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00:00:02:15 तो सभी को जय श्री राम और जय श्री राम। एक प्रासंगिक विषय चल रहा है। अ सच के आसपास वाला झूठ है जो प्रचारित किया जा रहा है। प्रचारित करने वाले कुछ अपने भी हैं। अ कुछ दिशाहीन लोग भी हैं और प्रचारित करने वाले ऐसे लोग भी हैं जिनको पूरी जानकारी नहीं दी गई जिसमें उनकी कोई गलती नहीं है। परंतु उनके माध्यम से भी ऐसा हो रहा है कि ऐसी चीजें फैल रही है, फैलाई जा रही हैं जो नहीं फैलनी चाहिए। तो आज हम उसी पर बात करेंगे और हमारे साथ विजय जी जुड़ने वाली हैं कुछ ही समय में। अ तब तक हम थोड़ा सा एक मामला है जिस पर मतलब जिस मामले पर हम लोग बात करने आए हैं उस पर थोड़ा सा प्रकाश डाल दें। तो आपने देखा होगा कुछ समय पूर्व एक विजय श्री नाम की जो मातृशक्ति थी वो हमारे चैनल पर आई थी लाइव

00:01:17:02 और उनके साथ हमारी करीब एक डेढ़ घंटे की शायद चर्चा रही होगी जिसमें कि उन्होंने बताया था कि किस प्रकार जब वो धर्म को नहीं जानती थी शास्त्र को नहीं जानती थी प्रामाणिक आचार्य को नहीं जानती थी। यह सब चीजें जब उनके जीवन में थी एक तरीके से कह सकते हैं कि वो एक दिशाहीन बट हिंदू थी। दिशाहीन हिंदू सभी को जय श्री राम। हां तो मेरी आवाज कट रही है। शिवा जी। मेरी आवाज कट रही है। कोई बताएगा क्या? आपका नेटवर्क बीच-बीच में नहीं मेरे पास तो बहुत अच्छा फाइबर है जो जो आप ही के परामर्श के बाद मैंने लगवाया था खैर आ रही है आवाज अभी फ्लो में आ रही है निर्बाद रूप से आ रही है एक बार बता दीजिए आवाज क्लियर आ रही है ना ठीक है ठीक है ठीक है फिर मेरी मेरी नेटवर्क समस्या होगी जी जी जी तो आपने कुछ समय समय पूर्व देखा होगा कि हमारे चैनल पर एक मातृशक्ति है जो लाइव जुड़ी थी।

00:02:32:10 अह जिनका नाम विजय श्री है। अब वर्तमान में और उनका पूर्व का नाम रिदमम कपूर था और लगभग मेरे ख्याल से डेढ़ से दो वर्ष पूर्व की बात है। जब अ मैं हमने इस की कुछ किताबें बेची जा रही थी। इस द्वारा जो मिस ट्रांसलेटेड भगवत गीता है। उसका प्रचार किया जा रहा था। तो हमने वहां जाकर के कुछ अपने प्रश्न किए थे वहां पर कि ऐसा ऐसा क्यों है आपकी भगवत गीता में? तो वो वीडियो जब हमने इंटरनेट पर डाला तो कई लोगों के पास पहुंचा। उस वीडियो को विजय जी जिनका नाम तब रिदमम कपूर था उन्होंने देखा और उस समय हमारे जो समर्थक थे वो उतने ज्यादा नहीं थे जब हमने वो वीडियो डाला था और विजय जी देखा जाए अगर Instagram के समर्थकों की गणना को अगर देखेंगे तो उस समय वो एक अच्छी स्थिति में थी और आमतौर पे हमने देखा हमने देखा है कि जब जो भौतिकवादी लोग हैं जिन जिनको जिनको लालच रहता है जिनके लिए अर्थ प्राथमिकता से होता है। उसके बाद दूसरी चीजें होती हैं। या

00:03:47:10 फिर अब वो किसी माध्यम से अच्छे से पैसा बटोर रहे हैं। तो ऐसे लोग जो होते हैं वो कुछ विषयों में कट्टरता के साथ अपना पक्ष रखने से सदैव बचते हैं। जैसे मान लीजिए कोई अच्छा यूबर हो गया तो वह मनुवाद की उन बातों को जिन पर विवाद हो रहा है उन बातों को बहुत मतलब साफ सुथरे तरीके से वो खुद मानता हो भले ही अपने जीवन में परंतु उनको स्पष्ट रूप से वो कहता नहीं है आकर के और जितनी भी ये जैसे इस इत्यादि ब्रह्मा कुमारीज इत्यादि संस्थाएं हैं इनको भी आप देख लीजिए इनकी जो अपनी मान्यताएं हैं जिस समय प्रचार करने आते हैं तो उस समय आपको अंदर की जो मूल मान्यता है उसको ना बता करके मिलाजुला सा जवाब देते हैं जिससे कि कहीं उनकी जो वो जो कट्टरता है वो जो डिप्लोमेटिक तरीका है उनका उसके कारण जो आने वाला व्यक्ति है वो उनसे कहीं सतर्क ना हो जाए जिसको वो मेंटली पज़ेस करना चाहते हैं। तो आमतौर पर आज के जो सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरर है खासतौर पर ऐसे जो मनुवादी नहीं है जिनके जीवन में प्रामाणिक आचार्य नहीं है

00:05:03:10 यहां तक कि आप देखिए गौतम खट्टर को। गौतम खट्टर यूं तो आर्य समाज से जुड़ा हुआ व्यक्ति है। है ना? परंतु वह भी कई जगह पर जो है साफ सुथरा जवाब नहीं देता। जैसे कि एक जगह का मुझे याद है। काफी जगह ऐसा हुआ होगा। पर एक जगह का मुझे याद है कि उससे पूछा गया कि साईं की पूजा क्यों होती है? या साईं को भगवान क्यों माना जाता है? है ना? तो गौतम खट्टर ने वहां यह नहीं कहा कि मूर्ति पूजा गलत है। अधर्म है। साईं हो चाहे कोई भी हो। गौतम खट्टर ने वहां पर यह कहा कि हमारे शंकराचार्य तो नहीं मानते। शंकराचार्य का आलंबन लिया गौतम खट्टर ने। पॉइंट टू बी नोटेड। अब बात क्या है कि क्यों नहीं बोलते हैं क्लियर कट। ये लोग अपनी बात मूर्ति पूजा अधर्म है पाप है क्योंकि यह YouTube पे फॉलोअशिप में आगे बढ़ चुके हैं तो अपनी कट्टरता नहीं दिखा सकते हालांकि शंकराचार्य का खंडन भी करते हैं ये मंच पे जाकर के जाकर के कहेंगे अरे शंकराचार्य क्या कर रहे हैं तब क्या कर रहे थे तब और उन्हीं शंकराचार्य का आलंबन लेकर के उस बात का जवाब दे रहे हैं जब पूछा गया कि साईं की पूजा क्यों करते हो तो बोल रहे हैं कि हमारे शंकराचार्य नहीं मानते

00:06:18:16 मतलब शंकराचार्य इनके लिए प्रमाण है। ऐसा वहां पर दिखाते हुए और इन्होंने अपनी बात को रख दिया। तो आमतौर पर देखा जाता है कि जो इस तरह के दिशाहीन यूर्स हैं या दिशाहीन जो भौतिकवादी लोग हैं वो धार्मिक विषय में विशेष तौर पर वह अपनी कट्टरता दिखाने से बचते हैं। पर उस समय जो रिदमम जी है यानी कि आज की जो विजय श्री इन्होंने ऐसा नहीं किया और वहां पर पुरजोर हमको समर्थन प्रकट किया। तो इससे हमें भी ढांडस मिला कि भाई और भी लोग हैं हमारे अलावा जो कहीं ना कहीं धर्म के प्रति सोच रहे हैं। भले ही उनको पूर्णतया भी चीजें नहीं मालूम है। जिज्ञास जिज्ञासु है मगर जैसे हम जानने के पथ पर आगे बढ़ रहे हैं वैसे ही कुछ लोग और भी हैं जो जानने के पथ पर आगे बढ़ रहे हैं। तो इन्होंने वहां से हमारा संपर्क हुआ विजय जी से और फिर उस संपर्क होने के कारण विचारों का आदान प्रदान होना जैसे उन्होंने उनका कहीं पर इंटरव्यू होने वाला था तो उन्होंने हमसे पूछा कि सच्चिदानंद की जैसे पूछा जाए अगर हमसे इंटरव्यू में कि धर्म क्या होता है तो हम

00:07:33:20 क्या परिभाषा दें तो जो गुरुदेव के मुख से जो थोड़ा बहुत ज्ञान अर्जित हुआ था प्रभु श्री राम की कृपा से उसी को मैंने एज इट इज वहां उनको बता दिया जो मैं यहां पर मेरे ख्याल से हर दूसरे मेरे वीडियो में रटता हूं। है ना? धर्म की परिभाषा। तो इन्होंने अपने इंटरव्यू में जाकर के अच्छा तब तक उस इंटरव्यू से इनका वो जो इंटरव्यू हुआ था क्या नाम है? महागेथा नाम का कोई चैनल है वहां इनका इंटरव्यू हुआ था। तो इन्होंने उस इंटरव्यू में मेरे से तब तक ये जान चुकी थी। प्रामाणिक आचार परंपरा से होना चाहिए। उससे पहले परंपरा का शब्द इन्हें नहीं मालूम था कि आचार्य जो है परंपरा से होना चाहिए। तो संपर्क में आने के बाद इन्होंने परंपरा जब जाना और फिर वहां पर इनसे जब पूछा गया धर्म क्या है? सनातन धर्म क्या है? तो फिर इन्होंने वहां पर बताई उसकी डेफिनेशन कि सनातन धर्म क्या है? तो इस तरह से होता हुआ और फिर धीरे-धीरे जब ये और सिद्धांतों को जानने लगी तो इनके मन में गुरुदेव के प्रति निष्ठा आई। सर्वशक्तिमान ईश्वर के प्रति निष्ठा आई। आदि शंकराचार्य के साथ इनका बचपन से एक कनेक्शन था। ये जानती नहीं थी कि वो उनकी उनकी महत्ता क्या है। पर इनके जीवन में भगवत पाद आदि शंकराचार्य जी सदैव थे किसी ना किसी रूप में। तो ऐसे करते हुए इनके

00:08:48:24 मन में भावना उत्पन्न हो गई कि भाई मुझे जो है शंकराचार्य जी से दीक्षित होना है और जब यह शायद लेने वाली थी दीक्षा उससे कुछ समय पूर्व तक यह अपने हर वीडियो के अंत में प्रणव शांति प्रणव ये उच्चारण करती थी जो कि गुरुदेव बताते हैं कि महिलाओं के लिए उच्चारण प्रणव का नहीं होना चाहिए। आज ये तो मैं आज यही देख रहा था मैं तो मैंने गलती से मेरे पास हां मेरे पास सजेशन में आया था Facebook पर और मैंने देखा तो आज ही मुझे लगा था मैंने कहा अरे ये कैसे तो फिर बाद में पता लगा ये तो बहुत पुरानी वीडियो है हां तो इनकी एक पहचान थी अपने हर वीडियो के अंत में ये बोलती थी प्रणव शांति प्रणव

00:09:40:03 तो मैंने इनको कभी नहीं कहा कि आप महिलाएं जो है प्रणव का उच्चारण नहीं करना चाहिए। मैंने शुरू से अंत तक इनको ऐसे कभी नहीं कहा क्योंकि गुरुदेव के जो वाक्य हैं वो मैं प्रयास करता हूं केवल सुनू नहीं उनको आत्मसात करूं। गुरुदेव कहते हैं अपनी बात को सदैव दर्शन विज्ञान व्यवहार के सामंजस्य के साथ रखो। एक दिन में किसी को देसी घी मत पिला डालो। पूरा ये दो तीन वाक्य थे। तो मैं कभी भी मैं इनको बाकी सब चीजें बताता था। मगर यह नहीं कहता था कि आप प्रणव का उच्चारण मत करो। कभी नहीं कहता था। किसी दिन इन्होंने गुरुदेव के सिद्धांतों को अपनी किसी सखी के साथ ताजा किया और वहां पर उसने इनको टोक दिया कि तुम भी तो प्रणव का उच्चारण कर रही हो अपने हर वीडियो के अंत में तो इनका फोन मेरे पास आता है कि भाई मैं जो कर रही हूं क्या वो भी गलत है? मैंने कहा बिल्कुल पर मैंने तो यह बोलती है तो आपने मुझे बताया क्यों नहीं? मैंने कहा मैं एक दिन में घी कैसे पिला दूं? अगर आप पूछती देखिए ब्रह्मा कुमारीज या इस की स्ट्रेटजी और हमारी स्ट्रेटजी में इतना फर्क है कि ब्रह्मा कुमारी जो स्कन से जो बातें विवादास्पद है उनप अगर सवाल किया जाएगा तो वो वहां झूठ भी बोल देंगे दोहरी बातें बोल देंगे

00:10:55:15 और हमारी स्ट्रेटजी में ये है कि हम एक ही दिन में घी नहीं पिला रहे हैं। मगर यदि आपने पूछ लिया कि प्रणव का उच्चारण मैं करूं या ना करूं तो फिर हम सत्य ही बोलेंगे। हम धीरे-धीरे आपको देंगे सत्य को घी को देंगे। मगर यदि आपने पहले ही कहा कि हमें आज ही दे दो तो हम दे देंगे। फिर हम वहां झूठ नहीं बोल देंगे कि नहीं नहीं मत करो वो किया करो प्रणव का उच्चारण अच्छा है। गुड क्योंकि आप हमारे समर्थक हो क्योंकि आपके फॉलोअर्स ज्यादा है हमारे कम है। है ना? तो इस तरह से नहीं किया और तो इन्होंने कहा कि आपको हमें बताना चाहिए था और उसके बाद से इन्होंने अपनी वह जो पहचान थी एक स्लोगन था इनका भाई एक होता है ना कि व्यक्ति के कुछ चीजें होती है वो जैसे हमारा है रामो विग्रह धर्म है ना तो एक कुछ स्लोगन होते हैं जैसे ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है हमारा स्लोगन है तो अब इसने माना है स्लोगन है ठीक है वो शास्त्रोक्त है या एक और है मत पड़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में। मैं खुद को बोलना नहीं चाहता था। मैंने बोल दिया ना मैं उसको बोलना नहीं चाहता था। तो क्या है कि एक इनकी पहचान थी

00:12:10:18 प्रणव प्रणव शांति प्रणव मगर इन्होंने उसको भी त्याग दिया। तो इससे कहीं ना कहीं देखिए इस जर्नी को मैं देख रहा हूं। मैं साक्षी हूं। तो मुझे पता चल रहा है कि व्यक्ति कैसे कैसे कैसे करके आगे बढ़ रहा है अपने धर्म के पथ पर। तो यह भी सीक्वेंस हुआ कि इन्होंने उसको त्याग दिया। उसके बाद इन्होंने जयपुर में जो गत वर्ष जो गुरुदेव का जन्मोत्सव मनाया गया था वहां जाकर के उनसे दीक्षा प्राप्त की गुरुदेव से और फिर इनको यदा कदा जो जहां समय मिल गया तो ये वहां उस शिविर में पहुंची गुरुदेव के एक दो बार और जो है गुरुदेव के सिद्धांतों को जाना गुरुदेव की सेवा करने का भी अवसर इनको प्राप्त हुआ जितना इनकी अधिकार की सीमा में है उतना तो ये तो इनकी वो जीवनी रही तो अब अब बात ये आ रही है कि इन अब उसके बाद क्या है कि क्योंकि इनका अच्छा खासा एक पेज बन चुका है। जब गुरुदेव से दीक्षा ली थी उससे पहले तक इनके लगभग 1 लाख के समथिंग फॉलोवर्स हो चुके थे। गुरुदेव से दीक्षा लेने से पहले तक। तो गुरुदेव से दीक्षा लेने के बाद यह आगे बढ़ रही है। मगर अब बात यह है कि जब इनको मनुवाद के सिद्धांतों का पता चला सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष

00:13:25:20 शाश्वत धर्म के बारे में पता चला तो ये अपने उस पेज का उपयोग यहां भी कर रही हैं कि हम अपने गुरु के वाक्यों का प्रचार प्रसार करें। अपने अधिकार की सीमा में लोगों को बताएं कि गायत्री मंत्र का उपयोग उसको नहीं करना चाहिए। महिलाओं को नहीं करना चाहिए। अब अब यह तो इनकी एक जर्नी रही कि भाई विजयश्री कौन है और वह कैसे गुरुदेव तक पहुंची और वह आज के समय में क्या कर रही हैं। हालांकि उनका जो मूल आजीविकोपार्जन का माध्यम है वो एक योग शिक्षिका है। कोई उनको आचार्य समझता है तो वो गलत है। तो वो एक योग शिक्षिका है और योग शारीरिक तौर पर वो योग सिखाती है। वो आध्यात्मिक वाला जो पार्ट है ऐसा नहीं है कि वो दार्शनिक स्तर पर योग सिखाती हो। शारीरिक स्तर पर वो योग सिखाती हैं। और इसका कारण यह है कि मूलभूत उनका आजीविक कोपार्जन का माध्यम वही है और यहां तक कि उन्होंने अपने पूरे जीवन संघर्ष किया इस विद्या को जानने के लिए। अब उनके पास कोई और रास्ता भी नहीं है। तो ये उनकी पूरी एक अगर समराइज किया जाए, पूछा जाए जैसा कि आज का हमारा पहला प्रश्न हो सकता है कि ये विजयश्री हैं कौन? तो ये हैं विजयश्री। अब मामला क्या

00:14:40:21 है? मामला यह है कि विजय श्री के भूतकाल के समय को लेकर के, भूतकाल के चित्रों को लेकर के, भूतकाल में उनकी जीवन शैली को लेकर के उन पर कटाक्ष किया जा रहा है कि यह भाई क्यों जुड़ रही हैं, मठ में क्यों दिख रही हैं परिकरों के साथ? या यह क्यों कर रही हैं? या यह योग क्यों सिखा रही हैं? या यह व्यापार क्यों? तो इस तो ये सारे जो उठने वाले प्रश्न है इनके संबंध में आज का वो है और कुछ लोग ये समझ रहे हो अगर कि मलेच राज का खंडन है ये वीडियो क्योंकि इस वीडियो का शीर्षक जो है वो मलेच राज सच के आसपास वाला झूठ है ना तो कुछ लोग ये समझ रहे हैं कि हम जो है जो मलेचराज के बारे में बताया गया है भगवत आनंद जी के द्वारा तो हम उसका मलेच्छराज का खंडन कर रहे हैं उस अस्तित्व का। उस उस विषय में वीडियो नहीं है। हम तो यह बता रहे हैं अपने शीर्षक से कि मलेच्छ किस तरह से लोगों को दिशाहीन बना सकता है। किस तरह से एक मिथ्या जो है विप्लव करवा सकती है अच्छे खासे वातावरण में और किस-किस

00:15:56:00 तरीके से मतलब वो जो प्रभाव होता है ना नकारात्मक शक्ति का प्रभाव उसका दतक के रूप में रूप में हमने मलेच्छराज का शब्द का उपयोग किया है। तो जो लोग ऐसा सोच रहे हैं कि मलेशराज का खंडन होने वाला है इस वीडियो में या ऐसा है तो वह लोग अभी के अभी इस वीडियो को छोड़कर जा सकते हैं क्योंकि वो यह मसाला उनको नहीं मिलने वाला है। ठीक है? हां मगर एक बात जरूर है इस लाइव के अंत में एक बहुत ही सनसनीखेज मामला आपको जरूर पता चलेगा और उसके लिए आप जुड़े रह सकते हैं। तो जितने भी प्रश्न है हमारे जो श्वेतांग जी हैं पंडित जी उन्होंने एकत्रित कर रखे हैं विजय श्री पर विजय श्री से संबंधित जितने भी प्रश्न है और वो हमसे पूछेंगे और फिर हम प्रयास करेंगे कि कुछ संतुष्टिजनक उसका उत्तर दे सके और इस सब में हमारा साथ देने के लिए विजय श्री भी यहां पर आ गई हैं। हम उनका स्वागत करते हैं अपने चैनल पर। जय श्री राम विजय जी नारायण तो थोड़ा सा मैं विजय सिंह जी से पूछ लूं कि अब इस धर्म युद्ध का एक अंश बन गए हैं जब आप

00:17:11:01 निमित्त बन गए हैं तो कैसा लग रहा है आपको रोमांचक लग रहा है बहुत अच्छा लग रहा है और ये पूरे ये पूरे सफर के अंदर हमें अपने जितने आचार्य हैं मठ से जितने कोई तकनीकी समस्या होगी। अच्छा मैं एक एक वैसी जानकारी और दे रहा था ये युद्ध से रिलेटेड ये दिन में मेरी बात हुई थी इनसे विजय श्री जी से तो इन्होंने मुझसे पूछा ये सब क्या हो रहा है मेरे साथ? मैंने कहा ये धर्म का जो पुंज है दुनिया का उसका नाम है शंकराचार्य। जैसे शक्तिमान हम देखते थे ना तो उसमें शक्ति पुंज होता था ना शक्ति पुंज होता था तो वही अगर धर्म कहीं से स्फुटित हो रहा है इस दुनिया में आज भी तो उसका नाम है शंकराचार्य और आप जाकर के शंकराचार्य से पहले तो आपने पड़ी लकड़ी उठा ली कि जुड़ गई पहले तो आपने ये पड़ी लकड़ी उठा ली और उसके बाद दूसरी पड़ी लकड़ी ये उठा ली कि अब मनुवादी मनुवाद के सिद्धांतों का प्रचार प्रसार करने लगी तो ऐसे थोड़ी ना होगा कि बस बस वो वो आप

00:18:26:04 जो है आओगे हंसते खेलते हुए हेलो टाटा बाय-ब हो जाएगा। है ना? तो अब जब आपने शंकराचार्य से जुड़े तब तक भी ठीक था। मगर अब तो आप शंकराचार्य के सैनिक बन रहे हो तो आपको हर तरह की स्थिति के लिए तैयार रहना होगा। भाई दुनिया में लड़ाई किस बात की है? लड़ाई है धर्म और अधर्म की। दुनिया में लड़ाई धर्म और अधर्म की है। तो जब आप एक तरफ से धर्म की तरफ से खड़े हो रहे हो तो फिर आप पर प्रहार होगा ना विजय जी विजय जी आपको आवाज आ रही है कोई तकनीकी समस्या हो गई मैं इनको एक बार डिस्कनेक्ट कर देता हूं तो आप दोबारा जुड़ जाइए विजय जी

00:19:11:19 जी तो यह सारी बातें हैं जो एक जिसके निमित्त आज हमें चर्चा करनी पड़ रही है और हमने बहुत प्रयास किया कि इस स्थिति तक मामले को ना आने दिया जाए और उसको उसी स्तर पर शांत किया जाए। पर वो संभव नहीं हो सका और बात होते होते ऐसीऐसी जगह भी पहुंच गई कि अब भाई थोड़ा सा सामने आना ही पड़ेगा। जी एक बार आपके मन में जितने भी प्रश्न हैं जो भी लोग प्रश्न कर रहे हैं या बातें कर रहे हैं जिन किया है ऑलरेडी नहीं नहीं अभी प्रश्न मत पढ़िएगा अभी किसी का आप जिसके भी मन में जो भी प्रश्न है जिसके भी मन में जो भी प्रश्न है वो दिल थाम के बैठे पहले सभी प्रश्न सुने उनका उत्तर सुने और उसके बाद यदि किसी को कोई असंतुष्टि है तो वो हमें बता सकता है तब हम आप प्रश्न करिएगा क्योंकि क्योंकि आपको ऐसा नहीं लगना चाहिए। यदि कभी भी आप आज हमारे हो सकता है आप विरोधी बन रहे हो। मगर यदि कभी भी आप हमारे समर्थक रहे होंगे तो आपको ये बात

00:20:26:19 मालूम होना चाहिए कि हम लोग वो बातें करते हैं जो अकाट्य हो। अकाट्य बातें करते हैं हम। ऐसी बातें नहीं करते कि वो सिलबिल वाली कि वो इस कौन की तरह कि वह जो है ईश्वर अल्लाह एक है मगर ईश्वर अल्लाह एक नहीं है। शिव और कृष्ण एक है मगर शिव और कृष्ण एक नहीं है। ऐसी बातें नहीं करते हम लोग अकाट बातें करते हैं। तो जरा धैर्य रखें तभी प्रश्नों को लिया जाएगा और जब कोई ऐसा प्रश्न आपको लगे जो नहीं लिया गया तो फिर आप आइएगा। तो हमने बताया ही है परामर्श तो दिया ही अनेकों बार कि मत पड़ो चक्कर में कोई है नहीं टक्कर में है ना जी विजय जी तो मैं पूछ रहा था कि जो आपका वो जो सफर है जो आपने यात्रा की उसके बाद आपने पूछा कि भाई ये क्या हो रहा है मेरे साथ तो मैंने आपको ये नहीं बताया मैंने आपको बता दिया पहले तो आपने पड़ी लकड़ी उठाई कि हम शंकराचार्य से दीक्षित होंगे ये अपने आप में ही एक बड़ी पड़ी लग रही है। जी और उसके बाद में आपने शंकराचार्य जी के सिद्धांतों का अपने अधिकार की सीमा में रहकर के प्रचार भी शुरू कर दिया। है ना? एकदम तो ये जाहिर सी बात है कि जब आप धर्म की रक्षा

00:21:41:20 कर रहे हैं धर्म धर्म के लिए बोल रहे हैं तो ऐसा हो सकता है कि अधर्म और या फिर अधर्म के द्वारा या किसी मिसकंसेप्शन के द्वारा या दिशाहीनता के द्वारा कारण से आपके ऊपर कटाक्ष हो हम तो कैसा लग रहा है आपको इस स्थिति से वो थोड़ा सा बताएं। बहुत रोमांचक लग रहा है और कुछ रिसर्च वैल्यू मतलब रिसर्च जिन लोगों ने की है उनकी वैल्यू कम देखकर हंसी आ रही है। पर सबसे सुंदर चीज यह है कि अह विरोध के साथ-साथ जो लोग साथ खड़े हैं, उनके लिए सम्मान है। और जब हम यह सोचते हैं कि हम तो सामान्य सांसारिक व्यक्ति हैं और हमारे ऊपर इतने कटाक्ष किए जाते हैं तो जो संतगण हैं और जो गुरुदेव हैं, उनके ऊपर तो मतलब उनका तो जीवन के अंदर कुछ ऐसा भी नहीं है कि यह पूर्व है और यह अब है। उनकी शुद्धता पर भी जब इतने कटाक्ष किए जाते हैं तो हम उस पीड़ा को थोड़ा महसूस कर पाए। तो जी आप बिल्कुल सही कह रही हैं। जब भी मेरी स्थिति कभी वैसे होती है प्रभु राम की कृपा है कि बहुत कम समय ऐसा आया। मगर जब भी ऐसा कुछ होता है तो मैं वो

00:22:56:26 समय याद करता हूं कि आज हम इतने जरा से बहिष्कार से विरोध से प्रतिकार से इतना जब घबरा रहे हैं। इतना हमें तकलीफ हो रही है कि ये क्या हो रहा है हमारे साथ? तो सोचिए जिसका विरोध पूरी दुनिया कर रही है पूरी दुनिया विरोध वो चाहती है शंकर का सिद्धांत खत्म हो जाए नष्ट हो जाए और हम अपनी पशुता को पोषित करने वाले सिद्धांतों को धर्म के रूप में ज्ञापित कर दो जी तो जिसका पूरी दुनिया विरोध कर रही है वो कैसे स्थिर रहते हो कि बस वहीं से प्रेरणा मिल जाती है वहीं से लगता है कि राम हमारे साथ है जी एकदम हम मान ठीक है तो श्वेतांग जी परिचय तो विजय श्री जी का हो ही चुका है मेरे ख्याल से। हां हो ही चुका है। जी आप उसके बाद मेरे पास कुछ प्रश्न है। हां मेरे पास कुछ प्रश्न है उसके जो मैं दूंगा मैं कोशिश करूंगा कि अपनी शब्दों को पूरा मर्यादित रखूं इन प्रश्नों के हिसाब से जैसे प्रश्न पूछे गए हैं। फिर भी तो विजय जी से एक प्रश्न करना चाहूंगा मैं क्षमा चाहूंगा कि Instagram आईडी अथवा सोशल मीडिया के हैंडल्स से पर्याप्त मात्रा में ऐसी बहुत सारी आपत्तिजनक सामग्रियां

00:24:12:04 मिली है जिसमें एक तो जैसे कि बहुत ही फेमस अभी हुआ है और रिसेंटली काफी लोगों ने इस पर कमेंट भी किया कि एक श्वाने के साथ मतलब कि मुख से मुख लगाकर उसको प्रेम कर रही हैं। है ना? तो ऐसी सामग्री जिसकी कोई भी धर्म से प्यार करने वाला व्यक्ति जो है वो निंदा ही करेगा। तो ऐसा दुचरित्र व्यक्ति शंकर मठ में क्या कर रहा है? ऐसा प्रश्न आया है। इसका विजय जी मैं ऐसा करता हूं प्रश्नों के उत्तर में थोड़ा सा मैं अपना पहले दृष्टिकोण बताता जाता हूं और उसके बाद फिर आप अपना दृष्टिकोण रख दीजिएगा। जी जी जी तो देखिए सबसे पहली बात तो यह है कि विजय श्री की जो भी आपत्तिजनक सामग्री इंटरनेट पर मौजूद है वो गुरुदेव की शरण में आने से पूर्व की है उसके आधार पर आज हम उन्हें ये नहीं कह सकते कि तुम तो शंकर की शिष्या हो शंकराचार्य की शिष्या हो तुम्हारे ऐसे दृश्य ऐसे चित्र कैसे मौजूद है ठीक है इसके साथ ही साथ एक जो शब्द आखिर में आया है कि वो वो मठ में क्या कर रही हैं? विजय जी आप इस समय कहां पर हैं? मठ में है क्या? मठ में नहीं है आप? नहीं। तो ये कैसा झूठ है? यह मठ में है।

00:25:27:08 यह गुरुदेव के गुरुदेव से दीक्षित गुरुदेव का गुरुदेव से जिन्होंने अपनी भक्ति करने के लिए मंत्र लिया है वो एक सामान्य मातृशक्ति है जो समय-समय पर गुरुदेव के दर्शन के लिए वहां जाती रहती है। मगर यह वर्ड यूज़ करना कि मठ में क्या कर रही है? तो यह तो अपने आप में ही एक मिथ्या का प्रचार प्रसार करना है। इसका प्रमाण देना चाहिए कि मठ मठ में रहने का मतलब है कि गुरुदेव का शिविर जहांजहां लग रहा है ये उस शिविर के साथसाथ ट्रेवल करती चली जा रही हैं। यही तो है मठ में रहने का मतलब तो मठ में ये नहीं रह रही है। और दूसरी एक बात मैं ये कहूंगा कि यदि कोई भी व्यक्ति देखिए आज का जो वातावरण है जैसे इसको कहते हैं वो गुरुदेव बताते हैं संक्रमण काल है ना? संक्रमण काल जब चल रहा है, परिवर्तन का काल जब चल रहा है और वातावरण ही समूचा अदूषित हो चुका है। ऐसी स्थिति में ज्यादातर लोग जो वास्तविक सिद्धांतों से जुड़ना जुड़ना चाहते हैं, जुड़ने का प्रयास करते हैं तो वो उनके जीवन में कई सारी ऐसी घटनाएं घटित हो चुकी होती है जो अशास्त्रीय शास्त्रों के विरुद्ध है जो धर्माचरण नहीं कहा जा सकता है और वहीं से वो जाकर के

00:26:42:16 शंकर के पास जाएंगे। तो प्रश्न मेरा यह है कि प्रश्न मेरा यह है कि क्या शंकराचार्य के पास सुधरे सुधराए लोगों को ही जाना है? क्या शंकराचार्य जी के प्रवचन सुनने उनके दर्शन करने उसी व्यक्ति को जाना है जो ज्ञानी हो चुका हो जिसको शास्त्र की मर्यादा का बोध हो चुका हो जिसको सब कुछ मालूम हो क्या वही जाएगा या वो जाएगा जो अनभिज्ञ हो जिसको जानना हो कौन जाएगा जी विजय जी इस प्रश्न के लिए दृष्टिकोण जो इन्होंने दिया है हम भी उसी दृष्टिकोण से किसी को भी उसी दृष्टिकोण को लेकर चलना चाहिए जब आप सबसे पहले तो जब आप किसी की प्रोफाइल खोल रहे हैं आप नीचे ही जा रहे हैं। है ना? आप पीछे जा रहे हैं उसके जीवन में कि शुरू से शुरू करते हैं तो जब आपने शुरू से शुरू किया है आपको कोई वीडियो या फोटो जो आपको आपत्तिजनक लग रही है आपको वो मिल रही है पर फिर जब आप ऊपर वापस आ रहे हैं या वहां से जब फोटो से आगे बढ़ रहे हैं तो आपको उन विषयों पर भी बात करनी चाहिए और जहां तक बात है एक स्ान की तो हम पहले

00:27:57:18 ही वो वहां पर दिख रहा है हमने ही वो वीडियो को वहां पर डाला है। वह मेरा पूर्व जीवन का है। पर जब हमें पूरी तरह से क्लियर हुआ है कि ये क्यों ठीक नहीं है जो शास्त्रों की साइंस है और उस पर हमने काफी रिसर्च भी की थी। है ना? हमें पशुओं से बहुत लगाव है। ठीक है? तो उस हिसाब से उस समय हम वैसे थे। पर तब भी हम ऐसे नहीं थे कि पशु को पूजा स्थान पर बिठाएं। पशु के साथ मतलब पूजा करने लगे जो कि बहुत लोग प्रमोट करते हैं और उसको बहुत अच्छा भी माना जाता है। तो अगर हम यह बात भी क्लियर कर देना चाहेंगे लोगों से। यदि आप हमें कभी किसी स्वान के साथ सोचिए मानिए कुछ खाना खिलाते हुए भी देख लिए हैं तो आप यह मत समझिए कि हम उन्हीं वस्त्रों के अंदर अब घर जाकर लेटेंगे सोएंगे खाना खाएंगे सारा विधि निषेध उसी उन्हीं वस्त्रों में करेंगे शुद्धता और अशुद्धता का ख्याल हमें उतना था जहां तक वो एक वीडियो की बात है हम मान रहे हैं कि आप लोगों के दिल को बहुत बुरा लग सकता है और मस्तिष्क को लगेगा कि अरे यह तो एकदम उसके विरुद्ध

