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00:00:02:02 तो जय श्री राम सभी को आशा करता हूं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और इसका फ्लैप खोल अ

00:00:15:13 मैंने आपको जैसा कि बताया था कि हम लोग एक बड़ा आंदोलन प्रारंभ करने वाले हैं। उसका उद्घोष हो गया है। जयघोष हो चुका है और मेरे पास जगह जगह से लोग संपर्क कर रहे हैं। बहुत जल्द दिल्ली में, पटना में, वाराणसी में, नागपुर में भी मतलब जगह-जगह से लोग संपर्क कर रहे हैं और रामपाल का पुतला जलाया जलाने की तैयारी है जगह-जगह पर और साथ ही साथ जो रामपाल का जो भी सेवक है जो उनके आसपास यदि रहता है तो अब आली रे आली क्या कहते हैं वो क्या कहता है उसमें आली रे आली अ तजी जी बारी आली तो वह स्थिति आने वाली है। तो अब यह लोग जो प्रचारक बने घूम रहे हैं इधर-उधर रामपाल के वो अपनी चीजों को देख लें जो भी उनके साथ होने वाला है। जगह-जगह पर ये अभियान शुरू होने वाला है और वो जो समोसे वाला है उसने दो दिन से समोसा लगाया नहीं है। ठेल और हम अभी एक दो बार वहां पर प्रदर्शन और कर देंगे। जैसे ही समय मिलेगा और लोगों को वहां बताएंगे। बल्कि वहां जो जब वह समोसे बेच रहा होगा तो जिस समय उसके समोसे

00:01:30:21 लोग खा रहे होंगे उसी समय प्लेट लेकर जाने वाले हैं बांटने के लिए। ये लो जिसके तुम समोसे खा रहे हो वो कौन है उसको जानो। यह सब चीजें होने वाली हैं। तो अच्छा हमारे इस प्रदर्शन के विरोध में कुछ हास्यात्मक वीडियोस भी मुझे दिख प्राप्त हुए। जिसमें जो सबसे प्रमुख रूप से जो वीडियो मुझे मिला है वह मिला है इसका अभिषेक का और उसमें राघव दास दोनों जो है खड़े हैं। वही उनका पुराना तरीका किताबों के पीछे खड़े हो जाओ किताबें दिखाओ और किताबों का कुछ ऐसा अट्रम शटरम कुछ बनाओ कि मामला जो है अपनी प्रजा को यह बता दो कि देखो कुछ हुआ तो हमने बोला बाकी उससे कुछ तंत पानी निकलता है कि नहीं निकलता वो कोई मतलब नहीं है। जैसे कि हमने कार्यवाही की यहां पर बोला भी लोगों को परास्त भी किया निरुत्तर भी किया ढेर सारी अनगिनत बार इसके बाद धरातल पर उतरे धरातल पर उतर के कोर्ट केस किया रामपाल जिस जेल में बंद है उसके जेलर को यहां बुलवा लिया जेलर को है ना और तुम्हारा नाम दान सेंटर बंद हो गया वहां पे लोगों को कहना पड़ा कि यहां पे किताबें नहीं है यह सब ऐसा

00:02:46:00 नहीं है कि सिर्फ बस हम औपचारिकता के लिए कर रहे हैं। हम कुछ ऐसा कर रहे हैं कि हमें प्राप्त करना है अभीष्ट फल केवल औपचारिकता के लिए नहीं। मगर वो दोनों जो टट्टू हैं किराए के वो बेचारे दोनों खड़े हो गए। वही अपना पुराना रटा रटाया कि यहां यह लिखा है वहां वो लिखा है। उसका अपने मन मन के अनुसार अर्थ जो कि अभी मैं बात करने वाला हूं। तो सबसे पहले राघव दास ने बात की कि यह कुछ नहीं है। यह भड़काता है और इसकी जो इसके साथ में जो लोग थे वो इतने कम संख्या वाले थे बोल रहा था कि बहुत कम हालांकि मैंने पूरा वीडियो नहीं देखा थोड़ा राघव दास की पूरी बात संभवत मैंने सुन ली और वो फैक्टफुल अभिषेक वो दोबारा तुरंत शुरू हो गया। वही किताबें खोलना ग्रंथ खोलना उनका अपने अनुसार मैनपुलेशन करना। अभेद का मतलब बता रहा है कि वह पति पत्नी का रिश्ता है। अभेद शब्द का अर्थ हो गया पतिप और पतिप में भी बलात्कार भी फिट हो गया। है ना? यह सब वो कर रहा है। तो अ वो क्या कह रहा है राघव दास? सबसे पहले तो वो ये बता रहा है कि तुम्हारे साथ इतनी भीड़ है जितनी तो हमारी गली में इकट्ठा हो जाती है। अबे मूर्ख व्यक्ति वो भीड़ तेरे ठिलिया कुलचे वाले के लिए थी। रामपाल के

00:04:01:01 लिए नहीं। अब तू अपने रामपाल को वास्तविकता में वही घोंंचू समझता है जो हम लोग समझते हैं तो बात अलग है जो इतना टच्चा है क्योंकि हम लोग उसको ज्ञान के मामले में तो टच्चा समझते ही है भौतिक रूप से भैया उसके पास संख्या बल है ऐसा थोड़ी ना है मगर तू उसको अगर ऐसा टच्चा समझता है ज्ञान के मामले में तो टच्चा है ही मगर वो तू इस मामले में भी उसे टच्चा समझता है कि वो जो जनता एकत्रित हुई थी वो रामपाल के लिए हुई थी ना रामपाल को नहीं अब रामपालियों को पकड़ा जाएगा वो तुम्हारे वो ठेले वाले मित्र के लिए हुई थी एकत्रित उसके लिए तो पर्याप्त है या तुम ठेले वाले को रामपाल के समान समझते हो तो बात अलग है। यह तुम तय कर लो कि तुम्हारा वो जो ठेले वाला व्यक्ति है वो रामपाल के बराबर दमखम वाला है या उनमें अंतर है तुम तय कर लो और

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00:04:45:25 अगर और अगर यह तय हो जाए कि नहीं दोनों बराबर हैं तो आकर के उसकी भी खीर ले लो। उसके यहां तेल के समोसे हैं। वह तेल जो भी तुम्हारी वह प्रक्रिया है प्रसिद्ध न्यूज़ समाचारों वाली समझ रहे हो ना नहाने आने का क्या मामला है वह तुम देख लेना तो फिर उसका भी चालू कर दो प्रसाद ग्रहण करना अगर रामपाल और वो दोनों एक है तो वो जो संख्या बल है वो तुम्हारे उस ठेले वाले के लिए था तो तुम ऐसा एक्सपेक्ट कर रहे हो कि वहां पर संख्या बल रामपाल वाला हो ठेले वाले के लिए यानी कि रामपाल और ठेले वाला तुम्हारे लिए एक है तो बोलो फिर तुम्हारा जेल कट्टू ठेले वाला रामपाल यही बोलोगे ना क्योंकि तुम्हें वही भीड़ चाहिए ठेले वाले के लिए भी जो रामपाल के लिए होनी चाहिए। कोई अंतर तो

00:05:28:24 है नहीं। तो यह तो रहा संख्या बल का एक जवाब। अब दूसरा संख्या बल का जवाब ले लो। यह पहला जवाब भी तुम्हारे ही तुम्हारा ही जूता तुम्हारे सर पर मारा। अब दूसरा जूता भी तुम्हारा ही है। भाई वो दिखा दीजिए जरा। एक स्क्रीनशॉट मैंने शेयर किया है। ऐसे

⬜ Not used yet · 00:05:44:14 – 00:06:17:27 (0:33)

00:05:44:14 अनेक ऐसे अनेक कमेंट मेरे उसमें आ रहे हैं। तेरे ही गुरु भाइयों के। तेरे ही रामपाल के फॉलोअर्स के। तेरे ही तत्व ज्ञानियों के तत्व ज्ञानी क्यों सब तत्व ज्ञानी 15 करोड़ तत्व ज्ञानी है ना पढ़ी है ना अपनी गरिमा गीता की तू हमारी किताबें पढ़ता है अपनी तो पढ़ता नहीं होगा उसमें क्या रखा है रामपाल के नाम से छपने वाली किताबों में तुम लोगों के लिए क्या रखा है तुम्हें मालूम है उसमें गोबर है तुम्हें मालूम है उसमें तुम्हारा रामपाल की खीर है मल मूत्र इत्यादि ये सब है उसमें है ना है ना तो

00:06:17:27 देखो भाई तो ये देखो कमेंट दिखाइए इसे ऊपर करिए ऊपर वाला चित्र दिखाइए। ये क्या लिखा है? यह रामपाल का जो हमने विरोध प्रदर्शन किया है उस प्रदर्शन के विरोध में ये कमेंट आ रहा है तेरे गुरु भाई का रामपाल के तत्व ज्ञानी शिष्य का। तत्व ज्ञानी शिष्य का मतलब समझा? तत्वज्ञानी वो जो सच्चा भक्त होता है वही तत्व ज्ञानी है। अब तेरे ये गुरु भाई भगत तो है ना। पढ़ ले अपनी गरिमा गीता की। सनातन धर्म की किताबें पढ़ने से पहले राघव दास अपनी तत्व ज्ञानी की किताबें पढ़ ले जेलकट्टू की शर्म आ जाएगी और कंफ्यूज हो जाएगा पागल हो जाएगा आत्महत्या करने की सोचेगा अगर पढ़ ली तो ये क्या पढ़ लिया मैंने [हंसी] कॉमेडी शो है कॉमेडी शो तो पहले उसको पढ़ ले उसमें उसने लिखा है कि भगत वही है जो तत्व ज्ञानी है तो ये तेरे तत्व ज्ञानी अब तू भगत तो मानता है ना अपने गुरु भाइयों को ऐसे अनेक कमेंट आ रहे हैं तेरे भगत जो कि तत्वज्ञानी है तो तत्वज्ञानी है तो वह क्या लिख रहा है सत्य अकेला खड़ा होता है और मूर्खों की फौज होती है ले तू मुझसे कह रहा

00:07:32:28 है ना कि मेरे पास मेरी फौज नहीं है कम लोग थे तो फौज कहां होती है मूर्खों के पास ये भी तेरा जूता ही तेरे सर पे इसको कहते हैं मार ठीक है अकाट्य बातें होती है यहां यहां वो फरलोबाजी नहीं है बस खड़े हो गए तमाशा कर और अपने गवार अनपढ़ फॉलोअर्स को संतुष्टि दे दी। देखो भाई कुछ हुआ तो हमने यह किया। यह फरलोबाजी नहीं है यहां पे। बिल्कुल कांटे की बात है। और जिस दिन सामना होगा एक खीखी खीखी खुल जाएगी। बस हिजड़ों की तरह ये सब करो कि क्या कहते हैं? फोटो बिगाड़ के डाल दो। ये सब फोटो बिगाड़ के और सबसे बढ़िया चीज है। वीडियो बनाओ। ये सब करो। इसमें तुम करते रहो, लगे रहो, मगन रहो। मैं जड़ से उखाड़ूंगा, जमीन पर उतरूंगा। रामपाल के समर्थकों का जीना दुश्वार।

00:08:26:26 दुर्गा माता को गाली देने वाले के समर्थकों को चैन से नहीं रहने दूंगा। मैं अपने पास की बात कर रहा हूं। ठीक है? तो एक तो ये बात रही तेरा जूता तेरे ही सर। पहला वाला भी तेरा जूता तेरे ही सर और दूसरा वाला तेरे तत्व ज्ञानी भाई का तेरा जूता तेरे सर। तू तू संख्या बल ढूंढ रहा है। तू फौज ढूंढ रहा है तेरा। तत्व ज्ञानी भाई कह रहा है कि फौज तो मूर्खों की होती है। शेर अकेले खड़ा होता है। अब सुन इतने से बात नहीं बनेगी। हमारे जो सनातन भाई बहन है सनातनी हिंदुत्ववादी मनुवादी उनके लिए भी सिद्धांत दे दूं जिससे वो इस बात का उत्तर दे पाए। जुगनू और उल्लू यह तेरे भेजे में नहीं घुसेगा और तेरे तत्वज्ञानी भक्तों के लिए नहीं। यह हमारे दर्शकों के लिए हमारे जो समर्थक हैं उनके लिए सिद्धांत जुगनू और उल्लू सूर्य के प्रकाश की ओर आकर्षित नहीं होते हैं। टिमटिमाते हुए दिए की ओर आकर्षित होते हैं। है ना? मगर सूर्य की ओर आकर्षित ना होने में सूर्य के सामर्थ्य का दोष नहीं है। बल्कि जुगनू और उल्लू के असामर्थ्य का दोष है। समझ में आया कुछ? हिंदी पढ़ लियो थोड़ा सा जाकर के। ठीक है? तो जुगनू और उल्लू सूर्य के प्रकाश की ओर आकर्षित नहीं होते। तो इसका क्या मतलब हुआ कि जुगनू और उल्लू

00:09:42:04 सत्य का निर्णय करने वाले नहीं होते। प्रकाश के विषय में जुगनू और उल्लू प्रमाण नहीं होते हैं। समझ में आया? और समझ ले दुनिया में कितने लोग हैं तेरे अनुसार बोल रहा हूं। तेरी फिलॉसफी के अनुसार मूर्ख व्यक्ति मैं तो तेरे ही जूता तेरे सर पर मारूंगा। तो मुझे अपनी चीजें लाने की जरूरत ही नहीं है। ज्यादा लोग काल के काल को फॉलो कर रहे हैं कि ज्यादा लोग तेरे तत्व ज्ञानी को फॉलो कर रहे हैं? जो तत्व ज्ञानी को फॉलो नहीं कर रहा है वो काल को फॉलो कर रहा है। तो तेरा तत्व ज्ञानी बेकार हो गया। हो

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00:10:15:08 गया। तत्व ज्ञानी तत्व ज्ञानी का क्या? क्या क्या निकलता है? चलिए। तो दुनिया भर में उन लोगों की संख्या ज्यादा है जो रामपाल को फॉलो नहीं कर रहे हैं या उन लोगों की संख्या ज्यादा है जो रामपाल को फॉलो कर रहे हैं। जाहिर सी बात है भाई अगर सब समग्र रूप से देखोगे तो हिंदू ही ऐसे मिल जाएंगे जो रामपाल को फॉलो नहीं कर रहे हैं। ठीक है? और अगर उसमें इन सबको जोड़ दो नास्तिक हैं, क्रिश्चियन है, मुस्लिम है इन सब की संख्या अगर ऐड कर दो तो तुम्हारा ये जो जेल कट्टू है कहां दिखाई देगा? तो

00:10:51:25 हो गया बेकार। उड़ा खिल ली अपने तत्व ज्ञानी की। तेरा जूता तेरे सर मारूंगा मैं। इसलिए कहते हैं मत पड़ो चक्कर में। कोई नहीं है टक्कर में। ऐसे ही नहीं कहते। ठीक है? अब दूसरी बात इसने यह कही है राघव दास ने कि भाई अ मेरे पास इसका राघव दास का फोन नंबर है और इसने मुझे कई बार बुलाया है। मैं आया नहीं हूं। इसने एक बार मुझे फोन किया था और इसने फोन किया था। यह बात मुझे पता चली थी। फोन के शायद महीने भर बाद जब वो कार्यक्रम हुआ था ना इनका तत्व ज्ञानियों की किताबें जलाई गई थी। ध्यान है ना? चौराहे पे उसी चौराहे पर पुतला जला है। तो जब वह कार्यक्रम हुआ था इनका जहां से इनकी बिगिनिंग शुरू हुई थी इनके एंड की इनका नाच शुरू हुआ था इनको नचाना मदारी की तरह तो तब जब किताबें वगैरह जलाई गई उनको पैरों से कुचल कुचल के जलाया था बाय द वे वो जो थूथुन होती है ना जहां पे थूथुन छपी है ना तुम्हारे दुर्गा माता को गाली देने वाला जो बाबा है तुम्हारा उसकी थूथुन जहां छपी है वहां पे मल मूत्र लगा हुआ जो चप्पल होता है ना उसको रगड़गड़ के कुचला गया था उन फोटो को और उसको कुच कुचल कुचल के रगड़ रगड़ के ऐसे करके वो किताबें जलाई गई थी। शर्म की बात है भाई। तुम

00:12:07:03 लोगों के अनुसार तो बड़ा सम्मान है उसका। हमारे लिए सम्मान नहीं है भैया दुर्गा माता को गाली देने वाले बाबा तो उसकी यह दुर्गति हुई थी। बहुत बुरी दुर्गति हुई थी। तो वो जब किताबें जब जलाई गई थी तो इसने वो जो कार्यक्रम हुआ था जब इसके थूथून को रगड़ा गया था। वो जो किताबें यह यह जो सीन था तो जब यह रगड़ा गया था इसको तब इसके मेरे ख्याल से इसके कुछ दो चार दिन के अंतराल में ही इसका फोन आया होगा। मैं इसे नहीं जानता था। इसका फोन मेरे पास आया और इसने मुझसे यह पूछा कि भाई आपके तुम्हारे क्या-क्या या आपके कहा होगा क्या-क्या प्रश्न है। तो मैंने मुझे नहीं पता कि कौन कॉल कर रहा है। ठीक है? तो मैंने और दिन भर में 50 लोग आते हैं। 50 लोग फोन कर रहे थे उस समय दिन भर में। तो मैंने

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00:12:59:20 कहा भाई मेरे प्रश्न जो भी हैं वीडियोस में डले हुए हैं उनमें देख लो। अच्छा मुझे अभी तक भी नहीं मालूम है कि ये कोई ऑथेंटिक व्यक्ति है रामपाल की ओर से। रामपाल ने इसका नाम नहीं लिया अभी तक। ठीक है? तो मुझे यह भी नहीं पता है कि सतलोक आश्रम से ऑथेंटिक कोई व्यक्ति है। ठीक?

