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00:00:01:23 [संगीत] तो सभी को जय श्री राम जय श्री राम विजया जी आपका भी स्वागत है यह विजया जी हैं और आज हम हमारी मुख्य अतिथि हैं और बहुत ही स्पेशल कह लीजिए कि एक आपको वृतांत सुनाने के लिए यहां पर आई है अपने जीवन का और इनकी एक जर्नी रही है जैसा कि आपने थंबनेल में देखा होगा कि रिदम से विजया तक की यात्रा कैसे हुई कैसे प्रामाणिक आचार्यों की शरण मिलीन है और प्रामाणिक जो सिद्धांत है सार्वभौम सिद्धांत सनातन के वह सब आपको बहुत ही एक कहूंगा महत्त्वपूर्ण और रोचक जानकारिया आज प्राप्त होने वाली है गायत्री मंत्र जो य व्यवस्थाएं हमारी विधि निषेध इस पर जो एक धार्मिक मर्यादाओं को आज जो एक एक अलग दृष्टिकोण से देखा जाता है कि बहुत ज्यादा व सोफिस्टिकेटेड है यह बहुत ज्यादा मतलब अलग अलग तरीके से देखा जाता है तो यह सारे विषयों पर यह प्रकाश डालने का प्रयास
00:01:17:02 करेंगी और आप लोग इन्ह जानते हैं इनका इग्राम पेज है और उस पर मतलब काफी अच्छी फैन फॉलोइंग भी है वहां पर उनकी ठीक तो मैं कहूंगा विजय जी आप सबसे पहले स्वयं का परिचय अपना आप ही दें और फिर थोड़ा सा हमारे दर्शकों को बताए कि आपका ये रिदम से विजया तक का सफर कैसा है क्या है जी सभी को नमस्ते मैं बहुत खुश हूं कि मैं इस लाइफ प हूं क्योंकि ये मेरे लिए बहुत स्पेशल मोमेंट है क्योंकि मेरी जो जर्नी है इस जर्नी में शिवांश ने बहुत बड़ा रोल प्ले किया है इन्होंने ही हमें इंट्रोड्यूस किया है जो शास्त्र प्रमाणिक आचार्य है वो उनकी शैली क्या है चाहे वो व्यवहार में हो या फिर किसी भी चीज में हो तो उस चीज के लिए हम शिवांश को बहुत-बहुत धन्यवाद देते हैं अभी जो भी हमें लाइव पर देख रहे हैं उनका अपना समय निकालने के लिए भी बहुत-बहुत धन्यवाद अब हम यह जरूर बताना चाहेंगे कि रिदम से विजया की जो जर्नी है वह बहुत ऑफकोर्स रियल है क्योंकि इट है हैपेंड विद मी पर बहुत चैलेंजिंग भी थी स्टार्टिंग में पर मैं
00:02:32:06 यह बोलूंगी कि वो जो रिदम टू विजया का जो शिफ्ट था विजया के अंदर उसके बाद सब कुछ बहुत स्मूथ हो गया एंड मैं थोड़ा यह भी बताना चाहूंगी कि मैं शिवांश के साथ टच में कैसे आई थी शिवांश की एक वीडियो थी अभी तो काफी टाइम हो गया वो जब रिलीज हो गी उसी समय की बात है अभी मुझे इतना याद नहीं है कि कितने महीने या साल उस वीडियो के अंदर शिवांश एक एस्कन से हमारे जो भाई हैं उनसे बात कर रहे थे और पहली वीडियो हमने देखी थी उसके अंदर वो बोल रहे हैं भाई को भाई से दूर किया जा रहा है और उन दिनों मैं इस चीज को बस समझ ही रही थी क्योंकि हुआ यह था कि एक महीने पहले या कुछ महीनों पहले ऐसा ही कुछ था जब नित्यानंदाकारी
00:03:27:16 की उनका जन्मदिन मनाया जा रहा था तो प्रवचन के अंदर एक व्यक्ति ने बोला कि कृष्ण भक्ति कीजिए उससे मोक्ष मिलेगा बहुत बढ़िया बात है एकदम उनका सेकंड वचन यह था कि दुर्गा की भक्ति करने वालों को मोक्ष नहीं मिलता है दुर्गा जेलर है और वह जेल में बंद कर देगी पर वह आपको मोक्ष नहीं देगी तो इसमें मैं और मेरा मित्र हम एक दूसरे को देख रहे हैं कि यहां क्या चल रहा है और व पूरी सभा में ज्यादातर महिलाएं थी तो जो बैठी है उनको ही अगर आप बोलेंगे कि दुर्गा जेलर है और व मोक्ष नहीं देती तो वो बहुत बात खटकती है पर किसी को व बात खटक नहीं रही थी वहां पर जो उनके फॉलोअर्स थे वह ऐसे थे जैसे पता नहीं बहुत ही बड़ी अच्छी बात कर रहे हैं तो उसके बाद अब वो होता है ना कि आपने कंटेंट कंज्यूम कर लिया फिर आपने अपने मित्र से चर्चा की फिर फोन आपको सारा कंटेंट वैसा ही भेजता है तो हमें धीरे धीरे समझ आने लगा कि यह कितनी गलत बात है कि ऐसा कैसे होगा मैं तो खुद देवी मां की उपासना करती हूं तो पर प्रश्न बहुत सारे थे पर उत्तर देने के लिए कोई भी नहीं उत्तर के लिए भी अभी वही जो वहां पर आचार्य थे उनसे बात की फिर वो बोले नहीं नहीं यह सब
00:04:42:18 तो चलता रहता है मेरा ऐसा तात्पर्य नहीं था स्पष्ट बोलने के बाद आपका तात्पर्य कुछ और था तो वह हमें कैसे पता होगा और वहीं पर जाने के बाद एक व्यक्ति थे जो वहां पर सेवादार थे मुझे याद है उन्होंने मेरे मेरे पास व आए वो बोले देखिए यहां पर मैं सेवा कर रहा हूं क्योंकि मु अपना समय काटना है मैं काल भैरव को मानता हूं हर चीज के लिए हर एक भगवान का एक रूप नियुक्त है हर कार्य के लिए तो इनकी बातों में मत आइए तो यह घटना हुई अब उसके काफी टाइम बाद अब अंदर में मुझे अच्छा तो लग नहीं रहा था गुस्सा भी बहुत आ रहा था कि ऐसे कैसे बोल सकते हैं या ये ऐसे कैसे दिमाग में डाल रहे हैं ऐसी बातें और क्यों कर रहे हैं उस समय मेरे अंदर में यह मतलब एक इच्छा बहुत तीव्र भी हो चुकी थी कि मुझे मेरे गुरु खोजने है और बहुत पहले से ही था यह तो मतलब मैंने अगर कुछ बहुत मांगा है अगर भगवान से तो यही मांगा है कि मुझे मेरे गुरु मिले तो उन्ही दिनों के मतलब व यही सी चल रहा था तो शिवांश की वीडियो हमारे पास आई ा में उसके अंदर ये उसको बोल रहे थे कि भाई को भाई से दूर किया जा रहा है उसके अंदर सारा सिद्धांत वही था कि कैसे कि
00:05:57:25 मतलब यह जो बंटवारा क्रिएट किया जाता है बातों बातों में और जो सॉफ्ट कंडीशनिंग है वह सब चल रही है तो हमें ऐसा लगा कि एक तो हमें उत्तर भी मिला कि हम अकेले ऐसा नहीं सोच रहे हैं यह गलत है और उस समय शिवांश उस समय भी और शायद अभी भी वो एक लते व्यक्ति हैं जिन्होंने इतनी आवाज उठाई और उसको ऑनलाइन डाल दिया क्योंकि लोगों को डर भी लगता है कि हम डाले नहीं डाले कोई पकड़ लेगा कोई कुछ कर लेगा तो वो बहुत आप कह सकते हैं करेज का भी काम है बहुत ब्रेवरी का भी काम है तो मुझे ऐसा लग रहा था कि मेरे अंदर का जो सैनिक है वो मेरे सामने वीडियो के अंदर खड़ा है और वो वैसे ही अपने भाव को व्यक्त कर रहा है और मतलब मैं ही वहां पर हूं भाव अगर हम भाव राज्य की बात करें तो इस तरह से हम जुड़े शिवांश के साथ और उन्होंने मेरी बहुत सहायता की मुझे काफी कुछ बताया और काफी कुछ नहीं भी बताया ताकि एक मेरी ऑर्गेनिक जर्नी भी चले तो मेरा इंट्रोडक्शन यही है बाकी मैं मैं कोशिश करती हूं कि मैं कंटेंट जो बना रही हूं अगर मैं अपना समय किसी चीज को दे रही हूं फिर चाहे वो योग हो या फिर बेसिक चीजें जो सनातन धर्म में क्वेश्चन आंसर की
00:07:12:28 आती है इतनी अच्छी शैली नहीं है मेरी हिंदी की जैसी शिवांश की है इंग्लिश में मेरा थोड़ा अच्छा होल्ड आ जाता है पर मैं कोशिश करती हूं कि मैं वो इंफॉर्मेशन दूं शिवांश मेरी बहुत मदद करते हैं कंटेंट को रिफाइन करने के लिए यह देखने के लिए कि कुछ गलती है या नहीं उसके कारण मैं बहुत कॉन्फिडेंट भी फील करती हूं क्योंकि मुझे एट द एंड ऑफ द डे यह पता रहता है कि जो दिया जा रहा है वह शुद्ध है और उसमें कुछ गलतियां या भ्रांतियां मिली नहीं हुई है क्योंकि अभी भी बहुत लोग जो कंटेंट बना रहे हैं बनाते हैं वो कुछ भी बोल
00:07:50:25 देते बहुत सुंदर परिचय मेरे बारे में कुछ ज्यादा बोल दिया आपने नहीं नहीं सत्य है पता नहीं चलेगा ना सबको फिर स्टोरी मिस रह जाएगी उनसे मिसिंग रहेगी ऐसा नहीं है और भी हमारे भाई बंधु हैं संभवत आपकी नजर ना पड़ी हो जो बोलते हैं यह है कि फेस को रिवील करते हुए सामने आकर के बात करने वाले थोड़े कम है मगर अब ऐसा लग रहा है कि एक एक करके एक एक करके जो मनुवादी है शुद्ध मनुवादी बाहर आएंगे वो एक वो है ना एक काम बोंगे तो लाखों आम निकलेंगे तो वो एक काम वाली बात के लिए मैं उतरा था कि भाई किसी ना किसी को तो उतरना ही पड़ेगा ऐसे एक बार क्या हुआ था कि जब इस्लाम वालों के साथ मेरी एक बात चली थी उसमें क्या था कि रात के न बजे तक वो बात चली थी और मुझे मेरी बात रखने नहीं दिया गया जैसा कि एक यूजुअल बिहेव हम अपेक्षा कर सकते हैं उन लोगों से तो नहीं रखने दिया गया तो उसके बाद जब मैं वापस आया तो अपनी फैमिली के बारे में सोचा कुछ सोचा एक बार वो क्लिक किया कि क्या ऐसा तो नहीं मैं अपनी फैमिली के साथ गलत कर रहा हूं
00:09:06:03 मेरी भी अपनी दायत है मैं रिस्क ले रहा हूं खामा खा तो फिर एक विचार आया कि हर किसी को अपनी फैमिली के लिए फैमिली के साथ ऐसा ना करना पड़े इसलिए किसी ना किसी को तो ऐसा करना पड़ेगा तो फिर मैंने कहा कि फिर बाकी हमारे साथ श्री रघुनाथ तो किस बात की चिंता हमें और अब मैं देख रहा हूं हमारे बहुत से भाई आगे आ रहे हैं तो ये चीजें हो रही है अ आपकी जर्नी प वापस आ जाते हैं आप हमको थोड़ा सा वो वाला पार्ट बताइए ये रिदम से विजया कैसे हुआ अच्छा मेरा नाम रिदम मेरी माता जी ने ही रखा है और जब मैं पैदा हुई थी उन्होंने मेरा नाम रख दिया था फिर वो भूल गई थी मेरे बर्थ सर्टिफिकेट पर नाम छप के आया था तो मतलब मेरा नाम पहले सेही आया ही है है ना क्योंकि उनका कोई मतलब वैसा कंट्रोल में नहीं था यह नाम भी अच्छा था जब मैंने उसका मतलब समझा ज्यादातर अंग्रेजी के जो नाम होते हैं उनमें कुछ मतलब नहीं रहता है पर इसमें मतलब था लय है हर एक चीज की ल है तो मुझे जो सीखना था मैंने सीखा पर जैसे मैं आगे चलती थी तो मैं बोलती थी पर इसके बाद क्या ल का क्या
00:10:21:09 ल के बाद क्या क्योंकि मुझे ऐसा बहुत मतलब महसूस भी होता है और मैं बिलीव करती हूं कि हमारे नाम से हमें बहुत प्रेरणा मिलती है हमारा नाम हमारी ढाल बन जाता है हमारे व्यक्तित्व को आगे जैसा भी हम रचें या वो रचने वाला है उसके अंदर अगर हम उतने कॉन्शियसली हर काम को करते हैं और समझते हैं अपने जीवन के दायित्व को तो रिदम आल्सो वो यह भी था ना कि वो एक लड़की जो बड़ी हो रही है मैं अमृतसर से हूं अमृतसर से हम कोलक शिफ्ट हुए तो एक अमृतसर से कटा का एक शिफ्ट था वहां पे मेरे दोस्त बदल गए माहौल बदल गया एक बड़ा शहर हो गया वहां की जो अच्छी चीजें मानी जाती हैं जो अमृतसर में है ही नहीं एजिस्ट ही नहीं करती है है ना तो वो सारी चीजों से भी हमारा मिलना हुआ मतलब लोगों से भी बहुत मिलना हुआ और जैसे एक नॉर्मल अगर किसी व्यक्ति की लाइफ हो कि लाइफ में क्या करना है बहुत पैसा कमाना है अच्छे कपड़े डालने हैं मैं ये नहीं कह रही हूं अभी भी पैसा कमाना है अच्छे कपड़े डालने ऐसा कुछ नहीं है ऐसा अभी भी है अच्छा ही सबके साथ अच्छा ही होना चाहिए अच्छा ही डालना चाहिए पर मुझे ये लगता है कि
00:11:36:20 जबक मुझे ऐसा भी लगता है कि मेरे परिवार ने अभी मुझे बहुत अच्छे से जितना उनके पास ज्ञान था उतना मुझे दिया और क्योंकि मैं मंदिर में ही पली बड़ी हूं तो मुझे हमेशा मेरी माता जी ने एक चीज बोली थी कि उनके पास मेरे प्रश्नों के उत्तर नहीं होते थे तो उन्होंने एक बार मुझे एक बात बोली कि बेटा देखो हर कुछ ऐसे ही नहीं हो जाता है आप पैदा हुए हैं हिंदू घर में उसका बहुत बड़ा कारण है और मेरे पास तुम्हारे प्रश्नों के उत्तर नहीं है इसका मतलब यह नहीं है कि तुम अपने कल्चर पर या अपने हिंदू धर्म पर विश्वास मत रखना तुम उस पर पूरा विश्वास रखना और उत्तर मेरे पास नहीं है बट किसी और के पास जरूर होंगे पर बिलीव हमेशा करना है और फिर वो बोल देती थी कि क्योंकि हमारे मुसलमानों के जो हमले हुए क्रिश्चन के जो हमले हुए उसमें हमारी किताब जल गई बहुत सारी नॉलेज ऐसे इधर उधर हो गई और अब बस जैसे एक वो नहीं होता है दादी अपनी पोती को बोलती है बेटा ये इस इस दिन यह नहीं करना अब हमारी नॉलेज इस तरह की रह गई कुछ चीजों में तो वो मेरे पास था ही पर जैसे यू नो एस अ ग्रोइंग गर्ल देर आर लॉट ऑफ अट्रैक्शन आता है
00:12:51:20 कि मैं यह करू मैं ऐसे कपड़े डालू मैं क्लब में जाऊं मैं ऐसे करूं तो मेरे पास वो माहौल थोड़ा ज्यादा था मैं अमेरिका भी गई हूं मैंने वहां पर भी काम किया है और धन्यवाद करती हूं मैं अमेरिका का कि उसके कारण मुझे समझ आया कि मुझे वहां रहना ही नहीं है मुझे भारत में ही आना है वहां प मेरे से होगा नहीं क्योंकि वो चर्म है है ना आपको जो लगता है एक भारतीय लड़की को जो लगता है कि वो जो कूल है कूल लाइफ है और मतलब शीज लुकिंग अट्रैक्टिव शी इज लुकिंग हॉट शी इज लुकिंग सेक्सी उसका जो चर्म आ जाएगा ना वो आपको अमेरिका में दे देखने के लिए मिल जाता है तो जब आप चर्म को देख लेते हैं आपको समझ आ जाता है कि यह कितना अच्छा है और कितना बुरा है तो मेरा अनुभव अमेरिका में इतना अच्छा रहा कि मुझे मैंने उसको हाथ जोड़े मैंने बोला बहुत बढ़िया हम वापस आएंगे हम नहीं जाएंगे वहा प हमारा भारत महान और हम वापस आए पर फिर भी एक गाइडेंस नहीं होता है जब हम बड़े हो रहे होते हैं एस अ गर्ल आल्सो लड़को का भी होता है यों का भी कि हमें ना सिर्फ रिबेल करना होता है अपने माता-पिता के साथ उन्होंने बोला यह करो यह तो हम करेंगे ही नहीं है ना सबका
