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00:00:03:12 सभी को जय श्री राम आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और आज हमारी चर्चा होने जा रही है जो ब्रह्मा कुमारी के एक फॉलोअर है और मेरे ख्याल से रिप्रेजेंटेटिव भी है कहीं ना कहीं से तो वह आज हमारे साथ में है और मेरी आवाज सभी को क्लियर आ रही

00:00:44:28 है वो चालू है क्या अब तो क्लियर आ रही होगी अभी अभी मैंने वाईफाई से कनेक्ट किया पहले वाईफाई से कनेक्ट नहीं था ठीक है कोई किसी चीज की कमी लग रही है क्या देखने में जय श्री कृष्ण अब क्लियर है जी ठीक है तो हमारे जो आज गेस्ट है वह ब्रह्मा कुमारी से हैं

00:01:27:02 और वो जुड़े हुए हैं कहीं से ब्रह्मा कुमारी से तो वह आज हमारे साथ है जय श्री राम ऋषभ पाटिल जी आवाज नहीं आ रही आपकी ऋषभ जी हां आ रहा है हेलो आ रही है आवाज आपकी आवाज आ रही है मैं एक रिक्वेस्ट करूंगा जी जी क्वालिटी लो है वीडियो

00:02:03:12 का य वीडियो किसका अटक रहा है एक हां अब ठीक है ठीक है वीडियो मेरा रुक रहा है मैं लीव करके एक बार दोबारा से जुड़ जाता हूं आप रुकिए मैं लीव करता हूं ठीक है ठीक अब ठीक आ रहा है आ रहा है आवाज आवाज ठीक आ रही है जी भाई

00:02:45:16 जी

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→ Used in: B · Video ब्रह्मकुमारी मत में कुरान, बाइबल और त्रिपिटक at 0:01 ↗

00:02:46:16 चलिए तो सभी को जय श्री राम सबसे पहले आप थोड़ा सा ऋषभ जी अपने द्वारा अपना थोड़ा सा परिचय आप दे दीजिए जी जी मेरा नाम ऋषभ पाटिल है मैं महाराष्ट्र से मुंबई में रहता हूं फिलहाल पढ़ाई के लिए हम हमारा एक छोटा गांव है अमलनेर करके जलगांव डिस्ट्रिक्ट में महाराष्ट्र में तो मैं वहां से बिलोंग करता हूं अभी पढ़ाई के लिए मुंबई में ह हम अभी बीटेक अभी बीटेक की पढ़ाई कर रहे लास्ट ईयर में कंप्यूटर साइंस

00:03:22:24 में हा और भाई और ब्रह्मा कुमारी से कैसे जुड़े भाई जी मैं बचपन से इस ज्ञान में चल रहा हूं मतलब मेरी उम्र होगी फर्स्ट फर्स्ट सेकंड स्टैंडर्ड से मैं इस ब्रह्म कुमारी संस्थान से जुड़ा मेरी माता के द्वारा हमारी माता जी ब्र कुमारी में जाती है उनके द्वारा मैं भी ज्ञान में जुड़ा उस ज्ञान से जुड़ा इस ब्रह्मकुमारी संस्था से जुड़ा और अभी तक हमारा कंटिन्यू हमारे परिवार में मेरे पिताजी भी मेरी माताजी भी और हम भी हम तीनों इस संस्थान से जुड़े हुए हैं बहुत बढ़िया तो आपने हमारी एक चर्चा देखी थी कुछ दिनों पहले ब्रह्मा कुमारी की दीदी थी उनके साथ अच्छा आप क्ला आप ये क्लासेस वगैरह भी लेते हैं क्या ब्रह्मा कुमारी नहीं भाई नहीं भाई जी लेकिन हम ये लेते मी काउंसलिंग लेते मेंटल कासंग जो होता है हा मी काउंसलिंग इन द सेंस ऐसे कोई स्पेशल बिजनेस थ वैसे नहीं लेकिन ऐसे फ्री में अगर को को परेशानी हो किसी को कोई तकलीफ हो किसी को कोई सोल्यूशन नहीं मिलता तब हम थोड़ी काउंसलिंग लेते हैं मेंटल अवेयरनेस के ऊपर लेते हैं बहुत सारी

00:04:37:24 डी एडिक्शन केपर लेते है बहुत सारी ऐसे छोटी छोटी जो है टॉप उनके ऊपर काउंसलिंग भी करते है और हमारा बाय साइड कंटेंट राइटर भी है हम कंटेंट राइटिंग इन स हम जो मेंटल हेल्थ आजकल बहुत जरूरी है यूथ के लिए उसके लिए हम लिखाई मी उसके लिए हम राइटिंग भी करते कंटेंट बनाते मिला कर कहीं ना कहीं जो ब्रह्मा कुमारीज के जो अभियान है उनमें कहीं ना कहीं आप कार्यरत है वर्किंग वर्किंग यस यस तो हमारी जो चर्चा हुई थी उसके मुख्य कुछ बिंदु है जिसके बारे में शायद आपने हमें कमेंट किया था और फिर कमेंट के बाद हमने आपको आमंत्रित किया जी भाई और फिर आमंत्रित होने के बाद आप जो है आज यहां पर उपलब्ध है और मैं अपने दर्शकों को बता दूं कि इनकी थोड़ी सी टाइमिंग इश्यूज थे इस कारण से इनके साथ जो चर्चा है वो हमने शाम को ना रख कर के और आज दिन में रखी है और शाम को हम अगर वो आ सके जो जिनके साथ अभी हमारा अरी चर्चा हुई है जो हमारा सेकंड चैनल है सर्वशक्तिमान धर्म वहां पर अभी रामपाल के फॉलोअर्स के फॉलोअर के साथ हमारी

00:05:52:27 चर्चा हुई थी दो दिन पहले और वो चर्चा यहां पर रुकी थी जब हमने ये कहा था कि पवित्र सद ग्रंथ कौन-कौन से हैं तो उसके बाद फिर वह कह के चले गए थे दो घंटे के बाद कि उनके पास अब समय खत्म हो रहा है तो उसके आगे की चर्चा आज शाम को जो है सर्वशक्तिमान धर्म पर शाम को हो सकती है तो आप लोग वहां पर जो भी पहुंच सके पहुंच तो हमारी जो चर्चा हुई थी वह जो दीदी है ब्रह्मा कुमारी वाली उनके साथ तीन विषयों पर मुख्य हमारी बात हुई थी एक थी कि क्या ब्रह्मा कुमारी का जो अनुसार कोई ऐसा हमारे पास फंडामेंटल है जिसके अनुसार हम नास्तिक को समझा सके कि ईश्वर इस दुनिया में है है ना जी और फिर दूसरी आगे बात आई थी कि क्या ईश्वर इस जगत को बनाने वाला है सब कुछ उसी ने बनाया है और क्या ईश्वर सर्वशक्तिमान है कुछ यह दो तीन टॉपिक पर हमारी बातें हुई थी तो उन्हीं में से उन टॉपिक्स को लेकर के आपको आपने अपना भाव व्यक्त किया है कि वहां पर उत्तर जो है सही तरीके से प्रस्तुत नहीं हो पाए ब्रह्म कुमारी का जो पक्ष था

00:07:08:09 और वही पक्ष आप प्रस्तुत करने आए है ना बिल्कुल ब बकुल मैं सबसे पहले इस पर ही आता हूं कि ब्रह्मा कुमारी के अनुसार ईश्वर की सिद्धि कैसे होती है सबसे पहले आपको ब्रह्म कुमारी के बारे में थोड़ा पता है भाई जी उसके बारे में थोड़ा बोल लि जाए ब्रह्म कुमारी ब्रह्मा कुमारी के बारे में जो मैं जानता हूं वो ये है कि ब्रह्मा कुमारी के बारे में जो बताया जाता है वो यह है कि आपके यहां पर कुछ दिव्य एक दिव्य शरीर वाले थे जिनका नाम था लेखराज हा उनके शरीर में ईश्वर आता है और वो जो बताता है उसको ब्रह्मा कुमारी फॉलो करता है है ना अब वो ईश्वर का जो नाम है वो सनातन और हिंदू धर्म ग्रंथों के नाम से मैच काता है बाकी फीचर वाइज अलग चीजें हैं मगर सनातन में जो नाम दिए हैं उन नामों से वह मैच खाता है तो इसलिए यह माना जा सकता है कि हिंदू धर्म से

00:08:23:18 ओरिजिन इसका है ब्रह्मा कुमारी इस का तो यह मुझे पता है और उसके बाद के जाने के बाद जो आज भी आपकी कोई ना कोई दीदी है जिनकी बॉडी को चुना है ईश्वर ने और फिर ईश्वर उसके अंदर आता है और अपनी दिव्य वाणी जिसको आप कहते हो मुरली मुरली जो वहां पर पहला प्रश्न किया था उसम मैंने कि मुरली क्या है तो

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00:08:48:15 मुरली वही है मेरा वीडियो फिर अटक रहा है ये कैसे हो स जो दर्शक है उनका का अटक रहा है किसका अटक रहा है किसका वीडियो अटक रहा है कोई कमेंट करके बताएगा ये कह रहे हैं सही आ रहा है कुछ कह रहे हैं अटक रहा है आप अपने आप पर चेक करिए शायद अटक नहीं रहा है डिले आ रहा

00:09:27:14 है अच्छा चलिए मैं एक बार लीव करके फिर से आता हूं आप रुकिए तब तक जी ऋषभ जी जी भाई जी तो

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→ Used in: B · Video ब्रह्मकुमारी मत में कुरान, बाइबल और त्रिपिटक at 6:03 ↗

00:10:15:22 यह हमें पता है कि आज भी आपकी कोई ना कोई दीदी है जिनके अंदर आपके अनुसार ईश्वर आता है और वह डेली कोई ना कोई एक बात बताता है और उस बात को पूरे वर्ल्ड में आपके द्वारा फैला लिया जाता है ब्रह्मा कुमारी के द्वारा और उसको एज ए लॉ या एज ए डायरेक्शन सब लोग फॉलो करते हैं जो ब्रह्मा कुमारी को मानते हैं या कहेंगे कि फॉलो करने का प्रयास करते हैं जी जी तो अब इसमें सबसे पहली बात यह हो गई कि ईश्वर हम लोग अगर इधर से चलेंगे ना तो हम ज्यादा समझ पाएंगे कि आपके अनुसार ईश्वर सर्वशक्तिमान है अनंत सामर्थ वान है या नहीं है ब्रह्मा कुमारी जी सबसे पहली बात यह जो ईश्वर है हम जिसकी बात कर रहे हैं उसका नाम पहले जानना जरूरी है ठीक है सबसे पहले यह जानना जरूरी कि वह ईश्वर कौन है उसका कर्तव्य क्या है उसका मूलभूत सिद्धांत क्या है उसके गुण क्या है उसके कर्तव्य क्या है सबसे पहली बात जानना जरूरी है

00:11:31:01 तो ब्रह्म कुमारी जिस ईश्वर की बात कर रहा है उसका नाम है परम पिता शिव परमात्मा जो जिसको हमने युगो युगों से ढूंढा है जिसको थोड़ा थोड़ा सा क्या है विषयात हो रहा है मुझे क्षमा करिएगा इंटर किया मैंने एक्चुअली क्या है कि आपके द्वारा उसको कहा क्या जाता है वो तो मालूम है ना जैसे आप ब्रह्मा कुमारी से आए ये हमें मालूम है उनका नाम ले एक रास्ता य हमें मालूम है और मैंने आपको यह भी बताया कि आपके द्वारा जो ईश्वर का आना बताते हैं उस ईश्वर का जो नाम है वह हिंदू धर्म ग्रंथों से सनातन धर्म ग्रंथों से मैच करता है मैंने य भी कहा तो हमें उस पर फोकस करने की आवश्यकता क्या है कि उसका नाम यही है अपनी बात कर मैं अपनी बात पूरी कर लू तो अब उसमें मामला यह है कि हम लोग यह डिस्कस कर रहे हैं किधर से भी शुरू कर सकते हैं तीन चीज ईश्वर सर्वशक्तिमान मानता है ब्रह्मा कुमारी ईश्वर ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार जो ईश्वर है जी वो अनंत सामर्थ वान है कि नहीं सर्वशक्तिमान है कि नहीं पहली बात या फिर हम यहां से चालू कर सकते

00:12:46:01 कि वो जो दीदी थी उन्होंने एक बात कही थी कि जो सभी धर्मों के द्वारा माना जाता है जो एक कॉमन चीज है सभी धर्मों के अंदर वो ईश्वर है ईश्वर के बारे में जो कॉमन चीज है सभी धर्मों के द्वारा वो ईश्वर है है ना तो इस पर हम लोग वहा बात नहीं कर पाए थे क्योंकि काफी सारे विषय थे तो यह वाला विषय छूट गया था कि सभी धर्मों में जो कॉमन है वो ईश्वर कैसे तो वो वो है और एक तीसरा पक्ष और है कि अगर हम यह जान ले कि ईश्वर है यह कैसे सिद्ध होता है तो वो जानने के लिए जिस प्रकार के ईश्वर की आवश्यकता हमें पड़ेगी हमें पता चल जाएगा कि यही ईश्वर हो सकता है क्योंकि जो ईश्वर का सिद्ध हो सकता है जो ईश्वर स्थापित किया जा सकता है वही ईश्वर ईश्वर है वरना हम अगर अपने मन से ईश्वर के फीचर्स बता दे और उसको सिद्धि ना कर पाए तो वो ईश्वर ही ईश्वर नहीं है तो इन तीन में से एक मुझे सबसे अच्छा जो लग रहा है वो यह है कि हम इस वाले को पकड़ लेते हैं जो सभी धर्मों में एक कॉमन चीज है ईश्वर का वो गुण है ईश्वर वो है अब जैसे सभी धर्मों ने निराकार तो माना है ईश्वर को कहीं ना कहीं हम बिल्कुल इसलिए आपने ईश्वर

00:14:01:03 को निराकार माना ठीक है तो इसको ले लेते हैं हम लोग अब इसमें क्या है जब हम यह कहते हैं कि सभी धर्मों के अनुसार तो सबसे पहले हमें यह जानना पड़ेगा कि धर्म किसे कहते हैं सभी धर्मों के अनुसार सबसे सभी धर्म के सबसे पहली बात धर्म जो है हम मतलब दुनिया में तो बहुत सारी फिलोसोफी इसके ऊपर लेकिन हमारे ब्रह्म कुमारीज में जो बताया जाता है धर्म किसे कहते हैं उस अनुसार पर हम बताएंगे आपको सबसे पहले धर्म अर्थात हमारे कर्म सत्य कर्म जब कर्म सत्य हो जाए तो वही सच्चा धर्म है और जब तक कर्म असत्य के मार्ग पर है वो धर्म नहीं हो सकता दूसरी बात हमारे कर्म जो है अगर किसी भी बात में किसी भी बात में विकर्म में की ओर जा रहे हैं वो धर्म नहीं हो सकता धर्म हमें कर्म कैसे करना है कहां करना है कब करना है किस जगह पर करना है वह सब सीख देता है और दूसरी बात कि धर्म जो है यह मानवता को एक सत्य

00:15:16:10 के आधार पर स्थिर रखता है अगर हम अगर कोई भी अगर कोई बात भी हो छोटा कर्म भी हो अगर वो असत्य के मार्ग से हो रहा है विकर्म के मार्ग से हो रहा है वहां पर धर्म नहीं हो सकता स्वयं मैं यही कहूंगा हमार ये यहां पर कि हमें जो सिखलाया जाता है जो हमें शिव सिखला है वो यही सिखला है कि सत्य कर्म ही सत्य धर्म है जब तक कर्म समझ सम समझ गया आपकी बात मैं आपकी बात समझ गया एक्चुअली क्योंकि हमारे पास टॉपिक्स बहुत है तो टाइम की अवेलेबिलिटी के लिए हमको थोड़ा सा संक्षिप्त में रहना पड़ेगा हा तो आपने कहा जो सत्य कर्म है वही धर्म है यानी कि धर्म एक ही है सत्य कर्म हम तो फिर इस लाइन का मतलब क्या है कि सभी धर्मों में जो एक कॉमन बात है वो ईश्वर का वो मान माना प्रमाणिक ये सभी धर्म कहां से आ गए इसका मतलब सत्य के अलावा और भी कुछ धर्म है या फिर य सभी धर्मों से मतलब है हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई या क्रिश्चियनिटी ना हिंदू मुस्लिम क्रिश्चियनिटी और इन सबके द्वारा येय सब इन सबको आपने धर्म कहा