00:13:14:28 तो अब इस अच्छा इसने उस समय यह भी नहीं कहा कि मैं ऑथेंटिक हूं। यही हो कि मैं ऑथेंटिक हूं कह दे। तो एक नॉर्मल व्यक्ति जो दिन भर में चिलवा भगत फोन किया करते हैं। वैसा ही एक चिलवा भगत ये था। आज भी है। मगर उनकी ओर से यह महत्वपूर्ण है। यह इसने नहीं बताया और सीधे इसने कहा कि कितने कौन-कौन से प्रश्न तो मैंने कहा भाई मैंने जो भी मेरे प्रश्न है वह वहां डले हुए हैं। वह आप देख लो। और उसके बाद जो है चर्चा करने बैठ जाओ। तो बाद में यह एमपी खबर एमपी खबर फास्ट वाले पर कोई मैंने इसकी वह देखी थी चर्चा जिसमें ये कह रहा था कि मैंने उससे पूछा कौन-कौन से प्रश्न है तो उसने प्रश्न ही नहीं बताए। अरे भाई पहले तू बता तो सही कि तू किस उद्देश्य से आया है और तू सतलोक आ तेरे जो चिलवा भगत लोग हैं ये देखा है सूखे चेहरे वाले छुआारे जैसे चेहरे के कितने लोग ये दिन भर फोन करते हैं। एक एक को मैं प्रश्न बताता घूमूं। तो यह तो यह रही बात। अब मैंने इसका कभी भी वह नंबर सेव नहीं किया था राघव का। ठीक है? इसने अलग से अच्छा इस इसने मुझे नाम भी नहीं बताया। शायद बताया हो तो शायद मैंने ध्यान नहीं दिया हो। राघव अब क्या है कि इसने मेरा कभी फॉर्म भरा होगा। यह वाला चर्चा चर्चा में आने वाला। राघव दास की बात बता रहा हूं। इसने कभी फॉर्म भरा होगा। मुझे नहीं मालूम यह वही व्यक्ति है जो मेरे पास आया तो मैंने उसको प्रश्न नहीं बताया। फिर

00:14:30:00 वह बाद में एमपी कवर फास्ट पे जाके बोल रहा है कि मुझे प्रश्न नहीं बताया।

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00:14:34:02 उसने अपने प्रश्न नहीं बताए कौन-कौन सी चीजों पर आपत्ति है। हालांकि हालांकि अगर यह जो 14 प्रश्न लिए फिरते हैं इसके अलावा ये दूसरे प्रश्न करना बंद कर दें जो 14 प्रश्न लेकर के घूमते हैं 14 है कि 15 हैं या फिर ये इन्होंने लिस्ट दी आज तक इतने ही प्रश्न ये सब तो अलग बातें हो गई। मगर ना तो इसकी पहचान मुझे वहां नोट हुई और जब यह वहां पर आया था एमपी खबर फास्ट वाले पर तो जब मैंने इसका देखा कि यह व्यक्ति थोड़ा सा मेरे ख्याल से थोड़ा इंटेलेक्चुअल लग रहा है। अन्य जो छुआारे आते हैं चिलवा भगत उनकी अपेक्षाकृत यह थोड़ा इंटेलेक्चुअल व्यक्ति दिख रहा है। तो मैंने जब इसका वो देखा लाइव में उसका वो कट कि एक व्यक्ति ये कह रहा है कि मैंने शिवश नारायण द्विवेदी को फोन मिलाया उससे पूछा कि आपको रामपाल के चीजों में कौन-कौन सी चीजों में आपत्ति है तो उसने बताने से मना कर दिया। जब इसने ये कहा तो मैंने एमपी खबर फास्ट वाले को फोन मिलाया। हालांकि उससे मेरा वो हो चुका था मुंह वो सब कि एमपी खबर फास्ट वाले ने कहा कि ग्वालियर आ जाओ। उसके बाद उसने मुकर गया अपनी बात से कहे। यह सब हो चुका है। उसके बाद बाद भी जब मैंने देखा कि एक व्यक्ति ऐसा है जिससे बात हो सकती है तो मैंने फोन मिलाया एमपी कवर फास्ट वाले को और मैंने उससे कहा कि आप तुम्हारी लाइव में एक व्यक्ति आया था जो

00:15:49:08 ऐसा ऐसा कह रहा था तुम मुझे उसका नंबर दो। मैं उसको प्रश्न बताऊंगा। यानी कि अभी तक भी मेरी जानकारी में नहीं है कि राघव दास का नंबर मेरे पास है। क्योंकि वह जो फोन आया था वह आया गया। 50 लोगों का आता है। मैं सबका नंबर सेव नहीं करता हूं।

00:16:03:06 अब राघव दास ने एक फॉर्म भी भरा हुआ है। अब वह कब भरा है वह मुझे नहीं पता है। मगर राघव दास नाम से फॉर्म मेरे पास भरा हुआ है। मुझे यह नहीं मालूम था कि यही इसी का ही है। और वो राघव दास नाम से नहीं है वो फॉर्म। वो फॉर्म भरा हुआ है राघव मिश्रा के नाम से।

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00:16:20:16 ठीक है? अब क्या होता है कि आज इस व्यक्ति ने ये कहा। मतलब यह सब पूरी कहानी डिटेल में क्यों बता रहा हूं? क्योंकि तुम मेरे लिए एक नगण्य व्यक्ति हो। राघव दास। तुम्हारी गिनती नहीं है मेरी दृष्टि में। एक नगण्य व्यक्ति तुम मेरी को जान तुम मुझे जानते हो मैं तुम्हें नहीं जानता हूं समझ रहे हो फिर भी मैंने जब यह देखा कि तुमने मुझसे बात करने की प्रयास किया और मैंने तुम्हें यथोचित उत्तर नहीं दिया तुमको उस भीड़ में शामिल समझा जो छुआरों की भीड़ थी उसमें शामिल समझा तो मुझे लगा कि नहीं इससे बात करनी चाहिए व्यक्ति इंटेलेक्चुअल है तो मैंने एमपी खबर फास्ट वाले से पूछ लेना उससे मैंने फोन करके पूछा था तुम्हारा नंबर वो रिकॉर्डिंग भी मेरे पास मिल जाएगी ढूंढूंगा ड्राइव में पड़ी होगी अब यह

00:17:05:20 सब बातें होने के बाद में मुझे आज तक नहीं पता था कि राघव दास का नंबर मेरे पास है या नहीं। मगर मेरा तो नंबर सार्वजनिक है ना राघव दास और तूने कितनी बार बुलाया है मुझे लाइव में बताओ कितना झूठ बोलेगा अपने गलों को यार शर्म नहीं आती क्या

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00:17:21:25 इसने आज बोला मैंने कई बार उसे लाइव में बुलाया भाई तूने उस दिन भी लाइव में नहीं बुलाया था तूने कहा था प्रश्न कितने हैं प्रश्न मैंने बताया नहीं फोन कट हो गया यही हुआ था ना उस दिन भी तूने लाइव में नहीं बुलाया था कि मैं तुझे हमारे ऑफिशियल चैनल उस समय तो तू कहता तो मैं आ भी जाता ये जो तेरा ऐसे न्यूज़ व्यूज वाले पे अगर तू बुलाता तो मैं आ जाता। मगर उस समय भी तूने यह नहीं बताया कि तू कहां पर बुला रहा है। लाइव में बुला रहा है कि नहीं बुला रहा है। तो यह सारी कहानी अब ये

00:17:51:20 आज ये बोला कल के वीडियो में शायद कल बोलता है कि भाई वो हमने उसे कई बार बुलाया। उसके पास मेरा नंबर है। अरे जो पुरुषत्व है ना तो अपना नंबर सार्वजनिक कर पहले कर पहली बात तो कि मुझे जो है तेरा नंबर ढूंढना ना पड़े। तुझसे किसने कह दिया कि मैंने तेरा नंबर सेव कर रखा है। एमपी खबर फास्ट वाले से नंबर मांगा था तेरा। पूछ लेना उससे। वो जो ऊंचा सुनता है ऐ करके बोलता है ना ऐसे। उससे पूछ लेना अपने बहरे मित्र से कि मैंने नंबर मांगा था कि नहीं? खैर उसने मुझे नंबर नहीं दिया। बीच में मेरे मन में यह बात हमेशा अटकी रही कि राघव दास का फोन आया था और मुझसे बात नहीं कर पाए। ठीक है? अब बात आती है कि आज इसने जब यह बोला कि इसके पास मेरा नंबर है। हम लोग कई बार लाइव पे बुला चुके हैं। तो आज मैंने अपने में देखा क्या मेरे पास राघव नाम से कोई नंबर सेव है? तो मेरे पास राघव नाम से नंबर मुझे मिल गया सेव। अब वह देखिए आप किस नाम से मेरे पास सेव है। हालांकि यह सब चीजें

00:19:07:06 प्रामाणिक नहीं होती है। किस नाम से है। यह देखिए इसको कैसे दिखाऊं कि यह जो है इसका नंबर ना दिखाई दे राघव दास का। अब यही तो बात है। पुरुषत्व होता तुम्हारे अंदर तो तुम अपना नंबर खुद सार्वजनिक करते तो मैं लोगों को दिखा पाता कि यह राघव दास का नंबर है। यह मेरे पास ऐसे उंगली रख के दिखा देता हूं।

⬜ Not used yet · 00:19:34:16 – 00:19:55:03 (0:21)

00:19:34:16 ये देखिए इसको जूम जूम करोगे क्या मेरा वाला? ये

00:19:55:03 अब आपको नहीं दिखाई दे रहा तो बात अलग है। मगर इसमें लिखा हुआ है एफ आई डी एंड टेम राघव मिश्रा। मिश्रा मैं क्यों लिख रहा हूं? क्योंकि इसने इस दोगले व्यक्ति ने जब फॉर्म भरा होगा मेरा जो चर्चा करने वाले फॉर्म होते हैं ना तो उसमें अपने आप को राघव दास नहीं बताएंगे। वहां पर अपना भोकाल दिखाएंगे। मिश्रा हैं। हां और वैसे मिश्रा कौन है? ब्राह्मण कौन है? जो सतयुग के राक्षस हैं। वो कलयुग में ब्राह्मण है। वो

⬜ Not used yet · 00:20:26:16 – 00:22:22:16 (1:56)

00:20:26:16 बात अलग है कि वहां पर यह भी लिखा है कि कलयुग में जो है सारी स्त्रियां जो है चरित्रहीन हो जाएंगी। तो मुझे लगता है कि यह अपने घर की स्त्रियों को बबिता के समान ही समझते होंगे। जो बबिता इत्यादि रामपाल के साथ जो मामला चला था वैसा ही समझते होंगे। क्योंकि शास्त्र तो यह कह रहा है कि ऐसा हो जाएगा। ऐसा एक दिन आएगा इस तरह का वातावरण होने लगेगा। उसकी रोकथाम करिए। मगर यह लोग कह रहे हैं नहीं नहीं कलयुग में सभी ब्राह्मण जो है राक्षस हैं। इस तरह की बातें तो राक्षस ही ब्राह्मण बनके राक्षस ही ब्राह्मण होंगे। यह नहीं लिखा है। राक्षस ब्राह्मण बनकर जन्म लेंगे। यह लिखा है। केवल सारे ब्राह्मण राक्षस होंगे। यह नहीं लिखा है। मगर अगर ऐसी बात है तो यह भी लिखा है भविष्य की घटनाओं के लिए कि कलयुग में स्त्रियां चरित्रहीन हो जाएंगी। पराए पुरुषों से बातें किया करेंगी। पराए पुरुषों से ज्यादा चिपकने की कोशिश किया करेंगी। ये सब भी भविष्यवाणियां है। तो ऐसी स्त्रियां वर्तमान में है ना और पुरुष भी हो जाएंगे। ऐसे दिन भर वो काम काम में ये किया करेंगे वो किया करेंगे। हालांकि रामपाल को देखें तो ये सारी चीजें लागू हो जाती हैं। रामपाल और बबता इत्यादि नाम सुनते हैं तो ये सारी चीजें लगता है कि वो सब चीजें चरितार्थ हो रही हैं इन व्यक्तित्वों पर। परंतु

00:21:41:27 परंतु वहां पर यह तो नहीं माना जा सकता। हम तो ये नहीं मानते कि भाई प्रत्येक स्त्री पुरुष हो जाएगा। मगर तुम्हारे अनुसार जिस तरह से तुमने सभी ब्राह्मणों को राक्षस मान लिया तो तुम्हारे अनुसार तुम्हें सभी स्त्रियों को वैसे ही मानना पड़ेगा। चरित्रहीन सभी पुरुषों को वैसा मानना पड़ेगा। तो तुम स्वयं भी वही हो गए। दिन भर देखने वाले ताक में रहने वाले कहां मिले जो है हमारे को अभीष्ट फल की प्राप्ति हो और वही तुम्हारे घर के लोग भी वही हुए। तुम्हारे साथ में रहने वाली स्त्रियों पर भी तुमने प्रश्न चिन्ह उठा दिया और तुमने रामपाल पर भी प्रश्न चिन्ह उठा दिया। सब पर उठा दिया। ठीक। मगर फॉर्म भरते समय राघव दास नहीं राघव मिश्रा। हर

00:22:22:16 बात को अपनी को [हंसी] काटते हो। हंसी आती है तुम्हारे तरस आता है तुम लोगों

⬜ Not used yet · 00:22:27:13 – 00:23:26:21 (0:59)

00:22:27:13 पर तुम्हारी बेवकूफियों पर और तुम बनते हो कि हम चर्चा करेंगे अगर तेरी सामर्थ्य होती ना तू नपुंसक नपुंसकता का प्रदर्शन ना करता भाई तू अपना नंबर प्रोवाइड कराता ना जिससे कि आज मैं आज मैं इस पर दिखा पाता कि मैंने तुझे कितने कॉल किए इस नंबर पर मैंने दिन में तीन कॉल कर लिए जब मुझे मिल गया कि राघव अच्छा एक चीज और है पहाड़ी जी के पास इसका नंबर था कभी पहाड़ी जी ने मुझे जिक्र किया था इस बात का कि राघव दास का नंबर है। तो पहाड़ी जी के पास आज मुझे याद आया अरे पहाड़ी जी ने कहा था उनके पास नंबर तो ये तो मैंने जब राघव नाम से ढूंढा अपने में तो राघव नाम से नाम निकल आया रामपाल से जुड़ा हुआ एक व्यक्ति जिसने फॉर्म भरा है। मगर वो राघव मिश्रा तो मैंने पहाड़ी जी से एक नंबर मांगा कि आपने कभी एक बार कहा था राघवदास का आपके पास नंबर है। उन्होंने भेजा। वो नंबर से मैंने यह नंबर मैच किया। कंफर्म हो गया कि हां यही है। पहाड़ी जी भी राघवदास का जो नंबर दे रहे हैं वही है और यह भी वही है। तो यह ऐसा दोगला व्यक्ति कि

00:23:26:21 एक तरफ ये कलयुग के ब्राह्मणों को राक्षस कहते हैं। फिर दूसरी बात फॉर्म भरते टाइम अपने आप को मिश्रा कहते हैं। और तीसरी बात कि ये जब फोन करते हैं तो बताते नहीं है कि मैं कौन बोल रहा हूं। मैं किस लिए मैंने फोन किया है। और उसके बाद इतने दिनों के बाद आज भी इस व्यक्ति ने जब लाइव के लिए मुझे अपनी जनता को खुश करने के लिए बातें बोली हैं कि मैंने उसे बुलाया है, यह किया है, लस्सी पी है, खीर पी है या वो समोसे वाले के समोसे खाऊंगा ना पता नहीं किस तरह के ये लोग खाते पीते हैं वो तो खैर अलग बात है। तो यह सब बात करते हुए भी इस व्यक्ति ने अपना नंबर ना तो सार्वजनिक किया और ना ही मुझे पर्सनल मैसेज भेज दिया। चलो भाई तुम्हें कायर हो या फिर ऐसा कुछ नपुंसकता का प्रदर्शन करना है। बचपन में माता जी ने ऐसा दूध नहीं पिलाया जो तुम्हें पोषण पोषक तत्व प्राप्त हो पाए हो तो चलो भाई प्राइवेटिवली है ना प्राइवेट तरीके से व्यक्तिगत रूप से तुम मुझे नंबर भेज देते यह मेरा नंबर है अपने आप ही मुंगेरी लाल के हसीन सपने कि मेरा नंबर शिवश नारायण द्विवेदी के पास नहीं शिवश नारायण द्विवेदी के पास तुम्हारी जो पहचान है यह थल मीडिया पर

00:24:42:16 इस पहचान के द्वारा आज से पहले तक शिवश नारायण द्विवेदी के पास तेरा नंबर नहीं था। आज मुझे वो नंबर मिला जब मैंने राघव टाइप किया वो भी किस नाम से मिला? राघव मिश्रा के नाम से। तो ये तो तुम्हारी षड्यंत्र वाली कहानियां है। तुम दोगलों से क्या अपेक्षा कर सकते हैं? तो इतना सब दोगलापन करने के बाद ये व्यक्ति कह रहा है कि अब ये आएगा नहीं। क्यों आऊं भाई? पांच महिला और एक बच्चे की हत्या मेरे पक्ष पर चल रही है। हत्या का आरोप मेरे पक्ष पर है कि तेरे पक्ष पर है? 12 साल जेल काट के तेरा बाबा आया है कि मेरा आया है? अपराधी अपराधी तुम लोग घोषित हो कि मैं घोषित हूं?

00:25:27:06 क्यों आऊं भाई तेरे यहां पर? दोगलापन हर पन्ने पर हर बात पर तुम्हारी दिख रहा है। टपक रहा है दोगलापन तुम्हारे मुंह से। चरित्रहीनता तुम्हारे मुंह से। व्यभचार तुम्हारे मुंह से टपक रहा है। मैं तुम्हारे स्थान पर आ जाऊं। झूठ की सीमा नहीं है जहां पर वहां मैं चला जाऊं। क्यों? अच्छा ये मेरे को ही तुम्हारे चलो ये तो एक रही कि तुम लोग तुम लोगों का चरित्र जो है समाज में बदनाम है। ये तो एक इसको अलग हटा दो। न्यूट्रल हो जाते हैं। तो बेवकूफ व्यक्ति ये कैसे तय होगा कि मुझे ही तेरे यहां आना है। ये कैसे तय होगा? न्यूट्रल जगह क्यों नहीं रखेगा तू? बोल नानी याद आती है ना? और आज तूने मेरा फोन क्यों नहीं उठाया? तुझे तो पता नहीं है कि मैं तेरे यहां आने वाला हूं कि नहीं आने वाला हूं। फोन क्यों नहीं उठाया? भाई आऊंगा तो तेरे से संपर्क करूंगा ना कि तेरे चैनल पे आना है, कब आना है, कहां आना है, कैसे आना है? तू तूने तो संपर्क किया नहीं। तो तेरे से संपर्क करूंगा ना। तो कैसे करूंगा? फोन से करूंगा। तो फोन कर रहा हूं तो तू उठा नहीं रहा। अभी भी डायल कर लेते हैं। देख लो भैया

00:26:39:06 देखते हैं उठाता है कि नहीं। राघव राघव मिश्रा बनेंगे। मिश्रा यह देखो। यह जा रहा है इस पर। फोन चल रहा है। फोन कर रहा हूं इस समय।

00:27:12:28 अब देखते हैं कितना बड़ा पौरुष वाला है ये। आप जिस व्यक्ति एक बार और मिलाते हैं। हो सकता है बिजी हो। कृपया खुद शेर का बच्चा एक ही अच्छा। ठीक है। केवल बोलते नहीं है। तांडव नृत्य करके दिखाते हैं। समझे? यह केवल बातों के शेर नहीं है। यह देखो दोबारा मिला रहा हूं। और किसी को नंबर चाहिए हो तो व्यक्तिगत रूप से जो है उससे पूछ लेना। नंबर भी प्रोवाइड करा दूंगा। और प्रामाणिक रूप से राघव जो है वो अपने फोन की कॉल डिटेल डाल दे आज के दिन की। प्रामाणिक वेरीिफाइड

00:28:04:02 ठीक है यह लग रहा है तुम्हारे राघव को नंबर जो भागा भागा फिर रहा है शिवश नारायण द्विवेदी ठीक है क्यों भागा भागा फिर रहा है उसको मालूम है गवरे तो पागल बन जाएंगे मगर शिवश नारायण द्विवेदी के सामने तो कोई को कॉल कर रही है वह उत्तर नहीं दे रहा है अब इस व्यक्ति को मैंने कितने ने कॉल कर ली अभी तक सुबह से जब से मैंने वो बात जानी कि भाई यह जो है इसका नंबर मेरे पास है ये कह रहा है तो ऐसा तो नहीं कि किसी नाम से इसका नंबर सेव हो मेरे पास अब देखो सुबह से चार दो अभी हो गई और दो पहले हो चुकी है ये देखो चार कॉल हो चुकी है बंदे को दिन भर में टाइम नहीं मिला शिवश नारायण द्विवेदी से बात करने का केवल तुम जैसे गवर्नरों को बेवकूफ खूब बनाने के लिए ये लोग ठायएं ठायएं करते हैं। ठाय ठायएं ठायएं दुनिया की ठाय ठायएं ठायएं और वास्तव में जब किसी मनुवादी से शंकराचार्य के सैनिक से सामना करने की बात आती है तो पुई पुई पुई पुई

