का प्रचार प्रसार कि कोन ने पकड़ लिया हम इसका प्रचार प्रसार करेंगे आज नरेट बन गया कि भाई जो है कृष्ण कृष्ण भगवान स्वयं राम के लिए भी शब्द आया है शिव जी के लिए भी यह पंक्ति आई है मगर इसका प्रचार प्रसार वैसे नहीं हुआ उन्होंने उसको एक कोपरेटिव वे

00:19:18:10 में बिल्कुल नैरेटिव बनाए और प्रचार प्रसार किया इस कारण से आज ये है ना तो यह हो गया आजय नरेट बन ग कृष्ण भगवान स्वयं वैष्णवास्त्र तो उसम भी वैश्णवा नाम यथा नैरेटिव डाला जा रहा है तो ठीक है वो वैष्णव है मगर इस बिहाव पर नहीं है कि नहीं सिर्फ वही वैष्णव है कृष्ण भी सैव है महाभारत में है है ना तो रुद्र समिता दसवा अध्याय और श्लोक

00:20:24:28 है 10 से 11 12 दवा अध्याय का 11 से 12 श्लोक शिव ने मेरा हाथ पकड़ कर श्री विष्णु को सर्वदा कामनाओं से र एकता में है संदेह नहीं करना चाहिए यहां पर देखिए एक चीज और है कि ब्रह्मा विष्णु और शिव की एक में किसी प्रकार का संदेह नहीं करना चाहिए यह भी साथ साथ बताते चलते हैं जिससे कि लोगों को भ्रम ना हो जाए किसी प्रकार का

00:21:50:27 346 बाकी आप अब लिंक शेयर कर दीजिए तो जिसको आना होगा वो आ सकता है चर्चा के लिए अंधविश्वास पाखंड से छुटकारा क्या हमारे आपके घर की बहन बेटियों पर अत्याचार होता तो तुम चुप बैठ जाओगे द्रौपदी को तो यह हमने दे दिया है कोई अगर देखिए वैचारिक मतभेद के निमित्त यदि रामपाल दास जी का कोई फॉलोअर है जैसा कि हमने कई बार कहा है कि आप आकर के अपना विचार प्रकट कर सकते हैं रख सकते हैं तो आप आ

00:22:43:16 सकते 346 जय श्री राम राजा राय जी हैप्पी छट पूजा क्या बात है आज आज छट पूजा बना रहे हैं हम आ गए घट से वापस आ गए ना तब देखि आपका लाइव चालू है तो फिर आए हां आज हम ब्रह्मा विष्णु महेश का जो अविनाशी तत्व है उसको बताने बैठे मैं उससे पहले कुछ कहना चाहता हूं मैं आज सुबह देख रहा था कि एक सज्जन जो उस दिन आए थे लाइव स्ट्रीम में रामपाल जी की तरफ से और अपना मत सिद्ध नहीं कर पाए थे तो हम लोगों को देखा देखिए आजकल वो भी लाइव स्ट्रीम करते हैं अपना चैनल बना के और अपने जो गुरु भाई लोग है उनको बुलाते हैं तो आ आपस में क्या बात कर रहे थे भाई हमारी जो परंपरा वादी हम लोग हैं तो वो कह रहे हैं अरे भाई पुरखों ने जो बात नहीं समझ पाई तो उस कुर्तियों का अंत किया है रामपाल जी ने तो लोग तुम नहीं मानते हो कोई जरी थोड़ी पुरखों की बात मानना पुरखों ने कोई बात नहीं समझी तो अरे भैया तुम्हारे पुरखे मूर्ख होंगे ना हमारे पुरखे मूर्ख नहीं

00:23:58:16 थे तुम्हारे जो पुरखे होंगे वो मूर्ख रहे होंगे हमारे पुरखे मूर्ख नहीं थे वो आचार्य थे और समस्त शास्त्र वेद को जानते थे श्रोत्रीय ब्रह्मण महापुरुष थे हम सनातन धर्मिल के शिष्यों से कहना चाहता हूं हम सनातन धर्म के जो आचार्य है शंकराचार्य रामानुजाचार्य माधवाचार्य निबार काचार्य वल्लभाचार्य ये लोग मूर्ख नहीं थे तुम्हारी जो गुरु परंपरा र तुम्हारे जो पुरखे रहे सारे मूर्ख रहे होंगे जैसा कि दिखता भी है प्रमाण के अनुसार हमारे पुरखे मूर्ख नहीं थे भैया ये मैं ब बहुत ही क्लियर तरीके से कहना चाहता हूं कि ये जो ये जो आप लोगों का सिद्धांत है ना ये आप ही लोगों को को जो है मुबारक को हमारे पहले भगवत गीता को मानने की बात करेंगे मगर फिर जब बताया जाएगा कि देखो उसमें कहा जा रहा है कि पूर्वजों द्वारा परंपरा से जो किया जा रहा है वही धर्म है हम तो कहेंगे हम नहीं मानते हमको दर्शी मनवाने के लिए हमको कभी कबीर जो है नहीं गीता में उसको भगवान मनवाने के लिए हमको गीता दिखाएंगे फिर हम जब गीता सेही उनका तोड़ बताएंगे तो वो कहेंगे ये तो काल ने कहा है और फिर पूछेंगे काल ने कहा है वो सिद्ध करो तो वो पता नहीं मैं फिर आऊंगा अ भाई हा कबीर सागर से लाइन दिखाएंगे कि चार भुजा की चार भुजा की भक्ति में भूल पड़ संसार

00:25:13:25 हम कह रहे लाइन ही प्रमाणिक है चारज की भक्ति जिसने लिखने वाला होगा मूर्ख होगा मैं कहता हूं जाओ अगर विष्णु की भक्ति में करने वाले हम लोग मूर्ख है तो तुम लोग कैसे प्रमाणिक हमारी दृष्टि में लिखने वाला ग्रंथी मूर्ख मूर्खों का लिखा हुआ है जाओ भाई देखिए कुल मिलाकर बात आ जाती है आप अपने मन गणन ग्रंथों के आधार पर किसी को भी कुछ भी मानो कुछ भी मानो हां वो बात की बात है कि वो तुम्हारा जो ईश्वर है वो सर्वशक्तिमान सिद्ध नहीं होगा बाद की बात है हा मगर आप वेद के आधार पर पुराण के आधार पर गीता के आधार पर ये नहीं कह सकते कि नहीं नहीं ऐसा है वैसा है है ना अरे हम तुम्हारे तुम अपने पुरखों को मानो ना मूर्ख भैया हमारे पुरखे मूर्ख नहीं थे ये लोग मोरे भाई है समाजी लोग उन लोगों का भी यही है उनकी नजर में भी सारे जो पूर्वा आचार्य थे आप स्तम ऋषि वाला सब नगण्य है वो सब मिथ्या वादी थे आप स्तम मिथ्या वादी थे कात्यान मिथ्या वादी थे बौधायन मिथ्या वादी थे जमनी मिथ्या वादी थे बस 20वीं शताब्दी में एक महर्षि आए बस वही सत्यवादी थे बाकी पिछले जितने आचार्य हुए रामानुज शंकर मध निंबार्क वल्लभ बलदेव विद्या भूषण सब मिथ्या वादी थे ये लोग य 19वी दो इतने बड़े महापुरुषों ने अवतार लिया है धर्म की रक्षा के लिए बस यही लोग सत्यवादी है बा

00:26:29:07 सारे हमारे जो आचार्य थे वो सब मिथ्या वादी थे अरे कहने में तुम लोग को लज्जा आनी चाहिए भाई जैसे कोई बालक अपने पिता से कल को बोले कि पिताजी आपको संतान उत्पत्ति करना नहीं आता आइए हम आपको सिखाए ऐसे तुम अपने ऐसे तुम अपने जो पूर्वा चार्य को हमारे पूर्वा चार्य को तो अपने पुरखों को मूर्ख मानते हो हमारे पुरखे मूर्ख नहीं थे भैया हमारे नहीं ये देखिए ये जो है ना यह अब यह लोग धर्म को नहीं बचा रहे हैं हा ये लोग को नहीं बचा रहे यह लोग केवल अपने उसको बचा रहे हैं कि हमने जिसको पकड़ लिया है अहंकार को बचा रहे हैं अपने लज्जा आ रही है ना छोड़े कैसे इतने साल तक हम बेवकूफ बनते रहे अब छोड़ देंगे तो हमारे समाज में हमारी हमारी हमारी बेज्जती होगी तुम तो बेवकूफ बने रहे व लड़का सा शिवा लोग थे उनके कहने में आ तुम छोड़ गए फिर तो हमारी बेजती हो जाएगी ना इ गधे रहे तब जिसम पड़े हुए उसी को जबरदस्ती सही सिद्ध करो कैसे भी करके हा

00:27:29:12 किसीने निष्ठा पूर्वक अपनी माता का दूध पिया हो तो शास्त्र के द्वारा सिद्ध कर दे उनके मत को करके दिखाओ कहते हैं कुछ समाजी कहते हैं कि भाई तुम्हारे यहां भी तो विरोधाभास है अरे भाई तो हमारे यहां विरोधा भास है तो हम कहा लड़ रहे हैं आपस में कि तुम विशिष्ट द्वत को मानते होत को मानते हैं आओ आपस में लड़ तुम्हारा खंडन करें तुम्हारा मंडन [संगीत] करें नहीं है वो सत्य सता की क्रमिक अभिव्यक्ति और मैं तो कहता हूं अगर आर्य समाज जो है वर्णाश्रम धर्म और य जो यज्ञ पवित इत्यादि का जो धर्म आचरण है उसमें जो इसने विकृति डाली है इसको छोड़ दे तो ब्रह्म को लेकर के य भी सर्वाइव कर सकते हैं शंकराचार्य के मन के अंडर में यह भी सरवाइव कर सकते हैं है ना अरे शंकराचार्य से तो नाम तक मिला है भैया य दयान स्वती नाम कहां से मिला है शंकराचार्य से मिला है शंका के संप्रदाय में सन्यास लिया है आपने पूर्णानंद सरस्वती से परमानंद सरती का नाम था उनका नाम था परमानंद सरस्वती सुन लो भैया आ समा जीयों परमानंद सरस्वती जो शंकराचार्य संप्रदाय के सन्यासी थे उनसे इनको नाम तक मिला है और इनका पहले

00:28:44:14 उससे नाम था शुद्ध चैतन्य वो भी शकर के संप्रदाय के सन्यासी के द्वारा ही इनको ब्रह्मचर्य की दीक्षा भी मिली थी ठीक है कहां से लाओगे ज्ञान कहां से लाओगे ज्ञान भैया हमारे यहां से ही लेना पड़ेगा हमारे यहां ही आना पड़ेगा कोई तु पास कोई सोर्स नहीं है और कुछ निर्लज आजकल ऐसा कहते हैं कि हमको डायरेक्ट भगवान से ज्ञान मिल गया अच्छा तो तुमको एक और एक और प्रमाण मिल गया अविनाशी इनको अविनाशी शब्द चाहिए ना भगवान शिव के लिए ये देखिए उसके बाद उन्होंने अपने अविनाशी स्वरूप का दर्शन किया दिख रहा है अविनाशी स्वरूप का दर्शन किया ये शिवजी का हो गया और ऐसे ही मैं रेफरेंसेस बोल दूं बहुत सारे हैं हमारे पास रेफरेंसेस बोल दूं बीच-बीच में दिखाता रहूंगा अभी हम लोग चर्चा कर लेते हैं आगे जिससे कि बीच-बीच में एक रस आता रहेगा अभी हमने शिवजी का अविनाशी तत्व बताया है शास्त्रों से और अब हम जो है आगे बीच-बीच में विष्णु भगवान का ब्रह्मा जी का भी बताएंगे गणेश जी का भी बताएंगे माता का भी बताएंगे है ना सबका बताएंगे आज की चर्चा में और

00:30:00:00 परम पुरुष पुरुषोत्तम कौन है यह भी बताएंगे और स शरीर कौन जाता है यहां से आप तो कबीर का स शरीर जाना नहीं दिखा पाओगे हमें शास्त्रों से हम दिखाएंगे स शरीर कौन जाता है ठीक है ना श्री कृष्ण भैया श्री कृष्ण का दिखा दीजिए ना भागवत से ज भगवान का ज लीला दिखाए वही दिखाएंगे वही दिखाएंगे वही है वही है भगवान लिखा हुआ है कि भगवान ने अपने शरीर को जलाया नहीं है स योयो के ध्यान का विषय है स्पष्ट लिखा है स्पष्ट लिखा है तो भाई हमारे बीच में आए हैं जय श्री राम ज श्रम बताइए भाई साब आपका परिचय आप तो पहले शायद आके एक बार हां जी जीी एक बार आ चुका हूं जी बताइए जी मेरा मानना यह है कि एक्चुअली हम हिंदुओं की भी कुछ गलती है जब कुछ मंत मत पंथ संप्रदाय पनपने लगते हैं जो ज्यादा जरूरी नहीं है उनको हम ही खुद पोषण करते हैं जब वो बहुत ज्यादा पोषित हो जाते हैं तो फिर उनकी ताकत इतनी बढ़ जाती है कि उसको जड़ से मिटाना बड़ा मुश्किल हो जाता है

00:31:15:12 हम क्या करते हैं उसकी डालो को काटते हैं पत्तो काते एक पत्ता तोड़ते हैं चार पत्ते और रुक जाते हैं हम उसे जड़ से उखाड़ने की कोशिश नहीं करते हैं ये ब्रह्म की व्याख्या ही बड़ी गलत करते हैं ब्रम अर्थात जो ब्रह्मांड पूरा परिपूर्ण ब्रह्म से है इसलिए तो ब्रह्मांड बोला जाता है सारा संसार ही परमात्मा से परिपूर्ण है अब ये क्या कहते हैं कि एक बात कही ना भाई साहब ये हिंदुओं की ही गलती है जो संप्रदाय में वो हो जाता है विकृतियां आ जाती है विकृति आती इस आप बिल्कुल सही कह रहे हैं इसका कारण क्या है कि होता क्या है कि जैसे हमारे यहां पहले कुल गुरु हुआ करते थे कुल देवता हुआ करते थे आज के टाइम हमारे घरों में ये सब कुछ मालूम ही नहीं है हमारे कुल गुरु कौन है कुल देवता कौन है ये सब कुछ आज के टाइम में नहीं मालूम बहुत कम लोगों को मालूम तो होता क्या है कि शास्त्र कहते हैं कि भाई भगवान की बारे में जो अध्ययन करना है वह गुरुओं की शरण में जाकर करो तो पहली बात तो कुछ लोग गुरु से गुरु की शरण में नहीं जाते हैं फिर जाते हैं तो वो फिर अप प्रमाणिक गुरु की शरण में चले जाते हैं तो एक एक क्रम है पांच पॉइंट्स में अगर बताना चाहूं

00:32:30:27 कि सबसे पहली बात तो सनातन समाज की जो मुख्य समस्या है वह है सार्वभौम सिद्धांतों से अनभिज्ञता सनातन समाज एक नहीं है और जबकि शास्त्र कहते हैं एक रहो ऋग्वेद में आया एक रहने के लिए दव मंडल में अब एक क्यों नहीं है वेद कहते हैं कि एक होकर भगवान की पूजा अर्चना करो एक मत से रहो संगठित हो कर के रहो बिल्कुल तो एक क्यों नहीं है क्योंकि सार्वभौम सिद्धांतों का अभाव है समाज में व्यक्ति को मालूम नहीं है कि भगवान निराकार है कि साकार है ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश कौन सा उनका विग्रह है या पांचों एक ही परम तत्व के रूप है या फिर मास खाना है कि नहीं खाना है इस यही नहीं मालूम है मांस खाना पाप है कि निम्न है कि अमुक अमुक विधि का आलंबन लेते हुए अमुक अमुक व्यवस्था पढ़ने पर ही खाना है यह सब संशय है इवन यहां तक की भी संशय है कि मैं आपको बताऊं अगर मैं यह कह दूं आज के समय कि भाई सनातन धर्म में चचेरी ममेरी फुफेरी जो बहने हैं उनसे विवाह अमान्य

00:33:46:19 है फिर भी आपको कुछ परंपराएं कुछ कुल परंपरा ऐसी मिल जाएगी ज बुआ और मामा में और इस तरह से विवाह हो रहे होंगे है ना और वो भी अपने आप को हिंदू भी कह रहे होंगे बिल्कुल बकल तो ये जो क्या कहते हैं यह जो एकता नहीं है ना वैचारिक एकता अब हम उनको जाकर बताए कि मनुस्मृति में लिखा है वो कहेंगे मनुस्मृति है क्या भला वैचारिक अविज्ञता हम लोगों के बीच में बटवारा अब वैचारिक अविज्ञता है मनुस्मृति मालूम ही नहीं राम ने मनुस्मृति को संविधान माना और यह तथाकथित जो स्वघोषित आचार्य ये कहते हैं कि मुझे पता नहीं है किसी ने मनुस्मृति को संविधान माना हो अपना राम ने जिसको संविधान माना उसके बारे में इनको नहीं पता आचार बने घ बड़ संविधान मनुस्मृति है हां और आचार्य बने घूम रहे हैं अब वो जो बताएंगे लोगों को भाई मुझे नहीं लगता किसी ने संविधान माना तो आजकल के युवाओं ने तो वो पढ़ा नहीं है बिल्कुल रामायण को इसमें राम जी मनुस्मृति का श्लोक उत कर रहे हैं एज इट इज जैसे मनुस्मृति में आए हैं वैसे के वैसे ही शलोक कुदरत किए तो अब लोगों को मालूम ही नहीं है कि भाई मनुस्मृति में यह लिखा है अच्छा आज मैं वैश्य

00:35:01:22 से कहूं कोई जो वैश्य कुल में जन्म लेने वाला है उससे मैं कहूं आपके घर के जो बालक हो उनका 16 से 22 वर्ष की आयु के बीच में जन करा देना मनुस्मृति में लिखा है वह क्या कहता है हमारे य होता ही नहीं है क्षत्रिय कहता है हमारे य शादी में होता है ब्राह्मण कहता है हमारे यहां शादी में होता है यह सब क्या है यह विकृति अपने शास्त्र को य क्या है धर्म और अधर्म को लेकर के जो सार्वभौम सिद्धांत है व पता ही नहीं दूसरा पॉइंट है सार्वभौम सिद्धांतों का अभाव ही संशय है जिसको भगवत गीता 44 में भगवान ने कहा संचय आत्मा विन जिस व्यक्ति के मन में अपने विशेषता धर्म और ईश्वर को लेकर के संशय होगा वो ना तो इस जीवन में सुखी है और ना ही परलोक में सुखी है तो हमारा जो समाज है पहला क्या है व्यावहारिक अनेकता और दूसरा क्या है संचय अनेकता क्यों है क्योंकि संचय संचय क्यों है क्योंकि गुरु तत्व से अविज्ञता है यह नहीं मालूम है कि हमको गुरु आवश्यक है यह नहीं मालूम है और जिनको मालूम है उनको यह नहीं मालूम है कि गुरु कौन कौन होना चाहिए वो फिर तत्वदर्शी को भी

00:36:16:26 य तथा जेल धाम में बैठे हु को भी गुरु बना लेंगे वो बाहर से आए हुए जो अतिक्रमण कारी रहे पुराने समय में मले उनको भी गुरु बना लेंगे आज मैंने एक फोटो देखी इा पर उसमें जो है एक विदेशी मूल का व्यक्ति हाथ में जो है जाप जाप जप माला लिए सिंहासन पर बैठा है और पीछे तथाकथित गुरु परंपरा दिखाई गई है और नीचे कौन बैठे हैं ब्रह्मा विष्णु महेश इत्यादि अब यह क्या है व्यक्ति ने उनको गुरु बना लिया जिनको कभी उस रूप में स्वीकार नहीं किया और गुरु बनाया तो बनाया अपने ब्रह्मा विष्णु महेश जो परमेश्वर के रूप है उनको भी दिखा रहा है चे बड बन गया छोटा दिखाओ और अपने गुरु को बड़ा दिखा दो हा अभी मैंने राम मि वालो की राम कृ मिशन वालो का एक फोटो देखा उसमें जो है मां काली नीचे बैठी है जो पूरे ब्रह्मांड की सबकी नियंता है सृष्ट की ऊपर जो है वो बैठे

00:37:25:07 हैं वो ऊपर बैठे हैं और वो उनके जो है नीचे बैठी है एक साइड कोई आचार्य है दूसरी साइड वो है पादरी ये है फोटो जब हम ऐसे फोटोस का प्रचार प्रसार करेंगे आने वाले टाइम में वोह फोटोस प्रमाण के रूप में उपयोग होने लगेंगी जैसे आज जो स्त्रियों का जनेऊ करवाने के लिए कहते हैं वो कहते हैं देखो देखो वहां पर एक मूर्ति उसमें जनेऊ है तो क्या हुआ हो सकता है नेपाल में एक आभूषण ऐसा आता है जो जने की तरह से पहना जाता है वो सिद्ध तो नहीं हो रहा जन फिर किस परंपरा में आचार्य ने जन स्वीकार किया है है ना स्त्रियों का नहीं स्वीकार किया तो अब जैसे य फोटो है यह प्रचलित हो रही है तो यह है क्रम सबसे पहले व्यवहारिक अनेकता उसके बाद दूसरा वैचारिक अनेकता और इसका कारण यह देखिए वो फोटो है देखिए ये वो फोटो है ये ब्रह्मा विष्णु महेश इत्यादि देखिए साइड में बैठे हुए बड़ा करिए थोड़ा और यह किस तंत्र के द्वारा प्रचारित की जा रही है आप देख सकते हैं आने वाले टाइम में यह भी भगवान हो जाएंगे बिल्कुल यह

00:38:40:24 शिव जी बैठे हैं साइड में देखिए हाथ जोड़े है ना अच्छा ये हो सकता है कि ऑफिली यह हो सकता है कि ऑफिली यह जो फोटो है वो स्कोन ने ना बनाई हो यह भी हो सकता है ऑफिशियल उन्होंने ना बनाई हो मगर अगर अनऑफिशियली उनके किसी फॉलोअर ने भी बनाई है तो यह खतरे की घंटी नहीं है कि उनके दिमाग में क्या भरा जा रहा है जो यह नौबत आ गई देखिए मैं इसका एक कारण बताता हूं आपको मैं मैं बस पूरा कर लू क्रम क्रम मेरा टूट जाएगा नहीं तो वैचारिक व्यावहारिक अनेकता उसके बाद वैचारिक अनेकता उसके बाद गुरु तत्व से अविज्ञता उसके बाद प्रामाणिक आचार्य के नियमों का ना मालूम होना प्रामाणिक आचार्य किसको बनाए यह मालूम ही नहीं है तो किसी को भी आचार्य बना लेते हैं किसी को भी गुरु बना लेते हैं उसमें फिर फस जाते हैं वह गलत गुरु निकलता है कभी-कभी वहां पर गुरु नाम जो है वो उसका अपमान हो जाता है गुरु शब्द का ही वहां पर तिरस्कार हो जाता है ऐसे ऐसे गुरु निकल आते हैं अब जैसे जब तत्वदर्शी य तथाकथित गए होंगे जहां पर इस समय है जेल

00:39:55:24 धाम में तो क्या के हयो पर आघात नहीं पहुचा होगा अब कुछ लोग उस बोझ को ढो रहे हैं कुछ लोगों ने छोड़ा भी होगा तो यह क्रम है वैचारिक व्यावहारिक अनेकता वैचारिक अनेकता गुरु तत्व से अविज्ञता फिर प्रामाणिक गुरु से अविज्ञता यह चार चीजें जब तक हमने प्रामाणिक गुरु की व्यवस्था हमारे शास्त्रों ने की है अथर्ववेद 11 पा 16 मनुस्मृति 12वां अध्याय 112 से 114 क्या ब्रह्मचारी सन्यासी वैराग्य वैराग्य वैराग्य कितनी बार आ रहा भगवत गीता में कि संसार रूपी वृक्ष को वही काट सकता है जो वैराग्य हो उसके पास वैराग्य अंततोगत्वा जो अंतिम निर्णायक है आपका वह वैराग्य वाला होना चाहिए सन्यासी होना चाहिए दूसरा परंपरा प्राप्त होना चाहिए चार दो तीन 16 छंद उपनिषद मुंड उपनिषद प्रार उपनिषद सब में लिखा है सब लोग अपनी परंपरा बता रहे हैं मगर जो तथाकथित लोग जो आज आचार्य बनकर बैठ गए हैं अपने तंत्र खोलकर बैठ ग वो अपनी परंपरा नहीं बता रहे हमने परंपरा पर प्रश्न किया आर्य समाज वालों से तो हमारे व्यक्तिगत हो गए यह हो गए वो हो गए ठीक है आज तक उन्होंने परंपरा नहीं बताई कैसे वेद

00:41:11:00 मंत्र आए आप तक नहीं बता पाए और उनके कई आचार्यों ने कई जगह पर परंपरा से वेदों को सुरक्षित होना माना है कैसे इंकार करोगे उनके जो खुद के कोई कई विद्वान है उन्होंने माना है तो से होना चाहिए चौथा जो हमारे जितने भी प्रामाणिक ग्रंथ स्वीकार किए गए उसमें शति स्मति शास्त्रों में सामंजस की शिक्षा देने वाला होना चाहिए ऐसा नहीं कि ये शिव पुराण मत मानो और फलाना पुराण मानो ऐसा नहीं उसके तथ्यों को हम नकार नहीं सकते किसी भी तथ्य का खंडन ना हो जाए शिव पुराण भी मानना है विष्णु भी मानना है ऐसा तथ्य निकालो जिसमें दोनों की बात रह जाए किसी की बात कट ना जाए और पांचवा क्या गुरु वही जो आपका अंधकार दूर कर दे ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध कर दे मोक्ष को परम स्वतंत्र सिद्ध कर दे धर्म को शाश्वत सिद्ध कर दे बस वो आपका गुरु अब इनसे मैंने कितनी बार पूछ लिया कि आपका जो कबीर अगर सर्वशक्तिमान है तो अपना दे बदल सकता है कि नहीं बदल सकता तो नहीं खड़े हो जाते हैं हा क्या है इनके द्वारा मिलने वाला जो ईश्वर है वो सर्वशक्तिमान है ही नहीं

00:42:26:04 मनुष्य को चाहिए मुक्ति प्रत्येक नियम से मुक्ति चाहिए उसे तो जो ईश्वर खुद नियमों में है वो मुक्ति कैसे देगा ये था जी बोलिए जी मैं ये कह रहा था कि उदाहरण के लिए आप आर्य समाज ही ले लो हम जो आर्य समाज की स्थापना हुई थी वो अंग्रेजों से मिलकर की थी अपने दयानंद जी ने जिनका मूल नाम ही था मूल शंकर तिवारी थियोसोफिकल सोसाइटी को लेकर के हम प्रामाणिक नहीं है मगर हा उनकी कई जगह पर ऐसी बात है है योसो फिकल सोसाइटी य 70 देशों में आज भी है अलग अलग नामों से िकल सोसाइटी ऑफ आर्य समाज के नाम से आरंभिक काल में चालू हुई थी 187 के आसपास बाद में दयानंद जी उनसे अलग हो गए थे उनके विचारधारा थोड़ी मैच नहीं कर रही थी तो थोड़ा अलग हो गए थे आप ये बताइए अंग्रेजों के ब्रिटिश राज था जब ब्रिटिश ब्रिटिशर राज करते थे वो क्या एक हिंदू अलग से ऐसा संगठन तैयार कर सकते हैं उनको फंडिंग क से होती होगी सीधी सी बात है उनको फंड करने वाले दयानंद जी हिंदुओ के मोहम्मद बनना

00:43:41:08 चाहते थे वो चाहते थे एक ही हमारी किताब हो उन्होने वेदों को चुन लिया वो भी अपने लिखे हुए वेदों को चुन लिया एक ही पुस्तक हो एक ही आदमी हो नबी की तरह जैसे खुद को चन लिया उन्होंने म ब्रा उनका सारा वो था अब जो भी जितने भी मत पंथ समुदाय चल रहे तो गंग गरो की तरह जो बिल्कुल अब्र की तरह काम करते हैं अब्र एक परमात्मा होता है जिसका नाक मुह आ मु कुछ नहीं होता है कोई हाथ पैर नहीं होते हैं दिखता नहीं है सुनता नहीं है बोलता नहीं है जन नहीं लेता अवतार नहीं लेता व मर नहीं सकता ऐसे का क्या काम जो आपके धरती प आके अवतार ना ले आपसे प्रेम ना कर सके अधर्म का विनाश ना कर सके पापियों का नाश ना कर सके आपके साथ रह ना सके तो ऐसे मुझे तो नहीं लगता परमात्मा का कोई अंग भी हो सकता कबीर को तो ईश्वर छोड़ो मैं उनसे तो महान भगत सिंह और चंद्रशेखर आजादी हो जिन्ने कम से अंग्रेजों के साथ लड़ाई तो वो तो अपने काल के मुसलमानों से भी

