⬜ Not used yet · 00:00:02:02 – 00:23:32:13 (23:30)
00:00:02:02 [संगीत] जय श्री राम सभी को आवाज आ रही है ठीक से हम वो कुछ कैमरे में कुछ
00:00:36:28 सेटिंग हो गई थी गड़बड़ तो एंड मूवमेंट तक ठीक नहीं हो पाई है आज बिल्कुल टाइम पर आने वाले थे तो यह हो गया ठीक है कौन-कौन है जो देख रहा है प्यारी बहना तो बहुत डाट है तो तो आज हम लोग बहुत सारी तकती भड़कती न्यूज लेकर आए आपके लिए जो जानकारियां है आपको बहुत आनंद आने वाला है एक रोमांचकारी सफर पर जाने वाले हैं आप सब लोग
00:01:19:16 और हां भाई गर्मी आ गई वो सर्दी आ गई ना इसलिए थोड़ा सा विंटर वाला वैसे यह वही ड्रेस है जिस ड्रेस पहली बार हम मेले में गए थे ना न इट ऑल वाज स्टार्टेड रामपाल काउंटर पर काउंटर किया था तो ये वही ड्रेस है हां तो हम लोग आज बात करने वाले हैं डगले पन की पराकाष्ठा डगले पन की भी कोई सीमा होती है जय श्री राम जय श्री राम सभी को तो दोगले पन की पराकाष्ठा क्या है वो आज हम देखेंगे और थोड़ी सी इनके काल की मीमांसा करेंगे कि इनका काल है क्या वह क्या-क्या करता है और बहुत ही अच्छी अच्छी चीजें आपको मालूम पड़ने वाली है तो सबसे पहले तो वह जो एक व्यक्ति है जो बातें किया करता है मगर वो सामने आने की हिम्मत नहीं जुटा पाता हमको फोन नहीं कर पाता कि शिवांश नारायण द्विवेदी मैं आपसे चर्चा करना चाहता हूं आपके चैनल पर नहीं आप इस वाले चैनल पर आ सकते हैं क्या या यहां पर आ सकते हैं क्या या ऐसा कुछ वो नहीं वो वही कर सकता है कुंडी लगा के
00:02:34:19 बिल्कुल सेफ कोई है तो नहीं फिर मैं अपने मन की सारी बातें बोल डालू बस और वही वाली बात जो अंद भक्त वा वा वाह वा वा वा शुरू तो करने दो होता है ना अर्ज किया है तो अर्ज करना शुरू किया और उससे पहले ही जो जनता है वो चिल्लाने लगी वाह वाह वाह तो व्यक्ति को कहना पड़ता है हमामा शुरू तो करने दो उसी तरीके का हिसाब उनका है उंडी लगाई कुछ भी बोल डाला कुछ ना कुछ बोलना है कुछ भी बोलना है भले ही व तर्क पूर्ण हो प्रमाण पूर्ण हो उस बात का कोई आधार निकल रहा हो नहीं निकल रहा हो बस बोलना है बोल के स्वयं को संतुष्टि दे देनी है कि हमने बोल दिया भाई और जो
00:03:28:22 वो ट्रेन में भरकर जाते हैं जो यहां भी आते जाते हैं आज कुछ पिक्चर आई थी तो वो जो अंध भक्त है उनको बस मिल गया वाह वाह वाह भाई क्या तीर मारा है वाह मजा आ गया अब उसने किया क्या है सबसे पहले उसके दोगले पन का आज प्रत्यक्ष प्रमाण आप लोग देखोगे उस व्यक्ति का दोगले पन की पराकाष्ठा वैसे वो पराकाष्ठा आई तो वहीं से है जिनका वो स्वयं को शिष्य कहता है वह भी देखोगे पराकाष्ठा उनके भी दोगले पन की और उनके जो जेल धाम निवासी जो संत है और यह जेल धाम निवासी मैं नहीं बोल रहा हूं यह आपके ही एक जो गुरु भाई है दास जो पहले गंजेपन का तेल बेचते थे यब पर और अब जो है उससे काम नहीं बना तोब धीरे से पहले रामपाल दास जी की बातें बताने आए और उसके के बाद देखा कि शिवांश नारायण द्विवेदी के साथ चर्चाएं गर्म है तो चलो बनाते हैं वीडियो शिवांश नारायण द्विवेदी अच्छा मैं कुछ ये भी देख रहा हूं कि ये जो कुछ लोग ऐसे भी है जो काउंटर करने के लिए आ तो रहे हैं मगर वो क्या करते हैं कुछ काउंटर काउंटर नहीं करते हैं सीधे बस यहां की
00:04:43:24 चीजें उठा के वहां दिखा देते हैं दो चार शब्द बोल देते हैं बस हो गया काट ऐसे काउंटर कैसे चलेगा ये तो वही वाली बात हो गई कि यहां के कंटेंट का उपयोग कर रहे हैं बस अपने चैनल से दिखा के एक दो बातें बोल दी बस ना कोई तर्क ना कोई प्रमाण र कम टू द पॉइंट क्विकली तो सबसे पहले उसने क्या कहा कि हमने जो अग्न्या के लिए प्रमाण दिखाया था उस अग्न के लिए प्रमाण हमने गलत भाष्य से दिखाया क्योंकि वो जो है इंद्र का अर्थ इंद्र लिख रहा है अरे भाई हमने आपसे कहा क्या आप इंद्र कार्थ इंद्र ही मानो हमने तो नहीं आपको अटका अब परमेश्वर मान लो बात वहां पर हो रही है जो अग्निया वाला मंत्र है उसमें बात हो रही है कि अग्न्या का अर्थ क्या लिया है तो इंद्र के अर्थ को दिखाने के लिए इन्होंने दूसरा वो दिखा दिया इंद्र के अर्थ को दिखाने के लिए इन्होंने दूसरा भाष्य दिखा दिया आर समाज का भाष्य और आर्य समाज के भाष्य से इन्होने दिखा दिया कि इंद्र का मतलब इन्होंने यह लिया है कबीर कवि का मतलब यह लिया है इंद्र अगर ये इंद्र का मतलब य नहीं लेते कवि का मतलब यह सब कर दिया अग्न्या पर बात क्या की इन्होंने अग्न्या का अर्थ होता है कुमारी गाय अब इनके जो तत्वदर्शी है इनके अनुसार तथाकथित उनका
00:05:59:03 कहना है हमारी भाषा जो हरियाणवी भाषा है उसमें अधनतरी होता है सबसे पहली बात यह है उनको पता नहीं मालूम है कि नहीं कोई उनको बता दो जाकर के जो हमारे वेद है ना वो वैदिक संस्कृत में है हरियाणवी लैंग्वेज में नहीं है और अगर आप यह कह रहे हो कि संस्कृत में कोई शब्द तो संस्कृत की जो डिक्शनरी होगी उस डिक्शनरी से आपको अदन्या का वो अर्थ दिखाना पड़ेगा मगर इन्होंने इस सब पर बात नहीं की कि दयानंद जी ने अग्न्या का अर्थ क्या लिखा है इसने इस व्यक्ति ने दोगले व्यक्ति ने इस बात बारे में बात ही नहीं की और यह दिखा दिया देखो यह जो आपको भाष्य दिखा रहा है ये गलत भाष्य क्योंकि इसी चीज का अर्थ जो है दयानंद जी ने यह लिखा है ना तो तुम इस भाष को मानते हो ना तुम जी को मानते हो तो तुम मानते किसी को भी नहीं हो मगर दूसरे को चुप कराने के लिए किसी का भी प्रमाण उठा कर के दिखा देते हो पहली बात अब दूसरी बात इन्होंने कही ज्ञान यज्ञ कि ज्ञान यज्ञ
00:07:14:08 क्या होता है तो ज्ञान यज्ञ के लिए इनका जो है मैं निराकरण कर दूं कि ज्ञान यज्ञ के बारे में इनके तत्वदर्शी क्या लिख रहे हैं यह कहते हैं ज्ञान यज्ञ से ही तो ज्ञान यज्ञ का अर्थ भाई वो आपके तत्वदर्शी ने तो स्वीकार नहीं किया ना हम तो मा ज्ञान यज्ञ का अर्थ होता है परमेश्वर की प्राप्ति मगर आपके तत्वदर्शी ने ज्ञान यज्ञ को स्वीकार नहीं किया कि ज्ञान यज्ञ वो यज्ञ है जिसके आधार पर आपको मोक्ष मिलेगा और वह बताते हैं कैसे स्वीकार नहीं किया खर आपने भी अपनी वीडियो में क्या स्वीकार किया कि ज्ञान यज्ञ के साथ में नाम जप करेंगे भगवान का स्मरण करेंगे आपका जो भगवान है बाधित वाला उसका स्मरण करेंगे तो मोक्ष मिलेगा ज्ञान यज्ञ से मोक्ष नहीं मिलेगा यानी कि ज्ञान यज्ञ की बात बता ने वाला जो व्यक्ति है वो पूर्ण मोक्ष का ज्ञान बताने वाला व्यक्ति नहीं है पूर्ण मोक्ष का ज्ञान बताने वाला व्यक्ति वो है जो व नाम बता दे तब भी ठीक है मगर यह बात तो गीता में नहीं लिखी है गीता में लिखी है ज्ञान य का ज्ञान देने वाला व्यक्ति आपको जो है उसके पास जाना चाहिए वह आपका पूर्ण गुरु है पूर्ण रूप से तत्वदर्शी उसको कहा है ज्ञान यज्ञ के ज्ञान देने वाले को तत्वदर्शी कौन है जो व्रत बताता है तप बताता है संयम बताता है
00:08:29:14 ने आपको भागवत से दिखा दिया मगर इसको अभी साइड में रख दीजिए तो भाई ज्ञान यज्ञ आपके तत्वदर्शी ने माना है शास्त्रों का पठन पाठन केवल शास्त्र को रीड करना पठन का मतलब रीड करना पाठन का मतलब रीड कराना ठीक है ज्ञान यज्ञ का मतलब आपके यहां तत्वदर्शी नहीं माना है और ज्ञान यज्ञ से मिलने वाला जो मोक्ष है उसने नहीं माना आपके तत्वदर्शी ने कि ज्ञान यज्ञ से आपको मोक्ष मिलेगा ब ब उसने कहा कि कि आपको फला फला कार्य करके शास्त्रों के पठन पाठन से वही फल मिलता है जो ज्ञान यज्ञ से मिलता है मगर पूर्ण मोक्ष नहीं मिलता तो जब ज्ञान यज्ञ एक अलग चीज है नाम से नाम नाम जप करने से एक अलग चीज है ज्ञान यज्ञ तो उस और उसका भी जो फल है वो मोक्ष नहीं है तो जब मोक्ष नहीं है तो ज्ञान य का ज्ञान देने वाला व्यक्ति पूर्ण गुरु नहीं हुआ पूर्ण गुरु वो हो सकता है जो नाम बताए मगर इसका विवरण वो कौन होगा इसका विवरण गीता में नहीं दिया है आपके अनुसार जो गीता में दिया है वो यह है ठीक अब इनको ज्ञान यज्ञ की परिभाषा एक बार याद दिला देते हैं तो ज्ञान यज्ञ की परिभाषा इनकी जीजी
00:09:44:24 के खोलिए और उसमें कंप्यूटर स्क्रीन के अनुसार जो पेज नंबर है वो 118 गरिमा गीता की जीजी के कंप्यूटर स्क्रीन के अनुसार पेज नंबर 60 और पीडीएफ के अनुसार पेज नंबर 40 कोई लिंक भी मांग रहा है क्या वैभव जी अभी देंगे लिंक अभी बहुत सारी चीजें हैं आपको बताने वाली
00:10:34:21 तब तक मैं कमलेश जी आपको पढ़नी चाहिए ज्ञानेश्वरी गीता रामचरित मानस और दास बोध हिंदी के साथ और इसके साथ ही साथ भक्ति सुदा और गर्व से कहो हम हिंदू है पांच ग्रंथ ले लीजिए इनको पढ़िए क्रमानुसार हां मैं बोल रहा हूं ना गरिमा गीता की पेज नंबर 60 60 नहीं सॉरी 118 118 वो खोलिए कंप्यूटर स्क्रीन के अनुसार पेज नंबर 118 वो इनको दिखा दें कि आपके तत्वदर्शी ज्ञान यज्ञ का अर्थ क्या मानते हैं यहां बहुत मात खा गए शब्दों को पकड़ते थे ना आप लोग अब जब हम शब्दों को पकड़ रहे तो तुम्हें दिक्कत हो रही है भाई ज्ञान एक का ज्ञान देने वाला तत्वदर्शी है नाम बताने वाला तत्वदर्शी नहीं है मोक्ष मिलेगा नाम से आपके अनुसार अभी दिखाते हैं बोलो
00:11:49:27 भाई ऑपरेटर जी हां आज खबर अच्छे से लेनी है आपकी स्टोरी वो फेमस हो गई छोटी बहन रामपाल के फॉलोअर्स भी आपकी स्टोरी चला रहे हैं अपने य पर पैक्ट भाई अभिषेक के दोगले पन की पराकाष्ठा आज आप लोग देखेंगे पराकाष्ठा सीमा रहित और मुझे कुछ लगता है क्रैक है क्या भाई आंखें बंद कर लेते हो क्या क्या बोल रहे हो क्या नहीं बोल रहे हो कुछ भी बे से पैर की बातें इसीलिए सामने नहीं आते अटक
00:12:43:08 जाऊंगा अब देखो चूल्हे से रोटी निकालने के लिए चिमटे को अपना मुह जलाना ही पड़ता है है ना भैया पेज नंबर आपको निकालना है 118 118 हा यही है इसमें पैराग्राफ नंबर फोर ऊपर से दिखाइए जरा पैराग्राफ कौन सा है वन टू और नीचे थ्री और फोर
00:13:26:18 हा इसको बड़ा करिए जरा अब इसमें फोर्थ पैराग्राफ कहां है नीचे लाइए हा और नीचे हां तो यह देखिए यहां क्या लिखा है कि नाम साधना के साथ पांचों यज्ञ भी आवश्यक हैं ठीक है और तो यहां पर यज्ञ अलग हो गया और नाम साधना अलग हो गई ठीक है और यज्ञ से नाम मिलेगा यज्ञ करने से नाम प्राप्त होगा यह कहीं नहीं लिखा आपके तत्वदर्शी ने यज्ञ को अलग कहा है और क्या कहा है लाइन नंबर फाइव पढ़नी वन टू थ्री फोर फ हा देखिए ज्ञान यज्ञ का अर्थ क्या है धार्मिक शास्त्रों का पठन पाठन क्या है धार्मिक शास्त्रों का पठन पाठन यह ज्ञान यज्ञ है
00:14:31:16 पठन पाठन मतलब बुक को रीड करना इवन समझना भी नहीं है अंडरस्टैंडिंग नहीं ओनली रीड पठन पाठन का मतलब होता है पठन पाठन तो आपको किस तरह से रीड करना है शास्त्रों को यह बताता है तत्वदर्शी आपके अनुसार आपके तत्वदर्शी के अनुसार नहीं तो मुझे आप आपके तत्वदर्शी के द्वारा स्वीकारी गई परिभाषा दिखाइए कि कहां उसने लिखा है कि ज्ञान यज्ञ का मतलब है मोक्ष
00:15:05:14 प्राप्ति ज्ञान यज्ञ के द्वारा मोक्ष प्राप्ति नहीं है और अगर ज्ञान यज्ञ और नाम जप एक ही है तो अलग से क्यों लिखा जा रहा है यहां पर कि नाम जप भी होना चाहिए अच्छा ज्ञान यज्ञ से यदि नाम मिलने वाला है नाम की प्राप्ति यदि ज्ञान यज्ञ से होनी है तो फिर यह क्यों कहा जा रहा है कि ज्ञान यज्ञ के साथ साथ नाम जब भी आवश्यक है जब ज्ञान यज्ञ ज्ञान प्राप्त होगा तत्वदर्शी के पास जाकर के और तत्वदर्शी फिर जब आपको समझा देगा अच्छे से तब आपको नाम मिल जाएगा ईश्वर का तो य ज्ञान यज्ञ के समय नाम कैसे आ रहा है इसका मतलब नाम अलग है नाम जप अलग है और ज्ञान यज्ञ अलग है ज्ञान यज्ञ से मुक्ति नहीं है पेज नंबर इनका इनको दिखा दीजिए इसी का 60 60 पेज नंबर
00:16:20:14 हां तो क्या है यज्ञों का लाभ केवल सांसारिक सुविधाएं मुक्ति नहीं नीचे आइए एक मिनट हा एक दो तीन चार हां तो यह जो है यहां पर भी ज्ञान यज्ञ वही दिया है अच्छा अ ज्ञान गंगा का इनको दिखा दीजिए पेज नंबर 240 पीडीएफ वाला पेज नंबर है यह ज्ञान गंगा का अनेकानेक जगह इन्होंने जो यज्ञ है ज्ञान यज्ञ से पूर्ण मुक्ति नहीं बताई है शास्त्रों का पठन पाठन अलग चीज है और वह नाम जप अलग चीज है क्योंकि नाम जप के बिना शास्त्रों के पठन पाठन से मुक्ति नहीं मिल रही है ज्ञान यज्ञ से मुक्ति नहीं है पॉइंट टू बी नोटे ठीक है अगर ज्ञान यज्ञ ज्ञान यज्ञ के द्वारा नाम मिलना था तो ज्ञान यज्ञ से मुक्ति बतानी चाहिए थी ज्ञान यज्ञ के द द्वारा या पूरी बात बतानी चाहिए थी और दूसरी बात जब आप जान रहे हो कि कौन है ईश्वर तो उस समय नाम जप कहां से होगा
00:17:35:26 पहले जानोगे ना तो फिर नाम जप कौन सा है इसका मतलब नाम जप लेने के लिए आपको अलग जाना पड़ेगा ना किसी और के पास तत्वदर्शी के पास नहीं किसी और के पास आपके अनुसार और वह व्याख्या सा सम्मत है नहीं किसके पास जाना है आपके अनुसार तो इसमें इनका पेज नंबर है ज्ञान गंगा में अभी हम लोग 18 प है ना हमको जाना है ज्ञान गंगा में 240 पेज नंबर में काफी आगे है हा ये 218 है और आगे चलिए 240 पर जाना है दो हा एक दो पेज और आगे पैराग्राफ टू है 240 में और पैराग्राफ टू में लाइन पहली है धार्मिक सद ग्रंथों के पठन पाठन से ज्ञान यज्ञ का फल मिलता है ठीक है ज्ञान यज्ञ का फल मिलता है और मोक्ष नहीं मोक्ष नहीं मिलता ज्ञान यज्ञ से अलग हो गया ये नाम जप से नाम जप और एक ये जो है एक नहीं है ज्ञान यज्ञ पहली बात अच्छा इनके दोगले पन की शुरुआत में एक हम पिछली लाइव में दिखा चुके हैं यह तो हो गया चैप्टर क्लोज ज्ञान यज्ञ की परिभाषा अगर ज्ञान यज्ञ से
00:18:51:18 आपको मोक्ष नहीं मिल रहा है नाम से मिल रहा है तो नाम अलग चीज हो गई और ज्ञान यज्ञ अलग चीज हो गया नाम यदि आपको ज्ञान यज्ञ से मिलना है ईश्वर के बारे में जानकारी आपको ज्ञान यज्ञ से मिलनी है तो फिर जिस समय आप किसी के बारे में जानकारी पर्याप्त कर रहे हो उस समय नाम जप कैसे करोगे जब आपको ज्ञान शास्त्रों के पठन पाठन से ही ये मालूम पड़ रहा है कि हमें तत्वदर्शी के पास जाना है और तत्वदर्शी के पास जाकर के आपको नाम प्राप्त हो रहा है तो फिर यहां ज्ञान यज्ञ के समय नाम कहां से आ जाएगा कौन बताएगा आ कर के जब अभी तुम तत्वदर्शी के पास गए नहीं हो तुमको ईश्वर का स्वरूप समझ में नहीं आया है तो यज्ञ के साथ में वह नाम जो आपको जपना है जिससे मोक्ष मिलना है मोक्ष उसी से मिलना है ज्ञान यज्ञ से मोक्ष नहीं है पॉइंट टू बी नोटे ध्यान रखना अगली बार दोगले पन की अच्छा इनके दोगले पन की पराकाष्ठा का एक हम लोग पिछली लाइव में एक में दिखा चुके हैं एक बार और दिखा दीजिए गरिमा गीता की जो इनका जीजी के है उसका पृष्ठ खोलिए
00:20:01:06 199 एक बार जरा ध्यान से देख लो अपने तत्वदर्शी को कितना तत्व पता है उसे और क्यों वह इस समय जेल धाम में है इसमें जाइए आप 179 199 हा पेज जी सही पेज सही पेज है इसमें पैराग्राफ तीसरे से चौथा जाइए तीन और चार तत्व बस बस बस तत्व ज्ञान के अभाव से मूर्ख प्राणी मुझे सभी प्राणियों का प्रभु मानते हैं क्या मानते हैं सभी प्राणियों का प्रभु यह पहली लाइन है बड़े बड़ा करिए थोड़ा तत्व ज्ञान के अभाव से मूर्ख प्राणी मुझे सभी प्राणियों का प्रभु मानते हैं ठीक है और अब इसका नीचे क्या कहेंगे भावार्थ किया है कि अनुवाद किया है ऊपर ऊपर ऊपर एक पैराग्राफ ऊपर जाइए इसी का यह लोग अनुवाद