00:29:12:21 है। पर आई थिंक उसका आंसर हम ऑलरेडी दे चुके हैं कि हर एक व्यक्ति का एक जीवन होता है। उसके कुछ कर्म होते हैं, प्रारब्ध होते हैं, कुछ समझ होती है और जब वो आगे बढ़ता है तो ये सब चीजें हट जाती हैं। है ना? मैं अगर हमेक्ट होते हैं तो आपके पास सामग्री नहीं होती ना। मैं इसमें ये कहना चाहूंगा कि देखिए ऐसा नहीं है कि हम में हम अगर ये कह रहे हैं कि ऐसा ऐसा करना गलत है और ऐसा ऐसा करना सही है तो ऐसा नहीं है कि हमसे गलतियां नहीं होंगी या हमसे गलतियां नहीं हुई है। मगर हम में और गलत में अंतर क्या है? यह बात मैं कई बार बता चुका हूं। हम में और गलत में अंतर यह है प्रमाण्य बुद्धि क्या है? प्रमाण्य किस में है? जब हमको बताया गया कि यह चीज गलत है तो हमने बताने वाले को या बताई गई बात को गलत कहा या अपने उस कृत को गलत कहा है ना पहली बात दूसरी बात यह है मैं एक छोटा सा प्रश्न करना चाहूंगा दुनिया का आज की तारीख में ये तो चलिए इनके गुरुदेव से जुड़ने की पूर्व की बात है मैं तो आज भी कह रहा हूं हमारे जीवन में आज भी ऐसी बहुत सी चीजें हो रही होंगी गिन के

00:30:28:06 101 101 अशास्त्रीय चीजें गिन के काउंट करके दुनिया का कोई भी व्यक्ति आ जाए सिवाय जो गुरुदेव और उनके परिकर इत्यादि उनको छोड़ के तो मैं उनके जीवन में 101 चीजें निकाल दूंगा जो गलत होंगी जो अशास्त्रीय होंगी तो उनके अशास्त्रीय होने में और जो व्यक्ति अशास्त्रीय है क्या अंतर है यही अंतर है कि जब उनको यह बताया जाएगा देखो मनुस्मति में यहां ये लिखा है ये गलत है तो वो कहेगा हां ये मुझसे गलत हो रहा दिक्कत हो रही है। ठीक है? और जब दूसरे व्यक्ति को बताया जाएगा, विरोधी को बताया जाएगा, वो कहेगा नहीं ये शास्त्र में मिलावट है, प्रक्षिप्त है। ये गलत है। हमारी विशुद्ध मनुस्मृति है। हम उसको मानते हैं। तुम्हारी को नहीं मानते। वो ये करेगा। वो अपने को सही कहेगा। परंपरा प्राप्त शास्त्र को गलत कहेगा। जैसे कि वो आचार्य जी आए थे। तमाजी आर्य समाजी वो बोले ऋषि जो लिख गए यहां तक कि दयानंद जी भी जो लिख गए उसको भी हम देश काल परिस्थिति के अनुसार बदल देते हैं। तो ये क्या हुआ कि हमने अपने धर्म को नया ख्यापित कर लिया और पुराना जो परंपरा से प्राप्त था उसको हमने डिनाय कर दिया। हम वो हैं जो जब हमें पता चलेगा शास्त्र के प्रति प्रतिकूलता

00:31:43:27 तो हम उसको मानेंगे स्वीकार करेंगे। आज के टाइम और जब हमें और वो वो है जिनको पता चलेगी उनकी प्रतिकूलता तो वो शास्त्र को दोष देंगे। खुद को दोष नहीं देंगे। जी शतांग जी दूसरी चीज मैं इसमें एक और ऐड करना चाहूंगा कि देखिए गलत है ना तब होता जब और कई लोगों ने इस पर प्रश्न भी किया है। मैं उसका इसका भी उत्तर हो जाएगा इसमें कि ये गलत तब कहा जा सकता था जब वो स्वयं को शंकर भट्ट का कोई अधिकृत वक्ता के रूप में प्रस्तुत करती और फिर विचार करती। ठीक है? तो तो समझ में आता है कि चलिए भाई ऐसा कर रही हैं तो और रिप्रेजेंट कर रही हैं मठ को। लेकिन ऐसा नहीं है। ऐसा तो नहीं कर रही हैं। ठीक है? नहीं। और रही बात दूसरी तो सबके अपनी-अपनी निजी जीवन होता है। अपना कार्य होता है। जैसे मैं भी एमएसी कंपनी में कार्य करता हूं। लेकिन जभी भी मैं अगर कभी भी अपना अगर मैं क्या बोलते हैं? अपने आप को संबोधित करूंगा तो बताऊंगा कि हां ठीक है। मैं मेरी माता का नाम या पिता का नाम ये है और इन इस आचार्य का इन गुरुदेव का अल्पज्ञ शिष्य हूं। ठीक है? तो तो ऐसे शिष्य बहुत सारे लाखों हुए हैं। ठीक है? मठ के ही बहुत सारे शिष्य होंगे। एक से एक बड़े बढ़कर प्रकांड शिष्य हैं। लेकिन कोई भी कोई अधिकृत अधिवक्ता बनकर या कोई

00:32:58:28 स्पोक्सपर्सन बनकर मटके रूप में अपने आप को ख्यापित नहीं करता और अगर करता है तो वो भी गलत है। और जहां तक मैंने देखा है मतलब मुझिया जी मुझे नहीं लगा कि आपने कभी ऐसा किया है ना आपने अभी तक तो नहीं किया। ठीक है? और अगर किया होता तो बिल्कुल बोला जाता कि भाई ये गलत है। आपने ऐसा क्यों किया? ठीक है? तो ये है दूसरा कि एक बार ना थोड़ा रेफरेंस ले लेते हैं इसका। मतलब मूलत मतलब विवाद क्या है ऐसा? मतलब कि केवल यही प्रश्न इनके ऊपर आक्षेप लगे हैं कि केवल यही है या फिर मतलब इसका रूट क्या है? ये शुरू खड़ा कैसे हुआ? देखिए विवाद विवाद शुरू देखिए जो घटना घटित हो रही है वो मैं अभी बताता हूं क्योंकि मैं जो बाकी जो दृष्टांत है उस पर मैं बाद में बात करना चाहूंगा। मगर ये शुरू कहां से होता दिख रहा है वो मैं आपको बता देता हूं कि

00:33:53:14 सर्वप्रथम मुझे ये कहा गया कि ये लड़की मठ में क्या कर रही है? इसको मठ में नहीं होना चाहिए। ये जो प्रथम आरोप थे इसके बाद तो आरोप बदलते गए हैं क्योंकि तर्क और प्रमाण जब पूछे जाते हैं ना सैद्धांतिक लोगों के द्वारा तो फिर सामने वाला घबराता है और वो विषयंतर करता है तो बात शुरू कहां से हुई कि ये जो है वो मठ में क्यों रह रही हैं या फिर वहां पर जो है खाना क्यों बांट रही हैं? कुछ इसमें से ऐसी चीजें जो वैसी भी है, निराधार भी है। तो यह मठ में क्यों रह रही है? यह बात निराधार और मंच साझा क्यों कर रही है? ये सब चीजें मतलब कुल मिला के ये आरोप था कि ये शंकराचार्य की ओर से एक फेस बनके क्यों दिख रही है? जबकि ऐसा नहीं है। ऐसा नहीं है। तो ये शुरुआत हुई। इसके बाद जब मठ में रहने वाली बात है तो उस पर उत्तर दिया गया मेरे द्वारा मैं आगे बता दूंगा परंतु इन पर फिर दबाव डाला गया इनकी जो पुरानी फोटोस है जिनको इन्होंने अपने किसी

00:35:11:02 उद्देश्य ये क्या हुआ मेरी आवाज आ रही है ना हां आ रही है कुछ आपकी भी स्क्रीन ऑफ हुई थी क्या अभी भी नहीं नहीं अच्छा मेरी हुई थी मतलब हां आपका हुआ था तो इन पर दबाव डाला गया इनकी जो पुरानी फोटो हैं जो इन्होंने किसी अच्छे उद्देश्य के निमित्त अपने पास रख रखी है अपने प्रोफाइल आईडी से हटाई नहीं है क्योंकि ये अपना जीवन लोगों एक बात है मतलब आप नाम लेने से थोड़ा बचिएगा अगर संभव हां नाम अमुक अमुक अमुक अमुक अमुक लोगों का नाम लेने से बचिए जी जी जी जी यहां किसी व्यक्ति विशेष का खंडन नहीं है। यहां पर जो एक समस्या है उसका समाधान प्रस्तुत करने के निमित्त आयोजित ये वो है। तो इसका ध्यान रहे कि हम किसी का भी व्यक्तिगत अनादर ना करें और तो मैं समस्या बता रहा था कि शुरू कैसे होती है ये कहानी। तो इनके फिर क्या हुआ कि जब यह बात नहीं चली कि वो मठ में क्यों कर क्या रह रही है? क्यों रह रही है? मठ में क्यों रह रही है? इस संबंध में आगे मैं जवाब दूंगा। मगर तो यह तो मानसिक रूप से था। केवल बातें हुई थी कि मठ में क्यों रह रही है? तो हमने कुछ बता दिया तो व्यक्ति सामने

00:36:26:15 वाला शांत हो गया या निष्क्रिय हो गया। उसने जो सक्रियता थी इस संबंध में बंद कर दी दिखाना। इसके बाद अचानक से कोई आता है और वह इनके जो भूत पूर्व काल के जो फोटो है वीडियोस है उनको अलग तरीके से थोड़ा एडिट एडिट करके मिर्च मसाला जैसे वो बीइंग द स्पिरिट सोल वाला करता है कहीं कीट कहीं करुणा भानुमती का कुबा जोड़ा तो उस तरीके से उस तरीके से एक व्यक्ति ने इनके वो फोटो फोटो निकाल करके और जो है दुष्प्रचार करना शुरू कर दिया जैसे इनके फोटो वगैरह कर शुरू कर दिया गुरुदेव का कोई वीडियो है जिसमें वो कोई योगाचार्य है कई कई प्रकार के लोग आते हैं तो कोई योगाचार्य आईगी तो उसमें गुरुदेव उनके विरोध में कुछ बात कह रहे हैं कुछ वो भी अपना जो शास्त्रोक्त कथन है वो बता रहे हैं तो उसको इनसे जोड़ कर दिखाने लगे कि भाई ये जो गुरुदेव कह रहे हैं ये इनके लिए कह रहे हैं। है ना ये सब चीजें हैं। अच्छा इसमें इस समय फैक्ट की बात ये है भाई ऐसी बातें नहीं चलती जिस दिन सामना होगा उस दिन आप निरत्तर हो जाओगे। अकाट्य बात नहीं है। गुरुदेव ने इनका नाम लिया क्या? नहीं

00:37:41:20 लिया। क्या उसके बाद ये गुरुदेव के पास गई दर्शन करने के? नहीं गई। गई क्या? उसके बाद गुरुदेव का इनको स्नेह मिला मिला। और ये भी सारे प्रमाण अकाट रूप से हम लोग दिखाएंगे। खैर दूसरी बात ये है कि अब ये सब चीजें क्या हुआ? एक आपको सामग्री मिल गई। जैसे अभी कुछ दिनों पूर्व क्या हुआ था? आर्य समाजियों ने मेरा मुंह बंद करने के लिए मेरी फोटो निकाल ली। अब होता क्या है? वो सच के आसपास वाला झूठ यहां आता है। सच के आसपास वाला झूठ क्या आता है कि हमने कोई ऐसी फोटो निकाली जो काफी प्रभावशाली है। वो नकारात्मक प्रभाव हो या सकारात्मक बात का है। मगर प्रभावशाली है जो इफेक्ट पैदा कर रही है। ऐसी फोटो निकाली। ठीक है? अब वो फोटो है। यह बात तो सत्य है। ठीक है। जैसे वो भव्य राधा कृष्ण दास आया था ना तो मैं कह रहा था कि वो जो आपको मां लग रही है उस उसको जो आप मां मान रहे हो वो अविद्या है। मां मानना या विद्या है मतलब वो मिथ्या है कि नहीं मां मानना है ना वो कह रहा था मां तो है ना मां तो है ना मां है मगर उसके साथ जो आप अपना वो मान रहे हो वो मिथ्या है व्यवहार में सत्य है मगर पारमार्थिक

00:38:57:08 दृष्टिकोण से बहुत आध्यात्मिक दृष्टिकोण से वो मिथ्या है जो आप मान रहे हो है ना तो इसी तरीके से क्या होता है कि ऐसी फोटो कि जो प्रभावित करे सामने वाले को सोचने पर मज मजबूर कर दे, भड़क जाए उसका दिमाग। ऐसी फोटो दिखाई उसके साथ एक टिप्पणी लिख दी। अब बात यह है वो फोटो तो है ना। वो फोटो तो है ना मगर उसके साथ जो टिप्पणी लिखी हुई है वो गलत है। है ना? तो ये किया गया इनके पूर्व काल के फोटो को लेकर के उनको प्रचारित प्रसारित करना शुरू किया गया। तो अब जब ऐसा हो रहा था इनका इनको भी भाई कोई ये कोई अभ्यस्त तो है नहीं। शंकर के सैनिक के रूप में हम लोग पुराने चावल हो रहे हैं धीरे-धीरे हैं। तो अब ये तो है नहीं। तो क्या है कि इनको भाई हरेसमेंट किया जा रहा था। मानसिक टॉर्चर एक तरीके से चालू कर दिया गया। जबकि ये कर क्या रही है? ये उन्हीं बातों को जाकर के समाज में बोल रही है जो तुम बोलते हो। इनके माध्यम से उनहीं बातों का प्रचार प्रसार हो रहा है। दो करोड़ लोगों ने लगभग दो करोड़ लोगों ने वो मंत्र गुरुदेव जो बोलते हैं इनकी आईडी से देखा अचुताय नमः अनताय नमः गोविंदाय नमः जिसमें ये बता रही है जिसमें ये बता

00:40:12:09 रही हैं कि जो वैदिक मंत्र इत्यादि है वो सभी के लिए सुलभ नहीं है। यह कह रही हैं। आप बताइए अपने गुरुदेव का जो वक्तव्य है उसका प्रचार किया। दो करोड़ लोगों ने उसको सुना। लोगों ने उसका आलंबन लिया। तो ये ये कर रही है। मगर कुछ ऐसे लोग मुझे लगता है कि ये करने वाला हो सकता है वो भी हो जो ये जो विरोधी तत्व उनके द्वारा हमारे बीच में डाला गया क्योंकि उसकी शक्ल नहीं है जिसने ऐसा चालू किया। है ना? उसकी उसका कोई फेस नहीं है जिसने ये सब चालू किया। तो उसने चालू कर दिया। तो यह सारा विवाद है और फिर चालू करके इन पर दबाव क्या डालता है? दबाव यह डालता है कि अगर आप अपनी वह सामग्री अपनी प्रोफाइल से बदल देंगी, हटा देंगी तो हम यह जो आपको टॉर्चर कर रहे हैं, मानसिक प्रताड़ना कर रहे हैं आपके साथ वो सब बंद कर देंगे। बताइए ब्लैकमेल सीधे-सीधे। अरे भाई अगर तुम्हें चिंता है, कोई आपको लग रहा है कि इन फोटो के माध्यम से बोला गया है क्या? हां। हां ऐसे बोला क्या धमकी सीधेसीधे सोचिए अब देखिए पहली बात तो ये अगर तुम्हें तुम्हारा कोई सार्थक उद्देश्य है जिसके कारण तुम ऐसा कर रहे हो तो

00:41:27:18 तुम सही रास्ते से आओ बात करो मगर ना बात ना चीत तुमने पहले तो दुष्प्रचार करना प्रारंभ कर दिया एक मातृशक्ति की जो तुम्हें सामग्री मिल गई उसका तुमने खिलवाड़ करना शुरू कर दिया अपने हिसाब से और उसके बाद तुम दबाव डाल रहे हो अगर तुम हटा दोगी तो हम यह रोक देंगे भाई पहले आते अगर तुम हिमायती थे तुम्हें धर्म की चिंता थी, गुरु की चिंता थी और गुरुदेव से दीक्षित लोगों की चिंता थी। यह भी तो होना चाहिए। हम ही हम है तो क्या हम है? तुम ही तुम हो तो क्या तुम हो? अरे तुम्हें उनका भी तो ख्याल रखना चाहिए जो गुरुदेव से दीक्षित है। गुरुदेव के प्रति समर्पित है। हो सकता है कि जो जिस दृष्टिकोण को तुम देख पा रहे हो। वो नहीं देख पा रहे हो उनको समझाओ। शास्त्र के वचन दो। गुरुदेव के वचन दो। समझाओ उन्हें जाकर के और तब अगर वह ना माने तो विरोध करो। तुमने तो विरोध पहले कर दिया और विरोध करने के बाद तुम जाकर धमका रहे हो। अब उनका जो कुछ उद्देश्य हो तो वो तुम्हें उद्देश्य बताएं या फिर अपना जो जो एक स्वाभिमान है उसकी रक्षा करें कि हम तुम्हारे कहने से तुम होते कौन हो? भाई गुरुदेव हमको कहेंगे तो हम अपने अकाउंट में आग लगा देंगे। तुम होते कौन हो? एक ऐसा व्यक्ति जिसका

00:42:42:26 इतना मुंह काला है जो किसी को मुंह दिखाने के लायक नहीं है। उसके घर में क्या हो गया है। उसकी माताओं के साथ क्या हो गया। उसकी बहनों के साथ भगवान ना करे कुछ हो। नहीं। और एक ऐसा व्यक्ति जिसके साथ पता नहीं ऐसा क्या हुआ जो समाज में किसी को मुंह दिखाने के लायक नहीं रह गया है। वो आकर के कौन होता है हमको धमकाने वाला। वो भी हमारे पूज्य गुरुदेव के रेफरेंस से कि मैं इसलिए ऐसा कर रहा हूं क्योंकि गुरुदेव के मान सम्मान की मुझे चिंता है। अरे चिंता होती तो इसका दुष्प्रचार जो तुमने किया है वो करने से पहले तुम बात करते ना तुमने तो उसका कहना क्या है कि इसका लोग दुरुपयोग करेंगे। मतलब लोग दुरुपयोग करेंगे इसलिए मैं दुरुपयोग कर रहा हूं। वाह कितना बड़ा तर्क है। ये सबसे इंटरेस्टिंग बात है। कितना बड़ा तर्क है भाई। नारायणता की पराकाष्ठा है ये कि कोई और दुरुपयोग ना कर सके इसलिए मैं दुरुपयोग कर रहा हूं। मतलब है मतलब कोई कन्या अपने घर से बाहर ना निकले वरना उसका कोई दुरुपयोग हो सकता है। तो कोई और दुरुपयोग ना करे इसलिए मैं उसका दुरुपयोग करूंगा। है ना? एक बार ऐसे ही मैं बस थोड़ा सा लाइट कर देता हूं इसको आप। एक बार ऐसे ही मैं अभिषेक

00:43:58:00 उपन्य हूं। एक वो हैं हमारे स्टैंड अप कॉमेडियन है। मैं उनका देख रहा था। तो बस यही बात मुझे याद आ गई। वो ऐसे ही किसी मतलब खूनी का वो दे रहे थे। तो कह रहे थे कि तुम गला लेके घूम क्यों रहे हो? अरे गला लेके घूमोगे तो वो काट ही देगा ना। तो तुम्हारी गलती है। तुम गला लेके घूम रहे हो। तो वैसे ही बात वैसे ही तर्क मुझे याद आ गया कि मतलब हम जिए ना सांस ना ले। सांस तुम ले लोगे तो तुम्हारी सांस बंद कर देंगे। वो वाली बात हो गई है। ठीक है। तो अब क्या है कि यह दबाव डाला गया। दबाव डालने के बाद फिर मैंने देखा कि इनका जो है हैरेसमेंट हो रहा है। तो मैंने इनका पक्ष दिखाने के लिए समाज को मैंने एक रील बनाई और मैंने वो जी। अब क्या हुआ कि जो लोग ऐसे थे जो उस व्यक्ति के साथी नहीं भी थे। परंतु कहीं ना कहीं उनके मन में भी इनके विरोध में अधूरी जानकारी के चलते थोड़ी बहुत द्वेष था या थोड़ी थोड़ा बहुत गुस्सा था, क्रोध था। अधूरी जानकारी के चलते मैं फिर कह रहा हूं उन लोगों को मेरे रील बना देने पर उस व्यक्ति के दुष्प्रचार के कारण फिर वो लोग भी मैदान में उतर आए। अब वो लोग भी सामने से आकर के जो है प्रतिकार करने लगे। वो व्यक्ति जिसने शुरू में मुझसे कहा था कि ये मठ में

00:45:13:01 क्या कर रही है। मैंने उनको कुछ जवाब दिया था जो जवाब मैं अभी आगे बताने वाला हूं। वो व्यक्ति भी मैदान में उतर आया। भैया अब तो ठीक है अब तो हम भी हैं। तो इस तरीके से एक वो झुंड में वार होने लगा। मगर मैं यहां पर एक पंक्ति कसना चाहूंगा कि झुंड

00:45:29:25 में वार करने वाला शेर नहीं ठग होता है। और दुश्मन अगर कायदे का हो तभी उसे मारने का मजा अलग होता है।

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00:45:39:21 हां। तो दुश्मन कायदे का नहीं होगा तो फिर क्या फायदा? ठीक है। तो यह सारा विवाद है। ऐसे करके विवाद बना और आगे क्या-क्या हुआ वो अभी आप प्रश्न करने ही वाले हो तो पता चल जाएगा। ये एक बात और जोड़ जोड़ देता हूं किकिकि आपने मठ की बात कही है यहां पर तो एक बार गुरुदेव से भी किसी ने पूछा था कि क्या कन्या या स्त्रियां या मातृशक्ति मठ में रह सकती हैं? तो उन्होंने बहुत ही अच्छा तर्क दिया था। उदाहरण दिया था। उन्होंने वाल्मीकि रामायण वाल्मीकि जी के आश्रम का उदाहरण दिया था। इसमें बताया था कि भगवती सीता भी उस समय तक वहां रही थी रह सकती तो वो भी काफी मतलब एक आप ये कह सकते हैं कि निरत्तर कर देने वाला वो तर्क था देखना चाहिए सब तो ऐसा नहीं है कि मतलब कि बिल्कुल निषेध है मठ में एंटर करना या जाना ही लेकिन आज आज जाया जा सकता है गुरु पूर्णिमा होगी तो क्या मतलब शिष्य गण जाएंगे नहीं गुरुदेव का दर्शन करने मठ में नहीं जाएंगे तो कहां जाएंगे वो बात वो भी आती है तो उस भाव से ये है लेकिन लेकिन बात एक्चुअली कई लोगों ने यहां पे भी प्रश्न किया है। शिवश जी आपकी आपको आवाज आ रही है? जी जी आ रही है। मुझे लगा होगा स्क्रीन फ्रीज हो गया है। ओके तो इसमें एक्चुअली ये भी पूछा कहा गया है कि जैसे

00:46:54:25 कि आप योग सिखाती हैं। तो कई लोगों ने इस पे भी कमेंट किया है कि जैसे कि आपके जो वस्त्र हैं वो आपत्तिजनक होते हैं योग सिखाने के के समय और ऐसा कुछ तो उस पे भी अगर आप कुछ प्रकाश डाल दें तो एकदम यह बहुत ही महत्वपूर्ण प्रश्न है क्योंकि सबको हमारे सिर्फ मतलब पहले हम एक कुछ चीज बोलना चाहेंगे इस प्रश्न का उत्तर देने पहले पहले मैं मैं बता दूं पहले फिर आप बताइए पहले ठीक है मैं क्या है मैं क्या है थोड़ा टैंक फुल है मेरा हां भरे बैठे हैं ये हां मैं भरा बैठा हूं तो पहले मैं बता तो पहली बात तो आपत्तिजनक वस्त्रों में योग सिखाना यह आरोप है। तो आपत्तिजनक वस्त्र में योग सिखाते हुए कौन सा अभी वर्तमान का वीडियो है इनका? मैं तो देख रहा हूं कि इनके योग सिखाने वाले वीडियो ही नहीं आ रहे। आएंगे भी नहीं। है ना? है ना? दूसरी बात मैं कहूंगा कि आमतौर पर ऐसा फेमस है कि योग सिखाते टाइम सभी लोग प्रणव का उच्चारण करते हैं। जी। इनका वीडियो है जिसमें राम का उच्चारण करा रही हैं। क्यों?

00:48:10:00 क्यों करा रही है? निष्ठा, बदलाव, परिवर्तन सालों से किए जाने वाले कार्य में परिवर्तन करने वाले के परिवर्तन करने के लिए गुर्दा चाहिए होता है। और वह गुर्दा आता है निष्ठा से। ऐसे ही नहीं आ जाता है। वो कहते हैं ना वो राजकुमार कहता है ना किसी में वो जब चाकू दिखाता है तो विलन वो कहता है जानी यह इसको चलाने के लिए ना गुर्दा चाहिए गुर्दा और वो गुर्दा एक मर्द अपनी माता के गर्भ से लेकर जन्म लेता है ये सब वो बताता है तो ये जो ऐसा जो परिवर्तन है जो आपकी पहचान है जो आपका नाम है जो आपका सिद्धांत है जीवन को जीने का वो आपने बदल डाला हम और ऐसे व्यक्ति पर उठा रहे हो नाम भी पर लोग उसको समझ नहीं पाते हैं उसकी गढ़ता को इनका नाम रिदमम कपूर था और जब इनका नाम मतलब जब इन्होंने गुरुदेव से दीक्षा ली है और दीक्षा के बाद कुछ समय बाद इनको गुरुदेव के द्वारा नाम प्राप्त हुआ विजय श्री ये नाम इन्होंने अपने मन से नहीं लिया इन्होंने

00:49:25:13 गुरुदेव से स्नेह प्राप्त किया जलन होती है मुझे इतना स्नेह इनको प्राप्त हुआ है गुरुदेव से गुरुदेव से इन्होंने नाम पूछा कि मेरा नाम क्या होना चाहिए और तब गुरुदेव ने इनको दुलार में वो नाम दिया विजय श्री जी और वो नाम दिया गया था और जब वो नाम इनको मिला तो इनके फॉलोअर्स करीब मतलब एक लाख हो चुके हैं और अगर ये लालची है पैसों की लालची व्यापार करने वाली तो इनको क्या पड़ी है वो जो नाम गुरुदेव ने दिया उसको बदलने की जबकि ये फेमस हो रही है प्रीतम कपूर नाम से क्यों बदलेंग गुरुदेव ने तो कहा नहीं इसको बदल दो जाओ [संगीत] निष्ठा है ना तो यह निष्ठा है उनकी जो उन्होंने अपने नाम को बदल डाला जो उन्होंने रिदमम कपूर से विजयश्री किया और मैं क्यों इनकी गवाही दे रहा हूं आज मैं क्यों साक्षी बना क्योंकि इस पूरी यात्रा का मैं एक एक कण का साक्षी हूं मुझे पता चल रहा है क्या हो रहा है तो इसलिए आज मैं बैठा हुआ हूं ना मैंने देखा है जिन लोगों ने नहीं देखा है वो लोग निराधार होकर के बिना जाने बिना पूरी जानकारी लिए बातें कर रहे जी है ना तो सबसे पहली बात है कि योग आपत्तिजनक वस्त्रों में योग करते

00:50:40:19 हुए इनके वर्तमान में कोई वीडियोस नहीं है। भूतकाल

✅ This part is already used · 00:50:44:04 – 00:51:22:00 (0:38)

→ Used in: A · Video धर्मयुद्ध अहंकार या व्यापार | क्या है पूरा विवाद | at 11:07 ↗

00:50:44:04 के पूर्व के वीडियोस है। तो यह लांछन लगाना कि ऐसा कर रही है। ये गलत है। और जब भूतकाल की बात आ गई तो हमने बता दिया कि व्यक्ति जब दिशाहीन है तो दिशाहीन ही तो दिशा पे आएगा। कोई व्यक्ति जो पशु रूप में उत्पन्न होता है धर्म ना पशु भी समाना कहां गया सिद्धांत भाई तो पशु के समान जो व्यक्ति है वही तो मनुष्य बनेगा जब उसके पास धर्म आएगा तो दिशाहीन जो है वही तो दिशा पे आएगा शंकर से दूर है वही तो शंकर के पास आएगा सार्वभौम सिद्धांतों को नहीं जानने वाला ही तो सार्वभौम सिद्धांतों को जानेगा और

⬜ Not used yet · 00:51:22:00 – 00:54:52:07 (3:30)

00:51:22:00 जब वो और जब वो जानेगा तो तुम कहोगे कि नहीं नहीं ये तो ये ऐसे कर रही थी। अब मैं एक बार मेरे एक मैं क्या है कि कभी-कभी टांग खींच लेता था अपने मित्रों की तो एक मैं छोटा सा वो बताऊं मेरा एक मित्र बोला मेरे से अचानक से अरे देखो यहां बारिश नहीं हो रही है। और यहां बारिश हो रही है। है ना? मतलब ऐसा होता है ना कई बार यहां बारिश होती है यहां नहीं हो रही है तो उसने मुझसे बोला मेरे मन में कुछ खोजनी वाला था मामला उस समय मेरा दिमाग अल्टर था मैं शायद वो रहा होगा थोड़ा सा गुस्से में रहा होगा तो मैंने क्या जवाब दिया उसको कि दुनिया में जब भी कहीं पर बारिश हो रही होती है उस समय दुनिया में कहीं ना कहीं ऐसी जगह जरूर होती है जहां पर बारिश नहीं होती है और दुनिया में कहीं ना कहीं ऐसी जगह भी होती है जहां पर वह दोनों जगह आपस में मिल रही होती हैं। तो अभी अभी तुमने उसी जगह के दर्शन किए हैं। बारिश हो रही है और बारिश नहीं हो रही है। अब भाई यहां पे बारिश हो रही है। यहां नहीं हो रही है। तो यहां नहीं हो रही है तो हम कटाक्ष कह रहे हैं। बारिश कैसे हो रही है? ये तो गलत बात है।

00:52:37:00 भाई तो कोई दिशाहीन व्यक्ति दिशा में आ गया तो हम कटाक्ष कर रहे हैं। दिशा वाला है। दिशाहीन कैसे दिख रहा है? ये तो गलत बात है। है ना? तो एक तो यह बात है। दूसरी बात यह भी है कि यह बात यह भी बताएंगे कि गुरुदेव से इन्होंने किस तरह से अनुमति प्राप्त की। इन्होंने पूछा गुरुदेव से कि क्या मैं योग शिक्षिका के रूप में शारीरिक स्तर तक योग सिखा सकती हूं कि नहीं? और गुरुदेव ने इनको आज्ञा दी कि अपने आजीविक उपार्जन के निमित्त आप यह कार्य करिए। वैसे भी गुरुदेव ने कहा है कि संक्रमण काल है जिसका जैसे-जैसे बन पा रहा है वैसे वैसे करो और यथा सामर्थ्य धर्म का आलंबन लो। अभी हम और आप भी बैठे हैं श्वेता जी हम भी उस स्थिति उस स्थिति में नहीं है जो पूर्णतया शास्त्रोक्त कार्य कर रहे हो। नहीं है। और जो ये आरोप लगा रहा है वो मेरे सामने आ जाए। मैं उसके घर में उसके जीवन में निजी जीवन में 101 गलतियां गिन के निकाल दूंगा। कहां बचोगे? क्या जिस गाड़ी में ब्रेक शू का उपयोग होता है, चमड़े का उपयोग होता है, उस गाड़ी को चलाने से बचोगे? ट्रेन में बैठने से बचोगे? कहां तक बचोगे? सब्जियां खाने से बचोगे? कितनी बार मिट्टी का प्रयोग

00:53:52:06 करोगे? करोगे कि नहीं करोगे? अरे वो तो बहुत दूर की बात है। वो तो बहुत दूर की बात है। अरे कुल्ला कितनी बार करोगे? ये बताओ। अरे ये तो आर्य समाजियों के लिए है। ये तो आर्य समाजियों के लिए तो तो मैं ये जो प्रश्न उठा रहे हैं कि वो योग क्यों सिखा रही है? आपत्ति आपत्तिजनक तो वस्त्र है नहीं। फिलहाल वो योग वाले वीडियोस भी नहीं डाल रही हैं और अंतत गतवा यह जो अनुमति है इनको गुरुदेव से प्राप्त है और मैं ये कहूंगा कि भाई जितने गुरुदेव आपके हैं जितना धर्म आपका है जितना शंकर मठ आपका है अगर आप शंकर मठ के हो मुझे नहीं पता कौन लोग है ठीक है मुंह छिपा के बात करने वाले ज्यादातर लोग हैं मगर यदि आप शंकर मठ के हो तो जाओ जाकर के हमारे पिता से हमारे दादा से हमारे गुरु से कहवा दो ना वो सब कुछ उसी दिन चेंज हो जाएगा। कुछ मालूम ना तालूम चले बस दूर ही

✅ This part is already used · 00:54:52:07 – 00:54:57:13 (0:05)

→ Used in: B · Live मूर्खों की चौपाल : केवल रामपालीयों की कमी रह गई at 1:14:42 ↗

00:54:52:07 दूर से सांप और बिच्छू शेरों को काटा नहीं करते। दूर ही दूर से रेंग

⬜ Not used yet · 00:54:57:13 – 01:42:25:20 (47:28)

00:54:57:13 कर निकल जाते हैं। ये वो वाली बात उतरिए ना भाई धरातल पे कुछ बदलाव लाने के लिए। हमने तो लाए ना। अपने शहर को रामपाल के आतंक से मुक्त कर दिया है। करवा दो अपने शहर को जाओ। कोई माई का लाल नहीं है जो अभी किताबें बेचने निकल आए लखनऊ में। इतना तो किया। तुमने क्या किया? तुम्हारी मां को गाली दी जा रही है। ऐसी किताबें तुम्हारे भी शहरों में बिक रही है। तुम रुकवा दो जाके जाओ। हमने रुकवाया। आग लगाई थी चौराहे पर।

00:55:31:08 बात करते हैं। ठीक है। जी विजय जी आप कुछ बता रहे हैं। हम हम यह बता रहे थे सबसे पहले तो इस प्रश्न के उत्तर के अंदर आने से पहले हमें कुछ दिनों तक मतलब आज से भी पूर्व तक हमें आज से पूर्व तक यह लगता था कि हम एक सामान्य कन्या है जो गुरुदेव से दीक्षित हैं और जितना हम मेरा अपना काम करेंगे जितना उसको बढ़ाएंगे और जितना मेरा ऑडियंस साइज लेट्स से यू नो ऑडियंस साइज जितना इनक्रीस होगा उतने ही लोगों को हम जो सही शास्त्रीय बातें हैं वो बता पाएंगे। बट ये बहुत कॉमन मतलब यू नो लाइक ड्रीम ऑफ अ कॉमन हिंदू गर्ल कि हम ज्यादा से ज्यादा लोगों को जो सही बात है वो बता पाए। पर हमें नहीं पता था कि लोग हम हमें इतने ऊंचे पद पर ऑलरेडी बिठा चुके हैं जहां पे हम खुद को भी आज तक नहीं बिठाए और उन्हें हमारे जीवन में इतनी रुचि है और वो हमसे परफेक्शन की डिमांड मतलब जब हम शायद पैदा होंगे उसी क्षण से ही कर रहे हैं

