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00:00:01:09 तो सभी को जय श्री राम 20 मिनट से लेट है और कुछ कार्य भी ऐसे ही है हमारे और स्वास्थ कल आपको आवान कॉल ऑफ धर्मा वाले चैनल पर बताया था कि थोड़ा स्वास्थ ठीक नहीं है तो अभी हमारे साथ गणेश दास जी है गणेश जी आपके पीछे वो लाइट आ रही है आप ऐसा करिए अपना फेस है ना साइड घुमा लीजिए उधर लाइट है तो आपका फेस ठीक से
00:00:57:10 रहेगा जय श्री कृष्ण नरेश दोराया जी जी गणेश जी तो हमारे साथ में एक बताया जाता है कि प्रमाण और युक्ति के मर्मज्ञ है इस समय गणेश दास जी करके हैं और वैसे अपना परिचय स्वयं भी देंगे मगर यह अनन्य भक्त हैं रामपाल जी के जय श्री कृष्ण सभी को जय श्री राम सभी को गणेश जी कोई समस्या है तो रहने
00:02:08:09 दीजिए हां असल में आपका चेहरा बलर दिखेगा ना पीछे से रोशनी आ रही है तो इसलिए हमने कहा था कोई बात नहीं इसी से काम चला लेंगे तो आप सब
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00:02:21:15 सर्वप्रथम थोड़ा अपने बारे में अपना परिचय दे दीजिए रामपाल जी से किस प्रकार से जुड़े हैं और कब से जुड़े हैं और थोड़ा भी आप बताना चाहेंगे जी सभी को नमस्कार सत साहेब मेरा नाम गणेश दास है और मैं झारखंड से हूं गोड्डा जिला पड़ता है मैंने संत रामपाल जी महाराज से 2014 में नाम दीक्षा लिया
00:02:54:20 है तो 2014 मतलब उनके वो क्या था बरवाला कांड था बरवाला कांड से ठीक कर ये बरला कान से पाले लिया है जी अच्छा ठीक है तो हम लोग ना विस्तार से बात करेंगे और हो सकता है ये हमारी चर्चा कई एपिसोड्स में हो क्योंकि बहुत सारी चीजें हम लोग डिस्कस करेंगे आराम आराम से तो सर्वप्रथम एक यह बात आती है कि रामपाल जी महाराज की कहानी जो समाज में शुरू होती है वो यहां से होती है कि उन्होंने सभी धर्मों के पवित्र सद ग्रंथों से खोल खोल कर दिखाकर सिद्ध कर दिया है कि वास्तविक ज्ञान क्या है वास्तविक ईश्वर कौन है वास्तविक तत्वदर्शी कौन है है ना जी जी जी तो इसमें तीन विशेषण आए हैं धर्म और उसके बाद पवित्र और उसके बाद अ सद ग्रंथ तो रामपाल जी महाराज के द्वारा किसी भी आईडियोलॉजी को धर्म के रूप में स्वीकार
00:04:09:24 करने का आधार क्या है जी एक बार फिर से प्रश्न को राइए मैं समझा नहीं कि आप कना क्या चा रहे हैं रामपाल जी महाराज के द्वारा और उनके अनुयायियों के द्वारा आपके जो रामपाल जी महाराज है उनके द्वारा और आप लोगों के द्वारा एक क्लेम सबसे पहला जो क्लेम है जिस पर पूरी इमारत खड़ी हुई है है उस परे यह है कि उन्होंने सभी धर्मों के पवित्र सद ग्रंथों से यह सिद्ध कर दिया है कि परमेश्वर कबीर है वह तत्वदर्शी है और गीता का ज्ञान काल ने बोला है यह सब उन्होने बोली तो जी जी अब जब वो आप लोग जब ये क्लेम कर रहे हो कि सभी धर्मों के यानी कि जिन जिन बुक्स को उन्होंने यूज किया है उन बुक्स वो बुक्स जिन आइडियो जीी से जुड़ी जैसे इस्लाम से क्रिश्चियनिटी से किसी भी आइडल जीी से जुड़ी हुई चीजें हैं तो उनको भी उन्होंने धर्म माना है क्रिश्चियनिटी को भी धर्म माना है इस्लाम को भी धर्म माना है
00:05:24:27 सबको उन्होंने धर्म माना है ठीक है जी जी जी तो दूसरी बात उनके जो ग्रंथ है स्क्रिप्चर है उनको उन्होंने पवित्र और सद ग्रंथ भी बोला है ठीक है तो सबसे पहला सवाल यह है कि किसी भी विचारधारा को धर्म के रूप में किसी भी ज्ञान को धार्मिक ज्ञान के रूप में स्वीकार करने का रामपाल दास जी का आधार क्या है
00:05:59:22 किसी भी बात को स्वीकार करने का आधार उनके शास्त्र है जैसे हम हिंदू धर्म की बात करें तो हिंदू धर्म में जो भी शास्त्र है जैसे हो गया मेरी बात आप समझ नहीं रहे जैसे जैसे कि मैं आपको उदाहरण दे दू जैसे कि मान लीजिए कि मेरे पास एक बुक है जी एक मिनट दिखा मान लीजिए ये है ठीक है इसमें मैंने कुछ बातें लिखी है जो मुझे ठीक लगी ओके जी भगवान के बारे में भी लिखा है और भी कुछ बातें लिखी है इस किताब को कुछ 10 20 लोग मानते भी है जी और धर्म भी कहते हैं तो क्या इस किताब को भी आप धर्म मान लेंगे धार्मिक किताब मान लेंगे या कोई कारण होगा जिस कारण से आप इसको किसी भी किताब को धार्मिक किताब मानेंगे वो क्या कारण है वो कारण यही है कि जो किताब को हम लोग धर्म
00:07:14:26 के रूप में मानते हैं वो वास्तव में ईश्वर प्रदत है इसीलिए उनको ग्रंथ माना गया है सद ग्रंथ माना गया है जिसको कि आप बोल रहे हैं किसी व्यक्ति के द्वारा लिखा गया ऐसा नहीं है जैसे वेद ईश्वर कृत है गीता भी मैं आपकी बात समझ गया मैं आपकी बात समझ गया कि जो ग्रंथ ऐसा होगा जो ईश्वर प्रदत होगा जी उसको आप पवित्र सद ग्रंथ और धार्मिक मानते हैं जी जी जी अच्छा तो मैं भी कह रहा हूं किय ईश्वर प्रदत है मुझे फिर इसको धार्मिक मानेंगे आप नहीं आपके कहने से केवल नहीं हो जाएगा उसको प्रत करना होगा कि वास्तव ईश्वर प्रदत है तो तो आपने आपने यह जो क्रिश्चियन वाला है वो कैसे प्रमाणित किया है व ईश्वर प्रदत्त
00:08:12:00 है पर जैसा कि आपने शुरुआत में कहा था कि संत रामपाल जी महाराज ने सर्व धर्म ग्रंथों से यह प्रमाणित किया कि कबीर साहब भगवान है पूर्ण परमात्मा है मैं वो नहीं पूछ रहा हूं नहीं सबसे शुरू में आपने पले इस पर भी आएंगे आपके हर प्रश्न का उतर लेकिन शुरुआत में जैसा कि आपने कहा कि संत रामपाल जी महाराज सभी धर्म ग्रंथों को लेकर के ख को खोल के दिखाते हैं और कहते हैं कि कबीर साहब परमात्मा है तो इस विषय को आगे बढ़ाते हुए सबसे पहले हम आपसे जानना चाहते हैं कि आपका ईश्वर के विषय में क्या विचार है ईश्वर हो रहा है देखिए ऐसा है विषयात हो रहा है अभी एक विषय चल रहा है कि अगर रामपाल अगर रामपाल जी ने किसी आइडल जीी को किसी विचारधारा को धर्म कहा है तो किसी भी लजी को धर्म के रूप में स्वीकार करने का आधार आपने बताया कि वो ईश्वर प्रदत होना चाहिए इसमें हम आपकी ओर से आप नहीं दे रहे मगर आपकी ओर से एक हम तर्क खुद ले लेते हैं कि भाई आपको विश्वास है कि मोहम्मद साहब ने सही कहा था आपको विश्वास है ईसा मसीह ने सही कहा था ठीक है रामपाल जी को विश्वास है अब मुझे
00:09:27:09 पहले तो एक बात बताइए क्या गीता जी काल के द्वारा प्रदत है या ईश्वर के द्वारा प्रदत है यह फिर वि अंतर होने लगा जैसा कि हमने आप जो प्रारंभ में जो बात शुरू किया था हम उस पर आना चाहेंगे इसके बाद मेरी बात मैं आपको कनेक्ट बता देता हूं व कनेक्शन क्या है आपकी जो यह जो लाइन है ना यह गलत लाइन है इसको मैं सिद्ध करूंगा इसी को सि कर रहा आपने जो यह कहा है कि ईश्वर द्वारा प्रदत जो धर्म जो शास्त्र होगा वह हमारे लिए धार्मिक ग्रंथ है तो जो यह जो गीता का ज्ञान है क्या वह ईश्वर के द्वारा प्रदत है बिल्कुल अच्छा व स्वयं ईश्वर ने दिया है या काल ने दिया
00:10:20:08 है यह तो काल के द्वारा दिया गया है और ईश्वर श जो है ये हर लिए प्रयुक्त होता है आम भाषा में ईश्वर भगवान को भी कहा जाता है ब्रह्मा विष्णु महेश को भी कुछ लोग ईश्वर कहते हैं ईश्वर शब्द केवल एक व्यक्ति के लिए नहीं होता है बल्कि भाई साहब मैं आपसे यह कह रहा हूं कि आपकी किसी भी शास्त्र को धर्म के रूप में स्वीकार किसी भी आईडियोलॉजी को धर्म के रूप में स्वीकार करने का आधार जो आपका पूर्ण ब्रह्म है उसके द्वारा प्रदत ज्ञान है किसी किसी को भी जिसको ईश्वर कहा जाएगा उसके द्वारा जो है आप मान लेंगे कि ईश्वर द्वारा प्रदत्त है
00:11:03:00 देखि पूर्ण ब्रम के द्वारा जो ज्ञान प्रदत है उन्हीं से मिलता जुलता ज्ञान अगर अन्य शास्त्रों में है तो हमारे लिए मान्य है चाहे व कुरान शरीफ में हो चाहे बाइबल में हो चाहे वेदों में हो कहीं भी हो तो हमारे लिए मान जिस शास्त्र में पूर्ण ब्रह्म की बातों के अनुसार बात लिखी होगी कहीं भी थोड़ी बहुत भी वो आपके लिए धर्म धार्मिक ग्रंथ हो जाए जी तो ये मैंने लिखा है पूर्ण ब्रह्म की भक्ति करो दिख रहा है आपको जी तो क्या अ ये धार्मिक ग्रंथ हो गया आपके लिए नहीं केवल एक शब्द लिख देने से तो फिर तो फिर मुझे बताइए कितने शब्द कितने शब्द लिखने पर हो जाएगा बताइए ग्रंथ के कुछ नियम होते हैं वो क्या है सिद्धांत होते हैं वो हम वो अलग विषय है अलग विषय नहीं है आप अलग विषय नहीं है मैं कनेक्ट बता रहा हूं आपकी बात कट रही है आपने अभी एक बात कही कि जिस ग्रंथ में थोड़ी बहुत बात भी भगवान से जुड़ी हुई होगी भगवान वो वाले भगवान नहीं जिनको आप वाइस कैप्टन के रूप में देखते हैं मेन भगवान ठीक है पूर्ण ब्रह्म पूर्ण ब्रह्म के अनुसार जिस भी ग्रंथ में कहीं भी लिखा होगा वो
00:12:18:04 हमारे लिए धार्मिक ग्रंथ है वो धर्म है तो ये आपका धार्मिक ग्रंथ माना जाएगा क्या ये अब आप कह रहे हैं अब आप कह रहे हैं कि नहीं और भी कुछ होता है वो और भी कुछ क्या है देखिए उसके विषय में हम आ रहे है उस भी आएंगे कि ग्रंथ क्या होता है म काव क्या होता है मैंने ग्रंथ नहीं कहा है मैंने कहा है धर्म धर्म आप किसी को भी किसी किसी भी बात को समाज में कोई भी संस्था है कोई भी मत है कोई भी पंथ है उस पंथ मत के द्वारा दी जाने वाली शिक्षा ज्ञान को आप धर्म जब कब कहते हैं किस कारण से कहते हैं यह पूछ रहा हूं मैं आपने कहा कि ईश्वर द्वारा प्रदत ज्ञान से मिलता जुलता होगा उसको हम धर्म कहेंगे तोय मिलता जुलता है पूर्ण ब्रम की भक्ति करो हा तो इसको भी जिसमें भी ऐसा कुरान शरीफ है चाहे बा आपने एक बात कही अभी इसको भी य धार्मिक ग्रंथ है आपका य ग्रंथ का क्या नाम है बताइए
00:13:25:12 शकत शिवांक उसको हम पढ़ेंगे तभी तो हम कुछ क सकेंगे बिना पढ़े आपने कहा था मिलती जुलती कहीं पर भी बात होती है व धार्मिक ग्रंथ होता है तो यह मिलती जुलती बात दिखा दी ना पूर्ण ब्रम की भक्ति करो हम तो नहीं पढ़े है आपके दिखाने आपको दिख नहीं रहा है क्या दिख नहीं रहा जूम करू रहा है कि नहीं वो हमको दे दीजिए पूरा हम पढ़ लेंगे इसके बाद निय है कि नहीं है तो वो तो यानी कि मिलती जुलती बात होने के बावजूद भी कुछ कारण ऐसे होते हैं जिन कारणों से आप डिसाइड करेंगे वह धार्मिक ग्रंथ है कि नहीं वह कारण क्या
00:14:15:04 है यानी मेरी बात समझिए देखिए आपसे शायद आप मेरा प्रश्न समझ नहीं पा रहे इसलिए ऐसा हो रहा है यानी की सिर्फ मिलती जुलती बात होने का होने से आप किसी को धर्म ग्रंथ नहीं मानेंगे आप उसम और भी जा करेंगे वो जांच का आधार क्या होगा यह पूछ रहा हूं जांच का आधार होगा वो उनका जो लेखक है वह कौन है वो कोई प्रमाणित व्यक्ति है अथवा नहीं इसके कौन लेखक होगा क्या प्रमाणित व्यक्ति किसके द्वारा प्रमाणित होआ किसी संत महात्मा के द्वारा लिखा होना चाहिए या जिसके बारे में हम जानते हैं कि वो भगवान का भेजा हुआ है उनके द्वारा होना चाहिए किसी आम व्यक्ति के लिख देने से कोई ग्रंथ नहीं हो जाता जैसे हम कोई शिवा आपके बारे में कुछ उल्टा सीधा या कोई भगवान के बारे में लिख दे तो वो ग्रंथ नहीं माना जाएगा तो यानी कि अब आपने कहा कि किसी संत कोई संत होना चाहिए है ना जी तो तो इसका मतलब यह है कि संत के द्वारा जो लिखा गया होगा वो आपका धार्मिक ग्रंथ है जी
00:15:30:21 और संत की परिभाषा क्या है आपके अनुसार संत कौन है शांति को जो प्राप्त करले वो संत कहलाते हैं शांति को जो प्राप्त कर ले वह संत कहलाते हैं तो आज के टाइम में कोई आपके सामने य रामपाल जी को छोड़ कर के संत है क्या नहीं अच्छा शांति से मतलब है वह युद्ध वगैरा ना करे नहीं शांति का मतलब होता है जैसे श्रीमद भगवत गीता अध्याय 18 लोक 6 में कहा गया है कि भारत सब प्रकाश परमेश्वर की शरण में जा उन्हीं की कृपा से तु परम शांति को यहां परम शांति जिस परम शांति की बात हो रही है उनको जो प्राप्त कर ले वो संत होता है वो संत होता है उसके द्वारा लिखा हुआ कोई भी ग्रंथ आप धार्मिक मानेंगे जी तो कुरान को किसने लिखा और क्या वोह शांति को प्राप्त
00:16:42:02 थे कुरान शरीफ मोहम्मद साहब के द्वारा लिखा हुआ है और वो भगवान से मैं पूछ क्या वो शांति को प्राप्त थे बिल्कुल आपने कहा जो संत जो संत महात्माओं के द्वारा लिखा गया ग्रंथ होगा वो धार्मिक ग्रंथ है अब उसके बाद आपने बताया कि संत व है जो शांति को प्राप्त हो चुका हो यानी कि जो परम शांति होती है मोक्ष को है ना मोक्ष अलग विषय है शं तव से जान लेना तत्व से जान लेना इतना ही बहुत है हा तो क्या मोहम्मद साहब आपकी उस संत की कसौटी पर खरे उतरते हैं [संगीत]
00:17:35:18 जी नहीं नहीं तो फिर वो आपका धार्मिक ग्रंथ कैसे हुआ इसलिए हुआ क्योंकि उसमें जो भी ज्ञान दिया गया है यानी देखिए भाई साहब अब थोड़ा सा मैं अब कहूंगा आपकी बातें बदल रही है आपने कहा था कि संत के द्वारा जो भी लिखा गया होगा वो धार्मिक ग्रंथ माना जाएगा ऐसे किसी के भी लिख देने से नहीं माना जाएगा फिर मैंने संत की परिभाषा पूछ ली संत के कसौटी पर वो जो है मोहम्मद साहब वो खरे नहीं उतर रहे मैं जानता हूं कोई नहीं उतरता सिवाय आप आप जिनको मानते उनके अलावा तो जब वो खरे नहीं उतर रहे हैं संत के द्वारा जो लिखे हुए जो ये है वो संत है ही नहीं वो शांति को प्राप्त है ही नहीं तो फिर आप उनके ग्रंथों को धार्मिक ग्रंथ कैसे बोल रहे हैं क्यों बोल रहे
00:18:23:04 [संगीत] हैं देखिए शांति को उ प्राप्त है कि नहीं इस विषय पर विचार करने से पूर्व हम अचानक ऐसा नहीं क सकते हैं कि उन्होंने शांति को प्राप्त कर लिया कि नहीं क्या ऐसे फिलहाल हमने अभी ये कहा है आपने मैं आपको क्लियर कर दूं पहली बात तो आपने भी कहा है कि वो संत नहीं थे क्योंकि वो शांति को प्राप्त नहीं थे दूसरी बात मैं आपके द्वारा बता दूं आपने एक किताब लिखी है मुसलमान नहीं समझे कुरान का ज्ञान जी यानी वो तत्व से नहीं जान पाए जी मुसलमान तो उसमें मोहम्मद भी आते हैं बिल्कुल आते हैं तो फिर कहां से वो शांति को प्राप्त होने वाले हो जाएंगे उसमें मतलब कि जो आप वो कह रहे हैं ना कि ऐसा हम लोग क्लियर नहीं कह सकते वो शांति को प्राप्त है कि नहीं है ये कह रहे हैं आपर आपकी ओर से क्लियर है कि वो शांति को प्राप्त नहीं है क्योंकि वो जान नहीं पाए कुरान का ज्ञान ये ये केवल मोहम्मद साहब के लिए नहीं है ये आम जो मुसलमान है वर्तमान के समय उनके लिए वो किताब लिखा हुआ है केवल नहीं जो जो आज के जो मुसलमान है वो मोहम्मद साहब को जो आयत उतरती थी मोहम्मद साहब अपने लोगों को बताते थे कि आयत का ये मतलब है उस
00:19:38:07 आयत का वो मतलब है वो आगे चला तो मोहम्मद साहब आपके अनुसार संत नहीं है मोहम्मद साहब आपके अनुसार जो है वो शांति को प्राप्त नहीं है मोहम्मद साहब कुरान के ज्ञान को समझने वाले भी नहीं है तो जब वो नहीं है तो फिर उनके द्वारा दिया गया जो ग्रंथ है वो आपके लिए धार्मिक कैसे हुआ असल में बात यह है मैं बताऊ बात य है कि इसका जो यह प्रश्न चल रहा है इस प्रश्न में महत्वपूर्ण बात यह है कि इस प्रश्न में बात करने से पहले हमें यह पता होना चाहिए धर्म क्या है जब हम यह पता कर लेंगे कि धर्म क्या है तो हमारे लिए स्पष्ट हो जाएगा कौन सा धार्मिक है कौन सा नहीं है धर्म क्या है जीव की चाह का जो वास्तविक विषय है मैं बोलू धर्म यह है क्योंकि व वोह प्रश्न छेड़ दूंगा उसमें भी आपको घंटा भर लग जाएगा जीव की चाह का जो वास्तविक विषय है सच्चितानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त को परिभाषित कर सकने वाले शास्त्रों द्वारा सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त करने के निमित्त बताए गई विधि विधान मर्यादा का नाम धर्म है तो यानी कि जो शास्त्र सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर की बात करेंगे