00:14:06:21 नहीं होता है मेरा था हम ऐसे थे कि मुझे ऐसा मतलब प्रश्न का उत्तर नहीं मिला तो मैं नहीं मानूंगी अभी भी मेरा यह है कि मुझे प्रश्न का उत्तर चाहिए उत्तर आपने दिया मेरा लॉजिकल दिमाग के अंदर या भाव में मेरा बैठी वो बात तो मैं वो कर लूंगी अब क्योंकि वो मिलता नहीं था और कोई गुरु भी नहीं था ना जैसे मुझे एक चीज समझ आई कि बच्चे अपने माता-पिता की बात सुनते हैं पर एक और होना चाहिए कि माता-पिता दादा दादी इनके अलावा भी कोई है जो आपको देख रहा है तो ऐसा हमारे पास माहौल था नहीं और हमने अकेले बहुत समय व्यतीत किया तो मेरा कॉलेज था होटल मैनेजमेंट का उसके अंदर में वी स्टडी अबाउट अल्कोहल वी स्टडी अबाउट मीट ऑल डिफरेंट काइंड ऑफ मीट तो अ लॉट ऑफ लाइफ स्टाइल जो बहुत लाइफ स्टाइल की चीजें आई थी वो मेरी स्टडी के कारण ही थी कि हां मैंने यह भी करना है वह भी करना है पर 2019 के अंदर में मतलब मैंने काफी काम कर लिया था तब तक मुझे यह समझ आया कि मैं खुश ही नहीं हूं कहीं पर खुशी ही नहीं है और आप कितना पार्टी कर लोगे आप कितना कहीं पर एंजॉय
00:15:21:24 कर लोगे कि अगर आपने पार्टी कर भी ली मैं बहुत खुश भी हूं पर उसके बाद भी मैं खुश नहीं हूं है ना कि एक सपोर्ट व्यक्ति हमेशा हर समय बाहर खोज रहा है और जब वो व्यक्ति बाहर सपोर्ट खोज रहा होता है यहां कोई महिला भी लाइक कोई लड़की जब बाहर अपने से ज्यादा सपोर्ट खोजती है तो उसे धोखा ही मिलता है क्योंकि दुनिया आपको सपोर्ट देने के लिए नहीं आ रही है दुनिया को आपसे सपोर्ट चाहिए तो इस तरह का भी जीवन में बहुत तरह के अनुभव रहे और जब मेरे को एक टाइम पर मैं जब आ गई थी लद मेरा नाम सब अभी भी अप्रिशिएट करते हैं कि रिदम बहुत अच्छा नाम है कि याद रहता है उनको क्योंकि अलग सा नाम है पर मुझे यह जरूर था कि मुझे भारतीय नाम चाहिए कि मेरा नाम मेरी संस्कृति के साथ होना चाहिए है ना और गुरुदेव से मुझे मेरा नाम मिला मेरे जन्म दिन पर इसी साल इसी साल तो मिला और मैं बहुत खुश हूं और उसके बाद से मेरे जीवन में बहुत सारा परिवर्तन आया और मैंने एक क्षण भी नहीं लगाया था अपना नाम उसको चेंज करने के के लिए क्योंकि मुझे लगता है कि रिदम जो थी उसने उसका क्या था उसने दुनिया
00:16:37:01 की रिदम समझी ना हर तरह के व्यक्ति की रिदम समझी अब वो रिदम मैंने समझ ली पर रिदम समझने के बाद जो हमें विजय होना है जीवन में वो मुझे गुरुदेव से मिला बहुत बढ़िया बहुत सुंदर आपने अपना तान बताया तो ये ये हमारे दर्शकों को थोड़ा सा बताए जसे आप वहां से वापस भी आ गए तो गुरुदेव आपके जीवन में कैसे एंट्री लेते हैं और वो जो सच्चित आनंद वाला जो आपका एक कांसेप्ट आपका है जो आपने कहीं कहीं पर कहा भी है तो वो कांसेप्ट और कैसे आप गुरुदेव तक पहुंचे हैं और फिर फिर अगला फिर हम उसके बाद की बातें फिर आगे करेंगे पर पहले आप ये बता दे कि गुरुदेव एगजैक्टली एंट्री कैसे करते हैं सच्चिदानंद जो आप ढूंढ रहे थे ना जैसे आपने कहा कि आप लोग आप पार्टीज में जाते थे सब जगह मगर एट द एंड आपको कुछ ऐसा था जो नहीं था वहां पर और इसी बात को अगर जगतगुरु जी की शैली में अगर बोले तो वो बोलते हैं कि व्यक्ति को खूब भोग देते रहो और तीन चार दिन अगर वह कुछ ना सोए जिसमें वह अपनी जीवन को ढूंढ रहा है कि मुझे यह चाहिए मुझे यह चाहिए यह चाहिए उसको तीन चार दिन सुलाव नहीं तो
00:17:52:06 वह पागल हो जाएगा पागल हुए बिना वो नहीं रहेगा है ना तो इसका अर्थ क्या है कि जिसम हम अपने जीवन को ढूंढ रहे हैं वास्तविकता में उसके ठीक विपरीत हमारी संतुष्टि है सही बात ये समझाने का प्रयास तो वो जो सच्चितानंद वाला कांसेप्ट है वो और फिर गुरुदेव की शरण शरणागत यह आपके जीवन में कैसे आई यह थोड़ा सा बताए सच्चिदानंद वाला कांसेप्ट तो शिवांश सबसे पहले आपने मुझे एक्सप्लेन किया था मैं तो एक बार ये सभी दर्शकों को बता दूंगी इन्होंने ही मुझे एक्सप्लेन किया था क्योंकि मुझे याद है एक पॉडकास्ट था उस पॉडकास्ट के अंदर मुझे कुछ कुछ मतलब मुझे था कि मैं इधर उधर बात मत करू उस समय मेरा मेरी दीक्षा नहीं हुई थी उस समय पर शिवांश काफी सपोर्टिव थे तो उन्होंने मुझसे एक चीज पूछी मैंने उन्हें बोला था कि मैंने यहां पर जाना है और इस मतलब इस तरह का माहौल होगा या इस तरह के प्रश्न और हम चाहते हैं हम ऐसे भाव व्यक्त कर पाए तो उन्होंने हमसे एक चीज पूछी ची जो मेरे अभी भी हम यही बोलते हैं कि जीव की चा का विषय क्या है जीव की चा का विषय है हर चीज जानना
00:19:07:26 और कभी ना मरना और हमेशा सुख की प्राप्ति करना ये है या नहीं हमने बोला हां एकदम ठीक बात है अगर हम कोई भी अपनी चाह को पकड़ ले तो वो इन तीन चीजों के अंतर्गत ही रहेगी फिर इन्होंने बताया तो इसीलिए उसको कहेंगे सत चित और आनंद जो हमने वीडियो में भी वहां पर जाके एक्सप्लेन किया था कि परमात्मा का स्वरूप भी वही है और हमारी चाह भी वही है जबकि हम सत कहीं खोजते हैं चित कहीं खोजते हैं आनंद कहीं खोजते हैं पर है सारा का सारा एक साथ ही तो इस चीज को मैं आज भी समझती हूं मतलब मैं मैं समझी हूं कि वह क्या है कितना है बट रोज एक तरह से खुद को बताना भी पड़ता है क्योंकि हमारे अंदर इंद्रिया भी हैं तो कभी-कभी हम भूल जाते हैं तो याद करवाना पड़ता है असली विषय क्या है तो फिर छोटे छोटे विषयों में हम फसते नहीं है इस पर मैं दोबारा आऊंगी पर गुरुदेव की जर्नी आ जाती है इसके अंदर एक बार आपका वीडियो थोड़ा सा दर्शको को दिखाना चाहूंगा आपने जो बड़े बड़ा अच्छा लगा था कि मैंने तो इतने अच्छे से समझाया भी नहीं था आपने बहुत अच्छे से एक्सप्लेन किया था ऑपरेटर जी वो वीडियो
00:20:23:03 जरा दिखा दीजिए दर्शको को तब तक आप बता सकते हैं क्या है आगे की चीज तक दिखाएंगे वीडियो तो अच्छी थी आपने अच्छे से एक्सप्लेन किया था इसलिए हम अच्छे से एक्सप्लेन कर पाए थे मतलब हमने सिर्फ ट्रांस ट्रांसलेशन कर दिया था हा मैंने कभी अंग्रेजी में अपने उस गुरुदेव के उस वक्त अंग्रेजी में नहीं देखा आपने अच्छा अभी मैंने देखा है आज शायद आपने अपनी स्टोरी पर लगाया था कुछ तो आप जिस तरह से उसको बड़ी सिंपलीसिटी के साथ इंग्लिश में उसको व्यक्त करती है ना बड़ा सही रहता है मतलब कोई व्यक्ति अगर कोई भी व्यक्ति जो इंग्लिश के माध्यम से सुनना चाहता है चीजों को उसको बड़ा सिंपल सा कर देती है तो वो बहुत बढ़िया था आपने उसमें दिखाया था कोशिश करती हं मैं उसको सुन कर के जो है सरप्राइज ये हो गया था मैंने मुझे मैंने अंग्रेजी में कभी उसको सुना नहीं था तो आपने इतनी सिंपलीसिटी में व बताया था मैंने कहा ये तो रील लगाने लायक है और हम लगाएंगे ल बनाए जर हां वो अच्छी है क्योंकि उसके अंदर बहुत सिंपल था कि जब हम वो बोलते
00:21:38:03 हैं ना सत कि हमें सब जान नहीं हमें इम्मोर्टालिटी चाहिए ंड चित इज वेयर वी वांट वी बिकम द नो इट ऑल एंड आनंद इज द स्टेट ऑफ ब्लिस सो सच्चिदानंद इ द स्टेट ऑफ व्ट सनातन धर्म टीस अस एंड वट सनातन धर्म तो यह जरूर था बाकी आपका जो प्रश्न था गुरुदेव को लेके इस हम थोड़ी सी हिस्ट्री देंगे की हिस्ट्री बहुत सिंपल है वट इ सनातन धर्म ली इ यू कैन डिफाइन इट इन फ्यू वर्ड्स देर आर थ्री थट एवरी ह्यूमन इ लुकिंग फर फर्स्ट इ मोटी वी ल वांट दैट सेकंड इज दिस नॉलेज टू बिकम नो एट ल द थर्ड इज गोइंग टू बी द एंडलेस जॉय इमोटी इ सत कंप्लीट नॉलेज चित एंडलेस जॉय आनंद एंड द स्टेट ऑफ सच्चि आनंद सच्चिदानंद एंड व्ट ब्रिंग्स यू टू द स्टेट ऑफ सच्चिदानंद इ व्ट
00:22:55:12 सना थैंक्स टू यू शिवांश बट ये सच है क्योंकि सच्चिदानंद का कांसेप्ट और किसी के पास नहीं है सिर्फ हमारे पास ही है सनातन धर्म ही आपको ऐसा कांसेप्ट देता है जैसे वासुदेव कुटुंब कम भी हमारा ही कांसेप्ट है द्वैत से अद्वैत भी हमारा ही कांसेप्ट है तो दिस इज द ब्यूटी ऑफ आवर कल्चर की सब चीज फिलोसोफी प है कि हमने ज्ञान को बहुत महत्व दिया है जी बिल्कुल तो फिर बताए फिर आगे सच्चिदानंद से फिर गुरुदेव की शरणागत जगतगुरु शंकराचार्य गुरुदेव श आपको पता है कि मेरे मैं इतनी खुश हूं ना कि गुरुदेव जो है व मेरे गुरुदेव बने और मुझे ऐसा मतलब अवसर बोलिए मौका बोलिए या फिर मतलब कुछ भी सबसे बड़ा जो शब्द होगा उसको बोल दीजिए कि हमारे गुरुदेव गुरुदेव जो है वो है पूरी मठ के जो शक अभी है वह हमारे गुरुदेव है यह बहुत गर्व की बात है सौभाग्य की बात है और आज अगर हम हम किसी को भी देख ले ना इतना तो मेरे को इतना
00:24:10:14 तो मैंने जानने की कोशिश भी नहीं की थी मुझे एक चीज पता थी शंकराचार्य है तो बस हमें यही जाना है तो एक तरह से देखा जाए तो जो शंकराचार्य है ना नाम उसने ही मुझे गुरुदेव से जोड़ा अब क्यों जोड़ा क्योंकि मैं ऋषिकेश में रहती हूं ऋषिकेश में योग के नाम पर बहुत सारी चीजें होती हैं योग और तंत्र के नाम पर और मेरे सामने फॉरेनर लड़कियां बोले लड़के बोले भारतीय लड़के बोले लड़किया बोले बहुत कुछ उल्टा पुल्टा हो जाता है स्पेशली जब वो तंत्र का नाम लेते हैं क्योंकि मैंने इतना कुछ यहां पर देखा था और मुझे आसन के मेरे दो टीचर्स है अच्छे टीचर्स है पर के लिए मुझे कभी कोई मिला ही नहीं अब लिखा तो सब श्लोक में है ना सारे छोटे छोटे उसके अंदर पर वो कोई पढ़ा नहीं कोई गुरुकुल भी बताया था हरिद्वार में जहां पर आपने प्रयास किया था चीजों को जानने के लिए हा वो इधर ही था शिवानंद आश्रम था वहां पर वो हा शिवानंद आश्रम था इधर ही ऋषिकेश में वो
00:25:25:18 वेदांत के ऊपर कोर्स करवा पर वो अलाउड नहीं है हमें वो अटेंड करना क्योंकि उनका ऑन स्टे होता है बट अपेरेंटली फॉरेनर्स अटेंड कर सकते हैं और मुझे य बात बहुत बुरी लगी थी कि अरे हम भारतीय क्यों नहीं कर सकते और महिलाए तो कर ही नहीं सकती अब वो उनके जो भी प्रोटोकॉल है वो है तो मुझे कभी मिला नहीं कोई अच्छा ना टीचर जो पढ़ाए मतलब थोड़ा थोड़ा यहां से इसका बोल दिया है ना चित्तवृत्ति निरोध उसके आगे से हो ही नहीं रहा है उसके बाद क्या पहले तो मुझे यह भी बता दो कि वृति क्या है फिर मुझे यह बताओ कि चित कहां पर है तो इस तरह से कभी हमें कोई मिला नहीं और मेरी कोशिश यही थी कि मुझे कोई ऐसा मिले और मुझे यह था कि कोई योगी या महात्मा मिलेगा तो उससे ही हम पढ़ सकते हैं क्योंकि हमें गुरुकुल वाला चाहिए यहां पर ज्यादातर क्या है कि कमर्शल स्कूल्स है वही आसन हमने कर लिए बॉडी को मतलब आपके पांव नाक से जुड़ गए बहुत बढ़िया बट मैंने जितना भी पढ़ा क्योंकि मैं बहुत पढ़ती हूं खुद से भी मुझे उतना ही समझ आया कि आसन लगाने के लिए भी एक भाव की आवश्यकता है आसन लगाने के लिए भी एक स्थिति
00:26:41:04 होनी चाहिए किसी के अंदर उसकी भाव स्थिति बोलिए या उसके मानसिक स्थिति बोलिए तो क्योंकि आसन तो बहुत लगा रहे हैं बट योग नहीं हो रहा है तो मुझे हमेशा यही था कि मेरे पास कोई है नहीं किसी से मैं पूछ नहीं सकती जिस मंदिर में गए थे वहां पर उन्होंने देवी जी को जेलर बोल दिया था तो वैसे मेरा मन नहीं लग रहा था और यहां पर आसपास में भी उस समय जो भी थे वो सब गांजा फूक के यह सब चल रहा था तो अब मैं अब वहां पर जाके उनसे ज्ञान लेने का मतलब है कि एक आप भी लगाइए एक वो भी लगाते हैं तो उसके बाद तो कोई कुछ भी बोलेगा तो कि आसमान नीला है तो फिर नीला है तो आसमान नीला है है ना इस तरह की चीज तो मैं मंदिर जाती थी और मैं मंदिर महादेव का मंदिर है यहां पर लक्ष्मण झूला में एक और वो मंदिर में जाकर मैं बोलती थी महादेव प्लीज मेरे को बस मेरे गुरुदेव से मिलवा दो मैं शिवानंद आश्रम गई वहां पर आदि शंकराचार्य जी की मूर्ति है तो उनको आके मैं हाथ जोड़ देती थी फिर एक और आश्रम है वहां पर भी आदि शंकराचार्य की मूर्ति में बोलती थी बस मेरे को आप अपने से मिलवा दो हमें और कोई नहीं चाहिए यह सब ड्रामा हो रहा है और आप ही है जबकि मुझे