00:56:46:19 जो कि एक्चुअली प्रैक्टिकल नहीं है क्योंकि एक तो हम कलयुग काल में हैं। है ना? और अगर हम उतने ही परफेक्ट होते तो आज शायद हम इस वीडियो में भी नहीं होते। और अब हम उत्तर पे आ जाते हैं। पर हां उतनी मतलब इतने लोगों की नजरें हम पे हैं। यह जानकर हमें काफी रोमांचक महसूस हुआ है। यह तो हम जरूर बोलेंगे और लोगों के पास इतना समय है हमारे ऊपर रील बनाने का और बिना मतलब रिसर्च करिए तो ऐसी रिसर्च करिए कि मजा आ जाए सामने वाले को। ऐसे मत करिए कि व्यक्ति आपकी चीजें देखकर और पढ़कर हंसता रहे। बस समस्या यह थी कि समय बहुत लग रहा था हमारा ना इन सब चीजों से मतलब पढ़ने का देखने का। अब आपके उत्तर पर आते हैं कि सबसे पहली बात है हम योगा के अंदर कोई आज के नहीं आए हैं। हम बहुत पहले के आए हैं। इसलिए वस्त्रभूषा भी हमारी अलग है। जब हमें समझ आया है और उसके बाद हमारे जीवन में बहुत एक्सीडेंट्स भी हुए हैं। ठीक है? मतलब बेड रिडन एक्सीडेंट। उसके बाद हमारे शरीर को ही दोबारा एक योग अभ्यास और एक योगा टीचर योगा शिक्षक के उसके अंदर आने में समय

00:58:01:27 लग गया है। और वो भी एक बहुत बड़ा रीजन है जिसके कारण आप मेरी योगा की कोई वीडियो नहीं देख पाते हैं। पर हां वीडियो ये एक्सीडेंट से पहले ही गुरुदेव से जुड़ने से थोड़ा टाइम पहले ही हमारी एज अ योगा टीचर भी वेशभूषा बदल चुकी थी। हम धोती डालते थे। तो ये सारी जो चीजें हैं इसे व्यक्ति को समझना चाहिए और हम एक टेक्निकल आसन प्राणायाम के टीचर हैं जिसके अंदर हम ऑफ कोर्स योगा फिलॉसफी की बातें करते हैं। बट मेनली हम किसी जैसे शरीर में जो डिजीज होती हैं। है ना? आपको यह तकलीफ है योगा कर लो। आपकी इंजरी हो गई तो आप कैसे करेंगे? हम इन सब चीजों के ऊपर ज्यादा ध्यान देते हैं। ना तो हम कोई आचार्य हैं, ना हमने कभी खुद को योगाचार्य या कोई भी आचार्य बोला है, ना हम कोई संत हैं। और जितने लोगों को लगता है हमारे Instagram पर आकर भी कभी भी वो बोलते हैं कि साध्वी हैं संत हैं। तो हम उसी समय बोलते हैं ना तो हम है कोई साध्वी ना हम संत हैं। हम एक बहुत ही कॉमन पर्सन की तरह अपना जीवन बिताते हैं। हम सांसारिक हैं। जैसे आप लोग सांसारिक हैं वैसे हम लोग सा हम खुद सांसारिक हैं। और जो भी शंकर मठ

00:59:17:03 से जुड़े हैं उन्हें इस चीज का ज्ञान होना चाहिए कि स्त्रियां सांसारिक जीवन ही जीती हैं। है ना? तो ये बात है। और अगर उसके बाद अगर किसी को मतलब आप रिसर्च अच्छे से कीजिए। है ना? केस सॉलिड बनाया करिए। केस आपका अच्छा नहीं है। और इसका उत्तर यही है। अगर आप अब हमें बहुत सारे मैसेजेस भी आने लग गए हैं कुछ दिनों से। है ना? हम जानते हैं जब हम योग का कोई प्रमोशन नहीं कर रहे हैं और धड़ धड़ धड़ धड़ धड़ धड़ मैसेज आ रहे हैं तो हम समझते हैं इन सब बातों को। तो हम तो यह बोलेंगे कि देखिए ना तो हम यह बोल रहे हैं कि अरे आप आइए गुरुदेव की योगा की क्लास है। ऐसे तो नहीं है। हमने ऐसा एकदम कभी भी नहीं कहा है। ना तो यह ऐसा बोला जा रहा है। गोवर्धन मठ का योगा प्रोग्राम चल रहा है। जिस दिन गोवर्धन मठ की तरफ से कोई योग का कार्यक्रम होगा उस दिन किसी के को किसी से पैसा नहीं लिया जाएगा। इतनी बात सबको कॉमन जनरल कॉमन सेंस होनी चाहिए। तो हमारा उत्तर भी यह प्रश्न हमारी सूची में है और इसको शायद अभी आगे लेंगे।

01:00:32:04 इस पर विस्तार से बात करेंगे और कुछ प्रश्न मुझे लगता है श्वेता जी आपने जो मुझे बताए थे उसमें से कुछ पीछे रह गए हैं। ये आपत्तिजनक वस्त्रों से पीछे कुछ प्रश्न रह गए हैं। नहीं मतलब एक आपने बताया था ना कि कि ये इन्होंने विदेश गमन क्यों किया? नहीं नहीं हां ये है ये अभी अगला प्रश्न पूछने ही वाला हूं मैं। जी तो वैसे बाकी कुछ लोगों को अभी भी समझ में नहीं आ रहा है। कोई लिख रहा है कि शास्त्रों में तो ऐसा नहीं कहा गया है कि स्त्रियां योग कर सकती है। तो अभी इसका उत्तर थोड़ी देर पहले दे चुके हैं। आप पीछे जाइए दोबारा देखिए। नहीं तो फिर अपना थोड़ा सा क्षमता बढ़ाइए सुनने की। ठीक है? भूल जाते हैं रवि जी। ठीक है। तो हां इस पे ये प्रश्न बहुत इंपॉर्टेंट है और मतलब बिल्कुल इस पे भी प्रश्न किया गया है कि विजयश्री ने विदेश गमन क्यों किया? जो आपने पूछा यही मैं प्रश्न पूछने वाला था। पहली बात है। पहली बात तो यह है कि कर्पात्री जी महाराज ने स्वयं यह कहा था कि जो लोग पतित हैं जिन लोगों का जनन इत्यादि

01:01:47:13 से जो नहीं है वह अपने धर्म के लिए विदेश गमन कर सकते हैं। पहली बात। दूसरी बात कि यह विदेश गमन भी गुरुदेव के संपर्क में आने से पहले की बात है। फिर वही बात आ जाएगी। पूर्व की बात है। कोई इन्होंने जाकर के ये थोड़ी ना कहा कि वो क्या कहते हैं? हम जो है गुरुदेव के उसमें आने के बाद विदेश गमन किया हो। तो वहां तो हम कह ही चुके हैं ना कि कोई दिशाहीन व्यक्ति ही तो दिशावान बनेगा। दिशावान ही दिशावान बनेगा। दूसरी बात यह है कि क्या इन्होंने अपने विदेश गमन को दिखाया। देखो देखो विदेश गमन करना धर्म है।

01:02:30:21 इस पर हम कुछ इंफॉर्मेशन देंगे बाद में पर पहले हां क्या विदेश गमन करना धर्म है? विदेश गमन सबको करना चाहिए। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र सभी को करना चाहिए। आर्य समाजी बनिए। शंकर को छोड़िए, शंकराचार्य को छोड़िए। क्या ये सब इन्होंने किया? भाई भाई बार-बार हम लोग बात कर चुके हैं। भूतपूर्व की बात है। अब इसमें एक बात आती है कि क्या इन्होंने प्रायश्चित किया? प्रायश्चित नहीं किया तो क्यों नहीं किया? पहली बात तो यह है कि सब सर्वप्रथम तो इनको प्रायश्चित का बोध होना चाहिए कि इनको प्रायश्चित करना है तो क्या करना है? करना है कि नहीं करना है और ऐसा नहीं है कि आज की डेट में भी इनको अगर यह बताया जाए कि आप जिस स्थिति में है उस स्थिति में आपको ये प्रायश्चित करना चाहिए। इन्होंने मुझको फोन कर करके फोन कर करके परेशान किया है कि इस स्थिति के लिए क्या कोई प्रायश्चित करना पड़ेगा? क्या करना पड़ेगा? तो मैं कौन सा करना पड़ेगा? ये सब बातें इन्होंने मुझे परेशान किया। तो अगर विदेश गमन की बात भी आती है और किसी को उससे आपत्ति है कि इन्होंने गुरुदेव के उसमें आने से पहले विदेश गमन क्यों किया था? तो पहली बात तो पूर्व की बात है। उसको लेकर के आज तो आप ये आरोप नहीं आप शंकराचार्य

01:03:46:02 के शिष्य हो के विदेश गमन कैसे कर लिए? पहली बात तो दूसरी बात ये अगर आपको कोई आपत्ति है आप आकर के बता दीजिए कि आपकी स्थिति के लिए प्रायश्चित है और यदि ये कहे नहीं मैं प्रायश्चित नहीं करूंगी। भाग जाओ यहां से। तो यह मानना पड़ेगा ना कि दोषी है। भाई जो एक अबोध बालक है वो जब कहीं पर शिक्षा प्राप्त करने पहुंच रहा है तो धीरे-धीरे करेगा ना। अब प्रायश्चित क्यों नहीं किया? इसके लिए वो दंड का भोगी हो गया और आए हुए उसको दो दिन हुए। आए हुए उसको चार दिन हुए। मगर उसने आने से पहले जो गलतियां की है उसके लिए उसने प्रायश्चित क्यों नहीं किया? इसके लिए दोषी ठहराना कहां तक सही है? और मैं फिर वही लाइन यह आज की पंच लाइन रहेगी। 101 गलतियां लिख के 101 गलतियां गिनवा दूंगा। वो बाकी भी और भी होंगी पर मैं 101 निकाल दूंगा। मेरा नाम शिवश नारायण द्विवेदी है। पूरी के शंकराचार्य जी का अल्पक शिष्य और राम का साधारण भक्त। ध्यान रखना जितने भी दंभी है वो सुन ले। 101 गलती तुम सबके जीवन में निकाल दूंगा और फिर पूछूंगा कि बता तूने प्रायश्चित किया कि नहीं? तो आज के इस संक्रमण काल में

01:05:01:15 हम में और गलत लोगों में केवल यही अंतर है कि हम अपने गलत को गलत कहेंगे। हम अपने गलत को धर्म के रूप में ख्यापित नहीं करेंगे। और दूसरा जो अधर्मी है वह अपने गलत को भी धर्म के रूप में ख्यापित करेगा। वह अपने गलत को भी सही कहेगा। वरना ऐसा नहीं है कि हमें आलंबन नहीं लेना पड़ेगा। कई जगह ऐसी चीजें होंगी जहां हमें आलंबन लेना पड़ेगा। ठीक है। जी विजय जी। इसके लिए हम सबसे पहले ये बोलेंगे कि जब हम विदेश गए थे तब हम 19 साल के भी नहीं थे। ठीक है? और हम एक स्टूडेंट एक्सचेंज की तरह गए थे। वे मेरी पढ़ाई का हिस्सा था। तो हम उस तरह से गए थे। अब हम आपको बताते हैं उसका फायदा क्या हुआ। हम एक बार नहीं दो बार जा चुके हैं और स्टूडेंट उसके साथ ही गए थे। अब इसका फायदा यह हुआ कि जब हम वहां पे पहली बार गए हमें कुछ भी अच्छा नहीं लगा। पर हम उनकी संस्कृति को बहुत पास से देख पाए। जो इतनी पास से आप लोग भी नहीं जानते हैं मतलब जिस जो नहीं गया है क्योंकि आप कुछ कुछ चीजों को बस अच्छा इनमें यह नहीं है यह नहीं है ये नहीं है यह अलग बात है

01:06:16:21 बट किसी चीज को सामने से देखना और उसको बहुत पास से समझ जाना कि अरे मतलब जब मैंने शास्त्र का मत श भी मेरे पास नहीं था उस समय हमें इतना ज्ञात हो गया था मेरा भारत महान उसके बाद दूसरी बार भी जब हमें वहां पर जाने को मिला तो उस समय हम और उन चीजों को बहुत सारे अलग-अलग जीवन के सेक्टर्स में उसको समझ पाए। अब हमारे पास ऑप्शन था वहां पर रहने का बस जाने का बहुत इजीली बट हमने उसको नहीं लिया। हम वापस आए उसके बाद हमें बहुत बार बोला गया कि आप बाहर जाइए। क्यों? क्योंकि पैसे भी ज्यादा मिलेंगे। हम काम में भी काफी अच्छे हम जो भी काम करते हैं हम उसमें अच्छे ही थे। तो आप जाइए। पर हमने अपने परिवार में और सबसे आज तक हमें पूछा जाता है कि अरे आप तो बाहर बहुत अच्छा कर लेते तो हम सबको आज तक यही बोलते हैं कि बाहर कुछ भी अच्छा नहीं है और क्योंकि हमने वहां जितना भी समय बिताया अब यह बात ध्यान से सुनिए सब लोग। आज हमारे सामने ऐसे बहुत से मेरे परिवार के लोग जो मेरे परिवार के नहीं है वह सब लोग आकर जब हमसे मिलते हैं तो हम उन्हें यह जो हमारे अनुभव वहां पर रहे हैं उनसे

01:07:32:04 अवगत करवाते हैं कि हम होकर आ चुके हैं वहां पे कुछ भी अच्छा नहीं है। अब हम हर चीज को अभी एक्सप्लेन नहीं करेंगे और इससे जो लोग वहां पर जाने के सपने देखते हैं या उन्हें लगता है कि अरे भारत कुछ भी नहीं है जो सब है बाहर है उनको प्रेरणा मिलती है। क्यों? क्योंकि वो यह समझते हैं कि हम सिर्फ बोलने के लिए नहीं बोल रहे हैं। हम प्रैक्टिकली होकर आए हैं। हम समझ रहे हैं। हम जान रहे हैं। ठीक है? और इसके इसका एक और फायदा है। यह हम एक घटना बता देते हैं आपको कि बाहर का एक व्यक्ति था जो किसी बच्चे को कन्विंस कर रहा था कि बाहर जाकर पढ़ लें। पर हम जब वहां पर बैठे और हमने उस व्यक्ति के बातों को काट दिया उसके बच्चे के माता-पिता के सामने कि कोई जरूरत नहीं है। अपने घर पे रहिए। तब तो हमारे पास गुरु की कोई शरण है। हमें तो इसमें कुछ पता ही नहीं था। हम तो मतलब पढ़ो, लिखो, काम करो। यह जीवन था मेरा। तो ये बात है और इसके अंदर आपको एक और चीज बताएंगे। जब हमारा अकाउंट ग्रो कर रहा था आई थिंक 60 हजार कुछ लोग हमारे साथ जुड़े थे तो विदेश में पढ़ने के लिए जो कंपनीज़ होती हैं अब क्या होता है कि हमें कंपनीज़ अगर बोलती हैं कि आप हमारी एडवर्टाइजमेंट

01:08:47:15 कर लो, हम आपको पैसे देंगे। ठीक है? तब हमें ₹ाई लाख ऑफर किए गए थे कि हम वीडियो बनाएं जिसमें हम यह बोले कि विदेश जाइए और विदेश जाकर यूरोप का और जर्मनी का कि यहां जाकर पढ़ाई कीजिए। हमने उस व्यक्ति को एक बात कही जिस दिन आप बाहर के लोगों को भारत में लाके पढ़ाने की बात करेंगे उस दिन हमें कांटेक्ट कर लीजिएगा। तो हम यह बोल रहे हम हम किसी से एक्सपेक्ट नहीं कर रहे हैं कि कोई हमें पर्सनली इतना डीपली जानता हो या समझता हो। पर क्योंकि आप हमें नहीं जानते नहीं समझते तो आप क्यों कोई एक फोटो को देख के यह ऐसा साबित कर रहे हैं कि आपको सब पता है। है ना? तो यह मेरा उत्तर है। इसमें इसमें मैं एक बात और जोडूंगा कि विवाह के संबंधित भी प्रश्न इनका किया जाता है कि अभी जो है इनकी आयु इतनी हो गई है। मैं हां काफी लोगों ने प्रश्न पूछा है। चैट में ही देख रहा था आई गेट इट। हमें पता है आपको बहुत लोगों को इस चीज का इंटरेस्ट है। हम पहले शिव जी को बोलने देंगे। फिर इस भी आपको बताएंगे। तो विवाह के संबंध में पहली बात तो ये है कि निर्लज हो तुम्हें शर्म नहीं आती।

01:10:02:24 मैं थोड़ा सा प्रश्न पूछ देता हूं कि मतलब विजय श्री की इतनी आयु हो जाने के बाद भी अभी तक विवाहित अविवाहित क्यों है ये ऐसे प्रश्न पूछे मतलब कि आ रहा है तो पहली बात तो ये है कि ये प्रश्न पूछने वाले वो लोग हैं ये प्रश्न भी देखेंगे ये प्रश्न पूछने वाले वो निर्लज है जिनको मार नहीं पड़ी है बहुत दिनों से सही बता रहा हूं मैं जब ये जो बीहड़ का माना जाता है ना जो एरिया है चंबल के आसपास वाला मैं उधर काफी रहा हूं तो वहां एक कहावत चलती है कि थोड़ी सी कोई बात हो जाती है तो गुर्जर गुर्जरों का वहां काफी बाहुल्य गुर्जर बाहुल्य क्षेत्र है तो वहां गुरुजनों का वो रहता है कि कोई बात हो गई तो चाचा ताऊ लठ्ठ लाऊ तुरंत और लोग ये गिनते हैं कि एक घर में कितने लठ हैं ये गिना जाता है वहां लठ लठ मतलब एक घर में कितने पुरुष हैं जितने पुरुष तो उतने लठ तो ये गिना जाता है वहां पे तो ये ये जो विवाह का प्रश्न करने वाले लोग हैं ना इनको लठ नहीं पड़े हैं बहुत दिनों से ये भी हो गए घर में बैठे-बैठे और इसीलिए इनके पास इनकी उंगलियों में वो भगवान ने सामर्थ

01:11:18:02 दे दिया तो थोड़ा चला ले और कुछ कुरदुर कोई कुछ कर रहा हो तो उसमें जो है जाकर के खुरपैच कर ले छोटे भाई का मुझे किस्सा याद आता है छोटे भाई का उसने एक दिन क्या किया बहुत छोटे हम लोग हम लोग बहुत छोटे थे तो हमारा जो जिस जो मेन जो जो कक्ष था उसके दो गेट थे वो इतना छद्री उपद्री था बचपन में छोटा भाई उसने क्या किया दोनों तरफ से कुंडी लगा दी हमारे गेट की और जो भवन था वो उस समय बन बनने के उसमें था मतलब बन रहा था धीरे-धीरे थोड़े-थोड़े दिनों में तो उसने पहले हम लोगों को बंद कर दिया मैं माता-पिता दोनों तीनों लोग अंदर और वो छदरी उपद्री बाहर। फिर उसके बाद पता है उसने क्या किया? एक झाड़ू की सीक ली और झाड़ू की सीक लेकर के मधुमक्खी का एक वो था। मधुमक्खी नहीं वो पीली वाली होती है ना बर्र। हां हां बर्रा बर्रा बोलते हैं उसको। बर्रा बोलते बरैया ततैया बोलते हैं हां उधर ततया भी बोलते हैं कहीं बरैया भी बोलते हैं उसमें वो चीख लेकर के और जो है ततैया के उसमें और ऐसेसे करने लगा थोड़ी देर में ततैया

01:12:33:06 थोड़ी देर में ततैया बनाती हुई बाहर निकली तीन चार और वो जब निकली तो वो भागे और ततैया को तो टारगेट लॉक्ड था उसने काटना शुरू किया वो रो रहा है हम और रो रहा है तो हम लोग चिल्ला रहे हैं कि अरे क्या हो गया तो कुंडा बंद अच्छे से उसको बरैया ने काटा। बरैया थोड़ी उससे भी ज्यादा जहरीली होती है। मधुमक्खी से ज्यादा अच्छे से काटा इनको। तो वो उन्होंने क्यों किया था कि खाली बैठे क्या करें? करना है कुछ काम। वो कहते हैं ना भगवत गीता में भगवान ने कहा है ना कि मनुष्य एक क्षण के लिए भी कोई कार्य किए बिना नहीं रह सकता। इसलिए तू सदैव शास्त्र सम्मत कर्मों को करने में प्रयत्नशील हो जा। बिल्कुल तो इसीलिए कहा जाता है खाली दिमाग शैतान का घर उसी से कहावत बनी है ना यह तो क्या है कि उसके पास कोई कामधाम नहीं था तो झाड़ू सी ले के उसको पोचा करना था उसको मालूम था कि बड़े भाई हैं वो मुझे रोकेंगे माता-पिता मुझे रोकेंगे और मुझे उसमें खोचड़ करनी है तो उसने टाइम का सदुपयोग किया उसके हिसाब से और उसने अच्छे अच्छे से अपने आप को कटवाया बरैया से तो ये जो लोग हैं ये वही निर्लज लोग निर्लज लोग हैं जो ये कह रहे हैं कि आपका विवाह नहीं हुआ है सबसे पहली बात तो यह है

01:13:48:07 कि क्या इनके घर खानदान में कुल में इन सबका शास्त्रोक्त विधि के अनुसार वही वाली बात गलतियां इस वीडियो का नाम होगा मैं बता किसी का नहीं होगा हो चुका है अच्छा दूसरी बात ये है कि भाई किसी के जीवन में हां क्या उतार-चढ़ाव हो क्या संघर्ष हो क्या उसकी स्थितियां हो जो आए तो मुंह उठा कर के पूछने कि आपका विवाह क्यों नहीं हुआ एक एक कारण तो मैं भी अभी आपको बताऊंगा मगर आपका यह अधिकार कहां से बनता है कि आप किसी से पूछो आपका विवाह नहीं हुआ। आप जो गलत कर रहे हो हां पता नहीं उसके जीवन में कौन सी ऐसी दिक्कतें रही हो। आर्थिक दिक्कत होती है। दायित्व होते हैं। मां-बाप को छोड़ के कोई नहीं जा सकता। इकलौता है। हां। तो आप कौन से हिसाब से बिना जाने ताने ये कर रहे हो? क्यों कर रहे हैं पता है? क्योंकि इन्होंने बीड़ा उठाया कि मैं बताऊंगी स्त्रियों को कि तुम्हें गायत्री मंत्र नहीं जपना चाहिए। यही इनकी गलती है ना। इन्होंने बीड़ा उठाया कि मैं बताऊंगी लोगों को तुम्हें प्रणाम नहीं राम नाम का उच्चारण करते हुए तुम्हें योग करना चाहिए। क्योंकि इन्होंने बीड़ा उठाया। ये मंच पे आई। इन्होंने कायरता नहीं दिखाई। जो

01:15:03:10 लोग यह सब प्रश्न कर रहे हैं ज्यादातर वह लोग हैं जो जिनका मुंह काला है जो मुंह नहीं दिखा पा रहे हैं। वह व्यक्ति भी मुंह काला वाला है जिसने इनके फोटो का मिसयज किया था। वो व्यक्ति भी मुंह काला वाला है। मगर एक मात्र शक्ति होते हुए ये अपनी बात को रखने के लिए सामने आई। ये भी कोई फेक आईडी बना सकती थी कि चलो हम भी थोड़ा बहुत प्रचार कर देंगे गुरु के वाक्यों का। क्यों अपनी उसी आईडी पे मनुवाद के सिद्धांतों का बोलना शुरू किया कि दुनिया इनकी दुश्मन हो जाए। आप एक बात बताइए मनुवाद के सिद्धांतों का विरोध करने पर दुनिया आपका आज की दुनिया आपको फॉलो करेगी या मनुवाद के सिद्धांतों का समर्थन करने पर दुनिया आपको फॉलो करेगी?

01:15:44:01 सोचिए आज आप मनुवाद का खंडन करने लग जाओ। आपका मीटर देखो कैसे भागेगा। अभी एक व्यक्ति ने बताया था यू कैन चट महामृत्युंजय मंत्र एनीवेयर एनी टाइम। है ना? इन्होंने क्योंकि महामृत्युंजय मंत्र के लिए बोला कि वो सब लोग नहीं जप सकते तो उसने इनके खंडन में बनाया वीडियो यू कैन चट एनी टाइम एनीवेयर हम उसको देखो उसके फॉलोवर्स देख लिया मैंने थोड़े समय पहले उसके फॉलोवरर्स डेढ़ लाख देखे थे आज की टाइम में ढाई लाख 1 लाख फॉलोवर्स केवल इस मंत्र का खंडन इन इनकी बात का खंडन करने के बाद है 1 लाख फॉलोवर्स उसके बढ़ गए और वो यही कर रहा है अब दूस अब दूसरे वीडियो में बता रहा है आई मीन और अमीन और वो जो प्रणव है ये सब एक है। ये सब बताओ ये सेुलर बातें

01:16:38:15 करो। इसीलिए तो मैंने कहा था ऐसे लोगों ऐसे लोगों को देख के श्री राम श्री राम मैंने इसीलिए कहा था ऐसे लोगों को देख के मुझे थाने के उस पट्टे की याद आती है। मेरी माताजी कोर्ट में थी। तो मेरा जो है बचपन जो बीता है वो स्कूल की छुट्टी हो गई तो चाबी लेने जा रहा हूं। मेरी माता जी वहां पर पिए हैं। वो अपना कुछ कार्य कर रही हैं। तो मैं वहां जा रहा हूं और उनसे घर की चाबी ले रहा हूं। है ना? तो वहां पर जो न्यायाधीश है वो वही बैठे हैं तो मुझे चॉकलेट दे रहे हैं। तो मेरा जो जीवन है वो यह जो आज का जो ये न्याय व्यवस्था है इसमें मतलब बहुत पास से मैंने देखा है माता जी के कहने पर वो जो थाने की जो पुलिस की चीफ है वो आ जाती थी। कहीं पर कोई मदद चाहिए, कुछ करना है तो क्योंकि होता है ना कि एक न्यायाधीश के अंडर में एक थाना आता है। ऐसा कुछ होता है। तो क्योंकि माता जी एक कोर्ट में है, पीए हैं तो उनके कहने पर ऐसा होता था कि थाने की तरफ से व्यवस्था होती थी। कोई भी कार्यर होता था। तो मैंने इन सब गतिविधियों को बहुत पास से देखा है। तो मैंने क्या देखा कि वहां पर थाने

01:17:53:20 में चोरों की उचकों की पिटाई करने के लिए एक पट्टा रखा रहता था। बैठ के डिजाइन का होता था। हत्ता होता था लकड़ी का और उसमें नीचे पट्टा रहता था। उसमें जो ट्रक के पीछे जो शायरियां लिखी होती है उस तरह की शायरियां लिखी होती थी। किसी पे लिखा होता था आन मिलो सजना। किसी पे लिखा होता था फिर कब मिलोगे? किसी पे इस तरह की चीजें उस पर लिखी होती थी। किसी किसी पे ये भी लिखा होता था समाज सुधारक समाज सुधारक तो उसको देख के वो जो ये बता रहा है ना यू कैन चट एनीवेयर वो इंग्लिश के साथ उसको देख के उसी पत्ते लिया। तो मैं यह कह रहा था कि मनुवाद के सिद्धांतों का विरोध करने पर आपका आपका वो जो जो कहेंगे अर्थ कमाने का जो मीटर है वो तेज भागता है या मनुवाद के सिद्धांतों का समर्थन करने पर। आज आप देख लीजिए गुरुदेव जो निर्भीकता के साथ सबसे मतलब बिल्कुल पुष्ट तरीके से धर्म को रखते हैं। आज आप देख लीजिए उनका चैनल पर कितने फॉलोअर्स हैं। कभी-कभी तो मैं भी सोचता हूं कि जैसे मतलब ये लोग लिखते हैं और मेरे पास जवाब तो होता है

01:19:08:26 लेकिन मैं तो आलसी हूं। मैं इतना टाइप करता नहीं हूं। मैं देख लेता हूं कि हां ठीक है। तो मुझे याद आते हैं तथाकथित आचार्य प्रशांत जैसे वो अपने आईआईटी और आईएम का जो क्रेडेंशियल दे दे के बताते हैं मैं कि मैं भी अपना क्रेडेंशियल वही देता हूं और फिर गुरुदेव की बातों का मैं भी करता हूं प्रचार। आप ये देख लो जितने लोगों का बड़ा-बड़ा पेज है वो सब कहीं ना कहीं मनुवाद का खंडन कर रहे हैं। हां ये तो है देखा वो सब कहीं ना कहीं ये विधि निषेध को ताक में रखने की बात करते हैं। वही लोग सक्सेस है। चाहे वो आचार्य प्रशांत हो चाहे वो रामपाल हो चाहे वो आर्य समाज हो। यह सभी लोग कहीं ना कहीं जो विधि निषेध है परंपरा प्राप्त उसका खंडन करते हैं और बड़े-बड़े इनके पेज हैं। आप खंडन करने लग जाओ मान्यताओं का इन सबका आप खंडन करने लग जाओ। देखो आपका मीटर कैसे भागेगा। तो कहने का अर्थ यही है कि पहली बात तो विवाह के संबंध में आपका ये अधिकार ही नहीं है कि विवाह क्यों हुआ? गुरुदेव को नहीं मालूम है क्या? वहां उनके पास जाती हैं। गुरुदेव का स्नेह प्राप्त होता है। वहां पर ऐसा नहीं है कि अधिकार की सीमा में रहकर के गुरुदेव के सेवा कार्य भी करती हैं। जैसे कि मान लीजिए लाइन लग रही है। गुरुदेव के दर्शन कर जो चरण पादुका

01:20:23:27 होती है उसको सब छूने जाते हैं। तो उस समय लाइन में आने के लिए एक व्यवस्था करनी होती है। ऐसी इस प्रकार की व्यवस्थाओं में वहां पर खड़ी होती है। तो क्या गुरुदेव को नहीं दिख रहा है कि इनका विवाह नहीं है। और जब गुरुदेव को दिख रहा है तो तुम कौन होते हो ये कहने वाले कि तुम्हारा विवाह क्यों नहीं हुआ? ये दंभ है। ये दंभीपन है। अपने जीवन में टटोल कर देखोगे तो 101 गलतियां फिर बता रहा हूं। 101 गलतियां मैं गिनवा दूंगा लिख के। ठीक है? तो तुम ये पूछ रहे हो। अब एक एक कारण मैं भी बता देता हूं। बाकी और ये बताएंगी। एक कारण मैं बता देता हूं। मेरे संपर्क में जब ये आई थी और धीरेधी जब ये गुरुदेव के प्रति निष्ठावान होने लगी। उसके बाद बीच में इनके माता-पिता के द्वारा अब भाई जिसका जैसा जीवन है उसके मिलने जुलने वाले लोग भी तो उसी तरह के वातावरण से आएंगे। तो जिसका अगर जिसके जीवन जिसका जीवन विदेश से कनेक्टेड है तो उनके मिलने जुलने वाले लोग भी तो विदेशों से आएंगे। हां। तो इनके माता-पिता ने किसी अच्छे समृद्ध लड़के का इनको वो दिया। इन्होंने कोई निर्णय नहीं लिया। मुझसे सुझाव मांगा। एक

01:21:39:18 उसके मार्गदर्शक के रूप में इन्होंने सुझाव मांगा कि क्या करना चाहिए? तो मैंने तो यही कहा कि भाई अपने घर का दिया हम किसी और देश में क्यों जलाएं? समृद्ध व्यक्ति था। ये चाहती तो उससे विवाह करके आराम से सेटल हो जाती। अमेरिका अमेरिका में वहां से धीरे-धीरे मनवाद के सिद्धांतों का खंडन करती। हां। मगर नहीं किया ना। नहीं चुना इन्होंने वह समृद्ध वो सफलता वाला जो इनका पार्ट था जीवन का हो सकता था वो इन्होंने नहीं चुना त्यागा उस चीज को और अब आपके जो सगे संबंधी है वो सब विदेशों से कनेक्टेड है ठीक है आपके जो सगे संबंधी हैं वो सब विदेशों से कनेक्टेड है तो सबसे पहले तो ये फिल्टर एक लग जाना ये भी एक कारण है अच्छा मेरे मेरे संपर्क में भी ऐसे कुछ लोग थे जिनसे इनका का विवाह हो सकता था। मगर इनके मन में भी ये चीज रम गई कि नहीं मैं विदेश नहीं जाऊंगी। अब अब तो मैं यहीं रहूंगी। तो एक ये फिल्टर लगना लग जाना भी तो एक कारण है कि विवाह क्यों नहीं हो रहा है? जी विजय जी आई थिंक जो अभी लास्ट पार्ट बोला गया है क्योंकि सबको

01:22:54:19 यहां पे थोड़ा मसाला चाहिए। मतलब एक बात जानिए यह बिग बॉस का शो नहीं है। यह मेरा जीवन की बातें आप कर रहे हैं। आपकी आपके घर पे कोई बहन होगी उसको कोई भी एरा गगरा जिसको कोई जानता नहीं है फेक अकाउंट बना के रियल अकाउंट से जिसको कोई संपर्क नहीं है वो उनको बोले आपकी शादी क्यों नहीं हुई है? अजीब नहीं लगेगा आपको। शायद आपको नहीं अजीब लगे। पर आई थिंक उन्होंने आपको उत्तर दे ही दिया है कि ये प्रश्न बहुत ही निजी है और जिन लोगों को इंटरेस्ट है उन्हें शायद अपना नाम जप पे ज्यादा ध्यान देना चाहिए बल्कि कि विजय श्री की शादी क्यों नहीं हुई है उनका विवाह क्यों नहीं हुआ अभी तक तो इसका उत्तर हम बस यहीं पर देके समाप्त करेंगे

01:23:45:28 नारायण तो क्योंकि आपने मठ का भी नाम लिया है कई बार तो एक प्रश्न ये उठता है कि कई लोगों ने पूछा है कि यह जैसे आप मठ के कुछ कार्यों में हाथ क्यों बटाती हैं? मतलब किसने आपको अधिकार दिया है? आप होती कौन है? जैसे खानावाना बंटवाने में मदद करवाना या फिर आपके परिों से सुन नहीं पाए जैसे भोजन वोजन आदि बांटने में मदद हेल्प करवाना या जैसे लाइन वाइन जैसे बताया मैं मैं बता रहा हूं ना ये प्रश्न आया है प्रश्न आया है जैसे और आप क्या बोलते हैं किस अधिकार से आप मठ के परिकरों के साथ वार्तालाप करती हैं बातचीत करती हैं ऐसा कुछ ये सब पता लगा है हां मौत मैं पहले बोली पहली बात तो ये है कि पूर्व पक्ष को ले मैं चलता हूं सदैव। पहली बात तो ये है कि मैंने अभी-अभी बताया कि कोई बालक है जो शिक्षा प्राप्त करने अगर कहीं पहुंचेगा तो उसको कई चीजें नहीं मालूम होंगी। है ना? मैं तो यहां तक कह रहा हूं कि कोई बालक है वह स्टच जाने के बाद वापस आने के बाद हाथ धोए बिना हाथों को स्वच्छ किए बिना और वो जलपान करने के लिए जा रहा होगा तो उसके माता-पिता कहेंगे

