⬜ Not used yet · 00:00:04:10 – 00:21:29:03 (21:25)
00:00:04:10 तो सभी को जय श्री राम जैसा कि सभी को हमारी चर्चाएं होती रहती है ज्ञात है सभी को तो अभी हम लोग आपके समक्ष लाइव आए तो प्रभु जी आप थोड़ा सा पहले अपना इंट्रोडक्शन दे दीजिए लोगों को ओके मैं आराध्य भगवान दास इसको नागपुर में भी सेवा कर रहा हूं मेरा जो आध्यात्मिक जगत में जन्म जो है मेरा भुवनेश्वर में हुआ वहां पर प्रभुपाद जी के परम शिष्य है डिवाइन ग्रेस गौर गोविंद गोस्वामी महाराज तो उनके शिक्षाओं से मैं प्रेरित हुआ और उसके बाद मैं अभी नागपुर इकोन नागपुर में सेवा कर रहा हूं
00:01:01:26 अच्छा आपका थोड़ा बता देंगे जी मैं अभी बताता हूं एक कुछ टेक्निकल चीजों में देख रहा हूं थोड़ा सा यह जो फुल स्क्रीन कैसे होगी यह देख रहा हूं [संगीत] आपको स्क्रीन पर आप दिखाई आप कंपलीट क्लियर दिखाई दे र हो मैं भी दिखाई दे रहा हूं मेरा वाला छोटा दिखाई दे रहा है आपका बड़ा दिखाई दे रहा है ऐसा क्या च को ठीक है ठीक है ठीक
00:02:01:16 चलिए ठीक है ऐसे ही करते हैं अभी फिलहाल तो आपने हमसे संपर्क किया तो कुछ बताएंगे क्यों किया था कैसे आपको संपर्क मिला मैंने ऑलरेडी य में कुछ डिस्कशन मैंने देखा था हा तो मेरे को लगा कि ये आध्यात्मिक जगत के भक्त लोग ने के आपस में लड़ते क्यों रहते हैं तो मेरे को अा लगा गधे लोग ड़ते रहते अपने आपस में अरे इतने सारे लोगों के साम झगड़ा करना है इतने सारे मुस्लिम लोग हैं यह लोग हैं उनका हम कुछ नहीं करते लेकिन हिंदू लोग झगड़ झगड़ के मरेंगे तो इसलिए मेरे को अच्छा लगा की एक दूसरे को काटना पीटना यह सबने क्या हमारे सनातन धर्म में इतना चलता है एक दूसरे का टासे ते बोलते है ना तो इसलिए नहीं सोच रहा हूं कि एक दूसरे का हम मदद करके प्रचार को क्यों ना बढ़ाए लोगों को ज्यादा से ज्यादा सनातन धर्म को क्यों ना लाए रदर ने आपस में झगड़ा करते हैं और हमें नहीं क्या एक दूसरे का जब हम गलतिया निकालते हैं तो उसका बेनिफिट नहीं क्या कोई तीसरा उठाता है यह मेरा कसन था प्रूफ करना व सब करना तो व तो चलो ठीक है व तो बाकी बात है और हा
00:03:16:16 मेरे को ये भी पूछना था कि आप कहां से क्वालिफाइड हो आप कैसा है क्या है आपका एज कितना है सब टेल आप वो भी बता दीजिएगा मेरा नाम शिवांश नारायण द्विवेदी है और श्रीमत जग गु शंकराचार्य पुरी पीठाधीश्वर जी का एक अल्पज्ञ शिष्य हू मेरा परिचय बस इतना ही है कि उनके सानिध्य में उनके निर्देशन में मैंने जो भी स्वा अध्ययन किया है उसी के आधार पर भगवान को भगवान को प्राप्त करने की इच्छा रखता हूं और मैंने जो यह जोय चैनल ओपन किया या फिर जो भी सोशल मीडिया पर मैंने जो अपने संदेश देने शुरू किए वो सर्वप्रथम मैंने जो सनातन विरुद्ध तंत्र है उनको केंद्रित रख करके बनाए थे जो सनातन पर आघात करते हैं सनातन को नष्ट करना चाहते हैं सनातन से जिनकी बनती नहीं पर जब मैंने उन पर यह चीज उनसे बात करना चालू किया उनकी चीजों को उनकी चीज जो हमारे विरुद्ध फैलाई जा रही थी उनके समक्ष एक सशक्त प्रतिकार प्रस्तुत करना शुरू किया तो मैंने पाया कि उनको जो बल प्राप्त होता है वो वहां से होता है जहां से
00:04:32:01 सनातन के नाम पर सनातना भाष प्रस्तुत किया जाता है अध्यात्म के नाम पर अध्यात्मा भाष प्रस्तुत किया जाता है धर्म के नाम पर धर्मा भास प्रस्तुत किया जाता है तो फिर मैंने अपना जो ट्रैक है ऐसा नहीं है कि मैं बोलता नहीं हूं समय मिल जाता है तो सनातन ध तंत्रों पर भी बोलता हूं पर ज्यादा जो मेरा ध्यान केंद्रित होता है वो समाज का विघटन करने वाले जो तंत्र है या जो ऐसी शिक्षाए दे रहे हैं या जो कुछ व्यक्ति शेष है जिनकी शिक्षाओं से जो है हमारी जो जड़े है वो प्रभावित होती है जिनकी शिक्षाओं के कारण हमारा समाज बढ़ता है हमारे समाज में विपलव उत्पन्न होता है तो उन तंत्रों से मैंने बात करना शुरू किया और इन तंत्रों से बात करने का जो उद्देश्य मेरा यह नहीं है किय तंत्र नष्ट हो जाए बंद हो जाए क्योंकि कहीं ना कहीं जो इनकी भावनाएं है वो सनातन को ही प्रस्तुत करने के लिए उसके पीछे सनातना भाष प्रस्तुत अगर कर भी दे रहे हैं तो ये नहीं जत है कि य इनकी अज्ञानता है या फिर ये इनकी इनके अंदर कोई द्वेष है अथवा लालच है ये नहीं पता है इसलिए उनको नष्ट करने की भावना नहीं है हां शोधन शोधन करने की भावना
00:05:47:09 अवश्य कि उनकी जो जो शिक्षाए शोधित हो सकती है ओके वो वो शिक्षाए शोधित हो जानी चाहिए अच्छा तो अब हम किसी मूल प्रश्न पर आते हैं सीधे जो मेरा सबसे पहले ये बताइए आप हमारा जो ये मेरी एज है 35 ओके तो हम लोग
00:06:20:25 हैने वाला है अभी 35 होगा मैं तो आप आप नागपुर जो मंदिर है नागपुर मंदिर महाराष्ट्र में इकन मंदिर तो उसम आप कोई पद भार संभाले है या केवल सेवा दे रहे हैं क्या पद है आपका कुछ बताए मैं यहां पर कांग्रेगेशन प्रचार करता हूं और यूथ प्रीचर हू और साथ ही साथ मंदिर का फंड रेजर में सेवा करता हूं बचारी भी है क्या मैं ब्रह्मचारी आराध भगवान दास ब अच्छा तो क्या होता है ना कि मेरे पास ऐसे कमेंट कई बार आते कि भाई किसी ब्रह्मचारी से बात करो जा ऐसे कमेंट आपने मेरे साथ बात कर रहे जी जी जी जी जी हा तो ऐसे कमेंट आते हैं कि ब्रह्मचारी से किसी से बात करो तब पता चलेगा तो वही मैंने कहा कि मैं अय कन्फर्म कर लू कि आप ब्रह्मचारी है अच्छा सबसे पहली बात मैं ये कहूंगा क्या आपने हमारा जो स्न मंदिर लखनऊ के जो अध्यक्ष है श्यामदास जी वो देखा है तो उसम उने जितने भी डिबेट आपने किया है मैंने प्राय सबको देखा है आपका मैंने सोच को कंपलीटली पढ़ा है आप क्या सोचते हो आप क्या चाहते हो मैं कंपलीटली उसको
00:07:35:28 समझने के बाद मैं पहले से ही ट्राई कर रहा था आपसे कांटेक्ट करने के लिए लेकिन काट मिल नहीं रहा था जैसे ही मिला मेरे को भाग्य मिला कि आपसे डायरेक्ट बात कर पा रहा हूं मैं तो लगता था सामने सामने बैठ और भी अच्छा लगता लेकिन चलिए तना तो नहीं नहीं बिल्कुल अगर ऐसा होता तो हो सकता है मैं नागपुर आ जाता वहा पर बैठ कर के बात होती तो और भी अच्छा रहता तो मैं तो मैं एक आपसे य पूछना चाह रहा था तो ये जो स्न मंदिर लखनऊ वालों के साथ हमारा हुआ था बातचीत हुई उसको शास्त्र कहते तो उसम जो अध्यक्ष महोदय की तरफ से जो पक्ष प्रस्तुत किया गया था क्या उससे संतुष्ट है अब देखिए मैं यहां पर मेरा जो अंडरस्टैंडिंग है मैंने इकन और इकन के बाहर से भी क्या एजुकेशन लिया है और सब घूमने के बाद मेरे को इकन का जो फिलोसोफी है मेरे को बहुत अच्छा लगा मैं पहले खुद क्या मैं भुवनेश्वर से हूं तो वहां पर हमारे लिंगराज जी का हम भक्त थे उनकी कृपा से ही नहीं कि आज हम यहां पर आए हैं भक्ति से तो इस प्रकार से नहीं क्या थोड़ा बहुत हमारे हर
00:08:51:02 प्रकार के नॉलेज है तो इस प्रकार से तो मैंने सब कुछ सुना है और उसका मेरे को कुछ आसर भी मेरे पास है और और मैं पहला ये मेरा जो मतलब ये है कि हम लोग जो भी कर रहे हैं ये डिस्कशन आद इसमें नहीं क्या हमारा एक दूसरे को अगर मदद करने की भाव रहो रदर नहीं क्या दूसरे को अपमानित करने की इच्छा से अगर ना करें तो यह ज्यादा हमारा नि क्या सनातन धर्म बढ़ेगा हम क्या करते हैं इसको ड़ साले ऐसे है और वो ऐसे है ये सब अगर नहीं क्या मैं बोलूंगा कि अरे ये मायावादी लोग हैं अरे भाई एक साथ अगर नहीं कि हम मिलके अगर काम करते तो मेरे ख्याल से ज्यादा अच्छा होगा वो मेरा मेन नहीं नहीं नहीं नहीं वो आप सही कह रहे हैं मैंने तो ऐसा कुछ भी कभी तक किया नहीं है मेरी जानकारी में कि मैंने डायरेक्ट कोई व्यक्तिगत प्रहार कर दिया हो किसी पर कोई कटाक्ष किया हो मैं तो बचता हूं इन चीजों से क्योंकि हमारे गुरुदेव हमेशा सिखाते हैं कि दर्शन विज्ञान और व्यवहार को साध के अपनी बात बोलो सदैव तो मैंने अभी तक ऐसा कोई प्रयास किया नहीं है किसी को नीचा दिखाने तो मेरी जानकारी में नहीं किया यदि किसी किसी को ऐसा लगता हो कि नीचा दिखाने
00:10:06:06 का मैंने कोई प्रयास किया हो तो बताएगा मुझे बताए मैं स्वागत करता हूं उसका मैं ये पूछ रहा था कि जो वहां पर लखनऊ स्कोन मंदिर के जो अध्यक्ष है उन्होंने जो हमें उत्तर दिए समाधान या कहीं कहीं पर नहीं भी दिए उन्होंने कहीं कहीं पर ये तक कह दिया कि शास्त्रों की गहराई में जाना हमारा उद्देश्य नहीं है देखिए नॉलेज कितना है वो मेरे को नहीं पता अब नहीं क्या हम जितना पढ़े हैं और मुझे अपनी बात तो पूरी करने दीजिए मुझ एक चीज कर देते हैं पहले तो ज्यादा अच्छा रहेगा कि हम जो डिस्कशन कर रहे हैं डिस्कशन में नहीं क्या ऐसा हो कि पाच या 10 मिनट नहीं क्या आप बोल सकते हो और फिर कंपलीटली पा 10 मिनट नहीं क्या मुझे दिया जाए तो बीच में क्या है कि और आप मैं जो बोल रहा हूं आप बोल देंगे या फर आप जो बोल रहे मैं बोल दूं ऐसा नहीं होगा एक काम करिएगा अगर आप पा मिनट पले बोलिए अगर आपको फिर से ज्यादा बोलना ये जो चीज जो अभी आप बता रहे फिर दोबारा किसी दिन बैठेंगे तो हम टाइमर गगर लेकर के बैठ सकते हैं वहा क्योंकि अभी यहा पर सब मैनेज नहीं हो पाएगा दूसरी बात हो गया पा मिनट य बताने के लिए भी पा मिनट हो गया बताने के लिए भी एक निर्णायक पक्ष होगा बगल में क्या भाई तुम्हारा टाइम
00:11:21:09 ओवर हो गया जैसे मंडन मिश्र और उनका शास्त्रार्थ हुआ था शंकराचार्य तो उस तरीके से होना पड़ेगा नहीं है मैं अपनी तरफ से पूरा प्रयास करूंगा मैं सकारात्मक सोच के साथ आया हूं मैं चाहता हूं कि स्न का वो पक्ष सामने आए जो शायद कई लोग नहीं देख पा रहे हैं इकन से जो जुड़ रहे हैं वो तो देखते मगर जो स्न से नहीं जुड़े हैं उनके सामने स्कन की वो छवि बाहर आए जो शायद हम लोग नहीं देख पा रहे मैं यह सोच करके आया हूं तो मैं ऐसा नहीं है कि आपको बोलने नहीं दूंगा मेरी मैं ये कहना चाह रहा था वहां पर कि जो इस इकोन मंदिर के जो अध्यक्ष महोदय उन्होंने जो हमें उत्तर प्रस्तुत किए थे तो उनसे आप सहमत आपने आपने वो डिबेट आपने वो चर्चा देखी है तो आप उससे सहमत है उनके जो उन्होंने जो कहा कि शास्त्रों की गहराई में जाना हमारा उद्देश्य नहीं है तो आप इससे सहमत है नहीं मैं आपके क्वेश्चन का आंसर देने के लिए आया हूं मेरे को किसने क्या बोला आई डोंट केयर आप मेरे को डायरेक्ट प्रश्न ठीक ठीक है ठीक है ठीक है ठीक है तो अब मेरा पहला जो क्वेश्चन है वो यही है कि इकोन क्या
00:12:38:12 इसकन कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है अल्लाह मैं प्रश्न बोल क्या इसकन कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है अल्लाह और सनातन धर्म ग्रंथों के द्वारा प्रतिपादित होने वाले जो ईश्वर है कृष्ण वो इनको एक क्यों कहता है देखिए अगर मैं आपको इसको थोड़ा सा लॉजिक से समझाता हूं अगर नहीं क्या एक परिवार में पिता अगर कौन है पाच लोग है पिता कौन है तो यह व्यक्ति पिता है व हमको पता है कि वो कृष्ण है अबने क्या कुछ लोग बोल रहे हैं कि घर का पिता सबसे बड़ा होता है घर का पिता बड़ा होता उनको पता नहीं पिता कौन है तो आंख बंद करके नहीं क्या वहा बोलना पड़ेगा पिता बोले तो यह होता है उनको पता नहीं पिता कौन है क्या है उनको पता नहीं य परिवार में पिता बड़ा है तो ये अल्लाह जो मानते हैं वो लोग क्या बोलते हैं अल्ला इ सुप्रीम अगर सुप्रीम अगर कोई हो सकता है ट इ सुप्रीम पर्सनालिटी कृष्णा
00:13:53:25 तो अगर नहीं क्या वो जो कुरान के हिसाब से या फिर बाइबल के हिसाब से वो क्या बोल रहे कौन है उनको नहीं पता कृष्णा कौन है उनको नहीं पता सॉरी ये जो गड कौन है उनको नहीं पता जवा कौन है उनको नहीं पता उनका कोई पर्सनालिटी दिखा नहीं पाते है तो हम बोलते हैं कि अगर आपको पता है अल्लाह कौन है बताओ अगर नहीं पता है देन कृष्णा है एक्सेप्ट करो सिंपल नहीं मैंने मेरा प्रश्न आपद समझ नहीं पाए मैंने कहा कुरान के द्वारा प्र होने वाला देखि आप समझ देखि मैंने आपको पूरा बोलने दिया मगर जब मैं बोलने लगा तो आपने मुझे काट दिया