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00:29:16:24 यह स्थिति है इनकी। ठीक है। अरे भाई तेरा नंबर तूने सार्वजनिक नहीं किया हुआ है। तुझे पता नहीं है कि मैंने तेरा नंबर मैं तुझे बेनिफिट ऑफ डाउट दे रहा हूं। मैं तुझे बेनिफिट ऑफ डाउट दे रहा हूं कि तुझे ऐसा लगता है कि तूने जब जब मुझे एक बार जब तूने मुझे फोन किया मैं तुझे पहचान गया। मैं नहीं पहचाना। है कौन तू? क्या औकात है तेरी? हैं? तू पहचानता है मुझे। तू मैंने बनाया क्या राघव दास से तेरे ऊपर वीडियो कभी बता तू पहचानता है मुझे तूने फोन किया है मुझे मेरा नंबर सार्वजनिक है तो तूने कैसे सोच लिया अगर तू यह सोच भी रहा है कि मैं तुझे पहचानता हूं बेनिफिट ऑफ डाउट दुर्जनोष न्याय ये सब भाषा वैसे तुम लोगों के समझ में आने वाली है नहीं अपने लोगों के लिए बोल रहा हूं दुर्जनोष न्याय से बोल रहा हूं कि तू यह सोच रहा था कि मैं तुझे पहचानता हूं हालांकि तुझे सोचना नहीं चाहिए था सोचना भी घचूपना है मगर तूने अगर यह सोचा भी तो तूने यह क्यों सोचा कि मैंने तेरा उस एक फोन नंबर को एक बार कॉल करने को मैंने सेव कर लिया और तूने यह क्यों सोचा कि तू जब अपने आप को राघव मिश्रा लिखेगा राघवदास नहीं लिखेगा तो मैं तुझे राघवदास समझ लूंगा।

00:30:32:19 मतलब खुद जानबूझ के अपना परिचय छिप करके काम कर रहे हैं। फिर भी यह चाहते हैं कि सामने वाला इसका परिचय समझ ले और अगर वो ना समझ पाए तो ये लोगों को जाकर के ये झूठ बोलेंगे कि उसके पास मेरा नंबर है मगर उसने मुझसे संपर्क नहीं किया। ये तो रही संपर्क करने ना करने की बात।

00:30:50:07 अब ये बता तेरे प्लेटफार्म पे क्यों आए? भाई मुकदमे मेरे प्लेटफार्म पे चल रहे हैं कि तेरे पे चल रहे हैं? तेरे पर विश्वास क्यों करे कोई? तुम्हारी कोई कोई सम्मान है क्या समाज में तुम्हारा? अपने ही लोगों को खरीद खराब के और जो है पाइप बांट करके पैसा खर्चा करके तुम भीड़ कमाते हो। ये है तुम्हारी स्थिति। थूकते हैं लोग तुम्हारी फोटो लगा के। जूते से रगड़ते हैं। जिसको तुम मानते हो उसको हम जिसे मानते हो उसको तुम भी जूते से नहीं रगड़ पाओगे। और रगड़ दो। मैं राम को मानता हूं। रगड़ फोटो पैर से। पता चल जाएगा अभी। मालूम है तुम लोगों की आस्था नहीं है। दिखावा करते हो मगर रगड़ तो तुम भी नहीं पाओगे ना। तुम्हारी चीजों को लोग रगड़ रहे हैं। समझ में आया? यह अंतर है। इस अंतर को भूलो मत। बताया है ना कई बार वो बड़ा वाला जानवर है ना हाथी वो हम हैं। और वो जो होते हैं ना वो समझ लेना वो तुम हो। तो पानी में रह के मगर से बैर नहीं करने का। ह औकात ये सब शब्द ये सब तुम्हारे ऊपर शोभा नहीं देते हैं। वही दबे कुचले टाइप के व्यक्ति हो उतने में ही अपना कर लो

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00:32:03:20 और कर रहे थे। तुम्हारे लोगों ने मुझे उकसा दिया कि मैं इस हद तक इस अभियान को खड़ा कर दूं। और जैसे जैसे उस लड़ाई में मैं तुम्हें जानता गया तो मेरे अंदर तुम्हारे तंत्र को नष्ट करने की भावना और पुष्ट होती गई। मैं तो इतना जानता ही नहीं था कि तुमने इतना सब लिख रखा है। जैसे जैसे विरोध हुआ चीजें और सामने आई और सामने आई तो पता चला ये तो भाई बिल्कुल ही अलग चीजें हैं यहां तो अब तो युद्ध स्तर पर काम करना पड़ेगा। हो रहा है और युद्ध स्तर पर सोच लेना समझ लेना। तुम्हारा अंत निकट है तुम्हारे इस फर्जी तंत्र का। यह समझ लो और उसकी वजह होगी एक लड़ाई जो चालू हुई थी पिछले साल जब किताबें जलाई गई थी वहां से तुम्हारा अंत सुनिश्चित हो चुका है। ठीक है जो तुमने ये सब किया है ना

00:32:57:08 हमारे भगवान का अपमान हमारे आराध्यों का अपमान जिन जिन जिन चीजों में हमारी आस्था है त्यहार में आस्था है तो त्यहार का मजाक ग्रंथ में आस्था है तो ग्रंथ का मजाक दो कौड़ी के लोगों को तुम लोग बेवकूफ बनाया करते हो। पाखंड नहीं है आश्रम में। पाखंड नहीं है। कोई पत्रकार जाता है वह आकर के कहता है पाखंड नहीं है आश्रम में। भागे भागे फिरते हैं। फोन नहीं उठाते हैं। मालूम है एकदम चांद तारे नजर आने लगेंगे। पाखंड का हिंदी अर्थ क्या होता है? पढ़ा है कभी? निरुक्त से जाना है। पाखंड पा का [हंसी] मतलब वेद यह बाद में प्रचलित हुआ है कि पाखंडी किसी ढोंगी को कहा जाता है। किसी बहरूपियों को कहा जाता है। पाखंडी का वास्तविक अर्थ है वेद का खंडन करने वाला। अब वेद में लिखा है जन्म और मरण से मुक्ति वेद के बाहर किसी भी चीज से नहीं हो सकती। वेद से ही होगी। और तू और तेरा बाबा ये कहते फिरते हो कि वेद से मुक्ति नहीं होगी। हर पन्ने पर लिखा है तो यही पाखंड सिद्ध हो गया। खत्म।

00:34:12:00 सड़े हुए लोगों को समूह बना के चले आएंगे। पाखंड नहीं है। ये नहीं है। खत्म। यजुर्वेद में लिखा हुआ है। श्वेता शत्रोपनिषद में लिखा हुआ है। वेदों के अलावा वेदों के बाहर कोई मार्ग नहीं है मुक्ति का। ले। अब यदि तुमने कह दिया वेदों के बाहर है मुक्ति का मार्ग। ठीक है वेद में नहीं है मुक्ति का मार्ग लिखा है ना हर पन्ने पर यही पाखंड है क्योंकि वेद खुद कह रहे हैं इसी में है मुक्ति का मार्ग हो गया खत्म कुछ नहीं बाकी पाखंड सिद्ध करने के लिए जिस दिन सामना होगा ये सब खीखी खूख ये सब जो ड्रामेबाजी है ना जो गवर्नरों के लिए बनाते हो ना वीडियोस सब अकल ठिकाने आ जाएगी

00:34:59:15 इसको कहते हैं मार तेरा ही जूता तेरे सर। ठीक है? यहां अकाट्य बातें होती है। ऐसी वैसी बातें नहीं होती। तो भाई इसके [गला साफ़ करने की आवाज़] आगे इन्होंने जो अपने वीडियो में वही पुराना तमाशा के यहां देवी भागवत में ये लिखा है। जबकि इनका जो आका है वो जेलकट्टू जिनका प्रसाद लोग खाते हैं। ये वो आका कहता है कि हम पुराण को नहीं मानते। फिर वो फिर वह देवी देवताओं की बुराई करने के लिए पुराणों का अपना अर्थ निकालते हुए पुराणों को मानने भी लगता है। क्यों भाई वेद को मानना केवल गीता को मानना केवल फिर पुराण क्यों ले आता है? मतलब उससे यदि कोई हमारे पक्ष की चीज निकल रही होगी तो हम पुराण को नहीं मानते। और उससे यदि कोई हमारे धर्म के विरुद्ध चीज निकल रही होगी तो हम पुराण को मानते हैं। वो भी तब जब तुम अपना मनगढ़ंत अर्थ करो। यह तो तुम्हारा दोगलापन है और तुम बताते हो कि तुम्हारे साथ चर्चा की जाए। तुम्हारे सेंटर आए जाए। हैं क्या-क्या हुआ था सेंटर में? किसे कहते हैं व्यभचार? जहां झूठ बोला जाता। झूठ बोलना भी व्यभचार है। तुम्हारे ऐसे गधे मित्रगण

00:36:14:24 है। वो नोटिस भेज रहे हैं व्यभचार के अर्थ शब्द पे। गलत आचरण भी व्यभचार है। ठीक है? जो नहीं करना है वह करना व्यभचार है। तुम्हारे यहां पर घोषित है कानून के द्वारा उन्हीं कानून वालों से उनहीं प्रशासनिक लोगों से तुम आज अपने क्रेडिट लेते हो कि बाबा का इतना सम्मान हुआ। बाबा का यह सम्मान हुआ। अरे यह भी तो बता कोर्ट ने कहा है कि इसको जो है इतनी सजा होनी चाहिए। यह बात भी तो हाथी पर चढ़ के बताओ। कि बाबा का इतना अपमान हुआ। यह कौन बताएगा?

00:36:51:01 यह कोई नहीं बताएगा। वह अपने अनाकोंडा वाले पाइप लोगों को देते रहो। जब तक वह पाइप देते रहोगे तब तक वह लोग तुम्हारे हैं। ठीक है? पैसे से जो चीजें खरीदी जाती हैं उनकी कोई आयु नहीं होती मेरे भाई। वह पैसे के साथ साथ ही जाती हैं। ठोस चीजें होती है ना वह सिद्धांत से आती हैं। ठोस लोग सिद्धांत से तुम्हारे साथ खड़े होते हैं। पैसों से जिनको तुम अपने साथ लेकर आते हो ना वो बस वैसे ही होते हैं। पैसे पैसे के साथ आएंगे। पैसे के साथ जाएंगे और पैसे सदा रहने नहीं वाले। ये तो तुम्हारे बाबा ने भी माना है। तभी तो मोक्ष ढूंढ रहे हो। इतना तो तुम भी मानते हो या यहां पे भी कुगत कर दोगे। खैर अब इन्होंने आगे जो है फिर से कहा है कि भैया वह ब्रह्मा विष्णु महेश को जो है सिद्ध कर दे भगवान गुणातीत सिद्ध कर दे गुणों से परे सिद्ध कर दे तो भाई मैं एक दो चीजें पढूंगा क्योंकि मैं 50 बार बता चुका हूं 50 बार ठीक है

00:37:56:04 [गला साफ़ करने की आवाज़] एक दो चीजें बता देता हूं नारायण की शिवजी बोले ऊपर ऊपर जो ब्रह्मा 261 नंबर पेज पे हम इसमें यहां देखिएगा हा दिखाओ शिवजी बोले शिवजी बोले ऊपर ऊपर जो ब्रह्मा जी बोल रहे है उसको नहीं दिखाओगे ब्रह्मा जी भी तो कुछ बोल रहे होंगे तब ना शिवजी ने कुछ बोला है ऐसी आधी अधूरी व्याख्या करोगे क्या शास्त्र पड़ेगा रे तू ब्रह्मा और शिव का भगवती की स्तुति करना यहां शिवजी बोले शिवजी भगवान क्या बोले आपके प्रभाव से पारद भूत हुए तथा उसके बाद अबे पहले बोलना तो सीख लिख ले पादुरभूत नहीं होता प्रादुर्भूत होता है मतलब पढ़ना भी नहीं आता ऐसे अनपढ़ गवार है और ये देंगे शास्त्रों का व्याख्या ये देंगे शास्त्रों का ज्ञान

00:39:12:07 ना अनपढ़ गवार भी आपसे उत्पन्न हुए एक और एक और प्रादुर्भ को भगवान क्या बोले के प्रभाव से पारदुभूत हुए हुए देखो मतलब गवारों को हिंदी बोलना भी नहीं आ रहा संस्कृत तो बहुत दूर की बात है तथा उसके बाद ब्रह्मा जी भी आपसे उत्पन्न हुए। कौन बोल रहे हैं शिव जी? ये शिव जी बोलते हुए आ रहे है इधर इधर संस्कृत है। तुमको जब हिंदी नहीं पढ़नी आ रही तो तुमको क्या लगता है तुम सही अर्थ कर लोगे? हिंदी है। 261 नंबर पेज पे इसमें यहां देखिएगा। हां दिखाओ। शिवजी बोले। शिवजी बोले। ऊपर ऊपर जो ब्रह्मा जी बोल रहे है उसको नहीं दिखाओगे। ब्रह्मा जी भी तो कुछ बोल रहे होंगे तब ना शिवजी ने कुछ बोला है। ऐसी आधी अधूरी व्याख्या करोगे। क्या शास्त्र पड़ेगा रे तू? ब्रह्मा और शिव का भगवती की स्तुति करना है। तो यहां शिव जी ये तो बढ़िया कॉमेडी आपने दिखा दी कि सबसे पहली बात अब इन्होंने आगे क्या है कि जो दुर्गा माता के बलात्कार का जो मामला है कि उसने बोला है दुर्गा माता का बलात्कार तो अब तुम लोग सबसे पहले क्या करते हो दुर्गा माता के संबंध में इस बात को सिद्ध करने के लिए सबसे पहला शास्त्र कौन सा खोलते

00:40:27:10 हैं ये कबीर सागर अब कबीर सागर कौन से वैदिक वांगमय से प्रमाणित है कि कबीर सागर जो हमारा ग्रंथ है वो तो तुम कहते हो पांचवा वेद या सूक्ष्म वेद जो कहा गया है वो हमारे स्मृति ग्रंथों को कहा गया इतिहास पुराण महाभारत इत्यादि को कहा गया है छंद उपनिषद से मैंने प्रमाण दे दिया है ये तो तुम कहते हो ना कि सूक्ष्म सूक्ष्म फूहड़ कहीं के यही सूक्ष्म पादुरभूत इनको वो खीर वाले टाइम की वो सुगंध आती होगी जो एक सुगंध होती होगी खीर में मिश्रित हो के आती होगी क्योंकि क्योंकि वो जो मीडिया खबरों के अनुसार वो जो है पूरे शरीर से बह के आती है वो जो दूध तो वो जो मलमूत्र के जो द्वार होते हैं वहां से भी निकल के आता है। उसके बाद वो खीर बनती है मीडिया खबरों के अनुसार तो उस ऐसी बनी हुई खीर से जो महक आएगी तो वहां से वो वो बैठ जाएगा तो इनको जो है प्रादुर प्रादुर्भत भी प्रादुर्भाव या प्रादुर्भूत उसको वही वो भी इन्हें जो पादुरभूत दिखेगा पादुभूत इसीलिए बोल रहा है पादुभूत पादुभूत वो दिमाग झनझनाया हुआ है ना एक मेरे मित्र के पास एक वो था कुत्ता स्ान बरसात

00:41:42:24 के दिनों में उसको एक बार कूलर का करंट लग गया। चिपक गया वह उससे बहुत वफादार था। पर जब वो करंट वो कूलर के करंट से बच के वापस आया तो वो पहले तो आसमान में भूके फिर अपने मालिक पे भोंके सब पर भोंके। तो करंट से क्या होता है? जब हम ऐसी किसी हादसे से गुजर के आते हैं तो दिमाग झनझना जाता है। काम करना बंद कर देता है। उसी तरीके से यह भाई इतनी बढ़िया इतनी जो है ऐसी जो इनके बाबा जी की जेलधाम की नहा वह वाली खीर मीडिया खबरों खबरों के अनुसार शरीर से होते हुए आ रहा है दूध मल मूत्र के द्वारों से बहते हुए आ रहा है दूध हां और उस दूध से बनी हुई यदि सामग्री ग्रहण की हो तो ऐसे लोगों का फिर जब दिमाग झनझनाया हुआ मिल रहा है तो उससे सिद्ध हो रहा है कि ऐसी खीर वहां मिली थी जो मीडिया खबरें ठीक बता रही है ये तो तुम यही प्रकट कर रहे भाई मीडिया खबरें तुम्हारे अनुसार वह झूठी थी। मगर तुम अपने आचरण से तो यही सिद्ध कर रहे हो कि तुम्हारा दिमाग झनझनाया हुआ है जिससे पता चलता है कि तुम्हारे साथ ये खीर वाला हादसा हुआ ही है। इसीलिए तुम्हें वो प्रादुर भूत की जगह पादुर पादुर दिख रहा

00:42:57:25 है। हां। अच्छा तो अब मैं एक दो प्रमाण दे रहा हूं। आवश्यक प्रमाण क्या है? कि शिव पुराण 9 30 32 शिव से भिन्न किसी का ईश्वरत्व नहीं है। 9 30 32 शिव से भिन्न विद्वेष विद्वेष सम्यता है ये। शिव से भिन्न किसी का ईश्वरत्व नहीं है। ठीक है? और शिव जी को तुम लोग अज्ञानी कहते हो ना। शिव जी को जगतगुरु कहा जा रहा है। कहां पर कहा जा रहा है? शिव पुराण 10 26 27 विद्वेश्वर समिता उसमें कहा जा रहा है भगवान शिव के लिए जगतगुरु शब्द है शब्द देख लेना। अब मैं यहां पे दो-दो कैमरे लगा के नहीं रखता हूं तुम्हारी तरह कि एक कैमरे से सामने वाला फिर जो है दूसरे कैमरे या तुम तुम लोग एडिट करते होगे कि पहले सामने से ले लिया फिर ग्रंथ दिखाने के लिए यहां दिखा दिया। थोड़ा मेहनत करो और यदि कैमरे से छपी हुई चीजें दिखा देने पर ही वह प्रमाणित हो जाएगा तो कोई कुछ भी छाप सकता है आजकल कंप्यूटर से ठीक है तो

00:44:12:04 तो शिव जी जगतगुरु कहे गए हैं मैं ही परम ब्रह्म हूं शिव पुराण विद्वेष समिता 10 36 37 और वहीं पर यह भी लिखा है कि शिवलिंग और शिव की प्रतिमा दोनों के पूजन द्वारा भोग और मोक्ष की प्राप्ति होती है। शिव महापुराण एक पांच 31 सब निकल जाएगा। जब मेरे सामने आओगे ना तो यह पादुर भूति याद आएगा बस पादुर पादुर यही करोगे पादुर पादुर ये सब मखौल बाजी वहां नहीं चलेगा इसीलिए फोन नहीं उठा रहे हो बस पादुर पादुर रह जाएगा बाबा जी वाला तो वो जो खीर का प्रसाद है इनका उसकी जो महक है वो इन लोगों को याद रह जाती है इसीलिए दिमाग झनझनाया रहता है और इसीलिए सब लोग ये सब बकवास करते हैं आकर के उल्टी सीधी कोई सिर पैर नहीं कबीर सागर से प्रमाण देंगे। अच्छा कबीर सागर से बात बता दूं जो इनकी प्रामाणिक गद्दी है कबीर जी की वो गद्दी वाले भी मेरे संपर्क में है। उनके अनुसार कबीर बीजक वहां का प्रामाणिक ग्रंथ है और इनके अनुसार कबीर सागर प्रामाणिक ग्रंथ है। और कबीर सागर प्रामाणिक ग्रंथ होते हुए भी इनका जो बाबा है जो इनको पादुभूत देता है। वह बाबा कबीर सागर में

00:45:27:08 भी कहता है इसने काल में मिलावट कर दी। अरे तो भाई तो प्रमाण माने किसको? शास्त्रों से तुम्हारा बाबा सिद्ध होता है। ततर्शी उसी शास्त्र को बाबा कह देता है। इसमें काल ने मिलावट की है। तो फिर किस आधार पर माने कि बाबा ततर्शी है। बस इस आधार पे कि बाबा का प्रसाद खाएं और पादुरभूत हो जाए तुम्हारे जैसे। और जो जो तुम्हारे जैसा पादुभूत होता जाएगा वो जो है बाबा का भगत हो जाएगा। बाबा को प्रमाण मान लेगा। फिर बाबा जो जो कहेगा वो प्रमाण है। जो जो कहेगा प्रमाण नहीं है। यह है पादुभूत की व्याख्या। ठोको ताली। तो [गला साफ़ करने की आवाज़] ये शिव जी के बारे में हो गया और जो गुणातीत वाली बात है। हमने ये पीडीएफ कई बार दे रखी है और मैं यहां पे दोबारा से ये पीडीएफ दे दूंगा। ठीक है?

