⬜ Not used yet · 00:00:01:25 – 00:17:09:03 (17:07)
00:00:01:25 [संगीत] सभी को जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम तो हमें जो है ना आज एक कुछ सूत्र पकड़ में आ गए हैं कि वैसे देखिए जो कबीर पंथिया का ईश्वर है जो रामपाल के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो कबीर है व ईश्वर तो ईश्वर सिद्ध नहीं होता है मोक्ष मोक्ष सिद्ध नहीं होता है मिलने वाला जो धर्म है धर्म सिद्ध नहीं होता है सनातन तो सिद्ध होना बहुत दूर की बात है तो यह सब बातें तो हम कई बार कर चुके हैं कि जब भी यह बातें आती है कि ईश्वर यदि सर्व शक्तिमान है तो व क्या ये कर सकता है यदि वह अपने रूप को बदल पा रहा है तो उसका र रूप शाश्वत कैसे या वो जहां पर बैठा है सब कुछ उसने बनाया तो वो जगह किसने बनाई और फिर ये उस रूप को भी बता दिया इन्होंने कि वो भी जो है एकाद इनके ऐसे फॉलोअर आए जो मुझे लगता है कि वो रामपाल को फॉलो नहीं कर रहे या य या वो फॉलो अच्छे से कर रहे बाकी के नहीं कर रहे ऐसा तो
00:01:17:02 खैर वो यह भी मान लिया कि वो जो परमेश्वर है इनका वो सबसे पहले निराकार ही होता है वो कोई अनामी नाम का लोक है अब उसकी व्यवस्था कहां पर है क्या कहां नहीं है शास्त्रों में वो एक अलग विषय तो यह सब तो जब भी इस पर आते ना मूलभूत प्रश्नों पर क्योंकि शास्त्रों के साथ तो छेड़छाड़ कर देते हो उसमें देर लगती है आने में जगह पर आने में उसमें देर लगती है तो मूलभूत जो प्रश्न है कि आफ्टर ऑल एट द एंड आप दे क्या रहे हो क्या कभी ना बदला जाने वाला धर्म दे रहे हो संसार को क्या सर्वशक्तिमान ईश्वर दे रहे हो क्या परम स्वतंत्र मोक्ष दे रहे हो क्या सनातन धर्म दे रहे हो तो ये मूलभूत प्रश्नों का तो उत्तर कभी दिया नहीं आज तक आज तक नहीं दिया ना देंगे इन पर बात ही नहीं करेंगे हां वो शास्त्रों को यहां ये लिखा है वहां वो लिखा है य ये लिखा है तो इस तरीके की तो वो बातें जो मूलभूत प्रश्न है उसका तो कई बार हमारे दर्शकों को हम दे चुके हैं मूलभूत प्रश्नों का कोई उत्तर नहीं है संत रामपाल वालों के पास हां मगर यह शास्त्रों के साथ खिलवाड़ करने वाला मामला जो है इसमें जरूर मैं
00:02:32:09 कहूंगा कि निचले दर्जे की एक्सपर्टीज प्राप्त है इनको शास्त्रों के साथ खिलवाड़ कैसे किया जाए तो आज हम लोग देखते हैं कि रामपाल दास जी ने शास्त्रों के साथ खिलवाड़ किया है कि नहीं किया उसको थोड़ा सा हम टोले गे और जाहिर सी बात है कि जब भाई आप दूसरों के लूप पोल ढूंढने में एक्सपर्ट हो तो ऐसा तो है नहीं कि आपसे से लूल नहीं होंगे कहीं ऐसा कहीं ना कहीं होगा जब पकड़ में आएगा हैना पकड़ी है हमने अभी तक इनके शास्त्रों का बहुत गहन अध्ययन नहीं किया था आज थोड़ा सा मान के चलिए एक दो घंटे इनकी जो गरिमा गीता की है वो गरिमा जानने का प्रयास किया है अच्छा सबसे पहले तो मैं यहां से शुरू करूंगा इस बात को कि यदि हम कह रहे हैं यह वाली बात एक जगह पर हो चुकी है यदि हम यह कह रहे हैं कि गीता एक पवित्र ग्रंथ है और फिर हम यह भी कह दे रहे हैं कि उसमें कुछ बातें ऐसी है जो मन उचित नहीं है मनुष्य के द्वारा ग्रहण करने योग्य नहीं है मोक्ष प्राप्ति के में सहायक नहीं है तो फिर वह जिसमें
00:03:48:07 अपवित्र आ गई ग्रंथ में जिसमें वह फिर पवित्र कैसे रह जाता है और यदि यही मामला है कि जो चीज हमारे विचारों से मेल खाएगी या हमारे फलाने फलाने पांचवे नंबर के सूक्ष्म वेद से मेल खाएगी वही चीज हम ग्रहण करेंगे भगवत गीता की वेद की भी तो फिर उसमें दिक्कत ये आ जाएगी कि फिर तो मैं भी कुछ कुछ बातें ऐसी लिख सकता हूं जिसमें से कुछ बातें आपके सूक्ष्म वेद से मैच खाएगी और कुछ बातें जो है मैच नहीं खाएगी तो मेरा लिखा हुआ भी आपके लिए क्या पवित्र ग्रंथ हो जाएगा है ना अगर मैं दो चार पन्नों की कोई एक बुक लिख दूं जिसमें से कुछ बातें जो इनका जो सूक्ष्म वेद है इनके लिए जो अंतिम प्रमाण है उससे मेल खा जाए और कुछ बातें हैं जो मेल ना खाए तो क्योंकि कुछ बातें मेल खा रही है तो उसके कारण क्या ये मेरे लिखे हुए को पवित्र ग्रंथ कहेंगे आखिरकार मैं भी लिख पा रहा हूं तो परमेश्वर की उसमें वही है परमेश्वर की इच्छा के बिना तो एक पत्ता भी नहीं लि सकता तो उसको भी पवित्र ग्रंथी कहेंगे तो अगर पवित्र ग्रंथ की परिभाषा यही है कि उसमें भी मिलावट
00:05:03:13 हो सकती है उसमें भी गलत बातें हो सकती हैं तो फिर अपवित्र या जिसको पवित्र नहीं कहा जाएगा उस ग्रंथ की परिभाषा क्या हो जाएगी यह सोचने वाली बात है तो एक फैक्ट से तर्क से हमने चालू की आज की बात अब हम आ जाते हैं इनके सबसे बड़े जो सबसे पहला इनका जो दिक्कत वाली बात है ये कहते हैं कि जो काल है इनके अनुसार जो श्री कृष्ण से अलग वाला काल है और वो जो है उसको कई श्लोकों में इन्होंने भी अविनाशी माना है जैसे की बात करें कहां-कहां पे अविनाशी है इनके ही द्वारा तो इनकी गीता का पहले आपके पास वो जय दयाल गोविंद का वाली गीता है क्या तत्व विवेचन नए संस्करण में ये बा है मेरे पास है जरा शो कर दीजिए
00:06:15:21 7.25 तो सा 24 में क्योंकि गीता बोलने वाला काल है तो वह स्वयं को अविनाशी कह रहा है और सा 25 में भी वो स्वयं को अविनाशी कह रहा है तो काल ने स्वयं को अविनाशी कहा जन्म ना लेने वाला कहा सा 24 में उसने कहा कि जो मुझे मानव देह में इनके अनुसार अभी बात कर रहा हूं भाई वो हमारे श्री कृष्ण है जो बोल रहे हैं भगवत गीता को मर अभी मैं आपके फैक्ट के द्वारा आपकी बात का वो बता रहा हूं कि 7 24 में भगवान श्री कृष्ण के अंदर से इनके अनुसार जो काल बोल रहा है ऐसे बुक्ति खानी तो वो तो मैं भी दिखा देता अच्छा वो शेयर करना है क्या रुक हां रहा स्क्रीन शेयर करने में थोड़ा आनंद है वो आनंददायक होता है थोड़ा अभी कर रहा हूं आ रा
00:07:14:16 है हम तब तक मैं बता देता हूं पढ़ के बता देता हूं 724 में क्या लिखा आज बहुत बहुत इंटरेस्टिंग होने वाली है आज बहुत बढ़िया लोगों को बहुत कुछ जानने को मिलेगा अभी तो केवल वही दिखता है ना वो क्या कहते हैं कि इधर से आदान प्रदान वाणी का आदान प्रदान ही दिखता है मगर आज कुछ इंफॉर्मेशन भी मिलेगी अभी तो यही दिखता है कि भाई उसको कैसे पटक पटका गया फलाने तर्क को कैसे निरस्त किया गया तो बुद्धि हीन पुरुष मेरे अविनाशी परम भाव को ना जानते हुए मन इंद्रियों से परे मुझ अब यहां पर इन लोगों ने जो इनका भाव चल रहा है उस हिसाब से यहां पर जगह जगह पर इन्होंने जहां पर सच्चिदानंद संस्कृत में नहीं लिखा है सच्चिदानंद परमात्मा वहां पर इन्होने गीता प्रश् में यूज किया है क्योंकि इन्होंने कहीं अपना वो दिया है कि हमने सच्चिदानंद क्यों यूज किया व उसका आधार प्रमाण दिया है मगर अगर यहां पर काल बोल रहा है इनके हिसाब से है ना
00:08:29:19 तो वो क्या कह रहा है काल बुद्धिहीन पर पुरुष मेरे अविनाशी परम भाव को ना जानते हुए मन इंद्रियों से परे मन इंद्रियों से परे काल जो है व मन इंद्रियों से परे है है ना मन इंद्रियों से परे मुझ सच्चिदानंद परमात्मा को मनुष्य की भाति समझकर परमात्मा छोड़ दो परमात्मा मत मानो भाई आपके अनुसार भी बोलू तो क्या लिखा है बुद्धिहीन पुरुष मेरे अविनाशी परम भाव को ना जानते हुए मन इंद्रियों से परे मुझ को मनुष्य की भाति जन्म लेने वाला व्यक्ति भाव को प्राप्त हुआ मानते हैं यानी कि क्योंकि वह मानव देह में है काल इस समय श्री कृष्ण के रूप में तो यहां पर इन्होंने यह माना है कि काल यह कह रहा है कि मैं तो अविनाशी हूं सा 24 में इन्होंने माना है भगवत गीता 7 24 दिखा दीजिए
00:09:53:28 इनको क्या लिखा है बुद्धिहीन पुरुष अभी मैं वो जो एक शब्द है ना अनुत्तम को बाद के लिए रखूंगा अनुत्तम वाला शब्द वो भी एक अच्छा चैप्टर है आज का तो बुद्धिहीन पुरुष मेरे अविनाशी परम भाव को ना जानते हुए मन इंद्रियों से परे मुझको सच्चिदानंद परमात्मा हटा दिया इनके अकॉर्डिंग कर दिया मुझको मनुष्य की भाति समझकर जन्म लेने वाला व्यक्ति भाव को प्राप्त हुआ मानते हैं तो यहां पर उन काल को जन्म लेने वाला मानने वाला मानने वाले लोगों का खंडन किया जा रहा है कि और काल को अविनाशी ना मानने वाला मानने वाले लोगों का खंडन किया जा रहा है इस श्लोक में इसी प्रकार से सा 25 में भी इन्होंने इस काल ने स्वयं को इनके अनुसार जो काल है उसने स्वयं को कहा है अविनाशी वो क्या कहा है कि अपनी मैं अपनी योग माया से छिपा हुआ मैं सबके प्रत्यक्ष नहीं होता इसलिए यह अज्ञान समुदाय मुझ जन्म रहित अविनाशी परमेश्वर को नहीं जानता अर्थात मुझको जन्मने मरने वाला समझता है
00:11:09:22 तो यहां पर दो चीजें आ गई कि काल का ना तो जन्म होता है ना ही म मरता है क्योंकि वह अविनाशी है ठीक है अब भैया इसको जरा इनकी गीता दिखा दो आप ऑपरेटर महोदय इनकी गीता क्या कहती है पेज नंबर इनकी गीता का खोलना है आपको 40 45 45 वा पेज खोलिए इनकी गीता का नहीं 45 वा नहीं
00:11:48:10 सॉरी तीसरा अध्याय चौथा चौथे श्लोक पर जाना है 45 नंबर पर देखिए क्या हो रहा है अब सबसे पहली बात तो आती है हां यह 45 एक मिनट मुझे पढ़ने दीजिए क्या लिखा है ये एक तो इन्होंने इतनी इसमें वो की है सीधे-सीधे अपना भाष्य नहीं लिख सकते हैं कि गीता का अर्थ करके रख दे दूसरे का आधा टीटर आधा बटेर करना है ऊपर जाइए भैया थोड़ा बिल्कुल
00:12:26:21 हां रुक रुक रुक रु रुकिए रुकिए हा यही बिल्कुल सही जगह पर आ गए हम लोग अच्छा इससे पहले थोड़ा आगे चलिए 4.5 देख ले पहले और आगे और आगे अभी तीसरा ही चल रहा है चलिए थोड़ा तेजी से तीसरा अध्याय देखिए हेडिंग आ रही ना पर अभी चौथा अध्याय आ जाएगा अभी और ऊपर जाइए और मतलब चलते जाइए जिस दिशा में चल रहे उसी दिशा में चलिए आज इनकी गरिमा गीता की देखिए कितनी गरमा रखते हैं यह गीता की मतलब य क्या करते हैं अच्छा अच्छा बोल के उसका खंडन करते हैं और चलिए तेजी से चलिए अभी इन्होंने बीच में बहुत सारी अपनी मन की मन गणन बातें कर दी है इसमें
00:13:30:07 और तेजी से चलिए थोड़ा अभी लंबा है चैप्टर अभी भी तीसरा ही चल रहा है और चलिए कौन से चैप्टर में है चौथा फ फोथ चैप्टर जब फोर्थ आ जाएगा फोर्थ का पांचवा श्लोक हम देखेंगे फोर्थ आपका मैं बताता हूं फ आपका है पेज नंबर 94 प आ जाइए सीधा अच्छा आपके पास भी है ये वाली गीता गमा गीता अरे वाह क्या बात है मैं कर दू शेयर हा ये आ गया 94 प 94 प आ तो आप ही को कर देना चाहिए हा तो 94 में आप अब यहां पर गीता ज्ञान बोलने वाला भी ज जन्मता मरता है ठीक है तो इन्होंने यहां पर उसे जन्मना जन्मना जन्म लेने वाला और मरने वाला मान लिया और जबकि वो जो सातवा अध्याय 24 वा श्लोक दिखा दीजिए वहां
00:14:45:09 पर वो क्या कह रहा है मैं अविनाशी इन्होंने भी माना है कि वो अविनाशी है अगर दिखा सकते जल्दी से तो दिखा दीजिए नहीं मैं सराइज करके बोल दूं रहने दीजिए हटाइए हमें ले आइए मुख्य पटल पर तो इन्होंने यहां पर उसको जन्म लेने वाला और मरने वाला मान लिया जबकि वह स्वयं को सा 24 और 72 में जन्मने मरने के रूप में समझने वालों का खंडन कर रहा है अगर इनका वह काल है दूसरी बात उसने स्वयं को अविनाशी भी कहा है हां अविनाशी परमेश्वर मत लीजिए मगर उसने स्वयं को अविनाशी कहा है और यह संस्कृत के शब्द भी देखते हैं तो इनको संस्कृत का शब्द दिखा दो वयम ये दिख रहा है लास्ट में मा माम ये अवम अ वयम का अर्थ क्या होता है अविनाशी ठीक है बकल जिसका व ना हो अवम ठीक है
00:16:01:18 तो सा 25 में काल ने स्वयं को अविनाशी मान लिया स्वयं को अविनाशी घोषित कर दिया और जन्म मरण नहीं होता है यह भी घोषित कर दिया सा 24 में भी कर दिया और और इसके अलावा भी अनेको नेक जगह करा है अब इनकी गरमा गीता की पर जाइए तीसरे अध्याय के जहां अभी पहले थे ना हम तीसरे अध्याय के चौथे 14 श्लोक पर जाइ बहुत लंबा है इन्होने बीच में बहुत खिचड़ी पकाई है ठीक है तीसरे अध्याय के 26 में श्लोक पे आ गया 24 में जाना है हां 24 24 नहीं 14वां चवा 13 14 वही होगा एक साथ ही होगा
00:16:47:00 वो एक पता नहीं ये रहा 14 हां यही है ना हां यही अब यहां ये क्या कह रहे हैं इसको देखते हैं कि प्राणी अनन से उत्पन्न होते हैं अन्न वर्षा से उत्पन्न होता है वर्षा यानी वृष्टि
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→ Used in: A · Live गीता के नाम पर रामपाल के बोलबचन अध्याय 3 Ep-4 #satlokashram at 55:13 ↗
00:17:09:03 यज्ञ से यानी धार्मिक अनुष्ठान से होती है यज्ञ यानी धार्मिक अनुष्ठान शास्त्र अनुकूल कर्मों से सफल होते हैं ठीक
⬜ Not used yet · 00:17:22:20 – 00:37:10:04 (19:47)
00:17:22:20 है मैं भी एक मिनट खोल ू इसमें जय दयाल गोविंद का जी में अब इन्होंने कारण कारण बता है कि जो ब्रह्म है अंततोगत्वा व अविनाशी नहीं है कुल मिलाकर मैं आपको यह बताना चाह रहा हूं कि ब्रह्म को या काल को जो इनका काल है जो कि श्री कृष्ण से अलग है उसने यदि स्वयं को सा 24 और 72 में अविनाशी कह दिया इन्होंने भी उसको मान लिया कि वह अविनाशी है जन्म लेने वाला नहीं है मरने वाला नहीं है तो अब ये तीसरे अध्याय के चव श्लोक में जब ती ब्रह्म को उत्पन्न होने वाला दिखाते हैं अपनी बात को काटने काट भी रहे हैं और अपनी बात को बचा भी रहे हैं कैसे बचा रहे हैं क्योंकि भाई ब्रह्म अगर अविनाशी हो जाएगा तो वो ब्रह्म से अलग एक परम अक्षर ब्रह्म कैसे सिद्ध होगा कोई तो फिर यहां पर ब्रह्म को परमात्मा से उत्पन्न होने वाला बताने के लिए क्या कर रहे हैं कि जो वृष्टि होती है व यज्ञ से होती है और जो यज्ञ होते हैं यज्ञ भेद जो कर्म होते हैं तो तो ब्रह्म का जो अर्थ है ब्रह्म का अर्थ तीसरे अध्याय के 14वें
00:18:37:24 श्लोक में ब्रह्म का अर्थ लिया है वेद क्योंकि वेद भी ब्रह्म स्वरूपी है भगवत स्वरूपी है है ना निश्वास रूप वेद है कई जगह शास्त्रों में वर्णन आया है तो यहां पर जो अन्य भाष्य का हैं उन्होंने ब्रह्म का अर्थ वेद माना है कि वेद से उत्पन्न होने वाले यज्ञ यज्ञ कर्म और यज्ञ कर्म से होने वाली वृष्टि और वृष्टि से उत्पन्न होने वाले उत्पन्न होने वाला अन्न और अन्न से उत्पन्न होने वाला प्राणी ऐसे ये क्रम है तो यहां पर इन्होंने जब ब्रह्म शब्द इन्होने पा लिया अपने मन का तो उस ब्रह्म शब्द का अर्थ जो है वो यह सिद्ध करने के लिए कि भाई ब्रह्म को उत्पन्न करने वाला जो है वह सर्वव्यापी परम ब्रह्म है तो उन्होंने ब्रह्म का अर्थ जो है वो वेद ना लेकर के ब्रह्म का अर्थ अपना वाला काल ले लिया तो अब ले तो लिया इन्होंने उत्पन्न कर दिया उसे मगर प्रॉब्लम ये है कि सा 24 और 725 में वो जब अविनाशी है तो फिर ये तीन 14 के आधार पर आप ब्रह्म को उत्पन्न होने वाला या नष्ट होने वाला सिद्ध कैसे कर सकते हैं इसके लिए
00:19:53:25 आपको मानना पड़ेगा कि तीन वो इसके लिए आपको मानना पड़ेगा कि 7 24 और 725 में गीता में झूठ लिखा है वह अविनाशी नहीं है वह जन्म मृत्यु से बाहर नहीं है हो गया तो अब क्या हुआ आपने अपने पवित्र ग्रंथ को कहीं पर झूठा साबित कर दिया एक जगह नहीं है ये व अनेका अनेक जगह 35 श्लोक बहुत कम है उसके हिसाब से 5 पर जो बोला गया है वो बहुत कम है तो पहली बात तो यह आ जाती है कि काल यह अविनाशी भी है और फिर ये अब काल को ही विनाश वान भी सिद्ध कर देते हैं काल जो है जन्म और मृत्यु से परे भी है और फिर ये काल को ही जन्म मृत्यु वाला सिद्ध करने का प्रयास करते हैं अब प्रयास करने के लिए जो तर्क देते हैं वहां पर तीन 14 में वो यह तर्क देते हैं कि वो जैसे कोई माता के गर्भ से जन्म लेता है उस तरह से जन्म नहीं लेता इसलिए उसे
00:20:56:10 जन्म ना लेने वाला कहा गया गया है क्योंकि वह माता के गर्भ से जन्म नहीं ले रहा है मगर ऐसी कोई व्याख्या शास्त्र में नहीं आई है कि माता के गर्भ से जो जन्म नहीं लेगा उसको जन्म लेने वाला नहीं माना जाएगा वह उत्पन्न हो रहा है तो उसके लिए भी आविर्भव तिरो भाव यूज हो जाएगा और अगर आविर्भव तिरो भाव यूज हो रहा है तो आविर्भव रो भाव यदि यूज हो रहा है तो क्या होगा कि उस का अर्थ जन्म मृत्यु मान लिया जाएगा वो कैसे माना जाएगा कि जो ब्रह्मा विष्णु महेश की उत्पत्ति देवी भागवत में बताई गई है जहां पर वो कर रहे हैं कि मैं हम लोग आप ही से उत्पन्न होते हैं वो माता के गर्भ से उत्पन्न नहीं होते हैं वो माता की इच्छा शक्ति से संकल्प मात्र से उत्पन्न होते हैं माता के गर्भ से उत्पन्न नहीं होते हैं माता उनकी रचना करती है ठीक है मगर वहां पर जब वो अपने आप आविर्भाव तिरो भाव कहते हैं अपना आविर्भाव कहते हैं तो उसको आप जन्म मानते हैं ये तो ये रही बात उसको अगर लीला पूर्वक मान भी लोगे कि वह जन्म ही है माता के गर्भ से ही जन्म ले रहे हैं मगर माता के
00:22:11:13 गर्भ से जन्म लेने वाले को यहां पर कहा गया है कि जन्म और मृत्यु से रहित है ये इस शास्त्र में कहीं नहीं लिखा है जिस शास्त्र को आप प्रमाण मान रहे हैं तो पॉइंट ये आता है कि जब वो अपने और सबसे एट दी एंड जब उसने अपने आप को अविनाशी कह दिया तो फिर उसके कई मेरे और तेरे बहुत से जन्म हो चुके हैं 4.5 में इसको आप कैसे रख सकते हैं फिर वो या तो वह काल नहीं है जो यह कह रहा मेरे और मे मेरे और तेरे बहुत से जन्म हो चुके हैं और या तो व वो काल नहीं है जो कह रहा है कि मैं अविनाशी हूं तो यहां पर आपकी जो चीजें आपस में क्लश हो रही है आपकी चीजें यहां पर आपको दोनों में से एक बात को झूठ मानना पड़ेगा तो आपने अविनाशी को झूठ मान लिया क्योंकि उससे परम कोई ईश्वर आपको सिद्ध करना था तो इसलिए आपने अविनाशी को झूठ मान लिया तो यह भाई इन्होंने पवित्र ग्रंथ के साथ छेड़खानी की पहली बात ठीक है हां रामपाल वालों को लेंगे अभी अब इसमें हम लोग वो जो 7.25 अभी खोला था उसको जरा दोबारा खोलिए उसमें एक बात और है मजे
00:23:19:00 की 7.25 जय दयाल गोविंद का वाला जो अभी पंडित जी खोल रहे थे हां अ 7.25 खोलना है हां हां छटा अध्याय 81 हम ये आ जा पांचवा दवा 13वां
