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00:00:18:12 सभी को जय श्री राम ा पर हमारी बातचीत हुई है जतिन सेन जी से य स्न के फॉलोअर्स है और कुछ हमारे ऐसे उनके बीच वार्तालाप हुआ है कमेंट्स के माध्यम से जिसमें उनकी तरफ से हमारे कुछ सिद्धांतों के लिए सममिति प्रकट की गई है उसी के निमित्त एक ये लाइव चर्चा रखी है

00:01:14:26 वेट कर रहे हैं उनका कि वोह आए लाइव चर्चा में अगर कोई

00:04:19:01 अरविंद सिंह अरविंद जी आप सुन पा रहे हैं जी जय श्री राम आप अपना कैमरा ऑन कर लीजिए अवि

00:04:57:09 जी इधर दिख नहीं रहा जी अर जय श्री राम जय श्री राम जय श्री [प्रशंसा] राम आप इसकन की तरफ से चर्चा करने करना चाहते हैं क्योंकि हमारी यह शेड्यूल है यह चर्चा जो है यह चर्चा जो है शेड्यूल्ड है आपसे ही बात हो रही थी अभी ा पर नहीं जतिन जी से बात हो रही थी मेरे को जतिन जी ने लिंक भेजा है ये तो अ तो वो नहीं आ रहे हैं इस चैट में इस लाइव स्ट्रीम में वो

00:05:40:21 आएंगे एक मिनट जी वो एक ही मेंबर जुड़ सकता है तो वो आएंगे उनसे बात हो गई है तो आप को मैं हटा रहा हूं कोई बात

00:06:28:12 नहीं जी जतिन जी जय श्री राम जय श्री राम कैसे हैं आप मैं ठीक हूं आप कैसे हैं ब सारी की कृपा है आपकी आवाज बहुत कम आ रही है एक सेकंड मैं देखता

00:07:16:09 हूं मेरे पास माइक नहीं है ना तो फोन सही नहीं बहुत ज्यादा कमा रही है मतलब इतना तो मैं सुन नहीं पाऊंगा और कोई भी शायद हमारी जो वार्तालाप होगी जो भी उसको सुनने में बड़ी असुविधा होगी अब ठीक है थोड़ी कह सकते हैं कि काम चल जाएगा जी बताए आपने हमसे संपर्क किया था कि आपको लाइव चैट पर आना है बताए संपर्क इसलिए किया था मैंने क्योंकि मुझे बस य थोड़ा आप लाउड बोलिए क्योंकि सबसे पहले तो मुझे मुझे बस आपसे यह जानना है कि आपको वैष्ण विजम से दिक्कत है या इस कौन से दिक्कत

00:08:04:28 है मुझे जहां पर भी ईश्वर का खंडन होगा वेदों का खंडन होगा सार्वभौम सनातन सिद्धांतों का खंडन होगा उससे दिक्कत है और वैष्णव से मुझे कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि मैं स्वयं भी वैष्णव हूं आपके लिए आपने सुबह एक स्टोरी लगाई थी उसमें आपने लिखा था विष्णु द्रोही हां हमारे बारे में विष्णु द्रोही लिखा था तो आप हमें एक्सप्लेन करेंगे कि विष्णु द्रोही का अर्थ आप क्या लेते हैं सबसे पहली बात तो जो दूसरे देवताओं को और किसी को भी विष्णु समान मानता है व द्रोही है विष्णु का दही ये कहां लिखा हुआ है देखिए इसके पीछे बहुत सारी चीज मैंने आपसे एक चीज पूछी है देखिए विषयात ना करें इसीलिए लाइव चैट की है विष्णु के समान शिव दुर्गा का को समझना यह वेद वाक्य है पुराण का वाक्य है कहां का वाक्य है यह पद्म पुराण का वाक्य है एक्चुअली मैं आपको बता देता हूं य स्वयं भगवान शिव ने ही कहा था परमो विष्णु रेवत ज्ञानम मुक्ति साधन शास्त्र नाम बाकी सब भ्रम प्रदान करने

00:09:20:00 समझ गया उतना संस्कृत में जाने की आवश्यकता ही नहीं है मैं समझ गया आप जो कह रहे हैं वो सब मतलब हमने उस पर रिसर्च किया पढ़ा देखा अब मैं आपको बोलू कि शिवजी ने ही शिव पुराण में यह कहा है कि मैं विष्णु से बड़ा हूं तो क्या करें मैंने वही तो अभी बोला अगर आप उसका अर्थ समझेंगे तो शिवजी ने ही यह कहा है कि उसके अलावा जो भी ये बात शिवजी ने दो प्रकार की बातें कर दी अब किसी एक बात को माने या फिर कोई ऐसी बात माने जिसमें दोनों का मान रह जाए अगर आप मुझे सुनेंगे तभी तो जवाब दूंगा बरी बात तो पूरी होने दीजिए इसमें भगवान शिव स्वयं से यही कह रहे हैं ना कि उसके अलावा जो भी बातें कही जाती है वो सिर्फ मोह प्रदान करने के लिए भ्रम पैदा करने के लिए हैं अच्छा तो मैं यह कह रहा हूं कि यह बात कही किसने है शिव जी ने कही तो यानी कि हमें शिवजी पर विश्वास है बिल्कुल परम वैष्णव शज पर विश्वास है ना हा वैष्णव हा तो शिवजी ही तो दूसरी जगह य कह रहे हैं कि मैं हूं विष्णु

00:10:32:06 शास्त्र रेफरेंस दीजिए शिवजी ने य कहा में क रहे शिव पुराण में कह रहे हैं बहुत सी जगह भागवत पुराण में कहा जा रहा है श्री कृष्ण लिए हा उन्होंने यह कहा कि मैं विष्णु हूं मैं विष्णु हूं मैं ही विष्णु मैं ही ब्रह्मा हूं यह भी कहा है और मेरे से तुम सबकी उत्पत्ति हुई है यह भी कहा है और श्री कृष्ण ने विष्णु भगवान ने भी यह स्वीकारा है कि आपसे हम सबकी उत्पत्ति भागवत में यह है कि शिव जी से सबकी उत्पत्ति हुई है तो क्या इन बातों पर इन बातों को हम नजरअंदाज कर दे तो इसका अर्थ तो यह भी है कि कृष्ण तो भगवत गीता के सातव अध्याय के सातव श्लोक में तो यह भी कह रहे हैं मत प्रतर किंच दस धनंजय मुझसे परम कोई तत्व ही नहीं है मैं ही परम तत्व हूं क्या कृष्ण झूठ बोल रहे हैं कृष्ण दो तरह की बात वो परम तत्व है हमने मना थोड़ी ना किया है मगर वही तो शिव है मगर आप यह कहते हो कि जब वो शिव बनते हैं तो शिव चलिए इसको थ्योर कली समझ लेते थोड़ा आगे चलते हैं अभी क्लियर हो जाएगा अब आप मुझे बताइए आपकी ब्रह्म समता है उसमें लिखा हुआ है कि जिस प्रकार दूध से दही बन जाता है पर दही से दूध नहीं उसी प्रकार विष्णु तो शिव बन जाते हैं कृष्ण तो शिव बन जाते हैं पर शिव से वो

00:11:47:10 कृष्ण नहीं बन पाते हैं क्या कृष्ण शिव बनने के बाद बाधित हो जाते हैं द्वारा ठीक है और इसमें जो कि आपके जो गुरुदेव है उनका भी इसमें सहायता उन्होने ली है इसमें विष्णु विष्णु अष्टपदी है य शंकराचार्य जी ने लिखी है आदि शंकराचार्य मैंने आपसे एक सवाल पूछा है क्या क मैंने आपसे सवारी किताबों का रेफरेंस दीजिएगा पहले हम एक विषय तो तय कर ले हम बात किस पर कर रहे हैं मैंने आपसे पूछ जिस ईश्वर की पूजा कर रहे हैं क्या इकन के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर सर्वशक्तिमान है या नहीं है अगर है बिल्कुल अगर है आप मानते हैं वह सर्वशक्तिमान है बिल्कुल कोई ठीक है आप मानते अब मैं आपसे पूछ रहा हूं कि जिस प्रकार दूध से दही बन जाता है पर दही से दूध नहीं ये आपकी ब्रह्म समता में लिखा है आप इसको मानते हैं हां इसका उत्तर शिव जीी ही देते हैं अगर आप सुनना चाहे तो हां एक विषय तय कर ले एक विषय तय कर लेते हैं

00:13:02:22 एक विषय तय कर लेते हैं तो अब बात ये आती है कि कृष्ण जी शिव बनने के बाद दोबारा कृष्ण नहीं बन पा रहे हैं क्या वह सर्वशक्तिमान नहीं है यहां उनकी शक्ति घट जाती है इसमें ना आपको दो चीजों को पहले तो समझना पड़ेगा ठीक है एक जो मैं बताने जा रहा हूं वो सुना पड़ेगा और दूसरा जो ब्रह्म मद्व गोड़ी वैष्णव संप्रदाय का जो सिद्धांत है उसको समझना पड़ेगा सबसे पहली बात ये है शंकराचार्य स्वयं शव है कि नहीं आप शुरू करेंगे उससे पहले मैं कुछ चीजें क्लियर कर दूं आप किसी भी चीज को ये कहते हुए कि ब्रह्म वैष्णव गड़िया संप्रदाय का सिद्धांत है वह सिद्ध नहीं कर सकते आपको उसे वैदिक जो सनातन वैदिक वांग्मय है उससे सिद्ध करना पड़ेगा अगर आप यह कहते हैं कि हम भाई उनको मानते हैं वैष्णव को मानते हैं भले ही आप यह सिद्ध नहीं कर पा रहे कि वो सिद्धांत वेदों से पुराणों से मैच हो पा रहे हैं कि नहीं तो इसका अर्थ तो यह माना जाएगा ना कि आप उनको मानते हैं जो वेदों का विरोध करते हैं वेदों का विरोध किसने अगर कोई वैष्णव अगर ब्रह्म मध गोड़ी वैष्णव संप्रदाय का वेदों के विरोधी है क्या मैं वही तो कह रहा हूं आप शास्त्रों से दीजिए आप अपने संप्रदाय का मत मत बताइए शास्त्रों से बात करिए प्रमाण आप शास्त्रों से दीजिए अरे मैं आपके संप्रदाय की बुक ले

00:14:18:15 मैंने बस आपसे य क्वेश्चन किया कि विष्णु अष्टपदी शंकराचार्य जीने द्वारा रचित है कि नहीं है आप अपनी बात कहिए क्या कहना चाहते हैं तो विष्णु अष्टपदी में ही शंकराचार्य ने लिखा है कि मुझ में और आप में भेद ना होने पर भी मैं आपका हूं आप मेरे नहीं है क्योंकि तरंग ही समुद्र की होती है तरंग का समुद्र नहीं होता है तो दूध दही की जो बात की जाती है ना वैसे ही समुद्र और तरंग का जो रेफरेंस है दिया जाता है जो समुद्र है वो विष्णु है और तरंग जो है वो शिव है समुद्र से तरंग हो सकते है लेकिन तरंग से समुद्र

00:14:51:21 नहीं ठीक है आपकी बात पूरी हो गई जी अब यहां से दो क्वेश्चन पुट अप होते हैं एक शंकराचार्य जी ने का जो एक महावाक्य है शंकराचार्य जी ने जो उससे लिया है महावाक्य उसको कहा है अहम ब्रह्मास्मि उन्होंने कहा मैं ही ब्रह्म हूं इस चीज को स्वीकारा तो यह है परमार्थिक धरातल दो धरातल होते हैं एक व्यवहारिक धरातल एक परमार्थिक धरातल परमार्थिक धरातल पर यह तत्व सिद्ध है कि एक ही तत्व है दूसरा कोई तत्व ही नहीं है व्यवहारिक पर ऐसा कहा जा सकता है कि हा भाई लीला रूप में भगवान अलग अलग रूपों में प्रकट हो रहे हैं जीव भी बन रहे हैं जीव जगत जगदीश्वर के रूप में प्रकट हो रहे हैं तो अगर आप इस थ्योरी को मानेंगे शंकराचार्य जी की थ्योरी को मानेंगे तो शंकराचार्य जी की बाकी थ्योरी को भी मानना पड़ेगा तो शंकराचार्य जी की बाकी थ्योरी है उसके अनुसार तो एक तत्व के अलावा दूसरा तत्व ही नहीं है तो कहने का अर्थ यह है कि जो दिखाई दे रहा है वो व्यवहारिक धरातल पर दिखाई दे रहा है वस्तुतः सब कुछ एक ही है जैसे कि पृथ्वी गोल है पृथ्वी गोल है ना आप आप पृथ्वी

00:16:06:25 को गोल मानते हैं ना गोल मानते हैं कि नहीं बिल्कुल गोल है ना पृथ्वी हां जी हां जी बकल हमारा व्यवहार कैसा होता है पृथ्वी के साथ बिल्कुल अ दिखने में तो बिल्कुल ऐसे स्ट्रेट हमारा व्यवहार पृथ्वी चपटी है और वास्तविकता ये है कि पृथ्वी गोल है तो जो पृथ्वी की जो वास्तविकता है कि पृथ्वी गोल है वो हो गया प्राप्त व्य परमार्थिक धरातल एक तरीके से और जो व्यावहारिक धरातल है उसके अनुसार पृथ्वी हमारे लिए गोल है उसी तरीके से कि लीला रूप में जो भेद दिखाई दे रहा है लीला रूप में तत्व की दृष्टि से सब कुछ एक है तो यह आदि शंकराचार्य जी का सिद्धांत है और दूसरी बात य आती है अगर मान लिया जाए कि आदि शंकराचार्य जी ने भी ये लिखा है मैं तो आपसे पूछ रहा हूं क्या आप जिस ईश्वर की पूजा कर रहे हैं वह सर्वशक्तिमान है कि नहीं इसमें मेरे को बार-बार दोहराने की आवश्यकता नहीं है कि सर्वशक्तिमान है और आपके जो प्रश्न था उसका उत्तर मैंने ऑलरेडी शंकराचार्य कीने कहा वो जो लहर बनती है अब लहर पर आ जाते हैं आपने कहा वो जो लहर बनती है वो जो है शंकराचार्य ने कहा नहीं नहीं शंकराचार्य ने तो व्यावहारिक धरातल पर कहा है ना व्यवहारिक धरातल और परमार्थिक धरातल को आपको समझना होगा व्यवहारिक

00:17:22:08 धरातल पर जैसे कि जो हनुमान जी है हनुमान जी है हम कहते हैं सत्यम ज्ञान अनंतम ब्रह्म सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर किसी भी प्रकार के नियम से रहित है वह सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है हमने कहा सुन लीजिए एक मिनट सुन लीजिए मुझे पूरा करने दीजिए हमने कहा सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर जो है वह सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है अब मान के चलिए कृष्ण ही है कृष्ण भगवान क्या किसी स्त्री के साथ दुराचार कर सकते हैं नहीं नहीं कर सकते तो तो यहां तो इसका मतलब बाधित हो गया ईश्वर अर्थात यह है कि हमारे लिए कृष्ण भगवान का वही स्वरूप मान्य है जो कि स्त्री के साथ दुराचार ना करे तभी हम उसे कृष्ण के रूप में स्वीकारें हमारे लिए राम वही है जो कि एक स्त्री से ज्यादा विवाह ना करें तभी हम उसको राम के रूप में स्वीकार करेंगे हमारे लिए हनुमान जी वोह है जो ब्रह्मचर्य का पालन करें तभी हम उनको हनुमान जी के रूप में स्वीकार करेंगे वरना जब श्री कृष्ण ने विराट स्वरूप दिखाया तो उसमें से एक मुख हनुमान जी का भी था तो उस परमार्थिक धरातल पर देखा जाए तो हनुमान जी भी कृष्ण ही है तो

00:18:37:12 उस तरह से देखा जाए तो हनुमान जी ने स्त्री को छुआ कृष्ण के रूप में परंतु हम हनुमान जी उसी रूप को मानेंगे जो स्त्री को नहीं छुए तो ये व्यवहार और परमार्थ के अंतर को समझिए जो आदि शंकराचार्य जी ने कहा है आदि शंकराचार्य जी का आज मैंने दिन में भी दिया था मणि रत्न माला है बहुत सरल उसमें है व्याख्या में प्र प्रश्नोत्तरी उसमें दसवें नंबर में उनके शिष्य ने उनसे पूछा कि मैं उद्धार के लिए क्या करूं तो उन्होंने बताया कि विष्णु की पूजा करो शिव की पूजा करो उन्होंने भेद नहीं माना दूसरी बात जिस प्रकार से उन्होंने विष्णु के लिए कृष्ण के लिए अनेका अनेक ग्रंथ लिखे हैं उसी प्रकार से मैं एक मिनट लाकर दिखा देता

00:19:27:07 हूं मैं आशा करता हूं कि मुझे भी बोलने के लिए थोड़ा समय इतना मिलेगा उसी प्रकार से उन्होंने करीब 72 त्र लिखे हैं अलग-अलग भगवान के के अलग-अलग रूपों के प्रति उन सब में वो सभी जो भगवान जिसकी बात कर रहे हैं उसी की श्रेष्ठता वर्णित कर रहे हैं जैसे कि भगवान वेदव्यास ने जिस समय भगवती पुराण लिखा है उसमें भगवती को ही श्रेष्ठ लिखा है जिस समय शिव पुराण लिखा है उस समय शिव को ही श्रेष्ठ लिखा है जिस समय विष्णु पुराण लिखा है उस समय विष्णु को ही श्रेष्ठ लिखा है तो जिस समय जिसकी बात हो रही है जिसकी जिससे संबंधित वो व्याख्या है उसी को श्रेष लिखा है पूरी के शंकराचार्य जी का वक्तव्य दिखा दूंगा जिसमें वो एक जगह जी को बड़ा क रहे भगवती को बड़ा कह रहे वो तो चलो बात क्या क पर उने और शिव में भेद है देखो आपने अभी एक क्वेश्चन किया य

00:20:42:07 किया आपने पहले मेरे को एक क्वेश्चन का आंसर करिए पहले आप आप ब्रह्म में मानते हैं या शिव और विष्णु में मानते हैं पले य अपने बिव विष्णु परमार्थिक धरातल पर ब्रम ब्रह्म अच्छा फिर आपने क्या वो ब्रह्म सच्चिदानंद रूप है आपने जैसे अभी बोला अगर वो सच्चिदानंद रूप है तो व ब्रह्म कैसे है क ब्रह्म तो होता है तो निराकार हो सकता है तो उसका सच्चिदानंद रूप कैसे हो सकता है जो सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर है वही अपने आप को पांच रूपों में व्यक्त करता है वह व्यवहारिक हो जाता है जब वह ऋग्वेद में वचन है ऋग्वेद में वचन है कि जब वह अव्यावहारिक है जब उसके प्रति व्यवहार नहीं किया जा सकता है हम उसे छू नहीं सकते हम उसे देख नहीं सकते हम उसे सुन नहीं सकते यह अव्यावहारिक हो गया व्यवहार में ना आ सकने वाला

00:21:35:18 जब सत चित आनंद सत चित आनंद जानते म हा ब्रह्म में आनंद कैसे है सत चित आनंद का अर्थ क्या है सत का अर्थ है कभी ना बदला जाने वाला सत और चित का अर्थ है अखंड ज्ञान और आनंद का अर्थ है कभी ना खत्म होने वाला आनंद हां तो ब्रह्म में आनंद कैसे है देखिए हम लोगों की जो कन्वर्सेशन है वह बदलती जाएगी मैं दोबारा से एक बार आपको याद दिला दूं क्वेश्चन यह है क्या जो भगवान श्री कृष्ण है वह सर्वशक्तिमान है कि नहीं तो अपने आप दूध दही वाले उदाहरण के अनुसार उनको सही सर्वशक्तिमान सिद्ध करिए वो बताइए आप देखिए आपने जो बोला है मैं तो बस उसका उत्तर देने का प्रयास कर रहा हूं अगर आप पांच बातें बोल के मुझे कहोगे मेरी पहली वाली बात का उत्तर दो तो ऐसे तो नहीं चलेगा अगर आपने पांच बा ठी आप बात की पांच बातें छोड़ दीजिए एक एक बात को पकड़िए पहले इसको क्लियर करिए क्या जो इकोन के द्वारा पूजित होने वाला कृष्ण है वो सर्वशक्तिमान है कि नहीं यह बताइए आप तो इसका अर्थ तो यही हुआ अगर आप मुझसे प्रश्न करेंगे कि कोई दूध

00:22:50:21 बन दूध से दही बन सकती है और दही से दूध नहीं बन सकता इसका उत्तर दीजिए और अगर मैं शंकराचार्य को कोट करके कोई उत्तर दूंगा तो आप यही बोल देंगे नहीं परमार्थ शरार जी कीकर शंकराचार्य जी की और भी तो बुक्स है जिसम उन्होने उनको सर्वशक्तिमान कहा बोल तो रहा हूं रेफरेंस दे तो रहा हूं आपको यह तो देखो तो भाष्य सवाद है वो तो सारा मायावादी आगे उस पर हम बात कर लेंगे अभी फिलहाल आप इसकन के द्वारा पूजित होने वाले कृष्ण को सर्वशक्तिमान सिद्ध करिए यह जो ब्रह्म समता में रेफरेंस दिया गया है इसमें कहा गया है जिस प्रकार इसमें जो कहा गया है कि दूध से दही नहीं दही से दूध नहीं बन सकता है इसके आधार पर आप श्री कृष्ण को सर्वशक्तिमान सिद्ध करिए खैर ठीक है आपने श्रीपाद आदि शंकराचार्य का जो मैंने उत्तर दिया उसमें आपने भेद कर लिया चलो ठीक है अब अब देखिए ऐसा है जो सिद्धांतहा सदा उतर दे रहा हं उत्तर दे रहा हू उत्तर दे रहा हूं बन रहे उत्तर दे रहा हूं आप निर्णायक बन रहे हैं वो जो लहर सुनिए उस उत्तर को सुन लीजिए वो जो लहर आ रही है वो केवल हमारा