00:46:22:28 सुनो। विष्णु पुराण दो एक तीन ब्रह्मा वहां पर जो है विष्णु भगवान के लिए ही कहा गया अविनाशी परमात्मा सर्वदा एक रस सर्व विजय भगवान वासुदेव विष्णु ठीक है और वेदों के द्वारा कौन प्राप्त होता है यह भी समझ लो वेदों के द्वारा वही भगवान विष्णु प्राप्त होते हैं जो ब्रह्मा विष्णु है महेश सब एक हैं ये भी समझ लो कहां लिखा है तुम्हारे लिए बार-बार बस यही करता रहूं जो जिन सवालों के जवाब कई बार दे चुका हूं। वही सवालों के जवाब देता रहूं क्योंकि तुम लोग वही वही प्रश्न करोगे बार-बार लोगों को भ्रमित करोगे। तो यह मैं उनके लिए बना रहा हूं। जिन लोगों को तुम बरगलाओगे कल को

00:47:09:03 वेद जो है विष्णु के ही परायण हैं। दो तीन 15 वेद नारायण के परायण हैं। समस्त यज्ञ नारायण की प्रसन्नता के लिए हैं। समस्त योग साधना तपस्या नारायण के लिए हैं। समस्त साध्य और साधन नारायण के लिए हैं। ज्ञान द्वारा भी नारायण ही जाने जाते हैं। ठीक है? ब्रह्मा विष्णु और शंकर रूप से जगत की उत्पत्ति स्थिति एवं संहार के कारण विकार रहित विकार नहीं है। शुद्ध अविनाशी परमात्मा सर्वदा एक रस सर्व विजय भगवान वासुदेव विष्णु है। हो गया। ब्रह्मा विष्णु महेश का यह परम ब्रह्मता सिद्ध कर दी। अब ये घोंंचू आगे क्या करते हैं? अब यहां तक राघव दास तो चुप हो गया था। वो देवी भागवत को ले आया था। देवी भागवत से यह हो रहा है वो हो रहा है। तो यहां पे घोंंचू सुन ले देवी भागवत में क्या लिखा है? सुन तेरा बाबा तुझे तुझे कभी नहीं बताएगा। तू अपने बाबा की किताबें पढ़ेगा भी नहीं।

00:48:10:21 समय आने परमात्मा होते हुए वही देवी ही सगुण हो जाती है। वही देवी वो वो देवी का वास्तविक स्वरूप क्या है? वह भगवती ना ही स्त्री है ना ही पुरुष है और ना ही नपुंसक ही है। देवी भागवत तीन छ सात और तुम्हारे यहां क्या होता है कि जो ना तो स्त्री है ना पुरुष है इनके यहां पे

✅ This part is already used · 00:48:30:14 – 00:51:01:10 (2:31)

→ Used in: A · Video सात फेरों का मजाक बनाना रामपाल को पड़ा भारी at 0:03 ↗

00:48:30:14 स्त्रियां कैसे बनती है पता है ये लोग क्या करते हैं ये कहते हैं कि देखो वहां पे जो विवाह हुआ था वहां पे क्या सात फेरे लिए गए थे ये जो दैय जो योग होते हैं दिव्य शक्तियों के योग इनको ये मनुष्यों के विवाह के दृष्टि से देखता है तो ये बोलता है कि वहां पे किसी का सात फेरा हुआ था क्या तो ये सात आठ फेरे सब मनगढ़ंत है ठीक है तो इसका मतलब क्या है कि कि इनके यहां पर जो वहां की जो चीजें हैं आध्यात्मिक जगत की चीजें हैं वो एज इट इज़ अप्लाई हो जाती हैं। तो अब क्या है कि इनके यहां पर इनके अनुसार रामपाल के अनुसार जो जिसका जो वो थी ना जिसने एक हाथ उठाया था वो जीवात्माओं में से जिसको ये लोग भगवती से जोड़ते हैं। वह कैरेक्टर है जो वह कैरेक्टर उसके जो है स्त्री जो अंग होता है जिसको भग कहते हैं। वह गुप्तांग स्त्री का वह था ही नहीं। तो वह काल ने अपने नाखूनों से चिपकाया, एडजस्ट किया। ठीक है? तो इसका मतलब इनके यहां की स्त्रियां जो होती हैं इनके अनुसार रामपाल के अनुसार और राघव दास के अनुसार इसके यहां की जो माताएं और बहनें होती हैं वो आती तो बिना उसके हैं प्रजनन अंग के प्रजन प्रजननांग के बिना वो आती हैं जन्म

00:49:45:18 लेती हैं और उसके बाद ये लोग नाखूनों से जिससे वो बाई जाती हैं वो रामपाल के विवाह सिस्टम के अनुसार जिससे वो बाई जाती हैं फिर वो लोग उसके वो चिपकाते हैं फेवीक्विक से या फेविकॉल से वो चिपकाते हैं नाखूनों से उसको एडजस्ट करते हैं। उसके बाद फिर वो आगे जो है स्त्री शरीर पूरा हो के आगे चलता है मामला। ठीक है? ये घिनौनी बातें रामपाल ने अपनी किताबों में लिखी हुई है। स्त्री कैसे आती? पहले स्त्री है। पहले वो शरीर से पूरी तरीके से स्त्री नहीं है। पहले वो स्त्री घोषित हो गई। लड़की का रूप रंग अच्छा था। ये सब लिखा है। उसके बाद उसके जो है जो लड़की का जो स्त्री होने का जो सबसे जो स्वरूप भूत एक अंग मान लीजिए आप उसको तो वो जो है वो उसके बाद राक्षस उसके लगाता है तब वो जो है स्त्री बनती है। तो इनके यहां की क्योंकि ये लोग आध्यात्मिक जगत की चीजों को एज इट इज़ लागू करते हैं अपने यहां। जैसे इन्होंने ब्याह को लागू किया है। तो इनके यहां क्या है कि स्त्रियां जो हैं वह तब बनती हैं जब ब्याह हो जाता है और ब्याह होने के बाद जो है जिसके साथ ब्याह गई हैं वह जो है नाखूनों से फेविक्विक के फेविक्विक या फेविकॉल पता नहीं जो ज्यादा मजबूती से टिका रहे उसके द्वारा वो चिपकाया जाता है जो प्रजनन अंग होता है

00:51:01:01 क्या

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00:51:01:10 ऐसा ही है तो ये फॉल्स चीजें हैं उनका उदाहरण है ये रामपाल की हास्यात्मक बातें ठोको ताली अच्छा तो यहां से हमने क्या सिद्ध कर लिया कि भगवती वो है ही नहीं जिस जिसके कारण की उनके साथ बलात्कार होने की बात हालांकि भगवान बहुत हृदय को दुख होता है जितनी बार मैं ये बात बोलता हूं पर मैं यह बोलनी पड़ती है आप लोगों को जगाने के लिए छोड़ देते हैं अब यहां तक ये हो गया अब ये घोंंचू आगे क्या कह रहा है इसने भगवती के साथ बलात्कार को सिद्ध करने का प्रयास किया कबीर सागर से जिसको ये खुद प्रामाणिक नहीं मानते उसमें काल ने मिलावट कर रखी है वहां से सिद्ध करने का प्रयास किया और हम ना तो कबीर सागर को अगर वो पूरा शुद्ध रूप से भी हो तब भी हमारे लिए वो प्रमाण नहीं है। मगर यह हमारे लिए हमारे विरोध में की जाने वाली चीजों को सिद्ध कहां से करेगा ये? लल्लूलाल कबीर सागर से और उसके बाद कबीर सागर से सिद्ध करने के बाद

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→ Used in: A · Video सात फेरों का मजाक बनाना रामपाल को पड़ा भारी at 2:32 ↗

00:52:04:26 फिर आगे ये बोल रहा है कि भैया जो है देवी और परम ब्रह्म अभेद है। इससे पता लगता है कि वह ब्रह्म जो है वह उनका पति है। है ना? तो कई जगह आत्मा को भी परमेश्वर के साथ अभेद कहा गया है। तेरी किताबों में तेरा जूता ही तेरे सर मारूंगा। तेरी किताबों में आत्मा को सुन क्या लिखा है दूसरे उसमें दूसरे अध्याय में जहां पर ये दो 16 वाली बात आती है ना ननम छिंदती दो 23 जहां आत्मा को वो कहा गया है शाश्वत नित्य कहा गया है तो वहां पर तेरे बाबा ने लिखा है कि आत्मा का अभेद जो आत्मा ईश्वर के सानिध्य में होने के कारण जो आत्मा है वह अविनाशी है। ईश्वर के सानिध्य में होने के कारण ठीक है। वह अविनाशी है। तो यहां पर भी अभेद चीज हो गई। अब इसका अर्थ हो गया कि आत्मा रामपाल के अनुसार रामपाल का जो ईश्वर है जिस जो रामपाल के रूप में प्रकट हुआ है उसमें और रामपाल के अनुसार जो आत्माएं हैं जो इसके तत्वदर्शी चिलवा भगत हैं वो अभेद है तो इसलिए वह पतिपत्नी हो गए। यानी कि राघव और इस हिसाब से देखा जाए तो राघव को और जेलकट्टू को

00:53:20:00 पतिप्नी मानना पड़ेगा। तो यह राघव जो है राघव जैसी जो चिलए भगतों की जो तत्व ज्ञानियों की जो आत्मा है 15 करोड़ वह और रामपाल यह सब पति पत्नी क्योंकि वहां अभेद आ गया मामला अभेद शब्द आ गया तो इसलिए पतिपत्नी हो गए दूसरी बात कि ब्रह्म का अर्थ जो है हमारे यहां पर तो भाई शिव है शंकर है ब्रह्म का अर्थ 50 जगह दिखा चुके हैं ब्रह्म का अर्थ शिव भगवान स्वयं कह रहे हैं मैं ही परम ब्रह्म हूं ठीक तो इसको हमारे लिए यह है और तुम्हारे लिए जो तुम मानते हो उसके अनुसार तुम वो मान लो कि रामपाल और जितने चिलवा भगत आत्माएं हैं वह सब पतिप हैं और पतिप्नी है और फिर अच्छा एक चीज और है यहां से इसने केवल एक अभेद शब्द वो जो अभिषेक है वो अपने वीडियो में कह रहा है कि भाई जो प्रकृति है और पुरुष को अभेद कहा गया है अभेद इससे उनका विवाह सिद्ध हो गया और विवाह से बलात्कार भी सिद्ध हो गया कितने नीच नीचता भरी बातें हैं भाई। अरे जोक ऑफ द डे तो है ही तुम्हारी मूर्खता। मगर नीचता कितनी करोगे कि तुमने केवल एक अभेद शब्द से विवाह निकाल लिया

00:54:35:10 और विवाह में गौर रूप से तुमने बलात्कार भी मान लिया। यानी कि इनके यहां पर जो विवाह है उसमें बलात्कार होता है। इसका अर्थ तो यह मानना पड़ेगा ना। अरे बेवकूफ तेरी बातें इतनी ज्यादा तेरे ही ऊपर हावी हो जाएंगी ना कि सोचेगा कि भाई कहां चुल्लू पानी में जाकर के डूब मरूं जो मैंने बोला है। जो तू बोल रहा है। विवाह का मतलब बलात्कार है क्या? बलात्कार सिद्ध करना है ना तुझे शास्त्रों से। तो तू विवाह क्यों दिखा रहा है? हालांकि वो विवाह भी नहीं है। और अगर विवाह मानोगे तो फिर तेरे ऊपर यह आएगा कि तू पत्नी है रामपाल की कबीर की और रामपाल कबीर कबीर की पत्नी है। ये सब मानना पड़ेगा। और फिर उनके बीच तुम्हें ये सब मानना पड़ेगा नाखूनों से इसका ये अंग लगा दिया। उसका वो अंग लगा दिया। ये सब भी मानना पड़ेगा क्योंकि तुम आध्यात्मिक जगत की चीजों को एज इट इज मानते हो यहां पर। यह भी तुम्हारे से ही सिद्ध कर दिया। क्योंकि शिव पार्वती ने या वहां पर दय जगत में होने वाले विवाह में सात फेवरे तुम्हारी जानकारी में नहीं लिए तो इसलिए यहां पर भी नहीं लेने चाहिए। यानी आध्यात्मिक जगत की चीजें एज इट इज यहां मानी जाएगी। इसका मतलब रामपाल कबीर की पत्नी है और जितने 15 करोड़ तथाकथित 15 करोड़ है कि नहीं है मुझे नहीं पता। मगर तुम तो कहते हो 15 करोड़ है। तो

00:55:50:12 15 करोड़ पत्नियां है रामपाल की फिर हां और फिर वो किस तरह से जो लोग उस अंग के साथ नहीं है उस अंग का उस अंग को फिट कैसे करेंगे नाखूनों के द्वारा फेविकॉल से फेविक्विक से वो सारी क्रियाएं ये सब तुम्हारे साथ होंगी ना राघव और अभिषेक के साथ ठोको [हंसी] [गहरी सांस लेने की आवाज़] ठीक है [गला साफ़ करने की आवाज़] तो अभेद का मतलब होता है कि दो नहीं है एक ही है केवल दिख दो रहे ये है अभेद और जैसे ही तुम किसी भी मामले में अलग-अलग कर दोगे तो अभेद नहीं कहलाएगा। यह सनातनियों के लिए जवाब। ठीक है?

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00:56:34:00 अच्छा [गला साफ़ करने की आवाज़] अब इसने एक और कहा है कि गुणातीत। तो ये जो हमने पीडीएफ आज से दो साल पहले बना रखी थी ना ये सब जवाब उसी में दे दिए थे। गुणातीत इत्यादि ये सब तो शायद इसमें मुझे मैं आपका वह भी कर दूं। आज का दिन जो है आगे नहीं बढ़ पाएंगे हम लोग। शिव ही निष्कल रूप से ब्रह्म है।

00:57:19:15 इनका एक आरोप है कि भाई यह लोग जो है ब्रह्मा विष्णु महेश जो हैं गुणों से रहित नहीं है। अब सुन श्रीमद् भागवत दो 5 18 भगवान माया के गुणों से रहित है। विष्णु भगवान अनंत है सृष्टि स्थिति और प्रलय करने के लिए रजोगुण सतोगुण एवं तमोगुण माया के यह तीन गुण उनकी इच्छा से उनके द्वारा स्वीकार किए जाते हैं। और तब कार्य कारण वाले भेद से वो उस रूप में वहां दिखते हैं। मगर गुणों से रहित है। ये आ गया। ठीक। शिव जी किसी के किसी भी प्रकार के गुण से रहित हैं। एवं वही सृष्टि की उत्पत्ति पालन और संहार तीनों करते हुए ब्रह्मा विष्णु और शिव नाम धारण करते हैं। अतः इस प्रकार शिव जी की वो सिद्ध हो गई। ये कहां लिखा है? श्रीमद् भागवत 8 7 23 31 महाभारत अनुशासन पर्व दान धर्म पर्व अध्याय 14 224

00:58:08:26 अच्छा भगवती के लिए भी आ गया। भगवती सगुणा या निर्गुणा केवल कार्य भेद से प्रतीत होती है। कार्य कार्य करने वाली के रूप में सगुण है और जो है कारण के रूप में कि इस सृष्टि का कारण कौन है तो उस रूप में वो निर्गुण है। आगे जिस परम पुरुष को त्रिगुणातीत कहा गया जो अभेद है भगवती के साथ वह त्रिगुणातीत कहा गया है। जिस परम पुरुष को त्रिगुणातीत कहा गया है। वही उत्पत्ति स्थिति संहार कार्य का संपादन करने वाली महामाया अर्थात भगवती हैं। कौन है जिस त्रिगुणातीत अरे हिंदी समझ में नहीं आएगी मैं बता देता हूं थोड़ी तुम तो वो हो ना खीर वाले फड़ तो हिंदी बता दे त्रिगुणातीत का मतलब होता है गुणों से तीनों गुणों से रहित परे ठीक है तो ये हो गया शास्त्रों तुम्हें शास्त्रों से ही समझ में आता है अभी तर्क भी दूंगा और उसके बाद तुम्हारा थोड़ा सा तुम्हारी थोड़ी सी क्या कहते हैं चुटकी भी लूंगा तो ये सब आ गया निर्गुण तो एकमात्र परमात्मा देवी ही है देवी भागवत तीन नौ 70 कहां ले जाओ? निर्गुण। कितनी बार निर्गुण शब्द आ रहा है भाई। तुम कह रहे हो वो गुणों से प्रभावित है। अब चिलए भगतों तुम एक बात बताओ। तत्वदर्शी तुम एक बात बताओ। हालांकि तुम्हारे बाबा के अनुसार ही तुम लोग फड़ हो और गवार

00:59:24:04 हो। तुम्हारी गरिमा गीता की में लिखा हो। अब चिलवे भक्तों तुम एक बात बताओ। एक तरफ तुम कहते हो कि ब्रह्मा विष्णु महेश स्वयं गुण है। गीता में कहा जा रहा है इन तीनों गुणों से रहित हो जाओ। ठीक है? तो यह कह रहा है इनका बाबा कि वहां पर ब्रह्मा विष्णु महेश से अलग होने की बात की जा रही है। गीता में कहा जा रहा है कि ये जो सतजो तम गुण यानी कि यहां इस संसार में हम जिन चीजों के प्रति आकर्षित होते हैं वो या तो सतोगुणी होती है या रजोगुणी होती है या फिर तमोगुणी होती है। तो इनसे इनकी भक्ति मत करो। यानी इनके पीछे माया जगत के सतम गुण के पीछे मत भागो। भगवान के पीछे भागो। यह कहा जा रहा है। मगर इसने वहां सतरज और तम का अर्थ निकाल लिया कि वो ब्रह्मा विष्णु महेश ही है। अब तू यह बता कि ब्रह्मा, विष्णु, महेश सतर और तम गुण है तेरे हिसाब से तेरा ही जूता तेरे साथ ठोको ताली। अब तू यह बता कि सतरज और तम यह ब्रह्मा विष्णु महेश यह गुण है या गुणों से प्रभावित है अगर गुणों से प्रभावित है जो कि तू कह रहा है तेरा ये चलवा भगत कह रहा है जो बिना प्रजनन अंग के अभी तुम्हारे ही शास्त्र तुम्हारी शास्त्र व्याख्या के अनुसार रामपाल की पत्नी सिद्ध होते हो तो ये जो अभिषेक कह रहा है या कह रही है मैं समझ क्या कहूं अभिषेक तुम्हें रामपाल की पत्नी होने

