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00:00:01:27 [संगीत] तो सभी को जय श्री राम और दीपावली की एक बार फिर से ढेर सारी शुभकामनाएं आप सभी को आज कई दिनों से जो क्रम एक चल रहा था वो क्रम आज उसमें बदलाव आया है और आज बीच में आए हैं अ कन की तरफ से एक सज्जन है राहुल दीक्षित जी यह पहले आप लोगों ने देखा होगा एक बार आ भी चुके हैं राहुल दीक्षित जी से ही कहूंगा थोड़ा सा अपना परिचय दे द एक बार दर्शकों को जय श्री राम राहुल दीक्षित जय श्री राम आवाज र नहीं आवाज आपकी बहुत इको आ रहा है उसम गूंज रही है आवाज र
00:01:17:25 अब ठीक आ रही है सर आवाज अब कम आ रही है अब ठीक है अब बोलिए कम है हरे कृष्णा नहीं आवाज कम है आपकी कृष्णा हा ठीक है ठीक है पकड़ के आप उसको वहा आसपास लगा नहीं सकते वो चेहरे के पास ही रह कब तक आप पकड़े रहेंगे कोई नहीं प्यारी बहना कह रही है शिवांश भैया मैं तो दिवाली नहीं मना पाई रामपाल की वजह से बेटा जिसके हृदय में राम होते हैं ना उसके लिए प्रतिक्षण दिवाली है
00:02:13:15 हां तो हम राहुल दीक्षित जी आप अपना थोड़ा सा परिचय दे दीजिए जी मैं दिल्ली से हूं और इसन से जुड़ा हुआ हूं छ से सात साल से फिर आपकी आवाज कम आ रही है आप एक बार जाकर वापस आ जाइए दोबारा से एक बार बोलिए इसको पास में लाक बोलिए हमारे साथ श्री रघुनाथ तो किस बात की चिंता हमें तो जो श्री राम कृष्ण की शरण में है उनके लिए हर क्षण दिवाली जैसा ही होता है कल मैं दो तीन दिन से पिछले कुछ दो तीन दिन से मैं इस बात का चिंतन मनन कर रहा था कि दिवाली आ रही है जैसे जब मैं छोटा था तो दिवाली को लेकर के बहुत अतिरिक्त उत्सुकता रहती थी मन में बहुत ऐसा कुछ रहता था तो मैं यह सोच रहा था कि यह मैं अभी भी सामान्य क्यों हूं यह क्यों नहीं हो रहा है मेरे अंदर व एक्साइटमेंट कहां गई जो जब मैं छोटा था तब रहती थी मतलब क्या गुरु गोविंदो ग्रंथ का आलंबन
00:03:28:15 लेने के बाद व्यक्ति ऐसा जाता है क्या फिर उसके बाद मुझे गुरुदेव का एक वचन दिखाई दिया जो उस समय दिवाली के टाइम पर और मतलब इधर उधर वायरल हो रहा था वो वचन था अब जैसे कहा ना कि जब हम भगवान की शरण में जाते हैं तो प्राप्ति और प्राप्ति की रक्षा वही करते हैं चिंता भी वही करते हैं और रक्षा भी वही करते हैं अब मैं चिंतित हो रहा हूं मेरे मन में चिंतन चल रहा है कि भाई मैं मैं जो है दिवाली को लेकर के कुछ सामान्य तो नहीं हो गया ऐसा तो नहीं हो गया भावनाए मेरी कम हो गई है मैं मतलब अपने आप को दोष दे उसके बाद गुरुदेव का एक मुझे वह दिखाई दिया वक्तव्य स्क्रीन पर उसमें लिखा था गुरुदेव ने कहा था जिनके हृदय में राम बसते हैं उनके लिए प्र प्रतिक्षण दिवाली होती है तो इसलिए क्या होता है जिन अब हमेशा आपका सदा सर्वदा ही हर क्षण जब राममय है तो हालांकि वह कर्तव्य परायणता तो करेंगे मगर राममय तो पहले भी है इसलिए वो एक जैसा दिखता है इसलिए दोष दृष्टि नहीं आनी
00:04:47:12 चाहिए जी राहुल जी अन म्यूट कर लीजिए अब सर आवाज आ रही है आपको बहुत अच्छी अच्छे से आ रही है तो आप सर्वप्रथम अपना परिचय दे दीजिए दिल्ली से का फिर आपकी आवाज कम हो गई अभी आपने बोला था तो शायद पास मेंला के बोला था क्या मैं बोल रहा हूं कि मैं दिल्ली से हूं इस से कम सेम से सा साल से जुड़ा नहीं नहीं आवाज ठीक से नहीं आ रही मुझे नहीं आ रही सबको नहीं आ रही इनकी [संगीत] आवाज अभी आपने जब बोला था शुरू में तो आपने जब बोला था बिल्कुल साफ आवा आई थी काफी तेज आई थी सबसे पहले आप साफ आ रही है आवाज मैं बो रहा कि मैं दिल्ली मैं दिल्ली से हूं हम दिल्ली में सेटल्ड है वैसे बेसिकली हम यूपी से हैं कानपुर से बिलोंग करते हैं हां हां तो इस कन से मैं छ से सात साल से जुड़ा हुआ हूं ये आप चाहे तो एक बार एक बार बिना ईयरफोन के ट्राई कर लीजिए शायद आपको सहज रहेगा नहीं तो ऐसे ही करना पड़ेगा लगातार अब कैसा है हां बहुत अच्छी परफेक्ट अब ठीक है ठीक
00:06:02:25 है तो आप दिल्ली में है इस समय और आप बेसिकली आप जो है आपका जो जन्म है वह नेटिव प्लेस यूपी में कहीं पर है ना दिल्ली में है दिल्ली में कौन से कन से है आप जुड़े हुए दिल्ली मंदिर सेली दिल्ली स्कन वैली अच्छा ल्ली ल्ली इकन डेल्ली मतलब वो क्या वन एंड ओनली एक ही सेंटर है क्या इकन में मतलब इकन के डेल्ली में सबसे पहला है अच्छा सबसे बड़ा और सबसे पहला वही है अच्छा जो अमोग लीला प्रभु जी है वो आपके वहीं पर है सक्रिय कन दिल्ली हां प्रभु जी प्रचार करते रहते हैं ल ओवर इंडिया ट्रेवल करते हैं ल ओवर वर्ल्ड ट्रेवल करते हैं प्र बिलोंग कहां से मतलब दिल्ली से बिलोंग करते हैं कहां से करते
00:07:05:01 हैं दिल्ली से ही तो अच्छा तो डेल्ली मतलब य स्कन में कोई उनको पद मिला होगा राहुल जी आपका शायद ने ब्र आश्रम में ब्रह्मचारी में है 2 साल अच्छा उनको अभी मुझे आपकी बात समझ में नहीं आई क्योंकि आपका बीच में कट हो गया था आपकी [संगीत]
00:07:42:19 तरफ नहीं मेरा तो सबको साफसाफ दिखाई दे रहा है किसकी आवाज कट हो रही है बताएंगे बीच में ब्रेक आ रहा हो जिसकी आवाज में वीडियो किसकी रुकी है मेरी या राहुल जी की दीक्षित जी की वीडियो रुक गई है राहुल जी का आ रहा है मेरा नहीं आ रहा
00:08:20:06 है राहुल जी आपकी आवाज कट रही है आप आप अपना नेटवर्क इशू को ठीक करें तब तक हम लोग कुछ और बात कर लेते हैं एक ब्रज शब्द को लेकर के भ्रांति फैल रही है हालाकि हम आने वाले टाइम में इस नैरेटिव को भी स्पेशली ब्रज शब्द मीमांसा पर लाएंगे भ्रांति फैल रही है जब हमने ये वीडियो बनाया था ब्रज शब्द को लेकर के यहां पर भी बताया था कि व्रज का अर्थ जाना भी है और आना भी है तो हमने उसमें शिवराम आपटे जी की जो शब्द कोष है वो दिखाया था तो उसमें क्या है कि सबसे पहले तो पूरी बात को देखे समझे बिना ही कुछ कुतर की लोग हैं उन्होंने एक वीडियो बनाया और हमने उसमें यह कहा था कि ऐसी कोई डिक्शनरी लाओ जिसमें
00:09:35:21 ब्रज का अर्थ केवल जाना लिखा हो आना ना लिखा हो तो एक कोई कुतर की है जो यहां पर आकर के जा भी चुका है जिसके बारे में मैंने पहले बताया था नाम है रतन दास ऐसे आर से कुछ नाम उसने फिर एक दूसरी दूसरा एक शब्दकोष खोला उस शब्दकोष का नाम है चतुर्वेदी संस्कृत हिंदी शब्दकोश उसमें व्रज शब्द का अर्थ लिखा हुआ है जाना और चलना दो शब्द लिखे हैं और जो शिवराम आपटे जी की जो डिक्शनरी है उसमें काफी वृहद व्याख्या है जाना चलना पहुंचना दर्शन करना तड़क यह सब उसम अ अब उसने दिखा दिया व्रज शब्द का अर्थ है जाना और चलना सबसे पहली बात भाई साहब कि जो यह रामपाल दास जी है जब ्र शब्द का अर्थ बताते हैं तो यह कौन सी डिक्शनरी से बताते
00:10:41:00 हैं राहुल जी मैं आपको ले लेता हूं मैं थोड़ा अपनी बात पूरी करूंगा मैं बात पूरी करलू थोड़ी तो जो रामपाल दास जी के वीडियोस है जिसमें वो ब्रज शब्द को लेकर के आक्षेप लगा रहे हैं उन वीडियोस में वो शिवराम आपटे जी की डिक्शनरी दिखा रहे हैं शिवराम आपटे जी की डिक्शनरी दिखा रहे हैं तो आप डिक्शनरी को क्यों बदल रहे हैं आपको शिवराम आपटे जी की डिक्शनरी पर विश्वास नहीं है क्या तो जो डिक्शनरी वो दिखा रहे हैं उसमें उन्होंने क्या किया है कर्तव्य कि उन्होंने व्रज शब्द का अर्थ जाना दिखाने के लिए तो उधर तो कैमरा दिखाया मगर जहां पर आना लिखा है व हाथ रख लिया वहा पर कैमरा दिखाया नहीं कितना अच्छा तरीका है ना लोगों की आंखों में धूल झोंकने का मिर्ची झोंकने का अब दूसरी बात ये आ जाती है कि वो जो कुतर की हैक रामपाल दास जी तो इस समय बाहर है नहीं जो उनसे बात की जाए तो उनके नाम पर जो अपने पाखंड चला रहे हैं उसने बोला कि भाई यह देखो अब उसने वो शिवराम आपटे जी की डिक्शनरी दिखाई नहीं क्यों नहीं दिखाई क्यक दिख गया इसमें आना भी लिखा है अब उसने डिक्शनरी दिखाई चतुर्वेदी संस्कृत हिंदी शब्दकोश अब पहली बात तो यह
00:11:56:04 है कि उसमें जाना भी लिखा चलना भी लिखा है जब चलना लिखा है तो क्या इसका यह अर्थ नहीं निकलता कि सब कुछ त्याग दे सभी धर्मों का मुझ में मुझको समर्पित करते हुए मेरी शरण में चल हो गया चलना लिखा है ना वहा पर ब्रज के साथ साथ हमने कहा था कि जाना के जाना केवल जाना लिखा हो कोई और वहां पर अर्थ ना लिखा हो जिसका अर्थ आना में लिया जा सके अब वहां पर चलना लिखा है इसका क्या ये अर्थ नहीं हो सकता है कि सभी धर्मों का प्र त्याग करके मेरी शरण में चल तू जो भी धर्म कर्म कर वो मेरी शरण में मेरा सानिध प्राप्त करके कर तो इस पर उसको ध्यान नहीं देना कुत की को और एक कुतर्क और किया कि
00:12:50:01 जो भगवान जो श्री कृष्ण है उनकी शरण में तो अर्जुन पहले से ही है तो फिर वह अपनी शरण में आने को क्यों कह रहे हैं भाई पहली बात यह है कि क्या आप यह मानते हो कि आप आपकी बात कर रहा हूं जो कबीर को भगवान मानते हैं आप यह मानते हो कि आप जब जन्म लेते हो तब भगवान की शरण में नहीं होते हो क्या भगवान की सीमा के बाहर होते हो प्रैक्टिकली देखा जाए तो यदि आप कबीर को भगवान मान रहे तो जन्म से ही आप उसी की शरण में हो उसी की सत्ता की सीमा में हो मगर फिर भी उसकी सत्ता में क्यों जाना जब तुम उसकी सत्ता में हो ही तो इसका अर्थ आएगा कि अपने भाव से उन्हें स्वीकार कर लेना परमेश्वर के रूप में यहां उस शरण की बात हो रही है पहले शारीरिक फिजिकल शरण की बात हो रही थी अब आत्मिक शरण की बात हो रही है कि तू जो है मेरी शरण में आजा और दूसरी बात अगर यही बात है यह जो उस इस का खेल किया है ना आप लोगों ने रामपाल वालों से बात कर रहा हूं कि उसकी उसकी शरण में जब वो यहां खड़े तो किसकी शरण में जाने की बात कर रहे हैं ऐसे ही कबीर कबीर सागर के वो दोहे या वो जो भी आप उनको नाम
00:14:05:02 द वो लेख जिनम कबीर खुद कह रहे हैं कि मैं उस परमात्मा की श्रम में जाता हूं या उस गुरु से ज्ञान लेता हूं तो जब कबीर को तो पहले से ही ज्ञान है तो किस गुरु से ज्ञान लेने की बात कर रहे हैं किस परमात्मा के पास जाने की बात कर रहे हैं और ये हमने अपने द्वारा व्याख्या की हुई बात नहीं कही है यह जो आपके जो तथाकथित संत है रामपाल जो इस समय जेल धाम में वो जेल धाम वाले जो हैं जब वो जेल धाम में नहीं थे बाहर थे जब वो स्वतंत्र थे कुछ भी करने के लिए अभी वो बंदी है सब कुछ नहीं कर सकते तो जब वो बाहर थे तो उनके वीडियोस में उन्होंने वो दोहे पढ़े हैं तो आप ये भी नहीं कह सकते कि मिलावट है बहुत जल्दी मिलावट प आ जाते हो ठीक है तो आपके जो कबीर है जब वो पहले से परमेश्वर है ज्ञानवान है तो उनको गुरु की शरण में जाने का जाना क्यों पड़ रहा है जब रामपाल दास जी स्वयं उनके अवतार है तो उनको क्यों गुरु की शरण में जाना पड़ रहा है जब वो पहले से ही ज्ञानवान है है ना तो यह सब बातें सोच समझ के बोला करो यह कुतर के यहां नहीं चल पाएंगे और पीठ पीछे वीडियो बनाना आसान है आप सामना करिए सामने से आ कर के बातें रखिए तब पता चलेगा दूध का दूध और पानी का पानी
00:15:20:08 ठीक है ना क्या नाम है इनका रतन दास अगर कोई हो तो उन तक मैसेज पहुंचा दे आपके सभी कुतर्कों का उत्तर दे ब्रज का शब्द वहां जो डिक्शनरी आपने दिखाई है उसमें जाना भी लिखा है चलना भी लिखा है और सबसे बड़ी एक बात बताऊं कि आपने जो डिक्शनरी दिखाई है रतन दास ने जो डिक्शनरी दिखाई है उसके रचयिता कौन है चतुर्वेदी जी कहां से लखनऊ से कहां रहते थे हजरतगंज में उनकी जो पीढ़ी है उनसे हमने संपर्क कर लिया है एक दो दिन में हम जाकर के उनके साथ अपनी उनसे संपर्क किया बढ़िया भगवत गीता का पाठ करते हैं और वो भी बोल रहे थे कि नहीं पिताजी ने तो यहां चलना हमें तो भगवत गीता का अर्थ यही सिखाया ब्रज कार्थ जिसकी लिखी हुई चतुर्वेदी संस्कृत हिंदी शब्द कोश आप दिखा रहे हैं वह भी अपने गुरु की अवेल करते हुए क्योंकि उन्होंने शिवराम आपटे की दिखाई थी रामपाल दास जी ने अपने गुरु की अलना करते हुए जो डिक्शनरी आप दिखा रहे हैं वो डिक्शनरी लिखने वाले के जो वंश परंपरा है जो उसको आज भी छापने के लिए बैठे हुए हैं उस डिक्शनरी को वो यह बात बोल रहे हैं कि ब्रज का शब्द जो है क्या है जाना भी है आना भी है तो वहां
00:16:35:12 भाव के अनुसार लिया जाएगा ठीक है तो इसीलिए कहता हूं कि इधर उधर के चक्रों में नहीं पढ़ना चाहिए खैर हां वह सामने आया था मैंने उसे भगा दिया क्योंकि वह यहां आकर के हंसी ठट्ठा कर रहा था हम जब उससे सीधे सवाल पूछ रहे हैं तो वो एक्टिंग कर रहा है बताया था ना मैंने क्यों हटाया आप आ जाओ आपको अगर पता हो तो चलिए राहुल दीक्षित जी विषय पर आते
00:17:09:25 हैं तो मैं ये पूछ रहा था दक्षित जी आपकी फोटो नहीं आ रही अरे भाई वो कोई हमारा क्या मित्र है जो यहां हम उसके साथ बैत करके गप्पे मारे हंसी ठट्ठा करें जो विषय की बात है वो ना करके और जो इधर उधर की तरीके की एक्टिंग करने के लिए उसकी एक्टिंग देखने के लिए थोड़ी ना हम बैठे हुए हैं व्यर्थ का समय उसके पास होगा हमारे पास नहीं है क्योंकि वह फॉलो करता है जेल धाम में व्यर्थ समय बिताने वालों का हम नहीं
00:17:53:12 करते राहुल जी आप दिख नहीं रहे जी राहुल जी ओके तो राहुल जी मैं यह पूछ रहा था यह जो
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00:18:12:01 इसकन जो प्र तंत्र है जो संस्था है इसमें जैसे अमोग लीला जी कि कहीं के पदाधिकारी है या कहीं कोई ब्रह्मचारी है कहीं कोई गुरु है कहीं कोई शिक्षा गुरु है कहीं कोई दीक्षा गुरु भी है तो यह डिसाइड कौन करता है इस कन में यह थोड़ा सा जानने की उत्सुकता थी हमारे अंदर ये कन का तंत्र काम कैसे करता है कौन है निर्णय लेने वाला कि क्या होगा और क्या नहीं होगा
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00:18:41:10 इकन जो प्रभुपाद जी ने स्थापित किया तो प्रभुपाद जी ने एक जीबीसी करके एक ऑर्गेनाइज कियाज जीबीसी के थ्रू य जीबीसी डिसाइड जी के आपका नेटवर्क इशू बहुत ज्यादा है आप किसी ऐसी जगह प जाके बात नहीं कर सकते जहां पर नेटवर्क नेटवर्क इशू ना हो भाई साहब मैंने बहुत सारी बातें बोली है उन सारी बातों पर बात ना करके किसी एक वस्तु को जिस पर आप बात कर सकने के बारे में सोच रहे हो क्यों उठाते हो बहुत सारी बातें बोली है ना आप सामने आइए एक एक बात का आपको उत्तर मिलेगा कायर मत बनिए सामने आइए फ्रंट फेस पर रहिए राहुल जी आप अपने नेटवर्क का थोड़ा इशू ठीक करिए क्योंकि बारबार वही हो रहा है लाइव का जो मामला बिगड़ रहा
00:19:52:00 है आप लीव कर दीजिए और फिर आ जाइए दोबारा से और ऐसी जगह पहुंच करके आइए जहां पर यह समस्या ना आए तो
00:20:30:16 केशु गोस्वामी जी लिंक केशु गोस्वामी जी किस बारे में बात करनी है आपको जी बोलिए ल जी गवर्निंग
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00:20:49:03 बॉडी कमीशन जीबीसी करके जी ने बनाया बनाया तोव देखते हैं क्या योग्यता है गुरु की
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00:20:56:21 व डिसाइड करते मेंब है डायरेक्ट इंस्ट्रक्शन उन्होने ले रखी है पपा जी ने कुछ रूल्स एंड रेगुलेशन बनाए जीबीसी की एक तरफ है जीबीसी का होल्ड है पूरा जीबीसी अच्छा तोसे जी जी
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00:21:17:07 यानी कि जीवीसी पूरा तय करता है जो जीवीसी का जो जो कमीशन है वो तय करता है कि कहां क्या होगा अब बात ये आती है कि जीवीसी में कौन अ हो सकता है मेंबर कौन बन सकता है कौन नहीं बन सकता है इसकी कोई नियमावली है क्या नियमावली है प्रभुपाद जी क शिष्य है वही डिसाइड करते हैं और जैसे होता है कि जैसे हमारे सनातन धर्म में माना गया है कि अंतिम निर्णायक जो है वो सन्यासी होगा वैराग होना चाहिए जी के शिष्य स्यासी है कुछ वान वही निर्णय लेते
00:21:59:28 जीबीसी में जीबीसी में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है जो सन्यासी ना हो नहीं है प्रभुपाद जी के कई शिष्य हैं इसका इसकी शास्त्र सतता क्या है कि इस तरह से कमेटी बिठाई जाए जिसमें कि कुछ ग्रस्त अच्छा ग्रस्त नहीं हो सकता ऐसा है ये नियम है ग भी हो सक है कर रहे हैं एस एडवाइजरी मतलब ये क्या है एक जीबीसी मेंबर्स है एडवा एडवाइस लेते हैं एक मीटिंग हो है कन को समस्याओ से बचाया जाए क्या क्या इंप्रूवमेंट होनी चाहिए क्या डेवलपमेंट होनी चाहिए में लोग मेरा मेरा य पूछने का तात्पर्य यह है कि क्या यह जो जीबीसी का गठन है और किस आधार पर उसके मेंबर्स चुने जाएंगे एक एक जीबीसी जो है उसका जो गठन है किस आधार पर उसम मेरा प्रश्न सुन लीजिए मेरा प्रश्न सुन लीजिए कि किस आधार पर उसका गठन है और उसके जो मेंबर्स चुने जाएंगे व मेंबर्स चुने जाने के पैरामीटर एटली क्या है कि उसकी क्या योग्यता होनी चाहिए लक्षण से वह