00:16:31:21 क्रिश्चन को भी धर्म कहा हिंदू को भी धर्म कहा ईसा को भी र् मुस्लिम इस्लाम को भी धर्म कहा तो क्योंकि वो जो आपने परिभाषा द ना सत्य कर्म धर्म है वो एक अलग चीज है मगर आप य फिर सत्य कर्म अगर धर्म है तो धर्म एक हो जाएगा उसको बहुवचन नहीं लग सकता धर्म एक है सत्य जो भी आपको सत्य कर्म क्या है सत्य कर्म के द्वारा सत्य कर्म सत्य कर्म के द्वारा ईश्वर की प्राप्ति होती है तो जो भी कर्म आपको ईश्वर के पास ले जाए वह कर्म सत्य हो गया जो कर्म आपको ईश्वर से दूर ले जा रहा है वो कर्म विकर्म हो गया असत्य हो गया यानी धर्म एक ही है सत्य बिल्कुल तो जब ब्रह्मा कुमारी कह रहा है कि सभी धर्मों के द्वारा जो फिलोसोफी मान्य है वो हमें मान्य है ठीक है तो इसका मतलब व यहां इस वाली परिभाषा की बात नहीं कर रहा है कि सत्य कर्म ही धर्म है वो बात कर रहा कि जो हिंदू के द्वारा भी मान्य है जो हिंदू के द्वारा भी मान्य है जो मुस्लिम के द्वारा भी मान्य है जो क्रिश्चन के द्वारा भी मान्य है तो इन सारे धर्मों से जो कॉमन चीज आएगी वो हमें मानने है सबसे पहली बात जितने भी धर्म है

00:17:46:21 हम अगर किसी निष्पक्ष होकर अगर देखे कितने भी धर्म आपको मुझे इसलिए करना पड़ता है क् मैं मुझे ऐसा लगने लगता है शायद मैं अपने प्रश्न को समझा नहीं पाया कि जब आपने यह कह दिया कि मुस्लिम धर्म है आपने जितने भी धर्म है यानी हम लोग बात कर रहे हैं हिंदू मुस्लिम क्रिश्चन की है ना हमें ज्यादा उसम डीप नहीं जाना क्योंकि अगर उसम जाए बहुत हो जाएगा डीप नहीं जा रहा हूं आप मैं अपने क्वेश्चन को रखने के लिए पहले आपकी जो उसको मैं क्लियर करना चाह रहा हूं कि जब जब हमने कहा धर्म किसे कहते जो सत्य कर्म है वो धर्म है ठीक है तो आपने फिर दूसरी जगह यह भी कहा है कि जितने भी धर्म यानी कि आप हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई इनको भी धर्म मानते हैं हिंदू के अलावा जो चीज है उनको भी आप धर्म कह रहे हैं तभी बहुवचन आ रहा है ठीक है तो अब बकल अब अब बात ये आती है कि जो मुस्लिम है इस्लाम है उसमें कई चीजें ऐसी है

00:19:02:07 जो धर्म नहीं है कई चीज जो मैच खाएगी कई चीज है जो मैच खाएगी कई चीज है जो मैच नहीं खाएगी तो आपने फिर मुस्लिम को धर्म कैसे कहा सबसे पहली बात अगर हम ऐसे अगर मानने लगे अगर हम ऐसे इस दुनिया में मानने लगे कि वो धर्म नहीं या कुछ भी हो कुछ भी हो वो जैसा है जैसा चल रहा है उनकी अपनी मान्यता है उनका अपना कुछ होगा लेकिन हमें सबको बराबर तो रखना होगा ना भाई जी अगर हम उनको ऐसे समझ ठीक है मतलब कहने का मतलब ये है मैं मैं मैं समझ गया कहने का मतलब यह है कि हम जानते हैं कि उनके कुछ कुछ चीजें हैं जो अधर्म है विकर्म है मगर फिर भी हम हम उनको ऐसा बोलते हैं कि हम डायरेक्ट साफ सुथरा ऐसे बोलते नहीं कि तुम गलत हो हम तुमको भी धर्म ही कह रहे हैं अच्छा तो अब मुझे एक बात बताइए कि कुछ लोग ऐसे दुनिया में जो अपनी मां के साथ भी अफेयर करना चाहते हैं हम उनको भी मनाने के लिए कहेंगे क्या कि तुम भी इंसान हो तुम भी मनुष्य हो क्या कहेंगे हम उनको नीच कहेंगे या उनको भी उनको भी कह देंगे कि नहीं तुम भी अच्छे हो तुम भी बहुत बढ़िया हो यह सब सबसे पहली बात उनको तो

00:20:17:10 सजा दी जाएगी उनको तो सजा जो मातृ द्रोही उसको सजा तो मिलेगी ना अगर चीज देखिए अगर कोई गलत है और हम इसलिए कि उसको जो बुरा ना लग जाए व वो ना जाए तो उसकी सच्चाई से उ जी जी जी यहां पर यही पर यही एक चीज है भाई जी अगर वह कर्म तमो प्रधान है मतलब बहुत नीचे दर्जे का है तब कोई माफी नहीं है तब हम माफ नहीं कर सकते अगर वो कर्म जिस कर्म से जिस विकर्म से इस दुनिया में गंदगी फ है ना तो उस कर्म को हमेशा यही रूप दिया जाएगा कि उसके लिए वह सजा के पात्र होगा उसके सिवा और कोई सं नहीं द जाए मैं इसको अभी क्लियर कर लेता हूं इस्लाम में एक आयत

00:21:16:27 है मैं उसका जो क्रम है वो भूल गया हूं जी जी उसमें लिखा हुआ है यदि तुमने अपने मुह जुबानी किसी को बहन बेटी मां इत्यादि कह भी दी यही भाव है उसका तो मुंह बोले रिश्तों की कोई वो नहीं होती आप अपनी जुबान से पलट सकते हैं और पलट करके वो दूसरा व्यवहार कर सकते हैं आपका वॉइस क्रक हो रहा बोलिए बोलिए सुनाई दे रहा सुना मैं यह कह रहा हूं कि उसमें एक जगह कहा गया है कुरान में कि आपने यदि अपनी मुह जुबानी किसी से कोई रिश्ता बना लिया उसकी कोई वैल्यू नहीं है आप जो है अपनी उस रिश्ते से पलट सकते हो और उसके साथ जैसे आपने किसी को बहन बोल दिया तो उस पर डटे रहना आवश्यक नहीं है आप चाहो तो उससे विवाह कर सकते हो दूसरा बहन के ठीक उलट वाला कार्य भी कर सकते हो तो यह शिक्षा वहां दी गई है तो यह शिक्षा धर्म तो नहीं है बाद से पलट जाना नहीं है तो इसका मतलब कुरान के द्वारा जो शिक्षा मिली है वो धर्म नहीं है हम एक बात के ऊपर से यह डिसाइड नहीं कर सकते भाई जी सबका अपना अपना

00:22:32:02 मान है हम किसी को अ मानि नहीं कर सकते अगर हमें किसी को मान देना है तभी हमें मान मिलेगा अगर हम किसी को ही किसी को भी मान नहीं द बात बताए एक बात बताइए कि आपके अनुसार मोक्ष क्या है मुक्ति मुक्ति वो वो अवस्था है वो स्थिति है जहां पर आत्मा बंधन हो जाती आत्मा को समझ बंधनों से मुक्त हो जाती है तो क्या कुरान के अनुसार मुक्ति मिल रही है वहा कुरान के अनुसार वही मुक्ति है जो आपके अनुसार है हमें भाई जी सबसे पहली बात हम यहां पर किसकी चर्चा करने आए हम तो ईश्वर की चर्चा करने आए ना हम उस दिन का जो पॉइंट है वही आप समझ मैं उस चीज को क्यों क्लियर कर रहा हूं आपने कुरान को धर्म क्यों कहा है बात इसकी है आपने क्रिश्चियन को धर्म क्यों कहा बात इसकी है इसलिए जब सुनिए सुनिए अब सुन लीजिए इसमें क्या है कि जब हमने कहा कि उसकी कोई एक बात के आधार पर हम उसे नकार नहीं सकते ठीक है तो फिर अब हमारे पास परसेंटेज

00:23:47:24 होनी चाहिए कि कितनी परसेंट बात सही होगी और कितनी परसेंट बात गलत होगी उस रेशियो के आधार पर हम उसको प्रमाणिक मानेंगे और अगर वो रेशियो हमारे रेशियो से मैच नहीं खाया तो हम उसे अप्र माणिक मानेंगे तो ऐसा कोई रेशियो है क्या आपका सबसे पहले रेशो की बात अगर सभी धर्मों की पकड़ी जाए तो अगर सभी धर्म अगर हमें यह सिखला है कि हमारे कर्म जो है वो अच्छे सत्य और धर्म के आधार पर हो अच्छे मतलब वैल्यूज के आधार पर हो तो वो हमें मान्य करना होगा अगर कोई भी धर्म हमें ये सिखला आता है हमारे कर्म के बारे में अगर वो नहीं सिखला आता है तो वो अधर्म ही हो उस चीज में अधर्म ही होगा आप मैं ये जानना चाह रहा हूं आपने किसी को भी धर्म किस आधार पर मानते हैं आधार हा वो आधार है जो सीख दी जाती है फॉर एग्जांपल अलग अलग धर्म में अलग अलग सीख जाती है कुछ कुछ सीख अच्छी भी दी जाती है ऐसे नहीं कि कोई बुरी हमेशा सब सब धर्मों में बुरी सिख है बाकी धर्मों में भी अच्छी सिख दी गई है ऐसे मतलब बहुत सारी हम देख सकते अगर प्रत्येक धर्म का मूल न्यू क्या है अगर देखा जाए

00:25:02:28 न्यू अगर देखा जाए न्यू मतलब रूट तो वो रूट है सबके लिए सद्भाव सबके लिए शुभ भावना सबके लिए शुभकामना अगर ये न्यू है हर एक धर्म बाकी तो सब बाकी आगे जाके तो बहुत मत मंतर है भाई बहुत मत अगर उस न्यू के आ कह रहा मतलब आप मानते हैं ना कि इस्लाम और क्रिश्चियनिटी भी धर्म है आप ये मानते हैं हां और उसका आधार यह है कि जो भी हमें सत्कर्म सिखा रहा है तो वो धर्म है फिर भले ही उसने हमको विकर्म भी सिखाया हो वो आत्मा के ऊपर है ना वह क्या सीख रही वो क्या लेना चाहती है हम सही दे नहीं अभी हम अभी हम उसकी बात कर रहे कि कौन सी आईडियोलॉजी हमको सत्य सिखा रही है तो वो धर्म है कोई भी आइजी अगर हमको सत्य सिखा रही है तो वो धर्म है और भले ही वो साथ में ो थ बहुत हमें विकर्म भी सिखा रही हो हमारे अनुसार हो सकता है उनके अनुसार वो विकर्म भी ना हो जैसे कि यही बात अपनी जुबान से पलट जाना हो सकता है उनको लगे कि अच्छी बात है ठीक है मगर हमारे अनुसार वो विकर्म है हमारी जानकारी के अनुसार वो विकर्म है तो हमारे अनुसार हमारे अनुसार धर्म वो है

00:26:18:15 जो कोई भी हमें सत्य कर्म सिखा रहा है किसी एक अंश में फिर भले ही वो थोड़ा बहुत असत्य कर्म भी सिखा रहा हो हमारे अनुसार वो धर्म है ठीक है तो इसका अर्थ यह है कि मैं अगर अपनी एक बुक लिखूं और उसमें लिख दूं कि भगवान की भक्ति करो तो क्या मेरे द्वारा तैयार यह जो आईडियोलॉजी होगी इसको 10 15 लोग मानते भी होंगे आपके लिए धर्म है क्या ये आप इसे धर्म कहोगे भगवान भगवान की भक्ति करना यह तो थोड़ी ना गलत बात है भाई य तो अच्छी बात है मैंने मैंने एक बुक लिख दी और मैंने उस बुक को नाम दिया शिवांश कृत धर्म तो आप उसको धर्म के रूप में स्वीकार कर लोगे अगर वह ईश्वर प्राप्ति की तरफ लेकर जा रहा है तभी तो स्वीकार करेंगे अगर उसमें ईश्वर ही नहीं है तो कहां से होगा भाई नहीं मैंने दोनों बातें लिखी है मैंने दोनों बातें लिखी है तो वो वो आपका

00:27:20:21 धर्म आधार मतलब आधार आधार मेरे पास रात में फरिश्ता आता है वो आके बताता है खुदा का भेजा हुआ या मेरे पास रात में एंजल आता है वो बताता है अगर सबसे पहली बात र आपने जो बात कही कि मैं अगर कुछ लिख दू और वो धर्म हो जाए ऐसा कैसे हो सकता है सबसे पहली बात उसका मल इसका मतलब इसका मतलब केवल ईश्वर की बात करने वाला ही धर्म नहीं है उसम कुछ और भी ऐड करना पड़ेगा हा अनुभव में भाई जी अनुभव इस संसार में सबसे बड़ी बात है हिंदु सबसे आप अगर हिंदू धर्म का देखा जाए सबसे पहले हमारे धर्म की चर्चा करते सबसे पहले अगर हमें हिंदू धर्म में जितने भी शास्त्र है जितना भी है सभी आत्माओं को सभी जो भी है जो भी पढ़ता है उसे क्या फील होता है अनुभव होता है ना किसका अनुभव आप समझ नहीं रहे भाई साहब आप दूसरी जगह जा रहे प्रैक्टिकल पर चले जा रहे हैं वो प्रैक्टिकल वाला बात नहीं हो रही अभी बात हम ये कर रहे हैं कि आपने कहा कि इस्लाम भी धर्म है क्रिश्चियनिटी भी धर्म है फिर मैंने आपसे ये पूछा कि अ इस्लाम और क्रिश्चियनिटी भी अगर धर्म है उसमें आप ये भी मान रहे हैं कि

00:28:35:21 कुछ ऐसी चीजें हैं जो सही नहीं है मगर फिर भी आप उसको धर्म मान रहे हैं वो लोग नहीं मानते कि वो चीजें गलत है हम लोगों के अनुसार व चीजें गलत है फिर भी आप उसको धर्म मान रहे हैं तो जब हम उसे धर्म मान रहे हैं तो फिर यह क्या कहते हैं फिर मैंने आपसे पूछा कि फिर जब उसमें और बुरी गलत बात दोनों है तो फिर आप उसे धर्म क्यों कह रहे हैं तो आपने फिर बताया कि हां जिसमें विकर्म भी होगा और सत्य कर्म भी होगा तो उसको धर्म माना जाएगा तो मैं वही कह रहा हूं कि इस बुक में इस बुक में मैंने भी जैसे मोहम्मद साहब को एक फरिश्ता आता था जो आ कर के कहता था जिब्राइल और बाइबल के अनुसार ईसा वोय कहते थे मैं उसका पुत्र परमेश्वर का तो ऐसे ही मुझे भी लग रहा है कि मुझे ईश्वर की वाणी आ रही है और मैंने एक बुक लिख दी तो क्या आप इसको अपने धर्म की लिस्ट में ऐड कर लेंगे इस बुक को नहीं करूंगा बिल्कुल नहीं करूंगा उसम बत उसमें बहुत सारी गलत बातें भी आपके अनुसार बहुत सारी सही बातें भी आपके अनुसार तो आप ऐड करेंगे उ नहीं वैसे तो बिल्कुल नहीं हो सकता वैसे तो बिल्कुल नहीं हो सकता क फर क्या कारण है कि आपने इनको ऐड किया है मेरी बुक ऐड