01:00:39:06 के नाते स्त्रीलिंग शब्द का उपयोग करूं या मतलब मतलब तुम्हारे जो सड़े घिसे पिटे सिद्धांत है उनके अनुसार रामपाल की पत्नी होने के नाते राघव और अभिषेक तुम्हारे लिए स्त्रीलिंग प्रोनाउंसिएशन करूं उच्चारण करूं या फिर पुल्लिंग करूं। चलो पुल्लिंग ही कर लेता हूं। नहीं तो तुम पता नहीं कहां आज ही रात को कहीं ऐसा ना हो मेरे कारण जो है कहीं जो है इंतजाम कर लो। ऐसा कुछ चुल्लू भर पानी में है ना। तो पुल्लिंग कर देता हूं। तो यह जो चिलए भगत हैं यह कह रहा है अभिषेक कह रहा है कि और यह राघव दास कह रहा है कि यह जो है गुणों से प्रभावित नहीं है। शिवश नारायण द्विवेदी सिद्ध अबे तू पहले तय कर ले कि वह गुणों से प्रभावित है या तेरे आका के अनुसार वो गुण ही है। तो गुण ही है तो वो खुद से प्रभावित है क्या? क्या बताया बता रहा है भाई तू ये? प्रभावित होना एक क्रिया है। क्रिया होती है दो के बीच में। क्रिया किसके बीच में होती है? ये सब ये सब बातें तुम्हें कहां मालूम है? अब जब यह वाली बात आ ही गई है तो पूर्णतीत तो मैंने शास्त्रों से दिखा दिया। अब मैं चलते चलते एक बात और पूछ लेता हूं। यह लोग गुणों से प्रभावित है। चल मान लिया ये लोग तो थे नहीं काल के समय में। फिर वहां पे वो कौन से गुणों से प्रभावित हुआ तेरा काल? अच्छा

01:01:54:28 अब तुम लोग यह कहोगे कि नहीं नहीं यह जो है जो ब्रह्मा विष्णु महेश उनका गुणों से प्रभावित होना दिखाई देता है तो भाई तेरा जो तेरे अनुसार जो भी परमात्मा का स्वरूप है तेरा रामपाल जेल कट्टू वो भीख मांग रहा है दया की फिर उसको तू गुणों से परे क्यों नहीं गुणों से प्रभावित क्यों नहीं मांग रहा है मान रहा है जमानत मांग रहा है अभी वो सुनने में आ रहा है हाई कोर्ट में इसको तारीख पे प्रकट होना है वहां पर तो ये उड़ के जाके प्रकट नहीं हो रहा है। जबकि यह तो अंतर्यामी है। ये तो इनका खीर वाला सबका स्वामी है। मगर वो वहां पर हाई कोर्ट जा नहीं पा रहा। उड़ के गायब हो के ये सब नहीं कर पा रहा। बड़ा गजब का सर्वशक्तिमान ईश्वर है इनका। वो वहां प्रकट नहीं हो पा रहा है। जबकि कबीर ही इसके रूप में बैठे हैं इनके अनुसार। है ना? तो वो कोर्ट में जा नहीं पा रहा है। कोर्ट बुला रही है। वहां पर पता है क्या लिख के दिया जा रहा है एप्लीकेशन में कि हमारे गुरु जी की ना रामपाल की तबीयत खराब है। 10 तरह की बीमारियों ने घेर रखा है रामपाल को। इसलिए वो तारीख पे नहीं आ सकते हैं। आप वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उनकी तारीख करवा लीजिए। क्यों बे? ये कौन से गुणों से प्रभावित है तुम्हारा बाबा? हैं? यह एप्लीकेशन लिख रहा है। अच्छा लिख रहा है तो झूठ

01:03:10:00 लिख रहा है क्योंकि प्रभावित क्योंकि बीमार तो वह है नहीं तो झूठ लिख रहा है। तो यह कौन सा गुण हुआ? तमोगुण हुआ, रजोगुण हुआ, सतोगुण हुआ। कौन से गुण से प्रभावित है? और फिर इतनी सारी चीजें जो मार्केट में चल रही है मालूम है ना भविता इत्यादि इतनी थैली भर के 1 किलो ये मिला, वो मिला। ये सब। ये कौन से गुणों की वो पहचान? तो ये सब होते हुए और जेल गया। जेल में रहा। तमाम सारी चीजें। अच्छा तुम्हारा बाबा कहता है कि मैं भगवान हूं। कबीर का अवतार हूं तो फिर काहे को गरीब दास के पास जाना पड़ रहा है भाई? मंत्र लेने तंत्र लेने। क्यों गुरु के पास जाना पड़ रहा है? अज्ञानी भी था। तो अज्ञानी होते हुए खुद को जो है भगवान बोल रहा है या तो भगवान तुम्हारे यहां अज्ञानी है और या फिर अज्ञानी होते हुए वो बोल रहा है तो वो गुणों से प्रभावित है या फिर एक तीसरी चीज जब तुम लाओगे ये तो उनकी लीला है लीला ले आओगे ना तो लीला केवल रामपाल पे फिट हो सकती है और कहीं तो फिट हो नहीं सकती इसलिए तुम ये कहोगे भले ही शास्त्रों में लिखा हो कि वो गुणातीत है मगर शास्त्रों में दी गई लीलाओं के आधार पर वो गुणों से प्रभावित है और भले ही रामपाल का कहीं किसी

01:04:25:03 शास्त्र में ना लिखा हो कुछ भी मगर प्रत्यक्ष रूप से सिद्ध हो जाने पर तुम यह कहोगे कि वो गुणों से प्रभावित नहीं है। वो रोज शौचालय जा रहा है। रोज शौच जा रहा है। मगर वो किसी चीज से वो माया से प्रभावित नहीं है। वो संसार के उसमें नहीं है। दाब में प्रकृति से परे है। वो जबकि रोज लोटा लेकर के वो भी जाता है। जाता है ना कि नहीं जाता? रोके बैठा है। रोके बैठा है तो तुम्हारी खीर का और तुम्हें झटका लगा होगा। फिर तो अगर रोके बैठा होगा तो तो [गला साफ़ करने की आवाज़][खांसने की आवाज़] ये सब बातें हैं। राघव दास ने जो संपर्क करने वाला जो बेवकूफ बनाया है अपने गवर्नरों को तत्व ज्ञानियों को उसके बारे में मैंने बता दिया। मां भगवती के साथ दुराचरण के लिए कबीर सागर खोला। कबीर सागर की क्या वैल्यू है? इनके ही अनुसार हमारे अनुसार तो भाई जब तक वेद की सीमा में है तब तक मोस्ट वेलकम है। यदि उसका कुछ ऐसा अर्थ निकल रहा है जो वेद के विरुद्ध है। नो वेलकम तुम्हारे अनुसार भी उसका वेलकम नहीं है। क्योंकि जब तक उसका अर्थ जो है रामपाल के अनुसार निकल रहा है तब तक वेलकम है। वरना नो वेलकम। तो जो चीज तुम्हारे खुद के लिए प्रमाण नहीं है वो हमारे को प्रमाण क्यों दिखा रहा है बे? मूर्ख कहीं के जेब में नहीं है।

01:05:40:07 टल्ला टिल्ला मांग रहा है लाल किला। फिर

01:05:43:06 तीसरी बात कि हमारे यहां आना पड़ेगा। इसका भी मैंने उत्तर दे दिया कि पांच महिला और एक बच्चे की हत्या का मुकदमा मेरे ऊपर नहीं चल रहा है। मेरे पक्ष के ऊपर नहीं चल रहा है। 12 साल जेल में मैं नहीं रह के आया। ठीक है? और हर पन्ने पर तुम्हारा दोगलापन हर बात में तुम्हारा दोगलापन सिद्ध हो रहा है। मेरा नहीं सिद्ध हो रहा है। और तब भी मैं तुझे अपने आने की थोड़ी ना कह रहा हूं। है पुरुषत्व शेष तो बीच के स्थान पर मिल पता चल जाएगा यह राग कितना बड़ा तुम लोग तत्व ज्ञानी हो समझ गए चौथी बात मैंने यह भी दिखा दिया ऑन लाइव स्ट्रीम कितना साहस है इसके अंदर जो ताल ठोक रहा है वीडियो में कि मैंने उसको कई बार बुलाया अरे मनुवादी शंकराचार्य के सैनिक का फोन तक उठाने की तो सामर्थ्य है नहीं तुम में बात करते हो तुम सामना करोगे मालूम है तुम्हें में केवल ज्ञान से केवल वार्तालाप से तुम्हारी थूथुन को रगड़ दिया जाएगा। जगह नहीं मिलेगी मुंह छुपाने की। ये मालूम है तुम्हें। इसलिए अपने गवर्नरों के लिए वीडियो बनाते हो कि गवर्नर संतुष्ट हो जाए। उसके

01:06:58:16 बाद फिर तुम कह रहे हो कि गुणातीत है। शास्त्रों से दिखा दिया और तर्क से भी दिखा दिया। फिर तुम्हारा ही जूता तुम्हारे सर भी मार दिया। ठीक है? और यह भी मैंने बता दिया कि भाई अगर इनके यहां के सिद्धांतों को मान लिया जाए। हालांकि मैं इनके यहां के सिद्धांतों को नहीं मानता और एक मातृशक्ति होने के नाते सभी स्त्रियों का सम्मान है। मगर इनके सिद्धांतों को मान लिया जाए तो इनके यहां की स्त्रियां ब्याह के बाद जब फेरे जब फेरे नहीं इनका जो 17 मिनट वाला ब्याह है उसके बाद इनके यहां की स्त्रियां वो 17 मिनट वाले विवाह के बाद जब पति के द्वारा फेविकोल से या फेविक्विक से एक विशेष प्रकार का अंग उनके चिपकाया जाता है। तब वह संपूर्ण रूप से वह स्त्री बनती है, वह महिला बनती है जिनको हम महिला कहते हैं। साधारण लोग यह तो खीर जगत के लोग है ना भाई इनकी तो बात ही निराली है। ठीक है?

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01:07:53:03 यह भी मैंने बता दिया। गुणों से रहित होना भी सिद्ध हो गया। और अगर शास्त्रों में कहीं पर वर्णन नहीं है रामपाल का। वो दिख रहा है जो रोज लोटा लेकर के जाता हुआ संडास तब भी वह प्रकृति के दाब में सिद्ध नहीं होता है क्योंकि भैया बाबा ने पाइप बांटे हैं ना बाबा ने खीर खिलाई है ना बाबा ने प्रसाद भंडारे कराए हैं ना इसलिए भले ही तीन चार दिन उनसे कह दो बाबा बिना लोटे के बिना बिना संडास के रहो परमेश्वर हो पता चल जाएगा तुम्हारी खीर का जायका बढ़ जाएगा मगर नहीं भले ही बाबा बिना बिना संडास के ना रह पा रहा हो भले ही बाबा बिना सोए ना रह पा रहा हो मगर बाबा का कहीं कोई वर्णन नहीं है शास्त्रों में मगर फिर भी वह तत्व ज्ञानी है वो जगतगुरु है वो परमेश्वर का अवतार है और यह अन्यायपूर्ण बातें तुम चाहते हो कि हम मान ले हम ये सारी चीजें भी बता दी और जितना उन्होंने जहर उगला है बकवास की है अपने उसमें तो जो भी इंटेलेक्चुअल पर्सन है प्रबुद्ध जन है उनको सबको यहां पर जवाब मिल गया होगा ठीक है अब मैं [गला साफ़ करने की आवाज़] जो पिछली बार हमने अध्ययन किया था चैप्टर फाइव

01:09:08:28 का अध्ययन हमने जो किया था उसके बुलेट पॉइंट्स अभी बोल रहा हूं और जो आगे चैप्टर जो आगे बढ़ेगा वो अगले एपिसोड में हम लोग बढ़ाएंगे क्योंकि काफी देर हो चुकी है। अब बुलेट पॉइंट्स जब मैं बोल रहा हूं तो हम लोग आते हैं

01:09:22:26 मुख्य विषय पर। बाबा की सन्यास और गृहस्थ के विषय में बाबा मुझे लग रहा है कि आज तक समझ नहीं पाया कि उसको चूज किसे करना है, विरक्तता को चूज़ करना है या फिर गृहस्ती को चूज़ करना है। इसलिए बाबा ने ऐसा इसमें अ क्या कहेंगे भाई? पंचर कर देने वाला ज्ञान दिया है। दिमाग को पंचर कर देने वाला ज्ञान कि आप फिर से झंडू बाब इत्यादि ले लीजिए हाथ साथ में। तो भैया बाबा सबसे पहले मैं संक्षेप में बता दूं बुलेट पॉइंट स्टार्ट हो रहे हैं यहां से कि सबसे पहले बाबा कहता है कि कर्म सन्यास या फिर कर्म सन्यास दो हैं। एक घर में रहकर हठ पूर्वक इंद्रियों पर संयम रखते हुए व्यक्ति रहे वो भी कर्म सन्यास है और या फिर वो जंगल में जाकर के रहे वो भी कर्म कर्म सन्यास है। और ये दोनों शास्त्र विरुद्ध है। अब देखते जाना बाबा ने क्या रायता फैलाया है। अब देखो इसके बाद कर्म योगी क्या है? कर्म योगी वो है जो घर में शास्त्र विधि पूर्वक भक्ति करे। यहां पे इंद्रियों का निग्रह नहीं है।

01:10:38:14 बस वो शास्त्र विधि पूर्वक भक्ति करे। यानी कि वह अगर नाम जप कर रहा है शास्त्र विधि पूर्वक कुल मिलाकर के एक ही बात है। नाम जप यानी कि वह यदि भक्ति कर रहा है तो वो घर में रह के कुछ भी कर रहा हो वो जो है कर्म योगी कहलाएगा। भले ही वह चोर हो। चोर कैसे सिद्ध होता है? क्योंकि यह पेज नंबर 103 पर यही कहते हैं आगे कर्म योगी के बारे में बताते हुए कि जो व्यक्ति शास्त्र विधि के शास्त्र विरुद्ध तरीके से भी घर पर रह के और जो है

01:11:15:22 क्या लिखा है 103 दूसरी प्रकार के कर्म योगी वह होते हैं जो बाल बच्चों में रहते हैं तथा शास्त्र साधना शास्त्र विधि विरुद्ध करते हैं। यानी कि शास्त्र विधि विरुद्ध जो साधना कर रहे हैं वह भी कर्म योगी हैं। और शास्त्र विधि सहित जो साधना कर रहे हैं वह भी कर्म योगी हैं। तो अब अगर यह कहें ये लोग यानी कि सबसे पहले क्या सिद्ध हो गया कि व्यक्ति यदि रामपाल से नाम दीक्षा लेकर के चोरी भी कर रहा है। चोरी कर रहा है। व्यभचार कर रहा है। बलात्कार कर रहा है। कुछ भी कर रहा है। जैसे कि झूठ बोलना इत्यादि जो राघवदास इत्यादि अभिषेक का अभी हमने देखा तो यह लोग भी कर्म योगी हैं बाबा के जो राइफल ले खड़े होते हैं इनके यहां पर जो पकड़े जाते हैं जिन पर देशद्रोह का मुकदमा लगता है ये सब ये सब जो है कर्म योगी है क्योंकि इन्होंने बाबा से नाम दी इच्छा ले रखी है तो आपको अपने नाम के साथ कर्म योगी लिखने लगो अब अच्छा लगेगा अलंकारिक तो ये सब कर्म योगी है बाबा के अनुसार शास्त्र विधि के अनुसार घर में रहकर साधना करने वाला उसको इंद्रिय निग्रह नहीं करना है। केवल शास्त्र विधि

01:12:30:28 के अनुसार यदि वह घर में रह के वो कर रहा है तो भी वह कर्म योगी है। और शास्त्र विरुद्ध अगर वह घर में साधना कर रहा है तब भी वो कर्म योगी है। यह बाबा का ज्ञान है। ठीक है? और ऊपर क्या कह रहा है कि कर्म सन्यास वो है जिसमें कि शास्त्र विरुद्ध कर्म सन्यास वो है जो घर में रहे या जंगल में जाकर रहे मगर वह शास्त्र विरुद्ध है। कर्म सन्यास दो प्रकार का होता है। एक सन्यास तो वह होता है जिसमें साधक परमात्मा प्राप्ति के लिए प्रेरित होकर घर त्याग कर हट के जंगल में बैठ जाता है तथा शास्त्र विधि विधि रहित साधना करता है। यह भी कर्म सन्यास है। शास्त्र विधि रहित भी कर्म सन्यास है। शास्त्र विधि रहित कर्म सन्यास भी है। शास्त्र विधि रहित कर्म योग भी है। सब कुछ है। शास्त्र विधि रहित कर्म योग भी है। और शास्त्र शास्त्र विधि के अनुसार भी कर्म सन्यास भी है। शास्त्र विधि के अनुसार भी कर्म योग भी है। ये इस बाबा का ज्ञान है। तत्व ज्ञान सब कुछ है। सब कुछ है और कुछ भी नहीं है। देखो ध्यान से सुनो। कर्म सन्यास दो प्रकार के होते हैं।

01:13:46:00 एक तो सन्यास वह होता है जिसमें साधक परमात्मा प्राप्ति के लिए प्रेरित होकर घर त्याग कर हट करके जंगल में बैठ जाता है तथा शास्त्र विधि रहित साधना करता है। दूसरा घर पर रहते हुए भी हठ योग करके घंटों एक स्थान पर बैठकर शास्त्र विधि त्याग कर साधना करता है। यह दोनों ही कर्म सन्यासी हैं। यानी कि कर्म सन्यासी कौन है? जो शास्त्र विरुद्ध चल रहा है। ठीक है? अब जब कर्म योगी की बात आएगी तो कम से कम कर्म योगी को तो शास्त्र विधि के अनुसार चलने वाला मानना चाहिए ना। मगर कर्म योगी में शास्त्र विधि के अनुसार ये दोनों काम करे जंगल में रह के या घर पर रह के वो भी कर्म योगी है। और फिर कर्म योगी वो भी है जो शास्त्र विधि विरुद्ध ये दोनों काम करे जंगल में रह के या घर पे रह के। अरे कहना क्या चाहते हो? कर्म योगी और कर्म सन्यासी में कोई अंतर नहीं है। यह कहना चाहते हो और शास्त्र विधि में और शास्त्र विरुद्ध में कोई अंतर नहीं है। यह कहना चाहते हो बाबा जी कहना क्या चाहते हो? नहीं पता। आगे देखिए इसका क्या मामला होता है। एक इन्होंने वो बहुत फैलाई हुई है। ज्ञान गंगा का मैं एक पेज बता रहा हूं। वो आप निकालिए।

01:15:00:00 196 देखिए इस बाबा ने कितना तत्व ज्ञान दिया है। 196 197 पेज नंबर ज्ञान गंगा निकालिए। ठीक है? तब तक मैं पढ़ रहा हूं। तो कर्म योगी का समझ लिया आपने। यानी कि कुल मिलाकर बाबा के अनुसार शास्त्र विधि के अनुसार करने में और शास्त्र विरुद्ध करने में कोई अंतर नहीं है और ना कर्म सन्यास में कोई अंतर है ना कर्म योगी में कोई अंतर है क्योंकि शास्त्र विधि द्वारा पूजा करने वाले को भी यह कर्म योगी कर्म सन्यासी दोनों कह रहा है और शास्त्र विधि विधि विरुद्ध शास्त्र विधि के अनुसार चलने वाले को कर्म सन्यासी कर्म योगी दोनों कह रहा है और शास्त्र विधि विरुद्ध चलने का चलने वाले को भी यह कर्म योगी और कर्म सन्यासी दोनों कह रहा है। ठोको ताली। ठीक है? अब ये तो इसकी खिचड़ी हमने देख ली। अब हम देखते हैं एक इनके द्वारा बहुत एक बात फैलाई जाती है। रुचि ऋषि की जो कथा है 197 पेज नंबर एक बहुत बड़ा खुलासा होने वाला है रुचि ऋषि को लेकर के यहां पर। तो आप चाहे तो यहां से कट लगा लें। 1 घंटा 20 मिनट दिखाई दे रहा है। तो यहां से इस रुचि ऋषि वाले चैप्टर को आप लोग लेकर के डालिए। रुचि ऋषि के बारे में क्या किया है। अ

01:16:13:22 गीता ज्ञान यह यह श्राद्ध क्या श्राद्ध का विरोध कर रहा है यहां पर यह पेज नंबर 215 हां शास्त्र विधि विरुद्ध इसमें नीचे चलिए नीचे चलिए इसमें आएगी ऋषि ऋषि की कथा श्राद्ध वाला आया कोई और आगे चलिए ऊपर जाइए ऊपर हां हां हां हां हां हां हां नीचे नीचे नीचे नीचे जाइए ये इसी का प्रमाण मार्कंडेय पुराण में मार्कंडेय पुराण में निकलता है जिसमें कि एक रुचि नाम का साधक ब्रह्मचारी रहकर वेदों के अनुसार साधना कर रहा था देखिए ब्रह्मचारी रहना वेदों के अनुसार मान लिया इसने पहली बात तो ब्रह्मचारी का मतलब क्या हुआ ब्रह्म के लिए आचरण करने वाला ठीक तो ब्रह्म के लिए जो आचरण कर रहा है। वेदों के अनुसार है वो आचरण यानी कि वेद विरुद्ध भक्ति नहीं है। अब यहां पर क्या है कि वह विवाह नहीं करना चाहते। इसका मतलब वो विरक्त है। तो यहां अभी क्या कह रहा है कि जो सन्यास होता है जंगल में जाकर के सन्यासी बनता है। वो जो है गलत है। ठीक है?