01:25:01:03 कि अबे रुक पहले हाथ धो जाकर के कहेंगे ना और यदि वो बालक कह दे कि नहीं मैं हाथ नहीं धोऊंगा मैं ऐसे ही जलपान करूंगा तो वो गलत होगा ना या फिर माता-पिता के कह देने के बाद यदि उसने हाथ धो लिए तो वो गलत माना जाएगा। नहीं माना जाएगा। पहली बात सबसे बड़ी बात है। सबसे बड़ा रहस्य यह है कि ऐसा कुछ हुआ ही नहीं है। अगर हुआ है तो प्रमाण लाओ। प्रमाण की बातें हम आगे करेंगे कि प्रमाण क्यों नहीं है उसके उसके बारे में बात है सेगमेंट है मगर आपको प्रमाण दिखाना चाहिए कि विजय श्री खाना बांट रही है पहली बात दूसरा ये है कि अगर खाना बांटा भी तो भाई यह जो दोष है ये आप आपका दोष जो जाता है वो जाता है वहां के प्रशासन पर और मैं तो कहूंगा आपका जो है वो नहीं है अपने गुरु पर कि गुरुदेव ऐसा होने दे रहे हैं वहां पर गुरुदेव बैठे हैं और विजय श्री कैसे गलत गलत सलत बातें कर रही है। है ना? दूसरी पहली बात तो ऐसा हुआ ही नहीं। और दूसरी बात ये आदि आपकी शिकायत होनी भी चाहिए तो इनसे ना हो के

01:26:16:09 कि आपने ऐसा क्यों किया? आपको शिकायत होनी चाहिए कि आपने उसको ऐसा क्यों नहीं बताया? है ना? और यदि बताने के बाद विजय श्री ऐसा नहीं करती तो उस पर दोष करने की बारी आती। तो पहली बात तो यह हो गई। दूसरी बात ऐसा कुछ नहीं है। इनके द्वारा ऐसा कोई खाना बांटने वाला प्रोग्राम नहीं हुआ है। अब जो दूसरी बात है सच के आसपास वाला झूठ ये क्या है? मलेच्छराज अगर कोई राक्षस है दुनिया का तो उसकी नकारात्मक शक्ति का प्रभाव है। वो काम कैसे करता है? वो आपको भड़कीले भड़कीले सच बताएगा। ऐसे सच बताएगा जिनसे आप प्रभावित हो जाओगे। जिनसे आप आपकी जो सोचने समझने की जो विवेक शक्ति है वो जो है आपकी नष्ट हो जाएगी और उसके बाद आपको ऐसे तथ्य बताए जाएंगे। आपको उसके बाद ऐसे तथ्य बताए जाएंगे जो कि सच नहीं होंगे। मतलब उन्होंने क्या किया वही मैंने शुरू में बताया था पहले आपको फोटो दिखा दी अब फोटो के साथ एक टिप्पणी लिख दी अब फोटो तो है ना और वो

01:27:31:15 फोटो ऐसी है जो भड़का रही है आपको वो फोटो ऐसी है जो आपको प्रभावित कर रही है उसकी वजह से आपने अपने विवेक का उपयोग करना बंद कर दिया और फिर आपने जो बगल की पंक्ति पढ़ी उसको उसके तथ की तर्क शक्ति के साथ जांच करना आप भूल गए वही हो रहा है यहां पर वही हो रहा एक्सक्टली क्या हो रहा है कि क्या हो रहा है कि खाना बांटना तो झूठ है मगर परिककरों के साथ बात करती हुई ये है। ठीक है? अब पर अब क्योंकि पीछे से इतना प्रीफिक्स दे दिया गया है कि जब अब परिकरों के साथ बात करने वाली फोटो आएगी तो उसके साथ जो टिप्पणी होगी कि इनका परिकरों के साथ कैसा वो है व्यवहार ये क्या हो रहा है? तो आपको आप यह सोचना भूल ही जाओगे कि उसमें परिकरों के साथ क्या कोई आपत्तिजनक दृश्य है। यह सोचना भूल ही जाओगे कि क्या परिकरों के साथ बात करते हुए जो फोटो दिखाई गई है उसके साथ में यह फोटो दिखाई गई कि नहीं इन्होंने खाना बांटा कि नहीं बांटा। तो खाना बांटने वाली बात तो ऑटोमेटिकली सत्य हो गई क्योंकि बगल में परिककरों से बात करने वाला चित्र दिखाया गया। अब लोग ये सोचना भूल गए कि खाना बांटते हुए चित्र

01:28:46:19 नहीं दिखाया गया। लोग यह सोचना भूल गए इतना गंभीर मामला बना देने पर कि परिककरों से बात करना क्या अपराध है? अरे भैया गुरुदेव से गुरुदेव के प्रवचन सुनने जाएंगे गुरुदेव के दर्शन करने जाएंगे तो परिककरों से बात करने की बजाय क्या पाकिस्तान की सेना से बात करेंगे? बिल्कुल वही तुम्हें भी सोच समझ में नहीं आ रहा कि क्या विवेक तर्क शक्ति क्या बिल्कुल गायब हो गई है? अरे मैं गया हूं जितनी बार दर्शन करने मैंने तो बात की है। मैंने तो डांट खाई है।

01:29:19:25 अरे भाई अगर स्टेशन सुनिए स्टेशन पर गुरुदेव जा रहे हैं। ठीक है। अब गुरुदेव जा रहे हैं। सब लोग उनको बिठा रहे हैं। अब कोई सामान है जो छूट गया। और ये गुरुदेव के दर्शन कर रही है। वहीं खड़ी है। परिकर ने इनको देखा। अरे सुनो परिकर ने ढूंढा मदद किससे मिलेगी? परिकर ने इनको देखा। परिकर ने इनसे कहा ये सामान जल्दी लाना है। ये लाते टाइम किसी ने फोटो खींचा। हां अब हो गया

01:29:51:15 नहीं तो इसमें मुझे समझ में आया कि समस्या क्या है अगर बात कर बात की है तो क्यों नहीं बात कर सकते भाई सनातन सिद्धांत है क्या बात ना करने का हम इस पर कुछ बोलना चाहेंगे इस पर कि पहली बात कि पहली बात झूठी है क्योंकि और इसके अंदर हम आप सब लोग जो देख रहे हैं उन्हें बहुत प्रेम से यह बताना चाहेंगे जब आप मठ में जाते हैं तो आप सब लोग जो मठ में जाते हैं आपको पता है कि मठ में कितना अनुशासन और कितनी स्ट्रिक्टनेस है कि कौन कहां क्या कर सकता है और कौन कहां क्या नहीं कर सकता है। मुझे ऐसा लगता है कि जो व्यक्ति एक बात मठ के बारे में समझ जाएगा कि मठ में अनुशासन सबको बहुत प्रिय है तो वो वहां पर अब वहां पर लंबा समय बिता सकता है। नहीं तो वो एक-दो दिन में ही भाग जाएगा। पर अब बात ये है कि जब हमें पता है कि मठ में अनुशासन अनुशासन और पूजन कि आप अपनी संध्या पूजन कीजिए आराधना कीजिए। दो चीजें मठ में सबको बहुत प्रिय हैं। जो देख रहे हैं वह भी समझ जाइए। अगर आपकी आराधना नहीं हो रही

01:31:06:19 है टाइम से तब भी आपको बहुत डांट पड़ेगी और यदि आप अनुशासन की कोई भी सीमा को लांघ रहे हैं फिर चाहे आप कोई भी हो। ठीक है? तो तब भी आपको वहां आप वहां पर अपना कोई स्थान नहीं बना पाएंगे। आपको सीधा हाथ जोड़ के बोला जाएगा कि वो रहा मेन गेट। अब दोबारा मत आइएगा। हमें आपकी आवश्यकता नहीं है और शायद यही बात हमें मठ की मतलब यह सबसे पहली जो चीज थी यह गुण है कि हमें फर्क नहीं पड़ता आप प्राइम मिनिस्टर हैं। आप कौन से मिनिस्टर हैं? कौन से खेत की मूली है? अगर आप हमारे यहां के अनुशासन को समझ पाते हैं, आपका वेलकम है, नहीं समझ पाते हैं तो चले जाइए क्योंकि हमारा दाल पानी आपके ऊपर निर्भर नहीं है और इस तरह की सोच और व्यक्तित्व रखने वाले लोग हमें केवल गोवर्धन मठ में ही मिले हैं। तो जब हम यह बात बोल देते हैं तो जो यह भोजन की बात है तो यह नहीं आती है। सबको पता होना चाहिए कि भोजनालय के जो सीमा है और जो रूल्स हैं वो ब्राह्मण वर्ण के लोगों के साथ हैं और जो अधिकृत है सिर्फ वही करते हैं। हम तो वहां पे अगर कभी किसी को दिखेंगे भी तो सिर्फ इसलिए दिखेंगे कि हमें पत्तल दे दीजिए। उससे ज्यादा किसी को

01:32:22:02 हम और किसी तरह से नहीं दिख सकते हैं। तो ये पहली बात हुई। दूसरी बात ये है कि दूसरा क्या इनका पॉइंट था कि हम बात क्यों कर रहे थे? अगर हम परिकर से बात नहीं करेंगे तो क्या करेंगे? परिकर का और क्या काम है? दूसरी बात उनसे सब बात करते हैं। आप समझ रहे हैं उनसे पुरुष करते हैं। सब मतलब अरे मैं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं कि अगर हम लोग ये पोस्टर बनाते हैं कि भाई यहां पर गुरुदेव का शिविर लगने वाला है। आपको यहां आना है और किसी को अगर आने में कोई दिक्कत हो रही है, कोई जानकारी लेनी है तो उस पर एक नंबर लिखा होता है। वो नंबर किसका होता है? और उस पर फोन पे फोन लगा के क्या करें? चुप हो जाए। फोन लगा लिया उसके बाद बैठे हैं। हम इस बात में एक चीज से बात नहीं कर सकते। हां तो हम इस बात में यह चीज डाल देंगे कि देखिए जो लोग मजा लेना चाहते हैं या जो लोग इसको एज एन एंटरटेनमेंट यू नो देखिए एट द एंड ऑफ द डे उनका हमसे ज्यादा समय इसके अंदर जा रहा है। क्योंकि हम एडिट करने नहीं बैठे हैं। हम डालने नहीं बैठे हैं। हम यह सब करने के लिए नहीं बैठे हैं। दूसरी चीज हम गुरुदेव के एक वीडियो देखे थे। आई थिंक एक डेढ़ महीना पहले और उस वीडियो के अंदर गुरुदेव

01:33:37:10 बोल रहे हैं कि गुरुदेव के द्वारा सब नियुक्त हैं। गुरुदेव की इच्छा नहीं होगी। वो व्यक्ति वहां अंदर ही नहीं आ पाएगा। वो गेट के अंदर नहीं आ सकता है। मेरी इतनी निष्ठा गुरुदेव के साथ है। आप लोगों की नहीं है। इसीलिए शायद आप इस तरह से सोच रहे हैं। दूसरी बात यह है कि वहां पे गुरुदेव यह बोलते हैं कि अपने गुरु के आसपास के परिकरों से यदि कोई अच्छा स्वभाव नहीं रखता है, उनकी निंदा करता है तो वह गुरु द्रोही कहलाता है। अब आपने सब्जेक्ट तो यहां पे आपने हमें बना दिया। पर जिस भी परिकर के साथ आपने हमें जोड़ा है, आप शायद भूल रहे हैं कि यह कितना गलत है और मठ से आप जैसे कुतर्क करने वाले लोगों को ही संभल कर रहना चाहिए क्योंकि

01:34:32:14 हां एक मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। एक कोई विरोधी है, एक कोई विरोधी है मठ का। उसने जो है बड़ा आपत्तिजनक शब्द बोला और वो अपने आप को मटका हितैषी भी बोलता है। तो मान लीजिए कि उसने एक शब्द बोला मठ के किसी परिकर के बारे में या मठ से जुड़े हुए किसी व्यक्ति के बारे में। मान लीजिए किसी ने एक शब्द बोला कि वह जो है मूर्ख है या वह जो है कोई अधर्मी है। अधर्मी अधर्मी शब्द बोला। अब अगर वो पूरा वाक्य बोलेगा जो ये दावा कर रहा है कि मैं गुरु का हितैषी हूं तो उसका पूरा वाक्य क्या होगा? कि जगतगुरु शंकराचार्य अपनी सेवा अधर्मियों से करवाते हैं। बोलेगा ना सही बात तो पर वो नहीं बोल पाएगा। अगर वो सत्य को सत्य बोलने वाला है तो ये लाइन बोल कि जगतगुरु शंकराचार्य अगर तू उनको गुरु मानता है तो बोल कि जगतगुरु शंकराचार्य अपनी सेवा अधर्मियों से कराते हैं नीच से कराते हैं हीन व्यक्ति से कराते हैं बोल ये है दोगलापन सत्य बोलना नहीं बोल पाएगा और

01:35:47:20 बोलेगा तो तेरा जो वास्तविकता है तेरी बाहर आ जाएगी जो ऐसा बोल रहा है कि फलाना प्रकार ऐसा है, फलाना प्रकार ऐसा है। खैर हम इस बात को थोड़ा खत्म मतलब ये हमारा लास्ट होगा इस प्रश्न को लेके कि जिनको लगता है ना कि मठ के अंदर चार दिन भी निकालना बहुत आसान है। और वह अनुशासन, आराधना, संध्यान पूजा उस सब को छोड़ के भी वहां पे चार दिन अगर आप अच्छे से निकाल पाए वो बहुत आसान है तो वो बहुत आसान नहीं है। पर हम आपको एक और बात बताते हैं। हम भी मठ में आने से पहले हम भी एक जनरल लाइफ से आते हैं। जहां पे हमें मठ मंदिरों के बारे में बहुत तरह की बातें सुनने को मिल ही जाती हैं। ठीक है? हम तब भी आए और आज तक हमें वहां पर एक पुत्री के समान एक पोती के समान एक बहन के समान छोटी और बड़ी दोनों उस तरह से इतना स्नेह मिला है कि मतलब हमें लगता है कि जो हमारे मन में कभी-कभी आता नहीं है कि शायद मेरे को यहां मेरे घर के इस रिश्ते से मुझे प्यार की कमी रह गई। तो

01:37:02:24 हम वहां पर अपने आप को बहुत पूर्ण महसूस किए। तो बात यही है कि हम मेरे अगर हमसे पूछा जाए कि मठ में मर्यादा क्या है मठ की? मठ की मर्यादा यह है कि आप अपनी आराधन आराधना पूजा कीजिए और मठ के अनुशासन को मानकर चलिए तो सब बढ़िया है। अगर आप कहीं का आप आप अपने घर में भी जो आपका अनुशासन नहीं है कोई बाहर का आएगा और वो अनुशासन नहीं मानेगा आप उसको भी नहीं रहने देंगे। तो अना अना या जब आपका अधिकार नहीं है जब आपका कोई समय नहीं है किसी से मिलने का क्योंकि जिसका जो समय रहता है सब कुछ समय के हिसाब से होता है। अगर आप उन सब चीजों की रिस्पेक्ट करते हुए आगे बढ़ेंगे तो सामने वाले व्यक्ति भी आपको निष्ठावान श्रद्धावान समझेंगे। बस हम यही बोलेंगे इस बात पर। इस मामले में मैं एक चीज और बता दूं कि जिस व्यक्ति ने सबसे इस विवाद के शुरू होने से भी पूर्व में मुझसे इनके मठ में होने पर आपत्ति जताई थी तो भाई मैं खुद कोई भी निर्णय लेता नहीं हूं। गुरु गोविंद ग्रंथ के आलंबन से ही मैं कोई अपना बात कहने का प्रयास करता हूं और यदि मेरे पास नहीं है तो मैं वहां पर कहता हूं कि मुझे नहीं है भाई

01:38:18:02 मुझे नहीं मालूम है तो जब ये आपत्ति जताई गई तो इस विषय में शास्त्रोक्त बात क्या होनी चाहिए वो मुझे नहीं पता थी ये सत्य है मुझे उस समय नहीं पता थी जब मुझे बताया गया मेरे को भी ऐसा ही ज्ञात था कि जो आश्रम इत्यादि है इत्यादि है। उसमें स्त्रियों का निषेध है। ठीक है? यह शास्त्रोक्त मर्यादा के रूप में मैं ऐसा जानता था। फिर ये बात पहुंची गुरुदेव तक। ये प्रश्न पहुंचा गुरुदेव तक। ऐसा नहीं है। कट्टी गोलियां नहीं खेलते ना हम। गुरुदेव तक यह बात पहुंची कि क्या स्त्री मठ में आश्रम में रह सकती है? पहली बात तो ये है कि रह नहीं रही है। इसको दोबारा ध्यान दें। ये रह नहीं रही है। ये वहां पर विशेष आयोजनों में पहुंच पहुंची है। हम भी गए थे वैसे ये भी गई थी। जैसे मैं अपने सह परिवार गया था। ये अपनी जो अन्य जो इनके वो थी सखी थी इनकी वो इनके साथ गई थी। कुंभ में जैसे शिविर लगा था। तो पहली बात तो ये मठ में रहती नहीं है। मगर अगर यह मठ में मठ के किसी आयोजन में सम्मिलित हुई भी है। उस परिपेक्ष में भी हमने जब पूछा गुरुदेव से तो

01:39:33:06 गुरुदेव ने क्या कहा था? उन्होंने सीधे कहा कि माता सीता अपने बिना पति भाई पिता इत्यादि के वहां पर रही थी वाल्मीकि जी के आश्रम में। तो उनका सिद्धांत उन्होंने बताया कि यदि व्यभचारी नहीं है तो वह मठ में रह सकता है। ऐसा नहीं है। ये कोई सनातन सिद्धांत नहीं है कि नहीं रह सकता। तो मगर उस स्थिति को आने ही ना दिया जाए। इस वजह से एक सतही स्तर पर एक व्यवस्था बना दी जाती है कि नहीं नहीं रहना चाहिए। मगर सनातन सिद्धांत नहीं है। नहीं तो सीता माता ना रहती वाल्मीकि जी के आश्रम में। अब बताओ क्या करें? गुरुदेव का खंडन करें, गुरुदेव का विरोध करें और जो लोग आपत्ति जता रहे हैं, वह समझ ले अपनी उनकी स्थिति क्या है? सही बात है। उनकी स्थिति क्या है? अगर तुम उनको गुरु कह रहे हो तो तुम गुरु गुरु विरोधी हो और मेरे जानने में मेरे जानकारी में आप लोग गुरु वो आपके गुरु है ही नहीं। आप कोई मुंह छुपा करके दुष्प्रचार करने वाले यहां पर आने वाले विरोधी हो। ठीक है।

01:40:48:06 अब दूसरी बात यह है कि अ एक पक्ष इसका और भी है। एट द एंड अगर तुमको कोई दिक्कत हो रही है तो भाई गुरु केवल तुम्हारे थोड़ी ना है। गुरु इनके भी तो हैं। तो जाओ ना पहले जाकर के गुरुदेव से पूछो। क्या ऐसा करना चाहिए कि नहीं? फिर इनको बताओ ऐसा नहीं करना चाहिए। उसके बाद यदि यह नहीं करती है तो विरोध करो। मैं भी साथ दूंगा। एकदम। हां। ये क्या तरीका है कि तुमने गुरु का पक्ष तो सुना नहीं जाना नहीं। और गुरुदेव के नाम पर लगे अपने लट्ठे। चाचा ताऊ लठ्ठ लाऊ। तो ये तर्कहीनता है, प्रमाणहीनता है और मैं कहूंगा कि वो जो गुरुदेव की वाणी इन्होंने सुनी तो है मगर उसको आत्मसात धारण नहीं किया ऐसे लोगों ने। जी

01:41:45:08 तो इसके साथ ही एक प्रश्न उठता है आपके ऊपर विजयश्री जी कि आप गुरुदेव का नाम का प्रयोग करती हैं अपने अपने निजी व्यापार के लिए। कुछ कहना चाहेंग आप जी क्यों करती हैं? अवश्य अवश्य अवश्य मैं मैं कहूंगा पहले मैं फिर विजय जी जी आप तो बोलने ही नहीं देते नहीं उन्हें दृष्टिकोण रख लेने दीजिए फिर हम भी क्योंकि अंत तक अंत तक वैसे भी हमारे साथ वो सब लोग रहने ही वाले हैं जो सोच रहे हैं कि कुछ कुछ ऐसा बोला जाए तो चलने दीजिए कोई बात नहीं जुड़ा है उसे पूरा सुनना चाहिए गुरुदेव

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01:42:25:20 के नाम का व्यापार इन्होंने क्या किया इन्होंने अपनी कौन सी प्रचार सामग्री में यह कहा कि आपको शंकराचार्य की शिक्षा जो है वो कराने वाली है योग। इन्होंने अपने कौन सी प्रचार सामग्री में शंकराचार्य का फोटो लगा दिया। है

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01:42:41:08 ना? प्रचार सामग्री में कहां दिखा दिया? इन्होंने अभी सुनिए सुनिए। अरे बस एक बात बोलूंगा। इसमें इसको जोड़ देता हूं। करते हैं ऐसा। मेरे यहीं सोसाइटी के नीचे जहां मैं वहां रहता हूं मैं जहां पर वहां पर वो बांटते हैं वो भगवत गीता। ये है ये है ये आईआईटी से इन्होंने एमटेक किया है। ये लीजिए भगवत गीता हरे कृष्णा भगवत गीता ये तो पूरा वो पूरा प्रचार करते हैं अपने गुरु का मतलब वो अपने उसके फाउंडेशन का नाम लेकर तो लोग तो करते ही हैं। तो इसमें गलत क्या है? नहीं पहली बात तो ये है कि क्या ये अपने

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01:43:15:25 आप को शंकराचार्य की शिष्या के रूप में बताते हुए अपनी चीजों को जो भी ये कर रही है धनोपार्जन का प्रयास करती है क्या पहली बात तो इसका कोई प्रमाण दिखाए ये अंत में मैं लूंगा ये सब बातें प्रमाण इसका कोई प्रमाण दिखा है मुझे कि क्या इन्होंने ऐसा किया है जिससे झड़कता है गुरुदेव के नाम का उपयोग कर रही है है ना दूसरी बात ये है कि क्या गुरुदेव के संपर्क में आने से पहले इनका जो आजीविकोपार्जन था वह बंद था? वो चल नहीं रहा था। योगा क्लासेस नहीं हो रही थी। मैं तो यह कहूंगा कि इन्होंने अगर उस दृष्टिकोण से देखा जाए भौतिक वादिता के दृष्टिकोण से तो इन्होंने तो अपने बसे बसाए घर में आग लगाई है। मनुवाद के सिद्धांतों को अपने प्लेटफार्म पर लाके। कौन से लोग हैं जो शंकराचार्य का नाम सुनकर के मन जो मनुवाद का विरोध वो आज जो मनुवाद से जुड़े नहीं मनुवाद को जानते नहीं है सनातन को जानते नहीं है कौन से लोग हैं जो शंकराचार्य का नाम सुनकर के प्रभावित होंगे

01:44:23:06 बल्कि बुरा मानेंगे हाउ डेयर यू भगवान कभी भेद कर सकता है क्या पुरुष और स्त्री में तुमने कहा कैसे गायत्री मंत्र नहीं जप सकती मैं तो जपूंगी और बुरा माना बुरा माना इनके जाकर के कमेंट्स देखिए कितना विरोध हुआ इनको तब इनको पता चला कि विरोध होता क्या है? क्योंकि उससे पहले तक मनुवादी नहीं थी तो प्यार ही प्यार मिलता था जनता का। हां बहुत अच्छे सुपर। वाओ ये सब होता था। स्त्री स्त्रियों का जन्म हो रहा है तो लोग पहुंच जाते हैं वहां पे। वाओ कांग्रेट्स कांग्रेचुलेशंस। ये सब होता है ना। तो यही सब होता था। अब जब इन्होंने मनुवाद की चीजें बताई थोड़ी सी तो इनका विरोध हुआ। तो इन्होंने तो अपने बसे बसाए घर में आग लगाई। कहां से गुरुदेव का नाम लेकर के इनका प्रचार हो गया? बढ़ गया इनका मामला। और कौन से इन्होंने पोस्टर में जो है लिख दिया कि शंकराचार्य जी जो है वो हैं। शंकराचार्य जी के हम शिष्य और हम तुम्हें योग सिखाने वाले हैं।

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01:45:21:10 अरे मैं अपनी बात बता दूं श्वेतांग जी कि मैं जब गुरुदेव को जाना था थोड़ा बहुत। कभी जान पाऊं भविष्य में पूरा तो बात अलग है मगर जो थोड़ा बहुत मैं जाना था ना गुरुदेव को मैं पागल हो गया था गुरुदेव को जानने के बाद शंकर शंकर भगवान स्वयं बैठे हैं मैं पागल हो गया था और मैं लोगों को जाकर के बताता था कि स्वयं शंकराचार्य शंकर भगवान की गद्दी है वो और लोग मुझे पागल समझते थे चाहे हवा आने दे क्या लेके आया है ये ये जो आहान के सिद्धांत है ना मूल जो मूलभूत पांच सिद्धांत है जिस पर आहान खड़ा हुआ है वो सारे सिद्धांत जब क्रमबद्धता से एक जो एक बुक के रूप में बना तो मैं उस बुक को पढ़ाने के लिए अपने मित्रों के पास जाता था अपने जो आसपास जो मुझे प्रबुद्ध लोग लगते थे उनके पास जाता था कि देखो देखो देखो शंकराचार्य कौन है जान लो धर्म को बचा लो ऐसे करता था जाकर के पागलों की तरह और वो लोग मुझे अनसुना करते थे मेरे मेरे नाते रिश्तेदार सगे संबंधी सब लोगों को मैं पीडीएफ भेजता था कि ये पढ़ो शंकराचार्य को जानो

01:46:36:21 कौन है शंकराचार्य बच जाओगे जानता नहीं है तू अभी शंकराचार्य को मगर वो लोग मुझे पागल समझते थे भाई अगर ऐसा ही होता तो वो सब लोग आज मेरे साथ खड़े हो जाते आज मैं ये लोग जो आरोप लगा रहे हैं इनहीं से पूछना चाह रहा हूं कितनों की कितनों की सेना तुमने खड़ी कर ली शंकराचार्य का नाम ले ले के कितने कितने लोग आते हैं शंकराचार्य का नाम सुन के तुम्हारे साथ? तो कैसा बेवकूफी भरा प्रश्न है। अब दूसरी बात कि इन्होंने जिस व्यापार से जोड़कर वो बता रहे हैं कि इन्होंने व्यापार किया। पहली

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01:47:12:00 बात तो गुरुदेव कर्म लिया नहीं। मगर इन्होंने किया क्या था कुंभ में? जो इनकी डेढ़ लाख की फॉलोइंग वाला पेज है उससे प्रभावित होकर किसी व्यापारी ने इनसे संपर्क किया कि हम लोग वहां पर शिविर अपने लगा रहे हैं जिनको हम जिनका हम किराया लेंगे अच्छा अच्छा और वो उन शिविरों का आप अपने सोशल मीडिया हैंडल से अपने सोशल मीडिया हैंडल से प्रचार प्रसार करिए। ठीक है? और उस प्रचार प्रसार को करने का इन्हें एक प्रॉपर उस कंपनी की ओर से उस व्यापारिक संगठन की ओर से एक मूल्य मिलने वाला था। ठीक है? तो इन्होंने भाई इनका आज भी पार्जन का माध्यम भी है ना वो तो इन्होंने उस कंपनी कंपनी से इन्होंने वो किया कि इन्होंने उसका अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म से प्रचारित किया। मगर ऐसा नहीं है कि कहीं लिखा हो कि शंकराचार्य के शिविर में आपको जगह मिलेगी। ठीक है? जी। मगर इन्होंने किस तरीके से अपने उस आर्थिक उद्देश्य में भी अपनी गुरु निष्ठा दिखाई वो मैं आपको बता रहा हूं। जो चार लोग जो चार लोग विदेश इत्यादि से आए थे जो

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01:48:25:25 धन के दृष्टि से देखे तो समृद्ध उनको कहा जाएगा। ऐसे लोग जिन्होंने 5000 दिए कुंभ में रुकने के वो 500 इनके पास नहीं आते थे। 500 में से एक अंश था जो इनका था वो इनके पास आता था। पहली बात कि सब कुछ खर्च होने के बाद जो इनके पास उस प्रचार से आया हुआ धन था वो इन्होंने मठ में दान कर दिया। जी ठीक है। और दूसरी बात यह है कि वो जो चार लोग इनके पोर्ट इनके माध्यम से उन शिविरों में रुकने आए थे खर्चा दे के

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01:48:59:10 उनमें से एक व्यक्ति आज की डेट में गुरुदेव का शिष्य है। तो ये गलत किया इन्होंने।

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01:49:07:06 उन लोगों को जब इन्होंने जब ये जो कंपनी है जो पैकेज बताती है कि आपको कुंभ में क्या-क्या मिलेगा। आपने कभी देखा हो आप अगर किसी टूरिस्ट प्लेस पर गए हो तो आपने देखा होगा कि वहां के जो टैक्सी ड्राइवर होते हैं वो उन चीजों को भी अपने पैकेज में लिख देते हैं जिन चीजों का कोई वैल्यू नहीं होती है। नैनीताल जाओ, शिमला जाओ ऐसी जगह पे अगर जाओगे तो उन चीजों को भी लिख दिया कि फलाना मंदिर आपको दिखाया जाएगा। कहा आपको हिमालय दर्शन मैं एक बार नैनीताल जब गया था तो मुझे कहा गया कि हिमालय दर्शन आपको कराया जाएगा तो उसमें जो टूरिस्ट जो टैक्सी वाले होते हैं वो अपना जो कार्ड बना के रखते हैं उसमें एक कई सारे पॉइंट थे एक ही चीज थी नैनीताल में घूमने वाली जो मुख्य थी एक दो चीज और उसके अलावा उन्होंने 101 चीजें उसमें लिख रखी थी उसमें से एक था हिमालय दर्शन तो मैंने कहा बहुत बढ़िया हिमालय दर्शन हो जाएंगे आज तो बहुत अच्छा पैकेज है तो मैंने ले लिया और लेने के बाद जब मैं उसके साथ चल रहा था तो उसने रास्ते में एक कहीं सन्नाटा था। वहां गाड़ी खड़ी की कि आपका एक स्पॉट आ गया टूरिस्ट स्पॉट। मैंने कहा कौन सा स्पॉट है? हिमालय दर्शन। मैंने कहा कैसे? रोड के रोड से वो देखो हिमालय दिख रहे हैं। वो जो है धुंधले

01:50:23:15 तो क्या करते हैं? लोगों को आकर्षित करने के लिए जो टूरिस्ट कंपनीज होती हैं टूरिस्ट वाली वो अपने पैकेज को ऐसा बनाती है कि तुम्हें केवल एक चीज नहीं मिल रही। बहुत सारी चीजें मिल रही है। ऐसा बनाएंगी उसमें बहुत सारी चीजें लिखेंग तो उनमें से एक चीज लिखी हुई थी कि आपको कुंभ में घूमने के लिए प्रॉपर एक गाइड मिलेगा। बताने वाला मिलेगा, मार्गदर्शक मिलेगा। अब इनके माध्यम से वो लोग वहां गए मगर वो जो वो वाला जो पॉइंट है ना गाइड वाला उसमें भी इन्होंने ये किया कि कुंभ की इंपॉर्टेंट जो उनको क्लेम किया गया था कि आपको कुंभ की इंपॉर्टेंट चीजें दिखाई जाएंगी तो ये दिखा सकती थी योगी का मठ दिखा सकती थी योगी जी का मठ है या ये दिखा सकती थी और भी कुंभ में ऐसी चीज है चेत राम पराठे वाले को दिखा सकती थी चेत राम का आलू कुलचा खाओ भाई ये दिखा सकती थी वहां पर शिवालय पार्क बना हुआ है वो दिखा सकती थी। मगर इन्होंने उनको क्या दिखाया? इनको जब इंपॉर्टेंट चीजें उनको दिखाने की बारी आई तो इन्होंने उनको शंकराचार्य का शिविर दिखाया। वो शंकराचार्य जहां पर आपको भौतिक दृष्टि से कुछ नहीं

01:51:38:24 मगर आध्यात्मिक दृष्टि से संपूर्ण खजाना मिलता है। इन्होंने वो द्वार दिखाया जहां से तू मुक्त हो सकता है। जो तू 84 लाख योनियों में फंसा हुआ आज यहां पहुंचा है। इन्होंने उनको वो द्वार दिखाया। तो वो द्वार दिखाना गलत था। वो व्यापार था। उन चारों में से एक ने तो वहां पर गुरुदेव से दीक्षा ली। वो आज की डेट में गुरुदेव का शिष्य है। गुरुदेव के अनुसार मंत्र का जाप कर रहा है। अपने अधिकार की सीमा में। तो वो गलत था। नहीं करना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति हमसे हमारे आजीविकोपार्जन के माध्यम से जुड़ा है तो उसको नहीं बताना चाहिए कि जा भाई जान ले शंकराचार्य है अभी भी नहीं बताना चाहिए। जी जी विजय जी आपको कुछ कहना है इसलिए देंगे कि जब हम सबसे पहले तो उनका जो हमारा शिविर का लोकेशन था वो था अरेल मतलब कंप्लीटली डिफरेंट साइड। सो इसीलिए मैं बोल रही थी कि जिन लोगों ने रिसर्च किया है वो थोड़ा और समय बिताते क्योंकि चैनल पर आकर बोल देना और उसके बाद मतलब मजाक आपका ही बन रहा है क्योंकि आपकी रिसर्च पूरी नहीं थी। तो इसीलिए हम काफी हंसे भी बहुत कुछ देखकर। अब बात यह है