00:29:50:27 नहीं करोगे सबसे पहली बात सबसे पहली बात न्यू क्या है न्यू बहुत जरूरी है अगर हमने कह दिया हां मुझे आता है मुझे सब होता है वो बुक पढ़ भी लिया जाए वो बुक पढ़ भी लिया जाए अगर मैं अगर वो बुक पढो भी लेकिन उसमें वह किसी मनुष्य द्वारा फॉर एग्जांपल व किसी मनुष्य ने लिखी है या मनुष्य ने बताई है या मनुष्य द नुष लिखर आप उ र्म कैसे क पहली बात सबसे पहली हम किसी की अगर हम किसी को दोष दे रहे फर एपल किसी को दोष दे रहे हैं किसी को तो आप मुझे दोष दे तो रहे हो आप मुझे दोष दे तो रहे आपने मना कियारी चीज को आप स्वीकार नहीं करेंगे आपने मना किया सबसे पहली बात बुक को मना करना यह कोई ऐसी वैसी बात नहीं कि हमने बस आया और बता ख दिया धर्म क्या इतनी सी बात के ऊपर तय होता है

00:30:55:27 धर्म हमारे पास टॉपिक बहुत सारे और अगर हम लोग गोल गोल लंबा लंबा बात करेंगे तो चलेगा नहीं तो ऐसा करिए कि आप जो है सीधी एक परिभाषा दीजिए आप वो कारण बताइए कि आप किसी भी आइडल जीी को धर्म कब कहते हैं वो एक बार में बता दीजिए जिससे कि फिर मैं उस पर क्वेश्चन कर सकू आप किसी भी आईडियोलॉजी को धर्म कब कहते हैं किस कारण से कहते हैं जब आत्माओं का जब मनुष्य का कल्याण हो किसी बात में कल्याण हो रहा हो किसी बात की अभी फॉर एग्जांपल ये जब त देखिए ऐसा होता है देखिए हो क्या रहा है प्रॉब्लम ये आ रही है भाई कोई पांडे जी अगर देख रहे हो मॉडरेटर के लिए कोई आ जाए पांडे जी या फिर श्वेतांक जी या फिर नवीन जी कोई मॉडरेटर एस ए मॉडरेटर पहुंच

00:31:48:15 जाए कमेंट करके बता दे तो हम लिंक पहुंच देंगे आप तक देखिए आप मेरी बात आप समझ नहीं रहे हो मैं जैसे आप आपने कहा कि कोई भी जो आत्मा की बात करता है मैंने कहा ना कि मैंने अपनी बुक में आत्मा की बात की है भगवान की बात की है तो फिर आप उसको नहीं स्वीकार कर रहे इसका मतलब वो परिभाषा नहीं है आपकी धर्म के रूप में तो मैं उस परिभाषा को जानना चाह रहा हूं कि अने किसी को भी धर्म के रूप में स्वीकार के आधार पर किया है स्वीकार अर्थात हम उस धर्म को मान्यता दे रहे बस जैसे फॉर एग्जांपल वो बहुत सारे आजकल देखो बहुत सारे मट पं ठीक है बहुत सारे मट पंत है सब किसका रास्ता बता रहे भगवान का रास्ता बता रहे ना जो भगवान का रास्ता बता रहा हो जिसने यह बताया हो न्यू से कि भगवान को कैसे पाना है वह अगर न्यू हमें दे रहा हो तो हम उसे धर्म मानते अगर उस धर्म में कुछ ऐसी बातें भी है फॉर एग्जांपल कुछ गलत बात कुछ बहुत मतलब हम कह सकते जिसमें कोई तथ्य नहीं जिसमें कोई वो नहीं मतलब जिसम का कोई उद्देश्य नहीं है अगर वो चीजें भी हो अगर वो चीजें हर धर्म में है हर धर्म में एक धर्म

00:33:03:18 में नहीं हर सारे धर्मों में कुछ ऐसी चीजें है जो केवल हिंदू हिंदू को छोड़ कर के बात करें क्योंकि हिंदू का ऊपर अगर बात करेंगे तो सुनिए सुनिए अगर हिंदू में बात करें तो मुझे वहां पर तुरंत उसको फिर आना पड़ेगा कि भाई मैं हिंदू धर्म में बताओ तो हमारा विषय अलग हो जाएगा आप हिंदू को मत शामिल करिए बाकी सबको आप कहिए कि हां कमी है और जो है जो फैक्ट है हां बताइए हा आपने आपने जो सारे धर्म के नाम लिए उनके बोल रहा हूं बाकी हिंदू धर्म तो हमारा सर्वश्रेष्ठ धर्म है सबसे पहली बात तो पहली बात कि जो भी उनमें विकर्म भी हो रहा हो या कुछ भी हो रहा हो तो वोह उनका उनके धर्म के कुछ सिद्धांत होंगे उनका कुछ होगा लेकिन हम उनको अपमानित नहीं कर सकते किसी चीज को अपमानित अगर करने लगे तो इस सुनो बुक को बुक को रिजेक्ट करना अपमान नहीं है ना कि है

00:34:07:24 आपका चला गया आप एक बार जा कर के वापस आ जाइए आप फ्रीज हो फ्रीज हो गए आप जी जी जी जी जी अगर हम मैं समझ गया आपने कहा कि जिसने नीव से ईश्वर को प्राप्त करने की विधि बताई हो फिर भले ही उसमें कुछ विकृतियां भी हो मगर हम उसे धर्म के रूप में स्वीकार करेंगे ठीक है अपमानित नहीं कर सकते ना अपमानित नहीं कर सकते किसी मानि नहीं कर सकते तो अ बुक को रिजेक्ट करना कि ये धर्म नहीं है क्या ये अपमान है बुक को रिजिक करना क्या ये धर्म मतलब कौन सी बुक पे वो प जरूरी कोई बक कोई भी बुक कोई भी बुक कोई भी बुक जिसके लिए हमने कहा ये धर्म नहीं है क्या यह अपमान

00:35:01:04 हैय वो क्या बता रही है उसके ऊपर डिपेंड है पहली बात व पूछ रहा हूं वो देख वो आपने जान लिया कि वो क्या बता रही है उसके बाद आपने कहा एक मिनट भाई साब एक मिनट मैं पूछ रहा हूं कि आपने जान लिया परख लिया वो बुक में क्या कहा गया है उसके बाद आपने कहा यह जो बुक है यह धर्म नहीं है यह अपमान है कि नहीं है सबसे पहली बात भाई जी अगर वह बुक हमें सही मार्ग नहीं बता रही कौन से कोई भी मार्ग नहीं बता रही भाई साब क्वे य नहीं है क्वेश्चन ये है क्या बुक को रिजेक्ट करना आप अपमान मानते हैं या नहीं मानते हैं हा रिजेक्ट करूंगा क्योंकि उस चीज में सत्य नहीं कहा भाई साब देखिए मैं यह नहीं कह रहा हूं मैं पूछ रहा हूं कि बुक को रिजेक्ट करना आप अपमान मानते हैं कि नहीं मानते यह बताइए को रिजेक्ट करना मतलब ये कैसा प्रश्न हुआ भाई जी बुक को रिक्ट करना मैं दोबारा बता देता हूं मैं अच्छे से बता देता हूं कि मैंने अगर किसी की बुक को कहा भाई यह जो तुम्हारी बुक है इसको हम धर्म नहीं मानते तो यह क्या सामने वाले का जिसकी बुक को हमने रिजेक्ट किया है

00:36:16:16 धर्म ना मानते हुए क्याय उसका अपमान है उसको तो अपमान ही होगा ठीक है ठीक है ठीक है तो आप अपमान नहीं करते आप जो है कहते हो कि हा य तो अब मैं अपनी एक बुक लिख रहा हूं जिसमें कि ईश्वर की नीव से एक मिनट भाई एक मिनट मैंने ईश्वर की नीव से बात की कि उसको प्राप्त कैसे करना है सब कुछ करा और इसमें विकृतियां भी है और मैं दो तीन दिन में इसको करके दे दूंगा तो मेरा नाम जो होगा वह नाम लेते हुए आप उसको धर्म के रूप में स्वीकार करेंगे उसकी पहली बात है अगर आप किस धर्म किस आधार वो मुख्य चीज है पहले भाई साहब फिर भाई साहब आपका डेफिनेशन है ना बदल रही है प्रॉब्लम ये है आपने डेफिनेशन य द कि नीव से जो ईश्वर प्राप्ति की बात करे ठीक है उसको हम धर्म के रूप में स्वीकार करते हैं फिर भले ही उसम विकृतियां भी हो तो मैं कह तो रहा हूं कि नीव से मैंने बात की है ईश्वर ऐसा है वैसा है आपके विरुद्ध है मगर नीव से बात की है आप आपके विरुद्ध है कुछ चीज आपसे मेल खाएगी कुछ चीजें मेल नहीं खाएगी और फिर आप कल को इसका जो मैं एक निशान बनाऊंगा मैं इसमें कोई उड़ता हुआ तोता

00:37:31:22 बना दूंगा उड़ता हुआ तोता और वो मेरे धर्म ये जो मैंने बनाया है और इस तोते को जो है वो धर्म के रूप में वो जो चिन्ह होता है ना जैसे हमारा स्वास्तिक है प्रणव है सूर्य है ये हमारा है उनका इस्लामिस्ट का वो चांद है और उनका वो क्रॉस है तो आपके पास जब जाते हैं तो वो सारे निशान होते हैं आपके पास ना है ना जहां तक मैं जानता हूं तो इसी तरीके से मैं भी एक तोता उड़ता हुआ तोता इसका निशान बना दूंगा यह मेरी आईडियोलॉजी का य निशान है निशानी है तो इस निशान को आप धर्म के रूप में उसके साथ ऐड कर लेंगे इस किताब को धर्म का नाम दे देंगे धर्म के रूप में स्वीकार कर लेंगे मैं पूछ रहा हूं मैं तय करने वाला कोई नहीं है मैं तय करने वाला वो धर्म है या अधर्म हैब मैंने मेरा प्रश्न क्या है भाई साहब मैंने मेरा प्रश्न क्या है प्रश्न मैंने आपसे पूछा सुनिए तो मैंने आपसे पूछा है कि आप किसी को भी धर्म के रूप में स्वीकार कब करते हैं मैंने नहीं पूछा कि दुनिया कैसे करती है आपका सिद्धांत क्या है ब्रह्मा कुमारी का सिद्धांत क्या है धर्म ब्रह्मा कुमारी का सिद्धांत यह है इस संसार में जितने भी धर्म हो अभी

00:38:46:24 मुख्य बात कर रहा हूं इस संसार में जितने भी धर्म है उ से जो धर्म है उसको आप धर्म कहेंगे हा बस बाकी अपमानित हम को नहीं करना चाहते बस इतना ही रखना चाहते हैं सबको मान मिले हम किसी को अपमानित नहीं कर सकते यह धर्म है वो धर्म नहीं है अगर उस बात पर चर्चा की जाए उसके बारे में हमें पूरा अगर नहीं पता हो हम किस बात के आधार के ऊपर हम यह तय करने वाले हो जाते हैं अगर हम किसी का अपमान कर जब आप ये तय करने वाले हो सकते हैं एक मिनट जब आप ये तय करने वाले हो सकते हैं कि ये धर्म है तो आप ये तय करने वाले भी हो सकते हैं कि धर्म नहीं है जब आप ये बताने वाले हो सकते हैं जब आप ये बताने वाले हो सकते हैं कि बहन के साथ विवाह मत करो या यह बताने वाले हो सकते हैं कि इसके साथ विवाह कर लो तो यह बताने वाले भी हो सकते हैं कि इसके साथ विवाह मत करो जैसे की आपने कहा कि आइडल जीी पहले से है ठीक है तो कितना पहले से होनी चाहिए वो आइडल जीी तब आप धर्म के रूप में उसे स्वीकार करेंगे और फिर मैं अपना क्वेश्चन करू कि कितना पहले से वो आडलज होनी चाहिए वो आडलज उसके लिए कोई प्रमाण की आवश्यकता नहीं अगर वो पहले से प्रमाणित है पहले से इस किसने प्रमाणित किया कौन प्रमाणित कर र है प्रमाणित

00:40:01:24 उनके उनके अपने अपने धर्मों के जो है फॉलोवर्स वो प्रमाणित मैं कह रहा हूं इसको मैंने प्रमाणित किया अपने अपने अपने अपने प्रमाणित करेंगे तो मैं इसको प्रमाणित करर हूं मेरे पाच 10 लोग इसको प्रमाणित कर देंगे अ वैसा अगर होने लगा आज के संसार में तो हर कोई अपनी किताब निकाल लेगा ना भाई य कह रहा हूं हो रहा है वही तो हम सबको धर्म क्यों कह रहे हैं यही मेरा पॉइंट है हम क्यों कह रहे सबको धर्म हर कोई दूसरे दिन ये कहने लगेगा अगर हर अगर यही कारण है कि उसको लोग मानने वाले हैं तो यह तो कोई धर्म का आधार नहीं है हिरण्य कश्यप को मानने वाले ज्यादा थे कौरवों को मानने वाले ज्यादा थे तो कौरवों को क्योंकि मानने वाले तो कौरव सही हो जाएंगे क्या तो मानने वाले अगर है बहुत सारे तो उन्होंने क्योंकि उसको धर्म कह दिया कौरवों को अच्छा कह दिया तो हम थोड़ी ना मान लेंगे कि कौरव अच्छे हैं पांडव पांच थे लेकिन भगवान हमें क्या सिखा रहा है वो तो पढ़िए एक बार भाई जी एक बार सुनिए तो ऋषभ जी हम एक एक करके चलेंगे अभी बात ये है हम चैप्टर को हम डिबेट नहीं करना चाहते इस पर क्योंकि हमारा मूल सिद्धांत वही

00:41:16:28 था सर्वशक्तिमान का उसके ऊपर ही हम चर्चा करने वाले थे अगर इस बाद में अगर डिबेट होने लगे तो भगवान को सबसे पहली बात मेरे लिए तो बहुत बुरी बात है क्योंकि भगवान को पस भगवान जो है शिव जो हमें सिखाता है वो बस यही सिखाता है कि सर्व धर्म को किसी भी धर्म का किसी भी कुछ कुल का किसी भी मट का किसी भी पंथ का किसी का भी अपमान ना करो तो आप मेरा क्यों कर रहे आप मेरा क्यों कर रहे हैं मेरा मैंने कुछ डिसाइड ही नहीं किया भाई जी मैंने डिसाइड ही नहीं किया आपने कहा ना मैं इसको कभी नहीं करूंगा स्वीकार आपने कहा इतनी छोटी सी बात पे अगर मैं डिसाइड करने लग जाऊ तो इस संसार में तो कितनी सारी चीजें भाई जी बहुत सारी चीज है ना पझ भाई साहब आप समझ आप मैं इस चैप्टर को बंद कर रहा हूं मैं आपको ये भी बता दूंगा कि मैंने प्रश्न रखा क्यों है मगर मैं एक बात बता रहा हूं आप कह रहे कि हम किसी भी धर्म को किसी का भी अपमान नहीं कर सकते मगर आपने मेरा अपमान किया अब इसका जो नजर आता है व यह है कि भाई मुझे मेरे को फॉलो करने वाले उतने लोग नहीं जिससे आपको फर्क पड़े मगर जिनका ये तो फिर फिर आपका सुनिए तो आपने उचित कारण नहीं बताया मेरी बुक को डिसन करने

00:42:32:03 का अब दूसरी बात ये है कि धर्म की वास्तविक जो परिभाषा है वो सर्वशक्तिमान ईश्वर से कनेक्ट होती है और वो ईश्वर की सिद्धि से भी कनेक्ट होती है जो हमारे मेन पॉइंट ईश्वर की सिद्धि ईश्वर सर्वशक्तिमान जो सनातन परिभाषा है धर्म की वो ये है कि अस्तो मा सद गमय तमसो मा ज्योतिर्मया मृत मा मतम गम एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी कभी ना मरने की चाह विद्यमान है एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी सदा सुखी रहने की चाह विद्यमान है एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी अखंड ज्ञानी बन जाने की चाह विद्यमान है बिल्कुल ठीक है तो जिस प्रकार से हमारे अंदर जो इनबिल्ट इच्छाएं है भूख भूख से सिद्ध होता है दुनिया में भोजन है प्यास से सिद्ध होता है कि दुनिया में पानी है इसी प्रकार एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी सत चित आनंद की चा होने से य सिद्ध होता है कि दुनिया में कोई सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर है तो ईश्वर यहां पर ईश्वर

