⬜ Not used yet · 00:00:02:14 – 01:21:13:18 (1:21:11)
00:00:02:14 सभी को जय श्री राम और आशा करते हैं आप सभी लोग कुशलता से होंगे। आज की जो लाइव आप लोग देखने वाले हैं जो लाइव चर्चा आप लोग जानने वाले हैं बहुत सी चीजें वह बहुत ही संवेदनशील जानकारियां भी हैं और बिल्कुल आपके माइंड को घुमा देंगी और आज की लाइव इतनी इंपॉर्टेंट है कि मैं अपने लखनऊ से करीब 200 किलोमीटर की दूरी पर था और पूरे 6 घंटे की ड्राइव करके मैं यहां पर पहुंचा हूं और आपके सामने मैं उसी सीधे यहीं पर गाड़ी रोकी और फिर यहां पर हम लोग आपसे चर्चा कर रहे हैं। तो छ घंटे के बाद जो है यह डायरेक्टली मैं आपके सामने उपस्थित हूं। आपको मेरे चेहरे पर भी एक दिख रहा होगा कि हां भाई इसने कुछ काफी देर से ये कहीं पर कार्यरत थे। ठीक है? तो हम लोग सीधे पॉइंट पर आते हैं कि सतलोक आश्रम द्वारा रामपाल दास जी के नाम पर क्या हो रहा है? है ना? वो उनका क्या है? मान्यता उनकी क्या फिलॉसफीस हैं वो एक अलग विषय बिल्कुल अलग विषय मगर उन उसके नाम पर भी
00:01:17:18 क्या हो रहा है आज यह पता लगेगा आपको ठीक है तो हमारे साथ जो हैं वह रामपाल दास जी के ही एक फॉलोअ हैं और यह रहे वो आपके सामने रामचंद्र दास जी जय श्री राम जय श्री राम सभी भाइयों को आप सर्वप्रथम अपना स्वयं का परिचय आप रामपाल दास जी के संपर्क में उनके कब से हैं इस बारे में यतोचित रूप से आप जो है बताएं जनता को और जो रामपाल दास के फॉलोअर्स भी है ना जो स्वयं को बहुत बड़ा गुरु भक्त मानते हैं वो भी आंखें खोल के सुनना आज आंख और कान खोल लो अपने ठीक है चलिए कानपुर से रामचंद्र आपको शिवश नारायण द्विवेदी जी को जय सीताराम और नमस्ते नमस्कार प्रणाम और जितने भी हमारे पैनलिस्ट में भाई बहन देख रहे हो उनको भी सबको नमस्ते नमस्कार प्रणाम मैंने 24 मई 2014 में सतलोक आश्रम बरवाला में डीबीडी द्वारा नाम दीक्षा ली थी डीबीडी द्वारा नाम दीक्षा ली थी छ महीने बाद बरवाला कांड हो गया था
00:02:34:02 लेकिन मुझे उस समय कुछ पता नहीं था और उस सतलोक आश्रम बरवाला के अंदर जाने के लिए सबसे पहले क्या था कि आपकी नमक की पुड़िया तक भी गेट के बाहर रखवा ली जाती थी। जूते चप्पल सब आप गेट के बाहर रखवा ली जाते थे। इसके बाद हमारी और जो पुरुष की लाइन अलग होती है और महिलाओं की अलग। पुरुषों की महिलाओं की सबकी मेल्ट डिटक्टर से पूरी जांच होती थी। पूरी जांच होती थी आपके शरीर की दोनों तरफ और इसके बाद जांच होने के बाद जब आप एंट्री करते थे तो आपका जो बैग होता था कपड़ों का वो पूरा बैग खोल के एक एक कपड़ा पूरा चेक किया जाता था। आप एक बिस्किट तक उस आश्रम के अंदर नहीं ले जा सकते थे। इतनी बड़ी वहां शक्ति थी। इसके बाद अगर आपने जब एंट्री किया तो वहां जाने के बाद जो अलग व्यवस्था है कि मतलब आप फ्रेश हुए या जो भी क्या भंडारा लिया जब आप दर्शन के लिए लाइन में जाते थे तो आप उस लाइन में लगने लगते समय अगर आपकी जेब में पैसा है सिक्का है वो भी निकलवा लिया जाता था घड़ी है वो भी निकलवा ली जाती थी अगर गमछा डाले हो तो वो भी सब निकल पेन भी अगर आपके पास वो रखवा लिया जाता था इसके बाद आपको बड़ी लाइन
00:03:49:03 से दर्शन करने के लिए ले जाता था जब वहां दर्शन के के लिए हम जाते थे तो एक उन्होंने बैरिकेटिंग बना रखी थी बराबर हमारे बराबर लगभग इस तरह से बैरिकेटिंग बना रखी थी और उस बहुत लंबी बैरिकेटिंग थी मतलब डिवाइडेशन था एक तरफ महिला एक तरफ पुरुष फिर संत रामपाल जी महाराज के पीछे 1520 लोग चलते थे राइफल रिवाल्वर गन वगैरह लेकर के नाम और उस समय हम लोग नहीं समझते थे और वो पूरा पूरी एक ट्रॉली होती थी जो आगे से पीछे तक वहां चलाई जाती थी संत रामपाल जी महाराज आशीर्वाद देते थे वो बैरिकेडिंग के उधर वो थे इधर हम लोग और ये लोग जो है 1520 लोग राइफल रिवाल्वर लेकर चलते थे और ये दिखा दिखावा बहुत करते थे बार-बार दंडवत प्रणाम करना उस समय मेरे भी शंका हुई थी कि यार ऐसा ये ज्ञान कैसा जब ये बता रहे हैं कि जब आप सत्य के मार्ग चलोगे और प्रहलाद जी जैसा उदाहरण दिया जाता है कि सत्य के मार्ग पर प्रहलाद का उनका जो हिरण्य इतना पिता जो है काल ब्रह्म इतना ताकतवर था कुछ भी बिगाड़ नहीं पाया तो आज ये किले नुमा आश्रम के अंदर संत रामपाल जी महाराज को इतना बड़ा डर कैसे हो सकता कि इनके राइफल रिवाल्वर इस गन लेकर के जब ये लोग इनकी रक्षा
00:05:04:07 कर रहे हैं तो फिर हमारी रक्षा कैसे होगी इन मंत्रों से या इस विधि से ना तो सवाल तो आते थे लेकिन उतनी गहराई से नहीं एक मिनट एक मिनट यहां पर एक बात आ रही है सामने कि इनको जो है गुरुद्रोही का नाम मिला है। भाई देखिए जब यह क्रांति करेंगे कि इनके जो गुरु हैं रामपाल दास जी और उनके विरोध में उनके नाम से जो धांधलेबाजी की जा रही है जब ये उस तंत्र का प्रतिकार करेंगे तो वो तंत्र कुछ तो बोलेगा ना इनके लिए मगर जो ये तथ्य प्रस्तुत कर रहे हैं और यदि आपके अंदर सामर्थ्य है तो उन तथ्यों को काटिए आकर के उसको नाम क्या दिया गया है आपके सतलोक आश्रम की तरफ से वो मत कहिए उन तथ तथ्यों को जो ये बातें बोल रहे हैं उन प्रमाणों को उनको काटना है आपको है ना कि इसको बस उन्होंने सतलोक वालों ने मतलब जो भी जैसे किसी ने बोलना चालू किया ये तो डायन है इसकी बात मत सुनो ऐसे नहीं उसको डायन आप सिद्ध करिए है ना आकाशवाणी मत करिए दूसरी एक बात मैं कहूंगा कि एक कोई इस्लाम को फॉलो करने वाले कोई बात कह रहे थे कि मैंने
00:06:19:18 उनका पढ़ा नहीं है वो क्या कह रहे हैं? मगर मैं एक बात बता दूं कि जो इस्लाम को फॉलो करने वाले हैं क्या उनका ईश्वर सर्वशक्तिमान है? और अगर उनका ईश्वर सर्वशक्तिमान है तो वह आकर के सिद्ध करें हक है जो भी हैं या उसके चेले हैं आकर के सामना करें प्रत्यक्ष वार्ता में। और अगर सर्वशक्तिमान ईश्वर नहीं है तो ऐसे धर्म को या मजहब को छोड़ दें जहां पर ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं है और सर्वशक्तिमान ईश्वर को प्राप्त करने के निमित्त सनातन धर्म की शरणागति ग्रहण करें। जी जी जी रामचंद्र जी बोलिए दास जी आपने एक बात कही गुरुदोही गुरुदोही जैसे ये लोग जो है जिसको गुरुदोही घोषित कर आप अपनी बात वहीं से शुरू करिए जहां से कर रहे थे फिर हम ले लेंगे गुरु इसका जवाब भी दे देंगे आप जो अंदर जाने वाला मामला जो आपके मन में आया प्रहलाद ऐसे थे ये सब बातें आपके मन में उमड़ी है ना वहां से आप बात करिए लेकिन फिर भी हमने जो है ना ज्यादा उस पर ध्यान नहीं दिया कि सारे लोग उसी तरह जा आ रहे थे मन
00:07:34:21 में शंका थी लेकिन हम खुलकर बात नहीं कर सकते थे क्योंकि भाई वहां का जो अंदर का और इनर और आउटलुक देख के ना व्यक्ति कोई एहसास नहीं कर सकता था कि यह व्यवस्था हो सकती है। लेकिन छ महीने बाद छ महीने बाद 147 2014 को छ महीने की पहली बार बता रहा हूं। 24 मई 2014 को मैंने नाम दीक्षा लिया और 147 2014 को जब मैं वहां गया बरवाला में तो ये रात में हम लोगों को ट्रकों में बसों में लाद करके और ट्रकों में लाठियां भर के कई ट्रक लाठियां भर के ना और हम लोग बसों में रातों रात लेकर के हमें तो हिसार हम पहुंचे थे। मुझे तो हिसार ले गए। हजारों आदमियों को हिसार में रातों में उतार दिया कोर्ट के बाहर और इधर रोहतक में उतार दिया और हजारों लोगों को इन्होंने बुला लिया वहां पर लाखों लोगों को और किसी को नहीं पता चला ये क्या हुआ और इन्होंने जब सवेरा हुआ तो वहां की सरकार वहां का हिसार के लोग पूरा इन्होंने रोड हाईजेक कर लिया काले कमांडो लगा दिए चारों तरफ से पूरा जो है और हम लोग कुछ नहीं समझ पाए हमको डंडा और एक झंडा पकड़ा दिया और यह 147 2014
00:08:49:22 को संत रामपाल जी महाराज को तारीख पे जाना था क्योंकि 2006 के करोथा कांड के केस में इन्होंने 22 महीने तक संत रामपाल जी महाराज जेल में रहे थे 2006 से लगा 2008 तक तो किसी भी संत रामपाल जी महाराज की किसी भी शिष्य ने संत रामपाल जी महाराज की जमानत नहीं कराई थी। किसी भाई ने किसी पत्नी ने किसी बेटा बेटी ने किसी ने जमानत नहीं कराई थी। तो पर्सनल बांड पे कोर्ट ने जमानत दी थीटा कोर्ट ने और उनकी हाजरी माफी कर रखी थी क्योंकि हम आप सभी जानते हैं कि कोर्ट जेल के अंदर जो है आपका अगर आचरण सही है तो ये हमें अधिकार भी प्राप्त है कि जब कोई मेरी जमानत नहीं कराता है तो कोर्ट मुझे मतलब पर्सनल जवाब देता है और इनकी ये प्लानिंग 1999 से चल रही थी संत रामपाल जी महाराज को फसाने की प्लानिंग उनके बेटे भाई महेंद्र महेंद्र सिंह और उनके जो लड़के के वीरेंद्र, मनोज, पत्नी, बेटा बेटी ये सब लोगों की पहले से प्लानिंग थी और संत रामपाल जी महाराज ने 1994 में घर छोड़ दिया था। इसके बाद आज तक वो घर नहीं गए और ना किसी बेटा बेटी को अपने गले लगाया और सबको सत्संग के भी माध्यम से बताया कि मेरे बेटा बेटी चार संताने थी। मैं जानता
00:10:05:01 हूं कितनी मेरी सेवा करते हैं। अब तो हमारे लाखों बेटा बेटी हो गए। एक को आवाज देता हूं तो 10 खड़े हो जाते हैं। तो इस तरह से ना इन लोगों ने पूरा यह षड्यंत्र रचा 147 2014 को उन्होंने कोर्ट की अवमान करवा दी। वहां इन्होंने वकीलों के आई कार्ड छीन लिए। बड़ी अभद्रता की कोर्ट और जेल परिसर में दोनों जगह इन्होंने पढ़ते ही नहीं है तो वो कोर्ट की अवमानना इन्ह जब करवाई तो कोर्ट ने नोटिस तो ये झारखंड जो लोअर कोर्ट है ये कुछ नहीं कर सकता ये हाई कोर्ट को इंडिकेट करता है और हाई कोर्ट ही संज्ञान लेता है फिर हाई कोर्ट में जब यहां के जजों ने और वहां के वकीलों ने कंप्लेन की कि भाई आज तक भारत के इतिहास में कभी ऐसा नहीं हुआ कि जो किसी की हिम्मत हो जो जीडीसी को जो न्यायपालिका पर कब्जा कर ले तब जो है चंडीगढ़ हाई कोर्ट से संत रामपाल जी महाराज को नोटिस भेजा गया कि आप जो है कोर्ट में उपस्थित हो के आप जवाब ना पेश कीजिए। आपने जो कोर्ट की अवमानना की है। तो संत रामपाल जी महाराज को 268 2014 को चंडीगढ़ हाई कोर्ट में पेश होना था। लेकिन उसी दिन ये 2006
00:11:20:04 वाले केस की तारीख लगी हुई थी। जो 2004 का करौथा कांड केस हुआ था वो रोहतक में तारीफ थी आज बहुत जरूरी जाना था तो फिर संत रामपाल जी महाराज ने अपने वकील आज आर एस राय जी जो वर्तमान समय में नहीं रहे कैंसर से उनकी मृत्यु हो गई वो बहुत अच्छे वकील थे उन्होंने 268 2014 को कोर्ट में वहां पर एप्लीकेशन लगाई कि संत रामपाल जी महाराज ने लिखा कि जो 147 2014 को हिसार और रोहतक कोर्ट में जो काले कमांडो लगे थे ये मेरे नहीं थे ये राष्ट्रीय सभा सेवा समिति कमांडो में और उस राष्ट्रीय सभा सेवा समिति का संचालक राम कुमार ढाका है और यह राष्ट्रीय सभा सेवा समिति इन्होंने 2010 में रोहतक में मानसरोवर पार्क में बनाई थी जबकि संत रामपाल जी महाराज सतलोक आश्रम बरवाला में थे लेकिन उनके सामने इन्होंने ये कोई काम नहीं किया 51 लोग थे उसके सदस्य वो जो वहां पर जो भीड़ थी विरोध करने के लिए प्रशासन का उसमें जो अगवाई करने वाले कमांडो टाइप के थे वो ये रामपाल जी के द्वारा नियुक्त नहीं थे ऐसा उनका कहना है और वो नियुक्त थे तथाकथित जो एक तंत्र है जो रामपाल नाम रामपाल के नाम
00:12:35:08 से काम कर रहा है उनके द्वारा और जी ऐसा इसके संबंध में आपके पास यतोचित जो कागजात भी होंगे आपके पास प्रमाण भी होंगे है ना ठीक है एविडेंस है मैं प्रमाण से एक बात करता हूं जो 268 268 2014 को चंडीगढ़ हाई कोर्ट में संत रामपाल जी महाराज ने लिखित में वहां दिया था उसका भी हमारे पास प्राण सारे एविडेंस है। एविडेंस पे ही मैं बोलता हूं। इसके बाद इन लोगों ने क्या किया? जब इन्होंने संत रामपाल जी महाराज ने ये जब वहां पर अपना लेटर दाखिल कर दिया तो फिर चंडीगढ़ हाई कोर्ट ने राम कुमार ढाका मास्टर राम कुमार ढाका जो राष्ट्रीय सभा सेवा समिति का अध्यक्ष है इन्होंने पूरा बकायदे ये चार पन्नों का एक लेटर भी बनाया है। ये ये बात करेंगे तो बड़ी लंबी चर्चा हो जाएगी। इस इस चार पन्नों के लेटर में इन्होंने इस भारत को सोने की चिड़िया बना दिया था सपनों में। है ना? इस तरह से मूर्ख बनाया गया था और राष्ट्रीय सेवा सेवा समिति 2010 में निर्माण किया था इसका कोई लीगली प्रूफ नहीं है इन्होंने फर्जी बनाई थी फर्जी बनाई थी कि संत
00:13:50:09 रामपाल जी मां को फसाने के लिए तो ये राष्ट्रीय सभा सेवा सित के बारे में हमको भी नहीं पता था जब हम बरवाला जो भी ये जो भी यहां पर इस समय जो जानकारियां दी जा रही है उसकी जिम्मेदारी पूरी तरीके से से जो रामचंद्र जी है वह लेते हैं। यह अपना नंबर भी सार्वजनिक करते हैं। इस संबंध में यदि इन किसी को इनसे प्रमाण चाहिए तो वह नंबर भी अपना देते हैं। अभी यहां पर आपको दे दिया जाएगा। अगर आपको प्रमाण चाहिए कि यह जो समिति है यह किस तरह इसका क्या दस्तावेज है क्या नहीं है और अब इनके नाम से जो क्या कहते हैं रामपाल के रामपाल जी के नाम से जो चीजें हो रही हैं हम लोग उस पर आते हैं जरा आप लोग उस आप जरा उस पर प्रकाश डालना शुरू करें कि ये कैसे फिर उसके बाद उनके बाद उनकी क्या ऐसी चीजें हैं जो चीजें बदल रही है और तेजी से जो उनके नाम से दूसरा ही एक प्रचार चालू हो गया है। आपकी अगर इजाजत हो और समय हो तो मैं थोड़ा सा केस के बारे में बताना चाहता हूं। हां वो पूरा कर लीजिए आप पूरा कर लीजिए क्योंकि आपके
00:15:05:20 लिए भी और जितने हमारे लोग भाई बहन जुड़े हुए हैं उनके लिए बहुत जरूरी है। इसलिए मैं मतलब आपके माध्यम से पूरी दुनिया बताना चाहता हूं। ये ज्ञान अमृत एवं षड्यंत्र का विष नाम पुस्तक है। इसमें सारे ज्ञान अमृत एवं षड्यंत्र का विष अच्छा इस पुस्तक में हमने सारे केसों का जजमेंट लिखा हुआ है। एफआईआर नंबर 426 ब 2014 सरकारी काम में बाधा एफआईआर नंबर 427 ब 2014 बंधक बनाने वाला केस एफआईआर नंबर 428 ब 2014 देशद्रोह का केस जो वर्तमान समय में चल रहा है। 30 अप्रैल 2023 तक का एक एक तारीख का इसमें विवरण दिया हुआ है और एफआईआर नंबर 429 ब 2014 चार महिला एक बच्चे की हत्या हुई संत रामपाल जी महाराज को 16 अक्टूबर 2018 को शास्त्र मरते दम तक आजीवन कारण एफआईआर नंबर 430 में एक महिला 17 अक्टूबर 2018 को संत रामपाल जी महाराज को शास्त्र मरते दम तक आजीवन कारण एफआईआर नंबर 443 जो आवश्यक वस्तु अधिनियम गैस सिलेंडर जो 48 गैस सिलेंडर प्राप्त हुए थे उसमें ये इन केसों में संत रामपाल जी महाराज तीन केसों में ब्जत बरी हुई है। एफआईआर नंबर 426,
00:16:20:26 एफआईआर नंबर 427, एफआईआर नंबर 443 और एफआईआर नंबर 429 और 430 में इनको सजा हुई है। आज तक जितने संत रामपाल जी केस लगे थे। हजारों केस लगे पुस्तक के मामले में सब मामले में कि कहीं भी कोई पुस्तक प्रचार होते तो केस संत रामपाल जी लगा। किसी भी केस में संत रामपाल जी को आज तक सजा नहीं हुई। लेकिन एफआईआर नंबर 429 और 430 में पांच महिला एक बच्चे की हत्या संत रामपाल जी महाराज का बड़ा लड़का वीरेंद्र संत रामपाल जी महाराज का छोटा लड़का मनोज संत रामपाल जी महाराज की बहन राजबाला संत रामपाल जी महाराज का बहनोई कृष्णा संत रामपाल जी महाराज का भांजा जोगिंद संत रामपाल जी महाराज का भतीजा अमित संत रामपाल जी महाराज का सगा भाई महेंद्र संत रामपाल जी महाराज को जो बलजीत है इनके साथ रहता था बलजीत बलजीत की बेटी बबिता, सावित्री, पूनम, टीना, पुरुषोत्तम सैनी और राजेंद्र 28 गुंडे हैं। इन 28 गुंडों ने मिलकर के पांच महिला एक बच्चे को कमरे के अंदर बंद करके लाठियों से पीट पीट कर मार डाला। अब आप कह सकते हो आप ऐसे कह सकते कैसे कर सकते हैं। और वो इन्होंने स्वयं कोर्ट
00:17:36:04 में बयान दिया। सारा इसका जजमेंट की फाइल है। फाइल भी मैंने वायरल की है और इसमें सब पूरा दे रखा है। पांच महिला एक बच्चे की हत्या इन्होंने वहां पर कोर्ट में स्वीकारा और सारी उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट है। और देखिए वो जो पांच महिला एक बच्चे की जिनकी हत्या हुई थी उनके घर के लगभग 12 13 लोग जैसे मान लो आप हम वहां गए थे। मैं आपको एक बात कहना चाहूंगा। देखिए पांच महिला और पांच महिला और एक बच्चे की हत्या की बात आप कर रहे हैं। पहली बात तो ये जो जानकारी मैं फिर बता रहा हूं जो जानकारी ये उपलब्ध कराई जा रही है इसकी जिम्मेदारी पूरी तरीके से रामपाल जी की है। ये रामचंद्र दास जी की है और इस बारे में एक डिस्क्रिप्शन में नंबर दे दिया जाएगा। यदि किसी को इस बारे में यथोचित प्रमाण चाहिए तो वह इनसे संपर्क कर सकते हैं। हम इसकी जिम्मेदारी नहीं लेते हैं कि ये जो जानकारी दी जा रही है उसको हमने सत्यापित की हुई है। जानकारी ये भाई साहब दे रहे हैं। दूसरी बात यह है कि किसने क्या किया और किसने क्या नहीं किया। मतलब यह जो आपराधिक मामला है यह कोर्ट के द्वारा दिया गया डिसीजन है अगर तो ही उस डिसीजन को सामने दिखाते हुए हम बोल बोल सकते हैं। अन्यथा हम
00:18:51:13 नहीं बोल सकते कि किसने क्या किया और किसने क्या नहीं किया कि 28 गुंडों गुंडे शब्द का उपयोग भी इस तरह से करना जो है मुझे नहीं लगता कि हमारे अधिकार की सीमा में है। तो इसका थोड़ा सा ध्यान रखें। हां बिल्कुल बिल्कुल सही है ये इसमें थोड़ा मैं नहीं प्रो करूंगा वो निकल गया मुंह से है ना तो ये जो 28 लोग थे तो ऐसे नहीं आपने कोर्ट में कहा कि हां हमने इनकी हत्या की है तो ऐसे जज मान नहीं लेता है जज फिर आपके साथ एएलआई भेजता अधिकारी भेजता उसकी मैं एक एक बात जानना चाहूंगा जैसा कि आप क्वेश्चन कर रहे हैं कि ऐसा हुआ तो उसके पीछे कारण क्या रहा ऐसा कुछ बताया गया कि क्या कारण रहा उस वहां पर जो ऐसा हुआ और इस आरोप की सजा आपका कहना है वो मिली है रामपाल जी को जी जी जी जी इस आरोप की सजा यानी कि कोर्ट ने यानी कि कोर्ट ने ये नहीं माना है कि जिनका आपने नाम लिया उन पांच महिला और बच्चे को मारने का कोर्ट ने डिसाइड नहीं किया है कि उन्होंने ही मारा है। आप बोल रहे हो बात नहीं कोई भी डिसाइड नहीं किया है और बाकायदे हमारे पास जजमेंट की फाइल है और कोई भी मुझसे संपर्क कर सकता है
