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00:00:01:28 [घंटी की आवाज़] कहां से हो जाएगा? जैसे कि हमने यह जाना ना कि व्यक्ति जब अपने जो ये साइंस है, विज्ञान है, इससे जब वो पार नहीं पा पाता है अपने जीवन में सुख और इसकी तभी उसके जीवन में यहां पर आ रहा है कि भाई ईश्वर है। है ना? तो यहां से हुआ यह कि एक सर्वशक्तिमान सत्ता है। जहां सब कुछ फेल हो जाता है मगर वो सब कुछ भी कर सकती है। उसी के होने के कारण उसको एक संतोष रहता है कि मैं भाई ईश्वर को भज लूंगा तो मेरा जो है कल्याण चाहे बिल्कुल विपदा बिल्कुल खड़ी हो आपने आप प्रलय खड़ी हो सामने मगर उसको वो ईश्वर जो है वो इस प्रलय को भी रोक सकता है। है ना? इसीलिए आपने जैसे कहा कि उसको थैंक गॉड निकला निकल जीतने के बाद जैसे हम जो नास्तिक को संतुष्ट कर पाते तो इससे करते हैं कि तेरे अंदर भी सदा सुखी रहने की चाह विद्यमान है। तो इस अगर तेरे अंदर सतचित आनंद की चाह है तो इसका मतलब कोई दुनिया में सतचित आनंद है। अगर तेरे मन में भी ये आ रहा है कि बारिश थोड़ी कम हो जाए। नास्तिक के मन में भी आता है मुझे जाना है जल्दी तो बारिश थोड़ी कम हो जाए। यानी वो मौसम को भी कंट्रोल करने वाला बनना चाहता है। उसके मन में भी आता है धूप थोड़ी कम हो जाए। यानी वह धूप को भी कंट्रोल करने वाला बन कभी-कभी आता है मैं भविष्य देख लूं। नास्तिक भी सोचता है कल इंडिया पाकिस्तान

00:01:17:01 में कौन जीतेगा? ऐसा नास्तिक भी सोच लेता है। यानी कि वो भविष्य देखने वाला ही बन बनना चाहता है। तो हम जब यह ईश्वर को ईश्वर के एकिस्टेंस को प्रूव ही इससे कर पा रहे हैं कि वो व्यक्ति हर तरह के प्राकृतिक नियमों से परे हो जाने का सोच रहा है। तो उसकी इस चाह का जो सब्जेक्ट है वो वही ईश्वर है जो सर्वशक्तिमान है। सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर। तो जब हम कहते हैं कि ईश्वर सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर है। सर्वशक्तिमान तो सर्वशक्तिमान है तो फिर बात आती है कि ईश्वर किसी भी प्रकार के नियम के नीचे नहीं है। वो सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है। कुल मिलाकर के बात यही है ईश्वर वो है जो कुछ भी कर सकता है। उसकी कोई लिमिट नहीं है। अगर कोई लिमिट है तो वो ईश्वर नहीं है। तो क्या जो ब्रह्मा कुमारी के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है क्या वो सर्वशक्तिमान है? क्या वो किसी भी नियम के नीचे ना आने वाला है या फिर वो नियम के नीचे है? वो सर्वशक्तिमान है लेकिन वो दुख उन्हें देते हैं। बुरा कुछ नहीं करते हैं। वो दुख हर्ता सुख करता है। वो दुख भी देते हैं नहीं। वो बुरा करते हैं नहीं। आज हमारे पास जो है एक आए भाई तो उनको बहुत मानते हैं भगवान को। बट उन्होंने ऐसे वो कुछ वो तंबाकू वंबवाकू खा

00:02:32:02 रहे थे। मैंने कहा ऐसे क्यों कर रहे हैं आप? सेहत के लिए नुकसान करता है। अरे दीदी हम में भी भगवान है। आप में भी भगवान है। हम जो कर रहे हैं वो भी भगवान करा रहा है। सब कुछ भगवान करा रहा है। मैंने कहा नहीं भगवान ये तो बिल्कुल नहीं करा सकता है। भगवान कुछ गलत नहीं करा सकता। जो हमारी हमारी सेहत के लिए जो डॉक्टर्स मना कर रहे हैं तो भगवान के लिए कैसे हो जाएगा वो? तो ईश्वर हमारे हिसाब से दुख हर्ता सुख हर्ता। हमेशा सुख ही देते हैं। कोई गलत नहीं। एक्चुअली ईश्वर का एक वो वो है क्या कहते हैं? रूप जैसे कि पानी सब जगह है नमी के रूप में सब जगह है मगर हमारी प्यास पानी का वही रूप बुझा सकता है जो हमारे ग्लास में हो है ना तो ऐसे ही ईश्वर तो सर्वत्र समान रूप से व्याप्त है वो हर जगह अच्छाई में भी है सब कुछ जगह है मगर ईश्वर का वो रूप जो हमारे लिए मोक्षदायक हो जो हमारे लिए सुख करता हो दुख हर्ता हो उस वो रूप हमें हम उसकी पूजा करते हैं बाकी ईश्वर तो सब सब जगह है हर जगह है। देखिए भाई यही तो हम बताना चाहते हैं। ईश्वर सब जगह है। इसमें बहुत ईश्वर के लिए भावना छी हुई है। जब हम ये बोलते हैं ना भगवान सब जगह है। तो ये जो शब्द निकलते हैं सब जगह ये उन्हीं के

00:03:47:03 लिए निकलता है जिनसे हमको बहुत प्यार होता है। हमारे घर में अगर एक नन्हा बच्चा खेलता रहता है और वह दो दिन के लिए कहीं चला जाता है। तो उसकी एब्सेंस में भी उसकी प्रेजेंस फील होती है। हमको उसकी आवाज आती है। उसकी किलकारियां आती है। क्या कहते हैं? वो है नहीं तब भी लग रहा है कि है तो ईश्वर सर्वव्यापक नहीं है। क्यों ऐसा हमने कहा? नहीं जैसे हमें फील होता है मगर वो बच्चा होता नहीं है हमारे आसपास। तो क्या ईश्वर भी ऐसा ही है? आप बताइए। जैसे अभी हमने कहा ईश्वर सब जगह है। है ना? कई बार हम कहते हैं ईश्वर हमारे दिल में है। आपके दिल में है। अभी हमारे और फैक्ट है ये। ये भी ये भी एक फेस में ये भी राइट है कि जब हम किसी को बहुत प्यार करते हैं तो हम क्या कहते हैं? आप तो मेरे दिल में रहते हो। ठीक है? ये दो चीजें हमने बोली। दिल में रहते हैं। सर्वव्यापी है बिकॉज़ कि मैं उसे बहुत प्यार करती हूं। लेकिन जब जब हमें हमारे हमें कोई परेशान करता है हमारे पास कोई दुख तकलीफ आती है आप बार-बार उस व्यक्ति उस समस्या के लिए पूछ रहे हो बताइए क्या हुआ बताओ क्या हुआ और वो समस्या भी हमारे कंट्रोल में नहीं है तो हम क्या कहते हैं भाई देखो अब हाथ जोड़ के तुमसे कह रहे हैं अब मेरे से उस समस्या के बारे में बात नहीं करो अब ऊपर वाले के हवाले छोड़ दो तो अब भगवान जी कहां चले गए कहां गए ये तो हमारी समझ के ऊपर है ना समझ के नहीं भैया सब कोई कहते नहीं मैं मैं ये जानना चाह रहा हूं ईश्वर हर जगह है कि नहीं अकॉर्डिंग टू सूरज सूरज कहां कहां है? सूरज आकाश में स्थित है।