01:52:54:06 कि मेरे पास इसका मतलब प्रूफ भी है अगर कोई बोले प्रमाण दिखाइए कि सारा जो कुंभ का पैकेज था वो हमारा इट्स ये मेरा जो सेक्टर है काम का ये आता है रिट्रीट्स में हम पहले भी करते थे अभी भी किया है आगे जाके भी करते ही रहेंगे अब क्योंकि ये महा में था और कुंभ के अंदर उस समय आप लोगों को पता ही है कि तीन चीजें बहुत फेमस थी संगम नागासाधु और किन्नर अखाड़ा सही बात है तो पर जो एक्चुअल एसेंस है कुंभ का उसके बारे में कोई वो नहीं था और हम आज इस पब्लिक प्लेटफार्म पे घोषित कर देते हैं बता देते हैं ताकि आगे जाके कोई कंफ्यूज ना हो हम अपने काम में जितना आगे बढ़ेंगे जितना हम लोगों को जोड़ पाएंगे चाहे वो मेरे मित्र हो चाहे वो मेरे स्टूडेंट हो तो हम उन्हें गुरुदेव के साथ जोड़ेंगे। क्यों? क्योंकि हम गुरु नहीं है ना ही हम आचार्य हैं। ठीक है? हम एक टीचर हैं और एक मेंटोर समझ लीजिए और हम हमेशा अपने आप को वैसे ही क्लेम किया है और करेंगे भी तो पर लोगों को आवश्यकता है गुरु की और हम उनको अपने अगर हमें लालच होता तो हम ही गुरु बन जाते ना। लोगों को तो उल्टा और अच्छा रहता है कि हां आप ही बनिए पर हम उन्हें

01:54:09:13 गुरुदेव के पास लेके आते हैं। अब एक और बहुत महत्वपूर्ण बात यहां पे यह है क्योंकि शायद ऐसा प्रश्न किसी के मन में आ सकता है। जब हमने उनको यह पैकेज दे दिया था सब ऑलरेडी ऑन बोर्ड थे। उसके बहुत दिनों बाद जाकर हमने ग्रुप के अंदर जो हमारा ग्रुप था उसमें मैसेज शेयर किया था जिसके अंदर यह लिखा गया था कि शंकराचार्य पूरी मठ के शंकराचार्य से मिलने की। ठीक है? क्योंकि बाकी जगह वो जहां घूमे हमें उससे इतना कुछ वो मतलब नहीं है। वहां पर यह लिखा गया था कि पूरी मठ के शंकराचार्य के शिविर में आपको उनके दर्शन करने के लिए मिलेंगे और जिनको भी उनसे दीक्षा चाहिए वह बता दीजिए। यह जो पर्टिकुलर पार्ट है यह एज अ सेवा हम आपको दे रहे हैं क्योंकि हम उनके शिष्य हैं। दिस वाज़ नॉट इंक्लूडेड इन द पैकेज। किसी भी पैकेज के अंदर में हमारे पास पीडीएफ है। अगर किसी के पास पीडीएफ हो तो उसके अंदर यह कुछ इंक्लूडेड नहीं था कि हम शंकराचार्य के वो हैं उन्हें वहां लेके जाएंगे और उस हिसाब से यह किया जा रहा है। और क्योंकि हम नहीं चाहते हैं क्योंकि ऐसा है भी नहीं। है ना? दीक्षा के लिए किसी से कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। कोई भी आकर गुरुदेव के दर्शन कर सकता है। तो ये चीज मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण थी कि ये ऑलरेडी बता दी जाए क्योंकि क्योंकि अगर

01:55:24:19 इस पर कभी भी कोई बात होगी तो वो मठ की इमेज पे आती है और हम नहीं चाहते हैं कि कोई भी चीज आए। तो हम ऑलरेडी मतलब हम भी कुछ चीजें सोच कर ही किए थे। तो ये वो बात थी। बाकी वो कैसा गया? बहुत अच्छा गया। सब बहुत खुश थे। लोगों को पता ही नहीं था। जैसे काफी लोगों को पता ही नहीं है शंकराचार्य कौन है नहीं है। जिस व्यक्ति की दीक्षा हुई यदि अगर आप उससे बात कर लेते वह तो गदगद हो चुका था। मतलब वो इतना वो था वो मतलब वो तो कह रहा है वो और एक और बात बताते हैं आपको विदेश का बोल रहा है ना वो व्यक्ति साउथ इंडियन है। विदेश में रहता है। है ना? पर वो व्यक्ति दीक्षा के बाद यह बोल दिया है कि कुछ सालों में वो इंडिया वापस आएगा और अपनी साधना उपासना में लगेगा। तो यह प्रभाव है। है ना? ये अचीवमेंट्स हैं और और ये उन लोगों को प्राप्त होते हैं जो घर से निकलते हैं। मिल जाते हैं जी मिल जाते हैं एक मिनट एक मिनट

01:56:24:00 मिल जाते हैं सारे रंग इसी मिट्टी के रंग में और गिरते हैं वीर जियाले ही मैदान जंग में

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01:56:33:06 तो ये अचीवमेंट्स हैं और ऐसे प्रयास करते समय कुछ अगर मैं कह रहा हूं दुर्जन तोष न्याय से कोई अगर किसी से कोई गलती हो भी गई तो उसका निवारण करना चाहिए कि तुम्हारा दुरुपयोग दूसरे करेंगे इसलिए मैं दुरुपयोग कर रहा हूं। वाह सही बात है। तो जो उनको एक दिया गया था ना कि इंपॉर्टेंट चीजें आपको दिखाई जाएंगी। वो अलग दिखा दी। फिर भी एक उनके सामने एक भूमिका तैयार करके और एक सबसे इंपॉर्टेंट चीज के रूप में गुरुदेव के मठ का रास्ता दिखाना गुरुदेव से दीक्षा दिलवाना ये सब आपके लिए व्यापार है। हां और ये बताना भी कि ये निशुल्क है ताकि वो व्यक्ति मतलब जिस तरह से बाकी जगहों पे चल ही रहा था बड़े-बड़े गुरु उनके नाम पे चल रहा था उस समय कि 15,000 दीजिए तो ही अंदर आ पाएंगे। आप समझ रहे हैं पर हमारे यहां पर ऐसा कुछ भी नहीं था। जी श्वेता जी मैं विजय जी से पूछ रहा था कि आपको गुरुदेव से मिलवाया किसने? ये मुझसे पूछ रहे होंगे आप। नहीं नहीं मैं तो विजय जी से पूछ रहा हूं।

01:57:49:01 चलिए मैं पहले बताता हूं। यह सवाल यह प्रश्न असल में मेरे लिए है कि मैंने विजय जी को गुरुदेव से मिलवाया से मिलवाया है। तो अब मैं इससे प्रश्न करता हूं मैं कि आपने ऐसे विवाद से हमें उत्तर देने दीजिए। हम थोड़ी भूमिका बना देंगे तो उनकी भूमिका में और मतलब और अच्छा लगेगा। हमें गुरुदेव से मिलवाने वाले वह वह व्यक्ति हैं जिन्हें दो-तीन दिन पहले मेरे जीवन में सोचिए दो-ती दिन पहले हम एकदम कंफ्यूज हो गए थे क्योंकि हमें दिख रहा था हम कुछ समय पहले एस्कॉन होकर आए थे। एस्कॉन के अंदर नित्यानंद जी के जन्मदिवस की प्रोग्राम चल रहा था। मैं और मेरा मित्र गए थे कि मतलब चलो कृष्ण मंदिर होकर आते हैं। मतलब वो मेरे भाई जैसा ही है। हम लोग मंदिर के वो हैं। है ना? मंदिर वाले भाई बहन कि अगर कहीं जाएंगे तो मंदिर चलते हैं। तो हम उस व्यक्ति के साथ गए वहां पे और उनका प्रोग्राम चल रहा था कृष्ण जी का और नित्यानंद जी का। फिर उसके बाद जो मतलब लेक्चर बोलेंगे हम उसको। हम उसको सत्संग नहीं बोलेंगे क्योंकि वो एक लेक्चर था। अब वो लेक्चर में वो व्यक्ति ने ये और वहां पर महिलाएं बैठी हैं। ठीक है?

01:59:04:02 महिलाएं बैठी हैं और उनके सामने वो बोलता है कि दुर्गा मां जेलर है। दुर्गा मां की पूजा जो करता है उसे मोक्ष नहीं मिलता है और दुर्गा मां की पूजा नहीं करनी चाहिए क्योंकि मोक्ष तो हमें कृष्ण से मिलता है और कुछ दो चार पांच उसने अपने संस्कृत में श्लोक बता दिए और सब उसे सुन रहे हैं और मैं और मेरा जो मित्र था हम एक दूसरे को देख रहे हैं कि ये क्या बोल दिया है। अब चलिए वो घटना हट गई। उसके कुछ दिनों तक फिर उसके बाद वो नहीं होता है कि आपका फोन आपको जानता है कि क्या चल रहा है। उसने सुन ली है आपकी बातें तो वही सब दिखता है। तो मैं और मेरा मित्र परेशान है। गंगा जी पे बैठ के बात कर रहे हैं। ऐसे कैसे वो बोल सकता है? ये क्या बात हो गई? ये सब बातें चल रही हैं। तो हम काफी परेशान थे कि इसका करें क्या? फिर कुछ दिनों बाद हमें Instagram पे दिखते हैं एक व्यक्ति जो एस्कॉन के व्यक्ति के साथ माइक लेकर सड़क पर खड़े हैं और उस पूरे संवाद में उनसे पूछा जा रहा है। हम बोल रहे हैं वाह कोई तो मतलब मेरे मेरे भावनाओं को आवाज मिल रही है। हमें ऐसा लगा। फिर उसके बाद हमें ये था। हमें उम्मीद ही नहीं थी कि यह व्यक्ति मतलब जो ऑन ग्राउंड इतना काम कर रहा है वह हमारे मैसेज का रिप्लाई भी करेगा या हमें सीरियसली भी लेगा और उस समय ऐसा नहीं है कि मेरा फॉलोविंग नहीं था। था

02:00:19:15 बट मतलब मेरे मन में इतना सम्मान था इस व्यक्ति को लेकर कि इन्हें किसी का भय ही नहीं है। है ना? बोलने का भय होता है और ये डाल दिया और ये पहली बार हम देख रहे थे इंटरनेट पे किसी ने स्क का मतलब इस तरह से जाके शुरू किया और उस पूरे संवाद में हम मेरे मेरे हृदय से सम्मान और उस समय बढ़ा जब वीडियो के एंड में वे ये व्यक्ति बोलते हैं कि भाई को भाई से दूर किया जा रहा है यह ना बोल के कि तुम गलत हो और हम ठीक हैं और यह व्यक्ति थे शिवश द्विवेदी जी और हम यह भी बता देंगे कि हम उनसे जब जुड़े हैं एकदम से उन्होंने हमें यह नहीं बोला आप जाके दीक्षित हो जाइए या ये लीजिए मठ में जाइए ऐसा कुछ नहीं था तो हमें शिवश जी ने ही जोड़ा है और हम इस तरह से इनसे जुड़े थे तो तब तो शिवाश जी आपसे प्रश्न उठता है फिर ये कि आपने ऐसे विवादास्पद व्यक्ति को मठ से जोड़ा क्यों? मैं तो ये कहूंगा कि कौन व्यक्ति है जो विवादास्पद नहीं है? अगर यह विवादास्पद है तो वो मेरे सामने आ जाए। कौन व्यक्ति है जो विवादास्पद नहीं है? पहली बात। दूसरी बात यह है

02:01:34:27 कि क्या मैं जो ये प्रश्न कर रहे हैं कि मठ से क्यों जोड़ा? पहली बात तो मठ से जोड़ना किसे कहते हैं? और दीक्षा लेना किसे कहते हैं? क्या इनमें अंतर है? नहीं है। अगर है तो क्या है? और नहीं है तो फिर ये बात कैसे कही जा रही है? इन सब बातों की मीमांसा होनी चाहिए। उसके बाद मैं सीधी बात एक पूछूंगा क्या हम गुरुदेव के प्रति लोगों के मन में निष्ठा भाव उत्पन्न करना बंद कर दे तो फिर कौन सा प्रचार हमें करना है कौन सा अभियान का प्रचार करना है कैसे प्रचार करना है वो एक नियमावली बनाएं और उस पर गुरुदेव के हस्ताक्षर कराए हमें दे दे या फिर गुरुदेव के मुखार बिंदु से हमें सुनवा दे हम वो करने लगेंगे भाई गुरुदेव के प्रति लोगों में निष्ठा गुरुदेव के सिद्धांतों के प्रति सनातन सार्वभौम सिद्धांतों के प्रति सर्वशक्तिमान ईश्वर के प्रति परम स्वतंत्र मोक्ष के प्रति शाश्वत धर्म के प्रति लोगों में निष्ठा उत्पन्न करना कराना बंद कर दें। लोगों को ये बोलना बंद क्योंकि कोई अच्छा मेरा क्या है? मैं इसमें थोड़ा मुझे अपने आप कहना कि शंकराचार्य से दीक्षित हो जाओ। यह कहने में मुझे दिक्कत होती है। मैं नहीं कहता कभी भी

02:02:49:27 मुझे भी मुझसे कोई भी कहता है मुझसे कोई भी पूछता है कि कौन है असली गुरु कौन है? तो मैं ये नहीं कहता असली गुरु शंकराचार्य जी है। मैं उसे सिद्धांत बताता हूं। आपने मुझे कभी नहीं बोला कि आप जाकर दीक्षित हो जाइए। हां मैं उसे सिद्धांत बताता हूं। उस सिद्धांत के बाद वो खुद अपने बुद्धि और विवेक से तय करें कि कौन गुरु हो सकता है। तो यही बात इनके साथ थी। मैंने इनको कभी नहीं कहा था कि गुरुदेव से जाकर के दीक्षित हो। पहली बात तो क्या नहीं कहना चाहिए मगर मैं कह रहा हूं मैंने नहीं कहा था इनके मन में और अपने आप स्वतः श्रद्धा उत्पन्न हुई और इनको ये लगा कि मुझे जगतगुरु शंकराचार्य जी से दीक्षित होना चाहिए और मैं बता दूं इस समय जो भी आहान से जुड़े हुए गुरुदेव से जुड़े हुए आहान के निमित्त मात्र सहयोग से जुड़े हुए गुरुदेव को मानने वाले जितने भी लोग हैं वो लोग ये जानते होंगे इस सत्य को कि मैंने कभी भी किसी से ये कहा हो कि जाओ जाकर शंकराचार्य से तुम दीक्षित हो जाओ। ये मैंने कभी नहीं कहा किसी से भी। अगर जब भी बात आती है तो अगर वो ऑप्शन भी मानता है ना सामने वाला तो मैं सारी प्रामाणिक परंपराओं के जितने आचार्यों के नाम मुझे मालूम है मैं उनके नाम लेता हूं कि श्री संप्रदाय से ले लो। मधवाचार्य संप्रदाय से ले लो। अभी तो गड़िया वैष्णव संप्रदाय से भी

02:04:05:22 वो भी संप्रदाय प्रामाणिक क्या कहते हैं माना जा रहा है। तो उससे ले लो। मैं सबको मैं सबकी बात करता हूं। मैं केवल यह नहीं कहता हूं कि नहीं नहीं शंकर परंपरा से ही लो मगर मैं तीन चीजें बता देता हूं जहां से भी आपको ये संतुष्टि मिल रही हो आपका संशय दूर हो रहा हो वहां से ले लो और ये परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म और सर्वशक्तिमानी ये तीन चीजें आपको जहां से मिल जाए वो ले लो सिंपल वेद में प्रमाण्य बुद्धि होनी चाहिए वर्णाश्रम धर्म ही होना चाहिए और लक्षण ले लो हम तो मैं ऐसे करता हूं पर फिर भी पर पर फिर भी मैं ये कहूंगा कि क्या हमको गुरुदेव के प्रति आस्था करना मठ के प्रति सनातन सिद्धांतों के प्रति धर्म के प्रति भाई गुरुदेव का अर्थ क्या है शंकराचार्य का अर्थ क्या है लोग ये कहते हो कि शंकराचार्य का अर्थ है कि शंकर परंपरा के गुरु मगर शंकराचार्य का अर्थ है धर्म शंकराचार्य का अर्थ है ईश्वर जी तो क्या व्यक्ति को धर्म और ईश्वर से जोड़ना बंद कर दे ये कैसा बेवकूफी भी भरा सवाल है। गुरुदेव स्वयं कहते हैं कभी भी स्वयं से मत जोड़ो। सदैव धर्म से जोड़ो। ईश्वर से जोड़ो। गुरुदेव भी वही कहते हैं

02:05:20:24 और मेरी गलती शायद यह है इन लोगों के अनुसार कि गुरुदेव के वाक्यों को केवल सुना नहीं है। उनको तुरंत इम्प्लीफाई किया है। दिक्कत ये है इन लोगों ने इम्प्लीफाई नहीं किया जो ये प्रश्न कर रहे हैं। तो ये अपने आप में ही एक मूर्खता पूर्ण सवाल है कि तुमने व्यक्ति को धर्म से धर्म से क्यों जोड़ा? ईश्वर से क्यों जोड़ा? और शंकराचार्य से क्यों जोड़ा? भाई हम जोड़ेंगे और तोड़ेंगे भी जो सवाल करेगा उसको। तो फिर यह बताइए कि इस प्रकार के जो संशय उत्पन्न हो जाने मात्र से या मात्र हो जाने मात्र के आधार पर जो विरोध करने वाले वाले जो लोग हैं ठीक है जो उन्होंने इस संशय होने की स्थिति में जो कार्य किया है वो ना करके क्या कर क्या करना चाहिए था आपके साथ

02:06:11:26 देखिए हमने इस बारे में पीछे से जब उत्तर देते आ रहे हैं तो कई बार बता दिया है कि अगर आपको संशय हो भी रहा है कि रिदमम कपूर मठ में रह रही हैं। ये संशय है क्योंकि रिदमम कपूर मठ में नहीं रह रही है। ये वास्तविकता है। इसका एक उदाहरण दे दूं आपको। किसी व्यक्ति ने आक्षेप जब ये लगाया कि वो मठ में रह रही हैं। ये विजयश्री तो उसने खुद बोला कि मैं इतना बड़ा गुंडा हूं कि मैं ऋषिकेश में ही तुम्हारा इंतजाम करवा दूंगा। अगर तुम लड़का होती तो मैं शांत हूं। अभी वो धमकी दे रहा है। वो व्यक्ति धमकी दे रहा है। भाई कुछ कटाक्ष उसने किए, कुछ कटाक्ष इन्होंने किए। भाई कटाक्ष करोगे तो कटाक्ष सहने की क्षमता रखो। तो तुम इस पे आ गए कि अगर तुम लड़का होती तो तुम्हारा ऋषिकेश में इंतजाम करा देता। मैं लखनऊ में रह रहा हूं। मेरा इंतजाम करा दे भाई। मैं लड़का हूं। करा दे मेरा इंतजाम। छाती ठोक के तैयार हूं। बोल करा क्या? इंतजाम करा रहा है और दिल्ली में करा दे आगरा में करा दे या कहां कराएगा वहां बता दे व आ जाऊंगा एक और बात बताते हैं ये एक मिनट जी एक मिनट एक मिनट मैं बता रहा हूं बैठे हैं तू भारतवर्ष में कहीं भी बता दे मैं वहां खड़ा हो जाऊंगा पता कहां इंतजाम कराएगा मैं लड़का हूं ना मैं तो पुरुष हूं करा दे

02:07:26:28 मेरा इंतजाम बहुत बड़ा गुंडा है तू तू अगर कोई गुंडा है ना और तेरे पीछे तू जानता हो कि बहुत सारे लोग हैं ये है वो है तो मेरे पीछे राम है समझा तो वो इनको गुंडा ही बताने लगा अब बात क्या चल रही है कि विजय जी मठ में रह रही है मगर वो गुंडा खुद कह रहा है कि मैं तेरा इंतजाम ऋषिकेश में करा दूंगा मतलब वो ये जानता है कि ये ऋषिकेश में रह रही है ये गुरुदेव के शिविर में नहीं रह रही है मगर पता नहीं क्या वो एक वो है क्या कहेंगे उसको तरंग तरंग है एक कि सब लोग विरोध कर रहे हैं तो मुझे भी करना है। मुझे जबरदस्ती का वो नेता बनना है लोगों का और जब कुछ करने धरने की बारी आएगी तो मुंह छुपा लेंगे। है ना? मुंह छुिपा लेंगे। बोला तो मैंने जाओ कराओ अपने शहर को। रामपाल से मुक्त करा दो। मैंने तो कराया है। बोल रहा हूं भगवत कृपा से। तुम करा दो। क्यों नहीं करा पा रहे हो? सब लोग जहां जहां पर हैं जितने भी दंभी हैं जो बोल रहे हैं सब लोग अपने अपने शहर में रामपाल से मुक्त कराओ किताबें बिकना बंद करवाओ आग लगवाओ रामपाल के स्टॉल

02:08:42:07 में जाकर के नहीं करा पाओगे उसके लिए गुर्दा चाहिए केवल बातें छोंक लेने से इंटरनेट पर आकर के वो नहीं होती है क्रांति समझे तो अब ये जो लोग हैं इनको करना क्या चाहिए था अगर तुम्हारे हमारे मन में संशय उत्पन्न हो रहे हैं कि वो खाना बांटती हैं या उनका जो है वो मठ में से बात करती हैं या वो मठ में रहती हैं तो इन संशयों को लेकर के जिगरा लाओ जिगरा जाओ गुरु के पास ओ भगवतानंद जी ने एक जगह सही कहा है जाओ साहस दिखाओ साहस का उपयोग करके अपने गुरु को सारी बातें बताओ जो जो तुम्हें संशय है क्यों नहीं जा रहे हो मैं कह रहा हूं तुम लोग इतनी बातें करते हो मेरे पास प्रमाण ले आओ। मैं लाउडस्कर लेके खड़ा हो जाऊंगा मटके बाहर और बाहर से अनाउंसमेंट करने लगूंगा। मार डाले कोई मुझे मेरे पास लेके आओ प्रमाण। यही यही इसी पे एक प्रश्न उठता है जो जैसे जिसे मैं बोलता हूं करपात्र स्वामी गॉड मोड ये क्वेश्चन ही है क्योंकि जब करपात्री जब किसी से साक्षात करते

02:09:57:13 थे ना तो वो पहले बात सुनते थे और फिर उसको बताते थे तुमने ये पॉइंट मिस कर दिया ये पॉइंट मिस किया तुम ये भी बोल सकते थे ये भी बोल सकते थे और उसके बाद बताते थे कि अब सुनो इसका जवाब तो यही मैं आपसे प्रश्न पूछ रहा हूं कि आप आक्षेपकर्ताओं के आक्षेप में मुख्यतः जो जो अभाव है वह किस तत्व का है मतलब कहां वो पीछे रह क्या कमी रह गई उनकी देखिए आक्षेपकर्ता जो हैं अब मैं यहां पे बात करूंगा सबसे पहली बात है कि इनकी सभी बातों में अस्पष्टता है। जी अगर आक्षेपकर्ताओं से पूछा जाए कि तुम्हारी समस्या क्या है? हम हम तो वो आपको एक पंक्ति नहीं बोल सकते स्पष्ट। तुम्हारी समस्या यह है कि इनका जीवन ऐसा क्यों था? तुम्हारी समस्या ये है। देखिए कितनी बार पलटी मारी है। इसी से पता चल जाएगा। समस्या क्या शुरू होती है कि वो मठ में क्यों है? मठ में तो है ही नहीं। फिर क्या आता है कि उनकी ऐसी फोटो क्यों है? भैया फोटो तो पूर्व की है। फिर आता है कि फोटो आईडी पे क्यों है? अरे भाई जब पूरे उनके उनकी बुक टप चुकी है। उसके माध्यम

02:11:12:16 से वेबसाइट के माध्यम से उनकी फोटो प्रचारित है। कोई अभिनेत्री इन पर दबाव डाला गया कि फोटो डिलीट कर दो। आपकी आईडी पे क्यों है? कोई अभिनेत्री अगर गुरुदेव की शरण में आएगी तो क्या वो पहले से आकर के अपनी सारी फिल्में जितनी उसने फिल्में बनाई होंगी क्या वो सारी फिल्में पहले डिलीट कराएगी तब आएगी? क्या? हम कोई पुरुष अगर गुरुदेव की शरण में आएगा तो यदि वो अभिनेता होगा विराट कोहली होगा तो अपने सारे क्रिकेट मैच मिटा देगा क्योंकि उसने उस गेंद से खेल खेला है जिस गेंद में गाय का वो यूज़ होता है वो पहले अपने सारे क्रिकेट मैच मिटवाएगा तभी आ सकता है अन्यथा आ ही नहीं सकता तो ये तो बात ये इसका ना सर है ना पैर तो इनके तथ्यों में इन्होंने जो आक्षेप लगाए हैं, आक्षेपकर्ताओं ने जो आक्षेप लगाए हैं, इनके वक्तव्यों में, इनके आक्षेपों में प्रमाण की तो कमी प्रमाण तो है ही नहीं। प्रमाण का तो अभाव है। बाकी ना तर्क है, तर्क भी नहीं है। अच्छा, है क्या? फिर प्रमाण के नाम पर पता है क्या है? मैं 5 साल से जुड़ा हूं। मैं सब जानता हूं। हां

02:12:28:02 तुमको नहीं पता है। मैं मैं जानता हूं आगे क्या होगा। ये प्रमाण है भाई। इनके ऊपर युद्ध लड़े जाते हैं क्या? अभी का ही नहीं पता उन्हें पर उन्हें बेवकूफ लोग हो क्या? बेवकूफ हो क्या? बिल्कुल इनके ऊपर इनके ऊपर युद्ध लड़े। अरे मेरे पास लेके आओ भाई प्रमाण। तुमने प्रमाण कुछ दिखाया नहीं। यहां की फोटो जोड़ के कुछ एडिट कर दिया। वो दिखा दिया। यह प्रमाण नहीं है। यह प्रमाण नहीं है। आप आपत्तिजनक दृश्य दिखाइए कि मठ में इनका आपत्तिजनक दृश्य क्या है? मठ में खाना बांटते हुए दृश्य दिखाइए। गुरुदेव से दीक्षा लेने के बाद इनका उस तरह के वस्त्र पहनकर योगा सिखाना दिखाइए। अगर इन आपको लगता है कि इन्होंने व्यापार किया तो प्रमाण दिखाइए। खोखली और छिचली बातें मत करिए। मुझे दिखाइए। मैं करूंगा इनका प्रतिकार। पर प्रमाण तो है ही नहीं। जब उस बात में कोई सच्चाई होगी, तथ्य होगी तब तो बात होगी। तो उस बात में कोई प्रमाण नहीं

02:13:35:00 है। अच्छा अब मैं बताऊं ये सब बना कैसे? पूरा सिनेरियो कैसे बना है। अभी कुछ समय पूर्व की बात है। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को ले लो। ठीक है। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में भी कोई तर्क प्रमाण नहीं था शंकराचार्यों के विरोध में। मगर उन्होंने कहीं पर ये कह दिया तो उस बात को उससे जोड़ के दिखा दिया। रील बना दी ऐसेसे करके वो हुआ। तो ये सारी बातें हैं। ना तो इनके पास प्रमाण है ना ही इनके पास वो तर्क है कि मजबूत तर्क ही हो जिन पर बात बन जाए। तर्क में क्या आता है? बस मैं इनका अहंकार इनको लगता है कि ऐसा होगा इसलिए ऐसा होगा मान लो और इनको लगता है कि ऐसा हुआ है इसलिए ऐसा मान लो भाई हम किसी भी महत्वपूर्ण व्यक्ति के विषय में खासतौर पर शंकराचार्य से जुड़े हुए व्यक्ति के विषय में कोई भी कदम उठाने से पहले हमको ठोस प्रमाण चाहिए होगा ना भाई कि बातें ले ले हम तुम्हारी केवल वो तो है नहीं बस बातें छुपवा लो लाइव लाइव चालू चालू कर लो और दो चार 10 20 वो लोग हैं जो जिन्हें तुम्हें लगता हो कि तुम उनके आचार्य बन गए हो नेता बन

02:14:50:00 गए हो उनको अपनी बातें सुना लो ये सब है और क्या है ठीक है प्रमाण नहीं है से तो हां इसी को कंटिन्यू करते हुए एक प्रश्न पूछ रहा हूं क्षमा करिएगा ऐसा बोलना पड़ रहा है मुझे तो लेकिन ऐसे लोगों ने ऐसा प्रश्न पूछा कि ठीक है चलिए मान लिया कि विजय जी के आपने आपने उनको बताया कि उनका पूर्व जो समय था उसमें वो ऐसी थी अब वो बदल गई तो इसका मतलब तो अर्थ लोग ये कह रहे हैं कि इसका अर्थ ये हुआ कि मठ के परिकर जो है वो वो उनमें दोष है। नहीं पहले वो सिद्ध तो करें कि ऐसा हुआ है तब तो वो दोष सिद्ध होगा। वो सिद्ध तो करें पहले भाई कोई ठोस प्रमाण क्यों नहीं लाते? अब देखो ऐसा ऐसा है जैसे नहीं वो दोनों बात कह रहे हैं ना मतलब एक पहले तो विजय विजय जी को बोला कि हां भाई गलत है गलत है गलत है गलत है फिर उसके बाद जब वो उससे बात नहीं बनी तो अरे नहीं नहीं चलो ये तो चलो ठीक है जो हो गया सो हो गया इनकी गलती क्या है चलो उनकी गलती में कर भी देते हैं गलती तो फिर भामठ के परिक परिकरों की है उनकी ज्यादा गलती है तो तो ये ये फिर ये प्रश्न वाला ये प्रश्न कई लोगों ने बैक टू बैक पूछे हैं चार्ट गलती है कि वो जो लोग आते हैं उनसे बात करते हैं और उनको

02:16:05:06 बताते हैं कि मठ का अनुशासन तो यह कहूंगा आप इसके संबंध में गुरु वाक्य या सनातन सिद्धांत ही दे दो ना बात खत्म हो जाएगी बात नहीं करना है परिककरों को हां हां क्या बात बिना बात किए मतलब आप जाने समझेंगे क्या मतलब मूर्ख बन के बैठे थोड़ा इन मूर्खों वो तो इन मूर्खों से पूछो ना अरे सबर समय नहीं मिलता। मैं मैं बताता हूं अपनी बात कि मैंने कितनी बार ऐसे प्रश्न करता हूं मैं और मैंने डांट खाई है। मैंने एक बार श्री ब्रह्मचारी जी से प्रश्न किया था। उन्होंने मुझे डांट दिया। तो इसका मतलब ये थोड़ी ना है कि वो गलत है या बुरे हैं। ऐसा तो नहीं है। जिसका हर चीज का समय और अपना अनुशासन होता है ना। मैं उस अनुशासन का लांघा तो मैंने डांट खा ही तो बिल्कुल ठीक है। उसमें ठीक है। लेकिन लेकिन इसका भाई मैं मैं तो सीधी बात कह रहा हूं कि अगर किसी को लगता है कि ऐसा गलत हो रहा है वो प्रमाण लेकर के मुझसे संपर्क करें। मेरा नंबर है 740 जी 830869 वो संपर्क करें मुझसे प्रमाण लेकर के Google मीट इत्यादि पर मीटिंग करेंगे और देखते हैं डिसाइड करेंगे क्या करना है क्या नहीं करना है होगी सो राम की और बाकी सब हनुमान की पर कोई ऐसा नहीं माई का लाल आता

02:17:20:07 है जो प्रमाण लेके आए ठोस वो कहीं की ईंट कहीं का रोणा भानुमती का कुरवा जोड़ा कुछ की कुछ जाता ये देखो ये ये देखो स्क्रीनशॉट मैंने ले लिया ले लिया बहुत बड़ा क्या है उस स्क्रीनशॉट में दो व्यक्ति उसमें दो लोगों के चेहरे दिख रहे हैं। क्या करूं उस प्रमाण का मैं? ठीक है। हां मैं दो दो चीजें इसमें ऐड करूंगी। पहली बात तो ये है कि परिकर सबसे उनका काम ही सबसे बात करना है क्योंकि हिंदू राष्ट्र अभियान के साथ सबको जोड़ना है। और यदि कोई खो जाए मठ में या कुछ कर ले मतलब गायब थोड़ी खेल रहे हैं मठ में जाके सब। है ना? तो परिकरों का काम ही वो करना है। इसमें परिकर गलत कैसे हो गए? हम वही बोल रहे हैं। फिर से वो गुरु द्रोही वाला मेरे तो दिमाग हमारे दिमाग में वही चलता रहता है। वो गुरुदेव का एक बार अरे मैं तो ये कह रहा हूं मैं तो ये कह रहा हूं इनकी जो बातचीत हुई है मेरे सामने इनकी बातचीत परिकर से मेरी बातचीत परिकर से गुरुदेव के सामने हुई है। गुरुदेव देख रहे हैं। तो आप अगर गुरुदेव को वो कर रहे हो। आप स्वयं को दावा कर रहे हम गुरुदेव के समर्थक हैं। तो आप तो यहां पर गुरुदेव का ही खंडन कर रहे हो। वही वही वही और दूसरी बात यह है कि आप अगर क्या कहते हैं अगर वो बात नहीं करेंगे तो कार्य

02:18:35:15 कैसे होंगे? योजना कैसे बनेगी या गुरुदेव ट्रेवल कैसे करेंगे? और दूसरी बात हम ये भी बताएंगे कि अगर किसी को लगता है कि अगर दूर के ढोल आपने लग रहे हैं और लग रहा है कि हमें तो शायद कभी डांट नहीं पड़ी। हम पब्लिकली बता देते हैं स्वामी जी और सभी वहां पर जितने भी लोग हैं हम बहुत डांट खा चुके हैं। पर वो आपको नहीं पता है। पर शायद अगर आपके मन में मलाल रह रहा है कि हमसे तो मतलब हमारे पर तो फूल बरसते हैं। ऐसा कुछ नहीं है। हम रोज डांट खाते हैं। और हम जब भी वहां होते हैं डांट हमें पड़ती ही पड़ती है। पर हम ये शायद हम अब अंतर ये समझ रहे हैं कि हम उसे प्रसाद समझ कर ले लेते हैं। हमें ऐसा लगता है कि हमारे पुण्य ही बढ़ रहे हैं। पर आप यह जो लोग बातें कर रहे हैं वह अलग है। और दूसरी बात जहां तक यह व्यक्ति विशेष की बात हो रही है। हमारे पास अभी जो वीडियो आई थी हम बस यह बोलेंगे एक व्यक्ति है जो एक वीडियो शुरू करता है। यह बोलकर हम तो किसी की बहन बेटियों के ऊपर बात करते नहीं है। वीडियो के बीच में वो किसी के कार्य को लेकर उसको चरित्रहीन बोल देता है और वीडियो के अंत में बोलता है कि किसी के चरित्र को उछालने का अधिकार हमें किसने दिया हमने

