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00:00:02:00 सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे। और आज हमारे साथ जो है रामपाल को फॉलो करने वाले एक पुराने व्यक्ति आए हैं अमित दास। तो शायद कुछ नेटवर्क वगैरह का कुछ इशू है।
00:00:42:04 फोन करके इन्होंने कहा कि भाई पहले हमारा अध्ययन जो था वह उतना नहीं था। अब हमने अध्ययन और कर लिया है। तो हमें दोबारा से आपसे चर्चा करनी है और अध्ययन करने के बाद हमने पूछा कि भाई पहले आप कई बार निरुत्तर हो चुके हैं। बात को स्वीकार भी किया। निरुत्तर हो चुके हैं वाली बात को। हां अमित दास जी कई बार आ चुके हैं आप हमारे चैनल पर। साहब बिल्कुल मैं कई बार आ चुका हूं। दो बार आ चुका हूं। जैसा कि मेरा परिचय है कि मैं संत रामपाल जी महाराज का शिष्य हूं और समाज नारायण द्विवेदी से मैं दो बार चर्चा कर चुका हूं। इससे पहले ये ग्रंथ मेरे पास थे नहीं। अभी ग्रंथ रखे हैं। ग्रंथों का अच्छे से अध्ययन किया है। भगवत गीता अच्छे से पढ़ी है। समझा है। नहीं। वो ठीक है। पहले जब आप आए थे तो निरुत्तर हो गए थे। ये मानते हैं ना। पहले मैंने पहले मैंने ग्रंथों को नहीं पढ़ा ना। ठीक है। नहीं पढ़ा था तो निरंतर हुए ना उस ना पढ़ने के कारण। हम हां।
00:01:58:14 तो फिर उस बीच जो आपने यहां से जाकर के अपने चैनल पर चर्चा आगे बढ़ाइएगा। वो बेकार की बात है। मैं बढ़ाऊंगा बढ़ाऊंगा। थोड़ा सा एक कुछ थोड़ा सा एक टॉपअप जनता को थोड़ा सा प्रस्तुत तो कर दिया जाए। कुछ प्रीफिक्स वगैरह मतलब क्या सिद्ध करना चाहते हो कि मैं ठीक है बोलिए नहीं नहीं मैं ये कह रहा हूं कि जब आप ये मान रहे हैं कि आप पहले निरुत्तर हुए थे जब आपको ज्ञान का अभाव था ग्रंथ का अभाव था आपके जीवन में तो फिर जब आपने यहां से जाकर के जो हमारे वीडियोस पर जो टिप्पणियां की थी उन्हीं वीडियोस पर जिसमें आप निरुत्तर होकर के गए हैं जो आप मान रहे हैं वह अभी भी आपने अपने चैनल पर डाले हुए हैं।
00:02:46:28 अब कौन सी बात पर निरुत्तर हो गया था वह मुझे ध्यान ही नहीं है अभी तक। नहीं आपने यहां जो हमारे और आपके बीच में चर्चा हुई आप निरुत्तर हुए। अभी आपने माना तो उसके रिगार्डिंग आपने अपने चैनल पर जो वीडियोस डाले हैं हमारे विरोध में कि वहां पर यह दिखाते हुए कि आप निरुत्तर नहीं हुए। तो वो अभी भी है ना आपके चैनल पर। नहीं मैं आपसे यह पूछ रहा हूं कौन सी बात पर निरुत्तर हुआ यह भी तो मुझे पता होना चाहिए। अरे निरुत्तर होना तो आपने माना ना निरुत्तर हुए आपने माना ना हम मैं मैं निरत्तर हुआ ठीक है बस इससे क्या मिलेगा मैं बस एक मैं आपकी वो जो आज की लाइव चर्चा है उसप मैं आ रहा हूं कुछ मैं एक बात पर प्रकाश डालना चाह रहा हूं बहुत जरूरी बात है तो जिन चर्चाओं में आप निरुत्तर हो गए उन्हीं चर्चाओं में आपने अपने पक्ष में जो है वीडियो बनाया वो अभी आज भी डला हुआ है बस मेरा एक एक सुझाव है एक प्रश्न है मेरा छोटा सा ठीक कि क्या आपको नहीं लगता कि जिन चर्चाओं में आप निरुत्तर हुए हैं उन चर्चाओं में भी आपने अपने पक्ष को विजय घोषित करते हुए जो वीडियो डाल रखे हैं उन वीडियोस को देख के व्यक्ति भ्रमित होगा क्योंकि आपके हिसाब से वो चर्चाएं आपके पक्ष में नहीं है मगर आपने जो वीडियोस बनाए हैं
00:04:02:00 उसमें आपने यह दिखाया कि वह मेरे पक्ष में है तो जो बात झूठी है वह आपके वीडियो से निर्गत हो रही है यह मेरा कहना है इसमें कुछ कहेंगे कि हम लोग मेन मुद्दे पर हैं नहीं उस बात को मैं आज साबित करूंगा ना शास्त्रों से झूठी नहीं है वह बातें आप निरत्तर होकर के गए थे परंतु फिर भी आपने स्वयं तो आज मैं वो सिद्ध करूंगा कि गीता ज्ञान देने वाला जो प्रभु है वो मोक्ष नहीं देता वो नहीं कह रहा हूं मैं आपने बात मानी ना उस समय आपने उस समय आपने बात नहीं मानी थी लेकिन आज मैं शास्त्रों से प्रमाण दूंगा जब मानोगे आप बात ठीक है वो मैं मानूंगा मानूंगा आप जो गए थे निरत्तर हो के गए थे ना
00:04:51:18 हां उस समय मुझे उत्तर नहीं आया था अभी उत्तर है मेरे पास उत्तर है तो जो आपने वीडियोस बनाए थे ये दिखाते हुए कि आप निरुत्तर नहीं हुए तो आपका निरुत्तर ना होना जिन वीडियोस से आप दिखा रहे हो प्रकट कर रहे हो वो भ्रम फैलाएगा ना जनता में वो यह सोचेंगे कि यहां पर आपने शास्त्रों से जवाब नहीं दिया तब भी आप विजय आज की लाइव देख के फिर वो सारे भ्रम नष्ट हो जाएंगे। आज की लाइव देख के वो ये भी तो सोच सकते हैं कि जब इसने तब जो कहा था जब वो विश्वास करने योग्य नहीं हो सकता। अभी भी बोल रहा हूं। आज क्लियर हो आज आज क्लियर हो जाएगा ना। सोच वो सोचने वाला क्या सोच रहा है उसको छोड़िए। आपका काम क्या है? कुछ भी प्रचार है। आपको सत्य का प्रचार करना है कि नहीं करना है? बिल्कुल सत्य का प्रचार करेंगे। तो जहां पे आप निरुत्तर हो रहे हो वहां पर भी अपने पक्ष को ये दिखा रहे हो कि हम निरुत्तर नहीं हुए। ये असत्य का प्रचार है ना। मैंने कल भी सही बोला था और आज भी सही बोलूंगा। अरे भाई आपका खुद का कहना है कि आपके पास जवाब नहीं थे। आपने उत्तर जी ये चर्चा आगे बढ़ाइए। मैंने अभी थोड़ी देर
00:06:06:24 पहले आपसे यही प्रश्न किया था कि आपको इस पर कुछ बोलना है या हम लोग चर्चा आगे बढ़ाएं तो आपने कहा कि नहीं हां ऐसे कर चलिए ठीक है आपका प्रश्न बताइए तो मेरा प्रश्न ये रहेगा
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→ Used in: A · Video रामपाल को शास्त्र कहां से मिले? at 0:04 ↗
→ Used in: A · Video क्या भगवान श्री कृष्णा से मोक्ष नहीं मिलता at 0:02 ↗
00:06:22:28 पहला तो मैं ये प्रमाणित करूंगा उसमें प्रश्न नहीं है प्रमाणित करूंगा कि गीता ज्ञान देने वाला जो ईश्वर है अह वो मोक्ष नहीं देता ये गीता में ही प्रमाण है। दूसरा प्रश्न आपसे ये है कि गीता ज्ञान देने वाला प्रभु वो राक्षस स्वरूप क्यों है? जीवो का भक्षण क्यों करता है? और वो क्रूर क्यों है? उसका जो स्वभाव है, वो क्रूरता वाला क्यों है? ये आपसे प्रश्न है मेरा। पहले आप अपनी बात वो जो पहली वाली है वो साबित करो।
00:06:59:06 पहली वाली कौन सी साबित करूं? जो आपने यह कहा कि मैं यह साबित करूंगा कि गीता ज्ञान देने वाला जो है वह मोक्ष नहीं देगा। आपने प्रश्न पूछा था मैं प्रश्न ये तो मेरा प्रश्न पहला यही है कि वो क्रूर क्यों है? दूसरा कैसे सिद्ध करेंगे? मोक्ष नहीं देता है। आप कैसे सिद्ध करेंगे? मोक्ष नहीं देता है। कैसे सिद्ध करेंगे? गीता से। गीता से। गीता से से इसके लिए इसके लिए हम जाएंगे गीता अध्याय दो में और गीता अध्याय नौ में
00:07:40:12 गीता अध्याय दो का कौन सी कौन सी प्रेस की छपी हुई गीता है आपके पास मेरे पास गीता प्रेस गोरखपुर वाली है ये छोटी जो गुटखा आती है वाली अच्छा तो यह कैसे आई आपके पास भगवत गीता? आपकी आवाज कट रही है। कहने का तात्पर्य ये है कि आप गीता से गीता गीता अरे मैं गीता प्रेस गोरखपुर वालों ने दी है मुझे। मैं मैं बताऊंगा। मुझे दुकान से प्राप्त हुई है जी मुझे। मैं मैं अपनी बात पूरी कर लूं कि कहने का तात्पर्य यह है कि आप गीता नामक शास्त्र से सिद्ध करेंगे कि गीता का ज्ञान देने वाला मुक्ति दाता नहीं है। ठीक है आप आपकी आवाज कट कट के आ रही है। आपके इंटरनेट में प्रॉब्लम है। इंटरनेट में प्रॉब्लम है आपके। मेरे में नहीं है।
00:08:54:21 एक सेकंड नेटवर्क स्लो है आपका आ रही है आवाज हम हां तो मेरा यही कहना है गीता प्रेस गोरखपुर वालों ने दी है मुझे और दुकान से खरीद के लाया हूं मैं हम गीता प्रेस के पास कहां से आई है वो गीता प्रेस के पास कहां से आई? अब यह मुझे नहीं पता उनके पास कहां से आई।
00:09:31:27 वो तो वहीं जाके तहकीकात करनी पड़ेगी। तो आपको यह नहीं पता है कि गीता प्रस के पास कहां से आई है तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कहां से आई है। हां आप है ना थोड़ा सा प्रश्न गलत पूछ रहे हो। गीता का ज्ञान किसने दिया ये ये पूछोगे तो तो मैं बता सकता हूं। और इसके रचयिता कौन है? ये बता सकता हूं। मैं ये कह रहा हूं कि लेकिन आई कहां से ये नहीं बता सकता मैं। हम ये नहीं बता सकते। इसका मतलब इसका मतलब ये तो सिद्ध हो गया कि रामपाल यानी कि आपके पास जो गीता का ज्ञान आ रहा है गीता के श्लोक और उसका अर्थ आ रहा है। वो रामपाल के पास है ये आपको नहीं पता है। गीता प्रेस गोरखपुर वाले जो अनुवाद है उनको मानते हो ना आप? मैं मैं अपनी मैं बात करूंगा। मैं बात करूंगा। मगर फिलहाल तो बात यह हो रही है कि रामपाल रामपाल जी कह रहा हूं मैं फिलहाल क्योंकि भाई आपकी रामपाल के प्रति श्रद्धा है तो मैं फिलहाल रामपाल जी कह रहा हूं। रामपाल जी के पास गीता का ज्ञान कहां से आया? गीता के श्लोक कहां से आए? ये आपको नहीं पता है। कहां से आए?