00:43:47:04 हमें सिद्ध हो गया कैसे हुआ सिद्ध कि नास्तिक के अंदर भी ईश्वर को ही प्राप्त करने की चा है नास्तिक भी ईश्वर को ढूंढ रहा है बस वो अपनी मना ईश्वर को नहीं ढूंढ रहा ठीक है अब यहां पर एक बात आई की वो जो सत चित आनंद होना चाहता है तो व सच्चितानंद जो होना चाहता है इसको अगर हम डिफाइन करेंगे तो इसमें आएगा कि वह अबाध होना चाहता है आपने कहा मोक्ष क्या है सभी बंधनों से मुक्ति आबाद अबाध होना चाहता है तो ईश्वर कौन है ईश्वर कौन हो सकता है इस चाह का सब्जेक्ट कौन हो सकता है इस चाह का सब्जेक्ट वही हो स जो अबाध हो अबाध बन जाने की चाह का निराकरण कौन करेगा जो अबाध हो है ना तो ये अब बात ये आती है यह जो मैंने तो जो धर्म की परिभाषा में आपको बता रहा था कि जीव की चाह के वास्तविक विषय सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को परिभाषित कर सकने वाले शास्त्रों द्वारा सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त करने के निमित्त बताई जाने वाली विधि का नाम धर्म है हमारे लिए धर्म नहीं है

00:45:02:10 ये जो क्रिश्चन इस्लाम वगैरह है हम ये मक्खन नहीं लगाते कि आप लोगों में विकृति है तब भी हम आपको धर्म कहे वो भी अपने आप को धर्म नहीं कहते उनके अपने अपने अलग अलग वर्ड है उनका वर्ड है मजहब है वो दन है वो उनका वर्ड है रिलीजन है वो भी अपने आप को धर्म नहीं कहते हम ये मक्खन नहीं लगाते तुम भी धर्म क्यों क्योंकि उनके द्वारा दिए गए ज्ञान विज्ञान के अनुसार ईश्वर की प्राप्ति नहीं है मोक्ष है ही नहीं ईश्वर है ही नहीं ना तो वहां परम स्वतंत्र मोक्ष है ना ही वहां पर सर्वशक्तिमान ईश्वर है और ना ही वो धर्म शाश्वत है हम तो इसलिए जहां पर ये तीन चीजें नहीं होंगी वो धर्म नहीं है अकॉर्डिंग टू सनातन ठीक है यह धर्म की परिभाषा है अब आपने धर्म की दूसरी दूसरी परिभाषा बताए कि कोई भी ईश्वर की बात कर रहा है भले ही आधी सही कर रहा आधी गलत कर रहा हो वो भी धर्म है तो ऐसे नहीं परिभाषा यही है धर्म वो है जो जिसकी अक्षरस एक एक बात आपको ईश्वर की प्राप्ति में काम आए अक्षरस जी

00:46:08:06 अच्छ अपमानित नहीं करना चाहता बस उसके अपमानित नहीं करना चाहता बस आपने मुझे अपमानित किया ना वो चीज मैं अपमानित किसी और कोसे अपमा नहीं कहा आपने मुझसे कहा कि नहीं कहा मैं आपको कभी नहीं स्वीकार करूंगा धर्म के रूप में धर्म के रूप में अगर इतना बड़ा सब्जेक्ट के ऊपर मतलब आपने एक बुक लिख दिया और उसके ऊपर इतना बड़ा चर्चा का बता रहे हो कि आपने धर्म स्वीकार नहीं किया अगर ऐसे इस छोटी सी बात के ऊपर आप धर्म का है या नहीं वो वो प्रमाणित के ऊपर आ जाए तो आपने जो परिभाषा बताई है उसके अनुसार मेरी मेरी ये बुक भी धर्म मानना चाहिए था आपको आपकी या तो परिभाषा गलत है किसी भी किसी भी आइडल जीी को एक मिनट किसी भी आइडल जीी को धर्म के रूप में स्वीकार करना करने के निमित्त जो आपने परिभाषा बताई है या तो व परिभाषा आपने गलत आपकी परिभाषा कुछ और है आपने दूसरी परिभाषा बता दी है और अगर जो परिभाषा बताई है वो सही है आप उसको मानते हो फॉलो करते हो तो फिर आपको इसे स्वीकार करना चाहिए था मगर आपने इसे स्वीकार नहीं किया और जो आप ये कह रहे हो कि हम किसी का अपमान नहीं करते हम इसलिए नहीं बोलते

00:47:23:10 कि तुम धर्म नहीं हो तो यहां पर भी आपने उस चीज को फॉलो नहीं किया आपने अपने सिद्धांत को तोड़ दिया दो बार को तोड़ा नहीं भाई जी पहले अभी पहली बात सुन ली बहुत हो सबसे प ब इसके इस टॉपिक के परर बहुत हो गया सबसे पहली बात भाई जी हम अपने आपके जो सिद्धांत उस दिन जो आपका प्रश्न था उस प्रश्न के ऊपर आते जो भी आपकी प्रश्न उसन उस प्र असल देखि मैं आ जा रहा उसी पर आ रहा हूं वो प्रश्न तो था तो यह धर्म की बात इसलिए की है धर्म वही है जिसके द्वारा सर्वशक्तिमान ईश्वर की प्राप्ति हो मोक्ष हो है ना अब अब हम इस्लाम को भी धर्म कह रहे हैं वहा वो खुद चीक चक के कह रहा है हमारा ईश्वर सर्व शक्तिमान नहीं है कहीं पर कह रहा है दूसरी जगह कह रहा है व फलाने नहीं कर सकता वो ये नहीं कर सकता व सर्व शक्तिमान नहीं है उसका मोक्ष मोक्ष भी नहीं है हा तो उनका अपना तो उनका अपना है तो हम उसे धर्म क्यों कहे झूठ क्यों बोले सत्य कर्म सुनिए सत्य जो है वो हमें भगवान के पास ले जाता है झूठ कर्म नहीं हम जानते हैं कि वो धर्म नहीं है हम जानते कि वो धर्म नहीं है फिर भी हम उससे कह रहे कि नहीं नहीं तुम धर्म

00:48:38:13 हो और यहां पर आपने मेरे साथ भेदभाव कर दिया यहां पर भी य धर्म नहीं है मैं जानता हूं य धर्म नहीं है मैं जानता हूं मगर आपने यहां पर तो मेरा वो नहीं रखा सम्मान आपने आपने मुझसे कहा कि नहीं नहीं मैं इसको नहीं स्वीकार करूंगा खैर अब हम उस पर आ जाते ईश्वर सर्व शक्तिमान बात कर लेते हैं तो अब हमारे सामने एक बात आई है कि धर्म की परिभाषा यही है कि जो सभी बंधनों से मुक्त करा दे वो धर्म है ठीक है और सभी बंधनों से मुक्त करा दे तो सभी बंधनों से मुक्त कराने वाला है ईश्वर और ईश्वर को प्राप्त करने के निमित्त बताई गया बताया गया जो ज्ञान विज्ञान है वो धर्म तो सबसे पहली बात है कि क्या ब्रह्मा कुमारी सभी बंधनों से मुक्त ईश्वर की बात करता है या ईश्वर पर कुछ बंधन है नहीं नहीं ईश्वर पर कोई बंधन बंधन मुक्त है वो सदाशिव वो जन्म मरण के चक्र में भी नहीं आता वो किसी बंधन के भी चक्र में नहीं आता वो निराकार स्वरूप ते शिव है उसको कोई बंधन नहीं हो सकता कोई बंधन अच्छा शिव कभी

00:49:53:18 भगवान कभी बन बधन नहीं हो सकता यानी कि अनंत सामर्थ्य वान है हम अनंत सामर्थ्य वान शक्तिमान सर्वशक्तिमान है ही सर्वशक्तिमान बिल्कुल सर्वशक्तिमान बक तो इसका मतलब वो सब कुछ कर सकने में सामर्थ्य शली है समर्थ वो रचयिता है इस संसार का रचयिता है वो ठीक है वो सबसे पहली बात और मात पिता भी है सबसे पहली बात भाव है वो भाव है वो भावी है हमारा है मैं आपकी बात को स्वीकार कर रहा हूं भाई साहब मैं आपकी बात को स्वीकार कर रहा हूं आप उस पर ब जाइए तो जब हम यह कहते हैं कि ईश्वर किसी भी प्रकार के नियम के नीचे नहीं है वह सभी नियमों को बनाने वाला सर्व नियामक है व सर्वशक्तिमान है अनंत सामर्थ वान है तो सबसे पहला पॉइंट आता है कि क्या ब्रह्मा कुमारी के द्वारा परिभाषित प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है वो अवतार ले सकता है स्वयं साकार रूप में मनुष्य के बीच में आ सकता है या नहीं आ सकता आ आया है आया है

00:51:09:09 आया किस रूप में आया है किस रूप में आ उसने माध्यम चुना माध्यम नहीं माम नहीं वो स्व परया प्रवेश नहीं पर काया प्रवेश स्वयं स्वयं निराकार है ना निराकार है ना निराकार अगर निराकार को इसी माध्यम से आना होगा निराकार का जो रूप है निराकार ज्योति बिंदु स्वरूप हम जिसे कहते शिव वो निराकार इस यहां पर आकर साकार माध्यम लेता है साकार माध्यम अर्थात साकार माध्यम से अपना जो ज्ञान है सत्य ज्ञान वो सिखाता है यानी प्रवेश कर सकता है पर स्वयं अवतरित नहीं हो सकता नहीं हो सकता नहीं हो सकता वो निराकार है जी तो अभी हम लोग बात कर लेंगे जो निराकार है वो साकार कैसे हो सकता है उस पर बाद में पर पहले यह बात कर ले कि जब हमने कहा कि उसके ऊपर कोई नियम लागू नहीं होता तो यह नियम तो लागू हो गया ना कि वो नहीं आ सकता वो बंधन में आ गया ना वो यह काम नहीं कर पा रहा बन वो बंधन अगर उसने शरीर लिया उसने अगर साकार शरीर ले भी लिया तो अर्थात

00:52:24:20 क्या हुआ इसका अर्थ क्या हु आप समझिए अगर कोई शरीर लेता है इस इस संसार में अगर कोई शरीर लेर है वो खुद को बंधन में ला रहा है ना वो मतलब इसका अर्थ ईश्वर ईश्वर सुनिए ईश्वर उसका नाम है जो बंधन में होते हुए भी मुक्त है हां वही तो बोल रहा हू मैं तो अगर व साकार लेलेगा अगर वो साकार स्वरूप धारण कर लेगा तो ऐसा नहीं है कि उसकी जो सर्व व्यापकता खत्म हो गई वो बंधन में आ गया स बात उसको माध्यम चुनना होगा वो माध्यम लेगा देखिए य आपका आपकी अपनी शिक्षा है कि आप यह मानते हो मैंने एक बात कही कि यदि कारण कोई भी हो कारण कोई भी हो दुनिया का एक चिंदी मात्र भी कोई एक कार्य है जो अगर ईश्वर नहीं कर पा रहा है तो उसे सर्वशक्तिमान नहीं कह सकते अगर ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं होता वह रचयिता कैसे हो सकता है रचयिता है ना यता हमेशा मतलब सर्वशक्तिमान का अर्थ ये नहीं है कि वो सब कुछ कर सकता है वो सब कुछ कर सकता है लेकिन नियम है वो नियमों के ऊपर चलने वाला है वो नियम को तोड़कर किसी और चीज

00:53:39:21 के ऊपर नहीं आ सकता वो अगर फॉर एग्जांपल वो गलत काम नहीं करता है यानी वो गलत काम नहीं करता अपने नियमों को नहीं तोड़ता वो हमेशा पूरे ब्रह्मांड के नियमों के आधार पर सब कुछ करता है अगर वो चाहे तो सेकंड में अगर उसके पास क्षमता है लेकिन वो नहीं करेगा क्योंकि क्योंकि एक चीज है वो ब्रह्मांड के नियम को फॉलो करता है ब्रह्मांड के जो नियम है ब्रह्मांड के जो वसूल है उन नियमों के आधार वो सीधा एक नियम अगर हम उसने नियम तोड़ दिया तो फिर हमारे और उसके अंदर क्या भी अंतर होगा क्या नियम तो हम भी तोड़ रहे हैं ना बहुत सारे तो हमारे और उसके अंदर को ये बहुत सारी बातें हो जाएंगी हमारे उसके बीच में अंतर चलिए इसको भी लिख और बुरे काम नहीं करता और नियमों पर चलता है ठीक है

00:54:28:26 ठीक है अब इसमें बात य आती है कारण मैंने क्या कहा कारण कोई भी हो वो नियमों पर चलता है वो अपने नियम नहीं तोड़ता है ठीक है आप ये कह रहे तो इसका मतलब है कि दुनिया में कुछ कार्य ऐसा है जो वो नहीं कर सकता गुप्त रीति से करता है उसका कार्य गुपत ई बात को बात से बात का जवाब नहीं दे रहे आपने कहा कि वो सिर्फ नियमों पर चलता है तो क्या वह अपने नियमों के जो उसने अपने नियम बताए हैं आपको उस नियम के विरुद्ध जा सकता है नहीं जाएगा वो नहीं जाएगा जाएगा नहीं मैं कह रहा हूं उसके अंदर कैपेबिलिटी है कि नहीं उसके अंदर कैपेबिलिटी है लेकिन वो नहीं करेगा वो करेगा ही नहीं पहली बात तो अरे जब उसके अंदर कैपेबिलिटी है जब उसके अंदर कैपेबिलिटी है तो आप ये कैसे क सकते कि वो नहीं करेगा अगर आप यह कह रहे कि वो नहीं करेगा तो इसका मतलब आपके आपको उस

00:55:28:27 यह महसूस हो रहा है भाई यह विरोधा भास हो रहा है भगवान के प्रति आप भगवान के प्रति आप वो डाउट ले रहे हो बात समकी बात समझाऊ जैसे की एक तरीके से जो ईश्वर है वह सिर्फ पॉजिटिव चीज ही कर रहा है नेगेटिव चीज नहीं कर करता आप एक बात बताइए आतंकवादी जो बम से दुनिया इधर उधर लोगों को मार देते हैं उसको इलीगल तौर पर बम बना करके कोई देता है बिल्कुल तो बम बनाने वाला बम को बनाने वाला वो बुरा काम कर रहा है कि नहीं कर रहा है बिल्कुल कर रहा है बिल्कुल कर रहा है तो दुनिया में जो बुराई कर रहे हैं उनको बनाने वाला ईश्वर है कि नहीं बनाने वाला ईश्वर है बिल्कुल बुराई करने वाला जो है वो उसके कर्मों के आधार पर उसके कर्म मिनट बुराई करने वाले को ईश्वर बना रहा है कि नहीं पहले मैं य पूछ ब करने वा बुराई करने वाला कौन है वो बताइए करने वाला

00:56:43:28 एक मनुष्य मनुष्य कौन है मनुष्य कौन है एक आत्मा जिसने शरीर धारण किया है हा आत्मा पहले कौन सी स्टेट में होती है कौन सी अवस्था में होती है सबसे पहले आप अपना जवाब दीजिए ना मैं आपके अकॉर्डिंग हो सकता है सब कुछ ना बताऊ वही तो बस आत्मा जो होती है सबसे पहली बात हम मूल प आते मूल प आत्मा जो होती है पह बात जी बोलिए बोलिए बोलिए आत्मा जो हो आत्मा जो होती है सबसे पहली बात उसकी अवस्था सबसे पहले सतो प्रधान रहती है वो जो ऊपर से आती है वो बहुत स्वच्छ होती है सतो प्रधान रहती है सात्विक रहती है लेकिन जैसे जैसे वह जन्म लेने लगती है आगे जाकर उसके कर्म विकर्म बनने लगते हैं वह बुरे कर्म करने लगती है क्योंकि देह भान विकार जो है उससे बुरे कर्म कराता है वो जो वो जब आई समझ गया ईश्वर तो मैं समझ गया ईश्वर ने तो पवित्र बनाया था व फिर अपना खुद उसकी फ्रीविल हैने उसको नहीं आप एक बात बताइए आपका ईश्वर देख सकता है या नहीं सर्वशक्तिमान