00:27:56:09 इतनी डिटेल्स नहीं बताती उनकी मुझे लगता है मुझे आज भी इतनी डिटेल में नहीं पता है बट मुझे था कि ऐसा है और यह इसलिए भी था क्योंकि जो मेरी नानी है और मेरे नाना है मेरे नाना महंत थे और वह काली उपासक थे तो व जो मंदिर जहां पर वो करते हैं सब अपना उपासना और जहां के वो महंत है वो हमें शुरू से यह बोला गया था किय शंकराचार्य ने स्थापित किया था 1500 ईसीवी में सो व कहां से शंकराचार्य मेरे दिमाग में था कि शंकराचार्य शंकराचार्य 1500 ईसवी नहीं रहा होगा 1500 पहले पहले करा हो या तो वो शंकराचार्य उनकी जो परंपरा में जो शंकराचार्य बाद में आए उन्होंने किया होगा हां हां हां उन्होंने किया उन्होंने आदि शंकराचार्य ने नहीं पर परंपरा में से किसी एक शंकराचार्य ने जिधर से भी वो रहे होंगे उन्होंने किया तो वहां से मेरे पास नाम था शंकराचार्य और आदि शंकराचार्य के बारे में थोड़ा थोड़ा तो पढ़ा ही था कि अच्छा ऐसा है कि उन्होंने मैंने जितना भी ग पर मुझे मिला पढ़ने के लिए मैंने पढ़ा था और इस दौरान में बस मंदिर में जाक यही बोलती थी कि मुझे तो और कोई नहीं चाहिए यहां पर सब ढोंग चल रहा है हमें समझ नहीं
00:29:11:09 आ रही है आप ही मुझे मिलवा के दो फिर वो मानते नहीं थे तो फिर महादेव को बोलते थे कि महादेव आप ही आदि शंकराचार्य आदि शंकराचार्य भी महादेव आप ही चाहिए हमें गुरु के रूप में मुझे महादेव का ही चयन था कि मुझे आप आप ही दिलवाए आप ही मिलवा जाएंगे तो इस तरह की बात थी तो हम कहीं पर ज्यादा बैठते भी नहीं थे इस तरह मैं ये बोल सकती हूं मैं लकी भी रही हूं कि मैं मंदिर में पली बड़ी हूं क्योंकि मंदिर में ही हमें कितना कुछ देखने को मिल जाता है कि हमें पता चलता है कि ढोंग क्या है और असली चीज कहां पर हो रही है तो मैं कभी फसी नहीं उस तरह से किसी गुरु के चक्कर में ऐसे ही और फिर हमारी इसकन की वीडियो थी फिर मैंने आपसे बात की आपने हमें बताया कि ऐसा है कि यहां पे मट के अंदर गुरुदेव है फिर हम बहुत खुश हो गए उसके बाद तो फिर मुझे यह भी रिलाइज हुआ था कि मैं 2018 के अंदर गुरुदेव की वीडियोस देखती थी पर मुझे समझ नहीं आता था पर मैं कोशिश करती थी मेरी अभी कुछ महीने पहले मुझे समझ आया कुछ वीडियोस देख के कि अरे यह तो मैंने उस टाइम पर देखी हुई है तो मैं इसलिए बोलती हूं कि गुरुदेव का मेरी लाइफ में आना वो कहते नहीं
00:30:26:10 है कि आपने मांगा है आपकी मन पूरी हुई है ना कि मेरी आंसर्ड प्रेयर है गुरुदेव मैंने जैसा मांगा जो मांगा मुझे वैसा ही मिला और आपका बहुत-बहुत धन्यवाद शिवांश आपने हमें बताया कि दीक्षा हो सकती है और हमें दीक्षा मिली गुरुदेव के पास हम चातुर्मास में रहे भी हैं इस बार और इतना सानिध्य मिला इतना प्रेम मिला इतना मतलब जो छोटे छोटे प्रश्न हमें उलझा देते हैं हम सुलझ गए और जीवन में सुलझ नाही ही है हमें उसे तो हम ऐसे ही रहते हैं कुछ कुछ चीजों में और अब अगर हम देखें चाहे हम देखें कि कोई भी कथावाचक हो कथावाचक हो या कोई भी किसी का भी धर्म गुरु हो वो उनका गुरुदेव के प्रति सम्मान क्या है चाहे वह प्रेमानंद जी हो चाहे कोई भी हो कि गुरुदेव का सम्मान क्या है तो यह मैं अपने लिए नहीं बोल रही हूं ये मैं उन लोगों के लिए बोल रही हूं जिनको जिनको नहीं पता है गुरुदेव के बारे में जो नहीं जानते हैं कि गुरुदेव कहां है हमारे सनातन धर्म में उनका रोल क्या है उनका पद क्या है उनका अधिकार क्या है
00:31:43:06 और मैं उनकी शिष्य हूं इससे बड़ी गर्व की बात कोई नहीं है क्योंकि उनका शिष्य बनने के बाद मेरे लाइफ में बहुत ज्यादा मुझे रिस्पांसिबिलिटी पता चली है मेरे जीवन में ऐसे संस्कार भी आए कोमल संस्कार में उनको बोलती हूं कि कोमल संस्कार जो शायद मेरे माता-पिता भी मुझे नहीं दे पाए थे और मुझे समझ आया कि एक गुरु का महत्व कितना बड़ा है और एक अच्छे गुरु का महत्व और हमारे गुरुदेव के अलावा और कौन है य पर इतना अच्छा अभी तो कोई भी नहीं है तो यह स भाग्य है हमारा कि वह है और हम उनके शिष्य है हम उनसे मिल सकते हैं उनसे प्रश्न कर सकते हैं तो गुरुदेव को मे जीवन में लाने के लिए आपका भी धन्यवाद देखिए आपका नाम मैंने आपको एक बार पहले भी बोला था आपका नाम है शिवांश मैंने महादेव को ही बोला था मेरी अर्जी महादेव के साथ ही थी तो शिव का अंश लाक जाओ कन्या जाओ दीक्षा करवाओ नहीं नहीं ये चीज मेरे साथ हुई है मैंने जो जो लोग मेरे टच में आते जा रहे हैं मैं जहां पर आज से कुछ पांच छ साल पहले शिफ्ट हुआ था एक घर में जहां प अभी हूं
00:33:00:06 तो वहां पर मैं जब शिफ्ट हो रहा हूं तो कोई है जो मेरे आसपास उस जहां पर मैं शिफ्ट हुआ उसके आसपास और कोई रह रहा है जो भगवान शिव से डेली प्रार्थना कर रहा है कि मेरे सवालों का जवाब देने वाला कोई भेजो वो वो अपनी उस उसकी कोई टीचर की जॉब थी उसकी और उसको वो अपनी टीचर की जॉब से मतलब फ्रस्ट्रेट हो गया उसकी कुछ पर्सनल प्रॉब्लम भी थी जिसके कारण उस जॉब से वो अलग हुआ और उसके बाद वो वो भी एक मातृशक्ति थी तो वो भगवान की शिव भगवान की डेली भक्ति में लग गई और यह बात मुझे बाद में पता बाद में पता चली जब उनको इंट्रोड्यूस हो गए मिल गए और चीजें आगे बढ़ गई उसके बाद वो थरी की जिस समय मैं शिफ्ट हो रहा हूं उस समय भगवान से प्रार्थना कर रही है कि मुझे कोई ऐसा मिलवा दो जो ये बिल्कुल यही वर्ड थे कि जो मेरे सवालों का जवाब दे पाए मुझे भक्ति मुझे भक्ति दान में करवा दो मुझे मेरे प्रश्नों का हल दिलवा दो ये सारे उनकी वडिंग थी और मैं इधर शिफ्ट तो मुझे ऐसा लगता है कि मैं वो भगवान का बस एक वो छोटा सा निमित्त नहीं होता गिलहरी प्रयास वाला वही मेरा रोल है कि भाई
00:34:15:12 यहां प इसको जरूरत थी तो भगवान ने मुझे वहा टपका दिया भगवान ने वहां प टपका दिया तो तो ये तो रही ये वाली बात अच्छा अभी आपने एक सीरीज भी चलाई थी कि जो गुरु होगा वो अपनी दीक्षा को कभी बेचेगा नहीं इन द नेम ऑफ इनीशिएशंस आजकल क्या बोलते हैं कि इसका इनीशिएशन है और 00 000 2500 जो भी जिसका प्राइस है उसके लिए आपको कभी भी दीक्षा खरीदने की आवश्यकता नहीं है पहली बात ये दूसरी चीज यह कि जब गुरु आपको कुछ सिखाया जा रहा है या दीक्षा का प्रोसेस है उसकी वीडियोस नहीं बनती है यह चीजें वीडियोस पे डल ही नहीं है तीसरा आपसे कभी भी दीक्षा
00:35:30:20 के लिए कुछ मांगा नहीं जाता है यह एक अंदर से जैसे मेरा व्यवहार था कि रे मैं दीक्षा ले रही हूं मंत्र दे रही हूं कि मैं अपनी सेवा भाव में कुछ दूं बट गुरु आपसे कभी कुछ नहीं मांगेगा एक चीज जरूर मांग सकते हैं गुरु कि आप अपना जीवन सुधारे अपना जीवन सुधारे अपने माता-पिता का या अगर आप गृहस्थ वैसे जो भी आपका जिस भी चर्म में आ अपने जीवन के उसमें आप एक अच्छे व्यक्ति बने और एक अच्छे नागरिक भी बने तो जो आपके गुरु होंगे ना वो सिर्फ एनर्जी ये एनर्जी दिस एनर्जी दैट यह सब नहीं करेंगे वह आपको आपके देश के प्रति भी बहुत रिस्पांसिबल बनाएंगे वो एक और भाव डालेंगे कि आप देखिए कि जो दुनिया है संसार है उसमें अच्छा या बुरा क्या हो रहा है आदर देते हुए कुछ अभद्र भाषा में बोलने की आवश्यकता नहीं है आदर देते हुए गलत को गलत भी बोलना है और सही के साथ हमें खड़ा भी रहना है जिसमें जो सही है उसको सही बोलिए पर गलत का साथ मत दीजिए इसके अलावा गुरु सन्यासी होना बहुत आवश्यक है क्योंकि अगर उन्होंने वह लाइफ जी ही नहीं है
00:36:45:20 तो वह कहां से पढ़ा देंगे जो गृहस्थ होगा वह कितने श्लोक पढ़ लेगा कितना कर लेगा वो गृहस्थी अपनी संभालेगा या अपने गुरु के साथ वैसा जीवन जिएगा जिसने त्याग को जिया ही नहीं है वह आपको जितना भी बोल लेगा आपको उसकी बात समझ नहीं आएगी क्योंकि उसकी वाणी में वह है ही नहीं क्योंकि उन्होंने वो जिया नहीं है इसलिए उनकी वाणी फलती नहीं है कि बोल दिया और सत्य हो जाए यह माना जाता है हमारे जो महात्मा होते हैं गुरु होते हैं कि जो बोल देते हैं वो सत्य हो जाता है इसी का हमें बल भी मिलता है जब गुरु बोलते हैं कि जाओ तुम्हारा काम हो जाएगा तो हमें पता है कि वो हो जाएगा क्योंकि उनके पास वो शक्ति है तो हमें इन चीजों का ध्यान देना देना है हम य पर मैं क्लियर कर दू हा ऐसा गुरु में वैराग्य होना चाहिए ऐसा नहीं है कि आपकी दीक्षा जो है गृहस्थ से नहीं हो सकती है मगर यदि दीक्षा गृहस्थ से हो भी रही है तो वो उन सिद्धांतों को मानने वाला होना चाहिए जो सिद्धांत किसी ना किसी वैराग्य को प्राप्त आचार्य से स्फुट हो रहे हैं वहा से अपवाह है उनका उनके अंडर में रहने वाला कोई गृहस्थ से भी दीक्षा ले सकते हैं वैराग्य वैराग्य मतलब
00:38:00:26 आपका जो अल्टीमेट जो निर्णायक हो होगा आपके धर्म और अधर्म का वो वैराग्य वाला होना चाहिए बाकी दीक्षा हो सकती है कि आपका कोई गृहस्थ गुरु हो जो किसी वैराग्य प्राप्त आचार्य के शरणागत होकर के उनकी शिक्षाओं को आगे बढ़ा रहे हो तो वह भी दीक्षा आप दे सकते हैं जी धन्यवाद इसके लिए यह सही पॉइंट है तो इस चीज को जरूर फॉलो सभी जो सुन रहे हैं और सबसे इंपॉर्टेंट बात द मोस्ट इंपोर्टेंट थिंग अगर कोई व्यक्ति जो बोले कि मैं सनातन धर्म सनातन धर्म मतलब बस एक लाइफ स्टाइल है बट वह एक धर्म नहीं है रिलीजन नहीं है तो वहां पर थोड़ी दिक्कत है हमें कि कैसे नहीं है और जो व्यक्ति यह बोले कि शास्त्रों को मानने की कोई आवश्यकता नहीं है जो हम बोल रहे हैं वही शास्त्रों में है अगर शास्त्रों में नहीं है तो तो फिर शास्त्र बदल दिए जाए तो उस व्यक्ति को ही बदल दिया जाना चाहिए उस व्यक्ति को सुनना ही नहीं चाहिए हमें यह बात में थोड़ा फोकस करके इसलिए बोल रही हूं क्योंकि यह बहुत जरूरी बात है अभी मैं अभी आजकल मैंने पूछना शुरू किया है मैं सिर्फ
00:39:16:03 एक क्वेश्चन पूछती हूं कि आपको शिव और हरि का नाम कहां से मिला तो वो बोलते हैं शास्त्र से मैंने कहा तो शास्त्र बोल रहा है कि ये नाम का उच्चारण कैसे करना है तो वो क्यों नहीं करते हो जिसने नाम बताया यह भी तो बता रहा है कि उच्चारण कैसे करना है या किसके पास जाना है किसके पास नहीं जाना है तो जब शास्त्र आपको शास्त्र ही जानना है आपको साधना भी शास्त्र की चाहिए तो शास्त्र यह भी तो बता रहे हैं ना कि गुरु कैसा है तो यदि गुरु शास्त्रों को नहीं मानता है शास्त्रों की बातें नहीं बताता है तो उसे गुरु नहीं बनाना चाहिए क्योंकि हम गुरु बना ही इसीलिए रहे हैं ताकि हमें शास्त्र के अंदर जो ज्ञान विज्ञान है वो हम उसको प्राप्त कर सके अब इसके अंदर में अब पता कैसे चलेगा कि शास्त्र कौन मानते हैं नहीं मानते हैं तो इस पर आई थिंक शिवांश काफी अच्छा बता सकते हैं कि शास्त्र प्रमाणिक गुरु वह क्या है तो इस पर हम शिवांश से पूछेंगे इस सबसे पहली बात तो वही आ जाती है परंपरा जो एक प्रामाणिक आचार्य की सबसे महत्त्वपूर्ण घटक है वो एक परंपरा शास्त्र आपके पास कैसे आए शास्त्र आपके पास परंपरा से है
00:40:31:13 आज से लगभग दो अरब वर्ष पूर्व वेद प्रकट होते हैं और वह फिर ऋषि परंपरा से आगे बढ़ते ऋषियों से फिर व्यास जी तक आते व्यास जी से आपके पास तक कैसे आए तो वहां पर एक बहुत महत्त्वपूर्ण चीज आ जाती है कि परंपरा तो यदि हम अपने आप को सनातनी कह रहे हैं और हम सनातन से प्राप्त होने वाले किसी भी सामग्री को स्वीकार कर रहे हैं तो हमें वहां से स्वीकार ने वाली जो सामग्री है वह हमें किस सोर्स से स्वीकार हो रही है उस सोर्स को भी हमें मानना पड़ेगा अगर हम सोर्स को नहीं मान रहे हैं और केवल उस सामग्री को ले रहे हैं तो ये वो वाली बात है कि मीठा मीठा गब गप और कड़वा कड़वा सही बात है सही बात है और एक चीज और है इसमें की कई बार जो आपने एक बात कही ना कि फल चाहिए शास्त्र वाला फल तो चाहिए शास्त्र समत मगर विधि चाहिए मनमुक हा मुझे जो आवान का निर्माण हुआ है वो बहुत धीरे धीरे हुआ है बहुत स्लो उसकी प्रोसेसिंग थी तो उसमें क्या है जो जो चैप्टर है आवान का म जो जो उसके पिलर है आवान के पांच मूल सिद्धांत है तो उसमें और मैंने देखा
00:41:46:18 कि जो गुरुदेव है उन्होंने अपने बाद में मैं जाना कि गुरुदेव ने अपने कई जो प्रवचन है उनमें उन्होंने उसी क्रम में ही व जो क्या कहते हैं जो अपना वक्तव्य है वो दिया है जो शुरू होता है एक नास्तिक से एक नास्तिक से शुरू होता है और राम पर आकर के पूरा हो जाता है तो मेरे मतलब ये जो आवान के जो पिलर्स बने थे वो ऐसे बने थे कि मुझसे वो लोग टकराए थे धीरे धीरे मुझसे पहले नास्तिक टकराया तो नास्तिक वाला खंबा फिर मजबूत हुआ कि जीव की चाह का वास्तविक विषय मुझसे फिर मुसलमान टकराया तो फिर वो सत्यम ज्ञान अनंतम ब्रम ईश्वर वही है जो कुछ भी कर सकता है जब मुसलमान टकराया तो वो आ गया उसके बाद फिर शास्त्रों को थोड़ा मानने वाले थोड़ा ना मानने वाले टकराए तो फिर किसकी बात प्रामाणिक मानी जाए परंपरा प्राप्त आचार्य की तो इस तरीके से व पांच जो पिलर्स खड़े हुए वो चैप्टर वाइ हमारा जो कोर्स है उसम वो कोर्स भी उन्ही पांच पिलर्स के इर्दगिर्द बनाया आवान का कोर्स है जो पढ़ते तो उसमें क्या है कोई व्यक्ति अगर भगवान को नहीं मानता है कुछ