00:23:56:08 सवा ये लीजिए 24 25 ये रहा अब देखिए इन्होंने दोनों में से एक बात को देखिए पहली बात तो यह है कि मैंने कई बार कहा है कि हमारे शास्त्रों में लिखा हुआ है कि हमारे शास्त्रों में लिखा हुआ है यदि दो जगह दो तरह की बात आ रही है तो उनमें से किसी एक बात को नहीं ले सकते आप दोनों को ही लेना पड़ेगा तो इन्होंने क्या किया कि एक जगह की बात से दूसरी जगह का खंडन मान लिया और एक जगह तो अभी अभी अभी लिखा भी है अभी तो ये घुमा फिरा के कह भी देंगे कि हमने खंडन नहीं माना है मगर एक जगह तो इन्होंने लिखा है कि हा भाई वो जो वो खंडन हो जाता है उस वाले से इस वाले का खंडन हो जाता है अच्छा जब दो जगह अलग-अलग तरह की बातें आ रही है और इस बात से उस बात का खंडन हो रहा है तो वही बात क्यों मानी जाए उनमें से जो आप कह रहे हो वो बात क्यों नहीं मानी जाए जिसका आप खंडन कर रहे हो ये प्रॉब्लम आ जाती है तो सा 24 में देखिए क्या लिखा है कि बुद्धिहीन पुरुष मेरे अभी भी मैं उस वर्ड को छोडूंगा अनुत्तम वो बात के लिए रखेंगे हां अभी लिंक दिया जाएगा थोड़ी देर थोड़ा शब
00:25:11:25 रखें थोड़ा सा धैर रखें भैया भाई आपकी आवाज चली गई सा 24 तो सा 24 में ध्यान से पढ़िए क्या लिखा है बुद्धिहीन पुरुष मेरे अविनाशी परम भाव को ना जानते हुए मन इंद्रियों से परे अब यह बताइए क्या इनका जो काल है अगर यह कह रहे हैं काल है वह मनुष्यों को खाता है तो क्या वह मन इंद्रियों से परे है यहां पर काल के लिए चीज ये आई है जगह अव्यक्त और इसको इन्होंने भी माना है काल को कई जगह मन इंद्रियों से परे तो क्या काल मन इंद्रियों से परे है जब आप कह रहे हो कि वह खाता है तो जब वह आपको खाने आएगा आपको पकड़ेगा आपको आपको उसकी छुअन अनुभव होगा आपको उसका तो वह तो आपकी इंद्रियों का विषय हो गया तो यह कौन सा काल है जो मन इंद्रियों से परे
00:26:26:26 है यानी कि ये आपका वाला काल नहीं है जो लोगों को खाता है या जो अन्य कार्य करता है क्योंकि यह जो है अगर मान लो दिखाई नहीं दे रहा केवल वो बात एक अलग है कि दिखाई नहीं दे रहा मगर मन इंद्रियों से परे की जब बात आ जाती है तो मन इंद्रियों से परे के रूप में तो भाई वो किसी भी प्रकार की इंद्री का विषय नहीं होना चाहिए जैसे वायु है वो भी हमें दिखाई नहीं दे रही है मगर वो हमारी जो स्पर्श इंद्रिय है उसका विषय है वायु सही कह रहा हूं ना मगर यह तो मन इंद्रियों से परे लिखा है तो मन इंद्रियों से परे जो काल है उसके लिए यहां पर लिखा हुआ है अव्यक्त किसी भी प्रकार से एक तो यह बात हो गई अब बात करते हैं फेवरेट टॉपिक अनुत्तम बहुत चिल्लाया जाता है अनुत्तम के बारे में ठीक है यह कहते हैं अनुत्तम का मतलब है जो उत्तम नहीं है यहां पर काल को कहा गया है कि वो उत्तम नहीं है वो अश्र है व निम्न है अच्छा पहली बात तो ये है कि अनुत्तम का जो उत्तम
00:27:42:02 शब्द है अगर उत्तम का मतलब श्रेष्ठ है तो जो क्या कहते हैं ये उत्तम का विलोम होगा वो होगा निम्न विलोम शब्द उत्तम श्रेष्ठ है तो उत्तम का विलो विलोम शब्द क्या हुआ निम्न अब इसमें इन्होंने काल के लिए जो शब्द आया है वो है अनुत्तम तो हम लोग ये शिवराम आपटे जी की डिक्शनरी है ये भी अवेलेबल है क्या आपके पास बोल रहा हूं बोल रहा हूं तो मैं आपको बता देता हूं कहां पर है
00:28:24:27 अनुत्तम अनुचिंता अनुदान अनुत्तम य पेज नंबर 37 पर है यम य है ना वमन शिवराम आपटे जी हा वामन शिवराम आपटे जी की डिक्शनरी पेज नंबर 37 प्र संख्या ये रहा अभी आज कीय जो मैं जोय जो अभी एक दो घंटे की जो सामग्री लाया हूं य मोटे मोटे तौर पर जो मैंने अध्ययन कर पाया इनका उसी में इतनी प्राप्त हुई है कि
00:29:14:28 अभी वह उसी में जो मुझे सामग्री प्राप्त हो गई है वह अभी एंड होते होते बैंड बच जाएगा टिल द एंड बजेगा बैंड यय श हा 37 अनुत्तम हा अनुत अतम बोला ना मैंने अनुत्तम का अर्थ लिखा हुआ है जिससे अच्छा कोई और ना हो यह शिवराम अप की वही डिक्शनरी है जिस अ दिखाते जबक वहा पर चलना भी लिखा है पधार भी लिखा है पहुंचना भी लिखा है मगर यह वहां पर एक ही अर्थ दिखाते हैं जाना और दूसरे किसी अर्थ पर ध्यान मत दो यहां पे यहां पर जो है इसका जो प्राथमिकता से जो अर्थ लिखा हुआ है सीधे-सीधे जिससे अच्छा कोई और ना हो मैं दिखा दूं क्या अरे मैं शेयर तो कर रहा हूं अच्छा शेयर हो नहीं रहा है अ अरे यार अरे अरे मैं कब से दिखा रहा हूं ये देखिए हे भगवान ये देखिए ना जिससे अच्छा कोई जिससे अच्छा कोई और ना हो जिससे बढ़िया कोई और ना हो सबसे अच्छा यहां पर बढ़िया
00:30:30:16 यहां पर काल से प्रमुख रूप से सर्वोपरि तो यहां पर बस बस करिए तो यहां पर काल के लिए अनुत्तम शब्द आया है अब जब भैया इनका सा 24 दिखा दो जरा इनकी गीता का गमा गीता का सा 24 दिखा दो अगर उत्तम का विलोम अर्थ लिखना भी होगा तो अधम लिखो निम्न लिखो मगर यह जो है उत्तम का विलोम अर्थ बनाएंगे अनुत्तम छवा अध्याय सातवा अध्याय अब सिमरा आप इनके लिए प्रमाण नहीं रह गए तो बात य आती है अगर ये क्लेम करते हैं हमको संस्कृत नहीं आती है तो फिर इनको अनुत्तम का ये पता कहां से चला फिर और यह जो करके गए हैं इस जो व्यवस्था है इसमें इतनी खिचड़ी पकाई है इन्होंने गरमा गीता की में यह खुद पूरा भाष्य क्यों नहीं लिख दिया इसलिए नहीं लिखा कि संस्कृत आती नहीं है भाई हा य सा में कह रहे हैं ब्रह्म कह रहा है कि मूर्ख मेरे अति गंदे अटल
00:31:45:26 भाव को अब देखिए अति गंदे यह शब्द की संस्कृत वहां पर कहां है अच्छा यहां पर इन्होने इसको अविनाशी माना है देख लीजिए क्या माना है काल रूप को नहीं जा मुझ अव्यक्त अदृश्य मान अर्थात योग माया से छुपे हुए को व्यक्त श्री कृष्ण के रूप में प्रकट हुआ मानते हैं अर्थात मैं ही मैं ही श्री कृष्ण मैं श्री कृष्ण नहीं हूं य अपने चलो ठीक है कर दिया ठीक है अनुत्तम अविनाशी लो अविनाशी तो इन्होंने भी मान लिया यहां पर अविनाशी मान लिया ना बिल्कुल जब इन्होंने अविनाशी मान लिया तो फिर उसकी जन्म मृत्यु होने वाला उसको क्यों मान रहे हो अविनाशी का अर्थ इसका कभी विनाश नहीं हो सकता और तो और फिर तुम वहां पर यह भी कह रहे हो कि क्योंकि उस तरीके से जन्म नहीं होता है तो भैया महाभारत में कल हमने प्रमाण दिखाया था अभी दिखा देते हैं दोबारा क्या प्रमाण है कि भगवान वासुदेव जिनकी शरण में जाने के लिए इस भगवत गीता में कहा गया है सा 19 में कि वासुदेव ही सब कुछ है वही सर्व शक्तिमान सर्वव्यापक वासुदेव
00:33:01:22 महाभारत आदि पर्व 63 वा अध्याय 98 से 104 श्लोक है उसमें वह देवकी मां के गर्भ से जन्म लेते हैं दिखाई जन्म होता है मगर वह असल में प्रकट होते हैं व जैसे आपको कह रहे हो ना कि वो इस तरह से जन्म लेने वो उस तरह से जन्म लेने वाला नहीं होता है वो सिर्फ व्यवहारिक जगत के लोगों को ऐसा लगता है कि उनका जन्म हुआ भगवान सदा प्रकट ही होते हैं तो सबसे पहली बात इन्होंने अपने उसको काट दिया इन्होंने अनुत्तम का गलत अर्थ लिख दिया कि अनुत्तम का मतलब है सबसे गंदा दूसरी बात अव्यक्त जो अव्यक्त और छुपा हुआ होना चाहिए वह केवल आंखों से छुपा हुआ नहीं होता है वह हर प्रकार से छुपा हुआ होना चाहिए ना ऐसा थोड़ी ना है कि और हर प्रकार से छुपा हुआ यानी मन से छुपा हुआ स्पर्श इंद्री से छुपा हुआ हर प्रकार से छुपा हुआ होना चाहिए दूसरी बात यह है कि यह कहीं पर गीता प्रेस के ग्रंथों का हिंदी अर्थ चेक नहीं करते हैं कि वहां पर संस्कृत के शब्द क्या लिखे क्योंकि इनके मन की बातें हैं जैसे देवी भागवत का इन्होंने संक्षिप्त पढ़ा है संस्कृत पढ़ी नहीं है तो इन्होंने क्यों नहीं चेक किया कि कहीं यहां पर हम जो अर्थ ले रहे
00:34:16:25 हैं वो वहां संस्कृत के शब्द है कि नहीं अपने मन से क्योंकि अपनी बातें हैं इसी प्रकार से ब्रज शब्द के मामले में उंगली उठाते हैं गीता ब्रज ने गलत किया है अनुत्तम पर इन्होंने शिवराम आपटे पर भी प्रश्न उठा दिया अनुत्तम शब्द के अर्थ में शिवराम आपटे भी प्रश्न उठा दिया तो प्रश्न आता है कि इनको ये संस्कृत का ज्ञान हुआ कहां से जब इनको संस्कृत आती नहीं है तो फिर इनके लिए प्रमाण क्या बचा किस पर निर्भर करते हैं संस्कृत के लिए सवाल नंबर एक दूसरा इन्होंने कहा
00:34:49:26 कि ब्रह्म को एक जगह जब आप अविनाशी मान लेंगे तो दूसरी जगह उसको जो है परमात्मा के द्वारा विनाश होने वाला या फिर परमात्मा के द्वारा उत्पन्न होने वाला आप कैसे मान रहे हैं जब व अविनाशी है तो ठीक है तो इसका कोई ठोस वो नहीं है आगे चलते हैं अब आप जो है पा 29 खोलिए देखिए मिलावट देखिए 529 मैं पढ़ दे रहा हूं आप जो है उनकी खोलिए रामपाल वालों की
00:35:54:04 हेलो आवाज आ रही है मेरी नेक्ट हो गए क्या हम लोग आ गए 529 पर आ जाते हैं इन्होंने यहां पर एक शब्द है ऋषि वाला री है और रक्षति इसका अर्थ यहां पर इन्होंने गवा देना किया है कहां कौन सा है पेज नंबर 126 निकालिए यह तो अभी बहुत थोड़ी सी चीजें है भाई यह भी बहुत थोड़ी सी चीजें अभी जब इसका गहन अध्ययन करके आएंगे तब तो बात ही अलग हो जाएगी अगर आपकी ये ठीक से मतलब पूरा पढ़ लिया तो पता नहीं कितनी चीजें निकलेंगी 146 निकालिए य खोलो तो 126 ना 529 ये रहा हा ये ये आ गया हां ठीक है तो यह इनका गरिमा गीता की रामपाल दास जी के द्वारा प्रकाशित गीता है इसमें पा 29 में अनुवाद कर रहे हैं गीता का ज्ञान देने वाला ब्रह्म इनके अनुसार ये काल बोल रहा है क्या बोल रहा है कि तत्व ज्ञान से
00:37:09:20 ज्ञान
✅ This part is already used · 00:37:10:04 – 00:37:20:27 (0:11)
→ Used in: A · Live रामपाल की घटिया गिरी पाखंडी का गीता ज्ञान भाग 10 अध्याय 5 at 1:41:42 ↗
00:37:10:04 के अभाव से मुझ काल को यज्ञ तथा तपों को भोगने वाला संपूर्ण लोकों का महान ईश्वर यानी
⬜ Not used yet · 00:37:20:27 – 00:57:56:26 (20:36)
00:37:20:27 महेश्वर संपूर्ण प्राणियों का सुरत क्या लिखा है वो यही तो लिखा है हा मल सु लिखा हुआ हैम मतलब सब मतलब एक तरीके से हृदय में रहने वाला हृदय को सुख पहुंचाने वाला इस तरह से आप मान लीजिए स्वार्थ रहित दयालु दयालु और प्रेमी तो ऐसा समझते हैं और इसका नीचे इसका वो दिखाइए अर्थ क्या किया है भगवत गीता काने इन्होंने तो ये किया है इन्होंने किया है कि वो मुझे ऐसा जो समझते हैं वह शांति को गवा देते हैं शांति को गवा देते हैं है ना मुझे मतलब तेसी जान मुझे अपना तेसी समझते हैं कुल मिलाकर इसका भावार्थ य है कि जो लोग तत्व ज्ञान का भाव है जिनको वो मुझे जो है परमेश्वर समझते हैं और मुझे जो है उनका त समझते हैं और इस कारण से वह शांति और यहां पर परम शांति की बात हो रही है वो परम शांति को वो गवा देते हैं अब बात
00:38:36:00 आती है कि तत्व ज्ञान के अभाव से यह कहां लिखा है श्लोक में बताइए अब हम जरा वो खोलिए श्लोक है जो वास्तविक श्लोक है जो जय दयाल गोविंद का वाला हां इसमें वो श्लोक दिखाइए थोड़ा ऊपर करिए हां इसमें कौन सा शब्द है जिस जिसमें लिखा हो कि तत्व ज्ञान का अभाव है व्यक्ति को पहली बात तत्व ज्ञान के अभाव की संस्कृत यहां पर है ही नहीं अपने मन से जड़ दिया ठीक है अपने मन से क्योंकि कितना काटेंगे भाई हमने तो बोला 5 पर अगर ऐसे काटेंगे तो तो वह पूरी की पूरी गीता ही काटनी पड़ जाएगी पूरी पूरी गीता को ही कहना पड़ेगा कि पवित्र तो है मगर मानने योग्य नहीं है तो क्या कर दिया यहां पर अपने मन से लिख दिया तत्व ज्ञान के अभाव में और यह जो ऋषि का ऋ आया रक्षति इसका अर्थ इन्होंने लिख दिया वहां पर गवाना जबकि इसका अर्थ होता है जाना तो शांति को प्राप्त होता है शांति में पहुंचता है शांति में जाता है ठीक है यह शिवराम आपटे जी की डिक्शनरी दिखा दीजिए दोबारा मैं आपको पेज नंबर बता रहा हूं
00:40:17:22 लगभग यह पेज आएगा हां ये रक्षति ये आ रहा है पेज 2 23 223 पेज शिवराम आपटे जी की डिक्शनरी इसमें कहां है जमन 23 है ये तो ए चल रहा है ना ए ए प कैसे आएगा 23 आप आगे निकल गए शायद 26 था अभी ओ ओकेके थोड़ा पीछे जाइए इसमें लेफ्ट साइड में देखिए लेफ्ट साइड में लिखा हुआ है रि यह रहा रि हा उसी में ब्रैकेट में लिखा है रिती क्या खा है या होना जाना जाना लि है क्षमता का हा
00:41:33:00 जाना ठीक है तो अब जाना शांति में जाता है शांति को जाता है ठीक है यह तो हो रहा है मगर गवा देता है शांति को व कहां लिखा है रक्षति का अर्थ अपने मन से तत्व ज्ञान के अभाव में जोड़ दिया और अपने मन से रक्षति का अर्थ कर दिया कि वो गवा देता है रक्षति का अर्थ क्या लिखा है अब जब शिवराम आपटे पर इनको विश्वास नहीं है तो शिवराम आपटे की व्रज पर इनको क्यों विश्वास है जबकि पाणिनी कह रहे हैं व्रज का अर्थ होता है गतिमान गतिशील है ना और जबक सं का कोई ज्ञान नहीं है यही होता है कबीर देव परमात्मा ने इनको जो है संस्कृत का ज्ञान ही दे दिया होता वो तो है नहीं इनको ये खुद कहते हैं आगे चलते हैं इसमें एक और पॉइंट है जी एक पॉइंट य इस इसमें एक पॉइंट ये है कि अपने डिफेंस इसके लिए ये बोल सकते हैं कि शांति चली जाती है जाती है रिति को जाना आपने बोल दिया है तो अब इसम देखने उनका तर्क ये आएगा कि शांति चली जाती है जाती है शांति तो इसमें आ कहां रही है मगर वहा जाने वाला जो वहा पर जो करता है ना जाने वाला वहां पर वो है व्यक्ति अभी इसमें यह समझना पड़ेगा शांति में जब लिखा हुआ
00:42:48:02 है ना तो फिर ये जब म हल लता है तो फिर उसम ये लग रहा है ता है जो करता है वो वो है क्या पहली बात तो ये है कि गवाने गवाने की संस्कृत तो नहीं है अगर इनको जाना था तो जाने को एडजस्ट करना था वहां प तत्वदर्शी है ना अगर उसका मतलब जाना है तो जाने को एडजस्ट करो ना भाई गवा देना क्यों एडजस्ट कर रहे हो जिसकी संस्कृत नहीं है वहां बिल्कुल आप अपने मत की सिद्धि के लिए ऐसा कर रहे हो है ना आप उसी को जाने को एडजस्ट करते तब पता चलता अब उसमें क्या होता दिक्कत कि जो तत्व ज्ञान के अभाव में जो लोग मेरे को कुछ वहां पर जो भी है यह करते हैं वह शांति को जाते हैं उनकी शांति चली जाती है के लिए उनकी की संस्कृत आनी चाहिए श्लोक में उनकी की संस्कृत शब्द आना चाहिए उनकी शांति चली जाती है तो यह यहां पर पॉइंट है अपने मन से अर्थ कर दिया और लिख दिया वो शांति को गवा देते हैं भाई जब हर चीज में डिक्शनरी खो और बिल्कुल सारे शास्त्र खोल के बता रहे हो तो यहां गवाने की संस्कृत क्यों नहीं दिखा दी तुमने खोल
00:44:04:20 के और से जाना और में जाना यह भी समझ लो जब हम कहेंगे कि आजा बंदे शरण नाम की वो एक बार जरा प्ले कर दीजिए मधुर आवाज है जो गाते हैं व जेल धाम निवासी जरा एक बार प्ले करिए आजा बंदे शरण रा की लिए भाई जी बैकग्राउंड बैकग्राउंड कैसे चेंज हो रहा है एक बार देख लीजिएगा य हेलोवीन का कुछ थ लग गया है क्या बाय डिफॉल्ट है क्या ये हा वालो का ऐसा लग रहा है ऐसा लग रहा है कि रामपाल दास जी के लोक में बैठे हुए [हंसी]
00:44:53:15 हैं शरण राम की आजा बंदे शरण राम की अब यहां पर अब यहां पर क्या है बस करिए आजा अगर जाने का अर्थ ब्रज है तो आने का आने का अर्थ आ ब्रज है तो यहां पर हमें लिखना पड़ेगा आजा के लिए आव्रजन शब्द लेने पड़ेंगे दोनों शब्द लेने पड़ेंगे अगर इंग्लिश करेंगे अगर इंग्लिश में कन्वर्ट करेंगे तो कम गो तो कम गो बंदे शरण राम की या संस्कृत में करेंगे तो करेंगे कि आवज व्रज शरण राम की यही करेंगे ना या फिर यह वो वाला जाना है जिसमें आना होता है यह मानना पड़ेगा यह वह वाला जाना है जिसमें आना भी होता है यानी कि ऐसा जाना होता है जिसमें आना अंडरस्टूड होता है ठीक है हम नहीं तो आप इसकी संस्कृत करके दिखाओ अपने नियम के हिसाब से भाई आजा जब वो कह र आजा आने को कह रहे हैं पहली बात तो ये कि दो बातें हो गई आने को कह
00:46:08:20 रहे हैं कि जाने को कह रहे हैं अब आ जा दोनों अलग-अलग चीजें हैं तो दोनों के लिए कम गो या आ व्रज और व्रज ये करना पड़ेगा फस जाएंगे बिल्कुल मकड़ी जाले में फस जाएंगे पूरी तरह से खैर आगे चलते हैं ये धीरे-धीरे धीरे-धीरे इतना तार्किक और इतना अका होता जाएगा जो आज का य विश्लेषण है कि आपको मतलब हैप्पी बहुत बहुत बहुत प्रसन्नता होगी इसके बाद देखिए यह जो शास्त्र समत भक्ति बताते हैं यह क्या है कि भगवत गीता छठ अध्याय के दसव श्लोक को निकालिए जय दयाल गोविंद का जी का कन सा दवा लोक किसका छवा अध्याय दवा श रा
00:46:59:22 छवा अध्याय सवा लोक आ गया बताइए हा योगी यजत इसमें द लोक में ध्यान कैसे करना है परमेश्वर का वह बताया जा रहा है ऐसे ऐसे ध्यान करना है ठीक है अब ये देखिए कितनी गरिमा है इनके इनके लिए गीता की जो गरिमा गीता की लिखते हैं और जो पवित्र बोलते
00:47:35:22 हैं योगी जंत जो गीता को पवित्र बोलते हैं जो गीता की गर्मा कहते हैं गर्मा गीता की वो कितनी गर्मा मानते हैं गीता की अब देखिए यहां पर भक्ति करने का तरीका बता रहे हैं भगवान श्री कृष्ण या इनके हिसाब से वो उनके रूप में काल बोल रहा है मगर बोल तो परमात्मा के लिए ही रहा है ना तो इनकी गर्मा गीता की देखिए भाई क्या कह रहे हैं छवा अध्याय दसवा य प पढ़ के मैं बता देता हूं मन और इंद्रियों सहित शरीर को वश में रखने वाला हा मन और इंद्रियो सहित शरीर को वश में रखने वाला आशा रहित और संग्रह रहित योगी अकेला ही एकांत स्थान में स्थिर होक आत्मा को निरंतर परमात्मा में लगाने लगाए तो यहां पर ध्यान ध्यान कर वाला ध्यान योग जो है भक्ति योग का य ध्यान योग के विषय में भगवान बात कर रहे ध्यान कैसे करना है परमात्मा का तो वो बता रहे हैं ऐसे ऐसे करना है ध्यान कैसे लगेगा एकांत में लगेगा शुद्ध भूमि में अगला ही है श्लोक गवा शुद्ध भूमि में जिसके ऊपर कुष ब्रग छाला और वस्त्र बिछे हैं जो ना बहुत ऊंचा है जो ना बहुत नीचा है ऐसे अपने
00:48:50:26 आसन को स्थिर स्थापन करके आसन बिछा के कुछ का आसन ठीक है उस आसन पर बैठकर चित्त और इंद्रियों की क्रियाओं को वश में रखते हुए मन को एकाग्र करके अंतःकरण की शुद्धि के लिए योग का अभ्यास करें बिल्कुल और फिर लिखा है कि काया अपना शरीर सिर यानी कि सर और गले को समान यानी अलाइन रखते हुए स्थिर रखते हुए और अचल धारण करें जो उपव स्त्र धारण करते अचल धारण करते