00:57:59:18 वो आदि मध्य अंत का मालिक है भाई त्रिकाल दर्शी भाई तो फिर आपके ईवर को आपके आपके ईश्वर को ये पता नहीं था कि वो गलत कार्य करेगा वो पता है उसे उसे सबके बारे में पता इसका मतलब उसने जब उसको बनाया था तो उसको पता था ये आगे जाकर के बुराई करने वाला है फिर भी उसने बनाया बनाया मतलब आत्मा जो है वो अविनाशी है अविनाशी अरे आत्मा नहीं जब उन्होंने उसको देह दी जब उन्होंने उसको देह दी मनुष्य रूप में भेजा हर एक का पार्ट है भाई हर एक का अपना अपना पार्ट है फॉर एमल जैसे आपका एक यूनिक पार्ट है आप जैसे सारे यूथ को इंस्पायर करते हो बहुत सारे यूथ को बताते हो आपका एक खुद का पार्ट है बराबर मेरा अपना एक पार्ट है ए स्टूडेंट किसी और का अपने मात पिता का अपना एक पार्ट है हर एक का पार्ट अलग अलग है उसमें भगवान बस हमें हमारी आत्मा को शुद्ध पवित्र बनाता है बाकी जो भी है सब कर्मों के आधार पर ही होता है हमारा जो भी बात देखिए वो बहुत लंबा बताने की आवश्यकता नहीं है अगर हम लोग क्योंकि अभी डिस्कशन बहुत हैय तो एक छोटे से कुछ क्वेश्चन चल रहे हैं अभी क्या है कि आपने कहा कि ईश्वर जो है सिर्फ पॉजिटिव चीजें

00:59:14:25 करता है मगर वो यह जानते हुए भी कि कौन बुराई कर रहा है ईश्वर उसे बना रहा है वो जानता है रेप करेगा पर वो रेपिस्ट को जन्म दे रहा है सबसे पहली बात वो जन्म नहीं दे रहा है वो जन्म नहीं दे रहा है वो सबसे पहली बात वो जो कर्म कर रहा है वो उसके खुद के कर्म है उसमें भगवान का कोई हस्ताक्षेप नहीं है भगवान बस रचता है वो ये नहीं दे इसके कर्म उसके वो सब कुछ जो भी आधारित कर रहा है उस उसके अंदर हम भगवान को नहीं ला सकते अगर हम विकर्म को भगवान से जोड़ रहे हैं तो ये सबसे ब आप यहां पर इंटरप्ट करना चाहूंगा मैंने आपसे पूछा है कि अगर भगवान भविष्य देख सकता है तो क्या उसको मालूम है कि नहीं कि वह व्यक्ति रेप करेगा मैं उसे बनाऊ या ना बनाऊ सबसे पहली बात पहली बात भाई जी पहली बात वो रचयिता सबके बारे में जानता है लेकिन क या कि हम ये माने हम ये माने कि उसने सब कुछ बनाया है इसलिए वो ईश्वर है उसका हर चीज में हस्तक्षेप नहीं है उसकी सत्ता नहीं है वो ह सत्ता नहीं हस्ताक्षेप बोल रहा हूं हस्ताक्षेप मतलब अगर मैं कोई कर्म कर रहा हूं जब कहीं पर कोई गलत कार्य हो रहा है जब कहीं पर कोई गलत कार्य

01:00:29:26 हो रहा है तो उस वहां पर ईश्वर की सत्ता है कि नहीं है ईश्वर की अगर सत्ता होगी होती अगर फॉर एग्जांपल होती तो वो कर्म ही नहीं होता वहां प ईश्वर की वहां पे सबसे पहली बात ईश्वर या ईश्वर की सत्ता सब जगह नहीं है ईश्वर की सत्ता है भाई जी आप फॉर एग्जांपल ईश्वर की सत्ता का अर्थ पहले बताइए ईश्वर की सत्ता का अर्थ क्या है दुनिया में दुनिया में जो कहते हिलता है तो ईश्वर की सत्ता से हिलता है भगवान यह खुद कह रहा है मैं कर्म भवान देखिए भगवान क्या कह रहे हैं सुनिए सुनिए सुनि सुनिए देखिए भगवान सुनिए तो सुनिए सुनिए भगवान क्या कह रहे हैं यह प्रमाण हो गया अभी हम लोग केवल मैं आपकी आईडियोलॉजी जानना चाह रहा हूं मुझे आपकी यह आवश्यकता नहीं है भगवान ने कहा है कि नहीं कहा ब्रह्मा कुमारी क्या मानता है क्या सोचता है क्या कह वो बताइए जब आप प्रमाण देंगे जब आप प्रमाण देंगे तो मेरे पास भी अपने प्रमाण है फिर वो दूसरा क्लास चालू हो जाएगा और दूसरा क्स चालू हो जाएगा और यह टॉपिक रह जाएगा तो आप अपनी आइजी बताइए मैं आपसे प्रमाण नहीं मांग रहा हूं

01:01:45:09 ठीक है ठीक है देखि मैं आपको इसको सरल कर द जैसे आपने बताया फ्रीविल होती है ठीक है एक बच्चे ने अभी अभी जन्म लिया ठीक है निर्दोष उसने कुछ नहीं किया है सुनामी आ गई हम तो सुनामी में वो बच्चा डेड हो गया मृत्यु को प्राप्त हो गया निर्दोष था कुछ नहीं किया था उसने ये बुरा कार्य है कि नहीं है उसका मर जाना बेमौत बेमौत अकाली मृत्यु जिसे कहा जाता है अकाल मृ कहते हम दुखद है कि नहीं जो अ वो तो दुखद है दुखद दुखद है तो यह कार्य किसने किया यह कार्य किसने किया य कार्य यह कार्य पहली बात सबसे पहली बात यह कार्य क्यों हुआ पहली बात वो जानना जरूरी है सुनामी क्यों आई वो जानना जरूरी है सुनामी इसलिए ये जो जितने भी कार्य हो रहे ना प्रकृति में आजकल जैसे अभी कैलिफोर्निया में भाई साहब मैं कह रहा हूं उस बच्चे का दोष नहीं था वो अभी जन्मा है उसके अकॉर्डिंग तो वो कार्य किसने किया न्यू प जा रहा हूं मैं न्यू प जा रहा हूं मैं हमेशा मूल तत्व के आधार बात करता ह भाई जी

01:03:04:18 बोलिए जो प्रकृति आज जो जिसके बारे में जो सुनामी वगर जो कुछ आ रहा है वो क्यों हो रहा है वो पहले जानना जरूरी है हमने प्रकृति को बहुत दुख दिया है प्रकृति इसके वजह से यह सारे कार्य जो है सुनामी के वो इंसान प्रकृति के साथ बहुत बुरा हुआ समझ गया के साथ बहुत बुरा हुआ सुनामी आ गया ठीक है प्रकृति के साथ बहुत बुरा हुआ सुनामी आ गया सुनामी आ गया उसम एक निर्दोष उसमें एक निर्दोष बच्चा भी मरा व आत्मा कहा से पहली बात पहली बात वो आत्मा अभी की नहीं है उसने अभी अभी ज जन्म शरीर दवारा लिया है लेकिन उसकी यात्रा तो बहुत बड़ी है आपकी बातें में पता है क्या मैं प्रिडिक्टेबल है आप क्या आंसर दोगे प्रिडिक्टेबल है इसका अर्थ यह है इसका अर्थ यह है कि जो कार्य हमको देखने में बुरे लग रहे हैं वह कार्य जो हमको देखने बुरे लग रहे हैं वो कार्य भी बुरे नहीं होते हैं उनका कार्य का पीछे कोई सिस्टम होता है है इसका मतलब इसका मतलब जो कार्य हमको देखने में बुरे लग रहे हैं उन कार्यों के रूप में वो तो ईश्वर की सत्ता के रूप

01:04:19:25 में ही रहा है मगर उन कार्यों के होने का भी एक कारण है जो हमें नहीं दिख रहा कारण है हां नहीं दिख रहा है वही इसका मतलब इसका मतलब ये है कि ईश्वर भी हमें बुराई करता हुआ दिख सकता है बुराई करता हुआ दिख सकता है मतलब जैसे आपने कहा कि वो जो बच्चा जो सुनामी के कारण मरा आपने कहा कि उसने पूरा पिछले जन्म में कुछ ना कुछ किया होगा जिसके कारण उसकी ऐसी मृत्यु हुई यही कहा ना हम अब यहां से जब हम देख रहे हैं तो एक निर्दोष बच्चा मारा गया तो ये बुराई हो गई वो बात और है उसके पीछे वो बात और है उसके पीछे का फैक्ट कुछ और है तो जब वो बच्चा मारा गया तो इस तरीके से ये जो लीला है निर्दोष बच्चा मारा गया इस रूप में भगवान हमें बुरा कर्म करते हुए दिख गया ना भगवान कर्म करते हुए दिख गया मतलब अरे भाई य सुनामी किसकी मर्जी से आई सुनामी प्रकृति के नियमों अनुसार हो रही है प्रकृति भगवान उधर प्रकृति सुनामी हो जाए ऐसा कभी नहीं बोल सकता क्योंकि वो मात वो अपने बच्चों का कभी दुख दर उनको नहीं दे सकता खुद हो मतलब पहली बात ये है कि प्रकृति के पास अपनी चेतना है नियम

01:05:35:06 है नियम प्राण शक्ति जिसे हम कहते प्राण शक्ति सारे संसार में व्यापक है जिस प्राण शक्ति के आधार पर प्रकृति चलती है प्रकृति यह सारे संसार में जो प्राण शक्ति है वह प्राण शक्ति ही सब कुछ कराती है प्रकृति के द्वारा सबसे पहले यह बात जानना जरूरी है प्रक प्राण शक्ति है उसम भगवान मैं जो है इस क् मैं इसको क्लियर कर दूं थोड़ा कि ये जो प्रकृति जब उस निर्दोष बच्चे को मार रही है पहली बात तो यह बताइए कि वो जो बच्चे का मरना है वो बुरी बात है कि नहीं है पहले तो ये बता दीजिए वो बुरी वो बुरी बात मतलब वो दुखद घटना है ना कुछ भी हो जाए वो दुख दुखी तो बुरा है दुखद है दुखद है वो किसी मां के लिए दुखद है कि लिए है कि वो जो जो बच्चा निर्दोष मारा गया और जिस भी तरीके से मारा गया वहां पर ईश्वर की सत्ता थी कि नहीं थी वहां पर ईश्वर की सत्ता नहीं थी

01:06:41:09 [संगीत] क्यों आपका नेट नेट की कोई प्रॉब्लम है आपको आपकी वो नहीं आ रही वॉइस चिपक गया है तो अब इनकी ईश्वर की सत्ता भी सब जगह नहीं है ऐसा कुछ प्रतीत हो रहा है ऐसा कुछ आने वाला है सामने कि ईश्वर की सत्ता हर जगह नहीं है ठीक

⬜ Not used yet · 01:07:23:26 – 01:50:28:09 (43:04)

01:07:23:26 है तो अभी वह सब चीजें सामने आएंगी मैं कहूंगा कि आप दोबारा से जुड़ जाएं मैं एक काम करता हूं तब तक कोई बीके बीके का पक्ष रखने के लिए आना चाहता है तो आ सकता है क्योंकि बी के से संबंधित बात चल रही है ब्रह्मा कुमारी इस का पक्ष रखने के लिए कोई आना चाहे तो आ सकता है

01:08:54:15 हां चेहरे के साथ आओगे तो इस्लाम पर जरूर बात करेंगे विशाल आप बीके का पक्ष लेने आए क्या जय सेती जय श्री राम भैया जय श्री राम जय श्री राम शिवांश भाई जय श्री राम जगनाथ जय जगन्नाथ मेरे गुरु भाई हो एक दो जवाब आ रहे मैं उनको थोड़ा बता दूं कि यदि उसने कुछ कर्म ऐसे किए हैं जिसके कारण उसके साथ यहां पर ऐसा कुछ हो रहा है तो इसका मतलब ये है कि दुनिया में जो हमें बुराई लग रही है बुराई नहीं है सब कुछ अच्छा ही है सबके पीछे का कोई ना कोई लॉजिक है तो फिर हम ये बाधा कैसे लगा सकते हैं कि ईश्वर नहीं कर सकता जब कुछ बुरा है ही नहीं जब आत्मा मरती ही नहीं जैसे किसी ने अभी कमेंट किया आत्मा कभी नहीं मरती इसलिए अगर कोई वो हो रहा है तो कुछ बुरा नहीं है उसमें कुछ उसके उसके अपने कर्मों का वो है इसका मतलब यदि जो हमें बुरा लग रहा है वो वास्तविकता में बुरा है ही नहीं यही तो मेरा पॉइंट है जो हमें बुरा लग रहा है वो बुरा वास्तविकता में बुरा नहीं है इसलिए ईश्वर पर हमें बाधा नहीं लगा सकते कि ईश्वर ये नहीं कर सकता ईश्वर वो नहीं कर सकता क्योंकि ईश्वर

01:10:09:19 को वो दृष्टि प्राप्त है जो हमें प्राप्त नहीं है हम बुराई देख रहे हैं जिसमें वो बुराई बुराई है ही नहीं ईश्वर को वास्तविकता दिख रही है कि सब कुछ फ्लैट है दूसरी बात इन्होने कहा कि जैसे सुनामी आ रही है वहा प्रकृति मार रही है नवजात शिशु को तो वहां पर ईश्वर की सत्ता नहीं य मानना पड़ेगा और अगर नहीं है और अगर उसका बच्चे का मरना बुरा है बुराई उसको बुराई मानते हो तो फिर वहां पर ईश्वर के द्वारा व कार्य होना दिख रहा है और या फिर ये कह दो कि वो बुराई है ही नहीं बच्चे ने कुछ कर्म ऐसे किए या फिर दुनिया में अच्छा बुरा जो भी है वो हमारे लिए ईश्वर के लिए कुछ भी बुरा नहीं है जैसे भगवान श्री कृष्ण ने भगवत गीता में कहा कि मैं उन कर्मों में लिप्त नहीं

01:10:51:26 होता मैं कर्मों में लिप्त नहीं होता समस्त कर्म को करने वाला करता होते हुए भी तू मुझको अकता जान क्यों क्योंकि उनको व सम दृष्टि प्राप्त है अच्छाई और बुराई के बीच अरुण जी आप अपना चेहरा दिखाए और उसके बाद आएम जय श्री राम मतलब मैं पहले पीड़ी ही था ब्रह्मा कुमारी में च था मतलब गुरुदेव से जब मैंने वीडियो सुना पा साल पहले की बात है ब्रह्मा कुमारी से पीड़ा मतलब मतलब यह जो चंगुल है उससे मैं छूटा अपने जो पुरी के गुरुदेव है उनसे और इनके द्वारा पीड़ित कई परिवार है अभी कई परिवार है मतलब जो बेघर हो गए अनाथ हो गए हैं जिनके द्वारा नाव संस्था स्वीकार कर रही है और उनकी प्रॉपर्टी सारी रख ली गई है ऐसे कई लोग है तो शिवांश भाई आप एक मुद्दा उठा सकते है गुरुदेव के पास या फिर अभि मुक्तेश्वर जी के पास के इन संस्थाओं को हिंदू धर्म से अलग किया जाए क्योंकि यह संस्था जो है हिंदुओं को इतना गुमराह कर रही है इतना गुमराह कर रही है आज आपको मैं लिस्ट दे सकता हूं बहुत लोगों का ठीक है

01:12:07:00 तो आपको मैं इंस्टा प या किसी में मेल मेल द्वारा या फिर किसी और के द्वारा मेल करा सकता आप देख लीजिए जो भी है ऐसा नहीं है कि सिर्फ यह संस्था सिर्फ अच्छी अच्छी बातें करें जो इसके पीछे की बुराई है बहुत भयंकर है आप सुन के आपके कान खड़े य हिंदू है ही नहीं और शास्त्र मानते वो हिंदू हिंदू कैसे है देखिए पहली बात तो वो हिंदू के अलावा एक परिभाषा दे रहे वो भी धर्म है वो भी धर्म है फिर बता रहे हैं अपमान नहीं करते तो हम तुम्हारा अपमान कर सकते क्योंकि तुमने बुक लिखी और तुम हमारे लिए बेकार के लोग हो अरे उनके मूलिया जो छपती है जब मैं ब्रह्मा कुमारी में था उनकी मुरलिया में लिखा है कि शास्त्र गपो है वेद गपो है ऐसे प्रमाण आपको मैं भेज सकता हूं ऐसे ऐसे प्रमाण है जिसमें हिंदू भड़क उठ सकता है लेकिन आज तक ये लोग जो प्रदर्शनी लगाते हैं ना यह लोग जो सात दिन का कोर्स लगाते हैं इसमें थोड़ी-थोड़ी मतलब थोड़ी-थोड़ी मिर्च मसाले डाल के हिंदू धर्म की बातें लेके मतलब लोगों को धर्म परिवर्तन किया जा रहा है मतलब बेस बनाया जा रहा है धर्म परिवर्तन के लिए एक बहुत बड़ा मतलब इनको एक गिरोह समझ लीजिए और शिवश भाई मैं तो य अनुरोध करता हूं आप मेरे लिए गुरु भाई हो