00:44:50:16 मतलब मैं संक्षिप्त में इस बात को ऐसे बोल दू कि उनके जो चीज है आर्य समाज की उसका एक बहुत बड़ी अपूर्णता का दतक है कि जो उस समाज का आचार्य है आचार्य कोटि का व्यक्ति कह रहा है कि मैं यहां के मोक्ष से संतुष्ट नहीं हूं समझ नहीं पा रहा हूं आचार्य कोटि का व्यक्ति उनके यहां का यह कहता है पब्लिक में जाकर के मैं जो मोक्ष है उससे संतुष्ट नहीं हूं तो व्यक्ति आपके उसका पालन क्यों करेगा फिलोसोफी का केवल इसलिए कि आपने अपनी जो तथाकथित चीजें हैं उनको जो है वेदों से जोड़ दिया है एनीहाउ य हम जो बता रहे वेद के अर्थ बता रहे हैं अब वेद का अर्थ है कि मोक्ष नहीं है तो नहीं है मानना पड़ेगा वेद का अर्थ है ईश्वर फलानी फलानी चीज नहीं कर सकता तो मानना पड़ेगा जी राम पांडे जी को जय श्री राम स्वागत है आपका राम पांडे जी जी बताइए अभी भी भाई मैं कह रहा हूं वेदों में प्रमाण है कबीर साब भगवान है आ जाना भैया आवाज लगा रहे हैं कोई हो तो आ जाए है ना

00:46:05:20 कोई आना चाहे तो आ सकता है भैया वो अजर सिद्ध करें अविनाशी सिद्ध करें कबीर को शास्त्रों से हमने सिद्ध कर दिया ब्रह्मा विष्णु महेश को शास्त्रों से हा अविनाशी आप सिद्ध करिए कबीर अविनाशी है आ जाइए टक्कर में जी रामपाल पांडे जी जय श्री राम सभी को जय श्री राम मैं आज यह कहना चाह रहा था कि आज मैं एक न्यू चैनल देख रहा था ईटी करके इनोमिक टाइम से तो वहा पर एक हमारे महाराज जी है व मतलब तथा महाराज जी उनको बोलता हूं बहुत फेमस हुए थे कोरोना के टाइम उन्होने कहीं किसी मंदिर में शिव त पढ़ा था तो वो वीडियो बहुत वायरल हो गया था वो महाराज जी का इंटरव्यू चल रहा था वहा पर तो जैसे की एक तो हमारे अंदर में यह चीज है कि हमारा कोई जो हिंदुओं के जो धर्म गुरु है जो आचार्य हैं वो मतलब उनको कोई लीड कर हिंदू समाज को लीड करने वाला कोई नहीं है हर कोई हिंदू समाज को लीड करने में लगा हुआ है हर कोई हिंदू का ठेकेदार समझ के और कहीं भी जो मन में आता है वह बयानबाजी करने लग जाता है वो भी धर्म को कोट करते हुए तो एंकर

00:47:21:03 ने कोई क्वेश्चन पूछा था कि मतलब हिंदुओ में एकता कैसे आएगी हिंदू कैसे होंगे हिंदू राष्ट्र कैसे बनेगा तोव जाति व्यवस्था के ऊपर उन्होंने वो किया था क्या बोलते हैं प्रहार किया था कि हिंदुओ में जाति व्यवस्था जो है जातिवाद सबसे बड़ा घातक है जातिवाद होना ही नहीं चा क्या लीला जी की बात कर रहे क्या नहीं नहीं नहीं वो बहुत बड़े लगा शिव तांडव स्त्रोत उनका एक वीडियो था वो बहुत वायरल हुआ था वो सा साई बाबा बात कर अमोग लीला जी शिव तांडव स्त पढ़ेंगे तो पश्चिम से नहीं उ जाएगा

00:48:08:07 सूरज नहीं नहीं वो इतना हि दूंगा कि वो सा साई साई बाबा को भी वो भगवान की कैटेगरी में रखते हैं सदगुरु तो नहीं है नहीं नहीं सदगुरु सदगुरु नहीं है वो वो महाराज जी है वो कहते तथा जी हमारे कोई भी महाराज जी बन जा रहा उनको मानता हूं वो चीज है हा ठीक है व्याख्यान देते हैं अच्छा राष्ट्रवादी आदमी है राष्ट्र के प्रति उ मतलब हित रहता है उनका बट धर्म को कोट करते हुए जब कोई कुछ बोलता है तो मुझे बहुत बुरा लगता है क्योंकि जो देखने वाले लोग है जो देखने वाला समाज है हिंदू समाज वो उनको उनका तो आचार्य मानता है आए थे भैया कहां चले गए अभी कोई आया था

00:48:59:19 वो है बैक स्टेज है ना अभी जी बोलिए राम पांडे जी तो मैं ये कंटिन्यू करना चाह रहा था कि जो देखने वाले लोग है वो तो यही समझेंगे ये हमारे धर्म के आचार्य है यह जो बातें बता रहे हैं धर्म के अकॉर्डिंग बता रहे हैं तो उनके अंदर तो गलत फहमी तो जाएगी जाएगी अब वो जातिवाद को लेकर यह बोल रहे हैं कि हिंदुओं के अंदर जातिवाद है जातिवाद को खत्म कर दो जाति को खत्म कर दो वर्ण व्यवस्था के आधार पर जिनकी जो शादिया होती है वसे कर दो शादी वगैरह शादी वगैरह करने में जाति व्यवस्था मत देखो कौन जाति किसी की जाति में है कि नहीं है तो एक उसम मेरे को बहुत अच्छा लगा कि एक अपने आप को कम्युनिस्ट बोलता है उनका नाम है विवेक श्रीवास्तव मैं नाम लेता हूं वो इवन वो महाभारत का वो श्लोक तो कोड नहीं किया बट जहां पर भी आता है श्री कृष्ण भगवान कहते हैं कि हे अर्जुन जो जाति व्यवस्था के बारे में जो भगवान श्री कृष्ण ने बोला है अर्जुन को कि अगर जातियों में अगर विवाह नहीं होगा तो वर्ण सकता आ जाएगी वर्ण सकता पैदा होगी समाज तो इस तरीके से वो कोट कर रहा है तोव उस बातो को घुमाने लग गए जो महाराज जी है वो बातों को घुमाने लग गए कि नहीं नहीं ऐसा तो नहीं है भीम ने भी पता कौन

00:50:14:21 से हिडिंबा से शादी किया था अर्जुन ने भी नाग कन्या से शादी करी थी तो ऐसा कुछ होता तो य थड़ी हो रहा होता है ऐसे तो आजकल के समाज में यही है कि हर कोई जो बाबा है आज के टाइम प हिंदू ग्रंथों करते हुए और समाज में गलतफमिया मैं बताऊंगा जब तक हमारे ऊपर ब्रिटिशर्स का राज था ना तब तक भी एक चीज थी कि कोई भी अपने आप को अपने मन से आचार जगतगुरु की उपाधि नहीं देता था हा बिल्कुल बकुल आज कोई भी व्यक्ति जब से हम लोग स्वतंत्र हुए तब से हमारी सबसे पहले जो व्यास गदी है ना उसके साथ खिलवाड़ चालू हो गया कोई भी व्यक्ति अपने नाम के आगे जगतगुरु लगा सकता है आप उसको रोक नहीं सकते अच्छा अगर देखा जाए तो धर्म के अनुसार सबसे बड़ी गद्दी है जगतगुरु आचार्य यह सब गद्दिया सबसे इंपॉर्टेंट है प्रधानमंत्री से भी ऊंची गद्दी है क्योंकि यह हमारी अच्छाई और बुराई का निर्णायक गद्दी है मगर आज यदि कोई अपने घर के बाहर नेम प्लेट में लिखवा दे

00:51:18:14 प्रधानमंत्री या फिर राष्ट्रपति या फिर लिखवा दे केवल एसपी लिखवा दे आईजी लिखवा दे तो एक दो दिन लगेंगे वो व्यक्ति जेल के अंदर हवालात में दिखाई देगा ब बिल्कुल मगर कोई व्यक्ति अपने नाम के आगे जगतगुरु लगा दे उसको कोई कुछ नहीं कहेगा तो सबसे पहली दिक्कत है कि हमने इतने सारे आचार खड़े कर रखे हैं मनमाने ढंग से होने दिए क्या देखो जेल धाम में भी बैठा हुआ है तत्वदर्शी जगतगुरु है तो यह जो छूट है ना इसके कारण है यह जो दिख रहा है कि कोई भी व्यक्ति जो हमने छूट दे रखी है शासन तंत्र के द्वारा छूट प्राप्त है अरे भाई कई तो ऐसे जगतगुरु हैं चलो ठीक है वो अपने आप को जगतगुरु कह रहे हैं थोड़ा बहुत व परंपरा से जुड़े भी हुए हैं तो ठीक है कुछ तो बिल्कुल ही सुभ झूठे जगतगुरु बने हुए हैं नकली जगतगुरु बने हुए हैं शंकराचार्य बने हुए हैं नकली बिल्कुल एब्सलूट और की ही उन्ह वो प्राप्त है जी कोई आया है मैं देख लेता हूं कौन है बौधि सत्व जी आप अपना कैमरा ऑन

00:52:32:00 करें कैमरा ऑन करें बौधि बौधि सत्व जी और रामपाल दास का कोई भी शिष्य अगर आकर के भाई कैमरा कैमरे में अपना फेस दिखाए बौधि स जी जी अछ जी जी मेरे कुछ सवाल है मेरे कुछ सवाल है आपसे आप पहले फेस दिखाए भाई

00:53:11:14 साहब पहले फेस दिखा फ दिखा चोरी चोरी कायरता पूर्वक नहीं अगर सत्य के पक्षधर है तो सामने से आइए बिल्कुल चोरी और कायरता पूर्वक नहीं एक महा पाशुपतास्त्र महा पाशुपतास्त्र जीको बता दीजिए क्यों नहीं हो पाएगा इसलिए नहीं हो पाएगा क्योंकि जब हम अपना चेहरा साथ में लेकर चल रहे हैं अपनी आइडेंटिटी छुपा नहीं रहे हैं तो बात करते समय आपके पास एक प्लस पॉइंट होता है कुछ भी बोल देने के लिए क्योंकि आप सुरक्षित फील कर रहे होते हैं कि हमें कोई नहीं जानता तो ये जो बात बातचीत होगी वो समानांतर नहीं होगी समतुल्य नहीं होगी अंतर होगा इसमें ठीक है और आपके जो प्रश्न है व आप लिखकर भेजिए टेलीग्राम ग्रुप पर हमारे डिस्क्रिप्शन में लिखा हुआ है लिंक ठीक है ना बाकी भैया कोई रामपाल दास जी का आकर के बताना चाहता हो अविनाशी अविनाशी सिद्ध करो किसको कबीर दास जी को और यह लोग जो यह कहते हैं ना कि रामपाल जो

00:54:26:16 है वो गुरु के रूप में अ वो है वो गुरु के रूप में ईश्वर है नहीं रामपाल दास ने स्वयं को परमेश्वर कहा है बिल्कुल स्पष्ट बोला स् परमेश्वर इस समय दास के रूप में यहां विद्यमान है आपके सामने स्पष्ट कहा है पहली बात दूसरी बात अभी मैंने कल परसों की एक वीडियो में क्लिप देखी थी बोल रहा था कि मैं बीमार था और अब ठीक हो गया हूं यह बोल रहे थे वो बीमार कैसे हो गया भाई ईश्वर कैसे हो रहा है और अगर पहले की फोटो से आज की फोटोस का मिलान भी कर ले तो यंग से लेकर के बुढ़ापे तक का सफर नजर आ रहा है चश्मा लग गया बहुत कुछ नजर आ रहा है

00:55:15:02 तो नहीं नहीं गाली बाज की बात नहीं है यह एक मर्यादा है इस चैनल की बौधि सत्व जी कि हम जो वैचारिक मतभेद के निमित्त जो चर्चा होती है वो व्यक्ति की पहचान के साथ ही करते हैं व कायरों की तरह चोरी छिपे वाले चैनल नहीं है यह जहां पर बिना चेहरे के ही खूब सारी बातें हो जाती है लोग वापस चले जाते हैं आप वहां उन चैनल चैनल पर जाइए जहां पर इस तरह का आचरण ही होता हो केवल ठीक है तो बीच में मैं अब जो है वायु पुराण से प्रमाण कुछ दे दू एक ब्रेक ले लेते हैं छोटा सा और बाकी रामपाल दास जी के शिष्यों को निमंत्रण है कि आए और कबीर को अविनाशी ईश्वर परम ब्रह्म अजर कुवारी गाय अन्या बहुत सारे हमारे पास है तो उनमें से कोई भी आप अच्छा एक चीज मैंने और देखी है इनके जितने भी चैनल्स है जो हमने क्वेश्चन उठाए हैं उन क्वेश्चन पर कोई बात नहीं वो जो गोबर गणेश सभी ले थे बीच में और फिर फिर बीच में ले आए धूप अगरबत्ती

00:56:30:03 य सब ले आए तो राम पांडे जी चले गए थे क्या गोबर गणेश ले आए मगर अ ये कहते हैं कि वो जैसे ही उसकी बात कटने लगती तो व हटा देता है वह बात और है कि हम हटाते हैं जब विषयात कर रहा होता है या एक ही बात पर अटक जाता है या विषय से भाग रहा होता है वो अलग बात है मगर वो अपने चैनल पर स्वतंत्र करके भी उन प्रश्नों के उत्तर नहीं दे पा रहे हैं शास्त्र लेकर नहीं बैठते हैं जो बोलते ना उन्होंने सभी सद ग्रंथों को खोल के दिखाया है अरे तो दिखाया तो दिखाओ ना भैया जो सवाल कर रहे हैं वो दिखाओ अब अपने बंद कमरे में बैठ कर के भी जब तुम शास्त्र को नहीं दिखा पा रहे हो वहा बैठ कर के दो दो तीन तीन घंटे अच्छा मैंने एक चीज और देखी हसी की आप लोगों ने पता नहीं देखा हो कि नहीं वो जो एक नेपाली आता था ना ज्ञान से ज्ञान करता है मैं ज्ञान से ज्ञान को गा एक नेपाल से जुड़ा था एक व्यक्ति सावले कलर का था उसका क्या हुआ वो वहां पर लाइव चल रहा है उसके घर का कोई व्यक्ति आया उसके एक कंटाप दिया लाइव में और उसको उसने तुरंत अपना कैमरा बंद किया यह सब भी उनके चैनल्स में चल रहा है ज्ञान से ज्ञान काटू पड़ गया

00:57:45:04 कंटाप और ज्ञान से ज्ञान कट गया जी गोविंद जी मैंने आपको वीडियो भेजी थी व पर एक इन्होने मेरे को ड किया आवाज आवाज आ रही बहुत बहुत कम आ रही है अच्छा अभी आ रही है मेरी आवाज नहीं स्लो है अच्छा रुकिए जरा अब आ रही है मेरी आवाज थोड़ा ऊंचा बोलता हूं थोड़ा आ रही मैं सोच रहा हूं एक बार आप लीव करके दोबारा आ जाए हा तो मेरे ख्याल से दो तीन लोग आए हैं पंकज कटारे जी हैं और अमित स्वामी जी है दादू दास जी आप अपना चेहरा दिखाए अमित स्वामी जी जय श्री जय श्री राम जय श्री राम आप सभी को जय श्री राम जय श्री रामया जय श्री राम जय श्री राम अच्छा जब उसके कंटा प ना जब उसके कंटाप पड़ा लाइ लाइव स्ट्रीम में नेपाली के तो यह लोग भी थोड़ी देर तक मुस्कुरा रहे हैं यह क्या हो गया आप कुछ कर नहीं सकते लाइव है जी स्वामी शिवा जी मेरे पास ना तीन बातें है मैं आपसे डिस्कस करना चाहता मैं मेरा नाम अमित है मैं हरियाणा

00:59:00:18 से हूं और मेरे पास मैंने आपको एक बार पहले भी मैं आपके साथ जुड़ा था कुछ क्षण के लिए तब मैंने आपको बताया था कि यहां पर रामपाल महाराज जी का कितना सिस्टम फैला हुआ है तो एक्चुअल में मेरे पास तीन ही बातें हैं फिर मैं आपसे एक बात के लिए मैं आपसे सोल्यूशन भी चाहता हूं मैंने मैसेज भी किए थे लास्ट वाली स्ट्रीम में पर शायद वो किसी दूसरे विषय पर थी इसलिए आपने लिया नहीं होगा अच्छा मैं ये कह रहा हूं जैसे गांव में जो लोग हैं जो अभी इनके अनुयाई बन रहे हैं पहले भी बने हुए हैं और अ भी भी बन रहे हैं जबक संत रामपाल महाराज तो जेल में है तो इसका कारण क्या है कि लोगों को एक तो मैं जितने भी लोगों से मिला हूं एक तो आपको मैं धन्यवाद देना चाहता हूं कि आपकी स्ट्रीम देखने के बाद में मुझे कुछ ऐसी चीजें मेरे हाथ में है कि जिनके के बिहाव पर मैं लोगों से बात कर सकता हूं सो थैंक यू वेरी मच मैंने लोगों से बात की है तो मुझे यह समझ में आया कि किसी को किसी भी चीज का ज्ञान नहीं है ठीक है और धर्मशास्त्र का ज्ञान जीरो है तो इसलिए और यह जो शास्त्रों में दिखाते हैं ना कि ब्राह्मण उसमें

01:00:15:22 कलयुग में राक्षस बन जाएगा तो वह राक्षस वो इसी तरीके के ब्राह्मण है जिन्होंने शास्त्रों का थोड़ा बहुत ज्ञान लिया वह अपने आप में एक ब्राह्मण बन गए फिर उन्होंने लोगों को गलत रास्ते की तरफ लेकर गए तो वो एक राक्षस प्रवृति है मैं तो यह समझता हूं तो उसकी व्याख्या की गल फिट होती है वो बात मैं उसी के लिए कह रहा हूं तो यहां जो गांव में जो भोली भाली जनता है उसको एक्चुअल में शास्त्रों का ज्ञान ही नहीं है तो जिसने जो दिखाया वह मान लिया और भेड़ चाल ज्यादा चलती है एक गया उस वो एक्चुअल में उसकी बीमारी ठीक होने वाली थी वोह ठीक हो गया उसके पीछे 20 और चले गए फिर उन्होंने जाकर के सोच लिया भाई हम तो बस गुरु का वो लेले तो यह तो है कारण गांव में अशिक्षित यह लोग कहते हैं हम शिक्षित है शिक्षित है लेकिन आप पहली दूसरी तीसरी पांचवी क्लास पढ़े होंगे स्कूल में जाकर लेकिन आपने शास्त्रों का शिक्षा नहीं ली है इसलिए आप शास्त्रों की दृष्टि से आप अशिक्षित है ठीक है अब उनको जो चार लाइने बताई गई है वह उन्होंने मान ली है ठीक है उन चार लाइनों को लेकर के वह लोग चलते हैं और उनके दिमाग में बैठ गई है खाली दिमाग में आप कुछ भी भरोगे ना व कहते ना कि कच्ची मिट्टी से जो भी बनाओगे बन जाएगा तो वो सिस्टम ये इस भोली भाली जनता पर चलता है इन्होंने वो चार लाइने जो भी रटाई है ना वो रट

01:01:30:26 गई है वो निकलती नहीं है यह तो कारण दिखता है मुझे यहां दूसरा मैं आपसे एक निवारण चाहता हूं मैंने लोगों को बताया कुछ लोग मुझे मिले जो मेरी जान पहचान के थे उनको मैंने समझाया उनकी समझ में भी आया पर पता है लोग क्या कहते हैं लोग ये कहते हैं कि अमित भाई क्या है ना ये हमारा धर्म यह कहता है हमने किसी को गुरु मान लिया तो उसको छोड़ नहीं सकते अब तो मुझे आपसे यह सलूशन चाहिए कि मैं मैं उस पर भी थोड़ा सा थोड़ा संशय हो गया मैंने सोचा मैं क्या जवाब दूं तो मुझे आपसे इसका उत्तर चाहिए कि जो लोग छोड़ना चाहते हैं लेकिन वह लोग यह समझते हैं कि एक बार गुरु मान लिया तो मान लिया किसी एक बंदे ने मुझे एग्जांपल दिया कि गुरु गोरखनाथ जी ने गुरु मछिंद्रनाथ को गुरु मनाया था तो गुरु मछिंद्रनाथ ने धर्मशास्त्र छोड़ दिया था वह राजा बन गए थे कहीं रहने लग गए थे किसी सा किसी देश में तो गुरु गोरखनाथ जी ने क्या कि आपने गुरु को नहीं छोड़ा अपने गुरु को लेकर आए वापस तो तो लोग कहते हैं कि हम गुरु को बुरा नहीं कह सकते हम अपनी भक्ति करेंगे गुरु जैसा भी है तो इस चीज दो बा है य पर मैं आपको इसका सलूशन दे दूं बहुत इजी है महाभारत में कहा गया है घटनाओं का घटित होना

01:02:45:26 प्रमाण नहीं है उन्हें शास्त्र के द्वारा धर्म के रूप में स्वीकार किया जाना प्रमाण है घटनाओं का घटित होना प्रमाण प्रमाण नहीं है उन्हें शास्त्रों के द्वारा धर्म के रूप में स्वीकार किया जाना ही प्रमाण है तो सबसे पहले हमें यह देखना होगा कि हमने किसी को गुरु बनाया तो गुरु का अर्थ क्या है अद्व तार का उपनिषद में कहा गया है गु का मतलब अंधकार और रू का मतलब निकालने वाला स्कंद पुराण गु का मतलब अंधकार रू का मतलब निकालने वाला अज्ञानता रूपी अंधकार से निकालने वाला ही आपका गुरु हो सकता है ठीक है असतो मा सद गमाया तमसो मा ज्योतिर गमाया मृत मा मतम गमाया जब वो तमसो मा ज्योतिर गमाया कर ही नहीं रहा है तमसो मा ज्योतिर गमाया मुझे अंधकार से उजाले की ओर ले चलो जब जिसको आप गुरु कह रहे हो मगर वह आपको अंधकार से उजाले की ओर अभी मैंने पांच पैरामीटर बताए थे गुरु के गुरु कौन हो सकता है तो जब आप किसी को गुरु कह रहे हो तो शास्त्र के आधार पर कह रहे हो ना यह बात आपने शास्त्र से स्वीकारी कि गुरु को नकारा नहीं जा सकता इसका मतलब

01:04:01:02 गुरु भी आप उसी को बनाओगे जिसके लिए शास्त्र आदेश कर रहे होंगे शास्त्रों ने आदेश किया है कि गुरु अंततोगत्वा सन्यासी होना चाहिए आप सन्यासी के अधीन रहने वाले किसी गृहस्थ से दीक्षा ले सकते हो उसके अंदर शिक्षा ले सकते हो मगर वो किसी ना किसी सन्यासी के अधीन होना चाहिए किसी ना किसी अंतिम निर्णायक जो आपका हो जीवन का वो कोई वैरागी होना चाहिए वैराग्य होना चाहिए उसके पहली बात दूसरा परंपरा प्राप्त होना चाहिए भी शास्त्र कह रहे हैं तीसरा शति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा देने वाला होना चाहिए चौथा वोह आपका अंधकार दूर कर दे अब जैसे हम कह रहे हैं कि आप कह रहे हो कि जो जैसे ये जो तत्वदर्शी है तथाकथित यह कह रहे हैं कि भाई जो ब्रह्मा विष्णु महेश है वो नाशवान है अब हम दिखा रहे हैं शास्त्रों से कि भैया ब्रह्मा विष्णु महेश तो अपने आप को अविनाशी भी कह रहे हैं दिखा दिया हमने तो पहली बात आई कि समस्त सुति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य नहीं बैठाया क्यों क्योंकि जहां पर अविनाशी कहा गया वो नहीं माना और जहां नाशवान मान कहा जा रहा है वो मान लिया शिक्षा ऐसी देने वाला होना चाहिए गुरु जो दोनों बातों का मान रख

01:05:16:02 जाए तो मान क्या है लीला पूर्वक वो जो है अपना आविर्भाव तिरोभाव करते हैं मगर वस्तुतः वो अविनाशी दोनों बातें हो गई लीला पूर्वक आविर्भाव तिरोभाव हो गया वो भी स्वीकार हो गया मगर वास्तविकता में तो वह अविनाशी है तो यह एक पैरामीटर अंततोगत्वा जब व्यक्ति पूछ रहा है कि गुरुदेव यहां पर यह लिखा है मुझे समझ में नहीं आ रहा है गुरुदेव अगर ईश्वर सर्वशक्तिमान है तो रूप क्यों नहीं बदल पा रहा है गुरुदेव ईश्वर अगर अजर है तो वह दाढ़ी में क्यों दिख रहा है सफेद दाढ़ी में ईश्वर अगर आपके अंदर है तो आपको बीमारी क्यों हो रही है आपको आप चश्मा क्यों लगा रहे हो आप जेल में क्यों बंद हो इन का उत्तर गुरु नहीं दे रहा है तो इसका अर्थ है कि गुरु जो आप जिसको मान बैठे हैं वह आपका गुरु है ही नहीं क्योंकि उस पर गुरु शब्द चरितार्थ नहीं हो रहा क्यों नहीं हो रहा गु का मतलब अंधकार आपके अज्ञानता है आप पूछ रहे हो मगर वह नहीं बता रहा पाच 101 में कुरान में क्या कहा गया कि ज्यादा प्रश्न मत पूछो अन्यथा आपके लिए वो आयतें खोल दी जाएंगी जिनके कारण पूर्व में कुछ लो बागी हो गए थे इसका मतलब क्या है कि कुरान के द्वारा बताया जाने वाला जो धर्म है वह

01:06:31:04 यह सोच कर बताया जा रहा है कि कहीं यह व्यक्ति बुरा ना मान जाए अब जिस व्यक्ति को मान लो व्यभिचार की आदत पड़ी हुई है तो उस व्यक्ति को वो लोग यह बताएंगे कि तू व विचार कर यही तेरा धर्म है क्योंकि नहीं बताएंगे तो व बुरा मान जाएगा बागी हो जाएगा यह कोई आधार है धर्माधर्म का कि व्यक्ति को क्या अच्छा लगेगा वो हम उसको धर्म के रूप में बताए तो वहां मना कर दिया गया प्रश्न लिए अच्छा स्कोन की बात कर ले अचिंत प्रश्न मत करो अचिंत विषय तो यह भी आपके गुरु नहीं हो सकते गुरु वही जो आपके संच हों का निराकरण करने में समर्थवादी तरीके से तत्वदर्शी तो यदि आप शास्त्रों के आधार पर गुरु का आलंबन लेना चाहते हैं तो सबसे पहले शास्त्रों के आधार पर समझना होगा कि गुरु कौन हो सकता है यह शास्त्र में ही लिखा है कि गु का मतलब अंधकार तो अगली बार जब आपसे कोई ये कहेगा कि हम गुरु का त्याग नहीं कर सकते तो पहले आपको उससे कहना है कि गुरु का अर्थ बता तू मुझे यदि तू किसी को गुरु कह रहा है तो गुरु का अर्थ क्या है बता अब शास्त्र से आप उसको अर्थ बताओगे गुरु का अर्थ है जो तुझे अज्ञानता रूपी अंधकार से निकाल दे तो क्या जिसको तू गुरु कह रहा है वो तुझे अज्ञानता से बाहर ला रहा है

01:07:46:08 नहीं ला रहा है बहुत सारे टटर पटरम करके वो तुझको जो है अज्ञानता में फसाए हुए वो गुरु कहलाने लायक नहीं है और अगर लायक नहीं है तो आप तुरंत उसको छोड़िए उसका त्याग कर दीजिए वो गुरु है ही नहीं जी गोविंद जी जय श्री राम धन्यवाद धन्यवाद धनवाद अ जी आपको एक और बात बोलना चाहूंगा अगर आपके पास उम्मीद है एक मिनट होगा ठीक है यह रामपाल जी के आपने शायद किया होगा तो रामपाल जी की पुस्तक है ज्ञान गंगा उसका पेज नंबर छ सिक्स जहां लिखा होगा ना वो खोल लीजिएगा यहां पर खुद ही रामपाल बाबा जी क्या बोल रहे हैं अब भक्त समाज