00:21:16:16 लिख रहे हैं कि मूर्ख जन यानी कि भाई तत्व ज्ञान से अभाव में ऊपर जाइए इससे जस्ट पहले वाले पैराग्राफ में ब्लू करिए नीचे आइए हां जो सेकंड पैरा है ना उसम जाइए सेकंड सेकंड सेकंड में जाइए सेकंड पैराग्राफ हां क्या है कि मूर्ख जन मुझे तुच्छ जानते हैं तो न 11 में क्या लिख रहे हैं कि मूर्ख लोग मुझे तुच्छ जानते हैं और उसी के भावार्थ में क्या लिख रहे हैं कि
00:22:00:08 मूर्ख लोग मुझे भगवान मानते हैं अब बताइए कितना दोगलापन ठीक है अब हम अगला टॉपिक ले लेते हैं इनका गरमा गीता की का निकालिए पेज नंबर 116 पेज नंबर 116 यही है अच्छा इसमें जो है पैराग्राफ नंबर फाइव पांचवा पैराग्राफ है
00:22:52:01 इसमें पहला तो हो गया यह दूसरा हो गया तीसरा चौथा पांचवा हां ये तो अध्याय चार के श्लोक 23 से 24 का भाव है कि जो साधक सर्व कर्म परमात्मा को साक्षी रखकर कर रहा है वह सर्व कर्म ब्रह्म किसके लिए होते हैं उसके सारे कर्म ब्रह्म जैसे होते हैं क्यूंकि तत्व ज्ञानी शास्त्र विधि नीचे जाइए तत्व ज्ञानी शास्त्र विधि रहित मन माना आचरण नहीं करता और
✅ This part is already used · 00:23:32:13 – 00:23:41:04 (0:09)
→ Used in: B · Video खुद को ही एक्सपोज कर गया पाखंडी! | भाग 7 अध्याय 4 गीता के नाम पर रामपाल का भयंक... at 2:58 ↗
→ Used in: A · Live पाखंडी का गीता ज्ञान भाग 8 अध्याय 5 at 7:42 ↗
00:23:32:13 इसलिए उसके वचन कर्म परमात्मा के गुणगान करने में तथा सर्व समय प्रभु चिंतन में ही ली लीन रहता है तो तत्व
⬜ Not used yet · 00:23:41:04 – 00:29:50:21 (6:10)
00:23:41:04 ज्ञानी कौन है ऊपर जाइए जरा दोबारा इनको दिखा दीजिए तत्व ज्ञानी कौन है जो ब्रह्म पूर्ण ब्रह्म नहीं पूर्ण ब्रह्म नहीं तत्व ज्ञानी कौन है जो ब्रह्म और वो भी परमा यहां पर ब्रह्म को परमात्मा भी मान लिया उन्होने ब्रह्म परमात्मा जैसे होते हैं अगर ब्रह्म और पूर्ण ब्रह्म अलग अलग है तो यहां पर पूर्ण ब्रह्म लिखना चाहिए था तो य तत्व ज्ञानी से सच्चाई बाहर आ गई यहां देखिए तत्व ज्ञानी ने अपने पैरों पर कुला मारी और कई जगह मारी है अभी आप हैरान होते जाएंगे यहां पर इसने क्या माना परमात्मा कौन है ब्रह्म उसके सर्व कर्म ब्रह्म जैसे होते हैं तो यहां पर ब्रह्म के लिए कोष्टक में लिखा है परमात्मा कोई इसमें आना कानी नहीं और नीचे इसी परमात्मा में तत्व ज्ञानी लीन रहता है तो तत्वदर्शी कौन है जो इनके अनुसार जो गीता को बोलने वाला काल ब्रह्म है ना इन्हीं के अनुसार तत्वदर्शी वह है तत्व ज्ञानी वह है जो ब्रह्म में लीन रहता है ब्रह्म का भजन करता है और ऐसा करना शास्त्र विधि के अनुसार करना है इनको दिखा दीजिए तत्व ज्ञानी साधक
00:24:56:22 आगे की लाइन दिखा दीजिए ज्ञानी साधक शास्त्र विधि विधि रहित मनमाना आचरण नहीं करना करता यानी कि यह बात जो है ब्रह्म में लीन रहना यह शास्त्र सम्मत बात है ठीक है यह हो गया इनका और इसमें इन्होंने गपला भी किया है ये 24 23 24 में गपला क्यों किया है क्योंकि 23 24 में कहा जा रहा है कि जिस यज्ञ का अर्पण भी ब्रह्म है और यह भी ब्रह्म है उसमें डाली जाने वाली आहुति भी ब्र है है ना सब कुछ ब्रह्म है तो इन्होंने वह सब बातें गण कर दी और
00:25:40:04 उस उसके द्वारा जो प्राप्त होने वाला जो फल है ना वह भी ब्रह्म है ठीक है तो यह हो गया अच्छा अब बात करते हैं हमारी भगवत गीता 414 में हमारी भगवत गीता कहती है कि एक मिनट खोल लू जरा 4 14 और न 22 एक जैसी बात है 4 14 हां तो 41 में क्या लिखा है कि कर्मों के फल में मेरी कोई आसक्ति नहीं है इसलिए मुझे कर्म लिप्त नहीं करते तो इन्होंने वह चार च का वह अर्थ दिया ही नहीं है क्योंकि इनके विरुद्ध जा रहा था जो गीता को कहने वाला है वह कह रहा है कि मुझे कुछ भी प्राप्त करना शेष नहीं
00:26:56:06 है तो इसका मतलब क्या हुआ कि काल को कुछ भी खाने पीने की आश आवश्यकता नहीं है भगवत गीता 41 इनके इनके इनका वाला दिखा दीजिए कहां पर है व मैंने पेज नोट नहीं किया है इसी में दिखाइए पीछे होगा अध्याय चार में इन्होंने क्या अर्थ किया देख लेते हैं नहीं 2 24 नहीं पीछे चवा च श्लोक का क्या किया इन्होने
00:27:29:21 इसी अध्याय के चवा श्लोक पीछे जाइए थोड़ा हा रुक ऊपर चार देखिए 10 से 15 में काल ने ब्रह्म ने कहा कि जिनके दग जिसने यह वो मुझे यहां यह करता मैं मालिक हूं यह इन्होंने पूरा कच्चा चबा लिया जबकि यहां पर जो 15 चवा श्लोक है उसमें भगवान ने स्पष्ट कहा कि कर्म के फल में मेरी आसक्ति नहीं है इसलिए मुझे कर्म लिप्त नहीं करते मतलब वह सब कुछ करने वाला होकर के भी कुछ भी नहीं करते कुछ भी ना करने वाले क्योंकि उनके फल से उनके लिए सब एक जैसा है एक रस है और यही बात उन्होंने न 22 में भी कही है 322 में इनका तीसरा अध्याय दिखाइए जरा बहुत पीछे होगा बीच में उन्होंने कई सारी कथाएं लिख दी
00:28:27:03 है मुझे इन तीनों लोगों में ना तो कुछ कर्तव्य है और ना ही कोई प्राप्त करने योग्य वस्तु अप्राप्य है लो जो काल है अगर वह यह कह रहा है तीसरे अध्याय के 22वें श्लोक में कि मुझे कुछ भी प्राप्त नहीं करना है नीचे जाइए न 12 य यह देखिए तीन तीन श्लोक 26 में यही कहा है 27 से 29 ऊपर थोड़ा सा ऊपर तीन श्लोक 26 का भावार्थ और थोड़ा सा ऊपर यह देखिए जहां पर इनके विरुद्ध बात होती है ना उसको गप कर जाते हैं थोड़ा ऊपर जाएंगे भैया ऊपर दिखाइए इससे और ऊपर बस बस बस बस बस बस बस तीन श्लोक 10 से 19 और 19 के बाद
00:29:29:04 और आगे चलिए जरा धीरे धीरे धीरे 17 18 ठीक है अब आ गया कथनी और करनी में अंतर और 21 ये देखिए ये 21 से 24 ज्ञानी संतों
✅ This part is already used · 00:29:50:21 – 00:30:07:25 (0:17)
→ Used in: A · Live गीता के नाम पर रामपाल के बोलबचन अध्याय 3 Ep- 5(a) #satlokashram at 50:45 ↗
00:29:50:21 को अच्छे कर्म शास्त्र अनुकूल करने चाहिए क्योंकि उन्हीं का अनुसरण अन्य समाज भी करता है जबकि मुझे तीनों लों में कोई कर्म करने की आवश्यकता नहीं क्योंकि तीन लोग की सर्व सुविधा मैं बिन कर्म किए भी प्राप्त कर सकता हूं
⬜ Not used yet · 00:30:07:25 – 00:54:50:26 (24:43)
00:30:07:25 अब बताइए और यहां पर काल कह रहा है कि उसको कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं है मगर फिर उसकी जो छुदाई यह कौन सा पेज नंबर है पेज नंबर कौन सा है ये दिखाइए बस बस 48 हां तो यहां पर काल ने इन्होंने मान लिया कि गीता ज्ञानदाता कह रहा है कि मुझे कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं है अब इनको इसी का पेज नंबर दिखा
00:30:45:16 दीजिए इसका पेज नंबर दिखाइए 11 इसी गरिमा गीता की का आ गया हां पीडीएफ के अनुसार 91 पेज नंबर आएगा यह 98 है ना पीछे जाना है
00:31:28:01 िप व 91 आ गया इसमें पैराग्राफ नंबर वन है वन हा काल भगवान देखिए काल भगवान ने सोचा यदि संसार के प्राणी ऐसी साधना करने लग गए तो मेरी भूख कैसे मिटेगी यानी कुछ है जो इन्ह प्राप्त करना है जबकि गीता में वहां क्या हो रहा है इनको कुछ भी प्राप्त नहीं करना है और इन्ह कुछ करना पड़ेगा देखिए बुराई को आरंभ में काट डालू यह सोचकर क्यों ना बुराई को आरंभ में काट डालू इस पैराग्राफ की अंतिम लाइन दिखाई ने इसी पैराग्राफ की हा यानी कि इनको काट डालना पड़ेगा किसी चीज को इनको कुछ करने की आवश्यकता है वहां क्या कह रहे दोगले पन में कि काल भगवान को कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं है ठीक है लेपन की पराकाष्ठा
00:32:32:04 अब जरा सा बीच में उसका दोबारा ले लू टॉपिक जो उसने बातें की है कि ज्ञान यज्ञ की बात हो गई अब बात करते हैं उसने और क्या बात की थी हा उसने एक बात यह की थी कि ऐसा कोई कवि नहीं है जिसने जो कबीर जी ने जो बातें जो कार्य किए हैं वो और किसी ने नहीं किए ऐसा कोई और कभ कभी नहीं है यह बात हम क्यों मान ले भाई ऐसा कोई और कभी नहीं है क्यों मान ले वेद में लिखी है गीता में लिखी है क्यों मान ले सनातनी क्यों मान ले इस बात को क्योंकि फैक्ट भाई अभिषेक कह रहा है इसलिए हा
00:33:19:09 अच्छा ठीक है अब हम इसकी एक बात और पकड़ते हैं कि इसने जो है वहां पर जो अग्न्या को कहा कि जिसका वध ना किया जा सके वह अग्निया नहीं हो सकती क्योंकि हमारे सारे तत्व जो है वह अविनाशी कहे गए हैं लो साहब अब अगर किसी का वध नहीं किया जा सकता है तो फिर तुम यह क्यों कहते हो कि उन्होंने बहुत से लोगों को मरवाया काल बहुत से लोगों को खाता है अगर कहो कि लीला में तो लीला में गाय को भी मारा जाना स्वीकार करो मतलब जहां जिस बात से काम चल जाए वहां पर वही बात मान ली ं अरे भाई जब किसी का वध नहीं किया जा सकता है तो फिर तुम क्यों कह रहे हो कि काल जो है वो दांतों में चवा रहा है जब किसी का वध नहीं किया जा सकता तो तुम क्यों आरोप लगा रहे हो भगवान श्री कृष्ण पर कि उन्होंने जो है वो वो लोग आते हैं तो लोगों का श्रंगार करते हैं और बहुत सारी चीजें उसमें बक रहे हो क्यों बक रहे हो किसी का वद हो ही नहीं सकता तो यहां पर अग्न्या का अर्थ है कि जिसका वध ना किया जा सके संस्कृत खोलो भाई अपने मन से मनगण बातें मत करो शास्त्र के प्रमाण दिखाओ
00:34:34:19 और अगर नहीं किया जा सकता किसी का वध तो अविनाशी तो भैया सारे लोग है सारे तत्व जीवन अविनाशी है किसी का वध नहीं किया जा सकता तो फिर तुम क्यों बद मानना स्वीकार कर रहे हो मीठा मीठा गप ग कड़वा कड़वा थू और क्या इन्होंने कहा कि भगवान वो गुणों की इन्होंने परिभाषा दी है कि हमने गुण युक्त माना है तो गुण गुण गुण जब हमने गुण युक्त मान लिया है तो उनको गुण भी मान लो क्यों मान ले यह तर्क देखिए कितने निचले लेवल के तर्क है यह बोल रहे हैं कि हमने माना कि उनमें वो जो है उस उनमें गुण है वो गुण स्वयं नहीं है उनमें वो गुण युक्त है वो गुण स्वयं नहीं है अच्छा गुण है क्या क्या है गुण क्वालिटी क्वालिटी निराकार है या साकार है क्वालिटी क्वालिटी निराकार है कि साकार है साकार है मगर यह लोग तो खुद कहते हैं ब्रह्मा विष्णु महेश को जन्म दिया माता ने उनका आविर्भाव होता है त्र भाव होता है तो गुण युक्त होने में और गुण होने में अंतर है
00:35:49:26 यह तुम मानो यह बुद्धिजीवी लोग नहीं मानेंगे गुण युक्त होने को गुण मान लिया और सुनो तुम तो अभी कह रहे हो ना कि वो गाय को जो है अञ नहीं कहा जा सकता अध नहीं कहा जा सकता क्योंकि सभी अविनाशी है तो फिर काहे के लिए पीछे पड़े ब्रह्मा विष्णु महेश के वोह भी तो विनाशी हो गए मतलब जहां चाहो जिसको जैसे टोपी पहना दो फिर दोगलापन जिंदाबाद दोगलापन जिंदाबाद दोगले पन की पराकाष्ठा जिंदाबाद अब देखो गुण युक्त होने में गुण युक्त होने में आप दे देखिए कि अगर गुण युक्त होना क्या गुण युक्त होने से आप गुण मान लोगे
00:36:38:07 तो अब इनको पेज नंबर खोलिए भैया गरिमा गीता की पेज नंबर 48 ज्ञान गंगा सॉरी ज्ञान गंगा पेज नंबर 48 उसम षट रचना है हां भाई चर्चा करेंगे कोई चीज शुरू करते हैं तो उसको खत्म भी करते हैं अधूरा नहीं छोड़ते है ना चर्चा करेंगे उनसे बात हो रही है वह उनके बेसरी है अभी उनको उनको भी उत्तर देंगे हा ज्ञान गंगा और स्क्रीन के हिसाब से 48 नंबर और इसमें पैराग्राफ वन और लाइन नंबर फोर कबीर हां यह देखिए सत्पुरुष ने उसे तीन गुण प्रदान किए सत्पुरुष कौन है कबीर और कबीर ने काल को तीन गुण प्रदान किए ऊपर दे ऊपर जाइए जरा सा इनको तीन गुण की वो बता दे भागे नहीं कि
00:37:53:09 नहीं नहीं वो दूसरे तीन गुण थे है ना कौन से तीन गुण है व वो भी इसी में लिखा है कौन से तीन गुण है बस बस बस बस बस निरंजन चाहने लगे जैसे सत पुरुष रह रहे हैं नेता निकट परती और ऊपर जाइए थोड़ा सा यहीं पर तीन गुण की परिभाषा भी है बस बस ज्यादा ऊपर नहीं ज्यादा ऊपर नहीं नीचे जाइए व तीन गुण वही है सत और तम
00:38:28:19 और थोड़ा नीचे एक तो इनकी बुक्स नहीं मिल रही है ना तो इसलिए ज्यादा दिक्कत आ रही है बस बस बस बस बस ऊपर जाइए ऊपर जाइए वापस इसी इसी पेज में कहीं पर है कि वह तीन गुण वही है सतर रज और तम तो सतर रज और तम किसने दिया सत्पुरुष ने उसे तीन गुण दिए क्यों दिए इसको पीछे से पढ़ लेते हैं थोड़ा कुछ समय उपरांत ज्योति निरंजन ने सोचा इस इसमें कुछ रचना करनी चाहिए खाली ब्रह्मांड यानी प्लॉट किस काम के यह विचार कर 70 युग तप करके पूर्ण परमात्मा कबीर देव से रचना सामग्री की याचना की रचना सामग्री की याचना की और कबीर देव ने सत्पुरुष ने उसको तीन गुण दे
00:39:23:15 दिए ठीक है क्या हुआ और भी कुछ हां ये ये तीन गुण आ गए ऊपर निकला है अभी ठीक है तीन गुण ठीक है ये रहने दीजिए ये वाला नहीं ये नहीं दिखाना वो वो जो तीन गुण की बात हो रही थी वही तो अब ये जो तीन गुण है वो किसने दिए वो किसने दिए वो दिए कबीर ने और किसको दिए काल को दिए तो तीन गुण काल को दिए अब दूसरी बात ये है कि कबीर जो है वो पूर्ण ईश्वर है पूर्ण ब्रह्म है तो उसकी कोई भी चीज ना तो कभी कम होती है ना ज्यादा होती है जैसा है वैसा ही रहता है इसका अर्थ ये हुआ कि जो ब्रह्मा विष्णु महेश है अगर वो गुण है तो उनकी कभी भी वो कभी भी उनका नाश नहीं होता और वैसे भी अभी तुमने गाय के चक्कर में मान ही लिया कि उनका कभी नाश नहीं होता और दूसरी बात यह है कि अगर गुण युक्त होने से किसी को गुण माना जाएगा तो ये जो क कबीर गुण प्रदान कर रहे हैं ज्योति निरंजन को ब्रह्म को तो इसका मतलब कबीर के पास तीन गुण है तो फिर वह क्या हो गए वो भी गुण हो गए तो उनकी
00:40:38:19 भक्ति भी गलत हो गई ठीक है इसीलिए तो कहता हूं मत पढ़ो चक्कर में कोई है नहीं टक्कर में अच्छा इनकी ये बात हो गई अच्छा इसने जिस पेज जो पेज ये दिखाता है ना कि वो तीन गुणों से युक्त है तीन गुणों से युक्त है ये जो फैक्ट वाइ अभिषेक है बस हटा लीजिए जो यह दिखाता है फैक्ट वाई अभिषेक कि ये तीन गुणों से युक्त है तीन गुणों से युक्त है यह जहां दिखा रहा है वहीं पर लिखा हुआ है कि परमेश्वर निर्गुण है तो पहली बात अगर परमेश्वर निर्गुण है तो यहां पर गुण कैसे प्रदान कर रहा है पहली बात तो य हो गई और अगर परमेश्वर निर्गुण है यह परमेश्वर को निर्गुण मानते हैं कि नहीं मानते और अगर मानते हैं तो फिर वो तो साकार हो रहा है सगुण हो रहा है यह दिक्कत हो गई जहां से प्रमाण दे रहा है वही लिखा है जहां प्रमाण दे रहा है जब ये कह रहा है कि ब्रह्मा विष्णु महेश तो तीन गुणों से युक्त है वही नीचे लिखा है परमेश्वर तो निर्गुण है हम गुण आ गया
00:41:44:13 अच्छा रामपाल भक्तों तुम अपने गुरु के दर्शन करने के लिए जेल धाम जाते होंगे पक्का कोई कांड करके किसी ने ये कमेंट लिखा है वो पढ़ रहा था अच्छा ठीक है तो अब अब आगे चलते हैं इनकी एक बात का और जवाब देते हैं कि भाई वही वाली बात कि गुण जो है वो तो निराकार है गुण क्या है क्वालिटी और ये कह र ब्रह्मा विष्णु महेश जो है गुण है तो या तो उनको गुण मान लो और या फिर उनको जो है जन्मा मान लो दे धारी मान लो फस जाओगे बहुत तुम्हारा जो है ना बहुत ज्यादा वो चक्की पिसाई अजीब टाइप का है तुम्हारा अब मैं एक बात कहूंगा आर्य समाज यों से अलंकार समाज यों से कि आर्य समाज की संस्था है माउंट ताबू के द्वारा जिन्होंने हमको एक आमंत्रण दिया था शास्त्रार्थ की चुनौती और हमने उसका मौखिक जवाब यहीं से यब से दे दिया था लिखित जवाब देने का समय नहीं निकाल पा रहे थे वो भी दिया जा रहा था बहुत ज्यादा जल्दी है आपको मगर हमारे पास थोड़ा सा काम रहता है तो इस वजह से हम समय नहीं निकाल पा रहे थे हमने