00:20:54:01 और उसको प्राप्त कराने की बात करेंगे सर्वशक्तिमान ईश्वर की बात करेंगे वो हमारे लिए और उनके उसको प्राप्त करने के लिए प्रमाण और युक्ति के साथ वो तर्क के साथ जो परंपरा प्राप्त रूप से प्रा प्राप्त हुआ होगा तो उन शास्त्रों को हम धार्मिक कहते हैं हमारी परिभाषा है अब आपकी परिभाषा य किसी संत ने लिखा हो तो आपके ही अनुसार कोई संत है ही नहीं यहां तक कि व्यास इत्यादि भी संत नहीं थे महा ऋषि वेदव्यास जी जिनके द्वारा आपको वेद मिल रहे हैं जिनके द्वारा आपको पुराण मिल रहे हैं वो भी संत नहीं थे क्योंकि उनको भी तत्व ज्ञान नहीं हुआ था तो फिर य धार्मिक ग्रंथ कहने का दिखावा क्यों है फ आप सीधे कहिए कि हम कबीर सागर को धार्मिक ग्रंथ मानते हैं और उसके अनुसार जो होता है उसको हम कह देते हैं य धार्मिक ग्रंथ है मगर वास्तविकता में वो तत्व ज्ञान को ना जानने वालों ने लिखे हुए ग्रंथ है इसलिए हम नहीं मानते वास्तव में यह है मगर हम क देते हैं आपको य मानना पड़ेगा इस चीज
00:21:56:06 को देखिए आप बोले जा रहे हैं बोले जा रहे हैं हमने ऐसा कहां कहा कि व्यास जी संत नहीं थे या फिर गीता जी क्या कता है वेद आदि ये ग्रंथ नहीं है क्योंकि ये संत के द्वारा लिखा हुआ नहीं ऐसा हमने कहा नहीं य आप पहले पूर्व में क्या जाने क्याल दास जी ने लिखा है व्यास इत्यादि को भी तत्व ज्ञान नहीं था ये तो शास्त्रों में भी लिखा अन ग्रंथों में भी लिखा हुआ है वो ठीक है हम आपकी बात वो बाद में देखेंगे वो लिखा है उसका मतलब क्या है मगर फिलहाल वह संत नहीं थे उनके द्वारा दिया गया जो ग्रंथ है वह धर्म ग्रंथ क्यों उसको जब आपको संत रामपाल जी महाराज ने ऐसा कह दिया कि व्यास आदि को तत्व ज्ञान नहीं थे यही बात अगर पुराणों में लिखा हुआ है अय दूसरी बात है आपका यह मानना है कि व्यास को तत्व ज्ञान नहीं था यह आपका मानना है वो कारण उसका कुछ भी हो शास्त्र हो या कुछ भी हो सुन लीजिए सुन लीजिए सुन लीजिए देखिए व्यास जी को तत्व ज्ञान नहीं था कारण इसका कुछ भी हो मगर आप तो यह स्वीकार अंततोगत्वा कर रहे हैं कि व्यास जी को तत्व ज्ञान नहीं था तो जब आप यह स्वीकार कर रहे हैं
00:23:11:10 तो उनके द्वारा प्राप्त होने वाले जो धर्म ग्रंथ है लिखे गए जो धर्म ग्रंथ है मोहम्मद को भी मोहम्मद जी को भी तत्व ज्ञान नहीं था आपके अनुसार तो फिर उनके द्वारा मिलने वाला ईसा को ईसा को भी तत्व ज्ञान नहीं था आपके अनुसार तो फिर उनके द्वारा यह सब मिलने वाले जो धर्म ग्रंथ है इनको आप धर्म ग्रंथ क्यों कह रहे हो आप देखिए या तो आप अपनी परिभाषा को चेंज करिए वो सही परिभाषा बताइए जिससे कि हम इन सबको धर्म ग्रंथ मान सके आपने जो परिभाषा बताई है उसके अनुसार ये धर्म ग्रंथ सिद्ध नहीं हो रहे तो फिर आप क्या ढोंग करते हो बोलने का कि धर्म ग्रंथ सभी धर्मों के ग्रंथों से हमने प्रमाणित कर दिया वो परिभाषा सही नहीं बताई आपने इसका मतलब आपने कहा कि जो संत के द्वारा दिया गया होगा ऐसे किसी के भी द्वारा लिख देने पर नहीं माना जाएगा किसी संत प्रामाणिक अब भाई आपके आपके अनुसार ना व्यास प्रामाणिक संत है आपके अनुसार ना मोहम्मद प्रामाणिक संत है आपके अनुसार ना ईसा
00:24:09:00 यशु आप बो रहे ये मैंने कुछ कहा आपको अरे भाई आप अच्छा तो मैंने अभी आपसे पूछा अभी चलिए ठीक है आपने कहा नहीं कि मोहम्मद संत नहीं थे कहा नहीं ब्यास जी का नाम ले रहे और सब का नाम ले रहे व्यास जी के लिए भी लिखा है ब्रह्मा जी के लिए भी लिखा है को तत्व ज्ञान नहीं था सबके लिए लिखा है इनको तत्व ज्ञान नहीं था ये कोई संत सिद्ध नहीं हुआ आपकी परिभाषा मैं मैं आपकी बात पर बात कर रहा हूं अच्छा आपको तत्व ज्ञान हुआ फिर फिर विषयात मैं अभी एक चीज क्लियर कर रहा हूं देखिए मैं ये क्यों पूछ रहा हूं जिससे जब हम आगे बात करें तो हमें पता हो कि किस शास्त्र से प्रमाण लेना है समझ रहे हो इसलिए यह जानना आवश्यक है कि आप जिन को जिन जिन व्यक्तियों को मानते ही नहीं है कि वो तत्व ज्ञान वाले थे वो जो है वो संत थे और आपकी परिभाषा है कि जो संत के द्वारा दिए गए शास्त्र होंगे वो हम मानेंगे कि धार्मिक है ये आपने कहा तो इसलिए अब हम चेक करेंगे कि भा ये धार्मिक तो सिद्ध नहीं हो रहे क्योंकि आप ही कह रहे हो कि मोहम्मद वशिष्ठ और जो ईसा है यशु है ये सब जो है प्रामाणिक संत नहीं थे
00:25:24:08 हमारे लिए भी नहीं है हमारे लिए व्यास प्रमाणिक संत है आपके लिए व्यास भी नहीं है और अगर अगर केवल भगवान की बात लिख देने से ही वह संत होने की आवश्यकता नहीं है प्रामाणिक होने की आवश्यकता नहीं है केवल भगवान की बात होनी चाहिए तो तो फिर यह भी मान लो इसको भी ग्रंथ कह दो धार्मिक ग्रंथ चलिए अब इसमें एक स्टेप इसी का और क्लियर हो जाएगा मैं यह पूछ रहा था कि जैसे कोई मातृ शक्ति है स्त्री तो उसको पवित्र चरित्र वाली कब तक कहा जाएगा जब तक उसका एक भी बार उसके का उसके द्वारा कोई ऐसा व्यभिचार सुनि पले आगे बढ़ने से पहले हम आपसे जानना चा कि आप जो लाइव डिबेट करते हैं बत अ लोगों के साथ हो गया आज हमारे साथ हो रहा है तो आप जो लाइव डिबेट कर रहे हैं इसका उद्देश्य क्या है इसका उद्देश्य है कि सच्चाई बाहर आए रामपाल का ज्ञान ज्ञान है या अज्ञान है जी हम
00:26:41:02 ठीक है हम तो सबसे पहले हम आपसे एक आपने एक प्रश्न किया एक मिनट आपने एक प्रश्न किया मैंने बिना घुमाए फिराय बातों को बदले बिना बिल्कुल सटाक से उत्तर दिया ठीक है आपको एक मैं प्रश्न करता हूं उसके बाद आपको काफी देर लगती है उसम आप अपनी बातें कई बार बदल एक मिनट एक मिनट एक मिनट अब मैं पूछ रहा हूं आपका यह प्रश्न करने का उद्देश्य क्या था क्या आप जो प्रश्न कर रहे हैं अभी जो आपने एक प्रश्न किया कि आपका उद्देश्य क्या है लाइव डिबेट करने का तो इस प्रश्न आपका उद्देश क्या था यही उद्देश्य था कि जो उद्देश्य है उस उद्देश्य को लेकर के और कुछ उद्देश का पूर्ति हो इसीलिए मैंने आपको प्रश्न किया यह जानना चाहते थे आप कि मेरा उदेश जिसे क्या सही उद्देश्य पर चल रहा अगर सही उद्देश्य पर चलूंगा तो तो आप बात करेंगे अगर नहीं चलूंगा तो आप बात नहीं करेंगे हा बिल्कुल क्योंकि अब आपको मेरा उद्देश्य पता चल गया जी अब मैं आपसे प्रश् एक मिनट तो अब आपको मेरा उद्देश्य ठीक लगा कि नहीं लगा चलिए वो ठीक है आप अगर जाच कर रहे हैं तो अच्छी बात है जांचना
00:27:56:13 चाहिए मैंने शुरू में मैंने शुरू में जो विषय पूछा था इसलिए पूछा था जिससे कि देखिए हमारी चर्चा केवल आप ये मत सोचिए कि आज ही हो जाएगी इसके कई सारे एपिसोड रहेंगे आप एक सभ्य व्यक्ति है और हमारी आपस में ठीक से बात हो सकती है तो हम कई हिस्सों में बातें कर लेंगे अभी पहला जो चैप्टर हमने चल रहा है इस समय वो है सभी धर्मों के पवित्र सद ग्रंथ ठीक है अब हमने काफी देर तक धर्म पर बात कर ली है कि रामपाल जी जी के द्वारा किसी भी आईडियोलॉजी को या विचारधारा को मत पंथ को संप्रदाय को धर्म कहने का आधार क्या है उसमें आपने जो वो दिए हैं और मैंने जो दिए हैं वो जनता ने देखा है वो जो भी देखेगा वो अपना डिसाइड करेगा अब मैं इसमें जो आगे दो शब्द है उनकी बात कर रहा हूं इसी इसी चैप्टर का जो अगला भाग है वो भाग यह है कि कोई भी महिला पवित्र अगर वो उससे देखा जाए चरित्र से चरित्र के दृष्टिकोण से देखा जाए तो वो महिला कब तक कहलाए गी जब तक वो एक बार भी उसने व्यभिचार ना किया हो या अपवित्र कहलाने के लिए उसको कई बार व्यभिचार करना पड़ेगा तब वह अपवित्र कहलाए गी
00:29:11:20 जैसे कि थाली होती है थाली वह थाली खाने की थाली है और हम उसमें वह थाली अपवित्र कब कहलाए गी जब उसमें पूरी थाली झूठी हो या फिर उसमें केवल एक कौरा केवल एक कोर रख दो तो वो थाली झूठी हो जाएगी इनमें से कौन सी चीज को आप मानते हैं ये तो एक और रख देने मात्र से भी वो जूठी समझी जाती है पूरा करने का कोई आवश्यकता नहीं है और स्त्री कई बार उसको व्यभिचार करना होगा अपवित्र कहलाने के लिए या केवल एक बार व्यभिचार कर देगी तब कहलाए गी या पुरुष पुरुष की भी बात कर ले कई बार उसको व्यभिचार करना होगा या फिर एक ही बार व्यभिचार कर लिया तो उसकी पवित्रता भंग हो जाएगी बताइए एक ही बार करने से पवित्रता भंग हो सकता है अच्छा केवल एक ची एक बार एक मात्र चिंदी मात्र जो उलट व्यवहार है उसके कारण वह अपवित्र हो जाएगा है ना जी अच्छा तो आपके हिसाब से कोई भी शास्त्र पवित्र क्यों
00:30:19:14 है कोई भी शास्त्र का पवित्रता का आधार क्या है पवित्रता का आधार है कि वो हमें ईश्वर का मार्ग प्रदान करते हैं इसीलिए वो हमारे लिए पवित्र है आदरणीय आदर है अच्छा उसमें एक भी बात अगर ईश्वर के मार्ग से विरुद्ध जाने वाली होगी तो वो अपवित्र हो जाएंगे कि नहीं नहीं नहीं नहीं है ना नहीं तो ये तो आपकी दोहरी बातें हो गई थाली को अपवित्र करने के लिए पूरी थाली अपवित्र होने की आवश्यकता नहीं है और ली और पुरुष को अपवित्र कहने के लिए स्त्री पुरुष का सदैव का व्यभिचारी होना आवश्यक नहीं है मगर जब बात आप ग्रंथ की कर रहे जिसको आपने पवित्र कहा है उसमें एक भी बात जो भगवान के विरुद्ध हो रही है उसको हो जाने के बाद भी आप उसको पवित्र कह रहे तो फिर नियम क्या है तो किसी को पवित्र कहने का नियम क्या हुआ फिर
00:31:23:08 आपका थाली में पुरुष में विचार करने की बात और शास्त्र में दो तरह की बातें करना ये तो शास्त्र में फड़ा पड़ा है इससे वो श शास्त्र में दो तरह की बातें नहीं कह रहा हूं विरुद्ध ऐसी बात भगवान को प्राप्त ना कराए वो है हा तो भरा पड़ा है वो भरा पड़ा है वो ठीक है फिर उसको आप पवित्र क्यों कह रहे हो जब आपकी पवित्रता की परिभाषा ये है जिसमें चिंदी मात्र भी अपवित्र नहीं होगी वो पवित्र है वो पवित्रता वेदा कौन होता है एक मिनट वेदा कौन होता है जिसमें दाग ना हो वो दा सुनिए सुनिए वे दत किसे कहते हैं मिनट तो फिर तो फिर वो मुझे सिद्धांत बताइए कि शास्त्र का सिद्धांत क्या है पवित्र कहने
00:32:16:02 का जी फिर से बोलिए आपने कहा कि कोई महिला अथवा पुरुष जरा सा भी व्य विचार करेगा उसकी पवित्रता भंग हो जाएगी अ पवित्र कहलाएगा आपने कहा कि कोई थाली जो होगी उसमें एक चिंदी भी झूठी रख दो तो वह थाली झूठी कहलाए कीी वो पवित्र थाली नहीं कहलाए गी मगर आपने कहा के ग्रंथ में भले ही भगवान के विरुद्ध बात हो रही हो पूर्ण ब्रह्म के विरुद्ध फिर भी वो पवित्र कहलाएंगे क्यों तो पवित्रता का आधार क्या है फिर आपकी थाली में अपवित्र खाली प मत जाइए आप ग्रंथों को पवित्र कहने का आधार बताइए क्या है मैं आपको कही दिया कि जो शास्त्र पवित्र इसलिए है क्योंकि वो हमारे ईश्वर को प्राप्त कराने का मार्ग प्रदान करते हैं इसलिए व हमारे लिए पवित्र है आदर है आदरणीय है यानी कि कोई भी ऐसा शास्त्र जिसमें की ईश्वर को प्राप्त कराने की बात होगी उसको आप पवित्र कहेंगे भले ही उसमें दूसरे हिस्से में गलत शलत बातें भी लिखी हो जी ठीक है तो अब यह पवित्र है कि नहीं पूर्ण ब्रम की भक्ति करो मैं ने लिख दिया ये पवित्र सद्र ये पवित्र
00:33:31:12 है कि नहीं भले ही इसमें मैंने पीछे लिखा हो कि रामपाल चोर है या जेल कट्टू है कुछ भी लिखा हो उससे मतलब नहीं है मैंने तो यहां पर रामपाल जी की जय भी लिख दूंगा पूर्ण ब्रम की भक्ति भी तो ये पवित्र कहलाएगा कि नहीं कहलाएगा बिल्कुल नहीं कहलाएगा वो तो इसका मतलब इसका मतलब कि अपोजिट बात होने की स्थिति में उसकी पवित्रता हो रही है जब तक केवल सही सही बातें ही नहीं लिखी होंगी किसी शास्त्र में तब तक ही उसे पवित्र माना जा सकता है अगर एक भी बात उलट लिख दी तो उसको पवित्र नहीं माना जा सकता अन्यथा बोल दीजिए शिवांक जो रचना है यह पवित्र शास्त्र
00:34:19:27 है आप संत है फिर वही बात संत वाली बात तो हम पीछे छोड़ आए ना आपने कहा मोहम्मद संत नहीं है फिर भी उसके ग्रंथों को आपने माना आपको बता दिया के द्वारा लिखा होना चाहिए तो आप बारबार ल एक मिनट तो पवित्र एक मिनट सही कर लेते हैं आपने पवित्रता की परिभाषा बताई थी कि जो भी भगवान की बात करेंगे वो पवित्र है आपने उसम ये नहीं बोला था जो संतों के द्वारा प्रदान किया गया और भगवान की बात करेंगे तो वो पवित्र है तो अब आप अपनी परिभाषा एक बार सही करके दोबारा बता दीजिए क्या है पवित्र मानने की व वो धार्मिक ग्रंथ मानने की बात थी अभी मैं पवित्र पर बात कर रहा हूं पवित्र मानने की बात का क्या आधार अभी आपने जो परिभाषा बताई थी अभी आपने जो परिभाषा बताई थी अभी आपने जो परिभाषा बताई थी अभी आपने जो परिभाषा बताई थी उसके अनुसार यह भी पवित्र सद ग्रंथ सिद्ध हो रहा है जो कि आप मना कर रहे हैं तो अब आप अपनी बदली हुई परिभाषा बताइए मैंने परिभाषा नहीं बदला है हां पर आपने कहा जूठा थाली जूठा होने की बात वहां पर विषय अलग था ग्रंथ को भाई साहब मैंने कहा आपने जो परिभाषा बताई है ग्रंथ को पवित्र मानने की भाई साहब ग्रंथ को पवित्र मानने की जो आपने परिभाषा बताई
00:35:35:00 है वो परिभाषा आपने यह कही है कि जो भी ग्रंथ भगवान के र ले जाने की बात करेंगे वह हमारे लिए पवित्र है भले ही उसमें ठीक उलट बातें भी लिखी हो और यही अंतर है थाली में स्त्री पुरुष में और सद ग्रंथ में ग्रंथ में ठीक उलट बातें भी लिखी होंगी तो भी हम उसे पवित्र कहेंगे और थाली में भले ही ठीक उलट थाली में अगर ठीक उलट झूठा हुआ तो हम उसे पवित्र नहीं कहेंगे स्त्री पुरुष में ठीक उलट अगर त्रिया चरित्र हुआ तो हम उसे पवित्र स्त्री पुरुष नहीं कहेंगे मगर ग्रंथ में अगर ठीक उलट भी लिखा हुआ है फिर भी हम उसे पवित्र ग्रंथ कहेंगे फिर मैंने कहा कि ठीक है तो मैंने अब यह लिख दिया है तो अब इसके ठीक उलट बातें भी इसमें लिखी हुई है क्या ये आपके लिए पवित्र कहलाएगा तो आपने कहा कि नहीं कहलाएगा तो फिर अब आप आपको बदलनी पड़ेगी ना परिभाषा वो बदल के बता दीजिए मुझे क्या है तो आप तो ग्रंथ नहीं रहे आप तो अपना कुछ डायरी दिखा रहे हैं वो तो ग्रंथ है ही नहीं पले ग्रंथ है क्या आपको इतना लंबा चौड़ा करने से पहले हम आपको बता द सीधा सधी बात अगर जने पहले भी कहा कि हम आगे चर्चा जो करेंगे उसमें कुछ प्रमाणित लिया जाएगा शास्त्रों से तो कौन सा शास्त्र प्रमाणित है कौन सा पवित्र है ये कहना चाहता सीधा साफ साफ शब्दों में आप जान लीजिए
00:36:50:02 कि चारों जितने भी धर्म है जैसे हिंदू है हिंदू का जो वेद है गीता है पुराण है वो शास्त्र है वो वो धार्मिक ग्रंथ है मुसलमान अरे भाई आप वो सिद्ध नहीं कर पाए पहली बात तो यह है कि आप वो सिद्ध ही नहीं कर पाए कि वो धार्मिक ग्रंथ है आपकी परिभाषा के अनुसार और अभी आपने एक बात कही है कि जिस ग्रंथ में जिस पुस्तक में आप मुझे दोबारा परिभाषा बता दीजिए किसी भी पुस्तक को पवित्र पुस्तक मानने का आधार क्या है दोबारा बता दीजिए आप इसीलिए मैं कह रहा हूं बदल के बता दो
00:37:27:24 देखि फिर से वही बात होगी जो परिभाषा बदलना नहीं है जो कि जो बात मैंने बता दिया जब आप सुनिए आपने जो परिभाषा बताई थी भाई साहब वो यह थी जो जिस पुस्तक में जरा भी भगवान की ओर जाने की बात होगी भले ही उस पुस्तक में उल्टी बातें भी हो व हमारे लिए पवित्र है ठीक है तो जब मैंने यह दिखा दी भगवान की ओर जाने की बात तो आपने कहा ये नहीं है इसका मतलब कुछ और भी चीज है जो आपने बोला है उससे उल कुछ और भी चीजें है जो ऐड करनी है वो ऐड करके मुझे बताइए क्या है