00:20:06:16 और आप इस बात का दावा नहीं कर सकते ना फिर जब कोर्ट ने डिसाइड नहीं किया तो आप दावा नहीं कर सकते कि उन्होंने ऐसा किया है। नहीं वही तो बता रहा हूं सर दावा इसलिए कर सकता हूं क्योंकि जजमेंट की फाइल जो कहती है हम जजमेंट को मानते हैं क्योंकि इन्होंने कोर्ट में स्वयं बयान दिए हैं कि मैंने पांच महिला एक बच्चे की हत्या संत रामपाल जी महाराज के कहने पर की है। अच्छा लेकिन हां जो उन्होंने बयान दिया है ये बयान है आपके पास हां बकायदे जजमेंट की पूरी फाइल है एफआई नंबर 497 की जजमेंट की पूरी फाइल है और मैं सीएनआर नंबर भी दे दूंगा जो भी कोई मुझसे संपर्क करेगा मैं उसको सीएनआर नंबर दे दूंगा आप ऐसा करिएगा आप ऐसा करिएगा वो जो पीडीएफ है ना जजमेंट की जो पीडीएफ है और यह सारे जो है ये आप हमें दे दीजिएगा पीडीएफ इत्यादि हम इन सबके लिंक जो है डिस्क्रिप्शन में डाल देंगे तो वहां से लोग डाउनलोड करके अपना देख लेंगे। ठीक है? जी फाइल भेज दूंगा और उनको हम सबका सीएनआर नंबर दे दूंगा। सबसे मेन बात आपको जो भी देना है ना आपको जो भी देना है वो आप दे दीजिएगा तो हम यहां डिस्क्रिप्शन में उसको डाल देंगे। ठीक है? एक एक मतलब बहुत आसान
00:21:21:18 बात बता देता हूं कि सारी फाइलों का हम सी एन आर नंबर 16 अंकों का होता है। ठीक है? वो हम दे देंगे। आप ई कोड सर्विस नामक ऐप डाउनलोड कर लीजिए। वैसे भी हमें पूरे भारतवासियों को जागरूक बनना चाहिए कि आप अपने केस को घर बैठे देख सकते हैं। जिनके ऊपर केस चल रहा हो वो अपने वकील से 16 अंकों का सीएनआर नंबर दे ले ले और अपने घर बैठे तारीख वगैरह सब देख सकते हैं क्योंकि काफी वकील क्या गुमराह भी कर देते हैं या आपकी तारीख नहीं भी है तब भी आपको बुलाया जाता है। है ना? तो इस तरह हमारे पास सारे जजमेंट है और कोर्ट आपके कहने से नहीं मानेगा क्योंकि कोर्ट को सबूत चाहिए कि भाई संत रामपाल जी महाराज के द्वारा ना बोल के ना लिखित में कोई सबूत नहीं लेकिन 2014 से 2018 तक जज ने इनके जो 12 वकील थे संत रामपाल जी महाराज तरफ से सबसे इनसे 12 वकीलों से एविडेंस मांगते रहे अगर ये 268 2014 का जो चंडीगढ़ हाई कोर्ट में जो संत रामपाल जी महाराज लेटर दिया था राष्ट्रीय सभा सेवा मेरी नहीं है। इसके संचालक राम कम ढाका है। अगर 268 2014 का लेटर अगर ये कोर्ट को दे दिया जाता तो ये बरवाला कांड होता ही नहीं। और संत रामपाल जी महाराज
00:22:36:19 किसी भी तरह दोषी नहीं था बचते। क्योंकि संत रामपाल जी महाराज तो पहले दे दिया था। 18 नवंबर 2014 को बरवाला कांड हुआ है और 268 2014 को संत रामपाल जी महाराज वहां दे चुके थे कि मेरी राष्ट्रीय सभा सेवा मिली नहीं है। तो जब काले कमांडो जब वहां पूरा घेर रखा था तो वहां के प्रशासन को उसी समय कैप्चर करना चाहिए था कि भाई ये काले कमांडो कौन यहां पे है? तो अगर ये उसने एक्शन ले लिया जाता कानून प्रशासन के द्वारा तो ये बरवाला कांड नहीं होता। यह हम कहना चाहते हैं। चलिए बरवाला कांड तो ठीक है और एक बस बात रह गई अब आपने जब इतना छेड़ा है तो कि इन लोगों ने जब यह कह दिया वहां कोर्ट में कि हमने इनके कहने पर ऐसा किया है जिसका कि आप आप पीडीएफ देने वाले हैं जो यहां पर जजमेंट में डाला जाएगा जजमेंट का पीडीएफ तो कोर्ट ने फिर इनको कुछ नहीं किया जिन लोगों का जिन भी लोगों का आप नाम ले रहे हैं बहुत अच्छा आपने सवाल किया बहुत अच्छा सवाल किया शायद मेरे दिमाग से बात निकल जाती। देखिए संत रामपाल जी महाराज सहित 28 29 लोगों को साम मरते दम तक आजीवन कारा की सजा हुई।
00:23:52:19 29 लोगों को संत रामपाल जी महाराज सहित 29 लोगों को शास्त्र मरते दम तक आजीवन कारा की सजा हुई है। और ये 28 लोग मतलब जिनका आपने नाम लिया उनको सजा भी हुई है। सबको सजा हुई है। लेकिन शिवश जी आप बहुत मजे की बात देखिए। 28 लोग संत रामपाल जी महाराज सहित 29 लोगों को सजा हुई। 28 लोग जेल से बाहर घूम रहे जो पूरे वर्ल्ड में फर्जी आश्रम चला रहे हैं। फर्जी नाम दीक्षा दे रहे। फर्जी पुस्तके पूरे पूरी दुनिया में फैला रहे हैं। निर्दोष संत रामपाल जी महाराज सजा काट रहे हैं। और आपको बड़ी मजीब बता दूं। आप भी जानते हैं राम रहीम जी भी सुनारिया जेल में बंद है। और वो भी छ साल के अंदर कम से कम ढाई साल पैरोल पर बाहर आए हुए हैं। आप सबने सुना होगा। ठीक है। कौन? राम रहीम जी। राम रहीम जी। राम रहीम अच्छा हां हां लेकिन संत रामपाल जी महाराज की माता जी का 2021 में 2019 या 21 में देहांत हुआ था उनको एक दिन का भी पैरोल नहीं मिला। जबकि आप जानते हो कानून कहता है कहना है आपका
00:25:07:27 कहना है कि जिस आरोप के लिए 29 लोग जेल में बंद किए जाते हैं जी जी उनमें से 28 लोगों को बेल मिल जाती है। किसी ना किसी बहाने बेल में बेल पे है ना बाहर एक व्यक्ति को बेल नहीं मिलती है। एक व्यक्ति को बेल नहीं मिलती है। जो उन सब उनमें जो है उन सबका जो है कहना चाहिए उन सबके ही अनुसार जो सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति है उसी को बेल नहीं मिलती है और पेरोल तक पे वो बाहर नहीं आता है वो व्यक्ति। है ना? तो मतलब एक तरीके से इस तरह से देखा इस तरह से देखा जा सकता है कि भाई मतलब एक तरीके से इन 28 ये 28 लोग एक तरफ है और वो जो एक व्यक्ति है वो एक तरफ यहां तक उनकी माताजी के अंतिम संस्कार में भी उनको एक दिन का भी पैरोल नहीं मिला और जबकि ये न्याय प्रणाली का दोष नहीं है। कानून व्यवस्था को दोष नहीं है। कोर्ट ने इनको रामपाल जी महाराज को उनकी माताजी के अंतिम संस्कार में भेजना चाहता था। लेकिन इन लोगों ने क्या किया कि जब इनकी माताजी का देहांत हुआ तो ये सरकार को
00:26:23:18 प्रशासन को गुमराह करते रहे। पहले बोले बरवाला के बरवाला आश्रम के सामने माता जी का संस्कार किया। के 28 लोग सारे बाहर है। वही ये जो मैनेजमेंट है उसको कंट्रोल कर रहे हैं। हां यही यही यही सारे लोग पूरे पूरी दुनिया में छाए हुए हैं। यही सब पूरा फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। संत रामपाल जी महाराज जो निर्दोष है जिनका कोर्ट में कोई भी सबूत नहीं है। केवल इसलिए उनको सजा हुई कि इनके परिवार वालों ने कहा जैसे कि आप हो। भाई अगर बेटा अपने पिता की खिलाफ गवाही दे रहा है तो तो कोर्ट को मजबूरी मानना पड़ेगा। और एक मिनट वो देखिए वो निर्दोष है कि नहीं यह बात तो हम नहीं करेंगे मगर हम यह कर सकते हैं कि अगर पहली बात तो अगर यह जितना प्रचार प्रसार कर रहे हैं और इतनी गुरु भक्ति है इनके मन में तो इनको वहां पर ये गवाही नहीं देनी चाहिए थी कि भाई हम इन्ह इनके कहने पे हमने किया बल्कि वहां तो ऐसी गुरु भक्ति होती मैंने अपने आप किया अगर ये तो सर ये तो संत रामपाल जी महाराज को 1999 से फसाने का षटक चल रहा था। तो ये तो जब देखा कि बरवाला कांड में भी संत रामपाल जी महाराज किसी तरह नहीं फसे। ये बरवाला में भी हमें लाखों लोगों को मरवाने के लिए इन्ह प्लान था इनका।
00:27:39:03 147 2014 को भी कांड कराना था। ये बाकायदा सब पुस्तकें लिख रखी है। इन पुस्तकों में सब इनहीं के द्वारा लिखा हुआ है। ये बरवाला घटना की सच्चाई ये तीन तीन प्रकार की पुस्तकें हैं। इनमें सब कुछ लिखा हुआ है। ब्रज कुमार न्यायालय की ये सारी पुस्तकें हमने रखी है। ये बिना प्रूफ के बात नहीं करता हूं। ये जितनी पुस्तकें हैं ये सब देखिए भ्रज जज कुमार पर न्यायालय की गिरती गरिमा ये न्यायालय की गिरती गरिमा ब्रज जज कुमार पर ये सब इन्होंने ऐसी अश्लील भाषाएं लिख लिख के कोर्ट प्रशासन को सबको भड़काया इसमें चलिए अब अब हम आ जाते हैं जो हमारा जो मुख्य विषय हमने समझ गए कि एक तंत्र है जो अप्रत्यक्ष रूप से वही तंत्र रामपाल दास का दुश्मन बना हुआ है और वही तंत्र जो है रामपाल दास के नाम पर अब आगे जो जो है गतिविधियां फैला रहा है कि रामपाल दास ने ये कहा, रामपाल दास ने ये कहा। ये सब चीजें हो रही है। अब पहला क्वेश्चन आता है सर एक मिनट एक मिनट सर थोड़ा मैं रिक्वेस्ट करूंगा। एक बात कहना चाहता हूं। बहुत इंपॉर्टेंट बात है। संत रामपाल जी महाराज जेल में है। भारत के भारत की किसी भी जेल से किसी का भी फोन बाहर नहीं आता। ये आए दिन संत रामपाल जी महाराज ऑडियो सुनाते
00:28:54:07 हैं आश्रमों के अंदर। चुपके से कहीं 5 बजे बुलाते कहीं 4 बजे कि देखो संतराम पास जेल से फोन आ रहा है और जेल से ऑडियो आ रही वीडियो आ रही और इनके जितने सत्संग है सत्संगों पूरा परिवर्तन कर दिया मतलब वही आवाज बना के जबकि हम आप जानते हो कि आधुनिक जमाना है किसी की भी आवाज कहीं भी आप रिकॉर्ड करके किसी भी एक एक मैंने इस बारे में मैं एक बात कहूं एक वीडियो मैंने भी ऐसा देखा है जिसमें कि उनके जो ऊंट है रामपाल दास के जो ऊंट है वो कहीं और जा रहे हैं और आवाज कुछ और आ रही है। एक वीडियो मैंने ऐसा देखा है सर आप आप जो है ना उस पे YouTube पे जाकर के आप सर्च कर सकते हैं संत रामपाल जी महाराज के अंग्रेजी में सत्संग संत रामपाल जी महाराज के मराठा भाषी में सत्संग संत रामपाल जी महाराज का मुखड़ा चल रहा है। आवाज दूसरे की है। ये तो इन्होंने पहले कर रखा है और अब ये ऑडियो के द्वारा सत्संग सुना रहे हैं। कि यह हिसार जेल नंबर दो से संत रामपाल जी महाराज सत्संग सुना रहे। यह इस तरह से उन्होंने पूरा षड्यंत्र रखा है। और चलिए अब हम इस पे आते हैं। जी जी जी अब हम मुख्य विषय पर आते हैं। सबसे पहला आपका क्या आपका कहना ये है कि जो ज्ञान गंगा नाम
00:30:09:08 की पुस्तक है वो फर्जी है। जी जी जी जी शशि भूषण सिंह जी जय श्री राम। सर साहब जय श्री राम जी जी तो ये जो मैनेजमेंट के द्वारा जो बताया आजकल जो किताबें दी जा रही हैं इसमें एज इट इज वो ज्ञान नहीं है। वो ज्ञान सही है कि नहीं है वो एक अलग पक्ष है। फिलहाल हम ये बात करेंगे कि रामपाल दास जी ने जो भी कुछ कहा है एग्जैक्ट वही ज्ञान है इन पुस्तकों में कि नहीं है। है ना? जी तो ये जी ज्ञान गंगा फर्जी क्यों इस पे आप क्या बोलना चाहेंगे? आपने हमें ये बताया था ज्ञान गंगा जो है फर्जी पुस्तक है। कैसे फर्जी है? मेरे पास ये पांच प्रकार की ज्ञान का पुस्तक है। ज्ञान का पुस्तक ये पांच प्रकार की है। इसमें आप डिफरेंस समझ सकते हैं। ये देखो ब्लू कलर की है और ये इसका कलर दूसरा है। ठीक है? पांच प्रकार की पुस्तक का बता रहा हूं। और इसका पुस्तक ये कलर देखिए। ये थोड़ा इसका जो कॉर्नर है ये लाइट में है और ये डार्क में है। ये इसका अंतर बहुत बारीकी से जब आदमी समझता है तब देख पाता है ये और ये सबसे पुरानी
00:31:24:19 पुस्तक है। मेरे पास ये पांच प्रकार की पुस्तकें है और पांच प्रकार की पुस्तकों को प्रमाण के सहित हम कह रहे हैं कि ये फर्जी पुस्तक है। सबसे पहले आपको दिखाना चाहूंगा कि यह जो पुरानी पुस्तक है आप थोड़ी देर के लिए इनका वो बड़ा कर दीजिए जब ये पुस्तकें वगैरह दिखा रहे हैं जितनी देर जी जी हमको छोटा हमारा वाला छोटा कर दीजिए ले आउट और तो हम कैसे करेंगे बड़ा अच्छा हां ठीक ठीक है वहां कर दिया ये देखिए ये जो ज्ञान का पुस्तक है और इसमें ये ये देखो ये लिखा है नीचे ये येलो येलो कलर में लिखा हुआ है भक्ति सौदागर का संदेश विकल्प ज्ञान गंगा ये देखिए ये सबसे पुरानी ज्ञान गंगा है हां ये पुरानी ज्ञान है 2014 के पहले वाली हां हालांकि 2014 के बाद भी पुस्तकें चली है ना ये अभी लोगों ने उजागर करना शुरू किया तब हटा दिया है दूसरी बात दूसरी पुस्तक आप दिखा रहा हूं एक मिनट एक मिनट एक मिनट पहली पहली पुस्तक की पहचान है कि उसमें लिखा हुआ है भक्ति सौदागर को संदेश का विकल्प ज्ञान गंगा अब दूसरी आप दिखा रहे हैं ज्ञान गंगा
00:32:39:27 जी ये देखिए उसी इस पर इन्होंने ये लिख दिया इसमें हटा दिया उसको ये देखिए संदेश हटा दिया अब क्या लिख दिया है अब क्या लिखा है जगह पर वो कुछ नहीं लिखा बात बाकी ये चौकोर बना दिया उसको उस जगह को कवर करने के लिए अच्छा इसमें सतलोक आश्रम तोहाना रोड बरवाला जिला हिसार हरियाणा और धर्म ₹5 ये जो है ये लिखा है ठीक ठीक ये इन्होंने इन पुस्तकों परिवर्तन किया है दूसरी बात कोई पुस्तक और जो गूगल में चल रही पुस्तक वो 336 पेज की है। 336 पेज की गूगल और इसमें मेन पॉइंट आपको मैं बताना चाहता हूं। एक मिनट एक मिनट एक एक करके चलेंगे। एक एक करके चलेंगे। क्या उन्होंने ज्ञान गंगा लिखी थी? जी जी देखिए इसके भी बारे में आपको मैं पूरा प्रमाण से बता रहा हूं। पहली बात तो संत रामपाल जी महाराज का भी वीडियो है। सत्संग के माध्यम से उन्होंने बताया कि भक्तों ने बना दी ज्ञान।
00:33:55:27 भक्तों ने और इसमें भी लिखा इन्होंने भक्ति सौदागर का संदेश विकल्प ज्ञान पहली ज्ञान गंगा पहली मैं क्लियर कर दूं दर्शकों को पहली ज्ञान गंगा इस आधार पर बनी थी कि जो भक्ति सौदागर को संदेश है उसका हम विकल्प दे रहे हैं। ज्ञान गंगा है ना और ये रामपाल दास ने अपने किसी एक वीडियो में ये बोला है कि अ ज्ञान गंगा जो है भक्तों ने बनाई है। अच्छा वो वीडियो का लिंक आपने हमें भेजा था। भाई साहब वो जरा वीडियो दिखा दीजिए। जी वीडियो जरा चला दीजिए। तब तक मैं एक सज्जन है वो कह रहे हैं कि फिर गुरु जी का ऑडियो भी नकली बोलेंगे। नहीं ऑडियो को नकली नहीं बोलेंगे हम। का संदेश यह बुक इन्होंने लिखी है। अच्छा वो ज्ञान गंगा जो बोल रहे हैं कि भक्तों ने बना दी ज्ञान गंगा वो अलग वीडियो है। हां वो अलग वीडियो है। वो भी है। वो आप उसका लिंक भेज दीजिएगा। वो लिंक भी डाल देंगे इसमें। इन्होंने देखिए दर्शकों को मैं क्लियर कर दूं कि इनका कहना है कि रामपाल दास ने जो बुक लिखी थी उसका नाम है भक्ति सौदागर का संदेश।
00:35:12:00 और फिर पहला जो संस्करण इन्होंने निकाला ज्ञान गंगा के नाम से उसमें इन्होंने मेंशन किया कि यह जो रामपाल दास जी की बुक है भक्ति सौदागर का संदेश उसका विकल्प है ये ज्ञान गंगा है ना उसका विकल्प जी और फिर उसके बाद जब अगले संस्करण आए तो विकल्प वाली लाइन भी हटाते चले गए और बदलाव करते चले गए। अच्छा अब इसमें एक पॉइंट की बात है। कि एक यह जो किताबें फर्जी है यह इस पर भी पता चलता है कि इसमें जो प्रिंटर्स इत्यादि का जो एड्रेस वगैरह है वो अभी तक हमें मिला नहीं है और मैं खुद कुछ दिनों में बवाना जाने वाला हूं इनका जो इंडस्ट्रियल एरिया है वहां जाके मैं फोटो खींचूंगा वो 171 सी वगैरह कहां है जो ये डाल रहे हैं अपनी किताबों में मैं खुद जाऊंगा वहां तो ये मतलब जो आप फर्जी कह रहे हो वो इसलिए भी हमें फर्जी दिख रहा है क्योंकि ये प्रिंटर्स का नाम ही नहीं डाल रहे कौन सा जीएसटी नंबर है? कौन सी फर्म है जो इन किताबों को छाप रही है? और इससे एक चीज और निकल के आती है जिस पर हम अभी बात करेंगे कि क्या कहते हैं ये जो भी इन किताबों पर बेचता है यदि उस पर कोई मुकदमा किया जाएगा तो
00:36:27:01 वो स्वयं फंसेगा। इन किताबों को छापने वाला बिल्कुल नहीं क्योंकि उन किताबों पर किसी भी तरीके का कोई प्रमाण नहीं है कि इसने ही वह किताबें छापी है। ये क्लेम नहीं किया जा सकता किसी को। जिसके हाथ से वो बरामद होगी वही उसका जिम्मेदार है। है ना? ऐसा कुछ हुआ ना जब जब उसमें एड्रेस नहीं छपा है। पंजीकरण संख्या नहीं है। कुछ भी नहीं है उन किताबों पर। जी। और दूसरा मैं एक और प्रमाण देना चाहता हूं। ये फर्जी का ये इन्हें नहीं पुस्तक छापी अवतार हां जब जब हम इनकी किसी भी बात का प्रमाण सहित विरोध करते हैं तो ये सामना नहीं करते हम इनसे सबसे कहते हैं कि एक बार हम सब लोग बैठकर एक जगह मंच पर बैठ के बातचीत कर लेते हैं कौन गलत कौन सही है तो सामने नहीं आएंगे जब किसी भी बात का हम इनका प्रमाण सहित इनका उजागर करते तो इन पुस्तकों के अंदर ये चोरी चोरी छुपे बातों को लिखते हैं। अब इस पुस्तक के पेज नंबर चार पर इन्होंने खुद लिखा हुआ है। पेज नंबर चार पर मिनट इनका इनका कॉलम बड़ा कर दीजिए भाई साहब। पहले इनका कॉलम बड़ा कर दीजिए।
00:37:42:09 ये पहले पुस्तक दिखा दीजिए। आप पुस्तक दिखा दीजिए। पहले पुस्तक कवर पेज कवर पेज ये अवतार नाम की पुस्तक है। है ना? अवतार नाम की पुस्तक है। और यह भी वही से इसमें नीचे अंदर से दिखाइए। कहां से छपी हुई बता रहे हैं इसको। ये अपने ये दूसरा पेज है और इसमें
00:38:15:20 वो पेज दिखा दीजिए जो जहां पर वो रोचक जानकारी मेंशन है ये ये वो कबीर प्रिंटर्स सी 117 बवाना इंडस्ट्रियल ये देख लीजिए भाई साहब वही कबीर प्रिंटर्स जो बेनाम बादशाह है वही छाप रहे हैं इसको भी अब ये क्या बता रहे हैं अपने इस अवतार नाम की बुक में वो भी देख लीजिए। बाबू राम थोड़ा सा सबर करो। अभी तुमको मौका मिलेगा लिंक दिया जाएगा। आकर के अपना जो धैर्य है उसको धारण करो बेटे बाबू राम। धर्म का एक लक्षण धैर्य भी है। जी मैं समझ गया। मैं समझ गया। अब आप उसप आइए। उस वाले पृष्ठ पर आइए। एक मिनट तो समझ गया। इसके नीचे कोई भी फोन नंबर वहां का नहीं लिखा हुआ। ये बताइए। वो वो वो वो इनकी सभी पुस्तकों में अभाव है उसका। अब इसके इसी पुस्तक के इसी पुस्तक के पेज नंबर चार पे आपको ले चलता हूं।