00:24:06:00 जो हमें जो दिखाई दे आदि शंकराचार्य के नजरिए से देखे तो वो जो लहर आ रही है उसमें रूप का भेद है तत्व का रूप का भेद नहीं है वही लहर है वही पानी है जो लहर दिखाई दे रहा है इसका अर्थ है तात्विक रूप से हम एक है तो फिर इसका मतलब है अगर इस सिद्धांत के अनुसार आप ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध कर रहे हैं तो फिर तो आप शंकर मान रहे जिसम जिसमें की रूप अलग-अलग दिखाई दे रहे हैं परंतु वास्तविक रूप एक ही है तो फिर उस रूप में आकर के बा हो गया ईश्वर अगर वो ब्रह्म जो पांच रूप ये तो मैं तब मान रहा हूं ना जब मैं ईश्वर के जो दिखाई देने वाला रूप है उसको ये मानू कि व जो है भ्रम है यह तो तब है ना यह तो तब है ना जो आप जो बात कह रहे हो वो जो दिखाई देने वाला रूप है वो भ्रम है जब उसको भ्रम मानेंगे तब आप यह कह पाएंगे कि हां वो बाधित हुआ अगर आप वो भ्रम नहीं मानेंगे आप तो भ्रम नहीं मानते उसको आप तो कहते हो जो भी आंखों से दिखाई दे रहा है सब कुछ सत्य है माया को मानते ही नहीं हो आप आप

00:25:11:26 मानते माया विष्णु से सदाशिव महाविष्णु से सदाशिव का रूप अगर आप घोड़ वैष्ण कहा हमलोग भटक जाएंगे बात ी हो जाएगी मैं आपसे कह रहा हूं शंकराचार्य जी का जो आपने कोट किया है उसको आप साइड में रखिए आप अपने सिद्धांत के अनुसार यह सिद्ध करिए जो आप जानते हो जो आप मानते हो उसके अनुसार य सिद्ध करिए कि क्या कहते हैं कि इसकन के द्वारा पूजित होने वाला जो ईश्वर है वह सर्वशक्तिमान है यह बताइए आप मैं आपने जो दूध दही के आप आए हैं ना बात प उसी का उत्तर दूंगा मैं दूध मतलब महाविष्णु ठीक है और दही मतलब सदाशिव अब दूध से दही तो बना विष्णु तत्व से शिव तत्व अलग तो हुआ परंतु अब ये समझने की चीज है महा विष्णु से शिव निकले हैं अब अगर आप सिद्धांत की बात कर रहे आपका सिद्धांत क्या मैं वो समझा रहा हूं जो कि महाविष्णु से सदा शिव निकले ठीक है लेकिन वो सदा महाविष्णु सदाशिव में नहीं जा सकते हैं वो सदाशिव महाविष्णु में वापस चले जाएंगे परंतु वो सदाशिव महाविष्णु नहीं बन सकते हैं क्यों क्योंकि हमारा जो सिद्धांत है वो यही है कि कृष्ण ही

00:26:19:07 परमेश्वर अभी मैंने आप करने कोश कर इसको एक एक करके क्लियर करते हैं जब महाविष्णु शिव बने तो उनके अंदर कुछ विकृति आई कुछ कमी आई क्वालिटीज में गिरावट आई क्या आई वो पूर्ण नहीं रहे के संपक में माया के संपर्क में जब शिव होते हैं व तो इसका अर्थ य है कृष्ण माया के संपर्क में आते हैं तो उन वो बाधित हो जाते हैं कृष्ण माया के संपर्क में नहीं आते हैं कृ कृष्ण कृष्ण के कृष्ण से अलग होते हैं सदाशिव वो माया के संपर्क में आते कृ की इ जब कृ कोई तत्व अलग इसका मतलब अगर इच्छा हुई तो वापस कृष्ण बन सकते हैं वह कृष्ण नहीं बन सकते वो कृष्ण में समा सकते हैं ऐसा हम कह सकते हैं मैं ये पूछ रहा हूं अगर इच्छा हुई तो वापस कृष्ण बन सकते शव कृष्ण नहीं बन सकते हैं शिव कृष्ण नहीं बन सकते ये ये तो आपका क्लेम है अभी हम बात कर रहे हैं आप ऐसे उंगली दिखा कर के अपने क्लेम को आखरी बात मत बताइए मैं आपसे पूछ रहा हूं कि जब विष्णु माया के संपर्क में आते हैं विष्णु से अलग होने के बाद वो जो टुकड़ा है वो जो अंश है जो

00:27:34:10 शिव कह रहे हो जिसे आप वो जब माया के संपर्क में आता है वो अपूर्ण हो जाता है तो मैं पूछ रहा हूं क्या अपने एक तिनके मात्र के अंश में ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं शिव जीी भी सर्वशक्तिमान है क्योंकि वो विष्णु तत्व से निकले हैं शिव तत्व से निकले वो सारे कार्य कर सकते हैं जो विष्णु कर सकते हैं मैं पूछ रहा हूं वो सारे कार्य कर सकते हैं जो सब कार्य कर सकते आप मेरे को सुन नहीं रहे हैं अगर आप सुने अगर मेरे को बीच बच में का अगर आप बीच बीच में काटेंगे तो फिर नहीं हो सकता है ये सब है ना विष्णु देखो मेरी बात को समझने का प्रयास कीजिए महाविष्णु जो तत्व उनसे विष्णु से जो तत्व अलग होता है व शिव तत्व है ठीक है परंतु विष्णु तत्व से शिव तत्व आ सकता है शिव तत्व से विष्णु तत्व नहीं आ सकता है अब कोई कहे कि वो विष्णु ही है जो शिव बने विष्णु शिव नहीं बने हैं विष्णु ने एक क्रिएशन वि की क्रिएशन है वो शिव नहीं बनते हैं आप यह कह रहे हो जी ये मैं य कह रहा हूं मतलब विष्णु ने अपने मन में विष्णु भगवान ने कुछ सोचा और जो है सामने वो प्रकट हो का उधार करने तामस का उद्धार करने के लिए इसलिए उन्होने विषय अंतर हो जाएगा वो आगे

00:28:49:12 बात कर लेंगे वि भगवान मैं पूछ रहा हूं आपने कहा वो क्रिएट बनते नहीं है आपने य कहाना उसका उतर ऐसा दे रहा हूं क्योंकि उ आपसे पूछ रहा व क्रिएट करते हैं बनते नहीं है नहीं अपने में से तत्व को अलग करते हैं ऐसा किससे किससे विष्णु त विष्णु से जब तत्व अलग होता है तो मैं वही पूछ रहा हूं जब मुझसे मेरा कोई टुकड़ा अलग हुआ तो उस टुकड़े में मैं सर्वशक्तिमान हूं कि नहीं शक्तिमान नहीं है बिल्कुल शिव सर्व शक्तिमान विष्णु के बराबर शक्तिमान नहीं है ठीक है नहीं है

00:29:35:13 इसका मेरे से जब कोई टुकड़ा अलग होता है तो मैं उसमें बाधित होता हूं मेरे से लग होता है तो मैं उस उस उस टुकड़े में पूर्ण नहीं हो सकता मैं अपने एक प्रैक्टिकल और देख लीजिए मैं अपने शरीर के एक अंग में पूर्ण नहीं हो सकता आप यह कहना चाह रहे हैं मैं तो ये कहना ही नहीं चाह रहा आप एक्चुअली समझना नहीं चाह रहे मैं क्या कहना चाह रहा हूं विष्णु विष्णु हमेशा पूर्ण ही रहेंगे ठीक है क्योंकि देखो आप जो है लिमिटेड है आप जो लिमिटेड है लिमिटेड में से कुछ निकालो तो उसको कमी होगी लेकिन जो इनफाइकिल भी जाएगा तब भी वो इनफा ही रहेगा तो विष्णु जो है

00:30:21:27 कृ मेरा मेरा जो अंश अलग हुआ है उस अंश में सर्वशक्तिमान की पूरी ताकत है या नहीं यह बताइए सर्वशक्तिमान की पूरी ताकत नहीं जो टुकड़ा अलग हुआ यानी कि विष्णु का विष्णु भगवान का अगर एक अंग अलग हो जाता है तो वो जो अंग है वो सर्वशक्तिमान नहीं है विष्णु अपने अंश में विष्णु अपने अंश में सर्वशक्तिमान नहीं हो सकते विष्णु जब पूरे के पूरे हैं तभी वो सर्वशक्तिमान हो सकते हैं विष्णु हमेशा से ही सर्वशक्तिमान शिव सर्वशक्तिमान नहीं है मैं आप शक्तिमान हैव शक्तिमान नहीं बस आपकी बात हो गई खम हो गई आपकी बात खत्म करने ही नहीं दे रहे आपसे पूछ रहा हूं विष्णु तभी तक सर्वशक्तिमान है जब तक वो पूरे हैं अगर वो अपने एक अंश रूप में चले जाएंगे तो वह सर्वशक्तिमान नहीं रह जाएंगे क्या आप अंश और तत्व में भेद नहीं समझते हैं क्या हम भेद नहीं समझते ना इसीलिए तोत ये समय कहते हैं सुनिए हम तो ये कहते हैं कि विष्णु ही शिव बने कोई पावर्स का अंतर ही नहीं आया और वो दोनों ही बना प क्या विष्णु बाधित है बिना शिव बने को कार्य नहीं कर सकते बन का कर सते

00:31:37:18 भगवान को य संसार बनाना क्यों पड़ा भगवान को य संसार बनाना क्यों पड़ा अभी अगर अपने सिद्धांत की बात करूंगा क्योंकि हमारा जो सिद्धांत है व भक्ति है भैया हरि नाम संकीर्तन है भक्ति है अरे आपसे पूछ रहा भगवान ने संसार की रचना क्यों की भगवान ने संसार की र क्योंकि अगर मैं आपको वो समझाने को आऊंगा तो आप समझेंगे नहीं अगर आप चाहते हैं कि अपने सिद्धांत के हिसाब सेल में लाइन आती है सुप्रीम एंजॉयर एंजॉय के लिए किया ना नहीं भगवान को भगवान के लिए करते हैं विष्णु बनते हैं शिव बनते हैं माता दुर्गा भगवती बनते हैं काली बनते हैं य स्कार करने में आपको क्या दिक्कत हो रही है अगर आप कहेंगे की शिव अलग से कोई तत्व है विष्णु से तो फिर तव कई हो जाएंगे आपका द सिद्धांत भी खंडित हो जाए द सि मानते नहीं हम अचिंत

00:32:32:24 भद आ जाएंगे कुछ देर बाद अचत भदा भी आएंगे विषयात ना हो जाए फिलहाल सिद्ध नहीं कर पा रहे हैं कि विष्णु जब दिया नहीं कर विष्णु जब अपना एक अंश निकालते हैं अपने से अलग तो उस अंश के रूप में विष्णु सर्वशक्तिमान नहीं होते अंश के रूप में व विष्णु है ही नहीं अब को क्यों नहीं समझ रहेरी बात वो जो अंश हुआ है अलग कहां से हुआ है शिव तत्व विष्ण त कहा से हुआ है अंश क्या होता है ना मैं आपको

00:33:12:04 बताऊ जो भगवान के अवतार हो बोगे नहीं बात घुमाओ मैं पूछ रहा हूं अभी आपने कहा विष्णु के है आपने टुकड़े करके दो कर दिया अब आप भी तो एक प नहीं टिके टुकड़े करके दो कर दिया आपने भी आप तो कहते मान इस शिव सर्वशक्तिमान नहीं है विष्णु ही सर्वशक्तिमान है ये तो आपका क्लेम है तभी तो मैंने से शिव निकल रहे हैं तो अपने छोटे अंश में क्या विष्णु सर्वशक्तिमान नहीं

00:33:50:04 होते कहीं और से आते शिवजी कहीं और से आते हैं क्या आपको अभी पढ़ने की जरूरत है अंश और तत्व क्या होता है थोड़ा सा है ना आप अपने चीज पढ़ अच्छ तो ये बात तो आप मुझे जिसन ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध करने के पीछे पड़ जाएंगे तब आप आप ये व्यवहारिक धरातल और परमार्थिक धरातल को जानेंगे देखिए आप शकर को जानेंगे तब आप श सम शंकराचार्य को समझना ही नहीं है शंकराचार्य वैष्णव थे वो वैष्णव से वैष्णव के अंदर जो मिलावटी लोग है जो समर्थ बनना चाहते उनको अलग करने के लिए आए थे मायावा देने के लिए आए थे पद्म पुराण में शिवजी स्वयं बता रहे हैं वो हम देख लेंगे वो भी हम आएंगे विषयात हो जाएगा अभी आप इस चीज से आ ब आप अपनी बात बोल करके पीछे हट जाते हैं और

00:35:05:08 जब मैं उस बात पर पहुंचता तो आप कहते वि अभी एक ही टॉपिक चल रहा है क्या विष्णु भगवान से जो अंश अलग होता है जिसको आप शिव कहते हो वह जो अंश अलग होता है क्या विष्णु भगवान अपने अंश में पूर्ण नहीं होते क्या पूर्ण नहीं होते अपनी इच्छा से हो सकते हैं परंतु नहीं होते अगर उनकी इच्छा ई तो हो सकते हैं उनकी इच्छा हो तो सब कुछ हो सकते हैं उनकी इच्छा हो तो अपने अंश के रूप में पूर्ण होने की उनकी इच्छा हुई तो हो सकते हैं बिल्कुल हो सकते हैं तो इसका मतलब यह क्लेम करना गलत है कि वापस विष्णु नहीं बन सकता उनसे कोई नहीं शिव विष्णु नहीं बन सकता जो शिव है विष्णु में समा सकते हैं इच्छा हो तब भी नहीं हो सकता हा जी इच्छा हो तब भी नहीं हो सकता इच्छा विष्णु की इच्छा होगी नहीं विष्णु अपने रूप में करेगा शिवजी का जो स्वरूप है वो नहीं नहीं विष्णु भगवान की इच्छा होगी कि नहीं होगी आप डिसाइड करोगे भगवान विष्णु डिसाइड करेंगे लेकिन अगर आपको थोड़ी सी भगवान विष्णु डिसाइड करेंगे तो अगर उनकी इच्छा हो गई कि मैं भाई शिव से एक और विष्णु निकाल दूं तो आप उसमें रोक दोगे कि नहीं निकल सकता एक और विष्णु देखिए जो जो पहला स्वरूप है भगवान का वो विष्णु का

00:36:20:09 है शिव का स्वरूप बाद में आता है तो ओरिजिनल जो स्वरूप है भगवान का वो विष्णु का है कृष्ण का है तो आप पहला स्वरूप है वो विष्णु है मगर ऐसा नहीं है कि जो शिव स्वरूप है जो सेकंड नंबर पर जो स्वरूप है जो रूप ले रहे हैं आपको यह कहना चाहिए कि ऐसा नहीं है कि वो अपूर्ण है ऐसा नहीं है कि वह सर्वशक्तिमान नहीं है विष्णु भगवान ही शिव बनते हैं आप आ गए हमारी जगह पर जो हम कह रहे बनते नहीं ऐसा तो नहीं है आप अगर जबरदस्ती घ रहे बात करेंगे आप अगर पहले स्वरूप की बात करेंगे तो एक व्यक्ति जैसे आप वो उदाहरण देते हैं आपके कई लोग देते हैं कि एक व्यक्ति घर में अलग रूप में होता है और बाहर अलग रूप में होता है और कहीं ऑफिस में अलग रूप में होता है तो ठीक है अच्छी बात है मगर इन अलग-अलग रूपों में उस व्यक्ति जो घर में था उसके अंदर कोई विकृति थोड़ी ना आई वो तो अपने रूप बदल रहा है इसका अर्थ य अगर यह वाली बात आप लेंगे जो पहला रूप है विष्णु दूसरा रूप है शिव या तीसरा रूप है शिव तो इसमें तो ये विष्णु ही शिव बन रहे हैं शिव ही ब्रह्मा बन रहे हैं तो इनम तो भेद है ही नहीं फिर रूप अलग अलग हो रहे है अब किसी व्यक्ति को उनके ऑफिशियल रूप से प्यार हो गया किसी व्यक्ति को के घरेलू रूप से प्यार हो गया ये व्यक्ति की श्रद्धा है आप उस पर थोप मत नहीं पहले वाले रूप प ही

00:37:34:06 जाओ सुनिए शांत हो जाइए प्रभु सुनिए जी अब अगर अभी आपना ये चीज बता रहे हैं कि हम यह सोचते हैं कि वो उनमें हम भेद करते हैं इस तरह से कि वो एक नहीं है मतलब कि एक ही नहीं है इन द सेंस आपके वाला द्वैतवाद नहीं एक नहीं इन द सेंस की शिव ही विष्णु और शिव में नहीं मानता है कि महाविष्णु सदा भेद है परंतु कहने का अर्थ जो यह है कि जो सदाशिव है व महाविष्णु से निकले हैं जो सदाशिव महाविष्णु में ही जाते वो निकले नहीं है महाविष्णु ही शिव बने अगर इसको मानेंगे तो तो ठीक है निकले हैं कहेंगे और फिर कहेंगे कि उनमें कमी आ गई अभी आपने कहा व सर्वशक्तिमान नहीं है वो पूर्ण नहीं है शिवजी तो अगर आप यह कहेंगे तो विष्णु में ही तो अपूर्णता आई अगर वो निकले हैं तो फिर विष्णु बाधित है अगर वो विष्णु बने हैं तो विष्णु बाधित फिर व अपर्ण नहीं है शिवजी आप शिव और वि को शिव और विष्णु को एक जगह पर रखने की कोशिश कर रहे लेकिन हम एक जगह आपका क्लेम है और व चैलेंजिंग उसी को चैलेंज कर

00:38:46:13 रहा शास्त्र कोट कर रहा परम विष्णु न मुक्ति साधन परम विष्णु है अगर यहा पर हो सता परम विष्णु शिव ऐसा हो सकता था लेकिन प अा मैं आपको शास्त्र कोट करू तो चलेगा चलेगा बिल्कुल चलेगा आप क्या ही शस्त्र तो शरार के शास्त्र कोट करेंगे आदि शंकराचार्य का दिया भाष्य वैसे ही मायावादी आपको हां जी बोलिए अभी अभी मैं दिख रहा था कुछ देर के लिए जब मैंने स्क्रीन ऑफ की थी नहीं स्टिल हो गई थी आपकी फोटो अच्छा ठीक है तो मैं अभी आपको कोट कर रहा

00:39:55:12 हम कहां गए भैया ना सुनाई दे रहे ना दिखाई दे रहे हो श्रीमद् भागवत का बता रहा हूं मैं

00:40:43:06 आपको चाछ 50 शिव जीी ही सबके मूल हैं शिवजी ही सबके मूल हैं मूल का अर्थ क्या होता है और 8 सा 21 से 31 शिव जी की व्याख्या है परम सब कुछ परम वही है विष्णु भी उनसे ही निकले हैं सब कुछ विष्णु भी उनसे निकले हैं ठीक है आपको अभी दो तीन चीज और समझने की जरूरत है महाविष्णु और सदाशिव की हमने बात कही थी जैसे तो उसके बाद गर्भ दक्षा विष्णु शिरो दक्षा विष्णु की व्याख्या अगर आप भागवत भी पढ़ेंगे तो भागवत में आपको य भी पढ़ना चाहिए कि गर्भ दक्ष और शिरो दक्ष विष्णु भी है जैसे कि महाविष्णु सदाशिव एक ही प्लेटफार्म पर है तो उनके महाभारत अनुशासन पर्व 14 एक 18 उसमें लिख रहे हैं कि जो विष्णु जो शिव है वही सबके मूल है और सबके दृष्टा शिव है ब्रह्मा विष्णु महेश के भी दृष्टा शिव है अब बताइए क्या करें अब इसमें तो शिव जी सेही पूछना पड़ेगा और शिव जी तो यह बता रहे हैं कि ऐसी जो भी बातें कही जाती है भ्रम फैलाने के लिए कही जाती है तो फिर जब एक ही व्यक्ति खुद कह रहा है जो व्यक्ति एक बात कह रहा है वही व्यक्ति अपनी बात के लिए ब्रम कह रहा है तो दोनों में से किसी एक

00:41:58:08 बात को हम किस आधार पर मानेंगे व इस आधार पर मानेंगे इस आधार पर नहीं मानेंगे ना जब वो खुद अपनी बात को कह रहे हैं कि मैं विश्वास के योग्य नहीं हूं भाई जिसको भ्रम फैलाना है वह भ्रम फैलाए जब वह कह रहे हैं कि मेरी अन्य बातें भ्रम फैलाने के लिए हैं तो उनकी यह बात पर विश्वास कैसे होगा कि यह बात भ्रम फैलाने के लिए जो व्यक्ति एक बार कोय कह दे जो व्यक्ति एक बार को ये कह दे कि मैं भ्रम फैलाता हूं तो वो पता नहीं कहां कहा प भ्रम फैलाए जो अब्राम सोच है अब्राम सोच है दो 106 में अब्राम ईश्वर ने यह कहा कि मैं अपनी आयतों को बदल देता हूं मैं जो आदेश देता हूं उनको मैं समय समय पर बदल देता हूं तो फिर यह हो गया कि अब वो कौन सी आयत को बदलेगा किसको नहीं बदलेगा य तो भ्रम हो गया इसलिए पम पुराण हमारा जो आधार होता है इसलिए हमारा जब आधार होता है निर्णय करने का कि कौन सी बात माने कौन सी नहीं माने उसका आधार होता है वेद उसका आधार होता है श्रुति अगर कोई ऐसी बात