01:17:29:13 उसको यह गलत कह रहा है। और मार्कंडेय पुराण में जब पितर उसको कह रहे हैं अपने पुत्र को प्रकट होकर के कि भाई तू विवाह के मार्ग पर चल। विवाह के द्वारा होते हुए भी अगर तू अनासक्त भाव से संयम पूर्वक धर्म का निर्वाह करते हुए यदि तू वहां गृहस्ती का निर्वाह करेगा तब भी तू मुक्त हो जाएगा। यह पितर वहां पर कह रहे हैं तो यह उनका खंडन कर रहा है कि देखो एक व्यक्ति वेद विरुद्ध वेद के अनुसार चल रहा था तो उसके पितर आकर के उसको गलत दिशा में ले जा रहे हैं। उसका विवाह करवा रहे हैं। यानी कि विवाह करने की शिक्षा गलत है। रुचि ऋषि वाले प्रकरण में रामपाल ने यह माना है। और फिर यहां पे बार-बार कह रहा है कि विरक्त रहना गलत है और ब्रह्मचारी आजीवन रहना गलत है। जो विवाह करके जो चलेगा और वो नाम दीक्षा लेकर के जाप करते हुए वो सही है। वो बात और है कि उसमें आगे उसने ये भी माना कि चोरी भी करेगा वो भी सही है।

01:18:29:03 कर्म योगी कहा है उसको इसने। तो यह इसकी खिचड़ी है। अब देखिए अब इसको इसी किताबों से पहले दिखाता हूं कि इसने यहां पर यह कहा है कि पितर अगर तुम्हें विवाह करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं कि तुम जो है विवाह कर्तव्य कर्मों का पालन करते हुए गृहस्थ होते हुए भी तुम जो है वहां आगे पहुंच सकते हो। क्रमिक अभिव्यक्ति हो सकती है तुम्हारे जीवन में। क्रमिक विकास हो सकता है अध्यात्म का। तो यह पितर समझाने का प्रयास वहां पर कर रहे हैं रुचि ऋषि को। तो यह वहां पर पितरों का खंडन करने के लिए कह रहा है कि देखो देखो वो वेद के अनुसार चल रहा था तो यह उसको वेद के विरुद्ध ले जा रहे हैं। ठीक पितर पितरों को गलत साबित करने उसके चक्कर में खुद ही को गलत साबित कर लिया। इसका मतलब इसके अनुसार मार्कंडेय पुराण की जो रुचि ऋषि की कथा है उसमें इसने माना है कि विरक्तता ही सही है और जो गृहस्थ वाला आश्रम है वो गलत है। विवाह करना गलत है। अब ये जगह-जगह पर अपनी इस बात का खंडन करता है। देखिए कहां-कहां पे करेगा।

01:19:29:22 [गला साफ़ करने की आवाज़] कहां-कहां पर करेगा पेज पेज नंबर 36 निकालिए पेज नंबर 36 इसी का गरिमा गीता की पेज नंबर 36 में इस व्यक्ति ने विरक्तता को सही भी माना है और गलत भी माना है। जैसे मार्कंडेय पुराण में विरक्तता को सही माना है। तो पेज नंबर पेज नंबर 33 पहले 33 निकालिए। 33 तो पेज नंबर 33 में यह जो है फिर से

01:20:25:27 सन्यास का समर्थन कर रहा है। पेज नंबर 33 इतनी ज्यादा बेईमानी की है ना इस व्यक्ति ने। इतनी ज़्यादा इतनी ज़्यादा भ्रष्टता इतनी ज़्यादा धूर्तता इतने झूठ बोले हैं कि उसमें यह निर्णय करना कठिन हो जाता है कि शुरू करें तो कहां से करें? किसको पकड़ के बात करें? किस बात को पकड़ के बात करें? यह निर्णय करना कठिन हो जाता है। इतना झूठ परोसा है इसने। सब कुछ कह दिया भाई। ए बी सी डी एफ जी एच आई जे के एल एम एन ओ पी क्यू आर एस टी यू वी डब्ल्यू एक्स वाई जेड। तो ये जब एप्पल की स्पेलिंग पूछी गई किस अक्षर से शुरू होती है? तो मैंने पूरी ए बी सी डी पढ़ दी। उसी तरीके से इस बाबा ने हर चीज बोल दी जिससे कि कोई भी चीज मेरी सब कुछ मान ले। मैंने तो यह भी बोला है। तो इसने जो है घर गृहस्ती को जो है विरोध किया है। सन्यास को माना है रुचि ऋषि की कथा में। तो अब सबसे पहले तो हमने वहां पर देख लिया पृष्ठ संख्या 103 पे इसने ग्र गहस्ती को श्रेष्ठ माना है और कर्म जो सन्यास है उसको जो है गलत माना है वहां पर वो ऐसे ही विरक्त होकर के रह रहे हैं रुचि ऋषि तो उनको सही कह रहा है और यहां पर कह रहा है कि ऐसे रहना जो है वो गलत है घर में रहो घर में रह करके इंद्रिय निग्रह

01:21:40:28 मत करो इंद्रिय निग्रह मतलब अपने आप को संयमित रखने का प्रयास मत करो बस भक्ति करो यानी कि रामपाल ऐसे ही रहता होगा बबता इत्यादि ऐसे ही रहता होगा। वहां पर संयम की आवश्यकता कोई नहीं है। इसीलिए ऐसे कह रहा है। इसीलिए जो वीडियो का टाइटल है वो यह रखा गया कि भाई क्या काम वासना अभी भी बाकी है या अभी जो शारीरिक बदलाव होते हैं, वृद्धावस्था आ जाती है। उसमें जो है कई विषयों को लेकर के असामर्थ्यता आ जाती है। उसके कारण क्या वो चीजें नहीं है कि अभी भी वही है। क्योंकि इसके लेख को देख करके ऐसा लगता है गरिमा गीता की में जो इसने अह वो हुआ दिया है ज्ञान तत्व ज्ञान। उससे ऐसा समझ में आता है कि इसका जो चरित्र है ना वह समझ में आता है इसका खुद का चरित्र कैसा है। कभी यह सोचता है कि विरक्त हो जाओ। कभी यह सोचता है गृहस्थ हो जाओ। कभी यह सोचता है कि इंद्रियों का निग्रह करो। कभी यह सोचता है ना करो। तो जब ये पढ़ाने बैठता है तो करो इंद्रियों विषयों का इंद्रियों का निग्रह। मगर जब यह जो है घर जाता होगा या फिर जो इनके जो कुछ क्या-क्या मिले थे कोई कोई कहता है गुफा है मीडिया में ऐसा कुछ बताया गया कि इसका कुछ अपना एक कमरा था तो उसमें जाता होगा तो इंद्रियों का निग्रह मत करो ये सब चीजें शायद होती होंगी जिस कारण से इसने बार-बार अपनी ही बात को काटा है। रुचि ऋषि में इसने सन्यास

01:22:56:09 का समर्थन और गृहस्थ का विरोध किया है। अब यह क्या कह रहा है? सबसे पहले तो पृष्ठ क्रमांक 103 पे इसने सन्यास का विरोध और गृहस्थ जीवन का समर्थन किया है। हालांकि जो संयमित जीवन के अनुसार और शास्त्रोचित जो निर्देश दिए गए उनके अनुसार चलने पर हमारी गीता हमारे शास्त्रों के अनुसार दोनों ही मार्ग फलदायक है। ये गीता में भी लिखा हुआ है। मगर इसने जो है क्या किया है? सन्यास का समर्थन रुचि ऋषि वाली में और गृहस्थ का विरोध और पृष्ठ क्रमांक 103 गरिमा गीता की वहां पर इसने क्या किया है कि सन्यास का विरोध और गृहस्थ का समर्थन इसके बाद ये यहां पे नहीं रुकता है। इसने जो है फिर से एक तरफ ये हट पूर्वक इंद्रिय निग्रह करना मना करता है। यही कर्म कर्म योगी वाले में और और भी जगह-जगह मगर फिर यह पेज नंबर एक 33 पे गरिमा गीता की पेज नंबर 33 वहां क्या होता है ये पेज नंबर 33 है ना हां ये ये जिसको तत्वदर्शी संत नहीं मिला वह परमात्मा के स्मरण में स्थित नहीं हो सकता क्योंकि उसका मन वश में नहीं है मन वश में होना चाहिए पहली बात यह ध्यान रखिए इंद्रिय निग्रह मन वश में होना चाहिए उस अयुक्त यानी परमात्मा

01:24:11:22 पर ना टिके मन वाले पुरुष में अब देखिए एक जगह विरक्तता का विरोध करता है। फिर एक जगह समर्थन करता है। फिर एक जगह इंद्रिय निग्रह का विरोध करता है। फिर दूसरी जगह समर्थन करता है। यह तत्व ज्ञानी बाबा हैं। अच्छा तो उसकी बुद्धि स्थिर नहीं है। उस देखो यहां इसके ही अगले पैराग्राफ में ये कह रहा है क्योंकि पूर्ण संत रूपी केवट नाव के साथ नहीं है तो उस नाव को जल में वायु हर लेती हैं। यानी अपनी इच्छा अनुसार भटकाती हैं। वैसे ही पूर्ण संत के अभाव में तत्व ज्ञान ना होने से जल में नाव की भांति विषयों में विचरती हुई इंद्रियों में से मन जिस इंद्रिय के साथ लगा है वह एक ही इंद्रिय उस अभक्त की बुद्धि को हर लेती है तो यहां क्या हुआ इंद्रिय निग्रह करना चाहिए यहां बाबा जी ये मान रहे हैं वहां पे कह रहे हैं नहीं नहीं नहीं इंद्रिय निग्रह नहीं होना चाहिए इंद्रिय निग्रह नहीं करना केवल नाम जपो यहां इंद्रिय निग्रह का समर्थन कर रहा है कि इंद्रिय निग्रह होना चाहिए अब मैं आपसे पूछता हूं सब बातें छोड़ दो अगर क्या नाम जब जप रहे हो अपने ईश्वर का नाम जप रहे हो तो क्या फ्रीलांस रहने चाहिए क्या फ्री चाहे जहां पर जिस भी इंद्र को विषय देना है उसका भोग का विषय है उसको करने का प्रयास करना चाहिए बाबा ऐसा ही रहता

01:25:26:24 है क्या मैं रामपालियों से पूछ रहा हूं क्या अपने घर में ऐसे ही रहते हो कहीं पर भी संयम नहीं करते हो किसी भी क्षेत्र में संयम नहीं करते हो बाबा का तो नहीं पता है उसके बारे में तो बहुत सी चीजें हैं मगर तुम लोग क्या करते हो तुम बताओ इंद्रिय निग्रह करते हो हो ना संयम करते हो ना ठीक है यह हो गया अब देखिए विरक्तता का विरोध विरक्तता का समर्थन इंद्रिय निग्रह का विरोध इंद्रिय निग्रह का समर्थन अब

01:26:02:16 मैं आपको दिखाता हूं इसी में 36 पेज नंबर पर देखिए अब मैं आपको सन्यास का यहां पर समर्थन दिखाता हूं देखिए इसमें देखिए क्या लिखा है इसमें लिखा है 36 इसमें लिखा है [गला साफ़ करने की आवाज़] कि रात्रि में दो प्रकार के व्यक्ति जागते हैं। एक तो सांसारिक भोगों की इच्छा वाला सोते हुए भी स्वप्न में उन्हीं में भटकता रहता है। दूसरा परमात्मा की भक्ति में लगा स्थिर बुद्धि वाला साधक रात्रि में स्वप्न में भी परमात्मा में विचार विचार करता है। आगे क्या लिखा है? भावार्थ जो सांसारिक व्यक्ति भौतिक पदार्थों की प्राप्ति के लिए दिन भर भटकता है। ये जो भौतिक पदार्थों की प्राप्ति है ना यही जो माया के पीछे पड़े रहने का खंडन किया है गीता में वही है। भौतिक पदार्थों की जो भक्ति करते हैं माया की भक्ति करते हैं। माया को ढूंढते रहते हैं। वो खंडन किया तो उसको ये लोग बनाते हैं। ब्रह्मा विष्णु महेश की भक्ति मना की गई है। हालांकि खैर इधर आ जाते हैं। तो जो सांसारिक व्यक्ति भौतिक पदार्थों की प्राप्ति के लिए दिन भर भटकता है यानी नहीं भटकना चाहिए। भौतिक पदार्थों की प्राप्ति के लिए नहीं भटकना चाहिए। संयमी साधक की इच्छा उन पदार्थों की नहीं होती। ठीक है? यानी कि विरक्तता भौतिक पदार्थों के लिए विरक्तता का यहां समर्थन आ गया।

01:27:18:04 उसके लिए वे दिन भी रात्रि के समान है। अन्य लोग तो सांसारिक पदार्थों की प्राप्ति के लिए सजग रहते हैं। परंतु स्थिर बुद्धि वाला उनसे मुख मोड़े रहता है। अब भाई भौतिक पदार्थों से मुख मोड़ने वाला विरक्त हो गया ना। भौतिक पदार्थों से मुख मोड़ने वाला विरक्त हो गया तो भौतिक पदार्थ तो भोजन भी है तो भोजन से मुंह मोड़ने वाला व्रत हो गया व्रत का तो खंडन पर तू तो समर्थन कर रहा है यहां पर तेरे जूता ही तेरा ही जूता सदैव तेरे सर पर मारूंगा जो जो आएगा ना हमारे धर्म का अपमान करने हमारे भगवान का अपमान करने उसी का जूता उसके सर पर पड़ेगा ये देख और जिसने भी अपनी मां जिसको भी उसकी माताजी ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया है वो आकर की बात करी सामने से

01:28:08:02 तो यहां पे इसने व्रत का और विरक्तता का पुनः समर्थन कर दिया। अब इस बाबा से कोई पूछे भाई तू विरक्तता का समर्थन करता है कि विरोध करता है? क्या ऐसा है कि भविता के सामने आते ही तुझे गृहस्ती याद आने लगती है और जैसे ही जनता को बेवकूफ बनाता बनाना होता है मंचों से तो तुझे वहां पर विरक्तता याद आ जाती है। कर्म योगी में तू कहना क्या चाहता है कि शास्त्र विरुद्ध कर शास्त्र विरुद्ध चीजें करने वाला तो कर्म सन्यासी हो गया मान लिया तो इसका मतलब कर्म योगी क्योंकि कर्म योगी और कर्म सन्यासी में अंतर है। तो कर्म योगी अगर तूने कर्म सन्यासी शास्त्र विरुद्ध वाले को माना है तो भैया कर्म योगी तू उसको मान ले भाई हमें झंडू बाम नहीं लगाना पड़ेगा सर पे तो कर्म योगी तू उसको मान ले जो शास्त्र विधि के अनुसार तेरी वाली अभी तो तेरी वाली के अनुसार बात कर रहा हूं तो तू उसको मान ले कर्म योगी जो शास्त्र विधि के अनुसार चले मगर तू कर्म योगी में भी ये घुसेड़ दे रहा है कि कर्म योगी में इसने क्या घुसेड़ दिया 103 कर्म योगी में फिर तू कह रहा है कर्म योगी दो प्रकार के हैं एक तो बाल बच्चों सहित सांसारिक कार्य करता हुआ शास्त्र विधि अनुसार भक्ति साधना करता है या ना शादी करवा के घर पर या किसी आश्रम में रहता हुआ सांसारिक कर्म अथवा सेवा करता हुआ शास्त्र विधि अनुसार भक्ति करता है। यानी कि विरक्त और

01:29:23:06 गृहस्थ दोनों कर्म योगी हैं। और ऊपर वाले पैराग्राफ में विरक्त और गृहस्थ दोनों कर्म सन्यासी हैं। बस यहां दोनों पैराग्राफ में अंतर ये है कि ऊपर वाला शास्त्र विधि विरुद्ध साधना कर रहा है और नीचे वाला शास्त्र विधि सहित साधना कर रहा है। मगर इसने क्या किया तीसरा एक पैराग्राफ और लिखा 103 नंबर का पेज दिखा दो आप यहां। 103 नंबर इसने क्या किया यहां पर कर्म योग में नीचे लिखा है दूसरी प्रकार के कर्म योगी वह होते हैं जो बाल बच्चों में रहते हैं तथा साधना शास्त्र विधि विरुद्ध करते हैं अरे मेरे भाई तो वो तो कर्म सन्यासी है ना शास्त्र विरुद्ध वाला तो कर्म सन्यासी है ना तो यहां पे भी घुसेड़ दिया कर्म शास्त्र विरुद्ध विरोध को पागल है क्या भांग खा के लिखी है क्या ये किताबें ऐसा विवरण लिखा है ना ये देखिए इसका घचूपन देखिए कर्म सन्यास का विवरण कर्म सन्यास दो प्रकार के होते हैं। एक तो सन्यास वह होता है जिसमें साधक परमात्मा प्राप्ति के लिए प्रेरित होकर घर त्याग कर हटके जंगल में बैठ जाता है। यानी कि घर त्याग कर नहीं रहना चाहिए। यह वो वाला खंडन है जो वहां पर रुचि ऋषि की तपस्या में है। रुचि ऋषि का समर्थन कर रहा है। पितरों का विरोध करने के लिए। यहां पे रुचि ऋषि पितरों का समर्थन कर रहा है व्यक्ति। पित पितर कह रहे हैं ना गस्त