00:10:49:18 कहां से आए? मतलब उन्होंने गीता प्रेस गोरखपुर से गोरखपुर वाली दुकान से खरीदी होगी। अच्छा गीता प्रेस गोरखपुर की दुकान से खरीदी। मतलब गीता में क्या लिखा है और क्या नहीं लिखा है। इस विषय में रामपाल जी के लिए गीता प्रस प्रमाण है। गीता प्रस प्रमाण हो गई ना। गीता प्रस प्रमाण मतलब कि इसमें ये श्लोक लिखा है तो मैं मानता हूं कि गीता प्रस ने सही लिखा है वो श्लोक। जरूरी नहीं है। अगर प्रमाण नहीं मानेंगे तो हो सकता है कि वहां पर भगवान ने कुछ और कहा हो, अर्जुन ने कुछ और कहा हो, गीता प्रेस वाले कुछ और छाप रहे हो। तो गीता प्रस से जब वो मान रहे हैं कि गीता प्रस से जो गीता है वही गीता है जो कृष्ण भगवान ने अर्जुन को कही थी तो इसका मतलब रामपाल के लिए ये बता दीजिए आप प्रमाण किसको मानते हैं तर्कतर्क कर रहे हो बेकार की बहस नहीं है बहुत आवश्यक बहस है और इसमें मैं आपके पॉइंट पर जल्दी आ रहा हूं एक हमारा कार्य केवल आपको निरुत्तर करना नहीं है हमारा कार्य जन ता के समक्ष तथ्यात्मक तार्किक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है अपने सनातन को जानने के लिए कि वो कौन
00:12:04:24 सा दृष्टिकोण उन्हें रखना चाहिए। तो आपने कहा कि रामपाल जी जो है वो भगवत गीता ले आते हैं गीता प्रेस से तो इसका मतलब रामपाल जी के लिए गीता के विषय में गीता प्रेस गोरखपुर प्रमाण है। यानी वो मानते हैं यानी यानी मैं बता दे रहा हूं जो आपके प्रश्न का उत्तर दे रहा हूं। मैं अथवा मेरे गुरु जी जो मानते हैं वही मैं मानता हूं। मेरे गुरु जी का यह कहना है कि यह गीता का जो ज्ञान है वह काल ब्रह्म ने बोला है जो गीता में सीधे स्पष्ट लिखा हुआ है वह अपने आप को ब्रह्म बता रहे हैं और अपना मंत्र ओम बता रहे हैं। दूसरी बात इसकी जो रचनाकार लिखने वाले हैं वो वेदव्यास जी हैं। यानी कि जो अह गीता का ज्ञान देने वाला ब्रह्म और लिखने वाला वेदव्यास जी और जिस चीज को प्रमाण मानकर हमारे गुरु जी ने अपनी स्वयं की पुस्तक लिखी है गीता मैं थोड़ा सा इंटरप्ट करूंगा इंटरप्ट करूंगा देखिए बहुत अच्छे से बात हो जाएगी मुझे बहुत लंबा महिमा मंडन या प्रवचन इत्यादि नहीं सुनना है यहां पे बात ये है कि रामपाल जी
00:13:19:25 पूछा मैंने बोला आपने काफी लंबा बोला है और आपने व्यर्थ का बोला है वो मैं सिद्ध कर रहा हूं कैसे व्यर्थ का बोला है रामपाल जी क्या मानते हैं गीता को गीता ज्ञान देने वाला कौन है या उसको किसने लिखा था मैं मेरा प्रश्न ये नहीं है वो भले ही काल ने बोली मगर वो जो श्लोक वहां पर बोले गए हैं महाभारत काल में वो रामपाल जी को कैसे प्राप्त हुए तो आपने कहा वो गीता प्रेस गोरखपुर प्राप्त हुए।
00:13:52:09 उनको कैसे पता कि काल ने यह बोला था या नहीं बोला था? अगर वह इस विषय में गीता प्रेस पर आश्रित है तो गीता प्रेस उनके लिए प्रमाण हुआ कि गीता प्रेस सच बोलती है जो काल ने वहां पर बोला था आपके अनुसार वो काल ने बोला था तो काल ने जो बोला है एज इट इज वो संस्कृत के श्लोक गीता प्रेस ने आपको छाप कर दिए हैं। इस विषय में रामपाल जी के लिए गीता प्रेस प्रमाण हो गई ना आप नेटवर्क इशू आ रहा है थोड़ा सा हम्।
00:14:37:21 [हंसी] हम नेटवर्क इशू नहीं है। मुझे लग रहा है कि आपका फोन जो है ना उसमें मेमोरी ज्यादा उभर गई है। जिसके कारण वो यह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग वो सहन नहीं कर पा रहे हैं।
00:15:14:07 ऐसा होता है नेटवर्क इशू आ रहा है। आपको तो आपको नेटवर्क नेटवर्क वाले एरिया में जाता हूं। हां जाइए जाइए। नेटवर्क वाले एरिया जाता। आप लोग समझ रहे होंगे मैं किस तथ्य पर प्रकाश डालना चाहता हूं। आप लोगों को समझाना चाहता हूं कि
00:16:00:04 हर व्यक्ति को शास्त्रज्ञ या शास्त्रों को जानने वाला होने की आवश्यकता नहीं है। यदि वह अपने परंपरा विषयक सिद्धांत को समझ जाए। आपको लोगों को केवल ये समझाना है ना कि परंपरा क्या होती है और किस लिए आवश्यक है। कहां तक उनको सारे शास्त्रों की नॉलेज आप देंगे? कोई भी आकर के विधर्मी आपके शास्त्रों का खंडन करने लगेगा। आपके सिद्धांतों का खंडन करने लगेगा। आपके धर्म का खंडन करने लगेगा। और वहां पर वह कुछ ना कर पाए। एक साधारण व्यक्ति तो वहां पर आपको कौन बचा सकता है? बहुत लंबी लड़ाई लड़ने की जरूरत कहां है?