00:14:38:09 सॉरी तो मैंने कहा आप मेरा प्रश्न नहीं समझ पाए मैंने कहा मैंने य नहीं कहा कि वो लोग सुप्रीम किसे मानते हैं किसे नहीं मानते मैंने कहा कुरान के द्वारा डिफाइन होने वाला जो ईश्वर है कुरान की सीमा का जो ईश्वर है कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है क्या वो और हमारे कृष्ण एक है क्योंकि जब हम कुरान की बात करते हैं तो उसकी डेफिनेशन हमें लेनी पड़ेगी डेफिनेशन क्या है डेफिनेशन है कि उसकी मूर्ति नहीं बन सकती उस वो अवतार नहीं लेता उसकी संतान नहीं हो सकती वो कई जगह अपने आप को बाउंड करता है वो स्वयं बता रहा है मैं बाउंड हूं यस तो क्या हमारे कृष्ण को उसके समान फिर हम क्यों कहते हैं इस कन क्यों कहता है या तो आप ये कहिए कि हम केवल वर्ड ले रहे हैं समझ लि एक मिनट या या तो आप ये कहिए कि हम केवल शब्द ले रहे हैं हम कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर की बात नहीं कर रहे हम उसको कृष्ण नहीं मानते हम केवल शब्द मानते हैं हम केवल अल्लाह नाम का उपयोग कर रहे हैं क्योंकि अगर वह अपने ईश्वर को अगर व सुप्रीम अथॉरिटी को अल्लाह नाम से संबोधित करते तो ठीक है कोई बात नहीं
00:15:54:24 मगर क्या कहते हैं मगर जो उनकी जो डेफिनेशन है कुरान की उसके द्वारा प्रतिपादित होने वाले अल्ला की हम बात नहीं कर रहे जी ठीक आपको एक चीज दिखा रहा य अगर आपको दिख रहा होगा स्क्रीन पर मुझे जो है इसको करने के लिए बहुत सारी चीज कर क्या दिखा रहे पढ़ के बता दीजिए हा देखिए यहां पर नहीं क्या एक वस्तु है जिसका नहीं क्या दोनों तरफ से क्या उसका शैडो है तो एक शैडो गोल दिख रहा और एक सेड जो है व चतुष्कोण दिख रहा है तो अब यह जो हमारे सिलेंडर जो हमने रखा है यह अगर कृष्ण है तो यह अल्ला वालो को सिर्फ इतना पता है गोल वाला मतलब अगर कृष्ण अगर ह
00:16:51:08 पर सम जाएगा अगर कृष्णा अगर ने क्या ह पर भगवान है उनका आंशिक सत्य उनको पता है जैसे अगर एक व्यक्ति जैसे कृष्ण है वो घर में भी रहते हैं जसे पलो नरेंद्र मोदी नरेंद्र मोदी नहीं क्या भारत का प्रधानमंत्री है और घर में भी नहीं क्या उसके कोई नाना ताता पापू बोल रहे होंगे लो जो घर वाले लोग हैं उनको लगता है कि साधारण व्यक्ति है हमारे जैसा लेकिन जो उसको पूर्ण मात्रा में जानता है वो जानता है कि ये प्राइम मिनिस्टर है तो वैसा ही उन लोगों का ज्ञान कम है कि अला गड बोल कोई व्यक्ति है वो नहीं क्या नीचे उतर नहीं सकता बच्चा पैदा नहीं कर सकता लेकिन हम नहीं क्या ज्यादा ज्ञानी होने के कारण उनको पता है कि वो जो अल्लाह के बारे में बता रहे हो ना बेटा वो अल्लाह नहीं क्या कृष्ण है और वो नहीं क्या सब कुछ कर सकता है हम नहीं क्या उनको जाके इतना बताते हैं तुम्हारा अल्लाह का अंडरस्टैंडिंग जो है 10 पर है हमारा 100% है तो तुम्हारे हिसाब से तुमने इतना जाना है अभी तक अब हायर स्टडी करो वेद पढ़ो तुमको पता चल जाएगा वही अल्लाह जो है क्या आगे चल कृष्ण होते या ब्रह्म होते है य अंडरस्ट
00:18:06:10 ऐसा है बारबार प्रश्न बदल जा रहा है प्रश्न मैं कर रहा हूं क्या कुरान की सीमा का ईश्वर कुरान की सीमा वो लोग क्या समझ रहे हैं व सोच क्या रहे हैं वो नहीं कुरान देख बोलने दीजिए मुझे बोलने दीजिए मैं आपको कहूंगा तब बोलिएगा कुरान की सीमा का ईश्वर कुरान जो बातें कह रही है उसको अगर मान लिया जाए यथावत मान लिया जाए तो क्या वो कृष्ण है और अगर नहीं है तो फिर हमें यह कहना चाहिए कि कुरान का ईश्वर और जो सनातन म धर्म ग्रंथों का ईश्वर है वो एक नहीं है और अगर अगर यह वाली बात हम कहे कि वो लोग इतना जानते हैं और हम इतना जानते हैं तो हर वो व्यक्ति जो ईश्वर की बात करने लगेगा अगर मैं भी अभी नया पंथ और मत चालू करना चाहूं तो कर सकता हूं ईश्वर के बारे में दो चार बात कहूंगा मेरे जो नाम मैं दूंगा ईश्वर को वो भी आपको ले लेना पड़ेगा कि आप भी सही कह रहे हो आप 5 पर जानते हो हम 10 पर जानते हैं तो ये तो एक अलग बात रही 5 पर और 10 पर वाली मेरा कहने का मतलब है कि कुरान की सीमा कुरान ने जो कहा है ईश्वर के बारे में क्या वो सही कहा है एक तो ये हो गया अब दूसरी बात ये कहते हैं कि कम ज्यादा कम
00:19:21:10 जानना और पूरा जानना ये दोनों बातें अलग-अलग है कम जानना और पूरे जानने में डिफरेंस हो सकता है कि भाई कोई उस चीज को आधा जान पाया मगर अगर कुरान को सत्य माने तो वो आधा नहीं है कम नहीं है वो असत्य है आपके पर्सपेक्टिव से बात कर रहा हूं अगर कुरान को जो व्यक्ति सत्य मानर है तो उसको आपको कहना पड़ेगा यह सत्य नहीं है दूसरी बात यह है कि अधूरा जानना और पूरा जानना तो एक तरफ माना जा सकता है मगर ठीक विपरीत जानना ठीक विपरीत जानना यह तो नहीं स्वीकारा जा सकता जैसे मान लीजिए कि वो लोग नहीं जानते कि ईश्वर ले सकता है मगर वहा पर तो ठीक विपरीत ठीक वि लिखा हुआ कि नहीं उसकी कोई संतान नहीं हो सकती वहा लिखा ना होता संतान के बारे में तो बात अलग है तो कहते अधूरा है वो पॉइंट आता ही ना तो कहते वो अधूरा है मगर वहा पर पॉइंट है वो विरोध कर रहा है उसकी कोई मूर्ति नहीं हो सकती वो विरोध कर रहा है वो विरोध कर रहा है कि उसकी संतान नहीं हो सकती पहली बात दूसरी बात दूसरी बात शिक्षा में डिफरेंस है हमारे जो कृष्ण है राम के रूप में आते हैं और कहते हैं कि रामो दना भी भाष राम के रूप में कहते
00:20:36:12 हैं कि मैं अपनी पत्नी को त्याग सकता हूं अपने छोटे भाई को त्याग सकता हूं और मैं जो है अपनी अपने प्राणों को भी त्याग सकता हूं पर मैं अपने कहे हुए वचन से मुक नहीं सकता यह सिखाते है सनातन धर्म और वहां पर वो सिखा रहा है कुरान के जो ईश्वर है वो सिखा रहे 33 च में कि तुमने अगर अपने मुख से किसी को बहन बेटी या मां कह भी दिया है तुम्हारे मुह की बातें मतलब उसकी कोई मान्यता नहीं है मुख के वचनों की कोई मान्यता नहीं है उतनी वैल्यू नहीं है जितनी हमारे य हमारे य सिखाया जाता है ल रीत सदा चली आई प्राण जाई पर वचन ना जाई और वहा सिखाया जा रहा है कि भाई नहीं मुख से अगर कह दिया तो तुम इसके ठीक विपरीत कार्य कर सकते हो तो यह अधूरा नहीं है इसको अधूरा नहीं कहेंगे यह विरोध है ये अगेंस्ट है और अगर ये अगेंस्ट नहीं है तो अगेंस्ट क्या होता है ये बताइए फिर आप ठीक है बत अच्छी बात
✅ This part is already used · 00:21:29:03 – 00:22:11:28 (0:43)
→ Used in: A · Video भागवतानंद का निगमानंद पर प्रलाप । इस्कॉन व रामपाल जैसी संस्थाओं द्वारा प्रशिक्षण at 55:02 ↗
00:21:29:03 है देखिए मैथमेटिक्स में जब नहीं क्या बच्चा छोटा रहता है उसको बोला जाता है बड़े संख्या से छोटा संख्या जा सकता है मतलब माइनस हो सकता है लेकिन व उसको अगर कहा जाए दो माइनस अगर तीन अगर कहा जाए बो इंपॉसिबल संभव भी नहीं है बोलेगा वो अरे भाई हमारे टीचर ने नहीं क्या हमको बोला है कि बड़े से नहीं क्या छोटा जाता है छोटे से बड़ा जाता नहीं तुम पागल हो गए हो व हमको उल्टा गाली देगा तो अब क्या होगा कि अब ठीक है कि तू प्राइमरी बच्चा है अब आगे पढ़ेगा त नो डाउट ली कोई एक टीचर तो आएगा ना पढ़ाने के लिए तेरे को जब नहीं क्या हमारे जैसे टीचर वहां पर जाएंगे उसको बोलेंगे कि बेटा अभी तेरा पढ़ाई हो गया अब ज्यादा पढ़ आगे
⬜ Not used yet · 00:22:11:28 – 00:22:44:00 (0:32)
00:22:11:28 चलके पढ़ेगा कि 2 माइ 3 माइनस व होता है वैसा ही थोड़ा सा विषयात हो रहा है थोड़ा थोड़ा विषयात हो रहा है मैं आपको एक बात याद दिला विषत नहीं हो रहा है आपको ये बता विषयात वि भैया विषयात हो रहा है विष से क्या बात बदल जाती हो ही नहीं रहा आप चिंता मत करो बता बताइए बताइए बताइए अपनी बात कहिए
✅ This part is already used · 00:22:44:00 – 00:23:16:01 (0:32)
→ Used in: A · Video भागवतानंद का निगमानंद पर प्रलाप । इस्कॉन व रामपाल जैसी संस्थाओं द्वारा प्रशिक्षण at 55:51 ↗
00:22:44:00 उनके कुरान के हिसाब से उनको जो भी ज्ञान है थोड़ा बहुत उनको भगवान बोले कोई है यह तो उनको पता है अब नहीं क्या हम जाकर उनको बताते हैं अरे बेटा तुम जो भगवान या अल्लाह जिसको मानते हो अब नहीं क्या उससे भी नहीं क्या थोड़ा आगे जानो अल्लाह नहीं क्या ऐसा भी हो सकता है वो उसका नाम भी है उसका नाम है कृष्णा तो फिर उनको समझ में आ जाता है जिसको समझ में आ जाता है वो फिर से सनातन धर्म पस जाता है वो फिर माला करने लगता है जब करने लगता है सब कुछ करता
⬜ Not used yet · 00:23:16:01 – 00:24:47:18 (1:32)
00:23:16:01 है सिंपल है इसमें विषत को बात ही नहीं हुआ ना देखिए बात ऐसी है कि आपने कर आप अगर समझने की कोशिश करेंगे तो हो जाएगा आप जबरदस्त क्या इसको पकड़ के खी चेंगे देखिए समझने की कोशिश तो मैं भी कह सकता हूं कि आप समझने की कोशिश करेंगे तो भी हो जाएगा तो समझने की कोशिश करिए मैं यह बता रहा हूं कि इकन की सीमा का जो हमें जब किसी को यह बताना है कि कृष्ण भगवान है या कृष्ण ही ईश्वर है तो हमें उसको कहना पड़ेगा कि कुरान में जो ये बात लिखी हुई है कि ईश्वर अवतार नहीं ले सकता है गलत है ये बात गलत है रान में बात लिखी हुई है एक मिनट एक मिनट मिनट एक मिनट भैया मैंने आप मैं आपको बोलने दे रहा हूं आप मुझे बोलने नहीं दे रहे यहां से बात बिगड़ेगी फिर इसलिए मैं पहले बोला 10 10 मिनट कर लेंगे तो ज्यादा अच्छा रहेगा तो हमें उसको बताना पड़ेगा कि कुरान हां हां बोलिए बोलिए क्या कह रहे हैं मैं बोला कि बोलिए हमें बताना पड़ेगा कि कुरान में जो ये बात लिखी है कि तुम अपने मुख के वचनों को बोल स बदल सकते हो ये गलत लिखी है ये तुम गलत सोच रहे हो हमें
00:24:31:01 उसको ये बताना पड़ेगा ये नहीं बताना पड़ेगा अधूरा है अगर अधूरा है तो क्या हमारे यहां कौन सी स्टेज पर बताया जाता है कि अपने मुख्य वचनों को बदलो अगर किसी को बहन मानते हो तो उसको उसके साथ विवाह कर लो कौन सी स्टेज पर हमारे यहां बताया जाता है बताइए हां अगर
✅ This part is already used · 00:24:47:18 – 00:25:04:06 (0:17)
→ Used in: A · Video भागवतानंद का निगमानंद पर प्रलाप । इस्कॉन व रामपाल जैसी संस्थाओं द्वारा प्रशिक्षण at 56:24 ↗
00:24:47:18 कोई व्यक्ति अगर नहीं क्या उसका मानसिक इतना कमजोर है कि वो शास्त्र को अभी मानने के लिए योग्य नहीं बना है जिसका स्थिति इतना अभी नहीं है कि जो शास्त्र को मानने के योग्य हुआ है तो उसको क्या करते हैं पहले
⬜ Not used yet · 00:25:04:06 – 01:50:50:00 (1:25:46)
00:25:04:06 थोड़ मनुष्य बनाते हैं ठीक है ना अभी जो व्यक्ति पागल है उसको तो क्या हम शास्त्र के हिसाब से ऐसा नहीं करना चा मैं आपसे पूछ रहा हूं मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या सनातन धर्म ग्रंथों में किसी स्तर के व्यक्ति के लिए बात कही गई है क्या कि आप अपनी बहन अगर किसी को बहन मानते हो तो उससे विवाह कर सकते हो मुख्य वचनों की कोई वैल्यू नहीं होती हा तो आप इसम इसमें प्रूफ क्या करना चाहते हो बोलके देखि हमारा ग्रंथ नहीं क्या यह बताया गया है हमारे ग्रंथों में हमारे देखिए जो आप स्तर पर जा रहे ना व्यक्ति के स्तर की बात पहली बात तो यह है जब आप यह बात बोलते हैं कि भाई कुरान का ईश्वर प्रश्न एक ही है तो आप व्यक्ति का स्तर पूछते हैं क्या कौन किस स्तर पर है पूछ रहे होते हैं क्या देखो आप क्या क्या कर रहे हो आर्गुमेंट को समझने की कोशिश नहीं कर रहे हो आपको जितना है आर्मेंट तो फिर व्यक्ति क्या करेगा नहीं