00:38:04:16 वो इसीलिए नहीं है क्योंकि आप जिसको दिखा रहे हो वो तो संत कृत है नहीं पहले भी बता दिया कि वो ग्रंथ संतों के द्वारा रचित होना चाहिए यानी कि आपकी परिभाषा यही है पवित्र मानने की कि वो संत कृत होना चाहिए और वो जो है क्या कहते हैं भगवान की ओर ले जाने की बात करने वाला होना चाहिए फिर भले ही उस संस्कृत में उसमें कुछ उलट बातें भी लिखी हो भगवान से दूर ले जाने वाली ठीक है बिल्कुल हां तो अब बात फिर से वही आ जाती है कि आपके लिए संत कौन है हां ये अलग विषय है लेकिन अरे भाई अलग विषय क्यों है आप जिनको धर्म और ग्रंथ कह रहे हो पवित्र कह रहे हो धर्म कह रहे हो पवित्र कह रहे हो वो आपके ही अनुसार धर्म और पवित्र सिद्धि नहीं हो रहा है वो आपकी परिभाषा के अनुसार क्योंकि आप नहीं मानते कि मोहम्मद संत है और फिर आप कुरान को धार्मिक ग्रंथ कह रहे पवित्र ग्रंथ कह रहे हो तोय नाटक हुआ ना फि तो ढंग हुआ या तो आपकी परिभाषा और कुछ है वो
00:39:15:01 बताओ चलो इसमें जो आखरी पॉइंट है वो दर्शकों ने देख लिया बात होगी इसमें आखरी पॉइंट है सद ग्रंथ इसका अर्थ क्या होता है सद ग्रंथ का सद ग्रंथ सत्य बोलने वाले ग्रंथ सच्चा ग्रंथ सच्चा ग्रंथ अच्छा तो किसी भी ग्रंथ को आप सच्चा ग्रंथ मानने का आधार क्या है आपका वो ईश्वर प्रदत है भले ही वो झूठ हो जी ईश्वर प्रदत होना चाहिए भले ही झूठ हो जी उसम झूठ है है अच्छा ठीक है ये बताइए ये बताइए जो जो गीता है वह आपके अनुसार धर्म पवित्र ग्रंथ है कि नहीं बिल्कुल है उसमें झूठ है कि नहीं नहीं उसमें झूठ तो नहीं है उसमें झूठ नहीं है कहीं कहीं पर झूठ नहीं है ऐसा मेरा मत है 5 पर काल ने झूठ नहीं बोला है ये किसने कहा कि 5 पर काल झूठ बोला है रामपाल ने बोल
00:40:30:08 दूं दिखा दूं दिखा दीजिए आपको यह नहीं पता है कि रामपाल नेय कहा है कि गीता में पाच पर काल का अपना ज्ञान है वो सही नहीं है यह नहीं पता आपको आप दिखाइए कहां लिखा है आपको पता है तो बता दीजिए पूछ रहा हूं आपको पता है कि नहीं पता है खामा खा टाइम वेस्ट करा रहे पता है कि नहीं पता मैं दिखा दूंगा मैं दिखा दूंगा अन्यथा मैं रामपाल की भक्ति करना शुरू कर दूंगा आपको पता है कि नहीं पता है मैं दिखा दूंगा दिखा दीजिए आपको पता है कि नहीं पता है मुझे पता है पर आप जो क ऐसा नहीं कहे उनका कहने का भाव कुछ और था पर आप कुछ और बता रहे हैं क्या भाव था उनका वो बता दीजिए
00:41:20:10 दिखा नहीं नहीं दिखा दीजिए क् बोले क्या दिखाने वाले तो उसको देख ही लेते हैं कहां क्या लिखा है दिखा दे दिखा देते दिखा देते यह देखिए यह क्या लिखा है अंडरलाइन कर देता
00:42:19:22 हूं गीता अध्याय छ 10 से 15 श्लोक में इसके विपरीत यानी ऊपर जो बात चल रही है उसके विपरीत अपना मत यानी कौन सी चीज है काल के जाल में फसे रहने वाली बात बताई है और यह कई जगह लिखा है यह तो एक जगह कई जगह लिखा है अब आप बताइए इसमें क्या दिखाना चाह रहे थे आप क्या बोले यानी कि इसमें कुछ ऐसी बातें भी लिखी है जो भगवान के पास नहीं बल्कि भगवान से दूर ले जा रही है काल के जाल में फसा रही है गीता में तो फिर वह सद ग्रंथ कैसे अगर सद ग्रंथ व है जो भगवान के पास ले जाने की बात
00:43:08:09 करे इस जगह संत रामपाल जी महाराज यह बताए हैं कि गीता में जो पा की बात आप बता रहे हैं इसके विषय में बताया है कि गीता ज्ञान दाता भगवान अपने अपने मन से कुछ लोक बताए हैं उसके विषय में उन्होने खुद कहा है कि यह मेरा मत है अगर उस मत वो जो उनके द्वारा जो बताया गया ज्ञान है अगर वो वेदों से मिलता है तो उसका पालन करने योग्य है अगर वह नहीं मिलता है तो फिर वो पालन करने योग्य नहीं है इसी विषय यानी की उन्होंने ये भी माना ना कि ऐसा कुछ है गीता में जो पालन करने योग्य नहीं है जी तो सद ग्रंथ तो व है ना जो पालन करने योग्य हो फिर उसमें तो कुछ चीज ऐसी है जो पालन करने योग्य नहीं है फिर वो सद ग्रंथ कैसे फिर भी वो सद ग्रंथ इसका तो निर्णय हो ही गया उसम दोनों ही बात है यानी कि यानी कि जिस ग्रंथ में ईश्वर के ओर ले जाने वाली बात होगी वोह और ईश्वर से दूर ले जाने वाली बातें होंगी दोनों ही सद ग्रंथ आप मान लोगे दोनों ही बात उसम होता है और झूठा ग्रंथ किसे मानोगे झूठा ग्रंथ होता ही नहीं है जिसे
00:44:23:27 आप कोई झूठा ग्रंथ कोई झूठी बुक नहीं होती कोई झूठी किताब नहीं होती कोई झूठा शास्त्र नहीं होता कुछ नहीं झूठा होता लग गया तो तो ग्रंथ ही होता उसम तो दोनों ही बात है मैं आपसे पूछ रहा हूं झूठी किताब आप किसे मानोगे झूठी किताब तो वो होगा जिसमें की ईश्वर के बारे में कुछ लिखा हुआ ही नहीं है वोह झूठी होगी कुछ भी नहीं लिखा है अगर कुछ भी लिखा है तो वो अगर जरा सा ईश्वर के बारे में लिखा है तो व सच्ची हो जाएगी नहीं जरा से क्यों होगा क्या कितना होना
00:45:11:01 चाहिए इसका कोई पॉइंट नहीं है कि इतना ही होना चाहिए ऐसा कुछ नहीं है गीता की बाद मन मर्जी की बात है फिर मन मर्जी की बात है फिर कितना होना चाहिए मनमर्जी तो आप लोग कर रहे हैं कि आप कुरान शरीफ को मान बेकार की बात जब मैंने पूछा कि किसी शास्त्र में कितना ज्ञान होने पर आप उसको कितना परसेंटेज ज्ञान होने पर आप उसको मान लोगे कि सद ग्रंथ है अब आप मैंने कहा कि जरा सा भी अगर लिखा होगा तो क्या वो सद ग्रंथ होगा सच्चा ग्रंथ होगा तो आपने कहा नहीं जरा सा पे नहीं होगा तो मैंने पूछा कितना पे होगा इसका कुछ नहीं है इसका मतलब कि हम लोग आपके पीछे पीछे चलते रहे आंखों प पट्टी बांध के आप कह दो ये सद ग्रंथ है तो हम उसे सद ग्रंथ मान ले आप कह दोय सद ग्रंथ नहीं है झूठा है तो हम उसे ना माने क्योंकि आधार तो आप बता नहीं रहे हो नियम तो आप बता नहीं रहे
00:46:04:06 हो चलिए आप बता दीजिए कि ग्रंथ किसे कहा जाता है सद ग्रंथ सद ग्रंथ दीजिए आप आप बता दीजिए इसके बाद चर्चा शुरू होगी और े फालतू का इतना लंबा चौड़ा 40 45 मिनट बवाद हो गया इसके लिए कोई फायदा नहीं हुआ आप बता दो बात देखिए अ बातें करेंगे तो हमें यही चर्चा समाप्त करनी होगी आपके हिसाब से फालतू है आपके हिसाब से जो ब फालतू है वो मेरे हिसाब से नहीं है मेरे हिसाब से जो कचरा है वह आपके हिसाब से कचरा नहीं है मैं तो नहीं बोल रहा कि रामपाल कचरा है मैं तो नहीं बोल रहा व संडास है मैंने बोला क्या आप बोल दीजिए कि मान रख रहा हं मैं आपका मान रख रहा हूं कि नहीं रख रहा हूं तो आप ये क्यों कर रहे बे फालतू में आपने खर्च कर दिए आपको लगता है ये बे फालतू में खर्च हुए क्योंकि आपके पास उत्तर ही नहीं है इन तीनों चीजों में से किसी का भाई धर्म सुनो धर्म पवित्र सद ये विशेषण आपने जो लगाए हैं किसी भी शास्त्र को मानने के उसी विशेषण का जो आपका आधार है उसी विशेषण का जो आधार है आपका और जो आपने बताया वो खुद कट जाता है आपने कहा कि जो संत के द्वारा होगा वो होगा मगर
00:47:19:10 कुरान वाला लिखने वाला स संत नहीं है आपने कहा कि जो क्या कहते जिसम भगवान की ओर जाने की बात लिखी होगी जरा सी भी भले ही उसम उल्टी लिखी हो तो वो जो है वो सद ग्रंथ कहलाएगा फिर मैंने दिखा ये सद ग्रंथ है आपने कहा नहीं आप अपनी मनमर्जी चला रहे जिसको जहा मानना है मान ले रहे नहीं मानना नहीं मान उसका कोई सिद्धांत नहीं है मैंने आपसे ये तक पूछा कि कितना परसेंट होने पर आप उसको सद ग्रंथ कह दोगे तो आपने कहा इसका कोई वो नहीं है हिसाब तो यही हुआ कि जिस पर उंगली रख देंगे ये बच्चों ये है सद ग्रंथ मान लेंगे और जो बच्चों य सद ग्रंथ नहीं है नहीं मानेंगे बात खत्म यही है ना शास्त्र समत
00:48:01:06 भक्ति चलिए अब मैं आपसे इस चैप्टर को क्लोज ही कर रहे क्लोजिंग की र है मैं अब आपसे य पूछ रहा हूं आप इसको क्लियर कर लीजिए कि सद ग्रंथ क्या है जो आप बताना क् कर वही क्लियर कर रहा हूं ब मैं वही क्लियर कर रहा हूं कि आपके हिसाब से फिर झूठी किताब कौन सी होगी अगर जिसमें सच और झूठ वो भी सद ग्रंथ है तो असद ग्रंथ कौन सा
00:48:33:25 होगा अब ये बताइए आप अरे हमने तो कहा जिसका एक एक शब्द बिल्कुल अक्षर सत्य है हमारे लिए वो सद ग्रंथ है आपके लिए वो भी सद ग्रंथ है जिसम झूठ भी है यह अंतर है हम हम ढोंग नहीं करते हमारे लिए कुरान सद ग्रंथ नहीं पवित्र नहीं है संत के द्वारा दिया नहीं है हम ढोंग नहीं करते अब आप देखिए देखिए मैंने आपको अपनी परिभाषा कितनी देर लगी मुझे बताने में ना तो मैंने चेंज किया ना उसको बदला फटाक से बताया अब आप मुझे बता दीजिए कि अगर जिसमें झूठ और सच दोनों है वह भी सद ग्रंथ है तो असद ग्रंथ किसे कहेंगे मनुवा स्मृति को आप सद ग्रंथ मानते हैं ये विषयात मत मैंने अभी आपको आपसे आपकी परिभाषा पूछी आपने मुझसे पूछी मैंने बता दी आपकी परिभाषा पूछ रहा हूं आपका उत्तर हम दे रहे हैं आप ये बताइए मन आप उत्तर दीजिए देखिए जब ट्रेन में कोई व्यक्ति बिना टिकट पकड़ा जाएगा तो व यह नहीं कहेगा कि भैया वो भी तो बिना टिकट है आप अपना टिकट बताइए आपकी परिभाषा क्या है वो बताइए आपका टिकट ही पकड़ रहे हैं हम आप ब क्यों आप मेरा टिकट क्यों पकड़ रहे अभी आपसे आपका टिकट मांगा जा रहा
00:49:48:26 है आपके पास टिकट है सुनिए सुनिए सुनिए ऐसा है ये क्यों हो रहा है क्यों हो रहा है इसको मैं बता दूं जब हम मनुस्मृति की विवेचना पर जाएंगे तो क्या होगा कि वो एक अलग ही चैप्टर खुल जाएगा फिर हम उसम उसकी विवेचना करते रहेंगे फिर हम उसमें जब हम बात एक मिनट जब हम उसम बात कर रहे होंगे तो फिर उसमें कोई तीसरा अरे भाई सुन लो उसमें फिर कोई तो ऐसे निर्णय नहीं होगा क्योंकि हम जब भी किसी त किसी भी विषय को खत्म नहीं कर लेंगे तब तक हम दूसरा विषय खोलते चले जाएंगे निर्णय कहां से आएगा तो आप मुझे यह बताइए फिलहाल मैंने आपसे आपकी परिभाषा पूछ आपने मेरे से पूछी मैंने आपको बता दिया हमारे लिए सद ग्रंथ पवित्र ग्रंथ धर्म ग्रंथ वो है जिसका एक भी जो वो है शब्द वह गलत ना हो वो झूठ ना हो वह हमारे लिए सद ग्रंथ है पवित्र ग्रंथ है धर्म ग्रंथ है और वह परमेश्वर की प्राप्ति कराता हो परंपरा प्राप्त आचार्य द्वारा प्राप्त हुआ हो एक मिनट स
⬜ Not used yet · 00:50:49:01 – 00:51:18:27 (0:30)
00:50:49:01 लाइन परगा ये
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→ Used in: A · Video बिन पेंदी का लोटा -यह कहावत रामपाल के चेलों पर सही बैठती है #Rampalexpose at 48:33 ↗
00:51:18:27 कोई है बार-बार कह रहे हैं कि आप रामपाल के शिष्यों को टारगेट करते हैं भाई साइंस जर्नी और ह्यूमन विथ साइंस को हमारा नंबर दे दीजिए वो अगर मनुष्य के मोक्ष की बात करते हैं तो हम उनको अपना सिद्ध कर देंगे जाकर दे दीजिए एक बार आया था साइंस जर्नी वाला कह रहा था कि मैं चोरों की तरह कायरता पूर्वक ही बात कर पाऊंगा हमने कहा नहीं अगर माता जी का निष्ठा पूर्वक दूध पिया है तो आप चेहरे के साथ आक के बात करिए हमसे फोन मिलाइए हमारे लिए हम बात करेंगे आपसे तो यह संदेश आप उन्हे दे दीजिए शिवांश जी से आप बात करिए जब समय मिलेगा तो उनका प्रतिकार भी किया जाएगा बोलिए गण दा जी हम आपसे जो प्रश्न किए उसका थोड़ा सा बता दीजिए फिर चर्चा आगे बढ़ेगा हमने प्रश्न किया जो मनुस्मृति है उसको आप सथ मानते हैं बिल्कुल उनका लिखा हुआ सत्य है बिल्कुल तो मनुस्मृति के अध्याय पा का श्लोक 35 में क्या कहता है
00:52:29:12 क्या कहता है बताइए पढ विधि नियुक्त होने पर जो मनुष्य मास नहीं खाता व मरने के 21 जन्म तक पशु होता है क्या य लिखा है मा मेरी बात को समझिए देखिए पहली बात तो यह मैं सिद्ध कर दूंगा कि सही लिखा है मेरी बात समझिए मेरी बात समझिए भाई साहब मेरी बात समझिए मैं इसको सही मानता हूं गलत मानता हूं ये एक अलग चीज है और मुझे इसको सही सिद्ध करना पड़ेगा एक अलग चीज है मैं इसको सद ग्रंथ तब कह रहा हूं जब इसके एक एक शब्द को मैं सही मानता हूं जी आप सद ग्रंथ उसको कह रहे हैं जिसमें झूठ भी है गलत भी है उसको भी आप सद ग्रंथ कह रहे हैं मैं इसके लिए लडूंगा आप लड़ ना उन चीजों सुनिए मैं इसके लिए लडूंगा हारू या जीत वो एक अलग बात है मैं इसके लिए लडूंगा कि इसमें ये जो बात है सही लिखी है मैं लडूंगा आप लड़ उन चीजों के लिए जो चीज आपको झूठ बोलनी पड़ रही है गलत कहनी पड़ र उन चीजों के लिए लड़ यह हमारा हमारा सुनिए हमारा मानना यह मैंने मैंने आपको यह नहीं कहा कि मैं मैंने आपको यह नहीं कहा अभी कि मैं सही हूं या आप सही है क्योंकि उसी बारे में तो हम य आए कौन सही है सुन लीजिए सुन लीजिए सुन लीजिए भाई साहब सुन लीजिए
00:53:45:10 य इसलिए आए कि कौन सही है और कौन गलत है ठीक है हम लोग यहां पर इसीलिए आए हैं तो यह बात जिनको जिन ग्रंथों को मैं सही मानता हूं उसमें मेरा कहना है एक एक शब्द हम सही मानते हैं भाई मेरा मानना है कि इसमें जो लिखा है वो सब सही है आपका मानना है कि आप उन ग्रंथों को भी सद ग्रंथ कहते हैं जिसमें की झूठ मिला हो बात इस पर हो रही है कि हमारा सिद्धांत क्या है किसी ग्रंथ को सही अथवा गलत मानने का अब हम आपको प्रमाणित कर रहे जो मैंने कहा था कि ग्रंथ में झूठ भी हो सकता सही भी हो सकता है जैसे कि इस मनो स्मृति में अध्याय भाई तो आप ये बोलो आप ये बोलो ना कि हा मैं उसको भी मानता हूं जिसम झूठ भी होगा उसको भी मैं सद ग्रंथ मानता हूं ये बोलो ना यार पता नहीं क्यों इधर उधर भाग रहे हो बोल दो ना कि मैं मैं उसको भी सद ग्रंथ मानता हूं जिसमें सच और झूठ दोनों लिखा हो सुनिए पर आप हमारी बात को पहले सुन लीजिए बीच में आप नहीं बोलिएगा थिए बोलिए कहा सद ग्रंथ वो होता जिसका अक्षर सु अक्षर सत होता है मनुस्मृति अध्याय पा शलोक 35 में कहा गया है कि जो मांस नहीं खाता
00:55:00:13 है वो एकही जन्म तक नर्क में जाता है तो आप मेरे भाई मनुस्मृति में कहां पर गलत है कहां सही है और वो आपके और मेरे बीच में वो डिबेट का विषय है अभी मैं बात यह कर रहा हूं कि आपका क्या आधार यही है जिसमें झूठ और सच दोनों होगा उनको भी आप सद ग्रंथ कहेंगे मैंने आपसे ये पूछा है मैंने आपसे पूछा है मे मैंने आपसे पूछा है भाई साहब कि क्या आपकी परिभाषा किसी को सद ग्रंथ कहने की यह है कि उसमें झूठ और सच दोनों लिखा होगा वो सद ग्रंथ है क्या आपकी ये परिभाषा है भाई साहब ये एक अलग विषय है कि मनुस्मृति के एक एक शब्द को मैं सही सिद्ध करूंगा कि नहीं करूंगा वो एक अलग विषय है मास खाना सही है कि नहीं है मेरा बात सुन लीजिए हां मैंने कि ग्रंथ में झूठ और सही दोनों ही बातें लिखी होती है जैसा कि मनुस्मृति अध्याय पाच लोक 35 में गलत बाद लिखा हुआ है फिर भी वो सद ग्रंथ ये आपको सुनिए ये आपको गलत लग रही है मुझे गलत नहीं लग रही दुनिया को गलत लग रहा है मुझे गलत लगवाए मुझे गलत लगवाए एक ही जन्म तक नरक कैसे जाएगा सुनो सुनो सुनो सुनो सुनो सुनो सुनो मुझे गलत
00:56:15:19 नहीं लग रही है उसके पीछे कारण है आपने कभी कोई दवाई खाई है क्या क्या बोले आपने कभी कोई दवाई खाई है क्या खाया है कभी कोई ऐसा कैप्सूल खाया आपको मालूम है कैप्सूल वगैरह बनते टाइम पशुओं की चर्बी यूज होती है हो रहा उसम साफ साफ लिखा है खाने आप मेरी बात का जवाब दीजिए आप मेरी बात का जवाब दीजिए उसम आप मेरी बात का जवाब दीजिए हमको जवाब दे रहे हैं लेकिन आप जवाब नहीं दे कैप्सूल प चला गम क्या अरे भाई साहब अच्छा केवल वो श्लोक पढ़ोगे वो श्लोक पढ़ोगे कि आगे पीछे के सारे श्लोक पढ़ोगे आगे पीछे काभी पढ़ा दीजिए उसम देखि कहा लिखा कैप्सूल कैप्सूल में मिला कर के जो उसी शलोक में लिखा हुआ है कि जो मनुष्य विधि युक्त मास नहीं खाता विधि युक्त मास यानी कि विधि के अनुसार अब विधि क्या है यानी कि धर्म विधि क्या है यानी कि धर्म यानी जो धर्म के अनुसार मास नहीं खाता है वो व्यक्ति नर्क में जाता है यानी कि यानी कि यहां पर यह बताया जा रहा है कि जब आपको मांस खाने की आवश्यकता भी पड़ी तो आपने अगर धर्म नहीं खाया अगर आपने धर्म युक्त नहीं खाया तो आप 21 जन्मों तक