00:16:52:21 हां बताइए। हां तो काल ने आपके हिसाब से महाभारत काल महाभारत का जो समय था उसमें काल नामक कोई एंटिटी है जो राक्षस जैसी है और उसने भगवत गीता का ज्ञान दिया वो ठीक है अभी फिलहाल के लिए दुर्जन से मान लेते हैं कि उसी ने दिया जो रामपाल का मानना है वो सही है मैं ये कह रहा हूं कि वो जो श्लोक है उसने क्या कहा था संस्कृत में क्या नहीं कहा था वो श्लोक आपको आपके रामपाल जी को कहां से प्राप्त हुए आपको प्राप्त हुए मान लो गीता प्रेस से आपके रामपाल जी को भी प्राप्त हुए गीता प्रेस से इसका मतलब काल ने क्या कहा और क्या नहीं कहा इस विषय में गीता प्रेस रामपाल दास के लिए प्रमाण है गीता प्रेस गोरखपुर
00:17:41:06 मेरे लिए भी प्रमाण है नहीं तो जब हम किसी को प्रमाण कहते हैं तो इसका मतलब यह होता है कि हम यह कह रहे हैं कि नहीं यह झूठ नहीं बोलता अगर मेरे लिए प्रमाण है तो हम मेरे लिए सनातन धर्म के जितने भी शास्त्र है क्योंकि मैं रामपाल जी महाराज से जुड़ने से पहले एक मेरी तो हो जाने दीजिए एक मिनट एक मिनट एक मिनट अरे एक मिनट सुन तो लीजिए अब इससे पहले संत रामपाल जी महाराज से जुड़ने से पहले मैं हिंदू ही था और मैं सारे शास्त्रों को मानता था अरे मेरे उन्होंने मेरी
00:18:26:09 आप मैं आपने जो क्लेम कर दिया कि मैं मैं उसको प्रमाण मानता हूं। मैं उस क्लेम को काउंटर कर रहा हूं ना। सुनिए ना मैं उस क्लेम को उसको प्रमाण। अरे सुनिए मैं मैं भी इनको प्रमाण मानता हूं। इसकी प्रमाण कर दिया। अब आपको और ज्यादा बताने की आवश्यकता रह गई। नेम कर तो दिया आपने। आप मानते हैं प्रमाण? ठीक है। बस बस एक बात है बात यहां पे शुरू होती है एक मिनट एक मिनट एक मिनट बात यहां पे शुरू होती है बात ये शुरू होती है कि अ रामपाल दास प्रमाण मानते हैं गीता प्रेस को यानी कि गीता प्रेस झूठ नहीं बोलती काल ने जो जो कहा एज इट इज छाप के दिया है गीता प्रश्न
00:19:18:07 यही तो मानना पड़ेगा में लिखा लिखा हुआ है। हां हां हां मैं उसके लिए थोड़ा सा बोलूंगा कि गीता मैथ वालों ने जो चीज कोष्टक में लिखी है वो उन्होंने अपनी तरफ से लिखी है। बाकी के जो संस्कृत के अनुसार है वो ठीक है। अच्छा ठीक है। जो चीज कोष्टक में यानी कि गीता प्रेस अज्ञानता अवश्य कुछ कर सकती है। बता सकती है आपको धर्म का अर्थ जो आपके लिए प्रमाण है वोक में
00:19:51:06 जो आपके लिए मैं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं जो आपके लिए प्रमाण है वो कोष्क में झूठ बोल सकता है ना हां बिल्कुल हां यानी कि कोष्क में वो झूठ बोल सकता है। फिलहाल मैं आपको बता दूं विष्णु पुराण का अर्थ करते समय रामपाल ने बिना कोष्क के माना है कि जो गीता प्रेस है। उसने यहां पर अनुवाद गलत कर रखा है। यानी कि बिना कोष्क के भी गीता प्रेस वाले रामपाल दास के अनुसार झूठ बोल सकते हैं। अज्ञानता कर सकते हैं।
00:20:34:12 मेरे सुनिए मेरे अनुसार गुरु जी के अनुसार आपके अनुसार मतलब आप जो है रामपाल को नहीं मानते इतने अंश में जितने अंश में वो गीता प्रेस को बिना कोष्क के झूठ बोलने वाला या अज्ञानी है कहते हैं। फिलहाल में आपकी अरे फिलहाल में आपकी मेरे से ज्ञान चर्चा हो रही है। अरे भाई तुमने अभी क्लेम किया कि रामपाल दास जो जो मेरे से हो रही है ना चर्चा हम हां तो उनकी उनसे चर्चा नहीं हो रही ना आपकी उनसे जब चर्चा होगी तब आप उनसे बात करना फिलहाल मेरे से चर्चा की है पर्सनली मैं जो मानता हूं उसे मैंने आपको बता दिया एक मिनट अमित दास मैं तुमसे चर्चा कर रहा हूं रामपाल को सुनिए मैं इस समय उस समय उस फिलहाल मैं चर्चा ये कर रहा हूं ज्ञान देने वाला जो प्रभु है उसका इंटरनेट अटक रहा है मोक्ष नहीं रहा है उसका प्रमाण इंटरनेट अटक रहा है आपका मैं इंटरनेट अटक रहा है गीता का इंटरनेट अटक चिपचिप के आ रहा है अरे जो बता रहे हो वो बिगड़ रहा है ना मामला बताते हुए
00:21:52:07 मैं मैं ये मैं ये कह रहा हूं कि गीता का फिलहाल मेरी चर्चा इस पर नहीं है कि उसको सही साबित करना है कि किसको गलत करना है। ले जिस को लेकर के क्लेम करने वाले हो जिस शास्त्र को लेकर के तुम क्लेम करने वाले हो उसी शास्त्र को लेकर के मैं उसकी प्रमाणिकता के विषय में तुमसे बात कर रहा हूं ना
00:22:26:14 ठीक है तो उसकी प्रमाणिकता के विषय में आपके जो रामपाल है वो वो यह नहीं मानते कि गीता प्रेस अपनी किताबों में सच सच लिखती है। वो ये मानते हैं कि गीता प्रेस झूठ भी लिखती है। हम गीता प्रेस पर आश्रित नहीं है। उनकी मैं अपनी बात उनकी मान्यता में उनकी मान्यता में अभी ये क्लियर हुआ ही नहीं। मैंने उनको मुख से सुना ही नहीं कि क्या गलत है क्या सही है। अच्छा मतलब अभी आपको अभी आपको पता नहीं है रामपाल दास सही है कि गलत है। आपने ये कहा कि गीता प्रेस वालों गलत लिखते हैं। मैंने उनके मुंह से सुना नहीं ना।
00:23:06:02 तो विष्णु पुराण का जो वो क्या कहते हैं? वीडियो दिखाते हैं कि भैया इतने अंश में वह गलत है। जहां पर विष्णु पुराण में वह महादेव को काल बोला गया है। हम विष्णु पुराण के शिव पुराण में विष्णु पुराण विष्णु पुराण का लिखा है इनका अच्छा विष्णु पुराण में लिखा है ना वो विष्णु पुराण है समय विष्णु पुराण का अर्थ करते समय रामपाल दास ने ये माना है कि यहाँ पर जो है उन्होंने गलत अर्थ कर दिया है
00:23:43:03 हां तो उनका मानना है ठीक है सही बात है तो सही मानना है तो इसका मतलब गीता परस्पर विश्वास नहीं किया जा सकता कि वह आपको सही सही श्लोक देगी क्योंकि वह अमुक अमुक जगह कहीं-कहीं पर झूठ भी बोल रही है अज्ञानता वश या फिर किसी और के कारण अभी अभी आपको अभी आपको चर्चा डिवाइड करनी है या टॉपिक पर करनी है? अरे भाई इसको बताओ तो गीता प्रेस पर विश्वास है कि नहीं है? अरे गीता प्रेस गोरखपुर वाली जो गीता भगवत गीता है मैं
00:24:20:04 जगह भी झूठ बोल सकता है विश्वास मानते हो गीता गीता प्रेस विष्णु पुराण में और कोष्टक में झूठ बोल सकती है तो वो अन्य जगह श्लोकों को भी बदल सकती है श्लोक भी दूसरे लिख सकती है हां तो ये ऐसा ऐसा बोलो ना कोष्टक में जब उन्होंने इशारा कर दिया है कि ये अपनी तरफ से लिखा हुआ है ऐड करके। बाकी उन्होंने कहा एक मिनट एक एक मिनट उन्होंने ये कहां लिखा है कि कोष्क में मैं अपनी तरफ से लिख रहा हूं।
00:24:55:18 बुद्धिमान व्यक्ति समझ जाता है कोष्टक में जो लिखा हुआ होता है वो उसका अपनी तरफ से लिखा रहता है। कोष्ठक में लिखने का मतलब होता है कि वहां पे लिखे गए भाव को और अच्छे से समझाना। हम हम बिल्कुल। उसमें यह नहीं होता है कि मैं अपनी ओर से लिख रहा हूं। यह नहीं यह यह आवश्यक नहीं है। वहां पे जो चीज़ समझ में आ रही है वहां पे जो चीज कठिनता से समझ में आ रही है उसका एक सरलार्थ कोष्क में लिख दिया। हां वो सरल वो सरलार्थ अपनी तरफ से ऐड किया है ना। अपनी ओर से कहां किया? उसी का अर्थ लिखा ना उन्होंने तो उन्होंने अपनी जानकारी में हम उसी का अर्थ लिख रहे हैं। अब सुन आप सुनिए। अब जैसे कोई कार्य है उस कार्य करने में