00:49:36:15 हैं अचल का दूसरा भी कुछ सता है खैर और स्थिर होकर अपनी नासिका के अग्र भाग पर दृष्टि जमाकर है ना मतलब बिल्कुल स्थिर और एकाग्र चित होकर कुल मिलाकर के और आगे दिया हुआ है वो इधर उधर ना देखना दिशाओं को ना देखता हुआ इधर उधर ना देखना वो बिल्कुल एकाग एक सिंगल पॉइंट पर ध्यान लगाना तो ब्रह्मचारी के व्रत में स्थित भय रहित तथा भली भाती त शांत अंतःकरण वाला सावधान योगी मन को रोक कर मुझ में चित्त वाला और मेरे परायण होकर स्थित होवे अब यहां पर इनका खोलिए जरा छठवां अध्याय इन्होंने सीधे इसका खंडन कर दिया और कैसे किया वो मैं आपको दिखा इन्होंने मान लिया कि यह जो चीज यह जो चार श्लोक है यह गलत बोले क्योंकि इसका खंडन जो है वो लिखा हायह 10 से 15 ऊपर निकला ऊ परर निकल गया हाय हट गीता अध्याय छ श्लोक 10 से 15 का सारांश इन श्लोकों में एक स्थान पर बैठकर हट योग द्वारा अभ्यास करने को कहा है अब पहली
00:50:51:18 बात यह है क्या यहां पर हट योग लिखा है अपनी बात मन गणन ूस रहे हैं ना यहां पर हट योग नहीं लिखा है इंद्रियों को वश में हटात कहां पर यूज हुआ है उसके आधार पर ये काट रहे हैं अभी मैं अभी बात करूंगा तो अपने मन से इन्होंने हट शब्द यहां पर यूज कर दिया तो हट क्या है वश करना वश में करना क्या है कि हमने इंद्रियों को जीत लिया कि हमारी इंद्रियां हमारे काबू में है हमारे नियंत्रण में है और हमारे मन में भी उनका चिंतन नहीं चल रहा है जो उनका विषय है है ना जो उनका विषय है उनका चिंतन हमारे मन में नहीं चल रहा है यह तो हो गया इंद्रियों को वश में करना और हट क्या है हट को वहां पर बताया गया है हट वो है कि हमने अपने कर्मेंद्रियों को तो रोक लिया मगर मन से उन्हीं के विषयों का चिंतन कर रहे हैं समझ रहे हैं हमने अपने हाथों को रोक लिया जैसे मान लीजिए कि भोजन के प्रति हम आसक्त होते हैं तो ने उसको तो रोक लिया कि हम नहीं खाएंगे चाहे जो हो जाए मगर ध्यान उसी का कर रहे हैं कि आज क्या बना होगा मक्के की रोटी छोला भटूरा पनीर की सब्जी यह
00:52:06:21 सब बना पकवान बने होंगे अच्छे अच्छे 5 भोग बना होगा तो हम ध्यान उसी का कर रहे हैं यह हट है और इंद्रियों को वश में करने वाला और अंतःकरण में सावधान रहने वाला और यहां पर जो है उसे तो इन्होंने क्या किया यहां पर सबसे पहले हट को अपने मन से डाल दिया कि यहां पर जो है हट करके ध्यान लगाने की बात की जा रही जबकि यहां पर हट पूर्वक ध्यान लगाने की बात श्लोक में नहीं कही गई है अगर कही गई है तो कोई आए और यहां पर सिद्ध करे कि 6 पॉइंट 14 में 6.1 में हट पूर्वक योग कहां लिखा है हट पूर्वक ध्यान लगाना कहां लिखा है हट पूर्वक इंद्रियों को रोक लेना कहां लिखा है ठीक है अच्छा अब इन्होंने इसके लिए देखिए सीधे-सीधे क्या लिखा है गीता अध्याय तीन श्लोक तीन से आठ तक इसके विपरीत का है जो एक स्थान पर बैठकर हट कर के इंद्रियों को रोककर साधना करते हैं वे पाखंडी हैं एक स्थान पर बैठा रहा तो निर्वाह कैसे होगा
00:53:22:02 इस इस अध्याय छ श्लोक 10 से 15 के आधार पर आजकल बोले जिज्ञासु ऐसा वैसा करते हैं अढ़ाई घंटे सुबह शाम आवश्यक बताता है यह है वो है और आगे चलकर के इन्होंने खंडन शब्द का उपयोग भी किया है ऊपर जाइए जरा ऊपर ऊपर ऊपर ऊपर जाइए क्या लिखा है ऊपर 40 15 और ऊपर जाइए और ऊपर जाइए हा नीचे नीचे जाइए नीचे जाइए ये कहां आ गए रु छठवें में ही है ना छठ में 10 से 15 में सारांश बता रहे हैं
00:54:08:14 हां और और नीचे चलिए हा यहां रुकिए छ श्लोक तीन का सारांश पाच से छ का सारांश आठ से न का सारांश और हां बस बस रुक जाइए रुक जाइए क्या प्रयोग किया उन्होने शब्द खंडन हां देखिए 10 से 15 का सारांश इसमें क्या बोल रहे हैं देखिए यहां पर इस इन श्लोकों में इन श्लोकों में गीता ज्ञान दाता ने अपना मत बता दिया है जो वेद विरुद्ध है और एक जगह स्पेशली खंडन शब्द का उपयोग किया है कि इन मंत्रों का जो खंडन है वह तीसरे अध्याय में गया व तीसरा अध्याय खोलिए इन्होने खंडन क्या किया देखें तीसरे अ कौन से श्लोक में चौथे देखता हूं खंडन कहां दिया है उन्होने वो तीसरे अध्याय में वही पर जाइए मैं बता रहा हूं खंडन कहां दिया इसका तीसरे अध्याय में पाच से आठ तीसरा अध्याय पाच से आठवा श्लोक
00:55:31:04 ये तो भूमिका प ही है अभी तीसरा अध्याय दूसरा अध्याय तीसरा अध्याय हां तीन से 14 से 19 और और जाइ पाच से आ छ से नौ हा में आ जाएगा ना पाच से आठ नहीं छ न नहीं हा हा आ जाए लोक ना श्लोक नाइन है ना ये और और पीछे चलिए अध्याय दो यही इधर ही है आ गया ये रहा तीसरा अध्याय न से आ तीसरा अध्याय आ गया हाय तीन से आ जो बोल रहे है ना इस लोक में ज्ञानी तो ज्ञान को श्रेष्ठ मानते हैं निष्कर्ष भावार्थ है कि जैसे किसी व्यक्ति के उद्देश प्राप्त नहीं होता आगे और नीचे चलिए
00:56:28:26 इसमें इन्होंने कुल मिलाकर यहां पर यह कहा है मैं बता देता हूं संक्षिप्त में इन्होंने यह कहा है यहां पर कुल मिलाकर कि जो व्यक्ति अपनी इंद्रियों को मैं यहां से पढ़ के बता देता हूं इसको इन्होने बदला नहीं है तो मैं इससे पढ़ के बता देता हूं क्या कहा जा रहा है गीता ज्ञान दाता के बारे में आपके अनुसार यदि वो काल है हमारे अनुसार कृष्ण है तो गीता ज्ञानदाता एट द एंड क क्या रहे वो देख तीसरा तो कर्मों का आरंभ किए बिना मतलब जो कर्म से हम लोग मतलब य प्रवृत्ति मार्ग में रहते हुए भी हम कैसे काम कार्य कर सकते हैं तो यहां पर वह बताया जा रहा है कि आप क्योंकि एक क्षण के लिए भी कर्म किए बिना नहीं रह सकते हैं इसलिए आपको शास्त्रो चित कर्म में लगे रहना चाहिए तो पहली बात कि यदि व्यक्ति वहां पर भगवान के द्वारा बताई जाने वाली विधि के अनुसार या जिस ग्रंथ को आप पवित्र मानते हैं उसके अनुसार यदि वहां वो भक्ति कर रहा है तो वह चौथे ये जो पांचवा श्लोक है वो इसका विरोध नहीं कर रहा है क्यों क्योंकि यज्ञ का
00:57:43:26 अर्थ आपने भी माना है कि तप है और यदि वो वहां पर तप कर रहा है भक्ति कर रहा है तो फिर वो इसका विरोध कहां से हुआ वो तो शास्त्र वेद कर्म कर रहा है ना यहां पर यही कहा जा रहा है क्योंकि मनुष्य किसी भी काल में एक क्षण
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00:57:56:26 के लिए भी बिना कोई कर्म किए नहीं रह सकता है इसलिए तू लगातार शास्त्र
⬜ Not used yet · 00:58:02:03 – 01:27:07:12 (29:05)
00:58:02:03 भद कर्म करता रह यही सब बताया जा रहा है य पर अब मेन बात आती है जो मनुष्य समस्त इंद्रियों को हट पूर्वक है ना हट पूर्वक ऊपर से रोककर अब सबसे पहली बात है हट पूर्वक यहां पर गीता प्रेस वालों ने अपनी र से शब्द लिया है और यदि उनके द्वारा अपनी ओर से लिए जाने वाले अन्य शब्दों को आप नहीं लेते हैं तो आपने कैसे यहां पर मान लिया कि यहां पर हट पूर्वक की संस्कृत शब्द आया है बताइए आपने कैसे माना कि यहां पर हट पूर्वक शब्द आया है यह देखिए मैं आपको दिखा रहा हूं इनको दिखा दीजिए भैया तीसरा अध्याय छवा श्लोक दिखा दीजिए जो हट पूर्वक शब्द इन्होंने अपने आप यूज किया कि वहां पर वह जो भक्ति बताई जा रही है वह हट पूर्वक भक्ति है और यहां पर हट पूर्वक भक्ति का खंडन किया है इसलिए वह जो छठवें से 15 तक का जो मामला है वह स्वीकार करने योग्य नहीं है भले ही गीता पवित्र ग्रंथ है इन्होंने अनेकानेक प्रकार से भगवत गीता के ही कई
00:59:17:09 श्लोकों को कभी काल के नाम पर और कभी विरोधाभास के नाम पर काट दिया तो इन्होने ब्रैकेट में लिखा है नाय हा ये इन्होने ब्रैकेट में लिखा है जब ये ब्रैकेट वाले शब्दों को नहीं मानते हैं उसका जब तक संस्कृत शब्द नहीं होता है तो यहां पर क्यों मान रहे हैं कि हट पूर्वक की संस्कृत है यहां पर हट पूर्वक की संस्कृत तो नहीं है दूसरी बात यदि अगर मान भी लिया जाए तो हट पूर्वक का अर्थ यहां पर क्या है कि उसने शारीरिक रूप से अपनी इंद्रियों को रोक तो रखा है मगर मन से उन्हीं के विषयों का चिंतन कर रहा है है ना और वहां पर हट पूर्वक की संस्कृत व पर भी नहीं आ जबरदस्ती हो गया ना जबरदस्ती जबर य जबरदस्ती हट पूर्वक को इन्होंने अपने अनुसार स्वीकार कर लिया और वहां छठ अध्याय में हट पूर्वक भक्ति का जो है खंडन किया गया है भगवत गीता के तीसरे अध्याय में यह दिखा दिया जबकि हट पूर्वक शब्द कहीं पर है ही नहीं ना तीसरे अध्याय में है यहां पर और ना ही छठवें अध्याय में वहां पर कहा जा रहा है कि जो व्यक्ति अपनी पर वश कर लेता है इसका मतलब वह स्थिति जब उसने इंद्रियों पर संयम ऐसा पा लिया है कि व मन से भी उनके विषयों
01:00:32:13 का चिंतन नहीं कर रहा है और यहां पर उस स्थिति के लिए मना किया गया है जब उसने अपने शरीर को तो रोक लिया परंतु वह अपने मन से उनके विषयों का चिंतन कर रहा है तो ऐसे लोगों को मिथ्या चारी कहा है ऐसे लोगों को दंभी कहा है या ऐसे लोगों का खंडन किया है तो पहली बात य आती है यदि गीता पवित्र ग्रंथ है तो उसकी किसी भी बात को आप काट कैसे रहे हैं अब इन्होंने कहा कि वहां पर काल ने अपना ज्ञान दे दिया ऐसा मेरा मत है है ना तो यदि उसने यह कह दिया कि ऐसा मेरा मत है तो उसके बाकी के ज्ञान परमात्मा का है तो उसने कहा है क्या यह वह ज्ञान है जो परमात्मा दे रहे हैं वह मैं बोल रहा हूं और जो व्यक्ति एक जगह झूठ बोल सकता है वह दूसरी जगह क्यों नहीं बोलेगा तो यदि आपको गीता के किसी भी एक श्लोक पर विश्वास नहीं है तो किसी भी श्लोक पर विश्वास होना आपको सिद्धि नहीं होता है पहली बात और दूसरी बात यहां पर आपने अपनी मन मर्जी से हट पूर्वक शब्द का उपयोग कर लिया जहां पर नहीं था वहां पर अपने अनुसार ले लिया और जहां पर था वहां पर भी
01:01:48:22 जहां पर था जहां पर नहीं था वहां पर अपने आप उसको जन्म दे दिया ठीक है इतना हो गया जो लोग यह पूछ रहे हैं कि श्री कृष्ण ने यह कहा है कि उस परमात्मा की शरण में जा उनसे वो मुझे यह बताए कि वहां पर उसकी संस्कृत आई है क्या उस परमात्मा की शरण में जा 18 66 में उस परमात्मा की बात हुई है उसकी संस्कृत आई है क्या खैर आगे चलते हैं अभी इनका देखिए दूध का दूध और पानी पानी अभी भी इनको संतुष्टि नहीं हो रही होगी अभी देखिए कुल मिलाकर के गीता प्रेस वालों की जो ब्रैकेट वाली बात है वो क्या कहते हैं इन्होंने मान ली अपने अनुसार दूसरी बात जहां पर हट का उपयोग नहीं हुआ है वहां पर भी इन्होंने हट का उपयोग मान लिया तो संस्कृत का शब्द अवेलेबल नहीं है यह मनमुक भक्ति है यह शास्त्र सम्मत भक्ति नहीं है क्योंकि यह अच्छा एक एक बात और है जो छव अध्याय का पवा श्लोक है और छव अध्याय का चवा श्लोक है उसमें ब्रह्मचारी
01:03:03:24 शब्द भी आया है ब्रह्मचर्य और ब्रह्मचारी कौन है कॉपी मेखला पहनकर जो ब्रह्मचर्य धारण करता है वह ब्रह्मचारी है ठीक है तो ब्रह्मचर्य शब्द भी आया है तो इन शब्दों से इन चीजों से उसके आसन से बचने के लिए एकांत में ध्यान लगाने से बचने के लिए इन्होंने अपना मन मुखी एक शब्द उठा लिया गीता प्रेस गोरखपुर अगर कहीं पर भाव पिछले भाव को पकड़ते हुए यहां पर सच्चिदानंद स्वरूप अ परमेश्वर शब्द लिख रही है वो नहीं मानेंगे मगर यहां पर अगर उसने गीता प्रेस गोरखपुर ने हट पूर्वक शब्द का उपयोग कर लिया तो उसको मानेंगे और फिर आगे चलकर के ना गीता प्रेस ने माना ना संस्कृत में वो शब्द है अपने हिसाब से छठवें अध्याय के और अपने श्लोकों में कि नव से लेकर 15वें श्लोक तक जो है हट पूर्वक भक्ति बताई जा रही है तो यह भक्ति जो है काल ने अपने मन से दे दी है क्योंकि उसने कहा है कि ऐसा मेरा मत है तो जब वोह अपना मत बताएगा तो उसके लिए अगर यह सिद्धांत है कि वोह यह कह रहा है कि ऐसा मेरा मत है तो जब वह परमेश्वर का मत बताएगा तो वहां पर उस उसको कहना होगा कि यह परमेश्वर का मत है दूसरी बात झूठ बात कहने वाला भी यदि वही
01:04:18:25 है जिसकी बात को आप सच मान रहे हो तो उसकी बात को सच किस आधार पर मान रहे हो यह भी एक पॉइंट बनता है आगे चलते हैं सातवा अध्याय 19 वा श्लोक खोलिए सातवा अध्याय 19 वा श्लोक
01:04:51:02 हां इसमें देखिए सातवा अध्याय 19 श्लोक में खोल लू मुझे इसमें ठीक से दिखाई नहीं देता है हां बहुत जन्मों के अंत के जन्म में तत्व ज्ञान को प्राप्त पुरुष सब कुछ वासुदेव ही है इस प्रकार मुझको भजता है ठीक है सब कुछ वासुदेव ही है वासुदेव से भिन्न और कुछ नहीं है इस प्रकार मुझको माम मुझको भजता है तो यहां पर वासुदेव को सब कुछ मानने वाले को तत्व ज्ञानी कह दिया इन्होंने कहा था ना तत्व ज्ञानी के पास जाओ तत्वदर्शी के पास जाओ तो यहां पर तत्व ज्ञान को तत्व ज्ञानी कह दिया हो सकता है यहां पर अपनी मन मर्जी से यहां ना माने अभी पिछली बार ब्रैकेट में मान लिया था अब यहां पर ना माने मगर ज्ञानवान तो है तो वासुदेव ही सब कुछ है अब यहां पर इनके हिसाब से फिर से काल झूठ ही बोलेगा कि वासुदेव ही सब कुछ है ऐसा मान नहीं मानना चाहिए तो काल यहां पर फिर से झूठ बोलेगा तो फिर से काल झूठ बोलने वाला सिद्ध हुआ तो जो झूठ बोल रहा है वह सच कैसे बोलेगा यह
01:06:06:02 वाली बात क्योंकि अगर आप काल को नहीं पकड़ोगे तो आप अपने बाबा जी को तत्वदर्शी सिद्ध नहीं कर पाओगे यह भी सोचने वाली बात है अब आप अब आगे बात आती बहुत एक के बाद एक क्रमशः बोलिए नारायण तो इनका एक भक्त भी है बाबा जी का पवन दास उसने कहा भी है कि रामपाल दास जी के अंदर काल आकर के उनसे कुछ बुलवा सकता है ऐसा उसने कहा है ठीक है तो यह जो इन्होंने अर्थ का अनर्थ किया है उससे वही सिद्ध हो रहा है कि उनके अंदर वास्तविकता में कोई शैतान आ गया था और उसने यह गरिमा गीता की इनसे लिखवाया है गीता की गरिमा भंग कर दी है गीता की गरिमा दिखाने की बजाय गरिमा गीता की गरिमा भंग कर दी है ठीक है तो अब हम आ जाते कौन सा बोला मैंने
01:07:20:16 88.5 जो पुरुष अंत काल में मुझको स्मरण करता हुआ शरीर को त्याग कर जाता है वह मेरे साक्षात स्वरूप को स्वरूप को प्राप्त होता है अब यहां काल स्वयं को स्मरण करने की बात कह रहा है क्यों कह रहा है भाई जब स्मरण नहीं करना है वह बात क्यों कह रहे हो उससे क्या मतलब है ठीक है अच्छा एक बात और है यहां पर मेरे साक्षात स्वरूप को तो साक्षात तो हो गया वो नेत्रों का विषय भी हो गया है ना मेरे साक्षात स्वरूप को नेत्रों का विषय भी हो गया आगे देखते हैं 8.7 में क्या कह रहा है वह जो काल
01:08:13:08 है तू सब समय में निरंतर मेरा स्मरण कर अब यहां काल फिर से अपनी भक्ति करने की बात कर रहा है तो क्यों कर रहा है और अगर वो झूठ बोल यहां पर गलत बोल रहा है तो फिर जहां से जिसके आधार पर तुम तत्वदर्शी सिद्ध करते हो अपने आप को वोह सच है यह कैसे पता चला तो यहां वो कह रहा है तू सब समय में निरंतर मेरा ही स्मरण कर और मेरा स्मरण करते हुए युद्ध भी कर अपने कर्तव्य को कर अब देखिए यहां पर देखिए ये एक तरफ को कहते हैं युद्ध ना करो और दूसरी जगह तीसरे अध्याय के पांचवे श्लोक से लेकर के के तीसरे अध्याय के तीसरे श्लोक से लेकर के और आगे के श्लोकों में छठवें अध्याय में जो एकांत में जाकर सभी कर्मों को दूरी बनाकर सांसारिक जीवन से दूरी बनाकर जो साधना करने की बात की जा रही है उसका खंडन करता है यह कहते हुए कि नहीं कर्मों को छोड़कर कर्तव्य कर्मों को छोड़कर तुम नहीं जा सकते वहां पर प्रवृत्ति मार्ग की बात एक तरीके से हो रही है तो सभी कर्मों को छोड़कर तुम नहीं जा सकते कर्म करते हुए भी मेरा चिंतन करो वहां पर ये बात हो रही है तीसरे अध्याय में तो यह भाई साहब वहां
01:09:28:21 पर यह वहा उसके आधार पर छठवें अध्याय का खंडन कर रहे हैं मगर अब जब यह बात आ रही है कि भैया युद्ध करते हुए भी कर्तव्य तेरा युद्ध करना अभी कल हमने फोटो दिखाई थी कि अपनी रक्षा जब हमने फोटो दिखाई थी कि बाबा जी के साथ गन मैन क्यों खड़ा है गन मैन का मतलब युद्ध करने के लिए खड़ा है क्यों खड़ा है इनके अनुसार भाई रक्षा के लिए खड़ा है तो रक्षा के लिए बंदूक उठाना गलत बात नहीं है धर्म है हम भी मानते हैं तो यहां पर जो युद्ध करने की बात हो रही है इसमें कहेंगे वो युद्ध करने के लिए क्यों कहेगा तो अपने लिए मीठा मठा गप गप और फिर दूसरे के लिए कड़वा कड़वा तू यह इनका न्याय
01:10:09:10 है है ना यह इनका न्याय है तो अब यहां पर ये जो युद्ध की बात आ रही है य इसका खंडन किससे करेंगे नहीं नहीं इससे दूर हट और वहां पर कर्तव्य कर्मों को करने की बात करेंगे और उनके आधार पर छठवें अध्याय का खंडन करेंगे यानी कि छठवें अध्याय का खंडन तीसरे अध्याय के आधार पर और तीसरे अध्याय का खंडन यहां पर य युद्ध वाले उसके आधार पर यह सब अपना मनमुक इन्होंने डाल रखा है अब मैं जरूरी जरूरी और जल्दी जल्दी इनका दिखाऊंगा जल्दी से पूरा करूंगा नौवा अध्याय खोलिए इनका ये पेज नंबर है 181 इनका खोलिए अब हमारे की जरूरत नहीं है इनका
01:11:15:02 खोलिए नवा अध्याय पेज नंबर 81 हां 181 181 18 अब यहां पर क्या है ना बिल्कुल क्रिस्टल क्लियर चीजें हो जाएंगी क्रिस्टल क्लियर पवित्र वेदों के अनुसार साधना का परिणाम केवल स्वर्ग महा स्वर्ग प्राप्ति मुक्ति नहीं
01:11:49:01 वाह अब इन्होंने क्या है कि 91 में कहा है कि योग यज्ञों का भोक्ता कौन है इन्होंने य यज्ञों का भोक्ता माना है ब्रह्म को ठीक है देखिए जरा किसे माना इन्होंने यज्ञों का भोक्ता ऊपर जाइए ऊपर जाइए अच्छा श्लोक 18 में है क्या अध्याय न के शलोक 18 में कहा है कि 21 ब्रह्मांड का ही मैं ही स्वामी [संगीत] हूं 18 में क्या कहा है अविनाशी विधान कर एक मिनट मैं खोल लू जरा अपने में खोल ल 18वां अध्याय 18 अध्याय नवा अध्याय हा नौवा अध्याय अवा
