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00:00:06:02 आप कमेंट तो भरभ के करते थे। आज आप भरवात्म कह रहे हैं कि मुझे नहीं पता मुझे नहीं पता। खैर अब आप ये बताइए मुझे कि क्या काल तत्वदर्शी है? क्या? ये क्लेम किया जाता है कि भैया काल ने कहा कि तू तत्वदर्शी की शरण में जा। ठीक है। और 1866 में भी कहा कि तू जा। ठीक है। चार 34 में कहा कि तत्वदर्शी की शरण में जा। 1866 में था कहा कि तू और किसी दूसरे प्रभु की शरण में जा। आपके अनुसार है ना? इसका मतलब वो जिस चीज के लिए भेज रहा है वो चीज उसके पास नहीं है। हेलो क्या काल तत्वदर्शी है?

00:01:02:00 नहीं काल तत्वदर्शी नहीं है। काल तत्वदर्शी होते तो दूसरे के शरीर में जाने के लिए क्यों कहते? बस गुड। और आपके रामपाल ने भी यही माना है। ठीक है? तो इसका मतलब 1866 में तत्वदर्शी की 434 में तत्वदर्शी की शरण में जाने को कहा जा रहा है। तत्वदर्शी की शरण में जाने पर मोक्ष मिल जाएगा। पक्का पक्का। तो आपके पास भगवत गीता है

00:01:42:19 गीता है ना तो दूसरे अध्याय का 16वा श्लोक खोलिए हम खोला खोलना खोला पढ़िए क्या लिखा है इसमें इसमें लिखा है कि असत भाव न विद्यते तू सत अभाव अरे हिंदी पढ़ लो भैया संस्कृत मत पढ़ो हिंदी पढ़ लो आप असत की सत्ता नहीं है और सत्य का अभाव नहीं है। इस प्रकार इन दोनों का तत्व तत्व ज्ञानी पुरुषों द्वारा देखा गया है। यहां पे

00:02:51:01 असत का भाव नहीं है और सत का अभाव नहीं है। ठीक है? हम ठीक है ना? असत का भाव नहीं है और सत का अभाव नहीं है। इस प्रकार इस बात को जानने वाले को ऊपर संस्कृत में देखिए क्या लिखा है? नीचे तो तत्व ज्ञानी लिखा हुआ होगा। ऊपर क्या लिखा है? संस्कृत में क्या शब्द है? तत्वदर्शी भी। हां क्या लिखा है? तत्वदर्शी भी मतलब तत्वदर्शी संतों के द्वारा देखा जाता है। यानी कि तत्वदर्शी कौन है? जो यह बात जानता है कि सत्य का कभी अभाव नहीं होता और असत का कभी भाव नहीं होता।

00:03:46:09 है ना? तत्वदर्शी कौन है? का अरे इस श्लोक के हिसाब से कौन है? जो ये जानता है कि सत्य का

⬜ Not used yet · 00:04:06:14 – 00:04:22:09 (0:16)

00:04:06:14 कभी अभाव नहीं होता और असत का कभी भाव नहीं होता। ठीक है? तो अब बात ये आती है कि

00:04:22:09 जो व्यक्ति यह बता रहा है कि तत्वदर्शी कौन है जिसको यह पता है कि सत्य का कभी अभाव नहीं होता और असत का कभी भाव नहीं होता। जो व्यक्ति ये बता रहा है उसको यह बात मालूम है ना कि सत्य का कभी अभाव नहीं होता और असत का कभी सत का कभी अभाव नहीं होता और असत का कभी भाव नहीं होता। जो व्यक्ति जो व्यक्ति यह बता रहा है कि भैया जो भी व्यक्ति यह जानता है कि सत और असत का ये होता है वो व्यक्ति तत्वदर्शी है। जो व्यक्ति ये बता रहा है उसको ये मालूम है ना कि सत और असत का क्या मामला है? किसी ने तो आदेश दिया है ना कि तत्वदर्शी के द्वारा देखा जाता है। किस प्रकार देखा जाता है? सत्य और असत सत्य और असत्य क्या है? तत्वदर्शी ही बताता है। हां। मगर वो क्या है कि सत्य का कभी अभाव नहीं होता। वहां लिखा है ना इस प्रकार क्या लिखा है?