02:19:50:16 खुद को दिया तो आई थिंक अगर ऐसी बातें सुनकर आप इस तरह के प्रभावित हो रहे हैं तो आपका भजन कम है। ये पांच मिनट नहीं टिक सकते अगर मेरे सामने विरोधाभासी बन के आ गए तो ये ऐसे लोग अगर अपने बनके आएंगे तो थोड़ा गाड़ी खींच मिले। मैं कह रहा हूं भगवत कृपा से पांच मिनट के अंदर इनका मुंह आबा डब्बा चब्बा होने लगेगा। देखी है ना वो जॉनी लीवर वाली अब्बा डब्बा चब्बा तो वो होने लगेगा। बात ये है कि आप लोग का मतलब स्तर क्या है कि आपको कोई भी कुछ भी बात बता देगा। एक प्रैक्टिकल लॉजिकल सेंस होता है किसी का कोई बात समझने का। ये तो जब हम शास्त्र के उसके अंदर नहीं थे तब भी हमारे पास था। पर शायद वो कहते हैं ना कि किसी को लग रहा है हमें शास्त्र की 10 बातें पता है। पर मतलब दिमाग से काम करना और हर चीज को व्यवहार के अंदर डालना उसके अंदर फर्क है। तो आपको यह समझना चाहिए कि जो व्यक्ति बिना किसी ठोस प्रमाण के ठीक है? हम प्रैक्टिकल बात करने में विश्वास रखते हैं। जो व्यक्ति कोई भी जो यह व्यक्ति हैं या बहुत सारे व्यक्ति हैं जो बिना ठोस प्रमाण के किसी महिला के चित्र पे बात कर कर के यह बोले कि हम तो करते ही नहीं है और सब कुछ

02:21:05:20 बोल दे। ऐसे व्यक्तियों को अगर हम सुन रहे हैं और उनकी इन बातों से हम कंफ्यूज हो रहे हैं और साथ दे रहे हैं तो हमें यह समझना चाहिए कि देखिए कर्म बना रहे हैं आप और वह आपके पास तो आएगा ही तो आपके घर में भी बहन बेटियां होंगी। वह घूमता ही है। हम एज अ महिला अब हम आपको बता रहे हैं कि वह घूमता ही है। और दूसरी बात यह है अपना स्तर बढ़ाइए। अपनी लॉजिकल रीजनिंग को बढ़ाइए कि हम किस तरह के व्यक्ति की बात सुन रहे हैं। क्योंकि यह बोलना कि हम तो सभ्य भाषा में बात करते हैं और फिर बोल देना मैं तो जैसी मर्जी भाषा में बोलूं मैं तो गंदा आदमी हूं। तो जो व्यक्ति खुद ही स्वयं बोल रहा है वो गंदा आदमी है तो हमें ऐसे व्यक्ति की बातें क्यों सुननी है? है ना? हम नहीं आपको तो आपको तो आई थिंक कोई व्यक्ति मतलब शायद धमकी भी दे रहे हैं। अरे हां जी वो अभी सब बातेंगी धमकी नहीं वाली। नहीं नहीं ये एक चीज बताते हैं। एक और हम क्लियरली बता देते हैं। यदि आप ये देखिए 24 आवर्स अल्टीमेट है। वीडियोस एंड पिक्चर विल बी मेड। 24 आवर्स अल्टीमेटम तू अगर मिल गया ना तो वहीं पर चपेट खाएगा मुझसे। ये वो है ये वो है 24 आवर्स अल्टीमेटम वाले कौन है पता है

02:22:20:26 भूल भुलैया में वो छोटा पंडित आता है ना लास्ट में उसके एक कंटाप मारता है वो उसकी बुद्धि बिल्कुल हरी हो जाती है ये वो है 24 आवर्स अल्टीमेटम वाली कि जो भी अल्टीमेटम दे रहा है या नहीं दे रहा है बात यहां पे सीधी यही आ जा रही है बार-बार कि आप किसी को डरा के टारगेट करके अटैक कर रहे हैं यदि आप मठ के हितषी होते तो आप यह समझते कि मठ के साथ अगर कोई व्यक्ति जुड़ा है और अगर आपको लग रहा है कि यह नहीं होना चाहिए। हमारे पास यह फोटो है। हमारे पास यह वीडियो है। आप पहले उससे संपर्क करिए। उसके सामने अपनी बात रखिए। यदि आपकी बात तर्क पूर्ण और प्रामाणिक है और फिर भी वो नहीं मान रहा है तो वो दोषी है। फिर उसके विरुद्ध आप कार्रवाई करिए। मगर आपने तो ना तर्क दिया ना प्रमाण दिया। मैं मैं जानता हूं। हम पब्लिकली यह भी बोल देते हैं अभी यदि आपको लग रहा है आप यह सब कार्य करके बच जाएंगे तो आपको शायद लॉ एंड ऑर्डर के बारे में सोचना चाहिए कि अभी तक भी जितना कार्य हो चुका है उसका लॉ एंड ऑर्डर से क्या लेना देना है हम अगर यह बात सोच कर छोड़ते

02:23:36:04 हैं कि मठ का नाम जोड़ जोड़कर थोड़े बेवकूफ नालायक लोग हैं जो अपने स्वभाव विचार किसी के ऊपर उनकी सीमा नहीं है या फिर बातचीत करने तक की भी उनके अंदर संयम या विवेक नहीं है तो हम आप अगर हमें इस तरह से अल्टीमेटम बोल के दे रहे हैं तो हम भी आपको वही बोल रहे हैं कि आप एक तो पहली बात आप अपनी पहचान क्लियर नहीं कर सकते हैं। ठीक है मतलब आप अरे भाई ये सब क्या बातें कर रही हो माता जी ने बचपन में निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया है ना पहचान लेके सामने आप छीन लिया है यही बोलने वाला था मैं अभी हां पहले लिया पहचान लेकर तो सामने आइए उसके बाद आप हमारी पहचान के ऊपर कुछ बोलिए फिर बात करना अल्टीमेटम वाली सोशल मीडिया वॉरियर

02:24:28:04 हां बताइए आप अगला प्रश्न मेरा प्रश्न आप जी बोलिए बोलिए की बातें जो कर रहे हैं तो देखिए अल्टीमेटम देने वाले को यह बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि अल्टीमेटम का रिएक्शन भी एक अल्टीमेटम ही होता है। जी तो मतलब यह प्रश्न आपसे है शिवा जी कि मतलब अब जैसा कि विजय जी ने बताया कि आपकी वजह से वो जुड़ी हैं मठ से। तो विजय जी को मठ से जोड़ने का कुछ कारण और भी था क्या? ऐसा भी लोगों ने प्रश्न किया है। अच्छा हां एक आरोप लगाया जा रहा है कि कोई मेरा क्या कहते हैं मठ से जुड़ने का कोई कारण था अलग से हम तो इसके जवाब में तो वही है कि भाई अगर आपको लग रहा है कि कोई कारण था अलग से तो आप उस कारण का प्रमाण प्रस्तुत करिए। पहली बात तो देखिए कि विजय जी कौन है? क्या है? कैसे उनकी क्या जर्नी रही है? इस बारे में मैं एक साक्षी। ठीक है? अब आप मुझ में अपना कोई संबंधी गुरु भाई इत्यादि नहीं देख पा

02:25:43:06 रहे हैं। मेरा शब्द आपके लिए प्रमाण नहीं है। तो मगर फिर भी विरोध करने के लिए और इतना गंभीर विरोध करने के लिए आपको प्रमाण तो लाना होगा ना। मेरी वाणी आपके लिए प्रमाण नहीं है। आपका भाई आपके लिए प्रमाण नहीं है। फिर भी उनका खंडन करने के लिए आपको प्रमाण लाना होगा ना। तो आप जो आक्षेप लगा रहे हैं उसमें केवल क्या है? केवल आपकी नीचता है। जो आप ये बोल रहे हैं मैं जानता हूं। मेरी बात मान लो। मैं गुरुदेव से बड़ा हूं। मैं शंकराचार्य से बड़ा हूं। है ना? जी तो ये सब बातें निरर्थक होती है। ये सब बातें चलती नहीं है। जब हम युद्ध स्तर पर आते हैं ना ये सब बातें नहीं चलती। अकाट्य सिद्धांत चलते हैं। अकाट्य अकाट्य बात लाओ। अकाट्य जितनी बातें अभी तक हमने सुनी और देखी और समझी वो सब अकाट्य नहीं थी। सब काट डालूंगा। कट गई। कट गई। वो सब अकाट नहीं। आप अकाट बात लाइए। हम आपके साथ है ना। आप प्रमाण लाइए हम आपके साथ हैं। मगर जब होगा तब तो लाओगे। जी तो उसी भाव से एक प्रश्न उठता है कि

02:26:58:20 परंपरा के प्रति और शास्त्र के प्रति निष्ठा रखने वाले एक महानुभाव द्वारा यह बोला गया है कि विजय जी को एक प्रश्न पीछे है। एक एक प्रश्न आपने मुझे बताया था कि एक तो वह था कि इस घटना से मिलता जुलता कोई उदाहरण है क्या? और जी एक प्रश्न था कि क्या कहते हैं वो निराधार ये जो ये जो प्रलाप हो रहा है इसका आप दे चुके हैं आप दे चुके हैं। अच्छा इसका दे चुका हूं। तो ये जो बात है ना क्या कहते हैं इससे मिलता जुलता एक उदाहरण उसकी मैं बात कर रहा था कि अभी कुछ समय पूर्व की बात है। मैंने अभी थोड़ा सा जिक्र किया था इस विषय का। अभी कुछ समय पूर्व की बात है। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के समय गुरुदेव का खूब शंकराचार्यों का खूब सारा विरोध हुआ था। हम सब ने देखा था। जी। उस समय क्या था? यह जो हम कह रहे हैं ना सच के आसपास वाला झूठ उसका एक ज्वलंत उदाहरण है। अब क्या है उस समय जो शासन तंत्र के द्वारा पोषित जो

02:28:13:25 आईटी सेल थी या मीडिया तंत्र था उसने क्या किया कि कहीं कोई वीडियो मिल गया उसमें इतनी बात उठा ली कहीं कोई वीडियो मिल गया उससे इतनी बात जोड़ के बना दिया हम है ना तो जिस समय ऐसा दुष्प्रचार शंकराचार्य के विरोध में हो रहा था उस समय जो लोग उस विरोध से प्रभावित हो रहे थे। है ना? उस समय जो लोग उस विरोध से प्रभावित हो रहे थे तो हम लोग उनको दोष की दृष्टि से देखते थे कि तुमने जब तक पुख्ता सबूत नहीं है जब तक तर्क और प्रमाण संतुष्टि जनक नहीं है तो तुमने अपने स्व विवेक का त्याग क्यों कर दिया? हम लोग दोष दृष्टि से देखते थे। जो लोग बिना जाने ताने शंकराचार्यों ऊपर आक्षेप कर रहे थे। शंकराचार्य नेता किया क्या है? है ना? यह सब जो कर रहे थे तो हम लोग ऐसे लोगों को कहते थे क्या तुमने अपनी बुद्धि बेच खाई है क्या? तुमने जापान नहीं देखा तो क्या जापान इस दुनिया में है? नहीं क्या? तो तर्क और प्रमाण के अभाव में वो सच के आसपास वाला झूठ मैंने शुरू में बताया था ना कि कोई एक आपको फोटो दिखाई जिस फोटो से आप प्रभावित

02:29:29:10 हो गए। उसके बाद आपने अपने विवेक का त्याग कर दिया। आपने यह सोचना समझना बंद कर दिया कि इस फोटो से जोड़ के हमको जो चीज बताई जा रही है वो जो चीज है वो सत्य नहीं है जो खबर हमें दी जा रही है मगर वो फोटो इतनी भड़कीली है इतनी प्रभावशाली है जैसे एक इनका जो दृश्य है कुत्ते के साथ वो खिलवाड़ जो इन्होंने किया जो भूतकाल में ठीक है वो जो स्ान के साथ जो ये खेल रही है उसमें है ना जो एक होता है ना अपने पालतू पशु के साथ व्यक्ति के मन में वात्सल्य भाव होता है। है ना? तो वो जो उसमें जो इनका दृश्य है उसको जो है अ ऐसे प्रचलित किया गया कि भैया वो स्वान के साथ ऐसा कर रही वैसा कर रही मतलब कितना भी नीचे गिर सकते हो तुम। हां तो ये अभी कमेंट्स आ रहे हैं। उनकी बात कर रहा हूं मैं। तो ये तो खैर आपकी कोई मर्यादा नहीं है। मर्यादा इसलिए नहीं क्योंकि आपकी शक्ल छुपी हुई है। आप शक्ल लेके आ जाओ। फिर बोलो अभी देखो अभी देखो नानी याद आ जाएगी आप लोगों को ठीक है जो लोग ऐसा कर रहे हैं खैर दूसरी बात ये है कि हम लोग उनमें दोष

02:30:45:06 देखते थे जो सच के आसपास वाले झूठ से प्रभावित हो जाते थे और हर कोई शंकराचार्यों की निंदा करने में लगा हुआ था उस समय हर कोई हम लोग उनमें दोष देखते थे आज हम क्या कर रहे हैं आज हम भी वैसे ही एडिट की हुई चीजों से कहीं कहीं का ई कहीं का रोड़ा भानुमती का कुबा जोड़ा वाली जो सामग्री है उस चीज से प्रभावित होकर के निर्णय ले ले रहे हैं। तो हम भी आज वही हुए जिनको हम दोष की दृष्टि से देख रहे थे। भाई अगर विद्या श्री मठ में कुछ गलत कर रही है तो उसका प्रमाण लाइए। प्रमाण होना चाहिए। अगर उन्होंने खाना बांटा तो उसका प्रमाण होना चाहिए। अगर उन्होंने व्यापार किया तो उसका प्रमाण होना चाहिए। अगर उन्होंने आपत्तिजनक वस्त्र पहन के योग सिखाया उसका Instagram पर वीडियो डाला गुरुदेव से संपर्क में आने के बाद तो उसका प्रमाण होना चाहिए। अगर उनका जीवन में कुछ भौतिक वादिता के कारण विवाह देर से हो रहा है तो उसका प्रमाण होना चाहिए।

02:31:53:22 आकलन पर अंदेशों पर और अपने उस पर कि हमें लगता है मैं यह हूं मैं वो हूं मैं हूं बट स्वाहा हूं इन सब पे चीजें नहीं होती है हम फट स्वाहा है भैया तो इन सब पे युद्ध नहीं लड़े जाते हैं आप लेके आइए प्रमाण और उस पर आपको करना चाहिए और आप अगर नहीं ले देख रहे हैं प्रमाण आपके पास ठोस प्रमाण नहीं है और फिर भी आप ऐसे लोगों ऐसी चीजें कर रहे हैं आरोप लग रहे हैं आक्षेप लगा रहे हैं तो फिर आप भी वही हुए जो कुछ समय पूर्व शंकराचार्यों का विरोध करने वाले लोग हुआ करते थे जो अधूरी जानकारी पर मीडिया तंत्र के जाल में फंस गए थे वैसे ही आप लोग फंस रहे हैं और हम तब भी लड़े थे अन्याय के विरुद्ध और आज भी लड़ेंगे ठीक है क्या है कि मुझे हो सकता है ये जो दंभी पार्टी है इनके जैसा शास्त्रों का जो ये विधि विषयक इत्यादि जो वो है वो उतना नहीं पता है इसलिए मैं बार-बार जो विधि निषेध इत्यादि के संबंध में गुरुदेव के पास जाता हूं आचार्यों के पास जाता हूं जी तो

02:33:08:28 हो सकता है मुझे इतना ना हो मगर मैंने गुरुदेव के वाक्यों को गुरु वाक्यों को जितना सुना है उतना धारण किया है मैंने ग्रंथों के जितने वाक्यों को सुना है, पढ़ा है, उतना उनको धारण किया है। मैंने राम के चरित्र को जितना जाना है, उतना उसको धारण करने का प्रयास किया है। मगर यह उन लोगों में से हैं जो गुरु गोविंद और ग्रंथ के वाक्यों को सुनते, पढ़ते और भजते तो हैं मगर उनको धारण नहीं करते हैं। धारण नहीं किया आपने। आपने दर्शन, विज्ञान और व्यवहार में सामंजस्य नहीं बिठाया। आपने वितंडवाद किया है ना ट्राइंग टू अटैक एंड हरेस इसमें हम एक चीज ऐड करेंगे क्योंकि हमें लगता है ये थोड़ा इंपॉर्टेंट है। अ जिस व्यक्ति की वीडियो हमारे पास आई थी जो मतलब वो शुरू से वीडियो और एंड में ये सब गोलमोल जिनकी बातें थी उन्होंने अपने वीडियो में एक चीज बोली थी जिसको हम प्रकट करके बोलना चाहते हैं। उन्होंने यह बोला था कि दो दिन में जो व्यक्ति वहां जाता है। ठीक है? उसे पता चल जाता है कि वहां के विचार और हावभाव सब कैसे हैं। सबसे पहले

02:34:24:04 ये जो वहां है जिस स्थान की बात हो रही है वो धर्म का और भगवत प्राप्ति का एक केंद्र है। तो सबसे पहले तो आप उसकी समीक्षा उस स्थान की समीक्षा करने वाले कौन है? क्योंकि हमें नहीं लगता है कि कोई भी सांसारिक व्यक्ति कोई बड़े से बड़ा व्यक्ति भी उस स्थान की समीक्षा करने योग्य हो। दूसरी बात यह है। सेकंड चीज जो उस वीडियो में जोड़ी गई थी वह यह थी कि हम वहां पर रहे और उसके बाद हम हमने समय बिताने के बाद हमने किसी का विरोध नहीं किया। तो ये क्या मेरे हमारे ऊपर एक प्रेशर डाला जा रहा है कि हमें किसी का विरोध करना है। हमने किसी का विरोध क्यों नहीं किया? यह प्रश्न होना चाहिए था और उसका उत्तर यह है हमने किसी का विरोध इसलिए नहीं किया क्योंकि विरोध करने लायक हमें वहां पर कुछ दिखा ही नहीं। हमें वहां पर स्नेह, प्रेम, धर्म और भगवत प्राप्ति किस तरह से की जाए उसका आचरण, व्यवहार, विचार, व्याकरण इस सबका अनुभव मिला है। और जब तक हमें इस तरह का अनुभव नहीं हुआ है, आपको क्यों लगता है? आप आपको क्यों लगता है कि जो आप बोल रहे हैं, वह अनुभव हमें होना ही चाहिए था। मेरा अनुभव वैसा नहीं

02:35:39:06 है। हम तो इस तरह की बातें जब हम कर रहे हैं एक पर्टिकुलर स्थान को लेकर तो हमें यह समझ आना चाहिए कि बाकी सबको छोड़िए। हम खुद ही उस स्थान की समीक्षा कर रहे हैं जो स्थान हमें ही भगवत प्राप्ति करवा सके। यदि आप अभी बैठकर अगर उस स्थान के बारे में ध्यान कर लें तो आपके पुण्य बढ़ जाएंगे। पर आप बैठकर उस स्थान की समीक्षा करने में लगे हैं। तो यह एक अपराध ही है। मैं इसमें एक बात कह दूं कि भैया रामायण का युद्ध भी एक नारी के लिए ही हुआ था। और महाभारत का युद्ध भी एक नारी के सम्मान के लिए ही लड़ा गया था। और अगर यह युद्ध मुझे एक गुरु गोविंद और ग्रंथ के प्रति समर्पित शरणागत नारी के सम्मान के लिए लड़ना पड़ेगा तो मैं सदैव उसके लिए तत्पर हूं। अगर अपने लोगों से भी लड़ना पड़ेगा तो उसके लिए भी तत्पर हूं। क्योंकि गुरुदेव ने यह सिखाया है। मैंने कहा ना गुरुदेव के वाक्यों को सुनते

02:36:54:12 नहीं है केवल धारण करते हैं। गुरुदेव ने सिखाया था कि भाई संबंधों का त्याग भले ही करना पड़ जाए पर सिद्धांतों का त्याग कभी मत करना। तो अगर कोई व्यक्ति इस प्रकार से किसी निर्दोष मातृशक्ति के साथ दुर्व्यवहार करेगा। उसके सम्मान पर जो है आक्रमण करेगा तो मैं उसके लिए लडूंगा। अंतिम सांस तक लडूंगा और यदि वो निर्दोष नहीं है तो उसको दोषी सिद्ध करो और वरना अपना ये जो मुंह है जिसको दिखा पाने के लायक नहीं हो उसको बंद रखो। और अपना परिचय दे करिए ना। इसमें छुप के क्यों मतलब जो बात है उसको स्पष्ट सामने रख दीजिए। आप बताइए उल्टा आपका यश होगा अगर आपकी कोई बात सही निकल आएगी और एक और बात हम बोल रहे हैं जो भी व्यक्ति उसको इंग्लिश में क्या बोल रहे हैं मेरे दिमाग में वर्ड नहीं आ रहा है पर धमकी दे रहे हैं है ना जो व्यक्ति धमकी दे रहे हैं हम एक बार फिर से दोबारा बोल देंगे कृपया लॉ एंड ऑर्डर के बारे में सोच लीजिए अगर आप किसी गलतफहमी में है कि आप फेक अकाउंट बना के कर लेंगे

02:38:09:13 तो आज आजकल आधुनिकता के साथ यंत्रों के साथ आप फेक बनाइए, रियल बनाइए, कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। पर संयम और मर्यादा में रह के ही अपने शब्दों का और अपनी एडिटिंग का इस्तेमाल करिए। क्योंकि अगर आप इस तरह के अल्टी मतलब अभी भी लोगों के मतलब दिमाग का स्तर देखिए। अगर आप अभी भी इस तरह से बात और व्यवहार करना चाहते हैं तो लॉ एंड ऑर्डर नाम की भी एक चीज है भारत में जो चीजों को अच्छे से हैंडल कर लेती है। ठीक है? तो आपको वार्ता करनी है। आपको नहीं समझ आ रहा तो आप वो करिए। बट ये खेल मत खेलिए। हम हां। तो खेलिए है ना? मतलब कोई ये वार्निंग तो है नहीं। ये साफसाफड कर रहे हैं। खेल है चला है जो धमकी दे रहे हैं। चूर्ण चटनी बेचने वाले हां मतलब तो विजय जी पे ही तन कसते हुए एक प्रश्न है वो वो ये है कि यूजली जिम ट्रेनर या योगा ट्रेनर महिलाएं जो है उनका चाल चलन ठीक नहीं होता पता नहीं कौन कहां पे देख रहे हैं आप ये सब मतलब ये क्या बात

02:39:24:21 है ये तो बैंक में काम चरित्र अच्छा नहीं होता है नहीं मैं कह रहा हूं यही मैं कह रहा हूं ये गुरुदेव के शिष्य होने के नाम पर कलंक है अगर वो शिष्य है ये कलंक है ये नहीं देखिए मैं कह रहा हूं कि ये बात सही है गलत है वो बाद में है मगर कहने का आपका जो तरीका है आपने ना तो कोई प्रमाण दिया ना कोई सनातन सिद्धांत रखा आपने बोल दिया कि जिम और जिम ट्रेनर जो होते हैं उनके चाल चलन सब जानते हैं। ये क्या है भाई? क्या करें इसका? यह तुम कौन हो जो सनातन सिद्धांत समझा रहे हो? या तो तुम्हारा सिद्धांत सना तुम सनातन सिद्धांत समझाने वाले व्यक्ति हो। देखिए व्यक्ति हर तरह के व्यक्ति हर जगह पे भी हैं। ठीक है? घर पर बैठी महिलाएं भी व्यभचारी होती हैं जो कुछ भी नहीं करती हैं। ठीक है? और हर तरह का पुरुष और व्यक्ति हर तरह के मतलब हर तरह का व्यक्ति हर तरह पाया जाता है। पर हम अगर एक चीज को दिमाग में बिठा लें तो वो हमारे लिए ही नुकसानदायक है क्योंकि वो आपको किसी को अच्छे नजरिए से देखने नहीं देगी। जब हम यह बोलते हैं कि किसी की निंदा करने से हमारा वो घट जाता है तो आप ऐसा सोच अगर किसी

02:40:39:27 की ऑक्यूपेशन के साथ जोड़ लेंगे तो वो कितनी गलत बात है। आपको अगर हम सच बताएं कि सबसे पहली बात जो महिलाएं कार्य कर रही हैं वो कितनी मेहनती होंगी। क्यों महिला को पड़ी है कार्य करने की? ठीक है? अब वह उसमें मेहनत कर रहे हैं क्योंकि आप पुरुष वर्ग के हैं तो आपको ज्यादा पता होना चाहिए कि पुरुष समाज के अंदर भी अगर कोई महिला डटकर काम कर रही है तो वो कितनी स्ट्रांग होगी अंदर से। ठीक है? तीसरी बात यह है कि जब आपको कुछ आप हम आपको बताते हैं हम क्योंकि उस सर्कल में है योगा ट्रेनर्स के। हमें नहीं पता है कि आप बस बोलने के लिए ऐसी बातें क्यों बोल रहे हैं। पर अगर कोई मतलब 40% भी अच्छा टीचर है। वह आपसे 10 मिनट एक्स्ट्रा बात नहीं करेगा। चरित्र की बात तो बहुत दूर की है। योगा ट्रेनर्स स्पेशली फीमेल्स अपनी ऊर्जा लोगों के पर व्यर्थ नहीं करती हैं। क्योंकि फीमेल योगा टीचर्स को साधना साधन पढ़ना हमें पढ़ाई से फुर्सत नहीं मिलती है। और अगर आपको यकीन नहीं हो रहा है तो आप बस एक मिनट दीजिए। बस एक मिनट।

02:41:53:10 हम आपको चार पुस्तकें दिखाते हैं और हमारी पुस्तक की गैलरी बहुत बड़ी होती है। इतनी पढ़ाई करनी है। हमें फुर्सत नहीं है फालतू के लोगों के साथ अपना समय निकालने की और व्यर्थ करने की तो कृपया आप एक समाज की बात कर रहे हैं अभी। पर आपको उस समाज के बारे में कुछ पता ही नहीं है। तो इस तरह नहीं बोलना चाहिए। कोई भी बोल दे लड़के तो ऐसे ही होते हैं। है ना? कोई बोल दे लड़के तो मतलब वैभविचारी होते हैं। तो क्या सभी लड़के व्यभचारी होते हैं? नहीं। तो कृपया प्रश्न ऐसे पूछिए जिससे टाइम वेस्ट मत हो। हम जी तो जैसे कि आपने कई बार प्रमाण की बात करी है और किसी ने मतलब और कोई किसी नहीं बोलूंगा बल्कि एक परंपरा के प्रति शास्त्र के प्रति निष्ठा रखने वाले एक महानुभाव के द्वारा विजय जी को क्रिमेशन से जुड़ा बताया गया है। उनको और कई लोगों ने कमेंट ये भी किया है। मैं इसका इसका इसका दूसरा इसका दूसरा भाव भी बोल देता हूं। कई लोगों ने इस पर कमेंट भी किया है कि जैसे यूआईएसएफ नाम की जो संस्था है उससे जुड़े हुए हैं वो और इस पर भी काफी लोगों ने प्रश्न किया है। मैं

02:43:08:24 मतलब काफी प्रश्न भी आ रहे हैं। मैं इसमें बताइए ना पहले फ्रीेशन हम प्रश्न बता रहे हैं। बता देखिए सबसे पहले तो इसमें क्या है वही वाली बात है कि जिन जिन महानुभाव की आप बात कर रहे हैं मतलब मैं जान रहा हूं कि आप किन के बारे में बोल रहे हैं। जिन्होंने कहा है कि विजय जी फ्री मिशन से जुड़ी हुई है। हां हां तो मैं इसलिए बस मैं इसमें एक चीज जोड़ना चाहूंगा कि ये मतलब तथाकथित मैं बोल रहा हूं। सो कॉल्ड परंपरा के प्रति निष्ठा रखने वाला या शास्त्र के प्रति निष्ठा रखने वाला व्यक्ति है। मेरे हिसाब से जी आप कंटिन्यू कर देखिए मैं तो यह कहूंगा कि अ ये प्री मेंशनंस के प्रति मतलब साथ जो संबंध वाली बात है जो महानुभाव ने जिन्होंने कही है मैं ये कहूंगा कि इसमें उनकी कोई गलती नहीं है। गलती इसलिए नहीं है कि जो लोग अपने आप को पूरी का पूरी के शंकराचार्य जी का हितैषी कह रहे हैं। जो लोग अपने आप को शंकराचार्य का समर्थक कह रहे हैं। वही लोग जो है आप मतलब आप किनकी बात कर रहे जो

02:44:23:27 तथाकथित वाले हैं उनके उनके बारे में नहीं बोल रहा हूं। मगर जिनको मैं जानता हूं जिनको मैं जानता हूं उनकी बात मैं कर रहा हूं कि इस इस मामले में उनकी गलती नहीं है। ये जो गलत तरीके से सामग्री बना के WhatsApp इत्यादि पर चल रही है। प्रचारित की जा रही है। प्रसारित की जा रही है। ये सब ये सब उनकी गलती है कि वही वाली बात है ना कि आप ऐसा प्रस्तुत कर दो कहीं की ईंट और कहीं के रोड़े को कि वह अलग ही एक शख्स के आसपास वाला झूठ भी सत्य जैसा दिखने लगे। पहली बात हम तो ये जो अ क्या है कि ये बात है जो प्रीमेशन वाली बात है से जुड़ी हुई है या फिर एक बात मैं मैं अभी एक एक संस्था है जो पूरी दुनिया में मतलब सनातन को खत्म करके अपना राज्य करना चाहती है। ऐसा मुझे कुछ समझ में आता है। है ना? मोटा-मोटा कह सकते हो। सिर्फ ये है कि वन अर्थ वन रिलजन और वो रिलजन वो बनाएंगे अपना अपना रिलजन वो अपना नियम कानून बल्कि हां एक नया रिलजन बनाएंगे पंथ अपना बनाएंगे वन अर्थ वन वर्ल्ड हां उससे आप जुड़ी हुई हां तो ये उसकी एजेंट है ऐसा एक

02:45:39:20 स्लीपर सेल है पता है जिन्होंने ये जिन्होंने ये कहा है जिन्होंने ये कहा है हमें पता नहीं है हां अब पता नहीं है वो उस पर बात करेंगे। मगर जिन्होंने ये कहा है वो एक मतलब शास्त्र निष्ठ के रूप में जाने जाने वाले व्यक्ति हैं। परंपरा निष्ठ परंपरावादी के रूप में जाने जाने वाले व्यक्ति जिन्होंने ये कहा है। तो मगर ये उनका जो कहने का आधार था तो उन्होंने उसमें भी बताया कि उनका जो ये प्रेरणा हुई है वो वीडियो बनाने की वो प्रेरणा दो तीन लोगों से सुन लिया। मैंने यह बात उन लोगों ने सुन ली है। हां वो मगर जो मुख्य जिनकी मैं बात कर रहा हूं उनको यह वीडियो बनाने की जो प्रेरणा भी हुई है वो किसके द्वारा हुई है कि हमारे जो ये तथाकथित मठ के समर्थक है परंपरा के जो समर्थक है तथाकथित उनके जो वक्तव्य है उनके जो लेख है उनके आधार पर उस पर उन्होंने अपना दृष्टिकोण व्यक्त किया है। अब वो उसमें कितने उसको विश्वास करने वाली बात कह रहे हैं या नहीं है विश्वास करने वाली बात मगर उसका आधार वही बताया है। पहली बात दूसरी बात यह है कि जैसे अगर पूछा जाता है किसी से कि भाई मठ में परिकर लोग गलत कर रहे हैं। ये भी एक प्रश्न आता है उन्हीं की ओर से कि मठ के जो परिकर हैं उनका आचरण सही नहीं है। वो ऐसे ऐसे करते हैं। कई बार बताया

02:46:54:28 जाता है कई लोगों इसका भी आधार क्या है? जो हमारे जो जो हमारे जो तथाकथित समर्थक हैं हमारे नहीं गुरुदेव के जो तथाकथित शिष्य हैं, तथाकथित समर्थक हैं या शंकर परंपरा के तथाकथित समर्थक हैं यह तथाकथित वाले और हो सकता है वो कुछ बहरूपी ही हो विरोधियों के द्वारा टाले गए तो ये उनके द्वारा फैलाई जा रही मिथ्या होती है। कुछ अंश वही वाली बात है कि हमने मिलता जुलता कुछ अंश कहीं पर आंशिक रूप से देख लिया तो उससे अरे ये भी ऐसा ही कह रहा था। मुझे भी ऐसा ही लग रहा है। अच्छा इसका मतलब यह बात सही है। ठीक है।

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02:47:31:25 अब इसमें पहली बात तो यही आती है कि मठ के परिकर अगर कोई दुराचरण कर रहे हैं तो क्या इसका कोई प्रमाण है?

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02:47:41:27 है तो मुझे दिखाओ। मैं लूंगा एक लाउड स्पीकर। ये कोई प्रमाण नहीं है। है तो मुझे दिखाओ। मैं लूंगा एक लाउडस्कर। मैं चलूंगा तुम्हारे साथ। मगर नहीं दिखाते। नहीं है कोई प्रमाण। हम बिना प्रमाण के गंभीर निर्णय नहीं ले सकते। दूसरी बात दूसरी बात जैसे वो मूर्ख व्यक्ति वो जो ये कह रहा था कि दो दिन में पता चल जाता है मठ में जाकर के भाई कुंभ में वहां पर कितने कम से कम मेरे ख्याल से डेढ़ से 2000 लोग रहे होंगे। डेढ़ से 2000 लोग ज्यादा ही ज्यादा ही पूरे टाइमिंग को अगर देखेंगे तो हर व्यक्ति का एक एवरेज अगर आएगा तो दो दिन तो रहा उसको तो कुछ नहीं पता चला तो ये तुम्हारा सिद्धांत कट गया ऐसी बातें मत बोलो ना हां इसके डिफेंस में मैं बोल देता हूं अभी मैं बुरा बन जा रहा हूं थोड़ी देर के लिए अपना ये यूवाई यूवाईसएफ का तो प्रमाण दे दिया ना नहीं मैं बात करूंगा एक-एक करके एक-एक करके चल रहे हैं हमने दो दो टॉपिक खोल लिए ना अभी हमने दो टॉपिक एक मिनट सॉरी टू एक मिनट विजय जी एक विजय जी एक मिनट आएंगे आएंगे आएंगे हां आएंगे उसप आएंगे हम लोग एक एक करके चल रहे हैं मैं छोडूंगा कुछ भी नहीं इसकी चिंता ना

02:48:58:01 करें वो फ्रेश मैन फ्री तो फ्री मेंशन अलग है फ्री मेंशन अलग है और जी मेरा निवेदन है आप लोगों से मुझे बोलने दें प्लीज मेरा प्रवाह टूटता है तो उसमें भी दिक्कत होती है जी ठीक हां आपने आपने ऐसे नहीं किया लेकिन एक मिनट एक मिनट एक मिनट तब तक नहीं बोलने दे बोलिए बोलिए तो पहली बात है कि मठ में अगर कुछ ऐसा हो रहा है जो आपत्तिजनक है तो मुझे उसका प्रमाण लाकर दीजिए मैं चलूंगा मैं वो मंगवा लूंगा क्या कहते हैं ढोल वालों को और मैं ढोल पिटवाऊंगा वहां मगर प्रमाण लाओ ना और कोई गुर्दा वाला नहीं मिलेगा मैं अकेला चला जाऊंगा। मैं गया तो था अभी अक्षानंद के मठ में गया था ना मैं गया था। किसी के अंदर साहस ना हो भगवान भगवत कृपा से ये साहस मुझे प्राप्त हुआ है मेरी माता से। ठीक है? मैं जाऊंगा। आप मुझे प्रमाण लाकर दीजिए। तो प्रमाण के नाम पर क्या होता है? जैसे मट के परिकरों की बात आती है। तो प्रमाण के नाम पर क्या होता है कि 50 परिकरों ने ऐसा कहा। 100 परिकरों ने ऐसा कहा?