00:39:16:00 ये ये पेज नंबर चार ये जो येलो कलर में आपको दिखाई दिखाई दे रहा होगा। पेज नंबर चार मैं कहूंगा ऑपरेटर महोदय से कि अगर उन्होंने इस पुस्तक को डाउनलोड किया हो तो आप पीडीएफ को खोल के दिखा दीजिए जरा। हां ये है पेज नंबर चार का क्या लिखा है इसमें इसमें ये लिखा है कि संत रामपाल जी महाराज द्वारा लिखी पुस्तक गीता तेरा ज्ञान अमृत जीने की राह पुस्तक जीने की राह तथा सतलोक आत्म रोमन भाषा का क्या पेज नंबर चार लिखा है पेज नंबर चार रोमन में नहीं वैसे काउंटिंग में अच्छा काउंटिंग वाला पेज नंबर चार पर आइए एक मिनट रुक जाइए। जी
00:40:09:10 हां ये जो पैराग्राफ शुरू होता है गीता जी जी ये ये धरती पर अवतार यही है। नहीं धरती पर ये नहीं ये अवतार सिर्फ अवतार केवल अवतार नाम की बुक है। अगर वो हो आपके पास तो ठीक है। नहीं तो फिर भाई वो ये भाई साहब ही अपना बता देंगे पढ़ के। हां हां केवल अवतार आप आप इनका बड़ा कर दीजिए। इनका कॉलम बड़ा कर दीजिए। मैं पढ़ लेता हूं। आप इनका कॉलम बड़ा कर लीजिए। ये लोग
00:40:44:19 थोड़ा सा राइट हां प्रचार प्रसार बनाई पुस्तक। अच्छा प्रचार प्रसार समिति द्वारा बनाई पुस्तक। पढ़ दीजिए। आप पूरा पढ़ दीजिए। आप पूरा पढ़ दीजिए। ये देख लो भैया तत्वदर्शी कितने तत्वदर्शी तत्वदर्शी अंदर जेल में है और उनके नाम से उनका जो ये तंत्र है वो किताबें छाप रहा है और बता भी रहा है चोरी छुपे और तुम लोग आंखों पर पट्टी बांध कर रहे हो जी पढ़िए बताइए संत रामपाल जी महाराज द्वारा लिखी पुस्तक गीता तेरा ज्ञान अमृत जीने की राह तथा सतलोक आश्रम बरवाला की प्रचार प्रसार समिति द्वारा संत रामपाल दास जी के सत्संगों की डीवीडी से बनाई पुस्तक ज्ञान गंगा में जो आश्रम की वेबसाइट पर उपलब्ध है वेबसाइट जगतगुरु रामपाल जी डॉट ऑ्गनाइज ऑर्गेनाइजेशन और जी ये है इसमें लिखा हुआ है कि मतलब ज्ञान पुस्तक ये सब जरूर हां तो इसका मतलब क्या हो रहा है कि अगर तुम ये भी मानते हो अगर आप ये भी मानते हो कि तत्वदर्शी है रामपाल तब भी आप जो आज के टाइम में सतलोक आश्रम से जुड़कर
00:42:00:19 जो आप अपनी खोखली भक्ति कर रहे हो उस वो भक्ति में भी तत्वदर्शन नहीं है। आपका वाला ही तत्वदर्शन नहीं है। क्योंकि यह जो किताबें हैं यह किताबें आपके द्वारा माने गए तत्वदर्शी द्वारा वाला लिखित भी नहीं है। बल्कि उनके नाम पर जो तंत्र चल रहा है। जिस तंत्र का कौन है? कौन कहां का कौन है? ठिकाना कहां है? कुछ नहीं पता। उस तंत्र के द्वारा उन अपने मन से उनके वो जो क्या कहते हैं सत्संग जिन्हें वो कहते हैं उसके आधार पर अपने मन के आधार अपने मन से संकलित करके बनाई गई वो किताबें ये वो खुद कह रहे हैं। ये वो खुद कह रहे हैं। ठीक है? अब आगे चलते हैं। भक्ति का सौदागर हो गया। अब मैं जो ये फर्जीपन है ज्ञान गंगा का इसके लिए हमारे बीच में एक अधिवक्ता भी हैं। शशि भूषण सिंह जी तो ये जो फर्जीपन है ज्ञान गंगा का इस फर्जीपन को और हम लोग क्लियर करेंगे। सबसे पहली बात तो यह है कि अभी कुछ दिनों पहले मेरे पास लखनऊ के किसी वकील का फोन आया कि भैया वो रामपाल की जो किताबें हैं जिनको
00:43:15:22 आपने जो है ये किया है वहां से हटवाया है ये किताबें इन किताबों को हाई कोर्ट से क्लीन चिट मिली हुई है और जबकि एक प्रसंग है जो मैं आपसे पहले आप उसको प्रसंग को खोल दीजिए फिर हम लोग वकील जो वकील साहब है इनकी बात हम सुन लेंगे की ठीक है। वो प्रसंग क्या है जो तीन महिलाएं पकड़ी गई है इन किताबों के साथ वो क्या मामला है? ये हिसार कोर्ट के अंदर ये तीन महिलाएं पुस्तकें जो है यही मिलावटी पुस्तकें वहां दे रही थी बेच रही थी। है ना? ये लोग क्या कैंपस में कोर्ट कैंपस में कोर्ट कैंपस में और ये प्लेट भी छपवा रखे हैं। है ना? एक प्लेट भी भड़काऊ पलेट भी छुपा रखे हैं। तो ये क्या भक्तों को मूर्ख बना रखा कि तुम्हारे कर्म बनेंगे। है ना? तो वो तीन महिलाएं वहां पकड़ी गई थी। ठीक है? और और इसके बारे में पूरा विधिवत सदस जी बताएंगे कि उसमें कोर्ट में क्या हुआ। एक बात और मैं रखना चाहूंगा। एक बार हमने गुरु जी की बेटी मंजू और उनके भतीजे अमित से इनसे सबसे मैंने कहा कि मैं मैं थोड़ा झूठ बोला वहां पे कि मैं यहां पुस्तक सेवा
00:44:30:24 कर रहा था तो मुझे एलआई ने पकड़ रखा है। अब एलआई ने पकड़ रखा है। वो कह रहा है ये पुस्तक कहां तुम छपती है? कौन तुम्हें देता है? कहां से लाए हो? तो बताइए इसमें पता क्यों नहीं? इसमें ट्रस्ट का नाम क्यों नहीं? संस्था का नाम क्यों नहीं? तो हमने इनको मंजूस कहा गुरु जी की सगी बेटी जो इससे हैंडलिंग कर रही हमने कहा बहन जी मुझे एलआई ने पकड़ रखा है वो मुझे जेल भेज देगा बताइए मैं क्या करूं यहां के नाम दान संचालक को बताता हूं तो कह रहा मुझे ना बताना वो ऑडिटर कहता हूं वो कह रहा मुझे ना बताना पुस्तक कहां से ली और स्टेट कोटर को कोई जिम्मेदारी नहीं ले रहा तो बोले अमित से बात करो जो महेंद्र जी का लड़का है संत रामपाल जी सगे सगा भतीजा उसने कहा उसको ये बता दो कहीं हमें ये पुस्तक मिल गई थी अरे हमने ऐसे कैसे गए कहां मिल गए जी तो ये जो सबसे बड़ी व्यवस्था इन्हने बना रखी है कि आप फसो तो आप ही सजा काटो तो इसके बारे में अब सदूषण जी जो हमारे अधिवक्ता है वो आपको विधिवत पूरी जानकारी देंगे जी जी बताइए
00:45:33:22 पहले तो मैं देर से आने के लिए क्षमा मांगूंगा आप सभी से हैं लेकिन इसमें ये जो कहानी आई है तीन औरतों के बारे में जो पुस्तक सेवा कर रही थी वो भी कोर्ट कैंपस के अंदर तो उसमें तीन औरत में से नाम बता देते हैं आपको एक बाला सुरेश और रानी जैन करके थी ये तीनों स्त्रियां को वे लोग जो इनके पीछे लोग थे जो यह कार्य करते हैं वे बुक लिखे हुए थे बरवाला की घटना की सच्चाई उसमें में हर कुछ वे उत्तेजित करने वाला लोगों को प्रोवोकेट देने वाला शब्द लिखी गई थी और वे डायरेक्ट वे डायरेक्ट प्रत्यक्ष रूप से कोर्ट को लिखी गई थी और जितने भी कोर्ट में लिखे गए हैं हमने जितने भी कोर्ट को लिखे गए थे मैं समझा नहीं कोर्ट के संबंध में लिखे गए थे अच्छा कोर्ट के लिए कोर्ट के लिए मानना है उन हां
00:46:49:22 ये टोटल कोर्ट के विरुद्ध में लिखे थे कि फलाने फलाने नाम लेकर के कि फलाने ने इतने पैसे घस मांग रहा था तो फलाने ने यह किया गुरु जी तो मतलब कभी भी कोर्ट में जाते थे या नहीं जाते थे इनकी बातें छोड़ दीजिए गुरु जी को तो मतलब कोर्ट ने उनको 205 का लाभ दिया हुआ था कि आपको जब बुलाया जाएगा तभी कोर्ट में आवेंगे। लेकिन यह लोग यह लोग कोर्ट को प्रोवोकेट करने के लिए लोगों को प्रोवोकेट करने के लिए लोगों को एक साथ बंधित रहने के लिए यह लोग अपना संगठन बनाकर के और कोर्ट के विरुद्ध ये कार्य कर रहे थे और उसी पर यह किताब लिखे हुए थे और उस किताब को उसी कोर्ट के कैंपस के अंदर में इन महिलाओं को आगे करके और ये लोग बंटवा रहे थे तो वो किताबें ये वाली नहीं थी क्या ये ज्ञान गंगा जीने की राह ये सब नहीं था ये कंप्लीट था ज्ञान गंगा जीने की राह पुस्तक उस समय नहीं थी ये 2015 की बात है और वे जो था वो बरवाला घटना की सच्चाई
00:48:04:28 के बारे में था घटना लोग यही किए और सारे इल्जाम प्रशासन पर और यह कोर्ट पर कर दिए और गुरु जी गुरु जी तो एकदम निस्वार्थ भाव से मतलब कोर्ट जाया करते थे। उनके हर एक आदेश को माना करते थे। किंतु इन लोगों ने जबरदस्ती उनको कोर्ट में जाने नहीं दिया। क्योंकि मतलब वो बंधक बनाए हुए यह तो बाद की बात है। लेकिन यह इस घटना के बारे में मैं बता रहा हूं जो बाला सुरेश और बनाए हुए थे जो जिस भी प्रकार के अपराधिक वो होते हैं आक्षेप उनका हम लोग जिम्मेदारी नहीं लेते हैं। वो आप क्या कहते हैं प्रश्नवाचक रूप में आप कह सकते हैं मगर निर्णायक रूप से आप ना कहे कि कोई बंधक बनाया था उन्हें नहीं निर्णायक रूप से नहीं कहेंगे। तो ये ये जो है ये तीनों लोग वही कोर्ट के विरुद्ध में सारी मतलब उसमें बात लिखे हुए थे और उस किताब में कोर्ट के प्रति बहुत खराब भावना से लिखी गई थी और जो लोगों को मतलब एक एकत्रित किया जा रहा था कोर्ट के विरोध में जो कि कोर्ट एक
00:49:20:00 जो होता है कस्टिट्यूशनल के तहत में वो स्थापित होता है जहां जहां उसको हर अधिकार होता है। उस अधिकार को ये हनन करने के लिए लोग इन लोगों का इंटेंशन कुछ और था चाहे और हो। लेकिन वे लोग गलत कार्य उस पर लिखे हुए थे वो कोर्ट के विरुद्ध में और कोर्ट कैंपस में ही ये कार्य कर रहे थे। लोगों को किताबें बांट रहे थे, पंपलेट बांट रहे थे कि क्या यह करते हैं लोग। कैसे यह न्याय देंगे, क्या नहीं देंगे, ऐसे देंगे, वैसे देंगे, ऐसे देंगे। जबकि संत रामपाल जी महाराज उस समय तो जेल में थे और यह लोग जितने भी हैं यह किताबों में आप देखे होंगे ज्ञान गंगा पुस्तक जो है तो गुरु जी का तो लिखा हुआ है नहीं क्योंकि ये लोग खुद उस पर लिखे हुए हैं कि ज्ञान गंगा के दूसरे पृष्ठ पर देखिएगा तो लिखा हुआ है कि संत रामपाल जी महाराज के सत्संगों का संग्रह किया हुआ अनमोल पुस्तक बस बस इतना ज्ञान गंगा के तीसरे पृष्ठ पर दूसरे दूसरे दूसरे पर
00:50:35:22 सबसे ऊपर में सबसे ऊपर में लिखा होगा ये मेरे पास तीसरा दूसरा प्रश्न है। चलिए इसको देखना पड़ेगा क्योंकि थोड़ा बहुत मैं देख रहा हूं कि ज्ञान गंगा पुस्तकों में पेज भी आगे पीछे हो रहे हैं। हां हां पेज भी आगे पीछे वगरा हो रहे हैं। वही पे आप वही पढ़िए जहां ज्ञान का प्रकाशक प्रचार मूल्य लिखा हुआ उसी के ऊपर आप देखिए है ना उसी के ऊपर जहां मूल्य लिखा हुआ है ना प्रचार प्रसार ये देखिए ये लिखा तो है भाई ये रामपाल की लिखी पुस्तक नहीं है ये देख लो बड़ा बड़ा लिखा है ये महाराज के सत्संगों का संग्रह ये लो हां सत्संगों का संग्रह किसने किया? कब सत्यापित हुई? कहां सिग्नेचर है? हां। कब उन्होंने कब उन्होंने बोला कि मैंने ज्ञान गंगा पुस्तक दी है सत्यापित कर रहा हूं इस पुस्तक को। कुछ है? मैंने भी एक दिन इनसे पूछा था कि भाई वो तुम्हारे जो गुरु है वो है जेल में। अब उनके नाम से तुमको कोई पुस्तक दे रहा है। तुमको कैसे पता है? गुरु ने दिया है वही है। ये
00:51:51:13 हां सही सही सवाल था। सही प्रश्न था क्योंकि गुरु जी का मतलब गुरु अगर किसी को गुरु अगर किसी को उत्तराधिकारी घोषित करेगा अगर तो ये मेरा उत्तराधिकारी है तो उसको हक बनता है कि गुरु के नाम से वो कुछ आगे काम करे। काम करे। हां हां यही है और इस पर भी बात आगे हो जाएगी कि उन्होंने अपना कोई उत्तराधिकारी घोषित किया है कि नहीं किया है। खैर ये ये ध्यान से सुन लो जो हम लोग इसमें कमियां निकालते हैं ना तुम्हारे तत्वदर्शी की ये तत्वदर्शी के नाम से छापी गई है। ये देख लो इसमें तुम्हारे खुद ही लोग लिख रहे हैं कि ये उनके सत्संगों का संग्रह है। ये देख लो। तो ये ज्ञान गंगा फर्जी पुस्तक है। खैर चलिए बताइए आप हां तो यही मतलब इसी प्रकार का यह लोग जो है लोगों के बीच में यानी आपके हमारे या अन्य जो पब्लिक हैं लोगों के बीच में यह संत रामपाल जी महाराज का नाम लेकर केकि उनको ये ज्ञान तो मतलब बताते हैं और परमात्मा गुरु जी का ज्ञान तो सही है लेकिन उन ज्ञानों में ये लोग जो हैं
00:53:06:19 यानी उनके जितने भी शिष्य जो हैं जो पूरे पूरे मतलब सिस्टम को बदल दिए हुए हैं। वे लोग अपने स्तर से अपने तरफ से उसमें मर मिलावट करके कुछ ना कुछ आपको अभी याद आ नहीं रहा है। किताब देखने पड़ेंगे। वेब पेज भी बता देते आपको जीने की राह में गुरु कुछ चीजें हैं जो नोट है आप आप फिलहाल हमें वो बताइए अब कि वो जो तीन महिलाएं पकड़ी गई थी उनका क्या क्या डिसीजन हुआ है आपने हमें भी पीडीएफ भेजी है भाई साहब वो पीडीएफ जरा खोल के जजमेंट का आर्डर जो है जरा दिखा दीजिए
00:53:46:21 वैसे तो मैं जो मोबाइल पर है वो मोबाइल पर तो है वैसे दिखा नहीं सकता मोबाइल से नहीं नहीं वो वो वो वो दिखा रहे हैं वो दिखा रहे हैं आपकी अभी स्क्रीन पे दिखेगा आपको आर्डर हां पहले कौन सा वाला आर्डर खोलना है पहले कौन सा वाला ऑर्डर है वो आशीष जी वाला जो मतलब आशीष कुमार शर्मा जी जुडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास के हैं नहीं ऊपर क्या लिखा है इन द कोर्ट ऑफ आर के जैन ये नहीं खोलना है आर के जैन तो ये स्टेशन कोर्ट हो गया इसके बाद बाद वाला है इससे दूसरा पीडीएफ खोलिए दूसरा पीडीएफ खोलिए
00:54:32:00 ये है ये है इसमें लिखा हुआ है स्टेट वर्सेस बाला हां ये मतलब ये केस का नंबर हो गया है ना ये केस का नंबर है भाई ये नंबर लोग नोट कर ले और पीडीएफ का लिंक भी हो सका तो हम डाल देंगे डिस्क डिस्क्रिप्शन में स्टेट इसको थोड़ा बड़ा कर दीजिए भाई साहब बड़ा कर दीजिए थोड़ा स्टेट वर्सेस बाला सीआर ए 3462016
00:55:10:19 तो यह हमें उपलब्ध कराया गया है शशि भूषण सिंह जी के द्वारा और इसमें जो है ये एडवोकेट वगैरह का नाम भी है। जी क्या बता रहे थे आप इसके बारे में वो बताएं। हां मैं हां मैं यह बता रहा था कि यह घटना है 317 2015 का और ये लोग तीनों बाला सुरेश और रानी जैन ये तीनों कोर्ट कैंपस के अंदर लोगों का ये बरवाला घटना की सच्चाई और पंपलेट वगह बांट रही थी लोगों के बीच में वही वाली असली असली भगवान भगवान कौन है? ब्रह्मा विष्णु महेश के पिता कौन है? यही सब यही सब उसमें मतलब बहुत कुछ लिखा हुआ था। उसमें बहुत कुछ लिखा हुआ था और विशेष करके तो इससे मतलब कोर्ट जो है कोर्ट में एक बाला जिसका नाम सरोज बाला वो पुलिस लेडीज का एसआई थी जिसका नाम सरोज बाला था। वो एक लेडीज कांस्टेबल के साथ उनका वहां पेट्रोलिंग में थी। कोर्ट के अंदर
00:56:25:25 में तो इसको किसी मतलब गुप्त सूचना मिली कि यह लोग कोर्ट के अंदर में कैंपस के अंदर में यह लोग ऐसे ऐसे भड़काऊ चीज बंटवा रहा है जिससे लोगों में मतलब सार्वजनिक शांति जो है वो भंग होने की संभावना है। तो यह लोग वहां पर गई जाने के बाद में तीनों के पोजेशन से यह सारे पंपलेट किताब वग जप्त किए गए। और जब्त करने के बाद में 153 153 ए 504 505 दो में आईपीसी की धारा के तहत में इनका एफआईआर दर्ज हुआ और वह एफआईआर दर्ज हिसार सिविल लाइन जो थाना है उसने दर्ज किया उसके बाद में यह ट्रायल चला आशीष कुमार जुडिशियल मजिस्ट्रेट के कोर्ट में जिन्होंने यह घटना को सत्य पाया। इनके विरोध में हर कुछ प्राप्त पाया। एविडेंस मौजूद था। इन्होंने ये करीब 10 माह तक जेल में रही।
00:57:41:15 ले अब क्योंकि इसका नेचर जो था 153 153 ए 53 ए 504 इसका नेचर कुछ था कि उसमें सजा की जो अवधि होती है वो तीन वर्ष से ज्यादा की नहीं होती है तो उसमें 10 वर्ष ये लोग हो गए और एक औरत तथा एज के मुताबिक 10 माह हो गए 10 माह 10 माह हो गए थे हां तो 10 माह हो गए थे तोकि यह तीन वर्ष वैग्रह का कहने का मेरा मतलब कि सबसे ज्यादा तीन वर्ष है और तीन वर्ष में मतलब यह जो भी सजा देते हैं लोग तो मान लीजिए कि 50% अगर दे भी दिए तो उसमें भी मतलब 15 माह हुआ चाहे 12 माह हुआ लेकिन फिर भी उसमें से ये 10 माह ऑलरेडी ये लोग जेल के अंदर में रह चुकी है। तो यह लोग मतलब अपना वहां प्रार्थना की आशीष कुमार जुडिशियल मजिस्ट्रेट के साथ इन महिलाओं ने इन महिलाओं ने जब कोर्ट में केस चला तो इन महिलाओं ने ये नहीं उनको नहीं बुलाया जिन लोगों ने इनको वो किताबें दी थी वहां बेच बांटने के लिए उनको नहीं हां
00:58:56:16 उनको नहीं बुलाया क्योंकि लोग वो स्वयं नहीं आए इनको बचाने के लिए नहीं आए वो लोग नहीं नहीं आए नहीं आने का भी कारण होता है कि वे लोग डायरेक्ट मना कर जाते हैं कि हम उस औरत को जानते नहीं है। जैसे हमारे रामचंद्र भगत जी के भी साथ में ये एलआई वाले ने आया था तो वो बोल दिया कि आप बोल दो कि क्या-क्या बोल रहे थे ये अभी उसी तरह से ये लोग फस जाते हैं ना तो उसके सामने ये लोग नहीं आते हैं। और जो फंस गया मर गया सो मर रहा है। सो मरने देते हैं। तो वो जो किताबें थी जो ये लोग बांट रहे थे फिर उसमें मुकदमे में उनको सजा पड़ी। हां सजा हुई। सजा होने के सजा हुई। सजा होने के बाद में ये लोग प्रार्थना कोर्ट में कुछ
00:59:47:08 10 माह तककि जेल के कस्टडी में रही। वही उनको सजा कंफर्म किया। उसके बाद में उस सजा को इनको दोषी पाया। कोर्ट ने इन लोगों को दोषी पाया और यह भी पाया कि यह जो किताबें बांट रही थी या यह पंपलेट जो बांटे जा रहे थे यह लोगों के बीच सौहार्द भावना को भंग करना होता है या मतलब जो ये सामुदायिक सामुदायिक लोगों के बीच में भावना दुर्भावना को मतलब बढ़ावा देना होता है ऐसा कोर्ट ने पाया है तो ये उनको सजा दी इसके बाद इसके बाद ये सेशन कोर्ट में गया डीजे कोर्ट में। हां इसके बाद ये अपील किए सेशन कोर्ट में तो एस के जैन जो दूसरी वाली पीडीएफ है वो दूसरी दिखा दीजिए भैया एस के जैन वाली
01:00:51:01 इस ज्ञान गंगा पुस्तक के नाम पर जो अपने आप को रामपाल का भक्त मानते हैं या रामपाल का चेला मानते हैं या रामपाल का शिष्य मानते हैं। उनकी सच्चाई वास्तविकता में ये है कि वो रामपाल के शिष्य नहीं है बल्कि वो जो 29 लोग थे जिनको सजा हुई थी उनमें से जो 28 लोग बाहर हैं जिनके द्वारा रामपाल जी के नाम पर जो तंत्र चल रहा है अब वो उनके भक्त हैं। वो उनके शिष्य हैं। वो उनके चेले हैं। उन 28 लोगों में से इस पुस्तक के नाम पर जो स्वयं को भक्त मानते हैं रामपाल का स्वयं को शिष्य मानते हैं रामपाल ये है सच्चाई