00:57:30:19 ऐसा ऐसा होगा यह मैं सही मानता हूं आप नहीं मानते व आपका आउटलुक है आप नहीं मानते व आपका आउटलुक है मेरी बात समझिए इससे विषयात होगा मैं इस चैप्टर को रखूंगा लिख लीजिए इस चैप्टर को मैं आपके सामने सही सिद्ध करूंगा मुझे आप अपनी य जो परिभाषा है क्या यही है जिसमें झूठ भी होता है उसको भी आप सद ग्रंथ मानते हैं आप अपनी परिभाषा बता दीजिए भाई साहब आप अपनी परिभाषा बता दीजिए आपकी परिभाषा ये है मैं इसको गलत नहीं मैं इसको मैं इसको गलत नहीं मानता हूं भाई साहब आप विषयात करेंगे बात आगे नहीं बढ़ पाएगी हम में बहुत अच्छी अच्छी बातें हो सकती है हम में बहुत अच्छी बात हो सकती है आप विषयात मत करिए हम इस चैप्टर को लेंगे अभी नहीं क्योंकि अभी चैप्टर ये चल रहा है क्या आपकी परिभाषा यह है आप अपनी परिभाषा यह बताइए कि क्या आपकी परिभाषा यह है जिसमें सच और झूठ दोनों होगा क्या आप उसको मानते हैं कि वह सद ग्रंथ है मैं क्लियर कर रहा हूं भाई साहब यह हमारे पास बहुत सारे टॉपिक है सारे टॉपिक को अभी ले आएंगे कोई टॉपिक क्लियर नहीं होगा इसलिए मैं आपसे एक एक करके चल रहा हूं एक एक करके एक बात पूरी हो फिर हम आगे चले क्या आपके अनुसार सद ग्रंथ वो है जिसमें झूठ और सच
00:58:45:22 दोनों लिखा हो यह तो हजार बार बोल दिया कि हा भा ऐसा भी होता है वय प्रश्न किया कि तो फिर आपके हिसाब से टी पुस्तक कौन सी होगी झूठी पुस्तक वही होगी जो आप दिखा रहे थे अरे उसकी उसका फीचर्स तो बताओ कि उसमें क्या होगा क्या नहीं होगा जिसके कारण हम उसे झूठी कहेंगे भाई एक एक जो झूठी गवाही देने वाला चोर है सुन लीजिए सुन लीजिए उदाहरण बता दूं एक जो झूठी गवाही देने वाला चोर है वो भी दिन भर में कभी ना कभी कोई ना कोई सच्ची बात कहेगा तो क्या उसके कारण हम उसको सच्चा सच्चा व्यक्ति माने एक जो व्यभिचार करने वाली जो स्त्री है वह भी कभी ना कभी कुछ ऐसे कार्य करेगी जो व्यभिचार ना हो तो क्या हम उसके कारण उसको पवित्र कहे एक जो व्यभिचार करने वाला पुरुष है वोह भी कभी ना कभी ऐसे कार्य करेगा जो कि व्यभिचार ना हो तो क्या इसके कारण हम उसे पवित्र पुरुष कहे एक जो झूठी थाली है जिसमें एक और झूठा डला हुआ है उसमें भी कहीं ना कहीं साफ सुथरा खाना रखा होगा तो क्या उस कारण से हम उसको पवित्र थाली कहे
01:00:01:08 तो मेरा प्रश्न यही है कि अगर सच और झूठ दोनों बातें करने वाला आपके अनुसार सद ग्रंथ है तो फिर असद ग्रंथ का परिभाषा क्या है आपकी असद ग्रंथ क्या है देखिए हम जब बोलेंगे तो हमको बोलने का समय दीजिएगा बीच में आप बोलने लगते हैं तो हम बोल नहीं पाते हैं बोलिए मेंही बात होती है धर्म के विरुद्ध होता है कुछ धर्म के युक्त तो होता ही है क्यक ग्रंथ वही होता जो धर्म के अनुसार लिखा हो इसी बात को पुष्टि करने के लिए हमने एक लोक लि मनुस्मृति अध्याय पा शलोक 35 का भाई साहब देखिए बात ये है कि आप आप जब जब मनुस्मृति बोलते हैं तो उसम मुझे इंटरप्ट इसलिए करना पड़ता है कि वो चैप्टर ही अलग हो रहा है मैंने आपसे आपकी परिभाषा परिभाषा आप अपनी अपनी परिभाषा बताओ अपनी आप क्या मानते हो मैं आपसे पूछ रहा हूं आपकी परिभाषा क्या है बस वो बता दो उसमें उसम इतनी दिक्कत क्यों हो रही है आप क्या मानते हो असत ग्रंथ किसे कहोगे बस पहले सद ग्रंथ किसे कहते इसका तो बोलने ही
01:01:16:09 नहीं दे रहा है आपने बोल तो दिया स ग्र आपने बोल तो दिया सद ग्रंथ उसे कहते जिसम सच्ची झूठी दोनों बात हो मगर व भगवान की बात कर रहे हो आप मनो स्मृति का ख करने लगे ये तो बोलने दिए उसमें क्या खा आप भाई साहब देखिए विषयात हो जाएगा मैं आपसे पूछ रहा हूं आपकी असद ग्रंथ की परिभाषा क्या है विषयात आप कर दीजिए प्रश्न असत ग्रंथ की परिभाषा क्या है भाई साहब भाई साहब असत ग्रंथ की परिभाषा क्या है असद ग्रंथ की परिभाषा क्या है भाई साहब चलिए मैं इसको मैं इसको थोड़ा मैं इसको थोड़ा क्लियर कर दूं आप एक बा बताइए कि भगवत गीता आपके लिए सद ग्रंथ है कुरान भी सद ग्रंथ है बाइबल भी सद ग्रंथ है जी और यह यह भी सद ग्रंथ है गुड बहुत बढ़िया अब इसमें कोई बात झूठी लिखी है
01:02:20:28 क्या नहीं हा यानी कि जिसमें केवल सच्ची बातें लिखी है वह भी सद ग्रंथ है जिसमें झूठ और स दोनों लिखा है वो भी सद ग्रंथ है और असद ग्रंथ की परिभाषा हम बताएंगे नहीं जिसमें सारी बात गलत स ग्रंथ है जिसमें सिर्फ आपके हिसाब से सच लिखा है तो फिर यह भगवत गीता सद ग्रंथ कैसे है जिसम झूठ भी लिखा है वही तो मैं पूछ रहा हूं इसमें केवल सच लिखा है तो फिर इसका नाम कुछ और होना चाहिए ना य सद व ग्रंथ हो गया भगवत गता क्या हुआ भगवत गीता क्या हुआ कुछ कुछ बात झूठी है भगवत गीता ग्रंथ य दिखा स ग्रंथ और तो भगवत गीता या कुरान वगैरा सद ग्रंथ नहीं है ना एक ही बात तो एक बार एक बार बोलने से कोई फभ भगवत गीता ग्रंथ है और य सद ग्रंथ है यानी कि भगवत गीता सद ग्रंथ नहीं है
01:03:34:16 चलिए अच्छा आपको जो बता रहे थे उस पर क्या हा बोलिए मिनट जी बोलिए यह कभी कभी दोरी बात भी कर ले रहे हैं ना इसलिए दिक्कत हो जा रही बोलिए भाई अनीश जी आप देखो यह व्यक्ति क्या कह रहे हैं कि यह इसमें बात सच है यह भी सद ग्रंथ है जिसम मिक्स है वो भी सद ग्रंथ है अगर य स ग्रंथ है अगर गीता अगर गीता सद ग्रंथ है तो इसका नाम कुछ और होगा ना फिर जिसम एक एक बात सत्य है य इनका प्रिया चरित्र जो मैं जनता के सामने लाना चाहता हूं गीता पुरा वेद बाइबल को य स ग्रंथ नहीं मानते यह ढ करते मिनट ये दिखावा करते हैं कि हम उनको भी सद ग्रंथ मान रहे जिसको सद ग्रंथ मानते हैं फिर उसके एक भी शब्द पर अविश्वास नहीं होता
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01:04:31:21 हैय आप बोले हमको बोलने दिए जनता ने खद देख लिया भा अब हम आगे चले बोले जा रहे बोलने का मौका ही नहीं दे र सुनि आपने क्या क्या बोला मैं आपको याद दिला दू आपने बोला कि जो संत के द्वारा प्रदत शास्त्र होंगे वो एक मिनट भाई साहब मैं आपको याद दिला दूं आपने क्या क्या बोला है जो संत के द्वारा प्रदत शास्त्र होंगे व हमारे लिए एक मिनट आपने आप जो बोल रहे हो आपने कुछ बोला नहीं आपको याद दिला रहा आपने क्या क्या बोला है एक
01:05:16:07 मिनट एक पॉट तो आप एक बार ही जवाब दे दीजिए ना उसको पलट मत दोबारा मतलब अलग परिभाषा मत बताइए जो बताना है एक बार बता दीजिए उनको शायद आपकी आवाज नहीं आ रही तो
01:06:07:19 सुनिए ऐसा है कि
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→ Used in: A · Video क्या रामपाल का ईश्वर सर्वशक्तिमान है ? #Rampalexpose #RampaljiMaharaj #satlokash... at 0:03 ↗
01:06:10:12 यह जो तीन बातें हैं धर्म पत्र और सद यह तीनों बातों में हमारी बातें डिस्कशन हुआ आपने कुछ बातें कही कुछ हमने कही जनता ने देखा है अब हम एक बात मुझे समझ में आई उसमें तीनों में कॉमन थी कि जो भगवा की ओर पूर्ण ब्रम परम परमेश्वर उसम फिर वो बात आ जाएगी भगवान तो यह भी है वो भी है वो भी एक विषय है भगवान कैसे हैं मगर फिलहाल हम पूर्ण ब्रम की बात कर रहे जो पूर्ण ब्रह्म की बात करेंगे वो जो है हमारे लिए धर्मशास्त्र पवित्र शास्त्र और सद ग्रंथ हो जाएंगे तो अब मैं जब हम यह बात बारबार कह रहे हैं कि वही हमारे लिए धर्म है जो पूर्ण ब्रह्म की बात करे वही हमारे लिए पवित्र है जो पूर्ण ब्रम बात करे वही हमारे लिए सद है जो मोक्ष पूर्ण ब्रह्म की बात करे ईश्वर की बात करे तो इसका मतलब ये है कि क्या आपके अनुसार जो ईश्वर है वो क्या है उसकी क्या परिभाषा है ईश्वर
01:07:15:22 की यही प्रश्न हमने आपसे किया था कि सर्वशक्तिमान ईश्वर कौन है ईश्वर का क्या स्वरूप है इस सुनि सुनि सर्व शक्तिमान ईश्वर कौन है यह ऑब्जेक्टिव प्रश्न है यह ऑब्जेक्टिव अभी मैंने परिभाषा पूछी है ऑब्जेक्टिव देख सुनि ऑब्जेक्टिव का मतलब क्या है समझ ली ट ऑब्जेक्टिव का मतलब आवाज कहा से आ रही है ऑब्जेक्टिव का मतलब समझ लीजिए मैंने कहा कि जो हमें परमेश्वर की प्राप्ति कराएंगे वह शास्त्र हमारे लिए सद ग्रंथ है यह हो गया सिद्धांत वाला प्रश्न सिद्धांत सिद्धांत क्या है ये है अब ऑब्जेक्टिव प्रश्न क्या वस्तुनिष्ठ क्या वो ग्रंथ कौन कन से ये ऑब्जेक्टिव हो गया वो वेद है वो स्मृति ग्रंथ है ये ऑब्जेक्टिव हो गया अभी मैंने हम लोग बात इस पर कर रहे हैं कि जब आप बार-बार ईश्वर को प्राप्त कराने वाले शास्त्रों की बात कर रहे हैं कि वही सद ग्रंथ है वही धर्म ग्रंथ है वही पवित्र ग्रंथ है तो इसका मतलब आपको मालूम होना चाहिए कि ईश्वर किसे कहते हैं तो आपके अनुसार ईश्वर कौन है कौन मतलब ऑब्जेक्टिव नहीं उसका नाम नहीं पूछ रहा हूं उसकी परिभाषा पूछ रहा हूं ईश्वर किसे कहा जा सकता है क्या सिद्धांत है हां उनका लक्षण बता दीजिए उनका सरल बात में उनका लक्षण बता दीजिए ईश्वर का क्या लक्षण है परमेश्वर पूर्ण
01:08:31:01 ब्रम आप फिर इसम हो जाएंगे ईश्वर मैं पूर्ण ब्रम की बात कर रहा हूं पूर्ण ब्रम का क्या है परमेश्वर परमेश्वर जो लास्ट है उससे आगे कुछ नहीं है उसका उसकी क्या परिभाषा है क्या सिद्धांत है उसका देखि परमेश्वर का सिद्धांत है वो निर्विकार है दयालु है परम पवित्र है क्या है निर्विकार है हा सर्वेश्वर है न्याय का है सृष्टिकर्ता है सर्वव्यापक है सर्वशक्तिमान है सच्चिदानंद है यही उन उनके लक्षण अच्छा सर्वशक्तिमान अच्छा और सर्वज्ञ भी है सर्वज्ञ जी सर्वव्यापक भी है सर्वव्यापक भी है अच्छा तो सर्वव्यापक का अर्थ क्या होता है भाई साब क्या लेते हैं आप सर्वव्यापक का अर्थ जो अपने शक्ति से सर्व व्याप है हर जगह व्यापत है सब जगह सब जगह कोई भी दुनिया की ऐसी कुछ भी ऐसा कुछ भी कुछ भी ऐसा नहीं है ज ना हो जो अपने शक्ति से हर जगह व्याप्त है ठीक है शक्ति सेही सही मगर हर जगह सब जगह ना सब
01:09:46:14 जगह सब जगह ठीक है और सर्वज्ञ का क्या मतलब है जो सब कुछ जानता हो उसे सर्व कुछ कि वो ना जानता हो यानी कि सर्व का मतलब है सब कुछ कुछ शेष ना रह जाए यह सर्व का मतलब है हा अब मैं आपसे पूछता हूं कि ई साब मेरी बात अभी पूरी नहीं हुई रुक जाइए मैं आपसे एक बार और क्लियर कर लू कि आप जब सर्वज्ञ कह रहे एक मिनट एक मिनट जब आप सर्वज्ञ कह रहे हैं सर्वव्यापक ले कह रहे हैं तो आप सर्व का अर्थ ले रहे हैं कि जिससे बाहर कुछ भी शेष रह जाए सब कुछ सर्वव्यापक जो सब जगह व्याप्त हो सर्वज्ञ जो सब कुछ जानता हो ऐसा कुछ ना हो जो वो ना जानता हो ऐसा ऐसी कोई जगह ना हो जहा उसकी व शक्ति के रूप में व्याप्त ना हो आपके अनुसार ठीक है यानी सर्व जो विशेषण लग रहा है सर्व इसका अर्थ आप यह मान रहे हैं कि सब कुछ जिससे शेष कुछ ना रह जाए ठीक है जी तो अब बात आती है कि आपने ईश्वर को सर्वशक्ति मान भी कहा है बिल्कुल तो सर्वशक्तिमान का अर्थ आप क्या लेते
01:11:03:13 हैं सर्वशक्तिमान का मतलब हो सबसे सर्व कुछ करने वाला उसके असंभव कुछ हो या यानी कि वह सब कुछ कर सकता है जिसके बाहर कुछ भी शेष नहीं रह जाता ऐसा नहीं कहा जा सकता कि वो फलाना काम नहीं कर सकता हां लेकिन अब ये आगे बढ़ने से पहले मैं आपसे पूछना चाहता हूं क्योंकि आपने बहुत प्रश् पूछ ये प्रश्न मेरा ये चैप्टर क्लोज ही नहीं हुआ तो आप आगे क्यों जा रहे हैं मैं आपकी सर्वशक्तिमान की परिभाषा परही प्रहार कर रहा हूं एक मिनट एक मिनट भाई साहब अभी सर्व शक्ति अभी सर्व अभी जो सर्व वाली बात हो रही है आपने माना सर्वज्ञ वो है जिससे कोई भी चीज जानने की बाकी ना रह जाए और सर्वव्यापक वो है जो शक्ति के रूप में हर जगह व्याप्त हो कहीं भी कोई भी ऐसी चीज ना हो एक मिनट भाई साहब भाई साहब कैसे कर अब सर्व शक्तिमान की बात आई जो सब कुछ करने में सामर्थ वान हो और हम भी हम भी यही मानते गणेश जी दो मिनट दो मिनट दो मिनट आप चुप रहिए दो मिनट नहीं तो आप जब हम बोलेंगे रुकने के लिए आप रुकवा उनको शवा भैया को भी ठीक है भैया को आप बो बोलिए भैया बोलिए जब आपने
01:12:18:13 आपने सर्वज्ञ उसे माना जिससे जिसको कुछ भी जानना शेष ना हो आपने सर्वव्यापक उसे माना जिसका कहीं भी जिसका कहीं भी होना शेष ना हो हर जगह हो शक्ति के रूप में शक्ति के रूप तो फिर सर्वशक्तिमान का मतलब आपने माना जो सब कुछ
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01:12:35:27 कर सकता है तो अब मैं पूछ रहा हूं क्या वह माता के गर्भ से जन्म ले सकता है आपकी आवाज नहीं आ रही आपकी आवाज नहीं आ रही अब
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01:12:55:26 आ रहा है इसके पहले हम आपसे प्रश्न पूछना चाहते हैं कि ईश्वर के विषय में आपका क्या कहना है ईश्वर कौन है सर्वशक्तिमान ईश्वर कौन है उसका क्या स्वरूप है यह तो विषयात हो रहा ना भाई साहब जब एक बात कोई क्रम से जब एक बात कोई क्रम से चल रही है तो उसको खत्म करिए ना भाई साहब जब आपने कहा धर्म ग्रंथ और धर्म और पवित्र और सद वो है जो ईश्वर की बात करा तो मैंने आपसे आपके ईश्वर की भाषा पूछी अब आपने कहा कि भाई हम उसे सद ग्रंथ मानते हैं जो सर्वशक्तिमान की बात करे सर्वज्ञ की बात करे सर्वव्यापक की बात करे अब मैं आपसे आपके सर्व शक्तिमान को टटोल रहा हूं तो आप शास्त्रों को आप जिन शास्त्रों को सद ग्रंथ कहते हैं भाई साहब आप जिन शास्त्रों को सद ग्रंथ कहते हैं भाई साहब उन सद ग्रंथों के द्वारा जो प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है आपके अनुसार वह सर्वशक्तिमान आपने माना है तो अब मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या वह माता के गर्भ से जन्म ले सकता
01:14:02:13 है मेरी बात सुनिए भाई साहब मैं अपने आप को सही सिद्ध कर लूंगा अभी के अभी वो पॉइंट खड़ा करने पर विषयात होगा नहीं होगा अगर मैं गलत भी सिद्ध हो जाऊंगा सुनिए अगर मैं गलत भी सिद्ध हो जाऊंगा तो उससे आपका सही होना सिद्ध नहीं होता अपने आप को सही सिद्ध करिए भाई साहब मैं आपसे पूछ रहा हूं भाई साहब मैं आपसे ये पूछ रहा हूं भाई साहब कि क्या आपने कहा सर्वशक्तिमान का अर्थ जो सब कुछ कर सकता है क्या वह माता के गर्भ से जन्म ले सकता है इस प्रश्न पर का उत्तर हम देंगे आपको ले प आप अगर मेरे प्रश्न के जवाब में मुझसे प्रश्न करेंगे उल्टा सुनिए तो मैं अपने अपने बारे में कुछ बताऊंगा फिर आप उस पर प्रश्न करेंगे फिर तो वो एक चैप्टर ही खुल जाएगा ना नया मैं अपने आप सही सिद्ध करूंगा अभी आप रामपाल को सही सिद्ध कर रहे हैं अभी आप रामपाल को सही सिद्ध करिए मेरे अगर मैं हार गया अगर मैं अपने पक्ष को सही से सिद्ध नहीं कर पाया तो उससे रामपाल सही सिद्ध नहीं होंगे रामपाल के सही सिद्ध सुनो रामपाल के सही सिद्ध होने से ही रामपाल सही सिद्ध होंगे
01:15:17:19 आपकी परिभाषा अगर यह है आपकी परिभाषा अगर यह है कि सर्वशक्तिमान का अर्थ है सब कुछ कर सकता है भाई साहब मैं देखिए मैं मैं बहुत ज्यादा आपसे रिपीटेड नहीं कर सकता हूं मैंने आपको कहा कि आप आराम से वो रखिए आप अपने भी सवाल को लिख करके रखिए हमारी डिबेट कई एपिसोड्स में होगी हम लोग बात करते रहेंगे भाई साहब अभी बात चल रही है आपने सद ग्रंथ उसे माना है जो सर्वशक्तिमान ईश्वर की बात करें जी तो अब मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या आपका जो आपके अनुसार जो ईश्वर है वो माता के गर्भ से जन्म ले सकता मैं पूछ नहीं सकता क्या मेरा कोई अधिकार नहीं है भाई साहब अभी नहीं है अभी आप अपना जवाब दीजिए अभी नहीं है आप अपना जवाब दीजिए भाई साहब मेरी बारी आएगी तब मैं आपसे क्वेश्चन नहीं करूंगा मैं अपना जवाब दूंगा मैं अपना दूंगा भाई साहब आपके अनुसार आंसर दीजिए मेरे गलत होने से आपका सही होना सिद्ध नहीं होता आप अपने को सही सिद्ध करिए भाई साहब भाई साहब प्लीज भाई साहब मेरे पास इतनी ताकत नहीं है वैसे ही मेरा मेरा स्वास्थ्य गड़बड़ है भाई साहब मैं बारबार बोल बोल करके और मैं थक रहा हूं आप मेरी बात को समझिए जब आप मुझसे क्वेश्चन