01:08:27:04 ऐसी पुस्तक वैसे आपको नहीं उससे डरने वाली कोई बात नहीं है यदि आपको किसी चीज के ऊपर काम करना तो वो रख लेना कोई बुरी बात नहीं है रखे नहीं रखे वो आपकी चिंता है मैं आपको बता रहा हूं इसकी पुस्तक में क्या लिखा है ठीक है भक्त समाज में एक नकली गुरु नकली गुरु कौन है जो शास्त्र विरुद्ध ज्ञान देता हो ठीक है यह आ गया पक्की बात है ये ठीक है द्वारा एक गलत धारणा फैला रखी है कि एक बार गुरु धारण करने के पश्चात दूसरा गुरु नहीं बदलना चाहिए जरा विचार करके कि गुरु हमारे जन्म मृत्यु के रूप को रोग को काटने वाला वैद होता है यदि एक वैद हमारा रोग नहीं कटता है तो हम दूसरे अच्छे वैद के पास जाएंगे जिससे हमारा जानलेवा ठीक हो सके रोग जैसे ठीक धर्मदास जी के पहले गुरु श्री रूप दस द थे ठीक है तो फिर वह उसके बाद जो है वह कबीर जी की शरण में चले गए ठीक है तो इसके साथ नीचे भी एक इन्होंने लिखा हुआ है झूठे गुरु के पक्ष को तजत ना कीज वारी यानी देर ना लगाइए आपको पता चल जाए आपका गुरु झूठा है तो उसका त्याग करने में देर ना लगाइए तो मैं नहीं कह रहा यह बाबा रामपाल की पुस्तक है ज्ञान गंगा उसका प्रश् नंबर छ कह रहा है भक्ति मर्यादा के अंतर्गत बहुत बढ़िया तो ये अगर और ज्यादा

01:09:42:06 उनको चाहिए हो तो बता दीजिएगा तुम्हारा ही गुरु अपना खंडन करने के लिए कह रहा है तो मुझे अब तो मुझे परचेज करनी पड़ेगी देखिए डरना नहीं है कभी भी जीवन में कभी भी दादू दास जी आए हैं दादू दास जी कहां चले गए दादू दास जी चले गए छोड़ गए हम उनको सुनने वाले थे करण जी एक मिनट एक मिनट जुड़ गए क्या अभी दादू दास करके जुड़े थे चलिए जी करण जी जय श्री राम जय श्री राम जी जय श्री राम भैया बहुत दिन से आपकी लाइव स्ट्रीम देख रहा था तो काफी मन भी था आने का एक्चुअली मैं बेसिकली ट्रक ड्राइवर हूं बहुत छोटे लेवल से आता हूं तो आप मेरी अभी उम्र जो है वो 43 इयर्स है तो मैं रामपाल को एक्चुअली मैं रामपाल ही कहूंगा महाराज नहीं कगा क्योंकि मैं इसको तब से जानता हूं जब मंजे में बैठता था जब चार पांच भगत इसके आगे बैठते थे मैं 93 से इनको जान रहा हूं तो मैं वैसे बेसिकली पंजाब से रहने वाला हूं य चंडीगढ़ के एरिया में जिर्कपुर गांव पड़ता है तो वहां से रहने वाला हूं उस टाइम ये

01:10:57:25 तो यह कबीर पंथी थे एक्चुअली को कबीर पंथ से निकाल दिया गया था तो कबीर पंथ से जैसे ही इनको निकाला क्योंकि ये कबीर पंथ में रहते हुए ना खुद गुरु बनने की कोशिश में थे कहीं से जेई वगैरह रिटायर है ये जूनियर इंजीनियर तो उसके बाद फिर इन्होंने अपना ये पंथ स्टार्ट कर दिया और अपनी अपनी इन्होंने वो कहते है ना अर्थ का अनर्थ कर दिया वो काम किया इन्होंने यह तो पता नहीं किसकिस पर ब्लेम लगाते हैं तो गुरु नानक देव जी को भी धोखेबाज कहते हैं गुरु गोविंद सिंह जी को कहते तो कुछ है ही नहीं गुरु नान जी धोखेबाज थे वो नामदान लेकर चले गए और जो इनके अपने गुरु थे कबीर जी के रामानंद जी जो भी है उनको कहते हैं कि वो इनसे ही उन्होंने इ से ही नामदान लिया और इन्होने उनको सतलोक दिखाया कबीर जी ने तो बड़े काफी बार मुझे बुलाया मेरे पास एक दो इनकी बुक्स भी थी मैंने ऐसे ही फेंक दी बट अभी मैं जब जब भी इनका देखता हूं ना तो काफी ना एक मन में आता है क्या आता है मुझे मेरे मन में जो मेरे लाइव मेरे ल के जो लोग है ना जो बहुत नीवे लोग जो आप मानो जो दिहाड़ी करते हैं खेतों में जो दिहाड़ी करते हैं वो लोग इनके पास फसते हैं और यह उनको क्या कहते हैं स्टेज में कि आप पढ़े लिखे हो आपको सब पता है तो आप आ जाओ आपको वहां पर कोई भी बंदा वेल

01:12:12:28 एजुकेटेड नहीं मिलेगा आपको वहां सारे कौन मिलेंगे फिफ्थ क्लास सिक्सथ क्लास पास और उनके उनके पेरेंट्स क्या करते हैं कि मैं उनको बुरा नहीं कह रहा उन बेचार को कुछ पता ही नहीं है कि जीवन में हमने करना क्या है जीवन में हमें चाहिए क्या मैं आपकी बात फिर से सुनूंगा दादू दास जी आए हैं दादू दास जी जय श्री राम दादू दास जी जय श्री राम आप अपना माइक ऑन करिए दा उनका माइक बंद है माइक ऑन कर लीजिए

01:12:58:18 बोलिए वो बोल रहे हैं इनका माइक चालू नहीं है माइक माइक को ऑन कर लीजिए और एक जगह बैठ जाइए दादू दास जी आपका माइक बंद है बाबूराम यादव आप तो आ चुके हैं शायद एक बार बाबूराम यादव

01:13:30:26 जी सुनाई दे रहा है दिखाई दे रहा है बाबूराम जी नहीं दिख रहा इनको नहीं सुनाई दे रहा है कुछ भी दादू दास जी चले गए और बाबू राम यादव जी का फोटो स्टॉप हो गया है जी आप कंटिन्यू करें करण जी बेसिक मिलता है जाकिर नायक से इनका जो थोड़ा-थोड़ा बेसिक है वो जाकिर नायक से मिलता है वो भी वर्ष नंबर ये पेज नंबर ये व्ट एवर ये वो दिस एंड दैट करके बता देता है तो इनके जो भक्त होते हैं ना वो सत्संग में लिखते होते हैं मैं गया हूं कई जगह तो इनके गुरुजी उनको कहते थे उस टाइम कि यह चीज अपने पास लिख लो कि ताकि तुम किससे ज्ञान चर्चा करो मैं अपने दिमाग में सोचता था ये कैसी ज्ञान चर्चा की जो तुम पेज नंबर और मंत्र नंबर लिख के किसी साथ बात करोगे जब तक तुम्हे खुद शस नहीं करना आता किसी के साथ तो इनका यही चलता रहता है वहां प सिस्टम काफी जब अभी मैं बैठ के इनके देखता हूं प्रवचन वगैरह काफी सुनता हूं देखे भी है मैंने एक्चुअली सुनने का मतलब मेरा यह है कि मैं इनकी तरफ ध्यान देता मैं एक्चुअली इनका देखता हूं कि कर क्या रहे हैं इनका मतलब क्या है यह करना क्या चाहते हैं

01:14:46:04 कोई वो भैया ने बहुत पहले जो गोविंद जी है गुरुकुल वाले उन्होने कहा था एक फ्लोरेंस नाम की कोई लड़की है अमेरिका में और इन्होंने जय गुरुदेव की कुछ भविष्यवाणियां उठा के अपने से सिमिलर करके कि उन्होंने सा सितंबर एक 7 सितंबर 1971 को कहा था कि लड़का 20 साल का हो चुका है और वह पैदा हो चुका है तो व कहते ये दास ही है कि कहने का मतलब खुद को भी अब धीरे-धीरे कबीर प्रमोट करने वाले थे कि मैं ही कबीर का अवतार हूं यह इनका चल रहा था यदि इन पर पुलिस रेड ना होती तो आज यह बंदा कबीर बनके बैठा होता यह मेरी शटी है क्योंकि मैं 93 से इनको फॉलो कर रहा हूं एज लगालो इन्होने स्वयं को कबीर बोल दिया है बोलु अवरी नेता पुरुष बोल चुके दस के रूप में आपके सामने विराजमान है हां जी बोल चुके हैं इन्होंने यह भी कहा कि कबीर की एक वाणी है कि कलयुग जब 555 555 व ह यर पूरे हो जाएंगे तो मैं ही दोबारा आऊंगा और कबीर पंथ में 13वां पंथ चलाऊंगा इन्होने

01:15:55:02 यह बात बोली है तो ये कहते कि दास ही पैदा हुआ भी रामपाल अपने आप को कहता कि दास ही पैदा हुआ है और दास ही कबीर के रूप में दोबारा आया और तुम सबको सतलोक ले जाने आया तुम सब ब्रह्म के ग्रास हो ये हो व्ट एवर जो भी है मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है वो कुछ भी बोलता रहे पर मुझे दिक्कत आनी शुरू पता कब हुई है सर मुझे एक्चुअली दिक्कत आनी शुरू जब हुई है जब इसने भगवानों को ही काल कहना शुरू कर दिया पहले नहीं कहता था ये मैंने इसके पुराने प्रवचन आप इसके देखना तब ये कहता नहीं था तब ये कहता था कि ये मृत्यु लोक है ऐसे है वैसे है तब तक तो य सिंपल बात करता जब तक एक छोटी सी खाट पर बैठता था जैसे ही इनका आश्रम बनाना और वहां से थोड़ा बढ़ना शुरू हुआ इस तो फिर डायरेक्टली ही बस इशारा करना शुरू कर दिया कि यह सब फ्रॉड है मैं ही हूं जो हूं हा भया कबीर भगवान कहने वाले ध्यान से सुने माता जी ने निष्ठा पूर्वक यदि आपको सेवन कराया है और रक्त में प्रवाह है रक्तचाप है ठीक ठाक तो आ जाए और बताएं कहां तो बा ये तो बातें इनके खुद के पास पड़ी है और कबीर जी ने खुद को कभी कहा ही नहीं कि मैं भगवान हूं मैंने उनका काफी पढ़ के देखा है

01:17:10:10 यहां हमारे यहां भी एक दो कबीर पंथी संत है उनसे ही बात कीया वो कहते कबीर जी ने तो कभी आपको भगवान कहा ही नहीं वो तो कहते कि मैं संत हूं संत हूं बहा जो मर्यादा चल रही है मैं उनको हटाना चाहता हूं जो पढ़े लिखे नहीं है मैं उनको पढ़ाना चाहता हूं वो तो ये बा करते थे बट इनका एक अलग ही फंडा चल पड़ा था अ तो अब तो इनमें एक और दिक्कत हो गई है सर अब तो यह रामपाल जी रो रहे हैं जेल से फोन करके आप इनकी वीडियो देखना इनके चेले अलग हो गए उनके नाम पर सेक्स चल चुका है और जो जिसको जो फायदा हो रहा है वो हो रहा है अब इसमें जो रामपाल दास जी का रोल नहीं है कुछ भी अब अब तो खत्म हो चुका है सर इन्होने अपने भाई को बिठाने की कोशिश की थी इन्होने भाई को बने कोशिश की भैया मैं बीमार हो गया था ठीक हो गया हूं नहीं सर एक लेटेस्ट वीडियो है इनका उसमें ना इनके चेले हैं कोई पवन दास कर कहते हैं लोग हमसे ये कहते हैं कि अरे भैया उनकी भक्ति करने से सद भक्ति करने से हमारी बीमारी ठीक हो गई मा वो खुद बीमार पड़ रहा है व्यक्ति वो खुद बाहर तो आ नहीं रहे सर वो खुद तो अंदर बैठे हैं सबसे बड़ी बात है बीमारी को छोड़ दो मैं कहता हूं कि यार मैंने चमत्कारी पुरुष अपनी आंखों के सामने मैं नांगा साधु

01:18:25:15 गिरी साधु ऐसे देखे हैं सर मैंने ऐसे देखे हैं कि जो उन्होंने मुझे मेरे साथ हुआ है मुझे उन्होंने बोला कि आज तेरे घर से मुझे गाजर का हलवा आएगा सर मैं लेके गया हूं मेरे घर प बन रहा था जी मैं प्रत्यक्ष प्रमाण बैठा हूं वो अपने वो धुनि लगाई होती उन्होने उस पर बैठे थे और उन्होंने मुझे कहा कि आज तेरे घर से खाना आएगा और मीठा आएगा और हालू उसका गाजर का हलवा आएगा सर मैं घर पर आया तो मेरे घर वाले बना रहे थे मेरे मम्मी और मेरे वाइफ वो बना रहे थे तो मैंने यार ये तो मुझे बोला ही था तो मैं उस चीज को नहीं कहा जो जो करने जो करने वाले साधु है ना तो वो सर वो तो बहुत कुछ कर देते हैं और अभी तक तो इसका बहुत कुछ साबित हो जाता अभी तक तो बहुत कुछ साबित हो जाताला जी जय श्री राम थोड़ा सा ब्रेक लूंगा करण जी जय श्री राम शुक्ला जी जय श्री राम पहाड़ी जी जी शुक्ला जी बोले जय श हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेव जय श्री राम शुक्ला जी बताए नारायण नारायण जी वही अभी मैं जस्ट जवाइन किया तो शिवांश जी आवाज आ रही है आपको मेरी थोड़ी कम आ रही है आवाज आप अब आ रही है आप एक बार लीव करके दोबारा आ जाइए आवाज बहुत कम है

01:19:40:20 भैया कोई आना चाहे कबीर को अविनाशी परमेश्वर सिद्ध कर दे आए भैया अविनाशी परमेश्वर वाले यह हिस्ट्री ऑफ स्पिरिचुअलिटी कबीर जी अविनाशी परमेश्वर है बाकी सभी की जन्म और मृत्यु आ जाइए भैया आ जाओ ओ वेद में प्रमाण ओ कबीर नहीं भगवान है आवाज लगानी पड़ती सब्जी तरकारी वेदों में प्रमाण है क भगवान सबजी का ठेला चालू कर

01:20:19:12 दिया लाइव स्म लाइव स्ट्रीम का लिंक ले लो और आ जाओ और सुनि सबसे बड़ी बात है कि हम य जो क्वेश्चन पुट अप कर रहे हैं इनका कोई निराकरण प्राप्त नहीं हो रहा जो वहा दूसरी वह चल रही है लाइव स्ट्रीम अविनाश शुक्ला जी वापस आ गए हा जी अविनाश शुक्ला जी बोलिए बोलिए बोलिए बोलिए

01:21:01:14 बोलिए अवना जी आप अपना अन म्यूट कर लीजिए अन म्यूट कर लीजिए जी बोलिए पंकज जी बोलिए मैं वही कह रहा थाय मूर्ति पूजा का विरोध करते करते थक नहीं रहे साक्षात अभी प्रमाण है और कबीर जी जब थे तो तब से ही और उसी 600 साल पुराना जो है मंदिर आज बना हुआ है भगवान राम का कबीर जी ने खुद बनाया था उनके शिष्य के पास गए थे ना तो राजस्थान के मुंडावर तहसील में आज भी वो मंदिर जो है बना हुआ है और वहां पर जो है ना रामानु संप्रदाय के जो हमारे जो महंत है वहां पर पूजा अर्चना जो भी है उनकी सेवा कर रहे हैं य मूर्ति पूजा का विरोध करते करते जो है ना थक नहीं रहे और उनके खुद के कबीर जी जो है भगवान राम का मंदिर बना के चले गए एक जी कह रहे जो लोग कह रहे हैं कि जो लोग अन एजुकेटेड है व अच्छे हैं तो सुन लो मेरी बहन आईआईटी बमबे में है और व भी उन्हे फॉलो करती है हा भाई करती है हो सकता है ऐसा नहीं है कि व ह

01:22:13:24 पर तने फॉलोवर्स यहां पर आए हैं आप सबकी शक्ल देख लेना शक्ल से ही पता चल जाएगा कितना एजुकेशन है उनके अंदर केवल शक्ल से तो आपकी बहन हो स सती है हमने ऐसा नहीं कहा 100 पर ही है ऐसा नहीं है मिल जाता है अगर ऐसे एजुकेशन की आप बात करेंगे तो अब आप शंकराचार्य को रामानुजाचार्य को फॉलो करने वालों का एजुकेशन लेवल देखेंगे क्या अरे शंकराचार्य का स्वयं का एजुकेशन लेवल देखेंगे हाई कोर्ट के जो उनको जेल धाम में बैठाए हुए हैं वह लोग उनसे शिक्षा लेते हैं जिन्होंने आपके तत्वदर्शी को जेल धाम में बिठाया हुआ है ठीक है वो उ सुनते हैं हाथ जोड़ते हैं प्रणाम करते हैं पैर छूते हैं साइंटिस्ट वो आते हैं सुनने के लिए तो ये एक वो चेरी पिकिन मत करिए कि कोई एक बात बस मिल गई बस उसका उत्तर दे दूं अरे अविनाशी सिद्ध करो ना यार आकर के अविनाशी सिद्ध करो ईश्वर सिद्ध करो कबीर को वेदों के द्वारा ईश्वर सिद्ध करो ईश्वर सिद्ध करो अविनाशी सिद्ध करो अजर सिद्ध करो तत्वदर्शी सिद्ध करो कुवारी गाय का दूध ही सिद्ध कर दो चलो कुछ तो कर दो इतने

01:23:28:26 सारे ऑप्शन है अब जाकर तुम लाइव स्ट्रीम करोगे गोबर गणेश की पूजा भैया मत करो हम नहीं आएंगे आपसे कहने मत करो गोबर गणेश की पूजा वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है दिखाओ ना भाई हम कहां कह रहे गोबर गणेश की पूजा करो आप मत करो मत बनाओ दीपावली मत बनाओ होली हमको तो यह दिखा दो वेदों में कहां प्रमाण है कबीर भगवान है हमको तो यह दिखा दो ये सफेद दाढ़ी वाला बूढ़ा व्यक्ति अजर कहां से दिख रहा है हमको तो यह दिखा दो जो खुद बीमार पड़ रहा है व कहां से आपको जो है परमेश्वर का अवतार दिख रहा है हमको तो ये दिखा दो कि वो तत्वदर्शी कहां से सिद्ध हो गया कब पी लिया उसने कुमारी गाय का

01:24:18:20 दूध ये देख लीजिए भैया कौन बैठे हैं ये थोड़ा बड़ा करिए उच्चतम न्यायालय में पुरी शंकराचार्य जी का प्रवचन सुन लो जो अपने नकली प्रवचन दिखाते हो ना वीडियो में नकली प्रवचन दिखाते हैं एक कमरे में बैठा हुआ बोल रहा है कोई व्यक्ति और फिर दूसरी पब्लिक दिखा दी कहीं और की व अनिरुद्धाचार्य की पब्लिक दिखा दया एक बार शायद इकट्ठा हो गई हो वही पब्लिक हर वीडियो में यह इनका तरीका इतनी पब्लिक ने सुना इनके वीडियो देखो नकली साफ पता लगता है कमरे में बैठ कर के व्यक्ति बोल रहा है और जब पब्लिक दिखाई तो इतनी दिखा दी पूछो नहीं बागेश्वर धाम की पब्लिक ले आए जोड़ दिया पब्लिक को शास्त्री जी एक बात और कहनी चाहता हूं इनका एक एमपी खबर फस्ट एमपी खबर फास्ट करके य चैनल है और एक ऐसे करके य चैनल है वहां प ये क्या करते हैं को कह रहा हूं मैं उन्ही को कह रहा हूं य जो बात कह रहा हूं गोबर गणेश वाली अरे भाई आप यह तो बताओ अविनाशी का तो उत्तर दो से हम नहीं कह रहे आप गोबर गणेश की पूजा करो मत करो अभी आप और हम तो बैठे हैं हमने कौन सा गले में

01:25:33:21 कोई हमने कौन सा गले में रुद्राक्ष की माला डाल ली है पीले वस्त्र भगवा वस्त्र डाल के हम य बैठ के कोई आपस ट कर ले मतभेद थोड़ी ना ये तो बाद की बात है मतभेद इस बात का है वेद में प्रमा कबीर भगवान और तुम अग को अन बोल धन्य तुम तुम जो है वो जो क्या होता है घटा कास को तुम क्या का बोलोगे एक बात रखना चाहता हूं इसके बीच में जैसे कीय मूर्ति पूजा का खंडन करते ये वो अभी पंकज जी ने बोला मैं आज यही बोलने वाला था दरअसल उन्होंने कहा कि कबीर जी ने एक राम जी का मंदिर बनाया था अच्छा आपको पता है कि जगन्नाथ जी की मूर्तिया किसने किसने बनाई थी इसमें फनी बात क्या है बता देता हूं पहले तो प्रणाम है जगन्नाथ जी को इसमें फनी बात यह है कि पेज नंबर 52 ज्ञान मेरे हाथ में है देखिए कितनी मजेदार बातें लिखते हैं य पढ़ा करिए आपका बहुत वो कहते हैं ना खून बढ़ता रहता है हसने हसाने से ठीक है 52 नंबर पेज पर ये लिखते हैं कि कबीर साहब ने छ दिन में यह सृष्टि बना दी ठीक है यह लिखा हुआ है आपके सामने य छ दिन में उन्होंने सृष्टि बना दी ठीक है वैसे तो आपके पास होगा ही पीडीएफ इसका 52 नंबर पेज है छ दिन में बना रहे हैं पूरी सृष्टि

01:26:49:02 ध्यान से सुनिए और पेज नंबर 218 में लिखते हैं कि कबीर जी को जगन्नाथ जी की मूर्तियां बनाने में लगे थे 12 दिन यानी कि जगन्नाथ की मूर्तिया कबीर जी ने बनाई थी और दिन में बनी थी सृष्टि छ दिन में बना देते हैं और मूर्ति बनाने में 12 दिन लग जाते हैं भाई ये कौन य सा मेरे को बिल्कुल समझ नहीं आ रही से आ वो अजर अमर है ना इसलिए मल की जगन्नाथ जी की मूर्तियां बनाना इस सृष्टि को बनाने से भी डबल मुश्किल ठीक पहले ुद मूर्तिया बना रहे बता रहे कि इतनी महान है और फिर बोलते देखो मूर्ति पूजा कर रहे तो भैया आइए वेदों में प्रमाण वाले कहां चले गए व लुप्त हो गए पहले आते

01:27:45:09 आते ने बलक कर दिया मे को परसों मैं इनके उसम गया हु था लाइव में इन्होने पहले मेरे को एक्सेप्ट किया जैसे मेरी शक्ल देखी तुरंत एक सेकंड में मेरे को ब्लॉक भी कर दिया वहां से और बच्चों और छोटे छोटे बच्चों के साथ डिबेट कर रहे थे वहा बैठ के मैं जो है वायु पुराण का एक रेफरेंस दे रहा हूं य टी आर पहाड़ी जी आप मेरे को उतनी देर बता दीजिए कौन सी साइंस है कि छ दिन में सृष्टि बन जाती है और 12 दिन लगते हैं मूर्ति बनाने में ओ अब वही लोग जाने इस बात को वायु पुराण 12वां अध्याय पूर्वार्ध में ही है वायु पुराण का 12वां अध्याय और 86

01:28:48:26 वा गोविंद जी आपने मतलब कि यह ज्ञान गंगा पुस्तक की मतलब अच्छे से अध्ययन कर रखा एक एक चीज आपको मालूम मैंने हाई लाइटर से इसका छोड़ा कुछ नहीं है मैंने जोक्स इसके लिखे हुए सारे मैं इस कपिल शर्मा शो की तरह पता जब डिप्रेशन में होता ना लज के हिब है इसम ये तक बताया हु है कि द्रोपदी जी का जब वो हरण हो रहा था तो कबीर जी प्रकट हुए व उने उनका चीर रो

01:29:27:04 हम अध्याय और शलोक है 27 से 33 और यह अपने चैनल पर बैठकर हाथ जोड़ जोड़ के लोगों से प्रार्थना कर रहे हैं कि आवान चैनल पर नहीं जाना मैं आपको अरे मैं वीडियो दिखा दूंगा मैं वीडियो दिखा दूंगा आपको हाथ जोड़ जोड़ के प्रार्थना करते ना जिसको कि भैया ये देखिए हाथ जुड़े हुए उनके चैनल पर कोई डिबेट करने बाबू राम जी आए बाबू राम जी

01:30:04:16 बताए प्रमाण दे दू बस एक प्रमाण दे दूं योगी जिस किसी ऐश्वर्य लक्षण वाले भूत पर आसक्त होकर उसका सेवन करता है तब तक उसका निश्चित रूप से विनाश हो जाता है इसलिए जो ब्राह्मण सूक्ष्म परस्पर संश क्त भूत समूहों का परिहार करता है वही परम को प्राप्त करता है यह देखा गया है कि दिव्य नेत्र वाले महात्मा ऋषि गण भी सूक्ष्म भाव समूहों में समाज शक्ति के कारण दोष युक्त कहे गए हैं इसीलिए सूक्ष्म भूत समूहों में कभी भी आस्थावान ना हो ऐश्वर्य से अनुराग उत्पन्न होता है परंतु ब्रह्म जो है वो राग हीन है यह मैं क्यों बता रहा हूं वायु प्राण ब्रह्म जो है राग हीन है उसको राग नहीं होता किसी चीज से मगर ब्रह्म जो इनके अनुसार जो काल ब्रह्म है जिसको य तथाकथित इनका जो नकली वाला ब्रह्म है उसको यह बताते हैं कि उसको सृष्टि करने का राग हो गया था है ना सृष्टि करने का राग हो गया था ना इसी कारण से नई सृष्टि हुई ना वो सतलोक से आना पड़ा फिर उसको कॉपी करने के चक्कर में लोगों को तो ब्रह्म जो है यहां

01:31:19:19 पर राग हीन होता है आगे बताया जा रहा है इसलिए सात सूक्ष्म तत्वों का षड़ंग महेश्वर को जानकर प्र प्रकृति नियोग निपुणता से पारदर्शी होने में समर्थ होते हैं वही भगवान परब्रह्म को प्राप्त करते हैं और वह परम जो परम ब्रह्म है विधित तत्व के ज्ञाता महेश्वर डंग तत्व को इस प्रकार कहते हैं सर्व ज्ञाता तृप्ति अनादि अनादि आ गया भैया अनादि स्वतंत्र नित्य नित्य का मतलब जिसका नाश नहीं होता नित्य है तो अनादि भी आ गया और नित्य भी आ गया महेश्वर भगवान महेश के लिए यह वायु पुराण से पढ़ रहा हूं मैं और इसके पूर्वार्ध का 12वां अध्याय है और पहली बात ब्रह्म राग हीन है यानी कि इनके द्वारा ब्रह्म की जो डेफिनेशन है सृष्टि रचना में जो बताई गई है वो गलत है कि ब्रह्म को राग हो गया था कुछ करने का कुछ पाने का कुछ खोने का राग था और साथ ही साथ यहां पर भगवान को अनादि अनंत शाश्वत कहा गया है जी अब ले लेते हैं कौन है बाबू

01:32:34:28 राम दास जी को पहले ले ले मैं आपको बात बोलूंगा शुक्ला जी बाबू राम दास जी अपना कैमरा ऑन करें हां जी बाबू राम जी बताए श्री राम राम राम सर राम राम जी बताए सर मैं आपसे कुछ पूछना चाहते हैं सर हमारे मोबाइल में थोड़ा नेट कम चलता है इस से थोड़ा आपसे बात नहीं हो पा रही है तो हम अभी साइड में है बाहर जी सर हम ये पूछना चाहते हैं कि आपने संत रामपाल जी महाराज के लिए बहुत आपने कुछ बोलते हैं तो अच्छा नहीं लगता है देखिए हम लोग के और आप लोग के बीच में प्रकार से सब समस्या खड़ी हो रही है भाई जिसमें जो सच्चाई है सच्चाई जनता के सामने आना चाहिए चाहे कहीं से ज्ञान मिले जी तो हम यही चाहते हैं कि अगर आप लोग ही बता दें कि वर्तमान में जो ज्ञान सही है या संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान सही है उस ज्ञान को हम लोग स्वीकार किया जाए सब जनता ठीक है तो मैं आपसे यही पूछना चा सही बात