00:05:02:04 बस ऐसे ही सूरज एक ही जगह है ना लेकिन उसकी किरणें सब जगह है। यानी कि ईश्वर सब जगह नहीं है। उसकी शक्ति सब जगह है। शक्ति सब जगह है। पारबह्म परमेश्वर हमने तो गाया मतलब आप कहां रहने वाले? इसमें ब्रह्म तत्व से भी पार रहने वाले। जी। तो अभी दो चीजें आ गई। एक तो ईश्वर सब जगह अगर नहीं है उसकी शक्ति सब जगह है। शक्ति सब जगह है। तो फिर अब दिक्कत यह हो जाती है जैसे कि यहां पर हम लोग बैठे हैं। यहां पर ईश्वर की शक्ति नहीं है। वो ईश्वर की शक्ति है। ईश्वर नहीं है। तो जब दो तत्व हो गए। एक शक्ति हो गई एक हो गया एक हो गए ईश्वर। तो कहीं जब दो तत्व हैं तो कहीं ना कहीं इसमें और इसमें ईश्वर में और उसकी शक्ति में कुछ अंतर है। तभी तो वह अलग है। ईश्वर की शक्ति में और ईश्वर में भेद है। तभी तो वह दोनों अलग-अलग हैं। अगर भेद ही नहीं है तो अभेद है तो ईश्वर ही है शक्ति के रूप में। तो अभी देखिए हम क्या कहते हैं भगवान मेरे दिल में रहते हैं। क्यों? क्योंकि मैंने उनको पहचान लिया प्यार से लेकिन वो है ऊपर। नहीं वो तो हमारा वो हमारी समझ है जो जैसा बोल दे वो वैसा बोल दे। मगर जब हम बिल्कुल अच्छे से जानना जानने जाएंगे। जैसे हमने ये कहा कि ये जो जगह है टेबल ये ईश्वर हिला सकते हैं। ठीक है? अब हमारे आप कह रहे हैं कि ईश्वर तो यहां नहीं

00:06:17:06 है तो फिर शक्ति है। उनकी शक्ति है। तो यहां पर ईश्वर की शक्ति है। ईश्वर नहीं है। यानी कि दो चीजें हो गई। एक ईश्वर हो गए। एक उनकी शक्ति हो गई। अब जब ये चीज है तो शक्ति कहीं ना कहीं ईश्वर से कम पावरफुल होनी चाहिए। प्रधानमंत्री जी दिल्ली में बैठे रहते हैं। राष्ट्रपति जी दिल्ली में बैठे रहते हैं। उनका एक फोन यहां काफी है या नहीं है? वो एक फोन कर दे हमारे लिए तो उनकी पावर ही तो काम कर रही है। हम हमें उनसे चाहिए क्या? नहीं मैं वो नहीं पूछ रहा हूं। मैं ये पूछ रहा हूं। बस सेम ऐसे ही भैया सेम ऐसे ही उनका स्थान वो है लेकिन उनकी पावर हमारे लिए जितनी हमको चाहिए वो उतनी हमको पूरी मिल जाती है। नहीं मैं पूछ कुछ और रहा हूं मैं। एक्चुअली अगर हम दो चीजें मान रहे हैं। पहली बात तो वह प्रकृति अलग है। मतलब आज तक मैंने ऐसा माना नहीं था। अभी आप ही ने दो क्वेश्चन कर दिए हैं। वरना मेरे लिए वही भगवान है। उसकी शक्ति मेरे पास है। उनकी शक्ति वही मैं कह रहा हूं। तो अगर हम ये कह रहे हैं ना कि उनकी शक्ति है वो नहीं है। वो तो अपनी जगह बैठे हैं। तो फिर हम भी भैया हम भी तो कहां से आए थे। हमने भी अपने अकेले क्या कहा? जब हम बहुत दुखी होते तो हम भी क्या कहते हैं? हे भगवान मुझे ऊपर उठा ले। मतलब हम अज्ञानी है ना। हम मुक्त नहीं है। नहीं नहीं सच्चिदानंद स्वरूप नहीं है। ज्ञानी नहीं ये सबके मुंह से निकल रहा है कि हे ईश्वर तू मुझे ऊपर क्यों नहीं उठा लेता? हम कभी ये नहीं कहते हे भगवान मुझे अध्याय करने बुला लेता। मुझे

00:07:32:12 वृंदावन करने ऐसे विरक्त संत है कहते हैं क्या कहते हैं कि मैं हे भगवान तुम अपने में लीन कर लो। लीन कर लो। लेकिन फिर भी जाना कहां सबको जाना तो सबको ऊपर ही है। वो देखिए वो व्यवहार एक एक्सपेक्ट होता है। एक व्यवहारिक अंतर जैसे हम सब में ईश्वर है। फिर भी कोई मां है, कोई बहन है, कोई पिता है। सब में एक ही तत्व है। सब में आत्मा है। हां। आत्मा जी। परमात्मा ऊपर है। हां। जैसे हमारे रिश्ते नाते कुछ नहीं है। फिर भी हम रिश्ते नातों का वो कर रहे हैं। व्यवहार। जैसे हमने कहा कि ये ये इन चमड़ी का है ना। तो यह व्यवहारिक अंतर तो है। व्यवहारिक अंतर हम कर रहे हैं कि हमने व्यवहार के लिए कह दिया ईश्वर वहां है। जैसे कि मान लीजिए कि ईश्वर का एक्सिस्ट जैसे ईश्वर की शक्ति है वो यहां भी है। इसमें भी है तो ईश्वर की शक्ति इसमें भी है। मगर इसके साथ हमारा व्यवहार अलग होगा और इसके साथ व्यवहार अलग होगा क्योंकि इसमें फोटो बना है उनका। तो ये व्यवहारिक अंतर है कि वो ऊपर उठा ले या ये कर ले वो कर व्यवहारिक मगर जैसे अभी हमने कहा शक्ति का मतलब जब हम उनको याद कर रहे हैं याद के द्वारा हमारे पास में नहीं नहीं ये टेबल उनको याद नहीं कर रही है आप याद कर रहे हैं आप याद कर रहे हैं हम फील कर हम उनको हम उनके शक्ति को यूज़ करें जी जी मैं एक्चुअली जो प्रश्न है वो ये है कि जैसे हमने कहा ना ईश्वर सर्वव्यापी नहीं है अकॉर्डिंग टू ब्रह्मा कुमारी ईश्वर सब सर्वव्यापी नहीं है ईश्वर सर्वज्ञ