00:26:13:18 नहीं देख ऐसा हैब तस्मा शास्त्र प्रमाण आप मुझे शास्त्र से बोलिए तो आपकी बात स्वीकार करता जाऊगा आप शस्त्र में क्या लिखा है बताता भागवत में खा है पुलिल कसा आर सुंभ यना कसा दया यना बो कौन मुस्लिम उनको भी नहीं किया अगर भगवान का नाम देंगे तो आगे चलकर वह भी भक्त बन जाएंगे उनका भी उद्धार होगा वह भी सनातन धर्म वापस आएंगे ह पर आएंगे मैंने आपसे य पूछा है भाई साहब देखिए मैंने आपसे य पूछा है मैंने आपसे य पूछा है कि व्यक्ति का स्तर आप नापते हैं क्या और व्यक्ति का स्तर नापने का सनातन सिद्धांत क्या है और व्यक्ति को यह कहां पर कौन से स्तर पर सिखाया जा रहा है हमारे यहां पर कि वो यदि किसी को बहन कह रहा है तो उसको बहन के विपरीत व्यवहार करते हुए उससे विवाह कर ले और संबंध बना यह तीन प्रश्नों का उत्तर दीजिए ठीक है आप पहला आपको क्या ये जो शिक्षा है यह शिक्षा हमारे सनातन धर्म ग्रंथों से प्राप्त होने वाली शिक्षा के विरुद्ध नहीं है इसको आप अधूरा कहेंगे अधूरी इा है
00:27:28:18 विरुद्ध नहीं है और अगर ये विरुद्ध नहीं है तो विरुद्ध होता क्या है दुनिया में ये बता दीजिए ठीक है देखिए जो असुर लोग हैं वो नियम कानून को अच्छे से फॉलो नहीं कर पाते हैं तो इसीलिए हमको क्या कर कुरान अर्थात ये जो अर्थात आपके अनुसार जो कुरान की शिक्षाए व असुर जैसे लोगों के लिए है आपको डाउट है क्या नहीं मुझे मैं आपसे सुनना चाह रहा हूं ना बताइए ना मुझे नहीं मैं कुछ ट तो बताओ नहीं मैं पूछ तो रहा हू डाउट है इसलिए तो पूछ रहा आपसे मैं आपको प्रश्न पूछ रहा हूं आपको कुछ डाउट है क्या इसमें भाई आप एक तरफ यह कहते हैं ना कि कृष्ण और अल्ला एक ही है तो मुझे जानना है कि आपका परपट है क्या मैंने बोला की भगवान व एक व्यक्ति को मानते हैं व है अल्लाह और उनका पूरा नॉलेज उनके पास है नहीं तो उनको पूरा नॉलेज देने का जो कर्तव्य है वो किसका है वो हम सनातनी हों का है अगर हम उनको अगर पूरा नॉलेज नहीं देंगे तो व मैं पूरे और अधूरे की बात नहीं कर रहा हूं मैंने आपसे एक प्रश्न पूछा कि यह विपरीत
00:28:44:16 हैट आंसर है अगर वहा पर आपका क्लियर कट आंसर है आपको अगर आपको क्लियर आंसर दे रहा हूं भगवान एक ही है और जब नहीं क्या वो किसी व्यक्ति को अगर भगवान बोलते हैं तो उसका डेफिनेशन भले नहीं क्या वो अधूरा दे या कम दे लेकिन क्योंकि वह एक भगवान एक ईश्वर की बात कर रहे हैं वो एक ईश्वर जो है वो कृष्ण है उनको ज्ञान आधा है पूरा ज्ञान देने का अधिकार हमको है आपको अभी कुछ प्र य से बता आपको मैंने बारबार वही प्रश्न किया अगर हमारा धर्म यह सिखाता है कि बहन के साथ जिसको बहन बोल दो तो उस चन को निभाओ जो वचन बोल दो उसे निभाओ अगर कुरान य कह रही है कि जो वचन बोल दिया है उसको जरूरी नहीं है उसको निभाना ठीक है अब य आपके हिसाब से अधूरा अरे भाई बोलने दोगे फिर तभी तो बात बिगड़ती है बोलने तो दीजिए मुझे मैं आपकी पूरी बात सुन रहा हूं
00:29:49:21 तो टूट जाता है ना फलो से तो मैं ये पूछ रहा हूं कि हमारा धर्म सिखाता है कि अगर आपने मुख से कुछ बोला है तो आप उस पर डटे रहिए रल री सदा चली आई प्राण जा परवचन ना जाए मगर कोई है जो यह कह रहा है कि नहीं तुमने अगर मुख से कुछ बोल दिया तो कोई नहीं आप उसे बदल दो बदल सकते हो ठीक है अब आपके हिसाब से यह गलत नहीं है यह विरोध नहीं है य अधूरा ज्ञान है पहले तो यह बताइए हा कि
00:30:23:13 ना अपूर्ण ज्ञान है य य गलत नहीं है कौन सा जब नहीं आपको पूछ रहा हूं हमारे य सिखाया हमारे य सिखाया जा रहा है कि मुख का वचन मत बोलो बहन का मतलब बहन मां का मतलब मां बेटी का मतलब बेटी इसको आप बदल नहीं सकते अगर आपने किसी को बेटी बोल दिया तो बेटी बोलो उसको बेटी की नजरो से ही देखो मगर वहा दरी जगह सिखाया जा रहा है कि आप मुख के वचनों को बदल सकते हैं तो अब आप ये बताइए अधूरा है अपूर्ण है या फिर ये गलत है वि विरु सनातन के बहुत अच्छा तो आपका इसको आंसर ऐसा है मैंने जै आपको पहले बोला था की 3 माइनस ू जो है व छोटा बच्चा समझता है लेकिन माइनस नहीं समझ पाता है मैंने देखि एक करके चलेंगे भाई साब तो हो कुछ क्लियर नहीं होगा वो जलेबी बन र जाएगा मैंने आपसे पूछा अपूर्ण है यह अपूर्ण है या फिर विरुद्ध है यह अपूर्ण है या फिर गलत है यह बताइए हां मैं जस्टिफिकेशन नहीं मांग रहा हूं तो आपको देखो अभी नहीं क्या आपको सिंपल वे में समझाया उस समय
00:31:38:15 मैं भाई साहब आपसे पूछ रहा हूं कि ये जो ये जो शिक्षा दी जा रही सिपल है देखिए भा मैं आप एक प्रश्न पूछ रहा हूं क्या हम यहां पर वैदिक साहित्य और कुरान के साथ कंपेयर कर रहे हैं हमारा लक्ष्य क्या कंपर कर इसको कहते हैं वित इसको कहते विषयात अभी मैंने आपसे क्लियर प्रश्न पूछा है आपने कहा उनका ज्ञान अधूरा है मैं आपसे पूछ रहा हूं कि कि क्या यह गलत है सनातन विरुद्ध है या फिर यह अपूर्ण है इसको क्या कहा जाएगा अपूर्ण या फिर विरुद्ध अपूर्ण या फिर गलत आपके हमारे सनातन पर्सपेक्टिव से क्या कहेंगे हम उसको सनातन ध धर्म के प्रोस्पेक्टिव के हिसाब से अपूर्ण भी कहा जाएगा और गलत भी कहा जाएगा अच्छा अपूर्ण भी कहा जाएगा और गलत भी कहा जाएगा बहुत बढ़िया तोब मुझे अपूर्ण की अब अब मुझे अपूर्ण और गलत में अंतर बताते हुए दोनों की परिभाषा बता दीजिए आप य विष हो गया नहीं कैसे विष अंतर हो गया क्योंकि आप आप अपने मन से जो आ रहा है वो बोल रहे हो ना अगर वो गलत है तो आप गलत की परिभाषा दीजिए गलत ये होता है
00:32:54:08 आप गलत परिभाषा दीजिए दोनों मित्र बात कर रहे हैं ओके किसकी हम दोनों मि के जैसे बात कर रहे मित्र मित्र हा हा मि मित्रों से ऐसे ही बात करता हूं कर तो अभी मैं ये बता रहा हूं आप यहां पर जज नहीं है कि आपका देखो आपके सिद्धांत को नहीं कि आपने फिक्स जमा दिया पहले और आपके कुल मिलाकर के आप इस बात का जवाब नहीं देंगे कि ये जो ज्ञान है वो अपूर्ण है तो अपूर्ण क्यों है और गलत है तो गलत क्यों अपर्ण भी है और गलत भी है और कुछ सुनना चाहते हैं आप मेरे से चलो ये ये इतना मैंने आपसे सुना कि गलत है तो इससे थोड़ा सुनिए इतना मैंने आपसे सुन लिया कि अपूर्ण के साथ आपने गलत बोला इतना मुझे हृदय को बड़ी ठंडक मिली है इस वाकई में मैं आपके हाथ जोड़ के आप मतलब वो अभिवादन करना चाहूंगा आपने चलिए अपूर्ण के साथ ही गलत बोल दिया मगर गलत तो बोला ठीक है बात ये है हां ठीक है अब आगे ये चलते हैं कि इसका अर्थ है अगर हम बात करते स्तर की तो स्तर का अर्थ हो गया कि भाई
00:34:09:12 वो किसी विशेष देश काल परिस्थिति के अनुसार दिया जाने वाला ज्ञान है उसको हम परमानेंट नहीं मान सकते इतना तो पक्का है ना 100 पर हा ठीक तो इसका मतलब यह है कि कुरान का जो ज्ञान है वो सनातन ज्ञान नहीं है नहीं नहीं है ना तो सनातन ज्ञान नहीं है तो कुरान का ईश्वर फिर वही बात आ जाती है कि कुरान का जो ज्ञान है सनातन ज्ञान नहीं है और वह किसी विशेष देश काल स्थिति के वशीभूत हो कर के लिखा पढ़ाया कहा गया है तो सनातन के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है कृष्ण उसके साथ उस देश काल स्थिति के व जो ज्ञान दिया गया उसके जो उसके द्वारा उस सीमित व्याख्या के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर है उसके साथ उस क्यों खड़ा किया जा रहा है और अगर खड़ा किया जा रहा है तो इस क्या कहीं पर यह बता रहा हैन की हम कुरान के द्वारा प्रतिपादित कुरान की सीमा के ईश्वर को नहीं मानते हैं हम कृष्ण को अल्लाह भी कह देते हैं बस इतना कुरान के सीमा के ईश्वर को हम नहीं मानते क्या यह कहता है इसको क्योंकि कुरान जो है वो अपूर्ण नहीं है कुरान एक
00:35:24:13 मिनट क्योंकि कुरान जो है व अपूर्ण नहीं है विरोध कर भगवान कह रहे य धर्म भार स ऋगवेद में लिखा है कि वो गर्भ में जाता है विचरण करता है अने तरह तरह के माया से रूप बनाता है सब जगह लिखा है रूप लेता है लेता प्रकट होता सबग मगर कुरान य कह रही है उसकी मूर्ति नहीं बन सकती उसकी पूजा नहीं हो सकती हमारे यय ये अधूरा नहीं है अधूरा तब माना जाएगा जो अधूरे की डेफिनेशन है य हो सकती है कि वहा पर विग्रह पूजा के बारे में बा नहीं हो व संतान प्राप्ति के बारे में मिनट एक मिनट अधूरा अधूरा अपूर्ण तब माना जाएगा जब वहा पर संतान के बारे में बात ही नहीं होती कि ईश्वर के संतान हो सकती है कि नहीं हो सकती मगर वहां पर बात हो रही है और हो करके उस उस सिद्धांत को मना किया जा रहा है जो सिद्धांत य दिया तो व अपूर्ण नहीं है व विरुद्ध है तो हमें ये कहने में क्यों हैल मिलाकर वही बात आ प्रश्न वही था कि यदि वो सनातन ज्ञान नहीं है तो सनातन ईश्वर के साथ उसका कंपेरिजन क्यों किया जा रहा है आप लोग कहिए कि हम कृष्ण को मानते हैं अल्लाह के समान मानते हैं मगर ये वो अल्लाह नहीं है जो कुरान
00:36:39:16 के द्वारा प्रतिपादित होता है क्योंकि कुरान के द्वारा जो ईश्वर की व्याख्या की गई है वो अधूरी है वो सीमित है ऐसा कहां पर आप कहते हैं आपने लेक्चर सुना है क्या इसकन की बिल्कुल बिल्कुल मैंने भी कुछ लेक्चर दिया सुन लीजिए ठीक है ना देखिए यहां पे दो चीज है कि अगर आप अगर आप ऐसा कह रहे हैं तो बहुत अच्छी बात है अगर आप हम यही चाहते हैं हम यही चाहते हैं हमारा उद्देश्य यही है अगर आप ऐसा लेक्चर में कह रहे हैं आपको फिर उन जो ऐसा कह रहे है कि नहीं हम इसको कुरान का अल्लाह और हमारा कृष्ण एक ही है तो फिर आपको उनको फोन मिलाना चाहिए आपको उनका विरोध करना चाहिए कि आप इसकन की तरफ से ऐसे बयान मत दीजिए आपको ये करना चाहिए 100% अब सुनिए हम यहां पर क्या बात कर कि कुरान में जो अल्लाह का जो उन्होंने ईश्वर का जो भी वर्णन दिया है व अधूरा है पह यरा मिला है हमारा जो प्रश्न है कुल मिला के बात हमारा कृष्ण है वो कुरान की सीमा के ईश्वर के समान नहीं
00:37:49:15 हैने आपको दो चीज बताया सुनि अ सुन लीजिए मैंने दो चीज बताया उनका फिलोसोफी अधूरा है और गलत भी है तो क्या बोल रको स्पष्ट आपकी ही बात को मैं स्पष्ट कर रहा हूं कुरान की सीमा अगर कुरान कोही प्रमाण मानले भाई साहब आपली बता देता फिर आप बता तो जब मैं बता रहा हूं कि कुरान में दिया गया ईश्वर जो है वह अधूरा है कहां पर अधूरा है जहां पर नहीं किया वो भगवान को ने क्या लिमिटेड कर देते हैं वो बोलते हैं भगवान तो एक ही है तो वो चीज सही है भगवान अब बोलते हैं कि भगवान ये नहीं कर सकता वहा पर वो अधूरा हो जाता है कि ये नहीं कर सकता मतलब इनका ज्ञान नहीं है अधूरा नहीं होता ये बात गलत है वहां पर वो गलत होता है अगर हमारा अगर वास्तविकता ये है कि ईश्वर जन्म ले सकता है तो फिर ये कहने वाला कि ईश्वर जन्म नहीं ले सकता अगर हमारी अगर वास्तविकता ये है कि ईश्वर जन्म ले सकता है तो यह कहने वाला कि वो जन्म नहीं ले सकता वो गलत है और अगर वो गलत नहीं है अधूरा है तो गलत की डेफिनेशन क्या है अधूरे की डेफिनेशन मुझे बताइए आप स्पष्ट बोलने से क्यों पीछे हटते अरे चिंता मत करो हम क्या छती ठोक के
00:39:04:16 बोलने वाले है डरने वाले नहीं चिंता मत करो बाबा आपके सामने अब देखिए भगवत गता भ अगने आपसे प्रश् पूछ देखो प्रॉब्लम क्या है कि अबने इसलिए नहीं मेरे को बोलने देना पड़ेगा ना क्योंकि आपको मेरे से आंसर चाहिए हा तो पहला चीज है की भगवान श्री कृष्ण क्या कहते हैं कि मैं अजन्मा हूं एक जगह बताते हैं ना आप अपनी बात पूरी कर लीजिए फिर मुझे बताइएगा तो मैं बोलूंगा हां मैं आपको ये प्रश्न पूछ रहा हूं क्या भगवान ने भगवत गीता में कहा है कि मैं अजन्मा हूं ऐसा बोला है हां या ना उन्होंने कहा है मैं अजन्मा अविनाशी होते हुए भी अपनी माया को अपने अधीन करके जन्म लेता हूं प्रकट होता हूं अवतार लेता हूं मैंने आपको यह पूछा कि भगवान ने भगवत गीता में क्या यह बोला है कि मैं अजन्मा हूं हां या ना हा बोला बोला है बोला है ऐसे ही किसी बोला कुछ जो लिमिटेड बुद्धि वाले लोग है नहीं क्या व अगर पकड़ लि भगवान तो जन्म लेते ही नहीं भगवान तो जन्म लेते ही नहीं ठीक है इसको पकड़