01:01:34:12 हां तो यही पीडीएफ है ये पीडीएफ है इस पीडीएफ भाई ये इसमें जो भी डिटेल्स है वो आप लोग चेक कर सकते हैं। सेशन जज हिसार यूआईडी नंबर एचआर018 ठीक है अब इनको ले लीजिए शशि भूषण जी को वो बात बताएं जी हां तो ये मतलब जब सेशन में हुआ सेशन का मतलब यह हुआ कि ये अपील दायर की है तो सेशन कोर्ट ने उसको देखा देखने के बाद में 101 2000 आपको बता देते हैं 101 2017 को सेशन कोर्ट ने भी जो लोअर कोर्ट आशीष कुमार जुडिशियल मजिस्ट्रेट जी का जो मतलब जजमेंट था उसको यह कंफर्म कर दिया कि उन्होंने सही डिसीजन लिया है। उसमें कोई भी गलती नहीं है। कोई भी त्रुटि नहीं है। अच्छा उसके बाद मतलब निचली अदालत ने जो निर्णय दिया उससे ऊपर की अदालत ने उस निर्णय को माना सम्मान दिया हां मान लिया उसमें थोड़ी सी भी बिखराव और
01:02:49:13 या मॉडिफाई नहीं किया वो सही माना टोटल तब जाकर के ये लोग चंडीगढ़ हाई कोर्ट में गए हुए हैं। चंडीगढ़ हाई कोर्ट में उसका नंबर है आपको लिख देते हैं। वो क्रिमिनल रिवीजन 4760 सन 2017 जी ये वहां हां ये वहां पर हाई कोर्ट चंडीगढ़ में पेंडिंग है। अभी अभी तक से पेंडिंग है। उसके मतलब वो जस्टिस थे सुधीर मित्तल जी जिन्होंने मैं मैं एक बात कहना चाहूंगा अच्छी खासी सजा तो बेचारियों ने काट ही ली 10 महीने की। का बहुत काफी सजा है वो भी उनको तो उनको तो यूज़ किया गया था ना हां हां यूज़ किया गया था और ये लोग यूज़ करने वाले उनका कोई साथ नहीं दिए अभी तो आपको यह जो गुरु जी को जो सजा हुई है और गुरु जी के विरुद्ध में ये लोग इन लोगों के कहने से जो वास्तव में सही में भगत थे उनके कहावे में आकर के गवाही दिए तो कोर्ट में झूठ गवाही देने
01:04:04:16 का इन 14ों लोगों पर केस चल रहा है। अभी अच्छा क्या चल रहा है? क्या बोल रहे हैं? नहीं समझाया। जैसे एफआईआर 429 सन 2014 एफआईआर 430 सन 2014 में जो गुरु जी के विरुद्ध केस दायर हुआ था। तो उसमें यह लोग जो मतलब गुरु जी के विरोधी थे जो अभी ये चला रहे हैं चारों तरफ से अपना ये सतलोक आश्रम वैग्रह और किताब बांट बंटवा रहे हैं तो ये लोग जो गुरु जी के
01:04:44:24 जो केस किया था एफआईआर किया था जब गुरुजी के केसों में गवाही दिए हुए थे उन गुवाहों से मिल मिलकर के घर जा करके प्रोवोकेशन देकर के कुछ प्रलोभन देकर करके ये लोग उन लोगों से होस्टाइल करवाया और होस्टाइल करवाने का मतलब ऐसा तरीका यह अपनाया कि वे 141 15 जो गुवाह थे वो सब फंस गए। यानी कोर्ट ने उन लोगों पर केस दायर कर दिया कि कोर्ट में ये झूठ आकर के बोल रहे हैं। एक मिनट एक मिनट जो 28 लोग जो रामपाल दास के समेत जो 29 लोग सजा हुई। सजा में से 28 लोग बाहर आते हैं। आपका यह आपका यह क्लेम है कि वह जो 28 लोग थे या फिर रामपाल दास जी को जो बाहर नहीं आने देना चाहता है जो तंत्र है ना? हां हां हां हां हां उसने जिन वो जो तंत्र वो जो 15 गवाह थे जो जिन्होंने एफआईआर करवाई थी। हां जिन्होंने एफआईआर करवाई थी उनको जाके तोड़ा मरोड़ा तो उन्होंने जब अपने बयान पलटे कोर्ट में जाकर के तो कोर्ट ने उन
01:05:59:27 पर आरोप लगा दिया कि आप जो है कोर्ट को गुमराह कर रहे हैं ऐसा कुछ हां कोर्ट को गुमराह कर रहे हैं और वास्तविकता तक नहीं पहुंचने दे रहे हैं अच्छाकि हां अबकि यहां पर यह प्रश्न हो जाता है कि क्या है तो जो मारने वाले हैं जो पांच महिला एक बच्चे का हत्या करने वाले हैं। वे लोग कह रहे हैं कि हमने मारा और इनसे इन गुवाहों पर दबाव देकर के कहवा रहे हैं कि नहीं इन लोगों ने नहीं मारा। कि पुलिस ने आंसू गैल गैस गोले वगैरह दागे उससे लोग मरे हुए हैं। ये कौन कह रहा है? ये जैसे मतलब कि जितने भी डिफेंस में थे जो जितने भी एक्यू्यूज थे 28 जो कि मतलब इसमें फंसे हुए थे और जानबूझकर के फसाए हुए थे तो वे लोग का कहना था कि यह जितने भी गुवाह हैं गुवाहों से यह कहवाए कि नहीं ये जिनकी मृत्यु
01:07:15:10 हुई है यह हमारे परिवार समझ गया मतलब जो जो लोग पहले आरोप लगा रहे थे कि रामपाल ने मरवाया उसके बाद वही लोग ये बोलने लगे कि रामपाल ने नहीं मरवाया आंसू गैस से मरे नहीं वो मतलब जो उसमें मुदाले थे जिसने मारा था उसने लोग मतलब कहा कि मतलब हम लोगों ने मारपीट कर के घर में एक बंद करके और मारपीट किया जिसके कारण मृत्यु हो जाती थी तो मेन गेट पर हम लोग भेज देते थे फेंक देते थे और इनसे कहवाया कि नहीं कोई किसी भी प्रकार का घटना ये लोग नहीं किए हुए थे कि ये पुलिस की गोलीवली से लोग मरे हुए हैं। पुलिस जिन 15 जिन 15 लोगों के ऊपर जिन 15 लोगों के ऊपर हां जो 15 लोग पहले 15 लोग पहले गवाही क्या दे रहे थे वो बताइए 15 लोगों की गवाही पहले क्या थी हां पहले थी उनकी गवाही कि हम आश्रम में गए हुए थे सत्संग सुनने के लिए तो वहां पर पाए कि गुरु जी का तबीयत खराब है गुरु जी सत्संग नहीं कर रहे हैं तो एक दिन
01:08:30:19 दो दिन के बाद में हम लोग वापस चलना चाहे तो वापस जो ही चलना चाहे तो उनके जितने भी गुरे थे काले कपड़े पहने हुए थे लठ डंट लिए हुए थे आश्रम के अंदर वे आश्रम से बाहर नहीं जाने देते थे वह हम लोगों को रोक लेते थे और ज्यादा करके जबरदस्ती करने पर मतलब कि नहीं हम लोग जाएंगे ही हम लोग जाएंगे बाहर जाएंगे ही तो ये लोग क्या करते थे कि उनके पर परिवार को ले जाकर के और एक कमरे में बंद कर दिए थे। तो ये लोग कहे कि परिवार को बंद कर दिए और यह बंद करने के बाद में हमारे परिवार और बच्चे वगैरह सब लोग उसमें रहे तो हम लोग अब जाए कैसे? इस तरीका से मतलब इन्होंने बयान दिया कि वे लोग हमारे घर में बंद कर देने से उन लोगों की मतलब मारपीट की और मृत्यु हो गई। तब हमको सुबह में ओ लाश मिली। सुबह में लाश हॉस्पिटल से मिली। यह यह इनका पहला आरोप था अह मैनेजमेंट के ऊपर कि अह यह जो है इस तरह से हमारे घर वालों को इन्होंने बंद कर करके जो है मारा है और बाहर लाश आई है।
01:09:46:00 ये इनका आरोप था पहले। उसके बाद जब इनके पास भागदौड़ की तो इन्होंने अपने बयान पलटे। फिर उन्होंने भी हो चाहे जैसे भी हो मतलब जैसे भी चाहे जो भी हो तो इन्होंने बयान पलट उसके बाद उसके बाद कोर्ट ने ये कहा कि तुम बयान पलट रहे हो यानी कि तुम जो है गुमराह कर रहे हो तुम मतलब कोर्ट के साथ खेल रहे हो हां हां वे मतलब टोटली टोटली विपरीत करने लगे ये कहने लगे हां के मेरा सिग्नेचर है सिग्नेचर मान लेते थे कि मेरा सिग्नेचर किया हुआ है। लेकिन उसमें बयान को कहते थे कि नहीं कागज पर बयान लिया। सारे 15 का 15 यही कह रहे हैं कि मतलब कागज पर बयान लिए। कागज पर सिग्नेचर सादे कागज पर सिग्नेचर लिए और अपने ही से लिखे। अब यहां पर यह सोचने जानने की बात है कि हमारे परिवार के बारे में आप पूरे सबका नाम तो नहीं जानते होंगे। जब तक से मैं नहीं आपको बताऊं तो मेरे पूरे परिवार का नाम तो आप जानेंगे नहीं। वह लोग सारे परिवार परिवार का नाम मैं जब बताया तभी सब लोग जाने तो पुलिस कैसे मतलब
01:11:01:10 ये पुलिस का बयान दे रहे हैं कि मेरा यह भाई है। मेरे भतीजा है। हम लोग देखने आए थे। सत्संग में देखने आए थे। फलाने फलाने ने वहां नाम लिया है। अच्छा तो कुल मिलाकर के आपका यह कहना है कि उन लोगों वो लोग भी फंस गए जिन्होंने अपने बयान पलटे। बाकी अभी कोर्ट में जो मामला है वो वो विचाराधीन है। उस बात चल रही होगी मेरे ख्याल से। तो अब हम आ जाते हैं जी। अब हम आ जाते हैं इस ये जो ज्ञान गंगा पुस्तक जो है फर्जी कैसे है? अब हम इस पर बात करते हैं। तो सबसे पहली और सबसे रोचक जो बात है मगर मैं एक बात याद दिला दूं जो हमारा नया चैनल है विग्रहान धका लिंक इसके डिस्क्रिप्शन में भी दिया जाएगा। कुछ अगली और रोचक जानकारियां आपको वहां पर आने वाले समय में मिलेंग तो उसके साथ चैनल के साथ अभी से जुड़ जाए। विग्रह धर्म नाम से है। लिंक यहां पर दे दिया जाएगा। खैर तो अब मैं आपको सबसे फैक्टफुल एक जानकारी देना चाह रहा हूं जो मेरे को आज पता चली है। हमने हालांकि ध्यान नहीं दिया था। तो अब इन भाई साहब का कहना है यह पहली बात यह है कि इस पुस्तक को पढ़ने वाले यह ज्ञान गंगा
01:12:16:12 को पढ़कर स्वयं को रामपाल दास का शिष्य समझने वाले यह जान ले कि ये जो ज्ञान गंगा पुस्तक है और और भी सतलोक आश्रम से जो पुस्तक का पूरा ये सब चल रहा है। ये सारी चीजें रामपाल के द्वारा नहीं लिखी गई है। इसका सबूत सबसे पहला ये है कि जगत गुरु तत्वदर्शी संत है ना हां हां रामपाल जी महाराज के सत्संगों का संग्रह अनमोल पुस्तक ज्ञान गंगा ठीक है ज्ञान तो ये रामपाल जी महाराज द्वारा लिखी नहीं गई है जिसका जो मन आया कि कहां से कौन सा सत्संग उठाना है कौन सा नहीं उठाना है कौन सा अपने मन से लिख देना भाई हम अगर किसी के बोले हुए को उसके नाम से छाप रहे हैं तो हमारा यह दायित्व बनता है कि हम उससे जाकर उसका सत्यापन कराएं। यह वही लिखा है जो आप मानते हो। ठीक है? इसीलिए वही मैं सोचता था कि कोई व्यक्ति अपना ही खंडन इतनी बार कैसे कर रहा है। कर भी सकता है। खैर मगर अब हम मेन बात पर आते हैं। आप ये देखिए सबसे बड़ा खुलासा आपके सामने इस समय हो रहा है। अगर स्वयं को गुरु भक्त मानते हो, रामपाल का भक्त
01:13:31:20 भी मानते हो तो भी आज यह सोचना आज जो मैं बताने जा रहा हूं पष्ठ संख्या 142 भैया आप जरा वो ज्ञान गंगा खोल दीजिए और पीडीएफ के अनुसार पष्ठ संख्या 142 वो दिखाइए इनको बुक 142 142 पे जाइए। 120 पे है ना अभी 142 दिखाइए।
01:14:15:03 हां छुट्टी लेकर नीचे आइए। देखिए मेरे पास दूसरा है प्रश्न और इनके पास प्रश्न दूसरा आ रहा है ज्ञान गंगा का। अ इसमें जरा ऊपर अगले भटकों को मार्ग का विषय नहीं 142 ज्ञान गंगा हमें जाना है चैप्टर वो है जो विश्व विजेता संत देखिए आगे पीछे होगा विश्व विजेता संत ना ये चैप्टर नहीं है 149 पेज पे जाओ 149 पे जाइए हां 149 पे आगे आगे जाइए। अभी भी वही चल रहा है। भटकों को ये शायद इससे पहले का चैप्टर है क्या? भटकों को मार्ग हां ये ये इसके बाद का चैप्टर है। इसके बाद थोड़ा सा और आगे चलिए। थोड़ा दो चार पेजेस देखिए सबसे पहली बात तो यही है। पेजेस में ही अंतर आ रहा है। हां ये ये 336 पेज वाली होगी पुस्तक। यह 336 पेज वाली पुस्तक इसलिए अंतर है। हां और आगे चलिए और आगे चलिए।
01:15:33:06 कितना बड़ा जाल बिछा हुआ है भाई पूरा हां ये आया नहीं ये भी नहीं कबीर साहब जी की काल से वार्ता और आगे चलिए विश्व विजेता संत वाले आ गया अब इसमें आपको जाना है आठव नंबर के पॉइंट पर आठ नंबर का पॉइंट पहुंचिए ना ना निकल गया निकल गया
01:16:06:19 एक ज्यादा तेजी से मत जाइए नहीं तो हम देख नहीं पाएंगे चलिए और आगे चलिए और आगे चलिए एक दो तीन चार छ सात अब आठ आठ ये आ गया। ये देख लीजिए। अब यहां पर इनका कहना है कि जो रामपाल दास के जो सत्संग है उसके आधार पर यह बुक छापी गई है। इसका मतलब यह हुआ कि रामपाल दास ने अपने सत्संग में यह बता दिया था कि नास्तेदमस ने या किसी और भविष्यवक्ता ने भविष्यवाणी की थी। क्या भविष्यवाणी की थी? बहुत सारे संत नेता आएंगे जाएंगे। सर्व परमात्मा के द्रोही तथा अभिमानी होंगे। नास्त्रे दमस को आंतरिक साक्षात्कार उस सायरन का हुआ है। नास्त्रेमस ने कहा है कि महान हिंदू धार्मिक नेता को ना पहचानकर उस पर
01:17:21:25 राष्ट्रद्रोह का आरोप भी लगाया जाएगा। बताइए कौन से सत्संग में कहा रामपाल जी ने? कौन से सत्संग में कहा कि मुझ पर जो है रामपाल मुझ पर आगे चलकर के राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलने वाला है। ये देख रहे हैं आप ये ये पहले वाला बुक में जो इसके पहले जो घटना घटी 1811 2014 को उसके पहले वाला पुस्तक में कहीं भी यह शब्द नहीं लिखा हुआ है। अब आप अब आप वो वाली बुक दिखा दीजिए इनको जिसमें शब्द नहीं है। नहीं दिखा दीजिए। हम तीन प्रकार की पुस्तक दिखाऊंगा आपको। तीन प्रकार की एक ये पुस्तक है और एक ये पुस्तक है। कोई ये ना सोचे कि मैं अलग एक ही पुस्तक दिखा रहा हूं। ये तीन प्रकार की पुस्तकें आपको दिखाऊंगा। तीन प्रकार की हां और ये बात बाकी ये पुस्तक है ये दो प्रकार की ये है जो मिलावटी पुस्तक है। और आपके पास जो ये पुस्तक है ये 336 पेज वाली होगी जो गूगल पे है। हां ये गूगल पे 336 पेज वाली होगी। ये बहुत परिवर्तन किया है। जो पीडीएफ दिखाई है वो 336 की होगी। मेरे पास जो है वो ये वाली है। हां ये कितने पेज की है? ये 268 पेज की है।
01:18:37:06 200 ये देखो और कम कर दिया इसमें। इसमें 268 पेज कर दिया। ये मैं पुस्तक मिली ही नहीं है। जबकि 300 पेज से कोई कम नहीं। अब आप को ये दिखा रहा हूं। ये देखिए ये पहली वाली ज्ञान है पुरानी दोनों। अब इस आपको ले चलता हूं। यहां देखिए ये जी ये ये आप पढ़ सकते हैं अलग-अलग लिखा हुआ है इसमें ये अच्छा इसमें वो भविष्यवाणी है क्या वो वाली कौन सी का मुकदमा चलेगा एक मिनट ये पढ़ के सुना देता हूं आपको इसमें लिखा है बहुत सारे संत नेता आएंगे जाएंगे सब परमात्मा के द्रोही तथा अभिमानी होंगे मुझे मुझे नास्ते दम को आंतरिक साक्षात्कार उस सायरन का हुआ है। ये इतना चैप्टर अलग है। ये इतना चैप्टर ये अलग है। इसमें इसके बाद नीचे लिखा हिंदुस्तान का हां इसमें जो सब परमात्मा के दो होंगे और आप वाली उसमें लिख दिया कि राजद्रोह का उस केस लगेगा। ये देख लीजिए भैया जो पहले ज्ञान गंगा थी उस ज्ञान गंगा में यह बात नहीं लिखी थी।
01:19:53:18 और ये वाली इसमें भी आपको दिखा देता हूं। इसमें भी देखो ये अलग-अलग लिखा हुआ है। ये देखिए आप देख सकते हो। आप इसको हाईलाइट कर दीजिए तो आप देख सकते हो इसको। बड़ा करिए इनका। इनका बड़ा करिए भैया। इसमें क्या लिखा है? पढ़ के बता दीजिए। आप पढ़ के बता दीजिए। क्या लिखा है? ये पूरा आप देख सकते हैं इसमें भी वही लिखा है कि प्रश्न बहुत सारे संत नेता आएंगे जाएंगे सब परमात्मा के द्रोही तथा अभिमानी होंगे है ना और ये देखो परिवर्तित ज्ञान जो आप सुना रहे थे ये ये जो है ये हमारे पास 302 पेज वाली पुस्तक है ना इसके पेज नंबर
01:20:42:04 ये देखो इसमें सब मिलावट कर दिया वही आप जैसा मैटर इसमें दे दिया पूरा एक मिला दिया पूरा एक ही मिला दिया। अलग-अलग नहीं किया है। इसमें लिखा है बहुत सारे संत नेता आएंगे जाएंगे सर परमात्मा के दो ही तरह अभिमानी होंगे। मुझे नास्ते दम को आंतरिक साक्षात्कार उस सारण का हुआ है। नास्ते दम ने कहा कि उस महान ये ढाई लाइनें मिलाई गई है। ढाई लाइन जोड़ी गई दोनों के बीच का चैप्टर को एक करने के लिए। देखिए इतने ये बारीकियों के साथ है ना दमस
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01:21:13:18 ने कहा है कि उस महान हिंदू धार्मिक नेता को ना पहचान कर उस पर राष्ट्रद्रोह का भी आरोप लगाया जाएगा। ये
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01:21:22:24 ये ढाई लाइनें मुझे नाते धनुष को दुख है कि उस महान वह महान धार्मिक नेता को उपेक्षा का पात्र बनाया जाएगा। यह जो इन्होंने ढाई मैं तो यह कह रहा हूं कि अगर यह पुस्तक अगर उनके सत्संग के आधार पर है तो हमें वो सत्संग सुना दीजिए जिसमें रामपाल ने यह कहा हो कि मेरे ऊपर राष्ट्र दो का मुकदमा लगेगा। जी जी बस सिंपल हालांकि हमारे पास हालांकि हमारे पास पुरानी ज्ञान गंगा भी है जिसमें कि ये लाइन है ही नहीं। मगर तुम तो यही दिखा दो कि कौन से सत्संग में बाबा जी ने यह कहा है कि मेरे ऊपर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा लगने वाला है
01:22:09:22 और और आपको और एक आपको दिखा रहा हूं मजे की बात एक और आप देखिए उससे भी बड़ी मिलावट इन्होंने क्या की है ये अवतार नामक पुस्तक में जब ये हम लोगों ने इनका विरोध किया कि पांच महिला बच्चे की हत्या कर दी सारे केसों को आ गई तो देखिए इसमें भी इसमें भी डाल दिया कबीर प्रिंटर्स मतलब कबीर प्रिंटर्स बवाना इंडस्ट्रियल एरिया का एड्रेस डाल दिया। ये इसमें भी वही पता लिख दिया। और आपको एक चीज दिखा रहा हूं। देखिए इसमें लिख दिया 17 दो 2000 172 2000 17 को पुस्तक लिखी है। इन्होंने ये इसमें लिख दिया। इसके बाद आपको दिखाता हूं।
01:22:57:10 ये पेज नंबर पांच हाईलाइट कर जी ये पेज नंबर पांच इसमें पूरा लिख रखा है कि नासदमस ने कहा
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01:23:08:00 है कि मैं बड़े दुख के साथ कह रहा हूं कि प्रारंभ में सायरन को ठीक ना समझकर उस पर राजद्रोह का केस लगा देंगे उससे नफरत करेंगे और फिर जाने के पश्चात उसके उससे बेहद प्रेम करेंगे। इसके
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01:23:20:16 बाद इन्होंने क्या लिखा कि नास्त ने लिखा कि पांच नदियों के प्रख्यात प्रांत में एक महान धार्मिक नेता सारन का उदय होगा। वह एक सत्य के उन्माद को यानी अहंकार को समाप्त करेगा। वह उस कारवाई में छह लोग मारे जाएंगे। उस कारवाई में छह लोग जाएंगे। ये देखिए ये उस कारवाई में इसके अलावा देखिए देखिए और सुनिए और क्या लिखा है यह ऊपर लिखे देशद्रोह के मुकदमे की घटना का वर्णन है जिसमें पुलिस ने पॉइंट ध्यान से सुनिए जिसमें पुलिस ने संत रामपाल दास जी के छह अनुयायियों एक 11 वर्ष का लड़का जबकि वो डेढ़ साल का लड़का था। 11 वर्ष का नहीं था। इसमें 11 वर्ष का लिखा है। 11 वर्ष का लड़का
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01:24:18:00 तथा पांच महिलाओं को लाठियों से पीटपीट करके मार डाला। ये इसमें यह लिख रहे हैं कुछ पुलिस द्वारा बेहिसाब छोड़े गए आंसू गैस के गोलों से दम घुटकर मारे गए और हत्या के दो मुकदमे एफआईआर नंबर 429 तथा 430 19 नवंबर 2014 को बेकसूर संत रामपाल दास जी तथा उनके अनुयायियों पर बना