00:08:47:20 है सर्वज्ञ तो सर्वज्ञाता हो गया सर्वों का सर्व चीज को ज्ञाता है और सर्वशक्तिमान है सर्वव्यापी नहीं है उसकी की शक्ति है पर वो सर्वव्यापी खुद स्वयं नहीं है। तो अब जब हम ये कहते हैं ना कि उसकी शक्ति है तो फिर दो चीजें हो गई तो एक तरीके से शक्ति कहीं ना कहीं ईश्वर के सामने कम है। ईश्वर के कंपैरेटिवली जब दूसरा तत्व है तो उस पे ईश्वर का कंट्रोल होगा। मतलब ये मैंने कभी सोचा ही नहीं भैया। मुझे कभी लगा ही नहीं कि दो चीजें डिफरेंट हो सकती हैं। ये मुझे लगा ईश्वर मतलब ईश्वर और मतलब उसकी शक्ति भी ईश्वर ही है। जब हम कहते हैं वो ऊपर है ना तो हमें आसान होता है उनसे कनेक्ट होना। व्यवहार वो सब जगह रहेंगे तो मुझसे हम फिर कहां मन वही वो व्यवहारिक भेद है। हम मन कहां लगाएं? फिर हम कहते हैं ना मेरा मन तो भगवान में लग ही नहीं रहा। मैं बता रहा हूं इसको। तो अगर वह सब जगह भगवान है तो फिर कहीं भी लगा लो मन। मैं बता रहा हूं इसको। जैसे कि अकॉर्डिंग टू साइंस मॉडर्न साइल पृथ्वी गोल है। ठीक है? मगर हम लोग उसके साथ व्यवहार कैसा करते हैं? अगर हम उसको गोल मानेंगे चल पाएंगे। किसी को रास्ता दिखाना है कि सर वो ये कौन सा कॉलेज है पास में? आई एम। हां। मुझे वहां जाना है। तो हम उसको यूं कहेंगे ये चले जाओ सीधे सीधे। तो हमने व्यवहार क्या किया? यह सीधा है जबकि वास्तविकता क्या है कि गोल है। अगर हम गोल मानेंगे तो हम व्यवहार नहीं कर पाएंगे। व्यवहार नहीं कर पाएंगे तो हम कभी इस चपटेपन

00:10:02:24 से मुक्त नहीं हो पाएंगे। तो हमको इस व्यवहारिक भेद से मुक्ति पानी है। इसीलिए हमें ऐसा व्यवहार करना है जिससे हम मुक्ति पा सके। जैसे किसी को पृथ्वी को गोल देखना है वास्तविकता में। हम यहां से नहीं देख सकते। मगर स्पेसशिप बना सकते हैं। स्पेसशिपिप से जब बाहर जाएंगे तो वहां से अकॉर्डिंग टू साइंस हम देख सकते हैं। मगर उस स्पेसशिपिप को बनाने के लिए भी उतनी देर जितनी देर स्पेसशिपिप बना रहे हैं उतनी देर तो उसके उस चपटेपन को मानना ही पड़ेगा कि फ्लैट है। अब फ्लैट के अनुसार हम लोग व्यवहार करेंगे। तो ये तो ये हो गया। तो मगर मैं जो चलिए वो क्वेश्चन आपने कभी उस बारे में सोचा नहीं। मतलब आपको लगता है शक्ति के रूप में ईश्वर ही है। मगर सुनिए कई बार क्या होता है देखिए जैसे आपने यूथ्स की बात की थी शुरू किया था कि यूथ्स नास्तिक क्यों है? तो कई बार हम भगवान को भी इतना टिपिकल और इतना कॉम्प्लिकेटेड बना देते हैं ना मतलब जब वो हमारे पास आते हैं उनसे सिंपल बात करते हैं कि देखो आपने एक्सटर्नल साइंस यूज़ किया तो एक्सटर्नल डिस्टेंससेस खत्म हो गए। विदेश वालों से बात कर रहे हैं। इंटरनल साइंस दैट इज़ स्पिरिचुअलिटी दैट इज रिलेटेड टू गॉड। अभी हमने वो नहीं किया तो हमारे अंदर के डिस्टेंस आएंगे। भगवान ने कहा सृष्टि के बताऊंगा। एक्चुअली क्या है कि बहुत सारे स्पिरिचुअल कुछ फेक टीचर्स भी हो गए हैं।

00:11:18:00 उसकी वजह से क्या है कि ओरिजिनल जो स्पिरिचुअलिटी वो पहुंच नहीं पाती। अब जैसे जैसे आपने कहा ना इजी अब जैसे तुलसीदास जी कह गए कलयुग केवल नाम आधारा है ना और आज के टाइम में जैसे नाम जप अगर व्यक्ति करने लगे नाम जप वो जो आपने एक मिनट वाली बात बताई अपनी स्टाइल में तो ऐसा हमारे शास्त्रों ने भी व्यवस्था की है वो कोई जरूरी नहीं है आपकी वो टिपिकल चीज ही हो लेकिन बताते हम डिस्कस करते तो ऐसे डिस्कस करते हैं ना बच्चों को लगता है कि हमारे अंदर जा ही नहीं डिस्कस इसलिए कि यदि हम ईश्वर की सर्वशक्तिमत्ता को नहीं सिद्ध करेंगे तो ईश्वर का अस्तित्व ही नहीं होगा और नास्तिकता जीत जाएगी। एनिमलिज्म जीत जाएगा। ह्यूमनिटी हार जाएगी। इसलिए ईश्वर के अस्तित्व को दृढ़ता के साथ हमें आना चाहिए। भले ही भले ही उसका सबसे अच्छा प्रूफ हमारा अपना प्रैक्टिकल लाइफ है। आपकी अपनी प्रैक्टिकल जीवन है। हम कह सकते हैं भैया तुम मानो ना मानो। हमें तो पता है मेरा काम तो ईश्वर ही कर रहा है। सुनिए तो तो भले ही हम अपने स्टूडेंट्स को देख ले कि भाई हमें इस क्लास को ये पढ़ाना है ये ऐसी है। वो एक अलग एक्सपेक्ट मगर जब हम बात करेंगे कि भाई हमें स्पिरिचुअलिटी को एक खंभे की तरह गाड़ देना है। इम्युनिटी को बचाना ही है। जैसे हमारे जो देश के वो होते हैं जवान वो वहां पे अड़ जाते हैं कि हम नहीं आने देंगे