00:42:59:19 कल की डेट तक आपका वो लिख तैयार कर दिया था आपका जो रिप्लाई है और वह शायद हम कल सुबह पोस्ट कर देंगे ट्वीट भी कर देंगे ठीक है तो थोड़ा सा सब रखिए धैर रखिए बहुत ज्यादा मच मतलब वैसे अरी मत होइए संयम रखना सीखिए थोड़ा सा संयम रखें थोड़ा स्वयं पर इतना ज्यादा जल्दी आज आपने हम जब तक आपको देते हमारा नंबर आपको प्राप्त है आप कॉल कर लेते आप जवाब आप दे रहे कि नहीं दे रहे जब तक देते ना देते आपने तब तक जो है अपना एक और प्रस्तुत कर दिया तो हम जवाब दे रहे थे आपको और आज ही हमने कल हमने लिख लिया था और आज भी उसको देख पाने का समय नहीं मिला और कल हम उसको डाल देंगे तो थोड़ा सा अधैर मत दिखाए अधैर का प्रदर्शन ना करें और आपसे ही मुझे एक बात और याद आई कि आज एक बहुत ही निचले दर्जे की एक हरकत मैंने देखी तो मुझे बड़ा दुख हुआ और इसलिए मैं उसको थोड़ा सा बताऊंगा यह जो व्यक्ति है जो रामपाल का स्वयं को ये जेल धाम निवासी जो रामपाल है उनका जो स्वयं को शिष्य कहता है फैक्ट बाई अभिषेक तो ये फैक्ट
00:44:14:28 बाई अभिषेक ने वो जो किया हमको जो कहा सो कहा वह सब करते करते इसने बहुत ही कुछ नीच किस्म के कुछ वक्तव्य कह दिए मतलब निचले दर्जे के कहेंगे उस जो बिल्कुल भी क्षम में नहीं है जो बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है अगर कोई मतलब मैं मुझको मुझको वो सुन कर के खुद आत्मा में ठेस पहुंची इसने क्या किया कि कोई अमित जी करके हैं जो इनका निराकरण प्रस्तुत कर रहे हैं अपने स्तर पर तो उन्होंने अमित जी ने कहीं पर दयानंद जी की बात की होगी और दयानंद जी की बात करते करते उन्होंने कुछ प्रमाण दिखा दिए होंगे दयानंद जी की ओर से तो इसने जो है उनकी इतनी अवेल की है दयानंद जी की शर्म करो तुम थोड़ी बहुत तुम्हारे को बात करने की तमीज नहीं है फैक्ट बाई अभिषेक तुम्हें शर्म आनी चाहिए लज्जा आनी चाहिए तुम्हें अरे भाई जो व्यक्ति शरीर छोड़ चुका है हा उससे भी तुम घणा रख रहे हो उससे तुम दुश्मनी रख रहे हो और वो भी इतने स्तर की अगर तुम्हारे सामने होते ना दयानंद जी नहीं निकलती आवाज हमारे वैचारिक
00:45:30:10 मतभेद हैं दर्शन को लेकर सिद्धांतों को लेकर अंतर है मगर इतना पता है कि वो दयानंद स्वामी जो थे ना एक वीर मां की संतान थे ऐसे वैसे नहीं थे तुम्हारी जैसे विद्वान थे चतुर थे उनके पैरों के धूल के कण के बराबर भी नहीं हो इतनी घृणित बातें बोली इस व्यक्ति ने इतनी मतलब कोई कोई सीमा ही नहीं है कैसे कोई सुन सकता
00:46:07:24 है और इसके दोगले पन की पराकाष्ठा में कह रहा था ना दोगले पन की पराकाष्ठा क्या है देखिए फिर बताता हूं दिखाइए इनको वीडियो भैया वीडियो दिखा रहे करके पु थे पहले वो दिखाइए वो वाला जहां जहां इसने शब्दावली यूज की है गंदी वाली वो दिखाइए थे या करके इन्होने सत्या प्रकाश बोली है और भी
00:47:09:02 जो थे यानी करके इन्होने सत्यार्थ प्रकाश बोली है और भी जो प कर पज करिए नसेड़ी थे और नशा करके इन्होंने सत्यार्थ प्रकाश बोली है नसेड़ी थे गंजेड़ी थे अरे हटा क्यों लिया वो चलाइए ना अंत तक चलाइए को फ क्यों आप ऐसे लोगों को जी करके पुकार रहे हैं थे करके इन्होने सत्या प्रकाश बोली है और भी जो फिर क्यों आप ऐसे लोगों को जी करके पुकार रहे हैं देखिए इसने यहां पर जो एक बहुत आपत्ति जनक शब्द बोला है कि ऐसे नसेड़ी को आप लोग जी करके पुकार रहे हैं नसेड़ी
00:47:58:06 जिस दयानंद सरस्वती को समाज जानता है वह नसेड़ी नहीं था उनके जीवन में जो भी रहा हो और तुम उनके बारे में इतनी आपत्ति जनक बातें कर रहे तुम्हें शर्म नहीं आती है वैसे कहोगे कि हम लोग बहुत सभ्यता वाले हैं कितनी बार तुम लोगों को कह दिया इस तरह की चीजें खैर अब इसके दोगले पन की पराकाष्ठा यह है यह व्यक्ति क्या कह रहा है यहां पर कि ऐसे लोगों को तुम जी करके बुलाते हो मतलब ये मना कर रहा है कि जी करके नहीं बुलाना चाहिए दयानंद जी को है ना नहीं बुलाना चाहिए अब जरा इनका भाई वो दिखा दो इन्होंने ही शुरू में क्या बोला है जब इनको दया जब इनको किसी बात में दयानंद जी को प्रमाण के रूप में लेना था तो य वहां पर खुद कह रहा है कि दयानंद जी और बाद में मना कर रहा है
00:49:15:20 वह वाला क्लिप आप लोग इनके चैनल पर देख सकते हैं वो अवेलेबल नहीं है हमारे पास पहले खुद इसने प्रमाण दिखाने के लिए दयानंद जी बोला और बाद में खुद कह रहा है कि ऐसे नसेड़ी को आप लोग दयानंद जी कैसे बोल सकते हो तो ये है दोगले पन की पराकाष्ठा फैक्ट भाई अभिषेक माता जी ने निष्ठा पूर्वक नहीं पिलाया ना दुग्ध पान कराया है तो आप आइए सामना करिए सामना फोन करिए मुझे 7408 30169 है गुरदा है गुरदा आर्य समाज से कोई आए ना आए इस अमानना का प्रतिकार करने इसके लिए मैं ही पर्याप्त
00:50:04:22 हूं खर आप लिंक दे दीजिए वैसे अभी बहुत सी बातें हैं जब तक आप लिंक दे दीजिए अगर कोई बीच में आ जाएगा तो ले लेंगे उसे हां इसने एक काम और किया है इसने फैक्ट बाय अभिषेक ने कि जो नियोग वाला अध्या आता है वहां पर जो है बहुत मतलब निचले स्तर की इसने बातें वहां पर की है खुल के कोई मर्यादा नहीं है कोई सीमा नहीं
00:50:42:27 है ठीक है तो हमने लिंक दे दिया है कोई हमारी बातों को से सहमत ना हो तो आ सकता है एक भाई साहब पूछ रहे हैं कि आवान दयानंद जी और रामपाल एक ही है नहीं है एक नहीं है इंस्पायर्ड हो सकता है रामपाल उनसे मगर एक नहीं है क्योंकि दयानंद जी की वेदों में निष्ठा थी उन्होंने वेदों की निंदा नहीं की कभी वेदों में मुक्ति नहीं है यह अंतर है वेदों में मुक्ति नहीं है यह नहीं कहा दयानंद जी ने कभी वेदों की निंदा नहीं की उन्होंने उन्होंने परंपरा प्राप्त वेदार्थ की वेदार्थ का अनुगमन नहीं किया उसका प्रचार नहीं किया दूसरा अपना अर्थ निकाल लिया वह एक अलग बात है मगर वेदों के प्रति अनास्ता नहीं थी उनके मन में वेदों का सम्मान किया था प्रणव का सम्मान किया था इस व्यक्ति के द्वारा प्रणव की निंदा होती है का तो वो चिन्ह है
00:51:58:07 प्रणव और आप इसको और उनको एक कैसे कर दोगे कौन है भाई जय श्री राम महेंद्र जी जय श्री राम जी ज जय श्री राम भाई साहब य रामपाल है ना रामपाल खुद नसेड़ी कहता है दयानंद जी को भाई वो तो कहता है तो वो तो जेल में है ना और कहां लेकि लेकिन एक संत को ऐसी भाषा सबात नहीं देती ना गलत कहता है ना वो नहीं ठीक है वो जो भी है वो संत है कि नहीं वो तो एक अलग बात है ना मगर अगर दयानंद ने अगर इन्होने ये रामपाल ने अगर कुछ किया है तो समय जेल में और भेज दोगे हाय तो है मगर ये जो उनके नाम पर बाहर चल रहे हैं यह बड़ा मतलब इतना अमर्यादित बात इसने की है इस व्यक्ति ने आज कि मतलब मतलब आंखें जो है शर्म से झुक जाए किसी
00:53:03:16 ठीकठाक बिल्कुल बोलते हैं ये इनके मर्यादा तो है ही नहीं इनके पास कोई मर्यादा नहीं है भाई आप अपनी बात को रखो दर्शन विज्ञान व्यवहार मर्यादा की सीमा में अपनी बात को रखो यह क्या आप नसेड़ी बोल रहे हो घटिया बोल रहे हो नीच बोल रहे हो पता नहीं क्या क्या बोला है बहुत गंदा गंदा बोला बोला है भाई साब बर्दा से बाहर है ये बातें बहुत बहुत बुरा है बहुत बुरा बोला र हम लोग आ जाते दोबारा से जो बात चल रही थी
00:53:41:02 कि अब देखिए इन्होंने गरमा गीता की पेज नंबर पेज नंबर है 70 निकालिए गरिमा गीता की इतनी सारी बातें चल रही है रामपाल हम भी कोशिश करते हैं कि भाई रामपाल जैसे का नाम भी जी लगा के निकले कोशिश करते हैं प्रयास करते हैं और कभी कोई इतने सारे लांच लग चुके हैं इतनी सारी प्रेस की कटिंग है हमने कभी कोई उसके बारे में बात नहीं की कभी भी बात नहीं की
00:54:32:07 हमने तो पेज नंबर 70 पैराग्राफ तीसरे से चौथा पीडीएफ के अनुसार 50 नंबर पेज हां इसमें क्या है जो देखिए यहां पर इन्होंने मान लिया
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00:54:50:26 जो मेरे मत का अनुसरण करते हैं वह बुरे कर्मों से बच जाते हैं जो ऐसा नहीं करते वह मूर्ख अज्ञानी है हुआ
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00:55:00:04 क्या है यहां पर इन्होंने यह जो गीता ज्ञान दाता है इनके अनुसार हमारे भगवान श्री कृष्ण उसने यहां पर स्वीकार किया है कि यह मतलब यहां पर भी उसने कहा है शायद 37 नंबर के श्लोक में शायद कहा है कि ऐसा मेरा मत है यह कहा है तो ऐसा मेरा मत है जब उसने कह दिया तो यहां पर इन्होंने वह बात मान ली कि काल के मत के अनु मत भी सही है ठीक है तो काल ऐसा मेरा मत है कहकर सही बात बता रहा है यहां पर यह सिद्ध हो गया क्योंकि इन्होंने मान भी ली जो काल के मत के अनुसार नहीं चलते वह मूर्ख है अज्ञानी है वह सर्व शास्त्र विरुद्ध अज्ञान पर ज्ञान पर आसक्त है तो काल के मत के अनुसार चलना है यह र्च दर्शी के अनुसार ठीक है और देखिए आगे चलते
00:56:08:01 हैं इन्होंने एक जगह माना है 69 पेज नंबर निकालिए 48 निकालिए 48 4 इससे एक पहले बस बस 48 में जो तीसरे अध्याय के 21 में की इन्होंने वह की है कथनी करनी हां यहां देखिए यह भगवान श्री कृष्ण की बुराई कर रहे हैं यहां पर क्या बुराई कर रहे हैं कि गीता अध्याय तीन के श्लोक 21 से 24 में कहा है कि हे अर्जुन ज्ञानी संतो को अच्छे शास्त्र करने चाहिए और मैं फिर भी अच्छे कर्म करता हूं मुझे कुछ भी प्राप्त करना बाकी नहीं है मगर मैं अच्छे कर्म करता हूं ताकि अन्य प्राणी भी मेरा अनुसरण करें तो भाई काल का कौन सा अच्छा कर्म माना है तुमने काल को तुमने महाभारत कराने वाला माना काल
00:57:23:07 को तुमने प्राणियों को खाने वाला माना काल के सारे बुरे कर्म आपने माने ठीक है पहली बात तो क्या हमको इसका अनुसरण करना है जीवों को खाना है लड़ाई करवानी है आपके अनुसार तो यहां पर आपने मान लिया कि काल अच्छे कर्म करता है दूसरी बात क्यों माना है जिससे कि लोगों के मन में कृष्ण के प्रति नफरत पैदा हो कैसे होगी तो श्री कृष्ण यहां पर बुरे हैं इनके अनुसार इनके अनुसार यहां पर श्री कृष्ण के बारे में इन्होंने बहुत सी बातें कर दी कि वो ऐसे थे वो वैसे थे वो लीला यह वो सब बातें इन्होंने कर दी श्री कृष्ण को बुरा दिखाने के लिए कंपेरटिवली टू काल श्री कृष्ण को बुरा दिखाने के लिए इन्होंने काल के सामने रखते हुए कृष्ण जी की बुराई कर दी मगर अब जरा इनको पेज नंबर वो दिखा दीजिए महाभारत
00:58:17:13 वाला तो पहली बात तो यह हो गई एक बात तो यह निकल के आई कि काल जो है अच्छे कर्म करता है तो इनके हिसाब से लोगों को खाना यह सब अच्छे कर्म है और हम लोगों को भी वह करने चाहिए काल के अनुसार चलना है ना हमको जो मेरे मत के अनुसार यही पर माना अच्छा दूसरी बात क्या है कि इन्होंने कृष्ण की बुराई करने के लिए य बात कही थी कि कृष्ण से अलग कर दे काल को और कृष्ण की खूब बुराई कर दे मगर दिक्कत क्या है कि इन्होंने दूसरी जगह पर कृष्ण को काल से अलग करके कृष्ण की अच्छाई और काल की बुराई की है वह क्या है 21 नंबर पेज है इसका
00:59:03:02 21 म यहां पर 21 में देखिए महाभारत का इन्होने उदाहरण दिया कि गीता ज्ञान को बोलने वाला जो है वह काल है ऊपर करिए ऊपर जाइए हा और नीचे आ जा नीचे आ जा हेडिंग डली होगी गीता ज्ञान को बोलने वाला कौन है सबसे नीचे फोर्थ पैराग्राफ हां पवित्र श्रीमद् भगवत गीता का ज्ञान किसने कहा अब यहां पर उन्होने महाभारत का उदाहरण दे दिया है और यहां पर बताया कि श्री कृष्ण तो युद्ध को रोकना चाहते थे पर काल को क्योंकि लोगों को खाना था यह करना था वोह करना था तो उसने यह सब लड़ाई करवाई श्री कृष्ण तो अच्छे थे काल के कंपैरेटिव तो यहां पर श्री कृष्ण अच्छे हैं काल जो है बुरा है और वहां पर काल अच्छा है श्री कृष्ण बुरे हैं एट दी एंड कोई अच्छा नहीं है सब बुरे हैं केवल इनके जो जेल धाम में बै बैठे हुए तिरछे दर्शी है वो सही है ठीक है तो यह हो गई
01:00:06:09 बात अब हम अब देखिए गरमा गीता की का पेज नंबर 108 यहां पर यह लोग कह रहे हैं कि भगवान शंकर भी ब्रह्मा विष्णु महेश भी अज्ञानी है
01:00:59:12 ब्रह्मा विष्णु महेश जो है वह अज्ञानी है और यह संदर्भ हम कई बार मिल जाएगा कि ब्रह्मा जी को वेद प्राप्त हुए शिव जी से विष्णु जी को वेद प्राप्त हुए शिव जी से विष्णु जी से शिव जी को प्राप्त हुए स्वास रूपी वेद जो है प्राप्त होते हैं मगर जो ब्रह्मा विष्णु महेश है वेदों को देने वाले वह अज्ञानी है तो क्या हुआ अज्ञानी का मतलब यह हुआ कि ब्रह्मा विष्णु महेश को पता नहीं है कि क्या करना है क्या नहीं काल को भी नहीं पता है क्या क्या करना है क्या नहीं काल भी अज्ञानी है ब्रह्मा विष्णु महेश भी अज्ञानी है तो जब काल को कुछ पता नहीं है तो उसको यह कैसे पता कि तत्वदर्शी के पास जाना है और तत्वदर्शी कौन होगा जो उल्टे प्रक्ष की व्याख्या करेगा यह कैसे पता इसमें काल की अज्ञानता नहीं हो सकती जब ब्रह्मा विष्णु महेश को पता नहीं है कुछ भी तो उनको यह कैसे पता कि मेरा भी च और जन्म होता है त्र भाव आविर्भव होता है यह कैसे पता अज्ञानी का मतलब अज्ञानी और क्यों अज्ञानी है भी
01:02:08:04 समझो पेज नंबर 108 आ गया हां इसमें पीछे वाला पेज है पैराग्राफ नंबर टू दूसरा पैराग्राफ यह देखिए एक समय भगवान रामचंद्र पुत्र श्री दशरथ अयोध्यावासी को उनकी मौसी य वो एक दिन लंका के राजा रावण ने साधु के भेष में आकर हो गया थोड़ा आगे और चलिए इसमें लाइन नंबर है फाइव रुक रुकी ज्यादा नीचे मत जाइए ऊपर जाइए वापस हा बस बस बस बस न टूथ फोर फ हां देखिए भगवान शिव ने कहा यह परम ब्रह्म प्रभु है किसको कहा रामचंद्र जी को और यह काल को ही परम ब्रह्म मानते हैं तो यह अब यहां पर कह दिया क्योंकि यह लोग गलत मानते हैं तो अज्ञानी है तो जब इनकी यह बात गलत है तो उनकी व बात कैसे सही कि मेरा आविर्भव होता है त्र भाव होता है अज्ञानी है उनको नहीं पता मेरा क्या होता है है ना और दूसरी बात यह है
01:03:23:16 कि काल का जन्म और मृत्यु अलौकिक इसको तो अलग से लेंगे पूरा काल का चैप्टर बना दिया है ठीक है आगे चलते हैं अच्छा यह लोग कहते हैं यज्ञों से पूर्ण ब्रह्म की पूजा नहीं होती है मगर इनकी गर्मा गीता की खोलिए अ 64 नंबर 64 हर चीज गलत है हर चीज कुछ नहीं सही है कूड़ा
01:04:09:07 है हां भाई कर लेंगे दयानंद सही कि रामपाल सही कर लेंगे इसम बात रामपाल आपको वेदों से बाहर निकाल रहे हैं इस बात को समझिए और दयानंद जी उसका अर्थ जो भी करें मगर आपको वेदों में वेदों की सीमा में रख रहे हैं तो जब जब व्यक्ति को वेदों के प्रति आस्था आस्था है तो उसको आसान है कि सही अर्थ बता कर के सही रास्ते पर लाना मगर जो व्यक्ति वेदों के प्रति अनास्ता वान है उसको पहले वेदों तक लाना पड़ेगा और फिर उसको धर्म का रास्ता दिखाना पड़ेगा अंतर है एक बार पूज्य गुरुदेव जगतगुरु शंकराचार्य जी बता रहे थे यह बात मैं उनके लिए नहीं बोल रहा हूं दयानंद जी के लिए मगर बता रहे थे वो एक बार जंगल में जब शायद वो जंगल में थे यात्रा के दौरान थे तो वहां पर क्रिश्चन लोग जो है धर्म परिवर्तन कर रहे थे ईसाई मिशनरी वहां पर उनको कौन लो ले रहा था पता है उनसे क्रिश्चन से कौन लो ले रहा था उनसे गायत्री परिवार वाले