01:33:50:01 जो है वही तो हम बता रहे हैं बाबूराम जी जी तो मैं आपसे एक प्रश्न पूछ रहा हूं कि वर्तमान में जैसे कि हिंदू धर्म में तो सब लोग कहते हैं कि भाई हम लोग सनातनी है हम लोग सनातन धर्म को मानते एक मिनट एक मिनट एक मिनट पहले मैं ये कहूंगा महे जी आप थोड़ा उठ के बैठ जाइए और मैं आपको ये कहूंगा बाबू राम जी कि जी आपने एक बात कही कि आप बहुत गलत चलत बातें बोलते देखिए हमने कोई गाली तो दी नहीं है हमने ऐसा कोई शब्द नहीं बोला है जो मर्यादा के बाहर हो हां मगर जो थोड़ी बहुत जो अप्रत्यक्ष रूप से आपको अमानना जैसी फील हो रही है उसका कारण यह है कि हमारी दुर्गा माता के बारे में बहुत गलत बातें बोली है रामपाल दास ने बहुत गलत बात हमने कुछ नहीं बोला उसने यह तक बोला है दुर्गा माता के लिए कि दुर्गा माता के साथ दुराचार हुआ था इस सृष्टि में कोई ऐसा तत्व नहीं है जो उनके साथ कुछ कर सके जी तो पहले हमें सुधारने से पहले आप अपने तत्वदर्शी को सुधारने जाइए और फिर य अपेक्षा करिए यहां पर उसके लिए हीन भावना वाले वक्तव्य नहीं दिए जाएंगे जो व्यक्ति जिस लायक है जो उदारता आपके अस्तित्व और आदर्श पर हारी हो जाए हावी हो जाए वो उदारता उदारता नहीं कायरता कहलाती है

01:35:05:12 मेरी मां के विषय में तुम लोग ऐसे करोगे और यहां मैं आप लोगों का पूजा करूंगा नहीं नहीं हम किसी के देखिए नहीं हम किसी के सा किसी भी धर्म के बारे में किसी को भी अनदेखा नहीं कह रहे हैं जो अगर माय देखिए क्या शब्द लिखा है मुझे पूरे शास्त्र से मैं दिखा रहा मैं बिल्कुल क्लियर दिखा रहा हूं आपको रुकिए इनका थोड़ा सा वहम दूर हो जाएगा ठीक है बक पेज नंबर निकालो अरे पूरी षि रचना सुन लो ना सात आठ मिनट का वीडियो है उसका लिखा हुआ है भा क्या लिखा है और किसके बारे में लिखा हुआ है ये किसके बारे में लिखा हुआ है येट लिखा हुआ है ये कौन है हां ये कौन है बस करिए बस करिए हटा दीजिए बस करिए कभी गए अपने त से ा दर्शी से पूछने केय क्या लिख दिया तुमने दुर्गा माता के बारे में ये पृष्ठ संख्या बताइए हम मिलाते हैं अपने हमारे पास भी बुक है ना बताओ इनको पृष्ठ संख्या 24 नंबर

01:36:12:00 24 बुक कौन सा है ज्ञान गंग पहचाना चलिए ठीक है अब इसको मिला लेंगे हमारे पास अभी नेटवर्क अभी मिलाओ अब देखो बा भाई अब अभी मिलाओ अगर सत्य के पक्षधर हो अभी मिलाओ तुरंत बहुत सी वीडियो में तो यह कहा कि राम तो बोले राम तो राजा के लाग नहीं था इस तरीके से बोला राम तो राजा के ला नहीं था उसको तुम भगवान मानताओ आप हमको आ रहे हो संस्कार सिखाने हमने आज तक कुछ ऐसी बात कही नहीं है ना ही कोई व्यक्तिगत टिप्पणी की फैमिली के बारे में कोई टिप्पणी कर द हो 24 ंबर पेज नंबर है 24

01:37:04:09 नंबर दीपावली में भर भर के वीडियो उछाली है सोशल मीडिया पर इन लोगों ने और आपको नहीं मिलेगा तो आपको कहना चाहिए कि भाई मैं इतना बड़ा मुझे आपको दोष इस बात का देना चाहिए कि तुम कैसे पुत्र हो जो अपनी मां के बारे में य सब बातें सुन कर के यहां पर बात चौरिया रहे हो देखि देखिए मेरा 24 देखिए बुक पेज नंबर पेज नंबर 2 चैप्टर क्रमांक सब बता दो आप आप लोग देख लीजिए 24 मेरा पेज नंबर दिखा रहे आपके हाथ में अगर ज्ञान गंगा है तो उसी में आपको सबूत मिलेगा दिखा चैप्टर यह कौन सी पुस्तक हैन पर देखि एक बार ठीक है वही पुस्तक है दूसरा पुस्तक नहीं लिया वही पुस्तक है सता है आपके प क्रमांक बदल गए हो छपाई में कोई बात नहीं कोई बात नहीं अभी आहा रचना होगी शायद नहीं भक्ति मर्यादा है रना है नहीं ठीक सृष्टि रचना का पहला दूसरा तीसरा पन्ना

01:38:20:03 जी लो ये वाला पेज है आप य हेलो देख रहे देख रहे खल देख रहे और आपके यहां के लोगों का खून पता नहीं क्यों नहीं खोलता जब आप लोग यहां पर बैठ के प्रचार करते हो पुस्तकें देते हो ठीक है मैं कुछ बोलना नहीं चाहता हूं लाइव वीडियो में ठीक है लेकिन यदि ठीक है समझ जाइए बाकी बात किसी का खून खोल किसी दिन तो एक नई सृष्टि की रचना हो जाएगी पुरानी वाली का विवांस हो जाएगा अरे भाई क्या हुआ क्या बहुत देर लग रही है बाबू भाई नहीं मेरे में तो देखिए नहीं मिल रहा है

01:39:08:28 क्योंकि एक ब्रहमांड का मेन प दिखाइए बुक का देखना रचना वाला पेज दिखाइए जो दिखा रहे ये एक ब्रह्मांड का लघु चित्र आप पहले 24 नंबर पेज खोलिए ना जरा इ इनकी स्क्रीन करिए जो है ना मेन स्क्रीन इनकी लाइए मैं इनको गाइड करता हूं थोड़ा सा इनको मेन स्क्रीन पर ले लो भैया हां ये है ना आपका चलिए इसम अगले दो पेज और पलट यही हैका सुनिए आप अपना बैक कैमरा ऑन कर लीजिए बैक कैमरा ब दिखाइए आप स्वयं ना देखिए बैक कैमरा ऑन कर लीजिए आप उसके आगे ये चित्र आने वाला है ये वाला एक ब भाई आप अपना बैक कैमरा ऑन कर

01:39:58:20 लीजिए बैक कैमरा ऑन करिए और आपका पृष्ठ मिले या ना मिले उससे हमें कोई लेना देना बाबू भाई बक कमरा न करलो बैक कैमरा ऑन कर लो क चले गए बैक कैमरा ले टू स्टॉप द ट्रेन पुल चन इनको इनको बोले दिखाइए क्यों भाग रहे हैं व पीछे आ गए आ गए आ गए आओ भैया आ जाओ बाबू भाई आ जाइए बैक कैमरा ऑन कर लीजिए बाबू भाई कैमरा नहीं हो रहा है कट जा रहा है क्या नहीं हो बै कमरा नहीं हो रहा कट जाता है

01:40:57:08 चलो बुक ऊपर ले लो आप हम लोग पन्ना कहते जाएंगे आप पलटते जाना बुक ऊपर ले लो आप बुक ऊपर ले लो बाबू भाई जी जी जी जी मैं उ बुक परर में लिया देख लीजिए देखिए हा थोड़ा पास लाओ कैमरे के हटाओ मत उसको हम लोग बताएंगे ना आपको पन्ना पलटने के लिए आप वही रखो कैमरे के सामने जी जी जी कैमरे के सामने

01:41:28:27 रखो अरे इतनी दूर नहीं पास में ला कैमरे के [संगीत] हा ऐसे क्या पता चलेगा आपका बैक कैमरा चालू नहीं हो रहा क्या फोन का कट जा रहा है ना सर बक कैमरा मेरा तो नहीं कटेगा मैं तो अभी करके दिखा दूं आपको र आपकी ज्ञान गंगा है य जन गंगा आपको दिखा रहे आप देख नहीं पा रहे शायद दिखा दो भैया अपनी ज्ञान गंगा

01:42:06:01 इनको ज्ञान गंगा दिखा दो मैं तो दिखा रहा देखि मेरा मत दि आपकी ज्ञान गंगा पढ़ने में आ रही है क्या आपका बकम रा क्या कर नहीं क्या नहीं नहीं मैं इनको एक और बात क्लियर कर देता हूं आप यहां से भाग इसलिए नहीं सकते क्योंकि आप पेज पलटे ना पलटे यह जो हम दिखा रहे हैं ना स्क्रीन पर ये आपके बाबा रामपाल जी की वेबसाइट से डाउनलोड की गई है पीडीएफ ठीक है तो मैंने आपको बुक खोल के दिखा दिया है पीडीएफ में भी सेम बात लिखी हुई है ले आइए स्पी बड़ा करके दिखाओ 27 नंबर पेज पर लेके आइए इसको 27 नंबर पर देखिए जो संत रामपाल जी महाराज ने जो भी अगर लिखे हैं उनका जो ज्ञान है मि र दो मिनट चुप रहिए सड़ करने लगे ये शब्द तुमको दुर्गा माता के लिए सही लग रहा है क्या नहीं नहीं दिखाइए आप कहां लिखा हुआ है हा बस जूम कर दीजिए हा बस आ गया ना ये तो मैं पढ़ दू या स्क्रीन से आपको पढ़ना आता

01:43:12:13 है जी जी पढ़ ले हुई है आप मेरे बड़े भाई हो बहन भाई का योग बना महापाप का कारण बनेगा परंतु जति निरंजन में प्रकृति देवी को एक भी प्रार्थना नहीं सुनी तथा अपनी सब शक्ति द्वारा नाखूनों से स्त्री इंद्र प्रकृति को लगा तथा बलात्कार करने की ठानी उसी समय दुर्गा ने अपनी इज्जत रक्षा के लिए जी इसको तो संत रामपाल जी महाराज ने बताया तो है कि इसलिए इस प्रकार से उनके साथ ऐसा कर रहा था ज्योति निरंजन नहीं य कौन शत्र में खा के साथ ऐसा हुआ भाई उनको वहा तक तत्वदर्शी है तो उनको वहा तक की जानकारी फिर हमसे मत बोलो तुम रामपाल के लिए सब क्यों बोल रहे हो हम भी तत्वदर्शी है य बैठे सब तर्शी है तत्वदर्शी है तो शस्त्र से ज्ञान देता था या अपने से कहानी बनाता था तत्वदर्शी र् का काम क्या होता

01:44:18:20 खागा आए तुम हमको ज्ञान देने आप लोग रामपाल के लिए बोल रहे हो और तुम्हारा रामपाल ये बोल के बैठा उसको कुछ बोलने नहीं जाओगे वो तत्वदर्शी है बना द अपने से कहानी तो मेरे को तत्वदर्शी बोलोगे तुम मैं बाबू राम पूछ रहा मैं अपने से कहानी बनाऊ अगर तुम्हारे कबीर जी के बारे में कोई ऐसी बात बोलू तो तुम मेरे को तत्वदर्शी मान लोगे उ उन्होने य जो ज्ञान गंगा पुस्तक है सुप्रीम कोट बाबू बाबू सुनो प्यार से दूसरी बात कोई करनी है तो वो करो वरना जाओ सुप्रीम को फालतू की बकवास मत करना मैं अपने शब्दों को वापस लेता हूं ऐसी बातें मत करना अभी यहां पर गल कर लूंगा ना सुप्रीम कोर्ट में जो तुम झूठ बोलते हो ना तुम्हारा सुप्रीम कोर्ट का झूठ यही धरा का धरा रह जाएगा हमारे पास गल भी है औरन भी है साथ में शेयर करने वाली ठीक है प बन आए रामपाल के लिए बड़े अच्छे शब्द निकाले जो हमारी मां के बारे में सब बातें कर रहा है उसकी पूजा करें हम लोग यहा बैठ कर के इनके ऊपर केस होना पब्लिकेशन जो इसको छाप रहा है उसके ऊपर भी केस होना बदले इन किताबों को बदले कहां से केस होगा कहां से केस होगा सब तो बटे बैठे है ना हिंदू कोई मतलब है किसी को सब बटे बैठे

01:45:35:10 हैं अपने ही बंदों को खाने के लिए जब कोई बैठ सुनिए सुनिए मैं आपकी बात पंडित सूर्य प्रकाश जी की बात करकड़ा एक ककड़ा जब बाहर निने लगता हैना तो दूसरा उसको खच के अंदर लेता है वैसे हिंदुओ काल हो गया है पल बताओ तुम मुझे बाबू तुम मुझे ये बताओ तुम मुझे ये बताओ ये जो ये जो चीज है जो लिखी हुई है वहां पर यह शास्त्र में कहां लिखी है बताओ अब इसका उन्होंने प्रमाण हर देवी भागवत से दिए हैं वेद से दिए ग पूछ रहा हूं शास्त्र में कहां लिखी है आप मुझे शास्त्र का नाम बताइए अब देखिए हम उसको शास्त्र से तो हम अभी नहीं मिलाए है तो उसको हम कैसे क सकते हैं प क्यों ले रहे उसका तत्वदर्शी चलो तत्वदर्शी है वो सिद्ध करोगे तत्वदर्शी है वो उन्होंने सभी ग्रंथों से खुल खुल करके अरे या मैं कह रहा हूं वो तत्वदर्शी है ये कैसे सिद्ध होता है ये बताओ चलो तत्वदर्शी कैसे सिद्ध होता है ब तत्वदर्शी का मतलब क्या होता है ये तत्वदर्शी का मतलब क्या होता है तत्वदर्शी का मतलब ये होता है कि जो तत्व ज्ञान को दे जो यहां से वो मत बताओ मुझे मुझे मुझे बताओ कहां से सिद्ध होता है

01:46:50:12 कि रामपाल तत्वदर्शी है ये बताओ चलो उन्होंने बताया है कि तत्वदर्शी वही होगा जो गीता अध्याय 15 श बताओ मेरे भाई हम लोग शास्त्र को मानेंगे पहले कि पहले उन्हे तत्वदर्शी मान लेंगे जी जी जी जी बता रहे हैं गीता गीता अध्याय 15 श्लोक नंबर एक से चार को जो व्यक्ति जड़ से लेकर पत्ते तक डिटेल र् शब्द ही नहीं लिखा हुआ तुम्हारा एक और झूठ पकड़ा गया वहां तत्वदर्शी शब्द ही नहीं लिखा गया तो पहला झूठ तो आप रामपाल तोतो भैया रट्टू तोते हो तुम लोग रट्टू

01:47:30:16 तोते शब्द दिखा दो मैं मान लूंगा उसको 15 एक से चार में तत्वदर्शी शब्द दिखा दीजिए में तत्वदर्शी लिखा है बोलो रुकिए हम भी खोल ले रहे हैं खोल लो खोलो खोल लो जलेब बनाएंगे अभी थोड़ी देर

01:48:10:13 बाद इसमें जो 15 अध्याय के जो से लेकर के चार लोक तक जो है तत्वदर्शी दिखाओ उसम लिखा हुआ गीता में गीता में तत्वदर्शी लिखा हुआ दिखाए अरे 15.1 में तुम 15.1 से सिद्ध कर रहे हो ना एक से चार में बताए हम खा है अरे तत्वदर्शी कहा लिखा है जी जी जी बता बता रहे एक मिनट ता प में दिखाओ मुझे भाई जी जी बता रहे

01:48:52:26 दर्शी संत लिखा है क्या हां बता रहे हैं उस लिखा हुआ है अर्थ को सुनिए उसमें

01:48:59:07 लिखा हुआ है आदि पुरुष परमेश्वर मूल वाले और ब्रह्मा रूप मुख शाखा वाले जिस जिस संसार रूप पीपल के

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01:49:09:10 बीज को अविनाशी कहते हैं तथा वेद जिसके पत्ते कहे गए बताओ रुक जाओ एक मिनट रुक जाओ क्या ये जो पीपल रूपी वृक्ष है संसार रूपी वृक्ष ये अविनाशी है जी अविनाशी है अरे जो अर्थ बनाया उसने अविनाशी लिखा है लिखा तुम मानते हो कि नहीं संसार रूपी वृक्ष अविनाशी है हमारे गुरु संसार रूपी वृक्ष अविनाशी है कि नहीं भाई जो चीज इसम लिखा हुआ उसको हम क्यों नहीं माने भाई तुम मानते हो कि नहीं मैं पूछ रहा हूं जो चीज लिखी है मानते हो मानते हैं मानते हैं मानते हो इसम क्या ब्रह रूप वाला तो जब पेड़ अविनाशी है तो ब्रह्मा रूप शाखा क्या हो गई अविनाशी हो गई ब्रह्मा को अविनाशी मानते हो ठीक है उसका लोक पूरा तो पढ़ने दीजिए काट क्यों रहे हैं बा अरे मेरे भाई जहा तक पढ़ लिया उसको तो क्लियर कर ले ब्रह्मा जी को अविनाशी मानते हो भाई अगर लिखा होगा तो क्यों नहीं मानेंगे अगर नहीं लिखा कैसे माने सामने लिखा मैं पूछ रहा हूं ना सामने लिखा है ब्रह्मा रूप मुख्य शाखा वाला यह लिखा है रुक जाइए देख रहा हूं

01:50:24:24 मैं आदि पुरुष परमेश्वर मूल वाले ब्रह्मा रूप ब्रह्मा रूप मुख शाखा वाले हा जी ब्र खा है ब्रह्मा रूप शाखा वाला पेड़ पेड़ अविनाशी तो जब उस पेड़ में जो मुख्य शाखा है व है ब्रह्मा तो जब पेड़ अविनाशी है तो उसकी जो शाखा है वो भी अविनाशी हो गई ना भाई आगे अगर अविनाशी ब्रह्मा रूप को लिखा होगा तब हम उसको कहेंगे जब लिखा नहीं है तो कैसे कर अरे ब्रह्मा मैं कह रहा हूं य तुम्ह अविनाशी दिख रहा है कि नहीं दिख रहा है ब्रह्मा रूप मुख शाखा वाला लिखा हुआ है अब सु यानी कि तुम ये कह रहे हो पे पेड़ जो है अविनाशी नहीं है वो कट जाती है उसकी डाल ब्रह्मा जो है वो खत्म हो जाते हैं भाई सर लिखा होगा तब तो हम कहेंगे ऐसे कैसे कर दे अरे तो रहा य ब्रह्मा जब उसकी शाखा है जब ब्रह्मा रूप उसका मुख्य शाखा है और पेड़ जो है वो अविनाशी है तो तुम ब्रह्मा जी को अविनाशी मानोगे कि नहीं मानोगे बताओ भाई ब्रह्मा जी को अविनाशी नहीं लिखा हुआ हम इसको कैसे कर हम झूठ कैसे बोल क्या लिखा है ब्रह्मा रूप मुख्य शाखा वाले संसार रूपी पीपल वृक्ष को अविनाशी कहते हैं अविनाशी पीपल का वृक्ष है सुनो पीपल का वृक्ष अविनाशी है कि नहीं है यह बताओ पहले

01:51:39:26 जी उस पीपल बृ को अविनाशी बोला है और फिर यानी कि उसकाय नहीं हो सकता उसको काटा मारा नहीं जा सकता और ब्रह्मा क्या उस वक्ष रुक रुक एक मिनट रुक जा यहां पर हमारे गुरुजी ने अर्थ को बताए हैं जो हा अधम जो उर्ध्व मूलम को लिखा आदि पुरुष परमेश्वर वाले इसके बाद आया है जो ब्रह्मा रूप मुख शाखा वाला है इसको जो इसका जो संस्कृत लिखा हुआ अध खम लिखा हुआ है भाई साहब मैं आपसे पूछ रहा हूं अभी आप अर्थ पढ़ रहे थे आपने बोला ब्रह्मा रूप मुख्य शाखा वाले अर्थ गलत है क्या भाईयो यहां पर जो हमारे गुरुजी जिस आधार अर्थ को बताए है यहां पर गलत है ये अर्थ य यही प अर्थ जो है गलत है आपके जो आपके जो वो क्या कहते उनको ति दर्शी तत्वदर्शी वो सही अर्थ आपको बता रहे हैं है ना उन्होने उसको हम सिद्ध कर रहे हैं आपको दिखा रहे हैं आप थ शांत हो जाइए हा इस अखम का इसमें दिए है उन्होंने दूसरे श्लोक में दूसरे लोक में दूसरे शलोक देखिए दूसरा श्लोक में अध लिखा हुआ है एक जगह तो

01:52:54:28 अध माने नीचे लिखा हुआ है उसका अर्थ तो अध माने नीचे अ नीचे लिखा हुआ है तो इस पहला का पहले वाले श्लोक का जो अम लिखा हुआ है तो इसका होगा अध साख का मतलब होगा नीचे की ओर शाखा वाले अब आप ये बताइए कि य प आप ब्रह्मा जी को मानते हैं कि नहीं मानते यहां ब्रह्मा जी है ब्रह्मा लिखा हुआ है नहीं लिखा है ब्रह्मा ब्रह्मा लिखा हु इसको हम मानते हैं लेकिन जो हमारे गुरुजी ने बताया उसको बताया आपको रे गुरुजी को क्यों माने चलो ठीक है र् बताओ इसम इस लोक में तत्वदर्शी बताओ चलो बताओ चलो जी जी बता रहे आदि पुरुष परमेश्वर रूप मूल वाले ब्रह्मा रूप मुख शाखा वाले संसार रूपी पीपल

01:53:41:15 के बृज को अविनाशी कहते हैं तथा वेद जिसके पत्ते कहे गए हैं उस संसार रूप वृक्ष को जो पुरुष मूल सहित तत्व से जानता है

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01:53:53:19 जो तत्व से जानता है वह वेद के तात्पर्य को जानने वाला है अब अब यहां पर तत्व से जानने के लिए बोला गया है कहा है तो भाई तत्वदर्शी य नहीं जानता अच्छा एक बात बताओ वेदों को जानने वाला तत्वदर्शी होता है क्या आपके अनुसार भाई वेदों को जानने वाला तत्वदर्शी होता है क्या आपके अनुसार जी जी जी इसमें लिखा हुआ है कि वेद उसके सुनो य पर पेड़ को तत्व से जानने वाले को वेदों को जानने वाला कहा गया जो पेड़ को तत्व से जानता है पेड़ को तत्व से जानने वाले को वेदों को जानने वाला कहा गया तो क्या आप वेदों को जानने वाले को तत्वदर्शी मानते हैं बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल जो वेदों को जानेगा वह तत्वदर्शी होगा ठीक है अच्छा क्या वेदों में पूर्ण ब्रह्म परमात्मा का पूर्ण दिया गया है जी परमात्मा के बारे में होने लगा मैं पूछ रहा हूं क्या वेदों में आपके अनुसार परमात्मा का पूर्ण ज्ञान दिया गया है या किसी और वेद की जरूरत है

01:55:08:21 किसी और वेद की जरूरत है उसम पूर्ण ज्ञान नहीं है इस तो इसका मतलब वेदों को जानने वाला तत्वदर्शी सिद्ध नहीं हुआ और इस इसमें भी सुन लीजिए गीता में पूछ रहा पहले इस बात का उत्तर दो वेदों को जानने वाला तत्वदर्शी सिद्ध हुआ क्या तुम ही कह रहे हो इसमें पूर्ण ज्ञान नहीं है वेदों में भाई जो तत्वदर्शी हो वही तो उसको क्लियर करेगा कि कौन सही है कौन गलत है कहां तक जन को जानने वाला तत्वदर्शी से दोरा है क्या क्योंकि वेदों में तो पूर्ण ज्ञान है ही नहीं तो भाई उस तत्वदर्शी इसलिए तो उसको सही का चि मार रहा क्रस का चि मार रहा है कि नहीं कहां तक ज्ञान है क पहले र् तो सिद्ध होगा तब तो व चिन्ह मारेगा ना पहले तुम तत्वदर्शी सिद्ध करोगे पहले च चिन्ह मरवाओ ग भाई वो तद को जानने वाला वो दिखा दो दुर्गा देवी दुर्गा

01:56:02:06 से अभी तो गीता ही दिखा रहे गीता तो क्लियर कर लीजिए इसके बाद आगे दिखाएंगे आपको अरे भा आपको वेदों को जानने वाला कौन है यह दिखा रहे हैं वेदों को जानने वाला कौन हैय दिखा रहे हैं चलो चलो गीता को क्लियर कर ले चलो कर निकालो निकालो जी निकल गया निकल गया पढ़ो जी पढ़ो इस संसार इस संसार का वृच का स्वरूप जैसा कहा गया है वैसा यहां विचार काल में नहीं पाया जाता है हा पाया जाता है क्योंकि क्योंकि ना तो इसका आदि है और ना अंत है तथा ना इसकी अच्छी प्रकार से स्थिति है इसलिए इस इस अहं ममता अवर वासना रूप अति दृढ़ मूल वाले सार रूप पीपल के बृज को दृढ़ वैराग से शस्त्र द्वारा काटकर काटकर उसके पत वैराग्य संसार रूपी वृक्ष को काटने के लिए क्या चाहिए तत्व ज्ञान चाहिए नहीं वैराग्य भी चाहिए 15.3 वैराग्य भी चाहिए जी हा वैराग्य स्या

01:57:17:08 है आपके तत्वदर्शी है एक मिनट इसमें यह बोला गया श्लोक में कि जिस प्रकार से इसमें बताया गया है कि ऊपर का जोड़ नीचे की शाखा वाला तो ऐसा य विचार क भाई भाई सुनो जो तत्वदर्शी है वो जो पेड़ को है वो काटने वाला होगा ना काटने में सामर्थ मान हां जी वही बता सकता है कि ये संसार कैसा बना हुआ है तो ठीक है वो बता सकता है वो बता सकता है अभी मैं कह रहा हूं उसके पास यहां प बोला जा रहा है दण वैराग्य रूप का शस्त्र होना चाहिए है क्या जी जी जी उसी के पास है दूसरे के पास नहीं है वैराग्य है आप जिसको तत्वदर्शी बोल रहे हो वो वैरागी है उसके पास सब कुछ है का चीज नहीं है सरसे पूछ रहा हूं जो तत्वदर्शी जिसको बोल रहे हो वह गृहस्थ है या सन्यासी है वह तो गृहस्थ है तो फिर हो गया रुको अब हम आपको सबूत दे रहे वेदों को जानने वाला कौन है यहां पर तत्वदर्शी आपने माना ना वेदों को जानने वाला जी हा भैया इनको देवी भागवत दिखाओ अभी गता रुक जा गीता एक मिनट देवी भागवत को नहीं मानते क्यों नहीं मानते मानते हैं तो फिर देवी भागवत से आप मुझे वेदों

01:58:32:09 को जानने वाला संत रामपाल है ये दिखा दो दिखा दो दिखाओ वेदों को जानने वाला संत रामपाल है लिखा दिखा दो वहां पर किसी का नाम नहीं लिखा गया है वेदों में कि मतलब भागवत में उसकी पूर्ण पहचान बता रहे हैं वेदों को जानने वाला कौन है देखो देवी भागवत निकालो मैं बता रहा हूं आपको नी है यह है देवी भागवत श्री देवी भागवत है गीता प्रस गौरपुर द्वारा प्रकाशित है ठीक है इसके अंदर हम चलते हैं पेज नंबर देख लीजिए एक बार छटा स्कंद है और 424 नंबर है और यह 425 नंबर में क्या कह रहे हैं देखिए ध्यान से ठीक है जी अब पूरा ही पढ़ लेते हैं सुनो इस विषय में तुम्हें एक दृष्टांत दे रहा हूं साधु पुरुषों की चित् भी युग के प्रभाव से प्रभावित होकर भ्रम में पड़ जाते हैं राजेंद्र जैसे तुम्हारे पिता जी थे यद्यपि धर्म में उनकी निष्ठा थी ठीक है और इसी प्रकार नीचे आते आते और बताते हैं कि यहां से यह सब युग का प्रभाव है राजन निश्चय है कि सतयुग में ब्राह्मण वेद के पूर्ण विद्वान थे उनके द्वारा निरंतर भगवती जगदंबा की आराधना होती थी हां

01:59:47:12 भैया बस बस बस बस बस बस बस बस बस बस और बताइए विन एक मिनट सर और बता थ अ काट देंगे मिनट मिनट एक मिनट एक मिनट वेद का पूर्ण विद्वान है जो मां जगदंबा की नित्य आराधना करता है पूरा क्यों दिखाते दोबारा दिखा दो भैया दोबारा दिखा दो इनको रामपाल जी पूते थे पूरा पेज पढ़ाते थे वैसे वैसे पढ़ना है भाई जब और नीचे ही देखेंगे तो कैसे होगा और उसमें क्या लि बाबा जी आपके बाबा जी ने तो बस इतना सा कह दिया था कि भाई सतयुग के ब्राह्मण कलयुग में राक्षस है या पता नहीं क्या तो आपने कहा उनको कि पूरा पेज पढ़ाइए मेरे को कहा था इतनी बात आपने आप ज्यादा से नहीं कहेंगे उनको नहीं कहेंगे वो जो करें वो पहले ही बिना शास्त्रों के ही वो तत्वदर्शी हो जाते हैं आप आप क्या ज्यादा स्याने हो भाई मेरे को बता दीजिए हम आपको मूर्ख लग रहे हैं कोई आप अपने आप को समझते हो या हमें बचकाना समझ रहे हो आप