01:13:22:03 पर आपको ये मैंने एक दिन दिन शायद एक हफ्ते पहले बोला था कि ब्रह्मा कुमार इसके ऊपर मुद्दा उठाइए ठीक है मुद्दा तो उठाइए पर थोड़ी बहुत चीज है जो पीछे से भी वर्क करनी है तो आप आचार्यों के बात जाकर यह बात बता सकते हैं मैंने भी बताई तो थी पर मेरी बात मतलब वो बोल रहे कि कोई समुदाय टूट है कोई प्रूफ तो हो प्रूफ बिना प्रूफ के नहीं बता सकता तो आपको थोड़ी बहुत चीजें मैं बता सकता हूं जो डीएम में मैं बताऊंगा फिर हो पाए तो तो आप थोड़ा इस पर जदा बिल्कुल आपने जो भी चीज बोली है आपने जो भी चीजें बोली है वो जांच के अधीन है हम लोग जांच करेंगे वो उनमें कितनी सच्चाई है तथ्यात्मक है और आप अपनी चीजें हमें दे दीजिएगा हम उसको देखेंगे और यह जो अगर बात वहां पहुंचाने की लगेगी दिखाई देगी तो वहां भी पहुंचाएंगे फिलहाल हम लोग ये बात कर रहे देखिए ऐसा है हम लोगों को जो दृष्टि प्राप्त है उसके अनुसार दुनिया में अच्छाई और बुराई है ईश्वर जिधर से देख रहा है उसके लिए सब इक्वल है तो फिर ईश्वर पर दोष नहीं लगता है कि भैया वो भगवान ने कहा ना क्योंकि उनको किसी कर्म में फला शक्ति नहीं है तो फला शक्ति के ना होने के कारण वह किसी भी कर्म को करने वाले होते हुए

01:14:37:07 भी उस कर्म में वो लिप्त नहीं है इस कारण से जैसे कि कोई व्यक्ति यहां से मुक्त हो गया उसको पता चल गया जिस दुनिया में मैं था वो सब माया था प्रपंच ता में खामखा अपने आप को जो है सोच रहा था मैं गिर रहा हूं मैं मर रहा हूं वास्तविकता में तो मुझे कुछ हो ही नहीं सकता नैनम सि सस्ता नन ती पाव का तो जब ये उसको पता लग जाता है जब वो मुक्त हो गया है जब वहां से वो देखता है अरे सुनामी से डर रहे हैं भाग रहे हैं ये सब कैसे पागल ऐसे लगेगा ना जैसे कई बार होता है जो घर के बड़े होते हैं जो बच्चे होते हैं किसी ऐसी चीज को लेकर के परेशान हो रहे होते हैं रो रहे होते हैं मुझे वो चाहिए मुझे ये करना है जो चीजें बड़ों के लिए बिल्कुल वैल्यूलेस थी तो बड़े हंस रहे होते हैं उन चीजों को लेकर के और बच्चे रो रहे होते हैं तो अब बड़े हंस रहे हैं तो क्या इस पर बच्चे बच्चों का बुरा मानना सही है क्या अब बच्चे भह खा रहे हैं कि मैंने होमवर्क नहीं किया है आज आज हम लोग याद करें जब हम छोटे थे थर्ड क्लास में फोर्थ स्टैंडर्ड में तो कई बार ऐसा होता तो मेरे साथ कई बार हुआ कि मेरा पूरी पूरी मतलब होमवर्क जो है मेरा पूरा नहीं रहता था तो जब मैं वो गया मैं डरता था कि आज सर कितना मारे भय सुबह से प्रेयर से

01:15:52:24 प्रार्थना होती थी जो असेंबली प्रेयर वहां से लेकर के और जब तक वो पीरियड और यह पता लग जाए कि जिसकी आज वो चेक होने वाला है होमवर्क चेक होने वाला है वो सर नहीं आए वाह वाह वाह वाह आज लगता है यार कितनी छोटी सी बात के लिए हम बह खाते थे तो हमारे ही जीवित रहते हुए ही हम में कितना अंतर आया कि जो चीजें हमारे लिए अच्छी या बुरी थी आज वही चीजें हमारे लिए महत्वहीन है तो हम कैसे सोच सकते हैं कि यह जो अच्छाई और बुराई जो हमें दिख रही है वो ईश्वर के लिए भी अच्छाई और बुराई है जैसे आर समाजी मातृ शक्ति थी उन्होंने कहा कि वह चूहों के कूदने से अपने आप को जब ईश्वर नहीं बचा पा रहा है तो हमको क्या बचाएगा अरे भाई चूहों का कूदना आपको बुरा लग रहा है आपको बुरा लग रहा है वो ईश्वर है ईश्वर को नहीं लग रहा है ना बुरा भैया ऐसे बहुत होते हैं दूसरी दूसरी बात अगर ऐसे बुराई देखी जाए तो या तो आपको मानना पड़ेगा मेरा जो ईश्वर है भविष्य नहीं देख सकता या तो आपको मानना पड़ेगा कि मेरे ईश्वर की सब जगह सत्ता नहीं है या तो आपको मानना पड़ेगा कि मेरा ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं है सर्वव्यापक नहीं है है

01:17:07:26 ना यह सब आपको मानना पड़ेगा तब आप कह दो कि हमारा ईश्वर ये कार्य नहीं कर सकता तो फिर वह ईश्वर कहां बचा जो सर्वशक्तिमान नहीं है जिसकी सर्वत्र सत्ता नहीं है जो सब कुछ कर नहीं सकता है जो अनंत सामर्थ वान नहीं है वो फिर सर्वशक्तिमान कैसे ब फिर वो ईश्वर ही कैसे बचा और जब वो ईश्वर नहीं बचा तो फिर ऐसे घटिया ईश्वर को प्राप्त करने के निमित्त तुम क्या बता रहे हो ये ये बात आ जाएगी जब जब ना तो वो अनंत सामर्थ वान है ना तो वह सर्वशक्तिमान है ना ही वह भविष्य देख सकता है ऐसे ऐसे किसी एंटिटी को आप ईश्वर कह करके उसको पुजवा रहे हो उस तक लोगों को पहुंचा रहे हो वो उसको खुद मोक्ष नहीं है वो बंधनों में है

01:17:58:21 आज मैं वहां से कॉलेज से आ रहा था भैया तो कहीं पर मतलब साइड पर भंडारा या कुछ ऐसा लगा था तो वो साई साई का मंदिर था तो बाहर बोर्ड पर पता है क्या खा लिखा था उन्होंने अनंत ब्रह्मांड नायक संत श्री साई राम बाबा ऐसा कु मलब इतना मतलब वो जो मतलब हम पूज्य जो संत के पहले जो मतलब लगाते हैं ना की मतलब जो उपाधि लगाते आचार्य के नाम के पहले वो वो उपाधि साई के मंदिर के उस पर वहां प लिखी और इसमें एक शुरुआती बात रह जाती है बार-बार कि ठीक है आपका कहना है

01:18:45:25 कि आप इस आपका कहना है कि भाई उसका एक कारण है कि ईश्वर अवतार नहीं ले सकता उसका कारण है कारण मगर फिर उसको सर्वशक्तिमान मत कहो अगर कोई कारण है उससे य थोड़ी ना हो जाता है व सर्व लगा रहेगा क्योंकि भाई कोई कारण है शिवांश नारायण द्विवेदी दो सवा दो पर उसने चर्चा के लिए कहा था पर वह आ नहीं सका अब वह जब नहीं आ सका सवा दो पर फिर भी हम कहेंगे कि वह सवाद पर आया है क्योंकि उसका ना आने का कारण था अगर मैंने कहा कि सवा दो पर मुझे लाइव होना है और मैं सवा पर नहीं आया दो 20 पर आया और मेरा कोई कारण था रास्ते में मेरी चैन खराब हो गई थी साइकल से आ रहा था और चैन उतर गई थी मैं उसको चढ़ा रहा था तो क्योंकि मेरे पास कारण है इसलिए हम य यह कहने लगेंगे कि मैं सवा प आया था नहीं यहां हम यही कहेंगे कि भाई एक कारण था जिसके कारण वो दो 20 पर आया सवा पर नहीं आया उसी तरीके से अगर कोई कारण है कोई भी एक कार्य ना कर पाने का तो हम उसको सर्वशक्तिमान नहीं कह सकते

01:20:01:03 फिर और इसी प्रकार से जैसे इन्होंने कहा कि भाई बच्चे का मरना दुखद है बच्चे की मृत्यु क हुई क्योंकि उसने पीछे से कुछ किया था तो वह जो बुरा कार्य है वह है अगर वह बुरा है अब उसका पीछे कोई कारण है तो ऐसे ही भगवान जब आपको बुरा करते हुए दिख रहे हैं तो उसके पीछे कोई कारण हो सकता है उसको ढ कोशिश करो मगर ये मत कहो कि वो ये कार्य नहीं कर सकता और अगर ये कहोगे कि नहीं वो जो है ये नहीं कर सकता तो उसकी जो सर्व सामर्थ है वो सर्व व्यापकता है नित्यता है सनातन जो उसका गुण है सच्चिदानंद सब भंग हो जाएगा व ईश्वर ही नहीं सिद्ध होगी फिर वो जो ईश्वर है वो सिद्ध नहीं हो पाएगा क्योंकि ईश्वर की सिद्धि ही है सर्वशक्तिमान ईश्वर से बाद हो जाएगा फिर

01:20:52:06 वो तो आप अने कहा कि वो बुरे कार्य नहीं करता है या तो वो ना करे फिर आप कह रहे हो कर तो रहा है पर कारण है उसका तो इसका मतलब कारण हो तो कर सकता है बुरे कार कारण हो कारण हो तो बुरे कार्य वो कर सकता है तो फिर बुरे कार्य करने वाला भी आपको एक्सेप्ट करना पड़ेगा कि ईश्वर है और दूसरी एक बात और है जो उस दिन भी इन्होने बताई थी ईश्वर सृष्टि का समार नहीं करता है तो ईश्वर सर्वत्र समान रूप से सर्वव्यापक होते हुए उसकी सत्ता नहीं है सब जगह वो समार नहीं करता है वो सर्व सामर्थ्य वान नहीं है और भी कई सारे उस पर नियम लागू है मगर फिर भी वो अनंत सामर्थ वान है सर्वशक्तिमान है ईश्वर है तुमको उसे प्राप्त करना है मुरली के रूप में उसको प्राप्त करने की विधि बताई जा रही है जो कि सनातन नहीं है क्योंकि वो डेली आ रही है डेली आ रही तो सनातन किसी भी देश काल परिस्थिति में जो ना उत्पन्न हो ना खत्म हो वो सनातन है तोय मुरली सिद्धांत है सनातन नहीं है वो बात और है कि वो जो नाम उपयोग में लिए जाते हैं इनकी ओर से चुनाव चिन्ह के रूप में जो लेते हैं य वो हमारे हिंदू धर्म ग्रंथों में मिल जाते जिस कारण से

01:22:07:16 इनको हिंदू धर्म के रूप में जाना और देखा जाता है मगर वास्तविकता बिल्कुल उलट है जिसके लिए इस्लाम भी धर्म है क्रिटी भी धर्म है वो हिंदू कैसे नहीं हो सकता वो धर्म नहीं है क्योंकि ज जहा ही प्राप्त नहीं हो रहा है मोक्ष ही प्राप्त नहीं हो रहा है धर्म ही नहीं है शाश्वत नहीं है तो वो सनातन कहां से हो ग तो मैं अरुण जी जय श्री राम बताइए एक मिनट आपकी आवाज नहीं आ रही बोलिए आपने अपने आपको को म्यूट कर रखा है हा अब ठीक है नमस्कार सभी को य अच्छा वि पकड़ा है ब्रह्म कुमारी का यह हिंदू धर्म में घुस के हिंदू में घुन का काम कर रहे हैं तो इनका सारा कुछ जय जुड़ हुए थे आपसे वो सब कुछ आपको भेज देंगे सारी डिटेल मेरे पास है मैं कहेंगे तो 500 फैमिली इनसे पीड़ है बर्बाद हो चुकी है उनको भी जोड़ सकता काफी काम कर रहे जितना हो सक कर र है ले हमें भी कुछ मदद चाहिए होती

01:23:22:20 है सपोर्ट चाहि होता है हमारी समित पहुच तो समित दायरे में ही बात कर पा रहे हैं तो आप जैसे धर्म रक्षक अगर आपके आपके आते हैं तो ये जो जो गलत चीज फैला रही है वो सारी चीज उपलब्ध करवा सकता हूं मैं आपको जैसे बक पहले आ थे पहले जो भाई साहब आए थे जो कह के गए और चले गए उनको भी मैं कहूंगा कि आप जो है के जरिए हमसे जुड़े और हमको वो सामग्री भेजे जो आप भेजना चाह रहे थे ठीक है जी जी जी सुरेंद्र जी आपका आपका न में चे 74036 दे देता हूं बताइए

01:24:16:13 स आप बोलिए सर ंबर बोलिए यह देखिए महादेव शिवांश भैया जी ठीक है महादेव जय श्री राम अभी कुछ टाइम पूर्व में जय सती नाम के जो भ्राता जी आए थे तो उन्होंने एक बात कही थी बोला कि जिन जिन में मतलब ब्रह्मा कुमारी में ऐसे होता है कि वह संपत्ति अपने नाम कर लेते हैं तो ऐसी संस्था को हिंदू समाज से बाहर कर देना चाहिए पर एक प्रकार से देख हिंदू समाज में अनेक मत संप्रदाय है यदि हम सभी को ऐसे बार करेंगे तो इसका मतलब य हिंदू समाज तो पूरे टुकड़ों में बट जाएगा ऊंट की गर्दन लंबी हो तो इसका मतलब यह नहीं कि हम ट की गर्दन को काट दे उसमें कुछ सुधार ला सकते हैं उनको समझा सकते हैं ऐसा नहीं कि हिंदू समाज से बाहर कर दिया जाए ऐसे बहुत मत संप्रदाय सब अपना अपना अलग है देखि वो तो उनका रोष था मगर हम लोग सुधरी करण पर कार्य करते हैं सुधार परही हमारा कार्य है और दूसरी एक बात यह भी है कि जब तक वो सुधार नहीं है तब तक कुछ ना कुछ हमें ऐसा करना होगा जिससे कि हमारे ू दि भ्रमित ना हो अगर हम बिल्कुल सामान्य

01:25:31:14 ही रखेंगे उनको भी जो हिंदू धर्म का अपने आप को कहते हुए भी हिंदू धर्म विरोधी बातें कर रहे हैं और हम उसम कोई निशानी नहीं लगाएंगे कि नहीं भैया इससे बच के रहना है इससे जो है यह इस तरह से कार्य कर रहा है तो फिर वह तो इधर हम लोग भरते जाएंगे एक गागर भरेंगे दूसरी एक गागर भरेगी दूसरी फुट जाएगी तो कुछ ना कुछ तो ऐसा करना मगर बाहर निने की बात नहीं बात कही हिंदू धर्म से अलग कर दिया जाए तो ऐसे बहुत मत संप्रदाय में कह दिया कि वो तो उनका रोष था हम सुधार पर ही कार्य करते मगर हमको लोगों को यह तो ताना ही पड़ेगा कि ब्रह्मा कुमारी को आप हिंदू धर्म मान करके मत चलो क्योंकि उसमें शिव है ब्रह्मा है यह सब मान के आप मत चलो उसका वास्तविकता कुछ और है हमें यह बताना पड़ेगा हां जब सु हो जाएगा हा उनका जो मुख्य केंद्र था मा में वहा मैं करीबन आ साल रहा हूं माउंट अबू में विद्या अध्ययन किया मैंने वहा पर तो उनका ऐसा कुछ है मतलब अपना जो कोर्स आदि वो देते हैं सा दिन का रखते हैं और कुछ संपत्ति आदि अपने नाम करते हैं व्यक्ति की