01:05:24:09 लड़ रहे थे वहां पर तो आपको चुनना होगा प्राथमिकताओं को ठीक है अच्छा मैं कह रहा था आप पेज नंबर निकालिए 64 पेज नंबर इन्होंने इनको आप बिल्कुल सही कह रहे हैं इनको समझने का मतलब यह है किताबें छोड़ दो किताब पढ़ोगे कुछ नहीं खत्म और इनके पास चले जाओ बस किताबों से इनकी कोई बात मैच ही नहीं खाएगी अब इसमें यज्ञ में पूज्य पूर्ण ब्रह्म है ये लोग कहते हैं ञ जो वेदों की पूजा है वो पूर्ण ब्रह्म की पूजा नहीं है मगर इसका पैरा पैराग्राफ नंबर तीन है इसका
01:06:15:16 तीसरा देखिए सर्वव्यापी परम अक्षर ब्रह्म यज्ञ यानी धार्मिक अनुष्ठानों में प्रतिष्ठित है और के रूप में पूज्य यानी यज्ञों के द्वारा किसकी पूजा हो रही है ब्रह्म की और खुद ही कहते फिर रहे हैं कि वेदों के अनुसार जो पूजा है वो मतलब यज्ञों के द्वारा किसकी पूजा हो रही है सर्वत ब्रह्म सर्वव्यापी परम अक्षर ब्रह्म की हो रही है और खुद ही कहते घूम रहे हैं कि यज्ञ वो वेदों के द्वारा यज्ञ के द्वारा जो है पूर्ण परम अक्षर ब्रह्म की पूजा नहीं है ठीक
01:06:54:00 है इतनी कितनी चीजें हैं हर कदम पर इनका वेद गीता का ज्ञान अधूरा देखिए 117 नंबर पेज निकालिए जरा 117 नंबर पेज पीडीएफ के अनुसार 97 और पैराग्राफ नंबर तीन हम यह ज्यादा नीचे आ गए ऊपर
01:07:52:19 जाइए ऊपर से मुझे गिनने दीजिए ना पैराग्राफ कौन सा है वो पहला हो गया दूसरा हो गया तीसरा हां ये विचार करें ठीक है भगवान कृष्ण अर्जुन के गुरु रूप में थे इसमें क्या है कि लाइन नंबर नाइन इसकी नौवी लाइन वन टू थ्री फोर फ सक्स सेन 8 नाइन हां इससे विरुद्ध
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→ Used in: B · Video खुद को ही एक्सपोज कर गया पाखंडी! | भाग 7 अध्याय 4 गीता के नाम पर रामपाल का भयंक... at 4:11 ↗
→ Used in: A · Live पाखंडी का गीता ज्ञान भाग 8 अध्याय 5 at 9:48 ↗
01:08:20:28 है कि वेदों व गीता जी में वर्णित साधना से पाप का विनाश नहीं होता भोगने ही पड़ते हैं अन्य उपलब्धियां जैसे सिद्धियां
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01:08:28:24 वहा सर्ग प्राप्त हो जाती है परंतु पाप कर्म नष्ट नहीं होते क्योंकि वेदों तथा गीता का ज्ञान अधूरा है ठीक है वेदों में कबीर भी है तो यानी पूर्ण ब्रह्म की बात हो गई कबीर कैसा दिखता है वह सबको पता है और वेदों के द्वारा पूजा कौन जा रहा है कबीर ही पूजा जा रहा है मगर वेदों और गीता का ज्ञान अधूरा है तो भैया वेदों और गीता को छोड़ दो राम पाली किताबों में चले जाओ और अपना सर फोड़ लो जाकर के वेद और गीता तुम्हें इसीलिए पढ़ने हैं हिंदुओं रामपाल के अनुसार कि वेद और गीता नहीं पढ़ना है यह सीखो
01:09:13:21 उससे यहां पर इन्होंने चौथे अध्याय चौथा अध्याय चल रहा है क्या देखिए इसका ऊपर पेज कौन सा है अध्याय कौन सा चल रहा है इस इस पेज पर होगा अध्याय का नाम हां चौथा अध्याय चल रहा है इसमें देखिए 25 से 29 तक की व्याख्या गड़बड़ कर दी इन्होने इसी में होगा चा 10 से 15 चल रहा है ना आगे चलिए कोई भी बात एक भी लाइन सही नहीं है मुश्किल है एक भी लाइन समझना
01:10:06:02 ऐसा हो सकता है आप कह रहे हैं जो वो हो सकता है मगर हम लोग दूसरी चीज में जा रहे हैं उस पर भी बात करते हैं उस जगह आप सही कह रहे हो देखिए इन्होंने क्या किया 25 से 30 तक में
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→ Used in: A · Live गीता के नाम पर रामपाल के बोलबचन अध्याय 4 Ep-7 #satlokashram at 44:02 ↗
01:10:21:22 कहा है कि इनमें भिन्न भिन्न प्रकार की कर्म उपासना का विवरण दिया है कहा है कि कुछ साधक तो हवन यज्ञ करते
⬜ Not used yet · 01:10:28:26 – 01:14:25:14 (3:57)
01:10:28:26 हैं यह करते हैं वो करते हैं अन्य प्राणायाम करते हैं और यहां पर जो है पूरा इन्होंने उसका भाव ही बदल के रख दिया जो 25 से 29 तक की व्याख्या है वास्तविकता क्या है व मैं आपको बता देता हूं जो काम की बात है यह सभी योगी जन यज्ञों के द्वारा पापों का नाश कर देने वाले हैं और यज्ञों को जानने वाले हैं तो यहां पर जो 25 से 30 में आ रहा है ना यह सभी योगी जन पापों का नाश कर देने वाले क्लेम करते हैं पापों का नाश नहीं होता पापों का नाश नहीं होता तो पापों का नाश हो रहा है
01:11:43:26 यज्ञ से पापों का नाश हो रहा है ठीक है र आगे चलते हैं यज्ञ से बचे हुए भविष्य को यह गपला है देखिए गपला क्या है मैं बताता हूं जो भगवत गीता 431 है उसमें जो संस्कृत आई
01:12:19:19 है यज्ञ शिष्टा मृत भुज यहां पर इसका अर्थ जो है वो किया है यज्ञ से बचे हुए अमृत का अनुभव करने वाले मगर वहां उन्होंने कर दिया यज्ञ से अलग यज्ञ से बचे हुए यज्ञ से अलग तो जब वो यज्ञ से बचे हुए की जगह यज्ञ से अलग कर रहे तो उसकी संस्कृत देनी पड़ेगी ना ये घपला करते हैं यज्ञ से अलग अमृत का जो पान करते अनुभव करते हैं वो लोग जो है वो होते हैं यज्ञ का अनुभव जो करते हैं उनको वो नहीं मिलता है मोक्ष नहीं मिलता उनको परमात्मा नहीं मिलता यज्ञ से अलग अमृत का जो पान करते हैं उनको परमात्मा मिलता है उनको मोक्ष मिलता है जबकि यहां पर यज्ञ से बचे हुए अमृत का अनुभव करने वाले मतलब जो उसम आवती दी और वह जो लास्ट में जो किसी भी प्रकार का यज्ञ हो अगर वो जो अपान वायु में प्राण वायु का और प्राण वायु में अपान वायु यज्ञ इस तरह से बताए गए तो अलग-अलग प्रकार के जो यज्ञ है उसके बाद जो तत्व बच जाएगा उसका अनुभव करने वाले जो होते हैं योग जन वो जो यहां पर सुखी बताए गए हैं और परलोक का भी सुख उनको प्राप्त होता है सुखी मर यहां वहा पर क्या कर दिया यज्ञ से बचे
01:13:34:25 हुए यज्ञ से बचे हुए को यज्ञ से अलग यह गपला और वहां पर कर दिया मुक्ति है ना कि उसको मुक्ति मिल जाती है अब आती है बहुत जोरदार धमाकेदार बात वो क्या है इनकी भगवत गीता निकालिए 116 पेज नंबर और पीडीएफ के अनुसार 96 शायद यही है यही कही है व और पैराग्राफ भी पहला है हा पिछला हा बस बस बस अब देखिए यहां पर य लोग फस गए क्यों फस गए लाइन नंबर वन अध्याय
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01:14:25:14 चार के श्लोक 10 से 15 में काल ब्रह्म ने कहा कि जिनके राग द्वेष मर चुके
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01:14:32:27 हैं जिनने यह जान लिया है यह वह मता अलंबी हो चुके हैं तीनों मंत्रों के उपासक कबीर हंश सतनाम य स्मरण करके पैर रखकर यह वो सब आए हैं जैसे गीता अध्याय से मुझे अच्छे लगते हैं तथा मैं ज्ञानी को प्रिय हूं क्योंकि वह तीन गुणों की भक्ति छोड़कर जो है मेरी अर्थात ब्रह्म की भक्ति करते हैं इसी प्रकार गीता 41 में कहा है कि जो मुझे बसते हैं मैं उन्हें बसता हूं अर्थात मुझे अच्छे लगते हैं यही प्रमाण गीता में मिलता है फिर नीचे जाइए थोड़ा नीचे जाइए बस बस बस बस ज्यादा नीचे नहीं ज्यादा नीचे नहीं ज्यादा नीचे नहीं आप ज्यादा नीचे चले जाते थोड़ा ऊपर जाइए बस बस बस बस बस बस बस अरे हां तो क्या है ज्ञानी मुझे अच्छे लगते हैं ज्ञानी को प्रिय हूं क्योंकि तीनों गुणों को जोड़कर मेरी भक्ति करते हैं मुझे अच्छे लगते हैं फिर कहा कि जो मुझे अच्छी तरह जान लेता है फिर मेरे जाल में नहीं फसता तथा जो देवताओं को ये वो करके परंतु पूर्ण मुक्त नहीं है इसलिए देखिए भाई नीचे चलिए यहां पर इसने बता दिया कि जो मेरी भक्ति करेगा वह पूर्ण मुक्त नहीं है और यह जान लेना
01:15:48:08 यह पूर्वजों की तरह शास्त्र अनुकूल कर्म है इसलिए तू अपने पूर्वजों की तरह शास्त्रार्थ उनके पास तो सूक्ष्म वेद था नहीं सूक्ष्म वेद तो अभी आया है था तो किस रूप में था बताएं कष्ट करें सूक्ष्म वेद कहां था और पूर्वजों की तरह भक्ति कर तो अच्छा एक जगह इन्होने माना भी है कि अर्जुन जो है मुक्त हुआ तो अर्जुन का तत्वदर्शी गुरु कौन था और उस तत्वदर्शी ने पूर्वजों की तरह कौन सी भक्ति दी थी यह तो पूर्वजों की जो बातें चली आ रही है परंपरा से प्रचलित उनका खंडन करते हैं हम तो सूक्ष्म वेद के अनुसार चलेंगे यह करेंगे वह करेंगे तो सूक्ष्म वेद का क्या प्रमाण है कि वह पहले था किस रूप में था सूक्ष्म वेद इन्होंने एक जगह कहा है काल ने छिपा दिया था पांचवा वेद और वो बाद में कबीर जी आकर के स्वयं देते हैं कबीर स्वयं आते हैं वो देते हैं
01:17:03:15 तो कबीर जब स्वयं आ कर के दे रहे हैं तो वह पहले कहां था सूक्ष्म वेद तो नहीं था तो अर्जुन को कौन से पूर्वजों को पूर्वजों को फॉलो करने की बात की जा रही है उनके प्रमाण क्या है है ना इसीलिए कहता हूं भाई मत पढ़ो चक्कर में कोई है नहीं टक्कर में यहां से इनका पूरा सारा ताना बना खत्म हो गया पूर्वजों की भक्ति को इन्होने स्वीकार कर लिया अब जब पूर्वजों वो भी अर्जुन के पूर्वज हमारे पूर्वज होते तब भी मान लेते 600 साल पहले कबीर जी आए तब मान मान लेते पूर्वजों के अनुसार अर्जुन अर्जुन के पूर्वज कहां है कहां है वहां पर सक्षम इसलिए कहते हैं परंपरा प्राप्त
01:17:46:03 ज्ञान अब इनका एक इनके तत्व ज्ञानी का जो ये लोग जो वेद से तत्व ज्ञानी का वो लेते हैं ना भाई एक बार बो कर दीजिए बीच बीच में वह लिंक दे दीजिए जिससे कोई अगर आना चाहता हो भाई लिंक दे रहे हैं किसी को कोई बात से आपत्ति है तो व आ सकता है जो समझ ना पा रहे हो या समझाना चाह रहे हो वह आ सकता है विजय सिंह गुर्जर जी आ जाइए है ना जल्दी से आइए अपना आव भाव रो भाव कराइए केवल कमेंट में ही आव भाव त्र भाव हुआ करता है
01:18:33:08 आपका हा आओ ना भाई राजकुमार दास जवाइन करो राजकुमार दास अरे कहां गए राजकुमार दास जी इतनी बार कमेंट कर रहे हो कि आवान ऊपर लो दम है तो कमेंट में बात करके कुछ नहीं होगा औकात की बात भी कर रहे हो आप क्या हुआ राजकुमार जी जिसकी फोटो लगा रखी है उसने आपको आपकी जिस जो शब्द आपने यूज किया औकात उस बताई नहीं आपको आपकी या आपके अंदर वो नहीं है क्या है
01:19:27:25 महेंद्र जी दोबारा आए जी महेंद्र जी बढ़िया है जी मजा आ रहा है ये भाई साहब कह तो रहे हैं औकात की बात तो कर रहे हैं मगर आ नहीं रहे हैं नहीं कोई नहीं आता य ये सामने आते नहीं इनके पास तरक नहीं है ना जी तक हो तब तो आए जय जय श्री राम अमित जी जय जय श्री राम क्या कह रहे हैं रोकली जी आप मैं समझ नहीं पा रहा हूं आपके मैं कह रहा हूं जी इनके पास त्रक नहीं है रामपाल के दास के पास नहीं आपकी बात तो समझ में आ रही है वो कोई कमेंट कर रहा था मैं उसके लिए बोल रहा था खैर चलिए आगे चलते हैं आज बड़ी अच्छी अच्छी इंफॉर्मेशन मिल रही है ना बिल्कुल जी बहुत बढ़िया बढ़िया बातें हां ये अपनी बातों में फसते हैं बाद में बोलते हैं इसने ये कहा उसने वो कहा बिल्कुल सही कह रहे हो हा अपनी बात में फते हैं बिल्कुल हां अब बात करते हैं इनका जो देखिए हमने जो इनका भगवत गीता से जो तत्व ज्ञानी है उसका तो हमने निराकरण कर दिया कि वह पूर्ण ज्ञानी नहीं है पूर्ण ब्रह्म के बारे में बताने वाला नहीं है क्यों क्योंकि तत्वदर्शी की बात जो हो रही है वोह कौन
01:20:43:02 है ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देने वाला और ज्ञान यज्ञ के ज्ञान से मुक्ति नहीं है यानी कि गीता का जो तत्वदर्शी है वो वो नहीं है जो मुक्त करेगा ठीक है बिल्कुल तो फिर अगर अगर रामपाल तत्वदर्शी है तो रामपाल मुक्त कराने वाले नहीं है या तो बोलना बंद करो कि वो तत्वदर्शी है कुछ और बोलो अपनी बातों से फस रहे हैं अपनी बा बिल्कुल अब हम लोग अब इन्होने वेदों से भी सहारा लिया है थोड़ा सा वो मैं आपको बता दूं इन्होंने क्या किया है तत्व ज्ञानी की क्या करते करते यह कहा है कि भाई वेदों में जो है वो कहा गया है कि जिसको वेदों में यजुर्वेद के 40 में अध्याय के हम 13वें मंत्र में यह कहा गया है कि जिसको अक्षर का ज्ञान होगा वो विद्वान है जिसको अक्षर का ज्ञान होगा वो विद्वान है मगर कबीर जी ने कुछ और कहा है इस बारे में और ये बात इन्होंने कही है इनकी गरमा गीता की खोलिए
01:21:58:14 पेज नंबर 69 प्रमाण के साथ बात करते हैं पेज नंबर 69 इतना इनका हो गया ये लोग मुझे लग रहा है अब तो एक जन्म लग जाएगा इन बातों का कुछ कुछ तो जवाब देने तो एक जन्म लग जाएगा हर बात का जवाब देने तो 69 पेज नंबर पीडीएफ के अनुसार 49 बिल्कुल सही इसमें पैराग्राफ नंबर
01:22:36:06 फाइ एक दो तीसरा आ गया हे पार्थ वाला दो तीन चौथा आ गया ए पार्थ वाला और अगला आ गया ए पार्थ बस बस बस यही है क्या 49 पेज पर पेज नंबर फ पैराग्राफ नंबर फाइव और नीचे चलिए थोड़ा सा लगता है मुझसे नोट करने में कोई गलती हो गई यह देखो यह आ गया विद्वानों तो गीता ये वो करके इन्होंने आगे लिखा है यजुर्वेद अध्याय 40 श्लोक 13 में जरा वो अंडरलाइन कर दीजिए पहली लाइन में ही है पवित्र यजुर्वेद पहली बात तोय पवित्र क्या होता है मुझे समझ में नहीं आ रहा है जिसमें मोक्ष नहीं है जिसमें पूर्ण ब्रम की जानकारी नहीं है पवित्र क्यों है
01:23:28:13 तो यजुर्वेद अध्याय 40 श्लोक 13 में वेद ज्ञान दाता ब्रह्म ने कहा है कि जिस व्यक्ति को अक्षर अच्छा इस वेद को कहने वाला भी अज्ञानी है फिर भी वेद पवित्र है जनता आएगी नहीं ना बिना पवित्र कहे दुकान पर आएगी नहीं तो पवित्र कहना जरूरी है काल को भगवान कहना जरूरी है भले ही वो खाता है राक्षस जैसी सारी चीज मगर काल जो है भगवान है उसका भाव घटिया है अनुत्तम है मगर वोह जो है भगवान है तो अध्याय 40 मंत्र 13 में वेद ज्ञान दाता ब्रह्म ने कहा कि जिस व्यक्ति को अक्षर ज्ञान है उसे विद्वान कहते हैं इसका मतलब अध्याय 40 श्लोक 13 में तत्वदर्शी की बात नहीं हो रही है क्योंकि किसकी बात हो रही है ऐसे किसी की जिसको अक्षर ज्ञान जिसको इन्होने विद्वान नहीं माना आगे पढ़ लीजिए जिसे अक्षर ज्ञान नहीं है उसे अवि
01:24:37:22 दवानलोद जी ने कहा अपनी अमृतवाणी में विद्वान तथा विद्वान की परिभाषा बताई है और उन्होंने आगे बता दिया कि केवल अक्षर ज्ञान नहीं बल्कि जिसे परमात्मा का ज्ञान होता है वो जो है होता है अब इन्होंने क्या किया है इन्होंने हर जगह जो यह 40 13 का ही प्रमाण दिया है कि वेदों में भी यजुर्वेद में कहा है तत्वदर्शी के पास जाओ हालाकि कहा नहीं है मंत्र में यह आ रहा है कि हमें तत्व ज्ञान यह प्राप्त हुआ तत्व ज्ञान ज्ञान प्राप्त हुआ वेदों का मनीषियों के द्वारा जाने को नहीं कहा जा रहा कि कहीं जाओ मगर मैं कह रहा हूं एक मिनट को अगर मान भी लिया जाए कि वहां पर मनीषियों की बात हो रही है तो वहां पर आप ही तो उनको म नहीं मान रहे हो आप तो स्वयं कह रहे हो कि वो वो जो है विद्वान नहीं है 40 1 में विद्वान की बात नहीं हुई है आपके हिसाब से ठीक है यजुर्वेद तो इनका तत्व ज्ञानी जो वहां का है गीता का वो भी खंडित और जो यहां वेदों का है वो भी खंडित सब खंडित आगे चलते हैं अच्छा एक ये लोग ये कहते हैं कि जो परमात्मा है वो माता के गर्भ से नहीं आता है मगर
01:25:53:07 अ इनका यह गरमा गीता की में लिखा हुआ है कि परमा जो परम अक्षर ब्रह्म है वह अवतार लेता है यह किसी और दिन ले लेंगे अवतार लेने वाली बात अच्छा अब जरा ज्ञान गंगा खोलिए ज्ञान गंगा का 58 नंबर