01:16:32:20 करेंगे मैं अपना जवाब दूंगा आपको मैं आपसे क्वेश्चन नहीं करूंगा इससे विषयात होता है आप आप सुनिए इससे विषयात होता है भाई साहब टॉपिक चेंज होता है इससे आप अपना जवाब दीजिए आपका ईश्वर सब कुछ कर सकता है कि नहीं हो ना कि मैं आपसे पूछ नहीं सकता पूछो जब मेरी बारी आएगी तब पूछो जब मैं मेरे को अपना पक्ष सिद्ध करना होगा सही तब पूछो अभी आप अपना पक्ष सही सिद्ध कर रहे हैं आपने कहा पहले ही आपसे पूछा कि आपका उ देख आप जवाब नहीं दे रहे हैं अभी आपने कहा जवाब कैसे दूंगा अभी आपने कहा जवाब कैसे दू बोलने दोगे जब जब बोला बोलते हो तो जवाब नहीं देते कुछ और बोलते हो मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या सर्वशक्तिमान का जो अर्थ है वो सब कुछ कर सकने वाला है या कुछ कुछ काम नहीं कर सकने वाला है ये बता दो भाई साहब बता दो आप हमको बोलने दीजिए पहले बोलने दीजिएगा कि नहीं प्रश्न का उत्तर है ये देना इधर उधर की बात मत करो प्रश्न का उत्तर दो भाई साब जिसे हम देखो अभी पिछली कई चीजों में हमारी सहमति नहीं हुई नहीं हुई
01:17:47:20 ना फिर भी हम लोग बात कर रहे हैं ना हो सकता है कि अभी भी हमारी सहमति नहीं हो पाएगी फिर भी हम लोग बात करेंगे तो जब बात करेंगे तो आपके प्रश्न भी मैं लूंगा मगर भाई साहब प्रश्न के जवाब में प्रश्न करने से वह विषय बदलता है और अगर मान लो आपके अनुसार मैं गलत हूं एक मिनट के लिए मान लेते हैं मैं गलत हूं मेरा ईश्वर गलत है मैं जिन आचार्यों का शिष्य हूं वो गलत है मैं जिन ग्रंथों को एक एक अक्षर मानता हूं सत्य वो सब गलत है मैं गलत हूं पूरा मगर मेरे गलत होने से रामपाल जी का सही होना सिद्ध नहीं होता है अभी प्रश्न ये चल रहा है अभी प्रश्न चल रहा है अभी प्रश्न ये चल रहा है अभी प्रश्न ये चल रहा है अभी प्रश्न ये चल रहा है अभी प्रश्न ये चल रहा है अभी प्रश्न ये चल रहा है मेरे भाई मुझे बोलने दो पूरा अभी प्रश्न ये चल रहा है कि आपने कहा जो सर्वशक्तिमान अभी प्रश्न ये चल रहा है मैं पूरी लाइन कहूंगा उसके बाद ही चुप होऊंगा मैं पूरी लाइन बोलूंगा भाई साहब मैं पूरी लाइन बोलूंगा भाई साहब मैं पूरी लाइन बोलूंगा पूरी लाइन बोलूंगा भाई साहब भाई साहब मैं पूरी लाइन बोलूंगा मैं पूरी लाइन बोलूंगा भाई साहब भाई साहब भाई साहब भाई साहब भाई साहब भाई साहब अभी प्रश्न ये चल रहा है अभी प्रश्न ये चल रहा है
01:19:02:22 भाग गए भाई साहब भाई साहब भाग गए [संगीत] हां जी व तो चले गए भागेंगे भागेंगे ही ना उनके सिद्धांत क्लियर नहीं है उनके सिद्धांत क्लियर ही नहीं है भाई हम सही है या गलत है हमारी जो विचारधारा वो क्लियर है फट से बोलते है कोई भी आंसर हमसे पूछा जाता है फट से बोलते वो हम सही मान सही चीजों को सही मान रहे हैं या गलत चीजों को सही मान रहे वो एक अलग विषय जैसे उन्होंने मनुस्मृति पर क्वेश्चन किया तो मनुस्मृति में यह भी लिखा है कि जो इस जन्म में किसी का मास खाएगा अगले जन्म में वो बनेगा है ना
01:20:18:01 वो वो उसका मास खाएगा दंड लिखा है मनुस्मृति में यह भी लिखा है कि मास खाना छोड़ना 100 वर्षों तक प्रतिवर्ष जब तुम अश्वमेध यज्ञ करोगे उसके बराबर का फल देता है अब बोलो है ना अब ये कहेंगे कि नहीं ये बात क्यों ले तो जोड़ना पड़ेगा ना ये बात का मतलब क्या है ये बात का मतलब क्या तो वहां पर लिखा हुआ है जो विधि युक्त यानी आवश्यकता पड़ने पर भी अगर आपको मास खाना पड़ रहा है हारी बीमारी में मास जो विषम परिस्थितियां होती है उनमें खाने की आज्ञा है उस समय जो विधि का आलंबन नहीं लेता है विधि युक्त मास नहीं खाता है वो दंड के लायक है उसको नरक मिला है और अगर ऐसे ही एक बात को उठाना है तो इनकी जो यह है ज्ञान गंगा इसमें 31 में प्रश्न में कबीर ने बोला है कि गीता को बोलने वाला कौन है विष्णु के अवतार
01:21:19:20 कृष्ण हां भाई साहब कहां गए थे आप मत आपको भागना है ऐसे बिना बताए अब देखिए मैं आपको अन म्यूट कर रहा हूं भाई साहब अभी आपकी आवाज नहीं आ रही है हम लोग दोबारा प्रश्न पर आते फजूल की बातें नहीं करनी है ठीक है जी फिजूल की बात नहीं करनी ड खम हो गया फिजूल की बात नहीं करनी भाई साहब भाई साहब मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या आपने जो बताया कि हम उन्हें सद ग्रंथ मानते हैं उन्हें धर्म ग्रंथ मानते हैं उन्हें पवित्र ग्रंथ मानते हैं जो सर्वशक्तिमान ईश्वर को प्राप्त करने की बात करें आपने सर्वज्ञ का अर्थ बताया जो जिससे कुछ भी जानना शेष ना हो आपने सर्वव्यापक का अर्थ बताया जिसके द्वारा कोई ऐसी जगह ना हो जहां शक्ति के रूप में वो व्याप्त ना हो तो सर्वशक्तिमान का मतलब भी यही हुआ ना कि सर्वशक्तिमान का अ आपने स्वयं भी बताया जो सब कुछ करने में सामर्थ वान है अब मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या आपका ईवर सर्वशक्तिमान
01:22:35:03 है एक मिनट हम आपसे पूछना चाहेंगे दूसरी बात नहीं करनी अभी मुझे मैं थक गया मुझसे मछ ब आछ मुझसे मेरी बारी आएगी आप मुझसे अभी अपना जवाब दीजिए भाई साहब मैं आपसे पूछ रहा हूं आपके पास जवाब है तव का दिया हुआ आपके पास जवाब है सुनने का क्षमता है आप जाइए आप आपको जवाब देना है तो ऐसे ऐसे सर हिला दीजिए अन्यथा आप जा सकते हैं थक गया
01:23:17:06 मैं पीछे से जड़ की बात करना इसलिए आवश्यक है कि इनकी जड़ ही गलत है जड़ की बात इसीलिए करना आवश्यक है कि इनकी जड़ ही गलत है संत के द्वारा प्रदत शास्त्र होना चाहिए फिर वो सद ग्रंथ कैसे कुरान बाइबल और इनका ये क्योंकि ना वशिष्ठ ज्ञानी तत्व ज्ञानी ना ब्रह्मा विष्णु महेश ज्ञानी सब अज्ञानी थे तो वो संत नहीं थे और यहां तक कि यह तक लिखा है कि उनको मोक्ष नहीं मिली उनको शांति नहीं मिली तो आपको उनकी भक्ति करने वालों को शांति कहां से मिलेगी यह सब लिखा है इनकी किताबों में तो जिसको शांति नहीं है उसको संत क्यों मान रहे हो जो संत नहीं है उसके द्वारा प्राप्त ग्रंथों को तुम सद ग्रंथ क्यों कह रहे हो क्योंकि लोगों को बेवकूफ बनाना है ढोंग करना है कि हम सबको सद ग्रंथ मानते हैं आ जाओ आ जाओ आ जाओ हमारे पास आ जाओ हम तो तुमको भी मानते हैं हम तो तुमको भी मानते
01:24:21:19 हैं अनीश जी आप एक काम करिए आप एक यहां पर मैसेज कर दीजिए स्ट्रीम का लिंक अच्छा आज हमने एक बात प्रूफ की है सैद्धांतिक पटल पर आपको मैंने लिंक दिया ना थोड़ी देर के लिए जाइए बाहर और यहां नीचे आकर के कमेंट जो मैसेजेस चल रहे है इसम लिंक कर दीजिए आप कमेंट कर दीजिए अच्छा अच्छा अच्छा लाइव चैट में शेयर कर देते हैं ना चैट में हा लाइ तो आज क्या वो हुआ कि इनके द्वारा इनकी ही परिभाषा के आधार पर ना तो गीता वेद पुराण तो सद ग्रंथ है ही मगर उनकी तो बात छोड़ो कुरान और बाइबल की तो बात छोड़ो गीता वेद पुराण भी इनकी परिभाषा के अनुसार सद ग्रंथ नहीं है नहीं तो सिद्ध करें ये सद ग्रंथ कैसे कह रहे हैं अभी खुद ही इतना बड़ा वीडियो बनाया था इन्होंने किसके ग्रंथ अश्लील अब खुद कह रहे हैं कि वो ग्रंथ अश्लील है खुद कह रहे हैं और फिर कह रहे वो पवित्र है वो सद ग्रंथ है जब अश्लीलता भी है उसमें जो ठीक नहीं है सामाजिक उससे ऐसी बातें भी व बता रहे हैं ग्रंथ तो अच्छा फिर
01:25:36:24 मैंने पूछा यह प्रमाण के लिए मैंने पूछा कि भाई यह क्या है यह भी सद ग्रंथ है अंतर होना चाहिए इसके एक एक शब्द पर आपको विश्वास है तो फिर इसको भी सद ग्रंथ कह रहे हो उसको भी सद ग्रंथ कह रहे हो जिसमें मिलावट है और असद ग्रंथ की परिभाषा ही नहीं है वाह दीजिए भाई लिंक दीजिए यहां पर देखिए यह जो बातें होती है कोई अगर बुद्धिजीवी होता है उसको बिल्कुल समझ में आएगी ना तो इनका जो इनके द्वारा इनको सद ग्रंथ मानना वो सिद्ध होता है अब बात आती है एक ही चीज कॉमन मिली ईश्वर भगवान परमेश्वर पूर्ण ब्रह्म एक कॉमन मिला तीनों पात धर्म में पवित्रता में और हमने कहा चलो उसी में बात कर लेते हैं क्या तुम ईश्वर की बात कर रहे हो क्या तुम्हारे अनुसार वह शास्त्र ईश्वर की बात कर रहे हैं नहीं कर रहे आप खुद मानते हो कि ईश्वर गर्भ से जन्म नहीं ले सकता यजुर्वेद में लिखा है माता के वो गर्भ में बिचड़ता
01:26:47:26 है बस यही 18 62 करते रहो आओ आपको आपका वो है क्या कहते हैं मैसेज कहां से करते मुझे पता नहीं है पोस्ट कमेंट मैंने य कर दिया है कोई जवाइन कर लीजिए थोड़ा सा बात कर ले फिर उसके यह है इनकी पोल यह खुद को सही करने के लिए इनके लिए आवश्यक है कि दूसरा कोई गलत हो तभी तक इनका अस्तित्व है यह तभी तक सही है जब तक कोई दूसरा गलत है इनके अनुसार अन्यथा यह सही नहीं है यह अपनी बात को सही सिद्ध नहीं करेंगे यह दूसरे को गलत सिद्ध करके अपने को सही सिद्ध करेंगे व कहते हैं ना कि आदमी आजकल अपने दुख से दुखी नहीं है दूसरे के सुख से दुखी है तो यह सुखी तब होंगे जब दूसरा दुखी
01:27:59:00 होगा अरे आ जाओ ना भाई माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया है तो आप आइए जवाइन करिए चेहरे के साथ अगर आप हमें जानते हैं तो जय श्री राम जय श्री राम गुरुदेव जय श्री राम अच्छा एक बात और हां ये थोड़ा सा लोक सतलोक करते हैं तो सतलोक जो है इन्हीं के ज्ञान गंगा में आवाज आ रही है मेरी जी जी आ रही है आवाज आ रही है हा तो सतलोक जो बोलते हैं ज्ञान गंगा में ही कि सबसे पहले जो लोग था वो अनामी लोग था उसके नीचे जो है बाद में बनाया बना जो लोग तो अगम लोग उसके नीचे अलख लोग और सतलोक चौथा लोग बनाया ठीक है और ज जो लोग बाद में बना है व पहले नहीं था तो सनातन कैसे हो सनातन लोग नहीं जो लोग बाद में बना के कबीर सागर से और जो भी है जन गंगा से है तो जो लोग बाद
01:29:14:01 में बना है व सनातन कहा देख बाद में बना सनातन भी नहीं सनातन था है और रहेगा जी जी तो ये स और में जाए थे सतलोक के पैगंबर है वो तीन लोग ऊपर अभी य लोग नहीं पहुंच पाएंगे इ के कबीर सागर के अनुसार ठीक है और य नाशवान लोग है और देखिए एक कहते हैं यजुर्वेद
01:29:52:03 [संगीत] तो सत क्या है सत क्या है सत सत्य जो माना जाता है हा तो सत क्या है सत विष्णु भगवान का गुण है और ब्रह्मा जी का और तम शंकर जी का ठीक है तो सत भक्ति सत किसको य क्या सूचित कर सत गुण है जो सूचित करता है इनको विष्णु भगवान तो विष्णु सा है तो मतलब विष्णु मतलब परमात्मा विषणु को परमात्मा सिद्ध कर रहा है जी बिल्कुल बिल्कुल वो ऐसा है नाय सारी बातें हमारी उसमें आ सकती है दीपक जी आपकी आवाज नहीं आ रही आप य कबी सागर आप
01:30:45:20 देख आवाज नहीं आ रही है गड़बड़ हो रहा बीच में चलिए वो आ गए थोड़ी सी अपनी चर्चा हम लोग जारी करते हैं मैं ये कह रहा हूं भाई साहब आपको अपनी बात को सही सिद्ध करना है क्या या आपको अपनी बात को सही सिद्ध करने के लिए मुझे गलत सिद्ध करना आवश्यक है यदि आप गलत सिद्ध हो जाएंगे तो स्वाभाविक बात है कि हम ऑटोमेटिक सही सिद्ध हो जाएंगे क्योंकि आपका उद्देश्य था कि संत रामपाल जी महाराज गलत है साब किसी के गलत सिद्ध होने से किसी का सही सिद्ध होना सिद्ध होता है कहां लिखा है कहां का सिद्धांत है व आपस में लड़ रहा हो आपके पास आपके पास अपना ज्ञान है कि नहीं सिवाय दूसरे का न गलत करने के अपना ज्ञान है आप भी तो वही कर रहे है ना अरे भाई तत्व ज्ञान ये है क्या कि दूसरा गलत कैसे है बस तत्व ज्ञान ये नहीं है किय सही कैसे
01:31:46:06 है तो क्या है तत्व ज्ञान तो मैं आपसे पूछ रहा हूं कि क्या आप जिस ईश्वर को जो आप कह रहे थे सद ग्रंथ का वो ग्रंथ जो सर्वशक्तिमान ईश्वर की बात करे ठीक है अब आपने सर्वज्ञ का अर्थ बताया जो सब कुछ जानता है जिससे कुछ भी जानना शेष नहीं है आपने सर्वव्यापी का मतलब ये बताया जो शक्ति के रूप में सर्वत्र व्याप्त है जहां जिसका की कहीं भी ना होना शेष नहीं है है ना तो फिर सर्वशक्तिमान का अर्थ आपने भी बताया कि जो सब कुछ कर सकता है ऐसा कुछ नहीं जो वो नहीं कर सकता है तो अब मैं आपसे पूछ रहा हूं क्या वो माता के गर्भ से जन्म ले सकता है बिल्कुल ले सकता है जब सर सतिमान है तोव कुछ भी कर सकता है ले भी सकते हैं नहीं भी ले सकते उसका मर्जी ये आपके उसम कहां लिखा है कि ले सकता
01:32:39:16 है रामपाल ने माना आपने पूछा कि वो ले सकता है या नहीं ले सकता तो हमने कहा स इसका प्रमाण दिखाना पड़ेगा ना जब आपके रामपाल ने कहीं पर ये कहा हो क्योंकि हमें यह पता है कि वो एक कहता है कि माता के गर्भ से जन्म नहीं लेता ईश्वर नहीं ले सकता वो दिखाने के लिए फिर विषत होगा कि नहीं होगा विषयात कैसे होगा ू बोल रहे अपने गुरु अपने गुरु के विरोध में जा रहे हो तुम अपने को जिताने के लिए अपने कोरे गुरु ही गु तुम अपने गु के विरोध में जा रहे हो नहीं गलत आप हर बात को अपने बिना कुछ बात के विरोध कैसे चले गए आपने हमसे पूछा
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01:33:19:26 वो ईश्वर स शक्तिमान है आप हमारी बात सु हमारी बात सुनि आपने प्रश्न किया की ईश्वर सर्वशक्तिमान है तो मां के गर्भ में आ सकते हैं कि नहीं मैंने कहा कि व समान व आ
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01:33:38:06 भी सकते हैं नहीं भी आ सकते हैं अब आप बोल ास जी का तत्व ज्ञान है या आपका अपना है आपने यह नहीं पूछा वो आप परमात्मा मां के गर्भ में है कि नहीं आपने कहा कि आ सकते हैं कि नहीं सकते ये आपने प्रश्न किया है आ सकते हैं और आते हैं दोनों में अंतर है तो मैं आपसे वही पूछ रहा हूं व आ सकते हैं कि नहीं आ सकते आ सकते हैं क आपने कहीं पर माना है आपके जो गुरु है उन्होंने आ सकते हैं आ सकते हैं लेकिन आते नहीं है आते नहीं है तो मैं पूछ रहा आते नहीं है तो मैं पूछ ही नहीं रहा हूं आ सकते हैं कि नहीं आ सकते हैं तो ये कहीं पर मेंशन है कि वो गर्भ से भी जन्म ले सकता है जी बोलिए दीपक श हा कबीर सागर में लिखा है कि जिन साहेब संसार किया सो कित जन्म नार ठीक है जिसने संसार को किया कबीर सागर में लिखा और फिर ज्ञान गंगा में भी है वो उस टॉपिक को उसम रखे हैं तो कभी जो है नारी के गर्भ से गर्भ में नहीं आता नहीं जन्मता
01:34:53:10 है वो कोई ये कहते हैं आ सकता है तो भाई देखिए जब सर्व क्या दिक्कत है एक मैं देखिए आप मेरी बात को समझ ले कि जैसे कि आपका कहना है कि क्योंकि उसने कहा है वो आता नहीं है इसलिए वो नहीं आएगा तो फिर बात ये हो जाती है कि वो अपने कहे हुए से मुकर सकता है कि नहीं [संगीत] चलो बोलो यह तो आपके म मन की भावना है अपने मन प्रश्न किया है क्या अपने कहे हुए से मुकर सकता है कि
01:35:36:18 नहीं परमात्मा कुछ भी कर सकते हैं मां के घर में आ भी सकते जब परमात्मा शास्त्र में लिखा है परमात्मा सबके हृदय में विराजमान है तो एक आ आपसे पूछ रहा हूं क्या वो अपनी बात से मुक सकते हैं कि नहीं देखिए बार बार विषयात करने को आपने प्र नहीं है हम आपकी बात जो आप बात बोल रहे आपके गुरु के विरोध में है नहीं हमा गुरु रहे आप पक्ष किसके ले रहे जब आपका गुरु कह रहा है कि परमात्मा जो है वो उससे नहीं आता यह बात परमात्मा ने कही है अब मैं कह रहा हूं परमात्मा अपनी कही हुई बात से मुक सकते हैं कि नहीं नहीं नहीं तो यानी कि कुछ ऐसा है दुनिया में जो वो नहीं कर सकते नहीं ऐसा क कहा हमने अरे तुमने कहा ना नहीं मु कर सकते तुमने कहा ना नहीं मुक सकते तुमने कहा नहीं सकते तुमने कहा ना नहीं मुक सकते मैं पूछ रहा हूं तुमने कहा ना नहीं सकते मैं पूछ रहा हूं तुमने कहा ना नहीं मुक सकते अभी कहा कि नहीं पहला प्रश्न आपने किया देखिए भाई साहब आप जो है आप अगर पॉइंट प रहिए प्लीज बहुत देर हो गई मेरा गला बैठ चुका है मैं