02:01:03:02 हम किसी को मूर्ख नहीं कर सकते आपने माना आपने माना वेदों को जानने वाला तत्वदर्शी है य हमने लिखा दिखा दिया वेदों का पूर्ण विद्वान व है जो मां जगदंबा की नित्य आराधना करता है मानोगे कि नहीं तो ये बताइए कि क्या हम लोग नहीं करते क्या मैं अभी ये पूछ रहा हूं कि जो मां जगदंबा को परम ब्रह्मा मानता दोबारा दिखाओ परम ब्रह्म के रूप में गाय मंत्र का जाप करता है यह भी दिखा दो यत्र मंत्र का जाप करता है यह भी दिखा दो भैया यह देखिए जरा य क्या लिखा हुआ है एक मिनट

02:01:42:00 जदा यह देखिएगा जरा य पढ़ के सबको सुनाइए क्या है कौन सा श्रीमद भागवत गीता है जी अरे भागवत गीता यार देवी भागवत पुराण है क्या बच बात कर रहे ये क्या है गायत्री के ध्यान प्राणायाम एक मिनट मैं पढ़ रहा हूं सतयुग में ब्राह्मण वेद के पूर्ण विद्वान थे उनके द्वारा निरंतर भगवती जगदंबा की आराधना होती थी भगवती का दर्शन करने के लिए उनका मन सदा लालायित रहता था गायत्री के ध्यान प्राणायाम और जप में अपना सारा समय व्यतीत करते थे हो गया जी गायत्री काप एक मिनट गायत्री का जप मां भगवती की निरंतर आराधना निरंतर ये है वेदों को पूर्ण विद्वान अब आप मुझे दिखा दो वेदों का पूर्ण विद्वान आपका रामपाल कहां है या फिर वेदों का पूर्ण विद्वान एक मिनट वेदों का पूर्ण विद्वान कबीर को भगवान कहने वाला कहां लिखा है बताओ अब आप ठर लीजिए आप आप ठर लीजिए थोड़ी सी मेरी बात को सुनिए उसम आपने जो दिखाया कि सतयुग में ब्राह्मण पूर्व विद्वान मानते जो देवी का पूजा करते थे लेकिन आपने ये नहीं दिखाया कि देवी की पूजा करने से क्या

02:02:57:00 मोक्ष होता है क्या उसको आप दिखाइए बात ये चल रही है तत्वदर्शी कौन है अभी बात ये चल रही है तत्वदर्शी कौन है विषय को मत बदलो अभी बात चल रही है तत्वदर्शी कौन है तुमने माना वेदों को पूर्ण रूप से जानने वाला तत्वदर्शी है हमने आपको दिखाया वेदों को पूर्ण रूप से जानने वाला मां भगवती की उपासना कर रहा गायत्री मंत्र का जाप कर रहा है यह दोनों चीजें आपका जो तिरछा दर्शी है जेल धाम में उसके पास नहीं है अब आप बताइए अपनी बात विषय को मत बदलिए तत्वदर्शी कहां लिखा है दो तरीके से बता दीजिए या तो बता दीजिए तत्वदर्शी रामपाल हैय लिखा हो या तो बता दीजिए तत्वदर्शी व है जो कबीर को भगवान मानता है कबीर की पूजा करता है और जो तत मंत्र देता है वो अ अभी तो हम देखो भाई आप विषयात करोगे हम लोग अब हो गए अभ्यास अब अभ्यस्त हो चुके हैं ठीक है विषयात मत करना मैं सिर्फ पूछ रहा हूं तत्वदर्शी रामपाल कैसे है वह बताओ कहां लिखा है हेलो हेलो गए टू स्टॉप द ट्रेन पुल द

02:04:12:12 चेन हा इनको जरा जुड़ने दीजिए इनको मैं बताता हूं कि देवी मोक्ष कैसे देती है इनको जरा जुड़ने दीजिएगा अभी भाग पेज मेरे को पेज खोलने में थोड़ा सा टाइम लग गया तथा कथित तत्वदर्शी स्वघोषित जगतगुरु जेल धाम में निवास करने वाले रामपाल दास जी के चेले के द्वारा पलायन किया गया ठीक है भाग गए इनका फंडा क्या है पता है बारीकी से समझिए जब इनको इनकी चीज का प्रमाण देंगे तो ये दूसरा प्रश्न करेंगे कि मोक्ष कैसे मिलता है और फिर हम इनको गायत्री के जब से मोक्ष भी दिखा देंगे देवी भागवत सेही

02:05:04:09 दे सुनिए होगा क्या सुनिए गोविंद जी जब हम इनको मोक्ष दिखाएंगे तो फिर य तीसरा प्रश्न कर देंगे फ फिर विषयात हो जाएगा एक बात पहले खत्म तो हो अभी बात चल रही तत्वदर्शी हमने प्रमाण दिखा दिया आपका प्रमाण कहां है भाग ही गए बताओ सर पर पांव रख कर के अब दोबारा मुझे लगता नहीं जुड़ने का साहस करेंगे हां भाई अच्छाई ये है इन सब चीजों की ये ज्यादातर जो प्रमाण है हमें रामपाल जी के वीडियो से ही मिल गए मैंने बताया नाय ये जो अभी दुर्गा देवी भागवत वाला प्रमाण है यह तो मैंने वहीं से लिया जहां पर वो यह बता रहे कि वो सतयुग के जो ब्राह्मण है वो राक्षस होंगे

02:05:54:13 थोड़ा स्क्रीन अगर मेरी बड़ी कर दे तो इनको मैं मोक्ष का जवाब दे दूं यह श्रीमद् देवी भागवत है नवा स्कंद है शेयर कर देता हूं आप पेज नबर बता दीजिए परनी नहीं पेज नंबर नवा स्कंद खोल लीजिए उसका पहला ही अध्याय जैसे इन्होने आज कहा ना कि पूरा दिखाइए यही हिम्मत पहले दिखाई होती तो आज नौ मत नहीं आती रामपाल जी होरा दिखा कौन सा पेज है इसम बस नवा प लिए प नवा आ ग आ वापस आ ग मोक्ष देखलो देवी की पूजा से मोक्ष देखलो

02:06:40:04 भैया मि दो मिनट रुक जा सब कुछ कहेंगे आप ही कहेंगे पढ़ लीजिए पले उसके बाद आपने कुछ का जवाब दिया जा रहा है पूर्वक आप देखिए कीजिएगा स्क्रीन को ऊपर नीचे मत कीजिएगा बस यही रुकिए कहीं मत कीजिएगा स्क्रीन को अच्छा यह जो बाबा जी है हमारे पास रामपाल जी के आए इनका कहना है कि जो देवी दुर्गा है वो काल ब्रह्म की पत्नी है ठीक है चलिए आज इनके दोनों क्लेम को उड़ा देता हूं य प्रश् को थोड़ा नीचे लाइए अंतिम भाग में और से पढ़ाइए य जरा सारा य बस बस यही पर य जहा अंडरलाइन हुआ है पढ़ना एक बार जो गणेश की माता भगवती दुर्गा है उन्हें शिव स्वरूपा कहा जाता है यह भगवान शंकर की प्रयश भार्या है नारायणी विष्णु माया और पूर्ण ब्रह्म स्वरूपिणी नाम से प्रसिद्ध ब्रह्मादेवी

02:07:51:18 है यश मंगल सुख मोक्ष और हर्ष प्रदान करना लो भाई मोक्ष मिल गया हे उनका स्वाभाविक गुण है स्वाभाविक गुण है मोक्ष देना हेलो कहां ग मोक्ष मिल गया मैं कहीं दूर नहीं गया हं आपके पास मे सुनेंगे कुछ अपना सुनाते रहेंगे आपको सुन रहा इनकी स्क्रीन बड़ी कर दीजिए इकी स्क्रीन बड़ी कर दीजिए वापस ले आइए नर्मल कर दीजिए मैं आपको सुन रहा हं बा जी अब दो बातें हो गई पहली तत्वदर्शी आपने माना वो है जो वेदों को पूर्ण रूप से जानता है हमने बताया वेदों को पूर्ण रूप से वो है जानने वाला जो मां दुर्गा की निरंतर आराधना करे गायत्री मंत्र का जाप करे और वैराग्य भी हो ठीक है जी अब दूसरी बात ये आपने कहा कि मोक्ष हमने मोक्ष भी दिखा दिया और गायत्री के जब से मोक्ष भी हम दिखा सकते हैं आपको अगर आप कहेंगे तो जी मैं प्रश्न मैं प्रश्न कर दूं फिर आप करिए अब हमने अपने पक्ष के संबंध में सुनिए हमने अपने पक्ष के संबंध में आपको प्रमाण दे दिया अब आप रामपाल के पक्ष में प्रमाण दीजिए कि तत्वदर्शी रामपाल कैसे है बताओ मैं पहले पहला

02:09:06:19 बात मैं ये कहूंगा कि मैं अभी मैं जो कटा था मेरा य लाइव तो मैंने जब ड हो रहा था तो मैं ड क्यों नहीं हो पा रहा भाई इसमें कारण क्या है क्या मैं बता देता हूं क्या बोल रहे हैं ये य मुझे कु सुना दे रहा है क्या बाबू रामकी रहा दोबारा तो क्यों नहीं हो रहा इसम कारण क्या है अड नहीं हो

02:09:51:13 अभी थोड़ी देर पहले एक मिनट मैं इनको इन्हीं की भाषा में जवाब दूंगा आप लोग रहने दिया करो मैं दूंगा इनको जवाब इ की भाषा में अभी थोड़ी देर पहले आप कह रहे थे कि मेरा बैक कैमरा ऑन हो रहा है तो मैं कट जा रहा हूं उसका क्या कारण था उसका तो मान लीजिए मेरे से कैमरा बैक नहीं हो मतलब तुम्हारे पर जब बात आ तो मान लीजिए और हम पर तुम आरोप लगाओगे हम मान ले तुम्हारी सब बातें मान ले वो तत्वदर्शी है वो भगवान है सब बात मान ले तुम्हारी हम जी जी जी अच्छा कोई बात नहीं मैं आपसे भी पूछता हूं मेरा मेरा प्रश्न क्लियर नहीं हुआ है आपको बताना पड़ेगा आप अभी सुनो प्रश्न क्या है वो समझ लो आप आपने कहा तत्वदर्शी वो है जो वेदों को पूर्ण रूप से जाने हमने आपको बता दिया वेदों से वेदों को पूर्ण रूप से जानने वाला कौन है जो मां भगवती की निरंतर आराधना करे और गायत्री मंत्र का जप करे अब आप बताओ कि तत्वदर्शी कैसे सि हुआ बताओ मेरा भी कुछ सवाल रहेगा खाली आप ही सवाल करेंगे एक सवाल आप करेंगे तत्वदर्शी सिद्ध करो ना तुम विषय बदलते हो भाई अभी बात चल रही थी त की

02:11:06:22 तुमने फिर कहा मोक्ष है जब मोक्ष दिखा दिया तो अब तुम और सवाल करोगे अब पहले अपने रामपाल के बारे में तत्वदर्शी पना उसका सिद्ध करो नहीं है व तत्वदर्शी है सिद्ध करो ठीक है ठीक है मैं ये कह रहा हूं कि एक सवाल आप करेंगे एक सवाल हम करेंगे ऐसा नहीं है कि सिर्फ आप ही आप सवाल करेंगे अभी आप जो तत्वदर्शी की बात चल रही है उसका उत्तर दीजिए फिर आप प्रश्न करिएगा जी आपने जो आप लोगों के अनुसार जो जो भी तत्वदर्शी है बताइए कि गीता अध्याय 15 श्लोक नंबर एक से चा से मेरे को डिटेल बताइए कि वो तत्वदर्शी कौन है जो इसको डिटेल बता देगा वो तत्वदर्शी आप हीने कहाना वो है जो वेदों को पूर्ण रूप से जानता हो अब मुझे आप दिखा दीजिए कि वेदों को पूर्ण रूप से जानने वाला कहीं पर लिखा हो कि वो कबीर को मानने वाला हो मान लूंगा आपकी बात मैंने आपको दिखा दिया वेदों को पूर्ण रूप से मानने वाला जानने वाला वह है जो दुर्गा जो दुर्गा की पूजा करता है निरंतर फिर चले अबब फिर आएंगे रोएंगे बोलेंगे जुड़ नहीं रहा हूं मैं हा देख लिया भैया तिचा दर्शी की पोल

02:12:24:12 मत मैं दर्शकों को बता देता हूं देखिए ऐसा है कि हम लोग नहीं जोड़ते हैं अगर बैक स्टेज पर 10 लोग हैं टोटल यहां पर तो उसके बाद जुड़ नहीं पाएंगे ठीक है तो आए दादू दास जी आए हैं उनको ले लीजिए बोलिए दादू दास जी जय श्री राम नमस्कार सर हां नमस्कार बताइए कबीर अविनाशी है अजर है क्या कबीर साहिब में लिखा है कि कबीर सा कबीर साब नहीं वेदों में प्रमाण है कबीर अविनाशी है क्या वेदों में भी प्रमाण है और गीता में भी प्रमाण

02:13:17:13 है क्या प्रमाण है भाई साहब आपसे मैं पूछ रहा हूं कहां चले गए दादू दास जी कैमरा दिखाइए कैमरा ऑन करिए लाइट कैमरा एक्शन जी मैं पूछ रहा हूं कबीर अविनाशी है क्या अजर है क्या अजर अजर है क्या कबीर शिवांशु भाई पहले इनको अजर का अर्थ समझा दीजिए दादू दस जी आप अपना पहले माइक ऑन करिए हा हेलो सर आपको अजर का अर्थ पता है क्या तो पूर्णता अमर होते हैं वो अजर अजर का अर्थ पता है क्या अजर अजर का अर्थ पता है क्या जर मतलब बुढ़ापा नहीं आना हा ठीक है बुढ़ापा नहीं आना तो इनको फोटो दिखा दो फट से भैया बिना देर

02:14:14:28 किए नारायण ये तो फोटो में फस गए यह तो ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपने लिए खुद ही इतनी खाया खोद रखी है कि हमें कुछ करने की आवश्यकता ही नहीं है तभी मेरे समझ में आया कि जो पवन दास है जिनको य गुरु द्रोही बोलते हैं वह जो कबीर दास की जो फोटो है पिक्चर है उसको ता है इसलिए फता हो सकता कि य कुछ य

02:14:51:28 मैं दिखा दूं मैं दिखा देता हूं नारायण सर्च अरे वही सर्च कर दीजिए ना य प सर्च कर दीजिए आ जाएगा फोटो भर भर के बुक केपर फोटो बनी हुई है मेरे दूसरी कमरे में पड़ी हुई थी बुक रुकिए रुकिए मैं कर देता हूं हा ये आ गया ये आ गया दादू दास जी इनको देखिए क्या यह कबीर है आप पहचानते हैं क्या इन्ह जी इनको पहचानते हैं क्या पहचानते हैं अच्छा इनको आप क्या कहेंगे बूढ़ा कहेंगे अधेड़ कहेंगे युवा कहेंगे किशोर कहेंगे बालक कहेंगे या शिशु कहेंगे क्या कहेंगे इसे अच्छा एक चर्चा हुई है गोरखनाथ जी की और कबीर साहेब जी की एक चर्चा हुई भाई साहब देखिए देखिए मेरी एक बात समझिए विषयात नो नॉट अलाउड विषयात नॉट अलाउड अभी जो चीज चल रही है क्या कबीर अजर है उसके अंतर्गत एक बात हो रही है यह जो व्यक्ति है

02:16:07:01 जो आपने देखा आपने माना कि पूर्ण ब्रम परमात्मा है अब ये जो कबीर आपको दिख रहे हैं क्या ये आपको बूढ़े लग रहे हैं युवा लग रहे हैं बालक लग रहे हैं किशोर लग रहे हैं अधेड़ लग रहे हैं शिशु लग रहे वो बताइए पहले प्रश्न से भागय मत देखिए व परमात्मा यहां पर जो अपना कोई सा भी यहां से 12 साल रहे साब आपसे पूछ रहा पहले तो य बता दोय लग क्या रहा है बूढ़ लग रहा है कि नहीं लग रहा है फिर बाद में बात करेंगे बूढ़ा है कि नहीं लग रहे है ना लग रहा है गुड बूढ़ा लग रहा है पॉइंट टू बी नोटे बूढ़ा लग रहा है हा अब बताइए यह अजर तो नहीं है य कौन सा स्वरूप

02:16:57:26 है देखिए परमात्मा कोई सा भी स्वरूप बना लेते हमारे लिए आते धरती पे सतलोक से चल साहब आपसे मैं पूछ रहा हूं यह परमात्मा का ओरिजिनल स्वरूप है कि नहीं है व जब चाहे तब अपनी दाढी रख लेते हैं निकाल लेते हैं अरे मैं मैं पूछ रहा हूं यह परमात्मा का ओरिजिनल स्वरूप है कि नहीं यह नहीं है ओरिजिनल स्वरूप है यह ओरिजिनल है तो यह ओरिजिनल स्वरूप बूढ़ा दिख रहा है और परमात्मा के लिए कहा गया है अजर उसका प्रमाण दिखाऊ

02:17:32:18 क्या किसने प्रमाण दिखाएंगे वेदों में दिखाइए वेदों में युवा ये कह रहे हो कि हमारा परमात्मा अजर नहीं है उस पर आयु का फर्क पड़ता है पड़ता सर आयु का फर्क [हंसी] पड़ता है कि नहीं पड़ता है एक बार और बता दो आयु का फर्क नहीं पड़ता है सर तत्व से थोड़ा बात करिए ना नहीं पड़ता है तो फिर ये बूढ़ा क्यों दिख रहा है सुनिए मेरी बात आप फोटो देख के उनको बता रहे हैं कि ये बूढ़ा दिख रहा है कि नहीं दिख रहा है आपने हम नहीं बता रहे आपने स्वीकार किया किय बूढ़ा दिख रहा है अच्छा शंकर जी की फोटो भी होती है वो भी तो बूढ़ दछ रहा मैं आपसे पूछ रहा हूं आपसे पूछ रहा हूं आपने स्वीकार किया ना कि ये बूढ़ा है बूढ़ा मेरे स्वीकार करने से लेकिन वो बूढ़े नहीं है वो युवा कबीर है ये बूढ़ा बूढ़ा है कि नहीं ये जो व्यक्ति दिख रहा है आपको ये बूढ़ा है कि

02:18:42:07 नहीं आगे बढ़ो ना सर आगे नेक्स्ट सवाल करिए ना नेक्स्ट सवाल क्यों करे पहले इसको इसको या तो मान लो कि हां जो कबीर है वो नहीं है अच्छा ठीक है सिद्ध करके बताइए मेरे को क्या क्या सिद्ध करू कि जरा नहीं है करके उनको बुढ़ापा नहीं है आप मुझे कसी से वेदों में जसे अरे भाई य आपको बूढ़ रहा बूढ़ा लग रहा है कि नहीं लग रहा है कबीर लग रहे है तो जब जब कबीर आपने बूढ़ा स्वीकार कर लिया तो फिर यह कहां से हुआ वो अजर कहां से हुआ और ईश्वर तो अजर है अजर अमर अविनाशी

02:19:22:13 अच्छा तोय क आपके अकॉर्डिंग जो ईश्वर है वो अजर नहीं है ये मान लो फिर हम आपको वेदों से प्रमाण देंगे कि हा ईश्वर अजर है या तो यह कहो कि ईश्वर जो है अजर नहीं है फिर हम वेद खोलेंगे ईश्वर तो है ईश्वर अजर है और कबीर अजर नहीं है इसका मतलब कबीर ईश्वर नहीं है चलो मान लेते हैं कुछ देर के लिए मत करो दूसरे लोग भी लाइन में है टाइम वेस्ट मत करो अगर आपके पास उत्तर है तो बताओ खामा खा टाइम वेस्ट मत करो मैं आपसे पूछ रहा हूं कि जो कबीर है वह अजर है कि नहीं आपने कहा नहीं व बूढ़ा दिख रहा है व अजर नहीं सिद्ध हुआ अब आप कह रहे हो ईश्वर अजर है तो या तो ईवर को अजर मत मानो एक मिनट या तो ईश्वर को अजर मत मानो या फिर कबीर को ईश्वर मत मानो दो में से एक बात हो सकती है बताइए कबीर को क्या मानते भाई साहब फिर आप बात चेंज कर रहे हैं कबीर बूढ़ा दिख रहा है ना आपको कबीर बूढ़ तो अजर नहीं है

02:20:35:06 ी फिर आप अरे फोटो तो फोटो बनी है ना सर इसका मतलब आप यह कह रहे हैं कि यह जो फोटो दिखाई जा रही है यह ओरिजिनल फोटो नहीं है परमात्मा की यहां पर व ला करके गए धरती मैं आपसे पूछ रहा हूं यह जो फोटो दिखाई जा रही है क्या यह ओरिजिनल फोटो है परमात्मा की यह ओरिजिनल नहीं है ना लेकिन य तो ओरिजिनल नहीं है पॉइंट टू भी नोटे भाई देखो ओरिजिनल क्या है फिर और कहां है

02:21:18:27 दिखाओ रिजन तो आपके ब्रह्मा विष्णु महेश के फोटो नहीं है लेकिन हमारे पास अभी जो बात हो रही है ना वो बताओ आप जब अपनी चीज सिद्ध करने की बात आएगी हम एक एक चीज खोल के कर देंगे बिल्कुल जो परमात्मा है व वहां से सतलोक से स शरीर आता है हा स शरीर जाता भी है हा तो स शरीर आता है तो व अपने यह तो नहीं लिखा कि व अपने शरीर को बदल के आता है

02:21:51:20 बदल के आते हैं बदल के आते हैं कि नूर को कम करके आते हैं नूर को भी कम करके आते हैं फिर यहां पर लीला करते हैं जैसे आने वाली बात लिखी है आपकी किताबों में पहले तो यह बताओ लेकिन यहां पर मृत्यु लोक में आते हैं तो अने चीज क्लियर करते चलोगे बात अच्छे से हो जाएगी मैं पूछ रहा हूं यह बदल के आने वाली बात आपके उसम कहां लिखी हुई है लिखी ना है लेकिन चलो यही बता दो कि ये जो किताब में छपा है जिसके नीचे पूर्ण ब्रह्म पर परम ब्रह्म परमात्मा लिखा है यह ओरिजिनल स्वरूप नहीं है भगवान का यही लिखा हो दिखा दो कहीं लिखा हो तुम्हारी किताबों में स्वरूप के बा ये मतलब चित्र उन्हीं का ही है वो मैं आपसे पूछ रहा हूं यह जो चित्र है यह ओरिजिनल भगवान का चित्र नहीं है पहले तो यह दिखाओ तब तो हमारी जीत हो जाएगी अगर आपने यह दिखा दिया तो मैं कैसे दिखाऊ मेरे पास आपको नहीं पता आप अपने मन से बोल रहे हैं यह कबीर जी है और पूर्ण पात्मा है यह उनका ओरिजिनल स्वरूप है कि नहीं

02:23:07:07 है है देखो भाई व्यक्ति कैसे टाइम पास करता है देखो टाइम पास तुम कर रहे हो भाई टाइम पास कर रहे हो अभी कह रहे थे कि नहीं ओरिजनल स्वरूप नहीं स्वरूप है सुनो सुनो तुम लोग सिर्फ श्री राम की कथा फलत देखो फालतू फालतू बात नहीं फालतू बात नहीं विषयात नहीं विषयात करोगे हटा दिया जाएगा विषयात करोगे हटा दिया जाएगा विषयात करोगे हटा दिया जाएगा मैं कह रहा हूं जवाब देना चाहिए काम की बात करो काम की बात करो आपने पहले कहा वो ओरिजिनल स्वरूप नहीं है अब कह रहे ओरिजिनल स्वरूप है अगर ओरिजिनल स्वरूप है तो क्या ये स्वरूप अजर है अजर भी है और अमर भी है अभी तुमने खुद कहा था कि यह जो है बूढ़ा दिख रहा है

02:24:09:07 मुझे एक बात पर नहीं रहते हैं ये यह केवल पता हैय ये अपने वो तत्वदर्शी जो रामपाल जेल धाम में है ये तथाकथित जो संत है यह उनका पक्ष रखने नहीं आए हैं यह अपनी अपनी वर्चस्व सिद्ध करने आए यह गुरु यह गुरु भक्त भी नहीं है कि ये हो गु गुरु क्योंकि ये उसके सिद्धांत को भी ब्रेक कर रहे हैं य कर और ये भी तो बोल रहा है कि इनके सारे सिद्धांत इनकी पुस्तक में भी कहीं नहीं लिखे हुए खुद ही तो बोल रहा वो नहीं लिखा हु जब वो कह ही नहीं रहा कि व यह नहीं कह रहा कि व कबीर जो है नकली रूप है उसका लोग कह रहे अपनी जीत के लिए नकली है

02:24:54:28 यानी इनके इनके ग्रंथ कपलीट नहीं है इनके ग्रंथ भी कंप्लीट नहीं है पहली बात तो य सिद्ध हो जाता है और इतने भी कंप्लीट नहीं है कि इनके अपने ही जो कबीर जी है उनका स्वरूप का वर्णन कर सके हा ठीक है तोय कौन से कौन से ग्रंथ है भाई और कौन सा ग्रंथ पढ़ के आप अपने आप को धोखा दे रहे हो क्या मानव शरीर मिला हुआ है सत्य जानने के लिए या कोई ऐसी व्यर्थ की चीज करने के जब तुम्हे खुद पता है कि तुम्हारे ग्रंथों में पूर्ण जानकारी नहीं है तो क्यों अपना जीवन व्यर्थ कर रहे हो और अपने साथ हजारों का भी कर रहे हो पागल हो गए पागल हो गए बिल्कुल पागल हो गए कोई मतलब नहीं है पूर्ण ब्रह्म से धर्म से कोई मतलब नहीं है पागल हो गए

02:25:38:20 य क रहे हो अपनी बात पूरी कर कह रहे हो कि बाबा जी ने हमारे भंडारा लगाया हुआ है अरे भाई तुम्हें यह नहीं पता है कि जानवरों के चार लक्षण कौन से हैं खाना ना यह करना ठीक है यह जो मैथुन क्रियाए है और यह सब करना यह जानवरों के भी काम है मनुष्य शरीर तुम्हें क्यों मिला भंडारा खाने के लिए या सत्य जानने के लिए कैसी बात है वहा पर भंडारा लगा हुआ तो देखो वो सत्य हो जाता उससे कभी तो सोचो कभी मैं एक बात कह रहा हूं तिरुपति बालाजी में पूरे साल भंडारा चलता है क्यों नहीं मान लेते विष्णु भगवान को

02:26:18:03 परमेश्वर जब है नहीं तो कैसे मानेंगे परमात्मा होगा तो मानेंगे क गए पहले फोटो पहले अपना मुह दिखाओ पहले मुह दिखाओ अपना मुह दिखाने लायक तो है इतना भी क्या शरमाना को गोल्ड साबित करना चाहते है हा भाई कबीर का वो ओरिजिनल फोटो है अभी आपने माना अब ये बताइए कि वो बूढ़ा दिख रहा है यानी कि आपका जो ईश्वर है व अजर नहीं है हेलो भाई साहब देखिए चलते फिरते बात मत करिए एक जगह बैठ जाइए और चेहरा दिखाइए चेहरा यहां पर लाइट नहीं सर देख तो लाइट में आके बात करिए भाई साहब ऐसे बात नहीं कर पाएंगे क्योंकि हमें जो है कंटेंट नहीं मिलेगा फ जगत को दिखाने के लिए जगत वाले हैं ना हम लोग जगत वाले सतलोक वाले आप

02:27:19:04 लोग हमको जो है शर्ट हमको शॉर्ट बनाने के लिए आपका चेहरा चाहिए होगा अरे सतलोक के ऊपर तो एक नई स्टोरी डाल दी उसने अनामी लोग हा दोबारा बैक इन एक्शन बाबू रामदास जी बैक इन एक्शन जी बाबू राम जी वेदों को पूर्ण रूप से जानने वाला कौन है जी सर आप ही सवाल नहीं करें मैं भी सवाल करूंगा पहले मेरा सवाल रहे पहले वो एक बात जो जो बात पहले चल रही है पहले वो खत्म होगी तब अगला सवाल आएगा वेदों को पूर्ण रूप से जानने वाला कौन है अगर तत्वदर्शी का मतलब है वेदों को पूर्ण रूप से जानने वाला तो हमको बताओ वेदों को पूर्ण रूप से जानने वाला कौन है बस वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज है इसके अलावा कोई नहीं है कहां लिखा है कहां लि नाम थोड़ी लिखा रता है उस नाम यानी आप जो है शास्त्र सम्मत भक्ति नहीं करते पॉइंट टू बी नोटे ये लोग बहुत चिल्लाते हैं शास्त्र समत भक्ति पॉइंट टू ब नोटे हम लोग शास्त्र समत भक्ति करते हैं ऐसा कैसे लिखा है वेदों को पूर्ण रूप