00:25:42:16 कर दिया। मैं इसको और क्लियर कर देता हूं। जो वो श्लोक छाप रहे हैं वो अपनी बुद्धि विवेक से छाप रहे हैं कि नहीं छाप रहे हैं? अब मैं आपको एक एक मैं श्लोक दिखा देता हूं। इस श्लोक में क्लियर हो जाएगा। आपने कहा है कि सरल है क्या? नहीं नहीं। आपको श्लोक दिखा देता हूं। श्लोक में क्लियर हो जाएगा। श्लोक क्यों दिखा रहा हूं मैं फिलहाल बात ये चल रही है बता रहा हूं मैं आपको ये कह रहा हूं मैं आपको ये मैं आपको ये कह रहा हूं कि जो वो अपने बुद्धि और विवेक से आप कह रहे हो कोष्क में लिखते हैं तो क्या वो जो श्लोक छापते हैं वो अपने बुद्धि और विवेक से नहीं छापते उसमें बुद्धि विवेक को साइड में रखते हैं अब साइड में रखे हैं चाहे घर पे रखे वो तो मुझे पता नहीं लेकिन गीता अध्याय श्लोक 14 15 में सुनिए आपको विश्वास नहीं जिस आपको विश्वास नहीं है उसकी छापी हुई किताब को आधार बना दावे कैसे कर रहे हो कि यह बात सुनिए चर्चा खत्म कीजिए फिर जब विश्वास है नहीं है चर्चा नहीं है कि नहीं है कीजिए की बात कुछ नहीं होती यहां
00:26:57:20 सुनो मैं आप जैसे मुझे गुमराह करने का प्रयास कर रहे हो तो मैं गुमराह नहीं होऊंगा और आप फालतू बातें करेंगे आपको वाकई मैं निकाल दूंगा। आप यह स्वीकार करो। इस बात का उत्तर नहीं है। आप चर्चा पे आओ। इस बात का उत्तर नहीं है। आप अब आपको भ्रमित करने का प्रयास कर रहे है। आप चर्चा में आओ। नहीं आप भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हो। सीधा मेरा ये भ्रमित करना कहां पर सिद्ध होता है? कौन से शास्त्र के सिद्धांत से सिद्ध होता है? वो बताओ। चलो। तुम्हारे तुम्हारे तर्कों से सिद्ध होता है कि आप आप हमारा टॉपिक ये था कि गीता ज्ञान देने वाला जो प्रभु है वो मोक्ष नहीं तुम्हारा ये लिखा है तुम्हारे मन से मानी जाए आपके मन से बात मानी जाए बातें अरे हमारे मन से कुछ मत मानो तो फिर एक ये क्लेम जो किया है कि आप भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हो इसके संबंध में शास्त्री सिद्धांत दो चलो तुम रामपाल दास की किताब से ही बता दो। [हंसी] सुनो आप आप है ना मैं आपको
00:28:08:26 कर रहा हूं। मैं आपको सत्य की बात कर रहा हूं। आप इस संबंध में रामपाल दास की किताब से प्रमाण दे दो मान लूंगा। चलो इतनी छूट आप तो नहीं आप आप टॉपिक को छोड़ के दूसरे टॉपिक को भाग रहे वहां पे फसने लगो वहां पे अपने मनगढ़ंत बातें बोलने लगो तो फसने वाली बात ही कहां है तो भ्रमित कर रहे हैं आप मुझे तो टॉपिक पे दूसरी बातों पे क्यों लग रहे हो अरे तो बात है ना
00:28:44:26 जब मैं प्रमाण जब मैं प्रमाण दे रहा हूं गीता ज्ञान दाता प्रभु तू स्वयं कह रहा है कि मैं मोक्ष नहीं देता तो मैंने क्या कहा है मैंने क्या कहा है भाई साहब दूसरी जगह मत जाओ सुनने की बजाय आप जिसको प्रमाण कह रहे हैं वो प्रमाण सिद्ध नहीं हो रहा ना आप जिसको प्रमाण कह रहे हो वो प्रमाण सिद्ध नहीं हो रहा शुरुआत में आपने पूछा था कि पहले वाला जो प्रश्न है उसे सिद्ध कीजिए आप जिसको प्रमाण कह रहे हैं वो प्रमाण सिद्ध शुरुआत में अपनी बातों से मत शुरुआत में आपने कहा था कि पहले ये सिद्ध कीजिए कि गीता ज्ञान दाता प्रभु मोक्ष नहीं देता ये सिद्ध कीजिए जब मैं सिद्ध करने लगा तो आप तर्क वितर्क पे आ गए कि गीता प्रेस नहीं है बता रहा हूं जब आप ये सिद्ध करने लगे तो आपने गीता प्रेस की गीता उठाई है मैंने कहा क्यों उठाई गीता प्रेस पे क्यों आश्रित हो तो मैं अपनी दिखा रहा हूं अपने गुरु जी की दिखाऊं उसको मानोगे तो गुरुजी के पास आप मैं बताऊं मैं बता रहा हूं गुरु जी के पास जो आई है वो भी गीता से आई आपने खुद कह दिया या तो आप कहते कि गुरु जी के पास उनके गुरु से आई उनके पास उनके गुरु से आई गुरु परंपरा बताते तब हम सोचते सुनिए गीता का
00:30:00:02 बहुत से गुरुओं ने बहुत से संतों ने अपने अलग-अलग अनुवाद किए हैं। ऐसी बात नहीं है लेकिन जो ज्यादातर है ज्यादातर संख्या में लोग गीता प्रेस गोरखपुर की प्रमाण मानते हैं क्योंकि ये सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है। [हंसी] अरे सोच तो लिया करो क्या बोल रहे हो कहां मान्यता प्राप्त है सरकार मान्यता देगी कौन सी चीज प्रमाणिक है कौन सी नहीं है बिल्कुल भाई अब सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है आपको इसकी नॉलेज नहीं है अच्छा ठीक है रामपाल की रामपाल दास की किताबों की मान्यता कहां से प्राप्त है
00:30:45:03 हम जब आप सरकार की मानते हो तो फिर सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है क्या रामपाल की किताबें? अरे हम रामपाल जी महाराज को ही प्रमाण मानते हैं। अरे तो जब सरकार नहीं मान रही है उनको प्रमाण तो तुम क्यों मान रहे हो? यानी कि सरकार वो माने या ना माने उनकी मान्यता में सुनो उनकी मान्यता को लेकर मैं मानूंगा क्या? यानी सरकार उनकी मान्यता को मैं मानूंगा। नहीं मेरी मान्यता मेरे ऊपर निर्भर करती है। इसलिए मानते हैं क्योंकि सरकार प्रमाण मानती है। मैं क्या मानता हूं क्या नहीं मानता ये मेरे ऊपर निर्भर है। मैं गीता प्रेस को मानता हूं। ये मेरे ऊपर निर्भर है। मैं रामपाल जी को मानता हूं। ये मेरे ऊपर निर्भर है। ये किसीको कोई और तय नहीं करेगा। इसका कोई इन बातों का कोई उत्तर नहीं है। बस आपने माना यहां से शुरू करो कि भैया वो किताब में ये छपा है। बाकी मेरे पास इनका उत्तर नहीं है। प्रमाण भाड़ में आप आप ये बताइए आप गीता प्रेस को मानते हो? अरे मैं मैं तो मानता ही हूं ना मैं तुमसे पूछ रहा हूं तुम क्यों मानते हो? मैं तो इसलिए मानता हूं क्योंकि मेरे जो परंपरा प्राप्त आचार्य है उन्होंने कहा गीता प्रेस की गीता में सही सही श्लोक चपे हैं। सुनो हम जिसको
00:32:00:07 मानते हो मैं उसी से प्रमाण दे रहा हूं। अरे मेरे भाई तो तुम तुम तुम्हारे जो क्लेम है वो तो झूठे है ना। पहले ये तो स्वीकार मेरा छोड़ दो। मेरा छोड़ दो। मेरा छोड़ दो। आप जिसको मानते हैं मैं उसी से प्रमाण दे रहा हूं। ठीक है? अब बात ये आएगी कि मैंने जो लिखा है जो मैंने लिखा है उसके बारे में कोई और बताएगा कि मैं ही बताऊंगा कि मैंने क्या लिखा है। इसका अर्थ। तुमने जो लिखा है वो तुम ही बताओगे। कोई और क्यों बताएगा? तो मेरे गुरुओं ने जो व्यास जी से लेकर के यहां तक जो गीता लेकर के आए हैं उसका अर्थ बताया है कि गीता ज्ञान देने वाला जो है वो भगवान श्री कृष्ण जो है वो मोक्ष दायक है वो लेके आ रहे हैं वो लिख रहे हैं वो गीता प्रेस को दे रहे हैं गीता छापो अब तुम आकर के कह रहे हो कि तुमने जो लिखा है वो गलत उसका सही अर्थ मैं बता रहा हूं हम मतलब आपका यह कहना है कि जिन्होंने लिखा है। उन्होंने कह दिया श्री कृष्ण भगवान मोक्ष देते हैं। बस इतना काफी है। पढ़ने की आवश्यकता नहीं है। है मगर यदि उसका अर्थ यदि उसका अर्थ उन गुरुओं के विपरीत जा
00:33:15:10 रहा है जिन्होंने लिखा है जिन्होंने परंपरा से आपको गीता दी है। यदि उसका अर्थ उन गुरुओं के विपरीत जा रहा है तो एक मिनट एक एक मिनट भाई साहब एक मिनट यदि उसका अर्थ आपके हिसाब से उन गुरुओं के विपरीत जा रहा है जो जो गीता को लेकर के आ रहे हैं। तो आपको यह मानना पड़ेगा कि मैं गीता को प्रमाण नहीं मानता। मैं गीता को प्रमाण नहीं मानता। ये आपको कहना पड़ेगा। अगर अनुवाद को आप नहीं मानते तो आप भी प्रमाणित नहीं हुए। अरे मैं तो मानता हूं ना। मैं तुमसे पूछ रहा हूं। तुम अपने क्लेम को साफ करो कि गीता के आधार पर आप कुछ नहीं मानते हो। आपका आधार दूसरा होना चाहिए। ये कहना बंद करो कि मैं गीता के कारण किसी को तत्वदर्शी मानता हूं। ये कहना बंद करो कि मैं गीता के कारण किसी को काल मानता हूं। ये कहना बंद करो कि मैं किसी किसी को गीता के कारण कबीर मानता हूं। मैं ये कहना चाह रहा हूं। आप स्वतंत्र होकर के कहिए कि भैया कबीर भगवान है बिना गीता के। गीता को मानने का दावा करना झूठा है। ये बात है। तो मैं मैं इसी इसी