00:43:13:10 है जो शति का खंडन कर रही है तो वो नहीं मानी जाएगी अगर कोई ऐसी बात है जो शति का खंडन नहीं कर रही है तो मानी जाएगी तो वेदों ने तो रुद्र को रुद्र सूक्त में परमेश्वर माना हैय कौन कर सकता है हां निर्णय निर्णय कौन कर सकता है निर्णय मैं अच्छा एक आपके सामने मैं एक चीज रखता हूं या आप निर्णय करेंगे या मैं निर्णय करूंगा या कि शास्त्र देने वाले वेदव्यास निर्णय कर सकते हैं बताओ वेदव्यास निर्णय कर सकते हैं हा वेदव्यास वेदव्यास निर्णय क्यों नहीं कर सकते बिल्कुल कर सकते हैं मगर उनका दिया हुआ निर्णय तभी मान्य होगा जब वो वेदों के आधारित हो ऐसा नहीं है ऐसा नहीं है कि कोई वेदों का गलत वेदों का गलत अर्थ बता दे वेदव्यास जी की बात का गलत अर्थ बता दे तो हम वेदों से उसको मैच करेंगे ना तो मैं आपको श्लोक बता रहा हूं ना आलोम सर्व शस्त्राणि विचार पुन पुन इदम सु प्रश्नम यो नारायण सदा कि बारबार विचार करने पर अलग-अलग शास्त्रों के पुनः पुनः विचार करने पर एक ही बात सिद्ध होती है कि नारायण ही परम सत्य है आप ये वेदव्यास जी का एक आप वेदव्यास जी का यह तो दिखाइए कि उन्होंने कहा हो नारायण शिव नहीं है देखिए बात ऐसी है वेदव्यास

00:44:28:20 जी ने जिसको भी जहां पर भी कहा है जिसका महिमा मंडन कहा है मैंने कहा ना अभी मैंने क्या कहा कि महा भारत में वेदव्यास जी लिख रहे हैं कि शिव जीी सबके मूल है शिवजी दृष्टा है तो उनकी वह बात उन्होंने कहा है क्या मेरी बात मत मानू पहले तो मुझे ये मायावादी अभी आपसे मैं फिर पूछ रहा हूं आपका ईश्वर सर्वशक्तिमान सिद्ध हुआ क्या हां कृष्ण तो परम सर्वशक्ति मुझे सिद्ध करने की जरूरत नहीं है स्वयं भगवान क रहे तो आप आए सि नहीं करना तो मैंने तो सिद्ध कर दिया ना आपको मानना नहीं बात मैं आपसे पूछ रहा हूं अल बनते या विष्णु के अंदर से निकलते हैं विष्णु के अंदर से निकलते हैं परंतु विष्णु निते तो विष्णु के अंदर का जो पार्ट अलग हो रहा है उस पार्ट में विष्णु सर्वशक्तिमान है कि नहीं शिव सर्वशक्तिमान नहीं है विष्णु जो है महाविष्णु उसी प्रकार विष्णु जी का जो पार्ट निकल रहा है उनके अंदर से जिसको आप शिव नाम दे रहे हो वोह सर्वशक्तिमान है कि नहीं नहीं तो फिर विष्णु बाधित हो गया विष्णु कैसे बा हो जब अपने शरीर जब वो अपने पूरे शरीर में है तब

00:45:43:20 तक वो बाधित नहीं है मगर अगर वो अपने अंश में अलग हो जाएंगे तो बाधित हो जाएंगे ऐसा तो मैं भी कह सकता हूं कि आप भगवान को बाधित कर रहे हैं किस प्रकार अगर विष्णु के अंदर से कंश अलग होता है अगर भगवान अगर विष्णु चाहते हैं कि उसमें पूर्ण शक्ति ना हो तो इसका अर्थ आप कहते हैं कि नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता विष्णु पूर्ण शक्ति ही दे पाएंगे मैं नहीं कह रहा हूं मैं तो यह कह रहा हूं कि भगवान चाहते होंगे तो वो पूर्ण सर्व शक्तिमान रहेंगे नहीं चाहते होंगे तो नहीं रहेंगे वो चाते होंगे कि शिवजी से वो चाहते होंगे शिव जी से कृष्ण ना निकले तो नहीं निकलेंगे चाहते होंगे शिवजी से कृष्ण निकल आए तो निकल आएंगे हां तो परंतु शास्त्र देखने से शास्त्र की अगर बात करें शास्त्र में तो हमेशा विष्णु हम कर रहे ना कि आपसे जब आपका टुकड़ा अलग होगा इसमें तो भगवान को इनफा बता रहा हूं भगवान की इच्छा है कहा बता रहे आप बता रहे हैं कि जब उनसे एक टुकड़ा अलग हुआ तो वो जो टुकड़ा था जिसको हम शिव कहते हैं वो टुकड़ा पूर्ण नहीं है अगर वो पूर्ण है तो फिर अंतर क्या आया शिव और विष्णु में तो फिर शिव को भगवान के संतुल्य समझने वाले पापी क्यों हो गए देखो यह बात इस प्रकार है ना अगर अगर आप इस सिद्धांत को नहीं समझेंगे

00:46:58:21 देखो आप अगर सिं पूछ रहा हूं आपसे तब से सिद्धांत को नहीं समझना पड़ेगा ना उसके लिए महाविष्णु सदाशिव को एक ही बराबर रखा जाता है ठीक है महाविष्णु और सदाशिव को एक ही बराबर रखा जाता है परंतु विष्णु के भी तीन प्रकार हैं गर्भ दक्ष विष्णु और शरो दक्ष विष्णु अगर कहीं ये बात की जाती कि सदाशिव से शिव विष्णु निकले हैं महाविष्णु सदाशिव को सते हो क्योंकि वो लिमिटेड कार्य कर रहे हैं क्योंकि वो फला फला चीजें कर रहे तो हम उनको मानते हैं कि शिवजी जो है सर्वशक्तिमान नहीं है मगर तात्विक रूप से शिव और विष्णु में कोई भेद नहीं है आप यह कह सकते हो कि लीला रूप में विष्णु लीला रूप में विष्णु और शिव में भेद है तात्विक रूप में नहीं है आपको यह कहना पड़ेगा मगर जब आप क दोगे तो आप शंकराचार्य के सिद्धांति हो जाओगे तत्व ूप नहीं शंकराचार्य का सिद्धांति कैसे हो जाऊंगा भैया उससे ऊप जा बताओ आप बिना उनको माने सर्वशक्तिमान सिद्ध करो देखिए तत्व के रूप में तत्व के रूप में सबसे पहली बात इसमें मैं शंकराचार्य को स्वीकार नहीं कर रहा हूं पर तत्व के रूप में महाविष्णु सदाशिव में कोई भेद नहीं है ठीक है यानी की या ताक रूप से भेद नहीं है व्यवहारिक रूप से भेद है यही आप कह रहे हो ना

00:48:14:13 शक्ति रूप से व्यवहारिक रूप से भेद है शक्ति जो है तरीके से लीला रूप से हां तो लीला का जो रचना रचयिता है व महाविष्णु है शिव जी नहीं है अरे भाई जब आप कह रहे हो तात्विक रूप से एक है तो उसको या तो विष्णु कह लो या शिव कह लो अंतर क्या आ रहा है बहुत अंतर आ रहा है शिव आपने कहा तात्विक रूप से एक है तो ख खैर आपने यह तो माना कि सदाशिव ही महाविष्णु से निकलते हैं इस बात को आप स्वीकार करते हैं मैंने माना नहीं है मैं तो आपकी बात के अनुसार बात कर रहा हूं तब कह रहा हूं मैंने माना नहीं है वो कल्प भेद से कभी विष्णु से शिव निकलते हैं कभी शिव से विष्णु निकलते हैं शिव शिव विष्णु क निकलते शिव से विष्णु क़ है आपने कम पुराण नहीं पढ़ा

00:49:06:13 है कल्पे समझंग से विष्णु निकले की नहीं मैं कल्प समझ गया आप क्या कहना चाह रहे हैं आपने पूछा कि शिवजी से विष्णु कब निकले मैं पूछ रहा हूं शिवजी के वाम से विष्णु निकले कि नहीं हां गर्भ दक्षा विष्णु कह सकते यह उसमें लिखा है क्या शिव पुराण में गर्भ दक्षा विष्णु थे वो आप अभी आप कोट कर रहे थे उसको अपने भागवत को भागवत पढ़ेंगे तो आपको ये विवरण मिल जाएगा तीन विष्णु का महाविष्णु गर्भ विष्णु विष्णु शज के जो शिवजी के वाम अंग से निकलते हैं वो गर्भ दक्षा विष्णु है यह आप सिद्ध कर देंगे सिद्ध कर दूं शिव जी के ंग से निकलते हैं महाविष्णु से गर्भ दक्ष विष्णु आते हैं लेकिन महाविष्णु और सदाशिव में तत्व के रूप में कोई भेद नहीं है ठीक है और इस अद्वैतवाद नहीं है सबसे पहली बात तो अद्वैतवाद तो मायावादी अगर आप अद्वैतवाद मानेंगे तो आप आप जो बात कर रहे हैं उसम आपकी एक उसम आपका एक चिड़चिड़ापन नजर आ रहा है अववा के लिए जैसे आप बीच बीच

00:50:21:18 में बारबार बोलते हैं ना अद्वैतवाद मायावादी बात जो आप कर रहे हैं मैं भी कर सकता हूं पर मैं मर्यादित हो कर के बात कर रहा हूं बीच बीच में आप जो करते हैं नाय ये जो करते हैं उंगली मैं भी कर सकता हूं पर मैं मर्यादा में रह कर के बात करना चाह रहा हूं आत वो ऐसा नहीं हो सकता वो सर्व शक्तिमान है यह क्या है मालूम है यह है स्वयं संप्रभुता स्वयं को स्वयं की वर्चस्व को बस सामने वाले के ऊपर थोप दो नहीं आपने आपसे सिद्ध करने को कहा आप बारबार सीधे निर्णय सुना मैंने आपसे अभी तक एक भी बार कोई ऐसी चीज नहीं कही आक्षेप नहीं कहा कि भाई आपका तो यह है आप 10 बार बोल चुके मायावा है मायावा है माया बाद है व तो वो तो है देखो फिर कह र वो तो है ही चलो कोई बात नहीं कहते बता अभी तक आप य स नहीं कर पाए कि विष्णु से जब कृष्ण अलग होते हैं विष्णु से जब शिवजी अलग होते हैं तो उस टुकड़े में वो सर्वशक्तिमान होते हैं कि नहीं होते 10 बार सिद्ध कर दूंगा तो आप माने एक अलग बात है क्योंकि चलो ठीक है इस टॉपिक को खत्म करते हैं अब ये बताइए

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00:51:30:14 कि इकोन के द्वारा पूजित होने वाला जो ईश्वर है और कुरान के द्वारा माना जाने वाला जो ईश्वर

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00:51:36:26 क्या वो एक है वो तो आपके जो गुरुदेव शंकराचार्य वो अच्छी तरह से बता सकते हैं क्योंकि वो नमाजियों से क्या चदर उड़वा हैं दूसरे साधु संतों को देखा मैंने ऐसा एक वीडियो में तो वो शायद अच्छे से बता सकते है कुरान शायद कुरान के बारे में बाकी उन्होने कभी ये नहीं बोला है उनका मैं आपको वीडियो दे दूंगा कि कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है अल्लाह और जो हमारा ईश्वर है वह एक है उन्होंने कहा कुरान की सीमा का ईश्वर अवतार नहीं ले सकता वह हमारा ईश्वर नहीं है हम जिस ईश्वर को मानते हैं वह जीव जगत और जगदीश्वर के रूप में प्रकट होते हैं अभी आपने बहुत अनादर वाली बात कही है खैर मैं बात हो रही है तो मैं बता देता हूं शंकराचार्य जी जो चादर चढ़ने नहीं गए थे जब राम सेतु का आंदोलन चल रहा था तो उनका सहयोग किया था कोई अरविंद तिवारी जी है उन्होंने उन्होंने कहा कि मेरे जो गुरु है उनकी समाधि पर चलिए वह समाधि उनके गुरु की थी और वहां पर केवल पुरी के शंकराचार्य जी नहीं गए थे कई अच्छे संत गए थे जो राम जो राम सेतु आंदोलन के निमित्त जुड़े हुए थे उस कार्यक्रम के निमित्त व वहां गए और समय आने पर मीडिया ने उन चीजों को फैलाया खैर अब मैं आपको बता देता हूं

00:52:51:28 आप मेरे टब चैनल पर देख लीजिएगा इसकन के अधिकृत व्यक्ति कह रहे हैं और मैं आपको उनका वो वीडियो भी दिखा दूंगा जिसमें जब कोई व्यक्ति कह रहा है कि मोहम्मद अवतार थे ये है तो वो मना कर रहे हैं स्पष्ट कि कुरान की सीमा का ईश्वर और हमारा जो ईश्वर है जो अवतार लेता है उसमें अंतर है हम उस ईश्वर को नहीं मानते जो कुरान का ईश्वर है अलग है नहीं मानते हम अच्छा अब आपका मैं बता दूं कि आपके अधिकृत आप आप अधिकृत हो कि नहीं आपका परिचय नहीं बताया आपने आप अधिकृत हो कि नहीं नहीं कैसे हो क्या हो

00:53:30:00 मैं मैं गोड़ी वैष्ण विजम को फलो गोड़ी वैष्ण विजम को फॉलो करने वाला हूं मैं फलो ब आप फॉलोअर है अच्छा ठीक है मतलब आप एक ऑफिशियल रिप्रेजेंटेटिव नहीं है है ना नहीं हा तो

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00:53:43:24 जो आपके ऑफिशियल रिप्रेजेंटेटिव है उनका य वक्तव्य है कि कृष्ण अल्लाह और बाइबल का ईश्वर ज होवा इसमें कोई अंतर नहीं

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00:53:54:04 है अब बताइए कहां लिखा है प्रभुपाद के द्वारा कहां लिखा है तो इसका मतलब आप नाय करते हैं कि वो आपके ऑफिशियल वो नहीं है जिन्होने बोला इसके पीछे मैं आपको एक कारण बताता हूं इसके पीछे कारण बताता हूं क्यक जो गोड़ वैष्णव जो गोड़ वैष्णव संप्रदाय कौन के अधिकारी ने बोला है आप नाय डिसन करते उनकी बात को आप मेरे से यही सुनना चाहते हैं कि इसका जवाब सुनना चाहते हैं पले पहले हमारा विशेष निश्चित हो जाए कि बात किस पर कर रहे हैं क्या आप इस बात कर नहीं मैंने आपसे मैंने मेरा

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00:54:31:24 प्रश्न है पहले आप हा या ना में उत्तर यह तो बताइए तब हम आगे चले कि आप उनकी इस बात को डिसन करते हैं या आप उन्हीं को डिसन करते हैं पर्सनली उनकी बातों को डिसन करता हूं नहीं करता हूं ओके और सोशली करता हूं

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00:54:49:06 अब मैं आपको बताता समझते नहीं आप समझ नहीं रहे मेरी बात को क्या आप सिर्फ बोले जा रहे हैं बोले जा रहे बोले जा रहे हैं देखिए जो स्कोन है ये अकेली एक ऐसी संस्था है थोड़ा सा लाउड बोलिए आवाज आपकी कम आ रही है जो इस कोन

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00:55:08:06 है वो अकेली एक ऐसी संस्था है जो विदेशों में फैल रही है इस कोन की वजह से ही हरे कृष्ण महामंत्र और हरि नाम संकीर्तन फैल रहा है अगर आपको किसी को जोड़ना है आपको उसका खंडन नहीं कर सकते हैं सीधा अगर आप उसका खंडन करेंगे तो वो दूर जाएगा लेकिन अगर आपको किसी को जोड़ना है साथ में तो आपको उसकी प्रेस करके अपने अंदर लेना होगा धीरे-धीरे उसके मन में कृष्ण भक्ति पैदा करनी होगी कृष्ण भक्ति जागृत करनी होग एक तरीके से एक तरीके से ये झूठ ही होता है ना ये बात जो कही जाती है इस कौन की तरफ से बिल्कुल क्यों क्यों क्यों उसके बीने बोल दिया बहुत अच्छा किया चलिए ठीक है कारण कारण बताया मैंने आपको जी और सम आपका कारण धर्म को पने पहले उनको झूठ बोला जाता है फिर उनसे अपने आप में विलय कराया जाता है उनका फिर धीरे-धीरे सच्चाई बताई जाती है ठीक ठीक

00:55:58:24 हैन अब तीन प्रश्न हो जाते हैं आपके इस वक्तव्य को के लिए मैं तैयार था पर आप आज पहले व्यक्ति है जिसने इस बात को स्वीकार किया है इससे पहले जो भी मिलते थे वो आते थे यहां तक मगर मुंह से वो नहीं स्वीकार करते थे कि हा यह बात झूठ है आपने आज स्वीकार किया चलिए अब तीन प्रश्न आते हैं क्या कोई सनातन सिद्धांत है ऐसा जो यह कहता है कि धर्म का प्रचार प्रसार करने के लिए आप झूठ बोल करके प्रचार प्रसार करो सनातन सिद्धांत दूसरा तीन प्रश्न है मैंने तीन प्रश्न सुन लीजिए तीन प्रश्न सुन लीजिए दूसरा कि जब आप अल्लाह के भक्तों को अपने से जोड़ने के लिए अल्लाह के अनुगा मियों को अपने से जोड़ने के लिए कह देते हो कि कृष्ण अल्लाह एक है तो यह बात आपको शिव के अनुवा मियों के लिए ध्यान नहीं रह जाती तीसरा क्या भारत में सभी लोग अपने धर्म को पूर्णतया जान चुके हैं जो जो हम इस चीज पर फोकस करें कि भाई विदेशों में धर्म फैल रहा है कि नहीं इसलिए वहां पर हम झूठ बोले दूसरी बात सबसे पहली बात दूसरी च एक चौथा प्रश्न और है चौथा प्रश्न ये है कि जब हम झूठ बोल

00:57:13:24 रहे हैं वहां पर और झूठ बोल कर के किसी को अपने में मिला रहे हैं तो वही झूठ उनको क्यों बोला जा रहा है जो पहले से हिंदू

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00:57:22:10 है किसी हिंदू को हिंदुइज्म में मिलाने के लिए जो जो बातें बोली जा रही है वही बातें हिंदुओं को क्यों बोली जा रही है सिलेबस अलग होना चाहिए चार प्रश्न हो चार का जवाब दीजिए जो चौथा और पहला है जो सिमिलर ही है आपका प्रश्न

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00:57:40:28 तो जो पहला और चौथा उसका उत्तर य है कि सबसे पहली बात झूठ बोल कर के नहीं है झूठ बोल कर क्या होता झूठ है झूठ झूठ है गता पढ़ेंगे अगर आप भगवत गीता को पढ़ेंगे अगर आप भगवत गीता को समझेंगे तो भगवान ने यही कहा है कोई किसी भी रूप में किसी को भी पूछता है तो वो मुझे ही इनडायरेक्टली पूज रहा है ठीक है जैसे की कोई मुस्लिम है उसकी श्र आपने आज तक य कहा क्या शिव और विष्णु एक है शिव और विष्णु तो एक है ही नहीं स

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00:58:18:25 आप कह रहे शिव और विष्णु में भेद है भेद नहीं है आवाज नहीं आ रही आपकी कट रही है बीच में आप यह कह रहे हो कि शिव और विष्णु मैं भेद है और आप कह रहे हो अल्लाह और कृष्ण में कोई भेद नहीं है आवाज नहीं आ रही आपकी आवाज आ रही है आपको मेरी कटकट के आ रही है अभी सा आ रही है क्या हां अब ठीक है जी बताइए भगवान कृष्ण ने अभी आपने जो ये कहा था कि यह बात झूठ है वो झूठ नहीं है कौन सी बात हां ये वाली बात अभी आपने ये कहा था अभी आपने ये कहा था थोड़ी देर पहले हां बिल्कुल झूठ है तो जो बिल्कुल झूठ है इस बात को इस तरह समझिए अगर कोई किसी दूसरे इस पहले देखिए समने से पहले पहले आप एक बात क्लियर किया करिए आप समझाइए बाद में पहले आप क्लियर करिए हम किस पर बात कर रहे हैं

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00:59:33:19 क्या आपने अभी थोड़ी देर पहले इस बात को झूठ स्वीकार किया था या नहीं किया था झूठ स्वीकार नहीं किया था यह

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00:59:40:18 जरू हा बिल्कुल मैंने पूछा क्या बात ू है आपने बोला हां बिल्कुल आप मेरा उत्तर एक ही शब्द में लेना चाहते हैं कि मैं बोलू आप दीजिएगा पहले इसको क्लियर कर दीजिए मैंने आप से पूछा था क्या यह बात झूठ है तो आपने कहा था हां बिल्कुल मैंने कहा था पर्सनली मैं बिल्कुल मानता हूं पर्सनली पहले वाली लाइन अलग थी पर्सनली वाली लाइन आपकी थी वो अलग थी बाद में मैंने आपसे क्लियर कट पूछा क्या ये बात झूठ है तो आपने कहा हां बिल्कुल उसके बाद मैंने क्लियर भी किया कि अच्छा हुआ आज आपने य बात स्वीकार कर ली आप क्लेरिफाई करिएगा पहले हमारा पॉइंट तो क्लियर हो जाए कि किस पॉइंट को क्लियर कर रहे आपने जब मैंने आपसे पूछा क्या यह बात झूठ है तो