01:12:53:12 श्लोक नौवा अध और यह है 18वां श्लोक नारायण सबका स्वामी 18 में 18 श्लोक में कहा गया है कि प्राप्त करने योग जो परम धाम है वो मैं ही हूं अविनाशी कारण मैं ही हूं ठीक है बीज बीज को कारण कहा गया है अविनाशी कारण मैं ही हूं और यहां पर भी काल के लिए इनके अकॉर्डिंग काल के लिए यहां पर भी अवम यानी कि अविनाशी शब्द आया है तो यहां पर काल कह रहे हैं दो बातें हैं प्राप्त होने योग्य परम धाम मैं हूं परम गति मैं हूं और अविनाशी कारण समस्त चराचर जगत का मैं ही हूं उत्पत्ति प्रलय का हेतु मैं ही हूं स्थिति का आधार मैं ही हूं यह कह रहे हैं यह काल कह रहे हमारे अनुसार श्री कृष्ण कह रहे अब इनके अनुसार क्या क्या कहा जा
01:14:08:12 रहा है वहां पर उत्पत्ति व विनाश करता वाले इस अविनाशी विधान का कारण अब यहां पर देखिए थोड़ा सा बचा लिया इन्होंने काल को अविनाशी इन्होंने नहीं कहा क्योंकि इनके अनुसार काल बोल रहा है ना ये सब मगर आगे व हो जाएगा ठीक है और प्राप्त होने योग्य वो जो स्थिति है उसको तो खाई गए व गति का इन्होने कुछ कहा ही नहीं है बिल्कुल की गति कौन सी मिलती है मगर आगे चलते हैं अब आ जाता है 21 वा इसी का 21 वा आप खोल लीजिए मैं भी खोलता हूं इधर आप इसका खोलिए 9.21 नहीं 20 20 पले 20 ईस्ट मानकर
01:14:57:04 इसमें लिखा है तीनों वेदों में विधान किए हुए सकाम कर्मों को करने वाले सोम रस को पीने वाले पाप रहित पुरुष मुझको यज्ञों के द्वारा पूजक स्वर्ग की प्राप्ति चाहते हैं वे पुरुष अपने पुण्यं के फल स्वरूप स्वर्ग लोक को प्राप्त होकर स्वर्ग में दिव्य देवताओं के भोगों को भोगते हैं ठीक है अब यहां पर इन्होंने एक शब्द डाल दिया आप मत खोलो मैं इधर से पढ़ के बता दूंगा आप वही वाला खोलो हां अब इन्होंने यहां क्या किया 920 में एक शब्द डाल दिया है कि मुझको ईष्ट मानकर मुझको पूज्य मानकर यहां पर जो इतवा शब्द आया है स्वा संस्कृत में जो इतवा शब्द आया है वह एक बार आया है अगर उसका अर्थ मुझको पूज्य मानकर कर लेंगे तो पूजा करते हैं कि संस्कृत प्राप्त नहीं होगी और यदि पूजा करते हैं कि संस्कृत मान रहे हैं इटवा को तो फिर मुझको ईट मानकर इसकी संस्कृत नहीं है तो इसका अर्थ ये है यहां पर वा वास्तविकता में यह कहा जा रहा है कि मुझको
01:16:12:18 मेरी पूजा करते हैं है ना किसलिए स्वर्ग की प्राप्ति हेतु मेरी पूजा करते हैं वो स्वर्ग को भोगते तो हैं मगर उन्हें वापस आना पड़ता है यह भगवान श्री कृष्ण कह रहे हैं मगर इन्होंने अपने छल को अपने सिद्धांत को प्रतिपादित करने के लिए एक बात अपने मन से घुसे दी कि मुझको ईट मानकर मुझको पूज्य मानकर यह देखिए मुझको ईट देव यानी पूज्य देव रूप में यज्ञों द्वारा पूजक अब जब या तो पूजक या तो पूजक की संस्कृत नहीं है श्लोक में और या फिर आप जो बोल रहे हो कि ईस्ट देव यानी पूज्य देव रूप में इसकी संस्कृत श्लोक में नहीं है यहां यह चाह रहे हैं यह बताना कि इनके अनुसार काल यह बोल रहा है कि मुझको ईस्ट नहीं मानना चाहिए पर मानते हैं लोग तो उस बात के लिए अपने मन से एक बात फिट कर दी कि ईस्ट देव यानी पूज्य देव रूप में पूजक जबकि यहां पर ईस्ट देव यानी पूज्य देव रूप में की कोई संस्कृत यहां पर नहीं है आगे चलते हैं न 2 न में देखिए क्या लिखा है इन्होंने क्या लिखा है न
01:17:27:18 का अर्थ न का अर्थ इन्होने क्या लिखा है इन्होने है जो साधक अन्य देवी देवताओं की साधना ना करे पूण ब्रह्म के ब्रम में ब्रह्म में मेरी साधना करते हैं उनकी योग भक्ति क्षेम रक्षा नहीं करता मैं रक्षा करता हूं अब पहली बात तो ये हैय जो काल है इतना सारा ज्ञान गलत वाला दे क्यों रहा है जब यह सही ज्ञान देने आया है पहली बात तो यह हो गई अब दूसरी बात यह है कि अगर मान भी लिया कि इनके पास कोई और कोई ना कोई तो बनाया होगा इतने सालों का तंत्र कुछ ना कुछ जवाब इसका बनाया हो मगर काय सोचने वाली बात यह है कि यहां पर पूर्ण ब्रह्म के भ्रम में इसकी संस्कृत नहीं है संस्कृत दिखा दीजिए इनको इस श्लोक में जो इन् ने ये लगा दिया जो लोग पूर्ण ब्रह्म के पूर्ण ब्रह्म के भ्रम में मेरी पूजा करते हैं उनकी रक्षा उनकी भक्ति की रक्षा मैं करता हूं तो इसमें देख हां न 22 तो न 2 में पूर्ण पूर्ण ब्रह्म के भ्रम
01:18:42:28 में कहां लिखा है पूरे में दिखाइए कहां पर इसकी संस्कृत है अपने मन से जहां मन चाहा वहां अपना मत लिख दिया कहां पर संस्कृत है इसकी कि पूर्ण ब्रह्म के भ्रम में इसकी कोई संस्कृत नहीं है दूसरी बात एक बात ध्यान रखने की है कि यहां पर वो अभी भी जो काल है वह स्वयं को भजने की बात कर रहा है इनके अनुसार भगवत गीता में ज्यादातर काल ने स्वयं को भजने की बात की है ठीक है अच्छा अब देखिए आगे चलिए 9 2 नते खोलिए इसमें इन्होंने क्या कहा है जो अन्य देवताओं वे अन्य पूर्ण परमात्मा को भी पूजते हैं पूजते हैं हा वे मुझको ही पूजते हैं वे मुझको ही पूजते हैं यानी काल जाल मेंही रहते हैं हम और उनकी वह पूजा यहां देखिए जो अन्य देवताओ वह अन्य पूर्ण परमात्मा को यानी कि इन्होंने यहां पर
01:19:58:03 यह माना है कि कोई अन्य पूर्ण परमात्मा भी है काल के अलावा एक पूर्ण परमात्मा और एक अन्य पूर्ण परमात्मा भी है और इसकी भी कोई अलग से संस्कृत प्राप्त नहीं है यहां पर जो वास्तविकता है वो क्या है कि जो अन्य देवी देवताओं को बचते हैं वो पूजते तो मुझी को है किंतु उनका वह पूजन अधि पूर्वक अर्थात अज्ञान पूर्वक है यहां पर यह जो तर्क सम्मत प्राप्त है वह है ठीक है अब इनकी पूजा जो है वह अधि पूर्वक क्यों है क्योंकि काल यहां पर यह कह रहा है कि जो लोग मुझसे अन्य मुझसे भिन्न किसी को भजते हैं और यहां पर काल ने यह भी कह दिया कि अन्य पूर्ण परमात्मा को तो इसकी संस्कृत कहां है और अगर अन्य पूर्ण अगर पूर्ण परमात्मा को व्यक्ति काल को छोड़कर भज रहा है तो यहां तो काल को यह कहना चाहिए था ना कि वोह सही कर रहा है मगर ऐसे व्यक्ति को यह कह रहे हैं कि अज्ञानी है जो पूर्ण परमात्मा को भज रहा है वह अज्ञानी है देखिए
01:21:13:03 ठीक है और अगर इसमें यह ले ले कि जो इनका कबीर है उस पूर्ण परमात्मा को छोड़कर जो अन्य देवताओं को बजते हैं वो अज्ञानी है तो भाई जो यहां पर अगर इनका जो अन्य पूर्ण परमात्मा शब्द को हटा देंगे अगर क्योंकि वह उसकी कोई संस्कृत तो है नहीं तो संस्कृत के हिसाब से यहां पर इनके द्वारा काल यह कह रहा है कि मुझसे अलग जो अन्य देवताओं को भजता है वह अज्ञानी है तो अब बात यह आती है कि काल से अलग देव कौन है उस देव में तो कबीर देव भी आ जाते हैं इनके अनुसार कबीर देव है वेदों में प्रमाण है ओए कबीर देव भगवान है तो इनके अनुसार जो कबीर देव है उनकी पूजा करने वाला ज्ञानी और अगर मेरा य तर्क ना भी ले तो इन्होंने यहां पर मान लिया पूर्ण परमात्मा को पूजते हैं वह भी अज्ञानी है अंत तो गत्वा यदि कोई पूर्ण परमात्मा को पूज रहा है तो वो भी काल को ही पूज रहा है मत पूजो भैया पू परमात्मा को देख लो आप ही के लोग कह रहे हैं थोड़ा बड़ा कर दीजिए
01:22:28:07 इस लाइन को यदि कोई पूर्ण परमात्मा को पूज रहा है तो वह भी काल को ही पूज रहा है इसलिए पूर्ण परमात्मा को पूजने की कोई आवश्यकता नहीं है हो गया अच्छा और इसमें बहुत बढ़िया है आगे और चलिए अब न 24 देखिए यहां पर इनका सबसे बड़ा खुलासा होगा 94 में अब 94 में क्या है क्योंकि सब यज्ञों का भोगता भोगने वाला प्रभु केवल 21 ब्रह्मांड का स्वामी यहां पर वैसे इन सबकी संस्कृत है नहीं अपने आप लगा दिए मैं हूं समस्त यज्ञों को भोगने वाला मैं हूं और इसको मुझ इस प्रकार मुझको तत्व से नहीं जानते तो वह जन्म मरण के चक्कर में फसे रहते हैं पहली बात तो यह है कि जिसको से जानना ही नहीं है जिसको तत्व से जानना तत्व ज्ञान नहीं है उसको तत्व से जानने की आवश्यकता क्या है पहली बात चलो अगर जान भी रहे हो तो यहां पर आपने यज्ञों का भोक्ता किसको माना है यहां पर आपने यज्ञों का भोक्ता माना है
01:23:43:15 ब्रह्म को अब इनका तीसरे अध्याय का चवा श्लोक खोलिए इन्हीं का वही था शायद वह 45 था क्या था
01:24:43:09 आया पीछे है पीछे इन्होंने इसमें तीसरे अध्याय में इतने वो दे दिए अपनी कहानिया मन की पूछो नहीं चलिए और पीछे चलिए और पीछे चलिए इन कहानियों से पहले हा रुक जा रुक जाइ रुक जाइए 14 से 15 हां हा सब प्राणी उससे उत्पन्न और थोड़ा पीछे जाइए जहां से शुरुआत हो रही हो इसकी इससे पहले या तो कोई और श्लोक हो और ऊपर जाइए जरा
01:25:31:16 स जहां पर इन्होंने वो माना था ना ब्रह्म का अर्थ वेद अभी देखा था हमने पहले ब्रह्म का अथ इन्होने वेद नहीं माना था अपना काल माना था काल ये संपूर्ण प्राणी अन्न से उत्पन्न होते हैं है ना तो आठ के श्लोक 22 का यथार्थ अनुवाद और पीछे
01:26:08:20 जाइए विशेषण गीता अध्याय 3 199 में और पीछे जाइए और पीछे जाइए 31 और पीछे जाइए हां हां अब आ गया अब आ गया अब आ गया काल ब्रह्म की उत्पत्ति करता बस बस बस बस आगे आ जाइए आगे आ जाइए बस बस बस बस 14 से श्लोक हिंदी का अनुवाद प्राणी अन्न से उत्पन्न होते हैं और ऐसा ऐसा है प्राणी अन्न से उत्पन्न होते हैं एक मिनट जरा इससे पहले वाला पेज एक बार और दिखा दीजिए मुझे इससे पहले वाला पेज एक बार और दिखा दीजिए
01:26:54:22 अच्छा ठीक है ठीक है अब अब आ जाइए वही आ जाइए वही आ जाइए जहां थे हां तो भाई इन्होंने तीसरे अध्याय के 14 श्लोक से 19 में श्लोक का हिंदी अनुवाद किया है प्राणी अन्न से उत्पन्न होते हैं अन्न वर्षा से
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01:27:07:12 उत्पन्न होता है वृष्टि यज्ञ से यानी धार्मिक अनुष्ठान से होती है यज्ञ यानी धार्मिक अनुष्ठान शास्त्र अनुकूल कर्मों से सफल होते हैं ठीक है कर्मों को त ब्रह्म यानी काल ब्रह्म से उत्पन्न जान क्योंकि जीव सतलोक को त्याग कर काल लोक में आए तो कर्म करके सर्व पदार्थ प्राप्त करते हैं सतलोक में बिना कर्म किए सर्व पदार्थ प्राप्त होते हैं वहां नस कर्म में मुक्ति जीव को प्राप्त होती है इस श्लोक में आगे कहा गया है ब्रह्म यानी काल ब्रह्म की उत्पत्ति अविनाशी परमात्मा यानी परम अक्षर पुरुष से हुई है ऐसा
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01:27:42:03 जान इससे सिद्ध होता है कि सर्वव्यापी परम अक्षर ब्रह्म सदा ही यज्ञों यानी धार्मिक अनुष्ठानों में प्रतिष्ठित है ईष्ट रूप में पूज्य है यज्ञों द्वारा कौन पूज्य भाई यज्ञों द्वारा कौन पूज्य है परम अक्षर ब्रह्म ठीक है अब वहां पर वा वहां पर वापस आ जाइए जहां हम लोग 9 24 में
01:28:16:07 थे यहां पर इन्होंने मान लिया 3 15 में कि जो सर्वव्यापी परमेश्वर है वो यज्ञों द्वारा पूज्य है ठीक है यज्ञों द्वारा वो पूज्य है और यहां पर क्या कह रहे हैं यज्ञों का विषय कौन है वहां पर यज्ञों का विषय कौन है एक मिनट आपको आना है वो जो 9 24 था ना हम लोग पढ़ रहे थे जो हां यहां पर यहां पर यज्ञों का पूज्य कौन है यज्ञों द्वारा कौन पूज रहा है वो जिसको यज्ञ परंतु उनकी यह पूजा विधि पूर्वक होती है देवी देवता मुझे अच्छी तरह से नहीं जानते हैं यह काल है इसलिए उनकी पूजा करके भी पतन को प्राप्त होते हैं जिससे नरक में 84 लाख जैसे गीता अध्याय तीन श्लोक में कहा गया सर्व यज्ञों में प्रतिष्ठित अर्थात सम्मानित जिसको यज्ञ समर्पण की जाती है वह परमात्मा पूर्ण
01:29:31:09 ब्रह्म है वही कर्मा आधार बनकर सर्व प्राणियों को प्रदान पीछे चलिए पीछे यज्ञों का एक मिनट नीचे आइए एक मिनट नीचे आइए नीचे आइए और नीचे आइए हां कि काल काल ही भोगता है परंतु पूर्ण संत नाम मिलने तक सर्व यज्ञों का भोग अब यह जो व्याख्या है इन्होंने अपने मन से इसमें डाल दी कि पूर्ण संत ना मिलने तक इसकी संस्कृत कहां है कि पूर्ण संत ना मिलने तक यज्ञों का जो भोगता होता है वो काल होता है और इसलिए कह रहा है कि मैं सब सभी यज्ञों का भोक्ता व स्वामी हूं क्योंकि इन्होंने क्यों डाली ये बात कुल मिलाकर के ये गीता को पूरा का पूरा नहीं मानते हैं एक जगह की लिखी हुई बात को दूसरी अपने मन के अपने मन से जहां पर बात दिख रही है उसके आधार पर काट देते हैं अपने मन के अनुसार कहीं पर गीता प्रेस गोरखपुर का हिंदी अनुवाद स्वीकार कर लेते हैं और अपने मन के अनुसार जो शब्दों की संस्कृत वहां पर नहीं भी होती है वो भी वहां पर डाल देते हैं मगर ये तिरछा दर्शी नहीं है
01:30:46:13 ये तत्वदर्शी है अब अंत तो गत्वा ये देख लेते हैं यहीं पर एक और चीज है वेदों के अनुसार साधना ना करने वाला पूर्ण मुक्त नहीं है ठीक है यह लिखा है 182 में वेदों के अनुसार जो साधना नहीं करेगा वह पूर्ण मुक्त नहीं है ठीक है भैया कौन वे को मानते हैं अरे सुनिए तो सुन तो लीजिए एक मिनट वेदों के अनुसार जो साधना नहीं करेगा वह पूर्ण मुक्त नहीं है अब अब 181 पर आ जाइए यह आज का सबसे बड़ा खुलासा है दीजिए फिर मैं कुछ कहना चाहता हूं एक मिनट एक मिनट 181 में देखिए थोड़ा छोटा कर लीजिए मुझे लगता है बड़ा
01:31:34:16 है और और ऊपर जाइए हां यह भावार्थ वेदों में यह भावार्थ प आइए भावार्थ नीचे आइए नीचे यह भावार्थ ये भावार्थ दिख रहा है वेदों में हा इसको बड़ा कर दीजिए वेदों में महिमा तो अमर परमात्मा यानी परम अक्षर ब्रह्म की भी है जिसमें उसकी भक्ति के साधक पाप रहित होकर अमर सुख यानी पूर्ण मुक्ति को प्राप्त होते हैं परंतु भक्ति के जो मंत्र हैं यज्ञ आदि की जो क्रियाएं हैं वो ब्रह्म तक सीमित है अरे मेरे भाई अभी तुम दो बार कह रहे हो कि यज्ञों का भोक्ता वास्तविकता में जो है जब तत्वदर्शी की शरण में आ जाता है तो यज्ञ जो वेदा दि शास्त्र सम्मत जो यज्ञ है उनका भोक्ता सच्चिदानंद स्वरूप सर्वव्यापक सर्वशक्तिमान परमेश्वर है परम अक्षर ब्रह्म है अब यहां पर क्या कह रहे हो कि वेदों द्वारा बताए गए जो मंत्र और यज्ञ है उनकी क्रियाएं कहां तक सीमित है काल यज्ञ तक अच्छा दूसरी बात यह कह रहे हो कि जब यह जो क्रियाएं है यह पूर्ण ब्रह्म तक की नहीं है
01:32:50:12 काल ब्रह्म तक की सीमित है तो इसका मतलब है कि पूर्ण ब्रह्म की प्राप्ति के लिए तुम्हें वेदों से बाहर जाना पड़ेगा वेदों की सीमा से बाहर जाना पड़ेगा तो 182 में तुम लिख रहे हो जो वेदों के अनुसार नहीं चलता है वह जो है मुक्ति को प्राप्त नहीं करता है तो जब तुम यहां पर वेदों से बाहर जाने की बात स्वयं कर रहे हो तो फिर दूसरी जगह कैसे कह पा रहे हो कि जो वेदों के अनुसार नहीं चलता है वो मुक्ति को प्राप्त नहीं होता है मतलब वेदों का वेदों का जो ताकत है वहां दिखा दो जहां व्यक्ति को बेवकूफ दिखाना बनाना हो और उसके बाद यह भी बोल दो कि वेदों के बाहर तो आपको जाना ही पड़ेगा क्योंकि हम एक सूक्ष्म वेद ले आए हैं 600 साल पहले का अब यदि पूर्ण ब्रह्म तक जाने की बात वेदों में नहीं है जो अनादि काल से वेद हैं 600 साल पहले आए सूक्ष्म वेद में पूर्ण वेद पूर्ण ब्रह्म तक जाने की बात है तो फिर उसमें कुछ ऐसा ज्ञान है जो 600 साल पहले से पहले नहीं था वो कबीर ने आके दिया और था तो किस रूप में था सबूत दे कोई प्रमाण नहीं है तो जब
01:34:06:04 प्रमाण नहीं है तो इसको क्या माना जाएगा कि 600 साल पहले आया जो ज्ञान है उसको माना जाता है इनके द्वारा क्योंकि पूर्ण ब्रह्म की प्राप्ति कैसे की जाए इनके अनुसार वो वेदों में नहीं है अब ये अपनी ही बात को तो पहले तो काट रहे हैं कि वेदों के बाहर जो जाएगा वो जो है मुक्ति नहीं पा पाएगा फिर यहां पर वेदों के बाहर जाने की बात कर रहे हैं तो भाई किया क्या है तुमने क्या किया ये खिचड़ी पकाई
01:34:40:18 है यह दो तीन घंटे का कार्य है जो हमने इनकी भगवत गीता में देखा है खुद ही कह रहे हैं कि वेदों की सीमा के बाहर मत जाओ खुद ही कह रहे हैं कि वेदों में पूर्ण की प्राप्ति का मार्ग नहीं है इससे बड़ा और पंचरंगी ड्रामा क्या होगा क्या होगा अरे भाई तुम सूक्ष्म वेद के आधार पर और टूटा फूटा वेद और गीता लेने के आधार पर जब चल रहे हो और सूक्ष्म वेद तुम्हारा मेन है तो यह कहो कि हम सनातनी नहीं है क्योंकि जो सूक्ष्म वेद है वो सनातन नहीं है आप उसकी पहले की वो दिखाइए कहां है उससे पहले का प्रमाण
01:35:35:03 दिखाइए वह सूक्ष्म वेद स्वयं वेदों पर डिपेंड है और उसको आप प्रमाण मान रहे हो वेदों के आगे और वेदों को तुम खंडन कर रहे हो कि वेदों में भगवत प्राप्ति का मार्ग नहीं है वेद का मतलब है ज्ञान और ज्ञान का मतलब फिर ज्ञान होता है ज्ञान का मतलब फिर अज्ञान नहीं होता है हां भैया विशाल भाटिया जी जय श्री राम तो यह इनकी गरमा गीता की का जांच पड़ताल था एक सूत्रा क्मक शैली में मैं एंड कर दूं आज जो हमने जाना कि यह कहीं पर कोई सिद्धांत नहीं है कि यदि एक जगह की शिक्षा दूसरी जगह का खंडन कर रही होगी तो उसको खंडित कर दो नहीं दोनों जगह को मानना पड़ेगा यदि आप इन दोनों ग्रंथों को प्रमाण के रूप में स्वीकार करते हो यह शास्त्र कहते हैं दूसरी बात कि इन्होंने अनेका अनेक जगह भगवत जो गीता प्रेस गोरखपुर है उसके ब्रैकेट वाले जो शब्द होते उनको माना है स्वीकार कर लिया जबकि उसकी संस्कृत वहां नहीं दी गई है वहां पर उनके ज्ञान को स्वीकार कर लिया क्योंकि उस समय उनके जो शब्द है इनके मत की सिद्धि करने वाले हैं और अनेकानेक
01:36:50:15 जगह उनकी चीजों का खंडन कर दिया जो ब वाले शब्द उनको हटा दिया बल्कि अनेकानेक जगह अपने मन से जो जिन शब्दों का संस्कृत शब्द है ही नहीं उसको ले आए जैसे हट पूर्वक यह दूसरा प्राप्त हुआ तीसरा वही बात आ जाती है यदि काल अपने मन से कोई ज्ञान दे रहा है यानी वह अज्ञानता फैला रहा है तो जब वोह झूठ बोलेगा दोबारा तो जरूरी नहीं है तुमको बता के बोलेगा कि अी भी मैं झूठ ही बोल रहा हूं जिसका जिसका उद्देश्य आपको भटकाने का है वह आपको भटका जाएगा आपको बता के नहीं भटका जाएगा तो खुद ही खंडन तीसरा यह जो है एक जगह काल को अविनाशी कहते हैं तो दूसरी जगह कह देते कि वो उत्पन्न है वो जन्म और मरण ये वो सब खिचड़ी पका देते हैं कहीं पर काल के आधार पर कहीं पर खंडन के आधार पर कहीं पर अपने मन से ही यह भगवत गीता के ही श्लोकों का आपस में खंडन करते हो फिर कहते हैं गरिमा गीता की गीता तेरा ज्ञान अमृत और गीता जो है पवित्र ग्रंथ और अंततोगत्वा दो चीजें कहते हैं ये अच्छा पूरे