00:05:32:24 क्या लिखा है? हम इस प्रकार हम यानी कि मैं एग्जांपल ले लूं जैसे कि मान लीजिए कि मैं ये बता रहा हूं कि जो व्यक्ति ये जानता है कि कुर्सी को इंग्लिश में चेयर कहते हैं। ठीक है? मैं ये कह रहा हूं कि जो व्यक्ति ये जानता है कि कुर्सी को इंग्लिश में चेयर कहते हैं उसको इंग्लिश जानने वाला माना जाता है। ठीक है? तो मेरा मेरे ऐसे बताने से ये सिद्ध हो गया ना कि मैं जानता हूं कि कुर्सी को इंग्लिश में चेयर कहते हैं।

00:06:17:01 नहीं समझे? तो यहां तो आत्मा परमात्मा की बात चल रही है। चेयर कहां से भाई साहब? में एक एक करके बात करिए। मैंने अभी ये पूछा है कि अगर कुर्सी को इंग्लिश में चेयर जानने वाला मैं कह रहा हूं कि तत्वदर्शी है तो मैं यह बात जानने के कारण कि कुर्सी को इंग्लिश में चेयर कहते हैं। मैं भी तत्वदर्शी सिद्ध हो रहा हूं ना। जब मुझे पता है कि कुर्सी को इंग्लिश में क्या कहना चाहिए तभी तो मैं यह बता रहा हूं कि जो यह बात जानता है वह तत्वदर्शी है।

00:06:57:13 ये भी जो चीज है कि कुर्सी बनी किस पे है? कुर्सी बनने की बात वहां आ रही है क्या? खाली कुर्सी पे ही क्यों? नहीं भाई श्लोक में क्या लिखा है? श्लोक में खाली कुर्सी की बात जानने वाले को तत्वदर्शी कहा गया कि नहीं कहा गया? हा ये चीज ठीक है। लिखा है यहां पे लेकिन ये चीज लिखा है। एक मिनट भाई साहब भाई साहब भाई साहब एक मिनट भाई साहब एक एक करके चलिए वहां पर केवल सत्य और असत के बारे में सही से जानकारी रखने वाले को तत्वदर्शी कहा गया है कि सत्य का कभी सत्य का कभी अभाव नहीं होता और असत का कभी भाव नहीं होता। इसका मतलब जो इस बात को बता रहा है कि जो लोग यह जानते हैं वह तत्वदर्शी है वह बताने वाला भी तत्वदर्शी सिद्ध हो रहा है। तो इस श्लोक के अनुसार इस श्लोक के अनुसार काल भी तत्वदर्शी सिद्ध हुआ। ठीक है? अब दूसरी एक बात आती है कि आपके अनुसार जो रामपाल है, वो तत्वदर्शी है। ठीक है? इसके अनुसार

00:08:12:26 इसके अनुसार काल कैसे तत्वदर्शी संत हुए सिद्ध हुए इस श्लोक में तो ये खुद कह रहे हैं कि तत्वज्ञानी पुरुषों द्वारा देखा गया है। वो अपने आप को थोड़ी बता रहे हैं यहां पे। अरे भाई क्या देखा गया है? क्या देखा गया है? इसमें जब श्लोक में खुद कह रहे हैं कि तत्व ज्ञानियों तत्व ज्ञानियों के द्वारा क्या देखा गया भाई साहब तो जब ये कह रहे हैं कि सत्य का भाव नहीं और असत का अभाव नहीं और ये तत्व्ञानियों के द्वारा देखा ये तत्वज्ञानियों के द्वारा देखा गया तो काल जो काल है जो जो इस श्लोक को बोल रहा है उसको को पता चल गया ना कि सत्य का भाव अभाव नहीं होता है और जिसको पता चल गया उसको तत्वदर्शी माना उन्होंने

00:09:15:27 तो फिर वो दूसरे के पास जाने के लिए क्यों कहे ये तो आप बताओगे ना मुझे आपने कहा है ना काल तत्वदर्शी नहीं है मैंने तो नहीं कहा और आप दूसरे एक मिनट एक मिनट भाई साहब ये क्लेम हम नहीं करते हैं कि दूसरे के पास जाने को कहा ये आप करते हो। हम गीता का परंपरा से प्राप्त अर्थ लेते हैं। जिसमें जाने की बात को नहीं कहा गया है। हमने वहां कहा है कि आ जाने की बात को वहां कहा गया है। मगर आप कहते हो कि नहीं जाने को कहा गया है। तो अगर जाने को कहा गया है तो यहां तो तत्वदशी सिद्ध हो रहे हैं। काल आपके अनुसार अब दूसरी बात अब दूसरी बात भाई साहब। दूसरी बात ये है कि हमने एक बात जान ली कि सच का कभी अभाव नहीं होता। सत का कभी कभी अभाव अभाव नहीं होता। जीवन मरण से छूट जाना क्या उसे सत स्वरूप हो जाना कह सकते हैं?