00:23:14:28 कैसा होना चाहिए क्योंकि देखिए जो हमारी जितनी भी प्रामाणिक परंपरा है उन सब में जो अंतिम निर्णायक पद पर बैठा हुआ कोई व्यक्ति है जो भी है आचार्य है वो सन्यासी है चाहे राम अनुज परंपरा देख लीजिए चाहे आप निंबार्क परंपरा देख लीजिए शंकराचार्य परंपरा देख लीजिए तो उसमें वैराग्य है जो अंतिम निर्णायक की गद्दी में बैठा है और जैसा कि विवेचन किया गया है 434 का विवेचन आपकी जो एज इटेज भगवत गीता है उसमें भी वही विवेचन आता है कि परंपरा से तो होना ही चाहिए साथ ही साथ जिसका वो गृहस्थ से वैराग्य आ चुका हो जिसके पास है ना तत्वदर्शी वो हो जाता है तो मैं ये कह रहा था कि अंतिम निर्णायक पद पर बैठने के लिए जो जीबीसी का जीबीसी की सदस्यता है उसको प्राप्त करने के लिए कुछ पैरामीटर नहीं है जो शास्त्रीय हो शास्त्रीय पैरामीटर भगवान की भक्ति में लगा 5050 साल से लगा है प्रभुपाद जी के आदेशानुसार अपना जीवन यापन कर रहा है प्रभुपाद जी के शास्त्रों का जिन्होने बहुत अच्छे से अध्ययन किया है वो उनको लेते हैं भाई साहब मैं निश्चित नियमावली पूछ रहा हूं ऐसे वर्बल नहीं कहीं पर मतलब बिल्कुल निश्चिता के जी में कौन सदस्य होगा
00:24:30:07 कौन नहीं होगा इसके शास्त्रोक्त पैरामीटर कहां से प्रभुपाद जी ने ही निर्देशित किया है प्र
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00:24:36:22 चला रहे कोई बुक हैम कोई बुक कहीं पर लिखा होय न व जीबीसी का कोर्स भी होता है इना हा लेवल नहीं को होता है मीटिंग होती हैय प्र है क्योंकी बात य य जो प्रोसेस है
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00:24:54:01 जीवीसी अंतिम निर्णायक है यह प्रोसेस परंपरा की प्रोसेस नहीं है संदाय प्रोसेस नहीं है यह तो एक कंपनी की प्रोसेस है कन को मैनेज करने केन को कैसे मैने अभी मैं आपको बता देता हूं एक छोटा सा उदाहरण अभी मैंने कुछ दिनों पहले यह सुना था जब यह अभी एक वाक्य हो गया था यह बिहार में कुछ हुआ था उस पर नहीं जाएंगे कि क्या हुआ था क्या नहीं हुआ था मगर उसके बाद मैंने कई लोगों का इंटरव्यू देखा जोकन के ऐसे लोग जिनको लोग जानते हैं स्न का चेहरा तो वो लोग ऐसी बातें करते हुए नजर आए कि अब जीबीसी ने टेक ओवर किया है जीबीसी ऐसा ऐसा बदलाव ला रही है और जीबीसी अय ध्यान रखिए किस गुरु के कितने शिष्य होने चाहिए तो सोचिए एक गुरु है जो वो सन्यासी भी हो सकता है है ना ब्रह्मचारी भी हो सकता है हो सकता है ना गुरु एक जो गुरु है उसका निर्णय लेने वाला कोई
00:25:53:28 हा ब्रह्मचारी नहीं हो सकता सन्यासी भी हो सकता है तो वो ये कह रहे थे कि किस गुरु के कितने शिष्य होने चाहिए यह भी जीवीसी तय करने वाला है तो एक जो सन्यासी गुरु है उसका निर्णय जी सन्यासियों का निर्णय जीबीसी जिसमें की कोई गृहस्थ भी है कोई वानप्रस्थ भी है और कोई अलग अलग तरह के लोग है जो वहां पर जुड़े हुए हैं और इस तरीके से व एक सन्यासी के ऊपर लीडरशिप करेंगे कि तुम्हारे इतने ही गुरु होंगे यह कौन सा शास्त्र का संविधान है एक कितने
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00:26:30:09 हो सते ऐसे कोई ससी के लीडर नहीं और एक मैनेजमेंट हैली क्या है सिस्टम हैसी का सिस्टम हरसी को मर्याद र होना चाहिए को मैनेज करने के लिए जीसी बाकी जी के बारे जा दवारा जानना कह रहा
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00:26:58:24 आपको जानना चाहिए क्योंकि स्कन एक स्कन एक व्यवसायिक कंपनी नहीं है स्कोन क्लेम करती है कि हम धर्म संस्था है धर्म की संस्थापन कर रहे हैं तो उसमें एक व्यवसायिक जैसे कि वह बोर्ड ऑफ मीटिंग बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग होती है उस तरीके से जीबीसी हो गया अब वो तय कर रहा है कि कौन जो है सन्यासी के कितने गुरु होंगे यह तय करना तो बहुत गलत बात हो गई फिर और यह कौन से शास्त्र का संविधान है ऐसा नहीं है आपने गलत सुना है गलत व्यक्ति से सुना तो क्या है जब देखिए आप क्लेम तब कर सकते हैं मेरी चीज पर जब आप यह बताए कि सही क्या है मैंने तो सुना है वो मैं आपको बता रहा हूं और वो भी वीडियो से सुना है ऐसे नहीं कि बुक में पढ़ लिया हो मैं आपसे पूछ रहा हूं कि क्या इस बारे में कोई नियमावली है भाई हमें पता तो रहे कि हम लोग संप्रदाय को ही फॉलो कर रहे हैं बेसिकली तो हम संप्रदाय को फॉलो कर ही नहीं रहे क्योंकि वो जो जो क्लेम कर रहा है जो क्लेम कर रहा है कि हम चैतन्य महाप्रभु की पर से या जो क्लेम कर रहा है कि मधवा चार्य जी की परंपरा से है वस्तुत तो व स्वतंत्र है उसका निर्णय लेने वाले कौन है जीबीसी के मेंबर्स और उसम सन्यासी भी है गृहस्थ भी है वानप्रस्थ भी है सब है मिलजुल कर के और यह कोई व शास्त्रोक्त
00:28:14:02 नियम है ही नहीं भाई जिस परंपरा से है उस परंपरा में जो पीछे गुरु गद्दी है वो निर्णय लेगी कि आप क्या करोगे क्या नहीं करोगे यह तो एक कंपनी तो अलग हो गई बिल्कुल और फिर यह भी कह रहे आपके निर्णय कोई गुरु नहीं ले रहा है सन्यासी नहीं ले रहा है बल्कि एक कंपनी का पैनल निर्णय ले रहा है प्रभुपाद जी के अकॉर्डिंग कैसे संस्था को हम चला सकते बहुत अच्छे से उसम डेवलपमेंट करते हैं उसम कुछ चेंस किए जाते है प्रभुपाद जी केडिंग य सं बहुत अच्छे से चल पाए प्र जीने जीी कुछ रू बहुत
00:28:58:16 आपके यहां के जो ऑथेंटिक आपके प्रचारक है इनफ्लुएंसर्स है ये क्या कहते योगा ऑफ लव इनका मैंने वक्तव्य सुना है जो यह बोल रहे थे कि अब जीबीसी ये डिसाइड कर रही है किस गुरु के कितने शिष्य होंगे जिससे कि वो अपने शिष्य को मैनेज कर पाए तो जीबीसी कौन होता है किसी गुरु के पर निर्णायक बनने वाला जानकारी नहीं है इसके बारे में मेरे को जानकारी नहीं है कुछ होगा ऐसा अभी मैंसी मैं बस आपसे ये कह रहा हूं हम लोग आगे चलते हैं आपको जानकारी नहीं है कोई बात नहीं मगर मैं ये कह रहा हूं कि आपको नहीं लगता है कि जब आप यह कहते हो कि हम धर्म का प्रचार कर रहे हैं धर्म धार्मिक संस्था है तो उसकी जो जड़ है कम से कम उसको तो जाने हम लोग कह तो रहे हैं कि मधवा चार से हैं एक मिनट एक मिनट हम लोग कह तो रहे हैं भाई साहब भाई साहब एक मिनट एक मिनट हम लोग कह तो रहे हैं कि मधवा चार से हैं चैतन्य महाप्रभु से मगर वस्तुत तो स्वतंत्र है और हम लोगों का निर्णय लेने वाले वो जीबीसी के मेंबर्स है जो कि शास्त्रोक्त नहीं है अरे कार्यकारी कोई समिति कार्यकारी नहीं कोई समिति होती है हर संस्था में ये सब लौकिक सिद्धांत है भाई
00:30:13:20 साहब जो आप बोल रहे हैं ये सब ल सिद्धांत है मेरी बात समझिए आप स्वयं को सनातनी संस्था के रूप में क्लेम करते हैं और जो आप सिद्धांत बता रहे हैं यह लौकिक सिद्धांत है लौकिक सिद्धांत सनातन सिद्धांत गुरु परंपरा समझ को चलान को मैनेज करने के लिए बस इस को जो उसके व्यवसायिक चीज है कि भाई कितनी व गीता छनी है वो सब ठीक है मगर उसम धर्म और अधर्म का निर्णय लेने वाले भी वो है ना
00:30:51:28 किसने मैं बताता आपको धर्म धर्म यह बताइए अमोग लीला जीने जब कोई कर दी थी क्या कहते हैं वो विवेकानंद जी के पर टिप्पणी कर दी थी तो उनको जो है कुछ दिनों के लिए बैन किया गया था जीबीसी के द्वारा वो कौन होते हैं एक भक्त को बैन करने वाले बताइए उनको उनको तो इस ध्यान देना है कि मंदिर का मंदिर का बन रहा है कि नहीं बन रहा है या बुक्स जितनी छाप है उतनी छप रही है कि नहीं छप रही है अगर अमोग लीला जी एक भक्त है भक्त भगवत भक्त उनके ऊपर निर्णय लेने वाले वो कौन होते हैं जीबीसी वाले जो उनको बैन करे बताइए कौन सा तोन गुरु गुरु तो हो सकते हा उनके गुरु हो सकते हैं गुरु ने किया था हाज उन्होने किया लेकिन त में ऐसा नहीं था बत लेटने दे वो लेटर मैंने देखा है व लेटर में क्या नाम लिखा था नीचे मुझे नहीं पता क्या था लेकिन किया होगा तो गुरु के हिसाब से किया होगा ऐसे हर कोई नहीं कर सकता और जीबीसी कर सकती है जी जीबीसी ने
00:32:07:10 उसमें जो है यह लिया था निर्णय कि भाई हम उनको एक महीने के लिए बैन कर रहे हैं जीबीसी व लेटर जो निकला था प्रचारित हुआ और आपको एक बात बता दूं कि जो कुल मिलाकर के आपका यह कहना है कि आपका आप कह तो रहे हो कि मधवा परंपरा के है जैसे मैं शकरा परंपरा का हू तो मेरे अंतिम निर्णायक वो है जो शंकराचार्य की गद्दी पर बैठे हैं आप मधवा चार्य परंपरा के हैं तो आपकी अंतिम निर्णायक गद्दी पर कौन बैठा हैय आपको नहीं पता आप एट द एंड आप किसको फॉलो कर रहे हैं आपको नहीं पता जी को प्रभुपाद जी डायरेक्ट आपसे बात कर रहे हैं क्या लिख गए जो भी है उस हिसाब से चल रहा है आपको किसके द्वारा मिला बना प्रभुपाद जी का आप कह रहे हो कि मैंने वो पढ़ा भी नहीं है जो वो लिख के गए हैं अरे प्रभु जी गुरु शिष्य परंपरा से ज्ञान आता है ना दो गुरु शिष्य परंपरा से आया मगर गुरु शिष्य परंपरा से ज्ञान आया मगर प्रभुपाद जी वो जो जीबीसी का जो गठन है वह किस आधार पर किसको चुना जाएगा किसको नहीं चुना जाएगा वो कितने फैसले ले सकता होगा यह सब
00:33:22:10 आपने जाना ही नहीं है फिर भी आप कह रहे हो प्रभुपाद जी को फॉलो कर रहा हूं हां प्रभुपाद जी को फॉलो कर प्रभुपाद जी के प्रभुपाद जी के शिष्य आप तो ये कह रहे हो ना कि मुझे पता ही नहीं है प्रभुपाद जी ने क्या लिखा है इस बारे में फिर आप उनको फॉलो करने का क्लेम कैसे कर रहे हो प्रभुपाद जी के शिष्य से आ रहे प्रभुपाद जी की किताबों से आ रहे फिर वही बात मैंने अभी आपसे यह भी पूछा कि धर्म और अधर्म का निर्णय कैसे ले रही है जीबीसी एक भगवत भक्त को वो कौन होती है वो अगर एक व्यवसाय पहली बात तो यह है कि अगर वो ब्रह्मचारी भी है अमोग लीला जी तब भी उनको कोई गृहस्थ ये नहीं कह सकता है कि तुम बहन हो के लिए जीबीसी केनके गुरु है गुरु भाई है व हा तो गुरु भाई का नाम नहीं है ना लेटर में व जीबीसी का नामला जी के गुरु है परम पूज गोपाल क महाराज उनके जो गुरु भाई है वो जो लेटर निकला था मायापुर से भाई साब व जीबीसी की ओर से निकला
00:34:22:16 था आज की डेट में महामहिम कौन है जैसे मवार परंपरा में जो आनंद कृष्ण तीर्थ की गद्दी पर बैठेगा वह आज के टाइम में महामहिम है शंकराचार्य परंपरा में जो शंकराचार्य की गद्दी पर बैठेगा वह आज के टाइम में शंकर परंपरा का महामहिम है रामानुजाचार्य परंपरा में जो रामानुज की गद्दी पर बैठेंगे वह सब जगतगुरु कहलाएंगे और वह उसके महामहिम है रामानंदाचार्य परंपरा में जो रामानंदाचार्य के पद पर बैठेंगे वो उसके अंतिम निर्णायक है इस कन का अंतिम निर्णायक कौन है वो कौन प्रभुपाद जी आपके साथ व्यवहारिक नहीं है आज अरे आपको कैसे पता जो सूचनाएं आपको मिल रही है वो प्रभुपाद जी की सूचना है भाई वो वो देखिए वो एक संत होना चाहिए ना जो आपका अंतिम रूप से निर्णय लेगा प्रभुपाद जीर ऐसा है अगर ऐसा है तो फिर तो प्रभुपाद अगर ऐसी बात है तो प्रभुपाद जी का भी आलंबन लेने की क्या जरूरत है यही कह दो कृष्ण जी हमारे गुरु है सीधे यही बोल दो क्यों कृष्ण जगत बोल दो नहीं आप अगर जैसे प्रभुपाद जी जिस समय व्यवहारिक थे उस समय वो व्यवहारिक रूप से किसी के गुरु हो सकते हैं मगर आज के आपके व्यवहारिक गुरु कौन है जो प्रभुपाद जी की गद्दी में
00:35:37:16 बैठे हैं ठोस प्रश्न य प्र प्र कौन सा कौन सा शिष्य नाम बताइए बना चलिए 10 नाम गिना दीजिए जो आपके अंतिम निर्णायक है आज के टाइम में परम पूज राधानाथ स्वामी महाराज परम पूज लोकनाथ स्वामी महाराज ये सब जीसी में में हां जी और बताइए परम क्या क्या नाम बताया आपने परम पूज्य लोकनाथ स्वामी महाराज परम राधानाथ स्वामी महाराज परम पूज जयता स्वामी महाराज ये मेन ये तीन लोग जीबीसी में है इस समय और तीनों सन्यासी है और बाकी और और आपको नहीं पता है होंगे बहुत सारे मेंबर्स है प्र जी के क तो आपके अंतिम निर्णायक है वो केवल य तीन लोग है जिनका आपने नाम बताया या वो बाकी के लोगों का मिलक के आपको वो आएगा निर्णय कैसे लिया जाता है जब मीटिंग होती है उनके बीच में डिस्कशन आता है जो कंक्लूजन आता है वही निर्णय होता है इसका मतलब आपका कोई एक अंतिम निर्णायक नहीं है बहुत सारे और कितने य भी आपको नहीं पता है आप इससे अलग कोई क्वेश्चन करिए यह मैं समझा पागा ना आप समझ पाएंगे
00:36:53:15 ठीक है मतलब आपको इससे आपको इसको जानने की भी इच्छा नहीं है मुझे पता हो कि मैं किसको फॉलो कर रहा हूं जाना काने के लिए भाई साहब आपकी संस्था कोई धार्मिक संस्था है कि व्यवसायिक संस्था है धार्मिक संस्था है आज आपके धर्म और अधर्म का निर्णय कौन ले रहा है गुरु के गुरु के रूप में शस्त्र बताते केवल शास्त्र नहीं बताते आप तो बाहर जा रहे प्रभुपाद जी के विरु जा प्रभुपाद जी ने कहा केवल शास्त्र धर्म बता देंगे प्रभुपाद जी ने भगवान के कुछ नहीं कहाने प्रभुपाद जी ने कहा है कि केवल शास्त्र आपका धर्म निश्चित कर देंगे गुरु गोविंद और ग्रंथ केवल गुरु नहीं केवल गोविंद नहीं केवल ग्रंथ नहीं तो आपका वो गुरु कौन है जिसके आधार पर आपका धर्म धर्म का निर्णय हो जाता है गुरु और साधु भी तो वही बोलेगा जो शास्त्र बोल रहे हैं हम जो भी बोलते हैं वो आप मैं आपसे पूछ रहा हूं मैं आपसे ये पूछ रहा हूं आपके आज आप स्पन से बिलोंग करते हैं एस ए स्पन डिवटी या स्कन के प्रचारक आपको क्या करना है क्या
00:38:08:19 नहीं करना है यह निर्णय जीवीसी का पैनल ले रहा है उसमें कितने लोग हैं कौन-कौन है उसके लक्षण क्या है उसके क्या लक्षण होने चाहिए यह तक आपको नहीं पता है और आप जो है फॉलो कर रहे हैं सब पता है मेरे को अभी तो आपने 10 बार बोला नहीं पता है प्रभुपाद जी के शिष्य प्रभुपाद जी के निर्देश पालन करते हैं गुरु के निर्देशों का पालन करते हैं य मेरे को पता है वो सन्यासी है कि नहीं स्यासी है सन्यासी सारे के सारे आप बतंगड़ मत बनाओ इस चीज का वो बत अच्छे लेवल प हैर बात बतंग आप बना रहे हो अगर ऐसी बात करनी है तो ऐसे ही सही बात करने की चीज नहीं है ये कौन डिसाइड कर रहा है बात करने की चीज नहीं है जब आप य क रहे हो जब आप य क रहे जब आप ये कह रहे हो कि हम मधवा चार्य परंपरा से हैं तो आपका निर्णय कौन ले रहा है कि 100 स पता नहीं कितने लोग परंपरा से जुड़े हुए बताते हैं अपने आपको कैसे बताते हैं ये क्वेश्चन होना चाहिए आपका मेरा कहने का अर्थ यह है कि आपका जो अंतिम निर्णायक है वो कोई लक्षण संपन्न संत होना चाहिए ना कि एक बहुत सारे लोगों की कोई कमिटी और अगर है तो इसका शास्त्र में वर्णन कहा है मुझे बता दो आप हम
00:39:23:26 मैं जो बोल रहा हूं उसका वर्णन शास्त्र में बता दूंगा वो भी आपकी गीता से ब्राह्मण और गुणों के अनुसार ब्राह्मण गुणों से संपन्न है वो प्रभुपाद जी के शिष्य 50 सा साल से चचन कर रहे हैं उनके पास जाइए आपसे पूछ रहा हूं कि ये जो कमेटी का गठन है जो आपका अंतिम निर्णायक बना हुआ है वो कमेटी का गठन का शास्त्रोक्त वर्णन कहां पर है प्रभुपाद जी है ना प्रभुपाद जी ने पॉइंट किया अरे मेरे भाई प्र प्रभुपाद जी आपको शास्त्र विरुद्ध कोई चीज बताएंगे क्या
00:39:58:16 समत बताएगा ना समत बताएगा इसलिए को विश्वा तो मैं आपसे तो मैं आपसे रेफरेंस मांग रहा हूं ना इस बात का रेफरेंस कहां है कि एक कमेटी गठन होगी उसमें सन्यासी भी हो सकता है उसम ब्रह्मचारी भी हो सकता है सब कुछ हो सकता है इसका रेफरेंस बताइए प्रभुपाद जी ने कहां पर कहा यही बता दीजिए फिलहाल बाकी आगे देख लेंगे प्रभुपाद जी ने कहां पर कहा है ये आगे देखेंगे आप टॉपिक चेंज करिए मैं ना सम समझा पाऊंगा क्योंकि मैं इतनी जानकारी बात अभी आपने टॉपिक चेंज हो जाएगा आप य कह रहे प्रभुपाद जी ने कहा है कहा कहा है कहा लेटर है प्र जीबीसी को फॉलो करता है वही मेरा शिष्य रा अनुया हैने अरे जीबीसी को फॉलो करता है जीबीसी के जो नियम है कि कौन कन उसम बन सकता है कौन नहीं बन सकता यह तो बताइए और क्या
⬜ Not used yet · 00:40:47:14 – 02:36:51:20 (1:56:04)
00:40:47:14 वह शास्त्र समत है कि नहीं सबे रिटन मेंे देंगे आपको क्या क्या है क्या ता पता करके बता और य भी बताइएगा उस शास्त्र में कहा वर्णन है ठीक अब हम लोग इसको छोड़ देते हैं आपको ज्यादा इस बारे में आपने वो नहीं किया अध्यन अब मैं ये पूछ रहा था ये अचिंत बेदा भेद क्या थ समझाएंगे क्या अचिंत भे तत्व ये बता सकते हैं शंकर संप्रदाय में शंकराचार्य जी ने बताया कि आत्मा परमात्मा में कोई भेद नहीं है लेकिन चैतन्य महाप्रभु ने कहा है आत्मा परमात्मा में भेद है भी और नहीं भी चन महाप्रभु की वाणी है वही गुण गुणात्मक दृष्टि से देखे तो आत्मा परमात्मा में कोई भेद नहीं है और क्वांटिटी देख अगर संख्या की दृष्टि से देख तो इसका मतलब एक मिनट आप आप भले ही अभी कोट मत करिए किसने क्या कहा है आप केवल दृष्टांत बता देंगे उससे काम चल जाएगा है ना तो जीव और आत्मा का आपने कहा जीव और आत्मा में भेद है भी और नहीं भी ठीक है तो मैं ये पूछ रहा था