01:26:44:26 पेज अरे भाई मूर्खों से ज्ञान चर्चा नहीं करनी है तो यहां पर यह लिख कर जन चर्चा क्यों कर रहे हो क्योंकि कायर हो कायर हो सामना नहीं कर सकते हो अगर मूर्खों से ज्ञान चर्चा नहीं करनी तो लिख के ज्ञान चर्चा क्यों कर रहे हो लिख के भी मत करो ना क्योंकि कायर हो यहीं पर जुबान चल पाएगी राजकुमार दास जी आप आ सकते हैं ऊपर आइए बात करिए
01:27:25:07 ज्ञान गंगा का पेज नंबर 58 पेज नंबर 58 पीडीएफ के अनुसार 36 और पैराग्राफ नंबर वन जीव बिना सोचे समझे बस वही वही बड़ा करिए जीव बिना सोचे
01:27:59:02 समझे जो है मन के प्रभाव से गलत कार्य कर देता है और मन कौन है काल निरंजन किसके प्रभाव से काम काम कर देता है गलत कार्य और यहां पर किसे गलत कार्य माना जा रहा है ऊपर ऊपर चलिए थोड़ा सा थोड़ा ऊपर चलिए क्या गलत कार्य है यहां पर बात हो रही है कि इस प्रकार तीनों को साप देकर भवानी बहुत पछताई यानी कि श्राप देना गलत कार्य है श्राप देना गलत कार्य नीचे चलिए श्राप देना गलत कार्य और श्राप क्यों देता है कोई काल से प्रभावित होकर तो कबीर जी ने जो काल को श्राप दिया था वह काल से प्रभावित होकर दिया था ठीक है कबीर जी ने जो श्राप दिया था काल को कि तू एक लाख जीवों को रोज खाएगा सवा लाखों को उत्पन्न करेगा जो भी है वह काल से प्रभावित होकर कहा
01:29:08:14 था और काल से प्रभावित होकर कहा था काल देखिए क्या कर रहा है कि पहले प्रभावित कर रहा है कबीर जी कबीर जो भगवान है उनको भगवान को भी कोई प्रभावित कर सकता है पहली बात और उसके बाद काल स्वयं की मरने की व्यवस्था कर रहा है कि मैं काल स्वयं को श्राप दिलवा रहा है भगवान को कंट्रोल कर रहा है कौन काल क्योंकि श्राप देना जो है वो काल के प्रभाव से है एक तो पक्ष ये हो गया यहां का दूसरा पक्ष अब ले लीजिए काल यहां पर किसे कहा गया है मन को यहां पर काल कहा गया है मन को और इसी में अगले पेज
01:29:59:26 चलिए हां अगले पेज पर और यह जो है इस प्रकार माता विष्णु से कहा कि मन ही जग का करता है और वही ज्योत निरंजन है मन कौन है अब काल जो है मन है मन ही है जो जीवों को खाता है मन ही है जो राक्षस की तरह अपना विराट स्वरूप दिखाता है और मन जो है उसका आकार है मगर वह आकार दिखाता नहीं है यह मन है यह काल जो है काल की सबसे बड़ी व्याख्या क्या हो गई आज कि ज्योति निरंजन कौन है वो मन है मन ये आप लोग देख लीजिए बड़ा करके दिखा दीजिए भैया इनको मन ही जक्का करता है और वही ज्योत निरंजन है ठीक है तो काल जो जो है निराकार हो गया कहीं साकार हो गया काल है कौन यह समझ में नहीं आता है काल पहले श्री कृष्ण के अंदर घुसता है फिर बाहर निकल आता है फिर अपना विराट स्वरूप दिखाता है और हजारों तरह की बातें काल के बारे में केवल आप लोग पागल होते रहिए और कुछ नहीं कुछ नहीं
01:31:15:16 मिलेगा ठीक है अच्छा इसके बाद आगे चलते हैं कबीर भी किसी और का भजन कर रहे हैं ज्ञान गंगा पेज नंबर 30 हम कबीर वाणी के केवल उन चीजों को दिखाएंगे जो चीजें इनकी किताबों में स्वीकार कर ली गई बाकी चीजें नहीं दिखाएंगे क्योंकि उन बाकी की चीजों को य कह देंगे वो काल से प्रभावित है मन से प्रभावित है इनका मन जो है उसमें पेन चलवा देता है काल कौन है मन और जो हमसे गलतियां होती है वो काल के प्रभाव से होती है तो ये जो पेन चला देते हैं ग्रंथों में वह मन के प्रभाव से करते हैं काल के प्रभाव से हां इसमें जो है यह जो कविता लिखी है ना जो कबीर जी की हां हां बस बस ब बस बस बस बस बस नहीं नहीं ज्यादा ऊपर नहीं ज्यादा ऊपर
01:32:14:16 नहीं जो पेज नंबर नीचे वाला पेज था ना जो इससे नीचे ऊपर ही ऊपर ही है ये नौ नंबर है ऊपर आ जाइए ऊपर चलिए बस बस बस बस नंबर सात था वो एल वन इसकी लाइन वन बस बस कबीरा सुमर तासु को जाके भुजा अनंत कबीरा कबीरा सुमर तासु को जाके भुजा अनंत ये क्या है भाई कबीर जी किसी ऐसे ऐसे का भजन करते हैं जिसकी भुजाएं अनंत है अब क्या करें और यहां पर सुनिए एक बात और है गजब की कबीर जी ने वशिष्ठ जी को तत्व वेता ज्ञानी कहा है पॉइंट टू बी नोटे तत्व ज्ञानी कबीर के अनुसार कौन है वशिष्ठ जी अंडरलाइन करके दिखाइए जनता को प्रेस बिल्कुल
01:33:21:07 फ्रेश यह देखिए तत्व ज्ञान ठीक है तो कबीरा सुमर तासु को जाके भुजा अनंत वशिष्ठ मुनि से तत्व वेता ज्ञानी अब देखिए यह तत्व ज्ञानी तो हो गए तत्वदर्शी तो हो गए वशिष्ठ जी अब इनके अनुसार मोक्ष उन्होने कबीरा जी ने माना है कि नहीं माना बात अलग है मगर तत्वदर्शी कौन है कबीर के अनुसार वशिष्ठ जी वशिष्ठ जी कौन थे शंकराचार्य परंपरा के तीसरे नंबर के गुरु
01:33:55:27 श्री राम जी के गुरु वशिष्ठ जी को त तत्व ज्ञानी माना है तुम्हारी गुरु परंपरा में कहीं अगर आता हो तो वशिष्ठ जी का नाम तो बताना ठीक है भाई और कोई किताब पढ़ने की जरूरत ही नहीं है गुरुकुल गोविंद जी केवल इ की किताब पढ़ते रहो ये मैं एक एक नीचे वाला देख रहा हूं कि कबीर गोवर्धन श्री कृष्ण उठाया द्रोणागिरी हनुमंत शेष सृष्टि उठाई में कौन भगवंत अब इनको कोई पूछे क्या वेट की कंपटीशन चल रहा था कहीं प की कोई ज्यादा वेट उठाएगा तो उसको भगवान बना दिया जाएगा चलिए खैर वो कबीर जी की बात है क्या वो उनका दृष्टांत रहा लिखने का वह बात अलग है मगर यहां दो बातें क्लियर हो गई कि कबीर जो है किसी और को भजता है व स्वयं को नहीं भजता है उसको तो लिखा हुआ है कबीर सुमर तासु को जाके भुजा अनंत तो इसमें कौन सी शक बात अब इनको जवाब देना पड़ेगा इसके कौन है अनंत बाजुओ वाला फिर दिखा देंगे अनंत बाजू बस बस बस अनंत बाजू विराट स्वरूप मन मन जो है काल
01:35:09:09 है क्या इन्होने चक्कर आ जाए कोई कोई नॉर्मल आदमी ब पढ़ने बैठ जाए तो उसको चक्कर आने लगे खैर अच्छा आप करिए करिए जी जी मैं इसको पूरा कर लू बस तो अच्छा अब एक चीज और बता दूं आपको यह सब तो हमने कर लिया मगर इनके दोगले पन की पराकाष्ठा दिखानी है ना हम आपको तो हम दिखाएंगे आज तो देखिए भाई यह है गरिमा गीता की 147 पेज
01:35:49:21 नंबर डगले पन की पराकाष्ठा दिखाएंगे वो क्या है ऐसे थोड़ी ना जाने देंगे 147 147 यही है क्या इससे पीछे वाला होगा शायद 126 पैराग्राफ नंबर टू यहां पर कहीं पर प्रणव वो जो इनका तत्सत वाला मंत्र है ना उसकी व्याख्या दी गई है
01:37:41:09 स हरब
01:38:18:01 का ज्ञान गंगा का 147 और इसमें है पेज नंबर टू हां यह देखिए अब देखिए दोगले पन की वह क्या है पराकाष्ठा वह यह है पैराग्राफ नंबर पूर्ण परमात्मा का जो मंत्र है पूर्ण पूर्ण परमात्मा को प्राप्त करने का मंत्र देखिए क्या कहेंगे आप किसी एक बात पर टिके हैं ये देखिए पूर्ण परमात्मा को प्राप्त करने का यह जो मंत्र है यह दिया गया है यज्ञों से वेदों में भगवान की पूरी जानकारी नहीं मगर कबीर की जानकारी है जब कबीर तुमने बता दिया कि उसका शरीर है वह शरीर आता है जब शरीर के बारे में तुमने बता दिया तो पूरी जानकारी दे दी ठीक है अब यज्ञों से आपको मुक्ति नहीं मिलती मगर अर्जुन को मुक्ति मिल जाती है वो बात और है कि अर्जुन का कोई तत्वदर्शी गुरु नहीं था अर्जुन के पास सूक्ष्म वेद नहीं था मगर अर्जुन को मुक्ति मिल गई मगर अर्जुन को मुक्ति नहीं भी मिलती है अर्जुन को मुक्ति नहीं मिलती य भी बात है और अब यहां पर तुमने कहा कि यज्ञों में पूर्ण परमात्मा को प्राप्त करने का मंत्र नहीं है वेदों गीता में ज्ञान अधूरा है मगर
01:39:33:12 यहां पर क्या कहा कि पूर्ण परमात्मा को भैया अंडरलाइन कर दो ब्लू ब्लू लाइन से जरा जनता देख ले अच्छे से पूर्ण परमात्मा को प्राप्त करने का ये जो प्रणव तत सत यह मंत्र है यह जाप का निर्देश है किसको प्राप्त करने का है भ पूर्ण परमात्मा को हो गया यह सारी चीजें थी अब मैं इनके काल की जरा विवेचना आज मैंने नोट की थी वो मैं आपको बता दूं एक समरा कर दूं काल कौन है उसके बारे में बस हम लोगों का चेहरा बड़ा बड़ा कर दीजिए आपको पीडीएफ खोलने का अब काम नहीं है आज की डेट में ठीक है इनकी कोई बात भी इन्हीं की बातों से नहीं ठहरती है इनकी सारी बातें सारी बातें इन्होंने खुद ही काटी है खुद ही सब काट डाला तो काल अविनाशी नहीं है कौन सा श्लोक कौन सा श्लोक आप मुझे चैट में
01:40:40:28 बताए कौन सा श्लोक दिखाना है भगवत गीता का 17 से 23 और चैप्टर कौन 15 चैप्टर 17 चैप्टर 17 श्लोक 23 वहीं पर ओम तत्सत का है ना वो जिक्र 17 2 चैप्टर 17 शलोक 2
01:41:25:01 टी आर पहाड़ी जी इनको जो धो रहे हैं ना दूसरे चैनल पर मेरे को तो उसने ब्लॉक कर दिया वहां से अ गए क्या क्या हा और आज जहां पर गया है दूसरा एमपी खबर वाला वो उसने पहले लाइव खत्म की फिर लाइव खत्म करने के बाद उसने मेरे को बैक स्टेज से जोड़ा अंदर और मैंने स्क्रीन भी रिकॉर्ड करके रखी हु सारी की सारी येवा य तत हां बिल्कुल
01:42:10:09 ब्राह्मण और वेद उसी से षष्टि के आदि काल में ब्राह्मण और वेद तथा यज्ञ आदि रचे गए हैं किसने रचे हैं ब्रह्म ने ब्रह्म ने रचे हैं भाई ब्राह्मण और ये जो वेद है तो ईश्वर ने वेदों को नहीं रचा इनके हिसाब से ब्रह्म ने रचा काल ने रचा है वेदों को वेदों को किसने रचा भाई इनके हिसाब से काल ने रचा है तो अपर है वेद अपर है मगर इन्होने नहीं जो इनके हिसाब से वेदों को काल ने रचा इनके हिसाब से चलिए अब मैं काल को समरा इज करूंगा मगर उससे पहले मैं कुछ जरी बात एक बता दूं आपको ये इसमें भी मेरे पास कुछ
01:43:20:12 है एक बहुत जबरदस्त बात और है मेरे पास मैंने इसम नोट नहीं किए जो जो सातवा अध्याय है ना इसमें भी इनकी बहुत पोल खुलती है क्योंकि सातवे अध्याय का दूसरा श्लोक जरा दिखा दीजिए भैया अपनी गीता का
01:43:55:22 अब वहां पर ये गीता को गीता ज्ञान देने वाला जो है व इनके हिसाब से कह रहा है कि अब मैं तुझे वह ज्ञान दे रहा हूं जिसको जानने के बाद कोई और ज्ञान शेष नहीं रह जाता वोह ज्ञान गीता ज्ञान दाता दे रहे हैं ठीक है और वह ज्ञान क्या है इनके हिसाब से अगर वो ब्रह्म काल का ज्ञान है तो वही ज्ञान ऐसा है जिसको जानने के बाद और कोई ज्ञान शेष नहीं रह जाता उसी ज्ञान को अगर तुझे जानना है तो तत्वदर्शी के पास जा ठीक है अगर मान ले तत्वदर्शी के पास जाने को का मगर कौन सा ज्ञान जानना है काल को जानना ब्रह्म को जानना इनके अकॉर्डिंग और कोई ज्ञान नहीं जानना है ब्रह्म को जानना ही वह ज्ञान है जिसके बाद और कोई ज्ञान नहीं जानना है तो तत्वदर्शी के पास भी आप ब्रह्म के लिए जाओगे अगर ब्रह्म से अलग कोई परम ब्रह्म है कबीर सफेद दाढ़ी वाला उसके लिए नहीं जाओगे आप क्यों क्योंकि यहां पर काल ने स्पष्ट कह दिया कि कि जो मुझको जान ले मुझको जानेगा वो मेरे परायण मगर सात अध्याय के दूसरे शलोक में उन्होने कह दिया कि मुझको मुझको जानना ही व ज्ञान है जिसके पाद अन्य कोई ज्ञान शेष नहीं रह जाता इसका क्या करोगे कैसे काटोगे अब यदि तुम कहो
01:45:11:01 कि गीता में पूर्ण ब्रह्म की जानकारी नहीं है कल हमने वेद में दिखा दिया कि वेद में जिसकी बात हो रही है वही उसी को जानना उसी को पूजा करनी विराट पुरुष और आज हमने गीता से दिखा दिया कि भगवान श्री कृष्ण हमारे अनुसार और आपके अनुसार गीता ज्ञान को कहने वाला काल वो कौन है मन है क्या है वो अभी हम देखेंगे इनके उसके अनुसार भी आप ये उसको ही जान लेना वो ज्ञान है जिसके अलावा कुछ जानना बाकी नहीं रह जाए कोई और पूर्ण परम ब्रह्म के पास जाने की आवश्यकता नहीं है यह भगवत गीता में स्पष्ट कर दिया गया अगर वह काल है ना तो वही आपका अंत है उसके आगे कुछ नहीं है अब उसको काल मान लो भगवान श्री कृष्ण मान लो परम ब्रह्म मान लो कुछ भी मान लो मगर भगवत गीता की यह लाइन आपको काटनी पड़ेगी अगर इससे कोई और आपको भगवान चाहिए तो इससे भिन्न भगवान चाहिए तो गीता से बाहर का कोई और भगवान चाहिए तो तो आपको काल से गीता से भी छोड़ दो नहीं तो उसमें भी कुछ ना कुछ मिला के एक वीडियो बनाई होगी आधे घंटे का काल से बिन्नर आपको कोई भगवान चाहिए तो आपको भगवत गीता की ये लाइन
01:46:26:01 काटनी पड़ेगी जिस लाइन को उन्होंने ये नहीं कहा आपके तत्वदर्शी ने कि काल ने अपने मन से बोला यह भी नहीं बोला इसमें भी चूक हो गई तो ये लाइन आपको आप खुद सोचो अगर आप हिंदू हो आपसे कहा जा रहा है कि आप पवित्र वेदों को देखो और पवित्र गीता को देखो पग पग पर उसका अपमान हो रहा है और फिर आपसे कहा जा रहा है कि इसको छोड़ो इसमें कुछ नहीं है ना पूर्ण ब्रह्म है ना ब्रह्म को प्राप्त करने की पूर्ण सामग्री है इसको छोड़ो और हमारे साथ चलो जेल धाम में वहां पर आपको सारे जो प्रवचन है वो प्राप्त होंगे ईश्वर को जानने के लिए और स्वयं को सोचो कि हम बहुत बड़े शास्त्रों को मानने वाले हैं मगर हो असल में कुछ नहीं कुछ नहीं हो जीरो शास्त्रों को मानने के नाम पर जीरो हो
01:47:17:20 जीरो अच्छा इसमें सातव अध्याय के सातव श्लोक में फिर उन्होने क दिया मुझसे भिन्न कोई दूसरा परम कारण नहीं है अब इसका क्या करोगे क्या करोगे इसका मुझसे भिन्न कोई दूसरा परम कारण नहीं है कह दिया तो मत पढ़ो चक्कर में कोई है नहीं टक्कर भाई अच्छा मैं इसको समरा इज कर देता हूं जरा काल इनका क्या है आपको अच्छा लगेगा तो इनकी दोरी बातें पराकाष्ठा एक तो वो आपने देख ही लिया वो क्या है वो उसका क्या नाम है फैक्ट वाइ अभिषेक फैक्ट नहीं वो क्या कहेंगे उसको फॉल्स वाइ अभिषेक
01:47:55:09 रमर भाई अभिषेक ये नाम रख लो अपने चैनल का रमर भाई अभिषेक अच्छा वो क्या कहता है पहले हमारी किसी बात को या किसी और की किसी बात को हमारी वेद में यह लिखा है तो दयानंद जी के वेद में तो यह लिखा है दयानंद जी और उसके बाद जब दयानंद जी की बात से आपकी बात को दिक्कत हो रही है अरे ऐसे नसेड़ी को तुम जी कहते हो इतनी गंदी बात उसने कही है वहां पर दोगले पन की किसी के सगे नहीं है इनका जब फायदा दिखता है तो प्रभुपाद जी के भी चरणों में लेलेट जाते हैं देखिए वो सही लिख रहे हैं फिर स्वामी दयानंद जी के चरणों में भी लेट जाते हैं और जब इनको शक इवन की इन्होने शंकराचार्य की बातों को भी माना है कि उन्होंने अपने एक जगह पर लिखा है कि पंचम वेद भी है मैंने कहा ठीक है भाई पंचम वेद है तो उसका कोई नाम होगा ना नाम पता कुछ वो जब से पिक्चर में हम लोग आए तब से उठाइए वो बात
01:48:53:00 जब से हमने आगे परंपरा की बात छेड़ दी ना बिल्कुल ब नहीं परंपरा की बात करने वाला परंपरा छेड़ दि है तो उन्होंने वो बात उठा ली पंचम वेद पंचम वेद तो मैंने पूछा उस नाम पता वो मैं जरा काल को सराइज कर दू फिर अगर कोई आया होगा बात करने तो उसको ले लेंगे काल को समरा करता हूं दो मिनट में उनी दे काल अविनाशी नहीं है पर उसका जन्म और मरण माता के गर्भ से नहीं होता इसलिए उसे अविनाशी भी कहा गया है दोहरी बात क्योंकि उसका जन्म और मरण माता के गर्भ से नहीं होता इसलिए उसको जो है अविनाशी भी कहा गया है वह बात और है कि ब्रह्मा विष्णु महेश भी माता के गर्भ से नहीं जन्म लिए मगर उन्होंने अपना आदर भाव भाव कह दिया इसलिए वह नाशवान है और यहां पर इसने अपना स्वयं का जन्म और मरण माता के गर्भ से माना तब भी य नाशवान है तो नाशवान मानोगे कैसे और जो गैया माता है माता वो अविनाशी है क्योंकि उसको वहां पर अग्न को जो है काउंटर करना है इसलिए वो अविनाशी है अच्छा आगे चलते हैं काल स्थूल शरीर वाला जो रूप है वह किसी को दिखा नहीं सकता