01:26:46:24 उ काफी म बुरा भी है तो मतलब वो उन्होने कुछ ऐसे भा सबसे पहली बात तो यही है वो कह रहे हैं कि वह धर्म नहीं है मैं जानता हूं मगर मैं अपमान नहीं करना चाहता इसलिए मैं जो है उनको धर्म कहता हूं लेखराज बाबा यह सिखा रहे हैं मुरली के द्वारा यही सिखा रहे हैं ना अच्छा फिर मैंने कहा कि जो जो ऐसा गंदा व्यक्ति होगा कि जो बहुत ही गंदा होगा उसको मैं कहूंगा तो कौन कितना गंदा होगा कितना गंदा नहीं होगा इसका रेशियो क्या है यह नहीं पता सिद्धांत हीनता है ना देखिए पराका देखिए कुल मिलाकर कहना यह है कि आपको इन सेक्ट को अपने मिलाना है इनको फॉलो करने वाले लोग हैं शिवांश नारायण द्विवेदी को फॉलो करने वाला कोई नहीं है ऐसा कि कोई एक मत पंथ चल रहा हो तो हम उसको क्यों मान ले धर्म तो शिवांश नारायण द्विवेदी की लिखी हुई किताब को हम टकरा देंगे मगर मोहम्मद की दी हुई किताब को हम स्वीकार कर

01:27:49:21 लेंगे वो किताब भी वैसे ही है जैसे शिवांश की किताब है इनके लिए मुसलमानों के लिए होगी इनके लिए वो किताब वैसी है जैसे शिवांश की है मगर शिवांश की ठुकराए क्योंकि शिवांश को फॉलो करने वाले उतने नहीं है मगर मोहम्मद की अपना लेंगे क्योंकि मोहम्मद को फॉलो करने वाला दुनिया में बहुत आदमी है है ना तो यह इनका तरीका है हां विशाल जी बोलिए बोलिए विशाल जी भैया मैं एक पहले बात रखना चाहता हूं और दूसरी मतलब अनुरोध करना चाहता हूं आपसे मतलब की जब पिछली लाइव थी वो मतलब कल वाली न बजे वाली उसमें उसम आपने वो मॉडरेटर के रूप में मतलब मॉडरेटर तो नहीं थे लेकिन वह सहायक थे हमारे जो राम पांडे जी करके थे ना वो मतलब उन्होंने मतलब बहुत अच्छा कर्य ब उसम उन्होंने बोला कि मतलब वहां पर कोई मतलब निष्कर्ष मतलब रिजल्ट कुछ आया नहीं लेकिन रिजल्ट तो भ आ गया था ना कि मतलब वो निरुत्तर हो गया था सामने वाला इसलिए मतलब आपको व्यक्तिगत निंदा करने लगा था आपकी कि आप पाखंडी और मतलब अन्य अन्य कोई बात मतलब कौन कह रहा था कि उसमें

01:29:04:25 रिजल्ट नहीं आया था मतलब उन्होंने वो बोल रहे थे देखि देखने वाला हो तो आज जो अभी जो चर्चा हुई है इसमें भी रिजल्ट आया है क्या आया है पहला कि ब्रह्मा कुमारी झूठ बोलता है वो मानता है कि कुरान धर्म नहीं है मगर वो धर्म कहता है नहीं नहीं वैसे नहीं वैसे नहीं सुनिए तो और पाश उसम वो जिस कारण जिस कारण से मुसलमान का धर्म मुसलमान को धर्म कहेगा इस्लाम को धर्म कहेगा क्रिश्चियनिटी को धर्म कहेगा उसी कारण से वह शिवांस के धर्म को धर्म नहीं

01:29:39:09 कहेगा यानी की अब सर्म नहीं है विकर्म है दूसरी बात मैं आपकी बात से सहमत हूं आपकी बात से पूरा कर लू दूसरी बात इनके द्वारा ईश्वर सिद्ध नहीं हो रहा और तीसरी बात ये है कि वो बुराई को बनाने वाला वो नहीं है यानी कि बुराई का एक्जिस्टेंस है वो उसकी सत्ता के बाहर है तो वह सर्वत्र सर्वव्यापक रूप से सत्ता नहीं है उसकी कुछ दुनिया में ऐसा है जो उसकी सत्ता से बाहर है वहा ईश्वर कुछ नहीं कर सकता बाद तो बाधित है तो फिर वो और वो सब कुछ बनाने वाला नहीं है क्योंकि बुराई को बनाने वाला वो नहीं है बुराई का एक्जिस्टेंस अपने आप है तो क्या हुआ कि वो ना तो सब कुछ बनाने वाला है और ना ही सब कुछ करने वाला है ना ही उसकी सब जगह सत्ता है तो ना तो ये पहली बात तो ये कि इनके द्वारा ईश्वर सिद्धि नहीं हो सकता दूसरी बात यह है कि अगर ये किसी प्रकार से कुछ हमारी हमारी डेफिनेशन को लेकर के ईश्वर को सिद्ध करने भी लग जाए तो डेफिनेशन ख केवल इस बात प ईश्वर ने सब कुछ बनाया है इस बात पर भी ये लोग ईश्वर को सिद्ध नहीं कर सकते क्योंकि बाद में खुद ही कहेंगे इनकी दीदी ने कहा था कि

01:30:54:12 ईश्वर कीड़ों को पैदा नहीं करता है कीड़े हमारे लिए कीड़े है भाई जो पेंटिंग बनाने वाला है उसके लिए यह फरेड से लेकर के व जो टो तक का मामला है सब एक है कीड़े हमारे लिए कीड़े उसके लिए उसकी दुनिया है संसार है वो कलर भर रहा है और सब एक दूसरे के पूरक हैया कह रहा था मतलब वो जब समझा रहे थे ना उनको बहुत सवाद पूर्णक और बहुत मतलब मर्यादित अच्छे तरीके से उन्होंने समझाया लेकिन वो मतलब जो समझा रहे थे ना कि मतलब बोल रहे थे उस टाइम प कि अगर मतलब आप ऐसे मतलब बोलते रहोगे तो कुछ रिजल्ट नहीं मिलेगा तो मतलब मेरा इसमें ये कहना है कि रिजल्ट तो मतलब पहले आ ही चुका है कि मतलब वो सीधी नहीं कर पाया तो मतलब मुझे थोड़ा ऐसा समझ में नहीं कि वो रिजल्ट मतलब कौन से वे में कह रहे थे मतलब वो बात है कि मतलब मैं गलत हूं या मतलब कुछ ऐसा नहीं सही हो आप सही हो सही कह रहा हूं सुरेंद्र जी [संगीत] बताए एक अनुरोध ये है कि मतलब मैं कहना चाहता

01:32:09:19 हूं आपको कि मतलब भगवत पाद जो शंकराचार्य जी है हमारे वर्तमान के पूरी पीठाधीश्वर मलब उनके ग्रंथ और जो धर्म सम्राट स्वामी श करपात्री जी महाराज के जितने ग्रंथ अगर आप मतलब आप जितने ग्रंथ से परिचित हैय आपको पता है कि जितने भी ग्रंथ उन्होंने लिखे उनकी एक बार लिस्ट मतलब आप कुछ अगर अपलोड कर दे पब्लिक ठीक है आप लोग दो मिनट रुकिए यहां पर मैं एक बार उनसे संपर्क कर लेता हूं तब तक वल आप रहो यहां पर हा और हा कोई अभद्रता ना हो और बात को रखे और डायरेक्ट किसी पर लीगल और इलीगल वाला आरोप ना लगाए हम लोग लीगल इलीगल नहीं शास्त्रीय और शास्त्रीय धार्मिक और धार्मिक की बात कर सकते लीगल और लीगल पर हम प्रश्न खड़े कर सकते हैं वो जांच का विषय है कोर्ट का कानून का विषय है ठीक है जी जी मैं आता हूं अभी

01:34:50:19 [संगीत] तो

01:41:39:14 जय श्री राम सभी को और वो भाई साहब अब आएंगे नहीं दोबारा मैं एक बात क्लियर कर दूं देखिए है क्या कि यदि हम मानते हैं कि ईश्वर सब कुछ बनाने वाला है तो हमें मानना होगा कि ईश्वर ने जिसको हम बुराई मानते हैं जिसको हम बुराई मानते हैं वो भी उन्होंने ही बनाया है ठीक है और अगर वो बुराई बुराई नहीं है फिर आप उसके पीछे की चीज देख रहे हो तो फिर आप ये मत कहो कि ईश्वर ये नहीं कर सकता क्योंकि वो बुराई बुराई है ही नहीं फिर क्यों कह रहे हो कि ईश्वर ये नहीं कर सकता है ना वो बुराई बुराई नहीं है आप ही बता रहे हो वो बच्चे का पिछला जन्म था जिसमें कि उसने कुछ ऐसा किया था जिसके कारण उसकी देह के साथ ये वाला कष्ट आया तो इसका मतलब जो हमको बुरा करते हुए ईश्वर दिख रहा है उसके पीछे कोई कारण हो सकता है वस्तुत ईश्वर नहीं कर रहा है बुरा और दूसरा तरीका ये देख ले कि ईश्वर ने यदि सब कुछ बनाया है तो ईश्वर के लिए अच्छाई और बुराई में अगर जो गुण रूप से देखेंगे तो ईश्वर सभी कर्मों को करने वाला होते हुए भी अकता है क्योंकि वो यहां के प्रपंच रूपी संसार की अच्छाई बुराई से कनेक्ट नहीं है हम लोग कनेक्ट है मुक्त ईश्वर मुक्त है तो फिर ये दोष इस पर नहीं आ सकता कि क्या कहते हैं ईश्वर ने बुराई की ईश्वर में दोष है तो इस कारण से ईश्वर कुछ भी कर सकता है

01:42:55:01 कुछ भी कुछ भी मतलब कुछ भी एक कार्य भी ऐसा नहीं हो सकता जो वो ना कर सके और अगर हम यह कहे कि नहीं नेगेटिव वाले कार्य नहीं कर सकता तो जो भी दुनिया में किसी को ईश्वर कहता है उसके द्वारा न केन प्रकार ईश्वर के द्वारा जिसको बुराई कहता है वह कार्य होना में प्रूफ कर दूंगा या फिर उसको मानना पड़ेगा ईश्वर की सत्ता सब जगह नहीं है ईश्वर भविष्य नहीं देख सकता यह सब उसको मानना पड़ेगा फिर वो ईश्वर नहीं रह जाएगा तो पहली बात ब्रह्मा कुमारी का जो ईश्वर है व ईश्वर सिद्ध नहीं होता दूसरी बात वो सभी चीजों को बनाने वाला नहीं है इसलिए ब्रह्मा कुमारी का ही जो ईश्वर का कांसेप्ट है जिसने सब कुछ बनाया जिसने सब कुछ बनाया व ईश्वर है तो ब्रह्मा कुमारी की अपनी ही जो परिभाषा उसके अनुसार भी जिसने सब कुछ बनाया वो ईश्वर है तो वो उसने सब कुछ नहीं बनाया तो उन्ही की परिभाषा के अनुसार जो ईश्वर है वो भी ब्रह्मा कुमारी का ईश्वर सिद्ध नहीं होता दूसरी बात यह है कि अगर हमय केवल कह देंगे कि ईश्वर ने सब कुछ बनाया है और हम उसका कोई कनेक्शन नहीं फिट कर सकते मनुष्य से तो उसमें दिक्कत आएगी फिर व्यक्ति को धर्म व्यक्ति के लिए धर्म जो है अंतिम विकल्प नहीं होगा क्यों नहीं होगा कि भाई ठीक है वो पावरफुल है हम

01:44:10:04 क्या करें इसमें जब तक आप वो कनेक्शन नहीं बताओगे कि तुम्हारी चाह का वास्तविक विषय वही है है ना दुनिया में कोई एलन मस्क है हम क्या करें पूजा करने लगे उसकी तो सबसे ज्यादा पैसे वाला है तो केवल ये आधार नहीं हो सकता उसकी पूजा करने का उसकी भक्ति करने का तो यह बात एक हो गई दूसरी बात है दूसरी बात एक हो गई हा ईश्वर सिद्ध नहीं हो सकता पहली बात तो ये है कि ईश्वर को मनुष्य के अंतिम विकल्प के रूप में ब्रह्मा कुमारी स्थापित नहीं करता है दूसरी बात यह है कि ब्रह्मा कुमारी के द्वारा ईश्वर सिद्ध नहीं हो पाता है तीसरी बात यह है कि ब्रह्मा कुमारी जो टूटी फूटी एक परिभाषा लेकर चलता है कि सभी चीजों को बनाने वाला रचयिता ईश्वर है इसलिए पता चलता है कि दुनिया में ईश्वर है तो वह भी क्योंकि यह खुद कह रहे हैं कि बहुत सारी चीजें जिसको ईश्वर ने नहीं बनाया तो उस रूप में भी इनकी परिभाषा के अकॉर्डिंग ईश्वर सिद्ध नहीं होता दूसरी बात यह है कि इनके द्वारा इनके अनुसार ईश्वर सर्व मान नहीं है सर्वव्यापक नहीं है

01:45:25:08 सर्वत्र समान रूप से सत्ता धारण करने वाला नहीं है इसका अर्थ है कि जीव की चाह का वास्तविक विषय नहीं है इनके अनुसार और तीसरी बात यह है कि यह झूठ बोलते हैं कि हम उसको भी धर्म मानते हैं इसको भी यह मानते हैं वह मानते हैं यह सब झूठ है पाखंड है और वास्तव में वह कह रहा था कह रहे थे भाई साहब कि हम धर्म नहीं मानते हैं ऋषभ जी ये कह रहे थे तोय झूठ हुआ सत नहीं बोल रहे हैं और और जो इन्होंने परिभाषा बताई किसी को भी धर्म कहने की उस परिभाषा को खुद ही ठुकरा दिया जब इन्होंने मेरी बुक को ठुकराया और फिर उन्होंने कारण बताया कि हम क्यों नहीं ठुकराते किसी को भी उस कारण को भी नहीं निभाया जब इन्होंने मेरी बुक को ठुकराया यह सारा आज का जो इनके साथ जो चर्चा हुई है वह एक निचोड़ निकला है मोहित शर्मा जी जय श्री राम

01:46:23:28 आपका मट है ज श्रीम आज भया एक बात तो क्लियर हो गई है जितने भी ने अलग अलग पंथ बनाए कोई सिद्धांत सिद्ध होता ही नहीं भी एक भी सिद्धांत कोई भी एकही बात किसी पर भी अड़ने की कोई बात जो है सिद्ध होती ही नहीं क दूसरी बात चाता हं जो साई बाबा है मार्केट में नया भगवान आ लोगों ने पता नहीं कब से बना दिया फ बना समझ नहीं आता ये कहा से आया जबक मैंने कहीं से सुना है शायद पता नहीं स एक मिनट रुकिए यह भाई साहब एक जो विरोधाभास प्रकट कर रहे हैं देखिए पहली बात तो अपना नाम ही थोड़ा सा अगर आप धार्मिक चर्चा से जुड़े हुए हैं तो नाम तो कम से कम थोड़ा मर्यादा वाला रखें और दूसरी बात यह है कि माता जी ने निष्ठा पूर्वक अगर दूध पिलाया है तो आप सामने आकर के विरोध करिए यहां पर अपनी बात को रखिए हो सकता है कि आपके मजबूत हो कायरो की तरह व्यवहार करने से यही प्रतीत होगा कि आपके पास जो है आपने बचपन में आपको कुपोषण है आपको छ महीने तक कम से कम जो माता का दुख पान होता है व भी नहीं किया गया जिसके कारण आप अपनी चेहरे को दिखा