01:36:51:19 आपसे पूछ रहा हूं वो मुक सकते हैं कि नहीं मुक सकते कि नहीं दोबारा बता दीजिए मुक सकते हैं कि नहीं दोबारा बता दीजिए नहीं नहीं तो यानी कि दुनिया में कुछ काम ऐसा है जो वो नहीं कर सकते इससे कैसे य स हो गया कि वो नहीं कुछ कर सकते देख देख रहे हो वो अपनी कही हुई बात से मुक सकते हैं कि नहीं इससे यह सिद्ध नहीं हो परमात्मा अपने कही हु बात से मुक सकते हैं कि नहीं हो सकते यह तो आपके मन के फालतू का उपज है तत्व ज्ञान लेने बैठा हूं आप मुझे बताइए परमात्मा को आप कह रहे हैं सर्व शक्तिमान आपने कहा सर्व का मतलब जो कोई भी कार्य ऐसा ना हो जो नहीं कर सकता अब मैं पूछ रहा हूं क्या वो अपनी कही हुई बात से मुक सकता है कि नहीं आप कह रहे हो नहीं मुक सकता तोव सर्व शक्तिमान नहीं हुआ ना सर्व सर्व का मतलब सर्व मत कहो उसे सर्वशक्तिमान
01:38:01:07 मैं दूसरा मैं दूसरे तरीके से इस बात को क्लियर कर लेता हूं कबीर दास जी जिस रूप में वहां पर बैठे हैं उसी रूप में यहां पर आते हैं थोड़ा सा अपने अपने रूप को व उसका तेज कम करके ये अलग प्रश्न हो गया ये प्रश्न अगर रिलेट नहीं करेगा मैं पूरा यहां पर मैं नमन करने लगूंगा रामपाल जी को आप मुझे केवल इसका जवाब दीजिए कि वो वहां से जब आते हैं तो आते हैं तो वह अपने तेज को कम करके आते हैं कि नहीं वही बॉडी लेकर आते हैं कि
01:38:37:24 नहीं जी आते जी अच्छा तो जब वो आते हैं तो पहली बात तो एक ये हो गई कि जब वो आते हैं अपने शरीर के साथ यहां पर उसके प्रकाश को कम करके तो क्या वह अपने शरीर को बदल सकते हैं यहां आने के बाद वो सते वो पहाड़ बन सकते हैं कुछ भी कर सकते हैं कुछ भी कर सकते हैं तो जब वो पहाड़ होते हैं और वह दाढ़ी वाले बाबा जी भी होते हैं है ना यानी कि जो उनका जो य रूप है यह नित्य रूप नहीं है उनका यानी तत्व से वो कुछ और है
01:39:28:25 जिस रूप को वो बदल पा रहे हैं वो नित्य नहीं हुआ ना शाश्वत नहीं हुआ ना यानी कि तत्व से उनका रूप कुछ और है चलिए आपने कहा कि ईश्वर सर्वव्यापक है ठीक है तो मैंने आपसे कहा था
01:40:01:07 कि क्या कहते हैं कि जब बीमारी हो जाए और तब जो है विधि युक्त मांस खाने वाला जो होता है वो विधि युक्त मांस ना खाने वाला होता है तो वो नर्क में जाता है ऐसा मनुस्मृति में कहा गया है आपने वहां पर खट से कहा था आपने वहां पर खट से कहा था कि वहां पर बीमारी की बात नहीं हुई है कहा था ना जी कहा ना हा अब आपने एक बात कही है कि सर्वव्यापक का मतलब है जो शक्ति के रूप में सब जगह व्याप्त हो तो ये शक्ति की बात कहां हो रही है जब ईश्वर को सर्वव्यापक कहा जा रहा है तो वहा शक्ति क्यों घड़ रहे
01:40:45:27 हो देखिए ईश्वर की बात हो रहा है और ईश्वर हम पहले ही बता दिए कि ग्रंथ में ईश्वर के बारे में लिखा हुआ है जो ईश्वर को प्राप्त कराता हो ऐसे सद ग्रंथों में लिखा हुआ है इसलिए स जो आप आपने ईश्वर की परिभाषा जो बताई है उसमें आपने तीन चीजें बोली है अनंत सामर्थ्य वान सर्वव्यापक सर्वशक्तिमान सर्वज्ञ अब मैं इसी पर बात कर रहा हूं कि आपने जब सर्वव्यापक को तोड़ा तो आपने कहा जो शक्ति के रूप में सब जगह व्याप्त हो जबक वहां सर्वव्यापक है शक्ति के रूप में सर्वव्यापक नहीं है सर्वव्यापक है जो जो स्वयं सर्वव्यापक है कहां सर्वव्यापक है कहां पर स क्या मानते आपका ईश्वर सर्वव्यापक नहीं है हम नहीं बल्कि वेदों में क्या लिखा है उसको देखिए फिर भाई साहब हम लोग हम लोग अभी यह तय कर रहे हैं कि कौन सा ग्रंथ मानना है और उसके लिए जांच कर रहे हैं कि क्या आपके द्वारा जिन ग्रंथों को मानने का का दावा किया जाता है वो खोखला दावा है या वास्तविक है वो वो वास्तविक है तो वास्तविक है तो
01:42:01:08 आपका कहना है कि जो ग्रंथ परमात्मा परमेश्वर सर्वशक्तिमान सर्वज्ञ की बात करेंगे हम उनको धर्म ग्रंथ या सद ग्रंथ या वो पवित्र ग्रंथ कहते हैं तो अभी मैं आपके ईश्वर की बात जानना चाह रहा हूं क्या आप ईश्वर को कैसा मानते तो आपने बताया कि मैं उसको सर्वव्यापक मानता हूं सर्वशक्तिमान का आपके पास उत्तर नहीं है सर्वशक्तिमान का आपके पास उत्तर नहीं है कैसे उत्तर नहीं है क्यों जब मैंने आपसे पूछा कि भाई अगर वो यहां पर आने के बाद अपने शरीर को बदल रहा है तो फिर उसका वो जो रूप है दाढ़ी वाला व वो नित्य कैसे हुआ तो इसमें आप शांत हो गए क्या उत्तर दिया आपने है वो शरीर को बदले फिर से उसी रूप में आ जाए वो समर्थ वान का मतलब कुछ भी हो स कि कहते कहते सुनिए नित्य किसे कहते क नित्य किसे कहते हैं शाश्वत किसे कहते हैं जिसका विनाश नहीं होता है वही शाश्वत है उसी को नित्य कहते हैं तो उनका जो रूप है जितनी देर वो पहाड़ बने उनका विनाश हुआ ना रूप में परिवर्तन हुआ तत्व में परिवर्तन
01:43:16:16 तो नहीं हुआ ना तो मैं वही तो कह रहा हूं यानी कि उनका वो जो रूप है वो शाश्वत रूप नहीं है वो तत्व से शाश्वत है वो जो रूप है वो शाश्वत नहीं है क्योंकि जितनी जितनी दे सुनि जितनी दे जितनी देर जितनी देर जितनी देर वो पहाड़ बने जितनी देर वो पहाड़ बने उतनी देर उनके वो जो रूप था दाढी वाला उसका विनाश हुआ हमारी बात को सुनिए पहले हा परमात्मा जो जिस आपने कहा कि उ नित नहीं है मेरी बात समझ लीजिए सुनिए या तो परमात्मा ज आता है या सुनिए य रूप में आया है यदि वो जिस रूप में आया है या तो वो शाश्वत रूप नहीं है और या फिर वो परमात्मा सर्वशक्तिमान नहीं दोनों चीज एक साथ नहीं हो सकती अगर व सक्तिमान है अगर वो सर्वशक्तिमान है तो अपने रूप को बदल सकता है रू बदल सकता है तो उसका व रूप शाश्वत नहीं है आपने एक बात कही आपने एक बात कही किमा क ई बात से मुक सकता है बो बोलना तो हमको था हमने आपको स्पष्ट करना था बोलिए बोलिए
01:44:33:00 जिस समय व रूप को परिवर्तन करता है तो उसमें केवल रूप में परिवर्तन होता है त में परिवर्तन होता है हमने आपको मैंने
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01:44:42:22 यही तोहा या की तव कुछ और है रूप उसका फाइनल रूप नहीं है मैंने ही की बात कर रहा तुम क्यों आ रहे मैं भी य कहाने साब भाई साब भी यही मिनट मिही बात रहे भाई साब मैं वही बात क रहा नहीं बदलता है मगर जो उसका रूप होता है व बदलता है
01:45:17:24 या
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01:45:18:24 परम परमेश्वर है वो फाइनल रूप नहीं है भगवान का जि सम पहाड़ के रूप में आपने कहा पहा ट मेरा आवाज नहीं जा रहा है आप तब तक बोलिए दीपक जी और जो गणेश दास पा मिनट हा मैं य बोल रहा हूं कबीर जी को जो कहते है कमल हुए थे ऐसा नहीं है ठीक है आप यहां पर कबीर [प्रशंसा]
01:46:06:02 कबीर कहा पर [प्रशंसा] है आपको पूरा मिलेगा में यह रामानंद रहे जब स्वामी वत निन अंतरजमी तिनके ंग विधवा नारी सेवा बड़ो श्रम धारी प्रभु ध्यान लगाई विधवा तिनके ई प्रभु कियो बंदन बिन दोष प्रभु क पुत्रवती भर घोसा स अपने नाम बखाना यह विपरीत दियो वरदाना स्वामी क निकस मुख आयो पुत्रवती हरि तोही बनायो पुत्र कलंक न लागत है हरि अनुरागी त कर फुलका पर आयो कछ में ताते सुत आयो ठीक है य आप कबीर कबीर जी का मिल जाएगा कबीर जी जो है विधवा से ही उत्पन्न हुए हैं ठीक है और वो जो अपना मन गंत बनाकर करते हैं कबीर मूल बीजक आप खरीद लीजिए उसम जन्म साखी पढ़िए उनका पूरा लिखा हुआ है कबीर जी कैसे पैदा हुए प्रकट हुए ठीक है और फिर कबीर जी जन्मते और मरते हैं आपको मैं दिखा
01:47:19:10 दू देखिए पर है कबीर बज कबीर ज्ञान विजक शब्द 108 साखी एक आप जाकर के चेक कर लीजिएगा पूर्व जन्म अब हम बहली बहुरी जलना पूर्व जन्म तब का मद कीना मतलब कबीर जी को आपकी बात समझ सुनिए ऐसा है यह जहां पर भी इनके विरोध में कोई बात होगी ना तो उसमें कहेंगे यह सद ग्रंथ नहीं है यह काल ने बोला है यह मिलावट हो गई है इसीलिए तो मैं बेसिक्स क्लियर कर रहा हूं बेसिक इसीलिए मैं क्लियर कर रहा हूं इनके विरोध में बहुत सारी बातें हैं शास्त्रों में मगर जहां पर भी विरोध आएगा तोय कह देंगे काल ने बोला है यह मिलावट है ऋषियों का अपना मत है समझ रहे तो फिर मैं इनको चैलेंज कर रहा हूं कि जब आप यह मानते हैं कि शास्त्रों में कुछ गड़बड़ भी है तो आप उन्ह सद ग्रंथ क्यों कह रहे हो जो और वो भी तब जब जिसम बिल्कुल गड़बड़ नहीं है उसको भी सद ग्रंथ कह रहे हो तोय ढोंग हुआ ना आपके लिए सद ग्रंथ की केवल सच बोलने वाला ग्रंथ सद ग्रंथ है परिभाषा है उसके बाद जो सच भी बोलता है झूठ भी बोलता है उसकी परिभाषा भी उसको भी आप सद ग्रंथ कहते हैं और असद ग्रंथ की परिभाषा तो है ही अच्छा
01:48:34:19 एक बार कहते हैं हा हां एक बात और य कहते हैं लोग कि कबीर या कवि दोनों एक ही है तो ठीक है जो क कवि है वही कबीर है कवि कवि है 10 की 37 में ये जो भाई साहब आज आए हैं ये बढ़िया मतलब इनसे बहुत सारी हम लोग आज ही केवल बात नहीं करेंगे ये बात चलती रहेगी हो सकता है दो महीने तक चलती रहे थोड़े थोड़े टुकड़ों में दो दो घंटे बात कर लिया करेंगे हफ्ते में एक बार दो बार मगर यदि ये कोऑपरेट करें तो है ना जैसे अभी बिना बताए चले गए थे उसका कारण क्या था मुझे नहीं पता तो अब हम गणेश दास जी के पास वापस आते हैं गणेश दास जी एक तो बात यह है कि यदि ईश्वर अपना जो रूप बदल रहा है तो इसका मतलब तत्व से उसका वास्तविक रूप जो बदलता ना हो शाश्वत रूप वो कुछ और है फिर हम यह चैलेंज नहीं कर सकते कि नहीं यही रूप है उसका वास्तविक क्योंकि वो रूप तो बदल रहा है है ना दूसरी बात यह है कि हमने यह कहा कि ईश्वर अपनी कही हुई बातों से मुकर सकता है झूठ बोल सकता है आपने मान लिया वैसे मैं आपको एक बात बताऊं कि ये कुछ बातों में आप अपने गुरु के विरोध में चले जाते हैं कहीं कहीं पर हो सकता है आपने उनका सारा कुछ नहीं समझा
01:49:49:24 हो मगर जैसे आपने ये मान लिया कि वो अपने माता के गर्म में आ सकता है तो माता के गर्म में आ सकने वाली बात आपके गुरुदेव ने कहीं पर भी स्वीकार नहीं की है आ सकने वाली बात इसलिए मैंने आपसे प्रमाण पूछा था मगर अभी आपने मान लि आ सकता है अभी आपने मान लिया आ सकता है तो फिर उसके बाद जब हमने यह कहा उसके बाद हमने यह कहा कि क्या वह अपनी कही हुई बात से मुकर सकता है तो आपने कहा कि हा मुकर सकता है ठीक है ठीक है मुक सकता है कि नहीं दोबारा बता द हमको थोड़ा बोलने दीजिए बोलिए हमारे गुरु जी ने कहा है कि परमात्मा मां के गर्भ में नहीं आते और आपने प्रश्न किया कि वो मां के गर्भ में आ सकते हैं कि नहीं तो हमने कहा अभी मेरा प्रश्न अभी मेरा प्रश्न य है भाई साहब की क्या वो अपनी कही हुई बात से मुक सकते हैं जैसे आपने कहा कि वो नहीं आते नहीं आते यानी की यानी कि कोई प्रमाण है आपके पास जिसके कारण आप ऐसा कह रहे हैं और वो प्रमाण जाहिर सी बात है वो प्रमाण जाहिर सी बात है वो ईश्वर की वाणी है ठीक है तो अब मैं आपसे पूछ रहा हूं कि क्या वो अपनी कही हुई बात से मुकर सकते हैं कि नहीं ये तो उनका
01:51:05:00 मर्जी है वो क्या करेंगे नहीं करेंगे मैं आपसे पूछ रहा हूं भाई साहब ये हम फैसला तो नहीं कर सकते हैं कि ईश्वर क्या कर सकते हैं मुक सकते हैं कि नहीं मुक उसका मर्जी आपने कहा ईश्वर सर्वशक्तिमान है तो सर्व सर्व में बाधा लग जाएगी अगर आप ये नहीं कहेंगे कि हां वो ये भी कर सकता है हां मैंने कहा है कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है सर्वज्ञ है परंतु मैं नहीं हूं जो हम ईश्वर के बारे में बता सकते हैं कि वो ऐसा यानी आप अभी तत्व ज्ञानी की शरण में नहीं गए हा बिल्कुल गए है हा तो बताइए ईश्वर अपनी बात से मुक सकता है कि नहीं मैंने तो कहा उसका मर्जी व कुछ भी कर सकते हैं मैंने कहा सकता है कि नहीं
01:51:56:15 बिल्कुल नहीं मुक सकते बोलो क्या बोला क्या बोला परमात्मा सन है कुछ भी कर सकते हैं मैंने यही मैंने कहा आप इसको क्लियर कर दीजिए
⬜ Not used yet · 01:52:11:26 – 02:32:35:00 (40:23)
01:52:11:26 कि वह अपनी कही हुई बात से मुकर सकते हैं कि नहीं आप पाखंडी है कि नहीं आप जा सकते हैं कि नहीं [हंसी] आ जा भाई लोग आप लोग आ जाइए शेर का बच्चा एक नंबर एक नंबर आप जा सकते हैं या नहीं बो हर जग र सकते है पेट में नहीं रह सकता वहा से त है वो
01:52:54:15 कैसे लते हो भई आप ऐसा है मेरे अच्छी अच्छी ज्ञान चर्चा अच्छा ज्ञान चर्चा हो रहा था मैं सोचा कि बीच में आकर थोड़ा सा मैं इंटरफेयर करू और थोड़ा सा मतलब संभाव होकर आप लोगों का डिस्कशन कराऊ क्योंकि आप क्षमा करिएगा मतलब एक ही बात को बारबार रिपीट करने से थोड़ा सा फ्रस्ट्रेशन होता है आदमी के अंदर में तो मैं तो बस कहना चाह कि इनको आराम से आराम से इनको छी जैसे कि जो होता है ना जो छ होता है सही क रहे बात तो आप सही कह रहे हैं उसम होता क्या है हार हाइपर होने फ नहीं कट्टी मुर्गी का दर्द कट्टी मुर्गी जानती समझ मैं समझता हूं इन सब चीजों को बट ये एक्सेप्ट नहीं करते ना इन सब चीजों को तो मैं यही सोच रहा था कि यहां आकर और बीच में थोड़ा सा संभाव होके और आप दोनों का डिस्कशन कराऊ क्योंकि थोड़ा सा बंदा जेनन लग रहा था मेरे को मतलब सो है हम लोग हार या जीत प नहीं जो बात हमने कर ली काफी देर तक उसके बाद जनता डिसाइड करेगी हमले चटर चलते वही ये सब चीज आराम से करेंगे लगेगा और जनता को जानने को नलेज मिलेगा जन
01:54:09:18 बढेगा जनता को तो उनके अंदर डर पैदा होता है जहा तक मेरे को य ऐसा फील हुआ है वो जो बोलना चाह रहे व बोल भी नहीं पाते नहीं नहीं बात य है उनका जो जिसम चोरी है जिस सिद्धांत में चोरी है बारबार क्या करते हैं क्लियर बोलने की बजाय घुमा फिरा के बात बोलते जिससे मैं उस बात को आधार बना के आगे ना बढ़ पाऊ जैसे मैं बारबार पूछ रहा हूं कि क्या वह अपनी बात से मुकर सकता है कि नहीं यह बहुत आवश्यक क्वेश्चन है क्योंकि हम जो सनातनी है ना हम उन शास्त्रों को मानते हैं जिसे ईश्वर ने भी नहीं रचा जैसे ही यह बात य बोलेंगे कि ईश्वर अपनी बात से मुकर सकता है तो इनके यहां तो कुछ है नहीं अपोर वाला मामला तो इनकी कबीर वाणी पीर वाणी सब नष्ट हो जाएगी तुरंत बकुल सही कह रहे हैं उसको यस और नो में रिप्लाई करना था बट ये सब उन सब चीजों को नहीं समझ पाते तक का मतलब ही नहीं पता इनको मैं आपको सही बताऊं सु जी इनको शास्त्रार्थ डिबेट और तर्क क्या होता है इसका मतलब नहीं है इनको बस बता दिया गया है कि ये ये चीजें है आपको प्रमाण मिल गई है अब इसी पर आप माथा रगड़ रहो उसमें कोई दिक्कत नहीं है अब कोई
01:55:26:15 उन भी आना चाहता हूं त वो जो प्रमाणों की बात करते हैं मैं उन मैं पहले एक बेस क्लियर करता जा रहा हूं कि जो व्यक्ति आगे तक इन चर्चाओं को देखे वो शुरू में जान ले कि इनके द्वारा जो शास्त्रों को तो वहा पर जो है मैंने उनसे पूछा था कि काल का पहचान क्या है ठीक है तो उसने एक जो है दिया की सहस्त्र अच्छा काम करते हैं अब हम उनको एक बार ले लेते हैं और हम लोग पूछते हैं और वत्सल जी और दीपक जी आप लोग अब थोड़ा सा ऑफ मतलब हो जाइए रिमूव तो हम उनको ले लेते