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01:00:29:19 आपने कहा हां बिल्कुल उसके बाद मैंने यह भी कहा उसके बाद उसके बाद मैंने ये भी कहा कि अच्छा है आज आपने बात कही है आज तक जितने भी लोग आए उन्होंने यहां आ कर के घुमा दिया बात को उन्होंने कभी स्वीकार नहीं किया कि हां ये बात झूठ है आज आपने स्वीकार किया आप सुनते रहे जब मैंने आगे अपने चार प्रश्न बोले हैं तो आप बोलने लगे नहीं यह बात झूठ नहीं है भगवत गीता पर आधारित बात

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01:00:52:08 है मैंने यह नहीं कहा कि भगवत गता पर आधारित बात है जो यह बात है कि उनका जो अल्लाह पूज रहे हैं वह कृष्ण ही है यह बात बिल्कुल झूठ है परंतु ऐसा क्यों कहा जाता है मैं अभी भी अपनी बात पर अड़ी गई हूं ये झूठ ही है परंतु ऐसा क्यों कहा जाता है क्योंकि जोन है मतलब अब आप बीच में यह बदलिए मत कि यह बात झूठ झूठ नहीं है तो इसके लिए भगवत गीता का रेफरेंस देने की आपको आवश्यकता नहीं है अब आप यह यह बताइए कि हम ऐसा क्यों करते हैं बस आवश्यकता क्यों नहीं अरे भाई मेरी बात तो सुन तो लीजिए आप चाहते आप चाहते हैं कि जो आप पूछे आप चाहते हैं कि जो आप पूछे मैं उसका उत्तर देता रहूं पर आप वो बोलिए आप वो बोलिए जो आप चाहते हैं बोलिए तो भगवत गीता में भगवान स्वयं ऐसा बोल रहे हैं कि जो

01:01:49:03 भी अब उसकी बुद्धि तो नहीं काम ना कि कृष्ण ही परम भगवान है कृष्ण ही परम नियंता है तो इसीलिए वो अपनी अपनी तरफ से उनको अपने अपने भगवानों को पूजा पूछता जा रहा है इनडायरेक्टली क्योंकि वो तो एजिस्ट ही नहीं करते हैं वो तो परम जो हैं कृष्ण जो है इतने अदयालम वो तो नहीं है कटू तो नहीं है कि उनको उनका फल उनको ना मिले इसी प्रकार इनडायरेक्टली वो कृष्ण की पूजा करते हैं डायरेक्टली वो कृष्ण की पूजा नहीं करें अल्लाह कृष्ण नहीं है परंतु वो जिस अल्लाह को पूछ रहे हैं इनडायरेक्टली वो कृष्ण को जा रहा है क् कृष्ण बहुत मर्सी फुल है प्रकार जब अल्लाह कृष्ण नहीं है तो आपने कहा कि अल्लाह ही कृष्ण है तो कहने का अर्थ य है यह जो आप बोल रहे हैं व्यक्ति को अपने में विलय कराने के लिए मात्र बोल रहे हैं परंतु यह झूठ नहीं है पूरी तरह से वह मान रहे हैं डायरेक्टली वो कृष्ण की ही पूजा कर रहे हैं इनडायरेक्टली वो कृष्ण की तो जब वो इनडायरेक्टली हर व्यक्ति कृष्ण की पूजा कर रहा है तो एक जगह पर दिखा द जहां इकोन यह कहता हो कि शिव और कृष्ण में कोई भेद नहीं है अरे भाई इस

01:03:04:08 कोन की देखो इस कोन के पीछे क पड़े अगर आप इस कोन से हट के भी बात करोगे ना रामाचार्य मचार से आपका सही होना सिद्ध नहीं होता है अगर दुनिया में आपकी तरह और भी लोग गलत कर रहे हैं तो उससे आपका सही होना सिद्ध नहीं होता है आप स्वयं को सही सिद्ध करिए अगर आप इसलिए अल्लाह और कृष्ण को एक बताते हो जिससे कि व्यक्ति हो जाए बुरा ना माने उसके उसके लिए भी आपके पास भगवत गीता का एक आधार है उसके आधार पर आप कह ते तो आप शिव और विष्णु को एक क्यों नहीं हिंदू में विने के लिए हिंदू में विलय नहीं कराना भक्ति में भक्ति में बहुत उसम बहुत अंतर है वो इनडायरेक्टली कृष्ण का नाम जप रहा है इससे अच्छा वो डायरेक्टली कृष्ण का नाम जपे भक्ति में विलय कराने के लिए आपको हिंदु जम से कोई मतलब नहीं है आपको भक्ति से मतलब है केवल तो भैया पता नहीं कहां भटक जाते हो कि आपकी बात रिपीट कर लेता हूं

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01:04:00:19 आप भक्ति में विलय कराने के लिए अल्लाह के अनुयायियों से यह कहते हो कि अल्लाह और कृष्ण एक है तो आप शिव के अनुया से क्यों नहीं कहते हो कि शिव और कृष्ण एक है शिव और कृष्ण एक देखिए इसलिए उनको ऐसा बताते हैं ना जो शिव है वो परम वैष्णव है बस अब होने लगा मैं आपसे एक बात पूछ रहा हूं कि सेव और कृष्ण एक है कहां से आपके ऑफिशियल लोगों ने बोला देखिए मेरी अगर आप एक बात समझेंगे ना तो छोटी सी बात ये है कि हर वैष्णव संप्रदाय है विष्णु को परम मानता है शिव को नहीं मानता हर वैष्णव संप्रदाय जो अन्य वैष्णव संप्रदाय है वो कृष्ण अल्लाह को एक नहीं कहते एक दिखा दीजिए आप एक दिखा दीजिए मधवा चार निता में मानते हैं मैं कह रहा हूं मधवा चारचार वल्लभ चार किसी ने भी एक कहा हो हमने भी नहीं कहा ये तो कृष्ण ने कहा कि इनडायरेक्टली मेरी पूजा करते हैं वो इनडायरेक्टली शब्द है इनडायरेक्टली शब्द है क्या वहां पर जब आप कह रहे हो कृष्ण अल्ला एक

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01:05:03:00 है एक सेकंड भगवत गीता ही कोट करता हूं अब आप चूज कीजिए ये वाली करूं कि ये वाली करूं गजस गोरखपुर पर आपको भरोसा कोई भी कर लीजिए उसको तमाशा करने की आवश्यकता नहीं है तमाशा करने की आवश्यकता मैं तमाशा नहीं कर रहा हूं मैं आपके बस इस बात का जवाब दे रहा हूं कि भगवान ये कह रहे हैं क्यों आपको जवाब नहीं आ रहा मेरी बातो अ फिलहाल मेरे को तो सवाल करने दिया ही नहीं आपने वो अलग बात है मेरे बहुत सारे सवाल थे जवाब देने तो आप आए थे सवाल तो मैंने उठाए थे इग्राम

01:05:39:19 पर तो जो मैंने जवाब दिया आपने उसका भी भेद कर दिया आपने आपसे पूछा क्या विष्णु से निकलता है तो उस टुकड़े के अंदर वो सर्वशक्तिमान हो सकते नहीं तो आपने कहा नहीं समान हैट बस क रहा शास्त्र कह रहे शास्त्र कह रहे मैं शास्त्र को कोट करूंगा आप कहोगे संस्कृत मत बोलो शास्त्र से तो मैंने भी आपको बता दिया पुराण भगवती पुराण कितना बताऊ मैं आपको पूरी लिस्ट दे दूंगा आपको पूरी लिस्ट दे दूंगा लिस्ट तो मेरे पास भी है मैं भी तैयार करके नीचे पिन कमेंट में डाल दूंगा पिन कमेंट में डाल दूंगा कितने रेफरेंसेस है तो मैं भी आपको ा प पूरा दो चार पेज भेज दूंगा फिर बहुत सारे रेफरेंस इसका अर्थ ये हुआ कि शिव के लिए भी श्रेष्ठता वाले श्लोक है शास्त्रों में और विष्णु के लिए भी है तो मैं कहां मना कर रहा हूं विष्णु जी परम नहीं है मगर शिवजी परम नहीं है आप मना कर रहे हो आप दोनों को मैं सम मैं इस बात को समझता हूं आप अद्वैतवाद को बीच में लेकर आते हो लेकिन जब मैं अद्वैतवाद की बात करता हूं तो आप कहते कि नहीं नहीं नहीं आप अद्वैतवाद को बीच में नहीं लेके आ सकते क्या ये अद्वैतवाद है ना मैंने कब कहा

01:06:55:16 मैंने कब कहा को बीच में ना लाओ थोड़ी देर पहले आपने कहा कि अद्वैतवाद को बीच में ले आते हो अर कि जो जो आप जल से जो जल से आप जो लहर का उठना बता रहे हैं उसमें तो यह है कि वो हमें दिखाई मात्र दे रहा है भेद जबक कोई भेद है नहीं तात्विक रूप से आपने फिर कहा तत्व से शिव और विष्णु एक है मगर व्यवहारिक रूप से लीला रूप से एक नहीं है उसके बाद फिर कहने लगे शंकराचार्य स्वयं स्वयं यह कह रहे हैं कि मैं आप नहीं बन सकता उन्होने यह बोला है कि मैं आप नहीं बन सकता हूं था व्यवहारिक रूप से नहीं बन सकता व्यवहारिक रूप से नहीं बन सक अच्छा ये बताइए कि शंकराचार्य जी के शास्त्रों को आपने उनकी किस परंपरा के किस आचार्य से समझा है आप आपने शंकराचार्य जी को कोट किया है आपने उनके सिद्धांतों को उनकी परंपरा के किस आचार्य से समझा है यह बताइए इसी बुक से समझा आप गुरुदेव नहीं अच्छा तो आप आप यह कह रहे हैं कि परंपरा से अध्ययन करने की आवश्यकता नहीं है हम शास्त्रों से अध्ययन कर सकते हैं केवल परंपरा से अध्ययन करने की आवश्यकता है परंतु आपने शंकराचार्य के सिद्धांतों को शंकर

01:08:10:18 परंपरा के किस आचार्य से जाकर समझा मुझे समझने की आवश्यकता नहीं है ठीक है तो फिर आप केवल शास्त्रों के आधार पर अपना वक्तव्य दे सकते हैं क्या आप इस नियम को मानते हैं केवल शास्त्रों से नियम मिल सकते हैं हमें गुरु की आवश्यकता नहीं है नियमों को मैं नहीं मानता हूं परंतु शिवजी ये कह रहे हैं पदम पुरा में आचार्य की तरफ से कुछ कोट कर रहे हैं तो शंकर के सिद्धांतों को आपने किसी परंपरा प्राप्त आचार्य से समझा जो उनकी परंपरा के आचार्य है या अपने मन से समझ लिया आप तो उस परंपरा के हैं आप तो उस परंपरा के है तो जो मैंने बोला मैं तो बता रहा हूं ना व्यवहारिक धरातल प एक नहीं हो सकते बोल तो रहा हूं मैंने तो आप जिस संप्रदाय उनकी परंपरा के जो आचार्य उनसे समझाया आप बताइए कि आपने इन शास्त्रों को लेकर के उनकी परंपरा के किस आचार्य के पास गए अगर आप मुझसे पूछो कि आप इसकन के किस आचार्य के पास गए तो मैं फिर बता दूंगा इसन टेंपल लखनऊ उसके अध्यक्ष उनके पास हम जब गए उनसे हमने जब कंफर्म किया कि भाई मैं आपकी किताबों का ये ये अर्थ समझ रहा हूं क्या यह सही है उन्होंने कहा यह सही है उन्होंने उस पर सत्यापन किया आप बताइए कि आप जो समझ रहे हैं शंकराचार्य के सिद्धांतों के बारे में इसका सत्यापन आपने

01:09:25:25 कहां से कराया है क्योंकि आप मेरी व्यवहारिक और परमार्थिक वाली परिभाषा को समझ नहीं पा रहे मैंने आपको उदाहरण भी दे दिया कि व्यवहार में पृथ्वी च अगर आप आप ये बता सकते हैं अभी हम आपसे प्रश्न करना चाहता हूं कि अगर आप यह बता रहे हैं कि कोई आचार्य जो संप्रदाय का है वही बता सकता है कि सत्य है कि नहीं है तो ऐसा क्यों बोला गया है शिव जी के द्वारा कि माया का सिद्धांत जो मायावा सिद्धांत है वो दुष्ट और छ बुद्ध कहा जाता है इसको और मैंने एक ब्राह्मण के रूप में कलयुग में इसको दूंगा ऐसा क्यों लिखा है पदम पुराण में हा चलो ठीक है इसको भी बोल देते हैं पद्म पुराण का य जो श्लोक है इसके बारे में मधवा चार मधवा चार परंपरा के है जो अभी आपको दिखाता हूं एक

01:10:19:02 मिनट अच्छा आप क्या मानते द्वैतवाद मायावादी चलिए यह पुराण दिग्दर्शन है और यह लिखी किसने श्री संप्रदाय राम अनुजा चार संप्रदाय के जो प्रमाणिक आचार्य यह अपनी पुस्तक में लिख रहे

01:11:33:07 हैं आप बार-बार जो बोल रहे हैं कि इसको क्यों बोला है भाई सबसे पहले तो यह ना लक्षण से भी तो वह सिद्ध होना चाहिए आपका सिद्धांत जब वेदों में दिया गया है मायावादी सबसे पहली बात तो यह है आपने एक आरोप लगाया कि मायावादी पहली बात ये है कि शंकराचार्य वो ब्राह्मण है ये कैसे सिद्ध होता है अच्छा शंकराचार्य द्वारा दिया गया सिद्धांत कहां लिखा कि वो माया वाद है ये तो आपने लगाया है उसके ऊपर

01:12:08:27 मायावादी देखिए हां वो अपने आचार्य को पढ़ लेते यह भी बात है अभी जैसे थोड़ी देर पहले मैं आपके सिद्धांतों के आधार पर आपसे बात कर रहा था ऐसे ही हमारे किसी आचार्य ने थोड़ी देर अगर बात कर ली तो उसके लिए हो गया उन्होंने मान लिया वो माया वाद है माया को मायावा तब माना जाएगा जब हमारे सनातन शास्त्र उसको सत्यापित करेंगे ऐसे नहीं शंकर परंपरा के किसी आचार्य ने उसके लिए अगर मायावा को थोड़ी देर बहस के टाइम पर शास्त्रार्थ के टाइम पर थोड़ी देर के लिए अगर उसको मायावा से संबोधित कर दिया तो मायावादी संदाय इसको प्रमाणिक मानते हैं कि नहीं मानता हूं प्रमाणिक मानते हैं यह श्री संप्रदाय के आचार्य है और यह मायावादी ये मायावादी दे रहा है आपको हां दिखाई दे तो इसमें मायावादी और उसका समाधान बता रहे हैं पृष्ठ संख्या 217 और ये क्या कह रहे हैं यह कह रहे हैं यह देखिए आपका वाला श्लोक भी है आप जो श्लोक बोल रहे हैं लिखा है क्या हम हां ये लिख रहे हैं

01:13:24:13 कि प्रतिवादी

01:13:25:10 को मानो आक्षेप करने के लिए किसी पुराण का कोई मूल श्लोक मिलता ही नहीं इसलिए वह प्रक्षिप्त श्लोकों के आधार पर आक्षेप की इमारत खड़ी करना चाहता है अब आप

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01:13:38:21 बताइए इनको माने कि आपको माने नहीं अपने और साथ ही साथ सुन लीजिए सुन लीजिए मायावा साथ ही साथ इन्होंने ऋग्वेद का वो भी दिया है कि अगर सृष्टि को माया मान ना यह वैदिक है वेदों का है ये ये शंकराचार्य ने अपनी तरफ से नहीं दिया है यह देखिए नीचे ऋग्वेद का श्लोक उरत किया है आपको दिख रहा हो संभवत ठीक है दिख रहा है दूसरी बात अगर यह मान भी लिया जाए कि शिव जी ने ऐसा कोई अवतार लिया था जिसमें कि उन्होंने झूठ फैलाया तो यह जो मैच खाता है यह उस प्रकरण से मैच खाता है जहां पर दक्ष के यज्ञ में शिव गणों ने सामने वाले गणों को श्राप दे दिया था कि आपका जन्म ऐसी ऐसी योनि में होगा जहां आप मास मधरा का अवैध पूजा पाठ करोगे अवैध जीवन जियोगे और फिर वही श्राप उन्होंने इनको दे दिया था शिव गणों को और दोनों के उद्धार के लिए वैष्णों के लिए भी और इनके लिए भी का यह तय हुआ कि हम ऐसे शास्त्रों की रचना करेंगे जो अ वैदिक अवद लोगों तक लोगों को वैदिक वैदिक तक पहुंचाए इसके

01:14:53:26 निमित्त ऐसे शास्त्रों की रचना की गई जिनको आगम शास्त्र कहा जाता है आपकी जो ब्रह्म समता है वह भी एक आगम शास्त्र है उसके लिए देवी भागवत में सीधे सधे मेंशन किया गया है कि यह जो आगम शास्त्र होते हैं इसमें अपने संप्रदाय की धारणा को वरीयता देते हुए लिखा जाता है इसलिए और यह कहीं कहीं पर अवैध भी हो जाते हैं इसलिए इनकी उन बातों को ही मानना जो बातें वैदिक हो तो यह जो दूध दही वाला आपका उदाहरण है ना ब्रह्म समता का यह अवैध है क्योंकि यह रुद्र सूक्त का खंडन करता है खैर अब हम दोबारा उस बात पर आ जाते हैं जो हमने पांच प्रश्न उठाए थे आपकी उस बात पर क्योंकि य विषयात हो जाएगा आपने हमने पाच प्रश्न उठाए थे हमने पांच प्रश्न उठाए थे जी उसका तो उसी का उत्तर चल रहा था अभी आपने अगर इन चीजों को बोला तो मेरा य प्रश्न है कि आप अपने आचार्य को नहीं मानते हैं क्या अभी आपने कहा कि किसी आचार्य ने मायावादी मिश्र गोविदा नंद गोविंदा और अनंद गिरी ने भामती भाष्य रत्न प्रभा वाक्य और न्याय निर्णय यह शास्त्र लिखे हैं आपके ही आचार्य शंकर

01:16:09:12 संप्रदाय से तो इन्होने ब्रह्मसूत्र भाष्य की टिप्पणी की है उ किया मायावादी और किसी व्यक्ति के किसी आचार्य के स्वीकार करने से कि यह सिद्धांत मायावादी है सुनि बात आपके शलोक में हो रही है जिस मायावा की बात आपके लोक में हो रही है हमारे आचार्य उसी मायावादी बात कर रहे हैं कि नहीं बात य है अब जैसे माया को आपके भी शास्त्रों में लिखा है लिखा है कि नहीं लिखा है तो आप अपने आचार्य को झूठ मानते हैं आपके शास्त्रों में माया लिखा है कि नहीं लिखा है कौन से शास्त्र में कहां माया लिखा है उस किस संदर्भ में लिखा है वो देखना पड़ेगा संदर्भ लिखा है चलिए मैं दिखाता हूं रुकिए दिखाइए किस संदर्भ में मि वो भी बताइएगा और मेरे को पेज नंबर भी बताइएगा जरा मैं भी देख लू अच्छा मतलब आपके जो आचार्य बोले व सब संदर्भ की बात कह रहा हूं ना मैं उन्होंने

01:17:22:00 मायावादी क्या उन्होने स्वीकार किया क्या उन्होंने स्वीकार किया कि पद्म पुराण में जो वाक्य आया है कि मायावादी है क्या उन्होंने यह स्वीकार किया हम उसी मायावादी बात कर रहे हैं क्योंकि माया तो आपके इस भी आप आप अपने आप अपने आचार को झूठा मानते हैं क्या बताइए कहां लिखा है बहुत फेमस श्लोक है आपका य जिसमें आपने शिव जी का बहुत तिरस्कार किया है ना तिरस्कार क्या ये ले हम तो वैष्णव यथा वैष्णव का तिरस्कार हम कहां करेंगे ये देखिए माया शब्द दिख रहा है माया देवी अच्छा माया देवी अच्छा अच्छा तो माया शब्द आ गया ना आपके में भी तो हो गया भगवान की शक्ति माया की भगवान की शक्ति माया की बात माया शब्द आ जाने से क्या वो मायावादी आचार्य मावाद बोल रहे और देखिए मैं तो ये कह रहा हूं ना मेरे आचार्य ने उसको माया कहा दूसरे माया वाद को माया वाद कहा है पद्म पुराण वाले को नहीं कहा मैं तो स्पष्ट आपके मैं तो स्पष्ट आपके आचार्य का लिखा दिखा रहा हूं जो श्लोक आप बोल रहे हैं उसी श्लोक के

01:18:37:02 बारे में बात हो रही है इनको मानेंगे कि नहीं मानेंगे जिस श्लोक को आप बोल रहे हैं उस श्लोक के बारे में बोल रहे हैं कि झूठा श्लोक है इनको मानेंगे कि नहीं मानेंगे तो ये श्री संप्रदाय के है ना परंतु मैं आप आप देखिए मा तो आप तोय बता रहे ना उन्होने अपने सिद्धांत को मायावा कहा आपने क्या बोला था अभी आपने क्या बोला था अभी आपने ये बोला था अगर आपको किसी संप्रदाय किसी सिद्धांत को जानना है तो आपको उ चार से जानना चाहिए तो मैं तो आपके आचार से जान रहा हूं ना मैंने उनको पढ़ा जो आपने किताब दी है मैंने पढ़ी नहीं हैसे आपने मेरे आचार्यों का नाम लिया कि उन्होंने मायावा कहा है तो आपने उनकी परंपरा के आचार्यों से जाकर व्यवहारिक तौर पर ये पूछा क्या ये जो