00:12:33:13 आपको अंदर। यहां पर यह सब है। ब्रह्मा कुमारीज है। मुझे रक्षा करनी है। वहां से स्पिरिचुअलिटी चल रही है। बचाते हैं वो लोग अपनी जान पर खेल करके। इसलिए बचाते हैं क्योंकि उन्हें उस चीज को अड़े रहना है। तो ऐसे ही जो हम हमारा यह कार्य होता है जिस कि हम लोग ईश्वर के अस्तित्व को बताएं। अब जब ईश्वर की सर्वशक्तिमत्ता पर बात नहीं होगी। उसकी सर्वज्ञता पर सर्वव्यापकता पर बात नहीं होगी। तो वो जो हर स्थिति में ईश्वर पर डिपेंड होने वाला जो वो आपने बताया था पर्सेक्टिव वो कहीं ना कहीं फिर हिलने लगेगा कि भाई ये कैसा है भैया ईश्वर का एक गुण आपके पास और मेरे पास दोनों पास है प्यार का गुण है नास्तिक से नास्तिक व्यक्ति को भी क्या चाहिए प्यार चाहिए रिस्पेक्ट चाहिए तो हम क्या करते हैं जो ऐसे नास्तिक भी होते हैं ना हम कहते हैं ठीक है भगवान को मत मानो चलो ये काम कर लो चलो आप एक बार ट्राई करके देख लो हम कहां से जोड़ रहे हैं भगवान का ही कहा ना वो प्रेम के सागर है प्यार के सागर है वो अगर अगर उसको वो चीज नहीं समझ में आ रही है तो हम उनके गुण के द्वारा उनके उनके अंदर प्रवेश करेंगे। उनके भगवान जी के गुण के द्वारा हम ज्ञान की फिर इस तरह से तो फिर कोई वैल्यू ही नहीं रही ज्ञान की। देखिए भैया दोनों चीजें हैं। किसी को पहले ज्ञान बाद में वो तो वो पहले जो ज्ञान दे रहे हैं पहले ज्ञान वो होना चाहिए ना। ज्ञान से ही तो है सब कुछ। हमें ये लगता है भैया कि बस हमारे पास अगर आया है

00:13:49:03 तो हम उसको जाने नहीं देंगे। अब ये जो बात आई थी कि क्या ब्रह्मा कुमारीज के द्वारा जो माना जाने जो पूजित होता है जो ईश्वर परिभाषित ईश्वर वो सर्वशक्तिमान यानी कि किसी भी नियम के नीचे ना आने वाला है या नहीं और क्योंकि ब्रह्मा कुमारी से ये कहता है कि वो अवतार नहीं लेता बल्कि वो किसी शरीर में आता है। वो स्वयं अवतार नहीं लेता। जैसे उसमें कहा गया कि मैं अपना सृजन करता हूं सजाम में हम तो इसको वो शायद ये मानता है कि वो आता है किसी और के शरीर में आता है। आपने शायद ये माना है। उनके लिए कहते हैं रूप में बिंदु गुणों में सिंधु हम अब वो सागर छलकेगा कैसे? कहते कि आपने भी टीका यहां लगाया है। आप भी एक आत्मा आप भी रूप में बिंदु हो। लेकिन आपको आपकी पेनड्राइव को ये वो मिल गया सिस्टम बॉडी। तो ये रथ मिला तो आप अपना सारा कुछ फ्लो कर रहे हो। जो आपके अंदर है वो आप छलका रहे हो। हम वह रूप में बिंदु लेकिन गुणों में सुन दो। वह अपना शरीर अगर लेंगे तो फिर वह सिस्टम में वह भी सिस्टम का हिस्सा बन जाएंगे। फिर हमको कौन चार्ज करेगा? तो इसीलिए पर काया प्रवेश दूसरे की काया में उनका अवतरण ही होता है। जन्म का मतलब गर्भ से जन्म लेना। अवतरण का मतलब ही यही होता है। दूसरे

00:15:04:14 की गाड़ी बिल्कुल स्टार्ट है। आ के उस गाड़ी से अपना काम कराना। इसको कहते हैं अवतरण। तो यह अवतरण ही है। अवतरित होते हुए मतलब वो स्वयं किसी दूसरी बॉडी में ही आते हैं। वो स्वयं अवतार नहीं लेते। क्योंकि भैया वो रूप में बिंदु है। वो पेन ड्राइव है। उस पेन ड्राइव के अंदर क्या कंटेंट है हम उनको कैसे पता? नहीं वो ठीक है। मगर हमारा यहां पर ये बाधित हो गया कि वो सर्व जो ये वाली बात है ना सर्वशक्तिमान एक नास्तिक की चाह भी यही थी कि वो जो है प्रकृति के सभी नियमों से परे होना चाहता है। बचना चाहता है प्रकृति के नियमों से। तो यहां तो उसकी चाह का विषय वाले को बताते हैं एक ही पूरा कर लो बस तो यहां पर उसकी चाह का विषय ही वो है जो प्रकृति के सभी प्रकार के नियमों से परे हो वो कंट्रोल कर सकता हो तभी तो हम उस पर डिपेंड कर रहे हैं तभी एक नास्तिक को भी हम बनवा सकते हैं भाई ऐसी सत्ता है अगर जहां पे भी ईश्वर की जो सर्वशक्तिमत्ता है कहीं कॉम्प्रोमाइज होगी चलिए वो तो एक अलग एक्सपेक्ट है कि वो ईश्वर उसे माना जा सकता है कि नहीं जिसकी सर्वशक्तिमत्ता कंप्रोमाइज हो रही है मगर पहला सवाल तो यह आता है कि हम जब कह रहे हैं सर्वशक्तिमान तो या तो वह सब कुछ कर सकता है या फिर हमें उसे सर्वशक्तिमान ना कहकर शक्तिमान कहना चाहिए। सब कुछ अच्छा कर सकता है। सब कुछ अच्छा मतलब सब कुछ नहीं कर सकता। कुछ