00:40:19:19 लिया तो यानी कि आपका कहने का मतलब है आपका कहने का अर्थ है नहीं हुआ मेरा प्रश्न नहीं हुआ अब अच्छा उन कैटेगरी के लोगों को हम अधूरा बोलेंगे या फिर गलत बोलेंगे आप बताइए ठीक है अब मैं आपसे पूछ रहा हूं आपने कहा क्योंकि वहां पर एक वाक आप बोलने नहीं देंगे क्या आंसर दीजिए ना पहले मैं जो पूछा उसका आंसर दीजिए मैं आंसर मेंही आंसर ही दे रहा हूं आपको आंसर है अगर मैं पॉइंट से अगर मैं पॉइंट से हटू तो ये डिबेट यहीं प बंद हो जाएगी ये ये जो चर्चा
00:41:00:00 तो मैं उस प्रश्न का जवाब दे रहा हूं ना आप अगर गलत गलत ट्रैक में जाऊ अगर मैं गलत ट्रैक में जाऊ तो आप मुझे याद दिलाएगा मैंने आपसे य पूछा था हा तो मैंने आपको भगवान नेे मुझे आपको सुनना होगा मुझे आपको बोलने का अवसर देना होगा अगर मैंने कहा सुनिए मैंने कहा मेरा नाम शिवा वेद है अगर इस वाक्य में से दुनिया में किसी ने मैंने शब्द पर एक किताब लिख दी उसके किताब में मैंने आ गया तो यह और भले ही उसने लिखा हो मैं मेरा नाम जो है व वो मेरा नाम जो है अब्राहम है तो हम यह कहेंगे क्योंकि मैंने शब्द हमारी किताब में भी है और उनकी किताब में भी मैंने शब्द है इसलिए उनका ज्ञान अधूरा है क्योंकि मैंने तो यहां पर तुमने भी बोला था हम यही कहेंगे ना फिर तो क्योंकि हमारे से मिलता जुलता एक भी शब्द उनके य आ गया तो उनकी किताब अधूरी है विरुद्ध नहीं है पहली बात और जब यह विरुद्ध नहीं है तो दुनिया में मैं बता दूं कोई भी किताब सनातन विरुद्ध है ही नहीं फर तो फिर विरुद्ध है क्या दुनिया कोई भी किताब नहीं होगी हर चीज सनातन में होगी अगर का अक्षर कहीं पर
00:42:15:03 यूज हो गया होगा दुनिया में तो का तो हमारे भी है ना तो का अक्षर यूज हो गया अगर कहीं पर तो इसका मतलब है वो ज्ञान जो अधूरा है विरुद्ध नहीं है आप यह कहना चाहते हैं आप कंक्लूजन दे रहे हैं या फिर आंसर दे रहे हैं मैंने तो आपको पूछ लिया ना आंसर दे दिया अगर कहीं पर हमारे यहां के ग्रंथों से मिलता जुलता कोई शब्द आ गया कोई वाक्य आ गया तो उससे हम ये नहीं कह देंगे कि वो ज्ञान अधूरा है विरुद्ध नहीं है क्योंकि इस तरीके से तो दुनिया में आईएस आईएस वाले भी विरुद्ध नहीं होंगे जो हत्या कर रहे हैं फिर कहा जाएगा देखो वो भगवान ने कहा था ना अर्जुन को युद्ध कर तो आईएस आईएस वाले युद्ध कर रहे हैं तो उनका जन अधूरा है विरुद्ध नहीं है गलत नहीं है आप ये कहोगे मैं ऐसा कुछ बोले नहीं आप ही कंक्लूजन दे र आप आंसर दे रहे हो आपने तो बोला ना कि अगर मेरे हमारे ग्रंथ में आ गया कि मैं अजन्मा हूं तो उन्होंने इसको ले लिया केवल अजन्मा को इसलिए उनका जन अधूरा कहा जाएगा उनका जन गलत नहीं कहा जाएगा तो फर गलत कहा किसे जाएगा आपने फिर से नहीं अरे नहीं लिया हमारे य मैं कह रहा हूं हमारे य से मैच कर रहा है हमारे य से कर रहा है तो उनका ज्ञान अधूरा बोला
00:43:30:07 जाएगा हमारे य बोला जा रहा है स्पष्ट के मुख के वचनों का मूल है उनके य बोला जा रहा है मुख के वचनों का मूल नहीं है अब क्योंकि मुख के वचन शब्द यहां भी और वहा भी है तो हम ये कहेंगे विरुद्ध नहीं है अधूरा येय कहेंगे हम मैंने आपको सिंपल प्रश्न पूछा आप उसको आंसर नहीं दे इधर मेरा प्रश्न ऐसा है देखिए जो जनता देख रही है उसको ये समझ में आएगा कि मैंने क्या आपको आंसर दिया या नहीं दिया है जो जनता देख रही है ना उसको समझ में आएगा भले ही माने या ना माने मैंने आपको आंसर दिया है कि आपका य जो तर्क है वो गलत है कि अगर हमारे यहां पर अजन्मा कह दिया भगवान ने स्वयं को इसलिए उनके यहां पर अजन्मा जो लिखा है वो अधूरा है गलत नहीं है हमारे यहां पर जो कहा गया है वो ये कहा गया है कि ईश्वर जन्म ले सकता है वहां पर कहा जा रहा है नहीं ले सकता है आप इसे काउंटर कीजिए सुलो आपने
00:44:27:12 अगर हमारे य की एक भी चीज उनके आ रही है तो अगर इसको मानना है तो फिर तो दुनिया में कुछ भी विरुद्ध है ही नहीं तो मुझे आप विरु की परिभाषा बताइए विरु होता क्या मैंने आपको कुछ बोला ही नहीं आप नहीं पूरा परा खोल रहे हो प्रभ आपको गलत व्यक्ति से फर क्या य कर र देखो आपको वितर होने भी नहीं दूंगा ना मैं वितर करूंगा भी आपको मैं सिंपल वे में बता रहा हूं अगर क्या कोई व्यक्ति भगवान को को अगर अजन्मा मानता है खाली अब वो अधूरा ज्ञान है या वो गलत है वो मेरे को बताइए सिंपल सी फर्मूला वो हिंदू व्यक्ति मैं मैं आपको बता रहा हूं अगर वो ये कह रहा है कि भगवान अजन्मा है तो ये अधूरा है मगर वो ये कह रहा है भगवान जन्म नहीं ले सकता तो ये गलत है विरुद्ध है हां एकदम परफेक्ट ऐसा ही नहीं क्या जब वो हिंदू हो मुस्लिम हो अगर जब नहीं क्या वो बोलता है कि भगवान अजन्मा है वो अधूरा हो गया जब बोलता है कि वो जन्म नहीं लिख सकता वो गलत है इस तरह से नहीं कि कुरान प्रतिपादित किया हु अल्लाह है उनका ज्ञान अधूरा है और गलत भी है तो हम बड़े भाइयों का काम क्या हैरे अरे मेरे भाई आप कुरान
00:45:42:22 को चलिए इसको भी पकड़ लेते पकड़ने की बात है तो इसको भी पकड़ेंगे ठीक है अब मुझे आप बताइए आपने कुरान पूरी लिखने के बाद देखी है या जिस समय वो लाइन लिखी जा रही थी तब देख ली थी आपने कुरान को कब लिया जब वो पूरी कुरान कंपाइल हो गई है तब देखा है या जब उसकी एक पंक्ति लिखी जा रही थी तब देखा है देखि मैं कुरान का भक्त नहीं हूं बाबा देखो यही तो होता मैंने आपसे एक चीज पूछी बत सिंपल आपने कुरान को कब देखा पूरी कंपाइल होने के बाद देखा या एक एक पंक्ति लिखी जा रही थी तब देखा आपके खुशी खबर है आज तक कुरान कैसे दिखता दिखा नहीं तो फिर इसका अर्थ है कि आपको य कहना चाहिए कि इस विषय में मुझे ज्ञान नहीं है कि इसकन जो है कुरान को और इसके ईश्वर को एक क्यों कहता है जब आप उस विषय में जानते नहीं है तो फिर बात क्यों कर रहे हैं आप एकदम बच्चे के जैसा बात करते हो प्रभु सच बता रहा हूं आप पा साल ये समाज देखिए ये देखिए आपने कहा था कि आप यहां के कोई जज नहीं है आपने अभी थोड़ी देर पहले कहा था ना कहा था कि नहीं कहा था 100% बोला था और अब जज कौन बन रहा है अब जज कौन बन रहा है निर्णायक
00:46:57:24 कौन बन रहा हैय कौन दे रहा है बता एक सवाल पूछ रहा आपसे निर्णय कौन दे रहा है इस समय हा अभी मैं बोला जैसे जैसे आप जज बनते होने अभी त एक बार भी निय दिया है क्या नि दिया है क्या भाई साब मैंने एक बार नि दिया क्या आपसे पूछ रहा मैंने आपको कहा कि आप बातो को घमा रहे मैं बिल्कुल नहीं रहा हमारा एकदम क्लियर कट क्या मैंने निर्णय दिया क्या मैं तो जो आप बोल रहे हो केवल उसी से प्रश्न करता जा रहा हूं मैंने अभी तक एक बत भी आपको कोई उपमा नहीं दी आपने मुझे कह दिया कि आप जो है यहां पर वो आप जीतने के उद्देश्य से बात कर रहे हो आप बच्चों के जैसे से बात कर रहे हो ये आप निर्णायक बन रहे हो और आप मुझसे कह रहे हो कि आप यहां पर कोई जज नहीं हो हां तो अब सुनिए अब नहीं क्या हमारा बीच नहीं क्या बात ये है कि कुरान में देखिए देखिए देखिए देखिए अभी मैं आपको एक चीज पूछ रहा हूं आपने मुझे थोड़ी देर पहले जज कहा था आप यहां पर कोई जज नहीं है अभी आपने मुझे निर्णय दिया कि मैं बच्चों के जैसी बात कर रहा हूं ये निर्णय नहीं है क्या हा मैं बोला ना हम दोनों जब इक्वल है तो इक्वल में नहीं कैसे होता एक व्यक्ति रखना पड़ेगा जो व्यक्ति जो
00:48:12:25 नहीं जज रहेगा इसलिए मैंने बोला कि पा मिनट मिनट बो देखिए मैं आप मैं ये बताना चाह रहा हूं लोगों को कि इस समय आप निर्णायक बने जब आप आपने किसी बात का जवाब यह दिया कि आप बच्चों के जैसी बात कर रहे हैं हा हा कर रहे ना यही तो निर्णायक है इसी को कहते जज बनना नहीं आपने मुझे जब कहा था व्यर्थ कहा था और अभी आप खुद जज बन रहे हो अय बताओ जज होना चाहिए आपको कि नहीं होना चाहिए जब नहीं कि आप जज बन जाते हो तो मेरे को भी जज बनना पड़ता है अच्छा मैं कहां पर जज बना बताइए हा अब हम आप इस तरह से बन रहे मैंने आपको कौन सी उपमा दी है मैंने अभी तक आपको कौन सी उपमा दी है कि आप ऐसी बात कर रहे हो आप गलत बात कर रहे हो मैंने बोली है क्या हा आपको पूरा आपका मतलब य में भरा पड़ा है प्रभु आपका जिस तरह से आप अच्छा इसका मतलब है इसका मतलब है हमें अन्य चर्चाओं के बारे में भी य पर बात करनी है हा कर स अभी शुरू में आपने कहा था कि मैं दूसरों के बारे में बात
00:49:28:00 करने नहीं आया हूं हां यहां पे आपने जब उनके बारे में पूछा तो फिर आप जो अब आप जोय मुझे जज सिद्ध कर रहे हैं वो अन्य चर्चाओं के आधार पर सिद्ध कर रहे हैं और मैं आपको जो जज सिद्ध कर रहा हूं वो इसी चर्चा में हो रही बातों के आधार पर सिद्ध कर रहा हूं अब आप जब अन्य चर्चाओं का संदर्भ लेंगे तो इसका मतलब है लखनऊ मंदिर के अध्यक्ष के साथ जो चर्चा हुई है उसका भी संदर्भ ले रहे हैं या उसम भी सिलेक्टिव है देखो अभी नहीं क्या आप को जो बोला जा रहा है वो आप सुन नहीं रहे हो और आप आपका ही पॉइंट को नहीं किया जो तथ्य विहीन है अभी मैं आपको चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए बोल रहा हूं आप आप निर्णायक ना बनिए आप यह मत बोलिए कि आप बच्चों की तरह बात कर रहे हो ठीक है अब हम आगे बढ़ते हैं आगे बढ़ तो अब आपने आपका एक स्टेटमेंट प्राप्त हुआ है कि जो कुरान की कुरान का जो ज्ञान है व अरा भी है और गलत भी है जहां पर वो ये कह रहा है जन्मा है वो अधूरा है और जहां पर वो ये कह रहा है कि वो जन्म नहीं ले सकता वो गलत अब मैंने जब आपसे पूछा कि आपने सिर्फ जो जब कुरान को देखा तो वो लिखी जा रही थी तब देख लिया जो आप उसको अपूर्ण बोल रहे हो कि पूरी कुरान जब लिख गई जब ये निचोड़ आ गया
00:50:43:01 कि उनके य मूर्ति पूजा नहीं है निचोड़ में उनके अवतारवाद नहीं है निचोड़ में उसके बाद भी आप ये कह रहे हो कि ये जो है वो अधूरी लाइन वाली लिखी हुई है तो मैंने आपसे जब ये पूछा तो इस बारे में आपने कोई उत्तर नहीं दिया मगर एक बात आपने कहा कि जिस परिवार में सुप्रीम नाम जो बोला जाता है अल्लाह तो अगर वो अल्लाह मान रहे तो हम ये कह रहे बेटा वो जो है जिसको तुम अल्लाह कह रहे हो वो हमारा कृष्ण ही है हम यह समझाते हैं अब इसको लेक आगे बढ़ते हैं तो जब आप कुरान के ईश्वर को कृष्ण के समान कहते हो लोगों को समझाने के लिए कि जिसको तुम अल्लाह कह र हो वो कृष्ण ही है तो आप शिव पुराण के ईश्वर को कृष्ण के समान क्यों नहीं बोलते बहुत परफेक्ट क्वेश्चन पूछा आपने बहुत बहुत धन्यवाद आपको अब ये देखिए जैसे मैंने आपको पहले एक एग्जांपल दिया था कि ये एक परिवार है और परिवार में पता ये है और पिता के नीचे नी क्या एक उनका पुत्र होता है या फिर छोटा भाई होता है तो जब नहीं क्या कोई व्यक्ति यह बोलता है क्या यह छोटा भाई जो है क्या यह कृष्ण बन सकता है तो हम बोलते हैं कि नहीं बन सकता अब आपको आंसर मिला या नहीं मिला मैं एक्सन कर बताइए मैं अपना
00:51:58:08 प्रश्न दोबारा करता हूं जो लोग जो लोग जो लोग ईश्वर को अल्लाह के रूप में समझते हैं उनसे आप कह देते हो कि कृष्ण और अल्लाह एक ही है उसके पीछे की वजह आप जस्टिफाई करे ना करे वो एक अलग बात हो गई आप जो लोग अल्लाह के रूप में कुरान के ईश्वर के रूप में ईश्वर को देखते हैं समझते हैं सोचते हैं उनसे कह देते हो कि तुम्हारा जो अल्ला है वो और कृष्ण एक ही है तो जो लोग शिव पुराण की सीमा से ईश्वर को देखते सोचते समझते हैं उनसे आप य क्यों नहीं कहते हो कि शिव और कृष्ण एक ही है अभ फिर से मैं आपको आंसर दे रहा हूं आपके घर में आपके पिता है आपके छोटे भाई है बहुत सारे लोग है सुनो सुनो आप सु बाबा चिंता कर रहे होब तो बोला नहीं इशारा किया मर सुन रहा तो अबने क्या अगर घर के परिवार में पिता सबसे बड़ा होता है तो अब देखो अब क्या होगा य पर किसी का नाम नहीं लिया गया है तो हम बोलते पिता बोले तोय जब नहीं क्या वहां परनाम लिया जाता है कि पिता का छोटा भाई है क्या यह छोटा भाई ये बाप के जैसा है तो हम बोलते कि नहीं नहीं शिवजी