01:19:37:04 मायावादी के चार पाच भेद करते हैं फिर उसको अद्वैतवाद बोलते हैं जब उसम कई सारे द्वैत चतुर्वेद बार हो गए पर अद्वैतवाद कैसे हु ठीक है अभी मैंने आपसे एक प्रश्न पूछा अगर आप किसी की शिक्षा प्राप्त होने का क्लेम करेंगे तो उनके परंपरागत आचार्यों के पास जाकर सत्यापित करेंगे कि केवल ग्रंथों से क्लेम को मान लेंगे अच्छा ग्रंथों से क्लेम को नहीं मानना चाहिए तो इसीलिए आप ये मान रहे हैं कि मायावा उन्होने बोल दिया तो ये वही मायावा बो बोले तो जब आप तो मेरे आचार्य एक ही मावाद नहीं है ना मायावा कही है बेर खाती थी वो तीन बेर खाती है बेर शब्द का अर्थ एक बार है थ्री टाइम्स इन ए डे दूसरी बार है थ्री फ्रूट्स इन ए डे अब मुझे पता करना है कि भैया ये दो बार जो बेर शब्द आया है इसमें एक बार क्या अर्थ है दूसरी बार क्या अर्थ है तो मैं तो जाऊंगा उनके परंपरागत आचार्यों से पूछूंगा जाकर के भैया बेर शब्द का क्या अर्थ है जो आपने य मुझे फिनिश करने दीजिए तो आप तो यह जो शब्द है इनका तो बहुत बड़ा खेल है जैसे कि टेलीविजन टेलीविजन का अर्थ है दूर का दर्शन मगर आज के टाइम में अगर हम किसी से कह दे कि मैं टेलीविजन देख रहा हूं दूर का दर्शन कर रहा हूं

01:20:52:04 तो वो तो सोचेगा वो टीवी देख रहा हूं अगर मैं छत पर खड़ा होके दूरबीन से छत पर खड़ा हो कर के दबन से पते पूरी बात तो करने दो पूरी बात तो करने दो छ ड़ा हो करके कोई दूर की वस्तु विशेष देख रहा हूं तो मैं कहूंगा भाई मैं दूर के दर्शन कर रहा हूं व्यक्ति सोचेगा मैं टीवी देख रहा हूं तो इसलिए हमें परंपरागत आचार्य के पास जाक कन्फर्म करना होगा कि जो हम आपकी बात का मतलब समझ रहे क्या वही है या कुछ और है आपने कंफर्म नहीं किया मैंने कन्फर्म किया मैंने इस कन के अधिकृत व्यक्ति के पास जाकर के जो मैं समझ रहा हूं वो कन्फर्म किया अब आप दोबारा से आ जाइए वह पांच सवाल उन परे अब यह

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01:21:37:10 बताइए कि अगर वह झूठ बोलते हैं या वहां पर उनको अपने में भक्ति में लाने के लिए ऐसा बोलते हैं तो क्या यह कोई सनातन सिद्धांत है कि अपने मन से ऐसा करते हैं दूसरी बात ये अगर वो अल्लाह दूसरी बात य कि अगर वो अल्लाह के अनुयायियों के लिए ऐसा कर सकते हैं तो शिव के अनुयायियों के लिए ऐसा क्यों नहीं कर सकते तीसरी बात य कि अगर वो सिद्धांत गैर हिंदुओं के लिए बना था कृष्ण को ना मानने वालों के लिए बना था तो कृष्ण को मानने वालों के क्यों बताया जाता है सिद्धांत चौथी बात ये है जो आप ये बोल रहे हो कि मुसलमानों को भक्ति में लाने के लिए ऐसा किया जाता है बाइबल को बाइबल वालों को उसमें लाने के लिए ऐसा किया जाता है तो क्या कहीं पर अधिकृत व्यक्ति द्वारा यह कोट किया गया है है

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01:22:23:04 आप जो कह रहे हो और एक पांचवा प्रश्न और था वो भूल गया हूं फिर मैं बताऊंगा बताइए अरे वो पहला प्रश्न पांचवा प्रश्न एक ही था आपका तो एक सेकंड हां तो ऐसा इस प्रकार है अभी आपने कहा कि शवों के लिए वो यूज नहीं किया जाता और हिंदुओं के लिए यूज किया जाता है पता नहीं आप शैव और हिंदू को अलग क्यों समझ रहे हैं आप तो अद्वैतवाद है फिर भी शैव और हिंदू अलग कर रहे हैं आप तो ऐसा इस प्रकार है कि आप करते हो ना किई शिवजी भगवान नहीं है भवान है कृष्ण अला है आप ये कहते हैं कि हम जो है मगर कृष्ण अल्लाह में कोई अंतर नहीं है ये आप कहते हो तब मैं कह रहा हूं उस आधार पर मैं कह रहा हूं कि जब आप अल्लाह वालों से कह सकते हो कि अल्लाह और कृष्ण एक है उन्हें मनाने के लिए बहलाने फुसला के लिए तो आप शिव वालों से क्यों नहीं कह सकते हो क्योंकि इसके पीछे एक कारण यह समझना पड़ेगा कि अल्लाह एजिस्ट नहीं करता है अल्लाह एजिस्ट नहीं करता में प्र ब नहीं करते बिल्कुल बनाएगा अभी आप देखिए ऐसा है कि अल्लाह एजिस्ट नहीं करता है अल्लाह नाम की कोई चीज नहीं है ठीक है वो भक्ति में आ भक्ति में

01:23:38:26 किसी अधिकृत व्यक्ति ने ऐसा कहीं बोला है क्या स्टेटमेंट है क्या तो इसको कैसे मान ले आप बो रहे सब प सबसे पहली मैं वही बता रहा हूं आपको सबसे पहली बात तो आपको ये समझना पड़ेगा मैं अपनी इच्छा से आया हूं यहां पर आपको पता है मैं अपनी इच्छा से आया हूं ना मेरे ना अपने मेंटर से परमिशन लेकर के आया हूं ना मैं किसी को य क रहा मैं आपसे पूछ रहा हूं यह जो आप स्न की तरफ से वक्तव्य दे रहे हैं क्या यह शिक्षा कहीं पर हमें मिल सकती है कि वाकई में कन ऐसा मानता है अगर मिल जाएगी तो हमें बड़ा अच्छा लगेगा चलो एक चीज तो कम हुई क्या बात करेंगे अधिकृत व्यक्ति की अगर आप बात करेंगे तो एक नेटिव इ डालती हैय चीज अगर आप अगर आप कसे माने पूर्ण तरीके से यह बात तो पूर्ण तरीके से है कि आपके य अद्वैतवाद में कहीं भक्ति नहीं है भक्ति कहीं भी नहीं है दूर दूर तक भक्ति नहीं आपका वक्त मत है बाद बात करेंगे देखिए होता क्या है जब हम किसी एक विषय पर बात कर रहे हैं तो आप विषयात करने लगते हैं अभी मैं पूछ रहा हूं नहीं कर उता पर आपको लगता है उत्तर दे देगा आपको या उत्तर दे देगा इसको रोको आप

01:24:54:07 ऐसा समझते हैं इसको रोको इसको पीछे खींच के लाओ है ना ऐसा ही है आप अंतर्यामी ये चाहते हैं कि आपको मैं बस हां या ना में उत्तर देता रहू हा या ना मत उत्तर दीजिए पहले हम एक बात को क्लियर करें कि आप अगर कोई टॉपिक समझा रहे हैं तो वह कौन सा टॉपिक है इसलिए मैं आपसे पहले पहले एक हेडलाइन चाहता हूं कि जैसे अभी मैं आपसे पूछ रहा हूं कि क्या किसी इकन के अधिकृत व्यक्ति ने यह कहा है कि हम ऐसा मानते हैं

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01:25:27:12 तो ऐसा है तो कोई हमें प्रमाण दीजिए अगर नहीं कहा है तो हम कैसे माने कि स् कन ऐसा ही सोचता है अधिकृत व्यक्ति के ऐसे अधिकृत व्यक्ति ने ऐसा कभी नहीं कहा है परंतु जितना मैं इसमें रहा हूं रहा हूं मैंने क्योंकि मैं भक्ति मूवमेंट में रहा हूं मैं उनके साथ रहा हूं तो अंदर मुझे रहते रहते ये बात समझ में आई है कि अगर किसी को कृष्ण किसी कृष्ण के प्रति प्रति कुछ और है और बाहरी धारणा कुछ और है दिखाई देने वाली धारणा कुछ और है और अंदरूनी धारणा कुछ और है धारणा आप समझ नहीं रहे हैं आप पता ये क्या कहना चाहर कि अंदर खाते कुछ और चलता है बाहर बहर कुछ और चलता है नहीं आप ही तो कह रहे हो मैं उनके साथ रहा हूं तो इसका मतलब है वो जो मंचों पर जाकर कहते हैं अल्लाह और कृष्ण एक है वो गलत है अंदर से वो मानते हैं अल्लाह और कृष्ण एक नहीं है इसका मतलब वो कहते कुछ है अंदर से मानते कुछ है करते कुछ है कहते कुछ है क्योंकि मुस्लिमों के लिए अल्लाह क्या है परम नियंता है उनके लिए अल्लाह परम नियंता है हमारे लिए कृष्ण पर आपकी चीज को जई करने के उस स्टेप प आऊंगा पर एक चीज क्लियर कर लीजिए कि आपको यह मानना पड़ेगा कि वह कहते कुछ है अंदर से उनकी धारणा कुछ और है धारणा यही है कि कृष्ण ही परम भगवान है ठीक अल्ला अल्ला एस्ट नहीं करते

01:26:42:12 इस कन की धारणा है ना अंदर से ज्यादातर भक्त यही मानते हैं मैं फिर क्लियर शब्दों में पूछ रहा हूं अल्लाह

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01:26:50:08 एसिस्ट नहीं करते इसन की धारणा अंदर से इस कोन की धारणा क्या है आप समझना ही नहीं चाहते इस बात कोयत होती है उतर बात आप थोपना थोपना चाहते हैं बात को आप थोपना चाहते आप ही तो कह रहे हो मैं उनके साथ अंदर रहा हूं मुझे अंदर का पता पर्सनली मैंने पर्सनली 10 11 मुसलमानों को भगवत गीता और श्रीमन चैतन्य महाप्रभु के बारे में चैतन्य चमत प्रीच की है अगर मैं उनको जाकर के बोल भैया आपका अल्ला जो है ऐसा ऐसा ऐसा है तो आप नहीं कह रहा हूं कि जो आपने किया वो गलत है आप जस्टिफाई प क्यों चले जा रहे हैं पहले

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01:27:31:08 एक चीज क्लियर करिए अंदर सेय मानता है अल्लाह एजिस्ट नहीं करते मगर वो बाहर से कहता है कि अल्लाह और कृष्ण है स्कोन ऑफिशियल अगर हम बात करें तो बड़े जिन भक्तो के साथ रहा हूं जिन भक्तों के साथ मैं रहा हूं के साथ आप मुझे निचोड़ बताइए आप भक्तों की बात मत करिए आप अंदर रहे हैं आप बताइए कौन धारणा अंदर से क्या अल्लाह के बारे में यह बताइए इस प्रकार है कि अल्लाह और कृष्ण एक है लेकिन किस किस रूप में एक है उसको आप समझना परम नियंता के रूप में वो एक है परंतु अगर आप यह कहेंगे कि नहीं नहीं अल्लाह जो है कृष्णन अल्लाह कौन है अरबी अरबी में उसको अल्लाह कहते हैं परंतु वैसे तो भगवान अल्लाह कौन है आपकी जानकारी में अल्लाह कौन है अल्लाह कृष्ण है अरबी अरबिक इसमें भाषा भाषा का भेद है भाषा का भेद है भाषा का भेद है किसी से कह रहे होते हैं कि अल्लाह और कृष्ण एक है तो आपको वहां यह नहीं मालूम होता है कि जब मैं कहूंगा अल्लाह और कृष्ण एक है तो उस पंक्ति में वह जो अल्लाह शब्द है उसका अर्थ व निकालेगा कुरान से प्रतिपादित होने वाला

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01:28:44:14 ईश्वर क्या किसी से कहते हैं जब आप किसी से कहते हैं कि अल्लाह और कृष्ण एक है तो आपको यह नहीं मालूम होता है सामने वाला इस मत होने वा कुरान से प्रतिपादित होने वाला ईश्वर और कृष्ण एक है आपको यह नहीं मालूम होता है देखिए आपको भक्ति मूवमेंट नहीं पता ना इसलिए आप ये सब चीज बोल सकते हैं क्योंकि अगर आपको भक्ति के बारे में थोड़ा भी ज्ञात होता तो आपको मद व आप मेरी परीक्षा मत लीजिए मैंने आपसे अभी तक एक बार भी ऐसे नहीं कहा है कि आप ऐसे आप वैसे हैं आपने 10 बार सितो को आपने मुझको आप यह नहीं जानते आपने अध्ययन और करिए आपने सब कुछ कह लिया मुझे कुछ नहीं मद वहार कर रहा हूं तो मैं अपेक्षा करता हूं आप भी मर्यादित व्यवहार करें ठीक है मर्यादित व्यवहार जो आपका बिलीफ है मैं उस हिसाब से जवाब दूंगा ना आपको क आपको पता नहीं है आपने अध्यन नहीं किया ये क्या है अरे आपका बिलीफ है ना कि अल्लाह और सब एक ही है क्योंकि अद्वैतवाद का तो अर्थ यही होता है ना कि सब एक अल्ला आप मुझे बताइए अभी प्रश्न चल रहा है कि क्या इसकन ऊपर से कहता है अल्लाह एसिस्ट नहीं

01:29:59:15 करते क्या आप इसकन अंदर से यही मानता है कि कुछ और मानता है नहीं नहीं क्या मानता है क्योंकि आप भी तो वही जो आप मानते वही मानते हैं कि सब एक ही है अल्लाह और कृष्ण और जीसस क्राइस्ट सब एक ही है आप भी तो यही मानते के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर ईश्वर ही नहीं है सर्वशक्तिमान नहीं है वो तो हम तो मानते फिर वो अलग है वो अलग है वो है ही नहीं तो फिर अद्वैतवाद कहां गया इसमें क्योंकि देखिए आपका बिलीफ है उसकी रिस्पेक्ट करता हूं

01:30:33:10 व करते यही तो दिक्कत है यही तो फोगे आप यही फस अरे आप फस रहे हो करब आपको उत्तर मिल जाता है जब आपको उत्तर मिल जाता तो रा करते आपसे बारबार पूछ रहा हूं कि इस कौन य कहता है कृष्ण अल्ला एक है पहले आपने कहा किसने कहा दिखाओ फिर मैंने आपको प्रमाण दिया तो आपने बोला वो उनको विलय कराने के लिए भक्ति में लाने के लिए बोलते हैं फिर मैंने कहा कि ये अधिकृत कैसे माने तो मैं उनके साथ अंदर रहा हूं आपको आपको हम प्रमाण मान ले फिर मैंने जब इसको भी क्लियर करना चाहा तो हम यह मान ले कि इस कौन बाहर से कुछ कह रहा है मगर उसकी जो धारणा अंदरूनी रूप से कुछ और है तो वो भी आप क्लियर नहीं कर रहे और क मैं उसका उत्तर क्लियर उत्तर दे रहा हूं अल्लाह और कृष्ण एक

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01:31:19:10 लाइन है अल्लाह और कृष्ण एक है या तो झूठी लाइन है या फिर यह झूठी नहीं है हां कि ना यह सच्ची लाइन है सच्ची

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01:31:29:16 लाइन ला अल्ला और ये जो लाइन है अल्लाह और कृष्ण और शिव एक नहीं है ये जो लाइन है ये सच्ची लाइन है या झूठी लाइन है आप बात को समझ नहीं रहे यह भी सच्ची लाइन है कि महाविष्णु और सदाशिव एक ही है समझ रहे हैं आप महाविष्णु आपने क पर कही बात शिव और विष्णु एक हैव जहां जहां परम नियंता की बात

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01:31:54:22 है जहां जहां परम नियंता की बात आती है वो कृष्ण है परम नियंता की बात क अल्लाह को कोई परम नियंता करके संबोधित करता है अगर अल्लाह को कोई परम नियंता कह के संबोधित करता है तो इसका अर्थ यही है कि वो कृष्ण को संबोधित कर रहा है अगर क्राइस्ट को कोई परम नियंता कहके संबोधित करता है तो इसका अर्थ यही है कि वो कृष्ण को संबोधित कर रहा है क्राइस्ट का अर्थ होता इसका मतलब यह है कि कौन सच बोलता है ये वाली बात कृष्ण और अल्ला एक है जी बिल्कुल बोलता है अंदर से कोई धारणा अलग नहीं है ना नहीं अभी थोड़ी देर पहले तो आप कह रहे थे अलग है तो मेरी पर्सनल व हैय क्या आपने क्या है यह क्या है जब आप बोल रहे क्या है

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01:32:38:07 देखिए स्कोन की जो देखि आपको जो विचारधारा पसन क्या जाने आप पर्सनली क्या जाने के बारे में यही जानता हूं कि जो श्रीमन चैतन्य महाप्रभु का

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01:32:56:06 जो हरि नाम संकीर्तन जो अल्लाह के बारे में आपने थोड़ी देर पहले बोला था कि वो

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01:33:00:13 ये मानते हैं कि अल्लाह एजिस्ट ही नहीं करते अंदर से य मानता है स्कोन आपने जाना है क्या कोन की बात नहीं की मैंने मैंने कुछ कुछ लोगों की बात की मेरे जैसे लोग लोगन कन ऐसा नहीं मानता अभी आप पर्सनली क्या मानते हैं इसकन के बारे में क्या मानता है अरे भैया परम नियंता की जहां बात आती है वो कृष्ण की बात होती उत्तर दे रहा हू महाराज तो मैं आपको उत्तर दे रहा हूं जहां परम नियंता की बात आती है चाहे उसको अल्लाह नाम से पुकारे किसी भी नाम से पुकारे नाम कि मेरा जो क्वेश्चन है वो ये नहीं है मेरा क्वेश्चन ये है

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01:33:34:08 अभी आपने अपना पर्सनल वाला अलग कर लिया स्कन से ठीक है किया ना अब मैं आपसे पूछ रहा हूं पर्सनली आप स्कन के बारे में क्या जानते हैं क्या अंदर से उसकी धारणा यह है कि अल्लाह एजिस्ट नहीं करते या नहीं है उसकी धारणा ये

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01:33:50:12 धारणा यही है कि चाहे वो अल्लाह को ही कहे चाहे वो कुछ भी कहे जहां व परम की बात परसनल बात कही है कन के लिए नहीं थी नहीं आप ऐसा सोचते हो इस कन के बारे में आप ऐसा सोचते हो इस कन के बारे में इस कन ऐसा नहीं सोचता है अपने बारे में ग नहीं है किसी भी हद प व गलत बिल्कुल भी नहीं है आपको सी बात कह लेते सारी बात कह लेते हो यही तो दिक्कत है जहां पर जाओगे हा वो भी बा गलत नहीं वो भी बात गलत नहीं य भी गलत नहीं गलत नहीं तो भाई एक निष्कर्ष तो दो आपके अनुसार ार क्या है अला के बारे में इसको उन की धारणा क्या है अल्लाह के बारे में अगर आप सुनना समझना नहीं चाह रहे पता नहीं जहां जहा बने न मानता है बेत कर रहा है इसन मानता है के बारे बात कर रहा है मगर जब आपने बताया कि मैंने अंदर रह कर जाना है इस कोन य मानता है अल्लाह एजिस्ट ही नहीं करते अब इसमें से कौन सी बात को माने इस कोन के बारे में मैंने अंदर रह कर के इसकन की अंदर रह कर के नहीं जाना भक्तों के साथ रह कर के कुछ भक्तों के विचार जाने मैंने ऐसा बोल रहा हूं पर्सनली विचारों से आपको क्या लगान

01:35:05:21 की धारणा का पता लगा कि नहीं पता लगा इकोन की धारणा का पता लगा इस कोन की धारणा यही है कि चाहे कोई अल्लाह बोले या जीसस बोले जहां वो परम नियंता की बात कर इस बात को समझना नहीं चाहते हैं आप मेरी बात को हां या ना में जवाब लेना चाहते हैं तो मुझे समझ नहीं आरहा करते ये बात आपने क्यों बोली है आप क्या मानते हो अल्लाह एसिस्ट करते हैं कि नहीं करते हैं अल्लाह एजिस्ट करते हैं नहीं करते हैं देखिए वो शाब्दिक भेद है अभी आपसे पूछ रहा हूं अल्लाह एजिस्ट करते हैं कि नहीं करते आप क्या मानते हो निरा निराकार अगर उसकी कोई ये डेफिनेशन देता है कि निराकार ब्रह्म है वो एजिस्ट करता है तो वो नहीं करता है मतलब करता भी है लेकिन वो कृष्ण कृष्ण से ही आता है ठीक है और अगर कोई कहे कि परम अंता है वो अल्ला होने वाला ईश्वर है वो एजिस्ट करता है कि नहीं करता है अगर कुरान में ये डेफिनेशन है उसकी कि वो निराकार ब्रम है वो फम नहीं ले सकता मैंने कुरान नहीं पढ़ी नहीं पढ़ी उसके बारे में डिसीजन कैसे दे रहे हैं कुरान का जो यह पोर्शन है कि वह फॉर्मलेस है और वो निराकार है जो अल्लाह की व्याख्या है उस भेद उस उस उस तरीके से देखेंगे तो इस प्रकार है कि वो फॉर्मलेस है तो वो अल्लाह एजिस्ट नहीं करता है पर शब्द