01:38:06:00 वही मैंने कहा ना कि तुम मुझे अगर 35 श्लोक वो बता दो 35 श्लोक वो कौन-कौन से हैं तो उनके अलावा मैं आपको बताऊंगा कि देखो कहां कहां पर जो गीता को बोलने वाला है वह स्वयं की भक्ति करने की बात कह रहा है एक मिनट बस बस पूरा कर रहा हूं बस लास्ट वो तो बताओ नहीं पाओगे जीवन निकल जाएगा जेल धाम निवासी बाहर आएंगे कि नहीं आएंगे वह नहीं पता मगर आप बता नहीं पाओगे कि वह 35 श्लोक कौन-कौन से हैं जो नहीं मानने दूसरी बात दूसरी बात ये है मालूम होगा में कितने पव है अंततोगत्वा अंततोगत्वा जो बात है वोह क्या है खुद ही कह रहे हो कि वेदों के बाहर की भक्ति जो है वोह मुक्ति नहीं दिला पाएगी फिर खुद ही कह रहे हो कि वेदों की बाहर ही जाना पड़ेगा मुक्ति तो है ही नहीं वेदों में अब तुम डिसाइड कर लो करना क्या है हां जी विशाल भाटिया जी बताइए जय श्री राम शिवाज सर्वप्रथम आपको जय श्री राम वैसे तो मैं एक प्रमाण लेकर आया हूं मैं अभी प्रमाण तो दिखाऊंगा मैं फिर भी आपको बता दूं आप यह लोग सुधरने वाले नहीं है आप कितना भी प्रमाण दिखा चुके हैं हमने जैसे कल वो जो ये कौन थे वो बाबू रामदास नाम से हमने इनको महाभारत से प्रमाण दिखाया आपने
01:39:21:04 उनको महाभारत के अनुशासन प से यहां तक दिखाया कृष्ण काल है वो तो भी नहीं माना आपने वो जो अमित दास था आपने उसको शिव पुराण से दिखाया कि हनुमान जी की भक्ति से मोक्ष मिल सकते है नहीं वो नहीं माना तो ये जो इनका खंडन है ये लोग नहीं मानेंगे इनका इनका पूरा मनवाना नहीं है देखिए होता क्या है सुनिए विशाल जी बात ये है हम यहां किसी को मनवाने बैठे ही नहीं है जब यह लोग उल्टी हरकतें करते हैं जो तार्किक नहीं होती है इलॉजिकल होती है मूर्खता करते हैं तो इससे लोग लोगों में चेतना आती है जागरूक होते देख देखो कितना मूर्ख व्यक्ति हैय समझ रहे हैं वो कभी नहीं बोलेंगे वो रोबोट है वो चाबी भर के आए हैं अपने अंदर रट्टा मार के आए हां अभ ये देखिए मैं आया हूं ये मा माभारत का ये तीसरा खंड है मेरे पास ठीक है और मैं एक चीज बोलूंगा आप एक कवि पंथी आप चाहो तो उसको ले लीजिए र बहुत वो उछल कूद कर रहा है इसमें अभी अ नहीं वर्मा नाम से मेरे ही नाम का एक व्यक्ति है किसको कोट कर रहे हैं विशाल वर्मा क्या कह रहे मतलब है कबीर पंती बहुत उपत करता वो सामने नहीं आता बुलाने पर भी अरे तो कायर है भाई उनकी माता जी ने उन्हें निष्ठा पूर्वक नहीं पिलाया है तो य
01:40:36:08 देखिए मा है उनकी बातो पर क्या ध्यान दोगे व तो बकते रहेंगे बल्कि उनकी यह जो वो कमेंट करते हैं वह जानते नहीं है कि इसके कारण हमारी इंगेजिंग बढ़ रही रीच बढ़ रही हैय हमारा और दिखाएगा लोगों को चैनल क्योंकि उसको उसको वहां पर इंटरनेट का उपयोग कर रहे ना जितनी वो कमेंट कर रहे हैं बारबार बार बार बार बार तो ठीक है तो यह महाभारत के भीष्म पर्व में आती है य भगवत गीता तो अब देखिए ये ये देखिए दिख रहा है अब यहां से देखिए ये यहां से भगवत गीता जो है पूरी होती है सा श्लोकों की अब उसके भगवत गीता के बाद की जो घटना हुई थी उसको बताते हैं य पर भगवत गीता का महात्म इसमें दिया गया है जैसा आप पढ़ सकते हैं इसमें मैं पढ़ के सुना देता हूं कुछ लोक लोकी जी अगर हो तो जरा
01:41:51:12 वो ये पेज नंबर बता दीजिए वो खोल देंगे कीत का तीसरा खंड है महाभारत का य नहीं है गए अच्छा गए अच्छा ठीक है आप आप आप मुझे पेज नंबर बताइए तीसरा खंड पेज नंबर 869 भीष्म पर
01:42:30:08 जी आप दिखा दीजिए पढ़ मैं दूंगा 869 पेज नंबर 869 लग रहा है आज मैंने बोर कर दिया क्या नहीं नहीं को राम है तो हाथ उठाए स्टेज आओ भाई सास जटाओ खंडन कर रहे महाभारत से आ गया कितना बताया आपने 860 869 ना आ गए आप स्क्रीन पर दिखाइए कहां से पढ़ना है शलोक क्रमांक बता दीजिए यह देखिए पहले आप श्लोक नंबर एक और दो आप इसका अर्थ सही पढ़ दीजिए आप अर्थ है जन्म जाए अ अन्य बहुत से शास्त्रों का संग्रह करने की क्या आवश्यकता है गीता का ही अच्छी तरह से गान श्रवण कीर्तन पठन पाठन मनन और धारण करना चाहिए क्योंकि वह स्वयं पदमनाभ भगवान के साक्षात मुख कमल से निकली हुई है लो पद्मना भगवान क्या काल को पद्मना बोला जाता
01:43:46:02 है पमना विष्णु जी को कहा जाता है हा अभी आगे है ना गीता सर्व शत्र मय है भगवान श्री हरि सर्व देव मय है गंगा सर्व तीर्थ मय है और मनु सर्व वेद मय है अभय बस इसका चार और पांच लोक आप पढ़ दीजिए चौथा और इस गीता में 620 श्लोक भगवान श्री कृष्ण ने कहे हैं 57 श्लोक अर्जुन ने कहे हैं 67 श्लोक संजय ने कहे हैं और एक श्लोक धृतराष्ट्र का कहा हुआ है यह गीता का मान बताया जा रहा है कहीं लिखा है काल ने बोला श्लोक महाभारत से देख दिखा रहा हूं अब इसका आगे पढ़िए पांच नंबर भारत रूपी अमृत राशि के आप स्क्रीन पर दिखा दो ना स्क्रीन पर दिखा दो इनकी स्क्रीन बड़ी कर
01:44:42:24 दो भारत रूपी अमृत राशि के सर्वस्व सार भूत गीता का मंथन करके उसका सार निकालकर श्री कृष्ण ने अर्जुन के मुख में कानों द्वारा मन बुद्धि में डाल दिया बस ठीक है तो भैया य तोय हो गया महाभारत में बता दिया गया किसने कही है भगवत गीता गीता कहने के आगे ही यह कह दिया गया कि किसने कही है भगवत गीता चीज हमको समझाइए बस एक चीज इसमें लिखा है श्लोक नंबर चार में कि 620 श्लोक श्री कृष्ण ने बोले 57 श्लोक अर्जुन ने कहे और 67 शलोक ने क और एक श्लोक धृतराष्ट्र ने कहा तो लेकिन गीता में 700 श्लोक है ना कुल तो ये तो उससे ज्यादा नहीं हो जाएंगे वो एकाद जो उसका जो सम्मान में बोला जाता है ना उसमें ले लिया जाता है अच्छा हां एकाद जो श्लोक है जो उसके आगे पीछे उसका वर्णना होता है उसमें गिन लिया जाता है फिर आ बाबूराम दास जी जय श्री राम नारायण सभी को जय श्री राम जय श्री राम बाबूराम जी फिर आ गए अभी अभी हमने
01:45:57:25 पढ़ा आप गलत टाइम पर आ गए एन मौके पर आना चाहिए था आपको अभी अभी माबाद से आपका खंडन हुआ है कल जो इतना बोल रहे थे गीता दिखा दिखा के हमको दिखाने दो ना हमको दिखाने दो ना बाबू राम जी मुझे बताइए क्या आप अपनी चेहरा दिखाइए बाबूराम जी जो ये लोग अब शा से दिखाएंगे वही शा सम्मत होगा हम अगर दिखाएंगे तो वो गलत है बाबूराम जी चेहरा हां बा सर हां बाबू राम जीय बताइए क्या रामपाल दास जी के द्वारा जो ईश्वर बताया जाता है उसने ही समस्त ब्रह्मांड की रचना की है सब कुछ उसी ने बनाया है कि नहीं सर वो तो बताए से ही है क्या एक बार कह के गए थे पता करके आऊंगा उसके बाद आप आए तो दूसरी बातें की हम दूसरी बात से गीता पर च करने आए हैं सर नहीं नहीं नहीं आपके आप जिसको ईश्वर मानते हो उसने सब कुछ बनाया है कि नहीं नहीं मानते मानते हैं सर मानते हैं मानते हैं तो वो साकार
01:47:12:26 है यह मानते हो या वो मूल रूप से निराकार है यह मानते हो साकार है सर मानते हैं हम लोग तो साकार मानते हैं आपकी ज्ञान गंगा में तो यह लिखा हुआ है कि ईश्वर प्रकट हुआ सतलोक में हां तो जो ज्ञान गंगा में लिखा है उसको आप पक्के में पक्का मानिए उसमें हम कोई फेर बदल नहीं कर सकते हैं जो लिखा हो पता है क्या हम तो पढ़े हैं आप भी पड़े हैं उसमें छिपाने वाली क्या बात है आप भी पढ़े ही है अरे तो आए क्यों हो जब पढ़े नहीं हो तो हम तुम्ह बता दे रहे हैं श्री कृष्ण भगवान परमात्मा है मान लो जाओ पूजा करो आपने नहीं पढ़ा ना जाओ क्यों आए हो आपसे पढ आपसे पढ़ने के लिए आए सर कि आप हमको भी कुछ पढ़ा दीजिए मैंने पढ़ दिया तुमको अभी अभी हुआ है आप ठीक उसके बाद आए हो विशाल टया जी मुझे बात करने दीजिए आप लोग तब बोलिएगा जब मैं आपको कहू बोलने को मुझे बात करने द बाबू राम दास जी रामपाल दास के द्वारा जो ईश्वर बताया जा रहा है उसने सब कुछ बनाया है कि नहीं बनाया है दोबारा पूछ रहा हूं जी सर ज्ञान गंगा में ऐसे ही लिखा हुआ है क्या लिखा
01:48:28:00 है उन्हीं ने सब कुछ बनाया है वोह साकार है कि निराकार है साकार लिखा हुआ है सर अच्छा तो उसने जो है सतलोक को भी उसी ने बनाया है हां सर अच्छा तो सतलोक को जब उसने बनाया था तो जिस समय वो सतलोक को बना रहा था था तो वो जहां खड़ा था वो जगह किसने बनाई थी उसी ने बनाई थी मतलब वो जगह उसने वो मान लो यह एक पेन है जी इस पेन के अलावा दुनिया में कोई स्पेस नहीं है जी तो उसने वोह जगह कहां बनाई उसने पहले शब्द रूप में था इसके बाद यानी कि वो सा नहीं था पहले पहले उसने शब्द रूप में था इसके बाद उसने सृष्टि की यानी कि वह साकार रूप में नहीं था हां तो भाई शब्द रूप में यही हुआ कि शब्द रूप में जब था तो सकार में नहीं था रूप में नहीं था जी साकार रूप में नहीं था
01:49:43:28 पहले व साकार रूप में नहीं था पहले शब्द रूप में था शब्द से फिर उसने सृष्टि रची सृष्टि र देखो ज्यादा मत बोलो मैं पहले जो एक एक करके जो क्लियर कर वो क्लियर करो वो साकार नहीं था सबसे पहले इसको देखिए पूरा हम अच्छी तरह से क्लियर नहीं कर पाएंगे हम इसको गन अध्ययन नहीं किए आगे का नहीं तो तुम उसको उसको जब तुम यह कह रहे हो कि उसी ने सब कुछ बनाया है तो कैसे ठोक के कह रहे हो भाई यहां तक हम इसको पढ़े हैं ज्ञान गंगा में रामपाल जी का य पर पक्ष रखने चले आए हो आपको यह नहीं पता है कि उसने सब कुछ बनाया है कि नहीं बनाया है ज्ञान गंगा में लिखा हुआ है सर उ सब कुछ बनाया अरे तो मुझे बताओ ना कि कैसे बनाया जहां पर वो खड़ा है वो जगह किसने बनाई उसी ने बनाया है उसी ने बनाया अरे तो जब जब उसी ने बनाया है तो जब उससे भिन्न कोई जगह है ही नहीं वही वही है तो उसने जो भी कुछ बनाया वह कहां बनाया पहले उसने जब शब्द रूप में था इसके बाद उसने जब सकार में आया तो था निराकार था वो भाई जब सबद रूप में था तो निराकार रहा होगा होगा नहीं क्लियर
01:50:59:04 करो निराकार था इसको हम देखि कन्फर्म नहीं कर सकते हम जब उसको गन अध्ययन कर लेंगे नहीं तो ो के क्यों बोल रहे नहीं उसी ने सब कुछ बनाया जब तुम्ह पता नहीं है तो क्यों बोल रहे हो ताल ठोक के जाओ जाक पढ़ाई करो हा इसको देखिए हम वहा तक का तो अपनी चीज मूलभूत चीज तुम ईश्वर को क्यों मान रहे हो धर्म को धर्म क्यों मान रहे हो और मोक्ष को मोक्ष क्यों मान रहे हो य क्लियर करो जाकर के अच्छा यह बताओ धर्म क्या है रामपाल दास ने धर्म की कोई डेफिनेशन बताई है जी सर जी सर बताई है क्या है उन्होंने बताया है कि जीव हमारी जाति है मानव धर्म हमारा हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई धर्म नहीं कोई नहीं आ रहा अरे ये तो उसके वो हो गए व्यवहारिक लक्षण धर्म क्या है वो क्या नहीं है यह बता रहे हो वो क्या है यह तो बताओ वो किसके जैसा है यह बता रहे हो वो क्या है वो नहीं बता रहे हो अब उन्होंने तो भाई परमात्मा तक का भक्ति देते हैं भक्ति करने की ताकि आपका मोक्ष हो जाए अरे मेरे भाई
01:52:14:15 धर्म की क्या आवश्यकता है धर्म क्यों धर्म की आवश्यकता क्यों है धर्म का आलंबन क्यों लिया जाए धर्म में क्या बात है धर्म की वास् परिभाषा क्या है चलिए मैं अभी चलता हूं ठीक है जय श्री राम उन्होने बताया कि जो सनातन परमात्मा है उसकी भक्ति करने से मोक्ष प्राप्ति होगा तो सब लोग एक परमात्मा की भक्ति करिए और अपना कल्याण बता हो सनातन है तुम तो कह पहले व साकार है साकार है ना सर उने शब्द रूप में था शब्द रूप जो है हमको क्लियर नहीं है उसको हम कंफर्म कर लेंगे इसके बाद कह सकते हैं लेकिन इसका मतलब तुमको नहीं पता ना तुमको नहीं पता ना कि वो वो क्या कहते पूर्ण परमात्मा है कि नहीं जिसको तुम मन पूर्ण परमात्मा मानते हो भाई देखिए ज्ञान गंगा में तो पूर्ण परमात्मा ही लिखा हुआ है उसका कि वो अरे मेरे भाई सुनो मैंने सुनो मैंने तुमको कह दिया कि भाई मैं जो है पूर्ण परमात्मा हूं मैंने कह दिया तुमको मगर मैं ना उड़ पा रहा हूं ना मैं गायब हो पा रहा हूं बहुत से ऐसे काम है जो नहीं कर पा रहा और तुम्ह मेरे बारे में ज्यादा मालूम भी नहीं है तो तुम मुझे पूर्ण परमात्मा मानोगे
01:53:29:19 क्या नहीं माने नहीं मानेंगे कबीर को मानते हो क्या राइट माते मानते हैं मानते तो बताओ फिर वो साकार था कि निराकार था व साकार में था उस उनका बहुत सारा लक्षण उन्होने दिखाया पुस्तको से प्रकार जब पहली बार उन्होने बनाई तो वो साकार था हां उसने उन्होंने सृष्टि को जब रचा उन्होंने साकार हो कर सृष्टि को शुरुआत सबसे जो मूल रूप है वह क्या है परमात्मा का देखिए मूल रूप को हम अगली बार आपको बताएंगे उसको अध्ययन करके नहीं फोटो दिखाओ फोटो दिखाओ दिखाइए इनको फोटो दिखाओ
01:54:24:21 आप उसको अध्ययन किए हम उसको अध्ययन नहीं किया तो आपको हम क्लियर कैसे कर सकते हैं जब तुमने किसी का अध्ययन नहीं किया है तो तुमने उसको परमात्मा क्यों मान लिया बोलो उनके बहुत सारे लक्षण हमको मिले इसके वजह से हम परमात्मा माने है भाई जिसने सृष्टि बनाई और तुम बता रहे हो मुझे नहीं बताया कि उसने सृष्टि बनाई कि नहीं बनाई कैसे बनाई कुछ पता ही नहीं है तुमको फिर तुम कैसे मान रहे हो कि वो पूर्ण परमात्मा है उ किसी किसी ने केवल कह दिया ये जो गिलास है यह परमात्मा है बस इसलिए हम इसको परमात्मा मान रहे हैं हमें नहीं पता इसने ऐसा क्या है जो ये परमात्मा है जी क्यों ना धर्म पता ना ईश्वर पता और तुम तुम तुम तुम्हारे जैसे लोग संत रामपाल दास जी जो तुम कहते हो कि वो संत है उनका पक्ष आ कर के कमजोर करवाते हो मजाक उड़ते हो तुम लोग और पता है क्यों क्योंकि तुम उनके लिए नहीं आते हो तुम अपने लिए आते हो देखो देखो मैं शिवांश को जाकर के चुप कराऊंगा आके य ब दिखा देते हो नहीं पता निराकार कह देते हो सबसे बड़े दुश्मन तो तुम लोग हो उ
01:55:40:09 जेलम में बैठे हुए हैं जो उनके ऐसा मत कहिए उन्होने बताया है कि नाक कटवाने फिर हमको लोग कहते हैं कि आप अज्ञानी हों को क्यों ले लेते हो स्ट्रीम में फोन आता है हमको जबकि यह प्रश्न तुमसे हो चुका है 10 15 दिन 10 दिन पहले हफ्ते भर पहले दिखाओ इनको फोटो दिखाओ भैया कहां गए ठीक है फोटो दिखाइए फोटो दिखाइए अभी देखो दूध दू गंगा में कितना सच है व ज्ञान गंगा की फोटो दिखाओ जहा पर हा ये यहां पर यह जो चित्र दिखाई दे रहा है इसके ऊपर इन्होने लिखा है पूर्ण परमात्मने नम इसका अर्थ है कि ज्ञान गंगा के अनुसार ये जो चित्र है यही परमात्मा का वास्तविक स्वरूप है मानते हो कि नहीं हेलो हेलो
01:56:49:06 हेलो जी सर सुन रहेर सुन रहे सुन रहे हैं सुन रहे सर ये वास्तविक स्वरूप है कि नहीं हेलो नहीं बोलो क्लियर बोलो नहीं है नहीं है वास्तविक स्वरूप नहीं है वास्क स्वरूप नहीं है पॉइंट टू बी नोटे यानी किय पूर्ण ब्रम परमात्मा नहीं है यह पूर्ण ब्रहम परमात्मा नहीं है परमात्मा ही है लेकिन वास्त अरे परमात्मा ही है लेकिन वास्तविक स्वरूप नहीं उस तुमने वास्तविक स्वरूप नहीं है ना छलावा है ना
01:57:26:19 हेलो देखि यहां पर जब आते हैं हमको सुना रन आवाज देखो जी जी जी फिर से फोटो लाओ फोटो दिखा के बात कर फोटो फोटो लाओ हा बोलो अगर यह पूर्ण ब्रम परमात्मा नहीं है तो य के काल ने लिख दिया पूर्ण ब्रम परमात्मा हैय जी जी बता रहे हैं बता रहे सुन लीजिए उन्होंने बताया है गीता के अंदर कि परमात्मा वहां पर युवा शरीर में रहता है और वहां से जब मृत्यु लोक में आता है तो गति करके आता है अपना आपने बोला ये पूर्ण ब्रह्म परमात्मा नहीं है अभी आपने यह बोला यानी कि यह वास्तविक नहीं है यह झूठ है जो वास्तविक नहीं है वो क्या है एक मिनट वातक लेन यहां पर जब उन्होने आते लीला कर लिए नहीं नहीं आपने अभी बोला किय वास्तविक रूप नहीं है ये वास्तविक रूप कैसे है उन्होने हल्का तेज शर बना कर आते नहीं है ना बिल्कुल माया
01:58:42:07 रूप है वास्क शरीर सतलोक में बिल्कुल बिल्कुल अरे भाई उसके जैसा उसके जैसे रूप की बात कर रहा हूं मैं उस कागज बता ये अच्छा दोबारा दिखाओ दोबारा दिखाओ बात सुनि दिखाई दे रही है वास्तविक छ है पूर्ण ब्रम परमात्मा की अरे मैं जो किताब में पढ़ा हूं उसको तो सुन
01:59:15:13 लीजिए आपसे किताब पूछ नहीं रहा हूं मैं आपसे पूछ रहा हूं कि क्याय जा रही है यह जो फोटो दिखाई जा रही है यह पूर्ण परमात्मा की फोटो है वास्तविक वास्तविक क्या पूण ही है वास्तव में अ वहां पर हम जाक देखे थोड़ी है वहा पर कैसा है और यहां पर कैसे है अब इसको कैसे डिफाइन कर सकते है प ू बी नोटे भाई पॉइंट टू बी नोटे इनको विश्वास नहीं है कि परमात्मा ऐसा ही है कि कैसा है आपको विश्वास नहीं है ना आप हम आप सिर्फ अपना बात को ऊंचा रखने के चक्कर में आप हमको बोलने ही नहीं दे रहे हैं हम अपना बात को ं रख देंगे ता जनता देख र इधर उधर की बात मत करिए जब आप ये बताइए आपको विश्वास है हमारा भी सुनेंगे तब तो मैंने अरे तो जो चैप्टर चल रहा है उसको करो उसको पूरा करो ना चैप्टर को जो चैप्टर चल रहा है हमको विश्वास है किस पर विश्वास है इसका
02:00:35:00 मतलब बोलो बता रहे हैं बात को आप ऐसे ही आपका बात ऐसे ही ऊंचा नहीं हो जाएगा जनता आपको भी फैसला कर रही है हमको भी देख रही है का बोलोगे मुझे हटाना पड़ेगा व्यर्थ बोलोगे हटा दूंगा व्यर्थ मत बोलो पॉइंट की बात बोलो मैं मैं मैं व्यर्थ नहीं बोल रहा हूं वास्तविक बता रहा हूं अगर हटा ही देंगे तो उसमें कौन सी बड़ी बात है हटा दीजिए हम अपने हट जा रहे उसम कौन तुमने चार लाइन बोली मैं आपसे पूछ रहा हूं आपके अनुसार यह जो चित्र है यह वास्तविक पूर्ण परम ब्रह्म परमात्मा का वास्तविक चित्र है कि नहीं वास्तविक चित्र नहीं है ना वास्तविक क मतलब व ऐसा नहीं दिखता है नहीं वहां वहां पर युवा शरीर है यहां पर वो हल्का तेज पुंज का शरीर करके आते हैं हल्का शरीर करके आते हैं यानी कि ये जो ये जो छवि है ये नकली है ना झूठी है ना ये अगर वो वास्तविक शरीर में यहां पर खड़े हो जाएंगे तो उनके इतना प्रकाश है पूछ रहा हं नहीं तो मैं हटा दूंगा आपको मैं पूछ रहा हूं ये जो शरीर लेके वो आए ये जो शरीर दिखाया जा रहा है जिसके सामने पूर्ण
02:01:50:09 परम ब्रह्म परमात्मा लिखा यह वास्तविक छवि है कि नहीं झूठी है या वास्तविक है बताओ मैं गीता मैं गीता पर बात करने आया हूं गीता पर हमसे बात करिए देखिए आप अगर सवाल पगा पहले सवाल का जवाब दीजिए उसके बाद आइएगा आपका नेट भी अटक रहा है मैं अगली बार आप आइए तो इन बातों का उत्तर लेकर आइए आकाश दास जी आ चुके