01:30:38:14 ग्रस्त हो जाओ। विवाह करके कर लो। कर्तव्य कर्मों का पालन करते हुए कर लो। तो यहां पे पितरों का समर्थन कर रहा है। यह क्या कह रहा है? घर त्याग कर हटके जंगल में बैठ जाता है तथा शास्त्र विधि साधना करता है। दूसरा घर पर रहते हुए भी हठ योग करके घंटों एक स्थान पर बैठकर शास्त्र विधि त्याग कर साधना करता है। ये दोनों ही कर्म सन्यास यानी कि शास्त्र विरुद्ध तरीके से चलना कर्म सन्यास है। तो जाहिर सी बात है कि कर्म योगी की जब बात बताओगे तो शास्त्र विधि सहित चलना कर्म योगी होगा। मगर वहां ये क्या कह रहा है? यह भी दो प्रकार का होता है। एक तो बाल बच्चों सहित सांसारिक कार्य करता हुआ शास्त्र विधि अनुसार भक्ति साधना करता है या ना शादी करता करवा करके घर पर या किसी आश्रम में रहता हुआ सांसारिक कर्म अथवा सेवा करता हुआ शास्त्र विधि अनुसार साधना करता है। ये दोनों कर्म योगी हैं। मगर अब दूसरी प्रकार के कर्म योगी वह होते हैं जो बाल बच्चों में रहते हैं तथा शास्त्र विधि विरुद्ध कर शास्त्र साधना शास्त्र विधि विरुद्ध करते हैं या शादी ना करवा कर किसी आश्रम में सेवा करते हैं तथा साधना भी शास्त्र विधि के विपरीत करते हैं पागल है क्या फिर कर्म सन्यास कहां ले जाएगा अलग से तूने कर्म योगी में भी कर्म सन्यास वाली चीजें डाल ली

01:31:49:22 ठीक है बुलेट पॉइंट्स में आगे चलते हैं अब बुलेट पॉइंट्स में हम लोग आ जाते हैं। आगे चलते हैं। तो पांच दो की व्याख्या करते हुए यह व्यक्ति यह व्यक्ति पांच दो की व्याख्या करते हुए कहता है कि भाई यहां पे पांच दो के उसमें इसने लिखा है कि 16 से 23 तक गीता अध्याय 16 श्लोक 23 में कहा है शास्त्र विधि अनुसार ये वो तो जो साधना त्यागने की है पांच दो के उसमें लिखा है अर्थात ना करने वाली है तथा जो करने वाली है उनके लिए शास्त्रों को प्रमाण मानना चाहिए तो यहां पर जो त्यागने की साधना है वह गीता हमारे शास्त्रों में बताई गई रामपाल के अनुसार तो बात यह है कि जिसको त्यागने को कहा गया है उसको करने को कहां पे कहां पर कहा गया है यह बात फिर बाबा जी को बतानी होगी विद प्रूफ जो वो बता नहीं पाएंगे वो अपने जीवन भर की पाइप बांट दें खीर बांट दें किडनी बेच के बांट दें गुर्दा बेच के बांट दें जो भी कर ले मगर वो बता नहीं पाएंगे आगे आ जाइए पष्ठ संख्या 108 फिर इसने [गला साफ़ करने की आवाज़] पांच तीन में सन्यास का समर्थन किया। देखिए पांच तीन में सन्यास का समर्थन कैसे किया है। अह पांच

01:33:05:22 तीन में इसने सभी का समर्थन कर दिया। सन्यास का भी, जंगल में रहने वाले का भी, विरक्त का भी, गृहस्थ का भी सबका समर्थन कर दिया। जबकि एक तरफ कहता है कि जंगल में रह के साधना करना यह शास्त्र विरुद्ध है। त्याग कर साधना करना। जबकि मार्कंडेय वाले में कहता है कि भाई रुचि जी सही कर रहे थे रुचि ऋषि। यह कहना क्या चाहता है? यह सोचने में ही आप पागल हो जाओगे। तो 108 पे प्रश्न संख्या और सबसे नीचे से सेकंड पैरा सेकंड लास्ट पैराग्राफ यह भावार्थ कर रहा है अध्याय पांच श्लोक तीन में शास्त्र विधि अनुसार साधना करने वाले कर्म योगी का विवरण है। ये अब ध्यान से सुनिएगा यहां पर ये बात क्योंकि बहुत दिमाग लगाना पड़ेगा क्योंकि इसने इतने झूठ बोले हैं ना उन झूठों को समझने में भी उन असत्य भाषणों को समझने के लिए भी बहुत आपको ब्रेन चाहिए। ये सामर्थ्यवान जो इनको धारण कर पाए क्योंकि इसने इतने झूठ बोले हैं कि आप यह नहीं समझ पाओगे कौन सी जगह से झूठ को पिक करना है। तो इस अब ये क्या कह रहा है पांच तीन में शास्त्र विधि अनुसार साधना करने वाले कर्म योगी का विवरण है। जो श्रद्धालु भक्त चाहे बाल बच्चों सहित या रहित यानी गस्थ या विरक्त या किसी आश्रम में रहकर सतगुरु

01:34:21:18 व संगत की सेवा में रहत है। वह सर्वथा सर्वथा राग द्वेष रहित होता है। वास्तव में वही सन्यासी है। यह लिख दिया। यानी कि इसने गृहस्थ वाला विरक्त वाला दोनों को इसने अब यहां मान लिया। दोनों ठीक है। एक तरफ गलत कहता है। एक तरफ सही कहता है। आगे पांच श्लोक चार में कहता है ज्ञान योगी व गृहस्ती। यहां पे ज्ञान योगी यानी ईशांख योगी यानी वो बात हो रही है सन्यास और वो कर्म योगी की अपनी गीता के अनुसार। तो अब यह कह रहा है पांच श्लोक चार में ज्ञान योगी व गृहस्ती दोनों की एक ही उपलब्धि बताई गई है। यह रामपाल खुद कह रहा है श्लोक पांच चार की व्याख्या करते समय कि गीता में ज्ञान योगी यानी कि कर्म सन्यास वाले की और कर्म योगी यानी गृहस्थ की एक ही उपलब्धि बताई है गीता में रामपाल के अनुसार इसको नोट कर लो आप अभी आगे मजा आएगा। फिर यदि कोई कहता है कि ज्ञान योगी श्रेष्ठ या गस्थ श्रेष्ठ है तो वह पंडित नहीं है। अब यहां पर देखो इसको चैन नहीं पड़ रहा है। इसमें ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि ज्ञान योगी शास्त्र विरुद्ध है या गृहस्ती शास्त्र विरुद्ध है। यानी कि इसमें ऐसा कहीं नहीं लिखा कि ज्ञान योगी जो होता है यह ज्ञान योगी जो होता है वो शास्त्रों के विरुद्ध साधना करने वाला होता है। यह नहीं लिखा गीता में। मगर इसने

01:35:36:24 दोनों को ही बेकार कह दिया। ना ही इसमें यह लिखा है कि गस्ती जो होता है वह शास्त्र विरुद्ध साधना करने वाला होता है। मगर इसने गस्त को भी अमान्य कर दिया। फिर खुद कहता है कि यदि भक्ति शास्त्र विधि अनुकूल नहीं है तो वह चाहे गस्ती हो या ज्ञानी हो दोनों ही असफल है। यानी कि अगर शास्त्र के अनुसार होगी तो चाहे वो गृहस्ती हो और चाहे वो विरक्ति हो दोनों ही फिर सही होंगे। तो भाई इसमें मना कौन कर रहा है कि यहां उन गृहस्थों की बात हो रही है जो शास्त्र विधि विरुद्ध है। मगर इसको तो अपना पेच लड़ाते चलना है। अच्छा फिर से आगे जाकर के कह रहा है कि

01:36:16:28 अब देखिए पहले इसने माना कि दोनों की एक ही उपलब्धि बताई है। ठीक है? फिर आगे आगे बता रहा है इसी श्लोक में पांच चार में ही यह कह रहा है कि पांच श्लोक चार में दोनों की उपलब्धि एक बताई है। फिर आगे कह रहा है स्वयं भगवान कह रहे हैं कि शास्त्र विधि रहित साधना कर्म सन्यासियों से कर्म योगी उत्पन्न है। अब यहां पे दोनों की उपलब्धि अलग-अलग मान रहा है। क्योंकि कर्म सन्यास कर्म सन्यास में त्याग का अभिमान होना स्वाभाविक है। इसका कोई प्रमाण नहीं है। कर्म सन्यास में त्याग का अभिमान होता है। कोई सन्यास नहीं, कोई प्रमाण नहीं है। ठीक है? अध्याय पांच के श्लोक पांच में कहा है कि ज्ञान योगी तथा कर्म योगी एक ही स्थान प्राप्त करते हैं। यह इसने माना है अध्याय पांच के श्लोक चार और पांच में इसने यह माना है कि कर्म योगी और ज्ञान योगी यानी कि कर्म सन्यासी एक ही स्थान प्राप्त करते हैं। जिनकी साधना यदि शास्त्रानुकूल है और जो कोई ऐसा जानता है उसे ही ज्ञान कहते हैं। उसे ही ज्ञान। ठीक? अब इसने आगे क्या कहा है? इसी बात के बारे में अगले प्रश्न पर आइए आप 109 109 में नीचे आ जाइए विशेष

01:37:34:02 अब ये विशेष में क्या कह रहा है विशेष में ये कह रहा है कि गीता जी के अन्य अनुवादकर्ताओं ने जो गीता अध्याय पांच श्लोक चार में लिखा है कि सन्यास और कर्म योग द्वारा एक ही फल मिलता है। ठीक है? यह गलत अनुवाद है क्योंकि अध्याय पांच श्लोक छ के आधार से गलत सिद्ध होता है। भाई तूने ही तो अनुवाद किया है। दोनों की उपलब्धि एक है। हालांकि वही अनुवाद सही है। अनुवाद से अनुवाद क्यों काट रहा है भाई तू? दोनों की उपलब्धि एक है। तूने उसमें बड़ा छोटा किया है। दोनों से एक ही दोनों को एक ही उपलब्धि पे ले जाने वाला बताया गया है। ठीक है? गीता के अनुसार। मगर तूने खुद अभी कहा कि ये पांच श्लोक चार में ज्ञान योगी व गृहस्ती दोनों की एक ही उपलब्धि बताई गई है। फिर इसी प्रश्न में ऊपर कहा है 109 में ऊपर दिखाइए। देखिए इसके पंचर दिमाग को पंक्चर कर देने वाला ज्ञान सबसे पहला पैराग्राफ उसकी लास्ट की दो लाइनें

01:38:38:19 अध्याय पांच। यह अध्याय पांच लिखा है। सेकंड लाइन उसको अंडरलाइन करिए जरा। यह तू अनुवाद कर रहा है फड़ कहीं के। यह देख यह रामपाल ने अनुवाद क्या किया है? अध्याय पांच के श्लोक पांच में कहा है कि ज्ञान योगी तथा कर्म योगी एक ही स्थान प्राप्त करते हैं। यह कहा है। यह माना है रामपाल ने। अब नीचे विशेष में यह क्या कह रहा है? के ही स्थान प्राप्त नहीं करते।

01:39:14:19 ठीक है? अध्याय पांच के श्लोक चार और पांच दोनों में रामपाल ने माना कि दोनों कर्म योगी और कर्म सन्यासी एक ही स्थान पे आप प्राप्त करते हैं या ज्ञान योगी और गृहस्थ दोनों एक ही स्थान प्राप्त करते हैं। यह मान लिया रामपाल ने। फिर खुद रामपाल ही कह रहा है कि गीता के जो अनुवादक हैं अन्य उन्होंने गलत किया है क्योंकि दोनों एक ही स्थान प्राप्त नहीं करते। सन्यास मार्ग तो शास्त्र विरुद्ध है। अब यहां सन्यास मार्ग शास्त्र विरुद्ध हो गया। यानी रुचि ऋषि वहां पर पितरों की बात ना मान के सही कर रहे थे। ठोको ताली। ठोको ताली। आवाज नहीं आ रही तालियों की। तो भाई यह इसका सब पंचर कर देने वाला दिमाग वह है। इसमें जाते कुछ तर्क और दे दूं मैं कि यदि

01:40:05:10 आप किसी के अनुवाद पर निर्भर हैं तो आपको बाद वाला अनुवाद कुछ और लग रहा है। यह वाला कुछ आपने यह निर्णय कैसे लिया कि बाद वाले के अनुसार इसको बदलना है। यह यह क्यों नहीं हो सकता कि इसके अनुसार बाद वाले को समझे। यह निर्णय कैसे होगा? इसीलिए कहा ना अर्ध कुकुट न्याय नहीं कर सकते। सभी श्रुति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा साधु सम्मत धर्म है। एक भी श्लोक को काट नहीं सकते। श्लोक को काटोगे तो उनकी प्रामाणिकता पर प्रश्न आ जाएगा। सब कौन समझाया इन भुओं को? इनको समझाते समझाते मेरे सर में दर्द हो जाता है।

01:40:48:07 तो ये आज का रुचि ऋषि वाला हो गया। राघव ने जो चैलेंज के बारे में बेवकूफ बनाया गवर्नरों को वो हो गया। और जो जिन बातों को लेकर के हम लड़ रहे हैं इस तंत्र से अपराधिक तंत्र से उन चीजों को डिफेंड करने के लिए जो उसने अपने गवर्नरों को मूर्ख बनाने के लिए उल्टे सीधे प्रमाण प्रस्तुत करें उसका निराकरण हो गया। साथ ही साथ जो पिछले सप्ताह हमने एपिसोड जो नाइन है इस श्रंखला का उसमें जो अध्ययन किया था उसके बुलेट पॉइंट्स आज मैंने आपको यहां सुना दिए।

⬜ Not used yet · 01:41:23:13 – 02:02:24:24 (21:01)

01:41:23:13 आशा करते हैं आपको आनंद आया होगा। थोड़ा सा लिंक दे दीजिए तो थोड़ा सा मैं काम डाउन हो जाऊं। बहुत बड़े ट्रॉमा से निकलता हूं जब मैं इसको पढ़ता हूं। रामपाल को यह आपको लिंक दिया गया है। कोई वो अगर उपलब्ध तो वह आ जाए। वैचारिक मतभेद के निमित्त चर्चा करने ना आए। वो आना है तो फॉर्म भरे। हमारा नंबर दिया गया है। हम राघव दास और अभिषेक की तरह जो है उस तरह की स्त्री नहीं है जिसके विवाह के बाद वो अंग चिपकाया जाता है। अंग विशेष चिपकाया जाता है फेविकॉल फेवीक्विक के द्वारा और फिर उस बाबा से बाबा के साथ जो है संजोग होता है उनका जो बाबा खुद इसी प्रकार से अंग को चिपका कर जो है अपने तथाकथित परमेश्वर के साथ संजोग करके आता है। बड़ा गु्थी है बड़ी कोई आना चाहता है लाइव में कुछ विचार प्रकट करने के लिए तो आ सकता है।

01:42:31:22 तब तक मैं कमेंट पढ़ लेता हूं। ये बात बिल्कुल सही बता रहे हैं। रामपाल ने जो मार्ग बनाया है उस पर चलकर रामपाल के ही अनुसार लोगों को नरक के अलावा कुछ नहीं मिलेगा। अभी देखो उसकी किताबें पढ़ने में कितना नरक मिल रहा है। अच्छा आज खीर दिवस है। ओ हो हो

01:43:26:09 रामपाल के बारे में कुछ ये क्या कहना चाहती हैं? समझ में नहीं आ रहा है। बोलिए बताइए आपकी बात। एक व्यक्ति कह रहा है वेदों में प्रमाण है रामपाल शैतान है। हां कई उसी की किताबों से भी निकाला जा सकता है क्योंकि उसने इतनी खिचड़ी पकाई है ना।

01:44:22:07 अनिकेत जी लीजिए अनकेत जी को स्टेज पर लीजिए जय श्री राम अनकेत जी हां जय श्री राम भैया जय श्री राम इस वीडियो को मुझे दोबारा से अगर मैं और क्लेरिटी के साथ प्रस्तुत करना चाहूं ना जो आज मैंने इंफॉर्मेशन दी है कर्म सन्यास कर्म योग के बारे में तो मुझको काफी मेहनत करनी पड़ेगी उसको बिंदुगत तरीके से बताने के लिए जी भाटी जी जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम बस हम तो आज श्रोता ही है आप ही बोलिए लेकिन नहीं डालेंगे आपके बीच मेरा हो गया मेरा हो गया अरे लगातार एक डेढ़ घंटे से बोल तो रहा हूं बड़ा समय बांध दिया आज तो आपने

01:45:25:15 क्लीन बोल्ड कर दिया आपने एकदम से जिन्होंने नहीं देखा है अभियान शुरू हो चुका है हां बोलिए बोलिए आप बोलिए मैं अभी बाद में बोलता हूं बोलिए हां अब ये लोग क्या करेंगे कहेंगे मालूम है नई बात कहेंगे क्या कि देखो शिवश एकदम से ये हो गया है और उसका उसका दिमाग नहीं सही चल रहा है। शास्त्रों में प्रमाण है। सूक्ष्म सूक्ष्म वेद है। ये वही रिपीट करेंगे। बार-बार बार-बार वो मैं बता रहा हूं आपको। वो जो मैंने बताया था रॉकी जो कुत्ता था ना मित्र के यहां जो हवा में भौक रहा था। उस भौकने का कोई प्रयोजन नहीं था। उसका दिमाग झटका खा गया था। इसी प्रकार से इनका सही है। हां। इसी प्रकार से यह जो यह बोलते हैं ना आके अपनी रिपीटेड रिपीट करते हैं ना रिपीटेशन करते हैं जो यह बातें बोलते हैं ये इसका कोई प्रयोजन नहीं होता है कि हम जवाब दे रहे हैं वास्तविकता में हम कुछ ऐसा बोल रहे हैं जिससे सामने वाले की बात कटे कम से कम वो प्रभावित तो हो इनका काम बस बोलना होता है कि हमने कुछ बोला जिससे हमारी जनता को लगा वाह ठोको ताली हो गया इंतजाम हो गया अच्छा जनता भी कैसी है अरे तेरी तेरा

01:46:40:19 तेरा तो बैंड बज गया। अरे तेरा तो वीडियो बन गया। वीडियो बनने से बैंड निग्गू वाली बात निग्गू हां हां निग्गू भी यही करता है ना वो तो अच्छा हुआ। उस समय मेरे फोन में बैटरी कम थी नहीं तो मैं उसका पोस्टमार्टम तभी कर देता। मतलब वीडियो बना देना ही किसी के लिए ये बहुत बड़ा झंडा है। अच्छा वो एक बात और कह रहा था राघव दास कह रहा था कि भाई तू और कर क्या सकता है? तू तो यही कर सकता है। पुतला जा। अबे भचू कहीं के तेरी औकात क्या है? तू क्या कर सकता है? ये बार-बार बुक के पीछे खड़ा हो के अपने गवर्नरों को सुना सकता है उल्टी सीधी चीजें। अरे हम तो तेरी छाती पे खड़े होकर एक हम तो तेरी छाती पे हम तो तेरी छाती पे खड़े हो के आ रहे हैं। वहां के कोऑर्डिनेटर भागे हुए। तेरे यहां महिलाएं आकर कह रही है। यहां किताब नहीं है किताब नहीं है। और यह कह रहा है मुंडिका आश्रम आजा। वहां मेरा घर है मुंडका में। एड्रेस दिया है क्या तूने? एड्रेस दे कहां पर चिपकाना है तो हम देखेंगे किस किस प्रकार से चिपकेगा पर्चा और मैंने तो खुद उस वीडियो में कहा है ना भाई मुझे पूरी दुनिया में बदलाव नहीं लाना मुझे मेरी गली में लाना है जो हिंदू है वो अपनी गली में बदलाव लाएगा हर हिंदू अपनी गली में बदलाव लाएगा सब सही हो जाएगा