01:36:20:28 अगर शब्द की बात करेंगे अल्लाह को भगवान को अल्लाह के रूप में संबोधित करते हैं तो अल्लाह कृष्ण को हम अल्लाह के रूप में संबोधित कर सकते हैं उसमें क्या है यानी कि आप ये कहना चाहते हैं कि जब हम कहते हैं कि अल्लाह और कृष्ण एक है तो हम ये नहीं कह रहे कुरान के दवारा प्र होने वाला ईश्वर हम कह रहे बस अल्लाह नाम की कोई एंटिटी है मैं उसको बता रहा हूं आपका भगवत दर्शन मेरा भगवत दर्शन अलग है आप मानते हैं इस बात को इसलिए हमा हमारी विचार धरा अलग है भगवान को लेक जब मेरे से भगवान की बात करेंगे तो मैं कृष्ण समझूंगा अगर आपसे भगवान की बात करेंगे तो आप बाकी देवी देवताओं को भी बीच में सम्मिलित करेंगे इसी प्रकार है वो हमारे ईस्ट है हम राम को हम राम को ईस्ट रूप में मानते हैं राम को तो आप राक्षस मानते हैं अभी अभी मुक्तेश्वरा अंद जी ने बोला था राक्षस उसम प्रवेश कर जाएगा ऐसा कुछ बोला उन्होंने तो खैर अगर आप सामने होते तो जरूर आपको मैं ये चुनौती देता कि इसको सिद्ध करिए अभी ऑनलाइन पर बैठ कर आप कुछ भी कर सकते हैं खैर सारी बातें ऑन रिकॉर्ड है आ बते क्या कहा जी को रक्षस नहीं कहा क्या उन्होने राम जी की मूर्ति को कहा तो राम जी की मूर्ति को उसम कैसे राक्षस घुस जाएगा भैया उसमें कैसे राक्षस घुस जाएगा आप शास्त्रों को

01:37:35:28 नहीं मानते मैं तो शास्त्र को मानता हूं इसी प्रकार आप पहले अगर को य जवाब दे सकते बताइए राम जी कौन है अगर आप मुझे ये जवाब दे सकते हैं कि उसम असुर कैसे प्रवेश कर जाएगा तिरस्कार कर रहे हैं मे लोगों का मैंने अभी तक तिरस्कार किया क्या तिरस्कार कहा नहीं आप राम जी का तिरस्कार करें बने उनका कहीं से कोई एक रा सवाल ये चल रहा था सवाल यह चल रहा था कि राम कौन है सवाल यह चल रहा था कि अल्लाह और कृष्ण एक कैसे हैं इसको बात करिएना अभ मुक्तेश्वरा जी को क्यों ला रहे बीच में क्यों आ रहे आपका पला हका प रहा इसलिए मुझे बुरा लगे मुझे अच्छा महसूस ना हो इसलिए आप ऐसी बातें बोल रहे हैं मैं तिल मिलाऊ श्रीमन चैतन्य महाप्रभु को बीच में लेके नहीं आया अभी मैं क्योंकि वो भी आप श्रीमन चैतन्य महाप्रभु को मानते हैं क्या श्रीमन चैतन्य महाप्रभु को क्योंकि देखिए विषयात मत करिए आप ये बताइए क्या इसकन अल्लाह को मानता है वो एजिस्ट करते हैं या नहीं करते हैं प कही मैंने यही बात पहले कही आप आप चाहते हैं कि मैं हां बोलू या ना बोलू

01:38:51:24 आपने कहा या मैं हां बोलू या मैं ना बोलू लेकिन मैंने

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01:38:55:12 कहा कि आपका भगवत दर्शन अलग है मेरा भगवत दर्शन अलग है उसी प्रकार से शब्द में वो अल्लाह बुलाते हैं परंतु उनका दर्शन अलग है हमारा अल्ला दर्शन अल बात समझने का प्रयास कर रहा हूं आप मेरा प्रश्न समझिए मैं ये बोल रहा हूं जब आप कहते हैं अल्लाह और कृष्ण एक है तो क्या आप यह कहना चाहते हैं कि जब आप अल्लाह और कृष्ण को एक बताते हैं तो आप कुरान के द्वारा प्रतिपादित

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01:39:18:10 होने वाले ईश्वर की बात नहीं कर रहे होते हैं जब आप कहते हैं अल्लाह और कृष्ण एक है तो क्या आप तब कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर की बात नहीं कर रहे होते हैं उसी का जवाब दे आपकी आवाज नहीं आ रही उसी का जवाब दे रहा हूं मैं आपकी आवाज नहीं आ रही आवाज आ रही [संगीत] है आवाज आ रही है नहीं आ रही नहीं आ रही नहीं आ रही नहीं आ

01:39:58:10 रही आवाज आ रही है अब आ रही है अब आ रही है आवाज आवाज आ रही है नहीं आ रही आरही दोबारा री जॉइन करूं आवाज नहीं आ रही आपकी दोबारा न करू अब आ रही

01:40:41:10 है अब आ रही है मैं दोबारा आ अब आ रही है आवाज हां आ रही है मेरा स स यह है कि जब आप कहते हैं कि अल्लाह और कृष्ण एक है तो क्या हम यह माने कि आप कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर की बात नहीं कर रहे हैं बिल्कुल अच्छा ठीक है देखि ऐसा तो आपको कहीं भी कोई भी कोटेशन नहीं मिलेगी किसी भी आचार्य की कि उसी की बात हो रही अल्लाह का अर्थ है परम नियंता अगर परम क समझ रहा हूं देखिए आप जो कह रहे हैं ना वही मैं समझता हूं मगर बात यह कि सच्चाई को बाहर लाना ठीक है मैं यही समझता हूं इसकन जब यह कहता है मगर प्रॉब्लम यहां पर यह आ जाती है

01:41:57:01 क्या इसकन को नहीं मालूम है कि जब हम कहेंगे अल्लाह तो सारी दुनिया सोचेगी कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर सारी दुनिया उसको परम नियंता के रूप में पहले मानती है नहीं ऐसा नहीं है कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर समझेगी या नहीं समझेगी यह बात मालूम है कि नहीं इस कौन को देखिए वो मैं तो नहीं समझ स क्यों देखिए प आते हैं मैं सीध बात रहा हं क्या इस कौन को ये मालूम है कि

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01:42:26:24 नहीं जब हम बोलेंगे अल्लाह तो सारी दुनिया सोचेगी कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर क्या इस कौन को यह बात नहीं मालूम है

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01:42:35:27 या तो व या तो व ये कहे कि हां अल्लाह और कृष्ण एक है मगर कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर अल्लाह नहीं यह अलग अल्लाह की बात कर रहे अगर अल्लाह को आप परम नियंता मानो तो ठीक है मगर आप यह मत सोचना कि कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर और हमारा ईश्वर कृष्ण एक है क्या ऐसा बोला उन्होंने कहीं अल्लाह को दुनिया परम नियंता के रूप में मानती है नहीं मानती पूरी दुनिया नहीं क्या स्न वाले जानते हैं जब हम अल्ला बोलेंगे जब हम अल्लाह बोलेंगे क्या नहीं नहीं आप समझना नहीं आप समझना नहीं चाहते बा चाहते फसो अब मैं दूसरा प्रश्न बोल रहा तो फस ही नहीं रहा भया आप हर जगह फसे कौन सी बात आप केवल मुह से बोल रहे जनता को दिखाई देगा आप कहां फसे जो देखेगा इसको लाइव चैट को वो देखेगा आप कहां क फसे हैं आप ह मुझे चाहते कि हा ना में जवाब दू आप तो किसी टॉपिक को शुरू करने से पहले आपकी व्याख्या सुनने से पहले आपका मत तो पता चले कि आप किस बारे में बताने जा रहे हैं मैं आपसे पूछ को भगवान मानते नहीं देखिए ये वो अरे मैं विष्णु को भगवान मानता हूं हां

01:43:50:28 अब मैं आपको बताऊंगा क्यों मानता हूं यह अगला स्टेप है अभी आपसे मैंने पूछा जब स्कोन वाले कहते हैं कि शिव और अल्लाह एक है तो क्या उनको नहीं मालूम होता है कि हम जब कहेंगे अल्लाह तो इसका अर्थ पूरी दुनिया यह समझेगी कि कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर की बात हो रही है देखिए मेरी बात उने अ कहा उन्होंने जब अल्लाह कहा तो क्या किसी अधिकृत व्यक्ति ने कहीं लिखा है कहां है ऑन वीडि कि हम कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर की बात नहीं कर रहे हैं तो सबसे पहली बात तो आपको यही समझनी पड़ेगी जो हम हम जो है जो सनातनी है वो तो ऑलरेडी कृष्ण को परम भगवान मानते हैं सनातनी इन द सेंस की वैष्णव तो दूसरी बात जो आप कह रहे हैं कि पूरी इसको को पूरी व्याख्या करनी चाहिए कि अल्लाह कृष्ण है परंतु जो कुराण के द्वारा प्रतिपादित होने वाला अल्लाह है वो नहीं अब इसी बात को कह रहे ना कि पूरी क्लीयरेंस देनी चाहिए इसी बात को तो कह रहे परंतु क्या अरेबिक वर्ल्ड इस चीज को समझेगा क्या जो कि मुस्लिम है क्या व इस बात को समझेंगे क्या नहीं कक अल्ला की बात आ हो मेरे भाई आप जस्टिफाई कर रहे हो अभी आपने क्वेन किया

01:45:06:19 जब पूछ रहा क्या विष्णु को भगवान मानते हो तो पहले आप य बताओगे हा मानते उसके बाद बताओगे क्यों मानते हैं अभी मैंने आपसे पूछा है जब कहते अला तो उनको नहीं मालूम होता है कि सारी दुनिया समझेगी कुरान के दवारा होने वाला ईश्वर सारी दुनिया देखिए जो उसको मानने वाला है अल्लाह को मानने वाला इसके बारे में बताइए क्या जब स्कोन अल्लाह शब्द का उपयोग करता है तो वो यह नहीं जानता है कि लोग समझेंगे कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर आपको ना इसमें दो चीजें समझने वाली है अब मैं आप कहेंगे क्लेरिफाई कर रहा तो भैया आपने क्वेश्चन किया तो उसको क्लेरिफाई तो करूंगा क् जब अपना आप अपना आप मुझे मत तो बताइए आप क्या क्लेरिफाई करने वाले हैं अगर उसको क्लेरिफाई करने की आवश्यकता होगी तभी तो उसम टाइम वेस्ट किया जाए भाई आप पहले क्लियर तो करिए टाइम वेस्ट कैसे टाइम वेस्ट ऐसे कि जब आप मान लीजिए मैं मान लीजिए सपोज करिए मैं कह रहा हूं कि विष्णु भगवान नहीं है मान लीजिए सपोज और आप आपसे मैंने पूछा क्या विष्णु को भगवान मानते हैं आपने कहा नहीं मानता तो ब बात खत्म हो गई इसमें कुछ क्लेरिफाई करने की आवश्यकता ही नहीं है अभी वही बात अभी वही बात सुनि अपना म तो बता ही नहीं रहे ना मैं पूछ रहा हूं क्या इस जब अल्लाह शब्द का उपयोग

01:46:21:20 करता है तो क्या उसको यह मालूम नहीं होता है कि लोग अल्लाह शब्द का अर्थ समझेंगे कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर तो अभी मैं आपसे पूछता हूं क्या आप चाहते हैं कि मैं हां ना मैं उत्तर दूं या फिर मैं उत्तर दूं अरे आप अपना पूरा बताइएगा इस चीज को पहले कोट करिए क्या उसको मालूम होता है या नहीं होता है तो जिस जैसे आपने अभी कहा उसको मालूम होता है कि नहीं होता है ये

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01:46:46:26 पहले बता दीजिए फिर आगे चलिए अल्लाह को मानने वाले ऑलरेडी हैं तो उनके मन में तो अल्लाह की वही छवि है ना जो कुरान में दी गई है ऐसे सुन लीजिए फिर जब हम मुसलमान से अल्लाह कहेंगे तो व यह समझेगा कि कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर की बात हो रही है ये कन को मालूम होता है बिल्कुल होता है इसका मतलब इसकन सोच समझ के वहां पर झूठ बोल रहा होता है क्योंकि वो कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर की बात नहीं कर रहा है वो जानता है कि ये क्या समझ रहा है मेरे अल्लाह का मतलब फिर भी वो वहां पर क्लेरिफाई नहीं करता है

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01:47:19:27 इसको तो मैं क्लेरिफाई कर देता हूं अगर आप सुने पहले पहले इसको क्लियर तो करिए पहले क्या ऐसा ही है जो मैं समझ रहा हूं हां ऐसा ही आप जो समझ रहे हैं वैसा नहीं है आप जो समझ रहे हैं वैसा नहीं है मैं बताता हूं कैसे इस प्रकार है जैसे

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01:47:35:10 कि अगर अल्लाह शब्द का प्रयोग होता है तो अल्लाह को मानने वाले तो यही समझेंगे जो कुरान के द्वारा प्रतिपादित हो रहा है वो वाला अल्लाह परफेक्ट तो लेकिन जो कि इस कोन में या फिर जो वैष्णव मानते हैं कृष्ण परम भगवान है समझ गए आप मेरी बात तो उनके जो मन में अल्लाह की जो छवि है कि वो फॉर्मलेस है वो ये है वो तो ये सब गुण कृष्ण में भी है तो कृष्ण भी कर सकते हैं ये सब अगर आप कहेंगे नहीं कर सकते हैं तो फिर आप बाधित कर रहे हैं उनको मैं तो नहीं कह रहा कि नहीं कर सकते मैंने कब कहा तो बस फिर आपने एक्सेप्ट कर लिया कि जो अल्लाह की बात होती है कृष्ण ही है अल्लाह की जो बात होती है वो कृष्ण ही है चाहे जो जो अल्लाह के फीचर्स है वो सब कृष्ण कर सकते हैं तो मैंने एक्सेप्ट कर लिया अल्लाह कृष्ण एक है कर सकते हैं क्या नहीं कर सकते हैं कर सकते हैं तो बस फिर एक्सेप्ट कर लिया कैसे बस फिर कैसे ब बस फिर क्या होता है हो सि हो गया अगर उस अल्लाह की बात भी करता है जो कुरान में प्रतिपादित मैंने अगर यह कहा कि मैं अपने छोटे बच्चे के बराबर तेज स्पीड में चल सकता हूं तो इसका मतलब य हो गया कि मेरे और छोटे बच्चे के बीच में कोई अंतर नहीं है भाई मेरी अपनी भी तो कैपेसिटी है वो कहां चली जाएगी कृष्ण की अपनी

01:48:50:13 कैपेसिटी कहां चली जाएगी कि मैं अवतार ले सकता हूं अपनी कैपेसिटी कहां जाएगी कृष्ण की तो किसी चीज को एक कि जो जो अल्लाह कर सकते हैं वो वो कृष्ण कर सकते हैं तो इससे वो सिमिलर हो गए कृष्ण सिमिलर यार आप समझ नहीं रहे हैं मेरी बात को इस प्रकार है कि कृष्ण अगर फॉर्मलेस है तो कृष्ण फॉर्म भी ले सकते हैं बस फिर बस फिर वो बताइए पहले बस फिर क्या था वो तो वो तो आपने एक्सेप्ट किया ना तो मैंने यही बोला अल्ला है जो अल्लाह है उनके मन जो अल्लाह को मानने वाले हैं जैसे कि मुस्लिम है तो उनके मन में अल्लाह की छवि ये है कि वह एक निराकार है वो निर्ब है वो सर्वशक्तिमान है यही उनकी छवि है

01:49:36:02 तो कृष्ण

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01:49:37:15 में यही गुण है कुछ ऐसी चीज है जो अल्लाह से अलग है बिल्कुल जो अल्लाह में है ही नहीं कृष्ण में आपकी आवाज नहीं आ रही कृष्ण में अल्लाह से एक्स्ट्रा गुण भी है ना उनको कहां ले जाओगे कृष्ण में अल्लाह से एक्स्ट्रा गुण भी है अल्लाह 61 में कह रहे हैं मेरी संतान नहीं हो सकती आपकी आवाज नहीं आ रही अब आ रही है नहीं आ रही

01:50:19:01 आता हां बारी मैं यह कह रहा

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01:50:46:09 हूं कि अगर कृष्ण में वो सारी क्वालिटीज है जो अल्लाह में है मगर अल्लाह से अलग क्वालिटीज भी है कृष्ण शिक्षा अलग देते हैं अल्लाह शिक्षा अलग देते हैं तो मैं य मान लूंगा क्योंकि अल्लाह वाली क्वालिटी कृष्ण में इसलिए हो गया कि कृष्ण

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01:51:00:10 अल्ला एक है आप देखिए इस बात को ऐसे समझना पड़ेगा बोला कृष्ण में एक्स्ट्रा क्वालिटीज भी है इनफा क्वालिटी होता क्या है पहले एक चीज बता दूं होता क्या है कि हम लोग जो एक पॉइंट होता है वो क्लियर कट होने से पहले ही हम दूसरे पॉइंट पर चले जाते हैं अभी बात हो रही है कि जब इसकन किसी को अल्लाह कहता है जब इसकन अल्लाह की बात कर रहा है एक मुस्लिम सेवा आवाज नहीं आ रही

01:51:55:18 मैं पूछ रहा हूं जब इसकन किसी मुस्लिम से यह कहता है कि अल्लाह और कृष्ण एक है तो वह जानता

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01:52:02:13 है कि जब मैं अल्लाह कह रहा हूं तो अपने कुरान के अल्लाह को अल्लाह समझ रहा है है ना हां जानता है ब व क्या वो वहां पर उसकी गलतफहमी दूर कर रहा होता है या उस बात को जाने देता है तो अगर आप किसी को यह बोलेंगे कि अल्लाह और फिर कर रहे यही तो बात है आप क्लियर नहीं करते वो जाने देता है कि नहीं जाने देता है क्लियर करता है मुसलमान को वो एक मुसलमान से जब ये कहता है कि तुम्हारा अल्लाह कृष्ण हमारा कृष्ण एक है तो क्या वो व वो उसको क्लेरिफाई करता है कि मैं तुम्हारे कुरान के अल्लाह की बात नहीं कर रहा हूं यह क्लेरिफाई करता है वहा वो कुरान के अल्लाह की ही बात हो

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01:52:42:28 रही है तो व जो कुराण का अल्लाह है वो भी कृष्ण ही है समझ रहे कुरान का अल्ला कृष्ण हैरान आप मेरे से क्योंकि जो आप जो सुन जो सुनना चाहते हैं ना तो आप वही चाहते कि मैं वही बोलू जब गलत सत प होता है व जब सि होता है व्यक्ति तो फसता है आप फेंगे आप सि की बात करें तो फिर अवत से बड़ा सिद्धांत गलत कोई है ही नहीं अब आप सिद्धांत प मेरी सिद्धांत प उंगली उठाएंगे तो अद्वैत से बड़ा बत गलत मैंने तो आपका सिद्धांत मैं

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01:53:14:08 आपका मैं प्रूफ करने के बाद बोल रहा हूं मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या मुस्लिम को यह कहते समय अल्लाह और कृष्ण एक है वहां व यह क्लियर करते हैं कि यह कुरान का अल्लाह नहीं है जिसकी हम बात कर रहे हैं वही चीज है जो आपने एक्सेप्ट की थी कि अल्लाह और कृष्ण में एक ही क्वालिटीज है कृष्ण में ज्यादा है पर अला अला के अंदर जित क्टी वो सब इसके अंदर है कृष्ण के अंदर मगर अल्लाह और कृष्ण के अंदर एक ही क्वालिटी नहीं है कृष्ण अवतार लेते ता धर्म कृष्ण तो कुछ भी कर सकने वाले ईश्वर है सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रह्म कृष्ण जो है असतो मा सद गम तमसो मा ज्योतिर गम मृत मतम गम ये चा का विषय है कृष्ण अल्लाह नहीं है अल्लाह 61 में कह रहे है मैं नीचे नहीं आ सकता अल्लाह कह रहे हैं दो दो 106 में कि मैं अपनी बातों को बदल ता हूं रामो दना भी भाष प्रभु श्री राम कह रहे हैं राम दो प्रकार की बातें नहीं करता है रकुल री सदा चल जाई प्राण जाई पर वचन ना जाई इसका अर्थ है मां का मतलब मां बहन का मतलब बहन बेटी जो मैंने बोला था सुला 33 अध्याय के 33 अध्याय के अपनी चौथी आयत में बता रहे हैं कि भाई अगर आपने अपने मुख से किसी को बहन बेटी या मां बोल

01:54:29:12 दिया है कुछ भी रिश्ता बना लिया है उन रिश्तों की कोई वैल्यू नहीं है तो इतनी सारी चीजें अलग है इसलिए ये सिद्ध होता है कि कृष्ण और

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01:54:38:20 अल्लाह एक नहीं है अब मैं आपसे पूछ रहा अल्लाह की बात करते तो क्वालिटीज की बात कर रहे हैं अल्लाह की क्वालिटीज की बात कर रहे हैं वो कृष्ण में भी है उसको अल्लाह कोट करते हैं क्या कोट करते हैं दोबारा बोलिए जब आप अल्लाह की बात करते हैं कि अल्लाह और कृष्ण एक है तो ऑफकोर्स कृ नहीं करता पलेही करत कर रहा अपनी बात करहा अपनी बात कर रहा हूं