01:47:39:00 नहीं पा रहे हैं कुपोषित है सामने नहीं आ पा रहे है ना जी मोहित जी इस भाई को मैं जरा एक बात कहना चाहूंगा मैं खुद भी नास्तिक रह चुका हूं मैंने भी साइंस पढ़ ली बहुत अच्छे से पढ़ ली है शायद मैं इतने जदा कासे जाता ये भी नहीं जानता होगा पर फिर भी भगवान की स्थिति को भगवान के सिद्ध होने को य साइंस नकार नहीं सकता कोई कारण नहीं है अरे ये खुद ढूंढ रहा है अभी इसी के मुंह से बुलवा उा इसको परर परर ऊपर आ जाए बस ये ऊपर आ जाए इसी के मुंह से बुलवा उा बिल्कुल इनके पास कोई जवाब ही नहीं है तो वही होगा अभी जो थोड़ी देर पहले भाई साहब कह रहे थे टॉपिक चेंज करिए मैं इस टॉपिक के लिए नहीं आया था अच्छा मैंने सुना था की जो लाला लाजपतराय हमारे पंजाब केसरी मैंने सुना है कि उन्होने साई बाबा की पिठाई कर दी थी चोरी करते पकड़े गए थे किसने लाला लाजपत लाला लाजपत

01:48:38:09 राय हम लोग सैद्धांतिक विषय पर जानकारी रखते सैद्धांतिक विषय पर बात करते हैं जो इस तरह के बस जानकारिया है इसके आधार पर बात करने लेे तो बहुत कहीं का कहीं चलने लगेगा हुआ होगा कभी क्या हमें ऐसा अगर मालूम भी होता है तो इन बातों को हम रखते नहीं है जैसे कि कहीं प हरे कृष्ण वाला संकीर्तन होता है वहां पर आजकल आगे लोगों में मैरिज करा दी जा रही है सुनने में आया देखा भी है वीडियो अब हम इन बातों को क्या रखें सैद्धांतिक धरातल प आप देखिए एक ही तो सिद्धांत है आपको हमारे लगभग हर डिबेट में घुमा फिरा के वही सिद्धांत मिलेगा सर्वशक्तिमान ईश्वर धर्म क्या है ईश्वर सिद्ध कैसे होता है देखिए उसी में ही सब कुछ ध्वस्त है बिलकुल और हम यह तक कहते हैं कि आप ये चीजें ये मेन चीजें दे दीजिए जिसके कारण धर्म धर्म है हम आपके हो गए चलिए कहां चल ना

01:49:36:07 है भैया जय श्री राम आप आ जाइए ना वो जो जो भी चीज आपको गलत लग रही है आइए ऊपर या फिर फॉर्म भर के आइए किसी दिन बैठते हैं कायरो वाला व्यवहार क्यों भी थोड़ा अच्छा लगा थोड़ा अच्छा लगा थोड़ा सा आपकी भाषा शैली अभी अभी सुधर गई ये होता है देखो अभी देखो भाषा शैली सुधर गई मैं ईश्वर को मानता हूं बस अभी अभी हर मैसेज जो आ रहा था उसमें वो था हास्य वाला व व्यंग चित्र था ना इससे पहले बहुत सारे कमेंट्स आ रहे थे इनके तो उसमें हास्य वाले व्यंग चित्र वगैरह थे अब सम्मान आ गया मैं ईश्वर मानता हूं मगर आपकी सम्मान आ गया देखो इसको चलती चलती लाइफ में ही सुधार देते लोगों को तो सुधी कर हुआ अच्छा लगा आप सुधरे और और आप जो है वो फॉर्म भरिए और जो चीज गलत लग रही है उसका प्रतिकार करिए सामने से आकर के हम तो घर से

01:50:28:09 निकले ही थे बांध कर सर पे कफन जहां तेली पर लिए लो बड़ चले है ये कदम जिंदगी तो अपनी महिमा मौत की महफिल में है सरफरोशी की तमन्ना हमारे दिल में है हाथ जिन में हो जुनू कटते नहीं तलवार से सर जो उड़ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से दूर

⬜ Not used yet · 01:50:45:25 – 02:03:08:00 (12:22)

01:50:45:25 रह पाए जो हमसे दम कहां मंजिल में है सर फरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है तो ये जो जजबा है ना यह तब आता है जब हमारे पास सत्य की ताकत होती है यह ऐसे ही नहीं आता य कॉन्फिडेंस ऐसे ही नहीं मौत से आख से आंख मिलाता है कोई तो यह जजबा लाइए अपने अंदर जो प्रकट हो निकलो अपने घर से बाहर अपने आरामदायक जो आपका जो वह है क्राइटेरिया उससे बाहर निकलो ट टफ जिंदगी को चुनो तब पता चलेगा तब पता आपके आचरण से प्रतीत होगा कि आपके पास कौन सा सत्य है जो आपकी एक कायरता है यही बता दे रही है कि आपको आपके पास सिद्धांत नहीं है बिल्कुल ऐसे ही नहीं चले गए लोगों को कैंप में हा भैया आपका ईश्वर सर्व शक्तिमान है कि नहीं अका सिद्धांत था ना इसलिए गए थे नहीं नहीं होता हमारे पास भी अकाट्य सिद्धांत ऐसे ही कहीं कुछ दूसरी डीपी लगा कर के कमेंट कर रहे होते कहीं कहीं पर लोगों को परेशान कर रहे होते अका सिद्धांत है ना जी मोहित जी कम से कम कम से कम असली तो बन कर आओ नहीं मैं वही कह रहा हूं यह चेहरा छिपाने में भी चेहरा छिपाने में भी सिद्धांतों की कमी

01:52:01:00 है बिल्कुल है और जिसको अपने सिद्धांत पर डाउट होता है वह व्यक्ति घबराता है अपनी असलियत से भागता है और किसको अपने सिद्धांत पर डाउट होता जिसका सिद्धांत अकाट्य नहीं होता उसको डाउट होता है इस तरीके से मेरा स कर सकता है अगर थोड़ा बहुत भी विचारक होगा उसको डाउट होता है तो वो फिर इस तरीके से नहीं निकलता मैदान में व सद ग्रंथ

01:52:38:14 वाले सद ग्रंथ वाले सद ग्रंथ वाले मोहित जी मोहित जी क्या कह रहे बछ था मुझे धन्यवाद भया ज श्रम जी जय श्री राम ज श ठीक है तो दो घंटे की हो चुकी है और यह हमारा नंबर है 7408 30169 इस पर आप जो है अगर हमारे वैचारिक मतभेद रखते हमसे तो आप जो है इस पर आए इस पर ट करें और जो है एक फॉर्म होगा एलॉजिक डिशन के लिए उसको भर कर के आप आ सकते हैं

01:53:28:21 भैया हेलो एक मिनट एक मिनट और आज का हमने जो देखा वो यही है ब्रह्मा कुमारी के द्वारा ईश्वर सिद्ध नहीं है ब्रह्मा कुमारी का कहना यह है कि ईश्वर वह है जो सब कुछ बनाता है मगर ब्रह्मा कुमारी केही अनुसार आगे चलकर के ईश्वर जो है कई ऐसी चीजें है जो नहीं बना बता है तो ब्रह्मा कुमारी की परिभाषा के अनुसार जो कि पूरी नहीं है क्योंकि वो अंतिम विकल्प के रूप में स्थापित नहीं कर रही ईश्वर को तो उसके अनुसार भी ईश्वर सिद्ध नहीं हो रहा है क्योंकि उनका ईश्वर जो है सब कुछ नहीं बना रहा है ब्रह्मा कुमारी के अनुसार दूसरी बात ब्रह्मा कुमारी के ईश्वर की सत्ता हर जगह नहीं है और तीसरी बात की बहुत से कार्य है जो वो नहीं कर सकता सत्ता हर जगह नहीं है बहुत से कार्य वो नहीं कर सकता है और दूसरी बात ब्रह्मा कुमारी झूठ बोलता है यह पाखंड करता है कि हमारे लिए सभी धर्म धर्म है व झूठ है मुसलमान को धर्म नहीं मानता है वो तो हिंदू को भी नहीं मानता तो वो धर्म नहीं मानता पाखंड है धर्म कहना किसी को

01:54:43:24 भी ब्रह्मा कुमारी अपनी मुरली कोई धर्म मानता है यह सत्यता है और तीसरा क्या है कि उसका यह कहना है कि हम धर्म इसलिए कह देते हैं कि अपमान ना हो तो इसका मतलब हिंदू को धर्म भी इसलिए कह रहा है अपमान ना हो मुस्लिम को धर्म भी इसलिए कह रहा है अपमान ना हो और क्रिश्चियनिटी को भी धर्म इसलिए कह रहा है कि अपमान ना हो वो बात और है कि वो मेरी किताब को धर्म इसलिए नहीं कह रहा है मेरे मान अपमान से उसे चिंता नहीं है क्यों क्योंकि मेरे फॉलोअर्स उतने नहीं जितने क्रिटी मुस्लिम और हिंदू जम के इसलिए वो यहां पर ल करके कह रहा है कि मैं तुम्हारी किताब को कभी भी स्वीकार नहीं करूंगा ठीक है एक शंका

01:55:40:00 है आप फम भर कर के आइए जोहर जी और जहर जहर जी फम भर के आइए और हमको अपना पान कराइए इससे हम मूर्च हो जाए आपका पान करके सुरेंद्र विष्ण जी बोलिए अजर अमर और नित्य है सर्वशक्तिमान है तो अजर अमर नित्य भी होगा तो जब आवश्यकता कुछ नहीं है यं ही आवश्यकता उसको ईश्वर अच्छा ईश्वर है ईश्वर ने सृष्टि बनाई है ना जी बद तो ईश्वर ने सृष्टि बनाई है तो उसको सृष्टि बनाने की आवश्यकता क्या पड़ी तो सचिदानंद स्वरूप है सुनि वो सच्चिदानंद स्वरूप है आवश्यकता कुछ नहीं है वो अपने उसके मन है उसको आवश्यकता नहीं अच्छा सुनिए उसने वेद शास्त्र दिए ठीक है अगर ब्रह्मा कुमारी की मान ले तो मुरली देता है समाज की मान ले तो वेद देता है इस्लाम की मान ले तो कुरान देता है तो उसको कुरान मुरली

01:56:55:04 वेद की आवश्यकता क्या पड़ी सीधे अपने मन में सोचता और मन के अंदर सारा ज्ञान आ जाता मगर उसने प्रॉपर एक प्रोटोकॉल रचा के वेद पढ़ो यह करो यह सब रचा अकॉर्डिंग टू य जो विभिन्न व है फिलॉसफी तो यह आवश्यकता नहीं है य उसने सृष्टि में किसी पेड़ को लंबा किसी पेड़ को छोटा यही तो संसार है समझ रहे अच्छा इसका दूसरा पर्सपेक्टिव ये है जैसे ये आवश्यकता वाली बात वो भी कहते हैं अलंकार वाले वो कहते भा क्या कहते हैं आवश्यकता क्या है उसको आवश्यकता नहीं है वो बिना आए भी कर सकता है पर वो आ कर के करना चाह रहा है और इसके पीछे उसका एक रीजन होता है कि हमारा जो पर्सपेक्टिव है जहां ईश्वर जो मनुष्य है वह कमजोर है वो बाधित है और उसकी दृष्टि सीमित है तो उस सीमित दृष्टि के अनुसार व एक अवतार लेता हैय मतलब ये जो संसार है ये एक प्रपंच है उसके लिए संसार मा अवतार लिया तो जो मतलब निर्गुण सा निराकार ईश्वर है तो सर्वशक्तिमान है तब वो

01:58:10:09 अवतार लेगा तो अवतार लेते टाइम भी उसके अंदर सर्वशक्ति विद्यमान रहेगी बिल्कुल बिल्कुल लक्षण साम से वस्तु साम मैं आपको इसका उदाहरण देता हूं बहुत बढ़िया एक उदाहरण देता हूं आजकल वो एआई चल रहा है एई देखा है जी जी जी अच्छा एआई में अगर हम लोग ऐसा भी हो रहा है कि एआई का कोई कैरेक्टर बन करके आ जाता है मेल या फीमेल रूप में और वह एआई से आप जो भी पूछना चाहते हैं वह आपसे बात करता है सामने से जी देखते हैं जी जी हो रहा है ना ऐसा कई ऐसी बैंक कई ऐसे और दूसरी एप्लीकेशन है जिसमें की वो जो एप्लीकेशन जो भी कुछ बताना चाहती है वो एक कैरेक्टर आ जाता है और वह कैरेक्टर आ कर के आपसे बात करता है अब वो जो कैरेक्टर आ कर के आपसे बात कर रहा है उसको ऐसी कोई चीज है जो ना पता हो और पीछे एआई को पता

01:59:18:10 हो नहीं ना तो वो जो कक्टर है ना व का अवतार है क्या है अ ए आई का अवतार और वोह आकर के आपसे बात इसलिए कर पा रहा है जिससे कि आप कनेक्ट हो पा रहे हो आपके अंदर भावनाए आ पा रही है आप बहुत दिन तक उसको यूज करने लगो तो व आपके दोस्त किसी ना किसी थोड़ा सा ऐसा आपसे भावना बन जाएगी अवतार व ए आई का अवतार है व समझ रहे वो आपसे बात करेगा मेल या फीमेल वॉइस में और आकर के वो जो है वो एआई ही है जो पूरी नॉलेज है वही है मगर उसने एक अवतार लिया जिससे कि आप उसके साथ व्यवहार कर सको यही अवतार ईश्वर का है तो फिर भ्राता जी जैसे कि ईश्वर ने अवतार लिया अवतार लेने से पहले उसकी सर्वशक्तिमान वाली सिद्धियां थी शक्तियां थी कि वो मतलब त्रिकाल दर्शी भी यदि जब वो अवतार लेगा तो अवतार लेने के बाद भी एक तो मानव रूप में अवतार लेगा यानी कि देह रूप में अवतार लेगा तो जब उसमें दे रूप में जो शक्ति विद्यमान हो जाएगी तो निराकार होते हुए जो उसमें शक्तिया थी वह विद्यमान रहेगी दोनों प बिल्कुल बिल्कुल जब

02:00:33:13 मैं वही तो कह रहा हूं कि वो जो कैरेक्टर आपको ए आई का जो एक करैक्टर है एआई का जो अवतार है क्या कुछ ऐसा होगा जो ए आई को मालूम हो और उस अवतार को ना मालूम हो भाई एआई से आप क्वेश्चन करते हो ना जी तो ए आई को जवाब देता है तो क्या कुछ ऐसा होगा जो उस अवतार को ना मालूम हो ए आई को मालूम हो दोनों को मालूम रहेगा सेम ऐसे ही ईश्वर का अवतार है ईश्वर ने अवतार इसलिए लिया है क्योंकि जब आपके सामने कोई उसका रूप नहीं होगा तो आपके अंदर एक कनेक्शन जो होता है ना भावनात्मक वो नहीं बन पाएगा आप व्यवहार नहीं कर पाओगे अब देखो जैसे हम लोग अपने चेहरे के साथ में वीडियो बनाते हैं तो इसके साथ व्यवहार ज्यादा हो पाएगा या जिसने चेहरा नहीं दिखाया उसके साथ व्यवहार ज्यादा हो पाएगा

02:01:36:06 बताइए जैसे कि सिंपल बात है हमारे यहां पर ईश्वर के साकार स्वरूप को लिया गया तो हमारे ईश्वर सनातन ईश्वर के ऊपर कितनी फिल्में है और अल्लाह के ऊपर कितनी फिल्में है व्यवहार नहीं कर पा रहे ना वहा पर ईश्वर के साथ ईश्वर के साथ व्यवहार नहीं हो पा रहा है वहा क्योंकि ईश्वर का कोई रूप ही प्राप्त नहीं है कैसे हवा की फिल्म बना दे तो व्यवहार करने के लिए ईश्वर का रूप होता है आप कहां से मैं वसे रहने वाला जोधपुर का बीएचयू से स्टडी कर रहा हं शास्त्री बहुत बढ़िया ठीक है फिर अब किसी और दिन आप संतुष्ट हो गए जी बता जी चलिए भया भैया हा आप वो वीडियो से परिचित है जो मतलब वर्तमान रामानुजाचार्य जी जो है राघवाचार्य जी उन्होंने मतलब उनके क्लेम को मतलब डिसन किया है स्वामी नारायण वाले को कि मतलब जो बताते कि वो रामानुजाचार्य के सिद्धांत पर

02:02:51:06 चलते लेकिन कि नहीं चलते हो मालूम नहीं है करिएगा ठीक है करिएगा हा उन्होंने बहुत वित वीडियो बनाया हां करिए चलिए सभी को जय श्री राम जय श्री राम भैया

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Live 2:03:22 · 20 Jan 2025

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A · Live क्या रामपाल तत्वदर्शी संत हैं #rampaljimaharaj #kabir
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