00:53:13:15 जो है वो छोटे भाई है या फिर छोटे पुत्र है वो कृष्ण के साथ समान नहीं है मैंने आपसे बोला कि जब व्यक्ति का स्तर बेकार होता है तो आप उससे बोल देते हैं कि जिसको तुम कृष्ण समझ रहे हो जिसको तुम शिव समझ रहे हो वो कृष्ण ही है उसका स्तर कम है इसीलिए वो समझ रहा है ना शिव क्या क्या फिर से बोलिए पूछ रहा फिर से बोलिए मैंने कहा जब आप स्तर के स्तर के कम होने की वजह से जिस स्तर पर जो जिस नाम से जिस रूप में ईश्वर को भज रहा है उससे कह देते हो कि कृष्ण और तुम्हारा जो ईश्वर है जिस नाम से तुम भज रहे हो वो एक ही तो आप शिव के भक्तों से ये क्यों नहीं कह सकते कि कृष्ण और शिव एक ही है हां अब इसका मैं आंसर दे रहा हूं अगर नहीं क्या कोई बोलेगा कि आपके परिवार में पिता कौन है तो हम बोलते पिता बोले तो कृष्ण है बेटा अच्छा आपके परिवार में ये जो शिव कौन है हम बोलते हैं हमारे पिताजी के छोटे भाई तो अब नहीं क्या आप मेरा प्रश्न समझ नहीं पा रहे आप आप मेरा प्रश्न नहीं समझ रहे सम मैं बोल रहा
00:54:28:19 हूं जो व्यक्ति शिव के रूप मैं बोल रहा हूं जो व्यक्ति शिव के रूप में भगवान को जानता है उसको आप य क्यों नहीं बोलते कि जिसे तुम शिव समझ रहे हो वो कृष्ण ही है जब कि जो व्यक्ति अल्लाह के रूप में भगवान को जानता है उससे आप ये बोल रहे हो कि जिसे तुम अल्लाह समझ रहे हो वह कृष्ण ही है जो व्यक्ति यहोवा के रूप में भगवान को जानता है उससे आप ये बोल रहे हो कि तु जिसे यवा कह रहे हो वो कृष्ण ही है तो आप शिव वालो सेय क्यों नहीं बोल रहे कि जिसे तुम शिव कह रहे हो वो कृष्ण ही है हा तो आपने इसको और फिर से नहीं क्या मैं आपको फिर से बता रहा हूं जब एक परिवार में पिता का पोजीशन दिया जाता है पिता कौन हो सकता है तो आंख बंद करके नहीं क्या बोलते हैं कि पिता और कोई नहीं है एक ही पिता है वह है कृष्ण इतना समझ में आया आगे बोलिए हां अगर नहीं हा अगर कोई बोलता है कि ये जो हमारे शिव जी है शिवजी जो अगर मैं शिवजी का पूजा कर रहा हूं और शिव जी का मैं भक्त हूं उसमें कोई गलत नहीं है बहुत अच्छी बात है लेकिन हम बोलते हैं कि शिवजी अलग है और
00:55:43:20 कृष्ण अलग है कृष्ण बाप है तो शिवजी उनके पुत्र या फिर उनका भाई अब इसको समझ में आया आपको कोई कमेंट करके बताएगा क्या कोई कमेंट करके बता दे कि मैं जो प्रश्न पूछ रहा हूं ये उसी का आंसर दे रहे हैं कुछ और दे रहे हैं कोई कमेंट करेगा क्या चलिए किसी का कमेंट अगर आ भी रहा है तो हम लोग देख नहीं पा रहे उसे तो मेरा प्रश्न आप समझ नहीं पा रहे हैं मैं कह रहा हूं आपने कहा कि हम लोग यह बताते हैं लोगों को कि जो पिता है अरे जबरन परिवार बना रहा है अज्ञानी त्रिशूल कहां है भैया चलिए जी मैं ये कह रहा हूं कि
00:56:58:25 आपने कहा कि जब कोई व्यक्ति गलत समझ रहा होता है भाई को पिता समझ रहा होता है तो हम उसे कहते हैं नहीं वो पिता है वो भाई है वो पिता है ठीक है हा यहां पे शिजी को नहीं किया हम बोल रहे हैं जब कोई व्यक्ति गलत समझ रहा है भाई को पिता समझ रहा है तब हम कहते हैं कि तुम गलत समझ रहे हो तुम भाई को पिता कह रहे हो जबकि पिता जो है कृष्ण है और भाई जो है वो शिव है यही है ना हा हां ठीक है तो इसका अब मैं बोल रहा हूं कि जब कोई व्यक्ति गलत यह समझ रहा है कि अल्लाह ही ईश्वर है कुरान की सीमा का वही ईश्वर है तो उसको आप क्यों नहीं कह रहे हो कि अल्लाह नहीं वो अल्ला वो अल्ला भाई है और वो जो किस्म है वो पिता है हा अब देखिए यहां पर अल्लाह को इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि वो अल्लाह का अलावा किसी को जानते नहीं और वो अल्लाह कौन है वो भी उनको नहीं पता जब ने क्या यहां पर पिता शब्द आरहा सुप्रीम पर्सनालिटी यह सुप्रीम है तो जैसे पिता एक क्या है कि एक पोस्ट है समझ लो एक परिवार मेरा एक सिंपल सा प्रश्न भाई साहब मेरा एक सिंपल सा प्रश्न है जिसको आप आप
00:58:14:00 उससे अलग हटके वो दे रहे हैं मैंने आपसे पूछ पुराण के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर को कृष्ण के समान बोल सकते हैं तो शिव पुराण के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर को कृष्ण के समान क्यों नहीं बोल रहे यह बताइए ठीक है अभी कुरान में जो दिया हुआ अल्लाह कौन है अच्छा आप एक बात बताइए सि आपने इसको मैं समझा देता हूं प्रश्न को थोड़ा सा आपने कहा जो जो वो है कुरान का जो ज्ञान है वो अधूरा है है ना इसलिए हम उनको य बताते कि तुमको जो जो नहीं पता है वो सारी चीज कृष्ण में भी है इसलिए कृष्ण अल्ला एक ही है पुरान की चीजें जो है लिमिटेड अधूरा है मगर यहां पर आप शिव पुराण के द्वारा प्रतिपादित होने वाले भगवान से कृष्ण को अलग कर देते हो तो क्या आप यह कहना चाहते हो कि पुराण का ज्ञान तो अपूर्ण है मगर शिव पुराण का ज्ञान विरुद्ध है इसलिए शिव पुराण के ईश्वर को हम कृष्ण के समान नहीं खड़ा करते मगर कुरान के ईश्वर को कृष्ण के समान खड़ा कर देते हैं हा तो अभी आपका प्रश्न यह है कि आपको यह पता चल गया कि अल्लाह जो है कौन है उनको नहीं पता ना आपको पता है
00:59:29:04 और क्योंकि उसको सुप्रीम कह रहे हैं लिए अल्लाह जो भी है वो कुरान की सीमा का ईश्वर है कुरान की सीमा का ईश्वर और मैं कभी य नहीं कहूंगा कि कृष्ण राम के समान है आप कए देखो अने क्या आपने क्या अगर इसको समझने की कोशिश करो तो आराम से समझ जाओगे मैं क्या बोल रहा हूं शिव शिव जी के पास हम बाद में आएंगे पहले आप इसको समझ लो अगर नहीं क्या वो किसी को भी अगर बोल रहे हैं यह सुप्रीम है तो हम बोलते हैं कि सुप्रीम बेटा एक ही है व है कृष्णा आपको इसमें कुछ प्रॉब्लम है क्या प्रॉब्लम है आप यह बोलते हैं कि क जो सुप्रीम हमारा कृष्ण है वही तुम्हारा अल्ला है आप ये बोलते हैं हा हम उनको बोलते हैं कि अब कृष्ण को एक्सेप्ट करो तो फिर नहीं कृष्ण को एक्सेप्ट करो ठीक है आप आप शिव के भक्तो से क्यों नहीं बोलते कि भाई हमारा जो कृष्ण सुप्रीम है वही तुम्हारा शिव है आप कृष्ण को वो एक्सेप्ट करो हा देखो बोलते हो शिवजी नहीं है जो लोग नहीं क्या शिवजी के भक्त है जो व्यक्ति शिव जी के भक्त है शिव जी ने क्या उनको क्या करते हैं कृष्णा भक्ति में आके रख देते
01:00:44:25 हैं एक बहुत सार एपल है तो जब नहीं कि हमको पता है कि शिव जीी कौन है जैसे मैं खुद भी नहीं शिवजी का भक्त था आपने वृंदावन में जो प्रेमानंद महाराज आप आप ये जो कह रहे हैं ना कि शिवजी कौन है आप ये जो कह रहे हैं शिवजी कौन है आप कह रहे क्योंकि इनको पता है शिवजी कौन है इसलिए हम कहते हैं कि शिवजी जो है कृष्ण नहीं है आप ये कह रहे यस पर और उनको नहीं पता है कि अल्लाह कौन है हा तो फिर क अच्छा तो अल्लाह की डेफिनेशन क्या है आपके हिसाब से जो उनकी है अगर वो बोलते हैं कि अल्लाह एक ईश्वर है तो आंख बंद करके बोलने का कि तुम्हारा जो य ईश्वर तुम जिसको मानते हो जो तुम नहीं जानते हो देखिए मैंने अगर बगर मत बोलिए अगर मगर बोलिए मैं ये बोल रहा हूं ना अगर मगर बोलना पड़ेगा प्रभु क्योंकि बोल रहे अल्लाह अगर वो उसको सुप्रीम बोल रहे हैं तो हम सिंपल क्वेश्चन पूछते हैं आपको अगर अल्लाह कौन है पता है
01:01:59:26 तो बताओ नहीं पता है तो हमारे कृष्ण को एक्सेप्ट करो अगर आपको पता है अल्लाह कौन हैन है चलिए अब मैं बोल रहा हूं अच्छा ठीक है कि आपने अगर पढ़ा है कि अल्लाह कौन है तो बताओ तो यह कौन ये जो आप बोल रहे हैं कि क्योंकि उनको पता नहीं है ये कहां से बोल रहे कैसे किस आधार पर बोल रहे उनको पता नहीं वो तो बताएंगे ना वो बताएंगे कि अल्लाह कौन है अल्लाह वो है जिसने संसार बनाया अल्लाह वो है जो कुरान के द्वारा डिफाइन किया जाता है अल्लाह वो है जिसकी पांच वक्त की नमाज पढ़ी जाती है अल्लाह वो है सात आसमान पर बैठता है ये आपको किसने कह दिया ये आपको किसने कह दिया अल्लाह कौन है उन्हे पता नहीं है अगर नहीं उनको पूछा जाए अल्लाह जो व्यक्ति है वो व्यक्ति कौन है वो बताओ वो कैसे दिखता है क्या करता है क रहता है तो तो तो तो इसका मतलब यह है कहने का मतलब है कि दिखने से य पता अगर किसी व्यक्ति को उसका रूप मालूम है तो यह बात सिद्ध होगी कि वो उसको य मालूम है कि वो कौन है अन्यथा नहीं सिद्ध होगी य बात अच्छा तो
01:03:15:00 चलिए अब आपने यह माना कि आपको यह पता है कि कृष्ण कैसे दिखते हैं इसलिए आप ये कह सकते हो कि आप ये जानते हो कि कृष्ण कौन है और क्योंकि अ वाले लोग जो है नहीं जानते वो कैसा दिखता है इसलिए वो ये कह रहा व उनके लिए उनको नहीं पता है अल्लाह अल्लाह कौन है है ना यानी कि रूप ना मालूम होने से यह सिद्ध होता है कि हमें नहीं पता है कि वो कौन है रूप ना मालूम होने से सिद्ध होता है कि हमें नहीं पता है कि वो कौन है उनको कुछ भी नहीं क्योंकि उनको यह नहीं पता कि अल्ला इसके बारे में कोई व्याकरण अब इसके बारे में आपको सनातन धर्म ग्रंथ का प्रमाण मुझे बताइए ज लिखा हो कि रूप ना मालूम होने से सिद्ध होता है कि हमें नहीं पता है कि वो कौन है हा बहुत अच्छी बात बो आपने यह तो व्यक्तिगत त हो गया मतलब देख आप अगर मतलब जो जुक्ति जो नहीं देना चाहिए वही देंगे आपको विषय को बढ़ाना है आपको समझना नहीं है तो हम क्या कर सकते बता सिपल बन फि आप निर्णायक भाई आपने अपना एक सिद्धांत देखिए आप
01:04:30:07 अपना सिद्धांत क्यों दे रहे हैं कि अगर हमको किसी का रूप नहीं मालूम है तो हम ये नहीं जानते कि वो कौन है बहुत सी ऐसी चीज होंगी दुनिया में जिसके रूप के बारे में आपको नहीं पता होगा मगर फिर भी आप कहोगे मुझे मालूम है वो कौन है मैंने आज तक को नहीं देखा मगर मैं उसके बारे में बता सकता हूं वो कौन है अगर मैंने उसका रूप नहीं देखा तो य सिद्ध हो गया कि मैं जो है वो कौन है मैं नहीं जान अगर कोई ऐसी बात फसेगी जो आपका सिद्धांत आप बताओगे और तो मुझे स्वीकार नहीं होगा तो फिर उसके लिए हम शास्त्र को लेंगे ना शास्त्र से प्रमाण देना पड़ेगा तस्मा शास्त्र प्रमाण ग को शास्त्र देने की जरूरत नहीं है ना जो लोग गधे है उनको पता ही नहीं क्या कुछ है उनको क्या जरत है तोब शास्त्र देने की जरूरत नहीं है य भी आप सनातन से दीजिए
01:05:25:28 हां तो सिंपल सी बात है अगर नहीं कोई इसका अर्थ तो ये है इसका अर्थ आप जो कह रहे हैं उसका अर्थ पता है क्या है उसका अर्थ ये है कि हमें किसी को भी धर्म का ज्ञान देना ही नहीं चाहिए और व्यक्ति क्योंकि पशु होता है पैदा होता है तो तो हमें उसे धर्म का ज्ञान देना ही नहीं चाहिए क्यों नहीं देना चाहिए क्योंकि वो पशु है नहीं नहीं क्योंकि वो मनुष्य है पशु के जैसा बिहेवियर कर रहा है उसको प मनुष्य बनाएंगे हां तो इसका मतलब आपसे प्रमाण मांग रहा है आपसे जोय प्रमाण मांग रहा है टोटल पशु है आपसे जो प्रमाण मांग रहा है मिनट मिनट आपसे जो प्रमाण मांग रहा है ो उसके बाद उसको भक्त बनाएंगे भाई साहब मैं आपसे पूछ रहा हूं जो आपसे प्रमाण मांग रहा है व टोटल पशु है क्या आपको क्या कुछ प्रॉब्लम है क्या प्रभु आपने कहाना ग को देने की आवश्यकता नहीं होती है हां तो मैं जब बो आपने जो गधा वर्ड है किसके लिए यूज किया मेरे लिए या फिर कुरान को फॉलो करने वालो के लिए ये भी बता दीजिए आपके लिए नहीं भाई आप तो इतने बड़े महान इतने शास्त्र का जानते हैं आप तो ज्ञानी है मैं तो आपको गुरु के जैसा मानता हूं प्रभ