00:43:01:19 नहीं जानता है वो शून्य है अभी आध्यात्म के लेवल मगर यदि वह कोर्स करता है तो उसके जीवन में सबसे पहले भगवान का अस्तित्व सिद्ध करेंगे जब अस्तित्व सिद्ध हो जाएगा तो फिर भगवान को सर्व सामर्थ्य वान एक्सेप्ट करना आवश्यक हो जाएगा और फिर सर्व सामर्थ्य वान एक्सेप्ट करना आवश्यक हो जाएगा तो फिर उसके बाद यह दोनों चीजें आपको मिलती है प्रामाणिक ग्रंथ वेद से तो वेद को हम स्थापित करते हैं उसके जीवन में और फिर जब वेद स्थापित हो जाएगा तो यह तीनों चीजें आपको मिलती कहां से परंपरा से तो परंपरा आपके जीवन में स्थापित हो जाएगी और फिर इनका अमूल चूल जो चीज है गुरु और ग्रंथ आही गया तो दो चीज पांचवा जो घटक है उसमें शंकराचार्य भी है राम भी है वा तो नारायण समारंभा शंकराचार्य मध्यमाम अस्म चार्य पर्यंत वंदे गुरु परंपराम और यह सारी चीजों का आपको अगर सिटी में समझना है तो रामो विग्रहवां धर्म सिंपल वाल्मीकि बत अच्छ बहुत अच्छा है यह तो बहुत अच्छा बताया आपने तो आथ परंपरा प्राप्त चार्य की इंपोर्टेंस तो हमने काफी शेयर की है और लाइट में भी दिखती है
00:44:16:24 तो व तो है जी अच्छा तो ये तो पहुंच गए अब आप गुरुदेव की शरण में पहुंच गए अभी मैं आप को पूछूंगा कि वो परिवर्तन क्या क्या थे मतलब पहले जो शास्त्र सम्मत चीज थी उस पर थोड़ा सा गायत्री मंत्र जैसे की आपकी कुछ पुरानी भी रही है जने आपने देखा स्त्रियों का जने हो रहा है फिर आप शंकराचार्य के आप ऐसे लोगों के बीच में भी रहे हा एक गुरु थे एक गुरु थे जिन्होने हमें बोला कि मेरे पहले शिष्य बन जाओ हा वो सब बताइए बात यह थी कि एक हम एक जगह पर का काम कर रहे थे मतलब फुल टाइम नहीं था मेरा जस्ट हेल्पिंग हैंड में था तो हम वहां पर काम कर रहे थे तो ऐसे कोई चर्चा हुई तो उन्होंने बोला कि मैंने जो ज्ञान दिया उसको गुरु का ज्ञान समझना चाहिए मुझे मतलब मैं उस आवर में ना उनके साथ काम कर रही थी आई वाज द ट्रांसलेटर सिंपल हिंदी टू इंग्लिश ट्रांसलेटर सिंपल कर निकाला तो मैं एस ट्रांसलेटर काम कर रही थी तो अब उसके अंदर हमारा पेड था तो उन्होंने मुझे बाद में बोला कि अरे जो व्यक्ति थे बीच
00:45:31:28 में उन्होंने बोला कि नहीं इसका तो वो बोल रहे हैं कि आपको बैठे बैठे इतना ज्ञान मिल रहा है तो इसको तो गुरु का ज्ञान समझिए मैंने कहा गुरु किस बात के हुए ना तो मेरी दीक्षा हुई ना उन्होंने मुझे अपना शिष्य घोषित किया ना हमने उनको गुरु बनाया तो संस्कार कीजिए हमारा तो उनका था कि वो जने वाला संस्कार होगा ना तो यह हमें बाद में पता चला था तो उस समय पर देखिए मैं आपको एक और इसके अंदर छोटी सी इंटरेस्टिंग बात बताऊंगी तो हमने उनको बोल दिया हमने बोला ठीक है अगर आपको ऐसे ही देना है हमें तो ज्ञान चाहिए मैं तो उस समय तो वो कहते नहीं है कि भूख लगी है बहुत तो अब तो जो भी खाना दोगे अच्छा लगेगा तो मेरी मनो स्थिति ऐसी थी अंदर में तो मैंने उन्हें बोल दिया कि ठीक है हमें ज्ञान चाहिए कोई बात नहीं आप हमें आप बताइए हवन कब होगा हम आ जाएंगे और हम नहीं हमें कोई पैसे नहीं चाहिए आप हमें हम बैठ के ट्रांसलेट करेंगे आप जितना ट्रांसलेट करना है करवाइए पर हमारे जो भी प्रश्न होंगे वो आप अलग से सबके उत्तर देंगे तो उन्होंने हमें बोला कि अरे गुरु शिष्य का रिलेशनशिप बहुत डिफिकल्ट होता है अगर तुम फस गई कहीं पर तुमने गलती कर दी मेरा
00:46:47:02 मोक्ष नहीं हो पाएगा मैं फस जाऊंगा ये कोई बहुत ये बहुत मुश्किल बात है तुम सोच लो मतलब तीन दिन तुम्हें बैठना पड़ेगा हम बोले हम तीन दिन क्या एक साल बैठेंगे तपस्या करनी है हम करेंगे हमें चाहिए मतलब ये मेरे अंदर की बात थी कि मुझे इतना था कि अब मुझे यही जानना है क्योंकि मैंने हर तरह की किताब पढ़ ली पुस्तक पढ़ ली अलग-अलग कार्य कर लिए अलग-अलग जॉब्स कर ली मुझे कहीं पर संतुष्टि मिल रही है तो वो शास्त्रों से ही मिल रही है तो हमने उन्हें बोल दिया उन्होंने बोला ठीक है तुम सोच लेना उस समय मेरी मित्र थी लड़कियां थी सखियां थी तो उनको मैंने बोला देखो मैंने इनको बोला मुझे शिष्य बना लो तो इन्होंने आगे से मुझे बोल दिया कि मेरा मोक्ष नहीं होगा अगर तुम अटक गई तो उन्होंने बोला कि ऐसे नहीं होते हैं रिदम जो असली गुरु होते हैं उनको किस बात की टेंशन होती है उनके तो कितने वो होते हैं तो ये बात हुई तो उन्होंने करना वही था गायत्री मंत्र के साथ जो संस्कार होना था पर मेरा भाग्य अच्छा है क्योंकि मैंने महादेव को बोला हुआ है तो वैसा मेरा कहीं प अटका नहीं सामने वाले व्यक्ति ने ही बोल दिया कि मेरा मोक्ष नहीं होगा अगर आप अटक जाओगे तो हमने बोला ये कैसे बात हुई कि मतलब मैं गुरु भी उसको बनाऊ ना जो निडर हो है ना
00:48:02:04 कि निडर निडरता होनी चाहिए जैसे हमारे गुरुदेव है ड़ते हैं वो उनको किसी का डर नहीं है क्योंकि वो धर्म की बात करते हैं वो धर्म के लिए हैं ऐसा व्यक्तित्व है उनका तो मुझे व्यक्तित्व खोज रही थी मैं तो ऐसा हुआ हमारे साथ तो वो संस्कार तो हुआ नहीं और फिर जब गुरुदेव के साथ दीक्षा हुई और वहां पर चातुर्मास में भी और जब मैं बैठ के सोचती हूं गुरुदेव ने लाखों की लाखों लाखों लोगों की दीक्षा अभी तक कर दी होगी और उन्होंने कभी नहीं बोला होगा अरे मेरा मोक्ष नहीं होगा मैंने इसको दीक्षा दे दी अब ये जाके कुछ उल्टा पुल्टा करेगा तो तो ये बहुत बड़ा डिफरेंस है उस व्यक्ति में जो बोलता है कि वह गुरु है बट वोह गुरु है नहीं तो ये मतलब स्टोरी थी तो ऐसी कुछ चीजें थी जैसे कुछ मंत्र थे जिसका पहले हम उच्चारण करते थे जैसे महामृत्युंजय मंत्र हो गया गायत्री मंत्र का उच्चारण भी था और मतलब एवरी डे नहीं था बट था मतलब हमें पता ही नहीं था कि ऐसे नहीं करते हैं और प्रणव का उच्चारण था बहुत था आपको कुछ वीडियोस अभी भी मिल जाएंगी इसम मेरा इसमें मेरी वाली स्टोरी को ध्यान रखिएगा हां आपकी
00:49:17:14 वाली स्टोरी को मुझे गुस्सा तो आया था आपके ऊपर थोड़ा सा उस समय हम बोले अरे तो बात ये थी कि हम शिवांश से पूछते थे कि शिवांश क्या यह ठीक है या यह गलत है कि यह बात हमें कैसे रखनी चाहिए इसमें क्या सिद्धांत होगा नहीं होगा तो हमारी सहायता करते थे अब इन्हें पता था कि हम प्रणव शक्ति प्रणव करके बोलते हैं वीडियो के एंड में आप आप लोगों को अभी भी कुछ कुछ वीडियोस वहां पर मिल जाएंगी बट एक टाइम के बाद अब आपको नहीं मिलेंगी कि हमने उसको बोलना बंद कर दिया बट उसको मैंने रखा भी इसलिए है क्योंकि एक परिवर्तन है तो हमें अपना परिवर्तन दिखाने में कोई वो शर्म की कोई बात नहीं है उल्टा सीखने की बात है तो अब हम ये बोलते थे एक बार इन्होंने हमसे पूछा कि अच्छा आप ये क्यों बोलती है तो हमने अपनी पूरी फिलोसोफी बता दी कि अच्छा ये प्रणव शक्ति प्रणव बोलने के पीछे मेरा ऐसा भाव है इसको ये सुन के मेरे को ऐसा लगा एक गाने के ऊपर था उसकी वीडियो भी है तो हम बोलते थे पर इन्होंने कभी हमें नहीं बोला कि ये नहीं बोलना है और हम दीक्षा के लिए गए और उससे पहले कुछ ऐसा हुआ कि यह मेरे दिमाग में बात आई
00:50:32:21 कि अच्छा अगर नहीं बोल सकते तो फिर हम यह भी नहीं बोलेंगे और मैंने गुरुदेव से मेरा पहला प्रश्न गुरुदेव से जयपुर में यही था कि यो योग करते हैं हम ऋषिकेश में और सबसे ज्यादा उच्चारण अगर किसी चीज का होता है तो वो प्रणव का ही होता है जिनको प्रणव नहीं पता है उनके लिए प्लीज लिख दीजिएगा कि प्रणव क्या है है ना उनको समझ नहीं आएगा कि प्रणव क्या है तो ऋषिकेश में सबसे ज्यादा उच्चारण ही प्रणव का है और मैंने बोला अरे अब क्या होगा अब ये नहीं करेंगे तो क्या करेंगे एक आदत है ना एक आदत है और अब उसकी मैं बोल पूरा एक सिस्टम बना हुआ है उसी पर पूरा सिस्टम बना हां उसपे पूरा सिस्टम बनाया और फिर मैंने सोचा कि अगर ऐसी बात है तो कोई मना क्यों नहीं करता है मेरा पहला प्रश्न भी गुरुदेव से यही था तो उन्होंने उसका उत्तर भी दिया गुरुदेव ने कि नहीं कर सकते हैं कि ऐसा नहीं है अब उसके बाद मेरे जितने और प्रश्न थे तो वहां पर जो मठ में सब महाराज जी थे और बाबा थे उन्होंने मेरा और उत्तर दिया उसके बाद हमने शिवांश को बोला कि आपको पता है कि प्रण का उच्चारण हम नहीं कर सकते हम इतनी देर से ये गलती कर रहे थे तो ये हमें बोलते हैं चलिए बहुत बढ़िया हुआ
00:51:47:26 भगवान नेरी सुन ली तो फिर हमको हुआ कि अरे आपने बताया प्रणव वाला है ये आपका पहले क्लियर हो गया था दीक्षा बाद में हुई थी वहां पर भी आपने प्रश्न किया था तो एक दिन आपका फोन आया था मेरे पास हा आपकी किसी फ्रेंड ने आपको जो है टोका था कि फिर तू यह क्यों बोलती है हां हा गायत्री मंत्र को रिलेटेड वो वो कुछ था आपका फोन आया था कि वो हमारी एक मित्र थी आसाम की मित्र है याद आया हमें उसने मतलब मेरी उससे बात हो रही थी तो उसको मैं यही समझा रही थी कि हमें गायत्री मंत्र नहीं करना चाहिए और जो भी उसके टेक्निकल पॉइंट्स थे वो तो फिर उसने कहा कि अच्छा गायत्री मंत्र नहीं कर सकते तो फिर हमें यह भी नहीं करना चाहिए प्रणव का फिर मैंने एकदम मैं सोच में डूब गई मेरा पहला दिन मेरी दीक्षा नहीं थी ना पहले मैंने उनसे प्रश्न पूछा और उसके बाद मेरी दीक्षा हुई थी मेरा प्रश्न पहले था गुरुदेव से और दीक्षा मेरी बाद में हुई थी फिर उस समय मैंने आपको फोन किया था जब आपने बोला कि हां नहीं बोलना और हमने आपको बोला था कि अरे आपने हमें बताया क्यों नहीं हम आपकी बात सुनते पर आपको था कि वो एक नॉर्मल नेचुरली हो तो अच्छा रहेगा है हा उसम गुरुदेव कहते हैं कि
00:53:03:09 वो एक ही दिन में देसी घी नहीं पिला देना चाहिए थ सही बात है सही बात है नहीं पर आपको पता है गुरुदेव ने दिए है क्या करना है कैसे करना है उन्होने दे रखे हैं जैसे रिस्क वाला मामला भी है ना रिस्क आपने बोला ना कोई है जो मतलब फ्रंट में आ करके इतने रख रहा है तो अब तो खैर आदत हो गई है मगर जब हमने शुरू शुरू में वीडियोस बनाए थे स्कोन की तरफ से आज भी गालियों भरा हुआ है मेरे पास कॉल डाला हुआ है उसमें पुलिस की धमकी मार देने की धमकी मतलब कई तरह की धमकियां उसमें अब वो पे नंबर से करेंगे उसको कुछ कहा नहीं जा सकता मगर आए थे मेरे पास थ्रेट कॉल्स आते थे तो शुरू में तो थोड़ा सा लगा भी हां कुछ आ रहा है थट कॉल्स आ रहे हैं अब अब खैर अब एक वो हो गया है कि जब भी हम कोई विस्फोटक वो डालते हैं ना इस वीडियो सनसनी खेज वाला तो उसके बाद कुछ दिनों तक 10 15 दिनों तक उसके उसको लेकर के हमारे ऊपर हमें थ्रेट कॉल्स वगैरह आने ही है रामपाल वाला एक डाला है वो तो साल भर से अभी तक आते हैं कभी-कभी रामपाल वाले रात में 11 एक बजे भी फोन करते
00:54:19:18 हैं नहीं पर मुझे एक बात नहीं समझ आती है गुरुदेव से सारे सूत्र प्राप्त है गुरुदेव से सार जी जी बोलिए आप ही बोलिए नहीं नहीं हम आपकी इसी बात पर बोल रहे थे कि हमें यही नहीं समझ आता है कि बातें वही बात है ना बात शास्त्र की करनी है उन्हें पर फिर जब शास्त्र की बात में उनको बोले कि आप गलत कर रहे हो तो फिर वो गालिया अरे तुमको सीखना चाहिए बस बात मान लो खुश रहो कि कोई तो बता रहा है बट ऐसा नहीं है लोगों का एकदम नहीं
00:54:54:06 है गुरुदेव से आपको प्र है सूत्र उन्होंने बना मतलब जब भी कोई समस्या होती है तो जैसे भगवत गीता के श्लोक याद आते हैं तो उसी की सरल व्याख्या करने वाला गुरुदेव का कोई ना कोई वक्तव्य भी याद आ जाता है हा तो जैसे जैसे इनका भगवान श्री कृष्ण का भगवत गीता में कर्मन वादी का रस्ते मा फले सु कदाचन उन्होंने कह दिया और गुरुदेव का वक्तव्य क्या याद आता है जब तक नौका डूबती नहीं तब तक तुम्हारा काम है खेते रहना खेते रहना य गुरुदेव का वक्तव्य तो ऐसे ही उनके कई सारे ऐसे सूत्र है जो सूत्र में पिरो देते हैं बात को यह मतलब उनकी शैली य वाली बहुत वो कर देती है व्यक्ति को मतलब बिल्कुल एकदम से स्तब्ध हो जाए एक सूत्र में बहुत जटिल समस्या जो है व सुलझ जाती जैसे जीव की चा का वास्तविक जो विषय है सच्चिदानंद उसी का नाम ईश्वर हा सर बहुत जटिल समस्या को बहुत सूत्रा क्मक बताते हैं और उन्हीं का नाम आचार्य होता है उन्हीं का नाम प्रामाणिक आचार्य होता है जो बड़ी-बड़ी समस्याओं को सॉल्व कर देते हैं तो एक मैं इस परे आपसे