00:34:30:14 बात के प्रति उत्तर में मैं यह जवाब दूंगा आपको। जैसे किसी भी अन्य धर्म के व्यक्तियों से जब चर्चा होती है तो मैं उनको स्पष्ट कह देता हूं कि भाई मैं इस चीज को मानता हूं। इसमें इसमें जो चीजें लिखी हैं उन बातों को मैं प्रमाणित मानता हूं। और जो अनुवाद किया है मैं खड़े हुए हो जिसकी साइड से तुम यहां खड़े हुए हो वो तो नहीं मानता मैं सुनिए पर्सनली अपनी साइड से तो ये मानो कि अभी मुझे नहीं पता रामपाल सही बोलते हैं कि गलत बोलते हैं ये मानो मैं रामपाल जी महाराज की बात ही नहीं कर रहा अरे भाई तुम तो तुमसे हम बात क्यों कर रहे हैं फिर क्यों बात करेंगे फिर तुमसे हम हम गीता ज्ञान देने वाला जो प्रभु है का दावा कर रहे हो रामपाल के पक्ष को यहां पुष्ट करने नहीं आए हो तो हम क्यों तुमसे बात करें बहुत सारे लोग हैं जो हमारा विरोध करते हैं तुमसे हम क्यों बात करें भाई एक सेकंड तुम्हारी क्या बात हुई थी कि हम ज्ञान चर्चा करेंगे और अपने ज्ञान चर्चा में ये सिद्ध करेंगे कि गीता ज्ञान देने वाला प्रभु है वो मोक्ष आगे बढ़ो के इस विषय में मेरे मेरे पास उत्तर नहीं है मैं आगे बढ़ना चाहता हूं ये बोल दो आगे बढ़ो नहीं इस विषय में मैं बात नहीं
00:35:45:18 करना चाहता। मुझे सिर्फ यह बात करनी है कि गीता ज्ञान देने वाला नहीं। बात ना करने का कारण बताओ कि मेरे पास उत्तर नहीं है। कारण बताओ। कारण नहीं नहीं क्या क्या होता मैं जरूरी मैं उत्तर देना ही नहीं चाहता उसका। ठीक है। फिलहाल तुम्हारे यहां पर इतना सब कवायद करने से लोगों को लोग निर्णय ले लेंगे कि उत्तर है कि नहीं है। ठीक। अब तुम अपना वो क्लेम बताओ। गीता से हां गीता अध्याय दो और नौ में यह स्पष्ट लिखा हुआ है कि जितने भी भूत प्राणी हैं वो प्रकृति में लीन होते हैं और प्रकृति और परबह्म दोनों एक ही है। दोनों अलग नहीं है। इसे अलग समझने का प्रयास करेंगे तो फिर मुझे और भी प्रमाण देने पड़ेंगे पुराणों से गीता अध्याय दो श्लोक नंबर 27 में लिखा हुआ है क्योंकि इस मान्यता के अनुसार जन्मे की मृत्यु और मरे हुए का जन्म निश्चित है और नौ में लिखा हुआ है कि प्रकृति जितने भी भूत प्राणी हैं। जितने भी टोटली एक्स वाई जेड जितने भी भूत प्राणी हैं। प्रकृति में लीन होते हैं और लीन होने के बाद में
00:37:00:19 जब सृष्टि का जो कार्यभार है वो समेटने के बाद में फिर दोबारा से मैं उनको रच देता हूं। तो इस इस हिसाब से जन्म मृत्यु किसी की कटती नहीं है। कहां लिखा है? गीता अध्याय दो श्लोक नंबर 27 पढ़िए। उसके बाद में नौ पर आ जाइए। नौ का सात और आठ पढ़ लीजिए।
00:37:37:25 नौ का सात और आठ। पहले दो का 27 पढ़ लीजिए। उसके बाद नौ का सात आठ पढ़ना। जन्मे हुई की मृत्यु और मरे हुए का जन्म निश्चित है। दो का 27
00:38:14:21 ये हां दो का एक मिनट एक मिनट देख रहा हूं देख रहा हूं हां दो 27 में लिखा है संपूर्ण प्राणी जन्म से पहले अप्रकट थे और मरने के बाद भी अप्रकट होने वाले हैं। केवल बीच में ही प्रकट है। ऐसी स्थिति में शोक क्यों? 27 में लिखा है कि इस मान्यता के अनुसार जन्मे हुए की मृत्यु निश्चित है और मरे हुए का जन्म निश्चित है। इससे भी इस बिना उपाय वाले विषय में तू शोक करने योग्य नहीं है।
00:38:52:16 तो इसमें तो एक मान्यता बताई जा रही है कि यदि आपको मोक्ष प्राप्त नहीं हो रहा है तो उस स्थिति में जिसकी मृत्यु हो रही है उसका जन्म निश्चित है और जिसका जन्म हो रहा है उसमें मृत्यु निश्चित है। इसमें ये कहा है कि उसको मोक्ष मिलेगा ही नहीं। मोक्ष मिल ही नहीं सकता। अब अब आप नौ का सात और आठ पढ़ लीजिए। कल्पों के अंत में सब भूत मेरी प्रकृति को प्राप्त होते हैं। अर्थात प्रकृति में लीन होते हैं। और कल्पों के आदि में उनको मैं फिर रचता हूं। तो इसका अर्थ क्या हुआ? यह तो महाप्रलय की बात हो रही है। महाप्रलय के समय की बात हो रही है। ये मोक्ष की बात थोड़ी ना हो रही है। जिसके जो जन्मा जन्म जन्मांतर
00:40:04:21 एक सेकंड एक सेकंड सुनिए। अरे पूरा पढ़ा नहीं आपको। अपनी प्रकृति को अंगीकार करके स्वभाव के बल से परतंत्र हुए संपूर्ण भूत समुदाय को बार-बार उनके कर्मों के अनुसार रचता हूं। ठीक है? इसमें क्या दिक्कत है? इसमें क्या दिक्कत है? हां। अब सवाल हां मैं आगे आगे बढ़ता हूं। आगे बढ़ता हूं। अब आते हैं गीता अध्याय आठ के श्लोक नंबर 16 में। 16 में कहा है कि हे अर्जुन ब्रह्मलोक पर्यंत सब लोग पुनरावृत्ति में लेकिन मुझे प्राप्त करके पुनर्जन्म नहीं होता यानी कि प्रकृति और परब्रह्म दोनों एक ही है अलग नहीं है।
00:40:50:28 एक मिनट मुझे आठ 16 देख लेने।
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00:41:12:07 ब्रह्मलोक पर्यंत सब लोग पुनरावर्ती
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00:41:14:24 है। परंतु हे कुंती पुत्र मुझको प्राप्त होकर पुनर्जन्म नहीं होता क्योंकि मैं कालातीत हूं और यहां ये सब ब्रह्मा आदि लोक काल के द्वारा सीमित होने से अनित्य है। तो इसमें क्या दिक्कत क्या है? प्रकृति में प्रकृति में प्रकृति में प्रकृति में होना में आपका समझने का प्रयास कर रहा हूं मैं तो मुझे करेक्ट मुझे करेक्ट करिएगा एक मिनट एक मिनट आप वहां कह रहे हैं कि वो प्रकृति में लीन होते हैं कल्प के समय और यदि मुक्ति यही है कि वो जो है ईश्वर में लीन हो जाए तो क्योंकि प्रकृति और ईश्वर एक ही है तो इसलिए यदि प्रकृति में लीन होने से व्यक्ति मुक्त नहीं होता है तो फिर इसका मतलब ईश्वर में भी लीन होने से व्यक्ति मुक्त नहीं होगा।
00:42:07:27 मतलब आप ये समझते हैं कि प्रकृति और नहीं प्रकृति और ब्रह्म दोनों ही है। आपको शिव पुराण में प्रमाण दे सकता हूं। व्यवहार में व्यवहार की दृष्टि से नहीं सुनो सुनो मैं मैं प्रमाण में जानता हूं। भाई मेरी बात 120 मेरी बात सुनो भाई मेरी बात सुन लो सुन लो सुन लो सुन लो हां सुनाइए तत्व की दृष्टि से दोनों एक है व्यवहार में दोनों अलग-अलग है तो जहां पर ये कहा जा रहा है कि प्रकृति में लीन हो के वो लोग वापस आते हैं तो वहां पर व्यवहारिक भेद के अनुसार कहा जा रहा है और जहां पर यह कहा जा रहा है कि परम ब्रह्म और प्रकृति एक है तो उस परम ब्रह्म को प्राप्त करने वाले जो है मोक्ष को प्राप्त कर रहे हैं। जैसे कि जैसे कि इधर देखो भैया इधर देखो वीडियो की ओर देखो मैं
00:43:05:25 आपके शिव पुराण का एक मिनट वो मैंने एक्सेप्ट किया है। मैं आपको ये बता रहा हूं कि आपका नाम है अमित दास। आप उदाहरण मत दीजिए। सुनिए श्रीस भाई आपने आप जहां ब्रह्मा विष्णु महेश उदाहरण उदाहरण क्यों नहीं दूं तुम किसी के भाई हो किसी के बेटे हो किसी के किसी के पुत्र हो किसी के पति हो किसी के पिता हो कि नहीं हो तत्व की दृष्टि से हो जहां से की दृष्टि से हो वहां से वहां से आगे जाएंगे क्या आत्मा किससे आगे
00:43:50:21 जहां से ब्रह्मा विष्णु महेश प्रकट होते हैं। सुनिए जहां से ब्रह्मा विष्णु महेश आत्मा उससे बताइए उसका प्रमाण प्रकट होने से आगे जाएंगे। प्रकट होने से आगे जाएंगे। उसका प्रमाण मैं उसका प्रमाण दूंगा ना अपने आपको। एक मिनट मैं आपको प्रमाण दे तो रहा हूं। मैंने आपसे कहा कि आप किसी के पिता, पुत्र और भाई हैं। पति हैं। क्या आप तत्व की दृष्टि से भी पिता पुत्र पति है सबके?