00:10:20:21 जीवन मरण से छूट जाना। क्या उसे सत स्वरूप हो जाना कह सकते हैं? सत स्वरूप मतलब सत जो कभी बदलता नहीं है। इस शरीर का अगर मृत्यु हो गई, शरीर खत्म हो गया इसका मतलब यह नहीं हुआ कि हमारी हमारी मुक्ति हो गई। मैं कहां कह रहा हूं? मैं कह रहा हूं क्या जो आत्मा है वह छूट के कभी सत स्वरूप हो सकती है सतलोक में पहुंचने के बाद वो सत स्वरूप हो जाएगी कि नहीं जिसको कभी जो सत स्वरूप हो जाएगी अच्छा पक्का पक्का हां तो इसका मतलब आत्मा एक ऐसा तत्व है जिसका कभी अभाव नहीं हो सकता

00:11:15:20 क्योंकि वो सत है ना सत हो जाएगी ना सतलोक जा के तो अभाव तो हो नहीं सकता उसका तो आपके बाबा जी तो यहां पर लिख रहे हैं कि उसका अभाव था आत्मा का पहले यानी कि तत का भी किसी समय अभाव हो सकता है। ये पहले की बात है और पहले या बाद में तत का अभाव माना जा सकता है कि नहीं? यानी पहले वो असत थी। चलो ऐसे मान लो। पहले असत थी। असत तो बाद में हुई। सत्य पहले थी। पहले सत्य थी तो सत्य पहले थी तो अभाव कैसे हो गया? क्योंकि यहां है इसके लिए अब आप पहले मान रहे आने से पहले मेरे भाई पहले अपनी पढ़ो पहले हमारे ग्रंथों को पढ़ने की बजाय अपने बाबा जी के ग्रंथ को पढ़ो ये देखिए आप दूसरे अध्याय के

00:12:30:07 16व ही श्लोक का वर्णन करते हुए आपके जो रामपाल जी हैं कहते हैं कि उत्पत्ति से पहले आत्मा का अभाव था। दिख रहा है ठीक है तो यदि आत्मा का अभाव था यानी कि वो असत हो गई ठीक परमात्मा के साथ थे ना इसके लिए अरे इधर उधर देख के झूठ मत बोलो भाई नहीं वो कह रहे हैं सुनो सुनो आपके बाबा जी क्या लिख रहे हैं सुनिए

00:13:06:26 परमात्मा से संपूर्ण संपूर्ण संसार व्याप्त है। यानी कि विस्तार को प्राप्त हुआ है। उस अविनाशी परमात्मा का अभाव किसी भी समय में नहीं होता है। ठीक है? सही बात है। परमात्मा के अतिरिक्त कोई भी नित्य नहीं है। यानी कि आत्मा का अभाव था। परमात्मा से अलग है ना आत्मा? कोई भी नित्य नहीं है क्योंकि आत्मा की उत्पत्ति परमात्मा ने अपने वचन से अपने शरीर से की है। उत्पत्ति से पहले आत्मा का अभाव था। उत्पत्ति से पहले आत्मा का अभाव था। तो अभाव किसका होता है? असत का। जो असत है हां तो अगर आत्मा अगर आत्मा असत है सुनिए अगर आत्मा असत है तो दो 16 के अनुसार उसका कभी भाव नहीं हो सकता वो कभी सत्य नहीं हो सकती यह ज्ञान यहां पे है 21 ब्रह्मांड के लिए ये कहां लिखा है काल के काल काल के प्रमाण कहा है कि ये ज्ञान यहां के लिए है क्योंकि काल खुद दे रहे हैं ना