00:16:19:18 कार्य है जो वो नहीं कर सकता। बुरा नहीं ना बुरा कर सकता है ना बुरा करने देता है। अगर हम उनकी शरण में जाते हैं उनको याद करते हैं तो कम से कम हमारी मति को श्रेष्ठ रखता है। फिर हमने खुद को चार्ज नहीं किया होगा तो हम कर डालेंगे। नहीं कहने का मतलब यह है कि अगर वह कुछ कार्य हैं जो वह नहीं कर सकता है तो उसके आगे कर सकता नहीं है करता नहीं है वो मर्यादा नहीं है करता नहीं है करता नहीं है तो यानी कि करना चाहे तो कर सकता है अमर्यादित कर्म कोई नहीं करता है ना करवाना चाहे यानी कि वो करना चाहे तो कर सकता है मैं ये भी नहीं बोलूंगी करना चाहे वो चाहेंगे भी नहीं नहीं चाहेंगे की बात अलग है उसके पास क्षमता है कि नहीं करना है वो कर सकता है वो अवतार स्वयं का ले सकता है लेता नहीं है अच्छा अब आपने एक बात कही कि वो लेता नहीं है। जैसे आपने कहा कि वो बुरे कार्य नहीं करता है। तो इस दुनिया में जो बुराई एक्सिस्ट कर रही है वो कैसे उसको जन्म कौन दे रहा है? किसकी मर्जी से हो रही है? किसी की मर्जी से नहीं। कीड़े मकोड़े कैसे पैदा हो जाते हैं? मतलब ईश्वर की मर्जी से जैसे दही एक दही को भी अगर आप रख दो ना तीन चार दिन इकट्ठा हो जाता है। तो ईश्वर के पास ये छोटे-छोटे काम है वो कि पैदा करेंगे। ईश्वर ने ही तो सब कुछ बनाया। शक्ति इतनी ऊंची शक्ति है। मतलब ईश्वर ने सब कुछ नहीं बनाया। ईश्वर ने बनाया। आपको क्या लगता है? कीड़े मकोड़े भगवान मतलब ये सारे काम भगवान करते हैं। हर चीज

00:17:35:13 नहीं ऐसा नहीं है। अगर ईश्वर ने बनाया हो तो तुम कीड़े खा भी तो लेते हो। क्यों खा नहीं खाते ना? तो हम तो बहुत सी चीजें ईश्वर ने बनाई तो नहीं खाते, लकड़ी नहीं खाते, लोहा नहीं खाते। नहीं वो तो कर रहे हैं ना कि उन चीजों से हमको गिन भी आ रही है। हम अपने बिस्तर पे भी नहीं रख रहे उनको। यहां तो हमने रख रखा है ना। हां। तो बहुत सी चीजें हैं जो हमने ईश्वर ने बनाई है। हम नहीं खाते। तो जो लोग चार दिन नहीं नहाते हैं, कई दिन नहीं नहाते उनके अंदर कीड़े पड़ जाते हैं। वो नहीं कीड़े वो भगवान ने थोड़ी बनाए। तो यानी कि इस दुनिया में जैसे हमने कहा था जन्म गंदगी से हो रहा है। यानी कि इस हमने ये कहा था कि ईश्वर ही सब कुछ कार्यों को करने वाला है। मगर अभी हम कह रहे हैं कुछ कार्य ऐसे हैं जो ईश्वर ने नहीं अपने आप हो रहे हैं। साथ जाना। अच्छा मैं एक उस पर आता हूं कि जैसे हमने यह कहा कि इस संसार में क्योंकि चीजें हो रही हैं कोई कार्य हो रहा है इससे सिद्ध होता है कि ईश्वर है क्योंकि ईश्वर नहीं है तो बाहरी फोर्स के बिना कोई भी चीज जो मूवमेंट नहीं हो सकता वो जो अरेंजमेंट है प्रकृति का तो अभी जो ब्रह्मा कुमारीज का आपने ईश्वर बताया कि उसमें कुछ चीजें ऐसी भी आपने मान ली जो दुनिया में हो रही है मगर उसका कारण ईश्वर नहीं है तो फिर अब ईश्वर का अस्तित्व तो ब्रह्मा कुमारी कैसे भगवान ने खुद ही आप तो यह खुद भी जानते हैं कि कहा जब धरती पर वो होने लगेगा जो नहीं

00:18:50:14 होना चाहिए तब मैं आता हूं ठीक करने इसका मतलब वो नहीं करवा रहा है ना वो व्यवहारिक रूप से मतलब अब आपकी भाषा ना थोड़ी टफ हो जाती है मुझे ये बहुत नहीं आता मैं मैं बताता हूं एक ट्रुथ होता है बिहेविरियल एक होता है क्या कहते हैं पारमार्थिक पारमार्थिक मतलब ट्रुथ जो ईश्वर देख रहा है ईश्वर क्या देख रहा है कुछ नहीं है सब खेल है ईश्वर के लिए क्या है ईश्वर ईश्वर के लिए खेल है ईश्वर के लिए वो कोई दुखी नहीं है वो कोई सुखी नहीं है सब इक्वल है और यही दृष्टि की बात श्री कृष्ण ने भी कहा कि ना कोई मरता है ना कोई मारता है तू क्यों दुखी हो रहा है और हर स्थिति में तू समबुद्धि रख समत्व पुरुष बन जा ये कृष्ण भगवान ने भी कहा तो ईश्वर की दृष्टि हो गई वो पारमार्थिक दृष्टि है जैसे मान लीजिए कुछ आज तक ऐसी आत्माएं होंगी कुछ ना कुछ जो मुक्त हुई हो है ना तो वो जो मुक्त हुई जो यहां पर वो फील कर रही थी कि अच्छा हो रहा है, बुरा हो रहा है, ठंडी हो रही है, गर्मी हो रही है या मेरी मां की तबीयत खराब है। है ना? मगर अभी वो अगर वो वहां से देख रहा है वो व्यक्ति मुक्त होने के बाद तो अब उसको कोई फर्क नहीं पड़ रहा। तो जब उसको फर्क नहीं पड़ रहा तो ईश्वर को कहां से पड़ेगा? ईश्वर परम है। वो मरने के बाद तो छोड़ दीजिए। मुक्त होने के बाद हमको यही प्रैक्टिस तो कराई जा रही है कि इस बॉडी में रहते हुए रोल प्ले करते हुए