01:06:41:20 तो मैं उन लोगों के लिए बोल रहा हूं जो लोग ने क्या भगवान को नहीं जानते हैं अब जब उनको मैं कह रहा हूं ना कहा ये कहा का अगर हम सिद्धांत को अंतिम मान ले कि यह जो उसको शास्त्रीय प्रमाण नहीं द जाए व गधे है तो इसका मतलब है कि जो भी व्यक्ति पशु के जैसा व्यवहार कर रहा है उसको शास्त्र का जन नहीं मैंने क्या बोला मैंने बोला की शास्त्र जन तभी देना चाहिए जब शास्त्र ज्ञान लेने के अधिकारी बन जाए जब बच्चा रहता है ब क्या
01:07:19:14 करतेस आधार होगी उस देते आप बचपन ज पैदा हुए जब कोई बच्चा पैदा होता हैरे शास्त्र नहीं पढे मगर आज हमारे अंदर जितनी भी मानवता है व शास्त्र से ही आई है ना वो माता पिता के द्वारा प्रथम गु माता पिता होते भागवत में लिखा है तो हमको क्या क्या करना पड़ेगा उनका माता पिता बनके उनको प संस्कार देना पड़ेगा माता पिता ने शास्त्र के बाहर का ज्ञान दिया क्या अगर अगर हम आज मनुष्य जैसे बन पाए तो तो हमको क्या माता पिता ने शास्त्रों के बाहर का ज्ञान दिया था क्या एगजैक्टली वैसा ही नहीं कि हम क्या कर रहे हैं शास्त्रों का ज्ञान लेके वो जैसे उसको समझ सकते हैं उसको वैसा बना के वो बच्चों लोगों को जो लोग अभी मूर्ख हैं उनको हम पिला देते हैं ये है शास्त्रों का ज्ञान अब वो लोग ये जब पी लेते हैं तो आगे चलकर मनुष्य बन जाते हैं फिर उनको हम बोल देते हैं कि आप अभी नहीं क्या भगवत गीता पढ़ो हरे कृष्णा का जप करो अब मुस्लिम एंड क्रिश्चियन कुल मिलाकर के मैं तो कुल मिलाकर के मैं तो आपसे पूछ रहा हूं ना अरे भाई ठीक है ठीक है ठीक है मैं तो आपसे
01:08:36:18 पूछ अभी मैं तो आपसे पूछ रहा हूं ना मैं तो आपके हिसाब से पशु नहीं गदा नहीं ना आप तो महान हम गुरु तुल्य मित्र है लेकिन गुरु तुल्य हा तो अभी मैं आपसे पूछ रहा हूं कि अगर किसी ने रूप के बारे में नहीं सुना है तो वो जो है य नहीं जानता है कि वो कौन है इसका शास्त्रीय प्रमाण मुझे दीजिए मैं तो पूछ रहा हूं किसका शास्त्र प्रमाण भगवान का नहीं इस नियम का सिद्धांत आपने दिया है कि अगर कोई व्यक्ति उसके रूप के बारे में नहीं जानता है तो इससे सिद्ध होता है कि वो नहीं जानता कि वो कौन है जब तक वो रूप के बारे में नहीं जानेगा उससे सिद्ध होगा कि वो नहीं जानता कि वो कौन है ये इसके लिए मुझे प्रमाण चाहिए हा अभी नहीं क्या मैं आपको एक बार एक मुस्लिम ने मैं जब कुछ फल खरीद रहा था तो उस समय क्या उन्होने बो आपका सुन लेता आपका व्याख्यान सुन लेता हूं मगर मैं उससे पहले पूछ रहा पूछ रहा हूं क्या आपके पास इस बारे में शास्त्रीय प्रमाण है या नहीं ई शास्त्र प्रमाण दे रहा सनातन शास्त्र का प्रमाण है सनातन शास्त्र का प्रमाण
01:09:51:21 दे रहा बाबा चिंता मत तो एक व्यक्ति जब को जी आज एकादशी है थोड़ा फ्रूट ज्यादा दीजिए और वो फल वाला जो है मुस्लिम था तो उसने बोला क्यों आपका भगवान खाते हैं क्या तो उसने बोला कि आपके भगवान जब खाते हैं तो फोटो घीस के भेज देना मेरे को तो मैंने उसको तुरंत बोला क्यों भाई आप जब नमाज पढ़ते हो उसको कोई सुनता है क्या जब नहीं क्या बोलता हा हमारा ला सुनता है ना जब सुनता है तो फोटो ीच के भेज देना मैंने भी वैसे ही बताया उसको तो अबने का क्या हुआ वो बोला कि हां सुनता तो है मैं बोला कैसे सुनता है उसने मेरे बो तुम कैसे सुनते हो मैं बोला मैं अपने कान से सुनता हूं तो उसने क्या बोला हमारे आले भी अपने कान से सुनते हैं हां अगर तुम्हारा अल्लाह का कान है तो सिर्फ कान ही है क्या आंख नहीं है नाक नहीं है मुख नहीं है खाली कान तो नहीं हो सकता ना सब कुछ हो सकता है हां अगर तुमको नहीं पता अभी अब नहीं क्या हमारे मुख और भगवान के मुख में बहुत सारा फर्क है भगवान कैसे है कंदर प कोट कमनीय विशेष शोभ वो करोड़ काम देव से
01:11:06:28 क्या ज्यादा सुंदर है उनका बात करते हैं उसी प्रकार आपके जो अल्लाह है उसका भी अगर कान है तो आख कान नाक सब कुछ है तो यह बताओ तुमको अल्लाह कौन है तुमको पता है क्या व बो मुझे नहीं पता तो हम जो बता रहे सुनो वही अल्लाह ने क्या हमारे कृष्ण है क्या है क्या बता रहे हो आप वही तु जो तुम बोल रहे हो कि व अल्लाह जो सुनता है बोल रहे हो ना आपको पता है वै कैसा दिखता है क्या करता है बोले नहीं पता तो हम बोले अगर तुमको नहीं पता तो हमारा स्वीकार करो वो अल्ला कृष्ण है उसको पूजा करो अच्छा ठीक है अब ये बताइए क्या आप गुरु परंपरा को मानते हैं 100 पर ठीक तो यदि कोई सनातन धर्म के रेफरेंस से संदर्भ से कोई बयान कहीं पर दे देगा और वो परंपरा प्राप्त आचार्य के द्वारा दिया गया बयान नहीं होगा तो क्या उसको हिंदू धर्म की तरफ से माना जाना चाहिए सनातन सिद्धांतों के सनातन की तरफ से माना जाना चाहिए हा देखिए कोई हिंदू घर में जन्म लेकर के
01:12:22:02 हिंदू कोई हिंदू घर में जन्म लेकर के यदि कहीं पर कोई बयान दे दे और वो बयान हमारी जो परंपरा है गुरु परंपरा उससे उससे जो है प्रमाणिक बयान ना हो तो क्या हम उसे हिंदू धर्म का बयान मान ले हा तो अगर यहां पे आप बोल रहे हो कि अगर कोई व्यक्ति अगर कुछ भी बोल दे तो उसको क्या प्रामाणिक माने यही प्रश्न है ना मैं बोल रहा हूं हिंदू धर्म के संदर्भ से यदि कोई व्यक्ति कोई भी उटांग बात बोल दे कहीं प तो क्या ये माने कि ये हिंदू पूरा जो सनातन धर्म है उसका स्ट्रक्चर है ये उसका निचोड़ है ये जो बोल रहा है ना तो फिर आप जो मुस्लिम की तरफ से जो पक्ष प्रस्तुत कर रहे हो वो कौन था क्या था कुछ पता है आपको अगर आप मुफ्ती वहां के जो वहां के जो स्कॉलर्स होते हैं वहां के जो वो होते हैं वो बोलते आपको कि भाई हमारा जो अल्लाह है वो बिना कानों के सुन सकता है उसको कानों की आवश्यकता नहीं है हमारा जो अल्लाह है व बिना आंखों के देख सकता है उसको आप की आवश्यकता नहीं है व बोलता आपको तो आप एक किसी अज्ञात व्यक्ति के आधार पर उनकी मान्यताओं को डिसाइड कर ले रहे हो जज कर ले रहे हो यह कहां तक सही
01:13:37:12 है आपने अभी तक फिर भी नहीं समझा मैं यह बोल रहा हूं जब नहीं क्या हम उसको नहीं क्या ये प्रूव करके बता रहे हैं क्या जिससे आपने बात की थी वो वहा का कोई परंपरा प्राप्त विद्वान है क्योंकि सेन लेशन को वो भी मानते क्या जिससे आपने बात की थी वो कोई परंपरा प्राप्त वहा का विद्वान था एक्चुअली मैंने परंपरा प्राप्त विद्वान से भी बात किया है वह कौन था उनके मौलवी वगैरे थे जो सनातन उनके जो इलाम के मौलवी उनके जो पुजारी जो लोग रहते ना पुजारी उनके पंडित नाम क्या था उन नाम क्या मोहम्मद अली अभी भी है वो से प्रमाण य वीडियो देखेंगे तो देखेंगे उनका पक्ष कैसे उन्होने रखा है बोल रहे अला से खाता चलो आगे बढ़ते अगर आपने वहा के ट्रेडिशनल विद्वान से बात की थ तोय अच्छी बात
01:14:49:24 है मगर फिर भी मगर फिर भी एक बात य पर अधूरी कि अगर हमने किसी के रूप को नहीं देखा है तो इससे सिद्ध नहीं होता है कि हम उसे नहीं जानते हैं और अगर सिद्ध होता है तो आपको मुझे आपको मुझे संतुष्ट करने के लिए सनातन सिद्धांत देना है मैंने अभी आपसे पूछा था क्या आपके पास सनातन सिद्धांत है तो आपने कहा था आपको सनातन सिद्धांत ही दे रहा हूं शास्त्र से दे रहा हूं मगर अभी तक आपने शास्त्र से वो वचन नहीं दिया कि अगर हम किसी के रूप को नहीं जान नहीं तो इससे हो जाएगा हम उसको नहीं जानते कि वो कौन हैमा जी आप अपना दिमाग लगा के प्रश्न देखिए आपने शास्त्र पढ़े हो बहुत अच्छे तर्क लगाने में भी नहीं बहुत पंगत हो आप आप क्या करते हो इधर से उधर से मोड़ के नहीं क्या आप अपना दिखाना चाहते हो सिंपल सी बात है आपको मैंने पहले बता दिया आप मेरे मित्र जैसे हो इसलिए क्या मैं आपको क्लियर कट बता रहा हूं जब नहीं क्या एक शास्त्र में दिया गया है किरा ंद पुलिन पुल कसाद आबीर सुंभ यवन कसा दया इन सब लोगों ने क्या अगर भगवान का अगर नाम लेंगे तो उनका उद्धार
01:16:04:28 हो सकता है तो उनको भगवान का नाम देने का अगर कोई जाकर दे रहा है तो वो कोई गलत नहीं कर रहा है पहला चीज आपको मतलब मैंने आपसे नहीं पूछा कि आप जो कर रहे हैं वो सही कर रहे हैं नाम दे कर के या गलत कर रहे हैं ये विषय अंतर होता है आप पहले बात हो रही है अभी बात ये अटकी है हमारी कि अगर हम किसी को नहीं जानते हैं तो अगर हमने किसी को देखा नहीं है अगर हम उसके रूप को नहीं जानते देखिए आप मुझे नहीं बोलने देंगे नहीं अभी बोलने नहीं दूंगा इसलिए क्योंकि आप इसको पहले बताओ कि हम जो कर रहे हैं वो सही है या गलत बाकी बात बाद में गलत हम अगर गलत गलत कर रहे सनातन के नाम पर सनातना भास बांटते हो आप धर्म के नाम पर धर्मा भास बांटते हो आप आध्यात्म क्या जजमेंट बनता अगर कहीं अगर सुनिए पर्शियन भाषा में सुनिए अब नाम बाटने की बात ही बता देर हू आपने क्या पर्शियन भाषा में राम का अर्थ नौकर होता है पर्शियन भाषा में राम का अर्थ नौकर होता है उस परिपेक्ष में यदि कोई राम नाम का रट लगाएगा तो हम उसके साथ नहीं है अगर वो राम का अर्थ नौकर समझते
01:17:20:02 हुए टेगा तो हम उसके साथ नहीं है ये श्लोक का मिनिंग बता भागवत आपने मुझसे पूछा सही और गलत आपने मुझसे पूछा सही और गलत सुनि आपने मुझसे पूछा है सही और गलत अभी अभी अभी अभी देखिए आप निर्णायक मत बनिए नहीं तो व ब हो जाए नि बर निर्णय बने तो नि बना पड़ेगा आपसे मैंने जो पूछा है जो आप उसके पीछे डेफिनेशन दे रहे हैं क्या वो सही है तो आपसे मैंने पूछ अभी आपने कहा यदि कोई व्यक्ति किसी के रूप को नहीं जानता है तो उससे सिद्ध होता है कि हम उसे नहीं जानते हम नहीं जानते वो कौन है अब मैं आपसे पूछ रहा हूं रूप को ना जानने से यह सिद्ध कहां से होता है कि हम नहीं जानते वो कौन है दुनिया में ऐसी बहुत सी चीज जिनके बारे में मैंने सिर्फ सुना है उनके रूप के बारे में मैंने कुछ नहीं सुना है फिर भी मैं जानता हूं वो कौन है आपने भी दुनिया में ऐसी बहुत सी चीज है जिनके बारे में आपने सुना है कि वो ऐसे ऐसे है मगर उनके के बारे में आपने नहीं सुना फिर भी आप जानते हो आप कहते हो कि वो कौन है अगर आप मेरी बात से सहमत नहीं है तो मुझे संतुष्ट कराने के लिए मुझे शास्त्र का वचन दीजिए आपने कहा
01:18:35:07 कि मैं शास्त्र का वचन दे रहा हूं मगर आपने दिया नहीं आपने एक आपके साथ जो घटनाक्रम हुआ रू दिया मत बोलिए मैंने शास्त्र का प्रमाण दिया किरा हु पुलि पुलक आर सुभ कया शस्त्र का प्रमाण मैंने आपसे इस बारे में मा मैंने आपसे शास्त्र का प्रमाण इस बारे में मांगा है कि हमारे किसी के रूप किसी के रूप के बारे में ना जानने से ये सिद्ध होता है कि हम उसे नहीं जानते इसके लिए कोई शास्त्रीय प्रमाण दीजिए अगर आप चाहते हैं कि मैं आपके इस बात को मान लू भा क्यों बेक फालतू का डिबेट कर रहे हो आप गलत मत बोलो ये तो ये तो जनता देखेगी कौन निर्णायक बन रहा है कौन फालतू बोल रहा है कौन विषयात कर रहा है ये सब जनता देखेगी
01:19:28:18 देखो आप कर रहे हो आप ये भी बोलो आप ये भी बोलो आप य भी बोलो सब बोलूंगा चिंता मत करो मैं कोई डरने वाला व्यक्ति से नहीं अच्छा चलिए नेक्स्ट टॉपिक पर आते है अब नेक्स्ट टॉपिक पर आ जाते है यस नेक्स्ट टॉपिक क्या क्या स्न के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है वो सर्वशक्तिमान है यस ठीक क्या वो किसी भी प्रकार के नियम के नीचे नहीं है क्या वो किसी प्रकार के नियम के नीचे आने वाला ना होकर सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है यस अच्छा तो क्या वो सब कुछ कर सकता है यस
01:20:27:09 ठीक है अब मुझे बताइए क्या वो शिव बनने के बाद वापस कृष्ण बन सकता है अगर कृष्णा चाहे तो अगर कृष्ण चाहे तो बन सकता है शिव जी चाहे तो ब यानी कि जब शिव के रूप में यानी कि जब शिव के रूप में कृष्ण आते हैं तब भी वो पूर्ण होते हैं ह पर पूण होते हैं वो सब कुछ कर सकते हैं जो कृष्ण कर सकते