01:56:09:12 हैं मगर फिलहाल तो ये उस पर आ गए थे अर यादा प आप पाखंडी है कि नहीं नहीं कोई बात नहीं वो भी फ्रस्ट्रेट हो रहे हैं एक ही सवाल सुन सुन के ना सुनन वो भी फ्रस्ट्रेट हो जाते हैं गणेश जी जी गणेश जी एक मिनट मेरी बात सुनिए एक मिनट मेरी बात सुनिए आप बहुत सज्जन व्यक्ति लग रहे हैं मेरे को मैं आपको सुन भी रहा हूं बैकअप से देखिए जो शास्त्रार्थ होता है चाहे डिबेट होताहे तर्क होता है ना वो सद्भाव पूर्ण किया जाता है ठीक है कोई भी सवाल जब आपसे पूछा जा रहा है तो अगर वो नहीं आ रहा है आपको तो उसको घुमाइए मत प्लीज यस और नो में जवाब देकर आगे बढ़ है ऐसी बात नहीं है कि शिवांश जी आपको उसका रिप्लाई नहीं करेंगे या रिप्लाई देना नहीं चाहते लेकिन उस बात को जो पॉइंट है जो सवाल रखा गया है उसको क्लियर कर दीजिए क्लियर करने के बाद जब आपको नहीं आ रहा है तो आप उसे पूछिए कि इसमें आपका मत क्या है आप क्या समझते हैं तो आपको रिप्लाई मिलेगा ना आप लोग क्या करते हैं कि जो सवाल पूछा जाता है उसको सीधा सधा रिप्लाई ना देकर उसको घुमाने लगते हैं खिचड़ी पकाने लग जाते हैं तो खिचड़ी ना पकाए प्लीज जो भी सवाल आपके उनसे उनके द्वारा किया जा रहा है अगर वो आपको आ रहा है तो आप उसको दीजिए इधर उधर की बातें ना करिए और नहीं भी आ रहा है तो उसको आप वहीं पे स्टॉप कर दीजिए
01:57:24:13 कि नहीं यह मेरे को नहीं पता चाहे मेरे को इतना नॉलेज नहीं है आप आगे बढ़ी आपका इस क्या मत है तो आपको वो मत जान जानने को मिलेगा शिवांश जी देंगे चाहे अन्य कोई भी ब्रेक देगा जिससे भी आप चर्चा कर रहे हैं तर्क का मतलब यही होता है कि आप कोई बात रख रहे हो और वह बात समझ में नहीं आ रहा है तो उसी को आपने अपना तर्क दिया कि इसका मतलब यह क्या हुआ तो उसको आप घुमाइए मत प्लीज मैं आपको इसीलिए आप दोनों का चर्चा कंटिन्यू करने के लिए मैं थोड़ा सा आया था इसमें कि वो अच्छा लग रहा था मेरे को सद्भाव पूर्ण आप बात भी कर रहे हैं तो आप इसको कंटीन्यूअसली आगे बढ़ाइए लोगों को जानने को भी मिलेगा कि आपका पक्ष क्या है शिवान जी का पक्ष क्या है चाहे अन्य जो धर्मशास्त्र है हमारे उनके क्या मत है आप तो प्लीज आप सद्भाव पूर्वक चर्चा करिए शिवान जी से नहीं आ रहा अभी उनका क्वेश्चन है कि क्या वह अपनी बातों से मुकर सकता है कि नहीं यस और नो में रिप्लाई करना है आपको हां मुक सकता है नहीं मुक सकता है तो नहीं मुकर सकता है तो क्यों नहीं मुकर सकता है मुकर सकता है तो इसका रीजन क्या है यही तो करना है ना आपको अब ये आप आप पाखंड पाखंडी है कि नहीं आप यह है कि नहीं वो है कि नहीं इससे कोई मतलब नहीं नहीं निकल पाता चाहे इसका कोई रिजल्ट नहीं निकलेगा आपको चाहे आप कितने दिन भी आप चर्चा करते रहिए ज्ञानवर्धक बातें करते रहिए उसका कुछ रिजल्ट निकलना चाहिए तो इसीलिए मैं आपसे चाह
01:58:39:13 रहा हूं कि जो क्वे जी बताइए बोलिए कहा बहुत अच्छा विचार लगा आपका लेकिन शायद आप हो सकता है कि देर से आए होंगे इसलिए चर्चा को नहीं सुन पाए थे शुरू में शुरू से सुन रहा हूं गनेश जी मैं शुरू से सुन रहा हूं जब से लाइव स्टार्ट हुआ है तभी से सुन रहे अभी जब जब आपके उसके सद ग्रंथ के बारे में जब टॉपिक चल रहा था ना कि सद ग्रंथ किसको बोलते हैं किसको नहीं बोलते हैं चाहे असद ग्रंथ जिसको बोलते हैं वहां पर भी आप आपके साइड से कोई इनपुट निकल के नहीं आया यह बारबार ये जो बोलते हैं तोय फेट होते हैं उनको बारबार सवाल को रिपीट करना पड़ता है आपको सवाल समझ में आ जाता है लेकिन फिर भी आप उसका रिप्लाई नहीं करते उसका जवाब नहीं देते अब जाहिर सी बात है कि भाई जिसमें सब कुछ सब कुछ सही बातें लिखी हुई है वो भी सद ग्रंथ है तो भाई जब वो सब सद ग्रंथ है तो जिसमें झूठी बातें लिखी हुई है उसको क्या उसकी क्या परिभाषा है यही तो सवाल था ना आपका तो उसका सवाल देना था चाहे देखो हार हार और जीत की बात नहीं है बात है अपने सिद्धांत की आप अपना सिद्धांत रखिए जैसे शिवान जी कहते कि हम गलत भी साबित हो गए हैं तो उससे आपका सही होना साबित नहीं होता ना वो सिद्धांत ही नहीं है आपके पास में जो
01:59:54:15 अपना मत है उसको आप सही स्थापित करिए सही से आप उसको रिप्लाई करिए ये हमारा मत है इसको आपको मानना है मानना ना मानना वो अलग बात है कोई भी किसी की बात नहीं मानेगा चाहे किसी को जबरदस्ती कपट्टी पर बंदूक रखवा कर कोई तो बात मनवा नहीं रहा है विचारों का तो आदान प्रदान है ना तो आप अपना विचार रखिए अच्छे से रखिए शिवांश जी जो क्वेश्चन कर रहे हैं उसको आप रिप्लाई करिए नहीं आ रहा है उसको आप वहीं पर क्विट करके दूसरे क्वेश्चन पर आगे बढ़ सिंपल सी बात है बहुत बहुत बहुत एक मिनट ग एक मिनट जी मेरे हृदय को बड़ी तसल्ली मिली किसी ने मेरी बता को समझा और इनको समझाया क्योंकि मैं अभी उस हालत में नहीं हूं कि इनको ऐसे समझा पाऊ तो गणेश जी आपकी बात को मैं बुला देता हूं कि आपने पाखंडी इत्यादि कहा छोड़ देते अभी हम लोग मुख्य टॉपिक पर आ जाते हैं गश जी दोबारा से मुझे इस क्षमा चाहते हैं पखी करने का क्योंकि हम इसीलिए कहे क्योंकि आप ईश्वर को असमर्थ बताने लगे अपने म अब जा हीय मतलब नहीं हुआना या आप दोस्त
02:01:09:22 आप समझने की कोशिश करो आप मेरी बात सुनो एक ब हमारे सुन लीजिए जिस समय चर्चा शुरू हुई उन्होने कहा कि आगे जाकर के कुछ सद ग्रंथों से प्रमाणित करेंगे या फिर उ उस ग्रंथ से विचार करेंगे तो इसके पहले हम ये जान लेंगे कि कौन सा ग्रंथ सद ग्रंथ है किको हम ग्रंथ मानेंगे किसको नहीं मानेंगे इस विषय पर चर्चा जब हुआ तो हम शिवान जी से बोले कि आप ही एक बार ऐसा करिए कि दर्शकों को ये बता दीजिए कि सद ग्रंथ का कौन सा होते हैं उसका क्या सिद्धांत है क्या परिभाषा है तो वो तो बताए नहीं इसके बा मैंने नहीं बताया बताया एक मिनट मिनट एक मिनट एक मिनट उन्होने बताया था उन्होंने बताया था ग जी मेरी बात सुनिए उन्होंने बताया था कि भाई जिस ग्रंथ में सक्षर सब सच बात हो जिस पर हमारी आस्था हो जिस पर हम उसको विश्वास रखते हैं वोह हमारे लिए सद ग्रंथ है सिंपल सी बात थी उन्होंने ये नहीं बोला ना उन्होंने घुमाया नहीं आपको उन्होंने सीधा सीधा आपको तुरंत रिप्लाई किया था मैं भी था मैं सुन रहा था कि हमारे लिए वो सारे सारे धर्म ग्रंथ सारे धर्म ग्रंथ सद ग्रंथ है जिनमें सब कुछ सच्ची बात लिखी हुई हो उनके कहने का मतलब यही था हा तो मैंने भी जो स का परिभाषा
02:02:25:04 दिया था उसम यही दिया था कि स ग्रंथ में तो सारी बात सची है जी िक च हो रहा है टॉपिक फिर चेंज हो रहा है व से आ आके नहींन बोल प्ली इनको भी बोलने दीजिए बा रखने हमने एक बात यह कहा था कि सद ग्रंथ में ग्रंथ में दोनों में हालाकि अंतर नहीं है दोनों एक ही चीज है तो उसमें भी कुछ ऐसी बातें है जो कि नियम के विरोध है और ये इसका उदाहरण हमने दिया भी था कि दे इसलिए नहीं बोलने दूगा सुनिए एक मिनट मैं इसलिए नहीं बोलने देता हूं क्योंकि अगर यहां पर य बात जो बोलने जा रहे हैं बोल देंगे अब मुझे अभी व उस चैप्टर को अभी वो विषयात हो जाएगा या तो मैं उस चैप्टर को जो खोल रहे हैं या तो मैं अभी के अभी उसको सही सिद्ध करने में लग जाऊ और अगर नहीं किया तो चला जाएगा भया मनुस्मृति में फलानी जग गलत र है मेंब मनु जब मैं मनुम कोही सुनि पांडे जी जब मैं मनुस्मृति को सही सिद्ध करने के लिए बैठूंगा तब आप मनुस्मृति के सही अथवा गलत
02:03:40:12 होने पर क्वेश्चन उठाइए अभी आप रामपाल को सही सिध होने पर बात हो रही है तो आप उसकी बात बताइए क्या आपको तत्व से ज्ञात है भगवान का जो तात्विक विवेचना है वो रामपाल जी महाराज ने आपको दिया है आप फिर विषय को बदल रहे हैं पांडे जी मुझे काना इसलिए पड़ता है जी जी बोलिए जी मैं बस ये कह रहा हूं कि आप गणेश जी आप आपका टॉपिक जो है वह कहां से स्टार्ट होना क्योंकि ये सारी बातें हो चुकी थी ऑलरेडी मैं सुन रहा था हमारे जो लास्ट क्वेश्चन था कि उन्होंने यह कहा था कि जो सर्वशक्तिमान जो ईश्वर है वो अपनी बातों से मुकर सकते कि नहीं ये मेन क्वेश्चन था जहां से आपने क्यूट किया आपने मतलब पाखंडी बोलकर आप निकल गए तो आप क्या चाहते शुरू से फिर चर्चा हो या फर य से स्ला गया था हमको निकाल दिया गया था हम अपने से कुछ नहीं हुए है आप [प्रशंसा] पूछ बोलोगे तो तुम्हारी आरती उतारे बैठ के आप वैसा कर ही रहेको
02:04:49:10 बो प्रामाणिक करने में लग ग बो बोमा करिए अरे गणेश जी मेरी बात सुनिए आप ठीक है अब ये सब बातें पीछे की जो बातें हो चुकी है उसको आप साइड में रखिए ठीक है लेट्स स्टार्ट आप स्टार्ट करिए अभी फ्रेश से बिल्कुल ही कि आपको क्या कौन सा टॉपिक है जो पुराना वाला टॉपिक जो खत्म हो चुका है वहीं से स्टार्ट करना है या जहां से भी क्यूट किया था कि जो ईश्वर है वह अपनी बातों से मुक सकते हैं कि नहीं वहां से स्टार्ट करना है आपका क्या मत है आप बताइए मुझे फिर वहां से स्टार्ट करते हैं व से स्टार्ट प्लीज यही रिक्वे है वि ना हो जो टॉपिक है उस टॉपिक को पहले फिनिश करिए खत्म करिए फिर आप दूसरे टॉपिक पर जाइए जीय हम लोगों का आखरी जो प्रश्न चल रहा था वो यह था कि ईश्वर अपनी बात से मुकर सकते हैं कि नहीं देखि ईश्वर के गुणों में से एक गुण है व नित है सत्य है इसका मतलब यह हुआ कि उन्होने जो बात कहा दी उस को व सत्य करते हैं उसम मु करते नहीं है इसीलिए ईश्वर अपनी बात से मुक्त नहीं मुकता मैं समझ गया मैं समझ गया ईश्वर का एक गुण है कि वह नित्य है वो सत्य है तो एक गुण ये भी तो है कि वो सर्वशक्तिमान है जी
02:06:05:01 अगर सर्वशक्तिमान है और सर्व का अर्थ होता है सब कुछ आपने बोला जिसके बाहर कुछ भी ना हो ठीक है तो फिर ये दोनों गुण साथ में नहीं हो सकते अगर आप जो है सत्य का मतलब यह मानते हैं कि वो जो है अपनी बात से मुकर नहीं सकता है जी सत्य का मतलब ये मानते हैं तो फिर ये जो सर्वशक्तिमान है वो साथ में नहीं हो सकता आपको बोलना पड़ेगा हमारा ईश्वर सत्य तो है पर वो सर्वशक्तिमान नहीं है नहीं ऐसा नहीं हो सकता है हां कैसा हो सकता है
02:06:38:26 बताइए मुकने का गुण ये मनुष्य में होता है ईश्वर में नहीं होता है इसलिए वो आपने माना यही बोल रहा हूं गणेश जी मैं यही बोल रहा हूं दोहरी बातें नहीं चलेगी ना आप आप लोग समझने की कोशिश नहीं करते यार इसमें छोटा बड़ा होने की कोई बात ही नहीं है यर मैं आपको यही समझाने की कोशिश कर रहा हूं अभी आपने बोला कि उनका उनका जो स्वभाव है वो कुछ भी कर सकते हैं व मुकर भी सकते हैं और फिर आप थोड़ा सा घुमा के फिर आप यही बोल रहे कि नहीं वो मुक भी नहीं सकते ऐसा मत कर प्
02:07:22:20 एक बात करिए एक बात एक बात स्टैंड रखिए अपना एक बात प स्टंड रए बस बिल्कुल नहीं नहीं नहीं सकते आगे ब यानी यानी की वो सर्व शक्तिमान नहीं है शक्तिमान तो है सर्व सर्व शक्तिमान नहीं है इसका निर्णय पहले ही हो गया है कि वो सर्वशक्तिमान है बदल सकते अपने बात को बदल सकते है कि नहीं इसका उत्तर है कि आपको क्लियर कर दू मैं आपको क्लियर कर दूं आपने सर्वशक्तिमान का अर्थ बताया था जो सब कुछ कर सकता है मगर आप ये कह रहे कि व अपनी बात से मुक नहीं सकता जी तो क्या आप इस बात से सहमत है कि मेरी परिभाषा के अनुसार मेरा जो ईश्वर है वह सर्वशक्तिमान सिद्ध हो रहा
02:08:16:09 है क्या ईश्वर सब कुछ कर रहा है आपका कर पा रहा है आपने कहा ईश्वर व है जो सब कुछ कर सकता है क्या आपका ईश्वर सब कुछ कर स कर सकता है कर पा रहा है बसे तो आप ही तो कह रहे कि व अपनी बात से मुकर नहीं सकता मुकरे मुक जाता बाने दूसरी बा है उसके मुकने से क्या क्या होगा दूसरी बात है मुक सता है अगर वो मुक जाता तो सक्तिमान भांग हो जाता है शमान नहीं हो सकता है क्योंकि जिस बात को उन्होने पहले क दिया है उसका वो बात गलत स हो जाता है जिससे व सर्वशक्तिमान नहीं होगा व सत्य नहीं होगा उस ईश्वर का गुण है व गुण नष्ट हो जाएगा इसलिए व ऐसा नहीं कर सकते भाई साहब सर्व शक्तिमान का आप बदल रहे सर्वशक्तिमान अगर वो अपनी बातों से मुकर नहीं सकता तो व सर्वशक्तिमान कैसे हो गया क्वेश्चन य है ना आपका अगरी बात सु लीजिए उनका कहने का मतलब यह है कि अगर ईश्वर अपनी बातों से मुकर भी नहीं सकता तो वो कैसे सर्वशक्तिमान हो गया ये क्वेश्चन है आपका और इसको क्लियर
02:09:31:09 कर दूं और इसको मैं क्लियर कर दूं आपने ये कहा था कि जो सब कुछ करने में सामर्थ्य रखता है ठीक है अब आप ये कह रहे हैं कि वो अपनी बातों से मुकर नहीं सकता ठीक है ठीक है तो इसका मतलब दुनिया में कुछ कार्य ऐसे हैं जो वो नहीं कर सकता नहीं ऐसा नहीं कर सकते हैं हर कुछ कर सकते है तो वो अपनी बात से मुक सकते हैं क्या अपनी बात से नहीं मुक स जी मेरी बात सुनिए मेरी बात सुनि मेरे मेरी बात सुन लीजिए गणेश जी यही यही डिले होता है यह चर्चा इतना अभी दो दो घंटा 12 मिनट हो गया कोई परिणाम नहीं निकला कोई परिणाम नहीं निकला ऐसा प्रश्न ही कर रहे जिससे निकलेगा कुछ होने टॉप आए थे वो हो ही नहीं रहा है फालतू का प्रश्न कर रहा है क्या होगा नहीं वो आपके लिए फालतू है गणेश जी वो आपके लिए फालतू लग रहा है ना बेसिक पहले क्लियर तो करिए बेसिक के बाद ही तो आगे बढ़ेंगे ना कि आपका मत के सिद्धांत के हिसाब से ये क्वेश्चन जो चाहे जो ज्ञान गंगा आपकी जो पुस्तकें हैं उसके ऊपर डिस्कशन होगा ना चाहे हमारे धर्म ग्रंथों के ऊपर डिस्कशन
02:10:46:13 होगा ना आपका बेसिक मत क्या है वो जानने की इच्छा हो रही है जब तक वो क्लियर नहीं होगा तब तक व आगे नहीं बढ़ सकता ना आदमी और उसी उसी को क्लियर करने के लिए आपके द्वारा ये सब क्वेश्चन हो रहा है और क्वेश्चन पर आप इतना जब घुमाएंगे ना तो ऐसे ही डिले होता जाएगा आपको नहीं आ रहा है आप यही क्यूट कर लीजिए कि सर ठीक है मेरे को नहीं समझ में आ रहा आप आगे बढ़ तब जाकर अगला क्वेश्चन होगा आपके पास में जब नहीं आ रहा है तो हम भी तो हम भी बहुत बड़ा सर्व ज्ञानी थोड़ी है अभी इन्होने एक बगा करेगा आएगा तो ठीक है नहीं आएगा तो भाई तू बता दे भाई तू ही बता दे तेरा क्या मत है हम तो वही कर देंगे हम उसम से दही में से मथा नहीं करने लग जाए ना खिचड़ी नहीं बचाएंगे हमें पता है तो ठीक है नहीं पता है तो फिर मेरे को नहीं पता आप बताओ जी यही तो बात है ना गणेश जी आगे बढ़ नहीं आ रहा है तो आगे बढ़ आ ऐसा है गणेश जी ऐसा है अभी थोड़ी देर पहले आपने बोला भी था यह भाव प्रकट किया था कि हम नहीं बता सकते हमें नहीं पता यह भाव आपने प्रकट किया था मगर फिर मैंने आपको एक क्वेश्चन कर लिया कि आप क्या तत्व ज्ञानी की शरण में नहीं है तो आपका ईगो हर्ट हो गया ये बात है अच्छा
02:12:01:20 सुनिए ईश्वर की सर्वशक्ति मत्ता को हम लोग और भी तरीके से जांच सकते हैं जैसे कि आपने कहा सर्वशक्तिमान आपने कहा ईश्वर अपनी शक्ति के रूप में सर्वव्यापक है जी ठीक है जी कहा था अच्छा तो मैं वैसे इसमें आपसे प्रमाण मांग सकता हूं इसका प्रमाण कहां है मगर अभी प्रमाण वाले चैप्टर पर हम लोग आएंगे आगे तो आपने कहा कि ईश्वर सर्वत्र व्यापक है मगर शक्ति के रूप में वो स्वयं नहीं है जी यानी कि शक्ति और ईश्वर में थोड़ा बहुत अंतर है
02:12:52:15 जी क सकते हैं थोड़ा बहुत अंतर है ऐसा समझ लीजिए जैसे रसोई घर में मिर्च जब छोक लगाते हैं मिर्च का सब्जी में देने के लिए तो उसका जो निराकार शक्ति अगल बगल में बैठे लोगों के नाक में जाता है तो सिकता है लेकिन मूल रूप में जो मिर्च व रसोई घर में होता है और उनका निराकार शक्ति हर जगह व्याप्त हो जाता है ऐसा समझ लीजिए तो जो जो स्वयं मिर्च है उसमें और उसकी जो गं फैल रही है जी उसम अंतर है है ना जो कार्य मिर्च कर सकती है वो कार्य वो गंद नहीं कर सकती और हो सकता है कि जो कार्य गंद कर सकती हो व कार्य मिर्च ना कर सकती