00:20:05:15 जितना हम रोल से डिटच हो के सोल कॉन्शियस में प्ले करते हैं। तो हमें वो साक्षी भाव आ जाए। बस बस वही वही तो जो ईश्वर है वही सिखाने जो ईश्वर है वो डिटच है हर प्रकार की उससे वो जो हम जो रोल प्ले कर रहे हैं हम हम अटैच है और डिटच होने की प्रैक्टिस कर रहे हैं और ईश्वर कौन है जो डिटच है तो उसके लिए कुछ भी वो उसका पर्सेक्टिव है तो एक बिहेवियर लेकिन उसके लिए भी सही क्या है गलत क्या है उसको पता है ना वो बताने तो यही आया है ना तो उसने क्या कहा जब धरती पर गलत होता है तब मैं आता हूं तो वो डिटच दोनों से है लेकिन वो हम आत्माओं को गलत करते हुए या गलत दुख में देखना नहीं चाहते नहीं वो ठीक है वो वो वो ईश्वर का एक रूप हो सकता है। अगर हमने ईश्वर को ये कर दिया कि दुनिया में जो जो भी कीड़े जैसे आपने कहा कीड़े जन्म ले रहे हैं या दुनिया प्रलय आई सुनामी आई तो ये अब कोई बच्चा ये प्राकृतिक आपदाएं हैं। यानी कि ईश्वर की मर्जी से नहीं हुआ ना ये। तो अब हमने जो ईश्वर को नास्तिक के लिए कहा था कि दुनिया में हर कार्य का कोई ना कोई कारण है। है ना? तो क्योंकि इस दुनिया में सृष्टि में यह सब है। सृष्टि चल रही है। फूल पैदा हो रहा है। यह हो रहा है। वह हो रहा है। तो इसलिए इससे सिद्ध होता है कि इस दुनिया में उनको अरेंज करने वाला कोई ईश्वर भी है। ब्रह्माकुमारी का तो यही था ना शुरू में जो आपने बताया। तो अभी जब हम ये मान लेंगे कि दुनिया में जो कीड़े पैदा हो रहे हैं वो बिना ईश्वर की

00:21:20:16 मर्जी के हो रहे हैं। देखिए हर चीज भगवान हमारे लिए भगवान हमको सिर्फ गाइड कर रहे हैं। कर हम लोग खुद ही रहे हैं। नहीं नहीं और वो हमें अच्छे के लिए गाइड मैंने ये बिल्कुल नहीं कहा कि सब कुछ भगवान कर रहा है। तो यानी कि ईश्वर निर्माता भी नहीं है। भगवान क्या कर भगवान श्रेष्ठ दुनिया का निर्माता है। भगवान श्रेष्ठ दुनिया का निर्माता है। श्रेष्ठ आत्माओं को गाइड करने वाला। तो अभी अभी ये कभी नहीं कहती भगवान तूने कहा दुनिया बनाई। ठीक है। ठीक है। अब बात ये आती है कि अब भगवान है। ये कैसे प्रूफ होता है? बताइए। मैंने कहा ना भैया ये क्वेश्चन ही अगर हम कहें कि मेरे माता-पिता है ये कैसे प्रूफ होता है? तो हम नहीं कर सकते ना प्रूफ। नहीं क्योंकि उसको उसने अपने माता-पिता को देखा ना। ऐसे ही ये हमारा जो मैंने कहा ना भैया हमारा जो चैप्टर है हम चैप्टर में दिखाते हैं आपको हम सिर्फ बातें नहीं करते हैं हम आपको सिर्फ हमने अपना बताया जो मैंने सीखा आप उसको एक्सपेरिमेंट करके देख लो और अच्छा एक बात बताइए कि दुनिया में मुझे 1000 स्पिरिचुअल लीडर्स मिलेंगे जो हर बार ये कहेंगे कि मेरी चीज करके देख लो तो पहले वो एक साल या छ महीने हर हर मैं इसके लिए यही कहती हूं भैया ये बहुत इंस्टेंट रिजल्ट्स देने वाला है एक साल नहीं सिर्फ दो या तीन दिन आप स्टेप बाय स्टेप हम फर्स्ट जो उसमें होता ना फर्स्ट, सेकंड, थर्ड स्टेप में आते हैं। बहुत इजीली हमको समझ में आती है। रिजल्ट का मतलब आप क्या कह रहे हैं? जैसे कि आपको फील हो जाएगा। क्या फील होगा? भैया जैसे हमारे पास हम लोग ऑनलाइन

00:22:35:22 बच्चों की क्लास कराते हैं। उन बच्चों में क्या है? पांच सात साल के बच्चों से लेकर के 25 30 साल के बच्चे साथ में बैठते हैं। बहुत सारे बच्चे ऐसे हैं मम्मी हम भगवान को नहीं मानते। उनको मम्मी ने उनको जबरदस्ती लगा दिया। तो हम लोगों ने क्या कहा? पहले उनको थोड़ा सा समझाया। आज आप ये वाला काम भगवान जी से करके करना। दीदी मुझे तो कल तो मिरेकल हो गया। शिव बाबा ने मुझे ये सच में ऐसा करा। आपने तो शुरू में कहा था कि नहीं ईश्वर कोई मिरेकल वाली बात तो है नहीं ईश्वर की ईश्वर मिरेकल करवाता है कहने का मतलब ये है कि वो कौन सी चीज है जिस मतलब आपने कहा ना कि उनको फील हो जाएगा तो चमत्कार से हम ईश्वर को फील करा रहे हैं सिद्ध कर रहे क्या चमत्कार हमारे वैल्यूस जो दबे हुए थे वो बाहर आ गए जो हम सोच रहे थे हमसे होगा ही तो वो वो ये क्यों माने कि अगर मेरे वैल्यूस बाहर आएंगे तो उससे सिद्ध हो गया कि ईश्वर है अभी तक कोई नहीं निकाल पाया ना उसको बहुत लोगों ने टीचर्स ने कोशिश किया पेरेंट्स ने कोशिश किया यानी कि जो कोई नहीं कर सकता वह करने वाला ईश्वर है। तो वही तो मैं कह रहा हूं कि जो अवतार कोई नहीं ले सकता तो अवतार लेने वाला ईश्वर है। बस तो हमने बनाने तो मना ही नहीं तो सृष्टि में कीड़े को कोई नहीं बना सकता। कीड़े को बनाने वाला ईश्वर है। को कीड़े की बात अभी मुझे ऐसा लगता है कि मैंने भगवान जी से ये वाला चैप्टर नहीं समझा है। तो मैं इनको नहीं छोड़। अच्छा अच्छा आपने मतलब वो किया नहीं। ठीक है। चलिए खैर बहुत अच्छी बातचीत हुई हमारी दीदी के साथ और काफी चीजें मगर मैं एक बात और कहूंगा