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01:55:00:15 तो जब हम ये कोट करते हैं कि कृष्ण और अल्लाह एक है तो इसका अर्थ है अल्लाह में क्वालिटी है वो कृष्ण में भी है कृष्ण में चाहे इनफा है परंतु अल्लाह का

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01:55:10:26 [संगीत] सुप्रीम होने वाला ईश्वर इनफिट है क्या इनफिट है अगर वो परम तो कृष्ण है मैं पूछ रहा हूं कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर इनफिट है क्या दोबारा पूछ रहा हूं क्लियर जवाब दीजिए इनफा इस प्रकार है कि जो उसमें गुण है जो उसमें कला जितनी वह जानते हैं समझ रहे हो आप मेरी बात इस बात को इस प्रकार से समझिए उदित होने वाला ईश्वर है वो इनफिट नहीं है आप गलत है यहां पे नहीं अरे आप मेरी बात को समझ नहीं रहे हैं आप मेरी बात को सुन नहीं रहे हैं आप सुनना चाहते ही नहीं है जिस प्रकार आपका और मेरा सिधांत अलग है आपका भगवत दर्शन और मेरा भगवत दर्शन अलग है उनका भगवत दर्शन अलग है वो अल्ला को किसी और रूप में देखते हैं वो कृष्ण को अलाह के रूप में देखते उनकी क्वालिटी उनकी कमते पूछ र कुरान के द्वारा डिफाइन होने वाला ईश्वर इनफिट है क्या उनकी अगर आप डेफिनेशन कुरान के सीमा का ईश्वर इनफिट है क्या तो आप वही बात है मैंने जो कही आप हां ना में जवाब चाहते हैं हा ना जवाब दूंगा फिर ल बना आप उनकी उनकी धारणा मैं मुसलमानों की धारणा की बात नहीं कर रहा हूं कुरान जो गं है पुस्तक

01:56:26:01 है उसके द्वारा डिफाइन किया जाने वाला ईश्वर इनफिट है क्या मैं उसका जवाब दे रहा हूं आपको अगर आप सुनेना नहीं होता है ना जवाब स्पष्ट जवाब देते ही नहीं आप हा ना में जवाब दूंगा ही नहीं मैं हां ना में जवाब इसका अर्थ है कि मैं आपको र कभी दू दूंगा ही नहीं आभ क्योंकि अगर आपरे डल दो ने बात की है उन्होंने ऐसे ही किया है ऐसे ही किया है और फिर वो तिल मिलाते फिर कहते मैं आ रहा हूं आज विष्णु द्रोही कते तो नहीं रहा मैं तो

01:57:00:06 आपने मुझे विष्णु द्रोही कहा ना मैंने आज तक एक भी आपत्ति जनक शब्द कहा है क्या आपके लिए एक भी आपत्ति जनक शब्द बताइए कहा है क्या मैंने मुझे लगता है मैंने भी आपके लिए कोई आपत्ति जनक शब्द नहीं कहा आपने विष्णु द्रोही कहा ना मुझे मैं राम का उपासक हूं आप कह रहे विष्णु द्रोही तो आप तो फिर मैं उस बात पर उस बारे में बात करूंगा तो आप क कहेंगे मर्यादा भूल रहे हैं बा बोल रहे हैं तो उस बात पर मैं नहीं जाना चा मर्यादा वाली बात है ना वो तो आप किसी दिन अगर प्रत्यक्ष रूप से मिलते और आप फिर ऐसी बातें करते तब मैं आपको समझा पाता कि क्यों नहीं करनी चाहिए अब आप प्रत्यक्ष रूप से तो है नहीं मेरे सामने तो आप कुछ भी बोल लीजिए दूर बैठे हुए दूर बैठे बोलने कहां दे रहे हैं आप तो कहते कि मैं हा ना हा ना हा ना हा ऐसे करता अरे भाई जब हम किसी चीज को डिफाइन करेंगे उससे पहले हम यह तो समझ ले कि आप कहना क्या ने वाले क्या हो आप हमें क्या समझाने जा रहे हो तो मैं आपको वही समझाना चारहा कुरान के द्वारा प्रपात होने वाला जो ईश्वर है वो इनफिट है क्या हां तो उसका उत्तर है ना लेकिन क्यों ये सु ऐसे बोला करो ना लेकिन क्यों अब मैं सुनूंगा आपकी बात ऐसे बोला करो ना लेकिन क्यों अब बताओ क्यों बताओ लेकिन क्यों जिस प्रकार आपका और

01:58:15:08 मेरा भगवत दर्शन अलग है उसी प्रकार कुराण उनको मानने वा यन कुरान का ईश्वर इनाइट नहीं है तो डिफाइन करने की आवश्यकता क्या रह गई फिर अगर आप कहते अच्छा अभी आप कह रहे हैं कि क् नहीं चलो ठीक है आप आपने कहा कि हां ना में जवाब दो फिर बोलो अब मैं हां ना में जवाब देके बोलता हं तो आप मत बो लीजिए आप कर लीजिए डिफाइन कर लीजिए मगर कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि आप अगर कहते हां इनफिट है तो आवश्यकता होती उसको सिद्ध करने की ये तो मैं सहमत सहमत हूं इस बात से कि नहीं है इफना तो इसको सिद्ध करना की आवश्यकता ही नहीं है अब लेकिन यह बात मैं बोलूंगा क्यों बोलूंगा क्योंकि उसके पीछे कारण आप इसलिए बोलेंगे कि हम फिर कहते क्यों जब वो इनाइट नहीं है तो हम एक क्यों बताते हैं उसे वो आप इसलिए बोलेंगे क्योंकि ना इफट नहीं है क्योंकि जिस प्रकार हर एक का भगवत दर्शन अलग होता है उसी प्रकार उनका भगवत दर्शन अलग है उनके हिसाब से क्वालिटीज जो है वो इनफा नहीं है उन्होंने नहीं लिखी जितनी उनको क्वालिटीज पता थ उतनी लिख दी उन्होंने कृष्ण की क्वालिटी समझ रहे हैं नहीं समझ रहे जैसे मेरा और आपका भगवत दर्शन अलग है उनका भगवत दर्शन अलग अगर सनातन धर्म की भी बात करेंगे तो अगर आर्य समाजों की बात करते तो वो भी इनफा नहीं मानते हैं वो भी क्वा कम क्वालिटी लिमिटेड क्वालिटीज मानते हैं परंतु स्वयं

01:59:30:12 को हिंदू बताते हैं उसी प्रकार मुस्लिम है वो स्वयं को मुस्लिम बताते हैं लेकिन अल्लाह जो है उसकी क्वालिटीज को लिमिटेड बताते हैं तो हम उसी प्रकार उनको कहते हैं कि आपका जो भगवत दर्शन है वो अलग है आपकी जो क्वालिटीज है वो लिमिटेड है हालांकि भगवान की क्वालिटीज बंड है अनलिमिटेड है उनके भगवत दर्शन में भगवान की क्वालिटीज लिमिटेड है उसी प्रकार से होप आप मेरी बात समझ रहे टेड है आप जानते हो तो फिर अल्लाह कृष्ण को क्यों कहते हो और अगर आप केवल उनको अपने में मिलाने के लिए कहते हो तो क्या आप उनको यह बताते हो कि आप जो लिमिटेड ईश्वर जिसको जानते हो हम उस अल्लाह की बात नहीं कर रहे हैं श्वर को लिमिटेड समझते हो हम उस लिमिटेड ईश्वर की बात नहीं कर रहे हैं आप उनको य बताते हो सबसे पहले तो आपको य जानना होगा खुद को मिलाने और भगवान की भक्ति प्रदान करने में इसमें कितना बड़ा डिफरेंस होता है खुद में मिलाने का अता है कि आ जाओ आ जाओ जो मैं फॉलो करर मेरे शब्द में वापस लेता हूं भक्ति में मला विलय करा रहे हो ठीक है अब बात करिए क्या

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02:00:30:22 आप भक्ति में विलय कराते हुए यह उनको बताते हो कि जिस लिमिटेड ईश्वर के रूप में आप अल्लाह शब्द का उपयोग करते हो हम उस अल्लाह की बात नहीं कर रहे हैं जैसे ही वो भक्ति से जुड़ते हैं श्रीमन चैतन्य महाप्रभु बते फिर वही कर रहे आप पहले क्लियर करिए फिर आगे चलिए पहले क्लियर करिए क्या आप उन्हें बताते हो तो

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02:00:50:16 बता रहे हैं कैसे बता रहे हैं वो बता रहा हूं मैं आपको आपने अभी जैसे कहा था ना ना सुनिए ऐसे बताइए मुझे उसी प्रकार हा बताते हैं परंतु कैसे बताते हैं हां बताते हैं परंतु कैसे बताते हैं वो बता रहा हूं मैं आपको हा सुनना था ना मु से बता गए हो मंदिर या नहीं गए हो तो वहां पर भागवत भगवत गीता की क्लासेस चलती रहती है श्रीमन चैतन्य महाप्रभु की चैतन्य चरिता चलती रहती है जब वो उसमें बैठ कर के भगवान की लीलाओं का आनंद लेंगे तो स्वयं से उनको बोध होने लगेगा इस बातों का इसका मतलब जब वो धीरे धीरे आपके हो जाते तो उन्हें स्वयं अपने आप पता लग जाता है आप इसके लिए कोई विशेष प्रयास नहीं करते हो महाप्रभु के हो जाते हैं उनको पता चल जाता है ठीक है पता चल जाता है कुल मिलाकर के बात ये है कि जो सच्चाई है वह आपको शुरुआत में नहीं बता रहे हो ना सच्चाई क्या अरे यार आपको पता नहीं समझ में क्यों नहीं र वो सच्चाई जानते हैं परंतु वो आदि सच्चाई जानते हैं अरे जो आप उनको पूरी सच्चाई नहीं बता रहे हो ना वहां पर पूरी सच्चाई नहीं बता रहे अच्छा आप यह कह रहे कि हम उनको पूरा पूरा सिद्धांत नहीं बता रहे हैं इसी प्रकार कह रहे ना अल्लाह और कृष्ण एक नहीं है यह सच्चाई है अल्लाह और कृष्ण एक है ये आप बता रहे

02:02:06:24 हो अभी कुछ देर पहले आप ही ने एक्सेप्ट किया था कि हां अल्लाह और कृष् अभी तक एक्ट नहीं किया है आप झूठ बोल रहे हैं मैंने कहा अल्लाह के अंदर जितनी क्वालिटीज है वो सारी क्वालिटीज कृष्ण के अंदर भी है मगर कृष्ण के अंदर मगर कृष्ण के अंदर कुछ ऐसी क्वालिटीज है जो अल्लाह के अंदर नहीं है इससे सिद्ध होता है कृष्ण अल्लाह एक नहीं है जैसे कि दुनिया के किसी भी ग्रंथ को पढ़ेंगे तो बहुत सी चीजें अच्छी ऐसी है जो मिल जाएंगी आपको जो वेदों में भी है उनमें भी है मगर वेदों के अंदर बहुत सी ऐसी अच्छी चीजें हैं जो दुनिया के सभी ग्रंथों में नहीं मिलेंगी इसलिए वेद ही एक मात्र सनातन सिद्धांत है तो अगर आप आप जो कुछ क्टी मैच कर रही है तो हम ये कह वे वेदों के द्वारा प्रतिपादित धर्म और कुरान के द्वारा प्रतिपादित धर्म एक कह रहे हैं हम एक तो किसी ने कहा ही नहीं भैया मैं आपको क्या बता रहा आप ये मेरे ऊपर कह रहे हो ना आप नेभी थोड़ी देर पहले माना था माना था इन द सेंस कि आपने ये तो माना थाइए कि अधिकृत रूप सेय कहां पर लिख ये बहुत बहुत लंबा डिस्कशन हो गया अभ आप मुझे बताइए अधिकृत रूप से इस कौन ये कहां पर कहता है जो हम इस बात को माने कि व्यक्ति को यह पता चल जाए कि अल्लाह और कृष्ण एक नहीं है उस को पता चल जाए कि मैं यहां पर आकर के कुरान

02:03:22:04 के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर को नहीं पूछ रहा हूं तो वो तो अधिकृत रूप से कहने की क्या जरूरत है जब वो स्पिरिचुअल प्रैक्टिसेस करेगा तो तो आप अगर आप देखेंगे मतलब यन की तरफ से कुछ भी कह दिया जाए उसको अधिकृत रूप से कहने की आवश्यकता नहीं है कोई भी आ कर के कुछ भी बोल देन के बारे में आप यह कहना चाह रहे हैं ना कि अधिकृत रू की तरफ से किसी बात को प्रमाण कब माना जाए आप ये बताइए मुझे प्रमाणिक तब माना जाए जब जब कोई भी उनसे जुड़ता है और भागवत भगवत गीता इसका जब लेक्चर सुनता जो मंच प हम उन्हे सुनते हैं टीवी पर वीडियोस देखते हैं उनको वहां पर ना सुने ना माने उनकी बातें बातें तो उनकी बात मेरे को ना आपकी बात समझ में नहीं आ रही है क्यों तीन तरह की बात कते दो तीन तरह की बात कहते हैं फिर चलो प्रश् पूछ रहा हूं जो चीजें मुसलमानों को भ से जोड़ने के लिए बताई है जो कृष्ण को नहीं जानते जो बाधित ईश्वर को जानते हैं वही बातें हिंदुओं को जो कृष्ण को जानते हैं क्यों बताई जा रही है कौन से कृष्ण हिंदू को देखिए बहुत सारे लोग हैं जो इस्लामी परंपरा

02:04:37:10 को ही फॉलो करते आ रहे हिंदू सनातन धर्म आरे समाज को देखिए रामपाल को चलिए ठीक है तो फिर आपने कोई सिलेबस बनाया है क्या कि जो आर्य समाजी ना हो जो आर समाज जी उसको यह जो मुसलमान हो उसको यह जो बाइबल वाला हो उसको यह और जो पूर्ण सनातनी हो उसको यह सुनाना है कोई ऐसा सिलेबस है क्या इस प्रकार हम डंडा लेकर तो घूमते नहीं है कि जो दिखा तो उसको मार दिया इस प्रकार यानी कि आप सबको एक ही लकड़ी से हाक रहे हैं और आप एक ही आप एक ही चीज बता रहे हैं कि भैया आपका अल्लाह भी कृष्ण है और आपका शिव कृष्ण नहीं है आप सबको यही चीज बता रहे हैं मुस्लिमों के लिए नहीं है गैर सनातनी के लिए नहीं है यह सबके लिए है देख जो शिव को मान रहा है तो ऑलरेडी हम देखिए आपको यह समझना पड़ेगा कि वैष्णव दर्शन जो है वो शिव को नारायण को परम मानता कई बार क्या हुआ है समझनी पड़गी इकन के लोगों से तो आप मुझे बात बता छोटी सी बात आपको ये बता रहा हूं कि आपको यह मानना पड़ेगा कि जैसे वव सिद्धांत यही है वैष्णव सिद्धांत यही है कि नारायण परम है आपको य मानना पड़ेगा आपको शैव वैष्णव स्मार्त पढ़ने

02:05:52:16 पड़ेंगे पहले वैष्णव में यही है कि विष्णु सुप्रीम है अब शैव है अब शव के पास जाकर के अपनी चीज नहीं समझा सकते हैं क्योंकि वो मानते हैं कि शिव सुप्रीम है समझ रहे कैसे कैसे वो सनातन संस्कृति कोते हु एक बात कही थी कि भगवान ने यह कहा कि

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02:06:09:24 मेरे कई नाम हो सकते हैं मेरे कई रूप है इस संदर्भ में आपने कुछ बताया था अच्छा आप नहीं मानते हैं नहीं नहीं मैं मानता हूं फिर मैं आप मानते हैं कि नहीं मैं पूछ रहा हूं तसल्ली कर रहा हूं मानते हैं मानते हैं अच्छा इसीलिए आप कह देते हो कि कृष्ण अल्लाह एक है अल्लाह शब्द कृष्ण ही है हां ठीक है अल्लाह शब्द कृष्ण ही है ठीक है तो आप हरे अल्लाह हरे अल्लाह करवा सकते हैं क्या हरे अल्लाह नहीं करवा सकते क्यों क्योंकि उनके सिद्धांत में शक्ति नहीं है हरे का श जब आप अल्ला शब्द ले रहे हो तो सिद्धांत सिद्धांतों के अनुसार प्रतिपादित होने वाला अल्लाह ले रहे हो आप यह बात सोचो ना कि हम तो परम नियंता की बात कर रहे हैं हरे अल्लाह हरे अल्लाह करवाओ परत पर उनकी उनको मानने वालों की उसकी नजर देख सतो के अनुसार प्रतिपादित होने वाले अल्लाह की बात नहीं कर रहे हो ना बेसलेस बात कर रहे हैं आप बेसलेस बात कर रहे हैं बेले आपसे पूछ रहा हूं क्या आप उनके सिद्धांतों के अनुसार प्रतिपादित अल्लाह की बात कर रहे हो अभी आपने कहा था नहीं कर रहे उनके सिद्धांत उनके सिद्धांतों के अनुसार अल्लाह की बात कर रहे हैं इसलिए हरे अल्लाह नहीं बोल सकते क्योंकि उनके सिद्धांत के अनुसार उनके अल्लाह की कोई शक्ति नहीं है जिस प्रकार कृष्ण की शक्ति राधा रानी है मैं आपसे पूछ रहा हूं अभी आपने थोड़ी देर पहले माना था कि जब हम उनसे बात

02:07:24:26 करते हैं तो हम कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर की बात नहीं करते हैं और यह बात उनको धीरे-धीरे अपने आप पता लग जाती है जब व भक्ति में आते हैं तो ये माना था ना आपने मैंने तो ये भी माना था जो कलाए जो कलाए अल्लाह क को अल्लाह कहा जा सकता

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02:07:43:26 है कहा जा सकता है बिल्कुल तो फिर अरे अल्लाह क्यों नहीं करेंगे तो भैया अल्लाह किसके लिए अल्लाह अगर बताते हैं तो किसको बताते हैं सबसे पहली बात तो इसका उत्तर है किसको बताना है अल्लाह आपको थोड़ी अगर भी बता रहे क्या हरे अल्लाह कर सकते हैं उसी को जिसको बता रहे हैं उसको हरे अल्ला कवा सकते हैं हा क्योंकि उसके उसके मत में अल्लाह है लेकिन शक्ति नहीं है इसलिए हल्ला भाई तो आप तो जिस अल्लाह की बात कर रहे हो वो अल्लाह वो नहीं है ना उसके मत वाला अल्लाह तो हम वो बात कर क्यों रहे हैं उसके उसके साथ य बात करें तो उसके मत की बात करेंगे है ना हां समझ नहीं रहे ठी तो मैं पूछ रहा हूं उसके मत के लिए आप हरे अल्लाह भी करवा सकते हो उसके मत में शक्ति है ही नहीं अल्लाह की उसके मत हर एक अर्थ समझ मैं आपसे पूछ रहा हूं उसके मत के लिए आप अल्लाह नाम का जब करवा सकते हो उससे नहीं क्यों क्यों क्योंकि वो कृष्ण का नाम ले क्यों भाई कृष्ण अल्लाह तो एक है ना आपके अनुसार परंतु उसके मत में क्योंकि उसके मत में अल्लाह श आप बात नहीं कर रहे हो ना अरे तो भाई अल्लाह शब्द का प्रयोग होने के लिए अल्ला है ना वो जानता नहीं तो क्या ता

02:08:59:06 क्या सोच रहे हो

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02:08:59:28 आप ये समझ रहे हो कि इस कौन अल्लाह को मानता है कृष्ण को नहीं मानता है अल्लाह को मैं ये बताना चाहता हूं समाज को कौन दो प्रकार की बातें करता है इसको ब की बात करता है जो कृष्ण नाम समते धारणा कुछ और है वो अपना प्रचार करने के लिए कुछ और कहता है मैं

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02:09:18:27 ये बताना चा कुछ नहीं इस प्रकार है कि जो अल्लाह कृष्ण नाम नहीं समझता है अच्छा थोप दीजिए थोप दीजिए आप थोप रहे हैं बेसिकली आप थोप रहे वो जनता देखेगी जो अभी तक की कन्वर्शन है जनता देख आपकी ही जनता है बता क्या आप प्रभुपाद जी की द्वारा दी हुई शिक्षा को लेकर के आगे बढ़ रहे हैं जी बिल्कुल इकोन का अर्थन प्रभुपाद के बिना तो बिना अर्थ का है ना

02:09:52:16 अच्छा अब मुझे बताइए क्या आप इस जो प्रभुपाद जी है उनके शब्दों को बदलकर छापी गई भगवत गीता को मानते हैं या नहीं मानते हैं मानेंगे या नहीं मानेंगे नहीं मानेंगे कहां उ नहीं मानेंगे नहीं नहीं मानेंगे तो ये प्रभुपाद जी ने 1972 का वर्जन है भगवत गीता ए इट हा इसमें लिखा हुआ है दूसरा अध्याय 30 वा श्लोक और इसमें लिखा है कि ही हु डल्स इन द बॉडी इ टर्नल एंड कैन नेवर बी स्लेन अब इसका अर्थ आप जो आज भगवत गीता पढ़ रहे हैं उसमें देखिए क्या लिखा है आपने कौन सा श्लोक बोला दूसरा अध्याय तीसरा लोक 30 वा