02:02:31:03 हैं जी आकाश दास जी बोलिए जय श्री राम ठीक जी स साहेब राम राम ऐसा है मुझे आप सबसे पहले जब हम लोग धर्म चर्चा करने बैठे हैं तो आप मुझे आपकी जो धर्म की जो परिभाषा है पहले वो बता दीजिए अगर अगर वो गलत हो तो मैं उसको क्लियर कर दूं जिससे की क्योंकि मुझे लगता है कि हम लोग हम लोग धर्म को लेकर के ही यह सोचते हैं कि आपका धर्म कुछ और है हमारा धर्म कुछ और है मैं नाम की बात नहीं कर रहा हूं हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई वो मत बताना वस्तुत धर्म क्या है वो क्या नहीं है किसके जैसा है वो नहीं धर्म होता क्या है वो क्या है बताइए
02:03:23:27 देखिए सभी लोग धर्म जो है जो हम किसी भी के प्रति मन वचन कर्म से किसी का इतना हा आपकी आवाज बहुत कम आ रही है एक बार जाके वापस आइए आप एक बार जा ब्लूटूथ लगा के बात कर रहे हैं क्या अभिषेक सिं आपका चेहरा अभिषेक जी जी बताइए सीधे हो जाइए अभिषेक जी लेट के बातें ना करें आपका परिचय मेरा नाम अभिषेक दास है अभिषेक दास तो सिंह क्यों लिखा है आपने वो प्रोफाइल पर लिख रखा होगा टेबलेट न लिया था ध्यान नहीं रहा होगा अच्छा तो बदल लीजिए इसको बदल लीजिए फिर आइए क्यों बदल लीजिए बेवकूफ बनाने के लिए लिखा है ना नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं है अरे जो नहीं हो वो क्यों लिख रहे हो सच बोलो ना सच में है सच में है चलिए बोलिए
02:04:39:01 धर्म की परिभाषा क्या है आपके अनुसार नहीं मैं उस बात का उत्तर दूंगा जो आपने पिछले में बताया जो अध्याय में बोला है उसने मैंने अभी आपसे कोई प्रश्न नहीं पूछा है देखिए सबसे पहले हमारी चर्चा किस टॉपिक पर होनी है ये डिसाइड हो जाए आप धर्म की बात करने आए है तो मुझे जानना है कि आपके अनुसार धर्म है क्या आपका पहला वाला टॉपिक मैं क्लियर कर दूं जो उसने बताया था ब्र के देखिए मैं आपकी कोई बात तब सुनूंगा जब मैं यह जान लू कि आपके अनुसार धर्म है क्या पहले मैं वही वाला क्लियर करूंगा तो फिर जाइए आप जा सकते हैं ठीक
02:05:22:08 [संगीत] धर्म की जानकारी आवश्यक क्यों है क्योंकि जब हमारे जो बेस है जब उसको हम क्लियर कर लेंगे तो व्यक्ति उससे इधर उधर नहीं जाएगा ना कुछ भी करते हुए बाबूराम तुम्हारे पास जब इन सवालों का उत्तर हो तब आना और अपने प्रश्न भी लाना और इन सवालों का उत्तर लेकर के आना और नेटवर्क अच्छा हो तब आना आकाश दास जी जी अभी फिर आपकी आवाज कम आ रही है अभी भी आवाज कम आ रही है ठीक है हा बोलिए बोलिए आप थोड़ा हेडफोन निकाल लीजिए हेडफोन निकाल के बा हेडो ह ईयरफोन निकाल के त फिर बात की
02:06:23:12 हा आपके अनुसार धर्म क्या है वह बताइए धर्म देखिए जो सत्य को धारण करना ही धर्म है और मन वचन क्रम से हम किसी का हित ना करें और जो प्राणी भूला भटका है उसको सत्य के मार्ग पर जोड़ना ही हमारा सबसे बड़ा धर्म है देखिए यह इस तरह से है जैसे शिवांश नारायण द्वेदी कौन है तो शिवांश नारायण द्विवेदी जो य चैनल पर संत रामपाल दास जी के बारे में बातें करता है वो है इकन के बारे में बातें करता है वो है या फिर आर समाज के साथ बातें करता है वो है नास्तिकों से बातें करता है वो है मगर शिवांश द्विवेदी का स्वरूप भूत लक्षण क्या है वो आपने नहीं
02:07:19:13 बताया मैं बता देता हूं जी बताइए जीव की एक चा है जीव की एक चा है वास्तविक चा तो जो भी कुछ जीव कर रहा है उसमें एक चा छुपी हुई है जीव की जीव की चा का वास्तविक विषय जो है सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर है जो भी कुछ कर रहा है उसमें मूल रूप से वही है तो जीव की का वास्तविक विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को परिभाषित कर सकने वाले शास्त्र द्वारा बताई जाने वाली जीव की चा के वास्तविक विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त करने के निमित्त बताई गई विधि का नाम धर्म
02:08:14:04 है सुना जी सही है तो इसका मतलब क्या है कि जीव की जो चा है व है मोक्ष और जो मोक्ष जिन कार्यों को करके जिस विधि का आलंबन लेकर के आप मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं धर्म का उसी में परवन है उसी में विनियोग है उसी में उपयोग है ठीक है तो इसका मतलब यह है कि आप उसका धर्म मानेंगे उसके द्वारा दी जाने वाली नियमावली को मानेंगे जो आपको मोक्ष देती हो
02:08:51:21 ठीक है ना जी अब ये बताइए कबीर संत रामपाल दास जी के द्वारा जो दिया जाने वाला मोक्ष है मुक्ति क्या वो मुक्ति है जी हां बताइए आपका आज जो है सबसे ज्यादा प्यारा आपकी चाह का जो सबसे प्यारी चीज है वो क्या है अकॉर्डिंग टू रामपाल दास जी ज्ञान गंगा सबसे प्यारा जन्म मरण से छुटकारा शाश्वत स्थान को प्राप्त करना मतलब आपका सबसे प्यारा परमेश्वर नहीं है शाश्वत सुख आपका वह है परमेश्वर नहीं है आपका सबसे प्यारा और परमेश्वर को प्राप्त करना वही है जब शत स्थान प्राप्त हो जाएगा तो परमेश्वर प्राप्त हो जाएंगे आपका ध्यान सुख प है शाश्वत सुख परमेश्वर आपका आपकी मुख्य चाह नहीं है परमेश्वर केवल एक जरिया है वो शाश्वत स्थान प्राप्त कराने वाला ऐसा
02:10:01:19 है परमेश्वर और सा स्थान दोनों है परमेश्वर और शाश्वत स्थान दोनों दोनों आपका प्यार है दोनों में आपकी निष्ठा है भक्ति है ठीक तो आप मुझे बताइए जब आप मुक्त हो जाते हैं तो आप कहां पहुंचते हैं सतलोक में सतलोक में तो वहां जाने के बाद जो परमेश्वर के प्रति जो आपकी आसक्ति थी प्रेम था वो खत्म हो जाता है नहीं बढ़ जाता है मतलब अभी भी आपको परमात्मा को प्राप्त करने की इच्छा होती है
02:10:44:09 क्या ऐसा है जब वहां इच्छा तो नहीं होती है लेकिन जो है परमात्मा के प्रति प्रेम बना र इसने मना रता है मैं यह कह रहा हूं यदि आप परमात्मा से प्यार करते हैं उसे प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं तो क्या सतलोक पहुंच करके आप वो उस दुनिया में पहुंच जाते हैं जहां पर परमात्मा है मगर परमात्मा तो आपसे तब भी अलग रहते हैं ना अलग रहते हैं ना जी हा हा तो फिर वहां जाकर के आपका प्यार खत्म हो जाता है नहीं स्ने बना रहता है परमात्मा के परमात्मा को प्राप्त करने की जो यहां पर जो इच्छा हो रही है वह खत्म हो जाती है प्राप्त करने की इच्छा तो खत्म होही जाती है जब परमात्मा प्राप्त हो जाते हैं परमात्मा प्राप्त कैसे हो गया आप तो सतलोक पहुंचे हैं परमात्मा से थोड़ी ना चिपक गए आप सतलोक में परमात्मा का एक सतलोक में परमात्मा स्वयं विराजमान रहते हैं हमेशा एक तखत पर वरे भाई वो तो वो तो अभी जहां पर आप रह रहे हो वहां पर भी विराजमान है नहीं है यहां ऐसा यहां वो रूप नहीं है लेकिन वहां
02:11:59:16 हमेशा जब भी चाहो तब उनको दर्शन कर सकते हो उनकी सेवा कर सकते हो जब चाहे तब हा अच्छा यानी कि चाहत है सतलोक में भी चाहत है सतलोक में चाहत है कि नहीं है चाहत नहीं व यानी ईश्वर की चा खत्म सतलोक पहुंच के अपना वो बादाम काजू वो सब मिल गया ईश्वर की चा खत्म जी यानी कि ईश्वर के लिए जो प्रेम है यह केवल वहां तक पहुंचने के लिए वहां पहुंच के ईश्वर के प्रति प्रेम खत्म हो जाएगा प्रेम नहीं खत्म होता है प्रेम रहता है अरे प्रेम है तो जब तक ईश्वर को प्राप्त नहीं कर पा रहे हो जब तक ईश्वर दूर बैठा है बीच-बीच में उसे देखने की चाह आ रही है तो फिर सुखी कैसे
02:12:54:14 हो सेवा करने से आनंद आता है और आनंद आता है ईश्वर की सेवा करने से आनंद आता है ईश्वर की सेवा करने से आनंद आता है सतलोक में अच्छा तो जैसे फॉर एग्जांपल कोई एक सेवा बता दीजिए सतलोक की क्या कर सेवा में तो यही परमात्मा सेवा की जब चर वगैरा विराजमान होते हैं तो जो चब वगैरा की जाती है कर लेते है क्या समझा नहीं च वगैरा क्या होता है व समझाइए थोड़ा सा अने देखा होगा राजा के ऊपर दो तीन लोग साइड में रहते हैं वो ऐसे ऐसे करते रहते हैं ही अच्छा तो जैसे मान लीजिए कि आपने पंखा डला ये है ना इसमें आपको आनंद मिल रहा है इसीलिए आप सतलो जा रहे हैं क्योंकि आप भगवान की सेवा कर रहे हैं व और भी और भी आनंद है और बताइए क्या है वहा आनंद ही आनंद है संख लहर मह की और क्या है
02:14:09:20 और बताइए और क्या है वहां कोई दुख नहीं है अरे ठीक है मैं समझ गया दूसरा कोई आनंद बता दीजिए अब जैसे ही आनंद यही दूसरा कि हमें जैसे कोई भी चीज खाने की इच्छा हो रही है तो हम वहा कोई भी चीज के लिए परिश्रम नहीं या सतलोक जाने के बाद भी इच्छा है इच्छा हो सकती है तो इच्छा हो सकती है तो अब आपको एक सीन दिखा रहा हूं जरा मुझे करेक्ट करिएगा जैसे आप पंखा डला रहे हैं खूब देर तक आपने पंखा लाया ईश्वर के सामने खूब देर तक उनकी सेवा की फिर उसके बाद आपके अंदर इच्छा आई तो हमने सोचा कि हम काजू खा ले बादाम खा ले फिर जाकर के हमने काजू बादाम खाया ऐसा ही है चाहे कुछ भी करिए हा अरे भाई मैं सही बोल रहा हूं कि नहीं बोल रहा हूं हां सही बोल रहे हो सही बोल रहे हैं जी तो जब आप पंखा डला रहे थे तब आपको आनंद आ रहा था अब आपके अंदर इच्छा हुई है कि मैं जा कर के काजू बादाम खा लू काजू बादाम खाते समय आपको आनंद आएगा मगर पंखा डुलाना छोड़ करके जब आप जाएंगे काजू बादाम खाने
02:15:25:14 उतनी देर आप आनंदित तो नहीं हुए वहां कोई दुख भी नहीं है कोई कष्ट नहीं है किसी प्रकार का आनंद क्या क काजू बादाम को खाना आनंद है सेवा आनंद है वो परम आनंद है म आनंद है हा सही है परम आनंद नहीं है मतलब नहीं आनंद है मैं पूछ रहा हूं आपसे भगवान की सेवा करना आनंद है परमानंद है क्या
02:15:58:02 है हा हा परम आनंद सेवा करना परम आनंद है सेवा करना परमानंद है और वो काजू बादाम की इच्छा हो गई या इस तरह की और कोई इच्छा हो गई तो वो भोग करना वो परमानंद है आनंद है भाई साहब आवाज हा बोलिए आवाज आपकी अटक गई थी मेरी आवाज अटक रही क्या सुजीत जी हा नहीं नहीं ठीक है अच्छा दोबारा हमा आ मैं पूछ रहा हूं कि जो आप भोग करेंगे वहां पर जो काजू बादाम वगैरह खाएंगे वो परमानंद है या केवल सतलोक पहुंच जाना परमानंद है या ईश्वर की सेवा परमानंद है इसमें से परमानंद कौन सा है
02:16:52:24 परमानंद सेवा करना सेवा करना परमानंद है तो यानी कि जब आप जब आप काजू बादाम खा रहे होंगे तब आप परमानंद नहीं होंगे तब आनंदित होंगे आनंदित होंगे परमानंद नहीं होंगे तो इसका मतलब जो परमानंद है वह शाश्वत सुख नहीं है क्यों शाश्वत सु तोई शाश्वत क्या होता है हां हां परम आनंद सास जिसम बाधा ना आए जिसमें बाधा ना आए आप अगर पंखा भी डला रहे हो आप यहां से ले गए हवा करते हुए आप जब वापस लाओगे तो वहां से जब वापस लाना शुरू किया तो इसमें भी बाधा आ गई क्योंकि रुके अगर रुके वापस आने के लिए तो बाधा आ गई ये यह बाधा आ गई दूसरी बात काजू बादाम खाने चले गए तो बाधा आ गई रुक गया तो यानी कि जो आपका मोक्ष है वो नित्य सुखदाई नहीं है वहां पर भी रुकता है सुख बीच-बीच में कमी आती है सुख
02:18:05:07 में और कितना सुखी शोख है यहां तो कितना दुख है इस लोक में अरे यहां से बेटर है मैं मान रहा हूं मगर आपका वो नित्य सुख है कि नहीं सतलोक मैं पूछ रहा हूं सतलोक में नित्य सुख है कि नहीं नित्य सुख नि तो नित्य सुख है तो मुझे समझाओ ना कि जब आप काजू बादाम खाने जाओगे तो रास्ते में आप सुखी नहीं हो ना अगर काजू बादाम खाना जो है परमानंद है या तो यह केवल या तो यह कहो कि केवल सतलोक पहुंच जाना ही परमानंद है या तो यह कहो केवल सतलोक पहुंच ग तो परमानंद है कहो देखो वहा सुख का मतलब यह है कि अनंत
02:18:52:22 एक से बढ़ सम नहीं आपको दो चीज माननी पड़ेंगी या तो आपको यह मानना पड़ेगा कि वहां पर सुख जो है बाधित हो रहा है क्योंकि आप जब सेवा कर रहे हो तब सुखी हो जब सेवा नहीं कर रहे हो तब सुखी नहीं हो और या फिर यह मानना पड़ेगा अगर केवल या फिर यह मानना पड़ेगा कि सतलोक अगर पहुंच भी गए भले ही सेवा कर रहे हैं नहीं कर रहे वो भी परमानंद है है ना तो सतलोक पहुच गए भले ही सेवा कर रहे हैं नहीं कर रहे वोह भी परमानंद है हां वो भी आनंदित है इसका मतलब आप अपने प्रभु की सेवा नहीं कर रहे हो उनसे दूर खड़े हो तब भी सुखी हो जी जी तो फिर यहां पर जो आपकी जो ईश्वर की भक्ति है वो ईश्वर की भक्ति नहीं है वो सतलोक पहुंचकर सुख प्राप्त करने की भक्ति है अरे सतलोक पहुंचेंगे तो वही जो जिनकी भक्ति करोगे वही तो पहुंचाएंगे अरे भाई ईश्वर ईश्वर से तो दूर होगे ना ईश्वर हमेशा वहां पास में ही रहते ईश्वर की सेवा किए बिना भी सुखी हो ना वहा पर ईश्वर की भक्ति कि बिना भी सुखी हो ना वहा हा वहा भक्ति की आवश्यकता नहीं है तो इसका मतलब
02:20:07:24 यह है कि ईश्वर आपका एक सहारा है वहां पहुंचने का बस बस बस बस मेन है वो सतलोक का सुख बस सतलोक ईश्वर का प्रेम जो है व वही तक है जब एक बार सतलो पहुंच गए तो ईश्वर से कोई मतलब नहीं फिर कोई मतलब [संगीत] नहीं अब ये बताओ चलो ये अच्छा हुआ अब ये बताओ कि जब व जो यह है आपने कहा कि वहां पर किसी प्रकार की कोई कमी नहीं होती है जी व ऐसी जगह है जी जी तो ये बताइए ये सृष्टि बनते समय लोगों के मन में काल के पीछे जाने की इच्छा क्यों हो रही है देखि यह विस्तृत जानकारी ज्ञान गंगा पुस्तक में दी गई है भाब आप जन गंगा पढ़ के आए हैं कि नहीं आए आप क्यों आए जी पढ़ के आया बता रहा हूं बता देखिए जब परमात्मा ने इन लोगों की रचना की तो हमारे जी लोगों के प्रति एक जो जो आत्मा थी उसके अंदर
02:21:23:21 एक कमी आ गई थी कि लोक में रहने वाली आत्माओ के अंदर कमी आ सकती है पॉइंट टू बी नोटे हा नोट कर लीजिए जो ब्रम था नहीं है नित सुख है अरे कहा से जब तुम कह रहे हो कि सतलोक की आत्माओ के अंदर भी कमी आ सकती है के अंदर दूसरी चीज को प्राप्त करने का मन हो सकता है हा यानी की वो संतुष्ट नहीं है संतुष्ट संतुष्ट है लेकिन वो बात ऐसा है कि जैसे जब उन्होने देखा की य ब्रह्म काल जिसे कहते हैं यह साधना करने लगा तो इसके प्रति देख के हमारा यह भाव एक उदारता का जग गया इसके प्रति उदारता नहीं जाती है मतलब ममता आ ममता उदारता हां ममता इसने कुछ भी कहिए तो तो यानी ममता का भाव य आया कि हमें इसकी ओर जाना चाहिए जी तो परमा हमें कहीं पर जाने की इच्छा तब होती है जब हमें लगता है कि हमें इसकी ओर जाना चाहिए वहां
02:22:38:26 जाने से हमें सुख मिलेगा सुख की सुख की वजह से नहीं ऐसा है कहीं कहीं हा वहा कारण सुका नहीं क्या वो आसक्त हो गए और परमात्मा मना किया नित्य नित्य जो सुख वाला लोक है वहां पर भी सतलोक को छोड़ के किसी अन्य चीज में आसक्त हो सकती है आत्मा जी पहले पहले मेरी बात क्लियर कर दो आसक्त हो सकती है कि नहीं हो सकती है जब बता तोहा जब उ के लिए आसक्ति तब होगी जब मेरे को किसी चीज की कोई कमी होगी आप कह रहे हो आसक्त हुई आत्मा आसक्त हो गई कमी की वजह से नहीं हुई वहा जो है उसके भाव को देखकर आसक्त हो गई अरे तो भाव को देख कर के आसक्ति एट द एंड आसक्ति तो हुई आसक्ति का काम वो हम मान रहे आप आसक्ति लेकिन व यह ना क की सुख की वो मतलब सुख संपूर्ण सुखी लेकिन कह रहा हूं किसी कारण वस उसके मन में कमी आ जिसके कारण वह फसी हा
02:23:55:10 तो यानी की सतलोक में जाने के बाद भी सतलोक भी ऐसी जगह नहीं है जहां पर रहने वाला फसता नहीं है अगर आप आसक्त होगे तो गिर जाओगे फिर तो फसने तो काल के मुख में आ जा जा कर के भी वापस लौटने की आशंकाएं है आशंका है अगर आप पतिव्रता से गिरोगे तो भाई आप लोग रामपाल जी के भक्तही हो कि उनके शत्रु हो
02:24:29:12 य बताओ मोक्ष क्या है प म जन्म और मरण से के लिए हमेशा मुक्ति मिल [प्रशंसा] जाएगी क्या मिली क्या व जाके मुक्ति जब पहुंचेंगे सतलोक में तभी मिलेगी मैं पूछ रहा सतलोक में जाकर के मुक्ति मिल रही है क्या आपके अनुसार आप क तो फिर आ जाती है फिर आ जाएगी क रहे हो अरे एक बार से गलती हो गई एक बार पली बार गलती क्यों हुई
02:25:16:15 थी पहली बार हो गई [संगीत] अच्छा ठीक है अब हमने देख लिया कि आपका जो मोक्ष है वो लोगों ने देख लिया वह कैसा है ठीक है अब हम आगे चलते हैं आपका ईश्वर है वो कैसा है इनको जरा रामपाल य कबीर दास जी की फोटो दिखा दीजिए हम देख चुके हैं फोटो आपकी नहीं नहीं बार बार देखो देखने की चीज है हजार बार देखो जय
02:25:59:25 हो नहीं छूट रही भाई बंदी तो वहा भी है नहीं व नहीं आ जाओ वापस मको कहते जिसको प्राप्त करने के बाद कुछ भी प्राप्त करना शेष ना रह जाए जाने के बाद भी आपके अंदर वो आ रहा है पनी उनको तोड़ रहे हो वो गलती हुई एक बार हो गई तो तो गलती हो रही है ना वहां पर भी सतलोक में जाने के बाद भी अरे वो समय था अब नहीं चलो चलो अच्छा ये बताओ ये जो अभी हमने फोटो देखी है ये आपका जो ईश्वर है वो अजर अमर सर्वशक्तिमान है कि नहीं जी बिल्कुल अजर अमर सर्वशक्तिमान पूर्ण ब्रह्म अच्छा अजर अमर सर्वशक्तिमान शाश्वत पूर्ण ब्रह्म ठीक अब ये बताओ ये जो दिख रहे हैं कबीर ये बूढ़े हैं अधेड़ है व्यस्त है किशोर है बालक है या शिशु है कौन है देखिए यह मृत्यु लोक में परमात्मा शिशु रूप में आए थे और अंत
02:27:14:28 समय तक 120 वर्ष तक उन्होंने भाई साहब मैं आपसे पूछ रहा हूं मैं आपसे रहा हूं य जो रूप है परमात्मा का यह बूढ़ा है यह जवान है अधेड़ है क्या है ये यह वृद्ध अवस्था का है वृद्ध है और आप कह रहे हो यही पूर्ण परमात्मा का वास्तविक रूप है जी वास्तविक परमात्मा का रूप सतलोक में है भाई साहब देखिए हमको ज्यादा इतना घी नहीं पिया है हमको एट द डेडलाइन बोलिए डेडलाइन डेडलाइन बोलिए डेडलाइन अंतिम बात बोलिए वास्तविक स्वरूप है परमात्मा का या नहीं है वास्तविक स्वरूप परमात्मा का ये नहीं है यह मृत्यु लोक का ये जो हमारे मृत्यु लोक है यानी ये नकली स्वरूप है ये ये हा इसे आप कुछ भी मान लिए नकली स्वरूप मान लीजिए या कुछ मान लीजिए नहीं मैं नहीं मानूंगा आप बताइए क्लियर करिए वही मानू हां यह स्वरूप नकली है यह असली स्वरूप नहीं वहा परमात्मा बहुत सुंदर शरीर है तो जब यह असली स्वरूप