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01:24:41:22 दिया। पहली बात इसी के पेज नंबर मतलब इन्होंने पहले भविष्यवाणी दिखाई और फिर दिखाया देखो ये भविष्यवाणी कितनी सत्य हो रही है। ऐसा कुछ है। उसके बाद एक और आपको दिखा रहा हूं। इसके पेज नंबर 44 पर बड़ा करिए भैया इनका इनका वाला बॉक्स बड़ा कर दीजिए। हां। ये नीचे पेज नंबर 44 ये आप देख सकते हैं। ये सबसे नीचे। ठीक है। पढ़िए पढ़िए पढ़िए। मैं आपको पढ़ के सुना रहा हूं। जो आपने भविष्यवाणी पढ़ी थी ज्ञानंगा पुस्तक के पेज नंबर 164 पर हमारे इसमें पुरानी में 149 पर इसमें पेज नंबर 44 पर ये अवतार नाम मेरे और मेरे और मेरे वाले में मेरे पास जो ज्ञान गंगा है 268 पेज वाली उसमें है ये 142 पर 142 पर है ओ हो तभी कहां मिलेगा चैप्टर नहीं मिलेगा अब देखिए इसमें क्या लिखा इसी भजवाणी को इसी भविष्यवाणी को आप देखिए इसमें क्या लिखा है वही आठ नंबर प्रश्न उत्तर बहुत सारे संत नेता आएंगे जाएंगे सर परमात्मा के द्रोही तथा अभिमानी होंगे मुझे नास्तेदमस को आंतरिक साक्षात्कार
01:25:56:28 उस सारन का हुआ है नास्तेदमस ने कहा कि उस महान हिंदू धार्मिक नेता को ना पहचानकर उस पर राष्ट्रद्रोह का भी आरोप लगाया जाएगा उस कारवाई में छह लोग मारे जाएंगे ेंगे परंतु एक शत्रु एक मिनट एक मिनट एक मिनट सर
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01:26:13:08 परंतु एक शत्रु के उन्माद अहंकार को समाप्त कर देगा मुझे ना दम को दुख है कि वह महान हिंदू धार्मिक नेता उपेक्षा का पात्र बनाया जाएगा
⬜ Not used yet · 01:26:22:26 – 02:05:05:13 (38:43)
01:26:22:26 इसके बाद आपकी भविष्यवाणी लिखी है हिंदुस्तान का हिंदू संत आसामी इसमें ये और जोड़ दिया मतलब ये जो जो इनके जो जो ये होता जा रहा है उसको ये भविष्यवाणी के रूप में छापते जा रहे हैं। आता जा रहा है। जो जो होता जा रहा है उसको नहीं जिस जिस को हम लोग जान जाते हैं उसको हम प्रमाण के द्वारा पूरी दुनिया में प्रमाण सहित उजागर कर रहे हैं। इसके बाद इनमें मिलावट कर रहे हैं। लेकिन अगर ये सच्चे होते तो आज पूरी दुनिया के सामने इतने बड़े-बड़े अवसर बना रखे हैं। हम लोगों से लाइव डिबेट क्यों नहीं करते? आप सारे भक्तों को बुलाइए। सारे लोगों को बुलाइए। आप देखिए मैं आपको एक बात बताऊं। कि इनकी ओर से इनके अनऑफिशियल लोगों का तो फोन आएगा। मगर कहीं पर भी कोई ऐसा नहीं है कि जो ज्ञान चर्चा के लिए कोई अधिकृत व्यक्ति फोन कर दे अपने आप को मैं हूं अधिकृत कह ही नहीं सकता कोई। नहीं कर सकता है। सही बात बोल इंडिया न्यूज़ चैनल फर्स्ट इंडिया न्यूज़ चैनल राजस्थान के जयपुर से विजेंद्र सोलंकी जी ने दो बार एक एक घंटे का प्रोग्राम किया और इनको सबको बुलाया
01:27:38:07 और ये नहीं आए और उस चैनल पे इस अंधश्रद्धा बकरी खतरा को उन्होंने फाड़ दिया लेकिन ये कोई उनका सामना नहीं कर सके। यह अंधा वती खतरा जान पुस्तक को बड़ा कर दीजिए थोड़ा है ना इसको फाड़ दिया और एक ये कलर की पुस्तक छापी है दो तरह की है लेकिन ये कोई सामना उनका नहीं किया ये आ ही नहीं सकते और और आपको एक मजे की बात बताऊंगा अच्छा श्रद्धा भक्ति में इन्होंने क्या लिखा है पेज नंबर 18 1920 को क्या लिखा है जरा वो बताइए सब कुछ बताऊंगा सर देखिए एक मिनट सब बताऊंगा जब कोई इनका विरोध करता है तो देखिए मुझ पर सितंबर 2017 में पंजाब में एफआईआर कराई गई। मलोट के एकता नगर का नाम दान संचालक सुभाष चंद्र देखिए वो आप जो चीजें उसमें है वो अलग रखिए जो हम अकाट सत्य के रूप में यहां पर सिद्ध कर सके वो बात हम करते हैं केवल आपके ऊपर भी व्यक्तिगत हमले हुए एक तरीके से आपके ऊपर भी व्यक्तिगत हमले हुए सर एक मिनट सर इसमें ये बताना बहुत जरूरी है हम अपनी व्यक्तिगत दुख नहीं हो रहे हैं ये जो घटनाएं अन्य लोगों के साथ ना हो इसलिए आपके आपके चैनल के माध्यम से बताना
01:28:53:13 चाहता हूं कि जो इनका विरोध करता है तो यह विरोध सामने इसके बारे में आपके सामने नहीं आएंगे। तो इन्होंने क्या किया? अपनी पत्नी और बेटी के कपड़े फाड़ने की एफआईआर लिखवा दी मेरे ऊपर पंजाब में। जबकि मैं पंजाब कभी गया ही नहीं था। चार लोग पंजाब के एक लोग गंगानगर के कि मेरे घर में सत्संग हो गया। चल रहा है। एक मिनट सर। मेरे घर में सत्संग हो रहा था और इन्होंने मारपीट की। मेरी पत्नी कपड़े फाड़ डाले। 1 अगस्त 2024 को केस खत्म हुआ है और परमात्मा की दया से बाइज्जत भरी हुई है। इतने साल तक मैंने केस लड़ा है पंजाब में। ये सर इन पर किसी भी तरह कोई अगर आप कारवाई करते हैं कहीं भी तो ये इस तरह नहीं करेंगे कि मैं ये काम कर रहा था संत रामपाल जी महाराज से। वहां इनका आदेश खत्म हो जाता है। तो ये इतने ये मतलब इतने नीचे तक गिर जाते हैं कि पैसों के लिए अपनी बहन बेटियों को भी इस तरह इतना आगे करते हैं। ये मेरा कहने का मतलब अब आगे अब ज्ञान अंधश्रद्धा 18 1920 पर एक मिनट सर मैं आपको
01:30:09:18 ये सर देखिए ये अंध श्रद्धा भती खतरा जान पुस्तक है ये अंधश्रद्धा भक्ति खतरा जान पुस्तक है ये देखिए पेज नंबर 18 ये आप देख सकते हैं और कोई भी व्यक्ति अपने पुस्तक को डाउनलोड करके पढ़ सकता है अगर जिसके पास पुस्तक ना पेज नंबर 19 और नहीं 18 में 18 में क्या लिखा है जरा बताइए। शिवलिंग शिवजी की पेशाब इंद्री के चित्र में देखने से स्पष्ट होता है कि शिव का लिंग प्राइवेट पार्ट स्त्री की लिंगी यानी पेशाब इंद्री या योनि में प्रविष्ट है। इसकी पूजा हिंदू श्रद्धालु कर रहे हैं। और भी काफी कुछ लिखा है कि प्राण प्रतिष्ठा करवा करके ये तो जब पूरा सब लोग पढ़ेंगे तो उसका और समझ जाएंगे। इस तरह से मैंने अश्लील भाषा का इस्तेमाल किया। प्राइवेट पार्ट में इस तरह किया है। नीचे आप जाकर के देख सकते हैं।
01:31:25:10 19 में क्या लिखा है? 19 में चैप्टर नंबर तीसरे में जो विवेचन है उसमें आप पढ़ सकते हैं। इसमें लिखा है इसलिए अपने लिंग गुप्तांग की पूजा करने को कह दिया। पहले तो तेजो स्तंभ ब्रह्मा तथा विष्णु के बीच में खड़ा कर दिया। फिर शिव रूप में प्रकट होकर अपनी दुर्गा पत्नी को पार्वती रूप में प्रकट कर दिया और उस उस तेजोमय स्तंभ को गुप्त कर दिया और अपने लिंग गुप्तांग के आकार के पत्थर की मूर्ति प्रकट की तथा स्त्री की गुप्तांग लिंगी की पत्थर की मूर्ति प्रकट की। उस पत्थर की लिंगी को लिंगी यानी स्त्री की योन में प्रवेश करके ब्रह्मा तथा विष्णु से कहा यह लिंग था लिंगी अभेद रूप है यानी इन दोनों को ऐसे ही रखकर नित पूजा करना और इसके बाद आगे लिखा है इसके बाद इसके पश्चात ये बेशर्म पूजा सब हिंदुओं में देखा देखी चल रही है बेशर्म बेशर्म कौन है हिंदू जो शिवलिंग की पूजा करता है बेशर्म है जी जी जी ये इस तरह से पूरा इन्होंने और इसमें इसमें मजे की बात देखिए इसमें लिखा है कबीर प्रिंटर्स भवाना इंटरेस्ट एरिया दिल्ली और ये हमने हमने सब जगह
01:32:40:12 पता किया है दिल्ली में भी सर्च किया जयपुर में भी सर्च किया ये कबीर प्रिंटर्स के कई सर थाने उनमें सबने मैं फोन करके पता किया ऐसे नहीं आपके सामने बोल रहा हूं 2016 से 2024 तक इनका एक एक काला चिट्ठा पूरे वर्ल्ड में जहां बताइए मैं वहां आने के लिए तैयार हूं। इनसे कहता हूं कि आप सतलोक आश्रम धनाना में डिबेट कर लीजिए वहां आऊंगा। और अगर मेरी एक भी बात झूठी साबित हो जाए तो जिंदगी भर हम गुलामी करेंगे। लेकिन हम विदाउट क्यों नहीं करते भाई? क्यों नहीं करते इनसे ज्ञान चर्चा? अमित दास इनसे ज्ञान चर्चा करो। बाबू राम अपने चैनल पे इन्हें बुलाओ। ये आएंगे तुम्हारे चैनल पर। ठीक है? ये आएंगे तुम्हारे चैनल पर। करो ज्ञान चर्चा इनसे और क्या है 20 में क्या लिखा है जी
01:33:34:09 1920 18 19 20 में तो पूरा इन्होने चित्र बना करके रखा है आपके पास पुस्तक होगी आप खोल के देखिए जरा है ना इसमें तो लिखा है कि शिव का लिंग गुप्तांग का चित्र स्त्री के गुप्तांग का चित्र जिसमें शिवलिंग प्रविष्ट है जबकि संत रामपाल जी महाराज ने उस स्तंभ के देखिए शिवलिंग की पूजा अंध श्रद्धावान करते हैं जो शर्म की बात तो है ही परंतु धर्म के विरुद्ध भी है शर्म की बात है शिवलिंग की पूजा करना हिंदुओं तुम लोग कहते हो ना कि कोई अपमान नहीं है किसी का डूब मरो शर्म से जबकि संत रामपाल जी महाराज ने वो तेजोमय स्तंभ के बारे में पूरा सत्संग किया है उसमें इसमें कहीं ये नहीं कहा कि ये शिव जी का लिंग है। पूरा सत्संग है। और इसके बाद नीचे देखो इन्होंने क्या लिखा है। आगे चलते हैं। इसीलिए एक मिनट सर एक मिनट सर इसीलिए थोड़ा और चैप्टर नीचे रह जाएगा। उसको बता रहा हूं। पेज नंबर 20 का सबसे नीचे आप देखिए इसमें और इन्होंने बेशर्म की आवाज लिखी है। कि यदि ऐसी
01:34:48:16 नीचे इसमें कबीर जी ने कहा है कि मैं उन्हें बताना चाहता हूं। कबीर जी ने कहा है देखिए कैसा शब्द लिखा है इन्होंने कि मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि यदि शिव जी के लिंग को पूजने से शिव जी भगवान का लाभ लेना चाहते हो तो आप धोखे में है यदि ऐसी बेशर्म साधना करनी है तो खागड़ फिर इसके बाद ब्रैकेट में ओ इसके बाद मेल काऊ के लिंग की पूजा कर लो जिससे गाय को गर्व होता है उससे अमृत दूध मिलता है हल जोतने के लिए बैल व दूध पीने के लिए गाय उत्पन्न होती जो प्रत्यक्ष लाभ दिखाई देता है। आपको पता है कि खागल के लिंग से कितना लाभ मिलता है। फिर भी उसकी पूजा पूजा नहीं कर सकते। क्योंकि यह बेशर्मी का कार्य है। अब बताइए अब कहां-कहां तक बताएं? क्या क्या करें? 2014 में लिख रखा संस्करण इस 2014 का प्रथम संस्करण इनसे पूछिए किसी भी पुस्तक में संस्करण ला रखा है क्या?
01:35:48:09 ये ये हमें शर्म आती है कि हम अपने घर में हमारे भाई बहन पत्नी बेटा बेटी बेटियां इस पुस्तक को नहीं पढ़ सकती। लेकिन क्या करें? जिसको यह कहना हो कि यह गलत नहीं लिखा है, वह हमसे लाइव में आकर के चर्चा कर सकता है। खैर और ये जीने की राह जीने की राह में क्या लिखा है? गलत तो कुछ नहीं होता है। हम सभी जानते हैं कि हम अपने बेटा और बेटी की शादी क्यों करते हैं। हम सभी जानते हैं। इसका ये मतलब नहीं कि आप बेपर्दा हो जाइए। आप ऐसे असली भाषाओं लिखो जैसे मालूम पड़ता है किसी एक अबोध बालक को आप पढ़ा रहे हो उसको भी ऐसी भाषा नहीं पढ़ाई जाती है। अब ये जीने की राह पुस्तक आ गई जीने की राह इसमें जो रोमन काउंटिंग पेज नंबर दो रोमन काउंटिंग है ना इसमें भी लिख रखा इसमें देखिए बवाना इंडस्ट्रियल एरिया जयपुर सेम वही एड्रेस लेकिन कोई भी अब जयपुर भी 117 हां 117 है क्या सेम सेम
01:37:04:00 आप ये जीने की पुस्तक अगर आपके पास हो तो देख लेना और देखिए इसमें कहने का मतलब ये है कि इन्होंने जब जयपुर में प्लॉट लिया कबीर प्रिंटर प्रिंटिंग प्रेस खोलने के लिए तो इन्होंने वही प्लॉट नंबर इनको मिला जो प्लॉट नंबर इनको बवाना दिल्ली में मिला वही प्लॉट नंबर इनको बवाना जयपुर में मिला जयपुर में जयपुर में ही बवाना नाम की जगह है क्या? है ही नहीं वहां पेना एरिया है ही नहीं वहां पे ना। अरे सर जी शिवश जी शिवशय द्विवेदी जी अरे हम इतनी कच्ची गोली नहीं खाते। हम 2016 से 204 तक हर चीज का एक एक पॉइंट टू पॉइंट सर्च किया। इनको पता है ये पूरे वर्ल्ड में कोई भी हमसे बात नहीं कर सकता। अच्छा अब आगे चलते हैं। अपने पास जो इस समय जीने की राह छप रही है जरा उसको देखिए। उसमें क्या लिखा है? एड्रेस क्या लिखा है? एक मिनट एक मिनट एक मिनट जी जी आप जरा वो अपने पास जो जीने की राह है जो पीडीएफ मिल रही है जी जी जी
01:38:09:06 इसमें क्या एड्रेस डला है इसमें नई दिल्ली डला है अच्छा इसमें नई दिल्ली इसमें नई दिल्ली डला ये बड़ी बड़ी कलाकारी है सब ना देखिए हमारे पास दो जीने की पुस्तक है हमारे पास ये दो जीने की राह पुस्तक है। दो दो पुस्तकों में सेम वही जयपुर का एड्रेस डाला हुआ है। ये चलिए ऐसे ऐसे ऐसे हम सर बात नहीं करते। हम विदाउट प्रूफ कबीर सागर का कबीर सागर का सरलार्थ में क्या लिखा है इन्होंने वो बता दीजिए। पहले इसके बारे में बात कर लेते हैं ना थोड़ा सा इनके पेज में क्या लिखा है जीने की राह पुस्तक के नाम है ना जीने की रात पुस्तक का पेज नंबर 28
01:39:09:01 जीने की रात पुस्तक के पेज नंबर 28 में इन्होंने लिख रखा है जो चरित्रहीन लड़के लड़कियां होते हुए चलते समय अजीबोगरीब एक्टिंग करते हैं लज्ज मारो टेढ़ीमेढ़ी चाल चलते इस तरह से पूरा इसमें इन्ह अश्लील भाषाओं का लिख रखा है। पेज नंबर 28 पेज नंबर 30 29 30 और यह पेज नंबर 40 पेज नंबर 38 39 40 40 पे तो चोली ब्राजील पेंटी भड़ुए ताक जा है ना ये बड़वा बड़वा शब्द भी लिखा है उसमें भड़ुआ शब्द लिखा है चोली अरे सर ये देखिए हम हम कोई अरे मैं मैं पूछ रहा हूं आपसे मैं पूछ रहा हूं आपसे वो मत दिखाओ बड़वा शब्द लिखा है वहां सर जी पूरा इसमें सब लिख रखा है मैंने अच्छा जरा खोलिए जीने की राह का ये 39 नंबर पेज हां जी 40 नंबर 40 नंबर पेज खोलिए हां ये हमारे भी 40 नंबर पे है नीचे
01:40:27:15 तो इनके शिष्य अगर यह सब ये सब यूज़ कर रहे हैं अगर ये देखिए ए लिखा हुआ है तो इसका मतलब ये इनके शिष्य अगर ये सब शब्द यूज़ कर रहे हैं तो कोई नई बात नहीं है। अगर जब ये मानते हैं मेरे जो गुरु हैं वो ऐसे शब्दों से ही बात करते हैं। तो फिर तो फिर फिर इन्हें फिर एंड कंपनी ना कहा जाए क्यों ना इनको कंपनी कहा जाए जब इनकी किताबों में ही लिखा है लिख रखा है इन्होंने लिखा जो हो देखिए कितनी जगह देखिए ये आपको दिखाया जा रहा है एक नहीं 50ों जगह शब्द लिखा है ये है एक तत्वदर्शी संत की वाणी अरे कर रहा है। एक बात और आपको बता रहा हूं। ये देखो संत कबीर साहब की वाणियों में कितना परिवर्तन किया है। कबीर साहब ने लिखा कबीर पर नारी को देखिए बहन बेटी के भाव और कहे कबीर
01:41:30:19 इन्होंने लिख दिया कहे कबीर काम सेक्स मतलब उसमें ब्रैकेट में सेक्स नाश का यही सहज उपाव। कबीर साहब ने कब कहा था कि सेक्स नाश का यही उपाव। दूसरी बात कथा करो करतार की दोबारा बोलिए दोबारा बोलिए दोबारा बोलिए कबीर पर नारी को देखिए बहन बेटी के भाव और कहे कबीर काम नाश का यही सहज पाव तो इन्होंने ब्रैकेट में लिख दिया सेक्स मतलब वो आपत्तिजनक शब्दों को लेके चल रहे हैं बुरी तरीके से जिससे कि ये पेज नंबर 40 की बात बता रहा हूं ये तरीका ये बात करने का यह तरीका नहीं है संतों का। खैर आप आगे चलिए। एक और आपको बता रहा हूं। कबीर साहब की वाणियों में परिवर्तन किया है। कथा करो करतार की सुनो कथा करतार। और कबीर साहब की वाणी है कान कथा सुनिए नहीं कहे कबीर विचार। और इन्होंने क्या जोड़ दिया? कथा करो करतार की सुनो कथा करतार। काम सेक्स कथा सुनो नहीं कहे कबीर विचार। इनका सबको सेक्स ही नजर आता है। ये कबीर कबीर सागर का सरलार्थ
01:42:46:00 खोलिए जरा जहां पर हनुमान जी का अपमान किया गया है वो खोलिए जरा सर बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल पेज नंबर 598 ये कबीर सागर का सरलार्थ ये पेज नंबर ये कबीर सागर का सल्लास है और इसका ये पेज नंबर 598 में सबसे नीचे
01:43:24:19 जी ये आप हाईलाइट कर सकते हैं। दिखा रहा हूं ये कबीर सागर का सरलार्थ। इनका बड़ा कर दीजिए इनका वाला बॉक्स। यह कबीर सागर का सरलार्थ है और यह पेज नंबर 598 ये देखो इसमें सब लिखा हुआ आप देख सकते हो पढ़ सकते हो आप एक मिनट जरा लेफ्ट करिए लेफ्ट बस
01:43:57:25 गधे का गुप्तांग पढ़िए आप ही पढ़िए जो लिख रखा है इन्होंने लिख रखा है कि एक स्थान पर बताया गया कि हनुमान जी के दुम नहीं बताई है। एक स्थान पर हनुमान जी के दुम नहीं बताई है। वास्तव में हनुमान जी के दुम थी। वह दुम सदा बाहर नहीं रहती थी। वह दुम सदा बाहर नहीं रहती थी। आवश्यकता पड़ने पर आवश्यकता पड़ने पर बाहर प्रकट कर लेते थे। उदाहरण के तौर पर गधे का गुप्तांक देखने से दिखाई नहीं देता। गधी के मिलन के समय तीन चार फुट लंबा निकल आता है। यह उदाहरण भले ही अभद्र लगे परंतु सतीश बस करिए। बस करिए बस करिए। ठीक है। बस बस करिए। हटा दीजिए भैया।
01:44:56:09 अच्छा एक मैं बात पूछ रहा था कि ये जो डीवीडी के द्वारा जो नाम दीक्षा दी जा रही है ये कहां तक सही है? आपकी जानकारी में यह डीबीडी द्वारा नाम दीक्षा टोटल फर्जी है। संत रामपाल जी महाराज ने कभी भी डीबीडी द्वारा नाम दीक्षा देने का अधिकार नहीं दिया। जब संत रामपाल जी महाराज 2008 में 22 महीना जेल में रहे थे। एफआईआर नंबर 198 ब 2006 करोथा कांड में 22 महीने बाद जेल से बाहर आए थे। उसके बाद इन्होंने संत रामपाल जी महाराज को हाईजेक कर लिया। इन्होंने सबसे पहले एक महिला के द्वारा लगभग 15 से 20 दिन नाम दीक्षा दिलवाई थी। यह सत्संगों के माध्यम से संत रामपाल जी महाराज ने बताया संत रामपाल जी महाराज ने जो भी उजागर किया है टोटल सत्संगों के माध्यम से इशारे में उजागर किया है और एक एक चीज का मेरे पास सबूत है। एक एक सबूत विदाउट सबूत बात नहीं करते। इसलिए जब इन्होंने जान गए कि ये पूरी दुनिया में प्रचार प्रसार होने लगा तो ये कबीर सागर सल्ला के पुस्तक के पेज अंदर जाके सब मिलावट कर दिए। इसे मिलावट कर दिया। यहां लिख दिया द्वारा नाम देने का संत रामपाल जी महाराज ने अधिकार दिया है। इसी तरह इन्होंने ये पुस्तक दिया है किसको अधिकार किसको दिया है? किसी को नहीं। ये अपनी मर्जी से