02:11:09:25 30 इतने आप बताइए आप क्या समझते हैं इससे नहीं मैं समझता हूं कि यहां पर एक वर्ड है टर्नल यह शब्द हटा दिया गया है आज का जो वर्जन है उसमें शब्द नहीं है कहां गया क्यों बदला देहीनो दे सर्वस्य भारत देही यही वाला है आपको मेरे पास भी है मैं दिखा दू नहीं मुझे पता है आपके पास है आपके पास सब कुछ बता आप पूरा शस्त्र शास्त्र लेकर घूमते

02:11:45:26 है इनम शलोक की बात करते थे कि उसके तात्पर्य की बात कर रहे थे मैं हिंदी जो उसका अनुवाद किया गया इंग्लिश में ट्रांसलेशन उसकी बात कर रहा हूं हा तो इस दूसरे अध्याय के 30 श्लोक में एक वर्ड यूज किया टर्नल और वह शब्द आज की जो भगवत गीता है उसमें नहीं है अच्छा नहीं है तो इसमें तो य लिखा हैना शरीर में रहने वाले का कभी भी ब भाव मत जाइए प्रभुपाद जी का लिखा हुआ शब्द क्यों बदला गया है लिखा नहीं अर्थ सुनिए तो अर्थ एक ही है तो प्रभुपाद जी ने व टनल क्यों लिखा फिर उन्होने गलत लिखा था उन्होंने टनल टनल का मतलब क्या है नहीं मतलब नहीं मैं पूछ रहा हूं प्रभुपाद जी के शब्द को हटाया क्यों गया है गलत लिखा था क्या उन्होंने उन्होंने गलत लिखा था क्या अरे फिर बात भगत गता पेंगे प ये प्रभुपाद की तो अब इसमें जो प्रभुपाद जी की भगवत गीता 1972 वाली इसका यह शब्द हटाया क्यों गया इससे क्या प्रॉब्लम है प्रॉब्लम क्या है इससे क्यों

02:13:01:01 हटाया गया है कहां हटाया गया भैया तोय शब्द दिखाइए अपनी अपनी भगवत गीता में शब्द दिखाइए मेरे पास हिंदी एडिशन है आपको इलिश एडिशन का दिखा रहा हिंदी एडिशन नहीं मैं आपको इंग्लिश का दिखा रहा हूं इसमें जो लिखा है मैं आपको एक बार बता देता हूं आपकी ये देखिए इसमें कहीं भी आपको टर्नल शब्द दिख रहा है क्या ही ल् इन द बॉडी कैन नेवर बी स्लेन टर्नल श क्या है कैन नेवर बी स्लेन का अर्थ क्या है कैन नेवर बीन भी है मेरे भाई कैन नेवर बी स्लेन इसम भी हैनल शब्द से प्रॉब्लम क्या थी मैं ये पूछ रहा हूं एक शब्द से शब्द से प्रॉब्लम क्या है मैं ये पूछ रहा हूं क्या प्रॉब्लम थी क्या प्रॉब्लम है जो प्रभुपाद जी के लिखे हुए को हटा दिया गया जो यहां पर बोला गया उसका अर्थ भी तो इटरनल ही है भैया अरे मेरे भाई मैं मैं पूछ रहा हूं जो चीज प्रभुपाद जी ने लिखी है उसको हटाया क्यों वो सही है गलत है वो वैसा का वैसा ही भाव दे रहा है व सब कुछ सब अच्छा है मैं पूछ रहा हूं

02:14:16:04 उनका लिखा हुआ टर्नल शब्द हटाया क्यों तो ये आप जो ये जो प्रश्न है ना ये आप जीबीसी से करिए क्योंकि क्योंकि जितनी मेरी बु ठीक है तो इसका जब आपके पास हा क्योंकि उस जितनी मेरी बुद्धि है उसमें तो यही समझ आ रहा है कि अर्थ एक ही है अब अब अर्थ में बात करते हैं आपके पास नहीं है ठीक है अब अर्थ में बात करते हैं अब जिसको मारा ना जा सके क्या वह शाश्वत है हां अच्छा जिसको मारा ना जा सके वो ये जिसको मारा नहीं जा सकता वो श शाश्वत है वो वो आदि भी है जो अनंत है वो आदि भी है आदि नहीं आदि नहीं है जो तो टनल शब्द का अर्थ क्या है इटरनल का अर्थ है जो कि शाश्वत है जो कि हमेशा से हमेशा से जो हमेशा आद है ना अंत है यही तो है श जिसको मारा नहीं जा सकता उसका अंत नहीं है मगर वो अनादि नहीं है जिसको मारा नहीं जा सकता वह अनंत है अनादि नहीं है तो यहां से शाश्वत शब्द को हटाया गया प्रॉब्लम यह है और इसमें एक नहीं है ऐसे बहुत से ऐसे बहुत से वो है जैसे कि दो 51 भी है शायद ऐसे ही मुझे वर्बल

02:15:31:12 याद नहीं है ऐसे बहुत से अंतर है इसमें प्रभुपाद जी के शब्दों को खूब बदला गया है इसमें इसका अर्थ ये है कि आप प्रभुपाद जी की भगवत गीता नहीं पढ़ रहे उनके शब्दों को बदल कर छापी गई भगवत गीता पढ़ रहे हैं उसम फोटो है प्रभुपाद जी की आज जाइए संशय में शोधन करिए जीबीसी से पूछिए ऐसा क्यों किया ठीक है अर्थ तो मुझे अर्थ तो एक ही है भैया अर्थ कैसे एक है मैंने आपसे पूछा शाश्वत का अर्थ क्या है क्या है शाश्वत का अर्थ बताइए जिसका ना आदि है ना अंत है है ना जो अनादि है जो अनंत है और जो मारा नहीं जा सकता उसका मतलब है जो अनंत है वो अनादि नहीं है आप अगर जो मारा नहीं जा सकता व अनादि नहीं है वो अनंत है अच्छा आप कहीं पर लिखा दिखा सकते हैं कि शाश्वत का अर्थ है जिस जो क्या कहते आप शाश्वत का अर्थ य दिखा दिए जो अमर है वहां लिखा होगा जो नाना पैदा हुआ

02:16:46:15 जो ना मरेगा जिसकी ना शुरुआत हुको इसका अर्थ पता है सबको इसका अर्थ पता है कि शाश्वत का अर्थ होता है ना आदि हो जिसका नात हो शाश्वत का अर्थ यही होता है ना इस शाश्वत नहीं लिखालो अगर नेवर बी दूसरी बात यह है कि अगर कैन नेवर बी स्लेन पर्याप्त था टर्नल लिखने की आवश्यकता नहीं थी तो टर्नल प्रभुपाद जी ने लिखा क्यों और जब लिख दिया है तो उसको उनके अनुयायियों ने हटाया क्यों आप एक कह रहे हैं कि शाश्वत शब्द हटा दिया इसमें से अ यही कह रहे हैं ना हां ये क्या लिखा है हां तो ये तो यह तो मैं कह ही रहा हूं यह तो मैं कह ही रहा हूं जब शाश्वत शब्द उन्होंने मीनिंग में माना है तो नीचे उनके अनुवाद से क्यों हटाया गया तो बात पूछ र ह कि पेज नंबर पेज नंबर ट्रिपल आप थोड़ी सी बुद्धि ये लगाइए कि अगर किसी को हटाना होता किसी को छुपाना होता किसी को छुपाना हो होता तो वो मीनिंग में भी क्यों देता भैया जो व्यक्ति चोरी करता है वह सबूत छोड़ देता है जो व्यक्ति चोरी करता है जिसको धीमी चोरी करनी होती है वह धीरे-धीरे चोरी करता

02:18:02:10 है चलिए और एक पूछ लेता हूं मैं आपसे और छोड़िए ठीक है अब इसका तात्पर्य पढ़िए तात्पर्य में भी बताया बताया गया है अभी फिलहाल आप ये समझ ग भाई मैं कह रहा हूं प्रभुपाद जी का शब्द क्यों हटाया गया मैं पूछ रहा हूं आपसे प्रभुपाद जी का शब्द क्यों हटाया गया क्या वह गलत लिखते थे गलत सोचते थे गलत बताते थे जाना होता तो पूरी तरह हटाया जाता यही तो बात है यही तो बात है मैं इसीलिए पूछ रहा हूं थोड़ा भी क्यों ह अच्छा चलिए ठीक है क्या आप भगवान के मंदिर में एक तिनका झूठ रख देंगे नहीं क्यों रखना होता तो पूरी थाली रखते एक तिनके से क्या हो रहा है पूरी थाली जब रख दी जाएगी झूठी तभी माना जाएगा कि झूट कूट हो गई भाई मैं ये पूछ रहा हूं उन्होंने टर्नल जब लिखा है उसको क्यों

02:18:59:00 हटाया तो मतलब आप प्रभुपाद के फैन तो हैं ऐसे मैं हर उस व्यक्ति का फैन हूं जो भगवान का फैन है चलो अच्छी बात है ये तो आपने दिल जीता इस बात प तो मेरा तो बेसिकली आपका जो आपका कहने का अर्थन है गलत है आप य कहना चाह रहे हैं मैं ये प्रश्न उठा रहा हूं कि जीबीसी प्रभुपाद के लिखे हुए में चेंस क्यों कर रहा है सने सने इसमें 50 इसमें 50 बदलाव है मेरे मोबाइल में मैंने नोट करके रखे हैं 50 बदलाव बदलाव एक ब को भेजिएगा और आप उस अध्ययन करिए और जीबीसी का पता लगाइए व ऐसा क्यों कर रहा है अब ये बताइए कि क्या आप चैतन्य महाप्रभु को मानते हैं बिल्कुल तो चैतन्य महाप्रभु ने श्री चैतन्य चरितामृथम [संगीत]

02:19:55:14 को जगतगुरु मानता हूं मैं उनके द्वारा भगवान को जान पाया हूं मैं उनके द्वारा भागवत को समझ पाया हूं तो श्रीधर स्वामी तत्कालीन शंकराचार्य हां बिल्कुल मुझे पता था यही बोलेंगे श्रीमन चैतन्य महाप्रभु ने उस समय ऐसा क्यों किया कि उस समय जो कि बौद्ध धर्म और उसके बाद शंकराचार्य जब आए तो उन्होंने बध धर्म आपसे पूछ रहा हूं क्या उन्होंने सच बोला था या झूठ बोला था पहले तो ये स्वीकार कर था क्योंकि उन्होंने उनको गुरु स्वीकार किया था इसलिए उन्होंने सच बोला था तो इसका अ वो शकर परंपरा के सिद्धांतों से भगवान को जानते हैं ऐसा तो नहीं है बताइए बिल्कुल भी ऐसा नहीं है उन्होंने तो यह भी बोला है मायावादी बात आ जब कोई व्यक्ति मायावा की बात कर रहा है तो मायावा कई प्रकार के हैं जब चैतन्य महाप्रभु ने बोला मायावा किस माया के लिए क आप ये प्रकार समझाएगा मेरे को ये प्रकार नहीं समझ आ रहे कौन बहुत से प्रकार है जैसे आपके ग्रंथ में माया शब्द का उपयोग हो गया इसम मायावा आ गया माया देवी की बात हो रही है माया वाद आ गया इसमें कई जगह माया कहा गया है सृष्टि को माया कई जगह कहा

02:21:10:15 गया है इसमें कई जगह सृष्टि को माया कहा गया है अब मुझे आप यह बताइए कि उन्होंने जो कहा चलिए उन्होंने बुराई भी कर दी माया बात की ठीक है तो अब हम दो बातों में से किसी एक बात को किसको माने और क्यों माने यह बता दीजिए एक तरफ वह मायावादी श्रीधर स्वामी की तारीफ कर रहे हैं दूसरी तरफ वह मायावादी सबसे पहले श्रीमन चैतन्य महाप्रभु का अवतरण क्यों है इसको समझने की आवश्यकता है समझ रहे हैं आप ह संकीर्तन पूछ रहा हूं कि वो जिसे जगतगुरु मान रहे हैं जिसकी वजह से भागवत को समझ पा रहे हैं आप उसको जगतगुरु मानते हैं कि नहीं मानते हैं जगतगुरु देखिए संदर्भ में कहा था किस संदर्भ में जैसे कि आप मुझे कह रहे हैं जैसे कि आप मुझे कह रहे हैं कि एक श्लोक को देख कर के आप नहीं बता सकते इसलिए मैं भी कहता हूं एक श्लोक को आप देख मैं आपसे पूछ रहा हूं कि उनकी दो बातों में से किस एक बात को मानेंगे और क्यों माने आप से पूछ रहा हूं मैं निर्णय नहीं कर रहा हूं मैं आपसे पूछ रहा हूं जगतगुरु का जगतगुरु का अर्थ क्या है इस सृष्टि के गुरु

02:22:25:22 जगत गुरु का इस जगत गु के गुरु जगत गुरु जगत के गुरु ठीक है सबसे पहली बात शंकराचार्य भारत के बाहर तो कहीं गए नहीं खैर दूसरी बात ये है कि उनका जगत गुरु कहने का अर्थ ये था उन्होने शास्त्र ये जो अभी आपने पंक्ति बोली है वो भारत के बाहर नहीं हैय आपकी फ्रस्ट्रेशन थी लॉजिकल बात आपके पास अभी अभी तक चीज हुई है वो फ्रस्ट्रेशन आप ऐसे निकालते हो मैंने कहीं पर आपकी चीजों की अलना की क्या मैंने प्रभुपाद जी के बारे में कुछ कहा है क्या आप कितने आक्षेप लगा चुके हो अभी तक आपके केवल आक्षेप को गिरेंगे तो एक अच्छी खासी रील बनेगी उस पर रील तो बनाएंगे मुझे पता है उसका प्रचार भी अच्छे से करेंगे मेरी बातों को दबा करके बट खैर मैं आपको यह कहना चाह रहा हूं कि इसमें इसमें गलत क्या कहा मैंने जगतगुरु सृष्टि के गुने टप वो बात अलग है शंकराचार्य जी तो भारत से क्याय तो मेरी सोच थी बतासे क्या मतलब इसका आप मुझे यह बता द जगतगुरु कैसे हो सकते हैं मेरी भी कन्फ्यूजन है इसलिए

02:23:40:24 इस पर्ट को दोबारा पढा शीख रहे शास्त्र सीख रहे हैं तो आप उसको गुरु स्वीकार करते हैं इसमें कोई बड़ी बात नहीं है तो गुरु का अर्थ क्या होता है अभी गुरु शब्द के भी कई अर्थ है परंतु गु का अर्थ है अंधकार रु का अर्थ है तेज जो अंधकार से तेज की ओर कर के जाए वो गुरु है तो इसका अर्थ है कि जब हम किसी को गुरु कह रहे हैं तो हम उसके सिद्धांतों को स्वीकार कर रहे हैं कि यं ही कह रहे हैं गुरु इस प्रकार ऐसी बात है ना आप उसको उस उस समय काल के बारे में अगर सोचेंगे तो समय काल में जो कि स्मार्त है वही जो है गुरु बनते थे जिस प्रकार ब्रह्मचारी गुरु सन्यासी समझ रहे आप इसलिए

02:24:31:07 अगर ऐसा नहीं कहा उस काल की बात कर रहा हूं उस काल सबके गुरु मिलेंगे स्मार्थ गुरु नहीं मिलेंगे लेकिन ज्यादातर सन्यासी जो है व उस समय पर शंकर संप्रदाय से थे मायावादी थे बेसिकली मैं पूछ रहा हूं मैंने आपको सन्यास के लिए नहीं कहा मैंने ये नहीं कहा कि उन्होंने शंकर संप्रदाय से सन्यास की दीक्षा ली मैंने अभी ये नहीं कहा मैंने कहा वह भागवत को समझ पाए हैं शंकराचार्य शंकर परंपरा के आचार्य के आधार पर वह भगवान को समझ पाए हैं शंकरा शंकर परंपरा के आचार्य के आधार पर अब आप ये बताइए कि आधार पर समझने का अर्थ क्या होता है कि हम उनके दर्शन को उसके सिद्धांतों को भगवत दर्शन को मानेंगे कि नहीं मानेंगे सबसे पहली बात तो श्रीमन चैतन्य महाप्रभु स्वयं भगवान है ठीक है 18 में से 15 पुराण इसकी पुष्टि कर पर झूठ बोला है क्या कि मैं भगवान को समझ पाया हूं क्योंकि वह एक भक्त के रूप में अवतार हुए रिक धरातल परमार्थिक धरातल हो गया उसको एक मत करिए व्यावहारिक धरातल पर वो एक भक्त है परमार्थिक धरातल पर आपके अनुसार वो एक भगवान है ठीक है आपके आपके शास्त्रों

02:25:46:19 के अर्थों के अनुसार परमार्थिक धरातल पर भगवान है ठीक है आपकी बात मान ली मगर व्यवहारिक धरातल पर वो भक्त है और व्यवहारिक धरातल पर उन्होंने ये कहा कि मैं भगवान को समझ पाया हूं तत्कालीन शंकराचार्य श्रीधर स्वामी के द्वारा अब यह बताइए क्या श्रीधर स्वामी का भागवत भाष्य इकन में पढ़ाया जाता है नहीं क्योंकि श्री चैतन्य जो कि बिल्कुल उन्होंने क्या नाम है का जो वेदव्यास जी की भागवत है उसका अर्थ होता है वहां पर उसको पढ़ाया जाता है क्योंकि वेग श्रीधर स्वामी की वेदव्यास जी की भागत वेदस भागत अथ किया श्रीधर

02:26:34:06 स्वामी वेदव्यास जी की भागवत हैया अलग भागवत नहीं श्रीधर स्वामी जी ने वेदव्यास भागवत का अर्थ किया उससे समझ पाए चैतन्य महाप्रभु क्या आप उसी से समझ भगवान को गतम मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या आप श्रीधर स्वामी के भाष्य से भगवान को समझते हैं नहीं तो फिर आप चैतन्य महाप्रभु के फॉलोवर कैसे हुए तो श्री चैतन्य महाप्रभु ने यह कहीं पर भी नहीं आज्ञा दी कि आप भी इन्हीं से समझिए भाई आप चैतन्य महाप्रभु को फॉलो करते हो कि नहीं फॉलो फॉलो का अर्थ क्या होता है तो श्री चैतन्य महाप्रभु की टीचिंग को फॉलो करते हैं परंतु शी चैतन्य प्रभु ने उसका खंडन भी किया है अपनी टीचिंग का ठीक है अपनी टीचिंग का नहीं उनकी टीचिंग का मायावादी किया शंकर भाष्य का खंडन भी किया उन्होने अरे भैया शंकर भास का तो फिर मुझे बताओ जब उन्होंने दो बातें कर दी एक दूसरे के पॉजिट तो इनमें से किसी एक बात को आपने माना किसको माना और फिर क्यों माना यह बताओ इस बात के लिए ना इस बात के लिए अगर मैं कहूं कि इस संदर्भ में मैं इस चीज के बारे में मैंने चलिए बस बस बस ठीक है

02:27:49:10 इतना काफी है आपने नहीं पढ़ा आप ये कुछ प्रश्नों पर और जो पिछले कुछ प्रश्न उस पर और थोड़ा सा क्लियर तरीके से जिससे कि कुछ हम निष्कर्ष निकाल पाए ऐसे आप दोबारा आइएगा और अभी बहुत सारी और भी क्वेरी हो सकती है पर दो ढाई घंटे हो चुके हैं तो आप तैयारी करिए फिर दोबारा किसी दिन मिलेंगे ठीक है बात करके आपसे अच्छा ल जाने से पहले थोड़ा क मर्यादित हो जाते हैं अपनी बातो को रखने आचार होते टिप करते वो कर कर टिप्पणी का अर्थ टिप्पणी नहीं की मैंने मैंने जैसे आप मे से क्वेश्चन कर रहे कहा शंकराचार्य कभी भी विदेश नहीं गए बाहर नहीं गए इसका हमारे था उससे कोई मतलब नहीं था केवल आपने हीन भावना प्रकट करने के लिए इस बात को कहा हीन भावना सामने वाले व्यक्ति को बुरा लगे मेरे भाई ऐसा है हीन भावना नहीं है एक लॉजिकल चीज है एक लॉजिकल त है आप कह रहे हैं कि जगत गुरु जगत गुरु सम जगत गु क्या भगवान श्री कृष्ण कभी एशिया से बाहर गए थे वह तो ब्रह्मांड के पति है भैया मैं कह रहा हूं व्यवहारिक धरातल पर कभी वह एशिया

02:29:04:15 से बाहर गए थे लीला रूप में कभी एशिया से बाहर गए थे नहीं परं रिक धरातल सबके भगवान नहीं है केवल परमार्थिक धरातल पर ही है आध्यात्मिक धरातल प है आप मेरे को एक चीज ये समझनी है इसके बारे में पढ़ूंगा ये धरातल कितने होते हैं राल कितने होते हैं कितने प्रकार के होते पढ़ेगा अगली बार और तैयारी के साथ आइएगा चलिए फिर खत्म करें श्री राम जय राम जय जय राम कर ले थोड़ा कर लेते हैं श्री राम जय राम जय जय राम श्री राम जय राम जय जय राम श्री राम जय राम जय जय

02:29:52:27 राम श्री राम जय राम जय जय राम श्री राम जय श्री राम जय राम जय जय राम राम जय राम जय जय राम श्री राम जय राम जय जय राम श्री राम जय राम जय जय राम ठीक है फिर फिर कभी आपसे भेंट होती है सभी को जय श्री राम और हा मैं लखनऊ आता रहता हूं जब आऊंगा तो मिलूंगा आपसे आप मिलिए अवश्य मिलिए साथ बैठ कर के फिर बिल्कुल बिल्कुल खाएंगे पिएंगे प्रसाद भगवान का बिल्कुल ठीक है जय सियाराम जय श्री राम कैसे बंद होती

02:30:49:00 क

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Live 2:30:51 · 26 Jan 2024

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