02:28:34:06 से जानने वाला संत रामपाल है बताओ वो किसी को नहीं लिखा किसी के नाम थोड़ी लिखा है आप लोग का भी नाम नहीं लिखा उसम उस दो ची उसमें दो चीज ऐसी लिखी है जो रामपाल में नहीं है पहली मां भगवती की निरंतर आराधना करने वाला दूसरा गायत्री का जप करने वाला जी जी जी हम हमने य सिध कर दिया कि वेदों को जो जानने वाला सुको एक मिनट वेदों को जो पूर्ण रूप से जानने वाला है वो रामपाल तो नहीं है अब आप कर रामपाल कैसे तर्शी कोई बात नहीं हम मान लेते नहीं है लेकिन अब आप हमारा भी सवा नहीं ऐसे नहीं ो के मानो थोड़ी देर के लिए नहीं ठोक के मानो आज मैं स्वीकार करता हूं कि रामपाल तत्वदर्शी संत नहीं है ो के [संगीत]

02:29:32:19 मानो भागत आपको हम कैसे मान लेंगे भाई साब देवी भागवत को आपके तत्व ा दर्शी संत नहीं मानते क्या इनको भैया प्रमाण दिखाओ देवी भागवत प्रमाण है कि नहीं सि आपका प्रश् सुनिए पहली बात तो ये है सुनिए जब तत्वदर्शी की बात आई तो आपने कहा 15 एक में लिखा है तत्वदर्शी कौन है जबक वहां तत्वदर्शी नहीं लिखा था जो पेड़ को तत्व से जानने वाला है उसके बारे में लिखा था पेड़ को पेड़ को तत्व से जानने वाला उसको आपने कह दिया त एक मिनट उसको आपने कह दिया एक मिनट उसको आपने कह दिया तत्वदर्शी अब उसी अगर वो तत्वदर्शी है तो उस तत्वदर्शी की पहचान बताए गई कि वो वेदों को पूरा जानने वाला है वे को पूरा जानने वाला शास्त्रों में ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती को गणेश को भगवान मानने वाला है तो हमने आपको उसम से एक प्रमाण दिखा दिया कि वेदों को जो पूरा मान पूरा जानता है पूर्ण विद्वान है वेदों का वह मां भगवती की निरंतर आराधना करता और गायत्री का जाप करता है ठीक है दिखाइए यदि उस

02:30:47:26 पेड़ को तत्व से जानने वाला त है और तत्वदर्शी वही है जो वेदों को पूर्ण जानता है तो वो रामपाल है वेदों को जानने वाला या फिर यह दिखा दीजिए कि कबीर को भगवान समझने वाला वेदों को पूर्ण रूप से जानने वाला है मान लेंगे दिखाइए है ह हमारा प्रश्न है भाई साहब देखिए प्रश्न नहीं पहले एक चीज खत्म करिए तत्वदर्शी का चैप्टर चल रहा है अब पहले आप वो क्लियर करिए पहले आप वो क्लियर करिए कि वेदों को पूर्ण रूप से जानने वाला जो है वो या तो कबीर को भगवान कहने वाला हो या स्वयं को भगवान कहने वाला हो या फिर व वो जो जेल धाम में बैठा हो या फिर जिस पर मुकदमा चल रहा हो य जो भी मुकदम रामपाल जी पर चल रहे या फिर जो रामपाल हो ऐसे बताइए सि हो जाए जेल जो जेल धाम बैठे वही है तत्वदर्शी हा तो वो लिखा दिखाओ भैया लिखा शस्त्र में दिखाओ जैसे हमने दिखाया

02:31:50:03 वो किसी भी वेद में ग्रंथ में नहीं लिखा है किसी का नाम तो आप ही लोग का नाम नहीं लिखा उका लि बो यानी कि आप शास्त्र के बिना यह मानते हैं कि वह तत्वदर्शी है शास्त्र के बिना पूरे शास्त्र को खोल कर रख दिया आप कैसे कह रहे हैं भाई साहब आपसे शस्त्र में खा लिखा दिखाओ वेदों को पूर्ण रूप से जानने वाला रामपाल है वेदों को पूर्ण रूप से जानने वाले म में निवास करने वाले रामपाल है आप दिखाइए मुझे या फिर वेदों को जानने वाले पूर्ण रूप से जेल धाम में निवास करने वाले कबीर को भगवान कहने वाले रामपाल है ऐसे दिखाइए चलिए नेट कटने लगा तो का नेट कटने लगा हेलो जी जी नेट कट रहा था ये क रहे हेलो क्या आपके पास आपके पास क पर प्रमाण है भाई साहब कि तत्वदर्शी जो है वह पूरा वेदों को जानने वाला जो है वह रामपाल है कहीं प्रमाण है उसमें ना तो आप लोगों का नाम लिखा हुआ है ना तो उनका नाम लिखा उसम य लिखा

02:33:05:04 हु है पास इतना है ना गायत्री का जप करता हो हम कह रहे सुनिए गायत्री का जप करता हो और देवी मां की आराधना करता ह क्या ये दोनों चीजें रामपाल में है सिर्फ आपका प्रश्न नहीं रहेगा प्रश्न मेरा भी रहेगा आप जबरदस्ती क्यों कर रहे भा करो ना तत्वदर्शी हेलो ये पहले क्लियर तो करो तरा प्रश्न य है अरे भाई प्रश्न मैं पूछूं मैं मैं आपको प्रश्न करने मैं प्रश्न करने को कहूंगा मैं प्रश्न पूछूंगा आपसे आपका प्रश्न क्या है अभी आप ये चीज क्लियर करिए कि जब हमने बताया कि भैया वेदों को पूर्ण रूप से जानने वाला वो है जो देवी मां की आराधना करेगा गायत्री का जप करेगा तो अब आप मुझे बताइए कि आपके जो रामपाल है वो तत्वदर्शी क्यों मान लिए जाए जबक वह गायत्री का जप नहीं करते हैं वह देवी मां की निरंतर आराधना नहीं करते हैं

02:34:05:00 बताइए संत रामपाल जी महाराज देवी का भी निरंतर अर्थना करते हैं गायत्री का भी जाप करते हैं आप ऐसे कैसे समझिए नहीं करते चलो तालिया बजाओ भैया तालिया बजाओ तालिया बजाओ भैया एक बार और रिपीट कर दीजिए संत राम महाराज देवी मां की निरंतर आराधना करते हैं मां भगवती की चलिए कहिए मेरी बात सुनिए संत रामत राम हम क्लियर सुन नहीं पाए हम क्लियर सुन नहीं पाए जी जी संत रामपाल जी महाराज निरंतर देवी मां की आराधना करते हैं गायत्री का जप करते हैं संत रामपाल जी

02:34:47:07 महाराज उनके मत कर हमको यह बताइए एक बार क्लियर बोलिए क्या संत रामपाल जी महाराज निरंतर देवी मां की आराधना करते हैं और गायत्री मंत्र का जाप करते हैं यह बताइए बोलिए संत रामपाल जी महाराज जो हम लोग को मंत्र दिए हैं उसमें देवी का भी मंत्र है ब्रह्मा विष्णु महे का मंत्र नहीं बोलेंगे सब बोल देंगे अब थोड़ी देर गोविंद जी आपल कर भैया देवी का मंत्र दिया है इन्होने कौन से ग्रंथ में लिखा हुआ है ट के अलावा देख आप देखिए इनसे कुछ जानकारी लेता देख लिया भैया हेलो रामपाल के फॉलो देख लो ऐसे ही सच्चाई पर आना पड़ेगा जब बाल की खाल निकलेगी एक एक अपनी बुद्धि में थोड़ा बहुत विवेक बचाओ तो सोचो उन्हीं पन्नों से उन्हीं श्लोकों से जिन श्लोकों को तुम स्वीकार कर रहे हो उन्हीं से बता रहे औरक लिखा है उसी श्लोक में उसी भगवत गीता में ये कौन होते हैं संस्कृत का अर्थ करने वाले कौन होते हैं अभी संस्कृत में दो मिनट बोलने को दे दिया जाएगा बोल नहीं

02:36:02:09 पाएंगे न्यूमरस को न मोरिस बोलते हैं इंग्लिश में न्यूमरस को न मोरिस बोलते है रा बाराम जी ये जो देवी आद अरे सुन लीजिए सुन लीजिए ना आ रहा उसी पर आ रहा दो मिनट शांत रही इतना जल्दबाजी नहीं है कोई कहीं नहीं भाग रहा य जो देवी आदि के व मंत्र दे वो कौन से ग्रंथ से देते हैं कौन सा शास्त्र है व 18 पुराण होंगे ठीक है या वेद होंगे ठीक है आपको पता है श्लोक और मंत्र में अंतर क्या होता है वैसे जी जी हम उसको आप ही बताएंगे लोक और मंत्र में क्या [संगीत] अ जी एक बात आपसे निवेदन करूंगा विषय बदल जाएगा ये बात क्लियर नहीं हो पाएगी आप उस उसी

02:36:53:04 ये लोग क्या करते जैसे ये वाली बात खुलने लगी अगले अगले ल वो बात लने लगी उससे अग ल क्लियर होता नली स्कार कर लीजिए आप या तो यह मानिए कि जो आपके रामपाल है भगवती के भक्त हैती के भक्त यन्ने मान लिया रिकॉर्डिंग हमारे पास ी एक बार और एक बार और क्लियर कर दे जरा जनता देख ले जनता देख ले जरा जी जी जी जी मैं क्लियर कर रहा हूं मैं क्लियर कर रहा हूं संत राम अरे स्क्रीन दिखाइए स्क्रीन क्यों हटा रहे हैं स्क्रीन दिखाइए हां ये क रहे कि संत रामपाल जी महाराज देवी का भी ब्रह्मा विष्णु महेश का भी मंत्र देते हैं अपने भक्तों को हम लोग प्रतिदिन जाप करते हैं हम यह कह रहे हैं देवी मां की नित्य आराधना करते हैं क्या वो अब उसको उनसे पूछना पड़ेगा करते हैं नहीं करते हम उसको कैसे बाप बता तो फिर तोर पूछ के आइए या तो यह मानिए कि नहीं करते हैं पूछ के आइए उनसे पूछेंगे तो फिर आप चले जा बैठ कर चर्चा कर लीजिए ठीक है अब यहां प आपकी बात हो गई अब आप अपनी बात बोल सकते हैं वैसे अभी

02:38:08:07 आपने बिना पूछे मान लिया कि वो देवी मां की आराधना करते की निरंतर आराधना नहीं करते हैं बताइए संत रामपाल जी महाराज का निर ना करते हैं गायत्री का भी जाप करते हैं आप े कैसे समझ नहीं करते ठीक है प्रश् गोविंद जी इनको प्रश्न पूछ लेने दीजिए हो गया क्लियर हो गया पूछिए पूछिए अरे बोलिए वो ये सोच रहे हैं ऐसा ना हो एक और कंट दे द मैं इनको सही से चल नहीं रहा वो नहीं

02:38:58:19 चलेगा अरे वो कई लोग जुड़ना चाह रहे हैं तो नहीं चलिए ठीक है आप फिर बाद में आइए हां भाई कौन है योगेश योगेश को लीजिए पहले मयूर चौहान है और कौन है जोगेश जी बताइए मूट कर अपने आपको को अन म्यूट कर लीजिए योगेश जी एक जगह बैठ जाइए जय श्री राम शव जय श्री राम जय श्री राम यह जो कहते ना सतयुग में मतलब कबीर ने अवतार लिया तो इनका मतलब कोई भक्ति क्यों नहीं

02:39:37:08 करते अरे वो सत सुकृत नाम से मतलब अवतार लिया था ना ये कबीर ने तो इनकी कोई भक्ति नहीं कर पतार लिया ना [प्रशंसा] की भक्ति क्यों नहीं करते हा शलेश पुरी जी वापस आए आज शलेश पुरी जी वापस

02:40:09:06 आए सुनिए योगेश कौन है दास जी कौन है ये शलेश चौहान जी आपको कोई विशेष बात कहनी हो तो बताए बताइए अरे मुझे वो ये कबीर सागर में है ना ये कहते ना मतलब संत मतलब संत क्या रामपाल को कहते ना मतलब 500 साल 55 क्या था वो मतलब बाद में कबीर मतलब कबीर का चेला आएगा सतनाम देने योगेश जी आपकी बात इनको समझा देता हूं मैं आपकी बात इनको समझा देता हूं दरअसल है क्या कि इन्होने अपने पुस्तक में लिखा है कि सतयुग में कबीर जी आए थे सत स्वीकृत नाम से ठीक है त्रेता में आए वो के नाम से द्वापर में वो किसी और के नाम से आए तो ये पूछ रहे हैं कि ये जो उनके रूप है जो मुनंदर है या सत सुकृत है सतयुग वाले तो उनकी आराधना क्यों नहीं होती है हमारे अनुसार हा वह आराधना सीधे एक ही की होती है रामपाल दास जी यह देख लो जो इस समय बीमार पड़े थे अभी कुछ दिन पहले आंखें सूझी हुई थी गाल और मुह सब सूजा हुआ था अभी लास्ट मैंने वो देखा वो एकम

02:41:20:10 द्वितीय चैनल है उस पर मैंने देखा लास्ट एपिसोड जो ऐसे ही सामने आ गया था तो उसमें देखा कि यह इनका इंटरव्यू चल रहा है प्रेस वाले इंटरव्यू ले रहे हैं इनका और उसमें वो कह र भाई बीमार था में सही हो गया चश्मा लगाया आंखों पर आंखों पर चश्मा कब लगता है पाड़ी जी आपके चश्मा लगा हुआ है आप बताए चश्मा तभी लगता है जब नजरें कमजोर हो जाती है नजर कम हो जाती है शक्ति हीनता शक्तिमान में शक्ति हीनता आती है तब और हम तो साधारण मनुष्य हैं वो तो तत्वदर्शी थे कबीर का अवतार थे उनको कैसे लग गया चश्मा आज मुझे लग रहा है शैलेश पुरी जी बहुत तैयारी के साथ आए

02:42:12:26 हैं सही बात है बोलिए शैलेश पुरी जी योगेश जी आपको कुछ नहीं कहना है तो आप डप हो सकते यो जी आपकी बात हो गई वो अपनी मनमानी करते हैं शास्त्र समत कुछ नहीं करते वो उन शास्त्रों को भी नहीं मानते जो शास्त्र व मानने का दावा करते हैं नहीं नहीं अगर कोई रामपाल चले आए तो सुनाई नहीं दे रही आपकी आवाज एक तो आपके

02:42:47:03 पीछे एक जग पले होके बात करिए हा वो घ इधर उधर हां हां हां मैं क्या कह रहा हूं तो पय भक्ति नहीं करते बताते हम भक्ति कर योगेश जी आप रविवार को आ जाइए ठीक है रविवार को बात करते हैं आपसे है ना ठीक है हां हां ओके ओके ओ जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जिनको मैं कहूंगा कि मयंक जी आप थोड़ा सा बता दे कोई विशेष प्रयोजन हो तो थोड़ा सा स्क्रीन खाली करें ना होता क्या है कि चेहरे ज्यादा छोटे होते हैं ना तो शॉर्ट बनाते समय पिक्चर क्लियर नहीं आती है जी आप अपनी बात रख दे लेश जी पाच मिनट दीजिए मुझे मैं आपको लेता हूं जी कोई बात नहीं भैया मैं निकल जाता हूं अभी आप बात कर लो इनसे हा थोड़ा चेहरे बहुत छोटे हो जाते हैं ना तो वो रील बनाते टाइम वो बड़ा करना पड़ता है पड़ जाता है चेहरा ठीक है जितना कम से कम हो सके जी मुझे तो सिर्फ इतना याद आ रहा है वो कहावत नहीं आती अंधेर नगरी चौपट राजा नका य हाल है

02:44:02:22 य तोते बन गए जिनको सिखा दिया गया बस यही करना है वह तोते बन गए बाकी इनका खुद का जो स्व विवेक है ना खत्म हो गया चलिए कोई नहीं शायद जाग जाए भाई है हमारे कोई नहीं मुझे मैं हट जाता हूं कोई बात नहीं जी जी जी शैलेश पुरी जी जीम बोलिए जी ब बताइए सर क्या कबीर अजर है

02:44:44:25 अजर हालचाल लेने आ क्या बताइए क्या देखो सर जी पहले तो ये मेरे को एक चीज आपकी डिबेट में थोड़ी सी ठीक नहीं लगी हम जैसे अपन परमात्मा के ज्ञान की चर्चा कर रहे हैं जी परमात्मा तो सभी के लिए पूजनीय होते हैं कोई किसी भी रूप में पूज रहा है कोई किसी रूप में पूज रहा है तब देखिए आपके द्वारा बताई गई धारणाएं हमारे लिए तब सम्माननीय नहीं रह जाती जब आप हमारे हमारे द्वारा आस्त जो चीजें हैं उनका मजाक उड़ाए दीपावली का मजाक उड़ाए दुर्गा माता का मजाक उड़ाए इसलिए हमसे हमने जो व्यवहार किया बहुत मर्यादित किया है तो इसलिए हमसे तो यह सवाल करने का आपका कोई अधिकार है ही नहीं हम बहुत म आपके आगे आप आप तो उन किताबों को बेच रहे हो बांट रहे हो जिन किताबों में हमारी मां का अपमान लिखा हुआ है देखो अगर सर ऐसा है तो तो मैं अभी लेफ्ट हो जाता हूं आप आप अगर आप ये सवाल लेकर आए हैं कि देखिए मुझे आपकी डिबेट में ये नहीं अच्छा लगा वो नहीं अच्छा लगा तो आप जा सकते हैं नहीं

02:45:59:28 तो सुन तो लीजिए बो है तो आपको जो आपकी जो किताब है वो सबसे पहले जलानी चाहिए जिसमें दुर्गा माता के माले में भद्दी बात लिखी हुई है आपको अपना एमपी चैनल है सुनिए सुनिए आपको आपका जो एमली फास्ट चैनल है वहां जाकर के प्रतिकार करना चाहिए भाई देखो दिवाली तुम्हें नहीं बनानी मत बनाओ मजाक मत उड़ाओ दीपावली का तुम्हें गोवर का सम्मान नहीं है तुम्हें गणेश का सम्मान नहीं है मत करो मगर मजाक मत उड़ाओ तब हमसे आक के आपका य कहना उचित बनता है हम तो तब भी शब्दों की मर्यादा रख रहे

02:46:37:03 हैं पहले पहले पूरा सुनिए मैंने पूरा बोलही नहीं पाया मैं अपनी बात खत्म करता फिर आपने ही बोलना ठीक है मैं आपको बी बोलिए सुंदर सुंदर जी है ना हमारे जैसे कि एक वो प्रेमानंद जी है ठीक है उन्होंने भी दिवाली के लिए कुछ कहा था मैं उन्होंने क्या कहा था वो सुना दीजिए उन्होंने इतनी बात दिवाली केवल और केवल पटाखे आदि जलाने तक सीमित ना रखिए उनको कम करके ध्यान को ऊपर बढ़ाइए हरि का चिंतन करिए पूरा परिवार बैठकर हरि का भजन करिए हमने तो नहीं उनका कोई वो किया हालांकि उन्होंने भी अगर देखा जाए तो दीपावली का वैसे ही विरोध किया था लेकिन उन्होंने बताया कि सत्य क्या है आप लोगों के साथ दिक्कत क्या है आप पूरे त्यौहार को ही निंदनीय बताते हो ठीक है और आप निंदा पर ध्यान देते हो अब आप बोलिए मैं नहीं बोल अभी अभी भी इस समय छट पूजा का अपमान चल रहा है एक और बात इसम जोड़ देता हूं दिवाली के अवसर पर हम भगवती माल मा लक्ष्मी की आराधना करते हैं उनका आवाहन करते हैं उनकी प्रांत प्रतिष्ठा करते हैं और फिर उनकी आराधना करते हैं और उनसे उनसे य रिक्वेस्ट करते हैं कि वो यहां रह जाए भगवान गणेश के साथ और बाकी जो देवताओं का आवान कि होता है उनको अपने यथा यथा स्थान पर जाने के लिए उनसे प्रार्थना करते

02:47:52:09 हैं ठीक तो उसम भगवती की उपासना होती है उस समय रात में शाम को ठीक है यह सिर्फ पटाखे फोड़ना लाइट जलाना मिठाई बाटना नहीं है मेन जो कार्य है वो भगवती की आराधना ही है उस समय ठीक है मेरी बात भी हो गई है कोई जो एक मूर्ख है वो बारबार कुछ लिख रहा है अ ब्रह्मा गए 4 कोटि कन्हैया सात कोटि य वो सब लिख रहा है अरे मूर्ख यहां पर आकर के बात करना क्या हो गया पन में मा माता जी ने निष्ठा पूर्वक नहीं ले जी बोलिए ऐसा जी देखो वोह जो बोल रहे हैं आप आप जी को मैं डिबेट में आया हूं थोड़ा सा टाइम दीजिएगा प्लीज बोलिए मैं अपनी बात अभी पूरी नहीं कर पाई आपने का मैं यह कहना चाह रहा था कि जैसे आप डिबेट करते हो अच्छी चीज है होना चाहिए परमात्मा के ज्ञान के लिए डिबेट होना चाहिए जी लेकिन लेकिन जैसे परमा के डिबेट में अगर कोई हंसता है उसका मजाक बनाता है तो यह ठीक नहीं अरे भैया इनको जरा एक क्लिप दिखा दो उनके हसने वाली एमपी फास्ट वालों की और रामपाल जी के रामपाल जी की क्लिप दिखा दूं वो वाला दिखा दो ये हो गया ना इनका बाप वो वाली क्लिप दिखा दो अगर हो

02:49:07:21 तो अभी मैं कोई क्लिप नहीं देख रहा अभी मैं कोई क्लिप नहीं रहा आपको हमारा हसना दिखाई दे रहा है रामपाल दास के द्वारा मजाक ाना स्वीकार नहीं दे रहा दिखाई नहीं दे रहा बोल रहे थे आप बोल रहे थे कि संत रामपाल जी महाराज जो है दुर्गा जी का अपमान करते हैं मैं देखिए एक ॉ आपने छेड़ा है तो उस टॉपिक की बाल की खाल निकले उसके बाद मले में जाए या तो आप कए मुझे टॉप बात नहीं करनी ये अपना पवित्र सद ग्रंथ है ठीक है जी और हम इसको बहुत ही आदरण की दृष्टि से देखते हैं हमारे गुरुदेव जी देखते हैं हमारे गुरुदेव जी ने इनका आदर करना सिखाया है हमको भाई साहब सुनिए अभी एक बात चल रही है कि आपके जो गुरुदेव है उनको आपने गुरुदेव माना क्यों है यह बताइए क्यों माना है ये ये ये अच्छा यह कोई तर्क वाला प्रश्न नहीं है जी क्योंकि किसी को हम जब गुरु बनाते हैं तो उसका आधार होता है ना कुछ कि हम किसी को गुरु क्यों बनाएंगे हा उसका आधार सद ग्रंथ होते हैं सद ग्रंथ होते हैं तो सद ग्रंथ में कहां लिखा है रामपाल दास जी को गुरु बनाओ नहीं सद ग्रंथ के अंदर यह लिखा है कि वह गुरु है जो शास्त्र के अनुकूल साधना करवाए

02:50:22:28 हा शास्त्र के अनुकूल तो शास्त्र के अनुकूल मुझे बताओ तत्वदर्शी कैसे है यो जो गुरु शास्त्र के अनुकूल साधना करवाता है सभी शास्त्रों में मैं पूछ रहा हूं वो तर्शी वो तत्वदर्शी कैसे सिद्ध हुए शास्त्र के अनुकूल वो बताइए वही बता रहे हैं वही बता रहे हैं यही अपना जो पवित्र ये अपना जो पवित्र देवी भागवत है ना हमी किसे बताएंगे आपको ये थोड़ा चैप्टर बदल रहे हैं आप नहीं अरे क्या बात करते हो आप भाई तत्वदर्शी तत्वदर्शी आपने 15 एक में माना है ना सुनो जी सुनो हम सुनो जी ऐसा है जी तत्वदर्शी तत्वदर्शी का तो हमारे सभी पवित्र सद ग्रंथों में प्रमाण है ऐसा नहीं है कि कोई एक गीता जी के अंदर हो के एक वेद के अंदर ही हो ऐसा नहीं है हमारे जितने भी हमारे जितने भी आदरणीय सद ग्रंथ हैं चारों वेद हैं और अपना गीता है पुराण है बाइबल है पुराण है हां जी बाइबल बिल्कुल आपको एलर्जी हो अब अब अब आप यह दिखाइए कि देवी भागवत से आप क्या दिखा रहे हैं वो दिखाइए हम य जैसे आपने अभी बताया था कि संत रामपाल जी महाराज तत्वदर्शी कैसे

02:51:39:08 हैं बताओ कैसे देखो ऐसे है मैंने अभी मैंने अभी अपना जो पवित्र देवी प्राण है उसका यह प्रश्न नंबर 571 खोल रखा है खोल लो भैया 571 क्या लिखा है पहले पढ़ के बता दीजिए इसमें एक प्रकरण है देवी का हिमालय को ज्ञान उपदेश ये अरे क्या लिखा है आगे पढ़ो तो जो आप बताना चाह रहे हो वो पढ़ो पहले ये पता कर लो कि इनका संस्कृत हिंदी वाला है या केवल हिंदी संक्षिप्त वाला होगा इनका नहीं ऐसा जी प्रका वही है संत हिंदी वाला है या बना बिना संस्कृत वाला है इन गता इनको संस्कृत हिंदी भी नहीं पता है अरे र ऊपर संक्षिप्त लिखा है कि नहीं आप भी बताइए अपनी जो जो आपने ग्रंथ निकाला है उसके ऊपर संक्षिप्त लिखा है ऊपर सबसे परर क्या लिखा है

02:52:44:25 बोलिए अच्छा पहले हम इसका पहले हम इसका ये बोलना रहे थे 544 पेज निकाल लिया भाई साहब आप बताइए क्या है 544 नहीं है जी 5 सेव 571 पेज निकालिए भैया आ जाते हैं 57 य लीजिए यानी कि अब कुल मिला के अभी तक इतना तो है कि गीता के अनुसार तत्व द नहीं है फिलहाल इतना तो मानना पड़ेगा गीता छोड़ दी इन्होने नहीं आपकी बना पॉट टू बी नटेड गीता छोड़ ये आपकी बनावटी बात है बताइए बताइए क्या लिखा है उसम बताइए यानी हमारा यह पवित्र सद ग्रंथ है जैसे आप लोग कहते हो कि संत रामपाल जी महाराज इसको नहीं मानते तो इसी के अंदर लिखा हुआ है जो हमारी जो देवी शक्ति है आदि शक्ति माता जी वो राजा हिमालय को ज्ञान उपदेश दे रही है तो वो कह रही है इसम सभी कमलों का विवरण है इसके अंदर अरे बताओ आगे बताओ भैया आगे बताओ इसमें सभी कमलों का विवरण दिया है हम ठीक है तो उन कमलों की जानकारी इसमें दी

02:53:59:27 है जैसे मूल कमल स्वाद कमल नावी कमल हृदय कमल कंठ कमल ठीक है संसार कमल हम इसमें जो कमलों का वर्णन दिया हुआ है तो हमारे पूज्य गुरुदेव जी इन्हीं कमलों के अंदर जितने भी हमारे जो अधिपत्य है श्री गणेश जी श्री शेरावली माता जी श्री ब्रह्मा विष्णु जी और अपने विष्णु भगवान जी इन सबके जो वास्तविक रियल मंत्र है जो वास्तविक रियल मंत्र है उनको हमारे गुरुदेव संत रामपाल जी महाराज अपने अनुयायियों को देते हैं उन मंत्रों का जो सही जो वास्तव जो जाप है वह हमारे शरीर में सभी देवता विराजमान है अपने अपने कमलों के अंदर उनके मंत्र उनसे सभी लोगों कोब आपकी बात बहुत लंबी हो रही है आप मुझे य लिखा दिखा

02:54:58:20 य संत रामपाल जी महाराज की जो भक्ति है वो शास्त्र के अनुकूल है हमारे पवित्र के सुनो शास्त्र के अनुकूल कोई चोर भी होगा ना व भी अगर बता देगा गण जी की पूजा करो हदय में दिल में वो बाम जो बामन जी है चोर उसको भी हम त ले क्या जो भी जिसने हमारी किताबों को पढ़ लिया और उसने आकर के किताबों में य क गया उसके अनुसार बता दिया कि देख भाई झे ऐसा करना तुझे ऐसा करना हो गया तत्वदर्शी अच्छा एक रामपाल कोही तत्वदर्शी क्यों माना जाए यह बताओ अगर अगर यह बात अगर आपकी बड़ी करके मानते हैं एक मिनट के लिए आप पहले मुझे लिखा दिखाओ कि जो इस प्रकार से भक्ति बताएगा वो तत्वदर्शी कहलाएगा पहले तो ये