00:23:50:26 कि आप थोड़ा सा इस बारे में जरूर चिंतन करें कि नास्तिकता को हम कैसे हराएं इस ईश्वर को लेकर के जो कि सर्वव्यापक नहीं है जो कीड़ों को नहीं बनाता है या फिर जो आपने के लिए जरूर करते हैं। मैं आपको ही बता दूं हम लोग रोज एक काम करते हैं जो नास्तिक है संसार में जो नहीं भगवान नहीं वो नहीं कह रहा मैं उस मैं बस ये कह रहा हूं उसी उसके लिए हमें रोज करते आपने जो वो कहा ना कि मैंने अभी इस बारे में जाना नहीं है कि उसी ने सब कुछ बनाया है कि नहीं बनाया है। नहीं हमने कीड़े के लिए हमने ये तो कहा उसने नई दुनिया बनाई है। जो उसने बनाया हमको पता है। कीड़ों के बारे में मुझे मगर ये कीड़े हैं या जो भी कुछ ऐसी चीजें हो रही पता है ये भी मुझे पता है। जो कुछ ऐसी चीजें हो रही है जो नॉर्मली हम लोग नहीं कहेंगे ये ये पॉजिटिव चीज है। जैसे सुनामी आ गई। अब एक लड़का इसको हम लोग कहते हैं। इसको कहते हैं प्राकृतिक आपदाएं। ईश्वरी आपदाएं नहीं। तो वो ईश्वर की सत्ता से बाहर नहीं है ना। हम ही ने कहा कि ईश्वर वो है जो सब कुछ कर जब भगवान देखिए भगवान धरती पर कब आते हैं जब इंसान प्रकृति जीव सब अपनी सतो प्रधानता से खत्म हो जाते हैं जब प्रधान बनते तब भगवान मैं आपको बताऊं एक चीज हमारी जो बात शुरू हुई ईश्वर को हमने जो सिद्ध किया था वो सबसे पहली बात थी कि अगर इस दुनिया में कुछ भी हो रहा है तो इसका मतलब उसको करने वाला कुछ है कोई बाहरी फोर्स है। ठीक है? तो जब आंधी आ रही है, जब सुनामी आ रही है, तो इसका मतलब कोई बाहरी फोर्स हमें माननी पड़ेगी। तभी तो हो रहा है।

00:25:06:07 वरना हम ये कह ही नहीं सकते कि दुनिया में कोई सर्वशक्तिमान सत्ता है। प्रकृति अपने आप कर रही है। उस पर कंट्रोल ही नहीं है ईश्वर का। जो ईश्वर ने बनाया वहां की प्रकृति भी सतो प्रधान। ईश्वरी दुनिया जो कौन सी थी? सतयुगी यानी सृष्टि। वही जहां मनुष्य प्रकृति दोनों में सामंजस्य था। मैं वही कह रहा हूं। दोनों एक दूसरे के लिए हेल्पर मैं वही कह रहा हूं कि इस संसार में सब कुछ ईश्वर ने नहीं बनाया है। कुछ चीजें ऐसी है जो प्रकृति अपने आप बना रही है। अभी का जो चल रहा है वो डाउनफॉल चल रहा है और डाउनफॉल ईश्वर नहीं कर सकता। तो डाउनफॉल ईश्वर की मर्जी के बिना हो रहा है। ईश्वर की सत्ता के बाहर है। सत्ता के बाहर नहीं है लेकिन मर्जी नहीं है। ईश्वर की मर्जी नहीं है। नहीं मर्जी नहीं। मेरा कहने का मतलब है जैसे जैसे मैं वो मोबाइल वहां पे गिर रहा है। मेरे अंदर इतनी शक्ति नहीं है कि मैं उस मोबाइल को गिरने से रोक दूं। आंखों से देख के क्या ईश्वर ऐसा ही है? नहीं भगवान क्या कह भगवान ये वाला एग्जांपल अलग है। मकान पुराना हो रहा है। बच्चा बूढ़ा हो रहा है। ये किसी के कंट्रोल में भगवान पिता आकर के बच्चे को बीच में जवान नहीं कर देंगे। व्यक्ति का एक नियम है। चक्र है। नहीं नहीं मैं वो कह रहा हूं जो प्रकृति सुनामी आई। बाढ़ आ गई। ये सब वर्तमान समय प्रकृति भी अपने तमो प्रधान रूप में जाने। तो मैं आपसे वही पूछ रहा हूं। इस पे ईश्वर का कंट्रोल है कि नहीं? ईश्वर क्या कंट्रोल

00:26:21:18 करने आए हैं? तमो प्रधान प्रकृति को सतो प्रधान। भगवान सुनामी नहीं कर रहे हैं। भगवान आंधी नहीं ले। नहीं नहीं मेरा पूछना यह है कि अगर जैसे सुनामी फॉर एग्जांपल कि वहां से मोबाइल गिर रहा है। मेरे में इतनी ताकत नहीं है कि मैं उसको देख तो रहा हूं कि मोबाइल गिर रहा है और ना ही मैंने चाहा था कि वो गिरे। मगर मेरे में इतनी ताकत नहीं फिर भी मैं उसे रोक पाऊं। क्या ईश्वर में इतनी ताकत है कि वो सुनामी को रोक पाए? बिल्कुल। तो यानी कि दुनिया बना देंगे वो जहां पर सुनामी आएगी। नहीं नहीं सुनामी को रोक पाए। वर्तमान समय प्रकृति का तमो प्रधान रूप है। उसको ठीक करने भगवान आए। नहीं मैं पूछ रहा हूं। ओवर पूरी वो सुनामी को रोक सकते हैं कि नहीं? नहीं भगवान भगवान ने पता है क्या कहा? हमने कहा ड्रामा का ये राज है। तो लास्ट का सीन चल रहा है। फिर कुल मिला के बात वही आ गई ना हम ईश्वर को सिद्ध कैसे करेंगे? ईश्वर है ये कैसे सिद्ध होगा? ईश्वर को सिद्ध अपने लिए करना है। मुझे अपने आप आप जो यहां पे ये चला रहे हो आपके मन में तो ईश्वर सिद्ध है। मगर आप यहां इसलिए बैठे हो कि कोई आएगा तो हमको आपको ईश्वर के बारे में बताना है। तो आप कैसे सिद्ध करोगे ईश्वर को? हमने ये तो कहा ना भैया हम फर्स्ट ईश्वर को नहीं सिद्ध करने लगते। सामने वाले को देखते हैं। हम किस नर्व्स में है वो। मतलब कुछ नियम नहीं है। जो जैसा हो गया वैसा ही हम। नहीं सामने वाले को देखो भैया। हर व्यक्ति को एक क्लास में स्टूडेंट्स भी होते हैं 10 तो 10 वो एक जैसे नहीं होते। टीचर पढ़ाता