00:44:24:26 एक ही है। लेकिन व्यवहारिक रूप तत्व की दृष्टि से भी आप पिता, पुत्र, पति और भाई ये सब हैं। व्यवहारिक रूप से अलग हूं मैं। लेकिन तुमसे आप वही मैं कह रहा हूं। जहां पर प्रकृति में लीन हो के वापस आने की बात हो रही है। वहां व्यवहार की बात हो रही है। जहां पर प्रकृति और ब्रह्म अलग-अलग है। और जहां पर ब्रह्म को प्राप्त करके जो है मुक्ति पाने की बात हो रही है। वहां पर जब आप कहेंगे प्रकृति एक ही है तो वहां व्यवहार नहीं है। वहां मोक्ष है। वहां परमार्थ है। तत्व की दृष्टि की बात हो रही है। वहां समझ में आया? हां। उसी के लिए उसी के लिए गीता ज्ञान दाता प्रभु ने कहा है कि मुझ ब्रह्म का एक ओम मंत्र है और ओम मंत्र से ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है। बात को पलट रहे हैं और ब्रह्मोक में मंत्र लेट अरे भाई नहीं आप सुनिए अब मेरी बात सुनिए जवाब सुनिए आप जवाब सुनिए सुनिए एक एक मिनट अब आप जवाब सुनिए हां सातवा अध्याय बोलिए सातवा अध्याय बोलिए पांच सातवा अध्याय कौन सा खोलू बताइए? सातवां
00:45:40:04 अध्याय खोल लिया मैंने। कौन सा है? बता रहा हूं। कौन सा? इसमें लिखा हुआ है दव श्लोक में जाइए।
00:46:14:26 हेलो हेलो हां मैं सुन रहा हूं। 10वें श्लोक में लिखा हुआ है कि इसमें लिखा हुआ है कि हे अर्जुन तू संपूर्ण भूतों का सनातन बीज और मुझको ही जान मैं बुद्धिमानों की बुद्धि और तेजस्वी बलवानों का हो गया काफी है। सनातन हो गया बस काफी है। उतना काफी है। सनातन का मतलब क्या है? सनातन का सदा रहने वाला। जिसका ना कभी जन्म होता है ना कभी मृत्यु होती है।
00:46:54:00 सनातन आप ठीक से पढ़ पा रहे हैं ना? हां पढ़ रहा हूं। पढ़ पा रहे हैं ना? दोबारा आप खुद पढ़िए। आप पढ़िए ना पढ़ के सुनाइए। तू संपूर्ण भूतों का सनातन बीज मुझको जान। हां। सनातन बीज मुझको जान। बोल रहा है ना? सनातन यानी कि जो के लिए मुझसे ही उत्पन्न होना जान सनातन है वो जो बीज है वो सनातन है वो जो बीज है सनातन है जिससे भूत उत्पन्न हो रहे हैं वो भूत सन वो जो बीज है वो सनातन है तो इससे ये प्रमाण नहीं हो गया तो मोक्ष हो जाएगा अरे मैं मैं मैं सिद्ध करूंगा ना मैं सिद्ध करूंगा चार नौ पे जाओ चार नौ पे जाओ
00:47:46:07 बताइए चार में क्या है? क्या लिखा है? पढ़ो। नौ हे अर्जुन मेरे जन्म और कर्म दिव्य अर्थात निर्मल अलौकिक है। इस प्रकार जो मनुष्य तत्व से जान लेता है वह शरीर को त्याग कर फिर जन्म को प्राप्त नहीं होता। ठीक है? ये ये बिल्कुल सही बात है। आगे पढ़ो आगे आगे पढ़ो। आगे उसमें एक पंक्ति और है भाई। आगे एक पंक्ति और है। किंतु मुझको ही प्राप्त होता है। ये तो पढ़ो। हां किंतु मुझको प्राप्त होता है। कहां लिखा है? ये कोष्क में लिखा हुआ है आपने। गीता वाली में चेक कीजिए। एक मिनट। यह संस्कृत में मामेती लिखा हुआ है। मामेती आपके यहां कोष्टक में लिखा है। यहां पे कोष्टक में नहीं लिखा है। ये देखो बिना कोष्क के लिखा है। आप गीता प्रेस कौन सी है पुस्तक आपके पास?
00:49:01:08 गीता प्रेस गीता प्रेस को नहीं। दिखा दिया ना ये देखो। हां मैं पढ़ के सुना रहा हूं। एक सेकंड सुनो मेरी बात सुनो। वहां पर रुक जाओ। अर्जुन बोले एक मिनट एक मिनट एक मिनट वहां पे संस्कृत भी दी गई है। मा मेती मुझे ही
00:49:32:26 ठीक है। संस्कृत है वहां पे अवेलेबल। तो पहली बात तो ये है एक और भी मैं और भी श्लोक दे दूंगा मैं और भी श्लोक दे दूंगा प्राप्त होता है एक मिनट मैं और भी श्लोक दे दूंगा कि और भी पहले जो आपने बोला है उसको तो क्लियर कर लो मैं करूंगा क्लियर उसको क्लियर करूंगा मुझे बोलने तो दो लेट मी फिनिश मुझे बोलने दो मैं क्लियर कर रहा हूं मां मेथी को ये कह रहे हैं कि भैया वो जन्म जन्म और मृत्यु को प्राप्त नहीं होता। तो लास्ट में एक शब्द आ रहा है मामेती। तो वहां से निकल रहा है कि नहीं वो जन्म मृत्यु को प्राप्त नहीं होता किंतु मुझे ही प्राप्त होता है। ये अर्थ निकल रहा है वहां से। अब दूसरी बात ये आती है कि
00:50:24:26 शायद नौवे अध्याय का 34वा श्लोक मुझ में मनवाला हो मेरा भक्त बन मेरा पूजन करने वाला हो मुझको प्रणाम कर इस प्रकार आत्मा को मुझ में नियुक्त करके मेरा पराय होकर तू मुझको ही प्राप्त होता है बस हो गया यहां भी प्राप्त होने एक मिनट मैं अपने पूरे प्रमाण के बारे में बोल रहा एक एक मिनट और भी प्रमाण है एक मिनट ठीक है लीजिए फिर मैं बोलूंगा आठ पांच
00:51:19:20 आठ पांच आठ 13 आठ पांच निकालो पहले आठ पांच ठीक है 8 5 13 इसमें लिखा हुआ है कि सब इंद्रियों के द्वाराों को रोक कर तथा मन को हृदय में स्थिर स्थिर करके आठ पांच अच्छा आठ पांच हम
00:52:07:22 जो पुरुष अंतकारल में मुझको ही स्मरण करता हुआ शरीर को त्याग कर जाता है वह मेरे साक्षात स्वरूप को प्राप्त होता है। इसमें कुछ भी संदेह नहीं। हम ठीक है। तो अभी हमने जानी दो बातें कि जो गीता को कहने वाला है वह सनातन है। और जो भी व्यक्ति उसका भजन करता हुआ अंत काल में शरीर छोड़ता है वो उसको ही प्राप्त होता है। किसको? जो सनातन है उसके साक्षात स्वरूप को प्राप्त होता है। तो इसका मतलब वो कौन से स्वरूप को प्राप्त होता है? सनातन स्वरूप को। कहां गए? हम
00:52:57:10 सुन रहा हूं। आप बोलिए। अरे भाई शक्ल दिखाओ ना अपनी। चेहरा दिखाओ। अरे और भी कोई प्रमाण है बाकी फिर नहीं तो फिर मैं मैं बोलूं फिर अब इसको काट सकते हो तो काटो। काटो इसे। और भी कोई प्रमाण है आपके या फिर मैं बोल भाई और भी बहुत सी चीजें है पहले इसको काट सकते हो तो काटो
00:53:37:06 हां तो इसी को हां अब अब आई ना बात और प्रमाण देखना है तो देख लो 932 933 हम बोल लीजिए आप है ना इकट्ठा बोल लीजिए फिर मेरे बोलने आपने कहा प्रमाण है तो मैं दिखा देता हूं और देख लो 932 933 हां जब मैं प्रमाण दिखाऊंगा तो आप बीच में नहीं बोलना फिर आपने प्रमाण चर्चा तो फिर 932 में लिखा है वो मेरी शरण में होकर परम गति को प्राप्त करता है परम गति
00:54:18:24 ठीक है ठीक है अब काटो इसे हां तो पहला तो मैंने आपको प्रमाण दिया था कि प्रकृति को प्राप्त होकर प्राणी फिर उसका पुनर्जन्म सृष्टि रचना होती रहती है उसके कर्म के आधार से। ठीक है? अब हम आपको प्रमाण दिखाते हैं कि आपको बताया वहां पर व्यवहार की बात हो रही। आप यह कहो ना कि वो वहां पर मुझे प्राप्त हो जाता है। जहां पर मुझको प्राप्त होने की बात हो रही है वहां पर है। या तो सुनिए आप आप बोल लीजिए नहीं तो फिर मुझे प्रमाण दिखाने दीजिए। भाई ऐसा है ना आप आप क्या करोगे यहां से जितने टाइम आपने अपनी बात को रखा और मैंने काउंटर नहीं किया उतने टाइम की क्लिप निकाल करके वीडियो बनाओगे इसलिए आए हो मैं जहां आप बोलोगे वहां मैं आपको पता चलूंगा ना ठीक है कोई बात नहीं अच्छी बात है लेकिन पहला मेरा प्रमाण जो मैं दिखाता हूं उसको क्लियर हो जाए