00:42:02:14 और आपने कहा कि गुण के गुण की दृष्टि से देखा जाए तो गुण समान है दोनों में मगर क्वांटिटी की दृष्टि से देखा जाए तो वो दोनों अलग है तो इसका अर्थ है कि अगर मैं और मेरा कोई पुत्र होगा जिसमें सारे गुण है मेरे तो मुझ में और उसमें भी अचिंत वेदा भेद माना जाएगा आध्यात्मिक गुण बता रहा हूं आत्मा जो परमात्मा है उसम सच्चिदानंद गुण है आपके और उसम क्या गुण होंगे वो तो दोनों अलग अलग आत्मा है आपने पहले शरीर तद का मतलब हुआ बता रहा आपको अच सुनि मेरी बात सु पले अचत आपने पूछा मैंने बता दिया आपको अब इसको बतंगड़ बनाने के लिए मानसिक तर्क वितर्क करने के लिए कुतर्क करने के लिए आप वो करेंगे तो फिर लोग आए है चीजों को समझने कुछ निष्कर्ष पर पहुंचने आए कि मैंने आपसे कोई वो वाला कौन सा एक कोई गेम होता है ना जिसमें सी रैंडम रैंडम पूछते जाते हैं बसपा से बोलते चलो मैं आपसे पूछ रहा हूं अगर अचिंत वेदा भद का अर्थ यह है कि गुण गुण में समानता है मगर क्वांटिटी में समानता नहीं है इसलिए अचिंत भदा भेद ठीक है तो इस हिसाब से अगर मेरा कोई पुत्र
00:43:17:22 होगा जिसमें मेरे सारे गुण होंगे मगर क्योंकि वह छोटा है और मैं बड़ा हूं इसलिए हम दोनों में भी अचिंत भदा भेद कहलाएगा गु कहां समान होते है आप बताइए आपके पुत्र में आप आप में क्या गुण समान है या आपके पिताजी में आप गुण समान है तो गुण गुणों की समानता आप कब मानते हैं किस रूप में मानते हैं गुणों की समानता बताइए बता रहा आत्मा की बता रहा हूं य आपको आत्मा के गुणों की समानता क्या है बताइए जरा सत चित आनंद आत्मा भी सच्चित आनंद है आप ये कह रहे हैं अच्छा यहां पर सद का अर्थ क्या है टर्नल टर्नल मतलब आत्मा भी टर्नल है हा आत्मा भी टर्नल अच्छा तो सत का अर्थ यह है कि आत्मा भी सर्वज्ञ है क्या सब जगह है आत्मा एक ही आत्मा नित्य मतलब नित्य है तो आत्मा क्या सर्वज्ञ है क्या रहने वाला है मेरा मतलब है हमेशा से रहने वाला है देखिए नित्य स्थिरता जो होती है वह तब
00:44:32:26 मानी जा सकती है किसी की केवल काल में ही नहीं देश में भी उसमें कट ना आए जैसे कि मैं अभी यहां बैठा हूं और मैं कह रहा हूं मैं यहां हूं तो अगर वहां पर मेरे लिए बात हो दो फुट दूर तो वहां पर भी यही बात तो यहां भी शिवांश है तब तो मेरी नित्यता है अगर मैं वहां पर नहीं हूं तो तो निता नहीं रही वही मैं बता आत्मा भी ईश्वर की तरह सर्वज्ञ है यही आत्मा परमात्मा में भेद है परमात्मा सर्वज्ञ है आत्मा एक ही जगह हो सकता है परमात्मा सव तो फिर वो सत कैसे हुआ नित्य कैसे हुआ आमा ना अंत है ना आदि है वो नित्य है तो अंत हो तो रहा है आत्मा एक निश्चित पैरामीटर के बात नहीं है अंत हो तो रहा है आत्मा का विद्यमान है हमेशा से विद्यमान है देखिए आप समझ नहीं मेरी बात समझिए मैं ये पूछ रहा हूं जैसे आत्मा का एक निश्चित स्थान में स्थान डिसाइड जब कर रहे हैं तो उस स्थान के बाद उसका अंत ही तो है सीमा अंत हो गया ना उसका उसके बाद वो नहीं है मतलब मैंने बताया आदि ना है और ना अंत है तो आत्मा का नहीं होता नहीं होता
00:45:48:20 भाई साहब अंत हो तो रहा है आप यह कह रहे हो अगर आत्मा सब जगह नहीं है यानी कि उसकी सीमाए है वो इतनी सीमा के अंदर है सीमा बता सकते हो एक शरीर में रह सकते परमात्मा अलग अलग शरीर में विद्यमान रह सकते एक ही समय तो फिर वो सत कहां से रही नित्य कहां से रहीन अनंत तो बोलही नहीं रहा मैं आपको अनंत भगवान है परमात्मा है अनंत आपने अभी चार बार बोला जिसका ना आदि है ना अंत है हा तो अब बोल अनंत नहीं बोल रहा आप बताइए आत्मा का अंत होता है क्या मैं तो बोल रहा आत्मा तो देश काल परिस्थिति से विभाजित ना हो तब उसको सत कहा जाएगा आप केवल काल से विभाजित ना हो तब आप उसको सनातन कह दे रहे हैं मतलब ये होता है इसका आदि नहीं है अंत नहीं है जो पैदा जो मरा नहीं उसको नित्य कते मतलब आपका जो नित्य है जो आपका सनातन है वह सनातन देश से तो वो है विच्छेद मगर काल से नहीं है इसलिए आप उसको सनातन कह रहे हो हा काल से नहीं उसी को सनातन कहेंगे जिस काल का प्रभाव नहीं है अगर तो उसको कहा जाएगा ना जो किसी भी देश काल परिस्थिति में स्थिर रहता उसको नित्य कहा जाएगा अगर अगर
00:47:03:21 केवल काल की बात है तो जब वो जब वो नि जब हा केवल एक जगह एक देशीय होने वाले को भी अगर हम नित्य कह देंगे तो फिर सर्वज्ञ को क्या कहेंगे उसकी नित्यता का क्या होगा देशी से आप जोड़ रहे हैं किसी देश से किसी व्यक्ति को जोड़ रहे हैं तो ये तो फिर आप उसके शरीर को देख रहे एक्सली जज कर रहे हैं अरे मेरे भाई आप जोड़ जैसे आत्मा जो है आप य कह रहे हो आत्मा एक जगह होती है दूसरी जगह नहीं होती है आप ही तो कह रहे हो तो वन आमा है व और भी विद्यमान है क्या अभी भाई अगर आत्मा को नित्य कह रहे तो आत्मा तो सर्वज्ञ हो गई अगर नहीं तो नहीं स शब् अलग हो गया सर ठीक है अब अलग हो गया तो इसका मतलब य है कि आत्मा नित्य नहीं है आत्मा नित्य है मतलब काल काल से वो नित्य है काल की दृष्टिकोण से वो नित्य है आपका चर्चा करने का मतलब बहस करना है कि चर्चा करना है चर्चा में निष्कर्ष पर पहुच बहस में क नहीं प तो आप क्या चाहते हो जो आप बोल दो सुनके आगे बढ़ते जाए मत मतलब य आत्मा मैं बता रहा हूं नित्य है
00:48:18:24 आदि है ना अंत है आप बता उसको समझने का प्रयास कर रहा हूं आप इसमें नाराज क्यों हो रहे हैं क्रोधित क्यों हो रहे हैं जो आप बता रहे उसको समझने का जो आप बता रहे हैं मैं उसको समझने का प्रयास कर रहा हूं हां जी देखिए एक हो गया नित्य का मतलब कि वो कभी ना जन्म लिया उसने ना ही उसका कभी अंत होगा ठीक है अब बात आती है कि नित्य का अर्थ ये भी होता है कि ना तो उसकी कोई शुरुआत है ना कोई अंत है मगर जब आप कह रहे हैं कि आत्मा सर्वज्ञ नहीं है तो अगर मान लीजिए इधर देखिए मेरी ओर मान लीजिए आत्मा लेफ्ट से शुरू हो रही है और राइट पर खत्म हो रही है यानी यह उसका शुरुआत हो गया काल की दृष्टि से वह नित्य है मैं समझ गया देश की दृष्टि से वह अनित्य है आप कह रहे क्योंकि आत्मा सर्वज्ञ नहीं है क्योंकि व यहां से शुरू हो रही है और यहां पर खत्म हो रही है
00:49:23:06 अगर कहा से शुरू हो रही क से खम हो रही है आप ही तो बोल रहे हो कि वो सब जगह सर्वज्ञ नहीं है आपका क्वेश्चन है कि कहा से शुरू हो रही कहा से खत्म हो रही तो मुझे बता दीजिए मैं यह नहीं कह रहा हूं मैं यह कह रहा हूं कि अगर आत्मा नित्य है तो वह सर्वज्ञ होनी चाहिए और यदि वह सर्वज्ञ नहीं है तो वो नित्य नहीं होनी चाहिए अचिंत भदा जो आप बता रहे हो फिर वही बात अचिंत भदा में आपने माना आपने मान लिया कि जो आत्मा है वो सच्चित आनंद है अब जो सत की व्याख्या जब करेंगे कि वो सत्य है तो वो हर परिस्थिति में हर देश में हर काल में सत्य होना चाहिए मगर आप ये कह रहे हो जो आत्मा जो आत्मा आगरा में बैठी है सुनिए मगर आप ये कह रहे हो जो आत्मा आगरा में बैठी है वो आगरा वो जो आत्मा है दिल्ली में नहीं बैठी वो जो वो नित्य नहीं रहा उसका नित्य त्व समाप्त हो गया सत्य का और टर्नल का मतलब आप समझते हैं दोनों से में मैं बता तो रहा हूं जो मैं जानता हूं वो मैं आपको बताहा अगर कुछ और है तो आप बता आत्मा के बारे में यही तो बताया आत्मा आत्मा के दो प्रकार आत्मा को कह रहे हो
00:50:38:07 कि वो सर्वज्ञ नहीं है आप यह कह रहे हो आत्मा के दो प्रकार क उपनिषद में बताए अ म आत्म तु में बताया परमात्मा था अनुमा दोनों शरीर रूपी उसी वृक्ष में जीव के हृदय में विद्यमान है एक ही शरीर में दो विद्यमान है एक आत्मा एक परमात्मा लेकिन आत्मा एक ही है परमात्मा अलग अलग शरीर में भाई साहब मैं य प आपसे प्रमाण मांग ही नहीं रहा हूं मैं य आपसे मैं आपसे प्रमाण नहीं मांग रहा हूं अभी प्रमाणों पर हम जाएंगे मैं आपसे अभी पूछ रहा हूं कि यदि आत्मा सर्वज्ञ है तो वो नित्य नहीं हुई और यदि वो नित्य है तो वो सर्वज्ञ कैसे हुई ये मैं समझना चाह रहा हूं मुझे समझा दीजिए आपका दृष्टिकोण क्या है वो बता दीजिए दृष्टिकोण मेरा य नित्य का मतलब होता जिसका आदि है जिसका अंत नहीं सॉरी मैं सर्वज्ञ बोल रहा था उसको सर्वव्यापी कहते हैं सर्वव्यापी होती है जो आत्मा तो जो सर्वव्यापी जो है उसमें क्या है कि आत्मा अगर सर्वव्यापी है तो व नित्य कहलाई जा सकती है अन्यथा यह दोष आ जाएगा कि आत्मा यहां पर है वहां पर नहीं है यानी कि वहा नहीं बोल सकते कि आत्मा है जब ऐसा हो जाएगा तो फिर हम उसको नित्य कैसे कहेंगे
00:51:58:06 फिर वही क्वेश्चन घुमा घुमा के आप पूछ रहे सर्वज्ञ खाली परमात्मा है आत्मा नहीं होती है सर्वज्ञ छोड़ दीजिए अभी तो मैं सर्वव्यापी की बात कर रहा हूं सर्वव्यापी आत्मा नहीं है आपने कहा सर्वव्यापी नहीं है इससे उसके तत्व पर दोष आ रहा है अच्छा दूसरी बात मैं कह रहा हूं कि आत्मा में और ब्रह्म में भेद है भी और नहीं भी है ठीक है तो इसका मतलब यह है कि आपकी आपकी जो बात है वो बीच की बात है एक तरफ है मधवा चार्य जो क्लियर कट कह रहे हैं आत्मा और जीव में भेद है एक तरफ है आपके अनुसार शंकराचार्य जो आप कह रहे हैं आत्मा और ब्रह्म ब्र आत्मा और ब्रह्म में
00:52:56:28 जीव में और ब्रम में जीव और ब्रह्म में मधुवा चार्य जी ने बताया कि भेद है ठीक है भेद बताया आपसे पूछ रहा हूं जीवात्मा को भी कभी कभी सुनि मेरी बात जीवात्मा ब्रह्म को कभी कभी जीवात्मा को ब्रम कहा जाता है ब्रम ज्योति को भी ब्रम कहा जाता है कभी कभी भगवान के लिए नहीं जा रहा किसको कहा क्या कहा गया मैं ये पूछ रहा हूं मधवा चार्य जी ने यह कहा कि जीव और ब में भेद है और शंकराचार्य जी ने यह कहा कि जीव और ब्रह्म में भेद नहीं है अंततोगत्वा वो एक है व्यावहारिक दृष्टि से भेद है और पार मार्थी दृष्टि से भेद नहीं है मगर आपका कहना है कि भेद है भी और नहीं भी तो आप तो बीच वाले सिद्ध हुए फिर इसमें से आप पर्टिकुलर मधुवा चार जी की तरफ कैसे चले गए जितने मधुवा चार जी वाले हैं आप एक मिनट एक पूरा कर जितने आप मधुवा चार्य जी वाले हैं उतना ही आप शंकराचार्य जी वाले भी है जब आपकी चीज क्लियर है ही नहीं कि ब्रह्म है वो जीव और आत्मा में भेद है कि नहीं तो फिर जब आप और उसमें आप अचिंत कह रहे कि अचिंत विषय है तो जब वो बात क्लियर है ही नहीं तो आप किसी के विरोधी और किसी के तो आप किसी के विरोधी और किसी
00:54:12:02 के पक्षकार होने का दावा कैसे करते हैं भाई मधवा का सिद्धांत तो यही है कि आत्मा और परमात्मा में भेद है जीवात्मा और परमात्मा में भेद है यही दवाद है आप तो कह रहे हो ना कि अचिंत है ये बात आप तो ये नहीं कह रहे ना भेद है हा तो महाप्रभु ने मवा संप्रदाय में आए महाप्रभु ने महाप्रभु ने बताया ना कि भेद भी है भेद भी नहीं है गुणात्मक दृष्टि से भेद नहीं है सं द सेद है नहीं नहीं ने क्या बताया वो सही है मैं य पूछ रहा हूं अगर देख देखिए आप भेद मानने के कारण मधवा चार के हुए ना भेद मानने के कारण आप मवा चार के हुए ना मैं आपसे पूछ रहा हूं हाज मानने के कारण आप मधवा चार के हुए तो चारों वैष्णव संप्रदाय का यही है आमा परमा देखिए आप थोड़ा सा ना बंबू लेकर के दीवार को पार करने लगते हैं ंदने लगते हैं आप मैं पार नहीं कर रहा हूं तो रहे बात चल रही तो आप आप सीधे निष्कर्ष की बात क्यों बोलने लगते हैं जब बात चल रही है तो मैं बहस से बचना चाह रहा हूं मैं चर्चा करने आया बहस नहीं करने आया भाई साहब हम लोग चर्चा ही कर रहे हैं हम लोग तो बहस नहीं कर रहे आपको लग रहा है आ चर्चा और अच्छा आप चर्चा
00:55:27:07 करने आए हैं तो आप उसका प्रारूप मुझे बता दीजिए कि कैसे बात करनी है आप बता दीजिए बता दीजिए कि मैं अपना मत रखू आप अपना मत रखिए यही है और कुछ निष्कर्ष पर पहुचे हम मतलब मत रखने का अर्थ ये है कि मैंने बताया मेरा नाम शिवांश नारायण द्विवेदी है मैं पूरी शंकराचार्य जी का अल्पज्ञ शिष्य हूं श्री राम की भक्ति करता हूं यह मैंने अपना मत रख दिया अब आप रख दीजिए अपना मत और बात खत्म यही है जो आप क्वेश्चन रखे उस मत की बात कर रहा हूं अपना परिचय देने की बात नहीं कर रहा तो भाई साहब जो क्वेश्चन रखेंगे तो क्वेश्चन पर क्वेश्चन निकलेंगे तो उस पर बात करनी है मैंने क्वेश्चन पूछा आपने बोल दिया बात खत्म ये कोई आप जानकारी के लिए आप ये बताइए आत्मा और परमा में भेद है या नहीं देखिए जो एक टॉपिक चल रहा है सिलसिलेवार तरीके से उसको चलने दीजिए उसम बीच में आप ये मत कहिए कि चर्चा करने आया था आप बहस कर रहे हो ठीक है पूछ रहा आमा और परमात्मा की पूछ रहे देखिए आप जो पूछ रहे हैं उसी प ही मैं आऊंगा उसी पही आऊगा चल रही थी कि अगर मधवा चार्य जी ने कहा भेद और क्योंकि चैतन्य महाप्रभु ने भेद और अभेद दोनों माना है तो भेद मानने के कारण आप मधवा चार वाले हैं तो अभेद मानने के कारण आप शंकराचार्य वाले क्यों नहीं है यह
00:56:42:19 बताइए शंकराचार्य भी स्वीकार करेंगे आत्मा परमात्मा में भेद है गुम मचार जी स्वीकार किया है क्या आत्मा परमात्मा में अभेद है स्वीकार किया सवाल आप समझने का प्रयास तो करिए थोड़ा सकारात्मक दृष्टि से देखिए मेरे भाई मैं बहुत सामान्य तरीके से आपसे पूछा है जब भेद मानने के कारण आप मधवा चार्य के हो गए तो अभेद मानने के कारण आप शंकराचार्य के क्यों नहीं हुए यह बताइए आप स्वयं को शंकराचार्य के शंकराचार्य के विरोधी के रूप में प्रस्तुत कैसे कर सकते हैं जब आपकी दोनों बात मैं कहा कर रहा हूं शंकराचार्य को कहां कर रहा हू शंकराचार्य की बात नहीं ई शंकराचार्य की विरोधी विचारधारा नहीं है आपकी हमारी य विचारधारा मेरी विचारधारा सुन लीजिए आप आत्मा परमात्मा में भेद है आपकी विचारधारा को मैं जानता हूं उसको जानने के बाद मेरा प्रश्न है बात सुन लीजिए मचार ने बोला में भेद है चन महा कह रहे गुम दृष्टि से समान है दष्ट से अलग अलग बात सुन पले तो इसमें मचार का कौन सा का विरोध हो चुका है ये बताइए
00:57:57:19 मुझे आप मैं कहां कह रहा हूं विरोध हुआ जब उन्होंने कहा अभेद भी है क्या अभेद कहा मधुवा चार्य जी ने अभेद भी है क्या ये कहा मतलब शंकराचार्य संप्रदाय का प्रचार करने का मंच है क्या मैं ये कह रहा हूं कि जब आप भेद मानने के कारण मधवा चार के फॉलोअर है तो अभेद मानने के कारण आप शंकराचार्य दृष्टि से आप स्वीकार कर लीजिए तो मैं मान लेता हूं अरे अच्छा कौन से कौन सी दृष्टि से आप क्या कहते हैं कौन सी दृष्टि से आपने भेद स्वीकार किया है कौन सी कौन सी दृष्टि से आपने कौन सी दृष्टि से आपने अ एक मिनट कौन सी दृष्टि से आपने अभेद स्वीकार किया है अ चि भे गुणात्मक दष्ट से सेम गुणात्मक दृष्टि से आपने भेद स्वीकार किया और गुणात्मक दृष्टि से आपने अभेद स्वीकार किया और त्मक दृष्टि से आपने भेद स्वीकार किया यही है ना तो क्या मधवा चार्य जी ने मधवा चार्य जी ने मधवा चार मधवा चार्य जी ने गुणात्मक दृष्टि से भेद स्वीकार अभेद स्वीकार किया है क्या मधवा चार्य जी ने
00:59:12:22 गुणात्मक दृष्टि से अभेद स्वीकार किया है क्या किया है क्या किया है क्या अमित यादव जी आप आना चाहेंगे क्या आप शायद समझ पा रहे हो कि राहुल जी क्या कहना चाह रहे हैं लिंक दे दीजिए भैया हा आ ग रुक जा रुक जाइए जी राहु जी जैसे आप यह कह रहे हैं शंकराचार्य अगर संख्यात्मक दृष्टि से भेद को स्वीकार कर ले तो हम उनको मानने लगेंगे तो आप यह बताइए क्या गुणात्मक दृष्टि से अभेद को स्वीकार किया क्या मधवा चार जी ने कहीं पर आप शंकराचार्य की बात हटाइए मचार की बात हटाइए जो मैं आपको बो गुणात्मक दृष्टि से सेम है कि आत्मा और परमात्मा भाई साहब आप
01:00:27:26 ये क्लेम कर रहे हैं कि हम मधवा चार्य को फॉलो करने वाले हैं शंकराचार्य को फॉलो करने वाले नहीं है जबकि आपकी बातें दोरी है आपकी बातें बीच की है आप समझ बीच की है मैं बोल रहा हूं आपको आप शंकर संप्रदाय के प्रति माइंडफुल है इसलिए सामने वाले के सिद्धांत को स्वीकार नहीं कर पा रहे देखिए आप अगर इस तरह की बातें करेंगे तो फिर मैं क्या क्या कह सकता हूं आपको पता है और आपको बोलने भी नहीं दूंगा यह तो गलत बात है आप आप सीधे निर्णय कर रहे हैं क्लेम कर रहे लगा रहे मैं आपके साथ मैं आपके साथ मैं आपके साथ सज्जनता से बात कर रहा हूं आप मुझे मेरे ऊपर आरोप लगा रहे कि आप ब्रेन वश है आप ये कर रहे वो कर
01:01:14:02 रहे मैं आपसे पूछ रहा हूं अगर दोनों बातें मानी है आपने अगर दोनों बातें मानी आपने तो किसी एक के पक्षधर और एक के विरोधी कैसे हुए वो बताइए तने मा से पूछ लीजिए आप आपकी अगर पहुच है भाई साब आपको क्यों आए आप क्यों आए आपको आना नहीं चाहिए था सब कुछ उ से पूछना है जो महाने दिया है स्वीकार कर इसलिए आया वो आपने स्वीकार किया चेतन बाप ने अचिंत भेद दिया मुझे य जानना है य आपकी बातें बीच की है दोहरी है दोनों है तो उस ऐसी स्थिति में आप किसी एक के पक्षधर और एक के विरोधी कैसे हो गए यह