00:56:09:18 थोड़ी सी बात पूछना चाहूंगा कि आप जब ये नहीं जानती थी कि गायत्री मंत्र का उच्चारण नहीं करना है या प्रणव का उच्चारण नहीं करना है तो आप ऐसे लोगों को देख रही थी कि वो गायत्री मंत्र के उच्चारण के लिए परंपरा प्राप्त आचार्यों को कोस रहे हैं कोस रहे हैं बुरा भला भी कह रहे हैं और यह जो है ना क्या कहते हैं इनिन ये हा दीक्षा लेना इशन जने भी हो रहा है स्त्रियों का जने भी हो रहा है यह सब आप देखती थी हालांकि हमने इधर बहुत ही खत वाले वीडियो भी बनाए कि जैसे की लोग ताली बजा रहे हैं वाह वाह वाह वाह वाह आपका कांग्रेस कांग्रेस आपका जने हो गया तो इन सब चीजों को आप कैसे देखती है और अभी जब आप का प्रोनंसिएशन नहीं कर रही है और जो प्रणव के उच्चारण की जगह पर आपको गुरुदेव ने दूसरा उच्चारण बताया जो दूसरा उच्चारण जो आप कर सकते हैं वो भी प्रणव माना जाता है मगर वो क्या कहते हैं हा आगम के अनुसार वो प्रणाम माना जाता है ना आगम शास्त्र तो फिर आप आप उन लोगों को कैसे देखती है जो इस तरह से जो परंपरा प्राप्त आचार्य को कोस रहे
00:57:24:18 हैं और जो एक प्रोग्रामिंग कर दी गई है जैसे वो वो वाली मिनरल वाटर वाली बात है ना भाई पहले में पानी में थोड़ा सा केमिकल मिला दिया जहर मिला दिया कुछ मिला दिया वहां के लोग बीमार पड़ने लगे फिर कहा देखो तुम पानी से बीमार पड़ रहे हो इसलिए तुम मिनरल वाटर पियो अपना मिनरल वाटर बेचने लग तो इसी तरीके से गायत्री मंत्र जो है वो तुमको नहीं बोलने दिया जा रहा है देखो कितने कठोर है हम तुम्ह गायत्री मंत्र देते हैं गायत्री मंत्र को बोलना जीवन का उद्देश्य नहीं जीवन का उदेश मोक्ष एकदम सही बात और उसके कई सारे मार्ग गायत्री मंत्र को ही बोल कर के मोक्ष नहीं है गायत्री मंत्र उसका एक उसका प्रतिपादन कराने वाला एक समग्र रूप से उसकी व्याख्या कर देने वाला एक मंत्र जरूर है जिसको भगवान श्री कृष्ण ने का मगर उसी से मोक्ष मिलेगा ऐसा तो नहीं कहीं लिखा है है ना तो इसको आप कैसे देखते हैं कि यह जो प्रोग्रामिंग की गई है हमारे समाज की जिसके कारण से जिनसे हमें वेद आदि शास्त्र मिल रहे हैं उन्हीं को कोस रहा है जिससे मंत्र मिल रहा है उन्हीं को व्यक्ति कोस रहा है और फिर कर रहा है यह वो कांग्रेस हो रहा है और फिर आपके जीवन में एकदम से परिवर्तन आता है और फिर आप उसको छोड़ देती है फिर आपके जीवन में क्या परिवर्तन
00:58:39:19 आते इसको थोड़ा सा एक जो है फ्रेम में लीजिए कांग्रे वाले लड़के हम नहीं है साथ कांग नहीं हुआ था हम बच गए थे उसकी बात पहले बोल देंगे सबसे पहले तो मुझे यह लगता है कि कर्म का रहे हैं वो लोग ना क्योंकि और क्या ही होगा जो वो ऐसे कर्मकांड में फंसे हैं जिसमें गुरु की ही निंदा हो रही है सिर्फ ये नहीं होता है कि मैंने गुरु बना लिया तो मैंने उसकी मतलब अब मैं इनकी निंदा नहीं करूंगा है ना एक ढोंगी और गुरुओं की निंदा ना करना ढोंगी ढोंगी और गुरुओं में अंतर और फिर गुरुओं की निंदा ना करना बात यह है और कौन सा सिद्धांत कहां तक अप्लाई होगा कब तक अप्लाई होगा इसकी समझ भी जरूरी है कि अब कोई बोल दे कि मोह माया में कुछ नहीं रखा है अरे वो सिद्धांत कब अप्लाई होना है कहां तक अप्लाई होना है इसकी समझ परक भी तो होनी जरूरी है ना नहीं तो फिर आपका फायदा क्या हुआ अब बात करते हैं ऐसे लोगों की कि इनका एक मिनट यह हमारे यहां पर ठंड और गर्मी मिक्स चल रहा है अभी तो यह बेचारी एक ठंड में आके हमेशा शाम को बैठ जाती है मैं उसको कुछ बोलती नहीं हूं कि ठीक है समय चल रहा है
00:59:54:25 पर एनीवे बैक टू द टॉपिक सॉरी सॉरी सभी व्यूवर्स के लिए ये एक ही है ये हर बार शाम में आ रही है अभी कुछ दिनों में इसकी मृत्यु हो जाएगी क्योंकि थोड़े दिन की इनकी जीवन होता है तो वो भी है जब हम बात करते हैं उन लोगों की जो फॉलो नहीं कर पा रहे हैं पहले तो उन्हें मिला नहीं है दूसरा स्पेशली वो लोग होंगे जो एकदम छाती ठोक के बोलेंगे जिन्होंने इस पूरे व्यवसाय व्यवसाय बना दिया है इस पूरी चीज को ना मतलब वह जाने जाते हैं यह बोलने के लिए तो अब उन्होंने एक आइडेंटिटी बना दी है उस आइडेंटिटी को वो पीछे छोड़े तो उनके फॉलोअर्स उनके व्यूवर्स उनकी वा वाई और जो उनको फंडिंग आती है जहां से भी आती है जितनी भी आती है जिस तरह से भी आती है वह चली जाएगी है ना लाइक्स और कमेंट्स चले जाएंगे पर वो यह भूल जाते हैं कि आप ही तो जाएंगे सही जगह वालों से सही जगह से बट एक वो आइडेंटिटी क्रा दूसरी बात यह है कि जो मैंने पहले बोला कि उनका कर्म नहीं बन रहा है अभी ना उनका कि वो आए और अगली बात यह भी है कि कभी-कभी
01:01:10:09 ब्रेन वाशिंग का लेवल इतना स्ट्रांग हो चुका होता है और क्योंकि आइडेंटिटी भी फॉर्म हो चुकी है कि मैं गलत हूं यह मान लेना आसान नहीं लगता है क्योंकि सामने वाला भी भगवा वस्त्र में है सामने वाले काम भी कर रहे होंगे क्रांतिकारी काम का करते हैं तो उसके लिए रिस्पेक्ट है सबको रिस्पेक्ट है जो अच्छा आप काम कर रहे हैं उसके लिए पर वह व्यक्ति की समझ जो है वही इसीलिए मैं बोलती हूं कर्म है उसके ग्रह बैठे हुए हैं अभी उसे समझ नहीं आएगा जब हम यह अब इस बात के अंदर हम यह चीज को बोले कि जब हम यह करते थे हम अपनी बात कर सकते हैं कि मैंने यह किया और नहीं किया अब उसकी बीच में अंतर क्या रहा सिंपल सी बातें हैं जब यह जो व देख भी रहे हैं जो इस का उच्चारण करते हैं या ऐसी परंपराओं में है जो शास्त्रीय नहीं है जिसके कारण आप यह सब कर रहे हैं तो आप खुद से प्रश्न पूछिए क्या आपके साथ ऐसा होता है कि आप कुछ काम करने जा रहे हैं बट वह काम नहीं हो पा रहा है और आपके जीवन में फालतू लोग ही आ रहे हैं और आपका काम बनते बनते नहीं बनता है आप समस्याओं में उलझे रहते हैं और जिससे आप कटते जाते हैं हर चीज से हर व्यक्ति से कटते हैं हर रिश्ते से कटते
01:02:25:10 हैं हर कार्य से कटते हैं और एक तरह से अंदर एक पागलपन सा महसूस करते हैं यदि आप ऐसा कभी भी महसूस करते हैं तो इसका कारण है आध्यात्मिक रोग आपको आध्यात्मिक रोग हो चुका है जिसका जिसको कोई देख नहीं सकता है पर सुन के समझा जा सकता है और उसके अंदर में प्रश्न सिर्फ यही है कि आप कौन से मंत्रों का उच्चारण कर रहे हैं आप कौन सा पाठ कर रहे हैं क्या आप उसमें दीक्षित है क्या आपको उसका लाइसेंस मिला है या नहीं क्योंकि आप बिना गाइडेंस के और जो आपका मतलब क्षमता से बाहर की चीजें कर रहे हैं तो चोट आपको लगेगी ही अब होता यह है कि जब हम मंत्र उच्चारण करते हैं तो मंत्र दिखता नहीं है साउंड की तरह बोल के वह छूट जाता है जितने देर बैठे हैं तब तक तो एक एनर्जी फॉर्म बन गया अब जो एनर्जी जो है वो ऑलरेडी एजिस्ट कर रही है हमने सिर्फ उसके अंदर अपने आप को उससे जोड़ा अब क्योंकि आपने उसको अपने से जोड़ लिया है तो वह घूम के आपके पास ही आएगी जिधर से भी आपने जिससे जुड़ा है तो आपके पास ही वो आएगी पर आपकी क्षमता ही नहीं है ना उसको रखने की क्योंकि आपने मैनुअल तो फॉलो किया
01:03:40:14 ही नहीं है कि हम यह करना है और यह नहीं करना है अब इसमें आप क्या देखोगे प्रणव का उच्चारण हो गायत्री मंत्र का उच्चारण हो जो ये सिंगिंग मंत्र अवेलेबल है इली य प तो अब व्यक्ति 10 तरह की चीजें कर रहा होता है ऐसे व्यक्ति एक चीज नहीं करते हैं 10 तरह की चीजें कर रहे होते हैं आज यह मंत्र बोलूंगा कल वो मंत्र बोलूंगा परसों यह मंत्र बोलूंगा क्यों क्योंकि खुद के ईष्ट का कुल देवी देवता या जिसकी भी उनको साधना करनी है उसका एक मंत्र ही नहीं है कि मुझे इसको सिद्ध करना है मुझे इस मंत्र को ही जपना है इसको ही रटना है और इतनी सारी चीजें कर लेते हैं ना शुद्धि अशुद्धि ये सब चीजों का भी ध्यान है नहीं कौन सी माला होगी कौन सी माला नहीं होगी तो इस तरह की स को अट्रैक्ट करते हैं और अब मैंने य जितनी सारी बातें बोली हैं जब मैंने यह सब चीजें करनी बंद की है यह सब चीजें भी बंद हो चुकी है मेरा जीवन बहुत सरल बन चुका है मुझे पता है कि मुझे कौन सा मंत्र करना है कितनी देर करना है उसके लिए अशुद्धि और शुद्धि शुद्धि और शुद्धि के अंदर मुझे किन बातों का ध्यान रखना है 10 चीजें करने की कोई आवश्यकता ही नहीं है और जहां तक गायत्री मंत्र की बात कर रहे हैं हम अरे गायत्री
01:04:55:20 मंत्र का समझ आनी जरूरी है ना तो सार तो हम पढ़ ही सकते हैं आप सार पढ़िए पर बोलना क्यों है मेरे को मुझे क्या मिल जाएगा मुझे जो मेरा मंत्र जो मुझे करना है मेरे कुल देवी देवता ईष्ट देवी देवता या जो मेरी जो साधना है मुझे उसे सिद्ध करना है ना उसके अंदर में ऐसा तो है नहीं कि जब हम बात ही करते रहे हैं कि परमात्मा के अलग-अलग रूप और हर एक से हमें मिल रहा है मोक्ष तो हम अपनी सुई को क्यों अटका के र जब हम उनको प्रैक्टिकली एक्सप्लेन भी कर पाते हैं कि यह सब कारणों से यह आप मत कीजिए तो ना सुनने की भी शायद उनमें क्षमता नहीं है कि आपने कैसे बोल दिया है ना मैं आपको एक और बात बताती हूं शिवांश हाल फिलहाल में मेरे एक मित्र है उनको वह क्या करते हैं ना पंचाक्षरी मंत्र वो बोल देते हैं तो उनको मैंने बोला कि पर वो बोल सकते हैं क्योंकि वो बोल सकते हैं वो मंत्र उनके वो एलिजिबल पर मैंने उन्हें बोला कि ठीक है आप बोल रहे हैं पर आप चलते फिरते जैसे ग्रीटिंग नहीं होती जैसे मैं आपको बोलू राम राम आप ऐसे मत बोला करिए क्योंकि फिर वह सामने वाले को इनेबल कर देता है बोलने के लिए और सामने वाले के मुख से निकल जाएगा क्योंकि
01:06:10:21 सामने वाले को पता नहीं है कि उसे बोलना है या नहीं बोलना है तो व्यक्ति ने बोला कि अरे कलयुग चल रहा है हम मतलब ठीक है मैं सब करने के बाद क्षमा मांग लेता हूं और हमें भगवान का इनाम ले रहा हूं मैं यह सोचता हूं कि मैं माता की गोद में बैठा हूं और वह सब देख लेंगी भाव बहुत अच्छा है है ना भाव बहुत अच्छा है कि मैं माता की गोद में बैठा हूं बट यह भगवान भाव के भूखे हां तो यह बहुत सारी चीज आ जाती है जब हम किसी को यह बताते हैं यह मत करो और यह करो उन्हें लगता है कि हम उनको गलत बोल दे रहे हो कि वो कुछ गलती कर रहे हैं यह समझने की बजाय कि अगर आपको सच में कोई ऐसा व्यक्ति मिल रहा है जो आपको बोल रहा है यह मत करो और मेरे से भी मत पूछो गुरु के पास जाओ और उनसे पूछो वो बताएंगे तो उसका थोड़ा समर्थन करना चाहिए लोगों को क्योंकि एट द एंड ऑफ द डे जब ये जो मंत्र यह सब पढ़ रहे हैं बोल रहे हैं देखिए सोशल मीडिया पर ना सुंदर सी फोटो मतलब मैं मैंने ऐसा व्यक्त अपने जीवन में मेरा समय ऐसा निकला है कि जब मैं बहुत परेशान थी मैं बहुत रो रही थी और जो फोटो मैं डाल रही थी उस समय
01:07:25:21 मैं बहुत खुश थी किसी को पता ही नहीं चल सकता मेरे जीवन में क्या समस्या थी पर अगर आपके समस आपके जीवन में ये सूक्ष्म समस्याएं हैं जो आपको समझ नहीं आता क्यों होती है तो आपको थोड़ा ध्यान देना चाहिए कि शायद आप अपने पूजा पाठ के क्रम में ये गलतियां कर रहे हैं जो आप जब छोड़ देंगे तो यह सब समस्याएं भी चली जाएंगी आपके पास कोई फालतू व्यक्ति आएगा ही नहीं अब मैं अब मैं बोलू मुझे सन्यास चाहिए मेरा मंत्र बोल रहा है कि मुझे सन्यास चाहिए उसका भाव वही है मंत्र का वही कोड है वो कोड ही सन्यास का है और फिर आके मेरे को कोई धोखा दे जाए और मैं बोल मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है मेरे साथ धोखा क्यों हो रहा है मैं तो इतनी साधना कर रही हूं तो फिर बेवकूफ मैं हूं कोई और नहीं जी ये जो आपने जो मित्र की बात बताई इसमें मैं तीन वो प्राप्त है दृष्टांत गुरुदेव से और कृपा जी महाराज जी से प्लीज प्लीज रखिए क्योंकि हम चाहते हैं हम अपने मित्र के साथ य शेयर करें वो बहुत अच्छे व्यक्ति है बस जैसे उन्होंने बोला कलयुग ये कलयुग तो इसमें ये वाली बात आती है कि कपाती जी ने बोल कपाती जी महाराज बोला करते थे कि गर्मियां जब पड़ती है भीषण