01:46:13:01 मैं बोल रहा हूं इन्होंने जब ये मिलावट की तो इसमें कोई नाम लिखा अधिकार दिया है किसी को? ना किसी को नहीं। डीबी द्वारा नाम दीक्षा दे। कोई भी दे तो मैं भी दे सकता हूं। हां अब तो ये पूरी दुनिया में दे रहे है ना ये लोग पूरे वर्ल्ड में चल रहे है पूरे वर्ल्ड में कोई भी दे सकता है मतलब गुरु का कोई महत्व ही नहीं है और देखिए सबसे बड़ी बात ये है कि जब हम सबसे पहले 2016 से हमने विरोध करना शुरू किया था सबसे पहला विरोध हमने किया था और हमने बीजेपी द्वारा नाम दीक्षा चली थी लेकिन विरोध 2016 17 से वीडियो बनाना शुरू कर दिया था फर्जी का लेकिन वो दोनों मंत्रों का जाप करना हमने बंद नहीं किया लेकिन वो दोनों मंत्रों का जाप करना हमने 2019 से बंद किया। जब संत रामपाल जी महाराज के कई सत्संग हमारे पास आ गए। अब तो पूरे वर्ल्ड भेजता हूं। वो सारे जब सत्संगों कलेक्शन हो गया तब जाकर के हमने उस दिन से दोनों मंत्रों का जाप करना बंद कर दिया। आज के बाद मैं जब तक संत रामपाल जी महाराज मुझे डायरेक्ट नाम दीक्षा नहीं देंगे तब तक हम इन मंत्रों का जाप नहीं करेंगे। हम अपने गुरु जी का नाम लेंगे। उस दिन से हम इन मंत्रों का जाप नहीं करते। हालांकि जब जब जिन कई लोगों को हमने वो सब वीडियोस भेजे तो वो लोग भी काफी
01:47:28:04 लोगों ने मंत्रों का जाप करना बंद कर दिया। तो अब ये लोग अंदर ये मिलावट करते हैं। बाहर नहीं मिला पाते हैं। लेकिन अंदर लेकिन गुरु जी ने शिष्य की अधीनता में बहुत बढ़िया बात लिखी थी कि ऐसे अगर आप गुरु से नाम दीक्षा दिलोगे तब ये हमें आपको उदाहरण देते हैं गीता अध्याय चार श्लोक नंबर 34 का कि अर्जुन को उपदेश दिया कि तू तत्व संत की खोज कर और फिर कपट भाव छोड़कर उसकी शरण में जा और फिर उसकी सेवा कर। फिर तेरी सेवा से जब प्रसन्न होंगे तब तुझे तत्व ज्ञान देंगे और ये तो चले गए डी नाम दिशा दिया चले आए ये कोई नाम दीक्षा होती है क्या
01:48:06:21 हां हो गए हो गए और जब इनका ये करते ना ये सामने क्यों नहीं आते सर ये पुस्तकों के अंदर मिलावट करते हैं और अब तो सत्संग आज हमने जाना भाई कि इनकी पुस्तकों में कितनी धांधलेबाजी चल रही है कहां छपते यह भी नहीं पता है और इनके नाम से रामपाल जी के नाम से बहुत सारी चीजें जो है उल्टी सीधी चल रही है और
01:48:39:13 एक बात और है कि अगर जो इन पुस्तकों को बेचते हुए पकड़ा जाता है उसके पीछे भी कोई बैकग्राउंड नहीं है कि भाई हां यहां से छपी है पुस्तकें अगर है तो आप बताएं और इस पर हम आगे अपनी कारवाई जारी रखेंगे। जो भी ये जो इनकी जो ये जो तथाकथित जो चीजें चल रही है रामपाल के नाम पर और या फिर सतलोक आश्रम के नाम पर जी सर मैं एक बात कहना चाहता हूं ये जो पुस्तकें हैं चौथा कांड का रहस्य और ये भक्ति सौदागर का संदेश इसमें बंदी छोड़ भक्ति मुक्ति ट्रस्ट जो ट्रस्ट है उसका नाम लिखा हुआ है इन्होंने 1999 में बंदी छोड़ भक्ति मुक्ति ट्रस्ट बनाया एक तीन 2012 को कवि परमेश्वर भक्ति बनाया। 1999 में जो पुस्तकें छपी है उनमें बाकायदे ट्रस्ट का नाम लिखा हुआ है। इसके बाद किसी भी पुस्तक में ना संस्था का नाम है ना ट्रस्ट का नाम है ना ट्रस्ट का नाम है। 1999 के बाद वाली जितनी इन्होंने पुस्तक छापी है 2008 में 2010 में या वर्तमान समय में किसी भी पुस्तक में ट्रस्ट का नाम नहीं है। किसी भी पुस्तक में प्रश्न का नाम नहीं कांच मुद्रा कहां छपती है। दूसरी बात ये जो फर्जी कबीर परमेश्वर भक्ति टच
01:49:54:16 बना रखा है। यह यह 17 मई 2018 को इन्होंने बंद कर दिया और वो फर्जी ट्रस्ट है। उस फर्जी ट्रस्ट की आपको खूबी बताएं कैसी है। इन्होंने क्या किया? अंदर जहां ये ट्रस्ट बनवाया वहां जो भी अपना पैसा ले दे वहां संत रामपाल जी महाराज को उपस्थित होने नहीं दिया। वहां ये सब स्वयं अपना बन गए। और इसके बाद भी इन्होंने संत रामपाल जी महाराज की फोटो अलग से उसमें चपका दी। संत रामपाल जी महाराज फर्जी साइन कबीर परमेश्वर भक्ति ट्रस्ट में उनके लेटरों में फर्जी साइन और बाद में पुस्तक उसकी फोटो चपका दी ये सारे हमारे पास एविडेंस है और इसके बाद जब हम लोगों ने इसका उजागर किया तो 17 मई 2018 को इन्होंने मुनि धर्मा ट्रस्ट मान लिया और देखिए पूरे वर्ल्ड में फर्जी कबीर परमेश्वर भक्ति ट्रस्ट के पर्चे पर नाम दीक्षा दी जा रही है और एड्रेस पड़ा शत्रुक आश्रम बरवाला का जितने भी काम होते हैं जो भी पर्चा छपता है पीला पर्चा वो सतलोक आश्रम बरवाला के नाम से और 11 इनके आश्रम है। किसी भी आश्रम के नाम से कोई पुस्तक लांच नहीं होती है। किसी भी आश्रम का नाम किसी पुस्तक नहीं है। इसलिए आपके चैनल के माध्यम से विश्व के सारे धर्म गुरुओं से और उनके जो अनुयाई हैं हम सबसे
01:51:10:00 कानपुर से रामचंद्र दास हाथ जोड़ के निवेदन करता हूं कि कहीं भी कोई भी पुस्तक बेचता हुआ मिल जाए तो फोटो किसी लगा देने से या नाम लिख देने से उसकी पुस्तक नहीं हो जाती है। आप उनसे एविडेंस मांगिए और जो भी कारवाई करना हो आप उसके खिलाफ कीजिए। कृपया करके हम सब पढ़े लिखे हैं। हमारे ज्ञान मार्ग में कहीं भी वैचारिक मतभेद हो सकते हैं। लेकिन इस मार्ग इस तरह से अगर किसी भी संत के साथ किसी भी व्यक्ति के साथ अगर इस तरह घटना हो रही है तो हम तो सबसे कहेंगे कि भाई आप सब लोग सच का साथ दें। बात बाकी हम तो अपने घर में भी चार लोग मिलकर के एक मती के नहीं हो पाते हैं। ये मेरा कहने का मतलब है।
01:51:53:01 चलिए आपने आकर के बहुत सारे व्याख्यान बतावे बताए और बहुत सारे चीजें बताई। बहुत ही उसमें आवश्यक जानकारियां भी थी और इन लोगों के लिए भी है जो पागल हो चुके हैं। बस बंदी छोड़ बंदी छोड़ कर रहे हैं। ये नहीं पता कि वो ये करके उसी बंदी छोड़ जिसको बंदी छोड़ मानते हैं। उसी के ही पीठ में छुरा गोप रहे हैं। बिना सोचे समझे बस जो कर रहे हैं वो कर रहे हैं। हालांकि मुझे आशा है कि आज के इस व्याख्यान से कुछ लोगों की आंखें आंखों से पट्टी जरूर।
01:52:28:02 दो मिनट का और आपसे मैं समय लूंगा दो मिनट का। ये ये लोग क्या कहते हैं कि देखो अन्य धर्म गुरु के लोग हम भी हम भी भगवान शंकर की पूजा करते थे। हम भी नवरात्र व्रत रहते थे। आज भी हम सभी देवी देवताओं का सम्मान करते। हम भी हनुमान जी के भगत थे और आज भी उनके भगत है। ऐसा नहीं है। मानने का तरीका अपना अलग-अलग है। लेकिन सम्मान करने का तरीका सबका एक ही होता है। ये क्या कहते थे कि वो जो ब्रह्मा विष्णु मूर्ति की पूजा करते हैं उनको उससे क्या लाभ होता है? कुत्ता मुट जाता है टांग उठा के ये कर देता है। इस तरह इन्होंने पूरा हमारे संत रामपाल जी महाराज के और आप सब लोगों को बीच में जहर घोला। आज यही लोग जीवित गुरु जिंदा गुरु को जेल में डाल के जिस आप पवन ठक की बात करते हैं वो और ये जितने भी राष्ट्रीय सभा सेवा समिति के लोग जितने सतलोक आश्रम लोग हैं इन्होंने संत रामपाल जी मां की तस्वीर बना के और आज फोटो की पूजा कर रहे हैं स्वयं और स्वयं फोटो के आगे भोग लगा रहे हैं और दूसरे धर्म गुरु की गाली देते थे कि देखिए हनुमान जी की पूछ की हनुमान पत्थर की मूर्ति शंकर भगवान की पत्थर की मूर्ति क्या देगी जिंदा देगी आज जी डाल अरे इनको इनको चुप करो भाई बाबू राम जी को किसने इनको बोलने को दिया अभी रुक जाओ बाबू अभी बोलेंगे आपको
01:53:43:13 अभी बोलेंगे चुप रहो चाचा बाबू को चुप करो भाई जिंदा गुरु को जेल में डाल रखा जिंदा गुरु को और ये यहां फोटो की पूजा कर रहे हैं और दूसरे धर्म के लोग गालियां दे रहे थे और गुरु ने क्या ज्ञान दिया संत रामपाल जी महाराज इतने इतने उदाहरण दिए कि कोई भी पति स्त्री होती है वो अपने पति अगर उसका विदेश चला जाता है तो उसकी फोटो ले को अपने सीने में लगाती है लेकिन फोटो की पूजा नहीं करती वो जब पूजा करती है दंडवत प्रणाम करती है तो अपने पति के चरणों ध्यान रखती है पति के तो जहां तुम्हारा गुरु है वही जाने से लाभ होगा अगर बरवाला में गुरु थे अब वहां जाओगे तो कोई लाभ नहीं होगा
01:54:31:25 बाबू थे ये बाबू आए हैं आपसे कुछ क्रॉस क्वेश्चन करने तो फिर अब हम इनसे आपका वार्ता कराते हैं और देखते हैं। हां भाई बाबू आओ सामना करो चाचा जी बाबू पहले आप अपनी पहचान बताएं सर्वप्रथम मेरा नाम है बाबू रामदास मैं संत रामपाल जी महाराज महाराज के क्या है मैं संत रामपाल जी महाराज का शिष्य हूं। कैसे? अच्छा कब कब नाम दीक्षा ली थी आपने? सुनिए एक मिनट मैं इनको आप तक लेकर आऊंगा। तब तक आप थोड़ा धैर्य रखें। ठीक है। जी जी बताइए।
01:55:21:22 क्या कैसे शिष्य हैं? उनकी भक्ति करते हैं। अरे शिष्य कैसे हो? उनके द्वारा दिया हुआ भक्ति को करते हैं, साधना करते हैं। उनका लड़खड़ाने लगे। कुछने वाली क्या बात है? कुछ ऐसा है जो तुम नहीं बोल रहे हो? जो उन्होंने दिया है मैं उसको करता हूं। अरे उन्होंने तुमको कान में दिया। कैसे दिया? मिलके दिया। कब दिया? ये बताओ। एलईडी के माध्यम से दिए हैं। एलईडी के माध्यम से। ये कहां लिखा है? शास्त्र में एलईडी के माध्यम से नाम दान होगा। वो जहां लिखा होगा उससे आपको लेन देन नहीं है। हमको चाचा से बात करना है। अभी करवाएंगे। हमारे कोई वो नहीं हो मालिक जो तुम जो कहो वो करने लग जाए। अभी जो पूछ रहे हैं वो बताओ पहले। मेरे को चाचा से बात करने शिष्य कैसे हो? वो संत रामपाल जी महाराज से जुड़े थे। मैं भी जुड़ा हूं। उनसे बात करना है। पूछ रहा हूं। मैं पूछ रहा हूं। तुम संत रामपाल के शिष्य कैसे हुए? ये बताओ। एलईडी के माध्यम से नाम दीक्षा लिया हूं। भक्ति करता हूं। एलईडी के माध्यम से नाम दीक्षा ली जाती है। यह कहां लिखा है? शास्त्रों में कबीर वाणी में सूक्ष्म वेद में ही दिखा दो। जहां पर जरूरत
01:56:37:01 पड़ेगा दिखाने दिखाया जाएगा। मेरे को अभी जिसे बात करना है उनसे बात करना। इसका मतलब तुम ये भी नहीं सिद्ध। इसका मतलब तुम्हारा एलईडी से नाम दीक्षा लेना शास्त्र सम्मत नहीं है। फिलहाल वो वो जो विरोध कर रहे हैं उनसे मेरे को बात करना है। अभी बात करा रहे हैं। फिलहाल आप शास्त्र सम्मत वो भक्ति नहीं कर रहे हैं क्योंकि आपकी जो नाम दी इच्छा है वो शास्त्र सम्मत नहीं है ना। हम शास्त्र सम्मत कर रहे हैं। नहीं कर रहे हैं वो हमें मैं जानता हूं। आप नहीं जानते हैं उसके बारे में। तुम तो रोज चिल्लाते हो ना। शास्त्र सम्मत शास्त्र सम्मत तुम अभी बताओ। एलईडी से दीक्षा ली जाती है। यह कहां लिखा है? जरूरत पड़ेगा दिखा देंगे। अभी जरूरत नहीं है उसका। क्यों? शास्त्र सम्मत नहीं सिद्ध करना चाहते अपने आप को। अभी जो संत रामपाल जी महाराज का विरोध कर रहे हैं उस पर हम बात करेंगे। अरे भाई संत रामपाल जी महाराज का विरोध नहीं किया उन्होंने। वो अभी बात करेंगे। पहले तुम जिससे बात कर रहे हैं वो यह तो बताएं कि हां मैं प्रामाणिक शिष्य हूं और नहीं हूं तो यह बता कि हां ठीक है। इतने अंश में मैं प्रामाणिक नहीं हूं। मैं उनके प्रश्न का उत्तर दूंगा। यानी तुम्हारे पास इस प्रश्न का उत्तर नहीं है। उत्तर है लेकिन आपको नहीं दूंगा मैं। मेरे को उत्तर देना है उनका। चलो
01:57:52:07 तो फिर हम आपको पूछने भी नहीं देंगे। अगर आप ऐसे बात करोगे उत्तर है दूंगा नहीं। मेरे को मैं जिसका उत्तर देने आया हूं मैं उसका उत्तर दूंगा। जो प्रचार कर रहे हैं पूरी जनता को दिखा रहे हैं उन्होंने कि ऐसा है मैंने पूछा आपसे मैंने पूछा आपके पास एलईडी से दीक्षा लेने का कोई प्रमाण है शास्त्रों में आपको बताने का हमको जरूरत नहीं है जिसको जरूरत पड़ेगा हम बताएंगे जरूरत तो तुम ये तुम ये कहते हो ना कि हम शास्त्र सम्मत भक्ति करते हैं करते हैं तो शास्त्र सम्मत क्या है तुम्हारी इस नाम दीक्षा की आपको बताने की जरूरत नहीं है मेरे को मेरे को चाचा से बात करने तुम आए क्यों उनसे बात करने आए हैं उन्होंने जब हमारे गुरु जी के बारे में ऐसा विरोध कर रहे हैं इसके वजह से गुरु जी के बारे में विरोध नहीं किया उन्होंने उन्होंने जो गुरु जी के नाम पे जो वो चल रहा है ना तंत्र उसका विरोध किया है खैर अभी तुम्हारे पास अभी तुम्हारे पास अगर वो नहीं है वो क्या कहते हैं शास्त्र का प्रमाण तो तुम अपने आप को यह भी नहीं कह सकते कि मैं उनका शिष्य हूं फिलहाल तुम बात कर लो चलो भाई बात करो जी हां जी बताएं बाबू राम जी हम ये पूछना
01:59:07:18 चाहते हैं जी जी कि आप नाम दीक्षा पहले बताइए कब लिए हैं 24 में 2014 में 2014 में लिए हैं 204 में अरे 2014 में भैया मैं अच्छी तरह से होशो हवास भी बोलता हूं 24 मई 2014 14 और कब तक भक्ति किए आप आप ये दुनिया की बातें छोड़िए कब तक भक्ति किए आप मेन बात करिए इतना समय यहां नहीं है कोई घर में नहीं बैठकर भाई सुनिए मैं मैं जवाब दे देता हूं इस बात का ये बताने की जरूरत आपको नहीं है आप जो उन्होंने फैक्ट और फिगर बताए हैं ना उनको क्लेम करिए फैक्ट और फिगर जैसे कि उन्होंने बताया कि ये ज्ञान गंगा में छपा हुआ है आज की ज्ञान गंगा में कि उस महान हिंदू धार्मिक नेता को ना पहचान कर उस पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलेगा। यह रामपाल ने कब बोला? इस पर बात करो। संत रामपाल जी महाराज ने सभी पुस्तकों को छापे हैं। कोई दूसरा नहीं छापा है। जो उन्होंने लिखा है वो छपाया गया है। ये खुद लिख रहा है। ये खुद लिख रहा है। ये खुद लिख रहा है। ये ये पुस्तक गलत बोल रही है क्या? उन्होंने
02:00:23:20 पहले लिखा क्या है? ये क्या लिखा है मेरे भाई? क्या लिखा हुआ है? क्या लिखा है? पढ़ो। अरे जगत गुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज सत्संगों का संग्रह अनमोल पुस्तक ज्ञान गंगा लिखा हुआ है। हां तो उन्होंने अपने ही सत्संगों का संग्रह किया। फिर पुस्तक लिखी क्या? तो उन्होंने अपने सत्संगों को एक मिनट। उन्होंने जो सत्संग किए उनको खुद देखा मैंने कब क्या-क्या बोला। फिर उनका संग्रह किया। फिर पुस्तक छापी क्या? उन्होंने ही पुस्तक छापा। इसके बाद पूरे जनता को जनता तक पहुंचने के लिए बोला गया है। फिर वही बात मैंने अभी तुमसे पूछा। मैंने अभी तुमसे पूछा कि उन्होंने अपने किसी सत्संग में ये कहा था क्या कि मुझ पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलेगा? वो सब कुछ जानते हैं। आपको बताने की जरूरत नहीं है। सर एक मिनट एक मिनट जब कोई बताने की जरूरत ही नहीं है तो आए क्यों? निकल जाओ यहां से। फिर जाओ अपना काम करो। जी से बात करना है जी एक मिनट एक मिनट मुझे इनसे बात का लेने दीजिए एक मिनट बोलिए आप आपने कब नाम दीक्षा ली थी मैं 2019 में लिया हूं 2019 में लिया है जी आपके उस नाम
02:01:38:21 दीक्षा फॉर्म में क्या लिखा है अब जो भी लिखा हुआ है मैंने 2019 में नाम दीक्षा लिया उनका दिया हुआ भक्ति को कर रहा हूं मतलब तुम पूछोगे उसका जवाब दे एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट एक मिनट तुम पूछोगे उसका व्यक्ति कंठस्थ जवाब दे हम जो पूछे उसका मैं बताऊंगा नहीं मैं ये नहीं करूंगा मैं ये करने आया हूं अभी उन्होंने इसमें जीने की राह पर बहुत टिपा टिपणी कर रहे थे अभी करते हैं देखो तुम अगर उनसे कुछ पूछ रहे हो वो तुमसे पूछेंगे वो भी बताना पड़ेगा वो जीने
02:02:18:04 एक मिनट एक मिनट सर आपके नाम दीक्षा फार्म में क्या लिखा हुआ है यहां लॉजिकल बात कीजिए यहां हम घर में बैठकर के ना वह नहीं अगर यह बात करनी हो तो आप सतलोक आश्रम धनाारा में जब बताएं उस दिन मैं आ जाऊंगा आपके वहां महेंद्र जी जो है संत रामपाल जी महाराज के भाई है या जितने राम कुमार ढाका राजपूत सोनी या पूरे भारत में पूरे वर्ल्ड में जो भी आपके आश्रम चल रहे हो वहां के मेन व्यक्ति जैसे आपके विष्णु साहू प्रदेश में है उन व्यक्तियों से वीडियो आप डलवा दीजिए। जिस दिन आप बताएं उस दिन मैं वहां जाऊंगा और वही हम सब लोग डिबेट करते हैं। यहां सीमित समय है। आप ये बताइए आपके नाम दीक्षा फॉर्म में क्या लिखा है? आपको नहीं पता। ठीक है। एक मिनट एक मिनट एक मिनट। पहले एक मिनट सुन लीजिए। आपके नाम दीक्षा फार्म के बारे में तो आपको पता नहीं। जीने की राह तो बहुत बड़ी बात है। दूसरी बात है। एक बात सुन लीजिए। आप किसी भी डिबेट रख लीजिए। संत रामपाल जी महाराज का एक भी कोई शिष्य नहीं है पूरे वर्ल्ड में। अगर कोई एक भी व्यक्ति साबित कर दे कि मैं संत रामपाल जी महाराज का शिष्य हूं। मैं उसी से डिबेट करता हूं। अनावश्यक आप जैसे लोगों को नहीं कि आप आ जाओ।
02:03:33:08 कोई भी अपनी बात कह के चला जाए। और सुनिए अब तुम्हारी बात हम नहीं सुनेंगे। तुम्हारे पास कुछ नहीं है। तुम संत रामपाल से हो ही नहीं। अब सुनिए डीबी द्वारा नाम दीक्षा देने का अधिकार संत रामपाल जी महाराज दिया या नहीं दिया। हम प्रमाण ले बोलते हैं एक मिनट सुनो तुम्हारी सुनने के लिए बैठा हूं ये कबीर सागर का सलार्थ है पेज नंबर 78 पढ़ लेना ये पेज नंबर 78 है बड़ा करो भैया इनका बड़ा करो बॉक्स बड़ा करो एक मिनट सुनिए अभी अरे मैं सुन रहा हूं आप अभी आप जीने किरा पर विरोध कर रहे थे जीने बाबू राम को बाबू राम बाबू राम को बता रहे हैं से दीक्षा लेना गलत क्यों है वो सुन लो
02:04:15:13 बाबू राम आप बोलिएगा वो अभी बता रहे हैं वो अभी बता रहे हैं बाबूराम अभी बोलने का मौका मिलेगा वो अभी बता रहे हैं तुम्हारी जो नाम दीक्षा है डीवीडी से वो ढक्कन है कुछ नहीं है वो उसको मैं जानता हूं पेज नंबर है पेज नंबर कौन सा है उन्होंने भाई बाबूराम चुप हो जाइए अन्यथा म्यूट करना पड़ेगा आपको चुप हो जाइए नंबर 78 पेज नंबर 78 चुप हो जाओ। पेज नंबर 78 78 पेज नंबर 78 निकालिए भैया। हां सबसे नीचे आइए। 78 ये 71 है।
02:04:58:07 हां ये 78 में नीचे आइए। अब विशेष जो है ना विशेष लिखा हुआ देखिए इसके बीच में जो है वर्तमान
✅ This part is already used · 02:05:05:13 – 02:05:12:14 (0:07)