01:02:08:04 बताइए इनका नेट प्रॉब्लम कर रहा है आप लिंक शेयर कर दीजिए कोई आना चाहे तो आ जाए आपको कहां लग रहा है कि मैं विरोध कर रहा हूं यह बताइए मुझे आप मैं शंकराचार्य का विरोध कर रहा आपकी लगभग आपकी लगभग सारी बुक्स में मायावादी कहते हुए शंकराचार्य जी के सारे सिद्धांतों का खंडन करने का प्रयास किया गया है हमने नहीं किया य तो महाप्रभु ने खुद कि अरे भाई आप को समझते नहीं मैं आपसे भाई देखो फिर वही बात आप अपनी फिफी को समझते हैं कि नहीं यह बताइए आपने नहीं किया आप समझते कि नहीं आप समझते हैं कि केवल आप बस जुड़े हैं आपको समझते हैं उसे केवल आप जुड़े हैं तो मैं आपसे प्रश्न कर रहा हूं आपने नहीं किया मगर आप उसे जानने का दावा तो कर रहे हैं हां बिल्कुल जब दावा कर रहे हैं तो बताइए कि जब आप दोनों चीजों को मानते हैं तो किसी एक के पक्षधर और एक के विरोधी कैसे हुए कैसे पक्ष हो गए किसके विरोधी हो गए बताइए मुझे पहले फिर मैं बताता हूं आपको आपने कौन सी जगह आपकी बुक में मधवा चार्य जी का खंडन लिखा हुआ है बताइए
01:03:24:20 नाम लेक मधवा चार्य जी का नाम लेकर के कौन सी बुक में आपकी में खंडन लिखा है मैं आपको शंकराचार्य जी का विरोध दिखा दूं हर बुक में शुरुआत से लेकर अंत तक वही है भरी पड़ी है मायावा मायावादी मायावादी मायावादी मायावादी बताइए हा है मैंने स्वीकार कर लिया है का विरोध कहा पर है आपकी कौन सी बुक में मधवा चार जी का विरोध लिखा हुआ है
01:03:56:26 कहा लिखा है मवार जी का विरोध बताइए मुझे आप अरे मैं पूछ रहा हूं आपसे ना आप तो बीच के है ना आपने दोनों सिद्धांतों को माना है भेद भी और अभेद भी तो जब आपने शंकराचार्य का विरोध किया तो का विरोध किया य बताइए मेरी बात सुनिए हम मवा संप्रदाय से बिलंग करते है चैतन्य महा सितो का पालन कर ना किसी विरो कर रहे आपको वो सिद्धांत समझ में आ गए कि नहीं आ गए आपको वो सिधांत नहीं आ मेरा प्रश्न है आपको व सिद्धांत समझ में आ गए कि नहीं आ गए समझ में आ गया आ गए तो इस सवाल का जवाब दीजिए कि जब चैतन्य महाप्रभु ने बीच की बात कही है तो आप शंकर के विरोधी और मधुवा के पक्षधर कैसे हो गए यह बताइए को
01:04:56:20 आपने कहा भेद है भी और और भेद नहीं भी है अभेद भी है और भेद भी है तो इसमें तो मधवा चार जितना जितना विरोध इस बात में मधवा वो शंकर का है उतना ही विरोध इस बात में मधुवा का भी है तो आप मधवा के पक्षधर और के विरोधी कैसे हो गए बताइए आ परमा बताया या तो आप क्लियर कट कहिए नहीं भेद ही है तब तो मान लिया जाए कि आप मधवा के फलोर है ठीक है आप तो क्लियर कट नहीं बोल र आप तो बीच की बात बोल रहे भेद है भी और नहीं भी यह तो अगर किसी पा साल के पाच पढ़ने वाले बच्चे को भी बता देंगे व भी बता मुझे देख ऐसी बातें बोलिए जो सर्वमान्य रूप से ग्रहण की जाए जैसे मैं अगर कहू कि भगवान श्री कृष्ण ने बोला भगवत गीता में सुन लो ऐसे प्रमाण दीजिए अपने जो व्यक्तिगत व्यक्तिगत व्यक्तिगत कुतर को को य पर प्रमाण के रूप में प्रस्तुत मत करिए नहीं कर रहा कर किया क्या मैंने अपनी कोई मन की बात कही है तो किसी पा साल के बच्चे से पूछ लो कि इसकन में व्यभिचार होता है मैंने कहा क्या ये किसी पा साल के बच्चे से पूछ लो कि स्कन में वो व्यक्ति व्यभिचार करते हुए पकड़ा गया
01:06:11:27 मैंने कहा क्या ऐसा मेरी बात सुनिए ये बातें मत करिए आप जो है काम जो विषय प बात चल रही है जो विषय प बात चल रही है वो किया करिए एक ही चीज बनाने का प्रयास कर रहे हो आप यय कहा से डिसाइड हो रहा है बतंग बनाने का प्रयास है सनातन सिद्धांत दो मुझे आत्मा परमा कैसे स हो रहा है यह बताओ क्या चीज मैं बा का पतंग बना रहा हूं य आप सनातन से सिद्ध करिए आपका क्वे य है प्रमाण बात कर रहा आपको नहीं करनी आपको व्यक्तिगत मंतव्य घु सड़ना है अब मैं आपसे पूछ रहा हूं आप मुझे प्रमाण से सिद्ध कर दीजिए कि मैं जो है बात का बतंगड़ बना रहा हूं आप कौन करने वाले कि मैं सही कर रहा हूं कि गलत कर रहा हूं आप जो है प्रश्न जो किया है उस पर चलिए ना भाई अच्छे से बात हो रही है खाखा बात को बिगाड़ रहे हो मैं बारबार कह रहा हूं व्यक्तिगत मैं बारबार कह रहा हूं व्यक्तिगत आक्षेप मत करिए मगर आप कर रहे हैं मैंने व्यक्तिगत आक्षेप करना शुरू कर दिए तो आप सुन नहीं पाएंगे मैं बोल रहा हूं कि महाप्रभु ने कहां
01:07:27:22 अभेद को स्वीकार के बता प्रभु की चीज आप समझ गए हैं कि नहीं समझ गए ये बता दीजिए समझ गए तो मुझे ये बता दीजिए कि जब महाप्रभु ने दोनों की बातों को किया तो आप किसी एक की बातों को मानने वाले कैसे सिद्ध हुए ये बताइए इसका जवाब दिया है महाप्रभु ने इसका जवाब महाप्रभु ने दिया है आपको कि नहीं दिया है महाप्रभु ने कहा है कि आत्मा और परमात्मा हमेशा अलग है हमेशा से ही अलग बने रहेंगे ब्रह्म लीन नहीं होता आत्मा परमात्मा में लीन अत भदा भेद आपने कहा भेद है भी और नहीं भी संप्रदाय में कहते कि आत्मा परमात्मा में मज हो जाती है भाई साहब आपने कहा हम अचिंत वेदा भेद वाले हैं इसमें मधवा चार जी का थोड़ा बहुत विरोध है कि नहीं नहीं है नहीं है तो मधुवा चार्य जी ने कहा पर अचिंत भदा भेद कहा है मधवा चार ने भेद तो बताया है नहीं बताया
01:08:26:10 मैं पूछ रहा हूं कि उन्होंने अभेद कहा बताया अभेद कहा बताया आपने बताया अरे तो फिर वही बात तो य मधवा चार्य जी ने नहीं बताया ना ऐसे ही तो शंकराचार्य ने अद बताया वो मधवा चार्य जी ने नहीं बताया महाप्रभु ने बता दिया तो जब दोनों की मिक्स बात तो आप किसी एक को मानने वाले कैसे हो गए यह पूछ रहा हूं आप ये मान लीजिए जो परंपरा आ रही है म संप्रदाय की है चन इसका अर्थ ये है कि आपको समझ में नहीं आया बस परंपरा के कारण आप उसम बिलीव कर रहे हो क्योंकि वहा नाम है चैतन्य महाप्रभु का आपको समझ में नहीं आया सब समझ में आ गया आपको समझने में भाई जब जब आप बेदा भेद दोनों बातें कर रहे हैं जब आप भदा भेद दोनों बातें कर रहे हैं आपने क बताया बार बार आप बार बार प्रश्न का उत्तर यह दे देते हो कि चैतन्य महाप्रभु ने कहा इसलिए आप चैतन्य महाप्रभु की बात को एक्सप्लोर करिए समझाइए तो चिं भ तत्व की बात हो रही है तो महाप्रभु का नाम तो आएगा ही सर अरे महाप्रभु का नाम आएगा मगर वो उसका मुझे निस्तारण दीजिए जो मेरा प्रश्न है वो ये है कि अगर दोनों चीजें आपने मानी है भेद भी और अभेद भी तो आप किसी
01:09:41:15 एक को मानने वाले कैसे हो गए ये पूछ रहा हूं मैं आपका आपका अभेद का मतलब क्या है ये मुझे बताइए जो मैं स्वीकार करूं पहले आप बताइए मुझे अभेद का मतलब आपका अभेद का मतलब क्या है संख्यात्मक दृष्टि से संख्यात्मक दृष्टि से उन्होंने मधुवा चार्य जी ने संख्यात्मक दृष्टि से अभेद माना है क्या विरोध का हुआ हैने नहीं माना तो तो ठीक है ऐसे तो शंकराचार्य जी ने भी न भेद माना है सुनो ऐसे तो शंकराचार्य जी ने भी व्यवहार की दृष्टि से भेद माना है स्वयं कृष्ण ही कह रहे तो कौन स्वीकार नहीं करेगा फिर वही बात फिर वही बात कृष्ण को बोलो फिर आपको मधवा का मत बोलो मधवा बो मधवा चार जी के फॉलोअर कैसे हुए जब मधवा जो बात नहीं कही वह बात आप कह रहे हैं और वो भी वह बात जो शंकराचार्य से मैच खाती है जब आप दोनों दोनों बातें कर रहे हैं तो आप किसी एक को मानने वाले और किसी एक के विरोधी कैसे हुए य ये प्रश्न है बताइए किय अचिंत तव शंकर संप्रदाय से कहा मैच कर रहा है बताओ मुझे आप मधवा से कहा मैच कर रहा है बताओ मवा कर रहा है आत्मा परमात्मा में
01:10:56:15 भेद है तो भेद ठीक है शंकर से मैच कर रहा है उसम अभेद है दोनों बातें बोल रहे हो ना अभेद दोनों बा बोल रहे हो कि नहीं अभेद मत अरे शंकर से शंकर शंकर से मैच किया शंकर से मैच किया कि नहीं किया शंकर संप्रदाय का यही है ना आत्मा परमाद नहीं है मैं देखिए बात जो चल रही है उसकी बात बताइए जैसे आपने कहा जैसे आपने भाई साब राहुल दीक्षित जी राहुल दीक्षित जी सुनिए जैसे आपने कहा कि भेद है इसलिए मवा से मैच करता है तो मैं आपको बता दिया कि अभेद है इसलिए शंकर से भी तो मैच करता है नहीं मैच कर रहा है बता रहा मेरी बात सुन लीजिए मेरी बात सु बताइए शकर संप्रदाय का जो अभेद है आत्मा परमात्मा में कोई फर्क नहीं है आत्मा परमात्मा में विलीन हो जाती है ठीक है
01:11:55:16 चिंता भेद तव जो अभेद है वो है मवा संप्रदाय ने कहां पर अभेद माना है यह बताइए हमें चैतन्य महाप्रभु ने बताया ना भाई बता तो जब चैतन्य महाप्रभु ने सुनिए चैतन्य महाप्रभु चैतन्य महाप्रभु ने जब भेद स्वीकार किया तो आप मधुवा वाले हो गए तो अभेद स्वीकार करने के कारण आप शंकर वाले क्यों नहीं हुए आप शंकर संप्रदाय से कैसे जुड़े बताए मुझे फिर भाही मैं पूछ रहा हूं ना आपसे कैसे जुड़ा हुआ आपके हमारे इससे हमारे इस बात का क्या संबंध है कैसे जुड़े हैं संबंध है जभी पूछ रहा हूं मैं आपसे आप शंकर शकर परंपरा के वर्तमान के प्रामाणिक आचार्य जो गुरु गद्दी में बैठे हैं हम उनको फॉलो करते हैं इसलिए हम जुड़े हैं उनके दर्शन उनके सिद्धांतों को मानते हैं इसलिए हम जुड़े हैं के माध्यम से आप जुड़े किसके माध्यम से दीक्षा दीक्षा हुई आपकी शंकर संप्रदाय से हां दीक्षा हुई जुड़े है ना ऐसी को जुड़ा कहते हैं आप हा नहीं केवल एक दीक्षा से नहीं जुड़े सुन लीजिए मैंने दोनों बातें बताई उनके सिद्धांतों को मानते हैं आत्मसात करते हैं तब भी है
01:13:10:22 केवल दीक्षा लेने के कारण नहीं जुड़े हैं अगर हम आज विरोध करने लगेंगे शंकर संप्रदाय का विरोध बोलने लगेंगे तो कहां से जुड़े हुए माने जाएंगे मैं बोल रहा हूं कि आप सीधा उंगली महाप्रभु भी उठा रहे हैं कि वो मद संप्रदाय में नहीं थे यही तो बोल रहे हैं आप या तो आप बोलो देख देखिए उंगली उठा रहे हैं इस तरह की बातें मत करिए मैं आपसे बहुत ही सामान्य भाषा में प्रश्न कर रहा हूं आप आरोप लगा रहे हैं मैं प्रश्न कर रहा हूं मैंने आपसे कहा यदि चैतन्य महाप्रभु ने कोई बात कही है तो उसका उसमें उठने वाला जो संशय है उसको आप निदान करिए कि यदि भेद मानने के कारण आप मधवा वाले हो गए तो अभेद मानने के कारण आप शंकर वाले क्यों नहीं हुए ये निस्तारण करिए महाप्रभु को म संप्रदाय से कनेक्टेड मानते हैं कि नहीं मानते हैं चैतन्य महाप्रभु को हम नहीं मानते और बोलिए भाई आप अपने सिद्धांत को एक्सप्लेन करिए आप क्यों बारबार नाम का सहारा लेकर बचना चाहते हैं सिधांत आपतन तन महाप्रभु किसी भी संप्रदाय से बिलोंग करते हो उन्होंने जो बात कही है क्या आप उसको समझते हैं कि नहीं समझते हैं ये बताइए समझते तो समझाइए चत नाम
01:14:25:25 ने का प्रयास मत कर यही है उत्तर यही है कि आपके अभेद में और हमारे अभेद में वो अभेद मुझे मधवा चार परंपरा में दिखाओ ना वो अभेद म परंपरा में दिखाओ अगर अंतर है तो अंतर र फिर मधवा से भी कनेक्ट मत हो नहीं तो अपना अभेद जो है वो मधवा परंपरा से दिखाओ मुझे तब तो आप मधवा से कनेक्ट होगे या फिर आपका य कहना या फिर आपका यह कहना है या फिर आपका यह कहना है कि आपने अभेद का सिद्धांत तो वो मधुवा चार का नहीं है मगर क्योंकि हम वहां से दीक्षित है इसलिए जो है हम मधवा चार परंपरा के हैं आपका ये कहना है
01:15:11:02 क्या मैं आपको कितनी बार बता चुका हूं आपके अभेद में हमारे अभेद में फर्क है भाई साहब उन ये बात भी तो है अगर हमारा अभेद आपका अभेद नहीं है तो वो अभेद मधुवा का तो होना चाहिए अ तो मधुवा का ही तो है कहां है दिखाओ मुझे वो जो अभेद का मधवा काे है मधवा मधवा चार्य जी का जो अभेद है वो कहां लिखा है अब मैं बता रहा हूं कि आपको की गुणात्मक दृष्टि से आत्मा परमात्मा में कोई भेद नहीं है तो अभी आप कह रहे थे थोड़ी देर पहले ये जो अभेद वाली बात है चैतन्य प्रभु ने जोड़ी है अब आप कह रहे हो मधवा चार भी अवेद कहते थे तो इसका मतलब वो भी अचत वेदा वाले थे आप सीधी सी बात समझिए आत्मा परमात्मा भद है ये मवा सिधांत है मधवा संप्रदाय में बात आप सही कह रहे है जीव और ब्रह्म में भेद है ये मधवा सिद्धांत है मगर भेद नहीं है ये मधवा सिद्धांत नहीं है ये सं जीव और ब्रम किसको कह रहे ब्रम किसको कह रहे हो जीव किसको कह रहे हो अरे आत्मा और परमात्मा ले लो भैया हा क्या
01:16:26:12 हा बो रहा ब्रहम और परम यूज करिए ठीक है जीव और जो जीव और परमात्मा ठीक है ये चलेगा आत्मा और परमात्मा कर ले आत्मा परमा कर आत्मा परमात्मा कर ले हा जी हा ठीक है अब अब बात हो रही है कि आत्मा और परमात्मा में भेद है यह मधवा चार का सिद्धांत है मगर आत्मा और परमात्मा में भेद नहीं है ये मधवा चार का सिद्धांत नहीं है अगर आप दोनों बातें कहने वाले हैं तो आप किसी एक के पक्षधर कैसे हो गए वही मैं बता रहा हूं शिवांश अब सुनिए अभेद का मतलब है कि आत्मा परमात्मा में विलीन हो जाता है वो एक है ये संकर सिद्धांत है ये आपको पता है लेकिन यहां प अभेद महाप्रभु का है गुणात्मक दृष्टि से एक है और संख्यात्मक दृष्टि से अलग है ये अभेद है अ आपका जो अभेद है वो शंकराचार्य वाला अभेद नहीं है ठीक आपका जो अभेद है वो शंकराचार्य वाला भेद नहीं है होगा लेकिन सिद्धांत आपको वही आत्मा परमात्मा से मर्ज होना है ि जब नहीं
01:17:41:15 है तो होगा क्यों बोल रहे हो जब नहीं है तो कैसे बोल सकते हो भाई कितनी एक दोहरी बात बोलते हो क्या हर बार मैं बोल रहा बात आत्मा और परमात्मा का मर्ज होना होता है ना मर्ज आमा पर है देखिए चलिए ठीक है मैं आपकी बात को यहां पर छोड़ देता हूं इस वाली बात को हम लोग इसम ल करके नहीं बोल पाए ठीक है कोई बात नहीं मैं ये बोल रहा हूं होती हैन होती है आत्मा हा ना मधवा के हिसाब से होती है अभेद भी तो नहीं होता है
01:18:26:14 मधुवा में संख्यात्मक दृष्टि से अभेद कहा है क्या आप सिधांत को सम आपके बंद करल अपना क्योंकि आप मेरे वो है तानाशा आप क समलो शांत हो जाओ इसीलिए आए हो मैं जो बोल रहा मेरी भी सुन लीजिए आप अपने सुनारा है आप ने कहा कि अचिंत भदा भेद का अर्थ है कि गुणात्मक दृष्टि से अभेद और संख्यात्मक दृष्टि से भेद ठीक है हेलो ठीक है हाज अब मैं पूछ इससे आगे तो अब इसमें जब आप यह समझ गए हैं कि भेद क्या है अभेद क्या है तो अचिंत शब्द क्यों आ रहा है अचिंत का क्या मतलब है आप तो समझ गए आप तो समझ गए भेद क्या है और अभेद क्या है बिल्कुल क्लियर कट हो गया
01:19:27:18 अचय कोई स्वीकार नहीं कर पाएगा जसे आप स्वीकार नहीं कर अचिंत अच लेकिन अच अचिंत मतलब जो चिंतन में नहीं आ सकता उसको अचिंत कहते यायर नहीं है ना यानी की क्लियर नहीं है ना इतनी देर से और क्या कह रहा हूं क्यों नहीं की जो बात है वो आप ही काट रहे हो अभी आप कह रहे हो क्लियर है अब आप कह रहे हो नहीं क्लियर नहीं है म सिद्धांतही मैं बता रहा हूं ना एक एक शब्द को लेक प्रभु का सिद्धांत है तो अच्छी बात है भाई उसको मधवा से क्यों जोड़ रहे हो फिर उन्होंने कहा क्लियर नहीं है उन्होंने तो उन्होने तो उन्होंने ठोक के कहा कि जीव और ब्रह्म में वो आत्मा और परमात्मा में भेद है ये उन्होंने ठोक के कह दिया अब आप जो कह रहे हो वो अचिंत है मामला क्लियर नहीं कहा जाता आप शब्दों के जाल में ना फसाने का प्रयास करिए ना उस हिसाब से करिए अपने सिधांत को प्रस्तुत करने बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया देख रहे लोग समझेंगे वोन की विचारधारा अब मैं आपसे य पूछ रहा हूं अब मैं आपसे ये पूछ रहा हूं कि अगर
01:20:43:12 इकोन के द्वारा पूजित होने वाला जो ईश्वर है वह सर्वशक्तिमान है क्या वो सब कुछ कर सकता है सरय क्वेश्चन बहुत बार कर चुके हैं बकवास क्वेश्चन लगता है एक नंबर का मेरे को और ये क्वेश्चन ना करे तो बहुत अच्छा है नहीं नहीं नहीं इससे किसी निस्तारण पर पहुंचेंगे ना उससे क्या मतलब स्कन के इतने लोगों के साथ आपने बहस की है बहस का कभी भी निष्कर्ष नहीं निकलेगा चर्चा का निष्कर्ष निकलेगा और ये जो क्वेश्चन है ये ये प्रश्न जो आपके देख भाई साहब फिर वही बात कर रहे हैं चर्चा और बहस की बात फिर से कर रहे हैं आप फिर मैं कंगा आप कैसे सिद्ध करेंगे कि चर्चा नहीं बहस नहीं है ये वो है सर्व शक्तिमान एक ही है मैं ये प्रश्न किसी कारण वश कर रहा हूं जिसका हमारे जो अभी जो टॉपिक चल रहा था उससे रिलेशन है इस वजह से कर रहा हूं आप उत्तर दीजिए हां बताइए चलो क्वेश्चन करिए आप क्या स्कन के द्वारा पूजित होने वाला जो ईश्वर है वो सब कुछ कर सकता है आगे चलिए एक क्वेश्चन हो चुका है आगे चलिए क्या पूछना चाह रहे हैं भाई साहब इसका आंसर दीजिए उसी आंसर से रिलेट करता हुआ क्वेश्चन है क्योंकि आंसर दीजिए कंफर्म करिए शक्तिमान है वो कृष्ण है नहीं वह सब कुछ कर सकता है कि नहीं
01:21:58:24 सब कुछ कर सकता है अच्छा तो आपने जैसा कि बताया कि भगवान श्री कृष्ण का जो स्वरूप है वह शाश्वत है जो ना तो परिवर्तनशील है और ना ही वह कभी जन्म लेता है ना ही कभी उसको वो आता है क्या कहते हैं ना ही उसका कभी अंत होता है अब कहने का मेरा भाव यह है कि क्या श्री कृष्ण अपने रूप को बदल सकते हैं जब वो आते हैं वृंदावन में तो अपने रूप को बदल सकते हैं वो दूसरे रूप धारण कर सकते हैं अ अलग अलग प्रकार के जैसे उन्होंने विराट स्वरूप धारण किया था भगवत गीता को कहते समय और उन्होंने जो है जब वो आए थे तो शिशु रूप में आए थे उसके बाद उनका रूप बदला तो जब हम कह रहे हैं कि भगवान श्री कृष्ण का जो शरीर है वही वो शाश्वत है वो शाश्वत शरीर है और वो एज इट वहां से आते हैं गोलोक से यहां पर तो फिर उनका जो रूप है वो बदल कैसे रहा है कहने का अर्थ ये है कि अगर वो ईश्वर है तो क्या अपने शरीर को बदल सकते हैं और अगर वो बदल सकते हैं तो वो स वो शाश्वत कैसे शाश्वत है तो वो सर्व शाश्वत है तो बदल कैसे पा रहे हैं यह पूछ रहा हूं जब सर्वशक्तिमान कर रहे हो तो फिर सब कुछ कर सकता है ना अरे मेरे भाई उसका