01:47:57:15 हमें रामपाल [गला साफ़ करने की आवाज़] को नहीं पकड़ना है रामपालियों को पकड़ना है ध्यान रख लो आप सब लोग अपने बगल वाले अपने घर के पास निकटतम रहने वाले वाले रामपाली के यहां जाओ और वहां यह पर्चा चिपकाओ कि वह किसको चंदा देता है। तुम्हारी मां को गाली देने वाले वाले को वो चंदा देता है। उस उसके यहां पर शांतिपूर्वक तरीके से कोई लड़ाई झगड़ा नहीं। उसके आसपास दीवारों पर ये पर्चा चिपकाओ। जैसे लोगों के घर के बाहर लिख देते थे ना यह गद्दार का घर है। ऐसे ही आसपास उसके लोगों को बताओ कि यह उन लोगों से जुड़ा हुआ है। उन लोगों से इसका संबंध है जो तुम्हारी मां को गाली देते हैं। इसके साथ किसी भी प्रकार का संबंध रखने वाला अपनी माता के अपनी दुर्गा मां के बारे में प्रचारित होने वाली ऐसी भ्रामक बातों का समर्थक कहलाएगा। बताओ यह सारी सामग्री हमारे पास ड्राइव में उपलब्ध है। WhatsApp करिए, ड्राइव लीजिए। ये सारी प्रचार सामग्री आप आपको उपलब्ध है। ये पर्चा चिपकाइए और पुतला जला सकते हैं तो पुतला जलाइए। जी यही बात मैं कह रहा था। यही बात मैं कह रहा था। जिस प्रकार आपने जो पुतला दहन वाला किया ये पूरे भारतवर्ष

01:49:12:16 में गलीगली में होना चाहिए। हम क्या है कि बहुत सहिष्णुता अब बहुत ज्यादा रखनी है। मुखर विरोध जो आपने शुरू किया है वो भारत के हर कोनेकोने में होना चाहिए। ये बहुत अच्छा सराहनीय आपका स्टेप था और इसका अनुकरण हम सबको निश्चित रूप से करना चाहिए। बिल्कुल और मेरे पास कई लोगों ने संपर्क किया भी है। आज ही किया है। बहुत जल्द दिल्ली में पटना में। जी जगहजगह होना चाहिए। जगह-जगह ब्लॉक मुख्यालय पे तहसील स्तरों पे जिला मुख्यालय पे जगह-जगह होना चाहिए। ये ये भगवान का काम है। कोई छोटा-मोटा काम नहीं है। वो यार कुछ नहीं है। उनमें कोई नहीं है। बिल्कुल मतलब धूल में लट मार रहे हैं। जिसमें इतने तलीनता से लगे हुए हैं। इतनी निष्ठा से लगे हुए हैं। हमारा ये भगवत कार्य है। यह बहुत अच्छा लगा। यह कोनेकोने में होना चाहिए। यह बिगुल बच जाना चाहिए निश्चित रूप से।

01:50:12:09 अनिकेत जी तो तैयार हो ही चुके हैं। बहुत जल्द अपने क्षेत्र में करने वाले हैं कार्यक्रम। भाटी जी भी करेंगे और जितने भी लोग हैं जानकारी में कई लोगों के मुझे फोन आ चुके हैं। अब जगह होने वाला है। पिछली बार पिछली बार भैया आपने यही चीज आप जो आप बोल रहे हो ना यही चीज पिछली बार आपने बोला था कि मेरे गली में मेरी मां का अपमान होगा और मैं सुन के लूंगा। इतना कायर नहीं हूं। वो दिल पर मेरे बात छप गई थी। इसके लिए जब मैं जा रहा था तो मेरे यहां से मात्र 5 से 7 मिनट का ही दूरी है जहां पर वो लोग ये सब प्रचार करते थे। मैं जा रहा था सडनली मिल गए वो लोग और ताज्जुब की बात तो मुझे वो लगी कि वो आपको जानते हैं यहां के लोग भी [हंसी] तो मैंने उसमें जब उसने वीडियो बंद करवाया पहले बोला ऐसे ही बात करो तो मैंने बोला शिवा नारायण द्विवेदी को जानते हो बोलता है हां नाम सुना है मैंने फिर फोटो दिखाया आपका बोलता हां हां ये महाराज को जानते हैं पंडित जी को तो ये सब इनके बातों में आप मत फसो मुझे वो लपेट रहा था [हंसी] मुझे लपेट रहा था। मैं बोला ये तो डिबेट के लिए बुलाते हैं। तुम लोग आते ही नहीं हो। कर लो

01:51:27:18 डिबेट। मैं नंबर दे देता हूं। ये वो बोलते देखो डिबेट करना तो हमारे गुरु से करो। मैं बोला यार तुम्हारे गुरु आकर एक ही चीज बोलते हैं कि मेरा चैलेंज है सबको सबको हरा देंगे। और कैसे हराएंगे? बस बोल दिया तो हरा दिया। नहीं नहीं तुम ये कहो तुम अपने गुरु का नंबर दे दो ना। कर लेते हैं उसी से। नंबर लाओ। नंबर [गला साफ़ करने की आवाज़] तो दो हवा में कर ले क्या? हां तो मैं एक चीज एक संदेश सभी को दे दूं। हां एक संदेश दे दूं मैं तो मैंने उससे पूछा सर

01:52:08:19 एक एक संदेश मैं दे देता हूं। फिर आप आप लोग अपनी बात रखिए। सभी जितने भी हिंदू हैं और जिनके मन में भी रोष है रामपाल के तंत्र को उसकी गतिविधियों को लेकर के ठीक है अब भी जिसका खून ना खौला खून नहीं वो पानी है जो अपने अस्तित्व की लड़ाई के लिए काम ना आए वह बेकार जवानी है ठीक है तो आप अगर हिंदू हैं और दुर्गा माता को आप अपनी मां मानते हैं भगवती मानते हैं या सनातन धर्म से जुड़े हुए किसी भी भगवान के स्वरूप के प्रति आपकी आस्था है। सनातन धर्म में आपकी आस्था है और आप रामपाल के मामले से अवगत नहीं है तो अवगत हो जाइए और जिनके मन में पहले से रोष है तो आपको कोई झगड़ा नहीं करना है। कोई लूटखसोट कुछ नहीं। केवल जहां आपके निकटतम रामपाली कोई रह रहा है। उसका सामाजिक बहिष्कार करवाइए। यह लोग हम ही लोगों से अर्थ प्राप्त कर रहे हैं। आजीविका प्राप्त कर रहे हैं। हम ही लोगों से और उसका उपयोग इसी प्रकार से हमारे

01:53:24:02 हमारी आस्था का जो विषय हैं उनका अपमान करने में लगा रहे हैं। तो अब समय आ चुका है। खड़े हो जाइए। जगह-जगह पर अगर आपके पास सामर्थ्य है बजरंग दल सक्रिय है विश्व हिंदू परिषद सक्रिय है जो हिंदुत्ववादी कोई दल मिल जाए संस्था मिल जाए उसके साथ संपर्क करिए उसको ये चीजें बताइए पुतला दहन करिए अगर कर सकते हैं तो नहीं कर सकते कम से कम अपने घर के पास रहने वाले सबसे पहला सबसे मोस्ट इंपॉर्टेंट यह ध्यान रखिए पुतला दहन से भी ज्यादा इंपॉर्टेंट है आप अपने घर के पास रहने वाले रामपाली का सामाजिक बहिष्कार करिए लोगों को बताइए यह कौन व्यक्ति है जो यहां पर नौकरी कर रहा है इसके यहां उसके मालिक को बताइए जहां वह नौकरी कर रहा है लोगों को बताइए जहां वो परचूनी दुकान खोले बैठा है या और कोई दुकान खोले बैठा है उसके आसपास पर्चे चिपकाओ उसकी दुकान पर मत चिपकाओ उसके आसपास चिपकाओ उसके आसपास उद्घोष करो यह कौन है जैसे हमने किया वहां पर वो बोर्ड लगाओ अभी अकल ठिकाने आने लगेगी जगह जगह पर इनका बहिष्कार करो अभी मेरे पास संपर्क आने लगा उस समोसे वाले का। ठीक है? मैं बताऊंगा जो भी जैसा भी होगा आगे।

01:54:39:08 तो यह सब आप लोग चालू करें और देखिए किस तरीके से आपको अभी से ही तुरंत यह करते ही आपको संतोष हृदय को पड़ने लगेगा। मुझे बड़ा संतोष है। बिल्कुल उसकी छाती पर उसके वहां पेड़ पर जहां पर उसका ठेला लगता है वहीं पर लगा के आया हूं बोर्ड और दो दिन से दिख नहीं रहा है वो और अभी दिखेगा तो फिर वहां जाकर के करूंगा। इससे तो मुझे कोई नहीं रोक सकता ना। मैं फिर वहां जाकर के बताऊंगा लोगों को लाउडस्कर लेकर के। यह कौन व्यक्ति है जिसके तुम समोसे खा रहे हो।

01:55:19:06 ठीक है तो यह सब है जी अब आप लोग बोले जी अनिकेत जी आपको अपनी बात पूरी करनी हां तो मैंने उन लोगों से पूछा बुक वगैरह के बारे में कहां पर छपती है तो ये लोग वही बोले वो हमारा हरियाणा में छपता है मैंने बोला वो तो इललीगल है बोलते लीगल ये है बोला मुझे बुक दो। बोले बुक हम लोग लेकर घूमते। पहले तो एड्रेस बताने के लिए वो हिचकिचा रहा था वो वीडियो में भी आप लोग देखोगे सब लोग तो बाद में उससे मैंने एड्रेस उगलवा लिया। फिर उस एड्रेस पर मैं गया तीसरे दूसरे तीसरे दिन तो वहां पर कोई नहीं था। ये लोग एड्रेस भी झूठा बताते हैं। तब कि हमारा यहां पर एड्रेस है। हम यहां पर ऐसा-सा काम करते हैं। वगैरह फिर मैंने भैया 10 दिन कंटिन्यू उस स्टेशन पर उस ब्रिज पर मैंने आता आना जाना देखा। वहां पर तीन-तीन बार चार-चार बार जाता था वो लोग आना बंद कर दिए। वो लोग वहां पर 10 दिन से आना बंद कर दिए। आज तक मुझे नहीं दिखे वापस। तो जैसा आपने बताया ना कि संतुष्टि है। मुझे भी काफी संतुष्टि मिला कि भाई मेरी मां का अपमान करने वालों को मैंने यहां से भगा दिया। दिख नहीं रहे हैं। क्योंकि अन्नदान के

01:56:34:09 नाम पर उन लोग दान मांग रहे थे। गरीबों को, बुजुर्गों को हम खाना खिलाते हैं। अच्छा ये भी नहीं एक वक्त और याद आई वाशरूम के नाम एक बात और अच्छी याद आई है। यह लोग कहते हैं अन्नपूर्णा अन्नपूर्णा अन्नपूर्णा मुहिम। अन्नपूर्णा मुहिम। हालांकि तुम्हारे बाबा ने तो ये कह ही दिया कि मैं चंदा लेकर के ही करता हूं काम सारे। दूसरी बात यह है कि भाई तुमने जब यह स्कीम चलाई है जो अन्नपूर्णा मुहिम अन्नपूर्णा मुहिम क्यों चलाई है? राम पूर्ण यह जो अपना जेल कट्टू पूर्ण मुहिम क्यों नहीं चलाई है भाई हमारी जो देवी है अन्नपूर्णा माता उनका नाम लेकर के क्यों चल रहा है तू और अन्नपूर्णा के बारे में बता दूं साल के 365 दिन वहां पर भूखों को भोजन मिलता है बनारस में चले जाना अन्नपूर्णा अन्नपूर्णा अनाकोंडा पाइप गिन नहीं पाओगे इतने चीजें जो है सनातनियों के यहां की जाती है और उसका ढिंढोरा नहीं पीटा जाता तुम्हारे तुम्हारे जैसे लोगों की तरह हाथी पर चिल्ला के हमने यह कर दिया हमने यह कर दिया कंटिन्यू अनिकेत जी

01:57:53:08 हां ऐसा तो अनेक लोग कर रहे हैं भारतवर्ष में हजारों की तादाद में लोग कर रहे हैं लेकिन वह प्रचार नहीं करते अपना वो कर्तव्य समझ के ऐसा कर रहे हैं और विभिन्न प्रकल्पों में यह तो नाम मात्र का करते थोड़ा बहुत है और उसका प्रचार में जितना पैसा यह वो दान में लगाते हैं उससे सहना मुझे लगता है ये प्रचार में अपना वो वीडियो क्रिएशन में प्रचार में ज्यादा ज्यादा प्रचार पे बस इनका काम है सोशल मीडिया पे हावी होना बस किसी ने भी वीडियो बना दिया सोशल मीडिया पे उसको बिल्कुल रौंद डालो धरातल पे महाराज अरे धरातल पे अनिकेत जी को कैसे हां ये महाराज जी को मैं जानता हूं महाराज धरातल पे क्या हो गए महाराज हो गए [हंसी] बाकी शिवश जी मैं मैं जिस शहर से हूं वहां उस शहर में हमारे दो तीन प्रमुख हॉस्पिटल है वहां एक कोचिंग के संचालक हैं। वो भोजन कराते हैं। करोड़ों रुपया साल का खर्च करते हैं लेकिन उनका कोई प्रचार नहीं है। ऐसे मतलब हर अपने हर कस्बे में लोग होंगे सनातनी विभिन्न हमारे मंदिर होंगे जो बड़े-बड़े हॉस्पिटल चला रहे हैं।

01:59:01:27 जी मनप्रीत जी आप भी बोले फिर मुझे लगता है समय काफी हो गया है जी जय श्री राम जय श्री राम भाई ये तो बहुत अच्छा लगा आपकी वीडियो देख के पुतला दहनली और जो है बाकी सारा जो आपने किया इसके लिए तो इसमें दिल्ली में जो एक बारी देखना चाह रहे थे पर शायद हम भी ऐसा ही करना चाहते हैं तो क्या इसके लिए अनुमति लेनी पड़ती है और दिल्ली में भी आपका कोई ग्रुप या संगठन ऐसा हां जो कि चीजें तैयार चीजें दिल्ली की तैयारी चल रही है और इस तरह की बात आप मुझसे व्यक्तिगत कर लीजिएगा फोन पे। जी जी बिल्कुल ठीक है बाकी हमारे चेक भाइयों को भी काफी इन्होंने अंदर ले लिया है उल्टा सीधा पट्टी पढ़ा के तो इसलिए उनको भी अवेयरनेस के लिए वो देखिए आली रे आली वो आप बताओगे सही से आप उधर ही के हो महाराष्ट्र वो बताओ जरा अनिकेत जी आली रे आली क्या है वो चले गए क्या अनकेत जी इनके जी नहीं है अभी हां आता तू जी वारी आली आता तू जी वारी

02:00:17:06 आली आली रे आली आ आवाज आ रही बारी आ हां हां आ रही है ओ आली रे आली [हंसी] आता तू जी बारी आली ठीक है तो समझ लो जितने भी रामपालियों रह रहे हो मेरे जैसों के आसपास आली रे आली आता तुझ बारी आ चुटकी बजा के चुटकी चुटकी बजा के करता है भैया चुटकी बजा के करता है चुटकी बजा के ऐ सारे रामपालियों सुन लो जो भी किसी हिंदुत्ववादी व्यक्ति के आसपास रह रहे हो आली रे आली आ तु तुजी वारी आली ठीक है समझ लो

02:01:00:26 ये इनका अनिकेत जी का वीडियो है जो इन्होंने उनको पकड़ा था यह लोग अपना एड्रेस भी झूठा बता रहे थे। इनका चैनल है राधा माधव म्यूजिक करके आप लोग सब्सक्राइब कर लीजिएगा उनका चैनल और मनप्रीत जी की बात हो ही गई और भाटी जी आपकी राधा माधव म्यूजिक हां अरे इसको ब्लॉक करो ना एक ही कॉपी पेस्ट कर रहा है पागल कहीं का क्या नाम है इसका ना नैतिक खुजली क्या खजूरिया ये नंबर देख लीजिएगा यह नंबर पर आप कॉल करोगे ना कोई उठाता नहीं। कोई उठाता नहीं है। यह नंबर पर कॉल करेगा ना कोई नहीं उठाता है। अच्छा अच्छा ये जो नंबर है [हंसी] अच्छा ये लोग चंदा मांग रहे थे। नहीं कोई नहीं उठाएगा। मैं कितने 10 नंबर से मैंने फोन किया। नहीं नहीं मैं कह रहा हूं ये लोग मेरा पर्सनल नंबर तो ब्लॉक कर दिए। हां दो लेडीज लोग भी थी वहां पर। हां मैं कह रहा हूं मुझे पकड़ के चंदा मांग के मुझे समझा रहे थे कि अभी भी आचार्य चंदा मांग रहे थे। हां

02:02:17:25 चलिए ठीक है। बहुत-बहुत आभार सभी का जुड़ने के लिए और आशा करते हैं आपका जो आज की जो यात्रा चलो वो

02:02:24:24 तो एक पुतला दहन कार्यक्रम वो आप सबको पता चल गया। एक बात फिर से बोल दूं। रामपाल को नहीं रामपालियों को पकड़ो। यह मन में डाल लो आप इस तंत्र को नष्ट करना है हिंदू विरोधी तंत्र को तो रामपाल को नहीं रामपालियों को पकड़ो अपने घर के आसपास रहने वाले रामपालियों का टोटल बहिष्कार करो टोटल बॉयकॉट रामपाल बॉयकॉट मूवमेंट उसको समर्थन देने वाला व्यक्ति जहां भी किसी आप जैसे किसी धर्मनिष्ठ व्यक्ति के पास रह रहा है उसके घर के पास पास जाकर के आप विरोध प्रदर्शन करिए। उसके बारे में वहां के समाज को बताइए। वहां के समाज को अपील करिए। उसका बहिष्कार करने की क्रांति आएगी। आप ला सकते हो। उसके घर के आसपास आपको केवल यह जानकारी वाले पर्चे चिपकाने हैं कि रामपाल कौन है? वो क्या कर रहा है? और यह व्यक्ति उससे जुड़ा है। और इस प्रकार इस व्यक्ति से जुड़ने वाला व्यक्ति कौन सिद्ध होगा? यह आपको केवल बताना है। अपने घर के आसपास दुर्गा मां को गाली देने वाले का समर्थन करने वाला चैन से नहीं रहना चाहिए। उसको रात

02:03:40:00 में चैन से नींद नहीं आनी चाहिए। और उसके लिए लाठी भाले की नोक पर नहीं गोली बारूद के नोक पर नहीं केवल संविधान की सीमा में रहते हुए आपको अपनी बात को रखना है। ध्यान रखिए आपके घर के पास आपके गली मोहल्ले में आपकी जानकारी में दुर्गा मां को गाली देने वाले का समर्थक चैन से नहीं रहना चाहिए। अभी से प्रण ले लो सारे के सारे और यह टॉपअप है सोने पर सुहागा। यदि वहां के दल इत्यादि आपके साथ हो जाते हैं तो आप एक अच्छा सा प्रदर्शन करिए और इसका पुतला अच्छा मत बनाना। ऐसा ही सड़ा हुआ सा बनाना। पुतला बहुत सुंदर मत बना देना। तो ऐसे ही पुतला बनाइए और उसको जो है जलाइए। अपना विरोध दिखाइए। अपना रोष प्रकट करिए। ठीक है? तो

⬜ Not used yet · 02:04:35:10 – 02:05:52:00 (1:17)

02:04:35:10 यह देखिए यहां पर ये इनका बाबा जी का पुतला जलते हुए तो सभी का आभार समय देने के लिए ये पुतला जल रहा है। सभी का आभार समय देने के लिए और सभी को जय श्री राम जय श्री राम अनकेत जी जय श्री राम भाटी जी जय श्री राम मनप्रीत जी जय श्री राम जय जय श्री वो आप बताओगे सही से आप बताइए फिर फिर एक बार याद दिला रहा हूं रामपाल को नहीं रामपालियों को पकड़ो यही है अपना उद्घोष रामपाल को नहीं रामपालियों को पकड़ो जय श्री राम

02:05:50:08 [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Live 2:05:55 · 08 Sep 2026

क्या रामपाल अब भी कामवासना में फँसा हुआ है? पाखंडी का गीता ज्ञान भाग 10 अध्याय 5

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