01:08:41:12 गर्मी तो हमें मालूम है कि ये गर्मी है गर्मी तो पड़ेगी ही फिर भी हम गर्मी से बचने का प्रयास करते हैं ये सोच के हाथ प हाथ धर के नहीं बैठ जाते नहीं गर्मी है गर्मी तो पड़ेगी हम पंखा चलाते हैं अगर पंखा नहीं हुआ बिजना डला हैं कुछ तो करते हैं गर्मी से बचने का प्रयास करते हैं तो यह कलयुग है इसलिए हम हाथ प हाथ धर करके बैठ जाए तो यह तो कोई औचित्य नहीं जब आप सर्दी से बच रहे हो आप गर्मी से बच रहे हो तो आपको कलयुग से भी बचने का प्रयास रत होना चाहिए सही है ना दूसरी बात वो भाव वाली तो भाव वाले में भी उन्होंने एग्जांपल दिया था कपाती जी महाराज का एग्जांपल है एक मित्र जो अपने मित्र को पत्र लिखता है कि मैं कल की ट्रेन से 2 बजे पहुंच मेरे पास बहुत सारा सामान होगा तो आप मुझको लेने आ जाना तो वो खुश हो जाता है अपने मित्र का पत्र पढ़ के और वो जो है मार अपने घर को सजा देता है ढोल नगाड़े बुलवा लेता है आज से लेकर के कल न बजे तक जब उसकी ट्रेन आनी है वह इतना कर देता है कि जैसे वहां कोई बहुत बड़ा कोई सेलिब्रेशन हो रहा हो ब से एक गलती हो जाती है भाव चक्कर में जिस समय
01:09:57:06 उसको लेने जाना था अपने मित्र को जो ट्रेन से उतर रहा था वो भूल जाता भा विभोर रो कर के नाच रहा है नगाड़े भज रहे हैं सब हो रहा है वो मित्र जो था बहुत सारे समान के साथ उतरता है उसको मालूम ही नहीं था घर का वो ढूंढ रहा है पूरे शहर के चक्कर काट रहा है उसको रात हो गई आते आते वो उसका मित्र नाच रहा है 10 11 बजे आ रहा है वो मित्र और वो देख रहा है मेरा फ्रेंड पागलों की तरह नाच रहा है अब उसको क्या आएगा क्रोध आएगा गुस्सा आएगा क्या है उसने पूरे शहर के चक्कर काट लिए सामान ो के लाया तो इसी तरीके से जो भगवान है उन्होंने उनके लिए किस प्रकार का व्यवहार उन्हें पसंद है वह आपको लिख कर दिया है शास्त्र कि आपको मेरे लिए यह करना है उन्होंने कहा है कि श्रुति स्मृति मेरे मेरी आज्ञा है शास्त्र अगर आप उस पर ही ध्यान नहीं दोगे तो भगवान को कहां से अच्छे लगोगे आप सही बात है और इस पर हमने एक एक प्ले भी लाने वाले हैं आने वाले टाइम में मैंने आपको तो शेयर किया था बता दू एक नाटक हम लोग लाने वाले भगवान तो भाव के भूखे हैं जिसमें व्यक्ति ऐसे ऐसे कर्म करने का प्रयास करेगा इस नाम पर कि भगवान तो भाव के भूखे हैं अगर हम लोग इसके पीछे ही पड़ जाए ना भगवान तो भाव के भूखे हैं तो क्या जरूरत
01:11:12:06 है शास्त्र की मर्यादा की तो एक दिन ऐसा आएगा ना जब एक लड़का अपनी बहन से विवाह करने लगेगा और उसको जाकर टोको ग कि नहीं ये विवाह मत करो य अधर्म है कहां लिखा है कौन कह रहा है क्यों ना करो शास्त्र में लिखा है अरे भगवान तो भाव से मिलते हैं ना उनको क्या मतलब कि मैं बहन से विवाह करू कि ना करू भगवान तो भाव से मिलेंगे तो करो तो भगवान मर्यादा से मिलते हैं और वो मर्यादा हमें प्राप्त थ शास्त्र से तो यह था काफी सारी बातें हो गई मेरे ख्याल से और कुछ हमारे दर्शकों को वैसे हमारे जो दर्शक है वो एक्शन ज्यादा प्रेफर करते ये बहुत सिंपल स्वीट और बहुत अच्छी बात लाइट हा लाइट लाइट कन्वर्सेशन हमारे दर्शक अपेक्षा नहीं करते हैं इस चैनल से इस चैनल प सीधे गदर चैनल पर है वो वाली फिल्में नहीं चलती है लाइट वाली हम साथ साथ है हम आपके कोन वाली नहीं इस चैनल पर गदर चलती है घातक चलती है बॉर्डर चलती है एलओसी चलती है ये सब चलती है इसमें तो आप और कुछ बताना चाहे आप आए तो
01:12:27:09 है बहुत अच्छी अच्छी चीजें जानने को मिली है और क्योंकि हम लोग तो बोलते ही है मगर आपके द्वारा जब वही चीजें जो आपकी शैली में जो प्राप्त हो रही है तो जाहिर सी बात है इससे बहुत सारी जो है क्या कहते हैं उसमें जागरूकता आएगी समाज है ना हा जी आप बताए कुछ अच्छी अच्छी बात है आई होप व्यूवर्स के लिए भी बहुत मतलब नया है कि एकदम शांति शांति चल रही बट हमें लगता है हमने कुछ कुछ लोगों की बातें जो की है वो तो मतलब जरूरी थी वो हमने कि है मैं एक चीज जरूर बोलूंगी कि मुझे क्यों पसंद है यह पेज प और जितने भी लोग टीम में है ना आवान के कि बातें जब होती है स्टीम मतलब हम कहते हैं कि अ लॉट ऑफ स्टीमी टॉक्स आर हैपनिंग बहुत गुस्से वाला धु धुआ दार बातें हो रही है बट उसके अंदर जो एक बात बोली जाती है ना कि अभद्रता मत कीजिए अभद्र भाषा मत यूज कीजिए वो बहुत इंपॉर्टेंट है और मैं यह बोलूंगी किसी को भी कि देखिए मैंने भी सीखा है है ना आज मैं जैसी हूं मैं कल वैसी नहीं थी तो जब आप किसी महिला को
01:13:43:00 या किसी लड़के को पुरुष को लड़की को एक जगह देखें तो जब अगर तो आपसे भद्र भाषा में बात नहीं कर रहे पहली बात अगर वो आपसे भद्र भाषा में बात करर ने छोड़ी है आप हट जाइए वहां से है ना कि कोई कूड़ा फेंक रहा है तो हमें हट जाना चाहिए वो फेंकने वाला तो फेंक ही रहा है ऊपर से बिना देखे हु बस फेंक रहा है पर आपको यदि कोई ऐसा मिले तो उसके साथ थोड़ा विनम्र रहिए कोमल रहिए और एकदम कोई पिक्चर परफेक्ट नहीं होता है मैं भी धीरे-धीरे सीख रही हूं मुझे तो लगता है मुझे बहुत कुछ अभी सीखना ही है और किसी के चेंज को एक्सेप्ट करिए है ना धीरे-धीरे करके कि बस कुछ लोग वो नहीं करते शिवांश की अभी जैसे आगे जाकर जाएंगे तो पुरानी एक फोटो दिखा देंगे यह देखिए यह व्यक्ति का सच यह व्यक्ति ऐसा है अरे मेरे साथ हुआ है मेरे साथ तो हुआ मैंने तो अपनी पुरानी और नई दोनों जीवन शैली दिखा दी थी ऑलरेडी मगर शायद उनको दोष देखने वालो को दिखा नहीं होगा तो मेरे साथ तो ऐसा हो गया इवन उन्होने तो हमारी फैमिली को भी घसीट लिया फैमिली की कुछ प पिक्चर मिल गई तो उसको ले लिया छोटे वाले भाई को ले लिया उसका जो प्रकल्प है अपना आजी पार्जन का माध्यम
01:14:58:08 है उसको भी घसीट लिया सब कुछ घसीट लिया बस वो जने का शास्त्रोक्त विवरण नहीं दिया हा तो उ उन लोगों के लिए भी क्योंकि आई थंक देखते तो होंगे ही है ना वो तो देखते तो होंगे उनके लिए भी मैं यही बोलूंगी कि आप अगर सिद्धांत से सिद्धांत नहीं रख सकते तो आप किसी की लाइफ में पर्सनल मत हो जाइए क्योंकि मैं यह बात जरूर बोलूंगी जब हम गोरी गोरी लड़कियों के इंटरव्यू लेकर बोल सकते हैं कि देखिए इन्होंने हमारे सनातन धर्म को अपनाया तो हमारे कुछ पुराने जीवन क्योंकि हम अगर माता के गर्भ से सिद्ध होकर होते तो कहीं और होते है ना तो जब हम अपने जीवन एक शैली है तो उससे जब हम आगे बढ़ते बढ़ते हम बन रहे हैं ये आज जो हम वीडियो शूट कर रहे हैं आने वाले पांच सालों में हम भी बहुत अलग होंगे आप भी बहुत अलग होंगे बट एकदम और अच्छी और अच्छे स्तर पे और आगे बढ़ेंगे है ना जी तो तो जब हम ये जब हम गोरे लोगों का है ना चाहे लड़की हो या लड़का उनको इतना प्रेस कर सकते हैं तो कोई हमारे पुरानी फोटो या कोई वीडियो को उठा के अरे जीवन
01:16:13:10 था ना पर आज देखेंगे ना आपकी आज वो व्यक्ति कहां खड़ा है यहां तो बोलिए कि पहले जी वो देखो भक्त था और अब वो नाली में पड़ा है शराब पीए ऐसा तो कुछ नहीं है तो मुझे ये लगता कि आप फोटो उठाइए पर आप यह बोलिए कि देखिए इसको कहते हैं जर्नी यह हमने यह व्यक्ति ने अपने ऊपर किया है काम कि यहां से यह व्यक्ति यहां पर आया तो आपको कितनी इंस्पिरेशन उससे मिलती है कि हां यह भी एक जीवन है बदल सकता है क्योंकि लोग लोगों को लगता है कि शिफ्ट अलग ही है जैसे कुछ लोगों को लगता है कि जो शास्त्र की मर्यादा की बात करते हैं वो बाबा या सन्यासी होते हैं ऐसा कुछ नहीं है शास्त्र और मर्यादा जो भी उसकी है वो एक क्या कहते हैं ब्रह्मचारी से लेकर गृहस्थ से लेके वनप से लेकर सन्यास से लेकर सब पर अप्लाई है पशु पक्षी पर भी अप्लाइड है तो आई थिंक उस चीज पर हमें ध्यान देना चाहिए बाकी तो आई थिंक आप भी और इवन हम भी हम ऐसा कोई अपना जीवन छुपाते नहीं है कि यह था देखिए और फिर देखिए कि गति कहां प हुई है गति हो रही है जब तक गति हो रही है तब तक बढ़िया है गति रुक गई है तो फिर बात मुश्किल है है ना जी आपने ये वाली बात बहुत सही कही है कि अगर
01:17:29:02 कोई पाश्चात्य धरती का निवासी है मतलब ये गोरी लड़कियां गोरे यह लोग अगर हमारे भजन गाने लगेंगे और हमारी चीजों में आ जाएंगे तो हम बड़ा प्रेज करेंगे ये उन लोगों में से हैं जो लोग ऐसा करते हैं पुरानी फोटोज और नई फोटोज इर े उनके इ मगर वही पर कहीं कहीं जहां हमारे भारतीय भाई में अगर चेंज आया होगा तो उसके पुराने जीवन को लेकर के उसके नए जीवन को बर्बाद करने का प्रयास किया जाएगा नष्ट करने का प्रयास किया जाएगा उसकी टांग खींची जाएगी 90 चूहे खाके बिल्ली चली हज को ये
01:18:06:24 सब नहीं ना तो अपने चूहे का ना हम हज करते हैं हम ज श्रीराम करते हैं र इन्ही सब बातों से इन्हीं सब बातों से उभरने के लिए हमें गुरु गोविंद ग्रंथ का बल प्राप्त है हा मतलब मेरे को बहुत इंटरेस्टिंग लगी बात कि आप मतलब उस चीज को अगर उन्होने किया भी तो इसलिए क्योंकि कोई व्यक्ति शास्त्र की बात कर रहा है आर यू सीरियस मतलब यू नो इट्स लाइक व ये बोल सकते हैं दैट यू जस्ट शड दैट यू हैव नथिंग बेटर टू से दैट वाज योर मतलब टू गेट पर्सनल विद समबीत ऑप्शन जी जी है ना तो तो ऐसी स्थितियों से लड़ने के लिए ही फिर वो वाली बात आती है कि अगर व्यक्ति के पास वो भक्ति का बल नहीं होगा ना तो इतनी विपरीत सिचुएशंस में वो तुरंत क्विट करेगा टूट जाएगा जसे हां क्योंकि मैंने तो अपनी लाइफ में देखा है मुझे ऐसा बहुत अंदर से आता है कि ये जो भगवान के भक्ति मिल गई उनकी कृपा से जो भक्ति करने का एक मिल गया कि मैं उनके पास बैठ पाता हूं सवा घंटे या जो भी जो भी बैठ पाता हूं गुरुदेव के द्वारा निर्देशित जो चीजें हैं जो कर पाता हूं थोड़ा बहुत यथा सामर्थ मगर उसकी वजह से ही जो इतनी विपरीत परिस्थितियां आ जाती है लोग
01:19:21:27 गाली भी दे रहे हैं लोग क्रिटिसाइज कर रहे हैं ऐसा ऐसा बुरा बुरा क्रिटिसाइज और आपका फोटो उठा लिया पत्नी का फोटो उठा लिया और फैमिली का फोटो उठा करके दिखा दिया तो मतलब इतनी ज्यादा जो वैसे सिचुएशन अच्छा एक बात ये भी है मैं अगर अपने पुराने जीवन को देखूं मेरे जीवन में राम श्री राम जी का ऐसा वो रहा कृपा रही कि मैंने कभी दुर्व्स नहीं किए कभी ये सब चीजें नहीं है मेरी ऐसी फोटोज आपको नहीं मिलेंगी कि मैं जो है बाइक पर जो है घूम रहा हूं किसी को जो है घुमा रहा हूं बिना अविवाहित रूप से और ना ही मेरे हाथों में आपको यह सब मिलेगा मतलब जो अल्कोहल वाली चीज ये सब नहीं स्मोक करता हुआ कोई फोटो मिलेगा मगर जो एक सामान्य मगर दिशाहीन व्यक्ति के फोटो जो मिलेंगे सामान्य मगर दिशा बिगड़ा हुआ नहीं सामान्य मेरे हाथ में सिगरेट की फोटो आपको नहीं मिलेगी मेरे हाथ में आपको अल्कोहल की फोटो नहीं मिलेगी और जो वो आता है बिना किसी रिश्ते के जो है किसी मातृ शक्ति के साथ हा हा दिखाई देना वो आपको नहीं मिलेगा मगर एक सामान्य मगर अज्ञानी गुरु के बिना जो व्यक्ति होगा आज के समय का वो फोटो उन फोटोस को लेकर के व्यक्ति ये दिखाना
01:20:37:03 चाहता है कि ये जो आज कर रहा है ये सब गलत है क्योंकि ये ऐसा था तो ऐसा लोग करते हैं मैं जानता हूं आपके साथ भी निश्चित रूप से हुआ होगा जब आपके जीवन में ये चेंजेज आए हैं तो वो आपकी कुछ ऐसी चीजें रही होंगी जिनको उठा कर के आपका लेग पुलिंग करने का प्रयास किया होगा तो बोल देते अरे तुम तो ऐसे अब ऐसे तो बोलती हूं बस ऐसे अब क्या मतलब यही करते रहेंगे क्या इसी सिचुएशन से लड़ने के लिए ही जो भगवान श्री कृष्ण की वाणी हर जगह आपके कार जा हर जगह उनकी जो वाणी है हर जगह का आ जाती है वोह भी कहीं आपको गुरु मुख से सरलतम रूप में मिल गई हो तो क्या ही कहने जैसे भगवान ने कह दिया कि तू मेरी शरण में आजा तेरी प्राप्ति की रक्षा और अप्राप्य की चिंता मैं करूंगा और गुरुदेव कहते गुरुदेव बताते कपाती जी ने उनसे कहा था कि लोग आएंगे तुमसे कहेंगे कलयुग है किसी की बात मत सुनना बीच की रक्षा भगवान को अभीष्ट करते रहना आपको पताही गुरुदेव ने मेरे को एक प्रश्न का उत्तर दिया था पर मैं आज शेयर करूंगी क्योंकि गुरुदेव के भी बहुत सारे शिष्य भी
01:21:52:03 देखते ही हैं इसको तो अ अब क्या हुआ कि चातुर्मास के अंदर में वो भाव नहीं बरता है आपका अपने गुरु को देख के कि रोज इतनी मतलब इतना ज्ञान प्राप्त होता है तो तो मैंने सोचा कि अच्छा तो अब जब गुरुदेव का तो मोक्ष हो जाएगा पर हम तो अटके रह जाएंगे तो हमको कौन बचाएगा है ना क्योंकि अब मेरा मोक्ष होगा ठीक है गुरुदेव बोलते हैं कि पढ़ा ही रहे थे उस समय बोल रहे थे कि कलयुग है यह सोच के हमें यह कभी नहीं सोचना कि हमारा मोक्ष नहीं होगा और हमें हर समय मोक्ष की तरफ आगे ही बढ़ना है पर फिर भी मैं जितना भी आगे बढ़ रही हूं अगर मैं सोचूं कि चलो अगर कल मेरी मृत्यु होगी तो मेरा जन्म होगा एकदम होगा मुझे पता है होगा तो अब जब मेरा जन्म होगा पर गुरुदेव का तो मोक्ष हो गया होगा तो मैंने उनसे यही प्रश्न पूछा था कि गुरुदेव आपके जो शिष्य है उनका अगर मोक्ष नहीं होगा तो आप क्या उनको प्राप्त होते रहेंगे तब गुरुदेव ने उस समय बोल तो दिया था एक जनरल