→ Used in: A · Live Satlok Ashram भयभीत #तत्त्वदर्शीसंत #rampaljimaharaj at 52:14 ↗
02:05:05:13 में मेरे रामपाल दास द्वारा चलाया गया 13वा पंथ है यह दास रामपाल दास अंतिम सतगुरु है
⬜ Not used yet · 02:05:12:14 – 02:44:53:00 (39:41)
02:05:12:14 रामदास प्रकाश पुंज इलेक्ट्रॉनिक बॉडी यानी डीवीडी से दिया जाएगा दिया जाएगा अंतिम सतगुरु है इसके बाद कोई गुरु नहीं होगा दिया जाएगा अब के बाद नाद तथा बिंद का कोई चक्कर नहीं रहेगा पहले भक्ति विधि गलत कर देते थे। जिस कारण से बिंद वाले पंथ भक्ति मार्ग को नष्ट कर देते थे। भक्ति विधि ठीक रहेगी तो साधकों का मोक्ष होगा। अब तो डीबीडी से दीक्षा दिलाई जाएगी। यहां दिलाई जा रही है। अब तो डीबीडी दीक्षा दिलाई जाएगी। उसे वही दिलाएगा जिसको आदेश दिया जाएगा। वह चाहे नाद का हो या बिंद का हो। अब नाद और बि का मतलब क्या होता है? ना आपको बताने की जरूरत नहीं है उसको बाबू एक मिनट चुप हो जाओ बता देने दो बता दे दो होता है जब हम माता पिता से के सहयोग से मेरा जन्म होता है तो हम बि के होते हैं और जब हम गुरु बना लेते हैं और गुरु के पुत्र हो जाते हैं तो वो नाद वचन हो जाता है नाद के पुत्र कहलाते हैं। तो इसमें नाद या बिंद किसी को भी नाम दीक्षा
02:06:27:18 देने का अधिकार डीबीडी द्वारा जब जाएंगे तब देके जाएंगे तब यह डीबीटी चालू होगी और तुम तो 2009 से दे रहे हो 2009 से अब अपनी बात रखिए जीने की राह पुस्तक में क्या बताना चाहते हो जीने की राह पुस्तक में क्या तुम बताना चाह रहे हो बताओ स्टार्टिंग पेज पर स्टार्टिंग पेज पर आपने बोल रहे थे स्टार्टिंग पेज से चलिए जहां पर स्टार्टिंग िंग पेज स्टार्टिंग पेज पर जहां से आपने बोला था वही से दिखाइए क्या स्टार्टिंग पेज है तो हम तो बोल दिया देख लो ना कौन से स्टार्टिंग बताइए क्या गलत है स्टार्टिंग पेज पर यहां पर अपने स्टार्टिंग से ही बताया था यहां क्या गलत है क्या
02:07:12:21 अब तुमको उतना होश नहीं तो क्या बताएं अरे भाई भाई तुम अपना क्लेम करो अपना यहां पर सनी्नी देओल मत बनो गदर हमने भी देखी है ठीक है और तुम नहीं उखाड़ उखाड़ देंगे अंडर हैंड पंपा यहां गदर मत गदर मत मचाओ अपना क्लेम करो जो क्लेम करना है इन्होंने बोला था तुम अकेले नहीं हो घाटा बोला था हिसारहाना रोड बरवाला यहां पर कुछ और बोल रहे थे क्या दिखाइए क्या क्या गलत लिखे हैं दिखाइए य से स्टार्टिंग से रोड बरवाला भाई तुम पहले जाओ रो लो बाबू बाबू तुम पहले रो आओ जब रो लो अच्छे से थोड़ा काम डाउन हो जाना फिर आना तुम रो के आओ जाओ एक मिनट सर एक मिनट सर एक मिनट बस एक मिनट ये जीने की रा पुस्तक है जीने की रा पुस्तक में इसमें लिखा है प्रचार प्रसार समित प्रकाशक प्रचार प्रसार समित ये लिखा प्रचार प्रकाशक प्रचार प्रसार समित सर्व तथा सर्व संगत सतलोक आश्रम हिसार टोहाना रोड बरवाला जिला हिसार प्रांत हरियाणा ये क्या इसमें ट्रस्ट का नाम क्यों नहीं है? ये प्रचार प्रसार समिति क्या है? और एक चीज और आपने बोली
02:08:28:00 थी आपने जयपुर का एड्रेस मुझे याद आया। आपने जयपुर का एड्रेस पढ़ा था। ये जयपुर का एड्रेस क्यों पढ़ा? कहां जयपुर का एड्रेस है? ये किस किस ट्रस्ट से आप हो? आपका ट्रस्ट कौन सा है? अरे जयपुर का एड्रेस कहां है? दिखाओ तो स्क्रीन स्क्रीन बड़ा करो। जयपुर का एड्रेस कहां लिखा है इसमें? अरे मेरे भाइयों सुनो एक मिनट एक मिनट दोनों लोग शांत हो जाइए दोनों लोग शांत हो जाइए क्या हमने ये कहा है कि सिर्फ वही जीने की राह राह एक पुस्तक है मैंने ये बताया नहीं कि यहां मेरे हमारे पास जो जीने की राह पुस्तक है उसमें दूसरा एड्रेस पड़ा है इन बुक्स में एड्रेस सही नहीं लिखा है और किसी में जयपुर भी लिखा है तुम उस बात को क्लेम क्यों कर रहे हो अभी सुनो जब उन्होंने जयपुर का एड्रेस दिखाया तो हमने दिखाया था ना कि जीने की राह में नई दिल्ली भी पड़ा है एड्रेस उसको तो हम भी कह रहे हैं ये दो पुस्तक हैं और सामने का प्रमाण कहते हुए मानते रहे सामने का प्रमाण बताओ ऐसे बात नहीं होती है ना अच्छा मैं तुमसे कहूं कि तुम्हारे पास जो किताब है उसी को वो किताब माना जाए जो सतलोक आश्रम से छप रही है। इनके पास जो किताब है उसको ना माना
02:09:43:06 जाए। ये कैसे तय होगा? बताओ। की अभी अभी मैंने एक सवाल देखो बाबू मैंने एक सवाल किया उनके पास जो किताब है उसको ना माना जाए और तुम्हारे पास जो किताब है उसको प्रमाणिक माना जाए इसका आधार क्या है बताओ भाई इन्होंने बोल दिया लेकिन हम ये तो भक्ति को छोड़ दिए हमें संत रामपाल जी महाराज का भक्ति कर रहा हूं ये तुम मत करो ये तुम तय मत करो मैंने तुमसे पूछा कि तुम्हारे पास जो किताब है जीने की राह वो वास्तविक है और इन्होंने अपने मन से छपवाई है। यह किस आधार पर तय किया जाएगा? उस आधार पे तय किया गया जो उनका जो भगत है जो भक्ति कर रहा है अभी लाइन से चलते जा रहा है। तो वो कर तो पीछे एक मिनट। भक्ति को भक्ति कोई कर रहा है कि नहीं कर रहा है? ये कैसे तय होगा? वो वहां तक जो भक्ति कर रहा है वहां तक लिंक है उसका। कैसे लिंक है? वो मुझे वो मुझे सिद्धांत बताओ कि किसको भक्त माना जाएगा किसको भक्त नहीं माना जाएगा बताओ सिद्धांत जो संत रामपाल जी महाराज से भक्ति कर रहा है वही तो भक्त है जो भक्ति नहीं कर रहा वो कहेगा तो वो कर तो रहे हैं तुम्हारे एक मिनट एक मिनट
02:10:58:09 तुम्हारे पीछे कितना बड़ा फोटो लगा है रामपाल जी का बताओ तो इन्होंने तो बोल दिया कि जब वो बाहर आएंगे फिर वो नाम दीक्षा लेंगे पूछ रहा हूं तुम्हारे पीछे कितना बड़ा फोटो लगा हुआ है रामपाल का क्या मैं झूठ बोल रहा हूं इनका फोटो लगा के तो ये झूठ बोल रहे हैं क्या रामपाल जी का फोटो लगा के वो तो बोल रहे है आप सिद्धांत बताइए आप सुनो ये सिद्धांत बता दो कि ये संशय की स्थिति में कि वो जो डीवीडी वाली नाम दी इच्छा है वो सही है कि नहीं है संशय की स्थिति में अपने गुरु एक मिनट संशय की स्थिति में ये अपने गुरु का नाम जप रहे हैं डीवीडी से जो मन नाम मिला वो नहीं जप रहे। यह सिद्धांत बता दो कि इस आधार पर इस आधार पर यह माना जाएगा कि भगत नहीं है और इस आधार पर माना जाएगा कि इनके पास जो किताबें हैं वो वो किताबें नहीं है जो रामपाल जी के द्वारा छापी गई है और तुम्हारे पास जो किताबें वो सही है।
02:11:59:22 क्या है अभी देखो तुम बात बदल रहे हो। अभी बात यह चल रही है कि उनके पास की किताब को प्रमाणिक क्यों ना माना जाए। तुम्हारे पास की किताब को प्रमाणिक क्यों माना जाए? इसका जवाब देना है तुमको। तुमने क्योंकि चैलेंज किया क्योंकि तुमने चैलेंज किया है कि वो जो जयपुर का एड्रेस दिखा रहे हैं वो वाली किताब नकली छापी है। अरे भाई किसी को नकली छापना होगा वो जयपुर का एड्रेस नकली नहीं करेगा। अंदर अंदर जो जो सामग्री है ना उपदेश उनको बदलेगा। जिसको नकली छापनी होगी, जिसको नकली छापनी होगी, वह नई दिल्ली को जयपुर नहीं बनाएगा। अंदर धांधलेबाजी करेगा अंदर। समझ में आया? सामग्री सामग्री सामग्री में कहां गलती? अब आप एक मिनट एक मिनट एक मिनट। अब आप ये बता दीजिए क्या नई दिल्ली बवाना में ये है?
02:12:53:22 कबीर प्रिंटर्स आप टेढ़े दिख रहे हैं। अपने मोबाइल का वो स्क्रीन रोटेशन वाला अलऊ करिए। मोबाइल की सेटिंग्स ऑन करके स्क्रीन रोटेशन अलऊ करिए। बाबू राम अरे सर ये ये केवल कबीर प्रिंटर पढ़ रहे हैं। इनसे पूछो नीचे मोबाइल नंबर है कुछ नहीं ये 2019 के इनको क्या मालूम इनका कोई मुखिया आने वाला नहीं है। एक मिनट एक मिनट बाबूराम
02:13:37:18 बाबूराम कहां गए? जिन्हें जल्दी थी वो चले गए क्या? चलिए तब तक अब बाबूराम जब तक स्टॉप हो गए हैं तब तक बाकी लोगों को ले लेते हैं। जी बाबूराम आज रोते हुए आए हैं कि ये क्या हो गया मेरे साथ? कोई कोई नहीं आएगा। आपसे डिबेट के लिए आपने कहा था कोई नहीं आया डिबेट के लिए सुभाष भैया हर हर महादेव जय श्री राम हर हर महादेव हर महादेव राम
02:14:16:28 बाकी लोग भी अपना चेहरा दिखाएं सबसे पहले तो मैं इनको सभी भाइयों को नमस्ते नमस्कार प्रणाम जय श्री राम राम हर हर महादेव आप थोड़ी देर थोड़ी देर और रुक जाइए आइए थोड़ी देर और रुकिए अगर बाबू वापस आता है तो हम लोग वो चर्चा कंटिन्यू कर लेंगे। है ना? जी इनमें से कोई इस समय कोई स्क्रीन पर कोई रामपाल जो वर्तमान में जो रामपाल का तंत्र है उससे जुड़ा हुआ व्यक्ति तो नहीं है इस समय स्क्रीन पर जी जी जी ठीक है बढ़िया है तो सबसे पहले हम लोग अंश शर्मा जी आप बोले तो ये जो हमारे साथ जो बुजुर्ग है इनका कोई नाम इनको कैसे बुलाए उच्चारण करें इनका कोई नाम नहीं आ रहा इधर इनको ये इनको आप कहिए भगत जी रामचंद्र जी के वो दास दास जी दास जी नहीं नहीं रामचंद्र जी दास नहीं है सर मुझे रामचंद्र जी कहिए दास नहीं है यादव जी कहिए यादव जी
02:15:25:18 आप वैसे जो भी आप रिस्पेक्टेड वर्ड यूज़ करना चाहे वो अलग बात है लेकिन दास मत लगाइए दास बहुत बड़ी बात होती है अभी दास नहीं है तो हम रामचंद्र जी जो हमारे एक प्रकार से हमारे दादा जी की उम्र के हैं तो हम इनको को कहना चाहेंगे ये एक प्रकार से यही कर रहे हैं गुरु भक्ति कि जो गलत ज्ञान था वो उन्होंने सामने रखा गलत जो चीजें थी वो उन्होंने रखी कि इनके गुरु को गुरु जी जब इनके सामने इनको निर्देशन करने के लिए नहीं है तो उनके पीठ पीछे जो कार्य किया जा रहा है उनके नाम पर जो धांधलीबाजी की जा रही है और किस प्रकार की शब्दावली का इस्तेमाल किया जा रहा है उसका इन्होंने सबको सामने आज वो रखा और सतलोक आश्रम जो इनका आश्रम है उसके के कई YouTube चैनल जिसमें वहीं के लोगों को रखा जा रहा है। एक तरफ बताया जा रहा है ये हिंदू हैं और ये सतलोक आश्रम के है वो एक तरीके से दोनों सतलोक आश्रम के ही पर अंत में कंक्लूजन क्या आ रहा है कि वो लोग भी सतलोक आश्रम को अपना रहे हैं और वो भी बेतुक बयान को लेकर
02:16:28:14 और आज इन्होंने जो बात की है वो बहुत अच्छी बात लगी और ऐसे जो बाबूराम जी जो अभी गए और एक और हैं जो अमित दास इनका आज इनका भी हमें सच्चाई पता चली कि ये एक प्रकार से अंधभक्ति ही कर रहे हैं। और जो दीक्षा का प्रोसीजर है जो एक पवित्र जिसको हम मानते हैं कि गुप्त होती है जो मंत्र दीक्षा वो डीवीडी में दी जा रही है। उसकी पूरी मर्यादा को भंग कर दिया गया है एक प्रकार से। जी पंडित जी बोले जय श्री राम सभी को जय श्री राम। जय श्री राम। श्री राम भगत जी आज आपने बहुत सही मतलब के पूर्ण रूप से तर्क रखिए और आप देखिए इन्होंने किताबों में कितनी मतलब नीचता की है। आज आप दिखा रहे हैं कितना सनातन का अपमान कर रहे हैं। इसी प्रकार वैमस्य आता है। हम तो कह रहे हैं आप पूर्ण रूप से रामपाल जी को मानिए। हमारा कोई विरोध नहीं है। आप कबीर को भगवान मानिए हमारा कोई विरोध नहीं है। हमारा कोई लेना पर आप ये किताबों में भगवान के विषय में किसी देवी देवता के विषय में अपशब्द मत लिखिए। हमारा आपका कोई लेना मैं तो मैं तो कह रहा हूं पूरा अपना भगवान का तंत्र आप खड़ा कर लो वेदों से दूर हो जाओ पुराणों से दूर हो
02:17:43:15 जाओ परंतु एक बात है कि अब इनकी किताब इनकी पता इनको हम पता करेंगे और देखेंगे क्या इन पर केस हो सकता है मेरा कोई अब एक वकील है सुप्रीम कोर्ट का मैं तो वहां तक जाऊंगा इनको भी अब ये सुन रहे होंगे मेरी बात तो वो भी समझ ले आप आप संपर्क करिएगा इस इस पर जो है संगठनात्मक कारवाई करने की आवश्यकता है ये ऐसे और इतने इतनी नीचता पूर्ण बातें लिखी है कौन सहन कर पाए किसी के मां पिताजी के बारे में यदि ऐसा कह दिया जाए कितनी गलत बात है हम तो कह रहे आप मानिए आप क्यों हमारे विचार कोई भी पंथ ले चल रहा हो सनातन के विषय में कुछ है ही नहीं हमें क्या लेना देना और आपकी इतनी नीचता पूर्ण बातें इन किताबों को हम संभाल के रखेंगे और ये हम आगे पेश करेंगे ये कहां से छपरी है कौन इनका कार्यकर्ता है और इतनी मतलब घटिया बातें भगवान के विषय में मुझे आज बहुत दुख हो रहा है। मतलब इतना दुख है मैं आपसे कह भी नहीं सकता हूं। अब बताओ ऐसी बातें और फिर ये सफाई देने आ जाती है। बाबू राम ये क्या समझेंगे जिनको दिमाग है ही नहीं जो एक बात की रट लगा के आते हैं जिनको अपने रट लगाने के सिवाय और कुछ है नहीं। उनको जितना पढ़ाया गया जितना डीवीडी में दिखाया गया जितना वो बाहर का तंत्र है उनका पर खैर इनका भी इनकी भी कोई गलती
02:18:58:24 नहीं है इनको इतना ही समझाया गया है और पागल हो चुके हैं पागल दिमाग में ड्रिल मशीन डाल के जो बुद्धि का है आपका हम बहुत-बहुत धन्यवाद देते हैं आप आज आपने इनकी सच्चाई को सबके सामने रखा है और एक सतीश नाम ठाकुर का वो बड़ा विरोध कर रहा है मुझे तो लगता है इसका भी हाथ हो सकता है इसके कमेंट जरा पढ़िए इसके कमेंट भी जरा छांटिए यह बड़ा विरोध कर रहा था आपका। मुझे लगता है कि यह लोग भी इसमें शामिल ना हो। जो जो विरोध ऐसा है देखिए वो बात होती है कि इनके दिमाग में ड्रिल मशीन डाल के होती है और कड़वाई जो है वो होती तो कड़वाई सूरज जी सूरज जी एक मिनट इनके दिमाग में ड्रिल मशीन डाल के जो बुद्धि नाम का जो चिकनाहट होती है ना बुद्धि नाम की वो निकाल ली गई है सारी अब ये लोग वो बस चुंबीस जैसे बचे हैं बस ऐसे हो चुके हैं। खाते हैं रोटी का रोटी अन्न तो खाते ही होंगे। अन्न का तो सेवन करते हैं कि क्या लिख रहे हैं हम किताबों में कैसी बेहदा बातें लिखी हुई है। चलिए हम अब सुन लेते हैं पारस अवधिया जी को। जी पारस जी जय सियाराम भैया जी सादर प्रणाम।
02:20:14:00 जय श्री राम। जय सियाराम पारस जी। जय सियाराम। ये जो आदरणीय जो दादा जी आए हैं तो आपने जो ये क्या है हमारी दृष्टि में तो ये रामपाल के समर्थक थे ऐसा हम समझ रहे हैं। लेकिन मेरा मानना ये है कि क्या ये या फिर जो अभी जो दो-तीन दिनों से जो पिछली लाइव में भी खोड़ दूषण के रूप में आए थे अमित दास और वो बाबूराम वो और चाहे वो रामपाल जी और उनके जितना तंत्र है ये सारे का सारा तंत्र जितना भी है ये कपोल कल्पित और ये मन मन से बनाया हुआ पंथ ही है और ये मेरा मानना यह है कि ये खुद कबीर के ही विरोधी हैं ये लोग क्योंकि कबीर दास जी ने कहा था कि पोथी पढ़ पढ़ जग पंडित भय ना कोई और ये नकली पोथी लिख लिख के बैठे हैं और ढाई अखर प्रेम का इनको आता ही नहीं है तो ये काहे के कबीर को कह रहा हूं कबीर तो दूर की बात है। ये लोग तो रामपाल के भी विरोधी हैं। जी भैया जी ये रामपाल के विरोधी इनको मतलब नहीं है कि मेरा मेरा जो रामपाल है जिसको मैं गुरु मानता हूं
02:21:29:20 उस पर क्या बीत रही है। इनको इस बात से मतलब है कि मैंने जिसको मान लिया कि ये चीज ये शब्द सही है तो इसी शब्द के लिए मैं लडूंगा बस। सही बात है। जी पारस जी आप अपनी बात पूरी करें। और मैं यह बोल रहा था भैया जैसे उस दिन एक एक बात ये लोग अड़ रहे थे कि ये लोग बोल रहे थे दोनों खरदूषण कि उस दिन की लाइव में मैं अपनी बात रखना चाह रहा था लेकिन समय हो गया था। उस दिन ये दोनों लोग बोल रहे थे अमित दास और बाबूराम कि आप कौन सा सुमिरन करते हो? आप कौन से इस तरीके से मंत्र जाप करते हो इत्यादि। तो यह ये लोग कबीर दास जी की उस बात को ये कोट करना चाह रहे थे कि कबीर दास जी ने जो बोले थे कि माला फेर जुग गया फिराना मन का फेर और कर का मन का डार दे मन का मन का फेर माला तो कर में फिरे जी फिरे मुख माई और मनवा सो फिर ये तो सुमिरन नाई उनका भाव कुछ और रहा होगा लेकिन इन लोगों ने जो स्वास श्वास को पकड़े हैं भैया मैं यह मानता हूं कि हमारे यहां पे जो पद्धति है ये बकायदा पहली स्टेप दूसरी स्टेप तीसरी स्टेप है कि पहले आपको बोल के जपना है मंत्र फिर उसके बाद में आपको उपांशु जपना है। फिर मानसिक जपना है। सब नहीं जानते हैं। ये
02:22:44:26 सब नहीं जानते हैं। इसीलिए खंडन करते हैं। और उच्चारण जी। तो ये जो मानसिक जप है ये बहुत ऊंची अवस्था है। इन लोग सीधे मैं कह रहा हूं कि हम लोगों को हमारे गुरु जी बोलते हैं कि 16 माला आपको नित्य जपना है। हम 1600 बार लेते हैं। मैं गारंटी दे रहा हूं। ये 50 बार नहीं करते होंगे स्वास में। ये कर ही नहीं सकते उतना। शकल से लगती है। माला करते होंगे। उनकी शक्ल लगती है। और दूसरी बात यह कि हम लोग शास्त्रोक्त मंत्रों को जपते हैं और इन लोग कपोल कल्पित मन से निर्मित मंत्रों को जपते हैं। इनमें और हम में बहुत जमीन आसमान का अंतर है। ये लोग पूरी तरीके से कलिमल ग्रसे धर्म सब लुप्त भय सद ग्रंथ और दंभिन निजमति कल्प कर प्रकट किए बहुपंथ वाली संप्रदाय को चलाने वाले लोग हैं। जी अच्छा मैं अब
02:23:33:10 सुरेंद्र ब्नोई जी बोले जय श्री राम महादेव शिवास्त्र भैया जी महादेव महादेव महादेव महादेव भैया जी कुछ मतलब रामपाल पंथियों के ऐसे वीडियो है जो मतलब आपके वीडियो में से आधी आधी बात लेके काट के उसमें कुछ अपनी जोड़ देते हैं। बोला कि हमने शिवश भैया का बोलना बंद कर दिया है। ऐसे YouTube पे अभी ट्रेंड में चल रहे हैं इनके वीडियो। ऐसी बात बोलते
02:24:10:07 तो आधी बात आपकी कोई भी काट लेते और सुनते और बात पूरी नहीं करते और अपनी बात जोड़ देते बोले हमने उनको हरा दिया भैया। ये तो एक अच्छी बात है कि लोग सामने आकर बात करने में डरते हैं और पीछे ही पीछे वीडियो बनाते रहते हैं। तो इससे तो हमारा ही वर्चस्व है ना। हम तो छाती हम तो छाती खोल के खड़े हैं ना कि भय दिखे समुद्र को प्रलय करे वो बाण बन वायु को भी चीर दे विशाल सा विमान बन परास्त ना तू हो सके विश्वास चाहिए क्या बात है अगर गुरुदेव और संविधान इजाजत दे तो ऐसे लोग मिले तो फाड़ दे सामने से सीना