01:50:08:24 पर समय आने पर वह श्री कृष्ण के शरीर से बाहर निकलता है और वह बन जाता है विराट स्वरूप अपना धारण कर लेता है जबकि वह विराट स्वरूप भी किसी को नहीं दिखाता अपना वास्तविक स्वरूप किसी को ना दिखाने का उसने संकल्प लिया है और यह संकल्प घटिया भाव है उसका अविनाशी अच्छा अविनाशी घटिया भाव क्या होता है अगर भाव अविनाशी है तो जिसका वह भाव है वह भी तो अविनाशी हो गया नहीं तो जिस दिन वह विनाश होगा उसका उस दिन वह उसका भाव भी खत्म हो जाएगा तो अविनाशी घटिया भाव की इन्होंने व्याख्या नहीं की उसका भाव अविनाशी है काल घटिया अच्छा काल घटिया है मगर व भगवान है काल जो है वो घटिया है लोगों को खाता है मगर वो भगवान है काल की भक्ति से काल वाली घटिया शांति प्राप्त होती है मुक्ति प्राप्त होती है परम गति प्राप्त होती है कौन सी वाली काल वाली किससे काल की भक्ति से प्राप्त होती है और काल इसीलिए बारबार कह रहा है मेरी भक्ति करो मेरी भक्ति करो अच्छा काल श्री कृष्ण से अलग है पर अर्जुन काल को कृष्ण ही बोलते हैं जब काल कृष्ण के शरीर से बाहर निकलकर विराट स्वरूप ले रहा है उसके बाद भी अर्जुन वहां पर काल को कृष्ण ही बोलते हैं काल मन
01:51:24:13 है पर जीवों को खाता है काल मन है काल कोई वैसा कोई जीव नहीं है पर वह जीवों को खाता है दांतों में चबा आता है काल और वह स्थूल शरीर धारण नहीं कर सकता मगर वह जीवों को खाता है उसका दांत नहीं दिखाई दे भाई मन है ना मन का दांत थोड़ी ना होता है मगर उसका दांत है ठीक है काल की भक्ति से काल भी नहीं मिलता कितनी तरह की बातें काल की भक्ति काल भी नहीं मिलता काल की भक्ति करने वालों को काल खाता है जबकि काल की भक्ति करने वालों को तो काल प्यार करता है मगर उनको खाता भी है काल ने धृतराष्ट्र और द्रोणाचार्य जी को दांतों में चबा रहा था जब उसने विराट रूप दिखाया था मगर वही धृतराष्ट्र द्रोणाचार्य बाद में धृतराष्ट्र जो है वो भगवत गीता सुन रहे हैं महाभारत सुन रहे हैं और वही जो क्या कहते द्रोणाचार्य बाद में युद्ध भी लड़ रहे हैं मगर काल ने तो उनको चबा लिया था कचा है ना अच्छा श्री कृष्ण से काल अच्छा है क्यों क्योंकि श्री कृष्ण की लीलाए ऐसी है उनको फॉलो नहीं किया जा सकता मगर श्री कृष्ण से काल बुरा भी है क्यों क्योंकि श्री कृष्ण युद्ध नहीं करवाना चाहते थे व काल युद्ध करवाना
01:52:39:18 चाहता था कितना बढ़िया गोगले पन की पराकाष्ठा पराका कोई एंड नहीं है अच्छा काल के कई जन्म हो चुके हैं इसने माना कि काल के जन्म और वो माता के गर्भ से नहीं मगर काल कई बार उत्पन्न हो चुका है अर्जुन तेरे और मेरे कई जन्म हो चुके हैं तो इन्होने व मान लिया काल के कई जन्म हो चुके हैं अब इसका क्या मतलब है कि काल कई बार जन्म लिया और उसने कई बार जीवात्मा को अपने उसम फसाया यही तो मतलब हुआ इसका मतलब क्या है कि जो जीवात्मा सतलोक पहुंच जाती है काल का दोबारा जन्म होता है उसके बाद काल फिर से अपने जाल में उन्हें फता लेता है सिंपल
01:53:23:04 भाई कई बार जब काल का जन्म हो रहा है तो जो जीवात्मा जो मोक्ष को प्राप्त कर लेंगी फिर काल का जन्म होगा और फिर वो ले आएगा उनको नीचे फसा लेगा तो मोक्ष मोक्ष नहीं है नहीं तो कुछ और आंसर हो तो वो दीजिए क्या आंसर है इसका काल के कई जन्म से क्या मतलब है काल कई बार उत्पन्न हुआ कई बार अगर उत्पन्न हुआ काल तो उसने कई बार वो 21 ब्रह्मांड लिए उन 21 ब्रह्मांड में उन्होंने अपनी अपना संसार बचाया संसार बचाने के लिए उसने वहां से जीव लिए है ना तो अगर काल के कई बार जन्म हो चुके हैं तो काल का तो यही काम है काल कई बार सृष्टि बना चुका है तो सृष्टि बना चुका है काल कई बार तो जो सतलोक में रहने वाले प्राणी है उनको ला चुका है वो कई बार नहीं तो बताओ क्या हुआ काल का काल भगवान ब्रह्मा विष्णु महेश भगवान वो कैसे समझ में नहीं
01:54:16:16 आता प्राकृतिक रूप में वो जन्म नहीं लेता वो फिर भी अविनाशी है ये डेफिनेशन कहां पर है कि अविनाशी का मतलब होता है कि जो प्राकृतिक रूप से जन्म जन्म मृत्यु का धारण करने वाला नहीं है इसलिए व अविनाशी है वस्तुत व अविनाशी नहीं है जबकि सभी लोग अविनाशी है जीव तक जीव तक अविनाशी है मगर काल अविनाशी नहीं है ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी नहीं है जो गाय माता है उनका अगन का अर्थ सही वाला स्वीकार ना करना पड़ जाए इसलिए वह अविनाशी है मगर ब्रह्मा विष्णु महेश अविनाशी नहीं है दुर्गा माता अविनाशी नहीं है काल अविनाश कोई अविनाशी नहीं जी मैं कुछ कहू बोलिए य पूरा करलो इन्होने जानबूझ के डाला हैल का म जहां पर गीता से व्यक्ति को भटना हो वेदों से व्यक्ति को भटना हो काल कोड़ दो किसी प्रकार से बस काल का कांसेप्ट डाला और ये बता दिया गया है कि ब्रह्मा विष्णु महेश की भक्ति से काल के गाल में चले जाओगे पर मेरे यह समझ में नहीं आ रहा है कि ये जब कबीर की भक्ति करते इनकी क्या मृत्यु नहीं होती काल का मतलब तो समय होता है समय के अंतर्गत तो सारी चीज आती है मेज कुर्सी टेबल पहाड़
01:55:33:04 पथर जैसे बात कर रहे थी बन जाएंगे मैं समरी जरा पूरी कर लू तो अंत में क्या आया कि काल जो है वह मन है और मन का कोई आकार नहीं होता मगर काल का आकार है और काल आकार के साथ में अपना असली रूप दिखाता नहीं है वो छिपा रहता है ये अभी तक की काल की एक समरा इज है कुछ ही दिनों में एक अच्छी सी बुक आपको प्राप्त हो जाएगी जिसमें कि विधिवत इनका ये जो क्रमानुसार सारा प्रक्रिया इनकी लिखी होगी हर एक चीज का वो जो पहले जो पीडीएफ दी है उसमें केवल डिफेंस है अटैक नहीं है डिफेंस मतलब य जो जो आक्षेप करते हैं हमारे शास्त्रों में उनका निराकरण है आक्षेप का अब जो पीडीएफ उसी में अपग्रेड हो कर के आपको मिलेगी तो अब इसमें इनका तोड़ होगा इनकी हर बात का कि इन्होंने कितना गपला किया है अपने इसमें ये जीजी के में मुझे नहीं लगता कुछ बाकी रह गया अभी भी कुछ कोई मतलब बिल्कुल ही क्या कहते दवार में सर मारने वाला व्यक्ति होगा जो अभी भी यह सोचेगा कि नहीं नहीं वो शास्त्र सम्मत भक्ति कराते हैं तो कोई आया है क्या
01:56:46:14 जो इनकी तरफ से हो रामपाल दास करके कोई आया है दीपक शुक्ला जी जय श्री राम राम पांडे जी जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम गुरुदेव हा मैं थोड़ा सा हा मैं थोड़ा सा कॉल पर थोड़ा सा हम भी प्लस कर दें जी जैसे य ज्ञान का पृ 31 और 32 पर जो ये कभी कता कि काल निरंजन मन है ऐसा करके बोलता है एक बार तो अगर ये मन है तो ये जो है जब वहां से कहते हैं कि काल निरंजन और अष्टांगी दुर्गा को सतलोक से निकाल दिए और अगर शरीर में प्राण नहीं रहेगा तो मन का कोई अर्थ नहीं है मन अपने आप समाप्त हो जाएगा दूसरी बात अगर ये कहते हैं कि प्राण भी सोचता है मतलब उसमें वो जीवात्मा है उसको सोचता है उसका भी एक मन है तो सत्पुरुष ने इनको सतलोक से निकाल कैसे पाए जैसे प्राण के पास भी मन है तो वहा सतलोक में भी व जो
01:58:01:15 है मन म काल निवास करता है और हर एक जीव के पास अपना मन तो काल कितना है सबका अलग अलग प्रकार का मन ठीक है तो यह जो है सोचते मन है दूसरे कता खाता हैका जो काल है व एक शब्द है जो इन्होने यूज किया है हर जगह हमारी बात को गीता की बात को वेद की बात को काटने के लिए इतना समझिए बस और कुछ नहीं है इनका काल हमारा काल तो ईश्वर ही है वही ब्रह्मा विष्णु महेश के रूप में ईश्वर है थोड़ा सा इस हम की जो ये काल का ये कांसेप्ट लाए हैं यह बाइबिल और कुरान से लेकर के आए जो आदम और हवा की और जो काल जो शैतान है वो शैतान वाली बात जो जैसे निकाल दिया था वहां से
01:58:54:26 आवाज नहीं आ रही आपकी म्यूट हो गए हैं म्यूट हो गए हैं हा जो एक कांसेप्ट है बाइबिल और कुरान की य जो आदम और हवा को जो है शैतान ने बहका दिया था तो उसको निकाल दिया था शैतान के कारण वही चीज क्योंकि ये कबीर उसमें इस्लाम से भी इसको जो है ऐड करना चाहते थे ठीक है वो का हां वो जो काल का जो शैतान का जो कांसेप्ट है वहां से कॉपी किया गया है ठीक है मब है मगर बात ये है कि इन्होंने अगर कॉपी भी की होती तो कम से कम अपनी बात की तो रक्षा करते कि हम क्या बोल रहे क्या नहीं बोल रहे ये इन्होंने तो झूठों का पुलिंदा बना दिया पुलिंदा झूठों का पु अभी हम आज उसका एमपी फास्ट खबर का देख रहे थे तो हमको तो नहीं जोड़ा तो उसमें जो है ये बहस हो रहा था एक दीपक जी थे उसमें जो है उनसे डिबेट कर रहे थे तो वो एक यादव था उसे कह रहा था कि जो है कबीर देव हो गया ऐसा हो गया तो वहां जो है उसको मतलब बता रहे थे किय स्वामी दयानंद सरस्वती जो है उसको एक यजुर्वेद को एक जगह यजुर लिख दिए हैं ठीक है तो इस नाते जो है इस तरह से कबीर देव को कबीर हम लिख सकते हैं ऐसा जब वो कह रहे थे उसी बात से
02:00:09:26 खंडन होता है इनका जब कबीर जब यजुर्वेद को उसकी जो संधि हो के वो जुड़ा है यजुर्वेद उसको जब तोड़ोगे तो क्या बचेगा यजू यजू प्लस विसर्ग और प्लस वेद जब यजुर्वेद को हमने खोला तो क्या आया यज प्लस वेद मगर जब कबीर देव को हम खोलेंगे तो वो कह रहे कबीर देव अगर यजुर्वेद की तरह ही चलना है तो ऐसे खोलो ना कबीर देव को खोलो कवि प्लस देव कबीर कहां आया बिल्कुल बिल्कुल वही होगा लेकिन वो थोड़ा सा एक दे रहा था कि सत्यार्थ प्रकाश में स्वामी दयानंद सरस्वती ने यजुर वेद को यजुर लिख दिए हैं तो वो ये कह रहा था कि जैसे वो कर उसी तरह से हमने ठीक है यजुर लिख लेकिन व का ब कब बनता है और छोटी ई का बड़ी ई कब बनता है और व और ब अगर कह रहा मैं कह रहा हूं कि है तो वही कबीर क्यों जिसको तुम कह रहे हो जी जी जिसको तुम कह रहे हो वही क्यों कोई प्रमाण होना चाहिए ना उसका प्रमाण के लिए इनको बाहर जाना पड़ेगा अब बाहर जाने के लिए वो तत्वदर्शी बताएगा तत्वदर्शी सेट हो नहीं रहा ना तो वेद में हो रहा ना गीता में हो रहा से ठीक है अच्छा एक एक में रामपाल बोलते हैं कि
02:01:25:25 दयानंद जी को दयानंद जी को जो पकड़ रहे हैं तो दयानंद जी कोरय पकड़ भी रहे हैं तो मैं अभी यही तो कह रहे कि वो नसेड़ी है वो यह है वो वो है आपत्ति जनक बातें कर रहे हैं फ दयानंद जी इनके लिए प्रमाण कैसे हो गए बिल्कुल बिल्कुल एक बात और बोलते एक अंतिम जल्दी से बोल लीजिए आप बात हा एक बात और बोलते हैं कि ऐसा भी करते हैं कि कवि भी है वो ठीक है जैसे कबीर से जब पकड़ते हैं तो कहते हैं कवि भी है वो इसलिए वो देव है तो उसका सं विच्छेद कवि है क्योंकि कबीर देव कबीर जी एक कवि भी थे इसलिए व वही परमात्मा है वही कवि है ठीक है तो लेकिन गीता अध्याय 10 मैं ये कह रहा हूं अगर कोई ऐसा कभी हो गया हो जिसको तुम नहीं जानते तो उसका क्या करोगे ऐसे थोड़ी ना होता अ से कोई नहीं मिल रहा तो जो सामने दिख रहा है वही है प्रमाण होना चाहिए नहीं यही है तब होता है वो बात प्रमाण कते प्रमाण हां कवि कवि ही कबीर है तो गीता अध्याय 10 का 37 उसमें उन्होने कहा कि मैं उसना नाम का कवि हूं ठीक है तो मैं उसना कवि कवियों में मैं उसना कवि हूं तो वो जो काल है बो कवि शब्द पर हम लोग बहुत विवेचन कर चुके हैं
02:02:41:15 कवि शब्द कहां कहा किसकिस के लिए आया है वो भी है और अगर कवि की बात करोगे तो कवियों का कवि वेद में कहा गया है गणेश जी को कवियों का कवि वेद में कहा गया है गणेश जी को तो अगर तुम कवि की बात कर रहे हो कि कवि कहा गया तो गणेश जी ने शास्त्र भी लिखे हैं गणेश जी ने शास्त्र भी लिखे हैं ना गणेश जी शास्त्रों के रचनाकार अग अगर हम गीता कोही ले ले तो जो कते का और संसार का जो सबसे बड़ा काव्य रचना है वो है सबसे पहली महाकाव्य रामायण महाकाव्य और उसको रचने वाले वाल्मीक जी को कवीश्वर कवियों का ईश्वर कहा भी गया है
02:03:23:19 अगर हम गीता में ही ले ले तो अगर ये जो कवि बोल रहा है तो जो कहते की गीता को कालने क तो काल की पूजा करवा जी कभी मतलब कबीर है तो अगर आप फिर एक तरफ कते कबीर है फिर कहते हैं नहीं वह जो काल कहा गीता को तो जो है य काल की भक्ति करवा रहे हैं जी श हा विशाल जी जम ज श्री राम भैया प्रणाम सभी को जय श्री राम स भैया पता नहीं मुझको समझ में नहीं आ रहा पता नहीं एक आमने सामने एक युद्ध सा चल रहा है क्या भैया अभी अभी ये जो अमित दास नाम की जो व्यक्ति है ना ये लाइव अपना लाइव स्ट्रीम भी अपनी चला रहे हैं और ये जो हमारे मित्र है ना टी आर पहाड़ी जी हां हां ये उनके साथ डिबेट में लगे हुए हैं और जो यह प्रमाण टया पहाड़ जी इनको दे समझा रहे हैं वो मानने को वो राजी नहीं हो रहा है अपनी बातें में उसम लिंक में वो लिंक उसमें दिया नहीं वरना मेरे पास उसके खंडन में बहुत सारे प्रमाण मैं महाभारत से लाया हूं मैं
02:04:25:00 परन क्या करू एक तरफ पता नहीं मुझे खुद समझ में नहीं आ रहा क्या हो रहा है वो अभि नाथ तो किस बात की चिंता हम हा इतने उसमले नहीं हो जाना तर्क से आराम से सोच समझ करके जवाब देना है आपको प्रभावित नहीं होना है सिचुएशन में भगवत गीता भगवान ने पूरे पूरी भगवत गीता में अर्जुन को एक बात सिखाई है कि ना जीत में ना हार में सम बुद्धि रख सम बुद्धि समान बुद्धि चंद्रमा के समान है विशाल जी बर्मी को गुण पुत्र नच मूर्खा सते रप वो तो मूर्खों के समान है न चंद तारा बो तारा तारा कितने भी आकाश में हो चंद्रमा की अलग पहचान होती है आप ऐसे हैं शिवान जी दिखाऊ क्या महाभारत वाला महाभारत वाला दि हां महाभारत वाला दिखा दीजिए संक्षिप्त महाभारत
02:05:26:15 ज रामानंद स्वामी से आया है ज कबीर उसम अरे कौन बो मैं बोल मिनट मिनट पा कहां गए भाई मैं एक चीज बता दे रहा हूं किसी को भना सही जो अमित दस दो इनको मेरे लिए आप छोड़ दीजिएगा इनका हिसाब मैं करके रहूंगा अगली बार आएंगे य तो लि नहीं मिल रहा था टी पहाड़ी जी अकेले हैं आप मेरी बात समझ नहीं रहे हैं विशाल जी वो जोम दा स नाम का व्यक्ति है वह इसलिए नहीं आता है कि उसको हमें हमसे जीतना है वह जीतने और हारने नहीं आता है वोह केवल इस स्क्रीन पर दिखने के लिए आता है अपनी दो चार बातें बोलने के लिए आता है हां भाई देखिए कबीर ने उसे 21 ब्रह्मांड प्रदान
02:06:41:18 किए कहां से जरा ब्लू कर दीजिएगा जो पढ़ना है चलिए मैं अभी कुछ देर में आता हूं इधर ही हूं ठीक है यह आपको केवल एक डोले पन की पराकाष्ठा दिखाई जा रही है इस फिल्म में दिखाए जाने वाले सभी पात्र एवं घटनाए काल्पनिक है जो बलधाम निवासी जी के द्वारा रचे गए हैं
02:07:22:21 ये उससे भी अनर्थ पूर्ण है ओके एक म अभ ये पढ़े कहां से हा परमेश्वर कबीर साहब जी ने पूछा स्वामी जी गीता जी का ज्ञान किसने बोला स्वामी रामानंद जी ने उत्तर दिया कि श्री कृष्ण जी ने परमेश्वर कबीर साहब जी ने कहा स्वामी जी संक्षिप्त महाभारत द्वितीय खंड पृष्ठ संख्या 1531 पुराना वाला त 6 खंड वाली नहीं है अरे रुको तो 667 नया वाला में लिखा है कि श्री कृष्ण जी तो कह रहे हैं कि अर्जुन मुझे अब व गीता वाला ज्ञान याद नहीं है मैं दोबारा वही ज्ञान नहीं सुना सकता तो देखिए कबीर साहब 600 साल पहले गीता प्रेस गोरखपुर का हवाला दे रहे हैं कि उसके द्वारा जो छापी जाती है महाभारत गीता प्रेस गोरखपुर के द्वारा जो दो खंड में जो महाभारत छापी जाती है के द्वितीय खंड का हवाला दे रहे हैं अगर ये ये कहे ना वो कोष्टक में रामपाल जी ने अपनी तरफ से लिखा है तो कोष्टक के बाहर द्वितीय खंड लिखा है तो दो खंडों की महाभारत जो है उसकी बात कर रहे हैं कबीर जी 600 साल पहले और उसका सबूत देते हुए