01:23:07:03 आंसर दिया था पर बाद में उन्होंने बुलाकर मुझे बोला था कि देखो ऐसे ही बोला था उन्होंने सुनो सब मतलब सब उठ रहे थे बो सुनो बीज की रक्षा तो हमेशा करते ही हैं हम तो मैंने बोला अरे कि मतलब परमात्मा बीच की रक्षा अपने बीच की रक्षा करता ही है तो तब उन्होंने यह बात बोली थी तो उससे मतलब आई होप की जो सुनने वाले हैं वो भी उनको भी अच्छा महसूस हो कि क्योंकि सुखदेव जी के दर्शन हुए ना गुरुदेव को तो उस भाव में मैंने समझने की कोशिश की थी कि हमको गुरुदेव मिलते रहे है ना और अभी अगर कल मैं कल मेरी मृत्यु हो जाए तो तो मेरा तो मुझे माता है ना मुझे कैसे मिले गुरुदेव तो मेरे पास उनका वो रहेगा है ना सानिध्य तो उन्होंने बोला था कि हां ऐसे वो बीच की कि वो अपने सभी जितने भी बीच है गुरुदेव के अगर आप अच्छे हैं अच्छे रास्ते में तो आपकी रक्षा करेंगे ही तो खुश रही इस बात अच्छा अभी कुछ लोग ये भी पूछ रहे हैं आपके गुरु है कौन तो माननीय के गुरु है श्रीमद जगतगुरु शंकराचार्य पुरी
01:24:22:04 पीठाधीश्वर जी वो इनके गुरु है और इन्होंने अभी अ जयपुर में शायद उनका जन्मोत्सव था मनाया गया था वहां पर दीक्षा ली थी और अपना जीवन अभी उसके बाद चातुर्मास में गुरुदेव की सानिध्य भी इनको प्राप्त हुआ काफी लंबे समय तक और अब यह जो है उनके द्वारा निर्देशित बताए गए पथ पर अपने जीवन का यथा सामर्थ्य निर्वाह करते हुए आगे
01:24:58:20 तो शिवांश एक और बात मैं चाहती हूं कि आप ऐड करें इसके अंदर एक जब हम बात कर रहे थे ना कि गुरु कैसा होना चाहिए तो आजकल एक और चीज बहुत बढ़ रही है कि जो गुरु जीवित नहीं है है ना मतलब जिन्होंने कभी गुरु नहीं बनाया उनके लिए मैं बोल रही हूं तो वो ट्रेंड होता है ना कि हम इसको फॉलो कर ले उनका बहुत नाम है उनका समाधि स्थल है चले गए अच्छी बात है जाना चाहिए पर वो व्यक्ति क्या करते हैं कि मेरे साम में मिली हूं ऐसे व्यक्तियों से वो बोलते हैं कि मेरे गुरु यह बाबा है पर बाबा है नहीं मतलब कि वो उनसे पूछ सके प्रश्न उत्तर कर सके मेरे गुरु तो यह बाबा है बस अब वो अपने जीवन में गलत सही उनकी इंटू उनको बोल देती है तो मुझे ऐसा लगता है कि एक इसीलिए शायद परंपरा की भी बहुत वैल्यू है ना कि आपको वो मिलता रहता है वो छूटता नहीं है कि आपके पास एक गुरु जो जिससे आप पूछ सके जो आपको बता सके इस पर अगर आप थोड़ा बोलेंगे तो वो काफी लोग होती है तो जैसे जो नहीं है अब जो गुरु तो उनकी गद्दी जिसको प्राप्त हुई उन्होंने
01:26:13:21 अपना उत्तराधिकारी तो उस अपने गुरु को फिर उनके रूप में हमें देखना चाहिए जो उनकी गुरु गद्दी होती है और जिससे कि आपके जीवन में जो धर्म और अधर्म का निर्णय है ब्रह्म और अब ब्रह्म का जो निर्णय है वो आपको मिलता रहे आपके मन में जो जिज्ञासा हैं वो आपकी समाप्त होती रहे दूसरी एक बात ये है कि जैसे कुछ लोग ये भी पूछ रहे हैं कि भाई एक से ज्यादा गुरु बना सकते हैं क्या तो आप एक से ज्यादा आचार्यों के प्रति उनकी अमुक अमुक शिक्षाओं को लेने के लिए गुरु भाव रखिए और अपने गुरु के प्रति समर्पित रहिए गुरु भाव आप रखिए कोई दिक्कत नहीं है दूसरी बात ये है कि गुरु का अर्थ है जो आपकी अज्ञानता मिटा दे आपका अंधकार मिटा दे और यदि आपका अंधकार नहीं मिटा है तभी तो आपको दूसरे गुरु की आवश्यकता है अगर आपके जीवन में ऐसा प्रश्न आ रहा है कि दूसरा गुरु हो सकता है क्या इसका मतलब अभी अंधकार है अभी आपको एजेक्ट चीजें पता नहीं चली है तो इसका मतलब जिसको आप गुरु कह रहे हैं वो गुरु नहीं है तो इसको समझना है कि गुरु का मतलब ही है अंधकार को दूर करने वाला उसके लिए आदि शंकराचार्य जी ने उसमें 13 अध्याय के दूसरे श्लोक में बिल्कुल अगर आपका गुरु अयोग्य है एक तो पहले संप्रदाय हीन है
01:27:29:02 परंपरा हीन है उसकी कोई गुरु परंपरा है ही नहीं आचार्य प्रशांत जैसे लोग वो तो घर भी निकलवाना चाहते हैं ना महिला का घर भी निकाल दो वाह महिला महिला ही नहीं रहेगी फिर अच्छा इस पर थोड़ा मैं बात पूरी कर लू फिर आपसे पूछूंगा ये क्या कहते हैं उन्होंने स्पष्ट लिखा जो संप्रदाय से हीन हो मतलब जो परंपरा प्राप्त ना हो और फिर उन्होंने लिखा जो अयोग्य ऐसे गुरुओं को आप त्याग दे यह मत सोचे कि हम अपने गुरु के साथ क्योंकि वो आपका गुरु है ही नहीं जो आपका अंधकार नहीं मिटा रहा है वह आपका गुरु नहीं है आपके जीवन में अथातो ब्रह्म जिज्ञासा अथातो धर्म जिज्ञासा यह जो सवालों को लेकर के अंधकार है उसको मिटाने वाला ही आपका गुरु ठीक है तो यह आवश्यक है और यह जो गुरु को गुरु मानने के संबंध में जो चार सिद्धांत है ना उनमें से लास्ट एंड फाइनल यही है वो क्या है पहला था कि अ परंपरा प्राप्त होना चाहिए दूसरा सन्यासी वैराग्य होना चाहिए उसके जीवन में
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→ Used in: A · Live रामपाल की सेना साथ सीधी बात #तत्त्वदर्शीसंत #rampaljimaharaj at 38:48 ↗
01:28:37:08 तीसरा समस्त शति स्मति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा देने वाला होना चाहिए और चौथा
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01:28:43:22 चौथा क्या गुरु वही जो अपने शिष्य का संशय दूर कर दे अंधकार दूर कर दे तो ये चार सिद्धांत आपको रखने चाहिए अच्छा जो प्रशांत जी ने एक बात कही कि वो स्त्रियों के जीवन से वो गर्भाशय ही निकाल लेना चाहिए तो इसको कैसे देखती है थोड़ा सा बताते जाइए क्योंकि भाई हम लोग हम लोग लोगों को रूढ़ीवादी लगते हैं तो हम सोचते जो इंगलिश बोलना इंग्लिश में अपना धारा प्रवाह बोले और जिन्होंने वो जो क्या कहते हैं वो जो मॉडर्न लाइफ अच्छे से देखी है आपने कहा कि अमेरिका भी गए हैं तो फिर आपके मुख से अगर सुना जाए कि आप कैसे देखते हैं इन चीजों को तो आप बताए थोड़ा ओ गॉड इट्स बैड इट्स जस्ट बैड डोंट फॉलो इट बिकॉज वो बोल रहे हैं कि मतलब वो कोई बच्चा नहीं होता है कि वो बोलता है मेरी मम्मी मेरी मम्मी को इतना काम करना पड़ रहा है ओ हो हो बट हाथ भी नहीं बटाएगा है ना बट और कचड़ा कर देगा पर मम्मी मेरी मम्मी थक जाती है है ना तो थोड़ी उस तरह की बात है अब कैसे कि एक पुरुष और महिला का जो भेद है
01:29:58:25 वह शारीरिक भेद है आत्मा में कोई भेद नहीं है मैं महिला इसलिए हूं क्योंकि मेरे में फीमेल हार्मोस है ऑर्गन तो है ही बट हार्मोन मेरे जनरेट होते हैं तो जो मेरा यूटरस है जो मेरे को यवन प्रदान करता है मेरे को एक मां बनने की क्षमता देता है मैं मां बनू नहीं बनू क्योंकि बहुत वो लोग भी होंगे जो ये सुनेंगे कि अरे बट मैं तो क्योंकि लड़किया आजकल बोलती है मेरे को मत बताओ कि मुझे मां बनना है कि नहीं कोई बात नहीं नहीं भी बनना है आपको नहीं भी बनना है तब भी अगर आपको जवान रहना है सुंदर रहना है हष्ट पुष्ट रहना है कि आपको अर्थराइटिस ऑस्ट अर्थराइटिस जल्दी ना हो कमर की दर्द ना हो कमर ऐसे मुड़े नहीं तो आपको बहुत आवश्यक है कि आपके हार्मोन बहुत अच्छे जनरेट हो कि आपका जो मासिक धर्म व बहुत अच्छे से चले उसके लिए हमें किस चीज की आवश्यकता है यूटरस और ओवरीज की अब जब यह व्यक्ति बोल दे कि यह तो शोषण है इसको उठा के निकाल दो तो आपकी आप आप क्या बचेगा आप खाली हो जाओगे हार्मोन ही नहीं रहेंगे जब हार्मोस का इन बैलेंस
01:31:13:28 होता है तो हम इतने परेशान हो जाते हैं रोते हैं चिल्लाते हैं लड़ते हैं सब चीज करते हैं हार्मोन की मशीन ही नहीं रहेगी तो अब जो हार्मोन है वो बाकी ऐसा तो नहीं है कि बस वहां पर एक हार्मोन है और वो बाकी शरीर से कनेक्टेड नहीं है सब चीज सब चीज से कनेक्टेड है तो अब ये जो आचार्य है जो साइंस को भी नहीं समझ के बोल रहे कि सो कड आचार आचार्य प्रशांत सो आई थिंक वी शुड कंपलीटली बायकॉट पीपल लाइक दिस क्योंकि ये एक ऐसा विचारधारा शुरू कर देंगे कि लोग ऐसी हरकत करना शुरू कर देंगे जैसे हम देखते हैं जैसे कुछ महिलाओं की जो दिक्कत रहती है कि उनको मजबूरन करवाना पड़ता है और उनके जीवन का दुख है कि जवान लड़किया मां नहीं बन पा रही है पर बाहर के देशों में ऐसा हो रहा है कि कुछ लड़कियां जो अपने मासिक धर्म में क्योंकि उनका अच्छे से नहीं हो पाता है दर्द के कारण मेरे मैं जानती हूं ऐसे कुछ लोगों को उन्होंने अपना गर्भाशय हटा दिया है अब हटा दिया है तो उनका जीवन उनका मन मनोस्फीयर
01:32:54:00 आचार्य बोलने से आचार्य नहीं होता है ऐसे ऋषिकेश में 100 आचार्य घूमते हैं कोई किसी को नहीं पूछता है है ना तो यह जानना बहुत जरूरी है गुरुदेव से पूछा था मैंने प्रश्न जो थोड़ा सा उन्होंने हमें समझा दिया हम यही बोलेंगे कि हम समझ गए हमने प्रश्न किया था कि खुद के लिए किया था और यह जानने के लिए कि अगर ये प्रश्न हो जाएगा तो हम आगे इसको डाल
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01:33:20:22 सकते हैं तो मेरा प्रश्न था कि योगाचार्य कैसे होते हैं उन्हें पता है कि हम योग शिक्षक है उन्होंने बोला किसने बनाया तुम्हें योगाचार्य कहां से मिली प पदवी एक तरह से उत्तर भी उसी में ही है कि आचार्य बनाया किसने आचार्य कौन बनता है आचार्य का टाइटल देता कौन है यूनिवर्सिटी देती है नहीं वो आपको पीएचडी का टाइटल देती है तो लोगों को ये जानना भी बहुत जरूरी है कि कौन होगा जैसे हमने तो शैली पूछी थी कि उसका व्यवहार व्यवहार कैसा रहेगा और उसकी खुद की जो मतलब जीवन में जो आगे सीख रहा होगा वो कैसी रहेगी उसकी शैली क्या होगी पर उसमें जो हमें उत्तर चाहिए था गुरुदेव ने वो दे दिया कि सबसे पहले जो लोग खुद को आचार्य बोल रहे हैं आप प्लीज पहले समझिए कि कहां से आचार्य कौन सी परंपरा से आचार्य उसी में ही आपको पता चल जाएगा कि फॉलो करना है या नहीं करना है और सबसे सिंपल यही है आप किसी को मत माने आप आदि शंकराचार्य को तो मानेंगे तो उनके चार
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01:34:20:09 मठ है चार मठों को देखिए समझिए नहीं तो तो गुरुदेव तो है ही है ना जी अच्छा कुछ रैंडम क्वेश्चन आ रहे हैं तो अगर आपके पास समय हो तो ले ले क्या आपके लिए अगर कुछ क् हम हम समय लेके बैठे थे आज पहली बात तो कोई मुझसे पूछ रहा है सौरव जी पूछ रहे हैं क्या बिना गुरु के नाम जप कर सकते हैं देखिए नाम जप अगर नाम आपको है प्राप्त तो आप कई बार ऐसा होता है कि गोविंद की वजह से गुरु आ जाते हैं कई बार ऐसा होता है कि गुरु की वजह से गोविंद आ जाते है ये तीनों चीजें इंटर कनेक्टेड है आपके जीवन में आपको नाम मिल गया नाम जप पर जुड़ जाइए गुरु आ जाएंगे वो बात और है कि कभी गुरु ही पहले आ गए तो उसको नाम मिल गया व्यक्ति को तो वहां से गोविंद आ गए उसके जीवन में तो अगर आपको नाम है किसी नाम में आस्था है उसका जाप करिए तो क्या होगा कि योगक्षेम वम हम तेरी प्राप्ति और अप्राप्य की रक्षा कौन करेगा मैं करूंगा क्यों टेंशन लेता है चिल आउट जी अब अगर कोई
01:35:25:24 विजया जी से कोई अगर प्रश्न पूछना चाहता हो तो कर सकते हैं नाम डाल के करिएगा क्या मासा हरी को गुरु बनाना चाहिए भाई हम बात कर रहे हैं वैराग्य की और आप मासा हारी पैट के हुए हैं है ना तो वैराग्य होना चाहिए आपका जो गुरु है उसमें वैराग्य होना चाहिए तो मासा तो बहुत दूर की बात हो गई ठीक है यह भी आपको फॉलो करते हैं हर हर शंकर जी बोल रहे हैं इन मात्र शक्ति को हम भी फॉलो करते हैं धन्यवाद आपका बहुत बहुत धन्यवाद सभी सपोर्ट के लिए बोल रहे हैं आप क्या करते हैं यह किसके लिए प्रश्न है सना
01:36:16:25 जी आपकी प्रोफेशन क्या है मेरी पूछ रहे कि इनकी विजय जी की यह योग सिखाते हैं और मैं एक रिटायर्ड फिटनेस एनालिस्ट हूं रिटायर्ड अभी मैं पुल प्रूफ आप मुझे धर्म का अच्छा दीदी के लिए आप अपना बताए क्या करते आपसे पूछ रहे क्या करते अच्छा हम अभी तो हम योग सिखाते हैं ऑनलाइन ऑफलाइन कोर्सेस मैं पहले सिखाती थी बट अभी हम ऑनलाइन सिखा क्योंकि बहुत सारा काम है अभी और बहुत सारी चीजें आने वाली है 2025 में आपको काफी कुछ पता चलेगा बहुत सारा काम चल रहा है तो अगर आप जुड़े रहेंगे तो अच्छा लगेगा और बाकी हम यही करते हैं सनातन धर्म पर वीडियो बना रहे हैं और लोगों को जागरूक करने की कोशिश कर रहे हैं जितने लोग जागरूक होंगे उतना ही अच्छा रहेगा तो ही करते हैं हम जी