02:50:14:04 क्या यह हमारे सनातन सिद्धांत है? उन परिकरों के नाम भी नहीं है मतलब कि लिस्ट हो जाए। जी और वो ये आकर के कहने लगे हैं 100 के 100 गुरुदेव के गुरुदेव से दीक्षित ठीक है। और ये बताओ क्या संख्या से निर्णय होता है? कौन सही है? कौन गलत? फिर तो वो गलत थे प्रह्लाद जी। फिर तो वो गलत थे पांडव। तो संख्या के ऊपर हम निर्णय नहीं ले सकते कि 100 परकरों ने ऐसा कह दिया तो मान लिया जाए। पूरा विश्व भी कह देगा तो भी नहीं माना जा सकता। हमें चाहिए ठोस प्रमाण। अथवा वो व्यक्ति जिनके शब्द हमारे लिए प्रमाण हो। तो ऐसा कुछ नहीं है। कोई प्रमाण नहीं है। 50 लोगों ने कहा, 100 लोगों ने कहा या पीडीएफ आई। यह पीडीएफ बनाने से 100 लोगों के कह देने से जो है मैं जो महानुभाव यह कह रहे हैं मैं उनकी भी बात को रखूंगा कि जो महानुभाव ये कह रहे हैं कि 50 लोगों ने ऐसा कहा है तो ये हमारे सनातन सिद्धांत नहीं होते हैं झूठ और सच का फैसला करने के लिए

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02:51:22:21 और वो 100 लोग कितने क्रेडिबल कितनी उनकी क्रेडिबिलिटी है कितनी नहीं है ये भी सोचने वाली

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02:51:27:22 बात है भाई आप 100 लोगों से कहलवा रहे हो ऐसा होता है मैं 500 लोगों से कहवाऊंगा। ऐसा नहीं होता। फिर क्या होगा? ये ये कोई तरीका नहीं है अपनी बात को रखने का। यह कोई प्रमाण नहीं है कि अच्छा किसी ने पीडीएफ बना दी। किसी ने पीडीएफ ये पीडीएफ बाजी जो कर रहे हैं ये इनका दोष है। उनका तो दोष ही नहीं है। जो ऐसी बात बोल रहे हैं। वो तो खुद उन्होंने तो एक समीक्षा की है उस पीडीएफ की। उसके आधार पर मगर जब प्रमाण की बात आती है कि मठ में ऐसा हो रहा है वैसा हो रहा है। तो सब लोग गायब क्यों हो जाते हैं? यह कार में जो व्यक्ति बोल रहा है कि मठ में दो दिन में पता चल जाएगा। क्यों नहीं दिखाता प्रमाण? कब दिखाएगा प्रमाण? पहली बात तो तेरे अंदर स्वयं गुर्दा नहीं है। ये ये जो महानुभाव है जिन्होंने फ्री मेंशन से बताया है विजय जी को। इन्होंने खुद एक बहुत अच्छी बात बोली है। इन्होंने कहा कि भाई तुम लोग क्यों नहीं जा रहे हो? वहां जाकर के साहस का उपयोग करके क्यों नहीं बता रहे हो अपने गुरु को? मैं जा सकता हूं। प्रमाण दो ना मुझे। तर्क और प्रमाण के साथ मुझे दे दो। मैं जाऊंगा। कोई जाए या ना जाए। मगर नहीं। यह लोग यह कहेंगे दो दिन में पता चल जाएगा मठ में क्या होता है। ये हितैषी है मठ के। यह शंकराचार्य के हितषी

02:52:43:14 हैं। यह नीच है जो ऐसा बोल रहे हैं और इसके कारण वो जो परंपरावादी हैं, जो शास्त्रनिष्ठ है उनका भी वक्तव्य आता है। ऐसी बातों के लोगों को दिखाई देता है कि वो समर्थन में है तो लोग उससे भी प्रभावित होते हैं क्योंकि उनकी ख्याति अलग है। उनका वर्चस्व अलग है। प्रबुद्ध लोगों के बीच में। ठीक है? पहली बात। अब आता है कि प्रीशंस से विजय जी क्यों जुड़ी हुई है? और प्रीशंस की एक संस्था यूआईएसएफ और उस संस्था के द्वारा नियुक्त ये जो है स्टेट प्रेसिडेंट थी। ऐसी बात सामने आई है। तो मैं कहूंगा कि आपको

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02:53:32:16 क्या लगता है आप अभी ये बैठे हो यहां पे? आप किसी मल्टीीनेशनल कंपनी में जॉब कर रहे हो क्या आप गारंटी के साथ कह सकते हो कि उस मल्टीीनेशनल कंपनी का कोई भी संपर्क पूरी मिशन से नहीं होगा हो सकता है आपने इस बारे में जानकारी तो की नहीं है तो अगर आप जिस कंपनी में जॉब कर रहे हो अपनी आजीविकोपार्जन के लिए मल्टीीनेशनल कंपनी में अगर उसका कनेक्शन उस कंपनी का कनेक्शन अगर फ्री में नाम की संस्था से हो गया। इसका मतलब आप जो

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02:54:08:00 है के एजेंट हैं। मैं बचपन में मेरा बचपन मैं मैं पतित ब्राह्मण हूं मैं भाई बहुत अच्छा ब्राह्मण नहीं हूं। उत्तम कोटि का मेरा जो बचपन बीता है मैं क्रिश्चियन मिशनरी स्कूल में पढ़ा। उस क्रिश्चियन मिशनरी स्कूल में पढ़ते हुए मुझे वहां का स्पोर्ट्स कोटे का चैंपियन या फलाना रिप्रेजेंटेटिव या कुछ भी घोषित कर दिया गया। मेरे पास आज भी वो सर्टिफिकेट रखे हुए हैं। वो जो क्रिश्चियन मिशनरी है क्या हम गारंटी के साथ कह सकते हैं कि उसका प्रीमेशन से कोई वो नहीं होगा संपर्क तो हमें हो गया प्रीशंस का हो गया मैं ठीक है अब बात आती है कि ये क्या कहते

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02:54:57:26 हैं हम लोग YouTube पर कार्य कर रहे हैं और जिनका भी चैनल मोनेटाइज हो चुका है वो YouTube के पार्टनर पार्टनर हैं। ठीक है? जो भी Google एडसेंस से पैसे ले रहे हैं YouTube के वह प्रोग्राम के द्वारा वह सब Google के भी पार्टनर है। ठीक है? तो हम क्योंकि ऑफिशियली हम तो ऑफिशियली कनेक्टेड है तो जो भी कोई YouTube वो कर रहा है वो YouTube का पार्टनर है। और क्योंकि वो YouTube का पार्टनर है तो क्या आप गारंटी के साथ कह सकते हो कि YouTube का फ्री मेंशन से कोई संबंध नहीं होगा? कह सकते हो? तो इसका मतलब YouTube का जो जो व्यक्ति पार्टनर है वह सब प्रीमेशंस के एजेंट हैं। क्या हम यह

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02:55:44:18 माने क्या ये सही होगा? तो ऐसी बात रखनी चाहिए जो अकाट हो। ठीक है? तो अगर इन यह किसी संस्था में यूआईएसएफ में

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02:56:03:22 अगर मेरे पास आज एक सामान्य व्यक्ति के पास अगर कोई जॉब ऑफर आता है अगर कोई ऐसा ऐसी चीज आती है आप हमारे साथ कार्य कर लो तो हम एक सतही स्तर पर उसकी जांच करते हैं। पर हम यह नहीं जान पाते कि भैया उसका अंतरंग कितना ज्यादा अंतरंग उसके संबंध कहां है। ठीक है? मेरे जानने वाले कोई थे सपला कंपनी है दवाइयों की उसके बहुत बड़े जनरल मैनेजर बन गए बहुत बड़े पोस्ट पर बन गए बहुत दिनों के बाद उन्हें पता चला कि उस शिपला कंपनी का जो ओनर है वो तो मुस्लिम

02:56:40:01 है हां हिमालय हिमालय कंपनी की आप लोग दवाइयां खरीदते हो खाते हो पीसते हो या कई लोग ऐसे होंगे जिनका मेडिकल स्टोर होगा और उनके मेडिकल स्टोर पर वो हिमालय कंपनी की दवाइयां रखी होंगी और हिमालय कंपनी मुस्लिम के द्वारा संचालित है। ऐसा बताया जाता है कि वह अपने यहां पर हिंदुओं को नौकरी तक नहीं देता

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02:56:59:25 हिमालय वाला। तो जो जो मेडिकल स्टोर वाले हैं वो सब फ्री मेंशन के एजेंट हो गए। मैं कह रहा हूं रामदेव जुड़े हुए हैं आर्य समाज से और आर्य समाज तो फ्री मेंशन का घोषित हुआ है मलचराज सीरीज में तो रामदेव अगर किसी के संपर्क में आएंगे तो वो संपर्क में आने वाला वो जिसके भी संपर्क में आएंगे वो प्रीशंस का एजेंट घोषित हो गया मैं कह रहा हूं कि अगर कोई कथा करने जाता है भगवत कथा का कहीं पर जाकर के वो श्रोताओं को सुनाते हैं जिसके द्वारा वो कथा आयोजित की गई है। वह अगर कहीं पर जॉब करता है, वह कहीं पर अगर कार्य करता है गोपाल के निमित्त तो क्या उसकी जांच की जा सकती है कि नहीं कि वो फ्री मिशनंस से उसकी जो पीछे की गणना है निकलती जाए वो क्या कनेक्टेड निकल सकता है कि नहीं तो ये कोई अगर इस तरह से देखेंगे कि उसके पीछे वो कंपनी वो कंपनी वो कंपनी अगर इस तरह से हम लोग देखेंगे तो हम सब लोग प्रीशंस के एजेंट सिद्ध हो जाएंगे। तो ये आधार ठीक है। ठीक नहीं है किसी को फ्री मेंशनंस का कहने का। अब विजय जी इस पे आप अपनी बात बता दीजिए कि आप यूआईएसएफ

02:58:15:15 से कैसे जुड़ी थी वो क्या है बता दीजिए। सनसनी पहली बात तो हमें यही नहीं पता कि फ्री नेशन क्या है? सॉरी बट जो भी है कुछ अच्छा तो लग नहीं रहा है। दूसरी बात हम आपको शॉर्ट हिस्ट्री देंगे। यूवाईसएफ से हमारा जुड़ना क्या हुआ और क्या कार्य हुए। युवाएसएफ संस्था के बारे में हम यह जानते हैं कि सुरेश हां सुरेश जी और ज्योति उनकी जो धर्मपत्नी है उन्होंने एक योगा फेडरेशन स्टार्ट किया था। उनका लक्ष्य था कि योग के लिए लोगों को एक्टिव करेंगे। जैसे कि एक किसी भी स्पोर्ट्स फेडरेशन में होता है कि वह लोगों के रजिस्ट्रेशन लेते हैं। फिर कंपटीशन करते हैं 1 2 3 की तरह उपहार या प्राइिस दे देते हैं। तो यह संस्था का काम भी कुछ ऐसा ही था। हमारा का हमारी बातचीत जब पहली बार सुरेश जी से हुई थी तो वो यह हुई थी कि हम वो ऋषिकेश में मिले। उन्होंने हमें बुलाया कि आप हमारे कार्यक्रम में आइए। ऋषिकेश के ही एक आश्रम में उनका यह योग का कार्यक्रम चल रहा था। हम वहां पर गए और उसके बाद जब हमारी उनसे बातचीत हुई तो हमने उनके साथ अपने यह विचार प्रकट किए कि सुरेश जी और यह बात आप सबको पता होनी चाहिए। आज योगा अलायंस

02:59:30:26 करके एक सर्टिफिकेशन होता है जो हर योगा स्कूल अपने बच्चों को एक योगा टीचर ट्रेनिंग कंप्लीट होने के टाइम पर देता है और उस सर्टिफिकेट पे योगा अलायंस की स्टैंप लगी होती है। अब योगा अलायंस है क्या? योगा अलायंस एक कंपनी है जो अमेरिका में कुछ लोगों ने बनाई है। हमें नहीं पता किसने बनाई है। बट कुछ लोगों ने फेडरेशन बनाई। जब उन्होंने वो फेडरेशन कंपनी की तरह समझिए इसको। तो जब उन्होंने वो कंपनी बना दी उन्होंने यूएस के हर एक स्टूडियो जिम में जाके एक टाई अप किया कि अगर व्यक्ति के पास योगा अलायंस की सर्टिफिकेशन नहीं है तो उसे जॉब नहीं दी जाएगी और यह काम उन्होंने सक्सेसफुली मतलब यह बिजनेस मॉडल सेट हो गया। अब जो योगा अलायंस के अंदर में टीचर्स को लूटा कैसे जाता है आपको हम यह बताते हैं आज। योगा अलायंस के अंदर जब आप जैसे समझिए अगर हम हैं अगर हम योगा अलायंस के जो क्योंकि बाहर से भी लोग आते हैं सीखने के लिए और कुछ लोगों को बाहर काम के लिए जाना होता है तो योगा अलायंस की सर्टिफिकेशन इंटरनेशनलली बहुत जरूरी बन जाती है। आपके पास इंडियन सर्टिफिकेशन होगा उसकी कोई वैल्यू नहीं है। योगा गवर्नमेंट का होगा तब भी वह नहीं मानेंगे। मेरे कुछ जानकार लोगों के साथ ऐसा हो

03:00:46:02 भी चुका है। तो योगा अलायंस की सर्टिफिकेशन की अभी यह वैल्यू क्रिएट हो गई। तो अब योगा अलायंस के ये नहीं है कि आपने एक टीचर ट्रेनिंग कर ली सर्टिफिकेट में स्टैंप आ गया। सोचिए अगर हम हैं हमें हर महीने योगा अलायंस को पैसे भरने पड़ेंगे ताकि हमारी प्रोफाइल उस पर मेंटेन रह सके और जो स्कूल है जो सर्टिफिकेट अपने बच्चों को देते हैं वो पर महीना 12 से ₹1,000 एक स्कूल की तरफ से एक सर्टिफिकेशन के लिए जाता ही है। तो यह जो पूरा का पूरा व्यापार बना है सबसे पहले तो भारत आकर वो योग सीखेंगे जो कि हमारी आप समझ रहे हैं हमारे हमारे भारत का ज्ञान है और सर्टिफिकेशन के पैसे और टीचर्स को लूटा लूटेगा कौन अमेरिका की एक कंपनी तो यही यही जो हमारी बातचीत थी कि टीचर्स एक्सप्लइट हो रही हैं और भारतीय लोगों और भारतीय स्कूल के अंदर या हमारी कोई एक ऐसी पहचान क्यों नहीं है जो इंटरनेशनलली जिसको वैल्यू मिले और इस तरह से हम उनसे जुड़े थे यह बोलकर कि हम नहीं चाहते हैं कि योगा अलायंस को हम प्रमोट करें। हम कभी करेंगे भी नहीं। और उसके उसको छोड़कर हम क्या कर सकते

03:02:01:10 हैं कि हम प्रमाणिकता किसी और को दें। तब सुरेश जी ने हमें बोला था कि हम भी इसी कार्य पर कार्य कर रहे हैं। उत्तराखंड में एक पोजीशन खाली है। आप उस पर आ जाइए। एक योगा का कंपटीशन होने वाला है। तो वैसे हमें उन्होंने यूवाईसएफ का उत्तराखंड प्रेसिडेंट बना दिया। ठीक है? यहां तक सबको बात समझ आ गई। अब प्रेसिडेंट बनने के बाद जब हमने पूछा कि हमारे दायित्व क्या होंगे, कार्य क्या होंगे? उन्होंने हमें बोला हमें बता दिया जाएगा। तो उतनी देर में वो पोस्ट शेयर हो गई। अब आपको समय भी पता रहेगा कि कब वो पोस्ट शेयर हुई होगी। अब आपके पास अगर वो फोटो है तो अब हम आपको यह बोल रहे हैं कि उस दिन के बाद हमारी कोई बात ही नहीं हुई। हम कुछ कार्य ही नहीं किए ना उनकी तरफ से कोई चर्चा हुई ना हमारी तरफ से कोई चर्चा हुई। आप समझ रहे हैं मतलब हम बीमार पड़ गए। घर पर रहे काफी देर तो हमने वैसे कुछ काम किया नहीं। तो इतनी सी कहानी है हमारी युवा एसएफ के साथ। तो कुल मिला के इससे यह पता चलता है कि आपको अपॉइंट किया गया वहां और उसके बाद आपका संपर्क टूटा जिसके बाद आपने आपका संपर्क ही नहीं हुआ आज तक। ठीक है? और इसमें एक सबसे बड़ा फैक्टर ये है इस समय इस समय सबसे बड़ा फैक्टर ये

03:03:16:14 है कि

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03:03:17:08 हम किसी ना किसी प्रकार से सब आपस में कनेक्टेड हैं। सब किसी ना किसी प्रकार से सबका संबंध एक दूसरे से इस तरह के विरोधाभास से निकल आएगा। ठीक है? तो ऐसे में किस तरह का प्रमाण हमें आवश्यक होगा यह सिद्ध करने के लिए कि यह भाई फ्री मेंशन के उसी एजेंडे के लिए कार्यरत है जो एजेंडा उसका मूलभूत एजेंडा है प्रीमेशंस का तो हमें प्रमाण ऐसा चाहिए होगा जिसमें कि ऐसा सिद्ध हो सके कि इनको प्रीशंस के उसी कार्य के लिए उसी कार्य के लिए नियुक्त किया गया था जो कार्य सनातन धर्म के विरोध में है। जो कार्य अधर्म के पक्ष में है। वरना इस तरह से अगर पीछे चलते चले जाएंगे तो शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति मिले जिसका संपर्क किसी ना किसी विवादास्पद संस्था व्यक्ति इत्यादि से ना निकले।

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03:04:14:04 तो अगर निकलता है तो हमें ऐसा ऐसा प्रमाण सिद्ध देना होगा जिससे कि यह सिद्ध हो सके कि वो संस्था व्यक्ति विवादात्मद है जो वो जिस व्यक्ति के ऊपर हम आरोप लगा रहे हैं आक्षेप लगा रहे हैं उस व्यक्ति का उपयोग विनियोग उसी रूप में करते हैं जो रूप सनातन के लिए घातक है। ठीक है? ऐसे तो हम लोगों का अगर संबंध निकालेंगे तो कोई अछूता बचेगा ही नहीं। कोई भी ऐसे संबंध निकालेंगे तो ठीक है आगे बढ़िए अब इसको अब अंतिम पड़ाव पर आ गया है डिस्कशन काफी देर हो गई है ऑलमोस्ट 3 घंटे होने वाले हैं तो जी

03:04:58:03 अ कुछ स्टार्टिंग में आपने कुछ खुलासा की बात की थी तो सबसे बड़ा खुलासा हां खुलासा की बात भी करेंगे और एक चीज और एक चीज और बात करेंगे कि पहले ये बात कर लूं कि जो आपने पूछा था ना कि किस चीज का अभाव है जो आक्षेप करता है उन लोगों में उसमें एक चीज बच गई थी कि उनके पास एक तो प्रमाण नहीं है। ठीक है? प्रमाण के नाम पर उनकी बातें हैं कि मैं पांच साल से हूं। मैं ये जानता हूं, मैं करता हूं। दूसरी बात तर्क भी नहीं है। तीसरी बात उन्होंने यह भी नहीं बताया कि ऐसा क्या किया जाए जो ये सारी चीजें बंद हो जाए। ऐसा क्या शास्त्रोक्त या गुरु के वाक्य गुरु के वाक्य के समर्थन में ऐसी कौन सी विधि है जो यह सब चीज सही हो जाए ये सब उन्होंने कुछ नहीं उनको केवल विरोध करना था उनको समाधान से भी कोई मतलब नहीं है तो विरोध करना है तो क्या हुआ है ये अंधी भेड़ों की एक चाल के अलावा और कुछ नहीं है जिनको बस विरोध करना है हमसे पूछा जाए वो बंटी और बबली का वो है ना एक दृश्य जिसमें वो लोग जाते हैं थोड़ी देर के लिए उनको जब ताज महल को बेच होता है तो वो वहां पर एक नकली उसको बिठाते हैं अपने

03:06:13:14 रिप्रेजेंटेटिव को और जो वाकई में ताजमहल का रिप्रेजेंटेटिव था ऑथराइज पर्सन उसके घर पर एक भीड़ भेज देते हैं कि तुम जाओ जाओ वहां जाकर के नारे लगाओ तो यह परेशान होगी यहां से जाएगी जो वहां की रिप्रेजेंटेटिव ऑथराइज पर्सन ताजमल की तो जितनी देर वो जाएगी उतनी देर मैं अपनी बबली को यहां बिठा दूंगा ताजमल का सौदा कर लूंगा। तो अब क्या सीन है कि यहां तो ताजमल का सौदा हो रहा है बंटी और बबली के द्वारा और वो जो भीड़ है जो वहां गई है नारे लगाने जहां पे ये अधिकारी है जो ताजमहल की अथॉरिटी ये वहां पहुंचती है कि मेरे घर पे नारे क्यों लग रहे हैं? तो अब जो भीड़ है उसके पास कोई कारण तो है नहीं नारे लगाने का। कारण है क्या? तो यूं ही नारे लगाने हैं। तो यह ऑथोराइज्ड पर्सन वहां पहुंचती है उसके घर के बाहर नारे लग रहे हैं। इंकलाब जिंदाबाद। इंकलाब जिंदाबाद तानाशाही नहीं चलेगी तो ये पहुंचती है ये बोलती है अरे भैया रुको रुको रुको क्या दिक्कत है तो कहते हैं इंकलाब जिंदाबाद अरे अरे भैया शांत हो जाओ अरे बताओ तो सही तुम्हारी मांगे क्या है तो कहते हैं तानाशाही नहीं चलेगी अरे किसकी कौन कर रहा है तानाशाही किसकी नहीं चलेगी तो वो कहता है किसी की भी नहीं चलेगी किसी

03:07:28:16 की भी नहीं चलेगी समझ गए तो ये अंधे भेड़ों की बात है कि भैया विजय श्री ने ये किया विजय श्री ने ये किया विजय श्री ने वो किया पर प्रमाण है नहीं प्रमाण के नाम पर अपने वक्तव्य है केवल और फिर एंड में यह भी नहीं है कि ऐसा क्या हो जो ये इस मामले से आप संतुष्ट हो जाओ क्योंकि आप कुछ भी कहोगे तो उसमें हमें वो चाहिए होगा कोई शास्त्रीय विधान कोई गुरु वाक्य वो सब तो है नहीं आपकी मनमर्जी है तो इसलिए आप वही हो और कुछ नहीं हो कि तानाशाही नहीं चलेगी किसकी किसी की भी ठीक है हां अच्छा अब आपने जो अभी प्रश्न पूछा है वो सबसे बड़ा खुलासा वाला उसमें मैं कहूंगा कि जिन महानुभाव ने यह वीडियो प्रसारित किया है यह वक्तव्य दिया है कि ये जो फ्री मिशन से जुड़ी हुई है विजय श्री और उसका आधार उन्होंने बताया सबसे पहला आधार था प्रेरणा का आधार था कि उन्हें जो है वो क्या कहते हैं एक पीडीएफ प्राप्त हुआ है जो हमारे गुरु भाइयों का है कि नहीं है ये भी एक सोच सोचने वाली बात है। है ना? वो भी जांच का विषय है। और दूसरी बात कि ये प्रमाण नहीं होता है कि हमें 50 लोगों ने कह दिया। फिर भी इनको जो प्राप्त हुआ है मैं कहूंगा कि आपको थोड़ी सी और

03:08:44:09 रिसर्च करनी चाहिए थी एक महिला के बारे में। इस तरह का जो वक्तव्य है वंश वंश चला दूं मैं? नहीं मैं मैं कहूंगा तब आप चलाइएगा। तो सबसे पहली बात है कि प्रेरणा आपको मिली और धर्म का आपके अंदर रक्षा का भाव है। सही बात है और ऐसा नहीं है कि हम लोगों से अभी तक कोई गलती नहीं हुई होगी। हम लोगों से भी ऐसी कोई गलती हो सकती है कि हमने पूरी जानकारी नहीं है और हमने ऐसा वक्तव्य दिया। परंतु मैं वही कहूंगा कि ऐसा वक्तव्य हमें देने से बचना चाहिए। क्योंकि कई लोग हमारे आपके हमारे नहीं आपके शब्दों को प्रमाण के रूप में देखते हैं। तो आप कोई भी अगर बात कह रहे हैं तो उसको यथा यथोचित तरीके से जांच परख के कहे। अब जैसे सबसे बड़ी बात है कि जो महानुभाव है जिन्होंने वक्तव्य दिया है किशन से जुड़ी हुई हैं। अब पता नहीं उनके अंदर की क्या स्थिति रही होगी कि उन्होंने जल्दबाजी में या पूरी जानकारी जैसा कि विजय जी बार-बार कह रही हैं कि पूरी एक प्रॉपर रिसर्च करे बिना ही उन्होंने वक्तव्य दे दिया कि वो फ्री मेशन से जुड़ी हुई है। दूसरी बात फ्री मिशनंस से जुड़ी होना और फ्री मेशंस के लिए कार्य करना दोनों अलग-अलग बातें हैं। जुड़े होना हम सब जुड़े हैं। मैं कह रहा हूं। अगर ऐसे देखोगे तो हम सब जुड़े हैं फ्री मिशन से। श्वेता जी जुड़े हैं। रिदमम जी जुड़ी है। मैं जुड़ा हूं।

03:09:59:22 यहां तक कि जो व्यक्ति यह कह रहा है कि फ्री मिशन से जुड़े वह भी जुड़े हैं। तो जुड़े होना और उसके लिए कार्य करने में अंतर है। तो जब हम यह कह रहे हैं कि जुड़े होना तो इसका कोई मतलब ये व्यर्थ की बात है। हमें यह बताना होगा कि ये उसके लिए कार्य कर रही है कि नहीं जिसका अभाव है। दूसरी बात उन्होंने क्या किया कि ये भी एक वो बताया कि ये जो है पूरी के शंकराचार्य जी के साथ मंच साझा कर करके अपना व्यापार को पुष्ट कर रहे हैं अपने व्यापार को। तो अब और पूरी के शंकराचार्य के साथ मंच साझा कर करके तो मंच साझा करने के लिए संबंध में उन्होंने प्रमाण भी दिखाया अपने वीडियो में प्रमाण के रूप में कुछ दिखाया है पर पहली बात तो मैं मैं जो जानता हूं वो बता दूं कि इन्होंने कभी भी वो मंच साझा किया ही नहीं तो आप ये कैसे कह रहे हो कि वो पूरी के शंकराचार्य जी के साथ मंच साझा करके और जो है अपने व्यापार को पुष्ट कर रही है। दूसरी बात यह है कि आपने प्रमाण के रूप में यही सबसे बड़ा खुलासा है। सबसे बड़ा खुलासा यही है। प्रमाण के रूप में जो जो महानुभाव है उन्होंने जल्दी में कर दिया कि क्या कर दिया? उन्होंने जो वीडियो प्रस्तुत किया है उसमें जो स्त्री जो मातृशक्ति वहां पर बैठी दिख रही है पूरी के शंकराचार्य जी के मंच

03:11:15:00 पर वो विजय श्री है ही नहीं। वो विजयश्री है ही नहीं। तो यह अधूरी जानकारी पर जल्दी निर्णय लेते हुए और शायद पता नहीं किस स्थिति में उन्हें ये कार्य करना पड़ा तो मैं तो यही कहूंगा आप दिखा दीजिए एक बार को उनका वो वक्तव्य और उनके द्वारा जो वीडियो दिखाया गया है बताइएगा स्क्रीन शेयर

03:11:50:04 कर रहा हूं मैं जी आवाज आई है आपको? आवाज नहीं आई। प्ले भी नहीं हुआ है। आ रही है आवाज? अब ब्लर है। आवाज आ रही है? आवाज नहीं आ रही है। ठीक है। रुकिए। कोई समस्या? आपकी आवाज भी नहीं आ रही थी अभी तो अब अब आएगी आवाज

03:12:30:06 अच्छा अब जिस स्त्री की बात चल रही थी जिसका नाम विजयाश्री बताया गया आ रही है जी आ रही है आ रही है बताइए चलाइए हां तो बताइए ना अच्छा ठीक है

03:12:43:00 अब जिस स्त्री की बात चल रही थी जिसका नाम विजयाश्री बताया गया था मैं उस स्त्री को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानता हूं हां ये जरूर है कि शिव भगवान नारायण द्विवेदी इत्यादि लोग जो आहान चैनल के हैं वो लोग निकटता से जानते हैं संवाद इत्यादि होता रहता है ये सब बातें भी सार्वजनिक है और साथ ही साथ मैं इसी वीडियो में एक वीडियो अटैच करूंगा आप लोगों के लिए जिसमें आप देखिएगा कैसे पूरी के शंकराचार्य जी के मंच पर वो स्त्री बैठी हुई है और सम्मान के साथ बैठी

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03:13:06:16 हुई है अब उस स्त्री को पता है कि नहीं कि वो क्या कर रही है ये मैं नहीं जानता शंकराचार्य जी को पता है कि नहीं कि उस स्त्री के आगे पीछे कौन सी शक्तियां कार्य कर रही है ये भी मैंने बना वो स्त्री की वो स्त्री ये देखिए करिए पीछे करिए पीछे करिए पीछे नहीं जानता शंकराचार्य जी को पता है कि नहीं कि उस स्त्री के आगे पीछे कौन सी शक्तियां कार्य कर रही है ये भी मैं नहीं जानता बस

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03:13:33:20 बस क्या ये स्त्री आपको विजय श्री दिख रही है कोई है जो आ के कोई है जो आ के ये कहेगा कि ये जो स्त्री है ये

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03:13:44:14 विजयश्री है। ठीक है? तो गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु पूर्णिमा के दिन गुरुदेव के प्रति निष्ठा व्यक्त करने के लिए मंच पे नहीं मंच से नीचे मंच से नीचे खड़े होकर के इन्होंने कुछ शब्द अर्पित किए हैं गुरु चरणों में। बस एक बार इसके अलावा बोलने पर वो भी गुरुदेव के कहने पर मैं चला देता हूं। चलाइए।

03:14:17:10 से कपड़े क्यों? अब देखिए एक चीज और है। एक मिनट पॉज करिए। यहां पर ये जो स्त्री है यह मतलब जो इसने जो इतना पास में चली भी गई ना गुरुदेव के हम कभी नहीं इस पर भी वहां पर रोका गया था उसको और वहां पर फिर दूर बिठा दिया गया था कि आप इधर बैठो जाकर के। मतलब ये एक अनएक्सेक्टेड चीज थी जो इतना मतलब वो हो गई पास में चली गई। और उसको फिर कहा गया इस वीडियो के बारे में भी हम कुछ बताएंगे बाद में। बताएंगे आप बताइएगा। मगर सबसे पहली बात यह है कि क्या यह विजय श्री है?