00:55:22:19 बोलो कैमरा कहां गया? एक सेकंड इतनी सारी चर्चा करने की आप लोगों को जरूरत भी नहीं होती है। यदि आपके पास परंपरा है। ठीक है? यह सारे श्लोक आपको रटे हो कहां क्या लिखा है यह भी रटा हो कोई एक व्यक्ति नहीं है सनातन का दुश्मन बहुत है दिन और रात यही चल रहा है कैसे सनातन को नष्ट करें कैसे कृष्ण भगवान का खंडन करें कैसे राम भगवान का खंडन करें सारे शास्त्रों को या तो आप हर व्यक्ति रटा हो और नहीं तो वो किसी चौक चौराहे पर कोई व्यक्ति मिल गया कि देखो यहां पर तो उसने प्रकृति में लीन होने की बात कही है और प्रकृति और वो तो एक ही है यानी प्रकृति से व्यक्ति वापस आता तो लो हो गया। इसलिए आपको यह जानना आवश्यक है कि आपको सारे शास्त्रों को रटा होना आवश्यक नहीं है। आपको परंपरा प्राप्त आचार्य पर आश्रित होना आवश्यक है। अपने धर्म को यदि बचाना है तो नहीं तो हर दूसरा व्यक्ति आपके बच्चों को आपके भाइयों को कब आपसे छीन लेगा।
00:56:37:27 अभक्त के नाम पर काफिर बना देगा। आपके बच्चों को आपको पता नहीं चलेगा। अमित जी फिलहाल गायब हो चुके हैं। इसीलिए कहते हैं इसीलिए कहते हैं मत पड़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में। इसीलिए कहते हैं कि पहले तो तुम्हारा वो बाहर निकाली आत्मा शास्त्र कहां से आए? पहले तो वो वो आवश्यक है जनता को सिद्ध करना। परंपरा की आवश्यकता कितनी है? हर व्यक्ति हर बच्चा के रटे हुए घूमेगा कि कृष्ण भगवान ने कहा अपने आपको कहा है।
00:57:24:14 रट के घूमे हर व्यक्ति तब वो अपने आपको माइंड वाश से बचा सकता है। ब्रेन वाश से बचा सकता है। वरना ये अमित जैसे लोग रामपाल जैसे लोग हर दूसरे दिन आपके भाइयों को आपसे अलग कर देंगे। आपको रटना यह है एवं परंपरा प्राप्तिम मुंडकोनिषद एक एक से लेकर चार तक यह रटना है आपको कि तुमको शास्त्र कहां से मिले यदि तुम्हें भगवत कृपा से मिले हैं तो शास्त्र रटे होने चाहिए फिर मोबाइल में देख के मत बताओ हम तुम्हें किताब लेने क्यों जाना पड़ रहा है भाई गीता प्रेस तक
00:58:04:12 हमें शास्त्र परंपरा से मिलते और यदि कोई नहीं भी आ रहा है हमें शास्त्र परंपरा से मिलते हैं और परंपरा से जब हमने अपने गुरु मुख से वो चीजें सुनी है तो जब हम गीता प्रेस में कोई भी उसको छाप रहा हो तो हम वहां पर सत्यापित कर सकते हैं कि भैया ये हमसे हमारे परंपरा प्राप्त गुरुओं ने अपने गुरुओं से सुनी थी कि नहीं। जिन गुरुओं में पीछे वो लोग आ जाएंगे जिन्होंने उन शास्त्रों को लिखा था। कहां गए अमित? भाग गए। अब आ भी जाओ भाई। इतनी देर मत लगाओ।
00:58:45:13 ऊपर लीजिए ना। आप जानबूझ के ऊपर नहीं ले रहे हो। ऊपर ही तो ले गया है। और कितना ऊपर भेज दे तुमको? [हंसी] ऐसा नहीं है। ऐसा नहीं है। कितनी कितनी देर हो गई है तुम्हारे यहां नेट खराब चल रहा है क्या कुछ नेट की प्रॉब्लम है तुम्हारे यहां अभी वो थोड़ा सा छटपटाहट में है कि ऊपर लो ऊपर लो अभी बताता हूं बताता हूं वो पूरा पढ़ के नहीं आए थे वो उनको जितना रटा दिया कि यहां पर देखो यहां जाके इससे लड़ो उससे लड़ो वो उतने रटा रटाए पे आए थे अभी तो मैं वीडियो आपका हां आपका और वीडियो नहीं देखते हैं क्या ये लोग जब फॉर्म भर तो और वीडियो नहीं देखे क्या
00:59:42:14 ये सब चीज तो आपने चेहरा दिखाकर चर्चा होती है अमित को तो ऊपर लो ना हां अमित बताओ अरे अरे भाई सुभाष भाई आप डर क्यों रहे हो मेरे से चर्चा करने में इतना फालतू बात बोलोगे अमित हम तुमको भगा टू द पॉइंट बात करो उसी पे आ गए टू द पॉइंट बात करो उसी उसी पे आ गए कल जिस पर चर्चा किए थे उसी पे आ गए ये डर गए भाग गया ये हो गया हो गया डरने लगते हैं जब इनका इनका पारा हल्का होने लगता है तो व्यक्तिगत कटाक्ष जैसे उजेश पांडे जाहिलियत मूर्खता बदतमीजी ये क्या है जब हमारा पला हल्का होने लगे तो व्यक्तिगत कटाक्ष करने लग
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01:00:33:13 हां वो तो मैंने रात में सुना ही था कि जाहिलियत जाहिलियत वाले प्रश्न कर रहे हो तो आपने खाली प्रति उत्तर बहुत अच्छा दिया मतलब उनके मुंह नहीं लगे आप खाली इतना ही बोले कि जो आप कृत कर रहे हो ना वो भी भगवती देख रही है वहां पे हमने अपने राम की मर्यादा सिखाई उनके यहां तो राम भैया विधि विधि के विरुद्ध जाकर के कुछ भी कर लेते हैं जबकि भगवान कह रहे हैं कि सुति स्मृति मोहम आज्ञा बराबर हां जी राजपूत जी बताइए जय श्री राम
01:01:21:06 जी बताइए बताइए आपके यहां से आवाज मुझे रिपीट सुनाई दे रही है आप हेडफोन निकाल के बात करिए। अमित से मेरा कहना है कि अगली बार आना। अच्छी तैयारी करके आना और अपना नेट वगैरह अच्छे से ध्यान से रख के आना कि बार-बार वो सतलोक ना जाना पड़े नेट का कनेक्शन लेने के लिए। और [हंसी] चेहरा ना छुपाना पड़े बार-बार।
01:01:58:00 ठीक है? ये कहना है मेरा कोष्टक में बंद होकर के सतलोक की यात्रा कर लो अब तुम हां जी बताइए राजपूत जी नहीं वो बोलिए आप बोलिए बस हो गया बोल लिए तो खुद का नेट खराब है और वह यहां पर आकर के बोल रहा है कि ऊपर नहीं ले रहे डर गए हो यह है वह है
01:02:32:09 काफी दिनों बाद जो है रामपाल ही कोई मिला था। रामपाल वाले सोच रहे होंगे कि आजकल शिवश नारायण द्विवेदी जो है कुछ बोल नहीं रहा है हमारे ऊपर। भाई तुम अकेले नहीं हो ना? तुम अकेले नहीं हो ना? सनातन के दुश्मन बहुत सारे हैं और जो जितनाए आते हैं नए-नए आते हैं शिवाज भैया एक जगह आप गए थे एक खूब पकड़े थे वो बाल जिसका ऐसा खड़ाखड़ा था युद्ध नाम की कोई चीज ही नहीं है दुनिया में [हंसी] युद्ध नाम की कोई चीज ही नहीं है कमाल का व्यक्ति बीके पर भी आने वाले हैं और मैं एक बात बता दूं अभी मैंने स्किप स्किप चीजें तो खोली नहीं। अभी मैं अगर इसकी चीजें खोलता तो ये और तेजी में भागता।
01:03:28:24 भाई इसकी किताब में लिखा हुआ है कि श्री कृष्ण और विष्णु भगवान है। विष्णु के अवतार श्री कृष्ण है। वो ईश्वर है। परम परमेश्वर है। परम ब्रह्म है वो। इसकी किताब में लिखा है। रामपाल ने लिखा है। और इसकी किताब में क्या लिखा है कि आत्मा नित्य नहीं है। अच्छा आत्मा नित्य नहीं है। तो ये मोक्ष कैसे दिला देगा आत्मा को? बताओ। जब आत्मा [हंसी] नित्य ही नहीं है तो मोक्ष दिला सकता है क्या उसको? 216 में क्या लिखा है कि जो असत है उसका कभी भाव नहीं होता और जो सत है उसका कभी अभाव नहीं होता तो जो असत है जिसका अभाव था कभी ना कभी वो असत है जिसका अभाव है किसी समय किसी देश काल परिस्थिति में जिसका अभाव है वो असत है वो सत कैसे हो जाएगी हम अभी मैंने ये चैप्टर तो खोले ही नहीं थे अभी तो आयुष मात्र खाली खोला गया था। मेरे को लगता है उसको क्या लगा होगा कि उसको रटा दिखा