02:55:54:04 दिखाओ अब इसके लिए आपको गीता जी में जाना पड़ेगा हां जाओ जाओ जल्दी जाके लिए गीता जी में जाना पड़ेगा हां जाओ और गीता जी में जाने से पहले जाओ गीता जी खोलो गीता जी खोलो गीता जी खोलो बिल्कुल बिल्कुल अच्छा गीता जी में जाने से पहले अपन यहां पर थोड़ा सा हिंट दिया है अपने पवित्र इसी सद ग्रंथ के अंदर भा हमें हिंट प नहीं चलना है क्लियर कट बात पर चलना है हिंट पर नहीं चलना है क्लियर कट लिखा दिखाओ ंट पर नहीं चलना आपको क्लियर कट लिख दिखाएंगे गीता जी पर जाओ जाओ गीता जी पर यह अपनी पवित्र गीता है हा बोलो अरे बोलो आगे बोलो तत्वदर्शी बोलो प्रचार करले पहले वो हा

02:56:49:07 आप अपने सद ग्रंथ का म मजा को आते हो भाई जो मंत्र जो जो व्यक्ति मंत्र दे देगा यत में ख हो गया मतलब की अभी कोई चोर च कोई गता र् हो गया वाह अभी देखो गीता जी में अपन जाएंगे अभी गीता जी के देखो अ हेलो भैया सुनिए यह भी मंत्र देते हैं यह बता रहे तत्वदर्शी में भी मंत्र देता हूं वही वाले ये भी देता हैका नाम है रू ये भी तत्वदर्शी हो ग आपके लिए ये भी मंत्र देते मैं भी तो देवी भागवत पढ़ के दिखा रहा हूं आपको तो मेरे को तत्वदर्शी मानेंगे

02:57:42:00 क्या हेलो मंत्र तो दो लोग और मिल गए देने वाले इनको भी मानते हो क्या तत्वदर्शी शास्त्र अनुकूल भक्ति बता रहे हैं ये दोनों हेलो चलो बस अब इनका ले ले भाई बाबूराम जी है आप फिर बात होगी आपकी गीता जी जो है गीता जी इसका जो अध्याय नंबर चार का श्लोक नंबर 33 में गीता ज्ञान देने वाले भगवान स्पष्ट कह रहे हैं कि अर्जुन द्रव्य यज्ञ की अपेक्षा ज्ञान यज्ञ श्रेष्ठ है पहले ज्ञान को समझो ठीक है फिर ज्ञान समझो से आ

02:58:26:26 गए ठीक है जी अरे राम ज्ञान क्या है ज्ञान क्या है ज्ञान वो है जो कि संत सभी शास्त्रों में प्रमाण करे आज तक हमें तो किसी में लिखा हुआ क्या है वो बोलो अपना मत बताओ सुनो पन आपका ज्ञान की बात ही झूठ है आपने जो ज्ञान का मतलब बताया वही झूठ है पहली बात तो ये है सुनो सुनो गीता जी के अंदर क्या लिखा है जो हमारे पूज्य गुरुदेव जी ने हमको बताया है हम पहले गीता प क्या लिखा है पढ़ो भैया वो पढ़ो गीता जी में क्या लिखा है आपके पूज्य गुरुदेव ने क्या बताया वो बताओ अध्याय नंबर चार का लोक नंबर में स्पष्ट लिखा हुआ है हा उस ज्ञान को तू तत्वदर्शी ज्ञानियों के पास जाकर समझ ठीक है अब बताओ रामपाल कैसे हुए उसम यह नहीं लिखा कि किसी के पास भी उसम लिखा है तत्व रामपाल कैसे हुए वो बताओ ना भाई क्यों इतनी देर लगा रहे हो उनको भली बाती नवत प्रणाम कर

02:59:42:13 अरे भाई मैं त समझ गया आगे बढ़ो 15 एक प जाओ मुझे मालूम 15 प जाओगे उसके बाद में उसके बाद में वो तत् दर्शी संत होगा जो ज्ञान को बताएगा बारीकी से ठीक है जी अब क्या वो ज्ञान कौन सा है वो ज्ञान कौन सा है हां बोलो वो वो ज्ञान है अध्याय नंबर सात का श्लोक नंबर 29 बोलो भैया अध्याय नंबर सात श्लोक नंबर 29 हां लो मैं खोल लेता हूं 15 एक छोड़ दिया देख लो भैया 15 एक छोड़ दिया वो हो गया उसका काम हो गया उस पर जितनी करवानी थी वो करवा चुके हा खुल गया भाई बताइए लया इस इसमें स्पष्ट लिखा हुआ है कि जरा मरण मोछ माम आस यत ते ते ब्रह्म तद विदु कृष्णम अध्यात्म कर्म अखिलम यानी इसम क रहे जो मेरे शरण होकर जरा माने वृद्धावस्था और मरण माने मृत्यु से छूटने के लिए यत्न करते हैं वे पुरुष उस ब्रह्म को

03:00:57:25 यानी वो ब्रह्म अलग है उस ब्रह्म को और संपूर्ण अध्यात्म को संपूर्ण कर्म को जानते हैं भाई साब मैं पूछ रहा हूं तत्वदर्शी सिद्ध करिए तत्वदर्शी कहां है इसमें तत्वदर्शी ये तीन चीजों को से परिचित जाएगा व व्यक्ति जो त वो भी आप मुझे लिखा दिखाइए कि ये तीन चीजों से जो परिचित हो जाएगा वो तत्वदर्शी कहलाएगा वो भी लिखा दिखाओ अभी अभी वर्तमान के अंदर संत रामपाल जी महाराज ही तीन चीजों सेवा सुनने नहीं बैठा हूं आपको बोलने का अवसर दे रहा हूं इसका मतलब य नहीं आप अपनी बकवास बोलेंगे मैं पूछ रहा हूं कि यह तीनों चीज जो आपने बताई यह बताने वाला तत्वदर्शी होगा य कहां से सिद्ध हो रहा है आपको लेफ्ट करना है तो हटा दीजिए मैं स्वच्छा से हट जाऊगा कोई दिक्कत नहीं सते आपकी मर्जी आप जा सकते अगर

03:02:00:00 बता बता इन्होने अपने गुरु का दामन छोड़ दिया दिखाओ इनको ज्ञान गंगा में तत्वदर्शी की व्याख्या दिखाओ अभी जन मानते बकुल माते मानते हो नहीं हेलो देखो जो ज्ञान गंगा के अंदर ज्ञान है वो संत रामपाल जी महाराज ने हमारे अंदर ठोक के भर रखा है जी ठीक है तो अब हम उससे आपको दिखा रहे त कौन हैन दिखा दो चाहे तो आप ज्ञान गंगा तो भी कोई दिक्कत नहीं और संत रामपाल जी महाराज के दिखाइ पहले यहां पर स तत्वदर्शी की बात हो रही है और यहां पर जो है ब्रह्मा ब्रह्म को पूर्ण रूप से जानने वाले को आप कह रहे हो तत्वदर्शी ब्रह्म आपके अनुसार ब्रह्म तो पूर्ण ही नहीं वो तो काल है काल को जानने वाला तत्वदर्शी है क्या यही कह रहा है जो ब्रह्म को वो स्वयं ब्रह्म कह रहा है कि जो वे पुरुष उस ब्रह्म को यानी जो अलग ब्रह्म है मेरे से अलग ब ब्र का मतलब परम ब्रह्म भी होता है परम अक्षर ब्रह्म ब्रह्म का मतलब परम अक्षर ब्रह्म भी होता है परम अक्षर ब्रह्म मैं पूछ रहा हूं ब्रह्म

03:03:15:01 का मतलब परम अक्षर ब्रम भी होता है परम अक्षर ब्रह्म है इस अरे सर जी देखिए मेरी बात सुनो मेरी बात सुनो आपे सबसे पहले लि दिखाओ कि जो उस ब्रह्म को संपूर्ण अध्यात्म को जानता है संपूर्ण कर्म को जानता है वो तत्वदर्शी होता है य कहा लिखा है अध्याय नंबर तुरंत इसमें लिखा है अध्याय नंबर आठ के श्लोक नंबर एक में तुरंत प्रश्न किया है किम त ब्र हा किम अध्याम कर्म पुरुषोत्तम हा ठीक है फिर उसम तुरंत लिखा है तीसरे में कि वह जो ब्रह्म है जिसकी बात की जा रही है सा देख आप बातो को घमा रहे है आप ये बताइए तत्वदर्शी कहां लिखा है इनको जानने वाला तत्वदर्शी होगा यह बताइए अच्छा एक आप बताइए वो तो लिखा है उसम तो वो तो डंके की चोट पर लिखा है वो कोई लिखा है बताओ कहां लिखा है अब आप बताइए जी क्योंकि आप बताइए कि इसमें ये कहां लिखा है कि श्री कृष्ण भगवान तत्वदर्शी आप ये दिखाइए मैं आपसे प्रश्न कर रहा हूं बता मैंने कब मैं तो यहां कह ही नहीं रहा हूं मैं तो आपको बता रहा हूं कि तत्वदर्शी रामपाल नहीं है

03:04:30:07 मैं ये बता रहा हूं तो फ तत्वदर्शी फिर तत्वदर्शी कौन है आप बताओ बता रहा हूं मैं बता रहा हूं बता खोल दो इनको 15 एक हां बताओ बता आप बताओ जी हम पहले आपका ही देख ले सुनो इनको पहले 435 दिखा दो 45 में तत्वदर्शी बताया गया है कौन है दिखा [संगीत] दो 434 के बाद 435 पढ़ो आप खोलन मैं दिखान दिखा स्क्रीन पर दिखा

03:05:35:00 दो इसमें लिखा है कि तव तत्व से जानने वाला कौन है तत्व दर्श क्या है वो तुझे तत्व ज्ञान का उपदेश करेंगे इसमें क्या लिखा है पहले चार च में पढ़ रहा हूं कि तू जो है

03:05:51:19 तत्वदर्शी ज्ञानियों के पास जाकर समझ दंडवत प्रणाम कर उनकी सेवा करने से छल कपट छोड़कर सरलता पूर्वक प्रश्न करने से परमात्मा तत्व को भली बाती जानने वाले ज्ञानी महात्मा तुझे उस तत्व ज्ञान का उपदेश करेंगे अब वो अगले ही श्लोक में बता रहे हैं जिसको जानकर फिर तू इस प्रकार मोह को प्राप्त नहीं होगा हे अर्जुन जिस ज्ञान के द्वारा तू संपूर्ण भूतों को नि शेष भाव से पहले अपने में

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03:06:22:20 और फिर मुझ सच्चिदानंद घन परमात्मा में देखेगा अब लो अ जो भगवान जो जो जो गीता ज्ञान दाता है उसमें सच्चिदानंद घन परमात्मा को देखेगा परमेश्वर को वह तत्वदर्शी सिद्ध हो गया यहां से और 15 एक दिखा दो इनको बोल के रुक 15 एक दिखा दो एक मिनट नहीं अभी हमारा पूरा नहीं हुआ 15 एक दिखाओ

03:07:18:07 हां भाई 15 एक आदि पुरुष परमेश्वर स्वरूप

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03:07:27:25 मूल वाले और ब्रह्मा रूप मुख्य शाखा वाले जिस संसार रूप पीपल के वृक्ष को अविनाशी कहते हैं तथा वेद जिसके पत्ते कहे गए हैं उस संसार रूप वृक्ष को जो पुरुष मूल सहित तत्व से जानता

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03:07:42:14 है वह वेद के तात्पर्य को जानने वाला है अब वेद के तात्पर्य को जानने वाला कौन है वेद के तात्पर्य को जानने वाला वो है जो मां भगवती की आराधना करता है और 15 का 15 भी खोलिए एक बार 15 का 15 खोलिए इनको यही से सारे जवाब मिल जाएंगे कि वेद वेदों के द्वारा किसको जानना है 15 का 16 15 15 ये इनसे ही कहिए पढ़ने के लिए प 15 का 15 ये पढ़िए जरा एक बार प्रभु जी ये जो आए हैं रामपाल जी के जम सब प्राणियों के हृदय में अंतर्यामी रूप से स्थित हूं तज मुझसे ही स्मृति ज्ञान और अपोहन होता है और सब वेदों द्वारा मैं ही जानने योग्य हूं तथा वेदांत का कर्ता और वेदों को जानने वाला मैं ही हूं लो वेदों के द्वारा जानने योग्य क्या है भगवान जो बोल रहे हैं जो गीता बोल रहा है वही द्वारा जानने योग्य है हो गया आपका अब बोले अब बोलो धन्यवाद जी हा जैसे अभी

03:08:57:14 आपने इससे पहले बताया था 14 का 35 च का 3 हा उससे पहले आपने बताया था कि उस ज्ञान को तू तशी ज्ञानियों के पास जाकर समझ हा बताया था सर जी उसम उसम उसम अपन संस्कृत भी पढ़ेंगे प्रतिन प्र प्रश्ने सेवया उप मिट एक मिनट मैं आपसे पूछ रहा हूं आपको संस्कृत आती है क्या ऐसा सुनो आप जब संस्कृत पढ़ोगे जनी की आप य दावा कर रहे हो कि इसमें संस्कृत का अर्थ गलत है यानी कि आप हमें सही संस्कृत बताने वाले हो अब आप मुझे पट्टी प पं बता दो पूरी सुना दो आती है पट्टी पट पनती इसका मतलब एक मिनट भैया देखिए आप हमें संस्कृत के ज्ञाता बन के दिखा रहे हो आप हमें संस्कृत की जो ए बी सीडी है पटती पटत पं या साते ये बता दो अरे मैं तो सुनो सुनो

03:10:05:15 सुनो आप जो है बात को खींच रहे हैं आप जो है य ज्ञानी बन रहे संस्कृत के अब संस्कृत के ज्ञानी यदि हमें आपका ज्ञान मानना है तो हमें जानना होगा कि आपको संस्कृत आती है कि नहीं मैं पूछ रहा आपको संस्कृत आती है अभी जान लेता अभी जान अरे सुन लीजिए देखिए एक दूसरे पर आरोप मत लगाइए ये लिखने वाली एक चीज है इसको संस्कृत में क्या कहते हैं अच्छा मैं य यह पूछ रहा हूं इसमें उर्दू में क्या कहते हैं भाई साहब हम य उर्दू को उर्दू को जानने नहीं बैठे हम य इस बिलीव सुनिए हम यहां प गीता प्रेस गोरखपुर के अनुवाद पर बिलीव कर रहे हैं अगर आप कह रहे हो कि उनका अनुवाद गलत है तो आपको स करना होगा कि आप संस्कृत के ज्ञाता है अगर आप संस्कृत के ज्ञाता है तो हमको बता दीजिए कि साते को पूरा उसको जो टेबल है साते वाली वो बता दो जीने आप जी आप जी मेरे को ये बताइए सभी दर्शक देख रहे हैं आपने जो मेरे को पढ़ के सुनाया कि जिसको जानकर 34 में 35 में चौथा के अ मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या आपको जो गीता का जो अर्थ किया है उस पर भरोसा नहीं है गीता

03:11:20:21 प्रस प गीता जीने अर्थ किया हुआ है सुनिए पहले हा हम हम बिल्कुल सभी शब्दों को तोल के बोल रहे हैं सुनिए जी अच्छा जो गीता जी के अंदर आपने अभी अनुवाद मेरे को पढ़ के सुनाया है सुनो पहले आपका अनुवाद देखेंगे 434 को खोलो और अनुवाद करो उसको चलो पहले आपने शुरू किया ना 4 34 खोलो रुको 44 ने सबसे पहले देवी भागवत दिखाई थी और उसका मैं संस्कृत शलोक दिखा रहा हूं संस्कृत वाली देवी भागवत लिए भैया अभी बात को

03:12:08:19 ई साब संस्कृत वाली देवी भागवत बताओ क्या बताया अभी आपने जो मेरे को सुनाया है पढ़ के उसके अंदर तो सच्चिदानंद जब आप ये कह रहे हैं कि संस्कृत चेक करनी होगी एक एक शब्द को तोलना होगा तो हम अब एक एक शब्द को तोले गे ना हम एक एक शब्द को लेंगे ना तो अभी जो इन्होंने वो देवी भागवत बताई थी ना इन्होंने थोड़ी देर पहले वो कौन सा पेज नंबर था 571 उसम उसमें ये चेक करो 571 में अध्याय कौन सा है फिर मैं बताता हूं कौन सा निकालना है 51 संक्षिप्त वाली खोलिए पहले संक्षिप्त वाली हा इसम 571 पेज में देखिए सुनिए सर जी रुक जाओ भैया रुक जा रिक्वे रा जी ने एक एक शब्द को तोल के बताया है ना भैया र् है ना रुक जाओ रुक जाओ रुक जाओ इनको भैया सुनिए बीच में अब मत बोलिए आपने कहा एक एक शब्द को तोल के देखेंगे अब एक एक शब्द को तोल रहे हैं ठीक है नहीं इनको दो चार श दे

03:13:23:20 दीजिए ना कोई भी ट्रांसलेट करने के लिए सीधे ही नहीं नहीं ऐसे नहीं इन्होने जो दिखाया था 571 पेज तो निकालिए पहले वाली है अरे ये य अध्याय है आपका संक्षिप्त वाली ये रही संक्षिप्त वाली इसका ये अध्याय है आपका 39 ठीक है अध्याय 39 और स्कंद कौन सा है स्कंद भी लिखा होगा व परर जाना पड़ेगा मुझे च खा काट दिया

03:14:01:09 हैने क्रमांक दि देखिए कु शलोक क्रमांक दि नीचे जा शलोक दिए य पर अच्छा ये ओके ओके ओके मैं यहां पढ़ रहा हूं मैं इधर पढ़ रहा था मेरी गलती है कौन सा सा अध कौन सा है से देखो हिमालय राजा को ज्ञान सातवा स्कंद और 39 चैप्टर 39 आम आराम से ढूंढ आराम से श्री राम जय राम जय जयराम ये है दे पूजन के देवि पूजन के विविध प्रकारों का वर्णन यही है ना हा हा 114 मेरे पास ठीक है अब इसका आप ऐसे करके दिखाइए कि हिंदी ना दिखाई दे व कर सकते हैं क्या बिल्कुल कर सकते जी बिल्कुल कर सकते हैं चतुर्थ अध्याय अच्छ तो अष्टम स्कंद आ गया [संगीत] है ये रहा एक एक शब्द को तो लेंगे ना भैया

03:15:18:07 इनसे पूछेंगे जो हमें नहीं समझ आएगा वो इनसे हम पूछ लेंगे श्री देवी पूजा पटल जहां मनाया गीता प्रस को मान लिया और जहां मनाया नकार दिया अभी पता चलेगा यह लीजिए ये पढ़ प्रभु जी थोड़ा हा अभी एक मिनट वो मिलान कर लीजिए कहां पर थे जहा य वो 39 चैप्टर में बता रहे थे मैं वो मैं बता देता हूं य इन्होने बताया था व गणेश जी और ये और वो समझ गया समझ गया हा वो निकालिए व श्लोक कौन सा था जिसम वही सब बातें हो रही है वो श्लोक निकालिए यय थ और जूम कर ली और जूम कर दे हा थोड़ा सा वो हिंदी दिखेगी उसे अरे उतना व इतना क्या बता देंगे अभी इसमें ठीक है उनको ये नहीं पता चलेगा ना कि श्लोक का अर्थ है

03:16:27:02 हा चलिए भैया बताइए संस्कृत पढ़िए और एक एक शब्द को तोल के हमें इसका अर्थ बताइए हे तत्वदर्शी संत जी जेल धाम से इनकी रक्षा करें इनको शक्ति दे जिससे कि अर्थ कर पाए हां ये वाला है देखिए चलिए भैया ये आपके सामने वही संस्कृत के श्लोक है जिनका आपने हिंदी अर्थ पढ़ा था अभी आपने हमें बताया था अब आप इसका हिंदी करके बताइए एक एक शब्द को तोलिए कोई शब्द छोड़ मत दीजिएगा

03:17:10:02 एक ध्यान नहीं भट केगा नेटवर्क चला गयाने हमने 18 19 20 रखे ये वाले हा पढ़िए इनको इनका अर्थ बताइए ये वही अर्थ है जो आप बोल रहे थे या आप बता दो हम वो खोल देंगे अभी बता अच्छा इसमें जो कमलों की जानकारी दी जा रही थी वो वाले काते ये लोक है येरे मेरी बात सुनो बो सातवा स्कंद है पूछ 35 अध्याय अध्याय नंबर 35 है अरे उससे मतलब उससे मतलब क्या हैको तो इनको तो एक एक शब्द को तोलना है ना तो ये तोले गे बोलिए भैया 39 है 39 जिसमें वो बता रहे थे देखिए ना ये है आपका 39

03:18:08:12 हां कौन सा पेज नंबर बता 3 भाई आप नीचे मत देखिए चोरी करने के लिए ऊपर देखिए वो संक्षिप्त है एक एक शब्द का अर्थ नहीं है उसमें नीचे देखकर चोरी करने का जो प्लान बना रहे हैं मत देखिए वो एक एक शब्द का अर्थ नहीं है आप जी ने आप जी ने एक सच्चाई को छुपाने के लिए कौन सा नाटक शुरू कर दिया भाई साब देखिए विषय से हट के बात करेंगे मुझे आपको हटाना पड़ेगा आप कह रहे एक एक शब्द को तोलना है आपको गीता प्रेस के अनुवाद पर यकीन नहीं है देखिए इधर उधर की बातें करेंगे तो मुझे आपको हटाना पड़ेगा आपने कहा एक एक शब्द को तोलना है आपने सबसे पहले देवी भागवत का प्रमाण दिखाया था अभी देवी भागवत आपके सामने पढ़ना शुरू करिए और एक एक शब्द का आप मुझे अर्थ बताते जाइए मैं चेक करूंगा है कि नहीं कौन सा श्लोक नंबर 21 पढ़ दीजिए कोई भी पढ़ दीजिए आप मैं क्या बोल चलिए भाई 2 प आ गए बताइए पढ़िए भाई साहब सुनो मेरी बात सं के संस्कृत ज्ञ शिष्य पढ़िए सुनो भाई मनीष जी स साब

03:19:23:18 आपको पढ़ना है कि नहीं एक एक शब्द को तोलना है कि नहीं देखो मैं फालतू बात बिल्कुल नहीं सुनूंगा एक एक शब्द को तोलना है कि नहीं एक एक शब्द को तोलना है कि नहीं यानी इसको जो पढ़ एक शब्द को तोलना है कि नहीं इसको जो पढ़ देगा वो त है इसको पढ़ लना है इसको पढ़ के कोई कह देगा कि गोबर की पूजा कर दो तत्वदर्शी है चलो भाई आप जा सकते हो जाइए

03:19:57:19 चलिए गोबर की गोबर से पता नहीं सिद्ध करने के लिए देवी भागवत पर आ गए देवी भागवत से कूद के फिर गीता जी पर आ गए अब गीता जी के वो शलोक पहले बिना सोचे मान लिया जो अपने फेवर में है और जो अपने विरुद्ध जा रहे हैं उनको हम एक एक शब्द तो लेंगे तो शब्द तोलो अब अब इनके जो तत्वदर्शी जो जेल धाम में बैठे हैं सुन लो उनकी कहानी वो सब कुछ जो देवी भागवत से बता के गए वोह संक्षिप्त वाली से बता के गए हैं अब हम सब इनके सामने संस्कृत खोलेंगे इनको दिक्कत आ सर हेलो चलिए अब किसी और दिन रखते हैं बाबूराम जी आप फिर आइएगा दोबारा बहुत समय हो गया ज्यादा लेट नहीं कर सकते एक मिनट मिनट मिन ना अब आप कल आइएगा कल ठीक है कल आइएगा एडेंट वाइट सिंघम खाते हैं क्या नहीं इनको इनको गोबर से इतना प्रेम कैसे हो गया एकदम से इन्होंने सारे शास्त्र सारे वेद सारा कुछ साइड कर दिया और पास जब इनके पास जब उत्तर नहीं होता है तोय फुदक के दूसरी डाल पर बैठते हैं हम पंछी

03:21:12:26 डाल के हम तो डाल डाल चलते रहेंगे हम इस डाल से उस डाल उल से उल बस य इनका कार्यक्रम बंजारे तो नहीं बन गए कहीं बंजारों की तरह एक स्थान से दूसरा फ रा को संतक बनेगा ना उसके सामने उसके सामने यही संस्कृत खोलो सीधे आते बताता होता है ससंग आ मन लगा लो जहा मन आए अनुवाद सही है जहा मन आए अनुवाद गलत है हम एक एक शब्द लेंगे लिए खोल दिया तो हो गया वो इनके ना वो जो होता नहीं वही वो पहले में ऐसा होता था फिर मेरे दोस्त फड ने मेरे को यह बताया फिर मैं ये हो गया वैसे ही इनके सत्संग में खड़े ऐसे करके मैंने फलानी फलानी जगह से इतनी पीएचडी की है संस्कृत में और ये जो बोल रहे एक एक बात है खून से लिख कर दे सकता हूं य व ऐसे अपने प्रमाण देते एक बार पूछा इसको क्या उस व्यक्ति का वो देखिए कॉन्फिडेंट जो उसके जो बाबा जी ने बता दिया उसको उस उस एक दो श्लोक की संस्कृत की हिंदी के सहारे और वो जो है इतना ल के बोल रहा है एक एक शब्द को लेंगे मतलब

03:22:28:03 तुमको जहां प जहां पर तुम्हें अपना मन का बताना था मन का था वहां तुमने बिना तोले समान लिया और जहां पर तुम्हारे विपरीत दिखाई दे रहा है वहां पर तुम तोल रहे हो तो फिर वहां से तोलना शुरू करो फिर पीछे से अब ये क्या है संक्षिप्त देवी भागवत में कहीं संस्कृत तो है नहीं जो रामपाल दास जी ने जेल धाम से पहले बताया ये वाला श्लोक ऐसे वैसे अब हम इनसे जो है वब जब ये तोलने की बात करेंगे कभी भी तो हम वो खुलवाए पढ़ो इसको संस्कृत के ज्ञानी आए थे मैंने बस ये पूछा कि ये कलम को क्या कहते हैं संस्कृत में वो बोलने लगा नहीं तुम्हें उर्दू आती है मैंने कहा भाई य उर्दू की बात चल रही है मैं बता तो रहा हूं मैं जब छोटा था मैं रहागा शायद 21 या 22 वर्ष का तो मुझे रामपाल वाले लोग मिले थे उस समय और मुझे बैठ कर के गीता कार्थ सम आने लगे तो मेरी हिंदी अच्छी है जो हिंदी का वो है पकड़ हिंदी प अच्छी है तो मैंने तुरंत यह कुछ मुझे श्लोक पढ़ा रहे थे वो जो ब्रियों के बीच में ध्यान लगाने को कहते हैं ना भगवान कि दोनों ब्रियों के बीच में अपान वायु को रोक कर स्थिर करके आपको ध्यान लगाना है बस मैंने वही पूछ लिया बताओ अपान वायु क्या है पांचवे अध्याय में है ये

03:23:43:14 अब अपान वायु का अर्थ लोगों को पता नहीं है कि फार्ट को ही श ी में फर्ट को ही अपान वायु कहते हैं अब ये लोग घन चक्कर होगा मैंने कहा तुम तर्शी करके आए हो मेरे पास मैं 100 जूते में लगाऊंगा अपान वायु का तो बताओ पहले क्या है जब तुम मुझे गीता पढ़ाने बैठे हो तो बताओ य क्या लिखा है कुछ नहीं पता इनको वही पता है जितनी चाबी भरी तिरछा दर्शी ने उतना चले खिलौना उतना चले हा उतना चले भगत जी भगत भक्त नहीं भगत भगत उनके आगे श श का अपमान है हा शास्त्र इनके आगे शास्त्रों को खोलना शास्त्रों का अपमान है अच्छा इनकी एक कहानी और है एक कहानी और है कि क्योंकि भगवत गीता में मान लो देवी भागवत में ये लिखा है कि जो जो जो ऐसे ऐसे बताएगा वो सच्चा वो सच्चा जो ऐसे भक्ति बतानी चाहिए ऐसे भक्ति अब कोई कोई अगर बिल्कुल क्या कहते हैं चोर भी अगर वो वैसे भक्ति बता दे वो तत्वदर्शी हो जाएगा क्या बकल बिलकुल बकल यह कहां का लॉजिक