02:08:38:14 रामानंद जी को यह बता रहे हैं कि उसमें महाभारत में द्वितीय खंड में जो गीता प्रस के द्वारा छापी जाती है उसमें तो ऐसा ऐसा लिखा है कि अर्जुन को कृष्ण ने ज्ञान नहीं बोला तो ये आपको एक बहुत अच्छी जानकारी यहां प्राप्त हुई कि 600 साल पहले जब गीता प्रेस नहीं थी उस समय भी गीता प्रस के प्रमाण चलते थे और कबीर जी अपने गुरु को यह ज्ञान देते थे यह आप लोग देख सकते हैं लिखते समय पता नहीं क्या सोच के लिख रहे थे ये लोग क्या आपको तो बहुत-बहुत धन्यवाद है शिवांश भाई कि आप इतना झेल लेते हो हमारे बस का नहीं है पांडे जी बोले जय श्री राम जय श्री राम सभी को शिवान जी मैं बस य कहना चाह रहा था कि इनके
02:09:31:13 youtube1 दो तीन अब तो अचानक से जैसे ही कि मैं अपना टाइमलाइन खोलता हूं तो कभी अमित जात जी है कभी अभिषेक है कभी एमपी फोर है आज मैंने एक सुना एक दुर्गा ठाकुर ब्लॉग करके एक य चैनल है उनका सब मुझे गाली दे रहे नहीं गाली नहीं दे रहे हैं एक्चुअली क्या हमारे हमारे विरोध में ही सब बना रहे हैं हां वो उसी उसी एजेंडे प लगे हुए हैं सारे के सारे एक ही एजेंडा है उनका कि कैसे आवाहन को रोका जाए कैसे उनके तर्को को और कुतर्क है बस मतलब सुन मब हंसी आती है मैं तो देखता भी नहीं हूं बस थोड़ा सा देख के और साइड कर देता हूं मैं कहना क्या चाह रहे हैं आज मैं दुर्गा जी दुर्गा बहन जी का वो य चैनल देख रहा था थोड़े टाइम के लिए तो किसी हमारे कथावाचक है उनका नाम याद नहीं आ रहा मेरे को तो वो रामपाल का ही खंडन करते हुए उमेश जी उमेश जी उमेश जीम आचार अमित नहीं नहीं रामचंद्र कुछ उनका नाम था रामचंद्र शेखर ऐसे कुछ करके थे वो मैंने भी पहली बार उनका वीडियो देखा था तो वह रामपाल का खंडन करते हुए बोलते कौन सा भगवान अपने नाम के आगे दास लगाता है अगर कहीं शास्त्र में ऐसा कुछ मिल जाए तो उसका
02:10:46:19 उसका वो मतलब प्रमाण देने के लिए रामचरित मानस का वाला दे रही थी बहन जी मैंने बस ऐसे वीडियो ऐसे वीडियो में जाकर मैंने एक दो कमेंट किए कि सबसे पहले तो रामपाल जी को तत्वदर्शी सिद्ध करो और कबीर भगवान को कबीर भगवान सिद्ध करो वेद के अनुसार आओ वेलकम है आपका आपका ही चैनल का हवाला देते हुए आवाहन जी के चैनल पर आओ और वहां पर यह सब प्रूफ करके दिखाओ दूसरे में कह र हम तो बड़े बड़े टीवी पर आप बड़े टीवी का इंतजाम करो छोटे चैनल पर क्या होगा हम तो वर्ल्ड लेवल वर्ल्ड लेवल पर डिबेट कर ही रहे हैं मैंने बोला कि आपका छोटा सा कमरा ही वर्ल्ड है क्या आपने उसी को वर्ल्ड मान रखा है छोटे से कमरे पर मैंने तो आज तक आपका डिबेट नहीं देखा किसी बड़े चैनल प बड़े चैनल पर बस एक ही चीज आती है रामपाल जी का जो प्रवचन है मनगण जो देते रहते हैं आप लोग उसको ग्रहण करते रहते हो सुनते रहते हो तो कहने का मतलब मे बस यही है कि इनका और उनकी बातों से क्या लगता है आप किसी को भी देखिएगा ना उनकी बातों से यही लगता है ब्राह्मणवाद का नशा उनके अंदर घोला जा रहा है जो परंपरागत जो है चीज ब्राह्मण विरोध हा मब हमारे ऊपर ठप्पा लगा जाता है कि ब्राह्मणवाद है ये ब्राह्मणवाद का प्रव है
02:12:01:24 पांडे जी जय भीम वाले हो गए ये हो गए ये बड़ा खंडन करते हमें मनोवा दी बोलते हैं एक वो शंभू जी का चैनल है आप देख लेना जय भीम से वो ब्राह्मणों को कितनी गालियां देते हैं पानी पी प करके अरे तो उनका चैनल क्यों प्रमोट कर रहे हो नाम बता के व्यूज बढ़ेंगे सर सूरज को सूरज जी वो तो मुझे पता हैम आमी वाले हैं भीम आर्मी वाले वो वो जो लोग हैं जो भीम आर्मी वाले हैं वो तो भाई पॉलिटिकल एजेंडा है उनका व वो तो खंडन खुल के करते हैं लेकिन इनका खुला हुआ नहीं है इनके पीछे की बात बता रहा हूं इनके जो मन में जो भरा हुआ है ना उनकी बात बता रहा हूं कि ये बस ये चाहते की जरूरत नहीं है राक्षस हर युग में हुए हैं इसीलिए तो कोई प्रभा
02:12:54:15 ये महाभारत के पौंड्रक है पौंड्रक ये भाई कोई गाली दे रहा है अगर ज्यादा गलत गलत तो उसको जो है आप ब्लॉक कर दीजिए कोई गाली दे रहा है र हिमत है तो डिबेट में आओ गाली देने से खाली लिखने से क्या हो जाएगा हां यहां तो हम किसी को गाली भी नहीं देते बड़ी मर्यादा में बात करते आपको प्यार से बताएंगे मैं बस ये कहना चाह रहा हूं कि भागवत के भागवत भागवत कथा जो आती है ना जिसम श्री कृष्ण की लीला है उसमें पौंड्रक नाम का एक हीरो है वहां पर वो अपने आप को कृष्ण भगवान नहीं बताता था वासुदेव अपने आप को कलवाना चाह रहा था तो वही सब चीजें है एजेंडा वही है उसको भी उस टाइम पर लाका लोग को फॉलो करते ध सुदामा जी लेकिन एक धर्म नि जो सुदामा जी थे जो उसको टक्कर देते थे उसके बहकावे में नहीं है और वो रियल भगवान जो हमारे भगवान ते उनके उनको अपना आदर्श मानते हुए ने भकाया था उनको ना काशीराज ने भड़काया था लिंक आ गया है अगर माइका लाल हो तो वो आए और यहां पर अपनी बातों को रखे नहीं आएंगे ये एजेंडा
02:14:09:18 इनका खत्म हो चुका है जो लोगों को आना था वो आकर वो सीख चुके हैं साहस दात देनी होगी बाबूराम आ गया नहीं नहीं है ये नॉर्मल ये नॉर्मल नॉर्मल डिटर्जेंट से नहीं धुलने वाले हैं इनको स्पेशल सर्फ एक्शन लो ऋण लो और इनको अच्छे से इनको लगा के उसके बाद रगड़ दो ये अच्छे से साफ हो जाए तभी ये इन दिल के नो कहते थे हमारे गुरुजी कहते एक खाली पेज है और उसपे कुछ लिख दिया है पूरा पेज भरा हुआ है अब फिर उस परे दोबारा लिखने की कोशिश करो तो समझ में नहीं आएगा तोय भी ऐसे ही है क्या करनी बार कर चुके फिर से ले क्या बाबूराम को नहीं नहीं
02:15:02:10 बाब थ मुझे सबसे सब के सब एक जैसे हैं माइंड सेट इनका ऐ बन हम तो कहते नहीं कुछ रामपाल जी के बारे में जब वो जेल में गए तो इनके आश्रम में कितनी बोल नहीं चाहते वसे सबको मीडिया ने दिखाया हमने कभी बोला नहीं चलो संत है संतों के बारे में कितने संत तो खैर वो है ही नहीं कितनी आप क्या क रहे हां बाबू राम जी दिखाइए
02:15:45:08 चेहरा बाबू राम जी हमारी पिछली बार पूरी हुई थी कि जो पूर्ण प्रमाणिक आचार्य है गुरु उसके पास जो भगवान है कबीर आपके अनुसार उसका पूर्ण ज्ञान है कि नहीं हमारी यहां पर बात खत्म हुई थी आपने कहा था नहीं मैं बताऊंगा नहीं अभी आप उसका जवाब लेकर आए हैं क्या मैं जवाब दूंगा आपको लेकिन पहले मैं अपना प्रश्न रखूंगा क्योंकि आप तो पहले अपना प्रश्न रखेंगे तो ह देंगे आप प्रश्न अपना कहां से रखने वाले हैं एक बात बताइए गीता से गीता से और वो किस संबंध में है
02:16:30:22 प्रश्न प्रश्न रखेंगे गीता से आप तो कहते हैं कि गीता हमारे खून में बहती है तो आप तो खुद जान लेंगे कि कैसा खून बता बात यह है जब हम लोग वो सारी बातें कर चुके हैं और अब हम इस पर आ गए हैं कि गीता और वेद में ब्रह्म की पूर्ण जानकारी नहीं है हम लोग वो सारी बातें करके आगे आ चुके हैं तो फिर वही बातें क्यों और अगर आपके पास कुछ गरुण पुराण की कोई ऐसी बात है जो आपको समझ नहीं आ रही है तो मैं आपको याद दिला दूं हमारे बीच में जो दूरी है हमारे बीच में जो परस्पर विरोध है वो इस बात का नहीं है कि गरुण पुराण में क्या लिखा है वो इस बात का है कि क्या जो आप कबीर कह रहे हो भगवान कह रहे हो कबीर को या रामपाल को तत्वदर्शी कह रहे हो या श्री गीता को बोलने वाले को श्री कृष्ण से अलग कोई काल कह रहे हो क्या ये तीन चीजें हमारे शास्त्रों से सिद्ध है जी तो नहीं है ना आप तो यह तीनों चीजें कहते हो कि शास्त्र से बाहर जाओ तो शास्त्र से बाहर जाने की बात आ चुकी है शास्त्र में पूरी जानकारी नहीं है काल से अन्य भी भगवान है गीता के अंदर उसको आप गहन अध्ययन करेंगे तभी तो पता चलेगा भाई गहन अध्ययन मैंने वो सारे करके आपसे खूब सारी बातें कर ली है आप तो मुझे ये बताओ क्या तत्वदर्शी जो आपके अनुसार
02:17:46:04 जो पूर्ण ज्ञानी है उसके पास पूर्ण ज्ञान है है कि नहीं ब्रह्म का यह बताओ आप देखिए मैं आपका उत्तर दूंगा तहा आप लास्ट में हटा देंगे मेरे को पहले मैं प्रश्न रखूंगा इसके बाद आप रखेंगे अच्छा आप प्रश्न रख लीजिए चलिए जो सनातन परमात्मा है संसार रूपी पीपल के वृक्ष का कौन सा विभाग है उसका और जो गीता ज्ञान देता है उसका कौन सा विभाग है संसार रूपी पीपल परीक्षा मत लीजिए आप तो यह बताइए यहां से यह सिद्ध हो रहा है वहां से वो सिद्ध हो रहा है आप यहां पर परीक्षा मत लीजिए आप अपना मत बताइए आपका सिद्धांत क्या है वो बताइए बस हम हमरा सिद्धांत यह है कि गीता के अंदर तीन भगवान बताया गया है और आप लोग आप लोग कहते हैं कि कृष्ण ही काल है काल ही कृष्ण है इसके आगे कोई भगवान नहीं है अच्छा तो हम इस इस गीता से हम सिद्ध करना चाहते
02:19:01:06 हैं कि गीता के अंदर तीन भगवान हैं जिनका व मैं कह रहा हूं उनमें से एक भगवान वो है जो श्री कृष्ण के अंदर घुसा था जिसने गीता बोली अच्छा गीता को आप प्रमाण मानते हैं जी अच्छा अगर गीता बोलने वाले को मैंने सिद्ध कर दिया गीता बोलने वाला अज्ञानी है तो आप गीता को प्रमाण मानेंगे वो अपने लेवल का अपना ज्ञान दिया है इसके बाद गीता को आप पता है गीता को प्रमाण क्यों मानते हैं आप गीता को प्रमाण इसलिए मानते हैं कि गीता को क्यों नहीं मानना है गीता में दी गई चीजों को क्यों नहीं मानना है यह साबित करने के लिए आप गीता को प्रमाण मानते हैं और उसके बाद जब हमको यह साबित कर दोगे तो अंत में आपको कहां जाना गीता से बाहर भक्ति कहां मिलेगी गीता से बाहर पूर्ण ब्रम का ज्ञान कहा मिलेगा गीता से बाहर गीता को प्रमाण मानते हो अगर मैंने आपको बता दिया कि गीता कहने वाला ज्ञानी है तो फिर गीता की कोई भी बात आपके लिए प्रमाण कैसे रह गई
02:20:14:13 म सुनो जो मूर्ख है वो कहीं भी मूर्खता कर सकता है तुमको कैसे पता उसने वहां पर मूर्खता नहीं की जहां पर तुम उसे मान रहे हो ठीक है मान लीजिए को मूर्खता किया होगा लेकिन उसने एक विचार बात है कि अगर गीता के अंदर अगर कंप्लीट ज्ञान है तो उसने अ अर्जुन को तत्व दर्शी सं के शरण में जाने के लिए नहीं कहता वो तत्वदर्शी सं कौन है भाई तत्वदर्शी संत के बारे में उसने बताया है वो पर देखो आराम आराम से बात करते हैं तुमने कहा कि अगर वो उसने पूरा ज्ञान दिया होता तो वो उसको तत्वदर्शी संत के शरण में जाने को नहीं कहता ठीक है बिलकुल ये ये सिद्धांत जो है ये कहां लिखा है गीता अध्याय चार श्लोक नंबर 33 34 आप सिद्धांत समझिए कि अगर मुझे सारी बात पता है फिर भी मैं यह बता रहा हूं कि अगर तुझे ये ज्ञान लेना है तो किस तरह के लोगों से लेना है जी ये ज्ञान किस तरह के लोगों से लेना चाहिए तो यह जो मैं बता रहा हूं मैं मेरे को ज्ञान है मैं बता रहा हूं फिर भी मैं ये बता रहा हूं कि यह ज्ञान किस तरह के लोगों से मिलता है जी
02:21:29:26 यह इसलिए बताना आवश्यक है कि जब मैं भी मैं नहीं भी होगा तो तू इस इस तरह के लोग जो होंगे उनके पास जाकर ज्ञान ले लेना ठीक है जी मगर अगर आप कह रहे हो कि अगर मुझे पूरा ज्ञान होता तो मैं किसी और के पास जाने को क्यों कहता ठीक है जी तो ये किसी और के पास जाने की जो बात है यह सिद्ध कर मुझे ज्ञान नहीं है यह कहां पर लिखा है वही चार का 34 सिद्ध करता है कि मेरे पास व कंपलीट ज्ञान नहीं है देखा मैं पूछ क्या रहा हूं यह जो बात है कि मैंने अगर यह कह दिया कि तू किसी और के पास जाकर के ज्ञान ले तो इसका मतलब है कि मैं ज्ञानी नहीं हूं यह सिद्धांत कहां लिखा है उसने गीता अध्याय आठ लोक न भाई साहब आपको मैं एक बात बताऊं मेरी बात एक मिनट आपको मैं एक बात बताऊं आपने अभी एक लाइन बोली थी अगर उसको ज्ञान होता तो वह किसी और के पास जाने को क्यों कहता यह लाइन कहां पर लिखी है जो आपने लाइन बोली है ये कहां लिखी है उसने अपने से अन्य के अन्य के पास जाने के
02:22:45:03 लिए अपने से अपने से अन्य के पास जाने के लिए 18 के 62 में भी बोल दिया अवर 15 के चार में भी बोल दिया फिर वही बात मैं यह कह रहा हूं 18 अभी आपने जो एक जो श्लोक पकड़ा है ना 434 अपने से अन्य के पास जाने के लिए उसने यह नहीं कहा तू अभी चला जा मेरे पास ज्ञान नहीं है तू चला जा उसने कहा उस ज्ञान को वहां से लेना चाहिए उसने अपने त अभी यहां से चला जा मेरे पास ज्ञान नहीं है मगर उन्होंने इस संदर्भ में कहा कि अगर मैं नहीं भी तो तब कहा पर जाना पड़ेगा तुम्ह तत्व दर्श के पास जाना पड़ेगा तुम्ह उसने उसम उसने बोला एक बात अर्जुन को अर्जुन को तत्व ज्ञानी मिल गया था क्या कि नहीं मिला था नहीं मिला था ना नहीं मिला अन को मोक्ष भी नहीं मिला नहीं मिला चलो भैया चलो मोक्ष दि हा बता अर्जुन को अगर अर्जुन को मोक्ष अगर मिला होता तो उसने नरक में नहीं जाता उस आगे लिखा है महाभारत में मिला है पांडवों को मिला है अरे महाभारत
02:24:00:12 नहीं दिखाएंगे ना ना ना ना ना ना महाभारत नहीं दिखाएंगे इनको इनके तिरछे दर्शी की किताब दिखाएंगे खोलो भैया पेज नंबर 99 ठीक हम उसको देखेंगे अरे ऐसे कैसे देखोगे उसको हम दिखा रहा हूं बिना तत्वदर्शी के चलो भैया खोलो जी जी हां गरमा गीता की अब एक बात और बता रहा हूं इनके किताबों से इनका ही वो होने लगा है ना अब देख लेना मैं चैलेंज के साथ कह रहा हूं थोड़े ही दिनों में इनकी किताबें बदलने लगेंगी इसलिए जितना हो सके इनकी किताबें सबूत बना करके रख लीजिए थोड़ी-थोड़ी जिससे बाद में अपनी किताबें पलट क्योंकि इनकी किताबों की सच्चाई बाहर आ रही है स्क्रीन शट करके र की बात आप गीता की बात करते हो अरे पूरी महाभारत में श्री कृष्ण परमात्मा है पेज नंबर पीडीएफ के हिसाब से 99
02:25:13:15 है संयोग से अर्जुन को मोक्ष वाला जो पेज है वो मुझे याद है बबली इसको ढूंढना पड़ता फर्स्ट पैरा में ही है 99 बस बस बस बस बस अर्जुन
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02:25:29:15 यज्ञ में प्रतिष्ठित पूर्व परमात्मा को ईट रूप में मानकर यज्ञ करता है तथा यज्ञों के साथ साथ वास्तविक नाम का स्मरण करके मोक्ष रूपी अवंत को प्राप्त हो जाता
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02:25:40:15 है पूर्ण परमात्मा को प्राप्त हो जाता है लो भाई पढ़ लो गता द्वारा दिया गया अर्जुन यज प्रति पूर्ण परमात्मा के इट रूप में मानकर यज करता है तथा यज्ञों के साथ साथ वास्तविक नाम का शम करके पूर्ण मो रूपी अमृत को प्राप्त हो जाता है अर्थात परमात्मा बताओ इनकी स्क्रीन बड़ी कर दो जी जी रुक जाइए पढ़ तो रहे हैं अरे भैया पहली बात तो यह है कि हमें तो हमारे मतलब का जितना होगा उतना पढ़ेंगे ना हम पूरा प हमारे पास भी तो है पास मतलब जितना होता है उतना पढ़ेंगे का यही डायलग है डायलग है जो भी किताब लते उससे कहते हमारे मतलब का जितना है उतना पड़ेंगे अच्छा ठीक है अगर आप अपनी मतलब अगर हमको दिखा देंगे अन को मोक्ष मिला पढ़ लिया तुमने पढ़ लो और अर्जुन गीता
02:26:55:25 का ज्ञान दे जो अर्जुन था उस अर्जुन को मोक्ष नहीं मिला था उसने युधिष्ठिर युधिष्ठिर के पुण्य से उसने स्वर्ग में गया था अरे मेरे भाई यह लिखा है पूर्ण परमात्मा को प्राप्त हो जाता है मोक्ष इसका क्या करें ठीक है तो पढ़ तो रहे हैं रुक तो जाइए आप भग क्यों रहे हैं भाई मेरे पास वही पुस्तक है ना आपका गीता गरिमा सनातन प ब्र परमा अर्जुन भी दो हो