01:21:04:03 हैं अच्छा तो इसका अर्थ है कि जो य बात बोली जाती है कि जिस प्रकार दू से दही बनता है पर दही से र नहीं उसी प्रकार से से कृष्ण बनते हैं व कृष्ण से शिव बनते हैं पर कृष्ण से शिव से कृष्ण नहीं बन सकते य बात गलत है अगर कृष्ण चाहे तो दही को दूध बना सकते हैं मैंने आपसे यह पूछा है यह बातन की तरफ से बोली जाती है कि कृष्ण तो शिव बन सकते हैं पर शिव कृष्ण नहीं बन सकते य बात गलत है अभी बहुत अच्छा चीज बोले कि कृष्ण जो है शिव बन सकते हैं शिव जो है वो कृष्ण शिव अगर चाहे तो नहीं बन सकते क्योंकि भगवान ने एक पूर्ण व्यक्ति बनाया और सुनि सु एक्स सुन लीजिए येने क्या सपोज पकड़ लो मैं कृष्ण हूं और मैंने ऐसे नहीं य शिवजी निकाला यह शिव जी पूर्ण है और कृष्ण ने उनको बोला कि आप ये ये
01:22:03:10 ये सुन रहा हूं आपकी बात सुन रहा हूं ओके तो अगर सपोज मैं ली सपोज बोल रहा हूं य है नहीं अगर मैं कृष्ण हूं तो मैंने ऐसे करके शिवजी निकाला तो यह पूर्ण है य शिवजी और इनको नहीं क्या कृष्ण ने कार्य दिया आपको ये ये ये कार्य करना है तो बोले ठीक है तो अगर नहीं ऐसा दे दिया तो अब नहीं के शिवजी जो है व पूर्ण होने के बाद भी व वही कार्य करेंगे जितना उनको दिया गया व ज्यादा नहीं करेंगे हा अगर कृष्ण अगर चाहे तो वो शिव जी से भी प्रकट हो सकते हैं उसके लिए आपको उदाहरण भी दे दूंगा साउथ में एक शिवलिंग है उनको वो एक राजा थे तो उन्होंने उनके जो भक्त थे उनको बोला कि तुम ओम नम श लेकिन वो व्यक्ति वैष्णव थे इसलिए नहीं उन्होंने कहा कि मैं ओम नम शिवाय नहीं बोलूंगा तो उन्होंने कहा ओम नमो नरसिंहा तो तुरंत नहीं किया उस समय क्या हुआ जैसे ही व राजा वो व्यक्ति को मारने के लिए गए तो शिवलिंग को फाड़ के नरसिंह प्रकट हुए और वह राजा को मार दिए मतलब शिवजी से भी कृष्णा प्रकट होते
01:23:19:12 हैं आपको कोई डाउट है तो बताइए हा डाउट में पूछ रहा हूं बोलिए आपने कहा कि ये मान लीजिए कृष्ण है हा आपने कहा कि मान लीजिए कृष्ण ठीक है हा अब इससे आपने शिव जी को अलग किया तो जो पूर्ण की परिभाषा है वो ये कहती है कि पूर्ण से पूर्ण ही निकलेगा हा ठीक है और आपने बाद में माना भी आपने माना भी कि कृष्ण जो है चाहे तो जो शिव जी है वो भी उनसे भी प्रकट हो सकते इसका मतलब है कि शिवजी में कृष्ण वाली सारी बात होनी चाहिए हा तभी तो प्रकट होंगे ना कृष्ण शिवजी
01:24:14:08 से तो शिवजी में कृष्ण वाली सारी बातें होनी चाहिए या नहीं य बताइए हा होना चाहिए होना चाहिए बिल्कुल क रहे तो जब शिव जी में कृष्ण वाली सारी बातें है शिवजी भी पूर्ण है और कृष्ण भी पूर्ण है तो फिर आप क्यों कह रहे है की शिव से कृष्ण नहीं बन सकते और अगर नहीं कह रहे हैं तो फिर आपकी जो व बात है कही जाती है जिस प्रकार दूध से दही और सब वो गलत है क्या अ क्या इसको फिर से आपको मैं बहुत क्लियर समझा देता हूं अब नहीं क्या शिव जी जब प्रकट हुए तो शिवजी कितना का करेंगे व कौन डिसाइड करेगा व कृष्ण ही करेंगे कृष्ण तो मेरे अंडर में क्या आपके अंडर में तो नहीं है ना मैं आपसे पूछ रहा हूं अगर आपको आंसर दे रहा ह काम कन करेगा नहीं कह रहा आपका कहने का अर्थ य है की क्योंकि कृष्ण नहीं चाहते आपका कहने का अर्थ य है क्योंकि कृष्ण नहीं चाहते इसलिए शिव से कृष्ण नहीं बनते ठीक है हा यस क्योंकि कृष्ण बाधित नहीं
01:25:30:22 है नहीं चाहते मैं आपसे एक करके पूछ आपका कहने का मतलब यह है की क्योंकि कृष्ण नहीं चाहते इसलिए जो शिव है उनसे जो है कृष्ण नहीं बन सकते क्योंकि कृष्ण चाहते नहीं है और जाहिर सी बात है उन्होने बोला होगा भागवत में आपके पास प्रमाण होगा हां है हा तो अगर कृष्ण नहीं क्योंकि कृष्ण नहीं चाहते हैं इसलिए आप ये बोलते हैं कि शिव से कृष्ण नहीं बन सकते
01:26:14:15 हम अच्छा अब मुझे आप ये बताइए क्या कृष्ण बोलिए मतलब आप मेरे को ये बताइए आप जो से बाधित है या फिर वो पूर्ण ईश्वर है पूर्ण श्वर हा तो अगर आपे तो उनके अन रूप भी पूर्ण है वो जितने बात है बात की बात है पहले कृष्ण पूर्ण है और वो जो चाहते हैं व उनके कोई बाधा नहीं है ना ठीक है तो अब ऐसा हुआ कृष्ण चाहते शिवजी प्रकट हो और एक दो तीन चार पाच यह पांच कार्य शिवजी करे तो अगर अगर वो उतना कर रहे हैं तो हमको या आपको कुछ प्रॉब्लम है नहीं प्रॉब्लम नहीं है मैं ये पूछ रहा हूं क्या शिवजी में वो सारी एबिलिटीज है देखिए करना ना करना अलग बात जैसे राम जीने ला कम उनकी लाए हा क्योंकि देखिए भगवान श
01:27:30:04 भगवान श्री कृष्ण की इच्छा है एबिलिटी है एबिलिटी है ना श्री कृष्ण भगवान के समान शिव जी में भी सारी कलाए सारी शक्तियां सब कुछ है हा जब कृष्ण चाहे तो वो प्रकट करा सकते हैं मैं आपसे जो पूछ रहा हूं ये कह रहा हूं कि भगवान शिव में भी वो सारे गुण है जो श जो श्री कृष्ण में है हां खाली शिव जीी से नहीं आप में भी है भगवान चाहे तो आप में भी प्रकट कर सकते हैं आपको भी नहीं क्या जैसे कोई जीव कभी कभी नहीं कि उनको भी अवतार कहा जाता है तो अगर कृष्ण चाहे तो कहीं पर भी नहीं कि पूर्ण होके प्रकट करा सकते हैल है अब आप अद्वैत अब आप द्वैत को छोड़ के अद्वैत में पहुंच रहे हैं अब क्या कर
01:28:25:22 देखो प्रभ हम क्या कर अचिंत भदा द को भी ले साथ में को साथ अचिंत भदा भी जाएंगे अगर य चर्चा ज्यादा लंबी नहीं हुई तो मैं ये देख रहा हूं कोई कमेंट कैसे आएगा पर मैं बैठा हूं मतलब भगवान शिव जी को भगवान कृष्ण नेही दिया है तो इसीलिए शिव जी ने क्या कभी कृष्ण बनते नहीं है वह अपने मर्यादा में रहते हैं हां अगर कृष्ण चाहे तो शिवजी में भी कृष्ण प्रकट हो सकते हैं अगर अगर कृष्ण चाहे तो खंबे फाड़ के भी प्रकट हो सकते हैं अगर कृष्ण चाहे तोय पूछ रहा हूं इसका मतलब यह कह रहे हैं आपके शिवजी में वो सारी शक्तिया है वो सारी गुण है जो सारी कलाए है जो कृष्ण में भी है हा लेकिन उनको भगवान ने इतना काम करने के लिए दिया है पाच काम करने का बेटा ज्यादा नहीं करने
01:29:28:14 का नहीं नहीं वो सही है वो सही है आप जो कह रहे हैं वो सही है व आप वो अभी के लिए मान लेता हूं अब मैं ये कह रहा हूं कि क्योंकि आप को भगवान श्री कृष्ण ने यह बताया है कि मैंने शिव जी को बनाया है और शिवजी जो है वही कार्य कर सकते हैं जो मैं कहता हूं इसलिए वो वो नहीं बन सकते क्योंकि मैं नहीं कि उससे जो है कृष्ण निकल सके इसलिए आप ये बातें कहते हैं कि कृष्ण तो शिव बन सकते हैं मगर शिव जो है कृष्ण नहीं बन सकते क्योंकि भगवान नहीं चाहते ठीक है और ये बात आपको भगवान ने बताई भी है ठीक अब मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या भगवान अपनी कही हुई बातों के विरुद्ध कार्य कर सकते हैं कर सकते
01:30:18:25 है भगवान तो फिर जब आपको उन्होने ये बताया है कि जो है शिव जीी जो है कृष्ण नहीं बनेंगे तो क्या उसके उलट शिवजी कृष्ण बन सकते हैं बना है मैंने आपको उदाहरण भी दिया एक जगह शिवजी कृष्ण बने आपको उदाहरण दिया एक भक्त है विषक सेन तो फिर तो फिर तो फिर तो फिर ये कहना फिर गलत है तो फिर ये कहना गलत है तो फिर ये कहना गलत है कि जिस प्रकार दूध से दही बन जाता है पर दही से दूध नहीं मगर उसी प्रकार कृष्ण तो शिव बन जाते हैं पर शिव जो है कृष्ण नहीं बन सकते तो फिर ये कहना गलत हो गया हम बाउंड कर रहे हा आपने सही बोला अ शिवजी चाहे तो कृष्ण नहीं बन सकते शिवजी शिवजी के अंदर शिवजी शिवजी एक मिनट शिवजी चाहे तो कृष्ण नहीं बन सकते यानी कि शिवजी के अंदर कुछ ऐसा है जो कृष्ण में है शिवजी में नहीं है हां वो है व भगवान के इच्छा के अनुसार काम करते हैं भगवान हो कृष्ण हो गए भगवान में भगवान में एक गुण ज्यादा है भगवान के पास गु ज्यादा है वो ले सकते हैं शिवजी निर्णय नहीं ले सकते तभी तो जा बाधित नहीं हुए ना अगर नहीं कि हम जबरदस्ती
01:31:34:07 नहीं किया बोल देंगे कि शिवजी जो चाहे व करित हो गए मतलब भगवान श्री कृष्ण कुछ चाहते हैं व हो नहीं रहा है नहीं देखिए कह रहा हूं एक गुण श्री कृष्ण भगवान में एक गुण ज्यादा है एक गुण ज्यादा बोलिए बोलिए बोलिए मैं तो बोल ही रहा हूं ना मैं बोल रहा हूं एक गुण ज्यादा है श्री कृष्ण में वो निर्णय ले सकते हैं मगर शिवजी निर्णय नहीं ले सकते एक गुण ज्यादा है हा आपने जैसे हमने बोला कि आपके कृष्ण क्या बाधित है हम बाधित नहीं है भगवान श्री कृष्ण चाहे कि उनकी जब इच्छा हुई तो शिवजी प्रकट हुए शिव जी कितना काम करेंगे वो कृष्ण ने डिसाइड किया अगर नहीं क्या अगर कृष्ण चाहते हैं मैंने आपसे पूछा क्या कृष्ण भगवान के पास एक एक शक्ति ज्यादा है निर्णय लेने की भगवान शिव से है कि नहीं इसका हां और ना मैंने का जवाब नहीं है मैंने आपको फिर से बो बोला क्योंकि कृष्ण बाधित नहीं है और उन्होंने शिव जी को प्रकट किया
01:32:49:22 और उनको कहा कि तुमको यह पांच कार्य करना है वो उतना करते हैं वो कभी भी नहीं क्या कृष्ण के ऊपर जका अर्थ तो य दिख रहा है की केवल केवल कार अल अलग है वही व्यक्ति ही शिव बन रहा है उम बाकी कोई तात्विक भेद नहीं है जैसे की कोई व्यक्ति अपने कपड़ बदल रू ार करता और व स्वयं भगवान भी है लेकिन वो काम करते हैं कृष्ण के हिसाब से अब पूछ है देखिए एपल दे मैं जो आपसे पूछ रहा हूं आपने कहा शिवजी पूर्ण है शिवजी में भी वो सारी बातें है जो कृष्ण में है तो शिवजी में य वाली बात नहीं है कि वह अपनी इच्छा अनुसार कुछ कर सके व कृष्ण के अनुसार करते है तोय ये वाली बात नहीं है ना अपनी इा के अनुसार करने की तो वो इसलिए नहीं क्या भगवान जो है पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण है और बाकी सब लोग पूर्ण है तो इसका मतलब की कृष्ण और शिव में अंतर है आपको कुछ प्रॉब्लम है क्या उसमें तो मैं वही तो आपसे पूछ रहा हूं ये कौन सी बात होती है जब
01:34:04:26 भी मैं आपसे कोई दृष्टांत पूछता हूं आप कहते हो आपको कुछ प्रॉब्लम है क्या उसमें भाई यहां पर हम लोग प्रॉब्लम है तभी तो आए हैं हा मेरे को तो प्रॉब्लम दिखने रहा है इसलिए मैं बोल रहा हूं अभी देखिए आपको एक और एक एग्जांपल मैं आपसे वही तोब जब आपसे दो टू बात पूछी जाती है तो आप ये बोलने लगते हो कि आपको कुछ प्रॉब्लम है भाई मैं पूछ आपने कहा शिवजी में वो सारी चीजें है जो कृष्ण में है मगर अभी आप ये कह रहे हो शिवजी अपनी इच्छा अनुसार कार्य नहीं कर सकते कृष्ण कर सकते हैं यानी कि अंतर है हम अगर शिव जी को हमें पूर्ण मानना है पूर्ण सिद्ध करना है तो हमें मानना पड़ेगा कि कृष्ण ही शिव बने हैं इसलिए उनमें कोई कमी नहीं है और हम ये जो कह रहे हैं ये केवल भक्ति रस के वशीभूत हो कर के कह रहे हैं कि जो कृष्ण का भक्त है उसको कृष्ण में ही सब कुछ दिखाई दे रहा है रस के रस के कारण वो ऐसी बातें कर रहा है कि कृष्ण तो शिव बन सकते हैं पर शिव कृष्ण नहीं बन सकते रस के कारण शिव पुराण में भी ऐसी बातें है कि शिवजी जो कर सकते हैं वो कृष्ण नहीं कर सकते रस के कारण मगर इनको हम तात्विक रूप से अंतिम निर्णायक रूप से सिद्धांत नहीं मान सकते कि जो शिव जीी कर सकते हैं वो कृष्ण नहीं कर सकते और जो कृष्ण कर सकते वो शिवजी नहीं कर सकते हम इसको तात्विक सिद्धांत के रूप में नहीं ले सकते हां मैंने
01:35:20:02 अ भी वही बोला अब देखिए शिव जी का बात हम छोड़ दीजिए अभी देखिए जगन्नाथ बलदेव सुभद्रा महारानी है तो बलदेव भी नहीं क्या भगवान ही है लेकिन वो भी नहीं क्या भगवान की इच्छा के अनुसार काम करते हैं हमारा जो सिद्धांत ऐसा है अकेला ईश्वर कृष्णा और बाकी सब भृति उनके सब दास है तो इसीलिए नहीं किया जो जी वो आपका भक्ति भाव हो सकता है मगर उसको आप अंतिम निर्णायक के रूप में नहीं ठोक सकते ना लोगों पर क्योंकि वो सचाई नहीं है देखो देखो आपके ऊपर हमने कभी आके थोपा नहीं कि आप जबरदस्ती नहीं कृष्ण को मानो चलिए ठीक चलिए इसको इसको भी ले लेते हैं हम इसको भी लेंगे हम इसको भी ले लेते हैं अब आपने कहा कि हमारा ऐसा है आपने क्या कहा कि हमारा ऐसा है ठीक है तो यहां पर परिस्थिति लग गई इसका मतलब आपके द्वारा दी जाने वाला जो ज्ञान है वो सनातन नहीं है 100 पर है अरे कैसे सनातन के लिए अथ वेद में आया जो किसी भी देश काल परिस्थिति से प्रभावित ना हो आप वो ज्ञान दे रहे कि हमारा ऐसा है आप सनातन सिद्धांत क्या है वो