03:24:58:16 है भाई लिखा तो लिखा हुआ कि जो ऐसे बताएगा व तत्वदर्शी होगा और जब हम तुम्ह बता रहे तो उसम तुम तोल शब्दों को और शब्दों को जब तुमने बताया तो तोल नहीं रहे हिंदी पढ़ने वा जी पहाड़ी जी बोलिए जी आज का जो स्ट्रीम रहा व्यर्थ ही रहा थ यावा की बातो में ज्यादा चला गया नहीं नहीं नहीं व्यर्थ नहीं रहा है देखिए मेरे को जो हमारे जो मैं कहूंगा कि जो विद्युत मंडली है उसमें यह कहा जाता है कि आप क्या किया करते हैं इतने इतने लो लेवल के लोगों से आप चर्चा करते हैं तो मैं कहता हूं इसमें मेरी अवमानना है ना ठीक है मैं वो अवमानना सह लूंगा मगर उस चर्चा को देख कर के एक व्यक्ति भी अगर सही राह पर आया या एक व्यक्ति को भी अगर उससे सकारात्मक कुछ मिल गया तो मेरी वो चर्चा सर्तक है जी मैं कुछ रामपाल के जो शिष्य है उनके लिए कुछ क्वेश्चन छोड़ के जाऊंगा हो सके तो वो अपने स्ट्रीम में इनको ले सकते है पहला क्वेश्चन ये कि गीता का ज्ञान काल ने दिया है तो अगर काल सबको भ्रमित करता है सबको अधर्म के मार्ग में लगाता

03:26:13:27 है तो गीता अध्याय चार के छठे या सातव श्लोक में कह रखा है कि मैं धर्म को धर्म की स्थापना करता हूं साधु संतों की रक्षा करता हूं तो यह कैसे संभव हुआ तो इसका जवाब चाहिए हमको सबसे पहले जब वो भ्रमित करेगा हमको तो धर्म की भी स्थापना नहीं करेगा ना साधु संतो की रक्षा करेगा वो तोव तो उनको मारना ही चाहता ना वो तो तपत शिला में तपा के कुछ वहां से कुछ निकलता व खाता है उसके लिए तो और अ एक लाख जीवा आत्माओं का भोजन करना है डेली तो ये एक सवाल है मेरा तो काल ने धर्म की काल कैसे धर्म की स्थापना करता है और काल क्यों मतलब की साधु संतो की रक्षा करेगा गुड क्वेश्चन गुड क्वेश्चन और 182 में क्यों बोलेगा कि परमात्मा की शरण में जा इसमें एक बात में जोडा देखिए काल जो इनके हिसाब से बताया हुआ जो काल है ना वो नहीं करेगा ठीक है लेकिन जो हमारे हिसाब से बताया हु यानी कि जो शास्त्र के हिसाब से बताया हुआ काल है वो कर भी वो कर देगा व वो नहीं करेगा हमारे साथ तो करता ही है तो फिर व शलोक गलत हो जाएगा सबसे पहली बात तो य है इनसे यही पूछा जाए कि भैया तुम पहले यह बता दो गीता के

03:27:29:07 00 शलोक कौन से जिनको तुम मानते नहीं हो एक ला जी आप बोले कुछ बता जय श्री राम श जी भी ज हुए उनसे भी जी जी शुक्ला जी आप शुक्ला जी बोल रहे हैं जी बोलिए आवाज रही थोड़ी धीरे आ रही है थोड़ी धीरे आ रही है आपने यर फोनस लगाए

03:28:06:21 हैं अब आ रही है थोड़ा तेजी में जी मैं तो शवा जी आप बहुत बहुत धन्यवाद नारायण और पंडित जी आपका भी मैं इनके जैसे गोविंद जी है ना इनके प्रकार मैं भी पिछले चार पाच सालों से इनकी किताबों को इतना खंगाल डाला मैंने और इनकी किताबों से इतना पकड़ पकड़ के झूठ मिलता है मतलब मैं क्या बताऊं कि एक व्यक्ति के पास तनिक भी विवेक होगा ना और वो यदि जो ये प्रमाण देते अपनी किताब में उसको अगर अपनी किताबों से मिला लेंगे तो वैसे आदमी समझ जाएगा ये क्या क्योंकि बहुत वर्ष पहले मैं भी हल्का सा भ्रमित हुआ था इनकी बातों से लेकिन जब रामपाल एक निमित्त बने उनके निमि से मैंने देवी भागवत पुराण पूरा अध्ययन किया तो समझ में आया कि व्यक्ति क्या बता रहे हैं और असल में क्या लिखा है हमारे शास्त्रों में पूरा उल्टा मैं आपको एक छोटा सा उदाहरण देता हूं इसके हेतु अरे कहां चले गए प्रप हो गए वो नेटवर्क इशू शायद नेट का प्रॉब्लम शं जी शशांक जी आप आ आ ग जी बोलिए बोलिए हेलो जी बोलिए इनकी एक पुस्तक है अध्यात्मिक ज्ञानगंगा

03:29:22:03 इनकी पुस्तक आती है ज्ञानगंगा से थोड़ा अलग है वो पर व वैसी बात लिखी है उसमें एक देते ने नया करैक्टर बना परब्रह्म नाम का आपको शायद पता ही होगा ये अक्षर पुरुष इसका नाम हालाकि पारब्रह्म कैसा दिखता है क्या है कुछ इनको आईडिया नहीं जानकारी थोड़ी बहुत य व की तो उसके विषय में लिखा है इन्होंने शायद पेज नंबर याद नहीं आ रहा गोविंद जी देख के बता देंगे के परब्रह्मा की 100 हज कलाए है इने इसने लिखा हुम और उसका प्रमाण देते हैं विष्णु पुराण के अंश एक के अध्याय न के श्लोक नंबर 53 में जिसमें यह लिखा हुआ है कि जिसके दज अश के द हजार अंश में अनेको सृष्टि होती है वो परब्रह्मा है लेकिन वो श्लोक वास्तव में भगवान विष्णु के लिए ब्रह्मा जी बोल रहे है उसके ज नीचे में आप केंगे स्पष्ट रूप से लिखा है भगवान विष्णु के लिए और किस विष्णु के लिए क्योंकि विष्णु भी कई बना के रखे ने काल बवाला अलग उसम लिखा है कि पूर्व अवतारी विष्णु के लिए ब्रह्मा जी

03:30:26:07 ने ड्रॉप हो गए रेफरेंस याद है इन्होंने क्या रेफरेंस बोला था एक बार चेक कर लेते हैं इनका ऐसा है ना आधी बात आधी बात जैसे अब मैं कहूं किसी व्यक्ति से दो व्यक्ति हम बात कर रहे हैं मैं कहूं आप तो बहुत फ्रॉड है अब तीसरा व्यक्ति इतना ही सुना उसने और वहां से चला गया वो और पूरे गांव में फैला जा कि फलाना व्यक्ति फ्रॉड है पर उसने मेरी पूरी बात सुनी नहीं मैं कहना चाहता था आप फ्रॉड हो मैं आपके बारे में ऐसा सोचता था पर आप तो अच्छे व्यक्ति हो यह बात नहीं सुनी ये सुना उसने की आप फ्रॉड हो वो पूरे गांव में फैल गई हमें अभी क्या बना जेल में उसका नाम था नटवर लाल उसने क्या कहा कि जेलर से एक बार कह दिया कि मैं फलानी फलानी तारीख को जेल से भाग जाऊंगा तो जेलर ने क्या किया एक पर्ची बनवाई और सारे स्टाफ को बटवा दी उस पर्ची में लिखा था रोको मत जाने दो पर्ची में लिखा था रोको

03:31:41:25 मत जाने दो और उसमें जो है सब उसमें जो है अर्थ का अनर्थ कर दिया गया कि रोको मत जाने दो पची में लिखा था रोको मत जाने दो और उसमें अर्थ का अनर्थ हो गया रोको मत जाने दो नटवरलाल जिस तारीख को भागने को था तो उसम सब लोग पच बड़े रोको मत जाने दो जा भाई तो इनका वो हाल है अर्थ का अनर्थ करते हैं ब खैर इतनी शार्पनेस से भी नहीं करते हैं कि मतलब उसको पकड़ने में देर लगे इतनी शार्पनेस भी नहीं है अरे भाई अगर शास्त्र अनुकूल भक्ति बताने वाला कोई भी व्यक्ति तत्वदर्शी हो जाएगा तो जो देवी भागवत का आपका बताया हुआ चैप्टर पढ़ लेगा वो वैसे ही बोलने लगेगा हा भाई यह वाला मंत्र पढ़ो य वाला मंत्र पढ़ो मैं हो गया त यह कहां लिखा है कि वैसा का वैसा ही जो बताने लगे व तत्वदर्शी हो जाएगा फिर तो जो भी उसको रीड करेगा व तत्वदर्शी कहला देगा अगर कल आप लाइव आओ तो कल एक मुख्य उद्देश्य य था कि वेदों से मैं यह साबित करना चाह रहा था कि जो श्री कृष्ण भगवान ने जो परम पुरुष परम पुरुष का रूप दिखाया था चार वेद में कल देखिए दो दिन दो तीन दिन संभवत

03:32:57:10 थोड़ा प्रॉब्लम आएगी क्योंकि गुरुदेव आ गए लखनऊ जी वहां पर समय देना होगा दो तीन दिन और इसके बाद गोपाष्टमी पड़ रही है न तारीख को मैं आप लोगों से भी कहूंगा विशेष रूप से अपने आसपास गौ माता को ढूंढे गौवंश को ढूंढे गोपाष्टमी के दिन गौ माता की पूजा विशेष रूप से करें उनको सजाए उन पर फूल फूलों का फूल माला चढ़ाए उनके पैरों में वो घुंगरू वो जो आती है घंटी उनके गले में घंटी बांधे मतलब जो जिस तरह से भी उनका सम्मान किया जाता है और उनको अगर उड़ाने के लिए कुछ बनवा सके अच्छा सा कपड़ा तो जितना आप उसमें मिला सके उनको खाने पीने के लिए उनका जो चारा होता है उसकी व्यवस्था करें गुड़ और चने का ये सब व्यवस्था करें ये खिलाए उन्हें और बहुत मन से गौ माता का पूजन करें बहुत पुण्य प्राप्त होता है गोपाष्टमी है 9 तारीख के दिन सभी को मेरा संदेश है और और हमारा ं अकाउंट है वहा पर आप चाहे तो गोपाष्टमी के दिन जो पूजन करेंगे उस पूजन को आप वहा शेयर करें हो सका तो हम रील बना करके डालेंगे कि भाई ये लोगों ने पूजन पूरे भारतवर्ष में किया तो आप गोपाष्टमी के दिन जो है गौ माता का पूजन अवश्य करें गोपाष्टमी के

03:34:12:10 दिन ही गौ माता की गौवंश की हत्या की की गई थी 1866mhz वहां जो जेल में मिली जो चोट थी उनके साथ उन चोटों के साथ ही कराते कराते वह अंत तक अ अथवा जो है अपने दे को छोड़कर गए थे और जाने से पहले उन्होंने श्राप दिया था उस समय के शासन तंत्र को कि गोपाष्टमी के दिन तुमने गौ हत्या नहीं गौ हत्या तुमने की है तो तुम्हारे कुल का सर्वनाश भी गोपाष्टमी के दिन ही होगा और फिर वो जो कुल उससे जुड़ा हुआ था शासन से कि

03:35:19:09 हां एक बार में ज्यादा गुण ना खिलाएगा एक बात मैं कहता वो 1800 नहीं 1966 था वो गलती से बोल दिया 186 नहीं था 1966 था गलती से हो गया तो 1966 की बात है तो गौ माता मैं थोड़ा सा भावल हो जाता हूं उस वाले चैप्टर को जब मैं सोचता हूं मैं तो नाम दे दूंगा अभी तो भाई वो जो था इंदिरा गांधी उस जुड़े हुई थी उस समय शासन तंत्र से तो करपात्री जी ने श्राप दिया था कि जाओ आपके कुल का नाश भी गोपाष्टमी के दिन ही होगा और फिर तीनों लोगों का जो जो मरण हुआ है वह गोपाष्टमी को ही हुआ राजीव गांधी और जो संजय गांधी है और इंदिरा गांधी तीनों लोग गोपाष्टमी के दिन ही गए थे तो यह श्राप आज भी जाना जाता है एक संत का श्राप लगा था उस परिवार को और आप लोग विशेष रूप से गोपाष्टमी के दिन गौ माता का पूजन अवश्य करें और और संसार को यह मैसेज दे कि गौ माता हमारे लिए कितनी स्पेशल है गौ माता हमारे लिए कितनी महत्त्वपूर्ण है संसार भर को यह मैसेज दे कि गौ माता का कितना सम्मान होना चाहिए सब लोग जो सुन रहे हैं गोपाष्टमी

03:36:34:12 के दिन न तारीख के दिन गौ माता का विशेष रूप से पूजन करें संभव हो सके फोटो वीडियो इत्यादि हमारे साथ साझा करें यथा संभव हम प्रयास करेंगे कि वो सब कुछ इस प्लेटफॉर्म पर आवान के प्लेटफार्म पर दिखाया जाए जी बूंगा मैं एक बात से पूरी कर देता हूं कि इंदिरा गांधी मरी थी आवास में थी गोपाष्टमी राजीव गांधी मरे मद्रास में थथ गोपाष्टमी और संजय गांधी मरे आकाश में थ गोपाष्टमी धर्म सम्राट स्वामी श्री करपात्री जी महाराज की जय होय जय हो और एक बात अपनी रखनी चाहूंगा छोटी सी ज्यादा टाइम नहीं लूंगा हम यह करें ये कार्य करेंगे ठीक है क्योंकि गऊ सब हिंदुओं का ही एक केंद्र है जैसे मंदिर केंद्र है ना वैसे ही गौ की बात आते ही लोग संगठित हो जाते हैं तो अगर कोई व्यक्ति ऐसी छोटी सी भी गोष्ठी करे ना तो जरूर कुछ ना कुछ ऐसा उसके ऊपर जरूर बोले कि गौ रक्षा के लिए भी हम जो जरूरी कदम उठा रहे हैं ठीक है वो भी थोड़े थोड़े थोड़े ही आपके मदद से जो है वो लोगों में पहुंचेंगे ठीक है तो ये ना हो ये तो हो जाए पूजन हो जाए परंतु वो जो न के साथ जो व कहते हैं कि जो मेन मुद्दा है

03:37:49:27 वो भी हमने आगे बढ़ना कुछ ना जरूर बोलना है कैमरे के सामने कि इस प्रकार से गौ हत्या की जो की जा रही है हम सौहार्द चाहते हैं प्रेम चाहते हैं और गौ माता उसका मुख्य स्थान है उसी के दूध से हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई सभी पाले जा रहे हैं ठीक है तो यह भी मुझे लगता है एक मैसेज भी कन्वे करना अच्छा रहेगा उसमें और रामपाल भी गाय को माता मानते हैं तो उनके जो उनके जो शिष्य है वो भी गोपाष्टमी के दिन गौ पूजन करें गौ दान करें और विशाल भाटिया जी बोलिए जय श्री राम चलिए अभी अभी जो कपाती जी महाराज की बात हुई है तो उनके जो काशी में जो शब्द थे जो मंदिरों में बोए जाते हैं मैं उनसे बोलूंगा धर्म की जय हो विनाश हो प्राणियों में सवना विश्व का कल्याण कल्याण होनम पार्वती पते हर हर महादेव थ हर हर महादेव थोड़ा अधूरा रह गया गौ माता

03:38:51:28 की जय हो गौ हत्या बंद हो भारत अखंड हो अखंड हो भारत अखंड हो अखंड हो हर हिंदू सेना हो हर हिंदू सनातनी

⬜ Not used yet · 03:39:04:28 – 03:50:13:00 (11:08)

03:39:04:28 होनी हो नम पार्वती पतय हर हर महादेव हर हर महादेव शशांक चौधरी जी आपकी बात रह गई है जी जय श्री राम जय श्री राम मैं बाथरूम से करने आया लो रामपाल जी को तो चलेगा समय हो गया था नहीं तो हम उनको ले लेते व जो बाबू दास जी थे मैं आज फर उनका खंडन लाया हूं अच्छा शशा जी फिर कोई विशेष बात नहीं है फर करने को ब बहुत बढ़िया

03:39:46:03 बहुत बढ़िया तो शशांक जी फिर कोई विशेष बात नहीं है ना आपको बोलनी है जो नहीं नहीं मुझे उनसे काउंटर आर्गुमेंट करना था कुछ दो तीन पॉ पहाड़ी जी ने बोला था ना यदा यही धर्मस्य तो उसी में मुझे पूछना था कि अगर वो काल ने बोला है तो फिर वह धर्म की स्थापना कैसे करेगा और अगर व कृष्ण जी ने ही बोला है तो इसमें एक और बात आती ना कि वो दुष्टों का संहार करने के लिए भी जन्म लेते हैं और य कबीर जी को परमात्मा मानते हैं तो उन्होने तो कोई सहार नहीं किया उसके बाद ब है कबीर जी फ उनको भी रामपाल जी उनको भी परमात्मा मानते उन्होने भी उन्होंने भी उससे रिलेटेड कुछ नहीं किया अब तक कार्य इसका उत्तर मैं आपको दे देता हूं वो कितने चालाक लोग हैं वेदों में एक जगह आया कि व दुष्टों का संघार करता है तो रामपाल जी ने उसको पलट कर उसी के ऊपर पेन चलाकर लिख दिया कि वह अपने ज्ञान के द्वारा दुश्मनों को पराजित करता है ठीक हैसे ज्यादा आप क्या कर लो वो पन चला देगा उसके ऊपर ठीक है ना देखिए बात पूरी घूम फिर के आ जाएगी तत्वदर्शी प और तत्वदर्शी की डेफिनेशन ही अपनी बनाएंगे शास्त्र से नहीं देंगे तत्वदर्शी की डेफिनेशन एक डेफिनेशन तो बदल दी 15 एक की डेफिनेशन देते थे पहले आज वो भेद

03:41:01:10 खुल गया 15 एक के अनुसार तत्वदर्शी सिद्ध नहीं हुए 15 एक के अनुसार मां भगवती की पूजा करने वाला और शास्त्रों का अध्ययन करेंगे तो 15 एक के अनुसार बल्कि आगे दिखा दिया श्री कृष्ण को भगवान देखने वाला आगे बता दि है ना श्री कृष्ण को भगवान देखने वाला तत्वदर्शी है और 435 में बता दिया तत्वदर्शी है वो शास्त्र से नहीं बताएंगे शास्त्र से क्या बताएंगे कि वो नौ मंत्र देते हैं हमारे रामपाल जी भी नौ मंत्र देते तो हो गए तत्व दशी अरे भाई मैं भी देने लगू नौ मंत्र सबके मंत्र मैं भी दे रहा हूं पहाड़ी जी भी दे रहे हैं गोविंद जी भी दे रहे हैं पंडित पंडित जी भी दे रहे हैं भाटिया भी दे रहे हैं ज श यहां बैठे हुए सभी लोग तत्वदर्शी हो गए ये तो मनम व्याख्या है नारा में सारे के सारे देवताओं के मंत्र लिखे विधिया तक लिखी हुई है सारी तो वो तो बच्चा भी पढ़ के सुना देगा आपको अरे व विधिया अगर उसम भी डेप्थ में जाएंगे तो वो विधिया भी वो उपयोग में नहीं लाते हैं कहा लाते कुछ नहीं

03:42:13:13 लाते कर लीजिए बात आप इन लोगों से पूछिए पूरी महाभारत में जगह-जगह श्री कृष्ण को ईश्वर कहा गया है खाली गीता ही नहीं महाभारत में जगह जगह श्री कृष्ण ने अपने को ईश्वर बोला और तीन-तीन जगहों पर अपने विश्वरूप दिखाए हैं एक कर्मों की सभा में दिखाया था जब वो संधि प्रस्ताव के लिए गए थे एक उत्तक ऋषि को उन्होंने अपना विश्वरूप दिखाया और एक दिखाया नारद ऋषि को महाभारत में चार चार दिखाए जिनमें गीता में उन्होंने दिखाया क्या तब भी उनके अंदर कोई काल बैठा हुआ था अ ये इनसे पूछिए पूरी महाभारत में क्या काल बैठा था कृष्ण के अंदर अरे भाई वो तो यही कहेंगे वो बड़ा हुआ काल है अरे वो कह रहे व्यास जी के अंदर ही काल है वो वो कह रहा है व्यास के अंदर ही काल है तो आप कौन सा नहीं अनुशासन पर्व में लिखा है ना श्री कृष्ण ही काल है अनुशासन पर्व में वो तो हम लोग बात करेंगे काल प आएंगे चलिए आज का तो अच्छा रहा दो दो दो दो लोग आए मण मारना जी शशांक शुक्ला जी अविनाश शुक्ला जी जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम पूछेंगे भाया जी वाला और आप मुझसे संपर्क नहीं कर रहे हैं मैंने आपको कई बार कहा है नंबर नंबर दिया आपको कई बार संपर्क करने के लिए आपने आज तक व नहीं किया मुझे जी मैं प्रयास करूंगा लेकिन अभी मैं इंस्टा पे ही अभी मैं थोड़ा ठीक हूं तो इसलिए इ में थोड़ी सुविधा है ना तो इसलिए

03:43:28:19 मुझे असल में कानपुर में कुछ कार है ना इसलिए मैं कह रहा था जी आप आज मैं वैसे भी आज सुबह पनकी मंदिर में गया हुआ था आप बोले थे ना कई बार आप जा चुके हैं और मुझे आपकी बानपुर में कुछ कार्य है इसलिए मैं आपसे बोल रहा था जी जरूर श्री राम जय श्री राम अविनाश शुक्ला जी मैं ये कह रहा हूं कि इनको यही नहीं पता कि भगवत गीता महाभारत का एक भाग है अलग अलग मानते हैं अब मैं इनको क्या इनकी मूर बात करू इनको लगता है गीता जी अलग है महाभारत अलग है बोलते महाभारत नहीं मानेंगे लेकिन गीता मानेंगे मैं भी बोल दू भाई कि मैं तुम्हारी गरीब दास की वाणी में ये असुर नि कंदर रमण मानूंगा और गरीब दास की बाकी वाण को नहीं मानूंगा तो क्या मूर्खता इनकी बताओ आप इनको तो बेस इनके इनका रामपाल एक जगह लिखता है जब भगवत गीता बोली जा रही थी अरे भाई विशाल विशाल सट जी आइए ऊपर आइए भाई अगली बार आइएगा आज तो नहीं ठीक है सभी को जय श्री राम भैया आप लोग गोपाष्टमी के दिन 9 तारीख को गोपाष्टमी जरूर मनाए गौ माता की पूजा करें और धरातल पर जुड़ने के लिए 7408 30169 यह हमारा नंबर है आप जुड़ सकते हैं और धर्म रक्षा में सहायता कर सकते

03:44:43:24 हैं नास्त्र हमारा एक प्रकल्प चल रहा है जिसमें हम सब भाई बैठ कर के भगवान के नाम का जप करते हैं उसमें भी आप जुड़ सकते हैं ना मास्त्र में दिन में पांच बार अलग-अलग करते हैं 1515 मिनट और सुबह सवा घंटे करते हैं और इसके साथ ही साथ हमारी क्लासेस भी चलती है तो जो अध्ययन करना चाहते हैं वह भी ट कर सकते हैं वो निशुल्क होती है क्लासेस और किसी भी प्रकार की टेंशन है अगर हमारी बातों को लेकर के तो भी आप व कर सकते हैं टेंशन मिटाने के लिए फॉर्म है वहां पर वो भर सकते हैं वेदों में प्रमाण नहीं है ओए और कबीर भगवान नहीं है ठीक है सभी को कुछ कोई कुछ कहना चाह रहा है क्या बोली बत लेट हो रहे थोड़ा सा जाना था बोल लीजिए बोल लीजिए पूरा कर लीजिए मैं पूरा कर लू अना पूरा कर हा मैं की किताब में एक जगह ये भी लिखा है कि जब गीता का ज्ञान बोला जा रहा था तब शास्त्रों के रूप में एक मात्र वेद ही उपलब्ध थे और कोई नहीं थे तो इनको इनके बाबा ने पूरी गीता ही नहीं पढ़ी कि भगवान स्वयं अध्याय 13 के श्लोक में चार में

03:45:59:00 ब्रह्म सूत्र के पदों की बात कर रहे हैं तो इनको ब्रह्म सूत्र क्या होता है इने पता ही नहीं होगा इनको क्या चीज होती है बाबाज अरे लोग मना कर देते हैं उपनिषद को मना कर देते हैं ब्रह्म सूत्र को मना कर देते हैं नहीं तो बाबा झूठ क्यों बोल र जब गीता बोली जा रही कोई शास्त्र नहीं थे भगवान खुद ब्रह्मसूत्र के पदों की बात कर रहे हैं ना तो मतलब उन्होने पढ़ी नहीं गीता तो का तत्वदर्शी हुई जब जिसने पूरे श्लोक ही नहीं पढ़ा तो कैसे ऐसे व्यक्ति को स दर्शी माना जाए या तो वो झूठ बोल ना है या तो उने पढ़ा नहीं री बात तो है नहीं तो जिस जिस जिस जो ये पढ़ा रहे हैं सारे के सारे यह जो जब बोलते हैं कि हमारा जो ग्रंथ है वह तो पता नहीं उड़ता हुआ समुद्र मंस में से निकला था तो यही से झूठ सिद्ध हो जाते हैं और कोई ग्रंथ ही नहीं वेदों के अलावा जय श्री राम जी आप भी बोल वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है जब ऐसा बोलते ना बड़ी हसी आती है यह ऐसा लगता है जैसे लोहे को सोना पहना चाहते हैं गोल्ड 24 कैरेट गोल्ड बनाना चाहते हैं

03:47:06:14 बताओ बो अपमान है शास्त्र का इनको तो तर्को ही भगा देना चाहिए अरे मैं तो वही कर रहा था फिर इन्होने उड़ाना शुरू शिवांश नारायण द्वेदी शास्त्र नहीं खोलता है अरे तो शास्त्र तो इनके लिए समझ लो कि क्या क बच्चे भी इनसे बहुत बढ़िया है य अपनी स्ट नामा ऑनलाइन होता है ऑनलाइन होता है हम लोग गगल मीट इत्यादि पर जुड़ते हैं फिर साथ में मिलकर भजन व भगवान के नाम का जप करते

03:47:41:08 हैं यह गुरु वाणी है क्या दिखाना है इसमें गरीब दास थोड़ा जूम कर लीजिए फिर क्या है मूल कमल में राम है स्वाद चक्र में राम नाभी कमल में राम है कमल विश्राम कंठ कमल में राम है त्रिकुटी कमल में राम अब लो सब जगह राम है भैया सहस कमल दल राम है मुनि बसती त ठाम सब जगह राम ही राम है राम के भक्त

03:48:38:08 चलिए इसका रेफरेंस रख लीजिएगा प्लीज इसका रेफरेंस सेव कर लीजिएगा पाच यह इनका पांचवा वेद है ठीक है ठीक है भाई कुल मिलाकर बात यह है अगर यह अपनी कितनी भी बातें बताते हैं प्रमाण तो इनके सारे प्रमाण सबसे पहली बात है कि इनके ही अनुसार अगर इनकी बात मान ले थोड़ी देर वह सारे प्रमाण संकेता क्मक है कोई ठोस नहीं है संकेता क्मक प्रमाण है सारे तत्वदर्शी क्यों संकेता मेंक कबीर कबीर भगवान है क्यों संकेत काल संकेता मक कबीर की भक्ति संकेता क्मक सब संकेता मक है कुछ ठोस है ही नहीं और जो ठोस है उनको नकार देंगे चलिए सभी को जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम और एक बार फिर कह रहा हूं कबीर के श कबीर दास जी के रामपाल दास जी के शिष्यों को माता जी ने निष्ठा पूर्वक अगर पान कराया हो सेवन कराया हो उनके अंदर सा तो व आए और वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है सिद्ध करें भगवत गीता को काल ने बोला है श्री कृष्ण ने नहीं बोला है सिद्ध करें तत्वदर्शी

03:49:53:13 सिद्ध करें अजरावर अविनाशी नहीं है ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश सिद्ध करें और कबीर अजर अमर अविनाशी है यह सिद्ध करें ठीक है जय श्री राम जय श्री राम [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Live 3:50:18 · 07 Nov 2024

क्या रामपाल के kabir अविनाशी अजर है ? #rampaljimaharaj #kabir

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A · Live क्या रामपाल का ज्ञान शास्त्र सम्मत है #rampaljimaharaj #कबीर
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A · Live रामपाल की भक्ति मनमुखी या शास्त्र सम्मत
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A · Live क्या रामपाल तत्वदर्शी संत हैं #rampaljimaharaj #kabir
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A · Live रामपाल पंथ और उनके अनसुलझे रहस्य #rampaljimaharaj #kabir
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A · Live क्या गीता का पाँच प्रतिशत ज्ञान काल ने बोला है ? #kabir #rampaljimaha...
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