01:23:13:28 शरीर शाश्वत नहीं रहा ना अगर वो परिवर्तनशील है तोत है आप देखिए शंकर संप्रदाय के अकॉर्डिंग भवान जो है विष्णु जो है भाई साब आप शंकर संप्रदाय महाप्रभु और मधवा चार्य जी की बात लेकर के अपनी बात को सिद्ध मत करिए आप मुझे तर्क और प्रमाण से सिद्ध करिए तर्क और प्रमाण से हा बताए कि शाश्वत अभी आपने कहा कि शाश्वत वो है जो किसी भी देश काल परिस्थिति में नित्य है जो नित्य स्थाई अब अगर वह बदल रहा है उनका शरीर तो उसको शाश्वत कैसे कह रहे हैं आप तो मतलब राम जी अगर रूप में प्रकट हुए और बड़े हुए हैं तो फिर उनका रूप भौतिक हो गया उनका शरीर जो है जो हम देख रहे हैं व्यवहारिक दृष्टि से वो शाश्वत नहीं है भौतिक है जो जो वो लीला कर रहे हैं वो लीलाए उनकी जो है जो लीला वो कर रहे हैं वो हम अंततोगत्वा नहीं मान सकते कि वही ईश्वर का रूप है जो ईश्वर का रूप वहा परमार्थ की दृष्टि से प्राप्त जो हमें मिलेगा आपको अगर पता हो के ईश्वर के इस रूप को भजन पूजन और उसका अनुकरण अनुसरण करके हम वहां तक पहुंच सकते हैं उसको उस रूप में प्राप्त
01:24:29:06 कर सकते हैं जैसे कि भोजन के लिए हम प्रयास करते हैं तब हमें कैलोरी मिलती है भोजन के लिए हम जब प्रयास करते हैं तब हमें कैलोरी मिलती है तो आप हमें बताएं कि यदि भगवान का जो शरीर है शाश्वत जो गोलोक धाम में बैठा हुआ है वो शरीर शाश्वत है तो फिर व परिवर्तनशील कैसे और परिवर्तनशील है तो फिर वो शाश्वत कैसे और अगर परिवर्तनशील नहीं है परिवर्तनशील नहीं है तो वो सर्वशक्तिमान कैसे अब मैंने प्रश्न आपसे पूछा इसलिए मैं ये प्रश्न इसलिए लेकर आया हूं क्योंकि आज तक जितनी बार भी हमने प्रश्न किया अगर इस प्रश्न पर आगे बढ़े तो इसमें अंत में एक शब्द आया अचिंत ये जो है अचिंत हैय बात जबक अचिंत श किससे जुड़ा हुआ है अचिंत शब्द किससे जुड़ा हुआ था भदा भेद से मगर जहां पर भी इस कोन के सामने कोई ऐसा प्रश्न अटक जाता है जिसका उसके पास उत्तर नहीं होता तो व सब जगह चिंत डाल देता है इसलिए मैंने कहा था आज जिससे की आप अचिंत कह ना हट पाओ तो भगवान आपके लिए चिंते है क्या भगवान के दो रूप है भगवान के दो रूप है एक व्यवहार में ना आ सकने वाला और एक व्यवहार में आ सकने वाला
01:25:44:15 व्यवहार में आ सकने वाले रूप का आलंबन लेकर के व्यवहार में ना आ सकने वाले रूप तक पहुंचा जाता है में ना आ सकने वाला रूप कौन सा हैय बता दीजिए क्या फीचर व्यवहार में ना आ सकने वालाला रूप निर्गुण निराकार वही मैं बोल रहा हूं आप खंडन कर रहे होक फिर वही बात भाई साहब आपने भागवत को सम भागवत को समझा है कि नहीं मैं आपसे समझना चाह रहा हूं ना समना चाह रहा हूं शलोक का मतलब बता दीजिए मुझे बं मैं आपसे समझना चाह रहा हूं भाई साहब े नहीं आप केवल आप केवल प्रमाण दिखाएंगे या आचार्यों का नाम दिखाएंगे आप समझाएंगे कुछ नहीं राम राम की गुण राम का नाम और राम की लीलाओं को यूज करके निर्गुण ब्रम में कूदना है आपको भाई साहब आप य बताइए आप भागवत का नाम ले रहे चलिए अब आ जाते हैं बहुत बढ़िया टॉपिक आपने उठा दिया भागवत का नाम लिया भागवत आपने कहां से पढ़ी भाई साब गुरु शिष्य परंपरा से पड़ी अच्छा कौन कि परंपरा से पड़ी नाम बताइए वैष्णव संप्रदाय चैतन्य महाप्रभु से प्र
01:26:59:27 संस् है चैतन्य महाप ने कहा से पड़ी चैतन्य महा ने अपने कर परिक से भी पढ़ी है और जैसे लास्ट हमारी चर्चा हुई थी आप बता रहे श्रीधर स्वामी प्रमाण है वो बताइए प्रमाण प्रमाण उन्होंने किसकी भागवत को प्रमाण माना लास्ट डिस्कशन में आपने यही बोला था ना मेरे को श्रीधर स्वामी से पड़ी और शी स्वामी अभी उसको दोबारा से कर रहे दर्शको को नहीं मालूम है किसने क्या बोला था अभी आप दोबारा से उसको बताइए चैतन्य महाप्रभु ने किसकी भागवत को प्रमाण माना अपने परिक के साथ पढ़ते थे और चैतन्य चता में चैतन्य प्रमाण प्रमाण किसे माना बोलो ना अरे भैया मैं बोल तो रहा हूं श्रीम राधा रानी के विस्तार थे अपने अतरंग पार्षद रामाचार्य रामानंद राय और स्वरूप दामोदर के साथ भागवत पढ़ते थे चैतन्य महाप चैतन्य च आपसे पूछ रहा हूं कि उन्होंने प्रमाण माना है कि नहीं श्रीधर स्वामी की टीका को मान लिया बताइए आगे बोलिए हा आज आप भागवत पढ़ रहे हैं व श्रीधर स्वामी की भागवत से विरोध तो नहीं होता है कहीं श्रीधर स्वामी के बारे में जितना मैंने पढ़ा है लास्ट डिस्कशन के बाद श्रीधर
01:28:15:00 स्वामी शंकर संप्रदाय के पदाधिकारी थे गोवर्धन के पदाधिकारी ठीक है संप्रदाय खा और जहा तकने स्वामी क्या लिक था क्या लिंक था म संप्रदाय के जो सिद्धांत है मवा सिद्धांत उसको स्वीकार कर अरे मेरे भाई किससे शिक्षा ली थी मधवा चार्य जी की उन्होंने परंपरा से कैसे आया उनके पास ज्ञान मधवा का मुझे नहीं पता लेकिन नहीं पता इसीलिए नहीं पता नहीं पता हर चीज का नहीं पता आज जो आप भागवत पढ़ रहे हैं वो विरोध तो नहीं करती श्रीधर स्वामी का श स्वामी विरोध नहीं करती क्यों म सिद्धांत ठीक है मैं बताता हूं आपको विरोध मैं आपको एक बड़ा विरोध बताता हूं आप लोग भी जो देख रहे हैं वो
01:29:05:24 देखिएगा यह इसकन की भागवत में है ठीक है पहला स्कंद यह श्रीधर स्वामी की भागवत पहला
01:29:41:27 स्कंद अब यह बताइए श्रीधर स्वामी की भागवत में भागवत में सुबह सबसे पहला जो चैप्टर है वह है भागवत का महात्म दिख रहा है आपको नाम पहला चैप्टर क्या है महात्म दिख रहा है क्या भाई
01:30:20:09 साबसे इस महात्म में गणेश पूजन इत्यादि जो सप्ताह यज्ञ की विधि होती है वह सब बताई गई है ठीक है कि जो भागवत का पाठ है वह कैसे करना चाहिए और अगर व्याख्या की बात करें तो पृष्ठों में लगभग 22 पृष्ठों में इसकी व्याख्या हुई है महात्म की
01:30:55:18 यह पूरा ज्ञान पूरा का पूरा ज्ञान आपकी इस भागवत से गायब है यही है परंपरा जो गुरुजन लिखते हैं जो गुरुजन बताते हैं उसको गायब कर दिया जाए महात्म दि पहला चैप्टर अरे महात्म कहा है इसम भागवत का में देखिए आप में देखिए बताइए है अध भागवत ब यह तो आपने ठोक दिया ऊपर से म म में तो चैप्टर है भागवत का उसको क्या कहेंगे आप बताइए क्या कहेंगे मुझे क्या पता सर आप देख क्या जब मैंने आपको जब मैंने आपको चैप्टर बोला है तब मैंने आपको बोला ना महात्म
01:31:54:10 में में दिया है आप पढ जाके भाई साहब मैं खोल के देख रहा हूं मैं खोल रहा हूं मैं कोई आपके ऊपर वो नहीं कर रहा हूं मैं आपसे पूछ रहा हूं मगर सबसे पहली बात है जब आप यह कह रहे हैं जब आप यह कह रहे हैं कि महात्म जो है व चैप्टर नहीं है कुछ और है तो मैंने आपको चैप्टर के साथ साथ महात्म नाम भी लिया था अब मैं देख रहा आपका ब पहला चटर हा देख रहा और
01:33:46:15 [संगीत] रवा अध्याय भाई साहब यह महात्म जो है यह महात्म उसमें अलग से है यह महात्म उसमें भी है अलग से दोबारा वाला मैं दिखा देता हूं
01:34:36:07 आपको आपको दिखा देता हूं ये 12 स्क कावा चैप्टर है मैं स्कंद कावा चैप्टर उसम भी है यहां पर सबसे पहले जो ग्रंथ प्रारंभ हो रहा है तो श्रीधरी टीका है जितने भी और प्रामाणिक टीका है उसमें जो है महात्म गया है आपका महात्म कहां है वो जो स्कंद के अंदर स्कंद के अंदर जो महात्म है वह अलग है यह अलग से एक महात्म है भागवत का वो कहां है वो पूरा दिखाता भागवत में सुखद दिया है तो अलग से मेरी बात समझिए ये आपका जो आप बता रहे य चैप्टर है स्कंद के अंतर्गत चैप्टर स्कंद के अतिरिक्त जो महात्म लिखा हुआ भागवत में जिसको जी ने लिखा जो परंपरा से आया श्रीधर स्वामी तक उन्होंने भी लिखा उसका अर्थ सब कुछ वोह महात्मा आपका कहां है जो जो स्कंद के प्रारंभ होने से पहले है वो कहां है य ये जो इसमें आप बता रहे हैं अध्याय 13 यह तो उसमें भी है मैं दिखा देता हूं
01:35:55:14 विभिन्न पुराणों की श्रीमद भागवत की महिमा ये लो इसमें भी है हा य मात अरे वो जो चैप्टर है पूरा का पूरा अलग है उसम सबसे पहले कुछ भी घुसा दीजिए अंदर अपनी मने में शलोक श्रीधर स्वामी श्रीधर स्वामी की टीका है ये श्रीधर स्वामी टीका
01:36:28:10 है ये बताइए ये बताइए श्रीधर स्वामी की टीका आपके लिए मान्य है कि नहीं है हा जीी हा जीी मान्य है तो ये सीदर स्वामी की टीका सर सचार इसका अर्थ कर रहे हैं भागवत का महात्म लिख रहे हैं लास्ट डिस्कशन में आपको मैंने पता नहीं चत महा य पढ़ते थे क्या अच्छा ठीक है नहीं पढ़ते थे तो आप सिद्ध करोगे क्या पढ़ते थे वो कहां है वही ला दो आप तो दिखा दो अरे मैं कह रहा हूं वो क्या पढ़ते थे वो आप दिखा दो फिर जब हम जो दिखा रहे उसको आप गलत ठहरा रहे हो तो सही वाला आप दिखा दो ही बोल रहा
01:37:08:07 चन चैतन्य महा ने भागवत पढ़ा ठीक हैने डिस्कशन में मे से बात की थी श स्वामी से पढ़ चैन महा बोल रहे हैं श्रीधर स्वामी की जो को स्वीकार नहीं कर के समान है आपक कर रहे जी तो आपने मुझे एक लोक में से बताया था कि शिव ही ब्रह्मा बनते हैं मत बदलिए अभी विषय यह रखिए कि आपने सीदर स्वामी से अपना जो भागवत है उसको मैच करा है कि नहीं करा करा है तो कहां से करा व बताइए श्रीधर स्वामी की प हा चैतन्य बोलेंगे भागवत स्वामी केडिंग बोलेंग अलग तो नहीं कुछ बोलेंगे प तो प्रमाण अगर आपसे भाई साब पूछ रहा हूं कि आपने यह पता किया है कि आप जो पढ़ रहे हो व चैतन्य महाप्रभु के द्वारा जो कहा गया है भागवत का जो अर्थ बताया गया वो श्रीधर स्वामी से मैच खाता है कि नहीं मेरा प्रश्न तो यही है ना भाई जैसे आप उंगली उठा रहे हैं जैसे आप ये उंगली उठा रहे हैं कि ये किसने क्या लिखा हमें क्या पता तो ऐसे मैं भी बता सकता हूं कि चैतन्य महाप्रभु के बारे में किसने क्या लिखा हमें क्या पता वही मैं बोल रहा हूं चैतन्य मभु गगने का मतलब है चैतन्य महाप्रभु की जो प्रमाण
01:38:23:21 जानकारी है प्रामाणिक शिक्षा है व आपने ग्रहण की हमने नहीं मैं टी हेर फेर हो सकता है प्रमाणिक ग्रंथ उसको आप अस्वीकार नहीं कर सते मैं आपसे इसीलिए सिद्धांत पूछ रहा हूं कि श्रीधर स्वामी की श्रीधर स्वामी की व्याख्या आपने कहां से मैच किया कि आज जो हम पढ़ रहे हैं वो वही है जो शीर स्वामी ने लिखा वो मैच किया नहीं किया चलते तो आपने मैच किया है कि नहीं किया है बात हमारे आचार्य ने देना था व दे दिया मैं आपसे पूछ रहा हूं आपने मै मैं आपसे पूछ रहा हूं मैच आपने किया है कि नहीं किया हैरी बात बताइए नहीं
01:39:15:26 बताओगे मैं आपसे पूछ रहा हूं आपने मैच किया है कि नहीं किया है ये राम कलेश कुमार यादव बोल रहे हैं कि क्यों आपस में झगड़ा करते हो तारू हो जाते हो शिवांश भाई शत्रु बहुत भारी है पड़े हैं उनको पहले निपटाना आपस में वैचारिक मतभेद है सुलझा लेंगे भाई हमें ऐसे लोगों के साथ हम कंधा कैसे मिलाएंगे जो कृष्ण और अल्लाह को एक कहते हैं कैसे खड़े होंगे ये लोग हमारे साथ जब अल्लाह वाले हमारे पास आएंगे उनके सा खड़े हो
01:40:11:16 जाएंगे और ऊपर से कृष्ण और अल्लाह तो एक है मगर कृष्ण और शिव अलग अलग है इसीलिए इनसे बात करते हैं केवल कृष्ण और शिव में भेद नहीं है अन्य परंपराओं अन्य वैष्णव परंपराओं की तरह जय श्री राम जय श्री राम विशाल और दीपावली की ढेर सारी शुभकामना आपको जी कैसे हैं आप बस बस कृपा है राम की और बताइए आज किसका आज क्या चल रहा है आज टॉपिक है आज हा जी शिवा
01:41:26:28 जी मैं आपसे पूछ रहा हूं कि आपने कहा कि हम वही भागवत पढ़ रहे हैं जो भागवत श्रीधर स्वामी जी ने लिखी अब जो श्रीधर स्वामी के का जो दिया हुआ ज्ञान है वो भाई उनके नीचे के जो शिष्य है आपका कहना है कि उन्होंने उनके पास नहीं है आपके पास है इसका मतलब आपने आपका यह कहना है कि आप श्रीधर स्वामी जी के प्रामाणिक शिष्य परंपरा में है तभी तो आप उनके ज्ञान को जानने दावा कर सकते हमसे भी आगे श्रीधर स्वामी की ट्रीका को चैतन्य महाप ने आपने जैसे बताया कि श्रीधर स्वामी से स भागवत चैतन्य महाने आप यही कह रहे यही दावा कर रहे देखिए होता क्या है मैं आपको राहुल जी एक बात बताऊ अगर हम लोग एक एक बात एक एक बात बिना छोड़े चलते रहना तो हम किसी निष्कर्ष में पहुंचते हैं मैंने आपसे पूछा है कि क्या आपने वेरीफाई किया है कि जो आज आप भागवत पढ़ रहे हैं वो भागवत श्रीधर स्वामी की ही लिखी है आपने मैच किया है क्या श्रीधर स्वामी से सितो को पढ़ रहे हैं हम और बताइए शीर स्वामी को सिद्धांतों को और जितना सम चैतन्य महाप्रभु ने किसको गुरु माना है ईश्वर पुरी उनके गुरु थे अच्छा चैतन्य महाप्रभु ने
01:42:41:28 किसकी जो टीका है उसे प्रमाणिक माना है शीत स्वामी को बोला बताइए और जो श्रीमद भागवत का ज्ञान है वो क्या मधवा परंपरा से उनके पास नहीं आ पाया मैं बता रहा हूं आपको कि कौन से सिद्धांत मैच कर रहे हैं मैं आपसे पूछ रहा हूं मधवा चार्य जी से भागवत की व्याख्या उनके पास आई कि नहीं आई भागवत की व्याख्या चत महा पहुच ग से आई की नहीं आईली मैं पूछ रहा हूं मधवा चार्य जी से भागवत की व्याख्या
01:43:23:13 श्रीधर स्वामी से भागवत सीख ली ना मैं आपसे यह पूछ रहा हूं मधवा चार्य जी से आई उनके पास कि नहीं आई भागवत मधवा चार्य के पास नहीं आई चैतन्य महाप्रभु ने मतलब चैतन्य महाप्रभु के पास जो भागवत का ज्ञान है मधवा चार्य का नहीं है मधवा चार्य के पास तो ब्रहम समिता भी नहीं लगी ी हाथ में पूछ रहा हूं मैं आपसे भाई साहब जो पूछ रहा हूं वो मुझे बता दीजिए चैतन्य महाप्रभु के पास जो भागवत की व्याख्या का ज्ञान है वो मधवा चार्य से नहीं आया आपका क्वेन गलत है आपका क्वेन होवा से अग चन महाने भागवत सीखी आपका में लिखा हुआ है शिव ही परमेश्वर है व वही विष्णु बनते हैं वही ब्रह्मा बनते हैं मेरा क्वे नहीं है मेरा क्वेश्चन य है कि जब चैतन्य महाप्रभु श्रीधर स्वामी जो पूरी पीठ के शंकराचार्य थे गोवर्धन मठ के उनको जगतगुरु के रूप में स्वीकार कर रहे की टीका को प्रामाणिक मान रहे हैं तो फिर आप उनको ना मानने वाले कैसे सिद्ध हुए दूसरी बात क्या आप जो आज भागवत पढ़ रहे हैं वह चैतन्य महाप्रभु के विरोध में तो नहीं है क्योंकि चैतन्य महाप्रभु ने उनकी भागवत को प्रमाणिक स्वीकार
01:44:38:21 किया है तो क्या आप जो भागवत पढ़ रहे हैं वो सीदर स्वामी से मैच खाती है कि नहीं खाती तो मैंने आपको बता दिया एक पूरा का पूरा चैप्टर सीधरथ स्वामी की जो टीका है उसमें है और आपकी जो टीका है पूरा का पूरा चैप्टर सत्यानाश कर दिया गया है गायब है पूरा यब है पूरा चैप्टर गायब है पूरा ही नहीं है भागवत का भागवत का जो सप्ताह यज्ञ होता है भागवत ज सुनाई जाती है पाठ किया जाता है यह सब होता है कैसे करना है कैसे नहीं करना है यह सब उस चटर में लिखा होता है जिसम गणेश पूजन है इत्यादि इत्यादि बहुत सी बातें है वो सब है ही नहीं अग सर्वशक्तिमान गणेश पूजा का विधान कहा से आया भाई साहब अभी हम बात कर रहे हैं कि आप श्रीधर स्वामी को मानते हैं कि नहीं मानते हैं स्वामी को वैष्णव के रूप में स्वीकार करते हैं उनके पास वैष्णव का किस परंपरा से कौन से आचार्य के द्वारा ज्ञान आया मधवा संप्रदाय से आया दोनों को सिंथेटिक करने का प्रयास कि गुरु मवा तक पहुचे कौन से गुरु उनके गुरु का नाम क्या था जो मधवा चार परंपरा के थे
01:45:55:12 मधुवा संप्रदाय और शंकर संप्रदाय स्वामी के गुरु का नाम क्या था जो मधवा चार परंपरा के थे शंकर शर स्वामी ने दोनों को ही पढ़ा है मवा संप्रदाय को भी पढ़ा है जो श्रीधर स्वामी है उनके कौन से गुरु थे जो मधवा चार परंपरा के थे अरे भैया मैं अगर ब्रह्म संप्रदाय में हूं मधवा संप्रदाय में हूं शंकर संप्रदाय की टीका पढ़ रहा हूं तो गुरु स्वीकार करने की क्या जरूरत है बता वैष्णव स्वीकार कर रहे हैं तो प्रामाणिक वैष्णव थे वो कि नहीं थे है वही थे मैं तो वैष्णव ही स्वीकार कर रहा हूं उनको प्रामाणिक नहीं कर रहे प्रामाणिक कर रहा हूं प्रामाणिक है तो उनके आचार्य का नाम क्या है जो मधुवा से आ रहे थे अरे भैया दोनों सिद्धांतों को पढ़ना है तो दोनों जगह गुरु बनाने पड़ेंगे क्या ये बताइ आपसे पूछ रहा हूं कि अगर वो प्रामाणिक वैष्णव थे वो भी मधुवा चार परंपरा के तो फिर उनके आचार्य का नाम क्या है जो कि पीछे से गुरु के गुरु के गुरु के रूप में मधवा चार तक पहुंच गए चारों संप्रदाय के अगर मे को विदान सूत्र की टीका पढ़नी हो चारचार आपका कहना है कि शंकराचार्य का सिद्धांत वैष्णवास्त्र