01:04:44:24 कोई आए हैं। एक मिनट अक्षय जी करके कोई आए हैं जो लाइव में जुड़ना चाहते हैं। बात से मतलब नहीं होता। आप हमारे चैनल के हिस्ट्री पहले देख करके आइए। हम उसी को यहां पर लेते हैं जो अपना चेहरा दिखाए। ज्यादातर मतलब उस उस बात में जब आईडियोलॉजिकल डिबेट होनी है। जब हमें विरोधी क्या कहते हैं? वैचारिक मतभेद के निमित्त जब चर्चा करनी है तो उसी के साथ होती है जिसमें चेहरे के साथ व्यक्ति आता है और इसके कई सारे कारण है वो कई बार हम बता चुके बार-बार एक एक व्यक्ति को नहीं बता पाएंगे आपको अगर प्रोटोकॉल को फॉलो करते हुए आना है तो आप आ सकते हैं नहीं तो जय श्री राम ठीक है आप वीडियो सर्च करें और देखें अपनी जांच पड़ताल करें इस विषय में जो व्यक्ति चेहरे के साथ आएगा वो आ सकता है यहां पर लाइव में और अन्यथा नहीं ठीक है तो बेकार में अपनी उंगलियों को कष्ट ना दें। कीपैड वॉरियर बनके तभी आए जब आप चेहरा दिखाएं।
01:05:45:22 [हंसी] अभी संभवता ये हो सकता था कि वो यह कहता कि मैं सनातन तरीके से तुम्हारा जन्म और मरण करता रहता हूं। तो इसमें बहुत सी तात्विक विवेचनाएं हैं कि जो क्रिया होती है वह कभी सनातन हो ही नहीं सकती। क्योंकि वो शुरू हो रही है अंत हो रही है। व्यवहार हो रहा है। जहां व्यवहार है वह सनातन नहीं है। तो यह जो तुम्हारा जन्म और मरण मैं सदा से मैं करता हूं। यह वाली बात जहां सनातन बीज है ना दूसरी बात यह भी है। अगर वो ये कहता कि यहां पर ये नहीं कह रहे हैं कि वो सनातन बीज स्वयं है। यानी वो स्वरूप से सनातन है। वो ये कह सकता था कि वो कह रहा है कि वो सदा से उनके जीवन मरण की व्यवस्था करने वाला है। सदा से संपूर्ण भूतों ये कह सकता था। फिर वहां पर बात आती है कि भैया गीता प्रेस की बात जो गीता प्रेस वाले जो छाप रहे हैं वो मानेंगे कि जो उससे किताब ले कहेगा तुमने क्या लिखा है वो मैं बताऊंगा हम समझ रहे हैं मेरी
01:07:00:26 बात गीता प्रेस में लिखा है उन्होंने सनातन बीज उन्होंने कहा भगवान कृष्ण के लिए अब कैसे पता चलेगा कि उन्होंने भगवान कृष्ण के लिए कहा है हम गीता प्रेस वाले भगवान मानते हैं। कृष्ण को मोक्षदायक मानते हैं। गीता प्रेस वाले राधेश्याम जी खेमका जी आए थे अभी माघ मेले में जो गुरुदेव हैं। आपने एक वीडियो देखा होगा हमारे चैनल पर आहान पर जिसमें कि गुरुदेव को उनके जो मुख्य परिकर में से एक हैं ऋषिकेश ब्रह्मचारी जी उन्होंने एक राजस्थानी भेंट भगवान को भगवान के लिए जो थी वो गाई थी वहां पर स्टेज पर उस समय उनका साथ दे रहे थे राधेश्याम खेमका जी
01:07:46:26 ठीक है जो उसके संपादक भी है कल्याण के वो वहां पर थे वो दूसरे माइक पे बैठ के खड़े थे और वहां उनका साथ दे रहे थे मतलब जैसे जैसे कहीं पे जैसे डाउन ले बिगड़ती है ना तो वहां से वो उठाते थे दोबारा अगले पैराग्राफ को तो राधेश्याम खेमका जी बोल रहे हैं कि भैया हम कृष्ण के लिए ही बोल रहे हैं सनातन बीज मगर व्यक्ति उससे किताब लेके बोलेगा नहीं तुमने इसमें ये नहीं कहा है मैं जो बोल रहा हूं वो कहा है [हंसी] इसी को कहते हैं परंपरा ठीक है मुझे लगता नहीं वो वापस आएगा अब हो गया उसका काम नहीं हो गया हो गया समय में व्यर्थ दबाते हैं मैं सिर्फ ये बोलूंगा
01:08:38:07 भैया जो भी सनातन विरोधी तंत्र है अक्षय जी हमने आपकी बात सुन ली है जो भी सनातन विरोधी तंत्र हैं यदि वह सनातन सिद्धांतों पर आघात कर रहे हैं तो हमें उनका प्रतिकार करना पड़ेगा वो हमारा कर्तव्य है ठीक है और ठीक है इतनी देर की चर्चा पर्याप्त है। हमेशा की तरह क्लीन बोल्ड होकर वापस जा चुके हैं। रामपाली महोदय जो आए थे और आप लोगों को जो भी कुछ जानने को मिला हो उससे उसको अपने जीवन में अप्लाई भी अवश्य करें। भगवान का नाम जप करने से अंत समय में भी आपको भगवान ही याद आएंगे। जिसके कारण आपकी मुक्ति सुनिश्चित होगी। तो भगवान का नाम जप करें। अधिकार की सीमा में उनका मंत्र इत्यादि गुरु से प्रदत्त जो मंत्र है उसका जाप करें। ठीक है? चलिए अनिकेत जी लाइव में कैसे जुड़े? लाइव में जुड़ने के लिए हमने अभी यहां स्ट्रीम का लिंक दिया है प्रवीण जी और यदि वैचारिक मतभेद के निमित्त आपको लाइव में आना है तो अभी अभी बंद होगी लाइव अभी होने वाली है। जैसे ही बंद होगी तो आपको स्क्रीन पर एक नंबर दिखाई देगा। उस नंबर पर WhatsApp करिए और WhatsApp में क्या कहते हैं? WhatsApp करिए।
01:09:54:14 WhatsApp करने पर एक फॉर्म प्राप्त होगा YouTube लाइव स्ट्रीम डिस्कशन का। उसको भर देंगे तो हम आपके साथ चर्चा सुनिश्चित कर लेंगे। एक बात और है वो कह के गया उसको पूरा कर दूं। उसने कहा था कि वो क्रूर क्यों दिख रहे हैं? क्योंकि यदि इस संसार में क्रूरता नामक तत्व है तो भगवान के बिना नहीं है। ठीक है? तो दुनिया में यदि मृत्यु है तो उसके भी अंतिम निर्णायक कौन है? भगवान अगर मृत्यु है दुनिया में तो उसके भी अंतिम निर्णायक भगवान ही है ना यत्र तत्र सर्वत्र तो उस रूप को भी दिखाया जाएगा और दूसरी बात यह है कि दिखाने के बाद अर्जुन को जब आपका कहना है कि अर्जुन के वो कृष्ण भगवान के अंदर से निकल के अलग होकर के अपना रूप दिखाया था। मगर अर्जुन ने उसके बाद भी विराट रूप को देख लेने के बाद भी उनको भगवान कृष्ण ही कहा था। मधुसूदन ही कहा था। ये नहीं कहा था कि नहीं नहीं तुम काल हो। जब उसने देख लिया कि ये तो विराट विराट स्वरूप है जिसको तुम काल कह रहे हो वो अलग है। अर्जुन तो वहां पर उसको बार बार मधुसूदन कह रहा है। है ना? अर्जुन तो वही कह रहे हैं। मधुसूदन कह रहे हैं। और
01:11:10:09 दूसरी बात और क्या है वहां पर? कि भगवान यह दिखा रहे हैं कि जिनको तू मरा हुआ जान रहा है वह वास्तव में उनको एक ना एक दिन मरना ही है। मेरे यहां तो वो किसी ना किसी तरीके से काल के मुंह में जाने ही है। तो तू यह मत समझ के तूने किसी को मारा है। वो उसको भाव दिखाने के लिए उन्होंने वो अपना दृश्य दिखाया था कि उसके उनकी दांत में धृतराष्ट्र पिस रहे हैं या ये सब जो उन्होंने देखा था उन्होंने दुर्योधन इत्यादि सब उनकी दाढ़ में है। दांतों के बीच में पिस रहे हैं। तो वो जो दृश्य था उन्होंने वही भाव दिखाने के लिए बताया था कि भाई सबका मरना निश्चित है। कुछ कोई भी वो नहीं है। जब तक जीवन और मरण के चक्कर में फंसा हुआ है तब तक वो मुक्त नहीं है। वो दिखाने के लिए उन्होंने अपना स्वरूप दिखाया था। वो भाव प्रकट करने के लिए। इसलिए सोचना बेवकूफी है कि वो क्रूर क्यों है? ठीक है। तुम्हारा जो भगवान है जिसको तुम भगवान मानते हो वो क्या बुआ जैसा बना रहता है क्या हमेशा? ऐसे बुआ जैसा भोला भाई
01:12:16:02 और अगर ऐसा है तो तुम जैसे मूर्ख मान सकते हैं इसको भगवान भगवान तो वो है जिनके बिना कुछ संभव ही नहीं है। ठीक है? जय श्री राम। सभी को जय श्री राम।
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