01:37:26:28 हरिद्वार और ऋषिकेश में हिंदू धर्म बहुत तेजी से खत्म हो रहा है और मलेच्छ ज्यादा हो रहा है तो इनके क्या विचार है क्या सच है हम हिंदू धर्म खत्म नहीं हो रहा है हिंदू धर्म है इसीलिए बहुत सारे टूरिस्ट आते हैं और मतलब उनका कहने का मतलब व कन्वर्जन बहुत हो रहा है उधर कजन र ऊपर पहाड़ों साइड में हो रहा है तो अब हम पता है कन्वर्जन प मेरी थ्योरी बहुत सिंपल है जो मुझे भी यहां पर समझ आया है पहाड़ में रह के पाच साल से हम ऋषिकेश में ही रह रहे हैं हरिद्वार के साइड प आपको इतना नहीं समझ आएगा बाहर बाहर आउटर बाउंड्री के अंदर समझ आएगा और वो आपको कन्वर्जन इसलिए लगता है क्योंकि वो आउटर बाउंड्री में और आपको आपको उसी समय नहीं पता चलता आपको थोड़े टाइम बाद जैसे जैसे सोचिए मैंने आपको आज बोला अच्छा 10 लोग हो गए अब मैंने आपको एक महीने बाद बोला पता है 200 लोग हो गए तो आपको लगता है ओ बट जो वो जो समय बीता है ना और जो उनके लोग आके आके आके बाउंड्री क्रिएट होती है ये वो है अब जब हम कन्वर्जन करते हैं ये करते हैं हम खुद को खुद से ही हमें प्रश्न पूछना चाहिए कि हम लोगों की आस्था ये जो लोगों की आस्था टूटी
01:38:42:00 है एक तो उससे हमें यह पता चलता है कि उनके पास गुरु नहीं है उनके पास जीवन में चाहे फाइनेंशियल चीजें हम देखें फाइनेंशली ठीक नहीं होंगे या मजबूरियां होंगी य यह सारी मजबूरियों से सबसे ज्यादा जो उनके पास नहीं है वो है एक विल पावर और एक क्लेरिटी कि पैसे नहीं है तो क्या हुआ भगवान का नाम तो है आप समझ रहे हो वो लोग भगवान उनके जीवन में नहीं है तो हमें दूसरे को बोलने की बजाय कि इसने इसको कन्वर्ट किया हमें इस चीज पर ध्यान देना चाहिए कि हम अपने लोगों को जागरूक और भगवान की तरफ कितना जोड़े और जो लोग आ रहे हैं जा रहे हैं देखिए यह अभी धार्मिक स्थल से ज्यादा टूरिस्ट अट्रैक्शन बन चुका है आप लोगों को मैं एक एग्जांपल दूंगी एक वीडियो है मेरी ा पर जाकर देखिएगा आपको अगर देखना है कि किस तरह के लोग आज समाज में है तो व वीडियो है जिसमें एक बियर का कैन मैंने पकड़ा होगा गंगा जी पीछे से हैं आप उसको खोलिए उसके कमेंट सेक्शन में जाइए और कितने लोगों ने उसका समर्थन किया है कितने लोगों ने बोला है कि मैंने ही पीके रखा है वीडियो बनाने की के लिए और किस किस प्रकार के उसमें कमेंट्स है आपको उससे
01:39:57:08 पता चल जाएगा कि दुनिया का स्तर कहां पर है तो इन बातों में अटक के 10 15 मिनट आधा घंटा दो चार दिन बिताने से अच्छा है कि बात यह की जाए कि करना क्या है जी अच्छा अभी एक क्वेश्चन आया था कि शूद्र के गुरु हो सकते हैं क्या तो मलिक जी शूद्र के गुरु बिल्कुल हो सकते हैं हमारे बहुत बहुत सारे गुरु भाई है जो शूद्र है आर्य समाज में इतने ब्राह्मण नहीं होंगे जितने हमारे गुरु भाई शूद्र होंगे ठीक है हा ऐसा ही होना चाहिए ना उत्तर ये वाली बात आ तो हमारे बहुत सारे गुरु भाई शूद्र है जो हमारे साथ एड़ी चोटी का जोड़ लगा कर के धर्म की रक्षा के लिए तैनात है और हम केवल ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य नहीं है हम शूद्र भी है आदित्य वाहिनी में सब और अंत बोलते है ना गुरुदेव तो कि वो अंत है असली शब्द जो हम यूज करते हैं वो अंत का है छोटे भाई का जी और गुरुदेव से दीक्षित है और बहुत खुश है अपने जीवन को शास्त्र सम्मत तरीके से संतुष्टि जनक जीवन जी रहे हैं एक बात आई ना रामायण में
01:41:12:10 और मनुस्मृति में भी आई है आपके आप जैसे आपने बोला ना कि आप अपनी लाइफ में देखो तो हमारे पास उन चीजों का प्रमाण होता है जैसे आपने बोला तोव प्रमाण है तो तो यह बात रामायण में भी आई और मनुस्मृति में आई आपके आसपास यदि अनैच्छिक जो चीजें है अन एक्सपेक्टेड चीज होने लगे अकाल टाइप की चीज तो समझ लीजिए कि आसपास अशा स्त्रीय विधि का आलंबन लेकर के ये चीजें हो रही हैन पाठन तो बिल्कुल ब्राह्मण हो सकते हैं और किसी का विजया जी आज है आपके बीच में और पूरी शंकराचार्य जी की शिष्या है ये नाम भी उन्हे उन्हीं से प्राप्त हुआ है जी जी जी पूर्व काल का इनका नाम रिदम था और अभी इनका नाम विजय है और मैं आपके मतलब मुझे एक चीज बहुत अच्छी लगी कि आपका जो समर्पण भाव था ना गुरुदेव के प्रति वो मुझे बहुत अच्छा लगा मैं उसकी प्रशंसा जरूर करूंगा आपको जैसे ही व नाम मिला और खट से आपने चेंज कर दिया अपने इंस्टा आईडी पर जबक वहां पर लगभग मेरे ख्याल से एक लाख के समथिंग फॉलोअर्स हो गए थे तो जब हमारे इतने फॉलोअर्स हो जाते ना तो एक बार को डर आना एक नॉर्मल सी बात है
01:42:27:10 कहीं मेरी इमेज को कोई परेशानी तो नहीं होगी कहीं वो वाले फॉलोअर्स पूरा तो नहीं मान जाएंगे कहीं चले तो नहीं जाएंगे इन्हीं सब सिचुएशन से बचने के लिए ही भक्ति का बल व्यक्ति को मिला है जब व्यक्ति के सामने कोई रास्ता ना बचे तो फिर सोचे व्यक्ति कि हमारे साथ श्री रघुनाथ तो किस बात की चिंता तभी तो वो ऐसे रिस्ता है तो वो आपने बहुत साहस पूर्ण कार्य किया था अगर अब यही वाली बात आती जैसे जिसके पास भक्ति नहीं है ना उसके पास जैसे अब नाम नहीं लूंगी ये जो अलंकारी है इनके पास भक्ति नहीं है भक्ति क्या है ये लोग क कर्म तो है कर्म तो करना है मगर ऐसी विडंबना जब आप कर्म करने चलते हो ना तो दुनिया आपका विरोध करती है करती है आपके विपरीत परिस्थितियां उत्पन्न होंगी उस परिस्थिति से निपटने के लिए आपके पास भक्ति का बल होता है भैया ये क्वेश्चन मेरा था
01:43:26:00 यह क्वेश्चन मेरा था बिना गुरु दीक्षा लिए ही केवल नाम जप करने से मोक्ष मिल जाता है देखिए नाम जप आप जो कर रहे हैं अगर आप निष्ठा पूर्वक कर रहे तो इसका मतलब है कि आपकी ईश्वर को लेकर के गुटिया सु सुलज चुकी है आप अवाद ईश्वर की पूजा ही कर रहे हैं नाम के द्वारा ठीक है तभी तो निष्ठा आएगी निष्ठा कब आएगी जब ईश्वर अवाद सिद्ध होगा तब निष्ठा आएगी तो नाम जब आप कर रहे ईश्वर के प्रति निष्ठा आ गई है तो फिर अगर आपके जीवन में मोक्ष के लिए गुरु आवश्यक है तो फिर वो देखेंगे ना व गुरु को ला देंगे तो आप नाम जप समर्पण भाव के साथ शुरू करिए और गुरु भी आएंगे हां ठीक है यह हो गया तो मेरे ख्याल से अब कोई क्वेश्चन है नहीं किसी का बहुत बहुत धन्यवाद आपका आपका भी बहुत-बहुत धन्यवाद तम जी पूर्व काल का नाम और आज का नाम विजया जी स सम्मान आप हमारे चैनल पर आई और बहुत सारी अच्छी अच्छी और लाइट ऐसे मोमेंट इस चैनल पर कम देखने को मिलते हैं तो उसके लिए हार्दिक आभार आपका आपका भी बहुत बहुत आभार हमें बहुत अच्छा लगा
01:44:41:07 हम आए और हमें थोड़ा बताना भी था कि आपका लास्ट टाइम वाले में भी रहता था विज जी की विजय जी की इंस्टा आईडी है पर आप इन्ह फॉलो कर सकते हैं यह सारे चीजें हैं आपको वहां पर बहुत सारी चीजें मिलेंगी तो यहां पर आप फॉलो कर सकते हैं और हा और पहले वाली प्रणव की वीडियो में जाके क्रेजी मत हो जाइएगा सभी पहले की वीडियो है यह जान लीजिए बाद वाली वीडियोस को देखिए उसको रखा इसलिए गया है ताकि बाद में जैसे अभी जो दर्शक आए वो तो है ही पर बाद में हमय बता सके कि ऐसा होता है पर आप बदल सकते हैं जैसे इसमें भी बहुत था कि मुझे काफी बार बोला गया कि अरे आप बोलो फिर ऐसे अच्छा नहीं लगेगा हम बोले अरे अगर मतलब मुझे यह लगता है कि जब आपके अंदर यह भाव है ना या तो यह काम या फिर मेरे गुरुदेव अगर ऐसा भी आए तो हम अपने गुरु को ही चुनेंगे कि छोड़ देंगे हम ये सब क्योंकि मिला भी उनसे ही है तो जहां पर उनका मतलब हमें ना एक ये मुझे ये चीज समझ में आई रोज आती है कि अब क्या होता
01:45:56:07 है कि मुझे कभी भी कुछ करना होता है तो मैं उसके अंदर हर बार मेरे को आता है कि अरे ये गुरुदेव के मतलब उनका व्यक्तित्व इतना उनका प्रभाव इतना है कि यह नहीं करेंगे गुरुदेव इसका समर्थन नहीं कर पाएंगे गुरुदेव इसका समर्थन नहीं करते कर पाएंगे क्या हम कौन होते हैं ऐसे बोलने वाले कि गुरुदेव इसका समर्थन नहीं करेंगे तो यह तो करना ही नहीं है दूर रहो इससे तो गुरुदेव का ही वचन है कि कि एक मतलब मैं उनकी शैली में तो नहीं बोल पाती हूं पर उन्होंने एक बार बताया था कि बात बता रहे थे जिसमें उन्होंने कहा कि किसने लिखा है कि मेरे गुरु ने मुझे ऐसा दीपक दिया है जो वही रास्ता दिखाता है जहां चलना है और कोई मार्ग दिखाता ही नहीं है और वही बात क्या बात क्या बात सूत्रा क्मक शैली में बहुत बड़ी बात है ये हां जी बहुत बढ़िया तो गु मार्ग मिल जाता है जैसे यह वाली बात आज सुबह भी मुझसे किसी ने पूछी थी
01:47:00:16 कि क्या वो फलाने वाले गुरु है वह सही है क्या वोह फलाने वाले गुरु है वह सही है क्या फलाना शास्त्र सही है क्या फलानी चीज सही है क्या फलाना मंत्र हम जप सकते हैं क्या हम यह कर सकते हैं क्या हम वो कर सकते हैं तो इस तरह के प्रश्न मे सामने आए तो मैंने य बताया मैं अपने फिटनेस एनालिस्ट होने का फायदा उठाता हूं तो मेरे पास जब मैं किसी को न्यूट्रिशन बता देता था कि तुम्हें दिन भर में ये ये खाना है इतने बादाम खाने है इतना ये खाना है तो व्यक्ति का फोन आता था मेरे पास कि सर मैं थोड़े से यह खा सकता हूं क्या सर मैं थोड़े से चने खा सकता हूं क्या सर मैं थोड़ा पुलाव खा सकता हूं क्या पनीर खा सकता हूं क्या ऐसे फोन आता रहता था तो मैंने उसको जवाब दिया कि देखिए अगर हम ये ढूंढने निकलेंगे कि हमें क्या-क्या नहीं करना है तो वो अनंत है हमें क्याक नहीं करना वो अनंत है हमें क्या क्या नहीं खाना है अनंत है आज आपने कोई लिस्ट बना ली हमें ये नहीं खाना है 100 नाम कल 500 चीजें और जनरेट हो जाएंगी मार्केट में अब उनके लिए फोन करो तो क्या क्या नहीं खाना है इस पर ध्यान देने की बजाय क्या खाना है इस पर ध्यान दे दोगे अगर तो जो खाना आपको पता चल गया कि हमको ये खाना है उसके बाहर की सारी चीजें
01:48:15:26 नहीं खानी है तो मैंने जो आपको मैंने जो आपको डाइट बना के दी है उसके बाहर की सारी चीजें नो मा फोन रख देता था हा तो गुरु में भी है यही यही चीज है जब गुरु ने आपको जिस चीज में चलना है वो बता दिया तो ये यह कर सकते हैं क्या यह कर सकते हैं क्या इसमें आप अपना समय वेस्ट कर रहे हैं है ना तो ठीक है फिर और बहुत अच्छा लगा आपने चैनल पर काफी समय दिया और आकी
01:48:55:03 हमें अच्छा लगा आकर और लास्ट मैसेज हम ऑडियंस को ये देना चाहेंगे कि बाद में भी अगर कोई देखे कि आप अगर इस चैनल पर है ही तो एक काम जरूर कीजिए समझिए कि शंकर परंपरा है क्या जब आप यह समझ जाएंगे कि शंकर परंपरा आपको ऑप्शन ही ऑप्शन दे देता है चाहे आपको भगवती चाहिए गणपति चाहिए ब्रह्मा चाहिए विष्णु चाहिए महेश चाहि और उसमें आपका समर्थन करता है तो वह शंकर परंपरा है शंकर परंपरा आपको गुलाम नहीं बनाती है शंकर परंपरा आपको मोक्ष की तरफ लेकर जाती है आपको फ्री कर देती है यह सारे झंझट से अगर आपको जानना है कि शंकर परंपरा क्या है तो शंकर परंपरा वही है जो यह बोले कि वन वर्ल्ड की पिक्चर है जो वासुदेव कुटुंबकम को धारण करके बैठा है वह शंकर परंपरा है और शंकर परंपरा वही है जो हरि और हर के अंदर भेद नहीं बट उन उनका जो मिलन है उसको आपको समझाती है तो जब आप ऐसे आचार्य और ऐसे धर्म गुरुओं के साथ बैठते हैं तो यह ठीक है वो गलत है यह नहीं वो सब की बात आती नहीं है
01:50:10:04 और एक शंकर परंपरा ही है जहां पर आपको कृष्ण भक्ति चाहिए 10 महाविद्या की भक्ति चाहिए जिसकी भी भक्ति जिसकी भी दीक्षा चाहिए वो आपको शंकर परंपरा से मिल जाती है वन स्टॉप सोल्यूशन इन कलयुग इ शंकर परंपरा तो इसको समझिए क्या बात चलिए फिर बहुत बढ़िया सूत्रा क्मक शैली में शंकर परंपरा का परिचय देते हुए विजया जी ने बात को पूरा किया सभी को जय श्री राम साहब सिंह जी आपको हम देखेंगे आप जब हमसे बात करते हैं तो आपकी भाषा शैली कुछ और हो जाती है बहुत मर्यादित अच्छा आचरण करने लगते हैं मगर जब बात नहीं कर रहे होते तो बड़ा अभद्र सा आचरण करते हैं खैर आपको आज हम एक्शन पैक के मूड में है नहीं तो फिर किसी दिन हम बात करेंगे तो सभी को जय श्री राम सभी को जय श्री राम जय श्री राम विजय जी जय श्री राम हम भारत भव्य बनाएंगे हम हिंदू राष्ट्र राष्ट्र बनाएंगे नमः पार्वती पद हर ह
01:51:24:19 हर हर महादेव जय गुरुदेव जय गुरुदेव जय [संगीत]
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रिदम से विजया और जगदगुरु शंकराचार्य #vedpuran #hindu #shankaracharya
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