01:47:23:15 किस शीर्ष पर बैठे हुए गुरु तक पहुंचे बताइए मम ज्ञान या फिर उनका मनमुक ज्ञान था जिसको चैतन्य महाप्रभु ने स्वीकार कर लिया मैं वही चीज पूछ रहा हूं आज मैं मधवा संप्रदाय से हूं बाकी तीन संप्रदाय को को ज्ञान लेना है तो चार संप्रदाय में को दीक्षा लेनी पड़ेगी गुरु स्वीकार करना पड़ेगा क्या अगर पहली बात यह है कि चारों संप्रदाय की आप पढ़ाई करेंगे मगर आप माने उस संप्रदाय के जाएंगे जिस संप्रदाय के सिद्धांतों का आपने साथ करेंगे पढ़ाई सबकी कर लो मगर जिस संप्रदाय के सिद्धांतों को आप आत्मसात करेंगे उस संप्रदाय के आप माने जाएंगे अगर आपने सत स्वीकार अगर उन्होंने सिद्धांत स्वीकार किया है वैष्णव मत का वो वैष्णव मत का जो ज्ञान है व उनके पास कहां से आया क्या परंपरा है उनकी बताइए आपने कहा व वैष्णव थे वो कौन से वव थे और उनके गुरु का नाम क्या था उनके गुरु का नाम क्या था व कैसे परंपरा मधवा चार्य तक बताइए मुझे नहीं पता मधवा संप्रदाय को उन्होने पढ़ा तो भाई सी बोलो ना सीधे बोलो ना नहीं पता करवाते हो कर रहे हो फिर बोलोगे यही बोलो ना
01:48:39:07 क्या क्या क्वेश्चन किया मैंने बताइए आप आपने बोला शी स्वामी से भागवत पढी चैतन्य महा ने मैंने बोला आप ये क्लेम कर रहे हो कि श्रीधर स्वामी वैष्णव थे सुनो आपने किया श स्वामी वैष्णव थे आपकी भगवत गीता में लिखा है ज्ञान वही प्रमाणिक जो परंपरा से प्राप्त हो जब मैंने श्रीधर स्वामी के बारे में पूछा कि कौन सी परंपरा से उनके पास तक ज्ञान आया आपको नहीं पता आप कैसे क्लेम कर रहे हो कि व प्रमाणिक वैष्णव थे आप कहो मनमुक वैष्णव थे अगर वो मनमुक वैष्णव थे तो उनकी जो भागवत है उसको प्रमाण के रूप में स्वीकार करने वाले आप चैतन्य महाप्रभु को क्लेम कर रहे हो गुरु विरोधी सिद्ध कर रहे हो और अपने चैतन्य महाप्रभु को क्लेम करने के कारण आप गुरु विरोधी सिद्ध हो रहे हो और बोलो कुछ विरोधी सिद्ध नहीं हो रहा मैं जता देख रही है आपको ना तो यह मालूम है कि आपकी जीबीसी आपका अंतिम निर्णायक किस आधार पर कर रही है कौन से शास्त्रोक्त नियम है आपको ना तो यह मालूम है कि जीव ब्रह्म में एक है तो वो शंकराचार्य वाले कैसे हो गए और मधवा चार वाले कैसे हो गए शंकराचार्य वाले क्यों नहीं हुए हर बात को आप बदल रहे हैं उसके बाद जब ये आया कि सीदर स्वामी की उससे आए हैं तो आपने फिर कह दिया कि हमें नहीं पता भाई जब आपको कुछ पता ही नहीं है तो कोई
01:49:54:10 भी ठोस बात कहने के लिए आप कहां से अधिकृत हो गए जब आपको किसी चीज का बेस ही नहीं है आपके पास एक मिनट तो आप कोई भी सिद्धांत ठोस तरीके से कैसे कह रहे हैं मैंने जितने भी आपको इतने बार बोला है कि मेरे को नहीं पता वो आपके जो बजले क्वेश्चन है उसके ऊपर बोला कौन से ऐसा कुछ पता कौन से क्वेश्चन है कौन से क्वेश्चन है निरा ये कहां लिखा आपकी बात क मानी जाए कहां लिखा है चलो मैं अपने क्वेन को शास्त्र से सिद्ध करूंगा आप मुझे शास्त्र से बताइए मेरा क्वेश्चन क्यों गलत
01:50:33:03 है कौन सा क्वे था मैं आपको शास्त्र से सिद्ध करूंगा मैं मैंने जो क्वेश्चन पूछा आपने कहा आप सुनिए आपने कहा जो सर्वशक्तिमान वाला क्वेश्चन है बेजल है मैं उसको शास्त्र से सिद्ध कर दू सर्वशक्ति क्या है आप बताइए आपके लोगों ने कहा है ईश्वर कुछ भी कर सकता है प्रभुपाद जी ने लिखा है कि वो वो जो है क्या कहते प्रभुपाद जी ने क्या कहा कि प्रभुपाद जी ने उनको कहा कि वो रासकल रासकल शब्द का उपयोग किया ना क्यों क्योंकि राल का अस्तित्व अगर दुनिया में है तो उसका अर्थ है कि भगवान श्री कृष्ण में राल का तत्व भी है तभी तो दुनिया में अस्तित्व है राजल का ब ल की
01:51:27:04 बताइए बात क्या चल रही है नहीं उसका आप बात य कर रहेने कुछल के प्रश्न किए आप बताइए के प्रश्न कौन से है प्रश् कौन से ौ किसको कहते बझे मैं आपको अच्छा चलिए राजल का आप क्या बानते बताइए को क्या कहते है बताइए मुझे आप मैं आपको पूछ रहा हूं रासकल का अर्थ आप बताइए उन्होंने जो रासकल है वो क्यों कहा बताइए शास्त्र सेही बताऊंगा लंपट शब्द को क्या कहते हैं लंपट शब्द जो चंचल बुद्धि का हो कहीं भी उसका मन आ जाता हो ये हो जाता हो वो लपट ठीक है न क के लिए यूज की है अरे तो मैं कहा कह रहा हूं कि उन्होने गलत किया है मैं यह कह रहा हूं इस दुनिया में इस संसार में भाई मेरे थोड़ा थोड़ा तो थोड़ा तो बुद्धि का इस्तेमाल किया करो मैं यह कह रहा हूं कि इस दुनिया में संसार में अगर किसी भी चीज का अस्तित्व है तो उसके कारण श्री कृष्ण है आपके जो प्रभुपाद है उनके भी अनुसार इसीलिए उनको कहना पड़ा कि रासकल अगर रासकल क्या शब्द था उनका अगर दुनिया में रास्कल डम है तो इसका मतलब
01:52:42:07 यह है कि श्री कृष्ण में वो था इसीलिए है अगर श्री कृष्ण में रासकल डम नहीं है तो फिर रा भी अस्तित्व में नहीं हो सकते जीने नहीं बोला मतलब उन्होने स्वीकार किया कि अगर दुनिया में रेप हो रहा है अगर दुनिया में रेप हो रहा है तो रेप का तत्व भी श्री कृष्ण है अगर दुनिया में अपराध हो रहा है तो उसका भी श्री कृष्ण है उनको आप सीमित नहीं कर सकते आप खुद ही रेस्ट बना रहे हो भगवान को कृष्ण को ुद बना दिया आपने अपने त
01:53:17:27 से भैया आप जा सकते हैं अच्छा लगा आपसे बा करके हमारी आपकी चर्चा देख ली लोगों ने अब चर्चा का जो रुख है वो मुड़ रहा है आप यह बताइए आप एक बात बताइए आप जो चिल्ला रहे हैं कि हमने श्री कृष्ण को रेपिस्ट बनाया पहली बात तो मैं यह कहूंगा इसका अर्थ यह है कि श्री कृष्ण जहां पर रेप हो रहा है वह जगह श्री कृष्ण की सत्ता में नहीं है सब कुछ कृष्ण की सत्ता में है लेकिन आत्मा रेप कर रहा है भगवान रेप कर र है क्या वो इंसान रेप कर रहा है क्या को रोक सकते हैं जो हो रहा है इच्छा शक्ति जीवात्मा के पास है मैं आपको पूछ रहा हूं रोक सकते हैं फ्री विल में किसी में इंटरफेयर नहीं करते नहीं रोक सकते नहीं रोक सकते इ नहीं रोक सकते इच्छा शक्ति में कि मतलब मतलब ईश्वर यहां भी आपका बा देता है अगर कोई अपराधी अपराध कर रहा है व उसको रोक नहीं सकते क्यों बाद है मैं पूछ रहा हूं अपराधी को अपराध करने से रोक सकते हैं नहीं रोक सकते अरे प्रभु जी अपराध करने से रोक सकते भौतिक जगत बनाया क्यों भगवान ने फिर इसका मतलब वो य भी बाधित है यह बोलोना नहीं रोक सकते आगे
01:54:32:28 बढ़ते है है अच्छा ठीक है नहीं रोक सकते मगर बाधित नहीं है अरे भया जीवात्मा के पास इच्छा शक्ति है नहीं आपने कहा वो सब कुछ कर सकते हैं आपने सब कुछ कर सकते मगर अपराधी को अपराध करने से रोक नहीं सकते आप य क्वेन बताइर जी आत्मा के पास इच्छा शक्ति है आपने आक्षेप लगाया है अब इसको तोड़ लेंगे बिल्कुल अब इसकी बाल की ल निकाल लेंगे अब मैं पूछ रहा हूं आपसे आपने कहा वो सब कुछ कर सकते हैं मगर अपराधी को अपराध करने से रोक नहीं सकते इच्छा शक्ति है क्या नहीं है जीवात्मा के पास पूछ रहा हूं को रोक सकते हैं कि नहीं अपराधी को अपराध करने से वही आंसर दे रहा हूं इा शक्ति है मतलब कि नहीं अरे भाई मुझे बताओ रोक सकते हैं कि नहीं इच्छा शक्ति बताओ जीवात्मा के पास है या नहीं है मैं मवा संप्रदाय सकता हूं रावण संप्रदाय में भी सता हूं शंकर संप्रदाय में भी सतां क दू के आत्महत्या कर सकता
01:55:36:15 हूं मैंने आपसे एक प्रश्न पूछा है सिंपल सा आपने कहा भाई साहब भाई साहब भाई साहब देखिए मैं इसको व्यवहारिक रूप से पूरी करना चाहता हूं चर्चा को द्वंद नहीं लाना चाहता हूं मैं कह रहा हूं क्या अगर आपका अनुसार अगर आत्मा की अपनी इच्छा शक्ति है तो इसका मतलब यह है कि भगवान आत्मा की जो फ्री विल है गलत कार्य करने की उसमें रोक नहीं सकते उसे इंटरफेयर नहीं करते इर कर सकते हैं कि नहीं कर सकते हैं लेकिन इंटरफेयर नहीं करते भगवान कर सकते हैं कोई मायावादी ब कोई भक्त ब के पास इसका मतलब कर सकते हैं ना कर सकते हैं ना कर सकते
01:56:24:07 अब एक बात और पूछ लेता हूं विष्णु और कृष्ण में भेद मानते हो क्या आप जीमा में भेद मानते हो क्या विष्णु और कृष्ण में भेद मानते हो क्या दोनों एक मंच पर खड़े करें तो राम कृष्ण विष्णु में कोई भेद नहीं है ठीक है किसी लेडीज को मातृ शक्ति को उसके पति का रूप धारण करके और उसके साथ संबंध बनाना क्या ये अनैतिक क्रिया में आएगा या नहीं आएगा किसके लिए यूज कर रहे हो जीवात्मा के लिए भगवान के लिए आपने कहा ना कि हमने भगवान को रेपिस्ट बनाया है हम तो ये कही रहे भगवान के ऊपर कोई दोष नहीं लगता आपने व रा क्योंकि वो ईश्वर है आप कह रहे हो कि नहीं भाई ईश्वर अगर कुछ कर रहा उसको भी दोष लग जाएगा उसको दोष मत लगाओ अब मैं पूछ क्यों ईश्वर को क्यों दोष नहीं आपने इतने दोष नहीं लगेगा क्योंकि ईश्वर के लिए ईश्वर जो है इसलिए दोष नहीं लगता इसलिए दोष नहीं लगता क्योंकि ईश्वर के पास सम दृष्टि है उनको अच्छे बुरे में वो जानते हैं कि यह सब
01:57:39:13 जो प्रपंच है यह माया के द्वारा उत्पन्न प्रपंच है मुक्त है वो वह किसी भी चीज से प्रभावित नहीं होते हैं जो भगवत गीता में दो 2 17 से 2 31 तक भगवान ने बताया आगे भी बताया सम दृष्टि पांचवे अध्याय में सम दृष्टि अच्छे और बुरे में दृष्टि भेद अच्छे और बुरे का दृष्टि भेद अच्छे और बुरे का दृष्टि भेद हमारे लिए है भगवान के लिए नहीं है इसलिए भगवान कुछ भी कर सकते हैं भगवान पर दोष इसलिए नहीं लगता है क्योंकि व एक पेंटर है उन्होंने पेंटिंग बनाई है उसम फिर वो आंखों में कलर भरे या दूसरे अंगों में कलर भरे उनके लिए सब एक समान है हमारे लिए है क्योंकि हम उस पेंटिंग के अंदर फसे हुए हमारे लिए य भेद है इसलिए भगवान प दोष नहीं लगता आप हर चीज तर्क से ही देते हो प्रमाण नहीं है आपके पास बता रहा हूं आपको मैंने आपको प्रमाण दिया आपने कहा कि ईश्वर ईश्वर जो है वो नहीं कर सकता बिना अरे भाई सुनो प्रमाण बता रहा हूं आपको यार प्रमाण ज बता रहा हूं भाई साहब मैं आपको प्रमाण बता रहा हूं आपने कहा कि ईश्वर को ईश्वर जो है आप जो है ईश्वर को रेपिस्ट बना रहे हो वृंदा के साथ उसकी इच्छा के बिना उद्देश्य अच्छा था मगर
01:58:54:16 उसकी इच्छा के बिना भगवान विष्णु ने उनके पति का रूप धारण करके संबंध बनाया कि नहीं बनाया भगवान वह है जो कुछ भी कर सकता है उसे किसी सीमा में आप बांध नहीं सकते अब यह प्रमाण दू आपको मैं निकाल के आप मानते हो इसको बो बो बोलो बोलो के साथ भगवान ने संबंध बनाया विंदा देवी के साथ संबंध बनाया तो वि देवी को विरोध करना चाहिए देख रहे हैं ना भाई साहब आप इन सब की बातें मैं वही बता रहा हूं आपको धारण करके पति का रूप धारण करके संबंध बनाया था क्यों होती है क्यों होती है फ के साथ विष्णु तव की पूजा कर लो कितनी बकवास करोगे मेरे भाई तुम वहा वृंदा जी को इतना दुख हुआ था वृंदा जी को इतना दुख हुआ था वहां पर वृंदा जी को इतना दुख हुआ था कि उन्होंने आत्म कर लिया था और उसके बाद उसके बाद जो उसके बाद जो उसके बाद जो भगवान विष्णु है वो भी दुख में हील हो गए थे उसके बाद उनको कई प्रकार की चीज हुई जब उन्होंने उनका जो है तुलसी माता के रूप में पुनर्जन्म हुआ जब गौरी
02:00:09:24 माता से पांच रूपों में प्रकट हुई हमा बा ठीक है हमारी बात सुन ली है लोगों ने आपका अगर कोई आपकी और हमारी दोनों की बातें सुन ली है हां ये देखिए शिवांश जी क्या भौतिक जगत आध्यात्मिक जगत का कोई ज्ञान नहीं है ये देख लीजिए यही हम कहते हैं भौतिक और आध्यात्मिक वही है व्यवहारिक और परमार्थिक बोलने से कुछ नहीं होता एक बोल बोलने से कुछ नहीं होता ठीक है भाई साहब आपको आपको कुछ और कहना है आप आप य अपना कुछ करके आप जा सकते हैं आपको मैंने बोलने का वो दिया आप कह लीजिए बताया सुख दुख से परे भौतिक प्रपंच से परे हैं और यहां पर बोल रहे हैं कि उनका संग करके दुख में वेवल हो गए को बता रहा हूं कि हम जो ईश्वर कुछ भी कर सकता है कहते हैं वो इसलिए कहते हैं क्योंकि उन पर कोई दोष नहीं लगता आप दोष ही कह रहे हैं मैं विल क्यों हो मैं बात नहीं कर सकता आपसे आप जाइए हा
02:01:23:04 जय श्री राम शवा जय श्री राम अभी इसन से जो आप चर्चा कर रहे थे देखिए मेरे को कोई स्कन से कोई प्रॉब्लम नहीं है और मैंकन को देखा मैं कोई विरोध नहीं कर रन भी अच्छा काम ही कर है हा मुझे यह है कि दो चार बात उनकी समझ में नहीं आती ले चीज बताऊ मेरे पास जैसे कन की भी गीता है और मेरे पास य गीता प्रस की दो गीता है एक मेरे पास देखिए एक मेरे पास य तत्व गीता जयदयाल गोका जी की यह 2000 2001 की है इसलिए बहुत पुराना य लग संस्करण तो मैंने इसको पहले पढ़ा और जोकन वाली गीता इकन का ट्रांसलेशन इसका ट्रांसलेशन व्याख्या एक मिनट एक बात कह दू उनके जाने पर जो बात मैं समझाना चाह रहा हूं ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है उसकी वो सम दृष्टि समत्व दृष्टि वाला है उसके लिए कुछ अच्छा या बुरा का भेद नहीं है और यह बात जो मैं समझाना चाह रहा हूं कि ईश्वर व्यवहार में आकर के लीला पूर्वक कुछ भी कर सकते हैं वही बात अब वो बोल रहे हैं कि देखो देखो तुमने जो है वहां पर ईश्वर ने जो क्या कहते हैं आध्यात्मिक दृष्टि से जो कार्य किया
02:02:38:08 उसको जो ईश्वर के ऊपर दोष मर दिया मैं दोष नहीं मढ रहा हूं आप दोष मर रहे हैं अथवा दोष ना मरने की आड़ में आप ईश्वर को सीमित कर रहे हैं और फिर वो मेरी ही बात मुझको बता रहे हैं जो अभी इससे पहले मैं समझा रहा था कि ईश्वर कुछ भी करता है मगर उसके ऊपर दोष नहीं लगता प्रमाण भी है भगवत गीता में उन्होंने कहा कि मुझे कर्म लिप्त नहीं करते मैं सभी कर्मों को करता करने वाला होते हुए भी अकता ही हूं मैं सब कुछ कर रहा हूं मैं अपराधियों को जन्म देने वाला भी हूं मैं साधुओं को जन्म देने वाला भी पूरी सृष्टि मैंने बनाई है पाप पुण्य सबका निर्माता मैं ही हूं फिर भी क्योंकि मेरी दृष्टि में मैं मुक्त हूं मेरी दृष्टि में मैं प्रभावित नहीं हूं इस सांसारिक प्रपंच से इसलिए मैं सब कुछ करते हुए भी अकता हूं वहा तो काल ने बोली है ना मगर मगर क्या हुआ अब यह जब मैंने बताया तो नहीं नहीं आप जो है ईश्वर को यह दोष लगा रहे हो वो दोष लगा रहे हो और उसके बाद फिर खुद कह रहे हैं कि अरे तुमने व वृंदा वाले भाई भाई तो मैं भी आपको समझाना चाह रहा हूं जो अब आप मुझे समझा रहे हो जी बोलिए तो पहले मेरे पास जो त गीता है जयल गो जी की मैं वोन की गीता ली
02:03:53:14 दोनों का मैंने व्याख्या और दोनों का किया तो मुझे उसमें थोड़े थोड़े कांट्रडिक्शन मिले फिर अब एक मेरे पास एक ये है य सा जीी का जी मैंने इस लिया अब ये यह तो बहुत बड़ी टीका है तो मैंने पहले इसका और इसकन का मैंने पहले अध्याय के साथ किया तो उसमें भी क लेकिन ये बड़ी बड़ी है तो व्याख्या छोड़ के फिर मैंने ये राम सुख दास जी के अथ के साथन के साथ मैंने खाली किया दूसरे अध से अध्याय तो मुझे बहुत जगह जगह मुझे अलग अलग बात मिली उम दोनों में मैंने हाईलाइट भी करके रखे पन से बताओ बता और कोई आना चाहता है तो आप लिंक शेयर कर दीजिए व आ सकता है अभी भव्य राधा कृष्ण दास जी को देखा मैंने कमेंट बॉक्स प उसको अरदित व्यक्ति है उसको तमीज नहीं बात करने
02:04:45:06 की उनको जानता हूं मैं दो तीन बार उनके साथ बात कर चुका हूं वो तीन घंटे का व तो थोड़ा सा मेरा भी स स कर देने वाला विषय था ो कोई बात नहीं क्या फता है ना ब राधा कृष्ण दास को उसके मां बाप के द्वारा अच्छे संस्कार आचरण वगैरह नहीं मिले हैं किसे कैसी बात करनी उसको नहीं आता है और वो जो बदतमीज करता है या यह सब चीज जो वो करता है उसका उपयुक्त उत्तर दिया जा सकता है समय के अभाव के नहीं दिया जा रहा है जिसके कारण वो स्वयं को समझ रहा होगा कि मैं सामर्थ्य वान और जिसके लिए मैं प्रतिकारा क्मक व्यवहार कर रहा हूं वो अस असाम वान है तोय उसकी भूल है और आवश्यकता पड़ी तो ठोस कदम भी उठा लिए जाएंगे जी अगर लाइव में जुड़े हुए तो मैं उनको यही बोलूंगा कि मैं कुछ देखो इसकन के लिए मैं कुछ गलत नहीं कह रहा हां लेकिन जो मैंने गीता से बताया जो मुझको मतलब जैसा लगा वो सब मैंने अपनी बातें बता दी तो आप बस आप करते रहो कोई हमको कोई किसी से ै विरोध नहीं है बस हम अपना सनातन के
02:06:00:07 लिए काम करते रहे बस जा सी सबके रास्ते अपने अपने है सनातन क्या है विशाल भाया जी जी सनातन क्या है जो जो आदि से रहि जो अनादि काल से वही सनातन है कुरान का अल्ला सनातन है क्या कुरान का अल्लाह सनातन है अब उनके बारे में इतना मुझे थोड़ी मालूम है दूसरे धर्मों का वो धर्म है आपके अनुसार कुरान मजहब है धर्म सनातन कुरान का अल्ला ये कह रहा है कि 611 में मेरी संतान जन्म नहीं ले सकती इन्होंने ये कोट किया है कि कृष्ण और अल्लाह एक है इनके अधिकृत व्यक्तियों ने भी उनकी किताबों में भी कितना भी उससे बचने का प्रयास कर ले मगर ये ये फैलाते हैं कि कृष्ण क्राइस्ट और अल्लाह एक है तो फिर वो जब जिसमें अल्लाह आ गया जिसमें कृष्ण आ गया वो सनातन कहां से हो गया मैंने सुनि सुनि सुनि एक चीज बस एक चीज और मैंने भ राधा कृष्ण दास जी को एक बार इंस्टा पर कमेंट में बोला लाइव में कि भगवान श्री कृष्ण श उन्होने