01:36:35:06 बताइए हमारा ऐसा मत बताइए सनातन सिद्धांत बताइए सनातन सिद्धांत बताता हूं हमारे सिद्धांत के हिसाब से हम अगर कृष्ण भक्त है फिर हमारा ये हमारा जो परिस्थिति हो गई ना परिस्थिति हो गई ना हमारा ग है क्या ये सनातन विरुद्ध है क्या हमारे सिधांत के हिसाब से हमारा श मत कर हमारा करेंगे तो सनातन नहीं है तो सनातन क्या सनातन सि बता सनातन सनातन सिधांत क्या होता बता बोल दे प्र नहीं होता इससे मतलब नहीं कोई मेरा ऐसा मानना है उसका ऐसा सोचना है वसा माना जाता है तो व सनातन नहीं
01:37:22:15 है किसका क्या मानना है वो मत बताइए हां मेरे को ये बताइए भगवत गीता में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं मन मना भव मत भक्तो मया जीी माम नमस्कर तो यह सनातन है तो मैं शक्र करता हूं नहीं है तो फिर आप डिसाइड करिए क्या करना चाहिए मैं आपसे पूछ तो रहा हूं मैंने आपको बोला आपने कहा कि शिवजी में वो सारी चीजें हैं जो कृष्ण में भी है और लीला पूर्वक जब श्री कृष्ण से लीला पूर्वक तात्विक रूप से नहीं लीला पूर्वक जब श्री कृष्ण जो है शिव बनते हैं तो वो लीला पूर्वक कृष्ण की बात मानते हैं लिखा मगर वास्तविकता में कृष्ण कौन शास्त्र में अरे मैं लिखा हुआ नहीं बता रहा हूं मैं लि लिखा हुआ भी बता दूंगा लिखा हुआ भी बता दूंगा अगर अभी मैं ये नहीं कह रहा हूं सिद्धांत है मैं आपके भाव को मैं आपके भाव को समझने का प्रयास कर रहा हूं वो बोल रहा हूं आपका कहने का अर्थ यह है कि शिवजी में वो सारी बाते हैं जो कृष्ण में भी है मगर लीला पूर्वक जब कृष्ण शिव बन जाते हैं तो शिव के रूप में वो सारे कार्य नहीं करते हैं जो सारे कार्य वो कृष्ण बनके कर सकते हैं मगर तात्विक रूप से इनम कोई भेद नहीं है
01:38:37:19 अगर तात्विक रूप से भेद नहीं है तो फिर यह कहना गलत है कि शिवजी में कम क्वालिटीज है और अगर तात्विक रूप से भेद है तो यह कहना गलत है कि शिवजी में भी वो सारी क्वालिटीज है जो कृष्ण में है से कौन सी बात माने अभी तत्व के हिसाब से दूध से दही बनता है और दही कभी दूध नहीं बन सकता फिर आप भक्तो देखिए मैं सनातन सिद्धांत की आप बात करिए भक्तों के हिसाब से क्या मत बात करिए परिस्थिति मत बताइए बाबा मैं सनातन सिद्धांत की बात कर रहा हूं ब्रह्म संहिता में लिखा है ब्रह्म देखिए फिर वही बात आ जाएगी हमारे जो पुराण ग्रंथ है ब्रह्म समता ग्रंथ है इनमें कई जगह पर रस पूर्वक बात भी हुई है जैसे आपकी 2.2 भगवत गीता में ही रस पूर्वक का कि विष्णु में वो सारी बातें नहीं है जो कृष्ण में है अब इसको रस मानेंगे या ये माने कि कृष्ण जो है कृष्ण विष्णु से भी अलग है है तत्व है क्या है तत्व तो चलिए उस पर आ जाएंगे अभी आप ये मत बताइएगा कि भक्ति भक्ति का ये है सनातन बताइए आप ये मत बताइए हमारा सिद्धांत है हां ठीक है
01:39:53:18 हमारा बोले तो मैं सनातन बोल रहा था अगर आपका कुछ अलग है तो मेरे को नहीं पता अभी भाग सनातन की डेफिनेशन क्या है भाई साहब आप ये बताइए मुझे पहले हा बहुत अच्छी प्रश्न पूछा आपने सत चित और आनंद से आता है सनातन जो कहा लिखा है बोलिए बोलिए कहां लिखा है क लिखा है सच्चिदानंद कहा लिखा है हा लिखा है क जग लिखा है सत्य ब कई जगह लिखा सचन वही कृष्ण
01:40:32:04 है मैंने आपसे पूछा सनातन की परिभाषा शास्त्रों से बताइए शस्त्र मैंने बाहर से बताया क्या अरे और क्या सनातन की परिभाषा है नित्य स्थाई सनातन नित स्थाई जो किसी भी देश काल परिस्थिति में ना बदले उसका नाम है अब आप सच्च आनंद कोला रहे हां कृष्ण परिवर्तन नहीं होते है अरे भाई कृष्ण की बात ही नहीं हो रही जब मैं आपसे ये पूछ रहा हूं कुछ नहीं दिख रहा है कुछ नहीं दिख रहा है सेटिंग्स की दिक्कत है कोई कमेंट्स नहीं दिख रहे इस
01:41:17:27 समय [संगीत] तो ठीक है नित जो मैंने आपसे पूछा है सनातन की परिभाषा क्या है तो आप जो है जो प्राप्त है मनुष्य का वो बता रहे हैं सच्चिदानंद मैंने कहा सनातन की परिभाषा क्या है कुल मिलाकर के सनातन की परिभाषा जो है वो ये है जो किसी भी देश का परिस्थिति में ना बदले मगर आप जब ज्ञान दे रहे हैं तो कह रहे कि हम किसी पर थोप नहीं रहे हम ऐसा मानते हैं तो आप जब ये कह देंगे कि हम ऐसा हमारा ऐसा मानना है तो फिर वो सनातन ज्ञान नहीं कहलाएगा क्योंकि सनातन ज्ञान प परिस्थिति हम बोले तो क्या हम बोले तो क्या हम बोले तो शस्त्र आपने कहा हमारा ऐसा मानना वैष्णव लोगों का अरे भाई हमारा बोले तो हमारे सनातन जो सिद्धांत के हिसाब से मैं बोल रहा हूं शास्त्र से बोलूंगा देखिए श्रीमद भागवत में एक श्लोक आता है ते च अंश कला उमस भगवान की अनेक कला है अंश है अंश के अंश है लेकिन कृष्ण स्तु भगवान स्वयं तो अभी नहीं जब कृष्णत भगवान स्वय कहा गया तो अब मेरे को इसको स्वीकार करना चाहिए कि मेरे को आप स्वीकार
01:42:33:01 करना बताइ आप अगर भगवतम से बड़े हैं भाई बात तो ये चल रही थी ना सुनिए मैं देखिए आप विषयात कर रहे हैं आप विष कर रहे सनातन की परिभाषा मैंने तब पूछी आपसे इसलिए पूछी क्योंकि आप ये कह रहे हैं कि जब कृष्ण से शिव बने तो शिव के अंदर सारी एबिलिटी है मगर वो जो है जब क्या कहते है एक एबिलिटी नहीं है कि अपनी इच्छा अनुसार कार्य कर सके य एटी में नहीं है ठीक है अब जब मैंने आपसे ये पूछा यदि शिव के अंदर एक एक सूत भी कमी है तो इसका अर्थ है कि जो शिव है व पूण नहीं है तो आपका यह कहना गलत है शिव पूर्ण है और अगर वो उनके अंदर व सारी चीज व अपनी इच्छा अनुसार भी कार्य कर सकते हैं एक भी चीज ऐसी नहीं है जो ऐसी ना हो जो कृष्ण में उम ना हो तो फिर आपका यह कहना गलत है कि व अपनी इच्छा अनुसार निर्णय नहीं कर सकते यह सब रस की बाते है तो जब मैंने आपसे प्रश्न किया उसके उत्तर में आपने कहना चालू किया कि हमारा ऐसा मानना है हम किसी पर थोप नहीं रहेरा
01:43:49:18 सनातन सिद्धांत अगर बता रहे हैं तो हमारा ऐसा मानना नहीं कहेंगे वो सत्य बता रहे हम किसी को मानना हो तो मानो नहीं मानना है तो मत मानो यही सत्य है हमारा ऐसा मानना है ये नहीं है तो इस इस परिपेक्ष में मैंने आपसे पूछा पहले आप जब आप ये नहीं मानोगे कि सनातन की परिभाषा क्या तो मैंने उस परिपेक्ष में आपसे सनातन की परिभाषा पूछी जब आपसे मैंने सनातन की परिभाषा पूछी तो आपने भागवत उस क भगवान सनातन नहीं है क्या आपकी बात माने मैंने कहा है क्या कि भगवान नहीं है मैंने कहा क्या तोब क्या कहना चाहते हो अरे भाई पहले पहले मुझे बताइए मैंने कहा कृष्ण भगवान नहीं है कि कहा कि नहीं कहा ये बताइए हां और देखिए वहां पे जब कहा गया कि भगवान मैंने ये कहा कृष्ण भगवान नहीं है मैंने ये कहा कृष्ण भगवान नहीं है मैंने ये कहा कृष्ण भगवान नहीं है हां पूछ रहा हू मैं आपसे पूछ हा बोलिए क्या प्रश्न पूछ रहे है मैंने अभी आपसे पूछा है कि कृष्ण भगवान है नहीं है मैंने ऐसा बोला क्या अने कुछ हा आपने ऐसा
01:45:04:20 कुछ बोला नहीं है कि भगवान पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण है तो आपने य क्यों कहा कि भागवत की माने की आपकी माने हा क्योंकि उसी भागवत में भगवान स्वयं को मैं नहीं मानता हूं ये मैंने कब बोला कृष्ण भगवान स्व को नहीं मानता हूं य मैंने कब बोला अगर मैंने नहीं बोला तो आप ने क्यों कहा कि आपकी माने कि भागवत की माने आप बोल रहे हैं कि जो आपने मुझे भागवत के अगेंस्ट क्यों दिखाया इसलिए दिखाया क्योंकि भागवत में यह कहा गया है कि वैष्णव नाम यथा संभु आपने मुझे भागवत के क्यों दिखाया इसलिए दिखाया क्योंकि आप बोल रहे हैं कि शिवजी और कृष्ण जो है भगवान स्वयं आपला
01:45:53:07 आप शिवजी और क की है आपने क भगवान स्वयं लाइन य की है उसके बारे में बताइए क्या मैंने उसका विरोध किया है और अगर नहीं किया तो आपने है कृष्णा और शिवजी अगर इक्वल है जब बोल रहे हैं यह बात मैं नहीं आप बोल रहे चलिए आपसे काफी देर चर्चा हो गई आप आए आभार है ठीक है बहुत ठीक आपसे बात ई बात ई अब किसी और दिन हम लोग चर्चा करेंगे दो घंटे लगभग हो चुके बात करते करते आपके आने के लिए आवान दर्शकों से दर्शकों से मेरा व है अपील कि आप अपने रिव्यू दीजिए की यह जो भाई साहब जो आए
01:46:46:02 हैं इनका जो है कैसा रहा आना और जाना तो अभी मैं दर्शकों को केवल अ ठीक है आराध जी फिर आपको किसी दिन आमंत्रित करेंगे आपके आने के लिए
01:47:29:01 आभार जी तो आपको मैं आशा करता हूं आज की चर्चा अच्छी लगी हो और आप किसी त तक पहुंच पाए कुछ टेक्निकल दिक्कत है तो मैं आप लोग कमेंट्स नहीं देख पा रहा हूं अगली बार और तैयारी के साथ आएंगे और चर्चा में आने के लिए सभी का धन्यवाद जय श्री राम अच्छा एक कुछ बातें मैं आपको जाते जाते बता दूं जैसे कि जो कंक्लूजन निकला व वही निकला कुल मिलाकर के जो हमेशा निकलता है जब हमने इनसे पूछा कि कुरान की सीमा का ईश्वर कृष्ण है तो ये बोलते नहीं है उनका ज्ञान अधूरा और गलत भी है अधूरा क्यों है क्योंकि भाई जो एक लाइन हमारे य लिखी है वही उनके य भी ख इसलिए वो अधूरा है विरुद्ध नहीं है गलत नहीं है इसके बाद फिर हमने जब इनसे पूछा कि वो जब आप कुरान के ईश्वर को कह सकते हो कृष्ण के समान है तो आप अ शिव पुराण के ईश्वर को क्यों नहीं कह सकते हो इसमें भी इनका जवाब था कि क्योंकि वो
01:48:44:06 जानते नहीं है कि वो कौन है अल्लाह इसलिए हम अल्लाह से मैच करा देते हैं मगर शिव को नहीं जान शिव को जानते इसलिए हम शिव से मैच नहीं कराते इस पर भी आप देख लीजिएगा कितना बड़ा अच्छा तर्क है और इसके बाद फिर बाद में दू ही वाली बात आई उन्होने बोला कि शिव जी में सारी एबिलिटी है जो कृष्ण में है मगर फिर बाद में जब य वाली बात आएगी व क्यों नहीं बन सकते तो अपनी इच्छा अनुसार नहीं बन सकते तो इच्छा वाली एबिलिटी है वो शिव में नहीं है वो अंतर हो रहा है इसका मतलब कृष्ण से जब शिव बन रहे हैं तो वो पूर्ण नहीं है मगर क्या है कि इनको ऐसी बात बोलनी है कि सबका मन रह जाए तो इसलिए ऐसी बात बा बोलेंगे कि शि पूर्ण भी है और अपनी इच्छानुसार काम भी नहीं कर सकते भाई अगर वो इच्छानुसार काम नहीं कर सकते तो पूर्ण क्या से बाधित हो गए और अगर अपनी इच्छा अनुसार कार्य कर सकते तो बाधित नहीं हुए तो इनको यह भी कहने में दिक्कत है कि वो बाधित है ये भी कहने में दिक्कत है कि वो अपनी इच्छा अनुसार काम कर सकते हैं तो इनको इसीलिए सारी बातें कहते हैं उनका ज्ञान जैसे कुरान के विषय में उका ज्ञान और ये अभी और बड़े मंच पर होंगे ना और बड़े मंच पर होंगे तो य भी नहीं कहे जोभी इन्होने अधूरा औरण कहा है तो संभवत य क जो इनके बड़े
01:49:59:21 डर य भी नहीं कहे और इनके कई ग्रंथ है हमारे पास जोभी ले नहीं तो ठीक है ये तीन पॉइंट पर बात हुई है काफी लंबी चर्चा हो गई दो घंटे हो चुके जहा बैठा हुआ य पर हवा की और कोई व्यवस्था नहीं है तो धीरे धीरे देखि स्वेटिंग आ चुकी पसीना आ चुका है तो इसलिए दो घंटे हो चुके तो मैंने कहा कि अब इसको जो है आगे बढ़ाया सभी को जय श्री राम हा मगर एक चीज और अच्छी है की इनका जो व्यवहार था व अभी तक जो आए थे उनसे थोड़ा बेटर थाक आधे अधूरे सही मगर सनातन से जुड़े हुए हैं व सनातना भास है व अलग बात है धर्मा भास है सभी को ज श्रम
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