00:14:22:21 अब मैं प्रमाण पूछ रहा हूं इस समय आपसे काल खुद दे रहे हैं ये ज्ञान तो इसके लिए वो कह रहे हैं भाई साहब ये कहां लिखा है कि ये असत असत का जो बात है ये किस ब्रह्मांड के लिए है ये बात ये कहां लिखा है जब वो खुद कहते हैं ना कि हां भाई भाई साहब मैंने कहा अगला शब्द आप बताएं कि अध्याय नंबर ये श्लोक क्रमांक ये प्रमाण पूछ रहा हूं प्रमाण आपका पक्ष नहीं दो तीन तीन चीजें हैं कन्वर्सेशन में पक्ष, तर्क, प्रमाण तो पक्ष आपने रख दिया कि ये तो 21 ब्रह्मांडों की बात है। सत असत वाली बात 21 ब्रह्मांडों के लिए है।

00:15:06:12 ठीक है? तर्क भी मैंने आपसे मांगा नहीं। फिलहाल अब मैं आपसे प्रमाण मांग रहा हूं। प्रमाण बताइए। यह जो सतत की व्याख्या की है जिसके कारण तत्वदर्शी कहा गया व्याख्या को जानने वाले को यह व्याख्या केवल 21 ब्रह्मांडों के लिए है। ये कहां लिखा है? आपको कोई मतलब नहीं है क्या सच्चाई से? क्यों नहीं मतलब है? साफ दिखाई दे रहा है कि यहां पे आप अटक रहे हो। कुछ भी बोलते जा रहे हो। नहीं नहीं ऐसी बात तो नहीं है। आपके बाप जी ने कहां लिखा

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00:15:40:19 है? कहां लिखी है ये वाली बात? एक यह सत असत वाली बात 21 ब्रह्मांडों के लिए है। कहां लिखी है? तो ना ही आपके बाबा जी ने ये

00:15:58:16 लिखा है कि असत औसत की जो बात है वो केवल उसके लिए है 21 ब्रह्मांडों के लिए और ना ही हमारे सनातन शास्त्रों में कहीं लिखा है और तर्क के अनुसार भी देखेंगे तो यदि आप आत्मा का अभाव मान लोगे जिसका आपने जवाब नहीं दे पाए थे कि मटेरियल कहां से आया अभाव अगर मान लोगे तो जिस चीज का अभाव था उसका कभी शाश्वत सत स्वरूप नहीं हो सकती। फिर आप उसको मुक्ति नहीं दे सकते। जो सतलोक वाली अनंत काल की मुक्ति है वो फिर आप क्लेम नहीं कर सकते क्योंकि उसका अभाव था। वो भाव वाली नहीं हो सकती। फिर सत स्वरूप हो ही नहीं सकती क्योंकि वो सत स्वरूप थी नहीं। सत स्वरूप तो वही हो सकता है जो सत स्वरूप है। समझ रहे हैं कुछ?

00:16:46:14 सब बातें थोड़ा सोचा करिए। कुछ भी बोल दो चाहे वो अपने बाबा जी से मैच कर रही है कि नहीं कर रही। आपने 10 बातें अभी तक बोल दी जो आपके बाबा जी से मैच नहीं कर रही। पहले आप आत्मा को नित्य कह रहे थे। आपके बाबा जी ने नित्य नहीं माना आत्मा को। ठीक है। थोड़ा थोड़ा अपने सेंस ऑफ ह्यूमर का इस्तेमाल करो मेरे भाई। अच्छा बाबा जी ने बाबा जी ने नित्य नहीं माना है कि परमात्मा के जीव अविनाशी जीव है। अविनाशी अलग हो गया और फिर वो क्लेम बनता है जो कह रहा है कि पहले जो है ये नित्य नहीं ये अभाव था और फिर कह रहा है बाद में अविनाशी है। अच्छा अब दूसरी बात अब यह बताओ

00:17:29:27 कि आप कहते हो कि जब आत्मा ये हम अंतिम अंतिम थोड़ी सी बात कर रहे हैं। फिर उसके बाद किसी और से बात करेंगे। आपके साथ काफी बातें हो चुकी थी। अर्जुन जब भगवान श्री कृष्ण के साथ में खड़ा है शरीर से आपके अनुसार उनके उनके अंदर काल जाकर के बोल रहा था। ठीक है? तो यदि अर्जुन श्री कृष्ण की शरण में पहले से ही है तो फिर कृष्ण क्यों कहेंगे कि वह मेरे पास आए है ना