02:07:15:10 क नहीं है मैंने उनको विष्णु पुराण का दिखाया विष्णु पुराण के पांच अंश में जब श्री कृष्ण बाणासुर का य होता जो भगवान शिव बाणासुर के सपोर्ट में युद्ध करते हैं तो आप पाचवा पेंगे उसम श्री कृष्ण ने बोला है कि भगवान शिव को कि हम लोग एकही है बस जो बुद्धिजीवी लोग है वही हम लोगों में अज्ञानी लोग जो है वही हमें भेद दृष्टि करते हैं वो जब चीज मैंने उनको दिखाई राध कृष्ण दास जी को इन्होने मेरे को बोला की गीता प्रेस वालों ने उन लोको के गलत अर्थ किए हुए हैं यह बोला गीता प्र गोरखपुर वालो ने गलत अर्थ किए है भाई किसी ने भी किसी से किया हो ना तो इनका ईश्वर सर्वशक्तिमान है क्योंकि इनके अर्थ गीता के बदल रहे हैं तो प्रभुपाद जी को मानने वाले सिद्ध नहीं हुए क्योंकि ये चेतन महाप्रभु के द्वारा स्वीकारी गई जो श्रीमद् भागवत है ये उसको पढ़ने वाले नहीं है तो फिर य चेतन महाप्रभु के फॉलोअर सिद्ध नहीं हुए क्योंकि मधवा चार्य जी ने जो भागवत दिया या मधवा चार्य जी का जो ज्ञान है वो भागवत में य नहीं पढ़ रहे हैं तो ये मधवा चार को मानने वाले सिद्ध नहीं हो रहे हैं और क्योंकि इनका ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं है सब कुछ कर सकने वाला नहीं है वादित है तो ये कृष्ण को कृष्ण ईश्वर मानने वाले सिद्ध नहीं हो रहे हैं तो सिद्ध क्या होंगे जो मधु संप्रदाय जैसे
02:08:30:10 शंकराचा जी वो तो अद्वैत को मानने वाले थे और जो मधवा चार्य जी है वो तो द्वैतवाद में मानने वाले थे मैंने ये सुना है तो फिर आपने खिचड़ी बना रखी है इसकी ईट इसका रोड़ा भानी मती का कुनबा जोड़ा और फिर बताते हो कि हम जो है परंपरा परंपरा परंपरा पूछो तो परंपरा में अंतिम निर्णायक वो होगा जो आपके जो आचार्य की गद्दी है उस पर जो आज बैठा होगा व परंपरा में अंतिम निर्णायक होगा अंतिम निर्णायक कौन है भाई बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स जीबीसी जिसमें कोई बच्चा भी हो सकता है कोई ब्रह्मचारी भी हो सकता है कोई सन्यासी भी हो सकता है यहां का कोई सन्यासी है उसको अथॉरिटी कौन है उसमें किसी गृहस्थ की वो अपना वोट दे रहा है वहां प ये ये सनातन सिद्धांत है ये सनातन संस्था है वृंदावन धाम में संप्रदाय नाम तो ले लिया मगर संप्रदाय कहां है इसमें काम तो कर की तरर है जी वृंदावन धाम में जो राधा रमण जी का मंदिर है
02:09:30:13 ना तो जो उनकी जो मेन वो जो है श्री पुंडरी गोस्वामी जी पुंडरी गोस्वामी जी वो भी वैसे गौड़ी संप्रदाय से ही है वो भी श्रीमन चैतन्य महाप्रभु को ही फॉलो करने वाले हैं वो उनकी जो धर्मपत्नी है श्री श्रीमती रेणुका गोस्वामी जी तो उन्होंने भी भगवान शिव और श्री कृष्ण एक ही माने और वो उन्हीं के मा वो गयस वो शुद्ध परंपरा को फॉलो करने वाले हैं वो हम मैंने उनके देखे हैं
02:10:04:13 हम अभी एक जनाब कह रहे थे कि वो कृष्ण उसको कहां कहा एक आत्म साक्षात्कार का विज्ञान पढ़िए जगह जगह लिखा हुआ है फिलहाल मैं आपको एक मोटा मोटा दिखा दूं ये कन की बुक है श्री कृष्ण मेरे पास हैय पड़ी है इसमें सबसे पहली लाइन क्या लिखी है फ्रंट पेज पर ही अल्लाह बुद्ध यहोवा सब एक है राम सब एक
02:10:41:04 है अब यह लोग यह कहते शंकराचार्य ने यह कहा वो कहा भाई खंडन कर दिया ना सीधा सधा बोल के किया खंडन आप करवा दो किसी अपने बड़े आचार्य से यह मायावा से होता क्या है यह मायावा होता क्या है वैसे व्याख्या हो जाएगी चलिए चलिए मैं अभी चलता हूं और बताइए आप कुछ और बताइए क्या मैं हा बस यही था वो जो उन्होने जो आप कुछ प्रमाण लेकर आए थे ना दिखाने के लिए प्रमाण हा वैसे अभी आप इन दिनों से आप वो कबीर वालों के साथ डिबेट कर थे आपका पता है क्या आप उन ग्रंथों से उनका खंडन करते हो जिस ये लोग बोलते जैसे देवी भागवत हो गई गीता हो गई मैं उन ग्रंथों से इनका खंडन करता हूं जो इन लोगों ने खुद नहीं पढ़े जैसे मैंने ब्रह्म पुराण से खंडन किया जहा विष्णु जी ने कहा कि मेरा अंत नहीं होता मैं परमात्मा हूं फिर अभी मैंने आनंद रामायण से इनका खंडन किया था लास्ट टाइम फिर महाभारत से मैंने इनका खंडन किया अने नहीं पढ़े कभी कबीर वालो
02:11:56:26 ने अच्छा बढ़िया है नहीं आप अच्छा कार्य कर रहे हैं आपके इ तो हनुमान जी है ना जी देखिए हमारा कोई ऐसा कोई बैर नहीं है कि जो स्कन संस्था है व नष्ट हो जाए बात यह है कि क्या सनातन के नाम पर वाह जय हो जय हो जय बजरंग बात यह है कि सनातन के नाम पर ऐसा तो नहीं कि सनातन विरुद्ध चीजें बांटी जा रही हो बेची जा रही हो दुकान चलाई जा रही हो अब ये क्या है कहने को परंपरा वाले
02:12:35:07 है चलिए मैं चलता हूं ठीक है मिनट एक मिनट मिनट शिवांश भाई भविष्य पुराण में गोमय में लक्ष्मी के वर्णन को हेमंत राम पाली नहीं मानते इनकी पुराणों पर है अब इनका इनका अस्वीकार करना धोरा चरित्र है वो उन्हीं के लोग उनको अपशब्द कह रहे हैं काफी हमें कहने की कुछ आवश्यकता नहीं है व उनके ही लोग कह रहे हैं अभी और वो करते जाएंगे तो उसमें भी उन्हीं की हानी है जितना वो जैसे कल कोई बता रहा था मुझको कल कोई गया होगा उनके लाइव में तो वो बोला कि उन्हीं का व्यक्ति उनको बोल रहा है कि भाई आप भी तो यहां पर दीपक जलाते हो और इनका पुराना वीडियो है इन्होंने धूप बत्ती दीपक जलाने इत्यादि पर वो लगाया आक्षेप इनका पुराना वीडियो है रामपाल जी को पूजा पूजा हो रही है और उसमें धूपबत्ती जल रही है अगरबत्ती जल रही है तो इनके ही लोग इनके वीडियो में जाकर के वहां कह रहे भाई तुम एक सवाल कर रहे हो तुम्हारे यहां भी तो होता है ये तो ये सब चीज है ठीक है विशाल जी आज अच्छे लग रहे हैं
02:13:43:02 आप कहते हैं श्री कृष्ण ने गीता सुनाई थी तो महाभारत में अर्जुन को दूसरी बार गीता क्यों नहीं सुनाई शांति अनुशासन पव में हां इसका हम लोगों ने की थी उस दिन बात अच्छे से प्रमाण वगैरह दिए थे पहली बात तो वहा जहा का जहां की ये बात कर रहे वहां पर कृष्ण ने खुद बोला मैंने वो तुझे योग किसी तरीके से सुनाया मैंने हा मैंने तो मैंने जब कह दिया तो उन्होंने स्वीकार कर लिया ना मैंने सुनाई तो ये अपना खंडन खुद ही करते हैं वहां पर ठीक है जय श्री राम जय श्री राम जय श्री
02:14:21:10 मुझे लग रहा है मैं लेट आया हूं आज आपको किसने बोल दिया इसकन परंपरागत नहीं है इस कन रशियन परंपरा से अरे याय भाई किसी ने कमेंट किया था वो पढ़ा है मैंने अपने मन से नहीं बोला है जी हां लेट आए हैं मैंने अभी स दीवार में सर मारा है दो घंटे करीब अभी देखूंगा मैं बैठ के क्या हुआ पता नहीं लगा आज थोड़ा व्यस्त था मैं और सबको दिवाली की बहुत बहुत शुभकामनाएं भाई दुज की जी जी आपको भी सारी
02:15:11:02 शुभकामनाए तो अब तो बंद कर रहे हैं जी बस थोड़ी और देर देखते हैं कोई कबीर वाला आ जाए या न वाला आ जाए वो तो जो आजकल तो रोज डाल रहे हैं वो पता नहीं कौन से जी न्यूज वाले लेकिन नाम भी चुन के रखा है उन्होंने
02:15:47:15 आ भव्य राधा कृष्ण दास अगर नाम पर पैसे कमाने की बात है तो इस हिसाब से तो देखा जाए तो इसकन ने जो बुक छापी उसमें सबसे पहले शंकराचार्य और मायावा लिखा है तो कौन पैसे कमाने वाला सिद्ध हुआ अरे हिम्मत नहीं है तुम्हारे अंदर इसलिए तुम्हें ऐसे शब्दों का आलंबन लेना पड़ा जो अनैतिक है हमने कभी अपने मर्यादा को लांगाह अंदर तुम्हारे जिसके पास सिद्धांत नहीं होता है वो झूठ बोलता है अपनी बातों से पलट है चोरी करता है या फिर गालियां देता है तुमने वो किया जिसके पास सिद्धांत की ताकत होती है उसको यह सब नहीं करना पड़ता
02:16:38:20 है रामपाल वाले भी यही कहते हैं कि रामपाल के नाम से वो चला रहे हैं अगर देखो तो इन सबकी किताबों में सबसे पहले तो शंकराचार्य का नाम है उनका उनकी बुराई है तो तुम्हारा तो अस्तित्व ही है शंकराचार्य के विरोध में एक एक बोल रहा था एक इनके यहां का कोई बोल रहा था 30 मार्क हां वो बोल रहा था कि इनके पहले वीडियोस देखे थे गंदे से वीडियोस होते थे अब देखो कैमरा एमरा लेकर के टीम चल रही है प्रभुपाद जी ने जिस दिन सबसे पहले वो शुरू किया था उस दिन उसी स्टेटस में थे ना जिस समय वो शरीर को छोड़ के गए उस स्टेटस प थे और अगर नहीं थे उसमें विकास हुआ तो इसका मतलब वो भी है ना जो कि आप हमें कह रहे हो वो भी वही थे बिल्कुल ये आपके सिद्धांत है भाई सिद्धांतों का खंडन करो ना ईश्वर को तुम बाधित कर दे रहे हो वो अपने शरीर को बदल नहीं सकता फिर अगर बदल रहा है तो फिर शाश्वत मत बोलो झूठ मत बोलो फिर पूछोगे पूछेंगे तो अचिंत है अचिंत की बात तो वहां वहां हो रही है कि भाई जीव और आत्मा में भेद है भी और नहीं भी आप हर जगह अचिंत क्यों लगा रहे हो जब चैतन्य महाप्रभु ने केवल इस बात में
02:17:53:20 बोला है कि जीव और आत्मा में भेद है भी और नहीं भी तो आप हर जगह अचिंत का आलंबन लेकर के बचने की कोशिश करने लगे और अचिंत अनिर्वचनीय शब्दों का उपयोग होता है शास्त्र में ऐसा नहीं है होता है मगर उससे अपनी बात का खंडन नहीं होना चाहिए भगवान का पारिक स्वरूप जो है अनिर्वचनीय है व्यवहार में ना आ सकने वाला है अचिंत है ठीक है मगर यह थोड़ी ना कि भगवान यहां पर भौतिक संसार में कुछ भी कर सकने वाले नहीं है यहां वो दिखाई देंगे सगुण साकार रूप में आएंगे यहां पर सब कुछ कर सकने वाले हैं किसी भी मर्यादा के बाहर है वो परे
02:18:31:12 हैं आप अपनी बात का खंडन कर रहे हो कि पहले कह रहे हो वो शाश्वत है पहले उनको व्यवहारिक बना दिया वो स शरीर आते हैं यहां खड़ा कर दिया मनुष्यों के बीच में अब पूछ रहे हैं कि वो ये कर सकते हैं वो कर सकते हैं नहीं कर सकते अब जब मैंने पूछा यार तुम तो कह रहे हो सब कुछ कर सकते तो अचिंत है ये मामला तो पूछो ही मत आप अपनी बात का खंडन कर रहे हो और तब पूछ जा रहा क्वेन तो आप अचिंत बोल रहे हो अचिंत की आड़ में बचना चाह रहे हो राम जी शरण जी और अनिल अनिल कुमार जी आए हैं क्या जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम क्या स्न के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर सर्वशक्तिमान है अगर कोई आक के यहां बताना चाहता है बदतमीज अवा संस्कार हीन लोगों को छोड़कर तो आ सकता
02:19:26:07 है जिनके घर वालों ने उन्हें केवल बाल संवारना सिखाया है आगे की चीज आगे की मर्यादा नहीं सिखाए ऐसे लोगों को छोड़कर जो आना चाहे वो आ सकता है [संगीत] और क्या इसकन के द्वारा चैतन्य महाप्रभु को फॉलो किया जाता है आ सकता है क्या स् कन के द्वारा ल प्रभुपाद को फॉलो किया जाता है इस मामले में आ सकता है क्या स्कन के द्वारा मधुवा चार्य जी को फॉलो किया जाता है आ सकता है क्या स्कन सनातन धर्म का प्रचारक है आ सकता है सनातनी शिक्षा देता है आ सकता है केवल टैग लगाने से काम नहीं चलेगा ना अभी मैं टैग लगा लू मैं स्कन का हूं और बोलू वो बात है जो स्कन की नहीं है तो मुझे स्न वाला मानेंगे
02:20:27:15 क्याय सनातन के नाम पर जी जी जी अनिल कुमार जी बोलिए जय श्री राम मैंने एकन पढ़ा था की जो छोटी उसम है ना 15 अध्याय में स्न वाले ने ना उसम गायब कर दि लोक उसने 30 लो रखे बाकी जो 35 32 है ना उसम लोक है ही नहीं पता नहीं लोग क्या कर रखा है उसम आधा दि [संगीत] ये
02:21:08:12 इसम इसमें है क्या इस कौन की गीता है इसमें कहां श्लोक गया श यब है क्या लो गायब नहीं होंगे मुझे नहीं पता हा कौन सा चैप्टर बोल रहे हैं आप अनिल कुमार जी हो
02:21:43:22 गए कमेंट ह स्क्रीन गलत तरीके से आ गया [संगीत] अनिल कुमार [संगीत] जी पंडित लकी जी जय श्री राम जय श्री राम हर हर महादेव जय श्री राम राम जी शरण जी आप ही बोले अपनी बात इकन वाले अपने आप को माधव संप्रदाय का कहते हैं घोषणा करते
02:22:24:00 हैं का सिद्धांत तो द्वैत है फिर इनको अचिंत द्वैता दैत की आवश्यकता क्यों पड़ी पहला प्रश्न तो यही बनता है अपने आचार्य की सीमा से बाहर क्यों जाना पड़ रहा है गु इस कौन हो अथवा रामपाल वाला या कबीर पंथ भी आप मान लीजिए यह सब में कहीं ना कहीं गुरु द्रोह है यह सब अपने गुरुओ के विपरीत है और मुझे समझ में नहीं आता है जो संप्रदाय अथवा जो व्यक्ति भी हो जो गुरु से अपने गुरु से द्रोह करता हो गुरु के विपरीत जाता हो वह परमात्मा को प्राप्त कैसे कर सकता
02:23:17:18 है जगत मोहन जय श्री रामम श्री राम आवा आ आवाज आपकी क्लियर नहीं आ रही अब आ रही है जी बोलिए आवाज क्लियर नहीं आ रही है पंडित जी आ रही है आ रही है अब आ रही है [संगीत] बोलिए बोलिए जगत जी यह बता रहा है कोई लोगों ने क्या किया जो पॉइंट टू पॉइंट क्वेश्चन करने वाले लोग हैं उनको वो लोग ब्लॉक कर देते अपने चैनल पर टी आर पड़ और अपने ही लोगों से रोल प्ले करवाते हम आए जिज्ञासा पूछने हम आए तुमसे सवाल
02:24:14:21 पूछने वो व्यक्ति जो ये कर रहा है वो अपनी अत आत्मा में एक बार झाक नहीं सकता कि मैं किसको बचा रहा क्योंकि जिस जिसको मैं बचा रहा हूं उसम इतनी ताकत नहीं है जो इनका सामना कर सके मुझे झूठ का आलंबन लेना पड़ रहा है वो एक बार अपनी अंतरात्मा में क्यों नहीं झांकता क्यों एक बार जाकर के दर्पण में नहीं देखता है मैं कौन हूं मैं क्यों कर रहा हूं यह किसको बचा रहा हूं धर्म को ईश्वर को या फिर सिद्धांत को मर्यादा को या फिर अपनी वर्चस्व को एक बार अपने आप बात करके देखो झूठ का आलंबन लेने वालो एक बार अपनी अतमा से बात करके देखो हा जी कान लेने वालो ट चलती है लोग के सामने रख पू कर
02:25:09:13 लेता मैं कह रहा कि य पर इनकी डिबेट चलती है जैसे अभी दिवाली की डिबेट देख रहा था मैं पूरी स्टेज उन्हीं के व्यक्ति जो है एंटी है उही के वक्ति फेवर में है और इतने मतलब आप तर्क जो है इतने बकवास तर्क देंगे जो दिवाली के फेवर वाले होंगे ठीक है और वो सामने सामने बैठाए हैं उनको और उन्होने पवित्र ग्रंथ दो चार रख दिए हैं क इसी ग्रंथ से हम प्रूव करेंगे और और वो अंत में वो डिबेट आपको पता है कि कौन हारेगा जो जो वहा पर नकली पंडा पंडित ये पुरोहित जो भी बैठाए हैं वहां पर वो वो अंत में हार जाते हैं मतलब लग रहा है कि पूरी एकदम स्टेज है ये देखा था ये ये देख लीजिए इसम जो है इनकी पूजा हो रही है धूप बत्ती अगरबत्ती इत्यादि से ी के दीपक जल [संगीत]
02:26:02:15 रहे अच्छा मैं कह रहा था कि वाले जो क्लेम करते हैं कि भगवान कृष्ण और जो अब्राहम खुदा अथवा अल्लाह है व एक है अच्छा इनको इसको को अब्राहम खासकर जो मुसलमानों इस्लाम का जो है कुरान के अनुसार सचार की विधि पढ़ा दी जाए व सचार क्या
02:26:36:02 है आश्चर्य होता है कि जो पूर्णता पैशा चिक है उसको उस विचारधारा के अल्लाह को ये भगवान कृष्ण से तुलना करते हैं एक मानते तुलना भी नहीं करते एक मानते हैं मैं समझता हूं कि य भगवान कृष्ण के संबंध में अत्यंत अपराध कर रहे हैं वो अपराध है ही है गुरु विरोध है कृष्ण विरोध है ईश्वर विरोध है धर्म विरोध है सनातन विरोध है एवरीथिंग विरोध बिल्कुल [संगीत]
02:27:24:10 जगत जी आप कुछ कोई अपना पक्ष रखना है जो आपको लगता है कि आप सत्य के पक्षधर है यादव जी तो आप आए ऊपर और अपनी बात को रखे जी थोड़ा साल के सपने देखने के लिए आप [संगीत] स् मिलने के लिए [संगीत] आ जगत जी बोले सर नमस्कार सर पंडित जी मेरा नाम जगत मोहन द्विवेदी है मैं भोपाल से हूं अभी तीन चार दिन पहले ही मैं आपके चैनल से जुड़ा हुआ हूं मुझे बहुत अच्छा लगा आपकी भावनाएं जो आप
02:28:20:03 तो यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे भी धर्म की कुछ जानकारिया मिलेंगी तो आज य मेरा पहला दिन है तो मेरा कोई सवाल नहीं है बस मैं आप लोगों से जुड़ा हुआ हूं और उम्मीद करता हूं कि आप लोगों का आशीर्वाद मुझे मिलेगा हमारा नहीं परंपरा प्राप्त आचार्यों का आशीर्वाद प्राप्त करें भगवान श्री कृष्ण का नाम जप करें राम का नाम जप करें आपको सब कुछ मिल जाएगा जो भी आपके लिए आवश्यक होगा जी मेरी बहुत जिज्ञासा थी महाराज शंकराचार्य जी से दर्शन करने क्योंकि मेरे गांव में एक व्यक्ति थे जो आज से पाच छ साल पहले गए थे जगन्नाथ तो आने वाले जल्दी आएंगे आपके क्षेत्र से निकलेंगे और हमारी भोपाल आएंगे तो जरूर दर्शन होगा उनके जी जी आएंगे आएंगे तो वो बचपन से मुझे बहुत बताया उन्होने शंकराचार्य जी का इसलिए मेरा बहुत आध्यात्मिक लगाव है शंकराचार्य जी से बस इसी वजह से मैं जैसे ही मुझे ये वीडियो मिला आपका पाच छ दिन पहले तो मुझसे रुका नहीं गया तो आज मैं लाइव में जुड़ गया बस जी आभार ठीक है आप बोते क्लासेस भी जवाइन कर सकते हैं अगर आपको म करिए नाम जप ज कर नाम जप से जड़ आप एक नंबर दे दीजिए भाई
02:29:35:26 74836 इस पर करेंगे तो आपको विभिन्न प्रकार के फॉर्म प्राप्त हो जाएंगे उस से अपने इच्छा अनुसार फॉर्म भरिए और हमसे जुड़ जाइए जहा पर रू में जी अगर हम सब एक हैं तो ये डिबेट क्यों हो रही है अगर ये सारी सृष्टि भगवान ने ही बनाई है सब कुछ उसी ने बनाया है आपके अनुसार आपके अनुसार उसी ने जब बनाया है तो फिर तरह-तरह के भेद क्यों है भाई और पिता में भेद है बहन और मां में भेद है तो ये सारा जो भेद है ये व्यवहारिक है व्यवहार में जो भेद है उसमें से उस भेद को निकालना है जिस भेद का निर्वाह करके हम अभेद की स्थिति को प्राप्त कर सके भगवत प्राप्ति कर सके मोक्ष तक पहुंच