02:27:40:18 गए तब तक आप महाभारत से दिखा दीजिए बोलिए अर्जुन का मोक्ष भया चा 3 पर बैटरी रह गई रुकिए भैया एक सेकंड जल्दी लगाओ भाई आज तो इन्होंने दिमाग खराब कर दिया क्या बताऊं अरे आप दिमाग खराब म करिए भाई प्रभु का नाम लीजिए अरे भैया इतना टाइम नहीं है आप पहले ढूंढ लो पढ़ लो फिर आओ दोबारा पढ़ लिए पढ़ लिए पढ़ लिए पढ़ लिए आप ऐसा मत स कि हटा देंगे तो हमारा नाम रोशन चला जाएगा आप नाम रोशन ऐसे बताइए फालतू बात मत करिए बताइए अर्जुन को मोक्ष मिला कि नहीं उसम बता उसमें बता रहा है कि पूर्ण संत से भक्ति करने पर अर्जुन का मोक्ष मिल सकता है ऐसे मोक्ष नहीं मिलेगा कहां लिखा है ये उसी में लिखा दिखा दे रहे हैं आपको अरे अर्जुन को मोक्ष नहीं मिला ये कहां लिखा है अरे उस अर्जुन को नहीं बोल रहा है किसी भी अर्जुन को बोल रहा है यहां पर अच्छा बहुत बढ़िया किसी अर्न को किसी भी अर्जुन को बहुत बढ़िया व
02:28:55:20 पर तुम बो रहे हो वो अलग अर्जुन है वो कहा लिखा है इसी पर लिख रहा है सुन लीजिए सुना दे रहे आपको हा य बोल र कि भावत है कि पूर्ण संत द्वारा दिया गया दिया पूर्ण भक्ति मार्ग ही लाभदायक है अर्जुन यज्ञ में प्र अर्जुन
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02:29:14:27 यज्ञ में प्रतिष्ठित पूर्ण परमात्मा को इष्ट रूप में मानकर यज्ञ करता है तथा यज्ञ के साथ साथ वास्तविक नाम का सुमिर करके पूर्ण मोक्ष रूपी
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02:29:24:15 अमृत को प्राप्त हो जाता है अर्थात पूण परमात्मा को प्राप्त हो जाता है वो क्या बो रहा है परमात्मा का भक्ति करेगा बताओ ये वो अर्जुन नहीं है ये बताओ इसमें उस अर्जुन को नहीं कहा जा रहा है आप कैसे बात है अब तुम जाओ य तेजी के साथ फिर आना कोई बात नहीं अर्जुन दास य इसीलिए आते आपने हटा दिया उसको हटा दिया आपने उसको तो तो आप अपना अरे भाई उसको क्यों हम लोग स्पेस दे यहां पर क्यों उसको स्क्रीन टाइम दे खामा खा वो जब कहने लगा कि दूसरा अर्जुन है दूसरा अर्जुन लिखा कहां है उसके तत्वदर्शी ने वो भी नहीं दिखा दिखा रहा है अपने मन से चाहिए हमारे लिए तो ने ल नेशन मार रखा है रामपाल जी ने कुछ नहीं समझ में आएगा इनको कुछ भी आपना कितना भी कोशिश कर लो इनकी बातो को ग नहीं ने इ के ग्रंथ खोलने इनकी स करने थी होता है चर्चा करने का तरीका ही नहीं होता य
02:30:39:15 सब चीज य चर्चा थोड़ी होती है आ अपने याद किया हुआ है जाकर य पर उल्टी कर देते कर देना ये सब थोड़ी होता है चर्चा का मतलब ये कौन सा अर्जुन है जिसको वो मोक्ष मिल गया बन रहे होंगे वो बस ये कहते हैं य से चले जाते हैं तो कमेंट कमेंट गिरी करते हैं कि आप य ऐसे ही करते हो आप हटा देते हो अरे भाई अपने बात तो रखो रखना तो सीखो कि हा बातो को कैसे रखा जाता है तर्क कैसे किया जाता है चाहे आप भाई मेरे को समझ में नहीं आता इनके जो पूर्वज थे ये क्यों इतना ब अपने पूर्वजों को मूर्ख मानना कर व क देवी जी को सुन रहा था तो क पहले के लोग अनपढ गवार थे इसीलिए वो किसी के बका में आ जाते
02:31:33:12 थेने लिखा है पूर्वजों के अनुसार कर्म करने पर ही पूर्ण मोक्ष मिलेगा उनके हिसाब से मूर्ख है इनकी हा बो विल जी महाभारत का छठ खंड है अब तो उन्होने बोल दिया कि महाभारत हमारे पास संक्षिप्त है गीता प्रस की त भी उनके टा खंड वाली आती थी अब ये देखिए मेरे पास महाभारत का स्वर्गारोहण पर्व चौथा अध्याय
02:32:09:19 येय स् उसका चौथा चौथा अध्याय स्वर्ण पर सबसे आखरी पर भारत का बा बता दे र हूं दो बातें बता दे रहा हूं ये लोग अपनी किताबें बहुत जल्द बदलेंगे पक्का पक्की बात इनकी र पर रखलो भाई जी सबूत के तौर पर सार किताब दूसरी बात एक ये है हम तो उतना ही लेंगे जितना हमारे मतलब का होगा हम तो उतना अभी जैसे होती है ना एक सेना एक सेना दूसरी सेना प अपने निशाना चलाती है फ दूसरे पक्ष की सेना उसी सेना पर अपने निशाने चलाती है वैसे ही हो रहा है एक तरफ आप इनकीम दूसरी तरफ अमित दास फेक्ट बा अभिषेक अपने अपने वीडियो ला जा रहे बस यही चल रहा है अभी तो येय में जंग चल रही है इनकी अच्छा धंधा चल रहा है उन लोगों का बढ़िया चल रहा है उन लोगों कावा जी अजी थोड़ी बदलनी पड़ेगी ठ
02:33:18:22 बता यहां से काम नहीं चलेगा क्योंकि जितने भगत आने थे ना वो आ चुके हैं वो समझ चुके हैं देखिए महाभारत गीता प्र का ये छठ खंड है स्वर्गारोहण पर चौथा अध्याय अब इसकी य देखिए स्क्रीन बड़ी कीजिए मेरी ये देखिए क्या लिखा है यह हेडिंग पढ़िए क्या लिखा है य युधिष्ठिर का दिव्य लोक में श्री कृष्ण अर्जुन आदि का दर्शन करना अब आप प बता दो आप स्क्रीन प मत दिखाओ पढ़ के बता दो
02:33:55:09 जी पहले स् में पढ़ रहा अरे भैया हमारा घर सतलोक वाले आप आ जाइए निष्ठा पूर्वक माता जी ने यदि बचपन में आपको पौष्टिक आहार वगैरह दिया हो तो आप आ जाइए ऊपर आ रामपाल जी के शरीर का दूध पिया हो तो चलिए मैं पढ़ रहा हूं फर ठीक है पढ एक मिनट देखिए आपके बाबू भाई आकर के क्या कर रहे हैं अर्जुन दो कर दिए अभी देखिए हो सकता है रामपाल जी ने ना कि हो तो गुरु विरोधी है बड़े वाले अब रामपाल दो जाए कुछ दिनों बाद जेल वाला अलग बाहर
02:34:32:26 वाला काम नहीं आ रहे इनकी पुस्तको को देख के लगता है अरे कहना क्या चाहते हो प्रमाण स्टार्ट करने से पहले एक गाने की लाइन इन लोगों के लिए जोय ये खुद नहीं बोलते लेकिन ये है वही ये अंदर से बोल बाहर से नहीं बोल सकते अंदर सेय जरूर बोलेंगे पता है वो गाने की ंग है हम पागल नहीं है भैया हमारा दिमाग खराब है है ना चलिए अब मैं पढ़ रहा हूं महाभारत स्वर्गारोहण पर्व चौथा अध्याय यर का द लोक में श्री कृष्ण अर्जुन आदि का दर्शन करना अब य वैम महाराज जन्मेजय को सुना रहे है जन्मेजय तन देवता ऋषियो और मग के मु से अपनी प्रशंसा सुनते हुए राजा यष उस स्थान पर जा पहुचे शेष भीम सेना अर्जुन आदि विराजमान थे वहां पर वहा जाकर उन्होंने सबसे पहले क्या देखा य जी ने दूसरे शलोक में प वहा जाकर उन्होंने देखा कि भगवान श्री कृष्ण अपने ब्रह्म विग्रह से अपने ब्राहमम विग्रह से संपन्न है पहले के देखे गए साद से वे पहचाने जाते हैं उनके श्री विग्रह से अदभुत दीपति छटक रही है चक्र आदि दिव्य एवं भयंकर अस्त शस्त्र
02:35:48:03 दिव्य पुरुष विग्रह धारण कर उनकी यानी भगवान श्री कृष्ण की सेवा में उपस्थित है अत्यंत तेजस्वी वीरवर अर्जुन भगवान श्री कृष्ण की आराधना में लगे हुए हैं कु कुंती कुमार युधिष्ठिर ने भगवान मधुसूदन का उसी स्वरूप में दर्शन किया पुरुष सिंह अर्जुन और श्री कृष्ण देवताओ द्वारा पूजित थे इन दोनों ने यि को उपस्थित देख उनका यथावत सम्मान किया ये दिव्य लो वो सब अपने अपने स्वरूप में आगे चलकर विलीन हो गए थे अर्जुन जैसे इ के अश थे भीम पवन पुत्र के अंश थे और जो कौर वो राक्षसों के यक्ष के अलग अलग उस रूप में व अपने वापस विलीन हो ग थ महाभारत में लिखा हुआ है ऐसा अरे तुम लोग भगवत गता की बात करते हो तुम भगवत गीता की बात करते
02:36:38:25 होत भगवत गीता के अनुसार बता दू जनक जी को मोक्ष मिला है जनक जी को भगवत गीता के अनुसार मोक्ष मिला है कहां पर है ये बात बता देता हूं जो पूर्वजों के अनुसार जो भक्ति करते ये 4 10 से 15 या सवा सवा श्लोक है उसमें जनक जी को मोक्ष मिला है उन्होने जनक जी का नाम लिया नाम अपना कबीर तो देखो अपना कवि तो वो वही कबीर है जो हम कह रहे हैं अर्जुन कोई दूसरा अर्जुन है अर्जुन कोई दूसरा अर्जुन शिरोमण कबीर दास जी को भी बदनाम करके रखा है इन लोगों ने चलिए अब कोई नहीं आ रहा आज की लाइव स्ट्रीम को समाप्त करते हैं सभी को जय श्री राम विशाल जी जय श्री राम अच्छा एक बात और कहूंगा य चैनल को बंद कराने के प्रयास हो सकते हैं इसलिए आप लोगों से निवेदन है इसकी स सबसे पहले क्या कहते हैं जो लाइक और ये कमेंट वगैरह जो पॉजिटिव होते वो करें क्योंकि य को एक मिस इंफॉर्मेशन जाती है कि ये चैनल से गलत चीज हो रही है तो आपको अपना समर्थन प्रकट करना है यह करते हुए
02:37:54:04 कि लाइक करेंगे तो चैनल को youtube2 9 की उसका कुछ परसेंटेज महत्वपूर्ण हो जाता है ठीक है उसको पहली बात तो आप मेंबरशिप लेते हो तो उसको और पता चलता है कि भाई लोगों कोय चैनल बहुत पसंद आ रहा है दूसरी बात उसके पास कुछ परसेंटेज जाता है तो भी उसके लिए हमारा चैनल इंपोर्टेंट हो जाता है तो इसलिए यदि आपके पास है एक मासिक रूप से 29 मिनिमम जो मेंबरशिप है चैनल की 9र वाली है तो व आप अवश्य ले ले ठीक है अब कोई है नहीं अब हम लोग बढ़ाते हैं काफी देर हो चुकी है विशाल जी पूरी कर अब मैं एक प्रमाण वैसे ये जो प्रमाण अभी दिखा रहा हूं मैं पहले आपको एक बार दिखा चुका हूं लेकिन अभी जो ये लोग है इनकी संतुष्टि के लिए मैं ये प्रमाण दिखाना चाहता हूं कि अब जैसे ये लोग दिखाते हैं देवी भागवत से छाट छाट के कि ब्रह्मा विष्णु महे देवी की स्तुति करते हैं हम अजर नहीं है अविनाशी नहीं है हमारी जन्म मृत्यु होती है दिखाते हैं ना अब
02:39:09:09 यह मैं जो पुराण लाया हूं यह ब्रह्म पुराण है यह पहले भी मैं दिखा चुका हूं लेकिन एक बार दर्शको की संतुष्टि के लिए आप सबके लिए दिखा दे रहा हूं ये 18 पुराण जो है उम ब्रह्म पुराण सबसे पहली गिनती में आता है गीता का पुराण है संक्षिप्त है इनको संक्षिप्त समझ में आते है ना अब ये देखिए मेरे पास इसका पेज नंबर 116 हैन बड़ी में देखिए भगवान विष्णु क्या बोल रहे हैं जो भगवान विष्णु के भक्त थे उज्जैन के राजा महाराज इंद जिन्होने जगन्नाथ जी का मंदिर बनवाया था जगन्नाथ जी का मंदिर अब देखिए अब यहां से मैं पढ़ता हूं क्या बोल रहे भगवान विष्णु भगवान विष्णु बोले मैं देवता यक्ष दैत्य देवराज इंद्र ब्रह्मा अथवा रुद्र नहीं हूं मुझे पुरुषोत्तम समझो मैं समस्त लोगों की पीड़ा को दूर करने वाला अनंत बल पौरुष से संपन्न और संपूर्ण भूतों का आराध हूं मेरा कभी अंत नहीं होता क्या बोलर विष्णु जी मेरा कभी अंत नहीं होता जिसका सब शास्त्रों में उल्लेख किया जाता है जिसका सब शास्त्र में उल्लेख किया जाता है वेदांत ग्रंथों में वर्णन मिलता है जिसे योगी जन ज्ञान गम्य एवं वासुदेव कहते हैं वह परमात्मा मैं ही हूं वह परमात्मा मैं ही हूं भगवान
02:40:25:07 अनंत कोटि ब्रह्मांड नाय प्रा अखिलेश्वर भगवान ही नारायण है अब वो बोलेंगे कि वो विष्णु नहीं है कोई और विष्णु है उनके लिए तो सब दो दो है उनके लिए उनका तो कोई है ब्रम पुराण का कौन सा पेज है य 116 116 अध्याय कौन सा है अध्याय अध्याय इसम नहीं लिखा नंबर नहीं है लिखा होगा पीछे देखो वो लिख के आता है जहां खत्म होता है वहा जहां खत्म होता है ना नहीं लिखा है नहीं लिखा है नहीं लिखा है नहीं लिखा है कहीं नहीं लिखा ठीक है तो सभी को जय श्री राम किसी भी प्रकार के मद के लिए इनका जो मन है ले सकते हैं हमारे वीडियो यहां से ले सकते हैं उनको अपने चैनल पर डाल सकते हैं बशर्ते कि हम जो कह रहे हैं उसका भाव ना बदल जाए हम जो कह रहे वही रहे उसम दवारा प्रतित प्रतिपादित है उसका खंडन जरूर होना चाहिए और सत्य की राह पर जो है सनातन को आगे बढ़ाना है आप बिल्कुल भी हमेशा बिल्कुल लाइव आ कर के इनका
02:41:40:07 खंडन करिए और इनके द्वारा जो ख्या पित है उसको दूर करना हमारा अवश्य कार्य है ताकि जो सनातनी परम भ्रमित ना हो जाए और सनातनी परंपरा आगे बढ़े और इनके द्वारा जितना भी पाखंड हो पाखंड है उसको दूर जरूर करना चाहिए हम आपके साथ है आप निश्चिंत रहिए आपके चैनल को अच्छा मिलेगा और आपसे डिबेट में अभी हमारे अच्छे अच्छे मित्र भी जुड़ेंगे इसमें कोई संशय नहीं है चलिए आभार सभी को सभी को जय
02:42:16:25 श्री पिछली बार वक्ति जो सवाल कर रहा था कि महाभारत में कृष्ण जी ने लाखों लोगों को मरवा दिया महाभारत करवा दी मिला नहीं व रामायण का प्रमाण दिखा दीजिए रता ईश्वर जब संघार करते हैं किसी का तो सिर्फ संघार नहीं करते दूसरी तरफ रक्षा भी करते हैं जैसे किसी अपराधी को पकड़ा जाता तो हजारों लोगों की रक्षा अपने आप हो जा तो भगवान कृष्ण एक उनका श्लोक है यदा यदा ही धर्म पूरे लोक का अ जा उ सते जब जब धन की हानि होती है तब तब मैं आता हूं जब जब पाप बढ़ता है तब तब मैं आता हूं दुष्टों का अंत करने आता हूं अधर्म का विनाश करने आता हूं अपने भक्तों की रक्षा करता हूं साधुओं को भय मुक्त करता हूं धर्म की स्थापना बो य
02:43:25:27 भगवान महाभारत क्यों करवाते ला मवाते नहीं रक्षा कर ह मुक्ति बोध निकालिए मुक्ति बोध राजकुमार दास आने को बोल रहे हैं मगर बहुत लेट हो चुके हैं आप जो नंबर नोट कर
02:43:59:06 लीजिए मेरा व्यक्तिगत पूरा शेड्यूल बिगड़ जाता है अगले दिन का बता गाली दे रहा थामा मांगो भाई पहले नोट करलो राजकुमार दास इसम देखिए रावण में रामचंद्र की उत्पत्ति किससे हुई है मेम मेरे द्वारा बनाए गए नियम के आधार से रावण और रामचंद्र की उत्पत्ति हुई उनका युद्ध उनका युद्ध पूर्व निर्धारित संस्कार से हुआ परमेश्वर कबीर का वचन तो तुम्हारे कबीर ने कबीर ने लड़ाई करवा दी और समझदार इनके सामने अपनी निष्ठा पूर्वक माता जी ने जिसको दूध पिलाया हो वो अगर चर्चा के र पहाड़ी जी आ गए ह महादेव र पहा जी अपनी बात पूरी कर लू आप लोग शांत हो जाए प्लीज थोड़ा सा माता जी ने निष्ठा पूर्वक जिसको दूध पिलाया है वो
02:45:14:10 चर्चा में आए हमारा नंबर नोट कर ले वहां पर एक फॉर्म मिलेगा वो फॉर्म भरे और वह चर्चा में आए नंबर है से 74836 जी पड़ी जय श्री राम अभी मैंने आपको अमित दास जी के साथ लड़ते हुए देखा दो दिन से देख रहा हूं मैं देख रहा हूं किस तरह से बदतमीजी कर रहा था शल जी मैं आपसे अलग से बात करूंगा अ ये वाली बात दोबारा मत मुझे कुछ देर बात करनी है ना वो लिक था नहीं वरना मैं भी आपके साथ आता वभी बात नहीं आप अपनी बात बोले बोलिए मैं ऐसा क्यों कह रहा हूं इसके पीछे एक रीजन है मैं बताऊंगा मैं गया था उधर मैं ऐसा एक्चुअली हुआ कि चुनौती जब देने लगे कि निष्ठा पूर्वक वाला ना तो भीतर का सनातन जाग उठता है तो होके आए अकेले ु अब गुरुकुल गोविंद जी को तो ब्लॉक ही कर दिया उन लोगों ने अभ ये उनका भय है कि क्या है मेरे समझ में नहीं आया क्यों गुरुकुल गोविंद जी ने गाली वाली दी है क्या नहीं अब वो करते सि मैं एक तंज कस रहा हूं मैं एक तंज कस र हूं तो कल भी थोड़ी देर थोड़ी बात हुई
02:46:29:15 थी आज भी और वही शास्त्रों के ऊपर ही बात हो रही थी हमारी ज्यादा ऐसा कुछ नहीं है और एक एक ही चीज को बार-बार घुमा के कह रहे थे इसलिए मेरे को थोड़ा क्रोध आ गया कितनी बार कर र मेरा मुंह थ गया बोलते बोलते आप लोग देखते क्यों देखा ही मत करो परेशान होते हो एक ही चीज बार कोई पूछेगा तो सही थोड़ी ना है बता चुका हूं मैं उस चीज को मैं चलिए आपको यहां देख के अच्छा लगा वैसे चलिए ठीक है अब आज की चर्चा को पूरा करते हैं विशेष संदेश इसमें क्या है हां यह देखिए यह भी हम अगली बार इसका चिट्टा खोलेंगे तैमूर लंग को जो राज करने का वो था ना वरदान तैमूर लंग को मुगल जो आक्रांता था वो वरदान कबीर नहीं दिया था आप सोच लो अक्रांता को वरदान हा कबीर नहीं दिया
02:47:29:19 था कब ठीक है अब हम लोग अगली बार आते हैं आज की लाइव पूरी करते हैं आने के लिएने सभी को जय श्री रामय श्री राम जय जय जय हनुमान गोसाई कृपा करो गुरुदेव i [संगीत]
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