00:18:07:13 अर्जुन श्री कृष्ण की शरण में पहले से ही है। तो फिर ये तर्क नहीं बनता कि भाई मेरे अपने पास आने को क्यों कहेंगे वो ये क्लेम किया जाता है ना रामपाल रामपाल वालों की तरफ से हम तो अब बात यहां पर ये आती है कि क्या ये जो जीव है उसको जो अविनाशी कहा गया वो किस कारण से कहा गया है क्यों है जीव अविनाशी परमात्मा तो अंश है इसके लिए अविनाशी कहा गया नहीं

00:18:44:00 इसलिए कहा गया है कि वह सदैव परमात्मा के साथ रहती है। ये आपके बाबा जी ने अपनी किताब में कहा है। कि सदैव परमात्मा के साथ होने से आत्मा अविनाशी है। समझ रहे हैं मेरी बात? परमात्मा ऐसा लिखे हैं कि परमात्मा के साथ रहती थी। वहां से हम बिछड़ करके आए। इसके लिए नहीं अविनाशी अविनाशी तो है। नहीं परमात्मा के साथ है इसलिए अविनाशी है। साथ में है। जैसे ही वो साथ कट होगा हटेगा वो अविनाशी नहीं रह जाएगी। वो साथ में है परमात्मा के इसलिए अविनाशी है। तो परमात्मा जो है

00:19:41:13 क्या कहते हैं? परमात्मा के साथ रहने के कारण आत्मा अविनाशी बताई गई है आपके रामपाल के द्वारा। ठीक है? तो अब बात ये आती है कि यदि आत्मा सदैव परमात्मा के साथ होने के कारण अविनाशी है तो यानी कि जिस समय जो अर्जुन है वो काल की शरण में था श्री कृष्ण की शरण में था उसी समय अर्जुन परमात्मा की शरण में भी था

00:20:24:04 तो फिर किस परमात्मा की शरण में जाने को बोला यही चीज तो हम आपसे पूछना चाहते हैं। अरे हमारे अनुसार तो जाने को बोला ही नहीं जा रहा ना भाई। हमारे अनुसार तो ज्ञान दो तरीके की गति होती है। एक होती है ज्ञानार्थक और एक होती है गत्यार्थक। ज्ञानार्थक गति यह होती है कि मैं भले ही आपके पास भी खड़ा हूं पर फिर भी मैं मन से आपकी शरणागत नहीं हुआ हूं। ज्ञानार्थक गति नहीं है वहां पे। गत्यार्थक गति तो है। समझ रहे हैं? फिर आपने कहा कि तू मुझको अपना ले। तू मेरे पास आजा, मेरा हो जा, मेरी शरण में आजा। तो यह हो गई ज्ञानार्थक गति। वहां होते हुए भी आप उसकी शरण आपने उसकी सत्ता को स्वीकार नहीं किया था पहले मन से अब जो है मन से ज्ञानार्थक गति करने को बोला जा रहा है गत्यार्थक गति करके तो

00:21:39:06 तुम आ गए हो मगर ज्ञानार्थक गति अभी नहीं कर पाए हो तो ज्ञानार्थक गति के लिए वहां बोला गया तो हमारे अनुसार जाने के लिए बोला ही नहीं गया है आपके अनुसार बोला गया है तो सवाल फिर आपसे है कि यदि वहां पर परमात्मा भी था तो फिर किसके पास जाने को बोला गया? क्योंकि परमात्मा के साथ रहने के कारण ही आत्मा अविनाशी है। ठीक है? अब इस सब के बाद एक बात ये आ गई कुल मिलाकर के तत्वदर्शी हम सिद्ध नहीं कर पाए आपका। ठीक है? आपने आत्मा के बारे में कुछ बताया नहीं। आपने मोक्ष के बारे में कुछ बताया नहीं। काल के जीवन मरण के बारे में कुछ बताया नहीं। अब कुल मिलाकर के बात आ जाती है कि भाई जब आपके द्वारा मिलने वाला मोक्ष मोक्ष ही नहीं है।

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 22:42 · 21 Nov 2025

18:66 में किसके पास जाने को कहा है -रामपाल का महाझूठ

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A · Live गीता के नाम पर रामपाल के बोलबचन अध्याय 2 Ep-1 #satlokashram #rampalma...
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B · Live रामपाल का ईश्वर Discussion with Rampal follower #rampaljimaharaj #kabi...
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