03:14:55:06 नहीं है ये। चल आइए प्ले करिए।

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03:15:02:24 ये देखिए ये कौन से एंगल से आपको यही दिख रही है। वही मातृ शक्ति लग रही है जो ये बैठी

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03:15:08:24 है। तो मैं कहूंगा कि मतलब पहली बात तो यह है कि 50 100 लोग अगर बोल देते हैं तो उन बातों को प्रमाण ना समझा जाए और बहुत जल्दबाजी में ऐसी चीजें ना की जाए जिनसे कि जिन महानुभावों के वक्तव्य शब्द प्रमाण माने जाते हो उनके प्रति ऐसी चीजों से कहीं ना कहीं कुछ थोड़ा सा आएगा मन में अनास्था उत्पन्न हो सकती है। तो इससे बचे ऐसे वक्तव्य निर्गत करने से पहले बचना चाहिए रुकिए यहां पे यहां पे रुकिए यहां पे रुकिए ये जहां रुकी है ना वीडियो ये देख रहे हैं ये लाल सा ये जहां पे आपका कर्सर है ये है हम पता है हम लाइन लगा रहे हैं

03:15:54:02 अच्छा ये जो छोटा सा चेहरा दिख रहा है काले काला काला हरा लाइट जिस पे है उसके सामने में एक चेहरा लाल श और ये पीछे चोटी लंबे सीधे बाल हम ये हैं। हम लाइन साध रहे थे और जब यह महिला आई है हम जानते हैं इसका नाम प्रेम प्रेम बाईसा है। राजस्थान से आप सर्च कर लीजिए। तो ये ये जो लाइन लाइन समेट रहे हैं ना स्टेज के नीचे जो लोगों को बोल रहे हैं जय श्री राम नारायण आगे बढ़िए आगे बढ़िए। ये हैं हम। अब बताइए अब क्या हुआ? जो व्यक्ति वो वीडियो देखेगा उसके मन में क्या आएगा? उसके मन में यह आएगा कि भाई वो जो है मंच पर बैठी विजय श्री मंच पर बैठी जबकि वो नहीं बैठी। पहली बात। दूसरी बात यह है इसमें एक आगे की चीज और है कि उनके द्वारा यह बता दिया गया है कि भाई क्या है वह वक्तव्य क्या दिया गया है वहां पिंड कमेंट करके बाद में वीडियो के बाद में शायद जो जो ये जिन्होंने वीडियो बनाया है जिन्होंने वक्तव्य दिया है उन्होंने वीडियो के बाद में यह लिख दिया है कि वीडियो के अंत में जिस महिला को दिखाया गया है वो महिला यह नहीं है विजय श्री यह वीडियो के अंत में वो वीडियो

03:17:09:06 के डिस्क्रिप्शन में या पिंड कमेंट में उन्होंने वहां लिख दिया है क्योंकि शायद वीडियो बनाने के बाद उनको पता चल गया। मगर अब उन्होंने इस बात को पता नहीं मैंने पढ़ा नहीं है। उन्होंने इस बात को स्वीकार किया है कि नहीं कि ये गलती से हुआ है। ठीक है? उन्होंने इस बात को स्वीकार किया है कि नहीं कि ये गलती से हुआ है। मगर उन्होंने इतना कहा है शायद मैंने उस कमेंट को नहीं पढ़ा कि क्या कहते हैं ये? ये जो है अशास्त्रीयता दिखाने के लिए हमने वो वीडियो वहां पर लगाया था। पहली बात तो यह है कि देखिए आपका पूरा वक्तव्य क्या है कि विजय श्री की बात हो रही है और देखिए वो वो लड़की किस तरह से पूरी के शंकराचार्य जी के मंच को साझा कर रही है। ये आपका वक्तव्य है हमने सुना पहले भी सुना और उसके बाद आपने दिखाया तो अगर आपने यह नहीं कहा है अपने कमेंट में कि वो वीडियो मतलब कंफ्यूजन के चक्कर में लग गया तो यह ठीक बात नहीं है। यह ठीक नहीं है। और यदि आपको अशास्त्रीयता तो वो एक अलग विषय है। अशास्त्रीयता है गुरुदेव देख रहे हैं वहां पर और फिर अभी विजय जी भी बताएंगी कि क्या हुआ है यहां पर वो पूरी बात बताएंगी तो ये तो एक बात रही मगर दोनों ही तरीके से यह जो वीडियो है इससे कम से कम हमें इतना पता चल गया कि विजय श्री

03:18:24:07 मंच को साझा नहीं कर रही है ठीक है अब आपने अपने वीडियो में एक वक्तव्य दिया है कि मंच को साझा करके अपने व्यापार को पुष्ट कर रही है तो वो वक्तव्य तो नहीं कटा ना व्यापार को पुष्ट करने वाला यह जो लेडी है इन्होंने मंच को साझा नहीं किया तो मंच को साझा करने वाला जो वक्तव्य है वह गलत है। वो उन्होंने नहीं किया। मंच को साझा करके अपने व्यापार को पुष्ट करना यह वक्तव्य भी गलत है। तो मैं कहूंगा कि ऐसे वक्तव्य देने से बचे। ऐसे जो प्रलाप करने वाले लोग हैं इनसे इनके इनसे प्रेरित ना हो क्योंकि यह अपना चेहरा तक नहीं दिखाएंगे। जब सामना करने की बात होगी तब तो ऐसे वक्तव्य निर्गत करने से बचे और इससे अधिक मैं कुछ नहीं कहूंगा। आप भी एक सम्मानित व्यक्ति हैं और लोग आप मतलब आप अच्छा कार्य कर रहे हैं धर्म के विषय में। कई आपने अच्छी चीजें की है जिससे सभी प्रभावित है और इसीलिए मैं इस इस विषय में चिंता व्यक्त कर रहा हूं कि ऐसा वक्तव्य देने से बचें जो अकाट्य ना हो। अकाट्य चीजें रखिए। हम तो सदैव साथ में हैं। सभी परंपरावादी साथ में हैं। तो अकाट चीजें रखें

03:19:39:25 और जो अकाट नहीं है ऐसे वक्तव्यों को देने से बचें। ठीक है [संगीत] जीता बोलेंगे। हां बोलिए बोलिए। हमें आप बताइए वो हटा दीजिए। हम एक बात बोलेंगे कि जिन्होंने भी यह वीडियो बनाया है बहुत क्लियरली सबसे पहले बोला है कि उसकी वीडियो भी डाली जाएगी और वीडियो यह डाल दी गई है। ठीक है? उसके बाद अगर कोई यह बोले सामने वाला व्यक्ति अरे पर हमने नीचे लिख दिया था। हम यह बोलेंगे कि कितने व्यक्ति जाके नीचे पढ़ने वाले हैं कि आपने क्या लिखा था या क्या नहीं लिखा था। दूसरी बात वही हम बोल रहे हैं। बिना रिसर्च के आप किसी भी महिला और पुरुष किसी के भी बारे में बात कर रहे हैं। किसी का कोई परिवार है। कोई कहां से आ रहा है। आपको कितने लोग सुनते हैं। कितने लोग आपको सुनकर उत्साहित होकर कर्म कर देते हैं। कैसे-कैसे? तो अगर आपने गलत आपसे वीडियो बन गई है तो आपका दायित्व बनता है कि आप उस वीडियो को उतारें। और उसके अंदर क्योंकि रिसर्च है नहीं। बात सीधी है नहीं तो उस चीज़ को हटाया जाए अगर तो जिस

03:20:55:01 तरह से आ जो जिन्होंने वीडियो बनाई है उन्हें सम्मान सम्मान देके बात हो रही है कि वो एक महानुभाव है तो अगर अह मेरे हिसाब से अगर एक नॉर्मल व्यक्ति भी होगा और इस तरह की कोई घटना होगी तो आपके लिख देने से नहीं होता है क्योंकि आपके बोलने के ऊपर ज्यादा लोग जाते हैं। लोग रील के अंदर बैठकर पढ़ते नहीं है कि किसी ने क्या उसके बाद अपनी माफी मांगी है या बोला यह मेरे से गलती से हुआ या ये ऐसा नहीं है ऐसा है। आपने जो वीडियो बनाई है उसके अंदर आपने जो बोला है और उसको अटैच करके दिखाया है जो इतने उतावले लोग हैं जो कम से कम जिनके अंदर यह धैर्य नहीं था कि किसी का पूर्व जीवन है या यह बात सत्य है या नहीं। उनके अंदर यह भी धैर्य नहीं होगा कि वो इस बात को नीचे जाकर पढ़ें और समझें। है ना? और आश्चर्य की बात देखिए और यहां देखिए कितनी बड़ी वो है कोइंसिडेंस कह लीजिए जब यह महिला आई थी क्योंकि हम वहां पे कुंभ में लाइन की ड्यूटी करते थे। किसी को लगता है ना हमें बहुत कार्य दिल से हैं। हम लाइन का काम करते हैं। आइए करिए और आपको पता चलेगा कि लोग आपको कितना सम्मान देंगे। जब आप किसी को बोलेंगे कि लाइन के पीछे बैठिए।

03:22:11:03 ठीक है? तो जब हम वहां थे तो यह महिला आई थी। हमें पता था कि महिलाएं स्टेज पर नहीं जाती हैं। वो ब्रह्मचारी महात्माओं का स्थान है। तो हमने उस महिला को बोला था कि आप बगल में हम लोगों ने सोफा इसीलिए लगवाए थे कि सब जाके वहां पर बैठे। और स्टेज पर कौन जाता है, नहीं जाता है, हमें नहीं पता है। ये ये मेरा कार्य ही नहीं है। ठीक है? तो हमने उस महिला को सोफे पर बिठाया था और उसके बाद हम बाहर गए लोगों को देख रहे थे और जब आप यह वीडियो नहीं देख रहे हैं लाइन मैनेज करने की लाइन मैनेज करने के लिए जब हम लोग खड़े हुए हैं इतनी देर में हम देख रहे हैं कि यह महिला स्टेज पर चढ़ गई है आप समझ रहे हैं तो बहुत ही इंटरेस्टिंग सिचुएशन थी जबकि हम इस महिला को बोले भी थे कि ऊपर मत जाइए आप साइड पर बैठिए कोई ना कोई आपसे आके बात करेगा क्योंकि इनके साथ जो इनके राजस्थान से थे यह लोग इनके जो भाई थे वह बोल रहे थे गुरुदेव से मिलना है। गुरुदेव से मिलना है बोलकर सब लोग आ जाते हैं। बट गुरुदेव एक समय है। ठीक है? और उनसे कौन मिलेगा नहीं मिलेगा यह निर्णय हमारा नहीं है। उस चक्कर में भी हम काफी बुरे बने। काफी लोगों के लिए जो हमें याद है। तो इस महिला को यही बोला गया था। बट यह महिला कहां से चढ़ के आ गई? अब स्टेज के

03:23:26:07 ऊपर। तमाशा होता क्या होता हमें कुछ नहीं पता है। इसीलिए इंटरेस्टिंग पार्ट यह है कि इसकी मतलब बाय लक बोलिए बाय चांस बोलिए कि इस पूरी वीडियो में एंड में जब वो ऐसे घुमाते हैं तो हम वहीं खड़े हैं उनको लाइन में आगे बढ़ने के लिए। अच्छा वो क्या सीन था जो उसने पैर छू पैरों की ओर चली गई थी जो गुरुदेव के वो क्या वो महिला सबसे पहले तो देखिए जो शास्त्रीय बातें हैं सन्यास की और वो सबको पता ही है। हम स्पष्ट क्या ही बोलेंगे। है ना? हमसे तो ज्यादा शास्त्रीय लोग स्पर्श नहीं स्पर्श नहीं होता है स्पर्श भी और कौन क्या बन सकता है या क्या जीवन जो जीवन जिसका है या नहीं है तो ये महिला आई अब वो एक होता है कि किसी को रोकना पर एक नहीं होता है कि आपके सामने बस हो गया है और उसका माइक्रो सेकंड भी आपको नहीं मिला है कि कोई जाके वहां पे कर दे कि मतलब एक क्षण हम देख रहे हैं यह महिला आ गई है दूसरे क्षण वो पैरों के अंदर ऐसे जा रही है पर फिर उसे हटाया गया है बाद में जिसकी की कोई वीडियो नहीं है क्योंकि कोई अपनी जैसे यह महिला की जो वीडियो है वो अपने वही क्लिप्स डालेगी जहां पर वो बहुत अच्छी लगेगी है ना कि हम आए ऐसा हुआ पर कोई अपनी ऐसी वीडियो नहीं डालेगा जहां पर उसको बोला गया कि हट जाइए

03:24:41:10 आप समझ रहे हैं और यही बात है और कुछ बात ही नहीं है पर हमें यह जरूर लगता है कि जो व्यक्ति इस तरह की बातें कर रहे हैं या इतना बता के कि यह है ये है ये है जबकि प्रमाण एक शब्द का नहीं है तो आप उसको क्यों इरिस्पांसिबल होकर आप क्यों उसको पब्लिश कर देंगे उस वीडियो को है ना अगर हम कोई सोचिए वीडियो डाल दें जिसके अंदर हम कोई उल्टी बात बोल दें और उसके बाद हमें ज्ञान हो जाए कि अरे ये तो हमने गलत बोल दिया हम उस वीडियो को हटा देंगे है ना और दोबारा से बना दीजिए कोई बात नहीं पीडीएफ भी आपके पास है सब कुछ आपके पास है आप दोबारा से वीडियो को बनाइए पर यह हमें थोड़ा इरिस्पांसिबल लगा और हम मतलब हर संत सारे संत समाज की हम हम उनको प्रणाम करते हैं। हम एकदम साधारण सांसारिक व्यक्ति हैं। हम किसी की समीक्षा नहीं कर सकते हैं। और हम यह नहीं समझ मतलब हमें यह नहीं समझ आ रहा हम में इतनी मतलब हम कब इतने बड़े हो गए कि किसी संत को हमारी समीक्षा करनी पड़े और वह भी इस तरह से जिसने आपकी समीक्षा की है उसके द्वारा आपकी समीक्षा होना

03:25:56:12 बड़ी बात है नहीं तो हम वो क्या बोलते हैं गुरुदेव क्या बोलते हैं हम सच में बोल रहे हैं गुरुदेव बोलते हैं ना कि संतों के द्वारा दी हुई कटु वाणी भी प्रसाद होती है लेने वाले पर है तो तो हम उसे प्रसाद समझ कर ही लेंगे। है ना? शायद मुझे ऐसा लगता है कि अगर वो ये नहीं करते तो शायद नहीं होते। मैं इसमें एक प्रैक्टिकली एक चीज और बताऊंगा। जैसे इनका एक पार्ट है कि जिसमें वो कह रहे हैं कि अभी हम वीडियो के अंत में आपको वो वीडियो दिखाएंगे जिसमें वो मंच को साझा कर रही है और अपने उसको पोषित कर रही है। वही स्त्री जिसकी बात हो रही है जिसका नाम है विजयश्री। अब सबको पता है कि वीडियोस की बनती है रील। वही है। ठीक है। तो क्या ये गारंटी है कि जब आपका ये वाला उठाया जाएगा यहां से ये पार्ट ये दोनों चीजें उठाई जाएंगी। पहली बात तो आपके सब वो जो विजय जी ने बात बोली कि सभी लोग जाकर के उसका कमेंट पढ़ें। मुझे नहीं मैं मैं अपनी बात कर रहा हूं। मैं सारे कमेंट नहीं पढ़ता। कोई संयोग बस संयोग से कुछ दिख जाए तो दिख जाए। मैं नहीं पढ़ता अगर कोई वीडियो देखने जा रहा हूं तो डिस्क्रिप्शन भी चेक नहीं करता। ठीक है? तो क्या जरूरी

03:27:11:22 है जो आपसे प्रभावित होगा जो आपका क्या कहते हैं ये अ क्या कहते हैं रील बनाता होगा वो आपके इस वक्तव्य को लेकर के कि देखो देखो विजय श्री नाम की लड़की जो है और पूरी शंकराचार्य जी के मंच को साझा करके अपने व्यापार को पुष्ट कर रही है। तो ये दोनों चीजों को कनेक्ट करके वो रेल नहीं बनाएगा। तो यह सब विचारणीय है। आगे निर्णय आप लें जो आपको लेना है। हमने अपनी बातें बता दी हैं। और इसके बाद मैं अंत में यही कहूंगा कि प्रमाण कोई भी नहीं है। किसी के पास यदि कोई प्रमाण है तो शेर का बच्चा एक ही अच्छा है। वो एक कार्य करें। मेरा नंबर है 7408301869।

03:27:54:28 ठीक है? वो मुझसे संपर्क करें। मेरे पास प्रमाण लेकर के आए। अकाट्य जिनको काटा ना जा सके। पहली बात क्या है? जब भी कोई व्यक्ति आपको दोषी लगे तो उसके बारे सबसे पहले क्या करो? मेरा सिद्धांत है। मैं बता रहा हूं। मुझे जब भी किसी में संशय होता है, दोष उत्पन्न होता है, किसी के प्रति दोष दृष्टि आती है तो सबसे पहले मैं उसका स्वयं लॉयर बन जाता हूं। अधिवक्ता बन जाता हूं। मुझे उसको बचाना है। मैं कोर्ट में खड़ा हूं। मैं न्यायालय में खड़ा हूं। वो मेरा क्लाइंट है। अब मुझे बचाना है। मैं कौन-कौन सी बात बोल सकता हूं उसको बचाने के लिए? तो यदि मेरे पास उसको बचाने का जब कोई रास्ता नहीं रह जाता। मैं इसको कहते हैं पूर्व पक्ष। अगर सरल भाषा में पूर्व पक्ष कि आप सोचिए पूर्व पक्ष क्या-क्या हो सकता है जो बात आप कह रहे हो उसको कैसे कैसे काटा जा सकता है। तो जब वो सारे तरीके से पूर्व पक्ष हम सोच ले उसके बावजूद भी वो व्यक्ति दोषी दिखाई दे तो उसको दोषी मानना चाहिए। यह दो दिन में पता लग जाता है मठ में क्या होता है या जैसे एक वक्तव्य दिया गया कि वो अभी क्या कहते हैं उसको जो है चार दिन पहले चार महीने पहले तक जो ऐसी ड्रेस में घूम रही थी ये वक्तव्य दिया गया है जबकि

03:29:10:04 चार महीने पहले नहीं घूम रही थी तो ये आपकी बात कट रही है वो सालों पहले वो ड्रेस पहनी थी वो चार महीने पहले की बात कर रहा है तो ये ये अकाट्य बातें आप नहीं बोल रहे हो बोलो अकाट्य बोलना सीखो ये भी चीजें ठीक है तो मैं क्या कह रहा था कि पहले आप तरह-तरह से पूर्व पक्ष सोचिए क्या क्या हो सकता है? अगर आपको विद्या में दोष दृष्टि दिख रही है। अगर आपको पूरी मठ में दोष दृष्टि दिख रही है। अगर आपको आवाहान शिवश नारायण द्विवेदी में दोष दृष्टि आ रही है। कोई बात नहीं। पहला कार्य है कि आप उसके अधिवक्ता बनके उसको बचाने का हर संभव प्रयास सोचो मन में। मैं क्या-क्या तर्क दूंगा, क्या-क्या प्रमाण दूंगा। और जब सारे मेहनत कर लेने के बाद भी आपके पास कोई रास्ता ना बचे उसको बचाने का तब मानो कि हां यह दोषी है तो अभी तक जो भी बातें आई है सामने वो सब अकाट नहीं है सब ऐसे ही मुंह की बातें सब तुरंत खंडन हो सकता है उन बातों का वही की वही तो ये जितने गुरुदेव का समर्थक बनते हैं कि हम उनकी सेना है भले ही गुरुदेव ने स्वयं अपने मुख से इनमें जो प्रखर है जो व्यक्ति ये बोल रहा है ना कार में बैठकर के जिसने लाइव किया है आपके विरुद्ध वो व्यक्ति को गुरुदेव ने खुद घोषित किया है कि गुरुद्रोही है। सोचिए उसने कुछ ऐसा कुकृत किया

03:30:25:08 था आज से दो वर्ष पूर्व कि उसको गुरुदेव ने मंच पर आकर सबके सामने घोषित किया कि गुरु द्रोही है। और वो व्यक्ति आज गुरुदेव का समर्थक इसीलिए तो गुरुदेव तक जा नहीं पा रहा। पता नहीं कितने दिन हो गए होंगे। उसने गुरुदेव के दर्शन तक नहीं किए होंगे। मुझे नहीं था कि उसने दर्शन भी किए हो गुरु के क्योंकि गुरुदेव ने उसको दोषी कहा। गुरुदेव के द्वारा तू गुरु द्रोही दो घोषित है। पहचान ले अपने आप को और उसके बावजूद वो गुरुदेव का हितैषी होते हुए गुरुदेव ने उसको गुरुद्रोही कहा है। फिर वो गुरुदेव का हितैषी होते हुए जो है उल्टे सीधे तर्क हीन प्रमाण रहित जो है वक्तव्य निर्गत कर रहा है। जिसके कारण और भी विप्लव हो रहा है। समाज में जैसे कि एक विप्लव यही कि एक जो सशक्त व्यक्तित्व वाले हैं वह भी उससे प्रेरित हो गए। उन्होंने आपने देखा था जल्दी से वीडियो निर्गत कर दिया। प्रसारित कर दिया। अब उसमें ये चीज हो गई त्रुटि हो गई। तो सबसे पहले आप अंत में मेरी यही बात है। जिसके पास भी प्रमाण है इन सब बातों को लेकर के वो प्रमाण ले आए। मेरा नंबर है 7408301869 अकाट प्रमाण लाना ऐसे मत लाना कि वो देखो देखो बातें

03:31:40:16 करती हुई दिख रही है ना इसका मतलब कि उसका संबंध है ये नहीं है भाई बातें करते हुए दिखने से किसी का आपत्तिजनक संबंध सिद्ध नहीं होता अकाट्य प्रमाण आपके पास है आप लाइए आपका स्वागत है और मैं उस दल की अगवाई करूंगा मैं अकेला जाऊंगा अगर कोई नहीं जाएगा तो मैं जाऊंगा आप अकाट्य प्रमाण लाओ मैं फिर कह कह रहा हूं वीडियो के अंत में अकाट्य प्रमाण लाओ। ठीक है? तो सभी को समय देने के लिए धन्यवाद। और मैंने फिर बताया कि इस ये जो युद्ध है इसमें हम अंत तक जाएंगे। वही लोग इस युद्ध में कूदे जो अंत तक जाने का जज्बा रखते हो, गुर्दा रखते हो। केवल सोशल मीडिया वरियर हैं। उंगलियों में सामर्थ है। केवल पराक्रम नहीं है। उसका यह सब उन उन लोगों के लिए बोल रहा हूं जो तथाकथित अपने आप को समर्थक बोलते हैं पूरी पीठ का और यह सब कर रहे हैं कुकृत कर रहे हैं तो पराक्रम नहीं है धरातल पर आने का ढंडस नहीं है अपना चेहरा तक दिखाने का ढंडस नहीं है तो दूर रह ठीक है और वही आए जो अंत तक जा सकते हो सभी ने जो आप कुछ

03:32:55:20 कहना चाहती हो विजय जी तो बता दीजिए अन्यथा इसको हम लाइव पूरा करेंगे सबसे पहले तो सबको ये लाइव में जितनी देर जो भी बन रहा है उसके लिए अपना समय देने के लिए धन्यवाद और इसके बाद भी अगर किस आप लोगों में से जो भी हैं अगर सुन रहे हैं जिनको स्टंट्स करने हैं तो हम क्लियर अगर आप हमें क्लियरली धमकी अल्टीमेटम और थ्रेट थ्रेट वर्ड थ्रेट बोलेंगे इसको थ्रेट अगर दे सकते हैं तो हम उस थ्रेट का उत्तर लीगली भी आपको भिजवा सकते हैं। कृपया यह सारी बेवकूफियां मत करिए क्योंकि हमें अपना समय व्यर्थ नहीं करना है। और जितनी जिसकी जो भी शंकाएं थी हमें लगता है कि हमने सॉल्व कर दी हैं। हां जिन अ जो भी यह बड़े व्यक्ति हैं जिन्होंने इस तरह के रिमार्क्स दिए हैं उन्हें पुन विचार करना चाहिए क्योंकि क्योंकि ऑब्वियसली जिन लोगों ने उन्हें यह सब भेजा है रिसर्च की कमी के कारण भेजा है और उन्हें ही गलत सिद्ध करवा दिया है वीडियो पर एक्चुअली में देखा जाए तो हमें यह सोच लेना चाहिए कि कौन हमें वीडियो भेज रहा है किसकी हम बात सुन रहे हैं उसके बाद छोड़िए एक महिला के बारे में आप

03:34:10:21 मतलब कुछ भी बोलते जा रहे हैं। उसके बाद बस नीचे में कुछ लिख देंगे। हां, लिखने से क्या होता है? हम नहीं देखे उसे। आप समझ रहे हैं थोड़ा जब हम व्यवहार की दृष्टि से और सारी दृष्टि से बात कर रहे हैं, तो हमें यह बताइए कि शास्त्र क्या कहता है कि जब आपके पास किसी महिला का सबूत नहीं है, प्रमाण नहीं है, आप उसको पब्लिकली उसकी इज्जत की धज्जियां उड़ा देंगे? क्या यह आपका शास्त्र बोल रहा है? और इनफैक्ट आप जिस भी भ्रम से वो दूसरी वीडियो को अटैच भी किए हैं और मतलब उस महिला का नाम लगा के जो भी आपने वो सिद्ध करने की कोशिश की और एक पूरी चलो एनालिसिस काफी डीप था कि यह कंपनी यहां यहां यहां पर कोई उसकी सॉलिड लॉजिकल प्रैक्टिकल ऑन ग्राउंड रीजनिंग और उसको सिद्ध करने का प्रमाण नहीं है तो क्या इस तरह से किसी महिला को टारगेट करना ऑनलाइन जो आपके अ मतलब मतलब फॉलोअर्स हैं और किस तरह के मतलब उनके अंदर कितनी मतलब वो संयम है और वो क्या बात सुन के क्या एक्शन ले लेंगे मैं चाहूंगा मैं मैं चाहूंगा कि इस इन वक्तव्यों को जो यहां पर दिए जा रहे हैं तो सकारात्मक ले कहीं भी किसी का कोई अपमान

03:35:25:25 नहीं किया जा रहा है और हम अपनों से अपनों से हमारा कोई भी विरोध है भी नहीं प्रतिकार है भी नहीं बस इसको सकारात्मक दृष्टिकोण से देखें एक एक में इस प्रश्न का उत्तर दे दूं। सौरभ जी यह इस प्रश्न का उत्तर शुरुआत में दिया गया है। एक

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03:35:42:16 शिक्षिका के रूप में जो शारीरिक आसन होते हैं आध्यात्मिक लेवल पर नहीं शारीरिक लेवल पर सिखाने की अनुमति विजय जी ने स्वयं जगदगुरु शंकराचार्य भगवान से प्राप्त की है। क्योंकि उन्होंने अपने पूरे जीवन क्योंकि एकमात्र उनका आज भी पार्जन का माध्यम यही था। यही है। तो उनके पास और अन्य कोई विकल्प नहीं है। ठीक है? और उन्होंने अपने पूरे जीवन इसी विद्या को सीखने में संघर्ष किया है। वो आध्यात्मिक लेवल पर योगाचार्य नहीं है। वो केवल भौतिक लेवल पर योग सिखाने वाली एक तरीके से व्यायाम प्रशिक्षिका मात्र है। ठीक है। जी। और उसके लिए भी उसके लिए भी उन्होंने गुरुदेव से अनुमति दी है क्योंकि यह संक्रमण काल है। हम बिल्कुल जीरो से अपने आप को सही करके वापस नहीं आ सकते। अब इनके पास वो समय इनका पूरा परिवार इन पर निर्भर करता है। इनके पास अब वो समय नहीं है कि पहले जाकर के पढ़ाई करें दूसरी और फिर उस पढ़ाई के में जो है कुशलता प्राप्त करें और फिर से दोबारा ये रिस्ट करें कि भैया अब जो है हम ये है अब वो नहीं है। ठीक है? पहली बात तो ये। दूसरी बात अगर यह है

03:36:57:18 भी अशास्त्रीय तो भाई यह नहीं कह रही है कि यह जो है कोई शास्त्रीय योगाचार्य है या ये कहीं से किसी परंपरा प्राप्त उससे सर्टिफाइड है कि योग सिखा रही है भाई ये जैसे कई ब्राह्मण ऐसे हैं जिनको दवाई नहीं बेचनी चाहिए परचून की दुकान नहीं करनी चाहिए मगर वो कर रहे हैं विषम परिस्थितियों में विपरीत परिस्थितियों में तो

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03:37:20:14 यह एक मैटर अलग है एक शास्त्र का एक वचन है कि यदि आप अज्ञानता वश अथवा क्या कहते विवशतावश शास्त्र का पालन करने में असमर्थ हैं। फिर भी यदि आपके अंदर शास्त्र वचनों के प्रति मतलब आपको पता चल गया कि यहां शास्त्र के प्रतिकूलता है। परंतु फिर भी शास्त्र वचनों के प्रति प्रमाण बुद्धि यानी कि आपके अंदर यह भाव है कि इतने अंश में मैं शास्त्र के सम्मत कार्य नहीं कर पा रहा हूं। भगवान से प्रार्थना है कि मेरे जीवन को ऐसा बनाएं कि मैं उसमें पहुंच सकूं तो भी आप धर्मज्ञ कहलाओगे। यह शास्त्रों का वचन है। ठीक है? तो गुरुदेव से अनुमति प्राप्त है। ये अपने आप को योगाचार्य के रूप में नहीं बता रही है। ये एक व्यायाम प्रशिक्षिका के रूप में योग सिखा रही है लोगों को। और तीसरा कि ये अपने उतने अंश को जितने अंशों में शास्त्रों का निर्वाह नहीं कर पा रहे। इसीलिए तो हम सामान्य लोग हैं। इसीलिए तो हम लोग वो नहीं है जो शंकराचार्य हैं, जो आचार्य हैं। इसीलिए तो हम वो नहीं है। क्योंकि हम पहली बात तो हमें जीवन भाई बचपन से हमें वैसा पालन पोषण ही नहीं हुआ ना। तो हम पीछे से जाकर खुद को करेक्ट करके वापस नहीं आ सकते। तो जो जैसी

03:38:35:22 स्थिति में है वहीं से जितना सामर्थ्य है जितना वातावरण है उसके अनुसार ही वो धारण कर पाएगा और यथार रूप से धारण कर पा रहे। मगर फिर भी एक बात ये आएगी कि जब भी पूछा जाएगा कि सही क्या है? होना क्या चाहिए? तो हम सब लोग एक आवाज में वो बोलेंगे जो होना चाहिए। जैसे कि एक पिता की आदत अगर लग चुकी है कि उसको तंबाकू खाना है। उसकी आदत हो गई है। मैं इसको इस रूप में ले रहा हूं। तो वो अपने बच्चे को कभी नहीं सिखाता कि नहीं तंबाकू खाना चाहिए। वो अपने संतान को यही सिखाता है कि तंबाकू खानी नहीं चाहिए। ठीक है? तो प्रमाण्य बुद्धि होनी चाहिए आपकी और फिर यथा सामर्थ आपका जो आप धर्म का पालन निर्वाह कर सके अपनी वातावरण के अनुसार गुरु आज्ञा के अनुसार गुरु वाक्य के अनुसार तो वो आपको करना चाहिए बाकी इस संबंध में हमने शुरू में भी बात की है शुरू से आप देखेंगे तो मिल जाएगा अंत में फिर वही कह रहा हूं किसी के पास अगर कोई विजय श्री के विरोध में मठ के विरोध में कोई अकाट प्रमाण है तो वह लेकर के हमसे संपर्क करें और नहीं है तो इस तरह का दुष्प्रचार ना करें। स्वयं को ऐसी चीजों से बचाए जहां पर उसके वक्तव्यों की अवहेलना हो सकती है। ठीक है?

03:39:51:00 और अ जो गुरु निष्ठ होने का दावा कर रहे हैं विशेष रूप से उनके लिए ये सब बातें हैं। ये वीडियो है और कोई भी बात कहने से पहले उस पर अच्छी सी रिसर्च अवश्य करें। जय श्री राम। सभी को समय देने के लिए जय श्री राम। हम बस यह एक चीज उसमें ऐड कर देंगे वो व्यक्ति के लिए जिसका प्रश्न था सबसे पहले तो हम योगाचार्य नहीं हैं। हम गुरु नहीं हैं। हम आज तक किसी को यह बोलने भी नहीं देते हैं। ठीक है? मेरे स्टूडेंट्स भी बोलते हैं तो हम बोलते हैं नहीं हम आपके शिक्षक हैं। हम ना तो आपके आचार्य हैं ना तो आपके गुरु हैं। गुरु गुरुदेव हैं। और अगर हम इस तरह के भाव नहीं रखते तो आज शायद जो मेरे स्टूडेंट्स हैं वो दीक्षित नहीं होते गुरुदेव से। मेरे स्टूडेंट्स भी दीक्षित हैं गुरुदेव से। अब दूसरी बात यह है एक योगा टीचर में एक फीमेल एनाटमी और मेल एनाटॉमी में बहुत डिफरेंस है। और आपको एक और चीज हम दिखा देते हैं कि जब हमने पढ़ा है इतने सालों से हम पढ़ रहे हैं और जैसे-जैसे और समझ रहे हैं तो ऑब्वियसली जब हम अपनी पंच वायु को देखते हैं अपने शरीर के

03:41:06:02 अंदर तो कुछ आसन कुछ चीजें एक हद तक एक फीमेल बॉडी के लिए हैं और जो नहीं है वो हम नहीं करते हैं। नहीं तो शायद हम इस समय एक महिला का स्वरूप में होते भी नहीं और हम आपको दिखा देते हैं कि योग की पुस्तकों में आपको क्या सब भी पढ़ना पड़ सकता है जिससे जब कोई पढ़ रहा होता है तो उसको कहां से ज्ञान आएगा कि यह करना है और यह नहीं करना है और मानने की बात है और हम तो मानने वाले व्यक्ति हैं। हम बस यह

03:41:38:22 देखिए तो हम इस तरह का योग सिखाते हैं। इस तरह का योग पढ़वाते हैं। अगर इसके बाद भी आपको कुछ कंफ्यूजन है तो कृपया वीडियो को दोबारा देख लें और हम किसी की भी निंदा में कुछ बोलना नहीं चाहते हैं। स्पेशली जिन्होंने वीडियो डाला है मुझे आप हम आपको प्रणाम करते हैं। आप हमसे बहुत ही मतलब एक उत्कृष्ट है। एक वक्तव्य और एक वक्तव्य और प्रचारित हो गया है कि आपने वो विजय जी ने कुत्ते के साथ ये किया, किस किया। तो ऐसा भी नहीं बोलना चाहिए। यह गलत बात है। जिसने भी बोली है लैंग्वेज सुनिए मुझे बोलने दीजिए। ऐसा जिसने भी बोला है उसको नहीं बोलना चाहिए। संसार का कोई ऐसा व्यक्ति हो जो उस दृश्य को एक किस चुंबन के रूप में सिद्ध कर दे। सो तो मैं नतमस्तक हो जाऊंगा। तो ऐसे बातें नहीं बनानी चाहिए। अगर किसी ने यह वक्तव्य दिया मुझे नहीं पता किसने दिया है मगर वो जो दृश्य है उसके आधार पर उसे वो किस नहीं कह सकता चुंबन नहीं कह सकता ठीक है तो ऐसी बातें ना बोले महिला के बारे में बचे ऐसी बातें बोलने से अकाट बातें बोले सर हम जो भी बोल ये बोल दे कि वात्सल्य में वो इतनी मतलब

03:42:54:04 खो गई कि वो उनके ऊपर बच्चे की तरह बच्चे की तरह उसने प्यार किया मगर ये गलत तरीका है उसने ये गलत तरीका है उसने चुंबन किया उसने लिप टू लिप किस किया यह गलत तरीका है ये बिल्कुल भी स्वीकार नहीं अच्छा नहीं है की बातें कृपया मत करिए क्योंकि जिनको बड़े लड़ने होते हैं वो इस स्तर पे नहीं उसने उनको करना चाहिए ये कहना गलत था हम मठ के अंदर रह के एक चीज सुने हैं कि हम ये नहीं बोल रहे हैं कि गलत को गलत मत बोलिए पर बात यही है ना कि यहां गलत है नहीं दूसरी बात ये है कि और गलत को गलत बोलना भी कैसे है उसकी शैली भी कैसी होनी चाहिए चाहिए। फिर अगर आप मातृ शक्ति का आप मान इस तरह करते जाएंगे और बोलेंगे कि हमें सिद्धि मिलेगी तो आप भूल जाइए कि आप में से किसी को भी कोई सिद्धि मिलने वाली है या आपकी कोई भी नाम जप का आपको मिलने वाला है। अलग विषय है। ये अलग विषय है। हमारी बातें उनके ही जैसी हो जाएंगी। तो भविष्यवक्ता क्यों बने? हम तो अका हम माफी चाहते हैं। अगर हम अगर आपको हमारे किसी भी वक्तव्य से लगा कि हम आपको पर्सनली अटैक कर रहे थे। हमें लगता नहीं कि हम उस योग्य हैं और जिसको जो क्लेरिटी मिलनी थी वो अभी तक मिल ही चुकी होगी। तो अपने समय देने

03:44:09:08 के लिए बहुत-बहुत सभी का धन्यवाद और धन्यवाद। जितने भी आक्षेप है, प्रश्न है उनका निराकरण और समाधान प्रस्तुत कर दिया गया है। आप इस वीडियो को शुरू से देखें। सभी को जय श्री राम। जय श्री राम। विजय

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