02:13:43:22 हो चलो दूसरी लाइन को हटा देते हैं जो कार्य मिर्च कर सकती है वो कार्य गंद नहीं कर सकती ना तो ना पड़ेगा ना जी यानी कि मिर्च में और उसकी गंध में जिस प्रकार से अंतर है कहीं ना कहीं जो गंध है यानी कि कहीं ना कहीं जो शक्ति है वो ईश्वर के सापेक्ष थोड़ी कमतर है जैसे मिर्च से उसकी जो गंध है वो थोड़ी कमतर है जो मिर्च कर लेगी वो गंद नहीं कर सकती ठीक है थ क निर्णय नहीं कर सकेंगे इस विषय में हम इसका भी तत्व ज्ञान नहीं है आपको जी जानते श्वर के बारे में मिर्च की बात अलग थी तो फिर मिर्च का उदाहरण मत दीजिए ऐसा उदाहरण दीजिए जिसकी बात अलग ना हो चलिए
02:14:47:24 बताइए देख सेम टू सेम मिर्च की तरह ही कार्य करते हैं जैसा आपको अपना आपको अपना भाव क्लियर कर द जिसे हमारी जो वो है बात बहुत अच्छे से हो रही है हम लोग जल्दी से आगे बढ़ जाएंगे जी क्या भगवान यानी पूर्ण ब्रम जो है उसम मुझे दिक्कत हो जाती लोग भगवान ईश्वर परम बम पूर्ण ब्रम तो जो पूर्ण ब्रम है उनकी जो शक्ति है शक्ति में और पूर्ण ब्रह्म में एक सूत का भी अंतर है या नहीं है अंतर है तो शक्ति अलग है अंतर नहीं है तो यानी कि हमें मानना पड़ेगा कि ईश्वर ही
02:15:31:08 है जी अंतर है कि नहीं ये तो हम नहीं बता सकेंगे शक्ति में और परमात्मा में ईश्वर अंतर है या नहीं है क्योंकि परमात्मा शक्ति के रूप में ही विराजमान है तो कई देखिए ऐसा है मैं ये प्रश्न क्यों कर रहा हूं मैं आपको इसके बारे में बता दूं ऐसा है कि जब हम दो एंटिटी मान लेते हैं दो एंटिटी मान लेते हैं कि ईश्वर है और उसकी शक्ति है ईश्वर की जब दूसरी एंटिटी मानेंगे तो खटा से कहीं ना कहीं जो दूसरी एंटिटी होगी व बाधित होगी क्योंकि वह ईश्वर से थोड़ा सा भिन्न है और भिन्न जैसे होगी तो श्वर कौन है बाधित नहीं है वो बात अलग है को मानते उससे हम आगे आ चुके हैं और उसी को हम क्लियर कर रहे हैं ईश्वर की बाध्यता को तो जब हम दो एंटिटी मान लेते हैं कोई दो तत्व मान लेते हैं ईश्वर और उसकी शक्ति तो जब हम अलग मान रहे शक्ति को तो हमें शक्ति को कहीं ना कहीं कमतर मानना पड़ेगा और जब हम कमतर मान लेते हैं उसकी शक्ति को तो फिर सवाल ये उठेगा कि जहां पर ईश्वर है जितनी पावरफुल सत्ता वहां पर है ईश्वर की क्या उतनी
02:16:46:18 ही पावरफुल सत्ता सब जगह है अगर है तभी वो एक रस कहलाएगा जी तभी वो सर्वत्र बराबर रूप से सर्वव्यापक कहलाएगा अगर नहीं है उसकी सर्वत्र सत्ता समान रूप से तो फिर वो फिर बाधित हो गया जी बताइए तो इस बारे में आपको जवाब नहीं है हम लोग दूसरा क्लियर कर लेते हैं जी दूसरा प दूसरा कर लेते जी ईश्वर की सर्वशक्ति मत्ता पही एक बात और है कि जब ईश्वर इस संसार को बनाता है आपका कहना है कि वो जो एक आकृति है सफेद दाढ़ी वाली जिसको आप कबीर कहते हैं वो उसका परम रूप है एक बात हम आपसे पूछना चाह रहे हैं कबीर साहब के विषय में आपका क्या विचार है कबीर साहब कबीर साहब एक संत थे जहां तक उनकी बातें जो अपय ग्रंथ है वेद उनसे मैच खाती है तो हमारे लिए वो सब बातें सम्माननीय है ग्रहण करने योग्य है यदि वो वेद की सीमा को तोड़ती है यदि उनकी बातों का ऐसा अर्थ कोई निकाल रहा है जो वेद की सीमा को तोड़ रहा है सर्वशक्तिमान की सर्वशक्ति मत्ता को भंग कर रहा है तो वहां पर व
02:18:01:28 हम दूर से हाथ जोड़ लेंगे भैया हमारे लिए ये स्वीकार्य नहीं है तो कबीर साहब की जो ऐसी वाणिया है जिनका हमारे जो आचार्य है उन्होंने ऐसा अर्थ निकाला है जो कि ग्रहण करने योग्य है मगर आपके जो जो गुरु है वो ऐसा अर्थ निकालते हैं जो वेदों के बाहर है तो फिर हम अगर वो अर्थ आप रखेंगे कबीर का तो व अर्थ हमारे लिए स्वीकार नहीं होगा ठीक हैय विषयात हो रहा है अभी हम लोग ईश्वर की सर्व मता मैं इसीलिए आया था गणेश जी देखिए आपने अपना क्वेश्चन भी रखा उनका रिप्लाई भी आ गया जबक वो विषय से हट के था आपका विषयात हो रहा था फिर भी उन्होने रिप्लाई किया ठीक है तो उस खत्म हो जाने दो ना प्लीज जो चर्चा चल रही है जिस क्वेश्चन पर उन्होने अभी होल्ड करके और आपके क्वेश्चन का उन्होने रिप्लाई किया था तो फिर आप उसी क्वेश्चन पर उसी सब्जेक्ट पर दूसरा क्वेश्चन रख रहे हैं वो इसीलिए कहते हैं कि व विषयात होता चला जाता है जो मेन टॉपिक होती है व वही पर होल्ड हो जाती है उसका कोई रिजल्ट नहीं निकलता और दूसरी टॉपिक स्टार्ट हो जाती है वहा से तो खिचड़ी बन जाता है उसम
02:19:17:08 देखिए आपको कोई करना हैरी बानि गणेश जी अगर आपको फिर से उस पर कोई क्वेश्चन करना है तो वो क्वेश्चन रख दीजिए ठीक है फिर उसके बाद में मूल प्रश्न पर आ जाइएगा उसके अलावा फिर कोई दूसरा प्रश्न नहीं होना चाहिए मैं आपके लिए इतना कह सकता हूं शिवान जी से रिक्वेस्ट करके कि जो भी उनका प्रश्न है आपका वह प्रश्न आप रख लीजिए रखने के बाद फिर आप मूल प्रश्न पर आ जाइएगा प्रश्न खत्म नहीं हुआ उस को रि नहीं हु विषय बोलिए पहली बात तो विषय कुछ रखा ही नहीं गया जब जिसम प्रारंभ हुआ चर्चा उस समय कुछ विषय विशेष था ही
02:20:02:02 नहीं सुन सुन लीजिए पहली बात मैंने शुरू में य कहा था कि हमारी चर्चा केवल आज नहीं होगी जो आपको मुख्य विषय लगते हैं हो सकता आने वाले दिनों में उस पर बात हो हम जो मुख्य लगते उस भी तो बात करेंगे ना तो श जी आपसे ऐसा करते अगला जो टॉपिक्स होगा तो कब होगा हमको बता दीजिए अगला टॉपिक्स में हम लोग फिर से चर्चा करेंगे क्योंकि अभी चार बजने वाला है और अभी जो एक छोटा सा टॉपिक है वो करते जाइए जिसे सर्वशक्तिमान का चैप्टर हम लोग क्लोज कर दे ठीक है एक करते जाइए पा मिनट भी हम समय दे सकेंगे पा मिनट के बाद फिर बाद में दूसरे दिन समय दिया जाएगा ठीक है ठीक पा नहीं पा मिनट में हो जाएगा मे भी अगर आपने कोऑपरेट किया तो जी कह रहा हूं कि जोय कबीर के रूप में दिखने वाली जो आकृति है जिसको आप ईश्वर का नित्य रूप बोलते हैं सनातन रूप बोलते हैं तो क्या ईश्वर ने ही सब कुछ बनाया है पहले तो ये बता दीजिए सब कुछ ईश्वर ने ही बनाया है बिल्कुल कुछ भी ऐसा नहीं है जो ईश्वर ने नहीं बनाया नहीं ऐसा कुछ नहीं है सब कुछ बनाया है अच्छा तो ये बताइए कि जब वो शुरुआत होती
02:21:17:04 है सृष्टि की तो जहां वो खड़े होते हैं आकाश में कहीं पर खड़े होते हैं तो उनके जैसे ये लेफ्ट कंधा है और लेफ्ट कंधे से लेकर के राइट कंधे के बाद स्पेस होता है खाली खाली स्पेस होता है ना कोई भी आकृति तभी बन सकती है जब उस आकृति का शुरू हो रही हो और अंत हो रहा हो और उसके अगल बगल खाली जगह हो तभी तो आकृति बनेगी जी है ना अगर कबीर कबीर जी वो जो परम परमेश्वर का परम स्वरूप है परमाथ स्वरूप है तो उनके लेफ्ट क उधर और राइट कंधे के उधर जो खाली जगह थी वो किसने बनाई जब वह सृष्टि बना रहे हैं तब शुरू कर रहे कबीर जी ने बनाई थी मतलब वो जब लेफ्ट कंधा और राइट कंधे से पहले भी वह किसी रूप में विद्यमान थे तभी उन्होंने बनाई थी उसके बाद व अपने साकार स्वरूप में आए साकार स्वरूप तभी पॉसिबल है जब साकार के आस पास कुछ खाली स्पेस हो अन्यथा आकार का पॉसिबिलिटी नहीं है जब इस कंधे के बाहर कुछ खाली होगा जब इस कंधे के बाहर कुछ खाली होगा तब य कहा जा सकता है य एक आकृति
02:22:32:16 है और सब कुछ एक ही जैसा है तो कही नहीं सकते तो जो जगह जहां पर वह खड़े हैं सबसे शुरू में सृष्टि रचना वह जगह किसने बनाई कबीर जी ने बनाई परमात्मा ने बनाया आप मेरी बात समझ नहीं रहे हो अगर वो शुरुआत से ही साकार स्वरूप में है तो हमें मानना पड़ेगा कि जहां पर व जहां पर व अंतरिक्ष में होते हैं हवा में होते हैं जो उनके आसपास की खाली जगह होती है वो उन्होंने नहीं बनाई अगर वह शुरू से साकार है तो तो हमें मानना पड़ेगा कि जहां पर व खड़े होकर सृष्टि बनाते हैं वह भी शुरू से है वो भी नित्य है यानी कि वह संसार जहां पर कबीर जी है वो उन्होंने नहीं बनाया [संगीत] यानी कि एक तरीके से कहा जाए तो आकाश अंतरिक्ष यह सब उन्होंने नहीं
02:23:28:26 बनाया ऐसा नहीं है अगर हम ऐसा मानते हैं तो जिस प्रकार हम लोग कहते हैं कि जैसे आप लोगों का विचार है कि परमात्मा निराकार है सर्वत्र व्यापक है एक रस एक रस हैने नहीं परमात्मा सिर्फ निराकार है मैंने य नहीं कहा मगर जो परम स्वरूप है वो व्यवहार में ना आ सकने वाला है उसकी अगर हम आकृति डिसाइड कर देंगे तो हमें यह मानना पड़ जाएगा कि उससे जो अगल बगल की जगह व उसने नहीं बनाई या जिसे हम प्रकृति कहते हैं जी जी हम को आपके भगवान बना रहे हैं प्रकृति को जी हम इस बात का खंडन करने लग जाए तो हम यह भी जैसा कि आपका मत है कि परमात्मा सर्वत्र एक रस व्याप्त है निराकार है और हमने ये भी सुना है कि ये जो संसार जो दिखाई देता है ये भी भगवान का ही स्वरूप है अगर ऐसा है तो जिस समय यह धरती आकाश नहीं था उसम परमात्मा क्या इस जगह नहीं थे क्या बोल रहे हो भाई मेरा यश नहीं था तो सब कुछ भगवान में ही लीन होता है भगवान
02:24:44:06 ही स्वयं जीव जगत और जगदीश्वर के रूप में प्रकट हो जाते हैं तो फिर सकार नहीं जब भगवान में सब कुछ भगवान में लीन था फिर बाहर हो गया तो जिस समय बाहर नहीं होता उस मैंने कहा तो जो उनका परम रूप है वो वो साकार नहीं है बनते वो साकार होते हैं जो उनका परम परमार्थ का रूप है शाश्वत रूप है वह व्यवहार में ना आ सकने वाला रूप है उसके बाद जब वोह सृष्टि रचना करते हैं तो वो साकार होते हैं वो सृष्टि बनाते हैं आपका कहना शुरू से ही साकार है तो जब वो शुरू से साकार है देखिए फिर से वही हो रहा है कि आप जो है मेरे से प्रश्न करके अपनी बात को सही सिद्ध करना चाहते हैं सुन लीजिए सुन लीजिए रिप्लाई मिलेगा आपको अरे गणेश जी आपके सवालों का आंसर वही दे रहे हैं व समझा देंगे उनका एक्चुअली मत क्या है वो किस परमेश्वर को मानते हैं उनकी एक्चुअली विचार जान लीजिए फिर आप उसको काउंटर करिएगा जी बोलिए अपनी अपनी बात क्लियर कर लीजिए मैंने पूछा है अगर परमात्मा अगर परमात्मा शुरू से साकार है तो इसका मतलब शुरू से शुरू से
02:25:59:14 परमात्मा के अगल बगल खाली जगह थी यानी कि परमात्मा उस खाली जगह को बनाने वाला नहीं है देखिए यह एक तर्क का विषय है कि अगर परमात्मा सकार रूप में शुरू से थे तो उसके अगल बगल बनाने वाले नहीं है बाद में किसी दूसरे ने बना दिया या पहले जहां पर थे वोह किसी दूसरे ने बनाया यह एक अलग विषय है लेकिन इसी विषय को लेकर के क्योंकि हमारे पास पा मिनट पहले ही समय हम दे चुके थे तो अगला जो हम लोग एक जगह फिर से हम लोग इकट्ठा होंगे उसम इसी टॉपिक से हम लोग प्रश् को शुरुआत करेंगे ठीक है ठीक है चलिए जय श्री राम
02:26:52:03 आपके आने की वजह से काफी सकारात्मक मोड़ आ गया इस तरह से एक मॉडरेटर होना चाहिए उनको ऐसा लगता है ना शिवांश जी की आप उनको बोलने नहीं देते मैं जहां तक यह रिलाइज किया हूं उनको यह उनके मन में य बैठ जाता कि यह बंदा बोलने ही नहीं देता बोलने नहीं देता बोलने नहीं देता जबक वो चीज होती है हा जनन चीज वो हम लोग समझते हैं जो आम जन मानस है जो हमारा सिद्धांत वो आदमी आराम से जाता में क्या कहना चाह रहे हैं लेकिन उनको यह लगता है ना कि आप यह बंदा बोलने नहीं इससे क्या बात करें तो मैं इसीलिए कह रहा ठीक है कोई बात नहीं आप थोड़ा सा आराम से बात करिए बंदा जेनन लग रहा है क्योंकि काफी बंदों से ऐसा मतलब सकारात्मक वाली जो बातें होती है हो नहीं पाती है बंद जेनन लग रहा था इसलिए बो थोड़ा बात सुनते क्या इसका मत हैने इनके जितने भी जेनन बंदे हो ना वो बातें जो क्वेश्चन आपका रहता है वो नहीं समझ पाते हैं जितने भी जनन हो अब जहां पेड़ ना रुक वहा रेण प्रधान एक कहावत है हमारे यहां प जहां पर पेड़ ना रुक वहा रेण प्रधान हो जाता है तो वो वाली बात है इनके अंदर में च ठीक है समथिंग इज बेटर देन नथिंग मतलब भाई अच्छा तो अच्छा गा का होता हैने ये देखा है
02:28:07:27 कि जहां पर कुछ ऐसी बात आती है जो इनको लग रहा है कि भाई इसमें मैं या तो जानता नहीं हूं या फिर उनको लग रहा है कि मेरी कोई कही हुई बात जो है वो खत्म हो जाएगी तो ये फिर उसमें रुकना चुप रहना या फिर मेरे से मेरे बारे में पूछने लगना इस तरह से चीजें शुरू कर देते हैं अब उसमें क्या होता है वो देर होती जाती देर होती जाती देर हो उसका कुछ निष्कर्ष नहीं भाई सीधे सिंपल क दो य तत्व ज्ञान मुझे नहीं है मेरे तत्व ज्ञानी ने नहीं दिया य ज्ञान और नहीं दिया है इनकी चीजों में यह तत्व ज्ञान जो वास्तविक है य सब है ही नहीं प्रमाण है बस बस और उनका अपना मन माना
02:28:51:06 तर्क का मतलब नहीं समझते हैं शिवान जी इनको बस यही लगता है कि जो गुरु जी ने मेरे को जो प्रमाण दे दिए वही प्रमाण ले जाकर दिखा दूंगा दूसरों को तो दूसरा काउंटर नहीं करेगा हा हा ये तो सही लिखा है भाई इनके गुरु जी भी तर्क देते हैं बहुत लो लेवल के कक देते हैं फिर हम उनसे कहेंगे तुम गुरु तर्क क्यों दे रहे हैं केवल प्रमाण की बात करो तक की बात बंद कर दो अभी देखो तुम्हारी सारी तावली सब बेकार हो जाएगी तक के बिना चलिए दो घंटे 30 मिनट की लाइव है चलिए और सब बढ़िया तोय सोच रहा था क गा हो गए आप गायब हो गए अचानक से काफी लंबा समय हो गया था आपको देते हु बाहर गया कलने लाइव किया एक लाइव किया कल आए थे एक दिन एक दिन टीआर पहाड़ी जी वाले चैनल पर भी आप लाइव हुए थे न
02:29:44:08 में नहीं उसके पहले की बात का जी कुंभ में जाके है अब जाऊंगा मैं कुंभ में जाऊंगा आप आपका जलवा कुछ अलग है शिवांश जी आपका आपने एक लेबल लगा दिया है मजक नहीं कर रहा हूं आपने इन रामपाल जी के चेलो के ऊपर एक लेबल लगा दिया ठोक दिया है ठीक है वो लेवल अब नहीं निकलेगा चाहे य कितना भी फिनाइल लगा ले चाहे वो लगा ले वो नहीं निकलेगा मैं तो मैं तो कभी कभी सोचता हूं भैया कि कहां ने टा इधर टी आर पहाड़ी जी के भी चैनल देखा था मैंने अभी पहले एल्गोरिदम नहीं दिखा रहा था मेरे वाले प ये भी अच्छे से अच्छे से इन्होने स्टार्ट किया हुआ है इनका तर्क भी अच्छा है र प तर्क अच्छा देते हैं अभी टी आर पहाड़ी जी के साथ एक संडे के दिन लाइव आने वाला हूं मैं उसम उनके उनके चैनल पर आक के कुछ चर्चा होंगी ठीक है ऐसे ऐसे ही बनाकर आगे बढ़ना चाहिए हम ऐसे सिस्टम की जरूरत है उस दिन जब मैं ट्रेन से जवाइन किया अमित दस
02:30:59:09 भाग लिए त अमित दास जी को देखता अमित दास जी को देखता तो हसी आती है मुझे मैं उससे क्या चर्चा कर क्या बातें करें व जैसे ही चैनल पर आता है ज मेरे को हसी आती है ऐ रोक नहीं पाता अपने आपको म समझ में नहीं आ रहा उसके लिए गुरु गोविंद जी जो है ना वो सही बंदे गीता किसने बोला काल ने बोला ह आ जब काल ने उसम मिलावट कर दी है उसम गलत
02:31:39:19 बोला उनको क हो जाती है ब हराय बंदा हमारे हमारी टॉपिक पर क्यों बात कर रहा है कन्फ्यूजन उनको होता है जबक वो भाई हम समझते कि जजह से क्या बोल रहे कालने बोला है बात हुई कल वाली लाइव में बात हुई थी भैया ने बोला था जबसे प्रश्न सुनते कि य पर खाली जग थी तो य ईश्वर कौन था तो चौक जाते क्योंकि कभी सुने नहीं हैने प्रश्न पही तत्वदर्शी का जो उदाहरण व देते एपल गीता जी में यहा पर लिखा हुआ है गीता जी ने तो कालने बोला है काल तो भरता है पॉइंट सही है अब वो उनका क से रिप्लाई नहीं बनता उनको बिल्कुल चलिए कोई बात नहीं जी काफी लंबा समय हो गया जय श्री राम सभी को जय श्री राम हर हर महादेव
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