02:30:30:25 सके सब लोग पूछ रहे मेरा त्रिपु क अरे इसको प को भगाओ भाई इसको ना अकल है दो ढले की और ना ही इसके दोबारा मुझे दोबारा स्नान करना पड़ गया था उसके बाद मैंने त्रिकुंड लगाया नहीं है वरना सुबह की संध्या में लगाया था और दोपहर की में भी लगाया था शाम में लगा लूंगा मैं तो ऐसा नहीं है कि वो पूरा एकदम रंग है कि हमेशा लगा रहेगा अभी स्नान किया था पहले तो लो जी हम सोच रहे हैं कि वो जो राम भद्राचार्य जी का वो जो वीडियो है जिसमें वो कहते हैं कि जिसकी माने वो वाला वीडियो कट करके निकाल ले और जब बात आया करे तो यहां जो है प्ले कर दिया करें कि जिसकी मां ने निष्ठा पूर्वक दुखद पान कराया
02:31:22:18 तो वो आ जाए चाहे वो कबीर को भगवान कहने वाला हो या वो इकन को सनातनी अ सनातन प्रचारक या इकन के सिद्धांतों को सही कहने वाला हूं जी जी पानी से त्रिपुंड लगाना चाहिए कि सूखा लगाना चाहिए इसके बारे में आपको वाले कह रहे हैं दम है तो एमपी फास्ट पर आओ शिवांश एंड फ्लू की जी हम आएंगे मगर वहां नहीं एमपी फास्ट पर नहीं उनसे कहिए हमसे संपर्क करें और एक विदव तारीख दिनांक समय निश्चित होगा उस दिनांक समय पर एक मध्यस्थ चैनल पर हम लोग आएंगे या फिर अगर वह भी संभव नहीं हो पाया तो एक मध्यस्थ स्थान पर हम लोग आएंगे और वहां पर बात होगी है ना ठीक है आप लोग उन तक ये पहुंचा दीजिए हमारा नंबर 740819 कितनी बार तो दे चुके हैं लगता है ब
02:32:24:15 में नारायण एक एक मैं असल में कुछ जरूरी बातें होती हैं उनको जो है अ उसके रूप में बता देता हूं फौज का एक दृश्य देखा था मैंने हम सब ध्यान से वीडियो को और देखे किसी तरह से पेज बदलने के नाम पर कैमरे को फिरा दिया हां ये देखिए आपको ब्रज का मैं अर्थ दिखाऊ यहां देखिए ब्रज ब्रज का अर्थ दिखा रहे आपके तत्वदर्शी संत और जब नीचे जाना था कैमरा जहां पर आना लिखा है तो कैमरे को इधर ले गए लेफ्ट ले गए आप पहले समझ लीजिए सीधे नीचे नहीं लाए कैमरे को ध्यान से देखिए किस तरह से आपको झूठ बोला जाता है फिर से एक बार ऊपर से दिखा दो ब्रज का अर्थ यह ब्रज का अर्थ जो लिखा यह लिखा है शिवराम आपटे यही डिक्शनरी आपको दिखाई जा रही है रामपाल वालों यही डिक्शनरी दिखाई जा रही है और इस डिक्शनरी को दिखाते समय आपके साथ य छल किया गया कि जब कैमरा नीचे आना था जहां पर आना लिखा था वहां से टेढ़ कर दिया कैमरे
02:33:39:28 एक बार और दिखा दो भैया एक बार और दिखा देखिए यही डिक्शनरी दिखाई जा यही डिक्शनरी शो की गई है क्या पूरा पेज कहीं पर शो किया क्या उन्होंने शिवराम आपके की जो डिक्शनरी है उसमें ऐसे आपके आंखों में मिर्च झकी गई है देख लीजिए और अब जो उनके फॉलोअर है व रतन दास इत्यादि वो अब उन्होंने अपने गुरु के द्वारा स्वीकार की गई डिक्शनरी को छोड़ दिया इसको छोड़ दिया शिवराम आपटे को और किसको
02:34:22:28 पकड़ा उन्होंने पकड़ा चतुर्वेदी संस्कृत हिंदी शब्दकोश संयोग वस वो लखनऊ के थे और मेरी उनके परिवार वालों से बात हो गई बहुत बढ़िया ये देखिए जब नीचे जाना था जहां पर आना लिखा है ब्रज का अर्थ तो देखिए कैमरा नीचे नहीं जाएगा टेढ़ा जाएगा रछा ये देख रहे हैं ये है कलजी यही है तत्वदर्शी यही है तत्व का दर्शन कि कैसे कैमरे को अपनी बात के लिए मोड़ देना है कहते हो ना सभी शास्त्र खोल के दिखाए हैं यह दिखाया है खोल के
02:35:06:01 तुमको कोई सच्चा भक्त नहीं है जो आए तिरछा दर्शी तत्वदर्शी नहीं तिरछा दर्शी संत ये देख लो भैया तिरछा दर्शी संत तत्वदर्शी नहीं तिरछा दर्शी कैमरे को तिरछा ले गए मिलान कर लो एक बार और व लखनऊ के निकल आए उनके परिवार वालों से हमारी बात हो गई वहां पर उन्होंने भी चलना स्वीकार किया है चलना मामे कम शरणम ब्रज तो क्या हुआ कि तू मेरी शरण में चल तू मेरी शरण में विचरण कर तू मेरे साथ चल मेरा सानिध्य प्राप्त कर कितनी चीजें हो गई इसकी और तो और बेचारे को अपने गुरु की बात को सिद्ध करने के लिए गुरु के द्वारा स्वीकारी गई जो डिक्शनरी है उसको छोड़ना पड़ गया सोचिए बकुल व्यक्ति जीतना चाहता है व्यक्ति धर्म की स्थापना नहीं चाहता है आज का उसको जीतना है झूठ का आलंबन लेकर के जीतना पड़े जीतूंगा मैं हमारे अकॉर्डिंग तो श्रीधर स्वामी
02:36:28:21 वैष्णवास्त्र कमान ने नहीं उसके बाद भी एक और पॉइंट भी है ना कि वो बाहर से मायावादी थे लेकिन अंदर से वैष्णव थे अलग अलग लॉजिक तो वो झूठे हो गए फिर फिर वो झूठे हो गए झूठे हो गए ना अंदर से कुछ और है बाहर से कुछ और है यही लक्षण है क्या सन्यासी के
✅ This part is already used · 02:36:51:20 – 02:36:59:22 (0:08)
→ Used in: A · Video प्रमाणिक आचार्य की अवमानना स्वीकार नहीं at 16:55 ↗
02:36:51:20 जिनका मान मोह नष्ट हो चुका हो जिन्होंने काम इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर ली हो जिन
⬜ Not used yet · 02:36:59:22 – 02:50:53:00 (13:53)
02:36:59:22 जो सुख और दुख के द्वंद से मुक्त हो चुके हो यह है सन्यासी जो अपने सिद्धांत के बारे में बताते समय झूठ बोल रहा है और उसको फॉलो करने वाले चैतन्य महाप्रभु कितने दोष लगेंगे हर कोई झूठा है हर कोई मिलावटी है केवल कौन सही है वो जी सी का पैनल जो आज इकन की अपने इकन के प्रभुपाद जी के ग्रंथों में अपने मन मुताबिक परिवर्तन कर रहा है वो सही है बस और यह लोग क्या है ना जीबीसी ने क्या किया है काम तो जीबीसी कर रहा है सब कुछ मगर इनकी श्रद्धा को जोड़ दिया गया है कृष्ण भगवान से और शी श्री प्रभुपाद जी से और चैतन्य महाप्रभु से इनको ये लगने लगा है कि अगर हमने जीबीसी की दी हुई चीजों का विरोध किया तो हमारा विरोध हो जाएगा प्रभुपाद जी से श्री कृष्ण चैतन्य महाप्रभु से इसलिए वो जो आस्था हो गई है इनकी उसके चक्कर में झूठ बोलते हैं जीवीसी को बचाते
02:38:01:06 हैं जी अमित यादव जी जय श्री राम राम राम राम राम भैया जी बताइए जी मैंने पूरी स्ट्रीम आपकी देखी जो दो घंटे तकरीबन मैंने देखे हैं 38 मिनट छोड़ दिया जाए तो नहीं कह सकता लेकिन दो घंटे मैंने देखे पूरी स्ट्रीम हां यही यही जो अभी और उसके बाद में राहुल दीक्षित करके इकान के कोई श्रद्धालु थे उनके साथ जो आपकी चर्चा हो रही थी फलोर है मैं किसी का फॉलोअर नहीं हूं वैसे और ना ही मैं किसी गुरु से दीक्षित हूं आपका कोई आध्यात्मिक अस्तित्व है कोई सिद्धांत स्वीकार किया है आपने हां थोड़ा बहुत मैं सच या झूठ क्या बोलू लेकिन मेरा झुकाव सनातन परंपरा या सनातन के गुरुओ या कह सकते हो कि गीता के प्रति ज्यादा था तो गीता को लेकर गीता के कई अर्थ कर रखे हैं क्या पर्टिकुलर किसी एक संप्रदाय या किसी एक संस्था इत्यादि को लेकर के आप आस्थान वित है हां हां एक रूप में कह सकता कि मैंने जो जिस गीता का जिस गीता वर्जन का मैंने अध्ययन किया वह स्वामी अड़गड़ानंद महाराज का है जानते हैं आप उन्हें
02:39:16:10 जानते हैं हां तो उनकी वाली जो गीता थी वो मुझे थोड़ी कुछ ज्यादा अर्थों में अच्छी भी लगी क्योंकि उन्होंने अब वैसे तो गीता भाष्य या गीता का अनुवाद अनेक लोगों ने किया है लेकिन मैंने जो उनका वाला पढ़ा वर्जन वो कहीं ना कहीं मुझे बहुत प्रभावित किया और जिस तरह से उन्होंने चीजों को बताया है प्रता अनंद जी ने जितने अंशों में जो चरण संबंधी व्याख्या है धर्म संबंधी व्याख्या है जिसमें उन्होंने वर्णाश्रम धर्म को जन्म से स्वीकार नहीं किया है उतने अंशों में उनकी जो चीजें हैं वो स्वीकार नहीं है बाकी जहां ब्रह्म के विषय में हमने जाना नहीं कि उन्होंने क्या कहा है मगर यह जानते हैं कि वर्णाश्रम धर्म को उन्होंने जन्म से स्वीकार नहीं किया तो उतने अंशों में उनको स्वीकार नहीं किया जा सता है बाकी अगर वो अनुकरणीय है तो अनुकरण करने में कोई दोष नहीं है अच्छा ठीक है बाकी जो तो मैं स्ट्रीम में आने का कारण मेरा यह था कि जो आपने बोला कि ईश्वर बाधित है और जो अल्लाह गॉड ये जो वर्ड है अन्य नाम अन्य धर्मों के तो स्वामी अनंद जो आप
02:40:31:12 बता रहे वर्ड वाला मसला वो भी है और मत पर भी सहमत है कि ईश्वर के नाम जो है वह केवल एक भाषा या एक देश काल परिस्थिति में नहीं हो सकते उसको हम अल्लाह भी कह सकते हैं उसको गड भी कह सकते है तो स्वामी मराज जीको आपको क्लियर कर दूं कि दुनिया में जो भी शब्द है कुछ भी है जी वो ईश्वर के निमित्त ही है ईश्वर के बिना उसका अस्व नहीं संभव है मगर बकुल जिस प्रकार पानी सर्वत्र व्याप्त है नमी के रूप में अनेकानेक रूपों में मगर हमारी प्यास वही पानी बुझा सकता है जो हमारे गिलास अथवा कर पात्र इत्यादि की व्यवहारिक सीमा में आ जाए पानी सर्वत्र व्याप्त है मगर हमारी जो प्यास है वही पानी का वही रूप बुझा सकता है जो हमारे गिलास अथवा कपात इत्यादि की व्यावहारिक सीमा के अंदर आ जाए इसी प्रकार से ईश्वर तो सर्वत्र है ही सर्व सब कुछ ईश्वर ही है ईश्वर में है मगर हमारी मोक्ष की प्यास ईश्वर का वह रूप बुझा सकता है जो वेदा दि शास्त्र सम्मत बताई गई मोक्ष
02:41:46:22 की सीमा के अंदर आ जाए ठीक है बिल्कुल है ना तो ईश्वर तो सब कुछ है सभी नाम ईश्वर के उसम कोई दिक्कत नहीं है मगर जो नाम मोक्ष दायक बताए जाएंगे वेदों के द्वारा वो मोक्ष दिलाएंगे अल्लाह नाम शास्त्रों द्वारा मोक्ष दायक नहीं बताया गया तो वो मोक्ष नहीं दिलाएगा दूसरी बा दूसरी बात केवल हम नाम से अगर कहे कि नाम से ही अगर जोड़े तो एक बार को बात अलग है मगर हम अगर ये कहे कि कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर जिसको अल्लाह कहा जाता है वो और कृष्ण एक है तो गलत हो जाएगा क्यों क्योंकि कुरान की सीमा का ईश्वर साक्षात अवतार नहीं ले सकता वादित है सीमित है आप ठीक क रहे वो हमारा ईश्वर जो है वो सर्वशक्तिमान बिल्कुल ये बात मैं मान रहा हूं कि जैसे जितनी भी धार्मिक किताबें हैं उसमें व्याख्या अलग-अलग है ये नहीं ये बात तो बिल्कुल तय है क्योंकि उस बात का उतर है उसी बात का तो इकान वाला जो प्रश्न आपने उन लोगों से किया कि वो लोग कहते हैं गॉड अला ये सब एक ही है तो मैंने जितना श्री प्रभुपाद को सुना या
02:43:01:22 इस्कान को जितना समझा कुछ दो मेरे मित्र भी है इकान से मैंने भी उनसे पूछा तो वो लोग बताते हैं कि जब अगला आदमी जैसे मान लो कोई ऐसे हम लोग सनातन परंपरा से हम लोग आपस में चर्चा कर जवाब देने जा रहे हो वो मैं आपको बता दूं आप जो जवाब देने जा रहे हो वो मैं आपको बता दूं वोय बताते होंगे आपको कि उनको कन्वर्ट करने के लिए बोला जाता है उनसे बात बताओ जब पाकिस्तान में या अन्य जो मुस्लिम कंट्री जहा परन अपना प्रचार करता है और वहां पर जब मुसलमान यह पूछता होगा कि हमारा ईश्वर तो व हमारा ईश्वर और कृष्ण एक कैसे हो गया है तो वहां पर उनको ये लोग क्या कहते होंगे वही बात जो आज आपसे कह रहे हैं समझ में आ रहा है आपको जी जी आपसे ये कहा जा रहा है कि हम मुसल हम मुसलमानों को कन्वर्ट करने के लिए कह देते हैं कि अल्लाह और कृष्ण एक है तो जब मुसलमान ये प्रश्न करता होगा तो क्या उत्तर बनता है उनको कैसे संतुष्ट करेंगे कि हम हिंदुओं को कन्वर्ट करने के लिए कह देते हैं कि अल्लाह और कृष्ण एक है बाकी अल्लाह महान है नहीं वो और भी तर्क देते हैं जैसे 124000 पैगंबरों का या अलग-अलग
02:44:17:01 धर्मों में नबियों का नबी गए देखिए हमने कई सार इसम स्ट्रीम्स इसमें कई सारी कर ली आप हमारी पुरानी स्ट्रीम देखिए पुराण की सीमा का जो ईश्वर है अल्लाह उसमें और हमारा जो ईश्वर है वेदा दि शास्त्रों द्वारा निर्धारित सीमा का ईश्वर उसमें अंतर है हमारा ईश्वर अवतार ले सकता है उनका ईश्वर अवतार नहीं ले सकता ठीक है हमारा ईश्वर सिखाता है रघुकुल रीत सदा चली आई प्राण जाई पर वचन ना जाई उनका ईश्वर कहता है कि अगर तुमने किसी को माता बहन बेटी बोल भी दिया है मगर यह सब तुम्हारे मुह की बातें हैं मुंह की बातों का कोई मोल नहीं है तुम उनके साथ भी वह सब कर सकते हो जो माता बहन और पत्नी के साथ नहीं किया जाता जी जी मैंने पढ़े है जो है मैंने आपको मोटे मोटे धर्म और ब्रह्म दोनों में अंतर बता दिए दो बातें हैं सिद्धांत को फॉलो करने के पीछे के दो कारण है अध्यात्म को फॉलो करने का पीछे का दो कारण है धर्म और ब्रह्म तो उनका ब्रह्म अलग ब्रह्म है ही नहीं खैर धर्म अलग उनका
02:45:32:04 ईश्वर अलग और उनका आचरण भी अलग तो फिर हम ये नहीं कह सकते कुरान की सीमा का जो ईश्वर है वो हमारा ईश्वर है नहीं वो भैया इसका विरोध है वेद विरोधी नास्तिक उसने यह कहा कि कुरान के अला किसी भी पुस्तक को प्रमाण नहीं माना जा सकता कुरान को ही प्रमाण माना जा सकता है और हमारे य कहा गया दो 11 में कि वेद विरोधी नास्तिक तो इस हिसाब से तो नास्तिक सिद्ध हुआ और हम कह रहे कि भैया व कृष्ण और अल्ला एक है ऐसा प्रचार करने के कारण ही किसी दिन हमारी कोई बिटिया कहीं पर फस जाती है क्योंकि कृष्ण और अल्ला एक है वो सोचती है कि यहां भी वही मान्यता होंगी जो हमारे य होंगी यहां भी सिखाया गया होगा र सदा चली आई प्राण जाई परवचन ना जाई मगर वहा सिखाया गया नहीं आप किसी को भी कुछ भी बोल दो उसके बाद उसके साथ उलट व्यवहार कर सकते हो दूसरी बात दूसरी बात जब हम लोग यह फैला ही देंगे कि कृष्ण और अल्लाह एक है तो कृष्ण के जो केंद्र होंगे उन पर यदि कोई
02:46:47:07 आक्रमण होगा उनके द्वारा जो कृष्ण और अल्लाह को एक नहीं मानते हैं तो जिनके मन में निष्ठा व्याप्त हो चुकी होगी कि कृष्ण और अल्ला एक है क्या वह उतना प्रति होकर के रक्षा करने के लिए खड़े होंगे नहीं हो पाएंगे क्योंकि उनके मन में तो वहां के लिए भी श्रद्धा हो गई निष्ठा हो गई जी इस विषय पर मेरा अपना स्ट य था मैं बता रहा हूं जब प्रभु एक क्लिप है मतलब प या वगैरह प आते रहते हैं तो शील ूपा से शिक्षार्थ कम की बात कर रहे हैं बताइए नहीं शील इस्कान इस्कान वालो को मैं बात कर रहा हूं तो वहां पे शील प्रू पास से उसने पूछता है कि ईसा जो ईसा है वो पिता मतलब पिता किसे संबोधित करते हैं तो जब अगर प्रभुपाद के सामने ये प्रश्न है कि किसे संबोधित करते हैं तो वो क्या कहेंगे वो थोड़ी कहेंगे कि मैं नहीं जानता या मैं नहीं बताता वो तो कहेंगे कि वो कृष्ण को कह रहे हैं वो कहेंगे ना तो अगर वो बोल रहे हैं कि क्राइस्ट जो है वो कृष्ण से ही संबंधित है वो उसी को ही संबोधित कर रहे क्यों बात होती है जब बात होती है तो वर्बल बातें नहीं होती है बिल्कुल कंठस्थ
02:48:02:14 बातों पर बात होती है औपचारिकता वाली बातें नहीं होती है बात यह है कि इन्होंने गोद के लिखा है कि राम कृष्ण अल्लाह और जो यवा वो एक है और हमने केवल गलत समझ लिया ऐसा नहीं है हमने जाकर उनके जो अधिकृत व्यक्ति है उनसे पूछा उन्होंने बोला कृष्ण अल्लाह और जवा में कोई अंतर नहीं है अंतर है कुरान के द्वारा प्रतिपादित ईश्वर सीमित है कुरान के द्वारा प्रतिपादित जो धर्म है वह वैदिक धर्म की दृष्टि से अधर्म है तो अगर हम यह कह देंगे कि अल्लाह और कृष्ण एक है तो व्यक्ति की अल्लाह की चीजों में निष्ठा होने लगेगी हम यह कहे यदि कुरान के द्वारा बताया गया जो अल्लाह है वो सुप्रीम पावर है वो अनंत शक्तिमान है सर्व शक्तिमान है अनंत सावत मान है तो वो और कृष्ण एक है मगर नहीं कुरान का अल्लाह तो है ही वही जो सीमित है तो फिर हम कैसे कह रहे हैं कि अल्लाह और कृष्ण एक है नहीं कहना चाहिए यह भ्रम उत्पन्न करने वाली स्थितियां करते हैं जिससे की समाज को हानि पहुंचती है डंके की चोट प देखिए राघवाचार्य बोलते हैं डंके की चोट प डंके
02:49:17:19 की चोट प राघवाचार्य वो तो शंकराचार्य नहीं है रामानुज परंपरा से डंके की चोट पर बोलते हैं क्या बोलते हैं कि भैया मुस्लिमों ने भी मान लिया कि कोई अल्लाह ना अल्लाह है ठीक है मगर वह दिखाई नहीं दे सकता तो जो सब कुछ नहीं कर सकता वो ब्रह्म वो ब्रह्म कैसा वो ईश्वर कैसा ईश्वर तो वही है ना जो सब कुछ कर सकता है ये होते हैं प्रामाणिक परंपरा प्राप्त आचार्य जो जो शील प्रभुपाद जी थे उन्होंने कब क्या लिखा आज हम और आप कैसे बता द उनके नाम से जो चीज फैल रही है वो तर्क और प्रमाण के संगत नहीं है विरुद्ध है हो सकता है हा हो स शास्त्र विरुद्ध सिद्धांत विरुद्ध अच्छा जी चलिए ठीक है आज हो चुके करीब दो घंटे 50 मिनट और हम लोग जो है फिर कभी जुड़ेंगे आप आए अच्छा लगा अमित यादव जी और सभी को समय देने के लिए आभार और आपने आज हमारी चर्चा देखी उनके साथ स्कन वाले जो भाई आए थे सभी को जय श्री राम रोकी जी जय श्री राम जय श्री राम अमित याद जी ज श्री राम राम राम
02:50:32:25 ये कौन है हरे कृष्ण हरे कृष्ण कौन है भाई चेहरा दिखाने ला चलिए हटाइए फिर फिर मिलते हैं सभी को जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम [संगीत]
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इस्कॉन की परम्परा क्या है? Discussion with iskcon follower #iskconvrindavan
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