00:27:36:26 तो एक ही चैप्टर है। लेकिन अगर हम उनके पक्के नब्स को पकड़ लेते हैं तो उनको समझ में आता है इनको हम कहां से भगवान का वो कर सकते हैं। इनको तो आप बताइए ना कि आप आप मैं एक तरीके से मैं एक मिनट के लिए नास्तिक बन जाता हूं। आप मुझे बताइए ईश्वर को सिद्ध करिए। हम बस यही कहते हैं कि देखो भैया आज हम आपको एक छोटी सी वो कमेंट्री करा रहे हैं। मैं आपको आप कर फील कर लेना। अगर आपको ये चीज अच्छी लगे तो कल आप फिर से अपने आप कर लेना। नहीं तो मुझे कुछ अच्छा फील हो रहा है। इससे यह मतलब कहां है कि दुनिया में ईश्वर है। भैया हम ये बाद में भी कर सकते हैं ना। हम अच्छा फील करने लगे, अच्छा करने लगे हमको समझ में आ जाएगा। ईश्वर है। मुझे अच्छा फील हो रहा है इस समय। मैं बहुत अच्छा फील कर रहा हूं। अभी मैं मुझे बताइए ईश्वर कहां है? कैसे है? आप तो ईश्वर को मानने वाले हो। नहीं मैं अभी अभी मैं इस समय राइट नाउ मैं नास्तिक हूं। मैं पूछ रहा हूं। नहीं तो कोई बात नहीं। हम कोई हम इसको क्या कहते हैं कि नहीं अभी आप चार्ज हो। अभी आपके अंदर वो पावर है। भगवान की शक्ति आप लेकर के चल रहे हो। कुछ मतलब सिद्धांत नहीं है इसमें मतलब वो हम जब तक अच्छे काम कर रहे हैं मतलब हम भगवान वो अच्छे काम वो अच्छे काम अच्छे तब कहलाएंगे जब वो उसके अकॉर्डिंग हो जो ईश्वर है और अभी हम ये सिद्ध कर रहे हैं कि वो ईश्वर ईश्वर है कि नहीं उसी पे दिक्कत है भाई दुनिया में अच्छाई क्या है जो ईश्वर के करीब ले जाए वो अच्छा ही है जो ईश्वर से दूर ले जाए वो बुरा ही है तो हम नास्तिक को भी हम नास्तिक को भी यही कहते हैं अगर नास्तिक आ भी

00:28:51:27 गए हैं तो हम कहते हैं चलो ठीक है आप एक्सपेरिमेंट करते रहना भैया बिना एक्सपेरिमेंट के कोई चीज नहीं एक्सपेरिमेंट में कौन सी ऐसी चीज है जिससे हम ये कह देंगे कि नहीं भाई ये ईश्वर है। ये मान लो हम कहते हैं ना उसमें मैथमेटिक्स में भी करते हैं कि कुछ चीजें हाइपोथेसिस है। भैया आप मान लो दिस इज इक्वल टू दिस। आप यहां तक पहुंचने के लिए ये दो एक्सपेरिमेंट कर। जैसे मुझे कोई एग्जांपल बताइए। जैसे मैं आपके पास आ गया हूं। अभी मुझे आप बताइए कि ईश्वर को आप मेरे सामने क्या कौन सा एक्सपेरिमेंट देख? मैंने कहा मैंने कहा कि चलो देखो आप इतना आज के दिन मान लो कि ईश्वर ऊपर रहते हैं। हम आपको लेकर के चल रहे हैं। आप एक बार वहां फील करके देखना। आज मैं आपको लेकर फील वही मैं कह रहा हूं ना मुझे वहां पे कुछ आपने जो बताया वो मुझे फील हो गया। जैसे मैंने कहा ना कि यहां पे मुझे ठंडा-ठंडा फील होगा। मान लीजिए तो मुझे वहां ठंडा-ठंडा फील हो गया। मगर बात ये है कि ठंडा फील होना अपने आप सामने वाला बोलता है भैया। अपने आप बोलता है। एक ही दिन में ना एक्सपेरिमेंट। यानी कि कुल मिला के जो फिक्स सिद्धांत नहीं है वो सामने वाले के ऊपर है। वो क्या कर रहा है? हम तो अपना काम वही कर रहे हैं ना। हम थोड़ी बता रहे हैं कि यहां चले जाओ कि वहां। हम तो एक ही भगवान बता रहे हैं। ईश्वर एक है। सामने वाले के समझने की कैपेसिटी कैसी है? वो कैसे समझना चाहता है? वो ज्ञान सुनना चाहता है। वो फील करना चाहता है। पहले एक्सपेरिमेंट करना चाहता है। तो उनको हम बताते हैं। दिस इज इक्वल टू दिस। आप ये वाली चीज मिलेगी। आप ये वाला आज

00:30:07:03 करके देख लो। मैं उनको कमेंट्री करा के उनको मेडिटेशन कराया। आप एक दिन और करके देख लेना। फील हो तो अच्छी बात है। खैर ठीक है। बहुत लंबी चर्चा हो गई है। अभी मेरे ख्याल से एक घंटा हो गया होगा। 1 घंटे से ज्यादा ज्यादा हो गया। 1 घंटा 45 तो काफी लंबी चर्चा हो गई। बहुत अच्छा लगा बात करके और आप लोगों ने भी देखा बहुत सारी चीजें हुई। बस यही है कि मैं यही कहूंगा कि ब्रह्मा कुमारीज का अगर ईश्वर ये है जो सर्वव्यापक नहीं है या जो सब कुछ शक्तिमान है। सर्वशक्तिमान है। सर्वशक्तिमान भी नहीं है क्योंकि वो सुनामी को रोक नहीं सकता। आपने कहा वो हमेशा के लिए रोकता है। एक ऐसी दुनिया बनाने भगवान वो सुनामी को नहीं रोक सकता। अगर वो एक इतनी सी चीज में भी करने में अगर उसको दिक्कत है वो सर्वशक्तिमान नहीं है। यह हमें मानना पड़ेगा। तो मैं मुझे लग रहा है कि आपने इस ओर चीजें नहीं की है तो आप करिए और आप लोगों को ये चर्चा कैसी लगी और दीदी के साथ अब आप लोग हमारी दोबारा चर्चा देखना चाहते हैं उस पर कमेंट करिए और सभी को जय श्री राम।

00:31:32:29 [संगीत]

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B: SARVASHAKTIMAAN DHARMA Video 31:35 · 11 Apr 2026

क्या जो सर्वव्यापक सर्वशक्तिमान नहीं उस ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध हो सकता है? #brahmakumaris

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B · Video अंतिम प्रमाण वेद या मुरली ?ब्रह्माकुमारी वाले स्वयं को हिंदू ना समझे
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