02:28:30:07 नहीं है तो उसके सामने ये जो लिखा हुआ है कि पूर्ण ब्रह्म परमात्मा एक तो गलत लिखा है वो इस इस शरीर में आए थे ना इसलिए उनको पूर्ण परमात्मा लिखा है लीला की थी मालिक ने इस रूप में अच्छा यह कहां लिखा है आपके उसम यह जो शरीर है वास्तविक रूप ये हर चीज लिखी नहीं होती ज्ञान दिया परमात्मा ने लीला की और वो चली गई शरीर और नोटे भैया कबीर सागर में आप हर बात को ग्रंथों से दिखाते हो मैं आपसे पूछ रहा हूं यह जो परमात्मा का आपने रूप दिखाया है यह वास्तविक रूप नहीं है यह आपके ग्रंथों में कहां लिखा है रामपाल दास जी ने कहा लिखा है य वास्तविक नहीं है मैं और कोई ग्रंथ नहीं मांग रहा इसके बारे में नहीं लिखा है कि परमात्मा ये लिखा हैल दास जी से भी दो कदम आगे चल रहे हो आगे नहीं चल रहे हैं यह नहीं लिखा है मालिक ने आप उनसे भी बड़े तत्वदर्शी हो क्या आप कुछ ऐसा बता रहे हो जो उन्होंने नहीं बताया उन्होंने
02:29:45:10 बताया है नकली नहीं है ये लीला स्वरूप शरीर उनका नकली नहीं है ला ये वास्तविक परम परम सत्य नहीं है ना ये मैं वही पूछ रहा हूं हां ये जो सतलोक में जो शरीर है वो नहीं है कहने का भाव सीधा समझो डला वास्तविक परम सत्य कहां पर है सतलोक में तलोक यानी कि यह जो शरीर है वो सत्य नहीं है परम सत्य नहीं है ये हमने बता तो दिया जो सतलोक में शरीर है वो ये नहीं है आखरी शद में मैं पूछ रहा हूं ये परम सत्य है कि नहीं तो कितनी बार होता है ये परम सत्य नहीं है ये उनका लीला बता रहे हो आप ऐसी बात बोल रहे हो जिसम बाद में अपने आप को बचा सक इसलिए उ कर रहा ये लीलाम शरीर है यानी कि ये वास्तविक शरीर नहीं है ऐसे बो ये वास्तविक स्वरूप नहीं है उनका वास्तविक स्वरूप उका बात रामपाल दास जी ने कहां पर लिखी है अरे लिखी नहीं है हम बता रहे आपको देख लो भैया रामपाल दास जी वालों जब आप दूसरे की दूसरे की वाणी में ग्रंथों
02:31:00:19 में अपने मन मर्जी की चलाओगे तो ये प्रोडक्ट बाहर आएगा निकल कर के इस तरह की बातें बाहर आएंगी निकल कर के अब आपने जो नहीं बोला है वो ये बोल रहे हैं ठीक है तो यह वास्तविक स्वरूप नहीं है अच्छा अब यह बताइए जब वो वास्तविक स्वरूप नहीं है तो इतना तो है कि जो स्वरूप दिखाया जा रहा है बूढ़ा दिख रहा है आप कह रहे हो कि वो लीला वाला शरीर है तो बूढ़ा दिखेगा जी और वहां पर जो शरीर है वह बूढ़ा नहीं है यह कह रहे है नहीं वहा नहीं है ब व बूढ़ा नहीं है तो वहां से जब वो यहां आता है तो अपना रूप बदल लेता है हां अपना रूप बदल लेते हैं अपना रूप हल्का कर लेते हैं नहीं हल्का और तेज करना अलग बात है और रूप बदल लेना अलग बात है हल्का और तेज तो ये है कि उससे निकलने वाली जो रोशनी है वो कम हो गई अरे वही है चेंजिंग हुआ चाहे कुछ भी मान लिए बदल लेते हैं एक ही बा ऐसे नहीं होता है सुनो मेरी बात ऐसे नहीं करते आप कहां गए ज
02:32:13:24 भा कहां गए भाई य हां हम यह कह रहे हैं कि सतलोक से जब वो आते हैं तो अपना पूरा का पूरा रूप बदलते हैं लाइट कम कर लेते हैं अपने शरीर की आपने कहा वोज को हल्का करता है मगर यह लिखा है कि वो अपने तेज पुंज को कम कर लेते हैं तो यानी लाइट जो है कम हो रही है तेज कम हो रहा है प्रकाश कम हो रहा है जी रूप नहीं बदल गया कि पहले सा फट के थे तो फट हो गए ऐसा है क्या जी हां यही है हां तो वो जैसे वहां है वहां से यहां आ गए तो जब वो यहां पर ऐसे दिख रहे हैं दाढ़ी वाले सफेद दाढ़ी वाले तो वो वहां पर भी तो वही हो गए ना बस वहां रोशनी ज्यादा है हां तो फिर वो जवान कहां हो गए वहां वहां जवान इसलिए करवा देते हैं वहां जाके सेविंग करवा देते हैं देखो वहां जन बुढ़ापा ही नहीं य ल वृप आ जाता है वहां तेजम शरीर है ये वैसा शरीर हो जाता है मृत्युलोक में पहली बात तो
02:33:28:27 यह भाई साहब आपने एक बात कही कि यह जो शरीर है यह परमात्मा का वास्तविक शरीर नहीं है ठीक है यह रामपाल दास जी ने कहां लिखा है यह आपको पता नहीं है दूसरी बात आपने कही कि लीला मय जो शरीर होता है वो जो है उम्र का प्रभाव उसम दिखता है वहां पर बैठा हुआ जो रूप है उसमें उम्र का प्रभाव नहीं दिखता है मगर यह जो लीलाम स्वरूप है जिसमें सफेद दाढ़ी है यही स्वरूप वहां बैठा है तो यह कैसी बातें कर रहे हो या तो यह कहो वहां पर सफेद दाढ़ी नहीं है यहां लीला में सफेद दाढ़ी है देखो ऐसा है स्वरूप बता दो दिया वहां तेज पुंज और एकदम स्वस्थ युवा और यछ रहा हूं ये जो सफेद दा दिख रही है दिख रहा है ये दिखता है क्या वहा वहां बुढ़ापा नहीं दिखता है यानी कि वो अपना रूप बदल के आते हैं काली तेज कम नहीं करते हैं अब तुम चाहे कुछ भी मान लीजिए नहीं नहीं क्लियर ऐसे तो हमने बता तो वो अपना स्वरूप तेज जो तेज पुंज है वो हल्का करके आते हैं और लीला करते हैं और 120 वर्ष तक उन्होंने लीला की और फिर
02:34:43:28 वो सासरी चली गई मेरी बात आप समझिए कि जो वहां से आ रहे हैं वोद दाढ़ी में है सफेद दाढ़ी में है या नहीं है जब वो आते हैं तो शिशु रूप में आते हैं और जिंदा महात्मा के रूप में जैसा वहां जिंदा महात्मा जैसा इसमें दिख रहा है ऐसे ही कई रूप में कई बार आ चुके हैं परमात्मा मैं आपसे पूछ रहा हूं वहां पर सफेद दाढ़ी वाला रूप है कि नहीं है हां सफेद दाढ़ी वाला रूप है परमात्मा का सफेद दाढ़ी रूप है वहां प सतलोक में जी तो फिर इस रूप को आप क्या मानेंगे सतलोक में भी वो बूढ़े दिख रहे हैं अरे बूढ़ा बता दो दिया वहां अलग हिसाब है य वहां तेज पुंज है तेज पुंज का शरीर है अलग चमक है वहां हमेशा य दिख रहे हैं कि नहीं दिख रहे हैं ये बताओ वहां पे नहीं बूढ़े नहीं दिखते हैं वहां वहां हर चीज सफेद ही है यहां हम तुम काला सफेद है वहां हर चीज स्वेत है यानी कि वहां पे कुछ भी नहीं है सिर्फ सफेद ही सफेद है सब कुछ और कुछ नहीं है जो जो वस्तुत चीज है वो सफेद है जैसे फल है य पीले है हरे वहा सफेद है नहीं हर चीज सफेद
02:35:59:06 का मतलब क्या है ना कुछ पता ही नहीं चलेगा कि वहा है क्या सुनो हर चीज जब सफेद कर दोगे एक जैसी तो कुछ पता ही नहीं चलेगा कि है क्या अरे पता क्यों नहीं चलेगा जब जैसे हम यहां देख रहे ये जो स्किन है सुनो ये जो स्किन है यहां प स्किन कलर दिख रहा है तुमने कहा वहा सबज सफेद है वहा जाके ये भी सफेद हो जाएगी बाल भी सफेद हो जाएंगे सब कुछ सफेद हो जाएगा कपड़े सफेद हो जाएंगे फल सफेद हो जाएंगे तो दिखेगा क्या क्या है क्या नहीं है देखो सो मतलब बर्फ बारी होती रहती है अब कम ज्यादा सफेद हो जाता है ना इसलिए नहीं बता सकते दिखता है सब कुछ इसका मतलब यह आपने माना कि कबीर का जो रूप है वह शाश्वत नहीं है वहां शाश्वत रूप है यहां नहीं है शाश्वत रूप वहां शाश्वत रूप है यहां पर शाश्वत नहीं है यहां पर बदलता है हा य रूप बदलता है उनका य रूप बदलता है यागा य वो जब
02:37:14:21 आएगा तो लीला पूर्वक अपने शरीर को नष्ट करके भी दिखा सकता है हां वो दिखाना चाहे तो दिखा सकते हैं यानी कि ऐसी लीला कर सकता है जिसके कारण यह कहा जा सके कि कबीर की भी जन्म मृति होती है लीला लीला उसम लीला लोक में हां कर सकते हैं क्यों नहीं व तो परमात्मा है क्या नहीं कर सकते हैं तो बचा के अभय रामपाल दाने लिखा है वो बताओ कि कबीर अपनी अपनी देह को नष्ट करने की लीला दिखा सकते हैं कबीर की जो देह है वो लीला ये जो य नाशवान लो है यहां पर शाश्वत नहीं है और परम जो सतलोक है वहां पर शाश्वत है और यहां पर वो बूढ़ा दिखता है मगर वहां पर वो जवान दिखता है और दिखता वैसा ही है जैसा यहां पर दिख रहा है ये दिखाओ कहां पे है कहां लिखा
02:38:15:27 है अब हम यहां किताब तो लेकर बैठे नहीं है परमात्मा का वर्णन सुनना हम तो देखिए ये कोई हम लोग गिल्ली डंडा खेलने तो आते नहीं एंटरटेन करने के लिए चलो भाई पार्क में घूमने चले आपको आना हिए आपके पास प्रमाण हो अपनी बातो का प्रमाण है बता तो रहे हैं आप उसम ज्ञान गंगा में आप जो है उसम पूरा वर्णन है परमात्मा के स्वरूप का और कैसे आते हैं क्या करते हैं सब कुछ है अरे तो वो वो लाओ ना ऐसे बातों से थोड़ी ना होगा वो लाओ दिखाओ ज्ञान गंगा खोलिए उसमें सब लिखा है दिखाइए स्क्रीन पर ज्ञान गंगा नहीं रखते अपने पास कौन से पेज कौन से पेज क्या
02:39:09:24 देख रना अगली बत वो ष रचना हमने पढ़ी उसम क नहीं लिखा है वो निराकार था पहले आपने बोला पहले निराकार निराकार नहीं है वो निराकार नहीं है तो फिर जहां वो बैठा है वो जगह किसने बनाई वो देखिए पहले अनामी लोग और और किसी दिन आना और किसी को ले लेते हैं आपसे चर्चा हो गई काफी देर किसी और को ले लेते हैं हां भाई दिनेश दास जी जय श्री राम जी राम राम जी हां वेदों में प्रमाण है कबीर भगवान है कहां लिखा है देखा नहीं अभी तक आपने देखिए कट टू कट बात करिए हसी ट्टा करेंगे मुझे इसमें कोई इंटरेस्ट नहीं है अभी जो टॉपिक चल रहा है आप उस पर बात कीजिए उस पर आया हूं मैं करने के लिए अच्छा तो बताइए कि क्या सब कुछ कभी कबीर ने ही बनाया है जी सही बात है कबीर जी ने बनाया है सब कुछ
02:40:25:10 अच्छा कबीर साकार है कि निराकार है साकार है साकार है जी तो ये कबीर खड़ा है और यदि वह सतलोक को बना रहा है तो फिर जहां पर कबीर खड़ा है उस दुनिया को किसने बनाया ये जो आप प्रश्न कर रहे हैं ना ये आपकी बुद्धि की सोच है एक जीव की सोच है आप आप य मुझे बताए आपके पास प्रश्न का उत्तर है तो दीजिए वरना जाइए तो एक अच्छा एक मिनट सुनिए जैसे आप प्रश्न कर रहे उसका अ अच्छा आप जो प्रश्न या उदाहरण देते हैं या इधर उधर की बातें करते हैं उसका आपको अधिकार है आप जा सकते भाई चाहिए आप जाइए और बहुत सारे लोग अपने
02:41:27:21 इनको हटा दो भैया दिनेश दास जी को य यह केवल यह बताने आए थे हम क्या करते हैं क्या नहीं करते हैं बाबूराम आपका जो नेटवर्क है वो सही है जी सर नेटवर्क में जी जी जी नेटवर्क में है सर हा चेहरा दिखाइए अपना दिखा रहे है एलियन पु दिखा रहे सर दिखा रहे
02:42:06:14 हां तो मुझे य बताइए कि आप जिस धर्म का पालन कर रहे हैं जिन सिद्धांतों का पालन कर रहे हैं जी वो शाश्वत है कि नहीं सर मेरा आपसे एक विनती है हाथ जोड़ कर के आप बड़े भाई हैं मैं छोटा मैं आप आपसे मेरा एक विनती है आप मुझसे ये सब बातें मत करिए मैं जानता हूं आपकी फिराक क्या है ये सब करके ये चापलूसी करके आप क्या करने आए हैं मुझे मालो में मैं ये कहने आया हूं ये नाटक मत करिए यहां जी जी आज का टॉपिक ये नाटक मत करिए बड़े भाई का नाटक मत करिए मेरे इससे बात करिए आप मैं गीता प बात कर रहा हूं इससे बात करेंगे इससे बात करेंगे इससे बात करेंगे पहले चुप हो जाओ पहले चुप हो जाओ अब तुम्हारा प्रश्न है वो बोलो मेरा प्रश्न ये है कि कृष्ण भगवान से अन्य दो कौन सा भगवान है उनको बताइए गीता अध्याय आ श्लोक नंबर 20 और
02:43:11:01 21 भगवान श्री कृष्ण ही लीला पूर्वक सर्वव्यापी परमेश्वर विष्णु है जो श्री कृष्ण के रूप में आकर लीलाए करते हैं जी देवकी के मा देवकी के गर्भ से बाहर आ जाते हैं प्रकट होते हैं लीला करते हैं जी अब आपका कहना यह है आपका कहना यह है कि जो श्री कृष्ण है वह ईश्वर नहीं है वह परमेश्वर नहीं है तो अब मैं आपसे शास्त्र की बात करने से पहले शास्त्र को आप कितना मानते हैं यह पूछूंगा जिससे कि मैं आपको जब मेहनत करूं इसको नीचे कर दो बाबू इसको नीचे कर दो जिससे कि मैं जब आपको मेहनत करके शास्त्र दिखाऊं तो उसको आप मानो तो मुझे पता होना चाहिए कि आप शास्त्र को कितना मानते हैं कितना नहीं मानते ठीक है मैं आप आपके हिसाब से मैंने कृष्ण भगवान को मैं स्वीकार कर लिया दो घड़ी आगे मत चलिए जी पहले मैं आपके सिद्धांत को जान जाऊ शास्त्र का मान शास्त्र को मानने का सिद्धांत क्या है आपका ठीक है हमारा मान जी
02:44:26:02 पहला प्रश्न यह है कि आप गीता को आप गीता दिखाइए ऊपर करिए इसमें कितने पृष्ठ है खोलिए कितने पृष्ठ है मुझे बता दो मुझे दिखाओ मत बोल दो मुं से 428 428 है गीता में टोटल श्लोक 700 है जी ठीक है अब तुम एक बार दोबारा से ऊपर गीता
02:45:14:19 दिखाओ आगे पीछे से दोनों साइड से दिखा दो बढ़िया अब नीचे कर लो अगर अब यह बताओ मैं इस गीता में से कुछ पन्ने कैची से फाड़ दूं जी तो यह वही गीता रहेगी जो अभी है या बदल जाएगी वही गीता रहेगी फाड़ने के बाद फने आपके पास आप फाड़ देंगे मेरे पास तो है गीता है उसम से पन्ने काट दिए फाड़ के अलग कर दिए जला दिए तो यह वही गीता रहेगी जो अभी है मेरा ला फट जाएगी आप ला तो है ना आप बला तो सही है मैं आपकी हाथ में गीता पूछ रहा हूं क्या वो गीता वही रहेगी जो है मैं आपकी गीता पूछ रहा हूं अगर अगर वही रहेगी तो इसका मतलब अभी जो आप पकड़े वो गीता नहीं है क्योंकि वो फटने के बाद भी वही है और और अगर फटने के बाद में वो नहीं रहेगी तो फिर आप खुद उसको फाड़ने की बात करते हो कई जगह पर गीता के लोको को मानने से मना करते हो
02:46:29:24 ठीक है तो इसलिए मैं पूछ रहा हूं कि क्या इसके कुछ पन्ने कुछ श्लोक काट दिए जाए कैची से तब भी ये वही गीता रहेगी जिस गीता को मानने का अभी आप दावा कर रहे हो बताओ वही गीता हम मान करेंगे जो पहले वाली गीता है मैं अलग से नहीं बनाऊंगा मैं आपसे ये पूछ रहा हूं बाबू भाई देखो मेरे पास बहुत ज्यादा समय नहीं है मुझे हो चुका ढाई घंटा पौने तीन घंटा हम अगर जो गीता आप पकड़े हो उसमें से अच्छा ये बताओ मेरे पास भी गीता
02:47:07:14 है ये गीता है पूरी है इसमें से मैं तत्वदर्शी वाला जो आपका पार्ट है वो फाड़ दूं जी फिर कहूं साबित करके दिखाओ तत्वदर्शी है कि नहीं कर दोगे भाई अगर एक में फाड़ देंगे लेकिन एक और तो है डबल है ना उसमें से दिखा देंगे अरे मेरे भाई तो इसका मतलब ये इसका मतलब यह गीता नहीं रह जाएगी ना गीता तो वही कगी जो पूरी हो एक मिनट गीता वही कहलाए गी जो पूरी हो जिसको रा ना गया हो जिसम कटिंग ना की गई हो ये तो गीता नहीं कहलाए ना कंप्लीट नहीं कहलाए कहलाए इनकंप्लीट ऐसे नहीं ऐसे नहीं गीता को मानने का दावा तब करो जब गीता को कंप्लीट मानते हो मानते हो कि नहीं अब ये बताओ जी मैं इस गीता को कंप्लीट मानता हूं पूरा कारा मानते हो पूरा का पूरा मानता हूं अच्छा तो भैया छठवें अध्याय खोलो इनको छठवां अध्याय दिखाओ अभी जो खोला
02:48:14:21 था मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं द गीता मैं आपकी जानकारी कर रहा हूं आप गीता को पूरा मानते हो कि नहीं पहले मैं तसल्ली करूंगा ठी कर लीजिए कर लीजिए कर लीजिए हा छवा अध्याय खोलो जी श्लोक नंबर बोलिए पहले मुझे एक चीज क्लियर कर दो कि तत्वदर्शी कौन होता है जो शास्त्र के अनुकूल भक्ति
02:49:00:06 बताए तत्वदर्शी का मतलब यह होता है वो तत्व ज्ञान को दे देखिए अरे मेरे भाई शास्त्र के अनुकूल भक्ति बताए वो होता है कि नहीं मैं पूछ रहा हूं जैसे कि इस गीता में गीता कहा देखो मैं पूछ रहा हूं तुम्हे दोबारा शास्त्र के अनुकूल भक्ति बताने वाला तत्वदर्शी है कि नहीं जी शास्त्र के अनुकूल ही बताने वाला तत्वदर्शी होता है जो शास्त्र में लिखा हुआ है वही तर्शी होता है शास्त्र के अनुकूल भक्ति बताए शास्त्र के अनुकूल ठीक है जी जी जी ठीक है अब खोलो शलोक लोक क्रमांक 10
02:49:57:22 हा खुल गया सर पढो मन अ इंद्रियों सहित शरीर को वश में रखने वाला आशा रहित और संग्रह रहित योगी अकेला ही एकांत स्थान में स्थित होकर आत्मा को निरंतर परमात्मा में लगावे यह बताते हैं रामपाल की नहीं बताए है ना सर यह बताते हैं जी जी ठीक है चलो अगला पढ़ो
02:50:37:16 गवा गवा लिखा हुआ शुद्ध भूमि में जिसके ऊपर क्रम से कुसा मृग छला और वस्त्र बिछे है जो ना बहुत ऊंचा है और ना बहुत नि है ऐसा अपने आसन को स्थिर स्थापन करके उस आसन पर बैठकर चित अवर इंद्रियों की क्रियाओं को वश में रखते हुए मन को एकाग्र करके अंतः करणी शुद्धि के लिए योग का अभ्यास करें सही बात है बिल्कुल सही क नहीं य करने को कहते नहीं बकुल बताते जी जीवा पढ़ो ब पढ़े सर उस आसन पर बैठकर चित और इंद्रियों की क्रियाओं को वश में रखते हुए मन को एकाग्र करके अंतः करणी शुद्धि के लिए योग का अभ्यास करें बिल्कुल सही बात है अच्छा और एक और पढ़ दो आगे 13वां काया सर और गले को समान एवं अचल धारण करके अवर स्थिर होकर अपनी नासिका के अग्र भाग पर दृष्टि जमाकर अन्य दिशाओं
02:51:52:27 को ना देखते हुए बरवा में है ना देखता हुआ और 13 चवा पढ़ दो चवा चवा ब्रह्मचारी के व्रत में स्थित ब्रह्मचारी के ब्रह्मचारी के व्रत में स्थित भय रहित तथा भली भाति शांत अंतःकरण वाला सावधान योगी मन को रोक कर मुझ में चित वाला अवर मेरे परायण होकर स्थित होवे बहुत बढ़िया उसने उसने बोल रहा है किन अब ये बताओ जो तुम्हारे जो तत्वदर्शी है ये आसन बिछा के ऐसे ही नासिका को अग्र भाग यह पीछे जो लिखा है रवा कि नासिका पर ध्यान लगाओ एक चित्र हो करके और आसन बिछा के बैठो ये सब बताते हैं रामपाल नहीं बता इसको नहीं बताते इस इस श्लोक की तरह नहीं बताते नहीं यह जो लिखा है शुद्ध भूमि में जिसके ऊपर कुशा मृग छलावा निकालो
02:53:04:03 गवा जी जी जी जी इसमें लिखा है शुद्ध भूमि में जिसके ऊपर क्रमश आसन बिछाकर बहुत ऊंचा नहीं हो आसन बिछाकर वहां पर बैठे और तपस्या करें ध्यान लगाए यह बताते हैं कि नहीं जी जी बताते हैं इसको अच्छा अब तुम कितने बड़े वाले धूर तो हो जो तत्वदर्शी का खंडन कर रहे हो यहां पर बैठ कर के दिखाओ भैया इनको पेज नंबर खोलो इनकी ज्ञान गरमा गीता की अभी पता चलेगा तुम्हारी सच्चाई ूर्त कहीं के दिखाओ गरमा गीता की खोलो छवा अध्याय खोलो
02:53:53:27 आप मुझसे गीता के ऊपर बात नहीं कर सकते इसलिए नहीं हमको बोलने देते हो हां नीचे करो इसमें खोलो जरा छह से नौ वाला श्लोक कोई मतलब नहीं है क्या बोल रहे हैं क्या नहीं बोल रहे हैं चले आए मुंह उठा के अभी तुम्हारी पोल खुलने वाली है रुक जाओ हो जाओ बोलना नहीं बोलना नहीं जी से छ श्लोक एक का सारांश और नीचे चलो भैया और नीचे