02:24:47:13 फाड़ दे बिल्कुल नाखूनों से ऐसे मगर संविधान की सीमा में है गुरुदेव के द्वारा बताई गई दर्शन विज्ञान और व्यवहार की सीमा में तो जो शास्त्रोक्त शैली है उसी में ही बात कर रहे हैं। तो ये लोग उसमें भी इतना भय खाते हैं कि सामने नहीं आ सकते। ये ये लगा के जो बिंदी ठाकुर ये वो सब बनाया करते हैं। ये सांप और बिच्छू शेरों का शेरों को कांटा नहीं करते। दूर ही दूर से रेंग कर निकल जाते हैं। वो वाली बात है। जी भैया। तो खैर
02:25:23:20 खैर इनके तो भैया कुछ वो होता है ना मतलब कि कोई सार नहीं बचता वो तो कुछ भी अंश जोड़ के अपना मतलब काम चलाने के लिए अपना पीठा बांधने के लिए बोलते ही है क्या राम से रहा है हर हर महादेव जय श्री राम हर हर महादेव सभी लोगों को अच्छा लगा महादेव आप सभी लोगों को आज अच्छा अच्छा लगा चाचा जी आए कुछ बातें क्लियर हुई तो आप आज की जो चर्चा है वो सार्थक रही तो बाबूराम जी जो आए थे आज उसे बहुत क्यूट लग रहे थे पर वो चले गए हां तो वो गुस्से में थे थोड़ा आवेश में थे वो आवेश में अपना आपा खो बैठे थे वो कि जो पूछा जा रहा था उसका सीधा साधा जवाब ना देकर उसका उल्टा ही जवाब दे रहे थे कि आपको बताना जरूरी नहीं है तो आप यहां आए किस सच्चाई इतनी कड़वी होती है। सच्चाई इतनी कड़वी होती है। बिल्कुल। सही बात है। अरे इनका जो शुरुआत है वही गड़बड़ है। और बने हैं हम 30 मार खान। रामपाल जी के सेवक है। अरे रामपाल जी को ही बदनाम कर दिया इन लोगों ने। कबीर दास जी को जो इतने बड़े संत उनका भी
02:26:39:06 आगे पुराण की पीएचडी बता रहे हैं। स्वास के साथ मंत्र लेना है और खुद डीवीडी से दीक्षा लिए बैठे हैं। उनका ईगो आज हर्ट हुआ है। बहुत ज्यादा जो उनका रामपाल जी के समुदाय में जो वो शिवश भैया को गिराने का जो एक वो बना हुआ था ना उनका कैसे सम्मान बना हुआ था उसको आज अच्छे से ठेस उसको आज एक ठेस पहुंची है। उसका आज उन्होंने यहां पे अपना ईगो उनका हर्ट हुआ है। झूठ नहीं सच्चाई बताई बिल्कुल सबूतों के अनुसार सच्चाई बताए है कोई वो नहीं किया जब 30 साल के लड़के शिवश जी ने इनको चैलेंज दिया कि आइए डिबेट के लिए तैयारी कोई आया नहीं आया और ये आपस में अगर डिबेट करके वीडियो बना डाल रहे हैं तो ये उनका कायरानापन है उनका ये डर दिखाता है इसमें आप कम नहीं हो रहे हो ये सब जान गए यह अपने ही घर में डिबेट बनाते हैं। हिंदू मुसलमान कहीं क्रिश्चियन कहीं कुछ लेकर के फर्जी वीडियो बनाते हैं। इनकी सामने आने की हिम्मत नहीं है। लोगों को अरे मैं तो मैं तो ये कह रहा हूं ये लोग जो ये कहते हैं कि हमने शंकराचार्यों को बुलाया था। आए नहीं। आज मैं इतने
02:27:54:12 दिन से बुला रहा हूं सतलोक आश्रम वालों को। क्यों नहीं आ रहे? अगर तुम होते कौन हो? तुम कोई वीआईपी हो क्या? तो ये नहीं सोचा था शंकराचार्य के बारे में बोलते समय तुम हो कौन वीआईपी नहीं है वो तो सरकार की पदवी से शंकराचार्य है उनको तो वीआईपी वो रहता है गवर्नमेंट के असली गवर्नमेंट का सेकंड दर्जे का सिक्योरिटी उनहीं की है भारत सरकार की तुम अपना भाड़े के भाड़े के वो गुंडे लेकर के फिरते हो राइफल लेकर के फिरते हो ये सब करते हो एकलभ आश्रम की बात कर रहा हूं मैं एकलभ्य जी को द्रोणाचार्य जी ने बाण विद्या नहीं सिखाई थी। लेकिन एकलभ जी अपने द्रोणाचार्य जी को गुरु जो बनाया था तो जिस जितना उन्होंने श्रद्धा भाव से उनको अपने अंतरात्मा से माना उतना देखिए अब वो कहां किस पद भी पहुंचे और आप ये मंत्र के जाप से नहीं होगा जब तक गुरु आप पर खुश नहीं होगा। है ना? जब तक गुरु दया नहीं करेगा तब तक आप क्या कर सकते हो? बिना मंत्र के भी वो गुरु चाहे तो आपको सतगुरु जो चाहे तो कर 14 कोट दूर सतगुरु जात बिरंग है गुरु कर ले आप
02:29:09:13 समान लेकिन आप अपने गुरु को ही सम्मान नहीं देना चाहते ये इनका पूरा ये तंत्र बताएं आपको सर जी कि ये सब 3030 40 400 महीने 50 50000 महीने की नौकरी कर रहे हैं ये जितने भी आ रहे हैं जितने भी जो स्टॉल लगा रखे थे वहां लखनऊ में और जो ये नाम दान सेंटर चला रहे इनको सबको 50 हजार 30 हजार जी बाबू कहां गए भाई रोना तुम्हारा पूरा हो गया हो तो वापस आ जाओ आंसू पछ पांच के वापस आ जाओ शिवशु भाई जी जी पहाड़ी जी बोल रहे आप पूरा वो आपने एक धर्म की एक वो व्याख्या बताई थी ना विभीषण और कुंभकरण के बारे में कि एक रूजी धर्म कि वो साथ रावण का भी दे सकते थे विभीषण पर उन्होंने सत्य को चुना उन्होंने राम जी का साथ दिया तो आज ओसी चाचा जी ने भी बिल्कुल सत्य को जानते हुए साथ सत्य का दिया ये नहीं कि ये हमारी तरफ से जैसे कि इसमें मैं याद दिला दूं भीष्म पितामह को भी धर्म का बोध था
02:30:25:20 मगर जब द्रोपदी का तीर हरण हुआ तो उनका जो व्यक्तिगत धर्म था उसको उन्होंने ऊपर कर दिया और जो समष्टि के रूप से जो धर्म था उसको उन्होंने नीचे कर दिया। उन्होंने अपनी शपथ का ध्यान रखा कि मैंने शपथ खाई है तो मुझे गद्दी का साथ देना है। उन्होंने यह नहीं ध्यान रखा कि एक नारी का चीर हरण हो रहा है तो उसको मुझे रोकना चाहिए। तो उनका क्या हुआ कि सबसे पहले महाभारत के युद्ध में दंड उसी को मिलता है। विवेकी का दायित्व ज्यादा होता है। जिसे धर्म का बोध होता है वो अगर धर्म का पालन नहीं करता तो उसी का सबसे पहले उसी को दंड दिया जाता है। मनुस्मृति में भी कहा गया है कि ब्राह्मण को सबसे ज्यादा दंड है। वही वही पाप करने का जो एक शूद्र को दंड कम है। वैश्य को दंड कम है। मगर ब्राह्मण को सबसे ज्यादा दंड है। वही पाप करने का क्योंकि कामते क्योंकि क्योंकि ब्राह्मण जो है वो विवेकी माना गया है कि उसको धर्म अधर्म का बोध है। तो इसी प्रकार से आप द्रोणाचार्य को भी मान सकते हैं कि उन्होंने भी अपने व्यक्तिगत धर्म को आगे किया कि हम तो भैया कौरवों के वफादार हैं। वही रहेंगे। उसी उधर से ही लड़ेंगे जो भी है। तो क्या हुआ कि वो भी दंड के भागी बने। मगर वहीं
02:31:40:21 पर प्रह्लाद और विभीषण और श्री राम जी का भी एक ऐसा वो आता है जहां पर उन्होंने व्यक्तिगत धर्म को पीछे कर दिया। समष्टि के रूप से जो आवश्यक था उसको अपनाया तो वो हमारे आइडल बन गए। और वहीं पर देखिए कुंभकरण कुंभकरण भी जानता था कि राम जो है स्वयं भगवान है। कुंभकरण भी जानता था। मगर उसने भी अपने व्यक्तिगत धर्म को आगे कर दिया कि नहीं मैं तो अपने भाई की तरफ से लडूंगा तो क्या हुआ जानता था हां तो वो बात है तो इन्होंने जो काम किया है इन्होंने समष्टि के रूप से आप आज ये आगे आए हैं और व्यक्तिगत चीज को पीछे किया कि नहीं ये जो सतलोक आश्रम वगैरह और ये इनका तो व्यक्तिगत धर्म भी नहीं है क्योंकि इनके गुरु के नाम पर वो झूठा चल रहा है वो झूठा चल रहा है वो तंत्र इनका तो व्यक्तिगत धर्म भी नहीं है वो जी राजा राय जी जय श्री राम
02:32:40:09 जय श्री राम शिवश भैया कैसे हैं बस जय श्री राम बाबू राम जी को रोने के लिए भेज दिया आपने बोल दिया रोज रोज जाओ रोने चले गए इतनी अच्छी बात चल रही थी जी उनको बुलाइए वापस अब नहीं आएंगे वो मुश्किल है उनका आना शिवा एक दिन बादहित करके आएंगे वो हमने तो एक एक करके बोले जी रामचंद्र दास जी बोले बोलिए हम तो शिवश जी से परसाल भी संपर्क किया था जब इनका हमने वीडियो देखा था लखनऊ महोत्सव वाला है ना तो हमने शिवश भैया से संपर्क किया था इनको पता है इनका नंबर हमें निकाल करके इनसे हमने बात भी किया था और उस समय भी हमने काफी एविडेंस भेजे थे इनके पास बस काफी फाइलें भेजी थी। बहुत कुछ भेजा था। तो उस समय शुरुआत थी। है ना? और जब इस बार वीडियो देखा तो फिर हमने इनसे संपर्क किया। आप पूछ सकते हैं सीमा जी सामने हैं। है ना? हां। इनसे हमने ये लोग अपने गुरु की ये लोग अपने गुरु की लड़ाई को बहुत दिन से लड़ रहे हैं क्योंकि इन्होंने पिछले साल भी मुझसे संपर्क किया था।
02:33:56:04 भाई देखिए उनका वो जो दर्शन है वो जो ज्ञान है कहां तक सही है कहां तक गलत है वो एक अलग बात है मगर आज बात हो रही है कि जिसके नाम पर ये सब चल रहा है वो जो चलाने वाले और जो जिसके नाम पर चल रहा है वो दोनों का आपस में कितना बड़ा वो है दुराव बिल्कुल बिल्कुल कितनी सच्चाई हम भारत पाकिस्तान अमेरिका इटली ऑस्ट्रेलिया दुबई इंग्लैंड बेल्जियम कनाडा कतर दोहा बांग्लादेश जहांजहां इनके नाम द सेंटर खुले हुए सब मुझे जानते हैं। सबके नंबर सर्च करके सबसे बात करता हूं। पता नहीं कितने बोल रहे थे ना अभी बोल रहे थे आपको ये गुरुद्रोही है। भाई जो भी जो भी कोई बोलने आए अगर वो रामपाल की तरफ से निकला है क्रांतिकारी तो उसको गुरुद्रोही घोषित कर दो। और अगर वो अगर हम से जो बाहर से एक क्रांतिकारी आया है तो वो काल का दूत है। हां सुप्रीम कोर्ट के वकीलों से बात किए हरियाणा के कई मंत्रियों से बात किया और हमारी बहुत तीखी बहस हुई सब लोगों से कई कई डीजीपी पंजाब के डीजीपी से बात किया जय श्री राम जी जी
02:35:12:21 लेकिन सच को को बहुत कम लोग देने वाले होते हैं। बहुत कम लोग। जी बहुत अच्छा लगा। आप जिस तरीके से आगे आए हैं सच को लेकर के आपने एक गुरु गुरु भक्ति जो होती है उसकी एक नई मर्यादा स्थापित की है। आज के समय में और यहां पता है यहां पर केवल बात धर्म की नहीं हो रही है उन लोगों की तरफ से। एक जो है उनका पंथ चल रहा है। उस पंथ के सर्वोच्चता को सिद्ध करने के लिए वो लड़ रहे हैं। बस केवल
02:35:49:03 सर विशाल जी जय श्री राम हे जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम आप सभी भाइयों को बच्चों को जी जी मैं कुछ पूछना चाहता हूं पहले ये प्रमाणित सबूत सहित पूर्ण सत्य आप ये मतलब क्या वो मतलब हम तो अगर आप हम तो उन्हीं के खिलाफ लड़ रहे हैं संत रामपाल के खिलाफ तो फिर आप लोग हमारे ये इन्होंने ये लिखा है एक मिनट ये इन्होंने ये लिखा है ये जो भी जानकारियां दे रहे हैं सतलोक आश्रम के बारे में वो पूरी प्रमाणिक प्रमाणों के साथ दे रहे हैं तो इसलिए इन्होंने अपना नाम ही वो रख लिया है आज की लाइव में अच्छा और दूसरी चीज वो किसी का विरोध करने के लिए नहीं आए हैं यहां पर इस डिबेट में उन्होंने केवल सच का साथ दिया है। यह केवल सच को लेकर के आए हैं। अभी यहां पर वो इसलिए नहीं है कि रामपाल जी ने सही बात बोली है। यहां पर वो इसलिए है कि रामपाल जी ने जो भी बोला है रामपाल ने जो भी बोला है रामपाल के नाम से आज जो सतलोक आश्रम फैला रहा है वो गलत है। वो इसलिए आए हां आओ भाई आओ फैक्ट बाय अभिषेक एकका मेवा दम अब
02:37:04:04 तो आओ भाई तुम आप ही के लोग सभी लोगों का बहुत-बहुत आभार अब अरे मैं बात कहना चाहता हूं मैं तो अभी आता हूं हां बोलिए मैं तो अब आ रहा हूं ना मुझे आज समय नहीं मिला जी बोलिए मैं ये पूछना चाहूंगा पिछली बार कैसा रहा आपका मैच कौन सा मैच वही अमित दास जी के साथ बाबू राम दास जी के साथ मैच हुआ था। वो तो आप लोगों ने देखा होगा कैसा लगा आनंद आया कि नहीं बताइएगा। अरे मैंने अरे हम रिजल्ट बता देते हैं रिजल्ट बता देते हैं। थोड़ी देर के लिए ये बताओ पहले एक बार थोड़ी देर के लिए अमर हो गए कि नहीं सब लोग ये बताओ। अरे एक मिनट सुनो तो पूरा मेरी बात सुनते नहीं हो आप। अरे वो मैच का रिजल्ट पता है? मैच कल खेले। प्रैक्टिस कल शुरू हो गई थी। परसों मैच खेले थे। कल प्रैक्टिस हो रही थी। कल फिर वो लोग पंचायत और वहां पर खाली पता है सुनो हम वीजा खोल के बैठ गए वहां पर हम जब वीजा खोलना है तो हमको वो लोग मना कर रहे हैं नहीं नहीं आप वीजा की बात मत करो आप पहले तत्वदर्शी पर बात करो हम बोले नहीं हम बीज पर बात करेंगे तो अब जैसे आईपीएल होता है ना आईपीएल वैसे ये मैंने कर दिया कमेंट बॉक्स में भी लिखा था आहान कॉल ऑफ थमा स्पोंसर या
02:38:19:08 प्रेजेंट कर रहे हैं ये एजीसीपीएल एजीसीपीएल का मतलब पता है क्या आध्यात्मिक ज्ञान चर्चा प्रीमियर लीग नहीं नहीं नाम तो बहुत काफी बेहतरीन है और हम भी खूब स्टोरी लगा रहे हैं इस समय कुछ हुआ नहीं हुआ कम से कम हम अमर तो हो गए कुछ क्षण के लिए हुए पर हम अमर जरूर हो गए उनका कोई पता नहीं चल रहा हम बोल क्या रहे हैं जी जी जी अच्छा पहाड़ी जी बोले बाकी सब चुप हो पहाड़ी जी बोले पहाड़ी जी जी बोले पाणी जी जय श्री है जय श्री राम मैंने बोल दिया चाचा जी से जो आज जो आए थे यही कहना चाह रहा था कि आज जो भी है निष्पक्ष रूप से उन्होंने अपनी बातें रखी अच्छा लगा बिल्कुल बहुत अच्छा रखा उन्होंने बहुत सुंदर आगे भी अगर मौका मिले तो जरूर लीजिएगा जी और ऐसे लोगों के साथ पता है अच्छा लगता है डिबेट देखने वालों को भी अच्छा लगता है और एक चीज होती है ना सच सामने आता है। बिल्कुल सच को स्वीकार करना चाहिए। अपना उद्देश्य तो था कि भाई उन सामने
02:39:34:12 वाले जो शत्रु है हमारे वो लोगों को के अंदर में भी कितनी सत्यता है। वैसे तो वो पूरा झूठ का पुलिंदा शुरू से ही था। पर बाद में और झूठ में झूठ मिलते गया। यह तात्पर्य था। तो उस हिसाब से काका जी जो आए थे वो ठीक-ठाक अपने लिए तो ठीक थे अपने अभियान के लिए। बाकी मैं एक चीज और बोलना चाह रहा था भैया जी जैसा अभी शिवश भैया जी ने बताए थे कि जैसा भीष्म पितामह जी का जो स्थिति थी उन्होंने अपने व्यक्तिगत धर्म को सामने रखे थे और समष्टि के धर्म को को अनदेखा किए थे। सेम टू सेम वही कंडीशन सारे या तो हम रामपाली कहें या कबीरपंथी कहें या ब्रह्मकुमारी जितने भी पंथ वाले होते हैं इनकी ये स्थिति ये इसलिए होती है क्योंकि ये लोग केवल और केवल अपने आपके इतने 5 साल 10 साल का जो कार्यकाल इनका होता है ना उतने समय का उस पंथ में या उस मत में बिताया हुआ उसको गलत साबित ना करने के लिए ये लोग उदंडता कुतर्क इन सब चीजों पर हावी होते हैं। पर यह सब जानते सत्य को यह भी है कि हम गलत हैं। पर अब स्वीकार कैसे करें? हमारे इतने साल खपा दिए हमने। यह चक्कर में यह लोग पागल हुए जा रहे हैं और अपने आप को अपने पूरे जीवन को भी बर्बाद कर रहे हैं।
02:40:50:16 चलिए सभी का आने का बहुत-बहुत आभार। मैं एक चीज और बोलूं। और अब हम लोग अब अगली लाइव में आपको लेंगे। जी धन्यवाद देना चाहते हैं भगत जी ने बहुत अच्छा आज बिल्कुल सच्चाई बताई किताबों से आपका हम हृदय से आभार व्यक्त करते हैं जी सब लोगों का हृदय से आभार आपको रामचंद्र दास जी राम राम शिवश जी भैया और आप जितने भी पैनलिस्ट के लोग जुड़े हुए हैं सभी को मैं अपने तहे दिल से बहुत आ बहुत-बहुत आभार प्रकट करता हूं। दूसरी बात आज आप लोगों ने जो लाइव डिबेट में मुझको लेकर के जो आपने हम लोगों हमारे ऊपर जो एहसान किया है और जो आज मुझे ये खुशी हुई है कि हम हमें आपने अपने इस चैनल पर अपने स्टूडियो में बोलने का मुझे जो मौका दिया है ना इसकी खुशी की हम बयां नहीं कर सकते आपको कि कितनी मुझे खुशी है और जो आप लोगों ने मुझे सम्मान दिया आपने देखो मेरी मेरे गुरु जी ने एक बात कही थी मैं उस बात को लेकर चलता हूं। कोई भी व्यक्ति हो
02:42:05:25 किसी से भी हम सही रास्ता हमें कहीं भी किसी से मिल जाए तो हमें लेना कोई बुरी बात नहीं। संत रामपाल जी महाराज ने एक बात बताई थी विदुर विदुर जी की तरह सबूत देख के सत्य का साथ देना वरना करो कौरव और पांडवों की तरह तुम्हारा भी विनाश होगा। बचोगे नहीं केवल विदुर जी ही बचे थे। जब द्रोपदी जी का चीर हरण हो रहा था तो केवल विदुर जी ने ही विरोध किया था कि भाई ये गलत बात है। ये हमारी हमारे घर की स्त्रियां ये सब पर्दे के अंदर इज्जत मर्यादा के अंदर रहती है। आप ये गलत काम मत करिए। तो अब मुझे मुझे ऐसा लग रहा है कि अब जो लोग और प्रताड़ित लोग होंगे वो धीरे-धीरे संपर्क करेंगे। जो सतलोक आश्रम के सताए होंगे और आवाज उठाएंगे। आप लोग हमसे संपर्क कर सकते हैं। यदि आपको कोई प्रताड़ना मिल रही है और आप अपनी चीजें सामने आकर के रखना चाहते हैं तो और हमसे संपर्क करें। आपकी आवाज को हम उठाएंगे और
02:43:09:13 बचा लिए नहीं तो हम तो सोच रहे थे नाम दान लेने के लिए यार। किसी भी प्रकार की वैचारिक मतभेद के निमित्त कोई चर्चा हो तो आप हमसे संपर्क कर सकते हैं। 7408301869 पर विशाल भाटिया जी की बात के साथ हम आज की लाइव का अंत समापन करेंगे। जी विशाल जी एक मिनट शिवश एक मिनट एक मिनट चाचा जी से चाचा जी से हमको पूछना है कि क्या इन्होंने रामपाल जी ने जो वेदों के भी कुछ अनुवाद किए हैं क्या? वेदों के मंत्रों के भी कुछ अनुवाद किए हैं? सर देखिए मैं आपको बताना चाहता हूं कि हमने 24 मई 2014 में नाम लिया था। हम लोग इस बारे में किसी और दिन बात करेंगे रंजीत जी इस बारे में हम किसी और दिन इस बारे में किसी और दिन बात करेंगे रंजीत जी विशाल जी
02:44:00:24 बातों पे हम नहीं जाएंगे विशाल जी हमने भी रामचंद्र जी किसी और बात करेंगे बात हां जी विशाल जी तो बहुत अच्छा लग रहा है मेरे को और अभी जो पिछली बार की सत्र में हमने देखा था कि एक आए थे राजकुमार दास उन्होंने बोला था कि हम परित्याग करते हैं। जय श्री राम भी उन्होंने लिखा था तो उसके लिए मैं करतल ध्वनि तो अभी मैं लेटा हूं लेकिन मैं ये कहूंगा कि अब ये सब विजय के सूचक है। ठीक है? ऐसे ही आप आगे बढ़िए। प्रभु श्री राम राघव जहां विजय वहां। ठीक है? अब अलंकारियों की बारी है बस। इसके बाद सभी को जय श्री राम। जय जय जय हनुमान। हर हर महादेव
02:44:50:21 हर हर महादेव
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सतलोग आश्रम में छुपे हैं रामपाल के दुश्मन- सबसे बड़ा राज #तत्त्वदर्शीसंत #rampaljimaharaj
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