02:54:30:18 चलो पाच से छ और नीचे चलो आ से न का सारांश अब और नीचे चलो थोड़ी और नीचे चलो हा 10 से 15 आ गया आ गया ऊपर ऊपर है हा य ये ठीक है हट योग करके ध्यान कर गीता ज्ञान दाता का मत व्यर्थ है य वह मना कर रहे हैं छठ अध्याय के दवे लोक से लेकर 15 तक गलत है पढ़ो चवा शलोक में भी तो बोला पढ़ो क्या लिखा है गीता अध्याय शलोक पहले रुको बाबू रुक जाओ गीता अध्याय लोक 10 से 15 का सारांश इन लोको में एक स्थान पर बैठकर हट योग द्वारा अभ्यास करने को कहा गया है जबकि फला फला अध्याय में फला फला श्लोक में इसके विपरीत कहा गया है जो एक स्थान पर बैठकर हट कर के इंद्रियों को रोककर साधना करते हैं व पाखंडी हैं एक स्थान पर बैठ रहा है तो निर्वाह कैसे होगा इस अध्याय श्लोक छ इस अध्याय छ श्लोक 10 से 15
02:55:45:22 के आधार पर आज कल के भोले जिज्ञासु अब अगर तुमको किसी ने य चीज बताई है रामपाल दास जी ने तो तुम यहां पर भोले जिज्ञासु हो और उन्हें यह चीज बताने वाला कौन है भक्त भोले जिज्ञासु भक्त आत्म ध्यान योग केंद्रों के चक्कर लगाते हैं ध्यान साधना कोई अढ़ाई घंटे सुबह शाम आवश्यक बताता है कोई किसी फिल्मी गाने की धुन बजाकर नाच नाच कर दिखाता है फिर थक जाए तब सब आसन पर निडल होकर आनंद तथा फिर निद्रा को ध्यान की अंतिम स्थिति बताते हुए एक मिनट कोई प्रश्न न लगाए उत्तर मिलता है त्र पर लगाए
02:56:33:19 त्रिकुटी कोई प्रश्न करता है कि ध्यान त्रिकुटी का उस साधक को कोई ज्ञान नहीं है तो इन्होंने शुरू में ही कह दिया ऊपर कर दीजिए भैया जरा इन्होंने श्लोक नंबर 10 से 15 तक जो ज्ञान है वह व्यर्थ है और तुम कह रहे हो हमको तत्वदर्शी ने यह बताया है करने को अरे तो चवा लोक में भी तो मना किया था कि इसको नहीं बताते हैं मैं कह रहा हूं च को छोड़ दो को तो माना बवे को तो
02:57:11:26 माना लेकिन 14 लोक अभी तो आपने 11 12 के लिए भ इनको हटाओ के साथ झूठे मक्कार व्यक्ति को हटाइए हटाइए हटाइए कितने बड़े झूठ बताइए झूठ की कोई हद होती है अपने ही गुरु का खंडन कर रहे हैं अपने ही गुरु को बचाने के लिए गुरु कह रहा है 10 से 15 तक के श्लोक में व्यर्थ है और यहां हमसे छक लड़ाने के लिए आए हैं और इसलिए बोल रहे हैं कि नहीं यह बताया है हमारे गुरु नेरे शिवा पहली बार लोक पढ़े वो वो पहली बार वो लोक देखे हैं व इसलिए भटक
02:58:05:00 गए कुछ नहीं रामपाल जी बाबू को बाबू बना दिए रामपाल दास जी ने व आसन पर बैठना बताया है क्या जो गवा श्लोक है वह आपको बताया है भक्ति करने को जी जी आप हारने लगते हैं तो हटा देते हैंक रामपाल दास जी ने बताया है कि नहीं हमने चवा शलोक आपको मना किया थावा शलोक सही नहीं है उसने अपने बारे में बताया दिया मैंने चवा छोड़ दिया बाकी के क्या करें बाकी को भी छोड़ दीजिए उस दो प्रकार का आप कह रहे हो आप कह रहे हो किवा जो है शलोक हमको बताया है रामपाल दास जी ने करने को रामपाल दास जी कह रहे हैं गलत है वो श्लोक नहीं करना है नहीं करना है जब उन्होंने मना कर दिया तो नहीं करना है उसको क्या दिक्कत है अब आप जाइए तेजी के साथ चलिए गीता तो कह रही है ना ऐसे करने को देखो कितना कितना धूर्त व्यक्ति है रामपाल दास जी ने मना किया तो नहीं करना फिर अभी कह रहा था कि वो हमें क बताया है वो हमें बताया है थोड़ा पीछे का सीन दिखा दो इनको जरा स्क्रीन में जब ये 11वां श्लोक पढ़ रहे थे बिल्कुल सही है बिल्कुल सही है ऐसे बोल रहे इसको
02:59:20:06 हट योग बताया है रामपाल दास जी ने हट योग बताया रामपाल दास जी ने दिखाओ इनको यह पाखंड है ना खुद ही अपने पोल खोल रहे हैं ये जय श्री राम भाई जी जय श्री राम आज तो आप नए अवतार में दिख थोड़ा आजकल हम बाहर हैं सभी को एकादशी प्रबोधन एकादशी की बहुत बहुत शुभकामनाएं बहुत बहुत आपको भी हार्दिक शुभकामनाए अब मेरा गला बैठ गया तीन घंटे हो चुके हैं आज
03:00:08:08 बहुत जैसे आए थे ना काशीराज ने उनको उकसाया था को तुम भगवान बन जाओ तो वही दशा इनकी है वही हमारे गुरुदेव कहते हैं मूर्ख और शक दूसरों के बजाने से बचते हैं तो वही इनकी हालत है तो प को बड़ा घमंड हो गया था मैं स्वयं भगवान एक मिनट जरा इनको सुन लो सुनाइए क्या
03:00:43:03 प मन और इंद्रियों सहित शरीर को वश में रखने वा आशा रहित और संग्रह रहित योगी अकेला ही एकांत स्थान में स्थित होकर आत्मा को निरंतर परमात्मा में लगावे यह बताते हैं रामपाल की नहीं बताए सर ये बताते हैं जी जी चलो अगला पोवा लिखा शुद्ध भूमि में जिसके ऊपर क्रमश कुसा मृग छला और वस्त्र बछ है जो न बहुत ऊचा है और बत नी है ऐसा अपने आसन को स्थापन करके उस आसन पर बैठकर चित अवर इंद्रियों की क्रियाओं को वश में रखते हुए मन को एकाग्र करके अंतक शुद्धि के लिए योग का अभ्यास करें सही बात है
03:01:37:27 ब बकल सही बात है और यह रामपाल दास जी बताते हैं बिल्कुल सही बात है गुरु का द्रोह और रामपाल दास जी बताते नैतिकता का द्रोह झूठ रामपाल दास जी ने यह नहीं बताया वो मना कर रहे हैं श्लोक क्रमां छ से छ का छठ अध्याय का जो दसव से लेकर के पवा श्लोक है वो ठोक के कह रहे हैं यह काल का अपना मत है यह मानने योग्य नहीं है और यह य बोल रहे हैं कि बिल्कुल सही बात है और हमारे रामपाल दास जी ने बताया दो बातें हो गई एक गुरु द्रोह क्यों क्योंकि गुरु जो कह रहा है उसके विपरीत तुम कह रहे हो और दूसरा दूसरा क्या है नैतिकता का द्रोह झूठ बोल रहे हो कि रामपाल दास जी नेय बताया है किस लिए जबक जब तक बुद्धि में एकाग्रता नहीं आएगी तब तक वो कुछ नहीं कर सकती उन क्यों उनका तो रत ज्ञान है जितना ज्ञान रामपाल जी ने बताया किताब खोल करके उससे आगे आप उनको कहीं भी पूछ लो कहीं कुछ नहीं बताने वाले मतलब इनको समझाना स दीवाल पर सिर मारने के समान है वो तो आप पर भगवान इतनी क् रखी है कि आप इतना उनके साथ सर खपा लेते हैं
03:02:53:19 हमारे बस का नहीं है पर हमें जब तक हम आपका शो नहीं देखते हैं उत्तराखंड में हूं बड़ी ठंड है यति की म इस व्यक्ति की मूर्खता की पराकाष्ठा देखिए आप आज ही हमने अपनी लाइव में बताया है कि छव अध्याय के 10 से लेकर पवे श्लोक को रामपाल दास ने मानने से मना किया है उसका कोई भी कारण दिया हो सही बात और ये व्यक्ति तब भी आ कर के बोलना बिल्कुल सही है बिल्कुल सही क्यों हराने आया हूं उसको मतलब नहीं है कि धर्म जीते ईश्वर जीते गुरु जीते यह मतलब नहीं है उनके से कोई लेना शिवा नारायण द्विवेदी को आहवान को चुप कैसे कराया जाए
03:03:42:16 बस जी पाड़ी ये हरर महादेव सभी लोगम ये दिक्कत जब होती है जब खुद कुछ नहीं पढ़ते हैं दूसरे की बातों को मान लेते हैं ना तब होता है ऐसी स्थिति ब सुनी सुनाई बात है शिवांश जी को देख देख देख कर के तो वो भी सीख गए उनको तो कुछ पता ही नहीं था वो तो शिवांश जी ने दिखा सिखा दिया उनको इतना भी मगर फिर भी वो कहते हैं ना कि बिल्ली शेर को सब सिखाती है मगर छलांग मारना नहीं सिखाती ये कितना भी कर ले जैसे ही दर्शन वाला भाग आएगा ईश्वर ने सब कुछ कैसे किया यह वाला भाग जब आएगा इन लोगों के आज तक किसी ने जवाब दिया हो तो बता दो किसी ने नहीं जवाब किसी ने नहीं आश्चर्य वाली बात यह देखिए जो है
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→ Used in: A · Live Breaking news रामपाल का काल #rampaljimaharaj #kabir at 42:41 ↗
03:04:35:18 सारे ज्ञानी थे ब्रह्मा विष्णु महेश दुर्गा और ब्रह्म इनका पिता सर पुरुष और सतयुग के ब्राह्मण ये सारे अज्ञानी लो
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03:04:50:21 यथ ज्ञान भ सारे अज्ञानी है एक मिनट बंद कर दीजिए बस ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती गणेश ब्रह्म सब अज्ञानी है तो वह जो शास्त्र दे रहे हैं उसमें अज्ञान होगा या ज्ञान होगा बताइए अज्ञान होगा तो जब उसमें अज्ञान है और उसके आधार पर आप कह रहे हो वेदों में प्रमाण है और कबीर भगवान है तो इसका मतलब यह भी अज्ञानता है हमारे गुरु जी कहते हैं कि दोष हो तो मिट जाएगा स्वभाव में ही उनका जो है अज्ञान अज्ञानता भरी हुई है तो स्वभाव मिट नहीं सकता उनका दोष हो तो दूर हो जाएगा शिवांश भाई एक चीज आपने देखा है एक चीज आपने देखा कि आप जब से डिबेट करने लगे हैं तो लोगों के पास अब भगवत गीता की नई किताब आ गई [संगीत] है कुछ दिनों तक य चलता रहा तो जैसे आपके पीछे रखे हुए ग्रंथ है ऐसे हो सकता है उनके पास
03:06:05:26 भी ग्रंथ आ जाए अरे और चल गया थोड़े दिन तो रामपाल के फॉलोअर नहीं रहेंगे और थोड़े दिन चलता रहा तो पूर्णत सना हो जाएंगे वो बोलेंगे रामपाल जी आप जेल में रहो ये लोग एक्चुअली कर क्या रहे हैं कि जीतने के लिए रामपाल ने बोला हो या ना बोला हो ये हमारी बात को कॉपी कर रहे हैं जीतने के लिए कॉपी करते करते अंत में आएंगे कहां कि मैं एक दिन पूछूंगा गणेश जी की भक्ति बताई है हां बताई है करते हो हां करते हैं अभी एक दिन एक व्यक्ति बोल के गया है एक दिन एक व बोल गया करते हैं भगवती की भक्ति करते हैं रामपाल दास जी जेल में बोल के गया जीतने के चक्कर में ये हां हां हां हां करते जाएंगे और एक दिन वही बन जाएंगे जो हमें बनाना है यह सोच रहे हैं कि हम हरा रहे हैं और हम वस्तुत हम जीत रहे हैं बिल्कुल
03:07:10:00 ब इन लोग पिछले दो घंटे से आपने इतनी खोल खोल के दिखाया फिर भी मैं कमेंट देख रहा था आपके नीचे शिवांश अज्ञानी है शिवांश अज्ञानी है मतलब सामने खोल खोल के भी जो चीज दिखाई उसको देखने के बाद भी यह बोल कि अज्ञानी है तो इसका मतलब कि यह तो भ्रम जाल में जी रहे हैं फिर अगर कोई शास्त्र कोई दूसरा खोल के दिखा रहा है वह गलत है हां अगर रामपाल कुछ मनगण कहानिया भी आके दूसरे दिन बता रहा है वो सही है तो ये ब्रेन वश ही हुआ एक तरफ से जिसको समझना था मैं शिवांश भाई मैं सही बताऊ मैं तीन लोगों को रामपाल के चंगुल से मैं निकाल चुका हूं पिछले एक महीने में अच्छा वो भी छछ सा सात साल के जिन्होने नाम दीक्षा ले रखी थी मैंने उनसे सिर्फ इतना बोला आप मेरी बात मत मानो आप किसी की बात मत मानो भगवत गीता है उठाओ श्लोक एक से लेकर श्लोक 700 तक कंटिन्यू पढ़ो बीच का कोई भी श्लोक मिस मत करना पहला जो श्लोक का जो शब्द आता है
03:08:25:03 ध गीता का और लास्ट शब्द जो आता है मर धर्म ये ये बाबूराम पूछ रहे हैं यदि अज्ञानी नहीं हो तो हटाए क्यों क्योंकि गुरु द्रोही से क्या बात करें तुम आए हो रामपाल दास का पक्ष रखने और रामपाल दास जी की दास का ही विरोध कर रहे हो तो तुमसे बात क्या करें पहले अपनी चीज तो क्लियर करो कि रामपाल का पक्ष नहीं मैं रामपाल का द्रोही हूं फिर आना जब जब उन्होंने गीता पढ़नी शुरू करी लगभग एक महीने डेढ़ महीने दो महीने तक उन्होंने मेरे से खूब बहस करी खूब बहस करी खूब बहस करी लास्ट में जब मैंने बोला कि आप खुद गीता पढ़ लीजिए शुरू से मैंने एक एग्जांपल दिया उनको कि मैंने गुस्से से कह दिया कि आप चोर हो तो मेरे ऊपर बरस पड़े बरस पड़ा बोला से बोल ले कि चोर हो मैंने कहा भाई बात तो पूरी सुनो मैं समझता था आपको चोर हो आप तो आप तो बहुत अच्छे व्यक्ति हो इससे क्या समझे आप बोला अब उसके दिमाग में तो सिर्फ रामपाल बैठा है तो मैंने कहा कि इसका मतलब यह हुआ कि आपने आधी ही बात सुनी मेरी पूरी बात आपने नहीं सुनी आपने पूरी बात सुननी है तो आप पूरी गीता पढ़िए
03:09:40:13 तब आपको समझ में आएगा कि भगवान किसकी शरण में जाने को बोल रहे हैं और किसको पापों से मुक्ति कराने के लिए कह रहे हैं तुम कह रहे हो कि भग अर्जुन तो पहले ही उनके शरण में था वहां क्या शिक्षा लेने के लिए शरण में था यहां पापों की मुक्ति के लिए शरण में आने को बोलने हैं दो चीज हो गई देखिए शरण वाली बात तो ऐसी है कि कोई अपने सवालों की जानकारी मांगने गया कि मैं आपकी शरण में आया हूं मुझे मेरे सवालों का हल बताओ मेरी प्रॉब्लम कहां से सॉल्व होगी जी तो उन्होंने सब कुछ बता दिया और यह बताया कि तेरी प्रॉब्लम मुसे ही सॉल्व होगी तू मेरी शरण में आ और कहीं मत जा सिंपल जिस रूप को तू मेरे अभी तक जानता था उससे भिन्न मेरा जो रूप है उसको जान लिया है जब उस रूप के साथ मुझे स्वीकार करते हुए अब इस रूप को प्राप्त करने के निमित्त मेरी शरण में आ यह भागवत के एकादश स्कंद में भी है मुक्ति स्कंद भागवत का बहुत अ सारांश है विस्तृत सारांश है भागवत के एकादश स्कंध में तो आपकी जो डिबेट देख के बहुत से लोगों का जो मन है वो चेंज हुआ है नीचे कमेंट से भी
03:10:55:13 मैं देखता हूं इससे पहले कमेंट से मैंने देखे थे कुछ लोग थे जो जाल में थे वो लोग बाहर निकल रहे हैं अच्छी बात हैय चलिए भैया मैं वो पवन दास की वीडियो देखा था जो बताए थे ना क्या पवन दास वानस की वीडि देखा था मैं हां वो आपको बोला ये काल है आपको फसा रहा है अब वो तो ठीक है मगर उन्होने उसने मेरे बारे में बोलते हुए इन लोगों के लिए क्या क्या बोला वो तो सोचो भाई मैं तो विरोधी पार्टी हु तो मुझे मुझे थोड़ी ना मेरे को कह देगा कि वो राइट है मगर वो बोल रहा है कि तुम लोगों की ना शक्ल है ना सूरत है तुम लोग जाकर मुह उठा के चले जाते हो इतनी हसी आई इतनी ऐसी
03:11:45:09 आई चलिए अमित जी की बात सुन ले फिर इस चर्चा को हम लोग समाप्त करते हैं तीन घंटे हो चुके हैं जय श्री राम जी जय श्रीम ज श्री राम जय श्रम मेरा कहना यह है कि वैसे तो मैं भी दो चार सवाल इनसे पूछना चाहता था पर अवसर नहीं मिला कोई बात नहीं नेक्स्ट टाइम जरूर आप सवाल पूछना जब य क्वेश्चन आप करते हो क्या ब्रह्मांड का ईश्वर कबीर है कते हर चीज कबीर ने बनाई है जब कबीर ने सारी चीज बनाई है तो जब असली रूप में 500 साल पहले पैदा हुआ था तो दो रोटी क भी नहीं कमा पाता था पहनने के लिए दो कपड़े नहीं थे तो ब्रह्मांड का ईश्वर कैसे हो गया फिर इनसे पूछा जाता है कितने दिन में ब आए तो पूछ लीजिएगा जरूर दो तीन और बात है बेशक आप याद रख लीजिएगा मैं ह ना हू एक कुछ पूछ कबीर ने कते दिन में बनाई ये ईश्वर है कि राज मिस्त्री है और तीसरा दिन में तो किसी का बाथरूम नहीं बनता बताने सृष्टि बना दी दिन में साइंस नहीं पढ़ी इन लोगों ने सास के हिसाब से भी
03:13:00:09 13.8 अरब साल लगे नहीं यह तो ईश्वर का मन है अगर वह अपने मन से नहीं बना पा रहा है तो ईश्वर कैसा स ईश्वर का मन है व सोचे और सृष्टि बन जाए और एक चमत्कार वा ईश्वर का मन है चाहे तो सालो लगा दे सृष्टि बनाने में एक बात यह भी तो देखिए 500 साल पहले जो व्यक्ति 5000 पीछे जाकर भगवान कृष्ण के शरीर में घुस के काल बन रहा है यह कैसा चमत्कार है क्या है चौथा बंदी छोड़ बंदी छोड़ करते रहते हैं पता नहीं कौन सा बंदी छोड़ है या तो जेल में बंद है उनको फिर बंद बना मतलब मुक्ति अच्छा मेरे को लगा इनकी कोई बंदी भाग गई मगर वो मुक्ति है नहीं वहां जाके भी लालसा बाकी रह जाती है ठीक है च कुछ कहना हो तो बताइए आखरी बात और मैं ये कह रहा हूं कि कुछ नई बात आज पता चली है इनके सतलोक में भी जा काजू बादाम ही खाना पड़ रहा है पंखे की हवा खानी पड़ रही है वो चीज तो धरती पर भी उपलब्ध है बकल वाइ दुनिया में रह रहे तो यहां तो सब कुछ कलरफुल
03:14:15:15 है बाकी क्या बोलेगे तो शास्त्रों की क्या नाम है एक चीज और मैं कहना चाहता हूं शास्त्रों में वर्णन है कि अज्ञानी लोगों के आगे शास्त्र नहीं खोलना चाहिए जो अयोग्य लोग है उनको ना पढ़नी चाहिए ना सुननी चाहिए बात कल से कम से कम 50 लोग कह चुके हम किसी किसी को शास्त्र नहीं दिखा रहे हम सामने वाले को निरुत्तर होता हुआ या जो अधर्म फैला रहा है गलत बात फैला रहा है उसको दिखाकर जो हमारे लोग जो फस सकते हैं उन्हें फसने से बचा रहे हैं और हमारे लोग जो फसे हुए हैं उन्हें वापस लाने का प्रयास कर
03:15:06:25 रहे बात केलिए आपकी बत प्र बहुत अच्छा काम कर रहे लेकिन फिर भी है अयोग्य के आगे शास्त्र का ज्यादा वणन श कोने पाप लगता है तो मैं उस पाप को भुगत मैं अपने धर्म की रक्षा के लिए उस पाप को भुगतने के लिए तैयार हूं भाई और क्या बता महाराजा बुद्धिमान होने के बाव ब्रा को उ एक रस की कहानी है कि पता नहीं क्या हुआ था तो रुक्मिणी जी से या लक्ष्मी जी से जब उ उन्होंने वो डिमांड की
03:15:47:02 कुछ ऐसा करने की जो श्री कृष्ण भगवान के विरुद्ध था मान लो झूठ बोलने की डिमांड की कि आप जो है झूठ अगर बोल दोगे श्री कृष्ण से तो श्री कृष्ण को यह फायदा हो जाएगा श्री कृष्ण से अगर आप झूठ बोल दोगे तो आपको यह फायदा हो जाएगा तो लक्ष्मी माता या रुक्मिणी माता ने उस समय मना कर दिया कि नहीं नहीं मैं अपना मैं अपने पति से झूठ नहीं बोलूंगी अप मैं अपने पत्नी व्रता पतिव्रता धर्म का त्याग नहीं करूंगी जो पति से सच ही बोलूंगी मैं ऐसा एक एग्जांपल दे रहा हूं मुझे एक्जेक्टली याद नहीं है वो क्या कथा थी क्या मांगा था डिमांड क्या थी मगर फिर वही जो ऋषि थे वही ऋषि गोपियों के पास गए या राधा के पास गए राधा जी के पास उनसे वही बात बताई कि अगर तुम ऐसा कर दोगी छल श्री कृष्ण के साथ तो श्री कृष्ण को यह फायदा हो जाएगा तो उन्होंने कहा अच्छा हम तो करेंगे तो उन्होंने कहा अरे इसमें तुम्हें पाप लगेगा अरे पाप लगता है तो लगने दो श्री कृष् गोपियों के विषय में भी कुछ ऐसी कथा है कि उ चरणों की ल भगवान
03:17:02:21 श्री कुरुक्षेत्र की कहानी है भगवान को क्या हुआ था भगवान बहुत बीमार हुए थे भगवान एक लीला की थी कुरुक्षेत्र लास्ट में ग्रहण लगा था तो भगवान ने कहा कि गए लोग बोला जो पैर का धुला हुआ पानी पिलाए उसी से श्री कृष्ण जी ठीक हो जाएंगे रुक्मिणी जी के पास पहले रुण कोने कहा मुझे मेरे को पाप लग जाएगा मैं नरक में थोड़ी ना जाना चाहती हूं सबके पास गए मना किया फिर राधा जी के पास गए लास्ट में राधा जी ने कहा कि पाप लगना है तो लगने दो जो भी हो सकता है पानी जो है पैर का धुला हुआ भगवान जी को पिला दो मेरा इसमें कोई वो नहीं है यह कहानी है
03:17:47:01 चलिए फिर सभी को जय श्री राम जय श्री राम हद हर हर महादेव हर हर महादेव [संगीत]
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शैतान ने Rampal Das के अंदर प्रवेश कर गीता का किया गलत अनुवाद #rampaljimaharaj #kabir
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